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Chapter Solutions: Class 6 Agricultural Science (UP Board) - Chapter 2 भू परिश्करण
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Class 6 Agricultural Science Chapter 2 भू परिश्करण UP Board Solutions PDF
अभ्यास
Question 1. सही उत्तर पर सही ✓ का निशान लगाइए
(i) भू-परिष्करण कहते हैं -
(क) अनाज को बोरे में रखने को
(ख) फसलों की मड़ाई को
(ग) खेतों की जुताई को
(घ) फसलों की कटाई को
Answer: (ग) खेतों की जुताई को
In simple words: भू-परिष्करण का मतलब खेतों की जुताई करना है, ताकि मिट्टी को खेती के लिए तैयार किया जा सके।
🎯 Exam Tip: भू-परिष्करण की सीधी परिभाषा को याद रखें: यह खेत की मिट्टी को फसलों के लिए तैयार करने की प्रक्रिया है, जिसमें जुताई मुख्य है।
Question 1. (ii) भू-परिष्करण होता है -
(क) एक प्रकार का
(ख) दो प्रकार का
(ग) तीन प्रकार का
(घ) चार प्रकार का
Answer: (ख) दो प्रकार का
In simple words: भू-परिष्करण के दो मुख्य प्रकार होते हैं: पहला, जब खेत को पहली बार जोतते हैं, और दूसरा, जब फसल उगने के बाद हल्की जुताई करते हैं।
🎯 Exam Tip: भू-परिष्करण के प्रकारों को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे कि प्राथमिक और द्वितीयक भू-परिष्करण।
Question 1. (iii) भू-परिष्करण का उद्देश्य होता है –
(क) मृदा में वायु संचार बढ़ाना
(ख) मृदा में हानिकारक कीड़ों को बढ़ाना
(ग) मृदा कटाव बढ़ाना
(घ) मृदा में खरपतवारों को बढ़ाना
Answer: (क) मृदा में वायु संचार बढ़ाना
In simple words: भू-परिष्करण से मिट्टी के अंदर हवा अच्छे से पहुंच पाती है, जो पौधों की जड़ों के लिए बहुत जरूरी है।
🎯 Exam Tip: भू-परिष्करण के कई उद्देश्य होते हैं, लेकिन मिट्टी में हवा का संचार बढ़ाना इसका एक प्रमुख लाभ है।
Question 1. (iv) जुताई से होता है -
(क) बीजों का कम अंकुरण
(ख) मृदा में कार्बनिक पदार्थ की कमी
(ग) मिट्टी का कठोर होना
(घ) पानी सोखने की क्षमता का बढ़ना
Answer: (घ) पानी सोखने की क्षमता का बढ़ना
In simple words: जुताई करने से मिट्टी ढीली हो जाती है, जिससे वह बारिश या सिंचाई के पानी को ज्यादा देर तक सोख पाती है।
🎯 Exam Tip: जुताई से मिट्टी की संरचना सुधरती है, जिससे उसकी जल धारण क्षमता बढ़ जाती है, जो फसलों के लिए फायदेमंद है।
Question 1. (v) ऋतुओं के अनुसार जुताई होती है -
(क) जनवरी की जुताई
(ख) जून की जुताई
(ग) गर्मी की जुताई
(घ) सितम्बर की जुताई
Answer: (ग) गर्मी की जुताई
In simple words: अलग-अलग मौसम के हिसाब से भी जुताई की जाती है, और गर्मी के मौसम में की जाने वाली जुताई एक मुख्य प्रकार है।
🎯 Exam Tip: ऋतुओं के अनुसार जुताई के प्रकारों को याद रखना चाहिए, जैसे गर्मी की जुताई।
Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
Answer:
(क) फावड़े से खेत की **खुदाई** होती है।
(ख) भू-परिष्करण **भूमि की जुताई** से होता है।
(ग) द्वितीय भू-परिष्करण द्वारा मृदा की जल धारण क्षमता **बढती** है।
(घ) गर्मी की जुताई से खेत में खरपतवार **घट** जाते हैं।
In simple words: फावड़े से जमीन खोदी जाती है। खेत की जुताई को भू-परिष्करण कहते हैं। हल्की जुताई से मिट्टी में पानी रोकने की ताकत बढ़ती है। गर्मी में खेत जोतने से फालतू घास कम हो जाती है।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय शब्दों का सही अर्थ और उनके उपयोग पर ध्यान दें ताकि वाक्य सही बन सके।
Question 3. सही कथन के आगे सही (✓) और गलत के आगे गलत (X) का निशान लगाइए –
Answer:
(क) फूल एवं सब्जियाँ घरों में उगाई जाती हैं। (X)
(ख) खुर्पी से फसलों की निराई होती है। (✓)
(ग) पाटा चलाना द्वितीय भू-परिष्करण है। (✓)
(घ) भूमि में खाद मिलाना प्राथमिक भू-परिष्करण है। (✓)
(ङ) मृदा की जुताई करने से कणों के झुण्ड नहीं बनते हैं। (X)
In simple words: यह अभ्यास सही और गलत कथनों की पहचान करने के लिए है। उदाहरण के लिए, खुर्पी का उपयोग फसलों से खरपतवार हटाने के लिए किया जाता है, जो सही है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक कथन को ध्यान से पढ़ें और कृषि से संबंधित उसके सही या गलत होने का निर्णय लें। अक्सर सरल दिखने वाले कथन भ्रमित कर सकते हैं।
Question 4. निम्नलिखित में स्तम्भ 'क' का स्तम्भ 'ख' से सुमेल कीजिए – (सुमेल करके)
Answer:
| स्तम्भ 'क' | स्तम्भ 'ख' |
|---|---|
| फावड़ा | खुदाई |
| प्रारम्भिक भू-परिष्करण | प्राइमरी टिलेज |
| खुर्पी | निराई |
| जोतना | हल |
| झुण्ड | समुच्चय |
| सेकण्डरी टिलेज | द्वितीय भू-परिष्करण |
| वाटर होल्डिंग कैपेसिटी | मृदा जल धारण क्षमता |
🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, सबसे पहले उन जोड़ों को मिलाएं जिनके बारे में आप पूरी तरह से सुनिश्चित हैं, फिर शेष विकल्पों पर ध्यान दें।
Question 5. (क) प्रारम्भिक भू-परिष्करण किसे कहते हैं?
Answer: खेत को बोने से पहले जो भी कृषि के काम किए जाते हैं, उन्हें प्रारम्भिक भू-परिष्करण कहा जाता है। इसमें खेत जोतना, हैरो या कल्टीवेटर चलाना, पाटा चलाना और भूमि को समतल करना जैसे काम शामिल होते हैं। यह फसल बोने के लिए मिट्टी को तैयार करने का पहला चरण होता है।
In simple words: फसल बोने से पहले खेत को तैयार करने के सभी कामों को प्रारम्भिक भू-परिष्करण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रारम्भिक भू-परिष्करण की परिभाषा में, 'बीज बोने से पहले' और 'मिट्टी तैयार करना' जैसे मुख्य शब्दों पर जोर दें।
Question 5. (ख) मृदा में वायु संचार कैसे बढ़ायेंगे?
Answer: मिट्टी में हवा का संचार बढ़ाने के लिए खेतों की जुताई करनी पड़ती है और पाटा चलाना पड़ता है। इससे मिट्टी के कण आपस में मिलते हैं और मिट्टी में छोटे-छोटे खाली स्थान बन जाते हैं, जिससे हवा आसानी से अंदर जा पाती है। यह पौधों की जड़ों को सांस लेने में मदद करता है।
In simple words: मिट्टी में जुताई और पाटा चलाने से हवा का संचार बढ़ता है, क्योंकि मिट्टी ढीली हो जाती है।
🎯 Exam Tip: मिट्टी में वायु संचार बढ़ाने के लिए जुताई और पाटा चलाने के महत्व को बताएं, जिससे मिट्टी की संरचना सुधरती है।
Question 5. (ग) खेत में खरपतवार नष्ट करने के लिए क्या-क्या कार्य करेंगे?
Answer: खेत में खरपतवारों को खत्म करने के लिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करनी चाहिए। इससे खरपतवारों की जड़ें और कंद मिट्टी की सतह पर आ जाते हैं। फिर वे धूप और हवा से सूखकर नष्ट हो जाते हैं। यह खरपतवार नियंत्रण का एक प्रभावी तरीका है।
In simple words: खरपतवार हटाने के लिए, मिट्टी पलटने वाले हल से पहली जुताई करनी चाहिए ताकि जड़ें सूखकर खत्म हो जाएं।
🎯 Exam Tip: खरपतवार नियंत्रण के लिए मिट्टी पलटने वाले हल का उपयोग और धूप-हवा से जड़ों को सुखाने के सिद्धांत को याद रखें।
Question 5. (घ) गर्मी की जुताई का वर्णन कीजिए ।
Answer: गर्मी की जुताई खरीफ की फसलों की बुवाई से पहले की जाती है। इस समय बहुत तेज गर्मी पड़ती है, जिसके बाद बारिश का मौसम आता है। बारिश रुक-रुककर होती रहती है, जिससे घास के उगने को बढ़ावा मिलता है। हालांकि, फसलों के उगने के लिए तब तक सही परिस्थितियाँ नहीं बनतीं। गर्मी की जुताई से मिट्टी के कीट और खरपतवार मर जाते हैं।
In simple words: गर्मी की जुताई खरीफ फसल से पहले होती है। इसमें तेज गर्मी खरपतवार और कीटों को खत्म कर देती है।
🎯 Exam Tip: गर्मी की जुताई का समय (खरीफ से पहले) और इसका मुख्य लाभ (खरपतवार और कीटों का नाश) याद रखें।
Question 6. 1. भू-परिष्करण की परिभाषा लिखिए एवं उसके प्रकार का विस्तार से वर्णन कीजिए ।
Answer: कृषि वैज्ञानिक वेयर के अनुसार, "पौधों के अंकुरण और वृद्धि के लिए मिट्टी को सही स्थिति में लाने को भू-परिष्करण कहते हैं।" भू-परिष्करण मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
(क) प्रारम्भिक भू-परिष्करण: इसमें खेत तैयार करने से लेकर बीज बोने तक के सभी कृषि कार्य आते हैं। जैसे जुताई, हैरो चलाना, कल्टीवेटर चलाना, पाटा चलाना और भूमि को समतल करना। यह पहला कदम होता है।
(ख) द्वितीय भू-परिष्करण: यह बीज बोने के बाद से लेकर फसल कटने तक के कामों को कहते हैं। इसमें निराई-गुड़ाई, फसलों पर मिट्टी चढ़ाना जैसे काम शामिल होते हैं। ये फसल की देखभाल के लिए किए जाते हैं।
In simple words: भू-परिष्करण का मतलब मिट्टी को फसल के लिए तैयार करना है। इसके दो मुख्य प्रकार होते हैं: प्रारम्भिक (बीज बोने से पहले) और द्वितीयक (बीज बोने के बाद फसल कटने तक)।
🎯 Exam Tip: परिभाषा को सटीक रूप से प्रस्तुत करें और दोनों प्रकारों (प्रारम्भिक और द्वितीयक) का अंतर स्पष्ट करें। उनके उदाहरणों को भी याद रखें।
Question 6. 2. भू-परिष्करण के उद्देश्य का वर्णन कीजिए।
Answer: भू-परिष्करण के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:
(क) मृदा में पानी सोखने की क्षमता को बढ़ाना, जिससे पानी कम बर्बाद होता है।
(ख) मिट्टी में हवा का संचार बढ़ाना, जो जड़ों के विकास के लिए जरूरी है।
(ग) मिट्टी के कटाव को रोकना, ताकि उपजाऊ मिट्टी बह न जाए।
(घ) खरपतवारों को नष्ट करना, जिससे फसल को पूरा पोषण मिले।
(ङ) पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों और बीमारियों की रोकथाम करना।
(च) मिट्टी में जैविक पदार्थों को मिलाना, जिससे उसकी उर्वरता बढ़ती है।
In simple words: भू-परिष्करण से मिट्टी की पानी रोकने की ताकत बढ़ती है, हवा का संचार अच्छा होता है, कटाव रुकता है, खरपतवार और कीट मरते हैं, और मिट्टी में खाद मिलती है।
🎯 Exam Tip: भू-परिष्करण के प्रत्येक उद्देश्य को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से बताएं। प्रमुख लाभों पर ध्यान दें, जैसे जल और वायु संचार।
Question 6. 3. ऋतुओं के अनुसार जुताई का वर्णन कीजिए ।
Answer: ऋतुओं के हिसाब से जुताई तीन प्रकार की होती है, जो अलग-अलग मौसम की जरूरतों के अनुसार की जाती है:
(क) गर्मी की जुताई: यह खरीफ की फसल बोने से पहले की जाती है। तेज गर्मी से खरपतवार और मिट्टी में छिपे कीटों के अंडे नष्ट हो जाते हैं, जिससे अगली फसल को फायदा होता है।
(ख) सर्दी की जुताई: यह रबी की फसल बोने के बाद की जाती है, ताकि मिट्टी को ठंडी और नम रखा जा सके। यह मिट्टी को सर्दियों में कठोर होने से बचाती है।
(ग) दो ऋतुओं के मध्य की जुताई: यह एक फसल के कटने और दूसरी फसल बोने के बीच के समय में की जाती है। इसका उद्देश्य पिछली फसल के अवशेषों को मिट्टी में मिलाना और अगली फसल के लिए खेत को तैयार करना होता है। यह मिट्टी को जल्दी से दोबारा उपजाऊ बनाने में मदद करती है।
In simple words: जुताई तीन मौसम के अनुसार होती है: गर्मी में (कीट और खरपतवार के लिए), सर्दी में (मिट्टी को नरम रखने के लिए), और दो फसलों के बीच में (खेत तैयार करने के लिए)।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार की जुताई का नाम, उसे करने का समय और उसके मुख्य उद्देश्य को स्पष्ट रूप से याद रखें।
Question 6. 4. जुताई से होने वाले लाभ लिखिए ।
Answer: जुताई से कई महत्वपूर्ण लाभ होते हैं, जो फसल उत्पादन के लिए बहुत जरूरी हैं:
(क) मिट्टी में पानी सोखने की क्षमता बढ़ जाती है, जिससे सिंचाई की जरूरत कम होती है।
(ख) मिट्टी में जल और वायु का संचार अच्छा हो जाता है, जिससे पौधों की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है।
(ग) मिट्टी में फायदेमंद सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ जाती है, जो मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाते हैं।
(घ) बीजों का अंकुरण अच्छी तरह होता है, क्योंकि उन्हें सही वातावरण मिलता है।
(ङ) मिट्टी भुरभुरी और मुलायम हो जाती है, जिससे पौधों की जड़ें आसानी से फैल पाती हैं।
(च) खरपतवार नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसल को पूरा पोषण मिलता है।
(छ) हानिकारक कीट, पतंगे और उनके अंडे-बच्चे नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसलों को नुकसान कम होता है।
(ज) मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है, जो मिट्टी को और उपजाऊ बनाते हैं।
(झ) मिट्टी की भौतिक और रासायनिक दशाएँ सुधर जाती हैं, जिससे उसकी गुणवत्ता बढ़ती है।
In simple words: जुताई से मिट्टी ज्यादा पानी सोखती है, उसमें हवा आती है, अच्छे कीटाणु बढ़ते हैं, बीज अच्छे उगते हैं, मिट्टी नरम होती है, खरपतवार और कीट खत्म होते हैं, और मिट्टी की सेहत सुधरती है।
🎯 Exam Tip: जुताई के लाभों की एक विस्तृत सूची तैयार करें और प्रत्येक बिंदु को समझें। इससे आप किसी भी संबंधित प्रश्न का उत्तर दे पाएंगे।
Question 7. अन्तःकर्षण क्रियाओं से आप क्या समझते हैं?
Answer: प्रारम्भिक और द्वितीयक भू-परिष्करण के बाद, अच्छी फसल उगाने के लिए बीज बोने से लेकर फसल कटने तक के सभी काम अन्तःकर्षण क्रियाएँ कहलाते हैं। ये क्रियाएँ फसल की देखभाल और उसके बेहतर विकास के लिए की जाती हैं। जैसे:
1. पपड़ी तोड़ना: मिट्टी की ऊपरी कठोर परत को तोड़ना ताकि पानी और हवा अंदर जा सकें।
2. गुड़ाई करना: मिट्टी को ढीला करना और खरपतवार हटाना।
3. निराई करना: फसलों के बीच से खरपतवारों को हाथ से या औजारों से हटाना।
4. मिट्टी चढ़ाना: पौधों की जड़ों को सहारा देने और उन्हें मजबूत करने के लिए उनके चारों ओर मिट्टी जमा करना।
In simple words: अन्तःकर्षण क्रियाएँ फसल बोने के बाद से कटने तक के सभी काम होते हैं, जैसे गुड़ाई, निराई, और पौधों को सहारा देने के लिए मिट्टी चढ़ाना।
🎯 Exam Tip: अन्तःकर्षण क्रियाओं की परिभाषा और उसके विभिन्न उदाहरणों को स्पष्ट रूप से याद करें। यह भू-परिष्करण से किस प्रकार भिन्न है, इस पर भी ध्यान दें।
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