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Detailed Chapter 7 त्रिभुज UP Board Solutions for Class 9 Maths
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Class 9 Maths Chapter 7 त्रिभुज UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 9 Maths Chapter 7 Triangles (त्रिभुज)
प्रश्नावली 7.1
Question 1. चतुर्भुज ACBD में, AC = AD है और रेखाखण्ड AB, ∠A को समद्विभाजित करता है। दर्शाइए कि △ABC = ∆ABD है। BC और BD के बारे में आप क्या कह सकते हैं?
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक चतुर्भुज ACBD को दर्शाता है, जहाँ एक रेखाखंड AB शीर्ष A को कोण ∠A में समद्विभाजित करता है। बिंदु C और D रेखाखंड AB के विपरीत दिशा में हैं। भुजा AC और AD की लम्बाई समान है।
Answer: हल : दिया है : ACBD एक चतुर्भुज है जिसमें भुजा AC = AD है और रेखाखण्ड AB, ∠A को समद्विभाजित करता है। सिद्ध करना है : △ABC = ∆ABD; और ज्ञात करना है : BC और BD में सम्बन्ध । उपपत्तिः △ABC और △ABD की तुलना करने पर, AC = AD (दिया है) ∠CAB = ∠DAB (दिया है)। AB = AB (उभयनिष्ठ है) △ABC = ∆ABD (S.A.S. से) Proved. BC = BD
In simple words: प्रश्न में दी गई जानकारी के अनुसार, AC = AD और AB, ∠A को समद्विभाजित करता है। SAS सर्वांगसमता नियम का उपयोग करके, हम △ABC और ∆ABD को सर्वांगसम सिद्ध कर सकते हैं, जिससे BC = BD प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: सर्वांगसमता नियमों (जैसे SAS) का सही उपयोग करना और संगत भागों (CPCTC) को पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 2. ABCD एक चतुर्भुज है जिसमें AD = BC और ∠DAB = ∠CBA है। सिद्ध कीजिए कि
(i) ∆ABD = ΔΒАС
(ii) BD = AC
(iii) ∠ABD = ∠BAC
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक चतुर्भुज ABCD को दर्शाता है। इसमें दो विकर्ण AC और BD खींचे गए हैं। भुजा AD और BC बराबर हैं, और ∠DAB और ∠CBA भी बराबर दिए गए हैं।
Answer: हल : दिया है : चतुर्भुज ABCD में AD = BC और ∠DAB = ∠CBA सिद्ध करना है : (i) △ABD = ∆BAC (ii) BD = AC (iii) ∠ABD = ∠BAC उपपत्ति (i) △ABD और △BAC में, AD = BC (दिया है) ∠DAB = ∠CBA (दिया है) AB = AB (उभयनिष्ठ है) △ABD = ∆BAC (S.A.S. से) (ii) सर्वांगसम त्रिभुजों में संगत मापें बराबर होती हैं और △ABD और ABAC सर्वांगसम हैं। संगत भुजाएँ BD = AC (iii) ∆ABD = ∆BAC ∠ABD = ∠BAC (C.P.C.T.) Proved.
In simple words: हम SAS सर्वांगसमता का उपयोग करके △ABD और ∆BAC को सर्वांगसम सिद्ध करते हैं। एक बार त्रिभुज सर्वांगसम हो जाते हैं, तो उनके संगत भाग (जैसे BD और AC, या ∠ABD और ∠BAC) बराबर हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग (CPCTC) एक महत्वपूर्ण प्रमेय है जिसका उपयोग भुजाओं और कोणों की समानता सिद्ध करने के लिए किया जाता है।
Question 3. एक रेखाखण्ड AB पर AD और BC दो बराबर लम्ब रेखाखण्ड हैं। दर्शाइए कि CD, रेखाखण्ड AB को समद्विभाजित करता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में एक रेखाखंड AB है। बिंदु A पर AD एक लंब है और बिंदु B पर BC एक लंब है, और AD = BC दिया गया है। रेखाखंड CD खींचा गया है जो AB को बिंदु O पर काटता है।
Answer: हल : दिया है : AB एक रेखाखण्ड है जिसके सिरों A तथा B पर क्रमशः AD और BC लम्ब इस प्रकार हैं कि AD = BC सिद्ध करना है : CD, रेखाखण्ड AB को समद्विभाजित करता है। उपपत्तिः प्रश्नानुसार, ∠DAB = 90°
\( \implies \) ∠DAO = 90° तथा ∠CBA = 90°
\( \implies \) ∠CBO = 90° ∠DAO = ∠CBO ...(1) ∠AOD = ∠COB ...(2) (शीर्षाभिमुख कोण) (1) और (2) को जोड़ने पर, ∠DAO + ∠AOD = ∠CBO + ∠COB
\( \implies \) 180° – ∠ADO = 180° – ∠BCO (त्रिभुज के अन्तःकोणों का योग 180° होता है ।)
\( \implies \) ∠ODA = ∠OCB ... (3) अब △AOD व △BOC में, ∠DAO = ∠CBO [समीकरण (1) से] AD = BC (दिया है) ∠ODA = ∠OCB [ समीकण (3) से] ∆AOD = ∆BOC (A.S.A. से) AO = BO (C.P.C.T.) रेखाखण्ड AB बिन्दु O पर समद्विभाजित होता है। अतः CD, रेखाखण्ड AB को बिन्दु O पर समद्विभाजित करता है। Proved.
In simple words: AD और BC रेखाखंड AB पर लंब हैं और बराबर हैं। हम ASA सर्वांगसमता का उपयोग करके त्रिभुज AOD और BOC को सर्वांगसम सिद्ध करते हैं। इससे AO = BO प्राप्त होता है, जिसका अर्थ है कि CD, AB को समद्विभाजित करता है।
🎯 Exam Tip: शीर्षाभिमुख कोणों और त्रिभुज के कोण योग गुण का उपयोग करके कोणों की समानता स्थापित करना, फिर ASA सर्वांगसमता का प्रयोग करना एक सामान्य विधि है।
Question 4. l और m दो समान्तर रेखाएँ हैं जिन्हें समान्तर रेखाओं pऔर qका एक अन्य युग्म प्रतिच्छेदित करता है। दर्शाइए कि ∆ABC = ∆CDA
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में दो समांतर रेखाएँ l और m हैं, जिन्हें दो अन्य समांतर रेखाएँ p और q का एक युग्म प्रतिच्छेदित करता है। ये प्रतिच्छेदन बिंदु A, B, C, और D हैं। एक विकर्ण AC खींचा गया है जो दो त्रिभुज △ABC और △CDA बनाता है।
Answer: हल: दिया है । l और m दो समान्तर रेखाएँ हैं जिनको एक अन्य दो समान्तर रेखाओं p और q का युग्म बिन्दुओं A, B, C और D पर प्रतिच्छेदित करता है। रेखाखण्डे AC खींचा गया है। सिद्ध करना है : △ABC = △CDA उपपत्ति : l || m और AC एक तिर्यक रेखाखण्ड इन्हें प्रतिच्छेदित करता है। ∠DAC = ∠BCA (एकान्तर कोण युग्म) इसी प्रकार, p || q है और AC एक तिर्यक रेखाखण्ड इन्हें प्रतिच्छेदित करता है। ∠DCA = ∠BAC (एकान्तर कोण युग्म) अब ∆ABC और △CDA में, ∠BCA = ∠DAC (ऊपर सिद्ध किया है) AC = AC (उभयनिष्ठ है) ∠BAC = ∠DCA (ऊपर सिद्ध किया है) ABC = △CDA (A.S.A से) Proved.
In simple words: समांतर रेखाओं के गुणों का उपयोग करके, हम एकान्तर कोणों की समानता स्थापित करते हैं। फिर, ASA सर्वांगसमता नियम का उपयोग करके, हम त्रिभुज ABC और CDA को सर्वांगसम सिद्ध करते हैं।
🎯 Exam Tip: समांतर रेखाओं के गुणों (जैसे एकान्तर अंतःकोण) और तिर्यक रेखा के निर्माण को समझना महत्वपूर्ण है। ASA सर्वांगसमता के लिए दो कोण और उनके बीच की भुजा की पहचान करें।
Question 5. रेखा l कोण A को समद्विभाजित करती है और B रेखा पर स्थित कोई बिन्दु है । BP और BQ कोण A की भुजाओं पर B से डाले गए लम्ब हैं। दर्शाइए कि
(i) ∆APB = ∆AQB
(ii) BP = BQ अर्थात बिन्दु B कोण A की भुजाओं से समदूरस्थ है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र कोण A को दर्शाता है जिसे रेखा l समद्विभाजित करती है। रेखा l पर बिंदु B स्थित है। बिंदु B से कोण A की भुजाओं AP और AQ पर क्रमशः BP और BQ लंब डाले गए हैं, जिससे दो समकोण त्रिभुज ∆APB और ∆AQB बनते हैं।
Answer: हल : दिया है। एक रेखा है जो ∠A को समद्विभाजित करती है। रेखा l पर कोई बिन्दु B स्थित है। बिन्दु B से ∠ A की भुजाओं AP और AQ पर क्रमशः BP और BQ लम्ब खींचे गए हैं। सिद्ध करना है : (i) ∆APB = ∆AQB, (ii) BP = BQ अर्थात् बिन्दु B कोण △ की भुजाओं से समदूरस्थ है । उपपत्ति : (i) BP \( \perp \) AP और BQ \( \perp \) AQ ∠P = 90° और ∠Q = 90° ...(1) A रेखा l, ∠A को समद्विभाजित करती है। ∠QAB = ∠PAB ∠QAB= ∠PAB = x° ...(2) तब ∆APB और △AQB के अन्त:कोणों के योग की समानता से, ∠ABP + ∠PAB + ∠P = ∠ABQ + ∠QAB + ∠Q ∠ABP + x + 90° = ∠ABQ + x° + 90° [समीकरण (1) तथा (2) से] ∠ABP =∠ABQ Proved. अब ∆APB और △AQB में, ∠PAB = ∠QAB (दिया है) AB = AB (उभयनिष्ठ है) ∠ABP = ∠ABQ (अभी सिद्ध किया है) ∆APB = ∆AQB (A.S.A से) (ii) : ∆APB = ∆AQB BP= BQ (C.P.C.T.) अर्थात बिन्दु B, ∠A की भुजाओं से समदूरस्थ है। Proved.
In simple words: क्योंकि रेखा l, ∠A को समद्विभाजित करती है और BP तथा BQ लंब हैं, हम ASA सर्वांगसमता नियम का उपयोग करके त्रिभुज APB और AQB को सर्वांगसम सिद्ध कर सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप BP = BQ होता है, जो दर्शाता है कि बिंदु B कोण A की दोनों भुजाओं से समान दूरी पर है।
🎯 Exam Tip: कोण समद्विभाजक के गुण और लंब की अवधारणा को सही ढंग से लागू करें। ASA सर्वांगसमता नियम ऐसे मामलों में बहुत उपयोगी होता है।
Question 6. दी गई आकृति में, AC = AE, AB = AD और ∠BAD = ∠EAC है, दर्शाइए कि BC = DE है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक ज्यामितीय विन्यास को दर्शाता है जिसमें दो त्रिभुज △ABC और △ADE शामिल हैं। इसमें भुजा AC = AE, AB = AD, और कोण ∠BAD = ∠EAC के रूप में दिए गए हैं।
Answer: हल : दिया है : दी गई आकृति के △ABD में AB = AD तथा △ACE में AC = AE है और ∠BAD = ∠EAC। रेखाखण्ड DE खींचा। गया है। सिद्ध करना है : BC = DE उपपत्ति : ∠BAD = ∠EAC दोनों ओर ∠DAC जोड़ने पर, ∠BAD + ∠DAC = ∠EAC + ∠DAC ∠BAC = ∠DAE अब △ABC तथा △ADE में, AB = AD (दिया है) ∠BAC = ∠DAE [ समीकरण (1) से] AC = AE (दिया है) △ABC = ADE (S.A.S. से) अतः BC = DE (C.P.C.T.) Proved.
In simple words: दिए गए कोण ∠BAD और ∠EAC में ∠DAC को जोड़ने पर हमें ∠BAC = ∠DAE मिलता है। भुजाओं की समानता (AB=AD, AC=AE) के साथ, SAS सर्वांगसमता नियम का उपयोग करके △ABC और △ADE को सर्वांगसम सिद्ध किया जा सकता है। सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भागों से BC = DE प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: कोणों में समान मान जोड़ने या घटाने जैसी छोटी लेकिन महत्वपूर्ण ज्यामितीय संक्रियाओं पर ध्यान दें ताकि सर्वांगसमता के लिए आवश्यक कोण की समानता स्थापित की जा सके।
Question 7. AB एक रेखाखण्ड है और Pइसका मध्य बिन्दु है । D और E रेखाखण्ड AB के एक ही ओर स्थित दो बिन्दु इस प्रकार हैं कि ∠BAD = ∠ABE और ∠EPA = ∠DPB है। दर्शाइए कि
(i) △DAP = △EBP
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में रेखाखंड AB है जिसका मध्य-बिंदु P है। बिंदु D और E रेखाखंड AB के एक ही तरफ स्थित हैं। ∠BAD = ∠ABE और ∠EPA = ∠DPB दिया गया है। दो त्रिभुज △DAP और △EBP बनते हैं।
Answer: हल : दिया है : AB एक रेखाखण्ड है जिसका मध्य-बिन्दु P है । AB के एक ही ओर दो बिन्दु D और E हैं। D से रेखाखण्ड DA और DP खींचे गए हैं और E से रेखाखण्ड EB और EP खींचे गए हैं जिससे ∠BAD = ∠ABE तथा ∠EPA = ∠DPB है। सिद्ध करना है : (i) △DAP = ∆EBP उपपत्ति (i) P, AB का मध्य बिन्दु है जिससे AP = BP और ∠BAD = ∠ABE (दिया है) ∠PAD = ∠PBE हमें ज्ञात है कि ∠EPA = ∠DPB दोनों पक्षों में ∠EPD जोड़ने पर, ∠EPA + ∠EPD = ∠DPB + ∠EPD ∠DPA = ∠EPB (चित्र से) अब ∆DAP तथा ∆EBP में, ∠DPA = ∠EPB (अभी सिद्ध किया है) AP = BP (P, AB का मध्य-बिन्दु है) ∠PAD = ∠PBE (सिद्ध कर चुके हैं) ∆DAP = ∆EBP (A.S.A. से) (ii) ∆DAP = ∆EBP Proved.
In simple words: P रेखाखंड AB का मध्य-बिंदु है, इसलिए AP=BP। दिए गए कोणों ∠EPA = ∠DPB में ∠EPD जोड़ने पर ∠DPA = ∠EPB मिलता है। ∠BAD = ∠ABE भी दिया गया है। ASA सर्वांगसमता नियम का उपयोग करके त्रिभुज DAP और EBP को सर्वांगसम सिद्ध किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: मध्य-बिंदु के गुण और कोणों में समान मान जोड़ने की विधि का उपयोग करके सर्वांगसमता के लिए आवश्यक शर्तों को पूरा करें। ASA सर्वांगसमता एक महत्वपूर्ण प्रमेय है।
Question 8. एक समकोण त्रिभुज ABC में, जिसमें ∠C समकोण है, M कर्ण AB का मध्य बिन्दु है । C को M से मिलाकर D तक इस प्रकार बढ़ाया गया है कि DM = CM है। बिन्दु D को बिन्दु B से मिला दिया जाता है। दर्शाइए कि :
(i) ∆AMC = ∆BMD
(ii) ∠DBC एक समकोण है।
(iii) ∆DBC = ∆ACB
(iv) CM = \( \frac{1}{2} \) AB
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक समकोण त्रिभुज ABC को दर्शाता है, जहाँ ∠C 90 डिग्री है। M, कर्ण AB का मध्य-बिंदु है। CM को D तक बढ़ाया गया है ताकि DM = CM हो, और D को B से जोड़ा गया है।
Answer: हल : दिया है: ABC एक समकोण त्रिभुज है जिसमें ∠C = 90° है तथा कर्ण AB को मध्य-बिन्दु M है। रेखाखण्ड CM खींचकर इसे बिन्दु D तक इस प्रकार बढ़ाया गया है कि CM = DM है। बिन्दु D को बिन्दु B से मिलाकर रेखा BD खींची गई है। सिद्ध करना है : (i) △AMC = ∆BMD (ii) ∠DBC एक समकोण है। (iii) △DBC = ∆ACB (iv) CM = AB उपपत्ति : (i) △AMC और △BMD में, AM = BM (M, AB का मध्य-बिन्दु है) ∠AMC = ∠BMD (शीर्षाभिमुख कोण) CM = DM (दिया है) △AMC = ∆BMD (S.A.S. से) (ii) △AMC = ∆BMD ∠MAC = ∠MBD AC || BD ∠DBC + ∠ACB = 180° ∠DBC + 90° = 180° (iii) △DBC और △ACB में, DB = AC (C.P.C.T.) [∆AMC = ∆BMD] ∠DBC = ∠ACB [ भाग (ii) से ] BC = BC (उभयनिष्ठ) △DBC = △ACB (S.A.S. से) (iv) DC = AB (C.P.C.T.) 2CM = AB (DM = CM) CM = \( \frac{1}{2} \) AB Proved.
In simple words: हम SAS सर्वांगसमता से △AMC और ∆BMD को सर्वांगसम सिद्ध करते हैं, जिससे AC || BD और ∠DBC = 90° प्राप्त होता है। फिर, △DBC और △ACB को SAS नियम से सर्वांगसम सिद्ध किया जाता है। अंततः, CM = \( \frac{1}{2} \) AB प्राप्त होता है क्योंकि DC = AB और CM = \( \frac{1}{2} \) DC।
🎯 Exam Tip: यह प्रमेय समकोण त्रिभुज के कर्ण के मध्य-बिंदु से संबंधित एक महत्वपूर्ण परिणाम है। सर्वांगसमता और समांतर रेखाओं के गुणों का चरण-दर-चरण अनुप्रयोग महत्वपूर्ण है।
प्रश्नावली 7.2
Question 1. एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC में जिसमें AB = AC है, ∠B और ∠C के समद्विभाजक परस्पर बिन्दु O पर प्रतिच्छेद करते हैं। A और O को जोड़िए और दर्शाइए कि
(i) OB = OC
(ii) AO, ∠A को समद्विभाजित करता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC को दर्शाता है जहाँ AB = AC है। कोण B और C के समद्विभाजक बिंदु O पर मिलते हैं। बिंदु A और O को एक रेखाखंड से जोड़ा गया है।
Answer: हल : दिया है : समद्विबाहु △ABC में, AB = AC है। ∠B और ∠C के समद्विभाजक BO तथा CO बिन्दु O पर मिलते हैं। रेखाखण्ड AO को जोड़ा गया है। सिद्ध करना है : (i) OB = OC (ii) AO, ∠A को समद्विभाजित करता है। उपपत्ति : (i) △ABC में, AC = AB (दिया है) ∠ABC = ∠ACB (त्रिभुज में समान भुजाओं के सम्मुख कोण समान होते हैं) \( \frac{1}{2} \) ∠ABC = \( \frac{1}{2} \) ∠ACB ∠OBC = ∠OCB ...(1) (BO, CO क्रमशः ∠B और ∠C के समद्विभाजक हैं) : △OBC में, ∠OBC = ∠OCB अतः OB = OC (त्रिभुज में समान कोणों की सम्मुख भुजाएँ समान होती हैं।) (ii) △ABO तथा △ACO में, AB = AC (दिया है) OB = OC (ऊपर सिद्ध किया है) AO = AO (उभयनिष्ठ भुजा है) △ABO = ∆ACO (S.S.S. से) ∠BAO = ∠CAO (C.P.C.T.) अर्थात, AO, ∠A को समद्विभाजित करता है। Proved.
In simple words: AB=AC के कारण △ABC में ∠ABC = ∠ACB होता है। कोण समद्विभाजक BO और CO के कारण ∠OBC = ∠OCB, जिससे त्रिभुज OBC में OB = OC प्राप्त होता है। फिर SSS सर्वांगसमता से △ABO और △ACO को सर्वांगसम सिद्ध करके, AO को ∠A का समद्विभाजक दिखाया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: समद्विबाहु त्रिभुज के गुणों (समान भुजाओं के सम्मुख कोण बराबर होते हैं) और कोण समद्विभाजक की अवधारणा को समझें। SSS सर्वांगसमता का अनुप्रयोग ऐसे प्रमाणों में आम है।
Question 2. △ABC में AD भुजा BC का लम्ब समद्विभाजक है दर्शाइए कि △ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें AB = AC है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक त्रिभुज ABC को दर्शाता है। एक रेखाखंड AD भुजा BC पर लंब है और उसे समद्विभाजित करता है। बिंदु D, BC का मध्य-बिंदु है और ∠ADB = ∠ADC = 90° है।
Answer: हल : दिया है : ABC एक त्रिभुज है जिसमें भुजा BC का लम्ब समद्विभाजक AD है। सिद्ध करना है : △ABC समद्विबाहु त्रिभुज है जिसमें AB = AC है । उपपत्ति : AD, BC का लम्ब समद्विभाजक है। BD = CD तथा ∠ADB = ∠ADC = 90° अब △ABD और △ACD में, BD = CD (ऊपर सिद्ध किया है) ∠ADB = ∠ADC (ऊपर सिद्ध किया है) AD = AD (उभयनिष्ठ भुजा है) △ABD = ∆ACD (S.A.S.से) AB = AC (C.P.C.T.) अर्थात् ∆ABC समद्विबाहु है। Proved.
In simple words: AD, BC का लंब समद्विभाजक होने के कारण, BD = CD और ∠ADB = ∠ADC = 90° होता है। SAS सर्वांगसमता का उपयोग करके △ABD और △ACD को सर्वांगसम सिद्ध किया जाता है, जिससे AB = AC प्राप्त होता है। अतः, त्रिभुज ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है।
🎯 Exam Tip: लम्ब समद्विभाजक की परिभाषा (लम्ब और मध्य-बिंदु) को याद रखें। SAS सर्वांगसमता का सीधा अनुप्रयोग इस प्रमेय को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है।
Question 3. ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें बराबर भुजाओं AC और AB पर क्रमशः शीर्षलम्ब BE तथा CF खींचे गए हैं। दर्शाइए कि ये शीर्ष लम्ब बराबर हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC को दर्शाता है जिसमें AB = AC है। शीर्ष B से AC पर शीर्षलंब BE खींचा गया है और शीर्ष C से AB पर शीर्षलंब CF खींचा गया है।
Answer: हल : दिया है : एक समद्विबाहु △ABC में AB = AC तथा शीर्ष B से भुजा AC पर BE लम्ब डाला गया है और शीर्ष C से भुजा AB पर CF लम्ब डाला। गया है। सिद्ध करना है : BE = CF उपपत्तिः △ABC में, AC = AB (दिया है) ∠ABC = ∠ACB ...(1) (त्रिभुज में समान भुजाओं के सम्मुख कोण समान होते हैं) अब △BCF और △CBE में, ∠BFC = ∠CEB (BE \( \perp \) AC तथा CF \( \perp \) AB) BC = BC (उभयनिष्ठ भुजा) ∠FBC = ∠ECB (∠ABC = ∠FBC तथा ∠ACB = ∠ECB) △BCF = ∆CΒΕ (A.S.A. से) BE = CF (C.P.C.T.) Proved. अर्थात दोनों शीर्षलम्ब बराबर हैं।
In simple words: क्योंकि AB=AC, तो △ABC में ∠ABC = ∠ACB होता है। फिर, त्रिभुज BFC और CEB में, ∠BFC = ∠CEB = 90°, BC उभयनिष्ठ भुजा है, और ∠FBC = ∠ECB। ASA सर्वांगसमता नियम से, △BCF और △CBE सर्वांगसम होते हैं, जिससे BE = CF सिद्ध होता है।
🎯 Exam Tip: समद्विबाहु त्रिभुज के आधार कोणों की समानता का उपयोग करें। शीर्षलंबों के कारण बनने वाले समकोणों और उभयनिष्ठ भुजा की पहचान करें, फिर ASA सर्वांगसमता लागू करें।
Question 4. ABC एक त्रिभुज है जिसमें AC और AB पर खींचे गए शीर्षलम्ब BE तथा CF बराबर हैं। दर्शाइए कि
(i) ∆ABE = ∆ACF
(ii) AB = AC अर्थात △ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक त्रिभुज ABC को दर्शाता है। शीर्ष B से भुजा AC पर BE एक शीर्षलंब है और शीर्ष C से भुजा AB पर CF एक शीर्षलंब है। BE और CF की लंबाई बराबर दी गई है।
Answer: हल : दिया है : △ABC में शीर्ष B से शीर्षलम्ब BE तथा शीर्ष C से शीर्षलम्ब CF, क्रमशः AC और AB पर इस प्रकार खींचे गए हैं कि BE = CF है। सिद्ध करना है : (i) ∆ABE = ∆ACF (ii) AB = AC अर्थात △ABC समद्विबाहु है। उपपत्ति : (i) BE शीर्षलम्ब है AC पर ∠AEB = 90° ∠ABE = 90° – A (त्रिभुज के अन्तःकोणों को योग 180° होता है) इसी प्रकार, CF शीर्षलम्ब है AB पर ∠AFC = 90° ∠ACF = 90° – A (त्रिभुज के अन्तःकोणों का योग 180° होता है) ∠ABE = ∠ACF .......(1) अब ∆ABE और △ACF में, ∠ABE = ∠ACF [समीकरण (1) से] BE = CF (दिया है) ∠AEB= ∠AFC (प्रत्येक 90°) ∆ABE = ∆ACF (A.S.A.से) (ii) ∆ABE = ∆ACF AB = AC (C.P.C.T.) अतः △ABC समद्विबाहु है। Proved.
In simple words: BE और CF के शीर्षलंब होने के कारण ∠AEB और ∠AFC 90° होते हैं। त्रिभुज के कोण योग गुण का उपयोग करके ∠ABE = ∠ACF सिद्ध किया जा सकता है। फिर, ASA सर्वांगसमता नियम से △ABE और △ACF सर्वांगसम होते हैं, जिससे AB = AC प्राप्त होता है, और त्रिभुज ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज बन जाता है।
🎯 Exam Tip: समकोण त्रिभुजों में कोणों के संबंधों को समझें। ASA सर्वांगसमता का प्रभावी ढंग से उपयोग करके भुजाओं की समानता (और इस प्रकार समद्विबाहु प्रकृति) स्थापित की जा सकती है।
Question 5. ABC और DBC समान (एक ही) आधार पर स्थित दो समद्विबाहु त्रिभुज हैं। दर्शाइए कि ∠ABD = ∠ACD
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में दो समद्विबाहु त्रिभुज △ABC और △DBC एक ही आधार BC पर स्थित हैं। AB = AC और DB = DC दिया गया है। बिंदु A और D, BC के एक ही ओर हैं।
Answer: हल : दिया है। दो समद्विबाहु △ABC और △DBC एक ही आधार BC पर स्थित हैं और AB = AC तथा DB = DC सिद्ध करना है : ∠ABD = ∠ACD उपपत्ति : ∆ABC में, AB = AC (दिया है) ∠ACB = ∠ABC (त्रिभुज में समान भुजाओं के सम्मुख कोण समान होते हैं) ... (1) पुनः △DBC में, DB = DC (दिया है) ∠BCD = ∠CBD (त्रिभुज में समान भुजाओं के सम्मुख कोण समान होते हैं) ... (2) समीकरण (1) व (2) को जोड़ने पर, ∠ACB + ∠BCD = ∠ABC + ∠CBD ∠ACD = ∠ABD अतः ∠ABD = ∠ACD Proved.
In simple words: AB=AC के कारण ∠ABC = ∠ACB और DB=DC के कारण ∠CBD = ∠BCD। इन कोणों को जोड़ने पर ∠ABC + ∠CBD = ∠ABD और ∠ACB + ∠BCD = ∠ACD मिलता है, जिससे ∠ABD = ∠ACD सिद्ध होता है।
🎯 Exam Tip: समद्विबाहु त्रिभुजों के आधार कोणों की समानता का उपयोग करें। एक ही आधार पर बने दो त्रिभुजों में संगत कोणों को जोड़कर वांछित परिणाम प्राप्त किया जा सकता है।
Question 6. ABC एक समद्विभाहु त्रिभुज है, जिसमें AB = AC है । भुजा BA बिन्दु D तक इस प्रकार बढ़ाई गई है कि AD = AB है। दर्शाइए कि ∠BCD एक समकोण है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC को दर्शाता है जहाँ AB = AC है। भुजा BA को बिंदु D तक बढ़ाया गया है ताकि AD = AB हो। बिंदु C और D को जोड़ा गया है, जिससे एक नया त्रिभुज BCD बनता है।
Answer: हल : दिया है : △ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है जिसमें भुजा AB = AC है और भुजा BA को, बिन्दु D तक इस प्रकार बढ़ाया गया है कि AD = AB है। सिद्ध करना है : ∠BCD एक समकोण है । उपपत्ति : ∆ABC में, AC = AB (दिया है) ∠ABC = ∠ACB (त्रिभुज में समान भुजाओं के सम्मुख कोण समान होते हैं) ... (1) भुजा BA को बिन्दु D तक इस प्रकार बढ़ाया गया है कि परन्तु दिया है कि AB = AC भी हैं। △ACD में, ∠ADC = ∠ACD (त्रिभुज में समान भुजाओं के सम्मुख कोण समान होते हैं) ... (2) समीकरण (1) व समीकरण (2) को जोड़ने पर, ∠ABC + ∠ADC = ∠ACB + ∠ACD ∠ABC + ∠ADC = ∠BCD (चित्र से) ∠DBC +∠BDC = ∠BCD (∠ABC = ∠DBC तथा ∠ADC = ∠BDC) ...(3) अब : ABCD में, ∠DBC + ∠BDC + ∠BCD = 180° (त्रिभुज के अन्तःकोणों का योग 180° होता है) ∠BCD + ∠BCD = 180° [ समीकरण (3) से] 2 ∠BCD = 180° ∠BCD = 90° अतः ∠BCD एक समकोण है। Proved.
In simple words: AB=AC और AD=AB दिया है। इससे AC=AD भी होता है, इसलिए △ABC में ∠ABC = ∠ACB और △ACD में ∠ADC = ∠ACD। इन कोणों को जोड़ने और त्रिभुज BCD के कोण योग गुण का उपयोग करने पर ∠BCD = 90° सिद्ध होता है।
🎯 Exam Tip: समद्विबाहु त्रिभुज के गुणों को पहचानें। कोणों को व्यवस्थित रूप से जोड़ना और त्रिभुज के कोण योग गुण का उपयोग करना ऐसे प्रमाणों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 7. ABC एक समकोण त्रिभुज है, जिसमें ∠A = 90° और AB = AC है। ∠B और ∠C ज्ञात कीजिए।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक समकोण त्रिभुज ABC को दर्शाता है जिसमें ∠A = 90° है। यह एक समद्विबाहु समकोण त्रिभुज भी है, क्योंकि भुजाएँ AB और AC बराबर हैं।
Answer: हल : दिया है : ABC एक समकोण त्रिभुज है जिसमें A = 90° और बराबर भुजाओं में AB = AC है। ज्ञात करना है : ∠B तथा ∠C गणना : △ABC समद्विबाहु है जिसमें AB = AC है। ∠C = ∠B (त्रिभुज में समान भुजाओं के सम्मुख कोण समान होते हैं) ... (1) त्रिभुज के अन्तःकोणों का योग 180° होता है। ∠A + ∠B + ∠C = 180° 90° +∠B + ∠B = 180° [समीकरण (1) से] 2 ∠B = 180° – 90° = 90° ∠B = 45° ...(1) ∠C = ∠B ∠C = 45° अतः ∠B = 45° तथा ∠C = 45°
In simple words: क्योंकि △ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है (AB=AC), ∠B और ∠C बराबर होंगे। त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है। ∠A = 90° दिया है, इसलिए बचे हुए 90° को ∠B और ∠C में बराबर-बराबर बाँटने पर प्रत्येक कोण 45° का होगा।
🎯 Exam Tip: समद्विबाहु त्रिभुज के आधार कोणों की समानता और त्रिभुज के कोण योग गुण का उपयोग करके अज्ञात कोणों को आसानी से ज्ञात किया जा सकता है।
Question 8. दर्शाइए कि किसी समबाहु त्रिभुज का प्रत्येक कोण 60° होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक समबाहु त्रिभुज ABC को दर्शाता है, जिसमें सभी भुजाएँ (AB, BC, CA) समान लंबाई की हैं। इस प्रकार इसके सभी कोण भी समान होंगे।
Answer: हल : दिया है : ABC एक समबाहु त्रिभुज है जिसमें भुजाएँ AB, BC और CA परस्पर समान लम्बाई की हैं। ∠A, ∠B और ∠C समबाहु त्रिभुज के अन्तः कोण हैं। सिद्ध करना है : त्रिभुज का प्रत्येक अन्तःकोण = 60° उपपत्तिः △ABC समबाहु है जिसमें AB = BC = AC यदि AB = AC तो ∠C = ∠B ..... (1) यदि AB = BC तो ∠C = ∠A ...(2) (त्रिभुज में समान भुजाओं के सम्मुख कोण समान होते हैं) समीकरण (1) व समीकरण (2) से ∠A = ∠B = ∠C...(3) परन्तु त्रिभुज के अन्तःकोणों का योग = 180° ∠A + ∠B + ∠C = 180°
\( \implies \) ∠A + ∠A + ∠A = 180°
\( \implies \) 3 ∠A = 180°
\( \implies \) ∠A = 60° तब समीकरण (3) से ∠A = ∠B = ∠C = 60° अतः समबाहु त्रिभुज का प्रत्येक अन्तः कोण = 60° Proved.
In simple words: समबाहु त्रिभुज में सभी भुजाएँ बराबर होती हैं, जिससे सभी कोण भी बराबर होते हैं। त्रिभुज के कोणों का योग 180° होता है। यदि तीनों कोण बराबर हैं, तो प्रत्येक कोण 180° / 3 = 60° होगा।
🎯 Exam Tip: समबाहु त्रिभुज के मूलभूत गुणों को याद रखें: सभी भुजाएँ समान और सभी कोण समान। कोण योग गुण का सीधा अनुप्रयोग इसका प्रमाण देता है।
प्रश्नावली 7.3
Question 1. ABC और △DBC एक ही आधार BC पर बने दो समद्विबाहु त्रिभुज इस प्रकार हैं कि A और D, भुजा BC के एक ही ओर स्थित हैं। यदि AD बढ़ाने पर BC को P पर प्रतिच्छेद करे तो दर्शाइए कि :
(i) △ABD = ∆ACD
(ii) ∆ABP = ∆ACP
(iii) AP, ∠A और ∠D दोनों को समद्विभाजित करता है।
(iv) AP, रेखाखण्ड BC का लम्ब समद्विभाजक है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में आधार BC पर दो समद्विबाहु त्रिभुज, △ABC और △DBC, एक ही ओर बने हैं। रेखाखंड AD को P तक बढ़ाया गया है, जहाँ यह BC को प्रतिच्छेद करता है।
Answer: हल : दिया है। एक ही आधार BC पर दो समद्विबाहु त्रिभुज, △ABC और △DBC ऐसे स्थित हैं कि A और D, BC के एक ही ओर हैं। AD को बढ़ाने पर यह BC को P पर काटती है। सिद्ध करना है : (i) △ABD = ∆ACD (ii) ∆ABP = ∆ACP (iii) AP, ∠A और ∠D दोनों को समद्विभाजित करता है। (iv) AP, रेखाखण्ड BC का लम्ब समद्विभाजक है। उपपत्ति : △ABC समद्विबाहु है जिसको आधार BC है। AB = AC और △DBC समद्विबाहु है जिसका आधार BC है । BD = CD (i) △ABD और △ACD में, AB = AC [समीकरण (1) से] BD = CD [समीकरण (2) से ] AD = AD (उभयनिष्ठ भुजा से) △ABD = ∆ACD (S.S.S. से) (ii) ∆ABD = ∆ACD ∠BAD = ∠CAD अर्थात् AD, ∠A का समद्विभाजक है । (C.P.C.T.) तबे AD को आगे बढ़ाने पर AP भी ∠A का समद्विभाजक होगा। अब ∆ABP और △ACP में, AB = AC [समीकरण (1) से] ∠BAP = ∠CAP (AP, ∠A का समद्विभाजक है ।) AP = AP (उभयनिष्ठ भुजा) ∆ABP = ∆ACP (S.A.S. से) (iii) △ABP = ∆ACP के ∠BDP = ∠CDP (C.P.C.T.) DP, ∠D का समद्विभाजक है। AP, ∠D का समद्विभाजक है। और हम अभी सिद्ध कर चुके हैं कि AP, ∠A का समद्विभाजक है। तब, AP, ∠A और ∠D दोनों को समद्विभाजित करता है। (iv) अभी हमने सिद्ध किया है कि ∆ABP = ∆CP ∠APB = ∠APC तथा BP = CP (C.P.C.T.) अब BP = CP AP, भुजा BC का समद्विभाजक है। ∠APB + ∠APC = 180° और ∠APB = ∠APC (रेखीय युग्म) तब हल करने पर, ∠APB = ∠APC = 90° AP, BC पर लम्ब है। AP, BC पर लम्ब भी है और AP, BC का समद्विभाजक भी है। अतः AP रेखाखण्ड BC का लम्ब समद्विभाजक है। Proved.
In simple words: SSS सर्वांगसमता से △ABD = ∆ACD (AB=AC, BD=CD, AD=AD)। इससे ∠BAD = ∠CAD मिलता है, मतलब AP, ∠A को समद्विभाजित करता है। फिर SAS सर्वांगसमता से △ABP = ∆ACP सिद्ध होता है, जिससे BP=CP और ∠APB=∠APC। चूंकि ∠APB + ∠APC = 180°, तो ∠APB = 90°। अतः AP, BC का लम्ब समद्विभाजक है।
🎯 Exam Tip: इस बहु-भाग प्रश्न में कई सर्वांगसमता नियमों (SSS, SAS) और CPCTC का एक साथ उपयोग किया गया है। लम्ब समद्विभाजक की परिभाषा (मध्य-बिंदु और 90° कोण) को याद रखें।
Question 2. AD एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC का शीर्षलम्ब है, जिसमें AB = AC है। दर्शाइए कि
(i) AD, रेखाखण्ड BC को समद्विभाजित करता है।
(ii) AD, ∠A को समद्विभाजित करता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC को दर्शाता है जहाँ AB = AC है। AD शीर्षलंब है जो शीर्ष A से भुजा BC पर खींचा गया है। यह D पर BC को प्रतिच्छेद करता है।
Answer: हल : दिया है : ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है जिसमें AB = AC है । त्रिभुज के शीर्ष A से BC पर AD लम्ब डाला गया है जिससे AD शीर्षलम्ब है । सिद्ध करना है : (i) AD, रेखाखण्ड BC को समद्विभाजित करता है। (ii) AD, ∠A को समद्विभाजित करता है। उपपत्ति : AD, △ABC का शीर्षलम्ब है। AD \( \perp \) BC के ∠ADB = 90° और ∠ADC = 90° AB, ∆ABD को और AC, AACD का कर्ण है। तब समकोण त्रिभुज ABD और समकोण त्रिभुज ACD में, ∠ADB = ∠ADC (प्रत्येक 90°) AB = AC (दिया है) △ABD = ∆ACD (R.H.S.) (i) ABD = ∆ACD BD = CD (C.P.C.T.) D, BC का मध्य-बिन्दु है। अत: AD, रेखाखण्ड BC को समद्विभाजित करता है। (ii) △ABD = AACD ∠BAD = ∠CAD (C.P.C.T.) अत: AD, ∠A को समद्विभाजित करता है। Proved.
In simple words: AD के शीर्षलंब होने और AB=AC दिए होने के कारण, RHS सर्वांगसमता नियम से △ABD और △ACD सर्वांगसम होते हैं। इससे BD=CD (AD, BC को समद्विभाजित करता है) और ∠BAD=∠CAD (AD, ∠A को समद्विभाजित करता है) सिद्ध होता है।
🎯 Exam Tip: समद्विबाहु त्रिभुज में शीर्षलंब, मध्यिका और कोण समद्विभाजक अक्सर एक ही रेखा होते हैं। RHS सर्वांगसमता एक समकोण त्रिभुज के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
Question 3. एक ABC की दो भुजाएँ AB तथा BC और माध्यिका AM क्रमशः एक-दूसरे △PQR की भुजाओं PQ तथा QR और माध्यिका PN के बराबर है। दर्शाइए कि
(i) ∆ABM = ∆PQN
(ii) ∆ABC = ∆PQR
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो त्रिभुजों △ABC और △PQR को दर्शाता है। भुजाएँ AB = PQ, BC = QR और माध्यिकाएँ AM = PN दी गई हैं। माध्यिका AM, BC को M पर और PN, QR को N पर समद्विभाजित करती है।
Answer: हल : दिया है: △ABC और △PQR दो त्रिभुज हैं जिनमें AB = PQ, BC = QR तथा माध्यिका AM = PN सिद्ध करना है : (i) △ABM = ∆PQN (ii) ∆ABC = ∆PQR उपपत्ति : BC = QR (दिया है) \( \frac{BC}{2} \) = \( \frac{QR}{2} \) BM = QN (AM व PN माध्यिकाएँ हैं) (i) △ABM और △PQN में, AB = PQ (दिया है) AM = PN (दिया है) BM = QN (ऊपर सिद्ध किया है) △ABM = ∆PQN (S.S.S. से) (ii) △ABM = ∆PQN
\( \implies \) ∠B = ∠Q (C.P.C.T.) ... (1) अब △ABC तथा △PVR में, AB = PQ (दिया है) BC = QR (दिया है) ∠B = ∠Q [समीकरण (1) से] अतः △BC = ∆PQR (S.A.S. परीक्षण से) Proved.
In simple words: क्योंकि AM और PN माध्यिकाएँ हैं और BC=QR, तो BM=QN। SSS सर्वांगसमता से △ABM और ∆PQN सर्वांगसम होते हैं। इससे ∠B=∠Q प्राप्त होता है। फिर, SAS सर्वांगसमता से △ABC और △PQR सर्वांगसम होते हैं (AB=PQ, ∠B=∠Q, BC=QR)।
🎯 Exam Tip: माध्यिका की परिभाषा (भुजा को समद्विभाजित करना) को याद रखें। इस प्रश्न में SSS और SAS दोनों सर्वांगसमता नियमों का चरणबद्ध अनुप्रयोग शामिल है।
Question 4. BE और CF एक △ABC के दो बराबर शीर्षलम्ब हैं । R.H.S. सर्वांगसमता नियम का प्रयोग करके सिद्ध कीजिए कि △ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक त्रिभुज ABC को दर्शाता है जिसमें शीर्ष B से भुजा AC पर BE एक शीर्षलंब है और शीर्ष C से भुजा AB पर CF एक शीर्षलंब है। दोनों शीर्षलंब BE और CF बराबर हैं।
Answer: हल : दिया है : ABC एक त्रिभुज है जिसमें शीर्ष B से भुजा AC पर BE शीर्ष लम्ब खींचा गया है और शीर्ष C से भुजा AB पर CF शीर्षलम्ब इस प्रकार है कि BE = CF सिद्ध करना है: △ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है । उपपत्ति : △AВС में BE, शीर्ष B से AC पर शीर्षलम्ब है। ∠BEC = 90° △BEC एक समकोण त्रिभुज है जिसमें कर्ण BC है। पुनः △ABC में CF, शीर्ष C से AB पर शीर्षलम्ब है। ∠BFC = 90° △BFC एक समकोण त्रिभुज है जिसमें कर्ण BC है। समकोण त्रिभुज ABEC और △BFC में, ∠BEC = ∠CFB (प्रत्येक 90°) BE = CF (दिया है) BC = BC (उभयनिष्ठ भुजा) AВЕС = ∆BFC (R.H.S.) ∠ECB = ∠FBC
\( \implies \) ∠ACB = ∠ABC (C.P.C.T.) अब △ABC में, ∠ACB = ∠ABC AB = AC (त्रिभुज में समाने कोणों की सम्मुख भुजाएँ समान होती हैं) अतः △ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है। Proved.
In simple words: BE और CF के शीर्षलंब और बराबर होने तथा BC के उभयनिष्ठ कर्ण होने के कारण, RHS सर्वांगसमता नियम से त्रिभुज BEC और BFC सर्वांगसम होते हैं। इससे ∠ECB = ∠FBC प्राप्त होता है, जिसका अर्थ है कि ∠ACB = ∠ABC। अतः, समान कोणों के सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं, इसलिए AB = AC, और △ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है।
🎯 Exam Tip: RHS सर्वांगसमता नियम (समकोण, कर्ण, भुजा) को विशेष रूप से याद रखें। CPCTC का उपयोग करके कोणों की समानता स्थापित करना और फिर समद्विबाहु त्रिभुज के गुणों को लागू करना महत्वपूर्ण है।
Question 5. ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है जिसमें AB = AC है। AP \( \perp \) BC खींचकर दर्शाइए कि ∠B = ∠C
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC को दर्शाता है जहाँ AB = AC है। शीर्ष A से भुजा BC पर एक लंब AP खींचा गया है, जो BC को बिंदु P पर प्रतिच्छेद करता है, जिससे दो समकोण त्रिभुज △APB और △APC बनते हैं।
Answer: हल : दिया है: △ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है जिसमें AB = AC है। शीर्ष A से BC पर AP लम्ब खींचा गया है। सिद्ध करना है : ∠B = ∠C उपपत्ति: AP\( \perp \) BC △APB में, ∠APB = 90° जिससे कर्ण AB है। और ∆APC में, ∠APC = 90° जिससे कर्ण AC है। अब △APB और △APC में, ∠APB = ∠APC (प्रत्येक 90°) AB = AC (दिया है) AP = AP (उभयनिष्ठ भुजा) ∆APB = ∆APC (R.H.S. से) अतः ∠B = ∠C (C.P.C.T.) Proved.
In simple words: AP \( \perp \) BC होने के कारण ∠APB = ∠APC = 90° होता है। AB=AC दिया है और AP उभयनिष्ठ भुजा है। RHS सर्वांगसमता नियम का उपयोग करके △APB और △APC सर्वांगसम होते हैं। इससे ∠B = ∠C प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: समद्विबाहु त्रिभुज में समान भुजाओं के सम्मुख कोण बराबर होते हैं, जिसे सिद्ध करने के लिए RHS सर्वांगसमता एक सीधा तरीका है।
प्रश्नावली 7.4
Question 1. दर्शाइए कि समकोण त्रिभुज में कर्ण सबसे लम्बी (या सबसे बड़ी) भुजा होती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक समकोण त्रिभुज ABC को दर्शाता है, जिसमें ∠C = 90° है। AB इस त्रिभुज का कर्ण है, जो समकोण के सम्मुख है।
Answer: हल : दिया है : △ABC में, ∠C = 90° तथा भुजा AB कर्ण है। सिद्ध करना है : कर्ण AB, सबसे बड़ी भुजा है । उपपत्तिः △ABC में, ∠C = 90° (दिया है) ∠A + ∠B = 180° – ∠C = 180° – 90° = 90° (त्रिभुज के अन्तःकोणों का योग 180° होता है) ∠A तथा ∠B, 90° से छोटे हैं। ∠C > ∠A तथा ∠C >∠B ∆ABC में, ∠C > ∠A AB > BC (प्रमेय-4 से) ∠C > ∠B AB > CA (प्रमेय-4 से) AB > BC और AB > CA AB, दोनों (BC व CA) से बड़ी है। अतः कर्ण AB सबसे बड़ी भुजा है। Proved.
In simple words: समकोण त्रिभुज में एक कोण 90° होता है, इसलिए अन्य दो कोण 90° से छोटे होते हैं। सबसे बड़े कोण (90° वाले) के सामने वाली भुजा सबसे लंबी होती है। अतः, कर्ण सबसे लंबी भुजा होती है।
🎯 Exam Tip: त्रिभुज में सबसे बड़े कोण के सम्मुख भुजा सबसे बड़ी होती है। इस प्रमेय का उपयोग करके यह सिद्ध करना एक सीधा प्रमाण है।
Question 2. सम्मुख आकृति में, ∆ABC की भुजाओं AB और AC को क्रमशः बिन्दुओं P और Q तक बढ़ाया गया है साथ ही ∠PBC < ∠QCB है। दर्शाइए कि AC > AB
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में त्रिभुज ABC की भुजाएँ AB और AC को क्रमशः P और Q तक बढ़ाया गया है। बहिष्कोण ∠PBC और ∠QCB दिखाए गए हैं, जहाँ ∠PBC < ∠QCB दिया गया है।
Answer: हल : दिया है : △ABC में भुजाओं AB और AC को आगे बढ़ाया गया है। बढ़ी हुई AB पर बिन्दु P और बढ़ी हुई AC पर बिन्दु Q लिया गया है। इस प्रकार बने बहिष्कोणों में ∠PBC < ∠QCB सिद्ध करना है : AC > AB उपपत्ति : PBC, △ABC का बहिष्कोण है। ∠PBC = ∠ACB + ∠A .....(1) और ∠QCB भी △ABC का बहिष्कोण है। ∠QCB = ∠ABC + ∠A ...(2) ∠PBC < ∠QCB ∠ACB + ∠A < ∠ABC + ∠A [समीकरण (1) तथा (2) से ∠ACB < ∠ABC अब △ABC में, ∠ACB < ∠ABC ∠ABC > ∠ACB AC > AB (बड़े कोण की सम्मुख, भुजा बड़ी होती है) Proved.
In simple words: बहिष्कोण प्रमेय का उपयोग करके, ∠PBC = ∠ACB + ∠A और ∠QCB = ∠ABC + ∠A। दी गई असमानता ∠PBC < ∠QCB का अर्थ है ∠ACB < ∠ABC। त्रिभुज के गुण के अनुसार, बड़े कोण के सामने वाली भुजा बड़ी होती है, इसलिए ∠ABC के सामने AC, ∠ACB के सामने AB से बड़ा होगा (AC > AB)।
🎯 Exam Tip: बहिष्कोण प्रमेय का उपयोग करें। त्रिभुज में बड़े कोण के सम्मुख भुजा बड़ी होती है, इस महत्वपूर्ण गुण को ध्यान में रखें।
Question 3. सम्मुख आकृति में ∠B < ∠A और ∠C < ∠D है। दर्शाइए कि AD < BC
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक चतुर्भुज ABCD को दर्शाता है, जिसमें विकर्ण AC और BD खींचे गए हैं, जो बिंदु O पर प्रतिच्छेद करते हैं। इसमें त्रिभुज ABO और CDO बनते हैं। ∠B < ∠A और ∠C < ∠D दिया गया है।
Answer: हल : दिया है : दी गई आकृति में △ABO में ∠B < ∠A और △CDO में ∠C < ∠D. सिद्ध करना है : ऋजु रेखा AD < BC उपपत्तिः △ABO में, ∠B < ∠AAO < BO (प्रमेय-4 से) ... (1) इसी प्रकार △CDO में, ∠C < ∠D OD < OC (प्रमेय-4 से) ...(2) (1) व (2) को जोड़ने पर, AO + OD < BO + OC
In simple words: त्रिभुज के बड़े कोण के सामने वाली भुजा बड़ी होती है। △ABO में ∠B < ∠A है, इसलिए AO < BO। △CDO में ∠C < ∠D है, इसलिए OD < OC। इन दोनों असमानताओं को जोड़ने पर (AO + OD) < (BO + OC) प्राप्त होता है, जिसका अर्थ है AD < BC।
🎯 Exam Tip: त्रिभुज में बड़े कोण के सम्मुख भुजा बड़ी होती है, और छोटे कोण के सम्मुख भुजा छोटी होती है - इस मौलिक प्रमेय का उपयोग करके असमानताओं को सिद्ध करें।
Question 4. सम्मुख आकृति में, AB और CD क्रमशः एक चतुर्भुज ABCD की सबसे छोटी और सबसे बड़ी भुजाएँ हैं। दर्शाइए कि ∠A > ∠C और ∠B > ∠D
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक चतुर्भुज ABCD को दर्शाता है। इसमें AB सबसे छोटी भुजा और CD सबसे बड़ी भुजा है। विकर्ण AC और BD खींचे गए हैं।
Answer: हल : दिया है : ABCD एक चतुर्भुज है जिसमें AB सबसे छोटी और CD सबसे बड़ी भुजा है। सिद्ध करना है : ∠A > ∠C और ∠B > ∠D रचना : रेखाखण्ड AC तथा BD खीचिए । उपपत्ति : AB सबसे छोटी भुजा है। तब △ABC में, BC > AB ∠BAC > ∠ACB (प्रमेय-3 से) ...(1) पुनः CD सबसे बड़ी भुजा है। ∆ACD में, ∠DAC > ∠DCA (प्रमेय-3 से) ...(2) (1) व (2) को जोड़ने पर, ∠BAC + ∠DAC > ∠ACB + ∠DCA ∠BAD > ∠BCD ∠A > ∠C AB सबसे छोटी भुजा है। तब ∆ABD में, ∠ABD > ∠ADB (प्रमेय-3 से) ...(3) इसी प्रकार, CD सबसे बड़ी भुजा है। तब ABCD में, CD > BC ∠CBD > ∠BDC (प्रमेय-3 से) ...(4) (3) व (4) को जोड़ने पर, ∠ABD + ∠CBD > ∠ADB + ∠BDC ∠ABC > ∠ADC ∠B > ∠D Proved.
In simple words: विकर्ण AC खींचने पर, △ABC में BC>AB, इसलिए ∠BAC > ∠ACB। △ACD में CD सबसे बड़ी भुजा है, इसलिए CD>AD और CD>AC, जिससे ∠DAC > ∠DCA। इन असमानताओं को जोड़ने पर ∠A > ∠C प्राप्त होता है। इसी तरह विकर्ण BD खींचकर ∠B > ∠D सिद्ध किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: चतुर्भुज को त्रिभुजों में विभाजित करने के लिए विकर्णों का उपयोग करें। त्रिभुज में सबसे बड़े कोण के सामने वाली भुजा सबसे बड़ी होती है, इस प्रमेय का अनुप्रयोग असमानताओं को सिद्ध करने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 4. सम्मुख आकृति में, AB और CD क्रमशः एक चतुर्भुज ABCD की सबसे छोटी और सबसे बड़ी भुजाएँ हैं। दर्शाइए कि ∠A > ∠C और ∠B > ∠D
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): एक चतुर्भुज ABCD दिखाया गया है, जहाँ A, B, C, D शीर्ष हैं। AC और BD विकर्ण हैं। भुजा AB सबसे छोटी और CD सबसे बड़ी भुजा है।
Answer: हल : दिया है : ABCD एक चतुर्भुज है जिसमें AB सबसे छोटी और CD सबसे बड़ी भुजा है। सिद्ध करना है : ∠A > ∠C और ∠B > ∠D रचना : रेखाखण्ड AC तथा BD खीचिए । उपपत्ति : AB सबसे छोटी भुजा है। तब △ABC में,
BC > AB
∠BAC > ∠ACB (प्रमेय-3 से) ...(1)
पुनः CD सबसे बड़ी भुजा है।
△ACD में,
∠DAC > ∠DCA (प्रमेय-3 से) ...(2)
(1) व (2) को जोड़ने पर,
∠ BAC + ∠DAC > ∠ACB + ∠DCA
∠BAD > ∠BCD
∠A > ∠C
AB सबसे छोटी भुजा है।
तब △ABD में,
∠ABD > ∠ADB (प्रमेय-3 से) ...(3)
इसी प्रकार, CD सबसे बड़ी भुजा है।
तब △BCD में,
CD > BC
∠CBD > ∠BDC (प्रमेय-3 से) ...(4)
(3) व (4) को जोड़ने पर,
∠ABD + ∠CBD > ∠ADB + ∠BDC
∠ABC > ∠ADC
∠B > ∠D
Proved.
In simple words: इस चतुर्भुज ABCD में, सबसे छोटी भुजा AB और सबसे बड़ी भुजा CD है। हम विकर्ण AC और BD खींचकर यह सिद्ध करते हैं कि सबसे बड़ी भुजा के सामने का कोण सबसे बड़ा होता है, और सबसे छोटी भुजा के सामने का कोण सबसे छोटा होता है, जिसके परिणामस्वरूप ∠A > ∠C और ∠B > ∠D होता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के ज्यामितीय सिद्धियों में, दिए गए कथनों और प्रमेयों (जैसे कि त्रिभुज में बड़ी भुजा के सम्मुख बड़ा कोण होता है) का सही क्रम में उपयोग करना महत्वपूर्ण है।
Question 5. सम्मुख आकृति में, PR > PQ है और PS, ∠QPR को समद्विभजित करता है। सिद्ध कीजिए कि ∠PSR > ∠PSQ है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): एक त्रिभुज PQR है। P से एक रेखाखण्ड PS खींचा गया है जो भुजा QR को S पर प्रतिच्छेद करता है। PS, कोण QPR को दो बराबर भागों में बांटता है।
Answer: हल : दिया है: △PQR में, PR > PQ और ∠QPR को समद्विभाजक, QR से बिन्दु S पर मिलता है। माना ∠PSR = x° तथा ∠PSQ = y° सिद्ध करना है : ∠PSR > ∠PSQ उपपत्तिः △PQR में,
PR > PQ
∠Q > ∠R (प्रमेय-3 से)
PS, ∠P को समद्विभाजक है।
∠QPS = \(\frac { 1 }{ 2 }\) ∠P
तथा ∠RPS = \(\frac { 1 }{ 2 }\) ∠P
∠x°, △PQS का भुजा QS के बिन्दु S पर बहिष्कोण है।
x° = ∠Q + ∠QPS
\( \implies \) ∠Q = x°- ∠QPS
∠Q = x°- \(\frac { 1 }{ 2 }\) ∠P .....(1)
∠y°, △PRS का भुजा RS के बिन्दु S पर बहिष्कोण है।
y° = ∠R + ∠RPS
\( \implies \) ∠R = y°- \(\frac { 1 }{ 2 }[/latex] ∠RPS
\( \implies \) ∠R = y°- \(\frac { 1 }{ 2 }\) ∠P
∠Q > ∠R .....(2)
x°- \(\frac { 1 }{ 2 }\) ∠P > y°- \(\frac { 1 }{ 2 }\) ∠P
[समीकरण (1) व (2) से ]
x° > y°
\( \implies \) ∠PSR > ∠PSQ
Proved.
In simple words: एक त्रिभुज PQR में, यदि PR भुजा PQ से लंबी है और PS कोण QPR को दो बराबर भागों में बांटता है, तो कोण PSR, कोण PSQ से बड़ा होगा।
🎯 Exam Tip: त्रिभुज के बहिष्कोण गुणधर्म और भुजा-कोण संबंध प्रमेयों का उपयोग इस प्रकार के सिद्धियों में महत्वपूर्ण है। बहिष्कोण का मान दो आंतरिक सम्मुख कोणों के योग के बराबर होता है।
Question 6. दर्शाइए कि एक रेखा पर एक दिए हुए बिन्दु से, जो उस रेखा पर स्थित नहीं है, जितने रेखाखण्ड खींचे जा सकते हैं उनमें लम्ब रेखाखण्ड सबसे छोटा होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): एक सरल रेखा AB है। इस रेखा के बाहर एक बिंदु P है। बिंदु P से रेखा AB पर एक लंब PM और एक तिर्यक रेखाखण्ड PN खींचा गया है, जहाँ M और N रेखा AB पर स्थित हैं।
Answer: हल : दिया है: AB एक सरल रेखा है और P उसके बाहर दिया हुआ एक बिन्दु है । P से रेखा AB पर PM और PN रेखाखण्ड खींचे गए हैं, जिनमें PM ⊥ AB सिद्ध करना है : PM < PN उपपत्ति : △MPN में, ∠M = 90°, PM ⊥ AB शेष कोण ∠MPN + ∠PNM = 90° (त्रिभुज के अन्तःकोणों का योग 180° होता है) ∠PMN सबसे बड़ा कोण है।
∠M > ∠N
PN > PM (प्रमेय-4 से)
अतः P से खींचे रेखाखण्डों में PM सबसे छोटा है। Proved.
In simple words: एक रेखा के बाहर किसी बिंदु से उस रेखा तक खींचे गए सभी रेखाखण्डों में, वह रेखाखण्ड जो रेखा पर लंब होता है, सबसे छोटा होता है।
🎯 Exam Tip: यह एक मौलिक ज्यामितीय प्रमेय है। याद रखें कि समकोण त्रिभुज में कर्ण सबसे लंबी भुजा होती है, और यह गुणधर्म लंब रेखाखण्ड को सबसे छोटा साबित करने में मदद करता है।
प्रश्नावली 7.5
Question 1. ABC एक त्रिभुज है। इसके अभ्यन्तर में एक ऐसा बिन्दु ज्ञात कीजिए जो △ABC के तीनों शीर्षों से समदूरस्थ है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): एक त्रिभुज ABC है। इसकी भुजाओं AB और BC के लंब समद्विभाजक खींचे गए हैं जो बिंदु P पर मिलते हैं। बिंदु P से शीर्षों A, B और C तक रेखाखंड PA, PB और PC खींचे गए हैं।
Answer: हल : एक △ABC के अभ्यन्तर में एक ऐसा बिन्दु P ज्ञात करना है जो त्रिभुज के तीनों शीर्षों A, B व C से समान दूरी पर हो । रचना विधि : (1) सर्वप्रथम दिया हुआ त्रिभुज ABC बनाइए । (2) AB तथा BC के लम्ब समद्विभाजक खीचिए जो परस्पर बिन्दु P पर काटें। (3) रेखाखण्ड PA, PB और PC खीचिए । P अभीष्ट बिन्दु है जो तीनों शीर्षों से समदूरस्थ है।
In simple words: त्रिभुज के तीनों शीर्षों से समान दूरी पर स्थित बिंदु ज्ञात करने के लिए, उसकी किन्हीं दो भुजाओं के लंब समद्विभाजक खींचें। जहां वे मिलते हैं, वही बिंदु त्रिभुज के तीनों शीर्षों से समदूरस्थ होता है।
🎯 Exam Tip: यह बिंदु त्रिभुज का परिकेंद्र (circumcenter) कहलाता है, और यह त्रिभुज के परिवृत्त (circumcircle) का केंद्र होता है।
Question 2. किसी त्रिभुज के अभ्यन्तर में एक ऐसा बिन्दु ज्ञात कीजिए जो त्रिभुज की सभी भुजाओं से समदूरस्थ है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): एक त्रिभुज ABC है। इसके कोणों B और C के समद्विभाजक खींचे गए हैं जो बिंदु P पर मिलते हैं। बिंदु P से तीनों भुजाओं पर लंबवत दूरीयां समान दिखाई गई हैं।
Answer: हल : माना ABC एक त्रिभुज है जिसके अभ्यन्तर में एक ऐसा बिन्दु P ज्ञात करना है जो त्रिभुज की तीनों भुजाओं AB, BC और CA से समदूरस्थ हो । रचना विधि : (1) सर्वप्रथम दिया हुआ △ABC बनाइए । (2) ∠B और ∠C के समद्विभाजक खीचिए जो परस्पर बिन्दु P पर काटें । P अभीष्ट बिन्दु है जो तीनों भुजाओं से समदूरस्थ है।
In simple words: त्रिभुज की तीनों भुजाओं से समान दूरी पर स्थित बिंदु ज्ञात करने के लिए, उसकी किन्हीं दो कोणों के समद्विभाजक खींचें। जहां वे मिलते हैं, वही बिंदु त्रिभुज की तीनों भुजाओं से समदूरस्थ होता है।
🎯 Exam Tip: यह बिंदु त्रिभुज का अंतःकेंद्र (incenter) कहलाता है, और यह त्रिभुज के अंतःवृत्त (incircle) का केंद्र होता है।
Question 3. एक बड़े पार्क में, लोग तीन बिन्दुओं (स्थानों) पर केन्द्रित हैं :
(a) : जहाँ बच्चों के लिए फिसलपट्टी और झूले हैं।
(b) : जिसके पास मानव निर्मित एक झील है।
(c) : जो एक बड़े पार्किंग स्थल और बाहर निकलने के रास्ते के निकट है।
एक आइसक्रीम का स्टॉल कहाँ लगाना चाहिए ताकि वहाँ लोगों की अधिकतम संख्या पहुँच सके?
Answer: हल : A, B और C तीन बिन्दु स्थान हैं। आइसक्रीम का स्टॉल लगाने के लिए लोगों की उस पर अधिकतम पहुँच होने के लिए यह आवश्यक है कि स्टॉल तीनों स्थानों से B' समदूरस्थ हो । अतः आइसक्रीम स्टॉल लगाने के लिए हमें एक ऐसे स्थान (बिन्दु) P का चयन करना है जो पार्क के तीनों स्थानों से समान दूरी पर हो । ज्ञात करने की विधिः (1) बिन्दु △ से बिन्दु B को, बिन्दु B से बिन्दु C को और बिन्दु C से बिन्दु A को ऋजु रेखाओं द्वारा मिलाकर △ABC बनाइए । (2) किन्हीं दो भुजाओं (AB व BC) के लम्ब समद्विभाजक खीचिए जो परस्पर बिन्दु P पर काटें। आइसक्रीम स्टॉल के चयन के लिए उपयुक्त स्थान बिन्दु P होगा जो तीनों है स्थानों से समदूरस्थ है।
In simple words: आइसक्रीम स्टॉल को पार्क में उन तीन प्रमुख स्थानों (बच्चों का खेल का मैदान, झील और पार्किंग) से समान दूरी पर लगाना चाहिए ताकि अधिकतम लोग आसानी से पहुँच सकें। यह बिंदु त्रिभुज का परिकेंद्र होगा।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न परिकेंद्र के अनुप्रयोग को दर्शाता है। किसी भी तीन बिंदुओं से समदूरस्थ बिंदु खोजने के लिए, उन बिंदुओं को एक त्रिभुज के शीर्ष मानकर उनकी भुजाओं के लंब समद्विभाजक खींचना होता है।
Question 4. घड्भुजीय और तारे के आकार की रंगोलियों को 1 सेमी भुजा वाले समबाहु त्रिभुजों से भरकर पूरा कीजिए । प्रत्येक स्थिति में त्रिभुजों की संख्या गिनिए । किसमें अधिक त्रिभुज हैं?
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): दो रंगोलियाँ दिखाई गई हैं। पहली एक षड्भुजीय रंगोली है जिसकी भुजा 5 सेमी है, जो 1 सेमी भुजा वाले छोटे समबाहु त्रिभुजों से भरी हुई है। दूसरी एक तारे के आकार की रंगोली है, जो भी 5 सेमी भुजा वाली है, और 1 सेमी भुजा वाले छोटे समबाहु त्रिभुजों से भरी हुई है। दोनों आकृतियों में छोटे त्रिभुजों की संख्या की तुलना करनी है।
Answer: हल : चित्रों से स्पष्ट है कि विकर्गों को मिलाने पर षड्भुजीय आकृति को 6 समबाहु त्रिभुजों में और तारे के आकार की आकृति को 1∠समबाहु त्रिभुजों में विभाजित किया जा सकता है जबकि समबाहु त्रिभुजों में प्रत्येक भुजा, 5 सेमी है। पुनः षड्भुजीय आकृति के एक समबाहु त्रिभुज जिसकी भुजा 5 सेमी है, को 1 सेमी भुजा वाले समबाहु त्रिभुजों में विभाजित कर स्पष्ट किया गया है कि 5 सेमी भुजा वाले एक समबाहु त्रिभुज को 1 सेमी भुजा वाले 25 त्रिभुजों में विभाजित किया जा सकता है। तब स्थिति 1 : षड्भुजीय रंगोली इसको 1 सेमी भुजा वाले 6 x 25 = 150 समबाहु त्रिभुजों में बाँटा जा सकता है। स्थिति 2 : तारे के आकार की रंगोली 5 सेमी भुजा वाले समबाहु त्रिभुजों की संख्या = 12 आकृति में 1 सेमी भुजा वाले समबाहु त्रिभुजों की संख्या = 12 x 25 = 300 स्पष्ट है कि तारे के आकार वाली आकृति में त्रिभुजों की संख्या अधिक है।
In simple words: 5 सेमी भुजा वाली षड्भुजीय रंगोली को 1 सेमी भुजा वाले 150 छोटे समबाहु त्रिभुजों से भरा जा सकता है, जबकि 5 सेमी भुजा वाली तारे के आकार की रंगोली को 300 ऐसे ही छोटे त्रिभुजों से भरा जा सकता है। इसका मतलब है कि तारे के आकार की रंगोली में अधिक त्रिभुज हैं।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, आपको बड़ी आकृति को छोटी इकाइयों में विभाजित करने की अवधारणा को समझना होगा। समबाहु त्रिभुजों के क्षेत्रफलों के अनुपात का उपयोग करके भी यह गणना की जा सकती है (क्षेत्रफल भुजा के वर्ग के समानुपाती होता है)।
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