NCERT Solutions for Class 8 Hindi: Chapter 18 नीड का निर्माण फिर फिर
Access comprehensive textbook solutions for Chapter 18 नीड का निर्माण फिर फिर using the official curriculum guides for Class 8 Hindi. Designed to align with the 2026 27 UP Board standards, these detailed answers help students reinforce core academic concepts.
Practice Class 8 Hindi Solutions: Chapter 18 नीड का निर्माण फिर फिर
View or download the dedicated Chapter 18 नीड का निर्माण फिर फिर solution resource below. Engaging with these textbook answers under focused study conditions ensures continuous academic progress and mastery of the 2026 27 curriculum for Hindi.
समस्त पद्यांशों की व्याख्या
नीड़ का निर्माण .............................................................. फिर फिर ।
संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के नीड़ का निर्माण फिर-फिर' कविता से उद्धृत हैं। इसके रचयिता हरिवंशराय बच्चन' हैं।
प्रसंग – कवि ने कविता द्वारा जीवन की कठिनाइयों से लड़ने और सब कुछ नष्ट हो जाने पर भी फिर से नए निर्माण की प्रेरणा दी है।
व्याख्या – हे पक्षी! अपने नष्ट हुए घोंसले का फिर से निर्माण कर और अपने मीठे स्वर से इस संसार में फिर से प्रेम और स्नेह भर दे। आकाश में आँधी उठने से अचानक अँधेरा हो गया। धूल से भरे बादलों ने एकदम पृथ्वी को घेर लिया। इससे दिन, रात्रि के समान अंधकारयुक्त हो गया। रात्रि और भी अधिक अँधेरे वाली काली हो गई। ऐसा प्रतीत होता है मानो अब प्रकाश करने वाला सवेरा नहीं हो सकेगा। इस रात के तूफान और अंधकार से पृथ्वी का कण-कण और जीवजगत् भयभीत हो गया। परन्तु पूर्व दिशा में सूर्य की किरणें चमकने से अंधकार दूर हो गया। इससे हे पक्षी! निराश न हो और प्रेम को निमन्त्रण देकर, फिर से निर्माण कार्य कर नए घोंसले को निर्मित कर ।
बह चले झोंके ..................................................................... फिर फिर ।
संदर्भ – पूर्ववत् ।।
प्रसंग – रात्रि के भयंकर तूफान और आँधी ने जन जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया।
व्याख्या – रात्रि में आई आँधी इतनी भयंकर और विनाशकारी थी कि उससे बड़े आकार वाले पर्वत भी हिल उठे । अच्छे और बड़े-बड़े पेड़ टूटकर जड़ समेत उखड़-उखड़कर नीचे गिर पड़े। फिर तिनकों से बने घोंसले नष्ट होने से कैसे बच सकते थे? अर्थात् घोंसले भी नष्ट हो गए। कंकड़, पत्थर और ईंट से बने सुदृढ़ महल भी डगमगा गए । इतने विनाश के होने पर भी आशारूपी पक्षी छिपा बैठा था। यह पक्षी आकाश में ऊँचा चढ़कर गर्व से अपनी छाती खोले उड़ रहा था। नए सिरे से फिर से घोंसले के निर्माण में व्यस्त होकर, स्नेह और प्रेम को निमन्त्रण देकर सृजन में लगा था।
प्रश्न-अभ्यास
कुछ करने को
Question 1. 'आशावान व्यक्ति कभी पराजित नहीं होता है' -विषय पर कक्षा में भाषण : प्रतियोगिता आयोजित कीजिए ।
Answer: इन बिंदुओं पर आप भाषण लिख सकते हैं-आशा मनुष्य का शुभ संकल्प है। प्राणियों में वह अमृत समान है। जैसे सारा वनस्पति जगत सूर्य से प्रेरणा पाता है वैसे ही मनुष्य में आशाएँ ही पूर्ण शक्ति का संचार करती हैं। मनुष्य की प्रत्येक उन्नति जीवन की सफलता, जीवन लक्ष्य की प्राप्ति का संचार आशाओं द्वारा होता है। आशाएँ न होती तो संसार नीरस, अव्यक्त और निश्चेष्ठ सा दिखाई देता है। आशावान व्यक्ति कभी पराजित नहीं हो सकता।।
आशाएँ जीवन का शुभ लक्षण हैं। इनके सहारे मनुष्य घोर विपत्तियों में दुश्चिंताओं को हँसते-हँसते जीत लेता है जो केवल दुनिया का रोना रोते रहते हैं उन्हें अर्धमृत ही समझना चाहिए किन्तु आशावान व्यक्ति पौरुष के लिए सदैव समुद्यत रहता है। वह हाथ में फावड़ा लेकर टूट पड़ता है। खेतों में मिट्टी से सोना पैदा कर लेता है। आशावान व्यक्ति अपने भाग्य का स्वयं निर्माण करता है। वह औरों के आगे अपना हाथ नहीं फैलाता है वरन् औरों को जीवन देता है।
आशा और आत्मविश्वास चिरसंगी है। आशावादी व्यक्ति का आत्मविश्वासी होना भी अवश्यंभावी है। आत्मविश्वास से आंतरिक शक्तियाँ जागृत होती हैं। इन शक्तियों को वह जिस कार्य में जुटा दे, वहीं आश्चर्यजनक सफलता दिखाई देने लगेगी। संपूर्ण मानसिक चेष्टाओं से किए हुए प्रयास असफल नहीं होते किन्तु निराशा वह मानवीय दुर्गुण है जो वृद्धि को भ्रमित कर देता है। मानसिक शक्तियों को लुज-पुंज कर देता है। ऐसा व्यक्ति आधे मन से डरा-डरा सा काम करेगा। ऐसी अवस्था में सफलता प्राप्त कर सकना संभव नहीं है। जहाँ आशा नहीं वहाँ प्रयत्न नहीं।।
विद्वान विचारक स्वेट मार्डन ने लिखा है-निराशावाद भयंकर राक्षस है जो हमारे नाश की ताक में बैठा रहता है। निराशावादी प्रगति की भावना का त्याग कर देते हैं। यदि कभी उन्नति करने का कुछ खयाल आया भी तो विपत्तियों के पहाड़ उन्हें दिखाई देने लगते हैं। कार्य आरम्भ नहीं हुआ कि चिंताओं के बादल मँडराने लगे पर आशावादी व्यक्ति प्रसन्न होकर कार्य प्रारम्भ करता है। गतिमान बने रहने के लिए मुसीबतों को सहायक मानकर चलता है। उत्साहपूर्वक अंत तक पूर्व नियोजित कार्य में सन्नद्ध रहता, है इसी से उसकी आशाएँ फलवती होती हैं।
In simple words: आशावान व्यक्ति वह होता है जो जीवन में आने वाली कठिनाइयों और बाधाओं के बावजूद उम्मीद नहीं छोड़ता। वह अपने आत्मविश्वास और मेहनत से हर चुनौती का सामना करता है, और अंततः सफलता प्राप्त करता है।
🎯 Exam Tip: भाषण प्रतियोगिता में आशावाद के महत्व को उदाहरणों और प्रेरणादायक विचारों के साथ स्पष्ट करें।
Question 2. नोट- विद्यार्थी चित्र स्वयं बनाएँ।
Answer: विद्यार्थी चित्र स्वयं बनाएँ।
In simple words: इस प्रश्न में छात्रों को स्वयं चित्र बनाने के लिए कहा गया है।
🎯 Exam Tip: रचनात्मकता और कलात्मक कौशल को प्रदर्शित करने के लिए चित्र को स्पष्ट और आकर्षक बनाएँ।
विचार और कल्पना
Question 1. जैसे चिड़िया अपना घोंसला बनाती है वैसे ही मनुष्य अपने पक्के मकान बनाता है। बताइए एक मकान के निर्माण में किन-किन वस्तुओं की आवश्यकता होती है?
Answer: एक मकान के निर्माण में पक्की ईंटें, सीमेण्ट, रेत, सरिया, लकड़ी पानी आदि की आवश्यकता होती है।
In simple words: मकान बनाने के लिए मुख्य रूप से ईंट, सीमेंट, रेत, सरिया, लकड़ी और पानी जैसे बुनियादी निर्माण सामग्री की आवश्यकता होती है।
🎯 Exam Tip: मकान निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्रियों के नाम सही-सही लिखें।
Question 2. “आशा ही जीवन है' पर 10 पंक्तियाँ लिखिए।
Answer: आशा ही जीवन है, जबकि निराशा मृत्यु। संसार के सारे बड़े-बड़े रचनात्मक कार्य आशावान, साहसी लोगों ने ही किए हैं। आशा व्यक्ति का मार्ग-दर्शन करती है। मनुष्य का भविष्य के प्रति आशावान होकर कार्य करना ही उचित होता है। यदि हम इतिहास उठाकर देखें तो पता चलेगा कि सभी पराक्रमी । महापुरुष आशावादी थे । उन सबका दृष्टिकोण सकारात्मक था। आशा का पतवार लेकर बड़े-बड़े नाविकों ने महाद्वीपों का पता लगाया। इसके प्रतिकूल निराशा जीवन का नाश करने वाली और मनोबल गिराने वाली होती है। अतः हमें आशावादी होना चाहिए।
In simple words: आशा जीवन का आधार है जो हमें आगे बढ़ने और कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति देती है। यह हमें भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने और बड़े लक्ष्य हासिल करने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: आशा के महत्व को स्पष्ट करने के लिए तर्कसंगत और प्रेरणादायक पंक्तियाँ लिखें।
Question 3. नोट- विद्यार्थी स्वयं करें।
Answer: विद्यार्थी स्वयं करें।
In simple words: इस प्रश्न में छात्रों को स्वयं कार्य करने के लिए कहा गया है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में स्वयं करके सीखने पर जोर दिया जाता है।
कविता से
Question 1. 'नेह का आह्वान फिर-फिर' से कवि का क्या आशये है?
Answer: 'नेह का आह्वान फिर-फिर' से कवि का आशय है, स्नेह (आशा) से युक्त होकर नए सृजन कार्य में व्यस्त होना।
In simple words: कवि का अर्थ है कि प्रेम और आशा के साथ जीवन में लगातार नए लक्ष्यों और निर्माण कार्यों में लगे रहना चाहिए।
🎯 Exam Tip: कवि के भाव को स्पष्ट और संक्षिप्त शब्दों में व्यक्त करें।
Question 2. निराशा में आशा का संचार किस रूप में होता है?
Answer: कवि के अनुसार निराशा में आशा का संचार प्रेम और स्नेह के रूप में होता है।
In simple words: कवि के अनुसार, जब व्यक्ति निराश होता है, तो प्रेम और स्नेह की भावनाएँ ही आशा को फिर से जगाती हैं।
🎯 Exam Tip: प्रश्न का उत्तर देते समय कविता के मूल संदेश को ध्यान में रखें।
Question 3. निम्नलिखित भाव किन पंक्तियों में आए हैं? लिखिए
घोर तूफान और रात्रि के कष्टों से भयभीत जन में उषा अपनी सुनहरी किरणों से नई आशा भर देती है।
Answer: रात के उत्पात-भय से. भीत जन-जन, भीत कण-कण किन्तु प्राची से ऊषा की। मोहनी मुस्कान फिर-फिर
(ख) तेज आँधी के झोंकों के चलने से जब बड़े-बड़े पेड़-पर्वत काँपने लगते हैं, बड़े-बड़े पेड़ उखड़ जाते हैं, तब तिनकों से बने हुए घोंसलों की क्या स्थिति होगी?
Answer: बह चले झोंके कि काँपे भीम कायावान भूधर, जड़ समेत उखड़े-पुखड़कर, गिर पड़े, टूटे विटप वर, हाय तिनकों से विनिर्मित घोंसलों पर क्या न बीती ।
In simple words: यह प्रश्न पूछता है कि कविता की किन पंक्तियों में भयंकर तूफान से लोगों के भय और आशा के पुनर्जागरण, तथा पेड़ों और घोंसलों पर आँधी के प्रभाव का वर्णन है।
🎯 Exam Tip: भावों को समझने और सही पंक्तियों को उद्धृत करने पर ध्यान दें।
Question 4. सतत संघर्ष और निर्माण की क्रियाओं की उपमा कवि ने किससे की है?
Answer: सतत संघर्ष और निर्माण की क्रिया की उपमा कवि ने नीड़' का निर्माण फिर-फिर और नेह का आह्वान 'फिर-फिर' से की है।
In simple words: कवि ने लगातार कोशिश और नए काम करने की तुलना घोंसला बार-बार बनाने और प्रेम को बार-बार बुलाने से की है।
🎯 Exam Tip: उपमाओं को सटीक रूप से पहचानें और उन्हें उनके सही अर्थ के साथ प्रस्तुत करें।
Question 5. निम्नलिखित पंक्तियों के भाव स्पष्ट कीजिए
(क) रात-सा दिन हो गया, फिर रात आयी और काली।
Answer: भाव – धूल युक्त बादलों ने धरती पर इस प्रकार घेरा डाल दिया मानो दिन रात में बदल गया हो। और रात का अंधकार और बढ़ गया ।
बोल, आशा के विहंगम किस जगह पर तू छिपा था।
Answer: भाव – आशारूपी पक्षी, तू अब तक कहाँ छिपा था जो आकाश पर चढ़कर गर्व से बार-बार सीना तानता है।
In simple words: इस प्रश्न में दिए गए पंक्तियों का अर्थ समझाया गया है- पहली पंक्ति बताती है कि धूल भरे बादलों के कारण दिन रात जैसा लगने लगा और अंधेरा घना हो गया, जबकि दूसरी पंक्ति आशा को एक पक्षी के रूप में संबोधित करती है जो मुसीबत में भी गर्व से उड़ता है।
🎯 Exam Tip: पंक्तियों के गूढ़ अर्थ को सरल भाषा में स्पष्ट करें।
भाषा की बात
Question 1. 'धूलि धूसर बादलों ने भूमि को इस भाँति घेरा' में ध-ध और भ-भ की आवृत्ति हुई है। इससे पंक्ति में एक सरसता आ गई है, बताइए यहाँ किस अलंकार का प्रयोग हुआ है?
Answer: अनुप्रास अलंकार का प्रयोग हुआ है।
In simple words: इस पंक्ति में 'ध' और 'भ' वर्णों की बार-बार आवृत्ति होने के कारण अनुप्रास अलंकार का प्रयोग हुआ है।
🎯 Exam Tip: वर्णों की आवृत्ति होने पर अनुप्रास अलंकार होता है, इस नियम को याद रखें।
Question 2. कविता में 'फिर-फिर', 'जन-जन' तथा 'कण-कण' (पुनरुक्त शब्द) का प्रयोग हुआ है। फिर-फिर निर्माण करने की क्रिया' की विशेषता प्रकट कर रहा है जबकि 'जन-जन' से 'प्रत्येक जन' और 'कण-कण' से ‘प्रत्येक कण' का बोध हो रहा है। इसी प्रकारे नीचे लिखे पुनरुक्त शब्दों का अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए।
Answer: घर-घर = राम के राज्याभिषेक पर अवध में घर-घर खुशियाँ मनाई गई ।
क्षण-क्षण = युद्ध के मोर्चे पर क्षण-क्षण की खबर रखनी पड़ती है।
धीरे-धीरे = धीरे-धीरे गर्मी बढ़ती जा रही है।
भाई-भाई = हिन्दी-चीनी भाई-भाई का नारा बहुत पुराना है।
In simple words: इस प्रश्न में पुनरुक्त शब्दों का वाक्य प्रयोग करके उनका सही अर्थ और उपयोग समझाया गया है।
🎯 Exam Tip: पुनरुक्त शब्दों का वाक्य में प्रयोग करते समय उनके अर्थ की पुनरावृत्ति न हो, इसका ध्यान रखें।
Question 3. इस कविता को पढ़िए 'दुख की पिछली रजनी बीच विकसता सुख का नवल प्रभात; एक परदा यह झीना नील छिपाये है जिसमें सुख गात । जिसे तुम समझे हो अभिशाप, जगत की ज्वालाओं का मूल; ईश का वह रहस्य वरदान, कभी मत इसको जाओ भूल । विषमता की पीड़ा से व्यस्त हो रहा स्पंदित विश्व महान; यही दुख-सुख-विकास का सत्य यही भूमा का मधुमय दान ।”
(क) कविता में आए कठिन शब्दों के अर्थ शब्दकोश से ढूंढकर लिखिए।
Answer: रजनी-रात; नवल-नया; प्रभात-सवेरा; गात-शरीर; ज्वाला-अग्नि; स्पंदित-धड़कता, जीवित; भूमा-ऐश्वर्य
(ख) इस कविता का सार अपने शब्दों में लिखिए ।
Answer: कवि कहता है कि दुख की रात्रि में ही कहीं सुख का नया सवेरा जन्म लेता है। यह एक झीना परदा है जिसने दुख रूपी नीले निशान के पीछे सुख रूपी शरीर छिपा रखा है। जिसे मनुष्य अभिशाप समझता। वही जगत की ज्वाला रूपी जीवन का मूल होता है। ईश्वर के इस रहस्य रूपी वरदान को भूलना नहीं चाहिए। जीते जागते विशाल विश्व में अनेक विषमताएँ हैं जो जग की पीड़ा का कारण हैं। दुख या सुख के विकास का सत्य है और यही ऐश्वर्य का दान है।
(ग) कविता पर अपने साथियों से पूछने के लिए प्रश्न बनाइए ।
Answer:
• दुख की पिछली रजनी बीच विकसता सुख का नवल प्रभात से कवि को क्या तात्पर्य है?
• जग की पीड़ा के क्या कारण हैं?
(घ) कविता को उचित शीर्षक दीजिए ।
Answer: सुख-दुख ।
In simple words: यह प्रश्न एक कविता पर आधारित है जिसमें कठिन शब्दों के अर्थ, कविता का सार, प्रश्न निर्माण और उचित शीर्षक देने जैसे कार्य शामिल हैं, जिससे छात्रों की समझ और रचनात्मकता का आकलन किया जा सके।
🎯 Exam Tip: कविता को ध्यान से पढ़कर उसके मुख्य भाव, कठिन शब्दों के अर्थ और केंद्रीय विचार को समझें ताकि सभी उप-भागों का सटीक उत्तर दिया जा सके।
Free study material for Hindi
Free UP Board Textbook Explanations: Class 8 Hindi Chapter 18 नीड का निर्माण फिर फिर
Accessing Chapter 18 नीड का निर्माण फिर फिर Solutions
Review comprehensive exercise answers for Class 8 Hindi Chapter 18 नीड का निर्माण फिर फिर. Fully updated to match current UP Board syllabus guidelines, these textbook solutions help students verify their work and maintain accurate study notes.
Concept-Driven Answers for Class 8 Hindi
Beyond providing final answers, these guides offer step-by-step breakdowns for complex queries in the Class 8 Hindi module. This approach helps students balance theoretical depth with practical problem-solving skills required for UP Board exams.
Maximizing Study Efficiency
Frequent review of these structured answers builds strong analytical capabilities and response efficiency. Maximize your academic readiness by combining these textbook solutions with our curated study materials and mock evaluations for Class 8 Hindi.
FAQs
The complete and updated UP Board Solutions Class 8 Hindi Chapter 18 नीड का निर्माण फिर फिर is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 8 Hindi are as per latest UP Board curriculum.
Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 8 Hindi Chapter 18 नीड का निर्माण फिर फिर as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 8 Hindi Chapter 18 नीड का निर्माण फिर फिर will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 8 Hindi. You can access UP Board Solutions Class 8 Hindi Chapter 18 नीड का निर्माण फिर फिर in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 8 Hindi Chapter 18 नीड का निर्माण फिर फिर in printable PDF format for offline study on any device.