UP Board Solutions Class 7 Agricultural Science Chapter 4 Urvarakon Ke Prakar Evam Mrida Parikshan

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Detailed Chapter 4 उर्वरकोण के प्रकार एवं मृदा परीक्षण UP Board Solutions for Class 7 Agricultural Science

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Class 7 Agricultural Science Chapter 4 उर्वरकोण के प्रकार एवं मृदा परीक्षण UP Board Solutions PDF

अभ्यास

 

Question 1. (i) वजन के आधार पर वायुमण्डल में प्रतिशत नाइट्रोजन पाया जाता है-
(क) 60
(ख) 70
(ग) 78 (√)
(घ) 90
Answer: (ग) 78
In simple words: हमारी पृथ्वी के चारों ओर की हवा में, वजन के हिसाब से, 78 प्रतिशत नाइट्रोजन गैस होती है। यह सबसे ज़्यादा पाई जाने वाली गैस है।

🎯 Exam Tip: वायुमंडल में विभिन्न गैसों का प्रतिशत याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर नाइट्रोजन और ऑक्सीजन का।

 

Question 1. (ii) अमोनियम सल्फेट में प्रतिशत नाइट्रोजन की मात्रा पाई जाती है-
(क) 15
(ख) 20 (√)
(ग) 25
(घ) 30
Answer: (ख) 20
In simple words: अमोनियम सल्फेट नाम के उर्वरक में, 20 प्रतिशत नाइट्रोजन होता है। यह पौधों के लिए नाइट्रोजन का एक अच्छा स्रोत है।

🎯 Exam Tip: उर्वरकों में मौजूद पोषक तत्वों की सही प्रतिशत मात्रा को याद रखें, क्योंकि यह उनकी प्रभावशीलता को दर्शाती है।

 

Question 1. (iii) सिंगल सुपर फॉस्फेट में प्रतिशत फॉस्फोरस की मात्रा पाई जाती है-
(क) 12
(ख) 16 (√)
(ग) 20
(घ) 24
Answer: (ख) 16
In simple words: सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) एक उर्वरक है जिसमें 16 प्रतिशत फॉस्फोरस होता है। यह पौधों की जड़ों के विकास के लिए बहुत जरूरी है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न फॉस्फेटिक उर्वरकों में फॉस्फोरस की मात्रा को ध्यान में रखें, क्योंकि यह फसलों के लिए फॉस्फोरस की आपूर्ति में महत्वपूर्ण है।

 

Question 1. (iv) म्यूरेट ऑफ पोटाश में प्रतिशत पोटैशियम की मात्रा पाई जाती है-
(क) 40
(ख) 50
(ग) 60 (√)
(घ) 70
Answer: (ग) 60
In simple words: म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) एक पोटैशियम उर्वरक है, जिसमें 60 प्रतिशत पोटैशियम पाया जाता है। यह पौधों को मजबूत बनाता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

🎯 Exam Tip: पोटाश उर्वरकों में पोटैशियम की प्रतिशत मात्रा याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पौधों की समग्र सेहत और फल-फूल की गुणवत्ता के लिए जरूरी है।

 

Question 1. (v) जटिल उर्वरक प्रकार के होते हैं
(क) दो
(ख) तीन (√)
(ग) चार
(घ) पाँच
Answer: (ख) तीन
In simple words: जटिल उर्वरक मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं। इनमें एक से ज़्यादा पोषक तत्व एक साथ मिले होते हैं।

🎯 Exam Tip: जटिल उर्वरकों के प्रकार और उनके गुणों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये पौधों को एक साथ कई पोषक तत्व प्रदान करते हैं।

 

Question 1. (vi) जैव उर्वरक मृदा में बढ़ाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं
(क) नाइट्रोजन (√)
(ख) फॉस्फोरस
(ग) पोटाश
(घ) सल्फर
Answer: (क) नाइट्रोजन
In simple words: जैव उर्वरक का इस्तेमाल मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने के लिए किया जाता है। ये सूक्ष्मजीव होते हैं जो हवा की नाइट्रोजन को पौधों के लिए उपयोगी बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: जैव उर्वरक किस विशेष पोषक तत्व को बढ़ाने में सहायक होते हैं, इसे स्पष्ट रूप से याद रखें, क्योंकि यह उनके कार्य सिद्धांत का आधार है।

 

Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
Answer:
(i) मृदा वायु में वजन के आधार पर नाइट्रोजन की 79 प्रतिशत मात्रा पाई जाती है।
(ii) यूरिया में नाइट्रोजन की 46 प्रतिशत मात्रा पाई जाती है।
(iii) डाई कैल्सियम फॉस्फेट में फॉस्फोरस की 32 प्रतिशत मात्रा पाई जाती है।
(iv) पोटैशियम सल्फेट में पोटाश की 48 प्रतिशत मात्रा पाई जाती है।
(v) मिश्रित उर्वरक सस्ता होता है।
(vi) राइजोबियम बैक्टीरिया मृदा में नाइट्रोजन स्थिर करता है।
(vii) मृदा परीक्षण उर्वरता निर्धारण करने की एक रासायनिक विधि है।
In simple words: मिट्टी की हवा और विभिन्न उर्वरकों में पोषक तत्वों की मात्रा तय होती है। राइजोबियम जैसे जीवाणु मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाते हैं। मिट्टी की जाँच करना एक रासायनिक तरीका है जिससे यह पता चलता है कि मिट्टी कितनी उपजाऊ है।

🎯 Exam Tip: इन रिक्त स्थानों की पूर्ति में वैज्ञानिक नामों और मात्राओं को सही-सही याद रखना जरूरी है, क्योंकि ये सीधे तथ्य आधारित प्रश्न हैं।

 

Question 3. निम्नलिखित में स्तम्भ 'क' को स्तम्भ 'ख' से सुमेल कीजिए।
Answer:

स्तम्भ 'क'स्तम्भ 'ख'
कम्पोस्टकार्बनिक खाद
डाई अमोनियम फॉस्फेटजटिल उर्वरक
सूक्ष्म जीव कल्चरजैव उर्वरक
मृदा परीक्षणउर्वरता निर्धारण
नाइट्रोजन स्थिर करने वाली गाँठेंदलहनी फसलें
सिंगल सुपर फास्फेटअकार्बनिक उर्वरक
In simple words: इस सवाल में आपको कॉलम 'क' की चीज़ों को कॉलम 'ख' की सही चीज़ों से मिलाना था। यह दिखाता है कि आप अलग-अलग खाद, उर्वरक और मिट्टी से जुड़ी बातों को कितना समझते हैं।

🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, पहले उन जोड़ियों को मिलाएँ जिनके उत्तर के बारे में आप पूरी तरह सुनिश्चित हैं, फिर बाकी विकल्पों को हटाने की प्रक्रिया से हल करें।

 

Question 4. निम्नलिखित कथनों में सही पर (√) तथा गलत पर (X) का निशान लगाइए-
Answer:
(i) यूरिया फॉस्फेटिक उर्वरक है। (X)
(ii) नाइट्रोजन को कृषि की मास्टर कुंजी कहा जाता है। (X)
(iii) रॉक फॉस्फेट में 20-40% फॉस्फोरस पाया जाता है। (✔)
(iv) फॉस्फोरस वायुमण्डल से बैक्टीरिया द्वारा नाइट्रोजन को मृदा में स्थिर करने में सहायता करता है। (√)
(v) पोटाश पौधों की जड़ों एवं तना को मजबूत बनाता है। (√)
(vi) मृदा नमूना छायादार स्थानों से एकत्रित किया जाता है। (X)
In simple words: यूरिया एक नाइट्रोजन उर्वरक है, फॉस्फेटिक नहीं। नाइट्रोजन खेती के लिए बहुत ज़रूरी है लेकिन इसे 'मास्टर कुंजी' नहीं कहते। रॉक फॉस्फेट में अच्छा-खासा फॉस्फोरस होता है। फॉस्फोरस नाइट्रोजन स्थिरीकरण में मदद करता है। पोटाश पौधों की जड़ों और तने को मजबूत करता है। मिट्टी के नमूने हमेशा साफ और धूप रहित जगह से लेने चाहिए ताकि परिणाम सही आएं।

🎯 Exam Tip: सही या गलत बताने वाले प्रश्नों में, प्रत्येक कथन के पीछे के वैज्ञानिक कारण को समझें ताकि आप सही निर्णय ले सकें।

 

Question 5. खाद को परिभाषित कीजिए।
Answer: खाद एक तरह का कार्बनिक पदार्थ होता है। यह पौधों के लिए सभी जरूरी पोषक तत्व देता है। खाद मिट्टी की बनावट को भी सुधारती है, जिससे पानी और हवा आसानी से अंदर जा सकें। कम्पोस्ट खाद, गोबर की सड़ी-गली खाद, जैविक खाद और हरी खाद सभी इसके उदाहरण हैं।
In simple words: खाद वे कार्बनिक चीजें हैं जो पौधों को पोषक तत्व देती हैं। यह मिट्टी की सेहत भी सुधारती है।

🎯 Exam Tip: खाद की परिभाषा में 'कार्बनिक पदार्थ' और 'पौधों के पोषक तत्व' इन दो मुख्य शब्दों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. नाइट्रोजन उर्वरक का वर्गीकरण कीजिए।
Answer: नाइट्रोजन उर्वरकों को रासायनिक बनावट के आधार पर मुख्य रूप से इन वर्गों में बांटा गया है:
(i) नाइट्रेट उर्वरक-
1. सोडियम नाइट्रेट- इसमें 16% नाइट्रोजन होता है।
2. कैल्शियम नाइट्रेट- इसमें 15% नाइट्रोजन होता है। इन उर्वरकों को खड़ी फसलों पर छिड़काव करके इस्तेमाल किया जाता है।
(ii) अमोनियम उर्वरक-
1. अमोनियम सल्फेट- इसमें 20% नाइट्रोजन होता है।
2. डाई अमोनियम फॉस्फेट- इसमें 18% नाइट्रोजन होता है। इसमें नाइट्रोजन अमोनियम रूप में मिलती है और इसे मिट्टी में मिलाया जाता है।
(iii) अमोनियम और नाइट्रेट उर्वरक-
1. अमोनिया नाइट्रेट- इसमें 33.5% नाइट्रोजन होता है।
2. अमोनियम सल्फेट नाइट्रेट- इसमें 26% नाइट्रोजन होता है। इन उर्वरकों को फसल की बुवाई के समय खेत में मिलाया जाता है।
(iv) नाइट्रोजन घोल-
1. अमोनिया यूरिया घोल- इसमें 35% नाइट्रोजन होता है।
(v) एमाइड उर्वरक- ये उर्वरक पौधों को हरा-भरा रखने और उनकी वृद्धि के लिए बहुत जरूरी होते हैं।
In simple words: नाइट्रोजन उर्वरकों को उनके रासायनिक रूप के हिसाब से बांटा गया है, जैसे नाइट्रेट, अमोनियम, या दोनों का मिश्रण। कुछ उर्वरक छिड़काव के लिए होते हैं, तो कुछ मिट्टी में मिलाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन उर्वरकों का वर्गीकरण करते समय, प्रत्येक वर्ग के मुख्य उर्वरक और उनमें नाइट्रोजन की प्रतिशत मात्रा का उल्लेख करना सुनिश्चित करें।

 

Question 7. मृदा में नाइट्रोजन की कमी का पौधों पर प्रभाव बताइए ।
Answer: मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी होने पर पौधों की बढ़त रुक जाती है। पौधों की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं। इसके साथ ही, फल छोटे-छोटे और कम बनते हैं, और कई बार पकने से पहले ही झड़ जाते हैं। पर्याप्त नाइट्रोजन के बिना, पौधे ठीक से प्रोटीन नहीं बना पाते, जो उनके विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: नाइट्रोजन की कमी से पौधे धीरे बढ़ते हैं, पत्तियां पीली हो जाती हैं, और फल छोटे होकर समय से पहले गिर जाते हैं।

🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन की कमी के प्रभावों को बताते समय, पत्तों का पीला पड़ना, वृद्धि रुकना, और फलों पर असर जैसे मुख्य लक्षणों को जरूर शामिल करें।

 

Question 8. फॉस्फेटिक उर्वरकों का वर्गीकरण कीजिए ।
Answer: फॉस्फेटिक उर्वरकों को घुलनशीलता के आधार पर तीन मुख्य वर्गों में बांटा जाता है:
(i) जल में घुलनशील- इन उर्वरकों को अम्लीय और सामान्य मिट्टी में उपयोग किया जाता है।
1. सिंगल सुपर फॉस्फेट – इसमें 16% फॉस्फोरस होता है।
2. मोनो अमोनियम फॉस्फेट – इसमें 48% फॉस्फोरस होता है।
(ii) साइट्रेट घुलनशील- ये साइट्रिक अम्ल में घुलनशील होते हैं लेकिन पानी में नहीं घुलते। इनका उपयोग अम्लीय मिट्टी में किया जाता है।
1. डाई कैल्शियम फॉस्फेट – इसमें 32% फॉस्फोरस होता है।
2. बेसिक स्लैग – इसमें 15-25% फॉस्फोरस होता है।
(iii) अघुलनशील- ये उर्वरक साइट्रिक अम्ल और पानी दोनों में अघुलनशील होते हैं। इनका उपयोग ज़्यादा अम्लीय मिट्टी में किया जाता है। फॉस्फोरस पौधों की जड़ों को मजबूत बनाने और फूलों व फलों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
1. रॉक फॉस्फेट – इसमें 20-40% फॉस्फोरस होता है।
2. हड्डी का चूरा – इसमें 20-25% फॉस्फोरस होता है।
In simple words: फॉस्फोरस उर्वरकों को इस बात पर बांटा जाता है कि वे पानी या एसिड में कितनी आसानी से घुलते हैं। ये जल में घुलनशील, साइट्रेट घुलनशील और अघुलनशील होते हैं।

🎯 Exam Tip: फॉस्फेटिक उर्वरकों के वर्गीकरण में प्रत्येक वर्ग के मुख्य उदाहरणों और उनकी घुलनशीलता के प्रकार को बताना आवश्यक है।

 

Question 9. पोटाश का पौधों पर क्या प्रभाव होता है?
Answer: पोटाश पौधों की वृद्धि और फलों की चमक बढ़ाने में मदद करता है। यह पौधों में बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ाता है और प्रोटीन बनाने में भी सहायक होता है। पोटाश पौधों के तने और जड़ों को मजबूत बनाता है, जिससे फसलें तेज हवा या पानी से गिरती नहीं हैं। यह नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की अधिकता को संतुलित करता है। पोटाश की कमी होने पर फसलें देर से पकती हैं और अनाज, फल व बीज कम पैदा होते हैं। पोटाश पौधों को ठंड और सूखे जैसे तनावों से बचाने में भी मदद करता है।
In simple words: पोटाश पौधों को बढ़ने, फल चमकाने, बीमारियों से लड़ने और जड़ों को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसकी कमी से फसलें कमजोर और कम पैदावार वाली हो जाती हैं।

🎯 Exam Tip: पोटाश के प्रभावों का वर्णन करते समय, पौधों की बीमारियों से लड़ने की क्षमता, तने की मजबूती और फलों की गुणवत्ता पर इसके सकारात्मक प्रभावों को शामिल करें।

 

Question 10. मृदा परीक्षण क्यों कराना चाहिए?
Answer: मिट्टी परीक्षण इसलिए जरूरी है ताकि यह पता चल सके कि मिट्टी फसल उगाने के लिए कितनी अच्छी है। मिट्टी परीक्षण के मुख्य उद्देश्य ये हैं:
1. मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की सही मात्रा जानना।
2. फसलों की जरूरत के हिसाब से तत्वों की कमी का अनुमान लगाना।
3. खराब और अम्लीय मिट्टी को सुधारने के लिए सही मात्रा में सुधारक का इस्तेमाल करना।
इससे किसान यह जान पाते हैं कि किस फसल के लिए कौन सा उर्वरक और कितनी मात्रा में डालना सही रहेगा।
In simple words: मिट्टी परीक्षण से पता चलता है कि मिट्टी में कौन से पोषक तत्व कम या ज्यादा हैं। इससे सही खाद और उर्वरक डालने में मदद मिलती है ताकि अच्छी फसल हो।

🎯 Exam Tip: मृदा परीक्षण के उद्देश्यों को बताते समय, पोषक तत्वों का निर्धारण, कमी का आकलन और सुधारकों की मात्रा का निर्धारण जैसे बिंदुओं पर जोर दें।

 

Question 11. जैव उर्वरक क्या है?
Answer: जैव उर्वरक सूक्ष्मजीवों का एक कल्चर होता है। इनका उपयोग मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाने के लिए किया जाता है। कुछ जैव उर्वरक फॉस्फोरस को पौधों के लिए अधिक उपलब्ध बनाते हैं, और कुछ कार्बनिक पदार्थों को जल्दी सड़ाने में मदद करते हैं। जैव उर्वरक काफी सस्ते होते हैं और इनका इस्तेमाल करना भी आसान होता है। ये प्राकृतिक तरीके से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है।
In simple words: जैव उर्वरक छोटे जीव होते हैं जो मिट्टी में पोषक तत्व बढ़ाते हैं, जैसे नाइट्रोजन या फॉस्फोरस। ये सस्ते और इस्तेमाल करने में आसान होते हैं।

🎯 Exam Tip: जैव उर्वरक की परिभाषा में 'सूक्ष्मजीव कल्चर' और 'नाइट्रोजन बढ़ाने' जैसे मुख्य बिंदुओं को शामिल करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 12. नाइट्रोजन उर्वरकों का वर्गीकरण करके पौथों के लिए इनका महत्त्व लिखिए।
Answer: **नाइट्रोजन उर्वरकों का वर्गीकरण:**
नाइट्रोजन उर्वरकों को रासायनिक बनावट के आधार पर मुख्य रूप से इन वर्गों में बांटा गया है:
(i) नाइट्रेट उर्वरक- जैसे सोडियम नाइट्रेट और कैल्शियम नाइट्रेट। इन्हें खड़ी फसलों पर छिड़काव करके इस्तेमाल किया जाता है।
(ii) अमोनियम उर्वरक- जैसे अमोनियम सल्फेट और डाई अमोनियम फॉस्फेट। इन्हें मिट्टी में मिलाया जाता है।
(iii) अमोनियम और नाइट्रेट उर्वरक- जैसे अमोनिया नाइट्रेट और अमोनियम सल्फेट नाइट्रेट। इन्हें फसल की बुवाई के समय खेत में मिलाया जाता है।
(iv) नाइट्रोजन घोल- जैसे अमोनिया यूरिया घोल।
(v) एमाइड उर्वरक-

**पौधों के लिए नाइट्रोजन का महत्त्व:**
नाइट्रोजन पौधों की वृद्धि में मदद करता है। यह कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ाता है। यह अनाज और प्रोटीन के उत्पादन को भी बढ़ाता है। नाइट्रोजन पौधों में क्लोरोफिल बनाने में भी सहायक होता है, जिससे वे सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा बना पाते हैं।
In simple words: नाइट्रोजन उर्वरक पौधों को बढ़ने में, अनाज और प्रोटीन बनाने में मदद करते हैं। उन्हें रासायनिक रूप के आधार पर अलग-अलग वर्गों में बांटा गया है।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्न में वर्गीकरण और महत्व दोनों को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत करें, जिसमें प्रत्येक बिंदु का सही वैज्ञानिक आधार हो।

 

Question 13. फॉस्फेटिक उर्वरकों का वर्गीकरण कीजिए एवं फॉस्फोरस का पौधों पर प्रभाव का वर्णन कीजिए ।
Answer: **फॉस्फेटिक उर्वरकों का वर्गीकरण:**
फॉस्फेटिक उर्वरकों को घुलनशीलता के आधार पर तीन मुख्य वर्गों में बांटा जाता है:
(i) जल में घुलनशील- जैसे सिंगल सुपर फॉस्फेट (16% फॉस्फोरस) और मोनो अमोनियम फॉस्फेट (48% फॉस्फोरस)। इन्हें अम्लीय और सामान्य मिट्टी में उपयोग करते हैं।
(ii) साइट्रेट घुलनशील- जैसे डाई कैल्शियम फॉस्फेट (32% फॉस्फोरस) और बेसिक स्लैग (15-25% फॉस्फोरस)। इनका उपयोग अम्लीय मिट्टी में किया जाता है।
(iii) अघुलनशील- जैसे रॉक फॉस्फेट (20-40% फॉस्फोरस) और हड्डी का चूरा (20-25% फॉस्फोरस)। इनका उपयोग ज़्यादा अम्लीय मिट्टी में करते हैं।

**फॉस्फोरस का पौधों पर प्रभाव:**
फॉस्फोरस के कारण पौधों की वृद्धि अच्छी और तेज होती है। यह राइजोबियम बैक्टीरिया की वृद्धि में भी मदद करता है, जिससे दलहनी फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन को स्थिर कर पाती हैं। यह अनाज की गुणवत्ता बढ़ाता है और नाइट्रोजन की विषाक्तता को कम करता है। फॉस्फोरस पौधों में फूल और दाने लगने में मदद करता है, बीमारियों को कम करता है और प्रोटीन की मात्रा बढ़ाता है। यह पौधों में ऊर्जा के स्थानांतरण और भंडारण के लिए भी आवश्यक होता है।
In simple words: फॉस्फेटिक उर्वरकों को घुलनशीलता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। फॉस्फोरस पौधों को तेजी से बढ़ने, फूल-फल बनाने और बीमारियों से लड़ने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: वर्गीकरण में प्रत्येक प्रकार के उर्वरक के उदाहरण और उसमें फॉस्फोरस की अनुमानित मात्रा को शामिल करें। प्रभावों में जड़ों के विकास और ऊर्जा स्थानांतरण पर फोकस करें।

 

Question 14. पोटैशियम उर्वरकों का वर्गीकरण करते हुए पोटाश के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
Answer: **पोटैशियम उर्वरकों का वर्गीकरण:**
पोटैशियम उर्वरकों को मुख्य रूप से दो समूहों में बांटा गया है:
1. क्लोराइड लवण वाले पोटैशियम उर्वरक- इसमें मुख्य उर्वरक म्यूरेट ऑफ पोटाश (पोटैशियम क्लोराइड) है, जिसमें लगभग 60% पोटाश होता है। यह सस्ता होता है इसलिए किसान इसे ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं।
2. बिना क्लोराइड लवण वाले पोटैशियम उर्वरक- इस समूह का मुख्य उर्वरक पोटैशियम सल्फेट है, जिसमें 48-52% पोटाश होता है। इसे सल्फेट ऑफ पोटाश भी कहते हैं। यह आलू, टमाटर, तंबाकू और चुकंदर जैसी फसलों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। ये उर्वरक पौधों को मजबूत बनाते हैं और बीमारियों से लड़ने की शक्ति देते हैं।

**पोटाश का महत्त्व:**
पोटाश पौधों की वृद्धि और फलों की चमक बढ़ाता है। यह पौधों को बीमारियों से लड़ने की क्षमता देता है। प्रोटीन बनाने में मदद करता है। यह तना और जड़ों को मजबूत बनाता है, जिससे फसलें तेज हवा या पानी से गिरती नहीं हैं। यह मिट्टी में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की अधिकता को संतुलित करता है। पोटाश की कमी से फसलें देर से पकती हैं और अनाज, फल व बीज का उत्पादन घट जाता है।
In simple words: पोटैशियम उर्वरकों को क्लोराइड वाले और बिना क्लोराइड वाले समूहों में बांटा गया है। पोटाश पौधों को मजबूत बनाता है, बीमारियों से बचाता है, और फल-फूल की गुणवत्ता बढ़ाता है।

🎯 Exam Tip: पोटैशियम उर्वरकों का वर्गीकरण करते समय, क्लोराइड की उपस्थिति या अनुपस्थिति को मुख्य आधार बनाएं और प्रत्येक प्रकार का एक प्रमुख उदाहरण दें। महत्व बताते समय रोग प्रतिरोधक क्षमता और फल-फूल की गुणवत्ता पर जोर दें।

 

Question 15. जैव उर्वरक का वर्गीकरण कीजिए तथा जैव उर्वरक के प्रयोग करने की विधि का वर्णन कीजिए।
Answer: **जैव उर्वरक का वर्गीकरण:**
इन्हें मुख्य रूप से तीन वर्गों में बांटा गया है:
1. नाइट्रोजन स्थिर करने वाले जैव उर्वरक: ये हवा की नाइट्रोजन को मिट्टी में मिलाते हैं।
2. फॉस्फोरस घुलनशील बनाने वाले जैव उर्वरक: ये मिट्टी में मौजूद फॉस्फोरस को पौधों के लिए उपलब्ध कराते हैं।
3. कार्बनिक पदार्थ सड़ाने वाले जैव उर्वरक: ये मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों को तेजी से सड़ाने में मदद करते हैं।

**नाइट्रोजन स्थिर करने वाले जैव उर्वरक:**
जब इन जैव उर्वरकों को मिट्टी में मिलाया जाता है, तो सूक्ष्मजीवों द्वारा मिट्टी में स्थिर नाइट्रोजन की मात्रा बहुत बढ़ जाती है। उपयोग किए जाने वाले जैव उर्वरक निम्न हैं:
1. राइजोबियम कल्चर
2. एजोटोबैक्टर कल्चर
3. नीली-हरी शैवाल कल्चर
4. फास्फोवैक्टिरीन कल्चर
राइजोबियम कल्चर आमतौर पर दलहनी फसलों में उपयोग होता है, जबकि एजोटोबैक्टर कल्चर धान, कपास, ज्वार, सरसों, सब्जी, गेहूं, जौ आदि में इस्तेमाल किया जाता है।

**जैव उर्वरक प्रयोग विधि (राइजोबियम कल्चर के लिए):**
राइजोबियम कल्चर का उपयोग करने के लिए 100-200 ग्राम गुड़ को एक लीटर पानी में गर्म करके घोल बनाया जाता है। फिर, 200 ग्राम कल्चर को इस घोल में मिलाते हैं। इस मिश्रण का उपयोग एक हेक्टेयर में बोने वाले बीज में मिलाया जाता है। बीजों को छाया में सुखाकर फिर बो दिया जाता है। इस विधि से बीजों को सीधे मिट्टी में डालने से पहले ही उनमें लाभकारी सूक्ष्मजीवों को जोड़ दिया जाता है।
In simple words: जैव उर्वरक तीन प्रकार के होते हैं: नाइट्रोजन बढ़ाने वाले, फॉस्फोरस उपलब्ध कराने वाले और कार्बनिक पदार्थ सड़ाने वाले। इनका इस्तेमाल करने के लिए, कल्चर को घोलकर बीजों पर लगाते हैं और फिर बोते हैं।

🎯 Exam Tip: वर्गीकरण में प्रत्येक वर्ग के कार्य को स्पष्ट करें। प्रयोग विधि बताते समय, घोल बनाने और बीजों के उपचार की प्रक्रिया को क्रमबद्ध तरीके से समझाएं।

 

Question 16. मिश्रित उर्वरक से आप क्या समझते है? मिश्रित उर्वरक के लाभ एवं हानियों को समझाएँ।
Answer: दो या दो से अधिक उर्वरकों के मिश्रण को मिश्रित उर्वरक कहते हैं। मिश्रित उर्वरक मुख्य रूप से तीन मानकों (ग्रेड) के होते हैं:
1. कम मानक – इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की मात्रा कम होती है, और इनका कुल प्रतिशत 14 से कम होता है, जैसे – 2-8-2, 2-4-6 ग्रेड।
2. मध्यम मानक – इसमें तीनों पोषक तत्वों का कुल योग 15-25 प्रतिशत तक होता है।
3. उच्च मानक – इसमें तीनों पोषक तत्वों का कुल योग 25 प्रतिशत से अधिक होता है।

**लाभ:**
1. मिश्रित उर्वरक सस्ते होते हैं।
2. इनसे फसलों की पैदावार बढ़ जाती है।
3. किसान इन्हें आसानी से उपयोग कर सकते हैं।
4. इन्हें आसानी से स्टोर किया जा सकता है।
ये उर्वरक किसानों के लिए कई पोषक तत्वों को एक साथ प्रदान करने का एक आसान तरीका होते हैं।

**हानियां:**
1. जब मिट्टी में केवल एक या दो तत्वों की कमी हो, तो इनका उपयोग फायदेमंद नहीं होता।
2. इसमें अक्सर एक पोषक तत्व की मात्रा ज्यादा होती है जबकि दूसरे की कम होती है, जो मिट्टी की असल जरूरत के हिसाब से ठीक नहीं होता।
In simple words: मिश्रित उर्वरक दो या ज़्यादा उर्वरकों का मिश्रण होते हैं। ये सस्ते और इस्तेमाल में आसान होते हैं, पैदावार बढ़ाते हैं। लेकिन, अगर मिट्टी में सिर्फ एक-दो पोषक तत्वों की कमी हो तो ये उतने काम के नहीं होते।

🎯 Exam Tip: मिश्रित उर्वरकों की परिभाषा में 'दो या दो से अधिक उर्वरकों का मिश्रण' मुख्य है। लाभ और हानियों को सूची के रूप में स्पष्ट बिंदुओं में प्रस्तुत करें।

 

Question 17. जैव उर्वरक के लाभ लिखिए ।
Answer: जैव उर्वरक सूक्ष्मजीवों के कल्चर होते हैं, जिनका उपयोग मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने के लिए किया जाता है। जैव उर्वरकों का उपयोग करके फसलों के लिए आवश्यक नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की मात्रा को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जैव उर्वरक के मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
1. जैव उर्वरक से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है।
2. यह वायुमंडल की नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करने में मदद करते हैं।
3. ये जैविक पदार्थों को तेजी से सड़ाने में सहायक होते हैं।
4. ये मिट्टी की पानी सोखने की क्षमता को बढ़ाते हैं।
5. ये फसलों की उपज बढ़ाने में सहायक होते हैं।
6. ये पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। रासायनिक उर्वरकों के विपरीत, जैव उर्वरक मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाते हैं।
In simple words: जैव उर्वरक मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं, नाइट्रोजन बढ़ाते हैं, पानी रोकने की शक्ति सुधारते हैं और फसलों की पैदावार बढ़ाते हैं। ये पर्यावरण के लिए भी अच्छे हैं।

🎯 Exam Tip: जैव उर्वरक के लाभों को बताते समय, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना, नाइट्रोजन स्थिरीकरण और पर्यावरण संतुलन जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।

UP Board Solutions Class 7 Agricultural Science Chapter 4 उर्वरकोण के प्रकार एवं मृदा परीक्षण

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Detailed Explanations for Chapter 4 उर्वरकोण के प्रकार एवं मृदा परीक्षण

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 7 Agricultural Science chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 7 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these UP Board Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Agricultural Science Class 7 Solved Papers

Using our Agricultural Science solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 7 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 4 उर्वरकोण के प्रकार एवं मृदा परीक्षण to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest UP Board Solutions Class 7 Agricultural Science Chapter 4 उर्वरकोण के प्रकार एवं मृदा परीक्षण for the 2026 27 session?

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Are the Agricultural Science UP Board solutions for Class 7 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 7 Agricultural Science Chapter 4 उर्वरकोण के प्रकार एवं मृदा परीक्षण as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Agricultural Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 7 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 7 Agricultural Science Chapter 4 उर्वरकोण के प्रकार एवं मृदा परीक्षण will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 7 Agricultural Science Chapter 4 उर्वरकोण के प्रकार एवं मृदा परीक्षण in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 7 Agricultural Science. You can access UP Board Solutions Class 7 Agricultural Science Chapter 4 उर्वरकोण के प्रकार एवं मृदा परीक्षण in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Agricultural Science UP Board solutions for Class 7 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 7 Agricultural Science Chapter 4 उर्वरकोण के प्रकार एवं मृदा परीक्षण in printable PDF format for offline study on any device.