UP Board Solutions Class 9 Hindi Chapter Paathy Pustak Mein Diye Gaye Prashn evam Unke Uttar

Get the most accurate UP Board Solutions for Class 9 Hindi Paathy Pustak पथ्य पुस्तक में दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर here. Updated for the 2026 27 academic session, these solutions are based on the latest UP Board textbooks for Class 9 Hindi. Our expert-created answers for Class 9 Hindi are available for free download in PDF format.

Detailed Paathy Pustak पथ्य पुस्तक में दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर UP Board Solutions for Class 9 Hindi

For Class 9 students, solving UP Board textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 9 Hindi solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Paathy Pustak पथ्य पुस्तक में दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर solutions will improve your exam performance.

Class 9 Hindi Paathy Pustak पथ्य पुस्तक में दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर UP Board Solutions PDF

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. किस काल को हिन्दी काव्य का स्वर्ण युग कहा जाता है?
Answer: भक्तिकाल को हिन्दी काव्य का स्वर्ण युग कहा जाता है।
In simple words: भक्तिकाल को हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दौरान साहित्य का अभूतपूर्व विकास हुआ और कई महान कवियों ने उत्कृष्ट रचनाएँ कीं।

🎯 Exam Tip: भक्तिकाल की समय सीमा और उसकी प्रमुख विशेषताओं को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. निर्गुण काव्यधारा की शाखाओं के नाम लिखिए।
Answer: निर्गुण काव्यधारा की शाखाएँ हैं-
• ज्ञानमार्गी तथा
• प्रेममार्गी ।
In simple words: निर्गुण काव्यधारा की दो मुख्य शाखाएँ हैं - ज्ञानमार्गी, जिसमें ज्ञान पर जोर दिया जाता है, और प्रेममार्गी, जिसमें प्रेम को ईश्वर तक पहुँचने का माध्यम माना जाता है।

🎯 Exam Tip: निर्गुण काव्यधारा की दोनों शाखाओं के नाम और उनके मूल भाव को समझें।

 

Question 3. सगुण काव्यधारा की शाखाओं के नाम बताइए।
Answer: सगुण काव्यधारा की शाखाएँ हैं-
• रामभक्ति शाखा तथा
• कृष्णभक्ति शाखा।
In simple words: सगुण काव्यधारा में ईश्वर के साकार रूप की पूजा की जाती है, और इसकी दो मुख्य शाखाएँ हैं - रामभक्ति और कृष्णभक्ति।

🎯 Exam Tip: सगुण काव्यधारा की शाखाओं और उनके उपास्यदेव को स्पष्ट रूप से जानें।

 

Question 4. सगुण भक्ति शाखा के दो कवियों के नाम, उनकी एक-एक रचनाओं के साथ लिखिए।
Answer:
• तुलसीदास-रामचरितमानस।
• सूरदास-सूरसागर
In simple words: सगुण भक्ति शाखा के प्रमुख कवि तुलसीदास ने 'रामचरितमानस' और सूरदास ने 'सूरसागर' जैसी अमर रचनाएँ कीं, जिनमें ईश्वर के सगुण रूप का वर्णन है।

🎯 Exam Tip: सगुण भक्ति शाखा के प्रमुख कवियों और उनकी प्रसिद्ध रचनाओं को कंठस्थ करें।

 

Question 5. निर्गुण भक्ति शाखा के दो कवियों के नाम उनकी एक-एक रचनाओं के साथ लिखिए।
Answer:
• मलिक मुहम्मद जायसी-पद्मावत
• कुतुबन-मृगावती ।।
In simple words: निर्गुण भक्ति शाखा के दो महत्वपूर्ण कवि मलिक मुहम्मद जायसी ने 'पद्मावत' और कुतुबन ने 'मृगावती' की रचना की, जो प्रेममार्गी सूफी काव्य परंपरा का हिस्सा हैं।

🎯 Exam Tip: निर्गुण काव्यधारा के कवियों और उनकी प्रमुख रचनाओं को ध्यान से याद रखें।

 

Question 6. कबीर के अतिरिक्त दो प्रमुख सन्त कवियों के नाम लिखिए।
Answer:
• रैदास तथा
• मलूकदास ।
In simple words: कबीर के अलावा, रैदास और मलूकदास भी निर्गुण संत काव्यधारा के प्रमुख कवि थे, जिन्होंने समाज सुधार और भक्ति का संदेश दिया।

🎯 Exam Tip: संत काव्यधारा के मुख्य कवियों को पहचानें और उनके योगदान को समझें।

 

Question 7. सूफी काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि का नाम बताइए।
Answer: सूफी काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि हैं-मलिक मुहम्मद जायसी ।
In simple words: सूफी काव्यधारा के सबसे प्रसिद्ध कवि मलिक मुहम्मद जायसी हैं, जिनकी रचना 'पद्मावत' इस धारा का उत्कृष्ट उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: सूफी काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि का नाम और उनकी सबसे महत्वपूर्ण रचना को याद रखें।

 

Question 8. रामभक्ति धारा के प्रतिनिधि कवि का नाम बताइए।
Answer: रामभक्ति धारा के प्रतिनिधि कवि हैं-गोस्वामी तुलसीदास
In simple words: रामभक्ति धारा के सबसे महत्वपूर्ण कवि गोस्वामी तुलसीदास हैं, जिन्होंने 'रामचरितमानस' के माध्यम से राम के जीवन और आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाया।

🎯 Exam Tip: रामभक्ति शाखा के प्रमुख कवि का नाम और उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति को याद करें।

 

Question 9. सन्त काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि का नाम बताइए।
Answer: सन्त काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि कबीरदास हैं।
In simple words: संत काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि कबीरदास हैं, जिन्होंने अपनी साखियों और सबदों के माध्यम से समाज में व्याप्त आडंबरों पर प्रहार किया।

🎯 Exam Tip: संत काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि का नाम और उनके सामाजिक संदेश को जानें।

 

Question 10. कृष्णभक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि का नाम लिखिए।
Answer: कृष्णभक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि सूरदास जी हैं?
In simple words: कृष्णभक्ति शाखा के सबसे प्रमुख कवि सूरदास हैं, जिन्होंने कृष्ण की बाल लीलाओं और प्रेम का अत्यंत सजीव वर्णन किया है।

🎯 Exam Tip: कृष्णभक्ति शाखा के मुख्य कवि का नाम और उनकी काव्य शैली की पहचान करें।

 

Question 11. रामभक्ति काव्य की रचना किन भाषाओं में हुई?
Answer: रामभक्ति काव्य की रचना अवधी और ब्रजभाषा में हुई ।
In simple words: रामभक्ति काव्य मुख्य रूप से अवधी और ब्रजभाषा में रचा गया था, जैसे तुलसीदास की 'रामचरितमानस' अवधी में है।

🎯 Exam Tip: रामभक्ति काव्य की प्रमुख भाषाओं को याद रखें और उनके प्रयोग के उदाहरण जानें।

 

Question 12. आदिकाल के विभिन्न नाम बताइए।
Answer: आदिकाल को वीरगाथा काल, चारण काल, अपभ्रंश काल, सन्धिकाल, आविर्भावकाल, भट्टकाल आदि विभिन्न नामों से जाना जाता है।
In simple words: आदिकाल को अलग-अलग विद्वानों ने उसकी प्रवृत्तियों के आधार पर वीरगाथा काल, चारण काल, और संधिकाल जैसे कई नामों से पुकारा है।

🎯 Exam Tip: आदिकाल के विभिन्न नामों को याद करें और प्रत्येक नाम के पीछे के तर्क को समझें।

 

Question 13. पूर्व-मध्यकाल किस काल को कहते हैं?
Answer: भक्तिकाल को पूर्व-मध्यकाल कहते हैं।
In simple words: हिंदी साहित्य के इतिहास में भक्तिकाल को ही पूर्व-मध्यकाल के नाम से भी जाना जाता है, जो आदिकाल के बाद आता है।

🎯 Exam Tip: हिंदी साहित्य के काल-विभाजन में भक्तिकाल के अन्य नाम को स्पष्ट रूप से जानें।

 

Question 14. आदिकाल की अवधि लिखिए।
Answer: आदिकाल की अवधि 743 ई० से 1343 ई० तक है।
In simple words: आदिकाल का समय 743 ईस्वी से 1343 ईस्वी तक माना जाता है, जिसमें मुख्य रूप से वीर रस की रचनाएँ हुईं।

🎯 Exam Tip: आदिकाल की निश्चित समय अवधि को याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 15. आदिकाल की भाषा का नाम बताइए।
Answer: आदिकाल की भाषा का नाम डिंगल है।
In simple words: आदिकाल में वीर रस की रचनाएँ मुख्य रूप से डिंगल भाषा में की गईं, जो अपभ्रंश और राजस्थानी का मिश्रण थी।

🎯 Exam Tip: आदिकाल की प्रमुख काव्य भाषा और उसकी विशेषताओं को जानें।

 

Question 16. वीरगाथा काल के प्रथम कवि का नाम लिखिए।
Answer: चन्दबरदाई ।
In simple words: वीरगाथा काल के प्रथम कवि चंदबरदाई माने जाते हैं, जिन्होंने 'पृथ्वीराज रासो' जैसे महाकाव्य की रचना की।

🎯 Exam Tip: वीरगाथा काल के प्रथम कवि का नाम और उनकी रचना को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 17. वीरगाथा काल को चारणकाल क्यों कहा जाता है?
Answer: इस युग में चारण कवियों द्वारा राजाओं की प्रशंसा में बहुतायत रचनाएँ की गयीं इसीलिए इसे चारणकाल भी कहते हैं।
In simple words: वीरगाथा काल को चारणकाल इसलिए कहते हैं क्योंकि इस समय चारण कवि अपने आश्रयदाता राजाओं की वीरता का गुणगान करते हुए युद्धों का सजीव वर्णन करते थे।

🎯 Exam Tip: चारणकाल नामकरण के पीछे के कारण को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 18. आदिकाल की कविता का मुख्य विषय क्या रहा?
Answer: आदिकाल की कविता का मुख्य विषय आश्रयदाता राजाओं की प्रशंसा एवं वीर रस से पूर्ण गाथाओं का वर्णन था।
In simple words: आदिकाल की कविताओं का मुख्य विषय राजाओं की प्रशंसा और युद्धों की वीरता का बखान करना था।

🎯 Exam Tip: आदिकाल की कविता के केंद्रीय विषयों को पहचानें और उनका महत्व जानें।

 

Question 19. वीरगीत की दो रचनाओं के नाम बताइए।
Answer: वीरगीत की दो रचनाएँ हैं-
• परमाल रासो एवं
• बीसलदेव रासो ।
In simple words: 'परमाल रासो' (आल्हाखंड) और 'बीसलदेव रासो' आदिकाल के दो प्रमुख वीरगीत काव्य हैं, जिनमें युद्ध और शौर्य का वर्णन है।

🎯 Exam Tip: वीरगीत काव्य की दो प्रमुख रचनाओं के नाम और उनके रचयिताओं को याद रखें।

 

Question 20. वीरगीत काव्यों में सर्वाधिक लोकप्रिय ग्रन्थ कौन-सा है?
Answer: वीरगीत काव्यों में सर्वाधिक लोकप्रिय काव्य ग्रन्थ आल्हाखण्ड (परमाल रासो) है।
In simple words: आदिकाल के वीरगीत काव्यों में 'आल्हाखंड', जिसे 'परमाल रासो' भी कहते हैं, सबसे अधिक लोकप्रिय है, जो वीर रस से ओत-प्रोत है।

🎯 Exam Tip: वीरगीत काव्यों में सबसे लोकप्रिय ग्रंथ का नाम और उसके प्रचलित दूसरे नाम को जानें।

 

Question 21. आदिकाल (वीरगाथा काल) के दो प्रसिद्ध कवियों के नाम बताइए।
Answer: आदिकाल के दो कवि हैं-
• चन्दबरदाई तथा
• दलपति विजय ।।
In simple words: आदिकाल के दो प्रमुख कवि चंदबरदाई और दलपति विजय हैं, जिन्होंने वीरतापूर्ण रचनाओं से उस युग का प्रतिनिधित्व किया।

🎯 Exam Tip: आदिकाल के किन्हीं दो महत्वपूर्ण कवियों के नाम याद करें।

 

Question 22. आदिकाल की दो प्रमुख रचनाओं के नाम बताइए।
Answer: आदिकाल की दो प्रमुख रचनाएँ हैं-
• पृथ्वीराज रासो एवं
• हम्मीर रासो ।
In simple words: 'पृथ्वीराज रासो' और 'हम्मीर रासो' आदिकाल की दो प्रमुख रचनाएँ हैं, जो उस समय की वीरता और ऐतिहासिक घटनाओं का चित्रण करती हैं।

🎯 Exam Tip: आदिकाल की दो प्रसिद्ध रचनाओं के नाम और उनके विषय को याद रखें।

 

Question 23. भक्तिकाल कब से कब तक माना जाता है?
Answer: भक्तिकाल 1343 ई० से 1643 ई० तक माना जाता है।
In simple words: भक्तिकाल की अवधि 1343 ईस्वी से 1643 ईस्वी तक मानी जाती है, जिसे हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग भी कहते हैं।

🎯 Exam Tip: भक्तिकाल की समय सीमा को सटीक रूप से याद करें।

 

Question 24. भक्तिकाल की दो शाखाओं के नाम लिखिए।
Answer: भक्तिकाल की दो शाखाएँ हैं-
• निर्गुण भक्ति शाखा तथा
• सगुण भक्ति शाखा ।
In simple words: भक्तिकाल को दो मुख्य शाखाओं में बांटा गया है: निर्गुण भक्ति (ईश्वर के निराकार रूप की उपासना) और सगुण भक्ति (ईश्वर के साकार रूप की उपासना)।

🎯 Exam Tip: भक्तिकाल की दोनों प्रमुख शाखाओं के नाम और उनका मूल अंतर जानें।

 

Question 25. भक्तिकाल के दो प्रमुख कवियों के नाम बताइए।
Answer:
• तुलसीदास तथा
• सूरदास ।
In simple words: भक्तिकाल के दो महान कवि तुलसीदास और सूरदास हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया।

🎯 Exam Tip: भक्तिकाल के किन्हीं दो सबसे प्रसिद्ध कवियों के नाम अवश्य याद रखें।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. भक्तिकाल की सगुण शाखा की विशेषताएँ लिखिए।
Answer: भक्तिकाल की सगुण शाखा की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं
• इसमें ईश्वर (ब्रह्म) के साकार स्वरूप की उपासना की विधि अपनायी गयी है।
• इस काल के कवियों ने सुधारवादी दृष्टिकोण एवं समन्वय की भावना से ओतप्रोत रचनाएँ की हैं।
• इस काल में ईश्वर के नाम-स्मरण की महत्ता स्थापित हुई ।
In simple words: सगुण भक्ति शाखा में भगवान के साकार रूप की पूजा की जाती है, इसमें समाज सुधार और समन्वय की भावना प्रमुख थी, तथा भगवान के नाम का स्मरण अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता था।

🎯 Exam Tip: सगुण भक्ति शाखा की मुख्य विशेषताओं को बिंदुवार याद करें।

 

Question 2. ज्ञानाश्रयी (सन्त काव्यधारा) की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
Answer: सन्त काव्यधारा की प्रमुख प्रवृत्तियाँ या विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
• गुरु की महिमा का ज्ञान
• निर्गुण ब्रह्म की उपासना
• बाह्य आडम्बरों का विरोध और समाज-सुधार
• हिन्दू-मुस्लिम एकता पर बल
• एकेश्वरवाद में विश्वास
• रहस्यवादी भावना
• नाम-स्मरण का महत्त्व
• मायारूपी महाठगिनी की निन्दा
• पंचमेल या सधुक्कड़ी भाषा ।
In simple words: ज्ञानाश्रयी संत काव्यधारा में गुरु के महत्व, निर्गुण ईश्वर की भक्ति, बाहरी दिखावों का विरोध, सामाजिक सुधार, हिन्दू-मुस्लिम एकता और सरल, मिली-जुली भाषा का प्रयोग प्रमुख था।

🎯 Exam Tip: संत काव्यधारा की सभी प्रमुख विशेषताओं को विस्तार से जानें और उनके उदाहरण समझें।

 

Question 3. प्रेमाश्रयी (सूफी) काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
Answer: प्रेमाश्रयी काव्यधारा की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं
• फारसी की मसनवी पद्धति पर आधारित लोकगाथाओं को लेकर लम्बे प्रेमाख्यानों की रचना हुई।
• प्रेमाश्रयी शाखा के रचनाकार प्रायः मुसलमान ही हैं जिन्हें हिन्दू परम्पराओं का सामान्य ज्ञान है।
• कथाएँ प्रायः हिन्दू जीवन से ही सम्बद्ध हैं।
• प्रेमाख्यानों में श्रृंगार के मादक और मर्मस्पर्शी चित्रण हैं।
• कथा की ही प्रधानता है, उपदेशात्मक प्रवृत्ति का अभाव है।
• रचनाएँ प्रायः दोहे-चौपाइयों में हैं।
• काव्य में रहस्यवाद की झलक मिलती है।
In simple words: प्रेमाश्रयी सूफी काव्यधारा में प्रेम कहानियों के माध्यम से ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग दिखाया गया, जिसमें श्रृंगार और रहस्यवाद का सुंदर चित्रण मिलता है, और इसकी रचनाएँ अक्सर दोहे-चौपाइयों में होती थीं।

🎯 Exam Tip: सूफी काव्यधारा की विशिष्टताओं, जैसे मसनवी शैली और रहस्यवादी भावना को अच्छी तरह समझें।

 

Question 4. कृष्णभक्ति काव्यधारा की प्रमुख प्रवृत्तियों एवं कवियों का उल्लेख कीजिए।
Answer: भक्तिकालीन कृष्णभक्ति काव्यशाखा की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं
• उपास्यदेव श्रीकृष्ण हैं।
• कृष्ण के बाल-स्वरूप एवं किशोर अवस्था की लीलाओं का वर्णन हुआ है।
• दास्य एवं सखा-भाव की भक्ति-भावना है।
• वात्सल्य रस का चरमोत्कर्ष प्रस्तुत हुआ है।
• श्रृंगार के संयोग एवं वियोग-दोनों पक्षों का सुन्दर चित्रण हुआ है।
• प्रकृति-वर्णन उद्दीपन रूप में हुआ है।
• भाव और भाषा का उत्कृष्ट रूप है।
• मुक्तक शैली की प्रधानता है।
प्रदुख कवि हैं – सूर, नन्ददास, कुम्भनदास, मीरा, रसखान आदि ।
In simple words: कृष्णभक्ति काव्यधारा में भगवान श्रीकृष्ण को आराध्य मानकर उनकी बाल लीलाओं, युवावस्था की प्रेम कहानियों और विभिन्न रसों (जैसे वात्सल्य और श्रृंगार) का सुंदर वर्णन किया गया है, जिसके प्रमुख कवि सूरदास, मीरा और रसखान हैं।

🎯 Exam Tip: कृष्णभक्ति शाखा की विशेषताओं, प्रमुख रसों और कवियों के नाम को सूचीबद्ध करें।

 

Question 5. रामभक्ति काव्यधारा की प्रमुख प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
Answer: रामभक्ति काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
• राम को अपना इष्टदेव मानकर उनके लोकरक्षक एवं लोकरंजक रूप में रामचरित का गायन
• दास्य-भाव की भक्ति
• चातक-प्रेम के आदर्श पर आधारित अनन्य भक्ति-भावना
• वर्णाश्रम धर्म से समर्थित सामाजिक व्यवस्था को श्रेष्ठ मानते हुए लोक मर्यादा की प्रतिष्ठा
• लोकमंगल की भावना
• विभिन्न मत-मतान्तरों, सम्प्रदायों तथा काव्य-शैलियों में समन्वय की चेष्टा
• अवधी और ब्रज दोनों भाषाओं में अधिकारपूर्वक काव्य-रचना
• प्रबन्ध एवं मुक्तक दोनों काव्य रूपों में रचना।।
In simple words: रामभक्ति काव्यधारा में भगवान राम को लोकरक्षक रूप में पूजते हुए उनकी मर्यादाओं और आदर्शों का वर्णन है, इसमें दास्य भक्ति, सामाजिक व्यवस्था का समर्थन, लोकमंगल की भावना तथा अवधी और ब्रजभाषा का प्रयोग प्रमुख है।

🎯 Exam Tip: रामभक्ति काव्यधारा की प्रमुख विशेषताओं को उदाहरणों के साथ समझें।

 

Question 6. अष्टछाप से क्या तात्पर्य है? अष्टछाप से सम्बन्धित कवियों का नामोल्लेख कीजिए।
Answer: अष्टछाप कवि समुदाय का तात्पर्य-सन्त गुरु वल्लभाचार्य के आठ शिष्य-कवियों के समुदाय को अष्टछाप कवि-समुदाय कहा जाता है। ये कृष्णभक्ति धारा के कवि थे। इस समुदाय के कवि सूरदास, नन्ददास, परमानन्ददास, कृष्णदास, कुम्भनदास, चतुर्भुजदास, छीतस्वामी एवं गोविन्दस्वामी थे।
In simple words: अष्टछाप वल्लभाचार्य और उनके पुत्र विट्ठलनाथ द्वारा स्थापित आठ कृष्णभक्त कवियों का समूह था, जिन्होंने भगवान कृष्ण की लीलाओं का गुणगान किया, जिसमें सूरदास जैसे महान कवि शामिल थे।

🎯 Exam Tip: अष्टछाप के आठों कवियों के नाम और उनके गुरुओं को याद रखें।

 

Question 7. भक्तिकाल का परिचय अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: हिन्दी साहित्य के इतिहास के द्वितीय चरण मध्यकाल के दो उपखण्ड किये गये हैं-पूर्व- मध्यकाल और उत्तरमध्यकाल । पूर्व-मध्यकाल को ही 'भक्तिकाल' के नाम से जाना जाता है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने इसका समय 1375 ई० से 1700 ई० तक माना है। इस समय तक भारत में मुस्लिम शासन स्थापित हो चुका था। मुसलमानों के अत्याचारों से पीड़ित हिन्दुओं ने ईश्वर-भक्ति की शरण ली। अब कविता राजदरबार की वस्तु न होकर ईश्वरीय भक्ति का माध्यम बन गयी। भक्ति-भावना से ओत-प्रोत रचनाओं की प्रचुरता के कारण इस काल को भक्तिकाल कहा जाता है।
In simple words: भक्तिकाल, हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग है जो 14वीं से 17वीं सदी तक फैला था। इस दौरान धार्मिक और सामाजिक तनाव के बीच लोगों ने ईश्वर की शरण ली, जिससे भक्ति-भावना से ओत-प्रोत कविताएँ लिखी गईं, जिनमें निराकार और साकार दोनों रूपों की उपासना शामिल थी।

🎯 Exam Tip: भक्तिकाल का संक्षिप्त परिचय, समय सीमा और उसके उदय के कारणों को स्पष्ट करें।

 

Question 8. अष्टछाप के चार प्रमुख कवियों के नाम एवं उनकी रचनाएँ लिखिए।
Answer:
• सूरदास-सूरसागर, सूरसारावली, साहित्यलहरी
• नन्ददास-रास पंचाध्यायी, भ्रमरगीत
• कृष्णदास-भ्रमरगीत, प्रेमतत्त्व निरूपण ।
• परमानन्ददास-परमानन्द सागर
In simple words: अष्टछाप के चार प्रमुख कवि सूरदास (सूरसागर), नंददास (रास पंचाध्यायी), कृष्णदास (भ्रमरगीत) और परमानंददास (परमानंद सागर) हैं, जिन्होंने कृष्ण-भक्ति काव्य को समृद्ध किया।

🎯 Exam Tip: अष्टछाप के प्रमुख कवियों के नाम और उनकी महत्वपूर्ण रचनाओं को युग्म के रूप में याद रखें।

 

Question 9. आदिकाल को वीरगाथा काल क्यों कहा जाता है?
Answer: हिन्दी पद्म-साहित्य का प्रथम काल वीरगाथा काल कहलाता है। इसे चारणकाल, अपभ्रंशकाल, सन्धिकाल, आविर्भावकाल आदि नामों से भी सम्बोधित किया जाता है। इस युग में देश छोटे-छोटे राज्यों में बँटा हुआ था। राजा आपस में लड़ते थे। मुसलमानों का आक्रमण भी प्रारम्भ हो गया था। इस युग में वीरों और योद्धाओं में वीर रस का संचार करना ही काव्य का मुख्य उद्देश्य रह गया था । अतः वीर रस से पूर्ण गाथाओं का वर्णन किया जाता था इसीलिए इस काल को वीरगाथा काल कहा जाता है। यह सर्वथा उपयुक्त नाम है।
In simple words: आदिकाल को वीरगाथा काल इसलिए कहते हैं क्योंकि इस समय छोटे-छोटे राज्यों के राजा आपस में युद्ध करते थे और चारण कवि अपने आश्रयदाता राजाओं की वीरता का वर्णन करते हुए वीर रस से भरी गाथाएँ लिखते थे।

🎯 Exam Tip: वीरगाथा काल नाम के औचित्य को ऐतिहासिक और साहित्यिक संदर्भ में समझाएँ।

 

Question 10. आदिकाल (वीरगाथा काल) की पाँच प्रमुख विशेषताओं को लिखिए।
Answer: इस काल की पाँच प्रमुख प्रवृत्तियाँ (विशेषताएँ) इस प्रकार हैं-
• आश्रयदाता राजाओं की प्रशंसा
• सामूहिक राष्ट्रीयता की भावना का अभाव
• वीररस की प्रधानता और युद्धों का सजीव चित्रण
• ऐतिहासिक तथ्यों के प्रस्तुतीकरण में कल्पना का पुट
• श्रृंगार का पुट ।
In simple words: आदिकाल की प्रमुख विशेषताएँ हैं राजाओं की प्रशंसा, राष्ट्रीयता की कमी, युद्धों का जीवंत वर्णन, ऐतिहासिक घटनाओं में कल्पना का मिश्रण, और श्रृंगार रस का समावेश।

🎯 Exam Tip: आदिकाल की प्रमुख प्रवृत्तियों को बिंदुवार सूचीबद्ध करें और प्रत्येक को संक्षिप्त रूप से समझाएँ।

 

Question 11. वीरगाथा काल के प्रमुख कवियों और उनकी रचनाओं के नाम लिखिए।
Answer: इस काल के प्रमुख कवि और रचनाएँ इस प्रकार हैं-
• (i) चन्दबरदाई-पृथ्वीराज रासो
• (ii) स्वयम्भू-पउम चरिउ
• (iii) नरपति नाल्ह-बीसलदेव रासो
• (iv) दलपति विजय-खुमान रासो
• (v) जगनिक-आल्हाखण्ड या परमाल रासो
• विद्यापति-पदावली व कीर्तिलता
• मधुकर भट्ट-जयमयंक जसचन्द्रिका
• भट्ट केदार-जयचन्द प्रकाश
• अमीर खुसरो-इनकी फुटकर रचनाएँ
• पुष्पदन्त-उत्तर पुराण
• शारंगधर-हम्मीर रासो
• अब्दुल रहमान-संदेशरासक
• जोइन्दु-परमात्म प्रकाश ।
In simple words: वीरगाथा काल के कुछ प्रमुख कवि चंदबरदाई (पृथ्वीराज रासो), नरपति नाल्ह (बीसलदेव रासो), जगनिक (परमाल रासो) और विद्यापति (पदावली) हैं, जिनकी रचनाओं में वीरता और प्रेम का मिश्रण मिलता है।

🎯 Exam Tip: वीरगाथा काल के कम से कम पाँच कवियों के नाम और उनकी एक-एक प्रमुख रचना को याद रखें।

 

Question 12. भक्तिकाल के नामकरण के विषय में बताइए।
Answer: भक्ति-भावना की अधिकता होने के कारण इसका नाम 'भक्तिकाल' रखा गया, जो सर्वथा उपयुक्त है। भक्तिकाल में कबीर, जायसी, सूर, तुलसी जैसे भक्त कवियों ने भक्ति काव्य रचा।
In simple words: भक्तिकाल नामकरण इस काल में भक्ति भावना की प्रबलता के कारण हुआ, क्योंकि इस दौरान कबीर, सूरदास और तुलसीदास जैसे महान कवियों ने ईश्वर-भक्ति पर केंद्रित रचनाएँ कीं।

🎯 Exam Tip: भक्तिकाल के नामकरण के पीछे के मुख्य कारण को स्पष्ट करें।

 

Question 13. भक्तिकाल की विभिन्न धाराओं का नामोल्लेख कीजिए।
Answer: भक्तिकाल की काव्यधारा चार रूपों में प्रवाहित हुई-
• ज्ञानमार्गी काव्यधारा
• प्रेममार्गी काव्यधारा
• रामभक्ति काव्यधारा
• कृष्णभक्ति काव्यधारा।
In simple words: भक्तिकाल की काव्यधाराएँ चार मुख्य भागों में बंटी थीं - ज्ञानमार्गी और प्रेममार्गी (निर्गुण भक्ति के अंतर्गत), तथा रामभक्ति और कृष्णभक्ति (सगुण भक्ति के अंतर्गत)।

🎯 Exam Tip: भक्तिकाल की चारों प्रमुख धाराओं के नाम और उनके मूल विषय को याद रखें।

 

Question 14. भक्तिकाल के प्रमुख कवियों एवं उनकी रचनाओं के नाम लिखिए।
Answer:
• कबीरदास-बीजक
• मलिक मुहम्मद जायसी-पद्मावत
• कुतुबन-मृगावती
• सूरदास-सूरसागर
• नरोत्तम दास-सुदामाचरित
• परमानन्द दास-परमानन्द सागर
• तुलसीदास-रामचरितमानस
• नाभादास-भक्तमाल
• प्राणचन्द-रामायण महानाटक आदि ।
In simple words: भक्तिकाल के प्रमुख कवियों में कबीरदास (बीजक), जायसी (पद्मावत), सूरदास (सूरसागर), और तुलसीदास (रामचरितमानस) शामिल हैं, जिन्होंने अपनी महान रचनाओं से भक्ति साहित्य को समृद्ध किया।

🎯 Exam Tip: भक्तिकाल के कम से कम पाँच-छह कवियों के नाम और उनकी एक-एक प्रसिद्ध रचना को याद करें।

 

Question 15. भक्तिकाल की प्रमुख विशेषताएँ (प्रवृत्तियाँ) लिखिए।
Answer: सन् 1343 ई० से 1643 ई० तक का समय हिन्दी साहित्य में भक्तिकाल के नाम से जाना जाता है। भक्तिकाल के साहित्य की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
• भक्ति-भावना
• गुरु की महिमा
• सुधारवादी दृष्टिकोण एवं समन्वय की भावना
• रहस्य की भावना
• अहंकार का त्याग और लोकमंगल की भावना
• काव्य का उत्कर्ष
• जीवन की नश्वरता और ईश्वर के नाम-स्मरण की महत्ता
In simple words: भक्तिकाल की मुख्य विशेषताएँ थीं गहन भक्ति भावना, गुरु का महत्व, समाज सुधार का प्रयास, रहस्यवादी दृष्टिकोण, अहंकार का त्याग, और ईश्वर के नाम स्मरण पर जोर, जिससे काव्य का उत्कर्ष हुआ।

🎯 Exam Tip: भक्तिकाल की सभी महत्वपूर्ण विशेषताओं को विस्तृत रूप से समझें और उनके प्रभाव पर विचार करें।

 

Question 16. भक्तिकाल को हिन्दी काव्य का स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है?
Answer: भक्तिकाल में भाव, भाषा एवं शिल्प की दृष्टि से हिन्दी साहित्य का उत्कर्ष हुआ । भावपक्ष तथा कलापक्ष के उत्कृष्ट रूप के कारण ही भक्तिकाल को हिन्दी-साहित्य का स्वर्णयुग कहते हैं। इस समय कबीर, जायसी, सूर तथा तुलसी जैसे रससिद्ध कवियों की दिव्य वाणी उनके अन्तःकरण से निकलकर देश के कोने-कोने में फैली थी। यही सार्वभौम और सार्वकालिक साहित्य भक्तिकाल की अनुपम देन है।।
In simple words: भक्तिकाल को हिंदी काव्य का स्वर्ण युग इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दौरान भाव, भाषा और कला की दृष्टि से साहित्य का अभूतपूर्व विकास हुआ, जिसमें कबीर, सूरदास और तुलसीदास जैसे महान कवियों ने उत्कृष्ट रचनाएँ कीं जो आज भी प्रासंगिक हैं।

🎯 Exam Tip: भक्तिकाल को स्वर्ण युग कहने के कारणों को भावपक्ष और कलापक्ष के संदर्भ में स्पष्ट करें।

 

Question 17. भक्तिकाल की निर्गुण शाखा की विशेषताएँ लिखिए।
Answer: निर्गुण शाखा की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं
• इसमें ब्रह्म (ईश्वर) के निराकार स्वरूप की उपासना की विधि अपनायी गयी।
• निर्गुण शाखा के सन्त कवियों ने साधना के सहज मार्ग को अपनाया।
• इस शाखा के सन्त कवियों ने जाति-पाँति, तीर्थ-व्रत आदि बाह्याडम्बरों का विरोध किया।
• इस काल की रचनाएँ पंचमेल सधुक्कड़ी भाषा में लिखी गयीं।
In simple words: भक्तिकाल की निर्गुण शाखा में निराकार ईश्वर की उपासना पर जोर दिया गया, संत कवियों ने बाहरी आडंबरों, जाति-पाति का विरोध किया और सरल, मिली-जुली 'सधुक्कड़ी' भाषा में अपनी बात कही।

🎯 Exam Tip: निर्गुण भक्ति शाखा की मुख्य विशेषताओं को जानें, खासकर इसके सामाजिक और दार्शनिक पहलुओं पर ध्यान दें।

UP Board Solutions Class 9 Hindi Paathy Pustak पथ्य पुस्तक में दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर

Students can now access the UP Board Solutions for Paathy Pustak पथ्य पुस्तक में दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 9 Hindi textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest UP Board syllabus.

Detailed Explanations for Paathy Pustak पथ्य पुस्तक में दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 9 Hindi chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 9 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these UP Board Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Hindi Class 9 Solved Papers

Using our Hindi solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 9 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Paathy Pustak पथ्य पुस्तक में दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest UP Board Solutions Class 9 Hindi Paathy Pustak पथ्य पुस्तक में दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर for the 2026 27 session?

The complete and updated UP Board Solutions Class 9 Hindi Paathy Pustak पथ्य पुस्तक में दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 9 Hindi are as per latest UP Board curriculum.

Are the Hindi UP Board solutions for Class 9 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 9 Hindi Paathy Pustak पथ्य पुस्तक में दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 9 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 9 Hindi Paathy Pustak पथ्य पुस्तक में दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 9 Hindi Paathy Pustak पथ्य पुस्तक में दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 9 Hindi. You can access UP Board Solutions Class 9 Hindi Paathy Pustak पथ्य पुस्तक में दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Hindi UP Board solutions for Class 9 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 9 Hindi Paathy Pustak पथ्य पुस्तक में दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर in printable PDF format for offline study on any device.