UP Board Solutions Class 8 Hindi Chapter 18 Maharshi Dayanand

Official UP Board Solutions for Class 8 Hindi: Chapter 18 महर्षि दयानंद

Access comprehensive textbook solutions for Chapter 18 महर्षि दयानंद using the official curriculum guides for Class 8 Hindi. Designed to align with the 2026 27 UP Board standards, these detailed answers help students reinforce core academic concepts.

Chapter-wise Solutions for Hindi: Chapter 18 महर्षि दयानंद

Access the complete solution PDF for Class 8 Hindi below. Regular practice with these targeted textbook answers builds familiarity with standard question patterns and helps secure higher marks in final school evaluations.

Up Board Solutions For Class 8 Hindi Chapter 18 महर्षि दयानन्द (महान व्यक्तित्व)

पाठ का सारांश

महर्षि दयानन्द का बचपन का नाम मूलशंकर था। इसका जन्म सम्पन्न ब्राह्मण परिवार में सन् 1824 ई० को गुजरात के टकरा गाँव में हुआ। इनके पिता का नाम कर्षन जी त्रिवेदी और माता का नाम शोभाबाई था। मूलशंकर का मन अध्ययन और एकान्त चिन्तन में अधिक लगता था। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा संस्कृत में हुई। ये कुशाग्र बुद्धि और विलक्षण स्मृति वाले छात्र थे ।

सोलह वर्ष की आयु में मूलशंकर के जीवन में छोटी बहन की हैजे से मृत्यु होने से इनमें वैराग्य भावना पैदा हो गई। इसके तीन वर्ष बाद मूलशंकर को स्नेह करने वाले चाचा को भी देहान्त हो गया। 21 वर्ष की आयु में ये चुपचाप घर से निकल पड़े । सायले गाँव (अहमदाबाद) में जाकर एक ब्रह्मचारी जी से दीक्षा लेकर शुद्ध चैतन्य ब्रह्मचारी बन गए। इसके बाद नर्मदा के तट पर दण्डी स्वामी पूर्णानन्द सरस्वती से संन्यास की दीक्षा लेकर ये दयानन्द सरस्वती हो गए। दीक्षा के उपरान्त इन्होंने सारा समय विद्याध्ययन और योगाभ्यास में लगाया। इन्होंने द्वारिका के स्वामी महात्मा शिवानन्द से योग विद्या का ज्ञान प्राप्त किया। इसके बाद मथुरा के स्वामी विरजानन्द के चरणों में दयानन्द ने 'अष्टाध्यायी म्हाभाष्य और 'वेदान्त सूत्र' आदि अनेक ग्रन्थों का अध्ययन किया। विद्याध्ययन की समाप्ति पर गुरु के आदेशों का पालन करने की प्रतिज्ञा की। गुरु का आदेश था- “वत्स दयानन्द ! जंगलों में एकान्त साधना में संन्यास की पूर्णता नहीं है। कुसंस्कारों और अन्धविश्वासों का खण्डन करके समाज का उद्धार करो।”

स्वामी दयानन्द ने जीवनभर आडम्बरों का विरोध किया। उन्होंने महान ग्रन्थ 'सत्यार्थ प्रकाश' लिखा जिसमें धर्म, समाज, राजनीति, नैतिकता एवं शिक्षा पर उनके संक्षिप्त विचार दिए गए हैं। सन् 1875 ई० में स्वामी जी ने 'आर्य-समाज' की स्थापना की। इसका मुख्य उद्देश्य सभी मनुष्यों के शारीरिक, आध्यात्मिक और सामाजिक स्तर को उठाना था।

उन्होंने वेदों और संस्कृत साहित्य के अध्ययन पर बल दिया। उन्होंने नारी शिक्षा पर भी बल दिया। उन्होंने पर्दा प्रथा और बाल-विवाह का विरोध किया। विधवा विवाह और पुनर्विवाह का समर्थन किया। समाज में व्याप्त वर्ण-भेद, असमानता और छुआछूत की भावना का भी उन्होंने खुलकर विरोध किया। उन्होंने संस्कृत भाषा और धर्म को ऊँचा स्थान दिलाने के लिए हिन्दी भाषा को प्रतिष्ठित किया । महर्षि दयानन्द समाज सुधारक और आर्य संस्कृति के रक्षक थे। मानव कल्याण की कामना करने वाले महर्षि दयानन्द का जीवन-दीप सन् 1883 ई० को कार्तिक की अमावस्या को सहसा बुझ गया। स्वामी दयानन्द 19वीं सदी के भारत के पुनर्जागरण के प्रेरक व्यक्ति थे।

अभ्यास-प्रश्न

 

Question 1. स्वामी पूर्णानन्द सरस्वती से संन्यास की दीक्षा लेने के बाद मूलशंकर किस नाम से पुकारे जाने लगे?
Answer: दीक्षा लेने के बाद मूलशंकर 'स्वामी दयानन्द सरस्वती' के नाम से पुकारे जाने लगे ।
In simple words: मूलशंकर ने पूर्णानन्द सरस्वती से दीक्षा ली और उन्हें दयानन्द सरस्वती के नाम से जाना जाने लगा।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में दीक्षा के बाद के नाम परिवर्तन को स्पष्ट रूप से दर्शाना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. गुरु विरजानन्द ने स्वामी दयानन्द को क्या उपदेश दिया था?
Answer: गुरु विरजानन्द ने स्वामी दयानन्द को यह उपदेश दिया था, “वत्स दयानन्द जंगलों में एकान्त चिन्तन में संन्यास की पूर्णता नहीं है..... कुसंस्कारों और अन्धविश्वासों को खण्डन करके समाज • का उद्धार करो।”
In simple words: गुरु विरजानन्द ने दयानन्द को आदेश दिया कि जंगल में अकेले साधना करने के बजाय समाज के अंधविश्वासों और कुरीतियों को दूर करने का कार्य करें।

🎯 Exam Tip: गुरु विरजानन्द के उपदेश का मूल संदेश समाज सुधार पर केंद्रित है, इसे पूर्ण रूप से उद्धृत करना चाहिए।

 

Question 3. आर्य समाज की स्थापना किस उद्देश्य को लेकर की गयी थी?
Answer: आर्य समाज की स्थापना का उद्देश्य सभी मनुष्यों के शारीरिक, आध्यात्मिक और सामाजिक स्तर को ऊपर उठाना था।
In simple words: आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य था सभी लोगों के शारीरिक, आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन को बेहतर बनाना।

🎯 Exam Tip: आर्य समाज की स्थापना के त्रि-स्तरीय उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से बताना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. दयानन्द सरस्वती के समाज सुधार सम्बन्धी कार्यों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer: स्वामी दयानन्द ने प्राचीन संस्कृति और सभ्यता की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने वेदों और संस्कृत पर बल दिया। उन्होंने नारी शिक्षा पर भी बल दिया। उन्होंने पर्दा प्रथा और बाल विवाह का विरोध किया। उन्होंने विधवा विवाह और पुनर्विवाह का समर्थन किया। समाज में व्याप्त वर्ण-भेद, असमानता और छुआछूत की भावना का खुलकर विरोध किया। वे महान सुधारक और भारतीय संस्कृति के रक्षक थे ।
In simple words: स्वामी दयानन्द सरस्वती ने वेदों, संस्कृत, नारी शिक्षा पर जोर दिया और पर्दा प्रथा, बाल विवाह, वर्ण-भेद, असमानता, छुआछूत का विरोध किया, तथा विधवा विवाह और पुनर्विवाह का समर्थन किया।

🎯 Exam Tip: समाज सुधार के विभिन्न पहलुओं को क्रमबद्ध तरीके से उल्लेखित करना और उदाहरण देना प्रभावी होगा।

 

Question 5. स्वामी दयानन्द सरस्वती के विषय में रवीन्द्र नाथ टैगोर ने क्या कहा था?
Answer: स्वामी दयानन्द सरस्वती के विषय में रवीन्द्र नाथ टैगोर ने कहा था कि स्वामी दयानन्द 19वीं शताब्दी में भारत के पुनर्जागरण को प्रेरक व्यक्ति थे। उन्होंने भारतीय समाज के लिए एक ऐसा मार्ग प्रशस्त किया जिसपर चलकर भारतीय समाज समुन्नत किया जा सकता है।
In simple words: रवीन्द्र नाथ टैगोर ने स्वामी दयानन्द को 19वीं शताब्दी में भारत के पुनर्जागरण का प्रमुख प्रेरणास्रोत माना, जिन्होंने समाज की उन्नति का मार्ग दिखाया।

🎯 Exam Tip: रवीन्द्र नाथ टैगोर के कथन को सटीक रूप से प्रस्तुत करना उत्तर को अधिक प्रभावशाली बनाएगा।

 

Question 6. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (पूर्ति करके)
(क) महर्षि दयानन्द को जन्म सन् 1824 ई० में हुआ था।
Answer: महर्षि दयानन्द को जन्म सन् 1824 ई० में हुआ था।
(ख) मूलशंकर संन्यास की दीक्षा लेने के पश्चात स्वामी दयानन्द सरस्वती कहलाए।
Answer: मूलशंकर संन्यास की दीक्षा लेने के पश्चात स्वामी दयानन्द सरस्वती कहलाए।
(ग) स्वामी दयानन्द ने द्वारिका के स्वामी शिवानन्द से योग विद्या का ज्ञान प्राप्त किया।
Answer: स्वामी दयानन्द ने द्वारिका के स्वामी शिवानन्द से योग विद्या का ज्ञान प्राप्त किया।
(घ) आर्य समाज की स्थापना का मुख्य उद्देश्य सभी मनुष्यों के शारीरिक और आध्यात्मिक स्तर को ऊपर उठाना था।
Answer: आर्य समाज की स्थापना का मुख्य उद्देश्य सभी मनुष्यों के शारीरिक और आध्यात्मिक स्तर को ऊपर उठाना था।
In simple words: ये प्रश्न महर्षि दयानन्द के जीवन और कार्यों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को रिक्त स्थानों के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जिन्हें सही जानकारी से भरना होता है।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति में सही वर्ष, नाम और उद्देश्यों को सटीक रूप से याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. सही (८) और गलत (X) का निशान लगाइए (सही-गलत का निशान लगाकर)
(अ) दयानन्द सरस्वती ने महान धर्मग्रन्थ 'सत्यार्थ प्रकाश' लिखा ।
Answer: (√) दयानन्द सरस्वती ने महान धर्मग्रन्थ 'सत्यार्थ प्रकाश' लिखा ।
(ब) स्वामी दयानन्द ने दिल्ली में आर्य समाज की स्थापना की।
Answer: (X) स्वामी दयानन्द ने दिल्ली में आर्य समाज की स्थापना की।
(स) स्वामी दयानन्द ने पर्दा प्रथा तथा बाल-विवाह जैसी कुरीतियों का विरोध किया।
Answer: (√) स्वामी दयानन्द ने पर्दा प्रथा तथा बाल-विवाह जैसी कुरीतियों का विरोध किया।
(द) स्वामी दयानन्द का जीवन-दीप 1885 में बुझ गया ।
Answer: (X) स्वामी दयानन्द का जीवन-दीप 1885 में बुझ गया ।
In simple words: यह प्रश्न स्वामी दयानन्द सरस्वती के जीवन और कार्यों से संबंधित कथनों की सत्यता या असत्यता की पहचान करने पर आधारित है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक कथन को ध्यान से पढ़कर स्वामी दयानन्द के जीवन से संबंधित तथ्यों के आधार पर सही या गलत का चुनाव करें।

 

Question 8. स्वामी दयानन्द के जीवन दर्शन को संक्षेप में वर्णित कीजिए ।
Answer: स्वामी दयानन्द का जीवन दर्शन-कोई भी सद्गुण सत्य से बड़ा नहीं है। कोई ज्ञान भी सत्य से बड़ा नहीं है । इसलिए मनुष्य को सदा सत्य का पालन करना चाहिए। परमात्मा के रचे पदार्थ सब प्राणियों के लिए एक से हैं। इसलिए ईश्वर प्रदत्त धर्म भी सब मनुष्यों के लिए एक ही होना चाहिए। धर्म के नाम पर समाज का भिन्न-भिन्न सम्प्रदायों में बँटा होना ईश्वरीय नियम के प्रतिकूल है।
In simple words: स्वामी दयानन्द का जीवन दर्शन सत्य, ज्ञान और सभी मनुष्यों के लिए एक समान ईश्वर प्रदत्त धर्म के पालन पर केंद्रित था, जो सांप्रदायिक भेदों का विरोध करता है।

🎯 Exam Tip: जीवन दर्शन के मूल सिद्धांतों जैसे सत्य, एक धर्म और सांप्रदायिक एकता पर जोर दें।

 

Question 9. महर्षि दयानन्द सरस्वती के किन-किन गुणों से आप प्रभावित हैं? उन गुणों को स्वयं में कैसे विकसित करेंगे।
Answer: स्वामी दयानन्द सरस्वती की कुशाग्र बुद्धि, विलक्षण स्मरण शक्ति, अध्ययनशीलता, प्राचीन भारतीय संस्कृति के प्रति लगाव, सदा सत्य का पालन, एक ईश्वर प्रदत्त धर्म में विश्वास, स्वदेश प्रेम, परोपकार की भावना, मानव प्रेम और सहिष्णुता आदि गुणों से हम प्रभावित हैं। हमें इन गुणों में से कुछ को अपनाने के लिए स्वयं में लगन, अभ्यास और रुचि पैदा करनी होगी।
In simple words: हम महर्षि दयानन्द के तीक्ष्ण बुद्धि, याददाश्त, पढ़ाई के प्रति लगन, सत्यनिष्ठा, देश प्रेम और परोपकार जैसे गुणों से प्रभावित हैं और इन्हें लगन व अभ्यास से अपना सकते हैं।

🎯 Exam Tip: अपने प्रभावित करने वाले गुणों को स्पष्ट रूप से लिखें और उन्हें विकसित करने के लिए व्यावहारिक उपाय बताएं।

Step-by-Step Textbook Answers: Class 8 Hindi Chapter 18 महर्षि दयानंद

Accessing Chapter 18 महर्षि दयानंद Solutions

Explore reliable textbook solutions for Chapter 18 महर्षि दयानंद tailored for Class 8 learners. Utilizing these complete exercise answers ensures your preparation aligns exactly with official UP Board standards for Hindi.

Concept-Driven Answers for Class 8 Hindi

Clear, methodical explanations accompany every challenging problem within the Class 8 Hindi text. Engaging with these detailed answers lays a solid foundation for advanced learning and improves foundational clarity for upcoming assessments.

Maximizing Study Efficiency

Frequent review of these structured answers builds strong analytical capabilities and response efficiency. Maximize your academic readiness by combining these textbook solutions with our curated study materials and mock evaluations for Class 8 Hindi.

FAQs

Where can I find the latest UP Board Solutions Class 8 Hindi Chapter 18 महर्षि दयानंद for the 2026 27 session?

The complete and updated UP Board Solutions Class 8 Hindi Chapter 18 महर्षि दयानंद is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 8 Hindi are as per latest UP Board curriculum.

Are the Hindi UP Board solutions for Class 8 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 8 Hindi Chapter 18 महर्षि दयानंद as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 8 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 8 Hindi Chapter 18 महर्षि दयानंद will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 8 Hindi Chapter 18 महर्षि दयानंद in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 8 Hindi. You can access UP Board Solutions Class 8 Hindi Chapter 18 महर्षि दयानंद in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Hindi UP Board solutions for Class 8 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 8 Hindi Chapter 18 महर्षि दयानंद in printable PDF format for offline study on any device.