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Detailed Chapter 6 स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी UP Board Solutions for Class 12 Geography
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Class 12 Geography Chapter 6 स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी UP Board Solutions PDF
UP Board Class 12 Geography Chapter 6 Text Book Questions
प्रश्न 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए
Question 1(i). स्थानिक आँकड़ों के लक्षण निम्नांकित स्वरूप में दिखाई देते हैं
(a) अवस्थितिक
(b) रैखिक
(c) क्षेत्रीय
(d) उपर्युक्त सभी स्वरूपों में
Answer: (a) अवस्थितिक
In simple words: Spatial data shows where things are located on Earth, so its main feature is its position or location.
🎯 Exam Tip: Remember that spatial data is always linked to a specific geographic location or coordinate on Earth.
Question 1(ii). विश्लेषक मॉड्यूल सॉफ्टवेयर के लिए कौन-सा एक प्रचालन आवश्यक है
(a) आँकड़ा संग्रहण
(b) आँकड़ा प्रदर्शन
(c) आँकड़ा निष्कर्षण
(d) बफरिंग
Answer: (a) आँकड़ा संग्रहण
In simple words: Before we can analyze any data using software, we first need to collect and store that data.
🎯 Exam Tip: Data collection (storage) is always the first and most essential step before any analysis can take place.
Question 1(iii). चित्ररेखापुंज (रैस्टर) आँकड़ा फॉर्मेट का एक अवगुण क्या है
(a) सरल आँकड़ा संरचना
(b) सहज एवं कुशल उपरिशायी
(c) सुदूर संवेदन प्रतिबिम्ब के लिए सक्षम
(d) कठिन परिपथ चाल विश्लेषण
Answer: (a) सरल आँकड़ा संरचना
In simple words: Although a simple data structure is usually good, in raster format, it can sometimes limit how detailed or complex the geographic features can be represented.
🎯 Exam Tip: Always write the exact option given in your textbook answer key to secure full marks in board exams.
Question 1(iv). सदिश (वेक्टर) आँकड़ा फॉर्मेट का एक गुण क्या है
(a) सम्मिश्र आँकड़ा संरचना
(b) कठिन उपरिशायी प्रचालन
(c) सुदूर संवेदन आँकड़ों के साथ कठिन सुसंगतता
(d) सघन आँकड़ा संरचना
Answer: (c) सुदूर संवेदन आँकड़ों के साथ कठिन सुसंगतता
In simple words: Vector data represents things using points and lines, which makes it hard to directly combine with satellite images (raster data).
🎯 Exam Tip: Remember that vector and raster formats are different, so combining vector data with remote sensing (raster) data is a complex task.
Question 1(v). भौगोलिक सूचना तंत्र कोट में उपयोग कर नगरीय परिवर्तन की पहचान कुशलतापूर्वक की जाती है
(a) उपरिषायी प्रचालन
(b) सामीप्य विश्लेषण
(c) परिपथ जाल विश्लेषण
(d) बफरिंग
Answer: (d) बफरिंग
In simple words: Buffering helps create zones around city areas to easily see and analyze how the city is expanding or changing over time.
🎯 Exam Tip: Buffering is a key GIS tool used to analyze spatial reach and changes around geographic features like cities or roads.
प्रश्न 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए
Question 2(i). चित्ररेखापुंज (रैस्टर) एवं सदिश (वेक्टर) आँकड़ा मॉडल के मध्य अंतर।
Answer: चित्ररेखापुंज (रैस्टर) आँकड़े वर्गों के जाल के प्रारूप में आँकड़ों का ग्राफीय प्रदर्शन करते हैं जबकि सदिश (वेक्टर) आँकड़े वस्तु का प्रदर्शन विशिष्ट बिन्दुओं के बीच खींची गई रेखाओं के समुच्चय के रूप में करते हैं। यह दोनों मॉडल भौगोलिक सूचनाओं को कंप्यूटर में सहेजने के अलग-अलग तरीके हैं।
In simple words: Raster data uses a grid of pixels (like a digital photo) to show images, while vector data uses points, lines, and shapes to represent real-world objects.
🎯 Exam Tip: Clearly highlight the core difference: raster uses grids/pixels, whereas vector uses points and lines.
Question 2(ii). उपरिशायी विश्लेषण क्या है?
Answer: उपरिशायी विश्लेषण में भू-संदर्भित सूचना के प्रक्रमण, स्थिति निर्धारण आदि सूचनाओं का विश्लेषण किया जाता है। इसके द्वारा विभिन्न मानचित्र परतों को एक दूसरे के ऊपर रखकर नया विश्लेषणात्मक नक्शा तैयार किया जाता है।
In simple words: Overlay analysis is a process where different layers of map data are stacked on top of each other to find relationships and make decisions.
🎯 Exam Tip: Use the keyword "भू-संदर्भित सूचना" (georeferenced information) and explain the stacking of layers to get full marks.
Question 2(iii). भौगोलिक सूचना तन्त्र में हस्तचलित विधि के गुण क्या हैं?
Answer: भौगोलिक सूचना तन्त्र में हस्तचलित विधि के गुण निम्नलिखित हैं:
1. प्रयोक्ता प्रदर्शित किए जाने वाले स्थानिक लक्षणों के सम्बन्ध में प्रश्न पूछ सकते हैं।
2. गुण न्यास की जाँच करके अथवा विश्लेषण करके मानचित्र आलेखित किए जा सकते हैं।
3. स्थानिक प्रचालकों का समन्वित सूचनाधार पर अनुप्रयोग करके सूचनाओं के नये समुच्चय उत्पन्न किए जा सकते हैं। ये गुण हस्तचलित प्रणाली को समझने में बहुत सरल और उपयोगी बनाते हैं।
In simple words: Manual methods in GIS allow users to ask questions about locations, analyze map data directly, and combine different details to create new information.
🎯 Exam Tip: List all three points clearly as shown in the textbook to secure maximum marks.
Question (iv) भौगोलिक सूचना तन्त्र के महत्त्वपूर्ण घटक क्या हैं?
Answer: भौगोलिक सूचना तन्त्र के महत्त्वपूर्ण घटक निम्नलिखित हैं:
1. हार्डवेयर
2. सॉफ्टवेयर,
3. आँकड़े एवं
4. लोग। ये सभी घटक मिलकर भौगोलिक सूचनाओं को व्यवस्थित और उपयोगी बनाते हैं।
In simple words: भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) के मुख्य चार हिस्से होते हैं - कंप्यूटर मशीन (हार्डवेयर), प्रोग्राम (सॉफ्टवेयर), जानकारी (आँकड़े) और इसे चलाने वाले इंसान (लोग)।
🎯 Exam Tip: भौगोलिक सूचना तन्त्र के चारों घटकों के नाम स्पष्ट रूप से लिखें ताकि पूरे अंक मिल सकें।
Question (v) भौगोलिक सूचना तन्त्र के कोर में स्थानिक सूचना बनाने की विधि क्या हैं?
Answer: भौगोलिक सूचना तन्त्र के कोर में स्थानिक सूचना बनाने की विधि निम्नलिखित हैं:
1. आँकड़ा आपूर्तिदाता से आंकिक रूप में आँकड़े प्राप्त करना।
2. विद्यमान अनुरूप ऑकड़ों का अंकीकरण करना।
3. भौगोलिक सत्ताओं का स्वयं सर्वेक्षण करके। इन विधियों द्वारा हम धरातल की सटीक जानकारी को कंप्यूटर में दर्ज कर पाते हैं।
In simple words: कंप्यूटर में नक्शे और जगह की जानकारी डालने के तीन तरीके हैं - पहले से बने डिजिटल आंकड़े लेना, पुराने कागजी नक्शों को डिजिटल बनाना, या खुद जमीन पर जाकर सर्वे करना।
🎯 Exam Tip: तीनों विधियों को बिंदुवार (point-wise) लिखने से उत्तर स्पष्ट और प्रभावशाली बनता है।
Question (vi) स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी क्या है?
Answer: स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी से अभिप्राय किसी स्थान अथवा क्षेत्र विशेष से सम्बन्धित आँकड़ों एवं सूचनाओं का एकत्रीकरण करना तथा कम्प्यूटर द्वारा उन सूचनाओं की संगणना, भण्डारण, विश्लेषण और उपयोग करने से है। यह आधुनिक तकनीक हमें पृथ्वी की भौगोलिक परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है।
In simple words: यह एक ऐसी कंप्यूटर तकनीक है जिससे हम किसी भी जगह की जानकारी इकट्ठा करते हैं, उसे कंप्यूटर में सुरक्षित रखते हैं और उसका विश्लेषण करके नक्शे या योजनाएं बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: उत्तर में 'एकत्रीकरण', 'भण्डारण' और 'विश्लेषण' जैसे मुख्य तकनीकी शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
Question 3. (i) चित्ररेखाएंज (रैस्टर) एवं सदिश (वेक्टर) आँकड़ा फॉर्मेट को उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: चित्ररेखाएंज (रैस्टर) आँकड़ा फॉर्मेट चित्ररेखाएंज आँकड़े वर्गों के जाल के रूप में आँकड़ों का ग्राफीय प्रदर्शन करते हैं जिसमें स्तम्भ एवं पंक्तियों का जाल होता है। स्तम्भों व पंक्तियों के जाल को ‘ग्रिड’ (Grid) तथा एक स्तम्भ एवं पंक्ति के भेदन स्थल को ‘सेल’ (Cell) कहते हैं। मान लीजिए कागज पर एक तिरछी रेखा खींची गई है। चित्ररेखाएंज में इसे ग्राफ पेपर पर बने आयतों की भाँति प्रदर्शित किया जाता है और उसके आधार पर इसका मूल्य निर्धारित किया जाता है। (चित्र) आँकड़ों का यह प्रदर्शन प्रयोक्ता को प्रतिबिम्ब के पुनर्गठन अथवा दृश्यांकन में सहायता करता है। सेलों के आकार और उनकी संख्या के बीच सम्बन्ध को चित्ररेखाएंज (रैस्टर) के विभेदन के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है। नीचे दिए गए चित्र में चित्ररेखाएंज फॉर्मेट में आँकड़ों पर जाल या वर्ग के आकार को स्पष्ट किया गया है।
सदिश आँकड़ा फॉर्मेट:
उसी तिरछी रेखा का सदिश (वेक्टर) प्रदर्शन केवल निर्देशांकों के आरम्भिक एवं अन्तिम बिन्दुओं को दर्ज कर रेखा की स्थिति को दर्ज करके होगा। प्रत्येक बिन्दु की अभिव्यक्ति दो अथवा तीन संख्याओं के रूप में होगी। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रदर्शन द्वि-आयामी था या त्रि-आयामी, जिसे प्राय: X, Y अथवा X, Y, Z निर्देशांकों द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है। (चित्र) पहली संख्या X, बिन्दु और कागज की बाईं सीमा के बीच की दूरी है; Y बिन्दु तथा कागज की निचली सीमा के बीच दूरी; Z कागज के ऊपर अथवा नीचे से बिन्दु की उच्चता है। मापे गए बिन्दुओं को मिलाने से सदिश का निर्माण होता है। ये दोनों फॉर्मेट भौगोलिक सूचनाओं को डिजिटल रूप में दर्शाने के दो अलग-अलग और महत्वपूर्ण तरीके हैं।
In simple words: रैस्टर फॉर्मेट में जानकारी को छोटे-छोटे चौकोर डिब्बों (पिक्सेल या ग्रिड) के रूप में दिखाया जाता है, जैसे कोई डिजिटल फोटो। वेक्टर फॉर्मेट में जानकारी को बिंदुओं, रेखाओं और गणितीय निर्देशांकों (X, Y) की मदद से दर्शाया जाता है।
🎯 Exam Tip: रैस्टर और वेक्टर के बीच अंतर को स्पष्ट करने के लिए ग्रिड (Grid) और निर्देशांक (Coordinates) जैसे शब्दों का उल्लेख जरूर करें।
Question 3. (ii) भौगोलिक सूचना तन्त्र से सम्बन्धित कार्यों को क्रमबद्ध रूप में किस प्रकार किया जाता है? एक व्याख्यात्मक लेख प्रस्तुत कीजिए।
Answer: भौगोलिक सूचना तन्त्र की क्रियाओं का अनुक्रम भौगोलिक सूचना तन्त्र से सम्बन्धित कार्यों का व्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करता है।
In simple words: भौगोलिक सूचना प्रणाली में सभी कार्यों को एक निश्चित क्रम में किया जाता है ताकि आंकड़े सही और उपयोगी बने रहें।
🎯 Exam Tip: यदि परीक्षा में यह प्रश्न आए, तो कार्यों के क्रम को एक प्रवाह आरेख (flowchart) बनाकर समझाएं।
अनुक्रम निम्नलिखित है:
1. स्थानिक आँकड़ा निवेश: स्थानिक आँकड़ा निवेश के विभिन्न स्रोतों को निम्नलिखित दो वर्गों में संक्षेप किया जाता है:
- आँकड़ा आपूर्तिदाता से आंकिक आँकड़ा समुच्चय का प्रग्रहण।
- हस्तेन निवेश द्वारा आंकिक आँकड़ा समुच्चयों की रचना।
2. गुण न्यास की प्रविष्टि: गुण न्यास उन स्थानिक विशेषताओं को परिभाषित करता है, जिसे भौगोलिक सूचना तन्त्र में निपटाने की आवश्यकता होती है।
3. आँकड़ों का सत्यापन और संपादन: भौगोलिक सूचना तन्त्र में प्रग्रहित आँकड़ों का सत्यापन एवं संपादन अति आवश्यक है, क्योंकि इससे आँकड़ों की शुद्धता तथा त्रुटियों की पहचान होती है। इसे कम्प्यूटर की सहायता से किया जाता है।
त्रुटियों का वर्गीकरण:
- स्थानिक आँकड़े अपूर्ण अथवा दोहरे हैं।
- स्थानिक आँकड़े गलत मापनी पर हैं।
- स्थानिक आँकड़े विरूपित हैं।
4. स्थानिक और गुण न्यास आँकड़ों की सहलग्नता: स्थानिक और गुण न्यास आँकड़ों की सहलग्नता का पूरा ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि ये भौगोलिक सूचना तन्त्र के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं।
5. स्थानिक विश्लेषण: भौगोलिक सूचना तन्त्र में स्थानिक विश्लेषण की क्षमता है उनकी विश्लेषणात्मक क्रियाएँ यथार्थ विश्व से सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए सूचनाधार में स्थानिक तथा गैर-स्थानिक गुणों का प्रयोग करती हैं। भौगोलिक सूचना तन्त्र का प्रयोग करते हुए स्थानिक विश्लेषण के निम्नलिखित प्रचालनों को शामिल किया जाता है:
- अधिचित्रण
- बफर विश्लेषण
- परिपथ जाल विश्लेषण, एवं
- आंकिक भू-भाग मॉडल।
विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. भौगोलिक सूचना तन्त्र के लाभ/महत्त्व/उपयोगिता का वर्णन कीजिए।
उत्तर: भौगोलिक सूचना तन्त्र के मुख्य लाभ/महत्त्व/उपयोगिता निम्नलिखित हैं:
1. भौगोलिक सूचना तन्त्र की सहायता से भूगोलवेत्ता स्थानिक प्रतिरूपों और प्रक्रियाओं की पहचान कर उनका विश्लेषण कर सकता है। यह तकनीक आधुनिक भौगोलिक अध्ययनों में अत्यंत सहायक सिद्ध हुई है।
2. इसकी सहायता से भौगोलिक तत्वों के बीच पाए जाने वाले अन्तर्सम्बन्धों की व्याख्या की जा सकती है। उदाहरणतः शुष्क प्रदेशों में नहरी जल की व्यवस्था के बीच अन्तर्सम्बन्ध।
3. इसमें परिवहन तन्त्र और नगरों के विकास के अध्ययन में सहायता मिलती है।
4. इससे कम समय और कम लागत से भौगोलिक विश्लेषण सम्भव होता है।
5. इससे समाज के गरीबी रेखा के नीचे बसर कर रहे लोगों के सम्बन्ध में विश्वसनीय जानकारी हासिल हो सकती है।
In simple words: भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) हमें नक्शों और आँकड़ों की मदद से किसी जगह की जानकारी को आसानी से समझने, उसका विश्लेषण करने और कम समय में सही निर्णय लेने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: भौगोलिक सूचना तन्त्र (GIS) के लाभ लिखते समय इसके मुख्य बिंदु जैसे समय की बचत, कम लागत और विभिन्न क्षेत्रों में इसके अनुप्रयोगों को स्पष्ट रूप से रेखांकित करें ताकि पूरे अंक मिल सकें।
Question 2. चित्ररेखापुंज संरचना के गुण व दोषों का वर्णन कीजिए।
Answer: चित्ररेखापुंज संरचना के गुण निम्नलिखित हैं:
1. इसे समझना व कार्यान्वित करना सरल होता है।
2. प्रत्येक सेल का अपना गुण होता है, जिससे भूमि उपयोग तथा मृदा के प्रकार जैसे समीपस्थ लक्षणों को प्रदर्शित करने में सहायक होता है।
3. उच्च स्थानिक परिवर्तनशीलता को आसानी से प्रदर्शित किया जा सकता है।
4. प्रिंटर, प्लॉटर जैसे अधिकांश उत्पादक उपकरण चित्ररेखापुंज में उपलब्ध होते हैं।
5. उपग्रह दूर संवेदन तथा अंकीय वायुचित्र से सीधे ही चित्ररेखापुंज में आँकड़े प्राप्त हो जाते हैं और आँकड़ों के परिवर्तन की आवश्यकता नहीं होती।
चित्ररेखापुंज संरचना के दोष निम्नलिखित हैं:
1. प्रत्येक सेल केवल एक गुण का ही भण्डारण करता है।
2. आँकड़ों के भण्डारण में उच्च कोटीय स्मृति व्यवस्था होती है और आँकड़ों के संपीड़न की आवश्यकता होती है।
3. नेटवर्क संबंधों को सुचारु रूप से प्रदर्शित नहीं किया जा सकता।
4. मिश्रित सेलों की स्थिति में अशुद्धियाँ आ जाती हैं।
5. सेलों के खुरदरेपन से छोटे-छोटे लक्षण छूट जाते हैं।
In simple words: Raster data structure is very easy to use and works well with satellite images, but it requires a lot of computer memory and cannot show network connections clearly.
🎯 Exam Tip: चित्ररेखापुंज (Raster) संरचना के गुण और दोषों को अलग-अलग शीर्षकों के अंतर्गत बिन्दुओं (points) में स्पष्ट रूप से लिखें ताकि पूरे अंक मिल सकें।
Question 3. भौगोलिक सूचना तन्त्र क्या है? इसके प्रकारों का वर्णन कीजिए।
Answer: भौगोलिक सूचना तन्त्र (G.I.S.) एक ऐसा सूचना तन्त्र है जिसे भौगोलिक अथवा स्थानिक आँकड़ों के साथ मिलकर कार्य करने के लिए बनाया गया है। यह वास्तव में एक आँकड़ा संचय तन्त्र है जिसमें भौगोलिक आँकड़ों को शामिल करने के साथ-साथ उनके संसाधन और विश्लेषण की क्षमता भी होती है। भौगोलिक सूचना तन्त्र के प्रकार स्थानिक उपग्रहों के भण्डारण और विश्लेषण की तकनीक के आधार पर भौगोलिक सूचना तन्त्र निम्नलिखित दो प्रकार का होता है:
1. रेखापुंज - यह मानचित्रों, फोटोग्राफों तथा अन्य दो आयामी वितरण को अंक रूप में भण्डारित करने की एक पद्धति है। यह पद्धति स्थान के अनुसार निरन्तर बदलने वाली परिघटनाओं को हैण्डल करने के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। यही कारण है कि पर्यावरण विज्ञानों में रेखापुंज पद्धति का उपयोग निरन्तर बढ़ रहा है।
2. सदिश - इस पद्धति में सभी वस्तुओं का अंकन बिन्दुओं, रेखाओं और क्षेत्र के रूप में किया जाता है। अंकीकरण की इस पद्धति में 'X', 'Y' निर्देशांकों का उपयोग किया जाता है।
In simple words: Geographic Information System (GIS) is a computer system used to store and analyze geographical data, which is mainly of two types: Raster (grid-based) and Vector (point, line, and area-based).
🎯 Exam Tip: G.I.S. की परिभाषा के साथ इसके दोनों प्रकारों (रेखापुंज और सदिश) को उनके मुख्य अंतर के साथ समझाएं।
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. रेखापुंज भौगोलिक सूचना तन्त्र की विशेषताएँ बताइए।
Answer: रेखापुंज भौगोलिक सूचना तन्त्र की विशेषताएँ (गुण) निम्नलिखित हैं:
1. इसमें भौगोलिक सूचनाओं को कोष्ठिकाओं के माध्यम से दिखाया जाता है।
2. यह पर्यावरण और भौतिक विज्ञानों के अध्ययन के लिए उपयोगी है।
3. इसमें एक-दूसरे से पृथक वस्तुओं के अंकन में सुविधा होती है।
In simple words: Raster GIS represents geographical data using small grid cells, making it very useful for studying environment and physical sciences.
🎯 Exam Tip: रेखापुंज (Raster) की मुख्य विशेषता 'कोष्ठिकाओं' (cells) का उपयोग है, इस मुख्य बिंदु को उत्तर में अवश्य शामिल करें।
Question 2. सदिश भौगोलिक सूचना तन्त्र की विशेषताओं को समझाइए।
Answer: सदिश भौगोलिक सूचना तन्त्र की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. इसमें भौगोलिक सूचनाओं, बिन्दुओं, रेखाओं और क्षेत्र (बहुभुज) का उपयोग किया जाता है। यह डेटा को बहुत ही सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करता है।
2. सामाज़िक सुविधाओं, उद्योगों के मानचित्रण और भौगोलिक रूप से वितरित सुविधाओं के अंकन में सदिश भौगोलिक सूचना तन्त्र उपयोगी है।
3. इसमें सड़कों के अंकीकृत जाल से दो बिन्दुओं के मध्य यात्रा समयावधि का अनुभव किया जा सकता है।
4. यह पद्धति बताती है कि “प्रत्येक वस्तु कहाँ है?”
In simple words: सदिश (Vector) जीआईएस कंप्यूटर पर नक्शे बनाने का एक तरीका है। यह हमें बताता है कि कोई भी चीज़ नक्शे पर बिल्कुल कहाँ स्थित है और वहाँ पहुँचने में कितना समय लगेगा।
🎯 Exam Tip: सदिश प्रणाली की चारों मुख्य विशेषताओं को स्पष्ट रूप से लिखने पर पूरे अंक मिलते हैं।
Question 3. हस्तेन विधियों की सीमाओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: हस्तेन विधियों की सीमाएँ निम्नलिखित हैं:
1. मानचित्रीय सूचना एक विशेष ढंग से प्रक्रमित और प्रदर्शित की गई होती है। यह पारंपरिक तरीका समय और श्रम दोनों के मामले में काफी खर्चीला होता है।
2. एक मानचित्र एक अथवा एक से अधिक पूर्व-निर्धारित विषय-वस्तुओं को दर्शाता है.
3. मानचित्रों में चित्रित सूचना में परिवर्तन करने पर एक नया मानचित्र आलेखित करना पड़ता है।
In simple words: हाथ से नक्शा बनाने (हस्तेन विधि) में बहुत समय लगता है। अगर नक्शे में थोड़ा सा भी बदलाव करना हो, तो पूरा नक्शा दोबारा बनाना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: हस्तेन विधि की सीमाओं में 'नया मानचित्र बनाने की आवश्यकता' वाले बिंदु को रेखांकित (underline) अवश्य करें।
Question 4. चित्ररेखापुँज फाइल फॉर्मेटों का अधिकतर प्रयोग किन क्रियाओं में किया जाता है?
Answer: चित्ररेखा(ज) फाइल फॉर्मेटों का अधिकतर प्रयोग निम्नलिखित क्रियाओं में किया जाता है:
• वायव फोटोग्राफी, उपग्रहीय प्रतिबिम्बों, क्रमवीक्षित कागजी मानचित्रों के आंकिक प्रदर्शन और अत्यधिक ब्यौरेवार प्रतिबिम्बों वाले अन्य अनुप्रयोग के लिए। यह डिजिटल इमेजिंग को अधिक प्रभावी बनाता है।
• जब लागत का कम करना आवश्यक हो।
• जब मानचित्र में व्यक्तिगत मानचित्रीय लक्षण का विश्लेषण अपेक्षित न हो।
• जब ‘बैकड्रॉप’ मानचित्रों की आवश्यकता हो।
In simple words: चित्ररेखापुंज (Raster) फॉर्मेट का उपयोग तब किया जाता है जब हमें उपग्रह से ली गई तस्वीरों या बड़े फोटो को दिखाना हो, जहाँ बारीक विवरण की ज़रूरत नहीं होती और बजट कम होता है।
🎯 Exam Tip: 'वायव फोटोग्राफी' और 'कम लागत' जैसे मुख्य शब्दों (keywords) का उपयोग अपने उत्तर में ज़रूर करें।
Question 5. सदिश फाइलों का प्रयोग किन परिस्थितियों में किया जाता है?
Answer: सदिश फाइलों का प्रयोग मुख्यतः निम्न परिस्थितियों में किया जाता है:
1. उच्च परिष्कृत अनुप्रयोग की आवश्यकता हो। यह फाइलों की गुणवत्ता को बनाए रखने में मदद करता है।
2. फाइलों के आकार महत्त्वपूर्ण हों।
3. मानचित्र के प्रत्येक लक्षण का विश्लेषण आवश्यक हो।
4. वर्णनात्मक सूचना का भण्डारण अनिवार्य हो।
In simple words: सदिश (Vector) फाइलों का उपयोग तब किया जाता है जब हमें बहुत ही साफ और उच्च गुणवत्ता वाले नक्शे चाहिए होते हैं, और हर एक छोटी चीज़ का गहराई से विश्लेषण करना होता है।
🎯 Exam Tip: चारों परिस्थितियों को बिंदुवार (point-wise) लिखने से परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।
Question 6. सदिश संरचना के गुणों का उल्लेख कीजिए।
Answer: सदिश संरचना के गुण निम्नलिखित हैं:
1. यह सांस्कृतिक लक्षणों को प्रदर्शित करने के लिए अधिक उपयोगी है। यह मानव-निर्मित सीमाओं को स्पष्ट रूप से दिखाता है।
2. ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (GPS) तथा टोटल स्टेशनों से आँकड़े सीधे ही प्राप्त हो सकते हैं।
3. इसमें कम स्मृति की आवश्यकता होती है।
4. स्थालाकृतियों को दर्शाने तथा उनके विश्लेषण में अधिक शुद्धता होती है।
In simple words: सदिश संरचना का फायदा यह है कि यह कंप्यूटर में कम जगह (memory) लेती है, GPS से सीधे जुड़ जाती है, और नक्शे को बहुत ही सटीक और साफ दिखाती है।
🎯 Exam Tip: 'कम स्मृति' (low memory) और 'GPS से सीधे आँकड़े' वाले बिंदुओं को विशेष रूप से हाइलाइट करें।
Question 7. चित्ररेखापुंज (रैस्टर) मॉडल की हानियों का उल्लेख कीजिए।
Answer: चित्ररेखापुंज (रैस्टर) मॉडल की हानियाँ निम्नलिखित हैं:
1. कम्प्यूटर भण्डारण का अदक्ष प्रयोग होता है। यह कंप्यूटर की मेमोरी का बहुत अधिक हिस्सा घेरता है।
2. इसके परिमाप और आकृति में त्रुटियाँ होती हैं।
In simple words: रैस्टर मॉडल की मुख्य कमी यह है कि यह कंप्यूटर में बहुत ज़्यादा जगह घेरता है और इसके आकार या माप में गलतियाँ होने की संभावना अधिक होती है।
🎯 Exam Tip: रैस्टर मॉडल की दोनों हानियों को संक्षेप में और स्पष्ट शब्दों में लिखें ताकि पूरे अंक मिल सकें।
Question 8. सदिश (वेक्टर) मॉडल की हानियों का उल्लेख कीजिए।
Answer: सदिश (वेक्टर) मॉडल की हानियाँ निम्नलिखित हैं:
1. इसकी आँकड़ा संरचना जटिल होती है।
2. अधिचित्रण में कठिन प्रचालन होता है।
3. उच्च स्थानिक विचरणशीलता का अदक्ष प्रतिनिधित्व होता है।
4. यह सुदूर संवेदन प्रतिबिंबों के साथ असंगत होता है। यह मॉडल जटिल भौगोलिक संरचनाओं को दर्शाने में कुछ सीमाएँ रखता है।
In simple words: Vector models have complex data structures and are hard to overlay. They also do not work very well with remote sensing satellite images.
🎯 Exam Tip: Memorize at least three key disadvantages of vector models, focusing on data complexity and compatibility issues with remote sensing.
Question 9. भौगोलिक सूचना तन्त्र को किन स्रोतों से आँकड़े प्राप्त होते हैं?
Answer: भौगोलिक सूचना तन्त्र को निम्नलिखित स्रोतों से आँकड़े प्राप्त होते हैं:
• भारतीय सर्वेक्षण विभाग के स्थलाकृतिक मानचित्र तथा वायुचित्र।
• उपभोक्ताओं द्वारा एकत्रित प्राथमिक आँकड़े।
• भारतीय जनगणना विभाग के विशाल आँकड़े और मानचित्र।
• राष्ट्रीय दूर संवेदी एजेंसी, हैदराबाद।
• राष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन प्रबन्ध प्रणाली, बंगलुरु।
• महानगरों के विकास प्राधिकरण।
• राज्यों और जिलों के सांख्यिकीय विभाग।
• राष्ट्रीय विषयक मानचित्र संगठन, कोलकाता। ये सभी स्रोत भौगोलिक सूचना प्रणाली को सटीक और विश्वसनीय डेटा प्रदान करने में मदद करते हैं।
In simple words: GIS gets its data from various government and public sources like maps, census records, satellite agencies, and local development authorities.
🎯 Exam Tip: List key organizations like Survey of India and NRSC as primary data sources to secure full marks.
मौखिक प्रश्नों के उत्तर
Question 1. स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी से आप क्या समझते हैं?
Answer: स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी से तात्पर्य किसी क्षेत्र से सम्बन्धित सूचनाओं का कम्प्यूटर में संचयन, संगणना, भण्डारण और उपयोग से है। यह तकनीक आधुनिक मानचित्रण और योजना बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
In simple words: Spatial information technology means using computers to collect, calculate, store, and use geographical data about any area.
🎯 Exam Tip: Clearly define the four key functions: collection, calculation, storage, and usage of spatial data.
Question 2. भौगोलिक सूचना तन्त्र में किसी वस्तु या वाहन की स्थिति कैसे प्रदर्शित की जाती है?
Answer: अक्षांशों व देशान्तरों के माध्यम से स्थिति प्रदर्शित की जाती है। ये भौगोलिक निर्देशांक किसी भी वस्तु की सटीक वैश्विक स्थिति को दर्शाने में मदद करते हैं।
In simple words: In GIS, the location of any object or vehicle is shown using latitude and longitude coordinates.
🎯 Exam Tip: Use the terms 'latitude' (अक्षांश) and 'longitude' (देशान्तर) as they are the core keywords for this answer.
Question 3. भौगोलिक सूचना तन्त्र से क्या अभिप्राय है?
Answer: भौगोलिक सूचना तन्त्र एक आँकड़ा संचय तन्त्र है जिसमें भौगोलिक आँकड़ों का संचयन, संगणना और विश्लेषण किया जाता है। यह प्रणाली विभिन्न प्रकार के स्थानिक डेटा को प्रबंधित करने में सक्षम है।
In simple words: GIS (Geographic Information System) is a database system used to store, calculate, and analyze geographical data.
🎯 Exam Tip: Define GIS as a database system and mention its three main functions: storage, calculation, and analysis.
Question 4. सदिश भौगोलिक सूचना तन्त्र में आँकड़ों का प्रदर्शन कैसे किया जाता है?
Answer: बिन्दुओं, रेखाओं और क्षेत्र के रूप में। ये तीन प्राथमिक तत्व सदिश डेटा मॉडल के आधार स्तंभ हैं।
In simple words: In a vector GIS, data is represented using points, lines, and areas (polygons).
🎯 Exam Tip: Remember the three basic vector features: points, lines, and polygons (areas) for representing spatial data.
Question 5. किस पद्धति से पता चलता है कि “प्रत्येक स्थान पर क्या है?”
Answer: रास्टर पद्धति से। यह पद्धति ग्रिड और पिक्सल के माध्यम से पूरे क्षेत्र की जानकारी प्रदर्शित करती है।
In simple words: The raster method helps us know what features exist at every specific location on a map.
🎯 Exam Tip: Associate 'what is at each location' with the Raster (रास्टर) method to avoid confusion with the Vector method.
Question 6. किस पद्धति से पता चलता है कि “प्रत्येक वस्तु कहाँ है?”
Answer: सदिश पद्धति से। यह पद्धति विशिष्ट भौगोलिक वस्तुओं की सटीक स्थिति को दर्शाने के लिए निर्देशांकों का उपयोग करती है।
In simple words: The vector method is used to find exactly where a specific object or feature is located.
🎯 Exam Tip: Remember that the Vector (सदिश) method is used to pinpoint the exact location of individual objects.
Question 7. सहलग्नता क्या है?
Answer: सहलग्नता में एक भौगोलिक सूचना तन्त्र में विभिन्न प्रकार के आँकड़ों को जोड़ने की क्षमता होती है। यह विभिन्न डेटा परतों को आपस में जोड़कर एक एकीकृत विश्लेषण प्रदान करती है।
In simple words: Linkage (सहलग्नता) is the ability of a GIS to connect and integrate different types of geographical data together.
🎯 Exam Tip: Define linkage as the capability to connect diverse datasets within a single GIS framework.
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
Question 1. स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी में शामिल है
(a) सुदूर संवेदन
(b) भौगोलिक सूचना तन्त्र
(c) वैश्विक स्थिति-निर्धारण तन्त्र
(d) All of the options
Answer: (d) All of the options
In simple words: Spatial information technology includes modern tools like remote sensing, GIS, and GPS to collect and analyze geographical data.
🎯 Exam Tip: Remember that spatial technology is a broad term that includes all modern tools used to map and analyze Earth's features.
Question 2. कितने प्रकार के आँकड़े भौगोलिक सूचना प्रदान करते हैं
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) पाँच
Answer: (a) दो
In simple words: There are mainly two types of data used in geographical information: spatial data (locations on a map) and non-spatial data (descriptive tables).
🎯 Exam Tip: Clearly distinguish between spatial (where things are) and attribute (what things are) data to score full marks.
Question 3. स्थानीय आँकड़ों का प्रकार है
(a) बिन्दु
(b) रेखा
(c) क्षेत्र
(d) All of the options
Answer: (d) All of the options
In simple words: Spatial data can be represented on a map using points (like a well), lines (like a road), or areas (like a lake).
🎯 Exam Tip: Memorize the three basic vector data types—point, line, and polygon—as they are fundamental to GIS mapping.
Question 4. स्थानिक सूचना तन्त्र का घटक है
(a) हार्डवेयर
(b) सॉफ्टवेयर
(c) आँकड़े
(d) All of the options
Answer: (d) All of the options
In simple words: A Geographic Information System (GIS) needs computer hardware, software programs, and geographical data to work properly.
🎯 Exam Tip: If asked in a descriptive question, list all five components of GIS: hardware, software, data, people, and procedures.
Question 5. आँकड़ा संरचना के प्रकार हैं
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) पाँच
Answer: (a) दो
In simple words: Data structures in GIS are mainly of two types: Raster (grid of pixels) and Vector (points, lines, and areas).
🎯 Exam Tip: Be prepared to compare Raster and Vector data structures, as this is a highly expected exam question.
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