UP Board Solutions Class 9 Science Chapter 10 Gravitation

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Detailed Chapter 10 आकर्षण-शक्ति UP Board Solutions for Class 9 Science

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Class 9 Science Chapter 10 आकर्षण-शक्ति UP Board Solutions PDF

UP Board Solution Class 9 Science Chapter 10 पाठ्य - पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 149)

 

Question 1. गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम बताइये ।
Answer: गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम-विश्व का प्रत्येक पिंड प्रत्येक अन्य पिंड को एक बल से आकर्षित करता है, जो दोनों पिंडों के द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह बल दोनों पिंडों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में लगता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो समान द्रव्यमान वाले पिंडों 'A' और 'B' के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल को दर्शाता है। बल उनके केंद्रों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में निर्देशित होता है, और सूत्र \( F = G \frac{Mm}{d^2} \) द्वारा व्यक्त किया जाता है, जहाँ 'M' और 'm' पिंडों के द्रव्यमान हैं, 'd' उनके केंद्रों के बीच की दूरी है, और 'G' गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक है। गुरुत्वाकर्षण बल उनके केंद्रों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में निदेशित होता है।In simple words: हर वस्तु दूसरी वस्तु को आकर्षित करती है। यह आकर्षण बल वस्तुओं के द्रव्यमान के सीधे समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है, और यह बल हमेशा उनके केंद्रों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करता है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम की परिभाषा और उसका सूत्र याद करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भौतिकी के बुनियादी सिद्धांतों में से एक है।

 

Question 2. पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी वस्तु के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का परिमाण ज्ञात करने का सूत्र लिखिए ।
Answer: हल- \( F = G \frac{Me \times m}{R^2} \) जहाँ, \( G \) = गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक \( = 6.7 \times 10^{-11} Nm^2/kg^2 \) \( Me \) = पृथ्वी का द्रव्यमान \( = 6 \times 10^{24} kg \) \( m \) = वस्तु का द्रव्यमान \( R \) = पृथ्वी के केन्द्र और वस्तु के बीच की दूरी, या पृथ्वी की त्रिज्या \( = 6.4 \times 10^6 m \)In simple words: पृथ्वी और किसी वस्तु के बीच गुरुत्वाकर्षण बल का सूत्र \( F = G \frac{Me \times m}{R^2} \) है, जहाँ \( Me \) पृथ्वी का द्रव्यमान, \( m \) वस्तु का द्रव्यमान, \( R \) पृथ्वी की त्रिज्या (या दूरी) और \( G \) गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक है।

🎯 Exam Tip: इस सूत्र और इसमें प्रयुक्त प्रत्येक प्रतीक के अर्थ को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर संख्यात्मक समस्याओं को हल करते समय।

Class 9 Science Lesson 10 Question Answer पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 152)

 

Question 1. मुक्त पतन से आप क्या समझते हैं?
Answer: जब किसी वस्तु को किसी, मीनार या मकान की छत से मुक्त रूप से छोड़ा जाता है तो वस्तु पृथ्वी के आकर्षण के कारण बढ़ते हुए वेग से पृथ्वी तल की ओर गिरती है। पृथ्वी के आकर्षण के कारण किसी वस्तु का मुक्त रूप से पृथ्वी तल की ओर गिरना मुक्त पतन कहलाता है।In simple words: मुक्त पतन तब होता है जब कोई वस्तु केवल पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में ऊपर से नीचे गिरती है, जिससे उसका वेग लगातार बढ़ता जाता है।

🎯 Exam Tip: मुक्त पतन में वायु प्रतिरोध को नगण्य माना जाता है। इस अवधारणा को समझना गुरुत्वाकर्षण संबंधी समस्याओं को हल करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. गुरुत्वीय त्वरण से आप क्या समझते हैं?
Answer: पृथ्वी के आकर्षण के कारण पृथ्वी तल की ओर गिरती हुई किसी वस्तु का त्वरण 'गुरुत्वीय त्वरण कहलाता है। इसे 'g' से प्रदर्शित करते हैं। पृथ्वी तल पर गुरुत्वीय त्वरण का मान 9.8 m/s² है।In simple words: गुरुत्वीय त्वरण 'g' वह त्वरण है जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण किसी वस्तु में उत्पन्न होता है जब वह पृथ्वी की ओर गिरती है, और इसका मान लगभग 9.8 m/s² होता है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वीय त्वरण (g) और सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक (G) के बीच के अंतर को याद रखें। 'g' का मान स्थान के अनुसार बदलता है जबकि 'G' एक स्थिरांक है।

Gurutvakarshan Class 9 In Hindi पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 153)

 

Question 1. किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा भार में क्या अन्तर है?
Answer:
द्रव्यमानभार
1. किसी वस्तु में निहित द्रव्य की मात्रा उसका द्रव्यमान कहलाता है।1. किसी वस्तु का भार वह बल है जिससे पृथ्वी उस वस्तु को अपने केन्द्र की ओर आकर्षित करती है।
2. यह एक अदिश राशि है। यह एक परिमाण द्वारा व्यक्त की जाती है। इसमें दिशा नहीं होती।2. भार एक सदिश राशि है।
3. वस्तु का द्रव्यमान प्रत्येक स्थान पर एकसमान अर्थात स्थिर रहता है, बदलता नहीं।3. किसी वस्तु का भार गुरुत्वीय त्वरण g पर निर्भर करता है। अतः यह प्रत्येक स्थान पर स्थिर नहीं रहता। यह स्थान-स्थान पर g का मान बदलने पर बदल जाता है।
4. इसका S.I. मात्रक kg (किलोग्राम) है।4. भार का S.I. मात्रक न्यूटन (N) है जो कि बल का भी मात्रक है।
5. इसे कमानी द्वारा तथा तुला द्वारा मापा जाता है।5. इसे भौतिक तुला द्वारा मापा जाता है।
In simple words: द्रव्यमान किसी वस्तु में मौजूद पदार्थ की मात्रा है जो हर जगह स्थिर रहती है और किलोग्राम में मापी जाती है, जबकि भार वह बल है जिससे पृथ्वी किसी वस्तु को अपनी ओर खींचती है, जो स्थान के अनुसार बदलता है और न्यूटन में मापा जाता है।

🎯 Exam Tip: द्रव्यमान और भार के बीच के मुख्य अंतरों को याद रखें, खासकर उनकी परिभाषा, इकाई और इस तथ्य के संबंध में कि द्रव्यमान स्थिर रहता है जबकि भार गुरुत्वीय त्वरण के कारण बदलता रहता है।

 

Question 2. किसी वस्तु का चन्द्रमा पर भार पृथ्वी पर इसके भार का गुणा क्यों होता है?
Answer: उत्तर-माना कि किसी वस्तु का द्रव्यमान \( m \) है। अतः पृथ्वी पर उस वस्तु का, \( W_{\text{पृथ्वी}} = F_{\text{पृथ्वी}} \) \( = \frac{G \times M_{\text{पृथ्वी}} \times m}{(R_{\text{पृथ्वी}})^2} \) ...(i) [गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम से] जहाँ \( M_{\text{पृथ्वी}} \) तथा \( R_{\text{पृथ्वी}} \) क्रमशः पृथ्वी के द्रव्यमान तथा त्रिज्या हैं। उसी वस्तु का चंद्रमा पर भार, \( W_{\text{चंद्रमा}} = F_{\text{चंद्रमा}} \) \( = \frac{G \times M_{\text{चंद्रमा}} \times m}{(R_{\text{चंद्रमा}})^2} \) ...(ii) [गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम से] जहाँ \( M_{\text{चंद्रमा}} \) तथा \( R_{\text{चंद्रमा}} \) क्रमशः चन्द्रमा के द्रव्यमान तथा त्रिज्या हैं। समीकरण (ii) में समीकरण (i) से भाग देने पर \( \frac{W_{\text{चंद्रमा}}}{W_{\text{पृथ्वी}}} = \frac{M_{\text{चंद्रमा}}}{M_{\text{पृथ्वी}}} \times \frac{R^2_{\text{पृथ्वी}}}{R^2_{\text{चंद्रमा}}} = \frac{M_{\text{चंद्रमा}}}{M_{\text{पृथ्वी}}} \left( \frac{R_{\text{पृथ्वी}}}{R_{\text{चंद्रमा}}} \right)^2 \) पृथ्वी का द्रव्यमान चंद्रमा के द्रव्यमान का 100 गुना तथा उसकी त्रिज्या चंद्रमा की त्रिज्या का 4 गुना है। अतः, \( \frac{M_{\text{पृथ्वी}}}{M_{\text{चंद्रमा}}} = 100 \), तथा \( \frac{R_{\text{पृथ्वी}}}{R_{\text{चंद्रमा}}} = 4 \) अतः, \( \frac{W_{\text{चंद्रमा}}}{W_{\text{पृथ्वी}}} = \frac{1}{100} \times (4)^2 \) \( = \frac{16}{100} = \frac{1}{6} \) अर्थात्, चंद्रमा पर वस्तु का भार \( = \frac{1}{6} \) पृथ्वी पर वस्तु का भार \( W_{\text{चंद्रमा}} = \frac{W_{\text{पृथ्वी}}}{6} \) अतः चंद्रमा पर किसी वस्तु का भार पृथ्वी पर उसके भार का \( \frac{1}{6} \) वाँ हिस्सा होता है।In simple words: चंद्रमा पर गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी की तुलना में कम होता है क्योंकि चंद्रमा का द्रव्यमान और त्रिज्या पृथ्वी से काफी कम हैं। इसलिए, किसी वस्तु का चंद्रमा पर भार पृथ्वी पर उसके भार का लगभग छठा हिस्सा होता है।

🎯 Exam Tip: चंद्रमा और पृथ्वी के द्रव्यमान और त्रिज्या के अनुपात का उपयोग करके इस गणना को समझने से आपको यह याद रखने में मदद मिलेगी कि चंद्रमा पर भार पृथ्वी पर भार का 1/6 क्यों होता है।

Class Ix Gravitation पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 157)

 

Question 1. एक पतली तथा मजबूत डोरी से बने पट्टे की सहायता से स्कूल बैग को उठाना कठिन होता है, क्यों?
Answer: जब स्कूल बैग को उसके साथ लगे एक पतली तथा मजबूत डोरी से बने पट्टे की सहायता से उठाते हैं तो हाथ तथा डोरी के मध्य संपर्क क्षेत्रफल बहुत कम होता है तथा स्कूल बैग के भार के कारण हमारे हाथ पर दाब अधिक पड़ता है क्योंकि जब बल छोटे क्षेत्रफल पर लगता है तो दाब अधिक होता है अर्थात् बल का प्रभाव अधिक होता है इसी कारण स्कूल बैग को पतली डोरी से बने पट्टे की सहायता से उठाना कठिन है।In simple words: पतले पट्टे वाले स्कूल बैग को उठाना कठिन होता है क्योंकि पट्टा पतला होने के कारण हमारे हाथ पर दबाव का क्षेत्रफल कम होता है, जिससे बैग का पूरा वजन एक छोटे से क्षेत्र पर केंद्रित होकर अधिक दबाव डालता है।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न दाब (Pressure) की अवधारणा से संबंधित है, जहाँ दाब बल प्रति क्षेत्रफल होता है। कम क्षेत्रफल पर लगने वाला समान बल अधिक दाब उत्पन्न करता है।

 

Question 2. उत्प्लावकता से आप क्या समझते हैं?
Answer: जब किसी वस्तु को किसी तरल पदार्थ में डुबाया जाता है तो उस वस्तु पर ऊपर की दिशा में एक बल लगता है। यह बल वस्तु द्वारा हटाए गए तरल पदार्थ के भार के बराबर होता है। इस प्रकार वस्तु पर ऊपर की ओर लगने वाले बल को उत्प्लावकता बल या उत्प्लावन बल कहते हैं। यदि तरल पदार्थ का घनत्व अधिक होगा तो वस्तु द्वारा हटाए गये तरल पदार्थ का भार भी अधिक होगा और उत्प्लावन बल भी अधिक होगा।In simple words: उत्प्लावकता किसी तरल में डूबी हुई वस्तु पर ऊपर की ओर लगने वाला बल है, जो वस्तु द्वारा हटाए गए तरल के वजन के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: उत्प्लावकता बल आर्किमिडीज के सिद्धांत का आधार है और यह बताता है कि वस्तुएं तरल पदार्थों में क्यों तैरती या डूबती हैं।

 

Question 3. पानी की सतह पर रखने पर कोई वस्तु क्यों तैरती या बुबती है?
Answer: जब किसी वस्तु को पानी की सतह पर रखा जाता है या पानी में डुबाया जाता है तो यदि वस्तु द्वारा हटाए गये पानी का भार वस्तु के भार से अधिक है अर्थात् वस्तु का घनत्व पानी के घनत्व से कम है तो वस्तु पानी पर तैरती रहेगी। यदि वस्तु द्वारा हटाए गये पानी का भार वस्तु के भार से कम हो अर्थात् वस्तु का घनत्व पानी से अधिक हो तो वस्तु पानी में डूब जायेगी ।In simple words: कोई वस्तु पानी में इसलिए तैरती है क्योंकि उसका घनत्व पानी से कम होता है, या वह अपने भार से अधिक पानी हटाती है; यदि उसका घनत्व पानी से अधिक हो या वह अपने भार से कम पानी हटाए, तो वह डूब जाती है।

🎯 Exam Tip: तैरने और डूबने की अवधारणा घनत्व और उत्प्लावकता बल से संबंधित है। याद रखें कि वस्तु तभी तैरती है जब उसका घनत्व तरल के घनत्व से कम हो।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 158)

 

Question 1. एक तुला (weighing machine) पर आप अपना द्रव्यमान 42 kg नोट करते हैं। क्या आपको द्रव्यमान 42 kg से अधिक है या कम?
Answer: वास्तव में हमारा द्रव्यमान 42 kg से अधिक है। जब हम अपना भार एक कमानीदार तुला से मापते हैं। तो वायु द्वारा हमारे शरीर पर ऊपर की ओर उत्प्लावन बल लगता है, जिसके कारण हमारा भार कुछ कम हो जाता है।In simple words: तुला पर दर्शाया गया हमारा द्रव्यमान 42 kg से कम होता है क्योंकि हवा का उत्प्लावन बल हमारे शरीर पर ऊपर की ओर कार्य करता है, जिससे हमारा वास्तविक द्रव्यमान थोड़ा अधिक होता है।

🎯 Exam Tip: वायु का उत्प्लावन बल एक महत्वपूर्ण कारक है जो वस्तुओं के मापे गए भार को प्रभावित करता है। इसे 'आभासी भार' की अवधारणा को समझने के लिए याद रखें।

 

Question 2. आपके पास एक रुई को बोरा तथा एक लोहे की छड़ है। तुला पर मापने पर दोनों 100 kg द्रव्यमान दर्शाते हैं। वास्तविकता में एक-दूसरे से भारी है। क्या आप बता सकते हैं कि कौन-सा भारी है और क्यों?
Answer: वास्तव में रुई का बोरा लोहे की छड़ की अपेक्षा भारी होगा क्योंकि रुई के बारे का आयतन अधिक होने के कारण रुई के बोरे द्वारा हटाये गये वायु को भार लोहे की छड़ द्वारा हटाये गये वायु के भार से अधिक होगा। अतः वायु में रूई के बोरे के भार में अधिक कमी होती है। परन्तु दोनों का वायु में भार समान है अतः हम कह सकते हैं कि वास्तव में रुई के बोरे का भार लोहे की। छड़ की अपेक्षा अधिक होगा ।In simple words: रुई का बोरा वास्तव में लोहे की छड़ से भारी होगा, भले ही वे तुला पर समान द्रव्यमान दर्शाते हों, क्योंकि रुई का अधिक आयतन अधिक हवा को हटाता है, जिससे उस पर अधिक उत्प्लावन बल लगता है और उसका आभासी भार कम दिखाई देता है।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न उत्प्लावन बल और घनत्व के प्रभाव को दर्शाता है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि अधिक आयतन वाली वस्तु पर वायु का उत्प्लावन बल अधिक होता है, जिससे उसका मापा गया भार कम प्रतीत होता है।

अभ्यास प्रश्न (पृष्ठ संख्या 160 - 161)

 

Question 1. यदि दो वस्तुओं के बीच की दूरी को आधा कर दिया जाए तो उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल किस प्रकार बदलेगा?
Answer: गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियमानुसार दो वस्तुओं के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उनके बीच दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात्, \( F \propto \frac{1}{r^2} \) यदि दूरी को आधा कर दिया जाय तो \( F' \propto \frac{1}{(\frac{r}{2})^2} \)
या, \( F' \propto \frac{4}{r^2} \)
अतः, \( \frac{F'}{F} = \frac{4}{1} \)
या, \( F' = 4F \) अतः वस्तु के बीच दूरी आधी करने पर उनके बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल चार गुना हो जाता है।In simple words: यदि दो वस्तुओं के बीच की दूरी आधी कर दी जाए, तो उनके बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल चार गुना बढ़ जाएगा क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण बल की दूरी पर निर्भरता को समझना महत्वपूर्ण है (व्युत्क्रम वर्ग नियम)। दूरी में बदलाव का बल पर बड़ा प्रभाव पड़ता है।

 

Question 2. सभी वस्तुओं पर लगने वाला गुरुत्वीय बल उनके द्रव्यमान के समानुपाती होता है। फिर एक भारी वस्तु हल्की वस्तु के मुकाबले तेजी से क्यों नहीं गिरती?
Answer: स्वतंत्र रूप से गिरते समय प्रत्येक वस्तु त्वरण 'g' अनुभव करती है। इसे द्वारा व्यक्त किया जाता है जहाँ, \( G \) = सार्वत्रिक गुरुत्वीय स्थिरांक तथा \( R \) = पृथ्वी की त्रिज्या है। अतः स्वतंत्र रूप से गिरते समय, भारी वस्तु अपेक्षाकृत तेजी से नहीं गिरती है।In simple words: मुक्त पतन में, सभी वस्तुओं पर लगने वाला गुरुत्वीय त्वरण (g) उनके द्रव्यमान से स्वतंत्र होता है, इसलिए भारी और हल्की वस्तुएँ दोनों समान दर से गिरती हैं (यदि वायु प्रतिरोध को अनदेखा किया जाए)।

🎯 Exam Tip: गैलीलियो के मुक्त पतन के सिद्धांत को याद रखें, जो बताता है कि वायु प्रतिरोध की अनुपस्थिति में, विभिन्न द्रव्यमान वाली वस्तुएं समान दर से गिरती हैं।

 

Question 3. पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी 1 kg की वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल का परिमाण क्या होगा? (पृथ्वी का द्रव्यमान \( 6 \times 10^{24} \) kg है तथा पृथ्वी की त्रिज्या \( 6.4 \times 10^6 \) m है)।
Answer: हल - गुरुत्वीय स्थिरांक, \( G = 6.67 \times 10^{-11} Nm^2 kg^{-2} \) पृथ्वी का द्रव्यमान, \( m_1 = 6 \times 10^{24} \) kg वस्तु का द्रव्यमान, \( m_2 = 1 \) kg पृथ्वी की त्रिज्या, \( R = 6.4 \times 10^6 \) m गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियमानुसार, \( F = G \frac{m_1 \times m_2}{R^2} \) \( = \frac{6.67 \times 10^{-11} Nm^2kg^{-2} \times 6 \times 10^{24}kg \times 1 kg}{(6.4 \times 10^6m)^2} \)
या, \( F = 9.8 \) N उत्तरIn simple words: पृथ्वी और 1 kg की वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल का परिमाण लगभग 9.8 न्यूटन होगा, जिसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम का उपयोग करके पृथ्वी के द्रव्यमान, वस्तु के द्रव्यमान, पृथ्वी की त्रिज्या और गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक के साथ गणना की जाती है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण बल की गणना करते समय सभी इकाइयों को SI इकाइयों में रखना सुनिश्चित करें और घातांकों को ध्यान से संभालें।

 

Question 4. पृथ्वी तथा चंद्रमा एक-दूसरे को गुरुत्वीय बल से आकर्षित करते हैं। क्या पृथ्वी जिस बल से चंद्रमा को आकर्षित करती है वह बल, उस बल से जिससे चंद्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है बड़ा है या छोटा है या बराबर है? बताइए क्यों?
Answer: पृथ्वी चंद्रमा को उसी बल से अपनी ओर आकर्षित करती है जिस बल से चंद्रमा पृथ्वी को अपनी ओर आकर्षित करता है। क्योंकि, गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम के अनुसार, अंतरिक्ष में प्रत्येक वस्तु अन्य दूसरी वस्तु को उसी बल से आकर्षित करती है जो उन वस्तुओं की मात्रा के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।In simple words: पृथ्वी चंद्रमा को उसी बल से आकर्षित करती है जिस बल से चंद्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है, क्योंकि न्यूटन के गति के तीसरे नियम और गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम के अनुसार, आकर्षण बल हमेशा बराबर और विपरीत होता है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के गति के तीसरे नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम) को याद रखें, जो बताता है कि बल हमेशा युग्म में होते हैं और परिमाण में बराबर लेकिन दिशा में विपरीत होते हैं।

 

Question 5. यदि चंद्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है, तो पृथ्वी चंद्रमा की ओर गति क्यों नहीं करती?
Answer: न्यूटन की गति के तीसरे नियम के अनुसार, चंद्रमी भी पृथ्वी को अपनी ओर आकर्षित करता है। किन्तु, न्यूटन की गति के दूसरे नियम के अनुसार त्वरण, वस्तु के द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है। चंद्रमा की द्रव्यमान पृथ्वी से बहुत कम है। अतः हम पृथ्वी को चंद्रमा की ओर गति करते नहीं देखते हैं।In simple words: पृथ्वी चंद्रमा की ओर गति नहीं करती क्योंकि पृथ्वी का द्रव्यमान चंद्रमा की तुलना में बहुत अधिक है; न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार, समान बल लगने पर भी अधिक द्रव्यमान वाली वस्तु में बहुत कम त्वरण उत्पन्न होता है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के दूसरे नियम \( (F=ma) \) को याद रखें, जो बताता है कि बल किसी वस्तु में त्वरण उसके द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसलिए, भारी वस्तु में समान बल के लिए कम त्वरण होता है।

 

Question 6. दो वस्तुओं के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का क्या होगा, यदि-
(i) एक वस्तु का द्रव्यमान दोगुना कर दिया जाए?
(ii) वस्तुओं के बीच की दूरी दोगुनी अथवा तीन गुनी कर दी जाए?
(iii) दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान दोगुने कर दिए जाएँ?

Answer: उत्तर- (i) मान लिया वस्तुओं के द्रव्यमान क्रमशः \( m_1 \) तथा \( m_2 \) हैं तथा उन दोनों के बीच की दूरी \( d \) हो तो दोनों के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल \( F \) निम्न सूत्र द्वारा व्यक्त किया जाता है- \( F = \frac{G m_1 m_2}{d^2} \) जब एक वस्तु के द्रव्यमान को दो गुना कर दिया जाए तो \( F' = \frac{G(2m_1)m_2}{d^2} = 2 \frac{G m_1 m_2}{d^2} = 2F \) अतः दोनों वस्तुओं के मध्य लगने वाला बल भी दो गुना हो जाएगा। (ii) (a) जब दोनों वस्तु के मध्य दूरी को दो गुना कर दिया जाए तो \( F' = \frac{G m_1 m_2}{(2d)^2} = \frac{1}{4} \frac{G m_1 m_2}{d^2} = \frac{1}{4}F \) अतः वस्तुओं के बीच की दूरी दो गुना करने पर गुरुत्वाकर्षण बल \( \frac{1}{4} \) th (एक चौथाई) हो जाता है। (b) यदि दोनों वस्तुओं के मध्य दूरी तीन गुना कर दी जाए तो \( F' = \frac{G m_1 m_2}{(3d)^2} = \frac{1}{9} \frac{G m_1 m_2}{d^2} = \frac{1}{9}F \) अतः गुरुत्वाकर्षण बल मूल बल का \( \frac{1}{9} \) हो जाएगा। (iii) जब दोनों वस्तुओं का द्रव्यमान 'दो गुना कर दिया जाए तो \( F' = \frac{G(2m_1)(2m_2)}{d^2} = 4 \frac{G m_1 m_2}{d^2} = 4F \) अतः दोनों वस्तुओं के मध्य लगने वाला बल चार गुना हो जाएगा।In simple words: गुरुत्वाकर्षण बल, यदि एक वस्तु का द्रव्यमान दोगुना किया जाए तो दोगुना हो जाता है, यदि दूरी दोगुनी की जाए तो एक चौथाई हो जाता है, यदि दूरी तीन गुनी की जाए तो नौवां हिस्सा हो जाता है, और यदि दोनों द्रव्यमान दोगुने किए जाएं तो चार गुना हो जाता है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण के नियम \( F = G \frac{m_1 m_2}{d^2} \) में द्रव्यमान और दूरी के प्रभावों को याद रखें। द्रव्यमान सीधे समानुपाती होते हैं, जबकि दूरी व्युत्क्रम वर्ग नियम का पालन करती है।

 

Question 7. गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के क्या महत्त्व हैं?
Answer: गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम का महत्त्व- (i) इस बल के कारण ही सभी जीव-जन्तु, पेड़-पौधे आदि पृथ्वी पर टिके हुए हैं। (ii) सौरमण्डल में सूर्य के चारों ओर ग्रह गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही चक्कर लगाते हैं। (iii) चंद्रमा भी पृथ्वी के चारों ओर गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही चक्कर लगाता है। (iv) समुद्र में ज्वार-भाटा भी चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण उत्पन्न होता है । (v) पृथ्वी पर वायुमण्डल भी इसी गुरुत्वाकर्षण बल के कारण है।In simple words: गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम पृथ्वी पर जीवन, ग्रहों की सूर्य के चारों ओर गति, चंद्रमा की पृथ्वी के चारों ओर गति, ज्वार-भाटा का निर्माण और पृथ्वी पर वायुमंडल के अस्तित्व जैसी कई महत्वपूर्ण प्राकृतिक घटनाओं की व्याख्या करता है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के प्रमुख अनुप्रयोगों को याद रखें, क्योंकि ये प्राकृतिक घटनाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं और अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

 

Question 8. मुक्त पतन का त्वरण क्या है?
Answer: स्वतंत्र रूप से नीचे गिरती हुई वस्तुओं का त्वरण 9.8 m/s-2 होता है जो अग्रे प्रकार से ज्ञात किया जा सकता है। मान लिया कोई \( m \) द्रव्यमान की वस्तु स्वतंत्र रूप से पृथ्वी की ओर नीचे त्वरण \( g \) से गिरती है तो वस्तु पर लगा बल \( F = mg \) परन्तु गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम के अनुसार \( F = \frac{G M m}{R^2} \) या \( mg = \frac{G M m}{R^2} \)
\( g = \frac{G M}{R^2} \)
\( = \frac{6.67 \times 10^{-11}Nm^2kg^{-2} \times 6.0 \times 10^{24} kg}{(6.4 \times 10^6m)^2} \)
\( = 9.8 m/s^2 \) उत्तरIn simple words: मुक्त पतन का त्वरण, जिसे गुरुत्वीय त्वरण 'g' भी कहते हैं, पृथ्वी की सतह के पास लगभग 9.8 m/s² होता है, जो पृथ्वी के द्रव्यमान, त्रिज्या और गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक 'G' पर निर्भर करता है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वीय त्वरण (g) के सूत्र को याद रखें और समझें कि यह पृथ्वी के द्रव्यमान (M) और त्रिज्या (R) पर कैसे निर्भर करता है। यह एक मौलिक अवधारणा है।

 

Question 9. पृथ्वी तथा किसी वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल को हम क्या कहेंगे?
Answer: किसी वस्तु तथा पृथ्वी के मध्य लगा आकर्षण बल उस वस्तु का भार कहलाता है।In simple words: पृथ्वी और किसी वस्तु के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल को उस वस्तु का भार कहते हैं।

🎯 Exam Tip: भार (Weight) बल का एक रूप है, जिसे न्यूटन में मापा जाता है। यह द्रव्यमान से भिन्न है।

 

Question 10. एक व्यक्ति A अपने मित्र के निर्देश पर ध्रुवों पर कुछ ग्राम सोना खरीदता है। वह इस सोने को विषुवत् वृत्त पर अपने मित्र को दे देता है। क्या उसका मित्र खरीदे हुए सोने के भार से संतुष्ट होगा? यदि नहीं तो क्यों? (संकेत : ध्रुवों पर g का मान विषुवत् वृत्त की अपेक्षा अधिक है ।)
Answer: व्यक्ति A का मित्र उसके द्वारा ध्रुवों पर खरीदे गए सोने के भार से सहमत नहीं होगा क्योंकि भूमध्य (या विषुवत्) रेखा पर उसी सोने का भार ध्रुवों की अपेक्षा कम होगा। इसका कारण यह है कि वस्तु का भार गुरुत्वीय त्वरण g पर निर्भर करता है। पृथ्वी ध्रुवों पर थोड़ी पिचकी हुई है जिसके कारण ध्रुवों पर पृथ्वी की त्रिज्या भूमध्य रेखा की अपेक्षा कम है। गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी की त्रिज्या के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। ध्रुवों पर g का मान भूमध्य रेखा की अपेक्षा कम होगा। अतः ध्रुवों पर सोने का भार भूमध्य रेखा की अपेक्षा कम होगा।In simple words: मित्र सोने के भार से संतुष्ट नहीं होगा क्योंकि ध्रुवों पर गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान विषुवत् वृत्त की तुलना में अधिक होता है (पृथ्वी ध्रुवों पर चपटी होने के कारण), जिससे ध्रुवों पर खरीदे गए सोने का भार विषुवत् वृत्त पर कम हो जाएगा।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि पृथ्वी के आकार के कारण गुरुत्वीय त्वरण 'g' का मान ध्रुवों पर अधिकतम और भूमध्य रेखा पर न्यूनतम होता है। भार \( (W=mg) \) सीधे 'g' पर निर्भर करता है।

 

Question 11. एक कागज की शीट, उसी प्रकार की शीट को मरोड़कर बनाई गई गेंद से धीमी क्यों गिरती है?
Answer: जब कागज के पन्ने को गेंद की आकृति में बदला जाता है तो उसका पृष्ठ क्षेत्रफल जो वायु के संपर्क में आता है कम हो जाता है इस प्रकार नीचे गिरते समय वायु द्वारा उस पर पेपर सीट की अपेक्षा कम प्रतिरोध लगता है। अतः गेंद की आकृति का कागज नीचे जल्दी गिरता है, पेपर सीट का क्षेत्रफल अधिक होने के कारण वायु का प्रतिरोध अधिक लगता है इसलिए वह धीरे गिरता है।In simple words: कागज की एक शीट, उसी शीट से बनी गेंद की तुलना में धीमी गिरती है क्योंकि शीट का बड़ा सतह क्षेत्रफल वायु प्रतिरोध को बढ़ाता है, जबकि गेंद का कम सतह क्षेत्रफल वायु प्रतिरोध को कम करता है, जिससे वह तेजी से गिरती है।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न वायु प्रतिरोध के प्रभाव को दर्शाता है। याद रखें कि वायु प्रतिरोध वस्तु के सतह क्षेत्रफल पर निर्भर करता है; कम सतह क्षेत्रफल, कम वायु प्रतिरोध।

 

Question 12. चन्द्रमा की सतह पर गुरुत्वीय बल, पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय बल की अपेक्षा 3 गुणा है। एक 10 kg की वस्तु का चन्द्रमा पर तथा पृथ्वी पर न्यूटन में भार क्या होगा?
Answer: हल- वस्तु का द्रव्यमान \( m = 10 \) kg पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण \( g = 9.8 m/s^2 \) पृथ्वी पर वस्तु का भार \( = m \times g = 10 \times 9.8 = 98 \) N चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान \( g' = 1.63 m/s^2 \) चन्द्रमा पर वस्तु का भार \( = mg' = 10 \times 1.63 = 16.3 \) N वस्तु का द्रव्यमान प्रत्येक स्थान पर स्थिर रहता है। अतः वस्तु का पृथ्वी पर द्रव्यमान \( = 10 \) kg वस्तु का चन्द्रमा पर द्रव्यमान \( = 10 \) kgIn simple words: 10 kg की वस्तु का पृथ्वी पर भार 98 न्यूटन होगा (10 kg * 9.8 m/s²), और चंद्रमा पर इसका भार लगभग 16.3 न्यूटन होगा (10 kg * 1.63 m/s²), क्योंकि चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी की तुलना में बहुत कम है।

🎯 Exam Tip: द्रव्यमान और भार के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें। द्रव्यमान स्थिर रहता है, जबकि भार गुरुत्वीय त्वरण के मान पर निर्भर करता है, जो अलग-अलग ग्रहों पर अलग-अलग होता है।

 

Question 13. एक गेंद को ऊध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर 49 m/s के वेग से फेंकी जाती है तो परिकलन कीजिए
(i) अधिकतम ऊँचाई जहाँ तक कि गेंद पहुँचती है।
(ii) पृथ्वी की सतह पर वापस लौटने में लिया गया कुल समय ।

Answer: हल- (i) वस्तु का आरंभिक वेग, \( u = 49 \) m/s अधिकतम ऊँचाई पर वस्तु का वेग, \( v = 0 \) गुरुत्वीय त्वरण, \( g = - 9.8 \) m/s² मान लिया गेंद द्वारा तय की गई अधिकतम ऊँचाई \( = h \) हम जानते हैं कि, \( v^2 - u^2 = 2 gh \) \( 0 - (49)^2 = 2 \times (-9.8) \times h \)
या \( h = \frac{(49)^2}{2 \times 9.8} \)
\( h = \frac{49 \times 49}{2 \times 9.8} = 122.5 \) m (ii) मान लिया अधिकतम ऊँचाई पर पहुँचने में लिया गया समय \( = t \) \( u = 49 \) m/s, \( v = 0 \), \( g = - 9.8 \) m/s² \( v = u + gt \) \( 0 = 49 + (-9.8) t \)
\( t = \frac{49}{9.8} = 5 \) सेकण्ड उत्तर गेंद द्वारा जितना समय अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचने में लिया जाता है उतना ही समय वापस पृथ्वी तल पर लौटने में लिया जाएगा। अतः गेंद द्वारा लिया गया कुल समय \( = 5 + 5 = 10 \) सेकण्ड ।In simple words: जब गेंद को 49 m/s के वेग से ऊपर फेंका जाता है, तो वह अधिकतम 122.5 मीटर की ऊँचाई तक पहुँचती है और उसे पृथ्वी की सतह पर वापस लौटने में कुल 10 सेकंड का समय लगता है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण के तहत गति के समीकरणों का उपयोग करते समय, ऊपर की ओर गति के लिए 'g' को ऋणात्मक और नीचे की ओर गति के लिए धनात्मक लेना याद रखें। चढ़ाई और उतरने का समय समान होता है।

 

Question 14. 19.6 m ऊँची एक मीनार की चोटी से एक पत्थर छोड़ा जाता है। पृथ्वी पर पहुँचने से पहले इसका अंतिम वेग ज्ञात कीजिए ।
Answer: हल- मीनार की ऊँचाई \( h = 19.6 \) m \( g = 9.8 \) m/s² पत्थर को आरंभिक वेग \( u = 0 \) मान लिया पत्थर का अन्तिम वेग \( v = ? \) हम जानते हैं, \( v^2 - u^2 = 2gh \)
\( \implies v^2 - 0 = 2 (9.8) \times 19.6 \)
\( \implies v^2 = 19.6 \times 19.6 \)
\( \implies v = 19.6 \) m/sIn simple words: 19.6 मीटर ऊँची मीनार से छोड़े गए पत्थर का पृथ्वी पर पहुँचने से पहले अंतिम वेग 19.6 m/s होगा, गुरुत्वाकर्षण के तहत गति के समीकरण का उपयोग करके गणना की गई।

🎯 Exam Tip: मुक्त पतन की समस्याओं को हल करते समय \( u=0 \) लेना न भूलें जब कोई वस्तु 'छोड़ी जाती है'। सही समीकरण \( v^2 - u^2 = 2gh \) का उपयोग करें।

 

Question 15. कोई पत्थर ऊध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर 40 m/s के प्रारंभिक वेग से फेंका गया है। g = 10 m/s लेते हुए ग्राफ की सहायता से पत्थर द्वारा पहुँची अधिकतम ऊँचाई ज्ञात कीजिए । नेट विस्थापन तथा पत्थर द्वारा चली गई कुल दूरी कितनी होगी?
Answer: हल- प्रारंभिक वेग \( u = 40 \) m/s ऊपर की ओर गुरुत्वीय त्वरण, \( g = 10 \) m/s² नीचे की ओर माना कि पत्थर को उच्चतम बिंदु तक आने में \( t \) सेकण्ड लगते हैं, जहाँ उसका वेग \( v = 0 \) हो जाता है। अब, \( v = u - gt \) \( 0 = 40 - 10t \)
या \( 10t = 40 \)
या \( t = 4 \) सेकण्डे अर्थात् अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचने में पत्थर को 4 सेकण्ड लगते हैं। पुनः \( v = u - gt \) \( g = 10 \) m/s² तथा क्रमशः \( t = 0, 1, 2, 3, 4 \) सेकण्ड रखने पर निम्नांकित सारणी प्राप्त होती है-
t (सेकण्ड में)01234
v (मीटर/सेकण्ड में)403020100
उपर्युक्त सारणी की सहायता से खींचा गया वेग-समय ग्राफ निम्न चित्र में प्रदर्शित है-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह ग्राफ एक पत्थर के वेग-समय संबंध को दर्शाता है जिसे ऊपर की ओर फेंका गया है। Y-अक्ष वेग (मीटर/सेकंड में) और X-अक्ष समय (सेकंड में) को दर्शाता है। यह एक सीधी रेखा है जो वेग 40 m/s से शुरू होकर 4 सेकंड में 0 m/s तक घट जाती है, जो उच्चतम बिंदु को दर्शाता है। A बिंदु (0, 40) पर प्रारंभिक वेग, B बिंदु (4, 0) पर उच्चतम बिंदु पर वेग, और O बिंदु (0, 0) को दर्शाता है। पत्थर द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई, \( h \) = वेग-समय ग्राफ के नीचे घिरा क्षेत्र \( = \triangle OAB \) का क्षेत्रफल \( = \frac{1}{2} OA \times OB \) \( = \frac{1}{2} (40 \text{ m/s}) (4 \text{ s}) = 80 \text{ m} \) पत्थर पर कुल विस्थापन = प्रारंभिक तथा अंतिम बिंदु के बीच सरल रेखीय गति जबकि कुल तय दूरी = तय किए गए पथ की लंबाई \( = 2 \times \) अधिकतम ऊँचाई \( = 2 \times 80 = 160 \) m.In simple words: 40 m/s के प्रारंभिक वेग से ऊपर फेंका गया पत्थर 80 मीटर की अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचेगा, इस दौरान कुल विस्थापन 0 मीटर होगा (क्योंकि यह प्रारंभिक बिंदु पर वापस आ जाता है) और कुल तय दूरी 160 मीटर होगी।

🎯 Exam Tip: वेग-समय ग्राफ में, ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल विस्थापन देता है। यदि वस्तु वापस प्रारंभिक बिंदु पर आती है, तो कुल विस्थापन शून्य होगा, लेकिन कुल दूरी तय किए गए पथ की कुल लंबाई होगी।

 

Question 16. पृथ्वी तथा सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण बल का परिकलन कीजिए। दिया है, पृथ्वी का द्रव्यमान \( 6 \times 10^{24} \) kg तथा सूर्य का द्रव्यमान \( 2 \times 10^{30} \) kg| दोनों के बीच की औसत दूरी \( 1.5 \times 10^{11} \) m है।
Answer: हल-गुरुत्वाकर्षण बल \( F = G \frac{m_1 m_2}{R^2} \) \( = \frac{(6.67 \times 10^{-11}Nm^2/kg^2)(2.0 \times 10^{30}kg) \times (6 \times 10^{24}kg)}{(1.5 \times 10^{11})^2} \) \( = \frac{6.67 \times 2 \times 6 \times 10^{-11+30+24}}{1.5 \times 1.5 \times 10^{22}} \) \( = \frac{6.67 \times 12 \times 10^{43}}{1.5 \times 1.5 \times 10^{22}} \) \( = 3.56 \times 10^{22} \) N.In simple words: पृथ्वी और सूर्य के बीच का गुरुत्वाकर्षण बल बहुत अधिक होता है, जो उनके विशाल द्रव्यमान और उनके बीच की दूरी का उपयोग करके सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम से गणना करने पर लगभग \( 3.56 \times 10^{22} \) न्यूटन आता है।

🎯 Exam Tip: बड़ी संख्याओं (घातांकों) के साथ गणना करते समय सावधानी बरतें। सुनिश्चित करें कि आप सभी स्थिरांकों और दूरियों को सही इकाइयों में प्रतिस्थापित करते हैं।

 

Question 17. कोई पत्थर 100 m ऊँची किसी मीनार की चोटी से गिराया गया और उसी समय कोई दूसरा पत्थर 25 m/s के वेग से ऊध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंका गया। परिकलने कीजिए कि दोनों पत्थर कब और कहाँ मिलेंगे?
Answer: हल- माना पत्थर \( t \) सेकण्ड पश्चात् मिलेंगे। पहले पत्थर द्वारा \( t \) सेकण्ड में चली गई दूरी, \( S_1 = ut + \frac{1}{2}gt^2 \) \( u = 0 \), \( a = 10 \text{ ms}^{-2} \) इसलिए, \( S_1 = 0 \times t + \frac{1}{2} \times 10 \times t^2 \) अथवा \( S_1 = 5t^2 \) ...(i) दूसरे पत्थर के लिए, \( S_2 = ut + \frac{1}{2}gt^2 \) \( u = 25 \) m/s, \( g = -10 \text{ m/s}^2 \) इसलिए, \( S_2 = 25t + \frac{1}{2} \times (-10) \times t^2 \) अथवा \( S_2 = 25t - 5t^2 \) ...(ii) समीकरण (i) एवं (ii) को जोड़ने पर, \( S_1 + S_2 = 5t^2 + 25t - 5t^2 \) अथवा \( 100 = 4t \)
अथवा \( t = \frac{100}{25} = 4 \) सेकण्ड दोनों पत्थर 4s के पश्चात् मिलेंगे। समीकरण (ii) से \( S_2 = 25 \times 4 - 5 \times (4)^2 \) \( = 100 - 5 \times 16 \) \( = 100 - 80 = 20 \) m दोनों पत्थर पृथ्वी तल से 20m की ऊँचाई पर मिलेंगे।In simple words: एक 100 मीटर ऊंची मीनार से गिराया गया पत्थर और उसी समय 25 m/s के वेग से ऊपर फेंका गया दूसरा पत्थर 4 सेकंड के बाद पृथ्वी तल से 20 मीटर की ऊँचाई पर मिलेंगे।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, दोनों वस्तुओं की गति के समीकरणों को अलग-अलग लिखें और फिर उन्हें एक साथ हल करें। ध्यान रखें कि ऊपर की ओर फेंकी गई वस्तु के लिए गुरुत्वीय त्वरण ऋणात्मक होता है।

 

Question 18. ऊध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंकी गई एक गेंद 6s पश्चात् फेंकने वाले के पास लौट आती है। ज्ञात कीजिए।
(a) यह किस वेग से ऊपर फेंकी गई;
(b) गेंद द्वारा पहुँची गई अधिकतम ऊँचाई; तथा
(c) 4s पश्चात् गेंद की स्थिति ।
Answer:
हल - \( u = ?, v = 0, t = 6s, \)
\( g = - 9.8 \text{ ms}^{-2}, h = ? \)
(a) गेंद द्वारा ऊपर जाने तथा वापस आने में लिया गया कुल समय \( = 6 \text{ s} \)
गेंद द्वारा अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचने में लिया गया समय
\( t = \frac{6}{2} = 3 \text{ s} \)
गेंद का अधिकतम ऊँचाई पर वेग \( v = 0 \)
मान लिया गेंद का प्रारंभिक वेग \( = u \)
गुरुत्वीय त्वरण \( g = - 9.8 \text{ m/s}^2 \)
हम जानते हैं कि,
\( v = u + gt \)
\( 0 = u - 9.8 \times 3 \)
\( u = 29.4 \text{ m/s} \)
अतः वस्तु को \( 29.4 \text{ m/s} \) के वेग से ऊपर की ओर फेंका गया।
(b) मान लिया गेंद द्वारा तय की गई अधिकतम ऊँचाई \( = h \)
जहाँ \( u = 29.4 \text{ m/s}, t = 3 \text{ सेकण्ड} \)
\( h = ut + \frac{1}{2}gt^2 \)
\( = 29.4 \times 3 - \frac{1}{2} \times 9.8 \times (3)^2 \)
\( = 88.2 - 4.9 \times 9 \)
\( = 88.2 - 44.1 = 44.1 \text{ m} \)
(c) मान लिया \( 4s \) के पश्चात् गेंद की ऊँचाई \( = h \)
\( u = 29.4 \text{ m/s}, t = 4 \text{ s}, g = 9.8 \text{ m/s}^2 \)
\( h = ut + \frac{1}{2}gt^2 \)
\( = 29.4 \times 4 - \frac{1}{2} \times 9.8 \times (4)^2 \)
\( = 117.6 - 78.4 = 39.2 \text{ m} \)
अतः गेंद पृथ्वी तल से \( 39.2 \) मी की ऊँचाई पर होगी।
In simple words: A ball thrown upwards returns in 6 seconds. We calculated its initial velocity (29.4 m/s), maximum height (44.1 m), and position after 4 seconds (39.2 m from the ground) using kinematic equations under gravity.

🎯 Exam Tip: For problems involving vertical motion under gravity, remember to use the appropriate sign for 'g' (positive for downward motion, negative for upward motion) and that the time to reach maximum height is half the total flight time for symmetric trajectories.

 

Question 19. किसी दूर्व में डुबोई गई वस्तु पर उत्प्लावन बल किस दिशा में कार्य करता है?
Answer: जब किसी वस्तु को किसी द्रव में डुबोया जाता है तो वस्तु पर ऊध्वाधर ऊपर की ओर उत्प्लावन बल लगता है।
In simple words: When an object is immersed in a liquid, the buoyant force acts in an upward direction, opposing the object's weight.

🎯 Exam Tip: Understanding the direction of buoyant force is crucial for explaining why objects float or sink; it always acts upwards.

 

Question 20. पानी के भीतर किसी प्लास्टिक के गुटके को छोड़ने पर यह पानी की सतह पर क्यों आ जाता है?
Answer: जब प्लास्टिक के गुटके को पानी में डुबोकर छोड़ा जाता है तो वह पानी की सतह पर ऊपर आ जाता है। क्योंकि प्लास्टिक के गुटके पर पानी के कारण लगने वाला उत्प्लावन बल गुटके के भार से अधिक होता है। या हम यह भी कह सकते हैं कि प्लास्टिक के गुटके का घनत्व पानी के घनत्व से कम है इसलिए यह पानी में छोड़ने पर पानी में नहीं डूबता बल्कि पानी पर तैरने लगता है।
In simple words: A plastic block floats to the surface because the buoyant force exerted by water is greater than its weight, or simply because plastic is less dense than water.

🎯 Exam Tip: The principle of buoyancy dictates that an object floats if its density is less than the fluid it displaces, or if the buoyant force is greater than its weight.

 

Question 21. 50 g के किसी पदार्थ का आयतन 20 cm है। यदि पानी का घनत्व 1 gcm हो, तो पदार्थ तैरेगा या डूबेगा?
Answer:
हल-
पदार्थ का द्रव्यमान, \( m = 50 \text{ g} \)
आयतन \( V = 20 \text{ cm}^3 \)
पदार्थ का घनत्व \( = \frac{m}{V} = \frac{50 \text{ g}}{20 \text{ cm}^3} = 2.5 \text{ g/cm}^3 \)
पदार्थ का घनत्व \( (2.5 \text{ g/cm}^3) \) पानी के घनत्व \( (1 \text{ g/cm}^3) \) से अधिक है इसलिए यह पानी में डूब जाएगा।
In simple words: The substance will sink because its density (2.5 g/cm³) is greater than the density of water (1 g/cm³).

🎯 Exam Tip: To determine if an object floats or sinks, compare its density to the fluid's density; if the object's density is higher, it sinks.

 

Question 22. 500 g के एक मोहरबंद पैकेट का आयतन 350 cm³ है। पैकेट 1 g cm-3 घनत्व वाले पानी में तैरेगा या डूबेगा? इस पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का द्रव्यमान कितना होगा?
Answer:
हल-
(i) सील किए हुए पैकेट का द्रव्यमान,
\( m = 500 \text{ g} \)
आयतन, \( V = 350 \text{ cm}^3 \)
घनत्व \( = \frac{m}{V} = \frac{500 \text{ g}}{350 \text{ cm}^3} = 1.43 \text{ g/cm}^3 \)
पैकेट पानी में डूब जाएगा क्योंकि इसका घनत्व पानी के घनत्व से अधिक है इसलिए पानी द्वारा लगाया गया उत्प्लावन बल पैकेट के भार से कम है।
(ii) पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का आयतन \( = 350 \text{ cm}^3 \)
पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का द्रव्यमान \( = \) पानी का घनत्व \( \times \) पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का आयतन \( = 1 \text{ g/cm}^3 \times 350 \text{ cm}^3 = 350 \text{ ग्राम} \)
अतः पैकेट द्वारा विस्थापित जल का भार \( 350 \text{ ग्राम} \) होगा ।
In simple words: The packet will sink because its density (1.43 g/cm³) is greater than water (1 g/cm³). The mass of water displaced by the packet will be 350 grams, equal to the packet's volume times water's density.

🎯 Exam Tip: For objects submerged in a fluid, the volume of fluid displaced is equal to the object's volume, and the mass of displaced fluid determines the buoyant force.

 

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. सार्वत्रिक नियतांक का मान कितना है?
Answer: सार्वत्रिक नियतांक का मान है \( 6.67 \times 10^{-11} \text{ Nm}^2/\text{kg}^2 \)
In simple words: The universal gravitational constant (G) is a fundamental constant in physics, with a value of \( 6.67 \times 10^{-11} \text{ Nm}^2/\text{kg}^2 \).

🎯 Exam Tip: Remember the value and units of the universal gravitational constant (G) as it is frequently used in calculations involving gravitational force.

 

Question 2. पृथ्वी की सतह पर 'G' का मान \( 6.673 \times 10^{-11} \text{ Nmkg}^{-2} \) है। चन्द्रमा की सतह पर 'G' का मान क्या होगा?
Answer: चन्द्रमा की सतह पर 'G' का मान \( 6.673 \times 10^{-11} \text{ Nm kg}^{-2} \) होगा।
In simple words: The value of the universal gravitational constant 'G' remains the same everywhere in the universe, including on the Moon's surface.

🎯 Exam Tip: Differentiate between 'G' (universal gravitational constant) which is constant everywhere, and 'g' (acceleration due to gravity) which varies with location and celestial body.

 

Question 3. 1 किग्रा द्रव्यमान की वस्तु का भार कितना होगा? (g = 9.8 मी/से)
Answer:
हल- \( W = m \times g = 1 \text{ kg} \times 9.8 \text{ m/s}^2 = 9.8 \text{ न्यूटन} \)
In simple words: The weight of a 1 kg object on Earth is 9.8 Newtons, calculated by multiplying its mass by the acceleration due to gravity (9.8 m/s²).

🎯 Exam Tip: Weight is a force, measured in Newtons, and is calculated as mass times acceleration due to gravity (W=mg).

 

Question 4. पृथ्वी की सतह पर किसी वस्तु को द्रव्यमान 10 किग्रा है। इसका भार कितना होगा यदि इसे पृथ्वी के केन्द्र पर ले जायें?
Answer: शून्य, क्योंकि पृथ्वी के केन्द्र पर गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान शून्य होता है।
In simple words: The object would weigh zero at the Earth's center because the acceleration due to gravity (g) is zero there.

🎯 Exam Tip: Remember that 'g' (acceleration due to gravity) is zero at the Earth's center, which means any object there would be weightless.

 

Question 5. समुद्र में ज्वार-भाटा बनने के लिए उत्तरदायी बल का प्रकार तथा नाम बताइए।
Answer: गुरुत्वाकर्षण बल ।
In simple words: Tides in the sea are caused by the gravitational force primarily exerted by the Moon and, to a lesser extent, the Sun.

🎯 Exam Tip: Tides are a direct consequence of the Moon's gravitational pull on Earth's oceans, a key application of Newton's law of universal gravitation.

 

Question 6. G का मान्य मान क्या है?
Answer:
\( 6.67 \times 10^{-11} \text{ Nm}^2/\text{kg}^2 \)
In simple words: The accepted value for the universal gravitational constant (G) is \( 6.67 \times 10^{-11} \text{ Nm}^2/\text{kg}^2 \).

🎯 Exam Tip: It is important to know the numerical value and units of G for calculations and conceptual questions.

 

Question 7. उस बल का नाम बताइए जो मुक्त पतन में वस्तु को त्वरित करता है?
Answer: पृथ्वी का गुरुत्व बल ।
In simple words: The force that accelerates an object during free fall is the Earth's gravitational force.

🎯 Exam Tip: Gravitational force is the sole force acting on an object in free fall (neglecting air resistance), causing it to accelerate.

 

Question 8. मुक्त पतन का त्वरण क्या होगा?
Answer: मुक्त पतन का त्वरण \( 9.8 \text{ ms}^{-2} \) है।
In simple words: The acceleration of an object in free fall on Earth is approximately 9.8 meters per second squared, also known as 'g'.

🎯 Exam Tip: The acceleration due to gravity ('g') is constant for all objects in free fall near the Earth's surface, regardless of their mass.

 

Question 9. पृथ्वी के अन्य स्थानों की तुलना में पृथ्वी के केंद्र पर वस्तु का द्रव्यमान क्या होगा?
Answer: वस्तु का द्रव्यमान, प्रत्येक स्थान पर स्थिर रहता है।
In simple words: An object's mass remains constant regardless of its location, even at the Earth's center.

🎯 Exam Tip: Mass is an intrinsic property of an object and is invariant, unlike weight, which depends on gravity.

 

Question 10. \( m_1 \) वे \( m_2 \) द्रव्यमान अगर R दूरी पर हों तो उनके मध्य लगने वाला बल कितना होगा?
Answer:
\( F = G \frac{m_1 m_2}{R^2} \)
In simple words: The gravitational force between two masses \( m_1 \) and \( m_2 \) separated by a distance R is given by Newton's law of universal gravitation.

🎯 Exam Tip: Be sure to write down the formula for gravitational force correctly, including the universal gravitational constant G and the square of the distance in the denominator.

 

Question 11. क्या स्थिरांक G का मान प्रत्येक स्थान के लिए समान रहता है?
Answer: हाँ, यह एक सार्वत्रिक गुरुत्वीय स्थिरांक है।
In simple words: Yes, the universal gravitational constant 'G' has the same value across all locations in the universe.

🎯 Exam Tip: Emphasize that 'G' is a universal constant, meaning its value does not change, unlike 'g' which is specific to a gravitational field.

 

Question 12. G को S.I. मात्रक लिखिए।
Answer:
G का S.I. मात्रक है \( \text{Nm}^2/\text{kg}^2 \)
In simple words: The SI unit for the universal gravitational constant (G) is Newton-meter squared per kilogram squared.

🎯 Exam Tip: Deriving the units of G from the gravitational force formula \( F = G \frac{m_1 m_2}{r^2} \) is a good way to remember it: \( G = \frac{Fr^2}{m_1 m_2} \implies \frac{\text{N} \cdot \text{m}^2}{\text{kg} \cdot \text{kg}} \).

 

Question 13. पृथ्वी की सतह पर किसी वस्तु का द्रव्यमान 10 kg है। इसका भार कितना होगा यदि इसे पृथ्वी के केंद्र पर ले जाएँ?
Answer: शून्य । क्योंकि पृथ्वी के केंद्र पर गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान शून्य होता है।
In simple words: The object's weight would be zero at the Earth's center because the acceleration due to gravity 'g' is zero there, even though its mass remains 10 kg.

🎯 Exam Tip: Always distinguish between mass (which is constant) and weight (which depends on local gravity, 'g').

 

Question 14. g और G में क्या सम्बन्ध है?
Answer:
गुरुत्वीय त्वरण (g) तथा गुरुत्वाकर्षण नियतांक (G) में सम्बन्ध निम्नवत् है-
\( g = \frac{GM_e}{R_e^2} \)
जबकि \( M_e \) पृथ्वी का द्रव्यमान तथा \( R_e \) पृथ्वी की औसत त्रिज्या है।
In simple words: The acceleration due to gravity 'g' is directly proportional to the universal gravitational constant 'G', the mass of the Earth \( M_e \), and inversely proportional to the square of the Earth's radius \( R_e \).

🎯 Exam Tip: This relationship is fundamental for understanding how gravity varies on different celestial bodies; higher mass and smaller radius lead to a larger 'g'.

 

Question 15. किसी वस्तु का पृथ्वी पर द्रव्यमान 50 kg है। चन्द्रमा पर उसका द्रव्यमान क्या होगा और क्यों?
Answer: वस्तु का चन्द्रमा पर द्रव्यमान 50 kg होगा। क्योंकि प्रत्येक स्थान पर द्रव्यमान का मान अचर रहता है।
In simple words: The mass of the object will remain 50 kg on the Moon because mass is an inherent property of an object and does not change with location.

🎯 Exam Tip: Mass is an invariant quantity, meaning it is conserved regardless of location or gravitational field; only weight changes.

 

Question 16. दाब की परिभाषा कीजिए ।
Answer: एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला प्रणोद दाब कहलाता है।
In simple words: Pressure is defined as the force applied perpendicular to a surface per unit area.

🎯 Exam Tip: Remember the formula for pressure (P = F/A) and its SI unit (Pascal or N/m²) for quick recall.

 

Question 17. किसी द्रव में डुबोने पर कोई वस्तु हल्की क्यों प्रतीत होती है?
Answer: द्रव द्वारा वस्तु पर लगाए गए उत्प्लावन बल के कारण।
In simple words: An object feels lighter when submerged in a liquid due to the upward buoyant force exerted by the liquid.

🎯 Exam Tip: The apparent loss of weight in a fluid is directly equal to the buoyant force, which is Archimedes' principle in action.

 

Question 18. किसी पदार्थ का घनत्व \( 825 \text{ kgm}^{-3} \) है। बताइए यह पानी में डूबेगा या तैरेगा। पानी का घनत्व \( 1000 \text{ kgm}^{-3} \)
Answer: पदार्थ का घनत्व पानी के घनत्व से कम है। अतः पदार्थ पानी पर तैरेगा।
In simple words: The substance will float in water because its density (\( 825 \text{ kgm}^{-3} \)) is less than the density of water (\( 1000 \text{ kgm}^{-3} \)).

🎯 Exam Tip: An object floats if its density is less than the fluid it is in; it sinks if its density is greater.

 

Question 19. एक वस्तु को पहाड़ की चोटी पर ले जाने पर उसका भार कम होगा अथवा अधिक?
Answer: उसका भार कम होगा क्योंकि 'g' को मान ऊँचाई पर कम होता जाता है।
In simple words: An object's weight will decrease at the top of a mountain because the acceleration due to gravity ('g') decreases with increasing altitude.

🎯 Exam Tip: Weight changes with altitude because the value of 'g' decreases as you move further away from the Earth's center.

 

Question 20. किसी वस्तु के द्रव्यमान की परिभाषा लिखिए।
Answer: किसी वस्तु में निहित द्रव्य का परिमाण उसका द्रव्यमान कहलाता है।
In simple words: Mass is a fundamental property that quantifies the amount of matter an object contains.

🎯 Exam Tip: Mass is a scalar quantity, measured in kilograms, and represents an object's inertia or resistance to change in motion.

 

Question 21. 1 किग्रा-भार कितने न्यूटन के बराबर है।
Answer: 1 किग्रा भार \( = 9.8 \) न्यूटन ।
In simple words: One kilogram-force is equivalent to 9.8 Newtons, which is the force exerted by gravity on a 1 kg mass on Earth.

🎯 Exam Tip: Remember that kilogram-force is a unit of force, not mass, and its conversion to Newtons depends on the local acceleration due to gravity.

 

Question 22. 1 किग्रा और 5 किग्रा के दो पत्थर कुतुबमीनार की चोटी से साथ-साथ गिराये गये। कौनसा पत्थर पृथ्वी पर पहले पहुँचेगा?
Answer: दोनों पत्थर पृथ्वी पर साथ-साथ पहुँचेंगे ।
In simple words: Both the 1 kg and 5 kg stones will reach the Earth simultaneously because, in the absence of air resistance, the acceleration due to gravity is the same for all objects, regardless of their mass.

🎯 Exam Tip: A classic concept in gravity is that all objects, regardless of mass, fall with the same acceleration in a vacuum (or neglecting air resistance).

 

Question 23. भार ज्ञात करने के लिए किस प्रकार की तुला का प्रयोग करते हैं?
Answer: कमानीदार तुला का।
In simple words: A spring balance is used to measure the weight of an object.

🎯 Exam Tip: A spring balance measures force (weight), while a physical balance measures mass by comparing it with known masses.

 

Question 24. एक वस्तु का द्रव्यमान पृथ्वी पर 600 ग्राम है, चन्द्रमा पर उसका द्रव्यमान क्या होगा?
Answer: 600 ग्राम ही होगा, क्योंकि द्रव्यमान सदा समान रहता है।
In simple words: The object's mass will remain 600 grams on the Moon because mass is an inherent property of an object that does not change with location.

🎯 Exam Tip: Mass is a measure of the amount of matter and is constant, whereas weight is a measure of the gravitational force and varies with the gravitational field.

 

Question 25. चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान क्या है?
Answer: पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण के मान का \( \frac{1}{6} \)
In simple words: The acceleration due to gravity on the Moon is approximately one-sixth of that on Earth.

🎯 Exam Tip: The gravitational acceleration 'g' varies significantly between celestial bodies due to differences in their mass and radius.

 

Question 26. एक व्यक्ति का पृथ्वी पर भार 600 किग्रा-भार है, तो चन्द्रमा पर उसका भार कितना होगा?
Answer: 100 किंग्रा-भार ।
In simple words: A person weighing 600 kg-force on Earth would weigh approximately 100 kg-force on the Moon, as the Moon's gravity is about one-sixth that of Earth's.

🎯 Exam Tip: Weight on the Moon is about 1/6th of the weight on Earth because the Moon's gravitational pull is weaker.

 

Question 27. ग्रह अपने परिपथ में क्यों घूमते हैं?
Answer: ग्रह अपने परिपथ में सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण घूमते हैं।
In simple words: Planets orbit the Sun due to the Sun's strong gravitational pull, which acts as the centripetal force.

🎯 Exam Tip: Gravitational force is the centripetal force responsible for orbital motion of planets around the Sun and satellites around planets.

 

Question 28. यदि दो पिंडों के मध्य दूरी आधी कर दी जाये तो गुरुत्वाकर्षण कितना हो जायेगा?
Answer: गुरुत्वाकर्षण बल पिंडों के मध्य दूरी आधी करने पर चार गुना हो जायेगा क्योंकि \( F \propto \frac{1}{r^2} \)
In simple words: If the distance between two objects is halved, the gravitational force between them will become four times stronger because the force is inversely proportional to the square of the distance.

🎯 Exam Tip: Remember the inverse square law for gravitational force: halving the distance multiplies the force by \( (1/2)^{-2} = 4 \).

 

Question 29. उस बल का नाम बताइए जो चंद्रमा को पृथ्वी के चारों ओर घूमने के लिए उत्तरदायी है।
Answer: पृथ्वी का अभिकेन्द्रीय बल ।
In simple words: The Earth's gravitational force provides the necessary centripetal force for the Moon to orbit around it.

🎯 Exam Tip: In circular motion, a centripetal force is always required to keep an object moving in a curved path; for celestial bodies, this force is gravity.

 

Question 30. ग्रह कक्षाओं में क्यों घूमते हैं?
Answer: सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण।
In simple words: Planets revolve in their orbits because of the strong gravitational attraction exerted by the Sun.

🎯 Exam Tip: Kepler's laws of planetary motion are explained by Newton's law of universal gravitation, with the Sun's gravity providing the necessary force.

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. आर्किमिडीज का सिद्धान्त बताइए।
Answer: आर्किमिडीज का सिद्धान्त- जब किसी वस्तु को किसी तरल में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबोया जाता है। तो वह ऊपर की दिशा में एक बल का अनुभव करती है जो वस्तु द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है।
In simple words: Archimedes' principle states that an object submerged in a fluid experiences an upward buoyant force equal to the weight of the fluid displaced by the object.

🎯 Exam Tip: Archimedes' principle is fundamental to understanding buoyancy and floating; it directly links buoyant force to the weight of the displaced fluid.

 

Question 2. उत्प्लावन बल से क्या अभिप्राय है?
Answer: किसी वस्तु को किसी तरल में डुबोने पर, उसके द्वारा अनुभव किया गया ऊपर की ओर लगने वाला बल, उत्प्लावन बल कहलाती है।
In simple words: Buoyant force is the upward force exerted by a fluid that opposes the weight of an immersed object.

🎯 Exam Tip: Buoyant force is critical in determining whether an object will float or sink, acting opposite to gravity.

 

Question 3. आपेक्षिक घनत्व क्या है? यदि किसी वस्तु को किसी द्रव में पूर्णतया डुबोया जाए जिससे उत्प्लावन बल, वस्तु के भार के बराबर हो, तो द्रव तथा वस्तु के आपेक्षिक घनत्वों के बीच क्या संबंध होगा?
Answer: आपेक्षिक घनत्व- किसी पदार्थ का आपेक्षिक घनत्व उसके और पानी के घनत्व का अनुपात है अर्थात्
\( \text{आपेक्षिक घनत्व} = \frac{\text{किसी पदार्थ का घनत्व}}{\text{पानी का घनत्व}} \)
आपेक्षिक घनत्व समान होंगे।
In simple words: Relative density is the ratio of a substance's density to the density of water. If the buoyant force equals the object's weight when fully submerged, it implies the object's relative density is equal to the fluid's relative density (which is 1 if compared to water, meaning the object's density equals water's density).

🎯 Exam Tip: Relative density is a dimensionless quantity, indicating how dense a substance is compared to a reference substance (usually water).

 

Question 4. न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण सम्बन्धी नियम लिखिए तथा सम्बन्धित सूत्र दीजिए।
Answer: दो बिन्दु कणों को पारस्परिक गुरुत्वाकर्षण बल दोनों कणों के द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है तथा बल की दिशा दोनों वस्तुओं को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश होती है।
यदि एक कण का द्रव्यमान \( m_1 \) दूसरे कण का द्रव्यमान \( m_2 \) तथा उनके बीच की दूरी r हो तो
यहाँ F दोनों वस्तुओं के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल है तथा G सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक है।
\( F \propto m_1 \)
\( F \propto m_2 \)
\( F \propto \frac{1}{r^2} \)
अथवा \( F \propto \frac{m_1 m_2}{r^2} \)
अथवा \( F = G \frac{m_1 m_2}{r^2} \)
In simple words: Newton's law of universal gravitation states that every particle attracts every other particle with a force directly proportional to the product of their masses and inversely proportional to the square of the distance between their centers, given by the formula \( F = G \frac{m_1 m_2}{r^2} \).

🎯 Exam Tip: Ensure you clearly state both parts of the law-direct proportionality to masses and inverse square proportionality to distance-along with the correct formula and identification of variables.

 

Question 5. गुरुत्वाकर्षण नियतांक क्या होता है? इसका S.I. मात्रक निगमित कीजिए।
Answer: यदि दो पिण्डों के द्रव्यमान \( m_1 \) एवं \( m_2 \) तथा उनके बीच की दूरी r हो तो पिण्डों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल
\( F = G \frac{m_1 m_2}{r^2} \)
समानुपातिक नियतांक G को गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते हैं।
उपर्युक्त सूत्र से,
\( G = \frac{F r^2}{m_1 m_2} \)
अतः G का मात्रक \( = \frac{\text{F का मात्रक} \times r^2 \text{ का मात्रक}}{m_1 m_2 \text{ का मात्रक}} \)
\( = \frac{\text{न्यूटन} \cdot (\text{मीटर})^2}{(\text{किलोग्राम})^2} \)
अथवा न्यूटन मीटर\( ^2 \) किलोग्राम\( ^{-2} \)।
In simple words: The universal gravitational constant (G) is the proportionality constant in Newton's law of gravitation. Its SI unit is derived from the formula \( G = \frac{Fr^2}{m_1 m_2} \), which gives \( \text{N} \cdot \text{m}^2/\text{kg}^2 \).

🎯 Exam Tip: Always remember that G is a constant, and its unit can be easily derived from the universal law of gravitation, making it easier to recall.

 

Question 6. गुरुत्वाकर्षण, गुरुत्व तथा गुरुत्वीय त्वरण में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
Answer: पदार्थ के किन्हीं दो कणों के बीच उनके द्रव्यमान तथा बीच की दूरी पर निर्भर रहने वाले आकर्षण बल के उत्पन्न होने के गुण को गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) कहते हैं, जबकि पृथ्वी द्वारा किसी पिण्ड पर आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल को गुरुत्व (Gravity) तथा इसके द्वारा पिण्ड में उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं। इस प्रकार गुरुत्वाकर्षण द्रव्य का एक मौलिक गुण, गुरुत्व एक बल तथा गुरुत्वीय त्वरण एक त्वरण है।
In simple words: Gravitation is the universal phenomenon of mutual attraction between any two masses. Gravity is the specific force of attraction exerted by a massive body (like Earth) on another object. Gravitational acceleration is the acceleration experienced by an object due to gravity.

🎯 Exam Tip: Differentiate these terms by understanding that gravitation is a universal property, gravity is a specific force, and gravitational acceleration is the effect of that force.

 

Question 7. राशियाँ G तथा g क्या व्यक्त करती हैं? इनमें सम्बन्ध बताने वाला समीकरण स्थापित कीजिए।
Answer: राशि G गुरुत्वाकर्षण नियतांक है। इसका मान परस्पर 1 मीटर की दूरी पर स्थित 1-1 किग्रा द्रव्यमान के दो पिण्डों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल को व्यक्त करता है।
राशि g गुरुत्वीय त्वरण है अर्थात् यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण किसी वस्तु में उत्पन्न त्वरण को व्यक्त करती है।
g तथा G में सम्बन्ध निम्नवत् है-
\( g = \frac{GM_e}{R_e^2} \)
जबकि \( M_e \) पृथ्वी का द्रव्यमान तथा \( R_e \) पृथ्वी की औसत त्रिज्या है।
In simple words: G represents the universal gravitational constant, quantifying the strength of gravitational force, while g represents the acceleration due to gravity caused by a celestial body. The relationship is \( g = \frac{GM_e}{R_e^2} \), where \( M_e \) is Earth's mass and \( R_e \) is Earth's radius.

🎯 Exam Tip: Clearly define G as a universal constant and g as a variable acceleration. The equation linking them is crucial for calculations and conceptual understanding.

 

Question 8. किसी वस्तु के 'भार' से क्या तात्पर्य है? भार का S.I. मात्रक क्या है?
Answer: किसी वस्तु पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल को वस्तु का भार कहते हैं। इसका मान वस्तु के द्रव्यमान । (m) तथा गुरुत्वीय त्वरण (g) के गुणनफल से व्यक्त होता है \( (W = m.g) \) भार का S.I. मात्रक वही है जो बल का- अर्थात् न्यूटन (newton) ।
In simple words: Weight is the force of gravity acting on an object, calculated as its mass multiplied by the acceleration due to gravity (W=mg). Its SI unit is the Newton.

🎯 Exam Tip: Remember that weight is a force, so its unit is Newtons, not kilograms. It varies with the local gravitational field.

 

Question 9. किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा भार में अन्तर बताइए।
Answer:
द्रव्यमान तथा भार में अन्तर (Difference Between Mass and weight)- द्रव्यमान तथा भार में निम्नलिखित अन्तर हैं

द्रव्यमान (Mass)भार (Weight)
1. वस्तु में उपस्थित कुल पदार्थ की मात्रा होती है। यह वस्तु के जड़त्व की माप होती है।1. वह बल है जिससे पृथ्वी किसी वस्तु को अपने केन्द्र की ओर खींचती है।
2. यह प्रत्येक स्थान पर अचर होता है।2. वस्तु का भार स्थान-स्थान पर बदलता रहता है।
3. इसका मात्रक किलोग्राम है।3. इसका मात्रक न्यूटन है
4. यह भौतिक तुला से तोला जाता है।4. यह कमानीदार तुला से तोला जाता है।
5. यह एक अदिश राशि है।5. यह एक सदिश राशि है।

In simple words: Mass is the amount of matter in an object, constant everywhere and measured in kg, while weight is the gravitational force on an object, varying with location and measured in Newtons.

🎯 Exam Tip: A clear understanding of the differences between mass and weight (scalar vs. vector, constant vs. variable, unit) is fundamental to gravitation.

 

Question 10. लोहे का बना जहाज जल पर तैरता है। जबकि ठोस लोहे का टुकड़ा जल में डूब जाता है। क्यों?
Answer: लोहे के टुकड़े का भार उसके द्वारा हटाए गए जल के भार से अधिक होता है जिससे वह जल में डूब जाता है। जहाज का ढाँचा इस प्रकार बनाया जाता है कि इसके थोड़े-से हिस्से द्वारा हटाए गए जल का भार जहाज तथा उसमें लदे सामान के भार के बराबर होता है जिससे जहाज तैरने लगता है।
In simple words: A solid iron piece sinks because its density is greater than water, causing its weight to exceed the buoyant force. A ship floats because its hollow design makes its average density less than water, allowing it to displace a large volume of water whose weight is equal to the ship's total weight.

🎯 Exam Tip: The principle of flotation depends on the average density of an object. A ship's design manipulates its average density to be less than water, enabling it to float.

 

Question 11. जब मनुष्य चलता है तो भूमि पर दाब | क्यों अधिक पड़ता है, अपेक्षाकृत कि जब वह खड़ा होता है?
Answer: जब मनुष्य चलता है, तो एक समय पर उसका एक ही पैर भूमि पर होता है। इसके कारण, मनुष्य के भार का दाब उत्पन्न करता है। दूसरी ओर, जब मनुष्य खड़ा होता है, तो उसके दोनों पैर भूमि पर होते हैं। इसके कारण मनुष्य के भार का बल भूमि के बड़े क्षेत्र पर लगता है और भूमि पर कम दाब उत्पन्न करता है।
In simple words: When walking, a person exerts more pressure on the ground because the weight is supported by a smaller area (one foot). When standing, the weight is distributed over a larger area (two feet), resulting in less pressure.

🎯 Exam Tip: Pressure is inversely proportional to the area over which a force is applied. Smaller contact area means higher pressure for the same force.

 

Question 12. गद्दे पर जब मनुष्य खड़ा होता है तो क्यों काफी अधिक दबता है अपेक्षाकृत कि जब वह उस पर लेटा होता है?
Answer: जब मनुष्य गद्दे के ऊपर खड़ा होता है तो उसके केवल दो पैर (कम क्षेत्रफल वाले) गद्दे के संपर्क में होते हैं। इसके कारण मनुष्य का भार गद्दे के छोटे से क्षेत्र पर लगता है और अधिक दाब उत्पन्न करता है। यह अधिक दाब गद्दे में बड़े गर्त का कारण होता है। दूसरी ओर जब वही मनुष्य गद्दे के ऊपर लेटा होता है, तो इसका संपूर्ण शरीर (बड़े क्षेत्रफल वाला) गद्दे के संपर्क में होता है। इस स्थिति में मनुष्य का भार गद्दे के काफी बड़े क्षेत्र के ऊपर लगता है और काफी कम दाब उत्पन्न करता है और यह कम दाब गद्दे में बहुत छेटा गर्त बनाता है।
In simple words: When standing on a mattress, a person's weight is concentrated on a small area (feet), creating high pressure and a deep impression. When lying down, the weight is distributed over a much larger body area, resulting in lower pressure and a shallower impression on the mattress.

🎯 Exam Tip: This illustrates the concept of pressure: the same force (weight) applied over a smaller area results in greater pressure and thus a more noticeable effect.

 

Question 13. गुरुत्वीय त्वरण (g) व गुरुत्वीय स्थिरांक (G) में सम्बन्ध तथा अन्तर बताइये।
Answer: गुरुत्वीय त्वरण (g) व गुरुत्वीय स्थिरांक (G) में सम्बन्ध \( g = \frac{G.M}{R^2} \)
गुरुत्वीय त्वरण व गुरुत्वीय स्थिरांक में अन्तर

गुरुत्वीय त्वरण (g)गुरुत्वीय स्थिरांक (G)
1. इसका मान \( 9.81 \) मी/से\( ^2 \) होता है।1. इसका मान \( 6.6734 \times 10^{-11} \) न्यूटन मीटर\( ^2 \) किग्रा\( ^2 \) होता है।
2. इसका मान भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न होता है।2. इसका मान सदैव स्थिर रहता है।
3. इसका मात्रक मी/से\( ^2 \) है।3. इसका मात्रक न्यूटन मीटर\( ^2 \) किग्रा\( ^2 \) है।
4. यह एक सदिश राशि है।4. यह एक अदिश राशि है।

In simple words: Gravitational acceleration (g) is the acceleration due to gravity, which varies with location, and its value is around 9.81 m/s² on Earth. The universal gravitational constant (G) is a fixed constant, \( 6.6734 \times 10^{-11} \text{ Nm}^2/\text{kg}^2 \), and it is universal. They are related by \( g = \frac{GM}{R^2} \).

🎯 Exam Tip: Focus on the key differences: 'g' is acceleration (vector, variable, m/s²), while 'G' is a universal constant (scalar, constant, Nm²/kg²).

 

Question 14. नीचे की ओर गिरती हुई और ऊपर की ओर फेंकी गयी वस्तुओं के लिए u, v, g और h में सम्बन्ध लिखिए ।
Answer:
(1) यदि कोई वस्तु आरम्भिक वेग u से नीचे गिर रही है,
तब t सेकण्ड पश्चात् अन्तिम वेगे
(v) \( = u + gt \)
t सेकण्ड पश्चात् तय की गयी दूरी
(h) \( = ut + \frac{1}{2}gt^2 \)
v, u व h में सम्बन्ध \( v^2 = u^2 + 2 gh \)
(2) यदि कोई वस्तु विराम की अवस्था से नीचे गिर रही है तब
आरम्भिक वेग \( (u) = 0 \)
t सेकण्ड पश्चात् अन्तिम वेग \( (v) = gt \)
t सेकण्ड पश्चात् तय की गयी दूरी \( (h) = \frac{1}{2} gt^2 \)
v, u व h में सम्बन्ध \( v^2 = 2 gh \)
(3) जब कोई वस्तु आरम्भिक वेग (u) से ऊपर जा रही है, तब गुरुत्वीय त्वरण (g) ऋणात्मक होगा क्योंकि वस्तु के वेग की दिशा ऊपर की ओर है और गुरुत्वीय त्वरण की दिशा नीचे की ओर।
इस स्थिति में
t सेकण्ड पश्चात् अन्तिम वेग
(v) \( = u - gt \)
t सेकण्ड पश्चात् तय की गयी दूरी
(h) \( = ut - \frac{1}{2} g t^2 \)
v, u व h में सम्बन्ध \( v^2 = u^2 - 2 gh \)
In simple words: The relationships between initial velocity (u), final velocity (v), gravitational acceleration (g), and displacement (h) for vertically moving objects are given by the three equations of motion: \( v = u \pm gt \), \( h = ut \pm \frac{1}{2}gt^2 \), and \( v^2 = u^2 \pm 2gh \). The sign of 'g' depends on the direction of motion relative to gravity (positive for downward, negative for upward).

🎯 Exam Tip: These kinematic equations are essential for solving problems involving motion under gravity. Always correctly assign the sign of 'g' based on the direction of motion.

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. गुरुत्वाकर्षण' से क्या तात्पर्य है? न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के नियम की व्याख्या कीजिए ।
Answer:
गुरुत्वाकर्षण (Gravitation)- आकाशीय पिण्डों जैसे चन्द्रमा, ग्रह, पृथ्वी आदि की गतियों के आधार पर न्यूटन ने यह सिद्धान्त प्रतिपादित किया कि ब्रह्माण्ड में सभी वस्तुएँ एक-दूसरे को अपनी ओर बल लगाकर आकर्षित करती हैं। जिस बल के कारण दो वस्तुएँ एक-दूसरे को अपनी ओर आकर्षित करती हैं, उस बल को गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational force) तथा वस्तुओं के परस्पर आकर्षित होने के गुण को गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) कहते हैं।
न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम (Newton's Law of Universal Gravitation)- न्यूटन ने दो पिण्डों के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल सम्बन्धी एक नियम प्रस्तुत किया जिसे न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण सम्बन्धी नियम कहते हैं। इस नियम के अनुसार “विश्व में पदार्थ का प्रत्येक कण, प्रत्येक दूसरे कण को अपनी ओर आकर्षित करता है तथा किन्हीं दो कणों का पारस्परिक आकर्षण का बल कणों के द्रव्यमानों के अनुक्रमानुपाती एवं कणों के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।”
इस बल की क्रिया- रेखा दोनों कणों को मिलाने वाली ऋजु रेखा के अनुदिश होती है।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो पिंडों, A और B, को दर्शाता है जिनके द्रव्यमान क्रमशः \( m_1 \) और \( m_2 \) हैं। ये पिंड एक दूसरे से r दूरी पर स्थित हैं और उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल F लग रहा है, जो उनके केंद्रों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश होता है।

यदि दो कणों के द्रव्यमान \( m_1 \) तथा \( m_2 \) एवं उनके बीच की दूरी r हो तो कणों का पारस्परिक गुरुत्वाकर्षण बल
\( F \propto m_1 \)
\( F \propto m_2 \)
तथा \( F \propto \frac{1}{r^2} \)
अथवा \( F \propto \frac{m_1 m_2}{r^2} \)
अथवा \( F = G \frac{m_1 m_2}{r^2} \)
G एक समानुपातिक नियतांक है। इसका मान सभी कणों के लिए सभी स्थानों पर एवं सभी दशाओं में समान रहता है। अतः इसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (Universal gravitational constant) कहते हैं।
इसका मान \( 6.67 \times 10^{-11} \) न्यूटन मीटर/किग्रा है।
In simple words: Gravitation is the fundamental force of attraction between any two objects with mass. Newton's Law of Universal Gravitation states that this force is directly proportional to the product of their masses and inversely proportional to the square of the distance between their centers, mathematically expressed as \( F = G \frac{m_1 m_2}{r^2} \), where G is the universal gravitational constant.

🎯 Exam Tip: For this long answer, ensure you define gravitation, state both proportionality rules of Newton's law, write the complete formula with G, and mention the universal nature of G and its value.

 

Question 2. 'गुरुत्वीय त्वरण' का क्या अर्थ है? गुरुत्वाकर्षण के आधार पर पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का सूत्र प्राप्त कीजिए।
Answer:
गुरुत्वीय त्वरण (Gravitational Acceleration)- पृथ्वी द्वारा किसी वस्तु पर आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल को 'गुरुत्व' (Gravity) कहते हैं। इस | गुरुत्व बल के कारण वस्तु में जो त्वरण उत्पन्न होता है उसे गुरुत्वीय त्वरण (gravitational acceleration) कहते हैं।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक पिण्ड P को दर्शाता है जिसका द्रव्यमान m है, जो पृथ्वी के केंद्र से r दूरी पर स्थित है। पृथ्वी का द्रव्यमान \( M_e \) और औसत त्रिज्या \( R_e \) है। पिण्ड पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल और उसके कारण उत्पन्न गुरुत्वीय त्वरण को इस चित्र के माध्यम से समझाया गया है।

यदि किसी पिण्ड P का द्रव्यमान m, पृथ्वी का द्रव्यमान \( M_e \) तथा पृथ्वी के केन्द्र से पिण्ड P की दूरी r हो तो पिण्ड पर गुरुत्वाकर्षण बल
\( F = G \frac{M_e m}{r^2} \)
यदि इस बल से पिण्ड में त्वरण g उत्पन्न हो, तो
त्वरण \( = \frac{\text{बल}}{\text{पिण्ड का द्रव्यमान}} \)
अथवा \( g = F/m \)
अथवा \( g = \frac{G M_e}{r^2} \)
अब यदि पृथ्वी तल से पिण्ड की ऊँचाई h तथा पृथ्वी की औसत त्रिज्या \( R_e \) हो तो चित्र से \( r = R_e + h \)
अतः \( g = \frac{G M_e}{(R_e+h)^2} \)
उपर्युक्त समीकरण गुरुत्वीय त्वरण (g) तथा गुरुत्वाकर्षण नियतांक (G) का सम्बन्ध व्यक्त करता है।
पृथ्वी तल पर अथवा उसके निकट पिण्डों के लिए h को शून्य माना जा सकता है। अतः पृथ्वी तल पर अथवा उसके निकट स्थित पिण्डों का गुरुत्वीय त्वरण
\( g = \frac{G M_e}{R_e^2} \)
In simple words: Gravitational acceleration (g) is the acceleration experienced by an object due to the Earth's gravitational force. It is derived by equating the gravitational force \( F = G \frac{M_e m}{r^2} \) to the force \( F = mg \), resulting in the formula \( g = \frac{G M_e}{r^2} \). Near Earth's surface, \( r \) can be approximated as Earth's radius \( R_e \), giving \( g = \frac{G M_e}{R_e^2} \).

🎯 Exam Tip: Be precise in deriving the formula for 'g', clearly showing how Newton's law of universal gravitation and the definition of force lead to the expression of gravitational acceleration.

 

Question 3. पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण में किस प्रकार परिवर्तन होता है? आवश्यक सूत्र देकर स्पष्ट कीजिए।
Answer: पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण के मान में परिवर्तन- गुरुत्वाकर्षण नियतांक (G) का मान सदा अपरिवर्तित रहता है- परन्तु गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान परिवर्तनीय है। इसका परिवर्तन दो प्रकार से होता है
1. पृथ्वी के तल पर परिवर्तन - पृथ्वी की त्रिज्या, अर्थात् पृथ्वी के केन्द्र से पृथ्वी तल की दूरी सभी जगह समान नहीं है। पृथ्वी पर ही विषुवत रेखा पर पृथ्वी की त्रिज्या अधिकतम तथा उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुवों पर न्यूनतम होती है। अतः समीकरण के अनुसार g का मान विषुवत रेखा पर (\( R_e \) के अधिकतम होने के कारण) न्यूनतम तथा उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव पर (\( R_e \) के न्यूनतम होने के कारण) अधिकतम होता है। अतः विषुवत् रेखा से ध्रुवों की ओर (उत्तर या दक्षिण) जाने पर g का मान बढ़ता जाता है। इसी प्रकार तल से ऊपर मैदानों तथा पर्वतों में अधिक ऊँचाई पर 'g' का मान समुद्र तल पर इसके मान की अपेक्षा कम होता है। पृथ्वी पर समुद्र तल से नीचे जैसे गहरी खदानों में जाने पर भी g का मान शून्य होता है।
2. पृथ्वी के बाहर अंतरिक्ष में - पृथ्वी से दूर जाने पर, पृथ्वी के केन्द्र से दूरी बढ़ने के कारण g का मान कम होता जाता है।
यदि अंतरिक्ष में किसी स्थान की पृथ्वी के तल से ऊँचाई h हो तो उस स्थान की पृथ्वी के केन्द्र से दूरी \( r = (R_e + h) \) होगी ।
अतः उस स्थान पर \( g = \frac{G M_e}{(R_e+h)^2} \)
इससे स्पष्ट है कि पृथ्वी तल से ऊँचाई (h) बढ़ने के साथ g का मान कम होता जाता है।
In simple words: The acceleration due to gravity (g) varies due to Earth's non-uniform radius and altitude. It is minimum at the equator and maximum at the poles because Earth is slightly flattened. 'g' also decreases with increasing altitude from the Earth's surface, as shown by the formula \( g = \frac{G M_e}{(R_e+h)^2} \).

🎯 Exam Tip: When explaining 'g' variation, ensure you mention both geographical location (equator vs. poles) and altitude, providing the corresponding formula for altitude variation.

 

Question 4. पृथ्वी पर अथवा उसके निकट स्थित वस्तुओं की गति पर गुरुत्वीय त्वरण के प्रभावों को उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए ।
Answer:
पृथ्वी पर स्थित वस्तुओं पर गुरुत्व का प्रभाव
(a) एकविमीय गुरुत्वीय गति (One Dimensional Gravity Motion) - यदि कोई वस्तु कुछ ऊँचाई से स्वतन्त्रतापूर्वक छोड़ दी जाय तो वह ऊध्वाधर दिशा में गिरने लगेगी। वस्तु के गिरने का वेग लगातार एक-समान दर से बढ़ता जाता है अर्थात् वस्तु एक-समान त्वरण से गिरती है। इसका कारण यह है कि पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को अपने केन्द्र की ओर आकर्षित करती है। इसी आकर्षण बल के कारण गिरने वाली वस्तु में एक त्वरण उत्पन्न हो जाता है जिसका मान नियत होता है तथा सभी वस्तुओं के लिए समान होता है। यह त्वरण गुरुत्वीय त्वरण कहलाता है। इसे g से प्रदर्शित करते हैं। इसका मान \( 9.8 \text{ मी से}^{-2} \) है। पृथ्वी की ओर गिरती हुई अथवा पृथ्वी से ऊपर की ओर फेंकी गयी वस्तुओं की गति गुरुत्वीय गति कहलाती है।
अतः यदि कोई वस्तु प्रारम्भिक वेग u से पृथ्वी की ओर फेंकी जाय तो उसकी गुरुत्वीय गति के समीकरण निम्नलिखित होंगे- (ये गति के समीकरणों में \( a = +g \) रखने पर प्राप्त होती है।)
(i) \( v = u + gt \)
(ii) \( s = ut + \frac{1}{2} gt^2 \)
(iii) \( v^2 = u^2 + 2gh \)
स्वतन्त्रतापूर्वक गिरने वाली वस्तु के लिए प्रारम्भिक वेग \( u = 0 \) तथा त्वरण g ही है। अतः इसके लिए उपर्युक्त समीकरणों का स्वरूप निम्नवत् होगा -
(i) \( v = gt \)
(ii) \( s = \frac{1}{2} gt^2 \)
(iii) \( v^2 = 2gh \)
इसके विपरीत यदि वस्तु को नीचे से ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर फेंका जाय तो गति के समीकरणों में a के स्थान पर (-g) रखना होगा; क्योंकि गुरुत्वीय त्वरण g की दिशा सदैव पृथ्वी के केन्द्र की ओर होती है; जो अब वस्तु की गति की दिशा के विपरीत है।
अतः पृथ्वी तल से प्रारम्भिक वेग u से ऊपर की ओर फेंकी गयी वस्तु के लिए गुरुत्वीय गति के समीकरण निम्नवत् होंगे -
(i) \( v = u - gt \)
(ii) \( s = ut - \frac{1}{2} g t^2 \)
(iii) \( v^2 = u^2 - 2 gh \)
(b) प्रक्षेप्य की गति (द्विविमीय गुरुत्वीय गति) [Motion of Projectile (Two Dimensional Motion)] - यदि किसी पत्थर के टुकड़े को किसी ऊँचाई पर स्थित स्थान से पृथ्वी तल के समान्तर दिशा में फेंकते हैं तो इसका पथ पृथ्वी तल के समान्तर क्षैतिज नहीं रह पाता। यह पत्थर वक्र रेखीय प्रक्षेप पथ पर गतिशील होकर पृथ्वी पर गिरता है। चित्र में प्रक्षेप पथ (trajectory) तथा क्षैतिज (horizontal) पथ प्रदर्शित हैं।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक प्रक्षेप्य की गति को दर्शाता है, जिसमें एक वस्तु को क्षैतिज तल से फेंका जाता है। वस्तु गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में एक वक्र प्रक्षेप पथ का अनुसरण करती हुई अंततः पृथ्वी तल पर गिरती है, जबकि बिना गुरुत्वाकर्षण के वह क्षैतिज दिशा में सीधी रेखा में चलती।

यदि पत्थर पर गुरुत्व बल न लगता तो पत्थर क्षैतिज दिशा में रैखिक गति करता रहता, परन्तु पत्थर परे लगने वाले गुरुत्व बल के कारण इसकी दिशा परिवर्तित हो जाती है और यह त्वरित वेग से प्रक्षेप पथ पर चलकर फेंकने के स्थान से कुछ दूरी पर गिर पड़ता है। यदि किसी पिण्ड को किसी प्रारम्भिक वेग से पृथ्वी तल के समान्तर फेंका जाता है तो इस पर गुरुत्व बल आरोपित हो जाता है और यह पिण्ड त्वरित वेग से प्रक्षेप पथ पर चलकर पृथ्वी पर गिर पड़ता है तो इस पिण्ड को प्रक्षेप्य कहते हैं। किसी भवन की छत से फेंका गया पत्थर, किसी राइफल से छोड़ी गयी बुलेट, किसी हवाई जहाज से छोड़ा गया बम, खिलाड़ी द्वारा फेंका गया जेवलिन आदि प्रक्षेप्य हैं और प्रक्षेपण पथ पर त्वरित होते हैं।
In simple words: Gravitational acceleration affects the motion of objects near Earth's surface, causing them to fall with constant acceleration (one-dimensional motion) or follow a parabolic trajectory if thrown horizontally (two-dimensional projectile motion). The equations of motion are modified to include 'g' (positive for downward, negative for upward motion).

🎯 Exam Tip: Emphasize how 'g' consistently causes acceleration, leading to both straight-line vertical motion and curved projectile paths, and accurately apply the kinematic equations with appropriate signs for 'g'.

 

Question 5. क्या न्यूटन को गति का तीसरा नियम और गुरुत्वाकर्षण का नियम, एक-दूसरे के विरोधी हैं? एक पत्थर और पृथ्वी की स्थिति के अनुसार इसका स्पष्टीकरण करें।
Answer: न्यूटन के गति के तीसरे नियम के अनुसार, “यदि एक वस्तु दूसरी वस्तु पर बल लगाती है तो दूसरी वस्तु भी पहली वस्तु पर बराबर और विपरीत बल लगाती है।” न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के नियम के अनुसार, ब्रह्माण्ड का प्रत्येक द्रव्यमान (पिंड) दूसरे द्रव्यमान (पिंड) को अपनी ओर आकर्षित करता है। एक पत्थर और पृथ्वी की स्थिति को देखें तो स्वतंत्र अवस्था में गिरता हुआ पत्थर पृथ्वी की ओर आता है अतः पृथ्वी उसे अपने केन्द्र की ओर खींचती है, लेकिन न्यूटन के गति के तृतीय नियम के अनुसार पत्थर द्वारा भी पृथ्वी को अपनी ओर खींचना चाहिए और यह वास्तव में सही है। कि पत्थर भी उतने ही गुरुत्व बल के द्वारा पृथ्वी को अपनी ओर खींचता है, और \(F = m \times a\). पत्थर का द्रव्यमान कम होने के कारण उसके वेग में त्वरण 9.8 मी/से होता है लेकिन पृथ्वी का द्रव्यमान \(6 \times 10^{24}\) किग्रा होने से यह त्वरण 0.00000000000000000000000165 मी/से या \(1.65 \times 10^{-24}\) मी/से होता है; जो इतना कम है कि अनुभव ही नहीं हो सकता।
In simple words: न्यूटन के गति के तीसरे नियम और गुरुत्वाकर्षण का नियम एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं बल्कि पूरक हैं। पृथ्वी पत्थर को जितना बल लगाकर खींचती है, पत्थर भी पृथ्वी को उतना ही बल लगाकर खींचता है, लेकिन पृथ्वी का द्रव्यमान बहुत अधिक होने के कारण उसमें उत्पन्न त्वरण नगण्य होता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में न्यूटन के तीसरे नियम की अवधारणा को गुरुत्वाकर्षण के साथ जोड़कर समझाना महत्वपूर्ण है, जिसमें द्रव्यमान के अंतर के कारण त्वरण में भारी असमानता होती है।

 

Question 6. उचित उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए कि सामान्य द्रव्यमान की वस्तुओं के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल बहुत कम और खगोलीय पिंडों के मध्य बहुत अधिक लेता है।
Answer: किन्हीं दो सामान्य द्रव्यमान की वस्तुओं के मध्य लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल अत्यन्त कम होता है। और हमें अनुभव नहीं होता है लेकिन जब एक वस्तु कोई खगोलीय पिंड जैसे पृथ्वी या चन्द्रमा होता है, तो यह बल बहुत अधिक हो जाता है जो निम्न उदाहरणों से स्पष्ट है-
1. मान लीजिए आप और आपके मित्र का द्रव्यमान 50-50 किग्रा है और आप एक-दूसरे से 1 मीटर की दूरी पर स्थित हैं, तब आपके मध्य लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल (F) होगा-
\[F = G \frac{m_1 m_2}{d^2}\]
\[= \frac{6.6734 \times 10^{-11} \times 50 \times 50}{1^2} \text{ N}\]
\[= 16683.5 \times 10^{-11} \text{ N}\]
\[= 1.67 \times 10^{-7} \text{ N}\]
यह बल कमानीदार तुला में एक कॉपी का पेज लटकाये जाने पर तुला पर लगने वाले बल से भी सौ गुना कम है। अतः सामान्य रूप में अनुभव नहीं होता।
2. अगर वही मित्र, जिसका द्रव्यमान 50 किग्रा है, पृथ्वी पर खड़ा है, उस स्थिति में उसके व पृथ्वी के मध्य लगने वाले बल की गणना करे-
\(m_1\)= पृथ्वी का द्रव्यमान = \(6 \times 10^{24}\) किग्रा
\(m_2\)= मित्र का द्रव्यमान = 50 किग्रा
\(d\)= पृथ्वी के केन्द्र से मित्र की दूरी = पृथ्वी की त्रिज्या = \(6.37 \times 10^6\) मीटर
इस स्थिति में गुरुत्वाकर्षण बल
\[F = G \frac{m_1 m_2}{d^2}\]
\[= \frac{6.6734 \times 10^{-11} \times 6 \times 10^{24} \times 50}{6.37 \times 10^6 \times 6.37 \times 10^6}\text{ N}\]
\[= \frac{2002.02 \times 10^{13}}{40.96 \times 10^{12}}\text{ N}\]
\[= 49.07 \times 10^1 \text{ N}\]
\[= 490.7 \text{ N}\]
In simple words: गुरुत्वाकर्षण बल द्रव्यमानों के गुणनफल पर निर्भर करता है। सामान्य द्रव्यमान वाली वस्तुओं के बीच यह बल बहुत कम होता है क्योंकि उनका द्रव्यमान कम होता है, जबकि खगोलीय पिंडों (जैसे ग्रह) के विशाल द्रव्यमान के कारण उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल बहुत अधिक होता है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण बल के सूत्र \(F = G\frac{m_1 m_2}{d^2}\) का उपयोग करके द्रव्यमानों के गुणनफल और दूरी के वर्ग के प्रभाव को समझाएं। गणनाओं में सही घातांक का प्रयोग महत्वपूर्ण है।

 

आंकिक प्रश्न

 

Question 1. दो पिण्डों में से प्रत्येक का द्रव्यमान 40 किग्रा है तथा ये परस्पर 2 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल ज्ञात कीजिए ।
Answer: हल- \(F = G\frac{m_1 m_2}{r^2}\)
\[= \frac{6.67 \times 10^{-11} \times 40 \times 40}{(2)^2}\]
\[= 2.668 \times 10^{-8} \text{ न्यूटन ।}\]
In simple words: दो 40 किग्रा द्रव्यमान वाली वस्तुओं के बीच 2 मीटर की दूरी पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल बहुत कम, लगभग \(2.67 \times 10^{-8}\) न्यूटन होगा, जो हमारी इंद्रियों से महसूस नहीं किया जा सकता।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण बल की गणना करते समय, \(G\) के मान, द्रव्यमानों और दूरी को सही इकाइयों में सूत्र में रखना सुनिश्चित करें। छोटे द्रव्यमानों के लिए बल हमेशा बहुत छोटा होता है।

 

Question 2. दो पिण्डों के बीच की दूरी 90 सेमी होने से उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल \(1.0 \times 10^{-17}\) न्यूटन होता है। यदि पिण्डों के बीच की दूरी 90 मिमी कर दी जाय तो गुरुत्वाकर्षण बल कितना हो जायेगा?
Answer: हल- गुरुत्वाकर्षण नियम से \(F \propto \frac{1}{r^2}\)
अथवा \(\frac{F_2}{F_1} = (\frac{r_1}{r_2})^2\)
अतः प्रश्नानुसार
\(\frac{F_2}{1.0 \times 10^{-17}} = (\frac{90 \text{ सेमी}}{90 \text{ मिमी}})^2\)
\(\frac{90 \text{ सेमी}}{90 \text{ मिमी}} = (\frac{90 \text{ सेमी}}{0.9 \text{ सेमी}})^2 = (100)^2\)

\(\implies F_2 = 1.0 \times 10^{-17} \times 1 \times 10^4\)
\(\implies F_2 = 1.0 \times 10^{-13}\) न्यूटन ।
In simple words: जब दो पिंडों के बीच की दूरी 10 गुना कम की जाती है (90 सेमी से 90 मिमी), तो गुरुत्वाकर्षण बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होने के कारण 100 गुना बढ़ जाता है।

🎯 Exam Tip: दूरी-बल संबंध में इकाइयों का मानकीकरण (सेमी को मिमी में या vice-versa) गणना के लिए महत्वपूर्ण है। व्युत्क्रमानुपाती वर्ग नियम का उपयोग करके बल में परिवर्तन की गणना करें।

 

Question 3. पृथ्वी का द्रव्यमान \(6 \times 10^{24}\) किग्रा तथा एक मनुष्य का द्रव्यमान 60 किग्रा है। पृथ्वी मनुष्य को 600 न्यूटन बल से अपनी ओर खींचती है। मनुष्य पृथ्वी पर कितना गुरुत्वाकर्षण बल आरोपित करेगा तथा पृथ्वी का मनुष्य की ओर त्वरण कितना होगा?
Answer: हल-600 न्यूटन (क्योंकि दोनों बल क्रिया-प्रतिक्रिया होने के कारण बराबर हैं।) पृथ्वी का मनुष्य की ओर त्वरण \(a = \frac{F}{m}\)
\[= \frac{600 \text{ मी/से}^{-2}}{6 \times 10^{24}}\]
\[= 10^{-22} \text{ मी/से}^{-2}\]
\[= 100 \times 10^{-24} \text{ मी/से}^{-2}\]
In simple words: न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार, मनुष्य भी पृथ्वी पर उतना ही 600 न्यूटन बल लगाता है। लेकिन पृथ्वी का द्रव्यमान बहुत अधिक होने के कारण मनुष्य द्वारा उत्पन्न त्वरण पृथ्वी पर लगभग नगण्य होता है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के गति के तीसरे नियम को गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में समझें: क्रिया और प्रतिक्रिया बल हमेशा बराबर और विपरीत होते हैं। त्वरण की गणना में द्रव्यमान के महत्व को याद रखें।

 

Question 4. अंतरिक्ष में किसी स्थान पर 1 किग्रा द्रव्यमान के पिण्ड का गुरुत्वीय त्वरण 5 मी. से होता है। उसी स्थान पर 3 किग्रा के पिण्ड का त्वरण कितना होगा?
Answer: हल- 5 मी.से\(^{-2}\) (क्योंकि गुरुत्वीय त्वरण द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता)।
In simple words: गुरुत्वीय त्वरण वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है, इसलिए 1 किग्रा और 3 किग्रा दोनों पिण्डों के लिए एक ही स्थान पर गुरुत्वीय त्वरण 5 मी/से\(^{2}\) होगा।

🎯 Exam Tip: इस महत्वपूर्ण अवधारणा को याद रखें कि गुरुत्वीय त्वरण (g) वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है, केवल उस ग्रह या खगोलीय पिंड के द्रव्यमान और त्रिज्या पर जिससे वह संबंधित है।

 

Question 5. एक पत्थर को 20 मीटर की ऊँचाई से गिराया जाता है। ज्ञात कीजिए
(i) पत्थर कितने समय में भूमि पर पहुँचेगा?
(ii) पत्थर कितने वेग से भूमि से टकरायेगा?

Answer: (i) समीकरण \(h = \frac{1}{2}gt^2\) से क्योंकि पत्थर का प्रारम्भिक वेग \(u = 0\) है।
\[20 \text{ मी } = \frac{1}{2} \times 10 \text{ मी. से}^{-2} \times t^2\]
अथवा \(t^2 = 4 \text{ से}^2\); \(\implies t = 2 \text{ सेकण्ड}\)
(ii) समीकरण \(v^2 = 2gh\) से
\[v^2 = 2 \times 10 \text{ मी से}^{-2} \times 20 \text{ मी}\]
\[= 400 \text{ मी}^2/\text{से}^2\]
दोनों पक्षों का वर्गमूल लेने पर,
\[v = \sqrt{400} \text{ मी से}^{-1} = 20 \text{ मीसे}^{-1}\]
In simple words: 20 मीटर की ऊँचाई से गिराया गया पत्थर 2 सेकंड में जमीन पर 20 मी/से के वेग से टकराएगा, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल के कारण उसका वेग लगातार बढ़ता है।

🎯 Exam Tip: मुक्त पतन के प्रश्नों में गति के समीकरणों का सही उपयोग करें (\(v=u+at\), \(s=ut+\frac{1}{2}at^2\), \(v^2=u^2+2as\))। ध्यान दें कि प्रारंभिक वेग (\(u\)) अक्सर शून्य होता है और त्वरण (\(a\)) गुरुत्वीय त्वरण (\(g\)) के बराबर होता है।

 

Question 6. एक गेंद को 30 मी. से\(^{-1}\) के वेग से ऊध्वधरतः ऊपर को उछाला जाता है। ज्ञात कीजिए-
(i) पत्थर अधिकतम कितनी ऊँचाई तक जाएगा?
(ii) कितने समय में पत्थर महत्तम ऊँचाई तक पहुँचेगा?
(iii) कितने समय बाद पत्थर वापस भूमि पर लौटेगा?
(iv) लौटकर भूमि से टकराते समय पत्थर का वेग कितना होगा?

Answer: प्रारम्भिक वेग \(u = 30\) मी.से\(^{-1}\), अंतिम वेग \(v = 0, g = -10\) मी.से\(^{-2}\)
(i) यदि अधिकतम ऊँचाई \(h\) हो तो समीकरण \(v^2 = u^2 - 2gh\) से
\[0 = 30 \times 30 - 2 \times 10 \times h\]
\[\implies h = \frac{30 \times 30}{2 \times 10} = 45 \text{ मीटर}\]
(ii) यदि ऊपर जाने का समय \(t\) हो तो समीकरण \(v = u - gt\) से
\[0 = 30 - 10 \times t\]
\[\implies t = 3 \text{ सेकण्ड}\]
(iii) गिरते समय \(u = 0, g = 10\) मी.से\(^{-2}\), \(h = 45\) मी
समीकरण \(h = ut + \frac{1}{2}gt^2\) से
\[45 = 0 \times t + \frac{1}{2} \times 10 \times t^2\]
\[\implies t^2 = \frac{45 \times 2}{10} = 9\]
दोनों पक्षों का वर्गमूल लेने पर,
\[t = \sqrt{9} = 3 \text{ सेकण्ड}\]
अथवा \(t = 3\) सेकण्ड ।
\(\implies\) पत्थर को ऊपर फेंकने के समय से वापस आने तक का समय = 3 सेकण्ड + 3 सेकण्ड = 6 सेकण्ड ।
(iv) लौटकर भूमि से टकराते समय पत्थर का वेग
\(v = u + gt\) से,
\[v = 0 + 10 \times 3 = 30 \text{ मी.से}^{-1} \text{ नीचे की ओर}\]
In simple words: गेंद को ऊपर फेंकने पर वह 45 मीटर की अधिकतम ऊँचाई तक जाएगी, जिसमें 3 सेकंड लगेंगे और फिर 3 सेकंड में वापस लौटेगी। जमीन से टकराते समय उसका वेग प्रारंभिक वेग के बराबर (30 मी/से) होगा, लेकिन दिशा नीचे की ओर होगी।

🎯 Exam Tip: ऊपर की ओर फेंकी गई वस्तु के लिए g को ऋणात्मक लें और नीचे आते समय धनात्मक। उच्चतम बिंदु पर वेग शून्य होता है और ऊपर जाने तथा नीचे आने का समय बराबर होता है।

 

Question 7. एक पिण्ड का पृथ्वी पर भार 900 न्यूटन है। चन्द्रमा पर इसका भार कितना होगा? चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण, पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का है?
Answer: हल- चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण \(g_m = \frac{1}{6} \times g_e\)
तथा पृथ्वी पर भार \( = m.g_e = 900\) न्यूटन
अथवा \(g_e = \frac{900}{m}\)
चन्द्रमा पर भार \( = m.g_m\)
\[= m \times \frac{1}{6} \times g_e\]
\[= m \times \frac{1}{6} \times \frac{900}{m}\]
\[= 150 \text{ न्यूटन ।}\]
In simple words: चूंकि चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का लगभग 1/6वां हिस्सा है, इसलिए पृथ्वी पर 900 न्यूटन भार वाले पिंड का चंद्रमा पर भार 150 न्यूटन होगा।

🎯 Exam Tip: यह महत्वपूर्ण है कि द्रव्यमान एक अचर राशि है जबकि भार स्थान-स्थान पर बदलता है। चंद्रमा पर भार पृथ्वी पर भार का 1/6 गुना होता है, इस संबंध को याद रखें।

 

Question 8. 125. मीटर ऊँची मीनार से एक पिण्ड 10 मी. से\(^{-1}\) की चाल से क्षैतिज दिशा में फेंका जाता है। यह पिण्ड कितने समय बाद तथा मीनार के आधार से कितनी दूर जाकर पृथ्वी पर गिरेगा?
Answer: हल- पिण्ड की ऊर्ध्वाधर चाल \( = 0\), यदि पृथ्वी पर पहुँचने का समय \(t\) हो तो समीकरण \(h = \frac{1}{2}gt^2\) से
\[125 = \frac{1}{2} \times 10 \times t^2\]
अथवा \(t^2 = \frac{125}{5} = 25\)
दोनों पक्षों का वर्गमूल लेने पर,
\(\implies t = \sqrt{25} = 5\) सेकण्ड ।
\(\implies\) क्षैतिज चाल = 10 मी.से\(^{-1}\); क्षैतिज त्वरण = 0
क्षैतिज दूरी = चाल \(\times\) समय
\[= 10 \text{ मी.से}^{-1} \times 5 \text{ से. } = 50 \text{ मीटर}\]
अतः पिण्ड 5 सेकण्ड बाद 50 मीटर दूर जाकर गिरेगा।
In simple words: 125 मीटर ऊँची मीनार से क्षैतिज रूप से फेंका गया पिंड 5 सेकंड में जमीन पर गिरेगा और मीनार के आधार से 50 मीटर की दूरी पर होगा।

🎯 Exam Tip: प्रक्षेप्य गति के प्रश्नों को ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज गतियों में अलग-अलग हल करें। ऊर्ध्वाधर गति गुरुत्वाकर्षण के अधीन होती है जबकि क्षैतिज गति नियत वेग से होती है (वायु प्रतिरोध को नगण्य मानते हुए)।

 

Question 9. दो पिण्डों के द्रव्यमान 2 किग्रा तथा 5 किग्रा हैं तथा वे परस्पर 3 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। गणना कीजिए-
(i) पिण्डों पर गुरुत्वाकर्षण बल
(ii) यदि पिण्ड गति करने के लिए स्वतंत्र हों तो उनके त्वरण ।

Answer: (i) \(F = G\frac{m_1 \times m_2}{r^2}\)
\[= \frac{6.67 \times 10^{-11} \times 5 \times 2}{(3)^2}\]
\[= 7.4 \times 10^{-11} \text{ न्यूटन (दोनों पर)।}\]
(ii) 2 किग्रा के पिण्ड का त्वरण \( = \frac{F}{m}\)
\[= \frac{7.4 \times 10^{-11} \text{ न्यूटन}}{2 \text{ किग्रा}}\]
\[= 3.7 \times 10^{-11} \text{ मी.से}^{-2}\]
5 किग्रा के पिण्ड का त्वरण
\[= \frac{7.4 \times 10^{-11} \text{ न्यूटन}}{5 \text{ किग्रा}}\]
\[= 1.48 \times 10^{-11} \text{ मी.से}^{-2}\]
In simple words: दो पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल बहुत कम होता है। हालाँकि, यह बल दोनों पिंडों पर समान रूप से कार्य करता है, लेकिन छोटे द्रव्यमान वाले पिंड का त्वरण बड़े द्रव्यमान वाले पिंड की तुलना में अधिक होता है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण बल की गणना के लिए सूत्र \(F = G\frac{m_1 m_2}{r^2}\) का उपयोग करें और त्वरण की गणना के लिए न्यूटन के दूसरे नियम \(F = ma\) का उपयोग करें। यह ध्यान रखें कि बल दोनों पिंडों पर समान होता है।

 

Question 10. पृथ्वी तल से 3200 किमी की ऊँचाई पर गुरुत्वीय त्वरण की गणना कीजिए। [\(M_e = 6.0 \times 10^{24}\) किग्रा; \(R_e = 6400\) किमी]
Answer: हल- पृथ्वी के केन्द्र से दूरी \(r = (6400 + 3200)\) किमी
\[= 9600 \text{ किमी } = 9.6 \times 10^3 \times 10^3 \text{ मीटर}\]
\[g = \frac{G.M_e}{r^2}\]
\[= \frac{6.67 \times 10^{-11} \times 6.0 \times 10^{24}}{(9.6 \times 10^3 \times 10^3)^2}\]
\[= 4.3 \text{ मी.से}^{-2}\]
In simple words: पृथ्वी की सतह से 3200 किमी ऊपर, गुरुत्वीय त्वरण का मान घटकर लगभग 4.3 मी/से\(^{2}\) हो जाएगा, क्योंकि ऊंचाई बढ़ने पर गुरुत्वीय त्वरण कम होता है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वीय त्वरण की गणना करते समय, दूरी को पृथ्वी के केंद्र से मापा जाता है, इसलिए पृथ्वी की त्रिज्या और ऊँचाई दोनों को जोड़ना सुनिश्चित करें। सभी इकाइयों को SI में बदलें।

 

Question 11. पृथ्वी को द्रव्यमान \(6 \times 10^{24}\) किग्रा, चन्द्रमा का द्रव्यमान \(7.4 \times 10^{22}\) किग्रा तथा दोनों के द्रव्यमान केन्द्रों के बीच की दूरी \(3.84 \times 10^8\) मीटर है। पृथ्वी और चन्द्रमा के बीच लगने वाले आकर्षण बल की गणना कीजिए।
Answer: हल-

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र पृथ्वी (E) और चंद्रमा (M) को दर्शाता है, जिनके द्रव्यमान क्रमशः m1 और m2 हैं, और उनके केंद्रों के बीच की दूरी r है। यह दो खगोलीय पिंडों के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल को समझने में मदद करता है।

\(m_1 = 6 \times 10^{24}\) किग्रा
\(m_2 = 7.4 \times 10^{22}\) किग्रा
\(r = 3.84 \times 10^8\) मीटर
न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम के अनुसार,
\[F = G \frac{m_1 m_2}{r^2}\]
या,
\[F = \frac{6.67 \times 10^{-11} \times 6 \times 10^{24} \times 7.4 \times 10^{22}}{(3.84 \times 10^8)^2}\]
\[= \frac{6.67 \times 6 \times 7.4 \times 10^{46} \times 10^{-11}}{3.84 \times 3.84 \times 10^{16}}\]
\[= \frac{6.67 \times 7.4}{0.64 \times 3.84} \times 10^{19}\]
\[= \frac{49.36}{2.46} \times 10^{19}\]
\[= 20.146 \times 10^{19}\]
\[= 2.01 \times 10^{20} \text{ न्यूटन ।}\]
In simple words: पृथ्वी और चंद्रमा जैसे विशाल द्रव्यमान वाले पिंडों के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल बहुत अधिक होता है, जो उन्हें एक-दूसरे की परिक्रमा करने के लिए बाध्य करता है। इस गणना के अनुसार यह बल लगभग \(2.01 \times 10^{20}\) न्यूटन है।

🎯 Exam Tip: खगोलीय पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल की गणना करते समय, बहुत बड़े घातांकों को संभालना और सभी मानों को सही SI इकाइयों में रखना महत्वपूर्ण है। गणना में सटीकता के लिए घातांक के नियमों का सही ढंग से पालन करें।

 

Question 12. एक गेंद 490 मीटर-सेकण्ड\(^{-1}\) के वेग से ऊध्वाधरतः ऊपर की ओर फेंकी जाती है। इसके द्वारा प्राप्त महत्तम ऊँचाई ज्ञात कीजिए । (\(g = 9.8\) मी./से)
Answer: हल - \(u = 490\) मी.से\(^{-1}\), \(g = 9.8\) मी/से\(^{-2}\), \(v = 0\)
महत्तम ऊँचाई (H) = ?
\(v^2 = u^2 - 2gH\)
\[(0)^2 = (490)^2 - 2 \times 9.8 \times H\]
\[H = \frac{490 \times 490}{2 \times 9.8} = \frac{245 \times 245}{4.9}\]
\[= 245 \times 50 = 12,250 \text{ मीटर}\]
\[= \frac{12,250}{1000} \text{ किमी } = 12.25 \text{ किमी।}\]
In simple words: 490 मी/से के प्रारंभिक वेग से ऊपर फेंकी गई गेंद 12,250 मीटर (या 12.25 किमी) की अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचेगी, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण इसे धीमा कर देता है जब तक कि इसका वेग शून्य न हो जाए।

🎯 Exam Tip: उच्चतम बिंदु पर अंतिम वेग \(v=0\) होता है। ऊर्ध्वाधर गति के समीकरणों का उपयोग करते समय \(g\) का मान ऋणात्मक लेना न भूलें जब वस्तु ऊपर की ओर जा रही हो।

 

Question 13. पृथ्वी की ओर गिरने वाली वस्तु का त्वरण 10 मी/से\(^2\) होता है। यदि कोई गेंद 20 मीटर की ऊँचाई से छोड़ी जाय तो वह कितने समय में तथा किस वेग से पृथ्वी तल पर पहुँचेगी?
Answer: पृथ्वी की ओर गिरने वाली वस्तु का त्वरण \((g) = 10\) मी/से\(^2\)
ऊँचाई \((h) = 20\) मी, समय \((t) = ?\)
अन्तिम वेग \((v) = ?\), प्रारंभिक वेग \((u) = 0\)
\(h = ut + \frac{1}{2}gt^2\) से
\[20 = 0 \times t + \frac{1}{2} \times 10 \times t^2\]
\[20 = 5t^2\]
\[t^2 = 4\]
\[t = 2 \text{ सेकण्ड ।}\]
\(v = u + gt\) से
\[v = 0 + 10 \times 2\]
\[v = 20 \text{ मी/से}^{-1}\]
In simple words: 20 मीटर की ऊँचाई से गिराई गई गेंद 2 सेकंड में पृथ्वी पर 20 मी/से के अंतिम वेग से पहुँचेगी, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण के कारण वह निरंतर त्वरित होती है।

🎯 Exam Tip: मुक्त पतन की समस्याओं के लिए, प्रारंभिक वेग को शून्य लें और गुरुत्वीय त्वरण \(g\) को धनात्मक मानें। समय और अंतिम वेग दोनों की गणना के लिए गति के समीकरणों का सही ढंग से उपयोग करें।

 

Question 14. एक पिण्ड 15 मीटर. से\(^{-1}\) के वेग से ऊपर की ओर फेंका जाता है। पिण्ड पर पृथ्वी के कारण उत्पन्न होने वाला त्वरण 10 मी.से\(^{-1}\) नीचे की दिशा में कार्य करता है। ज्ञात कीजिए
(i) पिण्ड अधिकतम कितनी ऊँचाई तक जायेगा?
(ii) कितने समय बाद पिण्ड पृथ्वी पर वापस लौटेगा?
(iii) अधिकतम ऊँचाई की आधी ऊँचाई पर पिण्ड का वेग कितना होगा?

Answer: हल - \(u = 15\) मी.से\(^{-1}\), \(g = 10\) मी/से\(^2\)
(i) अधिकतम ऊँचाई \((h)= ?\), \(v = 0\)
\(v^2 = u^2 - 2gh\)
\[(0)^2 = (15)^2 - 2 \times 10 \times h\]
या, \(20h = 225 \implies h = \frac{225}{20}\)
\[= 11.25 \text{ मी. ।}\]
(ii) समय \((t) = ?\)
\(h = ut + \frac{1}{2}gt^2\) से
\[11.25 = 0 \times t + \frac{1}{2} \times 10 \times t^2\]
\(\implies 5t^2 = 11.25\)
\[t^2 = \frac{11.25}{5} = 2.25\]
दोनों पक्षों का वर्गमूल लेने पर,
\(\implies t = \sqrt{2.25} = 1.5\)
\(\implies\) पृथ्वी पर आने में लगा कुल समय \( = 2 \times t = 2 \times 1.5 = 3\) सेकण्ड
(iii) अधिकतम ऊँचाई की आधी ऊँचाई पर पिण्ड का वेग
\(v^2 = u^2 - 2gh\)
\[v^2 = (15)^2 - 2 \times 10 \times 5.625\]
\[v^2 = 225 - 112.5 = 112.5\]
दोनों पक्षों का वर्गमूल लेने पर,
\[v = \sqrt{112.5} = 10.6 \text{ मी/से}^{-2}\]
In simple words: 15 मी/से के वेग से ऊपर फेंका गया पिंड 11.25 मीटर की अधिकतम ऊँचाई तक जाएगा, जिसमें 1.5 सेकंड का समय लगेगा और यह 3 सेकंड बाद वापस लौटेगा। अधिकतम ऊँचाई की आधी दूरी पर इसका वेग लगभग 10.6 मी/से होगा।

🎯 Exam Tip: ऊपर की ओर गति के लिए \(g\) को ऋणात्मक लें। कुल समय ऊपर जाने और नीचे आने के समय का योग होता है। आधी ऊँचाई पर वेग ज्ञात करने के लिए गति के तीसरे समीकरण का उपयोग करें।

 

Question 15. एक भवन की छत से गिराये जाने पर एक गेंद 3 सेकण्ड में पृथ्वी पर गिरती है। पृथ्वी की ओर गेंद का त्वरण 10 मी.से\(^{-2}\) मानकर भवन की ऊँचाई ज्ञात कीजिए ।
Answer: हल - समय \((t) = 3\) से, त्वरण \((g) = 10\) मी.से\(^{-2}\)
ऊँचाई \((h) = ?\), \(u = 0\)
\(h = ut + \frac{1}{2}gt^2\) से
\[h = 0 \times 3 + \frac{1}{2} \times 10 \times (3)^2\]
\[= 5 \times 9 = 45 \text{ मीटर।}\]
In simple words: भवन की छत से गिराई गई गेंद 3 सेकंड में पृथ्वी पर गिरती है, तो भवन की ऊँचाई 45 मीटर है, क्योंकि मुक्त पतन में वस्तु गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरित होती है।

🎯 Exam Tip: मुक्त पतन के लिए प्रारंभिक वेग (\(u\)) को शून्य लें। गति के दूसरे समीकरण (\(s=ut+\frac{1}{2}at^2\)) का उपयोग करके ऊँचाई (\(h\)) की गणना करें, जहाँ \(a=g\)।

 

अभ्यास प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

निर्देश – प्रत्येक प्रश्न में दिये गये वैकल्पिक उत्तरों में सही उत्तर चुनिए-

 

Question 1. दो वस्तुओं के बीच गुरुत्वाकर्षण बल निर्भर नहीं करता
(a) उनके बीच की दूरी पर
(b) उनके द्रव्यमानों के गुणनफल पर
(c) गुरुत्वाकर्षण नियतांक पर
(d) ब्रह्माण्ड में उनकी स्थिति पर

Answer: (d) ब्रह्माण्ड में उनकी स्थिति पर
In simple words: गुरुत्वाकर्षण बल दो वस्तुओं के बीच की दूरी, उनके द्रव्यमान और गुरुत्वाकर्षण नियतांक पर निर्भर करता है, न कि ब्रह्मांड में उनकी निरपेक्ष स्थिति पर।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के सूत्र \(F = G\frac{m_1 m_2}{r^2}\) को याद रखें और इसके प्रत्येक पद के महत्व को समझें। \(G\) एक सार्वत्रिक नियतांक है जो स्थिति पर निर्भर नहीं करता।

 

Question 2. पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का मान किसी पिण्ड के
(a) द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता
(b) द्रव्यमान पर निर्भर करता है।
(c) आकार पर निर्भर करता है।
(d) घनत्व पर निर्भर करता है।

Answer: (a) द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता
In simple words: पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण (g) किसी वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है; यही कारण है कि भारी और हल्की वस्तुएँ (वायु प्रतिरोध के बिना) एक ही दर से गिरती हैं।

🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। गुरुत्वीय त्वरण \((g)\) वस्तु के द्रव्यमान से स्वतंत्र होता है, यह केवल ग्रह के द्रव्यमान और त्रिज्या पर निर्भर करता है।

 

Question 3. 'g' का अर्थ है
(a) पृथ्वी का आकर्षण बल
(b) गुरुत्व
(c) गुरुत्वाकर्षण
(d) स्वतंत्र रूप से गिरती हुई वस्तु के वेग में त्वरण

Answer: (d) स्वतंत्र रूप से गिरती हुई वस्तु के वेग में त्वरण
In simple words: 'g' गुरुत्वीय त्वरण को दर्शाता है, जो गुरुत्वाकर्षण बल के कारण स्वतंत्र रूप से गिरती हुई वस्तुओं में उत्पन्न होता है।

🎯 Exam Tip: 'g' और 'G' के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से समझें। 'g' एक त्वरण है, जबकि 'G' एक सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक है।

 

Question 4. विरामावस्था से स्वतंत्र रूप से गिरते हुए पिण्ड द्वारा पहले सेकण्ड में गिरी गयी दूरी का मान होगा
(a) g मीटर
(b) 2g मीटर
(c) \(\frac{1}{2}g\) मीटर
(d) g मीटर

Answer: (c) \(\frac{1}{2}g\) मीटर
In simple words: विरामावस्था से स्वतंत्र रूप से गिरते हुए पिंड द्वारा पहले सेकंड में तय की गई दूरी गति के दूसरे समीकरण \(s = ut + \frac{1}{2}gt^2\) से \(u=0\) और \(t=1\) सेकंड रखने पर \(\frac{1}{2}g\) मीटर होगी।

🎯 Exam Tip: गति के समीकरणों को लागू करते समय प्रारंभिक वेग (\(u\)) और समय (\(t\)) के मानों पर ध्यान दें। मुक्त पतन के लिए \(u=0\)।

 

Question 5. यदि पृथ्वी का द्रव्यमान बिनो परिवर्तित हुए, उसका व्यास आधा हो जाये तो पृथ्वी पर किसी वस्तु का भार
(a) आधा रह जायेगा
(b) दो गुना हो जायेगा
(c) चार गुना हो जायेगा
(d) अपरिवर्तनीय रहेगा

Answer: (c) चार गुना हो जायेगा
In simple words: यदि पृथ्वी का द्रव्यमान समान रहे और व्यास आधा हो जाए (यानी त्रिज्या आधी हो जाए), तो गुरुत्वीय त्वरण (g) चार गुना बढ़ जाएगा, जिससे वस्तु का भार भी चार गुना हो जाएगा क्योंकि \(g \propto \frac{1}{R^2}\)।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वीय त्वरण \(g = \frac{GM}{R^2}\) के सूत्र को याद रखें। भार द्रव्यमान और गुरुत्वीय त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है (\(W=mg\))। त्रिज्या आधी होने पर \(g\) चार गुना हो जाता है।

 

Question 6. भिन्न-भिन्न द्रव्यमानों के दो पिण्ड स्वतंत्रतापूर्वक समान ऊँचाई से छोड़े जाते हैं। इन पिण्डों के
(a) भूमि पर पहुँचने के समय भिन्न-भिन्न होंगे
(b) त्वरण भिन्न-भिन्न होंगे।
(c) भूमि पर पहुँचते समय वेग भिन्न-भिन्न होंगे
(d) पृथ्वी की ओर आकर्षण बल भिन्न-भिन्न होंगे

Answer: (d) पृथ्वी की ओर आकर्षण बल भिन्न-भिन्न होंगे
In simple words: मुक्त पतन में वस्तुओं का त्वरण (g) उनके द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता, इसलिए वे एक ही समय पर और समान वेग से जमीन पर पहुँचती हैं। हालाँकि, उन पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उनके द्रव्यमान पर निर्भर करता है, इसलिए वह भिन्न होगा।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वीय त्वरण द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है, लेकिन गुरुत्वाकर्षण बल द्रव्यमान पर निर्भर करता है (\(F=mg\))। इस अंतर को समझें ताकि आप सही विकल्प चुन सकें।

 

Question 7. गुरुत्वाकर्षण नियतांक को मात्रकः
(a) न्यूटन.मी\(^2\) किग्रा\(^{-2}\)
(b) न्यूटन.मी\(^2\) किग्रा\(^2\)
(c) न्यूटन.मी\(^2\) किग्रा\(^2\)
(d) मी. से\(^{-2}\)

Answer: (a) न्यूटन.मी\(^2\) किग्रा\(^{-2}\)
In simple words: गुरुत्वाकर्षण नियतांक (G) का SI मात्रक न्यूटन मीटर\(^{2}\) प्रति किलोग्राम\(^{2}\) (Nm\(^{2}\)kg\(^{-2}\)) है, जो गुरुत्वाकर्षण बल के सूत्र \(F = G\frac{m_1 m_2}{r^2}\) से प्राप्त होता है।

🎯 Exam Tip: भौतिकी में नियतांकों की इकाइयों को याद रखना महत्वपूर्ण है। गुरुत्वाकर्षण नियतांक \(G\) के लिए, सूत्र को पुनर्व्यवस्थित करके आप इकाई को आसानी से व्युत्पन्न कर सकते हैं: \(G = \frac{Fr^2}{m_1 m_2}\)।

 

Question 8. चन्द्रमा का द्रव्यमान, पृथ्वी के द्रव्यमान का लगभग है। यदि चन्द्रमा पर पृथ्वी का आकर्षण बल F हो, तो पृथ्वी पर चन्द्रमा का आकर्षण बल होगा
(a) \(\frac{F}{6}\)
(b) F
(c) 9F
(d) 81F

Answer: (b) F
In simple words: न्यूटन के गति के तीसरे नियम के अनुसार, यदि चंद्रमा पर पृथ्वी का आकर्षण बल F है, तो पृथ्वी पर चंद्रमा का आकर्षण बल भी समान परिमाण F का होगा।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के तीसरे नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम) को याद रखें, जिसके अनुसार प्रत्येक क्रिया की समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। गुरुत्वाकर्षण बल भी इसी नियम का पालन करता है।

 

Question 9. किसी व्यक्ति का द्रव्यमान 60 किग्रा है, उसका द्रव्यमान चन्द्रमा पर होगा
(a) 60 किग्रा
(b) 10 किग्रा
(c) 360 किग्रा
(d) सभी गलत हैं।

Answer: (a) 60 किग्रा
In simple words: द्रव्यमान एक वस्तु में पदार्थ की मात्रा है, जो स्थान बदलने पर नहीं बदलती। इसलिए, यदि किसी व्यक्ति का द्रव्यमान पृथ्वी पर 60 किग्रा है, तो चंद्रमा पर भी उसका द्रव्यमान 60 किग्रा ही रहेगा।

🎯 Exam Tip: द्रव्यमान और भार के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें। द्रव्यमान एक अचर राशि है जबकि भार (गुरुत्वाकर्षण बल) स्थान के गुरुत्वीय त्वरण पर निर्भर करता है।

 

Question 10. किसी पिंड का भार पृथ्वी पर 36 किग्रा भार है, चन्द्रमा पर उसका भार होगा
(a) 36 किग्रा- भार
(b) 6 किग्रा-भार
(c) 216 किग्रा-भार
(d) सभी गलत हैं।

Answer: (b) 6 किग्रा-भार
In simple words: चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का लगभग 1/6वां हिस्सा होता है, इसलिए पिंड का चंद्रमा पर भार पृथ्वी पर उसके भार का 1/6 होगा, यानी 6 किग्रा-भार।

🎯 Exam Tip: चंद्रमा पर भार हमेशा पृथ्वी पर भार का 1/6 होता है। इस संबंध को याद रखें और इसे सीधे लागू करें।

 

Question 11. किसी पत्थर को एक भवन की छत से छोड़ा गया, यह 2 सेकण्ड में पृथ्वी पर पहुँच गया, भवन की ऊँचाई होगी
(a) 9.8 मी
(b) 19.6 'मी
(c) 4.9 मी
(d) 39.2 मी

Answer: (b) 19.6 मी
In simple words: 2 सेकंड में स्वतंत्र रूप से गिरने वाले पत्थर द्वारा तय की गई दूरी गति के समीकरण \(h = ut + \frac{1}{2}gt^2\) से ज्ञात की जा सकती है, जहाँ \(u=0\) और \(g \approx 9.8\) मी/से\(^{2}\), जिससे ऊँचाई 19.6 मीटर होगी।

🎯 Exam Tip: मुक्त पतन के प्रश्नों के लिए, प्रारंभिक वेग \((u)\) शून्य लें और त्वरण \((a)\) को गुरुत्वीय त्वरण \((g)\) मानें। \(g\) का मान 9.8 मी/से\(^{2}\) या 10 मी/से\(^{2}\) (यदि निर्दिष्ट हो) का उपयोग करें।

 

Question 12. स्वतन्त्रतापूर्वक गिराई गयी वस्तु द्वारा चली गयी दूरी समानुपाती होती है
(a) t के
(b) \(\sqrt{t}\) के
(c) \(t^2\) के
(d) के

Answer: (c) \(t^2\) के
In simple words: स्वतंत्रतापूर्वक गिराई गई वस्तु का प्रारंभिक वेग शून्य होता है, इसलिए गति के समीकरण \(s = ut + \frac{1}{2}at^2\) से, दूरी \(s \propto t^2\) होती है।

🎯 Exam Tip: गति के समीकरणों को याद रखें। मुक्त पतन के लिए, \(u=0\), इसलिए \(s = \frac{1}{2}gt^2\), जिससे यह स्पष्ट होता है कि \(s\) समय के वर्ग के समानुपाती है।

 

Question 13. किसी वस्तु का द्रव्यमान 10 किग्रा है उसका पृथ्वी पर भार होगा
(a) 9.8N
(b) 8.9 N
(c) 89.0 N
(d) 98.0 N

Answer: (d) 98.0 N
In simple words: वस्तु का भार उसके द्रव्यमान और गुरुत्वीय त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है (\(W = mg\))। 10 किग्रा द्रव्यमान और \(g \approx 9.8\) मी/से\(^{2}\) के साथ, भार 98 न्यूटन होगा।

🎯 Exam Tip: भार की गणना का सूत्र (\(W = mg\)) याद रखें। \(g\) का मान लगभग 9.8 मी/से\(^{2}\) होता है, और भार की इकाई न्यूटन (N) है।

 

Question 14. पृथ्वी के केन्द्र से 12,800 किमी की दूरी पर गुरुत्वीय त्वरण 'g' का मान होगा-
(a) पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का
(b) पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का
(c) समान होगा।
(d) पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का दुगुना

Answer: (b) पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का
In simple words: पृथ्वी की सतह पर त्रिज्या 6400 किमी है। केंद्र से 12800 किमी की दूरी (जो सतह से 6400 किमी ऊपर है) पर गुरुत्वीय त्वरण का मान बदल जाएगा।

🎯 Exam Tip: पृथ्वी के केंद्र से दूरी बढ़ने पर गुरुत्वीय त्वरण \((g)\) कम होता जाता है। पृथ्वी की सतह पर \(g\) का मान सबसे अधिक होता है और केंद्र पर शून्य होता है।

 

Question 15. पृथ्वी पर किसी ऊँचाई से गिरने वाला पत्थर
(a) पृथ्वी द्वारा आकर्षित होता है ।
(b) पृथ्वी को आकर्षित करता है।
(c) पृथ्वी तथा पत्थर दोनों एक-दूसरे को आकर्षित | करते हैं।
(d) उपर्युक्त सभी कथन गलत हैं।

Answer: (c) पृथ्वी तथा पत्थर दोनों एक-दूसरे को आकर्षित | करते हैं।
In simple words: न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के नियम के अनुसार, सभी वस्तुएँ एक-दूसरे को आकर्षित करती हैं, इसलिए पृथ्वी और पत्थर दोनों एक-दूसरे को आकर्षित करेंगे।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण एक पारस्परिक बल है। इसका मतलब है कि दो वस्तुएं हमेशा एक-दूसरे को आकर्षित करती हैं, समान परिमाण के बल से, भले ही उनके द्रव्यमान अलग-अलग हों।

 

Question 16. दो वस्तुओं के मध्य की दूरी दो गुनी कर दी जाये तो उनके मध्य लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल हो जायेगा
(a) एक चौथाई
(b) आधा
(c) दुगुना
(d) प्रभावित नहीं होगा

Answer: (a) एक चौथाई
In simple words: गुरुत्वाकर्षण बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है, इसलिए यदि दूरी दोगुनी कर दी जाती है, तो बल 1/\((2^2)\) यानी 1/4 गुना हो जाएगा।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण बल के व्युत्क्रमानुपाती वर्ग नियम को याद रखें: \(F \propto \frac{1}{r^2}\)। दूरी में परिवर्तन का बल पर क्या प्रभाव पड़ता है, यह जानने के लिए इस संबंध को लागू करें।

 

Question 17. गुरुत्वीय त्वरण का मान
(a) पृथ्वी के प्रत्येक स्थान पर समान होता है ।
(b) सभी ग्रहों और उपग्रहों पर समान होता है ।
(c) भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न होता है ।
(d) उपर्युक्त सभी कथन असत्य हैं।

Answer: (c) भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न होता है ।
In simple words: गुरुत्वीय त्वरण (g) पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों (जैसे ध्रुवों और विषुवत रेखा पर) और विभिन्न ग्रहों या उपग्रहों पर उनके द्रव्यमान और त्रिज्या के कारण अलग-अलग होता है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वीय त्वरण \((g)\) ग्रह के द्रव्यमान और त्रिज्या पर निर्भर करता है, और पृथ्वी पर भी यह स्थानों के अनुसार थोड़ा बदलता रहता है (जैसे ध्रुवों पर अधिक, विषुवत रेखा पर कम)।

 

Question 18. गुरुत्वीय स्थिरांक (G) का मान
(a) पृथ्वी के प्रत्येक स्थान पर असमान होता है ।
(b) सभी ग्रहों और उपग्रहों पर समान होता है ।
(c) भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न होता है ।
(d) उपर्युक्त सभी कथन असत्य हैं।

Answer: (b) सभी ग्रहों और उपग्रहों पर समान होता है ।
In simple words: गुरुत्वीय स्थिरांक (G) एक सार्वत्रिक नियतांक है, जिसका मान पूरे ब्रह्मांड में, किसी भी स्थान पर और किसी भी वस्तु के लिए समान रहता है।

🎯 Exam Tip: 'G' (सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक) और 'g' (गुरुत्वीय त्वरण) के बीच के मूलभूत अंतर को समझें। 'G' हमेशा स्थिर रहता है, जबकि 'g' बदलता रहता है।

 

Question 19. गुरुत्वीय स्थिरांक (G) का मान S.I. मात्रक है-
(a) Nm\(^2\)/kg
(b) Nm\(^2\)/kg\(^2\)
(c) N\(^2\)m/kg
(d) Nm\(^2\)/kg\(^2\)

Answer: (d) Nm\(^2\)/kg\(^2\)
In simple words: गुरुत्वीय स्थिरांक (G) का SI मात्रक न्यूटन मीटर\(^{2}\) प्रति किलोग्राम\(^{2}\) (Nm\(^{2}\)/kg\(^{2}\)) है, जो गुरुत्वाकर्षण बल के सूत्र से प्राप्त होता है।

🎯 Exam Tip: भौतिक नियतांकों की इकाइयों को व्युत्पन्न करने या याद रखने में सक्षम होना महत्वपूर्ण है। गुरुत्वाकर्षण बल के सूत्र \(F = G\frac{m_1 m_2}{r^2}\) से \(G\) की इकाई आसानी से निकाली जा सकती है।

 

Question 20. यदि पृथ्वी का द्रव्यमान व अर्द्धव्यास दोनों आधे कर दिये जायें तो गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान होगा
(a) 9.8 मी/से\(^2\)
(b) 19.6 मी/से\(^2\)
(c) 4.9 मी/से\(^2\)
(d) 29.4 मी/से\(^2\)

Answer: (b) 19.6 मी/से\(^2\)
In simple words: यदि द्रव्यमान और त्रिज्या दोनों आधे कर दिए जाएं, तो गुरुत्वीय त्वरण \(g = \frac{GM}{R^2}\) के अनुसार, नया \(g'\) होगा \(G \frac{M/2}{(R/2)^2} = G \frac{M/2}{R^2/4} = 2 \frac{GM}{R^2} = 2g\)। इसलिए, \(g'\) का मान 2 \(\times\) 9.8 = 19.6 मी/से\(^{2}\) हो जाएगा।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वीय त्वरण के सूत्र \(g = \frac{GM}{R^2}\) में द्रव्यमान और त्रिज्या में होने वाले परिवर्तनों को सही ढंग से लागू करें। आनुपातिकता संबंध का उपयोग करके गणना को सरल बनाएं।

 

उत्तरमाला

1. (d) 2. (a) 3. (d) 4. (c) 5. (c) 6. (d) 7. (a) 8. (b) 9. (a) 10. (b) 11. (b) 12. (c) 13. (d) 14. (b) 15. (c) 16. (a) 17. (c) 18. (b) 19. (b) 20. (b)

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Yes, we provide bilingual support for Class 9 Science. You can access UP Board Solutions Class 9 Science Chapter 10 आकर्षण-शक्ति in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Science UP Board solutions for Class 9 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 9 Science Chapter 10 आकर्षण-शक्ति in printable PDF format for offline study on any device.