UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 27 Measure of Central Tendency Arithmetic Mean

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Detailed Chapter 27 केंद्रीय प्रवृत्ति का माप अंकगणितीय माध्य UP Board Solutions for Class 12 Economics

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Class 12 Economics Chapter 27 केंद्रीय प्रवृत्ति का माप अंकगणितीय माध्य UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions For Class 12 Economics Chapter 27 Measure Of Central Tendency: Arithmetic Mean (केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप : समान्तर माध्य)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (6 अंक)

 

Question 1. समान्तर माध्य से आप क्या समझते हैं ? समान्तर माध्य के प्रकार बताइए।
Answer: साधारण बोलचाल की भाषा में समान्तर माध्य को औसत कहते हैं। समान्तर माध्य केन्द्रीय प्रवृत्ति का एक मापक है। वह संख्या जो किसी समूह विशेष के सभी आँकड़ों का प्रतिनिधित्व करती है, समान्तर माध्य कहलाती है। समान्तर माध्य वह मान है जो दिये हुए पदों के योगफल में पदों की संख्या से भाग देने पर प्राप्त होता है। उदाहरण के लिए-यदि छः बालकों की आयु क्रमशः 5, 7, 9, 11, 13 व 15वर्ष है तो इसका समान्तर माध्य = \(\frac { 5+7+9+11+13+15 }{ 6 }\) = \(\frac { 60 }{ 6 }\) = 10 वर्ष होगा।
समान्तर माध्य निम्नलिखित रूप में परिभाषित किया जा सकता है प्रो० होरेस सैक्रिस्ट के अनुसार, “एक समंकमाला के पदों के मूल्यों के योग को उनकी संख्या से भाग देने पर जो संख्या प्राप्त होती है, उसे 'माध्य' कहते हैं।” क्रॉक्सटन व क्राउड़न के अनुसार, “माध्य समंकों के विस्तार के अन्तर्गत स्थित एक ऐसा मूल्य है जिसका प्रयोग श्रेणी के सभी मूल्यों का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया जाता है, क्योंकि माध्य समंकों के विस्तार के अन्तर्गत ही कहीं होता है; अतः यह केन्द्रीय मूल्य का माप कहा जाता है।”
गणितीय माध्य या समान्तर माध्य के प्रकार गणितीय या समान्तर माध्य के निम्नलिखित दो प्रकार होते हैं 1. सरल समान्तर माध्य तथा 2. भारित समान्तर माध्य।
1. सरले समान्तर माध्य – सरल समान्तर माध्य में समूह के सभी पदों या समंकों को समान महत्त्व दिया जाता है तथा इसकी गणना पदों के योगफल में पदों की संख्या से भाग देकर की जाती है।
2. भारित समान्तर माध्य – भारित समान्तर माध्य में प्रत्येक पद को उसके महत्त्व के अनुसार कम या अधिक भार प्रदान किया जाता है। पद मूल्यों को उसके महत्त्व के अनुसार भार देकर समान्तर माध्य निकालना ही भारित समान्तर माध्य कहलाता है।
In simple words: Arithmetic mean is simply the average of a set of numbers. It's calculated by summing all values and dividing by the count of values. There are two main types: simple (where all values are equally important) and weighted (where values have different importance).

🎯 Exam Tip: Clearly defining the arithmetic mean and explaining its types with simple examples can fetch full marks. Mathematical formulas for calculation are essential.

 

Question 2. समान्तर माध्य के गुण-दोष लिखिए ।
Answer: समान्तर माध्य के गुण- समान्तर माध्य में निम्नलिखित गुण पाये जाते हैं
1. सरलता – समान्तर मध्य में सरलता का गुण पाया जाता है। एक साधारण व्यक्ति भी इसकी गणना सरलतापूर्वक कर सकता है, क्योंकि इसको समझना आसान होता है।
2. समस्त पदों का प्रतिनिधित्व – समान्तर माध्य ज्ञात करने के लिए सम्पूर्ण समंकों का प्रयोग किया जाता है; अतः यह सभी पदों का प्रतिनिधित्व करता है।
3. निश्चितता – संमान्तर मध्य सदैव एक ही होता है। श्रेणी चाहे जिस ढंग से लिखी जाए, इसमें कोई अन्तर नहीं आता; अतः इसमें निश्चितता का गुण पाया जाता है।
4. तुलना का आधार – समान्तर माध्य के द्वारा विभिन्न समंकों में तुलना की जा सकती है; अतः समान्तर माध्य तुलना का आधार प्रस्तुत करता है।
5. बीजगणितीय विवेचन सम्भव होता है – समान्तर माध्य का प्रयोग बीजगणितीय क्रियाओं में सम्भव है; अतः इस माध्य का प्रयोग उच्च-स्तरीय सांख्यिकीय विश्लेषण में किया जाता है।
समान्तर माध्य के दोष – समान्तर माध्य में निम्नलिखित दोष पाये जाते हैं
1. समान्तर माध्य ज्ञात करते समय सभी पदों को महत्त्व दिया जाता है, परन्तु बड़े मूल्यों के पद माध्य को अधिक प्रभावित करते हैं, जिसके कारण समान्तर माध्य श्रेणी का ठीक प्रतिनिधित्व करने में असफल रहता है; जैसे – किसी कार्यालय के प्रबन्धक का वेतन Rs.14,000 और दो लिपिकों का वेतन क्रमशः Rs.3,000 और Rs.4,000 है तो इस समूह के वेतन का माध्य हैं Rs.7,000 होगा, जो कि श्रेणी का उचित प्रतिनिधित्व नहीं करता।
2. समान्तर माध्य द्वारा कभी-कभी अशुद्ध परिणाम भी निकल जाते हैं। उदाहरण के लिए-यदि तीन फर्मों के विभिन्न वर्षों के लाभ निम्नवत् हैं

वर्षफर्म Aफर्म Bफर्म C
199940,00060,00050,000
200050,00050,00050,000
200160,00040,00050,000

उपर्युक्त लाभ को देखने से स्पष्ट होता है कि तीनों फर्मों का औसत लाभ या समान्तर माध्य 50,000 है। इस आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि तीनों फर्म समान प्रगति पर हैं, परन्तु फर्म A प्रगति पथ पर है और फर्म B की स्थिति शोचनीय ।
3. गुणात्मक सामग्री का समान्तर माध्य ज्ञात नहीं किया जा सकता है। इस कारण गुणात्मक सामग्री के लिए यह अनुपयुक्त है।
4. समान्तर माध्य के द्वारा कभी-कभी विचित्र व हास्यास्पद परिणाम प्राप्त होते हैं; जैसे-एक व्यक्ति के पास 4 गाय हैं और दूसरे व्यक्ति के पास 3 गाय हैं तो इनका समान्तर माध्य 3.5 होता है। जबकि 3.5 गाय नहीं होती हैं; अतः जिन वस्तुओं का विभाजन असम्भव है उनके समान्तर माध्य को ज्ञात करना कठिन है।
5. समान्तर माध्य का बिन्दुरेखीय प्रदर्शन या रेखाचित्र असम्भव है।
6. समंकमाला को देखकर समान्तर मध्य का अनुमान लगाना कठिन होता है।
7. सम्पूर्ण समंकों में से यदि कोई एक समंक गायब हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में समान्तर माध्य ज्ञात करना कठिन होता है।
8. समान्तर माध्य छोटे पदों को कम और बड़े पदों को अधिक महत्त्व देता है।
In simple words: Arithmetic mean is easy to understand, represents all data points, is definite, aids comparison, and allows algebraic treatment. However, it's sensitive to extreme values, unsuitable for qualitative data, cannot be graphically represented, and can give misleading results with unequal importance of values.

🎯 Exam Tip: Listing at least 3-4 virtues and defects with a relevant example for each will demonstrate a comprehensive understanding. Focus on clarity and conciseness.

 

Question 3. समान्तर माध्य की गणना हेतु प्रयुक्त प्रत्यक्ष एवं लघु रीतियों को उदाहरण सहित समझाइए ।
Answer: समान्तर माध्य ज्ञात करने की दो विधियाँ हैं- 1. प्रत्यक्ष विधि (Direct Method) तथा 2. परोक्ष विधि या लघु विधि (Indirect or Short-cut Method)
1. प्रत्यक्ष विधि – समान्तर माध्य ज्ञात करने की यह विधि अत्यन्त सरल है, परन्तु यदि समंकों का मूल्य बड़ा होता है और उनकी संख्या भी अधिक होती है तो इस विधि का प्रयोग उचित नहीं रहता, क्योंकि गणना करने में अधिक समय व श्रम का व्यय होता है।
2. परोक्ष विधि या लघु विधि – इस विधि को अप्रत्यक्ष विधि या कल्पित माध्य विधि भी कहते हैं। इसमें दिये हुए पद-मूल्यों में से किसी एक को अथवा पद-मूल्यों से भिन्न किसी दूसरी संख्या को कल्पित माध्य (Assumed Mean) मान लेते हैं तथा कल्पित माध्य को प्रत्येक पद-मूल्य में से घटाकर धनात्मक या ऋणात्मक विचलन ज्ञात कर लेते हैं। कल्पित माध्य से प्रत्येक पद-मूल्य के विचलनों के योग को पदों की संख्या से भाग देते हैं। इस प्रकार जो भागफल प्राप्त होता है यदि वह धनात्मक (+) धनात्मक या ऋणात्मक विचलन ज्ञात कर लेते हैं। कल्पित माध्य से प्रत्येक पद-मूल्य के विचलनों के योग को पदों की संख्या से भाग देते हैं। इस प्रकार जो भागफल प्राप्त होता है यदि वह धनात्मक (+) होता है तो उसे कल्पित माध्य में जोड़ देते हैं और यदि ऋणात्मक (-) होता है तो उसे कल्पित माध्य से घटा देते हैं। जो मूल्य प्राप्त होता है वही समान्तर माध्य होता है। यदि समंकों का मूल्य बड़ा हो तथा समंकों की संख्या भी अधिक हो तो इस विधि का प्रयोग उचित होता है, क्योंकि गणना करने में समय व श्रम का कम व्यय होता है।
विशेष – समंक तीन प्रकार की श्रेणियों में मिल सकते हैं
(i) व्यक्तिगत श्रेणी (Individual Series) में,
(ii) खण्डित श्रेणी (Discrete Series) में तथा
(iii) सतत् (अखण्डित) श्रेणी (Continuous Series) में। प्रत्येक प्रकार की श्रेणी का समान्तर मध्य प्रत्यक्ष या परोक्ष दोनों ही विधियों से ज्ञात किया जा सकता है।

व्यक्तिगत श्रेणी में समान्तर माध्य की गणना

(अ) प्रत्यक्ष विधि – व्यक्तिगत श्रेणी में सभी पदों के मूल्यों को जोड़कर, कुल योग को पदों की संख्या से भाग देते हैं। सूत्र रूप में:
यहाँ, \( \overline { X } \) संकेताक्षर का प्रयोग सरल समान्तर माध्य के लिए है। x1, x2, x3, x4, आदि व्यक्तिगत पद-मूल्य हैं तथा n पदों की संख्या है। \( \Sigma \) (Sigma) ग्रीक भाषा का अक्षर है, जिसका अर्थ दिये गये समस्त पद-मूल्यों का योग है।

(ब) अप्रत्यक्ष विधि या लघु रीति – अप्रत्यक्ष विधि को कल्पित माध्य रीति भी कहते हैं। इसमें दिये हुए पद-मूल्यों में से किसी एक को अथवा पद-मूल्यों में से भिन्न किसी दूसरी संख्या को कल्पित माध्य मान लेते हैं, फिर निम्नलिखित क्रियाएँ करनी पड़ती हैं सूत्र \( \overline { X } \) = A + \(\frac { \Sigma dx }{ n } \) यहाँ n A = offrea FTET (Assumed Mean) \( \Sigma dx \) = कल्पित माध्य से विचलन (Deviations from Assumed Mean) n = पदों की संख्या
उदाहरण 1 एक कक्षा के 12 विद्यार्थियों के भार सम्बन्धी ऑकड़े निम्नलिखित हैं। प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रीति से समान्तर माध्य की गणना कीजिए भार (किग्रा में) : 45 42 47 55 58 60 61 44 49 52 48 45
हलः
समान्तर माध्य की गणना (प्रत्यक्ष विधि से)
सूत्र \( \overline { x } = \frac { X_1 + X_2 + X_3 + X_4........ X_n }{ n } \)
अथवा \( \overline { x } = \frac { \Sigma x }{ n } \)
अतः \( \overline { x } = \frac { 45+42+47+55 +58+60+61+44+49 +52 +48 + 45 }{ 12 } \)
\(\overline { x } = \frac { 606 }{ 12 } = 50.5\) किग्रा
या, \( \overline { x } = 50.5 \) किग्रा
अतः समान्तर माध्य या कक्षा का औसत भार = 50.5 किग्रा।
हलः समान्तर माध्य की गणना (अप्रत्यक्ष विधि से)

पद मूल्य (भार किग्रा)
X
कल्पित माध्य (A = 45)
से विचलन (dx)
450
42-3
47+2
55+10
58+13
60+15
61+16
44-1
49+4
52+7
48+3
450
\( \Sigma dx \) = 66

सूत्र \( \overline { x } = A + \frac { \Sigma dx }{ n } \)
अतः, \( \overline { x } = 45 + \frac { 66 }{ 12 } \)
या, \( \overline { x } = 45+5.5 \)
या, \( \overline { x } = 50.5 \)
अतः समान्तर माध्य = 50.5 किग्रा
In simple words: The direct method calculates the mean by summing all observations and dividing by their count. The indirect or shortcut method involves assuming a mean, calculating deviations from it, and then adjusting the assumed mean by the average of these deviations, making calculations easier for large datasets.

🎯 Exam Tip: When asked to explain methods with examples, ensure you provide both the formula and a step-by-step calculation for a clear understanding. Highlight the situations where each method is more suitable.

 

खण्डित श्रेणी में समान्तर माध्य की गणना
खण्डित श्रेणी में प्रत्येक पद-मूल्य की तत्सम्बन्धी आवृत्तियाँ दी हुई रहती हैं। इस श्रेणी में भी समान्तर माध्य दोनों विधियों से ज्ञात किया जा सकता है।

(अ) प्रत्यक्ष विधि द्वारा – खण्डित श्रेणी में प्रत्यक्ष रीति से समान्तर माध्य ज्ञात करने के लिए पद-मूल्यों को सम्बन्धित आवृत्तियों से गुणा करके गुणनफलों के योग में कुल आवृत्तियों का भाग दे देते हैं। सूत्र \( \overline { X } \) = A + \( \frac { \Sigma fx }{ n } \) इस सूत्र में- fx = आवृत्ति का उसके मूल्य का गुणनफल । \( \Sigma fx \) = सभी गुणनफलों का योग । n = आवृत्तियों का योग अर्थात् \( \Sigma f \)

(ब) अप्रत्यक्ष (लघु) विधि – कल्पित माध्य से पद-मूल्यों का विचलन निकालकर सम्बन्धित आवृत्तियों से गुणा करते हैं। गुणनफलों के योग में कुल आवृत्तियों का भाग देने पर प्राप्त भागफल यदि धनात्मक है तो उसे कल्पित माध्य में जोड़ देते हैं और यदि ऋणात्मक है तो उसे कल्पित माध्य से घटा देते हैं। इस प्रकार समान्तर माध्य ज्ञात हो जाता है। सूत्र \( \overline { X } \) = A + \( \frac { \Sigma fdx }{ n } \) यहाँ A = कल्पित माध्य; \( \Sigma fdx \) = कल्पित माध्य से पद-मूल्यों के विचलनों व आवृत्तियों के गुणनफल का योग; n = पदों की संख्या ।
उदाहरण 2 निम्नांकित श्रेणी के समान्तर माध्य की गणना प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रीति से कीजिए

पद-मूल्य3540455055
आवृत्ति38756

हलः
प्रत्यक्ष रीति से समान्तर माध्य की गणना

पद-मूल्य (x)आवृत्ति (f)पद-मूल्य \( \times \) आवृत्ति (fx)
353105
408320
457315
505250
556330
n = 29\( \Sigma fx \) = 1320

सूत्र- \( \overline { x } = \frac { \Sigma fx }{ n } \)
अतः, \( \overline { x } = \frac { 1320 }{ 29 } = 45.517 \)
अतः, समान्तर माध्य = 45.517
अप्रत्यक्ष रीति से समान्तर माध्य की गणना

पद-मूल्य
X
आवृत्ति
f
कल्पित माध्य (A = 45)
से विचलन
dx = x - A
विचलन व आवृत्ति का
गुणनफल
fdx
353-10-30
408-5-40
45700
5055+25
55610+60
n = 29\( \Sigma fdx \) = 15

सूत्र \( \overline { x } = A + \frac { \Sigma fdx }{ n } \)
अतः, \( \overline { x } = 45 + \frac { 15 }{ 29 } = 45+0.517 = 45.517 \)
अतः, समान्तर माध्य = 45.517
In simple words: For a discrete series, the direct method involves multiplying each value by its frequency, summing these products, and dividing by the total frequency. The indirect method uses an assumed mean, calculates deviations (x-A), multiplies them by frequencies (fdx), sums these products, and adjusts the assumed mean by the average of fdx.

🎯 Exam Tip: Remember that 'n' in a discrete series refers to the total frequency (\( \Sigma f \)). Ensure correct multiplication of values with their corresponding frequencies for accuracy.

 

सतत या अखण्डित श्रेणी में समान्तर माध्य की गणना
सतत् श्रेणी में मूल्य (x) वर्गों में दिये हुए रहते हैं; अतः सर्वप्रथम प्रत्येक वर्गान्तर का मध्य बिन्दु (mid point) या मध्य मूल्य (mid value) ज्ञात करते हैं। यह मध्य मूल्य M.V. को x यानि पद-मूल्य मानकर आगे की गणना की जाती है। इस प्रकार सतत् श्रेणी खण्डित श्रेणी में परिवर्तित हो जाती है। इसके बाद वे सभी क्रियाएँ करनी पड़ती हैं जो खण्डित श्रेणी में की जाती हैं। सतत् श्रेणी में समान्तर माध्य 'प्रत्यक्ष विधि तथा 'लघु विधि' दोनों प्रकार से ज्ञात किया जा सकता है।

(अ) प्रत्यक्ष विधि – सतत् श्रेणी में प्रत्यक्ष रीति से समान्तर माध्य ज्ञात करने के लिए वर्गों के 'मध्य मूल्य निकाले जाते हैं। तत्पश्चात् उनको आवृत्तियों (f) से गुणा करते हैं। गुणनफल के योग में आवृत्तियों के योग से भाग दे देते हैं। सूत्र \( \overline { X } \) = A + \( \frac { \Sigma fx }{ n } \) इस सूत्र में – fx = आवृत्ति का सम्बन्धित मध्य मूल्य से गुणनफल । \( \Sigma fx \) = सभी गुणनफलों का योग । n = आवृत्तियों का योग अर्थात् \( \Sigma f \) ।

(ब) अप्रत्यक्ष या लघु विधि – सतत् श्रेणी में लघु विधि द्वारा समान्तर माध्य ज्ञात करना प्रत्यक्ष विधि की अपेक्षा सरल होता है। लघु विधि में समान्तर माध्य ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित क्रियाएँ करनी पड़ती हैं
1. सर्वप्रथम वर्गान्तरों के मध्य मूल्य ज्ञात करते हैं।
2. मध्य मूल्य में से एक मूल्य या कोई अन्य कल्पित माध्य (A) मान लिया जाता है।
3. कल्पित माध्य को प्रत्येक मूल्य में से घटाकर विचलन (dx) ज्ञात करते हैं।
4. dx को तत्सम्बन्धी आवृत्तियों से गुणा कर fdx ज्ञात करते हैं।
5. गुणनफलों का योग करके \( \Sigma fdx \) ज्ञात करते हैं।
6. समान्तर माध्य ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग करते हैं
सूत्र- \( \overline { X } \) = A + \( \frac { \Sigma fdx }{ n } \) यहाँ, A = कल्पित माध्य; fdx = कल्पित माध्य से विचलन X आवृत्ति; \( \Sigma fdx \) = आवृत्ति तथा विचलन के गुणनफल का योग; n = पदों की संख्या ।
उदाहरण 3 निम्नलिखित तालिका में दिये गये आँकड़ों के आधार पर समान्तर माध्य की गणना प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रीति से कीजिए विद्यार्थियों की संख्या
हलः
प्रत्यक्ष विधि द्वारा समान्तर माध्य की गणना

प्राप्तांक वर्गविद्यार्थियों की संख्या
f
मध्य मूल्य M.V. या
X
पद मूल्य \( \times \) आवृत्ति
fx
0-542.510.0
5-1067.545.0
10-151012.5125.0
15-201617.5280.0
20-251222.5270.0
25-30827.5220.0
30-35432.5130.0
n = 60\( \Sigma fx \) = 1080.0

सूत्र- \( \overline { x } = \frac { \Sigma fx }{ n } \)
अतः, \( \overline { x } = \frac { 1080 }{ 60 } = 18 \)
अतः, समान्तर माध्य = 18
अप्रत्यक्ष विधि द्वारा समान्तर माध्य की गणना

प्राप्तांक वर्ग
X
विद्यार्थियों की संख्या या आवृत्ति
(f)
मध्य मूल्य
M.V.
कल्पित माध्य (A = 17.5)
से विचलन
dx = x - A
आवृत्ति तथा विचलन का
गुणनफल
fdx
0-542.5-15-60
5-1067.5-10-60
10-151012.5-5-50
15-201617.500
20-251222.5+5+60
25-30827.5+10+80
30-35432.5+15+60
n = 60\( \Sigma fdx \) = 30

सूत्र \( \overline { x } = A + \frac { \Sigma fdx }{ n } \)
अतः, \( \overline { x } = 17.5 + \frac { 30 }{ 60 } = 17.5+0.5 = 18 \)
अतः, समान्तर माध्य = 18
In simple words: For continuous series, first calculate the mid-point (x) for each class interval. Then, treat it as a discrete series and apply either the direct method (sum of fx divided by sum of f) or the indirect method (using an assumed mean and sum of fdx).

🎯 Exam Tip: Always calculate the mid-point correctly for continuous series. The accuracy of the mean depends heavily on this initial step.

 

संचयी आवृत्तियाँ दिये रहने पर समान्तर माध्य की गणना
सतत् श्रेणी में संचयी आवृत्तियाँ दो प्रकार से हो सकती हैं (1) 'से अधिक' तथा (2) 'से कम । दोनों प्रकार से दी गयी संचयी आवृत्तियों में समान्तर माध्य की गणना उदाहरण 4 तथा 5 द्वारा स्पष्ट की जा रही है।
उदाहरण 4 निम्नलिखित आवृत्ति वितरण से समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए
हलः
उपर्युक्त प्रश्न 'से अधिक के आधार पर संचयी आवृत्ति में दिया हुआ है। इसमें वर्गों की निम्न सीमाएँ दी गयी हैं; अतः इसे सर्वप्रथम सतत् श्रेणी में बदलेंगे। श्रेणी को देखने से ज्ञात होता है कि श्रेणी में वर्गान्तर 10 का है। अतः पहला वर्ग 10-20 का बनेगा तथा पहले संचयी आवृत्ति में से अगली संचयी आवृत्ति को घटाते जाएँगे, अर्थात् संचयी आवृत्ति से सामान्य आवृत्ति बनाएँगे; अब साधारण श्रेणी में प्रश्न निम्नलिखित प्रकार से बनेगा

प्राप्तांकआवृत्ति
10-202
20-303
30-407
40-508
50-6010
60-7010
70-805
80-903
90-1002

हलः

प्राप्तांक
X
आवृत्ति
f
मध्य मूल्य
M.V.
कल्पित माध्य से
विचलन
A = 55 dx
आवृत्ति तथा विचलन का
गुणनफल
fdx
10-20215-40-80
20-30325-30-90
30-40735-20-140
40-50845-10-80
50-60105500
60-701065+10+100
70-80575+20+100
80-90385+30+90
90-100295+40+80
N = 50\( \Sigma fdx \) = 20

सूत्र \( \overline { x } = A + \frac { \Sigma fdx }{ n } \)
अतः \( \overline { x } = 55 + \frac { 20 }{ 50 } = 55.4 \)
समान्तर माध्य = 55.4

 

उदाहरण 5 निम्नलिखित आवृत्ति-वितरण से समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए
हलः
उपर्युक्त प्रश्न 'से कम के आधार पर संचयी आवृत्ति में दिया हुआ है। इसमें वर्गान्तर की उच्च सीमाएँ दी हैं। हम देखते हैं कि श्रेणी के प्रत्येक वर्ग में अन्तर 10 का है। सर्वप्रथम हम इसे सतत् श्रेणी में बदलेंगे। हमारा पहला वर्ग 10-20 का होगा। प्रत्येक वर्ग की आवृत्ति ज्ञात करने के लिए अगले वर्ग की संचयी आवृत्ति में से पहले वर्ग की संचयी आवृत्ति घटा देंगे। सतत् श्रेणी में प्रश्न निम्नलिखित प्रकार से बनेगा

प्राप्तांकआवृत्ति
10-202
20-303
30-407
40-508
50-6010
60-7010
70-805
80-903
90-1002

हलः

प्राप्तांक
x
आवृत्ति
f
मध्य मूल्य
M.V.
कल्पित माध्य से
विचलन
A = 55 dx
आवृत्ति तथा विचलन
का गुणनफल
fdx
10-20215-40-80
20-30325-30-90
30-40735-20-140
40-50845-10-80
50-60105500
60-701065+10-100
70-80575-20-100
80-90385-30-90
90-100295-40-80
\( \Sigma N \) = 50\( \Sigma fdx \) = 20

सूत्र \( \overline { x } = A + \frac { \Sigma fdx }{ n } \)
अतः, \( \overline { x } = 50 + \frac { 20 }{ 50 } = 50.4 \)
अतः, समान्तर माध्य = 50.4

 

उदाहरण 6 निम्नलिखित श्रेणी से समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए
आयु 18-22 23-27 28-32 33-37 38-42 43-47 48-52 53-57
आवृत्ति 14 28 33 30 20 15 13 7
हलः

वर्गान्तरआवृत्ति
f
मध्य मूल्य
M.V.
मध्य मूल्य \( \times \) आवृत्ति
fx
कल्पित माध्य (A = 35)
से विचलन
dx = x - A
S.D. (i) = 5
\( dx' = dx/i \)
fdx'
18-221420280-15-3-42
23-272825700-10-2-56
28-323330990-5-1-33
33-3730351050000
38-422040800+5+1+20
43-471545675+10+2+30
48-521350650+15+3+39
53-570755385+20+4+28
n=160\( \Sigma fx \) = 5530\( \Sigma fdx \) = -14

प्रत्यक्ष विधि
सूत्र \( \overline { x } = \frac { \Sigma fx }{ n } \)
अतः, \( \overline { x } = \frac { 5530 }{ 160 } \)
अतः, \( \overline { x } = 34.563 \)
अतः समान्तर माध्य = 34.563 लगभग
अप्रत्यक्ष (लघु) विधि
सूत्र \( \overline { x } = A + \frac { \Sigma fdx' }{ n } \times i \)
अतः, \( \overline { x } = 35 + \frac { -14 \times 5 }{ 160 } \)
अतः. \( \overline { x } = 35-0.437 \)
अतः \( \overline { x } = 34.563 \) लगभग
In simple words: When cumulative frequencies are given ("less than" or "more than"), first convert them into normal frequencies to form a continuous series. Then, calculate the arithmetic mean using either the direct or indirect method, similar to a regular continuous series.

🎯 Exam Tip: The critical first step is to correctly convert cumulative frequencies into simple frequencies and define the class intervals accurately. Mistakes here will lead to incorrect final answers.

 

विशेष – समान्तर माध्य ज्ञात करने की यह कोई भिन्न विधि नहीं है, वरन् लघु विधि की सहायक विधि ही है। इस विधि में कल्पित माध्य से अन्तर की संख्याओं को किसी उभयनिष्ठ संख्या से भाग दे दिया जाता है, जिससे पद-विचलन बहुत छोटे हो जाते हैं। इस प्रकार इन छोटे पद-विचलनों में उनकी आवृत्तियों से गुणा करने पर कुल विचलन ज्ञात हो जाते हैं। अन्त में विचलनों के योग में उक्त उभयनिष्ठ संख्या का गुणा कर दिया जाता है। शेष विधि वही रहती है जिसे लघु विधि के अन्तर्गत समझाया गया है। चिह्नों के अर्थ भी वही होते हैं जिन्हें लघु रीति के अन्तर्गत स्पष्ट किया गया है।
उदाहरण 7 एक परीक्षा में 50 विद्यार्थियों द्वारा प्राप्तांक नीचे तालिका में दिये गये हैं। अंकगणितीय माध्य की गणना कीजिए
हलः

प्राप्तांक (x)विद्यार्थियों की संख्या (f)fx
65165
664264
675335
687476
6911759
7010700
716426
724288
732146
योगn = 50\( \Sigma fx \) = 3,459

उदाहरण 8

 

Question. निम्न समंकों में से समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए
Answer:

वर्गआवृत्ति
f
मध्य मूल्य
M.V.
कल्पित माध्य से विचलन
(A = 35) dx
आवृत्ति \( \times \) विचलन का
गुणनफल
fdx
0-10605-30-180
10-20515-20-100
20-30825-10-80
30-40153500
40-50745+10+70
50-60655+20+120
60-70365+30+90
N=50\( \Sigma fdx \) = -80

सूत्र \( \overline { x } = A + \frac { fdx }{ N } \)
अतः, \( \overline { x } = 35 + \frac { -80 }{ 50 } = 33.4 \)
समान्तर माध्य = 33.4
In simple words: This example illustrates how to calculate the arithmetic mean from grouped data (class intervals) using the shortcut method. First, mid-points are found for each class, then deviations from an assumed mean are calculated, multiplied by frequencies, and finally summed to adjust the assumed mean.

🎯 Exam Tip: Ensure that the mid-points are calculated correctly for each class interval. Proper handling of negative signs in `fdx` and accurate summation are key to getting the right mean.

 

Question 4. भारित समान्तर माध्य क्या है? भारित समान्तर माध्य ज्ञात करने की विधि उदाहरण के द्वारा समझाइए ।
Answer: आर्थिक समस्याओं के अध्ययन में भारित समान्तर माध्य का महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। यह वह माध्य होता है जिसमें पदों को उनके सापेक्षिक महत्त्व के अनुसार भार देकर माध्य की गणना की जाती है। अनेक स्थितियों में तुलना करने के लिए भारित समान्तर माध्य ही उपयुक्त विधि होती है। उदाहरणार्थ-एक कारखाने के कर्मचारियों की औसत आय ज्ञात करने के लिए व्यवस्थापक के वेतन तथा कर्मचारियों के वेतन को समान महत्त्व देना अनुचित होगा; क्योंकि कारखाने में व्यवस्थापक तो एक होगा तथा कर्मचारियों की संख्या अधिक होगी। उचित औसत आय तब ही प्राप्त हो सकती है, जब हम व्यवस्थापक तथा कर्मचारियों को उनके महत्त्व के अनुसार भार दें। इसके लिए भारित समान्तर माध्य ही उपयुक्त है।
भारित समान्तर माध्य ज्ञात करने की विधियाँ – भारित समान्तर माध्य भी प्रत्यक्ष विधि एवं अप्रत्यक्ष या लघु विधि से ज्ञात किया जा सकता है
(क) प्रत्यक्ष विधि से भारित समान्तर माध्य - (1) प्रत्येक पद को उसके महत्त्व के आधार पर भार (w) प्रदान किया जाता है। (2) प्रत्येक मूल्य (x) को उसके भार (W) से गुणा करके गुणनफल (Wx) ज्ञात करते हैं। इसके बाद गुणनफलों का योग करके \( \Sigma Wx \) निकालते हैं। । (3) गुणनफलों (\( \Sigma Wx \)) में भारों के योग (\( \Sigma W \)) का भाग देकर समान्तर माध्य निकालते हैं। सूत्र रूप में \( \overline { X } \) = A + \( \frac { \Sigma Wx }{ \Sigma W } \) यहाँ, \( \overline { X } \) w = भारित समान्तर माध्य है। \( \Sigma Wx \) = मूल्यों तथा भारों के गुणनफलों का योग है। \( \Sigma w \) = भारों का योग है।
(ख) लघु रीति से भारित समान्तर माध्य – इस विधि द्वारा भारित समान्तर माध्य ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित क्रियाएँ करनी पड़ती हैं
1. प्रत्येक पद को महत्त्व के अनुसार भार देना।
2. कल्पित माध्य (A) मानकर मूल्यों से विचलन (dx) ज्ञात करना।
3. विचलनों को तत्सम्बन्धी भार से गुणा करके गुणनफल ज्ञात करना तथा उनका योग करना। इस प्रकार \( \Sigma Wdx \) ज्ञात हो जाएगा।
4. निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग करके भारित समान्तर माध्य ज्ञात किया जाएगा
\( \overline { X } W \) = A + \( \frac { \Sigma Wdx }{ \Sigma W } \) यहाँ परे, \( \overline { X } W \) = भारित समान्तर माध्य; A = कल्पित माध्य । \( \Sigma Wdx \) = कल्पित माध्य से प्राप्त विचलनों और तत्सम्बन्धी भारों के गुणनफल का योग । \( \Sigma w \) = भारों का योग।
उदाहरण 9 एक व्यक्ति ने निम्नलिखित वस्तुएँ विविध मूल्यों पर नीचे दी गयी तालिका के अनुसार खरीदी हैं। उनका भारित समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए

वस्तुएँमूल्य प्रति किलो (Rs. में)खरीदी मयी वस्तु की मात्रा
आटा10.0020.0
दाल35.005.0
घी120.001.5
तेल40.001.5
चावल20.005.0

हलः
प्रत्यक्ष विधि द्वारा भारित समान्तर माध्य की गणना।

वस्तुएँमूल्य प्रति किलो
(Rs. में)
X
खरीदी गयी वस्तु की मात्रा
(किलो में)
(W)
गुणनफल
(Wx)
आटा1020200
दाल355175
घी1201.5180
तेल401.560
चावल205100
\( \Sigma W \) = 33\( \Sigma Wx \) = 715

सूत्र \( \overline { W } = \frac { \Sigma Wx }{ \Sigma W } \)
अतः, \( \overline { W } = \frac { 715 }{ 33 } \)
या, \( \overline { W } = 21.67 \)
अतः, भारित समान्तर माध्य = Rs. 21.67

लघु रीति द्वारा भारित समान्तर माध्य की गणना

वस्तुएँमूल्य प्रति किलो
(Rs. में)
X
मात्रा
(किलो में)
(W)
कल्पित माध्य
(A = 100) से विचलन
dx = x- A
विचलन भार
(Wdx)
आटा1020-90-1800
दाल355-65-325
घी1201.5+20+30
तेल401.5-60-90
चावल205-80-400
\( \Sigma W \) = 33\( \Sigma Wdx \) = -2585

सूत्र- \( \overline { W } = A + \frac { \Sigma Wdx }{ \Sigma W } \)
अतः, \( \overline { W } = 100 + \frac { -2585 }{ 33 } = 100-78.33 = 21.67 \)
अतः, भारित समान्तर माध्य = Rs. 21.67
In simple words: Weighted arithmetic mean assigns different weights (importance) to each data point. It's calculated by multiplying each value by its weight, summing these products, and then dividing by the sum of the weights. This method is crucial when certain values have more significance than others, like in calculating average cost of goods.

🎯 Exam Tip: The key difference from simple mean is the inclusion of 'weights'. Carefully assign weights (W) to each value (X) and ensure correct calculation of \( \Sigma Wx \) and \( \Sigma W \). The direct and shortcut methods are variations of the same principle.

लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

 

Question 1. निम्नांकित समंकों की सहायता से प्राप्तांकों का समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए । प्रश्न-पत्र के अधिकतम अंक 50 थे
Answer: हलः
[ संकेत-उपर्युक्त प्रश्न व्यक्तिगत श्रेणी के अन्तर्गत आता है।] ।
समान्तर माध्य सूत्र \( \overline { x } = \frac { \Sigma x }{ n } = \frac { \text{कुल प्राप्तांकों का योग} }{ \text{विद्यार्थियों की संख्या} } \)
अतः, \( \overline { x } = \frac { 527 }{ 24 } = 21.96 \)
समान्तर माध्य = 21.96
In simple words: This question asks to find the arithmetic mean of individual scores. For an individual series, the mean is simply the sum of all observations divided by the total number of observations.

🎯 Exam Tip: For individual series, simply add all given values and divide by the count. No frequency or class intervals are involved, making it the most straightforward calculation.

 

Question 2. निम्नलिखित आँकड़ों से लघु विधि द्वारा समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए 7, 10, 13, 18, 24, 30 हल:
Answer:

Xकल्पित माध्य (A=18)
से विचलन
dx = x - A
7-11
10-8
13-5
180
21+6
30+12
\( \Sigma dx \) = -6

सूत्र - \( \overline { x } = A + \frac { \Sigma dx }{ n } \)
यहाँ, n = 6
अतः, \( \overline { x } = 18 + \frac { -6 }{ 6 } \)
\( = 18-1 = 17 \)
अतः, समान्तर माध्य = 17
In simple words: This problem uses the shortcut method for an individual series. An assumed mean (A=18) is chosen, deviations (dx) are calculated, their sum (\( \Sigma dx \)) is found, and then added to the assumed mean, adjusted by the number of observations.

🎯 Exam Tip: For the shortcut method, choose an assumed mean close to the middle of the data to keep deviations small. Be careful with positive and negative signs when summing deviations.

 

Question 3. उत्तर प्रदेश सरकार के निम्नलिखित वार्षिक व्यय के माध्य की गणना कीजिए

वित्तीय वर्ष1974-751975-761976-771977-781978-791979-801980-81
व्यय (Rs. करोड़ में)7058109421063122014401716

हलः
समान्तर माध्य की गणना

वित्तीय वर्षव्यय (करोड़ Rs. में)
1974-75705
1975-76810
1976-77942
1977-781063
1978-791220
1979-801440
1980-811716
n = 7\( \Sigma \chi \) = 7896

सूत्र \( \overline { x } = \frac { \Sigma \chi }{ n } = \frac { \text{कुल व्ययों का योग} }{ \text{कुल वर्षों की संख्या} } \)
अतः, \( \overline { x } = \frac { 7896 }{ 7 } = 1128 \)
समान्तर माध्य = Rs. 1128 करोड़
In simple words: This problem requires calculating the mean annual expenditure. It is an individual series where each year's expenditure is a distinct observation. The mean is found by summing all expenditures and dividing by the number of years.

🎯 Exam Tip: For time-series data like this, treat each time point's value as an individual observation. Accurate summation is paramount for a correct average.

 

Question 4. लघु विधि द्वारा समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए गणना
Answer: हलः
लघु विधि द्वारा समान्तर माध्य

प्राप्तांक
X
विद्यार्थियों की संख्या
f
कल्पित माध्य
(A = 20) से विचलन
dx = x-A
विचलन व आवृत्ति
का गुणनफल
fdx
305+10+50
254+5+20
20300
152-5-10
107-10-70
n = 21\( \Sigma fdx \) = -10

सूत्र \( \overline { x } = A + \frac { \Sigma fdx }{ n } \)
अतः, \( \overline { x } = 20 + \frac { -10 }{ 21 } = 20-0.476 = 19.524 \)
अतः, समान्तर माध्य = 19.524
In simple words: This calculation uses the shortcut method for a discrete frequency series. An assumed mean (A=20) is chosen, deviations (dx) are calculated, multiplied by their respective frequencies (fdx), and summed. This sum is then used to adjust the assumed mean to find the actual mean.

🎯 Exam Tip: For discrete series using the shortcut method, accurately calculating `dx` (x-A) and then `fdx` for each row, and finally summing them correctly, is crucial for obtaining the right arithmetic mean.

लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

Question 1. निम्नांकित समंकों की सहायता से प्राप्तांकों का समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए । प्रश्न-पत्र के अधिकतम अंक 50 थे हलः [ संकेत-उपर्युक्त प्रश्न व्यक्तिगत श्रेणी के अन्तर्गत आता है।] । समान्तर माध्य सूत्र \( \overline{x} = \frac{\Sigma x}{\text{कुल पदों की संख्या}} = \frac{\text{कुल प्राप्तांकों का योग}}{\text{विद्यार्थियों की संख्या}} \) अतः, \( \overline{x} = \frac{527}{24} = 21.96 \) समान्तर माध्य = 21.96
Answer: समान्तर माध्य 21.96 है।
In simple words: यह प्रश्न व्यक्तिगत श्रेणी से संबंधित है, जिसमें दिए गए प्राप्तांकों का कुल योग करके उनकी संख्या से भाग देकर समान्तर माध्य ज्ञात किया जाता है।

🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत श्रेणी के प्रश्नों में, सभी मदों के मूल्यों को जोड़कर कुल मदों की संख्या से भाग देने पर समान्तर माध्य प्राप्त होता है। गणना में सटीकता के लिए सूत्र का सही अनुप्रयोग महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. निम्नलिखित आँकड़ों से लघु विधि द्वारा समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए 7, 10, 13, 18, 24, 30 हल:

Xकल्पित माध्य (A=18) से विचलन \(dx = x - A\)
7-11
10-8
13-5
180
21+6
30+12
\( \Sigma dx = -6 \)
सूत्र- \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma dx}{n} \) यहाँ, \( n = 6 \) अतः, \( \overline{x} = 18 + \frac{-6}{6} = 18 - 1 = 17 \) अतः, समान्तर माध्य = 17
Answer: समान्तर माध्य 17 है।
In simple words: लघु विधि का उपयोग करके, एक कल्पित माध्य (18) लिया जाता है और प्रत्येक मान से विचलन (dx) की गणना की जाती है। इन विचलनों का योग करके कुल पदों की संख्या से भाग दिया जाता है, और परिणाम को कल्पित माध्य में जोड़ या घटा दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: लघु विधि में, कल्पित माध्य को श्रेणी के लगभग मध्य से चुनने से गणनाएं आसान हो जाती हैं। विचलनों का सही योग और सूत्र का उचित अनुप्रयोग महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. उत्तर प्रदेश सरकार के निम्नलिखित वार्षिक व्यय के माध्य की गणना कीजिए

वित्तीय वर्ष1974-751975-761976-771977-781978-791979-801980-81
व्यय (Rs. करोड़ में)7058109421063122014401716
हलः समान्तर माध्य की गणना
1975-76
वित्तीय वर्षव्यय (करोड़ Rs. में)
1974-75705
810
1976-77942
1977-781063
1978-791220
1979-801440
1980-811716
\( n = 7 \)\( \Sigma x = 7896 \)
सूत्र \( \overline{x} = \frac{\Sigma x}{n} = \frac{\text{कुल व्ययों का योग}}{\text{कुल वर्षों की संख्या}} \) अतः, \( \overline{x} = \frac{7896}{7} = 1128 \) समान्तर माध्य = Rs. 1128 करोड़
Answer: समान्तर माध्य Rs. 1128 करोड़ है।
In simple words: यहाँ विभिन्न वित्तीय वर्षों के व्यय दिए गए हैं। समान्तर माध्य निकालने के लिए सभी वर्षों के व्यय को जोड़कर कुल वर्षों की संख्या से भाग दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, सभी मूल्यों को सही ढंग से जोड़ना और कुल मदों की संख्या से भाग देना सुनिश्चित करें। मुद्रा इकाइयों (जैसे 'करोड़ Rs.') को परिणाम में शामिल करना न भूलें।

 

Question 4. लघु विधि द्वारा समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए गणना हलः लघु विधि द्वारा समान्तर माध्य

प्राप्तांक Xविद्यार्थियों की संख्या fकल्पित माध्य (A = 20) से विचलन \( dx = x - A \)विचलन व आवृत्ति का गुणनफल fdx
305+10+ 50
254+5+ 20
20300
152-5-10
107-10-70
\( n = 21 \)\( \Sigma fdx = -10 \)
सूत्र \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx}{n} \) अतः, \( \overline{x} = 20 + \frac{-10}{21} = 20 - 0.476 = 19.524 \) अतः, समान्तर माध्य = 19.524
Answer: समान्तर माध्य 19.524 है।
In simple words: यह एक खण्डित श्रेणी का प्रश्न है जहाँ लघु विधि का उपयोग करके समान्तर माध्य निकाला गया है। इसमें कल्पित माध्य से विचलनों को उनकी आवृत्तियों से गुणा करके कुल विचलन का योग निकाला जाता है और फिर सूत्र का उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: खण्डित श्रेणी में लघु विधि का उपयोग करते समय, कल्पित माध्य का चुनाव और fdx कॉलम की सही गणना पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि ये गणना की सटीकता को सीधे प्रभावित करते हैं।

 

Question 5. 8 व्यक्तियों के समूह के मासिक व्यय का समान्तर माध्य Rs. 5,000 है। 12 व्यक्तियों के एक समूह का समान्तर माध्य Rs. 6,000 है। सभी 20 व्यक्तियों के मासिक व्यय का समान्तर माध्य ज्ञात करें। हलः समान्तर माध्य की गणना

मासिक व्यय (x)व्यक्तियों की संख्या (f)कुल व्यय (fx)
5000840,000
60001272,000
\( n = 20 \)\( \Sigma fx = 1,12,000 \)
सूत्र \( \overline{x} = \frac{\Sigma fx}{n} \) अतः, \( \overline{x} = \frac{1,12,000}{20} = 5,600 \) समान्तर माध्य = Rs. 5,600
Answer: सभी 20 व्यक्तियों का मासिक व्यय का समान्तर माध्य Rs. 5,600 है।
In simple words: दो अलग-अलग समूहों के औसत व्यय दिए गए हैं। कुल समान्तर माध्य निकालने के लिए, प्रत्येक समूह के कुल व्यय की गणना की जाती है, फिर उन्हें जोड़कर कुल व्यक्तियों की संख्या से भाग दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: संयुक्त समान्तर माध्य की गणना करते समय, प्रत्येक समूह के कुल मान (जैसे कुल व्यय) को सही ढंग से निकालना और फिर उन सभी को जोड़कर कुल इकाइयों की संख्या से भाग देना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. एक शहर के 100 परिवारों की मासिक आय निम्नवत है

मासिक आय (Rs. में)परिवारों की संख्या
5,00015
6,00025
8,00050
10,00010
उपर्युक्त आँकड़ों की सहायता से इस शहर के परिवारों की मासिक आय का समान्तर माध्य लघु विधि द्वारा ज्ञात कीजिए। हलः विधि द्वारा समान्तर माध्य की गणना
मासिक आय (Rs. में) Xपरिवारों की संख्या fकल्पित माध्य (A = 8000) से विचलन \( dx = x - A \)S.D. (i) = 1000 \( dx' = dx/i \)\( fdx' \)
5,00015- 3,000-3-45
6,00025-2,000-2-50
8,00050000
10,00010+2,000+2+20
\( n = 100 \)\( \Sigma fdx' = -75 \)
सूत्र - \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx'}{n} \times i \) अतः, \( \overline{x} = 8,000 + \frac{-75}{100} \times 1,000 \) अतः, \( \overline{x} = 8,000 - 750 = 7,250 \) परिवारों की मासिक आय का समान्तर माध्य = Rs. 7,250
Answer: परिवारों की मासिक आय का समान्तर माध्य Rs. 7,250 है।
In simple words: यह भारित समान्तर माध्य का एक उदाहरण है जिसे लघु विधि द्वारा हल किया गया है। इसमें एक कल्पित माध्य (A) चुना जाता है, विचलन (dx) निकाला जाता है, फिर dx' (dx/i) की गणना करके fdx' प्राप्त किया जाता है।

🎯 Exam Tip: लघु विधि या पद विचलन विधि का उपयोग करते समय, 'i' (वर्ग अंतराल) का सही मान चुनना और विचलन (dx') तथा fdx' की गणना में सावधानी बरतना आवश्यक है, खासकर जब संख्याओं के बड़े होने पर गणना को सरल बनाना हो।

 

Question 7. निम्नांकित श्रेणी से समान्तर माध्य की गणना प्रत्यक्ष तथा लघु दोनों रीति से कीजिए

पद-मूल्य3540455055
आवृत्ति38752
हलः प्रत्यक्ष एवं लघु विधि द्वारा समान्तर माध्य की गणना
पद-मूल्य Xआवृत्ति fपद-मूल्य x आवृत्ति fxकल्पित माध्य (A = 45) से विचलन \( dx = x - A \)विचलन व आवृत्ति का गुणनफल fdx
353105-10-30
408320-5-40
45731500
505250+5+25
552110+10+20
\( n = 25 \)\( \Sigma fx = 1100 \)\( \Sigma fdx = -25 \)
प्रत्यक्ष विधि सूत्र- \( \overline{x} = \frac{\Sigma fx}{n} \) अतः, \( \overline{x} = \frac{1100}{25} = 44 \) अतः, समान्तर माध्य = 44
Answer: प्रत्यक्ष विधि से समान्तर माध्य 44 है।
In simple words: प्रत्यक्ष विधि में, पद मूल्यों को उनकी आवृत्तियों से गुणा करके कुल fx का योग किया जाता है और उसे कुल आवृत्तियों की संख्या (n) से भाग दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: प्रत्यक्ष विधि में, fx कॉलम की गणना और \(\Sigma fx\) का सही योग ही परिणाम की सटीकता का आधार होता है। सावधानीपूर्वक गणना त्रुटियों से बचने में मदद करती है।

 

अप्रत्यक्ष (लघु) विधि सूत्र \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx}{n} \) अतः, \( \overline{x} = 45 + \frac{-25}{25} = 45 - 1 = 44 \) अतः, समान्तर माध्य = 44
Answer: अप्रत्यक्ष विधि (लघु विधि) से समान्तर माध्य 44 है।
In simple words: लघु विधि में, एक कल्पित माध्य (A) चुना जाता है, प्रत्येक पद से विचलन (dx) निकाला जाता है, फिर विचलन को उसकी आवृत्ति से गुणा करके fdx का योग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: लघु विधि में, कल्पित माध्य का चुनाव और विचलन (dx) के साथ fdx की सही गणना महत्वपूर्ण है। धनात्मक और ऋणात्मक चिह्नों का उचित ध्यान रखना सुनिश्चित करें।

 

Question 8. निम्नलिखित का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विधियों द्वारा समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए हल: संकेत - सर्वप्रथम वर्गान्तर समान अन्तराल के बनाने होंगे; क्योकि पहले वर्गान्तर में 1 का अन्तर है, दूसरे व तीसरे में 2 का तथा चौथे व पाँचवें में 5 का। अतः सुविधा के लिए पहले, दूसरे व तीसरे को मिलाकर एक वर्गान्तर बना लेंगे, जिसमें 5 का अन्तर होगा। प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष विधि द्वारा समान्तर माध्य की गणना

पद-मूल्य M.V. Xआवृत्ति fमध्य मूल्य तथा आवृत्ति का गुणनफल fxकल्पित माध्य (A = 7.5) से विचलन \( dx = x - A \)आवृत्ति तथा विचलन का गुणनफल fdx
2.52460-5-120
7.5129000
12.518225+5+90
\( n = 54 \)\( \Sigma fx = 375 \)\( \Sigma fdx = -30 \)
प्रत्यक्ष रीति सूत्र- \( \overline{x} = \frac{\Sigma fx}{n} \) अतः, \( \overline{x} = \frac{375}{54} = 6.94 \) अतः समान्तर माध्य = 6.94
Answer: प्रत्यक्ष विधि से समान्तर माध्य 6.94 है।
In simple words: इस प्रश्न में दिए गए असामान वर्गान्तरों को पहले समान वर्गान्तरों में बदला गया है। प्रत्यक्ष विधि में, मध्य मूल्यों को उनकी आवृत्तियों से गुणा करके कुल योग निकाला जाता है और कुल आवृत्तियों से भाग दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: सतत श्रेणी में, वर्गान्तरों को पहले मध्य मूल्य में बदलना महत्वपूर्ण है। प्रत्यक्ष विधि में \( \Sigma fx \) और \( n \) की गणना पर विशेष ध्यान दें।

 

अप्रत्यक्ष रीति सूत्र- \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx}{n} \) अतः, \( \overline{x} = 7.5 + \frac{-30}{54} = 7.5 - 0.56 = 6.94 \) अतः, समान्तर माध्य = 6.94
Answer: अप्रत्यक्ष विधि से समान्तर माध्य 6.94 है।
In simple words: अप्रत्यक्ष विधि में, एक कल्पित माध्य (A) चुना जाता है, मध्य मूल्यों से विचलन (dx) निकाला जाता है, और फिर विचलन को उसकी आवृत्ति से गुणा करके fdx का योग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: अप्रत्यक्ष विधि में, कल्पित माध्य का सही चुनाव और \( \Sigma fdx \) की गणना में धनात्मक/ऋणात्मक चिह्नों का ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. निम्नांकित का लघु विधि द्वारा समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए हलः लघु विधि द्वारा समान्तर माध्य की गणना

वर्ग-अन्तरालआवृत्ति fमध्य मूल्य Xकल्पित माध्य (A = 57) से विचलन \( dx = x - A \)आवृत्ति तथा विचलन का गुणनफल fdx
40-44342-15-45
45-49547-10-50
50-54752-5-35
55-59105700
60-64762+5+35
65-69567+10+50
70-74372+15+45
\( n = 40 \)\( \Sigma fdx = 0 \)
सूत्र- \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx}{n} \) अतः, \( \overline{x} = 57 + \frac{0}{40} = 57 + 0 = 57 \) या, \( \overline{x} = 57 \) अतः, समान्तर माध्य = 57
Answer: समान्तर माध्य 57 है।
In simple words: यह सतत श्रेणी का एक उदाहरण है जिसे लघु विधि द्वारा हल किया गया है। इसमें पहले वर्ग-अन्तरालों के मध्य मूल्य (X) निकाले जाते हैं, फिर एक कल्पित माध्य (A) चुनकर विचलन (dx) और fdx की गणना की जाती है।

🎯 Exam Tip: सतत श्रेणी में समान्तर माध्य निकालते समय, मध्य मूल्यों (M.V.) की गणना सबसे पहला और महत्वपूर्ण चरण है। fdx की गणना में धनात्मक और ऋणात्मक चिह्नों का सही ध्यान रखना सुनिश्चित करें।

 

Question 10. क, ख और ग आगरा के किसी इण्टरमीडिएट कॉलेज के परीक्षार्थी हैं। इन्होंने निम्नलिखित प्रश्न का समान्तर माध्य निकाला। तीनों परीक्षार्थियों के उत्तर एक-दूसरे से भिन्न थे। क का उत्तर 347, जबकि ख और ग के उत्तर क्रमशः 35 और 37 थे। समान्तर माध्य की गणना करके ज्ञात कीजिए कि इन परीक्षार्थियों में किसका उत्तर सही है?

वर्गान्तर0-1010-2020-3030-4040-5050-6060-70
आवृत्ति615182218156
हलः
वर्ग-अन्तरालआवृत्ति fमध्य मूल्य Xकल्पित माध्य (A = 35) से विचलन \( dx = x - A \)आवृत्ति तथा विचलन का गुणनफल fdx
0-1065-30-180
10-201515-20-300
20-301825-10-180
30-40223500
40-501845+10+180
50-601555+20+300
60-70665+30+180
\( n = 100 \)\( \Sigma fdx = 0 \)
सूत्र- \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx}{n} \) अतः, \( \overline{x} = 35 + \frac{0}{100} = 35 + 0 = 35 \) अतः, \( \overline{x} = 35 \) अतः, परीक्षार्थी 'ख' का उत्तर 35 सही है।
Answer: समान्तर माध्य 35 है, अतः परीक्षार्थी 'ख' का उत्तर सही है।
In simple words: इस प्रश्न में, हमें सतत आवृत्ति वितरण का समान्तर माध्य ज्ञात करना है। मध्य मूल्य (X) की गणना की जाती है, फिर एक कल्पित माध्य (35) चुनकर विचलनों को आवृत्ति से गुणा किया जाता है, जिसका कुल योग शून्य आता है, जिससे समान्तर माध्य 35 प्राप्त होता है।

🎯 Exam Tip: सतत श्रेणी में समान्तर माध्य की गणना करते समय, वर्गान्तरों से मध्य मूल्य निकालना, कल्पित माध्य का चुनाव और fdx की सटीक गणना सुनिश्चित करें। \( \Sigma fdx \) के सही योग पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 11. एक विद्यार्थी के पाँच विषयों में प्राप्त अंकों का समान्तर माध्य 40 है। छठे विषय में प्राप्त अंकों को सम्मिलित कर लेने पर समान्तर माध्य 46 हो जाता है। छठे विषय में उसे कितने अंक मिले? हल: पाँच विषयों में प्राप्त अंकों का समान्तर माध्य = 40 पाँच विषयों में कुल प्राप्त अंक = \( 40 \times 5 = 200 \) छः विषयों में प्राप्त अंकों का समान्तर माध्य = 46 छः विषयों में कुल प्राप्त अंक = \( 46 \times 6 = 276 \) छठे विषय में प्राप्तांक = छः विषयों के कुल प्राप्तांक-पाँच विषयों के कुल प्राप्तांक छठे विषय के प्राप्तांक = \( 276 - 200 = 76 \)
Answer: छठे विषय में विद्यार्थी को 76 अंक मिले।
In simple words: इस प्रश्न में, विद्यार्थी के पाँच विषयों के औसत अंक दिए गए हैं, और छठे विषय के अंक शामिल होने पर नया औसत दिया गया है। छठे विषय के अंक ज्ञात करने के लिए, दोनों स्थितियों में कुल अंकों की गणना करके उनका अंतर निकाला जाता है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के समस्याओं में, कुल योग की सही गणना ही कुंजी है। औसत और कुल संख्या का उपयोग करके कुल मान निकालने में सावधानी बरतें।

 

Question 12. निम्नलिखित आँकड़ों से लघु विधि द्वारा समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए हलः लघु विधि द्वारा समान्तर माध्य की गणना

प्राप्तांकपरीक्षार्थियों की संख्या fमध्य मूल्य M.V. Xकल्पित माध्य (A = 35) से विचलन \( dx = x - A \)S.D. (i) = 10 \( dx' = dx/i \)विचलन x आवृत्ति fdx'
0-1055-30-3-15
10-201215-20-2-24
20-301525-10-1-15
30-402035000
40-502545+10+1+25
50-601055+20+2+20
60-70865+30+3+24
70-80575+40+4+20
\( n = 100 \)\( \Sigma fdx' = 35 \)
सूत्र- \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx'}{n} \times i \) अतः, \( \overline{x} = 35 + \frac{35}{100} \times 10 \) अतः, \( \overline{x} = 35 + 3.5 = 38.5 \) अतः, समान्तर माध्य = 38.5
Answer: समान्तर माध्य 38.5 है।
In simple words: यह सतत आवृत्ति वितरण का समान्तर माध्य है, जिसे लघु विधि (या पद-विचलन विधि) द्वारा हल किया गया है। इसमें पहले मध्य मूल्य निकाले जाते हैं, फिर कल्पित माध्य से विचलन और पद-विचलन (dx') की गणना करके fdx' का योग निकाला जाता है।

🎯 Exam Tip: सतत श्रेणी में लघु विधि का उपयोग करते समय, वर्गान्तरों से मध्य मूल्य (X) की सही गणना, कल्पित माध्य का चुनाव और 'i' (वर्ग अंतराल) को सही ढंग से लागू करना परिणाम की सटीकता के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 13. निम्नलिखित आँकड़ों से प्राप्तांकों का समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए

प्राप्तांक0-100-200-300-400-500-60
परीक्षार्थियों की संख्या (संचयी आवृत्ति)1050608090100
हलः सर्वप्रथम वर्गान्तर को अपवर्जी श्रेणी बनाकर तथा संचयी आवृत्ति को सामान्य आवृत्ति में बदल लेंगे, तत्पश्चात् प्रश्न को अग्रवत् हल करेंगे
प्राप्तांक वर्गपरीक्षार्थियों की संख्या (संचयी आवृत्ति) cfप्राप्तांक वर्ग (अपवर्जी श्रेणी)आवृत्ति fमध्य मूल्य M.V. Xकल्पित माध्य (A = 25) से विचलन \( dx = x - A \)S.D. (i) = 10 \( dx' = dx/i \)विचलन x आवृत्ति fdx'
0-10100-10105-20-2-20
0-205010-204015-10-1-40
0-306020-301025000
0-408030-402035101+20
0-509040-501045202+20
0-6010050-601055303+30
\( n = 100 \)\( \Sigma fdx' = 10 \)
सूत्र- \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx'}{n} \times i \) अतः, \( \overline{x} = 25 + \frac{10}{100} \times 10 \) या, \( \overline{x} = 25 + 1 \) या, \( \overline{x} = 26 \) अतः, समान्तर माध्य = 26
Answer: समान्तर माध्य 26 है।
In simple words: यह एक संचयी आवृत्ति वितरण का प्रश्न है, जिसे पहले सामान्य आवृत्ति वितरण में बदला गया है। फिर पद-विचलन विधि का उपयोग करके समान्तर माध्य की गणना की गई है, जिसमें कल्पित माध्य (25) लेकर विचलनों को आवृत्ति से गुणा किया गया है।

🎯 Exam Tip: संचयी आवृत्ति से सामान्य आवृत्ति में रूपांतरण और अपवर्जी श्रेणी बनाना इस प्रकार के प्रश्नों में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। इसके बाद पद-विचलन विधि के सभी चरणों का सावधानीपूर्वक पालन करें।

 

Question 14. 10 छात्रों के अंक इस प्रकार हैं 10, 28, 32, 12, 18, 20, 25, 15, 26, 14. प्रत्यक्ष विधि से समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए। हल:

X
10
28
32
12
18
20
25
15
26
14
\( \Sigma x = 200 \)
सूत्र - \( \overline{x} = \frac{\Sigma x}{n} \) \( \overline{x} = \frac{200}{10} = 20 \) समान्तर माध्य = 20
Answer: समान्तर माध्य 20 है।
In simple words: यह व्यक्तिगत श्रेणी का एक सरल उदाहरण है, जिसमें सभी दिए गए अंकों को जोड़कर उनकी कुल संख्या से भाग देकर समान्तर माध्य ज्ञात किया जाता है।

🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत श्रेणी में समान्तर माध्य की गणना करते समय, सभी मदों को सही ढंग से जोड़ना और उनकी कुल संख्या गिनना महत्वपूर्ण है।

 

Question 15. निम्नलिखित समंकों में से प्रत्यक्ष रीति द्वारा समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए हलः

Xffx
0140
12121
22550
343129
451204
540200
639234
71284
\( n = 245 \)\( \Sigma fx = 922 \)
सूत्र \( \overline{x} = \frac{\Sigma fx}{n} \) \( \overline{x} = \frac{922}{245} = 3.76 \) समान्तर माध्य = 3.76
Answer: समान्तर माध्य 3.76 है।
In simple words: यह खण्डित श्रेणी का प्रत्यक्ष विधि से समान्तर माध्य ज्ञात करने का उदाहरण है, जहाँ प्रत्येक 'X' मान को उसकी आवृत्ति 'f' से गुणा करके 'fx' निकाला जाता है, फिर सभी 'fx' का योग करके कुल आवृत्तियों (n) से भाग दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: खण्डित श्रेणी में प्रत्यक्ष विधि का उपयोग करते समय, 'fx' कॉलम की गणना और '\(\Sigma fx\)' का सही योग महत्वपूर्ण है। छोटी से छोटी गलती भी अंतिम परिणाम को प्रभावित कर सकती है।

 

Question 16. निम्नलिखित समंकों में से अप्रत्यक्ष विधि से समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए हलः समान्तर माध्य की गणना

प्राप्तांक Xछात्रों की संख्या fमध्य मूल्य M.V.dx (A = 15)S.D. (10)fdx
0-1065-10-1-06
10-201015000
20-303025+10+1+30
30-40435+20+2+8
\( \Sigma n = 50 \)\( \Sigma fdx = 32 \)
सूत्र \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx}{n} \times i \) \( \overline{x} = 15 + \frac{32}{50} \times 10 = 15 + \frac{32}{5} \) \( = 15 + 6.4 = 21.4 \) समान्तर माध्य = 21.4
Answer: समान्तर माध्य 21.4 है।
In simple words: यह एक सतत श्रेणी का समान्तर माध्य है जिसे अप्रत्यक्ष विधि (पद-विचलन विधि) द्वारा ज्ञात किया गया है। इसमें वर्गान्तरों से मध्य मूल्य निकाले जाते हैं, एक कल्पित माध्य (A=15) चुनकर विचलन (dx) और पद-विचलन (dx') की गणना की जाती है, फिर fdx' का योग करके सूत्र में रखा जाता है।

🎯 Exam Tip: सतत श्रेणी में अप्रत्यक्ष विधि का उपयोग करते समय, मध्य मूल्य की गणना, कल्पित माध्य का चुनाव और विचलन (dx), पद-विचलन (dx') तथा fdx' की गणना में सावधानी आवश्यक है। 'i' का सही मान लगाना सुनिश्चित करें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

Question 1. समान्तर माध्य की गणना हेतु व्यक्तिगत श्रेणी की प्रत्यक्ष विधि का सूत्र लिखिए। उत्तर: सूत्र \( \overline{x} = \frac{\Sigma x}{n} \) सूत्र में - \( \overline{x} \) = समान्तर माध्य \( \Sigma \) = योग \( x \) = पद \( n \) = पदों की संख्या
Answer: व्यक्तिगत श्रेणी में समान्तर माध्य की गणना का प्रत्यक्ष विधि का सूत्र \( \overline{x} = \frac{\Sigma x}{n} \) है, जहाँ \( \overline{x} \) समान्तर माध्य, \( \Sigma x \) पदों का योग और \( n \) पदों की कुल संख्या है।
In simple words: व्यक्तिगत श्रेणी में समान्तर माध्य निकालने के लिए सभी संख्याओं को जोड़कर उनकी कुल गिनती से भाग दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: इस सूत्र को याद रखना मूलभूत है। परिभाषा के साथ सूत्र का सही उल्लेख और उसके घटकों की व्याख्या करने पर पूरे अंक मिलते हैं।

 

Question 2. एक आदर्श माध्य के गुण बताइए। उत्तर: एक आदर्श माध्य में निम्नलिखित आवश्यक गुण होने चाहिए
(i) स्पष्ट परिभाषा ।
(ii) श्रेणी के सभी पदों पर आधारित ।
(iii) माध्य सरल होना चाहिए।
(iv) अंकगणितीय एवं बीजगणितीय विवेचन सम्भव ।
(v) उच्चावचनों का कम प्रभाव ।
(vi) माध्य से निकाली गयी संख्या निश्चित एवं निरपेक्ष होनी चाहिए।
Answer: एक आदर्श माध्य स्पष्ट रूप से परिभाषित होना चाहिए, श्रेणी के सभी पदों पर आधारित होना चाहिए, गणना में सरल होना चाहिए, बीजगणितीय विवेचन के योग्य होना चाहिए, उच्चावचनों से कम प्रभावित होना चाहिए, और निश्चित तथा निरपेक्ष संख्या होनी चाहिए।
In simple words: एक अच्छे औसत को आसानी से समझा जाना चाहिए, सभी डेटा का उपयोग करना चाहिए, सरल होना चाहिए, गणितीय गणनाओं के लिए उपयुक्त होना चाहिए, बाहरी बदलावों से ज्यादा प्रभावित नहीं होना चाहिए और उसका मान स्पष्ट होना चाहिए।

🎯 Exam Tip: इन गुणों को याद रखें, क्योंकि ये केन्द्रीय प्रवृत्ति के मापों की तुलना और मूल्यांकन के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं। कम से कम तीन-चार गुणों का उल्लेख करना पर्याप्त होता है।

 

Question 3. एक व्यक्ति की मासिक आय Rs. में नीचे दी गयी है। प्रत्यक्ष विधि से समान्तर माध्य कीजिए 1400, 1350, 1500, 1750, 1100 हलः सूत्र \( \overline{x} = \frac{X_1+X_2 + X_3 + X_4........X_n}{n} \) या \( \overline{x} = \frac{\Sigma X}{n} \) अतः, \( \overline{x} = \frac{1400+1350 + 1500 + 1750 +1100}{5} \) \( \overline{x} = \frac{7100}{5} = 1420 \) अतः, समान्तर माध्य = 1420
Answer: समान्तर माध्य 1420 है।
In simple words: दिए गए सभी आय मूल्यों को जोड़कर कुल आयों की संख्या (5) से भाग देकर औसत मासिक आय ज्ञात की जाती है।

🎯 Exam Tip: प्रत्यक्ष विधि में, सभी डेटा बिंदुओं को सही ढंग से जोड़ना और फिर कुल डेटा बिंदुओं की संख्या से भाग देना सुनिश्चित करें। यह व्यक्तिगत श्रेणी के लिए सबसे सीधी गणना है।

 

Question 4. निम्नलिखित आवृत्ति सारणी के आधार पर छात्रों को प्राप्त अंकों का समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए

प्राप्तांकछात्रों की संख्या
0-813
8-1612
16-2427
24-3228
32-4028
40-4818
48-5614
56-6410
हलः
प्राप्तांक वर्गछात्रों की संख्यामध्य मूल्य M.V. या xपद मूल्य x आवृत्ति fx
0-813452
8-161212144
16-242720540
24-322828784
32-4028361008
40-481844792
48-561452728
56-641060600
\( n = 150 \)\( \Sigma fx = 4648 \)
सूत्र- \( \overline{x} = \frac{\Sigma fx}{n} \) से; अतः, \( \overline{x} = \frac{4648}{150} \) समान्तर माध्य = 309.86
Answer: समान्तर माध्य 309.86 है।
In simple words: इस सतत आवृत्ति वितरण में, पहले प्रत्येक वर्ग के मध्य मूल्य (X) ज्ञात किए जाते हैं। फिर इन मध्य मूल्यों को उनकी संबंधित आवृत्तियों (f) से गुणा करके fx का योग निकाला जाता है और कुल आवृत्तियों (n) से भाग देकर समान्तर माध्य ज्ञात किया जाता है।

🎯 Exam Tip: सतत श्रेणी में समान्तर माध्य की गणना के लिए मध्य मूल्य (X) की सही गणना अत्यंत महत्वपूर्ण है। fx कॉलम को सही ढंग से गुणा करना और \(\Sigma fx\) का सटीक योग सुनिश्चित करें।

निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

Question 1. समान्तर माध्य किसे कहते हैं? या समान्तर माध्य को परिभाषित कीजिए । उत्तर: समान्तर माध्य वह मान है जो दिये हुए पदों के योगफल में पदों की संख्या से भाग देने पर प्राप्त होता है। या वह संख्या जो किसी समूह विशेष के सभी आँकड़ों का प्रतिनिधित्व करती है, उस समूह का समान्तर माध्य कहलाती है।
Answer: समान्तर माध्य केन्द्रीय प्रवृत्ति का एक माप है जो किसी सांख्यिकीय श्रेणी के सभी मदों के योग को उन मदों की कुल संख्या से भाग देने पर प्राप्त होता है। यह श्रेणी के सभी मूल्यों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक औसत मान होता है।
In simple words: समान्तर माध्य, जिसे औसत भी कहते हैं, सभी संख्याओं को जोड़कर उन्हें कुल संख्याओं की गिनती से भाग देने पर प्राप्त होने वाला मान है।

🎯 Exam Tip: समान्तर माध्य की परिभाषा सीधी और सटीक होनी चाहिए। 'योगफल' और 'पदों की संख्या' इन दो मुख्य शब्दों का प्रयोग करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. समान्तर माध्य कितने प्रकार के होते हैं? उत्तरः समान्तर माध्य दो प्रकार के होते हैं
(i) सरल समान्तर माध्य तथा
(ii) भारित समान्तर माध्य ।
Answer: समान्तर माध्य मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: सरल समान्तर माध्य और भारित समान्तर माध्य।
In simple words: समान्तर माध्य दो तरह के होते हैं - सामान्य औसत और भार वाला औसत।

🎯 Exam Tip: प्रकारों का स्पष्ट और संक्षिप्त उल्लेख करें। यह एक सीधा प्रश्न है जिसमें सटीक जानकारी की अपेक्षा की जाती है।

 

Question 3. सरल समान्तर माध्य से क्या अभिप्राय होता है? उत्तर: सरल समान्तर माध्य की गणना पदों के योगफल में पदों की संख्या से भाग देकर की जाती है। सरल समान्तर माध्य में समूह के सभी पदों या समंकों को समान महत्त्व दिया जाता है।
Answer: सरल समान्तर माध्य केन्द्रीय प्रवृत्ति का वह मापक है जिसमें श्रेणी के सभी मदों को समान महत्त्व दिया जाता है और इसकी गणना सभी मदों के मूल्यों के योग को उनकी कुल संख्या से भाग देकर की जाती है।
In simple words: सरल समान्तर माध्य वह औसत है जहाँ सभी संख्याओं को बराबर महत्व दिया जाता है और उन्हें जोड़कर कुल गिनती से भाग दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: 'समान महत्त्व' और 'योगफल को संख्या से भाग' इन दो प्रमुख बिंदुओं को अपनी परिभाषा में शामिल करना सुनिश्चित करें।

 

Question 4. भारित समान्तर माध्य से क्या अभिप्राय होता है? उत्तरः भारित समान्तर माध्य में प्रत्येक पद को उसके महत्त्व के अनुसार कम या अधिक भार प्रदान किया जाता है। पद मूल्यों को उसके महत्त्व के अनुसार भार देकर समान्तर माध्य ज्ञात करना भारित समान्तर माध्य है।
Answer: भारित समान्तर माध्य वह समान्तर माध्य है जिसमें विभिन्न मदों को उनके सापेक्षिक महत्त्व के अनुसार अलग-अलग 'भार' (weights) प्रदान किए जाते हैं। फिर प्रत्येक मद को उसके भार से गुणा करके योग निकाला जाता है और इसे कुल भारों के योग से भाग दिया जाता है।
In simple words: भारित समान्तर माध्य वह औसत है जहाँ कुछ संख्याओं को दूसरों की तुलना में ज्यादा महत्व या 'भार' दिया जाता है, और यह उनके महत्व के अनुसार गणना की जाती है।

🎯 Exam Tip: 'महत्त्व के अनुसार भार' इस अवधारणा पर जोर देना महत्वपूर्ण है। एक संक्षिप्त उदाहरण देना भी सहायक हो सकता है।

 

Question 5. समान्तर माध्य की तीन सीमाओं की व्याख्या कीजिए। उत्तरः
(i) समान्तर माध्य की गणना करते समय सभी समंक समान गुण वाले होने चाहिए।
(ii) उच्चावचनों का कम प्रभाव होना चाहिए।
(iii) समान्तर माध्य की गणना योग्य एवं कुशल व्यक्ति के द्वारा की जानी चाहिए जिससे कि समान्तर माध्य शुद्ध प्राप्त हो सके ।
Answer: समान्तर माध्य की तीन मुख्य सीमाएँ हैं: (1) यह अत्यधिक या बहुत कम मानों से बहुत अधिक प्रभावित होता है, जिससे प्रतिनिधित्व त्रुटिपूर्ण हो सकता है। (2) इसे आलेखीय रूप से प्रदर्शित नहीं किया जा सकता। (3) यह गुणात्मक डेटा जैसे बुद्धिमत्ता या सौंदर्य के लिए अनुपयुक्त है।
In simple words: समान्तर माध्य बहुत बड़े या छोटे नंबरों से आसानी से बदल जाता है, इसे चित्र में नहीं दिखाया जा सकता, और यह भावनाओं या गुणों जैसी चीजों का औसत नहीं बता सकता।

🎯 Exam Tip: समान्तर माध्य की सीमाओं का उल्लेख करते समय, उन स्थितियों पर ध्यान केंद्रित करें जहाँ यह एक प्रभावी या सटीक केंद्रीय प्रवृत्ति का माप नहीं होता है। चरम मूल्यों (extreme values) से संवेदनशीलता एक महत्वपूर्ण सीमा है।

 

Question 6. अप्रत्यक्ष विधि से समान्तर माध्य ज्ञात करने का सूत्र लिखिए। उत्तरः खण्डित तथा सतत श्रेणी में अप्रत्यक्ष विधि से समान्तर माध्य ज्ञात करने का सूत्र- \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx}{n} \)
Answer: अप्रत्यक्ष विधि से समान्तर माध्य ज्ञात करने का सूत्र है: \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx}{n} \), जहाँ \( \overline{x} \) समान्तर माध्य, A कल्पित माध्य, \( \Sigma fdx \) आवृत्ति और कल्पित माध्य से विचलनों का गुणनफल का योग, और \( n \) कुल आवृत्तियों का योग है।
In simple words: अप्रत्यक्ष विधि का सूत्र कल्पित माध्य (A) में, आवृत्ति और विचलनों के योग को कुल आवृत्तियों से भाग देने पर प्राप्त मान को जोड़कर समान्तर माध्य निकालने के लिए उपयोग होता है।

🎯 Exam Tip: सूत्र को सही ढंग से लिखना और उसके सभी घटकों (A, \(\Sigma fdx\), n) को समझाना आवश्यक है। 'i' का उल्लेख तब करें जब पद-विचलन विधि का उपयोग किया जाए।

 

Question 7. समान्तर माध्य के दो गुण बताइए। उत्तरः
(i) समान्तर माध्य में सरलता का गुण पाया जाता है।
(ii) समान्तर माध्य सभी पदों का प्रतिनिधित्व करता है।
Answer: समान्तर माध्य के दो मुख्य गुण हैं: (1) इसकी गणना और समझने में सरलता होती है। (2) यह श्रेणी के सभी मदों पर आधारित होता है और उनका प्रतिनिधित्व करता है।
In simple words: समान्तर माध्य को समझना और निकालना आसान है, और यह सभी संख्याओं का प्रतिनिधित्व करता है।

🎯 Exam Tip: गुणों का उल्लेख करते समय, उनकी संक्षिप्त और स्पष्ट व्याख्या करें। गणना में सरलता और प्रतिनिधित्व क्षमता महत्वपूर्ण गुण हैं।

 

Question 8. समान्तर माध्य के दो दोष लिखिए। उत्तरः
(i) समान्तर माध्य ज्ञात करने में सभी पदों को महत्त्व दिया जाता है। किन्तु बड़े मूल्यों के पद समान्तर माध्य को अधिक प्रभावित करते हैं।
(ii) समान्तर माध्य द्वारा कभी-कभी अशुद्ध परिणाम भी निकल जाते हैं।
Answer: समान्तर माध्य के दो दोष हैं: (1) यह चरम मूल्यों (अत्यधिक बड़े या छोटे मानों) से अत्यधिक प्रभावित होता है। (2) इसे आलेखीय रूप से प्रदर्शित नहीं किया जा सकता, जिससे डेटा की दृश्य व्याख्या कठिन हो जाती है।
In simple words: समान्तर माध्य बहुत बड़े या बहुत छोटे नंबरों से आसानी से प्रभावित हो जाता है, और इसे ग्राफ में नहीं दिखाया जा सकता।

🎯 Exam Tip: दोषों का उल्लेख करते समय, उन नकारात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करें जो समान्तर माध्य को केंद्रीय प्रवृत्ति के एक प्रभावी माप के रूप में सीमित करते हैं। चरम मूल्यों से संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण दोषों में से एक है।

 

Question 9. समान्तर माध्य की गणना हेतु व्यक्तिगत श्रेणी की प्रत्यक्ष विधि का सूत्र लिखिए। उत्तर: व्यक्तिगत श्रेणी की प्रत्यक्ष विधि का सूत्र- \( \overline{x} = \frac{\Sigma x}{n} \)
Answer: समान्तर माध्य की गणना हेतु व्यक्तिगत श्रेणी की प्रत्यक्ष विधि का सूत्र \( \overline{x} = \frac{\Sigma x}{n} \) है, जहाँ \( \overline{x} \) समान्तर माध्य, \( \Sigma x \) पदों का योग और \( n \) पदों की कुल संख्या है।
In simple words: व्यक्तिगत श्रेणी में समान्तर माध्य निकालने के लिए सभी संख्याओं को जोड़कर उनकी कुल गिनती से भाग दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: इस सूत्र को सही ढंग से लिखना और उसके प्रतीकों (जैसे \(\Sigma x\), \(n\)) की व्याख्या करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. समान्तर माध्य की गणना हेतु व्यक्तिगत श्रेणी की अप्रत्यक्ष विधि का सूत्र लिखिए। उत्तरः व्यक्तिगत श्रेणी की अप्रत्यक्ष विधि का सूत्र- \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma dx}{n} \)
Answer: समान्तर माध्य की गणना हेतु व्यक्तिगत श्रेणी की अप्रत्यक्ष विधि का सूत्र \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma dx}{n} \) है, जहाँ \( \overline{x} \) समान्तर माध्य, A कल्पित माध्य, \( \Sigma dx \) कल्पित माध्य से विचलनों का योग और \( n \) पदों की कुल संख्या है।
In simple words: व्यक्तिगत श्रेणी में अप्रत्यक्ष विधि से समान्तर माध्य निकालने के लिए, एक कल्पित माध्य में सभी विचलनों के योग को कुल संख्या से भाग देने पर प्राप्त मान को जोड़ा जाता है।

🎯 Exam Tip: सूत्र में A (कल्पित माध्य) और \(\Sigma dx\) (विचलनों का योग) के महत्व को स्पष्ट करें। 'dx' की गणना \(x - A\) के रूप में होती है।

 

Question 11. समान्तर माध्य की गणना हेतु खण्डित श्रेणी की प्रत्यक्ष विधि का सूत्र लिखिए। उत्तरः खण्डित श्रेणी की प्रत्यक्ष विधि का सूत्र- \( \overline{x} = \frac{\Sigma fx}{n} \)
Answer: समान्तर माध्य की गणना हेतु खण्डित श्रेणी की प्रत्यक्ष विधि का सूत्र \( \overline{x} = \frac{\Sigma fx}{n} \) है, जहाँ \( \overline{x} \) समान्तर माध्य, \( \Sigma fx \) पद-मूल्यों और उनकी आवृत्तियों के गुणनफलों का योग, और \( n \) आवृत्तियों का योग है।
In simple words: खण्डित श्रेणी में समान्तर माध्य निकालने के लिए, प्रत्येक संख्या को उसकी आवृत्ति से गुणा करके सभी गुणनफलों को जोड़ा जाता है, फिर कुल आवृत्तियों से भाग दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: सूत्र में \( \Sigma fx \) का अर्थ 'पद मूल्य x आवृत्ति का योग' और \( n \) का अर्थ 'कुल आवृत्ति' है, इन्हें स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

Question 12. समान्तर माध्य की गणना हेतु खण्डित श्रेणी की अप्रत्यक्ष विधि का सूत्र लिखिए। उत्तरः खण्डित श्रेणी की अप्रत्यक्ष विधि का सूत्र- \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx}{n} \)
Answer: समान्तर माध्य की गणना हेतु खण्डित श्रेणी की अप्रत्यक्ष विधि का सूत्र \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx}{n} \) है, जहाँ \( \overline{x} \) समान्तर माध्य, A कल्पित माध्य, \( \Sigma fdx \) आवृत्ति और कल्पित माध्य से विचलनों के गुणनफल का योग, और \( n \) कुल आवृत्तियों का योग है।
In simple words: खण्डित श्रेणी में अप्रत्यक्ष विधि से समान्तर माध्य निकालने के लिए, एक कल्पित माध्य में, आवृत्ति और विचलनों के गुणनफलों के योग को कुल आवृत्तियों से भाग देने पर प्राप्त मान को जोड़ा जाता है।

🎯 Exam Tip: सूत्र के साथ-साथ A, \(\Sigma fdx\), और n के अर्थ को स्पष्ट रूप से समझाएं। 'dx' की गणना \(x - A\) के रूप में होती है।

 

Question 13. भारित समान्तर माध्य की गणना हेतु लघु विधि का सूत्र लिखिए। उत्तरः भारित समान्तर माध्य का लघु विधि का सूत्र \( \overline{X}W = A + \frac{\Sigma Wdx}{\Sigma W} \)
Answer: भारित समान्तर माध्य की गणना हेतु लघु विधि का सूत्र \( \overline{X}W = A + \frac{\Sigma Wdx}{\Sigma W} \) है, जहाँ \( \overline{X}W \) भारित समान्तर माध्य, A कल्पित माध्य, \( \Sigma Wdx \) भारों और कल्पित माध्य से विचलनों के गुणनफल का योग, और \( \Sigma W \) कुल भारों का योग है।
In simple words: भारित समान्तर माध्य को लघु विधि से निकालने के लिए, एक कल्पित माध्य में भारित विचलनों के योग को कुल भारों के योग से भाग देने पर प्राप्त मान को जोड़ा जाता है।

🎯 Exam Tip: इस सूत्र में 'W' (भार) के महत्व पर जोर दें। 'dx' का अर्थ 'कल्पित माध्य से विचलन' है, और \( \Sigma Wdx \) और \( \Sigma W \) की सही गणना महत्वपूर्ण है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

Question 1. केन्द्रीय प्रवृत्ति की एक माप है
(क) समान्तर माध्य
(ख) माध्य विचलन
(ग) प्रमाप विचलन
(घ) सह-सम्बन्ध
Answer: (क) समान्तर माध्य
In simple words: केन्द्रीय प्रवृत्ति वह मान है जो डेटा के केंद्र को दर्शाता है, और समान्तर माध्य इसका एक सामान्य उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: केन्द्रीय प्रवृत्ति के प्रमुख मापों (माध्य, माध्यिका, बहुलक) को याद रखें। माध्य विचलन, प्रमाप विचलन और सह-सम्बन्ध अन्य सांख्यिकीय माप हैं।

 

Question 2. समान्तर माध्य का मूल्य श्रेणी के सभी चरों के मूल्य के (क) योग के बराबर होता है। (ख) वर्गों के योग के बराबर होता है। (ग) योग में चरों की संख्या से गुणा करने पर प्राप्त मूल्य के बराबर होता है। (घ) योग में चरों की संख्या से भाग देने पर प्राप्त मूल्य के बराबर होता है । उत्तरः (घ) योग में चरों की संख्या से भाग देने पर प्राप्त मूल्य के बराबर होता है।
Answer: (घ) योग में चरों की संख्या से भाग देने पर प्राप्त मूल्य के बराबर होता है।
In simple words: समान्तर माध्य निकालने के लिए सभी संख्याओं को जोड़कर उनकी कुल गिनती से भाग दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: समान्तर माध्य की मूल परिभाषा को याद रखें। यह हमेशा मूल्यों के योग को उनकी संख्या से भाग देने पर प्राप्त होता है।

 

Question 3. खण्डित या विच्छिन्न श्रेणी में प्रत्यक्ष रीति से समान्तर माध्य निकालने का सूत्र है
(क) \( \overline{x} = \frac{\Sigma x}{n} \)
(ख) \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma dx}{n} \)
(ग) \( \overline{x} = \frac{\Sigma fx}{n} \)
(घ) \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx}{n} \)
Answer: (ग) \( \overline{x} = \frac{\Sigma fx}{n} \)
In simple words: खण्डित श्रेणी में प्रत्यक्ष विधि से औसत निकालने के लिए, प्रत्येक संख्या को उसकी आवृत्ति से गुणा करके सभी गुणनफलों को जोड़ा जाता है, फिर कुल आवृत्तियों से भाग दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: खण्डित श्रेणी में, पद-मूल्य \( (x) \) और आवृत्ति \( (f) \) दोनों होते हैं, इसलिए \( fx \) का योग लिया जाता है। व्यक्तिगत श्रेणी के सूत्र से भ्रमित न हों।

 

Question 4. खण्डित या विच्छिन्न श्रेणी में अप्रत्यक्ष रीति से समान्तर माध्य निकालने का सूत्र है
(क) \( \overline{x} = \frac{\Sigma x}{n} \)
(ख) \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma dx}{n} \)
(ग) \( \overline{x} = \frac{\Sigma fx}{n} \)
(घ) \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx}{n} \)
Answer: (घ) \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx}{n} \)
In simple words: खण्डित श्रेणी में अप्रत्यक्ष विधि से औसत निकालने के लिए, एक कल्पित माध्य में, आवृत्ति और विचलनों के गुणनफलों के योग को कुल आवृत्तियों से भाग देने पर प्राप्त मान को जोड़ा जाता है।

🎯 Exam Tip: अप्रत्यक्ष विधि में कल्पित माध्य \( (A) \) और विचलन \( (dx) \) का प्रयोग होता है। खण्डित श्रेणी में \( fdx \) का योग किया जाता है।

 

Question 5. अविच्छिन्न अथवा सतत् श्रेणी में प्रत्यक्ष रीति से समान्तर माध्य निकालने का सूत्र है
(क) \( \overline{x} = \frac{\Sigma x}{n} \)
(ख) \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma dx}{n} \)
(ग) \( \overline{x} = \frac{\Sigma fx}{n} \)
(घ) \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx}{n} \)
Answer: (ग) \( \overline{x} = \frac{\Sigma fx}{n} \)
In simple words: सतत श्रेणी में प्रत्यक्ष विधि से औसत निकालने के लिए, पहले वर्ग-अन्तरालों के मध्य मूल्य (x) निकाले जाते हैं, फिर उन्हें उनकी आवृत्तियों से गुणा करके योग किया जाता है, और कुल आवृत्तियों से भाग दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: अविच्छिन्न श्रेणी में \( x \) मध्य मूल्य का प्रतिनिधित्व करता है। सूत्र वही है जो खण्डित श्रेणी के लिए प्रत्यक्ष विधि में उपयोग होता है।

 

Question 6. अविच्छिन्न अथवा सतत् श्रेणी में अप्रत्यक्ष रीति से समान्तर माध्य निकालने का सूत्र है
(क) \( \overline{x} = \frac{\Sigma x}{n} \)
(ख) \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma dx}{n} \)
(ग) \( \overline{x} = \frac{\Sigma fx}{n} \)
(घ) \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx}{n} \)
Answer: (घ) \( \overline{x} = A + \frac{\Sigma fdx}{n} \)
In simple words: सतत श्रेणी में अप्रत्यक्ष विधि से औसत निकालने के लिए, एक कल्पित माध्य (A) में, आवृत्ति और विचलनों के गुणनफलों के योग को कुल आवृत्तियों से भाग देने पर प्राप्त मान को जोड़ा जाता है।

🎯 Exam Tip: यह सूत्र खण्डित श्रेणी की अप्रत्यक्ष विधि के समान है, जहाँ \( x \) मध्य मूल्य का प्रतिनिधित्व करता है। 'i' का उपयोग तब होता है जब पद-विचलन विधि लागू होती है।

 

Question 7. 53 छात्रों के प्राप्तांकों का समान्तर माध्य 53 है। यदि प्रत्येक छात्र के प्राप्तांकों में 3 की वृद्धि कर दी जाए तो प्राप्तांकों का समान्तर माध्य (क) \( 53 + \frac{3}{53} = 53 \frac{3}{53} \) हो जाएगा। (ख) \( 53 + 3 = 56 \) हो जाएगा। (ग) \( 53 + \frac{3}{4} = 54 \frac{1}{2} \) हो जाएगा। (घ) \( 53 + 32 = 62 \) हो जाएगा। उत्तरः (ख) \( 53 +3 = 56 \) हो जाएगा।
Answer: (ख) \( 53 + 3 = 56 \) हो जाएगा।
In simple words: यदि प्रत्येक संख्या में एक ही मान जोड़ा जाता है, तो औसत में भी वही मान जुड़ जाता है।

🎯 Exam Tip: समान्तर माध्य की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यदि श्रेणी के प्रत्येक पद में कोई स्थिरांक जोड़ा या घटाया जाता है, तो समान्तर माध्य भी उसी स्थिरांक से बढ़ या घट जाता है।

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