UP Board Solutions Class 12 Home Science Chapter 12 व्यक्ति के व्यक्तित्व पर बाल्यावस्था का प्रभाव

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Chapter Solutions: Class 12 Home Science (UP Board) - Chapter 12 व्यक्ति के व्यक्तित्व पर बाल्यावस्था का प्रभाव

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Class 12 Home Science Chapter 12 व्यक्ति के व्यक्तित्व पर बाल्यावस्था का प्रभाव Textbook Solutions with Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

 

Question 1. व्यक्तित्व की अवधारणा में निहित है।
या
व्यक्ति के व्यक्तित्व की पहचान कैसे करेंगे?

(a) आंतरिक गुण
(b) बाह्य गुण
(c) व्यक्ति के आन्तरिक व बाह्य गुण
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (c) व्यक्ति के आन्तरिक व बाह्य गुण
In simple words: Someone's personality is made up of both their inner qualities, like thoughts and feelings, and their outer qualities, like how they behave and look.

🎯 Exam Tip: व्यक्तित्व (Personality) को हमेशा आंतरिक और बाह्य दोनों गुणों का मिश्रण मानें, केवल बाहरी रूप-रंग को नहीं।

 

Question 2. वंशानुक्रम किस रूप में व्यक्तित्व को प्रभावित करता है?
(a) लिंग निर्धारण
(b) शारीरिक विशेषताएँ
(c) शैक्षिक प्रतिभा
(d) उपरोक्त सभी
Answer: (d) उपरोक्त सभी
In simple words: Heredity decides our gender, physical features, and mental potential, which all shape our overall personality.

🎯 Exam Tip: वंशानुक्रम (Heredity) माता-पिता से मिलने वाले सभी शारीरिक और मानसिक गुणों को प्रभावित करता है, इसलिए सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें।

 

Question 3. बाल्यावस्था मानी जाती है:
(a) 1 से 6 वर्ष
(b) 6 से 12 वर्ष
(c) 13 से 18 वर्ष
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) 6 से 12 वर्ष
In simple words: Childhood is the stage of life between 6 to 12 years of age, where a child grows steadily and starts going to school.

🎯 Exam Tip: Remember that 6 to 12 years is often called late childhood or school-going age, which helps in identifying the correct option quickly.

 

Question 4. व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले कारक हैं:
(a) परिवार का प्रभाव
(b) स्कूल का प्रभाव
(c) माता-पिता का प्रभाव
(d) उपरोक्त सभी विकल्प
Answer: (d) उपरोक्त सभी विकल्प
In simple words: A person's personality is shaped by everything around them, including their family, school, and parents.

🎯 Exam Tip: When all options contribute positively to the question's context, 'All of the options' is usually the correct choice.

 

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

 

Question 1. व्यक्तित्व का अर्थ बताते हुए परिभाषित कीजिए।
Answer: व्यक्ति की आंतरिक एवं बाह्य विशेषताओं का समन्वित एवं संगठित रूप ही व्यक्तित्व है। ऑलपोर्ट के अनुसार, "व्यक्तित्व व्यक्ति के भीतर उन मनोदैहिक गुणों का गत्यात्मक संगठन है, जो परिवेश के प्रति होने वाले अपूर्व समायोजन का निर्धारण करता है।" यह परिभाषा दर्शाती है कि हमारा व्यक्तित्व समय के साथ विकसित और अनुकूलित होता रहता है।
In simple words: Personality is the unique mix of a person's inner thoughts and outer behavior that decides how they react to their surroundings.

🎯 Exam Tip: Always write Allport's definition verbatim in quotes to score full marks in personality-related questions.

 

Question 2. श्रेष्ठ व्यक्तित्व की चार मुख्य विशेषताओं को बताएँ। (2013) अथवा सन्तुलित व्यक्तित्व की विशेषताएँ लिखिए। (2007)
Answer: सन्तुलित एवं श्रेष्ठ व्यक्तित्व की मुख्य विशेषताएँ निम्न हैं:
• उत्तम मानसिक स्वास्थ्य
• उत्तम शारीरिक स्वास्थ्य
• संवेगात्मक सन्तुलन
• सामाजिकता
• उत्तम चरित्र
• महत्ता के साथ-साथ सन्तोष होना। ये सभी गुण मिलकर एक व्यक्ति को समाज में आदरणीय और सफल बनाते हैं।
In simple words: A good personality means having a healthy mind and body, controlling your emotions, being friendly, and having good moral character.

🎯 Exam Tip: List at least four points clearly with bullet marks to make your answer structured and easy for the examiner to read.

 

Question 3. बालक के व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले दो मुख्य कारक कौन-कौन से हैं? (2012)
Answer: बालक के व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले दो मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:
1. वंशानुक्रम (आनुवंशिकता) - माता-पिता से मिलने वाले शारीरिक और मानसिक गुण।
2. वातावरण (पर्यावरण) - बालक के आस-पास का सामाजिक, पारिवारिक और विद्यालयी माहौल। ये दोनों कारक मिलकर बालक के सर्वांगीण विकास की दिशा तय करते हैं।
In simple words: A child's personality is shaped by two main things: the genes they get from their parents and the environment they grow up in.

🎯 Exam Tip: Clearly state 'Heredity' and 'Environment' as the two primary pillars of personality development to secure maximum marks.

 

Question 4. व्यक्तित्व के विकास की विभिन्न अवस्था लिखिए। (2014)
Answer: व्यक्तित्व के विकास की मुख्य रूप से चार अवस्थाएँ होती हैं जो मानव जीवन के क्रमिक विकास को दर्शाती हैं। ये अवस्थाएँ निम्नलिखित हैं:
• शैशवावस्था
• बाल्यावस्था
• किशोरावस्था
• प्रौढ़ावस्था
In simple words: Human personality grows through four main stages of life: infancy, childhood, adolescence, and adulthood.

🎯 Exam Tip: List all four stages in the correct chronological order to secure full marks.

 

Question 5. परिवार में बालक के व्यक्तित्व पर सर्वाधिक प्रभाव किसका पड़ता है। (2004)
Answer: परिवार में बालक के व्यक्तित्व पर सर्वाधिक प्रभाव माता-पिता का पड़ता है। माता-पिता के व्यवहार और संस्कार बालक के चरित्र की नींव रखते हैं। इसके अतिरिक्त बालक के व्यक्तित्व के विकास पर वातावरण का भी प्रभाव पड़ता है।
In simple words: Parents have the biggest influence on a child's personality because children learn most of their habits and behaviors from their family environment.

🎯 Exam Tip: Clearly highlight 'parents' (माता-पिता) and 'environment' (वातावरण) as the key influencing factors.

 

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

 

Question 1. अच्छे व्यक्तित्व की क्या-क्या विशेषताएँ हैं? (2013)
Answer: श्रेष्ठ व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. सुदृढ़ मानसिक स्वास्थ्य: स्वस्थ मन, एक अच्छे व्यक्तित्व की अभिन्न विशेषता है। स्वस्थ मन से आशय व्यक्ति की बुद्धि सामान्य होने, सदैव प्रसन्नचित रहने एवं समुचित मानसिक शक्तियों से सम्पन्न रहने से है।
2. उत्तम शारीरिक स्वास्थ्य: एक अच्छे व्यक्तित्व के लिए आवश्यक है कि शारीरिक गठन आयु एवं लिंग आदि के समानुपाती हो तथा शरीर स्वस्थ एवं रोगमुक्त हो। यह शारीरिक संतुलन व्यक्ति को ऊर्जावान बनाए रखता है।
3. सामाजिकता: व्यक्ति समाज के साथ जितना अच्छा समायोजन करने की योग्यता रखता है, उतना ही उसका व्यक्तित्व श्रेष्ठ माना जाता है।
4. संवेगात्मक सन्तुलन: संवेगात्मक रूप से सन्तुलित होने का अभिप्राय है कि व्यक्ति न तो अति संवेगी हो और न ही संवेग शून्य हो। श्रेष्ठ व्यक्तित्व के लिए संवेगों का विकास सन्तुलित रूप से होना आवश्यक है।
5. अच्छे लक्ष्य: श्रेष्ठ व्यक्तित्व के लिए लक्ष्य सदैव अच्छे, स्वस्थ एवं व्यावहारिक होने चाहिए।
6. चरित्रवान व्यक्तित्व: चारित्रिक गुणों; जैसे- झूठ न बोलना, धोखा न देना, चोरी न करना, बेईमानी न करना आदि से सम्पन्न व्यक्ति का व्यक्तित्व उत्तम माना जाता है।
7. सन्तोषी एवं महत्वाकांक्षी: श्रेष्ठ व्यक्तित्व के लिए सन्तोष एवं महत्वाकांक्षा के बीच सन्तुलन स्थापित होना आवश्यक है। व्यक्ति को निरन्तर प्रगति की ओर प्रयत्नशील रहना चाहिए, किन्तु अपने प्रयत्नों में असफल होने पर भी उसे दुःख, चिन्ता या भग्नाशा का शिकार नहीं होना चाहिए।
In simple words: A good personality means having a healthy mind and body, getting along well with others, controlling your emotions, having good goals, being honest, and staying positive even during failures.

🎯 Exam Tip: Try to list at least 4 to 5 key characteristics with brief explanations to score full marks in a 2-mark question.

 

Question 2. आनुवंशिकता से आप क्या समझते हैं? (2008, 10)
Answer: आनुवंशिकता (Heredity) से अभिप्राय उन शारीरिक और मानसिक गुणों से है जो माता-पिता से उनकी संतानों में जन्मजात रूप से हस्तांतरित होते हैं। यह जैविक प्रक्रिया बालक के रंग, रूप, बुद्धि और शारीरिक बनावट को निर्धारित करती है। ये गुण पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होते रहते हैं।
In simple words: Heredity is the passing of physical or mental characteristics genetically from parents to their children, like eye color or height.

🎯 Exam Tip: Define heredity clearly as the transmission of traits from parents to offspring and mention examples like physical appearance or intelligence.

आनुवंशिकता से आशय आनुवंशिक बालकों के विकास को प्रभावित करती है। आनुवंशिकता का अंग्रेजी शब्द हेरेडिटी (Heredity) होता है। लैटिन भाषा से निर्मित इस शब्द का आशय उस पूँजी से है, जो बच्चों को माता-पिता से उत्तराधिकार के रूप में प्राप्त होती है अर्थात् आनुवंशिकता का अर्थ व्यक्तियों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी संधारित होने वाले शारीरिक, बौद्धिक तथा अन्य व्यक्तित्व सम्बन्धी गुणों से है। इस मान्यता के अनुसार बच्चों में सन्तान के विभिन्न गुण एवं लक्षण अपने माता-पिता के समान होते हैं।

उदाहरणस्वरूप गोरे माता-पिता की संतान अधिकांशतः गोरी ही होती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि प्रजनन की प्रक्रिया के माध्यम से संचारित होने वाले जैविकीय एवं अन्य गुणों को आनुवंशिक माना जाता है। आनुवंशिकता के वाहक जीन्स होते हैं। आनुवंशिकता के ही परिणामस्वरूप विभिन्न पीढ़ियों में समानता होती है।

 

Question 3. टिप्पणी लिखिए - बच्चों के विकास में खेल का महत्त्व। (2006, 13)
Answer: खेल का बच्चों के सर्वांगीण विकास में बहुत योगदान है, क्योंकि खेलने से बच्चों के शरीर के सभी अंगों का सही प्रकार से विकास होता है। इसके अतिरिक्त खेलते समय बच्चे में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, टीम भावना, सहयोग, त्याग, हार के समय भी मुस्कुराना, अनुशासन आदि गुणों का विकास होता है। परिणामस्वरूप बच्चे का उत्तम प्रकार का समाजीकरण होता है। जहाँ तक संवेगात्मक गुणों के विकास का प्रश्न है, खेलने से बच्चे का तनाव दूर होता है एवं उसमें संवेगात्मक स्थिरता आती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि बच्चों के विकास में खेल का अत्यन्त महत्त्व है। खेलकूद से बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य भी सुदृढ़ होता है।
In simple words: Playing sports and games is essential for a child's overall growth. It not only builds physical strength but also teaches important life skills like teamwork, discipline, and emotional balance.

🎯 Exam Tip: To score full marks, highlight how play contributes to physical, social, and emotional development with clear examples like teamwork and stress relief.

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

 

Question 1. व्यक्तित्व को परिवार तथा वातावरण किस प्रकार प्रभावित करता है? विवेचना कीजिए। (2015)
अथवा
मनुष्य के व्यक्तित्व पर वातावरण किस प्रकार प्रभाव डालता है? (2008)
अथवा
बालक के व्यक्तित्व के विकास में आनुवंशिकता तथा पर्यावरण का क्या महत्त्व है? (2018)
अथवा
बालक के व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले तत्व कौन-कौन से हैं? (2003, 06)
अथवा
व्यक्तित्व निर्माण में किन कारकों का योगदान होता है? (2006, 08, 09, 14)

Answer: बालक के व्यक्तित्व निर्माण में आनुवंशिकता एवं पर्यावरण का प्रमुख योगदान होता है। आनुवंशिकता के अन्तर्गत वे समस्त कारक निहित होते हैं, जो बालक को अपने माता-पिता तथा पूर्वजों से प्राप्त होते हैं। बालक के शारीरिक गुण तथा अन्य विभिन्न जन्मजात गुण आनुवंशिकता से ही निर्धारित होते हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए हम कह सकते हैं कि बालक के व्यक्तित्व के विकास में आनुवंशिकता का विशेष महत्त्व होता है। पर्यावरण से आशय उन समस्त बाहरी कारकों से है, जो जन्म के उपरान्त बालक के जीवन को प्रभावित करते हैं। ये कारण भी अनेक हैं तथा इनका बालक के व्यक्तित्व के विकास में अत्यधिक योगदान होता है। उत्तम पर्यावरण बालक के विकास में सहायक तथा प्रतिकूल पर्यावरण बाधक होता है। दोनों कारक मिलकर ही एक संतुलित व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।
In simple words: A child's personality is shaped by both nature (heredity/genes from parents) and nurture (the environment they grow up in). While heredity provides the basic physical and mental traits, the environment molds and refines them.

🎯 Exam Tip: Always explain both heredity and environment as interconnected forces rather than separate ones, as personality is a product of their interaction.

व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले कारक

व्यक्तित्व विकास को प्रभावित करने वाले तत्व (Factors Affecting Personality Development)

ऐसे अनेक कारक हैं, जो बालक के व्यक्तित्व निर्माण में प्रभाव डालते हैं। बालक के व्यक्तित्व पर प्रभाव डालने वाले तत्व निम्नलिखित हैं:

  • 1. शारीरिक बनावट का प्रभाव: व्यक्ति के व्यक्तित्व पर उसके आकार का प्रभाव पड़ता है। यह देखा जाता है कि गोल-मटोल आदमी हास्यप्रिय, आरामपसन्द एवं सामाजिक होते हैं, जबकि दुबले-पतले व्यक्ति संयमी होते हैं। भव्य एवं आकर्षक शारीरिक गठन वाले व्यक्ति के प्रति सम्मान का व्यवहार किया जाता है।
  • 2. अन्त:स्रावी ग्रन्थियाँ: ये ग्रन्थियाँ अपना रस रक्त में छोड़ देती हैं एवं रक्त इसे सम्पूर्ण शरीर में ले जाता है। यदि ये ग्रन्थियाँ पर्याप्त मात्रा में रक्त को अपना रस देना बन्द कर दें, तो शरीर, बुद्धि एवं भाव में परिवर्तन हो आता है। यदि पीयूष ग्रन्थि आदि अपना काम मन्द गति से करती है, तो व्यक्ति की लम्बाई नहीं बढ़ती तथा वह बौना हो जाता है, यदि ये अन्य तीव्र गति से कार्य करती हैं, तो व्यक्ति लम्बा हो जाता है।
  • 3. स्नायुविक संगठन: निरीक्षण द्वारा यह देखा गया है कि यदि बाल्यावस्था में व्यक्ति के मस्तिष्क को किसी प्रकार का आघात लगता है, तो उसके व्यक्तित्व में विभिन्न प्रकार के परिवर्तन आ जाते हैं। इसके साथ-साथ विशिष्ट प्रकार के स्नायुविक संगठन का भी व्यक्तित्व पर उल्लेखनीय प्रभाव पड़ता है।
  • 4. माता-पिता का प्रभाव: माता-पिता का व्यवहार बच्चों पर बहुत अधिक प्रभाव डालता है। जो माता-पिता कठोर स्वभाव के होते हैं एवं अपने बच्चों को अधिक प्यार नहीं करते, ऐसे बच्चों में अन्तर्मुखी प्रवृत्ति बढ़ जाती है। वे एकान्त में रहने लगते हैं तथा हमेशा कल्पनाशील रहते हैं। जो माता-पिता अपने बच्चों को अधिक प्यार करते हैं, उन बच्चों में आत्मनिर्भरता के गुणों का अभाव पाया जाता है, वे बच्चे परावलम्बी हो जाते हैं। इस प्रकार उपरोक्त दोनों प्रकार के बच्चों का व्यक्तित्व स्वाभाविक तथा सामान्य नहीं होता है। अतः माता-पिता को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों के प्रति किए गए आचरण में प्यार एवं नियन्त्रण का सन्तुलन बना रहे।
  • 5. बालक के जन्म-क्रम का प्रभाव: परिवार में बच्चा जब तक इकलौता रहता है, तो उसके अधिकार को छीनने वाला कोई नहीं होता और न कोई उसकी सुख-सुविधाओं में हिस्सा लेता है, इसलिए वह जिद्दी हो जाता है। इससे भिन्न परिवार में सबसे छोटा बच्चा परिवार में सभी का स्नेह प्राप्त करता है एवं उत्तरदायित्वों से मुक्त होता है, वह हमेशा सहायता के लिए दूसरों की ओर ही देखता है।
  • 6. क्रीड़ा-समूह का प्रभाव: जब बच्चा चलने-फिरने योग्य हो जाता है, तो वह अन्य बच्चों के साथ मिलता-जुलता है। खेल-कूद के लिए बच्चों का एक क्रीड़ा समूह बन जाता है। वे अपना-अपना कार्य बाँट लेते हैं। कार्यों के आधार पर ही व्यक्तित्व का विकास होता है।
  • 7. आर्थिक स्थिति का प्रभाव: परिवार की आर्थिक स्थिति व्यक्तित्व विकास को प्रभावित करने में महत्त्वपूर्ण योगदान देती है। सामान्य रूप से यह देखा गया है कि जो बालक आर्थिक अभावों में पलते हैं, वे प्रायः अपराधी प्रवृत्ति के बन जाते हैं, जबकि सम्पन्न परिवारों के बालकों का विकास सुचारु रूप से होता है।

 

Question 2. “बाल्यावस्था अच्छी आदतों के निर्माण की उत्तम अवस्था है।” इस कथन की पुष्टि कीजिए। (2015, 18)
Answer: बाल्यावस्था सामान्यतः 2 से 12 वर्ष तक मानी जाती है। इस अवस्था को अच्छी आदतों के निर्माण की उत्तम अवस्था माना जाता है, क्योंकि इस अवस्था में बालक के व्यक्तित्व के सभी पक्षों का विकास स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होने लगता है। इस कथन की विवेचना निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत की जा सकती है:
1. शारीरिक विकास - बाल्यावस्था के दौरान बालकों की शारीरिक क्षमता बढ़ जाती है। वे कार्यों को स्वतन्त्र रूप से करने लगते हैं जिससे उनमें अच्छी आदतें विकसित होती हैं। यह विकास उनके भविष्य की मजबूत नींव रखता है।
In simple words: बाल्यावस्था (2 से 12 वर्ष) में बच्चों का दिमाग और शरीर तेजी से सीखता है, इसलिए इस उम्र में अच्छी आदतें डालना सबसे आसान और असरदार होता है।

🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय बाल्यावस्था की आयु सीमा (2 से 12 वर्ष) का उल्लेख अवश्य करें और मुख्य बिन्दुओं को रेखांकित करें।

 

Question 1. बाल्यावस्था में बच्चों के विकास (शारीरिक, मानसिक, सामाजिक-संवेगिक और नैतिक विकास) की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: बाल्यावस्था में बच्चों के विकास की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

१. शारीरिक एवं क्रियात्मक विकास: इस अवस्था में बालक शौच एवं नींद जैसी प्राथमिक क्रियाओं पर नियंत्रण करना सीखता है। नियमित रूप से मल त्याग की आदत एवं समय पर सोना व जागना ऐसी आदतें हैं, जो बाल्यावस्था में निरंतर अभ्यास करने से जीवनभर के लिए स्थायी हो जाती हैं। इस अवस्था में बालक पेशीय कौशलों में भी प्रमुख उपलब्धियाँ प्राप्त करता है। इस अवस्था में हाथ, भुजा एवं शरीर के सभी अंग, आँख की गति के साथ समन्वित होते हैं। बालक तेज दौड़ने, कूदने आदि में सक्षम रहता है। अतः इस अवस्था में बालक में अपने शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने एवं नियमित व्यायाम करने की आदत डाली जा सकती है। शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता भी बढ़ती है।

२. मानसिक विकास: सामान्यतः 7 से 11 वर्ष की आयु में बच्चे में किसी वस्तु की विभिन्न विशेषताओं पर ध्यान देने की क्षमता विकसित होती है। यह क्षमता बच्चे की इस बात को समझने में सहायक होती है कि चीजों को देखने या समझने के भिन्न-भिन्न तरीके होते हैं, इसके परिणामस्वरूप बच्चे दूसरों के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास करते हैं। चिंतन अधिक लचीला हो जाता है और समस्या समाधान करते समय बच्चे विकल्पों के बारे में सोच सकते हैं। स्पष्टतः इस अवस्था में माता-पिता एवं शिक्षक बच्चों में अच्छी आदतों का विकास करने में अधिक सफल होते हैं, क्योंकि वे बच्चों के समक्ष तार्किक उदाहरण प्रस्तुत कर उन्हें अच्छी आदतों के लाभ का ज्ञान करा सकते हैं, जिससे बच्चा स्वयं उन आदतों का अनुकरण करने की ओर उन्मुख होता है।

३. सामाजिक-संवेगिक विकास: बच्चे में विकसित हो रहे स्वतंत्रता के बोध के कारण वह कार्यों को अपने तरीके से करता है। बच्चे की इन स्वरित क्रियाओं के प्रति माता-पिता जिस प्रकार से प्रतिक्रिया करते हैं वह पहल की भावना या अपराध बोध को विकसित करता है। उदाहरणतः यदि उन्हें यह अनुभव कराया जाता है कि उनके प्रश्न अनुपयोगी हैं तथा उनके द्वारा खेले गए खेल मूर्खतापूर्ण हैं, तो संभव है कि बच्चों में स्वयं के प्रति दोष भावना विकसित हो। अतः बच्चों में कुछ नया रचनात्मक करने की एवं पहल करने की आदत का विकास, उनके कार्यों के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया से ही होता है। बाल्यावस्था में संवेगिक विकास का दूसरा पक्ष बच्चों के आत्मबोध से जुड़ा है। इस अवस्था में बच्चे स्वयं को सामाजिक समूहों के संदर्भ में देखना शुरू करते हैं; जैसे विद्यालय के संगीत क्लब, पर्यावरण क्लब आदि का सदस्य होना। इसके अतिरिक्त बाल्यावस्था में बच्चे अपनी लिंग भूमिका के प्रति जागरूक होते हैं। अतः इस अवस्था में बालक में दूसरे समूह अथवा दूसरे लिंग के व्यक्ति के अस्तित्व को स्वीकार करने की मनोवृत्ति पैदा की जा सकती है। सामान्यतः बाल्यावस्था में सामाजिक रूप से बच्चे का संसार विस्तृत हो जाता है एवं इसमें माता-पिता के अतिरिक्त परिवार तथा पास-पड़ोस एवं विद्यालय के प्रौढ़ व्यक्ति भी सम्मिलित हो जाते हैं। सामाजिक-संवेगिक विकास का यह चरण बालक में अनुकरण, सहानुभूति, सहनशीलता आदि के विकास को प्रोत्साहित करता है।

४. नैतिक विकास: इस अवस्था में बालक माता-पिता अथवा समाज के नियमों के आधार पर अपने नैतिक तर्कों को विकसित करता है। बच्चे इन नियमों को स्वयं के नियमों के रूप में स्वीकृत करते हैं। दूसरों की स्वीकृति प्राप्त करने के लिए इन नियमों को आत्मसात् कर लिया जाता है। बच्चे इन नियमों को ऐसे सुनिश्चित दिशा-निर्देश के रूप में देखते हैं, जिनका अनुकरण किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष: उपरोक्त विवेचन के आधार पर कहा जा सकता है कि बाल्यावस्था अच्छी आदतों के विकास की उत्तम अवस्था है।
In simple words: During childhood (ages 7 to 11), children develop physically, mentally, socially, and morally. They learn to control their bodies, understand other people's viewpoints, make friends in groups, and follow rules set by parents and society. This is the best age to build lifelong good habits.

🎯 Exam Tip: To score full marks, clearly divide your answer into subheadings like Physical, Mental, Social-Emotional, and Moral development, and write 2-3 key points under each.

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