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Detailed Chapter 2 स्थिर विद्युत विभव और धारिता UP Board Solutions for Class 12 Physics
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Class 12 Physics Chapter 2 स्थिर विद्युत विभव और धारिता UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 12 Physics Chapter 2 Electrostatic Potential And Capacitance (स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता)
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
Question 1. 5 x 10-8 C तथा -3 x 10-8 C के दो आवेश 16 cm दूरी पर स्थित हैं। दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के किस बिन्दु पर विद्युत विभव शून्य होगा? अनन्त पर विभव शून्य लीजिए ।
Answer:हल - दिया है, \( q_1 = 5 \times 10^{-8} \) कूलॉम, \( q_2 = -3 \times 10^{-8} \) कूलॉम
तथा \( r = 16 \) सेमी \( = 16 \times 10^{-2} \) मीटर \( = 0.16 \) मीटर
माना, दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के बिन्दु P पर वैद्युत विभव शून्य है तथा \( q_1 \) से P की दूरी \( x \) है तब \( q_2 \) से P की दूरी \( (r - x) \) होगी।
P पर वैद्युत विभव-
सूत्र \( V = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{q}{r} \) से,
\( q_1 \) के कारण
\( V_1 = \frac{9 \times 10^9 \times 5 \times 10^{-8}}{x} \)
\( q_2 \) के कारण
\( V_2 = \frac{9 \times 10^9 \times (-3 \times 10^{-8})}{(r-x)} \)
अतः P पर कुल विभव \( V = V_1 + V_2 = 0 \)
\( \implies \frac{9 \times 10^9 \times 5 \times 10^{-8}}{x} + \frac{9 \times 10^9 \times (-3 \times 10^{-8})}{(r-x)} = 0 \)
\( \implies \frac{5}{x} - \frac{3}{(0.16-x)} = 0 \)
\( \implies \frac{5}{x} = \frac{3}{(0.16-x)} \)
\( \implies 5(0.16-x) = 3x \)
\( \implies 0.8 - 5x = 3x \)
\( \implies 8x = 0.8 \) मीटर
\( \therefore x = \frac{0.8}{8} = 0.1 \) मीटर
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो आवेशों, \(q_1\) और \(q_2\), को मिलाने वाली रेखा पर स्थित एक बिंदु P को दर्शाता है। \(q_1\) से बिंदु P की दूरी \(x\) है और \(q_2\) से बिंदु P की दूरी \((r-x)\) है। यह विभव शून्य होने की स्थिति को रेखांकित करता है।
वैद्युत विभव दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के बाह्य बिन्दु \( P_1 \) पर भी शून्य होगा, जहाँ \( BP_1 = x \) (माना)
\( P_1 \) पर \( q_1 \) के कारण विभव \( V_1' = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{5 \times 10^{-8}}{(0.16+x)} \)
तथा \( q_2 \) के कारण विभव \( V_2' = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{(-3 \times 10^{-8})}{x} \)
\( P_1 \) पर परिणामी विभव \( V' = V_1' + V_2' = 0 \)
\( \implies \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{5 \times 10^{-8}}{(0.16+x)} + \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{(-3 \times 10^{-8})}{x} = 0 \)
\( \implies \frac{5 \times 10^{-8}}{(0.16+x)} - \frac{3 \times 10^{-8}}{x} = 0 \)
\( \implies \frac{5}{(0.16+x)} = \frac{3}{x} \)
\( \implies 5x = 0.48 + 3x \)
\( \implies 2x = 0.48 \) मीटर
\( \implies x = 0.24 \) मीटर
\( \implies = 24 \) सेमी
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो आवेशों, \(q_1\) और \(q_2\), को मिलाने वाली रेखा के बाहर स्थित एक बिंदु P1 को दर्शाता है। \(q_1\) से \(q_2\) तक की दूरी r है, और \(q_2\) से बिंदु P1 की दूरी \(x\) है। यह बाहरी बिंदु पर विभव शून्य होने की स्थिति को दर्शाता है।In simple words: विद्युत विभव दो आवेशों को जोड़ने वाली रेखा पर दो बिंदुओं पर शून्य होगा। एक बिंदु आवेशों के बीच में 10 सेमी की दूरी पर है, और दूसरा बिंदु बाहरी तरफ 24 सेमी की दूरी पर है। यह गणना आवेशों के परिमाण और उनके बीच की दूरी पर आधारित है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, यह महत्वपूर्ण है कि आप आंतरिक और बाहरी दोनों संभावित शून्य-विभव बिंदुओं पर विचार करें। दूरियों को सावधानीपूर्वक चिह्नित करें और बीजगणितीय चरणों में त्रुटियों से बचें।
Question 2. 10 cm भुजा वाले एक सम-षट्भुज के प्रत्येक शीर्ष पर 5 µC का आवेश है। षट्भुज के केन्द्र पर विभव परिकलित कीजिए ।
Answer:हल-
समषट्भुज के केन्द्र से प्रत्येक शीर्ष की दूरी समान होती है तथा यह इसकी भुजा \( a = 10 \) सेमी के बराबर होगी (चित्र 2.3)। चूंकि प्रत्येक शीर्ष पर आवेश भी समान (\( q = 5 \) µC \( = 5 \times 10^{-6} \) C) है, अतः प्रत्येक शीर्ष पर स्थित आवेश के कारण केन्द्र O पर विभव समान होगा।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक सम-षट्भुज (regular hexagon) को दर्शाता है जिसकी प्रत्येक भुजा 10 सेमी है। षट्भुज के केंद्र O से प्रत्येक शीर्ष की दूरी 'a' है, और सभी शीर्षों पर \(5 \mu C\) का आवेश रखा गया है। षट्भुज के आंतरिक कोण भी दर्शाए गए हैं।
A पर स्थित \( q \) आवेश के कारण O पर वैद्युत विभव
\( V_1 = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{q}{r} = \frac{9 \times 10^9 \times 5 \times 10^{-6}}{0.1} \)
अतः सभी शीर्षों पर स्थित आवेशों के कारण O पर वैद्युत विभव
\( V = 6 \times V_1 \)
\( = \frac{6 \times 9 \times 10^9 \times 5 \times 10^{-6}}{0.1} \)
\( = 2.7 \times 10^6 \) वोल्टIn simple words: एक सम-षट्भुज के केंद्र पर कुल विभव, प्रत्येक शीर्ष पर समान आवेश के कारण विभवों का योग होता है। चूंकि सभी आवेश और केंद्र से दूरियां समान हैं, केंद्र पर कुल विभव \(2.7 \times 10^6\) वोल्ट होगा।
🎯 Exam Tip: सममिति का उपयोग करें। यदि सभी आवेश और दूरियाँ समान हैं, तो कुल विभव को एक आवेश के विभव को शीर्षों की संख्या से गुणा करके आसानी से गणना की जा सकती है।
Question 3. 6 cm की दूरी पर अवस्थित दो बिन्दुओं A एवं B पर दो आवेश 2 µC तथा -2 µC रखे है।
(a) निकाय के सम विभव पृष्ठ की पहचान कीजिए।
(b) इस पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत-क्षेत्र की दिशा क्या है?
Answer:हल-
(a) दिया है, A व B पर दो आवेश 2 µC और -2 µC रखे हैं।
AB = 6 सेमी = 0.06 मीटर
दो दिए गए आवेशों के निकाय का समविभवी पृष्ठ A व B को मिलाने वाली रेखा के अभिलम्बवत् होगा। यह पृष्ठ, रेखा AB के मध्य बिन्दु C से गुजरेगा।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो आवेशों (+2µC और -2µC) को दर्शाता है जो A और B बिंदुओं पर रखे गए हैं, जो एक दूसरे से 6 सेमी की दूरी पर हैं। बिंदु C इन दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा का मध्य बिंदु है। विद्युत क्षेत्र रेखाएं धनावेश से निकलकर ऋणावेश में प्रवेश करती हुई दिखाई गई हैं।
C पर विभव, \( V = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \left[ \frac{2 \times 10^{-6}}{0.03} + \frac{(-2 \times 10^{-6})}{0.03} \right] = 0 \)
इस प्रकार इस पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर समान विभव है और यह शून्य है। अतः यह एक समविभवी पृष्ठ है।
(b) हमें ज्ञात है कि वैद्युत क्षेत्र सदैव + से – आवेश की ओर दिष्ट होता है। इस प्रकार यहाँ वैद्युत क्षेत्र (+ve) बिन्दु A से ऋणावेशित (-ve) बिन्दु B की ओर कार्य करता है। तथा यह समविभवी पृष्ठ के अभिलम्बवत् है ।In simple words: दो समान और विपरीत आवेशों के बीच समविभव पृष्ठ हमेशा उन्हें जोड़ने वाली रेखा के लंबवत होता है और उनके मध्य बिंदु से गुजरता है, जहाँ विभव शून्य होता है। विद्युत क्षेत्र की दिशा हमेशा धनावेश से ऋणावेश की ओर होती है और समविभव पृष्ठ के लंबवत होती है।
🎯 Exam Tip: समविभव पृष्ठ की परिभाषा और गुणों को याद रखें: सभी बिंदुओं पर समान विभव, विद्युत क्षेत्र रेखाओं के लंबवत, और किसी आवेश को पृष्ठ पर ले जाने में कोई कार्य नहीं होता।
Question 4. 12 cm त्रिज्या वाले एक गोलीय चालक के पृष्ठ पर 1.6 x 10-7 C पर आवेश एकसमान रूप से वितरित है।
(a) गोले के अन्दर
(b) गोले के ठीक बाहर
(c) गोले के केन्द्र से 18 cm पर अवस्थित, किसी बिन्दु पर विद्युत-क्षेत्र क्या होगा?
Answer:हल-
आवेश सदैव चालक के पृष्ठ पर रहता है तथा बाहरी बिन्दुओं के लिए यह ऐसे व्यवहार करता है जैसे सम्पूर्ण आवेश इसके केन्द्र पर स्थित हो ।
(a) गोले के भीतर वैद्युत क्षेत्र, \( E_{in} = 0 \)
(b) गोले के पृष्ठ पर वैद्युत क्षेत्र
\( E_s = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{q}{R^2} \)
यहाँ \( q = 1.6 \times 10^{-7} \) C, \( R = 12 \) सेमी \( = 0.12 \) मीटर
\( \therefore E_s = 9 \times 10^9 \times \frac{1.6 \times 10^{-7}}{(0.12)^2} = 10^7 \) N/C
(c) गोले के केन्द्र से दूरी, \( r = 18 \) सेमी \( = 0.18 \) मीटर पर स्थित बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र
\( E_0 = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{q}{r^2} = 9 \times 10^9 \times \frac{1.6 \times 10^{-7}}{(0.18)^2} \)
\( = 4.4 \times 10^4 \) न्यूटन/कूलॉमIn simple words: एक गोलीय चालक के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है। इसकी सतह पर विद्युत क्षेत्र का मान सबसे अधिक होता है और सतह से दूर जाने पर यह घटता जाता है।
🎯 Exam Tip: गोलीय चालकों के लिए गाउस के नियम का उपयोग करके विद्युत क्षेत्र की गणना करना सीखें। सतह के अंदर, बाहर और सतह पर विद्युत क्षेत्र के सूत्रों को याद रखें।
Question 5. एक समान्तर पट्टिका संधारित्र, जिसकी पट्टिकाओं के बीच वायु है, की धारिता 8 pF (1 pF = 10-12 F) है। यदि पट्टिकाओं के बीच की दूरी को आधा कर दिया जाए और इनके बीच के स्थान में 6 परावैद्युतक' का एक पदार्थ भर दिया जाए तो इसकी धारिता क्या होगी?
Answer:हल-
दिया है : पट्टिकाओं के बीच वायु होने पर समान्तर पट्ट संधारित्र की धारिता
\( C_0 = 8 \) pF \( = 8 \times 10^{-12} \) F
यदि प्रत्येक पट्टिका का क्षेत्रफल \( = A \)
तथा पट्टिकाओं के बीच दूरी \( = d \) हो, तो
\( C_0 = \frac{\varepsilon_0 A}{d} \quad ...(1) \)
पट्टिकाओं के बीच परावैद्युत पदार्थ भरने पर, तथा बीच की दूरी आधी \( \left(\frac{d}{2}\right) \) करने पर
\( \varepsilon = \varepsilon_0 K \)
C = संधारित्र की परावैद्युत पदार्थ की उपस्थिति में धारिता
\( K = 6 \)
इस प्रकार
\( C = \frac{\varepsilon A}{(d/2)} = \frac{\varepsilon_0 K A}{(d/2)} = \frac{2 K \varepsilon_0 A}{d} \quad ...(2) \)
समी० (2) में (1) से भाग देने पर
\( \frac{C}{C_0} = 2K \)
\( \implies C = 2KC_0 \)
\( = 2 \times 6 \times 8 \times 10^{-12} \) F
\( = 96 \times 10^{-12} \) F
\( = 96 \) pFIn simple words: एक संधारित्र की धारिता उसकी प्लेटों के बीच की दूरी कम करने और परावैद्युत माध्यम डालने से बढ़ जाती है। यदि दूरी आधी कर दी जाए और परावैद्युत भरा जाए, तो धारिता गुणात्मक रूप से बढ़ती है।
🎯 Exam Tip: संधारित्र की धारिता के लिए सूत्र \( C = \frac{K \varepsilon_0 A}{d} \) को याद रखें। ध्यान दें कि परावैद्युत स्थिरांक (K) और प्लेटों के बीच की दूरी (d) धारिता को कैसे प्रभावित करते हैं।
Question 6. 9 pF धारिता वाले तीन संधारित्रों को श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है।
(a) संयोजन की कुल धारिता क्या है?
(b) यदि संयोजन को 120 V के संभरण (सप्लाई) से जोड़ दिया जाए, तो प्रत्येक संधारित्र पर क्या विभवान्तर होगा?
Answer:हल-
तीनों संधारित्रों में प्रत्येक की धारिता 9 pF है।
अर्थात् \( C_1 = C_2 = C_3 = 9 \) pF; संभरण वोल्टता \( V = 120 \) वोल्ट
(a) यदि इनके श्रेणी संयोजन की कुल धारिता \( C_s \) हो
\( \therefore \frac{1}{C_s} = \frac{1}{C_1} + \frac{1}{C_2} + \frac{1}{C_3} = \frac{1}{9 \, \text{pF}} + \frac{1}{9 \, \text{pF}} + \frac{1}{9 \, \text{pF}} = \frac{3}{9 \, \text{pF}} \)
\( \implies C_s = 3 \) pF
(b) संधारित्रों के श्रेणी संयोजन पर कुल आवेश \( Q = C_s V = 3 \) pF \( \times 120 \) वोल्ट। श्रेणी संयोजन में प्रत्येक पर आवेश समान होगा। चूँकि प्रत्येक की धारिता भी समान है, अतः प्रत्येक संधारित्र का विभवान्तर भी समान होगा।
\( \therefore V_1 = V_2 = V_3 = \frac{Q}{C_1} = \frac{Q}{C_2} = \frac{Q}{C_3} \)
\( = \frac{3 \, \text{pF} \times 120 \, \text{वोल्ट}}{9 \, \text{pF}} = 40 \) वोल्टIn simple words: श्रेणी क्रम में जुड़े संधारित्रों की कुल धारिता व्यक्तिगत धारिताओं के व्युत्क्रमों के योग का व्युत्क्रम होती है। श्रेणी क्रम में, प्रत्येक संधारित्र पर आवेश समान रहता है, और यदि धारिताएं भी समान हों, तो विभवांतर भी समान रूप से विभाजित होता है।
🎯 Exam Tip: श्रेणी क्रम संयोजन में, आवेश समान रहता है और कुल विभवान्तर व्यक्तिगत विभवान्तरों का योग होता है। समानांतर संयोजन में, विभवान्तर समान रहता है और कुल आवेश व्यक्तिगत आवेशों का योग होता है। इन नियमों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 7. 2 pF, 3 pF और 4 pF धारिता वाले तीन संधारित्र पाश्र्वक्रम में जोड़े गए हैं।
(a) संयोजन की कुल धारिता क्या है?
(b) यदि संयोजन को 100 V के संभरण से जोड़ दें तो प्रत्येक संधारित्र पर आवेश ज्ञात कीजिए ।
Answer:हल-
यहाँ \( C_1 = 2 \) pF, \( C_2 = 3 \) pF, \( C_3 = 4 \) pF तथा संभरण वोल्टता \( V = 100 \) वोल्ट
(a) संधारित्रों के पाश्र्वक्रम (समान्तर संयोजन) की कुल धारिता
\( C = C_1 + C_2 + C_3 = 2 \, \text{pF} + 3 \, \text{pF} + 4 \, \text{pF} = 9 \) pF
(b) पाश्र्वक्रम संयोजन के प्रत्येक संधारित्र के सिरों के बीच वोल्टता संभरण वोल्टता के बराबर ही होगी अर्थात् \( V = 100 \) वोल्ट
अतः \( C_1 = 2 \) pF \( = 2 \times 10^{-12} \) F पर आवेश
\( Q_1 = C_1 \times V = 2 \times 10^{-12} \, \text{F} \times 100 \, \text{वोल्ट} = 2 \times 10^{-10} \) कूलॉम
\( C_2 = 3 \) pF \( = 3 \times 10^{-12} \) F पर आवेश
\( Q_2 = C_2 \times V = 3 \times 10^{-12} \, \text{F} \times 100 \, \text{वोल्ट} = 3 \times 10^{-10} \) कूलॉम
\( C_3 = 4 \) pF \( = 4 \times 10^{-12} \) F पर आवेश
\( Q_3 = C_3 \times V = 4 \times 10^{-12} \, \text{F} \times 100 \, \text{वोल्ट} = 4 \times 10^{-10} \) कूलॉमIn simple words: समानांतर क्रम में, कुल धारिता व्यक्तिगत धारिताओं का सीधा योग होती है। सभी संधारित्रों पर विभवांतर समान रहता है, लेकिन प्रत्येक संधारित्र पर आवेश उसकी अपनी धारिता के अनुपात में भिन्न होता है।
🎯 Exam Tip: समानांतर क्रम संयोजन में, प्रत्येक संधारित्र पर विभव स्रोत के विभव के बराबर होता है। आवेश की गणना \( Q = CV \) सूत्र का उपयोग करके की जाती है, जहाँ C प्रत्येक संधारित्र की व्यक्तिगत धारिता है।
Question 8. पट्टिकाओं के बीच वायु वाले समान्तर पट्टिको संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका का क्षेत्रफल 6 x 10-3 m² तथा उनके बीच की दूरी 3 mm है। संधारित्र की धारिता को परिकलित कीजिए। यदि इस संधारित्र को 100 V के संभरण से जोड़ दिया जाए तो संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका पर कितना आवेश होगा?
Answer:हल-
दिया है, प्लेट क्षेत्रफल \( A = 6 \times 10^{-3} \) m², \( V = 100 \) वोल्ट
बीच की दूरी \( d = 3 \) mm \( = 3 \times 10^{-3} \) m
धारिता \( C = ? \), प्रत्येक पट्टी पर आवेश \( = ? \)
सूत्र \( C = \frac{\varepsilon_0 A}{d} \) से,
धारिता \( C = \frac{8.854 \times 10^{-12} \times 6 \times 10^{-3}}{3 \times 10^{-3}} \)
\( = 17.7 \) pF \( = 18 \) pF (लगभग)
संधारित्र पर आवेश \( q = C V = 17.7 \times 10^{-12} \times 100 \)
\( = 17.7 \times 10^{-10} \) C
\( \therefore \) एक पट्टी पर आवेश \( = + 17.7 \times 10^{-10} \) C
दूसरी पट्टी पर आवेश \( = - 17.7 \times 10^{-10} \) CIn simple words: एक समानांतर प्लेट संधारित्र की धारिता प्लेटों के क्षेत्रफल के सीधे आनुपातिक और उनके बीच की दूरी के व्युत्क्रमानुपातिक होती है। आवेश की गणना धारिता और विभव के गुणनफल से होती है, जिसमें प्लेटों पर समान और विपरीत आवेश होते हैं।
🎯 Exam Tip: समानांतर प्लेट संधारित्र की धारिता के लिए सूत्र \( C = \frac{\varepsilon_0 A}{d} \) को याद रखें। आवेश की गणना \( Q = CV \) से करें, और ध्यान दें कि प्रत्येक प्लेट पर आवेश का परिमाण समान लेकिन चिह्न विपरीत होता है।
Question 9. प्रश्न 8 में दिए गए संधारित्र की पट्टिकाओं के बीच यदि 3 mm मोटी अभ्रक की एक शीट (पत्तर) (परावैद्युतांक = 6) रख दी जाती है तो स्पष्ट कीजिए कि क्या होगा जब
(a) विभव (वोल्टेज) संभरण जुड़ा ही रहेगा।
(b) संभरण को हटा लिया जाएगा?
Answer:हल-
प्रश्न 8 के परिणाम से,
\( V = 100 \) वोल्ट,
\( q = 18 \times 10^{-10} \) C
अब माध्यम का परावैद्युतांक \( K = 6 \)
परावैद्युत की मोटाई \( t = 3 \) mm \( = 3 \times 10^{-3} \) m
\( t = d \); अतः संधारित्र पूर्णतः परावैद्युत द्वारा भरा है।
संधारित्र की नई धारिता \( C = KC_0 = 6 \times 18 \) pF [\( C_0 = 18 \) pF]
\( = 108 \) pF
(a) विभव संभरण जुड़ा हुआ है; अतः संधारित्र का विभवान्तर नियत अर्थात् \( 100 \) वोल्ट रहेगा।
संधारित्र पर नया आवेश \( q = CV = 108 \times 10^{-12} \times 100 \)
\( = 1.08 \times 10^{-8} \) C
अतः इस स्थिति में, \( C = 108 \) pF, \( V = 100 \) V, \( q = 1.08 \times 10^{-8} \) C
(b) विभव संभरण हटा लिया गया है; अतः संधारित्र पर आवेश \( q = 18 \times 10^{-10} \) C नियत रहेगा।
\( \therefore \) नया विभवान्तर \( V = \frac{q}{C} = \frac{18 \times 10^{-10}}{108 \times 10^{-12}} \)
\( = \frac{1800}{108} = \frac{50}{3} \) V
अतः \( C = 108 \) pF, \( V = \frac{50}{3} \) V \( = 16.6 \) V, \( q = 1.8 \times 10^{-9} \) CIn simple words: जब एक संधारित्र में परावैद्युत पदार्थ डाला जाता है, तो उसकी धारिता बढ़ जाती है। यदि बैटरी जुड़ी रहे, तो विभव स्थिर रहता है और आवेश बढ़ जाता है। यदि बैटरी हटा दी जाए, तो आवेश स्थिर रहता है और विभव घट जाता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में दो परिदृश्यों को समझें: (1) बैटरी जुड़ी रहने पर विभव स्थिर रहता है और (2) बैटरी हटाए जाने पर आवेश स्थिर रहता है। इन दोनों स्थितियों में धारिता, आवेश और विभव के परिवर्तनों की गणना करें।
Question 10. 12pF का एक संधारित्र 50 V की बैटरी से जुड़ा है। संधारित्र में कितनी स्थिर विद्युत ऊर्जा संचित होगी?
Answer:हल-
यहाँ \( C = 12 \) pF \( = 12 \times 10^{-12} \) फैरड; \( V = 50 \) वोल्ट
अतः स्थिर वैद्युत ऊर्जा
\( U = \frac{1}{2} CV^2 \)
\( = \frac{1}{2} \times (12 \times 10^{-12}) \times (50)^2 \) जूल
\( = 1.50 \times 10^{-8} \) जूलIn simple words: एक संधारित्र में संचित ऊर्जा उसकी धारिता और उस पर लागू विभव के वर्ग के समानुपाती होती है। यह ऊर्जा विद्युत क्षेत्र के रूप में संधारित्र के अंदर जमा होती है।
🎯 Exam Tip: संधारित्र में संचित ऊर्जा का सूत्र \( U = \frac{1}{2} CV^2 = \frac{1}{2} \frac{Q^2}{C} = \frac{1}{2} QV \) याद रखें। इकाइयों का सही ढंग से उपयोग करना और pF को फैरड में बदलना न भूलें।
Question 11. 200 V संभरण (सप्लाई) से एक 600 pF से संधारित्र को आवेशित किया जाता है। फिर इसको संभरण से वियोजित कर देते हैं तथा एक अन्य 600 pF वाले अनावेशित संधारित्र से जोड़ देते हैं। इस प्रक्रिया में कितनी ऊर्जा का ह्रास होता है?
Answer:हल-
दिया है, धारिताएँ \( C_1 = 600 \times 10^{-12} \) F, \( C_2 = 600 \times 10^{-12} \) F
विभवान्तर \( V_1 = 200 \) V, \( V_2 = 0 \) V.
प्रक्रिया में ऊर्जा का ह्रास \( \Delta U = ? \)
आवेश के बाद संभरण को हटा दिया जाता है; अतः निकाय पर कुल आवेश नियत रहेगा।
माना संधारित्रों को जोड़ने पर उनका उभयनिष्ठ विभव \( V \) है,
तब
\( q = C_1 V_1 + C_2 V_2 = (C_1 + C_2) V \)
\( \implies 600 \times 10^{-12} \times 200 + 0 = [600 + 600] \times 10^{-12} \times V \)
\( \therefore V = \frac{600 \times 200}{1200} = 100 \) वोल्ट
\( \therefore \) निकाय की प्रारम्भिक ऊर्जा
\( U = \frac{1}{2} C_1 V_1^2 + \frac{1}{2} C_2 V_2^2 = \frac{1}{2} \times 600 \times 10^{-12} \times (200)^2 + 0 \)
\( = 12 \times 10^{-6} \) J
अन्तिम ऊर्जा \( U' = \frac{1}{2} (C_1 + C_2) V^2 \)
\( = \frac{1}{2} [600 \times 10^{-12} + 600 \times 10^{-12}] \times (100)^2 \)
\( = 6 \times 10^{-6} \) J
\( \therefore \) ऊर्जा का ह्रास \( \Delta U = U - U' = 6 \times 10^{-6} \) J
अन्य विधि : ऊर्जा का ह्रास \( \Delta U = \frac{1}{2} \frac{C_1 C_2}{(C_1 + C_2)} (V_1 - V_2)^2 \)
\( = \frac{1}{2} \times \frac{600 \times 10^{-12} \times 600 \times 10^{-12}}{[600 + 600] \times 10^{-12}} (200 - 0)^2 \)
\( = 6 \times 10^{-6} \) JIn simple words: जब एक आवेशित संधारित्र को एक अनावेशित संधारित्र से जोड़ा जाता है, तो आवेश का पुनर्वितरण होता है जिसके परिणामस्वरूप ऊर्जा का नुकसान होता है। यह नुकसान प्रारंभिक कुल ऊर्जा और अंतिम कुल ऊर्जा के बीच का अंतर होता है।
🎯 Exam Tip: ऊर्जा हानि की गणना के लिए, पहले और बाद में कुल ऊर्जा की गणना करें। उभयनिष्ठ विभव का सूत्र \( V = \frac{C_1 V_1 + C_2 V_2}{C_1 + C_2} \) और ऊर्जा हानि का सीधा सूत्र \( \Delta U = \frac{1}{2} \frac{C_1 C_2}{(C_1 + C_2)} (V_1 - V_2)^2 \) याद रखें।
अतिरिक्त अभ्यास
Question 12. मूल बिन्दु पर एक 8 mC का आवेश अवस्थित है। -2 x 10-9 के एक छोटे से आवेश को बिन्दु P(0, 0, 3 cm) से, बिन्दु R(0, 6 cm, 9cm) से होकर, बिन्दु Q(0, 4 cm, 0) तक ले जाने में किया गया कार्य परिकलित कीजिए।
Answer:हल-
मूल बिन्दु पर आवेश \( Q = 8 \times 10^{-3} \) C
दूसरा आवेश \( q = -2 \times 10^{-9} \) C
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 3D समन्वय प्रणाली में तीन बिंदु P(0,0,3), R(0,6,9) और Q(0,4,0) को दर्शाता है। मूल बिंदु O पर एक बड़ा आवेश Q रखा गया है। यह आरेख दर्शाता है कि एक छोटा परीक्षण आवेश q को P से Q तक R से होकर ले जाया जाता है।
स्थिरविद्युत क्षेत्र में किसी आवेश को एक बिन्दु से दूसरी बिन्दु तक ले जाने में किया जाने वाला कार्य मार्ग के स्थान पर अन्त्य बिन्दुओं पर निर्भर करता है।
आवेश \( q \) को बिन्दु P से Q तक ले जाने में किया गया कार्य
\( W = q (V_Q - V_P) \)
यहाँ बिन्दु Q की मूल बिन्दु से दूरी \( r_Q = OQ = 0.04 \) m
तथा बिन्दु P की मूल बिन्दु से दूरी \( r_P = OP = 0.03 \) m
मूल बिन्दु पर स्थित आवेश \( Q \) के कारण Q व P के बीच विभवान्तर
\( V_Q - V_P = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} Q \left[ \frac{1}{r_Q} - \frac{1}{r_P} \right] \)
\( = 9 \times 10^9 \times 8 \times 10^{-3} \left[ \frac{1}{0.04} - \frac{1}{0.03} \right] \)
\( = 72 \times 10^6 \left[ \frac{3 - 4}{0.12} \right] \)
\( = 72 \times 10^6 \left[ \frac{-1}{0.12} \right] = -6 \times 10^8 \) V
\( \therefore \) अभीष्ट कार्य \( W = q (V_Q - V_P) = (-2 \times 10^{-9}) \times (-6 \times 10^8) \)
\( = 1.2 \) JIn simple words: स्थिरवैद्युत क्षेत्र में किसी आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य केवल प्रारंभिक और अंतिम बिंदुओं पर निर्भर करता है, न कि तय किए गए मार्ग पर। यहाँ, कार्य की गणना दो बिंदुओं के बीच विभव अंतर को परीक्षण आवेश से गुणा करके की जाती है।
🎯 Exam Tip: स्थिरवैद्युत बल एक संरक्षी बल है, इसलिए किसी आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य पथ पर निर्भर नहीं करता। केवल प्रारंभिक और अंतिम विभवों की गणना करें।
Question 13. b भुजा वाले एक घन के प्रत्येक शीर्ष पर q आवेश है। इस आवेश विन्यास के कारण घन के केन्द्र पर विद्युत विभव तथा विद्युत-क्षेत्र ज्ञात कीजिए।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 'b' भुजा वाले एक घन को दर्शाता है। घन के सभी आठ शीर्षों पर 'q' आवेश रखा गया है। घन के केंद्र O को भी चिह्नित किया गया है, जहाँ विकर्ण AF, EB, CH और GD प्रतिच्छेद करते हैं। यह केंद्र से प्रत्येक शीर्ष की दूरी को समझने में मदद करता है।
हल-
चित्र 2.6 में घन की भुजा \( = b \)
अतः घन का प्रत्येक विकर्ण \( = \sqrt{b^2 + b^2 + b^2} = b\sqrt{3} \)
घन के प्रत्येक शीर्ष पर स्थित आवेश \( = q \) तथा प्रत्येक आवेश की घन के केन्द्र O (चारों विकर्णों AF, EB, CH तथा GD का छेदन बिन्दु, जो इनका मध्य बिन्दु होता है) से दूरी
\( r = \frac{\text{विकर्ण}}{2} = \frac{b\sqrt{3}}{2} \)
अतः प्रत्येक शीर्ष पर स्थित आवेश के कारण O पर विभव समान होगा।
अतः O पर परिणामी विभव
\( V = 8 \times \) एक शीर्ष पर स्थित आवेश के कारण विभव चूँकि प्रत्येक विकर्ण के
\( = 8 \times \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{q}{(b\sqrt{3}/2)} \)
\( = 8 \times \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{2q}{b\sqrt{3}} = \frac{16q}{4 \pi \varepsilon_0 b\sqrt{3}} = \frac{4q}{\pi \varepsilon_0 b\sqrt{3}} \)
शीर्ष पर समान परिमाण तथा समान प्रकृति के आवेश स्थित हैं, अतः इनके कारण O पर तीव्रता परिमाण में बराबर तथा दिशा में विपरीत होगी। अतः ये एक-दूसरे को निरस्त कर देंगी। अतः O पर परिणामी तीव्रता शून्य होगी।In simple words: एक घन के केंद्र पर कुल विभव, सभी शीर्षों पर रखे आवेशों के कारण विभवों का योग होता है। केंद्र से सभी शीर्षों की दूरी समान होती है। केंद्र पर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है क्योंकि सभी आवेशों के कारण क्षेत्र सदिश रूप से एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं।
🎯 Exam Tip: घन के केंद्र पर विभव की गणना के लिए, केंद्र से किसी एक शीर्ष की दूरी ज्ञात करें और उसे 8 से गुणा करें। विद्युत क्षेत्र के लिए, सममिति के कारण विपरीत आवेशों के क्षेत्र एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं, जिससे कुल क्षेत्र शून्य हो जाता है।
Question 14. 1.5 µC और 2.5 µC आवेश वाले दो सूक्ष्म गोले 30 cm दूर स्थित हैं।
(a) दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के मध्य बिन्दु पर, और
(b) मध्य बिन्दु से होकर जाने वाली रेखा के अभिलम्ब तल में मध्य बिन्दु से 10 cm दूर स्थित किसी बिन्दु पर विभव और विद्युत-क्षेत्र ज्ञात कीजिए ।
Answer:हल-
(a) मध्य बिन्दु की प्रत्येक आवेश से दूरी
\( r_A = r_B = 0.15 \) m
मध्य बिन्दु पर विभव
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो आवेशों, 1.5 x 10-6 C (A पर) और 2.5 x 10-6 C (B पर), को दर्शाता है जो एक दूसरे से 30 सेमी दूर हैं। बिंदु O मध्य बिंदु है, जहाँ से 0.15 मीटर की दूरियां दोनों आवेशों तक हैं। तीर \(E_A\) और \(E_B\) विद्युत क्षेत्र की दिशाएँ दिखाते हैं।
\( V = V_A + V_B = 9 \times 10^9 \left[ \frac{q_A}{r_A} + \frac{q_B}{r_B} \right] \)
\( = 9 \times 10^9 \left[ \frac{1.5 \times 10^{-6}}{0.15} + \frac{2.5 \times 10^{-6}}{0.15} \right] = 2.4 \times 10^5 \) V
माना \( q_A \) व \( q_B \) के कारण विद्युत क्षेत्र \( E_A \) तथा \( E_B \) हैं तब \( E_B > E_A \)
\( \therefore \) मध्य बिन्दु पर विद्युत-क्षेत्र
\( E = E_B - E_A = 9 \times 10^9 \times \frac{q_B}{r_B^2} - 9 \times 10^9 \times \frac{q_A}{r_A^2} \)
\( = 9 \times 10^9 \left[ \frac{2.5 \times 10^{-6}}{0.15 \times 0.15} - \frac{1.5 \times 10^{-6}}{0.15 \times 0.15} \right] \)
\( \implies E = 4.0 \times 10^5 \) Vm-1 बड़े से छोटे आवेश की दिशा में
(b) माना हमें बिन्दु P पर विद्युत विभव तथा विद्युत-क्षेत्र ज्ञात करना है।
तब \( AP^2 = BP^2 = 15^2 + 10^2 \)
\( = 325 = 25 \times 13 \)
\( \implies AP = BP = 5\sqrt{13} \) cm
\( = 18 \) cm \( = 0.18 \) m
\( \therefore \) बिन्दु P पर विभव
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो आवेशों को दर्शाता है, जो A और B बिंदुओं पर रखे गए हैं। बिंदु P, A और B को मिलाने वाली रेखा के लंबवत मध्य बिंदु O से 10 सेमी की दूरी पर स्थित है। A, O से 15 सेमी की दूरी पर है। यह P पर विद्युत क्षेत्र \(E_A\) और \(E_B\) की दिशाओं को भी दिखाता है।
\( V = V_A + V_B = 9 \times 10^9 \left[ \frac{2.5 \times 10^{-6}}{0.18} + \frac{1.5 \times 10^{-6}}{0.18} \right] \)
\( = 2 \times 10^5 \) V
बिन्दु P पर \( q_A \) के कारण विद्युत-क्षेत्र
\( E_A = 9 \times 10^9 \times \frac{1.5 \times 10^{-6}}{(0.18)^2} = 4.17 \times 10^{-5} \) N/C AP दिशा में
\( q_B \) के कारण बिन्दु P पर विद्युत-क्षेत्र
\( E_B = 9 \times 10^9 \times \frac{2.5 \times 10^{-6}}{(0.18)^2} = 6.94 \times 10^5 \) N/C BP दिशा में
माना परिणामी क्षेत्र BP दिशा से \( (\text{E}_B \text{ की दिशा से } \beta) \) कोण बनाता है, तब
\( \tan \beta = \frac{E_A \sin \theta}{E_B + E_A \cos \theta} \)
\( = \frac{4.17 \times 0.92}{6.94 + 4.17 \times (-0.38)} = \frac{3.8364}{6.94 - 1.5846} = \frac{3.8364}{5.3554} = 0.716 \)
\( \implies \beta = \tan^{-1} (0.716) = 35.6^{\circ} \)
\( \therefore \) परिणामी क्षेत्र द्वारा BA दिशा से बनाया गया कोण
\( \phi = \angle ABP + \beta = 90^\circ - \alpha + 35.6^\circ \)
\( = 90^\circ - 56.3^\circ + 35.6^\circ = 69.3^\circ \)
अतः परिणामी क्षेत्र \( 6.6 \times 10^5 \) Vm-1 है जो BA दिशा से \( 69^\circ \) का कोण बनाता है।In simple words: दो आवेशों के कारण किसी बिंदु पर विभव और विद्युत क्षेत्र की गणना के लिए, प्रत्येक आवेश के कारण व्यक्तिगत विभव और क्षेत्र को सदिश रूप से जोड़ें। मध्य बिंदु पर, क्षेत्र विपरीत दिशाओं में होने के कारण घटते हैं, जबकि विभव जुड़ते हैं।
🎯 Exam Tip: विभव एक अदिश राशि है और बीजगणितीय रूप से जुड़ता है, जबकि विद्युत क्षेत्र एक सदिश राशि है और इसे सदिश योग द्वारा जोड़ा जाना चाहिए, जिसमें दिशा का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।
Question 15. आन्तरिक त्रिज्या तथा बाह्य त्रिज्या \( r_1 \) वाले एक गोलीय चालक खोल (कोश) पर \( r_2 \) आवेश है।
(a) खोल के केन्द्र पर एक आवेश \( q \) रखा जाता है। खोल के भीतरी और बाहरी पृष्ठों पर पृष्ठ आवेश घनत्व क्या है?
(b) क्या किसी कोटर (जो आवेश विहीन है) में विद्युत-क्षेत्र शून्य होता है, चाहे खोल गोलीय न होकर किसी भी अनियमित आकार का हो? स्पष्ट कीजिए।
Answer:हल-
(a) जब चालक को केवल \( Q \) आवेश दिया गया है तो यह पूर्णतः चालक के बाह्य पृष्ठ पर रहता है। हम जानते हैं कि एक चालक के भीतर नैट आवेश शून्य रहता है; अतः खोल के केन्द्र पर \( q \) आवेश रखने पर, खोल की भीतरी सतह पर \( -q \) आवेश प्रेरित हो जाता है तथा बाहरी सतह पर अतिरिक्त \( + q \) आवेश आ जाता है।
अतः
भीतरी सतह पर आवेश \( = -q \)
बाहरी सतह पर आवेश \( = Q + q \)
भीतरी सतह पर पृष्ठीय आवेश घनत्व \( \sigma_1 = \frac{-q}{4 \pi r^2} \) (b) हाँ, यदि कोटर आवेशविहीन है तो
तथा बाहरी सतह पर पृष्ठीय आवेश घनत्व \( \sigma_2 = \frac{Q+q}{4 \pi r_2^2} \)
उसके अन्दर विद्युत-क्षेत्र शून्य होगा। इसके विपरीत कल्पना करें कि किसी चालक के भीतर एक अनियमित आकृति का आवेशविहीन कोटर है जिसके भीतर विद्युत-क्षेत्र शून्य नहीं है। अब एक ऐसे बन्द लूप पर विचार करें जिसका कुछ भाग कोटर के भीतर क्षेत्र रेखाओं के समान्तर है तथा शेष भाग कोटर से बाहर परन्तु चालक के भीतर है। चूंकि चालक के भीतर विद्युत-क्षेत्र शून्य है; अतः यदि एकांक आवेश को इस बन्द लूप के अनुदिश ले जाया जाए तो क्षेत्र द्वारा किया गया नैट कार्य प्राप्त होगा। परन्तु यह स्थिति स्थिरविद्युत क्षेत्र के लिए सत्य नहीं है (बन्द लूप पर नैट कार्य शून्य होता है)। अतः हमारी परिकल्पना कि कोटर के भीतर विद्युत-क्षेत्र शून्य नहीं है, गलत है। अर्थात् चालक के भीतर आवेशविहीन कोटर के भीतर विद्युत-क्षेत्र शून्य होगा।In simple words:
(a) एक गोलीय चालक खोल में, केंद्र में आवेश रखने पर, आंतरिक सतह पर प्रेरित आवेश उत्पन्न होता है और बाहरी सतह पर कुल आवेश बढ़ जाता है।
(b) किसी भी आकार के आवेशविहीन कोटर के अंदर विद्युत क्षेत्र हमेशा शून्य होता है।
🎯 Exam Tip: चालक के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है, यह गाउस के नियम का एक महत्वपूर्ण परिणाम है। आवेशित चालक की सतह पर आवेश का वितरण और प्रेरित आवेश की अवधारणाओं को अच्छी तरह समझें।
Question 16.(a) दर्शाइए कि आवेशित पृष्ठ के एक पाश्र्व से दूसरे पाश्र्व पर स्थिरविद्युत-क्षेत्र के अभिलम्ब घटक में असांतत्य होता है, जिसे
\( (\vec{E}_2 - \vec{E}_1) \hat{n} = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} \)
द्वारा व्यक्त किया जाता है। जहाँ एक बिन्दु पर पृष्ठ के अभिलम्ब एकांक सदिश है तथा \( \sigma \) उस बिन्दु पर पृष्ठ आवेश घनत्व है (\( \hat{n} \) की दिशा पाश्र्व 1 से पाश्र्व 2 की ओर है)। अतः
दर्शाइए कि चालक के ठीक बाहर विद्युत-क्षेत्र \( \frac{\sigma \hat{n}}{\varepsilon_0} \) है।
(b) दर्शाइए कि आवेशित पृष्ठ के एक पाश्र्व से दूसरे पाश्र्व पर स्थिरविद्युत-क्षेत्र का स्पर्शीय घटक संतत है।
[संकेत- (a) के लिए गौस-नियम का उपयोग कीजिए।
(b) के लिए इस तथ्य का उपयोग करें कि संवृत पाश पर एक स्थिर वैद्युत क्षेत्र द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है।]
Answer:उत्तर-
(a) माना AB एक आवेशित पृष्ठ है जिस पर पृष्ठीय आवेश घनत्व \( \sigma \) है। पृष्ठ के समीप प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत-क्षेत्र \( \vec{E} \) समान तथा पृष्ठ के लम्बवत् बाहर की ओर है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक आवेशित सतह AB को दर्शाता है, जिसके माध्यम से एक बेलनाकार गाउसीय पृष्ठ गुजर रहा है। गाउसीय सतह के दोनों वृत्ताकार फलकों पर विद्युत क्षेत्र \(E_1\) और \(E_2\) और क्षेत्र सदिश dA समानांतर दिखाए गए हैं। सतह के वक्र भाग पर विद्युत क्षेत्र \(E_3\) और dA लंबवत हैं।
चित्र में एक बेलनाकार गाउसीय पृष्ठ को प्रदर्शित किया गया है। इस पृष्ठ के वृत्ताकार परिच्छेदों पर अभिलम्ब सदिश \( \hat{n}_1 \) व \( \hat{n}_2 \) क्रमशः क्षेत्रों \( \vec{E}_1 \) व \( \vec{E}_2 \) के समदिश हैं जबकि वक्र पृष्ठ पर अभिलम्ब संगत क्षेत्र \( \vec{E}_3 \) के लम्बवत् हैं।
माना प्रत्येक वृत्तीय परिच्छेद का क्षेत्रफल \( \Delta A \) है तब गाउसीय पृष्ठ से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स
\( \oint \vec{E} . d\vec{A} = \int_I \vec{E}_1 . d\vec{A} + \int_{II} \vec{E}_2 . d\vec{A} + \int_{III} \vec{E}_3 . d\vec{A} \)
\( = \int_I E_1 dA + \int_{II} E_2 dA + 0 \) [\( \because \) वक्र पृष्ठ पर \( E_3 \perp dA \)]
\( = E_1 \int_I dA + E_2 \int_{II} dA \) [\( \because \) वृत्तीय पृष्ठों पर \( E_1 \) व \( E_2 \) नियत हैं तथा \( E_1 || dA, E_2 || dA \)]
\( = E_1 \Delta A + E_2 \Delta A \)
परन्तु गाउस प्रमेय से, \( \oint \vec{E} . d\vec{A} = \frac{1}{\varepsilon_0} q = \frac{1}{\varepsilon_0} (\sigma \Delta A) \)
\( \implies E_1 \Delta A + E_2 \Delta A = \frac{\sigma \Delta A}{\varepsilon_0} \)
\( \implies E_1 + E_2 = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} \quad ...(1) \)
जहाँ \( E_1 \) व \( E_2 \) क्रमशः \( |\vec{E}_1| \) व \( |\vec{E}_2| \) के परिमाण हैं।
स्पष्ट है कि
\( \vec{E}_1 = E_1 \hat{n}_1 \) व \( \vec{E}_2 = E_2 \hat{n}_2 \)
\( \therefore \vec{E}_1 . \hat{n}_2 = E_1 \hat{n}_1 . \hat{n}_2 \)
परन्तु \( \hat{n}_1 = -\hat{n}_2 \)
\( \implies -\vec{E}_1 . \hat{n}_2 = E_1 \)
अतः समीकरण (1) में मान रखने पर,
\( (\vec{E}_2 - \vec{E}_1) . \hat{n}_2 = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} \)
\( \implies (\vec{E}_2 - \vec{E}_1) . \hat{n} = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} \quad ...(2) \)
जहाँ \( \hat{n} \) की दिशा (अर्थात् \( \hat{n}_2 \) की दिशा) पार्श्व 2 से पार्श्व 1 की ओर है।
उपर्युक्त समीकरण (2) किसी आवेशित सतह के दोनों ओर स्थिरविद्युत-क्षेत्रों के बीच सम्बन्ध को व्यक्त करता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक अनियमित आकार के आवेशित चालक को दर्शाता है। चालक के बाहरी पृष्ठ पर \(E_1\) (चालक के भीतर क्षेत्र) और \(E_2\) (चालक के बाहर क्षेत्र) विद्युत क्षेत्र सदिश दिखाए गए हैं। यह दर्शाता है कि चालक के अंदर क्षेत्र शून्य है और बाहर क्षेत्र सतह के लंबवत है।
अब संलग्न चित्र में प्रदर्शित अनियमित आकृति के आवेशित चालक पर विचार कीजिए। चालक का सम्पूर्ण आवेश उसकी बाह्य सतह पर फैला है; अतः चालक की बाह्य सतह एक समविभव पृष्ठ है। आइए हम समीकरण (2) को इस चालक के बाहर विद्युत-क्षेत्र ज्ञात करने के लिए प्रयुक्त करते हैं।
चित्र से स्पष्ट है कि विद्युत क्षेत्र \( E_1 \) चालक के भीतर है,
परन्तु चालक के भीतर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है; अतः \( E_1 = 0 \)
समीकरण (2) में \( E_1 = 0 \) रखने पर,
\( \vec{E}_2 . \hat{n} = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} \) या \( E_2 = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} \)
चालक के बाहर विद्युत-क्षेत्र \( E = E_2 = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} \)
सदिश रूप में \( \vec{E} = \frac{\sigma \hat{n}}{\varepsilon_0} \)
(b) आवेशित पृष्ठ के एक ओर से दूसरी ओर जाने पर स्थिरविद्युत-क्षेत्र का स्पर्श रेखीय घटक सतत (सर्वथा शून्य) होता है, अन्यथा पृष्ठ के विभिन्न बिन्दु अलग-अलग विभवों पर होंगे तथा धनावेश पृष्ठ के अनुदिश उच्च विभव से निम्न विभव के बिन्दुओं की ओर गति करता रहेगा।In simple words:
(a) आवेशित सतह पर विद्युत क्षेत्र का अभिलंब घटक असंतत होता है, यानी सतह के आर-पार क्षेत्र के मान में अचानक परिवर्तन होता है। एक चालक के ठीक बाहर विद्युत क्षेत्र सतह पर आवेश घनत्व के समानुपाती होता है।
(b) स्थिरविद्युत क्षेत्र का स्पर्शीय घटक सतह के आर-पार सतत होता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि पृष्ठ पर कोई विभव अंतर न हो।
🎯 Exam Tip: गाउस के नियम का उपयोग करके सतह के अभिलम्ब घटक की गणना करें, और संरक्षी क्षेत्र की अवधारणा का उपयोग करके स्पर्शीय घटक की निरंतरता को सिद्ध करें। ये दो घटक स्थिरवैद्युत क्षेत्र की महत्वपूर्ण सीमा शर्तें हैं।
Question 16.
(b) दर्शाइए कि आवेशित पृष्ठ के एक पाश्र्व से दूसरे पाश्र्व पर स्थिरविद्युत-क्षेत्र का स्पर्शीय घटक संतत है।
Answer: (b) आवेशित पृष्ठ के एक ओर से दूसरी ओर जाने पर स्थिरविद्युत-क्षेत्र का स्पर्श रेखीय घटक सतत (सर्वथा शून्य) होता है, अन्यथा पृष्ठ के विभिन्न बिन्दु अलग-अलग विभवों पर होंगे तथा धनावेश पृष्ठ के अनुदिश उच्च विभव से निम्न विभव के बिन्दुओं की ओर गति करता रहेगा।
In simple words: The tangential component of the electric field remains continuous (or zero) across an charged surface, otherwise there would be a potential difference along the surface, causing charge to flow.
🎯 Exam Tip: Understanding the continuity of tangential components of electric fields across a surface is crucial for explaining potential behavior and charge movement. Focus on the implication of non-zero tangential fields on potential difference.
Question 17. रैखिक आवेश घनत्व \( \lambda \) वाला एक लम्बा आवेशित बेलन एक खोखले समाक्षीय चालक बेलन द्वारा घिरा है। दोनों बेलनों के बीच के स्थान में विद्युत-क्षेत्र कितना है?
Answer: हल-दोनों बेलनों के बीच \( r \) त्रिज्या तथा \( l \) लम्बाई के समाक्षीय बेलनाकार गाउसीय पृष्ठ पर विचार कीजिए। सममिति के कारण इस बेलन के वक्र पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत-क्षेत्र \( E \) सर्वत्र समान तथा पृष्ठीय अल्पांश \( dA \) के समान्तर है जबकि वृत्तीय पृष्ठों पर अल्पांश \( dA \) के लम्बवत् है; अतः गाउसीय पृष्ठ से गुजरने वाला विद्युत-फ्लक्स \( \phi E = \oint E.dA = \int _{ वक्र पृष्ठ } E.dA+ \int _{ वृत्तीय पृष्ठ } E.dA \) या \( \phi E = \int _{ वक्र पृष्ठ } E.dA \cos 0+\int _{ वृत्तीय पृष्ठ } E.dA \cos 90^\circ \) (गाउस प्रमेय से) या \( \frac { q }{ \varepsilon 0 } = \frac { 1 }{ \varepsilon 0 } ( \lambda l ) = E \int _{ वक्र पृष्ठ } dA + 0 = E(A) \) [ \( q = \lambda l \) ]
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक आवेशित बेलन को दर्शाता है जिसके चारों ओर एक गाउसीय बेलनाकार पृष्ठ बना हुआ है। इसमें विद्युत क्षेत्र रेखाएं (E) और क्षेत्रफल सदिश (dA) दिखाए गए हैं, जो गाउसीय पृष्ठ से निकलने वाले विद्युत फ्लक्स की गणना के लिए आवश्यक हैं। \( \frac { \lambda l }{ \varepsilon 0 } = E (2\pi rl) \) \( \implies E = \frac { \lambda }{ 2\pi \varepsilon 0 r } \) यह दोनों बेलनों के बीच अक्ष से \( r \) दूरी पर विद्युत-क्षेत्र का सूत्र है।
In simple words: Between two concentric cylinders with linear charge density \( \lambda \), the electric field at a distance \( r \) from the axis is calculated using Gauss's Law, resulting in \( E = \frac { \lambda }{ 2\pi \varepsilon 0 r } \).
🎯 Exam Tip: When applying Gauss's Law to cylindrical symmetry, always choose a cylindrical Gaussian surface. Ensure the electric field is uniform and perpendicular to the curved surface, and either zero or parallel to the end caps for simplification. Remember to correctly identify the enclosed charge.
Question 18. एक हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटॉन लगभग 0.53 Å दूरी पर परिबद्ध हैं: (a) निकाय की स्थितिज ऊर्जा का eV में परिकलन कीजिए, जबकि प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन के मध्य की अनन्त दूरी पर स्थितिज ऊर्जा को शून्य माना गया है। (b) इलेक्ट्रॉन को स्वतन्त्र करने में कितना न्यूनतम कार्य करना पड़ेगा, यदि यह दिया गया है कि इसकी कक्षा में गतिज ऊर्जा (a) में प्राप्त स्थितिज ऊर्जा के परिमाण की आधी है? (c) यदि स्थितिज ऊर्जा को 1.06 Å पृथक्करण पर शून्य ले लिया जाए तो, उपर्युक्त (a) और (b) के उत्तर क्या होंगे?
Answer: हल- यहाँ \( q1 = -1.6 \times 10^{-19} \) C, \( q2 = +1.6 \times 10^{-19} \) C \( r = 0.53 \) Å \( = 5.3 \times 10^{-11} \) m (a) इलेक्ट्रॉन-प्रोटॉन के निकाय की विद्युत स्थितिज ऊर्जा \( U = \frac { 1 }{ 4\pi \varepsilon 0 } \frac { q1q2 }{ r } \) \( = 9 \times 10^9 \times \frac { (-1.6 \times 10^{-19}) \times (1.6 \times 10^{-19}) }{ 5.3 \times 10^{-11} } \) \( = -4.35 \times 10^{-18} \) J \( = \frac { -4.35 \times 10^{-18} }{ 1.6 \times 10^{-19} } \) eV \( = -27.17 \) eV \( = -27.2 \) eV (b) इलेक्ट्रॉन की स्थितिज ऊर्जा \( U = -27.17 \) eV तथा गतिज ऊर्जा \( K = \frac { |U| }{ 2 } = \frac { 1 }{ 2 } \times 27.2 \) eV \( = 13.6 \) eV माना इलेक्ट्रॉन को मुक्त करने के लिए आवश्यक कार्य \( = W \) तब \( W+U+ K = \) मुक्त होने के बाद इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा \( = 0 \) \( \implies W = -U - K = -(-27.2) - 13.6 = 13.6 \) eV (c) \( r' = 1.06 \) Å \( = 1.06 \times 10^{-10} \) m की दूरी पर निकाय की विद्युत स्थितिज ऊर्जा \( U' = \frac { 1 }{ 4\pi \varepsilon 0 } \frac { q1q2 }{ r' } \) \( = 9 \times 10^9 \times \frac { (-1.6 \times 10^{-19}) \times (1.6 \times 10^{-19}) }{ 1.06 \times 10^{-10} } \) \( = -2.175 \) J \( = -13.6 \) eV \( U' \) को शून्य मानने पर, \( r = 0.53 \) Å दूरी पर स्थितिज ऊर्जा \( U'' = U - U' = -27.2 + 13.6 = -13.6 \) eV जबकि \( K = 13.6 \) eV अतः हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा \( E = K + U'' = 0 \) अतः इलेक्ट्रॉन को मुक्त करने के लिए आवश्यक कार्य \( W = E - U' = 0 - (-13.6) = 13.6 \) eV
In simple words: The potential energy of an electron-proton system is negative, indicating a bound state. The minimum energy required to free the electron (ionization energy) is the positive value of the total energy, which is \( 13.6 \) eV for a hydrogen atom. Changing the reference point for zero potential energy shifts the values but the energy difference for freeing the electron remains the same.
🎯 Exam Tip: Always be mindful of the sign conventions for potential energy; negative indicates attraction and a bound system. Remember to convert units (Joules to electron-volts) when required. The ionization energy is the negative of the total mechanical energy in a bound system, if potential energy at infinity is zero.
Question 19. यदि H₂ अणु के दो में से एक इलेक्ट्रॉन को हटा दिया जाए तो हमें हाइड्रोजन आण्विक आयन (H₂⁺) प्राप्त होगा । (H₂⁺) की निम्नतम अवस्था (ground state) में दो प्रोटॉन के बीच दूरी लगभग 1.5 Å है और इलेक्ट्रॉन प्रत्येक प्रोटॉन से लगभग 1 Å की दूरी पर है। निकाय की स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए। स्थितिज ऊर्जा की शून्य स्थिति के चयन का उल्लेख कीजिए ।
Answer: हल- स्थितिज ऊर्जा की शुन्य स्थितिअनन्त पर मानते हुए दिए गए वैद्युत निकाय (जिसमें चित्र 2.12 के । अनुसार दो प्रोटॉम एवं एक इलेक्ट्रॉन है) की स्थितिज ऊर्जा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र हाइड्रोजन आण्विक आयन (H₂⁺) को दर्शाता है, जिसमें दो प्रोटॉन (प्रत्येक पर +e आवेश) और एक इलेक्ट्रॉन (e आवेश) एक त्रिकोणीय विन्यास में स्थित हैं। प्रोटॉनों के बीच की दूरी 1.5 Å है, और प्रत्येक प्रोटॉन से इलेक्ट्रॉन की दूरी 1.0 Å है। \( U = U_{e,e} + U_{e,-e} + U_{-e,e} \) \( U = \frac { 1 }{ 4\pi \varepsilon 0 } \frac { e \times e }{ AB } + \frac { 1 }{ 4\pi \varepsilon 0 } \frac { e \times (-e) }{ BC } + \frac { 1 }{ 4\pi \varepsilon 0 } \frac { (-e) \times e }{ AC } \) \( = \frac { 1 }{ 4\pi \varepsilon 0 } e^2 \left[ \frac { 1 }{ AB } - \frac { 1 }{ BC } - \frac { 1 }{ AC } \right] \) \( = (9 \times 10^9)(1.6 \times 10^{-19})^2 \left[ \frac { 1 }{ 1.5 \times 10^{-10} } - \frac { 1 }{ 1 \times 10^{-10} } - \frac { 1 }{ 1 \times 10^{-10} } \right] \) जूल \( = (9 \times 10^9) \times (2.56 \times 10^{-38}) \left[ \frac { 2 }{ 3 } - 1 - 1 \right] \) जूल \( = 9 \times 2.56 \times \left( -\frac { 4 }{ 3 } \right) \times 10^{-19} \) जूल \( = -3 \times 2.56 \times 4 \times 10^{-19} \) जूल \( = -30.72 \times 10^{-19} \) जूल \( = [(-30.72 \times 10^{-19}) \div (1.6 \times 10^{-19})] \) eV \( = -19.2 \) eV
In simple words: The potential energy of the hydrogen molecular ion (H₂⁺) is calculated by summing the potential energies of all pairs of charges (two protons and one electron). Given the distances, the total potential energy is found to be \( -19.2 \) eV, with the zero potential energy chosen at infinite separation.
🎯 Exam Tip: For systems with multiple charges, the total potential energy is the sum of the potential energies of all distinct pairs of charges. Remember to consider the signs of charges carefully for each pair. The choice of zero potential energy (usually infinity) must be stated explicitly.
Question 20. a और b त्रिज्याओं वाले दो आवेशित चालक गोले एक तार द्वारा एक-दूसरे से जोड़े गए हैं। दोनों गोलों के पृष्ठों पर विद्युत-क्षेत्रों में क्या अनुपात है? प्राप्त परिणाम को, यह समझाने में प्रयुक्त कीजिए कि किसी एक चालक के तीक्ष्ण और नुकीले सिरों पर आवेश घनत्व, चपटे भागों की अपेक्षा अधिक क्यों होता है?
Answer: हल-माना इन गोलों पर आवेश क्रमशः \( q1 \) तथा \( q2 \) हैं। दोनों गोले चालक तार द्वारा जुड़े हैं; अतः दोनों के पृष्ठीय विभव बराबर होंगे। अतः \( \frac { 1 }{ 4\pi \varepsilon 0 } \frac { q1 }{ a } = \frac { 1 }{ 4\pi \varepsilon 0 } \frac { q2 }{ b } \) \( \implies \frac { q1 }{ q2 } = \frac { a }{ b } \) अतः गोलों के पृष्ठों पर विद्युत-क्षेत्र क्रमशः निम्नलिखित हैं : \( E1 = \frac { 1 }{ 4\pi \varepsilon 0 } \frac { q1 }{ a^2 } \) तथा \( E2 = \frac { 1 }{ 4\pi \varepsilon 0 } \frac { q2 }{ b^2 } \) \( \implies \frac { E1 }{ E2 } = \frac { q1 }{ q2 } \times \frac { b^2 }{ a^2 } \) \( \implies \frac { E1 }{ E2 } = \frac { a }{ b } \times \frac { b^2 }{ a^2 } \) \( \implies \frac { E1 }{ E2 } = \frac { b }{ a } \) सिद्ध करना कि आवेश घनत्व \( \propto \) वक्रता - त्रिज्या माना किसी आवेशित चालक के दो अलग-अलग भागों की वक्रता-त्रिज्याएँ \( a \) तथा \( b \) हैं। माना चालक का प्रथम भाग दूसरे की तुलना में अधिक नुकीला है तब \( a < b \) होगा। यदि इन भागों पर \( q1 \) व \( q2 \) आवेश संचित हैं तो \( \frac { q1 }{ q2 } = \frac { a }{ b } \) इन भागों पर पृष्ठीय आवेश घनत्व क्रमशः \( \sigma 1 = \frac { q1 }{ 4\pi a^2 } \) तथा \( \sigma 2 = \frac { q2 }{ 4\pi b^2 } \) होंगे। \( \implies \frac { \sigma 1 }{ \sigma 2 } = \frac { q1 }{ q2 } \times \frac { b^2 }{ a^2 } \) \( \implies \frac { \sigma 1 }{ \sigma 2 } = \frac { a }{ b } \times \frac { b^2 }{ a^2 } \) \( \implies \frac { \sigma 1 }{ \sigma 2 } = \frac { b }{ a } \) या \( \sigma \propto \frac { 1 }{ वक्रता-त्रिज्या } \) चूँकि \( a < b \) \( \implies \sigma 1 > \sigma 2 \) अर्थात् कम वक्रता-त्रिज्या वाले भाग (नुकीले भाग) का पृष्ठीय घनत्व अधिक वक्रता-त्रिज्या वाले भाग की तुलना में अधिक होगा।
In simple words: When two charged conducting spheres are connected, their potentials become equal. The ratio of their electric fields is inversely proportional to the ratio of their radii (E1/E2 = b/a). This means that sharper points (smaller radius of curvature) on a conductor have a higher surface charge density compared to flatter parts.
🎯 Exam Tip: For connected conductors, the potential is the same. Surface charge density is inversely proportional to the radius of curvature (\( \sigma \propto \frac{1}{R} \)), which explains why charge accumulates at sharp points, leading to a higher electric field there.
Question 21. बिन्दु (0, 0, -a) तथा (0, 0, a) पर दो आवेश क्रमशः -q और +q स्थित हैं। (a) बिन्दुओं (0, 0, z) और (x, y, 0) पर स्थिरविद्युत विभव क्या है? (b) मूल बिन्दु से किसी बिन्दु की दूरी पर विभव की निर्भरता ज्ञात कीजिए, जबकि \( \frac { r }{ a } \) >> 1 (c) x-अक्ष पर बिन्दु (5, 0, 0) से बिन्दु (-7, 0, 0) तक एक परीक्षण आवेश को ले जाने में कितना कार्य करना होगा? यदि परीक्षण आवेश को उन्हीं बिन्दुओं के बीच x-अक्ष से होकर न ले जाएँ तो क्या उत्तर बदल जाएगा?
Answer: हल- दिए गए बिन्दु आवेश एक विद्युत द्विध्रुव बनाते हैं। आवेशों के बीच की दूरी = \( 2a \) विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण \( \vec p = q \times 2a \) \( \implies p = 2q a \) (a) बिन्दु \( (0, 0, z) \) द्विध्रुव की अक्ष पर स्थित है, इस बिन्दु पर विद्युत विभव \( V = \pm \frac { 1 }{ 4\pi \varepsilon 0 } \frac { p }{ (z^2 - a^2) } \) बिन्दु \( (x, y, 0) \) द्विध्रुव के विषुवत तल में स्थित है; अतः इस बिन्दु पर विद्युत विभव शून्य होगा। (b) द्विध्रुव के कारण किसी बिन्दु पर विद्युत विभव : माना कोई बिन्दु \( P \), द्विध्रुव के केन्द्र (मूल बिन्दु) से \( r \) दूरी पर स्थित है। इस बिन्दु की बिन्दु आवेशों \( +q \) तथा \( -q \) से दूरियाँ क्रमशः \( r1 \) तथा \( r2 \) हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक विद्युत द्विध्रुव को दर्शाता है, जिसमें \( +q \) आवेश बिंदु \( (0,0,a) \) पर और \( -q \) आवेश बिंदु \( (0,0,-a) \) पर स्थित है। बिंदु \( O \) मूलबिंदु है। बिंदु \( P(x,y,z) \) को मूलबिंदु से \( r \) दूरी पर दिखाया गया है, और कोण \( \theta \) ओपी रेखा द्वारा \( z \)-अक्ष के साथ बनाया गया कोण है। यह \( P \) पर विभव की गणना के लिए ज्यामिति को स्पष्ट करता है। तब बिन्दु \( P \) पर द्विध्रुव के कारण विद्युत विभव \( V = \frac { 1 }{ 4\pi \varepsilon 0 } \left( \frac { q }{ r1 } - \frac { q }{ r2 } \right) \) ...(1) माना \( \angle ZOP = \theta \) तब \( \triangle OBP \) में, \( r1^2 = r^2 + a^2 - 2ar \cos \theta \) ...(2) तथा \( \triangle AOP \) में, \( r2^2 = r^2 + a^2 - 2ar \cos (180^\circ - \theta) \) \( \implies r2^2 = r^2 + a^2 + 2ar \cos \theta \) ...(3) समीकरण (2) से, \( r1 = (r^2 + a^2 - 2ar \cos \theta)^{1/2} = r \left( 1 + \frac { a^2 }{ r^2 } - \frac { 2a }{ r } \cos \theta \right)^{1/2} \) \( \implies \frac { 1 }{ r1 } = \frac { 1 }{ r } \left( 1 + \frac { a^2 }{ r^2 } - \frac { 2a }{ r } \cos \theta \right)^{-1/2} \) \( \approx \frac { 1 }{ r } \left( 1 - \frac { 1 }{ 2 } \left( \frac { a^2 }{ r^2 } - \frac { 2a }{ r } \cos \theta \right) \right) \) (द्विपद प्रमेय से) \( \implies \frac { 1 }{ r1 } \approx \frac { 1 }{ r } \left( 1 + \frac { a }{ r } \cos \theta \right) \) (जब \( \frac { r }{ a } \) >> 1 मानते हुए \( \frac { a^2 }{ r^2 } \) के द्विघात पद छोड़ने पर) इसी प्रकार \( r2^2 = r^2 \left( 1 + \frac { a^2 }{ r^2 } + \frac { 2a }{ r } \cos \theta \right) \) \( \implies \frac { 1 }{ r2 } = \frac { 1 }{ r } \left( 1 + \frac { a^2 }{ r^2 } + \frac { 2a }{ r } \cos \theta \right)^{-1/2} \) \( \approx \frac { 1 }{ r } \left( 1 - \frac { 1 }{ 2 } \left( \frac { a^2 }{ r^2 } + \frac { 2a }{ r } \cos \theta \right) \right) \) \( \implies \frac { 1 }{ r2 } \approx \frac { 1 }{ r } \left( 1 - \frac { a }{ r } \cos \theta \right) \) समीकरण (1) में मान रखने पर, \( V = \frac { q }{ 4\pi \varepsilon 0 } \left[ \frac { 1 }{ r } \left( 1 + \frac { a }{ r } \cos \theta \right) - \frac { 1 }{ r } \left( 1 - \frac { a }{ r } \cos \theta \right) \right] \) \( V = \frac { q }{ 4\pi \varepsilon 0 } \frac { 1 }{ r } \left[ 1 + \frac { a }{ r } \cos \theta - 1 + \frac { a }{ r } \cos \theta \right] \) \( V = \frac { q }{ 4\pi \varepsilon 0 } \frac { 1 }{ r } \left[ \frac { 2a }{ r } \cos \theta \right] \) \( V = \frac { 1 }{ 4\pi \varepsilon 0 } \frac { (2qa) \cos \theta }{ r^2 } \) जहाँ \( p = 2qa \) अतः द्विध्रुव के कारण उसके केन्द्र से \( r \) दूरी पर \( (\frac{r}{a} >> 1) \) विद्युत विभव \( V = \frac { p \cos \theta }{ 4\pi \varepsilon 0 r^2 } \) परन्तु \( p \cos \theta = \vec p . \vec r \) अतः \( V = \frac { \vec p . \vec r }{ 4\pi \varepsilon 0 r^3 } \) (c) बिन्दु \( P (5, 0, 0) \) तथा \( Q (-7, 0, 0) \) द्विध्रुव के विषुवत तल में स्थित हैं; अतः इन दोनों बिन्दुओं पर विभव शून्य होगा। परीक्षण आवेश \( q0 \) को बिन्दु \( P \) से \( Q \) तक ले जाने में किया गया कार्य \( W = q0 [V(Q) - V(P)] = 0 \) [ \( \because V(P) = V(Q) = 0 \) ] विद्युत-क्षेत्र एक संरक्षी क्षेत्र है जिसमें किया गया कार्य केवल अन्त्य बिन्दुओं पर निर्भर करता है, न कि मार्ग पर। अतः उत्तर में कोई परिवर्तन नहीं आएगा।
In simple words: For a dipole, potential is zero on its equatorial plane. For a point on the axial line, it's \( \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{p}{z^2-a^2} \). When \( r >> a \), potential due to a dipole is proportional to \( \frac{\cos\theta}{r^2} \). Since the given points are on the equatorial plane, the potential is zero at both points, meaning no work is done to move a charge between them, regardless of the path.
🎯 Exam Tip: Remember that for an electric dipole, the electric potential is zero everywhere on its equatorial plane. Work done by a conservative force (like electrostatic force) depends only on the initial and final positions, not on the path taken. This is a common trick question for path dependence.
Question 22. नीचे दिए गए चित्र 2.14 में एक आवेशविन्यास जिसे विद्युत चतुर्भुवी कहा जाता है, दर्शाया गया है। चतुर्भुवी के अक्ष पर स्थित किसी बिन्दु के लिए पर विभव की निर्भरता प्राप्त कीजिए जहाँ \( \frac { r }{ a } \) >> 1 । अपने परिणाम की तुलना एक विद्युत द्विध्रुव व विद्युत एकल ध्रुव (अर्थात् किसी एकल आवेश) के लिए प्राप्त परिणामों से कीजिए ।
Answer: हल-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक विद्युत चतुर्भुवी (quadrupole) को दिखाता है, जिसमें \( z \)-अक्ष पर तीन आवेश रखे गए हैं। मूल बिंदु \( O \) पर \( -2q \) आवेश है, और \( z = -a \) तथा \( z = a \) पर प्रत्येक पर \( +q \) आवेश है। बिंदु \( P \) अक्ष पर \( r \) दूरी पर स्थित है जहाँ विभव की गणना की जानी है। माना \( P \) की विभिन्न आवेशों से दूरियाँ निम्नलिखित हैं- \( r-a, r, r+a \) चतुर्भुवी होने के कारण बिन्दु \( P \) पर विद्युत विभव \( V = \frac { 1 }{ 4\pi \varepsilon 0 } \left[ \frac { q }{ r-a } + \frac { -2q }{ r } + \frac { q }{ r+a } \right] \) \( = \frac { q }{ 4\pi \varepsilon 0 } \left[ \frac { 1 }{ r-a } - \frac { 2 }{ r } + \frac { 1 }{ r+a } \right] \) \( = \frac { q }{ 4\pi \varepsilon 0 } \left[ \frac { r(r+a) - 2(r^2-a^2) + r(r-a) }{ r(r^2-a^2) } \right] \) \( = \frac { q }{ 4\pi \varepsilon 0 } \left[ \frac { r^2+ra - 2r^2+2a^2 + r^2-ra }{ r(r^2-a^2) } \right] \) \( = \frac { q }{ 4\pi \varepsilon 0 } \left[ \frac { 2a^2 }{ r(r^2-a^2) } \right] \) \( = \frac { 2qa^2 }{ 4\pi \varepsilon 0 } \frac { 1 }{ r(r^2-a^2) } \) जब \( \frac { r }{ a } \) >> 1 तब \( r^2-a^2 \approx r^2 \) \( \implies V = \frac { 2qa^2 }{ 4\pi \varepsilon 0 } \frac { 1 }{ r(r^2) } \) \( V = \frac { 2qa^2 }{ 4\pi \varepsilon 0 r^3 } \) \( \implies V \propto \frac { 1 }{ r^3 } \) विद्युत द्विध्रुव के कारण अक्ष पर विभव दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती \( (V \propto \frac { 1 }{ r^2 }) \) होता है। एकल ध्रुव के कारण यह दूरी के व्युत्क्रमानुपाती \( (V \propto \frac { 1 }{ r }) \) होता है। अतः चतुर्भुवी होने के कारण विभव, विद्युत द्विध्रुव तथा एकल ध्रुव की तुलना में अधिक तेजी से घटता है।
In simple words: For an electric quadrupole, when the distance \( r \) is much greater than the charge separation \( a \), the electric potential along its axis is proportional to \( \frac{1}{r^3} \). This fall-off is faster than for a dipole (\( \frac{1}{r^2} \)) and a monopole (\( \frac{1}{r} \)), indicating a weaker, more rapidly decaying field.
🎯 Exam Tip: Remember the potential dependencies for different charge configurations: monopole (\( \propto \frac{1}{r} \)), dipole (\( \propto \frac{1}{r^2} \)), and quadrupole (\( \propto \frac{1}{r^3} \)). This illustrates how higher-order multipoles have fields that decay more rapidly with distance. Use binomial approximation for \( (1 \pm x)^n \approx 1 \pm nx \) when \( x \) is small.
Question 23. एक विद्युत टैक्नीशियन को 1 kV विभवान्तर के परिपथ में 2 µF संधारित्र की आवश्यकता है। 1 µF के संधारित्र उसे प्रचुर संख्या में उपलब्ध हैं जो 400 V से अधिक का विभवान्तर वहन नहीं कर सकते। कोई सम्भव विन्यास सुझाइए जिसमें न्यूनतम संधारित्रों की आवश्यकता हो ।
Answer: हल- माना हम प्रत्येक पंक्ति में \( n \) संधारित्र जोड़ते हैं तथा ऐसी \( m \) पंक्तियों को समान्तर क्रम में जोड़ते हैं। श्रेणीक्रम में, \( 1 \) kV \( = 1000 \) V को विभवान्तर \( n \) संधारित्रों में बराबर बँट जाएगा । प्रत्येक संधारित्र पर विभवान्तर \( = \frac { 1000 }{ n } \) \( \implies \frac { 1000 }{ n } < 400 \) \( \implies \frac { 1000 }{ 400 } < n \) \( \implies 2.5 < n \) अतः \( n \) न्यूनतम पूर्णांक है; अतः \( n = 3 \) प्रत्येक पंक्ति की धारिता \( = \frac { 1 }{ n } \) µF \( = \frac { 1 }{ 3 } \) µF होगी। समान्तर क्रम में जुड़ी ऐसी \( m \) पंक्तियों की धारिता \( C_{eq} = \frac { 1 }{ 3 } + \frac { 1 }{ 3 } + \frac { 1 }{ 3 } + \dots + m \) पद \( = m \times \frac { 1 }{ 3 } \) µF हमें कुल धारिता \( 2 \) µF चाहिए। \( \implies m \times \frac { 1 }{ 3 } = 2 \) µF \( \implies m = 6 \) हमें \( 3-3 \) संधारित्रों को श्रेणीक्रम में जोड़कर इस प्रकार की \( 6 \) पंक्तियाँ बनानी होंगी। अब इन \( 6 \) पंक्तियों को समान्तर क्रम में जोड़ना होगा। कुल संधारित्रों की संख्या \( = n \times m = 3 \times 6 = 18 \) संधारित्र।
In simple words: To achieve a 2 µF capacitance with a voltage rating of 1 kV using 1 µF capacitors rated for 400 V, we need to connect 3 capacitors in series for each row (to handle the voltage) and then 6 such rows in parallel (to achieve the desired total capacitance). This requires a total of 18 capacitors.
🎯 Exam Tip: For series combination, capacitors share the voltage, so to increase voltage rating, connect in series. For parallel combination, capacitances add up, so to increase total capacitance, connect in parallel. Always check both the capacitance and voltage requirements.
Question 24. 2F वाले एक समान्तर पट्टिका संधारित्र की पट्टिका का क्षेत्रफल क्या है, जबकि पट्टिकाओं का पृथकन 0.5 cm है? [अपने उत्तर से आप यह समझ जाएँगे कि सामान्य संधारित्र uF या कम परिसर के क्यों होते हैं? तथापि विद्युत-अपघटन संधारित्रों (Electrolytic capacitors) की धारिता कहीं अधिक (0.1 F) होती है क्योंकि चालकों के बीच अति सूक्ष्म पृथक्न होता है।
Answer: हल- दिया है, समान्तर पट्ट संधारित्र की धारिता \( C = 2 \) F. इसकी प्लेटों के बीच पृथक्करण (दूरी) \( d = 0.5 \) cm \( = 5 \times 10^{-3} \) m प्लेट का क्षेत्रफल \( A = ? \), \( \varepsilon 0 = 8.854 \times 10^{-12} \) C\( ^2 \)/Nm\( ^2 \) सूत्र \( C = \frac { \varepsilon 0 A }{ d } \) से, \( \implies A = \frac { Cd }{ \varepsilon 0 } \) \( = \frac { 2 \times 5 \times 10^{-3} }{ 8.854 \times 10^{-12} } \) \( = \frac { 10 \times 10^{-3} }{ 8.854 \times 10^{-12} } \) \( = \frac { 10^{-2} }{ 8.854 \times 10^{-12} } \) \( = 1.129 \times 10^9 \) m\( ^2 \) \( = 1130 \times 10^6 \) मीटर \( ^2 = 1130 \) किमी \( ^2 \)
In simple words: To achieve a capacitance of 2 Farads with a plate separation of 0.5 cm, a parallel plate capacitor would require an extremely large plate area of approximately 1130 square kilometers. This massive area explains why typical capacitors are in the microfarad or picofarad range, although electrolytic capacitors achieve higher capacitances due to very small plate separations.
🎯 Exam Tip: The formula for capacitance of a parallel plate capacitor is \( C = \frac { \varepsilon 0 A }{ d } \). Pay attention to units and orders of magnitude. The result often highlights the impracticality of achieving very high capacitances with large plate separations, unless specialized dielectric materials or very small separations are used.
Question 25. चित्र 2.15 के नेटवर्क (जाल) की तुल्य धारिता प्राप्त 100 pF कीजिए। 300 V संभरण (सप्लाई) के साथ प्रत्येक संधारित्र का आवेश व उसकी वोल्टता ज्ञात कीजिए।
Answer: हल- दिए गए नेटवर्क को संलग्न चित्र 2.16 की भाँति व्यवस्थित किया जा सकता है-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 2.15 एक संधारित्र नेटवर्क दिखाता है जिसमें विभिन्न धारिताओं (100pF, 200pF, 100pF, 200pF) वाले चार संधारित्र जुड़े हुए हैं और एक 300V की सप्लाई से जुड़ा है। चित्र 2.16 इस नेटवर्क को एक सरल और समझने योग्य रूप में पुनर्व्यवस्थित करता है, जहाँ संधारित्र \( C1=100pF \), \( C2=200pF \), \( C3=200pF \), \( C4=100pF \) को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है ताकि तुल्य धारिता और प्रत्येक संधारित्र पर आवेश/विभवान्तर की गणना की जा सके। सर्वप्रथम \( C2 \) व \( C3 \) श्रेणीक्रम में जुड़े हैं, इनकी तुल्य धारिता \( C_{23} \) होगी: \( \frac { 1 }{ C_{23} } = \frac { 1 }{ C2 } + \frac { 1 }{ C3 } = \frac { 1 }{ 200 } + \frac { 1 }{ 200 } = \frac { 2 }{ 200 } = \frac { 1 }{ 100 } \) \( \implies C_{23} = 100 \) pF अब यह \( 100 \) pF की धारिता \( C1 \) के साथ समान्तर क्रम में जुड़ी है, अतः तुल्य-धारिता \( C_{123} = C1 + C_{23} = 100 + 100 = 200 \) pF पुनः यह \( 200 \) pF, \( C4 \) के साथ श्रेणीक्रम में जुड़ा है। नेटवर्क की तुल्य धारिता \( C_{eq} \) \( \frac { 1 }{ C_{eq} } = \frac { 1 }{ C_{123} } + \frac { 1 }{ C4 } = \frac { 1 }{ 200 } + \frac { 1 }{ 100 } = \frac { 1+2 }{ 200 } = \frac { 3 }{ 200 } \) \( \implies C_{eq} = \frac { 200 }{ 3 } \) pF संयोजन की वोल्टता \( V = 300 \) V. संयोजन पर कुल आवेश \( q = C_{eq} V = \frac { 200 \times 10^{-12} }{ 3 } \times 300 \) V \( = 2 \times 10^{-8} \) C \( C4 \) शेष संयोजन (धारिता \( 200 \) pF) के साथ श्रेणीक्रम में जुड़ा है, अतः \( C4 \) तथा शेष संयोजन, दोनों पर यही आवेश होगा। \( \implies q4 = 2 \times 10^{-8} \) C \( C4 \) का विभवान्तर \( V4 = \frac { q4 }{ C4 } = \frac { 2 \times 10^{-8} }{ 100 \times 10^{-12} } = 200 \) V शेष संयोजन का विभवान्तर \( V_{123} = V - V4 = 300 \) V \( - 200 \) V \( = 100 \) V \( C1 \), \( C2 \) व \( C3 \) के श्रेणी संयोजन से समान्तर क्रम में जुड़ा है, \( C1 \) का विभवान्तर \( V1 = 100 \) V \( \implies q1 = C1V1 = 100 \times 10^{-12} \times 100 = 10^{-8} \) C तथा \( C2 \) व \( C3 \) के श्रेणी संयोजन का विभवान्तर \( V_{23} = 100 \) V \( C2 \) = \( C3 \); अतः कुल विभवान्तर \( 100 \) V इन पर बराबर-बराबर बंटेगा। प्रत्येक का विभवान्तर \( V2 = V3 = 50 \) V प्रत्येक पर आवेश \( q2 = q3 = C2V2 = 200 \times 10^{-12} \times 50 = 10^{-8} \) C अतः संयोजन की धारिता \( C = \frac { 200 }{ 3 } \) pF \( C1 \) का विभवान्तर \( = 100 \) V तथा आवेश \( = 10^{-8} \) C \( C2 \) का विभवान्तर \( = 50 \) V तथा आवेश \( = 10^{-8} \) C \( C3 \) का विभवान्तर \( = 50 \) V तथा आवेश \( = 10^{-8} \) C \( C4 \) का विभवान्तर \( = 200 \) V तथा आवेश \( = 2 \times 10^{-8} \) C
In simple words: The equivalent capacitance of the given network is \( \frac{200}{3} \) pF. For a 300V supply, the total charge is \( 2 \times 10^{-8} \) C. Each capacitor's voltage and charge are calculated by systematically breaking down the series and parallel combinations: C4 gets 200V and \( 2 \times 10^{-8} \) C, C1 gets 100V and \( 10^{-8} \) C, and C2/C3 each get 50V and \( 10^{-8} \) C.
🎯 Exam Tip: For complex capacitor networks, first simplify series and parallel combinations step-by-step. Remember that capacitors in series have the same charge, and capacitors in parallel have the same voltage. Always work backward from the total equivalent capacitance to find individual charges and voltages.
Question 26. किसी समान्तर पट्टिका संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका का क्षेत्रफल 90 cm² है और उनके बीच पृथकन 2.5 mm है। 400 V संभरण से संधारित्र को आवेशित किया गया है। (a) संधारित्र कितना स्थिरविद्युत ऊर्जा संचित करता है?
Answer: हल - दिया है, \( A = 90 \) cm\( ^2 = 9 \times 10^{-3} \) m\( ^2 \), \( d = 2.5 \) mm \( = 2.5 \times 10^{-3} \) m \( V = 400 \) V, \( U = ? \) एकांक आयतन में ऊर्जा \( u = ? \) \( u \) व \( E \) के बीच सम्बन्ध \( = ? \) (a) संधारित्र में संचित ऊर्जा \( U = \frac { 1 }{ 2 } CV^2 \) यहाँ \( C = \frac { \varepsilon 0 A }{ d } = \frac { 8.854 \times 10^{-12} \times 9 \times 10^{-3} }{ 2.5 \times 10^{-3} } = 3.187 \times 10^{-11} \) F \( U = \frac { 1 }{ 2 } \times (3.187 \times 10^{-11}) \times (400)^2 \) J \( = \frac { 1 }{ 2 } \times 3.187 \times 10^{-11} \times 160000 \) J \( = 2.55 \times 10^{-6} \) J (b) संधारित्र का आयतन \( = Ad = (9 \times 10^{-3}) \times (2.5 \times 10^{-3}) \) m\( ^3 \) \( = 22.5 \times 10^{-6} \) m\( ^3 \) एकांक आयतन में संचित ऊर्जा \( u = \frac { कुल ऊर्जा }{ आयतन } = \frac { 2.55 \times 10^{-6} }{ 22.5 \times 10^{-6} } = 0.113 \) Jm\( ^{-3} \) पुनः चूंकि कुल संचित ऊर्जा \( U = \frac { 1 }{ 2 } CV^2 = \frac { 1 }{ 2 } \frac { \varepsilon 0 A }{ d } V^2 \) एकांक आयतन में संचित ऊर्जा \( u = \frac { U }{ Ad } = \frac { 1 }{ 2 } \frac { \varepsilon 0 A V^2 }{ d Ad } = \frac { 1 }{ 2 } \varepsilon 0 \frac { V^2 }{ d^2 } \) परन्तु \( E = \frac { V }{ d } \) \( \implies u = \frac { 1 }{ 2 } \varepsilon 0 E^2 \)
In simple words: The parallel plate capacitor stores \( 2.55 \times 10^{-6} \) J of electrostatic energy. The energy density (energy per unit volume) within the capacitor is \( 0.113 \) Jm\( ^{-3} \) and is directly related to the electric field strength by the formula \( u = \frac{1}{2}\varepsilon_0 E^2 \).
🎯 Exam Tip: Remember the two main formulas for energy stored in a capacitor: \( U = \frac{1}{2}CV^2 \) and \( u = \frac{1}{2}\varepsilon_0 E^2 \) for energy density. Always ensure correct unit conversions, especially for area (cm² to m²) and distance (mm to m). Calculating energy density helps understand how energy is distributed in the electric field.
Question 27. एक 4 µF के संधारित्र को 200 V संभरण (सप्लाई) से आवेशित किया गया है। फिर संभरण से हटाकर इसे एक अन्य अनावेशित 2 µF के संधारित्र से जोड़ा जाता है। पहले संधारित्र की कितनी स्थिरविद्युत ऊर्जा का ऊष्मा और विद्युत चुम्बकीय विकिरण के रूप में ह्रास होता है?
Answer: हल- दिया है, \( C1 = 4 \times 10^{-6} \) F, \( V1 = 200 \) V, \( C2 = 2 \times 10^{-6} \) F, \( V2 = 0 \) V माना जोड़ने के पश्चात् दोनों का उभयनिष्ठ विभव \( V \) है । जोड़ने से पूर्व संभरण को हटा लिया गया है; अतः कुल आवेश स्थिर रहेगा। \( q_{total} = C1V1 + C2V2 = (4 \times 10^{-6} \times 200) + (2 \times 10^{-6} \times 0) = 800 \times 10^{-6} \) C उभयनिष्ठ विभव \( V = \frac { C1V1 + C2V2 }{ C1 + C2 } \) \( = \frac { (4 \times 10^{-6} \times 200) + 0 }{ 4 \times 10^{-6} + 2 \times 10^{-6} } \) \( = \frac { 800 \times 10^{-6} }{ 6 \times 10^{-6} } = \frac { 800 }{ 6 } = \frac { 400 }{ 3 } \) V निकाय की प्रारम्भिक ऊर्जा \( U_{initial} = \frac { 1 }{ 2 } C1V1^2 + \frac { 1 }{ 2 } C2V2^2 \) \( = \frac { 1 }{ 2 } \times 4 \times 10^{-6} \times (200)^2 + \frac { 1 }{ 2 } \times 2 \times 10^{-6} \times (0)^2 \) \( = 2 \times 10^{-6} \times 40000 = 8 \times 10^{-2} \) J अन्तिम ऊर्जा \( U_{final} = \frac { 1 }{ 2 } (C1+C2) V^2 \) \( = \frac { 1 }{ 2 } (4 \times 10^{-6} + 2 \times 10^{-6}) \times \left( \frac { 400 }{ 3 } \right)^2 \) \( = \frac { 1 }{ 2 } \times 6 \times 10^{-6} \times \frac { 160000 }{ 9 } \) \( = 3 \times 10^{-6} \times \frac { 160000 }{ 9 } \) \( = \frac { 160000 }{ 3 } \times 10^{-6} = 53333.33 \times 10^{-6} = 5.33 \times 10^{-2} \) J विकिरण के रूप में ऊर्जा का ह्रास \( \triangle U = U_{initial} - U_{final} \) \( = 8 \times 10^{-2} - 5.33 \times 10^{-2} \) \( = 2.67 \times 10^{-2} \) J अन्य विधि : ऊर्जा ह्रास \( \triangle U = \frac { 1 }{ 2 } \frac { C1C2 }{ C1+C2 } (V1 - V2)^2 \) \( = \frac { 1 }{ 2 } \frac { (4 \times 10^{-6}) \times (2 \times 10^{-6}) }{ (4 \times 10^{-6}) + (2 \times 10^{-6}) } (200 - 0)^2 \) \( = \frac { 1 }{ 2 } \frac { 8 \times 10^{-12} }{ 6 \times 10^{-6} } (40000) \) \( = \frac { 1 }{ 2 } \times \frac { 4 }{ 3 } \times 10^{-6} \times 40000 \) \( = \frac { 2 }{ 3 } \times 40000 \times 10^{-6} \) \( = \frac { 80000 }{ 3 } \times 10^{-6} = 26666.67 \times 10^{-6} = 2.67 \times 10^{-2} \) J
In simple words: When a charged capacitor is connected to an uncharged capacitor, some energy is lost as heat and electromagnetic radiation. This energy loss is calculated by finding the difference between the initial and final stored energies, which occurs due to charge redistribution. The common potential after connection is used to calculate the final energy.
🎯 Exam Tip: For problems involving redistribution of charge between capacitors, remember that charge is conserved, but energy is not. Use the formula for common potential \( V = \frac{\Sigma CV}{\Sigma C} \) and the energy loss formula \( \Delta U = \frac{1}{2} \frac{C_1C_2}{C_1+C_2}(V_1-V_2)^2 \) for efficiency.
Question 28. दर्शाइए कि एक समान्तर पट्टिका संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका पर बल का परिमाण \( \frac { 1 }{ 2 } \) QE है, जहाँ संधारित्र पर आवेश है और \( E \) पट्टिकाओं के बीच विद्युत-क्षेत्र का परिमाण है। घटक \( \frac { 1 }{ 2 } \) के मूल को समझाइए ।
Answer: हल- माना दोनों पट्टिकाओं के बीच लगने वाला पारस्परिक आकर्षण बल \( F \) है तथा प्लेटों के बीच की दूरी \( x \) है। दूरी \( x \) में \( dx \) की वृद्धि करने पर आकर्षण बल \( F \) के विरुद्ध कृत कार्य \( dW = F dx \) .....(i) प्लेटों के बीच विद्युत-क्षेत्र \( E \) है; अतः संधारित्र के एकांक आयतन में संचित ऊर्जा \( u = \frac { 1 }{ 2 } { \varepsilon }_{ 0 }{ E }^{ 2 } \) प्लेटों का क्षेत्रफल \( A \) व बीच की दूरी \( x \) है; अतः संधारित्र की कुल ऊर्जा \( U = \frac { 1 }{ 2 } \varepsilon 0 E^2 (Ax) \) दूरी \( x \) में \( dx \) की वृद्धि करने पर ऊर्जा में वृद्धि \( dU = \frac { 1 }{ 2 } \varepsilon 0 E^2 A dx \) स्पष्ट है कि \( dW = dU \) \( \implies Fdx = \frac { 1 }{ 2 } \varepsilon 0 E^2 A dx \) \( \implies F = \frac { 1 }{ 2 } \varepsilon 0 E^2 A \) चूंकि \( E = \frac { \sigma }{ \varepsilon 0 } \) तथा \( Q = \sigma A \) \( \implies \sigma = \frac { Q }{ A } \) \( E = \frac { Q }{ \varepsilon 0 A } \) \( \implies F = \frac { 1 }{ 2 } \varepsilon 0 \left( \frac { Q }{ \varepsilon 0 A } \right)^2 A = \frac { 1 }{ 2 } \varepsilon 0 \frac { Q^2 }{ \varepsilon 0^2 A^2 } A \) \( F = \frac { 1 }{ 2 } \frac { Q^2 }{ \varepsilon 0 A } \) \( F = \frac { 1 }{ 2 } Q \left( \frac { Q }{ \varepsilon 0 A } \right) \) \( F = \frac { 1 }{ 2 } QE \) घटक \( \frac { 1 }{ 2 } \) का मूल इस तथ्य में निहित है कि चालक प्लेट के बाहर विद्युत-क्षेत्र \( \frac { E }{ 2 } \) तथा प्लेट के भीतर शून्य होता है। अतः औसत विद्युत-क्षेत्र में होता है, जिसके विरुद्ध प्लेट को खिसकाया जाता है।
In simple words: The force between the plates of a parallel plate capacitor is \( \frac{1}{2}QE \), where \( Q \) is the charge on one plate and \( E \) is the electric field between the plates. The factor of \( \frac{1}{2} \) arises because the electric field acting on a plate is only due to the charge on the *other* plate, not its own, and this field is \( E/2 \) (half of the total field between the plates).
🎯 Exam Tip: The factor of \( \frac{1}{2} \) in \( F=\frac{1}{2}QE \) is critical. It indicates that the electric field exerting force on a plate is only the external field created by the opposite plate, which is half of the total field between the plates. This is distinct from the total field \( E \) used for energy density calculations.
Question 29. दो संकेन्द्री गोलीय चालकों जिनको उपयुक्त विद्युतरोधी आलम्बों से उनकी स्थिति में रोका गया है, से मिलकर एक गोलीय संधारित्र बना है। दर्शाइए कि गोलीय संधारित्र की धारिता C इस प्रकार व्यक्त की जाती है:
\[ C = \frac{4 \pi \varepsilon_0 r_1 r_2}{r_1 - r_2} \]यहाँ r1 और r2 क्रमशः बाहरी तथा भीतरी गोलों की त्रिज्याएँ हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो संकेन्द्री चालक गोलों को दर्शाता है। भीतरी गोले पर +Q आवेश है और बाहरी गोले पर -Q आवेश है, जो पृथ्वी से जुड़ा हुआ है। बाहरी गोले की त्रिज्या r1 और भीतरी गोले की त्रिज्या r2 है। आवेशों के वितरण और क्षेत्र रेखाओं को तीर के निशान से दिखाया गया है।
Answer:
गोलीय अथवा गोलाकार संधारित्र की धारिता (Capacitance of Spherical Capacitor) का व्यंजक-माना गोलीय संधारित्र धातु के दो समकेन्द्रीय खोखले गोलों A व B का बना है, जो एक-दूसरे को कहीं भी स्पर्श नहीं करते (चित्र 2.17)। जब गोले A को -q आवेश दिया जाता है तो प्रेरण द्वारा गोले B पर +q आवेश उत्पन्न हो जाता है। चूंकि गोले B का बाहरी तल पृथ्वी से जुड़ा है; अतः गोले B के बाहरी तल पर उत्पन्न -q आवेश पृथ्वी से आने वाले इलेक्ट्रॉनों से निरावेशित हो जाता है। इस प्रकार गोले B के आन्तरिक पृष्ठ पर +q आवेश रह जाता है। माना गोले A की त्रिज्या r2 तथा गोले B की त्रिज्या b है।
गोले A पर - q आवेश के कारण विभव
\[ V_1 = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{q}{r_2} \]
चूँकि गोले के भीतर प्रत्येक बिन्दु पर वही विभव होता है जो कि उसके पृष्ठ पर होता है।
अतः गोले B के अन्दर, + q आवेश के कारण विभव
\[ V_2 = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{q}{r_1} \]
चूँकि विभव अदिश राशि है; अतः गोले A पर परिणामी विभव
\[ V = V_1 + V_2 = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{q}{r_1} - \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{q}{r_2} \]
\[ = \frac{q}{4 \pi \varepsilon_0} \left( \frac{1}{r_1} - \frac{1}{r_2} \right) = \frac{q}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{(r_2 - r_1)}{r_1 r_2} \]
गोला B पृथ्वी से जुड़ा होने के कारण इस पर विभव शून्य है। अतः गोले A व B के बीच विभवान्तर
\[ V = 0 - \frac{q}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{(r_2 - r_1)}{r_1 r_2} \]
अथवा
\[ \frac{q}{V} = 4 \pi \varepsilon_0 \frac{r_1 r_2}{(r_1 - r_2)} \]
संधारित्र की धारिता के सूत्र \( C = \frac{q}{V} \) से,
\[ C = 4 \pi \varepsilon_0 \frac{r_1 r_2}{(r_1 - r_2)} \]
अतः गोलीय संधारित्र की धरिता
\[ C = \frac{4 \pi \varepsilon_0 r_1 r_2}{(r_1 - r_2)} \]
यदि गोलों के बीच का स्थान K परावैद्युतांक वाले माध्यम द्वारा भरा है तो \(\varepsilon_0\) के स्थान पर \(\varepsilon_0 K\) रखने पर अभीष्ट धारिता
\[ C = \frac{4 \pi \varepsilon_0 K r_1 r_2}{(r_1 - r_2)} \]In simple words: The capacitance of a spherical capacitor with inner radius r2 and outer radius r1, and a dielectric medium K between them, is determined by the geometric factors and the permittivity of the dielectric, given by the formula \( C = \frac{4 \pi \varepsilon_0 K r_1 r_2}{(r_1 - r_2)} \). This formula shows that capacitance depends on the radii of the spheres and the dielectric constant.
🎯 Exam Tip: Remember to derive the capacitance by calculating the potential difference between the two spheres using the principle of superposition, and then use the definition \( C = \frac{Q}{V} \). Pay close attention to the sign conventions for charges and potential.
Question 30. एक गोलीय संधारित्र के भीतरी गोले की त्रिज्या 12 cm है तथा बाहरी गोले की त्रिज्या 13 cm है। बाहरी गोला भू-सम्पर्कित है तथा भीतरी गोले पर 2.5 µC का आवेश दिया गया है। संकेन्द्री गोलों के बीच के स्थान में 32 परावैद्युतांक का द्रव भरा है।
(a) संधारित्र की धारिता ज्ञात कीजिए।
(b) भीतरी गोले का विभव क्या है?
(c) इस संधारित्र की धारिता की तुलना एक 12 cm त्रिज्या वाले किसी वियुक्त गोले की धारिता से कीजिए। व्याख्या कीजिए कि गोले की धारिता इतनी कम क्यों है?
Answer:
हल-
दिया है, r1 = 13 cm = 0.13 m, r2 = 0.12 m, K = 32, Q = 2.5 x 10-6 C
(a) गोलीय संधारित्र की धारिता
\[ C = 4 \pi \varepsilon_0 K \left( \frac{r_1 r_2}{r_1 - r_2} \right) \]
\[ = \frac{1}{9 \times 10^9} \times 32 \left( \frac{0.13 \times 0.12}{0.13 - 0.12} \right) \text{F} \]
\[ = \frac{5.55 \times 10^{-9}}{9 \times 10^9} \text{F} = 5550 \text{pF} \]
\[ = 5.5 \times 10^{-9} \text{F} \]
(b) संधारित्र का विभवान्तर \( V = \frac{Q}{C} \)
\[ = \frac{2.5 \times 10^{-6}}{5.55 \times 10^{-9}} \text{C} = 450 \text{V} \]
बाहरी गोले का विभव = 0
यदि भीतरी गोले का विभव = V1 हो तो
V1 - 0 = 450
भीतरी गोले का विभव V = 450 V = 4.5 x 10^2 V
(c) r = 12 cm = 0.12 m त्रिज्या के गोले की धरिता C' = \( 4 \pi \varepsilon_0 r \)
\[ = \frac{1}{9 \times 10^9} \times 0.12 \text{F} \]
\[ = 13.3 \text{pF} = 1.3 \times 10^{-11} \text{F} \]
\[ \frac{C}{C'} = \frac{5.5 \times 10^{-9}}{1.3 \times 10^{-11}} = 416 \]
अतः \( C = 416 C' \)
अर्थात् गोलीय संधारित्र की धारिता एकल गोले की धारिता से 416 गुनी अधिक है। इससे यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि एकल चालक के समीप एक अन्य भू-सम्पर्कित चालक रखकर उनके बीच के स्थान में परावैद्युत भरने से धारिता बहुत अधिक बढ़ जाती है।In simple words: The capacitance of the spherical capacitor is calculated using its radii and dielectric constant, resulting in a significantly higher value compared to a single isolated sphere of similar dimensions. This increased capacitance is due to the presence of the earthed outer sphere and the dielectric material, which helps store more charge for a given potential difference.
🎯 Exam Tip: For problems involving spherical capacitors, ensure you correctly identify the inner and outer radii and apply the dielectric constant appropriately. Comparison questions require you to calculate both capacitances and analyze the ratio.
Question 31. सावधानीपूर्वक उत्तर दीजिए :
1. दो बड़े चालक गोले जिन पर आवेश Q1 और Q2 हैं, एक-दूसरे के समीप लाए जाते हैं। क्या इनके बीच स्थिर विद्युत बल का परिमाण तथ्यतः \[ \frac{Q_1 Q_2}{4 \pi \varepsilon_0 r^2} \] द्वारा दर्शाया जाता है, जहाँ r इनके केन्द्रों के बीच की दूरी है।
2. यदि कूलॉम के नियम में \[ \frac{1}{r^3} \] निर्भरता का समावेश (\[ \frac{1}{r^2} \] के स्थान पर) हो तो क्या गाउस का नियम अभी भी सत्य होगा?
3. स्थिरविद्युत-क्षेत्र विन्यास में एक छोटा परीक्षण आवेश किसी बिन्दु पर विराम में छोड़ा जाता है। क्या यह उस बिन्दु से होकर जाने वाली क्षेत्र रेखा के अनुदिश चलेगा?
4. इलेक्ट्रॉन द्वारा एक वृत्तीय कक्षा पूरी करने में नाभिक के क्षेत्र द्वारा कितना कार्य किया जाता है? यदि कक्षा दीर्घवृत्ताकार हो तो क्या होगा?
5. हमें ज्ञात है कि एक आवेशित चालक के पृष्ठ के आर-पार विद्युत-क्षेत्र असंतत होता है। क्या वहाँ विद्युत विभव भी असंतत होगा?
6. किसी एकल चालक की धारिता से आपका क्या अभिप्राय है?
7. एक सम्भावित उत्तर की कल्पना कीजिए कि पानी का परावैद्युतांक (= 80), अभ्रक के परावैद्युतांक (= 6) से अधिक क्यों होता है?
Answer:
हल-
1. यदि दोनों गोले एक-दूसरे से बहुत अधिक दूरी पर होंगे तभी वे बिन्दु आवेशों की भाँति कार्य करेंगे। कूलॉम का नियम केवल बिन्दु आवेशों के लिए सत्य है; अतः गोलों को समीप लाने पर कूलॉम का नियम लागू नहीं होगा।
2. नहीं, गाउस का नियम केवल तभी तक सत्य है जब तक कि कूलॉम के नियम में निर्भरता \( \frac{1}{r^2} \) अतः कूलॉम के नियम में निर्भरता (\( \frac{1}{r^3} \)) होने पर गाउस का नियम लागू नहीं होगा।
3. नहीं, यदि क्षेत्र रेखा एक सरल रेखा है, केवल तभी परीक्षण आवेश क्षेत्र रेखा के अनुदिश चलेगा।
4. शून्य, स्थिर विद्युत क्षेत्र में बिन्दु आवेश के बन्द वक्र पर चलाने में किया गया कार्य शून्य होता है। यदि वक्र दीर्घवृत्ताकार है तो भी कार्य शून्य होगा।
5. नहीं, चालक की पूरी सतह पर विद्युत विभव सतत होता है।
6. एकल चालक की धारिता एक ऐसे संधारित्र की धारिता है, जिसकी दूसरी प्लेट अनन्त पर है।
7. जल के अणुओं का अपना स्थायी द्विध्रुव आघूर्ण होता है; अतः जल का परावैद्युतांक उच्च होता है, इसके विपरीत अभ्रक के अणुओं का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है; अतः इसका परावैद्युतांक निम्न होता है।In simple words: This question explores fundamental concepts in electrostatics. The answers clarify that Coulomb's law applies strictly to point charges, Gauss's law depends on the inverse-square law, test charges only follow straight field lines, work done in a conservative field is zero for a closed path, potential is continuous across a conductor's surface, and dielectric properties are linked to molecular dipole moments.
🎯 Exam Tip: For conceptual questions, focus on the underlying principles of electrostatics, such as the applicability conditions for Coulomb's and Gauss's laws, properties of electric field lines, conservative nature of electric fields, and the molecular basis of dielectric behavior.
Question 32. एक बेलनाकार संधारित्र में 15 cm लम्बाई एवं त्रिज्याएँ 1.5 cm तथा 1.4 cm के दो समाक्ष बेलन हैं। बाहरी बेलन भू-सम्पर्कित है और भीतरी बेलन को 3.5 µC का आवेश दिया गया है। निकाय की धारिता और भीतरी बेलन का विभव ज्ञात कीजिए। अन्त्य प्रभाव (अर्थात सिरों पर क्षेत्र रेखाओं का मुडना) की उपेक्षा कर सकते हैं।
Answer:
हल-बेलनाकार संधारित्र की धारिता
\[ C = 2 \pi \varepsilon_0 \frac{l}{2.303 \log_{10} (\frac{b}{a})} \]
यहाँ l = 0.15 m, a = 1.4 cm, b = 1.5 cm, Q = 3.5 µC
\[ C = \frac{1}{2 \times 9 \times 10^9} \times \frac{0.15}{2.303 \log_{10} (\frac{1.5}{1.4})} \]
\[ = 1.21 \times 10^{-10} \text{F} \]
\[ = 121 \text{pF} = 1.2 \times 10^{-10} \text{F} \]
संधारित्र का विभवान्तर \( V = \frac{Q}{C} \)
\[ = \frac{3.5 \times 10^{-6}}{121 \times 10^{-12}} \]
\[ = 2.89 \times 10^4 \text{V} \]
अतः बाहरी बेलन का विभव = 0
अतः भीतरी बेलन का विभव = \( 2.89 \times 10^4 \) V या \( 2.9 \times 10^4 \) VIn simple words: The capacitance of a cylindrical capacitor is calculated using its length, inner and outer radii, and the permittivity of free space. Given the charge and capacitance, the potential of the inner cylinder is found, while the earthed outer cylinder remains at zero potential.
🎯 Exam Tip: For cylindrical capacitor problems, use the formula for capacitance involving logarithms of the radii ratio. Remember that the potential of an earthed conductor is zero, and the potential difference drives charge storage.
Question 33. 3 परावैद्युतांक तथा 107 Vm-1 की परावैद्युत सामर्थ्य वाले एक पदार्थ से 1 kV वोल्टता अनुमतांक के समान्तर पट्टिका संधारित्र की अभिकल्पना करनी है। [परावैद्यत सामर्थ्य वह अधिकतम विद्युत-क्षेत्र है जिसे कोई पदार्थ बिना भंग हुए अर्थात आंशिक आयनन द्वारा बिना विद्युत संचरण आरम्भ किए सहन कर सकता है। सुरक्षा की दृष्टि से क्षेत्र को कभी भी परावैद्युत सामर्थ्य के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए।] 50 pF धारिता के लिए पट्टिकाओं का कितना न्यूनतम क्षेत्रफल होना चाहिए?
Answer:
हल - दिया है, K = 3, परावैद्युत सामर्थ्य = \( 10^7 \) वोल्ट/m, C = 500 pF, न्यूनतम क्षेत्रफल A = ?
V = 1000 वोल्ट
प्लेटों के बीच अधिकतम क्षेत्र Emax = परावैद्युत सामर्थ्य का 10%
\[ = \frac{10}{100} \times 10^7 \text{V/m} = 10^6 \text{V/m} \]
माना प्लेटों के बीच की दूरी d है तो
\[ E_{max} = \frac{V}{d} \]
\( \implies d = \frac{V}{E_{max}} = \frac{1000}{10^6} = 10^{-3} \text{m} \)
अब,
\[ C = \frac{\varepsilon_0 K A}{d} \]
\[ A = \frac{C d}{\varepsilon_0 K} \]
\[ = \frac{50 \times 10^{-12} \times 10^{-3}}{8.854 \times 10^{-12} \times 3} \]
\[ = 1.88 \times 10^{-3} \text{m}^2 \]
\[ = 18.8 \text{cm}^2 \approx 19 \text{cm}^2 \]In simple words: To design a parallel plate capacitor, the maximum electric field it can withstand (dielectric strength) is used to determine the minimum plate separation for a given voltage. Once the separation is known, the required area for the plates can be calculated from the desired capacitance, dielectric constant, and permittivity of free space.
🎯 Exam Tip: When designing capacitors, always consider the dielectric strength to avoid breakdown. Remember the relationship between electric field, voltage, and distance (\( E = \frac{V}{d} \)), and the capacitance formula (\( C = \frac{\varepsilon_0 K A}{d} \)). Safety factors, like using 10% of dielectric strength, are crucial in practical applications.
Question 34. व्यवस्थात्मकतः निम्नलिखित में संगत समविभव पृष्ठ का वर्णन कीजिए :
1. z-दिशा में अचर विद्युत-क्षेत्र
2. एक क्षेत्र जो एकसमान रूप से बढ़ता है, परन्तु एक ही दिशा (मान लीजिए z-दिशा) में रहता है।
3. मूल बिन्दु पर कोई एकल धनावेश, और
4. एक समतल में समान दूरी पर समान्तर लम्बे आवेशित तारों से बने एकसमान जाल ।
Answer:
उत्तर-
1. x-y समतल के समान्तर समतल।
2. समविभव पृष्ठ x-y समतल के समान्तर होंगे, परन्तु बढ़ते क्षेत्र के साथ, भिन्न-भिन्न नियत विभव वाले समतल एक-दूसरे के समीप होते जाएँगे।
3. संकेन्द्रीय गोले जिनके केन्द्र मूल बिन्दु पर हैं।
4. ग्रिड के समीप, समविभव पृष्ठों की आकृति समय के साथ बदलेगी परन्तु ग्रिड से दूर जाने पर समविभव पृष्ठ ग्रिड (जाल) के अधिकाधिक समान्तर होते जाएँगे ।In simple words: Equipotential surfaces are always perpendicular to the electric field lines. For a uniform field, they are parallel planes; for a point charge, they are concentric spheres; and for complex charge distributions like parallel wires, they initially follow the field pattern but become more uniform far away.
🎯 Exam Tip: Understand the fundamental definition of equipotential surfaces (constant potential, perpendicular to E-field). Be able to visualize and describe these surfaces for common electric field configurations, as this is a frequent conceptual question.
Question 35. किसी वान डे ग्राफ प्रकार के जनित्र में एक गोलीय धातु कोश 15 x 106 V का एक इलेक्ट्रोड बनाना है। इलेक्ट्रोड के परिवेश की गैस की परावैद्युत सामर्थ्य 5 x 107 Vm-1 है। गोलीय कोश की आवश्यक न्यूनतम त्रिज्या क्या है? [इस अभ्यास से आपको यह ज्ञान होगा कि एक छोटे गोलीय कोश से आप स्थिरवैद्यत जनित्र, जिसमें उच्च विभव प्राप्त करने के लिए कम आवेश की आवश्यकता होती है, नहीं बना सकते ।
Answer:
हल-
दिया है, गोलीय कोश का विभव V = \( 15 \times 10^6 \) V
गैस की परावैद्युत सामर्थ्य \( E_{max} = 5 \times 10^7 \) V/m
माना कोश की न्यूनतम त्रिज्या r है, तब
कोश का विभव \( V = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{q}{r} \)
जबकि
\[ E_{max} = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{q}{r^2} \]
\( \implies \frac{V}{r} = E_{max} \)
\[ r = \frac{V}{E_{max}} = \frac{15 \times 10^6}{5 \times 10^7} \]
\[ = 0.3 \text{m} = 30 \text{cm} \]In simple words: The minimum radius for a spherical electrode in a Van de Graaff generator is determined by the maximum voltage it needs to hold and the dielectric strength of the surrounding gas. This calculation ensures that the electric field at the surface does not exceed the breakdown strength, preventing unwanted discharge.
🎯 Exam Tip: For Van de Graaff generator problems, remember the relationship \( E = \frac{V}{r} \) for a spherical conductor. The dielectric strength sets the maximum allowable electric field, which in turn dictates the minimum radius for a given voltage.
Question 36. r1 त्रिज्या तथा q1 आवेश वाला एक छोटा गोला r2 त्रिज्या और q2 आवेश के गोली खोल (कोश) से घिरा है। दर्शाइए यदि q1 धनात्मक है तो (जब दोनों को एक तार द्वारा जोड़ दिया जाता है) आवश्यक रूप से आवेश, गोले से खोल की तरफ ही प्रवाहित होगा, चाहे खोल पर आवेश q2 कुछ भी हो ।
Answer:
उत्तर-
हम जानते हैं कि किसी चालक का सम्पूर्ण आवेश उसके बाह्य पृष्ठ पर रहता है; अतः जैसे ही दोनों गोलों को चालक तार द्वारा जोड़ा जाएगा वैसे ही अन्दर वाले छोटे गोले को सम्पूर्ण आवेश तार से होकर बाहरी खोल की ओर प्रवाहित हो जाएगा, चाहे खोल पर आवेश q2 कुछ भी क्यों न हो ।In simple words: When a charged inner conductor is connected by a wire to a concentric hollow outer conductor, all the charge from the inner conductor will flow to the outer conductor. This happens because the outer surface of a conductor is its most stable charge-holding location, irrespective of any pre-existing charge on the outer conductor.
🎯 Exam Tip: This question tests the understanding of charge distribution in conductors and the principle of electrostatic shielding. Remember that in connected conductors, charge always moves to minimize potential energy, usually residing on the outermost surface.
Question 37. निम्न का उत्तर दीजिए:
(a) पृथ्वी के पृष्ठ के सापेक्ष वायुमण्डले की ऊपर परत लगभग 400 kV पर है, जिसके संगत विद्युत-क्षेत्र ऊँचाई बढ़ने के साथ कम होता है। पृथ्वी के पृष्ठ के सापेक्ष विद्युत-क्षेत्र लगभग 100 Vm-1 है। तब फिर जब हम घर से बाहर खुले में जाते हैं तो हमें विद्युत आघात क्यों नहीं लगता? (घर को लोहे का पिंजरा मान लीजिए; अतः उसके अन्दर कोई विद्युत-क्षेत्र नहीं है।)
(b) एक व्यक्ति शाम के समय अपने घर के बाहर 2 m ऊँचा अवरोधी पट्ट रखता है जिसके शिखर पर एक 1 m क्षेत्रफल की बड़ी ऐलुमिनियम की चादर है। अगली सुबह वह यदि धातु की चादर को छूता है तो क्या उसे विद्युत आघात लगेगा?
(c) वायु की थोड़ी-सी चालकता के कारण सारे संसार में औसतन वायुमण्डल में विसर्जन धारा 1800 A मानी जाती है। तब यथासमय वातावरण स्वयं पूर्णतः निरावेशित होकर विद्युत उदासीन क्यों नहीं हो जाता? दूसरे शब्दों में, वातावरण को कौन आवेशित रखता है?
(d) तड़ित के दौरान वातावरण की विद्युत ऊर्जा, ऊर्जा के किन रूपों में क्षयित होती है? [संकेत : पृष्ठ आवेश घनत्व = 10-9 Cm-2 के अनुरूप पृथ्वी के (पृष्ठ) पर नीचे की दिशा में लगभग 100 Vm-1 का विद्युत क्षेत्र होता है। लगभग 50 km ऊँचाई तक (जिसके बाहर यह अच्छा चालक है) वातावरण की थोड़ी सी चालकता के कारण लगभग + 1800 C का आवेश प्रति सेकण्ड समग्र रूप से पृथ्वी में पंप होता रहता है। तथापि, पृथ्वी निरावेशित नहीं होती, क्योंकि संसार में हर समय लगातार तड़ित तथा तड़ित-झंझा होती रहती है, जो समान मात्रा में ऋणावेश पृथ्वी में पंप कर देती है ।]
Answer:
उत्तर-
(a) हमारा शरीर तथा पृथ्वी के समान विभव पर रहने के कारण हमारे शरीर से होकर कोई विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती इसीलिए हमें कोई विद्युत आघात नहीं लगता।
(b) हाँ, पृथ्वी तथा ऐलुमिनियम की चादर मिलकर एक संधारित्र बनाती हैं तथा अवरोधी पट्ट परावैद्युत का कार्य करती है। ऐलुमिनियम की चादर वायुमण्डलीय आवेश के लगातार गिरते रहने से आवेशित होती रहती है और उच्च विभव प्राप्त कर लेती है; अतः जब व्यक्ति इस चादर को छूता है तो उसके शरीर से होकर एक विद्युत धारा प्रवाहित होती है और इस कारण उस व्यक्ति को विद्युत आघात लगेगा।
(c) यद्यपि वायुमण्डल 1800 A की औसत विसर्जन धारा के कारण लगातार निरावेशित होता रहता है। परन्तु साथ ही तड़ित तथा झंझावात के कारण यह लगातार आवेशित भी होता रहता है और इन दोनों के बीच एक सन्तुलन बना रहता है जिससे कि वायुमण्डल कभी भी पूर्णतः निरावेशित नहीं हो पाता।
(d) तड़ित के दौरान वातावरण की विद्युत ऊर्जा, प्रकाश ऊर्जा, ध्वनि ऊर्जा तथा ऊष्मीय ऊर्जा के रूप में क्षयित होती है।In simple words: This question explores various real-world electrostatic phenomena. The answers cover why we don't get shocked by atmospheric potential (we're at Earth's potential), how an insulated metal sheet can build charge and deliver a shock, how lightning recharges the atmosphere despite continuous discharge, and the energy conversions during lightning.
🎯 Exam Tip: This question emphasizes practical applications and conceptual understanding of electrostatics. Focus on concepts like equipotential surfaces, charge accumulation on isolated conductors, atmospheric electricity balance, and energy dissipation during electrical discharges.
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. वैद्युत विभव का मात्रक है
(i) जूल/कूलॉम
(ii) जूल x कूलॉम
(iii) कूलॉम/जूल
(iv) न्यूटन/कूलॉम
Answer: (i) जूल/कूलॉम
In simple words: Electric potential is defined as the work done per unit charge to move a test charge from infinity to a point in an electric field. Therefore, its unit is Joules per Coulomb.
🎯 Exam Tip: Always remember the definition of electric potential \( V = \frac{W}{Q} \), which directly gives its unit as Joules/Coulomb or Volts.
Question 2. E = 0 तीव्रता वाले वैद्युत-क्षेत्र में विभव V का दूरी r के साथ परिवर्तन होग
(i) V \(\propto \frac{1}{r}\)
(ii) V \(\propto r\)
(iii) V \(\propto \frac{1}{r^2}\)
(iv) V, r पर निर्भर नहीं करेगा
Answer: (iv) V, r पर निर्भर नहीं करेगा
In simple words: If the electric field (E) is zero, it means there is no change in potential with respect to distance (\( E = - \frac{dV}{dr} \)). Therefore, the potential (V) must be constant and not depend on r.
🎯 Exam Tip: Recall the relationship between electric field and potential gradient: \( E = - \frac{dV}{dr} \). If \( E = 0 \), then \( \frac{dV}{dr} = 0 \), implying V is constant and independent of r.
Question 3. दो प्लेटें एक-दूसरे से 1 सेमी दूरी पर हैं और उनमें विभवान्तर 10 वोल्ट है। प्लेटों के बीच वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता है-
(i) 10 न्यूटन/कूलॉम
(ii) 500 न्यूटन/कूलॉम
(iii) 1000 न्यूटन/कूलॉम
(iv) 250 न्यूटन/कूलॉम
Answer: (iii) 1000 न्यूटन/कूलॉम
In simple words: The electric field strength between two parallel plates is calculated by dividing the potential difference by the distance between them. Given 10 Volts and 1 cm (0.01 m), the field is 1000 N/C.
🎯 Exam Tip: Use the formula \( E = \frac{V}{d} \) for the electric field between parallel plates. Remember to convert units to SI (cm to m) for accurate calculations.
Question 4. 1 इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) मात्रक है
(i) ऊर्जा का
(ii) विभव का
(iii) वेग का
(iv) कोणीय संवेग का
Answer: (i) ऊर्जा का
In simple words: An electron-volt (eV) is a unit of energy commonly used in atomic and nuclear physics. It represents the kinetic energy gained by an electron when accelerated through an electric potential difference of 1 Volt.
🎯 Exam Tip: Know that the electron-volt (eV) is a unit of energy, often used for very small energy quantities. Convert it to Joules using \( 1 \text{ eV} = 1.6 \times 10^{-19} \text{ J} \).
Question 5. एक वोल्ट विभवान्तर पर त्वरित करने पर इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा होती है।
(i) 1 जूल
(ii) 1 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
(iii) 1 अर्ग
(iv) 1 वाट
Answer: (ii) 1 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
In simple words: By definition, when an electron is accelerated through a potential difference of 1 Volt, the energy it gains is 1 electron-volt. This unit is very useful for expressing energies at the atomic scale.
🎯 Exam Tip: Directly recall the definition of an electron-volt: the energy gained by an electron (or any particle with charge equal to the elementary charge) when accelerated through a potential difference of one volt.
Question 6. वैद्युत द्विध्रुव के कारण, केन्द्र से दूरी पर अक्ष में स्थित बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता एवं विभव क्रमशः E तथा V हैं। E तथा V में सम्बन्ध होगा
(i) \( E = \frac{V}{R} \)
(ii) \( E = \frac{V}{2r} \)
(iii) \( E = \frac{2V}{r} \)
(iv) E = 2rV
Answer: (iii) \( E = \frac{2V}{r} \)
In simple words: For an electric dipole, the electric field and potential on its axis at a distance r from the center are related such that the field strength is twice the potential gradient, specifically \( E = \frac{2V}{r} \). This indicates a faster decay of the field compared to potential with distance.
🎯 Exam Tip: For an electric dipole on its axis, remember that electric field \( E \propto \frac{1}{r^3} \) and potential \( V \propto \frac{1}{r^2} \). The exact relationship is \( E = \frac{2V}{r} \) for points far from the dipole.
Question 7. निम्न में से कौन-सा तथ्य समविभव पृष्ठ के लिए सत्य नहीं है ?
(i) पृष्ठ पर किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर शून्य होता है।
(ii) वैद्युत बल रेखाएँ पृष्ठ के सर्वथा लम्बवत् होती हैं।
(iii) पृष्ठ पर किसी आवेश को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने पर कोई कार्य नहीं होता है।
(iv) समविभव पृष्ट सर्वदा गोलाकार होते हैं।
Answer: (iv) समविभव पृष्ट सर्वदा गोलाकार होते हैं।
In simple words: Equipotential surfaces are not always spherical; their shape depends on the charge distribution. For instance, for a uniform electric field, they are planar, and for a point charge, they are spherical.
🎯 Exam Tip: Understand the properties of equipotential surfaces: potential is constant, no work is done moving a charge on them, and electric field lines are always perpendicular to them. Their shape varies with the charge configuration.
Question 8. एक इलेक्ट्रॉन को दूसरे इलेक्ट्रॉन के अधिक नजदीक लाने पर निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा
(i) घटती है।
(ii) बढ़ती है।
(iii) उतनी ही रहती है।
(iv) शून्य हो जाती है।
Answer: (ii) बढ़ती है।
In simple words: When two electrons, which both have negative charges, are brought closer together, the repulsive force between them increases. To overcome this repulsion and bring them closer, external work must be done, which is stored as increased electric potential energy of the system.
🎯 Exam Tip: Remember that like charges repel. Bringing like charges closer together increases the system's potential energy, while bringing opposite charges closer decreases it.
Question 9. वायु में 1 सेमी दूरी पर रखे प्रत्येक 1 माइक्रो कूलॉम के दो धनात्मक बिन्दु आवेशों के निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा है-
(i) 0.9 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
(ii) 0.9 जूल
(iii) 1 जूल
(iv) 9 जूल
Answer: (ii) 0.9 जूल
In simple words: The potential energy of a system of two point charges is calculated using Coulomb's constant, the magnitudes of the charges, and the distance between them. For two 1 \(\mu\)C charges separated by 1 cm, the potential energy is 0.9 Joules.
🎯 Exam Tip: Use the formula for electrostatic potential energy \( U = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r} \). Ensure all units are in SI (microcoulombs to coulombs, cm to meters) and use the value \( \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} = 9 \times 10^9 \text{ Nm}^2/\text{C}^2 \).
Question 10. निम्नलिखित में से धारिता का मात्रक कौन-सा है?
(i) कूलॉम
(ii) ऐम्पियर
(iii) वोल्ट
(iv) कूलॉम/वोल्ट
Answer: (iv) कूलॉम/वोल्ट
In simple words: Capacitance is defined as the ratio of the charge stored on a conductor to the potential difference across it. Therefore, its unit is Coulombs per Volt, also known as Farad.
🎯 Exam Tip: The definition of capacitance is \( C = \frac{Q}{V} \). Therefore, its unit is Coulombs/Volt, which is equivalent to a Farad (F).
Question 11. एक आवेशित संधारित्र बैटरी से जुड़ा है। यदि प्लेटों के बीच परावैद्युत पदार्थ की एक पट्टी रखी जाये तो निम्न में से क्या परिवर्तित नहीं होगा ?
(i) आवेश
(ii) विभवान्तर
(iii) धारिता
(iv) ऊर्जा
Answer: (ii) विभवान्तर
In simple words: If a charged capacitor remains connected to a battery, the battery maintains a constant potential difference across its plates. Inserting a dielectric will change the capacitance, charge, and stored energy, but the voltage supplied by the battery remains unchanged.
🎯 Exam Tip: When a capacitor is connected to a battery, the battery acts as a constant voltage source. Therefore, the potential difference across the capacitor plates remains constant regardless of changes in its physical properties like introducing a dielectric.
Question 12. वायु में रखे दो धनावेशों के मध्य परावैद्युत पदार्थ रख देने पर इनके बीच प्रतिकर्षण बल का मान
(i) बढ़ जायेगा
(ii) घट जायेगा
(iii) वही रहेगा ।
(iv) शून्य
Answer: (ii) घट जायेगा।
In simple words: When a dielectric material is placed between two charges, it effectively reduces the electric field and the force between them. This reduction is quantified by the dielectric constant (K), which decreases the force by a factor of K.
🎯 Exam Tip: The force between two charges in a dielectric medium is \( F = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0 K} \frac{q_1 q_2}{r^2} \). Since K > 1 for any dielectric, the force F will always be less than the force in a vacuum (where K=1).
Question 13. दिये गये चित्र 2.18 में बिन्दुओं A व B के बीच तुल्य धारिता है
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक संधारित्र नेटवर्क दिखाता है जिसमें तीन संधारित्र जुड़े हैं। एक 3 µF संधारित्र A और B के बीच सीधे जुड़ा है। दो 2 µF संधारित्रों की एक शाखा, जो आपस में श्रेणीक्रम में हैं, A और B के बीच समानांतर में जुड़ी है।
(i) 4 µF
(ii) \( \frac{12}{7} \) µF
(iii) \( \frac{1}{4} \) µF
(iv) \( \frac{7}{12} \) µF
Answer: (i) 4 µF
In simple words: To find the equivalent capacitance, first combine the two series capacitors, then add their equivalent capacitance in parallel with the third capacitor. This approach simplifies the circuit step-by-step.
🎯 Exam Tip: For series capacitors, use \( \frac{1}{C_{eq}} = \frac{1}{C_1} + \frac{1}{C_2} \). For parallel capacitors, use \( C_{eq} = C_1 + C_2 \). Apply these rules sequentially to simplify complex networks.
Question 14. दिये गये चित्र 2.19 में बिन्दुओं A व B के बीच तुल्य धारिता है-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक संधारित्र नेटवर्क दिखाता है जिसमें तीन संधारित्र A और B बिन्दुओं के बीच जुड़े हैं। एक 1 µF संधारित्र और एक 2 µF संधारित्र श्रेणीक्रम में हैं, और उनकी श्रृंखला के समानांतर में एक 3 µF संधारित्र जुड़ा है।
(i) \( \frac{2}{3} \) µF
(i) \( \frac{3}{2} \) µF
(ii) \( \frac{11}{3} \) µF
(iv) 1 µF
Answer: (iv) 1 µF
In simple words: To calculate the equivalent capacitance, first find the equivalent of the two capacitors in series. Then, add this value to the capacitance of the capacitor connected in parallel with that series combination.
🎯 Exam Tip: Remember that series capacitance is smaller than the smallest individual capacitance, and parallel capacitance is larger than the largest individual capacitance. Systematically reduce the circuit using series and parallel combination rules.
Question 15. चित्र 2.20 में प्रदर्शित संधारित्रों की तुल्य धारिता A व B के बीच है
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक व्हीटस्टोन ब्रिज जैसी संरचना में चार 1 µF संधारित्रों को दिखाता है, जो बिन्दुओं A और B के बीच जुड़े हैं। बीच में कोई संधारित्र नहीं है।
(i) 4 µF
(ii) 2.5 µF
(iii) 2 µF
(iv) 0.25 µF
Answer: (iii) 2 µF
In simple words: This circuit forms a balanced Wheatstone bridge. The equivalent capacitance is found by combining the two series pairs in parallel, which simplifies the calculation significantly due to the balanced condition.
🎯 Exam Tip: Identify Wheatstone bridge configurations. If the bridge is balanced, the central element can be ignored. Then, calculate the equivalent capacitance by combining the remaining series-parallel combinations.
Question 16. 100 माइक्रोफैरड धारिता वाले संधारित्र को 10 वोल्ट तक आवेशित करने पर उसमें संचित ऊर्जा होगी
(i) \( 5.0 \times 10^{-3} \) जूल
(ii) \( 0.5 \times 10^{-3} \) जूल ।
(iii) 0.5 जूल ।
(iv) 5.0 जूल ।
Answer: (i) \( 5.0 \times 10^{-3} \) जूल ।
In simple words: The energy stored in a capacitor is directly proportional to its capacitance and the square of the voltage across it. Using the formula for stored energy, a 100 \(\mu\)F capacitor charged to 10 Volts stores \( 5 \times 10^{-3} \) Joules of energy.
🎯 Exam Tip: Use the formula for energy stored in a capacitor: \( U = \frac{1}{2} C V^2 \). Remember to convert microfarads to farads (\(\mu\)F = \(10^{-6}\) F) before calculation.
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. वैद्युत-विभव की परिभाषा दीजिए तथा इसकी विमा लिखिए।
Answer:
वैद्युत-विभव-वैद्युत- क्षेत्र में किसी बिन्दु पर वैद्युत-विभव (V), परीक्षण-आवेश (+q0) को अनन्त से उस बिन्दु तक लाने में किये गये कार्य (W) तथा परीक्षण-आवेश के मान की निष्पत्ति के बराबर होता है।
अर्थात्
\[ V = \frac{W}{q_0} \]
जूल/कूलॉम या वोल्ट
वैद्युत-विभव (V) की विमा
\[ \text{वोल्ट} = \frac{\text{जूल}}{\text{कूलॉम}} = \frac{\text{न्यूटन} \times \text{मीटर}}{\text{ऐम्पियर} \times \text{सेकण्ड}} \]
\[ = \frac{(\text{किग्रा-मीटर} \times \text{सेकण्ड}^{-2}) \times \text{मीटर}}{\text{ऐम्पियर} \times \text{सेकण्ड}} \]
\[ = \text{किग्रा} \times \text{मीटर}^2 \times \text{सेकण्ड}^{-3} \times \text{ऐम्पियर}^{-1} \]
\[ \text{विमा} = [\text{ML}^2 \text{T}^{-3} \text{A}^{-1}] \]In simple words: Electric potential is the work done per unit positive test charge to bring it from infinity to a specific point in an electric field. Its SI unit is Joules per Coulomb (or Volt), and its dimensional formula is \( [\text{ML}^2 \text{T}^{-3} \text{A}^{-1}] \).
🎯 Exam Tip: Memorize the definition of electric potential and its dimensional formula. Understanding how it's derived from work and charge will help in recalling its units.
Question 2. इलेक्ट्रॉन-वोल्ट की परिभाषा दीजिए ।
या
eV क्या है? इसका मान जूल में ज्ञात कीजिए।
Answer:
इलेक्ट्रॉन-वोल्ट- यह ऊर्जा का जूल की तुलना में बहुत छोटा मात्रक है। इसको इस प्रकार परिभाषित किया जाता है-
"1 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट (eV) वह ऊर्जा है जो कि 1 इलेक्ट्रॉन (आवेश q = e = \( 1.6 \times 10^{-19} \) कूलॉम) 1 वोल्ट विभवान्तर पर त्वरित होने पर प्राप्त करता है।"
यदि q कूलॉम आवेश से आवेशित कण \( \triangle V \) विभवान्तर पर त्वरित होता है तो उसके द्वारा प्राप्त गतिज ऊर्जा \( K = q \times \triangle V \)
यहाँ, \( q = e = 1.6 \times 10^{-19} \) कूलॉम तथा V = 1 वोल्ट
1 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ऊर्जा = \( 1.6 \times 10^{-19} \) कूलॉम \( \times \) 1 वोल्ट = \( 1.6 \times 10^{-19} \) जूल ।
इस प्रकार \( 1 \text{ eV} = 1.6 \times 10^{-19} \) जूलIn simple words: An electron-volt (eV) is a unit of energy equal to the kinetic energy gained by a single electron accelerating through an electric potential difference of one volt. Its value in Joules is \( 1.6 \times 10^{-19} \) J.
🎯 Exam Tip: Understand that electron-volt is an energy unit, not a potential unit. It's crucial for calculations in atomic and nuclear physics, so remember its conversion factor to Joules.
Question 3. 1 Mev को जूल में व्यक्त कीजिए।
Answer:
हल-
\( 1 \text{ MeV} = 10^6 \text{ eV} = 10^6 \times 1.6 \times 10^{-19} \text{ जूल} = 1.6 \times 10^{-13} \text{ जूल} \)In simple words: To convert Mega electron-volts (MeV) to Joules, first convert MeV to eV by multiplying by \( 10^6 \), and then convert eV to Joules by multiplying by the electron's charge.
🎯 Exam Tip: Remember the conversion factors: \( 1 \text{ MeV} = 10^6 \text{ eV} \) and \( 1 \text{ eV} = 1.6 \times 10^{-19} \text{ J} \). Combining these gives \( 1 \text{ MeV} = 1.6 \times 10^{-13} \text{ J} \).
Question 4. क्या यह सम्भव है कि किसी बिन्दु पर वैद्युत विभव शून्य हो, लेकिन वैद्युत क्षेत्र शून्य न हो?
Answer:
उत्तर- हाँ। उदाहरण के लिए, वैद्युत द्विध्रुव की निरक्षीय स्थिति में।In simple words: Yes, it is possible for electric potential to be zero while the electric field is non-zero. A classic example is at the equatorial plane of an electric dipole, where the potential contributions from the positive and negative charges cancel out, but the electric field vectors add up to a net non-zero field.
🎯 Exam Tip: This is a key conceptual point. Remember that electric potential is a scalar quantity, while electric field is a vector quantity. Their relationship \( E = - \frac{dV}{dr} \) shows that a constant potential (even zero) means zero field, but a zero potential doesn't necessarily mean a zero field.
Question 5. 1 सेमी त्रिज्या के गोले को 1 कूलॉम आवेश देने से गोले के पृष्ठ पर उत्पन्न विभव की गणना कीजिए।
Answer:
हल - दिया है, q = 1 कूलॉम, r = 1 सेमी = \( 10^{-2} \) मीटर
\[ \text{गोले के पृष्ठ पर विभव V} = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{q}{r} \]
\[ = 9 \times 10^9 \times \frac{1}{10^{-2}} \]
\[ = 9 \times 10^{11} \text{ वोल्ट} \]
अतः गोले के पृष्ठ पर उत्पन्न विभव \( 9 \times 10^{11} \) वोल्ट होगा।In simple words: The potential on the surface of a charged conducting sphere is calculated using the formula \( V = \frac{kq}{r} \), where k is Coulomb's constant, q is the charge, and r is the radius. For a 1 Coulomb charge on a 1 cm sphere, the potential is very high.
🎯 Exam Tip: For spherical conductors, the potential on the surface (and inside) is \( V = \frac{kq}{r} \). Ensure units are in SI: charge in Coulombs, radius in meters, and use \( k = 9 \times 10^9 \text{ Nm}^2/\text{C}^2 \).
Question 6. + 40 माइक्रोकूलॉम के दो आवेश परस्पर 0.4 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। इनके मध्य बिन्दु पर विभव की गणना कीजिए। माध्यम का परावैद्युतांक 2 है।
Answer:
हल-
+ 40 माइक्रोकूलॉम के दोनों आवेशों के कारण उनके मध्य बिन्दु पर वैद्युत विभव
\[ V = 2 \times \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0 K} \frac{q}{r} \]
\[ \text{[ यहाँ K = 2 ]} \]
\[ = 2 \times (9.0 \times 10^9) \times \frac{1}{2} \times \frac{40 \times 10^{-6}}{0.2} \]
\[ = \frac{360 \times 10^{-6}}{0.2} = 1.8 \times 10^{-3} \text{ वोल्ट} \]In simple words: To find the potential at the midpoint between two identical charges in a dielectric medium, calculate the potential due to each charge at that point and sum them up. Remember to include the dielectric constant in the potential formula.
🎯 Exam Tip: Electric potential is a scalar quantity, so sum the potentials algebraically. Use the formula \( V = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0 K} \frac{q}{r} \) for each charge, ensuring \( \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} = 9 \times 10^9 \). Convert microcoulombs to coulombs.
Question 7. विभव-प्रवणता तथा वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता में सम्बन्ध बताइए ।
Answer:
उत्तर- वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता \( E = - \text{ विभव प्रवणता} = - \frac{\triangle V}{\triangle x} \)In simple words: The electric field intensity is equal to the negative of the potential gradient. This means the electric field points in the direction where the electric potential decreases most rapidly.
🎯 Exam Tip: Always remember the vector relationship \( \vec{E} = - \vec{\nabla} V \). This fundamental equation links the electric field, a vector, to the scalar potential, highlighting that the electric field is the rate of change of potential in space.
Question 8. विभव-प्रवणता का मात्रक एवं विमीय सूत्र लिखिए।
Answer:
उत्तर-
मात्रक-वोल्ट/मीटर तथा विमा- \( [\text{MLT}^{-3}\text{A}^{-1}] \)In simple words: Potential gradient, which is the rate of change of potential with distance, has units of Volts per meter. Its dimensional formula is \( [\text{MLT}^{-3}\text{A}^{-1}] \), reflecting its equivalence to electric field strength.
🎯 Exam Tip: The unit of potential gradient (Volt/meter) is the same as that of electric field strength (Newton/Coulomb), confirming their direct relationship. Be ready to derive the dimensional formula from fundamental units if needed.
Question 9. दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर 50 V है। एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक \( 2 \times 10^{-5} \) कूलॉम आवेश को ले जाने पर कितना कार्य करना होगा ?
Answer:
हल-
कार्य (W) = आवेश \( \times \) विभवान्तर
\( = 2 \times 10^{-5} \) कूलॉम \( \times \) 50 वोल्ट
\( = 10^{-3} \) जूल ।In simple words: The work done in moving a charge between two points is calculated by multiplying the charge by the potential difference between those points. Here, \( 2 \times 10^{-5} \) C moved across 50 V requires \( 10^{-3} \) Joules of work.
🎯 Exam Tip: The work done (W) in moving a charge (q) between two points with a potential difference (\( \triangle V \)) is given by \( W = q \triangle V \). Ensure units are consistent (Coulombs, Volts, Joules).
Question 10. 10 सेमी की दूरी पर स्थित दो बिन्दु A व B के विभव क्रमशः +10 वोल्ट तथा -10 वोल्ट हैं। 1.0 कूलॉम आवेश को A से B तक ले जाने में कितना कार्य करना होगा?
Answer:
हल-
1.0 कूलॉम आवेश को A से B तक ले जाने में किया गया कार्य
\( W = (V_B - V_A) q_0 \)
\( = (-10 - 10) \times 1.0 \)
\( = -20 \) जूल
अतः कार्य प्राप्त होगा।In simple words: The work done in moving a charge from point A to point B is the product of the charge and the potential difference between the points (V_B - V_A). For a 1 Coulomb charge moving from +10V to -10V, -20 Joules of work is done. The negative sign indicates that the electric field does positive work, or external work is done against the field.
🎯 Exam Tip: The work done \( W_{AB} = q(V_B - V_A) \). Pay careful attention to the signs of potential and charge. A negative work implies that the field does positive work on the charge, or that external work is done against the field.
Question 11. सम-विभव पृष्ठ से क्या तात्पर्य है?
Answer:
उत्तर- किसी वैद्युत क्षेत्र में खींचा गया वह पृष्ठ जिस पर स्थित सभी बिन्दुओं पर वैद्युत विभव बराबर हो, समविभव पृष्ठ कहलाता है।In simple words: An equipotential surface is a surface in an electric field where all points on it have the same electric potential. This means no work is done when moving a charge along such a surface.
🎯 Exam Tip: Remember the two key properties of equipotential surfaces: potential is constant everywhere on the surface, and electric field lines are always perpendicular to the surface.
Question 12. किसी समविभव पृष्ठ के दो बिन्दुओं के मध्य 800 µC आवेश को गति कराने में कितना कार्य होगा?
Answer:
हल-
समविभव पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर विभव का मान समान होता है। अतः पृष्ठ के किन्हीं भी दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर \( \triangle V = 0 \)
अतः q = 800 µC = \( 800 \times 10^{-6} \) कूलॉम को इन बिन्दुओं के बीच गति कराने में किया गया कार्य
\( W = q \times \triangle V = (800 \times 10^{-6}) \times 0 = 0 \) (शून्य)
[ \( 1 \text{ µC} = 10^{-6} \text{ C} \) ]In simple words: No work is done in moving a charge between any two points on an equipotential surface because the potential difference between those points is zero by definition.
🎯 Exam Tip: This is a fundamental property of equipotential surfaces: since \( W = q \Delta V \) and \( \Delta V = 0 \) on an equipotential surface, the work done is always zero.
Question 13. संधारित्र किसे कहते हैं?
Answer:
उत्तर- संधारित्र एक ऐसा समायोजन है जिसमें किसी चालक के आकार में परिवर्तन किये बिना उस पर आवेश की पर्याप्त मात्रा संचित की जा सकती है।In simple words: A capacitor is a device designed to store electric charge and, consequently, electrical energy. It typically consists of two conducting plates separated by a dielectric material.
🎯 Exam Tip: A capacitor's primary function is to store charge and energy. Its ability to do so without significant size change distinguishes it from a single conductor's ability to hold charge.
Question 14. संधारित्र की धारिता की परिभाषा लिखिए।
Answer:
उत्तर- किसी संधारित्र की धारिता, उसकी एक प्लेट को दिए गए आवेश तथा दोनों प्लेटों के बीच उत्पन्न विभवान्तर के अनुपात के बराबर होती है। अर्थात् संधारित्र की धारिता \( C = \frac{q}{V} \)In simple words: Capacitance is a measure of a capacitor's ability to store electric charge, defined as the ratio of the charge stored (q) on one plate to the potential difference (V) across the two plates.
🎯 Exam Tip: The formula \( C = \frac{Q}{V} \) is the definition of capacitance. Remember that C is a constant for a given capacitor, independent of Q or V, and its value depends on the capacitor's geometry and dielectric material.
Question 15. M.K.S. पद्धति में धारिता की विमा लिखिए। इसका मात्रक क्या है?
Answer:
उत्तर-
धारिता की विमा \( [\text{M}^{-1}\text{L}^{-2}\text{T}^4\text{A}^2] \) तथा मात्रक फैरड है।In simple words: The capacitance, measured in Farads (F) in the M.K.S. system, has a dimensional formula of \( [\text{M}^{-1}\text{L}^{-2}\text{T}^4\text{A}^2] \), which is derived from its definition \( C = \frac{Q}{V} \) and the dimensions of charge and potential.
🎯 Exam Tip: To find the dimensional formula for capacitance, start with \( C = \frac{Q}{V} \), substitute \( V = \frac{W}{Q} \), giving \( C = \frac{Q^2}{W} \). Then substitute the dimensions of charge (AT) and work (\( \text{ML}^2\text{T}^{-2} \)).
Question 16. परावैद्युत पदार्थ क्या है?
Answer:
उत्तर- परावैद्युत पदार्थ वह पदार्थ होता है जिसके अन्दर सभी परमाणुओं में उनके सभी इलेक्ट्रॉन नाभिक के आकर्षण बल से दृढ़तापूर्वक बँधे रहते हैं। अतः ऐसे पदार्थों में वैद्युत चालन के लिए कोई भी मुक्त इलेक्ट्रॉन उपलब्ध नहीं होता अथवा मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या नगण्य होती है। अतः परावैद्युत पदार्थ वे पदार्थ हैं जिनमें होकर वैद्युत प्रवाह नहीं होता। फिर भी यदि कोई वैद्युत-क्षेत्र किसी परावैद्युत पदार्थ पर आरोपित किया जाता है तो परावैद्युत पदार्थ के पृष्ठों पर प्रेरित आवेश उत्पन्न हो जाता है। अतः परावैद्युत पदार्थ वे कुचालक (insulator) पदार्थ हैं जिनमें वैद्युत प्रभाव (electric effects) बिना वैद्युत चालन के संचरित होते हैं।” किसी वैद्युत चालक के किसी बिन्दु पर दिया गया आवेश उसकी पूरी सतह पर शीघ्रता से फैल जाता है, जबकि किसी परावैद्युत के किसी बिन्दु पर दिया गया आवेश उसी के निकटवर्ती क्षेत्र में स्थिर रहता है। उदाहरण-काँच, रबर, प्लास्टिक, ऐबोनाइट, माइका, मोम, कागज, लकड़ी आदि ।In simple words: A dielectric material is an electrical insulator that can be polarized by an applied electric field. It does not conduct electricity but allows electric fields to pass through, causing charge to be induced on its surfaces.
🎯 Exam Tip: Dielectrics are insulators that can store electrical energy when subjected to an electric field. Remember their key property: they don't allow current to flow, but they can be polarized, reducing the electric field within them.
Question 17. संधारित्र में साधारणतया प्रयुक्त होने वाले किन्हीं दो परावैद्युत पदार्थों के नाम लिखिए ।
Answer:
उत्तर- अभ्रक व काँच ।In simple words: Common dielectric materials used in capacitors include mica and glass, chosen for their insulating properties and ability to store electric energy when polarized by an electric field.
🎯 Exam Tip: Be familiar with common dielectric materials like air, paper, mica, glass, and plastic. These are crucial for increasing the capacitance of a capacitor.
Question 18. किसी परावैद्युत पदार्थ के वैद्युत ध्रुवण से क्या तात्पर्य है?
Answer:
उत्तर-
द्युत धुवण- किसी परावैद्युत अथवा विद्युतरोधी को बाह्य वैद्युत क्षेत्र में रखने पर इसके धन व ऋण आवेशों के केन्द्र पृथक्-पृथक् हो जाते हैं, जिससे इनमें वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण प्रेरित हो जाते हैं। ऐसे परावैद्युत को ध्रुवित होना कहते हैं तथा इस घटना को वैद्युत ध्रुवण कहते हैं।In simple words: Electric polarization in a dielectric occurs when an external electric field causes the positive and negative charge centers within its atoms or molecules to separate slightly, forming induced electric dipoles. This alignment of dipoles is called polarization.
🎯 Exam Tip: Polarization is the key mechanism by which dielectrics modify electric fields. Understand that it involves the formation or alignment of electric dipoles within the material.
Question 19. संधारित्रों में परावैद्युत के उपयोग से धारिता क्यों बढ़ जाती है?
या
किसी संधारित्र की प्लेटों के बीच परावैद्युत पदार्थ भरने पर इसकी धारिता पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer:
उत्तर- संधारित्रों की प्लेटों के बीच परावैद्युत भरने से इसके अन्दर प्लेटों के बीच उपस्थित वैद्युत-क्षेत्र के विपरीत दिशा में एक आन्तरिक वैद्युत-क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है, जो इसकी सतह पर प्लेटों के विपरीत आवेश के प्रेरित होने से उत्पन्न होता है। अतः प्लेटों के बीच विभवान्तर घट जाता है, जिसके परिणामस्वरूप धारिता बढ़ जाती है।In simple words: Inserting a dielectric material between capacitor plates increases its capacitance because the dielectric becomes polarized, creating an internal electric field that opposes the external field. This reduces the net electric field and thus the potential difference for a given charge, leading to higher capacitance (\( C = \frac{Q}{V} \)).
🎯 Exam Tip: Remember that a dielectric reduces the electric field between the plates by a factor of K (dielectric constant). This reduction in E-field leads to a reduction in potential difference V, and since \( C = \frac{Q}{V} \), capacitance increases.
Question 20. परावैद्युत सामर्थ्य एवं भंजक विभवान्तर को स्पष्ट कीजिए।
Answer:
उत्तर-
• परावैद्युत सामर्थ्य- परावैद्युत पर आरोपित वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता का वह अधिकतम मान जिसको परावैद्युत बिना परावैद्युत भंजन के सहन कर सकता है, परावैद्युत की परावैद्युत सामर्थ्य कहलाती है।
• भंजक विभवान्तर- किसी परावैद्युत पदार्थ के भंजक हुए बिना उसके दोनों सिरों के बीच लगाए गए वैद्युत विभवान्तर के अधिकतम मान को उस परावैद्युत का भंजक विभवान्तर कहते हैं।In simple words: Dielectric strength is the maximum electric field a dielectric can withstand without breaking down and becoming a conductor. Breakdown voltage is the maximum potential difference that can be applied across a dielectric without it experiencing electrical breakdown.
🎯 Exam Tip: Distinguish between dielectric strength (maximum electric field per unit length) and breakdown voltage (maximum potential difference). Both relate to a dielectric's ability to resist conduction, but one is an intrinsic material property, and the other depends on geometry.
Question 21. एक आवेशित संधारित्र एवं एक वैद्युत सेल में मूल अन्तर क्या है?
Answer:
उत्तर- आवेशित संधारित्र में वैद्युत आवेश संग्रहीत रहता है, जबकि वैद्युत सेल में वैद्युत आवेश का प्रवाह होता है।In simple words: An charged capacitor stores electric charge and energy within its electric field, releasing it quickly. An electric cell (battery) generates and sustains a continuous flow of electric charge by converting chemical energy into electrical energy.
🎯 Exam Tip: The key difference is storage vs. generation/flow. A capacitor stores charge (like a bucket holds water), while a cell generates and drives the flow of charge (like a pump).
Question 23. दो संधारित्र जिनकी धारिताएँ क्रमशः 20 तथा 30 µF हैं, श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। उनकी तुल्य धारिता ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया है,
C1 = 20 µF
C2 = 30 µF
तुल्य धारिता C' श्रेणीक्रम में जोड़ने पर:
\[ \frac{1}{C'} = \frac{1}{C_1} + \frac{1}{C_2} \]
\[ \frac{1}{C'} = \frac{1}{20} + \frac{1}{30} = \frac{3+2}{60} = \frac{5}{60} \]
\( \implies \) \[ C' = \frac{60}{5} = 12 \, \mu F \]
In simple words: जब दो संधारित्र श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं, तो उनकी कुल धारिता उनके व्यक्तिगत धारिताओं के व्युत्क्रमों का योग होती है, जिसका परिणामी व्युत्क्रम कुल धारिता देता है।
🎯 Exam Tip: श्रेणीक्रम में संधारित्रों की तुल्य धारिता हमेशा व्यक्तिगत धारिताओं से कम होती है, जो उच्च-स्कोरिंग अनुप्रयोगों के लिए एक महत्वपूर्ण विचार है।
Question 24. नीचे दिये गये परिपथ में A और B बिन्दुओं के बीच तुल्य धारिता ज्ञात कीजिए-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में एक संधारित्र नेटवर्क दिखाया गया है जहाँ 3 µF का संधारित्र, 6 µF का संधारित्र, 3 µF का संधारित्र, 8 µF का संधारित्र और एक और 6 µF का संधारित्र जुड़े हुए हैं। A और B बिंदु नेटवर्क के इनपुट/आउटपुट टर्मिनल हैं।
Answer: हल-
दिये गये परिपथ को निम्नांकित चित्र से प्रतिस्थापित कर सकते हैं
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में पिछले संधारित्र नेटवर्क को एक व्हीटस्टोन सेतु के रूप में पुनर्व्यवस्थित करके दिखाया गया है। इसमें 3 µF, 6 µF, 8 µF, 6 µF के संधारित्र एक सेतु विन्यास में हैं, जिसके केंद्र में एक 8 µF का संधारित्र है, जो अब प्रभावहीन है। A, B, C, D नेटवर्क के बिंदु हैं।
स्पष्ट है कि दिया गया परिपथ व्हीटस्टोन सेतु व्यवस्था है, अतः 8 µF पर कोई आवेश संचित नहीं होगा।
अतः चित्र 2.22 को चित्र 2.23 से प्रतिस्थापित किया जा सकता है।
अत: A व B के बीच तुल्य धारिता C = 2 µF + 2 µF = 4 µF
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र व्हीटस्टोन सेतु के संतुलन के बाद के सरलीकृत नेटवर्क को दर्शाता है। केंद्रीय 8 µF संधारित्र को हटा दिया गया है, और शेष संधारित्रों को दो समानांतर शाखाओं में दिखाया गया है, प्रत्येक शाखा में 2 µF के दो संधारित्र श्रेणीक्रम में हैं।
In simple words: जटिल संधारित्र सर्किट को अक्सर व्हीटस्टोन सेतु के रूप में सरल बनाया जा सकता है; यदि सेतु संतुलित हो, तो बीच का संधारित्र अप्रभावी हो जाता है, जिससे कुल धारिता की गणना करना आसान हो जाता है।
🎯 Exam Tip: व्हीटस्टोन सेतु का सिद्धांत संधारित्र नेटवर्कों में तुल्य धारिता की गणना के लिए एक महत्वपूर्ण अवधारणा है; संतुलित सेतु की स्थिति में मध्य संधारित्र को छोड़ना याद रखें।
Question 25. एक समान्तर प्लेट वायु संधारित्र की धारिता 100 µF है। यदि इसे 50 वोल्ट तक आवेशित किया जाए, तो इसमें संचित ऊर्जा कितनी होगी?
Answer: हल-
दिया है, धारिता C = 100 µF = \(100 \times 10^{-6}\) F
विभवान्तर V = 50 वोल्ट
संचित ऊर्जा U = \( \frac{1}{2}CV^2 \)
\[ U = \frac{1}{2} \times (100 \times 10^{-6}) \, \text{फैरड} \times (50 \, \text{वोल्ट})^2 \]
\[ = \frac{1}{2} \times 10^{-4} \times 2500 \]
\[ = \frac{1}{2} \times 25 \times 10^{-2} \]
\[ = 1.25 \times 10^{-2} \, \text{जूल} \]
In simple words: संधारित्र में संचित ऊर्जा उसकी धारिता और उस पर लगाए गए वोल्टेज के वर्ग के सीधे आनुपातिक होती है, यह ऊर्जा विद्युत क्षेत्र के रूप में संग्रहीत होती है।
🎯 Exam Tip: संधारित्र में संचित ऊर्जा की गणना का सूत्र \(U = \frac{1}{2}CV^2\) है; इकाइयों को SI प्रणाली में बदलना सुनिश्चित करें।
Question 26. एक 10 µF के संधारित्र का विभवान्तर 100 वोल्ट से 200 वोल्ट कर देने पर उसकी ऊर्जा में परिवर्तन ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-
दिया है, धारिता C = 10 µF = \(10 \times 10^{-6}\) F
प्रारम्भिक विभवान्तर \(V_1\) = 100 वोल्ट
अन्तिम विभवान्तर \(V_2\) = 200 वोल्ट
ऊर्जा में परिवर्तन \( \triangle U = \frac{1}{2}C(V_2^2 - V_1^2) \)
\[ \triangle U = \frac{1}{2} \times 10 \times 10^{-6} [200^2 - 100^2] \]
\[ = 5 \times 10^{-6} \times (40000 - 10000) \]
\[ = 5 \times 10^{-6} \times 30000 \]
\[ = 15 \times 10^{-2} \]
\[ = 0.15 \, \text{जूल} \]
In simple words: जब किसी संधारित्र के वोल्टेज को बदला जाता है, तो उसकी संचित ऊर्जा में परिवर्तन होता है, जो प्रारंभिक और अंतिम वोल्टेज के वर्गों के अंतर पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: ऊर्जा परिवर्तन की गणना करते समय \( \frac{1}{2}C(V_2^2 - V_1^2) \) सूत्र का उपयोग करें, और सभी मानों को मानक इकाइयों में रखें।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. किसी वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता तथा विभव-प्रवणता के बीच सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
या
विभव-प्रवणता से क्या तात्पर्य है ? विभव-प्रवणता एवं विद्युत-क्षेत्र की तीव्रता के मध्य सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
या
विभव-प्रवणता से आप क्या समझते हैं ?
Answer: उत्तर-
माना बिन्दु O पर स्थित +q आवेश के वैद्युत-क्षेत्र में, जिसकी तीव्रता \( \overrightarrow {E} \) है, O से क्रमशः x तथा (x + \( \triangle x \)) दूरी पर x-अक्ष की धनात्मक दिशा में स्थित बिन्दु A तथा बिन्दु B हैं। यदि एक परीक्षण धनावेश +q0 बिन्दु B पर रख दिया जाये तो इस वैद्युत-क्षेत्र के कारण लगने वाला वैद्युत बल F = q0E होगा। इस बल की दिशा \( \overrightarrow {E} \) की दिशा में अर्थात् X-अक्ष की धनात्मक दिशा में होगी। अतः +q0 आवेश को बिन्दु B से बिन्दु A तक बल \( \overrightarrow {E} \) के विरुद्ध ले जाया गया है। बिन्दु A, बिन्दु O से x दूरी पर स्थित है, अतः इस प्रक्रिया में बाह्य कर्ता को बल \( \overrightarrow {F} \) के विरुद्ध कार्य करना पड़ेगा। अतः यदि यह कार्य \( \triangle W \) हो तो
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र विद्युत क्षेत्र में दो बिंदुओं A और B को दर्शाता है। बिंदु O पर एक धनात्मक आवेश +q है, जिससे विद्युत क्षेत्र रेखाएं बाहर की ओर निकल रही हैं। एक परीक्षण आवेश +q0 को बिंदु B से A तक ले जाया जा रहा है। चित्र में दूरियां और विद्युत बल F=q0E की दिशा भी दिखाई गई है।
\[ \triangle W = \text{बल} \times \text{विस्थापन} = F \times BA = (q_0E) \times (-\triangle x) \]
\[ \frac{\triangle W}{q_0} = - E \times \triangle x \]
यदि A तथा B के बीच विभवान्तर \( \triangle V \) हो तो विभवान्तर की परिभाषा से,
\[ \frac{\triangle W}{q_0} = \triangle V \]
अथवा
\[ \triangle V = - E \times \triangle x \]
\[ E = - \frac{(\triangle V)}{\triangle x} = - (\text{विभव-प्रवणता}) \]
राशि \( \frac{\triangle V}{\triangle x} \), दूरी के साथ विभव-परिवर्तन की दर है तथा इसे ही विभव-प्रवणता कहते हैं। अतः किसी वैद्युत-क्षेत्र में किसी बिन्दु पर किसी दिशा में वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता उस दिशा में क्षेत्र की ऋणात्मक विभव-प्रवणता के बराबर होती है। प्राप्त समीकरण (2). में ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि वैद्युत-क्षेत्र की दिशा में विभव घटता है तथा : वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता की दिशा विभव-प्रवणता की दिशा के विपरीत होती है।
In simple words: विद्युत क्षेत्र की तीव्रता वह दर है जिस पर विद्युत विभव दूरी के साथ बदलता है, और इसकी दिशा विभव घटने की दिशा में होती है।
🎯 Exam Tip: यह संबंध \(E = -\frac{dV}{dx}\) दिखाता है कि विद्युत क्षेत्र विभव-प्रवणता के ऋणात्मक मान के बराबर होता है; इसे ठीक से समझना और सूत्र याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. किसी वैद्युत-द्विध्रुव के अक्ष (अनुदैर्ध्य स्थिति) पर स्थित किसी बिन्दु पर वैद्युत-विभव का सूत्र स्थापित कीजिए।
या
वैद्युत-द्विध्रुव को परिभाषित कीजिए। किसी वैद्युत-द्विध्रुव की अक्षीय स्थिति में किसी बिन्दु पर वैद्युत विभव का सूत्र स्थापित कीजिए।
Answer: उत्तर-
वैद्युत-द्विध्रुव- कम दूरी पर स्थित दो बराबर तथा विपरीत आवेशों के निकाय को वैद्युत-द्विध्रुव कहते हैं।
वैद्युत-द्विध्रुव के अक्ष पर स्थित किसी बिन्दु पर वैद्युत- विभव-माना K परावैद्युतांक वाले माध्यम में एक वैद्युत-द्विध्रुव AB रखा है। द्विध्रुव +q व -q कूलॉम के आवेशों से बना है जिनके बीच की दूरी 2l है। द्विध्रुव के मध्य बिन्दु O से r मीटर की दूरी पर इसकी अक्षीय स्थिति में बिन्दु P पर वैद्युत-विभव ज्ञात करना है। चित्र 2.25 से स्पष्ट है कि बिन्दु P की आवेश +q से दूरी (r – l) तथा -q से (r + l) हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक विद्युत द्विध्रुव AB को दर्शाता है, जिसमें बिंदु A पर -q आवेश और बिंदु B पर +q आवेश है। द्विध्रुव का केंद्र O है। द्विध्रुव के अक्ष पर स्थित बिंदु P को दिखाया गया है, जिसकी O से दूरी r है। बिंदु P की +q आवेश से दूरी (r-l) और -q आवेश से दूरी (r+l) है।
आवेश +q के कारण P पर विभव,
\[ V_1 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0K} \frac{q}{(r-l)} \]
तथा आवेश -q के कारण P पर विभव,
\[ V_2 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0K} \frac{-q}{(r+l)} \]
चूँकि वैद्युत-विभव एक अदिश राशि है; अतः P पर परिणामी विभव
\[ V = V_1 + V_2 \]
\[ V = \frac{q}{4\pi\varepsilon_0K} \left( \frac{1}{(r-l)} - \frac{1}{(r+l)} \right) \]
\[ = \frac{q}{4\pi\varepsilon_0K} \left( \frac{(r+l) - (r-l)}{(r-l)(r+l)} \right) \]
\[ = \frac{q}{4\pi\varepsilon_0K} \frac{2l}{(r^2 - l^2)} \]
परन्तु \( q \times 2l = p \) (वैद्युत-द्विध्रुव का आघूर्ण) है,
अतः
\[ V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0K} \frac{p}{(r^2 - l^2)} \, \text{वोल्ट} \]
यदि \( l \ll r \) हो तो \( l^2 \) को \( r^2 \) की तुलना में नगण्य माना जा सकता है।
अतः
\[ V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0K} \frac{p}{r^2} \, \text{वोल्ट} \]
यदि माध्यम निर्वात् (अथवा वायु) हो, तो K = 1
अतः
\[ V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{p}{r^2} \, \text{वोल्ट} \]
In simple words: एक विद्युत द्विध्रुव के अक्ष पर किसी बिंदु पर विभव, आवेशों के बीच की दूरी और द्विध्रुव के केंद्र से बिंदु तक की दूरी पर निर्भर करता है, और द्विध्रुव आघूर्ण के सीधे आनुपातिक होता है।
🎯 Exam Tip: अक्षीय स्थिति में द्विध्रुव विभव का सूत्र \(V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0K} \frac{p}{(r^2 - l^2)}\) याद रखें; विशेष स्थितियों जैसे \(l \ll r\) के लिए भी सूत्र को समझें।
Question 3. सिद्ध कीजिए कि निरक्षीय स्थिति में किसी बिन्दु पर वैद्युत-द्विध्रुव द्वारा वैद्युत-विभव शून्य होता है।
Answer: उत्तर-
वैद्युत-द्विध्रुव की निरक्षीय स्थिति में वैद्युत-विभव- माना वैद्युत-द्विध्रुव AB की लम्ब-अर्द्धक रेखा पर द्विध्रुव के मध्य-बिन्दु O से r मीटर की दूरी पर स्थित बिन्दु P वह बिन्दु है, जहाँ हमें वैद्युत-विभव ज्ञात करना है। (चित्र 2.26)। अब बिन्दु P पर द्विध्रुव के आवेश (+q) के कारण विभव
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक विद्युत द्विध्रुव AB को दर्शाता है, जिसमें बिंदु B पर -q आवेश और बिंदु A पर +q आवेश है। द्विध्रुव का केंद्र O है। द्विध्रुव की निरक्षीय रेखा पर स्थित बिंदु P को दिखाया गया है, जिसकी O से दूरी r है। बिंदु P, A और B से समान दूरी पर है, जिससे एक समद्विबाहु त्रिभुज OAP और OBP बनता है।
\[ V_1 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0K} \frac{q}{(AP)} \]
तथा बिन्दु P पर द्विध्रुव के आवेश (-q) के कारण विभव
\[ V_2 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0K} \frac{-q}{(BP)} \]
P पर परिणामी विभव \( V = V_1 + V_2 \)
\[ V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0K} \left( \frac{q}{AP} - \frac{q}{BP} \right) \]
अथवा
\[ V = \frac{q}{4\pi\varepsilon_0K} \left( \frac{1}{AP} - \frac{1}{BP} \right) \]
चूँकि निरक्षीय स्थिति में \( AP = BP \) है।
अतः
\[ V = \frac{q}{4\pi\varepsilon_0K} \left( \frac{1}{AP} - \frac{1}{AP} \right) = 0 \]
अतः वैद्युत-द्विध्रुव के कारण निरक्षीय रेखा (equatorial line) पर स्थित प्रत्येक बिन्दु पर वैद्युत-विभव शून्य होता है।
In simple words: किसी विद्युत द्विध्रुव की निरक्षीय रेखा पर सभी बिंदुओं पर विद्युत विभव शून्य होता है क्योंकि धनात्मक और ऋणात्मक आवेशों के कारण विभव एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि निरक्षीय स्थिति में विद्युत विभव हमेशा शून्य होता है क्योंकि दोनों आवेशों से दूरी समान होने के कारण उनके विभव बराबर और विपरीत होते हैं।
Question 4. दिये गये आवेशों के निकाय की कुल वैद्युत स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक त्रिभुज के शीर्षों पर स्थित तीन आवेशों के एक निकाय को दर्शाता है। शीर्षों पर -q, +q, और +q आवेश हैं। इन आवेशों के बीच की दूरियां 2a, 2a, और a हैं, जिससे यह एक समद्विबाहु त्रिभुज बनता है।
Answer: हल -
+q तथा -q आवेशों की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा
\[ U_1 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{(+q) \times (-q)}{2a} = - \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q^2}{2a} \]
+q तथा +q आवेशों की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा
\[ U_2 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{(+q) \times (+q)}{a} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q^2}{a} \]
+q तथा -q आवेशों की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा
\[ U_3 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{(+q) \times (-q)}{2a} = - \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q^2}{2a} \]
कुल स्थितिज ऊर्जा \( U = U_1 + U_2 + U_3 \)
\[ U = - \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q^2}{2a} + \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q^2}{a} - \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q^2}{2a} \]
\[ U = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \left( - \frac{q^2}{2a} + \frac{q^2}{a} - \frac{q^2}{2a} \right) \]
\[ U = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \left( \frac{-q^2 + 2q^2 - q^2}{2a} \right) \]
\[ U = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} (0) = 0 \]
In simple words: किसी आवेशों के निकाय की कुल स्थितिज ऊर्जा सभी आवेशों के युग्मों की अलग-अलग स्थितिज ऊर्जाओं का बीजगणितीय योग होती है।
🎯 Exam Tip: निकाय की कुल स्थितिज ऊर्जा की गणना करते समय, प्रत्येक आवेश युग्म की स्थितिज ऊर्जा को ध्यान से जोड़ें, और यह सुनिश्चित करें कि आवेशों के चिन्हों को सही ढंग से शामिल किया गया है।
Question 5. निम्न चित्र में विभवान्तर (VA – VB) के मान की गणना कीजिए-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र x-अक्ष पर दो आवेशों (+q और -q) को दर्शाता है। +q आवेश बिंदु A पर है और -q आवेश बिंदु B पर है। A और B के बीच की दूरी x है, और दोनों बिंदु मूल बिंदु O से अलग-अलग दूरियों पर हैं।
Answer: हल-
बिन्दु A पर क्रमशः +q व -q आवेशों के कारण वैद्युत विभव
(+q आवेश के कारण A पर विभव) \( V_{A, +q} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{x} \)
(-q आवेश के कारण A पर विभव) \( V_{A, -q} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{-q}{2x} \)
बिन्दु A पर नैट वैद्युत विभव \( V_A = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \left( \frac{q}{x} - \frac{q}{2x} \right) = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{2x} \)
इसी प्रकार, बिन्दु B पर नैट वैद्युत विभव
(+q आवेश के कारण B पर विभव) \( V_{B, +q} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{2x} \)
(-q आवेश के कारण B पर विभव) \( V_{B, -q} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{-q}{x} \)
बिन्दु B पर नैट वैद्युत विभव \( V_B = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \left( \frac{q}{2x} - \frac{q}{x} \right) = - \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{2x} \)
समीकरण (1) में से समीकरण (2) को घटाने पर,
\[ V_A - V_B = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{2x} - \left( - \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{2x} \right) \]
\[ V_A - V_B = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{2x} + \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{2x} \]
\[ V_A - V_B = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{x} \]
In simple words: दो बिंदुओं के बीच का विभवान्तर प्रत्येक आवेश के कारण उन बिंदुओं पर विभव के योग के अंतर से प्राप्त होता है, जिससे नेट विभव की गणना हो सके।
🎯 Exam Tip: विभवान्तर की गणना करते समय प्रत्येक आवेश के कारण उत्पन्न विभवों का सही बीजगणितीय योग करना सुनिश्चित करें, खासकर जब आवेशों के चिन्ह विपरीत हों।
Question 6. किसी वैद्युत द्विध्रुव को एकसमान विद्युत क्षेत्र में संतुलन की स्थिति से कोण घुमाने में किये गये कार्य का सूत्र प्राप्त कीजिए।
Answer: हल-
माना p वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण का एक वैद्युत-द्विध्रुव, किसी एकसमान वैद्युत क्षेत्र E में रखा है तथा वैद्युत द्विध्रुव को वैद्युत क्षेत्र के भीतर घुमाया जा रहा है (चित्र 2.29)। माना किसी क्षण वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण p की दिशा क्षेत्र की दिशा से \( \alpha \) कोण बनाती है, तब वैद्युत-द्विध्रुव पर वैद्युत-क्षेत्र के कारण कार्य करने वाले बल-युग्म का आघूर्ण
\( \tau = pE \sin \alpha \)
वैद्युत-द्विध्रुव को इस स्थिति से आगे अल्पांश कोण d\( \alpha \) द्वारा घुमाने में वैद्युत-क्षेत्र के विरुद्ध कृत कार्य
dW = बल-युग्म का आघूर्ण x कोणीय विस्थापन
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक विद्युत द्विध्रुव को एकसमान विद्युत क्षेत्र E में रखा हुआ दर्शाता है। द्विध्रुव में -q और +q आवेश हैं, जो एक छोटी दूरी पर स्थित हैं। द्विध्रुव आघूर्ण p विद्युत क्षेत्र E के साथ α कोण बनाता है, और बल युग्म \( \tau \) इस पर कार्य करता है। A और B द्विध्रुव के सिरे हैं, और O इसका केंद्र है।
\[ = \tau \times d\alpha = pE \sin \alpha \times d\alpha \]
अतः वैद्युत-द्विध्रुव को प्रारम्भिक स्थिति \( \alpha = \theta_1 \), से अन्तिम स्थिति \( \alpha = \theta_2 \) तक घुमाने में कृत कार्य
\[ W = \int_{\alpha = \theta_1}^{\alpha = \theta_2} pE \sin \alpha \, d\alpha = pE \int_{\theta_1}^{\theta_2} \sin \alpha \, d\alpha \]
\[ = pE [-\cos \alpha]_{\theta_1}^{\theta_2} = -pE[\cos \theta_2 - \cos \theta_1] \]
\[ = pE [\cos \theta_1 - \cos \theta_2] \]
यदि प्रारम्भ में वैद्युत-द्विध्रुव बाह्य क्षेत्र की दिशा में अनुरेखित है अर्थात्
\( \theta_1 = 0^\circ \), तब वैद्युत-द्विध्रुव को \( \theta \) कोण से घुमाने में कृत कार्य
\[ W = pE (\cos 0^\circ - \cos \theta) \]
\[ = pE (1 - \cos \theta) \]
In simple words: किसी विद्युत द्विध्रुव को विद्युत क्षेत्र में घुमाने के लिए किया गया कार्य द्विध्रुव आघूर्ण, विद्युत क्षेत्र की तीव्रता और घुमाव कोण के कोसाइन के अंतर पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: द्विध्रुव को घुमाने में किए गए कार्य का सूत्र \(W = pE(\cos\theta_1 - \cos\theta_2)\) याद रखें, और विभिन्न प्रारंभिक और अंतिम कोणों के लिए इसके अनुप्रयोग को समझें।
Question 7. किसी आवेशित चालक की स्थितिज ऊर्जा के लिए व्यंजक \( U = \frac{1}{2} CV^2 \)
अथवा \( \frac{1}{2} \left( \frac{q^2}{C} \right) \) प्राप्त कीजिए, जहाँ C चालक
की धारिता, q चालक पर आवेश तथा V उसका विभव है।
या
सिद्ध कीजिए कि E, जहाँ \( E = \frac{1}{2} \left(\frac{q^2}{C} \right) \)
आवेशित चालक की ऊर्जा, q = चालक
पर आवेश तथा C उसकी धारिता है। या सिद्ध कीजिए कि आवेशित संधारित्र की स्थितिज ऊर्जा \( U = \frac{1}{2} CV^2 \) होती है।
Answer: उत्तर-
आवेशित चालक की स्थितिज ऊर्जा- किसी चालक को आवेशित करने में किया गया कार्य उसमें वैद्युत-स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। चूंकि प्रारम्भ में चालक पर आवेश शून्य है; अतः चालक तल पर विभव भी शून्य होगा। जैसे-जैसे चालक को आवेश दिया जाता है, उसका विभव वैसे-वैसे बढ़ता जाता है, क्योंकि चालक का विभव उसे पर उपस्थित आवेश के अनुक्रमानुपाती होता है। माना चालक को कुल आवेश q कूलॉम देने पर उसका विभव V वोल्ट (बैटरी के विभव के बराबर) हो जाता है। हम यह मान सकते हैं कि चालक को आवेश देते समय उसका औसत विभव \( (0 + V) / 2 = V/2 \) रहा; अतः चालक को आवेशित करने में किया गया कुल कार्य
\[ W = \text{आवेश} \times \text{औसत विभव} = q \times \left( \frac{V}{2} \right) = \frac{1}{2} qV \, \text{जूल} \]
यही कार्य आवेशित चालक के पृष्ठ पर स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित रहता है।
अतः चालक की स्थितिज ऊर्जा
\[ U = \frac{1}{2} qV \]
चूंकि \( q = CV \) (धारिता की परिभाषा से)
अर्थात्
\[ U = \frac{1}{2} (CV) \times V = \frac{1}{2} CV^2 \]
अथवा चूंकि \( V = \frac{q}{C} \)
\[ U = \frac{1}{2} q \left( \frac{q}{C} \right) = \frac{1}{2} \frac{q^2}{C} \]
यदि q कूलॉम में, V वोल्ट में तथा C फैरड में हों, तो ऊर्जा U जूल में प्राप्त होगी।
In simple words: एक आवेशित चालक में संग्रहित ऊर्जा चालक को आवेशित करने में किए गए कार्य के बराबर होती है, जिसे उसकी धारिता और वोल्टेज या आवेश के संदर्भ में व्यक्त किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: संधारित्र की स्थितिज ऊर्जा के तीनों रूपों (\( \frac{1}{2}CV^2 \), \( \frac{1}{2}qV \), \( \frac{1}{2}\frac{q^2}{C} \)) को याद रखें; प्रश्न में दिए गए ज्ञात मापदंडों के आधार पर सही सूत्र का चयन करें।
Question 8. एक समान्तर प्लेट संधारित्र को बैटरी से आवेशित किया जाता है। बैटरी का सम्बन्ध संधारित्र से विच्छेदित करने के उपरान्त प्लेटों के बीच की दूरी दोगुनी करने पर संधारित्र की धारिता तथा संग्रहित ऊर्जा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Answer: उत्तर-
माना कि संधारित्र पर संचित आवेश q है।
तब संचित ऊर्जा \( W = \frac{1}{2} \frac{q^2}{C} \)
बैटरी से हटाने पर संधारित्र पर आवेश अपरिवर्तित रहेगा। यदि प्लेटों के बीच दूरी d से 2d तक बढ़ाई जाती है तब धारिता घटकर आधी अर्थात् \( C' = C/2 \) रह जायेगी (\( C \propto \frac{1}{d} \))
अब संधारित्र में ऊर्जा \( W' = \frac{1}{2} \frac{q^2}{C'} = \frac{1}{2} \frac{q^2}{(C/2)} = \frac{q^2}{C} \)
अतः संग्रहित ऊर्जा दोगुनी हो जायेगी।
In simple words: जब बैटरी हटा दी जाती है और प्लेटों के बीच की दूरी दोगुनी कर दी जाती है, तो संधारित्र की धारिता आधी हो जाती है और संग्रहित ऊर्जा दोगुनी हो जाती है क्योंकि आवेश स्थिर रहता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि बैटरी हटाने के बाद आवेश स्थिर रहता है, और प्लेटों की दूरी बदलने पर धारिता और ऊर्जा के परिवर्तन का सीधा संबंध स्थापित करें (\(C \propto 1/d\) और \(U \propto 1/C\))।
Question 9. किसी चालक की वैद्युत धारिता से क्या तात्पर्य है ? RC का विमीय समीकरण निकालिए, जहाँ प्रतिरोध तथा C धारिता है।
Answer: उत्तर-
किसी चालक की वैद्युत धारिता- किसी चालक द्वारा आवेश ग्रहण करने की क्षमता उसकी वैद्युत धारिता कहलाती है। यह चालक को दिये गये आवेश तथा उसके संगत विभव में होने वाली वृद्धि के अनुपात के बराबर होती है।
धारिता \( C = q/V \)
(जहाँ q = आवेश, V = विभव में वृद्धि)
RC की विमा = R की विमा \( \times \) C की विमा
प्रतिरोध R का विमीय सूत्र \( [ML^2T^{-3}A^{-2}] \) है।
धारिता C का विमीय सूत्र \( [M^{-1}L^{-2}T^4A^2] \) है।
\[ RC \text{ की विमा } = [ML^2T^{-3}A^{-2}] [M^{-1}L^{-2}T^4A^2] \]
\[ = [T] \]
अतः RC की विमा समय की विमा होती है।
In simple words: वैद्युत धारिता एक चालक की आवेश धारण करने की क्षमता है, और RC का विमीय समीकरण समय के बराबर होता है, जिसका अर्थ है कि यह एक समय स्थिरांक है।
🎯 Exam Tip: धारिता की परिभाषा \(C=q/V\) को याद रखें, और RC समय स्थिरांक के विमीय विश्लेषण को समझें, जो सर्किट के प्रतिक्रिया समय को दर्शाता है।
Question 10. संधारित्र के ऊर्जा घनत्व से क्या तात्पर्य है? प्रदर्शित कीजिए कि एकांक आयतन में किसी समानान्तर प्लेट संधारित्र में संचित ऊर्जा, \( \frac{1}{2} {\varepsilon }_{ 0 }{ E }^{ 2 } \) है, जहाँ प्रतीकों का सामान्य अर्थ है।
Answer: उत्तर-
आवेशित संधारित्र की ऊर्जा उसकी प्लेटों के बीच स्थित माध्यम में निहित रहती है। संधारित्र की प्लेटों द्वारा घेरे गये माध्यम के एकांक आयतन में निहित ऊर्जा को संधारित्र का ऊर्जा घनत्व कहते हैं। अतः संधारित्र का ऊर्जा घनत्व
\[ u = \frac{\text{आवेशित संधारित्र की कुल ऊर्जा}}{\text{संधारित्र की प्लेटों द्वारा घेरा गया आयतन}} = \frac{U}{\upsilon} \]
परन्तु \( U = \frac{1}{2} CV^2 \) तथा \( \upsilon = A \times d \)
जहाँ C = संधारित्र की धारिता, V = इसकी प्लेटों के बीच विभवान्तर, A = संधारित्र की प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल तथा d = प्लेटों के बीच की दूरी
\[ \text{अतः संधारित्र का ऊर्जा घनत्व } u = \frac{\frac{1}{2} CV^2}{A \times d} \]
परन्तु \( C = \varepsilon_0 K A / d \) (जहाँ K माध्यम का परावैद्युतांक)
\[ u = \frac{\frac{1}{2} (\varepsilon_0 K A / d) V^2}{A \times d} = \frac{1}{2} \frac{\varepsilon_0 K V^2}{d^2} \]
परन्तु संधारित्र की प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता \( E = V/d \) अथवा \( V = E \times d \)
यह मान समी० (1) में रखने पर,
\[ u = \frac{1}{2} \varepsilon_0 K \frac{(E \times d)^2}{d^2} \]
अर्थात्
\[ \text{ऊर्जा घनत्व } u = \frac{1}{2} \varepsilon_0 K E^2 \, \text{जूल/मीटर}^3 \]
यदि संधारित्र की प्लेटों के बीच वायु अथवा निर्वात् हो तो K = 1
अतः
\[ \text{ऊर्जा घनत्व } u = \frac{1}{2} \varepsilon_0 E^2 \, \text{जूल/मीटर}^3 \]
In simple words: संधारित्र का ऊर्जा घनत्व उसके प्लेटों के बीच प्रति इकाई आयतन में संग्रहीत विद्युत ऊर्जा है, जो विद्युत क्षेत्र की तीव्रता के वर्ग के सीधे आनुपातिक होता है।
🎯 Exam Tip: संधारित्र के ऊर्जा घनत्व का सूत्र \(u = \frac{1}{2}\varepsilon_0 E^2\) (वायु या निर्वात के लिए) याद रखना महत्वपूर्ण है, और विभिन्न परावैद्युत माध्यमों के लिए \(K\) को शामिल करना न भूलें।
Question 11. तीन संधारित्र C1, C2 और C3 श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। इनकी समतुल्य धारिता का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Answer: हल -
माना कि संधारित्रों की प्लेटों के बीच विभवान्तर क्रमशः \( V_1, V_2 \) तथा \( V_3 \) हैं। तब
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र तीन संधारित्रों C1, C2, और C3 को श्रेणीक्रम में जुड़ा हुआ दिखाता है। संयोजन पर कुल वोल्टेज V है, और प्रत्येक संधारित्र पर व्यक्तिगत वोल्टेज V1, V2, और V3 हैं। श्रेणीक्रम में, प्रत्येक संधारित्र पर आवेश q समान होता है।
\[ V_1 = \frac{q}{C_1}, V_2 = \frac{q}{C_2}, V_3 = \frac{q}{C_3} \]
[जहाँ q संधारित्रों की प्लेटों के बीच आवेश है।]
कुल विभवान्तर \( V = V_1 + V_2 + V_3 \)
\[ V = \frac{q}{C_1} + \frac{q}{C_2} + \frac{q}{C_3} \]
यदि 'C' तुल्य धारिता हो तब समी० (1) से,
\[ \frac{q}{C} = \frac{q}{C_1} + \frac{q}{C_2} + \frac{q}{C_3} \]
\( \implies \) \[ \frac{1}{C} = \frac{1}{C_1} + \frac{1}{C_2} + \frac{1}{C_3} \]
जहाँ, C1, C2 तथा C3 श्रेणीक्रम में जुड़ी तीनों संधारित्रों की अलग-अलग धारिताएँ हैं।
In simple words: श्रेणीक्रम में जुड़े संधारित्रों की तुल्य धारिता का व्युत्क्रम उनके व्यक्तिगत धारिताओं के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है, क्योंकि आवेश समान रहता है और कुल वोल्टेज व्यक्तिगत वोल्टेज का योग होता है।
🎯 Exam Tip: श्रेणीक्रम संयोजन के लिए तुल्य धारिता का सूत्र \( \frac{1}{C} = \sum \frac{1}{C_i} \) याद रखें; यह उन अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण है जहां कम कुल धारिता की आवश्यकता होती है।
Question 12. एक समान्तर प्लेट संधारित्र की प्लेटों का व्यास 8 सेमी है। प्लेटों के बीच वायु भरी है। यदि इस संधारित्र की धारिता 100 सेमी त्रिज्या के गोले की धारिता के बराबर हो, तो इसकी प्लेटों के बीच दूरी की गणना कीजिए।
Answer: हल-
समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता = 100 सेमी त्रिज्या वाले गोले की धारिता
\[ = 4\pi\varepsilon_0 \times 100 = 400\pi\varepsilon_0 \, \text{फैरड} \]
पुनः समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता \( C = \frac{K\varepsilon_0A}{d} \)
जहाँ व्यास = 8 सेमी \( \implies \) त्रिज्या r = 4 सेमी = \( 4 \times 10^{-2} \) मीटर
क्षेत्रफल \( A = \pi r^2 = \pi (4 \times 10^{-2})^2 \)
वायु के लिए K = 1
\[ 400\pi\varepsilon_0 = \frac{1 \times \varepsilon_0 \times \pi (4 \times 10^{-2})^2}{d} \]
\[ 400\pi\varepsilon_0 = \frac{\varepsilon_0 \times \pi \times 16 \times 10^{-4}}{d} \]
\( \implies \) \[ 400 = \frac{16 \times 10^{-4}}{d} \]
\[ d = \frac{16 \times 10^{-4}}{400} = \frac{16}{4} \times 10^{-2} \times 10^{-2} = 4 \times 10^{-4} \, \text{मीटर} \]
\[ d = 0.04 \, \text{सेमी} \]
In simple words: समान्तर प्लेट संधारित्र और एक गोले की धारिता को बराबर करके, और प्लेटों के क्षेत्रफल को उनकी त्रिज्या के आधार पर गणना करके, प्लेटों के बीच की दूरी ज्ञात की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता \(\frac{\varepsilon_0A}{d}\) और गोलीय चालक की धारिता \(4\pi\varepsilon_0R\) के सूत्रों को याद रखें, और इकाइयों का सही रूपांतरण सुनिश्चित करें।
Question 13. 100 µF समान्तर प्लेट संधारित्र 400 वोल्ट तक आवेशित है। यदि इसके प्लेटों के बीच दूरी आधी कर दें तो प्लेटों के बीच नया विभवान्तर क्या होगा और संचित ऊर्जा में क्या परिवर्तन होगा ?
Answer: हल-
आवेशित संधारित्र पर संचित आवेश
\[ q = C \times V = (100 \times 10^{-6}F) \times (400 \, \text{वोल्ट}) \]
\[ = 4 \times 10^{-2} \, \text{कूलॉम} \]
संचित ऊर्जा
\[ U = \frac{q^2}{2C} = \frac{(4 \times 10^{-2})^2}{2 \times 100 \times 10^{-6}} = \frac{16 \times 10^{-4}}{2 \times 10^{-4}} = 8 \, \text{जूल} \]
आवेशन के पश्चात् बैटरी हटाने पर आवेश नियत ही बना रहेगा अर्थात् q ही रहेगा, परन्तु प्लेटों के बीच की दूरी आधी कर देने पर संधारित्र की धारिता दोगुनी हो जाएगी (\( C \propto 1/d \))
अतः नयी धारिता \( C' = 2 \times C = 2 \times 100 \, \mu F = 200 \times 10^{-6}F \)
नया विभवान्तर \( V' = \frac{q}{C'} = \frac{4 \times 10^{-2}}{200 \times 10^{-6}} = \frac{4 \times 10^4}{200} = 2 \times 10^2 = 200 \, \text{वोल्ट} \)
अब संचित ऊर्जा \( U' = \frac{q^2}{2C'} = \frac{(4 \times 10^{-2})^2}{2 \times 200 \times 10^{-6}} = \frac{16 \times 10^{-4}}{4 \times 10^{-4}} = 4 \, \text{जूल} \)
संचित ऊर्जा में परिवर्तन \( = U - U' = 8 - 4 = 4 \, \text{जूल} \)
In simple words: जब एक आवेशित संधारित्र को बैटरी से वियोजित करके प्लेटों की दूरी आधी कर दी जाती है, तो धारिता दोगुनी हो जाती है, नया विभवान्तर आधा हो जाता है, और ऊर्जा आधी हो जाती है।
🎯 Exam Tip: बैटरी हटाने पर आवेश नियत रहता है। दूरी d आधी करने पर C दोगुनी हो जाती है, V आधा हो जाता है, और ऊर्जा (q²/2C) आधी हो जाती है। इन संबंधों को याद रखें।
Question 14. दिये गये परिपथ में यदि A तथा B बिन्दुओं के बीच 150 वोल्ट विभवान्तर लगाया जाये तो 6 µF के संधारित्र के प्लेटों के बीच उत्पन्न विभवान्तर एवं संचित ऊर्जा की गणना कीजिए।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक संधारित्र नेटवर्क दिखाता है जिसमें 2 µF, 3 µF, और 6 µF के संधारित्र श्रेणीक्रम में जुड़े हैं, और उनके साथ 1.8 µF का संधारित्र समानांतर में है। A और B बिंदु नेटवर्क के इनपुट/आउटपुट टर्मिनल हैं।
Answer: हल—
चित्र 2.31 में, 2 µF व 3 µF श्रेणीक्रम में हैं। अतः इनकी तुल्य धारिता यदि \( C_1 \) हो तो
\[ \frac{1}{C_1} = \frac{1}{2} + \frac{1}{3} = \frac{3+2}{6} = \frac{5}{6} \]
\( \implies \) \[ C_1 = \frac{6}{5} \, \mu F \]
अतः \( \frac{6}{5} \, \mu F \) व 1.8 µF समान्तर क्रम में होंगे। अतः इनकी तुल्य धारिता यदि \( C_2 \) हो, तो
\[ C_2 = \frac{6}{5} + 1.8 = 1.2 + 1.8 = 3 \, \mu F \]
अब 3 µF व 6 µF श्रेणीक्रम में होंगे। अतः तुल्य धारिता यदि C हो तब
\[ \frac{1}{C} = \frac{1}{3} + \frac{1}{6} = \frac{2+1}{6} = \frac{3}{6} \]
\( \implies \) \[ C = 2 \, \mu F = 2 \times 10^{-6}F \]
आवेश \( q = CV = 2 \times 10^{-6} \times 150 \)
\[ = 3 \times 10^{-4} \, \text{कूलॉम} \]
अतः 6 µF के संधारित्र के प्लेटों के बीच उत्पन्न विभवान्तर
\[ V = \frac{q}{C} = \frac{3 \times 10^{-4}}{6 \times 10^{-6}} = \frac{3}{6} \times 10^2 = 0.5 \times 100 = 50 \, \text{वोल्ट} \]
संचित ऊर्जा \( = \frac{1}{2} CV^2 = \frac{1}{2} \times 6 \times 10^{-6} \times (50)^2 \)
\[ = 3 \times 10^{-6} \times 2500 = 7500 \times 10^{-6} = 7.5 \times 10^{-3} \, \text{जूल} \]
In simple words: जटिल संधारित्र नेटवर्क को श्रेणीक्रम और समानांतर संयोजन के नियमों का उपयोग करके सरल बनाया जा सकता है, जिससे कुल धारिता, आवेश और विशिष्ट संधारित्रों पर वोल्टेज और ऊर्जा की गणना की जा सके।
🎯 Exam Tip: जटिल संधारित्र सर्किटों को हल करने के लिए श्रेणीक्रम और समानांतर संयोजन के नियमों को क्रमिक रूप से लागू करें, और प्रत्येक चरण पर आवेश और वोल्टेज के वितरण को ध्यान में रखें।
Question 15. संधारित्रों के दिये गये नेटवर्क में बिन्दुओं A और B के बीच तुल्य धारिता ज्ञात कीजिए और 4 µF संधारित्र के प्लेटों के बीच विभवान्तर की गणना कीजिए।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक संधारित्र नेटवर्क दिखाता है जिसमें 3 µF, 18 µF, 3 µF, 4 µF, 6 µF के संधारित्र जुड़े हुए हैं। A और B बिंदु नेटवर्क के टर्मिनल हैं, और 2V का वोल्टेज स्रोत जुड़ा है।
Answer: हल-
चित्र 2.32 में 3 µF, 3 µF तथा 3 µF समान्तर क्रम में हैं। अतः इनकी तुल्य धारिता यदि \( C_1 \) हो, तो ।
\( C_1 = 3 + 3 + 3 = 9 \, \mu F \)
तथा 18 µF एवं \( C_1 = 9 \, \mu F \) श्रेणीक्रम में हैं।
अतः इनकी तुल्य धारिता यदि \( C_2 \) हो, तो
\[ \frac{1}{C_2} = \frac{1}{18} + \frac{1}{9} = \frac{1+2}{18} = \frac{3}{18} \]
\( \implies \) \[ C_2 = 6 \, \mu F \]
अब, \( C_2 = 6 \, \mu F \) तथा 6 µF समान्तर क्रम में हैं।
अतः इनकी तुल्य धारिता यदि \( C_3 \) हो, तो
\( C_3 = 6 + 6 = 12 \, \mu F \)
अब, यदि 12 µF तथा 4 µF श्रेणीक्रम में हैं तो माना इनकी तुल्य धारिता \( C_{AB} \) है, तब
\[ \frac{1}{C_{AB}} = \frac{1}{12} + \frac{1}{4} = \frac{1+3}{12} = \frac{4}{12} \]
\( \implies \) \[ C_{AB} = \frac{12}{4} = 3 \, \mu F = 3 \times 10^{-6}F \]
आवेश \( q = CV = 3 \times 10^{-6} \times 2 \) (चूंकि V = 2 वोल्ट)
\[ = 6 \times 10^{-6} \, \text{कूलॉम} \]
अतः 4 µF के संधारित्र के प्लेटों के बीच विभवान्तर,
\[ V = \frac{q}{C} = \frac{6 \times 10^{-6}}{4 \times 10^{-6}} = 1.5 \, \text{वोल्ट} \]
In simple words: जटिल संधारित्र नेटवर्कों को श्रेणीक्रम और समानांतर संयोजन के नियमों का उपयोग करके सरल किया जा सकता है, जिससे कुल धारिता और विशिष्ट संधारित्र पर वोल्टेज की गणना की जा सके।
🎯 Exam Tip: जटिल परिपथों को सरल बनाने के लिए समानांतर और श्रेणीक्रम संयोजन के नियमों को ध्यान से लागू करें; प्रत्येक चरण में तुल्य धारिता की गणना करते समय आवेश और वोल्टेज के वितरण को याद रखें।
Question 16. वैद्युत संधारित्र क्या होते हैं? इनके किन्हीं दो उपयोगों का उल्लेख कीजिए। धातु के दो गोलों की त्रिज्याएँ 18 सेमी तथा 27 सेमी हैं। प्रत्येक को 75 माइक्रोकूलॉम आवेश दिया गया है। चालक द्वारा दोनों गोलों को जोड़ने पर उभयनिष्ठ विभव का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: उत्तर-
वैद्युत संधारित्र - वैद्युत संधारित्र एक ऐसा समायोजन है जिसमें किसी चालक के आकार में परिवर्तन किए बिना उस पर आवेश की पर्याप्त मात्रा संचित की जा सकती है। माना कि किसी चालक को q आवेश देने पर उसका वैद्युत विभव V हो जाता है, तब चालक की धारिता, \( C = \frac{q}{V} \) संधारित्रों के उपयोग- संधारित्रों के प्रमुख उपयोग निम्नवत् हैं-
1. आवेश का संचय करने में संधारित्र को मुख्यतः आवेश का संचय करने में उपयोग किया जाता है। किसी परिपथ में क्षणिक एवं प्रबल धारी प्राप्त करने के लिए उस परिपथ में एक आवेशित संधारित्र जोड़ दिया जाता है। क्षणिक एवं शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए स्पन्दित वैद्युत चुम्बक (pulsed electromagnet) का प्रयोग करते हैं जो किसी आवेशित संधारित्र से ही प्रबल धारा प्राप्त करते हैं।
2. ऊर्जा का संचय करने में-आवेशित संधारित्र की प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र में पर्याप्त वैद्युत स्थितिज ऊर्जा संचित रहती है। यदि संख्या में बहुत अधिक आवेशित संधारित्रों का एक स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 93 संयोजन (संधारित्र बैंक) बनाएँ तो उस ऊर्जा की बड़ी मात्रा को संचित किया जा सकता है और समय आने पर उससे आवश्यकतानुसार ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।
3. इलेक्ट्रॉनिक परिपथों में इलेक्ट्रॉनिक परिपथों में विभिन्न कार्यों के लिए संधारित्रों का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, रेडियो-आवृत्ति के वैद्युत चुम्बकीय दोलनों के उत्पादन एवं संसूचन में अर्थात् रेडियो, टेलीविजन इत्यादि के कार्यक्रमों के प्रसारण तथा अभिग्रहण में, वैद्युत शक्ति-सम्भरण (electric power supply) में वोल्टता के उच्चावचन (fluctuations) कम करने में प्रायः फिल्टर प्रयोग होते हैं और संधारित्र एकदिशीय धारा के स्पन्दनों (pulses) के आयाम को कम करके दिष्ट धारा प्राप्त कराने में सहायक होता है।
4. वैद्युत उपकरणों में— वैद्युत उपकरणों जैसे-प्रेरण कुण्डली (induction coil), मोटर इंजन के ज्वलन तन्त्र (ignition system), बिजली के पंखे इत्यादि में संधारित्रों का उपयोग किया जाता है। हम जानते हैं कि जब किसी प्रेरकीय परिपथ को अचानक तोड़ा जाता है, तो उस स्थान पर चिंगारी (spark) उत्पन्न होती है, परन्तु यदि उसे परिपथ में संधारित्र को लगाया गया है, तो परिपथ के टूटने से उत्पन्न प्रेरित धारा संधारित्र की प्लेटों को आवेशित कर चिंगारी उत्पन्न होने की सम्भावना को समाप्त कर देती है।
5. वैज्ञानिक अध्ययन में-वैज्ञानिक अध्ययनों में भी संधारित्रों का विशेष महत्त्व है। विभिन्न प्रकार के संधारित्रों में विभिन्न आकार की प्लेटों के बीच अलग-अलग विन्यासों (configurations) के वैद्युत क्षेत्र स्थापित कर उसमें विभिन्न परावैद्युत पदार्थों को रखकर वैद्युत क्षेत्र में उनके वैद्युत व्यवहारों का अध्ययन किया जाता है।
दिया है, गोलों की त्रिज्याएँ \( r_1 = 0.18 \, \text{मीटर} \) तथा \( r_2 = 0.27 \, \text{मीटर} \) हैं।
a मीटर त्रिज्या के गोले की धारिता
\( C = 4\pi\varepsilon_0R \) फैरड होती है, जहाँ \( \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} = 9.0 \times 10^9 \, \text{न्यूटन-मीटर}^2/\text{कूलॉम}^2 \) (अथवा \( 9.0 \times 10^9 \, \text{मीटर/फैरड} \))
पहले गोले की धारिता \( C_1 = \frac{1}{9.0 \times 10^9} \times 0.18 = 2.0 \times 10^{-11} \, \text{फैरड} \)
दूसरे गोले की धारिता \( C_2 = \frac{1}{9.0 \times 10^9} \times 0.27 = 3.0 \times 10^{-11} \, \text{फैरड} \)
प्रत्येक गोले पर आवेश 75 माइक्रोकूलॉम है, अर्थात्
\( q_1 = q_2 = 75 \times 10^{-6} \, \text{कूलॉम} \)
चालक द्वारा दोनों गोलों को जोड़ने पर उभयनिष्ठ विभव,
\[ V = \frac{q_1 + q_2}{C_1 + C_2} \]
\[ = \frac{(75 \times 10^{-6}) + (75 \times 10^{-6})}{(2.0 \times 10^{-11}) + (3.0 \times 10^{-11})} \]
\[ = \frac{150 \times 10^{-6}}{5.0 \times 10^{-11}} \, \text{कूलॉम} \]
\[ = \frac{150}{5.0} \times 10^5 \, \text{वोल्ट} \]
\[ = 30 \times 10^5 \, \text{वोल्ट} \]
In simple words: संधारित्र एक ऐसा उपकरण है जो विद्युत आवेश को संग्रहीत करता है, जिसका उपयोग ऊर्जा भंडारण, विद्युत दालों को उत्पन्न करने और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में फिल्टरिंग के लिए किया जाता है; जब आवेशित गोलों को जोड़ा जाता है, तो उभयनिष्ठ विभव कुल आवेश को कुल धारिता से विभाजित करके पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: संधारित्र की परिभाषा और उपयोगों को याद रखें। उभयनिष्ठ विभव की गणना के लिए, कुल आवेश को कुल धारिता से विभाजित करें (\(V = Q_{\text{total}}/C_{\text{total}}\)), और धारिता के लिए \(C = 4\pi\varepsilon_0R\) का उपयोग करें।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. वैद्युत विभव की परिभाषा लिखिए । वैद्युत-आवेश के कारण किसी बिन्दु पर वैद्युत विभव के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए ।
Question 1. वैद्युत विभव की परिभाषा लिखिए । वैद्युत-आवेश के कारण किसी बिन्दु पर वैद्युत विभव के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए ।
Answer:वैद्युत-विभव- वैद्युत-क्षेत्र में किसी बिन्दु पर वैद्युत-विभव (V) परीक्षण-आवेश (+q0) को अनन्त से उस बिन्दु तक लाने में किये गये कार्य (W) तथा परीक्षण-आवेश के मान की निष्पत्ति के बराबर होता है।
अर्थात्
\[V = \frac{W}{q_0} \text{ जूल/कूलॉम या वोल्ट}\]
वैद्युत आवेश के कारण किसी बिन्दु पर वैद्युत विभव - माना एक माध्यम में, जिसका परावैद्युतांक \(K\) है, बिन्दु \(O\) पर \(+q\) कूलॉम का एक आवेश रखा है। इस आवेश के वैद्युत-क्षेत्र में \(O\) से \(r\) मीटर दूरी पर एक बिन्दु \(A\) है जिस पर वैद्युत-विभव ज्ञात करना है। इसके लिए हमें परीक्षण-आवेश \(q\) को अनन्त से \(A\) तक लाने में किये गये कार्य की गणना करनी होगी।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र मूल बिंदु पर स्थित एक आवेश \(+q_0\) को दर्शाता है। इससे विभिन्न दूरी \(r, r_1, r_2, r_3, \dots\) पर स्थित बिंदुओं A, B, C, D, \dots को दिखाया गया है, जहाँ से अनंत तक के बिंदु प्रदर्शित हैं। यह वैद्युत विभव की गणना के लिए संदर्भ स्थापित करता है।
बिन्दु \(A\) से अनन्त तक की दूरी को छोटे-छोटे भागों AB, BC, CD, .... में विभाजित हुआ मान लेते हैं। माना कि बिन्दु \(0\) से बिन्दु \(A, B, C, D, \dots\) की दूरियाँ क्रमशः \(r, r_1, r_2, r_3, \dots\) मीटर हैं। अब बिन्दु \(A\) पर \(+q_0\) कूलॉम का एक परीक्षण-आवेश रखने पर, आवेश \(+q\) के कारण \(q_0\) पर लगने वाला वैद्युत बल
\[F_A = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0 K} \frac{qq_0}{r^2} \text{ न्यूटन}\]
यदि परीक्षण-आवेश बिन्दु \(B\) पर रखें तो उस पर लगा वैद्युत बल
\[F_B = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0 K} \frac{qq_0}{r_1^2} \text{ न्यूटन}\]
चूँकि बिन्दु \(B\) व \(A\) बहुत समीप हैं; अतः उनके बीच बल का मान \(B\) व \(A\) पर बलों \(F_B\) व \(F_A\) के गुणोत्तर माध्य के बराबर ले सकते हैं।
अतः \(B\) व \(A\) के बीच \(q_0\) पर लगने वाला माध्य-वैद्युत बल
\[F_{BA} = \sqrt{F_B F_A}\]
\[F_{BA} = \sqrt{\frac{1}{4\pi\varepsilon_0 K} \frac{qq_0}{r^2} \times \frac{1}{4\pi\varepsilon_0 K} \frac{qq_0}{r_1^2}} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0 K} \frac{qq_0}{rr_1} \text{ न्यूटन}\]
आवेश \(q_0\) को \(B\) से \(A\) तक लाने में वैद्युत-बल के विरुद्ध किया गया कार्य
\[W_{BA} = \text{बल } F_{BA} \times \text{दूरी BA}\]
\[W_{BA} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0 K} \frac{qq_0}{rr_1} \times (r_1 - r) = \frac{qq_0}{4\pi\varepsilon_0 K} \left(\frac{1}{r} - \frac{1}{r_1}\right) \text{ जूल}\]
इसी प्रकार \(C\) से \(B\) तक परीक्षण-आवेश \(q_0\) को लाने में किया गया कार्य
\[W_{CB} = \frac{qq_0}{4\pi\varepsilon_0 K} \left(\frac{1}{r_1} - \frac{1}{r_2}\right) \text{ जूल}\]
इसी प्रकार \(D\) से \(C\) तक परीक्षण-आवेश \(q_0\) को लाने में किया गया कार्य
\[W_{DC} = \frac{qq_0}{4\pi\varepsilon_0 K} \left(\frac{1}{r_2} - \frac{1}{r_3}\right) \text{ जूल}\]
अन्य भागों के लिए भी किये गये कार्य की गणना इसी तरह कर सकते हैं। अतः परीक्षण-आवेश \(q_0\) को अनन्त से \(A\) तक लाने में किया गया कार्य
\[W = W_{BA} + W_{CB} + W_{DC} + \dots\]
\[W = \frac{qq_0}{4\pi\varepsilon_0 K} \left[\left(\frac{1}{r} - \frac{1}{r_1}\right) + \left(\frac{1}{r_1} - \frac{1}{r_2}\right) + \left(\frac{1}{r_2} - \frac{1}{r_3}\right) + \dots\right]\]
बीच के सभी पद कट जाते हैं और निम्न व्यंजक प्राप्त होता है-
\[W = \frac{qq_0}{4\pi\varepsilon_0 K} \left(\frac{1}{r} - \frac{1}{\infty}\right)\]
\[\implies W = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0 K} \frac{qq_0}{r} \text{ जूल} \quad \left(\because \frac{1}{\infty} = 0\right)\]
परन्तु बिन्दु \(A\) पर विभव, परीक्षण-आवेश \(q_0\) को अनन्त से बिन्दु \(A\) तक लाने में किये गये कार्य तथा परीक्षण-आवेश \(q_0\) की निष्पत्ति के बराबर होगा। अतः बिन्दु \(A\) पर \(+q\) आवेश के कारण वैद्युत-विभव,
\[V = \frac{W}{q_0} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0 K} \frac{q}{r} \text{ वोल्ट}\]
निर्वात् (अथवा वायु) के लिए \(K = 1\),
अतः
\[V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r} \text{ वोल्ट}\]
या
\[V = 9 \times 10^9 \frac{q}{r} \text{ वोल्ट}\]
\[\text{(= } 9 \times 10^9 \text{ न्यूटन-मीटर}^2\text{/कूलॉम}^2\text{)}\]
इसी प्रकार यदि बिन्दु \(O\) पर रखा आवेश ऋणात्मक \(-q\) हो, तब इससे \(r\) दूरी पर स्थित बिन्दु \(A\) पर वैद्युत-विभव
\[V = -\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r} \text{ वोल्ट} = - 9 \times 10^9 \frac{q}{r} \text{ वोल्ट}\]
वैद्युत-विभव अदिश राशि है, इसीलिए किसी बिन्दु पर कई आवेशों के कारण परिणामी विभव, उन आवेशों से उत्पन्न विभव को बीजगणितीय विधि से जोड़कर प्राप्त कर सकते हैं। यदि कोई बिन्दु \(+ q_1, - q_2, - q_3, + q_4\) कूलॉम के बिन्दु आवेशों से क्रमशः \(r_1, r_2, r_3\) तथा \(r_4\) मीटर दूरी पर हो, तो उस बिन्दु पर कुल वैद्युत-विभव
\[V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \left[\frac{q_1}{r_1} - \frac{q_2}{r_2} - \frac{q_3}{r_3} + \frac{q_4}{r_4}\right] \text{ वोल्ट}\]In simple words: The electric potential at a point due to a point charge is the work done per unit positive charge in bringing it from infinity to that point. It's inversely proportional to the distance from the charge.
🎯 Exam Tip: Understanding the definition of electric potential and its derivation for a point charge is fundamental. Pay attention to the sign of the charge and the inverse relationship with distance.
Question 2. समान्तर-प्लेट संधारित्र की धारिता के लिए व्यंजक का निगमन कीजिए। इसकी धारिता को कैसे बढ़ाया जा सकता है।
या किसी समान्तर-पट्ट संधारित्र की धारिता का व्यंजक प्राप्त कीजिए, जबकि दोनों प्लेटों के बीच परावैद्युत भरा हो।
या किसी समान्तर-प्लेट संधारित्र की धारिता के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
या किसी समतल आवेशित प्लेट के निकट वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता का सूत्र लिखिए। इसका उपयोग करके समान्तर-प्लेट संधारित्र की धारिता के व्यंजक का निगमन कीजिए।
Answer:समान्तर-प्लेट संधारित्र की धारिता- चित्र 2.34 में एक समान्तर-प्लेट संधारित्र दिखाया। गया है जिसमें मुख्यतः धातु की लम्बी व समतल दो प्लेटें X व Y होती हैं जो एक-दूसरे के आमने-सामने थोड़ी दूरी पर दो विद्युतरोधी स्टैण्डों में लगी रहती हैं। इन समान्तर-प्लेटों के बीच वायु के स्थान पर कोई विद्युतरोधी माध्यम (परावैद्युतांक \(K\)) भरा है। समतल प्लेटों में से प्रत्येक का क्षेत्रफल \(A\) मीटर तथा उनके बीच की दूरी \(d\) मीटर है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक समांतर प्लेट संधारित्र को दर्शाता है, जिसमें दो प्लेटें X और Y एक-दूसरे के समानांतर रखी हैं। प्लेटों पर क्रमशः धनात्मक और ऋणात्मक आवेश हैं, तथा एक प्लेट पृथ्वी से जुड़ी हुई है, जबकि दूसरी किसी अज्ञात स्रोत से जुड़ी है। यह संधारित्र की मूल संरचना और कार्यप्रणाली को समझाता है।
जब प्लेट \(X\) को \(+q\) आवेश दिया जाता है तो प्रेरण के कारण प्लेट \(Y\) पर अन्दर की ओर \(-q\) आवेश तथा बाहर की ओर \(+q\) आवेश उत्पन्न हो जाता है, चूंकि प्लेंट \(Y\) पृथ्वी से जुड़ी है; अतः इसके बाहरी तल का \(+q\) आवेश पृथ्वी में चला जाएगा। अंतः प्लेटों के बीच वैद्युत-क्षेत्र उत्पन्न हो जाएगा और लगभग सभी जगह क्षेत्र की तीव्रता एकसमान होगी ।
प्लेटों पर आवेश का पृष्ठ घनत्व \(\sigma = q/A\)
प्लेटों के बीच में किसी बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता
\[E = \sigma/\varepsilon \text{, जहाँ } \varepsilon (= K\varepsilon_0) \text{ परावैद्युत की वैद्युतशीलता है।}\]
\(\sigma\) तथा \(\varepsilon\) का मान रखने पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता
\[E = \frac{q}{K\varepsilon_0 A}\]
माना दोनों प्लेटों के बीच विभवान्तर \(V\) वोल्ट है व इनके बीच की दूरी \(d\) है।
अतः प्लेटों के बीच वैद्युत-क्षेत्र \(E = V/d\) अथवा \(V = E \times d\)
समीकरण (1) से \(E\) का मान रखने पर
\[V = \frac{qd}{K\varepsilon_0 A}\]
अथवा
संधारित्र की धारिता \(C = q/V = \frac{q}{qd/(K\varepsilon_0 A)} = \frac{K\varepsilon_0 A}{d} \text{ फैरड}\]
यदि प्लेटों के मध्य निर्वात् (या वायु) हो, तो \(K = 1\); अतः इस दशा में धारिता
\[C_0 = \frac{\varepsilon_0 A}{d} \text{ फैरड}\]
जहाँ, \(\varepsilon_0 = 8.85 \times 10^{-12}\) फैरड-मीटर (निर्वात् की वैद्युतशीलता है।)
संधारित्र की धारिता को निम्नलिखित प्रकार से बढ़ाया जा सकता है-
1. प्रयुक्त प्लेटें अधिक क्षेत्रफल की होनी चाहिए।
2. प्लेटों के बीच ऐसा माध्यम रखना चाहिए जिसका परावैद्युतांक अधिक हो।
3. प्लेटों के बीच की दूरी (\(d\)) कम लेनी चाहिए अर्थात् प्लेटें परस्पर समीप रखनी चाहिए।In simple words: A parallel plate capacitor stores charge between two parallel conductive plates separated by a dielectric. Its capacitance depends on the area of the plates, the distance between them, and the dielectric constant of the material in between.
🎯 Exam Tip: The derivation of parallel plate capacitor capacitance is a common question. Remember the factors affecting capacitance: area (A), distance (d), and dielectric constant (K).
Question 3. समान धारिता के चार संधारित्र समान्तर-क्रम में जुड़े हैं। 1.5 वोल्ट की बैटरी से जोड़ने पर प्रत्येक संधारित्र पर संचित आवेश 1.5 माइक्रोकूलॉम है। यदि इन्हें श्रेणीक्रम में जोड़कर उसी बैटरी से आवेशित किया जाए, तो प्रत्येक संधारित्र पर संचित आवेश की गणना कीजिए।
Answer:तुल्य धारिता, \(C_1 = C+C+C+C = 4C\)
संचित आवेश, \(q = 4C \times V\)
या संधारित्र की धारिता, \(C = \frac{q}{4V} = \frac{1.5 \times 10^{-6}}{4 \times 1.5} = \frac{1}{4} \times 10^{-6} = 0.25 \text{ µF}\)
श्रेणीक्रम में जोड़ने पर तुल्य धारिता \(C'\) है, तब
\[\frac{1}{C'} = \frac{1}{0.25} + \frac{1}{0.25} + \frac{1}{0.25} + \frac{1}{0.25}\]
\[\frac{1}{C'} = \frac{4}{0.25}\]
\[C' = \frac{0.25}{4} = 0.063 \text{ µF}\]
अतः संचित आवेश \(q = C'V = 0.063 \times 10^{-6} \times 1.5 = 0.095 \text{ µC}\)
अतः यदि श्रेणीक्रम में जोड़कर उसी बैटरी से आवेशित किया जाए तो प्रत्येक संधारित्र पर संचित संधारित्रों का आवेश \(0.095\) होगा।In simple words: When capacitors are connected in series to the same voltage source, the total charge stored on each capacitor will be the same, but the total capacitance will decrease. We first found the individual capacitance from the parallel connection, then calculated the total charge for the series connection.
🎯 Exam Tip: Be careful with parallel vs. series combinations of capacitors. For series, the charge on each capacitor is the same, and the reciprocal of equivalent capacitance sums up. For parallel, voltage is the same, and capacitances add up directly.
Question 4. एक समान्तर प्लेट वायु संधारित्र की धारिता 2 µF है। जब इसकी प्लेटों के बीच, प्लेटों के बीच की दूरी की तीन-चौथाई मोटाई की k परावैद्युतांक की प्लेट रखी जाती है, तब संधारित्र की धारिता 4 µF हो जाती है। k का मान ज्ञात कीजिए जहाँ प्लेटों का तथा परावैद्युत प्लेट का क्षेत्रफल समान है।
Answer:माना प्लेट का क्षेत्रफल \( = A\)
प्लेटों के बीच की दूरी \( = d\)
तब समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता \(C_0 = \frac{\varepsilon_0 A}{d}\)
\[2 \times 10^{-6} = \frac{\varepsilon_0 A}{d} \dots(1)\]
प्लेटों के बीच \(\frac{3}{4}d\) मोटाई की परावैद्युत (\(k\)) प्लेट रखने पर धारिता
\[C = \frac{\varepsilon_0 A}{d - \frac{3}{4}d + \frac{3}{4k}d}\]
\[C = \frac{\varepsilon_0 A}{\frac{d}{4} + \frac{3d}{4k}}\]
\[4 \times 10^{-6} = \frac{\varepsilon_0 A}{\frac{d}{4} + \frac{3d}{4k}} \dots(2)\]
समी० (2) को समी० (1) से भाग करने पर,
\[\frac{4 \times 10^{-6}}{2 \times 10^{-6}} = \frac{\varepsilon_0 A / (\frac{d}{4} + \frac{3d}{4k})}{\varepsilon_0 A / d}\]
\[2 = \frac{d}{\frac{d}{4} + \frac{3d}{4k}}\]
\[2 = \frac{1}{\frac{1}{4} + \frac{3}{4k}}\]
\[2 = \frac{4k}{k+3}\]
\[\implies 2(k+3) = 4k\]
\[\implies 2k + 6 = 4k\]
\[\implies 6 = 2k\]
\[\implies k = 3\]In simple words: Inserting a dielectric material partially between the plates of a capacitor changes its capacitance. The new capacitance formula accounts for both the air and dielectric regions. By comparing the initial and final capacitances, we can determine the dielectric constant 'k'.
🎯 Exam Tip: When a dielectric slab is partially inserted, the capacitor can be thought of as a combination of two capacitors: one with air and one with the dielectric. Be careful with distances and the effective capacitance formulas.
Question 5. दिये गये चित्र 2.35 में A और B बिन्दुओं के बीच तुल्यधारिता ज्ञात कीजिए।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक संधारित्र नेटवर्क को दर्शाता है, जिसमें A और B बिंदुओं के बीच पांच 2 µF संधारित्र एक ब्रिज कॉन्फ़िगरेशन में जुड़े हुए हैं। यह विन्यास व्हीटस्टोन ब्रिज के समान है और इसका उपयोग तुल्य धारिता की गणना के लिए किया जाएगा।
हल- दिया गया चित्र 2.35 संलग्न चित्र 2.36 से प्रतिस्थापित किया जा सकता है। यह एक व्हीटस्टोन सेतु है जो सन्तुलित अवस्था में है। अतः विकर्ण में लगा 2 µF परिपथ में प्रभावहीन है। अतः AC व CB में लगे 2 µF-2 µF के श्रेणी संयोजन की धारिता \(C'\) हो, तो
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र, पहले दिए गए ब्रिज नेटवर्क का एक पुनर्व्यवस्थित रूप है। इसमें A और B बिंदुओं के साथ-साथ C और D बिंदुओं को दर्शाया गया है, और पांच 2 µF संधारित्रों की स्थिति को स्पष्ट किया गया है। यह व्यवस्था व्हीटस्टोन ब्रिज के संतुलन को समझने में मदद करती है।
\[\frac{1}{C'} = \frac{1}{2 \text{ µF}} + \frac{1}{2 \text{ µF}} = \frac{2}{2 \text{ µF}}\]
\[C' = 1 \text{ µF}\]
इसी प्रकार AD व DB में लगे 2 µF-2 µF के श्रेणी संयोजन की तुल्यधारिता भी \(C'' = 1\) µF होगी। दोनों \(C'-C''\) बिन्दु \(A\) व \(B\) के बीच समान्तरबद्ध हैं। अतः \(A\) व \(B\) के बीच तुल्यधारिता \(C = C' + C'' = 1 \text{ µF} + 1 \text{ µF} = 2 \text{ µF}\)In simple words: The given circuit is a balanced Wheatstone bridge for capacitors, which means the capacitor in the middle branch carries no charge and can be removed. The remaining capacitors are then in series and parallel combinations, which can be simplified to find the equivalent capacitance.
🎯 Exam Tip: Recognize Wheatstone bridge configurations in capacitor circuits. If it's balanced, the central capacitor is ineffective. Simplify series and parallel combinations carefully to find the equivalent capacitance.
Question 6. एक समान्तर प्लेट संधारित्र की प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल 40 सेमी है तथा दोनों प्लेटों के बीच विद्युत-क्षेत्र की तीव्रता 50 न्यूटन प्रति कूलॉम है। प्रत्येक प्लेट पर आवेश की गणना कीजिए।
Answer:समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता \(C = \frac{\varepsilon_0 A}{d}\)
जहाँ \(A\) प्लेट का क्षेत्रफल है तथा \(d\) प्लेटों के बीच की दूरी है। यदि प्लेटों के बीच विभवान्तर \(V\) हो, तब प्रत्येक प्लेट पर आवेश
\[q = CV = \frac{\varepsilon_0 A}{d} \times V\]
यदि प्लेटों के बीच वैद्युत-क्षेत्र \(E\) हो, तब \(E = V/d\)
अतः प्रत्येक प्लेट पर आवेश \(q = \varepsilon_0 AE\)
\[q = 8.85 \times 10^{-12} \times (40 \times 10^{-4}) \times 50\]
\[q = 1.77 \times 10^{-12} \text{ कूलॉम}\]In simple words: The charge on the plates of a parallel plate capacitor can be calculated using the relation between electric field, permittivity of free space, and the area of the plates. The electric field is uniform between the plates.
🎯 Exam Tip: Remember the relationship between electric field (E), surface charge density (σ), and permittivity (ε₀) for parallel plates: E = σ/ε₀. Since σ = Q/A, then E = Q/(Aε₀), which allows you to find Q = E A ε₀. Be careful with unit conversions (cm² to m²).
Question 7. दिए गए परिपथ में संधारित्र की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा की गणना कीजिए।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक विद्युत परिपथ को दर्शाता है जिसमें एक 10V की बैटरी है, जिसका आंतरिक प्रतिरोध 1Ω है। बैटरी एक 4Ω के बाहरी प्रतिरोधक और एक 2µF के संधारित्र से जुड़ी है, जो बाहरी प्रतिरोधक के समानांतर है। इस परिपथ में संधारित्र की संचित ऊर्जा ज्ञात करनी है।
हल- परिपथ में धारा \(i = \frac{V}{R+r} = \frac{10 \text{ V}}{1\Omega + 4\Omega} = 2 \text{ A}\)
संधारित्र के सिरों के बीच विभवान्तर
\[V' = iR = 2 \text{ A} \times 4\Omega = 8 \text{ V}\]
धारिता \(C = 2 \text{ µF} = 2 \times 10^{-6} \text{ फैरड}\)
परिपथ में वैद्युत स्थितिज ऊर्जा
\[U = \frac{1}{2} CV'^2\]
\[U = \frac{1}{2} \times (2 \times 10^{-6} \text{ फैरड}) \times (8 \text{ V})^2\]
\[U = 64 \times 10^{-6} \text{ जूल} = 6.4 \times 10^{-5} \text{ जूल}\]In simple words: To find the energy stored in a capacitor within a circuit, first calculate the current flowing through the circuit to determine the voltage across the capacitor (which is the same as the voltage across the resistor in parallel). Then, use the energy storage formula for a capacitor.
🎯 Exam Tip: For circuits with capacitors, remember that in a DC steady-state, the capacitor acts as an open circuit. The voltage across a capacitor connected in parallel with a resistor is equal to the voltage drop across that resistor. Use Ohm's law and the energy formula U = 1/2 CV².
Question 8. दिए गए परिपथ में दोनों संधारित्रों पर संचित आवेशों की गणना कीजिए।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक विद्युत परिपथ को दर्शाता है जिसमें एक 20V की बैटरी, तीन प्रतिरोधक (4Ω, 5Ω, 1Ω) और दो संधारित्र (4µF, 6µF) समानांतर में जुड़े हैं। संधारित्र प्रतिरोधकों के साथ एक समानांतर शाखा में हैं। इस परिपथ में संधारित्रों पर संचित आवेशों की गणना करनी है।
हल- स्थायी अवस्था में, परिपथ में धारा
\[i = \frac{E}{R+r} = \frac{20 \text{ Volt}}{4\Omega+5\Omega+1\Omega} = 2 \text{ A}\]
A व B के बीच विभवान्तर
\[V = iR = 2 \text{ A} \times (4\Omega+5\Omega) = 18 \text{ V}\]
A व B के बीच तुल्य धारिता
\[C = \frac{C_1 C_2}{C_1+C_2}\]
\[C = \frac{4 \times 6}{4+6} = \frac{24}{10} = 2.4 \text{ µF}\]
प्रत्येक संधारित्र पर संचित आवेश \(q = CV\)
\[q = 2.4 \times 18 = 43.2 \text{ µC}\]In simple words: In a steady DC circuit, capacitors in series across a voltage supply accumulate the same charge on each capacitor. First, calculate the total current and the voltage across the capacitor branch, then find the equivalent series capacitance to determine the charge.
🎯 Exam Tip: In DC steady-state, once the capacitors are fully charged, no current flows through them. The voltage across the branch containing capacitors is important. Be mindful if capacitors are in series or parallel, as the calculation for equivalent capacitance and charge distribution changes accordingly.
Question 9. वानडे ग्राफ जनित्र की संरचना तथा कार्यविधि चित्र की सहायता से समझाइए।
या वानडे ग्राफ जनित्र के सिद्धान्त एवं कार्यविधि का वर्णन कीजिए।
या वानडे ग्राफ जनित्र के गुण-दोष/उपयोग का वर्णन कीजिए।
या वानडे ग्राफ जनित्र का नामांकित चित्र बनाइए। इसके कार्य करने का सिद्धान्त बताइए। यह किस तरह से उच्च वोल्टेज उत्पन्न करता है?
Answer:प्रोफेसर वानडे ग्राफ ने सन् 1931 में एक ऐसे स्थिर वैद्युत उत्पादक यन्त्र (electrostatic generator) की रचना की जिसके द्वारा दस लाख वोल्ट या इससे भी उच्च कोटि का विभवान्तर उत्पन्न किया जा सकता है। इस जनित्र को उनके नाम पर ही वानडे ग्राफ जनित्र कहते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र वान डे ग्राफ जनित्र की संरचना को दर्शाता है, जिसमें एक खोखला धातु का गोला S, विद्युतरोधी स्तंभों A और B पर टिका हुआ है। इसमें दो घिरनियाँ P1 और P2, एक बेल्ट, दो कंघियाँ C1 और C2 (फुहार और संग्राहक), एक आयन स्रोत, और एक मोटर शामिल हैं। यह उच्च विभवांतर उत्पन्न करने के सिद्धांत को स्पष्ट करता है।
सिद्धान्त- इस जनित्र का सिद्धान्त निम्न दो स्थिर वैद्युत घटनाओं पर आधारित है- (i) एक खोखले चालक का आवेश उसकी बाहरी सतह पर विद्यमान रहता है। (ii) किसी चालक से वायु में वैद्युत विसर्जन, उसके नुकीले सिरों की प्राथमिकता से होता है। इस जनित्र की कार्यविधि वैद्युत चालक के नुकीले सिरों (pointed ends) की क्रिया पर आधारित है। चालक के नुकीले भाग पर आवेश का पृष्ठ घनत्व बहुत अधिक होने के कारण, इसे भाग के पास तीव्र वैद्युत क्षेत्र उपस्थित होता है, जिससे वहाँ भी वायु का आयनीकरण (ionisation) हो जाता है। तब विपरीत प्रकृति का आवेश आकर्षण के कारण नुकीले भाग के पास तथा समान प्रकृति का आवेश प्रतिकर्षण के कारण नुकीले भाग से दूर की ओर दौड़ता है अर्थात् नुकीले भाग से वैद्युत पवन उत्पन्न हो जाता है।
यदि किसी खोखले चालक गोले के अन्दर जुडे किसी चालक के (नुकीले भाग के) पास कोई आवेश लाया जाए, तो यह सम्पूर्ण आवेश खोखले चालक के बाहरी पृष्ठ पर स्थानान्तरित हो जाता है, चाहे खोखले चालक को विभव कितना भी अधिक हो । इस प्रकार खोखले चालक पर बार-बार आवेश देकर इसके आवेश तथा विभव को बहुत अधिक मान तक बढ़ाया जा सकता है। इसकी सीमा वैद्युतरोधी कठिनाइयों द्वारा निर्धारित की जाती है।
रचना-
चित्र 2.39 में वानडे ग्राफ जनित्र की रचना प्रदर्शित है। इसमें लगभग 5 मीटर व्यास के धातु का खोखला गोला S होता है जो लगभग 15 मीटर ऊँचे विद्युतरोधी स्तम्भों A व B पर टिका रहता है । P₁ और P2 दो घिरनियाँ होती हैं जिनमें से होकर विद्युतरोधी पदार्थ; जैसे-रबर या रेशम की बनी एक पट्टी (belt) गुजरती है।
नीचे की घिरनी P को एक वैद्युत मोटर के द्वारा घुमाया जाता है जिससे पट्टी ऊध्वाधर तल में तीर की दिशा में घूमने लगती है। C₁ और C2 धातु की दो कंघियाँ होती हैं। C₁ को फुहार कंघी (spray comb) तथा C2 को संग्राहक कंघी (collection comb) कहते हैं। कंघी C₁ को एक उच्च विभव की बैटरी के धने सिरे से जोड़ दिया जाता है ताकि वह लगभग 10000 वोल्ट के पृथ्वी धनात्मक विभवे पर रह सके । कंघी C2 को गोले S के हैं आन्तरिक पृष्ठ से जोड़ दिया जाता है। D एक विसर्जन-नलिका (discharge tube) है।
कार्यविधि-
जब कंघे C₁ को अति उच्च विभव दिया जाता है, तो तीक्ष्ण बिन्दुओं की क्रिया के फलस्वरूप यह इसके स्थान में आयन उत्पन्न करता है। धन आयनों व कंघे C₁ के बीच प्रतिकर्षण के कारण ये धन आयन बेल्ट पर चले जाते हैं। गतिमान बेल्ट द्वारा ये आयन ऊपर ले जाए जाते हैं। C2 के तीक्ष्ण सिरे बेल्ट को ठीक छूते हैं। इस प्रकार कंघा C2 बेल्ट के धन आवेश को एकत्रित करता है। यह धन आवेश शीघ्र ही गोले S के बाहरी पृष्ठ पर स्थानान्तरित हो जाता है। चूंकि बेल्ट घूमती रहती है, यह धन आवेश को ऊपर की ओर ले जाती है जो कंघे C2 द्वारा एकत्रित कर लिया जाता है तथा गोले S के बाहरी पृष्ठ पर स्थानान्तरित हो जाता है। इस प्रकार गोले S का बाहरी पृष्ठ निरन्तर धन आवेश प्राप्त करता है तथा इसका विभवे अति उच्च हो जाती है। जब गोले S का विभवे बहुत अधिक हो जाता है, तो निकटवर्ती वायु की परावैद्युत तीव्रता (dielectric strength) टूट जाती है तथा आवेश का निकटवर्ती वायु में क्षरण (leakage) हो जाता है। अधिकतम विभव की स्थिति में आवेश के क्षरण होने की दर गोले पर स्थानान्तरित आवेश की दर के बराबर हो। जाती है। गोले से आवेश का क्षरण रोकने के लिए, जनित्र को पृथ्वी से सम्बन्धित तथा उच्च दाबे पर वायू भरे टैंक में रखा जाता है।
\[\text{R त्रिज्या के गोले की धारिता } C = 4\pi\varepsilon_0 R\]
यदि गोले पर आवेश \(Q\) हो, तो गोले का विभव \(V = \frac{Q}{C} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{R}\]
वास्तविक जनित्र में एक खोखले गोले S के स्थान पर दो खोखले गोले प्रयुक्त करके, एक गोले पर धनावेश तथा दूसरे गोले पर ऋणावेश एकत्रित करके, इन दोनों गोलों के बीच एक अत्यन्त उच्च विभवान्तर प्राप्त कर लिया जाता है। वानडे ग्राफ जनित्र धन आवेशित कणों को अति उच्च वेग तक त्वरित करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार का जनित्र IIT कानपुर में लगा है जो आवेशित कणों को 2 Mev ऊर्जा तक त्वरित करता उपयोग- वानडे ग्राफ जनित्र के उपयोग निम्नलिखित हैं
1. उच्च विभवान्तर उत्पन्न करने के लिए,
2. तीव्र एक्स किरणों के उत्पादन में,
3. नाभिकीय विघटन के प्रयोगों में आवेशित कणों (प्रोटॉन, डयूट्रॉन तथा \(\alpha\) कण आदि) को उच्च गतिज ऊर्जा प्रदान करने में,
4. नाभिकीय भौतिकी के अध्ययन में इसका उपयोग कण त्वरक (particle accelerator) के रूप में किया जाता है।
दोष- वानडे ग्राफ जनित्र के दोष निम्नवत् हैं-
1. इसके आकार के बड़ा होने के कारण इसका उपयोग असुविधाजनक होता है।
2. उच्च विभव के कारण इसको उपयोग खतरनाक होता है।In simple words: The Van de Graaff generator is an electrostatic machine that produces very high electrostatic potentials by continuously transferring charge to a large spherical conductor via a moving belt. It operates on the principle of charge residing on the outer surface of a conductor and point discharge.
🎯 Exam Tip: For Van de Graaff generators, focus on the principles of charge transfer by points and charge residing on the outer surface of a spherical conductor. Understand its main components (belt, combs, hollow sphere, motor) and their roles in generating high voltages.
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