Get the most accurate UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 25 आंकड़ों की प्रस्तुति here. Updated for the 2026 27 academic session, these solutions are based on the latest UP Board textbooks for Class 12 Economics. Our expert-created answers for Class 12 Economics are available for free download in PDF format.
Detailed Chapter 25 आंकड़ों की प्रस्तुति UP Board Solutions for Class 12 Economics
For Class 12 students, solving UP Board textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 12 Economics solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 25 आंकड़ों की प्रस्तुति solutions will improve your exam performance.
Class 12 Economics Chapter 25 आंकड़ों की प्रस्तुति UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 25 Presentation of Data (समंकों का प्रदर्शन)
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (6 अंक)
Question 1. आँकड़ों के चित्रमय प्रदर्शन से आप क्या समझते हैं ? रेखाचित्र द्वारा आँकड़ों के प्रदर्शन का क्या महत्त्व है ?
या
समंकों के चित्रमय प्रदर्शन से आप क्या समझते हैं। आर्थिक अध्ययनों में इसके उपयोग बताइए ।
या
दण्ड आरेख से आप क्या समझते हैं ? दण्ड आरेख के प्रकारों की विवेचना कीजिए।
या
आँकड़ों के चित्र सहित प्रदर्शन की उपयोगिता (महत्त्व) की विवेचना कीजिए।
या
समंकों के रेखाचित्रीय निरूपण के लाभों का वर्णन कीजिए।
Answer: सांख्यिकी का यह महत्त्वपूर्ण उद्देश्य है कि जटिल और विशाल आँकड़ों को इस रूप में प्रस्तुत करना कि वे समझने में सरल हो जाएँ। वर्गीकरण और सारणीयन के अन्तर्गत भी यही उद्देश्य निहित होता है। कभी-कभी अंकों का यह जमघट मस्तिष्क को भारी कर देता है। इसीलिए सांख्यिकीय आँकड़ों के चित्रमय प्रदर्शन की आवश्यकता समझी गयी । संक्षेप में हम यह कह सकते हैं- “सांख्यिकीय आँकड़ों (समंकों) को रोचक एवं आकर्षक बनाने के लिए ज्यामितीय आकृतियों; जैसे-रेखाचित्र, दण्ड-चित्र, वृत्त चित्र, आयत चित्र अथवा मानचित्र के रूप में प्रदर्शित करने की क्रिया को आँकड़ों का चित्रमय प्रदर्शन कहते हैं।”
आँकडों के चित्रमय प्रदर्शन का महत्त्व या लाभ उपयोगिता) आँकड़ों को जब चित्रों के माध्यम से निरूपित किया जाता है तब वे अधिक आकर्षक तथा समझने में सरल हो जाते हैं। ठीक ही कहा गया है- “एक चित्र हजार शब्दों के बराबर होता है।”
रेखाचित्र द्वारा आँकड़ों के प्रदर्शन के महत्त्व या लाभ निम्नलिखित हैं
1. चित्र समंकों को सरल व सुबोध बनाते हैं - जब समंक लम्बे-चौड़े दिये होते हैं तब उन्हें समझना कठिन होता है। बड़े-बड़े समंकों को देखकर मस्तिष्क परेशान हो जाता है तथा कोई भी निष्कर्ष नहीं निकल पाता है। सांख्यिकीय आँकड़े चित्रों, आकृतियों व आलेखों द्वारा निरूपित किये जाने से सरल तथा सुबोध हो जाते हैं।
2. अधिक समय तक स्मरणीय - समंकों को देखकर याद करना कठिन होता है, परन्तु चित्रों की स्मृति मस्तिष्क में दीर्घकाल तक बनी रहती है।
3. विशेष योग्यता की आवश्यकता नहीं - सांख्यिकीय चित्रों को देखकर शिक्षित तथा सामान्य शिक्षित व्यक्ति भी उनका अर्थ समझ जाते हैं। चित्रों को समझाने के लिए सांख्यिकी के सूत्रों आदि का ज्ञान होना आवश्यक नहीं है।
4. समय व श्रम में बचत - चित्रों को समझने तथा उनसे निष्कर्ष निकालने में कम समय व कम श्रम की आवश्यकता होती है। चित्रों को देखकर ही समंक पर्याप्त मात्रा में समझ में आ जाते हैं।
5. आकर्षक एवं प्रभावशाली - रेखाचित्रे अपनी आकृति, सरलता वे सुन्दरता के कारण लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं, जिसका स्थायी प्रभाव मस्तिष्क पर पड़ता है।
6. तुलना करने में सहायक - सांख्यिकीय आँकड़ों को चित्रों, आकृतियों, आलेखों द्वारा निरूपित करने से उनका तुलनात्मक अध्ययन सुविधाजनक हो जाता है। चित्रों को देखकर विभिन्न समंकों की तुलना सरलतापूर्वक की जा सकती है। वास्तव में चित्रों का सबसे अधिक महत्त्व समंकों की तुलना करने में ही दृष्टिगत होता है।
7. विज्ञापन में सहायक - सामान्यतः विज्ञापनों के साथ उपयुक्त चित्र बने होते हैं, जिनके माध्यम से विज्ञापन अधिक आकर्षक तथा बोधगम्य हो जाते हैं। आज के प्रतियोगिता के युग में विज्ञापनों का अत्यधिक महत्त्व है। रेखाचित्र विज्ञापन को अधिक आकर्षण व सौन्दर्य प्रदान करते हैं।
8. जनसाधारण को लाभ - आज के वैज्ञानिक युग में आँकड़े प्रस्तुत करने के लिए व्यापारी, अर्थशास्त्री, चिकित्साशास्त्री व सरकार रेखाचित्रों, विशेष रूप से स्तम्भ चार्टी व बिन्दु चित्रों का अधिक उपयोग करते हैं, जिनका लाभ जनसाधारण को भी मिलता है। निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है कि सांख्यिकीय चित्रों की उपयोगिता सार्वभौमिक है।
In simple words: Picture-based data representation makes complex data easy to understand, memorable, and visually appealing, without requiring special statistical knowledge. It aids in comparison, advertising, and saves time and effort for a general audience.
🎯 Exam Tip: Focus on understanding the core advantages of visual data representation, such as simplicity, memorability, and broad accessibility, as these are key scoring points.
Question 2. समंकों को रेखाचित्रों द्वारा प्रदर्शित करने की विभिन्न विधियाँ बताइए । या दण्ड-चित्र पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
Answer: सांख्यिकी में सामान्यतः निम्नलिखित प्रकार के रेखाचित्रों का प्रयोग किया जाता है
1. एक विमा (विस्तार) वाले चित्र (One dimensional diagrams),
2. दो विमा (विस्तार) वाले चित्र (Two dimensional diagrams),
3. तीन विमा (विस्तार) वाले चित्र (Three dimensional diagrams),
4. मानचित्र (Map diagrams) तथा
5. चित्र-लेख (Pictograms)
एक विमा (विस्तार) वाले चित्र
जब समंक पद-माला विच्छिन्न होती है और उसके किसी एक गुण की तुलना करनी होती हैं तो एक विमा (विस्तार) वाले चित्रों की रचना की जाती है। इस प्रकार के चित्रों की रचना केवल चित्रों की लम्बाई में ही पदों के मूल्यों के अनुसार की जाती है। मोटाई सामान्यतः एकसमान होती है और पदों के मूल्यों से उसका कोई सम्बन्ध नहीं होता है। एक विमा (विस्तार) वाले चित्र दो प्रकार के होते हैं
(क) रेखाचित्र तथा
(ख) दण्ड-चित्र ।
(क) रेखाचित्र (Line Diagram) - आँकड़ों के चित्रमय प्रदर्शन के अन्तर्गत यह चित्र प्रदर्शन में सबसे सरल है। इस चित्र का प्रयोग वहाँ किया जाता है, जहाँ किसी तथ्य से सम्बन्धित आँकड़ों की संख्या बहुत अधिक हो, लेकिन उनमें अन्तर बहुत कम हो। इस चित्र में समंकों को दर्शाने के लिए खड़ी रेखाओं का प्रयोग किया जाता है। इस चित्र का लाभ यह है कि समंकों के बीच तुलना आसानी से हो जाती है। यह चित्र आकर्षक नहीं दिखाई पड़ता, इसलिए इसका प्रयोग कम किया जाता है। (पाठयक्रम में इसको सम्मिलित नहीं किया गया है।)
(ख) दण्ड-चित्र (Bar Diagram) - इस चित्र का प्रयोग वहाँ किया जाता है, जहाँ किसी तथ्य से सम्बन्धित पद-मूल्यों की संख्या कम हो। दण्ड-चित्र की रचना के लिए एक निश्चित पैमाना निर्धारित किया जाता है और प्रत्येक पद-मूल्य को इस पैमाने के आधार पर बदलकर दण्डों की लम्बाई निश्चित की जाती है। इन चित्रों में सभी दण्डों की मोटाई का एक-समान होना आवश्यक है। दण्ड-चित्र पाँच प्रकार के होते हैं
(1) सरल दण्ड-चित्र - ये दो प्रकार से बनाये जा सकते हैं (i) उदग्र दण्ड-चित्र तथा
1. क्षैतिज दण्ड-चित्र ।
2. बहु-दण्ड-चित्र ।
3. द्वि-दिशा दण्ड-चित्र ।
4. अन्तर्विभक्त दण्ड-चित्र ।
5. प्रतिशत अन्तर्विभक्त दण्ड-चित्र।
दो विमा (विस्तार) वाले चित्र दो विमा वाले चित्र उन चित्रों को कहते हैं जिनमें समंकों का चित्रण दो विस्तारों - ऊँचाई और चौड़ाई-को ध्यान में रखकर किया जाता है। इसीलिए इन्हें क्षेत्रफल चित्र (Area diagram) अथवा धरातल चित्र (Surface diagram) भी कहा जाता है। दो विमा (विस्तार) वाले चित्र निम्नलिखित प्रकार के होते हैं (क) आयत चित्र, (ख) वर्ग चित्र और (ग) वृत्त चित्र ।
(क) आयत चित्र (Rectangular Diagram) - आयत चित्र उस चित्र को कहते हैं, जिसमें आयत की लम्बाई तथा चौड़ाई दोनों का महत्त्व होता है और दोनों दो भिन्न-भिन्न तथ्यों को स्पष्ट करते हैं। उत्पादन लागत विश्लेषण तथा पारिवारिक बजटों के चित्रण में आयत चित्रों का प्रयोग किया जाता है।
आयत चित्रों के अन्तर्गत बारम्बारता वितरण को प्रदर्शित करने के लिए रेखाचित्रों का भी प्रयोग किया जाता है। ऐसे प्रदर्शन को आवृत्ति रेखाचित्र या बारम्बारता रेखाचित्र (Frequency graph) कहते हैं। ये अग्रलिखित प्रकार के होते हैं
1. बारम्बारता आयत चित्र (Frequency Histogram),
2. बारम्बारता बहुभुज (Frequency Polygon),
3. बारम्बारता वक्र (Frequency Curve) तथा
4. थी बारम्बारता वक्र (Cumulative Frequency Curve or Ogive Curve)
(ख) वर्ग चित्र (Square Diagram) - जब चित्र द्वारा प्रदर्शित की जाने वाली राशियों का विस्तार बहुत अधिक हो या जब समंकों के न्यूनतम व अधिकतम मूल्यों में अत्यधिक अन्तर हो तो उन्हें दण्ड-चित्रों द्वारा प्रदर्शित नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में वर्ग चित्र का ही प्रयोग किया जाता है। (पाठयक्रम में इसको सम्मिलित नहीं किया गया है।)
(ग) वृत्त चित्र (Circular Diagram) - वृत्त चित्र वर्ग चित्रों के विकल्प हैं अर्थात् जिन परिस्थितियों में वर्ग चित्रों का प्रयोग उचित रहता है, उन्हीं दशाओं में वृत्त चित्रों का भी उपयोग किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में, जब प्रदर्शित की जाने वाली राशियों का विस्तार बहुत अधिक हो अथवा जब तथ्यों के न्यूनतम व अधिकतम मूल्य में पर्याप्त अन्तर हों तो वृत्त चित्र उपयुक्त रहते हैं।
In simple words: Data can be represented using various diagrams like one-dimensional (line, bar), two-dimensional (rectangle, square, circle), and three-dimensional, maps, or pictograms. One-dimensional diagrams use length, while two-dimensional use both height and width to depict data. Each type has specific applications depending on the data complexity and comparison needs.
🎯 Exam Tip: Remember the five main types of diagrams (one, two, three-dimensional, maps, pictograms) and the specific sub-types, especially for bar and frequency graphs, as these are common areas for questions.
Question 3. उदग्र दण्ड-चित्र से आप क्या समझते हैं ? निम्नलिखित आँकड़ों को ग्राफ पेपर पर उदग्र दण्ड-चित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए
Answer: सरल दण्ड-चित्र दो प्रकार से बनाये जा सकते हैं (i) उदग्र (Vertical) एवं (i) क्षैतिज (Horizontal)।
जब दण्ड सीधे बनाये जाते हैं तो वे उदग्र दण्ड कहलाते हैं। इनको बनाते समय यह प्रयास करना चाहिए कि सबसे बड़ा दण्ड बायीं ओर अथवा दायीं ओर बने और सबसे छोटा दायीं ओर अथवा बायीं ओर बने ।
1921 से 1961 ई० तक की जनसंख्या का चित्रमय प्रदर्शन दिये गये आँकड़ों की सहायता से उदग्र दण्ड-चित्र निम्नवत् बनाया जा सकता है
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक उदग्र दण्ड-चित्र है जो 1921 से 1961 तक की जनसंख्या (करोड़ में) को दर्शाता है। इसमें X-अक्ष पर 'वर्ष' (1921, 1931, 1941, 1951, 1961) और Y-अक्ष पर 'जनसंख्या (करोड़ में)' (0 से 45) प्रदर्शित है, जिसमें प्रत्येक 1 सेमी 5 करोड़ जनसंख्या को दर्शाता है। दण्डों की लम्बाई विभिन्न वर्षों में जनसंख्या के आँकड़ों के अनुसार है, जो जनसंख्या वृद्धि को ऊर्ध्वाधर रूप से प्रस्तुत करती है।
In simple words: Vertical bar diagrams are used when bars are drawn upright. The bars' lengths represent data values, and they should ideally be arranged in ascending or descending order for clarity. This type of diagram helps visualize changes over time, like population growth.
🎯 Exam Tip: When constructing vertical bar diagrams, ensure clear labeling of axes, proper scaling, and consistent bar width. Pay attention to the order of bars for better interpretation of trends.
Question 4. क्षैतिज दण्ड-चित्र से आप क्या समझते हैं ? 1921 से 2001 तक प्रत्येक जनगणना पर भारत की जनसंख्या निम्नवत है। क्षैतिज दण्ड-चित्र द्वारा इसे प्रदर्शित कीजिए
Answer: जब दण्ड खड़े न होकर लेटी दशा में बनाये जाते हैं तो उन्हें क्षैतिज दण्ड कहते हैं। इसमें मापदण्ड की रेखा ऊपर की ओर ली जाती है। इस प्रकार के दण्ड बनाते समय सबसे बड़ा दण्ड ऊपर और सबसे छोटा दण्ड नीचे आना चाहिए। परन्तु यदि आँकड़े विपरीत क्रम के अनुसार हों तो दण्ड भी उसी क्रम में बनाये जाने चाहिए।
1921 से 2001 तक की जनगणना पर भारत की जनसंख्या का चित्रमय प्रदर्शन
दिये गये आँकड़ों की सहायता से क्षैतिज दण्ड-चित्र निम्न प्रकार बनाया जा सकता है
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक क्षैतिज दण्ड-चित्र है जो 1921 से 2001 तक भारत की जनगणना पर जनसंख्या (करोड़ में) को दर्शाता है। इसमें Y-अक्ष पर 'वर्ष' (1921, 1931, ..., 2001) और X-अक्ष पर 'जनसंख्या (करोड़ में)' (0 से 110) प्रदर्शित है, जिसमें प्रत्येक 1 सेमी 10 करोड़ जनसंख्या को दर्शाता है। दण्डों की लम्बाई विभिन्न वर्षों में जनसंख्या के आँकड़ों के अनुसार है, जो जनसंख्या वृद्धि को क्षैतिज रूप से प्रस्तुत करती है।
विशेष - इस चित्र में आँकड़ों को क्षैतिज (Horizontal) रूप में प्रदर्शित किया गया है। आवश्यकता होने पर x और Y-अक्ष में परिवर्तन करके इसे उदग्र (Vertical) रूप में भी प्रदर्शित किया जा सकता है।
In simple words: Horizontal bar diagrams are used when bars are drawn lying down. The length of the bars represents the data, with the scale usually placed at the top. This type of diagram is effective for comparing categories or items.
🎯 Exam Tip: For horizontal bar diagrams, ensure the vertical axis (Y-axis) lists categories or years, and the horizontal axis (X-axis) represents the measured values. Proper scaling and clear labeling are crucial for readability.
Question 5. बहुदण्ड चित्र से आप क्या समझते हैं ? निम्नलिखित तालिका में एक विद्यालय के साहित्य और विज्ञान वर्गों का 2005 में हाईस्कूल का परीक्षाफल दिया गया है
छात्रों की संख्या
| वर्ग | प्रथम श्रेणी | द्वितीय श्रेणी | तृतीय श्रेणी | अनुत्तीर्ण | इन |
|---|---|---|---|---|---|
| साहित्य | 80 | 160 | 120 | 40 | |
| विज्ञान | 50 | 300 | 100 | 50 |
आँकड़ों को बहुदण्ड चित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
Answer: जब किसी चित्र द्वारा एक गुण से अधिक या एक ही गुण की एक से अधिक अवस्थाओं को प्रदर्शित करने के लिए चित्र बनाते हैं, तब प्रत्येक गुण या अवस्था के लिए अलग-अलग दण्ड सटे-सटे बनाये जाते हैं और निर्मित चित्र बहुदण्ड चित्र कहलाता है। इसे मिश्रित दण्ड-चित्र भी कहते हैं। दण्डों में अन्तर स्पष्ट करने के लिए उन्हें अलग-अलग चिह्नों या रंगों से दर्शाया जाता है। यह ध्यान रखना चाहिए कि एक ही तथ्य से सम्बन्धित सभी वर्षों अथवा स्थानों के दण्ड-चित्रों में एक ही रंग अथवा चिह्न भरे जाएँ। दण्डों के रंगों या चिह्नों को स्पष्ट करने के लिए अलग से एक संकेतक बनाया जाता है जिसे चित्र के अन्दर ही दिखाया जाता है। एक अवस्था से सम्बन्धित विभिन्न समूहों के दण्ड-चित्र एक साथ मिलाकर बनाये जाते हैं, फिर थोड़ा रिक्त स्थान छोड़कर दूसरी अवस्था से सम्बन्धित विभिन्न समूहों के दण्ड-चित्र एक साथ मिलाकर बनाये जाते हैं। दिये गये ऑकड़ों की सहायता से बहुदण्ड चित्र निम्नवत् बनाया जा सकता है
एक विद्यालय के साहित्य और विज्ञान वर्ग का 1995 ई० के परीक्षाफल का बहुदण्ड चित्र
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक बहुदण्ड चित्र है जो 1995 में एक विद्यालय के साहित्य और विज्ञान वर्गों के हाईस्कूल परीक्षाफल को दर्शाता है। इसमें X-अक्ष पर 'वर्ग' (साहित्य वर्ग, विज्ञान वर्ग) और Y-अक्ष पर 'छात्रों की संख्या' (0 से 320) प्रदर्शित है, जिसमें प्रत्येक 1 सेमी 40 छात्रों को दर्शाता है। प्रत्येक वर्ग के लिए अलग-अलग दण्डों का उपयोग कर प्रथम, द्वितीय, तृतीय श्रेणी और अनुत्तीर्ण छात्रों की संख्या को दर्शाया गया है, और प्रत्येक श्रेणी को अलग-अलग रंगों या पैटर्न से चिह्नित किया गया है ताकि तुलना आसान हो सके।
In simple words: A multiple bar diagram, or compound bar chart, uses several adjacent bars for each category to represent multiple aspects or states of a single characteristic. Different colors or patterns distinguish these sub-categories, allowing for easy comparison of various groups or conditions side-by-side.
🎯 Exam Tip: When creating multiple bar diagrams, ensure that the bars for a single category are grouped together, and a clear legend is provided to explain the different colors or patterns used for each sub-category. This enhances clarity and comparative analysis.
Question 6. द्वि-दिशा दण्ड-चित्र से आप क्या समझते हैं ? विभिन्न वर्षों में एक फर्म की लाभ-हानि (इ करोड़ में) का विवरण निम्नवत है। उपयुक्त चित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए
Answer: इस प्रकार के दण्ड-चित्र से दो विपरीत गुण वाले तथ्यों का प्रदर्शन किया जाता है। दण्ड आधार रेखा के ऊपर व नीचे दोनों ओर बनाये जाते हैं जो विपरीत गुणों का प्रदर्शन करते हैं। आधार-रेखा के ऊपर का भाग धनात्मक गुणों का और नीचे का भाग ऋणात्मक गुणों का प्रदर्शन करता है। इन्हें भी अलग-अलग रंगों या चिह्नों द्वारा स्पष्ट किया जाना चाहिए तथा एक संकेतक भी दिया जाना चाहिए। दिये गये आँकड़ों की सहायता से उपयुक्त दण्ड-चित्र (द्वि-दिशा दण्ड-चित्र) अग्रवत् बनाया जा सकता है
1996 से 2001 ई० तक फर्म की लाभ और हानि का चित्रमय प्रदर्शन
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक द्वि-दिशा दण्ड-चित्र है जो 1996 से 2001 तक एक फर्म के लाभ और हानि को दर्शाता है। इसमें X-अक्ष पर 'वर्ष' (1996 से 2001) और Y-अक्ष पर 'लाभ-हानि (Rs. करोड़ में)' (-80 से 120) प्रदर्शित है, जिसमें 1 सेमी 20 करोड़ Rs. को दर्शाता है। दण्ड आधार रेखा (0) के ऊपर लाभ (धनात्मक) और नीचे हानि (ऋणात्मक) को विभिन्न रंगों या पैटर्नों से दर्शाया गया है, जिससे लाभ और हानि की तुलनात्मक स्थिति स्पष्ट होती है।
In simple words: A two-directional bar diagram is used to represent two opposing characteristics of data, such as profit and loss. Bars extend both above (positive values) and below (negative values) a central baseline, making it easy to visualize and compare contrasting aspects.
🎯 Exam Tip: For two-directional bar diagrams, always set a clear baseline (zero point) and use distinct colors or patterns for positive and negative values. Ensure consistent spacing and width for all bars to maintain visual integrity.
Question 7. अन्तर्विभक्त दण्ड-चित्र से आप क्या समझते हैं ? एक विद्यालय में 1999-2000 एवं 2000-2001 के सत्र में विभिन्न वर्गों में छात्रों की संख्या निम्नवत थी। उपयुक्त चित्र (अन्तर्विभक्त दण्ड-चित्र) द्वारा प्रदर्शित कीजिए
छात्रों की संख्या
| वर्ग | 1999-2000 | 2000-2001 | उत्तर: |
|---|---|---|---|
| कला | 150 | 200 | |
| विज्ञान | 50 | 100 | |
| वाणिज्य | 200 | 300 | |
| योग | 400 | 600 |
Answer: जब एक ही राशि कई विभागों में विभाजित हो तो कुछ राशि तथा उसके विभिन्न भागों को अन्तर्विभक्त दण्डों द्वारा प्रदर्शित कर सकते हैं। ये विभिन्न अंश कुल परिणाम के साथ अपना अनुपात भी प्रकट करते हैं और एक-दूसरे के साथ तुलनीय भी होते हैं। विभिन्न अंशों को विभिन्न रंगों या चिह्नों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। दिये गये आँकड़ों की सहायता से उपयुक्त दण्ड-चित्र (अन्तर्विभक्त दण्ड-चित्र) अग्रवत् बनाया जा सकती है
1999-2000 एवं 2000-2001 के सत्र में विद्यालय के छात्रों की संख्या को अन्तर्विभक्त दण्ड-चित्र द्वारा प्रदर्शन
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक अन्तर्विभक्त दण्ड-चित्र है जो 1999-2000 और 2000-2001 सत्र में एक विद्यालय में विभिन्न वर्गों (कला, विज्ञान, वाणिज्य) में छात्रों की संख्या को दर्शाता है। X-अक्ष पर 'वर्ष' (2000, 2001) और Y-अक्ष पर 'छात्रों की संख्या' (0 से 600) प्रदर्शित है, जिसमें प्रत्येक 1 सेमी 100 छात्रों को दर्शाता है। प्रत्येक वर्ष के लिए एक ही दण्ड को अलग-अलग खण्डों में विभाजित कर कला, विज्ञान और वाणिज्य के छात्रों की संख्या को अलग-अलग रंगों या पैटर्न से दिखाया गया है, जिससे कुल संख्या के भीतर प्रत्येक वर्ग का अनुपात स्पष्ट होता है।
In simple words: Sub-divided bar diagrams represent the total value of a quantity and its various components within a single bar. Each segment of the bar uses different colors or patterns to show the proportion of each component, allowing for comparison of the parts relative to the whole and to each other across different categories.
🎯 Exam Tip: When creating sub-divided bar diagrams, ensure that all segments within a bar add up to the total, and a clear legend explains what each segment represents. This is crucial for accurately showing the composition of totals.
Question 8. अन्तर्विभक्त दण्ड-चित्र से आप क्या समझते हैं? वर्ष 2000 और 2001 में खाद्यान्नों के उत्पादन को निम्नलिखित सारणी में दिखाया गया है। प्रतिशत अन्तर्विभक्त दण्ड-चित्र द्वारा उत्पादन को प्रदर्शित कीजिए
उत्पादन (लाख टन में)
| खाद्यान्न | 2000 | 2001 |
|---|---|---|
| गेहूँ | 8 | 10 |
| चावल | 5 | 7 |
| चना | 3 | 3 |
| मटर | 4 | 5 |
Answer: पद-मूल्यों की सापेक्षिक तुलना के लिए प्रतिशत अन्तर्विभक्त दण्ड-चित्र का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार के चित्र में पद के सम्पूर्ण मूल्य को 100 मानकर उसके विभिन्न अंशों को प्रतिशत के रूप में बदल लिया जाता है। इसके पश्चात् उन प्रतिशतों को संचयी बना लिया जाता है। मापदण्ड के आधार पर पूर्ण दण्ड में से अंश काट दिये जाते हैं और अलग-अलग अंशों को भिन्न-भिन्न रंगों या चिह्नों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इस दण्ड-चित्र में प्रत्येक दण्ड की लम्बाई और चौड़ाई बराबर होती है। केवल इसके अन्तर्विभाजन में प्रतिशत की भिन्नता के अनुसार अन्तर होता है। इस दण्ड-चित्र का सबसे बड़ा गुण यह होता है कि समग्र के अंशों को प्रतिशत में व्यक्त किये जाने के कारण उनकी तुलना करना सरल होता है, किन्तु इस दण्ड-चित्र में कुल सामग्री की तुलना करना सम्भव नहीं होता, क्योंकि सभी राशियों के लिए बराबर-बराबर लम्बाई व चौड़ाई के दण्ड खींचे जाते हैं।
प्रश्न में दी गयी सारणी को निम्नवत् संचयी प्रतिशत सारणी के रूप में बदलेंगे
उत्पादन (लाख टन में)
| खाद्यान्न | 2000 | 2001 | ||||
|---|---|---|---|---|---|---|
| कुल उत्पादन | प्रतिशत | संचयी प्रतिशत | कुल उत्पादन | प्रतिशत | संचयी प्रतिशत | |
| गेहूँ | 8 | 40 | 40 | 10 | 40 | 40 |
| चावल | -5 | 25 | 65 | 7 | 28 | 68 |
| चना | 3 | 15 | 80 | 3 | 12 | 80 |
| मटर | 4 | 20 | 100 | 5 | 20 | 100 |
| योग | 20 | 100 | 25 | 100 |
प्रतिशत अन्तर्विभक्त दण्ड-चित्र द्वारा सभंकों का प्रदर्शन
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक प्रतिशत अन्तर्विभक्त दण्ड-चित्र है जो वर्ष 2000 और 2001 में विभिन्न खाद्यान्नों (गेहूँ, चावल, चना, मटर) के उत्पादन के प्रतिशत को दर्शाता है। इसमें X-अक्ष पर 'वर्ष' (2000, 2001) और Y-अक्ष पर 'उत्पादन (लाख टन में)' (0 से 100%) प्रदर्शित है, जिसमें प्रत्येक 1 सेमी 10 लाख टन उत्पादन को दर्शाता है। प्रत्येक वर्ष के लिए एक ही ऊँचाई के दण्ड को विभिन्न खाद्यान्नों के प्रतिशत के अनुसार विभाजित किया गया है, जिससे प्रत्येक खाद्यान्न का कुल उत्पादन में सापेक्ष योगदान स्पष्ट होता है।
In simple words: A percentage sub-divided bar diagram displays the relative share of different components within a total, by converting all values into percentages of 100. This makes it easier to compare the proportional distribution of parts across different categories, even if their absolute totals vary.
🎯 Exam Tip: When constructing percentage sub-divided bar diagrams, ensure each bar reaches 100% and that the cumulative percentages are calculated correctly. Clear color coding and a legend are essential for distinguishing between different components.
Question 9. बारम्बारता वक्र से आप क्या समझते हैं? नीचे दी गयी सारणी की सहायता से आयत चित्र, बारम्बारता बहुभुज तथा बारम्बारता वक़ निरूपित कीजिए
Answer: वर्गीकृत बारम्बारता बण्टन के वर्ग – अन्तरालों के मध्य-बिन्दुओं (x) को Y-अक्ष पर तथा बारम्बारता (f) को Y-अक्ष पर लेकर बिन्दुओं (x, f) को अंकित करने के बाद उन्हें सरल रेखाओं से क्रमशः मिलाने से जो आकृति बनती है, उसको बारम्बारता बहुभुज कहते हैं। दूसरे शब्दों में, आयत चित्र में, प्रत्येक दो क्रमागत आयतों की ऊपरी भुजाओं के मध्य-बिन्दुओं को एक रेखा-खण्ड द्वारा मिलाने से जो आकृति प्राप्त होती है, उसे बारम्बारता बहुभुज कहते हैं।
बहुभुज को पूर्ण करने के लिए प्रत्येक सिरे पर एक शुन्य बारम्बारता के वर्ग–अन्तराल की कल्पना की जाती है। पहले वर्ग के मध्य-बिन्दु को पहले वर्ग-अन्तराल से पूर्व शून्य बारम्बारता के वर्ग-अन्तराल की कल्पना करके उसके मध्य-बिन्दु से मिलाया जाता है। बाद वाले वर्ग के मध्य-बिन्दु को बाद वाले वर्ग-अन्तराल के बाद शून्य बारम्बारता वाले वर्ग-अन्तराल की कल्पना करके उसके मध्य-बिन्दु से मिलाया जाता है। यदि कल्पित वर्ग – अन्तराल मानना उचित न लगता हो तो पहले बिन्दु को पहले वर्ग-अन्तराल की निम्न सीमा से और अन्तिम बिन्दु को बाद वाले वर्ग-अन्तराल की ऊपरी सीमा से मिला दिया जाता है।
उपर्युक्त विवेचना के अनुसार बारम्बारता बहुभुज बनाने के दो तरीके हुए
(i) मध्य-बिन्दु और बारम्बारता को अंकित करके और (ii) पहले आयत चित्र बनाकर और उसके बाद मध्य-बिन्दुओं को मिलाकर ।
बारम्बारता बहुभुज में मध्य-बिन्दुओं को मिलाकर खींची गयी रेखा में कोणीयता आ जाती है। इस कोणीय स्वरूप को समाप्त करने के लिए मध्य-बिन्दुओं का आश्रय लेते हुए मुक्तहस्त (Freehand) से खींची गयी एक तदनुरूप रेखा को बारम्बारता वक्र कहते हैं। वर्ग–अन्तरालों के मध्य-बिन्दुओं को निर्दिष्ट करने वाली सारणी निम्नवत् बनायी जा सकती है
| वर्ग-अन्तराल | 0-5 | 5-10 | 10-15 | 15-20 | 20-25 | 25-30 |
|---|---|---|---|---|---|---|
| मध्य-बिन्दु | 2.5 | 7.5 | 12.5 | 17.5 | 22.5 | 27.5 |
| बारम्बारता | 3 | 7 | 12 | 6 | 5 | 8 |
दिये गये आँकड़ों की सहायता से आयत-चित्र, बारम्बारता बहुभुज और बारम्बारता वक्र निम्नवत् बनाया जा सकता है
आयत-चित्र, बारम्बारता बहुभुज और बारम्बारता वक्र का चित्रमय अंकन
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र आयत-चित्र, बारम्बारता बहुभुज और बारम्बारता वक्र को एक साथ दर्शाता है। X-अक्ष पर 'वर्ग-अन्तराल' (0 से 30) और Y-अक्ष पर 'बारम्बारता' (0 से 12) प्रदर्शित है। आयत-चित्र, प्रत्येक वर्ग-अन्तराल की बारम्बारता को आयत के रूप में दिखाता है। बारम्बारता बहुभुज आयतों के मध्य-बिन्दुओं को सीधी रेखाओं से जोड़कर बनाया गया है, जबकि बारम्बारता वक्र इन्हीं मध्य-बिन्दुओं से होकर गुजरने वाली एक चिकनी, मुक्तहस्त वक्र रेखा है, जो डेटा के वितरण को सहज रूप में दर्शाती है।
In simple words: A frequency curve is a smooth, freehand curve drawn through the midpoints of the tops of the rectangles in a histogram (or frequency polygon) to represent the frequency distribution of data. It provides a more generalized and continuous representation of the data's distribution compared to a frequency polygon.
🎯 Exam Tip: When drawing a frequency curve, it should start and end on the X-axis by extending to the midpoints of the preceding and succeeding zero-frequency intervals. Ensure the curve is smooth and accurately reflects the overall shape of the distribution, not just connecting points with straight lines.
Question 10. संचयी बारम्बारता वक्र से आप क्या समझते हैं? नीचे दी गयी बारम्बारता सारणी से एक संचयी बारम्बारता वक्र खीचिए
Answer: संचयी बारम्बारता वक्र संचयी बारम्बारता बण्टन का एक आलेख होता है। यदि वर्ग-अन्तरालों की ऊपरी सीमाओं को Y-अक्ष पर और उनकी संगत संचयी बारम्बारताओं को Y-अक्ष पर लेते हुए बिन्दुओं को अंकित किया जाए और फिर उन्हें क्रमशः सरल रेखाओं से मिला दिया जाए तो जो आकृति बनेगी वह संचयी बारम्बारता बहुभुज होगी। परन्तु यदि अंकित बिन्दुओं को मिलाते हुए एक मुक्त हस्त निष्कोण वक्र खींचा जाता है तो इसे संचयी बारम्बारता वक्र या तोरण या ओजाइव वक्र कहते हैं। संचयी बारम्बारता वक्र की सहायता से माध्यिका (Median) भी ज्ञात की जा सकती है। संचयी बारम्बारता वक्र दो प्रकार के होते हैं
(1) 'से कम वाले - इसके अन्तर्गत संचयी बारम्बारता का बिन्दु वर्गान्तर की ऊपरी सीमा के आधार पर अंकित किया जाता है। इसके बाद इन बिन्दुओं को मिलाकर मुक्त हस्त रेखा से वक्र बना दिया जाता है। यह वक्र नीचे से ऊपर की ओर उठता हुआ होता है।
(2) 'से अधिक वाले - इसके अन्तर्गत संचयी बारम्बारती को बिन्दु वर्गान्तर की निचली सीमा के आधार पर अंकित किया जाता है। इसके बाद इन बिन्दुओं को मिलाकर मुक्त हस्त से वक्र बना दिया जाता है, जो क्रमशः ऊपर से नीचे की ओर गिरता हुआ होता है। दिये गये आँकड़ों की सहायता से सर्वप्रथम बारम्बारता सारणी निम्नलिखित रूप में तैयार की जाएगी।
| वर्ग-अन्तराल | बारम्बारता | ऊपरी सीमा से कम | संचयी बारम्बारता | अंकित बिन्दु |
|---|---|---|---|---|
| 0-10 | 7 | 10 से कम | 7 | (10,7) |
| 10-20 | 10 | 20 से कम | 17 | (20, 17) |
| 20-30 | 23 | 30 से कम | 40 | (30, 40) |
| 30-40 | 51 | 40 से कम | 91 | (40,91) |
| 40-50 | 6 | 50 से कम | 97 | (50, 97) |
| 50-60 | 3 | 60 से कम | 100 | (60, 100) |
अब ग्राफ-पेपर पर बिन्दु (10, 7), (20, 17), (30, 40), (40, 91), (50, 97) तथा (60, 100) अंकित किये जाएँगे । अब इन अंकित बिन्दुओं को मिलाते हुए मुक्त हस्त से एक निष्कोण वक्र खींचा जाएगा।
अभीष्ट संचयी बारम्बारता वक्र या तोरण निम्नवत् होगा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक संचयी बारम्बारता वक्र ('से कम' ओजाइव) को दर्शाता है। X-अक्ष पर 'ऊपरी सीमा' (0 से 60) और Y-अक्ष पर 'संचयी बारम्बारता' (0 से 100) प्रदर्शित है, जिसमें 1 सेमी 10 इकाई या 10 बारम्बारता को दर्शाता है। विभिन्न वर्ग-अन्तरालों की ऊपरी सीमाओं और उनकी संगत संचयी बारम्बारताओं के बिन्दुओं को अंकित करके एक चिकनी, ऊपर की ओर बढ़ती हुई वक्र रेखा खींची गई है, जो संचयी आवृत्ति वितरण को दर्शाती है।
In simple words: A cumulative frequency curve, also known as an ogive, is a graphical representation of a cumulative frequency distribution. It is formed by plotting the upper limits of class intervals on the X-axis and their corresponding cumulative frequencies on the Y-axis, then connecting these points with a smooth curve. It helps in finding the median and other positional values.
🎯 Exam Tip: Distinguish between "less than" and "more than" ogives. A "less than" ogive rises from left to right, using upper class limits, while a "more than" ogive falls from left to right, using lower class limits. Both are useful for determining the median graphically.
Question 11. वृत्त चित्रों से आप क्या समझते हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं? संक्षेप में उनका विवरण दीजिए। या वृत्त चित्र पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: आँकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए वृत्तों या चित्रों का भी प्रयोग किया जाता है। जिन परिस्थितियों में वर्ग चित्रों का प्रयोग उपयुक्त होता है, उन्हीं में वृत्त चित्रों का प्रयोग किया जा समंकों (आँकड़ों) का प्रदर्शन 319 सकता है। दूसरे शब्दों में, जब प्रदर्शित की जाने वाली राशियों का विस्तार बहुत अधिक हो अथवा जब तथ्यों के अधिकतम व न्यूनतम मूल्य में पर्याप्त अन्तर हो तो वृत्त चित्र उपयुक्त होते हैं। वृत्त का क्षेत्रफल अर्द्धव्यास अथवा त्रिज्या पर निर्भर करता है। इसलिए वर्गों की भुजाओं के ही अनुपात से अर्द्धव्यास लेकर वर्गों के स्थान पर वृत्त भी बनाये जा सकते हैं। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि सभी वृत्त केन्द्र एक सरल क्षैतिज रेखा में होने चाहिए तथा सभी वृत्तों के बीच समान दूरी छोड़ी जाए।
वर्गों के स्थान पर वृत्त बनाने के दो लाभ होते हैं। एक तो वृत्तों का बनाना सरल होता है और दूसरे वे देखने में अच्छे भी लगते हैं। इनके द्वारा आँकड़ों के विभाजन को उचित रूप में प्रदर्शित किया जा सकता है। वृत्तों का प्रयोग प्रायः विश्व के विभिन्न देशों के उत्पादन, जनसंख्या आदि को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है।
वृत्त चित्रों के प्रकार-वृत्त चित्र दो प्रकार के होते हैं (क) साधारण वृत्त चित्र तथा (ख) अन्तर्विभक्त वृत्त चित्र ।
(क) साधारण वृत्त चित्र - साधारण वृत्त चित्र बनाने के लिए सबसे पहले समंकों का वर्गमूल लिया जाता है। इसके बाद इस वर्गमूल को किसी सामान्य संख्या से भाग देकर लघुरूप में बदल देते हैं। वर्गमूलों के इस छोटे रूप को ही त्रिज्या या अर्द्धव्यास मानकर वृत्त बनाते हैं। आवश्यकता पड़ने पर इन्हें अनुपात के हिसाब से छोटा-बड़ा किया जा सकता है।
वृत्त चित्र का पैमाना निकालने के लिए वृत्त का क्षेत्रफल ज्ञात करना होता है। वृत्त का क्षेत्रफल \(r^2\) होता है।
यहाँ, \( (\pi) \) मूल्य सदैव \( \frac{22}{7} \) होता है, r वृत्त का अर्द्धव्यास है। एक वृत्त का क्षेत्रफल निकल आने पर 1 वर्ग सेमी के लिए मूल्य निकाल लेंगे, यही पैमाना होगा।
उदाहरण - यदि किसी वृत्त का अर्द्धव्यास 2 सेमी है और उसमें Rs. 1,760 दिखाये गये हैं तो पैमाना निकालने की पद्धति इस प्रकार होगी
\( \frac{22}{7} \times (2)^2 \)
या \( \frac{22}{7} \times 4 \)
या \( \frac{88}{7} \)
या \( 12.57 \) वर्ग सेमी
\( \frac{88}{7} \) वर्ग सेमी Rs. 1,760 को दर्शाता है,
\( 1 \) वर्ग सेमी \( \frac{1760 \times 7}{88} \) को दर्शाएगा।
\( \frac{1760 \times 7}{88} = \frac{12320}{88} = \) Rs. 140
अतः पैमाना \( = 1 \) वर्ग सेमी \( = \) Rs. 140।
(ख) अन्तर्विभक्त वृत्त चित्र या कोणिक चित्र - वृत्त-चित्रों की बहुत बड़ी उपयोगिता उनके अन्तर्विभाजन की सुविधा के कारण है। वर्गों में यह सुविधा नहीं होती। वृत्त के केन्द्र पर 360° का कोण होता है। सम्पूर्ण को 360° मानकर उसके विभागों के लिए विभिन्न अंशों के कोणों की गणना कर ली जाती है। इस प्रकार सभी विभागों के कोणों का जोड़ 360° होगा। इन विभिन्न निश्चित किये हुए अंशो के अनुसार कोण बनाते हुए रेखाएँ परिधि से मिला दी जाती हैं।
In simple words: Circle diagrams, or pie charts, are used to compare data when the range of values is very large or when absolute minimum/maximum values have significant differences. They represent data as sectors of a circle, where the area of each sector is proportional to the value it represents, making them useful for showing parts of a whole. There are two main types: simple circle diagrams and sub-divided (angular) circle diagrams.
🎯 Exam Tip: For simple circle diagrams, remember that the radius is proportional to the square root of the data value. For sub-divided or angular circle diagrams, each component's share is represented by an angle at the center, calculated as (component value / total value) * 360 degrees. Ensure the sum of all angles is 360 degrees.
Question 12. नीचे सारणी में दी गयी सूचना को साधारण वृत्त-चित्र के रूप में प्रस्तुत कीजिए
Answer: सारणी में दिये गये आँकड़ों को साधारण वृत्त-चित्र के रूप में परिकल्पित करेंगे
| वस्तु | उत्पादन (लाख टनों में) | वर्गमूल | वृत्त का अर्द्धव्यास (सेमी में) जबकि 1 सेमी = 10 सेमी |
|---|---|---|---|
| चावल | 427.35 | 20.67 | 2.067 |
| गेहूँ | 264.77 | 16.27 | 1.627 |
| ज्वार | 77.53 | 8.805 | 0.8805 |
| • बाजरा | 53.57 | 7.32 | 0.732 |
पैमाना : 1 वर्ग सेमी = 1 करोड़ टन
अब इन राशियों को वृत्त का अर्द्धव्यास या त्रिज्या मानकर इनसे वृत्तों की रचना करेंगे। दिये गये आँकड़ों का साधारण वृत्त चित्र के रूप में प्रदर्शन
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र चावल, गेहूँ, ज्वार और बाजरा के उत्पादन को दर्शाने वाले चार साधारण वृत्तों को प्रस्तुत करता है। प्रत्येक वृत्त का आकार संबंधित खाद्यान्न के उत्पादन (लाख टन में) के वर्गमूल पर आधारित है, जिसमें त्रिज्या को इस तरह से समायोजित किया गया है कि 1 सेमी 10 सेमी के बराबर हो। सभी वृत्त एक क्षैतिज रेखा में केन्द्रित हैं और उनके बीच समान दूरी है, जिससे उनके सापेक्षिक उत्पादन की कल्पना करना आसान हो जाता है।
In simple words: Simple circle diagrams represent data magnitudes by the area of circles. To construct these, the square roots of the data values are typically calculated, and these square roots are then used as radii (or scaled radii) to draw the circles, making their areas proportional to the original data.
🎯 Exam Tip: When drawing simple circle diagrams, always ensure that the radii are proportional to the square root of the data to accurately represent magnitudes. Keep the centers of all circles aligned on a single horizontal line with equal spacing for clear comparison.
Question 13. नयी दिल्ली में किसी मकान को बनाने में आये विभिन्न मदों में व्यय के प्रतिशत आँकड़े निम्नलिखित सारणी में प्रदर्शित हैं
Answer: खर्च के प्रतिशत को वृत्त के संगत कोणों में बदलने की गणना निम्नलिखित रूप में की जाती है
*100 प्रतिशत बराबर है 360° के
\( \implies \) 1 प्रतिशत बराबर होगा \( \frac{360^\circ}{100} = 3.6^\circ \) के
अतः उपर्युक्त सारणी संगत कोणों के अंशों के आधार पर इस प्रकार बनायी जा सकती है
| मद | व्यय-प्रतिशत | कोण |
|---|---|---|
| श्रम | 25 | \(3.6 \times 25 = 90^\circ\) |
| ईंट | 15 | \(3.6 \times 15 = 54^\circ\) |
| सीमेण्ट | 20 | \(3.6 \times 20 = 72^\circ\) |
| स्टील | 15 | \(3.6 \times 15 = 54^\circ\) |
| लकड़ी | 10 | \(3.6 \times 10 = 36^\circ\) |
| देख-रेख | 15 | \(3.6 \times 15 = 54^\circ\) |
| योग | 100 | \(360^\circ\) |
सबसे पहले एक वृत्त खींचेंगे। वृत्त के केन्द्र पर 90° का कोण बनाएँगे। श्रम के लिए इसके बाद घड़ी में सूई के विपरीत 54°, 72°, 54°, 36° तथा 54° के कोण अन्य सामग्रियों के लिए बनाते चले जाएँगे। प्रत्येक उपविभाग को अलग-अलग चिह्नों से प्रदर्शित करेंगे ।
दिये गये आँकड़ों का अन्तर्विभक्त वृत्त-चित्र द्वारा प्रदर्शन
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक अन्तर्विभक्त वृत्त-चित्र (पाई चार्ट) है जो नयी दिल्ली में एक मकान के निर्माण में विभिन्न मदों पर हुए व्यय के प्रतिशत वितरण को दर्शाता है। इसमें श्रम, ईंट, सीमेण्ट, स्टील, लकड़ी और देख-रेख जैसे मदों को वृत्त के विभिन्न कोणिक खण्डों (सेक्टरों) के रूप में प्रदर्शित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर का आकार संबंधित मद के कुल व्यय में प्रतिशत हिस्सेदारी के आनुपातिक होता है, जिससे कुल व्यय के भीतर प्रत्येक घटक का योगदान स्पष्ट होता है।
In simple words: An angular or sub-divided circle diagram (pie chart) illustrates the proportion of different components that make up a whole, using sectors of a circle. Each component's value is converted into an angle (out of 360 degrees) at the center of the circle, and these sectors are then drawn, often with distinct colors or patterns, to show their relative sizes.
🎯 Exam Tip: When constructing a pie chart, ensure that the sum of all percentages is 100% and the sum of all central angles is 360 degrees. Use a clear legend to identify each sector and avoid using too many categories to maintain readability.
लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
Question 1. आँकड़ों के चित्रमय प्रदर्शन करते समय अथवा रेखाचित्र बनाते समय क्या-क्या सावधानियाँ रखी जानी चाहिए? या आँकड़ों के चित्रमय प्रदर्शन के सामान्य नियमों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: रेखाचित्र बनाते समय निम्नलिखित सावधानियाँ रखी जानी चाहिए
1. चित्र बनाने से पूर्व चित्र के लिए पैमाना निर्धारित कर लेना चाहिए जो सरल एवं स्पष्ट हो।
2. रेखाचित्र बनाते समय उसके आकार की ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। चित्र ने तो अधिक छोटा और न ही अधिक बड़ा होना चाहिए। चित्र का आकार कागज के आकार के ऊपर निर्भर करता है। अतः जिस कागज पर रेखाचित्र बनाया जा रहा है, उसी के अनुपात को ध्यान में रखकर रेखाचित्र का निर्माण किया जाना चाहिए ।
3. चित्रे आकर्षक होना चाहिए। अतः चित्र बनाते समय इस बात की पूरी सावधानी रखनी चाहिए कि चित्र स्वच्छ तथा प्रभावशाली हो, जिससे देखने वालों का मस्तिष्क चित्र की ओर शीघ्र ही आकर्षित हो जाए।
4. रेखाचित्रों की शुद्धता की ओर ध्यान रखना परम आवश्यक है। चित्रों को पटरी, परकार तथा पेन्सिल व चाँदे आदि की सहायता से सावधानीपूर्वक बनाना चाहिए। चित्र बनाने के लिए ग्राफ पेपर का प्रयोग उत्तम होता है।
5. रेखाचित्र में सरलता का गुण होना चाहिए, जिससे कि देखते ही चित्र का अर्थ एवं निष्कर्ष समझ में आ सके ।
6. रेखाचित्रों के पास ही वह सारणी (पैमाना) भी बनी होनी चाहिए, जिसके आधार पर रेखाचित्र बनाया गया है।
7. रेखाचित्र बनाते समय, समय तथा साधनों का ध्यान होना भी आवश्यक है। चित्र मितव्ययी होने चाहिए।
8. यदि समंकों को स्तम्भ चित्रों में दर्शाया जा रहा हो तब स्तम्भों में अन्तर की दूरी समान होनी चाहिए।
9. रेखाचित्र बनाते समय कागज पर चारों ओर पर्याप्त स्थान छोड़ना चाहिए जिससे उसका शीर्षक, पैमाना, संकेत आदि प्रदर्शित किये जा सकें।
10. चित्र को अधिक स्पष्ट तथा आकर्षक बनाने के लिए रंगों का उपयोग भी किया जा सकता है।
11. प्रत्येक चित्र के ऊपर पूर्ण, स्पष्ट संक्षिप्त शीर्षक दिया जाना चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि चित्र में क्या प्रदर्शित किया जा रहा है।
12. सांख्यिकीय आँकड़ों के प्रदर्शन के लिए अनेक प्रकार के चित्र बनाये जाते हैं, जिनकी अलग-अलग विशेषताएँ होती हैं; अतः समंकों के विश्लेषण के बाद उनके लिए कौन-सा चित्र उचित होगा, यह विचार करके ही चित्रों को बनाना चाहिए ।
In simple words: When creating diagrams, it's crucial to select an appropriate scale, ensure the diagram size is neither too big nor too small, maintain neatness and accuracy using proper tools, simplify the representation, and provide clear labels, scales, and titles. Consistent spacing for bars and appropriate use of colors also enhance clarity and appeal.
🎯 Exam Tip: The key to scoring well on diagram-related questions is to emphasize accuracy (correct scale, tools), clarity (labels, titles, legend), and appropriateness (choosing the right diagram type for the data). Mentioning aesthetics (colors, neatness) is also beneficial.
Question 2. चित्रमय प्रदर्शन की सीमाओं पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: सांख्यिकीय चित्रों में अनेक गुण होने के बावजूद इनकी कुछ सीमाएँ भी होती हैं। चित्रमय प्रदर्शन की कुछ सीमाएँ निम्नलिखित हैं
1. चित्रों द्वारा समंकों का पूर्ण निरूपण नहीं होता। चित्र तो समंकों का अनुमानित रूप में प्रदर्शन करते हैं; अतः वे उन्हीं क्षेत्रों में उपयुक्त होते हैं जहाँ किसी विषय की सरल रूप में सामान्य व्यक्तियों को जानकारी देनी आवश्यक हो।
2. चित्रों की सहायता से संख्याओं के सूक्ष्म अन्तर को दिखाना असम्भव है।
3. चित्रों की सहायता से तुलना तभी उपयुक्त हो सकती है जब वे समंकों के समान गुण के आधार पर बनायें जाएँ।
4. केवल चित्र का कोई महत्त्व नहीं होता, वरन् चित्रों के द्वारा आपसी तुलनात्मक अध्ययन सम्भव होता है।
5. चित्रों द्वारा पूर्ण सत्य निष्कर्ष नहीं निकाले जा सकते। ये तो निष्कर्ष की ओर पहुँचने के साधन मात्र हैं।
6. चित्रों द्वारा बहुमुखी विशेषताओं का प्रदर्शन नहीं हो सकता। वर्गीकरण व सारणीयन के द्वारा अनेक प्रकार की सूचनाएँ या विशेषताएँ प्रदर्शित की जा सकती हैं, लेकिन चित्रों के द्वारा किसी एक विशेषता का ही प्रदर्शन किया जा सकता है।
7. अनुचित एवं अशुद्ध चित्र बनाकर उनका आसानी से दुरुपयोग किया जा सकता है।
8. प्रत्येक प्रकार के अनुसन्धान में चित्र नहीं बनाये जा सकते। यदि बनाये भी जाएँगे तो कोई स्पष्ट भाव व्यक्त नहीं करेंगे।
9. यदि चित्र बनाने वाले को विषय तथा चित्र बनाने के नियमों का सम्यक् ज्ञान नहीं है तो उसके द्वारा बनाये गये चित्रों से स्थिति का वास्तविक ज्ञान नहीं हो सकेगा।
In simple words: Pictorial representation of data has limitations as it only provides an approximate view, cannot show subtle differences, requires similar data for comparison, and can be misused if improperly constructed. It may not be suitable for all types of research or provide comprehensive details of complex data.
🎯 Exam Tip: When discussing limitations, focus on the 'approximation' aspect of diagrams (not precise), their inability to show 'minute differences', and the potential for 'misrepresentation' if not made carefully. These points highlight the critical evaluation required for visual data.
Question 4. निम्नलिखित आँकड़ों से पहले आयत चित्र बनाइए और फिर उसी ग्राफ पर बारम्बारता बहुभुज और बारम्बारता वक्र बनाइए वर्ग- अन्तराल (0-10 10-20 20-30 30-40 40-50 50-60
Answer: दिये गये आँकड़ों से बारम्बारता बहुभुज बनाने के लिए सबसे पहले आँकड़ों से मध्य-बिन्दु और अंकित किये जाने वाले बिन्दु निम्नवत् ज्ञात करेंगे
| वर्ग-अन्तराल | बारम्बारता | मध्य-बिन्दु | अंकित किये जाने वाले बिन्दु |
|---|---|---|---|
| 0-10 | 4 | 5 | (5,5) |
| 10-20 | 5 | 15 | (15,5) |
| 20-30 | 9 | 25 | (25,9) |
| 30-40 | 12 | 35 | (35, 12) |
| 40-50 | 7 | 45 | (45, 7) |
| 50-60 | 3 | 55 | (55, 3) |
वर्ग - अन्तराल को X - अक्ष पर और बारम्बारता को Y - अक्ष पर लेते हुए प्रत्येक वर्ग-अन्तराल के लिए X-अक्ष पर एक आयत का निर्माण करेंगे। इस प्रकार जितने भी वर्ग-अन्तराल होंगे, उतनी ही आयतों का निर्माण होगा। अब इन आयतों के मध्य बिन्दुओं तथा अंकित किये जाने वाले बिन्दुओं को सीधी रेखा द्वारा मिला देंगे। इसके बाद मुक्त हस्त से एक रेखा इन सीधी रेखाओं के तदनुरूप बना देंगे। अभीष्ट आयत चित्र, बारम्बारता बहुभुज और बारम्बारता वक्र निम्नवत् बनेगा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख एक आवृत्ति वितरण को दर्शाता है जिसमें आयत चित्र, बारम्बारता बहुभुज और बारम्बारता वक्र एक ही ग्राफ पर प्रदर्शित किए गए हैं। X-अक्ष पर 'वर्ग-अन्तराल' और Y-अक्ष पर 'बारम्बारता' को दर्शाया गया है, जिससे विभिन्न वर्ग अंतरालों की आवृत्तियों का दृश्य प्रतिनिधित्व होता है और डेटा का वितरण पैटर्न स्पष्ट होता है। In simple words: हम आयत चित्र बनाते हैं, फिर उनके ऊपरी मध्यबिंदुओं को जोड़कर बारम्बारता बहुभुज बनाते हैं, और अंत में इन बिंदुओं को मुक्तहस्त से मिलाकर बारम्बारता वक्र बनाते हैं। यह हमें डेटा के वितरण को समझने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में आयत चित्र, बारम्बारता बहुभुज और बारम्बारता वक्र तीनों को एक ही ग्राफ पर सही पैमाने और स्पष्ट लेबलिंग के साथ प्रदर्शित करना महत्वपूर्ण है।
Question 5. अग्रलिखित सारणी में दिये गये 'से कम बारम्बारता वितरण को 'से अधिक बारम्बारता वितरण में परिवर्तित कीजिए और उससे संचयी बारम्बारता वक्र बनाइए
Answer: दिये गये प्रश्न में 'से कम' के अनुसार संचयी बारम्बारता दी गयी हैं। इन आँकड़ों को 'से अधिक' संचयी बारम्बारता में बदलने के लिए निम्नवत् सारणी बनानी होगी
| दी गयी सारणी | सामान्य सारणी | संचयी सारणी | |||
|---|---|---|---|---|---|
| 'से कम' प्राप्तांक | छात्र-संख्या | वर्गान्तर | बारम्बारता | 'से अधिक' | संचयी बारम्बारता |
| 20 से कम | 40 | 0-20 | 40 | 0 से अधिक | 200 |
| 40 से कम | 90 | 20-40 | 50 | 20 से अधिक | 160 |
| 60 से कम | 150 | 40-60 | 60 | 40 से अधिक | 110 |
| 80 से कम | 190 | 60-80 | 40 | 60 से अधिक | 50 |
| 100 से कम | 200 | 80-100 | 10 | 80 से अधिक | 10 |
अब ग्राफ पेपर पर बिन्दुओं (0, 200), (20, 160), (40, 110), (60, 50), (80, 10) को अंकित करेंगे। अब इन अंकित बिन्दुओं को मिलाते हुए मुक्त हाथों से एक निष्कोण वक्र खीचेंगे। यही अभीष्ट संचयी बारम्बारता वक्र या तोरण होगा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख 'से अधिक' संचयी बारम्बारता वक्र (ओजाइव) को दर्शाता है। इसमें X-अक्ष पर 'से अधिक प्राप्तांक' (वर्ग-अन्तराल की निचली सीमाएँ) और Y-अक्ष पर 'संचयी बारम्बारता' (छात्र संख्या) को प्लॉट किया गया है। वक्र ऊपर से नीचे की ओर ढलान वाला है, जो दर्शाता है कि जैसे-जैसे प्राप्तांक बढ़ते जाते हैं, उनसे अधिक स्कोर करने वाले छात्रों की संख्या घटती जाती है। In simple words: दिए गए 'से कम' आवृत्ति वितरण को पहले 'से अधिक' आवृत्ति वितरण में बदला जाता है, फिर निचली सीमाओं को संचयी आवृत्तियों के साथ प्लॉट करके एक चिकना वक्र खींचा जाता है, जिसे 'से अधिक' तोरण या ओजाइव कहते हैं।
🎯 Exam Tip: 'से कम' और 'से अधिक' दोनों प्रकार के संचयी बारम्बारता वक्रों को बनाने की प्रक्रिया और उनके बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर जब माध्यिका ज्ञात करनी हो।
Question 6. एक कक्षा में निम्नलिखित परिणाम को उपयुक्त चित्र द्वारा दिखाइए
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक कक्षा के परीक्षा परिणाम को श्रेणीवार (प्रथम, द्वितीय, तृतीय श्रेणी और अनुत्तीर्ण) एक स्तम्भ चार्ट के माध्यम से प्रदर्शित करता है। X-अक्ष पर श्रेणियों को और Y-अक्ष पर छात्रों की संख्या को दर्शाया गया है, जिससे प्रत्येक श्रेणी में छात्रों की संख्या की तुलना स्पष्ट रूप से की जा सकती है। In simple words: इस प्रश्न में, हमें एक कक्षा के परीक्षा परिणामों को विभिन्न श्रेणियों (जैसे प्रथम, द्वितीय, तृतीय श्रेणी और अनुत्तीर्ण) में दर्शाने के लिए एक स्तम्भ चार्ट (बार डायग्राम) बनाना है, जिससे प्रत्येक श्रेणी में छात्रों की संख्या स्पष्ट रूप से दिखे।
🎯 Exam Tip: स्तम्भ चार्ट का उपयोग तब करें जब आप विभिन्न असतत श्रेणियों में मात्राओं की तुलना करना चाहते हैं। स्पष्टता के लिए उचित पैमाने, शीर्षक और अक्षों पर लेबलिंग आवश्यक है।
Question 7. निम्नलिखित सारणी में एक डेरी फार्म की 100 गायों का वर्गीकरण उनके एक दिन के दूध के अनुसार दिया गया है
| दूध (लीटर में) | गायों की संख्या |
|---|---|
| 4-6 | 12 |
| 6-8 | 38 |
| 8-10 | 23 |
| 10-12 | 15 |
| 12-14 | 08 |
| 14-16 | 04 |
| योग | 100 |
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख एक डेयरी फार्म की गायों द्वारा प्रतिदिन उत्पादित दूध की मात्रा को दर्शाने वाला एक आयत चित्र (हिस्टोग्राम) है। X-अक्ष पर दूध की मात्रा (लीटर में) को वर्ग-अन्तराल के रूप में और Y-अक्ष पर गायों की संख्या (आवृत्ति) को दर्शाया गया है, जिससे दूध उत्पादन के वितरण को समझा जा सकता है। In simple words: यह प्रश्न एक डेयरी फार्म में गायों के दूध उत्पादन के आंकड़ों को प्रस्तुत करता है, और इसका उत्तर एक आयत चित्र के रूप में दिया गया है जो दूध की विभिन्न मात्राओं और उन्हें उत्पन्न करने वाली गायों की संख्या को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: आयत चित्र का उपयोग तब किया जाता है जब डेटा निरंतर होता है और विभिन्न वर्ग अंतरालों में आवृत्ति वितरण को दर्शाना हो। अक्षों पर सही लेबलिंग और पैमाने का ध्यान रखें।
Question 8. निम्नलिखित सारणी में एक डेरी फार्म की 100 गायों का वर्गीकरण उनके एक दिन के दूध के अनुसार किया गया है उपयुक्त से बारम्बारता बहुभुज बनाइए । हुलः यहाँ वर्ग-अन्तराल 4-6 का मध्यमान = \( \frac{4+6}{2} \) = 5 । इसी प्रकार अन्य वर्ग-अन्तरालों के मध्यमान क्रमशः 7, 9, 11, 13 तथा 15 हुए।
4-6 वर्ग-अन्तराल के निकटस्थ नीचे का वर्ग-अन्तराल 2-4 हुआ, जिसकी बारम्बारता शून्य है। इसी प्रकार 14-16 के निकटस्थ ऊपर का वर्ग-अन्तराल 16-18 है, जिसकी बारम्बारता भी शून्य है। इनके मध्यमान क्रमानुसार 3 एवं 17 हैं। इसके लिए दी गयी सारणी को निम्नवत् बदल लेते हैं
| वर्ग-अन्तराल | मध्यमान बिन्दु | बारम्बारता |
|---|---|---|
| 2-4 | \( \frac{2+4}{2} = 3 \) | 0 |
| 4-6 | \( \frac{4+6}{2} = 5 \) | 12 |
| 6-8 | \( \frac{6+8}{2} = 7 \) | 38 |
| 8-10 | \( \frac{8+10}{2} = 9 \) | 23 |
| 10-12 | \( \frac{10+12}{2} = 11 \) | 15 |
| 12-14 | \( \frac{12+14}{2} = 13 \) | 4 |
| 14-16 | \( \frac{14+16}{2} = 15 \) | 8 |
| 16-18 | \( \frac{16+18}{2} = 17 \) | 0 |
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख एक बारम्बारता बहुभुज को दर्शाता है जो एक डेरी फार्म की गायों के दूध उत्पादन के आंकड़ों से बनाया गया है। X-अक्ष पर दूध की मात्रा (लीटर में वर्ग-अन्तराल के मध्य बिन्दु) और Y-अक्ष पर गायों की संख्या (बारम्बारता) को प्लॉट किया गया है, और बिंदुओं को सीधी रेखाओं से जोड़कर डेटा के वितरण पैटर्न को प्रदर्शित किया गया है।
द्वितीय विधि
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख बारम्बारता बहुभुज को आयत चित्र विधि का उपयोग करके दर्शाता है। पहले आयत चित्र बनाए गए हैं, और फिर प्रत्येक आयत के ऊपरी मध्य-बिंदुओं को जोड़कर बारम्बारता बहुभुज का निर्माण किया गया है, जो दूध उत्पादन के वितरण को प्रस्तुत करता है। In simple words: इस प्रश्न में, हमें दिए गए दूध उत्पादन डेटा के लिए मध्य-बिंदुओं का उपयोग करके एक बारम्बारता बहुभुज बनाना है, जिसमें अतिरिक्त शून्य-आवृत्ति वर्ग-अंतराल शामिल करके वक्र को X-अक्ष पर बंद किया जाता है।
🎯 Exam Tip: बारम्बारता बहुभुज बनाते समय, वर्ग-अंतरालों के मध्य-बिंदुओं का सही ढंग से पता लगाना और वक्र को X-अक्ष पर बंद करने के लिए काल्पनिक शून्य-आवृत्ति वर्ग-अंतरालों को शामिल करना महत्वपूर्ण है।
Question 9. 10 विद्यार्थियों द्वारा गणित (X) व विज्ञान (Y) में प्राप्त अंक नीचे दिये हुए हैं। इन दोनों विषयों में प्राप्त अंकों के बीच सम्बन्ध की जाँच ग्राफ की सहायता से कीजिए
| X | 35 | 40 | 25 | 35 | 85 | 90 | 65 | 55 | 45 | 50 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Y | 32 | 44 | 30 | 74 | 80 | 83 | 64 | 49 | 42 | 46 |
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख गणित (X-अक्ष) और विज्ञान (Y-अक्ष) में 10 विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त अंकों के बीच संबंध को दर्शाने वाला एक स्कैटर प्लॉट है। प्रत्येक बिंदु एक छात्र के गणित और विज्ञान के अंकों के युग्म को प्रस्तुत करता है, जिससे दोनों विषयों के बीच सहसंबंध (या उसके अभाव) का दृश्य विश्लेषण किया जा सकता है। In simple words: हमें गणित (X) और विज्ञान (Y) में विद्यार्थियों के अंकों के बीच संबंध की जांच करने के लिए एक ग्राफ बनाना है, जिसमें X-अक्ष पर गणित के अंक और Y-अक्ष पर विज्ञान के अंक प्लॉट किए जाएंगे।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, X और Y अक्ष पर डेटा बिंदुओं को सही ढंग से प्लॉट करना महत्वपूर्ण है। परिणामी स्कैटर प्लॉट दो चरों के बीच सहसंबंध (सकारात्मक, नकारात्मक या कोई नहीं) को समझने में मदद करता है।
Question 10. निम्नलिखित सारणी को बारम्बारता वक्र निरूपित कीजिए
| वर्ग-अन्तराल | 0-10 | 10-20 | 20-30 | 30-40 | 40-50 | 50-60 | 60-70 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| बारम्बारता | 10 | 18 | 20 | 30 | 15 | 10 | 05 |
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख एक बारम्बारता वक्र (फ्रीक्वेंसी कर्व) को दर्शाता है। X-अक्ष पर 'वर्ग-अन्तराल' (मध्य बिन्दु) और Y-अक्ष पर 'बारम्बारता' को प्लॉट किया गया है, और बिंदुओं को एक चिकनी, मुक्तहस्त रेखा से जोड़ा गया है। यह वक्र दिए गए डेटा के वितरण की निरंतरता और पैटर्न को दर्शाता है। In simple words: इस प्रश्न में, हमें दिए गए आवृत्ति वितरण के लिए बारम्बारता वक्र बनाना है, जिसमें वर्ग-अंतरालों के मध्यबिंदुओं को X-अक्ष पर और बारम्बारता को Y-अक्ष पर प्लॉट करके एक चिकनी रेखा से जोड़ा जाएगा।
🎯 Exam Tip: बारम्बारता वक्र बनाते समय, मध्य-बिंदुओं को प्लॉट करने और उन्हें एक चिकनी, मुक्तहस्त वक्र से जोड़ने पर ध्यान दें। यह डेटा के वितरण की प्रवृत्ति को बेहतर ढंग से दर्शाता है।
Question 11. निम्नलिखित सारणी द्वारा संचयी बारम्बारता आलेख निरूपित कीजिए
| वर्ग-अन्तराल | 0-10 | 10-20 | 20-30 | 30-40 | 40-50 |
|---|---|---|---|---|---|
| बारम्बारता | 4 | 8 | 10 | 7 | 2 |
Answer: सर्वप्रथम संचयी बारम्बारता सारणी बनाएँ
| वर्ग-अन्तराल | बारम्बारता | संचयी बारम्बारता |
|---|---|---|
| 0-10 | 4 | 4 |
| 10-20 | 8 | 12 |
| 20-30 | 10 | 22 |
| 30-40 | 7 | 29 |
| 40-50 | 2 | 31 |
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख एक संचयी बारम्बारता वक्र (ओजाइव) को दर्शाता है। इसमें X-अक्ष पर वर्ग-अंतरालों की ऊपरी सीमाओं को और Y-अक्ष पर संगत संचयी बारम्बारताओं को प्लॉट किया गया है। बिंदुओं को एक चिकनी वक्र से जोड़ा गया है, जिससे डेटा के संचयी वितरण की प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। In simple words: इस प्रश्न में, हमें दी गई बारम्बारता सारणी से पहले संचयी बारम्बारता सारणी बनानी होगी और फिर वर्ग-अंतरालों की ऊपरी सीमाओं को X-अक्ष पर और संचयी बारम्बारता को Y-अक्ष पर प्लॉट करके संचयी बारम्बारता आलेख (ओजाइव) बनाना होगा।
🎯 Exam Tip: संचयी बारम्बारता आलेख बनाते समय, वर्ग-अंतरालों की ऊपरी सीमाओं के साथ संचयी बारम्बारता को प्लॉट करना महत्वपूर्ण है, और बिंदुओं को एक चिकनी वक्र के बजाय सीधी रेखाओं से जोड़कर ओजाइव बनाया जाता है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
Question 1. रेखाचित्रों द्वारा आँकड़ों के प्रदर्शन के चार महत्त्व बताइए। उत्तरः रेखाचित्रों द्वारा आँकड़ों के प्रदर्शन के चार महत्त्व निम्नलिखित हैं
Answer:
1. रेखाचित्र समंकों के प्रदर्शन का आकर्षक एवं प्रभावशाली साधन है।
2. रेखाचित्र समंकों को सरल एवं बोधगम्य बनाते हैं।
3. रेखाचित्रों के द्वारा समंकों की तुलना सरलता से की जा सकती है।
4. रेखाचित्रों से समय एवं श्रम की बचत होती है। In simple words: रेखाचित्र डेटा को समझने में आसान, आकर्षक और तुलना करने में सहायक बनाते हैं, साथ ही समय और प्रयास भी बचाते हैं।
🎯 Exam Tip: इन चार मुख्य बिंदुओं को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये रेखाचित्रों की उपयोगिता को संक्षेप में बताते हैं और अक्सर सीधे प्रश्न में पूछे जाते हैं।
Question 2. क्षैतिज दण्ड-चित्र किस प्रकार बनाये जाते हैं? उत्तर: जब दण्ड खड़े न होकर लेटी दशा में बनाये जाते हैं तो उन्हें क्षैतिज दण्ड कहते हैं। क्षैतिज दण्ड-चित्र बनाते समय सबसे बड़ा दण्ड ऊपर और सबसे छोटा दण्ड नीचे आना चाहिए। परन्तु यदि समंक विपरीत क्रम में हो तो दण्ड भी उसी क्रम में बनाये जाते हैं। क्षैतिज दण्ड चित्र में मापदण्ड की रेखा ऊपर की ओर ली जाती है।
Answer: क्षैतिज दण्ड-चित्र वे होते हैं जहाँ दण्ड क्षैतिज रूप से खींचे जाते हैं, न कि ऊर्ध्वाधर। इन्हें बनाते समय, सबसे बड़े दण्ड को ऊपर और सबसे छोटे को नीचे रखना चाहिए, जब तक कि डेटा का क्रम इसके विपरीत न हो, तब उसी क्रम का पालन करना चाहिए। मापदण्ड की रेखा ऊपर की ओर होती है। In simple words: क्षैतिज दण्ड-चित्रों में दण्ड लेटी हुई स्थिति में होते हैं, जिन्हें सामान्यतः सबसे बड़े मान से छोटे मान की ओर ऊपर से नीचे खींचा जाता है, और मापदंड Y-अक्ष पर होता है।
🎯 Exam Tip: क्षैतिज दण्ड-चित्र और उदग्र दण्ड-चित्र के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें और उनके बनाने के नियम, विशेष रूप से क्रम और अक्षों पर मापदण्ड की स्थिति, को याद रखें।
Question 3. आँकड़ों के चित्रमय प्रदर्शन के कोई दो लाभ लिखिए। उत्तरः दो लाभों के लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 1 के अन्तर्गत देखें।
Answer: आँकड़ों के चित्रमय प्रदर्शन के दो लाभ हैं कि वे डेटा को सरल और समझने में आसान बनाते हैं, और जानकारी को अधिक समय तक याद रखने में मदद करते हैं। In simple words: चित्र डेटा को समझना और याद रखना आसान बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: आँकड़ों के चित्रमय प्रदर्शन के लाभों को याद रखें क्योंकि यह एक मूलभूत अवधारणा है। आप विस्तृत उत्तरीय प्रश्न में दिए गए बिंदुओं का भी उपयोग कर सकते हैं।
Question 4. बारम्बारता वक्र किस प्रकार बनाये जाते हैं? उत्तरः यदि बारम्बारता बहुभुज में प्राप्त मध्यमान बिन्दुओं को सरल रेखा से न मिलाकर निष्कोण कर दिया जाए तो बारम्बारता वक्र बन जाता है। बारम्बारता वक्र के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह बारम्बारता बहुभुज के प्रत्येक शीर्ष से होकर जाए, परन्तु जहाँ तक हो सके, उसे बारम्बारता बहुभुज के प्रत्येक शीर्ष से होकर जाना चाहिए।
Answer: बारम्बारता वक्र बनाने के लिए, बारम्बारता बहुभुज के मध्यमान बिंदुओं को सरल रेखाओं से जोड़ने के बजाय एक चिकनी, मुक्तहस्त रेखा से जोड़ा जाता है। यद्यपि यह आवश्यक नहीं है कि वक्र बहुभुज के प्रत्येक शीर्ष से गुजरे, इसे यथासंभव उनसे निकट होना चाहिए। In simple words: बारम्बारता वक्र बारम्बारता बहुभुज के बिंदुओं को सीधी रेखाओं के बजाय एक चिकनी, घुमावदार रेखा से जोड़कर बनाया जाता है, जो डेटा के वितरण को अधिक तरल रूप से दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: बारम्बारता वक्र और बारम्बारता बहुभुज के बीच का अंतर समझें, खासकर वक्र की चिकनी प्रकृति और यह कैसे डेटा के वितरण को अधिक निरंतर तरीके से दर्शाता है।
Question 5. संचयी बारम्बारता वक्र क्या है? या संचयी आवृत्ति वक्र क्या है? उत्तर: संचयी बारम्बारता वक्र संचयी बारम्बारता बण्टन का एक आलेख होता है। यदि वर्ग अन्तरालों की ऊपरी सीमाओं को x-अक्ष पर और उनकी संगत संचयी बारम्बारताओं को y-अक्ष पर लेते हुए बिन्दुओं को अंकित किया जाए और फिर उन्हें क्रमशः सरल रेखाओं से मिला दिया जाए तो जो आकृति बनेगी, वह संचयी बारम्बारता बहुभुज होगी। परन्तु यदि अंकित बिन्दुओं को मिलाते हुए एक मुक्त हस्त निष्कोण वक्र खींचा जाता है तो इसे संचयी बारम्बारता वक्र या तोरण या ओजाइव (संचयी आवृत्ति) वक्र कहते हैं।
Answer: संचयी बारम्बारता वक्र (ओजाइव) एक संचयी बारम्बारता वितरण का ग्राफिकल प्रतिनिधित्व है। यह तब बनता है जब वर्ग अंतरालों की ऊपरी सीमाओं को X-अक्ष पर और उनकी संचयी आवृत्तियों को Y-अक्ष पर प्लॉट किया जाता है, और फिर इन बिंदुओं को एक चिकनी, मुक्तहस्त वक्र से जोड़ा जाता है। In simple words: संचयी बारम्बारता वक्र (ओजाइव) एक ग्राफ है जो दिखाता है कि किसी निश्चित बिंदु तक कितने डेटा मान जमा हुए हैं, जिसे वर्ग अंतरालों की ऊपरी सीमाओं और उनकी संचयी आवृत्तियों को प्लॉट करके बनाया जाता है।
🎯 Exam Tip: संचयी बारम्बारता वक्र की परिभाषा, इसके निर्माण की विधि (ऊपरी सीमाओं और संचयी बारम्बारताओं का उपयोग करके), और इसके वैकल्पिक नाम (तोरण या ओजाइव) को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 6. दण्ड चित्रों के किन्हीं दो प्रकारों को संक्षेप में लिखिए। उत्तरः दण्ड चित्रों के दो प्रकार निम्नलिखित हैं – (1) उदग्र (Vertical) (2) क्षैतिज (Horizontal)
1. उदग्र दण्ड चित्र - जब दण्ड सीधे बनाये जाते हैं तो वे उदग्र दण्ड चित्र कहलाते हैं। इसको बनाते समय यह प्रयास करना चाहिए कि सबसे बड़ा दण्ड बायीं ओर अथवा दायीं ओर बने ।
2. क्षैतिज दण्ड चित्र - जब दण्ड खड़े न होकर लेटी दशा में बनाये जाते हैं तो उन्हें क्षैतिज दण्ड चित्र कहते हैं। Answer:
1. उदग्र दण्ड चित्र: इसमें दण्ड सीधे (ऊर्ध्वाधर) खींचे जाते हैं। इन्हें बनाते समय, सबसे बड़े दण्ड को बाईं या दाईं ओर रखने का प्रयास करना चाहिए।
2. क्षैतिज दण्ड चित्र: इसमें दण्ड लेटी हुई (क्षैतिज) स्थिति में खींचे जाते हैं। In simple words: दण्ड चित्रों के दो मुख्य प्रकार हैं - उदग्र दण्ड चित्र (बार ऊर्ध्वाधर होते हैं) और क्षैतिज दण्ड चित्र (बार क्षैतिज होते हैं)।
🎯 Exam Tip: उदग्र और क्षैतिज दण्ड चित्रों की मूल परिभाषा और उनके चित्रण के तरीके में अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।
निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. आयत चित्र किसे कहते हैं? उत्तर: किसी बारम्बारता बंटन में वर्ग-अन्तराल और संगत बारम्बारता को किसी आयत की दो संलग्न भुजाएँ मानकर जो आयत बनाते हैं उन्हें आयत चित्र कहते हैं।
Answer: आयत चित्र एक ग्राफिकल प्रतिनिधित्व है जहाँ एक आवृत्ति वितरण में वर्ग-अंतरालों को आयतों की चौड़ाई और उनकी संगत आवृत्तियों को ऊँचाई के रूप में दर्शाया जाता है। ये आयत एक-दूसरे से सटे होते हैं। In simple words: आयत चित्र एक प्रकार का ग्राफ है जो वर्ग-अंतरालों को चौड़ाई और उनकी आवृत्तियों को ऊँचाई के रूप में उपयोग करके डेटा के वितरण को दिखाता है।
🎯 Exam Tip: आयत चित्र की परिभाषा को याद रखें, विशेष रूप से यह कि वर्ग-अंतराल और आवृत्ति क्रमशः आयत की चौड़ाई और ऊँचाई का प्रतिनिधित्व करते हैं।
Question 2. दण्ड चित्रों के किन्हीं दो प्रकारों का नामोल्लेख कीजिए । उत्तरः (1) सरल दण्ड चित्र- ये दो प्रकार के होते हैं – (i) उदग्र दण्ड चित्र, (ii) क्षैतिज दण्डचित्र । (2) बहु दण्ड चित्र ।
Answer: दण्ड चित्रों के दो प्रकार हैं:
(1) सरल दण्ड चित्र (Simple Bar Diagram), जिसमें (i) उदग्र दण्ड चित्र (Vertical Bar Diagram) और (ii) क्षैतिज दण्ड चित्र (Horizontal Bar Diagram) शामिल हैं।
(2) बहु दण्ड चित्र (Multiple Bar Diagram)। In simple words: दण्ड चित्रों के दो मुख्य प्रकार सरल दण्ड चित्र (उदग्र या क्षैतिज हो सकते हैं) और बहु दण्ड चित्र हैं।
🎯 Exam Tip: दण्ड चित्रों के विभिन्न प्रकारों के नाम याद रखें, जैसे सरल, बहु, द्वि-दिशा, अंतर्विभक्त और प्रतिशत अंतर्विभक्त दण्ड चित्र।
Question 3. सांख्यिकी में किसी वर्ग की ऊपरी सीमा तथा निचली सीमा के अन्तर को कहते हैं
(क) वर्ग-बारम्बारता
(ख) वर्ग-अन्तराल
(ग) मध्य बिन्दु
(घ) वर्ग सीमाएँ
Answer: (ख) वर्ग-अन्तराल In simple words: किसी वर्ग की ऊपरी और निचली सीमा के बीच का अंतर वर्ग-अंतराल कहलाता है।
🎯 Exam Tip: सांख्यिकी में वर्ग-अंतराल की अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझें, क्योंकि यह आवृत्ति वितरण और ग्राफिकल प्रतिनिधित्व का आधार है।
Question 4. द्विविमा चित्रों से आप क्या समझते हैं? उत्तरः द्विविमा चित्र-द्विविमा चित्र उन चित्रों को कहते हैं, जिनमें समंकों का चित्रण दो विस्तारों ऊँचाई और चौड़ाई को ध्यान में रखकर किया जाता है, इसलिए इन्हें क्षेत्रफल चित्र अथवा धरातल चित्र भी कहा जाता है।
Answer: द्विविमा चित्र वे होते हैं जिनमें डेटा को दो आयामों- ऊँचाई और चौड़ाई- को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया जाता है। इन्हें क्षेत्रफल चित्र या धरातल चित्र भी कहा जाता है क्योंकि ये क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। In simple words: द्विविमा चित्र वे ग्राफ होते हैं जो डेटा को ऊँचाई और चौड़ाई दोनों का उपयोग करके दिखाते हैं, इसलिए इन्हें क्षेत्रफल चित्र भी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: द्विविमा चित्रों की परिभाषा और उनके वैकल्पिक नाम (क्षेत्रफल चित्र, धरातल चित्र) को याद रखें, जो उनकी मुख्य विशेषता, यानी दो आयामों का उपयोग, को उजागर करते हैं।
Question 5. निम्नलिखित चित्र की सहायता से नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक आवृत्ति वितरण को दर्शाता है, जिसमें X-अक्ष पर 'वर्ग-अंतराल' और Y-अक्ष पर 'बारम्बारता' है। यह एक हिस्टोग्राम और एक आवृत्ति बहुभुज दोनों का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे विभिन्न वर्ग-अंतरालों में आवृत्तियों का वितरण स्पष्ट होता है।
(i) अधिकतम बारम्बारता वाला वर्ग- अन्तराल बताइए।
Answer: अधिकतम बारम्बारता वाला वर्ग-अन्तराल 60-70 है।
(ii) वह वर्ग-अन्तराल बताइए जिसकी बारम्बारता 15 है।
Answer: वह वर्ग-अन्तराल 20-30 से 40-50 है जिसकी बारम्बारता 15 है।
(iii) न्यूनतम वर्ग- अन्तराल वाला वर्ग-अन्तराल बताइए।
Answer: न्यूनतम वर्ग-अन्तराल वाला वर्ग-अन्तराल 30-40 है।
(iv) वह वर्ग-अन्तराल बताइए जिसकी संचयी बारम्बारता 60 है।
Answer: वह वर्ग – अन्तराल (50-60) है जिसकी संचयी बारम्बारता 60 है।
(v) वर्ग- अन्तराल (50-60) की बारम्बाता बताइए।
Answer: वर्ग-अन्तराल (50-60) की बारम्बारता 25 है। In simple words: इस प्रश्न में, हमें दिए गए ग्राफ से विभिन्न वर्ग-अंतरालों की बारम्बारता और संचयी बारम्बारता से संबंधित विशिष्ट जानकारी की पहचान करनी है, जैसे अधिकतम, न्यूनतम मान और विशिष्ट बारम्बारता वाले अंतराल।
🎯 Exam Tip: ग्राफ-आधारित प्रश्नों को हल करते समय, अक्षों पर लेबल और पैमाने को ध्यान से पढ़ें। ग्राफ पर डेटा बिंदुओं और वक्रों की स्थिति का सटीक रूप से विश्लेषण करें ताकि सही उत्तर दिए जा सकें।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. किसी आयत स्तम्भ के शीर्ष भुजाओं के मध्य बिन्दुओं को मुक्त-हस्त वक्र से मिलाने पर प्राप्त आलेख होगा
(क) तोरण
(ख) बारम्बारता वक्र
(ग) बारम्बारता बहुभुज
(घ) स्तम्भ चार्ट
Answer: (ख) बारम्बारता वक्र In simple words: आयत स्तम्भों के शीर्ष मध्य बिंदुओं को एक चिकनी रेखा से जोड़ने पर बारम्बारता वक्र बनता है।
🎯 Exam Tip: बारम्बारता वक्र की परिभाषा को याद रखें, खासकर यह कैसे आयत चित्र के मध्य बिंदुओं को एक मुक्त-हस्त वक्र से जोड़कर बनाया जाता है, न कि सीधी रेखाओं से, जैसा कि बारम्बारता बहुभुज में होता है।
Question 2. यदि बारम्बारता बहुभुज में प्राप्त मध्यमान बिन्दुओं को सरल रेखा से न मिलाकर निष्कोण कर दिया जाए तो प्राप्त आलेख होगा
(क) बारम्बारता वक्र
(ख) तोरण
(ग) स्तम्भ चार्ट
(घ) बारम्बारता बहुभुज
Answer: (क) बारम्बारता वक्र In simple words: जब बारम्बारता बहुभुज के मध्य-बिंदुओं को सीधी रेखाओं के बजाय एक चिकनी, घुमावदार रेखा से जोड़ा जाता है, तो हमें बारम्बारता वक्र प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: बारम्बारता बहुभुज और बारम्बारता वक्र के बीच अंतर को स्पष्ट करें - सीधी रेखाएं बहुभुज बनाती हैं, जबकि निष्कोण (चिकनी) वक्र, वक्र बनाता है।
Question 3. सांख्यिकी में किसी वर्ग की ऊपरी सीमा तथा निचली सीमा के अन्तर को कहते हैं
(क) वर्ग-बारम्बारता
(ख) वर्ग-अन्तराल
(ग) मध्य बिन्दु
(घ) वर्ग सीमाएँ
Answer: (ख) वर्ग-अन्तराल In simple words: किसी डेटा वर्ग की सबसे बड़ी और सबसे छोटी संख्या के बीच का अंतर वर्ग-अंतराल कहलाता है।
🎯 Exam Tip: यह एक बुनियादी सांख्यिकीय परिभाषा है; वर्ग-अंतराल, वर्ग-सीमा, वर्ग-मध्यबिंदु और बारम्बारता जैसी मूलभूत अवधारणाओं को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 4. किसी बारम्बारता बंटन में वर्ग- अन्तराल और संगत बारम्बारता से बना आलेख होगा
(क) स्तम्भ चित्र
(ख) आयत चित्र
(ग) बारम्बारता बहुभुज
(घ) बारम्बारता वक्र
Answer: (ख) आयत चित्र In simple words: एक आयत चित्र वर्ग-अंतरालों को चौड़ाई के रूप में और संगत आवृत्तियों को ऊँचाई के रूप में उपयोग करके बनाया जाता है।
🎯 Exam Tip: आयत चित्र की विशिष्ट पहचान यह है कि यह वर्ग-अंतरालों और उनकी आवृत्तियों का प्रतिनिधित्व करने के लिए संलग्न आयतों का उपयोग करता है।
Question 5. जब X-अक्ष पर बराबर-बराबर स्थान छोड़कर एकसमान चौड़ाई के दण्ड खींचे जाते हैं, तो उसे कहते हैं
(क) स्तम्भ चार्ट
(ख) आयत चित्र
(ग) बारम्बारता बहुभुज
(घ) बारम्बारता वक्र
Answer: (क) स्तम्भ चार्ट In simple words: जब अलग-अलग श्रेणियों के लिए समान चौड़ाई के दण्डों को X-अक्ष पर बराबर दूरी पर खींचा जाता है, तो इसे स्तम्भ चार्ट या बार डायग्राम कहते हैं।
🎯 Exam Tip: स्तम्भ चार्ट (बार डायग्राम) की विशेषता यह है कि इसमें दण्डों के बीच अंतराल होते हैं और वे असतत डेटा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि आयत चित्र में दण्ड सटे होते हैं और निरंतर डेटा के लिए होते हैं।
Question 6. निम्नलिखित में से कौन-सा द्विविमीय चित्र है?
(क) आयत चित्र
(ख) दण्ड चित्र
(ग) रेखा चित्र
(घ) प्रतीक चित्र
Answer: (क) आयत चित्र In simple words: आयत चित्र एक द्विविमीय चित्र है क्योंकि यह डेटा को ऊँचाई और चौड़ाई दोनों आयामों का उपयोग करके दिखाता है।
🎯 Exam Tip: द्विविमीय चित्रों (जैसे आयत, वर्ग, वृत्त चित्र) और एकविमीय चित्रों (जैसे दण्ड, रेखा चित्र) के बीच के अंतर को समझें, जहाँ द्विविमीय चित्र क्षेत्रफल का प्रतिनिधित्व करते हैं।
Question 7. निम्नलिखित में से कौन-सा एकविमीय चित्र है?
(क) आयत चित्र
(ख) वर्ग चित्र
(ग) कोणिक चित्र
(घ) अन्तर्विभक्त चित्र
Answer: (घ) अन्तर्विभक्त चित्र In simple words: अंतर्विभक्त चित्र एक प्रकार का एकविमीय चित्र है क्योंकि यह एक ही दण्ड को उसके विभिन्न भागों में विभाजित करके डेटा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें केवल लंबाई का उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: एकविमीय चित्र वे होते हैं जिनमें डेटा केवल एक आयाम (जैसे लंबाई) के आधार पर प्रदर्शित होता है, जबकि द्विविमीय चित्रों में दो आयाम (लंबाई और चौड़ाई) शामिल होते हैं।
Question 8. संचयी आवृत्ति वक्र को कहा जाता है
(क) ओजाइव
(ख) पाई चित्र
(ग) दण्ड आरेख
(घ) अन्तर्विभक्त दण्ड आरेख
Answer: (क) ओजाइव In simple words: संचयी आवृत्ति वक्र को ओजाइव भी कहते हैं, जिसका उपयोग संचयी वितरण को ग्राफिक रूप से दिखाने के लिए किया जाता है।
🎯 Exam Tip: संचयी आवृत्ति वक्र के वैकल्पिक नाम, ओजाइव, को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर सीधे परीक्षाओं में पूछा जाता है।
Free study material for Economics
UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 25 आंकड़ों की प्रस्तुति
Students can now access the UP Board Solutions for Chapter 25 आंकड़ों की प्रस्तुति prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 12 Economics textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest UP Board syllabus.
Detailed Explanations for Chapter 25 आंकड़ों की प्रस्तुति
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 12 Economics chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 12 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these UP Board Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Economics Class 12 Solved Papers
Using our Economics solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 25 आंकड़ों की प्रस्तुति to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 25 आंकड़ों की प्रस्तुति is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Economics are as per latest UP Board curriculum.
Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 25 आंकड़ों की प्रस्तुति as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Economics concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 25 आंकड़ों की प्रस्तुति will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 12 Economics. You can access UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 25 आंकड़ों की प्रस्तुति in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 25 आंकड़ों की प्रस्तुति in printable PDF format for offline study on any device.