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Detailed Chapter 6 द्वितीयक गतिविधियाँ UP Board Solutions for Class 12 Geography
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Class 12 Geography Chapter 6 द्वितीयक गतिविधियाँ UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 12 Geography Chapter 6 Secondary Activities (द्वितीयक क्रियाएँ)
UP Board Class 12 Geography Chapter 6 Text Book Questions
UP Board Class 12 Geography Chapter 6 पाठयपुस्तक से अभ्यास प्रश्न
Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए
(i) निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है
(क) हुगली के सहारे जूट के कारखाने सस्ती जल यातायात की सुविधा के कारण स्थापित हुए
(ख) चीनी, सूती वस्त्र एवं वनस्पति तेल उद्योग स्वच्छन्द उद्योग हैं
(ग) खनिज तेल एवं जलविद्युत शक्ति के विकास ने उद्योगों की अवस्थिति कारक के रूप में कोयला शक्ति के महत्त्व को कम किया है
(घ) पत्तन नगरों ने भारत में उद्योगों को आकर्षित किया है।
Answer: (ग) खनिज तेल एवं जलविद्युत शक्ति के विकास ने उद्योगों की अवस्थिति कारक के रूप में कोयला शक्ति के महत्त्व को कम किया है।
In simple words: यह प्रश्न उद्योगों की अवस्थिति के कारकों से संबंधित है। असत्य कथन (ग) है क्योंकि खनिज तेल और जलविद्युत के विकास ने वास्तव में कोयला शक्ति पर निर्भरता को कम किया है, उसके महत्व को नहीं।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही कथन को पहचानना महत्वपूर्ण होता है। विकल्पों को ध्यान से पढ़ें और प्रत्येक कथन की सत्यता का मूल्यांकन करें।
(ii) निम्न में से कौन-सी एक अर्थव्यवस्था में उत्पादन का स्वामित्व व्यक्तिगत होता है
(क) पूँजीवाद
(ख) मिश्रित
(ग) समाजवाद
(घ) कोई भी नहीं।
Answer: (क) पूँजीवाद ।
In simple words: पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों का स्वामित्व निजी व्यक्तियों या कम्पनियों के पास होता है, जहाँ लाभ कमाना मुख्य उद्देश्य होता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार की अर्थव्यवस्थाओं (पूँजीवाद, समाजवाद, मिश्रित) की मूलभूत विशेषताओं को समझें, विशेषकर स्वामित्व और उत्पादन के उद्देश्यों के संदर्भ में।
(iii) निम्न में से कौन-सा एक प्रकार का उद्योग अन्य उद्योगों के लिए कच्चे माल का उत्पादन करता है
(क) कुटीर उद्योग
(ख) छोटे पैमाने के उद्योग
(ग) आधारभूत उद्योग
(घ) स्वच्छन्द उद्योग ।
Answer: (ग) आधारभूत उद्योग।
In simple words: आधारभूत उद्योग वे होते हैं जो अन्य उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चे माल या उपकरण बनाते हैं, जैसे लोहा-इस्पात उद्योग।
🎯 Exam Tip: उद्योगों के वर्गीकरण (जैसे आधारभूत, उपभोक्ता, कुटीर, लघु, बड़े पैमाने) और उनके कार्यों को स्पष्ट रूप से जानें।
(iv) निम्न में से कौन-सा एक जोड़ा सही मेल खाता है
(क) स्वचालित वाहन उद्योग - लॉस एंजिल्स
(ख) पोत निर्माण उद्योग - लूसाका
(ग) वायुयान निर्माण उद्योग - फ्लोरेंस
(घ) लौह-इस्पात उद्योग - पिट्सबर्ग
Answer: (घ) लौह-इस्पात उद्योग - पिट्सबर्ग ।
In simple words: पिट्सबर्ग शहर लौह-इस्पात उद्योग के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है, जो सही मिलान दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों और उनसे संबंधित उद्योगों के भौगोलिक स्थानों को याद रखना मानचित्र आधारित और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के लिए सहायक होता है।
Question 2. निम्नलिखित पर लगभग 30 शब्दों में टिप्पणी लिखिए-
(i) उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग
Answer: उच्च तकनीक विनिर्माण में सबसे नवीन विधि है। गहन खोज और विकास के द्वारा अग्रिम वैज्ञानिक इंजीनियरिंग को समझा जाता है। व्यावसायिक (सफेद कालर) कामगार कुल कार्यशक्ति का एक बड़ा भाग है। ये उच्च विशेषज्ञ वास्तविक उत्पादक हैं। रोबोटिक, कम्प्यूटर जीवन आकृति और विनिर्माण शोधन प्रक्रिया का इलेक्ट्रॉनिक्स नियन्त्रणमय रासायनिक और फार्मास्युटिकल उत्पाद उच्च तकनीक उद्योग के उदाहरण हैं।
In simple words: उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास पर आधारित होते हैं, जहाँ रोबोटिक्स, कंप्यूटर-आधारित डिजाइन और विशेषज्ञ श्रम का उपयोग करके अत्यधिक परिष्कृत उत्पाद बनाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग की प्रमुख विशेषताओं और उदाहरणों को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से पूछा जाता है।
(ii) विनिर्माण
Answer: वे क्रियाएँ जिनमें प्राथमिक व्यवसाय जैसे कृषि, पशुपालन, खनन आदि के उत्पादों को तकनीकों का प्रयोग करके संसाधित किया जाता है और अधिक उपयोगी वस्तुओं में बदला जाता है। ऐसी प्रक्रियाएँ विनिर्माण उद्योग कहलाती हैं। उदाहरण के लिए, कपास को कच्चे माल के रूप में सूती वस्त्र उद्योग में प्रयोग करके वस्त्र उत्पादन किया जाता है।
In simple words: विनिर्माण उन प्रक्रियाओं को कहते हैं जहाँ कच्चे माल को बदलकर अधिक मूल्यवान और उपयोगी तैयार उत्पादों में बदला जाता है, जैसे कपास से कपड़ा बनाना।
🎯 Exam Tip: विनिर्माण की परिभाषा और इसके उदाहरणों को अच्छी तरह समझें, क्योंकि यह द्वितीयक क्रियाकलापों का मूल आधार है।
(iii) स्वच्छन्द उद्योग
Answer: स्वच्छन्द उद्योग व्यापक विविधता वाले स्थानों पर लगाए जा सकते हैं। वे किसी विशेष प्रकार के कच्चे माल पर निर्भर नहीं होते जिनके भार का ह्रास होता हो अथवा नहीं। ये उद्योग अधिकतर संघटक पों पर निर्भर करते हैं जिन्हें कहीं से भी प्राप्त किया जा सकता है। इनमें उत्पादन की मात्रा व श्रमिक कम होते हैं। आमतौर पर ये उद्योग प्रदूषण नहीं फैलाते । इनकी अवस्थिति में सबसे महत्त्वपूर्ण कारक सड़क मार्गों द्वारा 'पहुँच' है।
In simple words: स्वच्छन्द उद्योग ऐसे उद्योग होते हैं जिन्हें किसी भी स्थान पर स्थापित किया जा सकता है, क्योंकि वे कच्चे माल पर अधिक निर्भर नहीं करते और पर्यावरण को कम प्रदूषित करते हैं; सड़क पहुँच इनके लिए महत्वपूर्ण होती है।
🎯 Exam Tip: स्वच्छन्द उद्योगों की विशेषताओं (जैसे स्थान की स्वतंत्रता, कच्चे माल पर कम निर्भरता, कम प्रदूषण) को ध्यान में रखें, क्योंकि यह विशिष्ट प्रकार के उद्योग हैं।
Question 3. निम्नलिखित प्रश्नों का 150 शब्दों में उत्तर दीजिए :
(i) प्राथमिक एवं द्वितीयक गतिविधियों में क्या अन्तर है?
Answer: प्राथमिक एवं द्वितीयक गतिविधियों में अन्तर
| क्र०सं० | प्राथमिक गतिविधियाँ | द्वितीयक गतिविधियाँ |
|---|---|---|
| 1. | प्राथमिक क्रियाकलाप प्राकृतिक पर्यावरण से प्राप्त संसाधनों के विकास से सम्बन्धित हैं। | द्वितीयक क्रियाकलाप मनुष्य द्वारा कच्चे माल को संसाधित करके उसे नई वस्तुओं में परिवर्तन करने से है। |
| 2. | इन क्रियाकलापों से उद्योगों को कच्चा माल मिलता है। | इन क्रियाकलापों से कच्चे माल का परिष्करण होता है व उसकी उपयोगिता बढ़ती है। |
| 3. | मानव प्राथमिक क्रियाकलापों के द्वारा प्रत्येक रूप में वस्तुएँ प्राप्त करता है। | द्वितीयक क्रियाकलापों में उद्योगों को शामिल किया जाता है जो विभिन्न वस्तुओं का निर्माण करते हैं। |
| 4. | आखेट, संग्रहण, पशुचारण, खनन, मछली पकड़ना, लकड़ी काटना, कृषि आदि प्राथमिक क्रियाकलाप हैं। | विनिर्माण उद्योग, डेयरी उद्योग, कुटीर उद्योग आदि सभी क्रियाएँ द्वितीयक क्रियाकलाप हैं। |
In simple words: प्राथमिक गतिविधियाँ सीधे प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी होती हैं, जैसे खेती और खनन, जबकि द्वितीयक गतिविधियाँ कच्चे माल को संसाधित करके मूल्यवान तैयार उत्पादों में बदलती हैं, जैसे विनिर्माण।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक और द्वितीयक गतिविधियों के बीच के अंतर को तालिका प्रारूप में समझना और प्रस्तुत करना, अधिक अंक प्राप्त करने में सहायक होता है।
(ii) विश्व के विकसित देशों के उद्योगों के सन्दर्भ में आधुनिक औद्योगिक क्रियाओं की मुख्य प्रवृत्तियों की विवेचना कीजिए।
Answer: विकसित औद्योगिक देशों में आधुनिक औद्योगिक क्रियाकलापों में परिवर्तनशील प्रवृत्तियाँ देखी गई हैं। ये परिवर्तनशील प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं
- उद्योगों की अवस्थिति के लिए उत्तरदायी कारकों के महत्त्व में निरन्तर कमी आती जा रही है।
- विकसित अर्थव्यवस्था में विकास तथा वैज्ञानिक तकनीक की उन्नति के परिणामस्वरूप उद्योगों की संरचना एवं स्वरूप में परिवर्तन आया है। निरौद्योगीकरण की प्रवृत्तियाँ उत्पन्न हो रही हैं।
- आधुनिक औद्योगिक क्रियाकलापों में भी कई प्रकार के परिवर्तन हुए हैं। उद्योगों के उत्पादन के लिए उच्च तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
- कारखानों के स्थान पर छोटी इकाइयों का बिखराव बहुत बड़े क्षेत्रों में देखा जा रहा है।
- अवशिष्ट पदार्थों में कमी की वजह से पुनःचक्रण प्रतिस्थापन तथा विकल्पों का योगदान अधिक है।
- श्रम गहन उद्योग विकासशील देशों में विकसित हो रहे हैं।
- बड़े-बड़े कारखानों का स्थान छोटे कारखाने ले रहे हैं।
- डिजाइन तथा उत्पादन में बहुत ही तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं।
In simple words: विकसित देशों में आधुनिक औद्योगिक क्रियाएँ बदल रही हैं, जहाँ तकनीकी प्रगति और अवस्थिति कारकों के कम होते महत्व के कारण निरौद्योगीकरण हो रहा है; छोटे पैमाने के उद्योगों और उच्च तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है।
🎯 Exam Tip: आधुनिक औद्योगिक प्रवृत्तियों की विवेचना करते समय, तकनीकी उन्नति, अवस्थिति कारकों में परिवर्तन, और निरौद्योगीकरण जैसे मुख्य बिंदुओं पर जोर दें।
(iii) अधिकतर देशों में उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग प्रमुख महानगरों के परिधि क्षेत्रों में ही क्यों विकसित हो रहे हैं? व्याख्या कीजिए।
Answer: उच्च प्रौद्योगिक उद्योग औद्योगिक क्षेत्र अथवा प्रौद्योगिक पार्कों के रूप में महानगरों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। लन्दन, पेरिस, मिलान, टोकियो आदि इसके उदाहरण हैं। महानगरों के परिधीय क्षेत्र में उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग के विकसित होने के निम्नलिखित कारण हैं
- महानगरों के मध्यवर्ती क्षेत्रों की तुलना में परिधि क्षेत्रों में भूमि सस्ती और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होती है।
- यह क्षेत्र मानवीय आवास से दूर होता है, इस कारण मानवीय आवास औद्योगिक प्रदूषण से अधिक प्रभावित नहीं होते।
- महानगरों के परिधीय भागों में यातायात साधनों का पर्याप्त विकास पाया जाता है। यहाँ सड़क मार्ग एवं रेलों का सघन जाल पाया जाता है और यातायात बाधित नहीं होता।
- उत्पाद की खपत के लिए बाजार महानगरों के समीप ही उपलब्ध हो जाते हैं।
- इस भाग में खुला क्षेत्र अधिक होने के कारण पर्यावरण साफ व स्वच्छ रहता है।
- समीपवर्ती आवासीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों से श्रम की आपूर्ति आसानी से हो जाती है जो सस्ता भी होता है।
- सरकार की औद्योगिक नीति के कारण ही यह उद्योग मानवीय आवासों से दूर महानगर की परिधि क्षेत्र में स्थापित किए जाते हैं।
In simple words: उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग महानगरों के बाहरी इलाकों में विकसित हो रहे हैं क्योंकि वहाँ सस्ती जमीन, बेहतर परिवहन, कम प्रदूषण, कुशल श्रम की उपलब्धता और बड़े शहरी बाजार तक पहुँच जैसी सुविधाएं मिलती हैं।
🎯 Exam Tip: उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों के विकास के लिए अनुकूल भौगोलिक और आर्थिक कारकों का विश्लेषण करते समय, भूमि की लागत, प्रदूषण नियंत्रण और श्रम उपलब्धता जैसे बिंदुओं को शामिल करें।
(iv) अफ्रीका में अपरिमित प्राकृतिक संसाधन हैं फिर भी औद्योगिक दृष्टि से यह बहुत पिछड़ा- महाद्वीप है। समीक्षा कीजिए।
Answer: यह सत्य है कि अफ्रीका प्राकृतिक संसाधन में धनी है लेकिन औद्योगिक दृष्टि से वह पिछडा महाद्वीप है, जिसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं
1. विषम जलवायु - अफ्रीका महाद्वीप के अधिकांश भाग में विषम जलवायु पायी जाती है। सहारा मरुस्थलीय जलवायु में आने वाले देश अधिक तापमान व गर्म पवनों के कारण पिछड़े हुए हैं। इसी तरह जिन भागों में भूमध्यरेखीय जलवायु पायी जाती है उन क्षेत्रों में विषम परिस्थितियों के कारण उद्योग विकसित नहीं हो पाए।
2. उच्च प्रौद्योगिकी की अनुपलब्धता - उच्च प्रौद्योगिकी की अनुपलब्धता के कारण भी अफ्रीका के देशों में उद्योग विकसित नहीं हो पाए ।
3. परिवहन साधनों का अभाव - अफ्रीका महाद्वीप के देशों में विषम जलवायु; उच्चावच आदि के कारण परिवहन साधनों का विकास नहीं हो पाया है।
4. कुशल (प्रशिक्षित) श्रम का अभाव - अफ्रीका महाद्वीप के जिन देशों में खनिज पदार्थों की उपलब्धता है उन क्षेत्रों में कुशल श्रम के अभाव के कारण वे देश औद्योगिक दृष्टि से पिछड़े हुए हैं।
5. पूँजी का अभाव - अफ्रीका महाद्वीप में पूँजी का पर्याप्त अभाव है जिसके कारण यहाँ औद्योगिक विकास नहीं हो पाया है।
In simple words: अफ्रीका में प्रचुर प्राकृतिक संसाधन होने के बावजूद, औद्योगिक विकास की कमी विषम जलवायु, तकनीकी पिछड़ापन, अपर्याप्त परिवहन, कुशल श्रम और पूंजी की कमी जैसे कारकों के कारण है।
🎯 Exam Tip: अफ्रीका जैसे महाद्वीपों में औद्योगिक पिछड़ेपन के कारणों का विश्लेषण करते समय, प्राकृतिक, आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी कारकों के बीच के संबंध को स्पष्ट करें।
UP Board Class 12 Geography Chapter 6 Other Important Questions
UP Board Class 12 Geography Chapter 6 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. विनिर्माण उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए। अथवा विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत विनिर्माण उद्योगों का वर्णन कीजिए ।
Answer: विनिर्माण उद्योग-वे क्रियाएँ जिनमें प्राथमिक क्रियाएँ जैसे कृषि, पशुपालन, खनन आदि के उत्पादों को तकनीक का प्रयोग करके संशोधित किया जाता है और उन्हें अधिक उपयोगी वस्तुओं में बदला . जाता है। ऐसी प्रक्रियाएँ विनिर्माण उद्योग कहलाती हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख उद्योगों के वर्गीकरण के विभिन्न आधारों को दर्शाता है, जिसमें आकार, कच्चे माल का प्रकार, निर्मित माल का प्रकार और स्वामित्व शामिल हैं। प्रत्येक आधार के तहत उप-श्रेणियाँ जैसे कुटीर उद्योग, कृषि आधारित उद्योग, आधारभूत उद्योग और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग विस्तृत रूप से सूचीबद्ध हैं। विनिर्माण उद्योगों का वर्गीकरण विनिर्माण उद्योगों के वर्गीकरण के आधार हैं-आकार, कच्चा माल, उत्पाद एवं स्वामित्व ।
1. आकार पर आधारित उद्योग - किसी उद्योग के आकार का निश्चय उसमें लगाई गई पूँजी की मात्रा, कार्यरत श्रमिकों की संख्या तथा उत्पादन की मात्रा के आधार पर किया जाता है। इस आधार पर उद्योग तीन प्रकार के होते हैं
ओ कुटीर उद्योग
ओ छोटे पैमाने के उद्योग
ओ बड़े पैमाने के उद्योग ।
2. कच्चे माल पर आधारित उद्योग - कच्चे माल पर आधारित उद्योगों के वर्गीकरण के आधार निम्नलिखित हैं- ..
ओ कृषि आधारित उद्योग
ओ खनिज आधारित उद्योग
ओ रसायन आधारित उद्योग
ओ वन आधारित उद्योग
ओ पशु आधारित उद्योग ।
3. उत्पाद आधारित उद्योग - ऐसे उत्पाद जो अन्य उद्योगों के लिए कच्चा माल प्रदान करते हैं, उत्पाद आधारित उद्योग कहलाते हैं। उत्पाद आधारित उद्योगों के दो प्रकार निम्नलिखित हैं
ओ आधारभूत उद्योग (मूलभूत उद्योग) - जैसे-लोहा-इस्पात उद्योग।
ओ उपभोक्ता वस्तु उद्योग-जैसे - ब्रेड, बिस्कुट, चाय, साबुन आदि उद्योग ।
4. स्वामित्व के आधार पर उद्योग - स्वामित्व / अधिकार के आधार पर उद्योग के तीन प्रकार निम्न हैं
ओ सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग-ये उद्योग सरकार के अधीन होते हैं।
ओ निजी क्षेत्र के उद्योग-ये उद्योग व्यक्ति विशेष के अधीन होते हैं।
ओ संयुक्त क्षेत्र के उद्योग-इन उद्योगों का संचालन संयुक्त कम्पनी के द्वारा अथवा किसी निजी एवं . सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी के संयुक्त प्रयासों से होता है।
In simple words: विनिर्माण उद्योगों को उनके आकार, उपयोग किए गए कच्चे माल, उत्पाद के प्रकार और स्वामित्व के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, जिसमें कुटीर, कृषि-आधारित, आधारभूत और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: उद्योगों के वर्गीकरण को विस्तृत रूप से समझना और प्रत्येक प्रकार के उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अक्सर व्याख्यात्मक प्रश्नों में आता है।
Question 2. आकार के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।
Answer: आकार के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण आकार के आधार पर उद्योगों के वर्गीकरण के आधार हैं-निवेशित पूँजी, कार्यरत श्रमिकों की संख्या एवं उत्पादन की मात्रा । आकार के आधार पर उद्योगों के तीन प्रकार निम्नलिखित हैं
1. कुटीर उद्योग - यह विनिर्माण की सबसे छोटी इकाई है। इसे 'शिल्प उद्योग' भी कहा जाता है। इसमें दस्तकार अपनी पैतृक दक्षता के आधार पर अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर स्थानीय कच्चे माल का प्रयोग करते हुए सरल विधियों से अपने घर पर ही छोटी-छोटी वस्तुओं का निर्माण करते हैं। तैयार माल का या तो वह स्वयं उपभोग करता है अथवा उसे स्थानीय बाजार में बेच देता है। कभी-कभी वह वस्तु-विनिमय भी करता है। ये उद्योग पूँजी व परिवहन से प्रभावित नहीं होते हैं। इन उद्योगों में दैनिक जीवन में काम आने वाली वस्तुओं जैसे खाद्य पदार्थ, कपड़ा, बर्तन, औजार, फर्नीचर, जूते एवं लघु मूर्तियाँ आदि बनाई जाती हैं।
2. छोटे पैमाने के उद्योग (लघु उद्योग) - यह उद्योग कुटीर उद्योग का विस्तृत एवं संशोधित रूप है। इसमें स्थानीय कच्चे माल का उपयोग किया जाता है। इस उद्योग में अर्द्धकुशल श्रमिक व शक्तिचालित यन्त्रों का प्रयोग किया जाता है। रोजगार के अवसर इस उद्योग में अधिक होते हैं ।
3. बड़े पैमाने के उद्योग - बड़े पैमाने के उद्योग की विशेषताएँ हैं-विशाल बाजार, विभिन्न प्रकार का कच्चा माल, शक्ति साधन, कुशल श्रमिक, विकसित प्रौद्योगिकी, अधिक उत्पादन एवं अधिक पूँजी । वर्तमान में इन उद्योगों का विस्तार विश्व के सभी क्षेत्रों में है। बड़े पैमाने पर हुए विनिर्माण की प्रणाली के आधार पर विश्व के प्रमुख औद्योगिक प्रदेशों को दो बड़े समूहों में विभक्त किया जा सकता है
- बड़े पैमाने के परम्परागत औद्योगिक प्रदेश, एवं
- उच्च प्रौद्योगिकी वाले बड़े पैमाने के औद्योगिक प्रदेश ।
In simple words: आकार के आधार पर उद्योगों को कुटीर उद्योग (सबसे छोटे, घर आधारित), छोटे पैमाने के उद्योग (अर्द्धकुशल श्रमिक, शक्ति चालित यंत्र) और बड़े पैमाने के उद्योग (विशाल बाजार, उच्च पूंजी, उन्नत प्रौद्योगिकी) में वर्गीकृत किया जाता है।
🎯 Exam Tip: आकार के आधार पर उद्योगों को परिभाषित करते समय, प्रत्येक श्रेणी की मुख्य विशेषताओं-जैसे पूंजी निवेश, श्रम की संख्या और उत्पादन की मात्रा-को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question 3. विश्व में सूती वस्त्र उद्योग का वर्णन कीजिए।
Answer: सूती वस्त्र उद्योग सूती वस्त्र उद्योग संसार के प्राचीनतम उद्योगों में से एक हैं। भारत में हड़प्पा संस्कृति और मिस्त्र में वस्त्र निर्माण के प्रमाण मिले हैं। यह उद्योग कृषि आधारित है। इस उद्योग में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करोड़ों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इस उद्योग की प्रमुख क्रियाएँ हैं (1) कताई, (2) बुनाई एवं (3) वस्त्र निर्माण। सूती वस्त्र उद्योग की अवस्थिति के कारक (1) जलवायु, (2) कच्चे माल की उपलब्धता, (3) स्वच्छ जल की आपूर्ति, (4) कुशल कारीगर, (5) सस्ती जलविद्युत, (6) बाजार की समीपता आदि । सूती वस्त्र निर्माण के सेक्टर - इस उद्योग में सूती वस्त्रों का निर्माण तीन सेक्टरों में किया जाता है
1. हथकरघा सेक्टर - यह श्रम सघन क्षेत्र है जिसमें अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होती है। यह सेक्टर अर्द्धकुशल श्रमिकों को रोजगार प्रदान करता है। इस सेक्टर में पूँजी निवेश भी कम होता है। इसमें सूत की कताई, बुनाई आदि का काम किया जाता है।
2. बिजली करघा सेक्टर - बिजली करघों से कपड़ा बनाने में मशीनों का प्रयोग किया जाता है। परिणामस्वरूप इसमें श्रमिकों की कम आवश्यकता होती है। इस सेक्टर का उत्पादन हथकरघा सेक्टर की अपेक्षा अधिक होता है।
3. मिल सेक्टर - मिलों में कपड़ा बनाने के लिए अधिक पूँजी का निवेश किया जाता है, परन्तु उसमें कपड़ा अच्छा बनता है और अधिक मात्रा में बनता है। सूती वस्त्र उद्योग का वितरण - सूती वस्त्र बनाने वाले प्रमुख देश भारत, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, पाकिस्तान, उज्बेकिस्तान एवं मिस्र हैं। विश्व की 50 प्रतिशत से अधिक कपास का उत्पादन यही देश करते हैं। ग्रेट-ब्रिटेन, उत्तर-पश्चिमी यूरोप के देश एवं जापान आयातित धागे से सूती कपड़े का उत्पादन करते हैं। अकेला यूरोप विश्व की लगभग आधी कपास का आयात करता है।
प्रतिस्पर्धा और संकट - वर्तमान में सूती वस्त्र उद्योग को संश्लेषित रेशे से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है।. परिणामस्वरूप अनेक देशों में यह उद्योग नकारात्मक प्रवृत्ति दिखा रहा है।
अर्थव्यवस्था में विकास तथा वैज्ञानिक एवं तकनीकी उन्नति के फलस्वरूप उद्योगों की संरचना और स्वरूप में बदलाव लाया जा सकता है। उदाहरणतः दूसरे विश्वयुद्ध से लेकर सन् 1980 तक वस्त्र निर्माण में जर्मनी ने खूब तरक्की की, लेकिन बाद में यह उद्योग कम श्रम लागत के कारण जब अल्पविकसित देशों में स्थानान्तरित हो गया तो जर्मनी में वस्त्र उद्योग का ह्रास हो गया।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह मानचित्र विश्व के प्रमुख सूती वस्त्र निर्माता देशों को दर्शाता है। इसमें भारत, चीन, जापान, रूस, इटली, स्पेन, तुर्की, मिस्र, संयुक्त राज्य अमेरिका, बांग्लादेश, थाईलैंड, वियतनाम और मलेशिया जैसे देशों को सूती वस्त्र उत्पादन क्षेत्रों के रूप में हाइलाइट किया गया है, जो वैश्विक उत्पादन और वितरण को इंगित करता है।
In simple words: सूती वस्त्र उद्योग एक प्राचीन और कृषि आधारित उद्योग है, जो कताई, बुनाई और वस्त्र निर्माण के माध्यम से करोड़ों लोगों को रोजगार देता है। इसकी अवस्थिति जलवायु, कच्चे माल, जल, कुशल कारीगर और बाजार पर निर्भर करती है, और यह हथकरघा, बिजली करघा और मिल सेक्टरों में विभाजित है, लेकिन आजकल इसे संश्लेषित रेशों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
🎯 Exam Tip: सूती वस्त्र उद्योग के वर्णन में इसके ऐतिहासिक महत्व, अवस्थिति कारक, उत्पादन के विभिन्न सेक्टर और वर्तमान चुनौतियों को शामिल करना चाहिए।
Question 4. कच्चे माल पर आधारित उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए। अथवा कच्चे माल पर आधारित उद्योगों के वर्गीकरण के आधारों का वर्णन कीजिए ।
Answer: कच्चे माल पर आधारित उद्योगों का वर्गीकरण कच्चे माल पर आधारित उद्योगों के वर्गीकरण के पाँच आधार निम्नलिखित हैं
1. कृषि आधारित उद्योग - ये वे उद्योग हैं जो कृषि उत्पादों को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं तथा इन्हें विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा तैयार माल में बदलकर बिक्री हेतु ग्रामीण और नगरीय बाजारों में भेजते हैं। प्रमुख कृषि आधारित उद्योग हैं - भोजन प्रसंस्करण, शक्कर, अचार, फलों के रस, पेय पदार्थ (चाय, कॉफी, कोको), मसाले, तेल एवं वस्त्र एवं रबड़ उद्योग आदि ।
2. खनिज आधारित उद्योग - खनिज आधारित उद्योगों में खनिजों का कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है। ये उद्योग दो प्रकार के होते हैं
- लौह-धातु उद्योग - ये उद्योग ऐसी धातुओं पर आधारित होते हैं जिनमें लौहांश की मात्रा होती है। लौह-इस्पात उद्योग, मशीन व औजार उद्योग, तेल इंजन, मोटरकार तथा कृषि औजार उद्योग इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
- अलौह-धातु उद्योग - ये उद्योग ऐसी धातुओं पर आधारित होते हैं जिनमें लौहांश नहीं होता; जैसेताँबा, ऐलुमिनियम एवं जवाहरातों पर आधारित उद्योग ।
3. रसायन आधारित उद्योग - रसायन आधारित उद्योगों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले रासायनिक खनिजों का उपयोग होता है, जैसे- पेट्रो रसायन उद्योग में खनिज तेल का उपयोग होता है। नमक, गन्धक एवं पोटाश उद्योगों में भी प्राकृतिक खनिजों को काम में लेते हैं।
4. वन आधारित उद्योग - वन आधारित उद्योगों में वनों से प्राप्त मुख्य एवं गौण उपजों को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं। उदाहरणतः फर्नीचर उद्योग के लिए लकड़ी, कागज उद्योग के लिए लकड़ी, बाँस एवं घास तथा लाख उद्योग के लिए लाख वनों से ही प्राप्त होती है।.
5. पशु आधारित उद्योग - चमड़ा उद्योग के लिए चमड़ा एवं ऊनी वस्त्र उद्योग के लिए ऊन पशुओं से प्राप्त होती है। चमड़ा उद्योग, ऊनी वस्त्र उद्योग, हाथीदाँत उद्योग आदि पशु आधारित उद्योग हैं।
In simple words: कच्चे माल के आधार पर उद्योगों को कृषि-आधारित (भोजन प्रसंस्करण), खनिज-आधारित (लौह और अलौह धातु), रसायन-आधारित (पेट्रो रसायन), वन-आधारित (कागज, फर्नीचर) और पशु-आधारित (चमड़ा, ऊन) उद्योगों में वर्गीकृत किया जाता है।
🎯 Exam Tip: कच्चे माल पर आधारित उद्योगों के वर्गीकरण में, प्रत्येक प्रकार के उद्योग के नाम, उनके कच्चे माल के स्रोत और उत्पादों के उदाहरणों को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 5. उद्योगों की अवस्थिति के आधुनिक कारकों की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: उद्योगों की अवस्थिति के आधुनिक कारकों की विशेषताएँ उद्योगों की अवस्थिति के आधुनिक कारकों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
- उद्योगों की अवस्थिति के आधुनिक कारकों का अलग-अलग प्रभाव नहीं होता।
- ये कारक उद्योगों की अवस्थिति को सामूहिक रूप से प्रभावित करते हैं।
- इन कारकों का आपस में जटिल सम्बन्ध होता है।
- इन कारकों का सापेक्षिक महत्त्व कभी स्थायी नहीं होता बल्कि वह समय, स्थान, उद्योगों के प्रकार व अर्थव्यवस्था के अनुसार बदलता रहता है।
- किसी निश्चित समय पर उद्योगों की स्थापना के सभी कारक अनुकूल हों, आवश्यक नहीं।
- हर जगह कुछ कारक अनुकूल होते हैं व कुछ प्रतिकूला उद्योगों के लिए अच्छे स्थान वे माने जाते हैं जहाँ अनुकूल कारक अधिक प्रभावशाली हों व प्रतिकूल कारक कम प्रभावशाली हो ।
- उद्योगों की अनुकूलतम (Optimum) अवस्थिति वह होती है जहाँ सभी अनुकूल कारकों में सन्तुलन बैठ रहा हो।
वैसे अनुकूलतम अवस्थिति एक सापेक्षिक (Relative) शब्द है।
In simple words: उद्योगों की अवस्थिति के आधुनिक कारक परस्पर संबंधित, जटिल और गतिशील होते हैं, जो समय, स्थान और उद्योग के प्रकार के अनुसार बदलते रहते हैं; अनुकूलतम अवस्थिति वह होती है जहाँ सभी कारक संतुलन में होते हैं।
🎯 Exam Tip: अवस्थिति कारकों का वर्णन करते समय, उनकी परस्पर संबद्धता, परिवर्तनशीलता और सापेक्षिक महत्व पर जोर दें।
Question 6. आधुनिक बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: आधुनिक बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण की विशेषताएँ आधुनिक युग में बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
1. कौशल अथवा उत्पादन की विधियों का विशिष्टीकरण - शिल्प पद्धति में केवल थोड़ी वस्तुओं का ही उत्पादन किया जाता है जिनका पहले से ऑर्डर प्राप्त होता है। परिणामस्वरूप वस्तुओं की उत्पादन लागत अधिक आती है। बड़े पैमाने पर होने वाले उत्पादन में प्रत्येक कर्मचारी बड़ी संख्या में एक जैसे सामान (वस्तु). को बार-बार बनाता रहता है। इससे वस्तु की लागत भी कम आती है और वस्तुओं का मानक भी समान रहता है।
2. मशीनीकरण - मशीनीकरण से अभिप्राय ऐसी युक्तियों के उपयोग से है जिनसे कार्य सम्पन्न होता है। विनिर्माण में स्वचालित मशीनों का उपयोग मशीनीकरण की विकसित अवस्था को प्रदर्शित करता है। वर्तमान में सम्पूर्ण विश्व में ऐसे स्वचालित कारखाने दिखने लगे हैं जो कि कम्प्यूटर द्वारा नियन्त्रित हैं और जिनमें मशीनों को 'सोचने' के लिए विकसित किया गया है।
3. प्रौद्योगिक नवाचार - बड़े पैमाने के आधुनिक विनिर्माण की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि वे सतत शोध एवं विकास के बल पर ऐसे प्रौद्योगिक नवाचार का उपयोग करते हैं जिनसे गुणवत्ता का नियन्त्रण, अपशिष्टों का निस्तारण, अदक्षता की समाप्ति और प्रदूषण में कमी प्रभावी ढंग से हो सकती है।
4. संगठनात्मक ढाँचा एवं स्तरीकरण - आधुनिक विनिर्माण उद्योग एक संगठन की तरह कार्य करता है जिसमें सभी विभाग अपना-अपना दायित्व निभाते हैं। इस वृहद् प्रणाली के प्रमुख लक्षण हैं
- एक जटिल प्रौद्योगिकी यन्त्र
- अत्यधिक विशिष्टीकरण व श्रम विभाजन के द्वारा कम लागत पर उत्पादन
- अधिक पूँजी
- बड़े संगठन एवं
- प्रशासकीय अधिकारी वर्ग ।
5. अनियमित भौगोलिक वितरण - आधुनिक विनिर्माण के प्रमुख संकेन्द्रण विश्व में बहुत ही थोड़े स्थानों पर विकसित हो पाए हैं। विनिर्माण उद्योगों से सम्पन्न देश आर्थिक एवं राजनीतिक शक्ति के केन्द्र बन गए हैं।
In simple words: आधुनिक बड़े पैमाने के विनिर्माण की विशेषताएँ विशिष्टीकरण, मशीनीकरण, तकनीकी नवाचार, संगठनात्मक संरचना और कुछ ही स्थानों पर भौगोलिक एकाग्रता हैं, जो कम लागत पर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का उत्पादन सुनिश्चित करती हैं।
🎯 Exam Tip: बड़े पैमाने के विनिर्माण की विशेषताओं को समझाते समय, विशिष्टीकरण, मशीनीकरण और प्रौद्योगिकी के महत्व को स्पष्ट रूप से उजागर करें।
Question 7. उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
Answer: उद्योग हर जगह पर विकसित नहीं हो पाते। उनकी स्थापना ऐसे स्थानों पर की जाती है जहाँ उत्पाद के निर्माण और विक्रय पर लागत कम-से-कम आए और अधिक-से-अधिक लाभ हो । ऐसी अवस्थिति का चयन काफी सोच-विचार के उपरान्त किया जाता है। किसी भी उद्योग की अवस्थिति अनेक प्रकार के कारकों द्वारा नियन्त्रित होती है। उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं
1. बाजार - उद्योगों की स्थापना में सबसे महत्त्वपूर्ण कारक उसके द्वारा उत्पादित माल के लिए उपलब्ध बाजार का होना है। बाजार से अभिप्राय उस क्षेत्र से होता है जहाँ तैयार माल की माँग हो और वहाँ के निवासियों में उन वस्तुओं को खरीदने की क्षमता भी हो ।
2. कच्चे माल की प्राप्ति - उद्योग के लिए कच्चा माल अपेक्षाकृत सस्ता एवं आसानी से परिवहन योग्य होना चाहिए। कच्चे माल के स्रोत के समीप स्थित होने वाले उद्योग हैं
- ह्रासमान भार वाले कच्चे माल का प्रयोग करने वाले उद्योग, जैसे-चीनी उद्योग ।
- भारी कच्चा माल प्रयोग करने वाले उद्योग, जैसे-लौह-इस्पात उद्योग।
- कच्चे माल का भार कम होने वाले उद्योग, जैसे-ताँबा उद्योग ।
- शीघ्र नष्ट होने वाले कच्चे माल पर आधारित उद्योग, जैसे-दुग्ध पदार्थ, डिब्बाबन्द फल आदि ।
3. शक्ति के साधन - वे उद्योग जिन्हें अधिक शक्ति की आवश्यकता है, शक्ति स्रोतों के समीप ही लगाए जाते हैं, जैसे-ऐलुमिनियम उद्योग ।
4. श्रम आपूर्ति - कम्प्यूटरों के बढ़ते उपयोग, यन्त्रीकरण, स्वचालन एवं औद्योगिक प्रक्रिया के लचीलेपन के कारण उद्योगों की श्रमिकों पर निर्भरता थोड़ी कम हुई है। फिर भी औद्योगिक विकास के लिए उचित वेतन पर सही श्रमिकों का महत्त्व आज भी बना हुआ है।
5. परिवहन एवं संचार की सुविधा - कच्चे माल को कारखाने तक लाने के लिए और उत्पादित माल को खपत केन्द्रों तक पहुँचाने के लिए तीव्र और सक्षम परिवहन सुविधाएँ उद्योगों की अवस्थिति के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कारक हैं। उद्योगों के लिए सूचनाओं के आदान-प्रदान एवं प्रबन्धन के लिए संचार की महत्त्वपूर्ण आवश्यकता होती है।
6. सरकारी नीति - सरकारी नीति में उद्योगों के अवस्थितिकरण को प्रभावित करने वाली महत्त्वपूर्ण कारक है। उपर्युक्त सभी कारक सम्मिलित रूप से किसी उद्योग की अवस्थिति को प्रभावित व नियन्त्रित करते हैं।
In simple words: उद्योगों की अवस्थिति बाजार की उपलब्धता, कच्चे माल की निकटता, शक्ति के साधन, श्रम आपूर्ति, परिवहन और संचार सुविधाएँ, और सरकारी नीतियों जैसे कई कारकों से प्रभावित होती है, जिनका उद्देश्य उत्पादन लागत को कम करना और लाभ को अधिकतम करना है।
🎯 Exam Tip: उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारकों का विस्तृत वर्णन करते समय, प्रत्येक कारक की भूमिका और उनके आपस में संबंध को स्पष्ट रूप से समझाएं।
Question 8. उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों की विशेषताएँ उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
(1) उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों के उन्नत, वैज्ञानिक एवं इंजीनियरिंग उत्पाद अत्यन्त परिष्कृत होते हैं जिनका निर्माण गहन वैज्ञानिक शोध एवं विकास पर आधारित होता है।
(2) इन उद्योगों में उच्च कुशलता वाले दक्ष एवं विशिष्ट व्यावसायिक श्रमिकों (सफेद कॉलर) को नौकरी पर रखा जाता है। इनकी संख्या वास्तविक उत्पादन करने वाले श्रमिकों (नीला कॉलर) से अधिक होती है।
(3) उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों के कुछ प्रमुख उत्पाद-रोबोट (यन्त्र मानव), कम्प्यूटर आधारित डिजाइन (CAD) तथा निर्माण, धातु पिघलाने एवं शोधन करने के इलैक्ट्रॉनिक नियन्त्रण और रसायन व औषधियाँ होते हैं।
(4) इस नए औद्योगिक भू-दृश्य में धुआँ उगलती चिमनियों, बड़े-बड़े बदसूरत विशाल भवन, कारखाने, भण्डार और कूड़े के ढेर नहीं होते बल्कि उसके स्थान पर आधुनिक, साफ-सुथरे, स्मार्ट व डिजाइनर भवन, यत्र-तत्र स्थित कार्यालय तथा शोध एवं विकास की प्रयोगशालाएँ देखने को मिलती हैं।
In simple words: उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित होते हैं, परिष्कृत उत्पाद बनाते हैं, उच्च कुशल सफेद कॉलर श्रमिकों का उपयोग करते हैं, रोबोटिक्स और CAD जैसे उत्पाद शामिल करते हैं, और इनका औद्योगिक परिदृश्य आधुनिक व स्वच्छ होता है।
🎯 Exam Tip: उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों की विशेषताओं में उत्पादों की प्रकृति, श्रम शक्ति का प्रकार, प्रमुख उत्पादों और औद्योगिक परिदृश्य पर विशेष ध्यान दें।
(5) ये उद्योग बाजार की बदलती माँग के अनुसार अपने उत्पादों में तेजी से सुधार करते हैं। इसी कारण इसके उत्पाद अल्पजीवी होते हैं।
(6) इन उद्योगों में श्रम की गतिशीलता बहुत अधिक होती है, क्योंकि योग्यता और अनुभव अधिक आय उन्नत सुविधाओं व सामाजिक स्तर के प्रति संवेदनशील होते हैं।
(7) आज भी उपभोक्ता संस्कृति में एक बार तो इनके उत्पाद खूब बिकते हैं। उदाहरणतः कम्प्यूटरों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है।
🎯 Exam Tip: उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों की विशेषताओं में उत्पादों की अल्पजीविता, उच्च श्रम गतिशीलता और उपभोक्ता संस्कृति पर उनके प्रभाव पर भी ध्यान दें।
Question 9. उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों की अवस्थिति के कारकों का वर्णन कीजिए।
Answer: उच्च प्रौद्योगिकी विनिर्माण क्रियाकलापों में नवीनतम पीढ़ी है। पिछले दो दशकों से उच्च प्रौद्योगिकी पर आधारित उद्योग तेजी से विकसित हो रहे हैं। उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों की अवस्थिति के कारक इन स्वच्छन्द उद्योगों पर पारम्परिक कारकों का कोई विशेष प्रभाव नहीं होता। इनके स्थानीयकरण (अवस्थिति) में कुछ नए कारकों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है
(1) ये हल्के उद्योग होते हैं जो अधिकतर कच्चे माल की जगह उत्पादन के लिए अर्द्धनिर्मित तथा संसाधित वस्तुओं का उपयोग करते हैं।
(2) वैज्ञानिक और तकनीकी दक्षता पर निर्भर रहने के कारण ये उद्योग प्रायः विश्वविद्यालयों तथा शोध संस्थाओं के समीप स्थापित किए जाते हैं।
(3) इन उद्योगों के लिए ऊर्जा की आपूर्ति बिजली द्वारा होती है जो मुख्यतः राष्ट्रीय ग्रिड से प्राप्त होती है।
(4) इन उद्योगों के लिए अनुकूल जलवायु वाले महानगरीय क्षेत्र अधिक अनुकूल साबित होते हैं। महानगरों की सामाजिक, सांस्कृतिक व वैज्ञानिक गतिविधियाँ इन उद्योगों को अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देती हैं।.
(5) इन उद्योगों का अन्तिम उत्पाद छोटा किन्तु परिष्कृत होता है। अतः इन्हें सड़क मार्गों के निकट प्रदूषण रहित आवासीय क्षेत्रों से लगाया जा सकता है।
(6) ज्यादा-से-ज्यादा सफलता प्राप्त करने की अतृप्त भूख तथा प्रतिस्पर्धी कम्पनियों को पटकनी देकर सदा आगे रहने की मानसिकता के कारण नए उद्योगों के वैज्ञानिक, शोधार्थी प्रबन्धक, वित्त विशेषज्ञ तथा प्रशासक सदा तनावग्रस्त रहते हैं। उनके तनावरहित सन्तुलित व्यवहार को बनाए रखने के लिए कम्पनियों का पर्यावरण हरा-भरा, आकर्षक व सुखद होना आवश्यक है। अतः ऐसे उद्योग मनभावन जगहों पर विकसित होते हैं।
(7) परिवहन और संचार के अत्याधुनिक साधनों के बिना ये उद्योग जीवित ही नहीं रह सकते। उपभोक्ताओं, वित्तीय संस्थाओं, सरकारी विभागों, आपूर्तिदाताओं से तत्काल सम्पर्क बनाने तथा शोध के विभिन्न चरणों की सफलता के लिए उच्च कोटि के संचार व परिवहन के साधन आवश्यक हैं।
In simple words: उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों की अवस्थिति हल्के कच्चे माल पर निर्भरता, वैज्ञानिक और तकनीकी दक्षता के कारण विश्वविद्यालयों और शोध संस्थाओं के निकटता, अनुकूल महानगरीय जलवायु, प्रदूषण रहित आवासीय क्षेत्रों के करीब, और उन्नत परिवहन व संचार साधनों की उपलब्धता जैसे कारकों से प्रभावित होती है।
🎯 Exam Tip: उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों की अवस्थिति के कारकों को समझाते समय, तकनीकी निर्भरता, शहरी वातावरण और बुनियादी ढांचे के महत्व को विशेष रूप से बताएं।
लघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. द्वितीयक क्रियाकलाप से आप क्या समझते हैं?
Answer: द्वितीयक क्रियाकलाप-प्रकृति में पाए जाने वाले कच्चे पदार्थों यथा-गेहूं, चावल, कपास, लकड़ी, धातुएँ आदि में से बहुत कम का ही प्रत्यक्ष रूप से उपभोग किया जा सकता है। अतः आवश्यक है कि कच्चे माल का हाथ अथवा मशीनों की सहायता से रूप बदला जाए और उन्हें पहले से अधिक उपयोगी बनाया जाए। उदाहरणतः कपास को सूत में परिवर्तित करने पर उसका मूल्य बढ़ जाता है, क्योंकि इसका उपयोग वस्त्र बनाने में किया जा सकता है। स्पष्ट है कि जब प्राथमिक उत्पादों का प्रसंस्करण करके नई, उपयोगी और मूल्यवान वस्तुओं की रचना की जाती है तो इन्हें 'द्वितीयक क्रियाकलाप' कहते हैं। इस तरह द्वितीयक क्रियाकलापों का सम्बन्ध तीन चीजों से होता है-
- विनिर्माण
- प्रसंस्करण, एवं
- निर्माण ।
In simple words: द्वितीयक क्रियाकलाप वे प्रक्रियाएँ हैं जिनमें कच्चे माल को संसाधित करके अधिक उपयोगी और मूल्यवान तैयार उत्पादों में बदला जाता है, जिसमें विनिर्माण, प्रसंस्करण और निर्माण जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: द्वितीयक क्रियाकलाप की परिभाषा और उसके घटकों (विनिर्माण, प्रसंस्करण, निर्माण) को स्पष्ट उदाहरणों के साथ याद रखें।
Question 2. विनिर्माण के अर्थ को समझाइए ।
Answer: विनिर्माण का अर्थ-विनिर्माण का शाब्दिक अर्थ है-'हाथ से बनाना', लेकिन अब इसमें मशीनों से बनी वस्तुओं को भी शामिल किया जाने लगा है। मूल रूप से विनिर्माण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कच्चे अथवा अर्द्धनिर्मित माल को ऐसे ऊँचे मूल्य के तैयार उपयोगी माल में बदल दिया जाता है जिसे स्थानीय अथवा दूर स्थित बाजार में बेचा जा सकता है। विनिर्माण का अभिप्राय किसी भी वस्तु के उत्पादन से है। इसमें हस्तशिल्प कार्य से लेकर लोहे व इस्पात को गढ़ना, प्लास्टिक के खिलौने बनाने से लेकर कम्प्यूटर के अति सूक्ष्म घटकों को जोड़ना और अन्तरिक्षयान निर्माण आदि सभी प्रकार का उत्पादन शामिल होता है।
In simple words: विनिर्माण का अर्थ कच्चे या अर्द्धनिर्मित माल को हाथ या मशीन से संसाधित करके अधिक मूल्यवान और उपयोगी तैयार उत्पादों में बदलना है, जिसमें हस्तशिल्प से लेकर जटिल औद्योगिक उत्पादन तक सब कुछ शामिल है।
🎯 Exam Tip: विनिर्माण की परिभाषा में उसके पारंपरिक और आधुनिक दोनों अर्थों को स्पष्ट करें, साथ ही उदाहरण भी दें।
Question 3. स्वच्छन्द उद्योग की विशेषताओं को समझाइए।
Answer: स्वच्छन्द उद्योग की विशेषताएँ स्वच्छन्द उद्योग की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
- स्वच्छन्द उद्योग हल्के उद्योग होते हैं।
- ये उद्योग कच्चे माल के स्थान पर पों का उपयोग करते हैं।
- शक्ति के साधनों द्वारा प्रायः राष्ट्रीय ग्रिड से प्राप्त बिजली का उपयोग करते हैं।
- इस उद्योग के उत्पाद छोटे तथा आसानी से परिवहन के योग्य होते हैं।
- इन उद्योगों में कम लोग कार्य करते हैं।
- ये उद्योग स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त होते हैं।
- ये उद्योग संसाधन और बाजार उन्मुख नहीं होते ।
In simple words: स्वच्छन्द उद्योग हल्के होते हैं, कच्चे माल पर कम निर्भर करते हैं, कम प्रदूषण फैलाते हैं, राष्ट्रीय ग्रिड से बिजली लेते हैं और इनके उत्पाद छोटे व परिवहन योग्य होते हैं।
🎯 Exam Tip: स्वच्छन्द उद्योगों की विशेषताओं को बिंदुवार याद रखें, खासकर उनकी स्थान स्वतंत्रता और पर्यावरणीय प्रभावों के संदर्भ में।
Question 4. कुटीर उद्योग की विशेषताओं को समझाइए ।
Answer: कुटीर उद्योग की विशेषताएँ कुटीर उद्योग की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
- कुटीर उद्योग विनिर्माण की सबसे छोटी इकाई है।
- इस उद्योग में दस्तकार/कलाकार अपनी पैतृक दक्षता के आधार पर घर में ही छोटी-छोटी वस्तुओं का निर्माण करते हैं।
- इस उद्योग में दस्तकार परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर स्थानीय कच्चे माल का प्रयोग करते हुए वस्तुओं का निर्माण करते हैं।
- इन उद्योगों का व्यापारिक महत्त्व बहुत ही कम है।
- इन उद्योगों में खाद्य पदार्थ, बर्तन, आभूषण, दरियाँ, चटाइयाँ, थैले, टोकरियाँ इत्यादि बनाने का काम होता है।
In simple words: कुटीर उद्योग घर आधारित सबसे छोटी विनिर्माण इकाई है जहाँ परिवार के सदस्य स्थानीय कच्चे माल का उपयोग करके हस्तशिल्प और रोजमर्रा की वस्तुएँ बनाते हैं, जिनका व्यापारिक महत्व कम होता है।
🎯 Exam Tip: कुटीर उद्योग की पहचान उसकी छोटी इकाई, परिवार आधारित श्रम, स्थानीय कच्चे माल का उपयोग और कम व्यापारिक महत्व से होती है, इन बिंदुओं पर ध्यान दें।
Question 5. लघु उद्योग की विशेषताओं को समझाइए ।
Answer: लघु उद्योग की विशेषताएँ लघु उद्योग की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
- लघु उद्योगों को उत्पादन की तकनीक एवं निर्माण स्थल (घर से बाहर कारखाना) दोनों के आधार पर कुटीर उद्योगों से अलग किया जाता है।
- इस उद्योग में स्थानीय कच्चे माल का उपयोग होता है।
- इस उद्योग में अर्द्धकुशल श्रमिक व शक्ति के साधनों से चलने वाले यन्त्रों का प्रयोग किया जाता है।
- रोजगार के अवसर इस उद्योग में अधिक होते हैं।
- इस उद्योग से स्थानीय निवासियों की क्रयशक्ति में वृद्धि होती है।
In simple words: लघु उद्योग कुटीर उद्योग से बड़े होते हैं, कारखानों में अर्द्धकुशल श्रमिकों और शक्ति चालित यंत्रों का उपयोग करते हैं, स्थानीय कच्चे माल पर निर्भर होते हैं, और अधिक रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं।
🎯 Exam Tip: लघु उद्योगों की विशेषताओं को कुटीर उद्योगों से तुलना करते हुए याद रखें, विशेषकर उत्पादन तकनीक, श्रम और रोजगार के अवसरों के संदर्भ में।
Question 6. कृषि व्यापार पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: कृषि व्यापार-कृषि व्यापार औद्योगिक पैमाने पर व्यापारिक कृषि है। इसमें प्रायः बड़े-बड़े उद्योगपति पैसा लगाते हैं जैसे-टाटा अनेक प्रकार के उद्योग चलाता है तथा चाय के बागान के क्षेत्र में भी अपनी पूँजी लगाई है। कृषि व्यापार के फार्मों की विशेषताएँ हैं-यन्त्रीकरण, बड़ा आकार, साधनों का उपयोग तथा प्रबन्धन की आधुनिक प्रणाली । इन्हें कृषि कारखाने भी कहा जाता है।
In simple words: कृषि व्यापार औद्योगिक पैमाने पर की जाने वाली व्यापारिक कृषि है, जिसमें बड़े उद्योगपति निवेश करते हैं और यह यंत्रीकरण, बड़े आकार, आधुनिक प्रबन्धन प्रणालियों और संसाधनों के कुशल उपयोग द्वारा विशेषता प्राप्त करता है, जिन्हें अक्सर कृषि कारखाने कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: कृषि व्यापार को परिभाषित करते समय उसके औद्योगिक पैमाने, पूंजी निवेश, यंत्रीकरण और आधुनिक प्रबंधन पर जोर दें।
Question 7. भोजन प्रसंस्करण पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: भोजन प्रसंस्करण-भोजन प्रसंस्करण उद्योग वर्तमान गतिशील जीवन में तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसमें डिब्बाबन्द भोजन, क्रीम उत्पादन, फल प्रसंस्करण एवं मिठाई बनाना आदि शामिल किए जाते हैं। भोजन को सुरक्षित रखने की अनेक विधियों का ज्ञान मनुष्य को प्राचीनकाल से है; जैसे-उसे सुखाकर रखना, उसका अचार बनाना, उसे किण्वित करना यानि खमीर उठाना इत्यादि । हालाँकि इन विधियों से औद्योगिक क्रान्ति से पहले की माँगों को सीमित मात्रा में ही पूरा किया जाता था।
In simple words: भोजन प्रसंस्करण एक तेजी से बढ़ता उद्योग है जिसमें डिब्बाबंद भोजन, क्रीम, फल प्रसंस्करण और मिठाई जैसे उत्पादों को बनाया जाता है, जिसमें भोजन को सुरक्षित रखने की पारंपरिक और आधुनिक दोनों विधियों का उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: भोजन प्रसंस्करण की परिभाषा, इसके उदाहरण और इसके ऐतिहासिक विकास को संक्षिप्त में बताएं।
Question 8. नगरों के आन्तरिक भागों की तुलना में सीमान्त क्षेत्रों में औद्योगिक संकुल व प्रौद्योगिक पार्कों के लाभों को समझाइए ।
Answer: नगरों के आन्तरिक भागों की तुलना में सीमान्त क्षेत्रों में औद्योगिक संकुल व प्रौद्योगिक पाकों के लाभ
- जमीन की कीमतें अपेक्षाकृत सस्ती होने के कारण एकमंजिले कारखाने बनाए जा सकते हैं।
- ऐसे स्थानों पर भविष्य में भी विस्तार के लिए जगह उपलब्ध हो जाती है।
- प्रमुख सड़कों व रेलमार्गों तक पहुँचने की सुविधा होती है।
- समीपवर्ती बस्तियों से प्रतिदिन शहर की तरफ जाने वाले लोगों द्वारा श्रम की आपूर्ति हो जाती है।
- उद्योगों के स्थापित होने से पहले ही वहाँ भूमि विकसित हो जाती है तथा सभी प्रकार की संचार, परिवहन व नागरिक सुविधाएँ उपलब्ध हो जाती हैं।
In simple words: शहरी सीमांत क्षेत्रों में औद्योगिक संकुलों और प्रौद्योगिकी पार्कों को सस्ती भूमि, विस्तार की संभावना, बेहतर परिवहन पहुँच, श्रम की आसान उपलब्धता और पहले से विकसित बुनियादी ढाँचा जैसे लाभ मिलते हैं।
🎯 Exam Tip: शहरी सीमांत क्षेत्रों में औद्योगिक विकास के लाभों का वर्णन करते समय, भूमि, परिवहन, श्रम और विस्तार क्षमता जैसे महत्वपूर्ण कारकों को हाइलाइट करें।
Question 9. स्वामित्व के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।
Answer: स्वामित्व के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण
1. सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग - ये उद्योग सरकार के नियन्त्रण में होते हैं। भारत में कई उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र के नियन्त्रण में हैं। समाजवादी देशों में कई उद्योग सरकारी नियन्त्रण में होते हैं।
2. निजी क्षेत्र के उद्योग - इन उद्योगों पर व्यक्तिगत निवेशकों का स्वामित्व होता है। ये उद्योग निजी संगठनों द्वारा संचालित होते हैं। पूँजीवादी देशों में अधिकांश उद्योग निजी क्षेत्र में होते हैं।
3. संयुक्त क्षेत्र के उद्योग - इन उद्योगों का संचालन संयुक्त कम्पनी के द्वारा अथवा किसी निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी के संयुक्त प्रयासों द्वारा किया जाता है।
In simple words: स्वामित्व के आधार पर उद्योगों को सार्वजनिक (सरकारी), निजी (व्यक्तिगत स्वामित्व) और संयुक्त (निजी और सार्वजनिक प्रयासों का मिश्रण) क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जाता है।
🎯 Exam Tip: स्वामित्व के आधार पर उद्योगों के वर्गीकरण में, प्रत्येक प्रकार के नियंत्रण (सरकार, निजी, संयुक्त) और संबंधित देशों के उदाहरणों को स्पष्ट करें।
Question 10. कुटीर उद्योग एवं लघु उद्योग में अन्तर को समझाइए।
Answer: कुटीर उद्योग एवं लघु उद्योग में अन्तर
| क्र०सं० | कुटीर उद्योग | लघु उद्योग |
|---|---|---|
| 1. | कुटीर उद्योग में दस्तकार स्वयं व उसके परिवार के सदस्य कार्य करते हैं। | लघु उद्योग में मजदूर लगाए जाते हैं तथा मशीनों को चलाने के लिए ऊर्जा का प्रयोग किया जाता है। |
| 2. | अधिकांश उत्पादन घर में ही खप जाता है तथा बहुत कम अधिशेष बचता है। | समस्त उत्पादन बाजार में बेचा जाता है। |
| 3. | कुटीर उद्योगों में स्थानीय कच्चे माल का प्रयोग किया जाता है। | लघु उद्योगों में स्थानीय कच्चे माल के कम पड़ने पर वह बाहर से मँगाया जाता है। |
| 4. | जो थोड़ा-बहुत अधिशेष बचता है वह स्थानीय बाजार में बेचा जाता है। | लघु उद्योगों का उत्पाद स्थानीय बाजार के साथ-साथ दूर-दराज के बाजारों में भी बेचा जाता है। |
In simple words: कुटीर उद्योग परिवार द्वारा घर पर स्थानीय कच्चे माल से चलाए जाते हैं और स्थानीय उपभोग के लिए होते हैं, जबकि लघु उद्योग मजदूरों, मशीनों और ऊर्जा का उपयोग करते हैं, बाहर से कच्चे माल मंगा सकते हैं, और अपने उत्पादों को व्यापक बाजार में बेचते हैं।
🎯 Exam Tip: कुटीर और लघु उद्योगों के बीच के अंतर को तालिका के रूप में प्रस्तुत करें, जिसमें श्रम, पूंजी, कच्चे माल और बाजार के संदर्भ में स्पष्ट भेद हों।
Question 11. लघु उद्योग एवं बड़े पैमाने के उद्योग में अन्तर को समझाइए ।
Answer: लघु उद्योग एवं बड़े पैमाने के उद्योग में अन्तर
| क्र०सं० | लघु उद्योग | बड़े पैमाने के उद्योग |
|---|---|---|
| 1. | लघु उद्योग में उत्पादन छोटे पैमाने पर होता है। | बड़े पैमाने के उद्योग में उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। |
| 2. | इन उद्योगों में कम पूँजी व कम श्रम की आवश्यकता होती है। | इन उद्योगों में भारी पूँजी व अधिक श्रम की आवश्यकता होती है।. |
| 3. | उत्पादित वस्तुओं की गुणवत्ता पर कोई विशेष ध्यान नहीं रखा जाता। | उत्पादन की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाता है। |
| 4. | इन उद्योगों की प्रबन्ध प्रणाली साधारण होती है। | इन उद्योगों का प्रबन्ध जटिल व स्तरित होता है। |
| 5. | उत्पादन को प्रायः स्थानीय और दूर-दूर बाजारों में बेचा जाता है। | उत्पादन को दूर स्थित बाजारों में बेचने के साथ-साथ उसका निर्यात भी किया जाता है। |
In simple words: लघु उद्योगों में उत्पादन छोटे पैमाने पर, कम पूंजी और श्रम के साथ होता है, जहाँ गुणवत्ता पर कम ध्यान दिया जाता है, जबकि बड़े पैमाने के उद्योगों में उत्पादन बड़े स्तर पर, भारी पूंजी और श्रम के साथ, उच्च गुणवत्ता और जटिल प्रबंधन प्रणाली के तहत होता है।
🎯 Exam Tip: लघु और बड़े पैमाने के उद्योगों के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए पूंजी निवेश, श्रम, उत्पादन का पैमाना और प्रबंधन प्रणाली जैसे कारकों पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 12. निजी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्योग में अन्तर को समझाइए ।
Answer: निजी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्योग में अन्तर
| क्र०सं० | निजी उद्योग | सार्वजनिक उद्योग |
|---|---|---|
| 1. | इस उद्योग में उपभोग्य वस्तुओं तथा छोटे यन्त्रों के उद्योग आते हैं। | इस वर्ग में भारी तथा आधारभूत उद्योग शामिल हैं। |
| 2. | इन उद्योगों में सारी पूँजी, लाभ तथा हानि एक ही व्यक्ति की होती है। | इन उद्योगों में सारी पूँजी, लाभ तथा हानि सरकार की होती है। |
| 3. | इनमें अधिकतर छोटे पैमाने के उद्योग शामिल हैं। | इस क्षेत्र में भारी उद्योग शामिल हैं। |
| 4. | ऐसे उद्योग अधिकतर यू०एस०ए० तथा जापान में प्रचलित हैं। | ये उद्योग समाजवादी देशों जैसे रूस तथा भारत में प्रचलित हैं। |
In simple words: निजी उद्योग व्यक्तिगत स्वामित्व वाले होते हैं, उपभोक्ता वस्तुओं और छोटे पैमाने पर केंद्रित होते हैं, जबकि सार्वजनिक उद्योग सरकारी स्वामित्व वाले होते हैं, भारी और आधारभूत उद्योगों में शामिल होते हैं, और समाजवादी देशों में अधिक प्रचलित हैं।
🎯 Exam Tip: निजी और सार्वजनिक उद्योगों के बीच के अंतर को स्पष्ट करते समय स्वामित्व, उद्देश्य, उत्पाद के प्रकार और प्रचलित देशों के संदर्भ में तुलना करें।
Question 13. उपभोक्ता वस्तु उद्योग एवं उत्पादक वस्तु उद्योग में अन्तर को समझाइए ।
Answer: उपभोक्ता वस्तु उद्योग एवं उत्पादक वस्तु उद्योग में अन्तर
| क्र०सं० | उपभोक्ता वस्तु उद्योग | उत्पादक वस्तु उद्योग |
|---|---|---|
| 1. | ये उद्योग मुख्यतः कृषि पर आधारित हैं। | ये उद्योग मुख्यतः खनिज पर आधारित हैं। |
| 2. | इनमें उन वस्तुओं का निर्माण किया जाता है जिनका प्रयोग प्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ता करते हैं। | इनमें मुख्य रूप से मशीनों का निर्माण किया जाता है। |
| 3. | इन उद्योगों में कम पूँजी की आवश्यकता होती है। | इन उद्योगों में अधिक पूँजी की आवश्यकता होती है। |
| 4. | ये छोटे पैमाने के उद्योग हैं। | ये बड़े पैमाने के उद्योग हैं। |
In simple words: उपभोक्ता वस्तु उद्योग सीधे उपभोक्ताओं के उपयोग के लिए उत्पाद बनाता है, अक्सर कृषि-आधारित और छोटे पैमाने पर होते हैं, जबकि उत्पादक वस्तु उद्योग अन्य उद्योगों के लिए मशीनें और कच्चे माल बनाते हैं, खनिज-आधारित और बड़े पैमाने पर होते हैं।
🎯 Exam Tip: उपभोक्ता और उत्पादक वस्तु उद्योगों के बीच के अंतर को स्पष्ट करते समय उनके प्राथमिक इनपुट (कच्चा माल), उत्पाद का उपयोग, पूंजी निवेश और पैमाने पर ध्यान दें।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. प्राथमिक उत्पाद क्या है?
Answer: कृषि, पशुपालन, वानिकी, खनन, मत्स्य ग्रहण इत्यादि मानव की प्राथमिक क्रियाएँ हैं और इनसे प्राप्त उत्पाद ‘प्राथमिक उत्पाद' कहलाते हैं।
In simple words: प्राथमिक उत्पाद वे प्राकृतिक संसाधन हैं जो सीधे पृथ्वी से प्राप्त होते हैं, जैसे कृषि, खनन या मछली पकड़ने से मिलने वाले पदार्थ।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक उत्पाद की परिभाषा को उसके स्रोतों और उदाहरणों के साथ याद रखें।
Question 2. द्वितीयक क्रियाकलाप किसे कहते हैं?
Answer: जब प्राथमिक उत्पादों का प्रसंस्करण करके नई, उपयोगी और मूल्यवान वस्तुओं की रचना की जाती है तो इन्हें 'द्वितीयक क्रियाकलाप' कहते हैं।
In simple words: द्वितीयक क्रियाकलाप प्राथमिक उत्पादों को संसाधित करके उन्हें अधिक उपयोगी और मूल्यवान वस्तुओं में बदलने की प्रक्रिया है।
🎯 Exam Tip: द्वितीयक क्रियाकलाप की सरल और सटीक परिभाषा को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. विनिर्माण को परिभाषित कीजिए।
Answer: संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार, “विनिर्माण जैविक अथवा अजैविक पदार्थों का एक नए उत्पाद के रूप में यान्त्रिक तथा रासायनिक परिवर्तन है, चाहे यह कार्य शक्तिचालित मशीन द्वारा सम्पन्न होता है अथवा हाथ द्वारा, चाहे यह कार्य कारखाने में किया जाता है अथवा कामगारों के घर में और उत्पाद चाहे थोक में बेचे जाएँ अथवा फुटकर में ।”
In simple words: विनिर्माण वह प्रक्रिया है जिसमें जैविक या अजैविक पदार्थों को मशीनों या हाथ से, कारखाने या घर में, यांत्रिक या रासायनिक रूप से बदलकर नए उपयोगी उत्पादों में बदला जाता है।
🎯 Exam Tip: विनिर्माण की परिभाषा में 'यांत्रिक और रासायनिक परिवर्तन', 'कच्चे माल का मूल्यवान उत्पाद में बदलना' जैसे मुख्य शब्दों को शामिल करें।
Question 4. विनिर्माण उद्योगों की सामान्य विशेषताएँ बताइए ।
Answer: विनिर्माण उद्योगों की सामान्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
- जटिल किन्तु स्मार्ट संगठन
- विशिष्टीकृत श्रम
- मशीनों का उपयोग
- ऊर्जा के साधनों का उपयोग
- पूँजी का भारी निवेश
- बड़े पैमाने पर उत्पादन
- परिष्कृत उत्पाद
- अनुसन्धान एवं विकास
- एक जैसी वस्तुओं का उत्पादन ।
In simple words: विनिर्माण उद्योगों की प्रमुख विशेषताएँ जटिल संगठन, मशीनों का उपयोग, भारी पूंजी निवेश, बड़े पैमाने पर उत्पादन और अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से परिष्कृत उत्पादों का निर्माण करना है।
🎯 Exam Tip: विनिर्माण उद्योगों की विशेषताओं को बिंदुवार याद रखें, खासकर संगठनात्मक संरचना, उत्पादन विधि और निवेश के संदर्भ में।
Question 5. भोजन प्रसंस्करण के उदाहरण दीजिए।
Answer: भोजन प्रसंस्करण के उदाहरण हैं-डिब्बाबन्द भोजन, क्रीम उत्पादन, फल प्रसंस्करण एवं मिठाई बनाना आदि ।
In simple words: डिब्बाबंद भोजन, क्रीम, फल प्रसंस्करण और मिठाई बनाना भोजन प्रसंस्करण के कुछ उदाहरण हैं।
🎯 Exam Tip: भोजन प्रसंस्करण के सामान्य और आसानी से याद रखने वाले उदाहरणों को जानें।
Question 6. द्वितीयक क्रियाओं के कोई दो उदाहरण दीजिए।
Answer: द्वितीयक क्रियाओं के उदाहरण हैं
- कपास द्वारा सूती वस्त्र बनाना
- लौह-अयस्क से मशीनों का निर्माण।
In simple words: कपास से सूती वस्त्र बनाना और लौह-अयस्क से मशीनें बनाना द्वितीयक क्रियाओं के दो प्रमुख उदाहरण हैं।
🎯 Exam Tip: द्वितीयक क्रियाओं को समझने के लिए कच्चे माल से तैयार उत्पाद बनाने वाले सरल उदाहरणों को याद रखें।
Question 7. कुटीर उद्योग किसे कहते हैं?
Answer: कुटीर उद्योग विनिर्माण की सबसे छोटी इकाई है। इसे 'शिल्प उद्योग' भी कहा जाता है।
In simple words: कुटीर उद्योग विनिर्माण की सबसे छोटी और घर-आधारित इकाई है, जिसे हस्तशिल्प उद्योग भी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: कुटीर उद्योग की संक्षिप्त परिभाषा और उसके दूसरे नाम को याद रखें।
Question 8. बड़े पैमाने के उद्योग की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: बड़े पैमाने के उद्योग की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
- उत्पादन ऊर्जा चालित बड़ी-बड़ी मशीनों से होता है।
- एक ही इकाई में बहुत बड़ी संख्या (हजारों) में श्रमिक कार्य करते हैं।
In simple words: बड़े पैमाने के उद्योगों में उत्पादन ऊर्जा से चलने वाली बड़ी मशीनों द्वारा होता है और हजारों श्रमिक एक साथ काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: बड़े पैमाने के उद्योगों की प्रमुख विशेषताओं में उत्पादन का पैमाना और उपयोग की जाने वाली तकनीकें शामिल हैं।
Question 9. कृषि आधारित उद्योग से आप क्या समझते हैं?
Answer: कृषि आधारित उद्योग वे उद्योग हैं जो कृषि उत्पादों को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं व इन्हें विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा तैयार माल में बदलकर बिक्री हेतु ग्रामीण और नगरीय बाजारों में बेचते हैं।
In simple words: कृषि आधारित उद्योग वे हैं जो कच्चे माल के रूप में कृषि उत्पादों का उपयोग करके विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा तैयार माल बनाते हैं और उन्हें बाजारों में बेचते हैं।
🎯 Exam Tip: कृषि आधारित उद्योग की परिभाषा को उसके कच्चे माल के स्रोत और अंतिम उत्पाद के गंतव्य के संदर्भ में याद रखें।
Question 10. आधारभूत या मूलभूत उद्योग किसे कहते हैं?
Answer: जिन उद्योगों का निर्मित माल अथवा उत्पाद अन्य अनेक उद्योगों का आधार बनता है उन्हें आधारभूत या मूलभूत उद्योग कहा जाता है; जैसे-लौह-इस्पात उद्योग, विद्युत उत्पादन उद्योग एवं भारी मशीन निर्माण उद्योग आदि ।
In simple words: आधारभूत उद्योग वे होते हैं जो अन्य उद्योगों के लिए आधारभूत सामग्री या उपकरण प्रदान करते हैं, जैसे लोहा-इस्पात और भारी मशीन निर्माण उद्योग।
🎯 Exam Tip: आधारभूत उद्योग की परिभाषा और उसके उदाहरणों को याद रखें, विशेषकर उन उद्योगों को जो अन्य उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान करते हैं।
Question 11. उपभोक्ता उद्योग से क्या अभिप्राय है?
Answer: उपभोक्ता उद्योग वे उद्योग हैं जिनके उत्पाद का प्रयोग प्रायः अधिकतर लोग दैनिक जीवन में करते हैं। इन्हें गैर-आधारभूत उद्योग भी कहा जाता है; जैसे-कागज, पैन, वस्त्र व खाद्य पदार्थ आदि के उद्योग ।
In simple words: उपभोक्ता उद्योग वे उद्योग हैं जिनके उत्पाद सीधे आम लोगों द्वारा दैनिक जीवन में उपयोग किए जाते हैं, जैसे कागज, पैन, कपड़े और खाद्य पदार्थ।
🎯 Exam Tip: उपभोक्ता उद्योग को उसके उत्पादों के सीधे उपभोग और 'गैर-आधारभूत उद्योग' के रूप में उसकी पहचान के आधार पर समझें।
Question 12. संसार में द्वितीयक क्रियाओं का क्या महत्त्व है?
Answer: संसार में द्वितीयक क्रियाओं का महत्त्व इसलिए है क्योंकि इस क्रिया द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य बढ़ जाता है। वे अधिक मूल्यवान हो जाते हैं।
In simple words: द्वितीयक क्रियाओं का महत्व इसलिए है क्योंकि ये प्राकृतिक संसाधनों को संसाधित करके उनका मूल्य बढ़ाती हैं और उन्हें अधिक उपयोगी बनाती हैं।
🎯 Exam Tip: द्वितीयक क्रियाओं का मुख्य महत्व 'प्राकृतिक संसाधनों के मूल्यवर्धन' के संदर्भ में समझाएं।
Question 13. लोहा-इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग क्यों कहा जाता है?
Answer: लोहा-इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस उद्योग पर अन्य सभी उद्योग निर्भर हैं।
In simple words: लोहा-इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग कहते हैं क्योंकि यह अन्य सभी उद्योगों के लिए कच्चा माल और आधार प्रदान करता है।
🎯 Exam Tip: आधारभूत उद्योग की अवधारणा को लोहा-इस्पात उद्योग के उदाहरण के साथ स्पष्ट करें।
Question 14. आधारभूत तथा उपभोक्ता उद्योग के दो-दो उदाहरण दीजिए ।
Answer: आधारभूत उद्योग
- लोहा एवं इस्पात उद्योग, एवं
- मशीनी उपकरण उद्योग ।
उपभोक्ता उद्योग
- साबुन उद्योग, एवं
- चाय उद्योग।
In simple words: आधारभूत उद्योग के उदाहरण लोहा-इस्पात और मशीनी उपकरण हैं, जबकि उपभोक्ता उद्योग के उदाहरण साबुन और चाय उद्योग हैं।
🎯 Exam Tip: आधारभूत और उपभोक्ता उद्योगों के दो-दो स्पष्ट उदाहरणों को याद रखें।
Question 15. धातु उद्योग से क्या तात्पर्य है? '
Answer: जिन उद्योगों में विभिन्न प्रकार की धातुओं को कच्चे माल के रूप में प्रयोग किया जाता है, 'धातु उद्योग' कहलाते हैं। ये उद्योग दो प्रकार के होते हैं
- लौह धातु, एवं
- अलौह धातु उद्योग ।
In simple words: धातु उद्योग में विभिन्न धातुओं को कच्चे माल के रूप में उपयोग करके उत्पाद बनाए जाते हैं, और यह लौह धातु और अलौह धातु उद्योग में विभाजित है।
🎯 Exam Tip: धातु उद्योग की परिभाषा को उसके प्रकारों (लौह और अलौह) के साथ याद रखें।
Question 16. अधातु उद्योग से क्या तात्पर्य है?
Answer: ऐसे उद्योग जो अधात्विक खनिजों पर आधारित होते हैं उन्हें 'अधातु उद्योग' कहते हैं। कोयला, पेट्रोलियम, गन्धक आदि इसके उदाहरण हैं।
In simple words: अधातु उद्योग वे हैं जो अधात्विक खनिजों, जैसे कोयला, पेट्रोलियम और गंधक को कच्चे माल के रूप में उपयोग करते हैं।
🎯 Exam Tip: अधातु उद्योग को उसके कच्चे माल (अधात्विक खनिज) और उदाहरणों के साथ परिभाषित करें।
Question 17. आकार के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।
Answer: आकार के आधार पर उद्योगों के तीन वर्ग होते हैं
- कुटीर उद्योग
- छोटे पैमाने के उद्योग एवं
- बड़े पैमाने के उद्योग।
In simple words: आकार के आधार पर उद्योगों को कुटीर, छोटे पैमाने के और बड़े पैमाने के उद्योगों में वर्गीकृत किया जाता है।
🎯 Exam Tip: उद्योगों के वर्गीकरण के विभिन्न आधारों को याद रखें, विशेषकर आकार के आधार पर तीन मुख्य प्रकारों को।
बहविकल्पीय प्रश्नोत्तर
Question 1. द्वितीयक क्रियाकलाप सम्बन्धित हैं
(a) विनिर्माण से
(b) प्रसंस्करण से
(c) निर्माण से
(d) इन सभी से ।
Answer: (d) इन सभी से ।
In simple words: द्वितीयक क्रियाकलापों में विनिर्माण, प्रसंस्करण और निर्माण तीनों शामिल होते हैं, क्योंकि ये सभी कच्चे माल को तैयार उत्पादों में बदलते हैं।
🎯 Exam Tip: द्वितीयक क्रियाकलापों के सभी प्रमुख घटकों को समझें, क्योंकि यह एक व्यापक श्रेणी है।
Question 2. प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य बढ़ जाता है
(a) प्राथमिक क्रियाओं द्वारा
(b) द्वितीयक क्रियाओं द्वारा
(c) तृतीयक क्रियाओं द्वारा
(d) चतुर्थक क्रियाओं द्वारा ।
Answer: (b) द्वितीयक क्रियाओं द्वारा।
In simple words: प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य द्वितीयक क्रियाओं के माध्यम से बढ़ता है, जब उन्हें संसाधित करके अधिक उपयोगी उत्पाद बनाया जाता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न आर्थिक क्रियाओं (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक) का मुख्य उद्देश्य और परिणाम याद रखें।
Question 3. निर्माण के अन्तर्गत माना जाता है
(a) लोहे व इस्पात को गढ़ना
(b) प्लास्टिक के खिलौने बनाना
(c) प्लास्टिक के अति सूक्ष्म घटकों को जोड़ना
(d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (d) उपर्युक्त सभी ।
In simple words: निर्माण में लोहे और इस्पात को गढ़ना, प्लास्टिक के खिलौने बनाना और प्लास्टिक के सूक्ष्म घटकों को जोड़ना, ये सभी गतिविधियाँ शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: निर्माण शब्द के व्यापक दायरे को समझें, जिसमें विभिन्न सामग्रियों और जटिलता के स्तरों पर वस्तुओं का उत्पादन शामिल है।
Question 4. आधुनिक बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण की विशेषता है
(a) कौशल का विशिष्टीकरण
(b) यन्त्रीकरण
(c) प्रौद्योगिकीय नवाचार
(d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (d) उपर्युक्त सभी ।
In simple words: आधुनिक बड़े पैमाने के विनिर्माण की प्रमुख विशेषताओं में कौशल का विशिष्टीकरण, मशीनों का उपयोग और तकनीकी नवाचार शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: आधुनिक विनिर्माण की मुख्य विशेषताओं को याद रखें, जो इसे पारंपरिक तरीकों से अलग करती हैं।
Question 5. उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाला कारक है
(a) बाजार
(b) कच्चा माल
(c) श्रम आपूर्ति
(d) ये सभी ।
Answer: (d) ये सभी ।
In simple words: उद्योगों की स्थापना के लिए बाजार की उपलब्धता, कच्चे माल की सुलभता, और पर्याप्त श्रम की आपूर्ति- ये सभी महत्वपूर्ण कारक होते हैं जो उनकी अवस्थिति को प्रभावित करते हैं।
🎯 Exam Tip: उद्योगों की अवस्थिति के कारकों को समझना भूगोलीय विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 6. उद्योगों के वर्गीकरण का आधार है
(a) आकार
(b) उत्पाद
(c) कच्चा माल
(d) ये सभी ।
Answer: (d) ये सभी ।
In simple words: उद्योगों को उनके आकार (कुटीर, लघु, बड़े पैमाने), उनके द्वारा उत्पादित वस्तुओं के प्रकार, और उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल के प्रकार के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
🎯 Exam Tip: उद्योगों के वर्गीकरण के विभिन्न आधारों को याद रखना विश्लेषणात्मक प्रश्नों के लिए उपयोगी है।
Question 7. विनिर्माण का शाब्दिक अर्थ है
(a) हाथ से बनाना
(b) मशीनों से बनाना
(c)
(a) व
(b) दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
Answer: (c) (a) व (b) दोनों ।
In simple words: विनिर्माण का अर्थ है वस्तुओं का उत्पादन करना, जिसमें हाथ से दस्तकारी और मशीनों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर उत्पादन दोनों शामिल होते हैं।
🎯 Exam Tip: विनिर्माण की सटीक परिभाषा समझना औद्योगिक भूगोल की नींव है।
Question 8. उपभोक्ता वस्तु उद्योग का उदाहरण है
(a) ब्रेड उद्योग
(b) चाय उद्योग
(c) कॉफी उद्योग
(d) ये सभी ।
Answer: (d) ये सभी ।
In simple words: उपभोक्ता वस्तु उद्योग वे होते हैं जो सीधे उपभोक्ताओं द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुएँ बनाते हैं, जैसे ब्रेड, चाय, और कॉफी।
🎯 Exam Tip: उपभोक्ता वस्तु उद्योग सीधे बाजार की माँग से जुड़े होते हैं।
Question 9. स्वच्छन्द उद्योग की एक प्रमुख विशेषता है
(a) कुशलता
(b) निम्न पूँजी की आवश्यकता
(c) अधिक उत्पादन
(d) कहीं भी स्थापना।
Answer: (d) कहीं भी स्थापना।
In simple words: स्वच्छन्द उद्योग ऐसे उद्योग होते हैं जिनकी स्थापना कहीं भी की जा सकती है क्योंकि वे किसी विशिष्ट कच्चे माल या बड़े बाजार पर निर्भर नहीं करते।
🎯 Exam Tip: स्वच्छन्द उद्योगों की लचीली अवस्थिति उन्हें प्रदूषण-मुक्त और हल्के प्रकृति का बनाती है।
Question 10. वन आधारित उद्योग हैं
(a) फर्नीचर उद्योग
(b) कागज उद्योग
(c) लाख उद्योग
(d) ये सभी ।
Answer: (d) ये सभी ।
In simple words: वन आधारित उद्योग वे होते हैं जो अपनी उत्पादन प्रक्रिया के लिए कच्चे माल के रूप में वनों से प्राप्त उत्पादों (जैसे लकड़ी, बाँस, लाख) का उपयोग करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित उद्योगों के प्रकारों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 11. रूहर क्षेत्र का सम्बन्ध किस देश से है
(a) जर्मनी
(b) जापान
(c) चीन
(d) फ्रांस ।
Answer:
(a) जर्मनी ।
In simple words: रूहर क्षेत्र जर्मनी में स्थित है और अपने कोयला खनन तथा भारी उद्योगों, विशेषकर लौह-इस्पात उद्योग के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
🎯 Exam Tip: विश्व के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों और उनसे संबंधित देशों को मानचित्र पर पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 12. संयुक्त राज्य अमेरिका में लौह-इस्पात के उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र है
(a) उत्तर अप्लेशियन प्रदेश
(b) महान झील क्षेत्र
(c) अटलाण्टिक तट
(d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (d) उपर्युक्त सभी ।
In simple words: संयुक्त राज्य अमेरिका में लौह-इस्पात उत्पादन के कई प्रमुख क्षेत्र हैं, जिनमें उत्तर अप्लेशियन प्रदेश, महान झील क्षेत्र और अटलांटिक तट शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न देशों के औद्योगिक केंद्र और उनके विशिष्ट उद्योगों का ज्ञान भूगोलीय अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 13. भारत में लोहा-इस्पात उद्योग का प्रमुख केन्द्र है
(a) जमशेदपुर
(b) दुर्गापुर
(c) राउरकेला
(d) ये सभी ।
Answer: (d) ये सभी ।
In simple words: भारत में जमशेदपुर, दुर्गापुर और राउरकेला जैसे कई शहर लौह-इस्पात उद्योग के महत्वपूर्ण केंद्र हैं, जो देश के औद्योगिक विकास में योगदान करते हैं।
🎯 Exam Tip: भारत के प्रमुख औद्योगिक शहरों और उनके उद्योगों को जानना परीक्षा के दृष्टिकोण से आवश्यक है।
Question 14. सिलीकॉन घाटी किस उद्योग के लिए प्रसिद्ध है
(a) सॉफ्टवेयर
(b) इस्पात उद्योग
(c) वस्त्र उद्योग
(d) रासायनिक उद्योग।
Answer:
(a) सॉफ्टवेयर ।
In simple words: सिलीकॉन घाटी, संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित, अपने उच्च प्रौद्योगिकी और सॉफ्टवेयर उद्योगों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है।
🎯 Exam Tip: उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों के प्रमुख वैश्विक केंद्रों को जानना समकालीन भूगोल के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 15. हथकरघा क्षेत्र की विशेषता है
(a) अधिक श्रमिकों की आवश्यकता
(b) अर्द्धकुशल श्रमिकों को रोजगार
(c) कम पूँजी की आवश्यकता
(d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (d) उपर्युक्त सभी ।
In simple words: हथकरघा क्षेत्र में उत्पादन के लिए अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होती है, यह अर्द्धकुशल श्रमिकों को रोजगार प्रदान करता है, और इसमें अपेक्षाकृत कम पूँजी निवेश की जरूरत होती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों की विशेषताओं को समझना उनके आर्थिक और सामाजिक प्रभावों का मूल्यांकन करने में सहायक होता है।
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