UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 26 Classification Tabulation and Frequency Distribution of Data

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 12 Economics Chapter 26 आंकड़ों का वर्गीकरण, सारणीकरण और आवृत्ति वितरण

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UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 26 Classification, Tabulation and Frequency Distribution of Data (आँकड़ों का वर्गीकरण, सारणीकरण तथा बारम्बारता बंटन)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (6 अंक)

Question 1. सांख्यिकीय विधि के विभिन्न प्रकारों को बताइए। उत्तरः सांख्यिकीय विधि के विभिन्न प्रकार
Answer:1. आँकड़ों का संग्रह (Collection of Data) - किसी समस्या के अध्ययन के लिए अध्ययनकर्ता का सबसे पहला कार्य आँकड़ों का संग्रह करना है। इन्हीं आँकड़ों का वह विश्लेषण करता है तथा निष्कर्ष निकालता है; अतः यह अधिक महत्त्वपूर्ण है कि आँकड़े विश्वसनीय तथा सुसंगत हों। समंकों के संग्रहण के लिए पहले से ही सुनिश्चित योजना बना ली जानी चाहिए । 2. वर्गीकरण (Classification) - संगृहीत आँकड़ों को सरल बनाने के लिए उन्हें भिन्न-भिन्न समूहों या वर्गों में बाँटा जाता है। 3. सारणीकरण (Tabulation) - विभिन्न वर्गों के आँकड़ों को एक उपयुक्त क्रम में पंक्तियों एवं स्तम्भों में सारणी के रूप में प्रकट किया जाता है। 4. आँकड़ों का चित्रण या आलेखीय निरूपण (Diagrammatic or Graphical Representation of Data) - आँकड़ों की स्थिति को शीघ्र स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के लिए समंकों का चित्रण अथवा आलेखन किया जाता है। 5. ऑकड़ों का विश्लेषण (Analysis of Data) - वर्गीकृत आँकड़ों से सांख्यिकीय मापें; यथा - समान्तर माध्य, माध्यिका, बहुलक, विचलन आदि ज्ञात किये जाते हैं। 6. निर्वचन या व्याख्या (Interpretation) - उपर्युक्त गणनाओं के आधार पर समस्या के हल की व्याख्या की जाती है तथा निष्कर्ष निकाले जाते हैं। 7. पूर्वकथन या अनुमान (Predication) - निष्कर्षों के आधार पर आगे आने वाली परिस्थितियों के सम्बन्ध में अनुमान लगाया जाता है। उपर्युक्त आधार पर ही यह कहा जाता है कि सांख्यिकी वह विज्ञान है जो जिज्ञासा के किसी क्षेत्र में परिवर्तनशील संख्यात्मक, आँकड़ों के संग्रहण, प्रस्तुतीकरण, विश्लेषण, निर्वचन एवं पूर्वकथन की विधियों का वर्णन करता है।
In simple words: सांख्यिकीय विधियाँ डेटा को इकट्ठा करने, व्यवस्थित करने, विश्लेषण करने और उससे निष्कर्ष निकालने के चरणों का एक समूह हैं। ये विधियाँ किसी भी समस्या को समझने और भविष्य के बारे में अनुमान लगाने में मदद करती हैं।

🎯 Exam Tip: सांख्यिकीय विधियों के प्रत्येक चरण को सही ढंग से समझाना और उनके महत्व को स्पष्ट करना अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. वर्गान्तर बनाने की दोनों विधियों का वर्णन कीजिए। दोनों में अन्तर भी स्पष्ट कीजिए। उत्तरः वर्ग के अन्तराल के अनुसार वर्गान्तर बनाने की दो विधियाँ हैं, जो निम्नलिखित हैं (1) अपवर्जी विधि तथा (2) समावेशी विधि ।
Answer:1. अपवजी विधि (Exclusive Method) - इस विधि में प्रत्येक वर्ग-अन्तराल की उच्च सीमा आगे आने वाले वर्ग-अन्तराल की निम्न सीमा होती है। जैसे किसी कक्षा के छात्रों ने गणित में 0 से 30 अंक प्राप्त किये हैं, तो गणित में प्राप्तांकों को 5-5 के अन्तर से 6 वर्गों में बाँट सकते हैं-0-5, 5-10, 10-15, 15-20, 20-25, 25-30 अर्थात् पहला वर्ग उन छात्रों का है जिनको 0 से 4 अंक तक मिले इसी प्रकार छठा वर्ग उन छात्रों का है जिन्हें 25 से 30 अंक मिले । इससे स्पष्ट होता है कि यदि किसी छात्र ने 5 अंक प्राप्त किये हैं, तो उसे दूसरे अर्थात् 5-10 वाले वर्ग में तथा यदि 10 प्राप्तांक हैं तो उसे तीसरे अर्थात् 10-15 वाले वर्ग में रखा जाएगा। 2. समावेशी विधि (Inclusive Method) - इस विधि में किसी वर्ग की उच्च सीमा अगले वर्ग की निम्न सीमा नहीं होती, जैसे इस विधि में उपर्युक्त उदाहरण के वर्ग इस प्रकार बनेगे - 0-4, 5-9, 10-14, 15-19, 20-24, 25-29 अर्थात् पहला वर्ग उन छात्रों का है जिनको 0 से 4 अंक तक मिले। इसी प्रकार पाँचवें वर्ग में 20 से 24 तक अंक मिले । अपवर्जी व समावेशी विधियों में अन्तर

क्र० स०अपवर्जी विधिसमावेशी विधि
1.अपवर्जी विधि में प्रत्येक वर्ग-अन्तराल की उच्च सीमा आगे आने वाले वर्ग की निम्न सीमा होती है।समावेशी विधि में किसी वर्ग की उच्च सीमा अगले वर्ग की निम्न सीमा नहीं होती।
2.इस विधि में किसी वर्ग की उच्च सीमा तक के सभी अंक सम्मिलित नहीं किये जाते हैं बल्कि वर्ग के उच्च सीमा के समंक को अगले वर्ग में सम्मिलित किया जायेगा।इस विधि में वर्ग की उच्च सीमा तक के सभी समंक सम्मिलित किये जाते हैं।

In simple words: वर्गान्तर बनाने की दो मुख्य विधियाँ हैं: अपवर्जी विधि (Exclusive Method) जहाँ एक वर्ग की ऊपरी सीमा अगले वर्ग की निचली सीमा बन जाती है और उस सीमा के मान को अगले वर्ग में शामिल किया जाता है; और समावेशी विधि (Inclusive Method) जहाँ प्रत्येक वर्ग अपनी ऊपरी और निचली सीमा के सभी मानों को स्वयं में शामिल करता है और ऊपरी सीमा अगले वर्ग की निचली सीमा नहीं होती।

🎯 Exam Tip: दोनों विधियों की परिभाषा, उदाहरण और उनके बीच के मुख्य अंतरों को स्पष्ट रूप से दर्शाना उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।

 

Question 3. सारणीकरण (Tabulation) किसे कहते हैं तथा यह कितने प्रकार की होती है? सोदाहरण समझाइए । उत्तरः सारणीकरण-सारणीकरण वह रीति है जिसमें वर्गीकृत आँकड़ों को पंक्तियों एवं स्तम्भों में व्यवस्थित रूप में रखा जाता है।
Answer:सारणियों के प्रकार सारणियाँ मुख्यतः तीन प्रकार की होती हैं 1. सरल सारणियाँ (Simple Tables) - ये सारणियाँ सबसे साधारण होती हैं तथा इनमें आँकड़ों का केवल एक गुण ही प्रदर्शित किया जाता है। इसमें स्तम्भों के उपविभाग नहीं होते। उदाहरणार्थ- निम्नलिखित सारणी विभिन्न वर्षों में भारत की जनसंख्या दर्शाती है

वर्षजनसंख्या (करोड़ों में)
195135-92
196143-64
197154-79
2. द्विगुणी सारणियाँ (Double Tables) - इस प्रकार की सारणियों में एक ही प्रकार के आँकड़ों के दो गुणों को प्रदर्शित किया जाता है। उदाहरण के लिए-नीचे दी गयी सारणी में विभिन्न वर्षों की जनसंख्या में स्त्रियों तथा पुरुषों की संख्या (करोड़ों में अलग-अलग अंकित है
वर्षपुरुषस्त्रियाँयोग
195118.5217.4035.92
196122.4921.1543.64
197128.5426.2554.79
3. बहुगुण सारणियाँ (Manifold Tables) - इस प्रकार की सारणियों में दो से अधिक गुणों को प्रदर्शित किया जाता है। निम्नलिखित सारणी में पुरुष व स्त्रियों में शिक्षित/अशिक्षितों की संख्या (करोड़ों में) अलग-अलग प्रदर्शित की गयी है
वर्षपुरुषस्त्रियाँकुल योग
शिक्षितअशिक्षितयोगशिक्षितअशिक्षितयोग
19515.00-13.5218.521.8715.5317.4035.92
19617.7514.7422.492.7518.4021.1543.64
197110.3218.2228.543.8522.4026.2554.79

In simple words: सारणीकरण वर्गीकृत आँकड़ों को पंक्तियों और स्तम्भों में व्यवस्थित करने का एक तरीका है। यह मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है: सरल सारणी (एक गुण), द्विगुणी सारणी (दो गुण), और बहुगुण सारणी (दो से अधिक गुण)।

🎯 Exam Tip: सारणीकरण की परिभाषा के साथ-साथ तीनों प्रकार की सारणियों को उनके उदाहरणों सहित स्पष्ट करना आवश्यक है ताकि छात्रों को उनका अंतर समझ आ सके।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

Question 1. सारणी बनाते समय किन-किन बातों पर ध्यान देना चाहिए? उत्तरः एक अच्छी सारणी बनाने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है
Answer:1. सारणी का शीर्षक अवश्य दिया जाना चाहिए। शीर्षक सरल, स्पष्ट और सूक्ष्म होना चाहिए। इसे सारणी के शीर्ष पर लिखना चाहिए । 2. प्रत्येक स्तम्भ का भी अलग-अलग उपशीर्षक लिखना चाहिए। 3. सारणी का आकार न तो बहुत बड़ा और न बहुत छोटा होना चाहिए । 4. शीर्षक के साथ-साथ आँकड़ों की इकाइयाँ आदि अवश्य लिखनी चाहिए। 5. सारणी का मुख्य उद्देश्य आँकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन होता है; अतः वर्गों को इस प्रकार रखा जाना चाहिए कि तुलना करने में सुविधा रहे। 6. आँकड़ों के सम्बन्ध में कुछ विशेष सहायक सूचना, यदि हो, तो उसे टिप्पणी के रूप में नीचे दे देना चाहिए। 7. सारणी पूर्णतया स्वच्छ हो तथा उसका रूप आकर्षक हो ।
In simple words: एक अच्छी सारणी बनाने के लिए स्पष्ट शीर्षक, उपशीर्षक, उचित आकार, इकाइयों का उल्लेख, तुलनात्मकता को बढ़ावा देने वाले वर्ग, आवश्यक टिप्पणियाँ और आकर्षक प्रस्तुति का ध्यान रखना चाहिए।

🎯 Exam Tip: सारणी निर्माण के इन महत्वपूर्ण बिंदुओं को याद रखना और उन्हें अपने उत्तर में शामिल करना सारणीकरण के व्यावहारिक ज्ञान को दर्शाता है।

 

Question 2. बारम्बारता व बारम्बारता बंटन से क्या अभिप्राय है? उत्तरः किन्हीं आँकड़ों में कोई पद जितनी बार आता है, वह उसकी बारम्बारता कहलाता है और आँकड़ों को व्यवस्थित करके बारम्बारताओं में बाँटना ही इसका बारम्बारता बंटन कहलाता है। इस प्रकार प्राप्त सारणी बारम्बारता बंटन सारणी कहलाती है।
Answer:मान लीजिए एक विद्यालय के कक्षा 12 के 30 विद्यार्थियों ने कुल 50 अंकों में से इस प्रकार अंक प्राप्त किये - 25, 20, 16, 18, 30, 35, 40, 16, 20, 18, 25, 30, 46, 40, 30, 5, 10, 25, 18, 20, 30, 25, 44, 28, 35, 30, 25, 25, 20, 30. उपर्युक्त आँकड़ों को आरोही या अवरोही क्रम में रखते हैं, आरोही क्रम में आँकड़े इस प्रकार दिखाई देंगे - 5, 10, 16, 16, 18, 18, 18, 20, 20, 20, 20, 25, 25, 25, 25, 25, 25, 28, 30, 30, 30, 30, 30, 30, 35, 35, 40, 40, 44, 46. इन आँकड़ों को 'सारणी बद्ध आँकड़े' कहते हैं। आँकड़ों को इस प्रकार सारणी रूप में रख सकते हैं

अंकविद्यार्थियों की संख्याअंकविद्यार्थियों की संख्या
51281
101306
162352
183402
204441
256461
योग30

In simple words: बारम्बारता का अर्थ है किसी दिए गए डेटा सेट में एक विशेष मान की पुनरावृत्ति की संख्या। बारम्बारता बंटन एक सारणीबद्ध व्यवस्था है जो यह दर्शाती है कि डेटा के विभिन्न मान कितनी बार दोहराए जाते हैं, जिससे डेटा का संगठन और विश्लेषण आसान हो जाता है।

🎯 Exam Tip: बारम्बारता और बारम्बारता बंटन की परिभाषा के साथ एक छोटा उदाहरण या तालिका देना आपके उत्तर को अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाएगा।

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

Question 1. निम्नलिखित आँकड़ों को आरोही क्रम में लिखकर 5 की बारम्बारता बताइए 5, 2, 3, 5, 6, 8, 5, 2, 7, 5, 4, 7, 5 हल: आँकड़ों का आरोही क्रम 2, 2, 3, 4, 5, 5, 5, 5, 5, 6, 7, 7, 8 5, पाँच बार आया है। अतः 5 की बारम्बारता = 5
Answer:आँकड़ों का आरोही क्रम है: 2, 2, 3, 4, 5, 5, 5, 5, 5, 6, 7, 7, 8. संख्या 5 इस क्रम में पाँच बार आई है। अतः 5 की बारम्बारता = 5
In simple words: डेटा को छोटे से बड़े क्रम में व्यवस्थित करने के बाद, संख्या 5 कुल 5 बार दिखाई देती है, इसलिए 5 की बारम्बारता 5 है।

🎯 Exam Tip: बारम्बारता ज्ञात करने के लिए डेटा को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना और फिर प्रत्येक मान की गिनती करना एक सटीक तरीका है।

 

Question 2. एक परीक्षा में पूर्णाक 100 है। दस छात्रों के प्राप्तांक निम्नलिखित हैं 15, 25, 22, 38, 55, 59, 80, 87, 45, 18 आँकड़ों का परिसर बताइए । हलः अधिकतम प्राप्तांक = 87 न्यूनतम प्राप्तांक = 15 परिसर = 87 - 15 = 72
Answer:दिए गए प्राप्तांक हैं: 15, 25, 22, 38, 55, 59, 80, 87, 45, 18. अधिकतम प्राप्तांक = 87 न्यूनतम प्राप्तांक = 15 परिसर = अधिकतम प्राप्तांक - न्यूनतम प्राप्तांक परिसर = 87 - 15 = 72
In simple words: परिसर (Range) किसी डेटा सेट में सबसे बड़े मान और सबसे छोटे मान के बीच का अंतर होता है। इस प्रश्न में, अधिकतम अंक 87 और न्यूनतम अंक 15 हैं, इसलिए परिसर 72 है।

🎯 Exam Tip: परिसर की गणना के लिए डेटा के उच्चतम और निम्नतम मानों को सही ढंग से पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. एक बंटन के वर्ग चिह्न निम्नलिखित हैं - 104, 114, 124, 134, 144, 154, 164 वर्ग माप तथा वर्ग सीमाएँ ज्ञात करो। हल: दिये गये वर्ग चिह्न क्रमशः 104, 114, 124, 134, 144, 154, 164 दो क्रमागत वर्ग चिह्नों का अन्तरे = 10 वर्ग - अन्तराल या वर्ग माप = 10 अतः वर्ग-अन्तराल का आधा = \( \frac { 10 }{ 2 } \) = 5 प्रत्येक वर्ग चिह्न में से 5 घटाने तथा 5 जोड़ने पर वर्ग सीमाएँ प्राप्त होती हैं। अतः वर्ग सीमाएँ - 99-109, 109-119, 119-129, 129-139, 139-149, 149-159, 159-169
Answer:दिये गये वर्ग चिह्न क्रमशः 104, 114, 124, 134, 144, 154, 164 हैं। दो क्रमागत वर्ग चिह्नों का अंतर = 114 - 104 = 10. अतः वर्ग-अन्तराल या वर्ग माप = 10. वर्ग-अन्तराल का आधा = \( \frac { 10 }{ 2 } \) = 5. प्रत्येक वर्ग चिह्न में से 5 घटाने पर निम्न सीमा तथा 5 जोड़ने पर उच्च सीमा प्राप्त होती है। वर्ग सीमाएँ इस प्रकार हैं: (104 - 5) - (104 + 5) = 99-109 (114 - 5) - (114 + 5) = 109-119 (124 - 5) - (124 + 5) = 119-129 (134 - 5) - (134 + 5) = 129-139 (144 - 5) - (144 + 5) = 139-149 (154 - 5) - (154 + 5) = 149-159 (164 - 5) - (164 + 5) = 159-169
In simple words: वर्ग चिह्न दिए होने पर, वर्ग माप ज्ञात करने के लिए किन्हीं दो लगातार वर्ग चिह्नों के बीच का अंतर निकाला जाता है। फिर, वर्ग माप के आधे को प्रत्येक वर्ग चिह्न में से घटाकर निम्न सीमा और जोड़कर उच्च सीमा प्राप्त की जाती है।

🎯 Exam Tip: वर्ग माप और वर्ग सीमाओं की गणना के लिए वर्ग चिह्न की अवधारणा और सूत्र को समझना आवश्यक है।

 

Question 4. कक्षा 12 के 50 विद्यार्थियों ने अर्थशास्त्र की परीक्षा में पूर्णाक 50 में से निम्नलिखित अंक प्राप्त किये। 10 का वर्ग- अन्तराल लेकर अपवर्जी विधि से बारम्बारता सारणी बनाइए
Answer:प्राप्तांक: 43, 40, 40, 35, 35, 49, 22, 37, 25, 18 11, 36, 35, 15, 19, 0, 32, 23, 25, 18 29, 46, 43, 13, 18, 19, 22, 31, 21, 11 13, 44, 34, 16, 36, 37, 44, 17, 15, 26 26, 13, 28, 37, 38, 49, 41, 27, 35, 37 उपर्युक्त प्राप्तांकों में न्यूनतम अंक = शून्य तथा अधिकतम अंक = 49 अतः परिसर = 49 - 0 = 49 अतः उपर्युक्त आँकड़ों के लिए वर्ग-अन्तराल 10 के पाँच वर्ग बनाये । अपवर्जी विधि से बारम्बारता सारणी

प्राप्तांक वर्गटैली चिह्न विद्यार्थियों की संख्याबारम्बारता
0-10|1
10-20|||| |||| ||||14
20-30|||| |||| |11
30-40|||| |||| ||||14
40-50|||| ||||10
योग50

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह तालिका 50 विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त अंकों के बारम्बारता बंटन को अपवर्जी विधि का उपयोग करके दर्शाती है। इसमें प्रत्येक अंक वर्ग (जैसे 0-10) के लिए टैली चिह्न और उसकी संगत बारम्बारता (विद्यार्थियों की संख्या) दिखाई गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि किस अंक वर्ग में कितने विद्यार्थी आते हैं।
In simple words: अपवर्जी विधि का उपयोग करके, दिए गए प्राप्तांकों को 10 के वर्ग-अन्तराल में वर्गीकृत किया गया है। न्यूनतम अंक 0 और अधिकतम अंक 49 हैं, जिससे परिसर 49 है, और कुल 50 विद्यार्थियों के अंकों को 0-10, 10-20, 20-30, 30-40, 40-50 जैसे वर्गों में टैली चिह्न और बारम्बारता के साथ सारणीबद्ध किया गया है।

🎯 Exam Tip: अपवर्जी विधि में वर्ग सीमा निर्धारण और टैली चिह्नों के सही उपयोग का अभ्यास करने से सारणी बनाने में त्रुटियों से बचा जा सकता है।

 

Question 5. एक विद्यालय के 32 अध्यापकों की आयु (वर्षो में) दर्शाने वाली बारम्बारता सारणी नीचे दी गयी है
Answer:

आयु (वर्ष में)अध्यापकों की संख्या
20-254
25-308
30-357
35-404
40-454
45-502
50-552
55-601
योग32
(i) वर्ग 20-25 का मध्यमान \( \frac { 20+25 }{ 2 } \) = 22.5, इसी प्रकार अन्य वर्गों के मध्यमान क्रमानुसार 27.5, 32.5, 37.5, 42.5, 47.5, 52.5 तथा 57.5 है। (ii) वर्ग - अन्तराल = 5 (25 - 20 = 5) (iii) चतुर्थ वर्ग (35-40) की उच्च सीमा = 40 तथा निम्न सीमा = 35. (iv) विद्यालय में (32 में से) 8 अध्यापक 25-30 वर्ग समूह में हैं तथा 32 में से मात्र एक अध्यापक 55-60 वर्ग समूह में है।
In simple words: इस प्रश्न में 32 अध्यापकों की आयु का बारम्बारता बंटन दिया गया है। हमें प्रत्येक वर्ग का मध्यमान, वर्ग-अन्तराल, चतुर्थ वर्ग की सीमाएं और विशिष्ट बारम्बारता वाले वर्गों की पहचान करनी है।

🎯 Exam Tip: मध्यमान, वर्ग-अन्तराल और वर्ग सीमाओं की गणना के सूत्रों को समझना और तालिका से जानकारी को सही ढंग से निकालना महत्वपूर्ण है।

 

निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

Question 1. अपवर्जी विधि क्या है? उत्तरः इस विधि में प्रत्येक वर्ग की उच्च सीमा अगले वर्ग की निम्न सीमा बन जाती है; जैसे - 0-5, 5-10 आदि ।
Answer: इस विधि में प्रत्येक वर्ग की उच्च सीमा अगले वर्ग की निम्न सीमा बन जाती है; जैसे - 0-5, 5-10 आदि ।
In simple words: अपवर्जी विधि में, एक वर्ग की ऊपरी सीमा को अगले वर्ग की निचली सीमा के रूप में उपयोग किया जाता है, जिससे कोई भी डेटा बिंदु दो वर्गों में शामिल नहीं होता।

🎯 Exam Tip: अपवर्जी विधि की परिभाषा और एक सरल उदाहरण को स्पष्ट रूप से याद रखें।

 

Question 2. समावेशी विधि क्या है? उत्तरः इस विधि में एक ही सीमा दो वर्गों में नहीं आती; जैसे-0 - 4, 5 - 9 आदि ।
Answer: इस विधि में एक ही सीमा दो वर्गों में नहीं आती; जैसे-0 - 4, 5 - 9 आदि ।
In simple words: समावेशी विधि में, प्रत्येक वर्ग अपनी ऊपरी और निचली सीमा दोनों को शामिल करता है, जिससे कोई भी मान दो अलग-अलग वर्गों के बीच साझा नहीं होता।

🎯 Exam Tip: समावेशी विधि की परिभाषा को एक उपयुक्त उदाहरण के साथ प्रस्तुत करें।

 

Question 3. सारणीकरण किसे कहते हैं? उत्तरः सारणीकरण वह रीति है जिसमें वर्गीकृत आँकड़ों को पंक्तियों एवं स्तम्भों में व्यवस्थित रूप में रखा जाता है।
Answer: सारणीकरण वह रीति है जिसमें वर्गीकृत आँकड़ों को पंक्तियों एवं स्तम्भों में व्यवस्थित रूप में रखा जाता है।
In simple words: सारणीकरण का अर्थ है डेटा को व्यवस्थित और आसान समझने योग्य बनाने के लिए उसे पंक्तियों और स्तंभों वाली तालिकाओं में प्रस्तुत करना।

🎯 Exam Tip: सारणीकरण की परिभाषा को स्पष्ट और संक्षिप्त रखें।

 

Question 4. सारणियाँ कितने प्रकार की होती हैं? उत्तरः सारणियाँ तीन प्रकार की होती हैं
Answer: सारणियाँ तीन प्रकार की होती हैं
(1) सरल सारणी,
(2) द्विगुण सारणी तथा
(3) बहुगुण सारणी ।।
In simple words: सारणियाँ मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं - सरल (एक विशेषता), द्विगुण (दो विशेषताओं) और बहुगुण (दो से अधिक विशेषताओं) वाली सारणियाँ।

🎯 Exam Tip: सारणियों के तीनों प्रकारों के नाम याद रखना इस प्रश्न का सीधा उत्तर है।

 

Question 5. आँकड़ों के सारणीकरण के किन्हीं दो उद्देश्यों का विवरण दीजिए। उत्तरः (1) सारणीकरण का मुख्य उद्देश्य आकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन करना होता है। (2) सारणीकरण से आँकड़े व्यवस्थित और सरल हो जाते हैं।
Answer:(1) सारणीकरण का मुख्य उद्देश्य आकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन करना होता है। (2) सारणीकरण से आँकड़े व्यवस्थित और सरल हो जाते हैं।
In simple words: सारणीकरण के दो मुख्य उद्देश्य डेटा को तुलनात्मक अध्ययन के लिए तैयार करना और उसे व्यवस्थित तथा समझने में आसान बनाना है।

🎯 Exam Tip: सारणीकरण के उद्देश्यों को स्पष्ट और संक्षिप्त वाक्यों में समझाना चाहिए।

 

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

Question 1. आँकड़ों 5, 2, 3, 5, 6, 8, 5, 2, 2, 7, 5, 4, 7 में 5 की बारम्बारता है
(क) 4
(ख) 3
(ग) 5
(घ) 2
Answer: (ग) 5
In simple words: दिए गए आँकड़ों में संख्या 5 कुल 5 बार आती है, इसलिए इसकी बारम्बारता 5 है।

🎯 Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों में बारम्बारता की गणना करते समय सभी मानों को ध्यान से गिनें।

 

Question 2. यदि किसी बंटन के एक वर्ग का मध्यमान 37 है तथा वर्ग- अन्तराल 5 हो तो वर्ग की उच्च सीमा होगी
(क) 33.5
(ख) 34.5
(ग) 35.5
(घ) 39.5
Answer: (घ) 39.5
In simple words: वर्ग की उच्च सीमा निकालने के लिए मध्यमान में वर्ग-अन्तराल के आधे को जोड़ा जाता है, यानी 37 + (5/2) = 37 + 2.5 = 39.5.

🎯 Exam Tip: मध्यमान और वर्ग-अन्तराल के संबंध को समझते हुए उच्च और निम्न सीमा निकालने का सूत्र याद रखें। उच्च सीमा = मध्यमान + (वर्ग-अन्तराल / 2)।

 

Question 3. यदि किसी बंटन के एक वर्ग का मध्यमान 47 तथा वर्ग- अन्तराल 5 हो तो वर्ग की निम्न सीमा होगी
(क) 45
(ख) 44
(ग) 44.5
(घ) 40
Answer: (ग) 44.5
In simple words: वर्ग की निम्न सीमा निकालने के लिए मध्यमान में से वर्ग-अन्तराल के आधे को घटाया जाता है, यानी 47 - (5/2) = 47 - 2.5 = 44.5.

🎯 Exam Tip: मध्यमान और वर्ग-अन्तराल से निम्न सीमा निकालने का सूत्र याद रखें: निम्न सीमा = मध्यमान - (वर्ग-अन्तराल / 2)।

Step-by-Step Textbook Answers: Class 12 Economics Chapter 26 आंकड़ों का वर्गीकरण, सारणीकरण और आवृत्ति वितरण

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Are the Economics UP Board solutions for Class 12 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 26 आंकड़ों का वर्गीकरण, सारणीकरण और आवृत्ति वितरण as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Economics concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 12 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 26 आंकड़ों का वर्गीकरण, सारणीकरण और आवृत्ति वितरण will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 26 आंकड़ों का वर्गीकरण, सारणीकरण और आवृत्ति वितरण in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Economics. You can access UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 26 आंकड़ों का वर्गीकरण, सारणीकरण और आवृत्ति वितरण in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Economics UP Board solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 26 आंकड़ों का वर्गीकरण, सारणीकरण और आवृत्ति वितरण in printable PDF format for offline study on any device.