UP Board Solutions Class 7 Agricultural Science Chapter 5 Samanya Faslein

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Detailed Chapter 5 समन्या फासलीन UP Board Solutions for Class 7 Agricultural Science

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Class 7 Agricultural Science Chapter 5 समन्या फासलीन UP Board Solutions PDF

सामान्य फसलें

अभ्यास

 

Question 1. (i) ज्वार की खेती किस भूमि पर करते हैं?
(a) बलुई-दोमट
(b) दोमट
(c) काली कपास मिट्टी
(d) उपरोक्त में कोई नहीं
Answer: (a) बलुई-दोमट
In simple words: ज्वार की खेती के लिए बलुई-दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। यह मिट्टी पानी को अच्छे से सोख लेती है और ज्वार की जड़ों को बढ़ने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: फसलों की खेती के लिए सही मिट्टी का चुनाव बहुत जरूरी है, क्योंकि यह सीधे उपज पर असर डालता है।

 

Question 1. (ii) ज्वार में नाइट्रोजन उर्वरक प्रयोग किया जाता है
(a) 100 किग्रा प्रति हेक्टेयर
(b) 150 किग्रा प्रति हेक्टेयर
(c) 120 किग्रा प्रति हेक्टेयर
(d) इसमें से कोई नहीं
Answer: (a) 100 किग्रा प्रति हेक्टेयर
In simple words: ज्वार की फसल में 100 किलोग्राम नाइट्रोजन खाद प्रति हेक्टेयर के हिसाब से डालनी चाहिए। यह पौधों को मजबूत बनाने और अच्छी उपज देने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: सही मात्रा में नाइट्रोजन देने से पत्तियां हरी रहती हैं और पौधे की वृद्धि अच्छी होती है।

 

Question 1. (iii) ज्वार की फसल में पोटाश प्रयोग करते हैं-
(a) 100 किग्रा प्रति हेक्टेयर
(b) 40 किग्रा प्रति हेक्टेयर
(c) 60 किग्रा प्रति हेक्टेयर
(d) उपरोक्त में कोई नहीं
Answer: (b) 40 किग्रा प्रति हेक्टेयर
In simple words: ज्वार की फसल में 40 किलोग्राम पोटाश खाद प्रति हेक्टेयर डालनी चाहिए। पोटाश पौधों को बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है और अनाज की गुणवत्ता सुधारता है।

🎯 Exam Tip: पोटाश पौधों को सूखा और बीमारी झेलने में मदद करता है, जिससे फसल स्वस्थ रहती है।

 

Question 1. (iv) बाजरे की संकुल प्रजाति है-
(a) आई सी एम बी 115
(b) डब्लू सी सी 75
(c) बी के 560
(d) उपरोक्त में सभी
Answer: (b) डब्लू सी सी 75
In simple words: बाजरे की संकुल प्रजातियों में से एक डब्लू सी सी 75 है। यह एक खास तरह का बाजरा है जो अच्छी पैदावार देता है।

🎯 Exam Tip: संकुल प्रजातियाँ स्थानीय जलवायु के लिए उपयुक्त होती हैं और उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है।

 

Question 1. (v) बाजरे की संकर प्रजाति है-
(a) पूसा 322
(b) पूसा 23
(c) आई सी एम एच 451
(d) उपरोक्त में सभी
Answer: (b) पूसा 23
In simple words: बाजरे की संकर प्रजातियों में पूसा 23 एक महत्वपूर्ण नाम है। यह अधिक उपज देने वाली और बेहतर गुणवत्ता वाली प्रजाति होती है।

🎯 Exam Tip: संकर प्रजातियाँ अक्सर अधिक उपज देती हैं और उनमें विशिष्ट गुणों का मेल होता है।

 

Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
Answer:
(i) बाजरा बी के 560 **80-90** दिन की फसल है।
(ii) दीमक के नियन्त्रण हेतु **गामा BHC 20 EC** कीटनाशक प्रयोग करते है।
(iii) बाजरे की संकर प्रजाति से **24-25** कुंतल उपज प्रति हेक्टेयर प्राप्त होती है।
(iv) पूसा प्रालिफिक लांग **लम्बे फल वाले** प्रजाति है।
(v) दाने के लिए ज्वार का बीज **12-15** किग्रा प्रति हेक्टेयर प्रयोग किया जाता है।
(vi) बैंगन की बुवाई हेतु **400 से 500** ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर प्रयोग किया जाता है।
(vii) लौकी के बीज का रोगार अथवा **डाइमेथोएट** से उपचार किया जाता है।
(viii) बैगन की खेती के लिए **100** किग्रा नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर प्रयोग की जाती है।
In simple words: इन वाक्यों में खाली जगहों को सही जानकारी से भरा गया है। यह जानकारी हमें खेती से जुड़ी अलग-अलग फसलों और उनके रख-रखाव के बारे में बताती है।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय, प्रश्न के संदर्भ को समझें और सही तकनीकी या संख्यात्मक जानकारी भरें।

 

Question 3. निम्नलिखित कथनों में सही पर (√) तथा गलत पर (X) का निशान लगाइए-
Answer:
(i) ज्वार की फसल दाने व चारे दोनों के लिए बोई जाती है। (सही)
(ii) चारे के लिए ज्वार का बीज 50 किग्रा प्रति हेक्टेयर प्रयोग किया जाता है। (सही)
(iii) दाने के लिए ज्वार का बीज 12 से 15 किग्रा प्रति हेक्टेयर प्रयोग किया जाता है। (सही)
(iv) दानों के लिए ज्वार की फसल 115 दिन में पककर तैयार हो जाती है। (सही)
(v) बाजरे की खेती के लिए दोमट भूमि उपयुक्त है। (गलत)
(vi) बाजरे की बुआई से पहले बीज को थीरम से उपचारित करते हैं। (गलत)
(vii) आलू का प्रमुख रोग पिछेती झुलसा है। (सही)
(viii) राधे चना की प्रजाति है। (सही)
(ix) रचना मटर की प्रजाति है। (सही)
(x) फलीबेधक चने को प्रमुख कीट नहीं है। (गलत)
(xi) हरा तेला बैगन का कीट है। (सही)
(xii) चने के बीज का उपचार थीरम नामक रसायन से करते हैं? (सही)
(xiii) बैगन के बीज की मात्रा 400-500 ग्राम प्रति हेक्टेयर लगती है। (गलत)
In simple words: हमने हर कथन को पढ़ा और बताया कि वह सही है या गलत। यह हमें अलग-अलग फसलों और उनकी खेती से जुड़ी सही जानकारी को पहचानने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: सही/गलत प्रश्नों में, हर कथन को ध्यान से पढ़ें और सुनिश्चित करें कि आप खेती की प्रक्रियाओं और फसलों के बारे में सही तथ्य जानते हैं।

 

Question 4. निम्नलिखित में स्तम्भ क को स्तम्भ ख से मिलाइए (मिलान करके)।
Answer:

स्तम्भ 'क'स्तम्भ 'ख'
ज्वारमऊरानीपुर
बाजरावी के 560
मटरअपर्णा, हरी फली की डिब्बा बंदी
खुटाईबैगन
फलवेधकचना
आलूकन्द
लौकीपूसा मेघदूत

In simple words: यहाँ पर फसलों और उनसे संबंधित चीजों को सही ढंग से मिलाया गया है। यह हमें बताता है कि कौन सी फसल या प्रक्रिया किससे जुड़ी है।

🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, पहले उन जोड़ियों को मिलाएँ जिनके बारे में आप निश्चित हैं, फिर बाकी बची जोड़ियों को मिलाकर देखें।

 

Question 5. (i) आलू की पैदावार प्रति हेक्टेयर कितनी होती है?
Answer: मैदानी इलाकों में आलू की पैदावार लगभग 325-400 कुंतल प्रति हेक्टेयर होती है, जबकि पहाड़ी इलाकों में यह 200-250 कुंतल प्रति हेक्टेयर पैदा होता है। यह उपज मिट्टी की उर्वरता और जलवायु पर निर्भर करती है।
In simple words: आलू की पैदावार मैदानी क्षेत्रों में 325-400 कुंतल और पहाड़ी क्षेत्रों में 200-250 कुंतल प्रति हेक्टेयर होती है।

🎯 Exam Tip: आलू की उपज को लिखते समय, मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों की जानकारी देना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. (ii) आलू का बीज प्रति हेक्टेयर कितना प्रयोग किया जाता है?
Answer: आलू का बीज प्रति हेक्टेयर 20-25 कुंतल प्रयोग किया जाता है। बीज की मात्रा मिट्टी के प्रकार, जलवायु और बीज के आकार पर निर्भर करती है।
In simple words: एक हेक्टेयर में आलू का बीज 20-25 कुंतल लगता है।

🎯 Exam Tip: बीज की सही मात्रा का प्रयोग करने से पौधों के बीच सही दूरी बनी रहती है, जिससे अच्छी उपज मिलती है।

 

Question 5. (iii) बाजरे का उत्पादन प्रति हेक्टेयर कितना होता है?
Answer: बाजरे का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 25-30 कुंतल होता है। यह उत्पादन बाजरे की प्रजाति, मिट्टी की उर्वरता और सिंचाई की सुविधा पर निर्भर करता है।
In simple words: बाजरे की फसल एक हेक्टेयर में 25-30 कुंतल तक पैदा होती है।

🎯 Exam Tip: बाजरे की अच्छी उपज के लिए उन्नत किस्म के बीज और सही खाद का उपयोग करें।

 

Question 5. (iv) बाजरे की फसल लगभग कितने दिनों में पककर तैयार हो जाती है?
Answer: बाजरे की फसल लगभग 80-100 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। यह समय बाजरे की किस्म और स्थानीय जलवायु पर भी निर्भर करता है।
In simple words: बाजरा 80 से 100 दिनों में पक जाता है।

🎯 Exam Tip: फसल के पकने का समय जानने से किसान कटाई की योजना सही समय पर बना सकते हैं।

 

Question 5. (v) बाजरे की फसल में दीमक का नियन्त्रण किस कीटनाशक से करते हैं?
Answer: बाजरे की फसल में दीमक का नियंत्रण गामा BHC20EC कीटनाशक का उपयोग करके किया जाता है। यह कीटनाशक दीमक को फसल को नुकसान पहुंचाने से रोकने में प्रभावी है।
In simple words: बाजरे में दीमक को रोकने के लिए गामा BHC20EC दवा का इस्तेमाल करते हैं।

🎯 Exam Tip: कीटनाशकों का उपयोग हमेशा विशेषज्ञ की सलाह और सही मात्रा में ही करना चाहिए।

 

Question 5. (vi) बाजरे की फसल में कण्डुआ रोग के नियन्त्रण हेतु कौन फफूदी नाशक प्रयोग करते हैं?
Answer: बाजरे की फसल में कण्डुआ रोग के नियंत्रण के लिए कार्बेन्डाजिम अथवा कार्बोक्सीन नामक फफूंदनाशक का प्रयोग करते हैं। इन दवाओं से बीजों का उपचार करके रोग को फैलने से रोका जा सकता है।
In simple words: बाजरे में कण्डुआ रोग को रोकने के लिए कार्बेन्डाजिम या कार्बोक्सीन नाम की दवा इस्तेमाल होती है।

🎯 Exam Tip: बीज उपचार रोग नियंत्रण का एक सस्ता और प्रभावी तरीका है, जो फसल को शुरुआत से ही स्वस्थ रखता है।

 

Question 5. (vii) ज्वार की फसल में उर्वरक कितनी मात्रा में प्रयोग करते हैं?
Answer: ज्वार की फसल में 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की मात्रा में उर्वरक का प्रयोग करते हैं। यह मात्रा मिट्टी के परीक्षण के आधार पर कम या ज्यादा हो सकती है।
In simple words: ज्वार में 100 किग्रा नाइट्रोजन, 60 किग्रा फास्फोरस और 40 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर डालते हैं।

🎯 Exam Tip: उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी परीक्षण के बाद ही करना चाहिए, जिससे पौधों को सही पोषण मिल सके।

 

Question 5. (viii) ज्वार की संकर प्रजातियों के नाम बताइए ।
Answer: ज्वार की संकर प्रजातियाँ सी.एच.एस. 1, 2, 3, स्वर्ण, सी.एस.वी.-3 और संकर ज्वार टा-22 टी 8 वी हैं। इन प्रजातियों को उनकी उच्च उपज और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जाना जाता है।
In simple words: ज्वार की कुछ संकर किस्में सी.एच.एस. 1, 2, 3, स्वर्ण, सी.एस.वी.-3, और संकर ज्वार टा-22 टी 8 वी हैं।

🎯 Exam Tip: फसलों की विभिन्न प्रजातियों के नाम याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण होता है।

 

Question 5. (ix) ज्वार की बुआई का उपयुक्त समय क्या है?
Answer: ज्वार की बुआई का उपयुक्त समय जुलाई का दूसरा सप्ताह है। इस समय बुआई करने से फसल को पर्याप्त नमी मिलती है और वह अच्छे से उगती है।
In simple words: ज्वार को बोने का सही समय जुलाई का दूसरा हफ्ता होता है।

🎯 Exam Tip: सही समय पर बुआई करने से फसल को प्राकृतिक रूप से बेहतर विकास का अवसर मिलता है।

 

Question 5. (x) ज्वार के बीज को जमीन में कितनी गहराई पर बोते हैं?
Answer: ज्वार के बीज को जमीन में 4-5 सेमी की गहराई पर बोते हैं। इस गहराई पर बीज को पर्याप्त नमी और हवा मिलती है, जिससे अंकुरण अच्छा होता है।
In simple words: ज्वार के बीज को 4-5 सेंटीमीटर गहरा बोना चाहिए।

🎯 Exam Tip: बीज की सही गहराई बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पौधों का अंकुरण और प्रारंभिक विकास प्रभावित होता है।

 

Question 5. (xi) बैगन की दो संकरे प्रजातियों के नाम बताइये ।
Answer: बैगन की दो संकर प्रजातियाँ पूसा हाइब्रिड-1 और पूसा हाइब्रिड-36 हैं। ये दोनों प्रजातियाँ अच्छी उपज और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती हैं।
In simple words: बैगन की दो संकर किस्में पूसा हाइब्रिड-1 और पूसा हाइब्रिड-36 हैं।

🎯 Exam Tip: संकर किस्में अक्सर अधिक उपज देने वाली और गुणवत्ता में बेहतर होती हैं।

 

Question 5. (xii) बाजरे के लिए बीज प्रति हेक्टेयर कितने किलोग्राम प्रयोग किया जाता है?
Answer: बाजरे के लिए प्रति हेक्टेयर 4 या 5 किलोग्राम बीज प्रयोग किया जाता है। यह मात्रा बुआई की विधि और बाजरे की किस्म पर निर्भर करती है।
In simple words: बाजरे के लिए 4 या 5 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर चाहिए होता है।

🎯 Exam Tip: बीज की सही मात्रा का उपयोग करके, आप खेत में पौधों की संख्या को नियंत्रित कर सकते हैं।

 

Question 5. (xiii) गोल लौकी की दो प्रजाति लिखिए ।
Answer: गोल लौकी की दो प्रजातियाँ पूसा प्रोलिफिक राउण्ड और पूसा सन्देश हैं। ये दोनों किस्में अच्छी पैदावार और स्वाद के लिए लोकप्रिय हैं।
In simple words: गोल लौकी की दो किस्में पूसा प्रोलिफिक राउण्ड और पूसा सन्देश हैं।

🎯 Exam Tip: सब्जियों की विभिन्न प्रजातियों को याद रखना उनके गुणों और उपयोगिता को समझने में मदद करता है।

 

Question 6. ज्वार की फसल में खाद तथा उर्वरकों की मात्रा देने का समय एवं विधि का वर्णन कीजिए ।
Answer: ज्वार की फसल में खाद और उर्वरक देने का सही समय और तरीका महत्वपूर्ण है। चारे के लिए गोबर की खाद 150-200 कुंतल प्रति हेक्टेयर और दाने के लिए 100-150 कुंतल प्रति हेक्टेयर बारिश से पहले खेत में मिला देनी चाहिए। यदि खाद उपलब्ध नहीं है, तो उर्वरकों का उपयोग इस प्रकार करें: 100 किग्रा नाइट्रोजन, 60 किग्रा फास्फोरस, और 40 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर। नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुआई के समय और बची हुई आधी मात्रा 40-50 दिन बाद खड़ी फसल में देनी चाहिए। फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बुआई के समय ही देनी चाहिए ताकि पौधों को शुरुआत से ही पोषण मिल सके।
In simple words: ज्वार में गोबर की खाद या रासायनिक खाद सही मात्रा में और सही समय पर देनी चाहिए। नाइट्रोजन को दो बार में दें, जबकि फास्फोरस और पोटाश को बुआई के समय ही पूरा डाल दें।

🎯 Exam Tip: खाद और उर्वरकों का सही संतुलन फसल की वृद्धि और उपज के लिए आवश्यक है, मिट्टी परीक्षण के आधार पर मात्रा निर्धारित करें।

 

Question 7. ज्वार की फसल में लगने वाले कीट एवं रोग का वर्णन कीजिए।
Answer: ज्वार की फसल में कई कीट और रोग बड़ी हानि पहुंचाते हैं। बुआई के 4-5 दिन बाद, प्ररोह मक्खी और तना छेदक कीट को खत्म करने के लिए 1 लीटर मेटासिस्टॉक्स 25 ई.सी. को 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए। यह उपाय कीटों को बढ़ने से रोकता है। अनावृत कंडुवा ज्वार का एक प्रमुख रोग है। इस रोग के नियंत्रण के लिए कार्बेन्डाजिम या कार्बाक्सिन के 22.5 ग्राम को प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से मिलाकर बीजों को उपचारित करना चाहिए। बीज उपचार से रोग फैलने का खतरा कम हो जाता है।
In simple words: ज्वार में कीट जैसे प्ररोह मक्खी और तना छेदक लगते हैं, जिनके लिए मेटासिस्टॉक्स 25 ई.सी. का छिड़काव करते हैं। कंडुवा रोग के लिए कार्बेन्डाजिम या कार्बाक्सिन से बीज का उपचार करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: कीट और रोग नियंत्रण के लिए समय पर और सही तरीके से उपचार करना बहुत जरूरी है ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके।

 

Question 8. ज्वार की संकर प्रजातियाँ कौन-कौन हैं? उनके बोने का समय, विधि एवं औसत उपज बताइए।
Answer: ज्वार की संकर प्रजातियों में सी.एच.एस. 1, 2, 3, स्वर्ण, सी.एस.वी.-3, संकर ज्वार, और टा-22 प्रमुख हैं। इन प्रजातियों की बुआई के लिए जुलाई का दूसरा सप्ताह सबसे उपयुक्त होता है। चारे की फसल को बोने के लिए जून की शुरुआत में खेत को तैयार करके बुआई की जाती है। दाने के लिए बुआई कतारों में की जाती है, जहाँ कतार से कतार की दूरी 45 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 15-20 सेमी होनी चाहिए। बीज को 4-5 सेमी गहरा बोना चाहिए। इन प्रजातियों से दाने की औसत उपज 30-40 कुंतल प्रति हेक्टेयर होती है।
In simple words: ज्वार की संकर प्रजातियाँ सी.एच.एस. 1, 2, 3, स्वर्ण, सी.एस.वी.-3 और टा-22 हैं। इनकी बुआई जुलाई में होती है, दाने के लिए कतारों में बोते हैं, और औसत उपज 30-40 कुंतल प्रति हेक्टेयर मिलती है।

🎯 Exam Tip: संकर प्रजातियों के नाम, बुआई का समय, विधि और उपज क्षमता को हमेशा ध्यान में रखें क्योंकि यह फसल योजना के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. बाजरे की फसल में निराई-गुडाई, खरपतवार तथा कीट नियन्त्रण के बारे में लिखिए।
Answer:
**बाजरे की निराई, गुड़ाई एवं खरपतवार नियन्त्रण-** दाने के लिए बोई गई बाजरे की फसल में कम से कम दो से तीन बार निराई-गुड़ाई की जरूरत होती है। आप कानपुरी कल्टीवेटर का उपयोग करके भी गुड़ाई कर सकते हैं। खरपतवारों को नष्ट करने के लिए एट्राजीन की 1 किलोग्राम मात्रा को 700-800 लीटर पानी में घोलकर बुआई के तुरंत बाद प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए। यह खरपतवारों को उगने से रोकता है।
**कीट नियन्त्रण-** दीमक से फसल को बचाने के लिए गामा BHC 20 EC को सिंचाई के पानी के साथ इस्तेमाल करते हैं। अन्य कीड़ों से बचाव के लिए 1.25 लीटर इण्डोसल्फान 35 EC को 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए। कण्डुआ रोग को नियंत्रित करने के लिए 2.5 ग्राम कार्बाक्सीन को प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से मिलाकर बीज का उपचार करना चाहिए। इन तरीकों से बाजरे की फसल को कीटों और खरपतवारों से बचाया जा सकता है।
In simple words: बाजरे की फसल में खरपतवार हटाने के लिए निराई-गुड़ाई या एट्राजीन का छिड़काव करें। दीमक के लिए गामा BHC 20 EC, अन्य कीटों के लिए इण्डोसल्फान 35 EC और कण्डुआ रोग के लिए कार्बाक्सीन से बीज उपचार करें।

🎯 Exam Tip: फसल सुरक्षा में खरपतवार, कीट और रोग नियंत्रण के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना सबसे प्रभावी होता है।

 

Question 10. आलू के बोने का समय तथा बीज की मात्रा का विवरण दीजिए।
Answer:
**आलू के बोने का समय:** पहाड़ों पर आलू की फसल आमतौर पर गर्मी की शुरुआत में, यानी मार्च से मई तक बोई जाती है। मैदानी क्षेत्रों में आलू की फसल 25 सितंबर से 15 नवंबर के बीच बोई जाती है। सही समय पर बुआई करने से फसल को उचित मौसम और तापमान मिलता है।
**बीज की मात्रा:** बीज की मात्रा पंक्तियों की दूरी और बीज के आकार पर निर्भर करती है। 2.5 सेमी व्यास या 50 ग्राम वजन के बीज की मात्रा 20-25 कुंतल प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होती है। पूरे और कटे हुए दोनों तरह के बीजों का इस्तेमाल किया जाता है। बीज काटते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि हर टुकड़े में कम से कम 2 या 3 आँखें हों और उसका वजन लगभग 50 ग्राम हो। इससे हर टुकड़े से पौधा उगने की संभावना बढ़ जाती है।
In simple words: आलू पहाड़ों पर मार्च से मई और मैदानों में सितंबर से नवंबर के बीच बोया जाता है। बीज की मात्रा 20-25 कुंतल प्रति हेक्टेयर होती है, जिसमें हर टुकड़े में कम से कम 2-3 आँखें होनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: आलू की सफल खेती के लिए बुआई का सही समय और बीज की उचित मात्रा बहुत महत्वपूर्ण है।

 

Question 11. बाजरे की संकर प्रजातियों एवं उनके पकने का समय तथा उपज बताइए ।
Answer: बाजरे की संकर प्रजातियों में पूसा 322, पूसा 23 और आई.सी.एम.एच. 451 शामिल हैं। ये प्रजातियाँ अपनी उच्च उपज क्षमता के लिए जानी जाती हैं। इनके पकने में लगभग 85-90 दिन लगते हैं। इन प्रजातियों से प्रति हेक्टेयर 25-30 कुंतल की उपज प्राप्त होती है। यह उपज अच्छी कृषि पद्धतियों और अनुकूल मौसम पर निर्भर करती है।
In simple words: बाजरे की संकर किस्में पूसा 322, पूसा 23 और आई.सी.एम.एच. 451 हैं। ये 85-90 दिनों में पक जाती हैं और प्रति हेक्टेयर 25-30 कुंतल उपज देती हैं।

🎯 Exam Tip: बाजरे की संकर प्रजातियों के नाम, उनके पकने का समय और औसत उपज को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये किसानों के लिए उपयोगी जानकारी होती हैं।

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