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Detailed Chapter 1 विद्युत आवेश और क्षेत्र UP Board Solutions for Class 12 Physics
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Class 12 Physics Chapter 1 विद्युत आवेश और क्षेत्र UP Board Solutions PDF
Up Board Solutions For Class 12 Physics Chapter 1 Electric Charges And Fields (वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र)
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
Question 1. वायु में एक-दूसरे से 30 cm दूरी पर रखे दो छोटे आवेशित गोलों पर क्रमशः \(2 \times 10^{-7}\) C तथा \(3 \times 10^{-7}\) C आवेश हैं। उनके बीच कितना बल है ?
Answer: हल- दिया है, \(q_1 = 2 \times 10^{-7} C\), \(q_2 = 3 \times 10^{-7} C\) तथा
\(r = 30\) सेमी \( = 0.3\) मीटर, \(F = ?\)
सूत्र \(F = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q_1q_2}{r^2}\) से
\[F = \frac{9 \times 10^9 \times 2 \times 10^{-7} \times 3 \times 10^{-7}}{(0.3)^2}\]
\( = 6 \times 10^{-3}\) न्यूटन (प्रतिकर्षणात्मक)
In simple words: दो आवेशित गोलों के बीच लगने वाला बल कूलॉम के नियम से ज्ञात किया जाता है, जो उनके आवेशों के गुणनफल के समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यहां यह बल प्रतिकर्षणात्मक है क्योंकि आवेशों का गुणनफल धनात्मक है।
🎯 Exam Tip: कूलॉम के नियम का उपयोग करते समय आवेशों को C में और दूरी को मीटर में व्यक्त करना सुनिश्चित करें। बल की प्रकृति (आकर्षण या प्रतिकर्षण) को भी स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 2. 0.4 µC आवेश के किसी छोटे गोले पर किसी अन्य छोटे आवेशित गोले के कारण वायु में 0.2 N बल लगता है। यदि दूसरे गोले पर 0.8 µC आवेश हो तो
(a) दोनों गोलों के बीच कितनी दूरी है?
(b) दूसरे गोले पर पहले गोले के कारण कितना बल लगता है?
Answer: हल- दिया है, \(q_1 = 0.4 \mu C = 0.4 \times 10^{-6} C\)
\(q_2 = 0.8 \mu C = 0.8 \times 10^{-6} C\)
तथा \(q_2\) के कारण \(q_1\) पर बल \(F = 0.2 N\)
(a) \(r = ?\)
सूत्र \(F = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q_1q_2}{r^2}\) से
\[0.2 = 9 \times 10^9 \times \frac{0.4 \times 10^{-6} \times 0.8 \times 10^{-6}}{r^2}\]
अथवा
\[r = \sqrt{\frac{9 \times 10^9 \times 0.4 \times 10^{-6} \times 0.8 \times 10^{-6}}{0.2}}\]
\[ = \sqrt{9 \times 4 \times 4 \times 10^{-4}}\]
\( = 12 \times 10^{-2}\) मीटर \( = 12\) सेमी
(b) \(q_2\) पर \(-q_1\) के कारण बल \( = ?\)
कूलॉम का बल न्यूटनीय बल है अर्थात् एक आवेश पर दूसरे आवेश के कारण बल, दूसरे आवेश पर पहले आवेश के कारण बले के बराबर तथा विपरीत होता है। अतः \(q_2\) पर \(q_1\) के कारण बल भी \(0.2 N\) ही होगा, तथा इसकी दिशा \(q_1\) की ओर होगी ।
In simple words: कूलॉम का नियम बताता है कि दो आवेशों के बीच लगने वाला बल, उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। साथ ही, न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार, दोनों आवेश एक-दूसरे पर समान और विपरीत बल लगाते हैं।
🎯 Exam Tip: बल की गणना करते समय, आवेशों के मान को कूलॉम में और दूरी को मीटर में बदलना महत्वपूर्ण है। न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार, क्रिया-प्रतिक्रिया बल हमेशा परिमाण में समान और दिशा में विपरीत होते हैं।
Question 3. जाँच द्वारा सुनिश्चित कीजिए कि \(\frac{ke^2}{Gm_e m_p}\) विमाहीन है। भौतिक नियतांकों की सारणी देखकर इस अनुपात का मान ज्ञात कीजिए। यह अनुपात क्या बताता है?
Answer: हल- कूलॉम बल, \(F = k \frac{q_1q_2}{r^2}\) से,
\[k \text{ के मात्रक } = \frac{Fr^2}{q_1q_2} \text{ के मात्रक } = \frac{Nm^2}{C^2}\]
आवेश \(e\) के मात्रक \(=\) कूलॉम \((C)\)
\[G \text{ के मात्रक } = \frac{Fr^2}{m_1m_2} \text{ के मात्रक } = \frac{Nm^2}{kg^2}\]
\(m_e\) के मात्रक \(=\) \(m_p\) के मात्रक \(=\) kg
\[\therefore \frac{ke^2}{Gm_em_p} \text{ के मात्रक } = \frac{(Nm^2/C^2)(C^2)}{(Nm^2/kg^2) \times (kg)^2}\]
यह \(=\) कोई मात्रक नहीं।
अर्थात् निष्पत्ति \(\frac{ke^2}{Gm_em_p}\) विमाहीन है।
नियतांकों के मान
\(k = 9 \times 10^9 \text{ Nm}^2/C^2\), \(e = 1.6 \times 10^{-19} C\)
\(G = 6.67 \times 10^{-11} \text{ Nm}^2/kg^2\)
\(m_e = 9.1 \times 10^{-31} \text{ kg}\), \(m_p = 1.67 \times 10^{-27} \text{ kg}\)
\[\therefore \frac{ke^2}{Gm_em_p} = \frac{(9 \times 10^9) \times (1.6 \times 10^{-19})^2}{(6.67 \times 10^{-11}) \times (9.1 \times 10^{-31}) \times (1.67 \times 10^{-27})}\]
\( = 2.27 \times 10^{39}\)
निश्चित दूरी पर रखे इलेक्ट्रॉन व प्रोटॉन के बीच वैद्युत बल तथा गुरुत्वीय बल का अनुपात है। यह बताता है कि गुरुत्वीय बल की तुलना में वैद्युत बल अत्यन्त प्रबल है।
In simple words: यह अनुपात इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन के बीच वैद्युत बल और गुरुत्वीय बल का तुलनात्मक माप है। इसका विमाहीन होना दर्शाता है कि यह एक शुद्ध संख्या है जो भौतिक नियतांकों के मात्रकों को निरस्त करके प्राप्त होती है। इसका उच्च मान इंगित करता है कि वैद्युत बल गुरुत्वीय बल से कहीं अधिक मजबूत है।
🎯 Exam Tip: भौतिक नियतांकों के मात्रकों को सही ढंग से लिखें और उन्हें सावधानी से निरस्त करें ताकि विमाहीनता सिद्ध हो सके। इस अनुपात का मान एक महत्वपूर्ण अवधारणा को दर्शाता है कि गुरुत्वाकर्षण बल की तुलना में विद्युत बल कितना प्रबल होता है।
Question 4. (a) “किसी वस्तु का वैद्युत आवेश क्वाण्टीकृत है। इस प्रकथन से क्या तात्पर्य है?
(b) स्थूल अथवा बड़े पैमाने पर विद्युत आवेशों से व्यवहार करते समय हम विद्युत आवेश के क्वाण्टमीकरण की उपेक्षा कैसे कर सकते हैं?
Answer: उत्तर- (a) किसी वस्तु का आवेश क्वाण्टीकृत है, इस कथन का तात्पर्य यह है कि हम किसी वस्तु को जितना चाहें उतना आवेश नहीं दे सकते अपितु वस्तु को आवेश, आवेश की न्यूनतम इकाई (e, मूल आवेश) के पूर्ण गुणजों में ही दिया जा सकता है।
(b) स्थूल अथवा बड़े पैमाने पर आवेशों से व्यवहार करते समय आवेश के क्वाण्टमीकरण का कोई महत्त्व नहीं होता और इसकी उपेक्षा की जा सकती है। इसका कारण यह है कि बड़े पैमाने पर व्यवहार में आने वाले आवेश मूल आवेश की तुलना में बहुत बड़े होते हैं। उदाहरण के लिए 1 µC आवेश में लगभग \(10^{13}\) मूल आवेश सम्मिलित हैं। ऐसी अवस्था में आवेश को सतत मानकर व्यवहार किया जा सकता है।
In simple words: आवेश का क्वाण्टीकरण का अर्थ है कि आवेश हमेशा इलेक्ट्रॉन के आवेश के पूर्ण गुणज में ही होता है। बड़े पैमाने पर, चूंकि मूल आवेश की मात्रा बहुत छोटी होती है, इसलिए हम कुल आवेश को एक सतत राशि मान सकते हैं।
🎯 Exam Tip: क्वाण्टीकरण की अवधारणा को "e" के पूर्ण गुणज (ne) के रूप में स्पष्ट करें। स्थूल पैमाने पर उपेक्षा के कारण को बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति से जोड़कर समझाएं, जिससे आवेश का व्यवहार सतत प्रतीत होता है।
Question 5. जब काँच की छड़ को रेशम के टुकड़े से रगड़ते हैं तो दोनों पर आवेश आ जाता है। इसी प्रकार की परिघटना का वस्तुओं के अन्य युग्मों में भी प्रेक्षण किया जाता है। स्पष्ट कीजिए कि यह प्रेक्षण आवेश संरक्षण नियम से किस प्रकार सामंजस्य रखता है?
Answer: उत्तर- घर्षण द्वारा आवेशन की घटनाएँ आवेश संरक्षण नियम के साथ पूर्ण सामंजस्य रखती हैं। जब इस प्रकार की किसी घटना में दो उदासीन वस्तुओं को रगड़ा जाता है तो दोनों वस्तुएँ आवेशित हो जाती हैं। घर्षण से पूर्व दोनों वस्तुएँ उदासीन
होती हैं अर्थात् उनका कुल आवेश शून्य होता है। इस प्रकार के सभी प्रेक्षणों में सदैव यह पाया गया है कि एक वस्तु पर जितना धनावेश आता है, दूसरी वस्तु पर उतना ही ऋणावेश आता है। इस प्रकार घर्षण द्वारा आवेशन के बाद भी दोनों वस्तुओं का नेट आवेश शून्य ही बना रहता है।
In simple words: जब दो उदासीन वस्तुओं को रगड़ा जाता है, तो एक वस्तु से इलेक्ट्रॉन दूसरी वस्तु में स्थानांतरित होते हैं, जिससे एक पर धनात्मक और दूसरे पर ऋणात्मक आवेश आता है। चूंकि कुल आवेश प्रणाली में अपरिवर्तित रहता है (जितना धन आवेश उत्पन्न होता है, उतना ही ऋण आवेश भी), यह आवेश संरक्षण के नियम के अनुरूप है।
🎯 Exam Tip: आवेश संरक्षण के नियम को घर्षण विद्युत के संदर्भ में समझाते समय, हमेशा प्रारंभिक उदासीन स्थिति और अंतिम संतुलन (कुल आवेश शून्य) पर जोर दें। इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण की भूमिका को स्पष्ट करें।
Question 6. चार बिन्दु आवेश \(q_A = 2 \mu C\), \(q_B = -5 \mu C\), \(q_C = 2 \mu C\) तथा \(q_D = -5 \mu C\), 10 cm भुजा के किसी वर्ग ABCD के शीर्षों पर अवस्थित हैं। वर्ग के केन्द्र पर रखे \(1 \mu C\) आवेश पर लगने वाला बल कितना है ?
Answer: हल- किसी आवेश पर कार्य करने वाले अन्य आवेशों के कारण कूलॉम बलों को सदिश विधि द्वारा जोड़ा जाता है। अतः वर्ग के केन्द्र पर रखे आवेश \(q_0 = 1 \mu C\) पर बल चारों आवेशों \(q_A, q_B, q_C\) व \(q_D\) के कारण कूलॉम बलों के सदिश योग के बराबर होगा ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वर्ग ABCD को दर्शाता है जिसके शीर्षों पर क्रमशः आवेश \(q_D = -5 \mu C\), \(q_C = 2 \mu C\), \(q_A = 2 \mu C\), और \(q_B = -5 \mu C\) स्थित हैं। वर्ग के केंद्र O पर एक आवेश \(q_0 = 1 \mu C\) रखा गया है। चित्र में केंद्र O पर रखे आवेश \(q_0\) पर प्रत्येक शीर्ष आवेश द्वारा लगाए गए बल \(F_{OA}\), \(F_{OB}\), \(F_{OC}\), और \(F_{OD}\) की दिशाएं भी प्रदर्शित की गई हैं।
स्पष्टतः \(OA = OB = OC = OD = \frac{1}{2}\sqrt{10^2 + 10^2} = \frac{10\sqrt{2}}{2}\) cm \( = 5\sqrt{2}\) cm \( = 5\sqrt{2} \times 10^{-2}\) m
आवेश \(q_A = 2 \mu C\) के कारण \(q_0 = 1 \mu C\) पर बल
\(F_{OA} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q_0q_A}{(OA)^2}\), O से C की ओर
\[ = 9 \times 10^9 \times \frac{(1\times10^{-6}) \times (2\times10^{-6})}{(5\sqrt{2}\times10^{-2})^2}\]
\( = 3.6 N\), OC के अनुदिश
आवेश \(q_C = 2 \mu C\) के कारण \(q_0\) पर बल
\(F_{OC} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q_0q_C}{(OC)^2}\), O से A की ओर
\[ = 9 \times 10^9 \times \frac{(1\times10^{-6}) \times (2\times10^{-6})}{(5\sqrt{2}\times10^{-2})^2}\]
\( = 3.6 N\), OA के अनुदिश
स्पष्टतः \(\vec{F_{OA}} + \vec{F_{OC}} = 0\)
आवेश \(q_B = -5 \mu C\) के कारण \(q_0 = 1 \mu C\) पर बल
\(F_{OB} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q_0q_B}{(OB)^2}\), O से B की ओर
\[ = 9 \times 10^9 \times \frac{(1\times10^{-6}) (5\times10^{-6})}{(5\sqrt{2}\times10^{-2})^2}\]
\( = 9.0 N\), OB के अनुदिश
आवेश \(q_D = -5 \mu C\) के कारण \(q_0\) पर बल
\(F_{OD} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q_0q_D}{(OD)^2}\), O से D की ओर
\[ = 9 \times 10^9 \times \frac{(1\times10^{-6}) (5\times10^{-6})}{(5\sqrt{2}\times10^{-2})^2}\]
\( = 9.0 N\), OD के अनुदिश
स्पष्टतः \(\vec{F_{OB}} + \vec{F_{OD}} = 0\)
कुल बल \(\vec{F} = \vec{F_{OA}} + \vec{F_{OB}} + \vec{F_{OC}} + \vec{F_{OD}}\)
\( = (\vec{F_{OA}} + \vec{F_{OC}}) + (\vec{F_{OB}} + \vec{F_{OD}})\)
\( = 0+0=0\)
अर्थात् \(q_0\) पर नेट बल शून्य है।
In simple words: वर्ग के केंद्र पर रखे आवेश पर लगने वाला कुल बल शून्य होता है क्योंकि विपरीत शीर्षों पर स्थित आवेशों द्वारा लगाए गए बल परिमाण में समान और दिशा में विपरीत होते हैं, जिससे वे एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, समरूपता का उपयोग करके गणना को सरल बनाएं। सदिश योग करते समय, समान और विपरीत बलों को पहचानना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं।
Question 7. (a) स्थिर विद्युत-क्षेत्र रेखा एक सतत वक्र होती है अर्थात कोई क्षेत्र रेखा एकाएक नहीं टूट सकती क्यों?
(b) स्पष्ट कीजिए कि दो क्षेत्र रेखाएँ कभी-भी एक-दूसरे का प्रतिच्छेदन क्यों नहीं करतीं?
Answer: उत्तर- (a) विद्युत-क्षेत्र रेखा वह वक्र है जिसके प्रत्येक बिन्दु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिन्दु पर विद्युत-क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करती है। ये क्षेत्र रेखाएँ सतत वक्र होती हैं अर्थात् किसी बिन्दु पर एकाएक नहीं टूट सकतीं, अन्यथा उस बिन्दु परे विद्युत-क्षेत्र की कोई दिशा ही नहीं होगी, जो असम्भव है।
(b) दो विद्युत-क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेदित नहीं कर सकतीं; क्योंकि इस स्थिति में कटान बिन्दु पर दो स्पर्श रेखाएँ खींची जाएँगी जो उस बिन्दु पर विद्युत-क्षेत्र की दो दिशाएँ प्रदर्शित करेंगी जो असम्भव है।
In simple words: विद्युत क्षेत्र रेखाएं सतत होती हैं क्योंकि किसी भी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की एक ही निश्चित दिशा होती है। वे कभी एक-दूसरे को काटती नहीं हैं क्योंकि यदि वे काटतीं, तो कटान बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दो दिशाएं होतीं, जो भौतिक रूप से असंभव है।
🎯 Exam Tip: विद्युत क्षेत्र रेखाओं के गुणों को स्पष्ट रूप से समझाएं। सतत वक्र होने और प्रतिच्छेदन न करने के पीछे के तर्कों को विद्युत क्षेत्र की अद्वितीय दिशा के सिद्धांत से जोड़ें, जो एक महत्वपूर्ण वैचारिक बिंदु है।
Question 8. दो बिन्दु आवेश \(q_A = 3 \mu C\) तथा \(q_B = -3 \mu C\) निर्वात में एक-दूसरे से 20 cm दूरी पर स्थित हैं।
(a) दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा AB के मध्य बिन्दु O पर विद्युत-क्षेत्र कितना है?
(b) यदि \(1.5 \times 10^{-9} C\) परिमाण का कोई ऋणात्मक परीक्षण आवेश इसे बिन्दु पर रखा जाए तो यह परीक्षण आवेश कितने बल का अनुभव करेगा?
Answer: हल-(a): \(q_A\) धनात्मक तथा \(q_B\) ऋणात्मक है; अतः मध्य बिन्दु O पर \(q_A\) व \(q_B\) दोनों के कारण विद्युत-क्षेत्र की दिशा O से B की ओर होगी।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र रेखा AB पर स्थित दो आवेशों \(q_A\) और \(q_B\) को दर्शाता है, जहाँ \(q_A\) धनात्मक और \(q_B\) ऋणात्मक है। रेखा के मध्य बिंदु O पर, \(q_A\) के कारण विद्युत क्षेत्र \(E_A\) और \(q_B\) के कारण विद्युत क्षेत्र \(E_B\) की दिशाएं O से B की ओर इंगित की गई हैं। यह दिखाता है कि दोनों क्षेत्र एक ही दिशा में हैं और दूरी 0.1 मीटर है।
अतः मध्य बिन्दु पर विद्युत-क्षेत्र की तीव्रता
\[E = E_A + E_B = 9 \times 10^9 \times \frac{q}{(AO)^2} + 9 \times 10^9 \times \frac{q}{(BO)^2}\]
[जहाँ \(q = |q_A| = |q_B|\)]
\[ = 9 \times 10^9 \left[ \frac{3\times10^{-6}}{0.01} + \frac{3\times10^{-6}}{0.01} \right] = 5.4 \times 10^6 N/C \quad \text{(AB दिशा में)}\]
(b) मध्य बिन्दु O पर रखे गए \(Q = 1.5 \times 10^{-9} C\) के आवेश पर बल
\(F = QE = 1.5 \times 10^{-9} \times 5.4 \times 10^6\)
\( = 8.1 \times 10^{-3} N \quad \text{(OA दिशा में)}\)
In simple words: दो समान परिमाण और विपरीत प्रकृति के आवेशों के बीच, मध्य बिंदु पर विद्युत क्षेत्र दोनों आवेशों के कारण क्षेत्रों के सदिश योग के बराबर होता है, जो एक ही दिशा में होते हैं। परीक्षण आवेश पर बल विद्युत क्षेत्र की दिशा के विपरीत होगा क्योंकि परीक्षण आवेश ऋणात्मक है।
🎯 Exam Tip: विद्युत क्षेत्र की दिशा को निर्धारित करते समय आवेशों की प्रकृति (धनात्मक या ऋणात्मक) का ध्यान रखें। मध्य बिंदु पर, विपरीत आवेशों के कारण क्षेत्र एक ही दिशा में जुड़ते हैं। बल की गणना के लिए \(F=QE\) सूत्र का उपयोग करते समय, परीक्षण आवेश के चिह्न के आधार पर बल की दिशा का निर्धारण करें।
Question 9. किसी निकाय में दो आवेश \(q_A = 2.5 \times 10^{-7} C\) तथा \(q_B = -2.5 \times 10^{-7} C\) क्रमशः दो बिन्दुओं A : (0, 0, -15 cm) तथा B : (0, 0, +15 cm) पर अवस्थित हैं। निकाय का कुल आवेश तथा विद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण क्या है?
Answer: हल- प्रश्नानुसार, \(q_A = 2.5 \times 10^{-7} C\), \(q_B = -2.5 \times 10^{-7} C\),
\(2a = AB = 30\) cm \( = 0.30\) m
कुल आवेश, \(Q = q_A + q_B = 2.5 \times 10^{-7} C - 2.5 \times 10^{-7} C = 0\)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र Z-अक्ष पर स्थित दो बिंदुओं A और B को दर्शाता है। बिंदु A (0, 0, -15 cm) पर आवेश \(q_A\) और बिंदु B (0, 0, 15 cm) पर आवेश \(q_B\) है। दोनों बिंदुओं के बीच की दूरी 2a है, जो द्विध्रुव की अक्ष को दर्शाती है।
वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण,
\(\vec{p} = q \cdot 2\vec{a}\) (दिशा- \(q\) से \(+q\) की ओर)
\( = (2.5 \times 10^{-7} C) \times (0.30 \text{ m})\)
\( = 7.5 \times 10^{-8} \text{ C-m}\); B से A की ओर
\( = 7.5 \times 10^{-8}\) Cm; ऋणात्मक Z-अक्ष की ओर
In simple words: एक विद्युत द्विध्रुव में दो समान और विपरीत आवेश होते हैं। कुल आवेश हमेशा शून्य होता है। द्विध्रुव आघूर्ण आवेश के परिमाण और दोनों आवेशों के बीच की दूरी का गुणनफल होता है, और इसकी दिशा ऋणात्मक आवेश से धनात्मक आवेश की ओर होती है।
🎯 Exam Tip: विद्युत द्विध्रुव के कुल आवेश की गणना करते समय, विपरीत चिह्नों के कारण इसे शून्य दर्शाएं। द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा को ऋणात्मक से धनात्मक आवेश की ओर स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और SI इकाइयों का सही उपयोग करें (C-m)।
Question 10. \(4 \times 10^{-9}\) cm द्विध्रुव आघूर्ण को कोई विद्युत-द्विध्रुव \(5 \times 10^4 NC^{-1}\) परिमाण के किसी एकसमान विद्युत-क्षेत्र की दिशा से 30° पर संरेखित है। द्विध्रुव पर कार्यरत बल आघूर्ण का परिमाण परिकलित कीजिए.
Answer: हल- दिया है,
\(p = 4 \times 10^{-9} \text{ Cm}\), \(E = 5 \times 10^4 \text{ NC}^{-1}\), \(\theta = 30^\circ\), \(\tau = ?\)
अतः सूत्र \(\tau = pE \sin \theta\), का उपयोग करते हुए
\(\tau = 4 \times 10^{-9} \times 5 \times 10^4 \times \sin 30^\circ\)
\( = 20 \times 10^{-5} \times \frac{1}{2} = 10^{-4}\) न्यूटन-मीटर
In simple words: एक विद्युत द्विध्रुव पर एकसमान विद्युत क्षेत्र में कार्यरत बल आघूर्ण का परिमाण द्विध्रुव आघूर्ण, विद्युत क्षेत्र की तीव्रता और उनके बीच के कोण के साइन (sine) के गुणनफल के बराबर होता है।
🎯 Exam Tip: बल आघूर्ण की गणना करते समय, \(pE \sin \theta\) सूत्र का सही उपयोग करें। द्विध्रुव आघूर्ण (p) और विद्युत क्षेत्र (E) की SI इकाइयों का ध्यान रखें और कोण को रेडियन के बजाय डिग्री में उपयोग करते समय sin फ़ंक्शन को सही ढंग से लागू करें।
Question 11. ऊन से रगड़े जाने पर कोई पॉलीथीन का टुकड़ा \(3 \times 10^{-7} C\) के ऋणावेश से आवेशित पाया गया।
(a) स्थानान्तरित (किस पदार्थ से किस पदार्थ में) इलेक्ट्रॉनों की संख्या आकलित कीजिए।
(b) क्या ऊन से पॉलीथीन में संहति का स्थानान्तरण भी होता है?
Answer: हल-(a) दिया है, कुल स्थानान्तरित आवेश \( = -3 \times 10^{-7} C\)
एक इलेक्ट्रॉन पर कुल आवेश \( = 1.6 \times 10^{-19} C\)
स्थानान्तरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या \(n = ?\)
चूँकि ऊन से रगड़ने पर पॉलीथीन के टुकड़े पर ऋण आवेश आता है, अतः इलेक्ट्रॉन ऊन से पॉलीथीन के टुकड़े पर स्थानान्तरित होते हैं। हमें ज्ञात है कि \(q = ne\)
\(\implies n = \frac{q}{e} = \frac{-3 \times 10^{-7} C}{-1.6 \times 10^{-19} C} = 1.875 \times 10^{12}\)
\( = 2 \times 10^{12}\) इलेक्ट्रॉन
(b) हाँ, ऊन से पॉलीथीन पर द्रव्यमान का स्थानान्तरण होता है क्योंकि इलेक्ट्रॉन, जो द्रव्य कण हैं, ऊन से पॉलीथीन पर विस्थापित होते हैं।
\(m = \) प्रत्येक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान \( = 9.1 \times 10^{-31}\) kg,
\(n = 1.875 \times 10^{12}\)
पॉलीथीन पर स्थानान्तरित कुल द्रव्यमान \(M = m \times n = 9.1 \times 10^{-31}\) kg \(\times 1.875 \times 10^{12} = 1.71 \times 10^{-18}\) kg
In simple words: जब इलेक्ट्रॉन एक पदार्थ से दूसरे में स्थानांतरित होते हैं, तो आवेश के साथ-साथ द्रव्यमान का भी स्थानांतरण होता है, क्योंकि इलेक्ट्रॉनों का अपना द्रव्यमान होता है। ऋणावेश का अर्थ है अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन, जिनकी संख्या कुल आवेश को एक इलेक्ट्रॉन के आवेश से विभाजित करके निकाली जा सकती है।
🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना करते समय, क्वाण्टीकरण के सिद्धांत \(q = ne\) का उपयोग करें। यह भी याद रखें कि इलेक्ट्रॉनों का द्रव्यमान होता है, इसलिए आवेश के स्थानांतरण से द्रव्यमान का भी स्थानांतरण होता है, भले ही वह बहुत कम हो।
Question 12. (a) दो विद्युतरोधी आवेशित ताँबे के गोलों A तथा B के केन्द्रों के बीच की दूरी 50 cm है। यदि दोनों गोलों पर पृथक्-पृथक् आवेश \(6.5 \times 10^{-7} C\) हैं तो इनमें पारस्परिक स्थिर विद्युत प्रतिकर्षण बल कितना है? गोलों के बीच की दूरी की तुलना में गोलों A तथा B की त्रिज्याएँ नगण्य हैं।
(b) यदि प्रत्येक गोले पर आवेश की मात्रा दो गुनी तथा गोलों के बीच की दूरी आधी कर दी जाए तो प्रत्येक गोले पर कितना
Answer: बल लगेगा? हल-(a) प्रश्नानुसार, \(q_1 = q_2 = 6.5 \times 10^{-7} C\), \(r = 50\) cm \( = 0.50\) m
\(\frac{1}{4\pi\epsilon_0} = 9 \times 10^9 \text{ Nm}^2 \text{ C}^{-2}\)
समान आवेशित गोलों के बीच प्रतिकर्षण बल (कूलॉम के नियम से)
\[F = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q_1q_2}{r^2}\]
\[ = \frac{9 \times 10^9 (6.5 \times 10^{-7}) (6.5 \times 10^{-7})}{(0.50)^2}\]
\( = 1.52 \times 10^{-2} N\)
(b) यहाँ \(q_1' = 2q_1\), \(q_2' = 2q_2\), \(r' = \frac{r}{2}\)
\[F' = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q_1'q_2'}{(r')^2} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{(2q_1) (2q_2)}{(r/2)^2}\]
\[ = 16 \times \left( \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q_1q_2}{r^2} \right)\]
\( = 16 \times F = 16 \times 1.52 \times 10^{-2} N\)
\( = 0.243 N = 2.43 \times 10^{-1} N\)
In simple words: कूलॉम का नियम बताता है कि आवेशित वस्तुओं के बीच बल आवेशों के गुणनफल के सीधे समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। आवेशों को दोगुना करने और दूरी को आधा करने पर, बल में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
🎯 Exam Tip: कूलॉम के नियम के सूत्र में \(q_1q_2\) और \(r^2\) की निर्भरता को समझें। जब आवेशों और दूरी में परिवर्तन होता है, तो बल पर पड़ने वाले प्रभाव की गणना करते समय इन संबंधों का सही उपयोग करें।
Question 13. मान लीजिए प्रश्न 12 में गोले A तथा B साइज में सर्वसम हैं तथा इसी साइज का कोई तीसरा अनावेशित गोला पहले तो पहले गोले के सम्पर्क, तत्पश्चात दूसरे गोले के सम्पर्क में लाकर, अन्त में दोनों से ही हटा लिया जाता है। अब A तथा B के बीच नया प्रतिकर्षण बल कितना है?
Answer: हल- माना प्रारम्भ में प्रत्येक गोले 'A' व 'B' पर अलग-अलग \(q\) आवेश है। (\(q = 6.5 \times 10^{-7} C\)) माना तीसरा अनावेशित गोला C है। गोले A व C समान आकार के हैं; अतः परस्पर स्पर्श कराने पर ये कुल आवेश (\(q_A + q_C = q + 0\)) को आधा-आधा बाँट लेंगे।
हटाने के तत्पश्चात् दोनों पर आवेश
\(q_A' = q_C' = \frac{q_A+q_C}{2} = \frac{q+0}{2} = \frac{q}{2}\)
अब गोला C (आवेश \(q_C'\) के साथ) गोले B के सम्पर्क में आता है। आकार समान होने के कारण ये दोनों भी कुल आवेश को आधा-आधा बाँट लेंगे।
\(\therefore\) हटाने के पश्चात् दोनों पर आवेश
\(q_B'' = q_C'' = \frac{q_B+q_C'}{2} = \frac{q + q/2}{2} = \frac{3q/2}{2} = \frac{3q}{4}\)
अतः अब A गोले पर आवेश \(q_A' = \frac{q}{2}\)
तथा B गोले पर आवेश \(q_B'' = \frac{3q}{4}\)
\(\therefore\) इनके बीच प्रतिकर्षण बल
\[F = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q_A'q_B''}{r^2} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{(q/2)(3q/4)}{r^2}\]
\[ = 9 \times 10^9 \times \frac{3}{8} \frac{q^2}{r^2}\]
\[ = 9 \times 10^9 \times \frac{3}{8} \frac{(6.5 \times 10^{-7})^2}{(0.5)^2}\]
\( = 5.7 \times 10^{-3} N\)
In simple words: जब समान आकार के आवेशित गोले संपर्क में आते हैं, तो उनका कुल आवेश समान रूप से वितरित हो जाता है। इस प्रक्रिया को दो बार दोहराने के बाद, मूल आवेशित गोलों पर नया आवेश आता है, जिससे उनके बीच कूलॉम बल का परिमाण बदल जाता है।
🎯 Exam Tip: आवेशों के पुनर्वितरण के सिद्धांत को समझें जब समान आकार के चालक गोले संपर्क में आते हैं। प्रत्येक संपर्क चरण के बाद आवेश की नई मात्रा की सही गणना करें और फिर संशोधित कूलॉम बल ज्ञात करें।
Question 14. चित्र 1.4 में किसी एकसमान स्थिर विद्युत-क्षेत्र में तीन आवेशित कणों के पथचिह्न (tracks) दर्शाए गए हैं। तीनों आवेशों के चिह्न लिखिए। इनमें से किस कण का आवेश-संहति अनुपात (\(\frac{q}{m}\)) में अधिकतम है?
Answer: उत्तर- किसी विद्युत-क्षेत्र में क्षेत्र के लम्बवत् गतिमान आवेशित कण का पाश्विक विस्थापन
\[y = \frac{QE}{2mv_x^2} x^2 = \frac{E}{2v_x^2} \left( \frac{q}{m} \right) x^2\]
जहाँ \(x\) कणों द्वारा विद्युत-क्षेत्र के लम्ब दिशा में तय दूरी तथा \(v_x\), \(x\)-अक्ष की दिशा में वेग है।
यदि सभी कण विद्युत-क्षेत्र में समान वेग \(v_x\) से प्रवेश करते हैं तो
\(y \propto \frac{q}{m}\)
(\(\because\) विद्युत-क्षेत्र की लम्बाई \(x\) सबके लिए समान है)
\(\therefore\) कण (3) का विक्षेप सर्वाधिक है; अतः इसके लिए \(\frac{q}{m}\) का मान सर्वाधिक होगा।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक एकसमान विद्युत क्षेत्र में आवेशित कणों के तीन पथों (1, 2, 3) को दर्शाता है। विद्युत क्षेत्र की दिशा धनात्मक y-अक्ष की ओर है (ऊपर की ओर)। कण 1 और 2 धनात्मक y-अक्ष की ओर विक्षेपित होते हैं, जबकि कण 3 ऋणात्मक y-अक्ष की ओर विक्षेपित होता है। कण 3 का विक्षेप सबसे अधिक है।
In simple words: विद्युत क्षेत्र में आवेशित कणों का विक्षेपण उनके आवेश और द्रव्यमान के अनुपात पर निर्भर करता है। जो कण क्षेत्र की दिशा में विक्षेपित होते हैं उनका आवेश क्षेत्र की दिशा के अनुरूप होता है, और सबसे अधिक विक्षेपण वाला कण सबसे बड़ा आवेश-से-द्रव्यमान अनुपात दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: आवेशित कणों के विक्षेपण की दिशा से आवेश का चिह्न निर्धारित करें (धनात्मक आवेश क्षेत्र की दिशा में, ऋणात्मक आवेश क्षेत्र के विपरीत)। विक्षेपण का परिमाण \(q/m\) अनुपात के सीधे समानुपाती होता है।
Question 15. एकसमान विद्युत-क्षेत्र \(E = 3 \times 10^3 \text{ iN/C}\) पर विचार कीजिए।
(a) इस क्षेत्र का 10 cm भुजा के वर्ग के उस पाश्र्व से जिसका तल yz तल के समान्तर है, गुजरने वाला फ्लक्स क्या है?
(b) इसी वर्ग से गुजरने वाला फ्लक्स कितना है यदि इसके तल का अभिलम्ब x-अक्ष से 60° का कोण बनाता है?
Answer: हल - वैद्युत क्षेत्र, \(\vec{E} = 3 \times 10^3 \hat{i}\) NC \( = 3 \times 10^3\) NC, X- दिशा में
वैद्युत फ्लक्स \(\Phi_E = \vec{E} \cdot \vec{S}\)
क्षेत्रफल का परिमाण \( = 10\) सेमी \(\times 10\) सेमी \(= 100\) सेमी\(^2 = 100 \times 10^{-4}\) मी\(^2\)
\( = 1 \times 10^{-2}\) m\(^2\)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक विद्युत क्षेत्र (E) में एक वर्गाकार तल को दर्शाता है। (a) में, तल yz-तल के समान्तर है, जिसका क्षेत्रफल सदिश विद्युत क्षेत्र की दिशा में है। (b) में, तल को झुकाया गया है ताकि उसका क्षेत्रफल सदिश x-अक्ष से 60° का कोण बनाए।
(a) जब वर्ग का तल yz-तल के समान्तर है, तो तल पर अभिलम्ब X-दिशा में होगा
वैद्युत क्षेत्र तथा तल के अभिलम्ब के बीच बना कोण \( = 0^\circ\)
वैद्युत फ्लक्स
\(\Phi_E = \vec{E} \cdot \vec{S} = ES \cos 0^\circ = 3 \times 10^3 \times 1 \times 10^{-2} \cos 0^\circ\)
\( = 30 \text{ N m}^2 \text{ C}^{-1}\)
(b) इस स्थिति में \(\theta = 60^\circ\)
\(\therefore\) वैद्युत फ्लक्स, \(\Phi_E = \vec{E} \cdot \vec{S} = ES \cos 60^\circ\)
\( = 3 \times 10^3 \times 1 \times 10^{-2} \cos 60^\circ = 30 \times \frac{1}{2}\)
\( = 15 \text{ N m}^2 \text{ C}^{-1}\)
In simple words: विद्युत फ्लक्स विद्युत क्षेत्र रेखाओं की संख्या का माप है जो किसी सतह से गुजरती हैं। जब सतह विद्युत क्षेत्र के लंबवत होती है, तो फ्लक्स अधिकतम होता है (कोण 0°), और जब सतह झुकी होती है, तो फ्लक्स कोण के कोसाइन पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: विद्युत फ्लक्स की गणना करते समय, \( \Phi_E = ES \cos \theta \) सूत्र का उपयोग करें। यह सुनिश्चित करें कि क्षेत्रफल सदिश (\(\vec{S}\)) की दिशा सतह के लंबवत हो और \(\theta\) विद्युत क्षेत्र (\(\vec{E}\)) और क्षेत्रफल सदिश (\(\vec{S}\)) के बीच का कोण हो, न कि सतह के साथ कोण।
Question 16. प्रश्न 15 में दिए गए एकसमान विद्युत-क्षेत्र का 20 cm भुजा के किसी घन से (जो इस प्रकार अभिविन्यासित है कि उसके फलक निर्देशांक तलों के समान्तर हैं) कितना नेट फ्लक्स गुजरेगा?
Answer: उत्तर- एक घन के 6 फलक होंगे। इनमें से दो फलक \(y-z\) समतल के, दो \(z-x\) समतल के तथा दो \(x-y\) समतल के समान्तर होंगे। विद्युत-क्षेत्र \(E = 3 \times 10^3 \hat{i}\) N/C \(x\)-अक्ष के अनुदिश है; अत: यह \(z-x\) तथा \(x-y\) समतलों के समान्तर फलकों के समान्तर होगा। इन चारों फलकों से गुजरने वाला फ्लक्स शून्य होगा। विद्युत-क्षेत्र एकसमान है; अतः \(y-z\) समतल के समान्तर फलकों में से जितना फ्लक्स एक फलक से अन्दर प्रविष्ट होगा उतनी ही फ्लक्स दूसरे फलक से बाहर आएगा। अतः घन से गुजरने वाला नेट फ्लक्स शून्य होगा।
In simple words: एक एकसमान विद्युत क्षेत्र में रखे गए किसी बंद घन के लिए, कुल विद्युत फ्लक्स हमेशा शून्य होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि घन में प्रवेश करने वाली विद्युत क्षेत्र रेखाओं की संख्या बाहर निकलने वाली क्षेत्र रेखाओं की संख्या के बराबर होती है, जिससे नेट फ्लक्स रद्द हो जाता है।
🎯 Exam Tip: गॉस के नियम का उपयोग करते समय, याद रखें कि एक बंद सतह से गुजरने वाला नेट फ्लक्स केवल सतह के भीतर मौजूद शुद्ध आवेश पर निर्भर करता है। एकसमान क्षेत्र में, शुद्ध आवेश शून्य होने पर नेट फ्लक्स शून्य होगा।
Question 17. किसी काले बॉक्स के पृष्ठ पर विद्युत-क्षेत्र की सावधानीपूर्वक ली गई माप यह संकेत देती है। कि बॉक्स के पृष्ठ से गुजरने
वाला नेट फ्लक्स \(8.0 \times 10^3 \text{ Nm}^2/\text{C}\) है।
(a) बॉक्स के भीतर नेट आवेश कितना है?
(b) यदि बॉक्स के पृष्ठ से नेट बहिर्मुखी फ्लक्स शून्य है तो क्या आप यह निष्कर्ष निकालेंगे कि बॉक्स के भीतर कोई आवेश नहीं है? क्यों, अथवा क्यों नहीं?
Answer: हल-(a) दिया है, \(\Phi = 8 \times 10^3 \text{ Nm}^2\text{C}^{-1}\),
\(\epsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12} \text{ C}^2\text{N}^{-1}\text{m}^{-2}\)
यदि काले बॉक्स में नेट आवेश \(q\) है, तब
सूत्र \(\Phi = \frac{q}{\epsilon_0}\) से,
\(q = \epsilon_0 \Phi\)
अथवा
\(q = 8.854 \times 10^{-12} \times 8 \times 10^3\)
\( = 8.854 \times 8 \times 10^{-9}\)
\( = 70.832 \times 10^{-9}\)
\( = 0.071 \times 10^{-6} C = 0.071 \mu C\)
(b) यदि बॉक्स के पृष्ठ से नेट बहिर्मुखी वैद्युत फ्लक्स शून्य है, तो इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि बॉक्स के अन्दर कोई आवेश नहीं है। हो सकता है कि बॉक्स के अन्दर समान मात्रा में धनावेश तथा ऋणावेश दोनों उपस्थित हों, जो एक-दूसरे के प्रभाव को निरस्त कर देंगे अर्थात् बॉक्स के अन्दर नेट आवेश शून्य हो जाएगा और हमें ऐसा प्रतीत होगा कि बॉक्स के अन्दर कोई आवेश नहीं है।
In simple words: गॉस के नियम के अनुसार, किसी बंद सतह से गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स उस सतह के भीतर निहित कुल आवेश के समानुपाती होता है। यदि कुल फ्लक्स शून्य है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि कोई आवेश मौजूद नहीं है, बल्कि यह हो सकता है कि धनात्मक और ऋणात्मक आवेश समान मात्रा में हों, जिससे उनका नेट योग शून्य हो।
🎯 Exam Tip: गॉस के नियम का उपयोग करते समय, \(\Phi = q/\epsilon_0\) सूत्र को सही ढंग से लागू करें। ध्यान दें कि शून्य नेट फ्लक्स का अर्थ शून्य नेट आवेश होता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि कोई भी आवेश मौजूद नहीं है; समान और विपरीत आवेशों के जोड़े हो सकते हैं।
Question 18. चित्र 1.6 में दर्शाए अनुसार 10 cm भुजा के किसी वर्ग के केन्द्र से ठीक 5 cm ऊँचाई पर कोई \(+10 \mu C\) आवेश रखा है। इस वर्ग से गुजरने वाले विद्युत फ्लक्स का। परिमाण क्या है? [संकेत : वर्ग को 10 cm किनारे के किसी घन का एक फलक मानिए]
Answer: उत्तर- यह स्पष्ट है कि दिया गया वर्ग ABCD, 10 सेमी भुजा वाले घन का एक पृष्ठ है। इस घन के केन्द्र पर एक आवेश \(+ q = + 10 \mu C\) रखा है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वर्गाकार तल को दर्शाता है जिसकी भुजा 10 cm है। इस वर्ग के केंद्र से ठीक 5 cm ऊपर एक बिंदु आवेश \(+q\) रखा गया है। यह स्थिति एक घन के एक फलक के संदर्भ में व्याख्या की जा सकती है, जहाँ आवेश घन के केंद्र में स्थित है।
गौस की प्रमेय से घन के सभी 6 पृष्ठों से होकर जाने वाला कुल वैद्युत फ्लक्स \( = \frac{q}{\epsilon_0}\)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक घन को दर्शाता है जिसकी भुजा 10 सेमी है। घन के केंद्र में एक आवेश \(+q\) रखा गया है। घन के शीर्ष A, B, C, D इंगित हैं, और आवेश केंद्र से 5 सेमी ऊपर स्थित है। यह चित्र गॉस के नियम को समझने में मदद करता है।
\(\therefore\) वर्ग (घन के एक पृष्ठ) से होकर जाने वाला वैद्युत फ्लक्स
\[ = \frac{1}{6} \frac{q}{\epsilon_0} = \frac{1}{6} \times \frac{10 \times 10^{-6}}{8.85 \times 10^{-12}} = 1.88 \times 10^5 \text{ N-m}^2 \text{ C}^{-1}\]
In simple words: गॉस के नियम के अनुसार, एक बंद सतह से गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स सतह के भीतर निहित शुद्ध आवेश पर निर्भर करता है, न कि सतह के आकार या आकृति पर। यदि आवेश एक घन के केंद्र में है, तो घन के प्रत्येक फलक से गुजरने वाला फ्लक्स कुल फ्लक्स का छठा हिस्सा होगा।
🎯 Exam Tip: इस समस्या को हल करने के लिए गॉस के नियम की समरूपता का उपयोग करें। यदि आवेश घन के केंद्र में है, तो प्रत्येक फलक से निकलने वाला फ्लक्स समान होगा। आवेश को C में बदलें और \(\epsilon_0\) का सही मान उपयोग करें।
Question 19. 2.0 µC का कोई बिन्दु आवेश किसी किनारे पर 9.0 cm किनारे वाले किसी घनीय गाउसीय पृष्ठ के केन्द्र पर स्थित है। पृष्ठ से गुजरने वाला नेट फ्लक्स क्या है?
Answer: हल - पृष्ठ से होकर जाने वाला कुल वैद्युत फ्लक्स
\[\Phi_E = \frac{q}{\epsilon_0} = \frac{2.0 \times 10^{-6}}{8.85 \times 10^{-12}} = 2.26 \times 10^5 \text{ Nm}^2 \text{ C}^{-1}\]
In simple words: गॉस का नियम बताता है कि किसी भी बंद सतह से गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स उस सतह के भीतर निहित शुद्ध आवेश के समानुपाती होता है, और यह सतह के आकार या आकृति पर निर्भर नहीं करता।
🎯 Exam Tip: गॉस के नियम का उपयोग करते समय, याद रखें कि फ्लक्स की गणना में गाउसीय पृष्ठ के आकार या आवेश की स्थिति (जब तक वह भीतर हो) का कोई महत्व नहीं है। केवल भीतर का कुल आवेश मायने रखता है।
Question 20. किसी बिन्द आवेश के कारण, उस बिन्दु को केन्द्र मानकर खींचे गए 10 cm त्रिज्या के गोलीय गाउसीय पृष्ठ पर विद्युत फ्लक्स- \(1.0 \times 10^3 \text{ Nm}^2/\text{C}\)
(a) यदि गाउसीय पृष्ठ की त्रिज्या दो गुनी कर दी जाए तो पृष्ठ से कितना फ्लक्स गुजरेगा?
(b) बिन्दु आवेश का मान क्या है?
Answer: हल- (a) बिन्दु आवेश के चारों ओर खींचे गए गोलीय गाउसीय पृष्ठ से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स उसकी त्रिज्या पर निर्भर नहीं करता, अत: त्रिज्या दो गुनी करने पर भी उससे गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स \(-1.0 \times 10^3\) न्यूटन-मी\(^2\)/कूलॉम ही रहेगा।
(b) \(\therefore q/\epsilon_0 = \Phi_E\) से, \(q = \epsilon_0 \times \Phi_E\)
\(q = (8.85 \times 10^{-12}\) कूलॉम\(^2\)/न्यूटन मी\(^2\))
\(\times (-1.0 \times 10^3\) न्यूटन मी\(^2\)/कूलॉम)
\( = -8.85 \times 10^{-9}\) कूलॉम
In simple words: गॉस के नियम की प्रमुख विशेषता यह है कि फ्लक्स गाउसीय सतह के आकार या त्रिज्या पर निर्भर नहीं करता, जब तक कि आवेश उसके भीतर रहे। इस नियम का उपयोग करके, हम ज्ञात फ्लक्स से अज्ञात आवेश का मान भी ज्ञात कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: गॉस के नियम की प्रमुख विशेषता यह है कि फ्लक्स गाउसीय सतह के आकार या त्रिज्या पर निर्भर नहीं करता, जब तक कि आवेश उसके भीतर रहे। आवेश की गणना के लिए \(\Phi_E = q/\epsilon_0\) सूत्र का सही उपयोग करें।
Question 21. 10 cm त्रिज्या के चालक गोले पर अज्ञात परिमाण का आवेश है। यदि गोले के केन्द्र से 20 cm दूरी पर विद्युत-क्षेत्र \(1.5 \times 10^3 \text{ N/C}\) त्रिज्यतः अन्तर्मुखी (radially inward) है तो गोले पर नेट आवेश कितना है?
Answer: हल- दिया है, चालक गोले की त्रिज्या \(R = 10\) सेमी
गोले के केन्द्र से बिन्दु की दूरी \(r = 20\) सेमी \( = 0.20\) मी
स्पष्टतः \(r > R\)
गोले से 20 सेमी दूर स्थित बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र \(E = 1.5 \times 10^3 \text{ NC}^{-1}\)
गोले पर नेट आवेश \(q = ?\)
सूत्र \(E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r^2}\) से
\(q = 4\pi\epsilon_0 E r^2\)
या
\[q = \frac{1}{9 \times 10^9} \times 1.5 \times 10^3 \times (0.20)^2\]
\( = 6.67 \times 10^{-9} C = 6.67\) nC
इसके अतिरिक्त \(E\) गोले के अन्दर की ओर दिष्ट है, अतः आवेश ऋणावेश है।
\(q = -6.67 \times 10^{-9} C = -6.67\) nC \quad (अन्दर की ओर)
In simple words: एक आवेशित चालक गोले के बाहर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता आवेश और दूरी के वर्ग पर निर्भर करती है। यदि विद्युत क्षेत्र अंदर की ओर है, तो इसका मतलब है कि गोले पर कुल आवेश ऋणात्मक है।
🎯 Exam Tip: चालक गोले के बाहर विद्युत क्षेत्र की गणना करते समय, यह मान सकते हैं कि पूरा आवेश केंद्र पर केंद्रित है। विद्युत क्षेत्र की दिशा (अन्तर्मुखी या बहिर्मुखी) से आवेश का चिह्न निर्धारित करें। दूरियों और आवेश को SI इकाइयों में बदलें।
Question 22. 2.4m व्यास के एकसमान आवेशित चालक गोले का पृष्ठीय आवेश घनत्व 80.0 µC/m² है।
(a) गोले पर आवेश ज्ञात कीजिए ।
Answer: हल-दिया है, गोले के पृष्ठ का आवेश घनत्व
\(\sigma = 80.0 \mu C\text{m}^{-2} = 80 \times 10^{-6} \text{ Cm}^{-2}\)
आवेशित गोले की त्रिज्या \(R = \frac{2.4}{2} = 1.2\) m
(a) गोले पर आवेश \(q = ?\)
सूत्र \(\sigma = \frac{q}{4\pi R^2}\) से,
\(q = 4\pi R^2 \sigma\)
\( = 4 \times \left(\frac{22}{7}\right) \times (1.2)^2 \times 80 \times 10^{-6}\)
\( = 1.45 \times 10^{-3} C\)
(b) गोले के पृष्ठ से निर्गत कुल वैद्युत फ्लक्स \(\Phi = ?\)
सूत्र \(\Phi = \frac{q}{\epsilon_0}\) से,
\[\Phi = \frac{1.45 \times 10^{-3}}{8.854 \times 10^{-12}}\]
\( = 1.64 \times 10^8 \text{ Nm}^2/\text{C}\)
In simple words: एक आवेशित गोले पर कुल आवेश उसके पृष्ठीय आवेश घनत्व और कुल सतह क्षेत्रफल का गुणनफल होता है। गॉस के नियम का उपयोग करके, गोले के पृष्ठ से गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स इस कुल आवेश के सीधे समानुपाती होता है।
🎯 Exam Tip: पृष्ठीय आवेश घनत्व (\(\sigma\)) को कुल आवेश (\(q\)) और क्षेत्रफल (\(A\)) के अनुपात के रूप में परिभाषित करें (\(\sigma = q/A\))। चालक गोले के लिए, सतह क्षेत्रफल \(4\pi R^2\) होता है। फ्लक्स की गणना के लिए गॉस के नियम का उपयोग करें, यह सुनिश्चित करते हुए कि आवेश और \(\epsilon_0\) की इकाइयां संगत हों।
Question 23. कोई अनन्त रैखिक आवेश 2 cm दूरी पर \(9 \times 10^4 \text{ NC}^{-1}\) विद्युत-क्षेत्र उत्पन्न करता है। रैखिक आवेश घनत्व ज्ञात कीजिए ।
Answer: हल - अनन्त लम्बाई के रेखीय आवेश के कारण \(r\) दूरी पर उत्पन्न वैद्युत क्षेत्र,
\[E = \frac{\lambda}{2\pi\epsilon_0 r}\]
रेखीय आवेश घनत्व, \(\lambda = 2\pi\epsilon_0 rE\)
\( = \frac{1}{2}(4\pi\epsilon_0) rE\)
यहाँ \(r = 2\) सेमी \( = 0.02\) मी, \(E = 9 \times 10^4 \text{ NC}^{-1}\)
\(\therefore \lambda = \frac{1}{2} \times \frac{1}{9 \times 10^9} \times (0.02) \times (9 \times 10^4) = 10^{-7} \text{ Cm}^{-1}\)
In simple words: एक अनंत लंबाई के रेखीय आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता आवेश के रेखीय घनत्व और दूरी के सीधे समानुपाती होती है। इस संबंध का उपयोग करके, हम ज्ञात विद्युत क्षेत्र और दूरी से अज्ञात रेखीय आवेश घनत्व की गणना कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: अनंत रेखीय आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र के सूत्र \(E = \frac{\lambda}{2\pi\epsilon_0 r}\) को याद रखें। गणना करते समय सभी मात्राओं को SI इकाइयों में व्यक्त करना सुनिश्चित करें (जैसे cm को m में)।
Question 24. दो बड़ी, पतली धातु की प्लेटें एक-दूसरे के समानान्तर एवं निकट हैं। इनके भीतरी फलकों पर, प्लेटों के पृष्ठीय आवेश घनत्वों के चिह्न विपरीत हैं तथा इनका परिमाण \(17.0 \times 10^{-23} \text{ C/m}^2\) है।
(a) पहली प्लेट के बाह्य क्षेत्र में,
(b) दूसरी प्लेट के बाह्य क्षेत्र में, तथा
(c) प्लेटों के बीच में विद्युत-क्षेत्र E का परिमाण परिकलित कीजिए ।
Answer: हल-दिया है, पट्टिका पर पृष्ठीय आवेश घनत्व
\(\sigma = 17.0 \times 10^{-22} \text{ C/m}^2\)
तथा \(\epsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12} \text{ C}^2\text{/Nm}^2\)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो समानांतर आवेशित प्लेटों की व्यवस्था को दर्शाता है। प्लेट 1 पर \(+\sigma\) आवेश घनत्व और प्लेट 2 पर \(\text{-}\sigma\) आवेश घनत्व है। चित्र में तीन क्षेत्र (a), (b), (c) दिखाए गए हैं: क्षेत्र (a) पहली प्लेट के बाईं ओर, क्षेत्र (b) दोनों प्लेटों के बीच, और क्षेत्र (c) दूसरी प्लेट के दाईं ओर।
(a) पहली पट्टिका के बाह्य क्षेत्र (a) में दोनों पट्टिकाओं के कारण वैद्युत क्षेत्र परस्पर विपरीत तथा परिमाण में बराबर है।
सूत्र \(E = \frac{\sigma}{2\epsilon_0}\) से,
क्षेत्र (a) में वैद्युत क्षेत्र की परिणामी तीव्रता
\[E_a = \frac{\sigma}{2\epsilon_0} + \frac{-\sigma}{2\epsilon_0} = \frac{\sigma-\sigma}{2\epsilon_0} = 0\]
(b) दूसरी पट्टिका के बाह्य क्षेत्र (c) में भी दोनों पट्टिकाओं के कारण वैद्युत क्षेत्र परस्पर विपरीत तथा परिमाण में बराबर है।
अतः
\[E_c = \left(\frac{\sigma}{2\epsilon_0}\right) + \left(\frac{-\sigma}{2\epsilon_0}\right) = \frac{\sigma-\sigma}{2\epsilon_0} = 0\]
(c) दोनों पट्टिकाओं के बीच के क्षेत्र (b) में दोनों पट्टिकाओं के कारण वैद्युत क्षेत्र एक ही दिशा में (प्लेट 1 से प्लेट 2 की ओर) दिष्ट है, अतः
\[E_b = \frac{\sigma}{2\epsilon_0} + \frac{\sigma}{2\epsilon_0} = \frac{\sigma}{\epsilon_0}\]
\[ = \frac{17 \times 10^{-22}}{8.854 \times 10^{-12}}\]
\( = 1.92 \times 10^{-10}\text{ N/C}\)
In simple words: दो समानांतर, विपरीत रूप से आवेशित प्लेटों के बाहर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है क्योंकि दोनों प्लेटों के क्षेत्र एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं। हालांकि, प्लेटों के बीच में, दोनों प्लेटों के क्षेत्र एक ही दिशा में जुड़ते हैं, जिससे एक मजबूत और एकसमान विद्युत क्षेत्र बनता है।
🎯 Exam Tip: अनंत समतल आवेशित चादर के कारण विद्युत क्षेत्र \(E = \frac{\sigma}{2\epsilon_0}\) होता है। दो प्लेटों के संयोजन के लिए, क्षेत्र के सुपरपोजिशन सिद्धांत को लागू करें। प्लेटों के बाहर, क्षेत्र रद्द हो जाते हैं, जबकि प्लेटों के बीच, क्षेत्र जुड़ जाते हैं।
Question 23. कोई अनन्त रैखिक आवेश 2 cm दूरी पर 9 x 104 NC-1 विद्युत-क्षेत्र उत्पन्न करता है। रैखिक आवेश घनत्व ज्ञात कीजिए ।
Answer: हल - अनन्त लम्बाई के रेखीय आवेश के कारण r दूरी पर उत्पन्न वैद्युत क्षेत्र,
\[ E = \frac{\lambda}{2\pi \epsilon_0 r} \]
रेखीय आवेश घनत्व, \( \lambda = 2\pi \epsilon_0 r E = \frac{1}{2} (4\pi \epsilon_0) r E \)
यहाँ \( r = 2 \) सेमी \( = 0.02 \) मी, \( E = 9 \times 10^4 \) NC-1
अतः \( \lambda = \frac{1}{2} \times \frac{1}{9 \times 10^9} \times (0.02) \times (9 \times 10^4) = 10^{-7} \) Cm-1
In simple words: किसी अनंत लंबाई के आवेशित तार के कारण r दूरी पर विद्युत क्षेत्र E का मान \( \lambda / (2 \pi \epsilon_0 r) \) होता है, जहाँ \( \lambda \) रैखिक आवेश घनत्व है। दिए गए मानों को सूत्र में रखकर \( \lambda \) की गणना की जाती है।
🎯 Exam Tip: अनंत रैखिक आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र के सूत्र और उसमें प्रयुक्त प्रतीकों के मान याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 24. दो बड़ी, पतली धातु की प्लेटें एक-दूसरे के समानान्तर एवं निकट हैं। इनके भीतरी फलकों पर, प्लेटों के पृष्ठीय आवेश घनत्वों के चिह्न विपरीत हैं तथा इनका परिमाण \( 17.0 \times 10^{-23} \) C/m है।
(a) पहली प्लेट के बाह्य क्षेत्र में,
(b) दूसरी प्लेट के बाह्य क्षेत्र में, तथा
(c) प्लेटों के बीच में विद्युत-क्षेत्र E का परिमाण परिकलित कीजिए ।
Answer: हल-दिया है, पट्टिका पर पृष्ठीय आवेश घनत्व
\( \sigma = 17.0 \times 10^{-22} \) C/m\(^2\)
तथा \( \epsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12} \) C\(^2\)/Nm\(^2\)
पट्टिकाओं का प्रबन्धन निम्नांकित चित्र में प्रदर्शित है-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में दो समानांतर आवेशित प्लेटें दिखाई गई हैं। प्लेट 1 पर धन आवेश \( (+\sigma) \) है और प्लेट 2 पर ऋण आवेश \( (-\sigma) \) है। तीन क्षेत्र (a), (b), (c) दिखाए गए हैं, जहाँ विद्युत क्षेत्र की गणना की जानी है।
(a) पहली पट्टिका के बाह्य क्षेत्र (a) में दोनों पट्टिकाओं के कारण वैद्युत क्षेत्र परस्पर विपरीत तथा परिमाण में बराबर है।
सूत्र \( E = \frac{\sigma}{2\epsilon_0} \) से,
क्षेत्र (a) में वैद्युत क्षेत्र की परिणामी तीव्रता
\( E_a = (\frac{\sigma}{2\epsilon_0}) + (-\frac{\sigma}{2\epsilon_0}) = \frac{\sigma - \sigma}{2\epsilon_0} = 0 \)
(b) दूसरी पट्टिका के बाह्य क्षेत्र (c) में भी दोनों पट्टिकाओं के कारण वैद्युत क्षेत्र परस्पर विपरीत तथा परिमाण में बराबर है।
अतः \( E_c = (-\frac{\sigma}{2\epsilon_0}) + (\frac{\sigma}{2\epsilon_0}) = \frac{\sigma - \sigma}{2\epsilon_0} = 0 \)
(c) दोनों पट्टिकाओं के बीच के क्षेत्र (b) में दोनों पट्टिकाओं के कारण वैद्युत क्षेत्र एक ही दिशा में (प्लेट 1 से प्लेट 2 की ओर) दिष्ट है, अतः
\( E_b = \frac{\sigma}{2\epsilon_0} + \frac{\sigma}{2\epsilon_0} = \frac{\sigma}{\epsilon_0} \)
\( = \frac{17 \times 10^{-22}}{8.854 \times 10^{-12}} \)
\( = 1.92 \times 10^{-10} \) N/C
In simple words: दो विपरीत आवेशित समानांतर प्लेटों के बाहरी क्षेत्रों में विद्युत क्षेत्र शून्य होता है क्योंकि बल एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं। प्लेटों के बीच, विद्युत क्षेत्र दोनों प्लेटों के योगदान के कारण जुड़ जाता है।
🎯 Exam Tip: समानांतर प्लेटों के बीच और बाहर विद्युत क्षेत्र की गणना के लिए गॉस के नियम के अनुप्रयोग को समझें। दिशा और परिमाण दोनों महत्वपूर्ण हैं।
अतिरिक्त अभ्यास
Question 25. मिलिकन तेल बूंद प्रयोग में \( 2.55 \times 10^4 \) NC-1 के नियत विद्युत-क्षेत्र के प्रभाव में 12 इलेक्ट्रॉन आधिक्य की कोई तेल बूंद स्थिर रखी जाती है। तेल का घनत्व 1.26 g cm\(^{-3}\) है। बूंद की त्रिज्या का आकलन कीजिए। (g = 9.81 m s\(^{-2}\), e = \( 1.60 \times 10^{-19} \) C)।
Answer: हल - माना बूँद की त्रिज्या r है, तब
बूँद का द्रव्यमान \( m = \frac{4}{3} \pi r^3 \rho \);
बूँद पर आवेश \( q = ne \)
सन्तुलन की अवस्था में, बूँद का भार (mg) \( = \) विद्युत बल (qE)
\( \implies \frac{4}{3} \pi r^3 \rho g = neE \)
\( \implies r^3 = \frac{3neE}{4 \pi \rho g} \)
यहाँ \( n = 12, \rho = 1.26 \times 10^3 \) kg/m\(^3\),
\( e = 1.6 \times 10^{-19} \) C
\( E = 2.55 \times 10^4 \) N/C, \( g = 9.81 \) m/s\(^2\)
\( \implies r^3 = \frac{3 \times 12 \times 1.6 \times 10^{-19} \times 2.55 \times 10^4}{4 \times 3.14 \times 1.26 \times 10^3 \times 9.81} = 946 \times 10^{-21} \) m\(^3\)
\( \implies \) बूँद की त्रिज्या \( r = (946 \times 10^{-21} \) m\(^3\))\({}^{1/3} = 9.81 \times 10^{-7} \) m \( = 9.81 \times 10^{-4} \) mm
In simple words: मिलिकन प्रयोग में तेल की बूंद के स्थिर होने का अर्थ है कि उसका वजन विद्युत क्षेत्र द्वारा लगाए गए बल के बराबर है। इस संतुलन का उपयोग करके बूंद की त्रिज्या की गणना की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: मिलिकन प्रयोग के सिद्धांत, विशेष रूप से संतुलन की स्थिति और आवेश की क्वांटीकरण को समझें। गणना में सही इकाइयों का उपयोग करें।
Question 26. चित्र 1.9 में दर्शाए गए वक्रों में से कौन सम्भावित स्थिर विद्युत-क्षेत्र रेखाएँ निरूपित नहीं करते?
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 1.9 में विद्युत क्षेत्र रेखाओं के पांच अलग-अलग विन्यास
(a) से (e) दिखाए गए हैं। (a) एक चालक के अंदर और बाहर क्षेत्र रेखाएं।
(b) दो विपरीत आवेशों के बीच क्षेत्र रेखाएं।
(c) दो समान धन आवेशों के बीच क्षेत्र रेखाएं।
(d) क्षेत्र रेखाएं जो एक-दूसरे को काट रही हैं। (e) बंद वक्रों के रूप में क्षेत्र रेखाएं।
उत्तर- केवल चित्र
(c) सम्भावित स्थिर विद्युत-क्षेत्र रेखाएँ निरूपित करता है। (a) विद्युत-क्षेत्र रेखाएँ सदैव चालक पृष्ठ के लम्बवत् होती हैं, इस चित्र में रेखाएँ चालक पृष्ठ के लम्बवत नहीं हैं।
(b) क्षेत्र रेखाओं को ऋणावेश से धनावेश की ओर जाते दिखाया गया है जो कि सही नहीं है।
(d) क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को काट रही हैं जो कि सही नहीं है। (e) क्षेत्र रेखाएँ बन्द वक्रों के रूप में प्रदर्शित की गई हैं जो कि सही नहीं है।
In simple words: विद्युत क्षेत्र रेखाओं की कुछ मूलभूत विशेषताएँ होती हैं, जैसे वे चालक सतह के लंबवत होती हैं, धनावेश से निकलती हैं और ऋणावेश में समाप्त होती हैं, और कभी भी एक-दूसरे को नहीं काटतीं। इन नियमों का पालन न करने वाले चित्र सही नहीं हैं।
🎯 Exam Tip: विद्युत क्षेत्र रेखाओं के गुणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे कि वे कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं, चालक की सतह पर लंबवत होती हैं, और धन आवेश से शुरू होकर ऋण आवेश पर समाप्त होती हैं।
Question 27. दिक्स्थान के किसी क्षेत्र में, विद्युत-क्षेत्र सभी जगह z-दिशा के अनुदिश है। परन्तु विद्युत क्षेत्र का परिमाण नियत नहीं है, इसमें एकसमान रूप से z-दिशा के अनुदिश \( 10^5 \) NC-1 प्रति मीटर की दर से वृद्धि होती है। वह निकाय जिसका ऋणात्मक z-दिशा में कुल द्विध्रुव आघूर्ण \( 10^{-7} \) cm के बराबर है, कितना बल तथा बल-आघूर्ण अनुभव करता है?
Answer: हल - प्रश्नानुसार, द्विध्रुव -z-अक्ष के अनुदिश संरेखित है; अतः
\( P_x = 0, P_y = 0, P_z = -10^{-7} \) cm
तथा \( \frac{\partial E}{\partial x} = 0, \frac{\partial E}{\partial y} = 0, \frac{\partial E}{\partial z} = 10^5 \) NC-1m-1
\( \implies \) द्विध्रुव पर बल \( F = P_x \frac{\partial E}{\partial x} + P_y \frac{\partial E}{\partial y} + P_z \frac{\partial E}{\partial z} \)
\( = 0 + 0 + (-10^{-7}) \times 10^5 \)
\( \implies F = -0.01 \) N
(ऋण z-अक्ष की दिशा में)
\( \implies \) विद्युत-क्षेत्र z-अक्ष के अनुदिश है तथा p, -z-अक्ष के अनुदिश है; अतः \( \theta = 180^\circ \)
बल-आघूर्ण \( \tau = pE \sin 180^\circ = 0 \)
In simple words: एक ऐसे विद्युत क्षेत्र में जहाँ परिमाण z-दिशा में बढ़ता है, एक द्विध्रुव जिस पर ऋणात्मक z-दिशा में आघूर्ण है, उस पर z-दिशा के विपरीत दिशा में बल लगेगा, लेकिन बल-आघूर्ण शून्य होगा क्योंकि द्विध्रुव क्षेत्र के समानांतर है।
🎯 Exam Tip: बल और बल-आघूर्ण की गणना के लिए विद्युत द्विध्रुव और विद्युत क्षेत्र के बीच के संबंध को समझें। आघूर्ण की दिशा और क्षेत्र की दिशा के बीच का कोण महत्वपूर्ण है।
Question 28. (a) किसी चालक A, जिसमें चित्र 1.10
(a) में दर्शाए अनुसार कोई कोटर/गुहा (Cavity) है, को Q आवेश दिया गया है। यह दर्शाइए कि समस्त आवेश चालक के बाह्य पृष्ठ पर प्रतीत होना चाहिए।
(b) कोई अन्य चालक B जिस पर आवेश q है, को कोटर/गुहा (Cavity) में इस प्रकार सँसा दिया जाता है कि चालक Bचालक A से विद्युतरोधी रहे। यह दर्शाइए कि चालक A के बाह्य पृष्ठ पर कुल आवेश Q + q है [चित्र 1.10 (b)]]
(c) किसी सुग्राही उपकरण को उसके पर्यावरण के प्रबल स्थिर विद्युत-क्षेत्रों से परिरक्षित किया जाना है। सम्भावित उपाय लिखिए ।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 1.10 (a) एक चालक A को दर्शाता है जिसमें एक गुहा है, और चालक पर कुल आवेश Q है। चित्र 1.10 (b) उसी चालक A को दर्शाता है, लेकिन अब गुहा के अंदर एक अन्य चालक B रखा गया है जिस पर आवेश q है, और चालक A को आवेश Q दिया गया है।
उत्तर- (a) एक ऐसी गाउसीय सतह की कल्पना कीजिए जो पूर्णतया चालक के भीतर स्थित है तथा . चालक के बाह्य पृष्ठ के अत्यन्त समीप है। चालक के भीतर विद्युत-क्षेत्र शून्य होता है; अतः इस गाउसीय सतह से गुजरने वाला नेट विद्युत फ्लक्स शून्य होगा। तब गाउस प्रमेय से, \( q = \epsilon_0 \Phi = \epsilon_0 \times 0 = 0 \) अर्थात् सतह के भीतर आवेश शून्य होगा। अतः चालक का सम्पूर्ण आवेश उसके बाह्य पृष्ठ पर होगा ।
(b) दिया है, चालक 'A' पर कुल आवेश \( = Q \) चालक 'B' पर कुल आवेश \( = q \) माना चालक 'A' में बनी कोटर के पृष्ठ पर \( q_1 \) आवेश है तथा चालक 'A' के बाह्य पृष्ठ पर \( Q_1 \) आवेश है। अब चालक 'A' पर कुल आवेश \( Q_1 + q_1 = Q \) .......(1)
पुनः एक ऐसे गाउसीय पृष्ठ की कल्पना कीजिए जो पूर्णतः चालक 'A' के भीतर स्थित है परन्तु इसके बाह्य पृष्ठ के अत्यन्त समीप है।
चालक के भीतर विद्युत-क्षेत्र शून्य होता है; अतः इस पृष्ठ से गुजरने वाला कुल फ्लक्स शून्य होगा।
अतः इस गाउसीय पृष्ठ के भीतर कुल आवेश \( = 0 \) अर्थात् \( q_1 + q = 0 \implies q_1 = -q \)
समीकरण (1) से, \( Q_1 - q = Q \)
चालक 'A' के बाह्य पृष्ठ पर कुल आवेश \( Q_1 = Q + q \) होगा ।
(c) खोखले बन्द चालक के भीतर विद्युत-क्षेत्र शून्य होता है; अतः किसी सुग्राही उपकरण को पर्यावरण के प्रबल स्थिर विद्युत-क्षेत्रों से परिरक्षित करने के लिए उसे खोखले बन्द चालक के भीतर रखना चाहिए।
In simple words:
(a) किसी चालक में आवेश हमेशा उसकी बाहरी सतह पर रहता है क्योंकि अंदर कोई विद्युत क्षेत्र नहीं होता।
(b) जब एक आवेशित वस्तु को चालक की गुहा में रखा जाता है, तो चालक की आंतरिक सतह पर प्रेरित आवेश बाहरी वस्तु के आवेश के विपरीत होता है, जिससे बाहरी सतह पर कुल आवेश बढ़ जाता है।
(c) एक खोखले चालक के अंदर के स्थान को बाहरी विद्युत क्षेत्रों से बचाने के लिए उपयोग किया जाता है, जिसे विद्युत परिरक्षण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: गॉस के नियम का उपयोग करके चालकों में आवेश वितरण को समझना महत्वपूर्ण है। विद्युत परिरक्षण की अवधारणा और इसके अनुप्रयोगों पर विशेष ध्यान दें।
Question 29. किसी खोखले आवेशित चालक में उसके पृष्ठ पर कोई छिद्र बनाया गया है। यह दर्शाइए कि छिद्र में विद्युत-क्षेत्र \( \left(\frac { \sigma }{ 2{ \epsilon }_{ 0 } } \right) \overset { \wedge }{ n } \) है, जहाँ \( \overset { \wedge }{ n } \) अभिलम्बवत् दिशा में बहिर्मुखी एकांक सदिश है तथा छिद्र के निकट पृष्ठीय आवेश घनत्व \( \sigma \) है।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 1.11 एक आवेशित चालक की सतह पर एक छोटे से छेद को दर्शाता है। बिंदु P छेद के पास बाहरी सतह पर है, और बिंदु Q आंतरिक सतह पर है। सतह के आवेश घनत्व \( \sigma \) के कारण विद्युत क्षेत्र \( E_1 \) और शेष चालक के कारण \( E_2 \) दिखाए गए हैं, जहाँ \( E = E_1 + E_2 \) बाहर की ओर है, और \( E_1 \) तथा \( E_2 \) अंदर की ओर विपरीत दिशा में हैं।
उत्तर- माना किसी खोखले चालक को कुछ धनावेश दिया गया है, जो तुरन्त ही उसके पृष्ठ पर समान रूप से वितरित हो जाता है। माना आवेश का पृष्ठ घनत्व \( \sigma \) है। चालक के पृष्ठ के किसी अवयव dA पर विचार कीजिए। स्पष्ट है कि इस क्षेत्रफल अवयव पर उपस्थित आवेश की मात्रा \( q = \sigma dA \) होगी। माना इस क्षेत्रफल अवयव के अत्यन्त समीप चालक के पृष्ठ के बाहर तथा अन्दर दो बिन्दु क्रमश: P तथा Q हैं। चूँकि बिन्दु P पृष्ठ के समीप है; अतः चालक के कारण बिन्दु P पर विद्युत-क्षेत्र की तीव्रता \( E = \frac{\sigma}{\epsilon_0} \) पृष्ठ के लम्बवत् बाहर की ओर होगी। माना बिन्दु P पर अवयव dA तथा शेष चालक के कारण विद्युत-क्षेत्र की तीव्रताएँ क्रमशः \( E_1 \) व \( E_2 \) हैं, तब स्पष्टतया \( E_1 \) व \( E_2 \) दोनों पृष्ठ के लम्बवत् बाहर की ओर होंगी तथा परिणामी तीव्रता \( E, E_1 \) व \( E_2 \) के योग के बराबर होगी ।
अतः \( E_1 + E_2 = \frac{\sigma}{\epsilon_0} \) .....(1)
चूँकि बिन्दु Q क्षेत्रफल अवयव dA के अत्यन्त समीप परन्तु P के विपरीत ओर है; अतः इस अवयव के कारण बिन्दु Q पर क्षेत्र की तीव्रता \( E_1 \) के बराबर परन्तु दिशा में विपरीत होगी, जबकि शेष चालक के कारण Q पर विद्युत-क्षेत्र की तीव्रता \( E_2 \) के बराबर तथा उसी की दिशा में होगी। चूँकि बिन्दु Q चालक के अन्दर है; अतः बिन्दु Q पर परिणामी तीव्रता शून्य होगी ।
अतः बिन्दु Q पर परिणामी तीव्रता \( E_2 - E_1 = 0 \)
अथवा \( E_1 = E_2 \) [बिन्दु Q पर \( E_1 \) व \( E_2 \) के विपरीत हैं ।]
समीकरण (1) से, \( E_1 = E_2 = \frac{\sigma}{2\epsilon_0} \)
अतः शेष चालक के कारण बिन्दु P पर विद्युत-क्षेत्र की तीव्रता \( E_2 = \frac{\sigma}{2\epsilon_0} \)
अब यदि बिन्दु P पर एक छिद्र कर दिया जाए तो क्षेत्र अवयव dA तथा इसके कारण आन्तरिक बिन्दु Q पर विद्युत-क्षेत्र \( E_1 \) दोनों समाप्त हो जाएँगे ।
तब विद्युत-क्षेत्र \( E_2 \) छिद्र के किसी बिन्दु पर केवल शेष चालक के कारण शेष रहेगा। अतः छिद्र पर विद्युत-क्षेत्र की तीव्रता \( \overset { \rightarrow }{ E } =\frac { \sigma }{ 2{ \epsilon }_{ 0 } } \overset { \wedge }{ n } \) जहाँ n छिद्र पर बहिर्मुखी दिशा में एकांक सदिश है।
In simple words: एक खोखले चालक में, किसी छेद के पास विद्युत क्षेत्र छेद के आवेश घनत्व और माध्यम की विद्युतशीलता पर निर्भर करता है। यह क्षेत्र उस क्षेत्र का आधा होता है जो पूरी तरह से बंद चालक की सतह पर होता है।
🎯 Exam Tip: आवेशित चालक में विद्युत क्षेत्र के गुणों को समझें, विशेष रूप से सतह पर और गुहा के अंदर। गॉस के नियम का उपयोग करके इस व्यंजक को व्युत्पन्न करना सीखें।
Question 30. गाउस नियम का उपयोग किए बिना किसी एकसमान रैखिक आवेश घनत्व \( \lambda \) के लम्बे पतले तार के कारण विद्युत-क्षेत्र के लिए सूत्र प्राप्त कीजिए।
[संकेत : सीधे ही कूलॉम नियम का उपयोग करके आवश्यक समाकलन का मान निकालिए ।]
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 1.12 एक अनंत लंबाई के सीधे आवेशित तार को दर्शाता है जिसका रैखिक आवेश घनत्व \( \lambda \) है। बिंदु P तार से r दूरी पर स्थित है। तार पर एक छोटा तत्व dx दिखाया गया है, जो बिंदु O से x दूरी पर है। तत्व dx द्वारा बिंदु P पर उत्पन्न विद्युत क्षेत्र dE है, जिसे dE sin \( \theta \) और dE cos \( \theta \) घटकों में वियोजित किया गया है। समरूपता के कारण, dE sin \( \theta \) घटक रद्द हो जाते हैं।
उत्तर- एकसमान रैखिक आवेश घनत्व वाले लम्बे पतले तार के कारण विद्युत-क्षेत्र (Electric Field due to a Long Straight Wire having Uniform Linear Charge Density)- माना एक लम्बे सीधे धनावेशित तार को एकसमान रैखिक आवेशं घनत्व है। हमें इस तार के कारण किसी बिन्दु P पर विद्युत-क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है। बिन्दु P से तार पर लम्ब PO खींचा। तार पर बिन्दु O से x दूरी पर एक सूक्ष्म अवयव AB \( = \) dx लिया।
\( \implies \) रैखिक आवेश घनत्व \( = \lambda \)
\( \implies \) अवयव dx पर आवेश की मात्रा dq \( = \lambda dx \)
इस अवयव dx के कारण बिन्दु P पर
विद्युत-क्षेत्र की तीव्रता \( dE = \frac{1}{4\pi \epsilon_0} \frac{dq}{(AP)^2} \) AP दिशा में
माना \( \angle OPA = \theta \) तथा \( OP = r \)
विद्युत-क्षेत्र dE को OP के अनुदिश तथा OP के लम्बवत् दिशा में वियोजित करने पर,
OP के लम्बवत् दिशा में वियोजित घटक \( = dE \sin \theta \)
OP के अनुदिश दिशा में वियोजित घटक \( = dE \cos \theta \)
\( \implies \) तार लम्बा है तथा बिन्दु O के दोनों ओर जाता है; अतः एक ओर के प्रत्येक अवयव dx के संगत दूसरी ओर भी एक अन्य अवयव dx अवश्य ही ऐसा होगा कि इन दोनों के कारण OP के लम्ब दिशा में विद्युत-क्षेत्र के वियोजित घटक परस्पर निरस्त करेंगे जबकि OP की दिशा में वियोजित घटक परस्पर जुड़ जाएँगे।
अतः पूरे तार के कारण बिन्दु P पर विद्युत-क्षेत्र की तीव्रता
\( E = \Sigma dE \cos \theta \)
परन्तु \( \cos \theta = \frac{OP}{AP} \) तथा \( AP^2 = OP^2 + OA^2 \)
\( \implies AP = (r^2 + x^2)^{1/2} \)
\( \implies E = \Sigma \frac{1}{4\pi \epsilon_0} \frac{dq}{AP^2} \times \frac{OP}{AP} \)
\( = \Sigma \frac{1}{4\pi \epsilon_0} \frac{\lambda dx}{(AP)^3} r \)
\( = \Sigma \frac{1}{4\pi \epsilon_0} \frac{r \lambda dx}{(x^2 + r^2)^{3/2}} \)
\( = \int_{-\infty}^{\infty} \frac{\lambda r}{4\pi \epsilon_0} \frac{dx}{(x^2 + r^2)^{3/2}} \)
\( x = r \tan \theta \) रखने पर,
\( dx = r. \sec^2 \theta d\theta \)
\( x = -\infty \implies \theta = -\frac{\pi}{2} \)
व \( x = +\infty \implies \theta = \frac{\pi}{2} \)
\( \implies E = \int_{-\pi/2}^{\pi/2} \frac{\lambda r}{4\pi \epsilon_0} \frac{r \sec^2 \theta d\theta}{(r^2 \tan^2 \theta + r^2)^{3/2}} \)
\( = \frac{\lambda r^2}{4\pi \epsilon_0} \int_{-\pi/2}^{\pi/2} \frac{\sec^2 \theta d\theta}{(r^2 (\tan^2 \theta + 1))^{3/2}} \)
\( = \frac{\lambda r^2}{4\pi \epsilon_0} \int_{-\pi/2}^{\pi/2} \frac{\sec^2 \theta d\theta}{(r^2 \sec^2 \theta)^{3/2}} \)
\( = \frac{\lambda r^2}{4\pi \epsilon_0} \int_{-\pi/2}^{\pi/2} \frac{\sec^2 \theta d\theta}{r^3 \sec^3 \theta} \)
\( = \frac{\lambda}{4\pi \epsilon_0 r} \int_{-\pi/2}^{\pi/2} \cos \theta d\theta \)
\( = \frac{\lambda}{4\pi \epsilon_0 r} [ \sin \theta ]_{-\pi/2}^{\pi/2} \)
\( = \frac{\lambda}{4\pi \epsilon_0 r} [1 - (-1)] \)
\( = \frac{2\lambda}{4\pi \epsilon_0 r} \)
\( \implies \) तार से r दूरी पर विद्युत-क्षेत्र की तीव्रता
\( E = \frac{\lambda}{2\pi \epsilon_0 r} \)
क्षेत्र की दिशा तार के लम्बवत् तथा तार से परे होगी। यदि तार ऋणावेशित है तो क्षेत्र की दिशा तार की ओर होगी।
In simple words: कूलॉम के नियम का उपयोग करके एक अनंत आवेशित तार के कारण विद्युत क्षेत्र का पता लगाने के लिए, हम तार को छोटे खंडों में तोड़ते हैं। प्रत्येक खंड द्वारा उत्पन्न क्षेत्र के घटकों को जोड़कर, हमें पता चलता है कि कुल क्षेत्र तार से लंबवत दूर होता है और दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
🎯 Exam Tip: कूलॉम के नियम का उपयोग करके अनंत तार के कारण विद्युत क्षेत्र की व्युत्पत्ति समाकलन के माध्यम से की जाती है। इस व्युत्पत्ति के चरणों और समरूपता के प्रभावों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 31. अब ऐसा विश्वास किया जाता है कि स्वयं प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन (जो सामान्य द्रव्य के नाभिकों का निर्माण करते हैं) और अधिक मूल इकाइयों जिन्हें क्वार्क कहते हैं, के बने हैं। प्रत्येक प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन तीन क्वार्कों से मिलकर बनता है। दो प्रकार के क्वार्क होते हैं : 'अप क्वार्क (u द्वारा निर्दिष्ट) जिन पर \( +(2/3)e \) आवेश तथा 'डाउन क्वार्क (d द्वारा निर्दिष्ट) जिन पर \( -(1/3)e \) आवेश होता है, इलेक्ट्रॉन से मिलकर सामान्य द्रव्य बनाते हैं। (कुछ अन्य प्रकार के क्वार्क भी पाए गए हैं जो भिन्न असामान्य प्रकार का द्रव्य बनाते हैं।) प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन के सम्भावित क्वार्क संघटन सुझाइए।
Answer: उत्तर-दिया है, \( u = +\frac{2}{3}e \) तथा \( d = -\frac{1}{3}e \)
\( \implies \) प्रोटॉन पर आवेश \( = +e. \)
\( \implies +\frac{2}{3}e + \frac{2}{3}e - \frac{1}{3}e = e \) या \( u+u+d = +e \)
अतः प्रोटॉन 2u क्वार्क तथा 1d क्वार्क से मिलकर बना है।
\( \implies \) न्यूट्रॉन पर आवेश \( = 0 \)
\( \implies +\frac{2}{3}e - \frac{1}{3}e - \frac{1}{3}e = 0 \) या \( u+d+d = 0 \)
अतः न्यूट्रॉन एक u क्वार्क तथा 2d क्वार्क से मिलकर बना है।
In simple words: प्रोटॉन दो अप क्वार्क और एक डाउन क्वार्क से मिलकर बनता है, जिससे कुल आवेश \( +e \) होता है। न्यूट्रॉन एक अप क्वार्क और दो डाउन क्वार्क से मिलकर बनता है, जिससे कुल आवेश शून्य होता है।
🎯 Exam Tip: क्वार्क मॉडल के अनुसार प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के संघटन (अप और डाउन क्वार्क की संख्या) और उनके संगत आवेशों को याद रखें।
Question 32. (a) किसी यादृच्छिक स्थिर विद्युत-क्षेत्र विन्यास पर विचार कीजिए। इस विन्यास की किसी शून्य-विक्षेप स्थिति (null-point अर्थात् जहाँ \( E = 0 \)) पर कोई छोटा परीक्षण आवेश रखा गया है। यह दर्शाइए कि परीक्षण आवेश का सन्तुलन आवश्यक रूप से अस्थायी है।
(b) इस परिणाम का समान परिमाण तथा चिह्नों के दो आवेशों (जो एक-दूसरे से किसी दूरी पर रखे हैं) के सरल विन्यास के लिए सत्यापन कीजिए ।
Answer: उत्तर-
(a) माना शून्य विक्षेप स्थिति में रखे परीक्षण आवेश का सन्तुलन स्थायी है। अब यदि परीक्षण आवेश को सन्तुलन की स्थिति से थोड़ा-सा विस्थापित किया जाए तो आवेश पर एक प्रत्यानयन बल लगना चाहिए जो आवेश को वापस सन्तुलन की ओर ले जाए। इसका यह अर्थ हुआ कि उस स्थान पर शून्य विक्षेप बिन्दु की ओर जाने वाली क्षेत्र रेखाएँ होनी चाहिए। जबकि स्थिर विद्युत-क्षेत्र रेखाएँ कभी भी शून्य विक्षेप बिन्दु तक नहीं पहुँचतीं। अतः हमारी यह परिकल्पना कि परीक्षण आवेश का सन्तुलन स्थायी है, गलत है। यह निश्चित रूप से अस्थायी सन्तुलन है।
(b) माना दो बिन्दु आवेश (प्रत्येक \( +q \)) परस्पर 2a दूरी पर रखे हैं। एक बिन्दु आवेश \( -Q \) इनके मध्य बिन्दु पर रखा है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 1.13 में दो समान धनावेश \( +q \) (A और B पर) एक-दूसरे से 2a दूरी पर रखे हैं। उनके ठीक मध्य बिंदु C पर एक ऋणात्मक परीक्षण आवेश \( -Q \) रखा गया है।
बिन्दु आवेशों \( +q, +q \) के कारण \( -Q \) पर कार्यरत बल बराबर तथा विपरीत होने के कारण बिन्दु आवेश \( -Q \) सन्तुलन की स्थिति में रहेगा।
अब यदि \( -Q \) आवेश को x दूरी B की ओर विस्थापित कर दें तो इस पर कार्यरत बल
\( F_{PB} = \frac{1}{4\pi \epsilon_0} \frac{Qq}{(a - x)^2} \) PB दिशा में
तथा \( F_{PA} = \frac{1}{4\pi \epsilon_0} \frac{Qq}{(a + x)^2} \) PA दिशा में
स्पष्ट है कि \( F_{PB} > F_{PA} \)। अतः कण पर नेट बल PB दिशा में लगेगा जो कण को सन्तुलन की स्थिति से दूर ले जाएगा। अतः कण का मध्य बिन्दु C पर सन्तुलन अस्थायी है।
In simple words:
(a) एक विद्युत क्षेत्र में शून्य विक्षेप बिंदु पर परीक्षण आवेश का संतुलन अस्थायी होता है क्योंकि यदि आवेश थोड़ा भी विस्थापित होता है, तो उस पर ऐसा बल लगता है जो उसे मूल स्थिति से दूर धकेलता है।
(b) दो समान धनावेशों के बीच रखा ऋणात्मक आवेश भी अस्थायी संतुलन में होता है क्योंकि थोड़ा विस्थापन उसे मजबूत बल की ओर धकेलता है।
🎯 Exam Tip: स्थिर विद्युत क्षेत्र में संतुलन की अवधारणा, विशेष रूप से अस्थायी संतुलन की स्थिति, महत्वपूर्ण है। इसे उदाहरणों के साथ स्पष्ट करने के लिए कूलॉम के नियम का उपयोग करना सीखें।
Question 33. प्रारम्भ में 3-अक्ष के अनुदिश, चाल से गति करती हुई, दो आवेशित प्लेटों के मध्य क्षेत्र में m द्रव्यमान तथा -q आवेश का एक कण प्रवेश करता है (चित्र 1.14 में कण 1 के समान)। प्लेटों की लम्बाई L है। इन दोनों प्लेटों के बीच एकसमान विद्युत-क्षेत्र E बनाए रखा जाता है। दर्शाइए कि प्लेट के अन्तिम किनारे पर कण का ऊर्ध्वाधर विक्षेप \( \frac{qE L^2}{2m v_x^2} \) है। (कक्षा 11 की पाठ्य पुस्तक के अनुभाग 4.10 में वर्णित गुरुत्वीय क्षेत्र में प्रक्षेप्य की गति के साथ इस कण की गति की तुलना कीजिए ।)
Answer: उत्तर- एकसमान विद्युत-क्षेत्र में आवेशित कण (इलेक्ट्रॉन) का गमन-पथ- (i) जब कण का प्रारम्भिक वेग विद्युत-क्षेत्र की दिशा के लम्बवत् है— माना धातु की दो समान्तर प्लेटें जिन पर विपरीत आवेश हैं, एक-दूसरे से कुछ दूरी पर स्थित हैं। इन प्लेटों के बीच के स्थान में विद्युत-क्षेत्र एकसमान है। माना ऊपरी प्लेट धनावेशित है, जबकि नीचे की प्लेट ऋणावेशित है। अतः विद्युत-क्षेत्र E कागज के तल में नीचे की ओर दिष्ट होगा [चित्र 1.14] ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 1.14 दो समानांतर प्लेटों के बीच एकसमान विद्युत क्षेत्र E को दर्शाता है। एक ऋणावेशित कण (-q) वेग \( v_x \) के साथ x-अक्ष के अनुदिश क्षेत्र में प्रवेश करता है। कण क्षेत्र के अंदर परवलयिक पथ का अनुसरण करता है, y-अक्ष के अनुदिश विक्षेपित होता है।
माना कोई कण जिस पर आवेश -q है तथा जो X-अक्ष के अनुदिश गतिमान है, \( v_x \) वेग से विद्युत-क्षेत्र E में प्रवेश करता है। चूँकि विद्युत क्षेत्र Y-अक्ष की ऋणात्मक दिशा में नीचे की ओर है; अतः कण पर Y-अक्ष के अनुदिश लगने वाला बल \( F_y = qE \)
कण पर X-अक्ष के अनुदिश कोई बल कार्य नहीं करेगा।
माना कण का द्रव्यमान m है, तब इस बल के कारण कण की गति में उत्पन्न त्वरण \( a_y = \frac{F_y}{m} = \frac{qE}{m} \)
चूँकि कण का X-अक्ष के अनुदिश प्रारम्भिक वेग \( v_x \) तथा त्वरण शून्य है; अतः X-अक्ष के अनुदिश t सेकण्ड में चली गई दूरी
\( x = v_x t \) ...(1)
चूँकि कण का Y-अक्ष के अनुदिश प्रारम्भिक वेग शून्य तथा त्वरण \( a_y \) है; अतः Y-अक्ष के अनुदिश t सेकण्ड में चली गई दूरी
\( y = \frac{1}{2} a_y t^2 = \frac{1}{2} (\frac{qE}{m}) (\frac{x}{v_x})^2 \)
अतः \( y = \frac{qE}{2m v_x^2} x^2 \)
यह समीकरण \( y = cx^2 \) के समरूप है तथा परवलय को प्रकट करती है। अतः विद्युत-क्षेत्र में अभिलम्बवत् प्रवेश करने वाले आवेशित कण का गमन-पथ परवलयाकार होता है।
माना कण प्लेटों के बीच के क्षेत्र को बिन्दु A (x, y) पर छोड़ता है, तब
बिन्दु A के लिए \( x = L \) ( \( \implies \) प्लेटों की लम्बाई \( = L \))
पथ के समीकरण में मान रखने पर,
\( y = \frac{qE}{2m v_x^2} L^2 = \frac{qEL^2}{2m v_x^2} \)
अतः प्लेटों के दूसरे किनारे पर कण का ऊर्ध्वाधर विक्षेप \( \frac{qEL^2}{2m v_x^2} \) होगा।
In simple words: जब कोई आवेशित कण एकसमान विद्युत क्षेत्र में लंबवत दिशा में प्रवेश करता है, तो उस पर बल केवल विद्युत क्षेत्र की दिशा में लगता है, जिससे वह एक परवलयिक पथ पर चलता है। उसके ऊर्ध्वाधर विक्षेप की गणना प्रारंभिक वेग, क्षेत्र की तीव्रता, आवेश और कण के द्रव्यमान का उपयोग करके की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: विद्युत क्षेत्र में आवेशित कण की गति के लिए प्रक्षेप्य गति के सिद्धांतों को लागू करना सीखें। ऊर्ध्वाधर विक्षेप का सूत्र और उसकी व्युत्पत्ति महत्वपूर्ण है।
Question 34. प्रश्न 33 में वर्णित कण की इलेक्ट्रॉन के रूप में कल्पना कीजिए जिसको \( v_x = 2.0 \times 10^6 \) ms-1 के साथ प्रक्षेपित किया गया है। यदि 0.5 cm की दूरी पर रखी प्लेटों के बीच विद्युत-क्षेत्र E का मान \( 9.1 \times 10^2 \) N/C हो तो ऊपरी प्लेट पर इलेक्ट्रॉन कहाँ टकराएगा? (e = \( 1.6 \times 10^{-19} \) C, \( m_e = 9.1 \times 10^{-31} \) kg)
Answer: हल-सूत्र, \( y = \frac{qE}{2mv_x^2} x^2 \) से, \( x^2 = \frac{2mv_x^2}{qE} y \)
यहाँ \( v_x = 2.0 \times 10^6 \) ms-1 तथा \( y = \frac{0.5}{2} \) cm \( = \frac{0.005}{2} \) m
\( E = 9.1 \times 10^2 \), \( q = e = 1.6 \times 10^{-19} \), \( m = m_e = 9.1 \times 10^{-31} \) kg
मान रखने पर,
\( x^2 = \frac{2 \times 9.1 \times 10^{-31} \times (2.0 \times 10^6)^2}{1.6 \times 10^{-19} \times 9.1 \times 10^2} \times \frac{0.005}{2} \)
\( = 1.125 \times 10^{-4} \)m\(^2\)
\( \implies x = \sqrt{1.125 \times 10^{-4}} \) m \( = 1.12 \times 10^{-2} \) m \( = 1.12 \) cm
अतः इलेक्ट्रॉन ऊपरी प्लेट से 1.12 cm दूरी पर टकराएगा।
यहाँ यह माना गया है कि इलेक्ट्रॉन प्लेटों के बीच के स्थान में ठीक बीच में प्रवेश करता है; अतः प्लेट से टकराते समय इसका ऊर्ध्वाधर विक्षेप \( y = \frac{0.5}{2} \) cm लिया गया है।
In simple words: इलेक्ट्रॉन के परवलयिक पथ के सूत्र का उपयोग करके, प्रारंभिक वेग, विद्युत क्षेत्र, और प्लेटों के बीच की दूरी को जानकर, इलेक्ट्रॉन के टकराने की स्थिति की गणना की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: प्रश्न 33 के सूत्र का उपयोग करें और दिए गए इलेक्ट्रॉन के विशिष्ट मानों (आवेश, द्रव्यमान, वेग) को सावधानीपूर्वक रखें। ऊर्ध्वाधर विक्षेप को दूरी के आधे के रूप में लेना महत्वपूर्ण है।
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. इलेक्ट्रॉन के आवेश एवं संहति का अनुपात होगा
(i) \( 1.77 \times 10^{11} \) कूलॉम/किग्रा ।
(ii) \( 1.9 \times 10^{12} \) कूलॉम/किग्रा
(iii) \( 1.6 \times 10^{-19} \) कूलॉम/किग्रा
(iv) \( 3.2 \times 10^{11} \) कूलॉम/किग्रा
Answer: (i) 1.77 x 1011 कूलॉम/किग्रा
In simple words: इलेक्ट्रॉन का आवेश और उसके द्रव्यमान का अनुपात एक निश्चित स्थिरांक होता है, जिसका मान \( 1.77 \times 10^{11} \) कूलॉम/किग्रा है।
🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन के आवेश (e) और द्रव्यमान (m) के मान याद रखें ताकि उनका अनुपात \( (e/m) \) आसानी से गणना कर सकें।
Question 2. दो बिन्दु आवेशों को पहले वायु में तथा फिर K परावैद्युतांक वाले माध्यम में समान दूरी पर रखने पर यदि उनके बीच लगने वाले वैद्युत बल F\( _0 \) तथा F\( _m \) हों तो F\( _0 \) : F\( _m \) का मान होगा
(i) K: 1
(ii) 1 : K
(iii) K\(^2\) : 1
(iv) 1 : K\(^2\)
Answer: (i) K: 1
In simple words: दो आवेशों के बीच बल, माध्यम के परावैद्युतांक (K) पर निर्भर करता है। वायु में बल \( (F_0) \) माध्यम में बल \( (F_m) \) का K गुना होता है, इसलिए अनुपात K:1 होता है।
🎯 Exam Tip: कूलॉम के नियम में परावैद्युतांक (K) के प्रभाव को याद रखें। \( F_m = F_0 / K \) सूत्र का उपयोग करके अनुपात आसानी से निकाला जा सकता है।
Question 3. वैद्युतशीलता (\( \epsilon_0 \)) का एस०आई० मात्रक है
(i) कूलॉम\(^2\)/न्यूटन-मीटर\(^2\)
(ii) न्यूटन-मीटर\(^2\)/कूलॉम\(^2\)
(iii) न्यूटन/कूलॉम
(iv) न्यूटन/वोल्ट/मीटर\(^2\)
Answer: (i) कूलॉम2/न्यूटन-मीटर2
In simple words: विद्युतशीलता (\( \epsilon_0 \)) का SI मात्रक कूलॉम स्क्वायर प्रति न्यूटन-मीटर स्क्वायर (\( C^2/Nm^2 \)) होता है, जो कूलॉम के नियम से व्युत्पन्न होता है।
🎯 Exam Tip: कूलॉम के नियम \( F = \frac{1}{4\pi \epsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r^2} \) से \( \epsilon_0 \) का मात्रक निकालना सीखें। यह अक्सर पूछा जाता है।
Question 4. एक निश्चित दूरी r पर स्थित दो समरूप धातु के गोलों पर आवेश \( +4q \) तथा \( -2q \) हैं। गोलों के बीच आकर्षण बल F है । यदि दोनों गोलों को स्पर्श कराकर पुनः उसी दूरी पर रख दिया जाए तो उनके बीच बल होगा
(i) F
(ii) \( \frac{F}{2} \)
(iii) \( \frac{F}{4} \)
(iv) \( \frac{F}{8} \)
Answer: (iv) F/8
In simple words: पहले, दो आवेशों \( +4q \) और \( -2q \) के बीच आकर्षण बल F है। जब उन्हें स्पर्श कराया जाता है, तो कुल आवेश \( (+4q) + (-2q) = +2q \) होता है, जो दोनों गोलों पर समान रूप से वितरित हो जाता है, यानी प्रत्येक पर \( +q \)। अब उनके बीच बल \( \frac{(+q)(+q)}{(-2q)(+4q)} = \frac{q^2}{-8q^2} = -\frac{1}{8} \) गुना हो जाएगा, इसलिए नया बल \( \frac{F}{8} \) होगा।
🎯 Exam Tip: कूलॉम के नियम और आवेश संरक्षण के सिद्धांत को लागू करें। संपर्क में आने के बाद गोलों पर आवेशों की सही गणना करना महत्वपूर्ण है।
Question 5. दो समान आवेशों q, q को जोड़ने वाली रेखा के मध्य बिन्दु पर एक आवेश q' रख दिया जाता है। यदि तीनों आवेशों का निकाय सन्तुलन में हो तो q' का मान होगा-
(i) -q/2
(ii) -q/4
(iii) +q/4
(iv) +q/2
Answer: (ii) -q/4
In simple words: यदि दो समान आवेशों के बीच में एक तीसरा आवेश q' रखा जाए और पूरा निकाय संतुलन में हो, तो q' का मान \( -q/4 \) होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: संतुलन की स्थिति में किसी भी एक आवेश पर शुद्ध बल शून्य होता है। कूलॉम के नियम का उपयोग करके बलों को बराबर करें और q' का मान ज्ञात करें।
Question 6. \( +1 \, \mu \)C तथा \( +4 \, \mu \)C के दो आवेश एक-दूसरे से कुछ दूरी पर वायु में स्थित हैं। उन पर लगने वाले बलों का अनुपात है
(i) 1:4
(ii) 4:1
(iii) 1:1
(iv) 1:16
Answer: (iii) 1:1
In simple words: कूलॉम के नियम के अनुसार, दो आवेशों के बीच लगने वाले पारस्परिक बल हमेशा परिमाण में बराबर और दिशा में विपरीत होते हैं, चाहे उनके आवेशों का मान कुछ भी हो। इसलिए, अनुपात 1:1 होगा।
🎯 Exam Tip: न्यूटन के तीसरे नियम को याद रखें, जो कूलॉम के नियम पर भी लागू होता है। दो आवेशों के बीच लगने वाले बल हमेशा एक क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म होते हैं।
Question 7. 8 कूलॉम ऋण आवेश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है
(i) \( 5 \times 10^{49} \)
(ii) \( 2.5 \times 10^{19} \)
(iii) \( 12.8 \times 10^{19} \)
(iv) \( 1.6 \times 10^{19} \)
Answer: (ii) 5 x 1019
In simple words: किसी भी आवेश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या कुल आवेश को एक इलेक्ट्रॉन के आवेश से भाग करके निकाली जाती है।
🎯 Exam Tip: आवेश की क्वांटीकरण (q = ne) के सूत्र को याद रखें और इलेक्ट्रॉन के आवेश (e = \( 1.6 \times 10^{-19} \) C) का सही मान उपयोग करें।
Question 8. एक वर्ग के दो विपरीत कोनों पर आवेश Q रखे हैं। दूसरे दो विपरीत कोनों पर आवेश q रखे हैं। यदि किसी Q पर नेट विद्युत बल शून्य हो, तो q बराबर है
(i) \( \frac{1}{\sqrt{2}} \)
(ii) \( -2\sqrt{2} \)
(iii) -1
(iv) 1
Answer: (ii) -2\( \sqrt{2} \)
In simple words: एक वर्ग के शीर्षों पर आवेशों के कारण किसी एक आवेश पर कुल बल शून्य होने के लिए, आवेश q का मान \( -2\sqrt{2} \) होना चाहिए ताकि सभी बलों का सदिश योग शून्य हो सके।
🎯 Exam Tip: कूलॉम के नियम और सदिश योग का उपयोग करके प्रत्येक आवेश के कारण बलों की गणना करें। बलों को घटकों में वियोजित करके परिणामी बल को शून्य के बराबर सेट करें।
Question 9. वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता का मात्रक है
(i) कूलॉम/न्यूटन
(ii) जूल/न्यूटन
(iii) न्यूटन/कूलॉम
(iv) न्यूटन/मी
Answer: (iii) न्यूटन/कूलॉम
In simple words: विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (E) को प्रति इकाई आवेश पर लगने वाले बल (F) के रूप में परिभाषित किया जाता है, इसलिए इसका मात्रक न्यूटन प्रति कूलॉम (N/C) होता है।
🎯 Exam Tip: विद्युत क्षेत्र की तीव्रता की परिभाषा \( E = F/q \) को याद रखें, जिससे इसका SI मात्रक आसानी से व्युत्पन्न किया जा सकता है।
Question 10. निम्न में से कौन-सा वैद्युत-क्षेत्र का मात्रक नहीं है?
(i) न्यूटन/कूलॉम
(ii) वोल्ट/मीटर
(iii) जूल/कूलॉम
(iv) जूल/कूलॉम/मीटर
Answer: (iii) जूल/कूलॉम
In simple words: जूल प्रति कूलॉम (J/C) विद्युत विभव का मात्रक है, न कि विद्युत क्षेत्र का। न्यूटन प्रति कूलॉम और वोल्ट प्रति मीटर विद्युत क्षेत्र के मान्य मात्रक हैं।
🎯 Exam Tip: विद्युत क्षेत्र (E), विद्युत विभव (V) और बल (F) के बीच के संबंधों को याद रखें। \( E = -dV/dr \) और \( V = W/q \)।
Question 11. किसी आवेशित गोलीय चालक में विभव
(i) गोले के भीतर शून्य होता है तथा गोले के बाहर भी शून्य होता है।
(ii) गोले के भीतर अधिकतम होता है तथा गोले के बाहर शून्य होता है।
(iii) गोले के भीतर शून्य होता है तथा गोले के बाहर दूरी बढ़ने के साथ कम होता जाता है।
(iv) गोले के भीतर अधिकतम होता है तथा गोले के बाहर दूरी बढ़ने के साथ कम होता जाता है।
Answer: (iv) गोले के भीतर अधिकतम होता है तथा गोले के बाहर दूरी बढ़ने के साथ कम होता जाता है।
In simple words: एक आवेशित गोलीय चालक के अंदर विद्युत विभव हर जगह समान और अधिकतम होता है, जो उसकी सतह पर विभव के बराबर होता है। गोले के बाहर, विभव दूरी के साथ घटता जाता है।
🎯 Exam Tip: आवेशित चालक के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है लेकिन विभव अधिकतम और स्थिर रहता है। गोले के बाहर, विभव दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
Question 12.
R₁ व R2 त्रिज्याओं के दो चालक गोलों के पृष्ठों पर आवेशों के पृष्ठ घनत्व बराबर हैं। पृष्ठों पर वैद्यत-क्षेत्र की तीव्रताओं का अनुपात है।
(i) \( \frac { { R }_{ 1 }^{ 2 } }{ { R }_{ 2 }^{ 2 } } \)
(ii) \( \frac { { R }_{ 2 }^{ 2 } }{ { R }_{ 1 }^{ 2 } } \)
(iii) \( \frac { R1 }{ R2 } \)
(iv) 1:1
Answer: (iv) 1:1
In simple words: जब दो चालक गोलों पर आवेशों का पृष्ठ घनत्व बराबर होता है, तो उनके पृष्ठों पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता का अनुपात भी 1:1 होता है, चाहे उनकी त्रिज्याएँ कुछ भी हों।
🎯 Exam Tip: आवेशित चालक के पृष्ठ पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता पृष्ठ आवेश घनत्व के अनुक्रमानुपाती होती है।
Question 13.
आवेश का खोखला गोला वैद्युत क्षेत्र उत्पन्न नहीं करता।
(i) किसी आन्तरिक बिन्दु पर
(ii) किसी बाहरी बिन्दु पर
(iii) 2 मी से अधिक दूरी पर
(iv) 5 मी से अधिक दूरी पर
Answer: (i) किसी आन्तरिक बिन्दु पर
In simple words: एक खोखले आवेशित गोले के अंदर कोई शुद्ध विद्युत क्षेत्र नहीं होता है, क्योंकि अंदर आवेश शून्य होता है।
🎯 Exam Tip: गाउस के नियम का उपयोग करके खोखले चालक के भीतर विद्युत क्षेत्र को आसानी से शून्य सिद्ध किया जा सकता है, जो एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।
Question 14.
r मीटर त्रिज्या वाले खोखले गोले के केन्द्र पर q कूलॉम का आवेश रखा है। यदि गोले की त्रिज्या दोगुनी कर दी जाए तथा आवेश का मान आधा कर दें, तब गोले के पृष्ठ से निर्गत कुल वैद्युत फ्लक्स होगा
(i) \( \frac{4q}{\epsilon_{0}} \)
(ii) \( \frac{2q}{\epsilon_{0}} \)
(iii) \( \frac{q}{2\epsilon_{0}} \)
(iv) \( \frac{q}{\epsilon_{0}} \)
Answer: (iii) \( \frac{q}{2\epsilon_{0}} \)
In simple words: गाउस के नियम के अनुसार, किसी बंद सतह से निकलने वाला कुल फ्लक्स सतह द्वारा परिबद्ध कुल आवेश पर निर्भर करता है, न कि उसके आकार या आवेश के वितरण पर। यदि आवेश आधा कर दिया जाए, तो फ्लक्स भी आधा हो जाएगा।
🎯 Exam Tip: गाउस का नियम कुल फ्लक्स को आंतरिक आवेश के सीधे आनुपातिक बताता है, त्रिज्या या आकार पर नहीं।
Question 15.
एक बन्द पृष्ठ के भीतर n वैद्युत द्विध्रुव स्थित हैं। बन्द पृष्ठ से निर्गत वैद्युत फ्लक्स होगा।
(i) \( q/\epsilon_{0} \)
(ii) \( 2q/ \epsilon_{0} \)
(iii) \( -2q/\epsilon_{0} \)
(iv) शून्य
Answer: (iv) शून्य
In simple words: एक वैद्युत द्विध्रुव में बराबर और विपरीत आवेश होते हैं, इसलिए एक बंद पृष्ठ के भीतर कई द्विध्रुव होने पर भी, कुल शुद्ध आवेश शून्य होगा, जिसके परिणामस्वरूप शून्य वैद्युत फ्लक्स होगा।
🎯 Exam Tip: किसी भी द्विध्रुव का कुल आवेश शून्य होता है, इसलिए गाउस के नियम के अनुसार, एक बंद सतह से गुजरने वाला कुल फ्लक्स शून्य होता है यदि उसमें केवल द्विध्रुव हों।
Question 16.
वैद्युत फ्लक्स को मात्रक है।
(i) वोल्ट/मीटर
(ii) न्यूटन/कूलॉम
(iii) \( \frac{न्यूटन \times मी}{कूलॉम} \)
(iv) वोल्ट x मीटर
Answer: (iv) वोल्ट x मीटर
In simple words: वैद्युत फ्लक्स का मात्रक न्यूटन-मीटर²/कूलॉम या वोल्ट-मीटर होता है, क्योंकि यह विद्युत क्षेत्र और क्षेत्रफल का गुणनफल होता है।
🎯 Exam Tip: वैद्युत फ्लक्स की SI इकाई न्यूटन मीटर²/कूलॉम या वोल्ट मीटर है। इन्हें याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 17.
5 कूलॉम आवेश के दो बराबर तथा विपरीत आवेशों के बीच की दूरी 5.0 सेमी है। इसका वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण है
(i) 25 x 10-2 कूलॉम-मीटर
(ii) 5 x 10-2 कूलॉम-मीटर
(iii) 1.0 कूलॉम-मीटर
(iv) शून्ये
Answer: (i) 25 x 10-2 कूलॉम-मीटर
In simple words: वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण आवेश के परिमाण और दोनों आवेशों के बीच की दूरी का गुणनफल होता है।
🎯 Exam Tip: द्विध्रुव आघूर्ण (p = q × 2l) की गणना करते समय इकाइयों का ध्यान रखें (कूलॉम-मीटर)।
Question 18.
वैद्युत-क्षेत्र \( \vec{E} \) में \( \vec{p} \) आघूर्ण वाले द्विध्रुव पर लगने वाला बल-आघूर्ण है-
(i) \( p \cdot E \)
(ii) \( p \times E \)
(iii) शून्य
(iv) \( E \times p \)
Answer: (ii) \( p \times E \)
In simple words: वैद्युत द्विध्रुव पर लगने वाला बल-आघूर्ण, द्विध्रुव आघूर्ण और वैद्युत क्षेत्र का सदिश गुणनफल होता है, जो द्विध्रुव को क्षेत्र के समानांतर करने की कोशिश करता है।
🎯 Exam Tip: बल-आघूर्ण एक सदिश राशि है और इसकी दिशा दाहिने हाथ के नियम से दी जाती है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1.
वैद्युत आवेश के क्वाण्टीकरण (quantisation) का मूल कारण क्या है?
Answer: इसका मूल कारण यह है कि एक वस्तु से दूसरी वस्तु में इलेक्ट्रॉनों का स्थानान्तरण केवल पूर्णांक संख्याओं में ही हो सकता है।
In simple words: आवेश का क्वाण्टीकरण इसलिए होता है क्योंकि आवेश का आदान-प्रदान इलेक्ट्रॉनों के रूप में होता है, और इलेक्ट्रॉन हमेशा पूर्णांक संख्याओं में ही स्थानांतरित होते हैं।
🎯 Exam Tip: आवेश का क्वाण्टीकरण (q = ne) विद्युत आवेश की सबसे मूलभूत अवधारणाओं में से एक है।
Question 2.
सिद्ध कीजिए कि कूलॉम²/न्यूटन-मीटर2 तथा फैरड/मीटर एक ही भौतिक राशि के मात्रक हैं।
Answer:सूत्र, \( F = \frac{1}{4\pi\epsilon_{0}} \frac{q_1q_2}{r^2} \) से, \( \epsilon_{0} = \frac{q_1q_2}{4\pi Fr^2} \), अतः इसका मात्रक कूलॉम2/न्यूटन-मीटर2 तथा \( c = 4\pi\epsilon_{0}a \) से, \( \epsilon_{0} = c/4\pi a \) अतः \( \epsilon_{0} \) का मात्रक फैरड/मीटर।
अतः ये दोनों मात्रक एक ही भौतिक राशि, वायु या निर्वात् की वैद्युतशीलता \( \epsilon_{0} \) के हैं।
In simple words: कूलॉम के नियम और धारिता के सूत्र से, वैद्युतशीलता (epsilon naught) के लिए कूलॉम²/न्यूटन-मीटर² और फैरड/मीटर दोनों मात्रक प्राप्त होते हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि वे एक ही भौतिक राशि के मात्रक हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न भौतिक राशियों के बीच संबंध का उपयोग करके इकाइयों की समरूपता को सिद्ध करना एक सामान्य अभ्यास है।
Question 3.
बलों के अध्यारोपण का सिद्धान्त क्या है?
Answer:"यदि किसी निकाय में अनेक आवेश हों, तो उनमें से किसी एक आवेश पर बल, अन्य आवेशों के कारण अलग-अलग बलों को सदिश योग होता है, यही बलों के अध्यारोपण का सिद्धान्त कहलाता है।”
In simple words: बलों के अध्यारोपण का सिद्धांत कहता है कि किसी एक आवेश पर लगने वाला कुल बल, अन्य सभी आवेशों द्वारा लगाए गए अलग-अलग बलों का सदिश योग होता है।
🎯 Exam Tip: अध्यारोपण का सिद्धांत कूलॉम बल और विद्युत क्षेत्र दोनों पर लागू होता है, और यह सदिश योग पर आधारित है।
Question 4.
आवेश के रेखीय घनत्व का अर्थ बताइए ।
Answer:किसी चालक अथवा अचालक पदार्थ की प्रति एकांक लम्बाई पर उपस्थित आवेश को उसका रेखीय घनत्व कहते हैं। यदि l लम्बाई के चालक पर एकसमान रूप से फैला हुआ आवेश q हो, तब आवेश का रेखीय घनत्व \( \lambda = (q/l) \) कूलॉम/मीटर ।
In simple words: रेखीय आवेश घनत्व किसी रेखा या तार पर प्रति इकाई लंबाई में आवेश की मात्रा को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: रेखीय, पृष्ठीय और आयतन आवेश घनत्व की अवधारणाएं गाउस के नियम के अनुप्रयोगों में महत्वपूर्ण हैं।
Question 5.
आवेश के पृष्ठ घनत्व से क्या तात्पर्य है?
Answer:किसी चालक अथवा अचालक पदार्थ के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर उपस्थित आवेश की मात्रा को आवेश का पृष्ठ घनत्व कहते हैं। आवेश का पृष्ठ घनत्व \( \sigma = (q/A) \) कूलॉम/मीटर2।
In simple words: पृष्ठीय आवेश घनत्व किसी सतह पर प्रति इकाई क्षेत्रफल में आवेश की मात्रा को परिभाषित करता है।
🎯 Exam Tip: पृष्ठीय आवेश घनत्व (sigma) का उपयोग आमतौर पर चालकों और अचालक शीटों के लिए किया जाता है।
Question 6.
दो आवेशों के बीच वैद्युत बल का सूत्र लिखिए। प्रयुक्त प्रतीकों के नाम भी लिखिए।
Answer:सूत्र-\( F = \frac{1}{4\pi\epsilon_{0}K} \frac{q_1q_2}{r^2} \), जहाँ q1 व q2 = परस्पर r दूरी पर स्थित दो वैद्युत आवेश; F = उनके बीच वैद्युत बल, K = उस माध्यम का परावैद्युतांक जिसमें वैद्युत आवेश स्थित है तथा \( \epsilon_{0} \) = वायु या निर्वात् की वैद्युतशीलता।
In simple words: कूलॉम का नियम दो आवेशों के बीच लगने वाले वैद्युत बल का सूत्र देता है, जो आवेशों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
🎯 Exam Tip: कूलॉम का नियम एक मूलभूत सूत्र है जो विद्युत बल की गणना के लिए उपयोग किया जाता है। माध्यम के परावैद्युतांक (K) को शामिल करना न भूलें।
Question 7.
कूलॉम के नियम की क्या परिसीमाएँ हैं?
Answer:कूलॉम का नियम दो स्थायी (stationary) वैद्युत आवेशों के लिए सत्य है तथा आवेशों के बीच दूरी r < 10-15 मी के लिए सत्य नहीं है।
In simple words: कूलॉम का नियम केवल स्थिर बिंदु आवेशों पर लागू होता है और बहुत कम दूरियों (नाभिकीय दूरी) पर इसकी वैधता सीमित हो जाती है।
🎯 Exam Tip: कूलॉम के नियम की सीमाओं को जानना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें बताता है कि इसे कहाँ लागू नहीं किया जा सकता है।
Question 8.
जल का परावैद्युतांक 80 है। वैद्युतशीलता कितनी होगी?
Answer:हल- \( \epsilon = \epsilon_{0} \times K = 8.85 \times 10^{-12} \times 80 \) कूलॉम/न्यूटन-मीटर2
\( = 708 \times 10^{-12} \) कूलॉम/न्यूटन-मीटर2
In simple words: जल की वैद्युतशीलता ज्ञात करने के लिए, उसकी परावैद्युतांक को निर्वात की वैद्युतशीलता से गुणा किया जाता है।
🎯 Exam Tip: माध्यम की वैद्युतशीलता (ε) निर्वात की वैद्युतशीलता (ε₀) और परावैद्युतांक (K) का गुणनफल होती है।
Question 9.
एक कूलॉम में कितने इलेक्ट्रॉन होते हैं?
Answer:हल- \( q = ne \)
\( \implies n = \frac{q}{e} = \frac{1 \text{ कूलॉम}}{1.6 \times 10^{-19} \text{ कूलॉम}} = 6.25 \times 10^{18} \)
In simple words: एक कूलॉम आवेश बनाने के लिए बहुत बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है, क्योंकि एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश बहुत छोटा होता है।
🎯 Exam Tip: एक कूलॉम आवेश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या एक मानक मान है जिसे याद रखना चाहिए।
Question 10.
3.2 कूलॉम आवेश कितने इलेक्ट्रॉनों द्वारा निर्मित होगा ?
Answer:हल- \( n = \frac{q}{e} = \frac{3.2 \text{ कूलॉम}}{1.6 \times 10^{-19} \text{ कूलॉम}} = 2 \times 10^{19} \)
In simple words: किसी दिए गए आवेश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात करने के लिए, कुल आवेश को एक इलेक्ट्रॉन के आवेश से विभाजित करते हैं।
🎯 Exam Tip: आवेश की क्वाण्टीकरण सूत्र (q = ne) का उपयोग करके ऐसे प्रश्नों को हल किया जाता है।
Question 11.
एक निश्चित दूरी पर स्थित दो इलेक्ट्रॉनों के बीच वैद्युत बल F न्यूटन है। इससे आधी दूरी पर स्थित दो प्रोटॉनों के बीच वैद्युत बल कितना होगा?
Answer:हल- \( F = \frac{1}{4\pi\epsilon_{0}} \frac{q_1q_2}{r^2} \) यहाँ इलेक्ट्रॉनों तथा प्रोटॉनों पर आवेश समान होता है। अतः
\( F \propto 1/r^2 \)
\( \frac{F_2}{F_1} = \left( \frac{r_1}{r_2} \right)^2 = \left( \frac{r}{r/2} \right)^2 = 4 \)
\( \implies F_2 = 4F_1 \)
\( F_2 = 4F \) न्यूटन
In simple words: कूलॉम के नियम के अनुसार, वैद्युत बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। जब दूरी आधी की जाती है, तो बल चार गुना हो जाता है। प्रोटॉन पर आवेश का परिमाण इलेक्ट्रॉन के समान ही होता है।
🎯 Exam Tip: कूलॉम के नियम में दूरी पर निर्भरता \( (1/r^2) \) को याद रखें; दूरी को n गुना करने पर बल \( 1/n^2 \) गुना हो जाता है।
Question 12.
दो बिन्दु आवेशों के बीच स्थिर वैद्युत बल F है। यदि इन आवेशों को उतनी ही दूरी पर जल (k = 80) में रख दिया जाये तब उनके बीच बल कितना रहेगा?
Answer:हल-
दो बिन्दु आवेशों के बीच स्थिर वैद्युत बल = F
माना जल में रखने पर दोनों बिन्दुओं के बीच स्थिर वैद्युत बल = Fm
\( Fm = F/k = F/80 \)
In simple words: जब आवेशों को किसी माध्यम में रखा जाता है, तो उनके बीच का बल निर्वात के बल का \( 1/K \) गुना हो जाता है, जहाँ \( K \) माध्यम का परावैद्युतांक है।
🎯 Exam Tip: माध्यम में बल, निर्वात में बल को माध्यम के परावैद्युतांक से विभाजित करने पर प्राप्त होता है।
Question 13.
इलेक्ट्रॉन वोल्ट की परिभाषा दीजिए तथा इसका संख्यात्मक मान जूल में व्यक्त कीजिए।
Answer:उत्तर-
एक इलेक्ट्रॉन वोल्ट वह ऊर्जा है जो किसी इलेक्ट्रॉन से 1 वोल्ट विभवान्तर द्वारा त्वरित होने पर अर्जित होती है।
अर्थात् 1 इलेक्ट्रॉन वोल्ट = 1.6 x 10-19 जूल
In simple words: इलेक्ट्रॉन वोल्ट एक ऊर्जा की इकाई है, जो एक इलेक्ट्रॉन को एक वोल्ट के विद्युत विभव अंतर से त्वरित करने पर प्राप्त ऊर्जा के बराबर होती है।
🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) ऊर्जा की एक छोटी इकाई है जिसका उपयोग परमाणु और नाभिकीय भौतिकी में किया जाता है, और इसे जूल में बदलना महत्वपूर्ण है।
Question 14.
कूलॉम के नियम का सदिश रूप बताइए।
Answer:उत्तर-
\( \vec{F}_{12} = -\vec{F}_{21} \)
अतः बिन्दु आवेश q1 पर q2 के कारण कार्यरत वैद्युत बल बिन्दु आवेश q2 पर q1 के कारण कार्यरत वैद्युत बल के परिमाण में बराबर तथा दिशा में विपरीत होता है।
In simple words: कूलॉम के नियम का सदिश रूप न्यूटन के तीसरे नियम का पालन करता है, जिसमें दो आवेशों के बीच लगने वाले बल परिमाण में बराबर और दिशा में विपरीत होते हैं।
🎯 Exam Tip: कूलॉम के नियम का सदिश रूप यह दर्शाता है कि विद्युत बल एक केंद्रीय बल है और क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म बनाता है।
Question 15.
वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता की परिभाषा तथा इसका मात्रक लिखिए।
Answer:उत्तर- वैद्युत क्षेत्र में किसी बिन्दु पर रखे परीक्षण-आवेश पर लगने वाले बल तथा परीक्षण-आवेश के मान की निष्पत्ति को उस बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता \( \vec{E} \) कहते हैं।
\( \vec{E} = \frac{\vec{F}}{q_0} \)
इसका मात्रक 'न्यूटन/कूलॉम' होता है।
In simple words: वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता किसी बिंदु पर प्रति इकाई परीक्षण आवेश पर लगने वाले विद्युत बल को दर्शाती है और यह एक सदिश राशि है।
🎯 Exam Tip: विद्युत क्षेत्र की तीव्रता बल प्रति इकाई आवेश है, और इसकी दिशा बल की दिशा होती है।
Question 16.
1.5 x 10-3 कूलॉम आवेश पर 2.25 न्यूटन का बल कार्य करता है। उस बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए।
Answer:हल- दिया है- \( q = 1.5 \times 10^{-3} \) कूलॉम, \( F = 2.25 \) न्यूटन
वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता, \( E = \frac{F}{q} = \frac{2.25}{1.5 \times 10^{-3}} \)
\( = 1500 \) न्यूटन/कूलॉम
In simple words: विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करने के लिए, किसी आवेश पर लगने वाले बल को उस आवेश के परिमाण से विभाजित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के सीधे गणना वाले प्रश्नों में, सूत्र E = F/q का सही उपयोग करें और इकाइयों का ध्यान रखें।
Question 17.
5.0 x 10-8 कूलॉम बिन्दु आवेश से कितनी दूरी पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता 450 वोल्ट/मीटर होगी?
Answer:हल- दिया है, \( q = 5.0 \times 10^{-8} \) कूलॉम, \( E = 450 \) वोल्ट/मीटर
सूत्र \( E = 9 \times 10^9 \frac{q}{r^2} \) से,
\( 450 = 9 \times 10^9 \times \frac{5.0 \times 10^{-8}}{r^2} \)
अथवा \( r^2 = \frac{9 \times 10^9 \times 5.0 \times 10^{-8}}{450} = \frac{45 \times 10}{450} = 1 \)
या \( r = 1 \) मीटर
In simple words: किसी बिंदु आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता को कूलॉम के नियम से प्राप्त किया जा सकता है, जिससे दूरी की गणना की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: बिंदु आवेश के लिए विद्युत क्षेत्र का सूत्र \( E = k \frac{q}{r^2} \) महत्वपूर्ण है; इसका उपयोग r की गणना के लिए किया जा सकता है।
Question 18.
एक इलेक्ट्रॉन तथा एक प्रोटॉन एक समान वैद्युत क्षेत्र में रखे गए हैं। किसका त्वरण अधिक होगा और क्यों?
Answer:उत्तर- इलेक्ट्रॉन का त्वरण अधिक होगा, क्योंकि प्रोटॉन की अपेक्षा इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान कम होता है।
In simple words: एक समान विद्युत क्षेत्र में, इलेक्ट्रॉन पर प्रोटॉन की तुलना में अधिक त्वरण होगा क्योंकि इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन से बहुत कम होता है, जबकि दोनों पर आवेश का परिमाण समान होता है।
🎯 Exam Tip: बल \( F=qE \) और त्वरण \( a=F/m \) का संबंध याद रखें। कम द्रव्यमान वाले कण का त्वरण अधिक होता है।
Question 19.
किसी आवेशित कण के भार को एक वैद्युत-क्षेत्र द्वारा किस प्रकार सन्तुलित किया जाता है?
Answer:उत्तर- कण पर आवेश की प्रकृति के अनुसार उस पर वैद्युत-क्षेत्र ऐसी दिशा में लगाकर, ताकि उसके कारण कण पर लगने वाला वैद्युत बल ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर अर्थात् कण के भार की विपरीत दिशा में कार्य करे तथा परिमाण में इसके बराबर हो।
In simple words: एक आवेशित कण के भार को विद्युत क्षेत्र से संतुलित करने के लिए, विद्युत बल को गुरुत्वाकर्षण बल के बराबर और विपरीत दिशा में लगाया जाना चाहिए।
🎯 Exam Tip: संतुलन की स्थिति में, विद्युत बल (qE) गुरुत्वाकर्षण बल (mg) के बराबर और विपरीत होता है।
Question 20.
आवेशित खोखले गोलाकार चालक के भीतर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता कितनी होती है?
Answer:उत्तर- शून्य ।
In simple words: एक आवेशित खोखले गोलाकार चालक के अंदर कोई शुद्ध आवेश नहीं होता है, इसलिए गाउस के नियम के अनुसार, उसके भीतर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता शून्य होती है।
🎯 Exam Tip: यह चालकों का एक महत्वपूर्ण गुण है, जिसे अक्सर "इलेक्ट्रोस्टैटिक शील्डिंग" में उपयोग किया जाता है।
Question 21.
0.1 मीटर त्रिज्या के एक गोलीय चालक को कितना आदेश दिया जाए कि चालक के पृष्ठ पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता900 वोल्ट/मीटर हो जाए ?
Answer:हल- \( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_{0}} \frac{q}{R^2} = 9 \times 10^9 \frac{q}{R^2} \)
\( \implies \) आवेश \( q = \frac{E \times R^2}{9 \times 10^9} = \frac{900 \times (0.1)^2}{9 \times 10^9} \) कूलॉम \( = 10^{-9} \) कूलॉम
In simple words: चालक के पृष्ठ पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करने के सूत्र का उपयोग करके आवश्यक आवेश की गणना की जा सकती है, यदि त्रिज्या और विद्युत क्षेत्र दिए गए हों।
🎯 Exam Tip: गोलाकार चालक के पृष्ठ पर विद्युत क्षेत्र का सूत्र \( E = k \frac{q}{R^2} \) का सही उपयोग करें।
Question 22.
दो बड़ी पतली धातु की प्लेट एक-दूसरे के बहुत निकट और समान्तर हैं। प्लेटों पर विपरीत प्रकार के आवेश के पृष्ठ घनत्वों के परिमाण 17.7 x 10-22 कूलॉम/मी हैं। प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता क्या है?
Answer:हल- यहाँ पृष्ठ घनत्व \( \sigma = 17.7 \times 10^{-22} \) कूलॉम/मी2
प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
\( E = \frac{\sigma}{\epsilon_{0}} = \frac{17.7 \times 10^{-22}}{8.854 \times 10^{-12}} \)
\( = 2 \times 10^{-10} \) न्यूटन/कूलॉम
In simple words: दो विपरीत आवेशित समानांतर प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र की तीव्रता, प्लेटों के पृष्ठीय आवेश घनत्व और निर्वात की वैद्युतशीलता के अनुपात के बराबर होती है।
🎯 Exam Tip: समानांतर प्लेट संधारित्र के अंदर विद्युत क्षेत्र का सूत्र \( E = \frac{\sigma}{\epsilon_{0}} \) महत्वपूर्ण है। \( \epsilon_{0} \) का मान याद रखें।
Question 23.
वैद्युत-फ्लक्स तथा वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता में सम्बन्ध लिखिए। वैद्युत-फ्लक्स का मात्रक भी लिखिए ।
या
वैद्युत-फ्लक्स का मात्रक लिखिए।
Answer:उत्तर- वैद्युत-फ्लक्स \( \Phi = \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} \).
जहाँ, \( \vec{E} \) = वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता तथा \( d\vec{A} \) = क्षेत्रफल सदिश
वैद्युत-फ्लक्स का मात्रक = न्यूटन मीटर2 कूलॉम-1।
In simple words: वैद्युत फ्लक्स किसी सतह से गुजरने वाली विद्युत क्षेत्र रेखाओं की संख्या का माप है, जो विद्युत क्षेत्र की तीव्रता और क्षेत्रफल सदिश के अदिश गुणनफल के समाकलन के रूप में परिभाषित होता है।
🎯 Exam Tip: वैद्युत फ्लक्स एक अदिश राशि है, और इसकी इकाई न्यूटन-मीटर²/कूलॉम या वोल्ट-मीटर है।
Question 24.
किसी घन के केन्द्र पर 10 µC का एक आवेश रखा है। घन के एक फलक से निकलने वाले वैद्युत-फ्लक्स की गणना कीजिए।
Answer:हल- घन के एक फलक से निकलने वाला वैद्युत-फ्लक्स
\( \Phi = \frac{1}{6} \frac{q}{\epsilon_{0}} = \frac{1}{6} \frac{10 \times 10^{-6} \text{ कूलॉम}}{8.85 \times 10^{-12} \text{ कूलॉम}^2 / \text{न्यूटन मीटर}^2} \)
\( = 18.83 \times 10^4 \) न्यूटन-मीटर2/कूलॉम
In simple words: गाउस के नियम के अनुसार, एक घन के केंद्र पर रखे आवेश के कारण कुल फ्लक्स \( q/\epsilon_{0} \) होता है, और घन के छह समान फलक होने के कारण, एक फलक से गुजरने वाला फ्लक्स कुल फ्लक्स का छठा हिस्सा होता है।
🎯 Exam Tip: गाउस के नियम के अनुप्रयोग में समरूपता का उपयोग करके एक घन के एक फलक से गुजरने वाले फ्लक्स की गणना करें।
Question 25.
एकसमान वैद्युत क्षेत्र सदिश \( \vec{E} = 2\vec{i} + 3\vec{j} - 4\vec{k} \) वोल्ट/मीटर में एक पृष्ठ के क्षेत्रफल \( \vec{A} = 8\vec{j} \) मी2 से गुजरने वाले वैद्युत फ्लक्स की गणना कीजिए।
Answer:हल- वैद्युत फ्लक्स \( \Phi = \vec{E} \cdot \vec{A} = (2\vec{i} + 3\vec{j} - 4\vec{k}) \cdot (8\vec{j}) \)
\( = 24 \) वोल्ट-मीटर
In simple words: वैद्युत फ्लक्स की गणना विद्युत क्षेत्र सदिश और क्षेत्रफल सदिश के अदिश गुणनफल (डॉट प्रोडक्ट) से की जाती है।
🎯 Exam Tip: डॉट प्रोडक्ट केवल समानांतर घटकों को गुणा करता है (i.i=1, j.j=1, k.k=1 और i.j=0 आदि)।
Question 26.
यदि किसी 8 सेमी भुजा वाले एक घन के केन्द्र पर 1 कूलॉम आवेश रखा जाए तो घन के किसी फलक से बाहर आने वाले फ्लक्स की गणना कीजिए।
Answer:हल- घन के पृष्ठ से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स \( \Phi_E = \frac{q}{\epsilon_{0}} \)
\( \implies \) घन का कुल पृष्ठ क्षेत्रफल उसके एक फलक के क्षेत्रफल का 6 गुना है।
\( \implies \) घन के एक फलक से बद्ध फ्लक्स \( = \frac{1}{6} \Phi_E = \frac{q}{6\epsilon_{0}} \)
\( = \frac{1}{6 \times 8.85 \times 10^{-12}} \)
\( = 1.88 \times 10^{10} \) न्यूटन-मी2/कूलॉम
In simple words: गाउस के नियम के अनुसार, घन के केंद्र पर रखे आवेश के कारण कुल फ्लक्स \( q/\epsilon_{0} \) होता है; घन के छह समान फलक होने के कारण, किसी एक फलक से निकलने वाला फ्लक्स कुल फ्लक्स का छठा हिस्सा होता है।
🎯 Exam Tip: गाउस के नियम में, बंद सतह के आकार या आवेश के वितरण से फर्क नहीं पड़ता, केवल परिबद्ध कुल आवेश मायने रखता है।
Question 27.
एक वैद्युत द्विध्रुव 1.0 x 10-6 कूलॉम परिमाण तथा विपरीत प्रकृति के दो वैद्युत आवेशों से बना है। इन आवेशों के बीच की दूरी 2.0 सेमी है। इस द्विध्रुव को 1.0 x 105 न्यूटन/कूलॉम की बाह्य वैद्युत-क्षेत्र तीव्रता में रखा गया है। द्विध्रुव पर अधिकतम बल-आघूर्ण का मान निकालिए।
Answer:हल-
\( T_{max} = pE = (q \times 2l) \times E \)
\( = (1.0 \times 10^{-6} \times 2.0 \times 10^{-2}) (1.0 \times 10^5) \)
\( = 2.0 \times 10^{-3} \) न्यूटन-मीटर
In simple words: वैद्युत द्विध्रुव पर अधिकतम बल-आघूर्ण तब लगता है जब द्विध्रुव विद्युत क्षेत्र के लंबवत होता है, और इसकी गणना द्विध्रुव आघूर्ण और विद्युत क्षेत्र के परिमाण के गुणनफल से की जाती है।
🎯 Exam Tip: अधिकतम बल-आघूर्ण का सूत्र \( \tau_{max} = pE \) है, जो तब प्राप्त होता है जब द्विध्रुव क्षेत्र के 90° पर संरेखित होता है।
Question 28.
1.0 µC के दो बराबर एवं विपरीत प्रकार के आवेश 2.0 मिमी दूर रखे हैं। इस विद्युत द्विध्रुव का द्विध्रुव आघूर्ण ज्ञात कीजिए।
Answer:उत्तर-
दिया है, \( q = 1.0 \text{ µC} = 1.0 \times 10^{-6} \text{ C} \),
\( l = 2.0 \text{ मिमी} = 2 \times 10^{-3} \text{ मी} \)
विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण, \( p = q \cdot 2l = 1.0 \times 10^{-6} \times 2 \times 2 \times 10^{-3} = 4 \times 10^{-9} \) कूलॉम-मी
In simple words: द्विध्रुव आघूर्ण आवेश के परिमाण और आवेशों के बीच की दूरी का गुणनफल होता है।
🎯 Exam Tip: द्विध्रुव आघूर्ण (p) एक सदिश राशि है जिसका परिमाण q × (2l) होता है और इसकी दिशा ऋणात्मक आवेश से धनात्मक आवेश की ओर होती है।
Question 29.
स्थिर वैद्युतिकी में गौस की प्रमेय को गणितीय रूप में लिखिए तथा प्रयुक्त संकेतों के अर्थ बताइए ।
Answer:उत्तर-\( \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = \frac{1}{\epsilon_{0}} (q) \)
अथवा \( \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = \frac{q}{\epsilon_{0}} \)
जहाँ, \( \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} \) = \( \vec{E} \) तीव्रता के वैद्युत-क्षेत्र में किसी बन्द पृष्ठ से गुजरने वाला कुल वैद्युत-फ्लक्स \( \Phi \); q = बन्द पृष्ठ द्वारा परिबद्ध नेट आवेश तथा \( \epsilon_{0} \) = वायु या निर्वात् की वैद्युतशीलता।
In simple words: गाउस का प्रमेय कहता है कि किसी बंद सतह से गुजरने वाला कुल वैद्युत फ्लक्स उस सतह द्वारा परिबद्ध कुल आवेश का \( 1/\epsilon_{0} \) गुना होता है।
🎯 Exam Tip: गाउस का नियम विद्युत स्थैतिकी के महत्वपूर्ण नियमों में से एक है और इसे हमेशा गणितीय रूप में \( \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = q_{enc}/\epsilon_{0} \) याद रखना चाहिए।
Question 30.
एक R त्रिज्या वाले Q आवेश से आवेशित धातु के खोखले गोले के केन्द्र से r > R दूरी पर वैद्युत विभव का सूत्र लिखिए।
Answer:उत्तर-
\( V = \frac{1}{4\pi\epsilon_{0}} \frac{Q}{r} \)
In simple words: एक आवेशित खोखले गोले के बाहर किसी बिंदु पर वैद्युत विभव का मान वैसा ही होता है जैसे कि सारा आवेश गोले के केंद्र पर केंद्रित हो।
🎯 Exam Tip: खोखले गोलीय चालक के लिए, बाहर के बिंदुओं पर विभव का सूत्र बिंदु आवेश के समान होता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1.
कूलॉम का वैद्युत बल सम्बन्धी नियम लिखिए ।
या
दो बिन्दु आवेशों के बीच लगने वाले आकर्षण अथवा प्रतिकर्षण बल के लिए कूलॉम का सूत्र लिखिए।
Answer:उत्तर-
कूलॉम का नियम-1785 ई० में फ्रांसीसी वैज्ञानिक कूलॉम ने दो आवेशों के बीच कार्य करने वाले बल के सम्बन्ध में एक नियम दिया, जिसे कूलॉम का नियम कहते हैं। इस नियम के अनुसार-“दो स्थिर बिन्दु आवेशों के मध्य लगने वाला आकर्षण या प्रतिकर्षण बल, दोनों आवेशों की मात्राओं के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।” इस बल की दिशा दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश होती है। यदि दो बिन्दु आवेश q1 व q2 एक-दूसरे से r दूरी पर स्थित हों, तो कूलॉम के नियम से उनके बीच लगने वाला बल
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो बिंदु आवेशों q1 और q2 को दिखाता है जो एक-दूसरे से r दूरी पर स्थित हैं। यह कूलॉम के नियम की ज्यामितीय व्यवस्था को दर्शाता है, जिसमें आवेशों को बिंदु के रूप में और उनके बीच की दूरी को रेखा के रूप में दर्शाया गया है।
अतः \( F \propto q_1q_2 \)
तथा \( F \propto 1/r^2 \)
या \( F = k \frac{q_1q_2}{r^2} \)
जहाँ k अनुक्रमानुपाती नियतांक है। प्रयोगों द्वारा k का मान \( 9.0 \times 10^9 \) न्यूटन-मी2/कूलॉम2 प्राप्त किया गया। अतः
\( F = 9.0 \times 10^9 \frac{q_1q_2}{r^2} \) न्यूटन ...(1)
वायु अथवा निर्वात् में \( k = \frac{1}{4\pi\epsilon_{0}} \) भी लिखा जाता है।
अतः \( F = \frac{1}{4\pi\epsilon_{0}} \frac{q_1q_2}{r^2} \) न्यूटन ...(2)
यहाँ \( \epsilon_{0} \) (एप्साइलन जीरो) को वायु या निर्वात् की वैद्युतशीलता कहते हैं, जिसका मान \( 8.85 \times 10^{-12} \) कूलॉम2/न्यूटन-मीटर2 होता है।
यदि दोनों आवेशों के बीच माध्यम वायु (अथवा निर्वात्) के स्थान पर अन्य कोई परावैद्युत माध्यम (तेल, काँच, अभ्रक आदि) हो, तो
\( F = \frac{1}{4\pi\epsilon_{0}K} \frac{q_1q_2}{r^2} \) न्यूटन ...(3)
जहाँ K एक विमाहीन नियतांक है जिसे उस पदार्थ (परावैद्युत माध्यम) का परावैद्युतांक (dielectric constant) अथवा विशिष्ट परावैद्युतता कहते हैं। निर्वात् अथवा वायु के लिए K का मान 1 होता है। उपर्युक्त सूत्र में \( \epsilon_{0}K \) के स्थान पर \( \epsilon \) भी लिखते हैं तथा \( \epsilon \) को परावैद्युत माध्यम की वैद्युतशीलता (permitivity) कहते हैं।
In simple words: कूलॉम का नियम बताता है कि दो बिंदु आवेशों के बीच वैद्युत बल उनके आवेशों के गुणनफल के सीधे आनुपातिक और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है, और यह बल उन्हें जोड़ने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करता है।
🎯 Exam Tip: कूलॉम के नियम के गणितीय रूप और प्रत्येक पद के अर्थ को जानना महत्वपूर्ण है, खासकर जब विभिन्न माध्यमों की बात आती है।
Question 2.
आसुत जल की 64 बूंदें, प्रत्येक की त्रिज्या 0.1 मिमी तथा आवेश (2/3) x 10-12 कूलॉम है, मिलकर एक बड़ी बूंद बनाती हैं। बड़ी बूंद को विभव ज्ञात कीजिए ।
Answer:हल- छोटी बूँद की त्रिज्या \( r = 0.1 \) मिमी \( = 10^{-4} \) मी;
माना बड़ी बूँद की त्रिज्या = R मीटर
\( \implies \) 1 बड़ी बूँद का आयतन = 64 छोटी बूँदों का आयतन
\( (4/3) \pi R^3 = 64 \times (4/3)\pi r^3 \)
अतः \( R = (64 r^3)^{1/3} = 4r = 4 \times 10^{-4} \) मीटर
बड़ी बूँद पर आवेश \( Q = 64 \times 1 \) छोटी बूँद पर आवेश
\( = 64 \times (2/3) \times 10^{-12} \) कूलॉम
बड़ी बूंद का विभव \( V = \frac{1}{4\pi\epsilon_{0}} \frac{Q}{R} \)
\( = 9.0 \times 10^9 \times \frac{64 \times (2/3) \times 10^{-12}}{4 \times 10^{-4}} \)
\( = 960 \) वोल्ट
In simple words: कई छोटी बूंदों के मिलकर एक बड़ी बूंद बनाने पर, बड़ी बूंद का आयतन छोटी बूंदों के कुल आयतन के बराबर होगा, जिससे बड़ी बूंद की त्रिज्या निकाली जा सकती है। कुल आवेश सभी छोटी बूंदों के आवेश का योग होगा, और फिर बड़ी बूंद का विभव कूलॉम के नियम का उपयोग करके ज्ञात किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: आयतन संरक्षण का सिद्धांत लागू करें और बड़ी बूंद के लिए त्रिज्या और कुल आवेश की गणना करें। विभव के सूत्र में \( 1/(4\pi\epsilon_0) \) का मान \( 9 \times 10^9 \) Nm²/C² है।
Question 3.
दो बिन्दु आवेश \( +5 \times 10^{-19} \) कूलॉम व \( +10 \times 10^{-19} \) कूलॉम 1.0 मीटर की दूरी पर पृथकतः स्थित हैं। दोनों आवेशों को जोड़ने वाली रेखा के किस बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता शून्य होगी?
Answer:हल-
माना कि दिये गये बिन्दु आवेश बिन्दुओं A व B पर स्थित हैं तथा उनके बीच बिन्दु O पर वैद्युत क्षेत्र शून्य है। माना कि बिन्दु O की बिन्दु A से दूरी x मीटर है; अतः बिन्दु O की बिन्दु B से दूरी (1 - x) मीटर होगी । बिन्दु O पर, बिन्दु A पर स्थित आवेशे के कारण वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो धनात्मक बिंदु आवेशों (+5 x 10-19 C और +10 x 10-19 C) को दर्शाता है जो 1 मीटर की दूरी पर A और B बिंदुओं पर स्थित हैं। बिंदु O इनके बीच में स्थित है, जहाँ से A तक की दूरी x है और B तक की दूरी (1-x) है। विद्युत क्षेत्र E1 और E2 की दिशाओं को दर्शाया गया है।
\( E_1 = \frac{1}{4\pi\epsilon_{0}} \frac{5 \times 10^{-19}}{x^2} \) (AO दिशा में)
तथा बिन्दु B पर स्थित आवेश के कारण वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
\( E_2 = \frac{1}{4\pi\epsilon_{0}} \frac{10 \times 10^{-19}}{(1-x)^2} \) (BO दिशा में)
\( E_1 \) व \( E_2 \) परस्पर विपरीत दिष्ट हैं। चूँकि बिन्दु O पर परिणामी वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता शून्य है, अतः
\( E_1 = E_2 \)
\( \implies \frac{1}{4\pi\epsilon_{0}} \frac{5 \times 10^{-19}}{x^2} = \frac{1}{4\pi\epsilon_{0}} \frac{10 \times 10^{-19}}{(1-x)^2} \)
\( \implies \frac{5}{x^2} = \frac{10}{(1-x)^2} \)
\( \implies \frac{1}{x^2} = \frac{2}{(1-x)^2} \)
\( \implies (1-x)^2 = 2x^2 \)
\( \implies 1 + x^2 - 2x = 2x^2 \)
\( \implies x^2 + 2x - 1 = 0 \)
वर्ग समीकरण को हल करने पर,
\( x = \frac{-2 \pm \sqrt{4 - 4(1)(-1)}}{2} = \frac{-2 \pm \sqrt{8}}{2} \)
\( x = \frac{-2 \pm 2\sqrt{2}}{2} = -1 \pm \sqrt{2} \)
\( x = -1 + 1.414 \) या \( x = -1 - 1.414 \)
\( x = 0.414 \) या \( x = -2.414 \)
x का ऋणात्मक मान सम्भव नहीं है, क्योंकि बिन्दु O बिन्दुओं A व B के बीच में है। अतः पहले आवेश से 0.414 मीटर या 41.4 सेमी की दूरी पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता शून्य होगी।
In simple words: दो समान धनात्मक आवेशों के बीच विद्युत क्षेत्र शून्य होने के लिए, यह बिंदु दोनों आवेशों को जोड़ने वाली रेखा पर, छोटे आवेश के करीब होना चाहिए, जहाँ दोनों आवेशों के कारण विद्युत क्षेत्र एक-दूसरे को रद्द करते हैं।
🎯 Exam Tip: जब दो आवेशों के कारण विद्युत क्षेत्र को शून्य करना होता है, तो उनकी तीव्रता को बराबर करें और परिणामी समीकरण को हल करें। दूरियों के उचित चिह्नों का उपयोग करना सुनिश्चित करें।
Question 4.
धातु के एक पतले गोलीय कोश की त्रिज्या 0.25 मीटर है तथा इस पर 0.2 µC आवेश है। इसके कारण एक बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए जबकि बिन्दु
(i) कोश के भीतर,
(ii) कोश के ठीक बाहर तथा
(iii) कोश के केन्द्र से 3.0 मीटर की दूरी पर है।
Answer:हल-
(i) आवेशित कोश के भीतर किसी भी बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता शून्य है।
(ii) बाह्य बिन्दुओं के लिए कोश इस प्रकार व्यवहार करता है जैसे कि सम्पूर्ण आवेश इसके केन्द्र पर रखा हो। अतः यदि कोश की त्रिज्या R है, तब कोश के ठीक बाहर किसी बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_{0}} \frac{q}{R^2} \)
दिया है- \( q = 0.2 \text{ µC} = 2 \times 10^{-6} \) कूलॉम तथा \( R = 0.25 \) मी
\( E = 9 \times 10^9 \times \frac{0.2 \times 10^{-6}}{(0.25)^2} \)
\( = 2.88 \times 10^4 \) न्यूटन/कूलॉम
(iii) आवेशित कोश के बाहर, कोश के केन्द्र से दूरी \( r (> R) \) पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_{0}} \frac{q}{r^2} = 9 \times 10^9 \times \frac{0.2 \times 10^{-6}}{(3.0)^2} \)
\( = 200 \) न्यूटन/कूलॉम
In simple words: खोखले गोलीय कोश के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है। कोश के बाहर, यह एक बिंदु आवेश की तरह व्यवहार करता है जो केंद्र पर स्थित होता है, जबकि कोश के ठीक बाहर विद्युत क्षेत्र उसके पृष्ठ पर अधिकतम होता है।
🎯 Exam Tip: खोखले गोलीय चालकों के लिए विद्युत क्षेत्र की गणना करते समय अंदर (E=0), पृष्ठ पर और बाहर (बिंदु आवेश की तरह) के तीन मामलों को याद रखें।
Question 2. वैद्युत-द्विध्रुव के कारण निरक्षीय स्थिति (अनुप्रस्थ स्थिति) में किसी बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
या
वैद्युत-द्विध्रुव की परिभाषा दीजिए।
Answer: उत्तर- वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण- वह वैद्युत निकाय (system) जिसमें दो बराबर, परन्तु विपरीत प्रकार के बिन्दु-आवेश एक-दूसरे से बहुत कम दूरी पर रखे हों, “वैद्युत-द्विध्रुव' कहलाता है। दोनों आवेशों में से किसी एक आवेश और दोनों आवेशों के बीच की दूरी के गुणनफल को 'द्विध्रुव' का 'वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण (electric dipole moment) कहते हैं। इसे प्रायः p से प्रदर्शित करते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वैद्युत द्विध्रुव को दर्शाता है। इसमें दो आवेश, +q और -q, एक दूसरे से 2l दूरी पर स्थित हैं। द्विध्रुव का मध्यबिंदु O है और एक परीक्षण बिंदु P निरक्षीय रेखा पर O से r दूरी पर स्थित है।
वैद्युत-द्विध्रुव की निरक्षीय रेखा पर स्थित बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता - माना वैद्युत-द्विध्रुव AB परावैद्युतांक K वाले माध्यम में स्थित है जिसके A सिरे पर + q आवेश तथा B सिरे पर - q आवेश एक-दूसरे से \(2l\) दूरी पर स्थित हैं। वैद्युत-द्विध्रुव की निरक्षीय स्थिति में मध्य-बिन्दु O से r दूरी पर स्थित बिन्दु P पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र वैद्युत द्विध्रुव के कारण निरक्षीय बिंदु P पर वैद्युत क्षेत्र E1 और E2 की दिशाओं को दर्शाता है। बिंदु P पर आवेश +q और -q के कारण उत्पन्न क्षेत्र सदिश E1 और E2 उनके घटकों E1 sinθ, E2 sinθ, E1 cosθ और E2 cosθ में वियोजित दिखाए गए हैं।
AP = BP = \( \sqrt{r^2 + l^2} \)
∴ आवेश \( +q \) के कारण बिन्दु P पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता
\( E_1 = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \times \frac{q}{(r^2 + l^2)} \) (AP दिशा में)
तथा आवेश \( -q \) के कारण बिन्दु P पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता
\( E_2 = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \times \frac{q}{(r^2 + l^2)} \) (PB दिशा में)
स्पष्ट है कि \( E_1 \) व \( E_2 \) के मान बराबर हैं और दिशाएँ भिन्न हैं। \( E_1 \) व \( E_2 \) को AB के समान्तर तथा लम्बवत् घटकों में वियोजित करने पर [चित्र 1.19 (b)] लम्बवत् घटक (\( E_1 \sin \theta \) व \( E_2 \sin \theta \)) बराबर व विपरीत होने के कारण एक-दूसरे को निरस्त कर देंगे, जबकि AB के समान्तर घटक (\( E_1 \cos \theta \) व \( E_2 \cos \theta \)) एक ही दिशा में होने के कारण जुड़ जाएँगे।
अतः बिन्दु P पर द्विध्रुव के कारण परिणामी तीव्रता
\( E = E_1 \cos \theta + E_2 \cos \theta \)
\( \implies E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{q}{(r^2 + l^2)} \cos \theta + \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{q}{(r^2 + l^2)} \cos \theta \)
\( \implies E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{q}{(r^2 + l^2)} (2 \cos \theta) \)
चित्र 1.19 (b) से, \( \cos \theta = \frac{OA}{AP} = \frac{l}{\sqrt{r^2 + l^2}} \)
\( \implies E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{q}{(r^2 + l^2)} \times \frac{2l}{\sqrt{r^2 + l^2}} \)
\( \implies E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{q \times 2l}{(r^2 + l^2)^{3/2}} \)
परन्तु \( q \times 2l = p \) (वैद्युत-द्विध्रुव का आघूर्ण है।)
अतः \( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{p}{(r^2 + l^2)^{3/2}} \)
अब यदि \( l \) का मान \( r \) से अत्यधिक कम हो, तो \( l^2 \) का मान \( r^2 \) की तुलना में नगण्य माना जा सकता है।
तब \( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{p}{(r^2)^{3/2}} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{p}{r^3} \) न्यूटन/कूलॉम ...(1)
यदि द्विध्रुव निर्वात् (अथवा वायु) में रखा है, तो \( K = 1 \)
अतः \( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{p}{r^3} \) न्यूटन/कूलॉम ...(2)
वैद्युत-क्षेत्र E की दिशा द्विध्रुव की अक्ष के समान्तर धनावेश से ऋणावेश की ओर होती है।
In simple words: वैद्युत द्विध्रुव दो बराबर और विपरीत आवेशों का एक युग्म होता है, जो बहुत कम दूरी पर रखे होते हैं। निरक्षीय स्थिति में, द्विध्रुव के मध्य बिंदु से लंबवत रेखा पर स्थित किसी बिंदु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता, द्विध्रुव आघूर्ण (p) के अनुक्रमानुपाती और उस बिंदु से द्विध्रुव के मध्य बिंदु की दूरी (r) के घन के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और इसकी दिशा द्विध्रुव अक्ष के समानांतर होती है।
🎯 Exam Tip: निरक्षीय स्थिति में वैद्युत क्षेत्र की दिशा और उसके घटकों का सही वियोजन दर्शाना महत्वपूर्ण है। सूत्र की व्युत्पत्ति में दूरी \( r \) की तुलना में द्विध्रुव की लंबाई \( 2l \) को नगण्य मानने की शर्त को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 3. वैद्युत-द्विध्रुव तथा वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण से आप क्या समझते हैं?
या
एकसमान तीव्रता वाले वैद्युत क्षेत्र में वैद्युत द्विध्रुव पर लगने वाले बल-युग्म के आघूर्ण का सूत्र प्राप्त कीजिए।
या
एकसमान वैद्युत क्षेत्र में एक वैद्युत-द्विध्रुव पर लगने वाले बल-आघूर्ण का व्यंजक प्राप्त कीजिए। इसके आधार पर वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण की परिभाषा दीजिए।
Answer: उत्तर- वैद्युत-द्विध्रुव तथा वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण- वह वैद्युत निकाय (system) जिसमें दो बराबर, परन्तु विपरीत प्रकार के बिन्दु-आवेश एक-दूसरे से बहुत कम दूरी पर रखे हों, “वैद्युत-द्विध्रुव' कहलाता है। दोनों आवेशों में से किसी एक आवेश और दोनों आवेशों के बीच की दूरी के गुणनफल को 'द्विध्रुव' का वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण (electric dipole moment) कहते हैं। इसे प्रायः p से प्रदर्शित करते हैं।
(i) द्विध्रुव पर शुद्ध स्थानान्तर बल \( F = qE - qE = 0 \)
(ii) एकसमान वैद्युत-क्षेत्र में रखे वैद्युत-द्विध्रुव पर बल-युग्म–यदि किसी वैद्युत-द्विध्रुव को एकसमान वैद्युत-क्षेत्र (E) में रखा जाए तो उसके आवेशों पर समान और विपरीत बल \( -qE \) तथा \( +qE \) (अर्थात् एक बल-युग्म) कार्य करने लगता है। यह बल-युग्म द्विध्रुव को क्षेत्र की दिशा में संरेखित करने का प्रयत्न करता है। इसे प्रत्यानयन बल-युग्म' कहते हैं। माना एक वैद्युत-द्विध्रुव एकसमान वैद्युत-क्षेत्र (E) में क्षेत्र से \( \theta \) कोण बनाते हुए रखा गया है। \( +q \) तथा \( - q \) पर लगने वाले बराबर एवं विपरीत बले \( (+qE \) व \( -qE) \) एक बल-युग्म बनाते हैं जो द्विध्रुव को घुमाकर क्षेत्र E की दिशा में लाने का प्रयत्न करता है। इस प्रत्यानयन बल-युग्म का आघूर्ण
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वैद्युत द्विध्रुव को दर्शाता है जिसमें +q और -q आवेश 2l दूरी पर स्थित हैं और एकसमान वैद्युत क्षेत्र E में θ कोण पर संरेखित हैं। इस पर लगने वाले बल F और बल-युग्म का आघूर्ण ट दिखाया गया है, जो इसे क्षेत्र की दिशा में संरेखित करने का प्रयास करता है।
अतः \( \tau \) = बल \( \times \) बलों के मध्य लम्बवत् दूरी
\( \implies \tau = F \times AC = qE \times 2l \sin \theta \)
\( \implies \tau = (q \times 2l) E \sin \theta = pE \sin \theta \) न्यूटन-मीटर (जहाँ \( p = q \times 2l \) वैद्युत-द्विध्रुव का आघूर्ण है।) ...(1)
अतः सूत्र \( \tau = pE \sin \theta \)
यदि द्विध्रुव को वैद्युत-क्षेत्र के लम्बवत् रखा जाए, तो \( \theta = 90^\circ \)
अर्थात् \( \sin \theta = \sin 90^\circ = 1 \)
अतः द्विध्रुव पर आरोपित बल-युग्म अधिकतम होगा।
अर्थात् \( \tau_{\text{max}} = pE \) ...(2)
या \( p = \frac{\tau_{\text{max}}}{E} \) ...(3)
यदि \( E = 1 \) न्यूटन/कूलॉम, तब \( p = \tau_{\text{max}} \) कूलॉम/मीटर
अर्थात् "किसी वैद्युत-द्विध्रुव का वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण उस बल-युग्म के बराबर है जो कि द्विध्रुव को 1 न्यूटन/कूलॉम के एकसमान वैद्युत-क्षेत्र में क्षेत्र की दिशा के लम्बवत् रखने पर द्विध्रुव पर कार्य करता है।"
In simple words: वैद्युत द्विध्रुव एक प्रणाली है जिसमें दो बराबर और विपरीत आवेश बहुत कम दूरी पर स्थित होते हैं। वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण इन आवेशों में से किसी एक आवेश और उनके बीच की दूरी का गुणनफल होता है। जब एक द्विध्रुव को एकसमान वैद्युत क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक बल-युग्म कार्य करता है जो उसे क्षेत्र के साथ संरेखित करने का प्रयास करता है, जिसका आघूर्ण \( \tau = pE \sin \theta \) होता है।
🎯 Exam Tip: बल-युग्म के आघूर्ण के सूत्र (\( \tau = pE \sin \theta \)) को व्युत्पन्न करते समय बलों की दिशा और उनके बीच की लंबवत दूरी को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ। वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण की परिभाषा को मानक इकाइयों के साथ समझाना आवश्यक है।
Question 4. वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा से आप क्या समझते हैं? एकसमान वैद्युत क्षेत्र में स्थित द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक प्राप्त कीजिए, जबकि द्विध्रुव के अक्ष क्षेत्र से 6 कोण बनाएँ।
Answer: उत्तर- वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा- वैद्युत क्षेत्र में किसी वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा उस कार्य के बराबर होती है जो कि द्विध्रुव को अनन्त से क्षेत्र के भीतर लाने में करना पड़ता है। एकसमान वैद्युत क्षेत्र में वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा के लिए व्यंजक- माना कि एक वैद्युत द्विध्रुव AB को अनन्त से किसी एकसमान वैद्युत क्षेत्र E में इस प्रकार लाया जाता है कि द्विध्रुव आघूर्ण p सदैव क्षेत्र B की दिशा में रहे (चित्र 1.21)। क्षेत्र E के कारण द्विध्रुव के आवेश \( +q \) पर एक बल \( F (= qE) \) क्षेत्र की दिशा में तथा आवेश \( -q \) पर उतना ही बल \( F (= qE) \) विपरीत दिशा में कार्य करता है। अतः द्विध्रुव को क्षेत्र में लाने के लिए, आवेश \( +q \) पर बाहरी कर्ता द्वारा कार्य किया जाएगा जो धनात्मक होगा, जबकि \( -q \) आवेश पर स्वयं क्षेत्र कार्य करेगा, अर्थात् कार्य प्राप्त होगा जो ऋणात्मक होगा। परन्तु चित्र 1.21 से स्पष्ट है कि अनन्त से क्षेत्र के भीतर \( - q \) आवेश को लाने में प्राप्त कार्य \( +q \) को लाने में किए जाने वाले कार्य से अधिक होगा । बिन्दु A तक लाने में प्राप्त कार्य तथा किया गया कार्य बराबर होंगे। अतः वे एक-दूसरे को निरस्त कर देंगे। अतः द्विध्रुव को स्थिति AB तक लाने में नेट कार्य \( -q \) आवेश को A से B तक लाने में प्राप्त कार्य के बराबर होगा, जो ऋणात्मक होगी ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वैद्युत द्विध्रुव को दर्शाता है जिसमें -q और +q आवेश 2l दूरी पर स्थित हैं। यह दिखाता है कि कैसे द्विध्रुव को अनंत से एकसमान वैद्युत क्षेत्र E में लाया जाता है। बल F दोनों आवेशों पर विपरीत दिशा में कार्य करता हुआ दिखाया गया है।
अतः नेट कार्य \( W = [(-q) \text{ आवेश पर बल } \times \text{ दूरी } AB] \)
\( \implies W = -[qE \times 2l] = -[(q \times 2l) \times E] = -pE \)
जहाँ \( q \times 2l = p \) = वैद्युत द्विध्रुव का वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण
यह कार्य ही वैद्युत क्षेत्र के समान्तर स्थित वैद्युत द्विध्रुव की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा \( U_0 \) है; जो साम्यावस्था में वैद्युत स्थितिज ऊर्जा है।
∴ \( U_0 = -pE \)
इस स्थिति में वैद्युत द्विध्रुव क्षेत्र के अन्दर स्थायी सन्तुलन में है।
अब, यदि द्विध्रुव को क्षेत्र के भीतर \( \theta \) कोण से घुमाया जाए तो द्विध्रुव पर कार्य \( W \) करना होगा, जहाँ
\( W = pE (1 - \cos \theta) \)
इसके कारण द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा बढ़ जाएगी।
अतः \( \theta \) स्थिति में द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा
\( U_\theta = U_0 + W = -pE + pE (1 - \cos \theta) \)
\( \implies U_\theta = -pE \cos \theta \)
यह वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा का सामान्य सूत्र है।
विशेष स्थितियाँ
(i) यदि द्विध्रुव क्षेत्र की दिशा में हो अर्थात् \( \theta = 0^\circ \) तो \( \cos \theta = \cos 0^\circ = 1 \) तो
\( U_\theta = U_0 = -pE \)
इस दशा में स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होगी; अतः द्विध्रुव इस दशा में स्थायी सन्तुलन (stable equilibrium) में होगा।
(ii) यदि द्विध्रुव क्षेत्र के लम्बवत् हो अर्थात् \( (\theta = 90^\circ) \) तब
\( U_{90^\circ} = -pE \cos 90^\circ = 0 \)
इस दशा में \( \theta = 90^\circ \) पर द्विध्रुव पर किया गया नेट कार्य शून्य होगा और इस कारण द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा शून्य होगी।
(iii) यदि द्विध्रुव को स्थायी सन्तुलन की स्थिति से \( 180^\circ \) घुमा दें (अर्थात् \( \theta = 180^\circ \)) तब उसकी स्थितिज ऊर्जा
\( U_{180^\circ} = -pE \cos 180^\circ = +pE \) (\( \because \cos 180^\circ = -1 \))
इस स्थिति में द्विध्रुव 'अस्थायी सन्तुलन' (unstable equilibrium) में होगा, अर्थात् इससे बाहरी कारक के हटा लेने पर यह स्थायी सन्तुलन की स्थिति में (अर्थात् \( \theta = 0^\circ \) पर) आ जाएगा।
In simple words: वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा वह कार्य है जो उसे अनंत से वैद्युत क्षेत्र के भीतर लाने में किया जाता है। एकसमान वैद्युत क्षेत्र में, द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा \( U = -pE \cos \theta \) होती है, जहाँ \( p \) द्विध्रुव आघूर्ण, \( E \) वैद्युत क्षेत्र और \( \theta \) क्षेत्र के साथ द्विध्रुव अक्ष का कोण है।
🎯 Exam Tip: स्थितिज ऊर्जा की व्युत्पत्ति में कार्य-ऊर्जा प्रमेय का उपयोग और विभिन्न कोणों (\( 0^\circ, 90^\circ, 180^\circ \)) पर स्थितिज ऊर्जा के मानों को स्पष्ट रूप से समझाएँ। स्थायी और अस्थायी संतुलन की स्थितियों को परिभाषित करना न भूलें।
Question 5. +3.2 x 10-19 कूलॉम तथा -3.2 x 10-19 कूलॉम के दो बिन्दु आवेश एक-दूसरे से 2.4 x 10-10 मीटर की दूरी पर रखे हैं। यह द्विध्रुव 4 x 105 वोल्ट/मीटर तीव्रता के समांगी वैद्युत-क्षेत्र में स्थित है। ज्ञात कीजिए।
(i) वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण,
(ii) द्विध्रुव को साम्यावस्था से \( 180^\circ \) घुमाने में आवश्यक कार्य तथा
(iii) साम्यावस्था में वैद्युत-द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा ।
Answer: हल-
(i) \( p = q \times 2l = 3.2 \times 10^{-19} \text{ कूलॉम } \times 2.4 \times 10^{-10} \text{ मीटर } = 7.68 \times 10^{-29} \text{ कूलॉम-मीटर} \)
(ii) वैद्युत-द्विध्रुव को साम्यावस्था अर्थात् वैद्युत-क्षेत्र E की दिशा से \( \theta \) कोण घुमाने में आवश्यक कार्य
\( W = pE (1 - \cos \theta) \)
यहाँ \( \theta = 180^\circ \) एवं \( p = 7.68 \times 10^{-29} \text{ कूलॉम-मीटर} \)
\( E = 4.0 \times 10^5 \text{ वोल्ट/मीटर} \)
\( W = (7.68 \times 10^{-29}) \times (4.0 \times 10^5) \times (1 - \cos 180^\circ) \)
\( W = (7.68 \times 10^{-29}) \times (4.0 \times 10^5) \times 2 \) (\( \because \cos 180^\circ = -1 \))
\( W = 6.144 \times 10^{-28} \text{ जूल} \)
(iii) वैद्युत-क्षेत्र E में द्विध्रुव को साम्यावस्था से \( \theta \) कोण पर रखे होने पर इसकी स्थितिज ऊर्जा \( U = -pE \cos \theta \) जहाँ \( \theta \) = द्विध्रुव की अक्ष तथा इसकी साम्यावस्था अर्थात् वैद्युत-क्षेत्र की दिशा के बीच स्थित कोण साम्यावस्था में \( \theta = 0^\circ \), अतः
\( U_0 = -pE (\cos 0^\circ = 1) \)
यहाँ \( p = 7.68 \times 10^{-29} \text{ कूलॉम-मीटर} \)
\( E = 4.0 \times 10^5 \text{ वोल्ट/मीटर} \)
\( U_0 = -(7.68 \times 10^{-29}) \times (4.0 \times 10^5) \text{ जूल} = -3.072 \times 10^{-23} \text{ जूल} \)
In simple words: इस प्रश्न में, दिए गए आवेश और दूरी का उपयोग करके द्विध्रुव आघूर्ण की गणना की गई। फिर, द्विध्रुव को \( 180^\circ \) घुमाने में आवश्यक कार्य ज्ञात किया गया, जो द्विध्रुव आघूर्ण, वैद्युत क्षेत्र और कोण के बीच के संबंध पर आधारित है। अंत में, साम्यावस्था में वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा की गणना की गई।
🎯 Exam Tip: द्विध्रुव आघूर्ण, कार्य और स्थितिज ऊर्जा के सूत्रों को सही ढंग से लागू करें। कोण \( \theta \) के मान को डिग्री से रेडियन में बदलने की आवश्यकता नहीं होती यदि \( \sin \) या \( \cos \) फ़ंक्शन सीधे डिग्री में उपयोग किए जाते हैं, लेकिन कोणों के भौतिक अर्थ को समझें (\( 180^\circ \) का अर्थ है विपरीत दिशा में)।
Question 6. दो एक जैसे वैद्युत-द्विध्रुव AB तथा CD जिनके प्रत्येक के द्विध्रुव आघूर्ण P हैं तथा \( 120^\circ \) कोण पर चित्रानुसार रखे हैं। इस संयोजन का परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण ज्ञात कीजिए। यदि \( +x \) दिशा में एक समरूप वैद्युत क्षेत्र में आरोपित हो तब- संयोजन पर कार्य करने वाले बल-आघूर्ण का मान क्या होगा?
Answer: हल-
माना दोनों आवेशों के बीच की दूरी = \( 2a \)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो वैद्युत द्विध्रुवों AB और CD को दर्शाता है, जो एक दूसरे से \( 120^\circ \) के कोण पर रखे हैं। द्विध्रुव AB में आवेश \( -q_0 \) और \( +q \) हैं, जबकि द्विध्रुव CD में \( -q_0 \) और \( +q \) आवेश हैं।
A तथा B पर स्थित आवेश के कारण द्विध्रुव आघूर्ण
\( P_{AB} = q \times 2a = 2aq \)
C तथा D के लिए
\( P_{DC} = q \times 2a = 2aq \)
परिणामी द्विध्रुव-आघूर्ण
\( P_r = \sqrt{P_{AB}^2 + P_{DC}^2 + 2P_{AB} P_{DC} \cos 120^\circ} \)
\( \implies P_r = \sqrt{(2aq)^2 + (2aq)^2 + 2 (2aq) (2aq) \times (-\frac{1}{2})} \)
\( \implies P_r = \sqrt{4a^2q^2 + 4a^2q^2 - 4a^2q^2} \)
\( \implies P_r = \sqrt{4a^2q^2} \)
\( \implies P_r = 2aq \)
इसी प्रकार,
\( P_r = 2\sqrt{3}aq \)
अब, द्विध्रुव AB के कारण वैद्युत क्षेत्र
\( E_{AB} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2 \times 2qa \cos 0^\circ}{r^3} \)
\( \implies E_{AB} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{4q \times a}{r^3} \)
द्विध्रुव DC के कारण वैद्युत क्षेत्र
\( E_{DC} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2 \times 2qa \cos 120^\circ}{r^3} \)
\( \implies E_{DC} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2 \times 2q \times a \times (-\frac{1}{2})}{r^3} \)
\( \implies E_{DC} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{-2qxa}{r^3} \)
\( E_{\text{total}} = E_{AB} + E_{DC} \)
\( \implies E_{\text{total}} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{4qa}{r^3} + \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2qa}{r^3} \)
\( \implies E_{\text{total}} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{6aq}{r^3} \)
बल-आघूर्ण \( \tau = P \times E_{\text{total}} \)
\( \implies \tau = 2\sqrt{3}aq \times \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{6aq}{r^3} \)
\( \implies \tau = \frac{2\sqrt{3}}{4\pi\epsilon_0} \frac{6a^2q^2}{r^3} = \frac{12\sqrt{3}a^2q^2}{4\pi\epsilon_0 r^3} \)
In simple words: दो वैद्युत द्विध्रुवों को \( 120^\circ \) के कोण पर रखा गया है, और प्रत्येक का द्विध्रुव आघूर्ण P है। परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण की गणना वेक्टर योग विधि का उपयोग करके की जाती है। यदि इन द्विध्रुवों को एक समान वैद्युत क्षेत्र में रखा जाए, तो उन पर लगने वाले बल-आघूर्ण की गणना \( \tau = pE \sin \theta \) सूत्र का उपयोग करके की जाएगी, जहाँ \( p \) परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण है।
🎯 Exam Tip: परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण ज्ञात करने के लिए वेक्टर योग का नियम (त्रिभुज या समानांतर चतुर्भुज नियम) सही ढंग से लागू करें। बल-आघूर्ण की गणना करते समय परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण और वैद्युत क्षेत्र के बीच के कोण पर विशेष ध्यान दें।
Question 7. स्थिर वैद्युत में गौस की प्रमेय क्या है?
या
सिद्ध कीजिए कि किसी बन्द पृष्ठसे गुजरने वाला वैद्युत-फ्लक्स उस पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश q का \( 1/\epsilon_0 \) गुना होता है, जहाँ \( \epsilon_0 \) मुक्त आकाश (free space) की वैद्युतशीलता है।
या
गौस-प्रमेय लिखिए। सिद्ध कीजिए कि किसी बन्द पृष्ठ से गुजरने वाला नेट वैद्युत-फ्लक्स उस पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश q का \( 1/\epsilon_0 \) गुना होता है, जहाँ \( \epsilon_0 \) मुक्त आकाश की वैद्युतशीलता है।
या
वैद्युत-स्थैतिकी में गौस की प्रमेय लिखिए तथा उसको सिद्ध कीजिए।
या
स्थिर-विद्युतिकी (वैद्युत-स्थैतिकी) में गौस के नियम का उल्लेख कीजिए ।
Answer: उत्तर- गौस की प्रमेय (Gauss Theorem)- गौस की प्रमेय वैद्युत-क्षेत्र के कारण किसी बन्द पृष्ठ से निर्गत वैद्युत-फ्लक्स तथा उस पृष्ठ से परिबद्ध कुल वैद्युत आवेश के बीच सम्बन्ध व्यक्त करती है। इसके अनुसार- "किसी वैद्युत-क्षेत्र में स्थित बन्द पृष्ठ से निर्गत सम्पूर्ण वैद्युत-फ्लक्स का मान उस पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश का \( (1/\epsilon_0) \) गुना होता है।"
अर्थात् \( \Phi_E = \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = \frac{1}{\epsilon_0} (q) \)
जहाँ \( \epsilon_0 \) = वायु या निर्वात् की वैद्युतशीलता।
उपपत्ति (Proof) -
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक बंद पृष्ठ A को दर्शाता है जिसके भीतर बिंदु O पर एक बिंदु आवेश +q रखा है। पृष्ठ पर एक अति लघु क्षेत्रफल अवयव dA है, जिसकी बिंदु O से दूरी r है। वैद्युत क्षेत्र E और क्षेत्रफल सदिश dA दोनों एक ही दिशा में दिखाए गए हैं, जो बिंदु P पर उत्पन्न वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता को प्रदर्शित करता है।
इस लघु क्षेत्रफल dA को इस पर खींचे गये अभिलम्ब PN की दिशा में क्षेत्रीय वेक्टर \( d\vec{A} \) द्वारा प्रदर्शित किया गया है। बिन्दु P पर \( +q \) आवेश के कारण उत्पन्न वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r^2} \) ...(1)
की दिशा O से P की ओर होगी।
क्षेत्रफल \( d\vec{A} \) से निर्गत वैद्युत-फ्लक्स \( d\Phi_E = \vec{E} \cdot d\vec{A} \)
अथवा \( d\Phi_E = EdA \cos \theta \) ...(2)
जहाँ \( \theta = \vec{E} \) तथा \( d\vec{A} \) के बीच कोण।
समीकरण (1) से E का मान समीकरण (2) में रखने पर
\( d\Phi_E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r^2} dA \cos \theta = \frac{q}{4\pi\epsilon_0} \frac{dA \cos \theta}{r^2} \)
परन्तु \( \frac{dA \cos \theta}{r^2} \) = क्षेत्रफल \( d\vec{A} \) द्वारा बिन्दु O पर अन्तरित घन कोण = \( d\omega \) (माना)
∴ \( d\Phi_E = \frac{q}{4\pi\epsilon_0} d\omega \) ...(3)
अतः सम्पूर्ण बन्द पृष्ठ क्षेत्रफल A से अभिलम्बवत् निर्गत सम्पूर्ण वैद्युत-फ्लक्स
\( \Phi_E = \oint d\Phi_E = \oint \frac{q}{4\pi\epsilon_0} d\omega = \frac{q}{4\pi\epsilon_0} \oint d\omega \) ...(4)
परन्तु \( \oint d\omega \) = सम्पूर्ण बन्द पृष्ठ द्वारा बिन्दु O पर अन्तरित घन कोण
\( \implies \oint d\omega = 4\pi \) स्टेरेडियन
∴ \( \Phi_E = \frac{q}{4\pi\epsilon_0} \times 4\pi \) अथवा \( \Phi_E = \frac{1}{\epsilon_0} (q) \) ...(5)
यही गौस-प्रमेय का कथन है।
In simple words: गौस का नियम कहता है कि किसी भी बंद सतह से गुजरने वाला कुल वैद्युत फ्लक्स, उस सतह द्वारा घेरे गए कुल आवेश का \( 1/\epsilon_0 \) गुना होता है। यह प्रमेय वैद्युत क्षेत्र और आवेश के बीच एक मौलिक संबंध स्थापित करती है, और इसे कूलॉम के नियम से व्युत्पन्न किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: गौस प्रमेय का कथन सटीकता से लिखें और इसके गणितीय रूप को स्पष्ट करें। प्रमेय की उपपत्ति में क्षेत्रफल सदिश, घन कोण और समाकलन के चरणों को क्रमबद्ध तरीके से समझाएँ, और आरेख का सही उपयोग करें।
Question 8. गौस की प्रमेय से कूलॉम के नियम का निगमन कीजिए।
या
गौस-प्रमेय की सहायता से दो बिन्दु आवेशों के बीच कार्य करने वाले बल के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Answer: उत्तर- माना कोई विलगित बिन्दु आवेश \( +q \), वायु या निर्वात् में बिन्दु O पर रखा है। इससे \( r \) दूरी पर एक बिन्दु P है। इस बिन्दु से गुजरता हुआ \( q \) को परिबद्ध किये हुए एक गोलीय गौसियन-पृष्ठ खींचा गया है। इस बिन्दु P पर \( q \) के कारण वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता O से P की दिशा में पृष्ठ के लम्बवत् होगी । P के परितः किसी पृष्ठ अवयव के क्षेत्रफल \( d\vec{A} \) का क्षेत्रफल सदिश \( d\vec{A} \) भी \( \vec{E} \) की दिशा में होगा (चित्र 1.24)।
अतः सम्पूर्ण गौसियन पृष्ठ से होकर गुजरने वाला वैद्युत-फ्लक्स
\( \Phi_E = \oint d\Phi_E = \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = \oint EdA = E \oint dA = E \times 4\pi r^2 \)
परन्तु गौस-प्रमेय के अनुसार, \( \Phi_E = q/\epsilon_0 \)
अतः \( E \times 4\pi r^2 = \frac{q}{\epsilon_0} \)
या \( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r^2} \) ...(1)
यही बिन्दु आवेश \( q \) के कारण इससे \( r \) दूरी पर उत्पन्न वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक है जिसकी दिशा आवेश से दूर होगी।
यदि इस बिन्दु पर एक परीक्षण धनावेश \( q_0 \) रखें, तो \( q_0 \) पर आरोपित बल
\( F = q_0 E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q q_0}{r^2} \) ...(2)
यही कूलॉम का नियम है जो कि गौस-प्रमेय से व्युत्पन्न किया गया है। इस प्रकार, स्थिर विद्युतिकी में कूलॉम का नियम तथा गौस का नियम परस्पर तुल्य हैं। ये दो भौतिक नियम नहीं हैं, बल्कि एक ही नियम है जिसे विभिन्न रूपों में अभिव्यक्त किया गया है।
In simple words: गौस के नियम से कूलॉम के नियम को व्युत्पन्न करने के लिए, हम एक बिंदु आवेश को एक गोलीय गौसियन सतह के केंद्र में रखते हैं। गौस के नियम का उपयोग करके वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करते हैं। फिर, इस तीव्रता को एक परीक्षण आवेश पर लगने वाले बल के सूत्र में प्रतिस्थापित करके कूलॉम का नियम प्राप्त करते हैं, जो दो आवेशों के बीच बल को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: कूलॉम के नियम के निगमन में गौसियन पृष्ठ की कल्पना, समरूपता के आधार पर वैद्युत क्षेत्र की दिशा, और गौस के नियम का सटीक अनुप्रयोग महत्वपूर्ण है। अंतिम सूत्र में नियतांकों और दूरियों को सही ढंग से दर्शाएँ।
Question 9. गौस के नियम का उपयोग करके एक अनन्त लम्बाई के पतले, सीधे एकसमान आवेशित तार द्वारा उत्पन्न वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता के लिए एक व्यंजक का निगमन कीजिए।
या
वैद्युत-स्थैतिकी में गौस की प्रमेय बताइए। इसका उपयोग करके एकसमान आवेशित लम्बे तार के निकट वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए ।
या
स्थिर-विद्युतिकी (वैद्युत-स्थैतिकी) का गौस प्रमेय लिंखिए। इसकी सहायता से एक समान रूप से आवेशित अनन्त लम्बाई के सीधे तार के निकट वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
या
अनन्त लम्बाई के समान रूप से आवेशित सीधे तार के निकट वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक गौस के प्रमेय की सहायता से प्राप्त कीजिए।
Answer: उत्तर- गौस की प्रमेय-दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 7 का उत्तर देखिए। अनन्त लम्बाई के आवेशित तार के निकट वैद्युत-क्षेत्र की Y), तीव्रता-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक अनंत लंबाई के सीधे आवेशित चालक तार को दर्शाता है जिसका रैखिक आवेश घनत्व \( \lambda \) कूलॉम प्रति मीटर है। तार के चारों ओर एक बेलनाकार गौसियन पृष्ठ की कल्पना की गई है जिसकी त्रिज्या r और लंबाई l है। बिंदु P वक्र-पृष्ठ पर स्थित है, जहाँ वैद्युत क्षेत्र E और क्षेत्रफल सदिश dA एक ही दिशा में हैं, जबकि समतल पृष्ठों पर वे लंबवत हैं।
चित्र 1.25 में एक अनन्त लम्बाई का चालक तार प्रदर्शित है। जिसके आवेश का रेखीय घनत्व \( \lambda \) कूलॉम प्रति मीटर है। माना यह तार K परावैद्युतांक वाले माध्यम में रखा है। इसकी अक्ष से \( r \) दूरी पर एक बिन्दु P है जहाँ इस चालक तार के कारण वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है।
चित्र 1.25 में इस चालक तार के चारों ओर \( r \) त्रिज्या का एक ऐसा बेलन दर्शाया गया है जिसकी लम्बाई \( l \) है तथा प्रेक्षण बिन्दु P इसके वक्र-पृष्ठ पर है। इस बेलन की अक्ष तथा तार की अक्ष एक ही है। चूंकि तार समान रूप से आवेशित है, अतः इसकी अक्ष से समान दूरी पर स्थित प्रत्येक बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता के समान होगी तथा इसकी दिशा अक्ष के लम्बवत् बाहर की ओर होगी। अतः वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता की दिशी इस बेलन के अनुप्रस्थ काट के चित्र 1.25 समान्तर है। अतः इस बेलन के समतल पृष्ठों से गुजरने वाला वैद्युत-फ्लक्स शून्य होगा क्योंकि इसका क्षेत्रफल वेक्टर \( \vec{A} \), वेक्टर \( \vec{E} \) के लम्बवत् होगा, इसलिए वैद्युत-फ्लक्स
\( \Phi_{E1} = \vec{E} \cdot \vec{A} = EA \cos 90^\circ = 0 \)
बेलन के वक्र-पृष्ठ का क्षेत्रफल = \( 2\pi rl \)
अतः बेलन के वक्र-पृष्ठ से गुजरने वाला वैद्युत-फ्लक्स \( \Phi_{E2} = KE (2\pi rl) \) ...(1)
∴ बेलन से गुजरने वाला कुल वैद्युत-फ्लक्स
\( \Phi_E = \Phi_{E1} + \Phi_{E2} = 0 + KE (2\pi rl) \)
अर्थात् \( \Phi_E = 2\pi rl KE \)
इस बेलन के अन्दर परिबद्ध वैद्युत आवेश \( q' \)
= बेलन के अन्दर तार की लम्बाई \( \times \) एकांक लम्बाई आवेश = \( l \times \lambda \)
∴ गौस-प्रमेय के अनुसार बेलन से गुजरने वाला सम्पूर्ण वैद्युत-फ्लक्स
\( \Phi_E = \frac{1}{\epsilon_0} (q') \)
अथवा \( \Phi_E = \frac{1}{\epsilon_0} (l \times \lambda) \) ...(2)
समी० (1) तथा समी० (2) से, \( K E \times 2\pi rl = \frac{1}{\epsilon_0} (l\lambda) \)
\( \implies E = \frac{1}{2\pi\epsilon_0 K} \frac{\lambda}{r} \)
In simple words: गौस के नियम का उपयोग करके अनंत लंबाई के आवेशित तार के कारण वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करने के लिए, हम तार के चारों ओर एक बेलनाकार गौसियन सतह की कल्पना करते हैं। इस सतह के माध्यम से कुल वैद्युत फ्लक्स की गणना की जाती है और उसे गौस के नियम के अनुसार घेरे गए आवेश से संबंधित किया जाता है, जिससे वैद्युत क्षेत्र का सूत्र प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: अनंत लम्बाई के तार के लिए गौसियन पृष्ठ के रूप में बेलन का चयन और उसके वक्र तथा समतल पृष्ठों से फ्लक्स की गणना को स्पष्ट करें। वैद्युत क्षेत्र की दिशा और आवेश घनत्व के बीच संबंध को सही ढंग से दर्शाना सुनिश्चित करें।
Question 10. गौस के नियम का उपयोग करके एक समान आवेशित अनन्त समतल चादर के कारण विद्युत क्षेत्र ज्ञात कीजिए ।
या
गौस के नियम का प्रयोग करते हुए एक असीमित (अनन्त) विस्तार वाली आवेशित समतल चादर के निकट वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए।
या
वैद्युत स्थैतिकी में गौस-नियम का उल्लेख कीजिए। इस नियम का उपयोग करके अनन्त विस्तार की समतल आवेशित अचालक प्लेट के निकट वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए।
या
वैद्यत स्थैतिकी में गौस की प्रमेय का उल्लेख कीजिए। इसकी सहायता से अनन्त विस्तार की समतल आवेशित प्लेट के निकट वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए ।
Answer: उत्तर- गौस की प्रमेय (Gauss' Theorem)- दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 7 में देखिए ।
अनन्त विस्तार की समतल आवेशित प्लेट के कारण किसी निकट बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता -
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक अनंत विस्तार की धनावेशित समतल प्लेट को दर्शाता है। प्लेट के आर-पार एक बेलनाकार गौसियन पृष्ठ की कल्पना की गई है। इसके दो समतल सिरे P और P' हैं, और वैद्युत क्षेत्र E क्षेत्रफल सदिश dA के समानांतर बाहर की ओर निर्देशित है।
चित्र 1.26 में BCDG एक अनन्त विस्तार की आवेशित समतल प्लेट है, जिसकी मोटाई नगण्य है। इस प्रकार की प्लेट के दोनों पृष्ठों पर समान आवेश होता है। माना इसके प्रत्येक पृष्ठ पर आवेश का पृष्ठ घनत्व \( \sigma \) है।
यदि प्लेट धनावेशित है तो इसके कारण वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता प्लेट के लम्बवत् बाहर की ओर होती है। और यदि प्लेट ऋणावेशित है तो तीव्रता प्लेट के लम्बवत् अन्दर की ओर होती है। चित्र 1.26 में धनावेशित प्लेट दिखायी गयी है।
माना इस प्लेट के निकट बिन्दु P पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है। इसके लिए इसे प्लेट के आर-पार एक बेलनाकार गौसियन पृष्ठ की कल्पना करते हैं जिसकी अनुप्रस्थ काट P के परितः। क्षेत्रफल अवयव \( d\vec{A} \) है जो सीट (प्लेट) के समान्तर है। बेलन के P तथा P' सिरे प्लेट से समान दूरी पर हैं। सिरे P पर \( d\vec{A} \) के प्रत्येक बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता (E) समान होगी। यह वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता पृष्ठ के लम्बवत् बाहर की ओर होगी। क्षेत्रफल अवयव \( d\vec{A} \) को क्षेत्रफल सदिश \( d\vec{A} \) से प्रदर्शित किया गया है जो \( \vec{E} \) की ही दिशा में होगा। अतः सिरे P पर इस पृष्ठ से गुजरने वाला वैद्युत-फ्लक्स-
\( \Phi_p = \vec{E} \cdot d\vec{A} = EdA \cos 0^\circ = EdA \)
इसी प्रकार गौसियन पृष्ठ के सिरे P' से गुजरने वाला वैद्युत-फ्लक्स \( \Phi_{p'} = EdA \)
गौसियन पृष्ठ के वक्र तल पर स्थित प्रत्येक बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता तथा बाहर की ओर खींचे गये अभिलम्ब परस्पर लम्बवत् होंगे,
अर्थात् \( \theta = 90^\circ \) अथवा \( \cos 90^\circ = 0 \)
इसलिए \( \vec{E} \cdot d\vec{A} = 0 \)
अर्थात् गौसियन पृष्ठ (Gaussian surface) के वक्र तल से गुजरने वाला वैद्युत-फ्लक्स शून्य होगा।
अतः बन्द पृष्ठ (बेलनाकार गौसियन पृष्ठ) से गुजरने वाला कुल वैद्युत-फ्लक्स
\( \Phi_E = \Phi_p + \Phi_{p'} + \text{वक्र तल से गुजरने वाला फ्लक्स} \)
\( \implies \Phi_E = EdA + EdA + 0 = 2EdA \)
परन्तु बन्द पृष्ठ के अन्दर समतल प्लेट का घिरा क्षेत्रफल = \( dA \)
इस पृष्ठ पर उपस्थित आवेश \( q = \sigma \times dA \) (जहाँ \( q = \sigma \cdot dA \))
परन्तु गौसियन प्रमेय से, \( \Phi_E = \frac{q}{\epsilon_0} \)
\( \implies \Phi_E = \frac{\sigma dA}{\epsilon_0} \)
अर्थात् \( 2EdA = \frac{\sigma dA}{\epsilon_0} \)
अथवा \( E = \frac{\sigma}{2\epsilon_0} \)
In simple words: गौस के नियम का उपयोग करके अनंत समतल आवेशित चादर के कारण वैद्युत क्षेत्र ज्ञात करने के लिए, हम चादर के आर-पार एक बेलनाकार गौसियन सतह की कल्पना करते हैं। फ्लक्स की गणना बेलन के समतल और वक्र पृष्ठों के लिए की जाती है, और फिर गौस के नियम का उपयोग करके वैद्युत क्षेत्र का सूत्र \( E = \frac{\sigma}{2\epsilon_0} \) प्राप्त किया जाता है, जहाँ \( \sigma \) आवेश का पृष्ठ घनत्व है।
🎯 Exam Tip: अनंत समतल चादर के लिए बेलनाकार गौसियन पृष्ठ की कल्पना, वैद्युत क्षेत्र की दिशा का निर्धारण (दोनों सिरों पर और वक्र पृष्ठ पर), और गौस के नियम का सही अनुप्रयोग महत्वपूर्ण है। सूत्र की व्युत्पत्ति में चादर के आवेश घनत्व को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।
Question 11. गौस प्रमेय की सहायता से अनन्त विस्तार की समतल आवेशित चालक प्लेट के कारण वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता के सूत्र का निगमन कीजिए।
Answer: उत्तर- माना अनन्त विस्तार एवं परिमित लघु मोटाई की एक धन-आवेशित 'समतल चालक प्लेट निर्वात् (अथवा वायु) में स्थित है (चित्र 1.27)। चूँकि प्लेट एक 'समतल चालक' है, अतः प्लेट को दिया गया सम्पूर्ण आवेश प्लेट के बाह्य पृष्ठों 1 व 2 पर एकसमान रूप से वितरित हो जाता है। प्लेट के भीतर वैद्युत क्षेत्र सर्वत्र शून्य होता है तथा प्लेट के पृष्ठों पर एवं समीपवर्ती बाह्य बिन्दुओं पर वैद्युत क्षेत्र प्लेट के पृष्ठों के लम्बवत् होता है। माना कि प्लेट पर आवेश की पृष्ठ-घनत्व \( \sigma \) है।
माना कि चालक प्लेट के एक ओर ठीक बाहर एक बिन्दु P है जिस पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है। चूँकि प्लेट के भीतर कोई आवेश नहीं है, अतः इस प्लेट को आवेश की दो समतल चादरों 1 व 2, के तुल्य माना जा सकता है। बिन्दु P पर चादर 1 के कारण वैद्युत-क्षेत्र \( E_1 \) (माना) की तीव्रता
\( E_1 = \frac{\sigma}{2\epsilon_0} \) (चादर 1 से परे) (गौस प्रमेय द्वारा प्राप्त)
इसी प्रकार, बिन्दु P पर चादर 2 के कारण वैद्युत क्षेत्र \( E_2 \) (माना) की तीव्रता
\( E_2 = \frac{\sigma}{2\epsilon_0} \) (चादर 2 से परे)
चूँकि \( E_1 \) व \( E_2 \) एक ही दिशा में हैं, अतः बिन्दु P पर दोनों चादरों के कारण परिणामी तीव्रता
\( \vec{E} = \vec{E_1} + \vec{E_2} \)
\( \implies E = E_1 + E_2 = \frac{\sigma}{2\epsilon_0} + \frac{\sigma}{2\epsilon_0} \)
अथवा \( E = \frac{\sigma}{\epsilon_0} \)
धन-आवेशित चालक प्लेट के कारण वैद्युत क्षेत्र की दिशा प्लेट के लम्बवत् तथा प्लेट से परे की ओर को दिष्ट है। यदि प्लेट ऋण-आवेशित हो तब क्षेत्र की दिशा प्लेट के लम्बवत् तथा प्लेट की ओर को दिष्ट होगी। हमने उपरोक्त सूत्र एक समतल आवेशित चालक के लिए प्राप्त किया है। वास्तव में यह किसी भी आकृति' के चालक के लिए सत्य है। इस सूत्र से स्पष्ट है कि अनन्त विस्तार के आवेशित चालक के 'निकट' किसी बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता चालक के क्षेत्रफल अथवा चालक से इस बिन्दु की दूरी पर निर्भर नहीं करती। इसका अर्थ है कि चालक के 'निकट' सभी बिन्दुओं पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता समान होती है।
In simple words: गौस के प्रमेय का उपयोग करके एक अनंत आवेशित चालक प्लेट के कारण वैद्युत क्षेत्र ज्ञात करने के लिए, हम प्लेट को दो आवेशित समतल चादरों के रूप में मानते हैं। प्रत्येक चादर के कारण वैद्युत क्षेत्र की गणना की जाती है। चूंकि दोनों क्षेत्र एक ही दिशा में होते हैं, इसलिए कुल वैद्युत क्षेत्र उन दोनों के योग के बराबर होता है, जिससे \( E = \frac{\sigma}{\epsilon_0} \) का सूत्र प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: चालक प्लेट को दो समतल चादरों के रूप में मानने का तर्क स्पष्ट करें। प्रत्येक चादर के कारण वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता और उनकी दिशा का सही विश्लेषण करें। परिणामी वैद्युत क्षेत्र ज्ञात करने के लिए वेक्टर योग का सही अनुप्रयोग सुनिश्चित करें।
UP Board Solutions For Class 12 Physics Chapter 1 Electric Charges And Fields
Exercise 13(A)
Question 11.
यदि किसी 8 सेमी भुजा वाले एक घन के केन्द्र पर 1 कूलॉम आवेश रखा जाए तो घन के किसी फलक से बाहर आने वाले फ्लक्स की गणना कीजिए।
Answer:
हल- घन के पृष्ठ से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स \( \Phi_E = \frac{q}{\epsilon_0} \)
अतः घन का कुल पृष्ठ क्षेत्रफल उसके एक फलक के क्षेत्रफल का 6 गुना है।
अतः घन के एक फलक से बद्ध फ्लक्स = \( \frac{1}{6} \Phi_E = \frac{q}{6\epsilon_0} \)
\( = \frac{1}{6 \times 8.85 \times 10^{-12}} \)
\( = 1.88 \times 10^{-10} \) न्यूटन-मी\(^2\)/कूलॉम
In simple words: According to Gauss's law, the total electric flux through a closed surface is \( \frac{q}{\epsilon_0} \). For a cube with a charge at its center, the flux passes equally through all 6 faces. Therefore, the flux through one face is one-sixth of the total flux.
🎯 Exam Tip: Remember Gauss's law for calculating flux through closed surfaces, especially for symmetric shapes like cubes. Understanding how the charge's position affects flux distribution is crucial.
Question 27.
एक वैद्युत द्विध्रुव \( 1.0 \times 10^{-6} \) कूलॉम परिमाण तथा विपरीत प्रकृति के दो वैद्युत आवेशों से बना है। इन आवेशों के बीच की दूरी 2.0 सेमी है। इस द्विध्रुव को \( 1.0 \times 10^5 \) न्यूटन/कूलॉम की बाह्य वैद्युत-क्षेत्र तीव्रता में रखा गया है। द्विध्रुव पर अधिकतम बल-आघूर्ण का मान निकालिए।
Answer:
हल-
\( \tau_{max} = pE = (q \times 2l) \times E \)
\( = (1.0 \times 10^{-6} \times 2.0 \times 10^{-2}) (1.0 \times 10^5) \)
\( = 2.0 \times 10^{-3} \) न्यूटन-मीटर
In simple words: The maximum torque on an electric dipole in an external electric field is the product of the dipole moment (charge times separation) and the electric field strength. Here, we calculate it using the given charge, distance, and field strength.
🎯 Exam Tip: The maximum torque occurs when the dipole is perpendicular to the electric field (sin \( \theta \) = 1). Be careful with units and conversions (cm to m, µC to C).
Question 28.
\( 1.0 \mu C \) के दो बराबर एवं विपरीत प्रकार के आवेश 2.0 मिमी दूर रखे हैं। इस विद्युत द्विध्रुव का द्विध्रुव आघूर्ण ज्ञात कीजिए।
Answer:
उत्तर-
दिया है, \( q = 1.0 \mu C = 1.0 \times 10^{-6} C \),
\( l = 2.0 \) मिमी \( = 2 \times 10^{-3} \) मी
विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण, \( p = q . 2l = 1.0 \times 10^{-6} \times 2 \times 2 \times 10^{-3} = 4 \times 10^{-9} \) कूलॉम-मी
In simple words: An electric dipole moment is calculated by multiplying the magnitude of one of the charges by the distance separating the two charges. Make sure to convert all units to standard SI units before calculating.
🎯 Exam Tip: Remember the formula \( p = q \times 2l \). Pay close attention to unit conversions (micrometers to meters) to avoid common calculation errors.
Question 29.
स्थिर वैद्युतिकी में गौस की प्रमेय को गणितीय रूप में लिखिए तथा प्रयुक्त संकेतों के अर्थ बताइए ।
Answer:
उत्तर-
\( \int_A \vec{E} \cdot d\vec{A} = \frac{1}{\epsilon_0} (q) \)
अथवा
\( \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = \frac{1}{\epsilon_0} (q) \)
जहाँ, \( \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = E \) तीव्रता के वैद्युत-क्षेत्र में किसी बन्द पृष्ठ से गुजरने वाला कुल वैद्युत-फ्लक्स \( \Phi \); \( q = \) बन्द पृष्ठ द्वारा परिबद्ध नेट आवेश तथा \( \epsilon_0 = \) वायु या निर्वात् की वैद्युतशीलता।
In simple words: Gauss's theorem states that the total electric flux through any closed surface is proportional to the total electric charge enclosed within that surface. The proportionality constant is \( 1/\epsilon_0 \).
🎯 Exam Tip: Clearly define all symbols used in the mathematical expression of Gauss's law. Understanding the concepts of electric field, area vector, and permittivity of free space is vital for a complete answer.
Question 30.
एक R त्रिज्या वाले Q आवेश से आवेशित धातु के खोखले गोले के केन्द्र से \( r > R \) दूरी पर वैद्युत विभव का सूत्र लिखिए।
Answer:
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1.
कूलॉम का वैद्युत बल सम्बन्धी नियम लिखिए ।
या
दो बिन्दु आवेशों के बीच लगने वाले आकर्षण अथवा प्रतिकर्षण बल के लिए कूलॉम का सूत्र लिखिए।
Answer:
उत्तर-
कूलॉम का नियम-1785 ई० में फ्रांसीसी वैज्ञानिक कूलॉम ने दो आवेशों के बीच कार्य करने वाले बल के सम्बन्ध में एक नियम दिया, जिसे कूलॉम का नियम कहते हैं। इस नियम के अनुसार-"दो स्थिर बिन्दु आवेशों के मध्य लगने वाला आकर्षण या प्रतिकर्षण बल, दोनों आवेशों की मात्राओं के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।" इस बल की दिशा दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश होती है। यदि दो बिन्दु आवेश \( q_1 \) व \( q_2 \) एक-दूसरे से \( r \) दूरी पर स्थित हों, तो कूलॉम के नियम से उनके बीच लगने वाला बल
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो बिंदु आवेशों \(q_1\) और \(q_2\) को एक-दूसरे से \(r\) दूरी पर दर्शाता है, जो कूलॉम के नियम को समझने के लिए एक सरल विन्यास प्रस्तुत करता है।
अतः
\( F \propto q_1 q_2 \) तथा \( F \propto 1/r^2 \)
या \( F = k \frac{q_1 q_2}{r^2} \)
जहाँ \( k \) अनुक्रमानुपाती नियतांक है। प्रयोगों द्वारा \( k \) का मान \( 9.0 \times 10^9 \) न्यूटन-मी\(^2\)/कूलॉम\(^2 \) प्राप्त किया गया। अतः
\( F = 9.0 \times 10^9 \frac{q_1 q_2}{r^2} \) न्यूटन ...(1)
वायु अथवा निर्वात् में \( k = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \) भी लिखा जाता है।
अतः \( F = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r^2} \) न्यूटन ...(2)
यहाँ \( \epsilon_0 \) (एप्साइलन जीरो) को वायु या निर्वात् की वैद्युतशीलता कहते हैं, जिसका मान \( 8.85 \times 10^{-12} \) कूलॉम\(^2\)/न्यूटन-मीटर\(^2 \) होता है।
यदि दोनों आवेशों के बीच माध्यम वायु (अथवा निर्वात्) के स्थान पर अन्य कोई परावैद्युत माध्यम (तेल, काँच, अभ्रक आदि) हो, तो
\( F = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{q_1 q_2}{r^2} \) न्यूटन ...(3)
जहाँ \( K \) एक विमाहीन नियतांक है जिसे उस पदार्थ (परावैद्युत माध्यम) का परावैद्युतांक (dielectric constant) अथवा विशिष्ट परावैद्युतता कहते हैं। निर्वात् अथवा वायु के लिए \( K \) का मान 1 होता है। उपर्युक्त सूत्र में \( \epsilon_0 K \) के स्थान पर \( \epsilon \) केवल है भी लिखते हैं तथा \( \epsilon \) को परावैद्युत माध्यम की वैद्युतशीलता (permittivity) कहते हैं।
In simple words: Coulomb's Law states that the electrostatic force between two point charges is directly proportional to the product of their magnitudes and inversely proportional to the square of the distance between them. This force is attractive for opposite charges and repulsive for like charges.
🎯 Exam Tip: Be sure to write the full statement of the law, including both the magnitude and direction of the force. Also, mention the constant \( k \) or \( \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \) and its value, along with the significance of the dielectric constant \( K \) for different media.
Question 2.
आसुत जल की 64 बूंदें, प्रत्येक की त्रिज्या 0.1 मिमी तथा आवेश \( (2/3) \times 10^{-12} \) कूलॉम है, मिलकर एक बड़ी बूंद बनाती हैं। बड़ी बूंद को विभव ज्ञात कीजिए ।
Answer:
हल- छोटी बूँद की त्रिज्या \( r = 0.1 \) मिमी \( = 10^{-4} \) मी;
माना बड़ी बूँद की त्रिज्या \( = R \) मीटर
1 बड़ी बूँद का आयतन \( = 64 \) छोटी बूँदों का आयतन
\( \frac{4}{3} \pi R^3 = 64 \times (\frac{4}{3})\pi r^3 \)
\( R = (64 r^3)^{1/3} = (4^3 r^3)^{1/3} = 4r = 4 \times 10^{-4} \) मीटर
बड़ी बूँद पर आवेश \( Q = 64 \times \) 1 छोटी बूँद पर आवेश
\( = 64 \times (2/3) \times 10^{-12} \) कूलॉम
बड़ी बूँद का विभव \( V = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{Q}{R} \)
\( = 9.0 \times 10^9 \times \frac{64 \times (2/3) \times 10^{-12}}{4 \times 10^{-4}} \)
\( = 960 \) वोल्ट
In simple words: When many small droplets combine to form a larger one, the total volume and charge are conserved. The radius of the large drop can be found from volume conservation, and the total charge is the sum of individual charges. Then, the potential of the large drop is calculated using the formula \( V = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{Q}{R} \).
🎯 Exam Tip: This problem involves conservation of volume and charge. Ensure correct calculation of the new radius and total charge. Precision in powers of 10 and unit conversions is critical for the final potential value.
Question 3.
दो बिन्दु आवेश \( +5 \times 10^{-19} \) कूलॉम व \( +10 \times 10^{-19} \) कूलॉम 1.0 मीटर की दूरी पर पृथकतः स्थित हैं। दोनों आवेशों को जोड़ने वाली रेखा के किस बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता शून्य होगी?
Answer:
हल-
माना कि दिये गये बिन्दु आवेश बिन्दुओं A व B पर स्थित हैं तथा उनके बीच बिन्दु O पर वैद्युत क्षेत्र शून्य है। माना कि बिन्दु O की बिन्दु A से दूरी \( x \) मीटर है; अतः बिन्दु O की बिन्दु B से दूरी \( (1 - x) \) मीटर होगी । बिन्दु O पर, बिन्दु A पर स्थित आवेशे के कारण वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
\( E_1 = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{5 \times 10^{-19}}{x^2} \) (AO दिशा में)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो धनात्मक बिंदु आवेशों, \(+5 \times 10^{-19} C\) और \(+10 \times 10^{-19} C\), को 1 मीटर की दूरी पर A और B बिंदुओं पर दर्शाता है। बिंदु O, जो A से \(x\) दूरी पर है, वह बिंदु है जहाँ दोनों आवेशों के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रताएं \(E_1\) और \(E_2\) परिमाण में बराबर और दिशा में विपरीत होकर एक-दूसरे को निरस्त कर देती हैं।
तथा बिन्दु B पर स्थित आवेश के कारण वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
\( E_2 = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{10 \times 10^{-19}}{(1 - x)^2} \) (BO दिशा में)
\( E_1 \) व \( E_2 \) परस्पर विपरीत दिष्ट हैं। चूँकि बिन्दु O पर परिणामी वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता शून्य है, अतः
\( E_1 = E_2 \)
\( \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{5 \times 10^{-19}}{x^2} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{10 \times 10^{-19}}{(1 - x)^2} \)
\( \frac{5}{x^2} = \frac{10}{(1 - x)^2} \)
\( \frac{1}{x^2} = \frac{2}{(1 - x)^2} \)
\( (1 - x)^2 = 2x^2 \)
\( 1 + x^2 - 2x = 2x^2 \)
\( x^2 + 2x - 1 = 0 \)
\( x = \frac{-2 \pm \sqrt{4 - 4(1)(-1)}}{2} = \frac{-2 \pm \sqrt{8}}{2} \)
\( x = \frac{-2 \pm 2\sqrt{2}}{2} = -1 \pm \sqrt{2} \)
\( x = -1 \pm 1.414 \)
\( x = +0.414 \) या \( -2.414 \)
\( x \) का ऋणात्मक मान सम्भव नहीं है, क्योंकि बिन्दु O बिन्दुओं A व B के बीच में है। अतः पहले आवेश से 0.414 मीटर या 41.4 सेमी की दूरी पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता शून्य होगी।
In simple words: To find where the electric field is zero between two charges, we set the magnitudes of the electric fields due to each charge equal and solve for the distance. Since the charges are both positive, the zero-field point must be between them.
🎯 Exam Tip: Always consider the signs of charges when determining the direction of the electric field and identifying regions where it might be zero. For two like charges, the null point will be between them; for unlike charges, it will be outside, closer to the smaller magnitude charge.
Question 4.
धातु के एक पतले गोलीय कोश की त्रिज्या 0.25 मीटर है तथा इस पर 0.2 µC आवेश है। इसके कारण एक बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए जबकि बिन्दु
(i) कोश के भीतर,
(ii) कोश के ठीक बाहर तथा
(iii) कोश के केन्द्र से 3.0 मीटर की दूरी पर है।
Answer:
हल-
(i) आवेशित कोश के भीतर किसी भी बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता शून्य है।
(ii) बाह्य बिन्दुओं के लिए कोश इस प्रकार व्यवहार करता है जैसे कि सम्पूर्ण आवेश इसके केन्द्र पर रखा हो। अतः यदि कोश की त्रिज्या R है, तब कोश के ठीक बाहर किसी बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{R^2} \)
दिया है-
\( q = 0.2 \mu C = 2 \times 10^{-6} \) कूलॉम तथा \( R = 0.25 \) मी
\( E = 9 \times 10^9 \times \frac{0.2 \times 10^{-6}}{(0.25)^2} \)
\( = 2.88 \times 10^4 \) न्यूटन/कूलॉम
(iii) आवेशित कोश के बाहर, कोश के केन्द्र से दूरी \( r (> R) \) पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r^2} = 9 \times 10^9 \times \frac{0.2 \times 10^{-6}}{(3.0)^2} \)
\( = 200 \) न्यूटन/कूलॉम
In simple words: For a charged spherical shell, the electric field is zero inside, maximum at the surface, and outside it behaves as if all the charge is concentrated at its center. This is calculated using Coulomb's law with the appropriate distance.
🎯 Exam Tip: Remember the three key regions for electric field calculations in a spherical shell: inside (zero field), at the surface (maximum field), and outside (field decreases with square of distance from center). Be precise with units and powers of ten.
Question 5.
वैद्युत-फ्लक्स से क्या तात्पर्य है? इसे आवश्यक सूत्र देते हुए समझाइए ।
या
वैद्युत-फ्लक्स की परिभाषा तथा मात्रक लिखिए।
Answer:
उत्तर- वैद्युत-फ्लक्स (Electric Flux) - "वैद्युत क्षेत्र में स्थित किसी क्षेत्रफल से अभिलम्बवत् दिशा में गुजरने वाली वैद्युत बल-रेखाओं की संख्या को वैद्युत-फ्लक्स कहते हैं।" इसका मात्रक वोल्ट-मीटर है।
किसी निर्दिष्ट स्थिति पर वैद्युत बल-रेखाओं के लम्बवत् एकांक क्षेत्रफल से गुजरने वाली वैद्युत बल-रेखाओं की संख्या वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता \( \vec{E} \) को प्रदर्शित करती है। अतः किसी क्षेत्रफल अल्पांश \( d\vec{A} \) से गुजरने वाली वैद्युत बल-रेखाओं की संख्या \( \vec{E} \cdot d\vec{A} \) होती है जो इस अल्पांश से गुजरने वाला वैद्युत-फ्लक्स ही होता है।
किसी पृष्ठ के अल्पांश क्षेत्रफल \( d\vec{A} \) से गुजरने वाले वैद्युत-फ्लक्स \( d\Phi_E \) का मान इस क्षेत्रफल अल्पांश की स्थिति पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता \( \vec{E} \) तथा क्षेत्रफल सदिश \( d\vec{A} \) के अदिश गुणनफल के तुल्य होता है।
अतः \( d\Phi_E = \vec{E} \cdot d\vec{A} \)
सम्पूर्ण पृष्ठ के लिए वैद्युत-फ्लक्स का मान \( \Phi_E \) पृष्ठ के समस्त अल्पांशों से वैद्युत-फ्लक्स के मानों का योगफल होगा।
यदि अल्पांश अति-अल्प हो तो योगफल को समाकल से प्रतिस्थापित किया जा सकता है।
अतः \( \Phi_E = \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} \)
चिह्न \( \oint \) सम्पूर्ण पृष्ठ के लिए समाकलन का चिह्न है। इसकको पृष्ठ समाकल (surface integral) कहते हैं।
यदि वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता \( \vec{E} \) तथा क्षेत्रफल अल्पांश \( d\vec{A} \) के बीच कोण \( \theta \) हो, तो
\( \vec{E} \cdot d\vec{A} = EdA \cos \theta \)
अथवा \( \Phi_E = E \cos \theta \int dA \)
अथवा \( \Phi_E = E \cos \theta \times A \) जहाँ, \( \int dA = A \) (सम्पूर्ण क्षेत्रफल)
अतः \( \Phi_E = EA \cos \theta \)
यदि किसी बन्द सतह (वह पृष्ठ जिसके अन्दर आयतन परिबद्ध हो) से वैद्युत बल-रेखाएँ इससे बाहर की ओर निकलती हैं तो वैद्युत-फ्लक्स का चिह्न धनात्मक होता है। इसके विपरीत यदि बल-रेखाएँ बन्द पृष्ठ (सतह) के अन्दर की ओर जाती हैं तो वैद्युत-फ्लक्स का चिह्न ऋणात्मक होता है।
In simple words: Electric flux is a measure of the total number of electric field lines passing normally through a given area. It is represented by the dot product of the electric field and the area vector, and its SI unit is Volt-meter.
🎯 Exam Tip: Understand that electric flux is a scalar quantity. Its sign indicates whether field lines are entering or leaving the surface. The formula \( \Phi_E = \vec{E} \cdot \vec{A} = EA \cos \theta \) is fundamental.
Question 6.
एक समरूप वैद्युत-क्षेत्र \( \vec{E} = (5 \times 10^3) \hat{i} \) न्यूटन/कूलॉम में एक 10 सेमी भुजा वाला वर्गाकार समतल पृष्ठ yz- तल के समान्तर स्थित है। पृष्ठ से कितना वैद्युत फ्लक्स उत्पन्न होगा? यदि पृष्ठ का तल x-अक्ष की दिशा से 30° कोण बनाता है तब कितना वैद्युत फ्लक्स होगा?
Answer:
हल- वैद्युत-क्षेत्र \( \vec{E} = (5 \times 10^3) \hat{i} \) न्यूटन/कूलॉम
X-दिशा में वैद्युत फ्लक्स \( \Phi_E = \vec{E} \cdot \vec{S} \)
क्षेत्रफल का परिमाण \( = 10 \) सेमी \( \times 10 \) सेमी \( = 100 \) सेमी\(^2 \)
\( = 100 \times 10^{-4} \) मी\(^2 = 1 \times 10^{-2} \) मी\(^2 \)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एकसमान विद्युत क्षेत्र \(E\) में स्थित एक वर्गाकार पृष्ठ को दर्शाता है। (a) में, पृष्ठ का तल yz-समतल के समानांतर है, इसलिए इसका अभिलंब x-अक्ष की दिशा में है, जिससे क्षेत्र \(E\) और अभिलंब के बीच का कोण \(0^\circ\) है। (b) में, पृष्ठ का अभिलंब x-अक्ष से \(60^\circ\) का कोण बनाता है, जिससे फ्लक्स की गणना में \( \cos 60^\circ \) कारक का उपयोग होता है।
(i) जब वर्ग का तल yz-तल के समान्तर है, तो तल पर अभिलम्ब x-दिशा में होगा
तब वैद्युत क्षेत्र तथा तल के अभिलम्ब के बीच बना कोण \( = 0^\circ \)
वैद्युत फ्लक्स \( \Phi_E = ES \cos 0^\circ \)
\( = 5 \times 10^3 \times 1 \times 10^{-2} \times \cos 0^\circ \)
\( = 50 \) न्यूटन-मी\(^2\)-कूलॉम
(ii) उस स्थिति में जब \( \theta = 30^\circ \)
तब वैद्युत फ्लक्स, \( \Phi_E = ES \cos 30^\circ \)
\( = 5 \times 10^3 \times 1 \times 10^{-2} \times \cos 30^\circ \)
\( = 5 \times 10 \times \frac{\sqrt{3}}{2} \) [\( \because \cos 30^\circ = \frac{\sqrt{3}}{2} \)]
\( = 25\sqrt{3} \) न्यूटन-मी\(^2\)/कूलॉम
In simple words: Electric flux is calculated by taking the dot product of the electric field vector and the area vector. If the surface is parallel to the yz-plane, its area vector is along the x-axis, making an angle of \(0^\circ\) with the electric field. If the area vector is tilted by \(30^\circ\), the cosine of \(30^\circ\) is used.
🎯 Exam Tip: The key to solving this problem is correctly identifying the angle \( \theta \) between the electric field vector and the area vector (which is perpendicular to the surface). Remember to convert all units to SI (cm to m).
Question 7.
एक खोखले बेलन के भीतर \( q \) कूलॉम आवेश स्थित है। यदि बेलन के वक्रीय पृष्ठ से \( \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} \) वोल्ट-मीटर वैद्युत फ्लक्स सम्बन्धित हो तब बेलन के किसी एक समतल पृष्ठ पर कितना वैद्युत फ्लक्स होगा?
Answer:
हल- दिया है, आवेश \( = q \), फ्लक्स \( = \Phi \)
बेलनाकार गौसियन पृष्ठ से होकर जाने वाला कुल फ्लक्स \( = \oint_S \vec{E} \cdot d\vec{S} \)
\( = \int_{left} \vec{E} \cdot d\vec{S} + \int_{curved} \vec{E} \cdot d\vec{S} + \int_{right} \vec{E} \cdot d\vec{S} \)
बायाँ समतल वक्राकार पृष्ठ दायाँ समतल
कुल फ्लक्स \( = \int_{left} \vec{E} \cdot d\vec{S} + \int_{right} \vec{E} \cdot d\vec{S} + \int_{curved} \vec{E} \cdot d\vec{S} \)
तथा,
कुल फ्लक्स \( = \Phi_{left} + \Phi_{right} + \Phi_{curved} \)
यदि \( \Phi_{curved} \) वक्रीय पृष्ठ से सम्बंधित फ्लक्स है।
गौस के प्रमेय से, कुल फ्लक्स \( \Phi = \frac{q}{\epsilon_0} \)
माना एक समतल पृष्ठ से फ्लक्स \( \Phi_f \), तब दोनों समतल पृष्ठों से \( 2\Phi_f \).
तो, \( \frac{q}{\epsilon_0} = 2\Phi_f + \Phi_{curved} \)
\( \Phi_f = \frac{1}{2} (\frac{q}{\epsilon_0} - \Phi_{curved}) \)
In simple words: According to Gauss's law, the total flux through a closed cylindrical surface enclosing a charge is \( q/\epsilon_0 \). This total flux is distributed among its curved surface and two flat end surfaces. If the flux through the curved surface is known, the flux through one flat surface can be found by subtracting the curved surface flux from the total and dividing by two.
🎯 Exam Tip: For problems involving Gauss's law, remember that total flux through a closed surface is \( q/\epsilon_0 \). When a cylinder is involved, the total flux is the sum of flux through the curved surface and the two flat ends. Symmetry is key here.
Question 1.
किसी वैद्युत-द्विध्रुव के कारण अक्षीय स्थिति में किसी बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
या
वैद्युत द्विध्रुव के कारण अक्षीय स्थिति में किसी बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता के सूत्र का निगमन कीजिए।
Answer:
उत्तर-
अक्षीय स्थिति में वैद्युत- क्षेत्र की तीव्रता माना कि एक वैद्युत-द्विध्रुव AB, जिसमें \( (+q) \) व \( (-q) \) कूलॉम के आवेश एक-दूसरे से \( 2l \) मीटर की दूरी पर स्थित हैं, किसी ऐसे माध्यम में रखा है जिसका परावैद्युतांक \( K \) है। द्विध्रुव की अक्ष पर द्विध्रुव के मध्य बिन्दु \( O \) से \( r \) मीटर की दूरी पर स्थित प्रेक्षण बिन्दु \( P \) है, जिस पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है। माना कि द्विध्रुव के आवेश \( +q \) व \( -q \) के कारण बिन्दु \( P \) पर उत्पन्न वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता क्रमशः \( E_1 \) व \( E_2 \) हैं। चित्र 1.17 से स्पष्ट है कि आवेश \( (+q) \) से बिन्दु \( P \) की दूरी \( (r - l) \) है और आवेश \( (-q) \) से इसकी दूरी \( (r + l) \) है, अतः
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वैद्युत द्विध्रुव AB को दर्शाता है, जिसमें \(+q\) और \(-q\) आवेश \(2l\) दूरी पर रखे हैं। द्विध्रुव के केंद्र O से \(r\) दूरी पर अक्षीय स्थिति में एक बिंदु P स्थित है। बिंदु P पर \(+q\) और \(-q\) आवेशों के कारण उत्पन्न विद्युत क्षेत्र \(E_1\) और \(E_2\) की दिशाओं को दर्शाया गया है।
\( E_1 = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{q}{(r - l)^2} \) (AP दिशा में)
तथा
\( E_2 = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{q}{(r + l)^2} \) (PB दिशा में)
क्योंकि बिन्दु \( P \) पर तीव्रताएँ \( E_1 \) और \( E_2 \) एक ही रेखा के अनुदिश विपरीत दिशाओं में कार्यरत हैं, अतः बिन्दु \( P \) पर परिणामी तीव्रता \( E \) इन दोनों तीव्रताओं के अन्तर के बराबर होगी तथा परिणामी तीव्रता \( E \) की दिशा \( E_1 \) की दिशा में ही होगी; क्योंकि \( E_1 > E_2 \)
\( E = E_1 - E_2 = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \left[ \frac{q}{(r - l)^2} - \frac{q}{(r + l)^2} \right] \)
\( E = \frac{q}{4\pi\epsilon_0 K} \left[ \frac{(r + l)^2 - (r - l)^2}{(r^2 - l^2)^2} \right] \)
\( E = \frac{q}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{4rl}{(r^2 - l^2)^2} \)
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{2(q \times 2l)r}{(r^2 - l^2)^2} \)
चूँकि \( q \times 2l = \) वैद्युत-द्विध्रुव का वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण \( = p \)
अतः
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{2pr}{(r^2 - l^2)^2} \) ...(1)
यदि द्विध्रुव की लम्बाई के सापेक्ष प्रेक्षण बिन्दु \( P \) की मध्य बिन्दु \( O \) से दूरी \( r \) बहुत अधिक है (अर्थात् \( r >> 2l \)) तो \( r^2 \) की तुलना में \( l^2 \) का मान उपेक्षणीय होगा। अतः इस दशा में द्विध्रुव के कारण बिन्दु \( P \) पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{2p}{r^3} \) न्यूटन/कूलॉम ...(2)
यदि द्विध्रुव निर्वात् (अथवा वायु) में रखा है, तो \( K = 1 \)
अतः
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2p}{r^3} \) न्यूटन/कूलॉम ...(3)
वैद्युत-क्षेत्र \( E \) की दिशा द्विध्रुव के अक्ष के सदिश ऋणावेश से धनावेश की ओर होगी।
In simple words: For an electric dipole, the electric field at an axial point is the vector sum of the fields due to the individual charges. Due to opposite directions, the fields subtract, resulting in a net field that decreases rapidly with distance.
🎯 Exam Tip: Clearly define the dipole and the axial point. Show the directions of individual electric fields \( E_1 \) and \( E_2 \) and explain why they subtract. Ensure the final formulas for both general and short dipole cases are correct.
Question 2.
वैद्युत-द्विध्रुव के कारण निरक्षीय स्थिति (अनुप्रस्थ स्थिति) में किसी बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
या
वैद्युत-द्विध्रुव की परिभाषा दीजिए।
Answer:
उत्तर-
वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण- वह वैद्युत निकाय (system) जिसमें दो बराबर, परन्तु विपरीत प्रकार के बिन्दु-आवेश एक-दूसरे से बहुत कम दूरी पर रखे हों, ‘वैद्युत-द्विध्रुव’ कहलाता है। दोनों आवेशों में से किसी एक आवेश और दोनों आवेशों के बीच की दूरी के गुणनफल को ‘द्विध्रुव’ का ‘वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण (electric dipole moment) कहते हैं। इसे प्रायः \( p \) से प्रदर्शित करते हैं।
चित्र 1.18 में प्रदर्शित वैद्युत-द्विध्रुव का वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण \( p = q \times 2l \)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वैद्युत द्विध्रुव को दर्शाता है, जिसमें \(+q\) और \(-q\) आवेश \(2l\) दूरी पर रखे हैं, और द्विध्रुव आघूर्ण \(p\) को दर्शाया गया है।
वैद्युत-द्विध्रुव की निरक्षीय रेखा पर स्थित बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता- माना वैद्युत-द्विध्रुव AB परावैद्युतांक \( K \) वाले माध्यम में स्थित है जिसके A सिरे पर \( +q \) आवेश तथा B सिरे पर \( -q \) आवेश एक-दूसरे से \( 2l \) दूरी पर स्थित हैं। वैद्युत-द्विध्रुव की निरक्षीय स्थिति में मध्य-बिन्दु \( O \) से \( r \) दूरी पर स्थित बिन्दु \( P \) पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वैद्युत द्विध्रुव AB को दर्शाता है, जहाँ A पर \(+q\) और B पर \(-q\) आवेश \(2l\) दूरी पर हैं। द्विध्रुव के केंद्र O से \(r\) दूरी पर निरक्षीय स्थिति में बिंदु P है। बिंदु P पर दोनों आवेशों के कारण विद्युत क्षेत्र \(E_1\) और \(E_2\) को दर्शाया गया है, साथ ही उनके घटकों \(E_1 \sin \theta\), \(E_2 \sin \theta\), \(E_1 \cos \theta\), और \(E_2 \cos \theta\) को भी वियोजित रूप में प्रस्तुत किया गया है।
चित्र 1.19 (a) से बिन्दु \( P \) की प्रत्येक आवेश से दूरी
\( AP = BP = \sqrt{r^2 + l^2} \)
अतः आवेश \( +q \) के कारण बिन्दु \( P \) पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता
\( E_1 = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{q}{(r^2 + l^2)} \) (AP दिशा में)
तथा आवेश \( -q \) के कारण बिन्दु \( P \) पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता
\( E_2 = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{q}{(r^2 + l^2)} \) (PB दिशा में)
स्पष्ट है कि \( E_1 \) व \( E_2 \) के मान बराबर हैं और दिशाएँ भिन्न हैं। \( E_1 \) व \( E_2 \) को AB के समान्तर तथा लम्बवत् घटकों में वियोजित करने पर [चित्र 1.19 (b)] लम्बवत् घटक \( (E_1 \sin \theta \) व \( E_2 \sin \theta) \) बराबर व विपरीत होने के कारण एक-दूसरे को निरस्त कर देंगे, जबकि AB के समान्तर घटक \( (E_1 \cos \theta \) व \( E_2 \cos \theta) \) एक ही दिशा में होने के कारण जुड़ जाएँगे।
अतः बिन्दु \( P \) पर द्विध्रुव के कारण परिणामी तीव्रता
\( E = E_1 \cos \theta + E_2 \cos \theta \)
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{q}{(r^2 + l^2)} \cos \theta + \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{q}{(r^2 + l^2)} \cos \theta \)
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{2q}{(r^2 + l^2)} \cos \theta \)
चित्र 1.19 (b) से, \( \cos \theta = \frac{OA}{AP} = \frac{l}{\sqrt{r^2 + l^2}} \)
अतः
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{2q}{(r^2 + l^2)} \times \frac{l}{\sqrt{r^2 + l^2}} \)
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{2ql}{(r^2 + l^2)^{3/2}} \)
परन्तु \( q \times 2l = p \) (वैद्युत-द्विध्रुव का आघूर्ण है।)
अतः
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{p}{(r^2 + l^2)^{3/2}} \)
अब यदि \( l \) का मान \( r \) से अत्यधिक कम हो, तो \( l^2 \) का मान \( r^2 \) की तुलना में नगण्य माना जा सकता है।
तब
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{p}{(r^2)^{3/2}} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \frac{p}{r^3} \) न्यूटन/कूलॉम
निर्वात् (अथवा वायु) के लिए \( K = 1 \)
अतः
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{p}{r^3} \) न्यूटन/कूलॉम
\( E \) की दिशा द्विध्रुव की अक्ष के समान्तर धनावेश से ऋणावेश की ओर होती है।
In simple words: An electric dipole consists of two equal and opposite charges separated by a small distance. At a point on its equatorial line (perpendicular bisector), the electric fields due to each charge cancel out their perpendicular components, and their parallel components add up, resulting in a net field.
🎯 Exam Tip: When deriving the electric field at an equatorial point, clearly show the vector decomposition of \( E_1 \) and \( E_2 \). Explain why the perpendicular components cancel and the parallel components add up. Ensure the cosine factor is correctly applied and the final formula for both general and short dipole cases is accurate.
Question 3.
वैद्युत-द्विध्रुव तथा वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण से आप क्या समझते हैं?
या
एकसमान तीव्रता वाले वैद्युत क्षेत्र में वैद्युत द्विध्रुव पर लगने वाले बल-युग्म के आघूर्ण का सूत्र प्राप्त कीजिए।
या
एकसमान वैद्युत क्षेत्र में एक वैद्युत-द्विध्रुव पर लगने वाले बल-आघूर्ण का व्यंजक प्राप्त कीजिए। इसके आधार पर वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण की परिभाषा दीजिए।
Answer:
उत्तर-
वैद्युत-द्विध्रुव तथा वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण- वह वैद्युत निकाय (system) जिसमें दो बराबर, परन्तु विपरीत प्रकार के बिन्दु-आवेश एक-दूसरे से बहुत कम दूरी पर रखे हों, “वैद्युत-द्विध्रुव’ कहलाता है। दोनों आवेशों में से किसी एक आवेश और दोनों आवेशों के बीच की दूरी के गुणनफल को ‘द्विध्रुव’ का वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण (electric dipole moment) कहते हैं। इसे प्रायः \( p \) से प्रदर्शित करते हैं।
(i) द्विध्रुव पर शुद्ध स्थानान्तर बल \( F = qE - qE = 0 \)
(ii) एकसमान वैद्युत-क्षेत्र में रखे वैद्युत-द्विध्रुव पर बल-युग्म-यदि किसी वैद्युत-द्विध्रुव को एकसमान वैद्युत-क्षेत्र \( (E) \) में रखा जाए तो उसके आवेशों पर समान और विपरीत बल \( -qE \) तथा \( +qE \) (अर्थात् एक बल-युग्म) कार्य करने लगता है। यह बल-युग्म द्विध्रुव को क्षेत्र की दिशा में संरेखित करने का प्रयत्न करता है। इसे प्रत्यानयन बल-युग्म’ कहते हैं। माना एक वैद्युत-द्विध्रुव एकसमान वैद्युत-क्षेत्र \( (E) \) में क्षेत्र से \( \theta \) कोण बनाते हुए रखा गया है। \( +q \) तथा \( -q \) पर लगने वाले बराबर एवं विपरीत बले \( (+qE \) व \( -qE) \) एक बल-युग्म बनाते हैं जो द्विध्रुव को घुमाकर क्षेत्र \( E \) की दिशा में लाने का प्रयत्न करता है। इस प्रत्यानयन बल-युग्म का आघूर्ण
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वैद्युत द्विध्रुव को दर्शाता है जिसमें \(+q\) और \(-q\) आवेश \(2l\) दूरी पर एकसमान विद्युत क्षेत्र \(E\) में स्थित हैं। द्विध्रुव क्षेत्र के साथ \( \theta \) कोण बनाता है, और आवेशों पर लगने वाले बल \(F = qE\) को दिखाया गया है, जो एक बल-युग्म बनाता है।
\( \tau = \) बल \( \times \) बलों के मध्य लम्बवत् दूरी
\( = F \times AC = qE \times 2l \sin \theta \)
\( \tau = (q \times 2l) E \sin \theta = pE \sin \theta \) न्यूटन-मीटर
(जहाँ \( p = q \times 2l \) वैद्युत-द्विध्रुव का आघूर्ण है।) ...(1)
अतः \( \tau = pE \sin \theta \)
यदि द्विध्रुव को वैद्युत-क्षेत्र के लम्बवत् रखा जाए, तो
\( \theta = 90^\circ \)
अर्थात् \( \sin \theta = \sin 90^\circ = 1 \)
अतः द्विध्रुव पर आरोपित बल-युग्म अधिकतम होगा।
अर्थात् \( \tau_{max} = pE \) ...(2)
या \( p = \frac{\tau_{max}}{E} \) ...(3)
यदि \( E = 1 \) न्यूटन/कूलॉम, तब \( p = \tau_{max} \) कूलॉम/मीटर
अर्थात् "किसी वैद्युत-द्विध्रुव का वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण उस बल-युग्म के बराबर है जो कि द्विध्रुव को 1 न्यूटन/कूलॉम के एकसमान वैद्युत-क्षेत्र में क्षेत्र की दिशा के लम्बवत् रखने पर द्विध्रुव पर कार्य करता है।"
In simple words: An electric dipole is a pair of equal and opposite charges separated by a small distance. Its dipole moment is the product of the charge magnitude and the separation distance. When placed in a uniform electric field, it experiences a torque that tries to align it with the field.
🎯 Exam Tip: Define both electric dipole and dipole moment clearly. In the derivation of torque, accurately draw the diagram, specify the angle \( \theta \), and use vector cross-product relation \( \vec{\tau} = \vec{p} \times \vec{E} \) if possible, or derive from basic force and perpendicular distance. Remember the definition of dipole moment from torque.
Question 4.
वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा से आप क्या समझते हैं? एकसमान वैद्युत क्षेत्र में स्थित द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक प्राप्त कीजिए, जबकि द्विध्रुव के अक्ष क्षेत्र से \( \theta \) कोण बनाएँ।
Answer:
उत्तर-
वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा- वैद्युत क्षेत्र में किसी वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा उस कार्य के बराबर होती है जो कि द्विध्रुव को अनन्त से क्षेत्र के भीतर लाने में करना पड़ता है। एकसमान वैद्युत क्षेत्र में वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा के लिए व्यंजक- माना कि एक वैद्युत द्विध्रुव AB को अनन्त से किसी एकसमान वैद्युत क्षेत्र E में इस प्रकार लाया जाता है कि द्विध्रुव आघूर्ण \( p \) सदैव क्षेत्र B की दिशा में रहे (चित्र 1.21)। क्षेत्र E के कारण द्विध्रुव के आवेश \( +q \) पर एक बल \( F (= qE) \) क्षेत्र की दिशा में तथा आवेश \( -q \) पर उतना ही बल \( F (= qE) \) विपरीत दिशा में कार्य करता है। अतः द्विध्रुव को क्षेत्र में लाने के लिए, आवेश \( +q \) पर बाहरी कर्ता द्वारा कार्य किया जाएगा जो धनात्मक होगा, जबकि \( -q \) आवेश पर स्वयं क्षेत्र कार्य करेगा, अर्थात् कार्य प्राप्त होगा जो ऋणात्मक होगा। परन्तु चित्र 1.21 से स्पष्ट है कि अनन्त से क्षेत्र के भीतर \( -q \) आवेश को लाने में प्राप्त कार्य \( +q \) को लाने में किए जाने वाले कार्य से अधिक होगा । बिन्दु A तक लाने में प्राप्त कार्य तथा किया गया कार्य बराबर होंगे। अतः वे एक-दूसरे को निरस्त कर देंगे। अतः द्विध्रुव को स्थिति AB तक लाने में नेट कार्य \( -q \) आवेश को A से B तक लाने में प्राप्त कार्य के बराबर होगा, जो ऋणात्मक होगी ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वैद्युत द्विध्रुव को दर्शाता है, जिसमें \( -q \) और \( +q \) आवेश \(2l\) दूरी पर हैं, और उस पर एकसमान विद्युत क्षेत्र \(E\) में लगने वाले बल \(F\) को दिखाया गया है। यह द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा के व्यंजक को समझने के लिए विन्यास प्रस्तुत करता है।
अतः
नेट कार्य \( W = [(-q) \) आवेश पर बल \( \times \) दूरी AB]
\( W = -[qE \times 2l] = -[(q \times 2l) \times E] = -pE \)
जहाँ \( q \times 2l = p = \) वैद्युत द्विध्रुव का वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण
यह कार्य ही वैद्युत क्षेत्र के समान्तर स्थित वैद्युत द्विध्रुव की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा \( U_0 \) है; जो साम्यावस्था में वैद्युत स्थितिज ऊर्जा है।
अतः \( U_0 = -pE \)
इस स्थिति में वैद्युत द्विध्रुव क्षेत्र के अन्दर स्थायी सन्तुलन में है।
अब, यदि द्विध्रुव को क्षेत्र के भीतर \( \theta \) कोण से घुमाया जाए तो द्विध्रुव पर कार्य \( W \) करना होगा, जहाँ
\( W = pE (1 - \cos \theta) \)
इसके कारण द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा बढ़ जाएगी।
अतः \( \theta \) स्थिति में द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा
\( U_\theta = U_0 + W = -pE + pE (1 - \cos \theta) \)
\( U_\theta = -pE \cos \theta \)
यह वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा का सामान्य सूत्र है।
विशेष स्थितियाँ
(i) यदि द्विध्रुव क्षेत्र की दिशा में हो अर्थात् \( \theta = 0^\circ \) तो \( \cos \theta = \cos 0^\circ = 1 \) तो
\( U = U_0 = -pE \)
इस दशा में स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होगी; अतः द्विध्रुव इस दशा में स्थायी सन्तुलन (stable equilibrium) में होगा।
(ii) यदि द्विध्रुव क्षेत्र के लम्बवत् हो अर्थात् \( (\theta = 90^\circ) \) तब
\( U_{90^\circ} = -pE \cos 90^\circ = 0 \)
इस दशा में \( \theta = 90^\circ \) पर द्विध्रुव पर किया गया नेट कार्य शून्य होगा और इस कारण द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा शून्य होगी।
(iii) यदि द्विध्रुव को स्थायी सन्तुलन की स्थिति से \( 180^\circ \) घुमा दें (अर्थात् \( \theta = 180^\circ) \) तब उसकी स्थितिज ऊर्जा
\( U_{180^\circ} = -pE \cos 180^\circ = +pE \) [\( \because \cos 180^\circ = -1 \)]
इस स्थिति में द्विध्रुव 'अस्थायी सन्तुलन' (unstable equilibrium) में होगा, अर्थात् इससे बाहरी कारक के हटा लेने पर यह स्थायी सन्तुलन की स्थिति में (अर्थात् \( \theta = 0^\circ \) पर) आ जाएगा।
In simple words: The potential energy of an electric dipole in an electric field is the work done to bring the dipole from infinity to its position in the field. It depends on the angle between the dipole moment and the electric field. It's minimum when aligned (stable equilibrium) and maximum when anti-aligned (unstable equilibrium).
🎯 Exam Tip: Remember that potential energy is a scalar quantity. The reference point for potential energy is usually taken when the dipole is perpendicular to the field (\( \theta = 90^\circ \), \( U = 0 \)). The formula \( U = -pE \cos \theta \) is crucial, along with understanding stable and unstable equilibrium conditions.
Question 5.
\( +3.2 \times 10^{-19} \) कूलॉम तथा \( -3.2 \times 10^{-19} \) कूलॉम के दो बिन्दु आवेश एक-दूसरे से \( 2.4 \times 10^{-10} \) मीटर की दूरी पर रखे हैं। यह द्विध्रुव \( 4 \times 10^5 \) वोल्ट/मीटर तीव्रता के समांगी वैद्युत-क्षेत्र में स्थित है। ज्ञात कीजिए।
(i) वैद्युत-द्विध्रुव आघूर्ण,
(ii) द्विध्रुव को साम्यावस्था से \( 180^\circ \) घुमाने में आवश्यक कार्य तथा
(iii) साम्यावस्था में वैद्युत-द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा ।
Answer:
हल-
(i) \( p = q \times 2l = 3.2 \times 10^{-19} \) कूलॉम \( \times 2.4 \times 10^{-10} \) मीटर \( = 7.68 \times 10^{-29} \) कूलॉम-मीटर
(ii) वैद्युत-द्विध्रुव को साम्यावस्था अर्थात् वैद्युत-क्षेत्र \( E \) की दिशा से \( \theta \) कोण घुमाने में आवश्यक कार्य
\( W = pE (1 - \cos \theta) \)
यहाँ \( \theta = 180^\circ \) एवं \( p = 7.68 \times 10^{-29} \) कूलॉम-मीटर
\( E = 4.0 \times 10^5 \) वोल्ट/मीटर ।
\( W = (7.68 \times 10^{-29}) \times (4.0 \times 10^5) \times (1 - \cos 180^\circ) \)
\( = (7.68 \times 10^{-29}) \times (4.0 \times 10^5) \times 2 \) [\( \because \cos 180^\circ = -1 \)]
\( = 6.144 \times 10^{-28} \) जूल
(iii) वैद्युत-क्षेत्र \( E \) में द्विध्रुव को साम्यावस्था से \( \theta \) कोण पर रखे होने पर इसकी स्थितिज ऊर्जा \( U = -pE \cos \theta \) जहाँ \( \theta = \) द्विध्रुव की अक्ष तथा इसकी साम्यावस्था अर्थात् वैद्युत-क्षेत्र की दिशा के बीच स्थित कोण साम्यावस्था में \( \theta = 0^\circ \), अतः
\( U_0 = -pE (\cos 0^\circ = 1) \)
यहाँ \( p = 7.68 \times 10^{-29} \) कूलॉम-मीटर
\( E = 4.0 \times 10^5 \) वोल्ट/मीटर
\( U_0 = -(7.68 \times 10^{-29}) \times (4.0 \times 10^5) \) जूल \( = -3.072 \times 10^{-23} \) जूल
In simple words: This problem involves calculating the dipole moment, the work done to rotate the dipole from stable equilibrium, and the potential energy at stable equilibrium. The dipole moment is charge times separation, work is \( pE(1-\cos\theta) \), and potential energy is \( -pE\cos\theta \).
🎯 Exam Tip: Remember the definitions and formulas for electric dipole moment (\(p=q \times 2l\)), work done in rotating a dipole (\(W=pE(1-\cos\theta)\)), and potential energy of a dipole (\(U=-pE\cos\theta\)). Pay attention to angles (especially \(180^\circ\)) and unit conversions.
Question 6.
दो एक जैसे वैद्युत-द्विध्रुव AB तथा CD जिनके प्रत्येक के द्विध्रुव आघूर्ण \( P \) हैं तथा \( 120^\circ \) कोण पर चित्रानुसार रखे हैं। इस संयोजन का परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण ज्ञात कीजिए। यदि \( +x \) दिशा में एक समरूप वैद्युत क्षेत्र में आरोपित हो तब-संयोजन पर कार्य करने वाले बल-आघूर्ण का मान क्या होगा?
Answer:
हल-
माना दोनों आवेशों के बीच की दूरी \( = 2a \)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो समान वैद्युत द्विध्रुवों AB और CD को दर्शाता है, जिनमें प्रत्येक का द्विध्रुव आघूर्ण \(P\) है। ये द्विध्रुव \(120^\circ\) के कोण पर रखे गए हैं, और बिंदु O पर केंद्र में एक परीक्षण आवेश \(q_0\) है। विभिन्न बिंदुओं पर आवेश और परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण की सदिश दिशाओं को भी इंगित किया गया है।
A तथा B पर स्थित आवेश के कारण द्विध्रुव आघूर्ण
\( P_{AB} = q \times 2a = 2aq \)
C तथा D के लिए
\( P_{DC} = q \times 2a = 2aq \)
परिणामी द्विध्रुव-आघूर्ण
\( P_r = \sqrt{P_{AB}^2 + P_{DC}^2 + 2P_{AB} P_{DC} \cos 120^\circ} \)
\( P_r = \sqrt{(2aq)^2 + (2aq)^2 + 2(2aq)(2aq) \times (-\frac{1}{2})} \)
\( P_r = \sqrt{4a^2q^2 + 4a^2q^2 - 4a^2q^2} \)
\( P_r = \sqrt{4a^2q^2} = 2aq \)
इसी प्रकार,
\( P_r = 2\sqrt{3}aq \)
अब, द्विध्रुव AB के कारण वैद्युत क्षेत्र
\( E_{AB} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2 \times 2qa \cos 0^\circ}{r^3} \)
\( E_{AB} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{4qa}{r^3} \)
द्विध्रुव DC के कारण वैद्युत क्षेत्र
\( E_{DC} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2 \times 2qa \cos 120^\circ}{r^3} \)
\( E_{DC} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2 \times 2qa \times (-\frac{1}{2})}{r^3} \)
\( E_{DC} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{-2qa}{r^3} \)
\( E_{total} = E_{AB} + E_{DC} \)
\( E_{total} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{4qa}{r^3} + \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2qa}{r^3} \)
\( E_{total} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{6qa}{r^3} \)
बल-आघूर्ण \( \tau = P \times E_{total} \)
\( \tau = 2\sqrt{3}aq \times \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{6aq}{r^3} \)
\( \tau = \frac{2\sqrt{3}}{4\pi\epsilon_0} \frac{6a^2q^2}{r^3} = \frac{12\sqrt{3}a^2q^2}{4\pi\epsilon_0 r^3} \)
In simple words: When two dipoles are arranged at an angle, their resultant dipole moment is found using vector addition. The torque on this combined system in an external electric field is then calculated using the resultant dipole moment and the field strength.
🎯 Exam Tip: This problem requires vector addition of dipole moments. Remember that torque is \( \tau = pE \sin \theta \). The angle \( \theta \) between the resultant dipole moment and the external field must be correctly determined for the torque calculation.
Question 7.
स्थिर वैद्युत में गौस की प्रमेय क्या है?
या
सिद्ध कीजिए कि किसी बन्द पृष्ठसे गुजरने वाला वैद्युत-फ्लक्स उस पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश \( q \) का \( 1/\epsilon_0 \) गुना होता है, जहाँ \( \epsilon_0 \) मुक्त आकाश (free space) की वैद्युतशीलता है।
या
गौस-प्रमेय लिखिए। सिद्ध कीजिए कि किसी बन्द पृष्ठ से गुजरने वाला नेट वैद्युत-फ्लक्स उस पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश \( q \) का \( 1/\epsilon_0 \) गुना होता है, जहाँ \( \epsilon_0 \) मुक्त आकाश की वैद्युतशीलता है।
या
वैद्युत-स्थैतिकी में गौस की प्रमेय लिखिए तथा उसको सिद्ध कीजिए।
या
स्थिर-विद्युतिकी (वैद्युत-स्थैतिकी) में गौस के नियम का उल्लेख कीजिए ।
Answer:
उत्तर-
गौस की प्रमेय (Gauss Theorem)- गौस की प्रमेय वैद्युत-क्षेत्र के कारण किसी बन्द पृष्ठ से निर्गत वैद्युत-फ्लक्स तथा उस पृष्ठ से परिबद्ध कुल वैद्युत आवेश के बीच सम्बन्ध व्यक्त करती है। इसके अनुसार-"किसी वैद्युत-क्षेत्र में स्थित बन्द पृष्ठ से निर्गत सम्पूर्ण वैद्युत-फ्लक्स का मान उस पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश का \( (1/\epsilon_0) \) गुना होता है।”
अर्थात् \( \Phi_E = \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = \frac{1}{\epsilon_0} (q) \)
जहाँ \( \epsilon_0 = \) वायु या निर्वात् की वैद्युतशीलता।
उपपत्ति (Proof) - चित्र 1.23 में एक बन्द पृष्ठ दर्शाया गया है जिसका क्षेत्रफल \( A \) है। इस बन्द पृष्ठ में किसी बिन्दु \( O \) पर एक बिन्दु आवेश \( +q \) रखा है। इस प्रकार बन्द पृष्ठ \( +q \) आवेश के वैद्युत क्षेत्र में स्थित है। इस पृष्ठ के बिन्दु \( P \) पर एक अत्यन्त लघु क्षेत्रफल \( d\vec{A} \) लिया गया है। इस बिन्दु \( P \) की \( O \) से दूरी \( r \) है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक बंद पृष्ठ को दर्शाता है जिसके अंदर बिंदु O पर एक धनात्मक आवेश \(+q\) स्थित है। पृष्ठ पर एक छोटा क्षेत्रफल अल्पांश \(d\vec{A}\) बिंदु P पर दिखाया गया है, जिसकी O से दूरी \(r\) है। अल्पांश पर विद्युत क्षेत्र \(E\) और क्षेत्रफल सदिश \(d\vec{A}\) की दिशाओं को दर्शाया गया है।
इस लघु क्षेत्रफल \( d\vec{A} \) को इस पर खींचे गये अभिलम्ब PN की दिशा में क्षेत्रीय वेक्टर \( d\vec{A} \) द्वारा प्रदर्शित किया गया है। बिन्दु \( P \) पर \( +q \) आवेश के कारण उत्पन्न वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r^2} \)
\( \vec{E} \) की दिशा O से P की ओर होगी।
क्षेत्रफल \( d\vec{A} \) से निर्गत वैद्युत-फ्लक्स \( d\Phi_E = \vec{E} \cdot d\vec{A} \)
अथवा \( d\Phi_E = EdA \cos \theta \)
जहाँ \( \theta = \vec{E} \) तथा \( d\vec{A} \) के बीच कोण।
समीकरण (1) से \( E \) का मान समीकरण (2) में रखने पर
\( d\Phi_E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r^2} dA \cos \theta \)
परन्तु \( \frac{dA \cos \theta}{r^2} = \) क्षेत्रफल \( dA \) द्वारा बिन्दु \( O \) पर अन्तरित घन कोण \( = d\omega \) (माना)
अतः
\( d\Phi_E = \frac{q}{4\pi\epsilon_0} d\omega \)
अतः सम्पूर्ण बन्द पृष्ठ क्षेत्रफल \( A \) से अभिलम्बवत् निर्गत सम्पूर्ण वैद्युत-फ्लक्स
\( \Phi_E = \oint_A \vec{E} \cdot d\vec{A} = \frac{q}{4\pi\epsilon_0} \oint_A d\omega \)
परन्तु \( \oint_A d\omega = \) सम्पूर्ण बन्द पृष्ठ द्वारा बिन्दु \( O \) पर अन्तरित घन कोण
\( = 4\pi \) स्टेरेडियन
\( \Phi_E = \frac{q}{4\pi\epsilon_0} \times 4\pi \) अथवा \( \Phi_E = \frac{1}{\epsilon_0} (q) \)
यही गौस-प्रमेय का कथन है।
In simple words: Gauss's theorem states that the total electric flux through any closed surface is directly proportional to the total electric charge enclosed within that surface, divided by the permittivity of free space. The proof involves integrating the flux over a small area element and using the solid angle subtended by the surface.
🎯 Exam Tip: The proof of Gauss's theorem is crucial. Ensure you can clearly define solid angle and show how \( \oint d\omega = 4\pi \). This theorem simplifies electric field calculations for symmetric charge distributions significantly.
Question 8.
गौस की प्रमेय से कूलॉम के नियम का निगमन कीजिए।
या
गौस-प्रमेय की सहायता से दो बिन्दु आवेशों के बीच कार्य करने वाले बल के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Answer:
उत्तर-
माना कोई विलगित बिन्दु आवेश \( +q \), वायु या निर्वात् में बिन्दु \( O \) पर रखा है। इससे \( r \) दूरी पर एक बिन्दु \( P \) है। इस बिन्दु से गुजरता हुआ \( q \) को परिबद्ध किये हुए एक गोलीय गौसियन-पृष्ठ खींचा गया है। इस बिन्दु पर \( q \) के कारण वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता \( O \) से \( P \) की दिशा में पृष्ठ के लम्बवत् होगी । \( P \) के परितः किसी पृष्ठ अवयव के क्षेत्रफल \( d\vec{A} \) का क्षेत्रफल सदिश \( d\vec{A} \) भी \( \vec{E} \) की दिशा में होगा (चित्र 1.24)।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक बिंदु आवेश \(+q\) को केंद्र O पर दिखाता है, और त्रिज्या \(r\) के एक गोलीय गौसियन पृष्ठ को दर्शाता है जो बिंदु P से गुजरता है। बिंदु P पर क्षेत्रफल अल्पांश \(d\vec{A}\) और विद्युत क्षेत्र \(E\) दोनों ही पृष्ठ के अभिलंबवत बाहर की ओर हैं, जो गौस प्रमेय का उपयोग करके कूलॉम के नियम को व्युत्पन्न करने के लिए आवश्यक विन्यास है।
अतः सम्पूर्ण गौसियन पृष्ठ से होकर गुजरने वाला वैद्युत-फ्लक्स
\( \Phi_E = \oint d\Phi_E = \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = \oint E dA = E \times 4\pi r^2 \)
परन्तु गौस-प्रमेय के अनुसार, \( \Phi_E = q/\epsilon_0 \)
अतः \( E \times 4\pi r^2 = \frac{q}{\epsilon_0} \) अथवा \( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r^2} \) ...(1)
यही बिन्दु आवेश \( q \) के कारण इससे \( r \) दूरी पर उत्पन्न वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक है जिसकी दिशा आवेश से दूर होगी।
यदि इस बिन्दु पर एक परीक्षण धनावेश \( q_0 \) रखें, तो \( q_0 \) पर आरोपित बल
\( F = q_0 E = q_0 \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r^2} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q q_0}{r^2} \) ...(2)
यही कूलॉम का नियम है जो कि गौस-प्रमेय से व्युत्पन्न किया गया है। इस प्रकार, स्थिर विद्युतिकी में कूलॉम का नियम तथा गौस का नियम परस्पर तुल्य हैं। ये दो भौतिक नियम नहीं हैं, बल्कि एक ही नियम है जिसे विभिन्न रूपों में अभिव्यक्त किया गया है।
In simple words: Coulomb's law can be derived from Gauss's theorem by considering a point charge enclosed within a spherical Gaussian surface. The electric field is uniform and radial, allowing the flux integral to simplify, leading directly to the expression for the electric field and, subsequently, the force on another charge.
🎯 Exam Tip: When deriving Coulomb's law from Gauss's theorem, ensure you correctly choose a spherical Gaussian surface for a point charge due to its symmetry. Clearly show each step from flux calculation to the force formula, emphasizing the equivalence of the two laws.
Question 9.
गौस के नियम का उपयोग करके एक अनन्त लम्बाई के पतले, सीधे एकसमान आवेशित तार द्वारा उत्पन्न वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता के लिए एक व्यंजक का निगमन कीजिए।
या
वैद्युत-स्थैतिकी में गौस की प्रमेय बताइए। इसका उपयोग करके एकसमान आवेशित लम्बे तार के निकट वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए ।
या
स्थिर-विद्युतिकी (वैद्युत-स्थैतिकी) का गौस प्रमेय लिंखिए। इसकी सहायता से एक समान रूप से आवेशित अनन्त लम्बाई के सीधे तार के निकट वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
या
अनन्त लम्बाई के समान रूप से आवेशित सीधे तार के निकट वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक गौस के प्रमेय की सहायता से प्राप्त कीजिए।
Answer:
उत्तर-
गौस की प्रमेय-दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 7 का उत्तर देखिए। अनन्त लम्बाई के आवेशित तार के निकट वैद्युत-क्षेत्र की \( Y \), तीव्रता-चित्र 1.25 में एक अनन्त लम्बाई का चालक तार प्रदर्शित है। जिसके आवेश का रेखीय घनत्व \( \lambda \) कूलॉम प्रति मीटर है। माना यह तार \( K \) परावैद्युतांक वाले माध्यम में रखा है। इसकी अक्ष से दूरी \( r \) पर एक बिन्दु \( P \) है जहाँ इस चालक तार के कारण वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक अनंत लंबाई के सीधे आवेशित तार को दर्शाता है, जिसमें रेखीय आवेश घनत्व \(\lambda\) है। तार के चारों ओर एक बेलनाकार गौसियन पृष्ठ दिखाया गया है जिसकी त्रिज्या \(r\) और लंबाई \(l\) है। बिंदु P वक्र-पृष्ठ पर स्थित है। विद्युत क्षेत्र \(E\) तार के लंबवत बाहर की ओर है, जबकि क्षेत्रफल अल्पांश \(d\vec{A}\) भी इसी दिशा में है।
चित्र 1.25 में इस चालक तार के चारों ओर \( r \) त्रिज्या का एक ऐसा बेलन दर्शाया गया है जिसकी लम्बाई \( l \) है तथा प्रेक्षण बिन्दु \( P \) इसके वक्र-पृष्ठ पर है। इस बेलन की अक्ष तथा तार की अक्ष एक ही है। चूंकि तार समान रूप से आवेशित है, अतः इसकी अक्ष से समान दूरी पर स्थित प्रत्येक बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता के समान होगी तथा इसकी दिशा अक्ष के लम्बवत् बाहर की ओर होगी। अतः वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता की दिशी इस बेलन के अनुप्रस्थ काट के चित्र 1.25 समान्तर है। अतः इस बेलन के समतल पृष्ठों से गुजरने वाला वैद्युत-फ्लक्स शून्य होगा क्योंकि इसका क्षेत्रफल वेक्टर \( \vec{A} \), वेक्टर \( \vec{E} \) के लम्बवत् होगा, इसलिए वैद्युत-फ्लक्स
\( \Phi_{E_1} = \vec{E} \cdot \vec{A} = EA \cos 90^\circ = 0 \)
बेलन के वक्र-पृष्ठ का क्षेत्रफल \( = 2\pi rl \)
अतः बेलन के वक्र-पृष्ठ से गुजरने वाला वैद्युत-फ्लक्स \( \Phi_E = KE (2\pi rl) \) ...(1)
अतः बेलन से गुजरने वाला कुल वैद्युत-फ्लक्स
अर्थात् \( \Phi_E = \Phi_{E_1} + \Phi_{E_2} + \Phi_{E_3} = 0 + KE (2\pi rl) \)
\( \Phi_E = KE (2\pi rl) \)
इस बेलन के अन्दर परिबद्ध वैद्युत आवेश \( q' \)
\( = \) बेलन के अन्दर तार की लम्बाई \( \times \) एकांक लम्बाई आवेश \( = l \times \lambda \)
अतः गौस-प्रमेय के अनुसार बेलन से गुजरने वाला सम्पूर्ण वैद्युत-फ्लक्स
\( \Phi_E = \frac{1}{\epsilon_0} (q') \)
\( \Phi_E = \frac{1}{\epsilon_0} (l \times \lambda) \) ...(2)
समी० (1) तथा समी० (2) से, \( K E \times 2\pi rl = \frac{1}{\epsilon_0} (l\lambda) \)
\( E = \frac{1}{2\pi\epsilon_0 K} \frac{\lambda}{r} \)
In simple words: To find the electric field due to an infinitely long straight charged wire using Gauss's law, we construct a cylindrical Gaussian surface around the wire. The flux through the flat ends is zero, and the flux through the curved surface is used with the enclosed charge to find the electric field.
🎯 Exam Tip: For infinite line charge, always choose a cylindrical Gaussian surface coaxial with the wire. Remember that the electric field is perpendicular to the curved surface and parallel to the normal of the curved surface, while it's perpendicular to the end caps, resulting in zero flux through them.
Question 10.
गौस के नियम का उपयोग करके एक समान आवेशित अनन्त समतल चादर के कारण विद्युत क्षेत्र ज्ञात कीजिए ।
या
गौस के नियम का प्रयोग करते हुए एक असीमित (अनन्त) विस्तार वाली आवेशित समतल चादर के निकट वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए।
या
वैद्युत स्थैतिकी में गौस-नियम का उल्लेख कीजिए। इस नियम का उपयोग करके अनन्त विस्तार की समतल आवेशित अचालक प्लेट के निकट वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए।
या
वैद्यत स्थैतिकी में गौस की प्रमेय का उल्लेख कीजिए। इसकी सहायता से अनन्त विस्तार की समतल आवेशित प्लेट के निकट वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए ।
Answer:
उत्तर-
गौस की प्रमेय (Gauss' Theorem)- दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 7 में देखिए ।
अनन्त विस्तार की समतल आवेशित प्लेट के कारण किसी निकट बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता - चित्र 1.26 में BCDG एक अनन्त विस्तार की आवेशित समतल प्लेट है, जिसकी मोटाई नगण्य है। इस प्रकार की प्लेट के दोनों पृष्ठों पर समान आवेश होता है। माना इसके प्रत्येक पृष्ठ पर आवेश का पृष्ठ घनत्व \( \sigma \) है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक अनंत समतल आवेशित प्लेट BCDG को दर्शाता है, जिसमें आवेश का पृष्ठ घनत्व \(\sigma\) है। प्लेट के आर-पार एक बेलनाकार गौसियन पृष्ठ (Gaussian surface) बनाया गया है। इस पृष्ठ के दो सिरे P और P' प्लेट के समानांतर हैं, जहाँ विद्युत क्षेत्र \(E\) और क्षेत्रफल सदिश \(d\vec{A}\) दोनों बाहर की ओर हैं। बेलन का वक्र-पृष्ठ प्लेट के लंबवत है।
यदि प्लेट धनावेशित है तो इसके कारण वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता प्लेट के लम्बवत् बाहर की ओर होती है। और यदि प्लेट ऋणावेशित है तो तीव्रता प्लेट के लम्बवत् अन्दर की ओर होती है। चित्र 1.26 में धनावेशित प्लेट दिखायी गयी है।
माना इस प्लेट के निकट बिन्दु \( P \) पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है। इसके लिए इसे प्लेट के आर-पार एक बेलनाकार गौसियन पृष्ठ की कल्पना करते हैं जिसकी अनुप्रस्थ काट \( P \) के परितः । क्षेत्रफल अवयव \( dA \) है जो सीट (प्लेट) के समान्तर है। बेलन के \( P \) तथा \( P' \) सिरे प्लेट से समान दूरी पर हैं। सिरे \( P \) पर \( dA \) के प्रत्येक बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता \( (E) \) समान होगी। यह वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता पृष्ठ के लम्बवत् बाहर की ओर होगी। क्षेत्रफल अवयव \( d\vec{A} \) को क्षेत्रफल सदिश \( d\vec{A} \) से प्रदर्शित किया गया है जो \( \vec{E} \) की ही दिशा में होगा। अतः सिरे \( P \) पर इस पृष्ठ से गुजरने वाला वैद्युत-फ्लक्स-
\( \Phi_P = \vec{E} \cdot d\vec{A} = EdA \cos 0^\circ = EdA \)
इसी प्रकार गौसियन पृष्ठ के सिरे \( P' \) से गुजरने वाला वैद्युत-फ्लक्स \( \Phi_{P'} = EdA \)
गौसियन पृष्ठ के वक्र तल पर स्थित प्रत्येक बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता तथा बाहर की ओर खींचे गये अभिलम्ब परस्पर लम्बवत् होंगे,
अर्थात् \( \theta = 90^\circ \) अथवा \( \cos 90^\circ = 0 \)
इसलिए \( \vec{E} \cdot d\vec{A} = 0 \)
अर्थात् गौसियन पृष्ठ (Gaussian surface) के वक्र तल से गुजरने वाला वैद्युत-फ्लक्स शून्य होगा।
अतः बन्द पृष्ठ (बेलनाकार गौसियन पृष्ठ) से गुजरने वाला कुल वैद्युत-फ्लक्स
\( \Phi_E = \Phi_P + \Phi_{P'} + \) वक्र तल से गुजरने वाला फ्लक्स
\( = EdA + EdA + 0 = 2EdA \)
परन्तु बन्द पृष्ठ के अन्दर समतल प्लेट का घिरा क्षेत्रफल \( = dA \)
इस पृष्ठ पर उपस्थित आवेश \( q = \sigma \times dA \)
परन्तु गौसियन प्रमेय से, \( \Phi_E = \frac{q}{\epsilon_0} = \frac{\sigma dA}{\epsilon_0} \) (जहाँ \( q = \sigma \cdot dA \))
अर्थात् \( 2E dA = \frac{\sigma dA}{\epsilon_0} \) अथवा \( E = \frac{\sigma}{2\epsilon_0} \)
In simple words: For an infinite plane sheet of charge, the electric field is uniform and perpendicular to the sheet. Using a cylindrical Gaussian surface that passes through the sheet, the flux through the curved surface is zero, and the flux through the two end caps adds up. This leads to the electric field being \( \sigma / (2\epsilon_0) \).
🎯 Exam Tip: The key to this derivation is choosing a cylindrical Gaussian surface that penetrates the plane sheet symmetrically. Remember to explain why flux through the curved surface is zero and why the area vector for the end caps is parallel to the electric field.
Question 11.
गौस प्रमेय की सहायता से अनन्त विस्तार की समतल आवेशित चालक प्लेट के कारण वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता के सूत्र का निगमन कीजिए।
Answer:
उत्तर-
माना अनन्त विस्तार एवं परिमित लघु मोटाई की एक धन-आवेशित 'समतल चालक प्लेट निर्वात् (अथवा वायु) में स्थित है (चित्र 1.27)। चूँकि प्लेट एक 'समतल चालक' है, अतः प्लेट को दिया गया सम्पूर्ण आवेश प्लेट के बाह्य पृष्ठों 1 व 2 पर एकसमान रूप से वितरित हो जाता है। प्लेट के भीतर वैद्युत क्षेत्र सर्वत्र शून्य होता है तथा प्लेट के पृष्ठों पर एवं समीपवर्ती बाह्य बिन्दुओं पर वैद्युत क्षेत्र प्लेट के पृष्ठों के लम्बवत् होता है। माना कि प्लेट पर आवेश की पृष्ठ-घनत्व \( \sigma \) है।
माना कि चालक प्लेट के एक एक ओर ठीक बाहर एक बिन्दु \( P \) है जिस पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है। चूँकि प्लेट के भीतर कोई आवेश नहीं है, अतः इस प्लेट को आवेश की दो समतल चादरों 1 व 2, के तुल्य माना जा सकता है। बिन्दु \( P \) पर चादर 1 के कारण वैद्युत-क्षेत्र \( E_1 \) (माना) की तीव्रता
\( E_1 = \frac{\sigma}{2\epsilon_0} \) (चादर 1 से परे) (गौस प्रमेय द्वारा प्राप्त)
इसी प्रकार, बिन्दु \( P \) पर चादर 2 के कारण वैद्युत क्षेत्र \( E_2 \) (माना) की तीव्रता
\( E_2 = \frac{\sigma}{2\epsilon_0} \) (चादर 2 से परे)
चूँकि \( E_1 \) व \( E_2 \) एक ही दिशा में हैं, अतः बिन्दु \( P \) पर दोनों चादरों के कारण परिणामी तीव्रता
\( \vec{E} = \vec{E_1} + \vec{E_2} \)
\( E = E_1 + E_2 = \frac{\sigma}{2\epsilon_0} + \frac{\sigma}{2\epsilon_0} \) अथवा \( E = \frac{\sigma}{\epsilon_0} \)
धन-आवेशित चालक प्लेट के कारण वैद्युत क्षेत्र की दिशा प्लेट के लम्बवत् तथा प्लेट से परे की ओर को दिष्ट है। यदि प्लेट ऋण-आवेशित हो तब क्षेत्र की दिशा प्लेट के लम्बवत् तथा प्लेट की ओर को दिष्ट होगी। हमने उपरोक्त सूत्र एक समतल आवेशित चालक के लिए प्राप्त किया है। वास्तव में यह किसी भी आकृति' के चालक के लिए सत्य है। इस सूत्र से स्पष्ट है कि अनन्त विस्तार के आवेशित चालक के 'निकट' किसी बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता चालक के क्षेत्रफल अथवा चालक से इस बिन्दु की दूरी पर निर्भर नहीं करती। इसका अर्थ है कि चालक के 'निकट' सभी बिन्दुओं पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता समान होती है।
In simple words: For an infinite plane conducting sheet, the charge resides entirely on its outer surfaces. We can consider it as two separate non-conducting sheets. The electric field inside the conductor is zero. Outside, the electric field is the sum of the fields from the two surfaces, resulting in \( E = \sigma/\epsilon_0 \).
🎯 Exam Tip: Distinguish between a non-conducting and a conducting sheet. For a conductor, the charge distributes on surfaces, and the field inside is zero. The resulting field is \( \sigma/\epsilon_0 \) (twice that of a non-conducting sheet) because both surfaces contribute.
Question 12.
एकसमान आवेशित गोलीय कोश के कारण उसके पृष्ठ के किसी बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
या
एकसमान आवेशित गोलीय कोश के कारण उसके पृष्ठ पर, कोश के बाह्य बिन्दु पर तथा कोश के भीतर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक ज्ञात कीजिए।
या
गौस प्रमेय की सहायता से किसी आवेशित गोलीय कोश के बाहर किसी बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए।
या
एकसमान आवेशित गोलीय कोश के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक गौस के नियम के आधार पर प्राप्त कीजिए जबकि बिन्दु कोश के
(i) बाहर,
(ii) पृष्ठ पर तथा
(iii) भीतर स्थित है।
Answer:
उत्तर- माना कि त्रिज्या \( R \) का एक विलगित (isolated) गोलीय कोश है जिस पर आवेश \( +q \) एकसमान रूप से वितरित है। हमें इस कोश के बाहर, कोश के पृष्ठ पर तथा कोश के भीतर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है।
बाह्य बिन्दु पर (At an External Point)- माना कि आवेशित कोश के केन्द्र \( O \) (चित्र 1.28) से दूरी \( r \) पर \( (r > R) \) एक बिन्दु \( P \) है जिस पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है। इसके लिये, हम बिन्दु \( P \) से गुजरने वाला, त्रिज्या \( r \) का संकेन्द्री गोलीय पृष्ठ खींचते हैं जिसे ‘गौसियन पृष्ठ’ (Gaussian surface) कहते हैं।
आवेश-वितरण की सममिति के कारण, गौसियन पृष्ठ के सभी बिन्दुओं पर वैद्युत-क्षेत्र का परिमाण \( E \) समान होगा तथा दिशा बाहर की ओर को त्रिज्यतः (radially outward) होगी ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक आवेशित गोलीय कोश को दर्शाता है जिसकी त्रिज्या R है, और इसके केंद्र O पर आवेश +q वितरित है। कोश के बाहर एक बिंदु P (त्रिज्या r पर) पर विद्युत क्षेत्र ज्ञात करने के लिए, बिंदु P से होकर गुजरने वाला एक गोलाकार गौसियन पृष्ठ खींचा गया है, जो विद्युत क्षेत्र E और क्षेत्रफल अल्पांश dA की दिशा को इंगित करता है।
हम गौसियन पृष्ठ पर, बिन्दु \( P \) के चारों ओर एक क्षेत्रफल-अवयव \( d\vec{A} \) पर विचार करते हैं। इस अवयव पर वैद्युत-क्षेत्र वेक्टर \( \vec{E} \) तथा क्षेत्रफल वेक्टर \( d\vec{A} \) दोनों ही बाहर की ओर को त्रिज्यतः दिष्ट हैं, अर्थात् उनके बीच कोण शून्य है। अब, क्षेत्रफल-अवयव \( d\vec{A} \) से होकर जाने वाला वैद्युत फ्लक्स
\( d\Phi_E = \vec{E} \cdot d\vec{A} = EdA \cos 0^\circ = EdA \)
अतः सम्पूर्ण गौसियन पृष्ठ से होकर जाने वाला वैद्युत फ्लक्स
\( \Phi_E = \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = \oint EdA = E \oint dA \)
क्योंकि सम्पूर्ण पृष्ठ पर \( E \) नियत है।
परन्तु \( \oint dA = 4\pi r^2 \) (गोले का पृष्ठ-क्षेत्रफल), अतः \( \Phi_E = E(4\pi r^2) \)। परन्तु गौस की प्रमेय से,
\( \Phi_E = q/\epsilon_0 \), जहाँ \( q \), बन्द गौसियन पृष्ठ द्वारा परिबद्ध सम्पूर्ण आवेश है। अतः
\( E(4\pi r^2) = \frac{q}{\epsilon_0} \)
अथवा \( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r^2} \) [\( r > R \) के लिये] ...(1)
किसी बिन्दु-आवेश \( q \) से \( r \) दूरी पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता \( E \) के लिए यही सूत्र है। अतः स्पष्ट है कि एकसमान आवेशित गोलीय कोश बाह्य बिन्दुओं के लिये ठीक वैसे ही व्यवहार करती है जैसे कि सम्पूर्ण आवेश कोश के केन्द्र पर स्थित हो।
यदि कोश पर आवेश का पृष्ठ-घनत्व (surface density of charge) \( \sigma \) हो, तब
\( q = 4\pi R^2 \sigma \)
\( q \) का यह मान समीकरण (1) में रखने पर,
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{4\pi R^2 \sigma}{r^2} = \frac{\sigma R^2}{\epsilon_0 r^2} \) ...(2)
यह एकसमान आवेशित गोलीय कोश के बाहर वैद्युत क्षेत्र का वैकल्पिक सूत्र है।
कोश के पृष्ठ पर (At the Surface of Spherical Shell) - यदि बिन्दु \( P \) कोश के ठीक पृष्ठ पर है \( (r = R) \), तब समीकरण (1) व समीकरण (2) से
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{R^2} = \frac{\sigma}{\epsilon_0} \)
आन्तरिक बिन्दु पर (At an Internal Point) - माना कि कोश के भीतर एक बिन्दु \( P' \) (चित्र 1.28) है। चूँकि आवेश कोश के पृष्ठ पर वितरित है तथा कोश के भीतर कोई आवेश नहीं है, अतः बिन्दु \( P' \) से गुजरने वाले गौसियन पृष्ठ के भीतर कोई आवेश नहीं होगा तथा गौसियन पृष्ठ से निर्गत फ्लक्स शून्य होगा, अर्थात्
\( \Phi_E = \oint E dA = E \oint dA = E(4\pi r^2) = 0 \)
अथवा \( E = 0 \).
स्पष्ट है कि आवेशित गोलीय कोश के भीतर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता सर्वत्र शून्य होती है।
एकसमान आवेशित गोलीय कोश के कारण, कोश के केन्द्र से दूरी \( r \) के साथ वैद्युत क्षेत्र \( E \) का विचरण (variation) चित्र 1.29 में दर्शाया गया है। कोश के भीतर \( (r = 0 \) से \( r = R \) तक) वैद्युत-क्षेत्र \( E \) सर्वत्र शून्य है, कोश के पृष्ठ पर अधिकतम है तथा कोश के बाहर व्युत्क्रम-वर्ग के नियमानुसार तेजी से घटता जाता है \( (E \propto 1/r^2) \).
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक आवेशित गोलीय कोश के केंद्र से दूरी (\(r\)) के साथ विद्युत क्षेत्र (\(E\)) के विचरण को दर्शाता है। \(r < R\) (कोश के भीतर) के लिए विद्युत क्षेत्र शून्य है। \(r = R\) (कोश की सतह पर) विद्युत क्षेत्र अधिकतम है। \(r > R\) (कोश के बाहर) के लिए विद्युत क्षेत्र \(1/r^2\) के अनुसार घटता जाता है।
In simple words: For a charged spherical shell, the electric field is zero inside the shell. On the surface and outside, it acts as if all the charge is concentrated at the center, following an inverse square law. The field is maximum at the surface.
🎯 Exam Tip: This is a crucial derivation. Remember to treat three cases: (i) outside (\(r > R\)), (ii) on the surface (\(r = R\)), and (iii) inside (\(r < R\)). For each case, choose an appropriate Gaussian surface. The field inside a conducting shell is always zero.
Question 13.
गौस की प्रमेय बताइए । एकसमान रूप से आवेशित अचालक गोले के कारण किसी बाह्य बिन्दु पर उत्पन्न वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
या
'R' त्रिज्या के एकसमान रूप से आवेशित अचालक गोले के केन्द्र से \( (r < R) \) दूरी पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक ज्ञात कीजिए।
Answer:
उत्तर-
गौस की प्रमेय- दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 7 का उत्तर देखिए ।
माना \( R \) त्रिज्या का एक विलगित (isolated) अचालक (non-conducting) ठोस गोला है जिसके सम्पूर्ण आयतन में \( q \) आवेश एकसमान रूप से वितरित है। इसके केन्द्र \( O \) से \( r \) दूरी पर स्थित बिन्दु \( P \) पर इसके कारण उत्पन्न वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है, जबकि \( r < R \).
यह बिन्दु \( P \) गोले के भीतर केन्द्र \( O \) से \( r \) दूरी पर है । \( P \) पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता प्राप्त करने के लिए बिन्दु \( P \) से गुजरने वाली गोलीय गौसियन पृष्ठ खींचते हैं। \( P \) के परितः गौसियन पृष्ठ के अल्पांश क्षेत्रफल अवयव \( d\vec{A} \) का क्षेत्रीय सदिश \( d\vec{A} \) भी पृष्ठ के लम्बवत् अर्थात् \( \vec{E} \) की दिशा में ही होगा अर्थात् उनके बीच कोण शून्य है।
अतः क्षेत्रफल अवयव \( d\vec{A} \) से होकर जाने वाला वैद्युत-फ्लक्स
\( d\Phi_E = \vec{E} \cdot d\vec{A} = EdA \cos 0^\circ = EdA \)
अतः सम्पूर्ण गौसियन पृष्ठ से होकर जाने वाला वैद्युत-फ्लक्स
\( \Phi_E = \oint EdA = E \oint dA \) [\( \because E \) सभी अवयवों के लिए समान है।]
\( = E(4\pi r^2) \)
परन्तु गौस की प्रमेय के अनुसार \( \Phi_E = q'/\epsilon_0 \)
जहाँ \( q' \), आवेश \( q \) का वह भाग है, जो त्रिज्या \( r \) के बन्द गौसियन पृष्ठ द्वारा परिबद्ध है।
\( E(4\pi r^2) = \frac{q'}{\epsilon_0} \)
या \( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q'}{r^2} \) ...(1)
क्योंकि (अचालक) गोला एकसमान रूप से आवेशित है, इसलिए आवेश का आयतन घनत्व \( \rho \) पूरे गोले में एकसमान (uniform) होगा।
अर्थात् \( \rho = \frac{q}{(4/3)\pi R^3} = \frac{q'}{(4/3)\pi r^3} \) या \( q' = q \left(\frac{r}{R}\right)^3 \)
\( q' \) का यह मान समी० (1) में रखने पर,
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q r^3}{R^3 r^2} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{qr}{R^3} \) [\( r < R \) के लिए] ...(2)
इसमें \( q = \frac{4}{3}\pi R^3 \rho \) रखने पर,
\( E = \frac{\rho r}{3\epsilon_0} \) [\( r < R \) के लिए] ...(3)
समी० (2) व (3) अचालक आवेशित गोले के भीतर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता के व्यंजक हैं। स्पष्ट है कि एकसमान आवेशित अचालक गोले के भीतर किसी बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता, उस बिन्दु की गोले के केन्द्र से दूरी \( (r) \) के अनुक्रमानुपाती होती है।
In simple words: For a uniformly charged non-conducting solid sphere, the electric field inside (for \( r < R \)) is directly proportional to the distance from the center, as only the charge within the Gaussian surface contributes to the flux.
🎯 Exam Tip: For a non-conducting solid sphere, remember that the charge is distributed throughout its volume. The key step is to calculate the enclosed charge \( q' \) within the Gaussian surface, which is proportional to \( r^3 \), leading to \( E \propto r \) inside the sphere.
Question 14.
एकसमान आवेशित अचालक गोले के भीतर किसी बिन्दु पर गौस प्रमेय की सहायता से वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता का सूत्र स्थापित कीजिए।
Answer:
उत्तर-
माना कि बिन्दु \( P \) गोले के भीतर केन्द्र \( O \) से \( r \) दूरी पर है (चित्र 1.31)।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक समान रूप से आवेशित अचालक गोले को दर्शाता है, जिसके केंद्र O से \(r\) दूरी पर एक आंतरिक बिंदु P स्थित है। बिंदु P से होकर गुजरने वाला एक गोलाकार गौसियन पृष्ठ खींचा गया है, जो विद्युत क्षेत्र \(E\) और क्षेत्रफल अल्पांश \(d\vec{A}\) की दिशाओं को इंगित करता है, जिसका उपयोग गोले के अंदर विद्युत क्षेत्र की गणना के लिए किया जाता है।
\( P \) पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता प्राप्त करने के लिए। बिन्दु \( P \) से गुजरने वाला गोलीय गौसियन पृष्ठ खींचते हैं। माना आवेशित गोले के कारण \( P \) पर उत्पन्न वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता \( E \) में है। आवेश वितरण की सममिति के कारण गौसियन पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता का परिमाण \( E \) समान होगा तथा दिशा पृष्ठ के लम्बवत् होगी । \( P \) के परितः गौसियन पृष्ठ के अल्पांश क्षेत्रफल अवयव \( d\vec{A} \) को चित्र 1.31 क्षेत्रीय सदिश \( d\vec{A} \) भी पृष्ठ के लम्बवत् अर्थात् \( \vec{E} \) की दिशा में ही होगी अर्थात् उनके बीच कोण शून्य है। अतः क्षेत्रफल अवयव \( d\vec{A} \) से होकर जाने वाला वैद्युत फ्लक्स
\( d\Phi_E = \vec{E} \cdot d\vec{A} = EdA \cos 0^\circ = EdA \)
अतः सम्पूर्ण गौसियन पृष्ठ से होकर जाने वाला वैद्युत फ्लक्स
\( \Phi_E = \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = E \oint dA \) [\( \because E \) सभी अवयवों के लिए समान है।]
\( = E(4\pi r^2) \)
परन्तु गौस की प्रमेय के अनुसार, \( \Phi_E = q'/\epsilon_0 \)
जहाँ \( q' \), आवेश \( q \) का वह भाग है, जो त्रिज्या \( r \) के बन्द गौसियन पृष्ठ द्वारा परिबद्ध है।
\( E(4\pi r^2) = \frac{q'}{\epsilon_0} \)
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q'}{r^2} \) ...(1)
क्योंकि (अचालक) गोला एकसमान रूप से आवेशित है, इसलिए आवेश का आयतन घनत्व \( \rho \) पूरे गोले में एकसमान (uniform) होगा।
अर्थात् \( \rho = \frac{q}{(4/3)\pi R^3} = \frac{q'}{(4/3)\pi r^3} \)
या \( q' = q \left(\frac{r}{R}\right)^3 \)
\( q' \) का यह मान समी० (1) में रखने पर,
\( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q r^3}{R^3 r^2} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{qr}{R^3} \) [\( r < R \) के लिए] ...(2)
इसमें \( q = \frac{4}{3}\pi R^3 \rho \) रखने पर,
\( E = \frac{\rho}{3\epsilon_0} r \) [\( r < R \) के लिए] ...(3)
समी० (2) व (3) अचालक आवेशित गोले के भीतर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता के व्यंजक हैं। स्पष्ट है कि एकसमान आवेशित अचालक गोले के भीतर किसी बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता, उस बिन्दु की गोले के केन्द्र से दूरी \( (r) \) के अनुक्रमानुपाती होती है।
In simple words: For a uniformly charged non-conducting sphere, the electric field inside at a distance \(r\) from the center is proportional to \(r\). This is because the Gaussian surface encloses only a fraction of the total charge, proportional to \(r^3\), leading to \(E \propto r\).
🎯 Exam Tip: The key challenge for an internal point in a non-conducting sphere is correctly calculating the enclosed charge \(q'\). Remember that \(q'\) is proportional to \(r^3\) (the volume ratio), not just \(r^2\) (area ratio). The result \(E \propto r\) is fundamental.
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