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Detailed Chapter 14 प्राकृतिक संसाधन UP Board Solutions for Class 9 Science
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Class 9 Science Chapter 14 प्राकृतिक संसाधन UP Board Solutions PDF
पाठ्य – पुस्तक के प्रश्नोत्तर
पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 217)
Question 1. शुक्र और मंगल ग्रहों के वायुमण्डल से हमारा वायुमण्डल कैसे भिन्न है?
Answer: हमारे वायुमण्डल (पृथ्वी के) में वायु कई गैसों का मिश्रण है, जैसे-नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कॉर्बन डाई ऑक्साइड व जलवाष्प आदि । पृथ्वी पर इन सभी गैसों की उपस्थिति ही जीवन-यापन करने के लिए आवश्यक है। शुक्र व मंगल के वायुमण्डल में 95 से 97% तक कार्बनडाइआक्साइड ही पाई जाती है। अतः इन ग्रहों पर कोई जीवन नहीं पाया जाता है।
In simple words: पृथ्वी का वायुमंडल विभिन्न गैसों का मिश्रण है जो जीवन के लिए आवश्यक है, जबकि शुक्र और मंगल के वायुमंडल में मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड होने के कारण जीवन संभव नहीं है।
🎯 Exam Tip: ग्रहों के वायुमंडलीय संघटन की तुलना करते समय, पृथ्वी के वायुमंडल में जीवन-आधारक गैसों की उपस्थिति पर ध्यान दें।
Question 2. वायुमण्डले एक कम्बल की तरह कैसे कार्य करता है?
Answer: वायु ऊष्मा की कुचालक है। वायुमण्डल पृथ्वी के औसत तापमान को दिन के समय और यहाँ तक कि पूरे वर्ष-भर नियत रखता है। वायुमण्डल ही दिन में अचानक तापमान को बढ़ने से रोकता है, और रात के समय पृथ्वी के बाहरी आन्तरिक्ष में ताप की दर को कम करता है। अतः हम कह सकते हैं कि वायुमण्डल एक कम्बल की तरह कार्य करता है।
In simple words: वायुमंडल ऊष्मा का कुचालक होने के कारण पृथ्वी के तापमान को दिन में बहुत अधिक बढ़ने और रात में बहुत कम होने से रोकता है, जिससे तापमान स्थिर रहता है और यह एक कम्बल की तरह काम करता है।
🎯 Exam Tip: वायुमंडल के ताप नियामक गुणों को समझाते समय, दिन और रात के तापमान स्थिरीकरण पर जोर दें।
Question 3. वायु प्रवाह (पवन) के क्या कारण हैं?
Answer: स्थल तथा जल के ऊपर की वायु सौर ऊर्जा के कारण गर्म होती है। जल की अपेक्षा स्थल के ऊपर की वायु शीघ्र गर्म होकर ऊपर उठना प्रारंभ कर देती है। इससे वहाँ कम वायुदाब का क्षेत्र बन जाता है और समुद्र के ऊपर की वायु कम वायुदाब वाले क्षेत्र में प्रवाहित होने लगती है। इस प्रकार एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में वायु प्रवाह पवनों का निर्माण करती है। दिन के समय वायु की दिशा समुद्र से स्थल की ओर होती है। रात्रि में स्थल के ऊपर की वायु समुद्र के ऊपर की वायु की तुलना में जल्दी ठंडी हो जाती है। अतः रात्रि में वायु प्रवाह स्थल से समुद्र की ओर होता है।
In simple words: वायु प्रवाह, या पवनें, स्थल और जल के असमान रूप से गर्म होने के कारण बनती हैं, जिससे वायुदाब में अंतर आता है और हवा उच्च दाब से निम्न दाब वाले क्षेत्रों की ओर चलती है।
🎯 Exam Tip: पवन निर्माण की व्याख्या करते समय, स्थल और जल के बीच तापन के अंतर और परिणामस्वरूप वायुदाब भिन्नता को प्रमुखता दें।
Question 4. बादलों का निर्माण कैसे होता है?
Answer: बादलों का निर्माण-दिन में वायुमण्डल में जलवाष्प पहुँचती है क्योंकि गर्म होने पर जल जलाशयों से उड़ता है तथा जलवाष्प बनकर वायुमण्डल में आ जाता है। गर्म वायु जलवाष्प को अपने साथ लेकर ऊपर की ओर उठती है। फैलने पर यह ठंडी हो जाती है तथा संघनित होकर बादल बनाती है।
In simple words: बादलों का निर्माण तब होता है जब जल जलाशयों से वाष्पीकृत होकर वायुमंडल में पहुँचता है, गर्म हवा के साथ ऊपर उठकर फैलता है, ठंडा होता है और संघनित होकर छोटी बूंदों या क्रिस्टल बनाता है।
🎯 Exam Tip: बादल निर्माण प्रक्रिया में वाष्पीकरण, ऊपर उठना, ठंडा होना और संघनन के चरणों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
Question 5. मनुष्य के तीन क्रिया-कलापों का उल्लेख करें जो वायु प्रदूषण में सहायक हैं।
Answer: मानव निर्मित स्रोत जो विभिन्न मानव क्रिया-कलापों द्वारा उत्पन्न होते हैं, जैसे-
(i) जनसंख्या वृद्धि,
(ii) वनों का काटना,
(iii) शहरीकरण,
(iv) औद्योगीकरण
- मानव अपने कार्यों द्वारा विभिन्न प्रदूषण जैसे- कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), हाइड्रोकार्बन, आर्सेनिक तथा रेडियोधर्मी पदार्थ वायु में छोड़ता है।
- कोयला तथा पेट्रोलियम आदि जीवाश्म ईंधनों के जलने से भी प्रदूषक वायु में पहुँचते हैं।
- कृषि में अत्यधिक उर्वरकों तथा पीड़कनाशियों के प्रयोग से भी वायु में प्रदूषक पहुँचते हैं।
- ओजोन परत में छेद होने से भी पराबैंगनी किरणें पृथ्वी तक पहुँचती हैं।
In simple words: मानव की गतिविधियाँ जैसे जनसंख्या वृद्धि, वनों की कटाई, शहरीकरण और औद्योगीकरण वायु प्रदूषण के मुख्य कारण हैं, जिनसे कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड जैसे हानिकारक पदार्थ वायुमंडल में छोड़े जाते हैं।
🎯 Exam Tip: वायु प्रदूषण के मानवीय कारणों को सूचीबद्ध करते समय, जनसंख्या वृद्धि, वनों की कटाई और औद्योगिक गतिविधियों के प्रभावों पर ध्यान केंद्रित करें।
पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 219)
Question 1. जीवों को जल की आवश्यकता क्यों होती है?
Answer:
- सभी कोशिकीय प्रक्रियाएँ जल माध्यम में होती हैं।
- पदार्थों का संवहन घुली अवस्था में होता है।
- प्राणी को जीवित रहने हेतु जल आवश्यक है।
- जल प्राणियों का आवास भी है।
- स्थलीय जीवों को मीठे जल की आवश्यकता होती है।
In simple words: जीवों को जीवित रहने के लिए जल अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यह सभी कोशिकीय प्रक्रियाओं का माध्यम है, पदार्थों के संवहन में मदद करता है, और कई प्राणियों के लिए आवास प्रदान करता है।
🎯 Exam Tip: जल की आवश्यकता के विभिन्न पहलुओं को सूचीबद्ध करते समय, जैविक प्रक्रियाओं, परिवहन और आवास पर इसके महत्व को उजागर करें।
Question 2. जिस गाँव/शहर/नगर में आप रहते हैं वहाँ पर उपलब्ध शुद्ध जल का मुख्य स्रोत क्या है?
Answer: शहर में- नगर निगम द्वारा निर्मित जल के टैंक । गाँवों में- तालाब, कुएँ, नल तथा नदियाँ एवं नहर आदि ।
In simple words: शहरी क्षेत्रों में शुद्ध जल का मुख्य स्रोत नगर निगम द्वारा आपूर्ति किए गए टैंक हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह तालाब, कुएँ, नल, नदियाँ और नहरें होती हैं।
🎯 Exam Tip: स्थानीय जल स्रोतों को पहचानते समय, शहरी और ग्रामीण दोनों संदर्भों में विभिन्न प्रकार के स्रोतों का उल्लेख करें।
Question 3. क्या आप किसी क्रिया-कलाप के बारे में जानते हैं जो इस जल के स्रोत को प्रदूषित कर रहा है?
Answer:
(i) कृषि में उपयोगी कीटनाशक तथा उर्वरक
(ii) उद्योगों से निकला कचरा नदियों तथा झीलों में जमा हो जाता है।
(iii) जलाशयों में अनैच्छिक पदार्थों का मिलाना ।
(iv) इच्छित पदार्थों को जल से हटाना ।
In simple words: कृषि में कीटनाशकों और उर्वरकों का उपयोग, उद्योगों से कचरा निकालना, और जलाशयों में अनचाहे पदार्थों का मिलना प्रमुख क्रियाकलाप हैं जो जल स्रोतों को प्रदूषित करते हैं।
🎯 Exam Tip: जल प्रदूषण के कारणों की व्याख्या करते समय, कृषि अपवाह और औद्योगिक कचरे जैसे विशिष्ट मानवीय गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करें।
पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 222)
Question 1. मृदा (मिट्टी) का निर्माण किस प्रकार होता है?
Answer: मिट्टी बनाने में निम्नलिखित कारक काम करते हैं
1. सूर्य - सूर्य पत्थरों को गर्म करता है जिससे वे प्रसारित हो जाते हैं। रात के समय पत्थर सिकुड़ जाते हैं। इससे उसमें दरार पड़ जाती है और वह टूट जाता है।
2. जल - जले मिट्टी के निर्माण में दो तरीके से सहायता करता है-
- सूर्य के ताप से बनी दरार में पानी भर जाता है जो यदि जम जाता है तो वह दरार को चौड़ा कर देता है लेकिन यदि पानी बाद में जमता है तो यह दरार को और भी चौड़ा करेगा क्योंकि बहता हुआ व जमा हुआ पानी पत्थर को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देता है।
- तेज गति से बहता पानी पत्थर के टुकड़ों को बहा ले जाता है जिससे वे आपस में टकराकर टूटकर और छोटे हो जाते हैं। इस प्रकार मिट्टी अपने मूल पत्थर के स्थान से काफी दूर पायी जाती है।
3. हवा - हवा से पत्थर के टुकड़े आपस में टकराकर और भी छोटे-छोटे टुकड़ों में बँट जाते हैं।
4. जीव - जीव भी मिट्टी के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। लाइकेन पत्थरों की सतह पर उगते हैं जो पत्थर को चूर्ण के रूप में बदल देते हैं और मिट्टी की परत का निर्माण करते हैं। इसी प्रकार मॉस भी मिट्टी को बारीक करने का काम करते हैं।
In simple words: मृदा का निर्माण सूर्य की गर्मी से पत्थरों के टूटने, पानी द्वारा कटाव और अपघटन, हवा द्वारा पत्थरों के आपस में टकराने, और लाइकेन व मॉस जैसे जीवों द्वारा चट्टानों को बारीक करने से होता है।
🎯 Exam Tip: मृदा निर्माण के कारकों को सूचीबद्ध करते समय, भौतिक (सूर्य, जल, हवा) और जैविक (जीव) दोनों प्रक्रियाओं को शामिल करें।
Question 2. मृदा अपरदन क्या है?
Answer: उपरिमृदा (Top soil) का वायु/जल द्वारा उड़ना अथवा दूसरे स्थान पर पहुँचना ही मृदा का अपरदन है। मृदा के महीन कण बहते हुए जल के साथ चले जाते हैं। तेज वायु भी मृदा कणों को उड़ाकर ले जाती है।
In simple words: मृदा अपरदन वह प्रक्रिया है जिसमें ऊपर की उपजाऊ मिट्टी, तेज हवा या बहते पानी द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर चली जाती है, जिससे भूमि की उर्वरता कम होती है।
🎯 Exam Tip: मृदा अपरदन की परिभाषा देते समय, उपरिमृदा (top soil) के विस्थापन और इसके कारकों (वायु/जल) पर जोर दें।
Question 3. अपरदन को रोकने और कम करने के कौन-कौन से तरीके हैं?
Answer: अपरदन रोकने के निम्नलिखित तरीके हैं।
1. भूमि को उपजाऊ बनाना - अपरदन प्रायः बंजर भूमि में ही होता है। अतः भूमि की अम्लीयता या क्षारीयता को दूर करके उसे कृषि-योग्य बनाकर मृदा अपरदन को रोका जा सकता है। भूमि को उर्वर बनाने के लिए कम्पोस्ट खाद, हरी खाद, उर्वरक आदि का प्रयोग किया जाता है।
2. पशुओं के चरने पर नियंत्रण - इसके लिए नियंत्रित चरागाहों की व्यवस्था की जानी चाहिए। अतिचारण के कारण पौधे कुचलकर नष्ट हो जाते हैं। मृदा कणों के परस्पर उखड़ जाने पर अपरदन सुगमता से हो जाता है।
3. वनरोपण - वृक्षारोपण, वनरोपण, फसल उगाना आदि क्रियाओं के फलस्वरूप जड़े मृदा कणों को परस्पर बाँधे रखती हैं।
4. वायुरोधक पौधे लगाना - रेगिस्तानी क्षेत्रों में वायु अपरदन को रोकने या कम करने के लिए वृक्षों को पंक्तियों में एक-दूसरे के पास-पास उगाना चाहिए। इससे वायु की तीव्रता कम होने से मृदा अपरदन को कम किया जा सकता है। समोच्च जुताई-पहाड़ी ढलानों पर शिखर से नीचे की ओर समकोण पर गोलाई में जुताई-गुडाई करने से अपरदन कम होता है। इस प्रकार की खेती को कंटूर कृषि कहते हैं।
5. वेदिका निर्माण - पहाड़ी ढलानों को सीढ़ीनुमा खेतों में बाँटकरे अर्थात् वेदिका निर्माण करके खेती की जाती है। इससे जल अपरदन को रोका जा सकता है।
6. बाँध निर्माण - तेज बहाव वाले अधिक जल को रोकने के लिए बाँध बनाए जाते हैं। बाँध से रुके हुए जल का उपयोग विद्युत निर्माण और सिंचाई के लिए किया जाता है।
In simple words: मृदा अपरदन को रोकने के तरीकों में भूमि को उपजाऊ बनाना, पशुओं के चरने पर नियंत्रण, वनरोपण, वायुरोधक पौधे लगाना, वेदिका निर्माण और बाँध बनाना शामिल हैं, जो मिट्टी को बाँधने और पानी के बहाव को कम करने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: अपरदन नियंत्रण के विभिन्न तरीकों का वर्णन करते समय, प्रत्येक विधि के पीछे के सिद्धांत और उसके विशिष्ट लाभों को स्पष्ट करें।
पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 226)
Question 1. जल-चक्र के क्रम में जल की कौन-कौन सी अवस्थाएँ पायी जाती हैं?
Answer: जल-चक्र में पानी की मुख्यतया दो अवस्थाएँ पायी जाती हैं-एक तरल (द्रव) व दूसरी वाष्प । पहले पानी का वाष्पीकरण होता है फिर संघनन व फिर द्रव रूप में जल वर्षा के रूप में पृथ्वी में लौट आता है जो नदियों द्वारा समुद्रों में और कुछ भूजल के साफ पानी को हिस्सा बन जाता है।
In simple words: जल चक्र में जल मुख्य रूप से तरल (पानी) और गैसीय (जलवाष्प) अवस्थाओं में पाया जाता है, जो वाष्पीकरण, संघनन और वर्षण के माध्यम से एक-दूसरे में परिवर्तित होती रहती हैं।
🎯 Exam Tip: जल चक्र की अवस्थाओं का उल्लेख करते समय, तरल (जल) और वाष्प (जलवाष्प) के बीच के रूपांतरण पर ध्यान दें।
Question 2. जैविक रूप से महत्त्वपूर्ण दो यौगिकों के नाम दीजिए जिनमें ऑक्सीजन और नाइट्रोजन दोनों पाए जाते हों?
Answer: जैविक रूप से महत्त्वपूर्ण यौगिक जिनमें नाइट्रोजन व ऑक्सीजन दोनों पाए जाते हैं, वे हैं-प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल (डी.एन.ए. व आर.एन.ए.) व विटामिन हैं।
In simple words: प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल (डी.एन.ए. और आर.एन.ए.) जैसे जैविक यौगिकों में ऑक्सीजन और नाइट्रोजन दोनों तत्व मौजूद होते हैं, जो जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
🎯 Exam Tip: उन यौगिकों के उदाहरण देते समय जिनमें ऑक्सीजन और नाइट्रोजन दोनों होते हैं, प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल जैसे जैविक महत्व के पदार्थों पर ध्यान दें।
Question 3. मनुष्य की किन्हीं तीन गतिविधियों को पहचानें जिनसे वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है।
Answer: निम्नलिखित क्रिया-कलापों द्वारा वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है-
1. श्वसन - जीवों द्वारा श्वसन की प्रक्रिया में ग्लूकोस का ऑक्सीकरण होने से वह कार्बन डाइऑक्साइड में बदल जाता है और वह वायुमण्डल में एकत्रित हो जाती है तथा जीवों को ऊर्जा प्राप्त होती है।
2. दहन - इस क्रिया में ईंधन को जलाया जाता है। जिससे विभिन्न कार्यों के लिए ऊर्जा की आवश्यकता पूर्ति होती है। जैसे-खाना पकाना, गर्म करना, यातायात व उद्योग-धन्धों में किया जाता है। दहन क्रिया से भी । वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न होती है जो वायुमण्डल में एकत्रित हो जाती है।
3. औद्योगिक क्रान्ति - इसमें भी कारखानों में जीवाश्म ईंधन जलाया जाता है जिससे अत्यधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न होती है और वायुमण्डल में एकत्रित हो जाती है।
In simple words: मनुष्य की श्वसन क्रिया, जीवाश्म ईंधनों का दहन (जैसे खाना पकाना और यातायात) और औद्योगिक क्रांति (कारखानों में ईंधन जलाना) वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ाने वाली मुख्य गतिविधियाँ हैं।
🎯 Exam Tip: कार्बन डाइऑक्साइड वृद्धि के मानवीय कारणों को समझाते समय, श्वसन, दहन और औद्योगिक प्रक्रियाओं जैसे प्रमुख स्रोतों पर ध्यान दें।
Question 4. ग्रीन-हाउस प्रभाव क्या है?
Answer: वायुमण्डल में उपस्थित कुछ गैसें (कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन व जलवाष्प) पृथ्वी की ऊष्मा को बाहर जाने से रोकती हैं। वायुमण्डल में इस प्रकार की गैसों के प्रतिशत में वृद्धि पूरे विश्व के तापमान में वृद्धि कर पूरे विश्व के औसत तापमान को बढ़ा देगी, इसी प्रभाव को ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं।
In simple words: ग्रीन-हाउस प्रभाव वह प्रक्रिया है जिसमें वायुमंडल की कुछ गैसें, जैसे कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन, पृथ्वी से परावर्तित होने वाली ऊष्मा को रोकती हैं, जिससे पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ जाता है।
🎯 Exam Tip: ग्रीन हाउस प्रभाव की व्याख्या करते समय, प्रमुख ग्रीन हाउस गैसों (CO2, मीथेन) और पृथ्वी के तापमान पर उनके प्रभाव पर ध्यान दें।
Question 5. वायुमण्डल में पाए जाने वाले ऑक्सीजन के दो रूप कौन-कौन से हैं?
Answer:
1. वायुमण्डल में तत्त्व के रूप में ऑक्सीजन की प्रतिशत मात्रा 21% है।
2. यह पृथ्वी पर यौगिक के रूप में पाई जाती है। पृथ्वी पटल पर यह धातुओं व सिलिकॉन तथा कार्बन के आक्साइडों के रूप में और कार्बोनेट, सल्फेट, नाइट्रेट व अन्य खनिजों के रूप में भी पाई जाती है।
3. यह जैविक अणु, जैसे कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल और वसा का भी एक आवश्यक घटक है।
4. अधिक ऊँचाई पर यह त्रिपरमाण्विक (O3) ओजोन के रूप में भी पाई जाती है।
In simple words: वायुमंडल में ऑक्सीजन दो मुख्य रूपों में पाई जाती है: तत्व के रूप में ऑक्सीजन गैस (O2) और अधिक ऊँचाई पर ओजोन (O3), जो पराबैंगनी विकिरण से रक्षा करती है।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीजन के रूपों का उल्लेख करते समय, डायटोमिक ऑक्सीजन (O2) और ट्राईटोमिक ओजोन (O3) दोनों को स्पष्ट रूप से बताएँ।
अभ्यास प्रश्न (पृष्ठ - 227)
Question 1. जीवन के लिए वायुमण्डल क्यों आवश्यक
Answer: वायुमण्डल हमारे जीवन के लिए निम्नलिखित कारणों से आवश्यक है-
1. वायुमण्डल पृथ्वी को एक कम्बल की तरह चारों ओर से ढके हुए है।
2. वायुमण्डल पृथ्वी के औसत तापमान को दिन के समय यहाँ तक कि पूरे साल भर स्थिर (नियत) रखता है।
3. वायुमण्डल दिन में अचानक तापमान को बढ़ने से रोकता है।
4. रात के समय ताप को पृथ्वी के बाहरी अन्तरिक्ष में जाने की दर को कम करता है।
5. वायुमण्डल में उपस्थित ओजोन परत हानिकारक विकिरणों (पराबैंगनी किरणों) के प्रभाव से हमारी रक्षा करती है।
6. श्वसन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन भी वायुमण्डल से मिलती है।
In simple words: वायुमंडल जीवन के लिए आवश्यक है क्योंकि यह पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित करता है, हानिकारक पराबैंगनी विकिरण से रक्षा करता है, और श्वसन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन प्रदान करता है।
🎯 Exam Tip: वायुमंडल के महत्व को समझाते समय, इसके तापमान विनियमन, विकिरण से सुरक्षा और जीवनदायी गैसों की आपूर्ति जैसे प्रमुख कार्यों पर प्रकाश डालें।
Question 2. जीवन के लिए जल क्यों अनिवार्य है?
Answer: जीवन के लिए जल की उपयोगिता निम्नलिखित बिन्दुओं से स्पष्ट है-
1. पानी पीने के लिए अनिवार्य है जिससे हम जीवित रहते हैं।
2. सभी कोशिकीय क्रियाएँ जलीय माध्यम में ही होती हैं।
3. शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में पदार्थों का संवहन घुली हुई अवस्था में ही होता है।
4. जलीय जीवों को वास स्थान प्रदान करता है।
5. पौधों को प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में भी जल की आवश्यकता होती है।
6. पानी एक सार्वत्रिक विलायक है।
7. बीजों के अंकुरण के लिए भी जल आवश्यक है।
8. पृथ्वी पर जीवित रहने के लिए आसानी से उपलब्ध पानी एक आवश्यक स्रोत है।
In simple words: जल सभी जीवों के लिए अनिवार्य है क्योंकि यह कोशिकीय प्रक्रियाओं, पोषक तत्वों के परिवहन, प्रकाश संश्लेषण और अनेक जलीय जीवों के आवास के लिए महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: जल की अनिवार्यता की व्याख्या करते समय, जैविक कार्यों, परिवहन, और पारिस्थितिक महत्व जैसे विभिन्न पहलुओं को शामिल करें।
Question 3. जीवित प्राणी मृदा पर कैसे निर्भर हैं? क्या जल में रहने वाले जीव संपदा के रूप में मृदा से पूरी तरह स्वतंत्र हैं?
Answer: पृथ्वी की सबसे बाहरी परत को भूपृष्ठ कहते हैं। इस परत में पाए जाने वाले खनिज जीवों को विभिन्न प्रकार के पालन-पोषण करने वाले तत्त्व प्रदान करते हैं। कुछ जीव, जैसे-राइजोबियम फलीदार पौधों की जड़ों में ग्रन्थियाँ (गाठे) बनाते हैं और वायुमण्डल की स्वतंत्र नाइट्रोजन को यौगिकों (नाइट्राइट व नाइट्रेट) में बदलकर पौधों के लिए उपयोगी बना देते हैं। कुछ ऐसे भी जीवाणु हैं जो इन यौगिकों व गले-सड़े पदार्थों को पुनः तत्त्वों में बदल देते हैं। केचुएँ भी मिट्टी में ही रहकर उसे उपजाऊ बनाते हैं। अन्य सभी प्राणी भी मिट्टी में उगने वाले पौधे से अपना भोजन प्राप्त करते हैं। अतः हम कह सकते हैं कि जीवित प्राणी मिट्टी पर निर्भर करते हैं।
जल में रहने वाले जीव संपदा मिट्टी से पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हैं, क्योंकि जल में अत्यधिक पदार्थ घुल जाते हैं। जब जल चट्टानों पर से बहता है तो उसमें कुछ खनिज धुल जाते हैं। नदियाँ बहुत-से पोषक तत्त्व समुद्र में इन्हीं चट्टानों से पहुँचाती हैं जिन्हें समुद्री जीव प्रयोग करते हैं। अतः वे पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हैं।
In simple words: जीवित प्राणी मृदा पर निर्भर करते हैं क्योंकि मृदा पोषक तत्व प्रदान करती है और इसमें राइजोबियम जैसे जीव होते हैं जो नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं, जबकि जलीय जीव भी अप्रत्यक्ष रूप से मृदा पर निर्भर करते हैं क्योंकि चट्टानों से घुले हुए खनिज नदियों द्वारा समुद्र तक पहुँचते हैं और समुद्री जीवन का पोषण करते हैं।
🎯 Exam Tip: मृदा पर जीवों की निर्भरता समझाते समय, पोषक तत्व उपलब्धता और नाइट्रोजन स्थिरीकरण की भूमिका पर जोर दें, साथ ही जलीय जीवों की अप्रत्यक्ष निर्भरता को भी स्पष्ट करें।
Question 4. आपने टेलीविजन पर और समाचारपत्र में मौसम सम्बन्धी रिपोर्ट को देखा होगा। आप क्या सोचते हैं कि हमें मौसम के पूर्वानुमान में सक्षम हैं?
Answer: मौसम का पूर्वानुमान पवन की चाल व दिशा के अध्ययन द्वारा किया जा सकता है जो वर्षा आदि के विषय में अनुमान लगाने में सहायता करता है। इसके द्वारा कम व अधिक वायुदाब के क्षेत्रों का पता लगाया जा सकता है। भारत में अधिकतर वर्षा दक्षिणी-पश्चिमी या उत्तरी-पश्चिमी मानसून द्वारा होती है।
In simple words: हाँ, हम मौसम का पूर्वानुमान कर सकते हैं क्योंकि पवन की चाल और दिशा तथा वायुदाब के क्षेत्रों का अध्ययन हमें वर्षा और अन्य मौसमी घटनाओं का अनुमान लगाने में मदद करता है, खासकर मानसूनी हवाओं के संदर्भ में।
🎯 Exam Tip: मौसम पूर्वानुमान की क्षमता की पुष्टि करते समय, पवन की चाल, दिशा और वायुदाब के महत्व को उजागर करें।
Question 5. हम जानते हैं कि बहुत-सी यानवीय गतिविधियाँ, वायु, जल एवं मृदा के प्रदूषण-स्तर को बढ़ा रहे हैं। क्या आप सोचते हैं कि इन गतिविधियों को कुछ विशेष क्षेत्रों में सीमित कर देने से प्रदूषण के स्तर को घटाने में सहायता मिलेगी?
Answer: वायु, जल एवं मृदा के प्रदूषण-स्तर को बढ़ाने वाली गतिविधियों को कुछ विशेष क्षेत्रों में सीमित कर देने से प्रदूषण का स्तर घटाने में विशेष सहायता नहीं मिलेगी। जल व मृदा के प्रदूषण को कुछ सीमा तक कम किया जा सकता है, लेकिन वायु प्रदूषण के लिए यह प्रभावशाली नहीं होगा। प्रदूषण को कम करने के लिए अच्छा हो कि हम प्राकृतिक संपदा का विवेकपूर्ण एवं सीमित उपयोग करें और प्रदूषकों को जल, मृदा व वायु में एक सीमित मात्रा में छोड़े ताकि प्राकृतिक सूक्ष्म जीव उनको आसानी से विघटित कर सकें ।
In simple words: मानवीय गतिविधियों को कुछ क्षेत्रों में सीमित करने से प्रदूषण के स्तर में खास कमी नहीं आएगी, क्योंकि वायु प्रदूषण सीमाओं को नहीं मानता। प्रदूषण कम करने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और प्रदूषकों का नियंत्रित निष्कासन आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: प्रदूषण नियंत्रण पर भौगोलिक सीमाओं के प्रभाव की चर्चा करते समय, वायु प्रदूषण के वैश्विक स्वरूप और समग्र नियंत्रण रणनीतियों के महत्व पर जोर दें।
Question 6. जंगल वायु, मृदा तथा जलीय स्रोत की गुणवत्ता को कैसे प्रभावित करते हैं?
Answer: जंगल वायु, मृदा तथा जलीय स्रोतों की गुणवत्ता को निम्न प्रकार प्रभावित करते हैं- वायु की गुणवत्ता नियन्त्रित करने में पौधों का योगदान – पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में वायु से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं तो ऑक्सीजन गैस उत्पन्न करते हैं जिससे वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा नियन्त्रित रहती है तथा श्वसन में सहायक ऑक्सीजन बढ़ती है।
मृदा की गुणवत्ता नियन्त्रित करने में पौधों का योगदान
(i) पौधों की जड़े भूमि में काफी गहराई तक जाकर मृदा को बाँधे रखती हैं जिसके कारण भूमि अपरदन नहीं होता ।
(ii) भूमि अपरदन होने से मिट्टी नदियों की सतह में बैठने लगती है और नदियाँ उथली हो जाती हैं। जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
(iii) पौधे वाष्पोत्सर्जन द्वारा वायु में जलवाष्प छोड़ते रहते हैं, जिससे वायुमण्डल में नमी की उचित मात्रा बनी रहती है जो वर्षा को नियन्त्रित करती है और तेज वर्षा नहीं होती ।
(iv) तेज वर्षा की बूंदों द्वारा भूमि कटाव व मृदा अपरदन होता है। पौधों के पत्ते तेज बूंदों को सीधे पृथ्वी पर नहीं पड़ने देते जिससे भूमि कटाव व मृदा अपरदन नहीं होता जो नदियों को उथला कर, बाढ़ की स्थिति उत्पन्न करता है।
सुखद पर्यावरण – पौधे वातावरण को सुखद बनाते हैं। ये वातावरण की कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन की मात्रा तथा वाष्पोत्सर्जन द्वारा नमी की मात्रा बढ़ाते हैं। पौधे जीवों को सूर्य की तेज किरणों से बचाव कर वातावरण को सुखद बनाते हैं।
In simple words: जंगल वायु से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करके ऑक्सीजन छोड़ते हैं, मृदा अपरदन को रोकने के लिए अपनी जड़ों से मिट्टी को बांधे रखते हैं, वाष्पोत्सर्जन से नमी बनाए रखते हैं, और जल निकायों को प्रदूषित होने से बचाते हुए पानी को फिल्टर करते हैं।
🎯 Exam Tip: जंगलों के पारिस्थितिक महत्व को समझाते समय, वायुमंडलीय गैस संतुलन, मृदा संरक्षण, जल चक्र और पर्यावरणीय सुखदता में उनकी भूमिका पर ध्यान केंद्रित करें।
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. वायु प्रदूषण के दो प्राकृतिक स्रोतों के नाम लिखिए।
Answer: वायु प्रदूषण के दो प्राकृतिक स्रोत हैं-
- दावानल (Forest fire)
- वायु में उड़ते पराग कण (Pollen grains)।
In simple words: वायु प्रदूषण के प्राकृतिक स्रोतों में जंगल की आग (दावानल) और हवा में उड़ने वाले परागकण शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: वायु प्रदूषण के प्राकृतिक स्रोतों का उल्लेख करते समय, दो स्पष्ट और भिन्न उदाहरण दें।
Question 2. ऐसे दो पदार्थों के नाम लिखिए जिनको पुनःचक्रण किया जाता है।
Answer:
(i) मवेशी गृह का कचरा तथा गोबर आदि ।
(ii) कपड़ा एवं कागज आदि ।
In simple words: मवेशी गृह का कचरा (गोबर) और कपड़ा एवं कागज ऐसे दो पदार्थ हैं जिनका पुनर्चक्रण किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: पुनर्चक्रण योग्य पदार्थों के उदाहरण देते समय, कृषि अपशिष्ट और घरेलू/औद्योगिक अपशिष्ट दोनों श्रेणियों से उदाहरण चुनें।
Question 3. वायुमण्डल में CO2 गैस की मात्रा बढ़ने का पृथ्वी के औसत ताप पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Answer: पृथ्वी का औसत ताप बढ़ जायेगा (Global Warming)|
In simple words: वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की मात्रा बढ़ने से पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ेगा, जिससे वैश्विक तापन (ग्लोबल वार्मिंग) होगा।
🎯 Exam Tip: CO2 की सांद्रता और तापमान के बीच संबंध को समझाते समय, ग्रीन हाउस प्रभाव और वैश्विक तापन की अवधारणा पर जोर दें।
Question 4. पर्यावरण में हानिकारक प्रभावों से ओजोन परत किस प्रकार हमें सुरक्षा प्रदान करती है?
Answer: यह सूर्य से आने वाली पराबैंगनी विकिरणों को अवशोषित करती है, जो मनुष्य के लिए हानिकारक हैं।
In simple words: ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी विकिरणों को अवशोषित करके पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है, जिससे वे विकिरण मनुष्य तक नहीं पहुँच पाते।
🎯 Exam Tip: ओजोन परत के सुरक्षात्मक कार्य का वर्णन करते समय, पराबैंगनी (UV) विकिरण के अवशोषण को मुख्य बिंदु के रूप में शामिल करें।
Question 5. भूमि की उर्वरता कम होने का एक कारण लिखिए।
Answer: मृदा अपरदन भूमि की उर्वरता कम होने का एक कारण है।
In simple words: मृदा अपरदन, जिसमें उपजाऊ मिट्टी बह जाती है या उड़ जाती है, भूमि की उर्वरता कम होने का एक प्रमुख कारण है।
🎯 Exam Tip: भूमि की उर्वरता में कमी के कारण के रूप में मृदा अपरदन को स्पष्ट रूप से इंगित करें।
Question 6. भारतवर्ष में वर्षा के पैटर्न में परिवर्तन के लिए उत्तरदायी कारक का नाम बताइए ।
Answer: वर्षा का पैटर्न, पवनों के पैटर्न पर निर्भर करता है।
In simple words: भारत में वर्षा के पैटर्न में परिवर्तन के लिए पवन का पैटर्न मुख्य उत्तरदायी कारक है, क्योंकि मानसून हवाएँ वर्षा का वितरण निर्धारित करती हैं।
🎯 Exam Tip: वर्षा के पैटर्न पर प्रभाव डालने वाले मुख्य कारक के रूप में पवनों के पैटर्न (विशेषकर मानसून) का उल्लेख करें।
Question 7. जल अपरदन की दर किन क्षेत्रों में अधिक होती है?
Answer: पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक होती है।
In simple words: जल अपरदन की दर पहाड़ी क्षेत्रों में सबसे अधिक होती है, क्योंकि ढलान और गुरुत्वाकर्षण बल पानी के बहाव को तीव्र कर देते हैं।
🎯 Exam Tip: जल अपरदन की दर के लिए पहाड़ी क्षेत्रों को पहचानते समय, ढलान के महत्व पर प्रकाश डालें।
Question 8. प्रदूषित वायु में नियमित साँस लेने से उत्पन्न दो रोगों के नाम बताइए ।
Answer: कैंसर, हृदय रोग या एलर्जी।
In simple words: प्रदूषित वायु में लगातार साँस लेने से कैंसर, हृदय रोग या एलर्जी जैसी गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।
🎯 Exam Tip: प्रदूषित वायु से संबंधित बीमारियों का उल्लेख करते समय, कम से कम दो स्पष्ट उदाहरण (जैसे कैंसर और हृदय रोग) दें।
Question 9. दो जीवविज्ञानी महत्त्वपूर्ण यौगिकों के नाम बताइए जिनमें नाइट्रोजन उपस्थित है।
Answer: ऐल्केलॉइड तथा यूरिया ।
In simple words: ऐल्केलॉइड और यूरिया दो महत्वपूर्ण जैविक यौगिक हैं जिनमें नाइट्रोजन तत्व उपस्थित होता है।
🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन युक्त जैविक यौगिकों के रूप में ऐल्केलॉइड और यूरिया के उदाहरण दें।
Question 10. वायुमण्डल में CO2 की सांद्रता की वृद्धि के दो कारण बताइये ।
Answer:
(i) वनोन्मूलन ।
(ii) बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईंधनों को जलाना।
In simple words: वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की सांद्रता बढ़ने के दो मुख्य कारण वनोन्मूलन और जीवाश्म ईंधनों का बड़े पैमाने पर दहन हैं।
🎯 Exam Tip: CO2 सांद्रता में वृद्धि के मानवीय कारणों को समझाते समय, वनोन्मूलन और जीवाश्म ईंधन के दहन को मुख्य बिंदुओं के रूप में शामिल करें।
Question 11. ओजोन क्या है?
Answer: ओजोन ऑक्सीजन का एक अपररूप है जिसमें ऑक्सीजन के तीन परमाणु पाये जाते हैं (O3)|
In simple words: ओजोन ऑक्सीजन का एक अपररूप है जिसमें ऑक्सीजन के तीन परमाणु (O3) होते हैं, और यह वायुमंडल में एक परत बनाती है जो पराबैंगनी विकिरण से रक्षा करती है।
🎯 Exam Tip: ओजोन की परिभाषा देते समय, इसे ऑक्सीजन का एक अपररूप और इसके रासायनिक सूत्र (O3) को स्पष्ट रूप से बताएँ।
Question 12. वायुमण्डल में ऑक्सीजन किन रूपों में पायी जाती है?
Answer: ऑक्सीजन गैस (O2) और ओजोन गैस (O3)1
In simple words: वायुमंडल में ऑक्सीजन मुख्य रूप से ऑक्सीजन गैस (O2) और ओजोन गैस (O3) के रूप में पाई जाती है।
🎯 Exam Tip: वायुमंडलीय ऑक्सीजन के दो मुख्य रूपों (O2 और O3) का उल्लेख करें।
Question 13. ओजोन परत किस ऊँचाई पर उपस्थित है?
Answer: ओजोन पर्त वायुमण्डल में 16 km से 60 km की ऊँचाई पर उपस्थित है।
In simple words: ओजोन परत वायुमंडल में पृथ्वी की सतह से लगभग 16 किमी से 60 किमी की ऊँचाई पर स्थित है।
🎯 Exam Tip: ओजोन परत की ऊँचाई की सीमा (16-60 किमी) को सटीक रूप से इंगित करें।
Question 14. कौन जैवीय घटक हैं? वायु, पेड़, कीड़े ।
Answer: पेड़ व कीड़े ।
In simple words: जैवीय घटक वे जीवित प्राणी होते हैं, जैसे पेड़ और कीड़े, जो पर्यावरण का हिस्सा होते हैं।
🎯 Exam Tip: जैवीय घटकों को पहचानते समय, जीवित जीवों (जैसे पेड़ और कीड़े) पर ध्यान दें।
Question 15. वायुमण्डल का विस्तार क्या है?
Answer: वायुमण्डल पृथ्वीतल से 60 किमी तक पाया जाता है।
In simple words: वायुमंडल पृथ्वी की सतह से लगभग 60 किलोमीटर की ऊँचाई तक फैला हुआ है।
🎯 Exam Tip: वायुमंडल के विस्तार को पृथ्वीतल से लगभग 60 किमी तक की ऊँचाई के रूप में बताएँ।
Question 16. ओजोन स्तर का क्या महत्त्व है?
अथवा
सूर्य विकिरण का कौन-सा भाग ओजोन परत द्वारा अवशोषित किया जाता है?
Answer: यह सूर्य से आने वाले पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित कर, उसे पृथ्वी के धरातल तक नहीं पहुँचने देती ।
In simple words: ओजोन परत का महत्व यह है कि यह सूर्य से आने वाले हानिकारक पराबैंगनी (UV) विकिरणों को अवशोषित करती है, जिससे पृथ्वी पर जीवन की रक्षा होती है।
🎯 Exam Tip: ओजोन परत के महत्व को समझाते समय, पराबैंगनी विकिरण के अवशोषण और जीवन की सुरक्षा पर इसके प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 17. जैवमंडल के गैसीय घटक का नाम लिखिए ।
Answer: वायु (कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन आदि) ।
In simple words: जैवमंडल के गैसीय घटक में वायु शामिल है, जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन जैसी महत्वपूर्ण गैसें होती हैं।
🎯 Exam Tip: जैवमंडल के गैसीय घटक का उल्लेख करते समय, वायु और उसमें मौजूद मुख्य गैसों (CO2, ऑक्सीजन) को शामिल करें।
Question 18. पृथ्वी के वायुमण्डल में कार्बन डाइ-ऑक्साइड की प्रतिशतता क्या है?
Answer: 0.03%.
In simple words: पृथ्वी के वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की प्रतिशतता लगभग 0.03% है।
🎯 Exam Tip: कार्बन डाइऑक्साइड की वायुमंडलीय प्रतिशतता को सटीक रूप से (0.03%) बताएँ।
Question 19. दो क्रियाओं के नाम लिखिए जो वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करती हैं।
Answer:
(i) श्वसन - जिसमें ग्लूकोज आदि का ऑक्सीकरण होता है।
(ii) दहन।
In simple words: श्वसन (जीवों द्वारा) और दहन (जैसे जीवाश्म ईंधन जलाना) वे दो मुख्य क्रियाएँ हैं जो वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करती हैं।
🎯 Exam Tip: वायुमंडल में CO2 उत्पादन की दो प्रमुख प्रक्रियाओं (श्वसन और दहन) का उल्लेख करें।
Question 20. वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड़की मात्रा में वृद्धि के दो दुष्प्रभाव लिखिए।
Answer:
(i) कार्बन डाइऑक्साइड की अधिक मात्रा ग्रीन हाउस प्रभाव के द्वारा वायुमण्डल का ताप बढ़ा देती है।
(ii) ताप में वृद्धि होने पर जीवों की दक्षता कम हो जाती है।
In simple words: वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की वृद्धि के दो मुख्य दुष्प्रभाव हैं: ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि और परिणामस्वरूप जीवों की दक्षता में कमी आना।
🎯 Exam Tip: कार्बन डाइऑक्साइड की वृद्धि के दुष्प्रभावों को बताते समय, वैश्विक तापन और जैविक दक्षता पर इसके प्रभाव को शामिल करें।
Question 21. वायुमण्डल से कार्बन डाइऑक्साइड शोषित करने वाली क्रिया का नाम लिखिए।
Answer: पौधों द्वारा होने वाली प्रकाश संश्लेषण की क्रिया।
In simple words: प्रकाश संश्लेषण वह क्रिया है जिसमें पौधे सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और इसे भोजन में परिवर्तित करते हैं।
🎯 Exam Tip: वायुमंडल से CO2 को हटाने वाली मुख्य जैविक प्रक्रिया के रूप में प्रकाश संश्लेषण को पहचानें।
Question 22. मृदा निर्माण करने वाले दो कारकों के नाम लिखिए।
Answer: अजैविक घटक-ताप, जल और हवा जैविक घटक-सभी सजीव ।
In simple words: मृदा निर्माण के दो मुख्य कारक अजैविक घटक (जैसे ताप, जल, हवा) और जैविक घटक (जैसे सूक्ष्मजीव और पौधे) हैं।
🎯 Exam Tip: मृदा निर्माण के कारकों को सूचीबद्ध करते समय, अजैविक और जैविक दोनों श्रेणियों से उदाहरण दें।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. ग्रीन हाउस प्रभाव क्या है?
Answer: वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प आदि पृथ्वी से परावर्तित होने वाले अवरक्त विकिरण को अवशोषित कर लेते हैं जिससे वायुमण्डल का ताप बढ़ जाता है, इस प्रतिभास को ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं।
In simple words: ग्रीन हाउस प्रभाव वह प्रक्रिया है जिसमें वायुमंडल में मौजूद कुछ गैसें पृथ्वी से परावर्तित होने वाली अवरक्त विकिरण को सोख लेती हैं, जिससे वायुमंडल का तापमान बढ़ता है।
🎯 Exam Tip: ग्रीन हाउस प्रभाव की परिभाषा देते समय, अवरक्त विकिरण के अवशोषण और वायुमंडल के तापमान में वृद्धि पर ध्यान दें।
Question 2. वायुमण्डल में क्लोरो-फ्लोरो कार्बन क्या हानिकारक प्रभाव उत्पन्न करते हैं?
Answer: क्लोरोफ्लोरो कार्बन वायुमण्डल की ओजोन परत से क्रिया कर उसको क्षति पहुँचाते हैं।
In simple words: क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) वायुमंडल में ओजोन परत के साथ प्रतिक्रिया करके उसे क्षति पहुँचाते हैं, जिससे पृथ्वी को हानिकारक पराबैंगनी विकिरण से सुरक्षा में कमी आती है।
🎯 Exam Tip: CFCs के हानिकारक प्रभावों को समझाते समय, ओजोन परत को होने वाली क्षति और उसके परिणामों पर प्रकाश डालें।
Question 3. प्रदूषक किसे कहते हैं?
Answer: वे पदार्थ अथवा कारक जिनके द्वारा वायु, जल, भूमि के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक लक्षणों में अवांछित परिवर्तन उत्पन्न होता है, प्रदूषक (Pollutants) कहलाते हैं।
In simple words: प्रदूषक वे पदार्थ या कारक होते हैं जो वायु, जल या भूमि के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में अवांछित परिवर्तन करके उन्हें हानिकारक बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रदूषक की परिभाषा देते समय, पर्यावरण के विभिन्न घटकों (वायु, जल, भूमि) में अवांछित परिवर्तन उत्पन्न करने वाले एजेंटों पर ध्यान दें।
Question 4. मृदा क्या है?
Answer: मृदा जैविक तथा अजैविक घटकों का जटिल मिश्रण है और यह पौधों को जकड़े रखती है तथा जीविका प्रदान करती है।
In simple words: मृदा पृथ्वी की ऊपरी परत है जो जैविक और अजैविक पदार्थों का एक जटिल मिश्रण है, जो पौधों को सहारा देती है और जीवन के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती है।
🎯 Exam Tip: मृदा की परिभाषा में इसके जैविक और अजैविक घटकों के मिश्रण और जीवन को सहारा देने की क्षमता को शामिल करें।
Question 5. नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले दो जीवों के नाम लिखिए।
Answer:
(i) जीवाणु राइजोबियम,
(ii) नील-हरित शैवाल ।
In simple words: राइजोबियम जीवाणु और नील-हरित शैवाल दो ऐसे जीव हैं जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधों के लिए उपयोगी रूपों में परिवर्तित करके नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं।
🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवों के रूप में राइजोबियम और नील-हरित शैवाल के नाम दें।
Question 6. दो प्रक्रियाओं के नाम लिखिए जो वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ाने के लिए उत्तरदायी हैं।
Answer:
(i) जीवाश्म ईंधनों का दहन,
(ii) ज्वालामुखी का फटना।
In simple words: जीवाश्म ईंधनों का दहन और ज्वालामुखी का फटना वे दो प्रक्रियाएँ हैं जो वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को बढ़ाती हैं।
🎯 Exam Tip: CO2 की मात्रा बढ़ाने वाली प्रक्रियाओं के रूप में जीवाश्म ईंधन के दहन और ज्वालामुखी विस्फोट का उल्लेख करें।
Question 7. मृदा कटाव रोकने के लिए क्या करना चाहिए?
Answer: अत्यधिक मात्रा में पेड़-पौधों को उगाना चाहिए। सघन खेती अपनानी चाहिए।
In simple words: मृदा कटाव को रोकने के लिए अधिक पेड़-पौधे लगाने और सघन खेती जैसी विधियाँ अपनानी चाहिए, जो मिट्टी को बाँधे रखती हैं और अपरदन को कम करती हैं।
🎯 Exam Tip: मृदा कटाव रोकने के उपाय के रूप में वृक्षारोपण और सघन खेती को प्राथमिकता दें।
Question 8. वायुमण्डल के मुख्य संघटक लिखिए।
Answer: पृथ्वी के चारों तरफ पाया जाने वाला गैस का आवरण, वायुमण्डल (atmosphere) कहलाता है। यह 40 किमी तक पाया जाता है। पृथ्वी के धरातल पर वायुमण्डल में नाइट्रोजन लगभग 78%, ऑक्सीजन 21% व शेष 1% में अन्य गैसें जैसे- कार्बन डाइऑक्साइड, आर्गन, हीलियम, मीथेन आदि पायी जाती हैं। धरातल पर वायुमण्डल में उपस्थित विभिन्न अवयव निम्न प्रकार हैं-
| गैस | रासायनिक संकेत/सूत्र | प्रतिशतता |
|---|---|---|
| नाइट्रोजन | N2 | 78.084 |
| ऑक्सीजन | O2 | 20.946 |
| आर्गन | Ar | 0.934 |
| कार्बन डाइ-ऑक्साइड | CO2 | 0.033 |
| निऑन | Ne | 0.000018 |
| हीलियम | He | 0.0000052 |
In simple words: वायुमंडल मुख्य रूप से नाइट्रोजन (लगभग 78%), ऑक्सीजन (लगभग 21%) और आर्गन (लगभग 0.93%) से बना है, जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड, नियॉन, हीलियम और जलवाष्प जैसी अन्य गैसें बहुत कम मात्रा में मौजूद हैं।
🎯 Exam Tip: वायुमंडल के मुख्य संघटकों को सूचीबद्ध करते समय, प्रत्येक गैस के नाम, रासायनिक सूत्र और प्रतिशतता को तालिकाबद्ध रूप में प्रस्तुत करें।
Question 9. शुक्र तथा मंगल ग्रहों के वायुमण्डल को मुख्य संघटक क्या है? इसके प्रभाव लिखिए ।
Answer: शुक्र तथा मंगल ग्रहों के वायुमण्डल का मुख्य संघटक कार्बन डाइऑक्साइड है जो इनके वायुमण्डल में 95-97% तक है। इसका प्रभाव यह है कि वहाँ पर न कोई जीवन है और न जीवन को आधार देने वाले घटक ।
In simple words: शुक्र और मंगल ग्रहों के वायुमंडल का मुख्य संघटक कार्बन डाइऑक्साइड है, जिसकी 95-97% तक अत्यधिक सांद्रता के कारण इन ग्रहों पर जीवन संभव नहीं है।
🎯 Exam Tip: शुक्र और मंगल के वायुमंडलीय संघटन (उच्च CO2) और जीवन की अनुपस्थिति के बीच सीधा संबंध स्थापित करें।
Question 10. अम्लीय वर्षा (acid rain) से आप क्या समझते हैं? इसने ताजमहल को कैसे प्रभावित किया है?
अथवा
औद्योगिक क्षेत्र में स्थित संगमरमर से बने भवन हानि क्यों प्रदर्शित करते हैं? सम्बद्ध समीकरण की व्याख्या कीजिए।
Answer: कोयले में उपस्थित सल्फर जलने पर ऑक्सीकृत होकर सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) गैस बनाता है। यह गैस वायुमण्डल में मिल जाती है। वर्षा के समय यह गैस पानी में घुलकर सल्फ्यूरस अम्ल (H2SO3) बनाती है जो वर्षा के साथ पृथ्वी पर आता है जिसे अम्लीय वृष्टि कहते हैं। इस अम्लीय वृष्टि से ताजमहल के संगमरमर का संक्षारण हो रहा है। संगमरमर कैल्सियम कार्बोनेट है जो वर्षा के साथ आये सल्फ्यूरस अम्ल से क्रिया करता है। और संक्षारित हो जाता है।
\[ \text{H}_2\text{O} \, (\text{l}) + \text{SO}_2 \, (\text{g}) \longrightarrow \text{H}_2\text{SO}_3(\text{l}) \]
\[ \text{CaCO}_3 \, (\text{s}) + \text{H}_2\text{SO}_3 \, (\text{l}) \longrightarrow \text{CaSO}_3 \, (\text{s}) + \text{H}_2\text{O} \, (\text{l}) + \text{CO}_2 \, (\text{g}) \]
दूसरे, जीवाश्म ईंधनों के अपूर्ण दहन से उत्पन्न कार्बन के कण वायुमण्डल में विसरित होते हैं जो भवन के ऊपर जमा होकर, संगमरमर की चमक को कम कर देते हैं व धीरे-धीरे भवन काला होता जाता है।
In simple words: अम्लीय वर्षा सल्फर डाइऑक्साइड जैसी प्रदूषक गैसों के जल में घुलने से बनती है, जो सल्फ्यूरस अम्ल का निर्माण करती है। यह ताजमहल जैसे संगमरमर के स्मारकों को संक्षारित करती है और जीवाश्म ईंधन के कण उन्हें काला कर देते हैं।
🎯 Exam Tip: अम्लीय वर्षा की प्रक्रिया में सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) के निर्माण और उसके संगमरमर पर पड़ने वाले रासायनिक प्रभाव (समीकरण सहित) को स्पष्ट करें।
Question 11. वायु प्रदूषण की मुख्य हानियाँ लिखिए।
Answer: वायु प्रदूषण की मुख्य हानियाँ निम्नलिखित हैं-
1. वायु प्रदूषण श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। इससे श्वास, दमा, फेफड़ों का कैंसर व न्यूमोनिया जैसे विकार हो सकते हैं।
2. मोटर वाहनों एवं धूम्रपान से छोड़े गये धुएँ में कार्बन मोनोक्साइड पायी जाती है जो केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। CO में हीमोग्लोबिन से ऑक्सीजन की अपेक्षा संयोग करने की 200 गुना अधिक क्षमता होती है। यह COHb (कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन) बनाती है जो विषैला है और दम घुटने जैसे लक्षण उत्पन्न करता है। यह अवस्था प्राणघातक भी हो सकती है।
3. ओजोन परत के ह्यस होने से पराबैंगनी विकिरण पृथ्वी की सतह तक पहुँच सकता है जो त्वचा कैंसर, प्रतिरक्षा संस्थान तथा आँखों को हानि पहुँचाता है।
4. अम्ल वर्षा ऐतिहासिक स्मारकों को हानि पहुँचाती है।
5. कार्बन डाइऑक्साइड व मीथेन ग्रीन हाउस प्रभाव के लिए उत्तरदायी हैं। ये पृथ्वी का ताप बढ़ देते हैं।
In simple words: वायु प्रदूषण से श्वसन संबंधी बीमारियाँ (जैसे कैंसर, दमा), केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का प्रभावित होना (कार्बन मोनोक्साइड से), ओजोन परत का क्षरण, अम्ल वर्षा और वैश्विक तापन जैसे गंभीर हानिकारक प्रभाव होते हैं।
🎯 Exam Tip: वायु प्रदूषण के प्रभावों को सूचीबद्ध करते समय, मानव स्वास्थ्य (श्वसन, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र), पर्यावरणीय क्षति (ओजोन क्षरण, अम्ल वर्षा) और जलवायु परिवर्तन (ग्रीन हाउस प्रभाव) पर इसके प्रभावों को शामिल करें।
Question 12. ओजोन परत क्या है? यह कैसे बनती है? तथा इसका क्या महत्व है?
Answer: ओजोन (O3) तीन ऑक्सीजन परमाणुओं वाला ऑक्सीजन का अपररूप है। यह पृथ्वी से 16 km की ऊँचाई पर सूर्य किरणों के प्रभाव से ऑक्सीजन से उत्पन्न होती है। ओजोन (O3) का अनुपात इस ऊँचाई से 23 किमी की ऊँचाई तक बढ़ता जाता है। इस भाग में ओजोन परत अधिक सघन आवरण बनाती है। ओजोन अणुओं की यह विशेषता है कि वे सूर्य से आने वाले हानिकारक पराबैंगनी (Ultra-violet) विकिरण को अवशोषित कर लेते हैं। इस प्रकार पृथ्वी पर जीवों के लिए ओजोन परत एक सुरक्षात्मक आवरण के रूप में कार्य करती है।
In simple words: ओजोन ऑक्सीजन का एक त्रिपरमाण्विक अपररूप (O3) है जो सूर्य की पराबैंगनी किरणों से ऑक्सीजन के बनने से 16 से 60 किमी की ऊँचाई पर पाई जाती है, और यह हानिकारक पराबैंगनी विकिरणों को अवशोषित करके पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है।
🎯 Exam Tip: ओजोन परत को परिभाषित करते समय, इसकी रासायनिक संरचना (O3), निर्माण प्रक्रिया (UV से ऑक्सीजन) और महत्व (UV विकिरण का अवशोषण) को स्पष्ट करें।
Question 13. ओजोन छिद क्या है? ये कहाँ पर स्थित हैं?
अथवा
ओजोन परत के नष्ट होने के क्या मुख्य कारण हैं?
Answer: किन्हीं रसायनों के प्रयोग से ओजोन के आवरण में छेद हो जाते हैं। ये रसायन हैं- मुख्यतः क्लोरो फ्लोरो कार्बन व अन्य उनसे सम्बन्धित उत्पाद । इन छिद्रों से सूर्य से आने वाला पराबैंगनी प्रकाश (विकिरण) वायुमण्डल की निचली सतहों तक आ जाता है, जो त्वचा कैंसर के लिए जिम्मेदार माना जाता है। 1980 के आस-पास वैज्ञानिकों ने अण्टार्कटिक भाग के पास ओजोन छिद्र की उपस्थिति ज्ञात की।
In simple words: ओजोन छिद्र ओजोन परत में रासायनिक पदार्थों, मुख्य रूप से क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), के कारण होने वाले पतले होने को कहते हैं, जो अंटार्कटिक के पास स्थित है और हानिकारक पराबैंगनी विकिरण को पृथ्वी तक पहुँचने देता है, जिससे त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ता है।
🎯 Exam Tip: ओजोन छिद्र की व्याख्या करते समय, इसके कारणों (CFCs), स्थान (अंटार्कटिक) और परिणाम (पराबैंगनी विकिरण, त्वचा कैंसर) पर ध्यान दें।
Question 14. ओजोन परत कौन-से विकिरण को अवशोषित करती है? ओजोन परत के ह्रास होने के क्या-क्या कारण हैं? यदि ओजोन परत पतली हो जाये तो कौन-कौन से रोग होने की सम्भावना हो सकती है?
Answer: ओजोन परत द्वारा अवशोषित विकिरण पराबैंगनी विकिरण। ओजोन परत के ह्रास होने के कारण - ऐरोसॉल या क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन (CFC) की क्रिया के कारण। सुपरसोनिक विमानों में ईंधन के दहन से उत्पन्न पदार्थ व नाभिकीय विस्फोट भी ओजोन परत के ह्रास होने के कारण हैं। ओजोन परत के पतली होने पर सम्भावित रोग-त्वचा कैंसर ।
In simple words: ओजोन परत पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित करती है। इसके क्षरण के मुख्य कारण CFCs, सुपरसोनिक विमानों से उत्सर्जन और नाभिकीय विस्फोट हैं। ओजोन परत के पतले होने पर त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
🎯 Exam Tip: ओजोन परत द्वारा अवशोषित विकिरण, इसके क्षरण के कारणों (CFCs, विमानों का धुआँ, नाभिकीय विस्फोट) और संभावित रोगों (त्वचा कैंसर) के बीच संबंध को स्पष्ट करें।
Question 15. वायु प्रदूषण क्या है? इसके मुख्य स्रोत क्या हैं? वर्णन कीजिए ।
Answer: वायु प्रदूषण - जब वायु के विभिन्न अवयवों में किसी प्रकार का आनुपातिक असंतुलन होता है तो यह वायु प्रदूषण कहलाता है। वायु प्रदूषण के मुख्य स्रोत दो प्रकार के हैं :
(i) प्राकृतिक स्रोत (Natural Source)
(ii) मानवनिर्मित स्रोत (Man-made Source)
(i) प्राकृतिक स्रोत - इनमें वनों में लगी आग, ज्वालामुखी, आँधी और तूफान, कार्बनिक पदार्थों का अपघटन आदि सम्मिलित हैं।
(ii) मानवनिर्मित स्रोत - इनमें जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि, वनों की कटाई, शहरीकरण एवं औद्योगिकीकरण सम्मिलित हैं। मानव भी अपने क्रिया-कलापों द्वारा अन्य वायु प्रदूषकों को वायुमण्डल में छोड़ता रहता है जैसे-कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, लैड, आर्सेनिक, एस्बेस्टस तथा रेडियोधर्मी पदार्थों का वायुमण्डल में मिलना ।
In simple words: वायु प्रदूषण वायु के संघटन में असंतुलन है, जिसके मुख्य स्रोत प्राकृतिक (जैसे जंगल की आग, ज्वालामुखी) और मानवनिर्मित (जैसे औद्योगीकरण, जीवाश्म ईंधन का दहन, वनों की कटाई) हैं जो हानिकारक पदार्थों को वायुमंडल में छोड़ते हैं।
🎯 Exam Tip: वायु प्रदूषण की परिभाषा, उसके मुख्य प्रकार (प्राकृतिक, मानवनिर्मित) और प्रत्येक प्रकार के अंतर्गत विशिष्ट उदाहरणों को स्पष्ट करें।
Question 16. जीवों से नाइट्रोजन वायुमण्डल में कैसे वापस पहुँचती है?
Answer: जन्तुओं से नाइट्रोजन पुनः वायुमण्डल में निम्नलिखित चरणों में लौटा दी जाती है-
1. शाकाहारी जन्तुओं में उत्सर्जी पदार्थों (मल-मूत्र आदि) के साथ नाइट्रोजन पुनः मृदा में पहुँच जाती है।
2. पौधों तथा जन्तुओं के मृत शरीरों का विघटन जीवाणुओं तथा कवकों द्वारा होता है, जिससे नाइट्रोजन मृदा में पहुँचती है।
3. मृदा में उपस्थित प्यूट्रिफाइंग बैक्टीरिया (Putre fying bacteria) उत्सर्जी पदार्थों एवं प्रोटीनों का विघटन करके उन्हें अमोनिया यौगिकों में बदल देते हैं। इस क्रिया को अमोनीकरण (Ammoni fication) कहते हैं।
4. मृदा में उपस्थित नाइट्रीकारी जीवाणु (Nitrifying bacteria) अमोनिया को दो चरणों में नाइट्रेट में बदल देते हैं।
\[ \text{अमोनिया} \xrightarrow{\text{नाइट्रोसोमोनास}} \text{नाइट्राइट} \]
\[ \text{नाइट्राइट} \xrightarrow{\text{नाइट्रोबैक्टर}} \text{नाइट्रेट} \]
5. विनाइट्रीकरण बैक्टीरिया, जैसे-ल्यूडोमोनास, मृदा में उपस्थित नाइट्रेटों को नाइट्रोजन गैस में परिवर्तित कर देते हैं जो पुनः वायुमण्डल में मुक्त हो जाती है।
In simple words: जीवों से नाइट्रोजन उत्सर्जी पदार्थों और मृत शरीरों के अपघटन द्वारा अमोनिया में परिवर्तित होती है, फिर नाइट्रीकरण से नाइट्रेट में, और अंततः विनाइट्रीकरण बैक्टीरिया द्वारा नाइट्रोजन गैस के रूप में वायुमंडल में वापस लौट आती है।
🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन चक्र में जीवों से वायुमंडल में नाइट्रोजन की वापसी की प्रक्रिया (उत्सर्जन, अपघटन, अमोनीकरण, नाइट्रीकरण, विनाइट्रीकरण) को क्रमबद्ध तरीके से समझाएँ।
Question 17. ADP तथा ATP के पूरे नाम लिखिए। जीवों में इनका कार्य स्पष्ट कीजिए ।
Answer: ADP एडिनोसीन डाईफॉस्फेट (Adinocine Diphosphate), ATP एडिनो सीन ट्राईफॉस्फेट (Adinocine Triphosphate) जीवों की कोशिकाओं में श्वसन क्रिया द्वारा ऊर्जा को, ADP अवशोषित करके ATP में बदल जाता है- अर्थात् ऊर्जा का अतिरिक्त फॉस्फेट बंध में संचय करता है। शरीर द्वारा कार्य करने के लिए आवश्यक होने पर ATP पुनः ADP में बदल जाता है तथा संचित ऊर्जा को मुक्त करके, शरीर की पेशियों को उपलब्ध कराता है।
In simple words: ADP (एडिनोसिन डाईफॉस्फेट) और ATP (एडिनोसिन ट्राईफॉस्फेट) कोशिका में ऊर्जा भंडारण और संचरण के लिए महत्वपूर्ण हैं; ADP ऊर्जा को अवशोषित कर ATP में बदलता है, और ATP ऊर्जा मुक्त कर ADP में बदल जाता है।
🎯 Exam Tip: ADP और ATP के पूर्ण नाम और उनके ऊर्जा भंडारण व मुक्तिकरण की भूमिका को स्पष्ट करें, जिसमें फॉस्फेट बंध के महत्व पर जोर दें।
Question 18. श्वसन (Respiration) एवं साँस लेने (Breathing) में क्या अन्तर है?
Answer: जीवों की कोशिकाओं में ग्लूकोज के ऑक्सीजन से संयोग करके कार्बन डाई-ऑक्साइड एवं जल में बदलने तथा ऊर्जा मुक्त होने की क्रिया को श्वसन कहते हैं। जन्तुओं के शरीर में वायुमण्डल से ऑक्सीजन खचने तथा कार्बन डाई-ऑक्साइड बाहर निकालने की क्रिया को 'साँस लेना' कहते हैं। श्वसन एक रासायनिक अभिक्रिया है जबकि 'साँस-लेना' एक यान्त्रिक क्रिया है।
In simple words: श्वसन एक कोशिकीय रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें ऊर्जा उत्पादन के लिए ग्लूकोज का ऑक्सीकरण होता है, जबकि साँस लेना (ब्रीदिंग) एक यांत्रिक प्रक्रिया है जिसमें ऑक्सीजन को अंदर लेना और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालना शामिल है।
🎯 Exam Tip: श्वसन और साँस लेने के बीच के अंतर को स्पष्ट करते समय, श्वसन को रासायनिक और कोशिकीय प्रक्रिया के रूप में, और साँस लेने को यांत्रिक गैस विनिमय प्रक्रिया के रूप में परिभाषित करें।
Question 19. आवश्यक समीकरण देकर बताए कि ‘श्वसन' तथा 'प्रकाश-संश्लेषण' क्या अन्तर है?
Answer: ‘श्वसन' तथा 'प्रकाश-संश्लेषण' परस्पर विपरीत अभिक्रियाएँ हैं। श्वसन में ग्लूकोज ऑक्सीजन से संयोग होकर कार्बन डाइऑक्सइड तथा जल बनाता है।
\[ \text{श्वसन:} \quad \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 + 6\text{O}_2 \longrightarrow 6\text{CO}_2 + 6\text{H}_2\text{O} + \text{ऊर्जा} \]
प्रकाश-संश्लेषण में कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल के संयोजन से ग्लूकोज बनता है तथा ऊर्जा अवशोषित होती है।
\[ \text{प्रकाश-संश्लेषण:} \quad 6\text{CO}_2 + 6\text{H}_2\text{O} + \text{ऊर्जा} \longrightarrow \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 + 6\text{O}_2 \]
In simple words: श्वसन में ग्लूकोज और ऑक्सीजन मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड, जल और ऊर्जा मुक्त करते हैं, जबकि प्रकाश संश्लेषण में कार्बन डाइऑक्साइड, जल और ऊर्जा का उपयोग करके ग्लूकोज और ऑक्सीजन बनते हैं, ये दोनों प्रक्रियाएँ एक-दूसरे के विपरीत हैं।
🎯 Exam Tip: श्वसन और प्रकाश-संश्लेषण के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए उनकी रासायनिक समीकरणों और ऊर्जा के उपयोग/उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करें।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. जल-चक्र का वर्णन कीजिए।
Answer: जल चक्र (Water Cycle) – जल जीवधारियों के लिए अनिवार्य पदार्थ है। जीवधारियों के शरीर का सबसे बड़ा अंश लगभग 80-90 प्रतिशत जल होता है। जीवधारी जल को वायुमण्डल (वर्षा द्वारा) या भूमि से प्राप्त करते हैं। सौर ऊष्मा के, कारण झीलों, तालाबों, नदियों, समुद्र आदि का जल जलवाष्प बनकर वायुमण्डल में एकत्र हो जाता है और बादल बनते हैं- उनसे वर्षा, ओलावृष्टि के रूप में जल पुनः पृथ्वी पर वापस आ जाता है। मृदा जल को अवशोषित कर पौधे प्रकाश-संश्लेषण क्रिया करते हैं तथा शेष जल पत्तियों और खुले भागों द्वारा वाष्पोत्सर्जित होकर पुनः वातावरण में पहुँच जाता है। जन्तु जल का उपयोग भोजन में तथा पीने में करते हैं तथा मूत्र के रूप में उत्सर्जित करके वापस वातावरण को पहुँचाते हैं। जीवधारियों के श्वसन से भी जल वातावरण में लौटता है।
जीवधारियों की मृत्यु के पश्चात् अपघटकों द्वारा जल वापस वातावरण में पहुँच जाती है। इस प्रकार जीवधारी जितना जल वातावरण से प्राप्त करते हैं, किसी-न-किसी क्रिया द्वारा वापस वातावरण में पहुँचा देते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र जल चक्र को दर्शाता है, जिसमें सूर्य की ऊष्मा के कारण समुद्र और स्थल से पानी का वाष्पीकरण होता है, जिससे जलवाष्प वायुमंडल में ऊपर उठती है। यह जलवाष्प संघनित होकर बादल बनाती है, और फिर वर्षा (वर्षण) के रूप में पृथ्वी पर वापस आती है, जो नदियों और समुद्र में मिल जाती है, इस प्रकार जल का निरंतर चक्रण होता रहता है।
In simple words: जल चक्र एक निरंतर प्रक्रिया है जिसमें सूर्य की गर्मी से जल वाष्पीकृत होकर वायुमंडल में जाता है, बादल बनाता है, और फिर वर्षा के रूप में पृथ्वी पर लौट आता है, जिससे नदियों, झीलों और भूजल में पानी की भरपाई होती है।
🎯 Exam Tip: जल चक्र का वर्णन करते समय, वाष्पीकरण, संघनन, वर्षण और संग्रह जैसे मुख्य चरणों को क्रमिक रूप से समझाएँ।
Question 2. नाइट्रोजन चक्र का वर्णन कीजिए ।
अथवा
नाइट्रोजन स्थिरीकरण से क्या तात्पर्य है? स्पष्ट कीजिए कि वायुमण्डल से मृदा को नाइट्रोजन किस प्रकार प्राप्त होती है?
Answer: नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle) – वायुमण्डल का लगभग 78% भाग नाइट्रोजन गैस है। परन्तु सभी जीव (जीवाणु-एजोबैक्टर आदि को छोड़कर) इसका सीधा उपयोग नहीं कर सकते। इसके लिए नाइट्रोजन का नाइट्रेट लवणों के रूप में परिवर्तन आवश्यक होता है। वायुमण्डल की मुक्त नाइट्रोजन को जीवनोपयोगी नाइट्रोजन यौगिकों में परिवर्तन की क्रिया को नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) कहते हैं। प्रकृति में वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण तीन प्रकार से होता है-
1. विद्युत तड़ित से नाइट्रोजन स्थिरीकरण - आकाश में बिजली चमकने के समय वातावरणीय नाइट्रोजन वायु की ऑक्सीजन के साथ नाइट्रोजन डाइऑक्साइड बनाती है। यह वर्षा के जल के साथ मिलकर नाइट्रिक अम्ल बनाता है और जल द्वारा जीवों के शरीर व मृदा में पहुँच जाता है। मृदा के क्षारीय तत्त्वों (लाइमस्टोन) से क्रिया करके नाइट्रेट बनता है और भूमि में स्थिर हो जाता है।
(i) \( \text{N}_2 + 2\text{O}_2 \longrightarrow 2\text{NO}_2 \) नाइट्रोजन डाइऑक्साइड
(ii) \( 4\text{NO}_2 + 2\text{H}_2\text{O} + \text{O}_2 \longrightarrow 4\text{HNO}_3 \)
नाइट्रिक अम्ल
(iii) \( \text{CaCO}_3 + 2\text{HNO}_3 \longrightarrow \text{Ca}(\text{NO}_3)_2 + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2 \)
कैल्सियम नाइट्रेट
2. जीवाणुओं द्वारा नाइट्रोजन स्थिरीकरण - लेग्यूमिनस पौधों (जैसे-मटर, सेम, चना और दलहनी पौधे) की जड़ों की गाँठों में राइजोबियम जीवाणुओं (Rhizobium bacteria) का वास होता है जो नाइट्रोजन को उसके यौगिकों में परिवर्तित करके पौधों के लिए उपयोगी बना देते हैं। कुछ अदलहनी पौधे जैसे गिन्कगो (Ginkgo) और एल्नस (Alnus) भी नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं।
3. नीली-हरी शैवाल द्वारा नाइट्रोजन स्थिरीकरण - नीली-हरी शैवाल धान के खेतों में पायी जाती है। ये शैवाल नाइट्रोजन को उसके उपयोगी यौगिकों में परिवर्तित कर देती है।
4. नाइट्रोजन का औद्योगिक स्थिरीकरण - औद्योगिक क्षेत्र में नाइट्रोजन स्थिरीकरण को कृत्रिम स्थिरीकरण कहते हैं। कारखानों में वायुमण्डलीय N2 व H2 गैसें अमोनिया (NH3) बनाती हैं, NH3 ऑक्सीकृत होकर नाइट्रेट का निर्माण करती है। यह अम्लों से क्रिया करके अमोनिया लवण का निर्माण करता है। ये कृत्रिम उर्वरक (Fertilizers) के रूप में उपयुक्त होते हैं। इस विधि को हैबर की विधि (Haber's Process) कहते हैं, जैसे- अमोनियम सल्फेट [(NH4)2SO4], अमोनियम फॉस्फेट [(NH4)3PO4], अमोनियम नाइट्रेट NH4NO3 आदि ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र नाइट्रोजन चक्र को दर्शाता है, जिसमें वायुमंडलीय नाइट्रोजन विभिन्न प्रक्रियाओं जैसे तड़ित (बिजली), जीवाणु स्थिरीकरण और औद्योगिक विधियों द्वारा मृदा में प्रवेश करती है। पौधे इसे नाइट्रेट के रूप में अवशोषित करते हैं, जिन्हें जंतु खाते हैं। मृत जीवों और उत्सर्जी पदार्थों का अपघटन अमोनिया और फिर नाइट्राइट व नाइट्रेट बनाता है, जो विनाइट्रीकरण द्वारा वापस वायुमंडल में नाइट्रोजन गैस में बदल जाता है।
विधियों से वायुमण्डलीय नाइट्रोजन मृदा में नाइट्रेटों के रूप में पहुँच जाती है। पौधे अपनी जड़ों के द्वारा अवशोषित करके इन्हें ऐमीनो अम्लों में परिवर्तित करते हैं। तथा ऐमीनो अम्ल बहुलीकरण (Polymerisation) की क्रिया से प्रोटीनों में परिवर्तित हो जाते हैं। इस प्रकार नाइट्रोजन आहार श्रृंखला में प्रवेश करती है तथा शाकाहारी उपभोक्ताओं एवं अन्ततः मांसाहारी उपभोक्ताओं में पहुँचती है।
नाइट्रोजन का वायुमण्डल में पुनः प्रवेश – इन उपभोक्ताओं (पौधों एवं जन्तुओं) से नाइट्रोजन पुनः वायुमण्डल में निम्नलिखित चरणों में लौटा दी जाती है
- शाकाहारी जन्तुओं में उत्सर्जी पदार्थों (मल-मूत्र आदि) के साथ नाइट्रोजन पुनः मृदा में पहुँच जाती है।
- पौधों तथा जन्तुओं के मृत शरीरों का विघटन जीवाणुओं तथा कवकों द्वारा होता है, जिससे नाइट्रोजन मृदा में पहुँचती है।
- मृदा में उपस्थित प्यूट्रिफाइंग बैक्टीरिया (Putrifying bacteria) उत्सर्जी पदार्थों एवं प्रोटीनों का विघटन करके उन्हें अमोनिया यौगिकों में बदल देते है। इस क्रिया को अमोनीकरण (Ammonification) कहते हैं। \[ \text{अमोनिया} \xrightarrow{\text{नाइट्रोसोमोनास}} \text{नाइट्राइट} \] \[ \text{नाइट्राइट} \xrightarrow{\text{नाइट्रोबैक्टर}} \text{नाइट्रेट} \]
- विनाइट्रीकरण बैक्टीरिया, जैसे-ल्यूडोमोनास, मृदा में उपस्थित नाइट्रेटों को नाइट्रोजन गैस में परिवर्तित कर देते हैं जो पुनः वायुमण्डल में मुक्त हो जाती है।
In simple words: नाइट्रोजन चक्र वायुमंडल की नाइट्रोजन को विभिन्न जैविक और अजैविक प्रक्रियाओं (स्थिरीकरण, अमोनीकरण, नाइट्रीकरण, विनाइट्रीकरण) के माध्यम से जीवों और मृदा में परिवर्तित करता है और फिर उसे वापस वायुमंडल में छोड़ता है, जिससे पोषक तत्वों का संतुलन बना रहता है।
🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन चक्र का विस्तृत वर्णन करते समय, इसके सभी मुख्य चरणों - स्थिरीकरण (विद्युत, जैविक, औद्योगिक), अमोनीकरण, नाइट्रीकरण और विनाइट्रीकरण - को समीकरणों और संबंधित जीवों के साथ समझाएँ।
Question 3. कार्बन चक्र का वर्णन कीजिए ।
अथवा
कार्बन-चक्र का रेखाचित्र बनाइए। इसमें असन्तुलन का क्या प्रभाव होता है?
Answer: कार्बन चक्र (Carbon Cycle) - जीवधारियों में पाये जाने वाले सभी कार्बनिक यौगिकों में कार्बन उपस्थित होता है। कार्बन के प्रमुख स्रोत हैं-वायुमण्डल, समुद्र तथा कार्बोनेट चट्टानें (जैसे चूना-पत्थर), कोयला और पेट्रोलियम् । कार्बन वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में लगभग \(0.03\%\) से \(0.04\%\) (\(2.3 \times 10^{12}\) टन) होती है। समुद्र में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा लगभग \(1.3 \times 10^{13}\) टन है। इन दोनों स्थानों में पायी जाने वाली कार्बन डाइऑक्साइड एक-दूसरे से सन्तुलन बनाये रखती है। वायुमण्डल तथा समुद्र में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड, जीवनमण्डल और स्थलमण्डल की कार्बन डाइऑक्साइड के साथ निरन्तर आदान-प्रदान करती रहती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख कार्बन चक्र को दर्शाता है जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड का वायुमंडल, पौधों, जानवरों, जल में घुले हुए कार्बोनेट, कोयला, पेट्रोलियम और चूना पत्थर के बीच चक्रीय प्रवाह दिखाया गया है। इसमें प्रकाश-संश्लेषण, श्वसन, अपघटन और दहन जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं जो कार्बन के विभिन्न रूपों में रूपांतरण और परिसंचरण में सहायक होती हैं।
(क्लोरोफिलयुक्त पौधे) प्रकाश-संश्लेषण के लिए वायुमण्डल से कार्बन डाइ-ऑक्साइड लेते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड की अत्यन्त सूक्ष्म मात्रा का उपयोग रसायन संश्लेषी जीव भी करते हैं। इसके अतिरिक्त समुद्र में पाये जाने वाले पौधे भी कार्बन डाइऑक्साइड की कुछ मात्रा का सीधा उपयोग करते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड के जीवमण्डल में पहुँचने के बाद कार्बन आहार श्रृंखला द्वारा उत्पादकों से उपभोक्ताओं तक और इन दोनों से अपघटकों तक पहुँचता है। जीवमण्डल से कार्बन डाइऑक्साइड की लगभग समान मात्रा निम्नलिखित दो प्रक्रियाओं द्वारा प्रतिवर्ष वायुमण्डल में वापस लौटती है। 1. उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटकों के श्वसन द्वारा, और 2. ईंधन (लकड़ी, कोयला, पेट्रोलियम इत्यादि) को जलाने पर । इन स्रोतों के अतिरिक्त समुद्र में स्थित कैल्शियम कार्बोनेट की चट्टानें (चूना-पत्थर), चट्टानों का अपक्षय (weathering), गरम झरने, ज्वालामुखी, इत्यादि भी वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड विमोचित करते है।
वायुमण्डल में CO2 की अधिकता जीवाश्मीय ईंधन का अधिक उपयोग करने से तथा वनों के विनष्टीकरण के फलस्वरूप होती है। वायुमण्डल में CO2 की अधिकता के फलस्वरूप एक आवरण-सा बन जाता है जो सौर विकिरण के लिए पारदर्शी होता है। यह दृश्य प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने देता है किन्तु पुनः विकिरण के रूप में लौटी ऊष्मीय तरंगों को रोक लेता है। ऊष्मा वापस पृथ्वी पर लौटा दी जाती है, इसके फलस्वरूप ग्रीन हाउस प्रभाव उत्पन्न होता है। सामान्य स्थिति में इसके फलस्वरूप पौधों के उत्पादन में वृद्धि होती है, लेकिन वायुमण्डलीय ताप बढ़ जाने का दुष्प्रभाव जीवधारियों को परोक्ष रूप से प्रभावित करता है।
In simple words: कार्बन चक्र वह प्रक्रिया है जिसमें कार्बन वायुमंडल, पृथ्वी और जलमंडल के बीच विभिन्न रूपों में घूमता है, जैसे कि प्रकाश-संश्लेषण, श्वसन और दहन जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से। इस चक्र में असंतुलन, जैसे कि जीवाश्म ईंधन जलाने से CO2 की अधिकता, ग्लोबल वार्मिंग का कारण बन सकता है।
🎯 Exam Tip: कार्बन चक्र के प्रमुख स्रोतों और प्रक्रियाओं को समझना महत्वपूर्ण है, साथ ही CO2 के बढ़ते स्तर से ग्रीनहाउस प्रभाव पर पड़ने वाले प्रभावों को भी स्पष्ट करें।
Question 4. ऑक्सीजन-चक्र का वर्णन कीजिए ।
Answer: ऑक्सीजन-चक्र (Oxygen Cycle) - वायुमण्डल में लगभग 21% ऑक्सीजन स्वतन्त्र रूप में है। स्वच्छ एवं समुद्री जल में भी जल तथा कार्बन-डाई-ऑक्साइड के रूप में ऑक्सीजन होती है। मृदा में कार्बोनेट्स () नाइट्रेट्स () सल्फेट्स () तथा फॉस्फेट्स () आदि के रूप में ऑक्सीजन होती है।
ऑक्सीजन-चक्र के चरण निम्नवत हैं-
• श्वसन क्रिया में सभी जीव (जन्तु तथा पौधे) वायु से ऑक्सीजन लेते हैं। जलीय जीव जल में घुली हुई ऑक्सीजन का श्वसन हेतु उपयोग करते हैं।
• श्वसन क्रिया से कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल बनता है जो वायुमण्डल में अथवा जलमण्डल में छोड़ दिया जाता है।
• मानव के क्रिया-कलापों में ईंधनों के दहन में भी वायुमण्डल की ऑक्सीजन व्यय होती है तथा कार्बन डाइ-ऑक्साइड बनती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र ऑक्सीजन चक्र को दर्शाता है, जिसमें वायुमंडलीय ऑक्सीजन (O2) प्रकाश-संश्लेषण के माध्यम से जटिल कार्बनिक अणुओं (C6H12O6) और जल (H2O) में परिवर्तित होती है। फिर श्वसन और ईंधनों के दहन के माध्यम से ये कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) में बदल जाते हैं, जो फिर वायुमंडल में वापस चला जाता है, इस प्रकार ऑक्सीजन का चक्रण निरंतर जारी रहता है।
प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया द्वारा पौधे वायुमण्डल में छोड़ी गयी कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल का उपयोग करके जटिल कार्बनिक पदार्थ (ग्लूकोज, C6H12O6) बनाते हैं तथा वायुमण्डल में ऑक्सीजन को मुक्त करते हैं।
इस प्रकार जन्तुओं के श्वसन, ईंधनों के दहन तथा पौधों के प्रकाश-संश्लेषण की अभिक्रियाओं के द्वारा प्रकृति में ऑक्सीजन का चक्रण होता है।
In simple words: ऑक्सीजन चक्र वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा ऑक्सीजन वायुमंडल, जलमंडल और स्थलमंडल के बीच विभिन्न रासायनिक रूपों में घूमती है, जिसमें प्रकाश-संश्लेषण द्वारा ऑक्सीजन का उत्पादन और श्वसन व दहन द्वारा इसका उपभोग शामिल है।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीजन चक्र के मुख्य चरणों, विशेष रूप से प्रकाश-संश्लेषण और श्वसन की भूमिका पर ध्यान दें, क्योंकि ये पृथ्वी पर जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 5. जल प्रदूषण से आप क्या समझते हैं? जले किस प्रकार प्रदूषित होता है। इसे कैसे नियंत्रित किया जाता है?
Answer: जल प्रदूषण (Water Pollution) - स्वच्छ जल में घुलित खनिज तत्त्व तथा लवण आदि संतुलित मात्रा में पाए जाते हैं। जल में विषाक्त पदार्थ जैसे-कारखानों के अपशिष्ट उत्पाद, रासायनिक पदार्थ, वाहित मल, कूड़ा-करकट आदि के मिलने से जल दूषित हो जाता है। इसे जल प्रदूषण कहते हैं। वह जल जो मनुष्य के उपयोग योग्य नहीं होता और जिससे रोग हो सकते हैं, प्रदूषित जल कहलाता है। इसमें हानिकारक कीटाणु, जीवाणु तथा पीड़कनाशक आदि हो सकते हैं। प्रदूषण के कारण जल पीने योग्य नहीं रहता है।
जल प्रदूषण का मुख्य स्रोत कार्बनिक पदार्थ, अपमार्जक आदि हैं। कार्बनिक पदार्थों के सड़ने से पानी में गंध आने लगती है और वह प्रदूषित हो जाता है अर्थात् जल में भौतिक (Physical), रासायनिक (Chemical) व जैविक (Biological) परिवर्तन होने पर वह प्रदूषित हो जाता है। जल प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपाय-
• वाहित मल, घर से निकले हुए अपमार्जक तथा गंदे जल को शहर के निकट नदियों या तालाबों में न गिराकर नालियों द्वारा बाहर ले जाकर आबादी से दूर गिराना चाहिए।
• कारखानों से निकलने वाले विषैले अपशिष्ट पदार्थों एवं गर्म जल को जलाशयों, नदियों या समुद्रों में नहीं गिराना चाहिए।
• कारखानों के अपशिष्ट पदार्थों को उपचारित करके ही नदियों आदि में गिराया जाना चाहिए।
• कीटनाशकों का प्रयोग करते समय ध्यान रखना चाहिए कि उस खेत का जल पीने वाले जलाशयों में बहकर न जाए।
• कूड़ा-करकट को जलाशयों में न डालकर शहर से बाहर किसी गड्ढे में डालकर मिट्टी से ढक देना चाहिए।
In simple words: जल प्रदूषण तब होता है जब जल में हानिकारक पदार्थ मिल जाते हैं, जिससे यह पीने योग्य नहीं रहता और जीवों के लिए नुकसानदेह हो जाता है। इसे नियंत्रित करने के लिए अपशिष्ट जल का सही निपटान, औद्योगिक कचरे का उपचार और कृषि रसायनों के उपयोग में सावधानी बरतना आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: जल प्रदूषण के कारणों और उसके नियंत्रण के उपायों को विस्तार से समझाएं, विशेष रूप से मानवीय गतिविधियों के प्रभावों पर ध्यान दें।
अभ्यास प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. ऑक्सीजन किन स्रोतों से प्राप्त होती है?
(a) वायुमण्डल से
(b) जलमण्डल से
(c) उपर्युक्त दोनों से
(d) स्थलमण्डल से।
Answer: (c) उपर्युक्त दोनों से
In simple words: ऑक्सीजन मुख्य रूप से वायुमंडल से मिलती है, लेकिन जलीय जीव जलमंडल में घुली हुई ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं, इसलिए यह दोनों स्रोतों से प्राप्त होती है।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीजन चक्र में वायुमंडल और जलमंडल दोनों की भूमिका को स्पष्ट करें।
Question 2. सौर-ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तन होता है
(a) प्रकाश-संश्लेषण द्वारा
(b) श्वसन द्वारा
(c) उत्सर्जन द्वारा
(d) वाष्पोत्सर्जन द्वारा ।
Answer: (a) प्रकाश-संश्लेषण द्वारा
In simple words: प्रकाश-संश्लेषण वह प्रक्रिया है जिसमें पौधे सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा (ग्लूकोज) में बदलते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया और उसमें सौर ऊर्जा की भूमिका को परिभाषित करें।
Question 3. वायुमण्डल कहलाता है
(a) पृथ्वी का वह ठोस भाग जिसमें जीव हों
(b) पृथ्वी का जल से आच्छादित भाग
(c) पृथ्वी के ऊपर गैसीय भाग
(d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (c) पृथ्वी के ऊपर गैसीय भाग
In simple words: वायुमंडल पृथ्वी को घेरे हुए गैसों की एक परत है।
🎯 Exam Tip: वायुमंडल की परिभाषा और उसके घटकों को याद रखें।
Question 4. भू-मण्डल कहलाता है
(a) पृथ्वी का वह ठोस भाग जिसमें जीव हों
(b) पृथ्वी का जल से आच्छादित भाग
(c) पृथ्वी के ऊपर गैसीय भाग
(d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (a) पृथ्वी का वह ठोस भाग जिसमें जीव हों
In simple words: भू-मंडल पृथ्वी की ठोस सतह है जहां जीव निवास करते हैं।
🎯 Exam Tip: पृथ्वी के विभिन्न मंडलों (जैसे भूमंडल, जलमंडल, वायुमंडल) की परिभाषाओं में अंतर स्पष्ट करें।
Question 5. जल-चक्र का संचालन मुख्य रूप से होता है
(a) प्रकाश-संश्लेषण द्वारा
(b) वाष्पन द्वारा
(c) वर्षा द्वारा
(d) उपर्युक्त सभी से ।
Answer: (b) वाष्पन द्वारा
In simple words: जल चक्र का मुख्य संचालन वाष्पन से होता है, जहाँ जल जलाशयों से वाष्प बनकर वायुमंडल में जाता है।
🎯 Exam Tip: जल चक्र में वाष्पन, संघनन और वर्षा की भूमिका को समझें, वाष्पन प्राथमिक प्रेरक है।
Question 6. जैवमण्डल में पोषक तत्वों एवं पदार्थों का प्रवाह है
(a) उत्क्रमणीय
(b) एक ही दिशा में
(c) पहले एक दिशा में व बाद में उत्क्रमणीय
(d) चक्रीय
Answer: (d) चक्रीय
In simple words: जैवमंडल में पोषक तत्व और पदार्थ एक चक्र में प्रवाहित होते हैं, यानी वे विभिन्न जीवों और पर्यावरण के बीच लगातार घूमते रहते हैं।
🎯 Exam Tip: पोषक तत्वों के चक्रीय प्रवाह की अवधारणा को पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी भूमिका के संदर्भ में समझाएं।
Question 7. निम्न में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाला जीव है
(a) सूडोमोनाज
(b) नाइट्रोसोमोनाज
(c) राइजोबियम
(d) नाइट्रोबैक्टर ।
Answer: (c) राइजोबियम
In simple words: राइजोबियम बैक्टीरिया फलदार पौधों की जड़ों में रहकर वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधों के लिए उपयोगी रूपों में परिवर्तित करते हैं।
🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले विभिन्न जीवों के नाम और उनकी भूमिकाओं को याद रखें।
Question 8. निम्न में विनाइट्रीकरण वाला जीव है
(a) सूडोमोनाज
(b) नाइट्रोसोमोनाज
(c) राइजोबियम
(d) नाइट्रोबैक्टर ।
Answer: (a) सूडोमोनाज
In simple words: सूडोमोनाज एक बैक्टीरिया है जो नाइट्रोजन चक्र में नाइट्रेट को गैसीय नाइट्रोजन में बदलकर वायुमंडल में छोड़ता है, जिसे विनाइट्रीकरण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन चक्र के प्रत्येक चरण में शामिल विशिष्ट बैक्टीरिया के कार्यों को समझें।
Question 9. अमोनीकरण करने वाला जीव है
(a) सूडोमोनाज
(b) नाइट्रोसोमोनाज
(c) राइजोबियम
(d) नाइट्रोबैक्टर ।
Answer: (b) नाइट्रोसोमोनाज
In simple words: नाइट्रोसोमोनाज बैक्टीरिया अमोनिया को नाइट्राइट में परिवर्तित करता है, जो अमोनीकरण प्रक्रिया का एक हिस्सा है।
🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन चक्र में अमोनीकरण और नाइट्रीकरण के बीच अंतर स्पष्ट करें।
Question 10. नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदलने की प्रक्रिया कहलाती है-
(a) नाइट्रोजन स्थिरीकरण
(b) नाइट्रीकरण
(c) अमोनीकरण
(d) विनाइट्रीकरण
Answer: (b) नाइट्रीकरण
In simple words: नाइट्रीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदला जाता है, जो पौधों के लिए एक उपयोगी नाइट्रोजन यौगिक है।
🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन चक्र के विभिन्न चरणों- स्थिरीकरण, अमोनीकरण, नाइट्रीकरण और विनाइट्रीकरण को उनकी परिभाषाओं सहित याद रखें।
Question 11. कारक जो मृदा के निर्माण में सहायक है-
(a) सूर्य
(b) जल
(c) वायु
(d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: मृदा निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें सूर्य की गर्मी, जल का कटाव और वायु का अपरदन जैसे कई प्राकृतिक कारक योगदान करते हैं।
🎯 Exam Tip: मृदा निर्माण को प्रभावित करने वाले विभिन्न प्राकृतिक कारकों और उनकी भूमिकाओं का विश्लेषण करें।
Question 12. हानिकारक पराबैंगनी विकिरण रोक लिया जाता है-
(a) ऑक्सीजन परत द्वारा
(b) ओजोन परत द्वारा
(c) नाइट्रोजन परत द्वारा
(d) उपर्युक्त सभी से ।
Answer: (b) ओजोन परत द्वारा
In simple words: ओजोन परत सूर्य से आने वाले हानिकारक पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित करके पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है।
🎯 Exam Tip: ओजोन परत के महत्व और पराबैंगनी विकिरण से इसके बचाव की प्रक्रिया पर जोर दें।
Question 13. वातावरण में CO2 की कमी होती है-
(a) ईंधनों के दहन से
(b) प्रकाश संश्लेषण से
(c) श्वसन से
(d) दहन व श्वसन दोनों से ।
Answer: (b) प्रकाश संश्लेषण से
In simple words: प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में पौधे वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करते हैं, जिससे उसकी मात्रा कम होती है।
🎯 Exam Tip: कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन और अवशोषण की प्रक्रियाओं और वातावरण में CO2 के संतुलन में उनकी भूमिका को समझें।
Question 14. पर्यावरण को स्वच्छ एवं स्वास्थ्यवर्द्धक रखने के लिए-
(a) प्राकृतिक सम्पदा का बिल्कुल उपयोग न करें।
(b) प्राकृतिक सम्पदा का अति उपयोग करें
(c) प्राकृतिक सम्पदा का समुचित व आनुपातिक उपयोग करें।
(d) प्राकृतिक सम्पदा व पर्यावरण का कोई सम्बन्ध नहीं है।
Answer: (c) प्राकृतिक सम्पदा का समुचित व आनुपातिक उपयोग करें।
In simple words: पर्यावरण को स्वच्छ और स्वस्थ रखने के लिए हमें प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण और संतुलित उपयोग करना चाहिए।
🎯 Exam Tip: सतत विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व को स्पष्ट करें।
Question 15. सामान्य मनुष्य को चाहिए प्रतिदिन
(a) 100 - 110 किग्रा वायु
(b) 200 - 210 किग्रा वायु
(c) 250 - 265 किग्रा वायु
(d) 350 - 365 किग्रा वायु
Answer: (c) 250 - 265 किग्रा वायु
In simple words: एक सामान्य व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन लगभग 250-265 किलोग्राम वायु की आवश्यकता होती है।
🎯 Exam Tip: वायु की दैनिक आवश्यकता के महत्व और श्वसन प्रक्रिया में इसकी भूमिका को संक्षेप में बताएं।
Question 16. मृदा एक प्राकृतिक संसाधन है जो
(a) जीवित रहने के विकास के लिए आवश्यक है।
(b) खाद्य-पदार्थ, कपड़े व आश्रय प्रदान करता है।
(c) पौधों को आवश्यक पोषक तत्त्व प्रदान करता है।
(d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: मृदा एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है क्योंकि यह जीवन के विकास, खाद्य उत्पादन, कपड़े, आश्रय और पौधों को पोषक तत्व प्रदान करने में सहायक है।
🎯 Exam Tip: मृदा के महत्व और विभिन्न तरीकों को समझें जिनसे यह जीवन का समर्थन करती है।
उत्तरमाला
1. (c)
2. (a)
3. (c)
4. (a)
5. (b)
6. (d)
7. (c)
8. (a)
9. (b)
10. (b)
11. (d)
12. (b)
13. (b)
14. (c)
15. (c)
16. (d)
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