UP Board Solutions Class 9 Science Chapter 11 Work, Power And Energy

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Detailed Chapter 11 कार्य, शक्ति और ऊर्जा UP Board Solutions for Class 9 Science

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Class 9 Science Chapter 11 कार्य, शक्ति और ऊर्जा UP Board Solutions PDF

Up Board Solutions For Class 9 Science Chapter 11 Work, Power And Energy (कार्य, शक्ति और ऊर्जा)

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गतिज ऊर्जा का सूत्र पाठच - पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 164)

स्थितिज ऊर्जा और गतिज ऊर्जा का योग

 

Question 1. किसी वस्तु पर 7 N को बल लगता है। मान लीजिए बल की दिशा में विस्थापन 8 m है। (चित्र)। मान लीजिए वस्तु के विस्थापन के समय लगातार वस्तु पर बल लगता रहता है। इस स्थिति में किया गया कार्य कितना होगा?
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में एक वस्तु पर 7 न्यूटन का बल क्षैतिज दिशा में लगता हुआ दिखाया गया है, और बल की दिशा में वस्तु का 8 मीटर विस्थापन होता है। यह बल वस्तु के विस्थापन के दौरान लगातार लग रहा है।
Answer: हल- बल = 7N, विस्थापन = 8 m
किया गया कार्य = बल x विस्थापन
= 7N x 8m
= 56 Nm or J
In simple words: The work done is calculated by multiplying the applied force (7N) by the displacement (8m), resulting in 56 Joules. Work is done when a force causes an object to move over a distance.

🎯 Exam Tip: Work done is a scalar quantity, and its SI unit is Joule (J). Remember the formula W = F × d for force and displacement in the same direction.

Karya Tatha Urja Class 9 पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 165)

कार्य तथा ऊर्जा प्रश्न उत्तर

 

Question 1. हम कब कहते हैं कि कार्य किया गया है?
Answer: जब किसी वस्तु पर बल लगाया जाता है और वस्तु विस्थापित हो जाती है तो कहा जाता है कि कार्य किया गया है।
In simple words: Work is said to be done when a force acts on an object, causing it to move and change its position.

🎯 Exam Tip: For work to be done, two conditions must be met: a force must be applied, and the object must undergo displacement in the direction of the force.

 

Question 2. जब किसी वस्तु पर लगने वाला बल इसके विस्थापन की दिशा में हो तो किए गए कार्य को व्यंजक लिखिए।
Answer: जब बल विस्थापन की दिशा में ही लगता है तो कार्य = बल x विस्थापन
In simple words: If the force and displacement are in the same direction, the work done is simply the product of the force and the distance moved.

🎯 Exam Tip: This formula \(W = F \times d\) is fundamental for calculating work when the force is parallel to the displacement. Ensure units are consistent (Newtons for force, meters for displacement, Joules for work).

 

Question 3. 1J कार्य को परिभाषित कीजिए ।
Answer: जब किसी वस्तु पर एक न्यूटन का बल लगाने पर वस्तु में बल की दिशा में 1 मीटर का विस्थापन हो जाता है तो किया गया कार्य 1 J कहलाता है। \(1 J= 1 N \times 1 m\)
In simple words: One Joule of work is done when a force of one Newton causes an object to move one meter in the direction of the force.

🎯 Exam Tip: Understanding the definition of a Joule is crucial for foundational knowledge in physics. It directly links force, displacement, and work.

 

Question 4. बैलों की एक जोड़ी खेत जोतते समय किसी हल पर 140 N बल लगाती है। जोता गया खेत 15 m लंबा है। खेत की लंबाई को जोतने में कितना कार्य किया गया?
Answer: बैलों द्वारा लगाया गया बल = 140N
जोता गया खेत = 15 m
किया गया कार्य = बल x विस्थापन
= 140 N x 15 m
= 2100 Nm या 2100 जूल
In simple words: The work done by the oxen is found by multiplying the force they apply (140 N) by the distance they plow (15 m), resulting in 2100 Joules.

🎯 Exam Tip: This is a direct application of the work formula \(W = F \times d\). Pay attention to units, ensuring force is in Newtons and distance in meters to get work in Joules.

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 169)

 

Question 1. किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा क्या होती है?
Answer: गतिज ऊर्जा - किसी वस्तु में उसकी गति के कारण संचित ऊर्जा उसकी गतिज ऊर्जा कहलाती है। गतिज ऊर्जा उस वस्तु की चाल बढ़ने पर बढ़ती है। अथवा किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा उस कार्य के बराबर होती है जो उस वस्तु का वेग प्राप्त करने के लिए वस्तु पर किया जाता है। उदाहरण- चलती हुई कार, दौड़ते हुए खिलाड़ी, बहते हुए जल, गति करते हुए अणु इन सभी में गतिज ऊर्जा होती है।
In simple words: Kinetic energy is the energy an object possesses due to its motion; the faster or heavier an object, the more kinetic energy it has.

🎯 Exam Tip: Kinetic energy is a scalar quantity, and its SI unit is Joule. Always remember its dependence on both mass and speed, especially that it's proportional to the square of the speed.

 

Question 2. किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा के लिए व्यंजक लिखिए।
Answer: वस्तु की गतिज ऊर्जा = \( \frac{1}{2} mv^2 \) जहाँ, \(m\) = वस्तु का द्रव्यमान, \(v\) = वस्तु की चाल
In simple words: The formula for kinetic energy is half times the mass of the object multiplied by the square of its velocity.

🎯 Exam Tip: This formula, \(KE = \frac{1}{2} mv^2\), is fundamental. Note that velocity is squared, meaning a change in velocity has a much greater impact on kinetic energy than a change in mass.

 

Question 3. 5 ms-1 के वेग से गतिशील किसी m द्रव्यमान की वस्तु की गतिज ऊर्जा 25 J है। यदि इसके वेग को दोगुना कर दिया जाए तो इसकी गतिज ऊर्जा कितनी हो जायेगी? यदि इसके वेग को तीन गुना कर दिया जाए तो इसकी गतिज ऊर्जा कितनी हो जायेगी?
Answer: हल-वस्तु का द्रव्यमान = \(m\)
वस्तु का वेग, \(v = 5 ms^{-1}\)
गतिज ऊर्जा, \(K = 25 J\)
\(K.E = \frac{1}{2} mv^2\)
अथवा
\(25 = \frac{1}{2} \times m \times (5)^2\)

\(m = 2 kg\)
(i) वेग, दुगना करने पर
\(v = 10 ms^{-1}, m = 2 kg\)
\(K.E = \frac{1}{2} mv^2\)
\( = \frac{1}{2} \times 2 \times (10)^2 \)
\( = 100 J\)
(ii) वेग, तीन गुना करने पर
\(v = 15 ms^{-1}, m = 2 kg\)
\(KE = \frac{1}{2} mv^2\)
\( = \frac{1}{2} \times 2 \times (15)^2\)
\( = 225 J\)
In simple words: Since kinetic energy is proportional to the square of velocity, doubling the velocity increases the kinetic energy by a factor of four, and tripling it increases it by a factor of nine.

🎯 Exam Tip: This problem highlights the quadratic relationship between kinetic energy and velocity. Remember that \(KE \propto v^2\), which is a common source of error if not carefully applied.

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 174)

 

Question 1. शक्ति क्या है?
Answer: शक्ति, प्रति इकाई समय में किया गया कार्य है।
In simple words: Power is the rate at which work is done or energy is transferred, measuring how quickly work is accomplished.

🎯 Exam Tip: Power is a scalar quantity, and its SI unit is the Watt. The formula is \(P = \frac{W}{t}\), where \(W\) is work and \(t\) is time.

 

Question 2. एक वाट शक्ति को परिभाषित कीजिए।
Answer: यदि किसी स्रोत द्वारा एक सेकण्ड में एक जूल ऊर्जा की आपूर्ति की जाए तो उस स्रोत की शक्ति एक वाट होगी ।
In simple words: One Watt is defined as the power consumed or produced when one Joule of energy is transferred or converted in one second.

🎯 Exam Tip: This definition \(1 \text{ Watt} = 1 \text{ Joule/second}\) is fundamental. It connects the units of power, energy, and time directly.

 

Question 3. एक लैम्प 1000 J विद्युत ऊर्जा 10 सेकण्ड में व्यय करता है। इसकी शक्ति कितनी है?
Answer: हल - समय, \(t = 10s\), ऊर्जा = कार्य = \(1000 J\)
शक्ति = \( \frac{\text{कार्य}}{\text{समय}} = \frac{1000J}{10s} \)
= \(100\) वाट
In simple words: The lamp's power is calculated by dividing the energy consumed (1000 Joules) by the time taken (10 seconds), resulting in 100 Watts.

🎯 Exam Tip: This is a straightforward calculation using the power formula \(P = \frac{W}{t}\). Ensure to state the final answer with the correct unit, which is Watts (W).

 

Question 4. औसत शक्ति को परिभाषित कीजिए ।
Answer: ऊर्जा आपूर्ति को कुल लिए गए समय से विभाजित करने पर औसत ऊर्जा प्राप्त होती है। यदि कोई एजेन्ट \(t\) समय में 'W' यूनिट कार्य करता है, तब औसत शक्ति 'P'
\(P = \frac{W}{t}\)
In simple words: Average power is the total work done or energy supplied divided by the total time taken to do it.

🎯 Exam Tip: Average power considers the total work over a period, unlike instantaneous power which is at a specific moment. The formula is essential for calculating overall energy transfer rates.

अभ्यास प्रश्न (पृष्ठ संख्या 176-178)

 

Question 1. निम्न सूचीबद्ध क्रिया-कलापों को ध्यान में देखिए। अपनी कार्य शब्द की व्याख्या के आधार पर तर्क दीजिए कि इनमें कार्य हो रहा है अथवा नहीं।
(1) सूमा एक तालाब में तैर रही है।
(2) एक गधे ने अपनी पीठ पर बोझ को उठा रखा है।
(3) एक पवन-चक्की (पिण्ड मिल) कुएँ से पानी उठा रही है।
(4) एक हरे पौधे में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया हो रही है।
(5) एक इंजन रेल को खींच रहा है।
(6) अनाज के दाने सूर्य की धूप में सूख रहे हैं।
(7) एक पाल-नाव पवन ऊर्जा के कारण गतिशील है।
Answer:
(1) सूमा एक तालाब में तैर रही है-तैरते समय सूमा अपने हाथों से पानी पीछे फेंकती है तथा प्रतिक्रिया के कारण सूमा पर आगे की ओर बल लगता है। जिसके कारण वह पानी पर तैरती हुई 'आगे बढ़ती है। अतः कार्य हुआ है।
(2) एक गधे ने अपनी पीठ पर बोझ उठा रखा है- इस स्थिति में कोई कार्य नहीं हुआ क्योंकि गुरुत्व बल नीचे की ओर ऊर्ध्वाधर दिशा में कार्य कर रहा है परन्तु कोई विस्थापन नहीं हो रहा है।
(3) एक पवन चक्की कुएँ से पानी उठा रही है- इस स्थिति में पवन चक्की द्वारा कार्य किया जा रहा है क्योंकि पानी कुएँ से ऊपर की ओर उठाया जा रहा है जिससे बल लगाने पर विस्थापन हुआ है।
(4) एक हरे पौधे में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया हो रही है- यहाँ कोई कार्य नहीं हो रहा है क्योंकि प्रत्यक्ष रूप से विस्थापन नहीं हो रहा है।
(5) अनाज के दाने सूर्य की गर्मी में सूख रहे हैं- यहाँ भी कोई कार्य नहीं हो रहा है क्योंकि अनाज अपने स्थान पर स्थिर है। उसमें कोई विस्थापन नहीं होता।
(6) एक इंजन ट्रेन को खींच रहा है- इंजन द्वारा ट्रेन को खींचकर ले जाने में कार्य हो रहा है क्योंकि वस्तु का विस्थापन बल लगाने पर बल की दिशा में हो रहा है।
(7) एक पाल-नाव पवन ऊर्जा के कारण गतिशील है- यहाँ पवन गतिज ऊर्जा के कारण पाल-नाव पर बल लगाती है जिससे पाल-नाव की स्थिति में विस्थापन होता है। अतः यहाँ कार्य होता है।
In simple words: Work requires both a force and displacement in the direction of that force. Activities like swimming, drawing water with a windmill, an engine pulling a train, and a sailboat moving by wind involve work, while holding a load, photosynthesis, or drying grains do not, as there's no displacement or displacement isn't in the direction of the relevant force.

🎯 Exam Tip: To determine if work is being done, always check for two conditions: a force acting on an object, and the object moving (displacing) in the direction of the force. If either is absent, no work is done in the physics sense.

 

Question 2. एक पिण्ड को धरती से किसी कोण पर फेंका गया है। यह एक वक्र पथ पर चलता है और वापस पृथ्वी पर आ गिरता है। पिण्ड के पथ के प्रारंभिक तथा अन्तिम बिन्दु एक ही क्षैतिज रेखा पर स्थित हैं। पिण्ड पर गुरुत्व बल द्वारा कितना कार्य किया गया?
Answer: गुरुत्व बल द्वारा वस्तु पर किया गया कार्य शून्य होगा क्योंकि गुरुत्व बल नीचे की ओर ऊर्ध्वाधर दिशा में कार्य कर रहा है परन्तु वस्तु का विस्थापन क्षैतिज दिशा में है जो कि बल की दिशा के साथ 90° का कोण बनाती है। अतः गुरुत्व बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होगा।
In simple words: No work is done by gravity when an object starts and ends at the same horizontal level, because the gravitational force is vertical while the net displacement is horizontal, making the angle between them 90 degrees.

🎯 Exam Tip: Work done by a force is zero if the force is perpendicular to the displacement. For gravity, if the vertical displacement is zero over a closed horizontal path, no work is done by gravity.

 

Question 3. एक बैट्री बल्ब जलाती है। इस प्रक्रम में होने वाले ऊर्जा परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
Answer: बैट्री में उपयोग किए जाने वाले रासायनिक पदार्थों की रासायनिक ऊर्जा का सबसे पहले विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरण होता है। बल्ब जलने पर विद्युत ऊर्जा का प्रकाश ऊर्जा में रूपान्तरण होता है।
In simple words: When a battery powers a bulb, chemical energy stored in the battery is converted into electrical energy, which then transforms into light and heat energy in the bulb.

🎯 Exam Tip: This illustrates the law of conservation of energy, where energy merely changes forms (chemical to electrical to light/heat) but is not created or destroyed. Be precise in listing the sequence of energy transformations.

 

Question 4. 20 kg द्रव्यमान पर लगने वाला कोई बल इसके वेग को 5 ms-1 से 2 ms-1 में परिवर्तित कर देता है। बल द्वारा किए गए कार्य का परिकलन कीजिए।
Answer: हल-
बल द्वारा वस्तु पर किया गया कार्य = वस्तु की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन
\[ = \frac{1}{2} mv^2 - \frac{1}{2} mu^2 \]
\[ = \frac{1}{2} m (v^2 - u^2) \]
परन्तु \(u = 5 ms^{-1}\), \(v = 2 ms^{-1}\), \(m = 20 kg\)
अतः किया गया कार्य = \( \frac{1}{2} m (v^2 - u^2) \)
\( = \frac{1}{2} \times 20 [(2)^2 - (5)^2)] \)
\( = 10 (4 - 25) \)
\( = 10 \times (-21) \)
\( = -210 J \)
ऋणात्मक चिन्ह दर्शाता है कि बल वस्तु की गति के विपरीत दिशा में लग रहा है।
In simple words: The work done by the force is calculated as the change in kinetic energy of the object. Since the final velocity is less than the initial velocity, the work done is negative, indicating the force acted opposite to the direction of motion.

🎯 Exam Tip: Remember the work-energy theorem: net work done on an object equals the change in its kinetic energy. A negative sign for work indicates that the force opposed the motion, causing the object to slow down.

 

Question 5. 10 kg द्रव्यमान का एक पिण्ड मेज पर A बिन्दु पर रखा है। इसे B बिन्दु तक लाया जाता है। यदि A तथा B को मिलाने वाली रेखा क्षैतिज है तो पिण्ड पर गुरुत्व बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
Answer: वस्तु पर लगा गुरुत्व बल ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कार्य कर रहा है तथा वस्तु का विस्थापन गुरुत्व बल के साथ 90° कोण पर क्षैतिज दिशा में है। अतः गुरुत्व बल द्वारा वस्तु पर किया गया कार्य शून्य होगा।
In simple words: No work is done by gravity when an object is moved horizontally on a table because the gravitational force acts downwards, perpendicular to the horizontal displacement.

🎯 Exam Tip: This reinforces the concept that work is zero when the force and displacement are perpendicular (angle of 90°). Gravity only does work if there is a vertical component of displacement.

 

Question 6. मुक्त रूप से गिरते एक पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा लगातार कम होती जाती है। क्या यह ऊर्जा संरक्षण नियम का उल्लंघन करती है? कारण बताइए ।
Answer: स्वतंत्र रूप से गिरते एक हुए पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा धीरे-धीरे घटती जाती है। यह ऊर्जा संरक्षण नियम के विरुद्ध नहीं है क्योंकि जब वस्तु स्वतंत्र रूप से नीचे गिरती है तो उसकी स्थितिज ऊर्जा का रूपान्तरण गतिज ऊर्जा में होता जाता है। किसी भी बिन्दु पर गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा का योग हमेशा समान रहता है। जो कि ऊर्जा संरक्षण नियम के अनुसार ही है।
In simple words: A freely falling object's potential energy decreases, but this is not a violation of energy conservation. Instead, the lost potential energy is converted into kinetic energy, ensuring that the total mechanical energy (potential + kinetic) remains constant throughout the fall.

🎯 Exam Tip: This is a classic example of energy transformation under the conservation of mechanical energy. Understand that a decrease in one form of energy is compensated by an increase in another, keeping the total constant in the absence of external non-conservative forces.

 

Question 7. जब आप साइकिल चलाते हैं तो कौन-कौन से ऊर्जा रूपांतरण होते हैं?
Answer: साइकिल चलाते समय शरीर की पेशीय ऊर्जा साइकिल की गतिज ऊर्जा में बदल जाती है। साइकिल की गतिज ऊर्जा घर्षण बल के विरुद्ध कार्य करने में व्यय हो जाती है।
In simple words: When cycling, your body's chemical energy (from food) converts into muscular energy, which then becomes the kinetic energy of the bicycle. Some of this energy is also lost as heat due to friction.

🎯 Exam Tip: This question highlights multiple energy transformations: chemical (body) \(\implies\) muscular \(\implies\) kinetic (bicycle) + heat (friction). Be able to identify the initial, intermediate, and final energy forms.

 

Question 8. जब आप अपनी सारी शक्ति लगाकर एक बड़ी चट्टान को धकेलना चाहते हैं और इसे हिलाने में असफल हो जाते हैं तो क्या इस अवस्था में ऊर्जा का स्थानांतरण होता है? आपके द्वारा व्यय की गई ऊर्जा कहाँ चली जाती है?
Answer: नहीं, जब हम अपनी पूरी शक्ति से विशाल चट्टान को धकेलने पर नहीं खिसका पाते हैं, तो ऊर्जा का हस्तांतरण नहीं होता है। जब हम चट्टान को धकेलते हैं, तो हमारी पेशियाँ तन जाती हैं तथा इन पेशियों की ओर रक्त बहुत तेजी से विस्थापित होता है। इन परिवर्तनों में ऊर्जा खपत होती है तथा हम थका हुआ महसूस करते हैं।
In simple words: No, energy is not transferred to the rock if it doesn't move. The energy you expend is converted into internal energy (heat) within your muscles, which is why you feel tired.

🎯 Exam Tip: This illustrates the definition of work in physics: force times displacement. If there is no displacement, despite applying force, no work is done on the object. Your expended energy is dissipated internally as heat.

 

Question 9. किसी घर में एक महीने में ऊर्जा की 250 यूनिटें' व्यय हुईं। यह ऊर्जा जूल में कितनी होगी?
Answer: हल-
पूरे महीने के दौरान कुल ऊर्जा खपत = 250 न्यूनिट
1 यूनिट = 1 kWh
250 न्यूनिट = 250 kWh
पुनः \(1 kWh = 36,00,000 J\)
\(250 kWh = 250 \times 36,00,000 J = 90,00,00,000 J = 9 \times 10^8 J\)
In simple words: The total energy consumed in Joules is found by converting 250 kilowatt-hours to Joules using the conversion factor that 1 kWh equals 3.6 million Joules.

🎯 Exam Tip: The conversion factor between kilowatt-hour (kWh) and Joule (J) is crucial. Remember that \(1 kWh = 3.6 \times 10^6 J\). This conversion is frequently tested in numerical problems.

 

Question 10. 40 kg द्रव्यमान का एक पिण्ड धरती से 5 m की ऊँचाई तक उठाया जाता है। इसकी स्थितिज ऊर्जा कितनी है? यदि पिण्ड को मुक्त रूप से गिरने दिया जाए तो जब पिण्ड ठीक आधे रास्ते पर है उस समय इसकी गतिज ऊर्जा का परिकलन कीजिए। (g = 10 ms-2)
Answer: हल-
(i) वस्तु का द्रव्यमान, \(m = 40 kg\)
ऊँचाई, \(h = 5 m\)
गुरुत्वीय त्वरण, \(g = 10 m/s^2\)
स्थितिज ऊर्जा = \(m \times g \times h\)
\( = 40 kg \times 10 m/s^2 \times 5 m\)
\( = 200 J\)
उत्तर
(ii) जब वस्तु ऊपर से नीचे की ओर आधी दूरी तय
करती है तो वस्तु द्वारा तय की गई दूरी \(S = \frac{5}{2} = 2.5 m\)
मान लिया आधी दूरी तय करने पर वस्तु का वेग = \(v\)
यहाँ \(u = 0\), \(S = 2.5 m\), \(g = 10 ms^{-2}\)
\(v^2 = u^2 - 2 gS\)
\(v^2 = 2 \times 10 \times 2.5 = 50\)
\(v = \sqrt{50} ms^{-1}\)
गतिज ऊर्जा = \( \frac{1}{2} m.v^2 \)
\( = \frac{1}{2} \times 40 \times (\sqrt{50})^2 \)
\( = \frac{1}{2} \times 40 \times 50 = 1000 J\).
उत्तर
In simple words: The initial potential energy of the object is calculated as mgh. When it falls halfway, its potential energy reduces by half, and this lost potential energy is converted into kinetic energy, which can be found using the equations of motion to determine its velocity at that point.

🎯 Exam Tip: This problem involves both potential and kinetic energy calculations, illustrating the conservation of mechanical energy. Pay close attention to the point at which kinetic energy is calculated (halfway down) and correctly apply the equations of motion.

 

Question 11. पृथ्वी के चारों ओर घूमते हुए एक उपग्रह पर गुरुत्व बल द्वारा कितना कार्य किया जाएगा? अपने उत्तर को तर्कसंगत बनाइए ।
Answer: पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगा रहे उपग्रह द्वारा गुरुत्व बल के कारण किया गया कार्य शून्य होगा क्योंकि गुरुत्व बल की क्रिया-रेखा की दिशा उपग्रह की गति की दिशा के लम्बवत् है अतः किया गया कार्य = \(F \times s \times \text{Cos } \theta\)
\( = F \times s \times \text{Cos } 90^\circ \)
\( = F \times s \times 0 = 0\).
In simple words: Gravity does no work on a satellite orbiting Earth in a circular path because the gravitational force acts towards the center of Earth (perpendicular to the satellite's velocity), while the satellite's displacement at any instant is tangential to its path.

🎯 Exam Tip: This is a key concept in orbital mechanics. Remember that for uniform circular motion, the centripetal force (here, gravity) is always perpendicular to the displacement, leading to zero work done by that force.

 

Question 12. क्या किसी पिण्ड पर लगने वाले किसी भी बल की अनुपस्थिति में, इसका विस्थापन हो सकता है? सोचिए। इस प्रश्न के बारे में अपने मित्रों तथा अध्यापकों से विचार-विमर्श कीजिए ।
Answer: हाँ, बल की अनुपस्थिति में वस्तु में विस्थापन हो सकता है। यदि वस्तु एकसमान गति से चल रही है। तो उस वस्तु पर कोई बाह्य बल कार्य नहीं करता परन्तु वस्तु में विस्थापन होता है। जब वस्तु को किसी आनत-तल से मुक्त अवस्था में छोड़ा जाता है तो वह गुरुत्व बल के कारण नीचे आती है परन्तु पृथ्वी तल पर पहुँचने पर क्षैतिज दिशा में उस पर कोई बल कार्य नहीं करता परन्तु वह वस्तु क्षैतिज दिशा में एकसमान गति से चलती है तथा उसमें विस्थापन होता रहता है।
In simple words: Yes, displacement can occur without an external net force if an object is already moving at a constant velocity (Newton's First Law). For instance, a ball rolling on a frictionless surface continues to move even without further applied force.

🎯 Exam Tip: This question tests understanding of Newton's first law of motion. A body in uniform motion continues to be in uniform motion unless acted upon by a net external force. Thus, displacement occurs without net force if already in motion.

 

Question 13. कोई मनुष्य भूसे के एक गट्ठर को अपने सिर पर 30 मिनट तक रखे रहता है और थक जाता है। क्या उसने कोई कार्य किया या नहीं? अपने उत्तर को तर्कसंगत बनाइए।
Answer: भूसे के गट्ठे पर व्यक्ति द्वारा कोई कार्य नहीं किया गया क्योंकि गट्ठे की स्थिति में कोई विस्थापन नहीं हुआ ।
In simple words: In physics, no work is done on the bundle of hay because despite applying force, the bundle does not move (displace) from its position. The man gets tired because his muscles are doing internal work.

🎯 Exam Tip: Differentiate between "work" in a physiological sense and "work" in a physics sense. For work in physics, displacement in the direction of the force is essential. If no displacement, no work is done on the object.

 

Question 14. एक विद्युत हीटर (ऊष्मक) की घोषित शक्ति 1500 w है। 10 घंटे में यह कितनी ऊर्जा उपयोग करेगा?
Answer: हल-
विद्युत हीटर की शक्ति (P) = 1500 w
लिया गया समय है = 10 घंटे = \(10 \times 3600\) सेकण्ड
हीटर द्वारा खर्च की गई ऊर्जा = \(P \times t = 1500 \times 36000 = 54000000 J\)
ऊर्जा (kWh में) = \(1.5 kWh\).
In simple words: The energy consumed by the heater is calculated by multiplying its power (1500 Watts) by the time it's used (10 hours, converted to seconds), giving the energy in Joules or kilowatt-hours.

🎯 Exam Tip: This problem involves calculating energy consumption using the formula \(E = P \times t\). Be careful with unit conversions, especially converting hours to seconds for Joules or maintaining kilowatts and hours for kWh.

 

Question 15. जब हम किसी सरल लोलक के गोलक को एक ओर ले जाकर छोड़ते हैं तो यह दोलन करने लगता है। इसमें होने वाले ऊर्जा परिवर्तनों की चर्चा करते हुए ऊर्जा संरक्षण के नियम की व्याख्या कीजिए। गोलक कुछ समय पश्चात् विराम अवस्था में क्यों आ जाता है? अंततः इसकी ऊर्जा को क्या होता है? क्या यह ऊर्जा संरक्षण नियम का उल्लंघन है ?
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक सरल लोलक के दोलन की विभिन्न स्थितियों को दर्शाता है। स्थिति (a) और (c) लोलक के चरम बिंदु हैं जहां स्थितिज ऊर्जा अधिकतम होती है, और स्थिति (b) मध्य बिंदु है जहां गतिज ऊर्जा अधिकतम होती है। यह दोलन के दौरान स्थितिज और गतिज ऊर्जा के रूपांतरण को समझाता है।
Answer: एक सरल लोलक में एक धातु का गोलाकार गोलक किसी धागे द्वारा किसी दृढ़ आधार से लटकाया जाता है। जब किसी लोलक के गोले को एक ओर विस्थापित किया जाता है तो उसकी स्थितिज ऊर्जा में कुछ वृद्धि हो जाती है। जब इस लोलक को विराम अवस्था से छोड़ा जाता है तो उसकी गतिज ऊर्जा बढ़ती है तथा स्थितिज ऊर्जा घटती जाती है। मध्य स्थिति में पहुँचने तक गतिज ऊर्जा अधिकतम हो जाती है जैसा चित्रे (b) में दिखाया गया है। जब गोलक मध्य स्थिति से दूसरी ओर गति करता है तो उसकी गतिज ऊर्जा कम होती जाती है तथा स्थितिज ऊर्जा बढ़ती जाती है। कुल ऊर्जा, गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा का योग होती है। यह कुल ऊर्जा गोलक की चरम सीमा पर स्थितिज ऊर्जा अथवा गोलक की मध्य अवस्था में गतिज ऊर्जा के बराबर होती है। इस प्रकार किसी भी स्थिति में कुल ऊर्जा हमेशा बराबर रहती है अर्थात् ऊर्जा संरक्षित रहती है। अतः हम कह सकते हैं कि जब लोलक दोलन करता है तो किसी भी स्थिति में उसकी ऊर्जा हमेशा संरक्षित रहती है।
गोलक धीरे-धीरे विराम अवस्था में आ जाता है इसका कारण यह है कि लोलक के आधार बिन्दु पर घर्षण तथा वायु के प्रतिरोध के कारण ऊर्जा का क्षय होता रहता है। इस प्रकार गतिशील लोलक की आरंभिक यांत्रिक ऊर्जा का घर्षण के कारण ऊष्मा में क्षय होता रहता है अंततः लोलक विराम अवस्था में आ जाता है।
In simple words: A swinging pendulum continuously converts potential energy to kinetic energy and vice versa, obeying the law of conservation of mechanical energy (potential + kinetic = constant). It eventually stops due to energy loss from air resistance and friction at the pivot, converting mechanical energy into heat, but the total energy of the system remains conserved.

🎯 Exam Tip: The pendulum is an excellent example for demonstrating energy conservation and transformation. For an ideal pendulum, total mechanical energy is conserved. For a real pendulum, friction and air resistance convert mechanical energy into heat, causing it to eventually stop, but total energy of the universe (pendulum + surroundings) is still conserved.

 

Question 16. m द्रव्यमान का एक पिण्ड एक नियत वेग v से गतिशील है। पिण्ड पर कितना कार्य करना चाहिए कि यह विराम अवस्था में आ जाये?
Answer: हल-
वस्तु का द्रव्यमान = \(m\)
वस्तु का प्रारंभिक वेग = \(v\),
वस्तु का अन्तिम वेग = \(0\)
वस्तु पर किया गया कार्य = वस्तु की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन = अन्तिम गतिज ऊर्जा - प्रारंभिक गतिज ऊर्जा
\( = \frac{1}{2} m \times (0)^2 - \frac{1}{2} mv^2 \)
\( = 0 - \frac{1}{2} mv^2 = -\frac{1}{2} mv^2 \)
ऋणात्मक चिन्ह यह प्रदर्शित करता है कि किया गया कार्य वस्तु की गति की दिशा के विपरीत है।
In simple words: To bring a moving object to rest, a negative amount of work, equal in magnitude to its initial kinetic energy, must be done on it. This negative sign indicates that the force applied is opposite to the direction of motion.

🎯 Exam Tip: This problem directly applies the work-energy theorem. The work required to stop an object is equal to the negative of its initial kinetic energy. The negative sign signifies that the work is done against the motion.

 

Question 17. 1500 kg द्रव्यमान की कार को जो 60 km/h के वेग से चल रही है, रोकने के लिए किए गए कार्य का परिकलन कीजिए ।
Answer: हल-
द्रव्यमान \(m = 1500 kg\)
वेग \(v = 60 km/h = \frac{60 \times 1000}{3600} m/s = 16.67 m/s\)
गतिज ऊर्जा = \( \frac{1}{2} mv^2 \)
\( = \frac{1}{2} \times 1500 kg \times (16.67 m/s)^2 \)
\( = 208416.67 J \)
In simple words: The work required to stop the car is equal to its initial kinetic energy. First, convert the car's speed from km/h to m/s, then use the kinetic energy formula to calculate the work done.

🎯 Exam Tip: Remember to convert all units to SI (kilograms, meters, seconds) before calculation. The work done to stop an object is equal to its initial kinetic energy, as the final kinetic energy is zero.

 

Question 18. निम्न में से प्रत्येक स्थिति में m द्रव्यमान के एक पिण्ड पर एक बल F लग रहा है। विस्थापन की दिशा पश्चिम से पूर्व की ओर है जो एक लंबे तीर से प्रदर्शित की गई है। चित्रों को ध्यानपूर्वक देखिए और बताइए कि किया गया कार्य ऋणात्मक है, धनात्मक है। या शून्य है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र तीन अलग-अलग स्थितियों को दर्शाता है जहां एक बल F एक वस्तु पर कार्य कर रहा है, जबकि विस्थापन की दिशा (एक लंबे तीर से इंगित) पश्चिम से पूर्व की ओर है। चित्र (a) में बल विस्थापन के लंबवत है; चित्र (b) में बल विस्थापन की दिशा में है; और चित्र (c) में बल विस्थापन की विपरीत दिशा में है।
Answer: चित्र के (a) स्थिति में किए गए कार्य की मात्रा शून्य है, क्योंकि बल विस्थापन के लम्बवत् कार्य करता है। \(0\) कोण पर किया गया कार्य = \(F \times s \times \text{cos } \theta\)
\(W = F \times s \times \text{cos } 90^\circ\)
\(W = F \times s \times 0 = 0 J\)
चित्र के (b) स्थिति में किया गया कार्य धनात्मक है, क्योंकि वस्तु का विस्थापन आरोपित बल की दिशा में होता है। चित्र के (c) स्थिति में किया गया कार्य ऋणात्मक है, क्योंकि आरोपित बल की विपरीत दिशा में वस्तु का विस्थापन होता है।
In simple words: Work done is zero when force is perpendicular to displacement (a), positive when force is in the direction of displacement (b), and negative when force is opposite to displacement (c).

🎯 Exam Tip: The sign of work done depends on the angle between the force and displacement vectors. \(W = Fd \text{ cos } \theta\). For \(\theta = 90^\circ\), \(W=0\). For \(\theta < 90^\circ\), \(W>0\). For \(\theta > 90^\circ\), \(W<0\).

 

Question 19. सोनी कहती है कि किसी वस्तु पर त्वरण शून्य हो सकता है, चाहे उस पर कई बल कार्य कर रहे हों। क्या आप सहमत हैं? बताइए क्यों?
Answer: हाँ, हम उससे सहमत हैं। चाहे वस्तु पर कई बल लगे रहें, परंतु यदि वे बल परस्पर संतुलित हैं तो वस्तु पर परिणामी बल शून्य होगा।
तब समीकरण \(F = ma\) के अनुसार वस्तु का त्वरण = (चूँकि \(F = 0\)) भी शून्य होगा ।)
In simple words: Yes, zero acceleration is possible even with multiple forces if those forces perfectly balance each other, resulting in a net force of zero according to Newton's Second Law.

🎯 Exam Tip: This question tests your understanding of net force and Newton's Second Law (\(F=ma\)). If the vector sum of all forces acting on an object is zero, the net force is zero, and thus the acceleration is zero, regardless of how many individual forces are present.

 

Question 20. चार युक्तियाँ जिनमें प्रत्येक की शक्ति 500 w है 10 घंटे तक उपयोग में लाई जाती हैं। इनके द्वारा व्यय की गई ऊर्जा kWh में परिकलित कीजिए।
Answer: हल-
प्रत्येक युक्ति की शक्ति \(P = 500\) वाट = \(0.5\) किलोवाट,
\(t = 10\) घंटे
प्रत्येक युक्ति द्वारा व्यय ऊर्जा (\(W\)) = \(P \times t = 0.5\) किलोवाट घंटे \( \times 10 \) घंटे = \(0.5 \times 10\) किलोवाट-घंटे
चार युक्तियों द्वारा उपयोग की गई कुल ऊर्जा = \(4 \times 5 = 20\) किलोवाट-घंटा।
In simple words: The total energy consumed by four devices, each of 500 Watts used for 10 hours, is calculated by first finding the energy consumed by one device in kilowatt-hours, then multiplying by the number of devices.

🎯 Exam Tip: When calculating energy consumption in kilowatt-hours (kWh), ensure power is in kilowatts (kW) and time is in hours (h). This unit is commonly used for billing electricity.

 

Question 21. मुक्त रूप से गिरता एक पिण्ड अंततः धरती तक पहुँचने पर रुक जाता है। इसकी गतिज ऊर्जा का क्या होता है?
Answer: जब कोई वस्तु स्वतंत्र रूप से नीचे गिरती है तो उसकी स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदलती जाती है। जब वह भूतल से टकराती है तो संचित गतिज ऊर्जा का रूपान्तरण, ऊष्मा, ध्वनि या अन्य रूप में हो जाता है।
In simple words: When a freely falling object hits the ground and stops, its kinetic energy is not destroyed but is converted into other forms of energy such as heat, sound, and deformation energy.

🎯 Exam Tip: This illustrates the transformation of kinetic energy upon impact, upholding the principle of energy conservation. Energy is never lost but changes forms, often dissipating as heat and sound during collisions.

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

 

Question 1. (क) किसी पिण्ड पर F बल लगाकर उसे बल की दिशा से \( \theta \) कोण बनाते हुए \(d\) दूरी तक विस्थापित किया गया है। बल द्वारा किये गये कार्य का व्यंजक लिखिए।
(ख) यदि विस्थापन की दिशा बल के लम्बवत् हो तो कार्य कितना होगा?

Answer: (क) कार्य \(w = F.d. \text{ cos } \theta\)
(ख) कार्य (\(W\)) = \(F.d.\text{cos } 90^\circ = 0\) (because \(\text{cos } 90^\circ = 0\))
In simple words: The general formula for work includes the cosine of the angle between force and displacement. If force and displacement are perpendicular (90 degrees), the work done is zero.

🎯 Exam Tip: Understanding the formula \(W = Fd \text{ cos } \theta\) is critical. It encompasses all cases, including when force and displacement are parallel (\(\theta = 0^\circ\), \(\text{cos } 0^\circ = 1\)) or perpendicular (\(\theta = 90^\circ\), \(\text{cos } 90^\circ = 0\)).

 

Question 2. S.I. पद्धति में सामर्थ्य तथा स्थितिज ऊर्जा । के मात्रक लिखिए।
Answer: सामर्थ्य का मात्रक-वाट (watt); स्थितिज ऊर्जा का मात्रक-जूल (Joule)।
In simple words: In the SI system, power is measured in Watts, and potential energy is measured in Joules.

🎯 Exam Tip: Knowing the SI units for fundamental quantities like power and energy is basic but essential. Watt for power and Joule for all forms of energy (kinetic, potential, work) are standard.

 

Question 3. अश्व शक्ति (H.P.) किस राशि का मात्रक है? एक अश्व शक्ति में कितने वाट होते हैं?
Answer: अश्व शक्ति मशीन की सामर्थ्य का मात्रक है।
1 अश्व-शक्ति (Horse-Power) = 746 वाट ।
In simple words: Horsepower is a unit used to measure power, and one horsepower is equivalent to 746 Watts.

🎯 Exam Tip: Horsepower is a non-SI unit of power but is still widely used in certain contexts (e.g., engines). Memorize its conversion to Watts, as it's a common knowledge point.

 

Question 4. 50 किलोग्राम भार के पिण्ड को उठाये एक व्यक्ति पृथ्वी पर क्षैतिज दिशा में चल रहा है। एक किलोमीटर तक जाने में उसके द्वारा पिण्ड पर किये गये। कार्य की गणना कीजिए।
Answer: शून्य (मजदूर का विस्थापन गुरुत्व बल के लंबवत् है ।)
In simple words: No work is done against gravity when a person walks horizontally while carrying a load, because the force of gravity is vertical and the displacement is horizontal, making them perpendicular.

🎯 Exam Tip: This is a conceptual question emphasizing that for work to be done, there must be a component of force in the direction of displacement. Here, gravity's force is perpendicular to the horizontal movement, so it does no work.

 

Question 5. घड़ी में चाबी भरने पर स्प्रिंग में ऊर्जा किस रूप में एकत्रित हो जाती है?
Answer: स्प्रिंग की प्रत्यास्थ-स्थितिज ऊर्जा
In simple words: When you wind a clock, the energy gets stored in the spring as elastic potential energy due to its deformation.

🎯 Exam Tip: Elastic potential energy is stored in objects that can be stretched, compressed, or twisted and then return to their original shape, such as springs or rubber bands. This is a common application.

 

Question 6. अधिकतम तथा न्यूनतम कार्य के लिए बल तथा विस्थापन की दिशाओं के बीच कितना कोण होना चाहिए?
Answer: \(W = Fd \text{ cos } \theta\) (जहाँ \( \theta \) बल एवं विस्थापन के बीच कोण है ।)
\(W\) (अधिकतम) = \(Fd \text{ cos } 0^\circ = Fd\) (क्योंकि \(\text{cos } 0^\circ = 1\))
\(W\) (न्यूनतम) = \(Fd \text{ cos } 90^\circ = 0\) (क्योंकि \(\text{cos } 90^\circ = 0\))
अतः अधिकतम कार्य के लिए बल एवं विस्थापन के बीच कोण शून्य एवं न्यूनतम विस्थापन के लिए कोण 90° होना चाहिए।
In simple words: For maximum work, the force and displacement should be in the same direction (0° angle); for minimum (zero) work, they should be perpendicular (90° angle).

🎯 Exam Tip: The cosine function plays a key role in work calculation. Maximum positive work occurs when \(\text{cos } \theta = 1\) (\(\theta=0^\circ\)), and zero work when \(\text{cos } \theta = 0\) (\(\theta=90^\circ\)).

 

Question 7. यदि पिण्ड का वेग तीन गुना कर दिया जाय, तो पिण्ड की गतिज ऊर्जा कितनी गुनी हो जायगी?
Answer: \(K = \frac{1}{2} mv^2\)
यदि \(v = 3v\)
\(K' = \frac{1}{2} m(3v)^2 = \frac{1}{2} m(9v^2) = 9 \left(\frac{1}{2} mv^2\right) = 9K\)
अर्थात् गतिज ऊर्जा 9 गुनी हो जायेगी।
In simple words: Since kinetic energy is proportional to the square of velocity, if the velocity is tripled, the kinetic energy will become nine times its original value.

🎯 Exam Tip: This is a direct consequence of the kinetic energy formula \(KE = \frac{1}{2} mv^2\). Changes in velocity have a squared effect on kinetic energy, making it a critical concept for understanding motion and energy.

 

Question 8. यान्त्रिक कार्य अथवा कार्य से आप क्या समझते हो? इसका मात्रक लिखिए।
अथवा
कार्य को परिभाषित कीजिए। इसको मात्रक भी लिखिए।

Answer: यान्त्रिक कार्य अथवा कार्य (Mechanical work) - किसी पिण्ड पर लगे बल एवं बल की दिशा में विस्थापन के गुणनफल को यान्त्रिक कार्य या कार्य कहते है। अर्थात् यान्त्रिक कार्य = बल x बल की दिशा में विस्थापन
कार्य का मात्रक - इसका मात्रक न्यूटन-मीटर अथवा जूल है।
In simple words: Mechanical work is defined as the product of the force applied on an object and the displacement of the object in the direction of the force. Its SI unit is the Joule (or Newton-meter).

🎯 Exam Tip: Always specify the direction of displacement relative to the force when defining work. The SI unit for work, Joule (J), is equivalent to Newton-meter (N-m).

 

Question 9. यदि बल (F) एवं विस्थापन (S) के बीच कोण \((\theta)\) हो तो कार्य (W) के लिए व्यंजक लिखिए।
Answer: कार्य (\(W\)) = बल (\(F\)) x विस्थापन (\(S\)) \(\text{cos } \theta\)
In simple words: The formula for work done when force and displacement are at an angle is the product of force, displacement, and the cosine of the angle between them.

🎯 Exam Tip: This is the most general formula for work. Understand that \(\theta\) is the angle *between* the force vector and the displacement vector. This formula is critical for problems where forces are not perfectly aligned with motion.

 

Question 10. एक जूल कार्य को परिभाषित कीजिए ।
Answer: एक जूल कार्य- किसी वस्तु पर एक न्यूटन का बल लगाकर, उसे बल की दिशा में एक मीटर विस्थापित करने में किया गया कार्य एक जूल कार्य कहलाता है।
In simple words: One Joule of work is performed when a force of one Newton moves an object by one meter in the exact direction of the force.

🎯 Exam Tip: This definition clearly establishes the relationship between the units of force (Newton), distance (meter), and work (Joule). It is fundamental to understanding energy and work concepts.

 

Question 11. कार्य अदिश राशि है या सदिश?
Answer: कार्य एक अदिश राशि है।
In simple words: Work is a scalar quantity, meaning it only has magnitude and no direction.

🎯 Exam Tip: While force and displacement are vector quantities, their dot product (which defines work) is a scalar. Understanding this distinction is important for conceptual questions.

 

Question 12. किसी वस्तु पर बल लगाने से बल की दिशा में वस्तु दूरी तय करती है तब बल और दूरी के गुणनफल को किस नाम से पुकारते हैं?
Answer: अभीष्ट गुणनफल को यान्त्रिक कार्य या कार्य के नाम से पुकारते हैं।
In simple words: The product of force and the distance an object moves in the direction of that force is called mechanical work or simply work.

🎯 Exam Tip: This question tests the direct definition of work. Recognizing that "force × distance" (when in the same direction) directly translates to "work" is fundamental.

 

Question 13. ऊर्जा क्या है? ऊर्जा का मात्रक लिखिए ।
अथवा
ऊर्जा से क्या समझते हो ? ऊर्जा का मात्रक लिखिए ।

Answer: ऊर्जा (Energy) - किसी वस्तु द्वारा कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। ऊर्जा का मात्रक - इसका मात्रक 'जूल' या 'न्यूटन-मीटर' है।
In simple words: Energy is the capacity to do work, and its standard unit of measurement is the Joule.

🎯 Exam Tip: Energy is a scalar quantity, like work. Remember that the SI unit for energy (Joule) is the same as for work, emphasizing their close relationship.

 

Question 14. एक जूल ऊर्जा से क्या समझते हो?
अथवा
एक जूल को परिभाषित कीजिए ।

Answer: एक जूल (Joule) - किसी वस्तु पर एक न्यूटन का बल लगाकर उसे बल की दिशा में एक मीटर विस्थापित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा एक जूल कहलाती है।
In simple words: One Joule of energy is the amount of energy required to do one Joule of work, which is when a one Newton force moves an object one meter in its direction.

🎯 Exam Tip: The definition of a Joule for energy is identical to that for work, highlighting that energy is the capacity to perform work. This connection is fundamental to physics.

 

Question 15. यान्त्रिक ऊर्जा से क्या समझते हो?
अथवा
यान्त्रिक ऊर्जा किसे कहते हैं?

Answer: यान्त्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy) - किसी निकाय की सम्पूर्ण ऊर्जाओं के योग को उस निकाय की यान्त्रिक ऊर्जा कहते हैं।
In simple words: Mechanical energy is the total energy of an object or system due to its motion (kinetic energy) and position or configuration (potential energy).

🎯 Exam Tip: Mechanical energy is a conserved quantity in systems where only conservative forces (like gravity or spring force) do work. It's the sum of kinetic and potential energy.

 

Question 16. यान्त्रिक ऊर्जा कितने प्रकार की होती है? उनके नाम लिखिए।
Answer: यान्त्रिक ऊर्जा के प्रकार- यान्त्रिक ऊर्जा निम्नलिखित दो प्रकार की होती है
(1) गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)
(2) स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)
In simple words: Mechanical energy exists in two main forms: kinetic energy (energy of motion) and potential energy (stored energy due to position or state).

🎯 Exam Tip: Be able to define and give examples for both kinetic and potential energy. Their sum constitutes the total mechanical energy of a system.

 

Question 17. किलोवाट घण्टा और जूल में सम्बन्ध लिखिए।
Answer: \(1\) किलोवाट घण्टा = \(3.6 \times 10^6\) जूल ।
In simple words: One kilowatt-hour, a unit of energy often used for electricity billing, is equivalent to 3.6 million Joules.

🎯 Exam Tip: This conversion factor (\(1 kWh = 3.6 \times 10^6 J\)) is highly important for numerical problems involving energy consumption, particularly in real-world contexts like household electricity bills.

 

Question 18. ऊर्जा अदिश राशि है या सदिश?
Answer: ऊर्जा एक अदिश राशि है।
In simple words: Energy is a scalar quantity, meaning it has magnitude but no specific direction.

🎯 Exam Tip: Like work, energy is a scalar. This implies that the total energy in a system can be found by simply adding up the magnitudes of different forms of energy, without considering directions.

 

Question 19. स्थितिज ऊर्जा को परिभाषित कीजिए ।
अथवा
वस्तु की स्थितिज ऊर्जा से क्या तात्पर्य है?
अथवा
स्थितिज ऊर्जा से क्या समझते हो? इसका मात्रक लिखिए।

Answer: स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) - किसी वस्तु में उसकी विशेष स्थिति अथवा आकार के कारण जो कार्य करने की क्षमता होती है, उसे स्थितिज ऊर्जा कहते हैं। स्थितिज ऊर्जा का मात्रक - इसका मात्रक 'जूल' है।
In simple words: Potential energy is the energy stored in an object due to its position or configuration, giving it the potential to do work. Its SI unit is the Joule.

🎯 Exam Tip: Common types of potential energy include gravitational potential energy (due to height) and elastic potential energy (due to deformation). It's crucial to understand that potential energy is stored energy, ready to be converted into other forms.

 

Question 20. गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा के लिए सूत्र (व्यंजक) लिखिए।
अथवा
h ऊँचाई पर स्थित m द्रव्यमान की वस्तु की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा कितनी होगी?

Answer: गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा = \(mgh\).
In simple words: The formula for gravitational potential energy is the product of the object's mass, the acceleration due to gravity, and its height above a reference point.

🎯 Exam Tip: This formula \(PE = mgh\) is fundamental. Remember that 'h' is the vertical height from a chosen reference level (where potential energy is typically considered zero), and 'g' is the acceleration due to gravity.

 

Question 21. गतिज ऊर्जा को परिभाषित कीजिए ।
अथवा
वस्तु की गतिज ऊर्जा से क्या तात्पर्य है?
अथवा
गतिज ऊर्जा से क्या समझते हो? इसका मात्रक लिखिए।

Answer: गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)- किसी वस्तु में उसकी गति के कारण कार्य करने की क्षमता को गतिज ऊर्जा कहते हैं। गतिज ऊर्जा का मात्रक - इसका मात्रक 'जूल' या 'न्यूटन-मीटर' है।
In simple words: Kinetic energy is the energy possessed by an object due to its motion, allowing it to do work. Its SI unit is the Joule.

🎯 Exam Tip: Kinetic energy depends on both mass and speed. It's important to remember that it's a scalar quantity and its unit is the Joule, same as for work and other forms of energy.

 

Question 22. गतिज ऊर्जा के लिए सूत्र (व्यंजक) लिखिए।
अथवा
v वेग से गतिमान m द्रव्यमान की वस्तु में कितनी गतिज ऊर्जा होगी?

Answer: गतिज ऊर्जा = \( \frac{1}{2} mv^2 \).
In simple words: The mathematical expression for kinetic energy is half of the product of an object's mass and the square of its velocity.

🎯 Exam Tip: This formula \(KE = \frac{1}{2} mv^2\) is fundamental. Be mindful that even a small change in velocity can lead to a significant change in kinetic energy due to the square term.

 

Question 23. किसी वस्तु की संहति दोगुनी करने पर या उसका वेग दोगुना करने पर उसकी गतिज ऊर्जा किस स्थिति में अधिक प्रभावित होगी और क्यों?
Answer: उसका वेग दोगुना करने पर । संहति दोगुनी करने पर गतिज ऊर्जा दोगुनी होगी जबकि वेग दोगुना करने पर गतिज ऊर्जा चार गुनी हो जायेगी ।
In simple words: Kinetic energy is more significantly affected by doubling the velocity because kinetic energy is proportional to the square of velocity, whereas it's only directly proportional to mass. Doubling velocity quadruples kinetic energy, while doubling mass only doubles it.

🎯 Exam Tip: The \(v^2\) term in \(KE = \frac{1}{2} mv^2\) is key. Always remember that velocity changes have a squared impact on kinetic energy, making them far more influential than changes in mass.

 

Question 24. यदि किसी पिण्ड का द्रव्यमान दोगुना कर दिया जाये तो उसकी गतिज ऊर्जा किस प्रकार प्रभावित होगी?
Answer: यदि किसी पिण्ड का द्रव्यमान दोगुना कर दिया जाये तो उसकी गतिज ऊर्जा पहले की दोगुनी हो जायेगी, क्योंकि गतिज ऊर्जा द्रव्यमान के समानुपाती होती है।
In simple words: If an object's mass is doubled while its velocity remains constant, its kinetic energy will also double because kinetic energy is directly proportional to mass.

🎯 Exam Tip: Remember the direct proportionality of kinetic energy to mass (\(KE \propto m\)). This is a simpler relationship compared to its dependence on velocity, but equally important for conceptual clarity.

 

Question 25. यदि किसी पिण्ड का वेग आधा कर दिया जाये तो उसकी गतिज ऊर्जा किस प्रकार प्रभावित होगी?
Answer: यदि किसी पिण्ड का वेग आधा कर दिया जाये तो उसकी गतिज ऊर्जा पहले की (चौथाई) रह जायेगी, क्योंकि गतिज ऊर्जा वेग के वर्ग के समानुपाती होती है।
In simple words: If an object's velocity is halved, its kinetic energy will become one-fourth of its original value, as kinetic energy is proportional to the square of velocity.

🎯 Exam Tip: This is another illustration of \(KE \propto v^2\). Halving the velocity means \((1/2)^2 = 1/4\), thus the kinetic energy reduces to one-fourth. This is a common conceptual question.

 

Question 26. ऊर्जा संरक्षण का नियम लिखिए।
Answer: ऊर्जा संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Energy) - किसी निकाय की सम्पूर्ण ऊर्जाओं का योग सदैव नियत रहता है।
In simple words: The law of conservation of energy states that energy cannot be created or destroyed, only transformed from one form to another, meaning the total energy in an isolated system remains constant.

🎯 Exam Tip: This is a fundamental law in physics. Ensure you understand that while energy can change forms (e.g., potential to kinetic), the total amount of energy in a closed system always stays the same.

 

Question 27. समान द्रव्यमान की वस्तुएँ A तथा B पृथ्वी से क्रमशः 5 मीटर तथा 7 मीटर ऊँचाई पर हैं। बताइए किस वस्तु में स्थितिज ऊर्जा का मान अधिक होगा?
Answer: A की अपेक्षा अधिक ऊँचाई पर स्थित होने के कारण B की स्थितिज ऊर्जा अधिक होगी (स्थितिज ऊर्जा = \(mgh\))
In simple words: Object B will have more potential energy because, for the same mass, potential energy is directly proportional to height, and B is at a greater height (7m) than A (5m).

🎯 Exam Tip: Gravitational potential energy (\(PE = mgh\)) is directly proportional to height 'h'. For objects of the same mass and in the same gravitational field, the one at a greater height will have more potential energy.

 

Question 28. सामर्थ्य का मात्रक क्या होता है? एक सामान्य व्यक्ति की सामर्थ्य कितनी होती है?
Answer: सामर्थ्य का मात्रक - M.K.S. पद्धति में जूल/सेकण्ड या वाट होता है। अन्य मात्रक हॉर्स पावर (H.P) है। \(1\) हॉर्स पावर = 746 वाट। एक सामान्य व्यक्ति की सामर्थ्य \(0.05\) से \(0.10\) अश्व सामर्थ्य तक होती है।
In simple words: The SI unit for power is the Watt (or Joule/second). Horsepower is another common unit, with 1 horsepower equal to 746 Watts. An average person's power output ranges from 0.05 to 0.10 horsepower.

🎯 Exam Tip: Be familiar with both SI (Watt) and common practical units (Horsepower) for power, along with their conversion factors. The average human power output provides context but might not be required for calculations.

 

Question 29. m किग्रा का पिण्ड v मीटर-सेकण्ड-1 की चाल से गतिमान है। पिण्ड की गतिज ऊर्जा क्या होगी?
Answer: गतिज ऊर्जा \(E_k = \frac{1}{2} mv^2\) जूल।
In simple words: The kinetic energy of an object with mass 'm' moving at velocity 'v' is given by half the product of its mass and the square of its velocity.

🎯 Exam Tip: This is the fundamental formula for kinetic energy. Ensure correct application of mass in kilograms and velocity in meters/second to yield energy in Joules.

 

Question 30. \(E = mc^2\) में \(c\) किस भौतिक राशि का प्रतीक है?
Answer: निर्वात में विद्युत-चुम्बकीय तरंगों (जैसे प्रकाश) की चाल का \(c = 3 \times 10^8 m/s\)
In simple words: In Einstein's famous equation \(E=mc^2\), 'c' represents the speed of light in a vacuum, which is approximately \(3 \times 10^8\) meters per second.

🎯 Exam Tip: This equation highlights mass-energy equivalence. Knowing that 'c' stands for the speed of light is crucial for understanding its significance in nuclear physics and relativity.

 

Question 31. यदि 1 जूल कार्य 1 सेकण्ड में किया जाय तो कर्ता की सामर्थ्य क्या होगी?
Answer:
उत्तर - सामर्थ्य = \( \frac{1 \text{ जूल}}{1 \text{ सेकण्ड}} = 1 \text{ जूल-सेकण्ड}^{-1} \)
अथवा \(1\) वाट।
In simple words: If one Joule of work is performed in one second, the power (सामर्थ्य) is one Watt.

🎯 Exam Tip: This defines the unit of power. \(1 \text{ Watt} = 1 \text{ Joule/second}\). This is a direct application of the power formula \(P = W/t\).

 

Question 32. 1 वाट की परिभाषा दीजिए ।
Answer: यदि कोई वस्तु \(1\) सेकण्ड में \(1\) जूल कार्य करती है तो
सामर्थ्य = \( \frac{1 \text{ जूल}}{1 \text{ सेकण्ड}} = 1 \text{ जूल-सेकण्ड}^{-1} \)
अथवा \(1\) वाट !
In simple words: One Watt is the power expended when one Joule of work is done or energy is converted in one second.

🎯 Exam Tip: This definition is fundamental for understanding the SI unit of power. It shows the direct relationship between work, time, and power.

 

Question 33. 'किलोवाट-घंटा' किस भौतिक राशि का मात्रक है?
Answer: 'किलोवाट घंटा' ऊर्जा अथवा कार्य का मात्रक है।
In simple words: Kilowatt-hour is a unit used to measure energy, often seen on electricity bills, representing the total work done or energy consumed.

🎯 Exam Tip: Despite containing "watt" (a unit of power), kilowatt-hour is a unit of energy (\(Power \times Time\)). This is a common point of confusion, so clarify this distinction.

 

Question 34. 1 किलोवाट घण्टा का अर्थ समझाइए । '1 किलोवाट घंटा' का मान जूल में लिखिए।
Answer: \(1\) किलोवाट घंटा = \(1000 \times 1\) वाट \(\times 1\) घंटा
\( = 1000 \times 1\) वाट \(\times 3600\) सेकण्ड
\( = 3.6 \times 10^6\) जूल ।
In simple words: One kilowatt-hour means that a device with a power of one kilowatt has operated for one hour. It is equivalent to \(3.6 \times 10^6\) Joules of energy.

🎯 Exam Tip: This conversion is vital for understanding energy consumption in practical terms. A kilowatt-hour represents a large amount of energy compared to a single Joule.

 

Question 35. निम्नलिखित में से अदिश तथा सदिश राशियाँ चुनिए-
कार्य, संवेग, गतिज ऊर्जा, सामर्थ्य, बल

Answer: अदिश- कार्य, सामर्थ्य, गतिज ऊर्जा
सदिश- संवेग, बल ।
In simple words: Scalar quantities like work, power, and kinetic energy have only magnitude, while vector quantities like momentum and force have both magnitude and direction.

🎯 Exam Tip: Differentiating between scalar and vector quantities is a foundational skill. Remember that quantities like work and energy are scalars, while force and momentum are vectors requiring direction as well as magnitude.

 

Question 36. निम्नलिखित में किस प्रकार का ऊर्जा रूपान्तरण होता है
(i) विद्युत बल्ब,
(ii) मोमबत्ती,
(iii) पेट्रोल इंजन,
(iv) टार्च में प्रयुक्त सेल ।
Answer: (i) विद्युत बल्ब - विद्युत ऊर्जा \( \to \) प्रकाश, ऊष्मीय ऊर्जा । (ii) मोमबत्ती - रासायनिक ऊर्जा \( \to \) प्रकाश, ऊष्मीय ऊर्जा । (iii) पेट्रोल इंजन - पेट्रोल की रासायनिक ऊर्जा \( \to \) ऊष्मा \( \to \) यांत्रिक ऊर्जा । (iv) टार्च में प्रयुक्त सेल - रासायनिक ऊर्जा \( \to \) विद्युत ऊर्जा \( \to \) प्रकाश, ऊष्मा।
In simple words: विभिन्न उपकरणों में ऊर्जा का एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तन होता है; जैसे, विद्युत बल्ब में विद्युत ऊर्जा प्रकाश और ऊष्मा में, मोमबत्ती में रासायनिक ऊर्जा प्रकाश और ऊष्मा में, पेट्रोल इंजन में रासायनिक ऊर्जा ऊष्मा और फिर यांत्रिक ऊर्जा में, और टार्च सेल में रासायनिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में बदलकर फिर प्रकाश और ऊष्मा में बदल जाती है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा रूपांतरण के मूल सिद्धांतों को समझें और प्रत्येक उदाहरण के लिए प्रारंभिक व अंतिम ऊर्जा रूपों को स्पष्ट रूप से पहचानें।

 

Question 37. जैव पदार्थ से ऊर्जा प्राप्त करने का एक उदाहरण दीजिए।
Answer: गोबर \( \to \) गोबर गैस की रासायनिक ऊर्जा (मेथेन) \( \to \) ऊष्मा, प्रकाश।
In simple words: गोबर जैसे जैव पदार्थों को बायोगैस (मेथेन) में बदला जाता है, जिससे हमें गर्मी और रोशनी के रूप में ऊर्जा मिलती है।

🎯 Exam Tip: इस उदाहरण में ऊर्जा के स्रोत, मध्यवर्ती रूप और अंतिम उपयोगी रूपों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 38. एक ट्रक तथा एक कार दोनों 50 किमी-घण्टा की समान चाल से गतिशील हैं। किसकी गतिज ऊर्जा अधिक होगी?
Answer: ट्रक की गतिज ऊर्जा अधिक होगी ।
In simple words: चूंकि ट्रक का द्रव्यमान कार से अधिक होता है, और गतिज ऊर्जा द्रव्यमान पर निर्भर करती है, इसलिए समान चाल पर भी ट्रक की गतिज ऊर्जा अधिक होगी।

🎯 Exam Tip: गतिज ऊर्जा का सूत्र \( (\frac{1}{2}mv²) \) याद रखें और समझें कि यह द्रव्यमान (m) के सीधे आनुपातिक होती है।

 

Question 39. यांत्रिक ऊर्जा के दो स्वरूप लिखिए तथा यांत्रिक संरक्षण के दो उदाहरण दीजिए।
Answer:यांत्रिक ऊर्जा के स्वरूप-
(i) स्थितिज ऊर्जा,
(ii) गतिज ऊर्जा । उदाहरण- (i) सरल लोलक द्वारा आवर्त गति करना । (ii) किसी ऊँचाई से गिरती हुई वस्तु में स्थितिज ऊर्जा
In simple words: यांत्रिक ऊर्जा दो प्रकार की होती है - स्थितिज ऊर्जा (किसी वस्तु की स्थिति के कारण) और गतिज ऊर्जा (किसी वस्तु की गति के कारण); सरल लोलक का दोलन और गिरती हुई वस्तु इसके उदाहरण हैं।

🎯 Exam Tip: यांत्रिक ऊर्जा के दोनों रूपों और उनके व्यावहारिक उदाहरणों को स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

Question 40. 1 जूल कार्य से क्या तात्पर्य है?
Answer: जब 1 न्यूटन का बल लगाकर वस्तु को बल की दिशा में 1 मीटर विस्थापित किया जाय तो किया गया कार्य 1 जूल होगा ।
In simple words: 1 जूल कार्य तब होता है जब 1 न्यूटन का बल किसी वस्तु को बल की दिशा में 1 मीटर खिसकाता है।

🎯 Exam Tip: कार्य (Joule) की S.I. इकाई की परिभाषा को सटीक रूप से याद रखें, जिसमें बल की दिशा और विस्थापन का महत्व शामिल है।

 

Question 41. जब माइक्रोफोन के सामने बोला जाता है तो कौन-सी ऊर्जा किस रूप में परिवर्तित होती है?
Answer: ध्वनि ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा ।
In simple words: माइक्रोफोन हमारी आवाज की ध्वनि ऊर्जा को विद्युत संकेतों में बदल देता है।

🎯 Exam Tip: माइक्रोफोन के कार्य सिद्धांत को ऊर्जा रूपांतरण के संदर्भ में समझें।

 

Question 42. वृत्ताकार मार्ग पर घूमता पिण्ड एक चक्कर पूरा करने में कितना कार्य करेगा?
Answer: वृत्ताकार मार्ग पर एक चक्कर पूरा करने में विस्थापन शून्य होगा। अतः किया गया कार्य भी शून्य होगा।
In simple words: एक वृत्त में पूरा चक्कर लगाने पर वस्तु अपनी प्रारंभिक स्थिति पर वापस आ जाती है, जिससे कुल विस्थापन शून्य हो जाता है और किया गया कार्य भी शून्य होता है।

🎯 Exam Tip: कार्य की परिभाषा में विस्थापन के महत्व को याद रखें; शून्य विस्थापन का अर्थ शून्य कार्य होता है।

 

Question 43. यदि किसी वस्तु का विस्थापन उस पर लगे बल से 90° का कोण बनाता है तो बल द्वारा कितना कार्य किया गया?
Answer: शून्य ।
In simple words: जब बल और विस्थापन के बीच का कोण 90° होता है, तो बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है क्योंकि बल का विस्थापन की दिशा में कोई घटक नहीं होता।

🎯 Exam Tip: कार्य के सूत्र \( (W = Fd \cos\theta) \) में कोण (\( \theta \)) के महत्व को समझें, विशेषकर जब \( \theta = 90° \) हो।

 

Question 44. कार्य की परिभाषा एवं मात्रक लिखिए।
Answer: बल लगाकर किसी वस्तु को बल की दिशा में विस्थापित करने की क्रिया को कार्य कहते हैं। कार्य का मात्रक न्यूटन मीटर या जूल होता है।
In simple words: कार्य वह है जब कोई बल किसी वस्तु को अपनी ही दिशा में विस्थापित करता है, और इसकी इकाई जूल (न्यूटन-मीटर) होती है।

🎯 Exam Tip: कार्य की परिभाषा और उसके S.I. मात्रक को याद रखें; न्यूटन-मीटर और जूल एक ही इकाई हैं।

 

Question 45. एक अश्व-शक्ति में कितने वाट होते हैं?
Answer: एक अश्व शक्ति = 746 वाट।
In simple words: एक अश्व-शक्ति, जो शक्ति मापने की एक इकाई है, 746 वाट के बराबर होती है।

🎯 Exam Tip: अश्व-शक्ति और वाट के बीच के रूपांतरण मूल्य (746 वाट) को याद रखें।

 

Question 46. एक कार तथा एक बस दोनों 70 किमी घण्टा-1 की चाल से गतिमान हैं। किसकी गतिज ऊर्जा अधिक होगी?
Answer: बस की गतिज ऊर्जा अधिक होगी ।
In simple words: चूंकि बस का द्रव्यमान कार से अधिक होता है, समान चाल पर बस की गतिज ऊर्जा अधिक होगी क्योंकि गतिज ऊर्जा द्रव्यमान के सीधे आनुपातिक होती है।

🎯 Exam Tip: गतिज ऊर्जा \( (\frac{1}{2}mv²) \) के सूत्र को समझें और जानें कि समान वेग पर, अधिक द्रव्यमान वाली वस्तु की गतिज ऊर्जा अधिक होती है।

 

Question 47. प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा से क्या तात्पर्य है?
Answer: प्रत्यास्थ बलों के कारण वस्तुओं में निहित ऊर्जा को प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
In simple words: प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा वह ऊर्जा है जो किसी वस्तु में उसके खिंचाव या संपीड़न जैसे प्रत्यास्थ गुणों के कारण जमा होती है।

🎯 Exam Tip: प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा की परिभाषा और यह किन स्थितियों में उत्पन्न होती है, इसे समझें।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. कार्य' को व्यापक सूत्र लिखिए तथा स्पष्ट कीजिए कि वृत्ताकार पथ पर समान चाल से गतिमान पिण्ड द्वारा किया गया कार्य शून्य क्यों होता है?
Answer:कार्य का व्यापक सूत्र-यदि बल एवं विस्थापन की दिशायें समान न हों अर्थात् बल एवं विस्थापन एक-दूसरे से किसी कोण पर कार्य कर रहे हों, जैसा कि चित्र में प्रदर्शित है, तो कार्य की गणना करने के लिए विस्थापन का वह घटक लेना होगा जो बल की दिशा में हो ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): एक त्रिभुज ABC को दर्शाया गया है, जिसमें बिन्दु A से बिन्दु B तक एक विस्थापन L है। बल F बिन्दु A से C की दिशा में एक कोण \( \theta \) पर लग रहा है। यह चित्र बल F और विस्थापन L के बीच के कोण को दर्शाता है, जहाँ L का घटक बल F की दिशा में \( L \cos \theta \) है। वस्तु का विस्थापन A से B तक हुआ परन्तु विस्थापन L की दिशा तथा बल F की दिशा एक-दूसरे से \( \theta \) कोण बनाती हैं, अतः बल (F) की दिशा में L का घटक AC होगा जिसका मान \( L \cos \theta \) है। अतः बल F द्वारा वस्तु पर किया गया कार्य
\( w = FL \cos\theta \) उपर्युक्त सूत्र के अनुसार यदि बल (F) एवं विस्थापन (L) परस्पर लम्बवत् हों अर्थात् \( \theta = 90° \) हो तो कार्य \( W = F.L. \cos 90° = F.L. \times 0 = 0 \). वृत्ताकार मार्ग पर घूमते हुए किसी पिण्ड का विस्थापन तो होता है परन्तु घूमने के लिए लग रहे अभिकेन्द्र बल की दिशा केन्द्र की ओर है, जो विस्थापन के लम्बवत् है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): एक वृत्ताकार पथ पर गतिमान पिण्ड को दर्शाया गया है। इसमें पिण्ड बिन्दु A पर स्थित है और विस्थापन बाहरी दिशा में एक सीधी रेखा के रूप में दिखाया गया है, जबकि बल F वृत्त के केंद्र O की ओर लग रहा है। यह बल और विस्थापन के बीच लंबवत संबंध को दर्शाता है। अतः वृत्ताकार गति में किया गया कार्य शून्य होता है।
In simple words: कार्य का सामान्य सूत्र \( W = Fd \cos\theta \) है। वृत्ताकार गति में, भले ही वस्तु गतिशील हो, अभिकेन्द्र बल विस्थापन की दिशा के लंबवत होता है, जिससे \( \cos 90° = 0 \) के कारण किया गया कार्य शून्य हो जाता है।

🎯 Exam Tip: कार्य के लिए \( \cos\theta \) के महत्व को समझें, विशेषकर \( \theta = 0°, 90°, 180° \) के मामलों में। वृत्ताकार गति में अभिकेन्द्र बल द्वारा किए गए कार्य को शून्य क्यों माना जाता है, इस अवधारणा को स्पष्ट रखें।

 

Question 2. निम्नलिखित राशियों के S.I. मात्रक निगमित कीजिए। इन राशियों में क्या अन्तर है?
(i) कार्य,
(ii) सामर्थ्य ।
Answer:(i) कार्य = बल x बल की दिशा में विस्थापन कार्य का मात्रक = बल का मात्रक x विस्थापन का मात्रक S.I. पद्धति में कार्य का मात्रक = न्यूटन x मीटर = किग्रा मी/से² x मी = किग्रा.मी से-2 S.I. पद्धति में कार्य को मात्रक न्यूटन-मीटर, जिसे जूल (Joule) कहते हैं। यह उस कार्य के बराबर होगा जो 1 न्यूटन बल लगाने पर वस्तु को बल की दिशा में 1 मीटर विस्थापित करता है। (ii) परिभाषानुसार, सामर्थ्य = \( \frac{कार्य}{समय} \) सामर्थ्य का मात्रक = \( \frac{कार्य\: का\: मात्रक}{समय\: का\: मात्रक} = \frac{1\: जूल}{1\: सेकण्ड} = 1\: जूल-सेकण्ड-1 \) मात्रक जूल सेकण्ड-1 को 'वाट' (watt) कहते हैं। मूल मात्रकों में सामर्थ्य का मात्रक = \( \frac{जूल}{सेकण्ड} = \frac{किग्रा.मी^{2}से^{-2}}{से} \) \( \quad = किग्रा.मी^{2}से^{-3} \) कार्य को सामर्थ्य कहते हैं। परिभाषा से यह अन्तर स्पष्ट है। किसी कर्ता द्वारा किये गये प्रति एकांक समय
In simple words: कार्य (जूल में मापा गया) बल द्वारा किए गए कुल विस्थापन को दर्शाता है, जबकि सामर्थ्य (वाट में मापा गया) कार्य करने की दर को दर्शाता है, यानी प्रति इकाई समय में कितना कार्य किया गया।

🎯 Exam Tip: कार्य और सामर्थ्य दोनों की परिभाषाओं और उनके S.I. मात्रकों (जूल और वाट) को याद रखें। दोनों के बीच मूलभूत अंतर को स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

Question 3. सामर्थ्य किसे कहते हैं? कार्य तथा सामर्थ्य में क्या सम्बन्ध है?
Answer:सामर्थ्य (Power) - कार्य किये जाने की समय दर को सामर्थ्य अथवा शक्ति कहते हैं। कार्य तथा सामर्थ्य में सम्बन्ध (Relation between Work and Power) - यदि किसी मशीन द्वारा W कार्य t के समय में संपादित किया जाय, तो सामर्थ्य \( (P) = \frac{कार्य}{समय} = \frac{W}{t} \) और किया कार्य \( (W) = सामर्थ्य \times समय = P.t \) \( W = P.t \)
In simple words: सामर्थ्य कार्य करने की दर है (कार्य/समय), जबकि कार्य बल द्वारा किए गए विस्थापन का परिणाम है। इन दोनों का संबंध \( W = P \times t \) से व्यक्त किया जाता है।

🎯 Exam Tip: सामर्थ्य की परिभाषा और कार्य के साथ उसके गणितीय संबंध को याद रखें। सूत्र \( P = W/t \) और \( W = P \times t \) को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4.
(a) किसी गतिमान पिण्ड की गतिज ऊर्जा किन कारकों पर किस प्रकार निर्भर करती है? आवश्यक सूत्र देकर बताइए।
Answer:द्रव्यमान m के पिण्ड का वेग यदि v हो, तो पिण्ड की गतिज ऊर्जा \( E_k = \frac{1}{2} mv² \) होती है। अतः पिण्ड की गतिज ऊर्जा
(i) पिण्ड के द्रव्यमान के अनुक्रमानुपाती \( (E_k \propto m) \), तथा
(ii) पिण्ड के वेग के वर्ग के अनुक्रमानुपाती \( (E_k \propto v²) \) होती है।
In simple words: गतिज ऊर्जा किसी गतिमान वस्तु के द्रव्यमान और उसके वेग के वर्ग पर निर्भर करती है, जिसका सूत्र \( E_k = \frac{1}{2} mv² \) होता है।

🎯 Exam Tip: गतिज ऊर्जा के सूत्र को याद रखें और स्पष्ट करें कि यह द्रव्यमान के सीधे आनुपातिक तथा वेग के वर्ग के आनुपातिक होती है।

 

Question 4. (b) यांत्रिक ऊर्जा से आप क्या समझते हैं? यह कितने प्रकार की होती है?
Answer:यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy)- किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा एवं स्थितिज ऊर्जा के योग को उस वस्तु की यांत्रिक ऊर्जा कहते हैं। यह दो प्रकार की होती है-
1. गतिज ऊर्जा
2. स्थितिज ऊर्जा ।
In simple words: यांत्रिक ऊर्जा किसी वस्तु में उसकी गतिज और स्थितिज ऊर्जा का कुल योग होती है, और यह मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है: गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा।

🎯 Exam Tip: यांत्रिक ऊर्जा की परिभाषा और उसके दोनों प्रकारों (गतिज और स्थितिज) को याद रखें।

 

Question 5. एक पिण्ड को किसी वेग से ऊपर की ओर फेंकने पर वह कुछ समय बाद वापस पृथ्वी पर लौट आता है। इस पूरी प्रक्रिया में पिण्ड की ऊर्जा में होने वाले रूपान्तरण को स्पष्ट कीजिए। (गणितीय विवेचना आवश्यक नहीं)।
Answer:पृथ्वी तल पर पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा शून्य मान लेने पर पिण्ड को फेंकते समय उसकी गतिज ऊर्जा \( \frac{1}{2} mv² \) तथा स्थितिज ऊर्जा शून्य होती है। जैसे-जैसे पिण्ड ऊपर उठता है उसका वेग (v) घटता जाता है तथा पृथ्वी तल से ऊँचाई (h) बढ़ती जाती है- अतः पिण्ड की गतिज ऊर्जा \( (\frac{1}{2}mv²) \) में कमी तथा स्थितिज ऊर्जा (mgh) में वृद्धि होती जाती है अर्थात् गतिज ऊर्जा का रूपांतरण गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा में होता जाता है। अधिकतम ऊँचाई H पर पिण्ड एक क्षण के लिए रुक जाता है \( (v = 0) \), अतः इस स्थिति में पिण्ड की समस्त गतिज ऊर्जा का स्थितिज ऊर्जा में रूपांतरण हो जाता है। अब नीचे गिरते समय ऊँचाई (h) के घटने तथा वेग (v) के बढ़ने के कारण स्थितिज ऊर्जा घटती तथा गतिज ऊर्जा बढ़ती जाती है-अर्थात् गुरुत्वीय-स्थितिज ऊर्जा का रूपांतरण गतिज ऊर्जा में होता जाता है। पृथ्वी पर वापस पहुँचने पर स्थितिज ऊर्जा पुनः शून्य तथा गतिज ऊर्जा \( \frac{1}{2} mv² \) हो जाती है। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया में पिण्ड की संपूर्ण यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) अचर रहती है।
In simple words: जब किसी वस्तु को ऊपर फेंका जाता है, तो उसकी गतिज ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है; जब वह अधिकतम ऊँचाई पर रुकती है, तो पूरी ऊर्जा स्थितिज होती है। फिर, नीचे गिरने पर, स्थितिज ऊर्जा वापस गतिज ऊर्जा में बदल जाती है, जिससे कुल यांत्रिक ऊर्जा स्थिर रहती है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत को लागू करते हुए, ऊर्ध्वाधर गति में गतिज और स्थितिज ऊर्जा के बीच के रूपांतरण को स्पष्ट करें। अधिकतम ऊँचाई पर और पृथ्वी तल पर ऊर्जा के रूपों को ध्यान दें।

 

Question 6. ऊर्जा-रूपान्तरण से क्या तात्पर्य है? इसके तीन उदाहरण लिखिए ।
Answer:किसी प्रक्रिया में ऊर्जा के एक स्वरूप से दूसरे स्वरूप में परिवर्तन को ऊर्जा-रूपान्तरण कहते हैं। इसके कुछ उदाहरण निम्नवत् हैं-

उपकरणऊर्जा का स्वरूप परिवर्तन
1. विद्युत बल्बविद्युत ऊर्जा से ऊष्मा एवं प्रकाश ऊर्जा
2. विद्युत सेलरासायनिक ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा
3. मोमबत्तीरासायनिक ऊर्जा से प्रकाश तथा ऊष्मा ऊर्जा
4. फोटो इलेक्ट्रिक सेलप्रकाश से विद्युत ऊर्जा
5. माइक्रोफोनध्वनि से विद्युत ऊर्जा
6. लाउडस्पीकरवैद्युत ऊर्जा से ध्वनि (यांत्रिक ऊर्जा)
7. सितार एवं अन्य वाद्य-यन्त्रयांत्रिक ऊर्जा से ध्वनि ऊर्जा
8. भाप, पेट्रोल एवं डीजल का इंजनऊष्मा से यांत्रिक ऊर्जा
9. नाभिकीय रिएक्टरनाभिकीय ऊर्जा से ऊष्मा, प्रकाश, यांत्रिक ऊर्जा

In simple words: ऊर्जा-रूपान्तरण का अर्थ है ऊर्जा का एक रूप से दूसरे रूप में बदलना, जैसे विद्युत बल्ब में विद्युत ऊर्जा का प्रकाश और ऊष्मा में बदलना, या मोमबत्ती में रासायनिक ऊर्जा का प्रकाश और ऊष्मा में बदलना।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा रूपांतरण की परिभाषा को सटीक रूप से याद रखें और विभिन्न उपकरणों में होने वाले ऊर्जा परिवर्तनों के कम से कम तीन उदाहरणों को तालिका के रूप में प्रस्तुत करने का अभ्यास करें।

 

Question 7. आइन्सटीन का द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण लिखिए तथा इसका अर्थ समझाइए ।
Answer:आइन्सटीन के समीकरण के अनुसार, \( E = mc² \) जबकि m किसी कण या पिण्ड का द्रव्यमान तथा E वह ऊर्जा है जो पिण्ड के द्रव्यमान का ऊर्जा में रूपान्तरण होने से प्राप्त होती है। c = निर्वात में प्रकाश की चाल \( (3 \times 10^{8} \) मीटर सेकण्ड-1) है। उदाहरणतः यदि 1 किलोग्राम द्रव्यमान का ऊर्जा में परिवर्तन हो तो उससे प्राप्त ऊर्जा \( E = 1 \) किग्रा. \( \times (3 \times 10^{8} \) मी. से-1)\( ² = 9 \times 10^{16} \) जूल होगी ।
In simple words: आइंस्टीन का द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण \( E = mc² \) बताता है कि द्रव्यमान (m) को ऊर्जा (E) में बदला जा सकता है, जहाँ c प्रकाश की गति है, जो दर्शाता है कि एक छोटी मात्रा का द्रव्यमान भी बहुत बड़ी ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है।

🎯 Exam Tip: आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण को सटीक रूप से लिखें और उसके प्रत्येक पद (E, m, c) का अर्थ स्पष्ट करें। उदाहरण के साथ इसकी व्याख्या करें।

 

Question 8. जल-विद्युत उत्पादन गृह में किसी बाँध में एकत्र जल से विद्युत ऊर्जा उत्पादन के विभिन्न चरणों में होने वाले ऊर्जा-रूपान्तरण बताइए ।
Answer:(i) बाँध में एकत्र जल नीचे गिरने में गति प्राप्त करता है। इसमें जल में गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का रूपान्तरण जल की गतिज ऊर्जा में होता है। (ii) गतिमान जल टरबाइन के ब्लेडों से टकराकर उन्हें चलाती है तथा ब्लेड टरबाइन से जुड़े विद्युत-जेनरेटर में लगे आर्मेचर-कुंडली के घूमने से कुंडी को गतिमान करते (घुमाते) हैं। इस चरण में जल की गतिज ऊर्जा, टरबाइन की तथा अन्ततः जेनरेटर के आर्मेचर की गतिज ऊर्जा में बदलता है। (iii) आर्मेचर-कुंडली के घूमने से कुंडली के सिरों पर विद्युत-वाहक बल उत्पन्न होता है। इस चरण में आर्मेचर की गतिज ऊर्जा का रूपान्तरण विद्युत-स्थितिज ऊर्जा में होता है। (iv) जेनरेटर बाह्य परिपथ में धारा प्रवाहित करता है। इस चरण में जेनरेटर की विद्युत-स्थितिज ऊर्जा का रूपान्तरण इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा में होता है-जो विद्युत ऊर्जा का उपयोगी स्वरूप है।
In simple words: जल-विद्युत उत्पादन में, बाँध में जमा पानी की स्थितिज ऊर्जा पहले गतिज ऊर्जा में बदलती है जब वह गिरता है। यह गतिज ऊर्जा टरबाइन को घुमाती है, जिससे यांत्रिक ऊर्जा उत्पन्न होती है, और फिर जनरेटर इस यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदल देता है।

🎯 Exam Tip: जल-विद्युत उत्पादन के प्रत्येक चरण में होने वाले ऊर्जा रूपांतरणों को क्रमबद्ध तरीके से समझाएं, जिसमें स्थितिज ऊर्जा से गतिज, यांत्रिक और अंत में विद्युत ऊर्जा तक का प्रवाह शामिल हो।

 

Question 9. यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण नियम का उल्लेख कीजिए । सिद्ध कीजिए कि किसी निश्चित ऊँचाई से गुरुत्व बल के अन्तर्गत गिरते हुए पिण्ड के लिए पथ के प्रत्येक बिन्दु पर गतिज ऊर्जा एवं स्थितिज ऊर्जा का योग नियत रहता है। अथवा ऊर्जा संरक्षण का नियम लिखिए तथा व्याख्या कीजिए ।
Answer:यान्त्रिक ऊर्जा संरक्षण नियम (Mechanical Energy Conservation of Law) - यदि किसी वस्तु से ऊष्मा अथवा विकिरणों के रूप में ऊर्जा की हानि न हो, तो वस्तु की यान्त्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) अचर बनी रहती है। शेष प्रश्न के लिए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न संख्या 5 का अवलोकन करें ।
In simple words: यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण का नियम कहता है कि यदि बाहरी बल या घर्षण न हों, तो किसी निकाय की कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग) हमेशा स्थिर रहती है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के नियम को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और बताएं कि कैसे गतिज और स्थितिज ऊर्जा का योग एक प्रणाली में स्थिर रहता है जब कोई बाहरी बल या घर्षण मौजूद नहीं होता है।

 

Question 10. ऊर्जा के मात्रक किलोवाट-घण्टा' का मान जूल में निगमित कीजिए ।
Answer:परिभाषानुसार, अथवा कार्य = सामर्थ्य x समय यदि सामर्थ्य का मात्रक वाट तथा समय का मात्रक घंटा' लिया जाय तो कार्य का मात्रक = 1 वाट x 1 घंटा = 1 वाट-घंटा अब 1 किलोवाट घंटा = \( 1 \times 10^{3} \) वाट-घंटा = 1 वाट x 1 घंटा x \( 10^{3} = 1 \) वाट x 3600 सेकण्ड x \( 10^{3} = 3600 \times 10^{3} \) वाट x सेकण्ड परन्तु 1 वाट x सेकण्ड = 1 जूल 1 किलोवाट घंटा = \( 3600 \times 10^{3} \) जूल 1 किलोवाट घंटा = \( 3.6 \times 10^{6} \) जूल ।
In simple words: 1 किलोवाट-घंटा ऊर्जा की एक इकाई है जो 3.6 मिलियन जूल (\( 3.6 \times 10^{6} \) जूल) के बराबर होती है, यह 1 किलोवाट शक्ति को एक घंटे तक उपयोग करने पर खपत हुई ऊर्जा की मात्रा है।

🎯 Exam Tip: किलोवाट-घंटा और जूल के बीच के रूपांतरण को सटीक रूप से याद रखें और दिखाएं कि यह वाट और समय (सेकंड) की इकाइयों का उपयोग करके कैसे प्राप्त किया जाता है।

 

Question 11. एक कार समतल क्षैतिज सड़क पर एक-समान वेग से गति कर रही है। क्या कार द्वारा कोई कार्य किया जा रहा है? यदि हाँ, तो किन बलों के कारण?
Answer: समान वेग बनाये रखने के लिए कार को घर्षण बल के विरुद्ध, सड़क पर बल लगाना पड़ता है। कार का विस्थापन उस पर लगे क्षैतिज बाह्य-बल (घर्षण) की विपरीत दिशा में होता है। अतः कार द्वारा सड़क पर, कार्य किया जा रहा है। (कार के कार्य की गणना कार द्वारा सड़क पर लगाये बल के अनुसार होगी, न कि कार पर लगे बलों से)
In simple words: हाँ, एक समान वेग से चलती कार द्वारा कार्य किया जाता है, क्योंकि उसे घर्षण बल के विरुद्ध गति बनाए रखने के लिए बल लगाना पड़ता है, भले ही नेट बल शून्य हो।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय, बल और विस्थापन की सापेक्ष दिशा पर ध्यान दें। घर्षण बल की उपस्थिति के कारण, भले ही शुद्ध वेग स्थिर हो, घर्षण के विरुद्ध कार्य किया जाता है।

 

Question 12. एक व्यक्ति 20 किग्रा का बोझ लेकर जीने से चढ़ता हुआ 20 सेकण्ड में छत पर पहुँच जाता है। दूसरा व्यक्ति उतने ही
Answer: बोझ को लेकर उसी छत पर 30 सेकण्ड में पहुँच पाता है। दोनों व्यक्तियों के अपने भार बराबर हैं। कारण देते हुए बताइए
(i) क्या दोनों व्यक्तियों ने बराबर कार्य किया?
(ii) क्या दोनों की सामर्थ्य बराबर है? उत्तर-
(i) हाँ, चूँकि व्यक्तियों के बोझ के द्रव्यमान एवं विस्थापन समान हैं। अतः उनके द्वारा सम्पादित कार्य भी समान होंगे ।
(ii) पहले व्यक्ति ने कार्य करने में 20 सेकण्ड लिए। परन्तु दूसरे व्यक्ति ने वही कार्य करने में 30 सेकण्ड लिए। अत: P \( \times \) से पहले व्यक्ति की सामर्थ्य अधिक है।
In simple words: (i) दोनों व्यक्तियों ने समान कार्य किया क्योंकि उन्होंने समान द्रव्यमान को समान ऊँचाई तक उठाया। (ii) पहले व्यक्ति की सामर्थ्य अधिक थी क्योंकि उसने वही कार्य कम समय (20 सेकंड) में पूरा किया।

🎯 Exam Tip: कार्य की गणना (बल x विस्थापन) और सामर्थ्य की गणना (कार्य/समय) के बीच के अंतर को स्पष्ट रखें। समान कार्य होने पर भी समय में अंतर के कारण सामर्थ्य भिन्न हो सकती है।

 

Question 13. कहा जाता है कि कार्य केवल गतिज ऊर्जा द्वारा किया जाता है, स्थितिज ऊर्जा द्वारा नहीं। स्पष्ट कीजिए।
Answer: कार्य सम्पन्न होने के लिए वस्तु का विस्थापन आवश्यक है तथा विस्थापन तभी होता है जब वस्तु में गति हो । अतः वही वस्तु कार्य कर सकती है जिसमें गतिज ऊर्जा हो। जिस वस्तु में स्थितिज ऊर्जा है, उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन आवश्यक है। उदाहरणतः ऊँचाई पर स्थित हथौड़े में गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा है, परन्तु यह किसी वस्तु को तोड़ने का कार्य तभी कर सकता है जब यह गतिमान होकर वस्तु पर गिरे अर्थात् स्थितिज ऊर्जा का परिवर्तन हथौड़े की गतिज ऊर्जा में हो जाय ।
In simple words: कार्य करने के लिए वस्तु का विस्थापन आवश्यक है, जो गति के कारण होता है। स्थितिज ऊर्जा से सीधे कार्य नहीं होता, बल्कि जब स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदलती है और वस्तु विस्थापित होती है, तभी कार्य होता है, जैसे हथौड़ा जब गति में आता है तब कार्य करता है।

🎯 Exam Tip: कार्य की परिभाषा में विस्थापन के महत्व पर जोर दें। बताएं कि स्थितिज ऊर्जा, जब तक गतिज ऊर्जा में परिवर्तित न हो, सीधे कार्य नहीं करती।

 

Question 14. दो प्रोटॉन एक-दूसरे से कुछ दूरी पर स्थित हैं। यदि उन्हें परस्पर समीप लाया जाय तो उनकी स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि होगी या कमी, कारण देते हुए बताइए ।
Answer:प्रोटॉन धन आवेशित होते हैं। अतः एक-दूसरे के निकट रखे दो प्रोटॉन एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं। उन्हें एक-दूसरे के पास लाने में उनका विस्थापन उन पर लगे बलों के विपरीत होता है। अतः इस क्रिया में प्रोटॉनों पर कार्य किया जाता है। यह कार्य प्रोटॉनों में स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित होता है। अतः प्रोटॉनों की विद्युत-स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि होती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): दो धनात्मक आवेशित प्रोटॉन दिखाए गए हैं, जिन पर बल F लग रहा है और उनके बीच विस्थापन हो रहा है। पहले चित्र में बल और विस्थापन विपरीत दिशाओं में हैं, जबकि दूसरे चित्र में बल और विस्थापन एक ही दिशा में हैं, जो प्रोटॉन के एक-दूसरे के करीब आने और दूर जाने की स्थिति को दर्शाते हैं। (टिप्पणी-यदि प्रोटॉन एक-दूसरे से दूर हटें तो बल एवं विस्थापन एक ही दिशा में होने के कारण प्रोटॉन कार्य करेंगे। इसमें उनमें संचित ऊर्जा व्यय होगी तथा स्थितिज ऊर्जा घट जायेगी ।)
In simple words: जब दो धनात्मक आवेशित प्रोटॉनों को एक-दूसरे के करीब लाया जाता है, तो उनकी विद्युत-स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है क्योंकि उन्हें प्रतिकर्षण बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है।

🎯 Exam Tip: समान आवेशों के बीच प्रतिकर्षण बल और स्थितिज ऊर्जा के संबंध को समझें। बल के विरुद्ध किए गए कार्य के कारण स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि होती है।

 

Question 15. यदि किसी पिण्ड की गतिज ऊर्जा 16 गुनी बढ़ा दी जाय तो ज्ञात कीजिए कि उसका संवेग कितने गुना बढ़ेगा या घटेगा?
Answer:यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान m तथा वेग v हो तो उसका संवेग \( p = mv \) तथा गतिज ऊर्जा \( KE = \frac{1}{2} mv^{2} \)
\( \quad = \frac{m^{2}v^{2}}{2m} = \frac{p^{2}}{2m} \) अथवा जहाँ \( p = \sqrt{2mK} \) \( K = KE \) \( K \) का मान 16 गुना कर देने से, संवेग \( p_{1} = \sqrt{(2m \times 16K)} \)
\( \quad = 4\sqrt{(2mK)} = 4p \) अतः गतिज ऊर्जा 16 गुनी करने से संवेग चार गुना बढ़ जायगा।
In simple words: चूंकि संवेग (\( p \)) गतिज ऊर्जा (\( K \)) के वर्गमूल के समानुपाती होता है (\( p \propto \sqrt{K} \)), यदि गतिज ऊर्जा 16 गुना बढ़ती है, तो संवेग \( \sqrt{16} \) यानी 4 गुना बढ़ जाएगा।

🎯 Exam Tip: गतिज ऊर्जा और संवेग के बीच के संबंध \( (K = p²/2m) \) को याद रखें। यह समझना महत्वपूर्ण है कि \( K \) में परिवर्तन \( p \) में कैसे परिलक्षित होता है (वर्गमूल संबंध)।

 

Question 16. यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण के आधार पर सिद्ध कीजिए कि भूमि से ऊँचाई h से स्वतन्त्रतापूर्वक गिरने वाले पिण्ड का भूमि से टकराने का वेगः \( \sqrt{2gh} \) होता है।
Answer:माना m द्रव्यमान की वस्तु h मीटर ऊँचाई पर स्थित है और विरामावस्था में है ऐसी दशा में उसकी स्थितिज ऊर्जा \( U = mgh \) तथा गतिज ऊर्जा \( = mu² = m \times 0 \) चूँकि \( u = 0 \) संपूर्ण यांत्रिक ऊर्जा \( E = K + U = 0 + mgh \) यदि वायु के घर्षण द्वारा ऊर्जा का क्षय शून्य हो, तो पृथ्वी पर पहुँचते समय पृथ्वी से ऊँचाई \( = 0 \) \( U = mg \times 0 = 0 \) और वेग यदि v मान लें तो वस्तु की गतिज ऊर्जा \( K = \frac{1}{2} mv² \) सम्पूर्ण यांत्रिक ऊर्जा, \( E = \frac{1}{2} mv² + 0 \) यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण के नियमानुसार, वस्तु की सम्पूर्ण यांत्रिक ऊर्जा प्रारम्भिक अवस्था से गिरते समय = वस्तु की सम्पूर्ण यांत्रिक ऊर्जा पृथ्वी पर पहुँचते समय \( mgh = \frac{1}{2} mv² \)
\( v² = 2gh \)
\( v = \sqrt{2gh} \) [दोनों पक्षों को वर्गमूल लेने पर]
In simple words: ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार, जब कोई वस्तु h ऊँचाई से स्वतंत्र रूप से गिरती है, तो उसकी प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा (\( mgh \)) पूरी तरह से गतिज ऊर्जा (\( \frac{1}{2} mv² \)) में बदल जाती है, जिससे भूमि से टकराने का वेग \( \sqrt{2gh} \) प्राप्त होता है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के नियम का उपयोग करके गति के समीकरणों को व्युत्पन्न करने का अभ्यास करें। प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा को अंतिम गतिज ऊर्जा के बराबर सेट करना मुख्य है।

 

Question 17. दो पिण्डों के द्रव्यमान \( m_1 \) तथा \( m_2 \) हैं तथा उनके संवेग समान हैं। यदि उनकी गतिज ऊर्जा क्रमशः \( E_1 \) एवं \( E_2 \) हो तो \( E_1 \) : \( E_2 \) कितना होगा?
Answer: यदि दो पिण्डों के वेग क्रमशः \( v_1 \) एवं \( v_2 \) हों तो उनके संवेग समान होने से \( m_1v_1 = m_2v_2 \)
\( \implies \frac{v_1}{v_2} = \frac{m_2}{m_1} \) ...(i) अब \( \frac{E_1}{E_2} = \frac{(1/2) m_1v_1^{2}}{(1/2) m_2v_2^{2}} \)
\( \quad = \frac{m_1}{m_2} \times (\frac{v_1}{v_2})^{2} \)
\( \quad = \frac{m_1}{m_2} \times (\frac{m_2}{m_1})^{2} \) [समी. (i) से]
\( \quad = \frac{m_1m_2^{2}}{m_2m_1^{2}} = \frac{m_2}{m_1} \)
\( \implies E_1 : E_2 = m_2 : m_1 \)
In simple words: जब दो वस्तुओं के संवेग समान होते हैं, तो उनकी गतिज ऊर्जा उनके द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होती है; यानी, \( E_1 : E_2 = m_2 : m_1 \), जिसका अर्थ है कि अधिक द्रव्यमान वाली वस्तु की गतिज ऊर्जा कम होगी।

🎯 Exam Tip: संवेग और गतिज ऊर्जा के बीच के संबंधों (p=mv और \( K = \frac{1}{2}mv² \)) को उपयोग करके उनके अनुपात को व्युत्पन्न करने का अभ्यास करें। समान संवेग की स्थिति में गतिज ऊर्जा का अनुपात द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

 

Question 18. एक पिण्ड पर बल लगाकर उसे विस्थापित किया जाता है। समझाइए
(i) पिण्ड पर किस दिशा में बल लगाने पर अधिकतम कार्य होगा?
(ii) पिण्ड पर किस दिशा में बल लगाने पर कार्य शून्ये होगा?
Answer: (i) पिण्ड पर बल विस्थापन की दिशा में लगे तो कार्य अधिकतम होगा । (ii) पिण्ड पर बल विस्थापन के लम्बवत् लगे तो कार्य शून्य होगा।
In simple words: कार्य अधिकतम तब होता है जब बल विस्थापन की दिशा में लगता है (\( \theta = 0° \)), और कार्य शून्य तब होता है जब बल विस्थापन के लंबवत लगता है (\( \theta = 90° \))।

🎯 Exam Tip: कार्य के सूत्र \( W = Fd \cos\theta \) को याद रखें। अधिकतम कार्य के लिए \( \cos\theta = 1 \) (\( \theta = 0° \)) और शून्य कार्य के लिए \( \cos\theta = 0 \) (\( \theta = 90° \)) की स्थितियों को स्पष्ट करें।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. कार्य' से क्या तात्पर्य है? इसे किस प्रकार नापा जाता है? आवश्यक सूत्र का निगमन कीजिए तथा कार्य का S.I. मात्र प्राप्त कीजिए ।
Answer:कार्य की परिभाषा (Definition of work) - सामान्य भाषा में कार्य का अर्थ किसी क्रिया के सम्पादन से होता है। जब कोई व्यक्ति खेत में हल चलाता है, चक्की से आटा पीसता है, लकड़ी चीरता है या ढेकली से खेत में पानी देता है, पुस्तक पढ़ता है या उसका मनन करता है, तो सामान्य भाषा में यह कहा जाता है कि व्यक्ति कार्य कर रहा है, परन्तु भौतिकी में कार्य का विशेष अर्थ है जो निम्नवत् है- बल लगाकर किसी वस्तु को बल की दिशा में । विस्थापित करने की क्रिया को ही कार्य कहते हैं। अर्थात् कार्य होने के लिए (i) बल तथा (ii) बल की दिशा । में विस्थापन दोनों आवश्यक हैं। यदि बल लगाने से वस्तु में विस्थापन उत्पन्न न हो या विस्थापन तो उत्पन्न हो परन्तु बल की दिशा में विस्थापन न हो, तो भौतिकी में यही कहा जायेगा कि कार्य नहीं हो रहा है। कार्य की माप (Measurement of work) - स्पष्ट है कि यदि विभिन्न द्रव्यमान की वस्तुयें मेज पर पड़ी हों और उनमें से प्रत्येक को एक निश्चित ऊँचाई तक उठाना हो तो इस निश्चित विस्थापन को उत्पन्न करने के लिए उन पर लगाये गये बल का मान वस्तुओं के द्रव्यमान के अनुक्रमानुपाती होगा तथा जिस वस्तु को विस्थापित करने में अधिक बल लगाना पड़ेगा उस वस्तु पर किया गया कार्य भी उसी अनुपात में अधिक होगा। अतः किसी वस्तु को एक निश्चित दूरी तक विस्थापित करने में किया गया कार्य वस्तु पर लगाये गये बल के अनुक्रमानुपाती होता है। कार्य \( (W) \propto \) बल \( (F) \) ...(i) अब यदि एक ही वस्तु को बल लगाकर विस्थापित किया जाता हो तो जितना अधिक विस्थापन होगा उसी अनुपात में किया गया कार्य भी अधिक होगा। पानी से भरी एक बाल्टी को जितनी अधिक ऊँचाई पर ऊपर ले जाना होगा उतना ही अधिक कार्य बाल्टी पर करना होगा। अतः समान बल लगाकर किसी वस्तु को विस्थापित करने में किया गया कार्य विस्थापन के अनुक्रमानुपाती होगा। कार्य \( (W) \propto \) विस्थापन \( (d) \) ... (ii) अतः समीकरण (i) एवं (ii) से कार्य \( (W) \propto F \) (बल) \( \times d \) (विस्थापन) ...(iii) \( W = K.F.d \) (जहाँ K एक समानुपाती स्थिरांक है।) यदि कार्य का मात्रक इस प्रकार चुना जाय कि एकांक बल लगाने पर एकांक विस्थापन होने से कार्य भी एकांक हो अर्थात् जब \( F = 1 \) तथा \( d = 1 \) तो \( W = 1 \) तब उपर्युक्त समीकरण (iii) से, \( W = K.F.d \) या, \( 1 = K.1.1. \) या, \( K = 1 \) अतः \( W = F \times d \). अर्थात् कार्य = बल x बल की दिशा में विस्थापन कार्य का मात्रक (Unit of Work) : कार्य = बल \( \times \) विस्थापन कार्य को मात्रक = बल को मात्रक \( \times \) विस्थापन का मात्रक S.I. पद्धति में बल का मात्रक न्यूटन तथा विस्थापन का मात्रक मीटर है। अतः कार्य का मात्रक = 1 न्यूटन x मीटर = 1 न्यूटन-मीटर । S.I. पद्धति में कार्य के मात्रक न्यूटन-मीटर को जूल (joule) कहते हैं। जूल को संकेताक्षर J से प्रदर्शित करते है। अतः 1 जूल का कार्य उस समय होगा जब एक न्यूटन का बल लगाकर वस्तु को बल की दिशा में 1 मीटर विस्थापित किया जाता है।
In simple words: कार्य तब होता है जब एक बल किसी वस्तु को अपनी ही दिशा में विस्थापित करता है। इसे बल और विस्थापन के गुणनफल से मापा जाता है, और इसका S.I. मात्रक जूल (या न्यूटन-मीटर) है। कार्य के लिए बल और विस्थापन दोनों का होना आवश्यक है।

🎯 Exam Tip: कार्य की सटीक परिभाषा, उसके सूत्र (W=F.d या W=F.d cosθ) का निगमन और S.I. मात्रक जूल की विस्तृत जानकारी को शामिल करें। स्पष्ट करें कि कार्य के लिए बल और विस्थापन दोनों क्यों आवश्यक हैं।

 

Question 2. ऊर्जा' का क्या अर्थ है? ऊर्जा तथा कार्य में सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
Answer:ऊर्जा - प्रतिदिन की बोलचाल की भाषा में हम सभी लोग ऊर्जा शब्द का प्रयोग करते हैं और उसके अर्थ को समझते हैं। दिनभर एक मजदूर शारीरिक कार्य करता है और शाम को थक जाने पर उसकी ऊर्जा कम हो जाती है। जिसको वह आराम करके तथा भोजन करके पुनः प्राप्त कर लेता है। अक्सर हम कहते हैं कि एक गिलास सन्तरे या गन्ने के रस में बड़ी ऊर्जा है। बीमार पड़ जाने पर टॉनिकों का प्रयोग करके ऊर्जा प्राप्त की जाती है। इस प्रकार भोजन करने, फलों के रस या टॉनिकों को लेने से हमें ऊर्जा प्राप्त होती है, जिससे हमें पुनः काम करने की क्षमता प्राप्त हो जाती है। इसी प्रकार कोयला, पेट्रोल, लकड़ी आदि अनेक इस प्रकार के ईंधन हैं। जिनसे मशीनों को कार्य करने की क्षमता प्राप्त होती है। अतः ऊर्जा एक ऐसा कारक (factor) है जो कार्य करने के लिए आवश्यक है। जब किसी वस्तु में कार्य करने की क्षमता होती है। तो कहा जाता है कि वस्तु में ऊर्जा है। ऊर्जा की कोई मौलिक परिभाषा नहीं दी जा सकती। केवल यही कहा जा सकता है कि जिस कारण से किसी वस्तु में कार्य करने की क्षमता रहती है उसे ऊर्जा कहते हैं। उदाहरणतः गिरते हुए हथौड़े, चलती हुई बन्दूक की गोली, उच्च दाब पर अथवा तेज बहती हुई वायु, ऊँचाई पर रखा अथवा तेज गति से बहते झरने का जल, ऊष्मा इंजन में जलवाष्प, विद्युत सेल आदि ऐसी वस्तुयें हैं जो कार्य कर सकती हैं अर्थात् वस्तुओं पर बल लगाकर उनका विस्थापन कर सकती हैं। अतः इनमें ऊर्जा है। स्पष्ट है कि ऊर्जा का मात्रक वही होगा जो कार्य का मात्रक है तथा कार्य की भाँति यह भी एक अदिश (Scalar) राशि है। कार्य तथा ऊर्जा स्थानान्तरण (Work and Energy Transformation)- हम जानते हैं कि बल लगाने में सदा दो वस्तुयें भाग लेती हैं- एक, जो बल लगा रही है तथा दूसरी, जिस पर बल लग रहा है जब किसी पत्थर के टुकड़े को हाथ से पकड़कर ऊपर उठाते हैं तो पत्थर पर बल हाथ द्वारा लगाया जा रहा है। पत्थर को उठाने का कार्य हाथ द्वारा किया गया है इस क्रिया में कार्य करने वाली वस्तु (हाथ) की ऊर्जा व्यय हुई और पत्थर, जिस पर कार्य किया गया उसको ऊर्जा प्राप्त हुई और उसकी ऊर्जा में वृद्धि हुई । इसी प्रकार हॉकी का खिलाड़ी जब रुकी बाल को स्टिक से हिट लगाकर आगे फेंकता है तो स्टिक द्वारा गेंद पर बल लगाया जाता है और स्टिक द्वारा गेंद पर कार्य किया जाता है जिससे गेंद की ऊर्जा में वृद्धि हो जाती है। तथा हिट लगाने वाले की ऊर्जा का व्यय होता है। इस प्रकार ऊर्जा स्टिक से गेंद में स्थानान्तरित हो गयी। स्पष्ट है कि कार्य होने की क्रिया में ऊर्जा स्थानान्तरण होता है। कार्य तथा ऊर्जा में सम्बन्ध - जब एक वस्तु दूसरी पर कार्य करती है तो कार्य करने वाली वस्तु की ऊर्जा को व्यय होता है तथा जिस पर कार्य किया जाता है उसकी ऊर्जा बढ़ जाती है। निकाय की सम्पूर्ण ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होता। एक की जितनी ऊर्जा व्यय होती है। उतनी ही ऊर्जा की वृद्धि दूसरे की हो जाती है। ऊर्जा-स्थानान्तरण की माप किये गये कार्य से की जा सकती है। स्थानान्तरित ऊर्जा = किया गया कार्य
In simple words: ऊर्जा कार्य करने की क्षमता है। कार्य और ऊर्जा आपस में जुड़े हुए हैं; जब कोई वस्तु कार्य करती है, तो उसकी ऊर्जा घटती है और जिस पर कार्य किया जाता है उसकी ऊर्जा बढ़ती है। किया गया कार्य ऊर्जा के स्थानान्तरण के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा की अवधारणा को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और बताएं कि कार्य और ऊर्जा कैसे संबंधित हैं (कार्य ऊर्जा का स्थानांतरण है)। विभिन्न उदाहरणों के साथ इस संबंध को समझाएं।

 

Question 3. गतिज ऊर्जा की परिभाषा लिखिए तथा किसी गतिमानवस्तुकी गतिज ऊर्जा का सूत्रनिगमित कीजिए। अथवा किसी पिण्ड का द्रव्यमान m एवं इसका वेग v है । सिद्ध कीजिए कि उसकी गतिज ऊर्जा \( \frac{1}{2} mv² \) होगी ।
Answer:गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) - किसी वस्तु में उसकी गति के कारण कार्य करने की जो क्षमता होती है उसे उस वस्तु की गतिज ऊर्जा कहते है। उदाहरणार्थ - पैडल चलाना बंद करने पर भी साइकिल, उस पर लगने वाले घर्षण बल के विरुद्ध कुछ दूरी तय कर सकती है। इस क्रिया में साइकिल घर्षण बल के विरुद्ध कार्य करती है। उसकी यह गतिज ऊर्जा उसके द्वारा किये गये इस कार्य के बराबर होगी । गतिज ऊर्जा का सूत्र (Formula of Kinetic Energy) - माना कि m द्रव्यमान की कोई वस्तु v वेग से गतिशील है और एक मंदक बल F लगाने पर वह s दूरी चलकर विरामावस्था में आ जाती है। इन क्रिया में वस्तु द्वारा जितना कार्य किया जायगा वही उसकी गतिज ऊर्जा होगी। चूँकि F बल के विरुद्ध s दूरी चलने में किया गया कार्य F.s होता है अतः उसकी गतिज ऊर्जा का मान F.s होगा। यदि मंदक बल F के कारण वस्तु में उत्पन्न मंदन a हो तो गति के तृतीय समीकरण के लिए वस्तु का प्रारंभिक वेग v, अंतिम वेग शून्य, त्वरण -a तथा चली गयी दूरी s है। अतः \( 0 = v^{2} + 2.(-a).s. \)
\( \implies a.s. = \frac{1}{2} v^{2} \) दोनों ओर m से गुणा करने पर \( m.a.s. = \frac{1}{2} m.v^{2} \) परन्तु गति के द्वितीय नियम से, मंदक बल \( F = m.a \)
\( \implies \) गतिज ऊर्जा \( F.s = \frac{1}{2} m.v^{2} \)
अतः वस्तु की गतिज ऊर्जा \( E_k = \frac{1}{2} m.v^{2} \)
In simple words: गतिज ऊर्जा वह ऊर्जा है जो किसी वस्तु में उसकी गति के कारण होती है। इसका सूत्र \( E_k = \frac{1}{2} mv² \) है, जिसे कार्य-ऊर्जा प्रमेय (बल x विस्थापन) और गति के समीकरणों का उपयोग करके प्राप्त किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: गतिज ऊर्जा की परिभाषा, उसके सूत्र का निगमन (द्वितीय और तृतीय गति नियम का उपयोग करके) और इसके उदाहरणों को याद रखें। गणितीय व्युत्पत्ति को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 4. स्थितिज ऊर्जा से क्या अर्थ है? स्थितिज ऊर्जा के विभिन्न स्वरूपों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
Answer:स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) - किसी वस्तु में उसकी विशेष अवस्था अथवा स्थिति के करण, वस्तु में कार्य करने की जो क्षमता होती है उसे वस्तु की स्थितिज ऊर्जा कहते हैं। इस ऊर्जा की माप उस कार्य से की जायगी जो वह वस्तु अपनी अवस्था विशेष से प्रारम्भिक सामान्य अवस्था में आने में कर सकती है। स्थितिज ऊर्जा सापेक्ष रूप से ही नापी जाती है। वस्तु की प्रारम्भिक अवस्था कुछ भी मानी जा सकती है और स्थितिज ऊर्जा की माप उस अवस्था के सापेक्ष नापी जायेगी। यह आवश्यक नहीं है कि तनावरहित स्थिति को ही प्रारम्भिक स्थिति माना जाय। संपीडित अथवा तनी हुई अवस्था को भी प्रारम्भिक स्थिति मानकर अन्य अवस्थाओं में पूर्व अवस्था के सापेक्ष स्थितिज ऊर्जा की माप की जा सकती है। भिन्न-भिन्न प्रारम्भिक अवस्थाओं के लिए एक विशेष अवस्था की स्थितिज ऊर्जा भिन्न-भिन्न होगी । स्थितिज ऊर्जा के विभिन्न स्वरूप (Different Forms of Potential Energy)-
(i) प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (Elastic Potential Energy) - किसी संपीडित अथवा तनी हुई स्प्रिंग, तनी हुई कमान, खिंची हुई रबर की पट्टी, मुड़ी हुई धातु की छड़, संपीडित गैस आदि में उनकी प्रत्यास्थता (Elasticity) के गुण के कारण ऐसे बल उत्पन्न हो जाते हैं जो उन्हें सामान्य प्रारम्भिक अवस्था में लाने का प्रयास करते हैं। इन बलों को अन्य वस्तुओं पर आरोपित कराके कार्य किया जा सकता है। अतः प्रत्यास्थ बलों के कारण वस्तुओं में निहित ऊर्जा को प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
(ii) गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (Gravitational Potential Energy) - जैसे ही किसी m द्रव्यमान का पिण्ड पृथ्वी की सतह से v वेग से ऊपर उठता है, गुरुत्वाकर्षण बल mg पिण्ड पर नीचे की ओर गति की दिशा के विरुद्ध, कार्य करने लगता है और इस बल के विरुद्ध वस्तु जब ऊपर उठती है तो उसका वेग घटने लगता है। जब इसका वेग v से घटकर v1 हो जाता है तो गतिज ऊर्जा \( mv² \) से घटकर \( mv_1² \) हो जाती है। इस गतिज ऊर्जा का परिवर्तन स्थितिज ऊर्जा के रूप में होता है जो पिण्ड में एकत्र हो जाती है ।h ऊँचाई पर पहुँचकर जब वस्तु का वेग शून्य हो जाता है और गतिज ऊर्जा शून्य हो जाती है तो इस क्रिया में सम्पूर्ण गतिज ऊर्जा को रूपान्तरण पिण्ड में स्थितिज ऊर्जा के रूप में हो जाता है। इस क्रिया में पिण्ड में स्थितिज ऊर्जा उस पर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध कार्य करने के कारण उत्पन्न हुई अतः इस ऊर्जा को गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा कहते हैं। किसी स्थिति में वस्तु की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा उस कार्य से मापी जाती है जो उस वस्तु को किसी प्रारम्भिक स्थिति से उस स्थिति विशेष में गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध लाने में करना पड़ता है। यदि पृथ्वी के तल को प्रारम्भिक स्थिति मान लिया। जाय (अर्थात् इस स्थिति में स्थितिज ऊर्जा शुन्य है) तो m द्रव्यमान के पिण्ड को x ऊँचाई तक गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध विस्थापित करने में पिण्ड पर किया गया कार्य = गुरुत्वीय बल x विस्थापन = \( (mg) \times (x) = mgx \) अब जब पिण्ड x ऊँचाई पर पहुँच जाता है तो पृथ्वी तल के सापेक्ष पिण्ड की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा \( mgx \) होगी तथा h ऊँचाई पर पिण्ड की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा \( mgh \) होगी । गुरुत्वीय क्षेत्र में कोई वस्तु पृथ्वी तल से जितनी अधिक ऊँचाई पर स्थित होगी उतनी ही अधिक उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा होगी, क्योंकि अधिक ऊँचाई से गिरने वाली वस्तुओं द्वारा अधिक कार्य किया जा सकता है।
(iii) वैद्युत स्थितिज ऊर्जा (Electrical Potential Energy) - जिस प्रकार पृथ्वी के गृरुत्वीय क्षेत्र में रखे किसी पिण्ड पर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के । कारण उसमें गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का समावेश हो जाता है, उसी प्रकार विद्युत क्षेत्र में यदि कोई आवेशित वस्तु रखी हो तो उस पर लगने वाले वैद्युत बलों के कारण वस्तुयें विस्थापित हो सकती हैं और उनमें कार्य करने की क्षमता का समावेश हो जाता है। यह ऊर्जा वस्तु में विशेष अवस्था (वैद्युत क्षेत्र में स्थित होने) के कारण है अतः इस ऊर्जा को वैद्युत स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
(iv) चुम्बकीय स्थितिज ऊर्जा (Magnetic Potential Energy) - चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित किसी गतिशील आवेश या धारावाही चालक पर चुम्बकीय बलों के कारण कार्य करने की जो क्षमता उत्पन्न होती है उसे चुम्बकीय स्थितिज ऊर्जा कहा जाता है।
(v) रासायनिक ऊर्जा (Chemical Energy) - पदार्थ में उसकी विशेष परमाणविक संरचना के कारण जो स्थितिज ऊर्जा निहित होती है उसे रासायनिक ऊर्जा कहते हैं। रासायनिक क्रियाओं में इस ऊर्जा का रूपान्तरण अन्य स्वरूप (ऊष्मा, प्रकाश, वैद्युत-ऊर्जा आदि) में होता है।
(vi) नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy) - पदार्थ के मूल कणों (प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन) के परमाणुओं के नाभिक में रहने की विशेष अवस्था के कारण नाभिक में जो स्थितिज ऊर्जा निहित रहती है उसे नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं। परमाणु-बम, हाइड्रोजन बम, सूर्य तथा अन्य नक्षत्रों (stars) में नाभिकीय ऊर्जा का रूपान्तरण ऊष्मा, प्रकाश, यांत्रिक ऊर्जा आदि में होता है।
(vii) द्रव्यमान ऊर्जा (Mass Energy) - विभिन्न प्रकार की नाभिकीय प्रक्रियाओं में पदार्थ के द्रव्यमान का कुछ अंश ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है अर्थात् द्रव्यमान भी ऊर्जा का ही एक स्वरूप है। इसे दव्यमान ऊर्जा (Mass Energy) कहते हैं।
In simple words: स्थितिज ऊर्जा किसी वस्तु में उसकी विशेष स्थिति या आकार के कारण कार्य करने की क्षमता है। इसके विभिन्न स्वरूप हैं जैसे प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (स्प्रिंग में), गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (ऊँचाई के कारण), वैद्युत स्थितिज ऊर्जा (आवेशों के कारण), चुम्बकीय, रासायनिक, नाभिकीय और द्रव्यमान ऊर्जा।

🎯 Exam Tip: स्थितिज ऊर्जा की परिभाषा को स्पष्ट करें और इसके विभिन्न प्रकारों (जैसे गुरुत्वीय, प्रत्यास्थ, वैद्युत, रासायनिक, नाभिकीय, द्रव्यमान) को उदाहरणों के साथ समझाएं। प्रत्येक प्रकार के मूल सिद्धांत को समझने पर ध्यान दें।

 

Question 5. ऊर्जा-संरक्षण' का क्या अर्थ है? उदाहरण देकर समझाइए ।
Answer:ऊर्जा का संरक्षण (Conservation of Energy) - विज्ञान के अध्ययन के फलस्वरूप ऊर्जा सम्बन्धी एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण तथा व्यापक सिद्धान्त का पता चलता है। वह सिद्धान्त यह है कि ऊर्जा का एक रूप से दूसरे रूप में केवल परिवर्तन ही किया जा सकता है, ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है न ही नष्ट । इसे ऊर्जा के संरक्षण का सिद्धान्त (Principle of Conservation of Energy) कहते हैं। इसके परिणामस्वरूप विश्व की समस्त प्रकार की ऊर्जा का कुल परिमाण स्थिर (constant) रहता है। इसका तात्पर्य यह है कि यदि किसी क्रिया में किसी प्रकार की कुछ ऊर्जा लुप्त हो जाती है तो उतनी ही ऊर्जा किसी दूसरे रूप में उत्पन्न हो जाती है। ऊर्जा - संरक्षण के उदाहरण (Examples of Conservation of Energy) उदाहरण- 1. जब कोई पिण्ड किसी ऊँचाई से गिर रहा होता है तो उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा \( (U = mgh) \) का मान h के निरन्तर घटते जाने से कम होता जाता है जबकि पिण्ड का वेग v बढ़ता जाता है। अतः पिण्ड की गतिज ऊर्जा \( \frac{1}{2} mv² \) बढ़ती जाती है। इस प्रकार पिण्ड की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का रूपान्तरण गतिज ऊर्जा में होता रहता है परन्तु गणितीय विवेचना द्वारा निम्न प्रकार यह सिद्ध किया जा सकता है कि पिण्ड की प्रत्येक स्थिति में उसकी गतिज एवं स्थितिज ऊर्जा का योग अर्थात् उसकी सम्पूर्ण ऊर्जा नियत रहती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): एक ऊँचाई से गिरने वाली वस्तु की स्थितिज और गतिज ऊर्जा में परिवर्तन को दर्शाया गया है। इसमें एक वस्तु बिन्दु A से ऊँचाई h पर है, फिर बिन्दु B पर x दूरी नीचे आती है, जहाँ ऊँचाई h-x होती है, और अंत में बिन्दु C पर पृथ्वी तल पर पहुँचती है। यह ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत को समझने में मदद करता है। मान लीजिए m द्रव्यमान की एक वस्तु पृथ्वी तल से h ऊँचाई पर स्थित बिन्दु A पर विरामावस्था में है। क्योंकि A पर वस्तु का वेग शून्य है, इसलिए यहाँ इसकी गतिज ऊर्जा का मान शून्य होगा। अतः इस अवस्था में वस्तु की। कुल ऊर्जा = गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा \( = 0 + mgh = mgh \) ...(i) अब मान लें वस्तु को उसकी प्रारम्भिक स्थिति से x दूरी नीचे बिन्दु B तक गिराया जाता है। गति के तीसरे समीकरण से B पर वस्तु में उत्पन्न वेग \( v \) निम्न समीकरण से दिया जायेगा- \( v² = u² + 2gs \)
\( \quad = (0)² + 2gx = 2gx \) ... बिन्दु B पर वस्तु की गतिज ऊर्जा \( = \frac{1}{2} mv² \)
\( \quad = \frac{1}{2} m \times 2gx \)
\( \quad = mgx \)
In simple words: ऊर्जा संरक्षण का नियम कहता है कि ऊर्जा को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, यह केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। उदाहरण के लिए, जब कोई वस्तु ऊँचाई से गिरती है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा धीरे-धीरे गतिज ऊर्जा में बदल जाती है, लेकिन कुल ऊर्जा हमेशा समान रहती है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के नियम की स्पष्ट परिभाषा दें और एक या दो विस्तृत उदाहरणों (जैसे गिरते हुए पिण्ड का) के साथ इसे समझाएं, जिसमें विभिन्न बिन्दुओं पर ऊर्जा के रूपांतरण को दिखाया गया हो।

स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) – किसी वस्तु में उसकी विशेष अवस्था अथवा स्थिति के करण, वस्तु में कार्य करने की जो क्षमता होती है उसे वस्तु की स्थितिज ऊर्जा कहते हैं। इस ऊर्जा की माप उस कार्य से की जायगी जो वह वस्तु अपनी अवस्था विशेष से प्रारम्भिक सामान्य अवस्था में आने में कर सकती है।


In simple words: स्थितिज ऊर्जा किसी वस्तु में उसकी अवस्था या स्थिति के कारण संचित ऊर्जा है, जिसकी माप उस कार्य से होती है जो वस्तु अपनी वर्तमान स्थिति से सामान्य स्थिति में आने पर कर सकती है।

🎯 Exam Tip: स्थितिज ऊर्जा की अवधारणा को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करना और उसकी गणना के सूत्र को समझना महत्वपूर्ण है।

 

स्थितिज ऊर्जा सापेक्ष रूप से ही नापी जाती है। वस्तु की प्रारम्भिक अवस्था कुछ भी मानी जा सकती है और स्थितिज ऊर्जा की माप उस अवस्था के सापेक्ष नापी जायेगी। यह आवश्यक नहीं है कि तनावरहित स्थिति को ही प्रारम्भिक स्थिति माना जाय। संपीडित अथवा तनी हुई अवस्था को भी प्रारम्भिक स्थिति मानकर अन्य अवस्थाओं में पूर्व अवस्था के सापेक्ष स्थितिज ऊर्जा की माप की जा सकती है। भिन्न-भिन्न प्रारम्भिक अवस्थाओं के लिए एक विशेष अवस्था की स्थितिज ऊर्जा भिन्न-भिन्न होगी ।


In simple words: स्थितिज ऊर्जा हमेशा किसी संदर्भ बिंदु के सापेक्ष मापी जाती है, और संदर्भ बिंदु बदलने पर इसका मान भी बदल सकता है।

🎯 Exam Tip: सापेक्ष माप की अवधारणा को उदाहरणों के माध्यम से समझाना और स्थितिज ऊर्जा की विभिन्न प्रकारों को जानना स्कोरिंग के लिए महत्वपूर्ण है।

 

स्थितिज ऊर्जा के विभिन्न स्वरूप (Different Forms of Potential Energy)-
(i) प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (Elastic Potential Energy) - किसी संपीडित अथवा तनी हुई स्प्रिंग, तनी हुई कमान, खिंची हुई रबर की पट्टी, मुड़ी हुई धातु की छड़, संपीडित गैस आदि में उनकी प्रत्यास्थता (Elasticity) के गुण के कारण ऐसे बल उत्पन्न हो जाते हैं जो उन्हें सामान्य प्रारम्भिक अवस्था में लाने का प्रयास करते हैं। इन बलों को अन्य वस्तुओं पर आरोपित कराके कार्य किया जा सकता है। अतः प्रत्यास्थ बलों के कारण वस्तुओं में निहित ऊर्जा को प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
(ii) गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (Gravitational Potential Energy) - जैसे ही किसी m द्रव्यमान का पिण्ड पृथ्वी की सतह से v वेग से ऊपर उठता है, गुरुत्वाकर्षण बल mg पिण्ड पर नीचे की ओर गति की दिशा के विरुद्ध, कार्य करने लगता है और इस बल के विरुद्ध वस्तु जब ऊपर उठती है तो उसका वेग घटने लगता है। जब इसका वेग v से घटकर \( v_1 \) हो जाता है तो गतिज ऊर्जा \( mv^2 \) से घटकर \( mv_1^2 \) हो जाती है। इस गतिज ऊर्जा का परिवर्तन स्थितिज ऊर्जा के रूप में होता है जो पिण्ड में एकत्र हो जाती है ।h ऊँचाई पर पहुँचकर जब वस्तु का वेग शून्य हो जाता है और गतिज ऊर्जा शून्य हो जाती है तो इस क्रिया में सम्पूर्ण गतिज ऊर्जा को रूपान्तरण पिण्ड में स्थितिज ऊर्जा के रूप में हो जाता है। इस क्रिया में पिण्ड में स्थितिज ऊर्जा उस पर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध कार्य करने के कारण उत्पन्न हुई अतः इस ऊर्जा को गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा कहते हैं। किसी स्थिति में


In simple words: स्थितिज ऊर्जा कई रूपों में पाई जाती है, जैसे स्प्रिंग में संग्रहीत प्रत्यास्थ ऊर्जा या ऊंचाई के कारण वस्तु में संग्रहीत गुरुत्वीय ऊर्जा, जो किसी वस्तु को कार्य करने की क्षमता प्रदान करती है।

🎯 Exam Tip: स्थितिज ऊर्जा के विभिन्न प्रकारों को उनके उदाहरणों के साथ याद रखना और प्रत्येक प्रकार की ऊर्जा के पीछे के भौतिक सिद्धांतों को समझना परीक्षा के लिए आवश्यक है।

 

वस्तु की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा उस कार्य से मापी जाती है जो उस वस्तु को किसी प्रारम्भिक स्थिति से उस स्थिति विशेष में गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध लाने में करना पड़ता है। यदि पृथ्वी के तल को प्रारम्भिक स्थिति मान लिया। जाय (अर्थात् इस स्थिति में स्थितिज ऊर्जा शुन्य है) तो m द्रव्यमान के पिण्ड को x ऊँचाई तक गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध विस्थापित करने में पिण्ड पर किया गया कार्य = गुरुत्वीय बल x विस्थापन = \( (mg) x (x) = mgx \) अब जब पिण्ड x ऊँचाई पर पहुँच जाता है तो पृथ्वी तल के सापेक्ष पिण्ड की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा mgx होगी तथा h ऊँचाई पर पिण्ड की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा mgh होगी । गुरुत्वीय क्षेत्र में कोई वस्तु पृथ्वी तल से जितनी अधिक ऊँचाई पर स्थित होगी उतनी ही अधिक उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा होगी, क्योंकि अधिक ऊँचाई से गिरने वाली वस्तुओं द्वारा अधिक कार्य किया जा सकता है।
(iii) वैद्युत स्थितिज ऊर्जा (Electrical Potential Energy) - जिस प्रकार पृथ्वी के गृरुत्वीय क्षेत्र में रखे किसी पिण्ड पर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के । कारण उसमें गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का समावेश हो जाता है, उसी प्रकार विद्युत क्षेत्र में यदि कोई आवेशित वस्तु रखी हो तो उस पर लगने वाले वैद्युत बलों के कारण वस्तुयें विस्थापित हो सकती हैं और उनमें कार्य करने की क्षमता का समावेश हो जाता है। यह ऊर्जा वस्तु में विशेष अवस्था (वैद्युत क्षेत्र में स्थित होने) के कारण है अतः इस ऊर्जा को वैद्युत स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
(iv) चुम्बकीय स्थितिज ऊर्जा (Magnetic Potential Energy) - चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित किसी गतिशील आवेश या धारावाही चालक पर चुम्बकीय बलों के कारण कार्य करने की जो क्षमता उत्पन्न होती है उसे चुम्बकीय स्थितिज ऊर्जा कहा जाता है।
(v) रासायनिक ऊर्जा (Chemical Energy) - पदार्थ में उसकी विशेष परमाणविक संरचना के कारण जो स्थितिज ऊर्जा निहित होती है उसे रासायनिक ऊर्जा कहते हैं। रासायनिक क्रियाओं में इस ऊर्जा का रूपान्तरण अन्य स्वरूप (ऊष्मा, प्रकाश, वैद्युत-ऊर्जा आदि) में होता है।
(vi) नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy) - पदार्थ के मूल कणों (प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन) के परमाणुओं के नाभिक में रहने की विशेष अवस्था के कारण नाभिक में जो स्थितिज ऊर्जा निहित रहती है उसे नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं। परमाणु-बम, हाइड्रोजन बम, सूर्य तथा अन्य नक्षत्रों (stars) में नाभिकीय ऊर्जा का रूपान्तरण ऊष्मा, प्रकाश, यांत्रिक ऊर्जा आदि में होता है।
(vii) द्रव्यमान ऊर्जा (Mass Energy) - विभिन्न प्रकार की नाभिकीय प्रक्रियाओं में पदार्थ के द्रव्यमान का कुछ अंश ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है अर्थात् द्रव्यमान भी ऊर्जा का ही एक स्वरूप है। इसे दव्यमान ऊर्जा (Mass Energy) कहते हैं।


In simple words: स्थितिज ऊर्जा के अन्य रूपों में विद्युत, चुंबकीय, रासायनिक, और नाभिकीय ऊर्जा शामिल हैं, जो वस्तुओं की विशेष स्थिति या संरचना के कारण कार्य करने की क्षमता को दर्शाते हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार की स्थितिज ऊर्जाओं के मूल सिद्धांतों और उनके रूपांतरणों को समझना, साथ ही आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा संबंध को जानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. ऊर्जा-संरक्षण' का क्या अर्थ है? उदाहरण देकर समझाइए ।
Answer: ऊर्जा का संरक्षण (Conservation of Energy) - विज्ञान के अध्ययन के फलस्वरूप ऊर्जा सम्बन्धी एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण तथा व्यापक सिद्धान्त का पता चलता है। वह सिद्धान्त यह है कि ऊर्जा का एक रूप से दूसरे रूप में केवल परिवर्तन ही किया जा सकता है, ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है न ही नष्ट । इसे ऊर्जा के संरक्षण का सिद्धान्त (Principle of Conservation of Energy) कहते हैं। इसके परिणामस्वरूप विश्व की समस्त प्रकार की ऊर्जा का कुल परिमाण स्थिर (constant) रहता है। इसका तात्पर्य यह है कि यदि किसी क्रिया में किसी प्रकार की कुछ ऊर्जा लुप्त हो जाती है तो उतनी ही ऊर्जा किसी दूसरे रूप में उत्पन्न हो जाती है।
ऊर्जा – संरक्षण के उदाहरण (Examples of Conservation of Energy)
उदाहरण-
1. जब कोई पिण्ड किसी ऊँचाई से गिर रहा होता है तो उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा \( (U = mgh) \) का मान h के


In simple words: ऊर्जा संरक्षण का नियम कहता है कि ऊर्जा को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, यह केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है और ब्रह्मांड में कुल ऊर्जा हमेशा स्थिर रहती है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के नियम की परिभाषा, इसके मुख्य सिद्धांतों और वास्तविक जीवन के उदाहरणों को समझना और उन्हें स्पष्ट रूप से समझाना परीक्षा में अच्छे अंक दिला सकता है।

 

निरन्तर घटते जाने से कम होता जाता है जबकि पिण्ड का वेग v बढ़ता जाता है। अतः पिण्ड की गतिज ऊर्जा \( mv^2 \) बढ़ती जाती है। इस प्रकार पिण्ड की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का रूपान्तरण गतिज ऊर्जा में होता रहता है परन्तु गणितीय विवेचना द्वारा निम्न प्रकार यह सिद्ध किया जा सकता है कि पिण्ड की प्रत्येक स्थिति में उसकी गतिज एवं स्थितिज ऊर्जा का योग अर्थात् उसकी सम्पूर्ण ऊर्जा नियत रहती है।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वस्तु को विभिन्न ऊँचाईयों पर दर्शाता है। बिंदु A सबसे ऊपर है, जहाँ वस्तु विरामावस्था में है और इसकी ऊंचाई 'h' है। बिंदु B बीच में है, 'x' दूरी गिरने के बाद, और इसकी ऊंचाई 'h-x' है। बिंदु C सबसे नीचे पृथ्वी तल पर है। यह चित्र गतिज और स्थितिज ऊर्जा के बीच रूपांतरण और यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण को दर्शाता है।
In simple words: जब कोई वस्तु ऊंचाई से गिरती है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा घटती है और गतिज ऊर्जा बढ़ती है, लेकिन उनकी कुल यांत्रिक ऊर्जा स्थिर रहती है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के नियम को गणितीय रूप से सिद्ध करना और विभिन्न बिंदुओं पर ऊर्जा के रूपांतरण को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।

 

मान लीजिए m द्रव्यमान की एक वस्तु पृथ्वी तल से h ऊँचाई पर स्थित बिन्दु A पर विरामावस्था में है। क्योंकि A पर वस्तु का वेग शून्य है, इसलिए यहाँ इसकी गतिज ऊर्जा का मान शून्य होगा। अतः इस अवस्था में वस्तु की।
कुल ऊर्जा = गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा = \( 0 + mgh = mgh \) ...(i)
अब मान लें वस्तु को उसकी प्रारम्भिक स्थिति से x दूरी नीचे बिन्दु B तक गिराया जाता है। गति के तीसरे समीकरण से B पर वस्तु में उत्पन्न वेग \( \upsilon \) निम्न समीकरण से दिया जायेगा-


In simple words: जब एक वस्तु ऊंचाई पर होती है, तो उसमें केवल स्थितिज ऊर्जा होती है, और जैसे-जैसे वह नीचे गिरती है, स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदल जाती है।

🎯 Exam Tip: किसी वस्तु के मुक्त पतन के विभिन्न बिंदुओं पर स्थितिज और गतिज ऊर्जा की गणना करने के लिए सही सूत्रों का उपयोग करें।

 

\( \upsilon^2 = u^2 + 2gs \)
\( = (0)^2 + 2gx = 2gx \)
\( \implies \) बिन्दु B पर वस्तु की गतिज ऊर्जा
\( = \frac{1}{2} m\upsilon^2 \)
\( = \frac{1}{2} \times m \times 2gx \)
\( = mgx \)
अब, क्योंकि वस्तु पृथ्वी तल से \( (h - x) \) ऊँचाई पर
स्थित है, अतः बिन्दु B पर वस्तु की स्थितिज ऊर्जा
\( = mg (h - x) \)
\( \implies \) बिन्दु B पर वस्तु की कुल ऊर्जा = गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा
\( = mgx + mg(h - x) \)
\( = mgh \) ...(ii)
अब, मान लीजिए वस्तु पृथ्वी तल पर स्थित किसी बिन्दु उपर्युक्त समीकरण (i), (ii) व (iii) से
C तक गिरती है। इस स्थिति में स्थितिज ऊर्जा शून्य के बराबर
होगी, क्योंकि अब पृथ्वी तल से वस्तु की ऊँचाई = 0
अब यदि इसका वेग \( \upsilon' \) हो, तो-
\( \upsilon'^2 = u^2 + 2gh \)
\( = 0 + 2gh = 2gh \)
अतः पृथ्वी तल पर वस्तु की गतिज ऊर्जा
\( = \frac{1}{2} m\upsilon'^2 \)
\( = \frac{1}{2} m \times 2gh \)
\( = mgh \)
\( \implies \) बिन्दु C पर वस्तु की कुल ऊर्जा = गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा
\( = mgh + 0 = mgh \) ...(iii)
स्पष्ट है कि तीनों स्थितियों में वस्तु की कुल ऊर्जा सदैव स्थिर mgh रहती है। जब वस्तु पृथ्वी से टकरा जाती है तो उसकी कुल ऊर्जा ऊष्मा, ध्वनि तथा प्रकाश में बदल जाती है। इसी प्रकार ऊपर की ओर फेंके गये पिण्ड में भी गतिज ऊर्जा का रूपान्तरण स्थितिज ऊर्जा में होता जाता है तथा प्रत्येक स्थिति में दोनों का योग नियत रहता है।
2. सरल लोलक की दोलन क्रिया में भी गोलक की विभिन्न स्थितियों में इसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में तथा गतिज ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा में रूपान्तरित होती रहती है। यदि घर्षण का प्रभाव नगण्य माना जाय तो प्रत्येक स्थिति में दोनों प्रकार की ऊर्जाओं का योग नियत रहता है। ऊर्जा संरक्षण के कारण आदर्श स्थिति (घर्षण की अनुपस्थिति) में यह निरन्तर गति करता रहेगा परन्तु व्यवहार में इसकी ऊर्जा निलम्बन आधार तथा गोलक व वायु के बीच घर्षण के विरुद्ध कार्य करने में धीरे-धीरे व्यय होती रहती है। यह व्यय हुई ऊर्जा ऊष्मा में रूपान्तरित होती रहती है जिससे दोलनों का आयाम धीरे-धीरे कम होता जाता है। यदि इस दशा में ऊष्मीय ऊर्जा को भी । गणना में ले लिया जाय तो गोलक की प्रत्येक स्थिति में स्थितिज, गतिज एवं ऊष्मीय ऊर्जा का योग नियत रहता है। यही ऊर्जा संरक्षण का नियम है।
3. स्प्रिंग (Spring) - चित्र के अनुसार एक स्प्रिंग से एक भार लटकाइए। जब भार चित्र
(क) की तरह उच्चतम बिन्दु पर होता है, तो उसमें केवल स्थितिज ऊर्जा होती है और स्प्रिंग में कोई ऊर्जा नहीं होती ।


In simple words: किसी भी मुक्त रूप से गिरने वाली वस्तु में, जैसे-जैसे वह नीचे आती है, उसकी स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदलती जाती है, लेकिन किसी भी बिंदु पर उनकी कुल यांत्रिक ऊर्जा स्थिर रहती है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के नियम का उपयोग करके मुक्त रूप से गिरने वाली वस्तुओं की गति और ऊर्जा परिवर्तनों को समझना और उन्हें गणितीय रूप से प्रदर्शित करना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

 


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र स्प्रिंग से लटके हुए भार की दो स्थितियों को दर्शाता है। चित्र (क) में, भार ऊपर की उच्चतम स्थिति में है, जहाँ केवल स्थितिज ऊर्जा होती है और स्प्रिंग में कोई ऊर्जा नहीं होती। चित्र (ख) में, भार नीचे की ओर गतिमान है, जहाँ भार में गतिज ऊर्जा और स्प्रिंग में भी स्थितिज ऊर्जा संचित होती है।
In simple words: जब स्प्रिंग से लटके भार को उच्चतम बिंदु से छोड़ा जाता है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा और स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है, जिससे कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है।

🎯 Exam Tip: स्प्रिंग और भार के सिस्टम में ऊर्जा के विभिन्न रूपों - गतिज, गुरुत्वीय स्थितिज, और प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा - के बीच रूपांतरण को स्पष्ट रूप से समझाना आवश्यक है।

 

जब भार नीचे को लगता है, तो उसमें गति उत्पन्न होने के कारण गतिज ऊर्जा संचित होती है, किन्तु स्थितिज ऊर्जा में कमी होती है। इसके अतिरिक्त स्प्रिंग को खींचने के कारण उसमें स्थितिज ऊर्जा का संचय होता है। जब भार अपनी गतिशील अवस्था में होता है, तो उसकी प्रारम्भिक पूर्ण स्थितिज ऊर्जा, इसकी अपनी गतिज ऊर्जा एवं स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा में परिणत हो जाती है। जब भार चित्र (ख) की तरह निम्नतम बिन्दु पर होता है तो उसकी सम्पूर्ण ऊर्जा स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा के रूप में परिवर्तित हो जाती है। परिकलन से ज्ञात होता है कि प्रत्येक स्थिति में कुल ऊर्जा का परिमाण नियत रहता है। स्पष्ट है कि इसमें ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन होता है।


In simple words: स्प्रिंग-मास सिस्टम में, भार की गति के दौरान स्थितिज ऊर्जा (गुरुत्वीय और प्रत्यास्थ) और गतिज ऊर्जा एक-दूसरे में परिवर्तित होती रहती हैं, लेकिन सिस्टम की कुल यांत्रिक ऊर्जा हमेशा संरक्षित रहती है।

🎯 Exam Tip: किसी भी यांत्रिक प्रणाली में ऊर्जा के संरक्षण के नियम को लागू करते समय, घर्षण जैसे गैर-संरक्षित बलों की अनुपस्थिति को मान लेना महत्वपूर्ण है, ताकि कुल यांत्रिक ऊर्जा स्थिर रहे।

 

Question 6. ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों का विवरण दीजिए ।
Answer: ऊर्जा के स्रोत (Sources of Energy) - ऊर्जा के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं-
1. ईंधन (Fuels) - लकड़ी, कोयला, किरोसीन, पेट्रोल, डीजल आदि को जलाकर ऊष्मा प्राप्त की जाती है, जिसका सीधे अथवा विद्युत-ऊर्जा में परिवर्तन करके उपयोग किया जाता है। वर्तमान समय में यह ऊर्जा का प्रयुक्त होने वाला स्रोत है।
2. जल से ऊर्जा (To Water Energy) - भाखड़ा-नांगल जैसे बाँधों (Dams) में पहले जल को ऊँचाई पर इकट्ठा किया जाता है। इस जल में स्थितिज ऊर्जा होती है। जब जल टरबाइन के पंखे की पंखुड़ियों पर गिरकर टकराता है तो टरबाइन का पहिया घूमने लगता है। इस क्रिया में जल की स्थितिज ऊर्जा पहिये की गतिज ऊर्जा में बदल जाती है। इस पहिये द्वारा एक डायनामो के आर्मेचर को घुमाते हैं जिससे विद्युत ऊर्जा प्राप्त होती है। आजकल विद्युत ऊर्जा प्राप्त करने का यह महत्त्वपूर्ण स्रोत है।
3. वायु से ऊर्जा (To Air Energy) - वायु की गतिज ऊर्जा से अनेक यांत्रिक कार्य किये जाते हैं, जैसे अनाज से भूसा अलग करना, समुद्र में पाल द्वारा नाव चलाना, पवन-चक्की द्वारा विद्युत उत्पादन आदि ।
4. ईंधन, कोयला, पेट्रोल (Fuel, coal, Petrolium) - विभिन्न प्रकार के ईंधनों, जैसे कोयला, मिट्टी का तेल, गैस, पेट्रोल आदि में रासायनिक ऊर्जा होती है। विभिन्न युक्तियों का प्रयोग करके ऐसे इंजन तैयार किये गये हैं। जिनमें इन ईंधनों की रासायनिक ऊर्जा यांत्रिक ऊर्जा में बदली जाती है। इसी से मोटरकार, वायुयान आदि के इंजन चलाये जाते हैं।
5. नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy) - सन् 1939 में दो जर्मन वैज्ञानिकों हॉन तथा स्ट्रॉसमैन (Hahn and Strassman) ने यूरेनियम पर तीव्रगामी न्यूट्रॉनों की बमबारी की। इस बमबारी से यूरेनियम का नाभिक दो लगभग बराबर नाभिकों में टूट जाता है तथा कुछ द्रव्यमान की क्षति हो जाती है। यह द्रव्यमान क्षति आइन्सटीन के द्रव्यमाने-ऊर्जा सिद्धान्त के अनुसार ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है तथा अत्यधिक ऊर्जा मुक्त होती है।


In simple words: ऊर्जा के कई स्रोत हैं जैसे जीवाश्म ईंधन (लकड़ी, कोयला, पेट्रोल), जल ऊर्जा, पवन ऊर्जा, और नाभिकीय ऊर्जा, जिनका उपयोग विभिन्न कार्यों के लिए ऊर्जा उत्पन्न करने में होता है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों और उनके कार्यप्रणाली को उदाहरणों के साथ याद रखना और प्रत्येक स्रोत के ऊर्जा रूपांतरण को समझना महत्वपूर्ण है।

 

उपर्युक्त अभिक्रिया में जो ऊर्जा मुक्त होती है उसे नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं तथा यह क्रिया नाभिकीय विखण्डन कहलाती है। उस ऊर्जा को उत्पन्न करने के लिए नाभिकीय रिएक्टर (Nuclear Reactors) बनाये । गये हैं। मुम्बई के निकट ट्राम्बे में भाषा अनुसंधान केन्द्र में कई रिएक्टर-अप्सरा, साइरस और जरलीना कार्य कर रहे हैं। इनमें से अप्सरा सन् अगस्त 1956 से तथा जरलीना सन् 1961 से कार्य कर रहा है। इन रिएक्टरों से वैद्युत-ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है।
हमारे देश में विभिन्न स्थानों जैसे तारापुर (महाराष्ट्र), कोटा (राजस्थान), कलपक्कम (तमिलनाडु) तथा नरोरा (उत्तर प्रदेश) में ऐसे वैद्युत उत्पादक गृह हैं जिनमें नाभिकीय रिएक्टरों से प्राप्त नाभिकीय ऊर्जा से वैद्युत ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है।
6. अवशिष्ट जैव पदार्थ - हम दैनिक जीवन में बहुत-से कार्बनिक पदार्थों को बेकार समझकर फेंक देते हैं। अब ऐसे पदार्थ ऊर्जा के स्रोत के रूप में प्रयोग में लाये जा रहे हैं। उदाहरणार्थ : सड़ी-गली वनस्पतियाँ, गोबर आदि । इनको इकट्ठा करके किसी बन्द गड्डे में सड़ने दिया जाता है। इनसे एक प्रकार की गैस निकलती है जिसे मेथेन \( (CH_4) \) कहते हैं। यह एक ज्वलनशील गैस है। जिसका प्रयोग आजकल ईंधन की जगह किया जा रहा है। गोबर गैस भी इसी प्रकार का उदाहरण है।


In simple words: नाभिकीय विखण्डन से ऊर्जा रिएक्टरों में बिजली बनाने के लिए उपयोग होती है, जबकि अवशिष्ट जैव पदार्थ जैसे गोबर को मेथेन गैस बनाने के लिए उपयोग किया जाता है, जो एक ईंधन है।

🎯 Exam Tip: नाभिकीय ऊर्जा के उत्पादन की प्रक्रिया और जैव-मात्रा ऊर्जा के उपयोग को समझना, साथ ही इनके उदाहरणों को याद रखना आवश्यक है।

 

Question 7. सूर्य को ऊर्जा का मूल स्रोत क्यों कहते हैं? सूर्य की प्राप्त ऊष्मा तथा प्रकाश, किस प्रकार के ऊर्जा रूपान्तरण से प्राप्त होते हैं?
Answer: ऊर्जा का मूल स्रोत : सूर्य-वास्तव में सभी प्रकार की ऊर्जाओं का मूल स्रोत सूर्य ही है। मनुष्य ने पृथ्वी पर जो भी ऊर्जा का स्रोत बनाया है अथवा खोजा है। उन सब में सूर्य की ऊर्जा का ही रूपान्तरण होता है। सूर्य से ऊर्जा प्राप्त कर नये पेड़-पौधे बढ़ते हैं जिससे लकड़ी प्राप्त होती है। प्राचीन काल में पेड़-पौधों के पृथ्वी के अन्दर दब जाने से पृथ्वी के अन्दर अत्यधिक दाब के कारण ये पत्थर के कोयले, पेट्रोल आदि में परिवर्तित हो जाते हैं। इनसे हम ऊर्जा प्राप्त करते हैं। समुद्र का जल सूर्य से ऊष्मा लेकर वाष्प में परिवर्तित हो वायुमण्डल में चला जाता है तथा वर्षा होती है। वर्षा के जल से, बड़े-बड़े बाँध बनाकर वैद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जाती है। अतः हमारी पृथ्वी पर समस्त ऊर्जा स्रोतों का मूल स्रोत सूर्य से प्राप्त ऊर्जा ही है जो सौर ऊर्जा कहलाती है।


In simple words: सूर्य पृथ्वी पर सभी ऊर्जा का मूल स्रोत है क्योंकि यह सीधे या परोक्ष रूप से ईंधन, जल ऊर्जा, और पवन ऊर्जा जैसे अन्य सभी ऊर्जा स्रोतों को शक्ति प्रदान करता है।

🎯 Exam Tip: सूर्य को ऊर्जा के मूल स्रोत के रूप में उसकी भूमिका को स्पष्ट करें, जिसमें ऊर्जा रूपांतरणों की श्रृंखला शामिल है जो अन्य ऊर्जा स्रोतों को जन्म देती है।

 

सूर्य में ऊर्जा की उत्पत्ति पदार्थ के द्रव्यमान अथवा द्रव्यमान-ऊर्जा के रूपान्तरण से होती है। सूर्य में हाइड्रोजन का विशाल भण्डार है। सूर्य में ऊर्जा-रूपान्तरण की क्रिया में चार-चार हाइड्रोजन नाभिक परस्पर संयोग करके एक-एक हीलियम नाभिक बनाते रहते हैं। इस क्रिया में पदार्थ (नाभिकों) का कुछ द्रव्यमान, ऊष्मा, प्रकाश तथा अन्य स्वरूपों में रूपान्तरित हो जाता है। यही ऊर्जा सूर्य में प्रसारित होती है। द्रव्यमान से ऊर्जा में रूपान्तरण की इस प्रक्रिया को नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) कहते हैं।


In simple words: सूर्य में ऊर्जा का उत्पादन नाभिकीय संलयन से होता है, जहाँ हाइड्रोजन नाभिक मिलकर हीलियम बनाते हैं और इस प्रक्रिया में द्रव्यमान ऊर्जा में बदल जाता है, जिससे ऊष्मा और प्रकाश के रूप में ऊर्जा निकलती है।

🎯 Exam Tip: नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया को स्पष्ट करें और बताएं कि कैसे द्रव्यमान-ऊर्जा रूपांतरण से सूर्य से ऊष्मा और प्रकाश के रूप में ऊर्जा निकलती है।

 

द्रव्यमान एवं ऊर्जा के पारस्परिक रूपान्तरण की परिकल्पना सर्वप्रथम वैज्ञानिक आइन्सटीन ने सन् 1905 में की थी। सापेक्षता सिद्धान्त (Theory of Relativity) के अनुसार उन्होंने गणितीय विवेचना द्वारा, द्रव्यमान तथा ऊर्जा के पारस्परिक सम्बन्ध को निम्नलिखित समीकरण द्वारा व्यक्त किया। इसके अनुसार द्रव्यमान m के रूपान्तरण से प्राप्त ऊर्जा
\( E = mc^2 \) जबकि \( c = 3 \times 10^8 \) मीटर-सेकण्ड-1, निर्वात में प्रकाश की चाल है।
उदाहरण : 1 किलोग्राम से प्राप्त ऊर्जा का मान \( E = 1 \) किग्रा \( (3 \times 10^8 \text{ मीटर-सेकण्ड})^{-1})^2 = 9 \times 10^{16} \) जूल ।


In simple words: आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण \( E=mc^2 \) के अनुसार, द्रव्यमान को ऊर्जा में बदला जा सकता है, जहाँ \( c \) प्रकाश की गति है, और यह संलयन जैसी प्रक्रियाओं में भारी मात्रा में ऊर्जा छोड़ता है।

🎯 Exam Tip: आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा संबंध \( E=mc^2 \) को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें, उसके घटकों को समझाएं और एक उदाहरण के साथ ऊर्जा की गणना को प्रदर्शित करें।

 

Question 8. यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण का नियम लिखिए । सिद्ध कीजिए कि स्वतन्त्रतापूर्वक गिरते हुए किसी भी पिण्ड में गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा का योग सदैव नियत रहता है।
Answer: यांत्रिक ऊर्जा का संरक्षण नियम - यदि किसी वस्तु से ऊष्मा अथवा विकिरणों के रूप में ऊर्जा की हानि न हो, तो वस्तु की यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) अचर बनी रहती है।


In simple words: यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण नियम बताता है कि यदि कोई बाहरी गैर-यांत्रिक बल (जैसे घर्षण) काम नहीं कर रहा है, तो किसी प्रणाली की कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज + स्थितिज ऊर्जा) हमेशा स्थिर रहती है।

🎯 Exam Tip: यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण के नियम की स्पष्ट परिभाषा और मुक्त पतन की स्थिति में इसके गणितीय प्रमाण को समझना उच्च अंक प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।

 

आंकिक प्रश्न

 

Question 1. 2 किग्रा की एक पुस्तक 1 मीटर ऊँची मेज पर रखी है। पुस्तक की स्थितिज ऊर्जा की गणना कीजिए। \( (g = 9.8 \text{ मी.से}^{-2}) \)
Answer: हल : द्रव्यमान \( m = 2 \) किग्रा ऊँचाई \( (h) = 1 \) मी स्थितिज ऊर्जा \( (\text{P.E.}) = mgh = 2 \times 9.8 \times 1 = 19.6 \) जूल ।


In simple words: पुस्तक की स्थितिज ऊर्जा उसकी ऊंचाई और द्रव्यमान के कारण होती है, जिसे \( mgh \) सूत्र से गणना की जाती है, जहाँ \( g \) गुरुत्वाकर्षण त्वरण है।

🎯 Exam Tip: स्थितिज ऊर्जा की गणना के लिए \( mgh \) सूत्र को सही ढंग से लागू करना सुनिश्चित करें और सभी इकाइयों को S.I. में रखें।

 

Question 2. एक पिण्ड पर 20 न्यूटन का बल लगता है। यदि बल की क्रिया-रेखा विस्थापन की दिशा में 45° का कोण बनाता है। तो पिण्ड को 4 मीटर विस्थापित करने में किये गये कार्य का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: हल :
कार्य \( (W) = F \times d.\cos\theta \) \( [\cos45^\circ = \frac{1}{\sqrt{2}}] \)
\( = 20 \times 4 \times \cos45^\circ \)
\( = 80 \times \frac{1}{\sqrt{2}} \) जूल \( = 40\sqrt{2} \) जूल \( = 40 \times 1.4142 \) \( [\sqrt{2} = 1.4142] = 56.57 \) जूल ।


In simple words: जब बल विस्थापन की दिशा में एक कोण पर लगता है, तो कार्य की गणना बल, विस्थापन और बल तथा विस्थापन के बीच के कोण के कोसाइन के गुणनफल से की जाती है।

🎯 Exam Tip: कार्य की गणना करते समय बल और विस्थापन के बीच के कोण को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे एक ही दिशा में न हों।

 

Question 3. एक कुली 40 किग्रा का बोझ लेकर क्षैतिज प्लेटफॉर्म पर 20 मीटर की दूरी चलता है। उसके द्वारा गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध कितना कार्य किया गया?
Answer: हल : शून्य, क्योंकि \( W = Fd.\cos \theta \), F व d लम्बवत् हैं । \( = mgd \cos 90^\circ = 40 \times 9.8 \times 20 \times \cos 90^\circ \) \( [\cos 90^\circ= 0] = 40 \times 9.8 \times 20 \times 0 = 0 \)


In simple words: जब कुली क्षैतिज रूप से चलता है, तो गुरुत्वाकर्षण बल नीचे की ओर लगता है और विस्थापन क्षैतिज होता है, इसलिए बल और विस्थापन के बीच 90° का कोण होने के कारण गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध कोई कार्य नहीं होता है।

🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि यदि बल और विस्थापन के बीच का कोण 90° है, तो उस बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है।

 

Question 4. एक मशीन 20 सेकण्ड में 150 जूल कार्य करती है। मशीन की सामर्थ्य क्या है?
Answer: हल : सामर्थ्य \( = \frac{\text{कार्य}}{\text{समय}} \)
\( = \frac{150 \text{ जूल}}{20 \text{ सेकण्ड}} \)
\( = 7.5 \text{ जूल-सेकण्ड}^{-1} = 7.5 \) वाट


In simple words: सामर्थ्य कार्य करने की दर है, जिसकी गणना कुल कार्य को कार्य करने में लगे समय से विभाजित करके की जाती है।

🎯 Exam Tip: सामर्थ्य की गणना करते समय, कार्य (जूल में) और समय (सेकण्ड में) की सही इकाइयों का उपयोग करें ताकि परिणाम वाट में मिले।

 

Question 5. एक पम्प की सामर्थ्य 7.5 किलोवाट है। वह प्रति मिनट अधिक से अधिक कितना पानी 25 मीटर ऊपर उठा सकता है? \( (g = 10 \text{ मी. सेकण्ड}^{-2}) \)
Answer: हल :
दिया है सामर्थ्य \( 7.5 \) किलोवाट \( = 7500 \) वाट
कार्य \( = \) सामर्थ्य \( \times \) समय
बल \( \times \) विस्थापन \( = \) सामर्थ्य \( \times \) समय
द्रव्यमान \( \times \) त्वरण \( \times \) विस्थापन \( = \) सामर्थ्य \( \times \) समय


In simple words: पंप की सामर्थ्य (शक्ति) का उपयोग करके, यह गणना की जा सकती है कि एक निश्चित समय में कितना पानी एक निश्चित ऊँचाई तक उठाया जा सकता है, यह मानते हुए कि पंप की शक्ति कार्य करने की दर के बराबर है।

🎯 Exam Tip: किलोवाट को वाट में परिवर्तित करना और कार्य के सूत्र \( (\text{बल} \times \text{विस्थापन}) \) को सामर्थ्य \( \times \) समय के बराबर रखकर अज्ञात द्रव्यमान की गणना करना याद रखें।

 

द्रव्यमान \( = \frac{\text{सामर्थ्य} \times \text{समय}}{\text{त्वरण} \times \text{विस्थापन}} \)
\( = \frac{7500 \text{ वाट} \times 60 \text{ सेकण्ड}}{10 \text{ मी.से}^{-2} \times 25 \text{ मीटर}} \)
\( = 1800 \) किग्रा ।


In simple words: दिए गए सामर्थ्य, समय, गुरुत्वाकर्षण त्वरण और उठाई गई ऊंचाई का उपयोग करके, पानी के द्रव्यमान की गणना की जा सकती है।

🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि सभी इकाइयाँ (जैसे वाट, सेकंड, मीटर/सेकंड\(^2\), मीटर) संगति बनाए रखने के लिए S.I. प्रणाली में हैं ताकि द्रव्यमान किग्रा में प्राप्त हो।

 

Question 6. 10 अश्व-सामर्थ्य की मोटर द्वारा 7.46 मीटर गहरे कुएँ से प्रति सेकण्ड कितने किलोग्राम पानी खींचा जा सकता है? \( (g = 10 \text{ मी. सेकण्ड}^{-2}) \)
Answer: हल : खींचे गये पानी का द्रव्यमान
\( = \frac{\text{सामर्थ्य} \times \text{समय}}{\text{त्वरण} \times \text{विस्थापन}} \) (उपर्युक्त प्रश्न देखिए)
सामर्थ्य \( = 10 \) अश्व-सामर्थ्य \( = 10 \times 746 \) वाट
\( = 7460 \text{ किग्रा-मी}^2 \text{ से}^{-2}, t = 1 \) सेकण्ड, \( g = 10 \text{ मी.से}^{-2}\)
\( \text{ विस्थापन} = 7.46 \) मी।
\( \implies \) खींचे गये पानी का द्रव्यमान \( = \frac{7460 \times 1}{10 \times 7.46} \)
\( = 100 \) किग्रा ।


In simple words: मोटर की शक्ति का उपयोग करके, यह गणना की जा सकती है कि एक निश्चित गहराई से प्रति सेकंड कितना किलोग्राम पानी उठाया जा सकता है, जो शक्ति, समय, गुरुत्वाकर्षण त्वरण और गहराई पर निर्भर करता है।

🎯 Exam Tip: अश्व-सामर्थ्य को वाट में बदलना और सभी इकाइयों को S.I. प्रणाली में रखना महत्वपूर्ण है ताकि परिणाम सही किग्रा में प्राप्त हो।

 

Question 7. एक इंजन की सामर्थ्य 20 किलोवाट है। इसके द्वारा 100 किग्रा. के पिण्ड को 50 मीटर ऊँचाई तक उठाने में कितना समय लगेगा? \( (g = 10 \text{ मी-सेकण्ड}^{-2}) \)
Answer: हल :
सामर्थ्य \( = 20 \) किलोवाट \( = 20 \times 10^3 \) वाट;
द्रव्यमान \( = 100 \) किग्रा; विस्थापन \( = 50 \) मीटर ।
सामर्थ्य \( = \frac{\text{कार्य}}{\text{समय}} \)
\( \implies \) समय \( = \frac{\text{कार्य}}{\text{सामर्थ्य}} \)
\( = \frac{\text{बल} \times \text{विस्थापन}}{\text{सामर्थ्य}} \)
\( = \frac{\text{द्रव्यमान} \times \text{त्वरण} \times \text{विस्थापन}}{\text{सामर्थ्य}} \)
\( = \frac{100 \times 10 \times 50}{20 \times 10^3} \)
\( = 2.5 \) सेकण्ड ।


In simple words: इंजन की शक्ति और उठाए जाने वाले पिंड के द्रव्यमान और ऊँचाई का उपयोग करके, उस कार्य को करने में लगने वाले समय की गणना की जा सकती है।

🎯 Exam Tip: किलोवाट को वाट में परिवर्तित करें और कार्य \( (mgh) \) तथा सामर्थ्य के सूत्र का उपयोग करके समय की सही गणना करें।

 

Question 8. 5 किग्रा-भार के एक पत्थर के टुकड़े को 10 मीटर ऊँचाई से गिराया जाता है। पृथ्वी से टकराते समय उसकी गतिज ऊर्जा की गणना कीजिए । पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण 10 मी. से है।
Answer: हल :
पत्थर का द्रव्यमान \( (m) = 5 \) किग्रा
ऊँचाई \( (h) = 10 \) मीटर
\( g = 10 \text{ मी.से}^{-2} \) (दिया है) स्थितिज ऊर्जा \( = mgh = 5 \times 10 \times 10 = 500 \) जूल । स्थितिज ऊर्जा ही गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाएगी ।


In simple words: जब पत्थर को एक निश्चित ऊंचाई से गिराया जाता है, तो उसकी प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा पूरी तरह से पृथ्वी से टकराते समय गतिज ऊर्जा में बदल जाती है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार, गिरने वाली वस्तु की अधिकतम स्थितिज ऊर्जा पृथ्वी से टकराते समय उसकी अधिकतम गतिज ऊर्जा के बराबर होती है।

 

Question 9. 10 किलोवाट सामर्थ्य वाले एक इंजन द्वारा 80 मीटर की ऊँचाई पर स्थित एक पानी की टंकी जिसकी क्षमता 50 किलोलीटर है, को भरने में लगने वाले समय की गणना कीजिए। पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण 10 मीटर-सेकण्ड-2 है।
Answer: हल :
टंकी को भरने में किया गया कार्य \( = mgh = 50 \times 1000 \times 10 \times 80 \) जूल
सामर्थ्य \( = \frac{\text{कार्य}}{\text{समय}} \)
\( \implies 10 \times 1000 = \frac{50 \times 1000 \times 10 \times 80}{t} \)
\( \implies t = \frac{500000 \times 80}{10 \times 1000} \)
\( = 4000 \) सेकण्ड ।


In simple words: इंजन की शक्ति का उपयोग करके, यह गणना की जा सकती है कि एक निश्चित क्षमता वाली टंकी को एक निश्चित ऊंचाई तक भरने में कितना समय लगेगा, जिसमें पानी का द्रव्यमान और गुरुत्वाकर्षण त्वरण शामिल है।

🎯 Exam Tip: किलोलीटर को किग्रा में बदलना (1 किलोलीटर = 1000 किग्रा) और शक्ति, कार्य तथा समय के बीच संबंध \( (\text{कार्य} = \text{शक्ति} \times \text{समय}) \) का सही ढंग से उपयोग करना सुनिश्चित करें।

 

Question 10. 2 किग्रा द्रव्यमान का एक पिण्ड पृथ्वी से 10000 सेमी की ऊँचाई से गुरुत्वीय त्वरण \( (g) \) के अन्तर्गत स्वतंत्रतापूर्वक नीचे गिरता है। पृथ्वी पर पहुँचने पर इसका वेग तथा कुल ऊर्जा ज्ञात कीजिए। \( (g = 10 \text{ मीटर.से}^{-2}) \)
Answer: हल : द्रव्यमान \( (M) = 2 \) किग्रा
ऊँचाई \( (h) = 10000 \) सेमी \( = 100 \) मी।
यदि पृथ्वी पर पहुँचने पर उसका वेग \( = \upsilon \) मी.से-1 हो तो
\( \upsilon = \sqrt{2gh} = \sqrt{2 \times 10 \times 100} \)
\( = \sqrt{2000} \)
\( = \sqrt{400 \times 5} = 20\sqrt{5} \) मी. से-1
कुल ऊर्जा \( = M.g.h. = 2 \times 10 \times 100 \)
\( = 2000 \) जूल ।


In simple words: जब कोई वस्तु एक निश्चित ऊँचाई से स्वतंत्र रूप से गिरती है, तो पृथ्वी पर पहुँचने पर उसका वेग ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत से ज्ञात किया जा सकता है, जहाँ प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा अंतिम गतिज ऊर्जा में बदल जाती है।

🎯 Exam Tip: स्थितिज ऊर्जा को गतिज ऊर्जा में परिवर्तित करने के सिद्धांत का उपयोग करके पृथ्वी से टकराते समय वेग की गणना करें और कुल ऊर्जा की गणना के लिए \( mgh \) सूत्र का उपयोग करें। सेमी को मीटर में बदलना न भूलें।

 

Question 11. 10 किग्रा की एक ट्रॉली को एक स्प्रिंग से इतना सटाकर रखते हैं कि स्प्रिंग दबी रहे। ट्रॉली को छोड़ने पर स्प्रिंग के धक्के से ट्रॉली 4 मीटर-सेकण्ड-1 के वेग से चलना प्रारम्भ कर देती है। दबी अवस्था में स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा कितनी थी?
Answer: हल :
स्प्रिंग खुलने पर ट्रॉली को गतिज ऊर्जा प्रदान करता है जो उसकी स्थितिज ऊर्जा के बराबर होती है।
ट्रॉली की गतिज ऊर्जा \( = \frac{1}{2} mv^2 \)
\( = \frac{1}{2} \times 10 \text{ किग्रा} \times (4 \text{ मीटर. सेकण्ड}^{-1})^2 \)
\( = 80 \text{ किग्रा मीटर}^2 \text{ . सेकण्ड}^{-2} = 80 \) जूल अतः स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा \( = 80 \) जूल ।


In simple words: स्प्रिंग में संग्रहीत स्थितिज ऊर्जा ट्रॉली को गतिज ऊर्जा प्रदान करती है, इसलिए स्प्रिंग की प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा ट्रॉली की अंतिम गतिज ऊर्जा के बराबर होगी।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत को लागू करें: स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा ट्रॉली की गतिज ऊर्जा में बदल जाती है, इसलिए गतिज ऊर्जा की गणना करके स्प्रिंग की प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा ज्ञात की जा सकती है।

 

Question 12. 1 ग्राम द्रव्यमान को ऊर्जा में बदल देने पर कितनी ऊर्जा प्राप्त होगी?
Answer: हल : ऊर्जा \( E = mc^2 \) से जहाँ \( c = 3 \times 10^8 \text{ मी.से}^{-1} \)
\( E = \frac{1}{1000} \times (3 \times 10^8)^2 \)
\( = 10^{-3} \times 9 \times 10^{16} = 9 \times 10^{13} \) जूल।


In simple words: आइंस्टीन के \( E=mc^2 \) समीकरण का उपयोग करके, द्रव्यमान को सीधे ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है, जिससे एक छोटी मात्रा के द्रव्यमान से भी भारी मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है।

🎯 Exam Tip: द्रव्यमान को किग्रा में बदलें और प्रकाश की चाल \( (c) \) का मान सही ढंग से \( (3 \times 10^8 \text{ m/s}) \) उपयोग करें, फिर \( E=mc^2 \) सूत्र में लगाकर ऊर्जा की गणना करें।

 

Question 13. 18 मीटर ऊँची तथा 10 किलोलीटर क्षमता की पानी की टंकी को आधे घण्टे में भरने के लिए किस सामर्थ्य की मोटर लगानी पड़ेगी?
Answer: हल : मोटर की सामर्थ्य \( = \frac{\text{कार्य}}{\text{समय}} \)
\( = \frac{mgh}{t} \)
\( = \frac{10 \times 1000 \times 10 \times 18}{30 \times 60} \)
\( = 1000 \) वाट \( = 1 \) किलोवाट
अतः 1 किलोवाट सामर्थ्य की मोटर लगानी पड़ेगी।


In simple words: टंकी को एक निश्चित ऊंचाई तक भरने के लिए आवश्यक शक्ति की गणना पानी के द्रव्यमान, गुरुत्वाकर्षण त्वरण, ऊंचाई और भरने में लगने वाले समय का उपयोग करके की जाती है।

🎯 Exam Tip: किलोलीटर को किग्रा में बदलना (1 किलोलीटर = 1000 किग्रा), आधे घंटे को सेकंड में बदलना, और शक्ति के लिए \( P = \frac{mgh}{t} \) सूत्र का उपयोग करना सुनिश्चित करें।

 

Question 14. एक पम्प प्रति सेकण्ड 100 किग्रा जल 5 मीटर की ऊँचाई तक उठाता है। पम्प की सामर्थ्य की गणना कीजिए । \( (g = 10 \text{ मीटर-सेकण्ड}^{-2}) \)
Answer: हल : द्रव्यमान \( = 100 \) किग्रा, विस्थापन \( = 5 \) मी
समय \( = 1 \) सेकण्ड
अतः सामर्थ्य \( = \frac{\text{द्रव्यमान} \times \text{त्वरण} \times \text{विस्थापन}}{\text{समय}} \)
\( = \frac{100 \times 10 \times 5}{1} \)
\( = 5000 \) वाट \( = 5 \) किलोवाट ।


In simple words: पंप की शक्ति की गणना पानी के द्रव्यमान, उसे उठाने की ऊंचाई, गुरुत्वाकर्षण त्वरण और प्रति सेकंड किए गए कार्य की दर का उपयोग करके की जाती है।

🎯 Exam Tip: प्रति सेकंड उठाए गए पानी के द्रव्यमान को ध्यान में रखते हुए, शक्ति के सूत्र \( P = \frac{mgh}{t} \) का उपयोग करें और सभी इकाइयों को S.I. प्रणाली में रखें।

 

Question 15. एक खिलाड़ी पोल वाल्ट के खेल में 5.0 मीटर ऊँचा कूदना चाहता है। यदि ऊपर उठने के लिए आवश्यक ऊर्जा उसकी गति से प्राप्त हो तो उसे किस वेग से दौड़ना चाहिए? \( (g = 10 \text{ मीटर-सेकण्ड}^{-2}) \)
Answer: हल :
खिलाड़ी को इतने वेग से दौड़ना चाहिए कि कूदने से पूर्व उसकी गतिज ऊर्जा उसकी उच्चतम बिन्दु पर स्थितिज ऊर्जा के बराबर हो ।
गतिज ऊर्जा = स्थितिज ऊर्जा
\( \frac{1}{2} m\upsilon^2 = mgh \)


In simple words: पोल वाल्ट में, खिलाड़ी की गतिज ऊर्जा पूरी तरह से कूदने पर स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है, जिससे आवश्यक वेग की गणना ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत से की जा सकती है।

🎯 Exam Tip: गतिज ऊर्जा को स्थितिज ऊर्जा के बराबर करके \( (\frac{1}{2} m\upsilon^2 = mgh) \), आप आवश्यक प्रारंभिक वेग की गणना कर सकते हैं। द्रव्यमान \( m \) समीकरण से रद्द हो जाता है।

 

अथवा \( \upsilon^2 = 2gh = 2 \times 10 \times 5 = 10 \times 10 \)
\( \implies \upsilon = 10 \) मीटर-सेकण्ड-1


In simple words: आवश्यक वेग की गणना के लिए, गतिज ऊर्जा को स्थितिज ऊर्जा के बराबर रखा जाता है, जिससे वस्तु के वेग का वर्ग \( 2gh \) के बराबर आता है।

🎯 Exam Tip: ऊंचाई और गुरुत्वाकर्षण त्वरण के दिए गए मानों का उपयोग करके, सीधे \( \upsilon = \sqrt{2gh} \) सूत्र से वेग की गणना करें।

 

Question 16. 10 किग्रा दव्यमान के एक पत्थर को ऊर्ध्वाधर फेंका जाता है एवं वह पृथ्वी की सतह से 10 मीटर ऊँचाई तक पहुँचती है। फेंके जाते समय उसकी प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा की गणना कीजिए । पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण 10 मीटर-से 1 है ।
Answer: हल : द्रव्यमाने \( m = 5 \) किग्रा पृथ्वी की सतह से ऊँचाई \( h = 10 \) मीटर गुरुत्वीय त्वरण \( g = 10 \) मी. से स्थितिज ऊर्जा \( = mgh = 10 \times 10 \times 10 = 1000 \) जूल यही ऊर्जा प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा थी।


In simple words: जब एक पत्थर को ऊपर फेंका जाता है, तो उसकी प्रारंभिक गतिज ऊर्जा अधिकतम ऊंचाई पर पूरी तरह से स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का उपयोग करके, उच्चतम बिंदु पर स्थितिज ऊर्जा की गणना करें, जो प्रारंभिक गतिज ऊर्जा के बराबर होगी।

 

Question 17. 500 किग्रा द्रव्यमान की मोटर कार की चाल 20 मी. से-1 से बढ़ाकर 40 मी. से-1 करने में इंजन को कितना कार्य करना पड़ेगा? यदि यह कार्य 15 सेकण्ड में हो जाय तो इंजन की क्षमता का मान अश्व-शक्ति में कितना होगा?
Answer: हल : किया गया कार्य = गतिज ऊर्जा में वृद्धि =
अंतिम गतिज ऊर्जा - प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा
\( = \left[ \frac{1}{2} \times 500 \times (40)^2 - \frac{1}{2} \times 500 \times (20)^2 \right] \) किग्रा \( \times \) मी.से-
\( = \frac{1}{2} \times 500 (1600 - 400) \) किग्रा. मी\(^2\).से-2
\( = \frac{1}{2} \times 500 \times 1200 \) जूल
\( = 3,00,000 \) जूल \( = 3 \times 10^5 \) जूल ।
इंजन की क्षमता
\( = \frac{\text{कार्य}}{\text{समय}} = \frac{3 \times 10^5 \text{ जूल}}{15 \text{ सेकण्ड}} \)
\( = 2 \times 10^4 \) वाट \( = \frac{2 \times 10^4}{746} \)
\( = 26.8 \) अश्व शक्ति।


In simple words: इंजन द्वारा किया गया कार्य कार की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है, और इंजन की शक्ति की गणना इस कार्य को करने में लगने वाले समय से की जाती है, जिसे अश्व-शक्ति में व्यक्त किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: गतिज ऊर्जा में परिवर्तन \( (\Delta\text{KE} = \frac{1}{2}m\upsilon_f^2 - \frac{1}{2}m\upsilon_i^2) \) का उपयोग करके किए गए कार्य की गणना करें, फिर अश्व-शक्ति में बदलने के लिए \( 1 \) अश्व-शक्ति \( = 746 \) वाट का उपयोग करें।

 

Question 18. एकं पम्प की सामर्थ्य 5 किलोवाट है। यह 100 मीटर ऊँचाई पर स्थित टंकी में प्रति मिनट कितना जल चढ़ा सकता है? \( (g = 10 \text{ मी-से}^{-2}) \)
Answer: हल :
पम्प की सामर्थ्य \( = 5 \) किलोवाट \( = 5000 \) वाट
माना पम्प W किग्रा पानी टंकी में प्रति मिनट चढ़ा सकता है,
W किग्रा पानी 100 मी ऊपर चढ़ाने में किया गया
कार्य \( = Wgh = W \times 10 \times 100 \)
पम्प की सामर्थ्य के अनुसार प्रति मिनट उसके द्वारा किया गया कार्य \( = 5000 \times 60 \) जूल ।


In simple words: पंप की शक्ति का उपयोग करके, प्रति मिनट उठाए जाने वाले पानी के द्रव्यमान की गणना की जा सकती है, यह मानते हुए कि पंप की शक्ति द्वारा किया गया कार्य पानी की स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि के बराबर है।

🎯 Exam Tip: किलोवाट को वाट में परिवर्तित करें, प्रति मिनट को सेकंड में बदलें, और फिर शक्ति \( (P = \frac{mgh}{t}) \) के सूत्र का उपयोग करके द्रव्यमान \( W \) की गणना करें।

 

\( W \times 10 \times 100 = 5000 \times 60 \)
\( \implies W = \frac{5000 \times 60}{10 \times 100} \)
\( = 300 \) किग्रा ।


In simple words: पानी के द्रव्यमान की गणना पंप की शक्ति, समय और ऊंचाई का उपयोग करके की जाती है, जहाँ किए गए कार्य को शक्ति और समय के गुणनफल से प्राप्त किया जाता है।

🎯 Exam Tip: गणना के दौरान सभी इकाइयों को S.I. प्रणाली में सही ढंग से परिवर्तित करें ताकि परिणाम किग्रा में प्राप्त हो।

 

Question 19. 2 किग्रा द्रव्यमान का पिण्ड 20 मीटर की ऊँचाई से विरामावस्था से भूमि पर गिरने में 20 मीटर-सेकण्ड-1 की चाल से भूमि पर पहुँचता है। गणना द्वारा सिद्ध कीजिए कि यह आँकड़े यान्त्रिक ऊर्जा के संरक्षण की पुष्टि करते हैं। \( (g = 10 \text{ मी.से}^{-2}) \)
Answer: हल :
20 मीटर की ऊँचाई पर पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा \( = mgh = 2 \times 10 \times 20 = 400 \) जूल ।
तथा गतिज ऊर्जा = शून्य अतः कुल ऊर्जा \( = 400 \) जूल \( + 0 \) जूल \( = 400 \) जूल
पृथ्वी तल पर पहुँचने से स्थितिज ऊर्जा = शून्य तथा गतिज ऊर्जा \( = \frac{1}{2} mv^2 \)
\( = \frac{1}{2} \times 2 \times (20)^2 = 400 \) जूल कुल ऊर्जा \( = 0 + 400 \) जूल \( = 400 \) जूल । अतः पिण्ड की जितनी ऊर्जा ऊपर थी उतनी ही पृथ्वी तल पर पहुँचकर है। अतः ये आँकड़े ऊर्जा के संरक्षण की पुष्टि करते हैं।


In simple words: ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार, गिरने से पहले वस्तु की कुल यांत्रिक ऊर्जा (स्थितिज + गतिज) गिरने के बाद पृथ्वी पर पहुँचने पर उसकी कुल यांत्रिक ऊर्जा के बराबर होती है।

🎯 Exam Tip: प्रारंभिक स्थिति (ऊपर) और अंतिम स्थिति (पृथ्वी पर) में कुल यांत्रिक ऊर्जा (स्थितिज ऊर्जा + गतिज ऊर्जा) की गणना करें और तुलना करके ऊर्जा संरक्षण के नियम को सिद्ध करें।

 

Question 20. 4 किग्रा दव्यमान के एक पिण्ड की गतिज ऊर्जा 200 जूल है। पिण्ड का संवेग ज्ञात कीजिए।
Answer: हल : गतिज ऊर्जा \( = \frac{1}{2} mv^2 \)
\( \implies 200 = \frac{1}{2} \times 4 \times \upsilon^2 \)
\( \implies 200 = 2\upsilon^2 \)
\( \implies \upsilon^2 = 100 \)
\( \implies \upsilon = \sqrt{100} = 10 \text{ मी.से}^{-1} \)
संवेग \( = mv = 4 \times 10 \)
\( = 40 \text{ किग्रा} \times \text{ मी.से}^{-1} \)


In simple words: गतिज ऊर्जा के सूत्र का उपयोग करके पहले वस्तु का वेग ज्ञात किया जाता है, फिर उस वेग और द्रव्यमान का उपयोग करके संवेग की गणना की जाती है।

🎯 Exam Tip: गतिज ऊर्जा \( (\text{KE} = \frac{1}{2}mv^2) \) और संवेग \( (p = mv) \) के बीच के संबंध को समझना महत्वपूर्ण है। पहले वेग ज्ञात करें, फिर संवेग।

 

Question 21. एक गेंद को 10 मीटर की ऊँचाई से छोड़ा जाता है। यदि फर्श पर टकराने के बाद गेंद की ऊर्जा में 40% की कमी हो


In simple words: जब गेंद ऊंचाई से गिरती है तो उसकी ऊर्जा में कमी आती है, और इस कमी का उपयोग करके टक्कर के बाद गेंद की नई ऊंचाई का पता लगाया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांतों और ऊर्जा हानि के प्रतिशत का उपयोग करके टक्कर के बाद गेंद की ऊंचाई की गणना करने के लिए प्रारंभिक और अंतिम ऊर्जाओं को सही ढंग से संबंधित करें।

 

जाती है, तो गेंद फर्श से वापस लौटने पर कितनी ऊँचाई तक जायेगी?
Answer: हल : माना m किग्रा द्रव्यमान की गेंद को 10 मी
की ऊँचाई से छोड़ा जाता है।
\( \implies \) गेंद में संचित ऊर्जा \( = mgh \)
\( = m \times 10 \times 10 = 100 m \)
प्रश्नानुसार, 40% की कमी
\( = 100m - \frac{100m \times 40}{100} \)
\( = 100m - 40m = 60m \)
माना टकराने के बाद गेंद h मीटर ऊँचाई तक जाती
है।
\( \implies mgh = 60m \)
\( \implies 10h = 60 \)
\( \implies h = 6 \) मीटर


In simple words: टक्कर के बाद गेंद की ऊर्जा में 40% की कमी का मतलब है कि उसकी प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा का 60% हिस्सा ही बचा है, जिससे यह 6 मीटर की नई ऊंचाई तक पहुँचती है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा हानि के प्रतिशत को ध्यान में रखते हुए, प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा की गणना करें और फिर बची हुई ऊर्जा से गेंद की नई ऊंचाई ज्ञात करें।

 

Question 22. मान लो 50 न्यूटन का एक बल किसी वस्तु में 15 मी. से-1 का औसत वेग उत्पन्न कर देता है। उस बल की सामर्थ्य क्या होगी?
Answer: हल : \( F = 50 \) न्यूटन, \( \upsilon = 15 \) मी/से, \( P = ? \),
\( W = F \times d \) का उपयोग करके \( W = 50 \times 15 = 750 \) जूल
सामर्थ्य \( = \frac{\text{कार्य}}{\text{समय}} \)
\( = \frac{750}{1} \)
\( = 750 \) वाट ।


In simple words: बल द्वारा किए गए कार्य और औसत वेग को देखते हुए, कार्य को समय से विभाजित करके बल की सामर्थ्य (शक्ति) की गणना की जा सकती है, यह मानते हुए कि समय 1 सेकंड है।

🎯 Exam Tip: यदि वेग दिया गया हो, तो कार्य की गणना \( F \times d \) से की जा सकती है (जहाँ \( d = \upsilon \times t \)) और सामर्थ्य \( P = F \times \upsilon \) या \( P = \frac{W}{t} \) का उपयोग करके की जा सकती है।

 

Question 23. क्षैतिज तल से 45° पर झुके घर्षण रहित एक ढाले पर 30 किग्रा-भार का एक पिण्ड ऊपर खींचा जाता है। यदि ढाल की लम्बाई 28 मीटर से, तो पिण्ड को खींचने में उस पर किये गये कार्य की गणना कीजिए । [पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण 10


In simple words: एक झुके हुए तल पर पिंड को खींचने में किया गया कार्य बल, विस्थापन और बल तथा विस्थापन के बीच के कोण के कोसाइन के गुणनफल से ज्ञात किया जाता है।

🎯 Exam Tip: झुके हुए तल पर कार्य की गणना करते समय, बल को \( mg \sin\theta \) के रूप में और विस्थापन को ढाल की लंबाई के रूप में ध्यान में रखें, यदि इसे ऊपर खींचा जा रहा है।

 

मी.से-2 है ।]
Answer: हल : कार्य = ?
कार्य, \( W = F.d.\cos\theta \)
\( W = 300 \times 28 \times \cos 45^\circ \) \( \left[ \cos45^\circ=\frac{1}{\sqrt{2}} \right] \)


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक झुके हुए तल पर एक ब्लॉक को दर्शाता है। एक बल F ब्लॉक को तल के साथ ऊपर खींच रहा है। ढाल का कोण 45° है और विस्थापन B से A तक 28 मीटर है। F गुरुत्वाकर्षण बल \( m \times g \) के बराबर है जो ढाल के अनुदिश घटक के विरुद्ध कार्य कर रहा है।
In simple words: कार्य की गणना के लिए, बल, विस्थापन और बल तथा विस्थापन के बीच के कोण का कोसाइन का गुणनफल किया जाता है।

🎯 Exam Tip: झुके हुए तल पर कार्य की गणना करते समय, यह सुनिश्चित करें कि आप बल के उस घटक का उपयोग करें जो विस्थापन की दिशा में है।

 

\( F = mg = 30 \times 10 = 300 \) न्यूटन
\( W = 300 \times 28 \times \frac{1}{\sqrt{2}} \)
\( W = \frac{8400}{\sqrt{2}} \times \frac{\sqrt{2}}{\sqrt{2}} \)
\( W = 4200 \times \sqrt{2} = 5939.6 \) जूल।


In simple words: बल (पिंड का भार), विस्थापन (ढाल की लंबाई) और कोण \( (45^\circ) \) का उपयोग करके, झुके हुए तल पर पिंड को खींचने में किया गया कार्य \( F.d \cos\theta \) सूत्र से गणना की जाती है।

🎯 Exam Tip: बल के रूप में \( mg \) का उपयोग करें क्योंकि यह ढाल के अनुदिश बल का घटक है, और \( \cos 45^\circ \) का मान \( \frac{1}{\sqrt{2}} \) होता है।

 

Question 24. 100 ग्राम भार को एक पत्थर का टुकड़ा 100 मीटर की ऊँचाई से नीचे गिराया जाता है। इसकी महत्तम गतिज ऊर्जा तथा पृथ्वी से टकराते समय इसके वेग की गणना कीजिए। पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण 10 मी. से-2 है।
Answer: हल : महत्तम गतिज ऊर्जा
= महत्तम स्थितिज ऊर्जा \( = mgh \)
\( = 0.1 \text{ किग्रा.} \times 10 \text{ मी.से}^{-2} \times 100 \) मी
\( = 100 \) जूल ।
माना इसके पृथ्वी पर टकराने समय वेग \( \upsilon \) हो तो
\( \upsilon = \sqrt{2gh} \)
\( = \sqrt{2 \times 10 \times 100} = \sqrt{2000} \)
\( = 10 \times 4.47 \)
\( = 44.7 \) मीटर-सेकण्ड-1


In simple words: जब पत्थर को एक निश्चित ऊंचाई से गिराया जाता है, तो उसकी अधिकतम गतिज ऊर्जा उसकी प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा के बराबर होती है, और पृथ्वी से टकराते समय उसका वेग \( \sqrt{2gh} \) सूत्र से निकाला जा सकता है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का उपयोग करें, जहाँ प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा \( (mgh) \) अधिकतम गतिज ऊर्जा के बराबर होती है, और टकराते समय वेग की गणना के लिए \( \upsilon = \sqrt{2gh} \) सूत्र का उपयोग करें। ग्राम को किग्रा में बदलना न भूलें।

 

Question 25. एक व्यक्ति किसी भवन की पाँचवीं मंजिल पर चढ़ने में 5000 जूल कार्य करता है और 5 मिनट का समय लेता है। उसके सामर्थ्य की गणना कीजिए ।
Answer: हल : कार्य \( = 5000 \) जूल
समय \( = 5 \) मिनट \( = 5 \times 60 \)
\( = 300 \) सेकण्ड ।
सामर्थ्य \( = \frac{\text{कार्य}}{\text{समय}} \)
\( = \frac{5000}{300} = \frac{50}{3} \)
\( = 16\frac{2}{3} \) वाट।


In simple words: व्यक्ति की सामर्थ्य, उसके द्वारा किए गए कुल कार्य को उस कार्य को करने में लगे कुल समय से विभाजित करके ज्ञात की जाती है।

🎯 Exam Tip: मिनटों को सेकंड में परिवर्तित करें और सामर्थ्य \( P = \frac{W}{t} \) सूत्र का सही ढंग से उपयोग करें।

 

Question 26. क्षैतिज तल से 30° पर झुकी घर्षण रहित एक ढाल पर 50 किग्रा-भार का एक पिण्ड ऊपर खींचा जाता है। यदि ढाल की लम्बाई 20 मीटर हो, तो इसमें किये गये कार्य की गणना कीजिए। पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण 10 मीटर-सेकण्ड है।
Answer: हल : प्रश्न 23 की तरह हल करें । [ उत्तर - 5000 जूल]


In simple words: झुके हुए तल पर पिंड को खींचने में किया गया कार्य बल, विस्थापन और बल तथा विस्थापन के बीच के कोण के कोसाइन के गुणनफल से ज्ञात किया जाता है, जैसा कि प्रश्न 23 में समझाया गया है।

🎯 Exam Tip: ढाल पर किए गए कार्य की गणना के लिए \( W = (mg \sin\theta) \times d \) सूत्र का उपयोग करें, जहाँ \( \theta \) ढाल का कोण है।

 

Question 27. 5 ग्राम द्रव्यमान को ऊर्जा में बदल देने पर कितनी ऊर्जा प्राप्त होगी? (प्रकाश की चाल \( c = 3 \times 10^8 \) मी.से)
Answer: हल : \( m = 5 \) ग्राम \( = 0.005 \) किग्रा
\( c = 3 \times 10^8 \) मी. से-1
अतः \( E = mc^2 \) से
\( = 0.005 \times (3 \times 10^8)^2 \)
\( = 5 \times 10^{-3} \times 9 \times 10^{16} \)
\( = 4.5 \times 10^{14} \) जूल


In simple words: आइंस्टीन के \( E=mc^2 \) समीकरण का उपयोग करके, एक छोटे द्रव्यमान को भी ऊर्जा में बदलने पर बहुत अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

🎯 Exam Tip: ग्राम को किग्रा में परिवर्तित करें और \( c \) के मान का सही ढंग से उपयोग करके \( E=mc^2 \) सूत्र में गणना करें।

 

Question 28. एक साइकिल सवार पर 100 न्यूटन घर्षण बल कार्य करता है। वह 2 मी-से-1 की चाल से जा रहा है तो उसकी सामर्थ्य बताइए ।
Answer: हल :
सामर्थ्य \( = \frac{\text{कार्य}}{\text{समय}} \)
\( = \frac{100 \times 2}{1} \)
\( = 200 \) वाट ।


In simple words: साइकिल सवार की सामर्थ्य घर्षण बल और उसकी चाल के गुणनफल के बराबर होती है, क्योंकि सामर्थ्य कार्य करने की दर है।

🎯 Exam Tip: सामर्थ्य की गणना के लिए \( P = F \times \upsilon \) सूत्र का उपयोग करें, जहाँ \( F \) बल है और \( \upsilon \) वेग है।

 

Question 29. किसी पिण्ड पर 3 न्यूटन व 4 न्यूटन के दो बल एक साथ कार्यरत हैं। यदि इनका परिणामी बल 5 न्यूटन हो तो दोनों बल एक-दूसरे से कितने कोण पर झुके होंगे?
Answer: हल : माना कि दोनों बल एक-दूसरे से \( 0^\circ \) के कोण पर झुके होंगे।
अतः सूत्र \( R = \sqrt{P^2 + Q^2 + 2PQ\cos\theta} \) से
\( 5 = \sqrt{4^2+3^2+2\times4\times3\cos\theta} \)
\( \implies 25 = 16 + 9 + 24 \cos\theta \)
\( \implies 25 = 25 + 24 \cos\theta \)
\( \implies 24 \cos\theta = 0 \)
\( \implies \cos\theta = 0 \)
\( \implies \theta = 90^\circ \)


In simple words: दो बलों का परिणामी बल ज्ञात करने के लिए सदिश योग का नियम लागू किया जाता है, जिसमें परिणामी बल, दो बल और उनके बीच के कोण का उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: बलों के परिणामी सूत्र \( R = \sqrt{P^2 + Q^2 + 2PQ\cos\theta} \) का उपयोग करें और \( \cos\theta \) का मान ज्ञात करके कोण निकालें।

 

Question 30. एक मशीन की औसत सामर्थ्य 2 किलोवाट है। इसके द्वारा 10 मिनट में किये गये कार्य की गणना कीजिए।
Answer: हल : सामर्थ्य \( = \frac{\text{कार्य}}{\text{समय}} \)
\( \implies \) कार्य \( = \) सामर्थ्य \( \times \) समय
\( = 2 \times 1000 \times 10 \times 60 \) जूल
\( = 12,00,000 \) जूल
\( = 12 \times 10^5 \) जूल।


In simple words: मशीन द्वारा किया गया कार्य उसकी सामर्थ्य और कार्य करने में लगे समय के गुणनफल के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: किलोवाट को वाट में और मिनटों को सेकंड में परिवर्तित करें, फिर कार्य \( (\text{कार्य} = \text{सामर्थ्य} \times \text{समय}) \) की गणना करें।

 

Question 31. 15 ग्राम द्रव्यमान की एक गोली 100 मीटर-सेकण्ड के वेग से लक्ष्य को बेधती है। लक्ष्य बेधन के बाद उसका वेग 40


In simple words: गोली की ऊर्जा में ह्रास का मतलब है कि लक्ष्य को भेदने के बाद उसकी प्रारंभिक गतिज ऊर्जा में कितनी कमी आई है।

🎯 Exam Tip: गतिज ऊर्जा में ह्रास की गणना करने के लिए, प्रारंभिक गतिज ऊर्जा से अंतिम गतिज ऊर्जा को घटाएं, और द्रव्यमान को किग्रा में बदलना न भूलें।

 

मीटर-सेकण्ड रह जाता है। गणना करके बताइए कि गोली की ऊर्जा में कितना ह्रास हुआ?
Answer: हल : गोली की ऊर्जा में ह्रास
\( = \) प्रारम्भिक ऊर्जा – अन्तिम ऊर्जा
\( = \frac{1}{2} m\upsilon_1^2 - \frac{1}{2} m\upsilon_2^2 \)
\( = \frac{1}{2} m(\upsilon_1^2 - \upsilon_2^2) \)
\( = \frac{1}{2} \times \frac{15}{1000} (100^2 - 40^2) \)
\( = \frac{15}{2 \times 1000} (10000 - 1600) \)
\( = \frac{15}{2 \times 1000} \times 8400 \) जूल
\( = 63 \) जूल ।


In simple words: गोली की ऊर्जा में कमी उसकी प्रारंभिक गतिज ऊर्जा और लक्ष्य भेदने के बाद की अंतिम गतिज ऊर्जा के बीच का अंतर है।

🎯 Exam Tip: द्रव्यमान को किग्रा में परिवर्तित करें और गतिज ऊर्जा के सूत्र \( (\frac{1}{2}mv^2) \) का उपयोग करके प्रारंभिक और अंतिम गतिज ऊर्जाओं की गणना करें, फिर अंतर ज्ञात करें।

 

Question 32. एक 100 किलोवाट सामर्थ्य वाले इंजन द्वारा 500 किलोग्राम के दव्यमान को 50 मीटर की ऊँचाई तक उठाया जाता है। इसमें लगे समय का परिकलन कीजिए। (गुरुत्वीय त्वरण \( g = 10 \text{ मी.से}^{-2}) \)
Answer: हल : समय \( = \frac{\text{कार्य}}{\text{सामर्थ्य}} \)
\( = \frac{500 \times 10 \times 50}{100 \times 1000} \) सेकण्ड
\( = \frac{25}{10} \) सेकण्ड \( = 2.5 \) सेकण्ड ।


In simple words: इंजन की सामर्थ्य और किए गए कार्य (जो द्रव्यमान, गुरुत्वाकर्षण त्वरण और ऊंचाई पर निर्भर करता है) का उपयोग करके किसी वस्तु को उठाने में लगने वाले समय की गणना की जा सकती है।

🎯 Exam Tip: किलोवाट को वाट में बदलें और कार्य \( (mgh) \) तथा सामर्थ्य \( (P) \) के सूत्र \( (t = \frac{W}{P}) \) का उपयोग करके समय की गणना करें।

 

Question 33. एक 100 किलोवाट सामर्थ्य वाले इंजन द्वारा 1000 किलोग्राम भार के द्रव्यमान को 20 मीटर की ऊँचाई तक उठाने में लगने वाले समय की गणना कीजिए। (गुरुत्वीय त्वरण \( g = 10 \text{ मी.से}^{-2}) \)
Answer: हल :
सामर्थ्य \( = \frac{\text{कार्य}}{\text{समय}} \)
\( \implies \) समय \( (t) = \frac{1000 \times 10 \times 20}{100 \times 1000} \)
\( = 2 \) सेकण्ड ।


In simple words: इंजन की शक्ति का उपयोग करके, एक निश्चित द्रव्यमान को एक निश्चित ऊंचाई तक उठाने में लगने वाले समय की गणना की जाती है, जो कि किए गए कार्य और शक्ति के अनुपात से प्राप्त होता है।

🎯 Exam Tip: किलोवाट को वाट में परिवर्तित करें और कार्य \( (mgh) \) तथा सामर्थ्य \( (P) \) के सूत्र \( (t = \frac{mgh}{P}) \) का उपयोग करके समय की गणना करें।

 

Question 34. 1 किग्रा द्रव्यमान का एक पिण्ड पृथ्वी तल जूल से 20 मीटर की ऊँचाई पर विरामावस्था में स्थित है तथा स्वतन्त्रतापूर्वक गिरने पर 20 मीटर-सेकण्ड-1 की चाल से पृथ्वी पर पहुँचता है। गुरुत्वीय त्वरण \( g = 9.8 \) मीटर-सेकण्ड-है। गणना द्वारी सिद्ध कीजिए कि ये आँकड़े यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण की पुष्टि करते हैं।
Answer: हल :
प्रारम्भ में पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा \( = mgh = 1 \times 10 \times 20 \) जूल \( = 200 \) जूल
पिण्ड विरामावस्था में है।
पिण्ड की गतिज ऊर्जा \( = 0 \)
प्रारम्भ में पिण्ड की कुल ऊर्जा \( = 200 + 0 \) जूल \( = 200 \) जूल ...(i)
पृथ्वी पर पहुँचने पर पिण्ड की पृथ्वी तेल से ऊँचाई 0 होगी ।
पृथ्वी तल पर पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा \( = 0 \)
पृथ्वी तल पर पिण्ड की गतिज ऊर्जा \( = \frac{1}{2} mv^2 \)
\( = \frac{1}{2} \times 1 \times 20 \times 20 \) जूल \( = 200 \) जूल पृथ्वी तल पर पिण्ड की कुल ऊर्जा \( = (0 + 200) \) जूल \( = 200 \) जूल ... (ii)
समीकरण (i) व (ii) से स्पष्ट है कि दिये गये आँकड़े यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण की पुष्टि करते हैं।


In simple words: ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार, जब एक वस्तु स्वतंत्र रूप से गिरती है, तो उसकी प्रारंभिक कुल यांत्रिक ऊर्जा (स्थितिज + गतिज) और अंतिम कुल यांत्रिक ऊर्जा बराबर रहती है, यह दर्शाता है कि ऊर्जा संरक्षित है।

🎯 Exam Tip: प्रारंभिक और अंतिम दोनों स्थितियों में स्थितिज और गतिज ऊर्जा की गणना करें और उनकी योगफल की तुलना करके ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत को सिद्ध करें।

 

अभ्यास प्रश्न

 

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

निर्देश : प्रत्येक प्रश्न में दिये गये वैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर चुनिए-
Question 1. कार्य का S.I. मात्रक होता है
(a) जूले या न्यूटन मीटर
(b) न्यूटन
(c) वाट या जूल सेकण्ड
(d) किलोवाट


In simple words: कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं और इसका मानक अंतरराष्ट्रीय मात्रक जूल होता है, जिसे न्यूटन-मीटर भी कहा जाता है।

🎯 Exam Tip: कार्य के S.I. मात्रक को याद रखें जो जूल या न्यूटन-मीटर है।

 

Question 2. निम्न में से कौन-सी राशि अदिश है?
(a) आवेग
(b) संवेग
(c) आवेश
(d) बल


In simple words: आवेश एक अदिश राशि है, जिसका अर्थ है कि इसमें केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं।

🎯 Exam Tip: अदिश और सदिश राशियों के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, जिसमें दिशा की आवश्यकता होती है या नहीं।

 

Question 3. सामर्थ्य का S.I. मात्रक होता है
(a) वाट या जूल सेकण्ड-1
(b) न्यूटन मीटर या जूल-सेकण्ड-1
(c) किलोवाट-घण्टा
(d) जूल


In simple words: सामर्थ्य कार्य करने की दर है, जिसका मानक अंतरराष्ट्रीय मात्रक वाट होता है, जिसे जूल प्रति सेकंड \( (\text{जूल सेकण्ड}^{-1}) \) भी कहते हैं।

🎯 Exam Tip: सामर्थ्य के S.I. मात्रक को याद रखें जो वाट या जूल सेकण्ड-1 है।

 

Question 4. किसी वस्तु के कार्य करने की क्षमता कहलाती है
(a) सामर्थ्य
(b) ऊर्जा
(c) अश्व शक्ति
(d) बल


In simple words: किसी वस्तु के कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा की परिभाषा को याद रखें।

 

Question 5. \( \frac{1}{2} mv^2 \) सूत्र है-
(a) गतिज ऊर्जा का
(b) स्थितिज ऊर्जा का
(c) सामर्थ्य का
(d) नाभिकीय ऊर्जा का


In simple words: यह सूत्र किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा को दर्शाता है, जो उसके द्रव्यमान और वेग के वर्ग के गुणनफल के आधे के बराबर होती है।

🎯 Exam Tip: गतिज ऊर्जा के सूत्र को याद रखें और इसे सही ढंग से पहचानें।

 

Question 6. घड़ी को चाबी देने में संग्रह करते हैं
(a) स्थितिज ऊर्जा
(b) गतिज ऊर्जा
(c) गुरुत्वीय त्वरण
(d) सामर्थ्य


In simple words: घड़ी को चाबी देने पर उसकी स्प्रिंग में स्थितिज ऊर्जा संचित होती है, जो बाद में घड़ी को चलाने का कार्य करती है।

🎯 Exam Tip: चाबी वाली घड़ी में ऊर्जा के भंडारण के रूप को समझें।

 

Question 7. एक वस्तु पृथ्वी की ओर गिर रही है उसकी स्थितिज ऊर्जा
(a) बढ़ेगी
(c) घटेगी
(c) वही रहेगी।
(d) इनमें से कोई नहीं


In simple words: जब कोई वस्तु पृथ्वी की ओर गिरती है, तो उसकी ऊँचाई कम होने के कारण उसकी स्थितिज ऊर्जा घटती जाती है।

🎯 Exam Tip: स्थितिज ऊर्जा और ऊँचाई के बीच के संबंध को याद रखें।

 

Question 8. अपने सिर पर ईंट रखकर एक मजदूर क्षैतिज सड़क (horizontal road) पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने में
(a) अधिकतम कार्य करता है।
(b) कोई कार्य नहीं करता है।
(c) ऋणात्मक कार्य करता है।
(d) न्यूनतम कार्य करता है।


In simple words: मजदूर द्वारा ईंट पर गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध कोई कार्य नहीं होता क्योंकि बल (नीचे की ओर) और विस्थापन (क्षैतिज) के बीच 90° का कोण होता है।

🎯 Exam Tip: कार्य की परिभाषा \( W = Fd \cos\theta \) को समझें, जहाँ यदि \( \theta = 90^\circ \) हो तो कार्य शून्य होता है।

 

Question 9. ऊर्जा कैसी राशि है?
(a) सदिश
(b) अदिश
(c) दोनों प्रकार की
(d) इनमें से कोई नहीं


In simple words: ऊर्जा एक अदिश राशि है, जिसका अर्थ है कि इसमें केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा की प्रकृति (अदिश या सदिश) को याद रखें।

 

Question 10. किसी पिण्ड का द्रव्यमान दुगुना तथा वेग आधा करने पर उसकी गतिज ऊर्जा हो जायेगी
(a) आधी
(b) चौथाई
(c) दुगुनी
(d) अपरिवर्तित


In simple words: यदि किसी पिंड का द्रव्यमान दोगुना कर दिया जाए और वेग आधा कर दिया जाए, तो उसकी गतिज ऊर्जा अपरिवर्तित रहेगी क्योंकि वेग के वर्ग का प्रभाव द्रव्यमान के दोगुना होने के प्रभाव को संतुलित कर देता है।

🎯 Exam Tip: गतिज ऊर्जा के सूत्र \( (\frac{1}{2}mv^2) \) में परिवर्तन करके गणना करें। द्रव्यमान \( (2m) \) और वेग \( (\frac{v}{2}) \) रखने पर \( \frac{1}{2}(2m)(\frac{v}{2})^2 = \frac{1}{2}(2m)\frac{v^2}{4} = \frac{1}{4}mv^2 \) होगा, जो प्रारंभिक गतिज ऊर्जा का आधा है। *Correction*: "अपरिवर्तित" is incorrect, it should be "आधी". Let's double check. Initial KE = \( \frac{1}{2}mv^2 \) New mass = \( 2m \) New velocity = \( \frac{v}{2} \) New KE = \( \frac{1}{2}(2m)(\frac{v}{2})^2 = \frac{1}{2}(2m)\frac{v^2}{4} = \frac{1}{4}mv^2 \). So, New KE = \( \frac{1}{2} \) of Initial KE. Hence, it will become आधी (half). So, option (a) is correct. The provided answer on page 45 for Q10 is (a). My analysis matches. So the provided "अपरिवर्तित" is not part of my answer generation. It's just my calculation. The user content is what I will output. So `(a) आधी` is correct.

 

Question 11. गतिज ऊर्जा को मात्रक होता है
(a) जूल
(b) वाट
(c) किलोवाट
(d) न्यूटन


In simple words: गतिज ऊर्जा, किसी वस्तु की गति के कारण उसमें निहित ऊर्जा होती है, जिसका मानक अंतरराष्ट्रीय मात्रक जूल है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा (किसी भी प्रकार की) का S.I. मात्रक जूल है।

बहुविकल्पीय प्रश्न

निर्देश : प्रत्येक प्रश्न में दिये गये वैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर चुनिए-

 

Question 1. कार्य का S.I. मात्रक होता है
(a) जूले या न्यूटन-मीटर
(b) न्यूटन
(c) वाट या जूल सेकण्ड
(d) किलोवाट
Answer: (a) जूले या न्यूटन-मीटर
In simple words: कार्य का SI मात्रक जूल होता है, जिसे न्यूटन-मीटर भी कहा जाता है क्योंकि कार्य बल (न्यूटन) और विस्थापन (मीटर) का गुणनफल होता है।
In simple words: The SI unit of work is Joule, also known as Newton-meter, because work is the product of force (Newton) and displacement (meter).

🎯 Exam Tip: SI मात्रक पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए सभी मौलिक और व्युत्पन्न राशियों के मात्रक याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. निम्न में से कौन-सी राशि अदिश है?
(a) आवेग
(b) संवेग
(c) आवेश
(d) बल
Answer: (c) आवेश
In simple words: आवेश (चार्ज) एक अदिश राशि है, जिसका केवल परिमाण होता है और कोई दिशा नहीं होती, जबकि आवेग, संवेग और बल सदिश राशियाँ हैं।
In simple words: Charge is a scalar quantity, possessing only magnitude without direction, whereas impulse, momentum, and force are vector quantities.

🎯 Exam Tip: अदिश और सदिश राशियों के बीच अंतर को समझना भौतिकी में मूलभूत है और गणनाओं के लिए सही ढंग से उन्हें पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. सामर्थ्य का S.I. मात्रक होता है
(a) वाट या जूल सेकण्ड-1
(b) न्यूटन मीटर या जूल-सेकण्ड-1
(c) किलोवाट-घण्टा
(d) जूल
Answer: (a) वाट या जूल सेकण्ड-1
In simple words: सामर्थ्य की SI इकाई वाट है, जो प्रति सेकंड किए गए कार्य (जूल प्रति सेकंड) के बराबर होती है।
In simple words: The SI unit of power is Watt, which is equivalent to Joule per second, representing the rate at which work is done.

🎯 Exam Tip: मात्रकों को याद रखने के लिए उनकी परिभाषाओं को समझना और उन्हें अन्य संबंधित भौतिक राशियों से जोड़ना सहायक होता है।

 

Question 4. किसी वस्तु के कार्य करने की क्षमता कहलाती है
(a) सामर्थ्य
(b) ऊर्जा
(c) अश्व शक्ति
(d) बल
Answer: (b) ऊर्जा
In simple words: किसी वस्तु के कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं।
In simple words: The capacity of an object to do work is called energy.

🎯 Exam Tip: ऊर्जा की परिभाषा बहुत ही सीधी है और अक्सर परीक्षा में पूछी जाती है। इसे स्पष्ट रूप से समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. mv² सूत्र है-
(a) गतिज ऊर्जा का
(b) स्थितिज ऊर्जा का
(c) सामर्थ्य का
(d) नाभिकीय ऊर्जा का
Answer: (a) गतिज ऊर्जा का
In simple words: \( \frac{1}{2}mv^2 \) गतिज ऊर्जा का सूत्र है, जो किसी गतिमान वस्तु की गति के कारण उसमें निहित ऊर्जा को दर्शाता है।
In simple words: \( \frac{1}{2}mv^2 \) is the formula for kinetic energy, representing the energy possessed by an object due to its motion.

🎯 Exam Tip: गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा के सूत्रों को ठीक से याद रखना और उन्हें समस्याओं को हल करने में लागू करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. घड़ी को चाबी देने में संग्रह करते हैं
(a) स्थितिज ऊर्जा
(b) गतिज ऊर्जा
(c) गुरुत्वीय त्वरण
(d) सामर्थ्य
Answer: (a) स्थितिज ऊर्जा
In simple words: घड़ी को चाबी देने पर, उसकी स्प्रिंग में प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा जमा होती है, जिसे बाद में घड़ी के पुर्जों को चलाने के लिए गतिज ऊर्जा में बदला जाता है।
In simple words: When a watch is wound, elastic potential energy is stored in its spring, which is later converted into kinetic energy to power the watch's mechanisms.

🎯 Exam Tip: ऊर्जा के विभिन्न रूपों और उनके रूपांतरणों को समझना भौतिकी के महत्वपूर्ण अवधारणाओं में से एक है।

 

Question 7. एक वस्तु पृथ्वी की ओर गिर रही है उसकी स्थितिज ऊर्जा
(a) बढ़ेगी
(b) घटेगी
(c) वही रहेगी।
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) घटेगी
In simple words: जब कोई वस्तु पृथ्वी की ओर गिरती है, तो उसकी ऊँचाई कम होती जाती है, जिसके परिणामस्वरूप उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा घटती है।
In simple words: As an object falls towards the Earth, its height decreases, leading to a reduction in its gravitational potential energy.

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत को याद रखें: जब स्थितिज ऊर्जा घटती है, तो गतिज ऊर्जा बढ़ती है, कुल यांत्रिक ऊर्जा स्थिर रहती है (यदि कोई घर्षण न हो)।

 

Question 8. अपने सिर पर ईंट रखकर एक मजदूर क्षैतिज सड़क (horizontal road) पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने में
(a) अधिकतम कार्य करता है।
(b) कोई कार्य नहीं करता है।
(c) ऋणात्मक कार्य करता है।
(d) न्यूनतम कार्य करता है।
Answer: (b) कोई कार्य नहीं करता है।
In simple words: जब कोई मजदूर ईंट को सिर पर रखकर क्षैतिज रूप से चलता है, तो गुरुत्वाकर्षण बल (नीचे की ओर) और विस्थापन (क्षैतिज) एक-दूसरे के लंबवत होते हैं, इसलिए गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध कोई कार्य नहीं होता है।
In simple words: When a laborer carries a brick on their head and walks horizontally, the gravitational force (downward) and displacement (horizontal) are perpendicular to each other, resulting in no work done against gravity.

🎯 Exam Tip: कार्य की परिभाषा (Work = Force × Displacement × cosθ) को याद रखना महत्वपूर्ण है, जहाँ बल और विस्थापन के बीच का कोण 90° होने पर कार्य शून्य होता है।

 

Question 9. ऊर्जा कैसी राशि है?
(a) सदिश
(b) अदिश
(c) दोनों प्रकार की
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) अदिश
In simple words: ऊर्जा एक अदिश राशि है, जिसका केवल परिमाण होता है और कोई दिशा नहीं होती।
In simple words: Energy is a scalar quantity, possessing only magnitude and no direction.

🎯 Exam Tip: ऊर्जा की अदिश प्रकृति को समझना भौतिकी के मूलभूत सिद्धांतों में से एक है, जो ऊर्जा संरक्षण के नियमों को समझने में मदद करता है।

 

Question 10. किसी पिण्ड का द्रव्यमान दुगुना तथा वेग आधा करने पर उसकी गतिज ऊर्जा हो जायेगी
(a) आधी
(b) चौथाई
(c) दुगुनी
(d) अपरिवर्तित
Answer: (a) आधी
In simple words: यदि द्रव्यमान को दुगुना और वेग को आधा किया जाए, तो गतिज ऊर्जा \( (\frac{1}{2} \times 2m \times (\frac{v}{2})^2 = \frac{1}{2} \times 2m \times \frac{v^2}{4} = \frac{1}{4}mv^2) \) मूल गतिज ऊर्जा \( (\frac{1}{2}mv^2) \) की आधी हो जाएगी।
In simple words: If the mass is doubled and the velocity is halved, the kinetic energy \( (\frac{1}{2} \times 2m \times (\frac{v}{2})^2 = \frac{1}{2} \times 2m \times \frac{v^2}{4} = \frac{1}{4}mv^2) \) will become half of the original kinetic energy \( (\frac{1}{2}mv^2) \).

🎯 Exam Tip: गतिज ऊर्जा का सूत्र \( (\frac{1}{2}mv^2) \) याद रखना और द्रव्यमान और वेग में परिवर्तनों के प्रभाव को समझना संख्यात्मक प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 11. गतिज ऊर्जा को मात्रक होता है
(a) जूल
(b) वाट
(c) किलोवाट
(d) न्यूटन
Answer: (a) जूल
In simple words: गतिज ऊर्जा का SI मात्रक जूल है, क्योंकि यह कार्य करने की क्षमता है और कार्य का मात्रक भी जूल होता है।
In simple words: The SI unit for kinetic energy is Joule, as it represents the capacity to do work, and the unit for work is also Joule.

🎯 Exam Tip: ऊर्जा के सभी रूपों, चाहे वह गतिज, स्थितिज या कोई अन्य हो, का SI मात्रक जूल ही होता है।

 

Question 12. यदि कोई पिण्ड पृथ्वी से ठीक ऊपर की ओर फेंका जाय तो ऊपर की ओर जाते हुए उसकी सम्पूर्ण ऊर्जा
(a) बढ़ेगी
(b) कम होती जाती है।
(c) नियत रहती है ।
(d) कभी कम होगी कभी बढ़ेगी
Answer: (c) नियत रहती है ।
In simple words: जब कोई पिण्ड ऊपर फेंका जाता है, तो उसकी गतिज ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है, लेकिन वायु प्रतिरोध की उपेक्षा करने पर उसकी कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) हमेशा नियत रहती है।
In simple words: When an object is thrown upwards, its kinetic energy converts into potential energy, but assuming negligible air resistance, its total mechanical energy (kinetic + potential) remains constant.

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण का नियम भौतिकी का एक मूलभूत सिद्धांत है। यह समझना कि कुल ऊर्जा कैसे स्थिर रहती है, विभिन्न परिदृश्यों में सहायक है।

 

Question 13. सामर्थ्य किस प्रकार की भौतिक राशि है
(a) सदिश
(b) अदिश
(c) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) अदिश
In simple words: सामर्थ्य एक अदिश राशि है क्योंकि यह कार्य करने की दर को बताती है, जिसका केवल परिमाण होता है, कोई दिशा नहीं होती।
In simple words: Power is a scalar quantity because it describes the rate of doing work, having only magnitude and no direction.

🎯 Exam Tip: अदिश और सदिश राशियों को पहचानने में माहिर होना भौतिकी में गणनाओं और अवधारणाओं को समझने के लिए आवश्यक है।

 

Question 14. एक पिण्ड का वेग उसके प्रारंभिक वेग का तीन गुना करने पर उसकी गतिज ऊर्जा हो जायगी
(a) तीन गुनी
(b) दोगुनी
(c) अपरिवर्तित
(d) नौगुनी
Answer: (d) नौगुनी
In simple words: गतिज ऊर्जा वेग के वर्ग के समानुपाती होती है, इसलिए वेग को तीन गुना करने पर गतिज ऊर्जा \( (3^2 = 9) \) नौ गुना बढ़ जाएगी।
In simple words: Kinetic energy is proportional to the square of velocity, so tripling the velocity will increase the kinetic energy ninefold \( (3^2 = 9) \).

🎯 Exam Tip: गतिज ऊर्जा \( (\frac{1}{2}mv^2) \) के सूत्र में वेग की निर्भरता को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वेग में छोटे परिवर्तन भी ऊर्जा में बड़े बदलाव लाते हैं।

 

Question 15. किसी पिण्ड को बल लगाकर विस्थापित किया जाता है। कुल कार्य न्यूनतम होगा जबकि तल व विस्थापन के बीच कोण
(a) 0°
(b) 30°
(c) 60°
(d) 90°
Answer: (d) 90°
In simple words: कार्य न्यूनतम (शून्य) होता है जब बल और विस्थापन के बीच का कोण 90° होता है, क्योंकि इस स्थिति में बल का विस्थापन की दिशा में कोई घटक नहीं होता।
In simple words: Work is minimal (zero) when the angle between force and displacement is 90°, as there is no component of force in the direction of displacement in this case.

🎯 Exam Tip: कार्य के सूत्र W = Fd cosθ को याद रखें; जब cosθ = 0 (यानी θ = 90°), तो किया गया कार्य शून्य होता है।

 

Question 16. मात्रक जूले के स्थान पर लिख सकते हैं।
(a) वाट
(b) न्यूटन-मीटर
(c) किलोवाट
(d) न्यूटन
Answer: (b) न्यूटन-मीटर
In simple words: जूल कार्य का SI मात्रक है, और चूंकि कार्य बल (न्यूटन) और विस्थापन (मीटर) का गुणनफल है, इसे न्यूटन-मीटर के रूप में भी व्यक्त किया जा सकता है।
In simple words: Joule is the SI unit of work, and since work is the product of force (Newton) and displacement (meter), it can also be expressed as Newton-meter.

🎯 Exam Tip: विभिन्न भौतिक राशियों के समतुल्य मात्रकों को समझना मात्रक रूपांतरण और अवधारणात्मक प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 17. वाट-सेकण्ड मात्रक है।
(a) बल का
(b) ऊर्जा का
(c) सामर्थ्य का
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (b) ऊर्जा का
In simple words: वाट-सेकण्ड ऊर्जा का मात्रक है, क्योंकि सामर्थ्य (वाट) कार्य प्रति इकाई समय है, इसलिए सामर्थ्य को समय (सेकण्ड) से गुणा करने पर कार्य या ऊर्जा (जूल) प्राप्त होता है।
In simple words: Watt-second is a unit of energy, because power (Watt) is work per unit time, so multiplying power by time (second) gives work or energy (Joule).

🎯 Exam Tip: यह याद रखें कि 1 वाट-सेकण्ड 1 जूल के बराबर होता है, जो ऊर्जा का एक मौलिक मात्रक है।

 

Question 18. निम्नलिखित में कौन-सा कार्य का मात्रक नहीं है
(a) जूल
(b) न्यूटन-मीटर
(c) वाट
(d) किलोवाट-घंटा
Answer: (c) वाट
In simple words: वाट सामर्थ्य का मात्रक है, जबकि जूल, न्यूटन-मीटर और किलोवाट-घंटा सभी कार्य या ऊर्जा के मात्रक हैं।
In simple words: Watt is the unit of power, while Joule, Newton-meter, and kilowatt-hour are all units of work or energy.

🎯 Exam Tip: विभिन्न भौतिक राशियों के मात्रकों को ध्यान से अलग करना महत्वपूर्ण है ताकि भ्रम से बचा जा सके, विशेषकर कार्य, ऊर्जा और सामर्थ्य के बीच।

 

Question 19. 2 किग्रा द्रव्यमान का पिण्ड कुछ बल लगाकर ऊपर की ओर ऊर्ध्वाधरतः फेंका जाता है तथा 5 मीटर की ऊँचाई तक जाकर पृथ्वी पर वापस आ जाता है। इस सम्पूर्ण क्रिया में पिण्ड पर किया । गया सम्पूर्ण कार्य होगा- (g = 10 मी.से-2)
(a) 100 जूल
(b) 200 जूल
(c) 10 जूल
(d) शून्य
Answer: (d) शून्य
In simple words: यदि कोई पिण्ड उसी प्रारंभिक स्थान पर वापस लौट आता है जहाँ से उसे फेंका गया था, तो कुल विस्थापन शून्य होता है, और इसलिए बल द्वारा किया गया शुद्ध कार्य भी शून्य होता है।
In simple words: If an object returns to its initial starting point after being thrown, the net displacement is zero, and consequently, the net work done by the force is also zero.

🎯 Exam Tip: कार्य की गणना करते समय विस्थापन की प्रारंभिक और अंतिम स्थिति पर ध्यान दें। यदि प्रारंभिक और अंतिम बिंदु समान हैं, तो किया गया शुद्ध कार्य शून्य होगा।

 

Question 20. एक मशीन 200 जूल कार्य 8 सेकण्ड में करती है। मशीन की सामर्थ्य होगी
(a) 25 वाट
(b) 25 जूल.
(c) 1600 जूल-से
(d) 25 जूल-से
Answer: (a) 25 वाट
In simple words: सामर्थ्य कार्य करने की दर है, इसलिए 200 जूल को 8 सेकण्ड से विभाजित करने पर 25 वाट की सामर्थ्य प्राप्त होती है।
In simple words: Power is the rate of doing work, so dividing 200 Joules by 8 seconds yields a power of 25 Watts.

🎯 Exam Tip: सामर्थ्य के सूत्र P = W/t को याद रखें और इसे सही मात्रकों (वाट = जूल/सेकण्ड) में लागू करना सीखें।

 

Question 21. जब किसी वस्तु का वेग दुगुना कर दिया जाता है
(a) उसकी गतिज ऊर्जा दुगुनी हो जाती है।
(b) उसकी स्थितिज ऊर्जा दुगुनी हो जाती है।
(c) उसकी गतिज ऊर्जा चार गुना हो जाती है।
(d) उसकी गतिज ऊर्जा आधी रह जाती है।
Answer: (c) उसकी गतिज ऊर्जा चार गुना हो जाती है।
In simple words: गतिज ऊर्जा वेग के वर्ग पर निर्भर करती है \( (\text{K.E.} \propto v^2) \), इसलिए वेग को दुगुना करने पर गतिज ऊर्जा चार गुना हो जाती है।
In simple words: Kinetic energy depends on the square of the velocity \( (\text{K.E.} \propto v^2) \), so doubling the velocity results in a fourfold increase in kinetic energy.

🎯 Exam Tip: गतिज ऊर्जा के सूत्र \( (\frac{1}{2}mv^2) \) में वेग की घात को याद रखना महत्वपूर्ण है ताकि वेग में परिवर्तन का गतिज ऊर्जा पर सही प्रभाव निर्धारित किया जा सके।

 

Question 22. 1 किग्रा के एक पिण्ड की गतिज ऊर्जा 200 जूल है। उसका वेग है
(a) 20 मी. सेकण्ड-1
(b) \( \sqrt{20} \) मी. सेकण्ड-1
(c) 100 मी. सेकण्ड-1
(d) 400 मी. सेकण्ड-1
Answer: (a) 20 मी. सेकण्ड-1
In simple words: गतिज ऊर्जा सूत्र \( (\text{K.E.} = \frac{1}{2}mv^2) \) का उपयोग करके, वेग \( (v = \sqrt{\frac{2 \times \text{K.E.}}{m}}) \) की गणना करने पर 1 किग्रा द्रव्यमान और 200 जूल गतिज ऊर्जा वाले पिण्ड के लिए 20 मी/सेकंड प्राप्त होता है।
In simple words: Using the kinetic energy formula \( (\text{K.E.} = \frac{1}{2}mv^2) \), the velocity \( (v = \sqrt{\frac{2 \times \text{K.E.}}{m}}) \) for an object with a mass of 1 kg and 200 Joules of kinetic energy is calculated to be 20 m/s.

🎯 Exam Tip: गतिज ऊर्जा के सूत्र को फिर से व्यवस्थित करके अज्ञात वेग या द्रव्यमान ज्ञात करने की क्षमता संख्यात्मक समस्याओं के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 23. किसी पिण्ड का द्रव्यमान आधा तथा वेग दुगुना करने पर उसकी गतिज ऊर्जा हो जायगी
(a) चौथाई ।
(b) आधी
(c) दुगुनी
(d) अपरिवर्तित
Answer: (c) दुगुनी
In simple words: यदि द्रव्यमान आधा और वेग दुगुना किया जाए, तो गतिज ऊर्जा \( (\frac{1}{2} \times \frac{m}{2} \times (2v)^2 = \frac{1}{2} \times \frac{m}{2} \times 4v^2 = mv^2) \) मूल गतिज ऊर्जा \( (\frac{1}{2}mv^2) \) की दुगुनी हो जाएगी।
In simple words: If the mass is halved and the velocity is doubled, the kinetic energy \( (\frac{1}{2} \times \frac{m}{2} \times (2v)^2 = \frac{1}{2} \times \frac{m}{2} \times 4v^2 = mv^2) \) will become double the original kinetic energy \( (\frac{1}{2}mv^2) \).

🎯 Exam Tip: द्रव्यमान और वेग दोनों में परिवर्तनों के संयुक्त प्रभाव का विश्लेषण करने के लिए गतिज ऊर्जा के सूत्र का उपयोग करें।

 

Question 24. 1 किलोवाट बराबर होता है
(a) 1.34 अश्व सामर्थ्य
(b) 746 अश्व सामर्थ्य
(c) 16 अश्व सामर्थ्य
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (d) इनमें से कोई नहीं
In simple words: 1 किलोवाट 1000 वाट के बराबर होता है, जबकि 1 अश्व सामर्थ्य लगभग 746 वाट के बराबर होता है, इसलिए 1 किलोवाट 1 अश्व सामर्थ्य से अधिक होता है।
In simple words: 1 kilowatt equals 1000 watts, while 1 horsepower is approximately 746 watts, thus 1 kilowatt is greater than 1 horsepower.

🎯 Exam Tip: वाट और अश्व सामर्थ्य के बीच रूपांतरण कारक को याद रखें \( (1 \text{ H.P.} \approx 746 \text{ W}) \) क्योंकि यह अक्सर ऊर्जा और सामर्थ्य के संदर्भ में पूछा जाता है।

 

Question 25. शक्ति की इकाई है
(a) न्यूटन
(b) न्यूटन-मीटर
(c) जूल-सेकण्ड-1
(d) जूल-मीटर-1
Answer: (c) जूल-सेकण्ड-1
In simple words: शक्ति (सामर्थ्य) कार्य करने की दर है, इसलिए इसकी इकाई जूल प्रति सेकण्ड \( (\text{J s}^{-1}) \) है, जिसे वाट भी कहते हैं।
In simple words: Power is the rate of doing work, so its unit is Joules per second \( (\text{J s}^{-1}) \), also known as Watt.

🎯 Exam Tip: शक्ति के मात्रकों को कार्य और समय के मात्रकों से जोड़कर याद रखना, जैसे \( \text{Watt} = \text{Joule/second} \), समझने में मदद करता है।

 

Question 26. निम्न में कौन सामर्थ्य का मात्रक नहीं है
(a) जूल-सेकण्ड-1
(b) जूल x सेकण्ड
(c) वाट
(d) अश्व शक्ति
Answer: (b) जूल x सेकण्ड
In simple words: जूल x सेकण्ड कार्य और समय का गुणनफल है, जो सामर्थ्य का मात्रक नहीं है। सामर्थ्य कार्य प्रति इकाई समय है, जैसे जूल/सेकण्ड (वाट) या अश्व शक्ति।
In simple words: Joule x second is a product of work and time, which is not a unit of power. Power is work per unit time, such as Joule/second (Watt) or horsepower.

🎯 Exam Tip: विभिन्न भौतिक राशियों के मात्रकों की संरचना को ध्यान से समझें ताकि गुणनफल और भागफल के बीच अंतर कर सकें।

 

Question 27. बल तथा विस्थापन के बीच कोण \( \theta \) के जिस मान के लिए कार्य शून्य होगा, वह है-
(a) 0°
(b) 45°
(c) 60°
(d) 90°
Answer: (d) 90°
In simple words: जब बल और विस्थापन के बीच का कोण 90° होता है, तो कार्य शून्य होता है क्योंकि \( \cos(90^\circ) = 0 \)।
In simple words: Work is zero when the angle between force and displacement is 90°, because \( \cos(90^\circ) = 0 \).

🎯 Exam Tip: कार्य के सूत्र W = Fd cosθ को पूरी तरह से याद रखें और यह समझें कि \( \cos\theta \) का मान कार्य को कैसे प्रभावित करता है, विशेषकर शून्य कार्य की स्थितियों के लिए।

उत्तरमाला

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