UP Board Solutions Class 9 Science Chapter 15 Improvement in Food Resources

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Detailed Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार UP Board Solutions for Class 9 Science

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Class 9 Science Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions For Class 9 Science Chapter 15 Improvement In Food Resources (खाद्य संसाधनों में सुधार)

पाठ्य - पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 229)

 

Question 1. अनाज, दाल, फल तथा सब्जियों से हमें क्या प्राप्त होता है?
Answer:
1. अनाज - जैसे गेहूं, चावल, मक्का, बाजरी तथा ज्वार से कार्बोहाइड्रेट प्राप्त होता है जो हमें ऊर्जा प्रदान करता है।
2. दालें - जैसे चना, मटर, मूंग, उड़द, अरहर और मसूर इत्यादि सभी दालें हैं जो हमें प्रोटीन प्रदान करती हैं। जो हमारे शरीर की टूट-फूट की मरम्मत में मुख्य भूमिका निभाते हैं।
3. फल तथा सब्जियाँ - जैसे घीया, तोरी, गोभी, मटर, आलू अंगूर, आम, अनार, अनन्नास इत्यादि हमें विटामिन, खनिज व कुछ मात्रा में प्रोटीन इत्यादि प्रदान करते हैं।
In simple words: अनाज हमें कार्बोहाइड्रेट, दालें प्रोटीन और फल व सब्जियां विटामिन, खनिज तथा थोड़ी मात्रा में प्रोटीन प्रदान करती हैं, जो शरीर की ऊर्जा, वृद्धि और मरम्मत के लिए आवश्यक हैं।

🎯 Exam Tip: खाद्य पदार्थों से प्राप्त मुख्य पोषक तत्वों को स्पष्ट रूप से बताना महत्वपूर्ण है, साथ ही उनके शारीरिक कार्यों का भी उल्लेख करें।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 230)

 

Question 1. जैविक तथा अजैविक कारक किस प्रकार फसल उत्पादन को प्रभावित करते हैं?
Answer:
जैविक कारक - जैसे कीट, नेमेटोड, केंचुआ व अन्य जीवाणु इत्यादि सभी जैविक कारक में आते हैं। ये फसलों के उत्पादन में भी सहायता करते हैं, जैसे- फलीदार पौधों की जड़ों में पाए जाने वाले जीवाणु जो वायुमण्डले की नाइट्रोजन से यौगिक बनाते हैं, केंचुआ भी मिट्टी को पोली (सरन्ध्र व नरम) बनाकर उपजाऊ बनाता है जिससे फसल उत्पादन बढ़ता है परन्तु कुछ कीट व नेमेटोड फसल उत्पादन को कम करते हैं। अतः हमें इन परिस्थितियों को सहन करने वाली किस्में प्रयोग करनी चाहिए जैसे कम परिपक्व काल वाली फसलें आर्थिक दृष्टि से अच्छी होती हैं।
अजैविक कारक - जैसे वायु, तापमान, मिट्टी, जल इत्यादि अजैविक कारक में गिने जाते हैं। भूमि की अम्लीयता या क्षारकता, गर्मी, ठण्ड तथा पाला इत्यादि फसल उत्पादन को कम करते हैं। अतः हमें ऐसी फसलों को उपयोग करना चाहिए जो इन सभी परिस्थितियों को अच्छी प्रकार सहन कर सकें। इसके लिए मिश्रित फसलें वे अन्तर-फसली विधियाँ अपनानी चाहिए ।
In simple words: जैविक कारक (जैसे कीट और जीवाणु) और अजैविक कारक (जैसे तापमान और जल) दोनों ही फसल उत्पादन को प्रभावित करते हैं। कुछ जैविक कारक सहायक होते हैं, जबकि अन्य और अजैविक कारक उत्पादन को कम कर सकते हैं, इसलिए प्रतिरोधी किस्मों का चुनाव महत्वपूर्ण है।

🎯 Exam Tip: जैविक और अजैविक कारकों का स्पष्ट वर्गीकरण और उनके फसल उत्पादन पर पड़ने वाले सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों को समझाना आवश्यक है।

 

Question 2. फसल सुधार के लिए ऐच्छिक सस्य विज्ञान गुण क्या हैं?
Answer: पशुओं के लिए चारा प्राप्त करने के लिए ऐसी फसलें अधिक उपयुक्त होती हैं जिनमें पौधे लंबे तथा सघन शाखाओं वाले हों, अर्थात् यह फसल का ऐच्छिक सस्य विज्ञान गुण है। इसी प्रकार अनाज उत्पादन के लिए बौने पौधे उपयुक्त ऐच्छिक सस्य विज्ञान गुण है, क्योंकि इनको उगाने के लिए कम पोषक तत्वों की आवश्यकता होगी । इनके गिरने की संभावनाएँ भी कम होंगी। फसलों के उगने से लेकर कटाई तक कम समय लगना आदि उपयुक्त ऐच्छिक सस्य विज्ञान गुण कहलाते हैं। ऐच्छिक सस्य विज्ञान गुणों वाली किस्में अधिक उत्पादन करने में सहायक होती हैं।
In simple words: फसल सुधार के लिए वांछित गुण पौधों की ऊंचाई, सघनता, कम पोषण की आवश्यकता, गिरने की कम संभावना और कम परिपक्वता अवधि होते हैं, जिससे बेहतर उपज और आसान प्रबंधन होता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न फसल प्रकारों के लिए उपयुक्त ऐच्छिक सस्य विज्ञान गुणों का उल्लेख करें और स्पष्ट करें कि वे उत्पादन को कैसे बढ़ाते हैं।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 231)

 

Question 1. वृहत् पोषक क्या हैं और इन्हें वृहत्पोषक क्यों कहते हैं?
Answer: वे तत्त्व जो पौधों की वृद्धि के लिए अत्यन्त आवश्यक होते हैं उन्हें वृहत् पोषक तत्त्व कहते हैं। ये पोषक तत्त्व बहुत अधिक मात्रा में आवश्यक होते हैं अतः इन्हें पोषक तत्त्व कहते हैं।
In simple words: वृहत् पोषक वे तत्व होते हैं जो पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए बड़ी मात्रा में आवश्यक होते हैं, जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम।

🎯 Exam Tip: वृहत् पोषक तत्वों की परिभाषा और उनके 'वृहत्' कहलाने के कारण को स्पष्ट करें।

 

Question 2. पौधे अपना पोषक कैसे प्राप्त करते हैं?
Answer: पौधे पोषक तत्त्वों को खाद तथा उर्वरकों से प्राप्त करते हैं।
In simple words: पौधे अपनी वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को खाद (कार्बनिक) और उर्वरकों (रासायनिक) से प्राप्त करते हैं।

🎯 Exam Tip: पोषक तत्वों के दो मुख्य स्रोतों - खाद और उर्वरक - का उल्लेख करें।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 232)

 

Question 1. मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के लिए खाद तथा उर्वरक के उपयोग की तुलना किजिए।
Answer:
मिट्टी की उर्वरता की दृष्टि से खाद तथा उर्वरक के उपयोग की तुलनाः
खाद व उर्वरक दोनों के प्रयोग में निम्नलिखित अन्तर है :

खादउर्वरक
1. खाद में कार्बनिक पदार्थ अधिक होता है।1. उर्वरक अकार्बनिक पदार्थों से बने होते हैं।
2. ये सब्जियों, पेड़-पौधे, जन्तुओं के अवशेष के जैव अवशेष के जैव निम्नीकरण द्वारा तैयार की जाती है।2. ये रासायनिक पदार्थों से ही निर्मित होते हैं।
3. इनमें पोषक तत्त्व की मात्रा कम होती है।3. इनमें पोषक तत्त्व की मात्रा अधिक होती है।
4. खाद का भण्डारण एवं स्थानांतरण असुविधा- जनक है।4. इनका भण्डारण एवं स्थानांतरण सुविधाजनक व सरल होता है।
5. खाद का प्रयोग अधिक मात्रा में किया जाता है।5. इनका प्रयोग कम मात्रा में किया जाता है।
6. इसमें कोई पोषक तत्त्व विशिष्ट नहीं होता।6. उर्वरक सदैव पोषक विशिष्ट होते हैं।
7. लगातार प्रयोग से भी भूमि की दशा ठीक बनी रहती है।7. इनके सतत प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता घट जाती है।

In simple words: खाद कार्बनिक और प्राकृतिक होती है, मिट्टी की संरचना को सुधारती है और धीरे-धीरे पोषक तत्व देती है, जबकि उर्वरक अकार्बनिक और रासायनिक होते हैं, पोषक तत्व अधिक मात्रा में तुरंत देते हैं, लेकिन मिट्टी पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

🎯 Exam Tip: खाद और उर्वरक के बीच के मुख्य अंतरों को एक तालिका के रूप में प्रस्तुत करना तुलना को स्पष्ट और समझने में आसान बनाता है।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 235)

 

Question 1. निम्नलिखित में से कौन-सी परिस्थिति में सबसे अधिक लाभ होगा? क्यों?
(a) किसान उच्चकोटि के बीज का उपयोग करें, सिंचाई ना करें अथवा उर्वरक का उपयोग ना करें।
(b) किसान सामान्य बीजों का उपयोग करें, सिंचाई करें तथा उर्वरक का उपयोग करें।
(c) किसान अच्छी किस्म के बीज का प्रयोग करें। सिंचाई करें, उर्वरक का उपयोग करें तथा फसल सुरक्षा की विधियाँ अपनाएँ।
Answer: परिस्थिति (c) में सबसे अधिक लाभ होगा। अच्छी किस्म के बीजों का चयन परिस्थितियों के अनुसार, उनकी रोगों के प्रति प्रतिरोधकता, उत्पादन की गुणवत्ता एवं उच्च उत्पादन क्षमता के अनुसार करने से उत्पादन अच्छा होता है। गुणवत्ता के कारण फसल का अच्छा मूल्य मिलता है। समय-समय पर सिंचाई करने और उर्वरकों का उपयोग करने से फसल अच्छी होती है। फसल को कीटों, पीड़कों तथा खरपतवार से बचाने के लिए कीटनाशको पीड़कनाशकों, खरपतवारनाशकों का उपयोग करना चाहिए। उचित फसल-चक्र अपनाकर भी खरपतवार और पीड़कों से फसल की सुरक्षा की जा सकती है।
In simple words: परिस्थिति (c) सबसे अधिक लाभदायक है क्योंकि यह अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों, पर्याप्त सिंचाई, उर्वरक उपयोग और फसल सुरक्षा उपायों का एक संयोजन है, जिससे अधिकतम और सुरक्षित उपज सुनिश्चित होती है।

🎯 Exam Tip: फसल उत्पादन में वृद्धि के लिए एकीकृत दृष्टिकोण के महत्व को समझाएं, जिसमें बीज चयन, सिंचाई, उर्वरक और फसल सुरक्षा सभी शामिल हों।

 

Question 1. फसल की सुरक्षा के लिए निरोधक विधियाँ तथा जैव नियंत्रण क्यों अच्छा समझा जाता है?
Answer: फसलों की सुरक्षा के लिए बचाव की विधियों तथा जैविक विधियों का प्रयोग किया जाता है क्योंकि ये न तो फसलों को न ही वातावरण को हानि पहुँचाती हैं। पीड़कनाशी व अन्य रासायनिक पदार्थ फसलों को हानि पहुँचाते हैं तथा वातावरण को प्रदूषित करते हैं।
In simple words: निरोधक और जैव नियंत्रण विधियों को इसलिए अच्छा माना जाता है क्योंकि वे फसलों और पर्यावरण को रासायनिक पीड़कनाशकों से होने वाले नुकसान और प्रदूषण से बचाती हैं, जिससे एक स्थायी कृषि प्रणाली बनती है।

🎯 Exam Tip: निरोधक और जैव नियंत्रण विधियों के पर्यावरणीय लाभों पर जोर दें और समझाएं कि वे रासायनिक विधियों से कैसे बेहतर हैं।

 

Question 2. भंडारण की प्रक्रिया में कौन-से कारक अनाज की हानि के लिए उत्तरदायी हैं?
Answer:
अनाज के भण्डारण में बहुत हानि हो सकती है। इस हानि के लिए जैविक तथा अजैविक दोनों कारक उत्तरदायी हैं।
जैविक कारक - जैविक कारकों में कीट, केतक, कवक, चिंचड़ी तथा जीवाणु आते हैं।
अजैविक कारक - अजैविक कारकों में भण्डारण के स्थान पर उपयुक्त नमी व ताप का अभाव है। ये दोनों प्रकार के कारक फसल की गुणवत्ता को कम करते हैं। और वजन भी कम करते हैं। बीजों के अंकुरण की क्षमता कम हो जाती है और उत्पाद बदरंग हो जाते हैं। अतः इन कारकों पर नियंत्रण पाने के लिए अनाज को धूप व छाया में सुखाना चाहिए और फिर धूमक का प्रयोग करना चाहिए ताकि उसमें पीड़क उत्पन्न न हो सके।
In simple words: अनाज के भंडारण के दौरान जैविक कारक (कीट, कवक) और अजैविक कारक (नमी, तापमान) दोनों ही गुणवत्ता, वजन और अंकुरण क्षमता को कम करके हानि पहुंचाते हैं।

🎯 Exam Tip: जैविक और अजैविक कारकों को वर्गीकृत करें और समझाएं कि वे भंडारण के दौरान अनाज को कैसे नुकसान पहुँचाते हैं और उनकी रोकथाम के उपाय भी बताएं।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 236)

 

Question 1. पशुओं की नस्ल सुधार के लिए प्रायः कौन-सी विधि का उपयोग किया जाता है और क्यों?
Answer: विदेशज नस्लों (Foreign or Exotic Breeds) में दुग्ध स्रवणकाल देशज नस्लों (desi breeds) की अपेक्षा अधिक लंबा होता है। देशज एवं विदेशज नस्लों के बीच संकरण कराने पर संकर नस्लें उत्पन्न होती हैं। इन्हें प्राकृतिक (Natural) क्रॉस (Cros8) अथवा कृत्रिम वीर्यसेचन (Artificial Insemination) द्वारा उत्पन्न किया जाता है। कृत्रिम वीर्यसेचन से अनेकों लाभ हैं, जैसे-
• एक बैल से प्राप्त शुक्राणु द्वारा 3000 तक गायों को निषेचित कर सकते हैं।
• हिमशीतित वीर्य को लंबे काल तक संचित रखा जा सकता है।
• इसे देश के सुदूर भागों तक पहुँचाया जा सकता है।
• सफल निषेचन एवं आर्थिक दृष्टि से यह उपयोगी तथा लाभकारी है।
In simple words: पशुओं की नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम वीर्यसेचन विधि का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह अधिक दूध देने वाली विदेशी और स्थानीय नस्लों के गुणों को मिलाकर बेहतर संकर नस्लें तैयार करने में मदद करती है, जिससे उत्पादन और आर्थिक लाभ बढ़ता है।

🎯 Exam Tip: नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम वीर्यसेचन के लाभों और इसके द्वारा बेहतर उत्पादकता कैसे प्राप्त की जा सकती है, इसका विस्तार से वर्णन करें।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 237)

 

Question 1. निम्नलिखित कथन की विवेचना कीजिए-
"यह रुचिकर है कि भारत में कुक्कुट, अल्प रेशे के खाद्य पदार्थों को उच्च पोषकता वाले पशु प्रोटीन आहार में परिवर्तन करने के लिए सबसे अधिक सक्षम है। अल्प रेशे के खाद्य पदार्थ मनुष्यों के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं।"
Answer: कुक्कुट विशेषकर किसान पालता है या मुर्गीपालन घरों में किया जाता है जहाँ खाली स्थान ज्यादा हो और पशु भी पाले जा रहे होते हैं। मुर्गी को मांस (ब्रौलर) व अण्डे प्राप्त करने के लिए पाला जाता है। ये अण्डे देने वाले पक्षी (कुक्कुट) कृषि के उपोत्पाद से प्राप्त सस्ते रेशेदार पदार्थों को भोजन के रूप में उपयोग करते हैं और उसे प्रोटीन आहार के रूप में परिवर्तित करते हैं अर्थात् इनके अण्डों में व मांस में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। अतः यह ठीक है कि कुक्कुट कम रेशेदार को उच्चकोटि के पशु प्रोटीन आहार में परिवर्तित कर देते हैं।
In simple words: भारत में कुक्कुट पालन लाभदायक है क्योंकि मुर्गियां अल्प रेशे वाले कृषि अपशिष्ट पदार्थों को खाकर उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले पशु प्रोटीन (अंडे और मांस) में बदल देती हैं, जो मनुष्यों के लिए सीधे उपयोगी नहीं होते, जिससे खाद्य संसाधनों का कुशल उपयोग होता है।

🎯 Exam Tip: कुक्कुट पालन की आर्थिक और पोषण संबंधी दक्षता को रेखांकित करें, विशेष रूप से कृषि उपोत्पादों के रूपांतरण में इसकी भूमिका पर ध्यान दें।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 238)

 

Question 1. पशुपालन तथा कुक्कुट पालने के प्रबंधन प्रणाली में क्या समानता है?
Answer: दोनों के पालन के लिए निम्नलिखित बातें आवश्यक हैं-
• उचित आवास व्यवस्था
• उचित प्रकाश की व्यवस्था स्था
• उचित पोषण व्यवस्था
• समय पर टीकाकरण
• विकसित नस्लों का उपयोग
• सफाई तथा स्वच्छता का प्रबन्ध।
In simple words: पशुपालन और कुक्कुट पालन दोनों में अच्छी प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकता होती है, जिसमें उचित आवास, पोषण, स्वच्छता, टीकाकरण और उन्नत नस्लों का उपयोग शामिल है, ताकि स्वस्थ और उत्पादक पशुधन सुनिश्चित किया जा सके।

🎯 Exam Tip: पशुधन प्रबंधन के बुनियादी सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करें और बताएं कि ये सिद्धांत विभिन्न प्रकार के पशुधन पर कैसे लागू होते हैं।

 

Question 2. ब्रौलर तथा अंडे देने वाली लेयर में क्या अंतर है? इनके प्रबंधन के अन्तर को भी स्पष्ट करो।
Answer: अंडों के उत्पादन के लिए पाली गयी कुक्कुट लेयर व मांस उत्पादन के लिए पाले गये कुक्कट ब्रौलर कहलाते हैं। कुक्कुट अनाज, कीड़े-मकोड़े, सब्जियों के अपशिष्ट तथा कुछ कंकड़ आदि पर पोषित किये जाते हैं। ब्रौलर के आहार में प्रोटीन तथा वसा प्रचुर मात्रा में होनी चाहिए। इनके आवास में उचित ताप तथा स्वच्छता रखनी भी आवश्यक है। स्वच्छता के साथ नियमित रूप से रोगाणुनाशक का छिड़काव करना चाहिए। इनमें जीवाणु, विषाणु, कवक, परजीवी आदि से कई प्रकार के रोग हो सकते हैं अतः रोगों से बचाने के लिए टीका लगवाना चाहिए।
In simple words: लेयर मुर्गियाँ अंडे देने के लिए पाली जाती हैं, जबकि ब्रौलर मुर्गियाँ मांस उत्पादन के लिए पाली जाती हैं, और दोनों के पोषण व आवास प्रबंधन की आवश्यकताएं उनके विशिष्ट उद्देश्यों के अनुसार भिन्न होती हैं।

🎯 Exam Tip: लेयर और ब्रौलर के बीच के उद्देश्य-आधारित अंतरों को स्पष्ट करें और बताएं कि यह अंतर उनके आहार और प्रबंधन की आवश्यकताओं को कैसे प्रभावित करता है।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 239)

 

Question 1. मछलियाँ कैसे प्राप्त करते हैं?
Answer: मछली को समुद्र से या अलवणीय जल में से जाल द्वारा पकड़कर प्राप्त किया जाता है। मछली को पकड़ने के लिए विभिन्न प्रकार के जालों का उपयोग नाव से किया जाता है। सैटेलाइट तथा प्रति ध्वनि गंभीरतामापी से खुले समुद्र में मछलियों के बड़े समूह का पता लगाया जाता है जिससे मछली का उत्पादन बढ़ जाता है। अधिक आर्थिक महत्त्व वाली समुद्री मछलियों का समुद्री जल में संवर्धन भी किया जाता है। समुद्र में मछली संवर्धन को मैरीकल्चर कहते हैं।
In simple words: मछलियां समुद्र या मीठे पानी से जालों का उपयोग करके पकड़ी जाती हैं, और सैटेलाइट जैसी आधुनिक तकनीकों से बड़े समूहों का पता लगाया जाता है, जबकि मूल्यवान समुद्री मछलियों का समुद्री जल में पालन भी किया जाता है जिसे मैरीकल्चर कहते हैं।

🎯 Exam Tip: मछली पकड़ने की पारंपरिक और आधुनिक विधियों के साथ-साथ मछली संवर्धन (मैरीकल्चर) की अवधारणा को भी शामिल करें।

 

Question 2. मिश्रित मछली संवर्धन के क्या लाभ हैं?
Answer: मिश्रित मछली संवर्धन, अधिक मछली संवर्धन की विधि है। इसमें देशी तथा विदेशी प्रकार की मछलियों | का उपयोग किया जाता है। ऐसे तंत्र में अकेले तालाब में 5 या 6 मछली स्पीशीज का उपयोग किया जाता है। इनमें ऐसी मछलियों को चुना जाता है जिनमें आहार के लिए। प्रतिस्पर्धा न हो और उनके आहार की आदत अलग-अलग हों। इसके फलस्वरूप तालाब के हर भाग में स्थित प्राप्त आहार का उपयोग हो जाता है, जैसे-कटला मछली पानी की सतह से अपना भोजन लेती है। मृगल तथा कॉमन कार्प तालाब की तली से भोजन लेती है। रोहू मछली तालाब के मध्य क्षेत्र से अपना भोजन लेती है। ग्रास कार्य खरपतवार खाती है। इस प्रकार ये सभी मछलियाँ साथ-साथ रहते हुए भी बिना स्पर्धा से अपना-अपना आहार लेती हैं, जिससे मछली के उत्पादन में वृद्धि होती है।
In simple words: मिश्रित मछली संवर्धन में विभिन्न आहार आदतों वाली मछलियों की कई प्रजातियों को एक ही तालाब में पाला जाता है, जिससे तालाब के सभी खाद्य संसाधनों का कुशलता से उपयोग होता है और बिना प्रतिस्पर्धा के कुल मछली उत्पादन बढ़ जाता है।

🎯 Exam Tip: मिश्रित मछली संवर्धन के मुख्य लाभ, जैसे संसाधनों का कुशल उपयोग और बढ़ी हुई उत्पादकता, को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 240)

 

Question 1. मधु उत्पादन के लिए प्रयुक्त मधुमक्खी में कौन-कौन से ऐच्छिक गुण होने चाहिए?
Answer: मधु उत्पादन के लिए प्रयुक्त मधुमक्खी में निम्नलिखित ऐच्छिक गुण होने चाहिए-
1. इनमें मधु इकट्ठा करने की क्षमता अधिक होनी चाहिए ।
2. डंक कम मारने का स्वभाव ।
3. छत्ते में काफी समय तक रहे।
4. प्रजनन तीव्रता से करें। इन सब गुणों के लिए इटेलियन मधुमक्खी का उपयोग किया जाता है।
In simple words: मधु उत्पादन के लिए, मधुमक्खियों में अधिक शहद इकट्ठा करने की क्षमता, कम डंक मारने का स्वभाव, छत्ते में लंबे समय तक रहने की प्रवृत्ति और तेजी से प्रजनन करने की विशेषताएं होनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: मधुमक्खियों के वांछनीय गुणों को सूचीबद्ध करें जो कुशल मधु उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण हैं, और एक उदाहरण भी दें।

 

Question 2. चरागाह क्या है और ये मधु उत्पादन से कैसे सम्बन्धित है?
Answer: वह वनस्पति क्षेत्र जहाँ से मधुमक्खियाँ मकरन्द तथा परागकण एकत्रित करती है, चरागाह कहलाता है। ये क्षेत्र भौगोलिक स्थिति व क्षेत्र के आधार पर भिन्न-भिन्न होते हैं इसी कारण शहद (मधु) की गुणवत्ता व स्वाद चरागाह | में मधुमक्खी को उपलब्धं फूलों की किस्मों पर आधारित होता है। क्योंकि ये मधुमक्खियाँ मकरंद तथा पराग को फूलों से एकत्रित करती हैं। कश्मीर का बादामी शहद स्वाद में उत्तम होता है। मधुमक्खियाँ चरागाह में बादाम, महुआ, आम, नारियल, इमली, लीची, सेब, अमरूद, सूरजमुखी व बेर इत्यादि के फूलों का मकरन्द वे परागकण इकट्ठा करती हैं। और भिन्न-भिन्न प्रकार का शहद उत्पन्न करती हैं।
In simple words: चरागाह वह वनस्पति क्षेत्र है जहाँ से मधुमक्खियाँ मकरंद और पराग इकट्ठा करती हैं। चरागाह में उपलब्ध फूलों की किस्म और विविधता सीधे तौर पर उत्पादित शहद की गुणवत्ता, स्वाद और प्रकार को प्रभावित करती है।

🎯 Exam Tip: चरागाह की परिभाषा और मधु उत्पादन में इसकी भूमिका को समझाएं, विशेष रूप से यह कैसे शहद की गुणवत्ता और स्वाद को प्रभावित करता है।

अभ्यास प्रश्न (पृष्ठ - 241)

 

Question 1. फसल उत्पादन की एक विधि का वर्णन करो जिससे अधिक पैदावार प्राप्त हो सके ।
Answer: फसल उत्पादन की फसल किस्मों में सुधार विधि' एक ऐसी विधि है जिससे अधिक पैदावार प्राप्त होती है। “फसल किस्मों में सुधार-इसमें किसान को विभिन्न गुणों, जैसे रोग प्रतिरोधिता, उर्वरक के प्रति अनुरूपता, उत्पादन की गुणवत्ता तथा उच्च उत्पादन क्षमता के लिए फसलों की किस्मों का चुनाव प्रजनन द्वारा करना चाहिए। फसलों में ऐच्छिक गुण संकरण द्वारा भी डाले जा सकते हैं। संकरण की यह विधि अन्तराकिस्मीय (विभिन्न किस्मों), अन्तरास्पीशीज (विभिन्न स्पीशीज) और अन्तरावंशीय (विभिन्न जैनरा) भी हो सकता है। फसल सुधार की दूसरी विधि है, ऐच्छिक गुणों वाले जीन का डालना। इससे आनुवंशकीय रूपांतरित फसल प्राप्त होती है। इस कार्य के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले विशेष बीज अपनाने चाहिए, और बीज उसी किस्म के होने चाहिए जो अनुकूल परिस्थिति में उग सके । कृषि प्रणाली व फसल उत्पादन मौसम, पानी तथा मिट्टी की गुणवत्ता पर निर्भर होती है। फसलें ऐसी हों जो प्रत्येक प्रकार की मिट्टी व जलवायु की विभिन्न परिस्थितियों में भी उग सकें ।
In simple words: अधिक पैदावार प्राप्त करने के लिए फसल किस्मों में सुधार एक प्रभावी विधि है, जिसमें रोग प्रतिरोधक, उच्च गुणवत्ता और उच्च उत्पादन क्षमता वाले बीजों का चयन और संकरण या आनुवंशिक रूपान्तरण द्वारा वांछित गुणों को शामिल किया जाता है, साथ ही अनुकूल कृषि परिस्थितियों का ध्यान रखा जाता है।

🎯 Exam Tip: फसल किस्मों में सुधार की विभिन्न तकनीकों (प्रजनन, संकरण, आनुवंशिक रूपान्तरण) को स्पष्ट करें और बताएं कि वे कैसे पैदावार बढ़ाने में सहायक होती हैं।

 

Question 2. खेतों में खाद तथा उर्वरक का उपयोग क्यों करते हैं?
Answer: खेतों में खाद तथा उर्वरक का उपयोग भूमि की उपजाऊ शक्ति बनाए रखने के लिए किया जाता है। फसल के उगने में अर्थात् बीज बोने से परिपक्वन काल तक पौधे भूमि के 13 प्रकार के पोषक तत्त्व ग्रहण करते हैं जिससे ये तत्त्व भूमि में कम हो जाते हैं। भूमि में खाद मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है और मिट्टी की रचना व पानी धारण करने की क्षमता बढ़ जाती है। उर्वरक पौधे की कायिक वृद्धि में सहायक होते हैं और पौधों को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं।
In simple words: खेतों में खाद और उर्वरक का उपयोग इसलिए किया जाता है ताकि मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी को पूरा किया जा सके, उसकी उर्वरता और जल धारण क्षमता को बढ़ाया जा सके, जिससे पौधों की स्वस्थ वृद्धि और फसल की उपज में सुधार हो।

🎯 Exam Tip: खाद और उर्वरक दोनों के महत्व को अलग-अलग समझाएं और बताएं कि वे मिट्टी की उर्वरता और पौधों के स्वास्थ्य में कैसे योगदान करते हैं।

 

Question 3. अन्तराफसलीकरण तथा फसल-चक्र के क्या लाभ हैं?
Answer: अन्तराफसलीकरण तथा फसल-चक्र खरपतवार को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। इन विधियों द्वारा पीड़कों पर भी नियंत्रण किया जा सकता है, फसलों की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है और भूमि की उपजाऊ शक्ति भी बनी रहती है।
In simple words: अन्तराफसलीकरण और फसल-चक्र दोनों ही खरपतवार और कीटों को नियंत्रित करने, फसलों की उत्पादकता बढ़ाने और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में सहायक होते हैं, जिससे कृषि प्रणाली अधिक टिकाऊ और लाभदायक बनती है।

🎯 Exam Tip: अन्तराफसलीकरण और फसल-चक्र के संयुक्त लाभों पर ध्यान केंद्रित करें, विशेष रूप से खरपतवार/कीट नियंत्रण और मिट्टी के स्वास्थ्य पर उनके प्रभाव को उजागर करें।

 

Question 4. आनुवंशिक फेरबदल क्या हैं? कृषि प्रणालियों में यह कैसे उपयोगी हैं?
Answer:
आनुवंशिक फेरबदल फसल सुधार की एक नई विधि हैं जिसमें ऐच्छिक गुणों वाले जीन का डालना, इसके परिणामस्वरूप, आनुवंशिक रूपांतरित फसल प्राप्त होती है। इसमें उच्च तापमान, विशेष विकिरण या रासायनिक पदार्थों द्वारा पौधे के जीन में ऐसे उत्प्रेरित परिवर्तन लाए जाते हैं ताकि उत्पन्न होने वाली जीनों में इच्छित गुण आ जायँ ।
उपयोग- इस प्रणाली द्वारा ऐच्छिक गुणों वाली फसलें तैयार कर सकते हैं।
In simple words: आनुवंशिक फेरबदल एक ऐसी विधि है जहाँ फसलों में वांछित गुणों वाले जीन डाले जाते हैं या उनमें परिवर्तन किए जाते हैं, जिससे बेहतर गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और उच्च उपज वाली फसलें तैयार होती हैं, जो कृषि प्रणालियों के लिए बहुत उपयोगी है।

🎯 Exam Tip: आनुवंशिक फेरबदल की परिभाषा, इसकी प्रक्रिया और कृषि में इसके विशिष्ट उपयोगों को स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

Question 5. भण्डारगृहों (गोदामों) में अनाज की हानि कैसे होती है?
Answer: भण्डारगृह में अनाज की हानि के दो प्रकार के कारक उत्तरदायी हैं, जैसे- 1. जैविक 2. अजैविक ।
1. जैविक कारक - कीट, कुंतक, कवक, चिंचडी तथा जीवाणु जैविक कारक हैं।
2. अजैविक कारक - उपयुक्त नमी व ताप का अभाव अजैविक कारक हैं। ये दोनों कारक अनाज की गुणवत्ता को खराब कर देते हैं, उनका वजन कम कर देते हैं, अंकुरण करने की क्षमता कम करते हैं, उत्पाद बदरंग हो जाती है। जैविक कारक अनाज को कुतर देते हैं या भीतर घुस जाते हैं। ये कीट कभी-कभी पौधों की वृद्धि के समय प्रवेश कर जाते हैं।
In simple words: भण्डारगृहों में अनाज को जैविक कारक (कीट, कवक, जीवाणु) और अजैविक कारक (अधिक नमी, अनुचित तापमान) दोनों से नुकसान होता है, जिससे अनाज की गुणवत्ता, वजन और अंकुरण क्षमता कम हो जाती है।

🎯 Exam Tip: भंडारण में अनाज की हानि के लिए जिम्मेदार जैविक और अजैविक कारकों को स्पष्ट रूप से वर्गीकृत करें और उनके विशिष्ट प्रभावों का वर्णन करें।

 

Question 6. किसानों के लिए पशुपालन प्रणालियाँ कैसे लाभदायक हैं?
Answer: किसानों के लिए पशुपालन प्रणाली लाभदायक है, क्योंकि पशुपालन के दो उद्देश्य हैं- (1) दूध देने वाले (2) कृषि कार्य के लिए जैसे-हल चलाना, सिंचाई तथा माल ढोने के लिए इन पशुओं को ड्राफ्ट पशु कहते हैं। किसानों के कृषि उत्पाद ही पशुओं के भोजन, जैसे-रुक्षांश व सान्द्र भोजन के रूप में प्रयोग होते हैं। पशुपालन में इनके अतिरिक्त मुर्गी पालन और मधुमक्खी पालन भी किया जा सकता है। ये सभी पशुपालन प्रणाली किसानों को आय के साधनों में वृद्धि करने में सहायक है।
In simple words: पशुपालन प्रणालियां किसानों के लिए लाभदायक हैं क्योंकि वे दूध, मांस, कृषि कार्यों में सहायता (जैसे हल चलाना) और ऊन जैसे उत्पाद प्रदान करती हैं। इसके अतिरिक्त, मुर्गी पालन और मधुमक्खी पालन भी किसानों की आय बढ़ाते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

🎯 Exam Tip: पशुपालन के बहुआयामी लाभों पर प्रकाश डालें, जिसमें खाद्य उत्पादन, कृषि कार्य और अतिरिक्त आय के स्रोत शामिल हों।

 

Question 7. पशुपालन के क्या लाभ हैं?
Answer:
पशुपालन के लाभ-
1. दुधारू पशुओं जैसे गाय, भैंस, भेड़, बकरी आदि से दूध प्राप्त होता है। इसमें सभी पोषक तत्त्व पाए जाते हैं। दूध में विटामिन 'A' तथा 'D', कैल्सियम तथा फॉस्फोरस आदि खनिज पाए जाते हैं।
2. पशुओं से मांस प्राप्त होता है। मांस उच्च प्रोटीन का स्रोत है।
3. बैल, भैंसा, ऊँट, घोड़ा खच्चर आदि पशु बोझ ढोने के काम में लाए जाते हैं।
4. पशुओं का उपयोग कृषि कार्यों (हल चलाना, सिंचाई कार्य, अनाज की श्रेसिंग आदि) में किया जाता है।
5. भेड़ बकरी, ऊँट से हमें ऊन प्राप्त होती है। इसका विविध उपयोग किया जाता है।
6. जंतु अपशिष्ट से खाद तैयार की जाती है।
In simple words: पशुपालन से दूध, मांस, ऊन जैसे विभिन्न उत्पाद प्राप्त होते हैं। यह कृषि कार्यों में भी सहायक है और पशुओं के अपशिष्ट का उपयोग खाद बनाने के लिए किया जा सकता है, जिससे किसानों की आय और संसाधन प्रबंधन में सुधार होता है।

🎯 Exam Tip: पशुपालन से प्राप्त होने वाले उत्पादों और सेवाओं की विस्तृत सूची प्रदान करें, जिसमें कृषि और आर्थिक लाभ दोनों शामिल हों।

 

Question 8. उत्पादन बढ़ाने के लिए कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन तथा मधुमक्खी पालन में क्या समानताएँ हैं?
Answer: कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन तथा मधुमक्खी पालन में उत्पादन बढ़ाने के लिए अच्छी प्रबंधन प्रणालियाँ आवश्यक हैं, जैसे-
• उपयुक्त आवास, आवास की स्वच्छता, उपयुक्त ताप एवं स्वच्छता ।
• उचित आहार, आहार की गुणवत्ता।
• रोगों तथा पीड़कों पर नियंत्रण तथा उनसे बचाव ।
In simple words: कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन तीनों में ही उत्पादन बढ़ाने के लिए उचित प्रबंधन की आवश्यकता होती है, जिसमें साफ आवास, संतुलित आहार, रोग नियंत्रण और गुणवत्तापूर्ण नस्लों का उपयोग शामिल है।

🎯 Exam Tip: इन तीनों पालन प्रणालियों में समान प्रबंधन आवश्यकताओं को उजागर करें जो उनकी उत्पादकता सुनिश्चित करती हैं।

 

Question 9. प्रग्रहण मत्स्यन, मेरीकल्चर तथा जल संवर्धन में क्या अंतर है?
Answer:
प्रग्रहण मत्स्यन, मेरीकल्चर तथा जल संवर्धन में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं-

प्रग्रहण मत्स्यनमेरीकल्चरजल संवर्धन
प्राकृतिक स्रोतों से मछलियों के पकड़ने को कैप्चर फिशरी कहते हैं। जैसे- नदी या समुद्र से।समुद्री जीवों जैसे पंखयुक्त मछलियों (जैसे मुलेट), प्रॉन, मस्सल, ऑएस्टर और समुद्री खर-पतवार का समुद्री जल में संवर्धन को मेरीकल्चर कहते हैं।मछली तथा जलीय भोजन का उत्पादन किसी स्रोत जैसे लैगून में करना एक्वाकल्चर कहलाता है।

In simple words: प्रग्रहण मत्स्यन प्राकृतिक जल स्रोतों से मछलियां पकड़ना है, मेरीकल्चर समुद्री जल में समुद्री जीवों का पालन है, जबकि जल संवर्धन किसी भी जलीय स्रोत (जैसे लैगून) में मछली या जलीय भोजन का उत्पादन करना है।

🎯 Exam Tip: इन तीनों अवधारणाओं की परिभाषाओं और उनके संचालन के स्थानों के आधार पर अंतर को स्पष्ट करें।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. भोजन के उस संघटक का नाम लिखिए जो शरीर की वृद्धि एवं क्षतिपूर्ति के लिए आवश्यक है।
Answer: प्रोटीन ।
In simple words: प्रोटीन शरीर की वृद्धि और टूट-फूट की मरम्मत के लिए आवश्यक एक महत्वपूर्ण भोजन संघटक है।

🎯 Exam Tip: प्रोटीन के दो मुख्य शारीरिक कार्यों – वृद्धि और क्षतिपूर्ति – को याद रखें।

 

Question 2. शरीर की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाले भोजन के अवयवों के नाम लिखिए।
Answer: कार्बोहाइड्रेट एवं वसः
In simple words: शरीर की ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूरा करने वाले मुख्य भोजन अवयव कार्बोहाइड्रेट और वसा हैं।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा के मुख्य स्रोतों के रूप में कार्बोहाइड्रेट और वसा का उल्लेख करें।

 

Question 3. अगर चीनी और मक्खन की समान मात्रा ली जाए, तो इन दोनों में से कौन अधिक ऊर्जा प्रदान करेगा?
Answer: मक्खन ।
In simple words: मक्खन में वसा की मात्रा अधिक होने के कारण, समान मात्रा में चीनी की तुलना में यह अधिक ऊर्जा प्रदान करेगा।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि वसा, कार्बोहाइड्रेट की तुलना में प्रति ग्राम अधिक ऊर्जा प्रदान करती है।

 

Question 4. कोई चार खरीफ फसलें लिखिए।
Answer: मक्का, बाजरा, धान, कपास, उड़द ।
In simple words: खरीफ फसलें वे होती हैं जिनकी बुवाई मानसून के आगमन पर और कटाई सर्दियों की शुरुआत में की जाती है; जैसे मक्का, बाजरा, धान, कपास।

🎯 Exam Tip: खरीफ फसलों के सामान्य उदाहरणों को याद रखें जो वर्षा ऋतु में उगाए जाते हैं।

 

Question 5. कोई चार रबी फसलें लिखिए।
Answer: गेहूँ, जौ, चना, मटर, सरसों ।
In simple words: रबी फसलें वे होती हैं जिनकी बुवाई सर्दियों में और कटाई वसंत ऋतु में की जाती है; जैसे गेहूँ, जौ, चना, मटर और सरसों।

🎯 Exam Tip: रबी फसलों के सामान्य उदाहरणों को याद रखें जो शीत ऋतु में उगाए जाते हैं।

 

Question 6. खरीफ फसलें कब उगायी जाती हैं?
Answer: खरीफ फसलें जून से अक्टूबर तक उगायी जाती हैं।
In simple words: खरीफ फसलें आमतौर पर जून में मानसून की शुरुआत के साथ बोई जाती हैं और अक्टूबर तक काटी जाती हैं।

🎯 Exam Tip: खरीफ फसलों के बुवाई और कटाई के महीनों को याद रखें।

 

Question 7. रबी फसलें कब उगायी जाती हैं?
Answer: रबी फसलें नवम्बर से अप्रैल तक उगायी जाती हैं।
In simple words: रबी फसलें सर्दियों की शुरुआत में, आमतौर पर नवंबर में बोई जाती हैं और वसंत ऋतु में, अप्रैल तक काटी जाती हैं।

🎯 Exam Tip: रबी फसलों के बुवाई और कटाई के महीनों को याद रखें।

 

Question 6. उन्नत खेती को और किन-किन नामों से जाना जाता है?
Answer: उन्नत खेती को निम्न नामों से भी जाना जाता है-
1. पर्यावरणीय खेती,
2. कार्बनिक खेती तथा
3. टिकाऊ खेती ।
In simple words: उन्नत खेती को पर्यावरणीय खेती, कार्बनिक खेती और टिकाऊ खेती जैसे विभिन्न नामों से भी जाना जाता है, जो इसके पर्यावरण-अनुकूल और दीर्घकालिक स्थिरता पहलुओं को दर्शाते हैं।

🎯 Exam Tip: उन्नत खेती के वैकल्पिक नामों को याद रखें और समझें कि वे खेती के किस पहलू पर जोर देते हैं।

 

Question 9. उन्नत कृषि को पर्यावरणीय कृषि क्यों कहते हैं?
Answer: उन्नत कृषि से पर्यावरण संरक्षित रहता है, इसलिए इसे पर्यावरणीय कृषि भी कहते हैं।
In simple words: उन्नत कृषि को पर्यावरणीय कृषि इसलिए कहते हैं क्योंकि यह पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग करके प्रकृति का संरक्षण करती है।

🎯 Exam Tip: पर्यावरणीय कृषि के मुख्य उद्देश्य के रूप में पर्यावरण संरक्षण पर जोर दें।

 

Question 10. उन्नत कृषि को कार्बनिक कृषि क्यों कहा जाता है?
Answer: उन्नत कृषि में पोषक तत्त्व प्रबन्धन का मुख्य स्रोत कार्बनिक पदार्थ होते हैं, इसलिए उन्नत कृषि को कार्बनिक कृषि कहते हैं।
In simple words: उन्नत कृषि को कार्बनिक कृषि इसलिए कहते हैं क्योंकि यह रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बजाय मिट्टी की उर्वरता और पौधों के पोषण के लिए कार्बनिक पदार्थों जैसे खाद और जैविक खाद पर निर्भर करती है।

🎯 Exam Tip: कार्बनिक कृषि की पहचान के रूप में कार्बनिक पदार्थों के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 11. उचित वृद्धि के लिए निम्नलिखित में से किस फसल के लिए NPK अथवा यूरिया की न्यूनतम मात्रा की आवश्यकता होगी-
घास, मटर, गेहूँ, गन्ना?
Answer: मटर ।
In simple words: मटर एक फलीदार फसल होने के कारण वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करने की क्षमता रखती है, इसलिए इसे NPK या यूरिया जैसे अतिरिक्त नाइट्रोजन उर्वरकों की न्यूनतम मात्रा की आवश्यकता होती है।

🎯 Exam Tip: फलीदार फसलों की नाइट्रोजन स्थिरीकरण क्षमता को याद रखें और जानें कि इससे उनकी उर्वरक आवश्यकताएं कैसे कम होती हैं।

 

Question 12. एक लेग्यूम फसल का नाम लिखिए।
Answer: मटर, अरहर आदि ।
In simple words: मटर और अरहर दोनों ही फलीदार फसलें हैं जो अपनी जड़ों में नाइट्रोजन स्थिर करने वाले जीवाणुओं की उपस्थिति के कारण मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होती हैं।

🎯 Exam Tip: फलीदार फसलों के कुछ सामान्य उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 13. खाद की दो विशेषतायें लिखिए।
Answer: खाद में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा अधिक होती है और यह मृदा को अल्पमात्रा में पोषक प्रदान करता है।
In simple words: खाद में कार्बनिक पदार्थ अधिक होता है और यह मिट्टी की संरचना तथा जल धारण क्षमता को सुधारता है, जबकि यह पौधों को पोषक तत्व धीरे-धीरे और कम मात्रा में प्रदान करता है।

🎯 Exam Tip: खाद की विशेषताओं को याद रखें, विशेष रूप से कार्बनिक पदार्थ की मात्रा और पोषक तत्वों की धीमी आपूर्ति पर ध्यान दें।

 

Question 14. उर्वरक क्या है?
Answer: उर्वरक व्यावसायिक रूप से उत्पादित रासायनिक पदार्थ हैं जो पौधों को किसी तत्त्व विशेष की पूर्ति करते हैं।
In simple words: उर्वरक रासायनिक पदार्थ होते हैं जो विशेष पोषक तत्वों की आपूर्ति करके पौधों की वृद्धि को बढ़ाने के लिए कृत्रिम रूप से बनाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: उर्वरक की परिभाषा को याद रखें, जिसमें उसके रासायनिक स्वरूप और विशिष्ट पोषक तत्व आपूर्ति की भूमिका शामिल हो।

 

Question 15. खाद और उर्वरक के उत्पादन में एक अन्तर लिखिए।
Answer: खाद जन्तुओं के अपशिष्ट और पौधों के कचरे के अपघटन से तैयार किया जाता है जबकि उर्वरक का उत्पादन रासायनिक विधियों से किया जाता है।
In simple words: खाद जानवरों के अपशिष्ट और पौधों के कचरे के प्राकृतिक अपघटन से बनती है, जबकि उर्वरक रासायनिक प्रक्रियाओं का उपयोग करके कृत्रिम रूप से बनाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: खाद के जैविक उत्पादन और उर्वरक के रासायनिक उत्पादन के बीच के मौलिक अंतर को स्पष्ट करें।

 

Question 16. दो प्रकार के खाद कौन-से हैं?
Answer:
1. कम्पोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट ।
2. हरी खाद ।
In simple words: खाद के दो मुख्य प्रकार कम्पोस्ट (जैविक पदार्थों के अपघटन से) और हरी खाद (खेत में उगाकर मिट्टी में मिलाए गए पौधों से) हैं, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं।

🎯 Exam Tip: खाद के दो मुख्य प्रकारों के नाम याद रखें।

 

Question 17. अगली फसल के लिए अच्छे बीज तैयार करने के लिए फसल कटाई के बाद किये गये कार्यकलाप क्या हैं?
Answer:
1. उचित रूप में सुखाना अर्थात् बीजों को नमी रहित करना।
2. बीजों को कीटाणु रहित और अवांछनीय पदार्थों से दूर रखना ।
In simple words: अगली फसल के लिए अच्छे बीज तैयार करने के लिए फसल कटाई के बाद बीजों को ठीक से सुखाकर नमी रहित करना और उन्हें कीटों व अवांछनीय पदार्थों से मुक्त रखना आवश्यक है।

🎯 Exam Tip: फसल कटाई के बाद बीज तैयार करने के लिए दो महत्वपूर्ण चरणों - सुखाने और शुद्धिकरण - को याद रखें।

 

Question 18. कोई दो रासायनिक उर्वरक लिखिए।
Answer: यूरिया, सुपर फॉस्फेट ।
In simple words: यूरिया और सुपर फॉस्फेट दो सामान्य रासायनिक उर्वरक हैं जो पौधों को क्रमशः नाइट्रोजन और फास्फोरस जैसे आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं।

🎯 Exam Tip: सामान्य रासायनिक उर्वरकों के नाम और उनके द्वारा प्रदान किए जाने वाले मुख्य पोषक तत्वों को याद रखें।

 

Question 19. गेहूँ तथा धान के साथ उगने वाले किन्हीं दो सामान्य खरपतवारों के नाम बताइये ।
Answer: गेहूँ तथा धान के साथ उगने वाले दो खरपतवार-घास, चौलाई, बथुआ, हिरनखुरी आदि ।
In simple words: गेहूँ और धान जैसी फसलों के साथ उगने वाले सामान्य खरपतवारों में घास, चौलाई, बथुआ और हिरनखुरी शामिल हैं, जो फसल को नुकसान पहुँचाते हैं।

🎯 Exam Tip: गेहूँ और धान के खेतों में पाए जाने वाले सामान्य खरपतवारों के कुछ उदाहरण याद रखें।

 

Question 20. गेहूं की फसल के उस खरपतवार को नाम लिखिए जो खाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
Answer: बथुआ ।
In simple words: बथुआ एक ऐसा खरपतवार है जो गेहूँ की फसल के साथ उगता है लेकिन इसे पत्तीदार सब्जी के रूप में खाया भी जाता है।

🎯 Exam Tip: उस खरपतवार का नाम याद रखें जिसका उपयोग भोजन के रूप में भी किया जाता है।

 

Question 21. गेहूं की फसल में कवक द्वारा होने वाले रोगों के नाम लिखिए।
Answer: गेहूँ में कवक द्वारा दो रोग सामान्यतः हो जाते हैं। ये हैं-
• किट्ट या रतुआ (rust),
• कण्ड (smut)।
In simple words: गेहूँ की फसल में कवक के कारण होने वाले दो सामान्य रोग किट्ट (रतुआ) और कण्ड (स्मट) हैं, जो फसल को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं।

🎯 Exam Tip: गेहूँ में कवक जनित प्रमुख रोगों के नाम याद रखें।

 

Question 22. धान में कीट द्वारा उत्पन्न रोग क्या है?
Answer: धान में कीट गन्धी द्वारा ब्लास्ट (blast) रोग हो जाता है।
In simple words: धान की फसल में कीट गन्धी के कारण ब्लास्ट रोग होता है, जिससे उपज को काफी नुकसान हो सकता है।

🎯 Exam Tip: धान में कीट-जनित रोग का नाम और उसे उत्पन्न करने वाले कीट को याद रखें।

 

Question 23. अन्तराफसलीकरण क्या है?
Answer: दो या अधिक फसलों का एक साथ एक ही खेत में निर्दिष्ट पैटर्न में उगाना, अन्तराफसलीकरण कहलाता है।
In simple words: अन्तराफसलीकरण एक कृषि तकनीक है जिसमें एक ही खेत में दो या अधिक फसलों को एक निश्चित पैटर्न में एक साथ उगाया जाता है, जिससे भूमि का अधिक कुशल उपयोग होता है।

🎯 Exam Tip: अन्तराफसलीकरण की परिभाषा और इसके मुख्य लाभों को याद रखें, जैसे भूमि का कुशल उपयोग।

 

Question 24. अन्तराफसलीकरण और मिश्रित खेती में, किस विधि में अलग-अलग पैदावार प्रप्त की जा सकती है?
Answer: अन्तराफसलीकरण में।
In simple words: अन्तराफसलीकरण में अलग-अलग फसलों की पैदावार अलग-अलग प्राप्त की जा सकती है क्योंकि उन्हें विशिष्ट पंक्तियों में उगाया जाता है, जबकि मिश्रित खेती में फसलें एक साथ मिली होती हैं।

🎯 Exam Tip: अन्तराफसलीकरण में अलग-अलग कटाई और पैदावार की पहचान करें, जो इसे मिश्रित खेती से अलग करती है।

 

Question 25. बकरियों की कौन-सी नस्ल दूध की रानी कहलाती है?
Answer: सानेन नस्ल की बकरी दूध की रानी कहलाती है।
In simple words: सानेन नस्ल की बकरी को 'दूध की रानी' कहा जाता है क्योंकि यह अपनी अत्यधिक दुग्ध उत्पादन क्षमता के लिए प्रसिद्ध है।

🎯 Exam Tip: सानेन नस्ल की बकरी का नाम और उसकी विशेषता (उच्च दुग्ध उत्पादन) को याद रखें।

 

Question 26. भेड़ों को क्यों पाला जाता है?
Answer: भेड़ों को मुख्य रूप से ऊन एवं मांस उत्पादन के लिए पाला जाता है लेकिन इनसे दूध भी प्राप्त होता है।
In simple words: भेड़ों को मुख्य रूप से ऊन और मांस के उत्पादन के लिए पाला जाता है, हालांकि उनसे कुछ मात्रा में दूध भी प्राप्त होता है।

🎯 Exam Tip: भेड़ों के पालन के प्राथमिक उद्देश्यों - ऊन और मांस - को याद रखें।

 

Question 27. भारत की मांस उत्पादक भेड़ों के नाम लिखिए ।
Answer: भारत की मांस उत्पादक भेड़ों के नामजालौनी, मेड़िया एवं निल्लोरी ।
In simple words: भारत में मांस उत्पादन के लिए पाली जाने वाली भेड़ों की प्रमुख नस्लों में जालौनी, मेड़िया और निल्लोरी शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: भारत की मांस उत्पादक भेड़ों की कुछ प्रमुख नस्लों के नाम याद रखें।

 

Question 28. भारत की ऊन उत्पादक भेड़ों की नस्लों के नाम लिखिए।
Answer: भारत की ऊन उत्पादक भेड़ों के नामबीकानेरी, मारवाड़ी भाकरवाल, करनाह, भदरवाह, गुरेज, रामपुर-बुशियार, हसन एवं दकनी ।
In simple words: भारत में ऊन उत्पादन के लिए पाली जाने वाली भेड़ों की कुछ प्रमुख नस्लों में बीकानेरी, मारवाड़ी, भाकरवाल, करनाह, भदरवाह, गुरेज, रामपुर-बुशियार, हसन और दकनी शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: भारत की प्रमुख ऊन उत्पादक भेड़ों की नस्लों के नाम याद रखें।

 

Question 29. मांस एवं ऊन उत्पादक भेड़ों की नस्लों के नाम लिखिए।
Answer: मांस एवं ऊन उत्पादक प्रमुख भारतीय भेड़ों के नाम-हिसार डेल, बेलारी, लोही, कच्छी आदि ।
In simple words: भारत की कुछ भेड़ नस्लें जैसे हिसार डेल, बेलारी, लोही और कच्छी मांस और ऊन दोनों के उत्पादन के लिए पाली जाती हैं।

🎯 Exam Tip: मांस और ऊन दोनों के लिए पाली जाने वाली भेड़ों की नस्लों के नाम याद रखें।

 

Question 30. भेड़ की प्रमुख विदेशी नस्लों के नाम लिखिए।
Answer: भेड़ की प्रमुख विदेशी नस्लों के नाम-मेरीनो, रेम्बा उलेट, साउथ डान, कोरियेल, लीमेस्टर ।
In simple words: भेड़ की प्रमुख विदेशी नस्लों में मेरीनो, रेम्बा उलेट, साउथ डान, कोरियेल और लीमेस्टर शामिल हैं, जो अपनी ऊन और मांस उत्पादन क्षमताओं के लिए जानी जाती हैं।

🎯 Exam Tip: भेड़ की प्रमुख विदेशी नस्लों के नाम याद रखें।

 

Question 31. भेड़ की मेरीनो नामक नस्ल किसलिए प्रसिद्ध है?
Answer: भेड़ की मेरीनो नामक नस्ल संसार में सबसे अधिक बारीक एवं मुलायम ऊन के लिए प्रसिद्ध है।
In simple words: मेरीनो भेड़ अपनी असाधारण रूप से बारीक और मुलायम ऊन के लिए विश्व प्रसिद्ध है, जो उच्च गुणवत्ता वाले वस्त्रों के लिए उपयोग की जाती है।

🎯 Exam Tip: मेरीनो नस्ल की भेड़ की विशिष्टता (बारीक और मुलायम ऊन) को याद रखें।

 

Question 32. मुर्गी की प्रमुख मांस उत्पादक नस्लों के नाम लिखिए ।
Answer: मुर्गी की प्रमुख मांस उत्पादक नस्लों के नाम-असील, घाघस, गेम, चिटगाँव, बसरा, कड़कनाथ, जर्सी जाइट ।
In simple words: मुर्गी की प्रमुख मांस उत्पादक नस्लों में असील, घाघस, गेम, चिटगाँव, बसरा, कड़कनाथ और जर्सी जाइट शामिल हैं, जो उच्च गुणवत्ता वाले मांस के लिए पाली जाती हैं।

🎯 Exam Tip: मुर्गी की मांस उत्पादक नस्लों के कुछ प्रमुख उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 33. मुर्गी की प्रमुख अण्डा उत्पादक विदेशी नस्लों के नाम लिखिए।
Answer: मुगी की प्रमुख अण्डा उत्पादक विदेशी नस्लों के नाम- व्हाइट लैग हार्न, मनोरकर ऐनकोना, कैम्पिनस ।
In simple words: व्हाइट लैग हार्न, मनोरकर, ऐनकोना और कैम्पिनस मुर्गी की प्रमुख विदेशी नस्लें हैं जो अपने उच्च अंडा उत्पादन के लिए जानी जाती हैं।

🎯 Exam Tip: मुर्गी की अंडा उत्पादक विदेशी नस्लों के नाम याद रखें।

 

Question 34. संसार की सबसे अधिक अण्डा उत्पादक मुर्गी की नस्ल कौन-सी है?
Answer: व्हाइट लैग हार्न संसार की सबसे अधिक अण्डा उत्पादक मुर्गी की किस्म है।
In simple words: व्हाइट लैग हार्न विश्व में सर्वाधिक अंडा उत्पादन करने वाली मुर्गी की नस्ल है, जो अपनी उच्च अंडा देने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध है।

🎯 Exam Tip: सर्वाधिक अंडा उत्पादक मुर्गी नस्ल के नाम को याद रखें।

 

Question 35. मुर्गी की सर्वोत्तम मांस वाली भारतीय नस्ल कौन-सी है?
Answer: असील भारत की सर्वोत्तम मांस वाली मुर्गी की नस्ल है।
In simple words: असील भारतीय मुर्गी की सर्वोत्तम मांस उत्पादक नस्ल है, जो अपने मजबूत शरीर और उच्च गुणवत्ता वाले मांस के लिए जानी जाती है।

🎯 Exam Tip: भारत की सर्वोत्तम मांस उत्पादक मुर्गी नस्ल का नाम याद रखें।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. चरागाह क्या है और ये मधु उत्पादन से कैसे सम्बन्धित हैं?
Answer: मधुमक्खियाँ जिन स्थानों से मधु एकत्र करती हैं, उसे मधुमक्खी का चरागाह कहते हैं। मधुमक्खी पुष्पों से मकरन्द तथा पराग एकत्र करती हैं। चरागाह के पुष्पों की किस्में शहद के स्वाद को प्रभावित करती हैं।
In simple words: चरागाह वह वनस्पति क्षेत्र है जहाँ से मधुमक्खियाँ मकरंद और पराग इकट्ठा करती हैं। चरागाह में उपलब्ध फूलों की विविधता सीधे तौर पर उत्पादित शहद की गुणवत्ता और स्वाद को निर्धारित करती है।

🎯 Exam Tip: चरागाह की परिभाषा और मधु उत्पादन में फूलों की किस्मों के महत्व पर जोर दें।

 

Question 2. मकरंद किस प्रकार शहद में परिवर्तित होता है?
Answer: जब मधुमक्खी फूलों से मकरंद चूसती है, यह मकरंद उसके मधुकोष (Honey sac) में पहुँचता है जहाँ वह कुछ इनवर्टेस एन्जाइम की क्रिया द्वारा डेक्सट्रोस तथा लेबुलोस में रूपांतरित हो जाता है। प्रत्यावहम के बाद उपचारित मकरंद आखिरकार शहद में परिवर्तित हो जाता है।
In simple words: मधुमक्खियाँ फूलों से मकरंद चूसती हैं, जिसे वे अपने मधुकोष में संग्रहीत करती हैं। वहाँ, इनवर्टेस एंजाइम की क्रिया से मकरंद डेक्सट्रोस और लेबुलोस में टूट जाता है, जिससे अंततः शहद बनता है।

🎯 Exam Tip: मकरंद के शहद में परिवर्तन की प्रक्रिया में एंजाइमों की भूमिका को स्पष्ट करें।

 

Question 3. हरित खाद क्या है? हरित खाद कैसे तैयार की जाती है?
Answer:
हरित खाद उत्पन्न करने वाले पादपों तथा सनहेम्प (क्राटोलेरिया जूसिया) ढेचा (सिसबेनिया एक्यूलिएट) एवं ग्वार (स्यामोप्सोस ट्रेआगोनालोबा) से प्राप्त कार्बनिक पदार्थों के पूर्ण अपघटन से प्राप्त खाद हरित खाद कहलाती है।
हरित खाद तैयार करना-
• हरित खाद उत्पन्न करने वाले पादपों को आरंभिक अवस्था (फूल खिलने की अवस्था) में ही खेत में काटकर गिरा दिया जाता है
• इनके अवशेषों को 1-2 महीनों के लिए जमीन के नीचे दबा दिया जाता है। अब खेत को अगली फसल के लिए तैयार किया जाता है।
• प्रायः उच्च पोषक तत्त्व की जरूरत वाली फसलों यथा चावल (धान), मक्का, गन्ना, कपास, गेहूँ आदि को हरित खाद वाले खेतों में बोया जाता है।
In simple words: हरित खाद उन पौधों से बनी कार्बनिक खाद है जिन्हें खेत में उगाया जाता है और फूल आने से पहले मिट्टी में मिला दिया जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पोषक तत्वों की आपूर्ति होती है।

🎯 Exam Tip: हरित खाद की परिभाषा, तैयारी की विधि और मिट्टी की उर्वरता में इसके योगदान को विस्तार से समझाएं।

 

Question 4. मछलियों को हानि पहुँचाने वाले कारक क्या हैं? इनकी रोकथाम किस प्रकार की जा सकती है?
Answer: मछलियों को अनेक जन्तु, जैसे शृंग, जलीय शलभ, मेंढक, साँप, पक्षी आदि खा जाते हैं। मछलियों में जीवाणु तथा विषाणुओं के कारण अनेक रोग हो जाते हैं। मछलियों में VHS (वायरल हीमोरे के सेप्टीसेमिया), IPN (इन्फेक्सीयस प्रैक्रियाटिक नेक्रोसिस) आदि सामान्य संक्रमणीय रोग हैं। जल प्रदायों का प्रदूषण मछलियों को बहुत हानि पहुँचाता है। जल प्रदूषण के कारण मछलियाँ बहुत अधिक संख्या में मर जाती हैं। मत्स्यपालन के लिए जल-प्रदायों का उचित रख-रखाव आवश्यक है।
In simple words: मछलियों को प्राकृतिक शिकारी (जैसे पक्षी, साँप), जीवाणु और विषाणु जनित रोग (जैसे VHS, IPN) तथा जल प्रदूषण से हानि पहुँचती है। इनकी रोकथाम के लिए शिकारियों से बचाव, उचित जल प्रबंधन, स्वच्छ वातावरण और रोग नियंत्रण आवश्यक है।

🎯 Exam Tip: मछलियों को होने वाली हानि के जैविक (शिकारी, रोग) और अजैविक (प्रदूषण) कारकों को स्पष्ट करें और उनकी रोकथाम के उपाय बताएं।

 

Question 5. रोगों से कुक्कुटों को बचाने के लिए कुछ उपाय बताइए।
Answer:
1. कुक्कुटों के रहने के स्थान को उचित रूप से और नियमित रूप से साफ करना चाहिए।
2. कुक्कुटों के रहने का स्थान बड़ा, हवादार, उचित प्रकाश और संवातन वाला होना चाहिए। जाड़ों के दिनों में ठण्ड से चिड़ियों को बचाने के लिए कुक्कुट फार्म की खिड़कियों और शेड की जालीदार दीवारों को ढक दिया जाता है।
3. कुक्कुट फार्म मक्खियों, चुहियों, चूहों, बिल्लियों इत्यादि से मुक्त होना चाहिए।
In simple words: कुक्कुटों को रोगों से बचाने के लिए उनके आवास को साफ-सुथरा, हवादार और पर्याप्त प्रकाश वाला रखना चाहिए। साथ ही, उन्हें ठण्ड और कीटों (मक्खियों, चूहों) से बचाना और उचित स्वच्छता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

🎯 Exam Tip: कुक्कुटों को रोगों से बचाने के लिए आवास प्रबंधन, स्वच्छता और कीट नियंत्रण के महत्व पर जोर दें।

 

Question 8. वसा क्या हैं? उनके विभिन्न स्रोत क्या हैं?
Answer:
वसा (Fats) - 'लम्बी श्रृंखला वाले वसीय अम्लों व ग्लिसरॉल (एक प्रकार का एल्कोहॉल) के एस्टर, वसा कहलाते हैं। जैसे-ब्यूटायरिक अम्ल, पॉमीटिक अम्ल, ओक्टानोइक अम्ल । वसा के मुख्य स्रोत हैं-मक्खन, घी, दूध, पनीर, अंडे की जर्दी, गिरी, मांस, तेल आदि। तेलों में नारियल के तेल में 40.1% व तिल के तेल में 43.3% वसा है।
In simple words: वसा लंबी श्रृंखला वाले वसीय अम्लों और ग्लिसरॉल के एस्टर होते हैं जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसके मुख्य स्रोतों में मक्खन, घी, दूध, पनीर, अंडे की जर्दी और विभिन्न प्रकार के तेल शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: वसा की रासायनिक संरचना, उसके मुख्य स्रोतों और शरीर में उसकी भूमिका को स्पष्ट करें।

 

Question 7. प्रोटीन क्या हैं? उनके विभिन्न स्रोत क्या हैं?
Answer:
प्रोटीन (Protein)- ये कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन व नाइट्रोजन के अत्यन्त जटिल यौगिक हैं। कुछ प्रोटीनों के संघटन में सल्फर (गन्धक) व फॉस्फोरस भी उपस्थित होते हैं। प्रोटीन के मुख्य संघटक अमीनो अम्ल हैं। प्रोटीन के मुख्य स्रोत हैं-बीन, सोयाबीन, दूध, पनीर, अंडा, दालें आदि । दालों में मसूर दाल में 25.1%, मूंग दाल में 24.5%, उड़द दाल में 24.0%, अरहर दाल में 22.3%, प्रोटीन की मात्रा होती है। इसी प्रकार मूंगफली (दाने) में 26.7%, मछली में 18.8% व अंडे में 13.3% प्रोटीन की मात्रा उपस्थित है।
In simple words: प्रोटीन कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन से बने जटिल यौगिक हैं, जो शरीर की वृद्धि और मरम्मत के लिए आवश्यक हैं। इनके मुख्य स्रोतों में दालें, सोयाबीन, दूध, अंडा और मांस शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: प्रोटीन की रासायनिक संरचना, उसके मुख्य स्रोतों और विभिन्न खाद्य पदार्थों में उसकी प्रतिशत मात्रा को याद रखें।

 

Question 8. कार्योपयोगी पशु किन्हें कहते हैं? किन्हीं दो के नाम लिखिए।
Answer: वे पालतू पशु जो कृषि करने, बोझा ढोने आदि में प्रयोग किये जाते हैं, कार्योपयोगी पशु कहलाते हैं; जैसे-गधा, घोड़ा, बैल ।
In simple words: कार्योपयोगी पशु वे पालतू जानवर होते हैं जिनका उपयोग कृषि कार्यों जैसे हल चलाना, सिंचाई और सामान ढोने के लिए किया जाता है; उदाहरण के लिए, गधा, घोड़ा और बैल।

🎯 Exam Tip: कार्योपयोगी पशुओं की परिभाषा और उनके उपयोगों को कुछ उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।

 

Question 9. खाद्य उत्पाद प्राप्त करने हेतु, पशुपालन में आवश्यक पद्धतियों को क्रमबद्ध कीजिए।
Answer: पशुपालन में आवश्यक पद्धतियाँ निम्न प्रकार हैं-
1. भरण - पशुओं को भोजन दो रूपों में दिया जाता है- (a) ठोस आहार (concentrate) वे (b) मोटा चारा (रुक्षांश)। पशु को उचित आहार पूरी मात्रा में दिया जाये ।
2. आवास - आवास के लिए आश्रय-स्थल स्वच्छ, साफ-सुथरा हो जिसमें प्रकाश, वायु एवं पानी की समुचित व्यवस्था हो । अपशिष्ट पदार्थों के निकास एवं विसर्जन की उचित व्यवस्था हो ।
3. उन्नत नस्लें - पशुओं की उन नस्लों का पालन किया जाये जो अधिक उत्पादन करती हों।
In simple words: खाद्य उत्पाद प्राप्त करने के लिए पशुपालन में उचित भरण-पोषण (ठोस व मोटा चारा), स्वच्छ और हवादार आवास तथा उन्नत नस्लों का चयन महत्वपूर्ण है, ताकि पशु स्वस्थ रहें और अधिकतम उत्पादन दे सकें।

🎯 Exam Tip: पशुपालन की प्रमुख पद्धतियों को क्रमबद्ध करें और प्रत्येक के महत्व को समझाएं।

 

Question 10. रुक्षांश किसे कहते हैं? पशु इसे कैसे प्राप्त करते हैं ?
Answer: पशु आहार का रेशेदार व कम पोषण वाला भाग, जो चारे या घास-फूस से मिलता है, रुक्षांश कहलाता है। पशु इसे मोटे चारे, बरसीम, भूसा, रिजका आदि से प्राप्त करते हैं।
In simple words: रुक्षांश पशु आहार का वह रेशेदार हिस्सा है जिसमें पोषण कम होता है, जैसे चारा या घास-फूस, और पशु इसे मोटे चारे जैसे बरसीम, भूसा और रिजका से प्राप्त करते हैं।

🎯 Exam Tip: रुक्षांश की परिभाषा और उसके स्रोतों को याद रखें।

 

Question 11. दुग्धधारी पशुओं में आहार उनके उत्पादन को कैसे प्रभावित करता है?
Answer: दुग्धधारी पशुओं का उत्पादन उनके आहार पर बहुत निर्भर करता है। अपुष्ट अथवा अल्पपुष्ट पशु आहार देने से दुग्ध उत्पादन कम होता है। आहार की उचित व्यवस्था न होने के कारण हमारे देश में गाय 0.5 लिटर व भैंस 1.5 लीटर दूध प्रतिदिन कम देती हैं।
In simple words: दुग्धधारी पशुओं का दूध उत्पादन उनके आहार की गुणवत्ता और मात्रा पर सीधा निर्भर करता है; अपर्याप्त या असंतुलित आहार देने से दूध का उत्पादन घट जाता है।

🎯 Exam Tip: दुग्ध उत्पादन और पशु आहार के बीच सीधा संबंध स्थापित करें और अपर्याप्त आहार के नकारात्मक प्रभावों को समझाएं।

 

Question 12. कृषि उत्पादों के भंडारण को हानि पहुँचाने में कौन-से कारक उत्तरदायी हैं? इन्हें किस प्रकार नियंत्रित किया जा सकता है?
Answer: जैविक कारकों के अंतर्गत कुंतक, कीट तथा जीवाणु आदि आते हैं। अजैविक कारकों के अंतर्गत भंडारण के स्थान पर उपस्थित नमी तथा ताप का प्रभाव मुख्य कारक हैं। पीड़कों को नष्ट करने के लिए धूमकों का प्रयोग उचित रहता है। अनाज के भंडारण से पहले धूप में और फिर छाया में सुखी लेना चाहिए। अनाज में नमी की मात्रा 12% से अधिक नहीं होनी चाहिए। भंडार-गृह जल तथा नमी के लिए अभेदा होने चाहिए । भंडारित खाद्य पदार्थों की समय-समय पर निरीक्षण करते रहना चाहिए।
In simple words: कृषि उत्पादों के भंडारण में हानि के मुख्य कारक जैविक (कीट, जीवाणु) और अजैविक (नमी, तापमान) हैं। इनकी रोकथाम के लिए धूमक का प्रयोग, उचित सुखाना, 12% से कम नमी बनाए रखना और भंडारगृहों को जल-रोधी बनाना आवश्यक है।

🎯 Exam Tip: भंडारण में हानि के कारकों और उनके नियंत्रण उपायों को स्पष्ट रूप से वर्गीकृत करें, विशेष रूप से धूमक और नमी नियंत्रण पर ध्यान दें।

 

Question 13. मिश्रित फसलों के कोई दो लाभ लिखिए।।
Answer:
1. अवयवी फसलों के समपूरक प्रभाव के कारण दोनों फसलों की उपज बढ़ जाती है। उदाहरणार्थ गेहूँ और चना
2. दो फसलों को एक साथ उगाने से भूमि की उर्वरता में सुधार होता हैं।
In simple words: मिश्रित फसलें उगाने से फसलों की कुल उपज बढ़ती है क्योंकि वे एक-दूसरे के संसाधनों का बेहतर उपयोग करती हैं, और यह मिट्टी की उर्वरता को भी सुधारने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: मिश्रित फसलों के प्रमुख लाभों को याद रखें, जैसे बढ़ी हुई उपज और मिट्टी की उर्वरता में सुधार।

 

Question 14. किन कारणों से, भारतीय नस्लों से मुर्गे-मुर्गियों की संकर नस्लें क्यों लाभदायक हैं?
Answer:
1. ये अधिक अण्डे देती हैं। (लगभग 700 अण्डे वार्षिक जबकि देशी मुर्गी प्रति वर्ष 60 देती है।
2. वे अधिक मांस उत्पादित करते हैं। 1 kg मांस के लिए 2.3 kg चारा, जबकि देशी किस्में 1 kg मांस देने के लिए लगभग 5-6 kg चारा खाती हैं।
In simple words: भारतीय नस्लों से मुर्गे-मुर्गियों की संकर नस्लें लाभदायक हैं क्योंकि वे देशी नस्लों की तुलना में अधिक अंडे देती हैं और मांस उत्पादन के लिए कम चारा खाती हैं, जिससे उनकी आर्थिक दक्षता बढ़ जाती है।

🎯 Exam Tip: संकर नस्लों के दो मुख्य लाभों - उच्च अंडा उत्पादन और कुशल मांस उत्पादन - को संख्यात्मक डेटा के साथ प्रस्तुत करें।

 

Question 15. विभिन्न फसलों को अलग-अलग मौसम में क्यों उगाते हैं?
Answer: फसलों को समुचित वृद्धि एवं जीवन चक्र पूरा करने के लिए निम्न कारकों की आवश्यकता होती है
• जलवायु सम्बन्धी परिस्थितियाँ
• तापमान
• दीप्तिकाल (photoperiod)।
कुछ फसलें कम तापमान और कुछ अधिक तापमान पर उगती एवं वृद्धि करती हैं, कुछ फसलों को सूर्य का तेज प्रकाश और कुछ को सामान्य प्रकाश की आवश्यकता होती है, इसीलिए विभिन्न फसलों को अलग-अलग मौसम में उगाया जाता है।
In simple words: विभिन्न फसलों को अलग-अलग मौसम में इसलिए उगाया जाता है क्योंकि प्रत्येक फसल की वृद्धि के लिए विशिष्ट जलवायु परिस्थितियाँ, तापमान और दीप्तिकाल (प्रकाश की अवधि) की आवश्यकता होती है।

🎯 Exam Tip: फसलों को अलग-अलग मौसम में उगाने के पीछे के प्रमुख पर्यावरणीय कारकों को याद रखें।

 

Question 16. खाद क्या हैं? इनके मुख्य प्रकार लिखिए ।
Answer:
वे कार्बनिक पदार्थ जो बहुत अधिक आयतन में होने पर कम मात्रा में पोषक तत्त्व प्रदान करते हैं, खाद कहलाते हैं। ये निम्न प्रकार के होते हैं
1. गोबर की खाद (Farm Yard Manure) या (FYM) - यह पशुओं के गोबर या अपशिष्ट पदार्थों से बनायी जाती है। कृषि एवं पशुओं के अपशिष्ट जब कुछ दिन के लिए छेड़ दिये जाते हैं तो वे खाद में बदल जाते हैं।
2. हरी खाद - यह हरे पौधों को खेत में दबाकर बनायी जाती है। पटसन, मूंग, ग्वार, ढेचा आदि की फसल को हल चलाकर मिट्टी में दबा देते हैं। कुछ समय पश्चात् । यह खाद में बदल जाती है जिसे हरी खाद कहते हैं। यह मृदा में नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस की भरपूर आपूर्ति करती है।
In simple words: खाद वे कार्बनिक पदार्थ हैं जो कम मात्रा में पोषक तत्व प्रदान करते हुए मिट्टी की संरचना और उर्वरता को सुधारते हैं। इसके मुख्य प्रकारों में गोबर की खाद (पशु अपशिष्ट से) और हरी खाद (खेत में उगाए गए पौधों को मिट्टी में मिलाना) शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: खाद की परिभाषा और उसके विभिन्न प्रकारों (जैसे गोबर की खाद, हरी खाद) को याद रखें और प्रत्येक की तैयारी की विधि को भी बताएं।

 

Question 17. कम्पोस्ट खाद कैसे तैयार की जाती है?
Answer: कम्पोस्ट खाद तैयार करने के लिए, 4 से 5 मीटर लम्बा, 1.5 से 1.8 मीटर चौड़ा व 1.0 से 1.8 मीटर गहरा गड्डा खोदा जाता है। गड्ढे में पशुओं के अपशिष्ट, कृषि के अपशिष्ट, घर का कूड़ा-करकट एवं अपशिष्ट आदि को डालते जाते हैं। जब यह गड्डा भर जाती है तो इसके ऊपर कुछ पानी डालकर मिट्टी की एक परत से बंद कर दिया जाता है। दो या तीन महीने में यह काले रंग के कार्बनिक पदार्थ में बदल जाता है।
In simple words: कम्पोस्ट खाद एक गड्ढे में पशुओं के अपशिष्ट, कृषि कचरे और घरेलू कूड़े-करकट को जमा करके तैयार की जाती है। इन पदार्थों को सड़ने के लिए पानी और मिट्टी की परत से ढक दिया जाता है, जिससे कुछ महीनों में यह काले, कार्बनिक पदार्थ में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: कम्पोस्ट खाद बनाने की विधि के चरणों को स्पष्ट रूप से समझाएं, जिसमें गड्ढे के आयाम और सामग्री के अपघटन की प्रक्रिया शामिल हो।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. मिश्रित फसली खेती में फसलों का चयन किस आधार पर करते हैं?
Answer: मिश्रित फसली या बहुफसली खेती में फसलों का चयन निम्न बातों को ध्यान में रखकर करते हैं:
1. फसल की अवधि - एक फसल लम्बी अवधि की व दूसरी फसल छोटी अवधि की होती है।
2. वृद्धि की आदत - एक फसल के पौधे लम्बे व दूसरी फसल के छोटे होते हैं।
3. जड़ों का प्रकार - एक की जड़ें गहराई तक जाने वाली हों ।
4. पानी की आवश्यकता - एक को कम व दूसरी को अधिक पानी की आवश्यकता हो ।
5. पोषक तत्वों की आवश्यकता - एक को कम व दूसरी को अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता हो।
In simple words: मिश्रित फसली खेती में फसलों का चयन उनकी वृद्धि की आदतों, अवधि, जड़ प्रणाली, और पानी व पोषक तत्वों की आवश्यकताओं के आधार पर किया जाता है, ताकि वे एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा न करें और संसाधनों का अधिकतम उपयोग करें।

🎯 Exam Tip: मिश्रित फसली खेती में फसल चयन के विभिन्न मानदंडों (अवधि, वृद्धि की आदत, जड़ प्रकार, जल/पोषक तत्व आवश्यकता) को स्पष्ट करें।

 

Question 2. अंतराफसलीकरण (इन्टरक्लोपिंग) क्या है? मिश्रित खेती व अन्तराफसलीकरण में समानता व असमानता बताइये ।
Answer:
एक ही खेत पर दो या अधिक फसलें पंक्तिबद्ध रूप या निर्दिष्ट पैटर्न में उगाना, अंतराफसलीकरण कहलाता है।

मिश्रित खेती व अन्तराफसलीकरण की तुलना

मिश्रित खेतीअन्तराफसलीकरण
1. फसल असफलता को कम करना इसका उद्देश्य है।1. प्रति इकाई क्षेत्रफल में पैदावार बढ़ाना, इसका उद्देश्य है।
2. दो फसलों के बीज बोने से पहले मिला दिये जाते हैं।2. बीज मिलाये नहीं जाते।
3. पंक्तियाँ नहीं बनायी जार्ती।3. पंक्तियाँ बनायी जाती हैं या निर्दिष्ट पैटर्न प्रयोग किया जाता है।
4. फसल विशेष में उर्वरक लगाना कठिन है।4. उर्वरक आवश्यकतानुसार पंक्ति में लगाया जाता है।
5. कीटनाशक का स्प्रे फसल विशेष के लिए कठिन है।5. कीटनाशक का स्प्रे फसल विशेष के लिए किया जा सकता है।
6. फसलें अलग काटना व विनाना संभव नहीं है।6. फसलों की कटाई व विनाई अलग-अलग संभव है।
7. फसलों की अलग-अलग बिक्री असंभव है।7. प्रत्येक फसल की बिक्री अलग-अलग होती है।

In simple words: अन्तराफसलीकरण एक ही खेत में दो या अधिक फसलों को एक निश्चित पैटर्न में उगाने की विधि है। मिश्रित खेती और अन्तराफसलीकरण दोनों में एक से अधिक फसलें उगाई जाती हैं, लेकिन अन्तराफसलीकरण में फसलें विशिष्ट पंक्तियों में होती हैं जिससे प्रबंधन और कटाई आसान हो जाती है, जबकि मिश्रित खेती में फसलें मिश्रित होती हैं।

🎯 Exam Tip: अन्तराफसलीकरण की परिभाषा दें और मिश्रित खेती के साथ इसकी तुलना तालिका के रूप में प्रस्तुत करें, जिसमें प्रमुख समानताएं और असमानताएं स्पष्ट हों।

 

Question 3. शस्यावर्तन (फसल-चक्र) से आप क्या समझते हो? यह उपयोगी क्यों है? इससे फसले को होने वाला एक लाभ लिखिए।
Answer: फसल-चक्र या शस्यावर्तन-किसी भूमि पर फसलों को पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार अदल-बदल कर उगाना, फसल-चक्र या शस्यावर्तन कहलाता है। इस विधि में दो अनाज वाली फसलों के मध्य एक फलीदार (लेग्यूम) फसल जैसे मटर, सोयाबीन, चना, मूंगफली आदि लगायी जाती है। फसल भूमि से नाइट्रोजन यौगिक अधिकता से ग्रहण करती है जो भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए अत्यन्त आवश्यक है। अनाज वाली फसल भूमि से नाइट्रोजन यौगिक अधिकता से ग्रहण करती है जिससे भूमि में नाइट्रोजन की कमी हो जाती है। दाल वाली फसलों के पौधों की जड़ों में एक प्रकार के जीवाणु रहते हैं जो वायुमण्डल की नाइट्रोजन को नाइट्रोजन यौगिकों में बदलकर भूमि को प्रदान करते हैं। इस प्रकार भूमि को आवश्यक पोषक तत्त्व नाइट्रोजन की आपूर्ति से हो जाती है। इस प्रकार मृदा की उर्वरता बढ़ जाती है तथा यदि फसल-चक्र उचित ढंग से अपनाया जाए तो वर्ष में तीन तक फसलें उगायी जा सकती हैं।
In simple words: फसल-चक्र या शस्यावर्तन वह प्रक्रिया है जिसमें फसलों को एक ही खेत में एक नियोजित क्रम में बारी-बारी से उगाया जाता है। यह मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, कीटों और खरपतवारों को नियंत्रित करने में सहायक है, जैसे फलीदार फसलों को अनाज वाली फसलों के बीच उगाने से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है।

🎯 Exam Tip: फसल-चक्र की परिभाषा, इसके महत्व और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने तथा कीट नियंत्रण जैसे विशिष्ट लाभों पर जोर दें।

 

Question 4.
(i) लेयर किसे कहते हैं?
(ii) कुक्कुट के जीवन में अंडे देने की अवधि का वर्णन कीजिए ।
(iii) दो बाह्य कारकों के नाम बताइए जो मुर्गी के अंडे के उत्पादन पर अनुकूलित प्रभाव डालते हैं।
(iv) ब्रौलर किसे कहते हैं? इनकी पोषण की आवश्यकता का वर्णन कीजिए।
(v) कुक्कुट के जीवन में विभिन्न अवस्था के नाम लिखिए।
Answer:
(i) मुर्गी की उस अवस्था को जिसमें वह अंडों का उत्पादन करती है लेयिंग (Laying) अवस्था कहते हैं। तथा उसे लेयर (Layer) कहते हैं। एक लेयर 20 सप्ताह की अवस्था में अंडे देना आरंभ करती है।
(ii) लैंगिक परिपक्वता से अंडे देने तक की अवधि अण्डे देने की अवधि कहलाती है। इस अवधि में चूजों को लेयर्स कहते हैं। लेयर्स को पर्याप्त स्थान तथा उचित प्रकाश की आवश्यकता होती है।
(iii) दो बाह्य कारक जो अंडे के उत्पादन पर अनुकूलित प्रभाव डालते हैं
• प्रकाश की तीव्रता
• प्रकाश की अवधि ।
(iv) मुर्गी मांस उत्पादित नस्ल है। ब्रौलर के भोजन में
• प्रोटीन अधिक होनी चाहिए।
• पर्याप्त वसा होनी चाहिए।
• विटामिन A तथा K की अधिक मात्रा होनी चाहिए।
(v) कुक्कुट के जीवन में दो अवस्थाएँ हैं
• विकास अवधि ।
• अंडा देने की अवधि ।
In simple words: यह प्रश्न कुक्कुट पालन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालता है, जिसमें लेयर और ब्रौलर की परिभाषा, अंडे देने की प्रक्रिया, बाहरी कारक जो अंडे उत्पादन को प्रभावित करते हैं, और कुक्कुट के जीवन की विभिन्न अवस्थाएँ शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: कुक्कुट पालन से संबंधित शब्दावली और प्रबंधन के सिद्धांतों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये कृषि विज्ञान और पशुधन प्रबंधन से जुड़े प्रश्नों में अक्सर आते हैं।

 

Question 5.खाद की परिभाषा लिखिए। विभिन्न खाद कौन-कौन-सी होती हैं और ये मिट्टी को किस प्रकार प्रभावित करती हैं?
Answer:खाद (Manures) - खाद प्राकृतिक पदार्थ है। यह गाय के गोबर, मल-मूत्र, रेशे, पत्तियों आदि से बनती है। इन्हें प्राकृतिक उर्वरक (Natural fertilizers) कहते है। मृदा में कार्बनिक पदार्थों का होना अत्यंत आवश्यक है। इससे मृदा में अमस (humus) उत्पन्न होता है। यूमस से, जो कार्बनिक पदार्थों, जैसे पौधों के विभिन्न भागों, मृत पदार्थों, जीव-जंतुओं आदि के विभिन्न उत्सर्जी अथवा मृदा भागों के जीवाणुओं आदि की प्रक्रियाओं से बनता है, पौधों को अनेक आवश्यक पदार्थों की प्राप्ति होती है। हरी खाद के लिए दलहनी फसलें (Legume crops) अधिक उपयोगी होती हैं। दलहनी पौधों की जड़ों में पाई जाने वाली ग्रन्थिकाओं (nodules) में नाइट्रोजन स्थिरीकरण जीवाणु रहता है। इन फसलों के खेत में जोतकर दबा देने से भूमि में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है तथा साथ-साथ जैविक पदार्थ भी मिल जाता है जिसके कारण भूमि के गठन में सुधार होता है। खादों के प्रकार-ये गोबर की खाद, एफ वाई एम (FFYM), कंपोस्ट व हरी खाद तथा वर्मीपोस्ट (vermipost) होती है।
In simple words: खाद प्राकृतिक जैविक पदार्थ है जो मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाता है, मृदा संरचना में सुधार करता है और पौधों को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि होती है।

🎯 Exam Tip: खाद के प्रकार, उनके निर्माण की विधि और मिट्टी पर उनके प्रभावों को समझना कृषि विज्ञान में एक मूलभूत अवधारणा है।

 

Question 6.उर्वरक क्या हैं? परम्परागत खाद वे रासायनिक उर्वरकों में अन्तर स्पष्ट कीजिए। अथवा उर्वरक एवं खाद में चार भिन्नतायें लिखिए।
Answer:वे पदार्थ जो मृदा की उर्वरक क्षमता को बढ़ाने के लिए बाहर से दिये जाते हैं, उर्वरक कहलाते हैं। उर्वरक दो प्रकार के होते हैं- (a) परम्परागत खाद, (b) रासायनिक उर्वरक। (a) परम्परागत खाद - वह खाद जो वनस्पतिर्यो, कृषि एवं पशु अपशिष्ट के अपघटन से तैयार की जाती है, परम्परागत खाद कहलाती है। जैसे-कम्पोस्ट खाद, हरी खाद । (b) रासायनिक उर्वरक - वे रासायनिक यौगिक जो आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति करते हैं रासायनिक उर्वरक कहलाते हैं। जैसे- • नाइट्रोजन उर्वरक - जो भूमि को नाइट्रोजन की आपूर्ति करते हैं उदाहरणार्थ, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट । • पोटाश उर्वरक - जो भूमि को पोटैशियम की आपूर्ति करते हैं उदाहरणार्थ, पोटाश राख, पौटेशियम क्लोराइड । • फॉस्फेट उर्वरक - जो भूमि को फॉस्फेट की आपूर्ति करते हैं उदाहरणार्थ, NPK, सुपर फॉस्फेट । [जो उर्वरक दो या अधिक पोषक तत्वों की आपूर्ति करते हैं, मिश्रित उर्वरक कहलाते हैं जैसे-NPK, सुपर फॉस्फेट] मृदा की प्रकृति और फसल की आवश्यकता के अनुसार किसी उर्वरक का चयन किया जाता है।

परम्परागत खाद व रासायनिक उर्वरकों में अन्तर

परम्परागत खादरासायनिक उर्वरक
1. ये वनस्पति एवं जन्तुओं के अपशिष्ट पदार्थों के सूक्ष्म जीवों द्वारा अपघटन से प्राप्त कार्बनिक पदार्थ हैं।1. ये रासायनिक यौगिक हैं जो रासायनिक अभिकर्मिकों द्वारा उत्पन्न किये जाते हैं।
2. ये सूक्ष्म जीवों द्वारा जैव-रासायनिक क्रिया के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं।2. ये रासायनिक अभिक्रिया के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं।
3. इनमें विभिन्न पोषकों के मिश्रित यौगिक होते हैं व उसे बनाते हैं।3. इनमें कोई पोषक विशेष ही पाया जाता है।
4. ये मृदा का गठन बनाये रखते हैं।4. इनमें ऐसा नहीं होता।
5. ये मृदा की जल रोकने की क्षमता को बढ़ाते हैं।5. इनमें ऐसा नहीं होता।
6. इनका परिवहन तथा भंडारण आसा न नहीं है, क्योंकि इनका आयतन बहुत अधिक है।6. इनका परिवहन तथा भंडारण आसान है क्योंकि सांद्र होने के कारण इनका आयतन कम होता है।

In simple words: उर्वरक कृत्रिम रसायन होते हैं जो पौधों को विशेष पोषक तत्व प्रदान करते हैं, जबकि खाद जैविक पदार्थों से बनती है और मिट्टी की समग्र गुणवत्ता में सुधार करती है।

🎯 Exam Tip: खाद और उर्वरक के बीच के अंतर को सारणीबद्ध रूप में याद रखना तुलनात्मक प्रश्नों के लिए अत्यधिक प्रभावी होता है।

 

Question 7.पशु-पक्षियों के पोषण के लिए आहार की क्या-क्या विशेषताएँ होनी चाहिए? अथवा पशु-पक्षियों के आहार निर्धारण हेतु किन-किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
Answer:पशु-पक्षियों के आहार की विशेषताएँ - पशु पक्षियों के पोषण के लिए आहार की निम्न विशेषताएँ होनी चाहिए अर्थात् उनके आहार निर्धारण हेतु निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए-
(i) गर्भावस्था के दौरान पशु-पक्षियों को भ्रूणीय विकास हेतु अधिक पौष्टिक आहार देना चाहिए।
(ii) युवा पशु-पक्षियों को अधिक प्रोटीन युक्त आहार देना चाहिए।
(iii) अधिक परिश्रम करने वाले पशुओं को ऊर्जा प्रदान करने वाले अर्थात् अधिक कार्बोज की मात्रा वाले। आहार देने चाहिए ।
(iv) जो पशु-पक्षी उत्पादन कार्य नहीं कर रहे हों उन्हें केवल निर्वाह आहार देना चाहिए।
(v) पशु-पक्षियों के आहार का निर्धारण उनकी स्वास्थ्य दशा एवं मौसम को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
(vi) पशु-पक्षियों के आहार ग्रहण न करने की स्थिति में उन जीवों के स्वास्थ्य का परीक्षण करवाना चाहिए।
In simple words: पशु-पक्षियों के आहार का निर्धारण उनकी शारीरिक अवस्था, उम्र, गतिविधि और मौसम के अनुसार होना चाहिए ताकि उन्हें पर्याप्त पोषण मिल सके।

🎯 Exam Tip: पशु आहार से संबंधित प्रश्नों में पशु की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार पोषण संबंधी प्रावधानों का उल्लेख करना उच्च अंक प्राप्त करने में सहायक होता है।

 

Question 8.पशु आहार के विभिन्न घटकों के कार्य एवं स्रोत लिखिए।
Answer:

पशु आहार के विभिन्न घटकों के कार्य एवं स्रोत-

क्र.आहार के घटककार्यस्त्रोत
1.कार्बोहाइड्रेटऊर्जा प्रदान करनागेहूँ, चावल, ज्वार, मक्का एवं बाजरा आदि ।
2.प्रोटीनवृद्धि एवं कोशिकाओं की टूट-फूट की मरम्मतमूँगफली, कपास, सोयाबीन की खली एवं दालें।
3.वसाऊर्जा प्रदान करना
का तेल, खल।
तिल, मूँगफली, सोयाबीन के बीज
4.खनिज लवणनिरोग रखनानमक, हरा चारा, खनिज मिश्रण।
5.रेशेऊर्जा प्रदान करते हैं तथा पाचन शक्ति बढ़ाते हैंबरसीम, कड़बी, चरी, हरा चारा, भुस, कुटी।
6.पानीसभी जैव क्रियाओं के लिए आवश्यकतालाब, पोखर, कुआँ, नदी।

In simple words: पशु आहार में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण, रेशे और पानी जैसे घटक शामिल होते हैं, जिनमें से प्रत्येक पशु के स्वास्थ्य और ऊर्जा के लिए विशिष्ट भूमिका निभाता है।

🎯 Exam Tip: पशु आहार के घटकों के कार्य और उनके स्रोतों को सारणीबद्ध रूप में याद रखना, पशु पोषण और कृषि से संबंधित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 9.पशु-पक्षियों को रोगों से बचाने के लिए क्या-क्या प्रयास करने चाहिए? अथवा पशु-पक्षियों को रोगों से बचाने के लिए मुख्य उपाय लिखिए। अथवा पशु-पक्षियों को विभिन्न बीमारियों से बचाने हेतु प्रमुख उपाय बताइये ।
Answer:पशु-पक्षियों को विभिन्न बीमारियों (रोगों) से बचाने के लिए - पशु-पक्षियों को विभिन्न बीमारियों (रोगों) से बचाने के लिए निम्न उपाय (प्रयास) करने चाहिए-
(i) रोगी पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना चाहिए
(ii) पशुशाला एवं कुक्कुटशाला को साफ-सुथरा एवं जीवाणुरहित (संक्रमण रहित) रखना चाहिए।
(iii) बिछावन एवं अन्य दूषित पदार्थों को नष्ट कर देना चाहिए।
(iv) रोग फैलने की सूचना तुरन्त पशु चिकित्सक को देनी चाहिए।
(v) पशु चिकित्सक द्वारा समय-समय पर परीक्षण करवाते रहना चाहिए।
(vi) पशुओं की देखभाल करने वाले व्यक्ति को अपनी साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए।
(vii) नवीन पशुओं को परीक्षण के उपरान्त ही समूह में शामिल करना चाहिए।
(viii) चरागाहों को बदलते रहना चाहिए।
(ix) पशुओं को पौष्टिक सन्तुलित आहार देना चाहिए।
(x) उचित समय पर विभिन्न रोगों के टीके पशुओं को अवश्य ही लगवाना चाहिए।
In simple words: पशुओं को रोगों से बचाने के लिए स्वच्छ वातावरण, उचित पोषण, नियमित स्वास्थ्य जाँच और टीकाकरण आवश्यक है, साथ ही बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना भी महत्वपूर्ण है।

🎯 Exam Tip: पशुधन स्वास्थ्य प्रबंधन और रोगों की रोकथाम के उपायों को विस्तृत रूप से समझना पशुपालन और कृषि विज्ञान के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

 

Question 10.एक उत्तम पशु आवास कैसा होना चाहिए? अथवा एक उत्तम पशु आवास में कौन-कौन-सी सुविधाएँ होनी चाहिए । अथवा एक उत्तम पशु आवास में क्या-क्या विशेषताएँ होनी चाहिए?
Answer:एक उत्तम पशु आवास की विशेषताएँ एवं उसमें मिलने वाली सुविधाएँ - एक उत्तम पशु आवास में अग्रलिखित विशेषताएँ एवं उसमें मिलने वाली सुविधाएँ होनी चाहिए
(i) पशु आवास ऊँचाई पर स्थित होना चाहिए जिससे वहाँ जल भराव न हो सके ।
(ii) आवास स्वच्छ एवं जीवाणु रहित होना चाहिए।
(iii) आवास में प्रतिदिन साफ-सफाई की व्यवस्था होनी चाहिए।
(iv) आवास हवादार होना चाहिए जहाँ स्वच्छ हवा के आवागमन की व्यवस्था हो।
(v) आवास में सूर्य के प्रकाश को आने की व्यवस्था होनी चाहिए।
(vi) आवास में पशुओं के लिए स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।
(vii) आवास में मलमूत्र एकत्रित नहीं होना चाहिए। तथा पशुओं को रहने के लिए सूखा स्थान प्राप्त होना चाहिए।
(viii) पशु आवास का फर्श पक्का एवं ढालू होना चाहिए।
In simple words: एक अच्छा पशु आवास ऊँचाई पर, स्वच्छ, हवादार, और सूर्य के प्रकाश की उचित व्यवस्था के साथ होना चाहिए, जिससे जलभराव न हो, जीवाणु संक्रमण रुके और पशुओं को सूखा व आरामदायक स्थान मिले।

🎯 Exam Tip: पशु आवास की विशेषताओं और सुविधाओं पर आधारित प्रश्न पशुपालन के व्यावहारिक पहलुओं का परीक्षण करते हैं, इसलिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण के महत्व को रेखांकित करें।

 

अभ्यास प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

Question 1. दुग्ध उत्पादन में अपार वृद्धि कहलाती है
(a) श्वेत क्रान्ति
(b) हरित क्रान्ति
(c) नीली क्रान्ति
(d) ये सभी ।
Answer: (a) श्वेत क्रान्ति
In simple words: श्वेत क्रान्ति (White Revolution) भारत में दुग्ध उत्पादन में तेजी से वृद्धि को संदर्भित करती है, जिसका उद्देश्य देश को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना था।

🎯 Exam Tip: क्रांतियों से संबंधित प्रश्न अक्सर सामान्य ज्ञान और विज्ञान दोनों में पूछे जाते हैं; प्रमुख क्रांतियों (श्वेत, हरित, नीली, पीली आदि) को उनके संबंधित क्षेत्रों के साथ याद रखें।

 

Question 2. मछली उत्पादन में अपार वृद्धि कहलाती है
(a) श्वेत क्रान्ति
(b) हरित क्रान्ति
(c) नीली क्रान्ति
(d) ये सभी ।
Answer: (c) नीली क्रान्ति
In simple words: नीली क्रान्ति का संबंध मत्स्य पालन और समुद्री उत्पादों के उत्पादन में वृद्धि से है, जिससे देश में प्रोटीन स्रोत की उपलब्धता बढ़ती है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न कृषि और पशुधन क्रांतियों को उनके विशिष्ट क्षेत्रों से जोड़कर याद रखें; यह बहुविकल्पीय प्रश्नों में बहुत उपयोगी होता है।

 

Question 3. मधुमक्खी पालन एक अच्छा उद्यम है क्योंकि
(a) शहद का सर्वत्र उपयोग होता है ।
(b) इसमें पूँजी निवेश कम है।
(c) किसी विशिष्ट स्थान की आवश्यकता नहीं है।
(d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: मधुमक्खी पालन एक लाभकारी व्यवसाय है क्योंकि शहद की सार्वभौमिक मांग है, इसमें कम पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है, और यह किसी विशिष्ट भौगोलिक स्थान पर निर्भर नहीं करता।

🎯 Exam Tip: मधुमक्खी पालन के लाभों से संबंधित प्रश्नों में आर्थिक, पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं को शामिल करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. कुक्कुटों के आहार में उपस्थित अवयव होने चाहिए
(a) कार्बोहाइड्रेट, वसा
(b) कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लवण
(c) कार्बोहाइड्रेट व प्रोटीन
(d) प्रोटीन व लवण ।
Answer: (b) कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लवण
In simple words: कुक्कुटों के संतुलित आहार में ऊर्जा के लिए कार्बोहाइड्रेट, वृद्धि और मरम्मत के लिए प्रोटीन, और शरीर के कार्यों के लिए आवश्यक लवण शामिल होने चाहिए।

🎯 Exam Tip: पशु आहार के घटकों और उनके कार्यों को समझना पशुधन प्रबंधन के बुनियादी सिद्धांतों में से एक है; संतुलित पोषण पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 5. यदि कोई पशु अस्वस्थ है तो :
(a) वह आहार लेना बन्द कर देता है।
(b) वह निष्क्रिय हो जाता है।
(c) उसका दुग्ध उत्पादन, अंडे देने या कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है।
(d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: एक अस्वस्थ पशु कई लक्षण प्रदर्शित करता है, जैसे आहार न लेना, निष्क्रियता, और उत्पादन क्षमता (जैसे दूध या अंडे) में कमी, जो बीमारी के सामान्य संकेत हैं।

🎯 Exam Tip: पशु रोगों की पहचान में लक्षणों को समझना महत्वपूर्ण है; पशुओं के व्यवहार और उत्पादकता में बदलाव पर ध्यान दें।

 

Question 6. आवश्यक वृहत् पोषक तत्त्व है-
(a) N, P, K, Ca
(b) N, P, K, Fe
(c) N, P, K, Cu
(d) N, P, K, Cl.
Answer: (a) N, P, K, Ca
In simple words: पौधों के लिए वृहत् पोषक तत्व वे हैं जिनकी आवश्यकता पौधों को अधिक मात्रा में होती है, जैसे नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P), पोटेशियम (K), और कैल्शियम (Ca) आदि।

🎯 Exam Tip: पौधों के आवश्यक वृहत् और सूक्ष्म पोषक तत्वों की सूची को याद रखना जीव विज्ञान और कृषि विज्ञान के प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. सूक्ष्म पोषक तत्त्व है
(a) N, P, K, Ca
(b) Fe, Mg, Cu, Zn
(c) Fe, Mn, Cu, Zn, B, Mo
(d) Ca, Fe, Mn, Cu.
Answer: (c) Fe, Mn, Cu, Zn, B, Mo
In simple words: सूक्ष्म पोषक तत्व वे हैं जिनकी आवश्यकता पौधों को बहुत कम मात्रा में होती है, लेकिन वे उनकी वृद्धि और विकास के लिए उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं, जैसे लोहा (Fe), मैंगनीज (Mn), तांबा (Cu), जिंक (Zn), बोरॉन (B), मोलिब्डेनम (Mo)।

🎯 Exam Tip: वृहत् और सूक्ष्म पोषक तत्वों के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से समझें और प्रत्येक श्रेणी के तहत मुख्य तत्वों के उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 8. एक किसान दो खाद्यान्न फसलों के मध्य मटर की फसल उगाता है, वह अपनाता है-
(a) मिश्रित फसली
(b) फसल चक्र
(c) अंतराफसलीकरण
(d) उपर्युक्त में से कोई भी नहीं।
Answer: (b) फसल चक्र
In simple words: दो खाद्यान्न फसलों के बीच मटर जैसी फलीदार फसल उगाना फसल चक्र का एक उदाहरण है, जो मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में मदद करता है क्योंकि फलीदार पौधे नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं।

🎯 Exam Tip: फसल चक्र, मिश्रित खेती और अंतराफसलीकरण के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें; प्रत्येक विधि के लाभ और उपयोग के उदाहरणों पर ध्यान दें।

 

Question 9. गाय की देशी नस्ल है-
(a) मुर्रा ।
(b) फ्रीशवाल
(c) जर्सी
(d) शाहीवाल ।
Answer: (d) शाहीवाल
In simple words: शाहीवाल भारत की एक प्रसिद्ध देशी गाय की नस्ल है जो अपनी उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता और गर्मी सहने की क्षमता के लिए जानी जाती है।

🎯 Exam Tip: भारत की प्रमुख देशी और विदेशी पशु नस्लों और उनकी विशेषताओं को याद रखना पशुधन से संबंधित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. गाय की विदेशी नस्ल है-
(a) मुर्रा
(b) फ्रीशवाल
(c) शाहीवाल
(d) जर्सी
Answer: (d) जर्सी
In simple words: जर्सी एक प्रसिद्ध विदेशी गाय की नस्ल है जो अपने उच्च वसा वाले दूध उत्पादन और छोटे आकार के लिए जानी जाती है।

🎯 Exam Tip: विदेशी नस्लों के नाम और उनकी प्रमुख विशेषताओं पर ध्यान दें, खासकर जब तुलनात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं।

 

Question 11. गाय की संकर नस्ल है-
(a) मुर्रा
(b) शाहीवाल:
(c) फ्रीशवाल
(d) जर्सी ।
Answer: (c) फ्रीशवाल
In simple words: फ्रीशवाल (Frieswal) गाय की एक संकर नस्ल है जो भारतीय साहीवाल और डच होल्स्टीन-फ्रिसियन नस्लों के संकरण से विकसित की गई है, जिसमें दोनों नस्लों के अच्छे गुण पाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: संकर नस्लें दो अलग-अलग नस्लों के वांछित गुणों को मिलाकर बेहतर उत्पादन या अनुकूलन क्षमता प्राप्त करने के लिए विकसित की जाती हैं; इसके उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 12. निम्न में से मुर्गियों की देशी नस्ल है:
(a) व्हाइट लेगहार्न
(b) रोडे आइलैंड रैड
(c) ससेक्स
(d) इनमें से कोई भी नहीं।
Answer: (d) इनमें से कोई भी नहीं।
In simple words: व्हाइट लेगहार्न, रोडे आइलैंड रैड और ससेक्स सभी विदेशी नस्लें हैं, जो मुर्गी पालन में अंडे और मांस उत्पादन के लिए लोकप्रिय हैं।

🎯 Exam Tip: मुर्गी की देशी और विदेशी नस्लों को उनके विशिष्ट उपयोग (जैसे अंडे या मांस उत्पादन) के साथ याद रखें।

 

Question 13. बसरा, असील मुर्गियों की
(a) विदेशी नस्ल हैं
(b) देशी नस्ल हैं।
(c) संकर नस्ल हैं,
(d) परिवर्तित नस्ल हैं।
Answer: (b) देशी नस्लें हैं।
In simple words: बसरा और असील भारत की पारंपरिक देशी मुर्गी नस्लें हैं जो अपनी लड़ाई की क्षमता (असील) और मांस उत्पादन (बसरा) के लिए जानी जाती हैं।

🎯 Exam Tip: देशी नस्लों को उनकी उत्पत्ति और पारंपरिक उपयोग के संदर्भ में समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 14. मुर्गियों की संकर नस्ल है
(a) व्हाइट लेगहार्न
(b) JLS-82
(c) बसरा
(d) असील ।
Answer: (b) JLS-82
In simple words: JLS-82 मुर्गियों की एक संकर नस्ल है जिसे बेहतर अंडे या मांस उत्पादन के लिए विकसित किया गया है, जबकि व्हाइट लेगहार्न, बसरा और असील विशिष्ट मूल नस्लें हैं।

🎯 Exam Tip: संकर नस्लों को उनके मूल नस्लों और उनके विकास के उद्देश्यों के साथ पहचानना सीखें।

 

Question 15. कौन-सी मीठे जल की मछली नहीं है
(a) हिल्सा
(b) कटला
(c) रोहू
(d) टीरीका ।
Answer: (a) हिल्सा
In simple words: हिल्सा एक समुद्री और खारे पानी की मछली है, जबकि कटला, रोहू और टीरीका मीठे जल की मछलियाँ हैं जो नदियों और तालाबों में पाई जाती हैं।

🎯 Exam Tip: जलीय कृषि में मीठे जल और खारे जल की मछलियों के प्रकारों को जानना मत्स्य पालन से संबंधित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 16. उन्नत कृषि कहलाती है
(a) पर्यावरणीय कृषि
(b) कार्बनिक कृषि
(c) टिकाऊ कृषि
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: उन्नत कृषि में पर्यावरणीय, कार्बनिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियाँ शामिल हैं, जो पर्यावरण संरक्षण, रासायनिक मुक्त उत्पादन और दीर्घकालिक स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करती हैं।

🎯 Exam Tip: आधुनिक कृषि की विभिन्न अवधारणाओं, जैसे जैविक और टिकाऊ कृषि, को उनके मुख्य सिद्धांतों और लाभों के साथ समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 17. फसल-चक्र के प्रकार होते हैं
(a) एकवर्षीय
(b) द्विवर्षीय
(c) बहुवर्षीय
(d) ये सभी ।
Answer: (d) ये सभी ।
In simple words: फसल-चक्र में विभिन्न प्रकार की फसलें शामिल हो सकती हैं, जिनमें एकवर्षीय, द्विवर्षीय और बहुवर्षीय फसलें शामिल हैं, जिन्हें मिट्टी की उर्वरता और फसल विविधता बनाए रखने के लिए अनुक्रम में उगाया जाता है।

🎯 Exam Tip: फसल चक्र के विभिन्न प्रकारों और उनके महत्व को याद रखें, क्योंकि यह कृषि पद्धतियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

Question 18. सर्वाधिक दूध देने वाली गाय की संकर नस्ल
(a) करन स्विस
(b) करन फ्राई
(c) जरसिंध
(d) जर्सी
Answer: (c) जरसिंध
In simple words: जरसिंध गाय की एक संकर नस्ल है जिसे उच्च दुग्ध उत्पादन के लिए विकसित किया गया है, जो देशी और विदेशी नस्लों के गुणों को जोड़ती है।

🎯 Exam Tip: उच्च उत्पादन क्षमता वाली संकर नस्लों पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि वे पशुपालन के आर्थिक महत्व से जुड़ी होती हैं।

 

Question 19. बारीक एवं मुलायम ऊन के लिए प्रसिद्ध भेड़ की नस्ल है-
(a) बीकानेरी
(b) मेरीनो
(c) मारबाड़ी
(d) हिसार।
Answer: (b) मेरीनो
In simple words: मेरीनो भेड़ अपनी अत्यंत बारीक और मुलायम ऊन के लिए विश्व प्रसिद्ध है, जिसका उपयोग उच्च गुणवत्ता वाले वस्त्रों के निर्माण में किया जाता है।

🎯 Exam Tip: पशुओं की नस्लों को उनके विशिष्ट उत्पादों (जैसे ऊन, दूध, मांस) और गुणों के साथ याद रखें।

 

Question 20. संसार की सर्वाधिक अण्डा उत्पादक मुर्गी की नस्ल
(a) असील
(b) चिटगांव
(c) कड़कनाथ
(d) ह्वाइट लैग हॉर्न
Answer: (d) ह्वाइट लैग हॉर्न
In simple words: ह्वाइट लैग हॉर्न मुर्गी की नस्ल अपनी असाधारण अंडे देने की क्षमता के लिए विश्वभर में जानी जाती है, जिससे यह व्यावसायिक अंडे उत्पादन के लिए एक पसंदीदा विकल्प है।

🎯 Exam Tip: पोल्ट्री फार्मिंग में अंडे और मांस उत्पादन के लिए विभिन्न नस्लों की पहचान करना महत्वपूर्ण है।

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