UP Board Solutions Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure

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Class 9 Science Chapter 2 क्या हमारे आसपास के पदार्थ शुद्ध हैं UP Board Solutions PDF

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 16)

Question 1. पदार्थ से आप क्या समझते हैं ?
Answer: पदार्थ वह है जिसमें उपस्थित सभी कण समान रासायनिक प्रकृति के होते हैं।
In simple words: पदार्थ वह मूल इकाई है जिसके सभी घटक कणों की रासायनिक संरचना और गुण समान होते हैं।

🎯 Exam Tip: शुद्ध पदार्थों को समझना रासायनिक वर्गीकरण का आधार है।

 

Question 2. समांगी और विषमांगी मिश्रणों में अन्तर बताएँ।
Answer: समांगी मिश्रण - समांगी मिश्रण वह मिश्रण है जिनमें मिश्रित पदार्थों के अवयव समान रूप से मिले होते हैं, समांगी मिश्रण कहलाते हैं। जैसे-नमक का विलयन, चीनी का विलयन।
विषमांगी मिश्रण - विषमांगी मिश्रण वह मिश्रण है। जिनमें मिश्रित पदार्थों के अवयव समान रूप से नहीं मिले होते विषमांगी मिश्रण कहलाते हैं। जैसे- बालू और चीनी का मिश्रण।
In simple words: समांगी मिश्रण में घटक एक समान रूप से घुलते हैं, जबकि विषमांगी मिश्रण में घटक अलग-अलग दिखाई देते हैं या समान रूप से नहीं मिलते।

🎯 Exam Tip: उदाहरणों के साथ दोनों प्रकार के मिश्रणों की परिभाषा याद रखें।

 

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 20)

Question 1. उदाहरण के साथ समांगी एवं विषमांगी मिश्रणों में विभेद कीजिए ।
Answer: समांगी प्रकृति - द्रव्य की वह स्थिति जिसमें सभी जगह गुण समरूप हों, समांगी प्रकृति कहलाती है। जैसे, चीनी का घोल सर्वत्र समान रूप से मीठा होता है। अतः चीनी का घोल समांगी है।
विषमांगी प्रकृति - द्रव्य की स्थिति जिसमें एक अंश के गुण दूसरे से भिन्न हों, विषमांगी प्रकृति कहलाती है। जैसे-मिट्टी युक्त पानी आदि।
In simple words: समांगी मिश्रण पूरी तरह एक समान होता है, जैसे चीनी का घोल, जबकि विषमांगी मिश्रण में अलग-अलग हिस्से होते हैं, जैसे मिट्टी वाला पानी।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न समांगी और विषमांगी मिश्रण की अवधारणा को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. विलयन, निलंबन और कोलॉइड एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं ?
Answer: विलयन, निलंबन और कोलॉइड में निम्न प्रकार से अन्तर स्पष्ट किया जा सकता है

वास्तविक विलयनकोलॉइडनिलंबन
1. यह दो या अधिक पदार्थों का सजातीय मिश्रण होता है।यह सजातीय दिखने वाला लेकिन विषमजातीय मिश्रण होता है।यह किसी ठोस का विषमजातीय मिश्रण है जो द्रव या गैस में विक्षेपित रहता है।
2. विलेय के अणु दिखाई नहीं दे सकते हैं।विलेय के अणु सूक्ष्मदर्शी से दिखाई दे सकते हैं।ठोस अवस्था के अणु नंगी आँखों से दिखाई दे सकते हैं।
3. अणु का आकार 10-9 मी से कम होता है।अणु का आकार 10-6 से 10-9 मी के बीच होता है।अणु का आकार 10-6 मी से अधिक होता है।
4. छानकर संघटकों को पृथक् नहीं किया जा सकता है।संघटकों को केवल अप-केन्द्रीकरण द्वारा ही पृथक् किया जा सकता है।संघटकों को साधारणतया छानकर पृथक् किया जा सकता है।
5. उदाहरण : चीनी का जलीय विलयन।दुग्ध।गंदला पानी।

In simple words: विलयन सबसे छोटे कणों वाला समांगी मिश्रण है, कोलॉइड मध्यम आकार के कणों वाला विषमांगी मिश्रण है जो स्थिर दिखता है, और निलंबन बड़े कणों वाला विषमांगी मिश्रण है जिसमें कण नीचे बैठ जाते हैं।

🎯 Exam Tip: इस तुलनात्मक तालिका को याद रखना विभिन्न प्रकार के मिश्रणों को समझने और उनमें अंतर करने के लिए महत्वपूर्ण है। कणों के आकार पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 3. एक संतृप्त विलयन बनाने के लिए 36 g सोडियम क्लोराइड को 100 g जल में 293 K पर घोला जाता है। इस तापमान पर इसकी सांद्रता प्राप्त करें।
Answer: विलेय (सोडियम क्लोराइड) का द्रव्यमान = 36 g
विलायक (जल) का द्रव्यमान = 100 g
विलयन का द्रव्यमान = विलेय का द्रव्यमान + विलायक का द्रव्यमान = 36 g + 100 g = 136 g
\[ \text{सान्द्रता} = \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान}}{\text{विलयन का द्रव्यमान}} \times 100 \]
\[ = \frac{36}{136} \times 100 = 26.5\% \]
उत्तर
In simple words: संतृप्त विलयन की सांद्रता निकालने के लिए, विलेय के द्रव्यमान को विलयन के कुल द्रव्यमान से भाग देकर 100 से गुणा करते हैं, जिससे यह 26.5% आता है।

🎯 Exam Tip: विलयन की सांद्रता की गणना करते समय, विलेय और विलायक के द्रव्यमान को जोड़कर विलयन का कुल द्रव्यमान निकालना याद रखें।

 

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 26)

Question 1. पेट्रोल और मिट्टी का तेल (kerosene oil) जो कि आपस में घुलनशील हैं, के मिश्रण को आप कैसे पृथक् करेंगे? पेट्रोल तथा मिट्टी का तेल के क्वथनांकों में 25°C से अधिक का अन्तराल है।
Answer: पेट्रोल और मिट्टी के तेल का पृथक्करण प्रभाजी आसवन विधि द्वारा किया जाता है। दोनों के मिश्रण को प्रभाजी आसवन स्तम्भ में ले जाते हैं फिर ताप को घटाकर उसे ठंडा कर संपीडित किया जाता है जहाँ वाष्प अपने-अपने क्वथनांक के अनुसार पृथक् हो जाती है।
In simple words: पेट्रोल और मिट्टी के तेल के मिश्रण को उनके क्वथनांकों में अंतर के कारण प्रभाजी आसवन विधि से अलग किया जाता है, जहाँ अलग-अलग तापमान पर वाष्प बनकर अलग-अलग संघनित होते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रभाजी आसवन विधि उन तरल पदार्थों को अलग करने के लिए उपयुक्त है जिनके क्वथनांकों में 25°C से अधिक का अंतर होता है।

 

Question 2. पृथक् करने की सामान्यविधियों के नाम
(i) दही से मक्खन
(ii) समुद्री जल से नमक
(iii) नमक से कपूर

Answer: (i) दही से मक्खन अपकेन्द्रण द्वारा पृथक् किया जाता है।
(ii) जल से नमक वाष्पीकरण द्वारा पृथक् किया जाता है।
(iii) नमक से कपूर ऊर्ध्वपातन विधि द्वारा पृथक् किया जाता है।
In simple words: दही से मक्खन अपकेन्द्रीकरण से, समुद्री जल से नमक वाष्पीकरण से, और नमक से कपूर ऊर्ध्वपातन से अलग किए जाते हैं, क्योंकि प्रत्येक मिश्रण के गुणों के आधार पर अलग विधि का उपयोग होता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के मिश्रणों को अलग करने के लिए सही विधि का चयन उनकी भौतिक गुणों पर निर्भर करता है।

 

Question 3. क्रिस्टलीकरण विधि से किस प्रकार के मिश्रण को पृथक् किया जा सकता है।
Answer: क्रिस्टलीकरण विधि से वे ठोस पदार्थ शुद्ध किये जा सकते हैं, जिनमें अन्य ठोस पदार्थ अशुद्धि के रूप में मौजूद होते हैं।
In simple words: क्रिस्टलीकरण का उपयोग उन ठोस पदार्थों को शुद्ध करने के लिए किया जाता है जिनमें अशुद्धियाँ घुली हुई होती हैं, जिससे शुद्ध पदार्थ क्रिस्टल के रूप में अलग हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: क्रिस्टलीकरण शुद्ध ठोस प्राप्त करने की एक प्रभावी विधि है, खासकर जब अशुद्धियाँ घुलनशील हों।

 

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 27)

Question 1. निम्न को रासायनिक और भौतिक परिवर्तनों में वर्गीकृत करें-
पेड़ों को काटना, मक्खन का एक बर्तन में पिघलना, अलमारी में जंग लगना, जल का उबलकर वाष्प बनना, विद्युत तरंग का जल में प्रवाहित होना तथा उसका हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों में विघटित होना, जल में साधारण नमक का घुलना, फलों से सलाद बनाना तथा लकड़ी और कागज का जलना।

Answer: भौतिक परिवर्तन - पेड़ों को काटना, मक्खन का एक बर्तन में पिघलना, जल का उबलकर वाष्प बनना, जल में साधारण नमक का घुलना, फलों से सलाद बनाना।
रासायनिक परिवर्तन - अलमारी में जंग लगना, जल में विद्युतधारा का गुजरना तथा उसका हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों में विघटित होना, कागज और लकड़ी का जलना।
In simple words: भौतिक परिवर्तन में पदार्थ की पहचान नहीं बदलती, जबकि रासायनिक परिवर्तन में एक नया पदार्थ बनता है।

🎯 Exam Tip: भौतिक परिवर्तनों में केवल अवस्था या रूप बदलता है, जबकि रासायनिक परिवर्तनों में पदार्थ की रासायनिक संरचना बदल जाती है और नए पदार्थ बनते हैं।

 

Question 2. अपने आस-पास की चीजों को शुद्ध पदार्थों या मिश्रण से अलग करने का प्रयत्न करें।
Answer: ऑक्सीजन, कॉपर, ऐल्युमिनियम आदि शुद्ध पदार्थ हैं तथा वायु, शर्बत, पीतल आदि मिश्रण हैं।
In simple words: शुद्ध पदार्थ वे होते हैं जिनकी रासायनिक संरचना निश्चित होती है (जैसे ऑक्सीजन), जबकि मिश्रण में दो या दो से अधिक पदार्थ किसी भी अनुपात में मिले होते हैं (जैसे वायु)।

🎯 Exam Tip: शुद्ध पदार्थ तत्व या यौगिक होते हैं, जबकि मिश्रण समांगी या विषमांगी हो सकते हैं।

 

अभ्यास प्रश्न (पृष्ठ संख्या 30 - 33)

Question 1. निम्नलिखित को पृथक् करने के लिए आप किन विधियों को अपनाएँगे ?
(a) सोडियम क्लोराइड को जल के विलयन से पृथक् करने में।
(b) अमोनियम क्लोराइड को सोडियम क्लोराइड तथा अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण से पृथक् करने में।
(c) धातु के छोटे टुकड़े को कार के इंजन ऑयल से पृथक् करने में।
(d) दही से मक्खन निकालने के लिए।
(e) जल से तेल निकालने के लिए।
(f) चाय से चाय की पत्तियों को पृथक करने में।
(g) बालू से लोहे की पिनों को पृथक् करने में।
(h) भूसे से गेहूँ के दानों को पृथक् करने में।
(i) पानी में तैरते हुए महीन मिट्टी के कण को पानी से अलग करने के लिए।
(j) पुष्प की पंखुड़ियों के निचोड़ से विभिन्न रंजकों को पृथक् करने में।

Answer: (a) वाष्पीकरण विधि
(b) ऊर्ध्वपातन प्रक्रम
(c) छानने की क्रिया,
(d) अपकेन्द्रीकरण,
(e) कीप-पृथक्करण,
(f) छानने की क्रिया,
(g) चुम्बकीय पृथक्करण,
(h) विनोइंग द्वारा,
(i) निथारने की क्रिया
(j) क्रोमेटोग्राफी प्रक्रम द्वारा।
In simple words: प्रत्येक मिश्रण को उसके घटकों के भौतिक गुणों के आधार पर एक विशिष्ट पृथक्करण विधि, जैसे वाष्पीकरण, ऊर्ध्वपातन या छानना, का उपयोग करके अलग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न मिश्रणों के पृथक्करण के लिए उनकी भौतिक विशेषताओं के अनुरूप सही विधि का चयन करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. चाय तैयार करने के लिए आप किन-किन चरणों का प्रयोग करेंगे?
Answer: चाय बनाते समय हम निम्नलिखित चरणों का प्रयोग करेंगे-
चरण-1 : एक पतीली में थोड़ा पानी (विलायक) गर्म करें।
चरण-2 : एक केतली में थोड़ी चाय-पत्तियाँ (विलेय) डालें।
चरण-3 : उबलते पानी को केतली में डाल दें और पत्तियों को कुछ देर फूलने दें। यह एक विलयन में बदल जाएगा।
चरण-4 : एक कप में चीनी (विलेय) डालें।
चरण-5 : विलयन को केतली में हिलाएँ।
चरण-6 : छलनी से छानकर विलयन को कप में डालें। दो छोटे चम्मच दूध डालें । चम्मच से मिलाएँ। अब चाय तैयार है। चाय की पत्तियाँ (अवशेष) छलनी में रह जाएँगी जबकि चाय (छना हुआ भाग) विलयन में घुल जाएगी। चीनी और दूध घुलनशील विलेय हैं जबकि चाय की पत्तियाँ अघुलनशील विलेय हैं।
In simple words: चाय बनाने की प्रक्रिया में पानी गर्म करना, चाय पत्ती, चीनी और दूध मिलाना और फिर मिश्रण को छानना शामिल है, जिससे घुलनशील पदार्थ (चाय, चीनी, दूध) अलग हो जाते हैं और अघुलनशील पत्तियाँ छन जाती हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रक्रिया में विलायक, विलेय और छानने जैसी अवधारणाएँ शामिल हैं, जो मिश्रण के पृथक्करण को दर्शाती हैं।

 

Question 3. प्रज्ञा ने तीन अलग-अलग पदार्थों की घुलनशीलताओं को विभिन्न तापमान पर जाँचा तथा नीचे दिए गए आँकड़ों को प्राप्त किया। प्राप्त हुए परिणामों को 100 g जल में विलेय पदार्थ की मात्रा, जो संतृप्त विलयन बनाने हेतु पर्याप्त है, निम्नलिखित तालिका में दर्शाया गया है

विलेय पदार्थतापमान K में
283293313333353
पोटैशियम नाइट्रेट213262106167
सोडियम क्लोराइड3636363737
पोटैशियम क्लोराइड3535404654
अमोनियम क्लोराइड2437415566

(a) 50 g जल में 313 K पर पोटैशियम नाइट्रेट के संतृप्त विलयन को प्राप्त करने हेतु कितने ग्राम पोटैशियम नाइट्रेट की आवश्यकता होगी ?
(b) प्रज्ञा 358 K पर पोटैशियम क्लोराइड को एक संतृप्त विलयन तैयार करती है और विलयन को कमरे के तापमान पर ठंडा होने के लिए छोड़ देती है। जब विलयन ठंडा होगा तो वह क्या अवलोकित करेगी ? स्पष्ट करें ।
(c) 293 K पर प्रत्येक लवण की घुलनशीलता का परिकलन करें। इस तापमान पर कौन-सा लवण सबसे अधिक घुलनशील होगा?
(d) तापमान में परिवर्तन से लवण की घुलनशीलता पर क्या प्रभाव पड़ता है ?

Answer:
(a) तालिका के अनुसार, 313 K पर 100 gm जल में 62 gm पोटैशियम नाइट्रेट संतृप्त विलयन बनाने के लिए घोला है।
अतः 50 gm जल में इसका संतृप्त विलयन बनाने के लिए \( \frac{50 \times 62}{100} \) = 31gm पोटैशियम नाइट्रेट घोलना पड़ेगा।
(b) जब पोटैशियम क्लोराइड के 353K (80°C) पर संतृप्त घोल को कमरे के तापमान (293 K या 20°C) तक ठंडा किया गया तो उसकी विलेयता घट जाती है और इसके क्रिस्टल पात्र की तली पर इकट्ठा हो जायेंगे ।
(c) 20°C पर पोटैशियम नाइट्रेट की विलयेता
100 gm जल में पोटैशियम नाइट्रेट की विलेय मात्रा = 32 gm
विलयन की संहति = 100 + 32 = 132 gm
\[ \text{विलेयता} = \frac{32}{132} \times 100 \]
\[ = \frac{800}{33} = 24.3\% \text{ लगभग} \]

(ii) सोडियम क्लोराइड की 20°C पर विलेयता -
100 gm पानी में घोली गई सोडियम क्लोराइड की संहति = 36 gm
विलयन की संहति = 100 + 36 = 136 gm
\[ \text{विलेयता} = \frac{36}{136} \times 100 = \frac{450}{17} \]
\[ = 26.47\% \]

(iii) पोटैशियम क्लोराइड की 20°C पर विलेयता-
100 gm पानी में घुलित पोटैशियम क्लोराइड की संहति = 35 gm
विलयन की संहति = 100 + 35 = 135 gm
\[ \text{विलेयता} = \frac{35}{135} \times 100 \]
\[ = \frac{700}{27} = 26\% \]

(iv) अमोनियम क्लोराइड की 20°C पर विलेयता-
100 gm जल में अमोनियम क्लोराइड की घुलित संहति = 37 gm
विलयन की संहति = 100 + 37 = 137 gm
\[ \text{विलेयता} = \frac{37}{137} \times 100 \]
\[ = \frac{3700}{137} = 27\% \]
(d) किसी भी पदार्थ की घुलनशीलता तापमान के बढ़ने से बढ़ जाती है।
In simple words: पोटैशियम नाइट्रेट की 313 K पर घुलनशीलता के अनुसार 50g जल के लिए 31g की आवश्यकता होगी। पोटैशियम क्लोराइड का संतृप्त विलयन ठंडा होने पर क्रिस्टलीकृत हो जाएगा क्योंकि घुलनशीलता कम हो जाती है। 293 K पर अमोनियम क्लोराइड सबसे अधिक घुलनशील है। सामान्यतः, तापमान बढ़ने पर लवणों की घुलनशीलता बढ़ती है।

🎯 Exam Tip: घुलनशीलता तालिका से डेटा का सही उपयोग करके गणना करना और तापमान के प्रभाव को समझना इस प्रश्न के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. निम्नलिखित की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए
(a) संतृप्त विलयन
(b) शुद्ध पदार्थ
(c) कोलाइड
(d) निलम्बने ।

Answer:
(a) संतृप्त विलयन – किसी दिए हुए तापमान पर जब उस द्रव में और अधिक विलेय पदार्थ न घुल सके उसे संतृप्त घोल कहते हैं।
उदाहरण- कक्ष ताप (20°C) पर 50 mL पानी एक बीकर में लो। अब इसमें सोडियम क्लोराइड (नमक) थोड़ा-थोड़ा करके डालो और घोल लो। ध्यान रहे कि नमक तली में न रहे। इसी प्रकार नमक डालो और हिलाओ । एक स्थिति ऐसी आ जाती है कि और पदार्थ (नमक) घुलना बन्द हो जाता है। यही कक्ष ताप पर संतृप्त विलयन है।
(b) शुद्ध पदार्थ – वे वस्तुएँ जिनका दिए गए तापमान पर रंग-रूप, संरचना, स्वाद व स्वभाव एक समान रहे और उसके हर भाग में संरचना समान हो और उसे सरल भौतिक विधियों द्वारा और सरल पदार्थों में विभाजित न किया जा सके उसे शुद्ध पदार्थ कहते हैं। एक शुद्ध पदार्थ या तो तत्त्व होगा या फिर यौगिक।
उदाहरण- सोना, चाँदी, सोडियम, पोटैशियम, कार्बन डाइऑक्साइड आदि शुद्ध पदार्थ हैं।
(c) कोलाइड – यह एक ऐसा विषमांगी मिश्रण है। जिसमें विलेय व विलायक दोनों के कण समान रूप से फैले होते हैं और अधिक देर तक रखने पर भी कण नीचे नहीं बैठते । क्योंकि इनका आकार 1 nm से 100 nm के बीच होता है। ये कोलाइडी कण परिक्षेपण माध्यम में से गुजरने वाले दृश्य प्रकाश का प्रकीर्णन कर देते हैं।
उदाहरण- दूध, स्याही, धुंध, रक्त आदि।
(d) निलम्बन – निलम्बन एक ऐसा विषमांगी मिश्रण है जिसमें विलायक में विलेय पदार्थ घुलता नहीं है और उसके कणों को नंगी आँखों से भी देखा जा सकता है। इसके कणों का आकार 10-5 cm से भी ज्यादा होता है। अधिक देर बिना हिलाए रखने पर कण नीचे बैठ जाते हैं। उदाहरण- जैसे-चॉक के पाउडर को पानी में विलयन।
In simple words: संतृप्त विलयन वह घोल है जिसमें एक निश्चित तापमान पर और अधिक विलेय नहीं घुल सकता। शुद्ध पदार्थ वह है जिसकी संरचना और गुणधर्म एक समान होते हैं। कोलाइड एक स्थिर विषमांगी मिश्रण है जिसके कण प्रकाश को बिखेरते हैं। निलंबन एक विषमांगी मिश्रण है जिसके कण बड़े होते हैं और समय के साथ नीचे बैठ जाते हैं।

🎯 Exam Tip: इन चारों परिभाषाओं को उनके विशिष्ट गुणों और उदाहरणों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये रसायन विज्ञान की बुनियादी अवधारणाएँ हैं।

 

Question 5. निम्नलिखित में से प्रत्येक को समांगी और विषमांगी मिश्रणों में वर्गीकृत करें-सोडा जल, लकड़ी, बर्फ, वायु, मिट्टी, सिरका, छन्ति चाय ।
Answer: समांगी मिश्रण – सोडा जल, सिरका, छनित चाय, बर्फ ।
विषमांगी मिश्रण – मिट्टी, लकड़ी।
In simple words: समांगी मिश्रण वे होते हैं जो पूरी तरह से मिश्रित होते हैं और एक समान दिखते हैं, जबकि विषमांगी मिश्रण में अलग-अलग घटक स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं या असमान रूप से वितरित होते हैं।

🎯 Exam Tip: किसी मिश्रण को समांगी या विषमांगी के रूप में वर्गीकृत करने के लिए, उसकी एकरूपता और घटकों के वितरण को देखें।

 

Question 6. आप किस प्रकार पुष्टि करेंगे कि दिया हुआ रंगहीन द्रव शुद्ध जल है?
Answer: रंगहीन तरल पदार्थ किसी भी भौतिक विधि द्वारा और अधिक सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता यदि इसे वाष्पित किया जाए तो शेष कुछ नहीं बचता इसलिए दिया गया तरल शुद्ध पदार्थ है। दिए गए तरल का विद्युत विच्छेदन करने पर हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन आयतन के अनुसार 2 : 1 के अनुपात में प्राप्त होती है अतः दिया गया तरले जल है जो एक यौगिक है। दिया गया तरल वायुमण्डलीय दाब पर 373 K पर उबलने लगता है जो कि शुद्ध जल का क्वथनांक है अतः दिया गया तरल शुद्ध जल है।
In simple words: शुद्ध जल की पुष्टि करने के लिए, हम उसे वाष्पित करके देखते हैं कि कोई अवशेष न बचे, विद्युत विच्छेदन से 2:1 के अनुपात में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन मिले, और यह 373 K (100°C) पर उबले।

🎯 Exam Tip: शुद्ध जल की पहचान उसके निश्चित क्वथनांक (373 K) और रासायनिक अपघटन उत्पादों (2:1 हाइड्रोजन और ऑक्सीजन) से की जा सकती है।

 

Question 7. निम्नलिखित में से कौन-सी वस्तुएँ शुद्ध पदार्थ हैं ?
(a) बर्फ
(b) दुध
(c) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
(d) लोहा
(e) कैल्सियम ऑक्साइड
(f) पारा
(g) ईंट
(h) लकड़ी
(i) वायु ।

Answer: निम्न शुद्ध पदार्थ हैं-
(1) बर्फ
(2) लोहा
(3) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
(4) कैल्सियम ऑक्साइड
(5) पारा
In simple words: शुद्ध पदार्थ वे होते हैं जिनकी एक निश्चित रासायनिक संरचना होती है, जबकि दूध, ईंट, लकड़ी और वायु विभिन्न पदार्थों का मिश्रण होते हैं।

🎯 Exam Tip: तत्वों और यौगिकों को शुद्ध पदार्थ माना जाता है, जबकि मिश्रण (समांगी या विषमांगी) शुद्ध नहीं होते।

 

Question 8. निम्न मिश्रणों में से विलयन की पहचान करो
(a) मिट्टी
(b) समुद्री जल
(c) वायु
(d) कोयला
(e) सोडा जल ।

Answer: विलयन-
(1) समुद्री जल
(2) वायु
(3) सोडा जल
In simple words: विलयन समांगी मिश्रण होते हैं जहाँ घटक पूरी तरह से घुल जाते हैं और एक समान दिखते हैं, जैसे समुद्री जल, वायु और सोडा जल।

🎯 Exam Tip: विलयन की पहचान उसके समांगी प्रकृति और घटकों की एक समान वितरण से होती है।

 

Question 9. निम्नलिखित में से कौन टिण्डल प्रभाव को प्रदर्शित करेगा? (a) नमक का घोल (b) दूध (c) कॉपर सल्फेट का विलयन (d) स्टार्च विलयन
Answer: दूध और स्टार्च विलयन टिंडल प्रभाव दिखाएँगे।
In simple words: टिंडल प्रभाव केवल कोलाइडल विलयनों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, जैसे दूध और स्टार्च विलयन, क्योंकि इनके कण प्रकाश को प्रकीर्णित करने के लिए पर्याप्त बड़े होते हैं।

🎯 Exam Tip: टिंडल प्रभाव कोलाइडल विलयनों और वास्तविक विलयनों के बीच अंतर करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।

 

Question 10. निम्नलिखित को तत्त्व, यौगिक तथा मिश्रण में वर्गीकृत करें
(a) सोडियम
(b) मिट्टी
(c) चीनी का घोल
(d) चाँदी
(e) कैल्सियम कार्बोनेट
(f) टिन
(g) सिलिकन
(h) कोयला
(i) वायु
(j) साबुन
(k) मीथेन
(l) कार्बन डाइऑक्साइड
(m) रक्त ।

Answer: (a) तत्त्व
(b) मिश्रण
(c) यौगिक
(d) तत्त्व
(e) मिश्रण
(f) यौगिक
(g) मिश्रण
(h) मिश्रण
(i) तत्त्व
(j) तत्त्व
(k) तत्त्व
(l) यौगिक
(m) यौगिक।
In simple words: तत्वों में केवल एक प्रकार के परमाणु होते हैं (सोडियम), यौगिक दो या दो से अधिक तत्वों के निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोजन से बनते हैं (चीनी का घोल, कार्बन डाइऑक्साइड), और मिश्रण दो या दो से अधिक पदार्थों का भौतिक संयोजन होते हैं (मिट्टी, वायु)।

🎯 Exam Tip: तत्वों, यौगिकों और मिश्रणों के बीच अंतर उनकी संरचना और संयोजन के नियमों पर आधारित होता है।

 

Question 11. निम्नलिखित में से कौन-कौन से परिवर्तन रासायनिक हैं ?
(a) पौधों की वृद्धि
(b) लोहे में जंग लगना
(c) लोहे के चूर्ण तथा बालू को मिलाना
(d) खाना पकाना।
(e) भोजन का पाचन
(f) जल से बर्फ बनना।
(g) मोमबत्ती का जलना।

Answer: लोहे पर जंग लगना, भोजन का पकना, भोजन का पचना और मोमबत्ती का जलना-रासायनिक परिवर्तन हैं।
In simple words: रासायनिक परिवर्तन वे होते हैं जिनमें नए पदार्थ बनते हैं और रासायनिक संरचना बदल जाती है, जैसे जंग लगना या भोजन का पकना/पाचन, जबकि भौतिक परिवर्तन में केवल पदार्थ का रूप बदलता है।

🎯 Exam Tip: रासायनिक परिवर्तनों की पहचान नए पदार्थों के बनने, ऊर्जा परिवर्तन और अक्सर अपरिवर्तनीय प्रकृति से होती है।

 

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

Question 1. विलयन क्या है ?
Answer: दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण विलयन कहलाता है।
In simple words: विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का एक ऐसा मिश्रण है जिसमें सभी घटक पूरी तरह से एक दूसरे में घुल जाते हैं और मिश्रण हर जगह एक समान दिखता है।

🎯 Exam Tip: विलयन की मुख्य पहचान उसकी समांगी प्रकृति है।

 

Question 2. जलीय विलयन क्या है ?
Answer: विलेय का जल में विलयन, जलीय विलयन कहलाता है।
In simple words: जब कोई पदार्थ पानी में घुल जाता है तो बनने वाले विलयन को जलीय विलयन कहते हैं।

🎯 Exam Tip: जल को एक सार्वभौमिक विलायक माना जाता है क्योंकि यह कई पदार्थों को घोल सकता है।

 

Question 3. संतृप्त विलयन की परिभाषा दीजिए ।
Answer: वह विलयन जिसमें किसी ताप पर विलेय की अधिकतम मात्रा घुली हो संतृप्त विलयन कहलाता है।
In simple words: संतृप्त विलयन वह घोल है जिसमें किसी खास तापमान पर, विलायक में और अधिक विलेय नहीं घोला जा सकता।

🎯 Exam Tip: संतृप्तता की स्थिति तापमान पर निर्भर करती है - तापमान बदलने पर पदार्थ की घुलनशीलता भी बदल सकती है।

 

Question 4. विलयन की सान्द्रता से क्या अभिप्राय है?
Answer: विलेय की मात्रा जो विलायक या विलयन की इकाई मात्रा या इकाई आयतन में घुली होती है, विलयन की सान्द्रता कहलाती है।
In simple words: विलयन की सांद्रता बताती है कि किसी घोल में कितना विलेय पदार्थ घुला हुआ है, आमतौर पर प्रति इकाई विलायक या विलयन में।

🎯 Exam Tip: सांद्रता को प्रतिशत (द्रव्यमान या आयतन), मोलरता आदि विभिन्न इकाइयों में व्यक्त किया जा सकता है।

 

Question 5. कोलाइड काफी स्थायी होते हैं। उस प्रक्रम का नाम बताइये जिससे आप कोलाइड विलयन के अवयवों को पृथक् कर सकते हैं ?
Answer: अपकेन्द्रीकरण द्वारा कोलाइड विलयन के अवयवों को पृथक् कर सकते हैं।
In simple words: कोलाइडल कणों को अलग करने के लिए अपकेन्द्रीकरण विधि का उपयोग किया जाता है, जहाँ कणों को तेजी से घुमाकर अलग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: अपकेन्द्रीकरण एक ऐसी विधि है जो विभिन्न घनत्व वाले कणों को अलग करने के लिए उपयोगी है।

 

Question 6. किस कारक पर आधारित कोई विलयन तनु, सान्द्र अथवा संतृप्त कहलाता है ?
Answer: उसमें उपस्थित विलेय की मात्रा पर आधारित कोई विलयन तनु, सान्द्र अथवा संतृप्त कहलाता है।
In simple words: किसी विलयन में घुले हुए विलेय की मात्रा के आधार पर उसे तनु (कम विलेय), सांद्र (अधिक विलेय) या संतृप्त (अधिकतम विलेय) कहा जाता है।

🎯 Exam Tip: यह वर्गीकरण विलयन में विलेय की आपेक्षिक मात्रा को दर्शाता है।

 

Question 7. निम्न में से समांगी मिश्रण बताइए-लकड़ी, चीनी का जलीय घोल, मिट्टी मिला जल।
Answer: चीनी का जलीय घोल।
In simple words: चीनी का जलीय घोल एक समांगी मिश्रण है क्योंकि चीनी पानी में पूरी तरह से घुल जाती है और मिश्रण हर जगह एक समान दिखता है।

🎯 Exam Tip: समांगी मिश्रण में, घटक एक दूसरे में इतने अच्छी तरह से घुल जाते हैं कि उन्हें अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।

 

Question 8. केरोसिन तथा जल के मिश्रण को पृथक करने का सिद्धान्त बताइये ।
Answer: आपस में नहीं मिलने वाले द्रव अपने घनत्व के अनुसार विभिन्न परतों में पृथक् हो जाते हैं।
In simple words: केरोसिन और पानी एक-दूसरे में नहीं घुलते और उनके घनत्व अलग-अलग होने के कारण वे अलग-अलग परतें बना लेते हैं, जिससे उन्हें आसानी से अलग किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: अमिश्रणीय द्रवों को उनके घनत्व में अंतर के कारण पृथक्करण कीप (separating funnel) का उपयोग करके अलग किया जाता है।

 

Question 9. उस प्रक्रम का नाम बताइये जिसे आप जल और ऐल्कोहॉल के मिश्रण को पृथक् करने के लिए प्रयोग करेंगे ?
Answer: ऐल्कोहॉल और जल के मिश्रण को प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक् किया जा सकता है।
In simple words: जल और ऐल्कोहॉल के मिश्रण को उनके अलग-अलग क्वथनांकों के आधार पर प्रभाजी आसवन विधि से अलग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: प्रभाजी आसवन उन द्रवों को अलग करने के लिए उपयुक्त है जिनके क्वथनांकों में मामूली अंतर होता है।

 

Question 10. 30-50 K से अधिक क्वथनांक में अन्तर वाले मिश्रणीय द्रवों को पृथक् करने की विधि का नाम बताइए ।
Answer: साधारण आसवन।
In simple words: जिन मिश्रणीय द्रवों के क्वथनांकों में 30-50 K से अधिक का अंतर होता है, उन्हें साधारण आसवन विधि से आसानी से अलग किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: साधारण आसवन तब उपयोग किया जाता है जब दो द्रवों के क्वथनांकों के बीच पर्याप्त अंतर होता है, जबकि प्रभाजी आसवन कम अंतर के लिए होता है।

 

Question 11. चीनी के संतृप्त विलयन का ताप 5°C `बढ़ाने पर क्या होगा ?
Answer: चीनी के संतृप्त विलयन का ताप 5°C बढ़ाने पर विलयन असंतृप्त हो जायेगा।
In simple words: जब संतृप्त चीनी विलयन का तापमान बढ़ाया जाता है, तो चीनी की घुलनशीलता बढ़ जाती है, जिससे विलयन असंतृप्त हो जाता है और उसमें और चीनी घोली जा सकती है।

🎯 Exam Tip: अधिकांश ठोस पदार्थों की घुलनशीलता तापमान बढ़ने पर बढ़ती है, इसलिए एक संतृप्त विलयन गर्म करने पर असंतृप्त हो जाता है।

 

Question 12. दो अघुलनशील द्रवों को आप किस तकनीक से पृथक् करेंगे ?
Answer: दो अघुलनशील द्रवों को पृथक्करण कीप द्वारा पृथक् करेंगे।
In simple words: दो अघुलनशील द्रव, जैसे तेल और पानी, उनके घनत्व में अंतर के कारण पृथक्करण कीप का उपयोग करके अलग किए जाते हैं, जिससे वे अलग-अलग परतें बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: पृथक्करण कीप का उपयोग केवल अमिश्रणीय द्रवों (जो एक-दूसरे में नहीं घुलते) को अलग करने के लिए किया जाता है।

 

Question 13. किसी कोलायडी विलयन में उसके कणों को आकार क्या होगा ?
Answer: कोलाइडी विलयन में कणों का आकार 10-7 cm तथा 10-5 cm के बीच होता है।
In simple words: कोलाइडल विलयन के कणों का आकार 1 नैनोमीटर से 100 नैनोमीटर के बीच होता है, जो वास्तविक विलयन से बड़ा लेकिन निलंबन से छोटा होता है।

🎯 Exam Tip: कणों का यह आकार कोलाइडल विलयनों को टिंडल प्रभाव प्रदर्शित करने और छानने पर अलग न होने में मदद करता है।

 

Question 14. ऊर्ध्वपातन पदार्थ क्या हैं ?
Answer: वह पदार्थ जो गर्म करने से ठोस अवस्था से सीधे गैसीय अवस्था में बदल जाते हैं ऊर्ध्वपातन पदार्थ कहलाते हैं।
In simple words: ऊर्ध्वपातन पदार्थ वे होते हैं जो गर्म करने पर ठोस से सीधे गैस में बदल जाते हैं, बिना तरल अवस्था में आए।

🎯 Exam Tip: ऊर्ध्वपातन एक भौतिक प्रक्रिया है जिसका उपयोग ऐसे ठोस पदार्थों को पृथक् करने के लिए किया जाता है जो ऊर्ध्वपातित होते हैं और जो नहीं होते।

 

Question 15. दो ऊर्ध्वपातन पदार्थों के नाम बताइये ।
Answer: कपूर और अमोनियम क्लोराइड।
In simple words: कपूर और अमोनियम क्लोराइड दो ऐसे सामान्य पदार्थ हैं जो गर्म करने पर सीधे ठोस से गैस में परिवर्तित हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: यह याद रखना उपयोगी है कि नेफ़थलीन और आयोडीन भी ऊर्ध्वपातन पदार्थ के उदाहरण हैं।

 

Question 16. लोहे की पिन लकड़ी के बुरादे में मिल गयी है, इन्हें कैसे अलग करेंगे? ।
Answer: बुरादे में मिली लोहे की पिनों को चुम्बक द्वारा अलग करेंगे।
In simple words: लोहे की पिनें चुंबकीय होती हैं, इसलिए उन्हें लकड़ी के बुरादे से अलग करने के लिए चुंबक का उपयोग किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: चुंबकीय पृथक्करण विधि का उपयोग चुंबकीय पदार्थों को गैर-चुंबकीय पदार्थों से अलग करने के लिए किया जाता है।

 

Question 17. वायु के विभिन्न घटक किस प्रक्रम द्वारा अलग किये जाते हैं ?
Answer: वायु के विभिन्न घटक प्रभाजी आसवन विधि द्वारा अलग किये जाते हैं।
In simple words: वायु में मौजूद विभिन्न गैसों को उनके अलग-अलग क्वथनांकों के आधार पर प्रभाजी आसवन विधि द्वारा अलग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: द्रवीकृत वायु के प्रभाजी आसवन से ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और आर्गन जैसी गैसों को अलग-अलग प्राप्त किया जाता है।

 

Question 18. तन्यता क्या है ?
Answer: धातुएँ खींचने पर तार में बदल जाती हैं, इसे तन्यता कहते हैं।
In simple words: तन्यता धातुओं का वह गुण है जिसके कारण उन्हें पतले तारों में खींचा जा सकता है।

🎯 Exam Tip: सोना और चाँदी सबसे अधिक तन्य धातुएँ हैं।

 

Question 19. टिंडल प्रभाव क्या है ?
Answer: द्रव या गैस में निलम्बित पदार्थ के कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन टिंडल प्रभाव कहलाता है।
In simple words: टिंडल प्रभाव वह घटना है जिसमें कोलाइडल कण या निलंबन के कण प्रकाश के मार्ग को दृश्यमान बनाते हुए प्रकाश को बिखेरते हैं।

🎯 Exam Tip: टिंडल प्रभाव का उपयोग कोलाइडल विलयनों को वास्तविक विलयनों से अलग करने के लिए किया जाता है।

 

Question 20. कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पायी जाने वाली धातु का नाम लिखिए।
Answer: कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पायी जाने वाली धातु पारा है।
In simple words: पारा एकमात्र ऐसी धातु है जो सामान्य कमरे के तापमान पर तरल अवस्था में रहती है।

🎯 Exam Tip: गैलियम और सीज़ियम भी ऐसे धातु हैं जिनका गलनांक कम होता है और वे कमरे के तापमान से थोड़ा अधिक तापमान पर द्रव बन सकते हैं।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

Question 1. आसवन को परिभाषित कीजिए। आसवन से किस प्रकार के मिश्रणों को पृथक् किया जा सकता है?
Answer: आसवन, द्रव को गर्म करके वाष्प बनाने और तत्पश्चात् वाष्प को ठंडा करके पुनः द्रव प्राप्त करने का प्रक्रम है। आसवन को विलेय अवाष्पशील ठोसों से द्रव को पृथक् करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।
In simple words: आसवन वह प्रक्रिया है जिसमें द्रव को पहले गर्म करके वाष्प में बदला जाता है, फिर उस वाष्प को ठंडा करके वापस द्रव में संघनित किया जाता है, इसका उपयोग द्रव और अवाष्पशील ठोस के मिश्रण को अलग करने के लिए होता है।

🎯 Exam Tip: आसवन का मुख्य उद्देश्य घटकों के क्वथनांकों में अंतर का उपयोग करके उन्हें अलग करना है।

 

Question 2. क्रिस्टलीकरण प्रक्रम क्या है ? यह किस प्रकार उपयोगी है ?
Answer: संतृप्त विलयन में विलेय की अधिकतम मात्रा घुली होती है। अगर विलेय की मात्रा संतृप्त-स्तर से बढ़ जाये तो विलेय की संतृप्त स्तर से अधिक मात्रा अविलेय या क्रिस्टल के रूप में आ जाती है। अतः संतृप्त विलयन से क्रिस्टल बनने की प्रक्रिया क्रिस्टलीकरण कहलाती है। उपयोग- यदि कोई पदार्थ ठोस अवस्था में होता है। और उसमें अन्य कोई ठेस अशुद्धि के रूप में पाया जाता है, तब क्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया प्रयोग की जाती है।
In simple words: क्रिस्टलीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें एक संतृप्त घोल से शुद्ध ठोस पदार्थ को क्रिस्टल के रूप में प्राप्त किया जाता है, इसका उपयोग अशुद्ध ठोसों को शुद्ध करने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: क्रिस्टलीकरण पृथक्करण की अन्य विधियों, जैसे वाष्पीकरण, की तुलना में शुद्ध पदार्थ प्राप्त करने का एक बेहतर तरीका है।

 

Question 3. 5 g विलेय को 40 g जल में घोला गया। है। विलयन की द्रव्यमान प्रतिशतता क्या है?
Answer: विलयन का द्रव्यमान = विलेय का द्रव्यमान + विलायक का द्रव्यमान = 5 g + 40 g = 45 g
विलयन की द्रव्यमान प्रतिशतता
\[ = \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान}}{\text{विलयन का द्रव्यमान}} \times 100 \]
\[ = \frac{5}{45} \times 100 \]
\[ = \frac{1}{9} \times 100 = \frac{100}{9} \% = 11.1\% \]
In simple words: इस विलयन की द्रव्यमान प्रतिशतता की गणना करने के लिए, विलेय (5 g) के द्रव्यमान को कुल विलयन (45 g) के द्रव्यमान से भाग देकर 100 से गुणा किया जाता है, जिससे परिणाम 11.1% आता है।

🎯 Exam Tip: द्रव्यमान प्रतिशतता की गणना करते समय, विलेय के द्रव्यमान को विलयन के कुल द्रव्यमान (विलेय + विलायक) से भाग देना सुनिश्चित करें।

 

Question 4. कोलाइडल विलयन के दो लक्षण लिखिए।
Answer: कोलाइडल विलयन के लक्षण
(i) कोलाइडी विलयन समांगी दिखाई देता है, परन्तु वास्तव में वह विषमांगी होता है।
(ii) कोलाइडी विलयन में कणों का आकार वास्तविक विलयन से बड़ा परन्तु निलम्बन से छेटा होता है। वह व्यास में 1 nm और 100 nm के बीच होता है।
In simple words: कोलाइडल विलयन दिखने में समांगी लगते हैं लेकिन वास्तव में विषमांगी होते हैं, और इनके कणों का आकार वास्तविक विलयन के कणों से बड़ा लेकिन निलंबन के कणों से छोटा होता है।

🎯 Exam Tip: कोलाइडल विलयनों का टिंडल प्रभाव दिखाना उनके कणों के आकार और विषमांगी प्रकृति का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है।

 

Question 5. मिश्रणीय तथा अमिश्रणीय द्रवों में अन्तर कीजिए।
Answer: मिश्रणीय द्रव- दो या दो से अधिक अमिश्रणीय द्रवों का मिश्रण विभिन्न परतों में पृथक् हो जाता है जिनकी पृथकन सीमाएँ स्पष्ट होती हैं।
अमिश्रणीय द्रव - दो या दो से अधिक मिश्रणीय द्रवों का मिश्रण विभिन्न परतों में पृथक् नहीं होता है और समांगी विलयन बनाते हैं।
In simple words: मिश्रणीय द्रव एक-दूसरे में घुल जाते हैं और एक समान मिश्रण बनाते हैं, जबकि अमिश्रणीय द्रव एक-दूसरे में नहीं घुलते और अलग-अलग परतें बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: मिश्रणीय द्रवों को प्रभाजी आसवन से और अमिश्रणीय द्रवों को पृथक्करण कीप से अलग किया जाता है।

 

Question 6. मिश्रणों के प्रकारों को उचित उदाहरण सहित समझाइये ।
Answer: अवयवों के मिश्रित होने के आधार पर मिश्रण दो प्रकार के हैं-
(i) समांगी मिश्रण
(ii) विषमांगी मिश्रण।
(i) समांगी मिश्रण : वह मिश्रण जिनमें मिश्रित पदार्थों के अवयव समान रूप से मिले होते हैं समांगी मिश्रण कहलाते हैं, जैसे चीनी को विलयन, नमक का विलयन।
(ii) विषमांगी मिश्रण : वह मिश्रण जिनमें मिश्रित पदार्थों के अवयव समान रूप से नहीं मिले होते विषमांगी मिश्रण कहलाते हैं, जैसे बालू और चीनी का मिश्रण।
In simple words: समांगी मिश्रणों में घटक पूरी तरह एक समान रूप से घुल जाते हैं (जैसे नमक का घोल), जबकि विषमांगी मिश्रणों में घटक असमान रूप से वितरित होते हैं और अलग-अलग दिखाई देते हैं (जैसे बालू और चीनी का मिश्रण)।

🎯 Exam Tip: मिश्रणों का वर्गीकरण उनकी घटकों की एकरूपता और दृश्यमानता पर निर्भर करता है।

 

Question 7. टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect) क्या हैं ?
Answer: टिंडल प्रभाव : जो कोलाइडल कण प्रकाश को एक ओर बिखेरते हैं, उसे टिंडल प्रभाव कहते हैं।
अगर प्रकाश किरण-पुंज को कोलाइड विलयन से गुजारा जाए व प्रकाश किरण के लम्बवत् सूक्ष्मदर्शी रखकर देखा जाए तो प्रकाश किरण का पथ दिखाई देने लगता है।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र टिंडल प्रभाव को दर्शाता है। इसमें एक कोलाइडल विलयन के माध्यम से प्रकाश की किरण गुजर रही है। चित्र में दिखाया गया है कि कोलाइडल कण प्रकाश को बिखेरते हैं, जिससे प्रकाश का मार्ग दृश्यमान हो जाता है, जबकि एक वास्तविक विलयन में प्रकाश का मार्ग अदृश्य रहता है। यह प्रभाव कोलाइडल विलयन में निलंबित कणों के कारण होता है।


In simple words: टिंडल प्रभाव वह घटना है जिसमें कोलाइडल विलयन में निलंबित कण प्रकाश की किरणों को बिखेरते हैं, जिससे प्रकाश का मार्ग दृश्यमान हो जाता है।

🎯 Exam Tip: टिंडल प्रभाव का उपयोग कोलाइडल विलयनों को वास्तविक विलयनों से अलग करने के लिए किया जाता है।

 

Question 8. आप किसी निलम्बन तथा कोलाइडल में अन्तर किस प्रकार करेंगे ? प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए।
Answer: निलम्बन तथा कोलाइड में अन्तर निम्नलिखित हैं-

निलम्बनकोलाइड
1. विलेय कणों का आकार 10-5 सेमी से अधिक होता है।1. विलेय कणों का आकार 10-5 सेमी तथा 10-8 सेमी के बीच होता है।
2. यह साधारण फिल्टर पेपर द्वारा छानकर विलेय तथा विलायक में अलग किये जा सकते हैं।2. यह साधारण फिल्टर पेपर द्वारा विलेय तथा विलायक में अलग-अलग नहीं किये जा सकते हैं।
3. यह टिंडल प्रभाव उत्पन्न नहीं करते हैं।3. यह टिंडल प्रभाव उत्पन्न करते हैं।

In simple words: निलंबन में बड़े कण होते हैं जो नीचे बैठ जाते हैं और टिंडल प्रभाव नहीं दिखाते, जबकि कोलाइड में छोटे कण होते हैं जो नीचे नहीं बैठते और टिंडल प्रभाव दिखाते हैं।

🎯 Exam Tip: कणों का आकार और टिंडल प्रभाव की उपस्थिति निलंबन और कोलाइड के बीच अंतर करने के प्रमुख मानदंड हैं।

 

Question 9. मिश्रण के घटकों को अलग करने की आवश्यकता क्यों पड़ती है ?
Answer: मिश्रण के घटकों को अलग करने की आवश्यकता निम्न कारणों से है :
1. अवांछित घटक को दूर करने के लिए।
2. किसी हानिकारक घटक को दूर करने के लिए।
3. पदार्थ का शुद्ध नमूना प्राप्त करने के लिए।
4. किसी लाभप्रद घटक को प्राप्त करने के लिए।
In simple words: मिश्रण के घटकों को अलग करना आवश्यक है ताकि अवांछित या हानिकारक तत्वों को हटाया जा सके, शुद्ध पदार्थ प्राप्त किए जा सकें, और उपयोगी घटकों को निकाला जा सके।

🎯 Exam Tip: पृथक्करण विधियाँ शुद्ध पदार्थों को प्राप्त करने और हानिकारक घटकों को हटाने के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो विज्ञान और उद्योग दोनों में आवश्यक है।

 

Question 10. मिश्रणों के घटकों को पृथक् करने के लिए प्रयोग की जाने वाली सामान्य विधियों के नाम लिखिए।
Answer: मिश्रणों के घटकों को पृथक् करने के लिए। प्रयोग की जाने वाली सामान्य विधियाँ निम्नलिखित हैं :
1. छानना
2. चुम्बक द्वारा अलग करना
3. हाथ से चुनना
4. आसवन विधि
5. अपकेन्द्रन विधि
6. वाष्पीकरण
7. ऊर्ध्वपातन की प्रक्रिया द्वारा।
In simple words: मिश्रणों के घटकों को अलग करने के लिए कई विधियाँ हैं जैसे छानना, आसवन, अपकेन्द्रीकरण, वाष्पीकरण, और ऊर्ध्वपातन, जो घटकों के भौतिक गुणों के आधार पर चुनी जाती हैं।

🎯 Exam Tip: इन विधियों का सही चयन मिश्रण के घटकों के आकार, घनत्व, क्वथनांक या घुलनशीलता जैसे गुणों पर निर्भर करता है।

 

Question 11. मिश्रण एवं यौगिक में अन्तर बताइए ।
Answer: यौगिक एवं मिश्रण में निम्नलिखित अन्तर है

यौगिक (Compound)मिश्रण (Mixture)
1. यौगिक में उपस्थित परमाणु एक निश्चित संख्या में संयोग करते हैं।1. मिश्रण किन्हीं पदार्थों को किसी भी अनुपात में मिलाने से बनता है।
2. यौगिक का रासायनिक संघटन निश्चित होता है।2. इसका संघटन निश्चित नहीं होता।
3. बने यौगिक के गुण मूल पदार्थों से एकदम भिन्न होते हैं।3. मूल अवयव अपने गुणों को बनाये रखते हैं।
4. मूल पदार्थों को भौतिक विधियों द्वारा अलग नहीं किया जा सकता।4. मूल अवयवों को भौतिक विधियों द्वारा अलग किया जा सकता है।

In simple words: यौगिकों में घटक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से जुड़े होते हैं और उनके गुण मूल घटकों से भिन्न होते हैं, जबकि मिश्रणों में घटक किसी भी अनुपात में भौतिक रूप से मिले होते हैं और अपने मूल गुण बनाए रखते हैं।

🎯 Exam Tip: यौगिक और मिश्रण के बीच का अंतर उनकी संरचना, गुणों और पृथक्करण की विधियों पर आधारित होता है।

 

Question 12. क्रोमैटोग्राफी का उपयोग करकेनीली-काली स्याही में उपस्थित राइ को कैसे पृथक् करोगे ?
Answer:
1. फिल्टर पेपर की एक पतली और लम्बी पट्टी (Strip) लें। इसके निचले किनारे से 3 cm ऊपर पेंसिल से एक रेखा खींचें।
2. उस रेखा के बीच में स्याही की एक बूंद रखें। इसे सूखने दें।
3. जार में जल लें, उसमें हम फिल्टर पेपर को इस प्रकार रखें कि वह जल की सतह से ठीक ऊपर रहे।
4. जैसे ही जल फिल्टर पेपर पर ऊपर की दिशा की ओर अग्रसर होता है यह डाई के कणों को भी अपने साथ ले जाता है। प्रायः डाइ दो या दो से अधिक रंगों का मिश्रण होता है। रंग वाला घटक जो कि जल में अधिक घुलनशील है, तेजी से ऊपर उठता है और इस प्रकार, रंगों का पृथक्करण हो जाता है।
In simple words: क्रोमैटोग्राफी विधि का उपयोग करके नीली-काली स्याही के विभिन्न रंगों को अलग किया जा सकता है क्योंकि स्याही विभिन्न रंगों का मिश्रण होती है, और पानी ऊपर चढ़ते समय अलग-अलग घुलनशीलता के कारण रंगों को अलग-अलग गति से ऊपर ले जाता है।

🎯 Exam Tip: क्रोमैटोग्राफी उन मिश्रणों को अलग करने के लिए प्रभावी है जिनमें घटक विभिन्न विलायकों में अलग-अलग घुलनशीलता रखते हैं।

 

Question 13. कैल्सियम कार्बोनेट को गर्म करने पर कैल्सियम ऑक्साइड तथा कार्बन डाइऑक्साइड प्राप्त होते हैं।
(a) क्या यह भौतिक या रासायनिक परिवर्तन है?
(b) उपर्युक्त अभिक्रिया में प्राप्त उत्पादों से क्या तुम एक अम्लीय तथा एक क्षारीय विलयन बना सकते हो? यदि हाँ तो रासायनिक अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।

Answer:
(a) यह एक रासायनिक परिवर्तन है।
(b) हम अम्लीय तथा क्षारीय विलयन बना सकते हैं:
(i) \( \text{CaO} + \text{H}_2\text{O} \to \text{Ca(OH)}_2 \) (क्षारीय विलयन)
(ii) \( \text{CO}_2 + \text{H}_2\text{O} \to \text{H}_2\text{CO}_3 \) (अम्लीय विलयन)
In simple words: कैल्सियम कार्बोनेट का गर्म होना एक रासायनिक परिवर्तन है क्योंकि नए पदार्थ (कैल्सियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड) बनते हैं। इन उत्पादों से, कैल्सियम ऑक्साइड पानी के साथ मिलकर क्षारीय विलयन बनाता है, और कार्बन डाइऑक्साइड पानी के साथ मिलकर अम्लीय विलयन बनाता है।

🎯 Exam Tip: रासायनिक परिवर्तन में नए पदार्थों का निर्माण होता है, जिसे रासायनिक समीकरणों द्वारा दर्शाया जा सकता है। ऑक्साइडों का अम्लीय या क्षारीय व्यवहार याद रखें।

 

Question 14. भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन की परिभाषा उदाहरण सहित दीजिए।
Answer:
भौतिक परिवर्तन : वह परिवर्तन जिसमें पदार्थ के संघटन में कोई परिवर्तन नहीं होता है भौतिक परिवर्तन कहलाता है। जैसे-जल को बर्फ या भाप में बदलना, विद्युत बल्ब का चमकना।
रासायनिक परिवर्तन : वह परिवर्तन जिसमें पदार्थ के संघटन में परिवर्तन होता है, रासायनिक परिवर्तन कहलाता है। जैसे ईंधन का जलना, लोहे का जंग लगना। भौतिक परिवर्तन में नया पदार्थ उत्पन्न नहीं होता, केवल पदार्थ के भौतिक गुणों में परिवर्तन होता है, लेकिन रासायनिक परिवर्तन में नया पदार्थ बनता है और पदार्थ के रासायनिक गुणों में परिवर्तन होता है, किसी पदार्थ के रासायनिक गुण उसके रासायनिक संघटन पर निर्भर करते हैं।
In simple words: भौतिक परिवर्तन में पदार्थ का रूप या अवस्था बदलती है लेकिन रासायनिक पहचान नहीं बदलती (जैसे बर्फ का पिघलना), जबकि रासायनिक परिवर्तन में पदार्थ की रासायनिक संरचना बदल जाती है और नए पदार्थ बनते हैं (जैसे लोहे पर जंग लगना)।

🎯 Exam Tip: भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों के बीच का मुख्य अंतर यह है कि रासायनिक परिवर्तन में नए पदार्थ बनते हैं, जबकि भौतिक परिवर्तन में नहीं।

 

Question 15. निम्न को भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन में वर्गीकृत करें :
(a) काँच का पिघलना
(b) फूल से फल बनना
(c) अगरबत्ती का जलना
(d) रोटी का पकना
(e) कपड़े का फटना
(f) बादलों का बनना ।

Answer:
(a) काँच का पिघलना - भौतिक परिवर्तन
(b) फूल से फल बनना - रासायनिक परिवर्तन
(c) अगरबत्ती का जलना - रासायनिक परिवर्तन
(d) रोटी का पकना - रासायनिक परिवर्तन
(e) कपड़े का फटना - भौतिक परिवर्तन
(f) बादलों का बनना - भौतिक परिवर्तन।
In simple words: काँच का पिघलना, कपड़े का फटना और बादलों का बनना भौतिक परिवर्तन हैं क्योंकि कोई नया पदार्थ नहीं बनता, जबकि फूल से फल बनना, अगरबत्ती का जलना और रोटी का पकना रासायनिक परिवर्तन हैं क्योंकि नए पदार्थ बनते हैं।

🎯 Exam Tip: पहचान करें कि क्या नए रासायनिक बंधन बनते हैं या टूटते हैं (रासायनिक परिवर्तन) या केवल अवस्था/रूप बदलता है (भौतिक परिवर्तन)।

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

Question 1. विलेय और विलायक की अवस्था के आधार पर विलयनों का वर्णन कीजिए ।
Answer: विलेय व विलायक की अवस्था के आधार पर विलयन निम्न प्रकार के हैं :
(i) ठोस का द्रव में विलयन - जैसे चीनी का जल में विलयन (शर्बत), टिंचर आयोडीन । [आयोडीन (ठोस) का ऐल्कोहॉल (द्रव) में विलयन ।
(ii) गैस का द्रव में विलयन - जैसे ठंडे पेय जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड (गैस) जल द्रव में घुली होती है।
(iii) गैस का गैस में विलयन - जैसे वायु जिसमें ऑक्सीजन (21%) व नाइट्रोजन (78%) मिले होते हैं।
(iv) ठोस का ठोस में विलयन - जैसे मिश्र धातुएँ (Alloys)। पीतल में जिंक लगभग 30% व कॉपर लगभग 70% होता है।
In simple words: विलयन विलेय और विलायक की भौतिक अवस्थाओं के आधार पर कई प्रकार के होते हैं, जैसे ठोस-द्रव (चीनी का घोल), गैस-द्रव (सोडा), गैस-गैस (वायु), और ठोस-ठोस (मिश्र धातु)।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार के विलयन के लिए विलेय और विलायक की भौतिक अवस्था और एक उपयुक्त उदाहरण याद रखना आवश्यक है।

 

Question 2. निलम्बन, वास्तविक विलयन व कोलाइडल विलयन को उदाहरण देते हुए परिभाषित कीजिए ।
Answer: जब किन्हीं दो पदार्थों का घोल बनता है, तब विलेय के कण परिक्षेपण कण' (Dispersed particles) व विलायक 'परिक्षिप्त माध्यम' (Dispersion medium) कहलाता है। परिक्षिप्त माध्यम में परिक्षेपण कणों के आकार के आधार पर विलयन तीन प्रकार के हैं-
(i) वास्तविक विलयन : जब परिक्षिप्त माध्यम में परिक्षेपण कणों का व्यास 10-8 सेमी होता है तो परिक्षेपण कण परिक्षिप्त माध्यम में दिखाई नहीं देते। इस प्रकार का विलयन वास्तविक विलयन कहलाता है। उदाहरण- जल में नमक या चीनी का घोल। वास्तविक विलयन में परिक्षेपण कणों को सूक्ष्मदर्शी द्वारा नहीं देखा जा सकता।
(ii) कोलाइडल विलयन : जब परिक्षिप्त माध्यम में परिक्षेपण कणों का व्यास 10-7 से 10-5 सेमी होता है। तो विलयन कोलाइडल विलयन कहलाता है। उदाहरण- दूध, रक्त, टूथपेस्ट। कोलाइडल विलयन में परिक्षेपण कणों को आँखों द्वारा नहीं देखा जा सकता, लेकिन सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखा जा सकता है।
(iii) निलम्बन : जब परिक्षिप्त माध्यम में परिक्षेपण कणों का व्यास 10-5 सेमी या उससे अधिक होता है तो इसे निलम्बन कहते हैं। निलम्बन में परिक्षेपण कणों को परिक्षिप्त माध्यम में तैरते हुए आँख द्वारा देखा जा सकता। है। उदाहरण- जल में मिट्टी या बालू का घोल, जल में चॉक का घोल।।
In simple words: वास्तविक विलयन सबसे छोटे कणों वाले समांगी मिश्रण होते हैं (जैसे नमक पानी में), कोलाइडल विलयन मध्यम आकार के कणों वाले विषमांगी मिश्रण होते हैं जो स्थिर दिखते हैं (जैसे दूध), और निलंबन बड़े कणों वाले विषमांगी मिश्रण होते हैं जो समय के साथ नीचे बैठ जाते हैं (जैसे मिट्टी पानी में)।

🎯 Exam Tip: इन तीनों प्रकार के विलयनों को उनके कणों के आकार, दृश्यमानता और टिंडल प्रभाव प्रदर्शित करने की क्षमता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

 

Question 3. (i) विलयन को परिभाषित कीजिए। जब 15 g NaCl को 200 g जल में घोलकर विलयन तैयार किया जाता है, तो NaCl की द्रव्यमान प्रतिशतता परिकलित कीजिए।
(ii) वास्तविक विलयन से विलेय के कणों को पृथक् करना क्यों असम्भव है ?
(iii) तापमान में परिवर्तन से लवण की घुलनशीलता पर क्या प्रभाव पड़ता है ?

Answer:
(i) विलयन : दो या अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण विलयन कहलाता है।
दिया है : NaCl (विलेय) की मात्रा = 15 g
जल (विलायक) की मात्रा = 200 g
विलयन की मात्रा = विलेय की मात्रा + विलायक की मात्रा = 15 + 200 = 215 g
\[ \text{प्रतिशत सान्द्रता} = \frac{\text{विलेय की मात्रा} \times 100}{\text{विलयन की मात्रा}} \]
\[ = \frac{15 \times 100}{215} = 6.976\%. \]
(ii) वास्तविक विलयन में विलेय के कणों को पृथक् करना असंभव है, क्योंकि वे विलायक के साथ समांगी मिश्रण बनाते हैं।
(iii) तापमान बढ़ाने पर लवण की घुलनशीलता बढ़ जाती है और घटाने पर कम हो जाती है।
In simple words: विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण होता है; 15g NaCl को 200g जल में घोलने पर द्रव्यमान प्रतिशतता 6.976% होगी। वास्तविक विलयन में कणों को अलग करना मुश्किल है क्योंकि वे पूरी तरह से घुल जाते हैं, और तापमान बढ़ने पर लवण की घुलनशीलता आमतौर पर बढ़ती है।

🎯 Exam Tip: विलयन की परिभाषा, द्रव्यमान प्रतिशतता की गणना, और तापमान के घुलनशीलता पर प्रभाव को समझना इस प्रश्न के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. रासायनिक संघटन के आधार पर शुद्ध पदार्थों के प्रकार का वर्णन कीजिए ।
Answer: रासायनिक संघटन के आधार पर शुद्ध पदार्थ दो प्रकार के हैं :
(i) तत्त्व (Element)
एवं
(ii) यौगिक (Compound)

(i) तत्त्व : रॉबर्ट बॉयल पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने सन् 1661 में 'तत्त्व' शब्द का प्रयोग किया। एंटोनी लॉरेंट लवाइजिए (Antoine Laurent Lavoisier) ने तत्त्व की परिभाषा सर्वप्रथम निम्न प्रकार दी : “तत्त्व पदार्थ का वह मूल रूप है जिसे रासायनिक क्रिया द्वारा अन्य सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता।” जैसे-लोहा, ताँबा, चाँदी ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन आदि।
(ii) यौगिक : 'वह पदार्थ जो दो या अधिक तत्त्वों के किसी निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोजन करने से बनता है।” उदाहरणार्थ (i) जल एक यौगिक है जो हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन के 1 : 8 के द्रव्यमान-अनुपात में संयोजन करने पर बनता है। (ii) उसी तरह कार्बन डाइऑक्साइड एक यौगिक है जो कार्बन व ऑक्सीजन के 3 : 8 के द्रव्यमान अनुपात में संयोजन करने से बनती है।
In simple words: शुद्ध पदार्थ रासायनिक संघटन के आधार पर दो प्रकार के होते हैं: तत्त्व, जो पदार्थ का सबसे सरल रूप है जिसे रासायनिक रूप से तोड़ा नहीं जा सकता (जैसे लोहा), और यौगिक, जो दो या अधिक तत्वों के निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोजन से बनते हैं (जैसे जल)।

🎯 Exam Tip: तत्वों और यौगिकों के बीच का अंतर उनकी मौलिकता और घटकों के संयोजन के अनुपात पर आधारित होता है।

 

Question 5. निम्नलिखित मिश्रण के अवयवों को पृथक् करने की विधि बताइये :
सल्फर + रेत + चीनी + आयरन रेतन ।

Answer: इस मिश्रण के चार अवयव हैं-सल्फर, रेत, चीनी तथा आयरन रेतन। मिश्रण के ऊपर से एक चुम्बक को कई बार चलाते हैं। आयरन रेतन, चुम्बक द्वारा आकर्षित हो जाती है। वह चुम्बक पर चिपक जाती है और पृथक् हो जाती है। चीनी, गंधक तथा रेत के शेष मिश्रण को पानी में डालकर विलोडन करते हैं। इससे जल में चीनी घुल जाती है। छानने पर छनित्र में चीनी का विलयन प्राप्त होता है। छनित्र को वाष्पित करके चीनी प्राप्त की जा सकती है। अवशेष में सल्फर तथा रेत होते हैं। सल्फर तथा रेत के मिश्रण को कार्बन डाइसल्फाइड के साथ हिलाते हैं जिससे सल्फर, कार्बन डाइसल्फाइड में घुल जाता है और रेत बिना घुले रहता है। छानने पर, सल्फर विलयन के रूप में छनित्र में प्राप्त होती है। कार्बन डाइसल्फाइड के वाष्पन से सल्फर प्राप्त की जा सकती है। रेत, फिल्टर पेपर पर अवशेष के रूप में बच जाता है।
In simple words: इस मिश्रण को अलग करने के लिए पहले चुंबक का उपयोग करके आयरन रेतन को हटाया जाता है, फिर चीनी को पानी में घोलकर और वाष्पीकरण द्वारा अलग किया जाता है, और अंत में सल्फर को कार्बन डाइसल्फाइड में घोलकर और रेत को छानकर अलग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के जटिल मिश्रण को अलग करने के लिए घटकों के विभिन्न भौतिक गुणों (जैसे चुंबकीयता, घुलनशीलता, और क्वथनांक) का क्रमिक रूप से उपयोग किया जाता है।

 

Question 6. धातुएँ किसे कहते हैं? इनके गुणधर्मों को समझाइये ।
Answer: धातुएँ (Metals) - धातु एक तत्त्व है जो आघातवर्थ्य (malleable) तथा तन्य (ductile) होता है और विद्युत संचालित करता है। धातुओं के कुछ उदाहरण हैं : आइरन, कॉपर, ऐलुमिनियम, जिंक, सिल्वर, गोल्ड, प्लैटिनम, क्रोमियम, सोडियम, पोटैशियम मैग्नीशियम, निकिल, कोबाल्ट, टिन, लेड, कैडमियम, मर्करी, ऐन्टीमनी। एक तत्त्व मर्करी, जो कि एक द्रव है, को छोड़कर सभी धातुएँ ठोस हैं। धातुओं के गुणधर्म (Properties of Metals) धातुओं के प्रमुख गुणधर्म नीचे दिये गये हैं :
1. धातुएँ आघातवर्थ्य (malleable) हैं। इसका अर्थ है कि धातुओं को हथौड़े से पतली शीटों में (बिना टूटे) पीटा जा सकता है। गोल्ड (सोना) तथा सिल्वर (चाँदी) धातुएँ उत्तम आघातवर्थ्य धातुओं में से कुछ हैं। ऐलुमिनियम और कॉपर (ताँबा) धातुएँ भी अत्यधिक आघातवर्थ्य धातुएँ हैं। इन सभी धातुओं को हथौड़े से अत्यंत पतली (महीन) चादरों में कटा जा सकता है जो पन्नी (foils) कहलाती हैं। उदाहरणार्थ, सिल्वर (चाँदी) धातु को, उसकी उच्च आघातवटै र्यता के कारण, हथौड़े से महीन रजत पन्नियों (thin silver foils) में कूटा जा सकता है। चाँदी (रजत) की पन्नियों का उपयोग मिठाइयों को सजाने में किया जाता है। उसी प्रकार, ऐलुमिनियम धातु पर्याप्त आघातवर्थ्य है और महीन शीटों में रूपान्तरित की जा सकती है जो ऐलुमिनियम पन्नियाँ (aluminium foils) कहलाती हैं। ऐलुमिनियम पन्नियों को खाद्य सामग्रियाँ जैसे बिस्कुट, चॉकलेट, दवाइयाँ, सिगरेट इत्यादि पैक करने के लिए उपयोग किया जाता है। दूध की बोतल के ढक्कन भी ऐलुमिनियम पन्नी के बने होते हैं। ऐलुमिनियम चादरों (शीटों) को पाक बर्तनों (cooking utensils) के बनाने में किया जाता है। कॉपर (ताँबा) धातु भी अत्यधिक आघातवर्थ्य है। इसलिए, रसोई या अन्य घरेलू उपयोग के बर्तनों तथा अन्य बर्तनों या पत्रों को बनाने के लिए कॉपर की शीटों (ताँबे की चादरों) का उपयोग किया जाता है। अतः, आघातवर्ध्यता (malleability) धातुओं का एक प्रमुख अभिलाक्षणिक गुणधर्म है।
2. धातुएँ तन्य (ductile) हैं। इसका अर्थ है कि धातुओं को महीन तारों में खींचा जा सकता है । सभी धातुएँ समान रूप से तन्य नहीं होती हैं। दूसरों की अपेक्षा कुछ अधिक तन्य होती हैं। उत्तम तन्य धातुओं में गोल्ड (सोना) और सिल्वर (चाँदी) हैं। उदाहरणार्थ, सिल्वर जैसी अत्यधिक तन्य धातु के मात्र 100 मिलीग्रामों को लगभग 200 मीटर लम्बे महीन तार में खींचा जा सकता है। कॉपर और ऐलुमिनियम धातुएँ भी अत्यंत तन्य होती हैं और पतले तारों में खींची जा सकती हैं जिन्हें वैद्युत तार लगाने में उपयोग किया जाता है। अतः, तन्यता (ductility) धातुओं का एक अन्य प्रमुख अभिलाक्षणिक गुणधर्म है। उपर्युक्त विवेचना से हम निष्कर्ष निकालते हैं कि धातुएँ आघातवर्थ्य और तन्य होती हैं। आघातवर्ण्यता और तन्यता के गुणधर्मों के कारण ही विविध वस्तुएँ बनाने के लिए धातुओं को विभिन्न आकृतियाँ दी जा सकती हैं।
3. धातुएँ ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक हैं। इसका अर्थ है कि धातुएँ ऊष्मा और विद्युत को अपने में से आसानी से प्रवाहित होने देती हैं। धातुएँ सामान्यतः ऊष्मा की सुचालक होती हैं [ऊष्मा का चालन, ऊष्मा चालकता (thermal conductivity) भी कहलाता है। सिल्वर (चाँदी) धातु ऊष्मा का उत्तम चालक है। उसकी सबसे अधिक ऊष्मा चालकता होती है। कॉपर और ऐलुमिनियम धातुएँ भी ऊष्मा की अत्यन्त सुचालक हैं। पाक बर्तनों (cooking utensils) तथा जल क्वथित्रों (water boilers), इत्यादि को प्रायः कॉपर अथवा ऐलुमिनियम धातुओं का बनाया जाता है क्योंकि वे ऊष्मा की अत्यधिक सुचालक होती हैं। धातुओं में ऊष्मा का हीनतम चालक (poorest conductor) लेड (lead) है। मर्करी धातु भी ऊष्मा का हीन चालक है।
4. धातुएँ प्रायः दृढ़ होती हैं। उनमें उच्च तनन सामर्थ्य (high tensile strength) होती है। इसका अर्थ है कि धातुएँ बिना टूटे भारी (बड़े) भारों को रोक सकती हैं। उदाहरणार्थ, आइरन धातु (स्टील के रूप में) उच्च तनन सामर्थ्य वाली अत्यंत दृढ़ होती है। इसके कारण आइरन धातु को सेतुओं या पुलों, भवनों, रेल की पटरियों, गार्डरों, मशीनों, वाहनों और चेनों, इत्यादि के निर्माण में उपयोग किया जाता है। यद्यपि अधिकांश धातुएँ दृढ़ होती हैं। परन्तु कुछ धातुएँ दृढ़ नहीं होती हैं। उदाहरणार्थ, सोडियम और पोटैशियम धातुएँ दृढ़ नहीं हैं। उनमें निम्न तनन सामर्थ्य होती है।
5. धातुएँ कमरे के ताप पर ठोस होती हैं (मर्करी के अतिरिक्त जो कि एक द्रव धातु है। आइरन, कॉपर, ऐलुमिनियम, सिल्वर तथा गोल्ड, इत्यादि, जैसी सभी धातुएँ कमरे के ताप पर ठोस होती हैं। कमरे के ताप पर केवल एक धातु, मर्करी, द्रव अवस्था में है।
6. धातुओं का सामान्यतः उच्च गलनांक और क्वथनांक होता है। इसका अर्थ है कि अधिकांश धातुएँ उच्च तापों पर गलती और वाष्पित होती हैं। उदाहरणार्थ, आइरन 1535°C के उच्च गलनांक वाली धातु है। इसका अर्थ है कि 1535°C के उच्च ताप तक गर्म करने पर ठोस आइरन गलता है और द्रव आइरन (अथवा गलित आइरन) में परिवर्तित होता है। कॉपर धातु का भी 1083°C का उच्च गलनांक होता है। यद्यपि, कुछ अपवाद भी हैं। उदाहरणार्थ, सोडियम और पोटैशियम धातुओं के उच्च गलनांक (100°C से कम) होते हैं। अन्य धातु गैलियम का गलनांक इतना कम होता है कि वह हाथ में ही गलने लगता है (हमारे हाथ की ऊष्मा से)।
7. धातुओं के उच्च घनत्व होते हैं। इसका अर्थ है कि धातुएँ भारी पदार्थ हैं। उदाहरणार्थ, आइरन धातु का घनत्व 7.8 g/cm3 है जो पर्याप्त उच्च है। यद्यपि, कुछ अपवाद हैं। सोडियम और पोटैशियम के निम्न घनत्व होते हैं। वे अत्यंत हल्की धातुएँ हैं।
8. धातुएँ ध्वानिक (sonorous) होती हैं। इसका अर्थ है कि धातुएँ, जब उन्हें मारते हैं, घंटी की ध्वनि उत्पन्न करती हैं। धातुओं के ध्वानिकता के गुण के कारण ही उन्हें घण्टी, प्लेट के प्रकार के बाजा जैसे मंजीरा और तन्तु-वाद्य जैसे वॉयलिन, गिटार, सितार तथा तानपूरा, इत्यादि के लिए तारों (या तंतुओं) को बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।
9. धातुएँ प्रायः रजत (silver) अथवा धूसर भूरे (grey) रंग की होती हैं (कॉपर और गोल्ड के अतिरिक्त)। कॉपरे का रक्ताभ भूरा (reddish brown) रंग होता है जबकि गोल्ड (सोने) का रंग पीला होता है। धातुएँ बहुसंख्यक (अनेक) कार्यों के लिए हमारे दैनिक जीवन में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं। पाक-उपकरण, बिजली के पंखे, सिलाई मशीनें, कार, बस, ट्रक, रेलगाड़ियाँ, जहाज और वायुयान सभी, धातुओं अथवा मिश्रधातु (alloys) नामक धातुओं के मिश्रण से बनाये जाते हैं। वास्तव में, धातुओं की बनी वस्तुओं की सूची जिन्हें हम अपने दैनिक जीवन में उपयोग करते हैं, अन्तरहित (unending) है।
In simple words: धातुएँ वे पदार्थ हैं जो कठोर, चमकीले, आघातवर्ध्य, तन्य, ऊष्मा और विद्युत के सुचालक होते हैं। इनके कई विशिष्ट गुणधर्म होते हैं जैसे उच्च गलनांक, घनत्व और ध्वानिकता।

🎯 Exam Tip: धातु के विभिन्न गुणधर्मों को उदाहरण सहित समझाना महत्वपूर्ण है, खासकर आघातवर्ध्यता और तन्यता जैसे गुणों पर ध्यान दें।

 

Question 7. अधातुएँ क्या होती हैं? उनके गुणधर्मों को समझाइये ।
Answer: अधातुएँ (Non-metals) : अधातु एक तत्त्व है जो न तो आघातवर्थ्य न तन्य होता है, और विद्युत चालित (प्रवाहित) नहीं करता है। अधातुओं के कुछ उदाहरण हैं : कार्बन, सल्फर, फॉस्फोरस, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, फ्लुओरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन, हीलियम, निऑन, ऑर्गन, क्रिप्टान, और जीनाने । हीरा (diamond) तथा ग्रेफाइट (graphite) भी अधातुएँ हैं। वे कार्बन के अपररूप (allotropic forms) हैं। कमरे के ताप पर सभी अधातुएँ, ब्रोमीन के अतिरिक्त जो एक द्रव अधातु है, ठोस (solids) अथवा गैस (gases) होती हैं।
अधातुओं के गुणधर्म (Properties of Nonmetals) : अधातुओं के भौतिक गुणधर्म, धातुओं के भौतिक गुणधर्मों के बिल्कुल विपरीत हैं। अधातुओं के प्रमुख भौतिक गुणधर्म नीचे दिये गये हैं :
1. अधातुएँ आघातवर्थ्य नहीं हैं। अधातुएँ भंगुर (brittle) होती हैं। इसका अर्थ है कि अधातुओं को हथौड़े से पतली चादरों (thin sheets) में नहीं पीटा जा सकता है। जब हथौड़ा मारा जाता है, अधातुएँ छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाती हैं। उदाहरणार्थ, सल्फर (गंधक) और फॉस्फोरस ठोस अधातुएँ हैं जो आवातवर्थ्य नहीं हैं, उन्हें हथौड़े से पतली चादरों में पीटा नहीं जा सकता है। अतः अधातुओं की हम पतली चादरें नहीं प्राप्त कर सकते हैं। सल्फर और फॉस्फोरस अधातुएँ भंगुर हैं। हथौड़े से जब पीटी जाती हैं, वे छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाती हैं। भंगुरता (brittleness) ठोस अधातुओं का अभिल्लाक्षणिक गुणधर्म है।
2. अधातुएँ तन्य नहीं होती हैं। इसका अर्थ है कि अधातुओं को तारों में र्वीचा नहीं जा सकता है। खींचने पर वे आसानी से पड़-पड़ करके टूट जाती हैं। उदाहरणार्थ, सल्फर और फॉस्फोरस अधातुएँ हैं और वे तन्य नहीं हैं। जब खींचा जाता है, सल्फर और फॉस्फोरस टुकड़ों में टूट जाते हैं और तार नहीं बनाते हैं। अतः अधातुओं से हम तार नहीं प्राप्त कर सकते हैं। उपर्युक्त विवेचना से हम निष्कर्ष निकालते हैं कि : अधातुएँ न तो आघातवष्ट ये हैं न तन्य । अधातुएँ भंगुर हैं।
3. अधातुएँ ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं। इसका अर्थ है कि अधातुएँ अपने में से ऊष्मा और विद्युत को प्रवाहित नहीं होने देती हैं। अधातुओं में से अनेक, वास्तव में, विद्युतरोधी (insulators) हैं। यद्यपि, कुछ अपवाद हैं। कार्बन तत्त्व का एक रूप, हीरा (diamond) अधातु है जो ऊष्मा का सुचालक है और कार्बन तत्त्व का एक अन्य रूप, ग्रेफाइट अधातु है जो विद्युत का सुचालक है। विद्युत का सुचालक होने से, ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड (eletrodes) बनाने के लिए उपयोग किया जाता है (जैसे कि शुष्क सेलों में)।
4. अधातुएँ दीप्त (या चमकीली) नहीं होती हैं। वे देखने में धुंधली होती हैं। अधातुओं में चमक नहीं होती। है जिसका मतलब है कि अधातुओं में चमकीली सतह नहीं होती है। ठोस अधातुएँ देखने में धुंधली होती हैं। उदाहरणार्थ, सल्फर और फॉस्फोरस अधातुएँ हैं जिनमें दीप्ति । (चमक) नहीं है, अर्थात्, उनमें चमकीली सतह नहीं होती है। वे धुंधली (भद्दी) प्रतीत होती हैं। यद्यपि, एक अपवाद है। आयोडीन दीप्त (चमकीली) आकृति वाली अधातु होती है। उसमें चमकीली ऊपरी सतह होती है (धातुओं की भाँति)।
5. अधातुएँ आमतौर पर मृदु होती हैं (हीरे के अतिरिक्त क्योंकि यह अत्यंत कठोर अधातु है) । अधिकांश ठोस अधातुएँ काफी मृदु होती हैं। वे चाकू से आसानी से कट सकती हैं। उदाहरणार्थ, सल्फर और फॉस्फोरस ठोस अधातुएँ हैं जो काफी मृदु हैं और चाकू से आसानी से काटी जा सकती हैं। केवल एक अधातु कार्बन (हीरे के रूप में) अत्यंत कठोर है। वास्तव में, हीरा (जो कार्बन का एक अपररूप है। ज्ञात कठोरतम प्राकृतिक पदार्थ है।
6. अधातुएँ दृढ़ नहीं होती हैं। उनमें निम्न तनन सामर्थ्य होती है। इसका अर्थ है कि अधातुएँ बड़े (भारी) भारों को (बिना टूटे) रोक नहीं सकती हैं। उदाहरणार्थ, ग्रेफाइट एक अधातु है जो दृढ़ नहीं है। उसमें निम्न तनन सामर्थ्य होती है। जब ग्रेफाइट चादर पर भारी भार रखा जाता है, वह टूट जाता है।
7. अधातुएँ, कमरे के ताप पर, ठोस, द्रव अथवा गैसें हो सकती हैं। अधातुएँ सभी तीन अवस्थाओं : ठोस, द्रव और गैस में हो सकती हैं। उदाहरणार्थ, कार्बन, सल्फर और फॉस्फोरस ठोस अधातुएँ हैं; ब्रोमीन द्रव अधातु है; जबकि हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और क्लोरीन गैसीय अधातुएँ हैं।
8. अधातुओं के, तुलनात्मक रूप से, निम्न गलनांक और क्वथनांक होते हैं (ग्रेफाइट के अतिरिक्त जो अत्यंत उच्च गलनांक वाली अधातु है)। इसका मतलब है यह कि अधातुएँ, तुलनात्मक रूप से निम्न तापों पर गलती और वाष्पित होती हैं। उदाहरणार्थ, सल्फर 119°C के निम्न गलनांक वाली अधातु है। आयोडीन भी 113°C के निम्न गलनांक वाली अधातु है। केवल एक अधातु ग्रेफाइट का अत्यंत उच्च गलनांक (3700°C) होता है। अधिकतर अधातुओं के अत्यंत निम्न गलनांक होते हैं जिसके कारण वे कमरे के ताप पर गैसों के रूप में उपस्थित होते हैं।
9. अधातुओं के निम्न घनत्व होते हैं। इसका अर्थ है । कि अधातुएँ हल्के पदार्थ हैं। उदाहरणार्थ सल्फर 2 g/cm3 के निम्न घनत्व वाला ठोस अधातु है, जो काफी निम्न है। गैसीय अधातुओं का घनत्व अत्यंत निम्न होता है। एक अधातु आयोडीन का यद्यपि, उच्च घनत्व होता है।
10. अधातुएँ वानिक sonorous) नहीं होती हैं। इसका अर्थ है कि ठोस अधातुएँ, जब उन्हें मारा जाता है, घण्टी की ध्वनि उत्पन्न नहीं करती हैं।
In simple words: अधातुएँ वे पदार्थ हैं जो आघातवर्ध्य या तन्य नहीं होते और आमतौर पर ऊष्मा और विद्युत के कुचालक होते हैं। ये भंगुर होते हैं, निम्न गलनांक और घनत्व वाले होते हैं और विभिन्न भौतिक अवस्थाओं में पाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: अधातुओं के गुणों को धातुओं के गुणों के विपरीत याद रखना सहायक होता है, विशेषकर भंगुरता और कुचालकता।

 

Question 8. कोलाइडों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: कोलाइडों को निम्नलिखित सात वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है
(i) सॉल (Sol)
(ii) ठोस सॉल (Solid sol)
(iii) ऐरोसॉल (Aerosol)
(iv) इमल्शन (Emulsion)
(v) फोम (Foam)
(vi) ठोस फोम (Solid Foam)
(vii) जेल (Gel)
(i) सॉल (Sol) - सॉल एक कोलाइड है जिसमें नन्हें ठोस कण, द्रव माध्यम में परिक्षिप्त होते हैं। सॉलों के उदाहरण हैं : स्याही, साबुन विलयन, स्टार्च विलयन और अधिकांश पेण्ट (प्रलेप)
(ii) ठोस सॉल (Solid Sol) - ठोस सॉल एक कोलाइड है जिसमें ठोस कण, ठोस माध्यम में परिक्षिप्त होते हैं। ठोस सॉल का उदाहरण है : रंगीन रत्नपत्थर (माणिक्य काँच के समान) ।।
(iii) ऐरोसॉल (Aerosol) - ऐरोसॉल एक कोलाइड है जिसमें ठोस अथवा द्रव, गैस (वायु सहित) में परिक्षिप्त होता है। कोलाइडों जिनमें गैस में ठोस परिक्षिप्त होता है, के उदाहरण हैं : धुआँ या धूम (जो वायु में कालिख है) और स्वचालित वाहन निष्कास (Automobile Exhausts)। ऐरोसॉलों जिनमें गैस में द्रव परिक्षिप्त होता है, के उदाहरण हैं : केश स्प्रे, कोहरा, कुहासा और मेघ या बादल ।
(iv) इमल्शन (Emulsion) - इमल्शन (पायस) एक कोलाइड है जिसमें एक दूव की अत्यंत छोटी सूक्ष्म बूंदें, दूसरे द्रव जो उसके साथ मिश्रणीय नहीं हैं, में परिक्षिप्त होती हैं। इमल्शन के उदाहरण हैं दूध, मक्खन और फेस क्रीम ।
(v) फोम (Foam) - फोम (फेन या झाग) एक कोलाइड है जिसमें ठोस माध्यम में गैस परिक्षिप्त होती है। फोम के उदाहरण हैं : अग्निशामक आग (Fire-extinguisher Foam); साबुन के बुलबुले (Soap Bubbles), शेविंग क्रीम (Shaving Cream) और बीअर झाग (Beer Foam)।
(vi) ठोस फोम (Solid Foam) - ठोस फोम एक कोलाइड है जिसमें ठोस माध्यम में गैस परिक्षिप्त होती है। ठोस फोम के उदाहरण हैं : रोधी फोम, फोम रबड़ और स्पंज ।
(vii) जेल (Gel) - जेल एक अर्द्ध-ठोस कोलाइड है जिसमें द्रव में परिक्षिप्त ठोस कणों को लगातार जलक होता है। जेल के उदाहरण हैं : जेलियाँ (Jellies) और जिलैटिन (Gelatine)
In simple words: कोलाइड ऐसे मिश्रण होते हैं जिनमें कणों का आकार वास्तविक विलयन और निलंबन के बीच होता है, और इन्हें परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम के आधार पर विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है जैसे सॉल, इमल्शन, फोम और जेल।

🎯 Exam Tip: कोलाइड के विभिन्न प्रकारों और प्रत्येक के उदाहरणों को याद रखना वर्गीकरण-आधारित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।

तालिका रूप में कोलाइडों का वर्गीकरण

कोलाइड का तकनीकी नामपरिक्षिप्त प्रावस्थापरिक्षेपण माध्यमउदाहरण
1. सॉलठोसद्रवस्याही, साबुन-विलयन, स्टार्च-विलयन, अधिकांश पेन्ट्स ।
2. ठोस सॉलठोसठोसरंगीन रत्न पत्थर (माणिक्य काँच के समान)।
3. ऐरोसोल(i) ठोसगैससधुआँ, स्वचालित वाहन निष्कास ।
(ii) द्रवगैसकेशस्प्रे, कोहरा, कुहासा, मेघ।
4. इमल्शनद्रवद्रवदूध, मक्खन, फेस क्रीम।
5. फोम (फेन)गैसद्रवअग्नि-शामक झाग, साबुन के बुलबुले, शेविंग क्रीम, बीअर झाग।
6. ठोस फोमगैसठोसरोधी फोम, फोम रबड़, स्पंज ।
7. जेलठोसद्रवजेलियाँ, जिलैटिन।

 

Question 9. एक विलयन में, जल के 370 g में शक्कर के 30 ग्राम घुले हुए हैं। इस विलयन के सान्द्रण (सान्द्रता) की गणना कीजिए।
Answer: हल : विलयन की सान्द्रता (सान्द्रण) \[ \text{सान्द्रता} = \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान}}{\text{विलयन का द्रव्यमान}} \times 100 \] यहाँ, विलेय (शक्कर) का द्रव्यमान = 30 g और, विलायक (जल) का द्रव्यमान = 370 g इसलिए, विलयन का द्रव्यमान = विलेय का द्रव्यमान + विलायक का द्रव्यमान = 30 + 370 = 400 g इसलिए, विलयन का सान्द्रण (सान्द्रता) \[ = \frac{30}{400} \times 100 = 7.5\% \] अतः शक्कर के विलयन की सान्द्रता 7.5 प्रतिशत है।
In simple words: विलयन की सांद्रता निकालने के लिए, विलेय के द्रव्यमान को विलयन के कुल द्रव्यमान से भाग देकर 100 से गुणा किया जाता है। यहाँ, शक्कर विलेय है और जल विलायक है, जिससे कुल विलयन 400g का बनता है, और सांद्रता 7.5% होगी।

🎯 Exam Tip: सांद्रता की गणना करते समय, विलेय और विलायक के द्रव्यमान को सही ढंग से जोड़कर विलयन का कुल द्रव्यमान प्राप्त करना सुनिश्चित करें।

अभ्यास प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. लोहे से बने किसी बर्तन पर जंग का लगना कहलाता है
(a) घुलना और यह एक भौतिक परिवर्तन
(b) संक्षारण और यह एक रासायनिक परिवर्तन
(c) घुलना और यह एक रासायनिक परिवर्तन
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
Answer: (b) संक्षारण और यह एक रासायनिक परिवर्तन
In simple words: लोहे पर जंग लगना एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें लोहा ऑक्सीजन और नमी के साथ प्रतिक्रिया करके आयरन ऑक्साइड बनाता है, जिसे संक्षारण कहते हैं।

🎯 Exam Tip: जंग लगना (संक्षारण) एक सामान्य रासायनिक परिवर्तन का उदाहरण है; भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों के बीच अंतर को स्पष्ट रखें।

 

Question 2. सल्फर तथा कार्बन डाइसल्फाइडे का मिश्रण है
(a) समांगी तथा टिण्डल प्रभाव नहीं दर्शाता है।
(b) विषमांगी तथा टिण्डल प्रभाव नहीं दर्शाता है ।
(c) समांगी तथा टिण्डल प्रभाव देर्शाता है।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
Answer: (a) समांगी तथा टिण्डल प्रभाव नहीं दर्शाता है।
In simple words: सल्फर, कार्बन डाइसल्फाइड में पूरी तरह से घुल जाता है, जिससे एक समांगी विलयन बनता है जो टिंडल प्रभाव नहीं दिखाता है।

🎯 Exam Tip: वास्तविक विलयन समांगी होते हैं और टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाते, जबकि कोलाइडल और निलंबन टिंडल प्रभाव दर्शा सकते हैं।

 

Question 3. समुद्री जल से नमक प्राप्त किया जाता है|
(a) वाष्पीकरण द्वारा
(b) प्रभाजी आसवन द्वारा
(c) क्रोमैटोग्राफी द्वारा
(d) अपकेन्द्रन विधि द्वारा ।
Answer: (a) वाष्पीकरण द्वारा
In simple words: समुद्री जल से नमक प्राप्त करने के लिए वाष्पीकरण विधि का उपयोग किया जाता है, जहाँ जल को गर्म करके वाष्प में बदल दिया जाता है और नमक पीछे रह जाता है।

🎯 Exam Tip: वाष्पीकरण का उपयोग अवाष्पशील ठोस को उसके विलायक से अलग करने के लिए किया जाता है।

 

Question 4. ऊर्ध्वपातन पदार्थ नहीं है
(a) आयोडीन
(b) बेंजीन
(c) कपूर
(d) अमोनियम क्लोराइड ।
Answer: (b) बेंजीन
In simple words: ऊर्ध्वपातन वह प्रक्रिया है जिसमें एक ठोस गर्म करने पर सीधे गैस में बदल जाता है, और बेंजीन ऐसा पदार्थ नहीं है क्योंकि यह तरल अवस्था में मौजूद होता है।

🎯 Exam Tip: ऊर्ध्वपातन करने वाले पदार्थ सीधे ठोस से गैस में बदलते हैं; ऐसे पदार्थों के उदाहरण याद रखें।

 

Question 5. पृथक्करण फनल का उपयोग करते हैं अलग करने के लिए
(a) दो घुलनशील द्रवों को
(b) द्रव में अघुलनशील कणों को
(c) दो अघुलनशील द्रवों को ।
(d) द्रव में विलेय ठोस पदार्थ को ।
Answer: (c) दो अघुलनशील द्रवों को
In simple words: पृथक्करण फनल का उपयोग दो ऐसे द्रवों को अलग करने के लिए किया जाता है जो एक-दूसरे में घुलते नहीं हैं और अलग-अलग परतें बनाते हैं, जैसे तेल और पानी।

🎯 Exam Tip: पृथक्करण फनल की कार्यप्रणाली को समझें - यह विभिन्न घनत्व वाले अमिश्रणीय द्रवों पर आधारित है।

 

Question 6. लोहे की पिने, बालू व अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण घटकों को अलग करने के लिए प्रयोग किये गये प्रक्रमों का सही क्रम है
(a) विलयन बनाना, छानना व चुम्बकीय पृथक्करण
(b) चुम्बकीय पृथक्करण, विलयन बनाना व छानना
(c) चुम्बकीय पृथक्करण, ऊर्ध्वपातन
(d) विलयन बनाना, आसवन व चुम्बकीय पृथक्करण
Answer: (c) चुम्बकीय पृथक्करण, ऊर्ध्वपातन
In simple words: इस मिश्रण में, पहले चुंबक का उपयोग करके लोहे की पिनों को अलग किया जाता है, फिर अमोनियम क्लोराइड को गर्म करके ऊर्ध्वपातन विधि से बालू से अलग किया जाता है क्योंकि यह सीधे ठोस से गैस में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: मिश्रणों को अलग करने के लिए घटकों के भौतिक गुणों (जैसे चुंबकीय गुण, ऊर्ध्वपातनीय प्रकृति) के आधार पर सही क्रम का चयन करें।

 

Question 7. गर्म करने पर सन्तृप्त विलयन हो जायेगा|
(a) अति सन्तृप्त
(b) असन्तृप्त
(c) अपघटित
(d) तनु विलयन।
Answer: (b) असन्तृप्त
In simple words: एक संतृप्त विलयन में, गर्म करने पर विलेय की घुलनशीलता बढ़ जाती है, जिससे वह और विलेय घोल सकता है और असंतृप्त हो जाता है।

🎯 Exam Tip: तापमान बढ़ने पर अधिकांश ठोस विलेयों की घुलनशीलता बढ़ती है, जिससे संतृप्त विलयन असंतृप्त हो जाता है।

 

Question 8. टिंडल प्रभाव प्रदर्शित नहीं करते हैं
(a) वास्तविक विलयन
(b) निलम्बन
(c) कोलाइडल
(d) ये सभी ।
Answer: (a) वास्तविक विलयन
In simple words: टिंडल प्रभाव प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण होता है, जो केवल निलंबन और कोलाइडल विलयनों में देखा जाता है क्योंकि उनके कण बड़े होते हैं, जबकि वास्तविक विलयन के कण बहुत छोटे होने के कारण प्रकाश को प्रकीर्णित नहीं कर पाते।

🎯 Exam Tip: टिंडल प्रभाव कोलाइड और निलंबन की पहचान के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण है; वास्तविक विलयन इसे नहीं दिखाते।

 

Question 9. क्रोमैटोग्राफी का प्रयोग करते हैं
(a) डाई में रंगों को अलग करने में
(b) प्राकृतिक रंगों से लवकों को अलग करने में
(c) रक्त से नशीले पदार्थों को दूर करने में।
(d) उपर्युक्त सभी में ।
Answer: (d) उपर्युक्त सभी में
In simple words: क्रोमैटोग्राफी एक शक्तिशाली पृथक्करण तकनीक है जिसका उपयोग विभिन्न घटकों को उनके भिन्न-भिन्न अवशोषण या गतिशीलता के आधार पर मिश्रण से अलग करने के लिए किया जाता है, जैसे डाई के रंग, प्राकृतिक रंगों से लवक या रक्त से नशीले पदार्थ।

🎯 Exam Tip: क्रोमैटोग्राफी का उपयोग ऐसे मिश्रणों को अलग करने के लिए किया जाता है जिनके घटक विभिन्न दरों पर अधिशोषित होते हैं या गति करते हैं।

 

Question 10. धातुएँ
(a) चमकीली व गहरे रंग की होती हैं।
(b) विद्युत व ताप की सुचालक होती हैं।
(c) आघातवर्थ्य एवं तन्य होती हैं।
(d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: धातुएँ आमतौर पर चमकीली होती हैं, विद्युत और ऊष्मा की अच्छी सुचालक होती हैं, और उन्हें पीटा जा सकता है या तार में खींचा जा सकता है।

🎯 Exam Tip: धातुओं के मुख्य भौतिक गुणों को एक साथ याद रखें, जैसे चमक, चालकता और यांत्रिक गुण।

 

Question 11. कमरे के ताप पर द्रव धातु है
(a) टिन
(b) ब्रोमीन
(c) पारा
(d) बोरॉन
Answer: (c) पारा
In simple words: पारा (मर्करी) एकमात्र धातु है जो कमरे के सामान्य तापमान पर तरल अवस्था में मौजूद होती है।

🎯 Exam Tip: धातुओं के अपवादों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर वे जो कमरे के तापमान पर तरल होते हैं।

 

Question 12. कमरे के ताप पर द्रव अधातु है
(a) टिन
(b) ब्रोमीन
(c) पारा
(d) बोरॉन
Answer: (b) ब्रोमीन
In simple words: ब्रोमीन एकमात्र अधातु है जो कमरे के सामान्य तापमान पर तरल अवस्था में पायी जाती है।

🎯 Exam Tip: धातुओं और अधातुओं के भौतिक गुणों के अपवादों को पहचानें, जैसे कि कमरे के तापमान पर तरल अवस्था में पाए जाने वाले तत्व।

 

Question 13. उपधातु का उदाहरण है
(a) टिन
(b) ब्रोमीन
(c) पारा
(d) बोरॉन ।
Answer: (d) बोरॉन
In simple words: उपधातु वे तत्व होते हैं जिनमें धातुओं और अधातुओं दोनों के गुणधर्म होते हैं, और बोरॉन इसका एक उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: उपधातुओं के कुछ सामान्य उदाहरणों को याद रखें जो धातुओं और अधातुओं के बीच के गुणों को दर्शाते हैं।

 

Question 14. दो घुलनशील द्रव अलग किये जाते हैं
(a) आसवन प्रक्रम द्वारा
(b) पृथक्करण फनल द्वारा
(c) भारण विधि द्वारा
(d) ऊर्ध्वपातन द्वारा ।
Answer: (a) आसवन प्रक्रम द्वारा
In simple words: आसवन विधि का उपयोग दो घुलनशील द्रवों को अलग करने के लिए किया जाता है, जिनके क्वथनांकों में पर्याप्त अंतर होता है।

🎯 Exam Tip: आसवन का उपयोग ऐसे द्रवों को अलग करने के लिए किया जाता है जो घुलनशील होते हैं लेकिन उनके क्वथनांक अलग-अलग होते हैं।

 

Question 15. निलम्बन के कण दूर किये जाते हैं
(a) आसवन द्वारा
(b) पृथक्करण फनल द्वारा
(c) भारण विधि द्वारा
(d) ऊर्ध्वपातन द्वारा ।
Answer: (c) भारण विधि द्वारा
In simple words: निलंबन के कणों को भारण (सेडिमेंटेशन) विधि द्वारा अलग किया जा सकता है, जहाँ ठोस कण गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे बैठ जाते हैं।

🎯 Exam Tip: निलंबन में बड़े कण होते हैं जो गुरुत्वाकर्षण के तहत व्यवस्थित हो जाते हैं, जिससे उन्हें भारण द्वारा अलग करना संभव हो जाता है।

 

Question 16. दो अघुलनशील द्रव अलग किये जाते हैं
(a) आसवन द्वारा
(b) पृथक्करण फनले द्वारी
(c) भारण विधि द्वारा
(d) ऊर्ध्वपातन द्वारा ।
Answer: (b) पृथक्करण फनले द्वारी
In simple words: दो अघुलनशील द्रवों को, जो अलग-अलग परतें बनाते हैं, पृथक्करण फनल का उपयोग करके उनके घनत्व के अंतर के आधार पर अलग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: पृथक्करण फनल विशेष रूप से अमिश्रणीय (अघुलनशील) द्रवों को अलग करने के लिए है।

 

Question 17. दूध से क्रीम निकाली जाती है|
(a) आसवन द्वारा
(b) प्रभाजी आसवन द्वारा
(c) क्रोमैटोग्राफी द्वारा
(d) अपकेन्द्रन विधि द्वारा ।
Answer: (d) अपकेन्द्रन विधि द्वारा
In simple words: दूध से क्रीम को अपकेन्द्रन (सेंट्रीफ्यूगेशन) विधि से अलग किया जाता है, जहाँ तेजी से घुमाने पर हल्के घटक (क्रीम) भारी घटकों (महीन दूध) से अलग हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: अपकेन्द्रन का उपयोग उन मिश्रणों को अलग करने के लिए होता है जहाँ कण इतने छोटे होते हैं कि वे छानने से अलग नहीं हो सकते, जैसे दूध से क्रीम।

 

Question 18. पेट्रोलियम व वायु के घटक प्राप्त किये जाते हैं
(a) आसवन द्वारा
(b) प्रभाजी आसवन द्वारा ।
(c) क्रोमैटोग्राफी द्वारा
(d) अपकेन्द्रन विधि द्वारा।
Answer: (b) प्रभाजी आसवन द्वारा
In simple words: पेट्रोलियम और वायु के विभिन्न घटकों को उनके अलग-अलग क्वथनांकों के आधार पर प्रभाजी आसवन की प्रक्रिया द्वारा अलग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: प्रभाजी आसवन का उपयोग उन मिश्रणों को अलग करने के लिए किया जाता है जिनके घटकों के क्वथनांक में बहुत कम अंतर होता है।

 

Question 19. रक्त से नशीले पदार्थ अलग किये जाते हैं
(a) वाष्पीकरण द्वारा
(b) प्रभाजी आसवन द्वारा
(c) क्रोमैटोग्राफी द्वारा
(d) अपकेन्द्रन विधि द्वारा ।
Answer: (c) क्रोमैटोग्राफी द्वारा
In simple words: रक्त से नशीले पदार्थों को अलग करने के लिए क्रोमैटोग्राफी का उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह एक जटिल मिश्रण से विभिन्न घटकों को बहुत प्रभावी ढंग से अलग कर सकती है।

🎯 Exam Tip: क्रोमैटोग्राफी एक उच्च-स्तरीय पृथक्करण तकनीक है जो अक्सर जटिल जैविक या रासायनिक मिश्रणों में छोटे घटकों को अलग करने के लिए उपयोग की जाती है।

 

Question 20. घटकों का पृथक्करण चाहिए|
(a) अवांछित या हानिकारक घटक को दूर करने के लिए
(b) शुद्ध पदार्थ प्राप्त करने के लिए
(c) लाभदायक घटक को प्राप्त करने के लिए
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: मिश्रण के घटकों को अलग करने के कई कारण होते हैं, जैसे अवांछित या हानिकारक तत्वों को हटाना, शुद्ध पदार्थ प्राप्त करना, या किसी उपयोगी घटक को निकालना।

🎯 Exam Tip: मिश्रणों के पृथक्करण के पीछे के विभिन्न उद्देश्यों को समझें, क्योंकि यह दैनिक जीवन और औद्योगिक प्रक्रियाओं दोनों में महत्वपूर्ण है।

 

Question 21. समांगी मिश्रण का उदाहरण है
(a) कॉपर सल्फेट का विलयन
(b) नमक व सल्फर का मिश्रण
(c) सल्फर व लोहे के चूर्ण का मिश्रण
(d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (a) कॉपर सल्फेट का विलयन
In simple words: कॉपर सल्फेट का विलयन एक समांगी मिश्रण होता है क्योंकि इसमें कॉपर सल्फेट जल में समान रूप से घुल जाता है, जिससे एक ही चरण वाला मिश्रण बनता है।

🎯 Exam Tip: समांगी मिश्रण वे होते हैं जहाँ घटक पूरी तरह से एक-दूसरे में मिल जाते हैं और एक समान संरचना बनाते हैं।

 

Question 22. दो या अधिक पदार्थों को समांगी मिश्रण कहलाता
(a) विलयन
(b) निलम्बन
(c) कोलाइडल
(d) इनमें से कोई भी नहीं।
Answer: (a) विलयन
In simple words: दो या दो से अधिक पदार्थों के समांगी मिश्रण को विलयन कहा जाता है, जहाँ सभी घटक एक-दूसरे में समान रूप से घुल जाते हैं।

🎯 Exam Tip: विलयन की परिभाषा को याद रखें कि यह एक समांगी मिश्रण होता है।

 

Question 23. निलम्बन है एक
(a) समांगी मिश्रण
(b) विषमांगी मिश्रण जिसमें घुलित कण आँखों से देखे जा सकें
(c) विषमांगी मिश्रण जिसमें घुलित कण आँखों से न देखे जा सकें
(d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (b) विषमांगी मिश्रण जिसमें घुलित कण आँखों से देखे जा सकें
In simple words: निलंबन एक विषमांगी मिश्रण है जिसमें ठोस कण द्रव में तैरते रहते हैं और इतने बड़े होते हैं कि उन्हें नग्न आँखों से देखा जा सकता है।

🎯 Exam Tip: निलंबन की पहचान उसके बड़े, दृश्यमान कणों और विषमांगी प्रकृति से होती है।

 

Question 24. विलयन है एक
(a) समांगी मिश्रण
(b) विषमांगी मिश्रण जिसमें घुलित कण आँखों से देखे जा सकें
(c) विषमांगी मिश्रण जिसमें घुलित कण आँखों से न देखे जा सकें
(d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (a) समांगी मिश्रण
In simple words: विलयन एक समांगी मिश्रण होता है जिसमें विलेय कण विलायक में पूरी तरह से घुल जाते हैं और आँखों से दिखाई नहीं देते, जिससे एक समान मिश्रण बनता है।

🎯 Exam Tip: विलयन समांगी होते हैं और उनके कण इतने छोटे होते हैं कि वे प्रकाश को प्रकीर्णित नहीं करते और आँखों से दिखाई नहीं देते।

 

Question 25. कोलाइडल है एक
(a) समांगी मिश्रण
(b) विषमांगी मिश्रण जिसमें घुलित कण आँखों से देखे जा सकें
(c) विषमांगी मिश्रण जिसमे घुलित कण आँखों से न ' देखे जा सकें ।
(d) उपरोक्त सभी ।
Answer: (c) विषमांगी मिश्रण जिसमे घुलित कण आँखों से न ' देखे जा सकें ।
In simple words: कोलाइडल मिश्रण विषमांगी होते हैं, लेकिन उनके कण इतने छोटे होते हैं कि वे नग्न आँखों से दिखाई नहीं देते, हालांकि वे टिंडल प्रभाव दर्शा सकते हैं।

🎯 Exam Tip: कोलाइडल मिश्रण की विशेषता यह है कि वे विषमांगी होते हुए भी उनके कण नग्न आँखों से अदृश्य रहते हैं, जो उन्हें निलंबन से अलग करता है।

 

Question 26. मिश्रण के विषय में सही कथन नहीं है।
(a) घटक अपने गुण प्रदर्शित करते हैं।
(b) मिश्रण के गुण घटकों के गुण से भिन्न होते हैं।
(c) घटक किसी भी अनुपात में मिले होते हैं।
(d) घटक सरल विधियों द्वारा अलग किये जा सकते हैं।
Answer: (b) मिश्रण के गुण घटकों के गुण से भिन्न होते हैं।
In simple words: मिश्रण में, घटक अपने मूल गुणों को बनाए रखते हैं, जबकि यौगिकों में, घटक अपनी पहचान खो देते हैं और एक नया पदार्थ बनता है जिसके गुण घटकों से पूरी तरह भिन्न होते हैं।

🎯 Exam Tip: मिश्रण और यौगिक के बीच मुख्य अंतर उनके घटकों के गुणों का बना रहना या बदलना है।

 

Question 27. विषमांगी मिश्रण का उदाहरण है
(a) लकड़ी
(b) पीतल
(c) नमक का जलीय विलयन
(d) स्टील ।
Answer: (a) लकड़ी
In simple words: लकड़ी एक विषमांगी मिश्रण है क्योंकि इसकी संरचना में विभिन्न घटक (जैसे सेल्युलोज, लिग्निन, जल) असमान रूप से वितरित होते हैं।

🎯 Exam Tip: विषमांगी मिश्रणों में घटक असमान रूप से वितरित होते हैं और अक्सर अलग-अलग चरणों में दिखाई देते हैं।

 

Question 28. ठोस-ठोस विलयन का उदाहरण है-
(a) लकड़ी
(b) पीतल
(c) नमक का जलीय विलयन
(d) इमल्शन ।
Answer: (b) पीतल
In simple words: पीतल एक मिश्र धातु है जो तांबे और जस्ता का ठोस-ठोस विलयन है, जहाँ दोनों धातुएँ एक-दूसरे में समान रूप से मिश्रित होती हैं।

🎯 Exam Tip: मिश्र धातुएँ ठोस-ठोस विलयन के अच्छे उदाहरण हैं, जहाँ दो या दो से अधिक धातुएँ या धातु और अधातु एक साथ मिश्रित होते हैं।

 

Question 29. गंदला पानी उदाहरण है
(a) विलयन का
(b) निलम्बन का
(c) कोलाइडल का
(d) ये सभी
Answer: (b) निलम्बन का
In simple words: गंदला पानी एक निलंबन का उदाहरण है क्योंकि इसमें मिट्टी या अन्य ठोस कण जल में अस्थायी रूप से निलंबित रहते हैं और समय के साथ नीचे बैठ जाते हैं।

🎯 Exam Tip: निलंबन में वे मिश्रण आते हैं जिनके कण इतने बड़े होते हैं कि वे द्रव में तैरते हैं और नग्न आँखों से देखे जा सकते हैं, तथा गुरुत्वाकर्षण के कारण बैठ जाते हैं।

 

Question 30. साबुन का जलीय विलयन है एक
(a) विलयन का
(b) निलम्बन का
(c) कोलाइडल का
(d) ये सभी ।
Answer: (c) कोलाइडल का
In simple words: साबुन का जलीय विलयन एक कोलाइडल विलयन है क्योंकि साबुन के कण जल में समान रूप से वितरित होते हैं, लेकिन वे विलयन के कणों से बड़े होते हैं और टिंडल प्रभाव प्रदर्शित कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: साबुन का पानी, स्टार्च का विलयन और दूध जैसे पदार्थ कोलाइडल विलयन के सामान्य उदाहरण हैं।

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