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Detailed Chapter 5 प्राथमिक गतिविधियाँ UP Board Solutions for Class 12 Geography
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Class 12 Geography Chapter 5 प्राथमिक गतिविधियाँ UP Board Solutions PDF
UP Board Class 12 Geography Chapter 5 Text Book Questions
UP Board Class 12 Geography Chapter 5 पाठयपुस्तक से अभ्यास प्रश्न
Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए (i) निम्न में से कौन-सी रोपण फसल नहीं है (क) कॉफी (ख) गन्ना (ग) गेहूँ (घ) रबड़ ।
Answer: (ग) गेहूँ
In simple words: रोपण फसलें वे होती हैं जिनकी खेती बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए की जाती है, जैसे कॉफी, गन्ना, और रबड़, जबकि गेहूँ एक खाद्यान्न फसल है।
🎯 Exam Tip: रोपण फसलों के उदाहरण और उनकी मुख्य विशेषताओं को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बहुविकल्पीय प्रश्नों में अक्सर पूछा जाता है।
Question 1. (ii) निम्न देशों में से किस देश में सहकारी कृषि का सफल परीक्षण किया गया है (क) रूस (ख) डेनमार्क (ग) भारत (घ) नीदरलैण्ड ।
Answer: (ख) डेनमार्क
In simple words: डेनमार्क में सहकारी कृषि को बहुत सफलता मिली है, जहाँ किसान स्वेच्छा से मिलकर काम करते हैं ताकि उत्पादन और लाभ दोनों बढ़ें।
🎯 Exam Tip: सहकारी कृषि के सफल उदाहरण वाले देशों को याद रखें, खासकर डेनमार्क, क्योंकि यह इस मॉडल का एक प्रमुख उदाहरण है।
Question 1. (iii) फूलों की कृषि कहलाती है (क) ट्रक फार्मिंग (ख) कारखाना कृषि (ग) मिश्रित कृषि (घ) पुष्पोत्पादन ।
Answer: (घ) पुष्पोत्पादन
In simple words: फूलों की खेती को विशेष रूप से पुष्पोत्पादन कहा जाता है, जो फूलों के व्यावसायिक उत्पादन से संबंधित है।
🎯 Exam Tip: कृषि के विभिन्न प्रकारों के विशिष्ट नामों को समझना महत्वपूर्ण है, जैसे फूलों की खेती को पुष्पोत्पादन कहना, यह शब्दावली आधारित प्रश्नों में सहायक होता है।
Question 1. (iv) निम्न में से कौन-सी कृषि के प्रकार का विकास यूरोपीय औपनिवेशिक समूहों द्वारा किया गया (क) कोलखहोज (ख) अंगूरोत्पादन (ग) मिश्रित कृषि (घ) रोपण कृषि ।
Answer: (घ) रोपण कृषि
In simple words: रोपण कृषि का विकास यूरोपीय उपनिवेशवादियों ने विश्व के कई भागों में किया था ताकि बड़े पैमाने पर नकदी फसलों का उत्पादन कर सकें।
🎯 Exam Tip: औपनिवेशिक काल के दौरान विकसित कृषि पद्धतियों को जानना महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से रोपण कृषि के ऐतिहासिक संदर्भ को समझना।
Question 1. (v) निम्न प्रदेशों में से किसमें विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि नहीं की जाती है (क) अमेरिका एवं कनाडा के प्रेयरी क्षेत्र (ख) अर्जेण्टीना के पम्पास क्षेत्र (ग) यूरोपीय स्टैपीज क्षेत्र (घ) अमेजन बेसिन ।
Answer: (घ) अमेजन बेसिन
In simple words: अमेजन बेसिन घने वर्षावनों वाला क्षेत्र है और यहाँ विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ नहीं होती हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों में बड़े घास के मैदान हैं जो इसके लिए उपयुक्त हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न कृषि प्रकारों के भौगोलिक वितरण को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर यह पहचानने में कि कौन से क्षेत्र किसी विशेष प्रकार की कृषि के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
Question 1. (vi) निम्न में से किस प्रकार की कृषि में खट्टे रसदार फलों की कृषि की जाती है (क) बाजारीय सब्जी कृषि (ख) भूमध्यसागरीय कृषि (ग) रोपण कृषि (घ) सहकारी कृषि ।
Answer: (ख) भूमध्यसागरीय कृषि
In simple words: भूमध्यसागरीय कृषि अपने विशिष्ट जलवायु के कारण खट्टे रसदार फलों जैसे अंगूर, जैतून, और अंजीर की खेती के लिए प्रसिद्ध है।
🎯 Exam Tip: भूमध्यसागरीय जलवायु की विशेषताओं और वहां उगाई जाने वाली विशिष्ट फसलों को याद रखना, खासकर खट्टे फलों को, परीक्षा के लिए उपयोगी है।
Question 1. (vii) निम्न कृषि के प्रकारों में से कौन-सा प्रकार कर्तन-दहन कृषि का प्रकार है (क) विस्तृत जीवन निर्वाह कृषि (ख) आदिकालीन निर्वाहक कृषि (ग) विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि (घ) मिश्रित कृषि ।
Answer: (ख) आदिकालीन निर्वाहक कृषि
In simple words: आदिकालीन निर्वाहक कृषि को कर्तन-दहन कृषि भी कहा जाता है, जिसमें वनस्पति को जलाकर भूमि को साफ किया जाता है और कुछ समय बाद नए स्थान पर चले जाते हैं।
🎯 Exam Tip: कर्तन-दहन कृषि के वैकल्पिक नामों और उसकी प्रक्रिया को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आदिम जनजातियों द्वारा अपनाई जाने वाली एक पारंपरिक विधि है।
Question 1. (viii) निम्न में से कौन-सी एकल कृषि नहीं है (क) डेयरी कृषि (ख) मिश्रित कृषि (ग) रोपण कृषि (घ) वाणिज्य अनाज कृषि ।
Answer: (क) डेयरी कृषि
In simple words: मिश्रित कृषि में फसल उगाने के साथ-साथ पशुपालन भी किया जाता है, जबकि डेयरी कृषि, रोपण कृषि, और वाणिज्य अनाज कृषि एकल कृषि प्रकार हैं जो एक विशिष्ट उत्पाद पर केंद्रित होते हैं।
🎯 Exam Tip: एकल कृषि और मिश्रित कृषि के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझना महत्वपूर्ण है, खासकर उदाहरणों के साथ, क्योंकि यह अवधारणात्मक प्रश्नों में मदद करता है।
Question 2. निम्न प्रश्नों का 30 शब्दों में उत्तर दीजिए (i) स्थानान्तरी कृषि का भविष्य अच्छा नहीं है। विवेचना कीजिए।
Answer: स्थानान्तरी कृषि आदिम जातियों द्वारा पुरातन ढंग से की जाती है जिसमें प्रति व्यक्ति व प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम होता है। कम वहन क्षमता के कारण स्थानान्तरी कृषकों को खाद्यान्न की समस्या रहती है जिससे इनकी संख्या घट रही है। जिन जंगलों को जलाकर कृषि भूमि तैयार की जाती थी, वे भी सिकुड़ रहे हैं। अनेक सरकारें स्थानान्तरी कृषि से जुड़े कबीलियाई लोगों को स्थायी रूप से बसाने के प्रयास कर रही हैं। इससे भी इस प्रकार की कृषि कम हो रही है। इन कारणों से स्पष्ट है कि स्थानान्तरी कृषि का भविष्य अच्छा नहीं है।
In simple words: स्थानान्तरी कृषि आदिम जनजातियों द्वारा की जाती है जिसमें कम उत्पादन होता है, भूमि की उपजाऊ क्षमता जल्दी खत्म हो जाती है, और वन क्षेत्र कम होने के कारण इसका भविष्य सीमित है।
🎯 Exam Tip: स्थानान्तरी कृषि की चुनौतियों और इसके घटते प्रचलन के मुख्य कारणों पर ध्यान दें, जैसे पर्यावरणीय प्रभाव और सरकारी नीतियां, जो विवेचनात्मक प्रश्नों में सहायक होते हैं।
Question 2. (ii) बाजारीय सब्जी कृषि नगरीय क्षेत्रों के समीप ही क्यों की जाती है?
Answer: बाजारीय सब्जी कृषि को 'ट्रक कृषि' भी कहते हैं। इसके नगरीय क्षेत्रों के समीप किए जाने के कारण निम्नलिखित हैं
• नगरीय क्षेत्रों में जनसंख्या की अधिकता के कारण सब्जी की माँग अधिक होती है और वृहद् बाजार उपलब्ध होता है।
• इन क्षेत्रों में परिवहन की सुविधा के कारण सब्जियाँ आसानी से खपत केन्द्रों पर भेजी जा सकती हैं।
• पूर्ति की तुलना में माँग की अधिकता के कारण सब्जी की कीमत उच्च होती है।
In simple words: बाजारीय सब्जी कृषि शहरी क्षेत्रों के पास की जाती है क्योंकि शहरों में सब्जियों की मांग अधिक होती है, ताजा उपज के लिए तैयार बाजार उपलब्ध होता है, और परिवहन लागत कम होती है।
🎯 Exam Tip: ट्रक कृषि के कारणों को याद रखें – शहरी मांग, परिवहन की सुविधा, और ताजा उत्पादों की आवश्यकता – यह सभी एक साथ इस प्रकार की कृषि को शहरी क्षेत्रों के पास केंद्रित करते हैं।
Question 2. (iii) विस्तृत पैमाने पर डेयरी कृषि का विकास यातायात के साधनों एवं प्रशीतकों के विकास के बाद ही क्यों सम्भव हो सका है?
Answer: डेयरी कृषि के मुख्य उत्पाद दूध और दुग्ध पदार्थ होते हैं जो शीघ्र ही खराब होने वाली वस्तुएँ हैं। इसे उपभोक्ता तक पहुँचाने के लिए आवश्यक है कि यातायात के साधन तीव्र और सक्षम हों और इन वस्तुओं को कुछ देर तक बचाए रखने के लिए प्रशीतन प्रणाली विकसित हो। इसी कारण यातायात के साधनों और प्रशीतकों के विकास के बाद ही डेयरी कृषि का विस्तृत पैमाने पर विकास सम्भव हो पाया।
In simple words: डेयरी कृषि का बड़े पैमाने पर विकास तभी संभव हुआ जब तीव्र परिवहन और प्रशीतन (ठंडा रखने) की सुविधाएँ विकसित हुईं, क्योंकि दूध और दुग्ध उत्पाद जल्दी खराब हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: डेयरी उत्पादों की खराब होने की प्रकृति और प्रशीतन एवं परिवहन के महत्व को उजागर करें, क्योंकि ये प्रमुख कारक हैं जिन्होंने इस कृषि के विकास को गति दी।
Question 3. निम्न प्रश्नों का 150 शब्दों में उत्तर दीजिए(i) चलवासी पशुचारण और वाणिज्य पशुधन पालन में अन्तर कीजिए।
Answer: चलवासी पशुचारण और वाणिज्य पशुधन पालन में अन्तर
| क्र० सं० | चलवासी पशुचारण | वाणिज्य पशुधन पालन |
|---|---|---|
| 1. | चलवासी पशुचारण पुरानी दुनिया तक ही सीमित है। | वाणिज्य पशुधन पालन नई दुनिया में प्रचलित है। |
| 2. | इसके मुख्य क्षेत्र सहारा, पूर्वी अफ्रीका का तटीय भाग, दक्षिण-पश्चिमी व मध्य एशिया, यूरेशिया में टुण्ड्रा व दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका तथा मालागासी का पश्चिमी भाग है। | इसके मुख्य क्षेत्र उत्तरी अमेरिका के प्रेयरी, मध्य अमेरिका का लागोस, दक्षिणी अमेरिका का पम्पास, दक्षिणी अफ्रीका के वेल्ड, ऑस्ट्रेलिया के डाउन्स तथा न्यूजीलैण्ड के घास स्थल हैं। |
| 3. | चलवासी पशुचारक चारे तथा जल की खोज में एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहते हैं। | वाणिज्य पशुधन पालन एक निश्चित बाड़े में किया जाता है तथा उनके चारे की व्यवस्था स्थानीय रूप से की जाती है। |
| 4. | यह परम्परागत पद्धति पर आधारित है। वर्तमान में यह सीमित होती जा रही है। | यह आधुनिक पद्धति पर आधारित है। वर्तमान में इसका विकास किया जा रहा है। |
| 5. | चलवासी पशुचारक एक ही समय पर विभिन्न प्रकार के पशु रखते हैं। | वाणिज्य पशुचारक उस पशु को विशेष रूप से पालते हैं जिसके लिए क्षेत्र अनुकूल होता है। |
| 6. | इसमें पशु की देखभाल की कोई विशेष व्यवस्था नहीं होती है। | इसमें पशुओं की देखभाल वैज्ञानिक पद्धति से की जाती है। |
| 7. | चलवासी पशुचारण एक जीवन निर्वाह आर्थिक पद्धति है जिसमें स्थानीय खपत के लिए भोजन, वस्त्र, आवास तथा जीवन की अन्य सुविधाएँ जुटाई जाती हैं। | वाणिज्य पशुधन पालन में दूध, मांस, ऊन, खालों आदि का उत्पादन होता है जिनका अन्य क्षेत्रों के साथ व्यापार किया जाता है। |
| 8. | इसमें चारे की फसल नहीं उगाई जाती हैं। पशुओं को पूर्णरूप से प्राकृतिक घास पर निर्भर रहना पड़ता है। | इसमें प्राकृतिक घास की कमी होने पर चारे की फसल उगाई जाती है। |
In simple words: चलवासी पशुचारण एक पारंपरिक, खानाबदोश पद्धति है जिसमें पशुपालक चारे और पानी की तलाश में घूमते रहते हैं, जबकि वाणिज्य पशुधन पालन एक आधुनिक, व्यवस्थित और स्थिर पद्धति है जिसका उद्देश्य व्यावसायिक उत्पादन होता है।
🎯 Exam Tip: दोनों प्रकार के पशुपालन की मुख्य विशेषताओं जैसे गतिशीलता, उद्देश्य (निर्वाह बनाम वाणिज्य), उपयोग की जाने वाली तकनीकें और भौगोलिक वितरण पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 3. (ii) रोपण कृषि की मुख्य विशेषताएँ बताइए एवं भिन्न-भिन्न देशों में उगाई जाने वाली कुछ प्रमुख रोपण फसलों के नाम बताइए ।
Answer: रोपण कृषि की विशेषताएँ/गुण/लक्षण रोपण कृषि की प्रमुख विशेषताएँ/गुण/लक्षण निम्नलिखित हैं
• रोपण कृषि बड़े-बड़े आकार के फार्मों पर की जाती है।
• इस कृषि में अधिक पूँजी निवेश, उच्च प्रबन्धन एवं वैज्ञानिक तकनीकियों का प्रयोग किया जाता है।
• इस कृषि से उत्पादित अधिकांश भाग निर्यात कर दिया जाता है।
• इस प्रकार की कृषि में एक फसल के उत्पादन पर ही अधिक जोर दिया जाता है।
• इस कृषि में वैज्ञानिक विधियों, मशीनों, उर्वरक आदि का प्रयोग होता है।
• इस कृषि में कुशल श्रमिक कार्य करते हैं। ये श्रमिक स्थानीय होते हैं। कुछ प्रदेशों में दास श्रमिक भी कार्य करते हैं।
• बाजारों एवं कृषि बागानों को सुचारु रूप से जोड़ने के लिए कुशल व सस्ते परिवहन का प्रयोग किया जाता है।
• यह लाभ प्राप्त करने वाली वृहद् उत्पादन प्रणाली है जिसका विकास यूरोपीय लोगों द्वारा विश्व के अनेक औपनिवेशिक देशों में किया गया है।
• यह कृषि मुख्य रूप से उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में की जाती है।
विभिन्न देशों में उगाई जाने वाली प्रमुख रोपण फसलें
| क्र०सं० | देश का नाम | प्रमुख रोपण फसल |
|---|---|---|
| 1. | भारत | चाय |
| 2. | श्रीलंका | चाय |
| 3. | मलयेशिया | रबड़ |
| 4. | ब्राजील | कॉफी |
| 5. | पश्चिमी द्वीप समूह | गन्ना एवं केला |
| 6. | पश्चिमी अफ्रीका | कॉफी एवं कोको |
| 7. | फिलीपीन्स | नारियल व गन्ना |
In simple words: रोपण कृषि बड़े पैमाने पर की जाने वाली व्यावसायिक कृषि है जिसमें अधिक पूंजी, उच्च प्रबंधन, और वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करके एकल नकदी फसल का उत्पादन किया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य निर्यात होता है।
🎯 Exam Tip: रोपण कृषि की विशेषताओं जैसे पूंजी निवेश, श्रम की आवश्यकता, और निर्यात-उन्मुख प्रकृति को याद रखें, साथ ही विभिन्न देशों में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलों के उदाहरण भी।
UP Board Class 12 Geography Chapter 5 Other Important Questions
UP Board Class 12 Geography Chapter 5 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. आखेटकों और भोजन संग्राहकों की मुख्य विशेषताएँ बताइए तथा संग्रहण के उत्पाद और उपयोग बताइए। .
Answer: आखेटकों और भोजन संग्राहकों की विशेषताएँ आखेटकों और भोजन संग्राहकों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
• आखेट और भोजन संग्रहण का कार्य आदिमकालीन समाज के लोग करते हैं
• ये लोग अपने भोजन, वस्त्र तथा आवास की आवश्यकता की पूर्ति हेतु पशुओं एवं वनस्पति का संग्रह करते हैं।
• ये लोग भोजन की तलाश में भटकते रहते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह विश्व मानचित्र निर्वहन संग्रहण के क्षेत्रों को दर्शाता है। इसमें उच्च अक्षांशों (उत्तरी कनाडा, उत्तरी यूरेशिया, दक्षिणी चिली) और निम्न अक्षांशों (अमेजन बेसिन, उष्ण कटिबंधीय अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्वी एशिया) के क्षेत्रों को हाइलाइट किया गया है जहाँ लोग भोजन संग्रह और आखेट पर निर्भर रहते हैं। यह मानचित्र दर्शाता है कि कैसे ये समुदाय अपनी आजीविका के लिए प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हैं।
• ये लोग छोटे समूहों में रहते हैं। इनकी कोई निजी सम्पत्ति नहीं होती।
• ये लोग आखेट के लिए भालों और तीरकमान का उपयोग करते हैं।
• ये लोग स्थानीय पदार्थों से वस्त्रों और आवास की व्यवस्था करते हैं।
• ये लोग विभिन्न जलवायु प्रदेशों और संसाधनों वाले क्षेत्रों में सफलतापूर्वक जीवनयापन करते हैं।
• सामान्यतया ये लोग अपनी जीवन पद्धति के द्वारा अपने पर्यावरण में कोई परिवर्तन नहीं करते।
संग्रहण के उत्पाद और उपयोग संग्रहण के प्रमुख उत्पाद और उपयोग इस प्रकार हैं
• भोजन के लिए कन्द-मूल, नट, फल, शहद, पुष्प व चिकिल आदि ।
• वस्त्रों के लिए पेड़ों की छाल, पत्ते, घास व कुछ विशिष्ट किस्म के पेड़ों का रेशा ।
• अस्थायी निवास के लिए झोपड़ी, छप्पर निर्माण हेतु बाँस, टहनियाँ, पत्तियाँ व घास-फूस ।
• भोजन बनाने, सर्दी से बचने तथा जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए आग जलाने के लिए लकड़ी ।
• विभिन्न रोगों का उपचार करने के लिए औषधियाँ तथा जड़ी-बूटियाँ ।
In simple words: आखेटक और भोजन संग्राहक प्राचीन समाज के वे लोग हैं जो अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए सीधे तौर पर प्रकृति से भोजन, वस्त्र और आश्रय इकट्ठा करते हैं, छोटे समूहों में रहते हैं और स्थायी संपत्ति नहीं रखते।
🎯 Exam Tip: आखेटक और भोजन संग्राहकों की जीवनशैली की मुख्य विशेषताओं पर ध्यान दें- जैसे खानाबदोश जीवन, प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता, और सीमित उपकरण का उपयोग- ये सभी उनकी प्राचीन आर्थिक क्रियाओं को दर्शाते हैं।
Question 2. चलवासी पशुचारण की प्रमुख विशेषताएँ तथा इससे सम्बन्धित क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
Answer: चलवासी पशुचारण- चलवासी पशुचारण जीवन-निर्वाह का प्राचीन व्यवसाय रहा है। चूंकि ये पशुचारक स्थायी जीवन नहीं जीते; इसलिए इन्हें 'चलवासी' कहा जाता है। चलवासी पशुचारण की विशेषताएँ चलवासी पशुचारण की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं (1) इस कृषि में पशुचारक अपने पालतू पशुओं के साथ पानी व चरागाह की उपलब्धता एवं गुणवत्ता के अनुसार एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानान्तरित होते रहते हैं।
(2) इसमें पशुचालक न तो चारे की फसल उगाते हैं और न ही घास उगाने की व्यवस्था करते हैं। अतः इनके पशु पूर्णतया प्राकृतिक वनस्पति पर निर्भर करते हैं।
(3) प्रत्येक पशुचारक वर्ग अपने-अपने निश्चित चरागाह क्षेत्र में विचरण करता है। इन चरागाहों के सुस्पष्ट सीमा क्षेत्र होते हैं।
(4) इन्हें जानकारी होती है कि इनके द्वारा विचरित क्षेत्र में मौसम के अनुसार जल और घास कहाँ और कितनी मिलेगी ।
(5) भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार के पशु पाले जाते हैं। उदाहरणतः उष्ण कटिबन्धीय अफ्रीका के बढ़िया चरागाहों में गाय-बैल प्रमुख पशु हैं, जबकि सहारा तथा एशिया के शुष्क मरुस्थलों में भेड़, बकरी और ऊँट अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में गधे व घोड़े पाले जाते हैं। तिब्बत तथा एण्डीज के उच्च पठारी भागों में याक व लामा तथा आर्कटिक और उपउत्तरी ध्रुवीय क्षेत्रों में रेण्डियर पाले जाते हैं।
(6) चलवासी पशुचारक अपने भोजन, वस्त्र, शरण, औजार तथा यातायात के लिए अपने पशुओं व उनके उत्पादों पर निर्भर करते हैं।
(7) नए चरागाहों की खोज में ये पशुचारक समतल भागों तथा पर्वतीय क्षेत्रों में लम्बी दूरियाँ तय करते हैं। गर्मियों में मैदानी भाग से पर्वतीय चरागाह की ओर तथा शीत में पर्वतीय भाग से मैदानी चरागाहों की तरफ प्रवास करते हैं। इनकी इस गतिविधि को 'ऋतु प्रवास' कहते हैं।
चलवासी पशुचारण से सम्बन्धित क्षेत्र चलवासी पशुचारण से सम्बन्धित तीन प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं
• चलवासी पशुचारण का प्रमुख क्षेत्र उत्तरी अफ्रीका के अटलाण्टिक तट से अरब प्रायद्वीप होता हुआ मंगोलिया एवं मध्य चीन तक विस्तृत है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह विश्व मानचित्र चलवासी पशुचारण के प्रमुख क्षेत्रों को दर्शाता है। इसमें उत्तरी अफ्रीका के अटलांटिक तट से अरब प्रायद्वीप, मंगोलिया और मध्य चीन तक फैले एक बड़े क्षेत्र को गहरे रंग से हाइलाइट किया गया है, साथ ही यूरोप और एशिया के टुंड्रा प्रदेश और दक्षिणी गोलार्ध के कुछ हिस्सों को भी चिह्नित किया गया है जहाँ यह प्राचीन जीवन-निर्वाह गतिविधि प्रचलित है। यह पशुपालकों द्वारा चारे और पानी की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के पैटर्न को दर्शाता है।
• दूसरा क्षेत्र यूरोप तथा एशिया के टुण्ड्रा प्रदेश में है।
• तीसरा क्षेत्र दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका एवं मैडागास्कर द्वीप पर है।
In simple words: चलवासी पशुचारण एक पारंपरिक जीवन-निर्वाह प्रणाली है जहाँ पशुपालक अपने जानवरों के साथ चारे और पानी की तलाश में ऋतुओं के अनुसार एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहते हैं, मुख्यतः शुष्क या ठंडे क्षेत्रों में।
🎯 Exam Tip: चलवासी पशुचारण की खानाबदोश प्रकृति, प्राकृतिक चरागाहों पर निर्भरता और ऋतु प्रवास की अवधारणा पर विशेष ध्यान दें, साथ ही दुनिया भर में इसके प्रमुख वितरण क्षेत्रों को भी याद रखें।
Question 3. वाणिज्य पशुधन पालन की प्रमुख विशेषताएँ तथा इससे सम्बन्धित क्षेत्रों का वर्णन कीजिए ।
Answer: वाणिज्य पशुधन पालन की विशेषताएँ वाणिज्य पशुधन पालन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
• वाणिज्य पशुधन पालन अपेक्षाकृत अधिक व्यवस्थित एवं पूँजी प्रधान है।
• यह पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित है एवं फार्म भी स्थायी होते हैं।
• इसमें फार्म विशाल क्षेत्र पर फैले होते हैं तथा सम्पूर्ण क्षेत्र को छोटी-छोटी इकाइयों में विभाजित कर दिया जाता है। चराई को नियन्त्रित करने के लिए इन्हें बाड़ लगाकर एक-दूसरे से अलग कर दिया जाता है।
• इसमें पशुओं की संख्या चरागाह की वहन क्षमता के अनुसार रखी जाती है।
• यह एक विशिष्ट गतिविधि है, जिसमें केवल एक ही प्रकार के पशु पाले जाते हैं। प्रमुख पशुओं में भेड़, बकरी, गाय-बैल एवं घोड़े हैं।
• पालतू पशुओं से प्राप्त मांस, खालें एवं ऊन को वैज्ञानिक ढंग से संसाधित तथा डिब्बाबन्द कर विश्व के बाजारों में निर्यात कर दिया जाता है।
• पशु फार्म में पशुधन पालन वैज्ञानिक आधार पर किया जाता है। इसमें प्रमुख ध्यान पशुओं के प्रजनन, जननिक सुधार रोगों पर नियन्त्रण तथा उनके स्वास्थ्य पर दिया जाता है।
वाणिज्य पशुधन पालन से सम्बन्धित क्षेत्र वाणिज्य पशुधन पालन विश्व के सात क्षेत्रों में मुख्यतः किया जाता है
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह विश्व मानचित्र वाणिज्य पशुधन पालन के प्रमुख क्षेत्रों को दर्शाता है। इसमें उत्तरी अमेरिका के प्रेयरी, दक्षिण अमेरिका के लानोस और पम्पास, दक्षिणी अफ्रीका के वेल्ड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की शीतोष्ण घास भूमि के साथ-साथ कैस्पियन सागर और अरब सागर के उत्तर में स्थित क्षेत्रों को गहरे रंग से चिह्नित किया गया है, जहाँ व्यावसायिक पशुधन पालन बड़े पैमाने पर किया जाता है।
• उत्तरी अमेरिका का प्रेयरी क्षेत्र ।
• दक्षिणी अमेरिका में वेनेजुएला का लानोस घास स्थल ।
• ब्राजील के पठारी भाग में अर्जेण्टीना की दक्षिणी सीमा का क्षेत्र ।
• दक्षिणी अफ्रीका का वेल्ड क्षेत्र ।।
• ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैण्ड की शीतोष्ण घास भूमि ।
• कैस्पियन सागर के पूर्व में स्थित क्षेत्र ।
• अरब सागर के उत्तर में स्थित क्षेत्र ।
In simple words: वाणिज्य पशुधन पालन एक आधुनिक, पूंजी-प्रधान प्रणाली है जहाँ एक ही प्रकार के पशुओं को वैज्ञानिक तरीकों से बड़े-बड़े स्थायी फार्मों पर पाला जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य मांस, ऊन और खाल जैसे उत्पादों का व्यावसायिक उत्पादन और निर्यात करना है।
🎯 Exam Tip: वाणिज्य पशुधन पालन की वैज्ञानिक प्रकृति, एकल पशु प्रकार पर ध्यान, और निर्यात-उन्मुख उत्पादन को याद रखें, साथ ही उन क्षेत्रों के नाम भी जहां यह प्रमुखता से प्रचलित है।
Question 4. आदिकालीन निर्वाह कृषि की प्रमुख विशेषताएँ तथा इससे सम्बन्धित क्षेत्रों का वर्णन कीजिए ।
Answer: आदिकालीन निर्वाह कृषि की विशेषताएँ आदिकालीन निर्वाह कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
• आदिकालीन निर्वाह कृषि को स्थानान्तरणशील कृषि भी कहा जाता है।
• यह कृषि उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में की जाती है जहाँ आदिम जाति के लोग कृषि करते हैं।
• इस कृषि में वनस्पति को जलाकर साफ करके कृषि कार्य किया जाता है।
• यह कृषि कर्तन एवं दहन कृषि भी कहलाती है।
• इस कृषि में खेत बहुत छोटे-छोटे होते हैं तथा कृषि भी परम्परागत औजारों यथा-कुदाली, फावड़ा, लकड़ी आदि से की जाती है।
• जब भूमि का उपजाऊपन समाप्त हो जाता है, तब कृषक नए क्षेत्र में वन जलाकर कृषि के लिए भूमि तैयार करता है।
• यह कृषि किसान व उसके परिवार के जीवन-निर्वाह के उद्देश्य से की जाती है।
• इस कृषि में प्रति इकाई भूमि व प्रति व्यक्ति उपज कम होती है।
• इस कृषि में खाद्यान्न फसलें मुख्य रूप से उगाई जाती हैं। प्रमुख फसलें मक्का, कसावा, केला व शकरकन्दी आदि हैं।
आदिकालीन निर्वाह कृषि से सम्बन्धित क्षेत्र आदिकालीन निर्वाह कृषि से सम्बन्धित प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं
• भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में।
• मध्य अमेरिका एवं मैक्सिको में ।
• मलयेशिया व इण्डोनेशिया में ।
• ब्राजील में ।
• जायरे में ।
• मध्य अफ्रीका में ।
• फिलीपीन्स में ।
आदिकालीन निर्वाह कृषि के स्थानीय नाम आदिकालीन निर्वाह कृषि को विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में इसे 'झूम', मलयेशिया व इण्डोनेशिया में 'लादांग', मध्य अमेरिका व मैक्सिको में 'मिल्पा', ब्राजील में 'रोका', जायरे व मध्य अफ्रीका में 'मसोले' तथा फिलीपीन्स में 'चेनगिन' कहा जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह विश्व मानचित्र आदिकालीन निर्वाह कृषि के वितरण क्षेत्रों को दर्शाता है। इसमें उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों, जैसे भारत के पूर्वोत्तर राज्य, मध्य अमेरिका, मैक्सिको, मलयेशिया, इंडोनेशिया, ब्राजील, जायरे, मध्य अफ्रीका और फिलीपींस को गहरे रंग से हाइलाइट किया गया है, जहाँ यह पारंपरिक कृषि पद्धति प्रचलित है। मानचित्र विभिन्न महाद्वीपों में इस कृषि के फैलाव को दर्शाता है, जहाँ आदिम जनजातियां वनस्पति को जलाकर खेती करती हैं।
In simple words: आदिकालीन निर्वाह कृषि एक प्रकार की स्थानान्तरी कृषि है जहाँ आदिम जनजातियाँ छोटे-छोटे खेतों पर पारंपरिक औजारों से खेती करती हैं, जिसमें भूमि की उपजाऊ क्षमता कम होने पर एक नए स्थान पर चले जाते हैं।
🎯 Exam Tip: आदिकालीन निर्वाह कृषि के मुख्य लक्षणों, जैसे 'कर्तन-दहन' विधि, जीवन-निर्वाह का उद्देश्य, और कम प्रति हेक्टेयर उत्पादन को याद रखें, साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में इसके स्थानीय नामों को भी।
Question 5. गहन निर्वाह कृषि के प्रकार बताते हुए इसकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: गहन निर्वाह कृषि- यह कृषि की वह पद्धति है जिसमें अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए प्रति इकाई भूमि पर पूँजी और श्रम का अधिक मात्रा में निवेश किया जाता है। गहन निर्वाह कृषि के प्रकार गहन निर्वाह कृषि के दो प्रकार हैं 1. चावल प्रधान गहन निर्वाह कृषि – इसमें चावल मुख्य फसल होती है। जनसंख्या घनत्व की अधिकता के कारण खेत छोटे होते हैं। कृषि में कृषक का पूरा परिवार लगा रहता है। भूमि का गहन उपयोग होता है तथा मानव श्रम का अपेक्षाकृत अधिक महत्त्व है। भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए गोबर खाद व हरी खाद का उपयोग किया जाता है। इसमें प्रति इकाई उत्पादन अधिक एवं प्रति कृषक उत्पादन कम होता है।
2. चावल रहित गहन निर्वाह कृषि – मानसून एशिया के अनेक भागों में उच्चावच, जलवा (, मृदा तथा अन्य भौगोलिक दशाएँ चावल की खेती के लिए अनुकूल नहीं हैं। ऐसे ठण्डे और कम वर्षा वाले क्षेत्र उत्तरी चीन, मंचूरिया, उत्तरी कोरिया एवं उत्तरी जापान में स्थित हैं। यहाँ चावल की अपेक्षा गेहूँ, सोयाबीन, जौ एवं सोरघम बोया जाता है। भारत के गंगा-सिन्धु मैदान के पश्चिमी भाग में गेहूँ और दक्षिणी एवं पश्चिमी शुष्क प्रदेश में ज्वार-बाजरा मुख्य रूप से उगाया जाता है। इस कृषि में सिंचाई की जरूरत पड़ती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह विश्व मानचित्र गहन निर्वाह कृषि के क्षेत्रों को दर्शाता है। इसमें आर्द्र चावल प्रमुख फसल वाले क्षेत्रों (जैसे दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया) को गहरे हरे रंग से और अन्य प्रमुख फसल वाले क्षेत्रों (जैसे उत्तरी चीन, मंचूरिया, उत्तरी कोरिया, उत्तरी जापान) को हल्के हरे रंग से हाइलाइट किया गया है, जहाँ उच्च जनसंख्या घनत्व के कारण भूमि का गहन उपयोग किया जाता है।
गहन निर्वाह कृषि की विशेषताएँ गहन निर्वाह कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
• जनसंख्या घनत्व की अधिकता के कारण खेतों का आकार छोटा होता है।
• कृषि कार्य में कृषक का पूरा परिवार लगा रहता है।
• इस कृषि में यन्त्रों का महत्त्व अपेक्षाकृत कम होता है और मानव श्रम का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।
• कृषि भूमि पर जनसंख्या के अधिक दबाव के कारण भूमि का अनुकूलतम प्रयोग करने की चेष्टा की जाती है।
• कृषि की गहनता इतनी अधिक है कि एक वर्ष में तीन या चार फसलें उगाई जाती हैं।
• भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए पशुओं की गोबर की खाद एवं हरी खाद का उपयोग किया जाता है।
• इस कृषि में प्रति इकाई उत्पादन अधिक होता है, लेकिन प्रति कृषक उत्पादन कम होता है।
• इस कृषि में खाद्यान्न फसलों पर अधिक जोर दिया जाता है।
• यह कृषि अत्यधिक उपजाऊ भूमि और उपयुक्त जलवायु वाले क्षेत्रों में की जाती है।
In simple words: गहन निर्वाह कृषि एक ऐसी पद्धति है जहाँ प्रति इकाई भूमि पर अधिक श्रम और पूंजी लगाकर अधिकतम उत्पादन प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है, जो मुख्य रूप से चावल और चावल रहित (जैसे गेहूँ, सोयाबीन) दो प्रकार की होती है।
🎯 Exam Tip: गहन निर्वाह कृषि की विशेषताओं जैसे छोटे खेत, सघन श्रम, परिवार की भागीदारी, और प्रति इकाई उच्च उत्पादन लेकिन प्रति कृषक कम उत्पादन पर ध्यान दें।
Question 6. रोपण कृषि की विशेषताएँ बताते हुए इसके क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
Answer: रोपण कृषि की विशेषताएँ रोपण कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
• यह एक प्रकार की आधुनिक, संगठित एवं व्यवस्थित कृषि है जिसकी तुलना विनिर्माण उद्योग से की जा सकती है।
• इस कृषि में कृषि क्षेत्र का आकार बहुत विस्तृत होता है।
• इस कृषि में अधिक पूँजी निवेश, उच्च प्रबन्ध एवं तकनीकी आधार एवं वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है।
• यह एकफसली कृषि है जिसमें किसी एक फसल के उत्पादन पर ही विशिष्टीकरण किया जाता है।
• इस कृषि में सस्ते श्रमिक उपलब्ध हो जाते हैं।
• इन कृषि क्षेत्रों की विकसित यातायात व्यवस्था बागान एवं बाजार को सुचारु रूप से जोड़े रहती है।
• इस कृषि में फार्मों पर मशीनों, उर्वरकों, कीटनाशक दवाओं व रोगनाशक रसायनों का प्रयोग किया जाता है।
• इस कृषि में बागानों की प्रमुख उपजें रबड़, चाय, कॉफी, कोको, कपास, गन्ना, केले, अनन्नास, गरी, पटसन व सन हैं।
• बागानों उपजों को फार्मों पर ही संसाधित करके निर्यात हेतु उपलब्ध कराया जाता है।
रोपण कृषि के प्रमुख क्षेत्र रोपण कृषि के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं
• फ्रांसवासियों ने पश्चिमी अफ्रीका में कॉफी एवं कोको की पौध लगाई थी।
• ब्रिटेनवासियों ने भारत व श्रीलंका में चाय के बागान, मलयेशिया में रबड़ के बागान एवं पश्चिमी द्वीप समूह में गन्ना एवं केले के बागान विकसित किए।
• स्पेन एवं अमेरिकावासियों ने फिलीपीन्स में नारियल व गन्ने के बागान लगाए।
• इण्डोनेशिया में एक समय गन्ने की कृषि पर हॉलैण्डवासियों (डचों) का एकाधिकार था।
• ब्राजील में कुछ कॉफी के बागान, जिन्हें 'फेजेंडा' कहा जाता है, यूरोपवासियों के नियन्त्रण में हैं।
In simple words: रोपण कृषि एक बड़े पैमाने पर की जाने वाली व्यावसायिक कृषि है जिसमें पूंजी निवेश, उच्च प्रबंधन, और वैज्ञानिक विधियों का उपयोग करके एक ही नकदी फसल (जैसे चाय, कॉफी, रबड़) का उत्पादन किया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य निर्यात होता है और यह औपनिवेशिक काल में विकसित हुई।
🎯 Exam Tip: रोपण कृषि की संगठित और औद्योगिक प्रकृति, एकल फसल पर जोर, बड़े फार्म आकार, और औपनिवेशिक इतिहास को याद रखें, क्योंकि ये इसकी मुख्य पहचान हैं।
Question 7. विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि की विशेषताएँ बताते हुए इसके क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
Answer: विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि मध्य अक्षांशों के आन्तरिक अर्द्धशुष्क प्रदेशों में की जाती है। विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि की विशेषताएँ विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
• विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि की प्रमुख फसल गेहूँ है। यद्यपि अन्य फसलें जैसे मक्का, जौ, राई एवं जई भी बोई जाती हैं।
• इस कृषि में प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम होता है, किन्तु कृषित भूमि के बड़े क्षेत्रफल के कारण कुल उत्पादन अधिक रहता है।
• कम जनसंख्या घनत्व के कारण प्रति व्यक्ति अधिक उत्पादन होता है।
• इस कृषि में खेतों का आकार बहुत बड़ा होता है तथा खेत जोतने से फसल काटने तक सभी कार्य यन्त्रों द्वारा सम्पन्न किए जाते हैं।
• इस कृषि में एक या दो फसलों में विशिष्टीकरण कर लिया जाता है जिसमें पैदा किया जाने वाला मुख्य अनाज गेहूँ है।
विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि के प्रमुख क्षेत्र विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं
• उत्तरी अमेरिका के प्रेयरीज ।
• अर्जेण्टीना के पम्पास ।
• दक्षिणी अफ्रीका के वेल्ड्स ।
• यूरेशिया के स्टैपीज ।
• ऑस्ट्रेलिया के डाउन्स।
• न्यूजीलैण्ड के कैंटरबरी।
In simple words: विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि मध्य अक्षांशों के अर्द्धशुष्क घास के मैदानों में की जाने वाली एक बड़े पैमाने की कृषि है, जिसमें मुख्य रूप से गेहूँ जैसी खाद्यान्न फसलों का यंत्रीकृत उत्पादन होता है, और प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम होने पर भी विशाल क्षेत्र के कारण कुल उत्पादन अधिक होता है।
🎯 Exam Tip: विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि की प्रमुख विशेषताओं जैसे बड़े फार्म, मशीनों का व्यापक उपयोग, कम जनसंख्या घनत्व, और एकल फसल (गेहूँ) पर जोर को ध्यान में रखें, साथ ही विश्व के प्रमुख घास के मैदानों में इसके वितरण को भी याद करें।
Question 8. डेयरी फार्मिंग की विशेषताएँ बताते हुए इसके क्षेत्रों का वर्णन कीजिए ।
Answer: डेयरी फार्मिंग-जिस कृषि पद्धति में दूध व दुग्ध पदार्थों की नगरीय माँग को पूरा करने के लिए पशुओं, विशेष रूप से गायों के पालन और प्रजनन पर विशेष ध्यान दिया जाता है, उसे 'डेयरी फार्मिंग' कहते हैं। डेयरी फार्मिंग की विशेषताएँ डेयरी फार्मिंग की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
• डेयरी फार्मिंग दुधारू पशुओं के पालन-पोषण का सर्वाधिक उन्नत एवं दक्ष प्रकार है।
• इसमें पूँजी की अधिक आवश्यकता होती है।
• इसमें पशुओं के स्वास्थ्य, प्रजनन एवं पशु चिकित्सा पर भी अधिक ध्यान दिया जाता है।
• इसमें पशुओं को चराने, दूध निकालने आदि कार्यों के लिए वर्षभर गहन श्रम की आवश्यकता होती है।
• डेयरी फार्मिंग का कार्य नगरीय एवं औद्योगिक केन्द्रों के समीप किया जाता है, क्योंकि ये क्षेत्र डेयरी फार्मिंग के उत्पादों के अच्छे खपत केन्द्र होते हैं।
• वर्तमान समय में विकसित परिवहन के साधनों प्रशीतकों के उपयोग, पाश्चुरीकरण की सुविधा के कारण विभिन्न डेयरी उत्पादों को अधिक समय तक रखा जा सकता है।
डेयरी फार्मिंग के प्रमुख क्षेत्र डेयरी फार्मिंग के तीन प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं
• सबसे बड़ा प्रदेश – उत्तर-पश्चिमी यूरोप ।
• दूसरा क्षेत्र – कनाडा ।
In simple words: डेयरी फार्मिंग एक पूंजी-प्रधान और श्रम-गहन कृषि है जिसमें मुख्य रूप से दूध और दुग्ध उत्पादों की शहरी मांग को पूरा करने के लिए गायों जैसे दुधारू पशुओं का वैज्ञानिक तरीके से पालन किया जाता है।
🎯 Exam Tip: डेयरी फार्मिंग की पूंजी-गहन और श्रम-गहन प्रकृति, पशु स्वास्थ्य पर ध्यान, और शहरी बाजारों के साथ निकटता को याद रखें, साथ ही परिवहन और प्रशीतन के महत्व को भी समझें।
Question 9. ट्रक कृषि क्या है? ट्रक कृषि की विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।
Answer: ट्रक कृषि-नकदी कमाने अथवा व्यापार के उद्देश्य से सब्जियों व फलों की विशेषीकृत कृषि जो नगरों से काफी दूर सुगम मार्गों से जुड़े स्थानों पर की जाती है और जिसमें परिवहन की आवश्यकता होती है, 'ट्रक कृषि' कहलाती है। 'ट्रक' शब्द का प्रयोग अधिकांशतः संयुक्त राज्य अमेरिका में किया जाता है जिसका सीधा-सीधा अर्थ होता है- “बाजार के लिए उगाई गई ताजी सब्जियाँ व फल ।”
ट्रक कृषि की विशेषताएँ ट्रक कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
• ट्रक कृषि में अधिक मुद्रा मिलने वाली फसलें जैसे सब्जियाँ, फल एवं पुष्प लगाए जाते हैं जिनकी माँग नगरीय क्षेत्रों में होती है।
• इस कृषि में खेतों का आकार छोटा होता है।
• इस कृषि में खेत अच्छे यातायात साधनों के द्वारा नगरीय केन्द्रों से जड़े रहते हैं।
• इस कृषि में गहन श्रम एवं अधिक पूँजी की आवश्यकता होती है।
• इस कृषि में उर्वरक, सिंचाई, उत्तम बीज, कीटनाशकों, हरित गृह एवं शीत क्षेत्रों में कृत्रिम ताप का भी उपयोग किया जाता है।
• इस कृषि में गहन कृषि पद्धति अपनाई जाती है व छोटी-छोटी भू-जोतों पर सिंचाई की सुविधा, खाद एवं उन्नत बीजों का प्रयोग करके अधिकतम उत्पादन प्राप्त किया जाता है।
In simple words: ट्रक कृषि एक विशेषीकृत व्यावसायिक खेती है जिसमें शहरों के पास सब्जियों, फलों और फूलों का उत्पादन किया जाता है, जिन्हें ट्रकों द्वारा तेजी से बाजार तक पहुँचाया जाता है, और इसमें गहन श्रम और पूंजी निवेश होता है।
🎯 Exam Tip: ट्रक कृषि की विशेषताओं पर ध्यान दें - जैसे नगरीय मांग पर निर्भरता, ताजा उत्पादों का उत्पादन, कुशल परिवहन की आवश्यकता, और गहन कृषि विधियों का उपयोग।
Question 10. खनन क्या है? खनन की विधियों का वर्णन कीजिए।
Answer: खनन का अर्थ-पृथ्वी के सतह से अथवा भूगर्भ से चट्टानी पदार्थों को अधिक उपयोगी तथा मूल्यवान बनाने के उद्देश्य से संसाधित करने के लिए हटाना या खोदना 'खनन' कहलाता है। खनन की विधियाँ उपस्थिति की अवस्था एवं अयस्क की प्रकृति के आधार पर खनन के दो प्रकार हैं
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र खनन की दो मुख्य विधियों को दर्शाता है: विवृत्त अथवा विपट्टी खदान (Open-pit or Strip mining) और कूपकी खनन (Shaft mining)। विवृत्त खदान सतह पर खुली होती है, जहाँ मिट्टी और चट्टानों को हटाकर खनिज निकाले जाते हैं। कूपकी खनन में, गहरी भूमिगत गैलरी तक पहुंचने के लिए लंबवत शाफ्ट खोदे जाते हैं, जहाँ से खनिज निकाले जाते हैं, जो अधिक जटिल और जोखिम भरा होता है।
(1) धरातलीय खनन एवं (2) भूमिगत खनन। 1. धरातलीय खनन - धरातलीय खनन को 'विवृत्त खनन' भी कहा जाता है। इस विधि में धरातल की मिट्टी, चट्टानों आदि को हटाकर खनिज की परतों को खोदा, काटा या विस्फोटित किया जाता है। यह खनन का सबसे आसान व सस्ता तरीका है। इस विधि में सुरक्षात्मक पूर्वोपाय एवं उपकरणों पर होने वाली ऊपरी लागत अपेक्षाकृत कम होती है। खनिजों का उत्पादन भी शीघ्र व अधिक होता है। धरातलीय खनन तभी सफल व उपयोगी होता है जहाँ खनिजों के भण्डार धरातल के समीप कम गहराई पर अवस्थित होते हैं।
2. भूमिगत खनन - भूमिगत खनन को 'कूपकी खनन' भी कहा जाता है। जब अयस्क धरातल के नीचे गहराई में होता है तब इस विधि का प्रयोग किया जाता है। इस विधि में लम्बवत् कूपक गहराई तक स्थित हैं, जहाँ से भूमिगत गैलरियाँ खनिजों तक पहुँचने के लिए फैली हैं। इन मार्गों से होकर खनिजों का निष्कर्षण एवं परिवहन धरातल तक किया जाता है। खदानों में कार्यरत् श्रमिकों तथा निकाले जाने वाले खनिजों के सुरक्षित और प्रभावी परिवहन हेतु इसमें विशेष प्रकार की लिफ्टें, बरमा माल ढोने की गाड़ियाँ तथा वायु संचार प्रणाली की आवश्यकता होती है। भूमिगत खनन, धरातलीय खनन की तुलना में अधिक जोखिमपूर्ण होता है। इनमें जहरीली गैसों, आग, बाढ़ तथा सुरंगों और गुफाओं के बैठ जाने के कारण जानलेवा दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
In simple words: खनन पृथ्वी की सतह या भूगर्भ से मूल्यवान चट्टानी पदार्थों या खनिजों को निकालने की प्रक्रिया है, जिसकी मुख्य विधियाँ धरातलीय (सतह के पास) और भूमिगत (गहराई में) खनन हैं।
🎯 Exam Tip: खनन की परिभाषा और दोनों प्रमुख विधियों (धरातलीय और भूमिगत) के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें, खासकर उनकी लागत, सुरक्षा और गहराई के संदर्भ में।
लघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. भोजन संग्रहण करने वाले लोगों द्वारा पौधे के विभिन्न भागों के उपयोग पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: भोजन संग्राहकों द्वारा पौधे के विभिन्न भागों का उपयोग- भोजन संग्राहक कीमती पौधों की पत्तियाँ, छाल एवं औषधीय पौधों को सामान्य रूप से संशोधित कर बाजार में विक्रय का कार्य भी करते हैं। पौधे के विभिन्न भागों का ये उपयोग करते हैं। उदाहरण के तौर पर
• छाल का उपयोग कुनैन, चमड़ा तैयार करना एवं कार्क के लिए।
• पत्तियों का उपयोग पेय पदार्थ, दवाइयाँ एवं कान्तिवर्द्धक वस्तुओं के लिए।
• रेशे का उपयोग कपड़ा बनाने के लिए।
• दृढ़फल का उपयोग भोजन एवं तेल के लिए।
• तने का उपयोग रबड़, बलाटा, गोंद व राल बनाने के लिए।
In simple words: भोजन संग्राहक अपनी आवश्यकताओं और आर्थिक लाभ के लिए पौधों के विभिन्न भागों, जैसे छाल, पत्तियां, रेशे, फल और तने का उपयोग करते हैं, जिनसे भोजन, वस्त्र, दवाइयाँ और अन्य उपयोगी वस्तुएँ प्राप्त करते हैं।
🎯 Exam Tip: भोजन संग्राहकों द्वारा पौधों के विभिन्न भागों के बहुमुखी उपयोग पर ध्यान दें, यह दर्शाता है कि वे कैसे प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हैं।
Question 2. वर्तमान में भोजन संग्रह विश्व के किन-किन भागों में किया जाता है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: वर्तमान में भोजन संग्रह विश्व के दो भागों में किया जाता है
• उच्च अक्षांश के क्षेत्र जिनमें उत्तरी कनाडा, उत्तरी यूरेशिया एवं दक्षिणी चिली आते हैं।
• निम्न अक्षांश के क्षेत्र जिनमें अमेजन बेसिन, उष्ण कटिबन्धीय अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया एवं दक्षिण-पूर्वी एशिया का आन्तरिक भाग आता है।
In simple words: वर्तमान में भोजन संग्रह मुख्य रूप से उच्च अक्षांशों (उत्तरी कनाडा, यूरेशिया) और निम्न अक्षांशों (अमेजन बेसिन, उष्णकटिबंधीय अफ्रीका) के दूरदराज और आदिम क्षेत्रों में किया जाता है, जहाँ आधुनिक कृषि का विकास कम हुआ है।
🎯 Exam Tip: भोजन संग्रह के वर्तमान भौगोलिक वितरण को याद रखें, विशेष रूप से उच्च और निम्न अक्षांशों पर, और उन विशिष्ट क्षेत्रों के नाम जो इन श्रेणियों में आते हैं।
Question 3. संग्रहण के भविष्य पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: संग्रहण का भविष्य - आज विश्व स्तर पर भोजन संग्रहण का अधिक महत्त्व नहीं रहा है। विश्व बाजार की प्रतिस्पर्धा में इन क्रियाओं द्वारा प्राप्त उत्पाद पिछड़ जाते हैं। अनेक प्रकार के गुणवत्ता और कम मूल्य वाले कृत्रिम उत्पादों ने उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन के भोजन संग्रह करने वाले समूहों के उत्पादों का स्थान ले लिया है।
In simple words: भोजन संग्रहण का भविष्य सीमित है क्योंकि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा, कम मूल्य वाले कृत्रिम उत्पादों का उदय, और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण ने इसके पारंपरिक महत्व को कम कर दिया है।
🎯 Exam Tip: भोजन संग्रहण के घटते महत्व के पीछे के आर्थिक और तकनीकी कारकों पर ध्यान केंद्रित करें, क्योंकि ये इसके भविष्य को निर्धारित करते हैं।
Question 4. चलवासी पशुचारण के क्षेत्रों की विशेषताएँ समझाइए ।
Answer: चलवासी पशुचारण के क्षेत्र की विशेषताएँ चलवासी पशुचारण के क्षेत्र की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं (1) चलवासी पशुचारण के क्षेत्र सामान्यतया कठोर प्राकृतिक दशाओं वाले होते हैं। ये क्षेत्र या तो अत्यधिक गर्म व शुष्क हैं या अत्यधिक ठण्डे ।
(2) विषम जलवायु के कारण यहाँ घास और झाड़ियाँ छोटी-छोटी और बिखरे टुकड़ों में पायी जाती हैं। अधिक शुष्क मौसम आने पर घास का घनत्व भी कम हो जाता है। इससे घास के मैदानों में प्रति इकाई भूमि की वहन शक्ति घट जाती है। इस कारण चरवाहों को बहुत विस्तृत क्षेत्र में पशुचारण कराना पड़ता है।
In simple words: चलवासी पशुचारण उन क्षेत्रों में प्रचलित है जहाँ कठोर जलवायु परिस्थितियाँ (अत्यधिक गर्म, शुष्क या ठंडी), छोटी और बिखरी घास की उपलब्धता, और निम्न वहन क्षमता के कारण पशुओं को बड़े क्षेत्रों में घुमाना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: चलवासी पशुचारण के क्षेत्रों की जलवायु और वनस्पति विशेषताओं पर ध्यान दें - जैसे कठोर तापमान, बिखरी घास - क्योंकि ये पशुपालकों की खानाबदोश जीवनशैली को सीधे प्रभावित करते हैं।
Question 5: गहन जीविकोपार्जी कृषि की नवीन प्रवृत्तियों पर टिप्पणी लिखिए ।
Answer: गहन जीविकोपार्जी कृषि की नवीन प्रवृत्तियाँ-पिछले दो दशकों में उन क्षेत्रों में जहाँ चावल तथा गेहूँ की उन्नत किस्मों के संकर बीजों को बोया गया है, वहाँ कृषि उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कुछ क्षेत्रों में रासायनिक खादों, फफूंदीनाशक एवं कीटनाशक दवाओं तथा सिंचाई सुविधाओं का प्रयोग होने से परम्परागत जीविकोपार्जी कृषि में वाणिज्यिक कृषि की कुछ विशेषताएँ विकसित हो गई हैं।
In simple words: गहन जीविकोपार्जी कृषि में अब उन्नत बीजों, रासायनिक खादों, कीटनाशकों और सिंचाई के उपयोग से उत्पादकता में वृद्धि हुई है, जिससे इसमें वाणिज्यिक कृषि के कुछ लक्षण विकसित हुए हैं।
🎯 Exam Tip: गहन जीविकोपार्जी कृषि में आधुनिकीकरण के कारकों जैसे संकर बीज, रासायनिक खाद और सिंचाई के उपयोग पर ध्यान दें, जो इसे पारंपरिक निर्वाह कृषि से वाणिज्यिक कृषि की ओर ले जा रहे हैं।
Question 6. मिश्रित कृषि व डेयरी कृषि में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
Answer: मिश्रित कृषि व डेयरी कृषि में अन्तर
| क्र० सं० | मिश्रित कृषि | डेयरी कृषि |
|---|---|---|
| 1. | मिश्रित कृषि में फसल उगाने तथा पशुपालन पर बराबर बल दिया जाता है। | डेयरी कृषि में पशुपालन पर अधिक बल दिया जाता है। |
| 2. | इस कृषि में खाद्यान्न, चारे वाली व नकदी तीनों प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। | इस कृषि में चारे की फसलें प्रमुख होती हैं व खाद्यान्न थोड़ा-बहुत उगाया जाता है। |
| 3. | मिश्रित कृषि महानगरों के समीप की जाती है। | डेयरी कृषि महानगरों के समीप उन स्थानों पर की जाती है जहाँ जलवायु अपेक्षाकृत आर्द्र होती है। |
| 4. | इस कृषि का प्रचलन पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, दक्षिण अफ्रीका व दक्षिण-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में है। | इस कृषि का प्रचलन यूरोपीय देशों, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैण्ड में है। |
In simple words: मिश्रित कृषि में फसलों और पशुपालन दोनों को समान महत्व दिया जाता है, जबकि डेयरी कृषि मुख्य रूप से दुधारू पशुओं के पालन पर केंद्रित होती है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य दूध और दुग्ध उत्पादों का उत्पादन करना है।
🎯 Exam Tip: मिश्रित कृषि और डेयरी कृषि के बीच मुख्य अंतरों पर ध्यान दें, जैसे फसलों और पशुपालन का संतुलन, उगाए जाने वाले फसल प्रकार, और भौगोलिक वितरण, क्योंकि यह तुलनात्मक विश्लेषण में मदद करता है।
Question 7. रोपण कृषि व उद्यान कृषि में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: रोपण कृषि व उद्यान कृषि में अन्तर
| क्र० सं० | रोपण कृषि | उद्यान कृषि |
|---|---|---|
| 1. | रोपण कृषि का मुख्य उत्पाद चाय, कॉफी, गन्ना, कोको, नारियल, रबड़ आदि हैं। | उद्यान कृषि के मुख्य उत्पाद फल व फूल हैं। |
| 2. | इस कृषि के उत्पादों का व्यापार दूर-दूर तक होता है। | इस कृषि के उत्पादों की बिक्री समीपवर्ती महानगरों में की जाती है। |
| 3. | इसमें फसलों का विशिष्टीकरण होता है। | इसमें फसलों का विशिष्टीकरण नहीं होता है बल्कि माँग के अनुसार उत्पाद पैदा किए जाते हैं। |
| 4. | रोपण कृषि में मशीनों का प्रयोग किया जाता है। | उद्यान कृषि में अधिकतर कार्य हाथों से होता है। |
In simple words: रोपण कृषि बड़े पैमाने पर एक नकदी फसल का उत्पादन करती है जिसका निर्यात किया जाता है, जबकि उद्यान कृषि फलों और फूलों का उत्पादन करती है जिनकी बिक्री स्थानीय बाजारों में होती है और इसमें श्रम का अधिक उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: रोपण कृषि (निर्यात-उन्मुख, एकल फसल) और उद्यान कृषि (स्थानीय बाजार-उन्मुख, विविध फसल) के बीच के अंतरों पर ध्यान दें, विशेषकर उत्पादन के उद्देश्य और बिक्री के क्षेत्र के संदर्भ में।
Question 8. मिश्रित कृषि किसे कहते हैं? इसके प्रचलन वाले क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
Answer: मिश्रित कृषि - वह कृषि जिसमें फसलों को उगाने के साथ-साथ पशुओं को पालने का कार्य भी किया जाता है, उसे 'मिश्रित कृषि' कहा जाता है। मिश्रित कृषि के प्रचलन वाले क्षेत्र - मिश्रित कृषि का अधिक प्रचलन पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, अर्जेण्टीना, दक्षिणी अफ्रीका, न्यूजीलैण्ड व दक्षिण-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में है।
In simple words: मिश्रित कृषि एक ऐसी प्रणाली है जिसमें फसल उत्पादन और पशुपालन दोनों को एक साथ किया जाता है, जिसका प्रचलन पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, और दक्षिणी गोलार्ध के समशीतोष्ण क्षेत्रों में होता है।
🎯 Exam Tip: मिश्रित कृषि की परिभाषा को याद रखें, जिसमें फसल और पशुपालन का समन्वय महत्वपूर्ण है, साथ ही इसके प्रमुख भौगोलिक वितरण क्षेत्रों को भी जानें।
Question 9. विश्व में मिश्रित कृषि की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: मिश्रित कृषि की विशेषताएँ मिश्रित कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
• मिश्रित कृषि विश्व के अत्यधिक विकसित भागों में की जाती है।
• इस कृषि में खेतों का आकार मध्यम होता है।
• इस कृषि में बोई जाने वाली फसलें गेहूं, जौ, राई, जई, मक्का, चारे की फसल एवं कन्द-मूल प्रमुख हैं। चारे की फसलें मिश्रित कृषि के प्रमुख घटक हैं।
• इस कृषि में फसल उत्पादन एवं पशुपालन दोनों को समान महत्त्व दिया जाता है।
• फसलों के साथ पशु भी आय के मुख्य स्रोत हैं।
• शस्यावर्तन (फसलों की हेर-फेर) एवं अन्तःफसली कृषि मृदा की उर्वरता को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
• पर्याप्त पूँजी, आधुनिक प्रबन्धन, वैज्ञानिक कृषि विधियाँ, कृषि यन्त्र, इमारतों, रासायनिक एवं हरी खाद के गहन उपयोग, यातायात, शहरी बाजार की समीपता व पर्याप्त वर्षा वाली शीतल जलवायु से इस कृषि को भारी प्रोत्साहन मिलता है।
In simple words: मिश्रित कृषि एक विकसित कृषि पद्धति है जो मध्यम आकार के खेतों में फसल उत्पादन और पशुपालन को समान महत्व देती है, जिसमें फसलों के साथ पशु भी आय का स्रोत होते हैं और इसमें आधुनिक प्रबंधन और वैज्ञानिक विधियों का उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: मिश्रित कृषि की संतुलित प्रकृति (फसल और पशु), फसल चक्रण का उपयोग, और आधुनिक इनपुट (पूंजी, प्रबंधन, प्रौद्योगिकी) के महत्व पर जोर दें।
Question 10: भूमध्यसागरीय कृषि के विस्तार पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: भूमध्यसागरीय कृषि का विस्तार (क्षेत्र)-यह एक अति-विशिष्ट प्रकार की वाणिज्य कृषि है जो (1) यूरोप में भूमध्यसागर के तटीय क्षेत्रों (2) एशिया माइनर (3) उत्तरी अफ्रीका की तटीय पट्टियों पर ट्यूनीशिया से अटलाण्टिक तट तक विस्तृत है। भूमध्य सागरीय तटों से दूर यह कृषि व्यवस्था कैलिफोर्निया (संयुक्त राज्य अमेरिका), मध्य चिली, दक्षिण-पश्चिमी केप प्रान्त (दक्षिण अफ्रीका) और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया . के दक्षिण-पश्चिम में पायी जाती है।
In simple words: भूमध्यसागरीय कृषि भूमध्यसागर के तटीय क्षेत्रों और उससे मिलते-जुलते जलवायु वाले दूर के क्षेत्रों जैसे कैलिफोर्निया, मध्य चिली और दक्षिण-पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में फैली हुई एक विशेष प्रकार की वाणिज्यिक कृषि है।
🎯 Exam Tip: भूमध्यसागरीय कृषि के वितरण क्षेत्रों को याद रखें और इस बात पर ध्यान दें कि यह केवल भूमध्यसागर के आसपास ही नहीं, बल्कि समान जलवायु वाले अन्य क्षेत्रों में भी पाई जाती है।
Question 11. संसार में भूमध्यसागरीय कृषि की विशेषताओं को समझाइए ।
Answer: भूमध्यसागरीय कृषि की विशेषताएँ
• भूमध्यसागरीय कृषि अति विशिष्ट प्रकार की कृषि है।
• अंगूर की कृषि इस कृषि की प्रमुख विशेषता है।
• यह कृषि मुख्यतः यहाँ की लम्बी ग्रीष्म ऋतु, शीतकालीन वर्षा और शुष्क एवं अकालग्रस्त अवधि में कृत्रिम सिंचाई द्वारा प्रभावित रहती है।
• शीत ऋतु में जब यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में फलों एवं सब्जियों की माँग होती है तब उनकी पूर्ति इसी क्षेत्र से की जाती है।
In simple words: भूमध्यसागरीय कृषि एक विशेष प्रकार की कृषि है जो लंबी गर्मियों, सर्दियों की वर्षा, और सूखे की अवधि के अनुकूल होती है, जहाँ अंगूर की खेती प्रमुख है और शीतकाल में फलों व सब्जियों की मांग पूरी की जाती है।
🎯 Exam Tip: भूमध्यसागरीय कृषि की जलवायु-निर्भरता, अंगूर की खेती का महत्व, और शीतकालीन फलों व सब्जियों की आपूर्ति में इसकी भूमिका को विशेष रूप से याद रखें।
Question 16. खनन को प्रभावित करने वाले भौतिक कारकों को समझाइए।
Answer: खनन को प्रभावित करने वाले भौतिक कारक निम्नलिखित हैं
- खनिज का अंश जितना अधिक होगा उतनी ही उस खनिज की गुणवत्ता अधिक होगी। उतना ही खनिज लाभदायक होगा।
In simple words: Physical factors like the mineral content and quality determine how profitable mining is. Higher concentration and better quality minerals make mining more worthwhile.
🎯 Exam Tip: When discussing physical factors, emphasize how the inherent properties of the mineral deposit directly impact the feasibility and profitability of mining operations.
Question 17. खनन को प्रभावित करने वाले आर्थिक कारकों को समझाइए।
Answer: खनन को प्रभावित करने वाले आर्थिक कारक निम्नलिखित हैं
- खदान को विकसित करने के लिए आवश्यक पूँजी।
- खनन कार्य के लिए आवश्यक तकनीक, ज्ञान व प्रौद्योगिकी।
- पर्याप्त मात्रा में सस्ते श्रम की उपलब्धता।
- परिवहन के प्रकार, उनके विकास की स्थिति व क्षमता।
- खनिजों की स्थानीय व अन्तर्राष्ट्रीय मांग इत्यादि।
In simple words: Economic factors such as capital investment, technology, labor availability, transport infrastructure, and market demand are crucial in determining the viability and success of mining activities.
🎯 Exam Tip: Highlight the interplay between economic factors and the decision-making process for initiating and sustaining mining projects, focusing on cost-benefit analysis.
अतिलघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. आर्थिक क्रिया किसे कहते हैं?
Answer: मानव के वह कार्यकलाप जिनसे आय प्राप्त होती है, उन्हें 'आर्थिक क्रिया' कहा जाता है।
In simple words: An economic activity is any human activity performed to earn income or make a living.
🎯 Exam Tip: A concise and accurate definition is key here. Ensure you mention 'income' or 'earning' as the core purpose.
Question 2. आर्थिक क्रियाओं को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
Answer: आर्थिक क्रियाओं को चार भागों में बाँटा जा सकता है
- प्राथमिक
- द्वितीयक
- तृतीयक तथा
- चतुर्थक क्रियाएँ।
In simple words: Economic activities are categorized into primary, secondary, tertiary, and quaternary sectors based on the type of work involved and their role in the economy.
🎯 Exam Tip: Listing all four categories accurately is essential. Briefly understanding what each category entails can help in broader questions.
Question 3. प्राथमिक क्रियाएँ किस पर निर्भर हैं. और क्यों?
Answer: प्राथमिक क्रियाएँ सीधे-सीधे पर्यावरण पर निर्भर हैं क्योंकि ये प्राकृतिक संसाधनों जैसे भूमि, जल, वनस्पति, जीव-जन्तु एवं खनिजों के उपयोग से जुड़ी हुई हैं।
In simple words: Primary activities are directly dependent on the natural environment because they involve utilizing raw natural resources like land, water, plants, animals, and minerals.
🎯 Exam Tip: Emphasize the direct link to 'natural resources' and 'environment' as the defining characteristic of primary activities.
Question 4. प्राथमिक क्रियाओं में कौन-कौन से कार्य शामिल किए जाते हैं?
Answer: प्राथमिक क्रियाओं में आखेट, भोजन-संग्रह, पशुचारण, मछली पकड़ना, वनों से लकड़ी काटना, कृषि एवं खनन कार्य शामिल किए जाते हैं।
In simple words: Hunting, gathering, pastoralism, fishing, logging, farming, and mining are all examples of primary activities, as they involve direct extraction or production from natural resources.
🎯 Exam Tip: Providing a diverse list of examples showcases a comprehensive understanding of primary activities.
Question 5. चिकल किसे कहते हैं?
Answer: चुविंगगम चूसने के बाद शेष बचे भाग को 'चिकल' कहते हैं। ये जेपोटा वृक्ष के दूध से बनता है।
In simple words: Chicle is the natural gum base used in chewing gum, derived from the milky sap of the sapodilla (Jepota) tree.
🎯 Exam Tip: Accurately identifying the source (Jepota tree) and its use in chewing gum is crucial for a complete answer.
Question 6. कृषि से आप क्या समझते हैं?
Answer: विभिन्न प्रकार की फसलों का बोया जाना तथा पशुपालन कृषि कहलाता है।
In simple words: Agriculture refers to the practice of cultivating different types of crops and raising livestock to produce food, fiber, and other products.
🎯 Exam Tip: A good definition includes both crop cultivation and animal rearing as integral parts of agriculture.
Question 7. रैन्च (Ranch) क्या है?
Answer: वाणिज्य पशुधन पालन में पशुओं को सैकड़ों वर्ग किमी क्षेत्र के बाड़ों में रखा जाता है, जिन्हें प्रेयरी क्षेत्र (उत्तरी अमेरिका) में 'रैन्च' कहा जाता है।
In simple words: A ranch is a large area of land, often hundreds of square kilometers, used for commercial livestock rearing, especially in the prairie regions of North America.
🎯 Exam Tip: Mentioning both the large size and the specific geographic context (North American prairies) strengthens the answer.
Question 8. एस्टेंशिया (Estancia) क्या है?
Answer: वाणिज्य पशुधन पालन में पशुओं को सैकड़ों वर्ग किमी क्षेत्र के बाड़ों में रखा जाता है, जिन्हें पम्पास क्षेत्र (दक्षिणी अमेरिका) में 'एस्टेंशिया' कहा जाता है।
In simple words: Estancia is the term used in the Pampas region of South America for large-scale commercial livestock farms, similar to ranches, where animals are kept in vast fenced areas.
🎯 Exam Tip: Differentiate it from 'Ranch' by specifying the 'Pampas region' and 'South America' to show precise knowledge.
Question 9. निर्वाह कृषि को वर्गीकृत कीजिए।
Answer: निर्वाह (जीविकोपार्जी) कृषि को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है
- आदिकालीन निर्वाह कृषि एवं
- गहन निर्वाह कृषि।
In simple words: Subsistence agriculture is primarily categorized into primitive subsistence farming, characterized by traditional methods, and intensive subsistence farming, which involves maximizing output from small landholdings.
🎯 Exam Tip: Listing these two main types is sufficient, but briefly understanding their differences helps contextualize the classification.
Question 10. आदिकालीन निर्वाह कृति के कोई दो स्थानीय नाम क्षेत्र सहित लिखिए।
Answer: आदिकालीन निर्वाह कृषि के स्थानीय नाम हैं
- भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में - झूमिंग कृषि
- मलयेशिया व इण्डोनेशिया में - लदांग
In simple words: Primitive subsistence agriculture is known by different local names globally, such as Jhuming in Northeast India and Ladang in Malaysia and Indonesia.
🎯 Exam Tip: Providing a pair of region-specific names demonstrates detailed knowledge of agricultural practices.
Question 11. मिल्या क्या है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: आदिकालीन निर्वाह (स्थानान्तरित) कृषि को मध्य अमेरिका एवं मैक्सिको में 'मिल्पा' के नाम से जाना जाता है।
In simple words: Milpa is the local term for shifting cultivation, a type of primitive subsistence agriculture practiced in Central America and Mexico.
🎯 Exam Tip: Connect 'Milpa' directly to 'shifting cultivation' and its specific geographical location for clarity.
Question 12. उन दो क्रियाओं के नाम बताइए जिन पर आदिमकालीन मानव अपने जीवन निर्वाह के लिए निर्भर रहते हैं।
Answer: आखेट तथा संग्रहण।
In simple words: Primitive humans relied on hunting animals and gathering wild plants for their sustenance and survival.
🎯 Exam Tip: 'Hunting' and 'gathering' are the fundamental activities of primitive societies; ensuring both are mentioned is key.
Question 13. चलवासी पशुचारण क्या है?
Answer: चलवासी पशुचारण वह मानवीय क्रिया है जिसमें पशुचारक चारे एवं जल की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते हैं।
In simple words: Nomadic herding is a practice where herders move their livestock from place to place in search of pasture and water, adapting to seasonal changes.
🎯 Exam Tip: The core concept of 'movement' in search of 'fodder and water' for livestock should be highlighted in the definition.
Question 14. विश्व में चलवासी पशुचारकों की संख्या क्यों घट रही है? इसका मुख्य कारण स्पष्ट कीजिए।
Answer: चरागाह धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं। उन पर कृषि की जा रही है तथा घर बनाए जा रहे हैं।
In simple words: The number of nomadic herders is declining globally primarily because grazing lands are shrinking due to conversion into agricultural land and residential areas.
🎯 Exam Tip: Focus on the loss of traditional grazing lands as the primary reason for the decline in nomadic pastoralism.
Question 15. मिश्रित कृषि किसे कहते हैं?
Answer: वह कृषि जिसमें फसलों को उगाने के साथ-साथ पशुओं को पालने का कार्य भी किया जाता है, उसे 'मिश्रित कृषि' कहा जाता है।
In simple words: Mixed farming is an agricultural system that combines both crop cultivation and livestock rearing on the same farm, integrating both aspects for efficiency and income.
🎯 Exam Tip: Emphasize the combination of 'crop cultivation' and 'animal rearing' as the defining characteristic of mixed farming.
Question 16. विश्व में मिश्रित कृषि के विस्तार वाले क्षेत्रों के नाम बताइए।
Answer: उत्तर-पश्चिमी यूरोप, उत्तरी अमेरिका का पूर्वी भाग, यूरेशिया के कुछ भाग तथा दक्षिणी महाद्वीपों के समशीतोष्ण अक्षांश वाले भागों में मिश्रित कृषि का विस्तार है।
In simple words: Mixed farming is widely practiced in regions like Northwestern Europe, the eastern parts of North America, some parts of Eurasia, and temperate latitudes of the Southern continents.
🎯 Exam Tip: Accurately naming key geographical regions where mixed farming is prominent demonstrates good spatial understanding.
Question 17. मिश्रित कृषि की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
Answer: मिश्रित कृषि की विशेषताएँ हैं
- विकसित कृषि यन्त्र,
- रासायनिक व वनस्पति खाद का गहन उपयोग।
In simple words: Key features of mixed farming include the use of advanced agricultural machinery and intensive application of chemical and organic fertilizers to enhance productivity.
🎯 Exam Tip: Focus on specific operational aspects like technology and input use rather than just the definition itself.
Question 18. डेयरी कृषि का कार्य कहाँ किया जाता है और क्यों?
Answer: डेयरी कृषि का कार्य नगरीय एवं औद्योगिक केन्द्रों के समीप किया जाता है, क्योंकि ये क्षेत्र ताजा दूध एवं अन्य डेयरी उत्पाद के अच्छे बाजार होते हैं।
In simple words: Dairy farming is typically located near urban and industrial centers because these areas provide a large and ready market for fresh milk and other dairy products.
🎯 Exam Tip: The crucial link here is 'proximity to markets' due to the perishable nature of dairy products.
Question 19. सहकारी कृषि क्या है?
Answer: जब कृषकों का एक समूह अपनी कृषि से अधिक लाभ कमाने के लिए स्वेच्छा से एक सहकारी संस्था बनाकर कृषि कार्य सम्पन्न करे तो उसे 'सहकारी कृषि' कहते हैं।
In simple words: Cooperative farming is a system where a group of farmers voluntarily form a cooperative society to collectively carry out farming activities, aiming for greater profits and efficiency.
🎯 Exam Tip: The keywords are 'group of farmers', 'voluntary formation', and 'collective farming' for mutual benefit.
Question 20. सामूहिक कृषि का आधारभूत सिद्धान्त क्या है?
Answer: सामूहिक कृषि का आधारभूत सिद्धान्त यह होता है कि इसमें उत्पादन के साधनों का स्वामित्व सम्पूर्ण समाज व सामूहिक श्रम पर आधारित होता है।
In simple words: The fundamental principle of collective farming is that the means of production are owned by the entire society, and labor is collectively contributed, emphasizing shared ownership and effort.
🎯 Exam Tip: Focus on 'social ownership of means of production' and 'collective labor' as the core tenets of collective farming.
Question 21. कोलखहोज क्या है?
Answer: सामूहिक कृषि को सोवियत संघ में कोलखहोज के नाम से जाना जाता है।
In simple words: Kolkhoz refers to the collective farms established in the Soviet Union, representing their model of collective agriculture.
🎯 Exam Tip: Clearly link 'Kolkhoz' with 'collective farming' and 'Soviet Union' for a precise answer.
Question 22. कारखाना कृषि कहाँ की जाती है?
Answer: पश्चिमी यूरोप एवं उत्तरी अमेरिका के औद्योगिक क्षेत्रों में उद्यान कृषि के अलावा कारखाना कृषि भी की जाती है।
In simple words: Factory farming is predominantly practiced in the industrial regions of Western Europe and North America, often alongside horticultural farming.
🎯 Exam Tip: Identifying 'industrial regions' of 'Western Europe' and 'North America' as key areas for factory farming is important.
Question 23. खनन से आप क्या समझते हैं?
Answer: पृथ्वी की सतह से अथवा भूगर्भ से चट्टानी पदार्थों को अधिक उपयोगी व मूल्यवान बनाने के उद्देश्य से संसाधित करने के लिए हटाना या खोदना 'खनन' कहलाता है।
In simple words: Mining is the process of extracting valuable minerals or other geological materials from the Earth, either from the surface or underground, to make them more useful and valuable.
🎯 Exam Tip: A comprehensive definition includes both surface and underground extraction, along with the purpose of increasing utility and value.
Question 24. अयस्क किसे कहते हैं?
Answer: जिन कच्ची धातुओं से खनिज मिलते हैं, उन्हें 'अयस्क' कहा जाता है।
In simple words: An ore is a naturally occurring rock or sediment that contains one or more valuable minerals, typically metals, that can be extracted and refined for economic profit.
🎯 Exam Tip: Define 'ore' as a rock from which minerals, especially metals, can be extracted, highlighting its economic significance.
Question 25. उत्खनन से आप क्या समझते हैं?
Answer: यदि धरातल से खुदाई करके खनिज प्राप्त किए जाएँ तो उसे 'उत्खनन' कहते हैं।
In simple words: Quarrying, or opencast mining, is the process of extracting minerals from the Earth's surface by digging shallow pits or trenches, without requiring deep underground operations.
🎯 Exam Tip: Distinguish 'उत्खनन' (quarrying/opencast) from general 'खनन' (mining) by specifying surface extraction.
Question 26. खनन की विधियों के नाम बताइए।
Answer: उपस्थिति की अवस्था एवं अयस्क की प्रकृति के आधार पर खनन के दो प्रकार हैं
- धरातलीय खनन एवं
- भूमिगत खनन।
In simple words: Based on the depth and nature of the ore, mining methods are broadly classified into surface (opencast) mining and underground (shaft) mining.
🎯 Exam Tip: Naming the two primary methods, surface and underground mining, is the key requirement.
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
Question 1. प्राथमिक क्रियाएँ हैं (a) आखेट (b) भोजन संग्रह (c) पशुचारण (d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: All the listed options - hunting, food gathering, and pastoralism - are examples of primary activities, which involve direct interaction with natural resources.
🎯 Exam Tip: For MCQ, correctly identify all activities that fall under the primary sector, as they typically involve raw resource extraction or production.
Question 2. आर्थिक क्रियाओं के कितने वर्ग हैं (a) चार (b) पाँच (c) छह (d) सात ।
Answer: (a) चार
In simple words: Economic activities are generally categorized into four main sectors: primary, secondary, tertiary, and quaternary.
🎯 Exam Tip: Remembering the standard classification of economic activities into four main categories is important.
Question 3. आदिमकालीन समाज किस पर निर्भर था (a) उद्योगों पर (b) कृषि पर (c) व्यापार पर (d) जंगली पशुओं पर ।
Answer: (d) जंगली पशुओं पर
In simple words: Primitive societies primarily depended on wild animals for hunting and gathering, along with natural vegetation, to meet their basic needs for survival.
🎯 Exam Tip: Focus on direct reliance on nature (wild animals and plants) as the defining characteristic of primitive societies' sustenance.
Question 4. प्राचीनतम ज्ञात आर्थिक क्रिया हैं (a) आखेट (b) भोजन संग्रह (c) कृषि (d) (a) व (b) दोनों ।
Answer: (d) (a) व (b) दोनों
In simple words: The earliest known economic activities were hunting and food gathering, which predated agriculture and industrialization.
🎯 Exam Tip: Understand that hunting and gathering were the foundational economic activities before human societies developed agriculture.
Question 5. पौधे की छाल का उपयोग करते हैं (a) कुनैन में (b) चमड़ा तैयार करने में (c) कार्क में (d) उपर्युक्त सभी में ।
Answer: (d) उपर्युक्त सभी में
In simple words: Plant bark can be utilized in various ways, including for quinine extraction, leather tanning, and producing cork, showing its diverse utility.
🎯 Exam Tip: Recognize the versatility of natural products like bark; if multiple uses are listed, 'all of the above' is often the correct choice for such questions.
Question 6. चलवासी पशुचारण में पशुचारक किस चीज के लिए पशुओं पर ही निर्भर करता है (a) भोजन (b) वस्त्र (c) औजार (d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: Nomadic herders depend entirely on their animals for various necessities like food, clothing (from wool/hides), and tools (from bones/hides), which are central to their way of life.
🎯 Exam Tip: For nomadic herders, livestock serves as a multi-purpose resource for almost all their survival needs; hence, all listed options are typically correct.
Question 7. चलवासी पशुचारण के कितने प्रमुख क्षेत्र हैं (a) चार (b) पाँच (c) छह (d) तीन ।
Answer: (d) तीन
In simple words: Nomadic pastoralism is primarily found in three distinct major regions globally, reflecting its specific environmental and cultural adaptations.
🎯 Exam Tip: Recall the specific number of major geographical regions associated with nomadic pastoralism to answer accurately.
Question 8. वाणिज्य पशुधन पालन में पाला जाने वाला प्रमुख पश हैं (a) भेड़ व बकरी (b) गाय व बैल (c) घोड़े (d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: Commercial livestock rearing involves a variety of animals such as sheep, goats, cattle (cows and bulls), and horses, depending on the region and market demand.
🎯 Exam Tip: Commercial livestock farming is diverse, so a range of animals including sheep, goats, cattle, and horses can be raised for various products.
Question 9. गहन निर्वाह कृषि के कितने प्रकार हैं (a) दो (b) तीन (c) चार (d) पाँच ।
Answer: (a) दो
In simple words: Intensive subsistence agriculture is typically classified into two main types: rice-dominant and non-rice dominant.
🎯 Exam Tip: Remember the two main types of intensive subsistence agriculture, usually differentiated by the dominant crop (rice or non-rice).
Question 10. मलयेशिया व इण्डोनेशिया में स्थानान्तरित कृषि का स्थानीय नाम है (a) मिल्पा (b) झूमिंग (c) लदांग (d) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (c) लदांग
In simple words: Shifting cultivation is known as Ladang in Malaysia and Indonesia, a regional term for this traditional farming practice.
🎯 Exam Tip: Correctly associate 'Ladang' with shifting cultivation in Southeast Asian countries like Malaysia and Indonesia, distinguishing it from other regional names.
Question 11. रोपण कृषि में उगाई जाने वाली प्रमुख फसल है (a) चाय (b) रबड़ (c) गन्ना (d) ये सभी ।
Answer: (d) ये सभी
In simple words: Plantation agriculture involves large-scale cultivation of commercial crops such as tea, rubber, and sugarcane, among others.
🎯 Exam Tip: Plantation agriculture focuses on high-value cash crops; tea, rubber, and sugarcane are all prime examples, making 'all of the above' the likely answer.
Question 12. भूमध्यसागरीय कृषि में उगाई जाने वाली फसल है (a) अंगूर (b) जैतून (c) अंजीर (d) ये सभी ।
Answer: (d) ये सभी
In simple words: Mediterranean agriculture is known for its specialized cultivation of crops like grapes, olives, and figs, which are well-suited to its distinctive climate.
🎯 Exam Tip: The Mediterranean climate is ideal for specific fruit crops; grapes, olives, and figs are characteristic produce of this agricultural region.
Question 13. सहकारी कृषि को सर्वाधिक सफलता किस देश में मिली है (a) डेनमार्क (b) नीदरलैण्ड (c) बेल्जियम (d) स्वीडन ।
Answer: (a) डेनमार्क
In simple words: Denmark is widely recognized for the exceptional success and extensive implementation of cooperative farming practices.
🎯 Exam Tip: Remember Denmark as the leading example of successful cooperative agriculture globally.
Question 14. सामूहिक कृषि को कोलखहोज नाम कहाँ दिया गया (a) नीदरलैण्ड में (b) कनाडा में (c) जर्मनी में (d) सोवियत संघ में।
Answer: (d) सोवियत संघ में
In simple words: Collective farms, known as Kolkhoz, were a prominent feature of agricultural organization in the former Soviet Union.
🎯 Exam Tip: Directly link 'Kolkhoz' to the 'Soviet Union' as its country of origin for collective farming.
Question 15. खनन की विधियाँ हैं (a) दो (b) तीन (c) चार (d) पाँच ।
Answer: (a) दो
In simple words: Mining generally involves two main methods: surface mining and underground mining, chosen based on the depth and type of mineral deposit.
🎯 Exam Tip: The two fundamental methods of mining are surface (opencast) and underground (shaft) mining.
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