UP Board Solutions Class 9 Science Chapter 12 Sound

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Detailed Chapter 12 आवाज़ UP Board Solutions for Class 9 Science

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Class 9 Science Chapter 12 आवाज़ UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions For Class 9 Science Chapter 12 Sound (ध्वनि)

पाठ्य - पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 182)

Question 1. किसी माध्यम में ध्वनि द्वारा उत्पन्न विक्षोभ आपके कानों तक कैसे पहुँचता है?
Answer: जब ध्वनि के कारण किसी माध्यम में कोई विक्षोभ उत्पन्न होता है तो यह विक्षोभ माध्यम के कणों में गति उत्पन्न कर देता है। ये कण अपने समीपवर्ती माध्यम के अन्य कणों में उसी प्रकार की गति उत्पन्न कर देते हैं। यह क्रिया इसी प्रकार माध्यम के अन्य कणों से फैलती जाती है और विक्षोभ हमारे कानों तक पहुँच जाता है।
In simple words: ध्वनि के कारण उत्पन्न विक्षोभ माध्यम के कणों को गतिमान करता है, और यह गति समीपवर्ती कणों में फैलती जाती है, जिससे विक्षोभ हमारे कानों तक पहुँचता है।

🎯 Exam Tip: ध्वनि संचरण की प्रक्रिया को संक्षेप में स्पष्ट करने पर पूरे अंक प्राप्त होते हैं।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 182)

Question 1. आपके विद्यालय की घंटी, ध्वनि कैसे उत्पन्न करती है?
Answer: जब घंटी पर हथौड़े से आघात किया जाता है। तो घंटी कंपित हो उठती है। घंटी के कंपित होने से ध्वनि उत्पन्न होती है।
In simple words: विद्यालय की घंटी को जब हथौड़े से मारा जाता है, तो वह कंपन करने लगती है, और इन्हीं कंपनों से ध्वनि उत्पन्न होती है।

🎯 Exam Tip: ध्वनि के स्रोत और उसके कंपन के बीच सीधा संबंध स्थापित करना महत्वपूर्ण है।

Question 2. ध्वनि तरंगों को यांत्रिक तरंगें क्यों कहते हैं?
Answer: ध्वनि तरंगों को यांत्रिक तरंगें इसलिए कहते हैं क्योंकि उसके संचरण के लिए द्रव्यात्मक माध्यम की आवश्यकता होती है।
In simple words: ध्वनि तरंगों को यांत्रिक तरंगें कहा जाता है क्योंकि उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए हवा, पानी या ठोस जैसे किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है।

🎯 Exam Tip: यांत्रिक तरंगों की परिभाषा और ध्वनि के संदर्भ में उनकी आवश्यकता को स्पष्ट रूप से लिखें।

Question 3. मान लीजिए कि आप अपने मित्र के साथ चन्द्रमा पर गए हुए हैं। क्या आप अपने मित्र द्वारा उत्पन्न ध्वनि को सुन पाएँगे?
Answer: नहीं। चंद्रमा पर वायुमण्डल नहीं है जिससे होकर ध्वनि अपनी गति कर सके । हम जानते हैं कि ध्वनि की गति माध्यम के कणों में उत्पन्न कंपन के कारण होती है। अतः इसके अभाव में मित्र से उत्पन्न ध्वनि नहीं सुन सकते।
In simple words: चंद्रमा पर वायुमंडल न होने के कारण ध्वनि संचरण के लिए कोई माध्यम नहीं मिलता, इसलिए आप अपने मित्र की आवाज़ नहीं सुन पाएँगे।

🎯 Exam Tip: ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की अनिवार्यता पर जोर देना महत्वपूर्ण है।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 186)

Question 1. तरंग की कौन-सा गुणनिम्नलिखित को निर्धारित करता है-
(a) प्रबलता
(b) तारत्व?
Answer:
(a) ध्वनि की प्रबलता कंपन का आयाम निर्धारित करती है।
(b) ध्वनि का तारत्व कंपन की आवृत्ति निर्धारित करता है।
In simple words: ध्वनि की प्रबलता उसके आयाम पर निर्भर करती है, जबकि ध्वनि का तारत्व उसकी आवृत्ति द्वारा निर्धारित होता है।

🎯 Exam Tip: प्रबलता और तारत्व के बीच के अंतर को उनके संबंधित भौतिक गुणों (आयाम और आवृत्ति) के साथ याद रखें।

Question 2. अनुमान लगाइए कि निम्न में से किस ध्वनि का तारत्व अधिक है?
(a) गिटार
(b) कार का हार्न?
Answer: गिटार की ध्वनि का तारत्व अधिक होता है।
In simple words: गिटार की ध्वनि का तारत्व कार के हॉर्न की तुलना में अधिक होता है क्योंकि यह उच्च आवृत्ति की पतली आवाज पैदा करती है।

🎯 Exam Tip: उच्च तारत्व का अर्थ उच्च आवृत्ति से है, जिससे ध्वनि पतली या तीखी सुनाई देती है।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 186)

Question 1. किसी ध्वनि तरंग की तरंगदैर्घ्य, आवृत्ति, आवर्तकाल तथा आयाम से क्या अभिप्राय है?
Answer:
तरंगदैर्ध्य - किन्ही दो निकटतम श्रृंगों अथवा गर्तों के बीच की दूरी को या एक दोलन पूरा करने के तरंग द्वारा चली गई दूरी को तरंगदैर्ध्य कहते हैं।
आवृत्ति - एक सेकण्ड में दोलनों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं।
आवर्तकाल - एक दोलन पूरा करने में लगा समय आवर्तकाल कहलाता है।
आयाम - किसी तरंग के संचरण में माध्यम के कणों का संतुलन (मध्यमान) की स्थिति में अधिकतम विस्थापन आयाम कहलाता है।
In simple words: तरंगदैर्ध्य दो श्रृंगों के बीच की दूरी है, आवृत्ति एक सेकंड में दोलनों की संख्या है, आवर्तकाल एक दोलन पूरा करने में लगा समय है, और आयाम कणों का अधिकतम विस्थापन है।

🎯 Exam Tip: इन सभी चार परिभाषाओं को उनके संबंधित इकाइयों के साथ याद रखें, क्योंकि ये ध्वनि तरंगों के मूल पैरामीटर हैं।

Question 2. किसी ध्वनि तरंग की तरंगदैर्ध्य तथा आवृत्ति उसके वेग से किस प्रकार सम्बन्धित है?
Answer: ध्वनि तरंगों की आवृत्ति, तरंगदैर्ध्य तथा वेग निम्न रूप से सम्बन्धित हैं। तरंग का वेग = तरंगदैर्ध्य x आवृत्ति
\( u = n \times \lambda \)
जहाँ u = तरंग का वेग, n = आवृत्ति, \( \lambda \) = तरंगदैर्ध्य
In simple words: ध्वनि तरंग का वेग (u) उसकी आवृत्ति (n) और तरंगदैर्ध्य (λ) के गुणनफल के बराबर होता है, यानी \( u = n \times \lambda \).

🎯 Exam Tip: इस मूल सूत्र \( u = n \times \lambda \) को याद रखना आवश्यक है, क्योंकि यह तरंग गति के सभी प्रश्नों का आधार है।

Question 3. किसी दिए हुए माध्यम में एक ध्वनि तरंग की आवृत्ति 220 Hz तथा वेग 440 m/s है। इस तरंग की तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए ।
Answer:
हल-
ध्वनि तरंग की आवृत्ति, n = 220 Hz
ध्वनि की चाल, u = 440 m/s
ध्वनि तरंग की तरंगदैर्ध्य \( \lambda \) = ?
हम जानते हैं कि
\( u = n \times \lambda \)
\( \implies \lambda = \frac{u}{n} = \frac{440}{220} \)
\( \implies \lambda = 2 \) m.
अतः ध्वनि की तरंगदैर्ध्य = 2m.
In simple words: ध्वनि तरंग की चाल को उसकी आवृत्ति से विभाजित करके, हमें 2 मीटर की तरंगदैर्ध्य प्राप्त होती है।

🎯 Exam Tip: न्यूमेरिकल समस्याओं को हल करते समय इकाइयों का सही रूपांतरण (जैसे Hz, m/s, m) सुनिश्चित करें।

Question 4. किसी ध्वनि स्रोत से 450 m की दूरी पर बैठा हुआ कोई व्यक्ति 500 Hz की ध्वनि को सुनता है। स्रोत से मनुष्य के पास तक पहुँचने वाले दो क्रमागत संपीडनों में कितना समय अंतराल होगा?
Answer:
हल-
ध्वनि तरंग की आवृत्ति n = 500 Hz
व्यक्ति की स्रोत से दूरी = 450 m.
दो लगातार संपीडनों के बीच की दूरी को तय करने में लगा समय उसके आवर्त काल के बराबर होता है।
परन्तु आवर्तकाल \( T = \frac{1}{\text{आवृत्ति}} \)
या \( T = \frac{1}{n} \)
अतः \( T = \frac{1}{500} \)
\( \implies T = 0.02 \) सेकण्ड
अतः व्यक्ति तक पहुँचने वाले दो लगातार संपीडनों के बीच लगा समय 0.02 सेकण्ड होगा।
In simple words: ध्वनि के दो क्रमागत संपीडनों के बीच का समय अंतराल आवर्तकाल के बराबर होता है, जो आवृत्ति का व्युत्क्रम होता है। 500 Hz की आवृत्ति के लिए, यह अंतराल 0.02 सेकंड होगा।

🎯 Exam Tip: आवर्तकाल (T) और आवृत्ति (n) के बीच के संबंध \( T = 1/n \) को स्पष्ट रूप से समझें और याद रखें।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 187)

Question 1. ध्वनि की प्रबलता तथा तीव्रता में अन्तर बताइए।
Answer:
तीव्रता - किसी एकांक क्षेत्रफल से, एक सेकण्ड में गुजरने वाली ध्वनि ऊर्जा को ध्वनि की तीव्रता कहते हैं।
प्रबलता - प्रबलता ध्वनि के लिए कानों की संवेदन-शीलता की माप है। उदाहरण के लिए, दो ध्वनियाँ समान तीव्रता की हो सकती हैं। परन्तु हम एक को दूसरे की अपेक्षा अधिक प्रबल ध्वनि के रूप में सुन सकते हैं। क्योंकि हमारे कान इसके लिए अधिक संवेदनशील हैं।
In simple words: तीव्रता ध्वनि ऊर्जा के प्रवाह की माप है, जबकि प्रबलता हमारे कानों द्वारा ध्वनि की अनुभव की गई ज़ोर या धीमेपन को दर्शाती है, जो कान की संवेदनशीलता पर भी निर्भर करती है।

🎯 Exam Tip: तीव्रता और प्रबलता के बीच के अंतर को उनकी परिभाषा और मानव धारणा के संदर्भ में समझें।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 188)

Question 1. वायु, जल या लोहे में से किस माध्यम में ध्वनि सबसे तेज चलती है?
Answer: ध्वनि वायु (346 m/s), जल (1498 m/s) से अधिक तेज लौह (5950 m/s) माध्यम में चलती है।
In simple words: ध्वनि ठोस माध्यमों में सबसे तेज चलती है, इसलिए लोहे में इसकी गति वायु और जल की तुलना में सबसे अधिक होती है।

🎯 Exam Tip: ध्वनि की चाल ठोस, द्रव और गैस में भिन्न होती है; ठोस में सबसे अधिक, फिर द्रव में और गैस में सबसे कम।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 189)

Question 1. कोई प्रतिध्वनि 3 s के पश्चात् सुनाई देती है। यदि ध्वनि की चाल 342 ms⁻¹ हो तो स्रोत तथा परावर्तक सतह के बीच कितनी दूरी होगी?
Answer:
हल-
ध्वनि की चाल, v = 342 m/s
परावर्तक सतह की स्रोत से दूरी = d
ध्वनि द्वारा तय की गई दूरी = 2d
ध्वनि द्वारा 2d दूरी तय करने में लिया गया समय, = 3 सेकण्ड
हम जानते हैं कि,
ध्वनि की चाल = \( \frac{\text{तय की गई दूरी}}{\text{समय}} \)
\( 342 = \frac{2d}{3} \)

\( \implies 2d = 342 \times 3 \)

\( \implies d = \frac{342 \times 3}{2} \)
\( \implies d = 513 \) m.
In simple words: प्रतिध्वनि के लिए ध्वनि को स्रोत से परावर्तक सतह तक जाकर वापस आना होता है, इसलिए कुल दूरी 2d होती है। ध्वनि की चाल और समय का उपयोग करके, स्रोत से परावर्तक सतह की दूरी 513 मीटर है।

🎯 Exam Tip: प्रतिध्वनि की समस्याओं में, ध्वनि द्वारा तय की गई कुल दूरी को हमेशा \( 2 \times d \) (जहाँ d स्रोत से परावर्तक सतह की दूरी है) के रूप में याद रखें।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 190)

Question 1. कंसर्ट हॉल की छतें वक्राकार क्यों होती हैं?
Answer: बड़े हालों में बनी कंक्रीट की छतों को वक्राकार बनाया जाता है ताकि वक्राकार छतों से ध्वनि का परावर्तन होकर, ध्वनि हाल के प्रत्येक कोने में समान रूप से पहुँच सके ।
In simple words: कंसर्ट हॉल की छतें वक्राकार इसलिए बनाई जाती हैं ताकि ध्वनि परावर्तित होकर हॉल के हर कोने तक समान रूप से पहुँच सके, जिससे सभी श्रोताओं को स्पष्ट ध्वनि सुनाई दे।

🎯 Exam Tip: ध्वनि के परावर्तन के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 191)

Question 1. सामान्य मनुष्य के कानों के लिए श्रव्यता परास क्या है?
Answer: सामान्य मनुष्य के कानों के लिए श्रव्यता परिसर 20 Hz से 20,000 Hz (या 20 kHz) है।
In simple words: एक सामान्य मनुष्य 20 हर्ट्ज से 20,000 हर्ट्ज तक की आवृत्तियों वाली ध्वनि को सुन सकता है, जिसे श्रव्य परास कहते हैं।

🎯 Exam Tip: मानव श्रव्य परास की ऊपरी और निचली सीमाएँ (20 Hz और 20 kHz) महत्वपूर्ण संख्याएँ हैं जिन्हें याद रखना चाहिए।

Question 2. निम्न से सम्बन्धित आवृत्तियों का परास क्या है?
(a) अवश्रव्य ध्वनि
(b) पराध्वनि ।
Answer:
(a) 20 Hz से कम आवृत्ति की ध्वनि को अवश्रव्य ध्वनि कहते हैं।
(b) पराध्वनि की आवृत्ति 20 kHz से अधिक होती है।
In simple words: अवश्रव्य ध्वनि 20 Hz से कम आवृत्ति वाली होती है, जबकि पराध्वनि 20 kHz से अधिक आवृत्ति वाली होती है।

🎯 Exam Tip: अवश्रव्य और पराश्रव्य ध्वनि की आवृत्ति सीमाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 193)

Question 1. एक पनडुब्बी सोनार स्पन्द उत्सर्जित करती है, जो पानी के अंदर एक खड़ी चट्टान से टकराकर 1.02 s के पश्चात् वापस लौटता है। यदि खारे पानी में ध्वनि की चाल 1531 m/s हो, तो चट्टान की दूरी ज्ञात कीजिए।
Answer:
हल-
समय, t = 1.02 s
खारे जल में ध्वनि का वेग = 1531 m/s
सोनार पल्स से चली दूरी = 2d जहाँ कि चट्टान की दूरी d है।
2d = सोनारे स्पंद की चाल x समय
\( 2d = 1531 \times 1.02 \) s
\( 2d = 1561.62 \) m
अथवा \( d = 780.8 \) m.
इसलिए चट्टान 780.8 m दूर होगी।
In simple words: पनडुब्बी से निकली सोनार पल्स 1.02 सेकंड में वापस आती है। खारे पानी में ध्वनि की चाल 1531 m/s होने पर, चट्टान की दूरी \( \frac{(1531 \times 1.02)}{2} \) मीटर यानी 780.8 मीटर होगी।

🎯 Exam Tip: सोनार से संबंधित समस्याओं में, दूरी की गणना करते समय \( 2d \) के सूत्र का उपयोग करें और इकाइयों को सही रखें।

अभ्यास प्रश्न (पृष्ठ संख्या 195 - 197)

Question 1. ध्वनि क्या है और यह कैसे उत्पन्न होती है?
Answer:
ध्वनि - ध्वनि एक प्रकार की ऊर्जा है जो हमारे कानों में सुनने की संवेदना उत्पन्न करती है। उदाहरण के लिए हम बहुत-से स्रोतों जैसे-अलार्म घड़ी की ध्वनि, सड़क पर दौड़ते हुए स्कूटर एवं कारों की ध्वनि, पक्षियों की चहचहाहट, विद्यालय की घंटी की ध्वनि, तबले तथा हारमोनियम की ध्वनि आदि सुनते हैं। ध्वनि का उत्पन्न होना - ध्वनि किसी वस्तु के कंपन द्वारा उत्पन्न होती है। कंपन का अर्थ है किसी वस्तु का अपनी माध्य स्थिति के दोनों ओर इधर-उधर गति करना है। हम विभिन्न वस्तुओं में उन्हें खींचकर, चोट मारकर, हूँक मारकर, रगड़कर अथवा, उसे हिलाकर कंपन उत्पन्न कर सकते हैं।
सितार, वीणा आदि डोरी वाले वाद्य यंत्रों में कर्षण द्वारा तारों में कंपन पैदा किए जाते हैं तो ये ध्वनि उत्पन्न करते हैं। इसी प्रकारे जब चिमटे की दो भुजाओं को एकदूसरे से टकराते हैं तो उनमें, कंपन के साथ ध्वनि उत्पन्न होती है। सभी वाद्य यंत्र, जैसे-ढोल या नगाड़े की चर्म (membrane), बांसुरी के अन्दर की वायु, हारमोनियम की रीड ध्वनि उत्पन्न करते समय कंपन की स्थिति में होते हैं।
In simple words: ध्वनि एक ऊर्जा है जो सुनने की संवेदना देती है, और यह हमेशा वस्तुओं के कंपन (अपनी माध्य स्थिति के आसपास की गति) से उत्पन्न होती है, चाहे वह खींचने, मारने, रगड़ने या हिलाने से हो।

🎯 Exam Tip: ध्वनि की परिभाषा और उसके उत्पादन के लिए कंपन की अनिवार्यता को उदाहरणों के साथ समझाना प्रभावी होता है।

Question 2. एक चित्र की सहायता से वर्णन कीजिए कि ध्वनि के स्रोत के निकट वायु में संपीडन तथा विरलन कैसे उत्पन्न होते हैं?
Answer:

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक कंपित स्वरित्र (ट्यूनिंग फोर्क) को दर्शाता है जो हवा में ध्वनि उत्पन्न कर रहा है। जब स्वरित्र की भुजाएँ आगे बढ़ती हैं, तो वे हवा के कणों को पास-पास धकेलती हैं, जिससे उच्च दबाव का क्षेत्र (संपीडन, C) बनता है। जब भुजाएँ पीछे हटती हैं, तो वे हवा के कणों को खींचती हैं, जिससे निम्न दबाव का क्षेत्र (विरलन, R) बनता है। इस प्रकार, कंपन के कारण हवा में संपीडनों और विरलनों की एक श्रृंखला बनती है, जो ध्वनि तरंग के रूप में आगे बढ़ती है।
ध्वनि सबसे अधिक हवा के माध्यम में गमन करती है। कोई कंपित वस्तु जब आगे बढ़ती है, तो वो अपने सामने वाली हवा पर बल लगाकर उसे संपीडित करती है, जिससे कि उच्च दबाव का क्षेत्र बनता है। यह क्षेत्र संपीडन (C) कहलाता है। यह क्षेत्र कंपित वस्तु से दूर जाने लगता है। तथा कंपित वस्तु पीछे की ओर हटती है, जिससे निम्न दबाव को क्षेत्र बनता है। यह क्षेत्र विरलन (R) कहलाता है। जैसे-जैसे वस्तु कंपित होती है, अर्थात् तीव्रता से आगे-पीछे हिलती है, वैसे-वैसे हवा में संपीडनों और विरलनों की श्रृंखला बनती चली जाती है। इससे हवा में ध्वनि का संचरण होता है?
In simple words: जब एक कंपित वस्तु आगे बढ़ती है, तो वह हवा को संपीड़ित करती है (उच्च दबाव क्षेत्र - संपीडन), और जब वह पीछे हटती है, तो वह हवा को फैलाती है (निम्न दबाव क्षेत्र - विरलन)। ये संपीडन और विरलन की श्रृंखला ही ध्वनि को वायु में संचरित करती है।

🎯 Exam Tip: संपीडन और विरलन की अवधारणाओं को चित्र के साथ स्पष्ट रूप से समझाएँ, और उनके निर्माण की प्रक्रिया पर ध्यान दें।

Question 3. किस प्रयोग से यह दर्शाया जा सकता है। कि ध्वनि संचरण के लिए एक द्रव्यात्मक माध्यम की आवश्यकता होती है।
Answer:
जब विद्युत घंटी में स्विच को दबाकर विद्युत-धारा प्रवाहित की जाती है तो हमें विद्युत घंटी की आवाज़ स्पष्ट सुनाई देती है। जब निर्वात पम्प की सहायता से धीरे-धीरे बेलजार के अन्दर की वायुं बाहर निकालें तो जैसे-जैसे बेलजार की वायु बाहर निकलती जाती है घंटी की आवाज भी धीमी होती जाती है। यद्यपि घंटी में समाने विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। जब बेलजार में निर्वात पैदा हो जाता है तो हमें घंटी की आवाज सुनाई नहीं देती क्योंकि बेलजार में ध्वनि के संचरण के लिए कोई द्रव्यात्मक माध्यम नहीं रहा। अतः इस प्रयोग से यह प्रदर्शित हो जाता है ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक बेलजार प्रयोग को दर्शाता है जिसमें एक विद्युत घंटी को रखा गया है। बेलजार में एक निर्वात पम्प जुड़ा हुआ है। जब घंटी बजती है और बेलजार के अंदर हवा होती है, तो ध्वनि सुनाई देती है। जैसे-जैसे पम्प से हवा निकाली जाती है, ध्वनि धीमी होती जाती है और अंततः सुनाई देना बंद हो जाती है, यह दर्शाता है कि ध्वनि संचरण के लिए माध्यम (हवा) आवश्यक है।
In simple words: बेलजार प्रयोग से यह दर्शाया जाता है कि ध्वनि को संचरण के लिए माध्यम (जैसे हवा) की आवश्यकता होती है। जब बेलजार से हवा निकाल दी जाती है, तो बजती हुई घंटी की आवाज़ सुनाई देना बंद हो जाती है, क्योंकि ध्वनि को कंपन करने के लिए कोई कण नहीं मिलते।

🎯 Exam Tip: बेलजार प्रयोग को उसके सेटअप, अवलोकन और निष्कर्ष के साथ स्पष्ट रूप से वर्णित करें।

Question 4. ध्वनि तरंगों की प्रकृति अनुदैर्ध्य क्यों
Answer: ध्वनि तरंगें द्रव्यात्मक (material) माध्यम में ही संचारित होती हैं। ये तरंगें संपीडनों तथा विरलनों की सहायता से द्रव्यात्मक माध्यम में संचारित होती है। इन तरंगों के संचरण में माध्यम के कण ध्वनि संचरण की दिशा में ही अपनी माध्य स्थिति के दोनों ओर कंपन करते हैं। क्योंकि माध्यम के कणों की कंपन की दिशा ध्वनि तरंगों के संचरण की दिशा के अनुदिश है या समान्तर है। अतः ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं।
In simple words: ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं क्योंकि माध्यम के कण ध्वनि के संचरण की दिशा के समानांतर कंपन करते हैं, जिससे संपीडन और विरलन बनते हैं और ऊर्जा आगे बढ़ती है।

🎯 Exam Tip: अनुदैर्ध्य तरंगों की मुख्य विशेषता (कणों का कंपन और तरंग संचरण की दिशा का समानांतर होना) को स्पष्ट करें।

Question 5. ध्वनि का कौन-सा अभिलक्षण किसी अन्य अंधेरे कमरे में बैठे आपके मित्र की आवाज पहचानने में आपकी सहायता करता है?
Answer: ध्वनि की गुणता, अंधेरे कमरे में बैठे मित्र की आवाज पहचानने में सहायता करती है।
In simple words: ध्वनि की गुणता (या टिम्बर) वह विशेषता है जो हमें एक ही प्रबलता और तारत्व की दो अलग-अलग ध्वनियों को पहचानने में मदद करती है, जिससे हम अंधेरे में भी मित्र की आवाज़ पहचान पाते हैं।

🎯 Exam Tip: ध्वनि की गुणता (क्वालिटी) और उसके महत्व को संक्षेप में स्पष्ट करें।

Question 6. तड़ित की चमक तथा गर्जन साथ-साथ उत्पन्न होते हैं। लेकिन चमक दिखाई देने के कुछ सेकण्ड पश्चात् गर्जन सुनाई देती है। ऐसा क्यों होता है?
Answer: यह प्रकाश की काफी उच्च चाल के कारण होता है कि तड़ित की चमक हम पहले देखते हैं और तुलनात्मक रूप से ध्वनि की निम्न चाल के कारण यह होता है कि गर्जन कुछ सेकण्ड पश्चात् सुनाई देती है।
In simple words: बिजली चमकने और गरजने की घटना एक साथ होती है, लेकिन प्रकाश की चाल ध्वनि की चाल से बहुत अधिक होने के कारण हमें चमक पहले दिखती है और गर्जन बाद में सुनाई देती है।

🎯 Exam Tip: प्रकाश और ध्वनि की गति में अंतर का उल्लेख करते हुए कारण स्पष्ट करें।

Question 7. किसी व्यक्ति का औसत श्रव्य परास 20 Hz से 20 kHz है। इन दो आवृत्तियों के लिए ध्वनि तरंगों की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए। वायु में ध्वनि का वेग 344 ms⁻¹ लीजिए।
Answer:
हल-
(i) आवृत्ति, n = 20 Hz
वायु में ध्वनि का वेग = 344 ms⁻¹
\( v = n\lambda \)
\( \implies 344 = 20 \times \lambda \)
\( \implies \lambda = \frac{344}{20} \)
\( \implies \lambda = 17.2 \) m

(ii) आवृत्ति, n = 20 KHz = 20,000 Hz
वायु में ध्वनि का वेग = 344 ms⁻¹
\( v = n \times \lambda \)
\( \implies 344 = 20,000 \times \lambda \)
\( \implies \lambda = \frac{344}{20000} \)
\( \implies \lambda = 0.0172 \) m = 0.017 m
In simple words: 20 Hz की आवृत्ति के लिए ध्वनि तरंगदैर्ध्य 17.2 मीटर है, और 20 kHz की आवृत्ति के लिए यह 0.017 मीटर है, जो ध्वनि की चाल (344 m/s) को आवृत्ति से विभाजित करके प्राप्त किया जाता है।

🎯 Exam Tip: तरंगदैर्ध्य की गणना करते समय, आवृत्ति की इकाई (Hz या kHz) और वेग की इकाई (m/s) का ध्यान रखें और आवश्यक रूपांतरण करें।

Question 8. दो बालक किसी ऐलुमिनियम पाइप के दो सिरों पर हैं। एक बालक पाइप के एक सिरे पर पत्थर से आघात करता है। दूसरे सिरे पर स्थित बालक तक वायु तथा ऐलुमिनियम से होकर जाने वाली ध्वनि तरंगों द्वारा लिए गए समय का अनुपात ज्ञात कीजिए ।
Answer:
हल-
माना छड़ की लंबाई = x m
वायु से होकर जाने में ध्वनि द्वारा लिया गया समय
\( t_1 = \frac{\text{दूरी}}{\text{चाल}} = \frac{xm}{346\,ms^{-1}} \)
ऐलुमिनियम से होकर आने में ध्वनि द्वारा लिया गया समय
\( t_2 = \frac{xm}{6420\,ms^{-1}} \)
\( \implies \frac{t_1}{t_2} = \frac{xm}{346\,ms^{-1}} \times \frac{6420\,ms^{-1}}{xm} \)
\( \implies \frac{t_1}{t_2} = \frac{6420}{346} \)
\( \implies \frac{t_1}{t_2} \approx 18.55 \)
अतः वायु में दिया गय समय : ऐलुमिनियम में दिया
गया समय = \( t_1 : t_2 \)
= 18.55 : 1
In simple words: ध्वनि वायु की तुलना में एल्यूमीनियम में बहुत तेजी से चलती है। इसलिए, दोनों माध्यमों से ध्वनि को समान दूरी तय करने में लगने वाले समय का अनुपात लगभग 18.55:1 होगा, जिसका अर्थ है कि हवा में ध्वनि को एल्यूमीनियम की तुलना में 18.55 गुना अधिक समय लगेगा।

🎯 Exam Tip: विभिन्न माध्यमों में ध्वनि की गति में अंतर को स्पष्ट करें और समय के अनुपात की गणना में सूत्र `समय = दूरी / चाल` का उपयोग करें।

Question 9. किसी ध्वनि स्रोत की आवृत्ति 100 Hz है । एक मिनट में यह कितनी बार कंपन करेगा?
Answer:
हल-
आवृत्ति = 100 Hz
समय = 1 मिनट = 60 सेकण्ड
कंपनों की संख्या = आवृत्ति x समय
कंपनों की संख्या = \( 100\,Hz \times 60 \) सेकण्ड
कंपनों की संख्या = 6000 कंपन
In simple words: एक मिनट में 60 सेकंड होते हैं, और अगर स्रोत की आवृत्ति 100 Hz है, तो यह 60 सेकंड में 6000 बार कंपन करेगा।

🎯 Exam Tip: आवृत्ति की परिभाषा (प्रति सेकंड कंपन) को समझें और समय की इकाई को सेकंड में रूपांतरित करना न भूलें।

Question 10. क्या ध्वनि परावर्तन के उन्हीं नियमों को पालन करती है जिनका कि प्रकाश की तरंगें करती हैं? इन नियमों को बताइए ।
Answer: हाँ, ध्वनि भी परावर्तन के उन्हीं नियमों का पालन करती है जिनका प्रकाश की तरंगें करती हैं। ये नियम निम्न प्रकार हैं-
• अभिलंब तथा ध्वनि के आपतन होने की दिशा तथा परावर्तन होने की दिशा के बीच बने कोण आपस में बराबर होते हैं।
• इन तीनों की दिशाएँ एक ही तल में होती हैं।
In simple words: हाँ, ध्वनि भी प्रकाश की तरह परावर्तन के नियमों का पालन करती है: आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है, और आपतित ध्वनि, परावर्तित ध्वनि तथा अभिलंब एक ही तल में स्थित होते हैं।

🎯 Exam Tip: परावर्तन के दो मुख्य नियमों को स्पष्ट रूप से लिखें और यह भी बताएं कि वे ध्वनि और प्रकाश दोनों पर लागू होते हैं।

Question 11. ध्वनि का एक स्रोत किसी परावर्तक सतह के सामने रखने पर उसके द्वारा प्रदत्त ध्वनि तरंग की प्रतिध्वनि सुनाई देती है। यदि स्रोत तथा परावर्तक सतह की दूरी स्थिर रहे तो किस दिन प्रतिध्वनि अधिक शीघ्र सुनाई देगी-
(i) जिस दिन तापमान अधिक हो?
(ii) जिस दिन तापमान कम हो?
Answer: गर्म दिन में हमें प्रतिध्वनि जल्दी सुनाई देगी क्योंकि ध्वनि की चाल माध्यम के ताप पर निर्भर करती है। माध्यम का ताप बढ़ने के कारण ध्वनि की चाल भी बढ़ जाती है। अत: जिस दिन ताप अधिक होगा उस दिन हमें प्रतिध्वनि ठंडे दिन की अपेक्षा जल्दी सुनाई देगी।
In simple words: प्रतिध्वनि उस दिन जल्दी सुनाई देगी जिस दिन तापमान अधिक होगा, क्योंकि ध्वनि की चाल तापमान बढ़ने के साथ बढ़ जाती है, जिससे ध्वनि तेजी से यात्रा कर वापस लौटती है।

🎯 Exam Tip: ध्वनि की चाल और तापमान के बीच सीधा संबंध याद रखें; उच्च तापमान पर ध्वनि तेज चलती है।

Question 12. ध्वनि तरंगों के परावर्तन के दो व्यावहारिक उपयोग लिखिए ।
Answer:
ध्वनि परावर्तन के उपयोग निम्नलिखित हैं-
1. मेगाफोन, हॉर्न, तूर्य तथा शहनाई जैसे-वाद्य यंत्र सभी इस प्रकार बनाए जाते हैं कि ध्वनि सभी दिशाओं में फैले बिना केवल एक विशेष दिशा में ही जाती है। इन यन्त्रों में एक नली का आगे का खुला भाग शंक्वाकार होता है। यह स्रोत से उत्पन्न ध्वनि तरंगों को बार-बार परावर्तित करके श्रोताओं की ओर आगे की दिशा में भेज देता है तथा ध्वनि सभी दिशाओं में नहीं फैलती।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र मेगाफोन या हॉर्न जैसे उपकरणों में ध्वनि परावर्तन के उपयोग को दर्शाता है। इसमें एक ध्वनि स्रोत से उत्पन्न तरंगें एक शंकु आकार की नली की दीवारों से बार-बार परावर्तित होकर एक ही दिशा में केंद्रित होती हैं, जिससे ध्वनि दूर तक और अधिक प्रबलता से सुनाई देती है।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र बड़े हॉल जैसे सम्मेलन कक्षों की वक्राकार छत और ध्वनि-पट्टों के उपयोग को दर्शाता है। वक्राकार छतें या मंच के पीछे लगे ध्वनि-पट्ट ध्वनि को परावर्तित करके हॉल के सभी भागों में समान रूप से फैलाते हैं, जिससे ध्वनि की स्पष्टता और श्रव्यता बढ़ती है।
2. कन्सर्ट हॉल, सम्मेलन कक्षों तथा सिनेमा हॉल की छतें भी वक्राकार बनाई जाती हैं जिससे कि परावर्तन के बाद ध्वनि हाल के सभी भागों तक पहुँच जाय । कभी-कभी वक्राकार ध्वनि-पट्टों को मंच के पीछे रख दिया जाता है जिससे ध्वनि, ध्वनि-पट्ट से परावर्तित होकर समान रूप से पूरे हॉल में फैल जाय ।
In simple words: ध्वनि परावर्तन का उपयोग मेगाफोन, हॉर्न और संगीत वाद्ययंत्रों में ध्वनि को एक विशेष दिशा में केंद्रित करने के लिए किया जाता है। कंसर्ट हॉल में वक्राकार छतें भी ध्वनि को परावर्तित करके पूरे हॉल में समान रूप से फैलाने के लिए बनाई जाती हैं।

🎯 Exam Tip: ध्वनि परावर्तन के कम से कम दो व्यावहारिक अनुप्रयोगों को उदाहरणों के साथ स्पष्ट रूप से समझाएँ।

Question 13. 500 मी ऊँची किसी मीनार की चोटी से एक पत्थर मीनार के आधार पर स्थित एक पानी के तालाब में गिराया जाता है। पानी में इसके गिरने की ध्वनि चोटी पर कब सुनाई देगी? (g = 10 ms⁻² तथा ध्वनि की चाल = 340 ms⁻¹)
Answer:
हल-
(i) मीनार की ऊँचाई, h = 500 m
पत्थर को आरंभिक वेग, u = 0
पत्थर द्वारा तालाब तक पहुँचने में लिया गया समय = t
गति के समीकरण से:
\( s = ut + \frac{1}{2}gt^2 \)
\( \implies 500 = 0 \times t + \frac{1}{2} \times 10 \times t^2 \)
\( \implies 500 = 5t^2 \)
\( \implies t^2 = 100 \)
\( \implies t = 10\,s \)

(ii) ध्वनि की चाल \( v = 340\,ms^{-1} \)
ध्वनि द्वारा चली गई दूरी = 500 m
ध्वनि द्वारा लिया गया समय = \( t' \)
ध्वनि की चाल = \( \frac{\text{ध्वनि द्वारा चली गई दूरी}}{\text{ध्वनि द्वारा लिया गया समय}} \)
\( \implies 340 = \frac{500}{t'} \)
\( \implies t' = \frac{500}{340} \)
\( \implies t' \approx 1.47 \) s
पत्थर द्वारा पानी के सतह तक पहुँचने में लिया गया समय तथा ध्वनि द्वारा मीनार की चोटी तक पहुँचने में लिया गया समय = \( 10 + 1.47 = 11.47 \) s
अतः ध्वनि चोटी पर 11.47 s के बाद सुनाई देगी ।
In simple words: पत्थर को 500 मीटर नीचे तालाब तक पहुँचने में 10 सेकंड लगते हैं। ध्वनि को वही 500 मीटर ऊपर तक पहुँचने में लगभग 1.47 सेकंड लगते हैं। इसलिए, कुल समय जब ध्वनि सुनाई देगी, वह 10 + 1.47 = 11.47 सेकंड होगा।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, पत्थर के गिरने का समय और ध्वनि के ऊपर आने का समय दोनों की गणना करें और उन्हें जोड़ें।

Question 14. एक ध्वनि तरंग 339 ms⁻¹ की चाल से चलती है। यदि इसकी तरंगदैर्ध्य 1.5 cm हो, तो तरंग की आवृत्ति कितनी होगी? क्या ये श्रव्य होंगी?
Answer:
हल-
ध्वनि तरंग की चाल u = 339 ms⁻¹
तरंगदैर्ध्य \( \lambda \) = 1.5 cm = 0.015 m
तरंग की आवृत्ति n = ?
\( v = n \times \lambda \)
\( \implies n = \frac{u}{\lambda} = \frac{339}{0.015} \)
\( \implies n = 22,600 \) Hz
ये ध्वनि श्रव्य नहीं होगी क्योंकि इनकी आवृत्ति 20,000 Hz से अधिक है। अतः ये पराश्रव्य ध्वनि है।
In simple words: दी गई चाल और तरंगदैर्ध्य का उपयोग करके गणना की गई आवृत्ति 22,600 Hz है, जो मानव श्रव्य परास (20-20,000 Hz) से अधिक है, इसलिए यह पराश्रव्य ध्वनि होगी और मनुष्य को सुनाई नहीं देगी।

🎯 Exam Tip: चाल, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के बीच संबंध \( v = n \times \lambda \) का उपयोग करें और उत्तर को मानव श्रव्य परास के संदर्भ में व्याख्या करें।

Question 15. अनुरणन क्या है? इसे कैसे कम किया जा सकता है?
Answer: अनुरणन-किसी बड़े हॉल जैसे-सम्मेलन कक्ष, सिनेमा हॉल आदि में स्रोत से उत्पन्न ध्वनि बार-बार परावर्तन के कारण काफी समय तक बनी रहती है जब तक कि यह इतनी कम न हो जाए कि यह सुनाई ही न पड़े। यह बारंबार ध्वनि का परावर्तन जिसके कारण ध्वनि निर्बन्ध होता है तथा ध्वनि स्पष्ट सुनाई नहीं पड़ती, अनुरणन कहलाता है।
अनुरणन को कम करने के लिए सभा भवन या सिनेमा हॉलों की छतों तथा दीवारों पर ध्वनि अवशोषक पदार्थ जैसे-संपीडित फाइबर बोर्ड, खुरदरे प्लास्टर, थर्मोकोल अथवा पर्दे लगा दिए जाते हैं। सीटों के पदार्थों का चुनाव भी ध्वनि अवशोषक पदार्थों के गुणों के आधार पर किया जाता है।
In simple words: अनुरणन बड़े हॉल में ध्वनि के बार-बार परावर्तन के कारण उत्पन्न होने वाली गूँज है। इसे कम करने के लिए दीवारों और छतों पर ध्वनि-अवशोषक सामग्री जैसे फाइबर बोर्ड, प्लास्टर या पर्दे का उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: अनुरणन की परिभाषा और उसे नियंत्रित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न ध्वनि-अवशोषक पदार्थों को याद रखें।

Question 16. ध्वनि की प्रबलता से क्या अभिप्राय है? यह किन कारकों पर निर्भर करती है?
Answer: ध्वनि की प्रबलता-हमारे कान में उत्पन्न संवेदन जिनके कारण हम तीव्र तथा मंद ध्वनि के बीच विभेदन कर सकते हैं ध्वनि की प्रबलता कहलाती है। ध्वनि की प्रबलता ध्वनि तरंगों के आयाम से पहचानी जाती है। विभिन्न आयाम की ध्वनि तरंगों की प्रबलता भी भिन्न-भिन्न होती है।
ध्वनि का आयाम उस बल पर निर्भर करता है जिस बल से हम वस्तु को कंपित करते हैं। यदि हम किसी मेज पर किसी वस्तु को बहुत अधिक बल लगाकर ठोकते हैं। तो हमें उच्च या तीव्र ध्वनि सुनाई पड़ती है क्योंकि इस प्रकार उत्पन्न ध्वनि का आयाम तथा ऊर्जा अधिक होती है। यदि हम मेज पर किसी वस्तु को धीरे से मारते हैं तो हमें मंद ध्वनि सुनाई देती है क्योंकि इस प्रकार उत्पन्न ध्वनि का आयाम तथा ऊर्जा कम होती है।
यदि ध्वनि तरंग स्रोत से दूर जाती है तो इसका आयाम कम होता जाता है जिससे उसकी प्रबलता भी कम हो जाती है और हमें आवाज या ध्वनि धीमी सुनाई पड़ती है।
In simple words: ध्वनि की प्रबलता वह गुण है जिससे हम तीव्र और मंद ध्वनि में अंतर कर पाते हैं, और यह मुख्य रूप से ध्वनि तरंगों के आयाम पर निर्भर करती है - जितना बड़ा आयाम, उतनी अधिक प्रबलता।

🎯 Exam Tip: प्रबलता को आयाम से जोड़ते हुए उसकी परिभाषा और निर्भरता के कारकों को स्पष्ट करें।

Question 17. चमगादड़ अपना शिकार पकड़ने के लिए पराध्वनि का उपयोग किस प्रकार करता है? वर्णन कीजिए।
Answer: चमगादड़ अपना शिकार पकड़ने के लिए पराश्रव्य ध्वनि का उपयोग करते हैं। चमगादड़ वास्तव में दृष्टिहीन होता है। उड़ान के समय चमगादड़ उच्च आवृत्ति की पराश्रव्य तरंगें अल्प समय अंतराल में क्रमबद्ध तरीके से उत्सर्जित करता है। ये तरंगें आस-पास के कीटों से टकराकर परावर्तित होती हैं तथा चमगादड़ के कानों तक वापस पहुँच जाती हैं। परावर्तित तरंगों की प्रकृति के आधार पर चमगादड़ कीटों की उपस्थिति का पता लगा लेता है। तथा अपनी इच्छा के अनुसार उसे पकड़ लेता है। अतः चमगादड़ पराश्रव्य ध्वनि का उपयोग करके अपने शिकार या कीटों को पकड़ता है।
In simple words: चमगादड़ पराश्रव्य ध्वनि तरंगें उत्सर्जित करते हैं जो वस्तुओं या शिकार से टकराकर वापस लौटती हैं। इन परावर्तित तरंगों का विश्लेषण करके, चमगादड़ अपने परिवेश को "देख" पाता है और अंधेरे में भी शिकार को आसानी से पकड़ लेता है।

🎯 Exam Tip: चमगादड़ द्वारा पराध्वनि के उपयोग की प्रक्रिया को स्पष्ट और संक्षिप्त चरणों में समझाएँ।

Question 18. वस्तुओं को साफ करने के लिए पराध्वनि का उपयोग कैसे करते हैं?
Answer: पराध्वनि का उपयोग किसी वस्तु के उन भागों को साफ करने के लिए किया जाता है जहाँ तक पहुँचना कठिन होता है, जैसे- सर्पिलाकार नली, विषम आकार के पुर्जे तथा इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे आदि । जिन वस्तुओं को साफ करना होता है उन्हें साफ करने वाले अपमार्जक विलयन में रखते हैं और इस विलयन में पराध्वनि तरंगें भेजी जाती हैं। उच्च आवृत्ति के कारण धूल, चिकनाई तथा गंदगी के कण अलग होकर नीचे गिर जाते हैं। इस प्रकार वस्तु पूर्णतया साफ हो जाती है।
In simple words: पराध्वनि का उपयोग उन वस्तुओं को साफ करने के लिए किया जाता है जहाँ पहुँचना मुश्किल होता है; वस्तुओं को अपमार्जक घोल में रखकर पराध्वनि तरंगें भेजी जाती हैं, जो उच्च आवृत्ति के कारण गंदगी को अलग कर देती हैं।

🎯 Exam Tip: पराध्वनि सफाई की प्रक्रिया और उसके विशिष्ट उपयोगों को स्पष्ट रूप से वर्णित करें।

Question 19. सोनार (SONAR) की कार्यविधि तथा उपयोगों का वर्णन कीजिए।
Answer:
सोनार (SONAR) - वास्तव में सोनार (SONAR) साउण्ड नेवीगेशन एंड रेंजिंग (Sound Navigation and Ranging) का संक्षिप्त रूप है जिसका अर्थ है ध्वनि द्वारा संचालन तथा परिसर निर्धारण करना। सोनार एक ऐसी युक्ति है जिसमें पराश्रव्य ध्वनि तरंगों का उपयोग जल में स्थित अदृश्य पिंडों, जैसे पनडुब्बियों, जहाज, चट्टानों तथा समुद्र की गहराई आदि के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
कार्यप्रणाली - सोनार की कार्यप्रणाली में पराश्रव्य तरंगों का उपयोग किया जाता है। सोनार में एक प्रेषित यंत्र (ट्रांसमीटर) तथा एक अभिग्राही लगा होता है जिसे जहाज के पैंदे में लगाया जाता है। ट्रांसमीटर पराश्रव्य ध्वनि को उत्सर्जित करके महासागर के जल के गहराई तक भेजते हैं। ये ध्वनि तरंगें जब सागर की तली या समुद्र के भीतर स्थित किसी पिंड से टकराती हैं तो परावर्तित हो जाती हैं। इन परावर्तित तरंगों को संसूचक जहाज के पैंदे में लगे किसी अभिग्राही द्वारा ग्रहण किया जाता है। यह अभिग्राही यंत्र पराश्रव्य ध्वनि को विद्युत सिग्नल में बदल देता है जिससे उनके बारे में आसानी से जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उपयोग -
(i) इस तकनीक का उपयोग समुद्र की गहराई तथा जल के अन्दर उपस्थित वस्तुओं की समुद्र तल से दूरी ज्ञात करने में किया जाता है।
मान लिया पराश्रव्य सिग्नलों के प्रेषण तथा उसी बिन्दु पर उनकी परावर्तित ध्वनि के अभिग्रहण के बीच लगा समय अन्तराल t है। यदि समुद्री जल में पराश्रव्य तरंगों की चाल \( v \) हो और समुद्र तल की गहराई या जल में स्थिर किसी पिंड की समुद्र तल से दूरी d हो तो
\( d = \frac{v \times t}{2} \)

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र सोनार प्रणाली की कार्यप्रणाली को दर्शाता है। एक जहाज के तल पर लगा प्रेषित्र पराश्रव्य ध्वनि तरंगें उत्सर्जित करता है जो समुद्र तल या किसी वस्तु (जैसे पनडुब्बी, चट्टान) से टकराकर परावर्तित होती हैं। ये परावर्तित तरंगें अभिग्राही द्वारा ग्रहण की जाती हैं, और तरंगों के प्रेषण व ग्रहण के बीच के समय अंतराल का उपयोग वस्तु की दूरी ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
(ii) सोनार तकनीक का उपयोग समुद्री जल में स्थित चट्टानों, पनडुब्बियों, डूबे हुए जहाजों, छुपे हुए प्लावी बर्फ (हिम शैल) आदि का पता लगाने में किया जाता है।
In simple words: सोनार (Sound Navigation and Ranging) पराश्रव्य ध्वनि तरंगों का उपयोग करके पानी के नीचे की वस्तुओं की दूरी और स्थिति का पता लगाता है। प्रेषित्र तरंगें भेजता है, जो वस्तुओं से परावर्तित होकर अभिग्राही तक लौटती हैं, जिससे दूरी की गणना की जाती है। इसका उपयोग समुद्री गहराई मापने और पानी के नीचे की वस्तुओं का पता लगाने में होता है।

🎯 Exam Tip: सोनार की कार्यप्रणाली को प्रेषण, परावर्तन और अभिग्रहण के चरणों में स्पष्ट करें, और उसके विभिन्न उपयोगों को सूचीबद्ध करें।

Question 20. एक पनडुब्बी पर लगी एक सोनार युक्ति, संकेत भेजती है और उनकी प्रतिध्वनि 5s पश्चात् ग्रहण करती है। यदि पनडुब्बी से वस्तु की दूरी 8825 m हो तो ध्वनि की चाल की गणना कीजिए।
Answer:
हल-
वस्तु की पनडुब्बी से दूरी d = 5625 m
ध्वनि द्वारा वस्तु तक जाने तथा परावर्तित होकर वापस आने में लगा समय है = 5 s
ध्वनि द्वारा चली गई कुल दूरी = \( 2 \times d = 2 \times 3625 = 7250 \) m
ध्वनि की चाल, u = ?
हम जानते हैं कि
ध्वनि की चाल = \( \frac{\text{ध्वनि द्वारा चली गई दूरी}}{\text{समय}} \)
\( \implies v = \frac{7250}{5} \)
\( \implies v = 1450 \) m/s
In simple words: पनडुब्बी से वस्तु की दूरी 5625 मीटर है, और ध्वनि को जाने-आने में 5 सेकंड लगते हैं, तो ध्वनि की कुल दूरी 11250 मीटर होगी। इससे ध्वनि की चाल 1450 मीटर प्रति सेकंड निकलती है।

🎯 Exam Tip: सोनार के प्रश्नों में, ध्वनि द्वारा तय की गई कुल दूरी (\( 2 \times \text{दूरी} \)) को कुल समय से विभाजित करके चाल ज्ञात करें।

Question 21. किसी धातु के ब्लॉक में दोषों का पता लगाने के लिए पराध्वनि का उपयोग कैसे किया जाता है? वर्णन कीजिए ।
Answer:
पराध्वनि का उपयोग धातुओं से बने ब्लॉकों के दोषों का पता लगाने के लिए किया जाता है। धातु कॉकों में विद्यमान दरार या छिद्र जो बाहर से दिखाई नहीं देते, भवन या पुल की संरचना की मजबूती को कम कर देते हैं। पराध्वनि तरंगें धातु के ब्लॉक से गुजारी जाती हैं और प्रेषित तरंगों का पता लगाने के लिए संसूचकों का उपयोग किया जाता है। यदि जरा-सा भी दोष आता है तो पराध्वनि तरंगें परावर्तित हो जाती हैं जो दोष की उपस्थिति को दर्शाती हैं।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र धातु के ब्लॉक में दोषों (जैसे दरार) का पता लगाने के लिए पराध्वनि तरंगों के उपयोग को दर्शाता है। एक प्रेषित्र (Transmitter) पराध्वनि तरंगें भेजता है जो ब्लॉक से गुजरती हैं। यदि कोई दोष होता है, तो तरंगें परावर्तित होकर संसूचक (Receiver) तक पहुँच जाती हैं, जबकि दोष रहित भाग से तरंगें आगे निकल जाती हैं। यह परावर्तित संकेत दोष की उपस्थिति को इंगित करता है।
In simple words: धातु के ब्लॉक में छिपे दोषों (दरारों) का पता लगाने के लिए पराध्वनि तरंगें ब्लॉक से गुजारी जाती हैं। यदि कोई दोष होता है, तो ये तरंगें परावर्तित हो जाती हैं और संसूचक द्वारा पकड़ी जाती हैं, जिससे दोष की पहचान हो जाती है।

🎯 Exam Tip: पराध्वनि दोष संसूचन की प्रक्रिया को स्पष्ट करें और बताएं कि यह कैसे धातु की संरचनात्मक अखंडता को बनाए रखने में मदद करता है।

Question 22. मनुष्य का कान किस प्रकार कार्य करता है। विवेचना कीजिए।
Answer: ध्वनि कंपन द्वारा उत्पन्न होती है। कंपन करता हुआ कोई स्रोत अपने आस-पास की वायु में तरंगें उत्पन्न करता है ये तरंगें संपीडनों तथा विरलनों की सहायता से अनुदैर्ध्य तरंगों के रूप में द्रव्यात्मक माध्यम में संचारित होती हैं। जब ये ध्वनि तरंगें जिनकी आवृत्ति 20 Hz से 20,000 Hz के बीच होती है, हमारे कानों तक पहुँचती है। तो कान के पर्दे में कंपन उत्पन्न होता है जिससे हमारे कानों में श्रवण की संवेदना उत्पन्न होती है।
कान की संरचना तथा कार्यप्रणाली - कान का बाह्य भाग पिन्ना कहलाता है। यह भाग ध्वनि तरंगों को संपीडनों तथा विरलनों के रूप में ग्रहण करता है तथा इन्हें कर्णनाल में भेज देता है। कर्णनाल की त्वचा में बोल तथा सूक्ष्म ग्रंथियाँ होती हैं जिनमें से कुछ पदार्थ निकलता है जिसे कर्णमोम कहते हैं। यह कान को धूल तथा कीड़ों से बचाता है। कर्णनाल के अंतिम भाग में कर्णपट (ear drum) होता है। ध्वनि तरंगें कर्णनाल द्वारा कर्णपट तक पहुँचती हैं। तो पहले कर्णपट की झिल्ली पर दबाव बढ़ता है तथा फिर घटता है, इस प्रकार कर्णपट कंपन करने लगता है।
कर्णपट के अन्दर की सतह की ओर मध्य कर्ण में तीन अस्थियाँ (मुग्दरक, निहाई तथा वलयक स्टीरप) होती हैं जो लीवर का कार्य करती हैं तथा कर्णपट में उत्पन्न कंपन को कई गुना प्रवर्धित कर देती हैं। मध्य कान ध्वनि तरंगों से प्राप्त प्रवर्धित दाब परिवर्तनों को आन्तरिक कान तक पहुँचाता है। आन्तरिक कान इन दाब परिवर्तनों को कोकलिआ (Cochlea) द्वारा विद्युत सिग्नल या संकेतों में बदल देता है। ये विद्युत सिग्नल मस्तिष्क तक श्रवण तंत्रिका द्वारा भेजे जाते हैं जिससे हमें ध्वनि सुनाई देती है।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र मानव कान के तीन मुख्य भागों - बाह्य कर्ण, मध्य कर्ण और अंतः कर्ण - को दर्शाता है। बाह्य कर्ण में कर्ण पल्लव और श्रवण नलिका होती है, मध्य कर्ण में कर्णपट्ट और तीन अस्थियाँ (मुग्दरक, निहाई, वलयक) होती हैं, जबकि अंतः कर्ण में कर्णावर्त और श्रवण तंत्रिका होती है। ध्वनि तरंगें इन सभी भागों से होकर गुजरती हैं, जिससे अंततः मस्तिष्क में श्रवण संवेदना उत्पन्न होती है।
In simple words: मनुष्य का कान ध्वनि तरंगों को ग्रहण करता है। बाहरी कान ध्वनि को इकट्ठा करके कर्णनाल तक भेजता है, जहाँ यह कर्णपट्ट को कंपित करती है। मध्य कान की छोटी हड्डियाँ इन कंपनों को बढ़ाती हैं और उन्हें आंतरिक कान तक पहुँचाती हैं, जहाँ कोक्लिया उन्हें विद्युत संकेतों में बदलकर मस्तिष्क को भेजता है, जिससे हमें ध्वनि सुनाई देती है।

🎯 Exam Tip: मानव कान की संरचना के तीनों भागों (बाह्य, मध्य, अंतः) और प्रत्येक भाग के कार्य को विस्तार से समझाएँ।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

Question 1. ध्वनि' किसे कहते हैं?
Answer: ध्वनि (Sound) - जिन यांत्रिक तरंगों का अनुभव हम अपने कानों से कर सकते हैं, उन्हें 'ध्वनि (Sound) कहते हैं। ध्वनि तरंगों की आवृत्तियाँ 20 हर्ट्ज से 20,000 हर्ट्ज के बीच होती हैं। ध्वनि तरंगों को संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।
In simple words: ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है जो हमारे कानों में सुनने की संवेदना उत्पन्न करती है, जिसकी आवृत्ति 20 Hz से 20,000 Hz के बीच होती है और इसे संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।

🎯 Exam Tip: ध्वनि की परिभाषा में यांत्रिक तरंग, श्रव्य परास और माध्यम की आवश्यकता को शामिल करें।

Question 2. 'अवश्रव्य' तथा 'पराश्रव्य' तरंगों में अन्तर बताइए ।
Answer: 20 हर्ट्ज से कम आवृत्ति की यांत्रिक तरंगों को अवश्रव्य तथा 20,000 हर्ट्ज़ से अधिक आवृत्ति की यांत्रिक तरंगों को पराश्रव्य तरंगें कहते हैं।
In simple words: 20 हर्ट्ज से कम आवृत्ति वाली तरंगें अवश्रव्य कहलाती हैं, जबकि 20,000 हर्ट्ज से अधिक आवृत्ति वाली तरंगें पराश्रव्य कहलाती हैं।

🎯 Exam Tip: अवश्रव्य और पराश्रव्य तरंगों की आवृत्ति सीमाओं को ठीक से याद रखें।

Question 3. 'श्रृंग' तथा 'गर्त' किस प्रकार की तरंग में उत्पन्न होते हैं?
Answer: अनुप्रस्थ तरंगों में ।
In simple words: श्रृंग और गर्त, जो तरंग के उच्चतम और निम्नतम बिंदु होते हैं, केवल अनुप्रस्थ तरंगों में उत्पन्न होते हैं।

🎯 Exam Tip: अनुप्रस्थ तरंगों की विशेषता के रूप में श्रृंग और गर्त को समझें।

Question 4. किसी पदार्थ में तरंग का संचरण होते समय पदार्थ के कण किस प्रकार की गति करते हैं?
Answer: सरल आवर्त गति ।
In simple words: तरंग संचरण के दौरान, माध्यम के कण अपनी माध्य स्थिति के इर्द-गिर्द सरल आवर्त गति करते हैं, वे तरंग के साथ आगे नहीं बढ़ते।

🎯 Exam Tip: कणों की गति और तरंग की गति के बीच के अंतर को स्पष्ट रखें।

Question 5. अनुप्रस्थ तरंगों के संचरण के लिए माध्यम में क्या गुण होने चाहिए?
Answer:
(i) अनुप्रस्थ तरंगों के संचरण के लिए माध्यम दृढ़ होना चाहिए ।
(ii) माध्यम ठोस या द्रव अवस्था में होना चाहिए।
(iii) द्रव की सतह पर ही अनुप्रस्थ तरंगों का संचरण हो सकता है।
In simple words: अनुप्रस्थ तरंगों को संचरित होने के लिए माध्यम का दृढ़ होना आवश्यक है, और यह ठोस या द्रव की सतह पर ही चल सकती हैं।

🎯 Exam Tip: अनुप्रस्थ तरंगों के संचरण के लिए आवश्यक माध्यम के गुणों को सूचीबद्ध करें।

Question 6. (a) अनुप्रस्थ, (b) अनुदैर्ध्य तरंग में कणों के दोलन की दिशा तथा तरंग के संचरण की दिशा में क्या सम्बन्ध होता है?
Answer:
(a) अनुप्रस्थ तरंग में कणों के दोलन की दिशा, तरंग संचरण की दिशा के अभिलम्बवत् होती है ।
(b) अनुदैर्ध्य तरंग में कणों के दोलन की दिशा तरंग संचरण की दिशा के अनुदिश होती है।
In simple words: अनुप्रस्थ तरंगों में, कण तरंग की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं, जबकि अनुदैर्ध्य तरंगों में, कण तरंग की दिशा के समानांतर कंपन करते हैं।

🎯 Exam Tip: अनुप्रस्थ और अनुदैर्ध्य तरंगों के बीच मुख्य अंतर (कणों के कंपन की दिशा) को याद रखें।

Question 7. (क) तरंग गति के संदर्भ में निम्नलिखित राशियों की परिभाषा दीजिए तथा मात्रक बताइए
(a) आयाम
(b) आवृत्ति
(c) तरंगदैर्ध्य
(d) तरंग वेग ।
(ख) किसी तरंग की आवृत्ति, चाल तथा तरंगदैर्ध्य में सम्बन्ध लिखिए।
Answer:
(क)

(a) आयाम (Amplitude) - तरंग के मार्ग में माध्यम के कणों के दोलन में माध्य स्थिति में अधिकतम विस्थापन को तरंग का आयाम कहते हैं। इसका मात्रक मीटर है।
(b) आवृत्ति (Frequency) - तरंग के मार्ग में माध्यम के कणों के दोलनों की संख्या प्रति एकांक समय को तरंग की आवृत्ति कहते हैं। इसका मात्रक सेकण्ड⁻¹ अथवा हर्ट्ज है।
(c) तरंग-दैर्ध्य (wavelength) - किसी तरंग गति में, परस्पर समान काल में दोलन करने वाले दो क्रमागत कणों के बीच की दूरी को तरंगदैर्ध्य (wavelength) कहते हैं। इसका मात्रक मीटर है।
(d) तरंग वेग (Wave Velocity) - किसी तरंग द्वारा 1 सेकण्ड में तय की गयी दूरी तरंग वेग कहलाती है। इसका मात्रक मी/से है।
(ख) यदि तरंग की आवृत्ति (n), चाल (u) तथा तरंगदैर्ध्य \( \lambda \) हो तो चाल = आवृत्ति x तरंगदैर्ध्य \( u = n \times \lambda \)
In simple words: आयाम कणों का अधिकतम विस्थापन है (मीटर), आवृत्ति प्रति सेकंड दोलन संख्या है (हर्ट्ज), तरंगदैर्ध्य दो क्रमागत समान कणों के बीच की दूरी है (मीटर), और तरंग वेग प्रति सेकंड तय की गई दूरी है (मी/से)। इनका संबंध \( u = n \times \lambda \) है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक राशि की परिभाषा, मात्रक और चाल, आवृत्ति व तरंगदैर्ध्य के बीच के सूत्र को याद रखें।

Question 8. किसी तरंग की तरंग दैर्ध्य (λ), वेग (u) तथा आवर्तकाल (T) में सम्बन्ध का समीकरण लिखिए।
Answer:
तरंग की चाल = आवृत्ति x तरंग दैर्ध्य
या
तरंग की चाल = \( \frac{\text{तरंग दैर्ध्य}}{\text{आवर्तकाल}} \)
\( u = \frac{\lambda}{T} \)
या तरंग-दैर्ध्य (λ) = तरंग की चाल (v) × आवर्तकाल (T)।
\( \lambda = v \times T \)
In simple words: तरंग की चाल (u) तरंगदैर्ध्य (\( \lambda \)) और आवर्तकाल (T) के अनुपात के बराबर होती है: \( u = \frac{\lambda}{T} \).

🎯 Exam Tip: वेग, तरंगदैर्ध्य और आवर्तकाल के बीच के संबंध को सूत्र के रूप में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

Question 9. किसी माध्यम में दो कणों के बीच की दूरी है। इनकी कलाएँ समान होंगी या विपरीत ।
Answer: दूरी चलने में समय लगेगा। अतः कलाएँ विपरीत होंगी।
In simple words: किसी माध्यम में दो कणों के बीच की दूरी होने पर, उनकी कलाएँ समान नहीं होंगी बल्कि विपरीत होंगी, क्योंकि तरंग गति के दौरान कण एक निश्चित कला अंतर पर दोलन करते हैं।

🎯 Exam Tip: तरंग गति में कणों की कला (phase) और उनके बीच की दूरी के संबंध को समझें।

Question 10. किसी माध्यम में दो क्रमागत कणों में से एक का विस्थापन + a तथा दूसरे का विस्थापन उसी क्षण पर - a है। इनके दोलनों में कितना समयान्तर होगा तथा इनके बीच की दूरी कितनी होगी यदि आवर्तकाल T तथा तरंग दैर्ध्य \( \lambda \) हो ?
Answer:
महत्तम विस्थापन की एक स्थिति (दोलन पथ का एक सिरा) से दूसरी विपरीत स्थिति (दोलन पथ का दूसरा सिरा) तक जाने में दोलन होता है अर्थात् इसमें समय लगेगा।
अतः दोलनों का समयान्तर \( = \frac{T}{2} \).
समय में तरंग द्वारा चली गयी दूरी \( = \frac{\lambda}{2} \).
अतः कणों के बीच की दूरी \( = \frac{\lambda}{2} \).
In simple words: यदि दो क्रमागत कणों का विस्थापन \( +a \) और \( -a \) है, तो उनके दोलनों में आधा आवर्तकाल (\( T/2 \)) का समयान्तर होगा और उनके बीच की दूरी आधी तरंगदैर्ध्य (\( \lambda/2 \)) होगी।

🎯 Exam Tip: विपरीत कला में दोलन कर रहे कणों के लिए समयान्तर और दूरी के संबंधों को याद रखें।

 

Question 11. किसी तरंग का दोलन-आयाम तीन गुना बढ़ा देने पर तरंग की तीव्रता में क्या परिवर्तन होगा?
Answer: तीव्रता = (3)² = 9 गुना बढ़ जायगी [नियम तीव्रता \( \propto \) (आयाम)² से ] ।
In simple words: यदि किसी तरंग के दोलन का आयाम तीन गुना बढ़ा दिया जाए, तो उसकी तीव्रता नौ गुना बढ़ जाएगी क्योंकि तीव्रता आयाम के वर्ग के समानुपाती होती है।

🎯 Exam Tip: आयाम और तीव्रता के बीच के संबंध को समझना तरंगों के ऊर्जा गुणों का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 12. ऐसी दो प्रकार की यांत्रिक तरंगों के नाम लिखिए जो हमें सुनायी नहीं देती हैं।
Answer: अवश्रव्य तरंगें तथा पराश्रव्य तरंगें।
In simple words: अवश्रव्य तरंगें (बहुत कम आवृत्ति) और पराश्रव्य तरंगें (बहुत अधिक आवृत्ति) दो ऐसी यांत्रिक तरंगें हैं जिन्हें मनुष्य अपने कानों से नहीं सुन सकते।

🎯 Exam Tip: श्रव्य परास (20 Hz से 20 kHz) से बाहर की आवृत्तियों को पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 13. एक दोलन के समय में तरंग द्वारा चली गयी दूरी को क्या कहते हैं?
Answer: तरंगदैर्ध्य ।
In simple words: एक पूर्ण दोलन के दौरान तरंग द्वारा तय की गई दूरी को तरंगदैर्ध्य कहते हैं।

🎯 Exam Tip: तरंगदैर्ध्य एक मूलभूत तरंग गुण है जो तरंगों के spatial periodicity को दर्शाता है।

 

Question 14. वायु में ध्वनि तरंगें किस प्रकार की होती हैं?
Answer: वायु में गमन करने वाली तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं।
In simple words: ध्वनि तरंगें वायु में अनुदैर्ध्य होती हैं, जिसका अर्थ है कि माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा में आगे-पीछे कंपन करते हैं।

🎯 Exam Tip: ध्वनि के संचरण माध्यम के आधार पर तरंग के प्रकार को समझना आवश्यक है।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. सिद्ध कीजिए कि u = n x \( \lambda \), जहाँ संकेतों के सामान्य अर्थ हैं।
Answer:
हम जानते हैं कि,
U = \( \frac{\text{दूरी}}{\text{समय}} \)
जहाँ T आवर्तकाल है अर्थात् \( \lambda \) दूरी चलने में लगा समय है।
पर आवृत्ति में n = \( \frac{1}{\text{T}} \) होता है।

\( \implies \) u = n x \( \lambda \)
\( \implies \) u = \( \lambda \) x n
\( \implies \) u = n\( \lambda \)
In simple words: तरंग की चाल उसकी आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के गुणनफल के बराबर होती है, जो दर्शाता है कि तरंग कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और उसके दोलनों की Spatial extent कितनी है।

🎯 Exam Tip: यह सूत्र तरंगों के गति विज्ञान में एक मौलिक संबंध है और न्यूमेरिकल्स को हल करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. 'अनुप्रस्थ तरंग' तथा 'अनुदैर्ध्य तरंग' का अर्थ उदाहरण देकर बताइए । इनकी विशेषताएँ बताइए ।
Answer:
अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse waves) – अनुप्रस्थ तरंगों में माध्यम के कण, तरंग गति की दिशा के लम्ब दिशा में कंपन करते हैं।
शान्त जल में पत्थर डालने पर जल की सतह पर उत्पन्न तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं। यदि इन तरंगों के रास्ते में एक कागज का छोटा टुकड़ा रख दें तो वह अपने ही स्थान पर ऊपर-नीचे कंपन करता है, आगे नहीं बढ़ता अर्थात् तरंग गति दिशा के लम्बवत् कंपन करता है। तनी डोरी जैसे, सितार के तार अथवा एक सिरे पर दीवार से बँधी डोरी को दूसरे सिरे से ऊपर-नीचे झटका देने पर अनुप्रस्थ तरंगें उत्पन्न होती हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक रस्सी में उत्पन्न अनुप्रस्थ तरंग को दर्शाता है, जिसमें कम्पन की दिशा (ऊपर-नीचे) तरंग संचरण की दिशा (दाएँ) के लंबवत् होती है, जिससे श्रृंग और गर्त बनते हैं।
**अनुप्रस्थ तरंगों की विशेषताएँ (Characteristics of Transverse Waves)** –
• इनके माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् कम्पन करते हैं।
• उनके संचरण में श्रृंग तथा गर्त होते हैं।
• ये तरंगें ठोसों में तथा द्रवों की सतह पर चल सकती हैं।
अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal waves) – अनुदैर्ध्य तरंगें वे तरंगें हैं जिनमें माध्यम के कण, तरंग-संचरण की दिशा में ही कम्पन करते हैं।
लोहे के टुकड़े को ठोकने पर उसके अन्दर अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।
इसके अतिरिक्त हमारे बोलने पर वायु में उत्पन्न तरंगें या किसी गैस में उत्पन्न तरंगें भी अनुदैर्ध्य होती हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक लोहे की छड़ में उत्पन्न अनुदैर्ध्य तरंग को दर्शाता है, जिसमें कम्पन की दिशा (दाएँ-बाएँ) तरंग संचरण की दिशा (दाएँ) के समानांतर होती है, जिससे संपीडन और विरलन बनते हैं।
**अनुदैर्ध्य तरंगों की विशेषताएँ (Characteristics of Longitudinal waves)** – अनुदैर्ध्य तरंग की निम्न विशेषताएँ हैं।
• इनके माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा में ही कम्पन करते हैं।
• इनके संचरण से संपीडन तथा विरलन होते हैं।
• ये तरंगें ठोस, द्रव व गैस तीनों माध्यमों में चल सकती हैं।
• इन तरंगों के कारण दाब-परिवर्तन होता है।
In simple words: अनुप्रस्थ तरंगों में कण तरंग के लंबवत कंपन करते हैं (जैसे पानी की लहरें), जबकि अनुदैर्ध्य तरंगों में कण तरंग के समानांतर कंपन करते हैं (जैसे ध्वनि तरंगें), दोनों ही ऊर्जा का संचरण करती हैं।

🎯 Exam Tip: अनुप्रस्थ और अनुदैर्ध्य तरंगों के बीच का अंतर उनकी कण गति की दिशा और संचरण की दिशा के आधार पर समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. दो कणों के दोलनों का 'समान कला' तथा 'विपरीत कला' में होने का क्या अर्थ है? इनके कलान्तर को आवर्तकाल के पदों में लिखिए ।
Answer:
सरल आवर्त गति करने वाले दो कण यदि गति-पथ की विभिन्न स्थितियों (जैसे माध्य स्थिति, महत्तम विस्थापन आदि) में एक-साथ समान क्षणों पर पहुँचे तो उन्हें 'समान-कला' में कहा जाता है। ऐसे कणों का कलान्तर 0, T, 2T, 3T,.... अर्थात् शून्य अथवा आवर्त-काल को पूर्ण गुणित होता है।
यदि सरल आवर्त गति करने वाले दो कणों के किसी विशेष स्थिति अथवा कला में पहुँचने में आधे दोलन अर्थात् समय का अन्तर हो तो उनके दोलन 'विपरीत-कला' में होते हैं। ऐसे कणों का कलान्तर, \( \frac{\text{T}}{2}, \frac{3\text{T}}{2}, \frac{5\text{T}}{2} \) ...... अर्द्ध-आवर्तकाल \( (\frac{\text{T}}{2}) \) का विषम गुणित होता है।
In simple words: समान कला का अर्थ है कि दो कण एक ही समय पर समान स्थिति और दिशा में कंपन कर रहे हैं (कलांतर शून्य या T का गुणक), जबकि विपरीत कला का अर्थ है कि वे विपरीत दिशाओं में कंपन कर रहे हैं (कलांतर T/2 का विषम गुणक)।

🎯 Exam Tip: कलांतर की अवधारणा को समझकर आप तरंगों के phase relationships और उनके बीच के हस्तक्षेप का विश्लेषण कर सकते हैं।

 

Question 4. तरंगदैर्ध्य से आप क्या समझते हैं? तरंगदैर्घ्य, आवर्तकाल एवं तरंग की चाल का सम्बन्ध लिखिए।
Answer:
किसी तरंग गति में परस्पर समान कला में दोलन करने वाले दो क्रमागत कणों के बीच की दूरी को तरंग दैर्ध्य कहते हैं।
\[ \text{तरंग की चाल} = \frac{\text{तरंग दैर्ध्य}}{\text{आवर्तकाल}} \]
या
\[ \lambda = \text{तरंग की चाल (v)} \times \text{आवर्तकाल (T)} \]
\( \implies \) v = \( \frac{\lambda}{\text{T}} \) ...(i)
यदि तरंग में दोलन की आवृत्ति n हो तो परिभाषानुसार,
n = \( \frac{1}{\text{T}} \) ...(ii)
अतः समीकरण (i) तथा समीकरण (ii) से
v = \( \lambda \times \frac{1}{\text{T}} \)
v = \( \lambda \times \) n
v = n \( \times \lambda \)
**तरंग का वेग = तरंगदैर्ध्य \( \times \) आवृत्ति**
In simple words: तरंगदैर्ध्य दो लगातार समान कला वाले कणों के बीच की दूरी है, और तरंग की चाल उसकी आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के गुणनफल के बराबर होती है।

🎯 Exam Tip: यह सूत्र तरंग गति के मूल तत्वों- तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति, आवर्तकाल और वेग- के बीच का संबंध स्थापित करता है, जो भौतिकी में महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. किसी माध्यम में यांत्रिक तरंगों की आवृत्ति बढ़ाने से तरंगदैर्ध्य पर क्या प्रभाव होगा? आवश्यक सूत्र देकर बताइए ।
Answer:
तरंग की चाल = आवृत्ति \( \times \) तरंगदैर्ध्य
अथवा तरंग दैर्ध्य = \( \frac{\text{तरंग की चाल}}{\text{आवृत्ति}} \)
चूँकि किसी माध्यम में तरंग की चाल नियत होती है, इसलिए आवृत्ति बढ़ाने पर तरंगदैर्ध्य घट
\( \implies \text{तरंग दैर्ध्य} \propto \frac{1}{\text{आवृत्ति}} \)
जायगा ।
In simple words: जब किसी माध्यम में यांत्रिक तरंगों की आवृत्ति बढ़ाई जाती है, तो उनकी तरंगदैर्ध्य घट जाती है, क्योंकि तरंग की चाल स्थिर रहती है।

🎯 Exam Tip: आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य का व्युत्क्रम संबंध तरंगों के व्यवहार को समझने में महत्वपूर्ण है, विशेषकर जब तरंग की गति स्थिर हो।

 

Question 6. एक निश्चित आवृत्ति की तरंग वायु में तथा जल में संचरित होती है। कारण देते हुए बताइए कि किस माध्यम में तरंग का तरंगदैर्ध्य अधिक होगा?
Answer:
सूत्र : तरंग की चाल = आवृत्ति \( \times \) तरंग दैर्ध्य
से तरंग दैर्ध्य = \( \frac{\text{तरंग की चाल}}{\text{आवृत्ति}} \)
यदि आवृत्ति नियत हो तो तरंगदैर्ध्य तरंग की चाल अतः तरंग की चाल अधिक होने से तरंग-दैर्ध्य अधिक होगा। चूँकि वायु की अपेक्षा जल में तरंगों की चाल अधिक होती है अतः जल में तरंग दैर्ध्य अधिक होगा।
In simple words: एक ही आवृत्ति की तरंग का तरंगदैर्ध्य उस माध्यम में अधिक होगा जहाँ तरंग की चाल अधिक होती है। चूंकि जल में ध्वनि की चाल वायु से अधिक होती है, इसलिए जल में ध्वनि तरंग का तरंगदैर्ध्य अधिक होगा।

🎯 Exam Tip: माध्यम के बदलने पर तरंग की चाल में परिवर्तन होता है, जिससे आवृत्ति स्थिर रहने पर तरंगदैर्ध्य में भी परिवर्तन आता है।

 

Question 7. अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्ध्य तरंगों में क्या अन्तर है?
Answer:
**अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्ध्य तरंगों में अन्तर (Difference between Transverse Waves and Longitudinal Waves)**

**अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse Waves)****अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal Waves)**
1. इनमें माध्यम के कण अपनी मध्यमान स्थिति के ऊपर-नीचे, अर्थात् तरंग गति की दिशा में लम्बवत् कम्पन करते हैं।1. इनमें माध्यम के कण अपनी मध्यमान स्थिति के इधर-उधर, अर्थात् तरंग गति की दिशा में कम्पन करते हैं।
2. अनुप्रस्थ तरंग शीर्ष एवं गर्त के रूप में संचरित होती है। एक शीर्ष तथा गर्त मिलकर एक तरंग बनाते हैं।2. अनुदैर्ध्य तरंग संपीडन एवं विरलन के रूप में संचरित होती है। एक संपीडन तथा एक विरलन मिलकर एक तरंग बनाते हैं।
3. शीर्ष पर माध्यम के कणों का विस्थापन धनात्मक व अधिकतम होता है तथा गर्त पर माध्यम के कणों का विस्थापन ऋणात्मक व अधिकतम होता है।3. संपीडन की स्थिति पर माध्यम के कणों का वेग अधिकतम एवं धनात्मक होता है तथा विरलन पर माध्यम के कणों का वेग अधिकतम एवं ऋणात्मक होता है।
4. ये तरंगें केवल उसी माध्यम से संचरित हो सकती है जिसमें दृढ़ता हो अर्थात्, ये तरंगें केवल ठोसों में तथा द्रव की सतह पर ही उत्पन्न की जा सकती हैं। द्रव के अन्दर या गैस में ये तरंगें उत्पन्न नहीं की जा सकती हैं।4. ये तरंगें उस माध्यम में संचरित हो सकती हैं जिसमें आयतन प्रत्यास्थता हो अर्थात् ये तरंगें तीनों माध्यमों (ठोस, द्रव तथा गैस) में उत्पन्न की जा सकती हैं।
5. इन तरंगों के संचरण से माध्यम के घनत्व तथा दाब में कोई परिवर्तन नहीं होता है।5. इन तरंगों के संचरण से संपीडन की स्थितियों पर माध्यम का घनत्व व दाब अधिक होता है तथा विरलन की स्थितियों पर माध्यम का घनत्व व दाब कम होता है।

In simple words: अनुप्रस्थ तरंगों में कण तरंग संचरण की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं (जैसे प्रकाश तरंगें), जबकि अनुदैर्ध्य तरंगों में कण तरंग संचरण की दिशा के समानांतर कंपन करते हैं (जैसे ध्वनि तरंगें)।

🎯 Exam Tip: इन दोनों तरंग प्रकारों की विशेषताओं और अंतरों को तालिका के रूप में याद करना परीक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी है।

 

Question 8. निम्नलिखित को अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्ध्य तरंगों में वर्गीकृत कीजिए-
(i) स्प्रिंग उत्पन्न तरंगें
(ii) तने हुए तार में उत्पन्न तरंगें
(iii) जल के तल पर उत्पन्न तरंगें,
(iv) वायु में उत्पन्न तरंगें ।
Answer: (i) अनुदैर्ध्य तरंगें (ii) अनुप्रस्थ तरंगें (iii) अनुप्रस्थ तरंगें (iv) अनुदैर्ध्य तरंगें ।
In simple words: स्प्रिंग और वायु में ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं, जबकि तने हुए तार और जल की सतह पर उत्पन्न तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न माध्यमों में तरंगों के व्यवहार के उदाहरणों को याद रखना वर्गीकरण संबंधी प्रश्नों को हल करने में मदद करेगा।

 

Question 9. किसी तरंग के गुणधर्म क्या हैं? अथवा किसी तरंग के गुणधर्म लिखिए।
Answer: तरंग के गुणधर्म-तरंग के निम्न गुणधर्म हैं-
1. तरंग, कम्पन करते स्रोत द्वारा आवर्ती (Periodic) विक्षोभ के कारण होता है।
2. तरंग के कारण ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है, न कि पदार्थ का।
3. तरंग में माध्यम के कण संचरित नहीं होते, वे अपनी मूल स्थिति में ही कम्पन करते हैं एवं अपने आस-पास के कणों में ऊर्जा को स्थानान्तरण करते हैं।
4. तरंग की गति माध्यम की प्रकृति पर निर्भर करती है, तरंग स्रोत की गति या कम्पन पर नहीं।
5. यदि तरंग स्रोत के चारों तरफ का माध्यम एकसमान (समांगी) है तो तरंग गति भी सभी दिशाओं में समान रहती है।
In simple words: तरंग ऊर्जा का संचरण करती है, माध्यम के कणों को नहीं, और इसकी गति माध्यम की प्रकृति पर निर्भर करती है, स्रोत पर नहीं।

🎯 Exam Tip: तरंगों के इन मूलभूत गुणों को समझना तरंगों के व्यवहार और उनके संचरण तंत्र की गहरी समझ प्रदान करता है।

 

Question 10. वस्तुओं को साफ करने के लिए पराध्वनि का उपयोग किस प्रकार करते हैं?
Answer:
**वस्तुओं को साफ करने के लिए पराध्वनि का उपयोग** – पराध्वनि प्रायः उन भागों को साफ करने में उपयोग में लाई जाती है जिन तक पहुँचना बहुत कठिन होता है। जिन वस्तुओं की सफाई करनी होती है उन्हें साफ करने वाले विलयन में रखकर उसमें पराध्वनि प्रेषित की जाती हैं। उच्च आवृत्ति के विक्षोभ के कारण चिकनाई, धूल कण एवं गन्दगी के कण अलग होकर विलयन में आ जाते हैं और इस प्रकार वस्तु पूर्णतया साफ हो जाती हैं। इस विधि का उपयोग प्रायः विषम आकार के पुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक अवयव आदि को साफ करने में किया जाता है।
In simple words: पराध्वनि का उपयोग उन वस्तुओं को साफ करने में होता है जिनके छोटे-छोटे या विषम आकार के हिस्से हों। वस्तुओं को एक घोल में रखकर पराध्वनि तरंगें भेजी जाती हैं, जिससे उच्च आवृत्ति के कंपन गंदगी को हटा देते हैं।

🎯 Exam Tip: पराध्वनि की उच्च आवृत्ति का उपयोग उन क्षेत्रों की सफाई के लिए विशेष रूप से प्रभावी है जहाँ यांत्रिक ब्रश या रासायनिक एजेंटों का पहुंचना मुश्किल होता है।

 

Question 11. चमगादड़ किस प्रकार अन्धकार में अपना शिकार हूँढ़ते हैं?
Answer:
**चमगादड़ द्वारा अन्धकार में अपना शिकार ढूँढने की युक्ति** - चमगादड़ अन्धकार में अपना शिकार ढूँढने के लिए सोनार युक्ति का उपयोग करते हैं। वे उड़ते समय पराध्वनि तरंगें उत्सर्जित करते हैं जो उच्च आवृत्ति के कारण अवरोधों एवं कीटों से परावर्तित होकर चमगादड़ के कानों तक पहुँचती हैं जिनका चमगादड़े संसूचन करते हैं। इन परावर्तित स्पन्दों की प्रकृति से चमगादड़ को पता चल जाता है कि उसका शिकार कहाँ है तथा किस प्रकार का है।
In simple words: चमगादड़ पराध्वनि तरंगें उत्सर्जित करते हैं जो बाधाओं और शिकार से टकराकर वापस आती हैं। इन प्रतिध्वनियों का उपयोग करके, चमगादड़ अंधेरे में भी अपने वातावरण और शिकार का पता लगा लेते हैं।

🎯 Exam Tip: यह प्रक्रिया इकोलोकेशन कहलाती है और उच्च आवृत्ति वाली पराध्वनि तरंगों का उपयोग करके चमगादड़ को उनके परिवेश का एक विस्तृत मानसिक नक्शा बनाने में मदद करती है।

 

Question 12. सोनार की कार्यविधि लिखिए ।
Answer:
**सोनार की कार्यविधि** – सोनार में एक प्रेषित्र एवं एक संसूचक लगा होता है। जहाज पर लगे प्रेषित्रों द्वारा नियमित समय अन्तरालों पर पराश्रव्य ध्वनि के शक्तिशाली स्पन्दों अर्थात् सिग्नलों को लक्ष्य तक भेजा जाता है। ये तरंगें जल में गति करती हैं तथा लक्ष्य से टकराने के बाद परावर्तित होकर संसूचक द्वारा ग्रहण कर ली जाती हैं। संसूचक पराध्वनि को विद्युत संकेतों में बदल । देता है जिनकी व्याख्या कर ली जाती है। जल में ध्वनि की चाल तथा पराध्वनि के प्रेषण एवं अधिग्रहण के समय को ज्ञात करके लक्ष्य की दूरी की गणना कर ली जाती है।
In simple words: सोनार एक उपकरण है जो पराश्रव्य तरंगों को भेजता है और उनके परावर्तन को प्राप्त करता है। तरंगों के जाने और लौटने में लगे समय तथा जल में ध्वनि की चाल का उपयोग करके पानी के नीचे की वस्तुओं की दूरी का पता लगाया जाता है।

🎯 Exam Tip: सोनार की कार्यप्रणाली में प्रेषित्र और संसूचक का कार्य, पराध्वनि तरंगों का उपयोग, और दूरी की गणना का सिद्धांत स्पष्ट रूप से समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 13. सोनार के उपयोग लिखिए ।
Answer:
**सोनार के उपयोग** – सोनार के निम्नांकित प्रमुख उपयोग हैं
1. चमगादड़ द्वारा अन्धकार में अपना शिकार हूँढ़ने में।
2. चमगादड़ का रात्रि में उड़ते समय अवरोधों से टकराने से बचाव करने में।
3. पारपाईस मछलियों द्वारा अँधेरे में अपने भोजन की खोज करने में।
4. समुद्र में डूबे हुए जहाज एवं पनडुब्बियों का पता लगाने में तथा समुद्र की गहराई ज्ञात करने में।
5. समुद्र के अन्दर स्थित चट्टानों, घाटियों, हिम शैलों एवं अन्य अवरोधों की स्थिति का पता करने में।
In simple words: सोनार का उपयोग पानी के नीचे वस्तुओं का पता लगाने, समुद्री गहराई मापने, और चमगादड़ जैसे जानवरों द्वारा इकोलोकेशन के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: सोनार के विभिन्न व्यावहारिक अनुप्रयोगों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर समुद्री अन्वेषण और जीव विज्ञान के संदर्भ में।

 

Question 14. ध्वनि के परावर्तन के व्यावहारिक उपयोग लिखिए।
Answer: ध्वनि के परावर्तन के व्यावहारिक उपयोग-ध्वनि के परावर्तन के प्रमुख व्यावहारिक उपयोग निम्नलिखित हैं-
1. मेगाफोन, लाउडस्पीकर, हॉर्न, तूर्य तथा शहनाई जैसे वाद्ययन्त्रों द्वारा ध्वनि विस्तार में।
2. स्टेथोस्कोप द्वारा हृदय की धड़कनों को डाक्टर के कानों तक पहुँचाने में।
3. बड़े हॉलों एवं सभाकक्षों में वक्राकार छतों द्वारा ध्वनि को परावर्तित करके कक्षों के प्रत्येक हिस्से में ध्वनि को प्रेषित करने में।
4. कर्ण तूर्या' जैसी श्रवण सहाय युक्तियों के कार्य करने में।
In simple words: ध्वनि परावर्तन का उपयोग ध्वनि को एक विशेष दिशा में केंद्रित करने (मेगाफोन), हृदय की धड़कनें सुनने (स्टेथोस्कोप), और बड़े कमरों में ध्वनि के समान वितरण (वक्राकार छतें) के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: ध्वनि परावर्तन के इन रोजमर्रा के अनुप्रयोगों को समझना छात्रों को अवधारणा की प्रासंगिकता को जोड़ने में मदद करता है।

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. तरंग गति से क्या तात्पर्य है? स्पष्ट रूप से समझाइए तथा तरंग गति की विशेषताएँ लिखिए।
Answer:
**तरंग गति (Wave Motion)** – यदि किसी तालाब के शान्त जल में एक पत्थर ऊपर से डाला जाय तो जिस स्थान पर पत्थर गिरता है, वहाँ पर जल के कण अपने स्थान से हट जाते हैं अर्थात् वहाँ पर जल में एक विक्षोभ (Disturbance) उत्पन्न होता है। इस विक्षोभ के कारण जल के कण ऊपर-नीचे दोलन करने लगते हैं।
जब जल का कोई कण, जो चारों ओर अन्य कणों से घिरा है, अपनी साम्यावस्था से हटता है तो जिन दूसरे कणों के निकट जाता है वे जल की (अंतर-आणविक बल से उत्पन्न) प्रत्यास्थता के कारण उसे प्रतिकर्षित करते हैं तथा ये कण जिन कणों से दूर हटता है वे उसे आकर्षित करते हैं, इस प्रकार कण पर प्रत्यानयन बल उत्पन्न होता है जो कण की माध्य-स्थिति से उसके विस्थापन के अनुक्रमानुपाती तथा मध्य-स्थिति की दिशा में होता है। अतः कण अपनी माध्य-स्थिति के इधर-उधर सरल-आवर्त-गति करने लगता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक माध्यम में तरंग की गति को दर्शाता है, जहाँ एक कंपन स्रोत (कांटा) विक्षोभ उत्पन्न करता है। माध्यम के कण अपने स्थान पर कंपन करते हैं, जिससे संपीडन और विरलन की एक श्रृंखला बनती है, जो तरंग के रूप में आगे बढ़ती है और विक्षोभ के साथ ऊर्जा का संचरण करती है।
अब इस कण पर लगे प्रत्यानयन-बल की प्रतिक्रिया में इसके निकटवर्ती दूसरे कण पर भी ठीक इसी प्रकार का बल लगता है, जिसके कारण दूसरा कण भी अपने स्थान से विस्थापित होकर दोलन-गति करने लगता है। एक कण से दूसरे में दोलन-गति अथवी विक्षोभ के स्थानान्तरण की यह प्रक्रिया क्रमागत कणों में आगे बढ़ती जाती है तथा जल के तल पर एक स्थान पर उत्पन्न विक्षोभ चारों ओर फैलता जाता है। इसी प्रकार किसी भी माध्यम (ठोस, द्रव, या गैस) में किसी स्थान पर उत्पन्न विक्षोभ, माध्यम में सभी ओर को स्थानान्तरित होता हुआ फैलता जाता है। प्रारम्भ में जिस स्थान पर विक्षोभ उत्पन्न किया जाता है। वहाँ परे कणों की गति के कारण उनमें गतिज ऊर्जा होती है। जैसे-जैसे विक्षोभ आगे बढ़ता जाता है, दोलन करने वाले अन्य कणों को भी गतिज ऊर्जा मिलती जाती है अतः उपर्युक्त संपूर्ण प्रक्रिया में, माध्यम में ऊर्जा का भी स्थानान्तरण होता है। इस संपूर्ण प्रक्रिया को तरंग गति (Wave Motion) कहते हैं।
अतः “तरंग गति ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी माध्यम में उत्पन्न विक्षोभ, माध्यम के क्रमागत कणों के दोलनों की सहायता से, माध्यम में एक निश्चित चाल से स्थानान्तरित होता है।"
उपर्युक्त उदाहरणों में तरंग गति की विशेषताओं को निम्नवत् दिया जा सकता है-
• तरंग गति की उत्पत्ति किसी माध्यम में किसी स्थान पर विक्षोभ उत्पन्न करने से होती है।
• तरंग गति के कारण माध्यम में विक्षोभ एक निश्चित चाल से एक कण से दूसरे कण को स्थानान्तरित होते हुए आगे बढ़ता है।
• तरंग गति के कारण माध्यम के कण विक्षोभ के साथ आगे गति नहीं करते वरन् अपनी माध्य स्थिति के इधर-उधर आवर्त गति करते हैं।
• माध्यम के कणों के दोलनों के द्वारा विक्षोभ उत्पन्न होने के स्थान से गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा का सभी दिशाओं में एक कण से अगले कण में स्थानान्तरण होता जाता है, अर्थात् यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) का संचरण होता है।
In simple words: तरंग गति वह प्रक्रिया है जिसमें एक माध्यम में उत्पन्न विक्षोभ (ऊर्जा) माध्यम के कणों के दोलनों के माध्यम से एक निश्चित चाल से आगे बढ़ती है, जबकि कण स्वयं अपनी माध्य स्थिति के इर्द-गिर्द कंपन करते हैं।

🎯 Exam Tip: तरंग गति की परिभाषा, उसके उत्पन्न होने की विधि और ऊर्जा संचरण के सिद्धांत को उदाहरणों के साथ समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. तरंगें कितने प्रकार की होती हैं? उनके एक-एक उदाहरण दीजिए।
Answer:
किसी माध्यम में तरंग गति होने पर दो प्रकार की गतियाँ होती हैं-
(i) माध्यम के कणों की अपनी माध्य-स्थिति के इधर-उधर दोलन-गति तथा
(ii) माध्यम में विक्षोभ अथवा तरंग की गति ।
इन गतियों के आधार पर तरंगें दो प्रकार की होती हैं।
(i) **अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse Wave)** – जब माध्यम के कणों के दोलन करने की दिशा, तरंग की गति की दिशा के लम्बवत् होती है, तो ऐसी तरंग को अनुप्रस्थ तरंग कहते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक अनुप्रस्थ तरंग को दर्शाता है, जिसमें दोलन की दिशा (ऊपर-नीचे) तरंग संचरण की दिशा (दाएँ) के लंबवत् होती है।
(ii) **अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudinal wave)** – अनुदैर्ध्य तरंग में माध्यम के कणों के दोलन की दिशा, तरंग-गति की दिशा के समान्तर होती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक अनुदैर्ध्य तरंग को दर्शाता है, जिसमें दोलन की दिशा (दाएँ-बाएँ) तरंग संचरण की दिशा (दाएँ) के समानांतर होती है।
इसके अतिरिक्त अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्ध्य तरंगों में निम्न अन्तर होते हैं|
1. अनुदैर्ध्य तरंगें सभी प्रकार के माध्यमों (ठोस, द्रव या गैस) में संचरित हो सकती हैं, जबकि अनुप्रस्थ तरंगें केवल ठोस माध्यम में तथा द्रवों के केवल बाहरी पृष्ठ पर संचरित होती हैं। अनुप्रस्थ तरंगें गैसों में नहीं चल सकतीं।
2. अनुदैर्ध्य तरंगों में माध्यम में सभी बिन्दुओं पर संपीड़न (compression) तथा विरलन (Rarefaction), अर्थात् दाब का बढ़ना-घटना (आवर्त परिवर्तन) होता है, जबकि अनुप्रस्थ तरंगों द्वारा दाब का परिवर्तन नहीं होता।
**उदाहरण :**
**अनुप्रस्थ तरंग -**
(i) एक सिरे पर बँधी डोरी के दूसरे सिरे को ऊपर-नीचे या दाहिने-बाएँ हिलाने पर डोरी में उत्पन्न तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं।
(ii) जल या किसी द्रव के ऊपरी तल पर पत्थर गिराने या द्रव के तल को ऊपर-नीचे हिलाने से उत्पन्न तरंगें।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक अनुप्रस्थ तरंग को दर्शाता है जो एक तनी हुई रस्सी में उत्पन्न होती है, जहाँ कणों का दोलन (ऊपर-नीचे) तरंग के संचरण की दिशा (दाएँ) के लंबवत् होता है।
(iii) किसी तनी हुई डोरी, तार या एक सिरे पर कसी हुई छड़ को लंबाई के लंबवत् हटाकर छोड़ने से उत्पन्न तरंगें।
**अनुदैर्ध्य तरंग-**
(i) वायु में ध्वनि करती या कंपन हुई वस्तु से वायु या किसी गैस में अनुदैर्ध्य तरंगें उत्पन्न होती हैं।
(ii) तने हुए तार, डोरी या छड़ को लम्बाई की दिशा में रगड़ने से अनुदैर्ध्य तरंग उत्पन्न होती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक स्प्रिंग में उत्पन्न अनुदैर्ध्य तरंग को दर्शाता है, जहाँ कणों का दोलन (दाएँ-बाएँ) तरंग के संचरण की दिशा (दाएँ) के समानांतर होता है, जिससे संपीडन और विरलन बनते हैं।
(ii) किसी स्प्रिंग के एक सिरे पर कोई भार बाँध कर लटकाने तथा भार को कुछ नीचे खींचकर छोड़ देने से स्प्रिंग में ऊपर-नीचे दोलन होता है तथा तरंग भी ऊपर-नीचे चलती है। यह अनुदैर्ध्य तरंग है।
In simple words: तरंगें दो प्रकार की होती हैं- अनुप्रस्थ, जिनमें कण तरंग की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं (जैसे पानी की लहरें); और अनुदैर्ध्य, जिनमें कण तरंग की दिशा के समानांतर कंपन करते हैं (जैसे ध्वनि तरंगें)।

🎯 Exam Tip: अनुप्रस्थ और अनुदैर्ध्य तरंगों के बीच के अंतर को उनके कण गति की दिशा और संचरण माध्यम के उदाहरणों के साथ स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है।

 

Question 3. तरंग गति में 'कलान्तर' से क्या तात्पर्य है? कलान्तर के आधार पर तरंगदैर्ध्य का अर्थ स्पष्ट कीजिए तथा सूत्र u = n\( \lambda \) का निगमन कीजिए ।
Answer:
**कलान्तर (Phase-difference)** – सरल आवर्त गति करता हुआ कोई कण, अपने गतिपथ पर, विभिन्न क्षणों पर, विभिन्न स्थितियों में होता है तथा अपने पूर्ण आवर्तकाल T में, गतिपथ की सभी स्थितियों से गुजरता हुआ पुनः गति आरंभ की अवस्था में आ जाता है। उदाहरणतः यदि कण O क्षण पर माध्य स्थिति 0 से गति आरंभ करे तो महत्तम विस्थापन की स्थिति A पर T/4 समय में, पुनः O पर समय में, A' पर
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक सरल आवर्त गति कर रहे कण के गतिपथ और विभिन्न समय अंतरालों (T/4, T/2, 3T/4, T) पर उसकी स्थिति को दर्शाता है, जिससे कलांतर की अवधारणा को समझाया जा सके।
समय में तथा वापस O पर T समय में पहुँचता है। गतिपथ की इन स्थितियों को समय के पदों में, O, \( \frac{\text{T}}{4}, \frac{\text{T}}{2}, \frac{3\text{T}}{4} \), T व्यक्त किया जा सकता है। इसी प्रकार गतिपथ पर कण की किसी भी स्थिति को, उस पर पहुँचने वाले क्षण को T की किसी भिन्न स्थिति द्वारा व्यक्त किया जा सकता है। गतिपथ में कण की स्थिति को व्यक्त करने वाली राशि को कण के दोलन की कला (phase) कहते है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र तरंगदैर्ध्य (\( \lambda \)) को दर्शाता है, जो तरंग पर समान कला में कंपन कर रहे दो लगातार बिंदुओं (A और B) के बीच की दूरी है।
इससे स्पष्ट है कि यदि समान आवर्त-काल के दो या दो से अधिक कण एक-दूसरे के बाद भिन्न-भिन्न क्षणों पर दोलन गति आरंभ करें तो वे गति-पथ की किसी भी नियत स्थिति पर भिन्न-भिन्न क्षणों पर पहुँचेंगे। इसका अर्थ है कि इन कणों के दोलनों की कलाएँ भिन्न-भिन्न होंगी अथवा कणों के दोलनों में कलान्तर (Phase Difference) होगा।
किसी माध्यम में किसी बिन्दु पर उत्पन्न विक्षोभ उत्पन्न होने से, माध्यम में विक्षोभ का संचरण एक नियत वेग से होता है, जिसके फलस्वरूप किसी एक दिशा में स्थित क्रमागत कण, विक्षोभ के पहुँचने पर, भिन्न-भिन्न समयों पर दोलन गति आरंभ करते हैं तथा एक निश्चित क्रमागत कलान्तर के साथ माध्यम के कणों के दोलनों के द्वारा विक्षोभ के संचरण को ही तरंग गति कहते हैं। इस प्रकार हम देखते हैं कि तरंग-गति में माध्यम के क्रमागत कणों के दोलनों में एक निश्चित कलान्तर होता है।
अब यदि माध्यम में किसी कण A से दूसरे कण B तक विक्षोभ के संचरण का समय आवर्तकाल (T) के बराबर हो तो जिस क्षण पर कण B पहला दोलन पूरा करके दूसरा दोलन प्रारंभ कर रहा होगा, ठीक उसी क्षण पर कण B अपना पहला दोलन प्रारंभ करेगा अर्थात् कण A तथा कण B दोनों एक साथ दोलन प्रारंभ करने की अवस्था में होंगे। अतः कण A एवं B परस्पर समान कला में होंगे अथवा कलान्तर शून्य होगा।
किसी तरंग गति में परस्पर समान कला में दोलन करने वाले दो क्रमागत कणों के बीच की दूरी को तरंगदैर्ध्य (Wavelength) कहते हैं। इसे प्रतीक \( \lambda \) से व्यक्त किया जाता है। उपर्युक्त विवेचना से स्पष्ट है तरंग द्वारा एक पूर्ण दोलन करने में लगा समय (T), चली गयी दूरी तरंग दैर्ध्य (\( \lambda \)) के बराबर होती है। अतः यदि माध्यम में तरंग का वेग u हो
\[ \text{u} = \frac{\text{चली गयी दूरी}}{\text{समयान्तर}} = \frac{\lambda}{\text{T}} \]
अथवा
\[ \text{v} = \frac{\lambda}{\text{T}} \]
...(i)
यदि तरंग में दोलन की आवृत्ति n हो तो परिभाषानुसार,
\[ \text{n} = \frac{1}{\text{T}} \]
...(ii)
अतः समीकरण (i) तथा समीकरण (ii) से
\[ \text{v} = \lambda \times \left(\frac{1}{\text{T}}\right) = \lambda \text{n} \]
\[ \text{v} = \text{n} \times \lambda \]
**तरंग का वेग = तरंगदैर्ध्य \( \times \) आवृत्ति**
In simple words: कलान्तर दोलन कर रहे कणों की सापेक्ष स्थिति और गति को दर्शाता है। तरंगदैर्ध्य समान कला वाले दो क्रमागत कणों के बीच की दूरी है, और तरंग का वेग आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के गुणनफल (u = n\( \lambda \)) के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: कलांतर, तरंगदैर्ध्य और वेग-आवृत्ति संबंध के व्युत्पत्ति को समझना तरंग भौतिकी में conceptual clarity के लिए आवश्यक है।

 

Question 4. अल्ट्रासोनोग्राफी क्या है? इसकी कार्य | विधि एवं उपयोग का वर्णन कीजिए ।
Answer:
**अल्ट्रासोनोग्राफी (Ultrasonography)** – वह तकनीक जिसके द्वारा शरीर के किसी आंतरिक भाग | या अंग का प्रतिबिम्ब, पराध्वनि तरंगों का प्रयोग कर मॉनीटर | पर प्रदर्शित या फिल्म पर मुद्रित किया जा सके, | अल्ट्रासोनोग्राफी कहलाता है।
**कार्य-विधि**- अल्ट्रासोनोग्राफी प्राप्त करने के लिए, पराध्वनि संसूचक का प्रयोग किया जाता है। इस तकनीक में, पराध्वनि तरंगें उस भाग या अंग से प्रवाहित की जाती हैं और उस भाग के ऊतकों से परावर्तित हो जाती हैं। विभिन्न घनत्व वाले भागों से उनका परावर्तन भिन्न होता है। परावर्तित तरंगों को विद्युत संकेतों में बदलकर उस भाग या अंग का प्रतिबिम्ब प्राप्त कर लिया जाता है।
**उपयोग**-
• अल्ट्रासोनोग्राफी का उपयोग आंतरिक अंगों जैसे यकृत, पित्ताशय, वृक्क, गर्भाशय आदि की संरचना के प्रतिबिम्ब प्राप्त करने में किया जाता है।
• अल्ट्रासोनोग्राफी का उपयोग गर्भकाल में भ्रूण की जाँच तथा जन्मजात दोष या अनियमितताओं का पता लगाने में किया जाता है।
• अल्ट्राध्वनि तरंगें वृक्क की पथरी को तोड़कर महीन कणों में बदलने में उपयोगी हैं जो मूत्र के साथ। बाहर निकाल दिए जाते हैं।
In simple words: अल्ट्रासोनोग्राफी एक मेडिकल इमेजिंग तकनीक है जो शरीर के आंतरिक अंगों की छवियाँ बनाने के लिए पराध्वनि तरंगों का उपयोग करती है। यह गर्भावस्था की निगरानी और आंतरिक विकारों का पता लगाने में सहायक है।

🎯 Exam Tip: अल्ट्रासोनोग्राफी के सिद्धांत (पराध्वनि तरंगों का उपयोग), कार्यप्रणाली (तरंगों का परावर्तन और विद्युत संकेतों में रूपांतरण) और नैदानिक ​​उपयोगों को विस्तार से समझना आवश्यक है।

 

Question 5. मानव कर्ण की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए ।
Answer:
मानव कर्ण एक अति संवेदी युक्ति है, जो मनुष्य को सुनने में सहायक है। मानव कर्ण के तीन भाग हैं-
(i) बाह्य कर्ण (External ear)
(ii) मध्य कण (Middle ear)
(iii) अन्तः कर्ण (Inner ear)।
(i) **बाह्य कर्ण** – यह' कर्ण-पल्लव' (pinna) कहलाता है। यह परिवेश से ध्वनि-तरंगों को एकत्रित करता है।
(ii) **मध्य कर्ण** – बाह्य कर्ण एवं मध्य कर्ण के बीच एक 2-3 सेमी लम्बी नलिका होती है जिसे श्रवण-नलिका (Ear canal) कहते हैं। श्रवण-नलिका के सिरे पर एक पतली, प्रत्यास्थ एवं गोल झिल्ली होती है जिसे कर्ण-पटल या कर्ण-पटह (Ear drum) कहते हैं। इसे Tympanum भी कहते हैं। कर्ण-पटल के आगे तीन छोटी एवं कोमल हड्डयाँ होती हैं जो मुग्दरक (Hammer), निहाई (Anvil) और वलयक (Stirrup) कहलाती हैं। मुग्दरक कर्ण-पटल से जुड़ा रहता है।
(iii) **अन्तः कर्ण** – इसमें एक कुंडलित नलिका कर्णावर्त (Cochlea) होती है जो मध्य कर्ण से एक झिल्ली द्वारा संबंधित रहती है। कर्णावर्त में एक तरल भरा होता है। कर्णावर्त का दूसरा सिरा श्रवण तंत्रिका (Auditory Nerve) से जुड़ा होता है जो मस्तिष्क को जाती है। बाह्य कर्ण व मध्य कर्ण में वायु भरी होती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र मानव कान की विस्तृत संरचना को तीन मुख्य भागों-बाह्य कर्ण, मध्य कर्ण और अन्तः कर्ण-में विभाजित करके दिखाता है, जिसमें ध्वनि तरंगों के प्रसंस्करण के लिए प्रत्येक भाग की भूमिका और संबंधित संरचनाएं जैसे कर्ण पल्लव, कर्णपट्ट, अस्थियाँ और कर्णावर्त शामिल हैं।
In simple words: मानव कान सुनने का एक जटिल अंग है जिसके तीन मुख्य भाग होते हैं: बाह्य कर्ण जो ध्वनि एकत्र करता है, मध्य कर्ण जो ध्वनि को प्रवर्धित करता है, और अन्तः कर्ण जो ध्वनि कंपन को विद्युत संकेतों में बदलकर मस्तिष्क तक भेजता है।

🎯 Exam Tip: मानव कान के प्रत्येक भाग की संरचना और कार्यप्रणाली को विस्तार से जानना आवश्यक है, क्योंकि यह ध्वनि के संचरण और सुनने की प्रक्रिया को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

आंकिक प्रश्न

 

Question 1. उस ध्वनि तरंग का तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए, जिसकी आवृत्ति 150 हर्ट्ज है। ध्वनि की चाल = 300 मीटर/सेकण्ड ।
Answer:
हल :
v = 300 मी/से, n = 150 हर्ट्ज
अतः v = n \( \times \lambda \) से

\( \implies \lambda = \frac{\text{v}}{\text{n}} = \frac{300}{150} = 2 \) मीटर।
अतः ध्वनि तरंग का तरंगदैर्ध्य = 2m.
In simple words: ध्वनि तरंग का तरंगदैर्ध्य 2 मीटर है, जो उसकी चाल और आवृत्ति के अनुपात से ज्ञात होता है।

🎯 Exam Tip: तरंग के वेग, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के बीच के संबंध (v = n\( \lambda \)) को सही ढंग से लागू करना न्यूमेरिकल्स हल करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. उस ध्वनि तरंग की लम्बाई ज्ञात कीजिए, जिसकी कम्पन संख्या 150 हर्ट्ज है। (ध्वनि का वेग = 300 मीटर. सेकण्ड-1)
Answer:
हल : सूत्र
v = n \( \times \lambda \) से
300 = 150 \( \times \lambda \)

\( \implies \lambda = \frac{300}{150} = 2 \) मी
अतः ध्वनि तरंग की लम्बाई = 2 मीटर।
In simple words: ध्वनि तरंग की लंबाई 2 मीटर है, जो उसकी चाल और कंपन संख्या (आवृत्ति) के आधार पर गणना की जाती है।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, 'कम्पन संख्या' का अर्थ आवृत्ति है, और यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि सभी इकाइयां सुसंगत हों।

 

Question 3. एक स्वरित्र का आवर्तकाल 0.05 सेकण्ड है। इससे उत्पन्न तरंग की तरंगदैर्ध्य 16 मीटर है। तरंग की चाल ज्ञात कीजिए ।
Answer:
हल : दिया है, आवर्तकाल T = 0.05 सेकण्ड
तरंग दैर्ध्य \( \lambda \) = 16 मीटर
तरंग की चाल v = ?
सूत्र v = \( \frac{\lambda}{\text{T}} = \frac{16}{0.05} = \frac{1600}{5} = 320 \)
अतः तरंग की चाल = 320 मीटर सेकण्ड-1
In simple words: स्वरित्र द्वारा उत्पन्न तरंग की चाल 320 मीटर प्रति सेकंड है, जिसे तरंगदैर्ध्य को आवर्तकाल से विभाजित करके निकाला गया है।

🎯 Exam Tip: आवर्तकाल (T), तरंगदैर्ध्य (\( \lambda \)) और चाल (v) के बीच संबंध (v = \( \lambda \)/T) का सही उपयोग न्यूमेरिकल्स हल करने में मदद करता है।

 

Question 4. एक स्वरित्र 10 सेकण्ड में 500 दोलन करता है। इसकी आवृत्ति तथा आवर्तकाल की गणना कीजिए ।
Answer:
हल : आवृत्ति = \( \frac{\text{दोलनों की संख्या}}{\text{समय}} = \frac{500}{10} = 50 \) हर्ट्ज
आवर्तकाल = \( \frac{1}{\text{आवृत्ति}} = \frac{1}{50} = 0.02 \) सेकण्ड
In simple words: स्वरित्र की आवृत्ति 50 हर्ट्ज है और इसका आवर्तकाल 0.02 सेकंड है, जो दोलनों की संख्या और समय से गणना की जाती है।

🎯 Exam Tip: आवृत्ति और आवर्तकाल एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं (f = 1/T), और यह संबंध इन quantities की गणना के लिए मौलिक है।

 

Question 5. किसी पुरुष के स्वर की आवृत्ति 400 कम्पन-सेकण्ड-1 हैतथा उत्पन्न ध्वनि तरंगों की तरंगदैर्ध्य 1 मीटर है। यदि किसी महिला के स्वर की तरंगदैर्ध्य 80 सेमी हो तो उसके स्वर की आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
Answer:
हल : तरंग की चाल v = n \( \times \lambda \)
= 400 से-1 \( \times \) 1 (पुरुष के लिए)
तथा v = n \( \times \) 80 सेमी
= n \( \times \) 0.8 मीटर (स्त्री के लिए)
\( \implies \) n \( \times \) 0.8 = 400 \( \times \) 1
\( \implies \) n = \( \frac{400}{0.8} \)
= 500 कम्पन-सेकण्ड-1 या हर्ट्ज ।
In simple words: महिला के स्वर की आवृत्ति 500 हर्ट्ज है, क्योंकि माध्यम में ध्वनि की चाल समान रहती है, और चाल आवृत्ति तथा तरंगदैर्ध्य का गुणनफल होती है।

🎯 Exam Tip: यह न्यूमेरिकल इस सिद्धांत पर आधारित है कि एक ही माध्यम में ध्वनि की चाल स्थिर रहती है, जिससे आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के बीच व्युत्क्रम संबंध का उपयोग करके अज्ञात मान की गणना की जा सकती है।

 

Question 6. तरंगों A और B की आवृत्तियों की तुलना कीजिए जबकि A का वेग 5 x 103 मी. से-1 तथा तरंगदैर्ध्य 25.0 मीटर और B का वेग 4 x 103 मी. से-1 तथा तरंग दैर्ध्य 200 मीटर है।
Answer:
हल : **A की आवृत्ति**
\[ \text{n}_{\text{A}} = \frac{\nu}{\lambda} = \frac{5 \times 10^3 \text{ मी.से}^{-1}}{25 \text{ मी}} = 200 \text{ से}^{-1} \]
**B की आवृत्ति**
\[ \text{n}_{\text{B}} = \frac{\nu}{\lambda} = \frac{4 \times 10^3 \text{ मी.से}^{-1}}{200 \text{ मी}} = 20 \text{ से}^{-1} \]
\( \implies \frac{\text{n}_{\text{A}}}{\text{n}_{\text{B}}} = \frac{200 \text{ से}^{-1}}{20 \text{ से}^{-1}} = 10:1 \)
In simple words: तरंग A की आवृत्ति 200 Hz और तरंग B की आवृत्ति 20 Hz है, जिससे उनकी आवृत्तियों का अनुपात 10:1 है, जो उनके वेग और तरंगदैर्ध्य से प्राप्त किया गया है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न तरंगों की आवृत्तियों की तुलना करते समय, यह सुनिश्चित करने के लिए कि वेग और तरंगदैर्ध्य के मान सही ढंग से लागू किए गए हैं, 'चाल = आवृत्ति x तरंगदैर्ध्य' सूत्र का उपयोग करें।

 

Question 7. एक तरंग की आवृत्ति 130 हर्ट्ज है। यदि तरंग की चाल 520 मी. से- हो तो उसकी तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए ।
Answer:
हल :
v = n \( \times \lambda \)
या, 130 \( \times \lambda \) = 520

\( \implies \lambda = \frac{520}{130} = 4 \) मीटर
In simple words: तरंग की तरंगदैर्ध्य 4 मीटर है, जिसे तरंग की चाल को उसकी आवृत्ति से विभाजित करके निकाला गया है।

🎯 Exam Tip: तरंगदैर्ध्य की गणना के लिए v = n\( \lambda \) सूत्र का सही अनुप्रयोग महत्वपूर्ण है, विशेषकर जब वेग और आवृत्ति दिए गए हों।

 

Question 8. किसी माध्यम में चलते वाली दो यांत्रिक तरंगों की आवृत्तियों का अनुपात 2 : 3 है। इन तरंगों के
(i) तरंगदैर्ध्य का अनुपात क्या होगा?
(ii) आवर्तकाल का अनुपात क्या होगा?
Answer: (i) 3 : 2 (ii) 3 : 2.
In simple words: चूंकि माध्यम में तरंगों की चाल स्थिर रहती है, यदि आवृत्तियों का अनुपात 2:3 है, तो उनके तरंगदैर्ध्य और आवर्तकाल का अनुपात इसके व्युत्क्रम, यानी 3:2, होगा।

🎯 Exam Tip: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एक ही माध्यम में आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य/आवर्तकाल एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं।

 

Question 9. किसी माध्यम में चलने वाली दो यांत्रिक तरंगों की आवृत्तियों का अनुपात 4 : 5 है।
(i) इन तरंगों के तरंगदैर्ध्य का अनुपात क्या होगा ?
(ii) इन तरंगों के आवर्तकाल का अनुपात क्या होगा ?
Answer: (i) 5 : 4. (ii) 5 : 4.
In simple words: यदि दो यांत्रिक तरंगों की आवृत्तियों का अनुपात 4:5 है, तो उनके तरंगदैर्ध्य और आवर्तकाल का अनुपात क्रमशः 5:4 होगा, क्योंकि ये राशियाँ आवृत्ति के व्युत्क्रमानुपाती होती हैं।

🎯 Exam Tip: समान माध्यम में तरंगों के लिए आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य/आवर्तकाल के बीच व्युत्क्रम संबंध को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. एक स्वरित्र 5 सेकण्ड में 1000 दोलन करता है। इसकी आवृत्ति तथा आवर्तकाल की गणना कीजिए ।
Answer:
हल : आवृत्ति = \( \frac{1000}{5} = 200 \) प्रति सेकण्ड
आवर्तकाल = \( \frac{1}{\text{आवृत्ति}} = \frac{1}{200} = 0.005 \) सेकण्ड ।
In simple words: स्वरित्र की आवृत्ति 200 हर्ट्ज (प्रति सेकंड दोलनों की संख्या) है, और इसका आवर्तकाल 0.005 सेकंड (एक दोलन पूरा करने में लगा समय) है।

🎯 Exam Tip: आवृत्ति की गणना दोलनों की संख्या को समय से विभाजित करके की जाती है, और आवर्तकाल आवृत्ति का व्युत्क्रम होता है।

 

Question 11. एक कम्पित वस्तु 1 सेकण्ड में 240 दोलन करती है। इसके द्वारा किये गये 15 कम्पनों के समय में तरंग कितनी दूर जायेगी? वायु में तरंग की चाल 330 मी. से-1 है।
Answer:
हल : 1 कम्पन का समय = \( \frac{1}{240} \) सेकण्ड

\( \implies \) 15 कम्पनों का समय = \( \frac{15}{240} \) सेकण्ड
दूरी = चाल \( \times \) समय
= 330 मी/स.-1 \( \times \frac{15}{240} \) सेकण्ड
= 20.625 मीटर।
In simple words: वस्तु 15 कंपनों के समय में 20.625 मीटर की दूरी तय करेगी, जिसकी गणना वायु में ध्वनि की चाल और कंपनों के लिए लगे कुल समय का उपयोग करके की जाती है।

🎯 Exam Tip: दूरी, चाल और समय के बीच संबंध (दूरी = चाल \( \times \) समय) का सही उपयोग और कंपनों के लिए लगे समय की गणना इस न्यूमेरिकल को हल करने में महत्वपूर्ण है।

 

Question 12. दो स्वरित्र A तथा B वायु में कंपन कर रहे हैं। A की आवृत्ति 116 हज एवं उसके द्वारा उत्पन्न तरंगों की तरंगदैर्ध्य 200 सेमी है। B की आवृत्ति 83 हर्ट्ज है। B द्वारा उत्पन्न तरंगों की तरंगदैर्ध्य कितनी होगी? वायु में तरंग का वेग कितना है?
Answer:
हल : **स्वरित्र A के लिए-**
n1 = 116 हर्ट्ज \( \lambda_{1} \) = 200 सेमी = 2 मी
**स्वरित्र B के लिए-**
n2 = 83 हर्ट्ज \( \lambda_{2} \) = ?

\( \implies \) n1\( \lambda_{1} \) = n2\( \lambda_{2} \)

\( \implies \lambda_{2} = \frac{\text{n}_{1}\lambda_{1}}{\text{n}_{2}} = \frac{116 \times 2}{83} = \frac{232}{83} = 2.795 \) मीटर
**वायु में ध्वनि का वेग**
v = n1\( \lambda_{1} \) = 116 \( \times \) 2
= 232 मीटर/सेकण्ड-1
In simple words: स्वरित्र B द्वारा उत्पन्न तरंगों की तरंगदैर्ध्य 2.795 मीटर है, और वायु में ध्वनि का वेग 232 मीटर प्रति सेकंड है, क्योंकि ध्वनि की चाल माध्यम में स्थिर रहती है।

🎯 Exam Tip: यह न्यूमेरिकल इस सिद्धांत पर आधारित है कि एक ही माध्यम में ध्वनि की चाल स्थिर रहती है (v = n\( \lambda \)), जिससे अज्ञात तरंगदैर्ध्य और वेग की गणना की जा सकती है।

 

Question 13. एक सरल लोलक 20 सेकण्ड में 40 दोलन पूरे करता है। दोलनों की आवृत्ति तथा आवर्तकाल ज्ञात कीजिए ।
Answer:
हल : आवृत्ति = \( \frac{40 \text{ कंपन}}{20 \text{ सेकण्ड}} = 2 \) कम्पन. सेकण्ड-1
आवर्तकाल = \( \frac{1}{2} = 0.5 \) सेकण्ड ।
In simple words: सरल लोलक की आवृत्ति 2 कंपन प्रति सेकंड है और उसका आवर्तकाल 0.5 सेकंड है, जो दोलनों की संख्या और कुल समय से गणना की जाती है।

🎯 Exam Tip: आवृत्ति और आवर्तकाल की गणना के लिए मूलभूत सूत्रों का सही उपयोग करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 14. एक स्वरित्र का आवर्तकाल सेकण्ड है। इसकी आवृत्ति ज्ञात कीजिए ।
Answer:
हल : आवृत्ति = \( \frac{1}{\text{आवर्तकाल}} = \frac{1}{1/256} \)
= 256 कम्पन. सेकण्ड-1
In simple words: स्वरित्र की आवृत्ति 256 कंपन प्रति सेकंड है, जो उसके दिए गए आवर्तकाल का व्युत्क्रम है।

🎯 Exam Tip: आवृत्ति और आवर्तकाल के व्युत्क्रम संबंध (f = 1/T) को याद रखना इस प्रकार के प्रश्नों को त्वरित रूप से हल करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 15. किसी माध्यम में चलने वाली दो यांत्रिक तरंगों की आवृत्तियों का अनुपात 3 : 4 है। इन तरंगों के तरंग दैर्ध्य का अनुपात ज्ञात कीजिए ।
Answer: हल : तरंगदैर्ध्य का अनुपात = 4 : 3
In simple words: When two mechanical waves travel in a medium, their wavelengths are inversely proportional to their frequencies. If the frequency ratio is 3:4, the wavelength ratio will be the inverse, 4:3.

🎯 Exam Tip: Remember the inverse relationship between frequency and wavelength (\( \lambda \propto 1/n \)) when the wave speed in a medium is constant.

 

Question 16. एक स्वरित्र का आवर्तकाल 0.05 सेकण्ड है। उससे उत्पन्न तरंग का तरंग दैर्ध्य 16 मीटर है। तरंग की चाल ज्ञात कीजिए ।
Answer: हल : तरंग की चाल = तरंग-दैर्ध्य × आवृत्ति
\( \text{तरंग की चाल} = \frac{\text{तंरग-दैर्ध्य}}{\text{आवर्तकाल}} = \frac{16 \text{ मी}}{0.05 \text{ सेकण्ड}} \)
\( = 320 \text{ मीटर. सेकण्ड}^{-1} \)
In simple words: To find the speed of the wave, divide its wavelength (16 meters) by its time period (0.05 seconds). This calculation gives us the wave's speed in meters per second.

🎯 Exam Tip: Ensure you correctly identify the given values for wavelength and time period. The formula `speed = wavelength / time period` is crucial for these calculations.

अभ्यास प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

निर्देश : प्रत्येक प्रश्न में दिये गये वैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर चुनिए

 

Question 1. हर्ट्ज मात्रक है
(a) ऊर्जा को
(b) वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता का
(c) आवृत्ति का
(d) तरंगदैर्ध्य का
Answer: (c) आवृत्ति का
In simple words: Hertz (Hz) is the standard unit used to measure frequency, which represents the number of cycles or vibrations per second.

🎯 Exam Tip: Knowing the SI units for fundamental physical quantities is essential for quick and accurate answers in objective questions.

 

Question 2. चन्द्रमा पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता रहता है। चन्द्रमा की गति
(a) सरल आवर्त गति
(b) कम्पनित गति है।
(c) दोलन गति है
(d) आवर्त गति है।
Answer: (d) आवर्त गति है।
In simple words: The Moon's motion around the Earth is an example of periodic motion because it repeats its path over a fixed interval of time.

🎯 Exam Tip: Distinguish between different types of motion: simple harmonic (to and fro about a mean position), vibratory (rapid to and fro), oscillatory (to and fro), and periodic (repeating after fixed time).

 

Question 3. किसी गैस में तरंगें उत्पन्न हो सकती हैं
(a) केवल अनुप्रस्थ
(b) केवल अनुदैर्ध्य
(c) अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्ध्य दोनों
(d) दोनों में से कोई नहीं
Answer: (b) केवल अनुदैर्ध्य
In simple words: Gases can only transmit longitudinal waves because they lack the elasticity to support shear forces, which are necessary for transverse wave propagation.

🎯 Exam Tip: Understand that gases can only propagate waves through compressions and rarefactions (longitudinal waves) and not through sideways displacements (transverse waves) due to their molecular structure.

 

Question 4. अनुप्रस्थ तरंगों में दो शृंगों के बीच की दूरी होती है
(a) आयाम
(b) अर्द्ध-आयाम
(c) तरंग दैर्ध्य
(d) अर्द्ध तरंग दैर्ध्य
Answer: (c) तरंग दैर्ध्य
In simple words: In transverse waves, the distance between two consecutive crests (shring) or two consecutive troughs (gart) is defined as the wavelength.

🎯 Exam Tip: Clearly differentiate between wavelength (distance between two identical points on successive waves) and amplitude (maximum displacement from equilibrium).

 

Question 5. ध्वनि की चाल सर्वाधिक होती है
(a) ठोस में
(b) द्रव में
(c) गैस में।
(d) ठोस व द्रव में
Answer: (a) ठोस में
In simple words: Sound travels fastest in solids because their particles are closely packed and can transmit vibrations more efficiently compared to liquids or gases.

🎯 Exam Tip: Remember the general trend for sound speed: solids > liquids > gases. This is due to the varying intermolecular distances and elasticity in different states of matter.

 

Question 6. एक तरंग की तरंगदैर्ध्य 50 सेमी तथा आवृत्ति 400 प्रति सेकण्ड है। तरंग की चाल होगी
(a) 8 सेमी. सेकण्ड-1
(b) 20,000 सेमी. सेकण्ड-1
(c) 400 सेमी.सेकण्ड-1
(d) 200 सेमी. सेकण्ड-1
Answer: (b) 20,000 सेमी. सेकण्ड-1
In simple words: To find the speed of the wave, multiply its wavelength (50 cm) by its frequency (400 per second), which results in 20,000 cm/s.

🎯 Exam Tip: Apply the formula `speed = frequency × wavelength (v = nλ)`. Pay attention to units, ensuring consistency (e.g., cm/s).

 

Question 7. अनुदैर्ध्य तरंगों में माध्यम के कण दोलन करते हैं
(a) तरंग गति की दिशा के लम्बवत्
(b) तरंग गति की दिशा से 60° के कोण पर
(c) तरंग गति की दिशा के समान्तर
(d) किसी दिशा में नहीं
Answer: (c) तरंग गति की दिशा के समान्तर
In simple words: In longitudinal waves, the particles of the medium vibrate back and forth in the same direction that the wave energy is traveling.

🎯 Exam Tip: Understand the key characteristic of longitudinal waves: particle displacement is parallel to wave propagation, unlike transverse waves where it is perpendicular.

 

Question 8. अनुप्रस्थ तरंगों में माध्यम के कण दोलन करते हैं
(a) तरंग गति की दिशा के लम्बवत्
(b) तरंग गति की दिशा के समान्तर
(c) तरंग गति की दिशा से 120° कोण पर
(d) किसी दिशा में नहीं
Answer: (a) तरंग गति की दिशा के लम्बवत्
In simple words: In transverse waves, the particles of the medium oscillate perpendicular to the direction in which the wave is moving.

🎯 Exam Tip: For transverse waves, visualize particles moving up and down while the wave travels horizontally, illustrating the perpendicular vibration.

 

Question 9. पानी में पत्थर डालने पर पानी की सतह पर उत्पन्न तरंगें होती हैं
(a) केवल अनुदैर्ध्य
(b) केवल अनुप्रस्थ
(c) अनुप्रस्थ व अनुदैर्ध्य दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (b) केवल अनुप्रस्थ
In simple words: When a stone is dropped into water, the ripples observed on the surface are transverse waves, where water particles move up and down perpendicular to the wave's direction of travel.

🎯 Exam Tip: Surface waves in water are primarily transverse, though a combination of longitudinal and transverse motion can occur below the surface. Focus on the visible surface phenomenon for this context.

 

Question 10. वायु में ध्वनि तरंगों की प्रकृति होती है
(a) केवल अनुप्रस्थ
(b) केवल अनुदैर्ध्य
(c) विद्युत चुम्बकीय तरंगें ।
(d) अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्ध्य दोनों प्रकार की
Answer: (b) केवल अनुदैर्ध्य
In simple words: Sound waves in air are longitudinal because they propagate through compressions and rarefactions, meaning air particles vibrate parallel to the direction of sound travel.

🎯 Exam Tip: Remember that sound waves require a medium and are mechanical waves, specifically longitudinal in fluids like air due to the absence of shear rigidity.

 

Question 11. किसी तरंग की चाल (u), आवर्तकाल (T) तथा तरंगदैर्ध्य λ में सही सम्बन्ध है
(a) u = λT
(b) u =
(c) u = \( \frac{\lambda}{T} \)
(d) T = λυ
Answer: (c) u = \( \frac{\lambda}{T} \)
In simple words: The speed of a wave (u) is directly proportional to its wavelength (λ) and inversely proportional to its time period (T), meaning it covers one wavelength in one time period.

🎯 Exam Tip: Recall the fundamental wave equation `speed = frequency × wavelength (v = nλ)` and the relationship `frequency = 1 / time period (n = 1/T)`. Substituting `n` leads to `v = λ/T`.

 

Question 12. ध्वनि तरंगों की आवृत्ति होती है
(a) 20 हर्ट्ज से कम
(b) 20,000 हर्ट्ज़ से अधिक
(c) 20 हर्ट्ज से 20,000 हर्ट्ज तक
(d) उपर्युक्त तीनों
Answer: (c) 20 हर्ट्ज से 20,000 हर्ट्ज तक
In simple words: The human ear can typically perceive sound waves with frequencies ranging from 20 Hertz to 20,000 Hertz, which is known as the audible range.

🎯 Exam Tip: Memorize the audible frequency range (20 Hz - 20 kHz) and understand that frequencies below this are infrasound and above are ultrasound.

 

Question 13. तरंगदैर्ध्य (λ), आवृत्ति (n) तथा तरंग दैर्यो की चाल (u) में सही सम्बन्ध है-
(a) n =
(b) u =
(c) λ =
(d) λ = \( \frac{u}{n} \)
Answer: (d) λ = \( \frac{u}{n} \)
In simple words: The wavelength (λ) of a wave is found by dividing its speed (u) by its frequency (n), reflecting how far the wave travels during one cycle of oscillation.

🎯 Exam Tip: The fundamental wave equation is `u = nλ`. Rearranging this equation to solve for wavelength gives `λ = u/n`.

 

Question 14. वायु में दो ध्वनियों की तरंग दैर्ध्य का अनुपात 1 : 4 है। इनकी आवृत्तियों का अनुपात होगा
(a) 1 : 4
(b) 1 :2
(c) 4 : 1
(d) 2:1
Answer: (c) 4 : 1
In simple words: In the same medium (air), the speed of sound is constant. Therefore, wavelength and frequency are inversely proportional. If the wavelength ratio is 1:4, the frequency ratio will be its inverse, 4:1.

🎯 Exam Tip: When the speed of a wave is constant in a given medium, frequency is inversely proportional to wavelength (`n ∝ 1/λ`). This means if wavelength increases, frequency decreases proportionally.

उत्तरमाला


1. (c)
2. (d)
3. (b)
4. (c)
5. (a)
6. (b)
7. (c)
8. (a)
9. (b)
10. (b)
11. (c)
12. (c)
13. (d)
14. (c)

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