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Detailed Chapter 3 वर्तमान विद्युत UP Board Solutions for Class 12 Physics
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Class 12 Physics Chapter 3 वर्तमान विद्युत UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity (विद्युत धारा)
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
Question 1. किसी कार की संचायक बैटरी का विद्युत वाहक बल 12 V है। यदि बैटरी को आन्तरिक प्रतिरोध 0.4 Ω हो तो बैटरी से ली जाने वाली अधिकतम धारा का मान क्या है?
Answer: हल- E वैद्युत वाहक बल वाली बैटरी से ली जाने वाली धारा, \( I = \frac{E}{R+r} \) जिसमें R बाह्य प्रतिरोध तथा r आन्तरिक प्रतिरोध है। अधिकतम धारा के लिए बाह्य प्रतिरोध, \( R = 0 \) धारा, \( I = \frac{E}{r} = \frac{12}{0.4} = 30 \) A
In simple words: किसी बैटरी से अधिकतम धारा तब ली जा सकती है जब बाह्य प्रतिरोध शून्य हो। इस स्थिति में धारा का मान बैटरी के विद्युत वाहक बल और उसके आंतरिक प्रतिरोध के अनुपात के बराबर होता है।
🎯 Exam Tip: अधिकतम धारा के लिए बाह्य प्रतिरोध को शून्य मानना महत्वपूर्ण है। यह सूत्र \( I_{max} = E/r \) का सीधा अनुप्रयोग है।
Question 2. 10 V विद्युत वाहक बल वाली बैटरी जिसका आन्तरिक प्रतिरोध 3 Ω है, किसी प्रतिरोधक से संयोजित है। यदि परिपथ में धारा का मान 0.5 A हो तो प्रतिरोधक का प्रतिरोध क्या है? जब परिपथ बन्द है तो सेल की टर्मिनल वोल्टता क्या होगी?
Answer: हल- दिया है, बैटरी का वैद्युत वाहक बल \( E = 10 \) वोल्ट बैटरी का आन्तरिक प्रतिरोध \( r = 3 \) ओम परिपथ में धारा \( I = 0.5 \) ऐम्पियर प्रतिरोधक का प्रतिरोध \( R = ? \) बन्द परिपथ में बैटरी की टर्मिनल वोल्टता \( V = ? \) सूत्र \( I=\frac{E}{R+r} \) से,
\( R+r = \frac{E}{I} \)
अथवा \( R = \frac{E}{I}-r \)
\( = \frac{10}{0.5}-3 \)
\( = 20-3 = 17 \) ओम
बैटरी की टर्मिनल वोल्टता \( V=E-Ir \)
\( = 10-0.5 \times 3 \)
\( = 10-1.5 = 8.5 \) वोल्ट
In simple words: पहले ओम के नियम का उपयोग करके परिपथ में कुल प्रतिरोध ज्ञात करते हैं, फिर आंतरिक प्रतिरोध को घटाकर बाहरी प्रतिरोध निकालते हैं। टर्मिनल वोल्टता आंतरिक प्रतिरोध के कारण हुई वोल्टता हानि को विद्युत वाहक बल से घटाकर प्राप्त की जाती है।
🎯 Exam Tip: आंतरिक प्रतिरोध के साथ सेल के परिपथ में ओम के नियम का सही अनुप्रयोग करें और टर्मिनल वोल्टता के सूत्र \( V = E - Ir \) को याद रखें।
Question 3. (a) 1 Ω, 2 Ω और 3Ω के तीन प्रतिरोधक श्रेणी में संयोजित हैं। प्रतिरोधकों के संयोजन का कुल प्रतिरोध क्या है? (b) यदि प्रतिरोधकों का संयोजन किसी 12 V की बैटरी जिसका आन्तरिक प्रतिरोध नगण्य है से सम्बद्ध है तो प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर वोल्टता पात ज्ञात कीजिए।
Answer: हल- दिया है, \( R_1 = 1 \, \Omega; R_2 = 2 \, \Omega; R_3 = 3 \, \Omega \)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में तीन प्रतिरोधक 1Ω, 2Ω, और 3Ω को श्रेणी क्रम में एक बैटरी से जोड़ा गया है। बैटरी का विद्युत वाहक बल 12 वोल्ट है और उसका आंतरिक प्रतिरोध नगण्य दर्शाया गया है। प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर वोल्टता पात V1, V2, V3 को दर्शाया गया है।
(a) यदि श्रेणी संयोजन में तुल्य प्रतिरोध R हो, तो \( R = R_1 + R_2 + R_3 = 1 + 2 + 3 = 6 \) ओम
(b) दिया है, बैटरी का वै० वा० बल \( E = 12 \) वोल्ट बैटरी का आन्तरिक प्रतिरोध \( r = 0 \) तथा बाह्य प्रतिरोध \( R = 6 \) ओम यदि संयोजन द्वारा परिपथ में प्रवाहित धारा \( I \) हो, तो
\( I = \frac{E}{R+r} \)
\( = \frac{12}{6+0} = 2 \) ऐम्पियर
अतः विभव पतन
R₁ पर \( V_1 = IR_1 = 2 \times 1 = 2 \) वोल्ट
R₂ पर \( V_2 = IR_2 = 2 \times 2 = 4 \) वोल्ट
R₃ पर \( V_3 = IR_3 = 2 \times 3 = 6 \) वोल्ट
In simple words: श्रेणी क्रम में प्रतिरोधकों को जोड़ने पर उनका कुल प्रतिरोध उनके व्यक्तिगत प्रतिरोधों का योग होता है। यदि बैटरी का आंतरिक प्रतिरोध नगण्य हो, तो परिपथ में कुल धारा ओम के नियम से आसानी से ज्ञात की जा सकती है, और प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर वोल्टता पात \( V=IR \) सूत्र से निकाला जाता है।
🎯 Exam Tip: श्रेणी क्रम में कुल प्रतिरोध की गणना, कुल धारा का निर्धारण, और प्रत्येक प्रतिरोधक पर वोल्टता पात की गणना के लिए ओम के नियम का सटीक प्रयोग करें।
Question 4. (a) 2 Ω, 4 Ω और 5Ω के तीन प्रतिरोधक पार्श्व में संयोजित हैं। संयोजन का कुल प्रतिरोध क्या होगा ? (b) यदि संयोजन को 20 V के विद्युत वाहक बल की बैटरी जिसका आन्तरिक प्रतिरोध नगण्य है, से सम्बद्ध किया जाता है तो प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली धारा तथा बैटरी से ली गई कुल धारा का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-
(a) समान्तरक्रम में तुल्य प्रतिरोध \( R_p \) के लिए
\( \frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3} \)
\( = \frac{1}{2} + \frac{1}{4} + \frac{1}{5} \)
\( \implies R_p = \frac{20}{19} \Omega \)
(b) समान्तरक्रम में प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों के बीच विभवपात समान रहता है।
\( \therefore \) प्रतिरोध R₁ में धारा, \( I_1 = \frac{V}{R_1} = \frac{20}{2} = 10 \) A
प्रतिरोध R₂ में धारा, \( I_2 = \frac{V}{R_2} = \frac{20}{4} = 5 \) A
प्रतिरोध R₃ में धारा, \( I_3 = \frac{V}{R_3} = \frac{20}{5} = 4 \) A
बैटरी से ली गई कुल धारा, \( I = I_1 + I_2 + I_3 = 10 + 5 + 4 = 19 \) A
In simple words: समांतर क्रम में जुड़े प्रतिरोधों का तुल्य प्रतिरोध उनके व्युत्क्रमों के योग के व्युत्क्रम के बराबर होता है। समांतर संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोधक पर वोल्टता समान रहती है, जिससे प्रत्येक शाखा में धारा ज्ञात की जा सकती है, और कुल धारा सभी शाखाओं की धाराओं का योग होती है।
🎯 Exam Tip: समांतर क्रम में तुल्य प्रतिरोध के सूत्र का सही उपयोग करें और याद रखें कि प्रत्येक शाखा में वोल्टता समान होती है लेकिन धारा भिन्न हो सकती है। कुल धारा सभी शाखा धाराओं का योग होती है।
Question 5. कमरे के ताप (27.0°C) पर किसी तापन-अवयव का प्रतिरोध 100 Ω है। यदि तापन-अवयव का प्रतिरोध 117 Ω हो तो अवयव का ताप क्या होगा? प्रतिरोधक के पदार्थ का ताप-गुणांक 1.70 x 10-4°C-1 है।
Answer: हल-प्रश्नानुसार,
\( R_{27} = 100 \, \Omega, R_T = 117 \, \Omega, T = ?; \alpha = 1.70 \times 10^{-4} \, (°C)^{-1} \)
ताप गुणांक, \( \alpha = \frac{R_T - R_{27}}{R_{27} (T-27)} \), ताप T अज्ञात है।
\( \implies T - 27 = \frac{R_T - R_{27}}{R_{27} \cdot \alpha} \)
\( = \frac{117 - 100}{100 \times 1.70 \times 10^{-4}} \)
\( = \frac{17}{17 \times 10^{-3}} = 1000 \)
\( T = 1000 + 27 = 1027°C \)
In simple words: किसी पदार्थ का प्रतिरोध तापमान के साथ बदलता है। इस संबंध को ताप-गुणांक से व्यक्त किया जाता है। यदि हमें दो अलग-अलग तापमानों पर प्रतिरोध और ताप-गुणांक ज्ञात हो, तो हम अज्ञात तापमान की गणना कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रतिरोध के ताप पर निर्भरता के सूत्र \( R_T = R_0 [1 + \alpha (T - T_0)] \) का सही अनुप्रयोग करें और दिए गए डेटा को ध्यान से उपयोग करें।
Question 6. 15 मीटर लम्बे एवं 6.0 x 10-7 m² अनुप्रस्थ काट वाले तार से उपेक्षणीय धारा प्रवाहित की गई है और इसका प्रतिरोध 5.0 Ω मापा गया है। प्रायोगिक ताप पर तार के पदार्थ की प्रतिरोधकता क्या होगी?
Answer: हल- दिया है, तार की लम्बाई \( l = 15 \) मीटर तार की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \( A = 6.0 \times 10^{-7} \) मीटर² तथा तार का प्रतिरोध \( R = 5.0 \) ओम तार के पदार्थ की प्रतिरोधकता \( \rho = ? \)
सूत्र \( R = \rho \frac{l}{A} \) से,
\( \rho = \frac{RA}{l} \)
\( = \frac{5.0 \times 6.0 \times 10^{-7}}{15} \)
\( = \frac{30.0 \times 10^{-7}}{15} \)
\( = 2 \times 10^{-7} \) ओम-मीटर
In simple words: किसी चालक की प्रतिरोधकता उसकी लम्बाई, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल और प्रतिरोध पर निर्भर करती है। यह एक पदार्थ का आंतरिक गुण है जो बताता है कि वह कितनी आसानी से विद्युत धारा का प्रवाह करता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिरोध के सूत्र \( R = \rho L/A \) को पुनर्व्यवस्थित करके प्रतिरोधकता \( \rho \) की गणना करते समय इकाइयों (मीटर, ओम, मीटर²) का विशेष ध्यान रखें।
Question 7. सिल्वर के किसी तार का 27.5°C प प्रतिरोध 2.1 Ω और 100°C पर प्रतिरोध 2.7 Ω है। सिल्वर का प्रतिरोधकता ताप-गुणांक ज्ञात कीजिए ।
Answer: हल - प्रश्नानुसार,
\( R_1 = 2.1 \, \Omega, t_1 = 27.5° C, \)
\( R_2 = 2.7 \, \Omega, t_2 = 100° C, \alpha = ? \)
सिल्वर की प्रतिरोधकता का ताप-गुणांक,
\( \alpha = \frac{R_2 - R_1}{R_1 (t_2 - t_1)} \)
\( = \frac{2.7 - 2.1}{2.1 (100 - 27.5)} \)
\( = \frac{0.6}{2.1 \times 72.5} \)
\( = \frac{0.6}{152.25} \)
\( = 0.0039 \, (°C)^{-1} \)
In simple words: प्रतिरोध का ताप-गुणांक यह बताता है कि तापमान बदलने पर किसी पदार्थ का प्रतिरोध कितना बदलता है। इसे दो भिन्न तापमानों पर प्रतिरोधों के मानों का उपयोग करके परिकलित किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: तापमान के साथ प्रतिरोध परिवर्तन के सूत्र \( \alpha = \frac{R_2 - R_1}{R_1 (t_2 - t_1)} \) का सही उपयोग करें। गणना में दशमलव स्थानों का ध्यान रखें।
Question 8. नाइक्रोम का एक तापन-अवयव 230 V की सप्लाई से संयोजित है और 3.2 A की प्रारम्भिक धारा लेता है जो कुछ सेकेण्ड में 2.8 A पर स्थायी हो जाती है। यदि कमरे का ताप 27.0°C है तो तापन-अवयव का स्थायी ताप क्या होगा? दिए गए ताप-परिसर में नाइक्रोम का औसत प्रतिरोध का ताप-गुणांक 1.70 x 10-4°C-1 है।
Answer: हल - कमरे के ताप \( t_1 = 27°C \) पर तापन-अवयव का प्रतिरोध
\( R_1 = \frac{\text{सप्लाई वोल्टता}}{\text{प्रारम्भिक धारा}} = \frac{230 \text{ वोल्ट}}{3.2 \text{ ऐम्पियर}} = 71.875 \) ओम
तापन-अवयव के स्थायी ताप \( t_2°C = ? \) पर तापन-अवयव का प्रतिरोध
\( R_2 = \frac{\text{सप्लाई वोल्टता}}{\text{स्थायी धारा}} = \frac{230 \text{ वोल्ट}}{2.8 \text{ ऐम्पियर}} = 82.143 \) ओम
तापन परास (\( t_1 \) से \( t_2 \)) के अन्तर्गत प्रतिरोध ताप गुणांक के सूत्र \( \alpha = \frac{R_2 - R_1}{R_1 (t_2 - t_1)} \) से,
\( t_2 - t_1 = \frac{R_2 - R_1}{R_1 \alpha} \)
\( = \frac{82.143 - 71.875}{71.875 \times (1.7 \times 10^{-4})} \)
\( = \frac{10.268}{0.01221875} \approx 840.35°C \)
\( \therefore t_2 = (840.35 + t_1)°C = (840.35 + 27)°C = 867.35°C \)
In simple words: जब एक तापन-अवयव गर्म होता है, तो उसका प्रतिरोध बढ़ता है, जिससे उसमें प्रवाहित धारा कम हो जाती है। हम प्रारंभिक और स्थायी धाराओं तथा दिए गए ताप-गुणांक का उपयोग करके स्थायी तापमान की गणना कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: ओम के नियम (\( R = V/I \)) का उपयोग करके विभिन्न तापमानों पर प्रतिरोध की गणना करें। फिर प्रतिरोध के ताप-गुणांक सूत्र \( \alpha = \frac{\Delta R}{R_1 \Delta t} \) का उपयोग करके अज्ञात तापमान ज्ञात करें।
Question 9. चित्र 3.2 में दर्शाए नेटवर्क की प्रत्येक शाखा में प्रवाहित धारा ज्ञात कीजिए।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में एक बंद परिपथ दिखाया गया है जिसमें दो बैटरी (10V) और कई प्रतिरोधक (10Ω, 5Ω) जुड़े हुए हैं। इसमें विभिन्न बिंदुओं (A, B, C, D, H, G) और शाखाओं (AB, BC, CD, DA, BG, GH, HA) में धाराओं का वितरण दिखाया गया है। यह किरचॉफ के नियमों का उपयोग करके धाराओं की गणना के लिए एक नेटवर्क है।
हल - पॉश ABDA पर किरचॉफ का नियम लगाने पर,
\( 10I + 5I_3 - 5I_2 = 0 \)
या \( 2I_1 - I_2 + I_3 = 0 \) ...(1)
तथा पॉश BCDB से,
\( 5(I_1 - I_3) - 10 (I_2 + I_3) - 5I_3 = 0 \)
या \( 5I_1 - 10I_2 - 20I_3 = 0 \)
या \( I_1 - 2I_2 - 4I_3 = 0 \) ...(2)
पॉश ABCGHA से,
\( 10I + 5(I_1 - I_3) + 10I = 10 \)
या \( 10I + 15I - 5I_3 = 10 \)
या \( 2I + 3I - I_3 = 2 \)
तथा बिन्दु A पर सन्धि के नियम से,
\( I_1 + I_2 = I \) ...(4)
समी० (4) से \( I \) का मान समी० (3) में रखने पर,
\( 5I_1 + 2I_2 - I_3 = 2 \) ...(5)
समी० (5) व (1) को जोड़ने पर,
\( (5I_1 + 2I_2 - I_3) + (2I_1 - I_2 + I_3) = 2 + 0 \)
\( 7I_1 + I_2 = 2 \) ...(6)
समी० (1) को 4 से गुणा करके समी० (2) में जोड़ने पर,
\( 4(2I_1 - I_2 + I_3) + (I_1 - 2I_2 - 4I_3) = 0 + 0 \)
\( 8I_1 - 4I_2 + 4I_3 + I_1 - 2I_2 - 4I_3 = 0 \)
\( 9I_1 - 6I_2 = 0 \implies I_2 = \frac{3}{2}I_1 \) ...(7)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक जटिल विद्युत परिपथ नेटवर्क है जिसमें कई प्रतिरोधक और वोल्टेज स्रोत जुड़े हुए हैं। इसमें किर्चॉफ के नियमों का उपयोग करके विभिन्न शाखाओं में बहने वाली धाराओं (I, I1, I2, I3) की गणना की जाती है। यह चित्र उन धाराओं और उनकी दिशाओं को दर्शाता है।
समी० (6) में मान रखने पर,
\( 7I_1 + \frac{3}{2}I_1 = 2 \)
\( \frac{14I_1 + 3I_1}{2} = 2 \)
\( 17I_1 = 4 \implies I_1 = \frac{4}{17} \) A
समी० (7) से,
\( I_2 = \frac{3}{2} \times \frac{4}{17} = \frac{6}{17} \) A
समी० (1) से,
\( I_3 = I_2 - 2I_1 = \frac{6}{17} - 2 \times \frac{4}{17} = \frac{6-8}{17} = -\frac{2}{17} \) A
तथा \( I_1 - I_3 = \frac{4}{17} - (-\frac{2}{17}) = \frac{4+2}{17} = \frac{6}{17} \) A
तथा \( I_2 + I_3 = \frac{6}{17} + (-\frac{2}{17}) = \frac{6-2}{17} = \frac{4}{17} \) A
तथा \( I = I_1 + I_2 = \frac{4}{17} + \frac{6}{17} = \frac{10}{17} \) A
\( \therefore \) शाखा AB में धारा \( = \frac{4}{17} \) A
शाखा CD में धारा \( = -\frac{4}{17} \) A
शाखा AD में धारा \( = \) शाखा BC में धारा \( = \frac{6}{17} \) A
शाखा BD में धारा \( = -\frac{2}{17} \) A
In simple words: किरचॉफ के संधि नियम (जो धाराओं के संरक्षण पर आधारित है) और लूप नियम (जो ऊर्जा के संरक्षण पर आधारित है) का उपयोग करके एक जटिल विद्युत नेटवर्क की प्रत्येक शाखा में धाराओं की गणना की जाती है।
🎯 Exam Tip: किरचॉफ के नियमों का सही अनुप्रयोग करते समय संधि नियम (आने वाली धारा = जाने वाली धारा) और लूप नियम (\( \sum IR = \sum E \)) के लिए सही चिह्न परिपाटी (sign convention) का पालन करें। समीकरणों को सावधानी से हल करें।
Question 10. (a) किसी मीटर-सेतु में जब प्रतिरोधक S = 12.5 Ω हो तो सन्तुलन बिन्दु, सिरे A से 39.5 cm की लम्बाई पर प्राप्त होता है। R का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। व्हीटस्टोन सेतु या मीटर सेतु में प्रतिरोधकों के संयोजन के लिए मोटी कॉपर की पत्तियाँ क्यों प्रयोग में लाते हैं ? (b) R तथा S को अन्तर्बदल करने पर उपर्युक्त सेतु का सन्तुलन बिन्दु ज्ञात कीजिए । (c) यदि सेतु के सन्तुलन की अवस्था में गैल्वेनोमीटर और सेल का अन्तर्बदल कर दिया जाए तब क्या गैल्वेनोमीटर कोई धारा दर्शाएगा?
Answer: हल- दिया है,
(a) \( l_1 = 39.5 \) सेमी, \( R = ?, S = 12.5 \) ओम
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक मीटर सेतु का परिपथ आरेख है। इसमें एक मीटर लंबा तार AC, एक ज्ञात प्रतिरोध R, एक अज्ञात प्रतिरोध S, एक गैल्वेनोमीटर G और एक बैटरी E व कुंजी K1 जुड़े हुए हैं। गैल्वेनोमीटर के साथ जुड़ी जौकी को तार पर खिसकाकर संतुलन बिंदु D ज्ञात किया जाता है, जहाँ गैल्वेनोमीटर शून्य विक्षेप दर्शाता है।
सूत्र \( \frac{P}{Q} = \frac{R}{S} \) से, \( \frac{l_1}{100-l_1} = \frac{R}{S} \)
अथवा \( R = S \frac{l_1}{100-l_1} \)
\( = 12.5 \times \frac{39.5}{100-39.5} \)
\( = 12.5 \times \frac{39.5}{60.5} \)
\( \therefore R = 8.16 \) ओम
ताँबे की मोटी पत्तियों का प्रतिरोध नगण्य होता है, अतः इनका उपयोग संयोजित्र के रूप में किया जाता है जिससे कि परिणाम में शुद्धता बढ़ जाती है।
(b) जब R व S को परस्पर बदल दिया जाता है, तब \( R = 12.5 \) ओम, \( S = 8.16 \) ओम, \( l = ? \)
अतः \( \frac{l}{100-l} = \frac{S}{R} = \frac{8.16}{12.5} \)
अथवा \( 12.5 \times l = 8.16 \times (100-l) \)
अथवा \( 12.5l = 816 - 8.16l \)
अथवा \( (12.5+8.16)l = 816 \)
\( 20.66l = 816 \)
\( l = \frac{816}{20.66} \approx 39.5 \) सेमी
(c) सेतु के सन्तुलन की स्थिति में धारामापी तथा सेल की स्थितियाँ परस्पर बदली जा सकती हैं, और धारामापी में होकर धारा प्रवाहित नहीं होती।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र (a) और (b) व्हीटस्टोन सेतु के दो विन्यास दिखाते हैं। दोनों में चार प्रतिरोधक P, Q, R, S एक चतुर्भुज के रूप में जुड़े हैं, गैल्वेनोमीटर विकर्ण BD के आर-पार और बैटरी विकर्ण AC के आर-पार जुड़ी है। चित्र (a) में संतुलन की स्थिति P/Q = R/S है, जबकि चित्र (b) में R/P = S/Q या R/S = P/Q है। यह दर्शाता है कि संतुलन स्थिति में गैल्वेनोमीटर और सेल की स्थिति बदलने से संतुलन शर्त पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
चित्र 3.5 (a) में सन्तुलन की स्थिति में \( \frac{P}{Q} = \frac{R}{S} \)
चित्र 3.5 (b) में सन्तुलन की स्थिति में \( \frac{R}{P} = \frac{S}{Q} \) अथवा \( \frac{R}{S} = \frac{P}{Q} \)
In simple words: मीटर सेतु व्हीटस्टोन सेतु के सिद्धांत पर काम करता है। संतुलन की स्थिति में, प्रतिरोधों का अनुपात बराबर होता है। मीटर सेतु में मोटी तांबे की पट्टियाँ प्रतिरोध को कम करने के लिए उपयोग की जाती हैं। संतुलन बिंदु नहीं बदलता यदि सेल और गैल्वेनोमीटर को आपस में बदल दिया जाए क्योंकि यह व्हीटस्टोन ब्रिज की द्वैतता को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: मीटर सेतु के संतुलन की शर्त \( R/S = l_1 / (100-l_1) \) को याद रखें। तांबे की मोटी पत्तियों का उपयोग संपर्क प्रतिरोध को कम करने के लिए किया जाता है। संतुलन की स्थिति में सेल और गैल्वेनोमीटर को बदलने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, यह एक महत्वपूर्ण वैचारिक बिंदु है।
Question 11. 8 V विद्युत वाहक बल की एक संचायक बैटरी जिसका आन्तरिक प्रतिरोध 0.5Ω है, को श्रेणीक्रम में 15.5 Ω के प्रतिरोधक का उपयोग करके 120 V के D.C. स्रोत द्वारा चार्ज किया जाता है। चार्ज होते समय बैटरी की टर्मिनल वोल्टता क्या है? चार्जकारी परिपथ में प्रतिरोधक को श्रेणीक्रम में सम्बद्ध करने का क्या उद्देश्य है?
Answer: हल- जब बैटरी को 120 V की D.C. सप्लाई से आवेशित किया जाता है, तो बैटरी में सामान्य अवस्था की अपेक्षा धारा विपरीत दिशा में होगी। अतः बैटरी की टर्मिनल वोल्टता,
\( V = E + Ir \)
यहाँ विद्युत वाहक बल, \( E = 8 \) V, आन्तरिक प्रतिरोध \( r = 0.5 \, \Omega \)
परिपथ में धारा,
\( I = \frac{120-8}{15.5+0.5} = \frac{112}{16} = 7 \) A
\( V = 8 + 7 \times 0.5 = 8 + 3.5 = 11.5 \) V
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक संचायक बैटरी को चार्ज करने का परिपथ दिखाता है। 8V की बैटरी (आंतरिक प्रतिरोध 0.5Ω) को 120V के DC स्रोत से 15.5Ω के श्रेणी प्रतिरोधक के माध्यम से चार्ज किया जा रहा है। कुल प्रतिरोध \(15.5 \Omega + 0.5 \Omega = 16 \Omega \) है, और नेट वोल्टेज \(120V - 8V = 112V \) है।
श्रेणी-प्रतिरोध बाह्य D.C. सप्लाई से ली गई धारा को सीमित करता है। बाह्य प्रतिरोध की अनुपस्थिति में संचायक बैटरी द्वारा अनुमेय सुरक्षित धारा के मान से अधिक धारा प्रवाहित हो सकती है।
In simple words: बैटरी को चार्ज करते समय, बाहरी स्रोत का वोल्टेज बैटरी के वोल्टेज से अधिक होता है और धारा विपरीत दिशा में प्रवाहित होती है। टर्मिनल वोल्टता बढ़ जाती है, और एक श्रेणी प्रतिरोधक का उपयोग अत्यधिक धारा को रोकने और बैटरी को नुकसान से बचाने के लिए किया जाता है।
🎯 Exam Tip: चार्जिंग के दौरान टर्मिनल वोल्टता के लिए सूत्र \( V = E + Ir \) का उपयोग करें। श्रेणी प्रतिरोधक का उद्देश्य अत्यधिक धारा को सीमित करना और परिपथ की सुरक्षा करना है, यह महत्वपूर्ण है।
Question 12. किसी पोटेशियोमीटर व्यवस्था में, 1.25 V विद्युत वाहक बल से एक सेल का सन्तुलन बिन्दु तार के 35.0 cm लम्बाई पर प्राप्त होता है। यदि इस सेल को किसी अन्य सेल द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया जाए तो सन्तुलन बिन्दु 63.0 cm पर स्थानान्तरित हो जाता है। दूसरे सेल का विद्युत वाहक बल क्या है ?
Answer: हल- दिया है सेल \( E_1 = 1.25 \) V के लिए अविक्षेप बिन्दु की दूरी \( l_1 = 35.0 \) cm \( E_2 = ?, \) जबकि \( l_2 = 63.0 \) cm
विभवमापी के लिए \( E \propto l \)
\( \implies \frac{E_2}{E_1} = \frac{l_2}{l_1} \)
\( \implies E_2 = \frac{l_2}{l_1} \times E_1 \)
\( = \frac{63.0}{35.0} \times 1.25 \) V
\( = 1.8 \times 1.25 \) V
\( = 2.25 \) V
अतः दूसरे सेल का वि० वा० बल \( E_2 = 2.25 \) V
In simple words: विभवमापी के सिद्धांत के अनुसार, किसी सेल का विद्युत वाहक बल संतुलन लंबाई के सीधे आनुपातिक होता है। इसलिए, दो अलग-अलग सेलों के विद्युत वाहक बलों का अनुपात उनकी संगत संतुलन लंबाइयों के अनुपात के बराबर होता है।
🎯 Exam Tip: विभवमापी के सिद्धांत \( E_1/E_2 = l_1/l_2 \) का सही अनुप्रयोग करें। गणना करते समय इकाइयों की संगति बनाए रखें (सेमी को सेमी में)।
Question 13. किसी ताँबे के चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों का संख्या घनत्व 8.5 x 1028 m-3 आकलित किया गया है। 3 m लम्बे तार के एक सिरे से दूसरे सिरे तक अपवाह करने में इलेक्ट्रॉन कितना समय लेता है? तार की अनुप्रस्थ-काट 2.0 x 10-6 m² है और इसमें 3.0 A धारा प्रवाहित हो रही है।
Answer: हल- दिया है, इलेक्ट्रॉन का संख्या घनत्व \( n = 8.5 \times 10^{28} \) m-3 तार की लम्बाई \( l = 3 \) m तार के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \( A = 2.0 \times 10^{-6} \) m² तार में धारा \( i = 3.0 \) A इलेक्ट्रॉन का आवेश \( e = 1.6 \times 10^{-19} \) C
माना तार के एक सिरे से दूसरे सिरे तक प्रवाहित होने में इलेक्ट्रॉन द्वारा लिया गया समय \( t \) है, तब सूत्र \( i = neAv_d \) से,
\( v_d = \frac{i}{neA} \)
\( = \frac{3}{8.5 \times 10^{28} \times 1.6 \times 10^{-19} \times 2.0 \times 10^{-6}} \)
\( = \frac{3}{8.5 \times 1.6 \times 2.0 \times 10^{28-19-6}} \)
\( = \frac{3}{27.2 \times 10^3} \)
\( = 0.1103 \times 10^{-3} \) m/s
\( = 1.103 \times 10^{-4} \) m/s
समय \( t = \frac{l}{v_d} = \frac{3}{1.103 \times 10^{-4}} \)
\( = 2.72 \times 10^4 \) सेकण्ड
\( = \frac{27200}{3600} \) घण्टे \( \approx 7.55 \) घण्टे \( \approx 7 \) घण्टे \( 33 \) मिनट
In simple words: किसी चालक में इलेक्ट्रॉनों को एक सिरे से दूसरे सिरे तक जाने में लगने वाला समय उनकी अनुगमन चाल पर निर्भर करता है। अनुगमन चाल धारा घनत्व और इलेक्ट्रॉन संख्या घनत्व से संबंधित होती है।
🎯 Exam Tip: अनुगमन वेग \( v_d = i / (neA) \) और समय \( t = l / v_d \) के सूत्रों का उपयोग करें। गणना करते समय सभी घातांकों और इकाइयों का ध्यानपूर्वक प्रबंधन करें।
अतिरिक्त अभ्यास
Question 14. पृथ्वी के पृष्ठ पर ऋणात्मक पृष्ठ-आवेश घनत्व 10-9 C cm-2 है। वायुमण्डल के ऊपरी भाग और पृथ्वी के पृष्ठ के बीच 400 kV विभवान्तर (नीचे के वायुमण्डल की कम चालकता के कारण) के परिणामतः समूची पृथ्वी पर केवल 1800 A की धारा है। यदि वायुमण्डलीय विद्युत क्षेत्र बनाए रखने हेतु कोई प्रक्रिया न हो तो पृथ्वी के पृष्ठ को उदासीन करने हेतु (लगभग) कितना समय लगेगा? (व्यावहारिक रूप में यह कभी नहीं होता है। क्योंकि विद्युत आवेशों की पुनः पूर्ति की एक प्रक्रिया है यथा पृथ्वी के विभिन्न भागों में लगातार तड़ित झंझा एवं तड़ित का होना)। पृथ्वी की त्रिज्या = 6.37 x 106 m);
Answer: हल - पृथ्वी की त्रिज्या, \( R_E = 6.37 \times 10^6 \) m,
पृष्ठीय-आवेश घनत्व \( \sigma = 10^{-9} \) C/cm² \( = 10^{-9} \times 10^4 \) C/m² \( = 10^{-5} \) C/m²
वायुमण्डल से पृथ्वी पर धारा \( i = 1800 \) A
पृथ्वी के निरावेशन में लगा समय \( t = ? \)
पृथ्वी की सतह पर कुल आवेश \( q = \) पृष्ठीय क्षेत्रफल \( \times \sigma \)
\( = 4 \pi R_E^2 \times \sigma \)
\( \therefore \) निरावेशन में लगा समय \( t = \frac{q}{i} \)
\( = \frac{4 \pi R_E^2 \sigma}{i} \)
\( = \frac{4 \times 3.14 \times (6.37 \times 10^6)^2 \times 10^{-5}}{1800} \)
\( = \frac{4 \times 3.14 \times 40.5769 \times 10^{12} \times 10^{-5}}{1800} \)
\( = \frac{509.64 \times 10^7}{1800} \)
\( = \frac{5096.4 \times 10^4}{1800} \)
\( = 2.831 \times 10^4 \) s
\( \approx 283 \) s
In simple words: पृथ्वी के पृष्ठ पर कुल आवेश उसके पृष्ठ-आवेश घनत्व और सतह के क्षेत्रफल का गुणनफल होता है। यदि यह आवेश एक निश्चित धारा दर से निष्प्रभावी हो रहा है, तो उदासीन होने में लगने वाला समय कुल आवेश को धारा से विभाजित करके निकाला जा सकता है।
🎯 Exam Tip: पृथ्वी के सतह क्षेत्रफल के सूत्र \( 4 \pi R^2 \) का उपयोग करें और पृष्ठ-आवेश घनत्व की इकाइयों (C/cm² से C/m²) को सही ढंग से परिवर्तित करें। आवेश और धारा से समय की गणना के सूत्र \( t = q/i \) का अनुप्रयोग करें।
Question 15. (a) छह लेड एसिड संचायक सेलों, जिनमें प्रत्येक का विद्युत वाहक बल 2Vतथा आन्तरिक प्रतिरोध 0.015 Ω है, के संयोजन से एक बैटरी बनाई जाती है। इस बैटरी का उपयोग 8.5 Ω प्रतिरोधक जो इसके साथ श्रेणी सम्बद्ध है, में धारा की आपूर्ति के लिए किया जाता है। बैटरी से कितनी धारा ली गई है एवं इसकी टर्मिनल वोल्टता क्या है? (b) एक लम्बे समय तक उपयोग में लाए गए संचायक सेल का विद्युत वाहक बल 1.9 V और विशाल आन्तरिक प्रतिरोध 380 Ω है। सेल से कितनी अधिकतम धारा ली जा सकती है? क्या सेल से प्राप्त यह धारा किसी कार की प्रवर्तक-मोटर को स्टार्ट करने में सक्षम होगी?
Answer: हल -
(a) दिया है, \( E = 2.0 \) V, \( n = 6, r = 0.015 \, \Omega, R = 8.5 \, \Omega \)
जब सेल श्रेणीक्रम में है, तो
धारा, \( I = \frac{nE}{R+nr} = \frac{6 \times 2.0}{8.5 + 6 \times 0.015} = \frac{12}{8.5 + 0.09} = \frac{12}{8.59} \approx 1.4 \) A
टर्मिनल वोल्टता, \( V = IR = 1.4 \times 8.5 = 11.9 \) V
(b) सेल से ली गई धारा, \( I = \frac{E}{R+r} \)
अधिकतम धारा के लिए, \( R=0 \)
अधिकतम धारा, \( I_{\text{max}} = \frac{E}{r} = \frac{1.9}{380} = 0.005 \) A
कार की प्रवर्तक मोटर को चलाने के लिए बहुत अधिक धारा लगभग 100A की आवश्यकता होती है, अतः सेल कार की प्रवर्तक मोटर को चलाने में सक्षम नहीं है।
In simple words: श्रेणी क्रम में जुड़े सेलों के लिए कुल विद्युत वाहक बल व्यक्तिगत सेलों के योग के बराबर होता है और कुल आंतरिक प्रतिरोध भी जुड़ जाता है। अधिकतम धारा तब प्राप्त होती है जब बाहरी प्रतिरोध शून्य हो, और यह धारा आंतरिक प्रतिरोध पर निर्भर करती है।
🎯 Exam Tip: श्रेणी क्रम में सेलों के संयोजन के लिए कुल EMF और कुल आंतरिक प्रतिरोध के सूत्रों का सही उपयोग करें। अधिकतम धारा की गणना के लिए बाहरी प्रतिरोध को शून्य लें। व्यावहारिक अनुप्रयोग में उच्च धारा की आवश्यकता वाले उपकरणों के लिए बैटरी की क्षमता पर विचार करें।
Question 16. दो समान लम्बाई की तारों में एक ऐलुमिनियम का और दूसरा कॉपर को बना है। इनके प्रतिरोध समान हैं। दोनों तारों में से कौन-सा हल्का है? अतः समझाइए कि ऊपर से जाने वाली बिजली केबिलों में ऐलुमिनियम के तारों को क्यों पसन्द किया जाता है? (\( \rho_{Al} = 2.63 \times 10^{-8} \, \Omega m, \rho_{Cu} = 1.72 \times 10^{-8} \, \Omega m \), Al का आपेक्षिक घनत्व = 2.7, कॉपर का आपेक्षिक घनत्व = 8.9)
Answer: हल- दिया है, \( \rho_{Al} = 2.63 \times 10^{-8} \, \Omega m, \rho_{Cu} = 1.72 \times 10^{-8} \, \Omega m \)
माना इन तारों के अनुप्रस्थ परिच्छेद क्रमशः \( A_{Al} \) तथा \( A_{Cu} \) हैं।
\( \therefore \) तारों के प्रतिरोध समान हैं; अतः
\( \rho_{Al} \frac{l}{A_{Al}} = \rho_{Cu} \frac{l}{A_{Cu}} \)
\( \implies \frac{A_{Al}}{A_{Cu}} = \frac{\rho_{Al}}{\rho_{Cu}} \)
माना Al व Cu के घनत्व क्रमशः \( d_{Al} \) व \( d_{Cu} \) हैं, तब
द्रव्यमानों का अनुपात \( \frac{m_{Al}}{m_{Cu}} = \frac{A_{Al} \times l \times d_{Al}}{A_{Cu} \times l \times d_{Cu}} = \frac{A_{Al}}{A_{Cu}} \times \frac{d_{Al}}{d_{Cu}} \)
या \( \frac{m_{Al}}{m_{Cu}} = \frac{\rho_{Al}}{\rho_{Cu}} \times \frac{d_{Al}}{d_{Cu}} \)
\( = \frac{2.63 \times 10^{-8}}{1.72 \times 10^{-8}} \times \frac{2.7}{8.9} \)
\( = 1.529 \times 0.303 \approx 0.46 \approx \frac{1}{2} \)
स्पष्ट है कि ऐलुमिनियम के तार का द्रव्यमान, कॉपर के तार के द्रव्यमान का आधा है अर्थात् ऐलुमिनियम का तार हल्का है। यही कारण है कि ऊपर से जाने वाले बिजली के केबिलों में ऐलुमिनियम के तारों का प्रयोग किया जाता है। यदि कॉपर के तारों का प्रयोग किया जाए तो खम्भे और अधिक मजबूत बनाने होंगे।
In simple words: समान प्रतिरोध और लंबाई वाले तारों के लिए, हल्के पदार्थ का उपयोग किया जाता है। एल्युमिनियम का घनत्व कम होने के कारण यह कॉपर से हल्का होता है, इसलिए बिजली के केबलों में एल्युमिनियम को प्राथमिकता दी जाती है ताकि खंभों पर भार कम पड़े।
🎯 Exam Tip: प्रतिरोधकता, घनत्व और द्रव्यमान के बीच के संबंध को समझें। गणना में प्रतिरोध के सूत्र \( R = \rho l/A \) और द्रव्यमान के सूत्र \( m = \text{घनत्व} \times \text{आयतन} \) का उपयोग करें, साथ ही यह भी ध्यान रखें कि आयतन \( A \times l \) होता है।
Question 17. मिश्रधातु मैंगनिन के बने प्रतिरोधक पर लिए गए निम्नलिखित प्रेक्षणों से आप क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
| धारा A | वोल्टता V | धारा A | वोल्टता V |
|---|---|---|---|
| 0.2 | 3.94 | 3.0 | 59.2 |
| 0.4 | 7.87 | 4.0 | 78.8 |
| 0.6 | 11.8 | 5.0 | 98.6 |
| 0.8 | 15.7 | 6.0 | 118.5 |
| 1.0 | 19.7 | 7.0 | 138.2 |
| 2.0 | 39.4 | 8.0 | 158.0 |
Answer: हल- दी गई सारणी के प्रत्येक प्रेक्षण से स्पष्ट है कि \( \frac{V}{i} = 19.7 \, \Omega \) इससे स्पष्ट है कि मैंगनिन का प्रतिरोधक लगभग पूरे वोल्टेज परिसर में ओम के नियम का पालन करता है, अर्थात् मैंगनिन की प्रतिरोधकता पर ताप का बहुत कम प्रभाव पड़ता है।
In simple words: मैंगनिन के प्रतिरोधक के लिए वोल्टेज और धारा का अनुपात (प्रतिरोध) लगभग स्थिर है, जो दर्शाता है कि यह ओम के नियम का पालन करता है और इसकी प्रतिरोधकता तापमान से बहुत कम प्रभावित होती है।
🎯 Exam Tip: ओम के नियम की अवधारणा (\( V = IR \) या \( R = V/I \)) को समझें। यदि \( V/I \) अनुपात स्थिर है, तो पदार्थ ओम के नियम का पालन करता है, और यह भी इंगित करता है कि प्रतिरोध तापमान पर कम निर्भर करता है।
Question 18. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(1) किसी असमान अनुप्रस्थ काट वाले धात्विक चालक से एकसमान धारा प्रवाहित होती है। निम्नलिखित में से चालक में कौन-सी अचर रहती है-धारा, धारा घनत्व, विद्युत क्षेत्र, अपवाह चाल ।
(2) क्या सभी परिपथीय अवयवों के लिए ओम का नियम सार्वत्रिक रूप से लागू होता है? यदि नहीं, तो उन अवयवों के उदाहरण दीजिए जो ओम के नियम का पालन नहीं करते।
(3) किसी निम्न वोल्टता संभरण जिससे उच्च धारा देनी होती है, का आन्तरिक प्रतिरोध बहुत कम होना चाहिए, क्यों?
(4) किसी उच्च विभव (H.T.) संभरण, मान लीजिए 6 kV को आन्तरिक प्रतिरोध अत्यधिक होना चाहिए, क्यों?
Answer: हल-
(1) केवल धारा अचर रहती है, जैसा कि दिया गया है। अन्य राशियाँ अनुप्रस्थ क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती हैं।
(2) नहीं, ओम का नियम सभी परिपथीय अवयवों पर लागू नहीं होता । निर्वात् नलिकाएँ, (डायोड वाल्व, ट्रायोड वाल्व) अर्द्धचालक युक्तियाँ (सन्धि डायोड तथा ट्रांजिस्टर) इसी प्रकार की युक्तियाँ हैं।
(3) किसी संभरण से प्राप्त महत्तम धारा \( I_{\text{max}} = \frac{E}{r} \) वि० वा० बल कम है; अतः पर्याप्त धारा प्राप्त करने के लिए आन्तरिक प्रतिरोध का कम होना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त आन्तरिक प्रतिरोध के अधिक होने से सेल द्वारा दी गई ऊर्जा का अधिकांश भाग सेल के भीतर ही व्यय हो जाता है।
(4) यदि आन्तरिक प्रतिरोध बहुत कम है तो किसी कारणवश लघुपथित होने की दशा में संभरण से अति उच्च धारा प्रवाहित होगी और संभरण के क्षतिग्रस्त होने की संभावना उत्पन्न हो जाएगी।
In simple words: किसी असमान चालक में कुल धारा स्थिर रहती है। ओम का नियम सभी पदार्थों पर लागू नहीं होता; अर्धचालक और वैक्यूम ट्यूब जैसे घटक इसका अपवाद हैं। उच्च धारा वाले स्रोतों में कम आंतरिक प्रतिरोध होना चाहिए ताकि अधिक शक्ति वितरित हो सके और उच्च वोल्टेज स्रोतों में उच्च आंतरिक प्रतिरोध होना चाहिए ताकि शॉर्ट सर्किट की स्थिति में खतरनाक रूप से उच्च धारा को सीमित किया जा सके।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न धारा, धारा घनत्व, ओम के नियम के अपवाद, और आंतरिक प्रतिरोध के महत्व जैसे विभिन्न अवधारणाओं का एक संक्षिप्त अवलोकन प्रदान करता है। प्रत्येक भाग के मूल सिद्धांत को समझें।
Question 19. सही विकल्प छाँटिए-
(1) धातुओं की मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता प्रायः उनकी अवयव धातुओं की अपेक्षा (अधिक/कम) होती है?
(2) आमतौर पर मिश्रधातुओं के प्रतिरोध का ताप-गुणांक, शुद्ध धातुओं के प्रतिरोध के ताप-गुणांक से बहुत (कम/अधिक) होता है।
(3) मिश्रधातु मैंगनिन की प्रतिरोधकता ताप में वृद्धि के साथ लगभग (स्वतन्त्र है/तेजी से बढ़ती है)।
(4) किसी प्रारूपी विद्युतरोधी (उदाहरणार्थ, अम्बर) की प्रतिरोधकता किसी धातु की प्रतिरोधकता की तुलना में (1022 /1023) कोटि के गुणक से बड़ी होती है?
Answer: उत्तर-
(1) अधिक ।
(2) कम ।
(3) स्वतन्त्र है।
(4) 1022
In simple words: मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता उनकी घटक धातुओं से अधिक होती है, और उनका ताप-गुणांक शुद्ध धातुओं से कम होता है। मैंगनिन जैसी मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता तापमान से लगभग स्वतंत्र होती है। विद्युतरोधी पदार्थ धातुओं की तुलना में बहुत अधिक प्रतिरोधकता रखते हैं, लगभग 1022 गुना अधिक।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न विभिन्न पदार्थों (धातुओं, मिश्रधातुओं, विद्युतरोधियों) के प्रतिरोधकता और ताप-गुणांक के गुणों को संक्षेप में प्रस्तुत करता है। इन तथ्यों को याद रखना वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 20.
(a) आपको Rप्रतिरोध वाले n प्रतिरोधक दिए गए हैं। (i) अधिकतम, (ii) न्यूनतम प्रभावी प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए आप इन्हें किस प्रकार संयोजित करेंगे? अधिकतम और न्यूनतम प्रतिरोधों का अनुपात क्या होगा?
(b) यदि 1 Ω, 2 Ω, 3Ω के तीन प्रतिरोध दिए गए हों तो उनको आप किस प्रकार संयोजित करेंगे कि प्राप्त तुल्य प्रतिरोध हों:
(i) \( \frac{11}{3} \) Ω
(ii) \( \frac{11}{5} \) Ω
(iii) 6 Ω
(iv) \( \frac{6}{11} \) Ω
(c) चित्र 3.7 में दिखाए गए नेटवर्को का तुल्य प्रतिरोध प्राप्त कीजिए ।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 3.7(a) में कई प्रतिरोधक श्रेणी और समांतर क्रम में जुड़े हुए दिखाए गए हैं। एक शाखा में 1Ω का प्रतिरोध, दूसरी में 2Ω और तीसरी में 2Ω का प्रतिरोध दर्शाया गया है। चित्र 3.7(b) में भी समान प्रतिरोधक (R, R, R, R) विभिन्न विन्यासों में जुड़े दिखाए गए हैं, जो तुल्य प्रतिरोध की गणना के लिए एक सामान्य नेटवर्क का प्रतिनिधित्व करता है।
हल - (a) (i) अधिकतम प्रतिरोध के लिए उन्हें श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा।
श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध \( R_s = R + R + R + .... n \) पद \( = nR \)
(ii) न्यूनतम प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए इन्हें पार्श्व क्रम में जोड़ना होगा।
\( \frac{1}{R_p} = \frac{1}{R} + \frac{1}{R} + \frac{1}{R} + .... n \) पद \( = \frac{n}{R} \)
\( \therefore \) पार्श्वक्रम में तुल्य प्रतिरोध \( R_p = \frac{R}{n} \)
अभीष्ट अनुपात \( \frac{R_s}{R_p} = \frac{nR}{R/n} = \frac{n^2}{1} \implies R_s : R_p = n^2 : 1 \)
(b) यहाँ \( R_1 = 1 \, \Omega, R_2 = 2 \, \Omega, R_3 = 3 \, \Omega \)
(i) \( \frac{11}{3} \, \Omega \) का प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए \( R_1, R_2 \) को पार्श्वक्रम में व \( R_3 \) को श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र प्रतिरोधकों के एक संयोजन को दर्शाता है जहाँ 1Ω और 2Ω के प्रतिरोधक समांतर क्रम में जुड़े हुए हैं, और फिर यह संयोजन 3Ω के प्रतिरोधक के साथ श्रेणी क्रम में जुड़ा हुआ है। यह विशेष संयोजन कुल तुल्य प्रतिरोध 11/3 Ω प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
\( R_{eq} = \frac{R_1 R_2}{R_1 + R_2} + R_3 \)
\( = \frac{1 \times 2}{1+2} + 3 = \frac{2}{3} + 3 = \frac{2+9}{3} = \frac{11}{3} \, \Omega \)
(ii) \( \frac{11}{5} \, \Omega \) का प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए \( R_2, R_3 \) को पार्श्वक्रम में तथा \( R_1 \) को श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र प्रतिरोधकों के एक संयोजन को दर्शाता है जहाँ 2Ω और 3Ω के प्रतिरोधक समांतर क्रम में जुड़े हुए हैं, और फिर यह संयोजन 1Ω के प्रतिरोधक के साथ श्रेणी क्रम में जुड़ा हुआ है। यह विशेष संयोजन कुल तुल्य प्रतिरोध 11/5 Ω प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
\( R_{eq} = \frac{R_2 R_3}{R_2 + R_3} + R_1 \)
\( = \frac{2 \times 3}{2+3} + 1 = \frac{6}{5} + 1 = \frac{6+5}{5} = \frac{11}{5} \, \Omega \)
(iii) \( 6 \, \Omega \) का प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए तीनों को श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा।
तब \( R_{eq} = R_1 + R_2 + R_3 = 1+2+3 = 6 \, \Omega \)
(iv) \( \frac{6}{11} \, \Omega \) का प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए तीनों को पार्श्वक्रम में जोड़ना होगा।
(c) (a) प्रत्येक पॉश में 1Ω - 1Ω श्रेणीक्रम में तथा 2Ω - 2Ω श्रेणीक्रम में हैं।
इन शाखाओं के अलग-अलग प्रतिरोध \( 1+1 = 2 \, \Omega \) व \( 2+2=4 \, \Omega \)
अब ये दो शाखाएँ समान्तर क्रम में जुड़ी हैं।
\( \therefore \) प्रत्येक पॉश का प्रतिरोध \( = \frac{2 \times 4}{2+4} = \frac{8}{6} = \frac{4}{3} \, \Omega \)
इस प्रकार के 4 पॉश श्रेणीक्रम में जुड़े हैं।
\( \therefore \) नेटवर्क का प्रतिरोध \( R_{eq} = \frac{4}{3} + \frac{4}{3} + \frac{4}{3} + \frac{4}{3} = \frac{16}{3} \, \Omega \)
(b) RΩ के 5 प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जुड़े हैं,
\( \therefore \) नेटवर्क का प्रतिरोध \( R_{eq} = R + R + R + R + R = 5R \)
In simple words: अधिकतम प्रतिरोध के लिए प्रतिरोधकों को श्रेणी क्रम में जोड़ते हैं, जबकि न्यूनतम प्रतिरोध के लिए उन्हें समांतर क्रम में जोड़ते हैं। दिए गए प्रतिरोधों से विभिन्न तुल्य प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए मिश्रित संयोजन (श्रेणी और समांतर) का उपयोग किया जा सकता है। जटिल नेटवर्क का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात करने के लिए उसे सरल उप-भागों में विभाजित करके हल किया जाता है।
🎯 Exam Tip: श्रेणी और समांतर संयोजन के सूत्रों को याद रखें। जटिल नेटवर्क को सरल खंडों में तोड़कर चरण-दर-चरण विश्लेषण करें। मिश्रित संयोजन के लिए, पहले समांतर भागों को हल करें, फिर उन्हें श्रेणी में जोड़ें, या इसके विपरीत। अधिकतम और न्यूनतम प्रतिरोधों का अनुपात \( n^2:1 \) एक महत्वपूर्ण परिणाम है।
Question 21. किसी 0.5 Ω आन्तरिक प्रतिरोध वाले 12V के एक संभरण (Supply) से चित्र 3.10 में दर्शाए गए अनन्त नेटवर्क द्वारा ली गई धारा का मान ज्ञात कीजिए। प्रत्येक प्रतिरोध का मान 1 Ω है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 3.10 एक अनंत सीढ़ीनुमा प्रतिरोधक नेटवर्क को दर्शाता है। इस नेटवर्क का प्रत्येक प्रतिरोध 1 ओम का है। यह नेटवर्क 0.5 ओम के आंतरिक प्रतिरोध वाले 12V की विद्युत आपूर्ति से जुड़ा है। इस परिपथ से खींची गई कुल धारा ज्ञात करनी है।
Answer: हल- माना बिन्दुओं A व B के बीच तुल्य प्रतिरोध R है।
चूँकि अनन्त ± 1 = अनन्त,
अतः बिन्दुओं C व D के बीच प्रतिरोध वही होगा जो बिन्दुओं A व B
के बीच है; अतः समान्तरक्रम में जुड़े प्रतिरोध R तथा 1Ω का तुल्य
प्रतिरोध,
\( R_1 = \frac{R \times 1}{R+1} = \frac{R}{R+1} \)
बिन्दुओं A व B के बीच तुल्य प्रतिरोध
\( R_{AB} = R_1+1+1 \)
अतः परिकल्पना से
\( R_1+1+1 = R \)
\( \implies \frac{R}{R+1} + 2 = R \)
\( \implies R+2(R+1) = R(R+1) \)
\( \implies R+2R+2 = R^2+R \)
\( \implies 3R+2 = R^2+R \)
\( \implies R^2 - 2R - 2 = 0 \)
\( \implies R = \frac{-(-2) \pm \sqrt{(-2)^2 - 4(1)(-2)}}{2(1)} = \frac{2 \pm \sqrt{4+8}}{2} = \frac{2 \pm \sqrt{12}}{2} = \frac{2 \pm 2\sqrt{3}}{2} = 1 \pm \sqrt{3} \Omega \)
चूँकि प्रतिरोध ऋणात्मक नहीं हो सकता
\( \therefore R = (1 + \sqrt{3}) \Omega = (1 + 1.732) \Omega = 2.732 \Omega \)
सप्लाई से ली गई धारा, \( I = \frac{E}{R+r} \)
\( = \frac{12}{2.732+0.5} = \frac{12}{3.232} A = 3.7 A \)In simple words: इस प्रश्न में, हमें एक अनंत प्रतिरोध नेटवर्क में प्रवाहित धारा का मान ज्ञात करना था। हमने पहले नेटवर्क का समतुल्य प्रतिरोध निकाला, यह मानते हुए कि अनंत नेटवर्क में एक शाखा जोड़ने या हटाने से कुल प्रतिरोध पर कोई फर्क नहीं पड़ता। फिर ओम के नियम का उपयोग करके कुल धारा की गणना की।
🎯 Exam Tip: अनंत प्रतिरोध नेटवर्क वाले प्रश्नों को हल करते समय, यह समझना महत्वपूर्ण है कि नेटवर्क का एक हिस्सा हटाने या जोड़ने से कुल प्रतिरोध नहीं बदलता। द्विघात समीकरणों को सावधानीपूर्वक हल करें और ऋणात्मक प्रतिरोध के भौतिक अर्थ को समझें।
Question 22. चित्र 3.12 में एक पोटेशियोमीटर दर्शाया गया है। जिसमें एक 2.0 V और आन्तरिक प्रतिरोध 0.40 Ω का कोई सेल, पोटेशियोमीटर के प्रतिरोधक तार AB पर वोल्टता पात बनाए A रखता है। कोई मानक सेल जो 1.02 V का अचर विद्युत वाहक बल बनाए रखता है (कुछ mA की बहुत सामान्य धाराओं के लिए) तार की 67.3 cm लम्बाई पर सन्तुलन बिन्दु देता है। मानक सेल से अति न्यून धारा लेना सुनिश्चित करने के लिए । इसके साथ परिपथ में श्रेणी 600 kΩ का एक अति उच्च प्रतिरोध इसके साथ सम्बद्ध किया जाता है, जिसे सन्तुलन बिन्दु प्राप्त होने के निकट लघुपथित (shorted) कर दिया जाता है। इसके बाद मानक सेल को किसी अज्ञात विद्युत वाहक बल E के सेल से प्रतिस्थापित कर दिया जाता है जिससे सन्तुलन बिन्द तार की 82.3 cm लम्बाई पर प्राप्त होता है।
(a) E का मान क्या है?
(b) 600 kΩ के उच्च प्रतिरोध का क्या प्रयोजन है?
(c) क्या इस उच्च प्रतिरोध से सन्तुलन बिन्दु प्रभावित होता है?
(d) क्या परिचालक सेल के आन्तरिक प्रतिरोध से सन्तुलन बिन्दु प्रभावित होता है?
(e) उपर्युक्त स्थिति में यदि पोटेशियोमीटर के परिचालक सेल का विद्युत वाहक बल 2.0 V के स्थान पर 1.0 V हो तो क्या यह विधि फिर भी सफल रहेगी?
(f) क्या यह परिपथ कुछ mV की कोटि के अत्यल्प विद्युत वाहक बलों (जैसे कि किसी प्रारूपी तापविद्युत युग्म का विद्युत वाहक बल) के निर्धारण में सफल होगी? यदि नहीं, तो आप इसमें किस प्रकार संशोधन करेंगे?
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 3.12 एक विभवमापी परिपथ को दर्शाता है। इसमें एक 2.0 V का चालक सेल, जिसका आंतरिक प्रतिरोध 0.4 Ω है, पोटेंशियोमीटर तार AB से जुड़ा है। एक गैल्वेनोमीटर और एक उच्च प्रतिरोध (600 kΩ) के माध्यम से एक मानक सेल (1.02 V) को तार AB के साथ संतुलित किया जाता है।
Answer: हल-
(a) विभवमापी के तार की समान विभव प्रवणता के लिए, दो सेलों के वै० वा० बलों की तुलना करने का सूत्र निम्न है।
सेल E₁ के लिए सन्तुलन लम्बाई l₁ = 67.3 सेमी
सेल E₂ के लिए सन्तुलन लम्बाई l₂ = 82.3 सेमी
मानक सेल का विद्युत वाहक बल E₁ = 1.02 V
तब, विभवमापी के सिद्धान्त से \( \frac{E_2}{E_1} = \frac{l_2}{l_1} \)
\( \implies E_2 = E_1 \frac{l_2}{l_1} = 1.02 \times \frac{82.3}{67.3} V = 1.248 V \approx 1.25 V \)
अतः अज्ञात सेल का विद्युत वाहक बल E = 1.25 V है।
(b) उच्च प्रतिरोध का प्रयोजन धारामापी में धारा को कम करना है जबकि जौकी संतुलन बिन्दु से दूर है। इससे प्रमाणिक सेल नुकसान (damage) से बचा रहता है।
(c) संतुलन बिन्दु उच्च प्रतिरोध से प्रभावित नहीं होता है, क्योंकि संतुलन की स्थिति में सेल के द्वितीयक परिपथ में धारा नहीं बहती ।
(d) परिचालक सेल के आन्तरिक प्रतिरोध से संतुलन बिन्दु प्रभावित नहीं होता क्योंकि हमने तार पर विभव प्रवणता पहले से ही नियत रख दी है।
(e) नहीं, क्योंकि विभवमापी के कार्य करने के लिए परिचालक सेल का वै० वी० बल, द्वितीयक परिपथ के सेल के वै० वा० बल (E) से अधिक होना चाहिए।
(f) क्योकि संतुलन बिन्दु सिरे A के निकट होगा तथा मापन में त्रुटि बहुत अधिक होगी। इसके लिए परिचालक सेल के श्रेणीक्रम में एक परिवर्ती प्रतिरोध (R) जोड़ते हैं तथा इसका मान इस प्रकार व्यवस्थित करते हैं कि तार AB के सिरों के बीच विभवपात द्वितीयक सेल के वै० वा० बल से थोड़ा ही अधिक हो ताकि संतुलन बिन्दु अधिक लम्बाई पर प्राप्त हो, इससे मापन में त्रुटि कम होगी तथा मापने की यथार्थता बढ़ेगी ।In simple words: यह प्रश्न एक विभवमापी का उपयोग करके अज्ञात सेल के विद्युत वाहक बल (E) को मापने और विभवमापी के विभिन्न घटकों के उद्देश्य को समझने के बारे में है। सिद्धांत यह है कि संतुलन बिंदु पर गैल्वेनोमीटर से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है, जिससे E का सटीक माप होता है।
🎯 Exam Tip: विभवमापी के अनुप्रयोगों में संतुलन बिंदु की स्थिति, उच्च प्रतिरोध का उद्देश्य, और परिचालन सेल व अज्ञात सेल के विद्युत वाहक बल के बीच संबंध को अच्छी तरह से समझें। यह सुनिश्चित करें कि परीक्षण सेल का EMF, ड्राइविंग सेल के EMF से कम हो।
Question 23. चित्र 3.13 दो प्रतिरोधों की तुलना के लिए विभवमापी परिपथ दर्शाता है। मानक प्रतिरोधक R = 10.0 Ω के साथ सन्तुलन बिन्दु 58.3 cm पर तथा अज्ञात प्रतिरोध X के साथ 68.5 cm पर प्राप्त होता है। X का मान ज्ञात कीजिए । यदि आप दिए गए सेल E से सन्तुलन बिन्दु प्राप्त करने में असफल रहते हैं तो आप क्या करेंगे?
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 3.13 दो प्रतिरोधों की तुलना के लिए एक विभवमापी परिपथ को दर्शाता है। एक मानक प्रतिरोधक R और एक अज्ञात प्रतिरोध X एक गैल्वेनोमीटर और जॉकी के साथ विभवमापी तार AB से जुड़े हैं, जो संतुलन बिंदु का पता लगाने में मदद करता है।
Answer: हल-
कुँजियों K₁ तथा K2 को क्रमशः बन्द करके विभवमापी के तार पर सन्तुलन बिन्दु प्राप्त करने पर यदि संगत सन्तुलन
लम्बाई क्रमशः l₁ तथा l₂ हो, तो R के सिरों का विभवान्तर = Kl₁ = R I
तथा X के सिरों का विभवान्तर = Kl₂ = X I
जहाँ I = विभवमापी के तार में धारा
तथा K = इसकी विभव प्रवणता
\( \implies \frac{K l_1}{K l_2} = \frac{R I}{X I} \)
\( \implies \frac{l_1}{l_2} = \frac{R}{X} \)
\( \implies X = R \frac{l_2}{l_1} \)
यहाँ R = 10.0 Ω, l₁ = 58.3 सेमी तथा l₂ = 68.5 सेमी
\( \implies X = 10.0 \times \frac{68.5}{58.3} = 11.75 \Omega \)
तो इसका अर्थ है कि R या X के सिरों के बीच विभवान्तर विभवमापी के तार AB के सिरों के बीच विभवान्तर से अधिक
है। ऐसी स्थिति में बाह्य परिपथ में धारा का मान कम करने के लिए श्रेणीक्रम में एक उचित प्रतिरोध जोड़ना होगा जो बिन्दु
C व D के बीच जोड़ा जाएगा।In simple words: इस प्रश्न में, विभवमापी के संतुलन सिद्धांत का उपयोग करके एक अज्ञात प्रतिरोध X का मान ज्ञात किया गया है। यदि संतुलन बिंदु प्राप्त नहीं होता है, तो बाह्य परिपथ में धारा कम करने के लिए एक उचित प्रतिरोध जोड़ना चाहिए।
🎯 Exam Tip: विभवमापी के संतुलन सिद्धांत \( (\frac{R}{X} = \frac{l_1}{l_2}) \) को याद रखें। यदि संतुलन बिंदु नहीं मिलता है, तो यह दर्शाता है कि तार पर विभव पात कम है, या परीक्षण सेल का EMF ड्राइविंग सेल के EMF से अधिक है।
Question 24. चित्र 3.14 में किसी 1.5 V के सेल का आन्तरिक प्रतिरोध मापने के लिए एक 2.0 V को पोटेशियोमीटर दर्शाया गया है। खुले परिपथ में सेल का सन्तुलन बिन्दु 76.3 cm पर मिलता है। सेल के बाह्य परिपथ में 9.5 Ω रतिरोध का एक प्रतिरोधक संयोजित करने पर सन्तुलन बिन्दु पोटेंशियोमीटर के तार की 64.8 cm लम्बाई पर पहुँच जाता है। सेल के आन्तरिक प्रतिरोध का मान ज्ञात कीजिए ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 3.14 एक पोटेंशियोमीटर परिपथ को दर्शाता है जिसका उपयोग 1.5V सेल के आंतरिक प्रतिरोध को मापने के लिए किया जाता है। एक 2.0V का चालक सेल परिपथ को शक्ति प्रदान करता है, और एक गैल्वेनोमीटर के माध्यम से अज्ञात सेल को पोटेंशियोमीटर तार से जोड़ा जाता है, जिसमें एक 9.5 Ω का बाहरी प्रतिरोध भी शामिल है।
Answer: हल-
यहाँ वैद्युत वाहक बल E = 1.5 वोल्ट जिसके संगत (जब सेल खुले परिपथ में है) विभवमापी के तार की संगत सन्तुलन
लम्बाई l₁ = 76.3 सेमी । सेल के साथ बाह्य प्रतिरोध R = 9.5 Ω संयोजित करने पर (अर्थात् जब सेल बन्द परिपथ में
है) तो सेल के टर्मिनल विभवान्तर V के संगत लम्बाई l₂ = 64.8 सेमी ।
\( \frac{E}{V} = \frac{K l_1}{K l_2} = \frac{l_1}{l_2} \)
सेल का आन्तरिक प्रतिरोध, \( r = R \left( \frac{E}{V} - 1 \right) \)
\( \implies r = R \left( \frac{l_1}{l_2} - 1 \right) \)
\( \implies r = 9.5 \left( \frac{76.3}{64.8} - 1 \right) \Omega \)
\( \implies r = 9.5 \left( \frac{76.3 - 64.8}{64.8} \right) \Omega \)
\( \implies r = 9.5 \times \frac{11.5}{64.8} \Omega \)
\( \implies r = 1.68 \Omega \)In simple words: इस प्रश्न में, विभवमापी का उपयोग करके एक सेल का आंतरिक प्रतिरोध ज्ञात किया गया है। संतुलन लंबाई का उपयोग करके, जब सेल खुला और बंद परिपथ में होता है, आंतरिक प्रतिरोध के सूत्र में मानों को प्रतिस्थापित करके परिणाम प्राप्त किया जाता है।
🎯 Exam Tip: विभवमापी द्वारा आंतरिक प्रतिरोध ज्ञात करने के सूत्र \( r = R(\frac{l_1}{l_2}-1) \) को याद रखें। यह सुनिश्चित करें कि आप खुले और बंद परिपथ की संतुलन लंबाई को सही ढंग से पहचानें।
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. किसी चालक में 3.2 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही है। प्रति सेकण्ड प्रवाहित इलेक्ट्रॉनों की संख्या होगी।
(i) \( 2 \times 10^{19} \)
(ii) \( 3 \times 10^{20} \)
(iii) \( 5.2 \times 10^{19} \)
(iv) \( 9 \times 10^{20} \)
Answer: (i) \( 2 \times 10^{19} \)In simple words: धारा और इलेक्ट्रॉन आवेश के संबंध का उपयोग करके, एक सेकंड में प्रवाहित इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: आवेश के क्वांटमीकरण \( Q = ne \) और धारा की परिभाषा \( I = Q/t \) के बीच संबंध को जानें। एक इलेक्ट्रॉन का आवेश \( e = 1.6 \times 10^{-19} \) C होता है।
Question 2. वैद्युत धारा घनत्व j तथा अपवाह वेग vd में सम्बन्ध है।
(i) \( j = n e v_d \)
(ii) \( j = \frac{n e}{v_d} \)
(iii) \( j = \frac{v_d e}{n} \)
(iv) \( j = v_d^2 \)
Answer: (i) \( j = n e v_d \)In simple words: धारा घनत्व, आवेश वाहकों की संख्या घनत्व, उनके आवेश और उनके अपवाह वेग के गुणनफल के बराबर होता है।
🎯 Exam Tip: धारा घनत्व \( j \), इलेक्ट्रॉन संख्या घनत्व \( n \), इलेक्ट्रॉन आवेश \( e \), और अपवाह वेग \( v_d \) के बीच संबंध \( j = n e v_d \) को याद रखें। यह सूत्र चालक में धारा के सूक्ष्म विवरण को समझने के लिए मौलिक है।
Question 3. प्रतिरोध की विमा है।
(i) \( [M L^2 T^{-2} A^{-2}] \)
(ii) \( [M^2 L^3 T^{-2} A^{-2}] \)
(iii) \( [M L^2 T^{-3} A^{-2}] \)
(iv) \( [M L^3 T^{-3} A^{-3}] \)
Answer: (iii) \( [M L^2 T^{-3} A^{-2}] \)In simple words: प्रतिरोध की विमा को ओम के नियम \( R=V/I \) और विभव तथा धारा की मूल विमाओं का उपयोग करके निकाला जा सकता है।
🎯 Exam Tip: भौतिक राशियों की विमाओं को निकालने के लिए मूल समीकरणों (जैसे ओम का नियम, कार्य या शक्ति के सूत्र) को याद रखें। वोल्ट, एम्पीयर, और जूल जैसी इकाइयों की विमाएँ जानना सहायक होता है।
Question 4. 40 W तथा 60 w के दो बल्ब 220 V लाइन से जोड़े जाते हैं, उनके प्रतिरोधों में अनुपात होगा
(i) 4:3
(ii) 3:4
(iii) 2:3
(iv) 3:2
Answer: (iv) 3 : 2In simple words: बल्ब की शक्ति और वोल्टेज के संबंध का उपयोग करके, प्रत्येक बल्ब का प्रतिरोध ज्ञात किया जा सकता है, जिससे उनके प्रतिरोधों का अनुपात निकलता है।
🎯 Exam Tip: शक्ति \( P \), वोल्टेज \( V \), और प्रतिरोध \( R \) के बीच संबंध \( P = V^2/R \) का उपयोग करें। यदि वोल्टेज समान है, तो प्रतिरोध शक्ति के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
Question 5. एक ताँबे के तार को खींचकर 1% लम्बाई में वृद्धि कर दी जाए, तो प्रतिरोध में प्रतिशत परिवर्तन होगा
(i) 4% वृद्धि
(ii) 2% वृद्धि
(iii) 1% वृद्धि
(iv) 2% कमी
Answer: (ii) 2% वृद्धिIn simple words: जब किसी तार को खींचा जाता है, तो उसकी लंबाई बढ़ती है और अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल घटता है, जिससे प्रतिरोध लंबाई के वर्ग के समानुपाती होता है। 1% लंबाई में वृद्धि से प्रतिरोध में लगभग 2% की वृद्धि होती है।
🎯 Exam Tip: तार के खींचने पर प्रतिरोध में परिवर्तन के लिए सूत्र \( R \propto l^2 \) को याद रखें, जहाँ \( l \) लंबाई है। प्रतिशत परिवर्तन के लिए, \( \frac{\Delta R}{R} \approx 2 \frac{\Delta l}{l} \) का उपयोग करें।
Question 6. 50 Ω प्रतिरोध के धात्विक तार को खींचकर उसकी लम्बाई दो गुनी कर देते हैं। उसका नया प्रतिरोध है-
(i) 25 Ω
(ii) 50 Ω
(iii) 100 Ω
(iv) 200 Ω
Answer: (iv) 200 ΩIn simple words: जब किसी तार को खींचकर उसकी लंबाई दोगुनी की जाती है, तो उसका प्रतिरोध मूल प्रतिरोध का चार गुना हो जाता है।
🎯 Exam Tip: तार को खींचने पर प्रतिरोध \( R' = n^2 R \) होता है, जहाँ \( n \) लंबाई में वृद्धि का कारक है। इस सूत्र को याद रखें।
Question 7. एक 100 वाट-220 वोल्ट का बल्ब 110 वोल्ट की सप्लाई से जुड़ा है। बल्ब में व्यय होने वाली शक्ति होगी।
(i) 100 वाट
(ii) 50 वाट
(iii) 25 वाट
(iv) 2 वाट
Answer: (iii) 25 वाटIn simple words: बल्ब का प्रतिरोध ज्ञात करने के बाद, नए वोल्टेज पर व्यय होने वाली शक्ति को \( P = V^2/R \) सूत्र का उपयोग करके निकाला जा सकता है।
🎯 Exam Tip: बल्ब की रेटेड शक्ति और वोल्टेज से उसका प्रतिरोध \( R = V_{rated}^2 / P_{rated} \) ज्ञात करें। फिर, वास्तविक शक्ति \( P_{actual} = V_{actual}^2 / R \) की गणना करें।
Question 8. 2 ऐम्पियर की वैद्युत धारा चित्र 3.15 में प्रदर्शित परिपथ में प्रवाहित हो रही है। विभवान्तर \( (V_B - V_D) \) है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 3.15 एक व्हीटस्टोन सेतु परिपथ को दर्शाता है जहाँ 2 Ω, 3 Ω, 4 Ω और 6 Ω के प्रतिरोध एक चतुर्भुज में व्यवस्थित हैं। 2A की विद्युत धारा बिंदु A से प्रवेश करती है। यह परिपथ के विभिन्न बिंदुओं पर संभावित अंतर को दर्शाने में मदद करता है।
(i) 12 वोल्ट
(ii) 6 वोल्ट
(ii) 4 वोल्ट
(iv) 0 वोल्ट
Answer: (iv) 0 वोल्टIn simple words: यह परिपथ व्हीटस्टोन सेतु का एक संतुलित विन्यास है, जहाँ प्रतिरोधों का अनुपात समान है, इसलिए बिंदुओं B और D के बीच कोई संभावित अंतर नहीं होता।
🎯 Exam Tip: व्हीटस्टोन सेतु के संतुलन की स्थिति \( \frac{P}{Q} = \frac{R}{S} \) को पहचानें। संतुलित सेतु में गैल्वेनोमीटर शाखा (यहां B और D के बीच) में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है, जिसका अर्थ है कि उस शाखा के सिरों पर विभव अंतर शून्य है।
Question 9. समान्तर क्रम में जुड़े 10 ओम के दो प्रतिरोधों की तुल्य प्रतिरोध है।
(i) 20 ओम
(ii) 10 ओम
(iii) 15 ओम
(iv) 5 ओम
Answer: (iv) 5 ओमIn simple words: दो समान प्रतिरोधों को समानांतर में जोड़ने पर कुल प्रतिरोध प्रत्येक प्रतिरोध के मान का आधा हो जाता है।
🎯 Exam Tip: दो प्रतिरोधों \( R_1 \) और \( R_2 \) के समानांतर संयोजन के लिए तुल्य प्रतिरोध \( R_{eq} = \frac{R_1 R_2}{R_1 + R_2} \) होता है। यदि प्रतिरोध समान हों \( (R_1 = R_2 = R) \), तो \( R_{eq} = R/2 \) होता है।
Question 10. दो प्रतिरोध R तथा 2R एक विद्युत परिपथ में समान्तर क्रम में जुड़े हैं। R तथा 2R में उत्पन्न ऊष्मीय ऊर्जा का अनुपात होगा
(i) 1:2
(ii) 2:1
(iii) 1:4
(iv) 4 : 1
Answer: (ii) 2:1In simple words: समानांतर क्रम में जुड़े प्रतिरोधों में, वोल्टेज समान रहता है, इसलिए ऊष्मीय ऊर्जा प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
🎯 Exam Tip: ऊष्मीय ऊर्जा के सूत्र \( H = \frac{V^2}{R} t \) का उपयोग करें। समानांतर क्रम में वोल्टेज \( V \) समान रहता है।
Question 11. एक चालक तार का प्रतिरोध R ओम है। इसको n बराबर भागों में बाँटकर उनको समान्तर क्रम में जोड़ने पर तुल्य प्रतिरोध होगा
(i) \( \frac{R}{n^2} \)
(ii) \( \frac{n^2}{R} \)
(iii) \( \frac{n}{R} \)
(iv) \( \frac{R}{n} \)
Answer: (i) \( \frac{R}{n^2} \)In simple words: जब एक तार को n बराबर भागों में काटा जाता है और उन्हें समानांतर में जोड़ा जाता है, तो प्रत्येक छोटे तार का प्रतिरोध \( R/n \) होता है, और समानांतर में n ऐसे तारों का तुल्य प्रतिरोध \( \frac{R/n}{n} = \frac{R}{n^2} \) होता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि जब एक तार को n भागों में काटा जाता है, तो प्रत्येक भाग का प्रतिरोध \( R/n \) होता है। फिर, समान प्रतिरोधों को समानांतर में जोड़ने का सूत्र \( R_{eq} = R_{part} / n \) का उपयोग करें।
Question 12. एक प्राथमिक सेल का वि० वा० बल 2.4 V है। इस सेल को जब लघुपथित कर देते हैं तो 4.0 A की वैद्युत धारा प्राप्त होती है। सेल को आन्तरिक प्रतिरोध है ।
(i) 6.0 Ω
(ii) 1.2 Ω
(iii) 4.0 Ω
(iv) 0.6 Ω
Answer: (iv) 0.6 Ω[संकेत लघुपथित का अर्थ है कि R = 0
\( \implies i = \frac{E}{R+r} \) से,
\( \implies i = \frac{E}{r} \)
\( \implies r = \frac{E}{i} = \frac{2.4}{4.0} = 0.6 \Omega \)In simple words: लघुपथित होने पर, बाहरी प्रतिरोध शून्य हो जाता है, जिससे सेल का आंतरिक प्रतिरोध ओम के नियम का उपयोग करके सीधे विद्युत वाहक बल और धारा से ज्ञात किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: लघुपथित स्थिति में, बाहरी प्रतिरोध \( R=0 \) होता है, इसलिए परिपथ में धारा \( I = E/r \) होती है। इस संबंध का उपयोग करके आंतरिक प्रतिरोध \( r \) को आसानी से निकाला जा सकता है।
Question 13. एक बैटरी जिसका वि० वा० बल 5 वोल्ट है तथा आन्तरिक प्रतिरोध 2.0 ओम है, एक बाहरी प्रतिरोध से जुड़ी है। यदि परिपथ में धारा 0.4 ऐम्पियर हो, तो बैटरी की टर्मिनल वोल्टता है।
(i) 5 वोल्ट
(ii) 5.8 वोल्ट
(iii) 4.6 वोल्ट
(iv) 4.2 वोल्ट
Answer: (iv) 4.2 वोल्टIn simple words: टर्मिनल वोल्टता, विद्युत वाहक बल में से आंतरिक प्रतिरोध के कारण होने वाले वोल्टेज ड्रॉप को घटाकर ज्ञात की जाती है।
🎯 Exam Tip: सेल के डिस्चार्ज होने की स्थिति में टर्मिनल वोल्टता \( V = E - Ir \) के सूत्र का उपयोग करें। यह सूत्र दर्शाता है कि टर्मिनल वोल्टता विद्युत वाहक बल से कम होती है।
Question 14. किरचॉफ का धारा का नियम किसके संरक्षण के परिणामस्वरूप है?
(i) ऊर्जा
(ii) संवेग
(iii) आवेश
(iv) द्रव्यमान
Answer: (iii) आवेशIn simple words: किरचॉफ का पहला नियम, जिसे संधि नियम भी कहते हैं, यह बताता है कि किसी भी संधि पर धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है, जो आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है।
🎯 Exam Tip: किरचॉफ के नियमों को उनके संरक्षण सिद्धांतों से जोड़ना याद रखें: पहला नियम आवेश संरक्षण से और दूसरा नियम ऊर्जा संरक्षण से संबंधित है।
Question 15. 5 मीटर लम्बे तथा 5Ω प्रतिरोध वाले विभवमापी के तार में 2 mA की धारा प्रवाहित हो रही है। विभवमापी की विभव-प्रवणता है।
(i) \( 2.0 \times 10^{-3} \) वोल्ट/मीटर
(ii) \( 2.5 \times 10^{-3} \) वोल्ट/मीटर
(iii) \( 1.6 \times 10^{-3} \) वोल्ट/मीटर
(iv) \( 2.3 \times 10^{-3} \) वोल्ट/मीटर
Answer: (i) \( 2.0 \times 10^{-3} \) वोल्ट/मीटरIn simple words: विभव-प्रवणता, तार की प्रति इकाई लंबाई में वोल्टेज ड्रॉप है, जिसे तार के कुल वोल्टेज ड्रॉप को उसकी लंबाई से विभाजित करके निकाला जा सकता है।
🎯 Exam Tip: विभव-प्रवणता \( K = V/L \) या \( K = IR/L \) के सूत्र का उपयोग करें। इकाइयों को सही ढंग से मीटर और एम्पीयर में परिवर्तित करना सुनिश्चित करें।
Question 16. विभवमापी के प्रयोग में दो सेलों के विद्युत वाहक बल E₁ तथा E₂ हैं। इन्हें श्रेणीक्रम में जोड़कर विभवमापी के तार पर अविक्षेप बिन्दु 58 सेमी पर प्राप्त होता है। जब E₂ विद्युत वाहक बल वाली सेल की ध्रुवता उलट दी जाती है तब अविक्षेप बिन्दु 29 सेमी पर प्राप्त होता है। \( \frac{E_1}{E_2} \) का अनुपात है
(i) 3: 1
(ii) 2: 1
(iii) 1:3
(iv) 1:2
Answer: (ii) 2:1In simple words: विभवमापी के सिद्धांत का उपयोग करके, जब दो सेल श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं और फिर ध्रुवता उलट कर जोड़े जाते हैं, तो संतुलन लंबाई के अनुपात से उनके विद्युत वाहक बलों का अनुपात ज्ञात किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों के लिए सूत्र \( \frac{E_1}{E_2} = \frac{l_1 + l_2}{l_1 - l_2} \) का उपयोग करें, जहाँ \( l_1 \) और \( l_2 \) संबंधित संतुलन लंबाइयाँ हैं।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. किसी चालक के भीतर वैद्युत-क्षेत्र \( \vec{E} \) तथा धारा घनत्व \( \vec{J} \) में क्या सम्बन्ध है?
Answer: \( \vec{E} = \rho \vec{J} \), जहाँ \( \rho \) चालक के पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध है।In simple words: चालक के भीतर विद्युत क्षेत्र, धारा घनत्व और विशिष्ट प्रतिरोध के गुणनफल के बराबर होता है, जो ओम के नियम का सदिश रूप है।
🎯 Exam Tip: ओम के नियम के सदिश रूप \( \vec{E} = \rho \vec{J} \) को याद रखें, जहाँ \( \rho \) विशिष्ट प्रतिरोध है। यह संबंध अक्सर पूछा जाता है।
Question 2. समीकरण \( \vec{E} = \rho \vec{J} \) में \( \rho \) को मात्रक लिखिए।
Answer: \( \rho = E/j \); अतः मात्रक \( = \frac{\text{न्यूटन / कूलॉम}}{\text{ऐम्पियर / मीटर}^2} = \text{ओम-मीटर} \)In simple words: विशिष्ट प्रतिरोध \( \rho \) का मात्रक विद्युत क्षेत्र की इकाई (वोल्ट/मीटर या न्यूटन/कूलॉम) को धारा घनत्व की इकाई (ऐम्पियर/मीटर\(^2\)) से विभाजित करके ओम-मीटर प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट प्रतिरोध की इकाई ओम-मीटर है। इसे विद्युत क्षेत्र और धारा घनत्व की इकाइयों से व्युत्पन्न किया जा सकता है।
Question 3. किन्हीं दो गुणों से एक चालक और एक अर्द्धचालक का भेद बताइए।
Answer:
(i) चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या बहुत अधिक होती है, जबकि अंर्द्धचालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन चालकों से कम होते
हैं।
(ii) चालकों का ताप बढ़ाने पर उनका प्रतिरोध बढ़ता है, जबकि अर्द्धचालकों का ताप बढ़ाने से उनका प्रतिरोध घटता है।In simple words: चालक और अर्द्धचालक मुख्य रूप से मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या और ताप के साथ उनके प्रतिरोध में परिवर्तन के आधार पर भिन्न होते हैं।
🎯 Exam Tip: चालकों और अर्द्धचालकों के बीच मुख्य अंतर को मुक्त इलेक्ट्रॉन घनत्व और तापमान के साथ प्रतिरोध पर उनके विपरीत व्यवहार के संदर्भ में याद रखें।
Question 4. विशिष्ट चालकत्व (specific conductance) की परिभाषा दीजिए। इसकी इकाई भी लिखिए ।
या
विशिष्ट चालकता के लिए सूत्र एवं मात्रक लिखिए।
या
किसी चालक पदार्थ की विशिष्ट चालकता क्या है? विशिष्ट चालकता का अन्तर्राष्ट्रीय पद्धति में मात्रक दीजिए।
Answer: किसी चालक के पदार्थ के विशिष्ट प्रतिरोध के व्युत्क्रम को उस पदार्थ की विशिष्ट
चालकता (specific conductance) कहते हैं।
इसे \( \sigma \) से प्रदर्शित करते हैं। अर्थात् \( \sigma = \frac{1}{\rho} \)
इसकी इकाई म्हो-मीटर\(^{-1}\) होती है।In simple words: विशिष्ट चालकता, विशिष्ट प्रतिरोध का व्युत्क्रम है और यह बताती है कि कोई पदार्थ कितनी अच्छी तरह विद्युत का संचालन करता है; इसकी इकाई म्हो-मीटर\(^{-1}\) है।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट चालकता की परिभाषा और सूत्र \( \sigma = 1/\rho \) को याद रखें। इसकी इकाई (म्हो-मीटर\(^{-1}\) या सीमेंस-मीटर\(^{-1}\)) भी महत्वपूर्ण है।
Question 5. धारा-घनत्व, विशिष्ट चालकता तथा विद्युत-क्षेत्र के बीच परस्पर सम्बन्ध लिखिए तथा इससे विशिष्ट चालकता का मात्रक निकालिए।
Answer: विशिष्ट चालकता \( = \frac{\text{धारा-घनत्व}}{\text{वैद्युत-क्षेत्र}} \)
\( \implies \sigma = \frac{j}{E} = \frac{\text{ऐम्पियर / मीटर}^2}{\text{वोल्ट / मीटर}} = \frac{\text{ऐम्पियर}}{\text{वोल्ट} \times \text{मीटर}} = \text{ओम}^{-1} \times \text{मीटर}^{-1} \)
\( = \text{म्हो-मीटर}^{-1} \)In simple words: विशिष्ट चालकता धारा घनत्व और विद्युत क्षेत्र के अनुपात के बराबर होती है, और इसकी इकाई ओम-मीटर का व्युत्क्रम होती है, जिसे म्हो-मीटर\(^{-1}\) भी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: धारा घनत्व, विशिष्ट चालकता और विद्युत क्षेत्र के बीच संबंध \( \vec{J} = \sigma \vec{E} \) को याद रखें। इस सूत्र से विशिष्ट चालकता की इकाई आसानी से निकाली जा सकती है।
Question 6. मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग तथा वैद्युत धारा घनत्व में सम्बन्ध लिखिए। प्रयुक्त संकेतों के अर्थ बताइए।
Answer: हल-
धारा घनत्व \( (j) = n e v_d \)
जहाँ, n = मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या
e = इलेक्ट्रॉन का आवेश
\( v_d \) = इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेगIn simple words: धारा घनत्व, प्रति इकाई आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या, इलेक्ट्रॉन के आवेश और उनके अपवाह वेग का गुणनफल होता है।
🎯 Exam Tip: धारा घनत्व और अपवाह वेग के बीच संबंध \( j = n e v_d \) को याद रखें। इसमें सभी प्रतीकों के अर्थ (n, e, \( v_d \)) स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 7. ताँबे के एक तार, जिसकी अनुप्रस्थ काट \( 2 \times 10^{-6} \) मी\(^2\) है; में 3.2 ऐम्पियर धारा प्रवाहित हो रही है। तार में प्रवाहित धारा-घनत्व का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: हल- धारा-घनत्व \( j = \frac{i}{A} = \frac{3.2 \text{ ऐम्पियर}}{2 \times 10^{-6} \text{ मी}^2} \)
\( = 1.6 \times 10^6 \text{ ऐम्पियर/मीटर}^2 \)In simple words: धारा घनत्व की गणना कुल प्रवाहित धारा को तार के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल से विभाजित करके की जाती है।
🎯 Exam Tip: धारा घनत्व \( j = I/A \) के सूत्र को याद रखें। क्षेत्रफल की इकाई मीटर\(^2\) में होनी चाहिए।
Question 8. धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग एवं भ्रांतिकाल में सम्बन्ध लिखिए। प्रयुक्त संकेतों के अर्थ बताइए।
Answer: हल- अपवाह वेग, \( v_d = \frac{e V \tau}{m l} \), जहाँ \( \tau \) = श्रांतिकाल,
m = इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान,
l = धात्विक तार की लम्बाई
V = तार के सिरों के बीच विभवान्तरIn simple words: धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अपवाह वेग, तार के सिरों पर लगाए गए वोल्टेज, इलेक्ट्रॉन के आवेश और श्रांतिकाल के सीधे समानुपाती होता है, जबकि इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान और तार की लंबाई के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
🎯 Exam Tip: अपवाह वेग और श्रांतिकाल के बीच संबंध के सूत्र को याद रखें और उसमें प्रयुक्त सभी प्रतीकों (e, V, \( \tau \), m, l) का सही अर्थ लिखें।
Question 9. एक इलेक्ट्रॉन वृत्ताकार कक्षा में \( 6 \times 10^6 \) चक्कर प्रति सेकण्ड की दर से घूम रहा है। लूप में तुल्य प्रवाहित धारा का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-
यहाँ, \( n = 6 \times 10^6 \) चक्कर, \( t = 1 \) सेकण्ड
तथा \( e = 1.6 \times 10^{-19} \) कूलॉम
\( \therefore \) लूप में तुल्य प्रवाहित धारा \( i = \frac{n e}{t} \)
\( = \frac{6 \times 10^6 \times 1.6 \times 10^{-19}}{1} \)
\( = 9.6 \times 10^{-13} \) ऐम्पियरIn simple words: एक वृत्ताकार कक्षा में इलेक्ट्रॉन के घूमने से उत्पन्न धारा की गणना कुल आवेश (चक्करों की संख्या गुणा इलेक्ट्रॉन का आवेश) को घूमने में लगे समय से विभाजित करके की जाती है।
🎯 Exam Tip: धारा \( I = Q/t \) के मूल सूत्र का उपयोग करें, जहाँ \( Q \) कुल आवेश \( (n \times e) \) है। आवृत्तियों या चक्कर प्रति सेकंड को ध्यान में रखते हुए समय को सही ढंग से निर्धारित करें।
Question 10. 0.5 मिमी त्रिज्या के एक तार में 0.5 ऐम्पियर की धारा बह रही है। यदि तार में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या \( 4 \times 10^{28} \) प्रति मी\(^3\) हो, तो उनके अनुगमन वेग की गणना कीजिए।
Answer: हल-
दिया है, \( r = 0.5 \) मिमी \( = 5 \times 10^{-4} \) मी, \( i = 0.5 \) ऐम्पियर,
\( n = 4 \times 10^{28} \) प्रति मी\(^3\)
तार के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \( A = \pi r^2 = 3.14 \times (5 \times 10^{-4})^2 \)
\( = 78.5 \times 10^{-8} \text{ मी}^2 \)
तार में धारा घनत्व \( J = \frac{i}{A} = \frac{0.5}{78.5 \times 10^{-8}} \)
\( = 6.4 \times 10^5 \text{ ऐम्पियर/मी}^2 \)
अनुगमन वेग \( v_d = \frac{J}{n e} = \frac{6.4 \times 10^5}{4 \times 10^{28} \times 1.6 \times 10^{-19}} \)
\( = 10 \times 10^{-5} \text{ मी/से} \)In simple words: इलेक्ट्रॉन का अनुगमन वेग ज्ञात करने के लिए, पहले तार के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल और धारा घनत्व की गणना की जाती है, फिर धारा घनत्व के सूत्र को संख्या घनत्व और इलेक्ट्रॉन आवेश से संबंधित करके अनुगमन वेग निकाला जाता है।
🎯 Exam Tip: अनुगमन वेग \( v_d = \frac{I}{n e A} \) सूत्र का उपयोग करें। सभी मानों को SI इकाइयों में रखना सुनिश्चित करें (जैसे मिमी को मीटर में बदलना)।
Question 11. अनओमीय परिपथ से आप क्या समझते हैं? इसका एक उदाहरण दीजिए।
या
अनओमीय चालक किसे कहते हैं?
या
गत्यात्मक प्रतिरोध का अर्थ क्या है?
Answer: वे परिपथ (अर्थात् चालक) जिनमें ओम के नियम का पालन नहीं होता है; अर्थात् जिनके सिरों पर आरोपित विभवान्तर V तथा संगत धारा I का अनुपात नियत नहीं रहता है, अनओमीय परिपथ (चालक) कहलाते हैं। ऐसे परिपथों के लिए V तथा I के अनुपात के नियत न रहने का अर्थ है कि इनका वैद्युत प्रतिरोध परिवर्तनीय होता है। अतः इनके प्रतिरोध को गत्यात्मक प्रतिरोध (dynamic resistance) भी कहते हैं। अनओमीय परिपथ के किसी खण्ड के विभवान्तर में अल्पांश परिवर्तन \( \triangle V \) तथा उसके संगत धारा में परिवर्तन \( \triangle i \) का अनुपात गत्यात्मक प्रतिरोध के बराबर होता है; अर्थात् गत्यात्मक प्रतिरोध \( = \frac{\triangle V}{\triangle i} \) उदाहरण- बल्ब को तन्तु तथा डायोड बल्ब ।In simple words: अनओमीय परिपथ वे होते हैं जो ओम के नियम का पालन नहीं करते, अर्थात उनमें वोल्टेज और धारा का अनुपात स्थिर नहीं रहता। ऐसे परिपथों का प्रतिरोध स्थिर नहीं होता, जिसे गत्यात्मक प्रतिरोध कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: अनओमीय परिपथों की परिभाषा, उनका प्रतिरोध परिवर्तनशील क्यों होता है, और गत्यात्मक प्रतिरोध की अवधारणा को याद रखें। डायोड और बल्ब फिलामेंट जैसे सामान्य उदाहरणों का उल्लेख करें।
Question 12. एक तार का प्रतिरोध 10 ओम है। इसे दोगुनी लम्बाई तक खींचा जाता है। इसका नया प्रतिरोध क्या होगा?
Answer: हल-
\( R' = R \left( \frac{l'}{l} \right)^2 = 10 \times \left( \frac{2l}{l} \right)^2 = 40 \Omega \) (: \( l' = 2l \))In simple words: जब एक तार को खींचकर उसकी लंबाई दोगुनी की जाती है, तो उसका आयतन स्थिर रहता है, जिससे प्रतिरोध मूल प्रतिरोध का चार गुना हो जाता है।
🎯 Exam Tip: तार को खींचने पर प्रतिरोध में परिवर्तन के लिए सूत्र \( R' = n^2 R \) का उपयोग करें, जहाँ \( n \) लंबाई का गुना है। यह सूत्र वॉल्यूम के संरक्षण पर आधारित है।
Question 13. कार्बन प्रतिरोधक के सिरों पर 50 वोल्ट विभवान्तर लगाया जाता है। प्रतिरोधक पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वलयों के रंग क्रमशः लाल, पीला एवं नारंगी हैं। प्रतिरोधक में धारा का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-
दिया है, \( V = 50 \) वोल्ट
प्रतिरोध \( R = AB \times 10^C \)
[जहाँ, \( A = 2, B = 4 \) तथा \( C = 3 \)]
प्रतिरोध \( R = 24 \times 10^3 \Omega = 24 \text{ k}\Omega \)
धारा \( I = \frac{V}{R} = \frac{50}{24 \times 10^3} \)
\( = 0.20 \times 10^{-2} \) ऐम्पियरIn simple words: कार्बन प्रतिरोधक के रंग कोड का उपयोग करके उसका प्रतिरोध ज्ञात करें, फिर ओम के नियम \( I = V/R \) का उपयोग करके उसमें प्रवाहित धारा की गणना करें।
🎯 Exam Tip: कार्बन प्रतिरोधक के रंग कोड को सही ढंग से याद रखें (BBROY GReat Britain Very Good Wife)। प्रतिरोध ज्ञात करने के बाद, ओम के नियम को सही तरीके से लागू करें।
Question 14. विशिष्ट प्रतिरोध का मात्रक एवं विमाएँ लिखिए।
Answer: उत्तर-
मात्रक-ओम-मीटर या ओम-सेमी
विमा सूत्र- \( [M L^3 T^{-3} A^{-2}] \)In simple words: विशिष्ट प्रतिरोध किसी पदार्थ का मौलिक गुण है जो विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है; इसकी इकाई ओम-मीटर है और इसकी विमा \( [M L^3 T^{-3} A^{-2}] \) है।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट प्रतिरोध की मानक इकाई (ओम-मीटर) और विमा सूत्र को याद रखें। यह प्रतिरोध के भौतिक आयामों (लंबाई और क्षेत्रफल) पर निर्भरता को दर्शाता है।
Question 15. पूर्ण प्रज्वलन स्थिति में 100 वाट, 200 वोल्ट के विद्युत बल्ब का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-
\( P = 100 \) वाट, \( V = 200 \) वोल्ट
\( R = \frac{V^2}{P} = \frac{(200)^2}{100} = 400 \Omega \)In simple words: किसी बल्ब का प्रतिरोध उसकी रेटेड शक्ति और वोल्टेज का उपयोग करके \( R = V^2/P \) सूत्र से ज्ञात किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: बिजली के उपकरणों के लिए प्रतिरोध की गणना के लिए \( P = V^2/R \) या \( R = V^2/P \) सूत्र को याद रखें।
Question 16. एक प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी का प्रतिरोध \( 0^\circ C \) ताप पर 3.0 ओम तथा \( 1000^\circ C \) पर 3.75 ओम है। किसी अज्ञात ताप पर इसका प्रतिरोध 3.15 ओम है। अज्ञात ताप का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-
दिया है, \( R_0 = 3 \) ओम, \( R_{100} = 3.75 \), \( R_t = 3.15 \), \( t = ? \)
अज्ञात ताप \( t = \frac{R_t - R_0}{R_{100} - R_0} \times 100 \)
\( = \frac{3.15 - 3}{3.75 - 3} \times 100 \)
\( = \frac{0.15}{0.75} \times 100 = 20^\circ C \)In simple words: प्रतिरोध तापमापी का उपयोग करके अज्ञात तापमान की गणना प्रतिरोध में रैखिक परिवर्तन के सिद्धांत का उपयोग करके की जाती है, जहाँ तापमान और प्रतिरोध के बीच संबंध ज्ञात होता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिरोध तापमापी द्वारा अज्ञात तापमान ज्ञात करने के सूत्र \( t = \frac{R_t - R_0}{R_{100} - R_0} \times 100^\circ C \) को याद रखें।
Question 17. 1000 W – 250 V के हीटर के तार का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-
\( P = 1000 \) W, \( V = 250 \) V
\( R = \frac{V^2}{P} = \frac{(250)^2}{1000} = 62.5 \Omega \)In simple words: किसी हीटर के तार का प्रतिरोध उसकी रेटेड शक्ति और वोल्टेज का उपयोग करके \( R = V^2/P \) सूत्र से ज्ञात किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: शक्ति, वोल्टेज और प्रतिरोध के बीच संबंध \( P = V^2/R \) को याद रखें, जिसका उपयोग ऐसे उपकरणों के प्रतिरोध की गणना के लिए किया जाता है।
Question 18. एक चालक में 50 वोल्ट पर 2 मिली-ऐम्पियर तथा 60 वोल्ट पर 3 मिली-ऐम्पियर धारा बहती है। चालक ओमीय है या अन-ओमीय इसे गणना द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Answer: हल-
चालक का प्रतिरोध \( R_1 = \frac{V}{I} = \frac{50}{2 \times 10^{-3}} \)
\( = 25 \times 10^3 \Omega \)
\( R_2 = \frac{V}{I} = \frac{60}{3 \times 10^{-3}} \)
\( = 20 \times 10^3 \Omega \)
चूँकि चालक में प्रतिरोध परिवर्तनशील है। अतः यह अन-ओमीय है।In simple words: यह चालक अन-ओमीय है क्योंकि विभिन्न वोल्टेज पर गणना किया गया प्रतिरोध स्थिर नहीं रहता है, जो ओम के नियम के पालन न करने को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: ओम के नियम के लिए, प्रतिरोध \( (R = V/I) \) स्थिर रहना चाहिए। यदि दिए गए विभिन्न वोल्टेज और धाराओं के लिए प्रतिरोध मान भिन्न होते हैं, तो चालक अन-ओमीय होता है।
Question 19. ऐसे दो पदार्थों के नाम लिखिए जिनकी प्रतिरोधकता ताप बढ़ाने पर घटती है।
Answer: उत्तर- अर्द्धचालक- जर्मेनियम तथा सिलिकॉन ।In simple words: अर्द्धचालक जैसे जर्मेनियम और सिलिकॉन की प्रतिरोधकता तापमान बढ़ने पर कम होती है, क्योंकि उच्च तापमान पर अधिक आवेश वाहक उपलब्ध होते हैं।
🎯 Exam Tip: अर्द्धचालकों का एक महत्वपूर्ण गुण यह है कि उनका प्रतिरोध तापमान बढ़ने पर घटता है। जर्मेनियम और सिलिकॉन इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
Question 20. किसी धातु के प्रतिरोध पर ताष को क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: उत्तर- ताप के बढ़ने से किसी धातु के प्रतिरोध का मान बढ़ता है अर्थात् धातु के पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध अथवा पदार्थ की प्रतिरोधकता बढ़ जाती है। दूसरे शब्दों में, ताप के बढ़ने पर धातु की वैद्युत चालकता कम हो जाती है।In simple words: धातु का तापमान बढ़ने पर उसका प्रतिरोध बढ़ जाता है, क्योंकि उच्च तापमान पर इलेक्ट्रॉनों का कंपन अधिक होता है, जिससे वे अधिक टकराते हैं और धारा प्रवाह में बाधा उत्पन्न होती है।
🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि धातुओं का प्रतिरोध तापमान के साथ बढ़ता है, जबकि अर्द्धचालकों का घटता है। प्रतिरोधकता और चालकता के बीच व्युत्क्रम संबंध को भी ध्यान में रखें।
Question 23. 60 वाट, 30 वोल्ट के बल्ब को 90 वोल्ट सप्लाई पर जलाने के लिए श्रेणीक्रम में जुडे प्रतिरोध का मान ज्ञात कीजिए ।
Answer:हल- परिपथ में धारा \( i = \frac{P}{V} = \frac{60}{30} \) = 2 ऐम्पियर परिपथ का प्रतिरोध \( R_L = \frac{V^2}{P} = \frac{30 \times 30}{60} \) = 15 Ω पुनः परिपथ में धारा \( = \frac{\text{परिपथ में लगे स्त्रोत का वैद्युत वाहक बल}}{\text{परिपथ का कुल प्रतिरोध}} \) \( 2 = \frac{90}{R_L + R} \)
\( \implies \) \( 2 = \frac{90}{15 + R} \) \( 15 + R = 45 \)
\( \implies \) \( R = 30 \) Ω
In simple words: किसी बल्ब के लिए दी गई शक्ति और वोल्टता से उसका प्रतिरोध और उससे प्रवाहित होने वाली धारा निकाली जाती है। फिर, दिए गए सप्लाई वोल्टेज और कुल धारा से कुल प्रतिरोध निकालकर, श्रेणीक्रम में जुड़े अतिरिक्त प्रतिरोध का मान ज्ञात किया जाता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, पहले बल्ब के प्रतिरोध की गणना करें, फिर परिपथ में प्रवाहित कुल धारा का उपयोग करके अज्ञात प्रतिरोध ज्ञात करें।
Question 24.दिये गये परिपथ में A और B के बीच तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक ब्रिज सर्किट (सेतु परिपथ) है जिसमें 3 ओम के चार प्रतिरोधक एक चतुर्भुज आकृति में जुड़े हैं। A और B सिरे ब्रिज के विपरीत कोनों पर हैं, और एक 3 ओम का प्रतिरोध सीधे A और B के बीच जुड़ा है, जिससे कुल 5 प्रतिरोधक बनते हैं।
Answer:हल-दिये गये परिपथ को चित्र 3.17 के रूप में माना जा सकता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक व्हीटस्टोन ब्रिज को दर्शाता है जहाँ प्रत्येक भुजा में 3 ओम का प्रतिरोध है। एक प्रतिरोध A और C के बीच, एक C और D के बीच, एक D और B के बीच, एक B और A के बीच जुड़ा है। कुल पांच प्रतिरोधक हैं, जहाँ केंद्र में भी एक प्रतिरोधक है, लेकिन यह संतुलन की स्थिति को दर्शाता है। माना इसका तुल्य प्रतिरोध R है तब \( \frac{1}{R} = \frac{1}{3} + \frac{1}{3} + \frac{1}{3} \) \( = \frac{3}{3} = 1 \) \( \implies \) \( R = 1 \) Ω
In simple words: दिए गए परिपथ को संतुलित व्हीटस्टोन ब्रिज के रूप में देखा जा सकता है जहाँ बीच का प्रतिरोध अप्रभावी होता है। शेष प्रतिरोधों को समांतर क्रम में मानकर तुल्य प्रतिरोध की गणना की जाती है।
🎯 Exam Tip: व्हीटस्टोन ब्रिज के संतुलन की स्थिति की पहचान करना महत्वपूर्ण है। यदि ब्रिज संतुलित है, तो गैल्वेनोमीटर (या बीच की भुजा) में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है, जिससे उस भुजा का प्रतिरोध गणना में शामिल नहीं किया जाता है।
Question 25. 10 Ω प्रतिरोध के तार को 5 बराबर भागों में काट कर उनको समान्तर क्रम में जोड़ा गया है। इस संयोजन का परिणामी प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
Answer:हल- 10 Ω के प्रतिरोध को 5 बराबर भागों में बाँटने पर प्रत्येक प्रतिरोध का मान \( = \frac{10}{5} \) = 2 Ω माना समान्तर क्रम में जोड़ने पर इनका तुल्य प्रतिरोध R है- तब \( \frac{1}{R} = \frac{1}{2} + \frac{1}{2} + \frac{1}{2} + \frac{1}{2} + \frac{1}{2} = \frac{5}{2} \) \( \implies \) \( R = 0.40 \) Ω
In simple words: जब एक तार को कई बराबर भागों में काटा जाता है, तो प्रत्येक भाग का प्रतिरोध मूल प्रतिरोध के भागों की संख्या से विभाजित होता है। जब इन भागों को समांतर क्रम में जोड़ा जाता है, तो तुल्य प्रतिरोध प्रत्येक भाग के प्रतिरोध को भागों की संख्या से विभाजित करने पर प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिरोध को n बराबर भागों में काटने पर प्रत्येक भाग का प्रतिरोध R/n हो जाता है। यदि इन n भागों को समांतर क्रम में जोड़ा जाए, तो कुल प्रतिरोध \( R_{eq} = \frac{R/n}{n} = \frac{R}{n^2} \) होगा।
Question 26. सेल के आन्तरिक प्रतिरोध से आप क्या समझते हैं?
Answer:उत्तर- जब किसी सेल की प्लेटों को तार द्वारा जोड़ देते हैं तो तार में वैद्युत धारा सेल की धन-प्लेट से ऋण-प्लेट की ओर तथा सेल के भीतर उसके घोल में ऋण-प्लेट से धन-प्लेट की ओर बहती है। इस प्रकार, सेल की दोनों प्लेटों के बीच सेल के भीतर वैद्युत धारा के प्रवाह में घोल द्वारा उत्पन्न अवरोध को सेल का 'आन्तरिक प्रतिरोध' कहते हैं।
In simple words: सेल के अंदर घोल (इलेक्ट्रोलाइट) द्वारा धारा के प्रवाह में उत्पन्न रुकावट को आन्तरिक प्रतिरोध कहते हैं। यह सेल के भीतर ही उत्पन्न होता है।
🎯 Exam Tip: आन्तरिक प्रतिरोध सेल के इलेक्ट्रोलाइट के गुणों और इलेक्ट्रोडों के बीच की दूरी पर निर्भर करता है, और यह सेल की दक्षता को प्रभावित करता है।
Question 27. सेल का आन्तरिक प्रतिरोध किन-किन बातों पर निर्भर करता है?
Answer:उत्तर- सेल का आन्तरिक प्रतिरोध निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है-
(i) सेल के इलेक्ट्रोडों के बीच की दूरी पर- यह दूरी के अनुक्रमानुपाती होता है।
(ii) वैद्युत-अपघटय के घोल में इलेक्ट्रोडों के डूबे हुए भागों के क्षेत्रफल पर- यह क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
(iii) वैद्युत-अपघटय की प्रकृति तथा सान्द्रता पर- विभिन्न वैद्युत-अपघटयों के लिए आन्तरिक प्रतिरोध भिन्न होता है तथा यह वैद्युत अपघटय के घोल की सान्द्रता के भी अनुक्रमानुपाती होता है।
In simple words: सेल का आंतरिक प्रतिरोध इलेक्ट्रोडों के बीच की दूरी, इलेक्ट्रोलाइट में डूबे इलेक्ट्रोडों के क्षेत्रफल और इलेक्ट्रोलाइट की प्रकृति व सांद्रता पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: इन कारकों को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये सेल के प्रदर्शन और उसके आउटपुट वोल्टेज को समझने में मदद करते हैं।
Question 28. सेल के विद्युत वाहक बल एवं टर्मिनल विभवान्तर में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer:उत्तर- एकांक आवेश को पूरे परिपथ में सेल सहित प्रवाहित करने में सेल द्वारा दी गयी ऊर्जा को सेल का 'विद्युत वाहक बल' कहते हैं, जबकि किसी परिपथ के दो बिन्दुओं के बीच एकांक आवेश को प्रवाहित करने में किए गए कार्य को उन बिन्दुओं के बीच 'टर्मिनल विभवान्तर' कहते हैं।
In simple words: विद्युत वाहक बल (EMF) सेल द्वारा पूरे परिपथ में एकांक आवेश को चलाने में दी गई कुल ऊर्जा है, जबकि टर्मिनल विभवान्तर सेल के सिरों के बीच का वोल्टेज होता है जब उससे धारा ली जा रही हो।
🎯 Exam Tip: EMF तब मापा जाता है जब सेल खुले परिपथ में हो (कोई धारा नहीं बह रही हो), जबकि टर्मिनल विभवान्तर तब मापा जाता है जब सेल से धारा ली जा रही हो। आंतरिक प्रतिरोध के कारण टर्मिनल विभवान्तर EMF से कम होता है।
Question 29. 3.2 वोल्ट की एक बैटरी 1.5 ओम प्रतिरोध में 2 ऐम्पियर की धारा भेज रही है। बैटरी का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
Answer:हल- \( i = \frac{E}{R+r} \) से, \( 2 = \frac{3.2}{1.5+r} \)
\( \implies \) \( 2 \times 1.5 + 2r = 3.2 \)
\( \implies \) \( 3.0 + 2r = 3.2 \)
\( \implies \) \( 2r = 3.2 - 3.0 = 0.2 \)
\( \implies \) \( r = \frac{0.2}{2} \) = 0.1 ओम
In simple words: बैटरी द्वारा उत्पन्न धारा, उसके विद्युत वाहक बल और परिपथ के कुल प्रतिरोध (बाह्य प्रतिरोध + आन्तरिक प्रतिरोध) पर निर्भर करती है। दिए गए मानों का उपयोग करके, हम बैटरी के आन्तरिक प्रतिरोध की गणना कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: ओम के नियम के संशोधित रूप \( i = \frac{E}{R+r} \) को याद रखें, जहाँ E विद्युत वाहक बल, R बाह्य प्रतिरोध और r आन्तरिक प्रतिरोध है।
Question 30. किसी वैद्युत परिपथ में 2 ऐम्पियर की धारा 5 मिनट तक प्रवाहित करने पर सेल द्वारा 1200 जूल कार्य किया जाता है। सेल के विद्युत वाहक बल की गणना कीजिए।
Answer:हल- परिपथ में प्रवाहित वैद्युत आवेश \( q = it = 2 \times 5 \times 60 \) = 600 कूलॉम विद्युत वाहक बल \( = \frac{1200}{600} \) = 2 वोल्ट
In simple words: विद्युत वाहक बल प्रति एकांक आवेश पर किए गए कार्य के बराबर होता है। पहले प्रवाहित कुल आवेश की गणना करें, फिर कार्य को आवेश से विभाजित करके विद्युत वाहक बल ज्ञात करें।
🎯 Exam Tip: विद्युत वाहक बल (EMF) की परिभाषा को याद रखें: \( E = \frac{W}{q} \), जहाँ W किया गया कार्य और q प्रवाहित आवेश है। समय को हमेशा सेकंड में बदलें।
Question 31. एक सेल से 0.5 ऐम्पियर धारा लेने पर उसका विभवान्तर 1.8 वोल्ट तथा 1.0 ऐम्पियर धारा लेने पर 1.6 वोल्ट हो जाता है। सेल का आन्तरिक प्रतिरोध तथा विद्युत वाहक बल ज्ञात कीजिए।
Answer:हल- दिया है,
(i) जब \( i = 0.5 \) ऐम्पियर तब \( V = 1.8 \) वोल्ट
(ii) जब \( i = 1.0 \) ऐम्पियर तब \( V = 1.6 \) वोल्ट हम जानते हैं, टर्मिनल विभवान्तर \( V = E - ir \) प्रथम स्थिति में, \( 1.8 = E - (0.5)r \) .....(1) द्वितीय स्थिति में, \( 1.6 = E - (1.0)r \) .....(2) समी० (1) व (2) को हल करने पर, समीकरण (1) में से (2) घटाने पर: \( (1.8 - 1.6) = (E - 0.5r) - (E - 1.0r) \) \( 0.2 = -0.5r + 1.0r \) \( 0.2 = 0.5r \) \( r = \frac{0.2}{0.5} \) = 0.4 Ω r का मान समी० (1) में रखने पर: \( 1.8 = E - (0.5)(0.4) \) \( 1.8 = E - 0.2 \) \( E = 1.8 + 0.2 \) = 2.0 वोल्ट अतः सेल का आन्तरिक प्रतिरोध \( r = 0.4 \) Ω विद्युत वाहक बल \( E = 2.0 \) वोल्ट
In simple words: सेल के टर्मिनल विभवान्तर और आंतरिक प्रतिरोध के संबंध \( V = E - ir \) का उपयोग करके, दो अलग-अलग धारा और विभवान्तर स्थितियों के लिए समीकरणों की एक प्रणाली बनाएं और उन्हें हल करके विद्युत वाहक बल (E) और आंतरिक प्रतिरोध (r) ज्ञात करें।
🎯 Exam Tip: दो अज्ञात राशियों (E और r) को ज्ञात करने के लिए दो अलग-अलग समीकरणों की आवश्यकता होती है। समीकरणों को सावधानीपूर्वक हल करें ताकि गणना में त्रुटि न हो।
Question 32. मिश्रितक्रम में सेलों के संयोजन में अधिकतम धारा की क्या शर्त है?
Answer:उत्तर- बैटरी का कुल आन्तरिक प्रतिरोध = बाह्य परिपथ का प्रतिरोध ।
In simple words: मिश्रित क्रम में सेल संयोजन से अधिकतम धारा प्राप्त करने के लिए, बाहरी परिपथ का प्रतिरोध सेलों के कुल आंतरिक प्रतिरोध के बराबर होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: यह शर्त परिपथ में शक्ति के अधिकतम संचरण के सिद्धांत पर आधारित है। इसे अधिकतम शक्ति स्थानांतरण प्रमेय भी कहते हैं।
Question 33.निम्न चित्र में धारा का मान ज्ञात कीजिए-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक नोड (P) पर मिलने वाली धाराओं को दर्शाता है। नोड में 2A की दो धाराएं प्रवेश करती हैं, और एक 1A की धारा बाहर निकलती है। एक अन्य धारा (i) और एक 1.2A की धारा भी नोड से बाहर निकल रही है। एक R ओम का प्रतिरोध और 1A की धारा नीचे की ओर जा रही है।
Answer:हल- बिन्दु P पर धारा \( i_1 \) = बिन्दु P की ओर आने वाली धाराओं का योग – बिन्दु P से दूर जाने वाली धाराओं का योग \( i_1 = 2 + 2 - 1 = 3 \)A बिन्दु Q पर धारा \( i_2 = i_1 – 1 \) A \( = 3 – 1 = 2 \) A बिन्दु R पर धारा \( i_2 + 1 \) A \( = i + 1.2 \) A \( i = (2 + 1 – 1.2) \) A = 1.8 A
In simple words: किरचॉफ के प्रथम नियम (धारा नियम) का उपयोग करके, किसी जंक्शन पर प्रवेश करने वाली धाराओं का योग बाहर निकलने वाली धाराओं के योग के बराबर होता है। इससे अज्ञात धारा का मान ज्ञात किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: किरचॉफ का पहला नियम (जंक्शन नियम) हमेशा आवेश संरक्षण पर आधारित होता है। यह सुनिश्चित करें कि आप सभी प्रवेश करने वाली और बाहर निकलने वाली धाराओं को सही ढंग से जोड़ते/घटाते हैं।
Question 34. किरचॉफ का पहला नियम तथा दूसरा नियम किस भौतिक राशि के संरक्षण पर आधारित है?
Answer:उत्तर- किरचॉफ का पहला नियम आवेश के संरक्षण पर तथा दूसरा नियम ऊर्जा के संरक्षण पर आधारित है।
In simple words: किरचॉफ का पहला नियम (धारा नियम) आवेश के संरक्षण पर आधारित है, जबकि दूसरा नियम (वोल्टेज नियम) ऊर्जा के संरक्षण पर आधारित है।
🎯 Exam Tip: यह एक मौलिक अवधारणा है। आवेश संरक्षण और ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांतों को समझना किरचॉफ के नियमों के सही अनुप्रयोग के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 35. व्हीटस्टोन सेतु की सर्वाधिक सुग्राही होने की शर्त क्या है?
Answer:उत्तर- व्हीटस्टोन सेतु के चारों प्रतिरोध जब एक ही कोटि (order) के होते हैं तो यह सर्वाधिक सुग्राही होता है।
In simple words: व्हीटस्टोन सेतु सबसे अधिक संवेदनशील तब होता है जब उसकी सभी भुजाओं के प्रतिरोध लगभग समान मान के होते हैं।
🎯 Exam Tip: जब प्रतिरोध एक ही क्रम के होते हैं, तो संतुलन बिंदु के पास गैल्वेनोमीटर में विक्षेप सबसे स्पष्ट होता है, जिससे मापन अधिक सटीक होता है।
Question 36. व्हीटस्टोन सेतु में यदि सेल तथा धारामापी की स्थिति को आपस में बदल दिया जाए तो सन्तुलन की स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ेगा? क्यों?
Answer:उत्तर- कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसका कारण यह है कि सेल तथा धारामापी व्हीटस्टोन सेतु के विकर्णों के सिरों के बीच जुड़े होते हैं। किसी भी एक विकर्ण के सिरों के बीच सेल जोड़ने पर दूसरे विकर्ण के सिरे समविभव पर होने से सेतु सन्तुलित रहता है।
In simple words: यदि व्हीटस्टोन सेतु संतुलित है, तो सेल और गैल्वेनोमीटर के स्थान बदलने पर संतुलन की स्थिति अपरिवर्तित रहती है क्योंकि संतुलन का सिद्धांत विकर्णों पर लागू होता है, न कि विशिष्ट भुजाओं पर।
🎯 Exam Tip: यह व्हीटस्टोन ब्रिज की एक महत्वपूर्ण संपत्ति है जिसे "विनिमय प्रमेय" के रूप में भी जाना जाता है। इसे याद रखने से ब्रिज के विभिन्न संयोजनों को समझने में मदद मिलती है।
Question 37.यदि संलग्न चित्र 3.19 में दिखाया गया व्हीटस्टोन परिपथ सन्तुलित हो, तो अज्ञात प्रतिरोध x का मान बताइए।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक संतुलित व्हीटस्टोन ब्रिज सर्किट है जिसमें चार भुजाओं में प्रतिरोध P, Q, R और S हैं। P = 4 ओम, Q = 8 ओम, R = 2 ओम, और S = x ओम हैं।
Answer:हल- \( \frac{P}{Q} = \frac{R}{S} \)
\( \implies \) \( \frac{4}{8} = \frac{2}{x} \)
\( \implies \) \( \frac{1}{2} = \frac{2}{x} \)
\( \implies \) \( x = 4 \) Ω
In simple words: संतुलित व्हीटस्टोन ब्रिज में, विपरीत भुजाओं के प्रतिरोधों का अनुपात समान होता है, जिससे अज्ञात प्रतिरोध का मान आसानी से ज्ञात किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: व्हीटस्टोन ब्रिज के संतुलन की शर्त \( \frac{P}{Q} = \frac{R}{S} \) को अच्छी तरह याद रखें। यह अज्ञात प्रतिरोधों को मापने के लिए एक मानक विधि है।
Question 38. विभवमापी द्वारा मापे गये सेल का वि० वा० बल यथार्थ क्यों होता है ?
Answer:उत्तर- क्योंकि विभवमापी से पाठयांक तब लिया जाता है जब परिपथ में परिणामी धारा शून्य होती है। अर्थात् सेल खुले परिपथ में होती है।
In simple words: विभवमापी द्वारा मापा गया विद्युत वाहक बल सटीक होता है क्योंकि यह 'शून्य विक्षेप विधि' पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि मापन के दौरान सेल से कोई धारा नहीं ली जाती है, जिससे टर्मिनल विभवान्तर विद्युत वाहक बल के बराबर हो जाता है।
🎯 Exam Tip: विभवमापी की शून्य विक्षेप विधि इसे वोल्टमीटर की तुलना में अधिक सटीक बनाती है, क्योंकि यह सेल के आंतरिक प्रतिरोध के कारण होने वाले वोल्टेज ड्रॉप को समाप्त कर देती है।
Question 39. विभवमापी की सुग्राहिता से क्या तात्पर्य है? इसे कैसे बढ़ाया जा सकता है?
Answer:उत्तर- विभवमापी की सुग्राहिता का अर्थ है कि जौकी को शून्य विक्षेप स्थिति से थोड़ा-सा खिसकाने पर धारामापी में बहुत अधिक विक्षेप उत्पन्न हो जाये । विभवमापी की सुग्राहिता विभव-प्रवणता के व्युत्क्रमानुपाती होती है। परन्तु विभव-प्रवणता \( K = \frac{V}{L} \) (जहाँ V = विभवमापी के तार के सिरों का विभवान्तर), अतः \( K \propto \frac{1}{L} \) अर्थात् विभवमापी के तार की लम्बाई L बढ़ाने से K का मान कम हो जाएगा; अर्थात् सुग्राहिता बढ़ जाएगी । इस प्रकार विभवमापी की सुग्राहिता में वृद्धि तार की लम्बाई में वृद्धि करके की जा सकती है।
In simple words: विभवमापी की सुग्राहिता यह है कि संतुलन बिंदु से छोटे से विचलन पर भी गैल्वेनोमीटर में एक बड़ा विक्षेप हो। इसे विभवमापी के तार की लंबाई बढ़ाकर बढ़ाया जा सकता है, जिससे विभव प्रवणता कम हो जाती है।
🎯 Exam Tip: विभवमापी की सुग्राहिता विभव प्रवणता के व्युत्क्रमानुपाती होती है। तार की लंबाई बढ़ाना या प्राथमिक परिपथ में धारा कम करना (जिससे V कम हो) दोनों ही विभव प्रवणता को कम करके सुग्राहिता बढ़ा सकते हैं।
Question 40. किसी विभवमापी में 1.0182 वोल्ट विवा०बल के सेल के लिए सन्तुलन बिन्दु 339.4 सेमी लम्बाई पर प्राप्त होता है। विभवमापी की विभव प्रवणता ज्ञात कीजिए।
Answer:हल-दिया है, विद्युत वाहक बल \( (E) = 1.0182 \) तथा \( l = 339.4 \) सेमी \( l = 339.4 \times 10^{-2} \) मीटर विभव-प्रवणता \( K = \frac{E}{l} \) \( = \frac{1.0182}{339.4 \times 10^{-2}} \) \( = 0.003 \times 10^2 \) वोल्ट/मीटर \( = 0.3 \) वोल्ट/मीटर
In simple words: विभवमापी में विभव प्रवणता तार की प्रति इकाई लंबाई पर वोल्टेज ड्रॉप को दर्शाती है। इसे ज्ञात करने के लिए, सेल के विद्युत वाहक बल को संतुलन बिंदु की लंबाई से विभाजित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: विभव प्रवणता की इकाई वोल्ट/मीटर होती है। गणना करते समय सभी इकाइयों को SI प्रणाली में बदलना सुनिश्चित करें (जैसे सेमी को मीटर में)।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. धारा-घनत्व j से आप क्या समझते हैं? इसका मात्रक M.K.S.A. पद्धति में लिखिए तथा विमा सूत्र बताइए। यह सदिश राशि है या अदिश?
या
धारा-घनत्व की परिभाषा दीजिए तथा इसका मात्रक भी लिखिए ।
या
धारा घनत्व (j) की परिभाषा लिखिए ।
Answer:उत्तर- धारा-घनत्व (Current Density)- किसी चालक में किसी बिन्दु पर प्रति एकांक क्षेत्रफल से अभिलम्बवत् गुजरने वाली धारा को उस बिन्दु पर 'धारा-घनत्व' कहते हैं। इसे j से प्रदर्शित करते हैं। यदि किसी चालक में प्रवाहित धारा, चालक के अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A पर एकसमान रूप से वितरित हो, तब उस क्षेत्रफल के किसी बिन्दु पर धारा-घनत्व \( j = \frac{i}{A} \) M.K.S.A. पद्धति में इसका मात्रक ऐम्पियर प्रति मीटर \( ^2 \) तथा विमा \( [\text{AL}^{-2}] \) है। धारा-घनत्व, चालक के भीतर किसी बिन्दु का एक लाक्षणिक गुण है (न कि सम्पूर्ण चालक का) तथा यह एक सदिश राशि है। किसी बिन्दु पर धारा-घनत्व की दिशा उस बिन्दु पर धनावेश के चलने की दिशा होती है।
In simple words: धारा-घनत्व (j) किसी चालक में प्रति इकाई क्षेत्रफल से गुजरने वाली विद्युत धारा की मात्रा है। यह एक सदिश राशि है जिसका मात्रक ऐम्पियर प्रति मीटर वर्ग होता है।
🎯 Exam Tip: धारा-घनत्व की परिभाषा, सूत्र, मात्रक और विमा सूत्र को अच्छी तरह याद रखें। यह एक सदिश राशि है, इसकी दिशा धनावेश के प्रवाह की दिशा में होती है।
Question 2. किसी धारावाही चालक में धारा घनत्व J, अनुगमन वेग vd, प्रति एकांक आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या तथा मूल आवेश में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
या
मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग समझाइए । अनुगमन वेग व धारा-घनत्व के बीच सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
या
किसी चालक में प्रवाहित धारा तथा इसमें मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह (अनुगमन) वेग में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
या
मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग के लिए विद्युत धारा के पद में व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।
Answer:उत्तर- मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग- [संकेत- दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 1 के उत्तर में पढ़िए ।] धारा तथा अनुगमन वेग में सम्बन्ध- माना किसी धातु में किसी स्थान से t सेकण्ड में मुक्त इलेक्ट्रॉनों द्वारा ले जाया जाने वाला कुल आवेश q है, तब धातु में वैद्युत धारा \( i = \frac{q}{t} \) ...(1) माना तार के अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल A है तथा उसके प्रति एकांक आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या n व इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग \( v_d \) है, तब एक सेकण्ड में तार के क्षेत्रफल में से गुजरने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या = \( nAv_d \) t सेकण्ड में तार के क्षेत्रफल में से गुजरने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या = \( nAv_d \times t \) तथा t सेकण्ड में तार के क्षेत्रफल में से गुजरने वाले आवेश की मात्रा \( q = nAv_d \times t \times e \) (जहाँ, e = इलेक्ट्रॉन का आवेश है) q का मान समीकरण (1) में रखने पर । \( i = neAv_d \) ...(2) यह वैद्युत धारा तथा अनुगमन वेग में सम्बन्ध है। धारा-घनत्व तथा अनुगमन वेग में सम्बन्ध- हम जानते हैं कि धारा-घनत्व \( j = \frac{i}{A} \) समीकरण (2) से i का मान रखने पर \( j = nev_d \) यह धारा-घनत्व तथा अनुगमन वेग के बीच सम्बन्ध है।
In simple words: अनुगमन वेग वह औसत वेग है जिससे मुक्त इलेक्ट्रॉन किसी चालक में विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में गति करते हैं। विद्युत धारा (I) अनुगमन वेग \( (v_d) \), मुक्त इलेक्ट्रॉन घनत्व (n), आवेश (e), और अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल (A) के गुणनफल \( I = neAv_d \) के बराबर होती है, और धारा घनत्व \( j = nev_d \) होता है।
🎯 Exam Tip: यह संबंध ओम के नियम की सूक्ष्मदर्शीय व्याख्या के लिए आधार है। सभी प्रतीकों (n, e, A, \( v_d \)) के अर्थ और उनकी इकाइयों को याद रखें।
Question 3.एक तार के अनुप्रस्थ-काट का क्षेत्रफल \( 1 \times 10^{-7} \) मीटर तथा तार में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या \( 2 \times 10^{28} \) प्रति मीटर है। तार में 3.2 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही है। ज्ञात कीजिए-
(i) तार में धारा-घनत्व,
(ii) तार में इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग।
Answer:हल - यहाँ तार की अनुप्रस्थ-काट का क्षेत्रफल \( A = 1.0 \times 10^{-7} \) मीटर \( ^2 \), तार में मुक्त इलेक्ट्रॉन घनत्व \( n = 2 \times 10^{28} \) प्रति मीटर \( ^3 \) तथा तार में धारा \( i = 3.2 \) ऐम्पियर
(i) तार में धारा-घनत्व \( j = \frac{i}{A} \) \( = \frac{3.2 \text{ ऐम्पियर}}{1.0 \times 10^{-7} \text{ मीटर}^2} \) \( = 3.2 \times 10^7 \) ऐम्पियर/मीटर \( ^2 \)
(ii) \( j = nev_d \); अतः मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग \( v_d = \frac{j}{ne} \) \( = \frac{3.2 \times 10^7 \text{ ऐम्पियर/मीटर}^2}{2 \times 10^{28} \text{ प्रति मीटर}^3 \times (1.6 \times 10^{-19} \text{ कूलॉम})} \) \( = 10^{-2} \) मी/से
In simple words: धारा-घनत्व की गणना कुल धारा को अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल से विभाजित करके की जाती है। फिर, धारा-घनत्व के सूत्र \( j = nev_d \) का उपयोग करके इलेक्ट्रॉनों के अनुगमन वेग की गणना की जाती है।
🎯 Exam Tip: धारा-घनत्व और अनुगमन वेग के सूत्रों को याद रखना महत्वपूर्ण है। गणना करते समय इकाइयों (जैसे \( \text{मी}^2, \text{मी}^3, \text{कूलॉम} \)) का ध्यान रखें और सही घातांकों का उपयोग करें।
Question 4. L लम्बाई के एक चालक को E विद्युत वाहक बल की सेल से जोड़ा जाता है। यदि इस चालक के स्थान पर समान पदार्थ व समान मोटाई के किसी अन्य चालक जिसकी लम्बाई 3L हो, सेल से जोड़ दिया जाए तब अनुगमन वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Answer:उत्तर -L लम्बाई के चालक के स्थान पर 3L लम्बाई के चालक को जोड़ने पर प्रतिरोध 3 गुना हो जाएगा और इसलिए धारा एक तिहाई \( (\frac{1}{3}) \) रह जाएगी। अतः सूत्र \( v_d = \frac{i}{neA} \) के अनुसार, अनुगमन वेग एक तिहाई \( (\frac{1}{3}) \) रह जाएगा।
In simple words: जब चालक की लंबाई तीन गुना बढ़ा दी जाती है, तो उसका प्रतिरोध भी तीन गुना बढ़ जाता है, जिससे परिपथ में प्रवाहित धारा एक-तिहाई हो जाती है। क्योंकि अनुगमन वेग धारा के समानुपाती होता है, इसलिए अनुगमन वेग भी एक-तिहाई हो जाएगा।
🎯 Exam Tip: प्रतिरोध लंबाई के समानुपाती (R \( \propto \) L) होता है। यदि धारा घटती है, तो अनुगमन वेग भी घटता है, क्योंकि \( v_d \propto I \)।
Question 5. धातुओं में इलेक्ट्रॉनों के अनियमित (मुक्त) वेग और उनके अनुगमन वेग में क्या अन्तर है?
Answer:उत्तर- धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉन बन्द बर्तन में भरी गैस के अणुओं की तरह व्यवहार करते हैं तथा धातु के भीतर स्थित धन आयनों के बीच खाली स्थान में उच्च वेग ( \( 10^5 \) मी/से) से अनियमित गति करते हैं, यह मुक्त इलेक्ट्रॉनों का वेग है। धातु के सिरों के बीच विभवान्तर होने पर मुक्त इलेक्ट्रॉन अपनी अनियमित गति के होते हुए भी एक निश्चित सूक्ष्म वेग (= \( 10^{-4} \) मी/से) से उच्च विभव वाले सिरे की ओर खिसकते हैं, यह अनुगमन वेग है।
In simple words: अनियमित वेग इलेक्ट्रॉनों का बिना किसी बाहरी क्षेत्र के उच्च, यादृच्छिक गति है, जबकि अनुगमन वेग बाहरी विद्युत क्षेत्र की उपस्थिति में इलेक्ट्रॉनों का एक निश्चित दिशा में धीमा, औसत वेग है।
🎯 Exam Tip: अनियमित वेग बहुत अधिक होता है लेकिन औसत शून्य होता है, जबकि अनुगमन वेग बहुत छोटा होता है लेकिन इसकी एक निश्चित दिशा होती है।
Question 6. सिद्ध कीजिए कि \( \hat{j} = \sigma \vec{E} \) है, जहाँ E चालक का वैद्युत क्षेत्र, \( \hat{j} \) धारा घनत्व तथा विशिष्ट चालकता है।
Answer:उत्तर- यदि किसी धातु का विशिष्ट प्रतिरोध \( \rho \) हो तो उसकी विशिष्ट चालकता \( \sigma = \frac{1}{\rho} \) परन्तु विशिष्ट प्रतिरोध की परिभाषा से \( \rho = \frac{E}{j} \) जहाँ, E = चालक के अन्दर किसी बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता तथा j = धारा घनत्व \( \implies \sigma = \frac{1}{\rho} = \frac{1}{E/j} = \frac{j}{E} \) अथवा \( j = \sigma E \) अथवा वेक्टर रूप में \( \vec{j} = \sigma \vec{E} \) अर्थात् धारा घनत्व = विशिष्ट चालकता \( \times \) वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
In simple words: ओम के नियम के सूक्ष्मदर्शी रूप को सिद्ध करने के लिए, विशिष्ट प्रतिरोध \( \rho \) को विद्युत क्षेत्र (E) और धारा घनत्व (j) के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है। चूंकि विशिष्ट चालकता \( \sigma \) विशिष्ट प्रतिरोध का व्युत्क्रम है, इसलिए \( j = \sigma E \) प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: इस व्युत्पत्ति में ओम के नियम और विशिष्ट प्रतिरोध की परिभाषा के बीच संबंध को समझना महत्वपूर्ण है। यह संबंध विद्युत धारा और विद्युत क्षेत्र के बीच सीधे संबंध को स्थापित करता है।
Question 7. ताँबे में मुक्त इलेक्ट्रॉनों का संख्या घनत्व \( 8.5 \times 10^{28} \)/मीटर \( ^3 \) है। 0.2 मीटर लम्बाई तथा 1 मिमी \( ^2 \) परिच्छेद क्षेत्रफल के ताँबे के तार से होकर प्रवाहित धारों का मान ज्ञात कीजिए, जबकि 4 वोल्ट की एक बैटरी जुड़ी है। तार में इलेक्ट्रॉनों की गतिशीलता \( 4.5 \times 10^{-6} \) मी \( ^2 \)/वोल्ट सेकण्ड है।
Answer:हल-दिया है, \( \mu = 4.5 \times 10^{-6} \) मी \( ^2 \)/ वोल्ट सेकण्ड, \( n = 8.5 \times 10^{28} \)/ मीटर \( ^3 \), \( l = 0.2 \) मीटर, \( A = 1 \times 10^{-6} \) मीटर \( ^2 \), \( V = 4 \) वोल्ट \( E = \frac{V}{l} = \frac{4}{0.2} = 20 \) वोल्ट/मीटर \( v_d = \mu E = 4.5 \times 10^{-6} \times 20 = 9 \times 10^{-5} \) मी/से० प्रवाहित धारा \( i = neAv_d \) \( = 8.5 \times 10^{28} \times 1.6 \times 10^{-19} \times 10^{-6} \times 9 \times 10^{-5} \) \( = 1.22 \) ऐम्पियर
In simple words: चालक में प्रवाहित धारा की गणना करने के लिए, पहले विद्युत क्षेत्र (E) को वोल्टेज और लंबाई से ज्ञात किया जाता है। फिर, गतिशीलता \( (\mu) \) का उपयोग करके अनुगमन वेग \( (v_d) \) निकाला जाता है। अंत में, धारा का सूत्र \( i = neAv_d \) का उपयोग करके धारा ज्ञात की जाती है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के बहु-चरणीय प्रश्नों में, प्रत्येक चरण के सूत्र और इकाइयों को सही ढंग से लागू करना महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से गतिशीलता और अनुगमन वेग के संबंधों को याद रखें।
Question 8. एक तार में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या \( 2 \times 10^{28} \) प्रति मी है। तार का अपवाह (अनुगमन) वेग 1.0 सेमी/सेकण्ड है। तार में धारा घनत्व की गणना कीजिए।
Answer:हल - धारा घनत्व \( j = v_d \times n \times e \) \( = (1 \times 10^{-2} \text{ मी/से}) \times 2 \times 10^{28} \text{ प्रति मी}^3 \times (1.6 \times 10^{-19} \text{ कूलॉम}) \) \( = 3.2 \times 10^7 \) ऐम्पियर/मी \( ^2 \)
In simple words: धारा घनत्व की गणना अनुगमन वेग, मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या घनत्व और इलेक्ट्रॉन के आवेश के गुणनफल से की जाती है।
🎯 Exam Tip: ध्यान रखें कि सभी मानों को SI इकाइयों (मीटर, सेकंड, कूलॉम) में परिवर्तित किया जाए ताकि सही उत्तर प्राप्त हो सके।
Question 9. एक चालक में 6.4 ऐम्पियर वैद्युत धारा प्रवाहित होती है। यदि चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या \( 8 \times 10^{24} \) प्रति मीटर हो तो उनका अनुगमन वेग ज्ञात कीजिए।
Answer:हल- \( v_d = \frac{i}{neA} \) यहाँ, A नहीं दिया गया है, लेकिन प्रश्न में \( \text{प्रति मीटर}^3 \) दिया है, न कि \( \text{प्रति मीटर} \), यह संख्या घनत्व \( n \) है। इसलिए, \( i = neAv_d \) में A को निकालने के लिए, हमें धारा घनत्व \( j = nev_d \) का उपयोग करना होगा। यदि प्रश्न में "प्रति मीटर" का अर्थ संख्या घनत्व प्रति इकाई लंबाई (N/L) है, तो अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A की आवश्यकता होगी। यदि प्रश्न में "प्रति मीटर" का अर्थ संख्या घनत्व प्रति इकाई आयतन (N/V) है, तो A की आवश्यकता नहीं है, लेकिन तब प्रश्न में इकाई \( \text{प्रति मीटर}^3 \) होनी चाहिए। मान लेते हैं कि \( n \) संख्या घनत्व है \( 8 \times 10^{24} \text{ प्रति मीटर}^3 \)। हम जानते हैं, \( i = neAv_d \) प्रश्न में कुछ जानकारी अनुपस्थित है (जैसे अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A)। यदि यह संख्या प्रति इकाई आयतन है, तो धारा के मान के लिए क्षेत्रफल की आवश्यकता होगी। यदि 'प्रति मीटर' का अर्थ संख्या प्रति इकाई लंबाई है, तो फिर से क्षेत्रफल की आवश्यकता है। आइए मान लें कि यह एक धारा घनत्व का प्रश्न है, जहाँ \( j = nev_d \), और \( j = i/A \)। यदि A नहीं दिया है, तो धारा घनत्व \( j \) भी नहीं निकाल सकते, और \( v_d \) भी नहीं। यदि 'मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या' प्रति इकाई क्षेत्रफल और प्रति इकाई समय हो, तब \( i = \text{number} \times e \)। यहां "मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या \( 8 \times 10^{24} \) प्रति मीटर" एक भ्रामक इकाई है। आमतौर पर, यह \( \text{प्रति मीटर}^3 \) होता है। यदि हम इसे \( n = 8 \times 10^{24} \text{ प्रति मीटर}^3 \) और तार का क्षेत्रफल A = 1 मान लें (या यदि प्रश्न में \( i \) के बजाय \( j \) दिया गया हो), तब गणना हो सकती है। परन्तु, यदि 'प्रति मीटर' से तात्पर्य संख्या घनत्व है, तो यह \( n_L \) (रेखीय संख्या घनत्व) होगा। तब \( i = n_L e v_d \), जहाँ \( n_L = nA \)। दिया गया हल उपयोग करता है: \( v_d = \frac{i}{ne} \) जो बताता है कि \( A \) को 1 माना गया है (शायद, \( \text{प्रति मीटर}^2 \) का संदर्भ है)। यदि \( n \) को प्रति इकाई आयतन माना जाए और \( A \) को 1 \( \text{m}^2 \) माना जाए, तो \( v_d = \frac{6.4}{8 \times 10^{24} \times 1.6 \times 10^{-19}} \) \( = \frac{6.4}{12.8 \times 10^5} \) \( = 5.0 \times 10^{-6} \) मी/से
In simple words: चालक में प्रवाहित धारा, मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या घनत्व, इलेक्ट्रॉन के आवेश और अनुगमन वेग के गुणनफल से संबंधित होती है। दिए गए मानों का उपयोग करके, हम अनुगमन वेग की गणना कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, सभी इकाइयों को सही ढंग से परिवर्तित करना महत्वपूर्ण है। \( i = neAv_d \) सूत्र का उपयोग करते समय, सुनिश्चित करें कि आपके पास सभी आवश्यक चर (n, e, A, i) हों। यदि A नहीं दिया गया है, तो प्रश्न में स्पष्टीकरण की आवश्यकता हो सकती है या इसे एक विशेष संदर्भ (जैसे प्रति इकाई क्षेत्रफल) में माना जा सकता है।
Question 10. विशिष्ट प्रतिरोध की परिभाषा दीजिए तथा मात्रक बताइए । विशिष्ट प्रतिरोध तथा विशिष्ट वैद्युत-चालकता में क्या सम्बन्ध है? या विशिष्ट प्रतिरोध की परिभाषा लिखिए।
Answer:उत्तर- विशिष्ट प्रतिरोध- "किसी धारावाही चालक के अन्दर किसी बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता E तथा उस बिन्दु पर धारा-घनत्व ) के अनुपात को चालक का विशिष्ट प्रतिरोध कहते हैं ।" \( \implies \) विशिष्ट प्रतिरोध \( \rho = \frac{E}{j} \) ...(1) माना कि किसी चालक की लम्बाई \( l \) है तथा अनुप्रस्थ-काट का क्षेत्रफल A है। माना कि इसके तारों पर विभवान्तर V लगाने पर इसमें स्थायी धारा \( i \) बहती है। तब तार के किसी बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता \( E = \frac{V}{l} \) तथा धारा-घनत्व \( j = \frac{i}{A} \) ये मान समीकरण (1) में रखने पर \( \rho = \frac{V/l}{i/A} = \frac{V}{i} \frac{A}{l} \) परन्तु ओम के नियम से, \( (\frac{V}{i}) \) = चालक का प्रतिरोध = R \( \implies \rho = R (\frac{A}{l}) \) ...(2) अब यदि \( l = 1 \) मीटर, \( A = 1 \) मीटर \( ^2 \) तो \( \rho = (R \text{ ओम}) \times (\frac{1 \text{ मीटर}^2}{1 \text{ मीटर}}) = R \) ओम-मीटर अतः "किसी पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध उस पदार्थ के 1 मीटर लम्बे तथा 1 मीटर \( ^2 \) अनुप्रस्थ-परिच्छेद के क्षेत्रफल वाले तार के प्रतिरोध के बराबर होता है।" मात्रक-ओम-मीटर तथा ओम-सेमी। विशिष्ट प्रतिरोध \( \rho \) तथा विशिष्ट वैद्युत-चालकता \( \sigma \) में सम्बन्ध \( \sigma = \frac{1}{\rho} \)
In simple words: विशिष्ट प्रतिरोध किसी पदार्थ का वह गुण है जो यह बताता है कि वह विद्युत धारा के प्रवाह का कितना विरोध करता है। यह प्रतिरोधकता के व्युत्क्रम को विशिष्ट चालकता कहते हैं। इसका मात्रक ओम-मीटर होता है।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट प्रतिरोध की परिभाषा, सूत्र \( \rho = R\frac{A}{l} \), मात्रक और विशिष्ट चालकता \( (\sigma) \) के साथ इसके संबंध \( (\sigma = \frac{1}{\rho}) \) को याद रखना आवश्यक है।
Question 11. किसी धातु के 20 सेमी लम्बे तार को खींच कर इसकी लम्बाई 25% बढ़ा दी जाती है। नये तार के प्रतिरोध में प्रतिशत वृद्धि की गणना कीजिए।
Answer:हल- \( \frac{R'}{R} = (\frac{l'}{l})^2 \) \( l' = l + 0.25l = 1.25l \) \( \implies \frac{l'}{l} = 1.25 = \frac{125}{100} = \frac{5}{4} \) \( \frac{R'}{R} = (\frac{5}{4})^2 = \frac{25}{16} \) प्रतिशत वृद्धि \( = (\frac{R'}{R} - 1) \times 100\% \) \( = (\frac{25}{16} - 1) \times 100\% \) \( = (\frac{25-16}{16}) \times 100\% \) \( = \frac{9}{16} \times 100\% = 56.25\% \)
In simple words: जब एक तार को खींचा जाता है, तो उसकी लंबाई बढ़ती है और अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल घटता है, जिससे उसका प्रतिरोध बढ़ता है। प्रतिरोध में प्रतिशत वृद्धि की गणना के लिए, नए प्रतिरोध और मूल प्रतिरोध के अनुपात का वर्ग करके, फिर प्रतिशत परिवर्तन सूत्र का उपयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: तार को खींचने पर उसका आयतन स्थिर रहता है। प्रतिरोध के लिए \( R \propto l^2 \) (जब तार को खींचा जाता है और आयतन स्थिर रहता है) का संबंध याद रखें।
Question 12. चित्र 3.20 में किसी चालक में बहने वाली धारा I तथा उसके सिरों पर लगाए गए विभवान्तर V को ग्राफ द्वारा प्रदर्शित किया । (ऐम्पियर) गया है। चालक का प्रतिरोध, कोण \( \theta \) के व्यंजक में कितना होगा?
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक I-V ग्राफ को दर्शाता है, जहाँ y-अक्ष पर धारा (I) और x-अक्ष पर विभवान्तर (V) है। ग्राफ एक सीधी रेखा है जो मूल बिंदु से गुजरती है और x-अक्ष के साथ \( \theta \) कोण बनाती है।
Answer:हल- हम जानते हैं कि, ओम के नियम से, प्रतिरोध \( R = \frac{V}{I} \) चित्र 3.20 से, \( \tan \theta = \frac{I}{V} \) \( \implies \frac{V}{I} = \frac{1}{\tan \theta} = \cot \theta \) \( \implies R = \cot \theta \)
In simple words: ओम के नियम के अनुसार, प्रतिरोध विभवान्तर और धारा का अनुपात होता है। I-V ग्राफ में, यह अनुपात ग्राफ के ढलान के व्युत्क्रम के बराबर होता है, जो \( \cot \theta \) के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: ओम का नियम \( V = IR \) याद रखें। I-V ग्राफ के लिए, यदि I को y-अक्ष पर और V को x-अक्ष पर लिया जाता है, तो ढलान \( \tan \theta = \frac{I}{V} = \frac{1}{R} \) होगा, इसलिए \( R = \cot \theta \)।
Question 13. एक बल्ब पर 100 वाट तथा 220 वोल्ट अंकित है। जब बल्ब जल रहा हो, तब उसका प्रतिरोध एवं उसमें प्रवाहित धारा की गणना कीजिए।
Answer:हल- यदि बल्ब का प्रतिरोध R ओम तथा वह V वोल्ट पर जलता है, तब उसमें क्षय वैद्युत शक्ति (वाट में) \( P = \frac{V^2}{R} \) \( \implies R = \frac{V^2}{P} \) \( = \frac{(220 \text{ वोल्ट})^2}{100 \text{ वाट}} = \frac{48400}{100} \) = 484 ओम ओम के नियम से, बल्ब में प्रवाहित धारा \( i = \frac{V}{R} \) \( = \frac{220 \text{ वोल्ट}}{484 \text{ ओम}} \) = 0.45 ऐम्पियर
In simple words: बल्ब की शक्ति (P) और वोल्टेज (V) की रेटिंग का उपयोग करके, हम \( R = V^2/P \) सूत्र से उसका प्रतिरोध ज्ञात कर सकते हैं। फिर, ओम के नियम \( i = V/R \) का उपयोग करके बल्ब से प्रवाहित धारा की गणना की जाती है।
🎯 Exam Tip: शक्ति के सूत्र \( P = V^2/R \) को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर ऐसे प्रश्नों में उपयोग होता है जहाँ प्रतिरोध और धारा दोनों की गणना करनी होती है।
Question 14. 8 ओम के मोटे तार को खींचकर इसकी लम्बाई दोगुनी कर दी जाती है। तार के नये प्रतिरोध की गणना कीजिए।
Answer:हल- दिया है, तार का प्रतिरोध \( (R) = 8 \) ओम तार की लम्बाई में वृद्धि \( (n) = 2 \) माना तार का नया प्रतिरोध \( = R' \) तब, \( R' = n^2 R \) \( R' = (2)^2 \times 8 \) \( = 4 \times 8 \) = 32 ओम
In simple words: जब एक तार को खींचा जाता है जिससे उसकी लंबाई n गुना बढ़ जाती है, तो उसका नया प्रतिरोध मूल प्रतिरोध का \( n^2 \) गुना हो जाता है।
🎯 Exam Tip: तार को खींचने पर उसका आयतन स्थिर रहता है। इस स्थिति में प्रतिरोध का नया सूत्र \( R' = n^2 R \) बहुत उपयोगी है, जहाँ n लंबाई में वृद्धि का गुणक है।
Question 15. दिये गये तीन प्रतिरोधों में प्रत्येक का प्रतिरोध 4Ω है तथा प्रत्येक को अधिकतम 64वाट तक की विद्युत शक्ति दी जा सकती है। पूरा परिपथ अधिकतम कितनी शक्ति ले सकता है ?
Answer:हल- तार में व्यय वैद्युत-शक्ति \( P = i^2 R \) अधिकतम शक्ति \( P_{\text{max}} = i_{\text{max}}^2 R \) \( \implies i_{\text{max}} = \sqrt{\frac{P_{\text{max}}}{R}} \) \( = \sqrt{\frac{64}{4}} = \sqrt{16} \) = 4 ऐम्पियर अतः परिपथ के किसी भी तार में प्रवाहित अधिकतम धारा 4 ऐम्पियर है। परिपथ में 4Ω, 4Ω के दो प्रतिरोध समान्तरक्रम में हैं, अतः इनका तुल्य प्रतिरोध \( \frac{1}{R_1} = \frac{1}{4} + \frac{1}{4} = \frac{2}{4} = \frac{1}{2} \) \( \implies R_1 = 2 \) Ω अब 2Ω तथा 4Ω के प्रतिरोध श्रेणीक्रम में हैं। अतः इनका तुल्य प्रतिरोध \( R_2 = 2 + 4 = 6 \) Ω पूरे परिपथ का कुल प्रतिरोध \( R_2 = 6 \) Ω अतः पूरे परिपथ में व्यय अधिकतम शक्ति \( P_{\text{max}} = (i_{\text{max}})^2 \times R_2 = (4)^2 \times 6 = 16 \times 6 \) = 96 वाट
In simple words: सबसे पहले, प्रत्येक प्रतिरोध की अधिकतम धारा क्षमता ज्ञात करें। फिर, परिपथ के तुल्य प्रतिरोध की गणना करें। अंत में, अधिकतम शक्ति को कुल प्रतिरोध और अधिकतम अनुमेय धारा के वर्ग के गुणनफल के रूप में निकालें।
🎯 Exam Tip: शक्ति के सूत्र \( P = i^2 R \) का उपयोग करें। ध्यान दें कि समांतर संयोजन में धारा बँट जाती है, जबकि श्रेणी संयोजन में धारा समान रहती है, जिससे अधिकतम अनुमेय धारा का निर्धारण प्रभावित होता है।
Question 16. एक कार्बन प्रतिरोधक की तीन पट्टियों (बैण्ड) के वर्ण कोड़ क्रमशः नीला, काला तथा पीला हैं। यदि इनके सिरों के बीच 30 वोल्ट का विभवान्तर लगाया जाए तब इसमें प्रवाहित धारा क्या है?
Answer:हल-वर्ण कोड की सहायता से, नीला (6), काला (0), पीला (\( 10^4 \)) प्रतिरोध \( R = 60 \times 10^4 \) Ω \( = 600 \text{ k}\Omega \) दिया है, \( V = 30 \) V धारा \( i = \frac{V}{R} \) \( = \frac{30}{60 \times 10^4} = \frac{30}{600000} \) \( = 5 \times 10^{-5} \) ऐम्पियर
In simple words: कार्बन प्रतिरोधक के रंग कोड का उपयोग करके प्रतिरोध का मान ज्ञात करें। फिर, ओम के नियम \( i = V/R \) का उपयोग करके प्रतिरोधक से प्रवाहित धारा की गणना करें।
🎯 Exam Tip: कार्बन प्रतिरोधक के रंग कोड (BB ROY Great Britain Very Good Wife) को याद रखना महत्वपूर्ण है, जहाँ प्रत्येक रंग एक अंक (0-9), गुणक या सहनशीलता का प्रतिनिधित्व करता है।
Question 17. तीन प्रतिरोध तार हैं। प्रत्येक का प्रतिरोध 4 ओम है। इनके सम्भावित संयोजनों को प्रदर्शित कीजिए तथा प्रत्येक संयोजन में तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
Answer:हल- चित्र 3.22 (a) से,
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र तीन 4 ओम प्रतिरोधकों को दर्शाता है। दो 4 ओम प्रतिरोधक समांतर क्रम में जुड़े हैं, और उनका संयोजन तीसरे 4 ओम प्रतिरोधक के साथ श्रेणी क्रम में जुड़ा है। परिपथ में, 4Ω, 4Ω के दो प्रतिरोध समान्तर क्रम में हैं। अतः इनका तुल्य प्रतिरोध \( \frac{1}{R_1} = \frac{1}{4} + \frac{1}{4} = \frac{2}{4} = \frac{1}{2} \) \( \implies R_1 = 2 \) Ω अब 2Ω तथा 4Ω के प्रतिरोध श्रेणीक्रम में हैं। अतः इनका तुल्य प्रतिरोध \( R_2 = 2 + 4 = 6 \) Ω चित्र 3.22 (b) से,
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र तीन 4 ओम प्रतिरोधकों को श्रेणी क्रम में जुड़े हुए दिखाता है। परिपथ में 4Ω, 4Ω तथा 4Ω के तीन प्रतिरोध श्रेणीक्रम में हैं। अतः इनका तुल्य प्रतिरोध \( R = (4 + 4 + 4) = 12 \) Ω चित्र 3.22 (c) से,
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र तीन 4 ओम प्रतिरोधकों को समांतर क्रम में जुड़े हुए दिखाता है। परिपथ में, 4Ω, 4Ω तथा 4Ω के तीन प्रतिरोध समान्तरक्रम में हैं। अतः इनका तुल्य प्रतिरोध \( \frac{1}{R} = \frac{1}{4} + \frac{1}{4} + \frac{1}{4} = \frac{3}{4} \) \( \implies R = \frac{4}{3} = 1.33 \) Ω
In simple words: तीन प्रतिरोधों को विभिन्न तरीकों से जोड़ा जा सकता है: सभी श्रेणी में, सभी समांतर में, या मिश्रित (कुछ समांतर में और फिर श्रेणी में)। प्रत्येक संयोजन के लिए तुल्य प्रतिरोध की गणना श्रेणी और समांतर संयोजन के नियमों का उपयोग करके की जाती है।
🎯 Exam Tip: श्रेणीक्रम में \( R_{eq} = R_1 + R_2 + ... \) और समांतर क्रम में \( \frac{1}{R_{eq}} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + ... \) सूत्रों को याद रखें। मिश्रित संयोजनों में, छोटे खंडों का विश्लेषण करके बड़े खंडों का निर्माण करें।
Question 18. एक R ओम प्रतिरोध के तार को खींचकर तीन गुनी लम्बाई की जाती है। इस खींचे तार को । तीन बराबर लम्बाई के तारों में काट कर उन्हें समान्तर क्रम में जोड़ दिया जाता है। इस संयोजन का कुल प्रतिरोध क्या होगा?
Answer:हल- माना तार की प्रारम्भिक लम्बाई \( l \) है तथा खींचने के पश्चात् \( l' \) है। तार का प्रारम्भिक अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A है तथा खींचने के पश्चात् \( A' \) है। तार का प्रारम्भिक आयतन Al तथा खींचने के पश्चात् \( A'l' \) होगा। परन्तु खींचने पर तार का आयतन नहीं बदलेगा; अतः \( Al = A'l' \) \( \implies \frac{A}{A'} = \frac{l'}{l} \) ...(1) परन्तु, \( \frac{l'}{l} = 3 \) \( \implies \frac{A}{A'} = 3 \) खींचने से पहले तार का प्रतिरोध \( R = \rho \frac{l}{A} \) ...(2) खींचने के बाद तार का प्रतिरोध \( R' = \rho \frac{l'}{A'} \) ...(3) समी० (2) व (3) से, \( \frac{R'}{R} = \frac{\rho l'/A'}{\rho l/A} = \frac{l'}{l} \times \frac{A}{A'} \) \( = \frac{l'}{l} \times \frac{l'}{l} = (\frac{l'}{l})^2 \) \( \implies R' = R (\frac{l'}{l})^2 = R (3)^2 = 9R \) इस तार को 3 बराबर भागों में काटने पर प्रत्येक तार में प्रतिरोध \( = \frac{9R}{3} = 3R \) माना समान्तर क्रम में जोड़ने पर इनका तुल्य प्रतिरोध \( R'' \) है- तब \( \frac{1}{R''} = \frac{1}{3R} + \frac{1}{3R} + \frac{1}{3R} \) \( = \frac{1+1+1}{3R} = \frac{3}{3R} = \frac{1}{R} \) \( \implies R'' = R \)
In simple words: जब एक तार को खींचा जाता है तो उसका प्रतिरोध उसकी लंबाई के वर्ग के अनुपात में बढ़ता है। फिर, इस लंबे तार को बराबर भागों में काटकर समांतर क्रम में जोड़ने पर, कुल प्रतिरोध मूल प्रतिरोध के बराबर ही रहता है।
🎯 Exam Tip: तार को खींचने पर आयतन संरक्षण के नियम का उपयोग करें, जिससे प्रतिरोध \( R \propto l^2 \) हो जाता है। समांतर क्रम में जुड़े n समान प्रतिरोधों का तुल्य प्रतिरोध \( R_{eq} = \frac{R_{\text{single}}}{n} \) होता है।
Question 19. सेल के विद्युत वाहक बल से क्या तात्पर्य है ? किसी वोल्टमीटर से सेल का वि० वा० बल सही-सही क्यों नहीं नापा जा सकता है ?
या
किसी सेल के विद्युत वाहक बल से क्या तात्पर्य है?
Answer:उत्तर- सेल का विद्युत वाहक बल - एकांक आवेश को पूरे परिपथ (सेल सहित) में प्रवाहित करने में सेल द्वारा दी गयी ऊर्जा को सेल का 'विद्युत वाहक बल' (electromotive force) कहते हैं। यदि किसी परिपथ में q आवेश प्रवाहित करने पर सेल को W कार्य करना पड़े (ऊर्जा देनी पड़े) तो सेल का वि० वा० बल \( E = \frac{W}{q} \) यदि W जूल में तथा q कूलॉम में हों तो E का मान वोल्ट में प्राप्त होता है। यदि किसी परिपथ में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित करने पर सेल द्वारा दी गयी ऊर्जा 1 जूल हो, तो सेल का वि० वा० बल 1 वोल्ट होता है। वि० वा० बल प्रत्येक सेले का एक लाक्षणिक गुण होता है। सेल के विद्युत वाहक बल का सही मापन करने के लिए, इसको मापने के लिए प्रयुक्त यन्त्र का प्रतिरोध अनन्त होना चाहिए। परन्तु वोल्टमीटर का प्रतिरोध अनन्त नहीं होता है। इसलिए इससे विद्युत वाहक बल का सही-सही मापन नहीं किया जा सकता है।
In simple words: विद्युत वाहक बल (EMF) एक सेल द्वारा एकांक आवेश को पूरे परिपथ में घुमाने के लिए किया गया कुल कार्य है। वोल्टमीटर से EMF को सटीक रूप से नहीं मापा जा सकता क्योंकि इसका आंतरिक प्रतिरोध सीमित होता है और यह सेल से थोड़ी धारा खींचता है, जिससे मापा गया वोल्टेज टर्मिनल वोल्टेज होता है, न कि वास्तविक EMF।
🎯 Exam Tip: EMF की परिभाषा और यह तथ्य कि वोल्टमीटर आदर्श रूप से अनंत प्रतिरोध वाला नहीं होता, को याद रखें। विभवमापी EMF को अधिक सटीक रूप से मापता है क्योंकि यह शून्य विक्षेप विधि का उपयोग करता है।
Question 20. किसी सेल के टर्मिनल विभवान्तर, वि० वा० बल तथा आन्तरिक प्रतिरोध में सम्बन्ध स्थापित कीजिए तथा दिखाइए कि टर्मिनल विभवान्तर, सेल से ली गयी धारा पर निर्भर करता है।
या
किसी सेल के विद्युत वाहक बल तथा इसके सिरों के बीच विभवान्तर (टर्मिनल विभवान्तर) में सम्बन्ध का सूत्र स्थापित कीजिए।
Answer:उत्तर- माना E विद्युत वाहक बल तथा आन्तरिक प्रतिरोध वाली एक, सेल को चित्र 3.23 की भाँति एक कुंजी. K द्वारा किसी बाह्य परिपथ में जोड़ दिया गया है, जिसका प्रतिरोध R है। कुंजी को बन्द करने पर परिपथ में एक नियत धारा \( i \) प्रवाहित होने लगती है जिसका मान परिपथ के श्रेणीक्रम में जुड़े अमीटर की सहायता से पढ़ा जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक सरल विद्युत परिपथ है जिसमें एक सेल (E) जिसका आंतरिक प्रतिरोध (r) है, एक कुंजी (K), एक अमीटर (A), और एक बाहरी प्रतिरोधक (R) श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। एक वोल्टमीटर (V) बाहरी प्रतिरोधक R के समानांतर जुड़ा है। माना धारा \( i \) परिपथ में t समय के लिए प्रवाहित की जाती है। अतः परिपथ में प्रवाहित आवेश \( q = \text{धारा} \times \text{समय} = i \times t \) है, सेल सहित पूरे परिपथ में इस आवेश को प्रवाहित कराने में सेल द्वारा किया गया कार्य (अर्थात् सेल द्वारा दी गयी ऊर्जा) W हो, तो यह ऊर्जा सेल सहित पूरे परिपथ में निम्नलिखित दो भागों में प्रयुक्त होती है- ऊर्जा का एक भाग \( W_{\text{बाह्य}} \); प्रतिरोध R में आवेश q को प्रवाहित कराने में तथा शेष दूसरा भाग \( W_{\text{आन्तरिक}} \), सेल के आन्तरिक प्रतिरोध \( r \) (अर्थात् वैद्युत-अपघटय) में आवेश q को प्रवाहित कराने में व्यय होता है। \( W = W_{\text{बाह्य}} + W_{\text{आन्तरिक}} \) दोनों पक्षों में q का भाग देने पर \( \frac{W}{q} = \frac{W_{\text{बाह्य}}}{q} + \frac{W_{\text{आन्तरिक}}}{q} \) ...(1) परन्तु सेल के विद्युत वाहक बल की परिभाषा के अनुसार, \( \frac{W}{q} = \) सेल का विद्युत वाहक बल = E तथा टर्मिनल विभवान्तर की परिभाषा के अनुसार, \( \frac{W_{\text{बाह्य}}}{q} = \) सेल का टर्मिनल विभवान्तर = V और \( \frac{W_{\text{आन्तरिक}}}{q} = \) आन्तरिक विभवान्तर पतन = \( ir \) \( \implies E = V + ir \) अतः \( V = E - ir \) यह सम्बन्ध दर्शाता है कि टर्मिनल विभवान्तर (V) विद्युत वाहक बल (E) से आन्तरिक प्रतिरोध पर होने वाले वोल्टेज ड्रॉप (ir) के कारण कम होता है। जैसे-जैसे धारा \( i \) बढ़ती है, \( ir \) का मान बढ़ता है, जिससे टर्मिनल विभवान्तर \( V \) का मान घटता है। इस प्रकार, टर्मिनल विभवान्तर सेल से ली गई धारा पर निर्भर करता है।
In simple words: सेल का टर्मिनल विभवान्तर (V) उसके विद्युत वाहक बल (E) और आंतरिक प्रतिरोध (r) के कारण होने वाले वोल्टेज ड्रॉप \( (ir) \) के अंतर के बराबर होता है: \( V = E - ir \)। यह सूत्र दर्शाता है कि जैसे-जैसे सेल से ली जाने वाली धारा \( (i) \) बढ़ती है, आंतरिक प्रतिरोध पर वोल्टेज ड्रॉप \( (ir) \) बढ़ता है, और इसलिए टर्मिनल विभवान्तर घटता है।
🎯 Exam Tip: \( V = E - ir \) सूत्र को अच्छी तरह समझ लें। यह ओम के नियम का एक विस्तारित रूप है जो सेल के आंतरिक प्रतिरोध के प्रभाव को बताता है। याद रखें कि जब सेल से धारा नहीं ली जाती है \( (i=0) \), तो \( V=E \)।
Question 21. 60 ओम के बाह्य प्रतिरोध को बैटरी के टर्मिनलों से जोड़ने पर 0.3 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित होती है तथा प्रतिरोध घटाकर 30 ओम कर देने पर धारा का मान 0.5 ऐम्पियर हो जाता है। बैटरी के वि० वा० बल और आन्तरिक प्रतिरोध की गणना कीजिए।
Answer: हल- माना बैटरी का विद्युत वाहक बल E तथा आन्तरिक प्रतिरोध है। इससे जुड़े बाह्य प्रतिरोध R में वैद्युत धारा \( i = \frac { E }{ R+r } \)
\( \implies \) E = i (R + r)
प्रथमं स्थिति में, E = 0.3 (60 + r) .....(1)
द्वितीय स्थिति में, E = 0.5 (30 + r) ........(2)
समी० (1) व (2) से,
0.3 (60 + r) = 0.5 (30 + r)
18 + 0.3r = 15 + 0.5r
0.2 r = 3
r = 15 Ω
विद्युत वाहक बल E = 0.3 (60 + 15) = 0.3 x 75 = 22.5 वोल्ट
In simple words: We calculated the internal resistance 'r' and electromotive force 'E' of the battery by setting up two equations based on the given current and external resistance values. Solving these equations simultaneously gave us r = 15 Ω and E = 22.5 V.
🎯 Exam Tip: Remember to set up a system of equations when dealing with varying external resistances and currents to find the internal resistance and EMF of a cell.
Question 22. खुले परिपथ में एक सेल की प्लेटों के बीच विभवान्तर 1.5 वोल्ट है। इस सेल को 10 ओम के प्रतिरोध से जोड़ने पर इसकी प्लेटों के बीच विभवान्तर 1.2 वोल्ट हो जाता है। वैद्युत परिपथ बनाकर सेल का आन्तरिक प्रतिरोध एवं 10 ओम के प्रतिरोध में प्रवाहित होने वाली, धारा का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-
सेल का वि० वा० बल E = 1.5 वोल्ट
सेल का विभवान्तर V = 1.2 वोल्ट
बाह्य प्रतिरोध R = 10 ओम
सेल का आन्तरिक प्रतिरोध \( r = \frac { (E-V)R }{ V } \)
\( = \frac { (1.5-1.2) \times 10 }{ 1.2 } = \frac { 0.3 \times 10 }{ 1.2 } = \frac { 30 }{ 12 } \)
\( = \) 2.5 ओम
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक सेल, उसके आन्तरिक प्रतिरोध 'r', और एक बाह्य प्रतिरोध (10 ओम) के साथ जुड़े एक वोल्टमीटर को दर्शाता है। यह व्यवस्था सेल के टर्मिनल विभवान्तर और बाह्य प्रतिरोध में प्रवाहित धारा को समझने में मदद करती है।
\( \therefore \) 10 ओम के प्रतिरोध में प्रवाहित धारा, \( i = \frac { V }{ R } = \frac { 1.5 }{ 10 } = 0.15 \) ऐम्पियर
In simple words: Given the cell's EMF (1.5V) and terminal voltage (1.2V) when connected to a 10 Ω resistor, we calculated its internal resistance as 2.5 Ω. The current flowing through the 10 Ω resistor was then found using Ohm's law, resulting in 0.15 A.
🎯 Exam Tip: For problems involving cell characteristics, clearly distinguish between EMF (open circuit voltage) and terminal voltage (voltage across external resistance) and use the correct formula involving internal resistance.
Question 23. किसी बैटरी के सिरों पर उच्च प्रतिरोध के वोल्टमीटर को जोड़ने पर पाठयांक 15 वोल्ट मिलता है। बैटरी के सिरों को एमीटर से जोड़ने पर एमीटर 1.5 ऐम्पियर और वोल्टमीटर 9 वोल्ट पढ़ता है। बैटरी के आन्तरिक प्रतिरोध तथा एमीटर एवं संयोजक तारों के प्रतिरोध की गणना कीजिए।
Answer: हल- E = 15 वोल्ट, टर्मिनल विभवान्तर V = 9 वोल्ट, धारा i = 1.5 ऐम्पियर
\( \therefore \) बैटरी का आन्तरिक प्रतिरोध \( r = \frac { E-V }{ i } = \frac { 15-9 }{ 1.5 } = \frac { 6 }{ 1.5 } = 4 \) ओम
यदि एमीटर तथा संयोजक तारों का प्रतिरोध R हो, तो
V = iR से,
\( R = \frac { V }{ i } = \frac { 9 }{ 1.5 } = 6 \) ओम
In simple words: When a high-resistance voltmeter reads 15V (EMF), and then an ammeter reads 1.5A with a voltmeter reading 9V (terminal voltage), we can calculate the battery's internal resistance using the EMF, terminal voltage, and current. The resistance of the ammeter and connecting wires is then found using Ohm's law with the terminal voltage and current.
🎯 Exam Tip: Understand that the voltmeter reading on an open circuit gives the EMF (E), while the reading on a closed circuit gives the terminal voltage (V). Use these values with current (i) to find internal resistance (r) and external resistance (R).
Question 24. किसी सेल से 0.6 ऐम्पियर धारा लेने पर उसकी टर्मिनल वोल्टता 1.6 वोल्ट हो जाती है तथा 0.8 ऐम्पियर धारा लेने पर टर्मिनल वोल्टता 1.3 वोल्ट हो जाती है। सेल का वैद्युत वाहक बल तथा आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-
दिया है, I₁ = 0.6 ऐम्पियर, V₁ = 1.6 वोल्ट
I₂ = 0.8 ऐम्पियर, V₂ = 1.3 वोल्ट
सेल के सिरों पर विभवान्तर V = E - Ir
पहली स्थिति में, 1.6 = E - 0.6 x r .......(1)
दूसरी स्थिति में, 1.3 = E - 0.8 x r ........ (2)
समीकरण (1) व (2) को हल करने पर,
(1) - (2)
(1.6 - 1.3) = (E - 0.6r) - (E - 0.8r)
0.3 = 0.2r
\( r = \frac { 0.3 }{ 0.2 } = 1.5 \) ओम
r का मान समीकरण (1) में रखने पर:
1.6 = E - 0.6 x 1.5
1.6 = E - 0.9
E = 1.6 + 0.9 = 2.5 वोल्ट
सेल का वैद्युत वाहक बल E = 2.5 वोल्ट तथा सेल का आन्तरिक प्रतिरोध r = 1.5 ओम
In simple words: We used two different load conditions (currents and terminal voltages) to set up two simultaneous equations based on the cell's terminal voltage formula (V = E - Ir). Solving these equations allowed us to determine both the cell's internal resistance (r) and its electromotive force (E).
🎯 Exam Tip: When given multiple current-voltage pairs for a cell, always form a system of simultaneous equations (V = E - Ir) to accurately solve for both EMF and internal resistance.
Question 25. आपको एक 6 वोल्ट विद्युत वाहक बल तथा 1 ओम आन्तरिक प्रतिरोध की सेल के साथ दो बाह्य प्रतिरोध R₁ = 2 ओम व R₂ = 3 ओम दिए जाते हैं। परिपथ में धारा क्या होगी, जब
(i) R₁ व R₂ श्रेणीक्रम में जोड़े जाएँ?
(ii) R₁ व R₂ समान्तर क्रम में जोड़े जाएँ।
Answer: हल-
दिया है,
वि० वा० बल E = 6 वोल्ट
आन्तरिक प्रतिरोध r = 1 Ω
R₁ = 2 Ω, R₂ = 3 Ω
(i) श्रेणीक्रम में
तुल्य प्रतिरोध \( R_{eq} = R_1 + R_2 = 2+3 = 5 \) ओम
अब धारा \( I = \frac { E }{ R_{eq}+r } = \frac { 6 }{ 5+1 } = \frac { 6 }{ 6 } = 1 \) ऐम्पियर
(ii) समान्तर क्रम में
तुल्य प्रतिरोध \( R_{eq} = \frac { R_1 R_2 }{ R_1+R_2 } = \frac { 2 \times 3 }{ 2+3 } = \frac { 6 }{ 5 } = 1.2 \) ओम
अब धारा \( I = \frac { E }{ R_{eq}+r } = \frac { 6 }{ 1.2+1 } = \frac { 6 }{ 2.2 } = \frac { 60 }{ 22 } = \frac { 30 }{ 11 } \approx 2.73 \) ऐम्पियर
In simple words: For a given cell and two external resistors, we calculated the total current in the circuit for two scenarios: when the resistors are connected in series and when they are connected in parallel. This involved first finding the equivalent resistance for each arrangement, then adding the cell's internal resistance, and finally applying Ohm's law to find the current.
🎯 Exam Tip: Remember the formulas for equivalent resistance in series (\(R_{eq} = R_1 + R_2\)) and parallel (\(R_{eq} = \frac{R_1R_2}{R_1+R_2}\)). Don't forget to include the internal resistance of the cell when calculating the total circuit resistance for current calculation.
Question 26. एक 3 वोल्ट विद्युत वाहक बल की सेल 4 ओम प्रतिरोध वाले विभवमापी तार AC के मध्य जुड़ी है। 2 ओम प्रतिरोध के सिरों के बीच विभवान्तर ज्ञात कीजिए, यदि सम्पर्क बिन्दु B विभवमापी तार के ठीक मध्य में हो।
Answer: हल- E = iR - ir [जहाँ r = 0]
E = iR [जहाँ R = 4 Ω]
\( i = \frac { 3 }{ 4 } \) ऐम्पियर
2 Ω प्रतिरोध के सिरों के बीच विभवान्तर \( V = iR = \frac { 3 }{ 4 } \times 2 = 1.5 \) वोल्ट
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक साधारण परिपथ को दर्शाता है जहाँ 3 वोल्ट का सेल 2 ओम और 4 ओम के दो प्रतिरोधकों के साथ जुड़ा है। संपर्क बिंदु B को विभवमापी तार के मध्य में दिखाया गया है, जो परिपथ के विभिन्न भागों में वोल्टेज वितरण को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: We identified the total voltage and resistance in the circuit. Using Ohm's law, we found the total current flowing through the circuit. Then, we calculated the voltage drop across the 2-ohm resistor using this current.
🎯 Exam Tip: When a cell with negligible internal resistance is connected to a series circuit, calculate the total current first using the cell's EMF and total external resistance. Then, use this current to find the voltage drop across any specific resistor.
Question 27. निम्नचित्र में प्रदर्शित परिपथ में प्रतिरोध R है। A व B के बीच तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 3.26 एक जटिल प्रतिरोध नेटवर्क दिखाता है, जिसमें R प्रतिरोध के कई घटक A, B, C, D, E, F बिंदुओं के बीच जुड़े हुए हैं। यह एक सिमेट्रिकल ब्रिज संरचना को दर्शाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 3.27, चित्र 3.26 में दिखाए गए नेटवर्क को एक संतुलित व्हीटस्टोन सेतु के रूप में पुनर्व्यवस्थित करके प्रस्तुत करता है। इसमें प्रत्येक भुजा में R ओम का प्रतिरोध है, और यह संरचना A और B बिंदुओं के बीच तुल्य प्रतिरोध की गणना के लिए सरलीकृत रूप दिखाती है।
प्रश्न में दिए गए चित्र 3.26 में दिए गए प्रतिरोधों को चित्र 3.27 की भाँति व्यवस्थित कर सकते हैं। इस प्रकार यह परिपथ एक सन्तुलित व्हीटस्टोन सेतु के तुल्य है। यदि A व B के बीच सेल जोड़ दी जाए तो भुजा CD में कोई धारा नहीं बहेगी। अतः C व D के बीच जुड़ा प्रतिरोध प्रभावहीन है।
ADB में जुड़े प्रतिरोधों का परिणामी प्रतिरोध
R₁ = R + R = 2R Ω
तथा ACB में जुड़े प्रतिरोधों का परिणामी प्रतिरोध
R₂ = R + R = 2R Ω
भुजा ADB तथा ACB में जुड़े प्रतिरोध R₁ व R₂ परस्पर समान्तर क्रम में हैं।
अतः A व B के बीच तुल्य प्रतिरोध \( R_{AB} = \frac { 2R \times 2R }{ 2R+2R } = \frac { 4R^2 }{ 4R } = R\Omega \)
In simple words: The complex circuit can be simplified into a balanced Wheatstone bridge. Since the bridge is balanced, no current flows through the central arm (CD), making that resistor ineffective. The equivalent resistance between points A and B is then calculated by considering the remaining resistors in series and parallel.
🎯 Exam Tip: Always look for symmetry or familiar configurations like a Wheatstone bridge when simplifying complex resistor networks. A balanced Wheatstone bridge simplifies calculations significantly by eliminating current flow through its central arm.
Question 28. चित्र में दर्शाए गए 75 Ω के प्रतिरोध में प्रवाहित धारा का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक विद्युत परिपथ को दर्शाता है जिसमें एक 190V का स्रोत (E) और विभिन्न प्रतिरोधक (100Ω, 50Ω, 75Ω, 50Ω) जुड़े हुए हैं। 50Ω, 75Ω और 50Ω के प्रतिरोधक एक समानांतर संयोजन में हैं, जो फिर 100Ω प्रतिरोधक के साथ श्रेणी में जुड़ा है।
50 Ω, 50 Ω व 75 Ω समान्तर क्रम में लगे हैं; अतः इनका तुल्य प्रतिरोध R' के लिए:
\( \frac { 1 }{ R' } = \frac { 1 }{ 50 } + \frac { 1 }{ 50 } + \frac { 1 }{ 75 } = \frac { 3+3+2 }{ 150 } = \frac { 8 }{ 150 } \)
\( R' = \frac { 150 }{ 8 } = 18.75 \) Ω
18.75 Ω तथा 100 Ω श्रेणी क्रम में हैं; अतः इनका तुल्य प्रतिरोध \( R = 100+18.75 = 118.75 \) Ω
माना कि 100 Ω, 50 Ω, 50 Ω तथा 75 Ω में धाराएँ क्रमशः i₁, i₂, i₃ तथा i₄ हैं। सेल E द्वारा पूरे परिपथ में भेजी गई धारा i₁ है।
\( i_1 = \frac { E }{ R } = \frac { 190 }{ 118.75 } = 1.6 \) ऐम्पियर
विभवान्तर \( V = i_1 \times R' = 1.6 \times 18.75 = 30 \) वोल्ट
75 Ω में प्रवाहित धारा \( i_4 = \frac { V }{ R_{75} } = \frac { 30 }{ 75 } = 0.4 \) ऐम्पियर
In simple words: First, we calculated the equivalent resistance of the three parallel resistors (50 Ω, 50 Ω, 75 Ω). Then, we added this equivalent resistance to the 100 Ω resistor (in series) to find the total resistance of the circuit. Using the total voltage (190 V) and total resistance, we found the total current. Finally, we calculated the voltage across the parallel combination and used it to find the current through the 75 Ω resistor.
🎯 Exam Tip: When analyzing complex circuits, simplify parallel and series combinations step-by-step. Remember that voltage is the same across parallel components, and current is the same through series components.
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अनुगमन वेग से आप क्या समझते हैं? इलेक्ट्रॉन अनुगमन वेग के सिद्धान्त द्वारा ओम के नियम का निगमन कीजिए।
या
किसी चालक के विभवान्तर तथा मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह (अनुगमन) वेग के बीच का सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
या
किसी चालक के बीच विभवान्तर तथा मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अनुगमन वेग के बीच सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
या
मुक्त इलेक्ट्रॉनों के 'अपवाह वेग से आप क्या समझते हैं? मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग के आधार पर ओम के नियम की व्याख्या कीजिए।
या
अनुगमन वेग की परिभाषा दीजिए।
या
मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अनुगमन वेग से आप क्या समझते हैं?
या
किसी धातु में मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग से क्या तात्पर्य है? मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग के आधार पर ओम का नियम व्युत्पन्न कीजिए।
Answer: उत्तर-
**अनुगमन वेग (अपवाह वेग)** - किसी धातु के तार के सिरों को बैटरी से जोड़ देने पर तार के सिरों के बीच एक विभवान्तर स्थापित हो जाता है। इस विभवान्तर अथवा वैद्युत-क्षेत्र के कारण इलेक्ट्रॉन एक वैद्युत बल का अनुभव करते हैं जो इलेक्ट्रॉनों को त्वरण प्रदान करता है। परन्तु इस त्वरण से इलेक्ट्रॉनों की चाल लगातार बढ़ती नहीं जाती, बल्कि धातु के धन आयनों से टकराकर ये इलेक्ट्रॉन बैटरी से प्राप्त ऊर्जा को खोते रहते हैं। स्पष्ट है कि बैटरी का विभवान्तर इलेक्ट्रॉनों को त्वरित गति प्रदान नहीं कर पाता बल्कि तार की लम्बाई के अनुदिश एक लघु नियत वेग ही दे पाता है जो इलेक्ट्रॉनों की अनियमित गति पर आरोपित हो जाता है। इलेक्ट्रॉनों के इस लघु नियत वेग को ही 'अनुगमन वेग' (drift velocity) कहते हैं। इसे \(v_d\) से प्रदर्शित करते हैं।
**ओम के नियम का निगमन-** माना एक धातु के तार की लम्बाई \(l\) तथा अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल \(A\) है। जब इसके सिरों के बीच विभवान्तर \(V\) लगाया जाता है, तो इसमें वैद्युत धारा \(I\) प्रवाहित होने लगती है। यदि तार के प्रति एकांक आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या (मुक्त इलेक्ट्रॉन-घनत्व) \(n\) हो तथा इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग \(v_d\) हो, तब
\( I = neAv_d \) ...(1)
जहाँ, \(e\) इलेक्ट्रॉन का आवेश है।
तार के प्रत्येक बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता \( E = \frac { V }{ l } \)
इस क्षेत्र द्वारा प्रत्येक मुक्त इलेक्ट्रॉन पर आरोपित बल \( F = eE = \frac { eV }{ l } \)
यदि इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान \(m\) हो, तो इस बल के कारण इलेक्ट्रॉन में उत्पन्न त्वरण \( a = \frac { F }{ m } = \frac { eV }{ ml } \) ...(2)
तार के भीतर मुक्त इलेक्ट्रॉन धातु के धन आयनों से बारम्बार टकराते रहते हैं। किसी धन आयन से टकराने के पश्चात् इलेक्ट्रॉन का वेग वैद्युत-क्षेत्र \(E\) की विपरीत दिशा में बढ़ने लगता है। यदि किसी इलेक्ट्रॉन की, धन आयनों से हुई दो क्रमागत टक्करों के बीच का समयान्तराल \(\tau\) है, तो इलेक्ट्रॉन के वेग में \(a\tau\) वृद्धि होगी। यदि किसी क्षण वैद्युत-क्षेत्र की अनुपस्थिति में किसी इलेक्ट्रॉन का ऊष्मीय वेग \(u_1\) है, तब वैद्युत-क्षेत्र में की उपस्थिति में उसका वेग बढ़कर \(u_1 + a\tau_1\) हो जाएगा; जहाँ \(\tau_1\) उस इलेक्ट्रॉन का दो क्रमागत टक्करों के बीच का समयान्तराल है।
इसी प्रकार, अन्य इलेक्ट्रॉनों के वेग \((u_2 + a\tau_2)\), \((u_3 + a\tau_3)\) होंगे। सभी \(n\) इलेक्ट्रॉनों का औसत वेग ही मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग \(v_d\) है। इस प्रकार
\( v_d = \frac { (u_1 + a\tau_1) + (u_2 + a\tau_2) + ... + (u_n + a\tau_n) }{ n } \)
\( v_d = \frac { u_1 + u_2 + ... + u_n }{ n } + a \frac { (\tau_1 + \tau_2 + ... + \tau_n) }{ n } \)
परन्तु \( \frac { u_1 + u_2 + ... + u_n }{ n } = \) मुक्त इलेक्ट्रॉनों का औसत ऊष्मीय वेग (जो शून्य होता है)
परन्तु यह शून्य होता है तथा \( \frac { (\tau_1 + \tau_2 + ... + \tau_n) }{ n } = \tau = \) इलेक्ट्रॉनों का दो क्रमागत टक्करों के बीच का 'औसत' समयान्तराल है जिसे श्रांतिकाल (relaxation time) कहते हैं।
\( \therefore v_d = 0 + a\tau \)
\( \implies v_d = a\tau \) ...(3)
समीकरण (2) से \(a\) का मान समीकरण (3) में रखने पर,
\( v_d = \frac { eV }{ ml } \tau \)
यह तार में मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अनुगमन वेग \(v_d\) तथा तार के सिरों के बीच विभवान्तर \(V\) में सम्बन्ध है।
\(v_d\) का यह मान समीकरण (1) में रखने पर,
\( I = neA \left( \frac { eV\tau }{ ml } \right) \)
\( I = \frac { ne^2A\tau }{ ml } V \)
या \( \frac { V }{ I } = \frac { ml }{ ne^2A\tau } \)
चूँकि एक निश्चित ताप पर दिये गये तार के लिए \( \frac { ml }{ ne^2A\tau } \) एक नियतांक (constant) है। इसे तार का वैद्युत प्रतिरोध R कहते हैं।
अर्थात् \( R = \frac { ml }{ ne^2A\tau } \)
\( \therefore \frac { V }{ I } = R \) (नियतांक)
यही ओम का नियम है।
In simple words: Drift velocity is the average velocity attained by charge carriers in a material due to an electric field. Ohm's law can be derived by relating current to drift velocity, which in turn depends on the electric field, electron charge, mass, relaxation time, and material properties.
🎯 Exam Tip: Deriving Ohm's law from drift velocity is a common question. Ensure you clearly define all terms (drift velocity, relaxation time) and show each step of the mathematical derivation, linking current to voltage and resistance.
Question 2. हाइड्रोजन परमाणु में 1 इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर 7.0 x 10-11 मीटर त्रिज्या की कक्षा में 4.4 x 106 मी/से की चाल से चक्कर लगाता है। कक्षा में इसके समतुल्य वैद्युत धारा का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-
कक्षा में किसी बिन्दु से 1 चक्कर में प्रवाहित आवेश \(q = e\) तथा इलेक्ट्रॉन द्वारा 1 चक्कर पूरा करने में लिया गया समय \(t = T = \frac { 2\pi r }{ v }\);
इसलिए कक्षा में वैद्युत धारा \( i = \frac { q }{ t } = \frac { e }{ 2\pi r/v } = \frac { ev }{ 2\pi r } \)
परन्तु यहाँ \( e = 1.6 \times 10^{-19} \) कूलॉम, वेग \( v = 4.4 \times 10^6 \) मी/से तथा त्रिज्या \( r = 7.0 \times 10^{-11} \) मीटर
अतः
\( i = \frac { 1.6 \times 10^{-19} \text{ कूलॉम} \times (4.4 \times 10^6 \text{ मी/से}) }{ 2 \times \left( \frac { 22 }{ 7 } \right) (7.0 \times 10^{-11} \text{ मी}) } \)
\( = \frac { 1.6 \times 10^{-19} \times 4.4 \times 10^6 }{ 2 \times 3.14 \times 7.0 \times 10^{-11} } \)
\( = 1.6 \times 10^{-3} \) ऐम्पियर
\( = 1.6 \) मिली ऐम्पियर
In simple words: We calculated the equivalent electric current produced by an electron orbiting the nucleus by dividing the electron's charge by the time it takes to complete one orbit. The time period was found using the given radius and speed of the electron.
🎯 Exam Tip: Remember that a moving charge constitutes a current. For an electron in orbit, the current can be calculated as \(I = e/T\), where \(T = 2\pi r/v\) is the time period of orbit.
Question 3. 60 W, 220 V तथा 100 W, 220 V के दो बल्ब श्रेणीक्रम में जोड़कर 220 वोल्ट मेन्स से सम्बन्धित किये गये हैं। उनमें प्रवाहित होने वाली धाराओं की गणना कीजिए। यदि बल्ब समान्तर क्रम में जोड़े जाये तब धाराएँ कितनी होंगी?
Answer: हल-
**श्रेणीक्रम में जुड़े बल्बों में समान धारा प्रवाहित होगी।**
60 वाट के बल्ब का प्रतिरोध \( R_1 = \frac { V^2 }{ P_1 } = \frac { (220 \text{ वोल्ट})^2 }{ 60 \text{ वाट} } = \frac { 48400 }{ 60 } = 806.67 \) ओम
तथा 100 वाट के बल्ब का प्रतिरोध \( R_2 = \frac { V^2 }{ P_2 } = \frac { (220 \text{ वोल्ट})^2 }{ 100 \text{ ओम} } = \frac { 48400 }{ 100 } = 484 \) ओम
\( \therefore \) कुल प्रतिरोध \( R = R_1 + R_2 = 806.67 + 484 = 1290.67 \) ओम
बल्ब 220 वोल्ट मेन्स से जुड़े हैं।
अतः प्रत्येक में धारा \( I = \frac { V }{ R } = \frac { 220 \text{ वोल्ट} }{ 1290.67 \text{ ओम} } \approx 0.17 \) ऐम्पियर
**समान्तर क्रम में जुड़े दोनों बल्बों पर मेन्स से प्राप्त विभवान्तर V (= 220 वोल्ट) समान होगा, परन्तु उनमें धाराएँ अलग-अलग होंगी।**
अतः
60 वाट के बल्ब में धारा \( I_1 = \frac { P_1 }{ V } = \frac { 60 \text{ वाट} }{ 220 \text{ वोल्ट} } \approx 0.273 \) ऐम्पियर [ P = Vi वाट]
तथा 100 वाट के बल्ब में धारा \( I_2 = \frac { P_2 }{ V } = \frac { 100 \text{ वाट} }{ 220 \text{ वोल्ट} } \approx 0.454 \) ऐम्पियर
In simple words: We first calculated the resistance of each bulb using their power and voltage ratings. Then, for series connection, we found the total resistance and used it to calculate the common current. For parallel connection, we calculated the individual currents through each bulb, as the voltage across them remains the same.
🎯 Exam Tip: Remember that in a series circuit, current is the same and voltages add up, while in a parallel circuit, voltage is the same and currents add up. Also, use the power formula \(P = V^2/R\) to find resistance from power ratings.
Question 4. दिये गये चित्र 3.29 में दिखाए गए परिपथ में लगी बैटरी का विद्युत वाहक बल 12 वोल्ट तथा आन्तरिक प्रतिरोध नगण्य है। अमीटर A के पाठयांक की गणना कीजिए । जबकि, कुँजी k
(i) खुली हो, (ii) बन्द हो।
Answer: हल-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक विद्युत परिपथ को दर्शाता है जिसमें एक 12V बैटरी और दो 40 ओम के प्रतिरोधक हैं। कुंजी 'k' एक प्रतिरोधक के समानांतर जुड़ी है, और एक अमीटर कुल धारा को मापता है। यह दो स्थितियों - कुंजी के खुले और बंद होने पर - कुल प्रतिरोध और धारा की गणना करने के लिए है।
(i) जब कुँजी k खुली हो तब
परिपथ में कुल प्रतिरोध \( R_{total} = 40 + 40 = 80 \) ओम (दोनों 40 ओम प्रतिरोध श्रेणीक्रम में हैं)
अमीटर का पाठयांक \( I = \frac { V }{ R_{total} } = \frac { 12 \text{V} }{ 80 \text{Ω} } = \frac { 12 }{ 80 } = \frac { 3 }{ 20 } = 0.15 \) ऐम्पियर
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 3.30 (a) उस स्थिति को दर्शाता है जब कुंजी 'k' खुली होती है। इस स्थिति में, दोनों 40 ओम प्रतिरोधक श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं, और अमीटर कुल परिपथ धारा को मापता है।
(ii) जब कुँजी k बन्द हो तब
कुंजी के समानांतर वाला 40 ओम प्रतिरोधक अब शॉर्ट-सर्किट हो जाता है (क्योंकि कुंजी बंद होने पर इसका प्रतिरोध शून्य हो जाता है)। इसलिए, परिपथ में केवल एक 40 ओम प्रतिरोधक ही प्रभावी रहेगा।
परिपथ में कुल प्रतिरोध \( R_{total} = 40 \) ओम
अमीटर का पाठयांक \( I = \frac { V }{ R_{total} } = \frac { 12 \text{V} }{ 40 \text{Ω} } = \frac { 12 }{ 40 } = \frac { 3 }{ 10 } = 0.3 \) ऐम्पियर
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 3.30 (b) उस स्थिति को दर्शाता है जब कुंजी 'k' बंद होती है। इस स्थिति में, कुंजी के समानांतर जुड़ा 40 ओम का प्रतिरोधक शॉर्ट-सर्किट हो जाता है, जिससे केवल एक 40 ओम का प्रतिरोधक ही प्रभावी रहता है, और अमीटर नई परिपथ धारा को मापता है।
In simple words: When key 'k' is open, both 40 Ω resistors are in series, giving a total resistance of 80 Ω and a current of 0.15 A. When key 'k' is closed, it short-circuits one of the 40 Ω resistors, leaving only one 40 Ω resistor in the circuit, resulting in a total current of 0.3 A.
🎯 Exam Tip: Remember that a closed switch in parallel with a resistor effectively "short-circuits" that resistor, meaning current bypasses it, and its resistance no longer contributes to the total circuit resistance.
Question 5. वैद्युत परिपथ के लिए किरचॉफ के नियमों का व्याख्या सहित वर्णन कीजिए ।
या
वैद्युत परिपथ के लिए किरचॉफ के नियमों का उल्लेख कीजिए और उनको परिपथ बनाकर समझाइए ।
या
वैद्युत परिपथ सम्बन्धी किरचॉफ के दोनों नियम समुचित परिपथ आरेख बनाकर समझाइए ।
या
वैद्युत परिपथ सम्बन्धी किरचॉफ के नियम लिखिए।
या
किरचॉफ का धारा नियम लिखिए तथा धारा के लिए चिह्न परिपाटी भी बताइए।
Answer: उत्तर-
**किरचॉफ के नियम (Kirchhoff's Laws)**-
**प्रथम नियम**- किसी वैद्युत परिपथ की किसी भी सन्धि पर मिलने वाली धाराओं का बीजगणितीय योग (algebraic sum) शून्य होता है;
अर्थात् \( \sum { i } = 0 \)
माना कि चालक जिनमें धाराएँ \(I_1, I_2, I_3, I_4\) व \(I_5\) बह रही हैं, सन्धि O पर मिलते हैं। चिह्न परिपाटी के अनुसार सन्धि की ओर आने वाली धारा धनात्मक है। अतः \(I_1\) व \(I_2\) धनात्मक तथा \(I_3, I_4\) व \(I_5\) ऋणात्मक हैं। किरचॉफ के नियम के अनुसार,
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र किरचॉफ के प्रथम नियम (धारा नियम) को दर्शाता है। इसमें एक संधि बिंदु 'O' दिखाया गया है जहां पांच धाराएं (\(I_1\) से \(I_5\)) मिलती हैं। कुछ धाराएं संधि की ओर आ रही हैं (धनात्मक), जबकि कुछ संधि से दूर जा रही हैं (ऋणात्मक), जो बताता है कि संधि पर कुल बीजगणितीय योग शून्य है।
\( I_1 + I_2 – I_3 – I_4 – I_5 = 0 \)
या \( I_1 + I_2 = I_3 + I_4 + I_5 \)
स्पष्ट है कि परिपथ के किसी बिन्दु पर आने वाली धाराओं का योग वहाँ से जाने वाली धाराओं के योग के बराबर होता है। यह नियम आवेश के संरक्षण को व्यक्त करता है।
**द्वितीय नियम**- किसी वैद्युत परिपथ में प्रत्येक बन्दपाश के विभिन्न भागों में प्रवाहित होने वाली धाराओं एवं संगत प्रतिरोधों के गुणनफलों का बीजगणितीय योग उस पाश में लगने वाले समस्त वि० वा० बलों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है।
अर्थात् \( \sum { iR } = \sum { E } \)
इस नियम को लगाते समय धारा की दिशा में चलने पर धारा व इसके संगत प्रतिरोध का गुणनफल धनात्मक लेते हैं तथा सेल के वैद्युत-अपघटय में ऋण इलेक्ट्रोड से धन इलेक्ट्रोड की ओर चलने पर वि० वा० बल धनात्मक लेते हैं। चित्र 3.32 में दिखाये गये वैद्युत परिपथ में दो बन्दपाश (1) व (2) हैं। इस नियम के अनुसार बन्दपाश (1) के लिए
In simple words: Kirchhoff's first law states that the sum of currents entering a junction equals the sum of currents leaving it (conservation of charge). The second law states that the algebraic sum of potential differences around any closed loop in a circuit is zero (conservation of energy), including EMFs and voltage drops across resistors.
🎯 Exam Tip: When applying Kirchhoff's laws, assign arbitrary current directions and loop polarities. Be consistent with your sign conventions for current direction and voltage drops/EMFs to avoid errors. The current law is based on charge conservation, and the voltage law is based on energy conservation.
Question 6. वैद्युत परिपथ के लिए, किरचॉफ के नियमों का उल्लेख कीजिए तथा उनकी सहायता से किसी व्हीटस्टोन सेतु के सन्तुलित होने का सूत्र \( \frac { P }{ Q } = \frac { R }{ S } \) व्युत्पादित कीजिए, जहाँ संकेतों को सामान्य अर्थ है।
या
व्हीटस्टोन सेतु का परिपथ चित्र खींचकर उसकी साम्यावस्था का प्रतिबन्ध निकालिए।
या
व्हीटस्टोन ब्रिज का सिद्धान्त क्या है?
या
व्हीटस्टोन सेतु की संतुलन अवस्था में उसकी भुजाओं के प्रतिरोध में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
या
व्हीटस्टोन सेतु का परिपथ आरेख खीचिए तथा संतुलन के प्रतिबन्ध का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
या
व्हीटस्टोन ब्रिज सिद्धान्त की संतुलन गति को लिखिए।
Answer: उत्तर-
किरचॉफ के नियमों के लिए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 5 का उत्तर देखिए।
**व्हीटस्टोन सेतु का सिद्धान्त**-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 3.32 एक विद्युत परिपथ को दर्शाता है जिसमें दो बंद लूप और दो बैटरी E1 और E2, साथ ही विभिन्न प्रतिरोधक R1, R2, R3 जुड़े हुए हैं। यह चित्र किरचॉफ के दूसरे नियम (वोल्टेज नियम) को लागू करने के लिए उपयोग किया जाता है, जहाँ प्रत्येक लूप में वोल्टेज ड्रॉप और EMF का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 3.33 एक व्हीटस्टोन सेतु व्यवस्था को दर्शाता है, जिसमें P, Q, R, S चार प्रतिरोधक एक चतुर्भुज के रूप में जुड़े हैं। एक गैल्वेनोमीटर G इसके विकर्ण में और एक बैटरी E कुंजी K1 के साथ दूसरे विकर्ण में जुड़ी है। यह सेतु के संतुलन की स्थिति का अध्ययन करने और अज्ञात प्रतिरोध को ज्ञात करने के लिए उपयोग किया जाता है।
चित्र 3.33 में व्हीटस्टोन सेतु व्यवस्था दिखायी गयी है। जब व्हीटस्टोन सेतु में चतुर्भुज रूप में जुड़े प्रतिरोधों के मान इस प्रकार समायोजित किये जाएँ कि सेल की कुंजी K₁ तथा धारामापी की कुंजी K₂ दोनों बन्द करने पर धारामापी में कोई विक्षेप न आये तो इस दशा में सेतु सन्तुलित (balanced) कहा जाता है।
“सेतु की सन्तुलन अवस्था में सेतु (चतुर्भुज) की किन्हीं दो संलग्न भुजाओं में लगे प्रतिरोधों का अंनुपात शेष दो संलग्न भुजाओं में लगे प्रतिरोधों के अनुपात के बराबर होता है।”
अर्थात् \( \frac { P }{ Q } = \frac { R }{ S } \)
किरचॉफ के नियमों का उपयोग करके उपर्युक्त सम्बन्ध का निगमन-
चित्र 3.33 में बन्दपाश ABDA में किरचॉफ का द्वितीय नियम लगाने पर
\( I_1 \times P + 0 \times G - I_2 \times R = 0 \)
(जहाँ G = धारामापी का प्रतिरोध तथा इसमें धारा = शून्य)
\( \implies I_1 \times P = I_2 \times R \) ...(1)
इसी प्रकार बन्दपाश BCDB में किरचॉफ का द्वितीय नियम लगाने पर
\( I_1 \times Q - I_2 \times S + 0 \times G = 0 \)
\( \implies I_1 \times Q = I_2 \times S \) ...(2)
समी० (1) को समी० (2) से भाग देने पर
\( \frac { I_1 \times P }{ I_1 \times Q } = \frac { I_2 \times R }{ I_2 \times S } \)
\( \implies \frac { P }{ Q } = \frac { R }{ S } \)
In simple words: The Wheatstone bridge principle states that if a bridge circuit is balanced (no current through the galvanometer), the ratio of resistances in two adjacent arms is equal to the ratio of resistances in the other two adjacent arms. This condition is derived by applying Kirchhoff's second law to the two closed loops of the bridge.
🎯 Exam Tip: The Wheatstone bridge is a classic application of Kirchhoff's laws. For balance conditions, remember that the current through the galvanometer is zero, simplifying the loop equations and leading to the \(P/Q = R/S\) relation.
Question 7. विभवमापी का सिद्धान्त चित्र खींचकर समझाइए। यह वोल्टमीटर से श्रेष्ठ क्यों है?
या
हम सेल का विद्युत वाहक बल नापने के लिए वोल्टमीटर की अपेक्षा विभवमापी को वरीयता क्यों देते हैं।
या
विभवमापी का सिद्धान्त समझाइए । इसकी सुग्राहिता किस प्रकार बढ़ाई जा सकती है?
या
विभवमापी में प्रयोग किए जाने वाले तार के विशेष गुण लिखिए।
Answer: उत्तर-
**विभवमापी**- यह किसी सेल का विद्युत वाहक बल अथवा किसी वैद्युत परिपथ के दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर नापने का यथार्थ उपकरण है।
**विभवमापी का सिद्धान्त**- इसमें मुख्यतः एक लम्बा व एकसमान व्यास की धातु का प्रतिरोध-तार AB होता है। इसका एक सिरा A एक संचायक-बैटरी के धन-ध्रुव से जुड़ा होता है। बैटरी का ऋण-ध्रुव एक कुंजी (K) तथा एक धारा नियन्त्रक (Rh) के द्वारा तार के दूसरे सिरे B से जोड़ दिया जाता है। धारा नियन्त्रक के द्वारा तार AB में धारा को घटाया अथवा बढ़ाया जा सकता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 3.34 एक विभवमापी का मूल परिपथ दर्शाता है। इसमें एक लंबी प्रतिरोधक तार AB, एक प्राथमिक सेल E, एक कुंजी K, और एक धारा नियन्त्रक Rh मुख्य परिपथ बनाते हैं। एक अज्ञात सेल E को गैल्वेनोमीटर G और जॉकी J के माध्यम से तार से जोड़ा जाता है, जिसका उद्देश्य संतुलन बिंदु ज्ञात करके सेल का विद्युत वाहक बल मापना है।
E एक सेल है जिसका विद्युत वाहक बल नापना है। इसका धन-ध्रुव तार के A सिरे से जुड़ा होता है। तथा ऋण-ध्रुव एक धारामापी G के द्वारा जौकी J से जुड़ा होता है जो तार पर खिसकाकर कहीं भी स्पर्श करायी जा सकती है।
बैटरी से वैद्युत धारा तार के सिरे A से सिरे B की ओर को बहती है। अतः A से B की ओर तार के प्रत्येक बिन्दु पर वैद्युत-विभव गिरता जाता है। तार की प्रति एकांक लम्बाई में विभव-पतन को विभव-प्रवणता कहते हैं तथा इसे K से प्रदर्शित करते हैं।
माना जौकी को J₁ पर स्पर्श कराते हैं, जबकि A और J₁ के बीच विभवान्तर, सेल E के वि० वा० बल से कम है। चूंकि बिन्दु A का विभव J₁ से । ऊँचा है; अतः बैटरी B₁ की धारा AE J₁ मार्ग से धारामापी में प्रवाहित होगी। परन्तु सेल E का धन-ध्रुव, बिन्दु A से जुड़ा है; अतः सेल की धारा AJ₁E मार्ग से धारामापी में प्रवाहित होगी। स्पष्ट है। कि ये दोनों धाराएँ परस्पर विपरीत दिशाओं में हैं। परन्तु चूँकि सेल का वि० वा० बल बैटरी के कारण उत्पन्न A व J₁ के बीच विभवान्तर से अधिक है; अतः सेल की धारा की प्रधानता होगी। इस प्रकार AJ₁E की दिशा में प्रवाहित एक परिणामी धारा के - कारण धारामापी की सूई एक ओर विक्षेपित हो जाएगी ।
इसके विपरीत यदि जौकी को J₂ पर स्पर्श कराते हैं, जबकि A व J₂ के बीच विभवान्तर, सेल E के वि० वा० बल से अधिक हो, तो बैटरी B₁ की धारा की प्रधानता होगी। इस दशा में धारामापी में एक परिणामी धारा AEJ₂ दिशा में प्रवाहित होगी और धारामापी की सूई पहले से विपरीत दिशा में विक्षेपित हो जाएगी।
स्पष्ट है कि जौकी की दोनों स्थितियों J₁ व J₂ के मध्य में J एक ऐसा बिन्दु होगा, जहाँ पर जौकी को स्पर्श कराने पर धारामापी में कोई विक्षेप नहीं होगा। यह शून्य विक्षेप की स्थिति होगी और ऐसी स्थिति में A व J के मध्य विभवान्तर, सेल के वि० वा० बल के बराबर होगा।
माना तार में बहने वाली धारा का मान \(I\) है तथा तार की 1 सेमी लम्बाई का प्रतिरोध \(p\) है, तब
विभव-प्रवणता K = ip
यदि तार के भाग AJ की लम्बाई \(l\) सेमी हो तथा बिन्दु A व J के बीच विभवान्तर \(V\) हो, तो
V = Kl
शून्य विक्षेप स्थिति में, विभवान्तर V सेल के विद्युत वाहक बल E के बराबर होता है। अतः
E = Kl
विभवमापी की सुग्राहिता बढ़ाने के लिए विभवमापी के तार की लम्बाई बढ़ा दी जाती है जिस कारण विभव-प्रवणता कम हो जाती है और शून्य विक्षेप की स्थिति की दूरी (\(l\)) अधिक लम्बाई पर आती है।
**विभवमापी में प्रयोग होने वाले तार के विशेष गुण**
(i) तार का व्यास सर्वत्र समान होना चाहिए ।
(ii) तार के पदार्थ का प्रतिरोध ताप-गुणांक अधिक होना चाहिए ।
(iii) तार के पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध कम होना चाहिए।
**वोल्टमीटर की तुलना में विभवमापी की श्रेष्ठता**
(i) जब हम सेल का वि० वा० बल विभवमापी से नापते हैं तो शून्य-विक्षेप स्थिति में सेल के परिपथ में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती; अर्थात् सेल खुले परिपथ पर होती है। अतः इस स्थिति में सेल के वि० वा० बल का वास्तविक मान प्राप्त होता है। इस प्रकार विभवमापी अनन्त प्रतिरोध के आदर्श वोल्टमीटर के समतुल्य है।
(ii) वोल्टमीटर द्वारा वि० वा० बल नापने के लिए वोल्टमीटर में विक्षेप पढ़ना पड़ता है। विक्षेप के पढ़ने में त्रुटि रह सकती है। इसके विपरीत विभवमापी द्वारा वि० वी० बल अविक्षेप (null) विधि से नापा जाता है। इसमें तार पर शून्य-विक्षेप स्थिति को पढ़ना होता है। शून्य-विक्षेप स्थिति में पढ़ने में अधिक-से-अधिक 1 मिमी की त्रुटि हो सकती है, जो नगण्य है।
In simple words: A potentiometer measures EMF accurately because it draws no current from the cell at the null point, making it an ideal voltmeter. Its sensitivity can be increased by increasing the length of the potentiometer wire, thus reducing the potential gradient. The wire should have uniform cross-section, high resistivity, and low-temperature coefficient of resistance.
🎯 Exam Tip: Focus on why a potentiometer is superior to a voltmeter (null deflection method drawing no current). Remember the factors affecting its sensitivity and the properties of its wire material.
Question 8. एक विभवमापी की संरचना तथा कार्यविधि का वर्णन कीजिए। इसके द्वारा सेल का विद्युत वाहक बल कैसे ज्ञात किया जाता है?
या
विभवमापी का सिद्धान्त समझाइए । विभवमापी से किसी सेल का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात करने के लिए परिपथ आरेख खीचिए तथा प्रयुक्त सूत्र को प्राप्त कीजिए ।
या
विभवमापी का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। इसकी सहायता से किसी सेल का आन्तरिक प्रतिरोध कैसे ज्ञात करते हैं?
Answer: उत्तर-
**विभवमापी की संरचना**- विभवमापी में मुख्यतः एक उच्च विशिष्ट प्रतिरोध व निम्न प्रतिरोध ताप गुणांक की मिश्रधातु (जैसे-कॉन्सटेन्टन, मैंगनिन आदि) का 4 से 12 मीटर तक लम्बा एक समान व्यास का तार होता है। इस तार को एक-एक मीटर के समान्तर टुकड़ों के रूप में चित्र 3.35 की भाँति एक लकड़ी के तख्ते पर बिछा देते हैं। तार के ये सभी टुकड़े ताँबे की मोटी पत्तियों के द्वारा श्रेणीक्रम में ज़ोड़ दिये जाते हैं। इस सम्पूर्ण तार के प्रारम्भ होने वाले सिरे और अन्तिम सिरे पर क्रमशः संयोजक पेंच A और B लगा देते हैं। तारों की लम्बाई के समान्तर एक मीटर पैमाना M लगा रहता है, जिससे जौकी J की स्थिति पढ़ ली जाती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 3.35 एक विशिष्ट विभवमापी की संरचना को दर्शाता है, जिसमें एक लकड़ी के बोर्ड पर कई मीटर लंबी प्रतिरोधक तार को श्रेणीबद्ध तरीके से जोड़ा गया है। एक पैमाना (M) तार की लंबाई को मापने के लिए होता है, और यह जॉकी (J) के स्थान को इंगित करता है, जिसका उपयोग संतुलन बिंदु खोजने के लिए किया जाता है।
कार्यविधि अथवा कार्य सिद्धान्त- उपरोक्त दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 7 में पढ़िए ।
**विभवमापी द्वारा किसी सेल का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात करना**- इसके लिए विभवमापी के तार AB के सिरों के बीच एक संचायक सेल अथवा बैटरी B1 धारा नियन्त्रक Rh व कुंजी K₁ चित्र 3.36 के अनुसार जोड़ देते हैं। सेल B1 का धन-ध्रुव तार के सिरे A से जोड़ा जाता है। अब जिस सेल को आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात करना होता है, उसके धन सिरे को बिन्दु A से तथा ऋण सिरे को एक शण्टयुक्त धारामापी G द्वारा जौकी J से जोड़ देते हैं। इस सेल के समान्तरक्रम में चित्र 3.36 के अनुसार एक प्रतिरोध बॉक्स व कुंजी K₂ डाल देते हैं। सर्वप्रथम कुंजी K₂ से प्लग को निकालकर सेल E को खुले परिपथ में रखा जाता है। अब कुंजी K₁ का प्लग लगाकर सेल E के लिए शून्य विक्षेप स्थिति ज्ञात कर लेते हैं। मान लीजिए कि इस स्थिति में सिरे A से दूरी \(l_1\) सेमी है। चूंकि खुले परिपथ पर सेल की प्लेटों के बीच विभवान्तर V इसके विद्युत वाहक ब्रल E के बराबर है, अतः
\( E = Kl_1 \) .....(1)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 3.36 एक विभवमापी परिपथ को दर्शाता है जिसका उपयोग एक सेल के आंतरिक प्रतिरोध को निर्धारित करने के लिए किया जाता है। इसमें एक मुख्य सर्किट (बैटरी B1, धारा नियंत्रक Rh, कुंजी K1) और एक द्वितीयक सर्किट (अज्ञात सेल E, प्रतिरोध बॉक्स, कुंजी K2, गैल्वेनोमीटर G, और जॉकी J) शामिल है।
जहाँ K तार AB की विभव-प्रवणता है। अब प्रतिरोध बॉक्स में से कोई उचित प्रतिरोध R निकालकर कुंजी K₂ को बन्द कर देते हैं। इस दशा में प्रतिरोध R के सिरों के बीच लगने वाले विभवान्तर V के लिए तार AB पर शून्य विक्षेप स्थिति ज्ञात करे लेते हैं। माना इस स्थिति की बिन्दु A से दूरी \(l_2\) सेमी है, तब
In simple words: A potentiometer determines a cell's internal resistance by first finding the null point (length \(l_1\)) with the cell in an open circuit (giving EMF E = Kl1). Then, a known external resistance R is connected in parallel with the cell, and a new null point (length \(l_2\)) is found (giving terminal voltage V = Kl2). The internal resistance is calculated using the formula \(r = R \left( \frac { E }{ V } - 1 \right)\).
🎯 Exam Tip: To find internal resistance using a potentiometer, remember to take two null points: one for the cell's EMF (open circuit) and one for its terminal voltage (closed circuit with a known external resistance). The key formula is \(r = R \left( \frac { l_1 }{ l_2 } - 1 \right)\).
Question 9. विभवमापी की संरचना तथा कार्यविधि का वर्णन कीजिए। इसके द्वारा दो सेलों के वि० वाहक बल की तुलना कैसे की जाती है। परिपथं आरेख बनाकर समझाइए।
Answer: उत्तर-
विभवमापी की संरचना- उपरोक्त दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 8 में पढ़िए ।
विभवमापी की कार्यविधि- उपरोक्त दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 7 में पढ़िए ।
**विभवमापी द्वारा दो सेलों के वि० वा बल की तुलना**- पहले विभवमापी के तार के सिरों A व B के बीच एक संचायक सेल अथवा बैटरी B₁, धारी-नियन्त्रक Rh तथा एक कुंजी K₁ चित्र 3.36 के अनुसार जोड़ देते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 3.36 एक विभवमापी परिपथ को दर्शाता है जिसका उपयोग एक सेल के आंतरिक प्रतिरोध को निर्धारित करने के लिए किया जाता है। इसमें एक मुख्य सर्किट (बैटरी B1, धारा नियंत्रक Rh, कुंजी K1) और एक द्वितीयक सर्किट (अज्ञात सेल E, प्रतिरोध बॉक्स, कुंजी K2, गैल्वेनोमीटर G, और जॉकी J) शामिल है।
B₁ का धन-ध्रुव तार के A सिरे से जोड़ा जाता है। अब जिन दो सेलों E₁ व E₂ के विद्युत वाहक बलों की तुलना करनी है, उनके धन-ध्रुवों कों A से जोड़ देते हैं तथा ऋण-ध्रुवों को एक द्वि-मार्गी (two-way) कुंजीk, के द्वारा एक शन्टयुक्त धारामापी G से जोड़कर जौकी J से जोड़ देते हैं। पहले कुंजी K₁ को लगाकर तार AB के सिरों के बीच विभवन्तर स्थापित करते हैं। अब पहले सेल” E₁ को कुंजी K₂ के द्वारा परिपथ में डालते हैं और जौकी के द्वारा शून्य-विक्षेप स्थिति ज्ञात कर लेते हैं। मान लो तार पर शून्य-विक्षेप स्थिति की बिन्दु A से दूरी \(l_1\) सेमी है। तब
\( E_1 = Kl_1 \)
जहाँ K तार पर विभव-प्रवणता है। इसी प्रकार दूसरे सेल E₂ को कुंजी K₂ के द्वारा परिपथ में डालकर पुनः शून्य-विक्षेप स्थिति ज्ञात कर लेते हैं। मान लो इस स्थिति की बिन्दु A से दूरी \(l_2\) सेमी है।
तब \( E_2 = Kl_2 \)
अतः \( \frac { E_1 }{ E_2 } = \frac { Kl_1 }{ Kl_2 } = \frac { l_1 }{ l_2 } \)
यदि इनमें एक सेल प्रमाणिक सेल हो, इस सूत्र से \( E_1 / E_2 \) की गणना कर सकते हैं। जिसका विद्युत वाहक बल ज्ञात होता है तो दूसरी सेल का विद्युत वाहक बल ज्ञात किया जा सकता है। विभवमापी में शून्य-विक्षेप की स्थिति में, सेल E, अथवा E, में कोई धारा नहीं बहती अर्थात् सेल खुले । परिपथ में होती है। अतः विभवमापी से सेल का यथार्थ विद्युत वाहक बल प्राप्त होता है।
In simple words: To compare two cell EMFs using a potentiometer, each cell is individually connected to the potentiometer circuit to find its null point length (\(l_1\) for \(E_1\) and \(l_2\) for \(E_2\)). The ratio of their EMFs is then equal to the ratio of their corresponding null point lengths, i.e., \(E_1/E_2 = l_1/l_2\). This method is accurate because no current is drawn from the cells at the null point.
🎯 Exam Tip: When comparing EMFs using a potentiometer, ensure the driving cell's EMF is greater than the EMFs of the cells being compared. The ratio \(E_1/E_2 = l_1/l_2\) is crucial for this experiment.
Question 10. चित्र 3.37 में AB एक 15 ओम प्रतिरोध का 1 मीटर लम्बा, समरूप तार है। शेष आँकडे चित्र में प्रदर्शित हैं। ज्ञात कीजिए-
(i) तार AB में विभव-प्रवणता तथा
(ii) अविक्षेप स्थिति में तार AO की लम्बाई ।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 3.37 एक पोटेंशियोमीटर परिपथ को दर्शाता है। इसमें एक 10 ओम प्रतिरोध और एक 2 वोल्ट के स्रोत से जुड़ी मुख्य तार AB है। एक अज्ञात स्रोत (1.5 वोल्ट) को गैल्वेनोमीटर (G) और 1.2 ओम तथा 0.3 ओम के प्रतिरोधों के साथ संयोजित किया गया है ताकि संतुलन बिंदु ज्ञात किया जा सके।
हल-
(i) चित्र 3.37 में विभवमापी के तार से जुड़े मुख्य परिपथ का कुल प्रतिरोध = 10 Ω + 15 Ω = 25 Ω
तथा परिपथ में जुड़े सेल का वि० वा० बल E = 2 वोल्ट; अतः इस तार में प्रवाहित धारा,
\(i = \frac{\text{वि० वा० बल E}}{\text{कुल प्रतिरोध}}\)
\(i = \frac{\text{2 वोल्ट}}{\text{15 + 10 ओम}}\) = 0.08 ऐम्पियर
तार की लम्बाई L = 1 मीटर = 100 सेमी का प्रतिरोध R = 15 ओम। अतः तार की एकांक लम्बाई का प्रतिरोध
\(\rho' = \frac{R}{L} = \frac{\text{15 ओम}}{\text{100 सेमी}}\) = 0.15 ओम/सेमी
अतः तार AB में विभव-प्रवणता
\(K = i \times \rho'\) = 0.08 ऐम्पियर x 0.15 ओम/सेमी = 0.0120 वोल्ट/सेमी
(ii) तार AB से जुड़े द्वितीयक परिपथ का कुल प्रतिरोध R' = 1.2Ω + 0.3Ω = 1.5Ω तथा इसमें लगा वि० वा० बल E' = 1.5 वोल्ट।
अतः इस परिपथ में प्रवाहित धारा i' = \(\frac{\text{E'}}{\text{R'}}\) = \(\frac{\text{1.5 वोल्ट}}{\text{1.5 ओम}}\) = 1 ऐम्पियर
अतः 0.3Ω के सिरों के बीच विभवान्तर V = i' x 0.3 ओम
= 1 ऐम्पियर x 0.3 ओम = 0.3 वोल्ट
यही विभवान्तर इस परिपथ में जुड़ी सेल के सिरों के बीच होगा जो तार AB की AO लम्बाई पर सन्तुलित है। अतः तार AO की लम्बाई यदि l हो तो V = K x l से,
\(l = \frac{V}{K} = \frac{\text{0.3 वोल्ट}}{\text{0.0120 वोल्ट/सेमी}}\) = 25.0 सेमी
In simple words: This problem involves a potentiometer setup. We first calculate the total resistance of the main circuit and the current flowing through it. Then, we find the potential gradient (K) across the potentiometer wire. For the secondary circuit, we calculate its total resistance and current to determine the potential difference across the 0.3Ω resistor. Finally, we use this potential difference and the potentiometer's potential gradient to find the balance length.
🎯 Exam Tip: Accurately identifying series/parallel combinations and correctly applying Ohm's law and potential gradient formulas are crucial for scoring. Ensure units are consistent throughout calculations.
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