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Detailed Chapter 6 जल संसाधन UP Board Solutions for Class 12 Geography
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Class 12 Geography Chapter 6 जल संसाधन UP Board Solutions PDF
UP Board Class 12 Geography Chapter 6 Text Book Questions
UP Board Class 12 Geography Chapter 6 पाठयपुस्तक से अभ्यास प्रश्न
Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए (i) निम्नलिखित में से जल किस प्रकार का संसाधन है
(क) अजैव संसाधन
(ख) अनवीकरणीय संसाधन
(ग) जैव संसाधन
(घ) चक्रीय संसाधन
Answer: (घ) चक्रीय संसाधन
In simple words: जल एक चक्रीय संसाधन है क्योंकि यह पृथ्वी पर विभिन्न अवस्थाओं में लगातार परिवर्तित और पुनर्चक्रित होता रहता है, जिससे इसकी उपलब्धता निरंतर बनी रहती है।
🎯 Exam Tip: जल के चक्रीय स्वभाव को समझना जल संसाधनों के प्रबंधन और उसके सतत उपयोग के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह इसके नवीकरणीय गुण को दर्शाता है।
Question 1. (ii) निम्नलिखित नदियों में से, देश में किस नदी में सबसे ज्यादा पुनः पूर्ति योग्य भौम जल संसाधन हैं
(क) सिन्धु
(ख) ब्रह्मपुत्र
(ग) गंगा
(घ) गोदावरी
Answer: (ग) गंगा
In simple words: गंगा नदी में भारत के अन्य नदियों की तुलना में सबसे अधिक पुनः पूर्ति योग्य भूजल संसाधन हैं, क्योंकि इसका विशाल बेसिन और नियमित वर्षा इसे भरपूर जल आपूर्ति प्रदान करती है।
🎯 Exam Tip: भारत की प्रमुख नदी प्रणालियों और उनके भूजल पुनर्भरण क्षमता का ज्ञान, विशेषकर परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए, आवश्यक है।
Question 1. (iii) घन किमी में दी गई निम्नलिखित संख्याओं में से कौन-सी संख्या भारत में कुल वार्षिक वर्षा दर्शाती है
(क) 2,000
(ख) 3,000
(ग) 4,000
(घ) 5,000.
Answer: (घ) 4,000
In simple words: भारत में औसतन प्रतिवर्ष 4,000 घन किमी वर्षा होती है, जो देश के जल संसाधनों का प्राथमिक स्रोत है।
🎯 Exam Tip: भारत की वार्षिक वर्षा की मात्रा और उसके वितरण से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी याद रखना भौगोलिक ज्ञान को मजबूत करता है।
Question 1. (iv) निम्नलिखित दक्षिण भारतीय राज्यों में से किस राज्य में भौम जल उपयोग ( % में) इसके कुल भौम जल संभाव्य से ज्यादा है
(क) तमिलनाडु
(ख) कर्नाटक
(ग) आन्ध्र प्रदेश
(घ) केरल
Answer: (क) तमिलनाडु
In simple words: तमिलनाडु में भूजल का उपयोग उसके कुल उपलब्ध भूजल क्षमता से अधिक है, जो अत्यधिक सिंचाई और अन्य जरूरतों के कारण होता है।
🎯 Exam Tip: राज्यों के भूजल उपयोग पैटर्न और उनकी क्षमता के बीच के असंतुलन को जानना जल प्रबंधन की चुनौतियों को समझने में मदद करता है।
Question 1. (v) देश में प्रयुक्त कुल जल का सबसे अधिक समानुपात निम्नलिखित सेक्टरों में से किस सेक्टर में
(क) सिंचाई
(ख) उद्योग
(ग) घरेलू उपयोग
(घ) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (क) सिंचाई
In simple words: भारत में कुल जल उपयोग का सबसे बड़ा हिस्सा कृषि सिंचाई के लिए किया जाता है, जो खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न क्षेत्रों में जल के उपयोग के अनुपात को समझना जल संसाधनों के आवंटन और प्राथमिकता को दर्शाता है।
Question 2. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर 30 शब्दों में दीजिए (i) यह कहा जाता है कि भारत के जल संसाधनों में तेजी से कमी आ रही है। जल संसाधनों की कमी के लिए उत्तरदायी कारकों की विवेचना कीजिए।
Answer: जल संसाधनों की कमी के लिए उत्तरदायी कारक
(i) सिंचाई के लिए जल की अधिक माँग
(ii) जल की प्रति व्यक्ति उपलब्धता का कम होना
(iii) जनसंख्या वृद्धि के परिणामस्वरूप जल के उपयोग में वृद्धि
(iv) उद्योगों में जल का अन्धाधुन्ध प्रयोग एवं
(v) जल प्रदूषण में वृद्धि आदि ।
In simple words: भारत में जल संसाधनों की कमी के मुख्य कारण बढ़ती जनसंख्या की जल आवश्यकता, कृषि और औद्योगिक उपयोग में वृद्धि, और जल प्रदूषण हैं, जो उपलब्ध जल को अनुपयोगी बना रहे हैं।
🎯 Exam Tip: जल की कमी के कारणों को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत करना उच्च अंक दिलाता है, विशेषकर जब बिंदुओं में उत्तर दिया गया हो।
Question 2. (ii) पंजाब, हरियाणा और तमिलनाडु राज्यों में सबसे अधिक भौम जल विकास के लिए कौन-से कारक उत्तरदायी हैं?
Answer: पंजाब, हरियाणा और तमिलनाडु राज्यों में भौम जल का विकास सर्वाधिक हुआ है। पंजाब तथा हरियाणा में कम वर्षा होने के कारण धरातलीय जल पर्याप्त रूप में नहीं मिलता और भौम जल का प्रयोग अधिक होता है। इन राज्यों की मिट्टी कोमल है जिससे नलकूप खोदना आसान है। तमिलनाडु में चावल की कृषि के लिए अधिक जल की आवश्यकता होती है, इस कारण भौम जल का प्रयोग किया जाता है।
In simple words: पंजाब, हरियाणा और तमिलनाडु में भूजल के अत्यधिक उपयोग का कारण कम सतही जल की उपलब्धता, मुलायम मिट्टी जो नलकूपों के लिए उपयुक्त है, और चावल जैसी जल-गहन फसलों की खेती है।
🎯 Exam Tip: विशेष राज्यों में भूजल के अधिक उपयोग के कारणों को भौगोलिक और कृषि संबंधी कारकों से जोड़कर समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 2. (iii) देश में कुल उपयोग किए गए जल में कृषि क्षेत्र का हिस्सा कम होने की सम्भावना क्यों है?
Answer: देश में कुल उपयोग किए गए जल में कृषि क्षेत्र का हिस्सा कम होने की बड़ी सम्भावना है क्योंकि उद्योग तथा अन्य आर्थिक क्रियाएँ कृषि की अपेक्षा अधिक तेजी से उन्नति कर रही हैं और उनमें अधिकाधिक जल प्रयोग होने की सम्भावना है।
In simple words: कृषि क्षेत्र में जल उपयोग का हिस्सा कम होने की संभावना इसलिए है क्योंकि औद्योगिक और अन्य आर्थिक गतिविधियों में जल की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे कृषि के लिए जल की उपलब्धता घट सकती है।
🎯 Exam Tip: जल के उपयोग में क्षेत्रीय बदलाव के कारणों का विश्लेषण करते समय आर्थिक विकास और सेक्टर-वार वृद्धि को ध्यान में रखना चाहिए।
Question 2. (iv) लोगों पर संदूषित जल/गन्दे पानी के उपभोग के क्या सम्भव प्रभाव हो सकते हैं?
Answer: संदूषित/गन्दे जल के उपभोग से मनुष्य को अनेक रोग लग जाते हैं जिनमें हैजा, पेचिश, तपेदिक, पीलिया आदि प्रमुख हैं। एक अनुमान के अनुसार देश में 80 प्रतिशत पेट के रोग संदूषित/गन्दे जल के उपभोग के कारण पैदा होते हैं।
In simple words: दूषित जल के सेवन से मनुष्यों में हैजा, पेचिश और पीलिया जैसे कई जल-जनित रोग हो सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
🎯 Exam Tip: दूषित जल के स्वास्थ्य प्रभावों को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से बताना, और संबंधित बीमारियों के नाम का उल्लेख करना अच्छे अंक प्राप्त करने में सहायक होता है।
Question 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें (i) देश में जल संसाधनों की उपलब्धता की विवेचना कीजिए और इसके स्थानिक वितरण के लिए उत्तरदायी निर्धारित करने वाले कारक बताइए।
Answer: भारत में जल संसाधन - देश में एक वर्ष में वर्षण से प्राप्त कुल जल की मात्रा लगभग 4,000 घन किमी है। धरातलीय जल और पुनः पूर्तियोग्य भौम जल से 1,869 घन किमी जल उपलब्ध है। इसमें से केवल 60 प्रतिशत जल का लाभदायक उपयोग किया जा सकता है। इस तरह देश में कुल उपयोगी जल संसाधन 1,122 घन किमी है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र भारत के नदी बेसिनों को दर्शाता है, जिसमें सिन्धु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा, तापी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी प्रमुख नदियाँ शामिल हैं। इसमें पश्चिमी और पूर्वी प्रवाही नदियों के समूह, बंगाल की खाड़ी, अरब सागर, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के साथ-साथ पड़ोसी देश पाकिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यानमार को भी दर्शाया गया है। यह मानचित्र भारत के जल संसाधनों के भौगोलिक वितरण को स्पष्ट करता है।
Answer: संसाधन – धरातलीय जल हमें नदियों, तालाबों, झीलों तथा अन्य जलाशयों के रूप में मिलता है। सबसे अधिक धरातलीय जल नदियों में पाया जाता है। कुल धरातलीय जल का लगभग 60 प्रतिशत भाग भारत की तीन प्रमुख नदियों-सिन्धु, गंगा और ब्रह्मपुत्र में से होकर बहता है।
भौम/भूगर्भिक जल – देश में भूगर्भिक जल का वितरण अत्यधिक असमान है। इस पर चट्टानों की संरचना, धरातलीय दशा, जलापूर्ति की दशा आदि तत्त्वों का प्रभाव पड़ता है। भारत के समतल मैदानी भागों में स्थित जलज चट्टानों वाले अधिकांश भाग में, भूगर्भिक जल की अपार राशि विद्यमान है। यहाँ पर प्रवेश्य चट्टानें पायी जाती हैं, जिनमें से जल आसानी से रिसकर भूगर्भिक जल का रूप धारण कर लेता है। भारत के उत्तरी मैदान में भूगर्भिक जल के विशाल भण्डार हैं। लगभग 42 प्रतिशत से भी अधिक भौम जल भारत के विशाल मैदानों में पाया जाता है। इसके विपरीत प्रायद्वीपीय भाग कठोर तथा अप्रवेशनीय चट्टानों का बना हुआ है, जिनमें से जल रिसकर नीचे नहीं जा सकता; इसलिए इस क्षेत्र में भूगर्भिक जल का अभाव है।
In simple words: भारत में जल संसाधन वर्षा, धरातलीय और भूगर्भिक जल स्रोतों से प्राप्त होते हैं, जिनका वितरण भौगोलिक संरचना और वर्षा की मात्रा पर निर्भर करता है; उत्तरी मैदानों में अधिक भूगर्भिक जल उपलब्ध है जबकि प्रायद्वीपीय पठार में कम।
🎯 Exam Tip: जल संसाधनों की उपलब्धता और वितरण के कारकों का विश्लेषण करते समय, भौगोलिक विशेषताओं और जल चक्र के तत्वों को शामिल करना महत्वपूर्ण है।
Question 3. (ii) जल संसाधनों का ह्रास सामाजिक द्वन्द्वों और विवादों को जन्म देते हैं। इसे उपयुक्त उदाहरणों सहित समझाइए ।
Answer: जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ जल की माँग भी तेजी से बढ़ रही है। इसके विपरीत जल की आपूर्ति एक निश्चित सीमा तक ही हो सकती है। यह सीमित आपूर्ति भी अत्यधिक उपयोग, प्रदूषण अथवा अप्रबन्धन के कारण उपयोग के अयोग्य हो सकती है। इस दुर्लभ संसाधन के आवंटन और नियन्त्रण पर तनाव और लड़ाई-झगड़े राज्यों व देशों के बीच विवाद का विषय बन गए हैं।
भारत की अधिकतर नदियाँ अन्तर्राज्यीय विवादों से ग्रस्त हैं। देश की लगभग सभी नदियाँ एक से अधिक राज्यों में बहती हैं और उनका जल भी विभिन्न राज्यों द्वारा प्रयोग किया जाता है। भारत में प्रमुख अन्तर्राज्यीय नदी जल विवाद
(i) तमिलनाडु, कर्नाटक तथा केरल के बीच कावेरी जल विवाद ।
(ii) महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा आन्ध्र प्रदेश के बीच कृष्णा नदी जल विवाद ।
(iii) गुजरात, राजस्थान तथा मध्य प्रदेश के बीच नर्मदा नदी जल विवाद ।
(iv) पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर तथा दिल्ली के बीच रावी नदी जल विवाद ।
(v) पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान के बीच सतलज-यमुना लिंक नहर पर जल विवाद ।
In simple words: जल की बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति राज्यों के बीच नदी जल विवादों को जन्म देती है, जैसे कावेरी, कृष्णा और नर्मदा जल विवाद, जो इस दुर्लभ संसाधन के उचित बंटवारे पर आधारित होते हैं।
🎯 Exam Tip: जल विवादों के कारणों और प्रमुख उदाहरणों को स्पष्ट रूप से दर्शाना, साथ ही उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को समझना, उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।
Question 3. (iii) जल-संभर प्रबन्धन क्या है? क्या आप सोचते हैं कि यह सतत पोषणीय विकास में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है?
Answer: जल-संभर प्रबन्धन – जल-संभर एक ऐसा क्षेत्र है, जिसका जल एक बिन्दु की तरफ प्रवाहित होता है, जो इसे मृदा और जल संरक्षण की आदर्श नियोजन इकाई बना देता है। इसमें एक या अनेक गाँव, कृषि योग्य और कृषि अयोग्य भूमि और विभिन्न वर्गों की जोतें और किसान शामिल हो सकते हैं। जल-संभर विधि से कृषि और कृषि से सम्बन्धित क्रियाकलापों जैसे उद्यान कृषि, वानिकी और वन-वर्धन का समग्र रूप से विकास किया जा सकता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र जल-संभर प्रबंधन के माध्यम से जल संरक्षण को दर्शाता है, जिसमें प्रस्तर कूप (पत्थर के कुएँ) और चेक डैम जैसी संरचनाएँ दिखाई गई हैं। यह दिखाता है कि कैसे वर्षा जल को विभिन्न भू-आकृतियों का उपयोग करके इकट्ठा और संग्रहीत किया जा सकता है, जिससे भूजल पुनर्भरण और सतत जल उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
Answer: जल – संभरता विधि जल संरक्षण का एक महत्त्वपूर्ण उपाय है, जिससे कृषि का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, पारितन्त्रीय ह्रास को रोका जा सकता है और लोगों के जीवन-स्तर को ऊँचा उठाया जा सकता है।
सतत पोषणीय विकास यह व्यवस्था सतत पोषणीय विकास में सहयोग कर सकती है। जल प्रबन्धन के कार्यक्रम कई राज्यों में चल रहे हैं जैसे नीरू-मीरू (जल और आप) कार्यक्रम आन्ध्र प्रदेश में तथा राजस्थान के अलवर जिले में अरवारी पानी संसद । कुछ क्षेत्रों में जल-संभर विकास परियोजनाएँ पर्यावरण और अर्थव्यवस्था का कायाकल्प करने में सफल हुई हैं। फिर भी सफलता कुछ ही को मिली है। अधिकांश घटनाओं के कार्यक्रम अपनी उदीयमान अवस्था पर ही हैं। देश के लोगों को जल-संभर और प्रबन्धन के लाभों को बताकर जागरूकता उत्पन्न करने की आवश्यकता है और इस एकीकृत जल संसाधन प्रबन्धन उपागम द्वारा जल उपलब्धता सतत पोषणीय आधार पर निश्चित रूप से की जा सकती है।
In simple words: जल-संभर प्रबंधन एक क्षेत्र-विशिष्ट योजना है जो मिट्टी और जल संरक्षण पर केंद्रित है, यह सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है क्योंकि यह जल उपलब्धता बढ़ाती है, कृषि में सुधार करती है, और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखती है।
🎯 Exam Tip: जल-संभर प्रबंधन की परिभाषा, उसके उद्देश्यों और सतत विकास में उसकी भूमिका को उदाहरणों सहित स्पष्ट करना, उत्तर को प्रभावी बनाता है।
UP Board Class 12 Geography Chapter 6 Other Important Questions UP Board Class 12 Geography Chapter 6 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. राष्ट्रीय जल नीति, 2002 की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: राष्ट्रीय जल नीति, 2002 की विशेषताएँ राष्ट्रीय जल नीति, 2002 की जल आवंटन प्राथमिकताएँ विस्तृत रूप में निम्नलिखित क्रम में निर्दिष्ट की गई हैं- पेयजल, सिंचाई, जलशक्ति, नौकायन, औद्योगिक और अन्य उपयोग। इस नीति में जल व्यवस्था के लिए प्रगतिशील नए दृष्टिकोण निर्धारित किए गए हैं। इसकी मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं
(i) सिंचाई और बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं में पीने का जल घटक में शामिल करना चाहिए जहाँ पेयजल के स्रोत का कोई भी विकल्प नहीं है।
(ii) पेयजल सभी मानव जाति और प्राणियों को उपलब्ध कराना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
(iii) भौम जल के शोषण को सीमित और नियमित करने के लिए उपाय करने चाहिए।
(iv) सतह और भौम जल दोनों की गुणवत्ता के लिए नियमित जाँच होनी चाहिए। जल की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक चरणबद्ध कार्यक्रम शुरू किया जाना चाहिए।
(v) जल के सभी विविध प्रयोगों में कार्यक्षमता सुधरनी चाहिए।
(vi) दुर्लभ संसाधन के रूप में, जल के लिए जागरूकता विकसित करनी चाहिए।
(vii) शिक्षा विनिमय, उपक्रमणों, प्रेरकों और अनुक्रमणों द्वारा संरक्षण चेतना बढ़ानी चाहिए ।
In simple words: राष्ट्रीय जल नीति, 2002, जल के आवंटन में पेयजल को प्राथमिकता देती है, भूजल के अंधाधुंध दोहन को नियंत्रित करती है, जल की गुणवत्ता की नियमित जांच और सुधार पर जोर देती है, और जल संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करती है।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय जल नीति की प्रमुख विशेषताओं को बिंदुओं में प्रस्तुत करना और प्रत्येक बिंदु को संक्षेप में समझाना, नीति की समझ को दर्शाता है और अच्छे अंक प्राप्त करने में मदद करता है।
Question 2. जल-संभर प्रबन्धन के उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।
Answer: जल-संभर प्रबन्धन के उद्देश्य जल संभर प्रबन्धन का मूल उद्देश्य क्षेत्र के संसाधनों के वैज्ञानिक मूल्यांकन तथा उनके सतत पोषणीय उपयोग द्वारा उनका संरक्षण तथा परिरक्षण करना है। इस कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं
(i) वर्षा निर्भर तथा संसाधनों की कमी वाले क्षेत्रों में कृषि की उत्पादकता और उत्पादन को बढ़ाना।
(ii) कृषि के साथ-साथ सम्बन्धित क्रियाकलापों; जैसे उद्यान कृषि, जैव कृषि, वानिकी और वन वर्धन का समग्र रूप से विकास करना ।
(iii) चरागाहों का संवर्धन तथा पशुपालन को अधिक-से-अधिक लाभकारी बनाना।
(iv) सामुदायिक प्राकृतिक संसाधनों के दक्ष प्रबन्ध पर बल देना ताकि मृदा अपरदन और बाढ़ के प्रकोप को कम किया जा सके ।
(v) भू-जल स्तर को ऊँचा उठाकर जल की लवणता को नियन्त्रित करना और परिणामस्वरूप जल की उपयोग क्षमता को बढ़ाना। इससे भूमि का भी उपचार होता है।
(vi) वनों के कटाव को रोककर वन्य जीवन को नैसर्गिक विकास के अवसर प्रदान करना तथा लोगों को वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध कराकर पर्यावरण के ह्रास को नियन्त्रित करना।
(vii) लोगों को विशेषतः स्त्रियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना ताकि उनका जीवन-स्तर ऊँचा उठ सके। रोजगार के ये साधन पेड़ लगाने, घास काटने व उसे बेचने, तालाबों की तली में भरी गाद को निकालने, मछली पालन, सिंचाई, खेती में मजदूरी तथा वृक्षोत्पादों की बिक्री में पैदा होते हैं।
In simple words: जल-संभर प्रबंधन का उद्देश्य संसाधनों का सतत उपयोग करते हुए उनका संरक्षण करना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना, भूजल स्तर में सुधार करना, पर्यावरणीय क्षरण को रोकना और स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है।
🎯 Exam Tip: जल-संभर प्रबंधन के उद्देश्यों को विभिन्न पहलुओं जैसे कृषि, पर्यावरण, और सामाजिक-आर्थिक विकास के संदर्भ में सूचीबद्ध करना, एक व्यापक उत्तर प्रदान करता है।
Question 3. वर्षाजल संग्रहण क्या है? इसकी तकनीकों व उद्देश्यों को समझाइए।
Answer: वर्षाजल संग्रहण-वर्षा के जल को भविष्य के उपयोग के लिए इकट्ठा करना ही 'वर्षाजल संग्रहण' कहलाता है। वर्षाजल संग्रहण के दो रूप हैं
(i) धरातल पर एकत्र करना एवं
(ii) धरातल के नीचे भू-जल का पुनर्भरण करना।
वर्षाजल संग्रहण की तकनीकें वर्षाजल संग्रहण की उल्लेखनीय तकनीकें निम्नलिखित हैं
(i) छत के वर्षाजल का संग्रहण।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र वर्षाजल संग्रहण के विभिन्न तरीकों को दर्शाता है, जिसमें छतों से वर्षाजल को हैंडपंपों या परित्यक्त कुओं में पुनर्भरण के लिए इकट्ठा करना, खंदकों द्वारा पुनर्भरण, और सीमेंट नाला बांध जैसे संरचनाओं का उपयोग करके जल संचयन शामिल है। यह स्पष्ट करता है कि कैसे वर्षाजल को भूजल पुनर्भरण और स्थानीय उपयोग के लिए कुशलता से प्रबंधित किया जा सकता है।
Answer:
(ii) बन्द व बेकार पड़े कुओं का पुनर्भरण ।
(iii) खुदे हुए कुओं का पुनर्भरण ।
(iv) बन्द व चालू हैण्डपम्पों का पुनर्भरण ।
(v) रिसाव गड्डों का निर्माण ।
(vi) खेतों के चारों तरफ खाइयाँ बनाना।
(vii) छोटी सरिताओं पर बंधिकाएँ और रोक बाँध बनाना ।
(viii) पुनर्भरण शाफ्ट द्वारा जल संग्रहण ।
(ix) बोर कुएँ सहित क्षैतिज शाफ्ट द्वारा जल संग्रहण।
(x) छनाई ताल, नाला बन्द, सीमेण्ट प्लग जैसी फैलाव तकनीकें अपनाना।
वर्षाजल संग्रहण के उद्देश्य . वर्षाजल संग्रहण के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं
(i) जल की स्थानीय घरेलू माँग को पूरा करना विशेष रूप से गर्मियों में जब पानी की सबसे अधिक समस्या होती है।
(ii) भौम जल के भण्डारों में वृद्धि करना तथा जल स्तर को ऊँचा उठाना ताकि पर्यावरणीय सन्तुलन बना रहे। इससे ऊर्जा का संरक्षण होगा, क्योंकि जितना भू-जल ऊँचा होगा उसे निकालने में उतनी ही बिजली कम लगेगी ।
(iii) जल की नियमित आपूर्ति को सुनिश्चित करना जिससे सूखे या अनावृष्टि के हालातों में मुकाबला किया जा सके ।
(iv) फ्लुओराइड और नाइट्रेट्स; जैसे-संदूषकों को कम करके भूमिगत जल की गुणवत्ता में सुधार करना।
(v) जल के सतही बहाव को कम करना जो अन्यथा नालियों में भरकर उन्हें अवरुद्ध कर देता है।
(vi) जल को सड़कों पर न फैलने देना। इससे पानी और सड़क क्षेत्रों का बचाव होता है।
(vii) भौम जल के प्रदूषण को कम करना।
(viii) मृदा अपरदन और बाढ़ को रोकना तथा इसका जलभृतों के पुनर्भरण के लिए उपयोग करके तटीय प्रदेशों में लवणीय जल के प्रवेश को रोकना।
In simple words: वर्षाजल संग्रहण बारिश के पानी को इकट्ठा कर भूजल को रिचार्ज करने और स्थानीय उपयोग के लिए जमा करने की प्रक्रिया है; इसका उद्देश्य जल की मांग पूरी करना, भूजल स्तर बढ़ाना, सूखे से निपटना और जल की गुणवत्ता में सुधार करना है।
🎯 Exam Tip: वर्षाजल संग्रहण की परिभाषा, उसकी तकनीकों और उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से समझाना, खासकर जब आप उनके पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक लाभों पर जोर देते हैं, तो यह उत्तर अधिक प्रभावी होता है।
Question 4. भारत में सिंचाई की आवश्यकता के कारणों को समझाइए ।
Answer: भारत में सिंचाई की आवश्यकता भारत में सिंचाई की आवश्यकता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं
(i) वर्षा की अनिश्चितता - भारत में वर्षा की मात्रा और समय अनिश्चित है। मानसूनी वर्षा कभी निश्चित समय से पहले शुरू होती है और कभी निश्चित समय से पहले खत्म हो जाती है। कभी बाढ़ आती है तो कभी सूखा पड़ जाता है, अतः मानसूनी वर्षा की इस अनिश्चितता के कारण अच्छी उपज लेने के लिए सिंचाई आवश्यक है।
(ii) वर्षा का असमान वितरण - भारत में वार्षिक वर्षा का औसत लगभग 118 सेमी है, लेकिन इसका क्षेत्रीय वितरण बहुत असमान है। चेरापूँजी और मासिनराम में वर्ष में 1200 सेमी से अधिक वर्षा होती है। इसके विपरीत पश्चिमी राजस्थान और लद्दाख में प्रतिवर्ष 20 सेमी से भी कम वर्षा होती है, अतः कम वर्षा वाले क्षेत्रों में अच्छी फसल के लिए सिंचाई आवश्यक है।
(iii) वर्षा का कुछ महीनों तक सीमित होना - भारत में 80 प्रतिशत वर्षा जून से सितम्बर तक केवल चार महीनों में ही होती है। उष्ण कटिबन्धीय देश होने के कारण ग्रीष्म ऋतु में तापमान ऊँचे रहते हैं, अतः सूखे के शेष चार महीनों में सिंचाई की सुविधाएँ जुटाना आवश्यक हो जाता है।
(iv) जनसंख्या वृद्धि - भारत की जनसंख्या निरन्तर बढ़ रही है। बढ़ी हुई जनसंख्या के लिए अतिरिक्त खाद्यान्न पैदा करने के लिए सिंचाई का उपयोग किया जाता है।
(v) कुछ फसलों को अधिक जल चाहिए - चावल, गन्ना, जूट तथा सब्जियों को कुछ अन्तराल पर नियमित रूप से जल चाहिए। ऐसी फसलों के लिए पानी की पूर्ति सिंचाई द्वारा ही सम्भव है।
(vi) व्यापारिक फसलों के उत्पादन के लिए - व्यापारिक फसलों से किसान को अधिक आय होती है तथा देश को विदेशी मुद्रा मिलती है। ऐसी फसलों का उत्पादन सुनिश्चित सिंचाई से ही बढ़ सकता है।
(vii) वर्षा का बौछार के रूप में होना - मानसूनी वर्षा तेज बौछारों के रूप में होती है। ऐसी वर्षा का पानी बह जाता है तथा उसे धरातल में रिसने का अवसर ही नहीं मिलता है। ऐसे में भूमि प्यासी रह जाती है, अतः धरती की प्यास बुझाने के लिए सिंचाई आवश्यक हो जाती है।
In simple words: भारत में सिंचाई की आवश्यकता वर्षा की अनिश्चितता, असमान वितरण, कुछ महीनों तक वर्षा की सीमा, बढ़ती जनसंख्या के लिए खाद्यान्न उत्पादन, जल-गहन और व्यापारिक फसलों की खेती, और वर्षा के तीव्र बहाव जैसे कारकों के कारण है।
🎯 Exam Tip: सिंचाई की आवश्यकता के कारणों को क्रमबद्ध और तार्किक रूप से समझाना, भौगोलिक और आर्थिक पहलुओं को शामिल करते हुए, एक पूर्ण और प्रभावी उत्तर के लिए महत्वपूर्ण है।
लघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. भौम जल के वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों को समझाइए।
Answer: भौम जल के वितरण को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं
(i) भारत के उत्तरी समतल जलोढ़ मैदानों में भौम जल के विशाल भण्डार हैं। इसका कारण यह है कि यहाँ कोमल तथा प्रवेश्य चट्टानें पायी जाती हैं जिनमें से वर्षा एवं बाढ़ का जल रिस-रिसकर भौम जल का रूप लेता रहता है।
(ii) प्रायद्वीपीय भारत की कठोर चट्टानी भूमियों में जल का रिसाव बहुत ही धीमा होने के कारण यहाँ भौम जल की सम्भावित क्षमता कम है।
(iii) प्रायद्वीपीय भारत के राज्यों-महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और तमिलनाडु में भौम जल की सम्भावित क्षमता इसलिए अधिक है क्योंकि इन राज्यों का आकार बड़ा है।
In simple words: भूजल का वितरण भूगर्भिक संरचना (जैसे जलोढ़ मैदानों में मुलायम चट्टानें और प्रायद्वीपीय पठार में कठोर चट्टानें) और वर्षा एवं बाढ़ से होने वाले जल के पुनर्भरण की दर पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: भूजल वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों को क्षेत्रीय भौगोलिक विशेषताओं, जैसे मिट्टी और चट्टानों के प्रकार, से जोड़कर समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 2. प्रमुख जल संसाधनों को समझाइए ।
Answer: प्रमुख जल संसाधन निम्नलिखित हैं
(i) पृष्ठीय (धरातलीय) जल – यह जल नदियों, झीलों तथा तालाबों में पाया जाता है। पृष्ठीय जल का मूल स्रोत वर्षा है। मानव द्वारा पृष्ठीय जल का उपयोग पीने के लिए किया जाता है। घरेलू उपयोग, कृषि तथा उद्योगों के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।
(ii) भौम जल – वर्षा से प्राप्त जल का एक अंश पृथ्वी पर रिसकर नीचे चला जाता है जो कि 'भौम जल' कहलाता है। इसका उपयोग कृषि व घरेलू कार्यों में किया जाता है।
In simple words: प्रमुख जल संसाधन पृष्ठीय जल (नदियों, झीलों, तालाबों में पाया जाने वाला वर्षा जल) और भूजल (वर्षा जल जो पृथ्वी में रिसकर जमा हो जाता है) हैं, जिनका उपयोग पीने, कृषि और उद्योगों सहित विभिन्न मानवीय जरूरतों के लिए किया जाता है।
🎯 Exam Tip: पृष्ठीय जल और भूजल दोनों को उनके स्रोतों और उपयोगों के साथ स्पष्ट रूप से परिभाषित करना, जल संसाधनों की व्यापक समझ को दर्शाता है।
Question 3. भारत में जल संसाधनों के संरक्षण की विधियों को समझाइए।
Answer: भारत में जल संसाधनों के संरक्षण की विधियाँ निम्नलिखित हैं
(i) नदियों पर बाँध बनाकर तथा विशाल कृत्रिम तालाब बनाकर जल का संरक्षण किया जा सकता है।
(ii) प्रदूषित जल का पुनश्चक्रण करके जल संसाधनों का संरक्षण किया जा सकता है।
(iii) सिंचाई की फव्वारा और टपकन विधियों का प्रयोग किया जाना चाहिए।
(iv) सिंचाई में नालियों के स्थान पर पाइपों का प्रयोग किया जाना चाहिए।
(v) अधिकाधिक वृक्षारोपण करके जल का संरक्षण किया जा सकता है।
(vi) कम जल चाहने वाली फसलों को बोया जाना चाहिए ।
In simple words: भारत में जल संरक्षण के लिए बांध निर्माण, प्रदूषित जल का पुनर्चक्रण, आधुनिक सिंचाई विधियों का उपयोग, वृक्षारोपण और कम पानी वाली फसलों की खेती जैसे उपाय अपनाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: जल संरक्षण की विधियों को सूचीबद्ध करना और प्रत्येक विधि के पीछे के सिद्धांत को संक्षेप में समझाना, उत्तर को व्यापक बनाता है।
Question 4. जल के मुख्य उपयोगों को समझाइए ।
Answer: जल के प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं
(i) जल का उपयोग सिंचाई में किया जाता है।
(ii) जल का उपयोग उद्योगों में विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है।
(iii) जल का उपयोग घरेलू कार्यों में किया जाता है।
(iv) जल का उपयोग शक्ति उत्पादन में किया जाता है।
(v) जल का उपयोग मनोरंजन, मत्स्य पालन व परिवहन के लिए किया जाता है।
In simple words: जल का उपयोग मुख्य रूप से कृषि सिंचाई, औद्योगिक प्रक्रियाओं, घरेलू खपत, बिजली उत्पादन, मनोरंजन, मछली पालन और परिवहन सहित विभिन्न क्षेत्रों में होता है।
🎯 Exam Tip: जल के विभिन्न उपयोगों को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से बताना, जल संसाधनों के महत्व को दर्शाता है।
Question 5. भारत के विशाल मैदान भौम जल संसाधनों से सम्पन्न क्यों हैं? स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत के विशाल मैदान भौम जल संसाधनों से सम्पन्न होने के निम्नलिखित कारण हैं
(i) विशाल मैदानों में जलोढ़ मृदा पायी जाती है जिसमें जल आसानी से रिस जाता है।
(ii) इन मैदानों में बहने वाली नदियाँ सदानीरा हैं। इनमें वर्ष-भर जल प्रवाह उच्च रहता है।
(iii) इन मैदानों में पर्याप्त गहराई तक अवसादी शैल पायी जाती है जिससे जल की मात्रा का अधिक संग्रहण होता है।
(iv) इन मैदानों में मानसून वर्षा भी पर्याप्त होती है जो जल का एक स्रोत है और इस वर्षा का जल रिसकर भौम जल बनाता है।
In simple words: भारत के विशाल मैदानों में जलोढ़ मिट्टी, सदानीरा नदियाँ, गहरी अवसादी चट्टानें और पर्याप्त मानसूनी वर्षा भूजल के समृद्ध भंडार का कारण बनती हैं, क्योंकि ये सभी कारक जल के आसान पुनर्भरण और संग्रहण में सहायक होते हैं।
🎯 Exam Tip: विशाल मैदानों में भूजल की समृद्धि के भौगोलिक और भूगर्भीय कारणों को स्पष्ट रूप से समझाना, क्षेत्रीय जल उपलब्धता की गहरी समझ को दर्शाता है।
Question 6. प्रायद्वीपीय भारत की तुलना में विशाल मैदानों में सिंचाई अधिक विकसित क्यों है?
Answer: प्रायद्वीपीय भारत की तुलना में विशाल मैदानों में सिंचाई अधिक विकसित होने के कारण निम्नलिखित हैं
(i) उत्तरी विशाल मैदान की मृदा अपेक्षाकृत उपजाऊ है, इसलिए यहाँ सिंचाई की सुविधाएँ बढ़ाई गई हैं।
(ii) विशाल मैदान में मुलायम मृदा होने से नहरें तथा नलकूप बनाना आसान है।
(iii) विशाल मैदान में नदियाँ हिमालय से निकलती हैं; इसलिए. उनमें सदा जल रहता है जो कि नहर निकालने के लिए आवश्यक है।
(iv) विशाल मैदान एक समतल मैदान है। इस मैदान में नदियाँ मन्द गति से बहती हैं, जिनसे नहरें निकालना आसान है।
In simple words: विशाल मैदानों में उपजाऊ और मुलायम मिट्टी, हिमालय से निकलने वाली बारहमासी नदियाँ और समतल भूभाग जैसी अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियाँ सिंचाई के विकास को आसान बनाती हैं, जो प्रायद्वीपीय भारत में कठिन चट्टानी संरचना के कारण अधिक चुनौतीपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: प्रायद्वीपीय भारत की तुलना में विशाल मैदानों में सिंचाई के अधिक विकास के कारणों को भौगोलिक विशेषताओं से जोड़कर समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 7. जल संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता क्यों है?
Answer: जल संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता के कारण निम्नलिखित हैं
(i) देश के अनेक भागों में जलाभाव की स्थिति है।
(ii) देश में वर्षा का कुछ ही समय में होना ।
(iii) वर्षा का वितरण अत्यधिक असमान होना।
(iv) जल की माँग में तेजी से वृद्धि हो रही है जबकि आपूर्ति तेजी से कम हो रही है।
(v) जल को प्रदूषित होने से बचाने के लिए।
In simple words: जल संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि देश के कई हिस्सों में पानी की कमी है, वर्षा अनियमित और असमान है, पानी की मांग बढ़ रही है जबकि आपूर्ति घट रही है, और जल प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है।
🎯 Exam Tip: जल संरक्षण की आवश्यकता के कारणों को बढ़ती मांग, सीमित आपूर्ति और पर्यावरणीय खतरों के संदर्भ में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना चाहिए।
Question 8. वर्षा जल संग्रहण के आर्थिक और सामाजिक मूल्यों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: वर्षा जल संग्रहण के आर्थिक और सामाजिक मूल्य निम्नलिखित हैं
(i) जल की निरन्तर माँग को पूरा करते रहना।
(ii) नालियों को रोकने वाले सतही प्रवाह को कम करना।
(iii) सड़कों पर जलभराव को रोकना और प्रदूषण को घटाना।
(iv) भौम जल की गुणवत्ता को सुधारकर उसे बढ़ाना ।
(v) मृदा अपरदन को रोकना।
(vi) ग्रीष्मकाल में जल की आवश्यकता को पूरा करना।
In simple words: वर्षा जल संग्रहण से लगातार जल की मांग पूरी होती है, भूजल की गुणवत्ता सुधरती है, सड़कों पर जलभराव और प्रदूषण कम होता है, मृदा अपरदन रुकता है, और ग्रीष्मकाल में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होती है, जिससे आर्थिक और सामाजिक लाभ मिलते हैं।
🎯 Exam Tip: वर्षा जल संग्रहण के आर्थिक और सामाजिक मूल्यों को स्पष्ट बिंदुओं में प्रस्तुत करना और उनके सीधे लाभों पर जोर देना महत्वपूर्ण है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. धरातलीय जल कहाँ मिलता है?
Answer: धरातलीय जल हमें नदियों, झीलों, तालाबों तथा अन्य जलाशयों के रूप में मिलता है।
In simple words: धरातलीय जल नदियों, झीलों और तालाबों जैसे प्राकृतिक जलाशयों में पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: धरातलीय जल के स्रोतों को सीधे और सटीक रूप से परिभाषित करना, संक्षिप्त उत्तरों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 2. भूगर्भिक जल को प्रभावित करने वाले कारक बताइए।
Answer: भूगर्भिक जल को प्रभावित करने वाले कारक हैं
(i) चट्टानों की संरचना
(ii) धरातलीय दशा एवं
(iii) जलापूर्ति की दशा आदि ।
In simple words: भूगर्भिक जल की उपलब्धता और वितरण चट्टानों की संरचना, भूमि की सतह की स्थिति और जल के पुनर्भरण की दर जैसे कारकों से प्रभावित होता है।
🎯 Exam Tip: भूगर्भिक जल को प्रभावित करने वाले मुख्य कारकों को सूचीबद्ध करना, इस विषय की मूलभूत समझ को दर्शाता है।
Question 3. भौम जल का सर्वाधिक उपयोग किसमें किया जाता है?
Answer: भौम जल का सर्वाधिक उपयोग सिंचाई के लिए किया जाता है।
In simple words: भारत में भूजल का सबसे अधिक उपयोग कृषि सिंचाई के लिए होता है ताकि फसलों को पर्याप्त पानी मिल सके।
🎯 Exam Tip: भूजल के प्रमुख उपयोग को स्पष्ट रूप से बताना, जल संसाधनों के उपयोग पैटर्न को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 4. जल की गुणवत्ता से क्या तात्पर्य है?
Answer: जल की गुणवत्ता से तात्पर्य जल की शुद्धता अथवा अनावश्यक बाहरी पदार्थों से रहित जल से है।
In simple words: जल की गुणवत्ता का अर्थ है पानी का शुद्ध और बाहरी, हानिकारक तत्वों से मुक्त होना।
🎯 Exam Tip: जल की गुणवत्ता की परिभाषा को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत करना चाहिए, जिसमें शुद्धता और अवांछित पदार्थों की अनुपस्थिति पर जोर दिया गया हो।
Question 5. जल को मापने की कोई दो प्रमुख इकाइयाँ बताइए ।
Answer: जल को मापने की प्रमुख इकाई
(i) घनमीटर जल एवं
(ii) हेक्टेयर मीटर जल ।
In simple words: जल की मात्रा को मापने के लिए घनमीटर और हेक्टेयर मीटर जैसी इकाइयाँ उपयोग की जाती हैं।
🎯 Exam Tip: जल को मापने की इकाइयों को सटीक रूप से याद रखना और उन्हें सूचीबद्ध करना आवश्यक है।
Question 6. भूमिगत जल किसे कहते हैं?
Answer: वर्षा का जल मृदा में प्रवेश कर भूमिगत हो जाता है, उसे भौमजल' या भूमिगतजल' कहा जाता है।
In simple words: भूमिगत जल वह वर्षा जल है जो मिट्टी में रिसकर भूमि के नीचे जमा हो जाता है, जिसे भूजल भी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: भूमिगत जल की परिभाषा में उसके स्रोत (वर्षा) और उसकी स्थिति (मृदा के नीचे) को स्पष्ट रूप से शामिल करना चाहिए।
Question 7. सिंचाई किसे कहते हैं?
Answer: जल की प्रणाली अथवा नालियों द्वारा कृत्रिम रूप से खेतों तक पहुँचाने को सिंचाई कहते हैं।
In simple words: सिंचाई का अर्थ है फसलों की वृद्धि के लिए खेतों तक कृत्रिम रूप से पानी पहुँचाना।
🎯 Exam Tip: सिंचाई की परिभाषा में 'कृत्रिम' शब्द और 'खेतों तक पानी पहुँचाने' की क्रिया पर जोर देना चाहिए।
Question 8. शष्क व अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में जल संरक्षण के कोई दो प्रमुख उपाय बताइए।
Answer:
(i) शुष्क कृषि प्रणाली एवं
(ii) बौछारी तथा टपकन सिंचाई ।
In simple words: शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में जल संरक्षण के प्रमुख उपाय शुष्क कृषि प्रणालियों का उपयोग करना और बौछारी तथा टपकन सिंचाई जैसी कुशल विधियों को अपनाना है।
🎯 Exam Tip: शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में जल संरक्षण के उपायों में जल-कुशल कृषि तकनीकों को शामिल करना महत्वपूर्ण है।
Question 9. जल-संभर से क्या आशय है?
Answer: जल-संभर प्रकृति द्वारा निर्मित एक ऐसा सुनिश्चित क्षेत्र होता है जिसका जल एक ही बिन्दु की तरफ प्रवाहित होता है।
In simple words: जल-संभर एक भौगोलिक क्षेत्र है जहाँ वर्षा का पानी एक सामान्य बिंदु पर बहकर इकट्ठा होता है।
🎯 Exam Tip: जल-संभर की परिभाषा में 'निश्चित क्षेत्र' और 'एक ही बिंदु पर प्रवाहित जल' के तत्वों को शामिल करना चाहिए।
Question 10. जल-संभर प्रबन्धन से क्या तात्पर्य है?
Answer: जल-संभर प्रबन्धन से तात्पर्य धरातलीय और भौम जल संसाधनों के संरक्षण और उनके दक्ष प्रबन्धन से है।
In simple words: जल-संभर प्रबंधन का अर्थ है किसी विशेष क्षेत्र में सतही और भूजल संसाधनों का कुशलता से संरक्षण और प्रबंधन करना।
🎯 Exam Tip: जल-संभर प्रबंधन की परिभाषा में 'संरक्षण' और 'दक्ष प्रबंधन' पर जोर देना चाहिए, जो इसके मुख्य उद्देश्यों को दर्शाता है।
Question 11. जल-संभर प्रबन्धन का मूल उद्देश्य क्या है?
Answer: जल-संभर प्रबन्धन का मूल उद्देश्य क्षेत्र के संसाधनों के वैज्ञानिक मूल्यांकन तथा उनके सतत पोषणीय उपयोग द्वारा उनका संरक्षण तथा परिरक्षण करना है।
In simple words: जल-संभर प्रबंधन का प्राथमिक लक्ष्य किसी क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करके उनका सतत और संरक्षित उपयोग सुनिश्चित करना है।
🎯 Exam Tip: जल-संभर प्रबंधन के मूल उद्देश्य में 'वैज्ञानिक मूल्यांकन' और 'सतत पोषणीय उपयोग' जैसे मुख्य शब्दों को शामिल करना चाहिए।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
Question 1. भारत में विश्व जल संसाधन का कितना भाग पाया जाता है
(a) 4 प्रतिशत
(b) 1 प्रतिशत
(c) 3 प्रतिशत
(d) 2 प्रतिशत ।
Answer: (a) 4 प्रतिशत
In simple words: भारत में विश्व के कुल जल संसाधनों का लगभग 4 प्रतिशत हिस्सा है, जो देश की विशाल जनसंख्या के लिए महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: भारत में विश्व के कुल जल संसाधनों के अनुपात से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी को याद रखना आवश्यक है।
Question 2. भारत में भौम जल के कुल उपलब्ध संसाधनों का कितना प्रतिशत भाग विकसित किया जा सका
(a) 40 प्रतिशत
(b) 55 प्रतिशत
(c) 32 प्रतिशत
(d) 25 प्रतिशत ।
Answer: (c) 32 प्रतिशत
In simple words: भारत में कुल भूजल संसाधनों का लगभग 32 प्रतिशत भाग ही अब तक विकसित किया जा सका है।
🎯 Exam Tip: भूजल विकास के प्रतिशत से संबंधित संख्यात्मक डेटा को याद रखना, परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. सिंचाई की आवश्यकता का क्या कारण है
(a) फसलों की प्रकृति
(b) वर्षा की अनिश्चितता
(c) वर्षा का असमान वितरण
(d) उपर्युक्त सभी ।
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: सिंचाई की आवश्यकता फसलों की प्रकृति, वर्षा की अनिश्चितता और उसके असमान वितरण जैसे कई कारकों के कारण होती है।
🎯 Exam Tip: सिंचाई की आवश्यकता के सभी प्रासंगिक कारणों को समझना, एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
Question 4. वर्षण से प्राप्त जल कैसा होता है
(a) अलवणीय
(b) लवणीय
(c) पृष्ठीय
(d) वायुमण्डलीय ।
Answer: (a) अलवणीय
In simple words: वर्षा से प्राप्त जल आमतौर पर मीठा और अलवणीय होता है, जो पीने और कृषि के लिए उपयुक्त होता है।
🎯 Exam Tip: वर्षण के जल की प्रकृति (अलवणीय) को जानना, जल विज्ञान की मूलभूत अवधारणा है।
Question 5. गंगा नदी भारत के किस भाग में बहती है
(a) उत्तरी
(b) पूर्वी
(c) पश्चिमी
(d) दक्षिणी ।
Answer: (a) उत्तरी
In simple words: गंगा नदी भारत के उत्तरी मैदानी भागों में बहती है, जो देश के सबसे महत्वपूर्ण नदी बेसिनों में से एक है।
🎯 Exam Tip: भारत की प्रमुख नदियों और उनके भौगोलिक प्रवाह क्षेत्रों का ज्ञान मानचित्र-आधारित और तथ्यात्मक प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 6. वर्षा का जल बहकर नदियों, झीलों और तालाबों में चला जाता है, उसे क्या कहते हैं
(a) भौम जल
(b) पृष्ठीय जल
(c) अलवणीय जल
(d) महासागरीय जल ।
Answer: (b) पृष्ठीय जल
In simple words: वर्षा का जल जो सतह पर बहता हुआ नदियों, झीलों और तालाबों में जमा होता है, उसे पृष्ठीय जल कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: पृष्ठीय जल की परिभाषा और उसके स्रोतों को समझना, जल चक्र की मूलभूत अवधारणाओं का हिस्सा है।
Question 7. भारत में जल अधिनियम कब बनाया गया
(a) 1970 में
(b) 1972 में
(c) 1974 में
(d) 1976 में।
Answer: (c) 1974 में
In simple words: भारत में जल अधिनियम 1974 में बनाया गया था, जिसका उद्देश्य जल प्रदूषण को रोकना और जल संसाधनों का प्रबंधन करना था।
🎯 Exam Tip: जल से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनों और उनकी स्थापना के वर्ष को याद रखना, नीतिगत समझ को दर्शाता है।
Question 8. राष्ट्रीय जल नीति कब लागू की गई
(a) सन् 2000 में
(b) सन् 2002 में
(c) सन् 2004 में
(d) सन् 2005 में।
Answer: (b) सन् 2002 में
In simple words: भारत में राष्ट्रीय जल नीति 2002 में लागू की गई थी, जिसका उद्देश्य जल संसाधनों के सतत विकास और प्रबंधन के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करना है।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय जल नीति के लागू होने की तिथि को याद रखना, जल प्रबंधन नीतियों की ऐतिहासिक जानकारी के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 9. रालेगैन सिद्धि किस राज्य में है
(a) गुजरात
(b) महाराष्ट्र
(c) उत्तर प्रदेश
(d) राजस्थान ।
Answer: (b) महाराष्ट्र
In simple words: रालेगैन सिद्धि महाराष्ट्र में स्थित एक आदर्श गाँव है जिसने जल संरक्षण और सतत विकास में अनुकरणीय कार्य किया है।
🎯 Exam Tip: जल संरक्षण के लिए प्रसिद्ध स्थानों और उनके राज्यों को जानना, केस स्टडी-आधारित प्रश्नों के लिए उपयोगी हो सकता है।
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