UP Board Solutions Class 12 Civics Chapter 2 The End of Bipolarity

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Detailed Chapter 2 द्विध्रुवीता का अंत UP Board Solutions for Class 12 Civics

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Class 12 Civics Chapter 2 द्विध्रुवीता का अंत UP Board Solutions PDF

UP Board Class 12 Civics Chapter 2 Textbook Questions

 

प्रश्न 1. सोवियत अर्थव्यवस्था की प्रकृति के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
(क) सोवियत अर्थव्यवस्था में समाजवाद प्रभावी विचारधारा थी।
(ख) उत्पादन के साधनों पर राज्य का स्वामित्व/नियन्त्रण होना।
(ग) जनता को आर्थिक आजादी थी।
(घ) अर्थव्यवस्था के हर पहलू का नियोजन और नियन्त्रण राज्य करता था।
उत्तर: (ग) जनता को आर्थिक आजादी थी।
In simple words: In the Soviet system, the government controlled all businesses and resources, meaning ordinary citizens did not have the freedom to choose their own economic paths or run private businesses.

🎯 Exam Tip: Remember that the Soviet Union followed a state-controlled socialist model where private property and individual economic freedom did not exist.

 

प्रश्न 2. निम्नलिखित को कालक्रमानुसार सजाएँ:
(क) अफ़गान संकट
(ख) बर्लिन दीवार का गिरना
(ग) सोवियत संघ का विघटन
(घ) रूसी क्रान्ति
उत्तर:
(घ) रूसी क्रान्ति (1917)
(क) अफ़गान संकट (1979)
(ख) बर्लिन दीवार का गिरना (1989)
(ग) सोवियत संघ का विघटन (1991)
In simple words: This lists the historical events in order of when they happened, starting from the Russian Revolution in 1917 to the collapse of the Soviet Union in 1991.

🎯 Exam Tip: Memorize the years of these key Cold War events to easily arrange them in chronological order during exams.

 

प्रश्न 3. निम्नलिखित में से कौन-सा सोवियत संघ के विघटन का परिणाम नहीं है?
(क) संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच विचारधारात्मक लड़ाई का अन्त।
(ख) स्वतन्त्र राज्यों के राष्ट्रकुल (सी०आई०एस०) का जन्म।
(ग) विश्वव्यवस्था में शक्ति सन्तुलन में बदलाव।
(घ) मध्यपूर्व में संकट।
उत्तर: (घ) मध्यपूर्व में संकट।
In simple words: The crisis in the Middle East was not caused by the collapse of the Soviet Union; it had its own separate historical and regional reasons.

🎯 Exam Tip: Focus on the direct consequences of the USSR's collapse, such as the end of the Cold War and the rise of the US as the sole superpower.

 

प्रश्न 4. निम्नलिखित में मेल बैठाएँ:
(1) मिखाइल गोर्बाचेव — (क) सोवियत संघ का उत्तराधिकारी
(2) शॉक थेरेपी — (ख) सैन्य समझौता
(3) रूस — (ग) सुधारों की शुरुआत
(4) बोरिस येल्तसिन — (घ) आर्थिक मॉडल
(5) वारसा — (ङ) रूस के राष्ट्रपति
उत्तर:
(1) मिखाइल गोर्बाचेव — (ग) सुधारों की शुरुआत
(2) शॉक थेरेपी — (घ) आर्थिक मॉडल
(3) रूस — (क) सोवियत संघ का उत्तराधिकारी
(4) बोरिस येल्तसिन — (ङ) रूस के राष्ट्रपति
(5) वारसा — (ख) सैन्य समझौता
In simple words: This matches key leaders, policies, and countries of the Soviet era with their correct descriptions, like matching Mikhail Gorbachev to his reform policies.

🎯 Exam Tip: In matching questions, write the correct pair directly opposite to each other in your final answer sheet to score full marks.

 

प्रश्न 5. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें:
(क) सोवियत राजनीतिक प्रणाली ………… की विचारधारा पर आधारित थी।
(ख) सोवियत संघ द्वारा बनाया गया सैन्य गठबन्धन …………. था।
(ग) …………. पार्टी का सोवियत राजनीतिक व्यवस्था पर दबदबा था।
(घ) ………… ने 1985 में सोवियत संघ में सुधारों की शुरुआत की।
(ङ) …………. का गिरना शीतयुद्ध के अन्त का प्रतीक था।
उत्तर:
(क) सोवियत राजनीतिक प्रणाली समाजवाद की विचारधारा पर आधारित थी।
(ख) सोवियत संघ द्वारा बनाया गया सैन्य गठबन्धन वारसा पैक्ट था।
(ग) कम्युनिस्ट पार्टी का सोवियत राजनीतिक व्यवस्था पर दबदबा था।
(घ) मिखाइल गोर्बाचेव ने 1985 में सोवियत संघ में सुधारों की शुरुआत की।
(ङ) बर्लिन दीवार का गिरना शीतयुद्ध के अन्त का प्रतीक था।
In simple words: These fill-in-the-blanks complete key facts about the Soviet Union, such as its socialist ideology, the Warsaw Pact military alliance, the ruling Communist Party, leader Gorbachev, and the fall of the Berlin Wall.

🎯 Exam Tip: Underline the filled-in words in your answer sheet so they stand out clearly to the examiner.

(ख) सोवियत संघ द्वारा बनाया गया सैन्य गठबन्धन वारसा पैक्ट था।
(ग) साम्यवादी पार्टी का सोवियत राजनीतिक व्यवस्था पर दबदबा था।
(घ) मिखाइल गोर्बाचेव ने 1985 में सोवियत संघ में सुधारों की शुरुआत की।
(ङ) बर्लिन की दीवार का गिरना शीतयुद्ध के अन्त का प्रतीक था।

 

Question 6. सोवियत अर्थव्यवस्था को किसी पूँजीवादी देश जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था से अलग करने वाली किन्हीं तीन विशेषताओं का जिक्र करें।
Answer: सोवियत संघ ने समाजवादी व्यवस्था को अपनाया जबकि अमेरिका ने पूँजीवादी व्यवस्था को अपनाया। यह व्यवस्था मुख्य रूप से समाज के कल्याण और समानता पर केंद्रित थी। समाजवादी अर्थव्यवस्था को पूँजीवादी देश जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था से अलग करने वाली तीन विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं:
1. सोवियत अर्थव्यवस्था पूँजीवादी अर्थव्यवस्था से भिन्न है क्योंकि इसमें उद्योगों को अधिक महत्त्व नहीं दिया गया जबकि पूँजीवादी देशों में विशेषकर संयुक्त राज्य अमेरिका में उद्योगों को विशेष महत्त्व दिया गया।
2. सोवियत अर्थव्यवस्था के उत्पादन तथा वितरण के साधनों पर राज्य या सरकार का नियन्त्रण था, जबकि पूँजीवादी देशों में निजीकरण को अपनाया गया।
3. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था वाले देशों के विपरीत सोवियत संघ में अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध और राज्य के नियन्त्रण में थी। पूँजीवादी देशों में मुक्त व्यापार की नीति को अपनाया गया।
In simple words: The Soviet Union followed a socialist system where the government controlled all businesses and resources to help everyone equally. In contrast, the US followed a capitalist system where private individuals owned businesses to make profits.

🎯 Exam Tip: Clearly list the three points of difference under separate numbers to make it easy for the examiner to read and award full marks.

 

Question 7. किन बातों के कारण गोर्बाचेव सोवियत संघ में सुधार के लिए बाध्य हुए?
Answer: निम्नांकित बातों की वजह से गोर्बाचेव सोवियत संघ मे सुधार हेतु बाध्य हुए:
(1) पश्चिमी देशों में सूचना और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में क्रांति हो रही थी और सोवियत संघ को उनकी बराबरी में लाने के लिए सुधार आवश्यक हो गए थे। गोर्बाचेव ने पश्चिमी देशों के साथ सम्बन्धों को सामान्य बनाने, सोवियत संघ को लोकतान्त्रिक संघ का रूप देने और वहाँ सुधार करने का फैसला किया। इस फैसले की कुछ ऐसी भी परिस्थितियाँ रहीं जिनका किसी को कोई अन्दाजा नहीं था। पूर्वी यूरोप के देश सोवियत खेमे के हिस्से में थे। इन देशों की जनता ने अपनी सरकारों और सोवियत नियन्त्रण का विरोध करना शुरू कर दिया। गोर्बाचेव ने देश के अन्दर आर्थिक, राजनीतिक सुधारों और लोकतन्त्रीकरण की नीति अपनायी, जिसका कट्टर कम्युनिस्ट नेताओं द्वारा विरोध किया जाने लगा। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ की गिरती हुई साख को बचाना था।
(2) सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था काफी समय तक अवरुद्ध रही। गोर्बाचेव ने सैन्यवाद को कम करके राष्ट्रीय संसाधनों को विकास कार्यों में लगाने के लिए यह आवश्यक समझा कि पश्चिमी देशों के साथ सम्बन्धों को सामान्य बनाया जाए। साम्यवादी दल का देश में प्रभाव होने से सत्ता का केन्द्रीकरण हुआ। बोरिस येल्तसिन ने सैन्य तख्ता पलट के विरोध में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई और वे एक नायक की तरह उभरकर सामने आए। ऐसे में गोर्बाचेव ने सुधार करके सोवियत संघ की समस्याओं को पूरा करने का वायदा किया और उन्होंने अर्थव्यवस्था को सुधारने, पश्चिम की बराबरी पर लाने और प्रशासनिक ढाँचे को सुधारने का प्रयत्न किया और वायदा किया कि वे व्यवस्था को सुधारेंगे।

वास्तव में सोवियत संघ पश्चिमी देशों की तुलना में काफी पिछड़ चुका था। यह पूँजीवादी देशों से अलग-थलग पड़ गया। जनता अपने अधिकारों और स्वतन्त्रता की माँग करने लगी। ऐसे में आवश्यक था कि गोर्बाचेव सोवियत संघ में सुधार करें। गोर्बाचेव ने सब बातों को ध्यान में रखते हुए सुधार के प्रयास किए और वायदे भी किए परन्तु वह आलोचना से बरी न हो पाए और उनका समर्थन करने वाले धीरे-धीरे घटते चले गए।
In simple words: Mikhail Gorbachev was forced to make reforms because the Soviet Union was lagging behind Western countries in technology and economy. The citizens wanted more freedom, and the heavy military spending was draining the country's resources.

🎯 Exam Tip: Mention both the technological gap with the West and the internal economic stagnation as key reasons for Gorbachev's reforms.

 

Question 8. भारत जैसे देशों के लिए सोवियत संघ के विघटन के क्या परिणाम हुए?
Answer: सोवियत संघ के विघटन से पूर्व भारत और सोवियत संघ के बीच काफी अच्छे सम्बन्ध थे। इसके बाद भारत के रूस के साथ भी गहरे सम्बन्ध बने। रूस और भारत दोनों का सपना बहुध्रुवीय विश्व का था। इस विघटन के बाद भी भारत और रूस के बीच पारंपरिक मित्रता बनी रही। भारत जैसे देशों के लिए सोवियत संघ के विघटन के अग्रलिखित परिणाम हुए:
1. शीतयुद्ध की समाप्ति से भारत की विदेश नीति में बदलाव आया और उसने अमेरिका तथा अन्य पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना शुरू किया।
2. भारत को अपने रक्षा उपकरणों और तकनीकी सहायता के लिए रूस तथा अन्य पूर्व-सोवियत गणराज्यों के साथ नए सिरे से समझौते करने पड़े।
3. मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के संबंधों को एक नया आयाम मिला, जिससे ऊर्जा और व्यापार के नए मार्ग खुले।
In simple words: The collapse of the Soviet Union meant India lost its strongest ally, forcing it to improve relations with the United States and other Western nations. However, India maintained its close friendship and defense ties with Russia.

🎯 Exam Tip: Highlight how India adapted its foreign policy from a bipolar world to a unipolar world dominated by the US.

 

Question 9. शॉक थेरेपी क्या थी? क्या साम्यवाद से पूँजीवाद की तरफ संक्रमण का यह सबसे बेहतर तरीका था?
Answer: शॉक थेरेपी का अर्थ—साम्यवाद के पतन के पश्चात् पूर्व सोवियत संघ के गणराज्य एक सत्तावादी समाजवादी व्यवस्था से लोकतान्त्रिक पूँजीवादी व्यवस्था तक के कष्टप्रद संक्रमण से होकर गुजरे। रूस, मध्य एशिया के गणराज्य और पूर्वी यूरोप के देशों में पूँजीवाद की ओर से संक्रमण का एक विशेष मॉडल अपनाया गया। विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा निर्देशित इस मॉडल को शॉक थेरेपी अर्थात् आघात पहुँचाकर उपचार करना कहा गया। यह मॉडल पूरी तरह से सफल नहीं रहा और इससे कई देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई।

शॉक थेरेपी से साम्यवाद की अर्थव्यवस्था में पूर्ण रूप से परिवर्तन लाने की प्रक्रिया अपनायी गई। शॉक थेरेपी की सर्वोपरि मान्यता थी कि मिल्कियत का सबसे प्रभावी रूप निजी स्वामित्व होगा। इसमें राज्य की सम्पदा के निजीकरण और व्यावसायिक स्वामित्व के ढाँचे को तुरन्त अपनाने की बात शामिल थी। सामूहिक कार्य को निजी कार्य में बदला गया और पूँजीवादी पद्धति से खेती शुरू हुई। इस संक्रमण में राज्य नियन्त्रित समाजवाद या पूँजीवाद के अतिरिक्त किसी भी वैकल्पिक व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया गया।

शॉक थेरेपी से इन अर्थव्यवस्थाओं के बाहरी व्यवस्थाओं के प्रति रुझान बुनियादी तौर पर बदल गए। अब यह स्वीकार कर लिया गया कि अधिक-से-अधिक व्यापार करके ही विकास किया जा सकता है। इस तरह मुक्त व्यापार को पूर्ण रूप से अपनाना आवश्यक माना गया।

रूस ने मध्य एशिया के गणराज्य और पूर्वी यूरोप के देशों में इस मॉडल को अपनाया। अतः सोवियत संघ के विघटन के बाद सोवियत संघ के गणराज्य समाजवादी व्यवस्था से लोकतान्त्रिक पूँजीवादी व्यवस्था तक के संक्रमण से गुजरे। अन्ततः इस संक्रमण से सोवियत खेमे के देशों के बीच मौजूद व्यापारिक गठबन्धनों को समाप्त कर दिया गया। धीरे-धीरे इन देशों को पश्चिमी अर्थतन्त्र में समाहित किया गया। पश्चिमी दुनिया के पूँजीवादी देश अब नेता की भूमिका निभाते हुए अपने विभिन्न संगठनों के सहारे इस खेमे के देशों के विकास का मार्गदर्शन और नियन्त्रण करेंगे।
In simple words: शॉक थेरेपी का मतलब था अचानक से साम्यवादी व्यवस्था को छोड़कर पूँजीवादी व्यवस्था को अपनाना। इससे लोगों को बहुत परेशानी हुई क्योंकि सब कुछ अचानक बदल गया।

🎯 Exam Tip: शॉक थेरेपी की परिभाषा और इसके मुख्य परिणामों को स्पष्ट रूप से लिखने पर पूरे अंक मिलते हैं। मुख्य शब्दों जैसे 'निजीकरण' और 'मुक्त व्यापार' को रेखांकित करें।

 

Question 10. निम्नलिखित कथन के पक्ष या विपक्ष में एक लेख लिखें.. “दूसरी दुनिया के विघटन के बाद भारत को अपनी विदेश-नीति बदलनी चाहिए और रूस जैसे परम्परागत मित्र की जगह संयुक्त राज्य अमेरिका से दोस्ती करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।”
Answer: उपर्युक्त कथन के पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं-

(1) भारत द्वारा अपनायी गयी गुटनिरपेक्षता की नीति वर्तमान में पूरी तरह से लाभप्रद नहीं हो सकती क्योंकि अब विश्व में दो महाशक्तियाँ नहीं हैं। सोवियत संघ के विघटन के बाद अब विश्व में अमेरिका ही महाशक्ति है। अतः अब हमें अमेरिका के साथ सम्बन्ध बनाए रखना चाहिए। इसमें ही भारत का हित होगा। वैश्विक परिदृश्य में बदलाव के साथ रणनीतिक साझेदारी को बदलना समय की मांग है।
In simple words: सोवियत संघ के खत्म होने के बाद अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बन गया। इसलिए भारत को अपने फायदे के लिए अमेरिका के साथ अच्छे रिश्ते बनाने चाहिए।

🎯 Exam Tip: ऐसे विश्लेषणात्मक प्रश्नों में अपने तर्कों को बिंदुवार (points) स्पष्ट करें ताकि परीक्षक को समझने में आसानी हो।

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Question 1. "भारत और अमेरिका के संबंध हमेशा से बहुत मधुर और घनिष्ठ रहे हैं।" इस कथन के पक्ष और विपक्ष में तर्क दीजिए।
Answer:
कथन के पक्ष में तर्क:
(2) भारत और अमेरिका दोनों ही देशों में उदारीकरण की नीति अपनायी गई है। भारत के समान ही अमेरिका में भी शक्तिशाली लोकतन्त्र है। भारत ने अमेरिका के साथ सम्बन्धों में परिवर्तन करके सामान्यीकरण की प्रक्रिया अपनाई।
(3) संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत की स्वराज की माँग का समर्थन किया था और ब्रिटेन की सरकार पर भारत को शीघ्र स्वतन्त्रता देने के लिए दबाव डाला था। इसके बाद भी अमेरिका ने भारत को समय-समय पर विभिन्न प्रकार की सहायता दी। शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद भारत की स्थिर लोकतन्त्रीय व्यवस्था, भारत में उदारीकरण, भारत के प्राकृतिक संसाधन आदि के कारण भारत और अमेरिका के सम्बन्धों में निकटता आती रही है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और तकनीकी आदान-प्रदान ने भी इस साझेदारी को एक नया आयाम दिया है।
(4) 11 सितम्बर, 2001 में अमेरिका में आतंकवादी हमले के समय अमेरिका ने भारत तथा पाकिस्तान के साथ मधुर सम्बन्ध बनाने का प्रयास किया। भारत और अमेरिका दोनों ने मिलकर आतंकवाद को समाप्त करने की योजना बनाई।
(5) भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका से अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहकर ही सम्बन्ध बनाने चाहिए और अपनी सम्प्रभुता और स्वतन्त्रता के प्रति सतर्क रहना चाहिए क्योंकि अमेरिका भी भारत के साथ व्यापारिक सम्बन्धों में वृद्धि करने को निरन्तर उत्सुक रहता है। उपर्युक्त बिन्दुओं से स्पष्ट होता है कि समय और परिस्थितियों को देखते हुए भारत को अपनी विदेश नीति में परिवर्तन लाना चाहिए, जो कि भारत के लिए हितकर होगा।

पूछे गए कथन के विपक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं:
(1) सोवियत संघ भारत का परम्परागत मित्र रहा है। भारत के विकास में सोवियत संघ का विशेष सहयोग रहा है। खुश्चेव ने भारत-रूस मैत्री को मजबूत किया और कश्मीर के प्रश्न पर संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत का समर्थन किया। ताशकन्द समझौते ने भी भारत-रूस के सम्बन्धों को बढ़ावा दिया।
(2) सोवियत संघ के विघटन के बाद भारत ने सभी 15 गणराज्यों को मान्यता दी। रूसी राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन 27 जनवरी, 1993 को भारत आए और 29 जनवरी, 1993 को भारत-रूस सन्धि की गई जिसमें तय किया गया था कि दोनों देश एक-दूसरे की अखण्डता तथा सीमाओं आदि की रक्षा करेंगे। इसी दौरान भारत-रूस के मध्य सैन्य तकनीकी समझौता भी हुआ।
(3) जून 1994 के पश्चात् भारत और रूस के शासनाध्यक्षों का आवागमन हुआ और विभिन्न प्रकार के सैन्य, तकनीकी और व्यापारिक समझौते हुए।
(4) भारत द्वारा मई 1998 में किए गए नाभिकीय परीक्षणों का रूस ने समर्थन किया और भारत को बधाई दी। भारत-पाक कारगिल युद्ध के समय भी रूस ने भारत का समर्थन किया। 7 दिसम्बर, 1999 को भारत और रूस के मध्य एक दसवर्षीय समझौता हुआ। इसके अनुसार वे सभी प्रकार के सैन्य व असैन्य विमानों के उत्पादन का कार्य करेंगे।
(5) भारतीय सेना के आधुनिकीकरण के लिए रूस व भारत के मध्य चार समझौते हुए और विभिन्न प्रकार के सहयोग का आदान-प्रदान हुआ। साथ ही यह भी तय किया गया कि भारत और पाकिस्तान के मध्य विवादों का निपटारा दोनों देश आपस में वार्ता करके समाप्त करेंगे। कोई अन्य देश हस्तक्षेप नहीं करेगा।
(6) आतंकवाद पर चर्चा करने के लिए 4 नवम्बर, 2001 को भारत के तत्कालीन प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी रूस गए। वहाँ आतंकवाद के विरुद्ध संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किया गया। स्वतन्त्रता के बाद भारत द्वारा अपनायी गयी गुटनिरपेक्ष नीति के कारण भारत और अमेरिका के बीच कटुता पैदा हो गयी। इसके साथ ही अमेरिका का झुकाव पाकिस्तान की तरफ हो गया और उसने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से भारत के विरुद्ध पाकिस्तान को सैनिक सहायता प्रदान की। उपर्युक्त कारणों से भारत-अमेरिका के मधुर सम्बन्धों का ह्रास हुआ है।
In simple words: This answer explains the ups and downs of India's relations with the US and Russia. While India and the US share democratic values and trade, historical events like the Cold War and US support to Pakistan created tension, whereas Russia has been a steady and reliable friend to India.

🎯 Exam Tip: When writing about international relations, clearly categorize your points into positive aspects (पक्ष) and negative aspects (विपक्ष) with key historical dates to score maximum marks.

 

Question 1. मानचित्र में स्वतन्त्र मध्य एशियाई देशों को चिह्नित करें। पूर्वी, मध्य यूरोप और ‘स्वतन्त्र राज्यों के राष्ट्रकुल’ का मानचित्र
मानचित्र में दर्शाए गए प्रमुख स्थान और देश:

  • रूसी संघ
  • बेलारूस
  • यूक्रेन
  • मोल्डोवा
  • रोमानिया
  • बुल्गारिया
  • कजाकिस्तान
  • उज्बेकिस्तान
  • तुर्कमेनिस्तान
  • ताजिकिस्तान
  • किरगिझस्तान
  • जॉर्जिया
  • अज़रबैजान
  • आर्मेनिया
  • तुर्की
Answer: स्वतन्त्र मध्य एशियाई देश ये हैं—
1. उज्बेकिस्तान,
2. ताजिकिस्तान,
3. कजाकिस्तान,
4. किरगिझस्तान,
5. तुर्कमेनिस्तान।
ये देश मध्य एशिया के महत्वपूर्ण भू-भाग में स्थित हैं और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध हैं।
In simple words: मानचित्र में दिखाए गए मध्य एशिया के पांच प्रमुख देश उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान, किरगिझस्तान और तुर्कमेनिस्तान हैं। ये सभी देश पहले सोवियत संघ का हिस्सा थे।

🎯 Exam Tip: मानचित्र आधारित प्रश्नों में देशों की भौगोलिक स्थिति को ध्यान से देखें ताकि परीक्षा में उन्हें सही स्थान पर चिह्नित किया जा सके।

 

Question 2. मैंने किसी को कहते हुए सुना है कि “सोवियत संघ का अन्त समाजवाद का अन्त नहीं है।” क्या यह सम्भव है?
Answer: यह सही है कि सोवियत संघ का अन्त समाजवाद का अन्त नहीं है। यद्यपि सोवियत संघ समाजवादी विचारधारा का प्रबल समर्थक तथा उसका प्रतीक था, लेकिन वह समाजवाद के एक रूप का प्रतीक था। समाजवाद के अनेक रूप हैं और समाजवादी विचारधारा के उन रूपों को अभी भी विश्व के अनेक देशों ने अपना रखा है। दूसरे, समाजवाद एक विचारधारा है जिसमें देश, काल और परिस्थितियों के अनुसार विकास होता रहा है और अब भी हो रहा है। लोकतांत्रिक समाजवाद और कल्याणकारी नीतियां आज भी कई देशों में सफलतापूर्वक लागू हैं। इसीलिए सोवियत संघ का अन्त समाजवाद का अन्त नहीं है।
In simple words: सोवियत संघ का खत्म होना समाजवाद का अंत नहीं है क्योंकि समाजवाद एक बड़ी सोच है जिसके कई रूप हैं। दुनिया के कई देश आज भी समाजवाद के अलग-अलग रूपों को अपनाते हैं।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि सोवियत संघ समाजवाद का एकमात्र मॉडल नहीं था, बल्कि समाजवाद के कई अन्य रूप भी अस्तित्व में हैं।

 

Question 3. सोवियत और अमेरिकी दोनों खेमों के शीतयुद्ध के दौर के पाँच-पाँच देशों के नाम लिखिए।
Answer: शीतयुद्ध के दौर के सोवियत और अमेरिकी खेमों के पाँच-पाँच देशों के नाम निम्नलिखित हैं:
(1) अमेरिकी खेमे के देश -
1. संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)
2. ब्रिटेन (United Kingdom)
3. फ्रांस (France)
4. पश्चिम जर्मनी (West Germany)
5. इटली (Italy)

(2) सोवियत खेमे के देश -
1. सोवियत संघ (USSR)
2. पोलैंड (Poland)
3. पूर्वी जर्मनी (East Germany)
4. हंगरी (Hungary)
5. बुल्गारिया (Bulgaria)
ये देश शीतयुद्ध के दौरान वैचारिक और सैन्य रूप से अपने-अपने गुटों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध थे।
In simple words: शीतयुद्ध के समय दुनिया दो बड़े समूहों में बंटी थी। अमेरिकी समूह में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देश थे, जबकि सोवियत समूह में सोवियत संघ, पोलैंड और पूर्वी जर्मनी जैसे देश शामिल थे।

🎯 Exam Tip: दोनों खेमों के देशों के नाम लिखते समय नाटो (NATO) और वारसा पैक्ट (Warsaw Pact) के सदस्य देशों को याद रखना एक आसान तरीका है।

1. संयुक्त राज्य अमेरिका,
2. इंग्लैंड,
3. फ्रांस,
4. पश्चिमी जर्मनी,
5. इटली।

 

(2) सोवियत खेमे के देश:
1. सोवियत संघ,
2. पूर्वी जर्मनी,
3. पोलैंड,
4. रोमानिया,
5. हंगरी।

 

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. सोवियत संघ के विभाजन के कारणों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए। अथवा सोवियत संघ का पतन क्यों हुआ? कारणों सहित विवेचना कीजिए। अथवा सोवियत संघ के विघटन के लिए उत्तरदायी कारकों का वर्णन कीजिए।
Answer: सोवियत संघ के विभाजन (विघटन) के लिए उत्तरदायी कारण विश्व की दूसरी महाशक्ति (सोवियत संघ) का सन् 1991 में अचानक विघटन हो गया और इसके साथ ही सोवियत संघ की साम्यवादी शासन-व्यवस्था का भी अन्त हो गया। सोवियत संघ के विघटन के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
1. राजनीतिक-आर्थिक संस्थाओं की शिथिलता - सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था वर्षों तक रुकी रही। इससे उपभोक्ता वस्तुओं की व्यापक कमी हो गई और सोवियत संघ की एक बड़ी आबादी अपनी राजव्यवस्था को सन्देह की नजर से देखने लगी थी। सोवियत संघ की राजनीतिक व आर्थिक संस्थाएँ अन्दर से कमजोर हो चुकी थीं जो जनता की आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सकीं। फलस्वरूप यह स्थिति सोवियत संघ के पतन या विभाजन का कारण बनी।
2. संसाधनों का अधिकांश भाग परमाणु हथियार व सैन्य साजो-सामान पर व्यय करना - सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था में गतिरोध आने के पीछे एक कारण यह भी है कि सोवियत संघ ने अपने संसाधनों का अधिकांश भाग परमाणु हथियार एवं सैन्य साजो-सामान पर व्यय किया। साथ ही उसने अपने संसाधन पूर्वी यूरोप के अपने पिछलग्गू देशों के विकास पर भी खर्च किए ताकि वे सोवियत संघ के नियन्त्रण में रहें। इससे सोवियत संघ पर गहरा आर्थिक दबाव पड़ा, अर्थव्यवस्था का यह गतिरोध आगे चलकर इसके विभाजन का कारण बना।
3. औद्योगिकीकरण के क्षेत्र में पिछड़ना - औद्योगिकीकरण के विरोध के कारण सोवियत संघ में विज्ञान और तकनीक का विकास नहीं हो पाया। कृषि के द्वारा देश का विकास उस गति से नहीं हो पाया, जैसा कि पश्चिमी देशों का हुआ। सच्चाई यह थी कि सोवियत संघ पश्चिमी देशों की तुलना में पिछड़ चुका था, इससे लोगों को मनोवैज्ञानिक धक्का लगा; जो सोवियत संघ के विभाजन का एक कारण बना।
4. कम्युनिस्ट पार्टी का अंकुश - सोवियत संघ पर कम्युनिस्ट पार्टी ने 70 सालों तक शासन किया और यही पार्टी अब जनता के प्रति जवाबदेह नहीं रह गई थी। एक ही दल होने से भी संसाधनों पर कम्युनिस्ट पार्टी का नियन्त्रण रहता था, साथ ही जनता के पास कोई विकल्प भी नहीं था। पार्टी के अधिकारियों को आम नागरिकों से अधिक विशेषाधिकार मिले हुए थे और वे आम जनता की जरूरतों के प्रति पूरी तरह उदासीन हो चुके थे।
In simple words: सोवियत संघ के टूटने के मुख्य कारण उसकी कमजोर अर्थव्यवस्था, हथियारों पर अत्यधिक खर्च, पश्चिमी देशों की तुलना में तकनीकी रूप से पिछड़ना और कम्युनिस्ट पार्टी का तानाशाही शासन था।

🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय सोवियत संघ के विघटन के मुख्य बिंदुओं जैसे आर्थिक कमजोरी, सैन्य खर्च और कम्युनिस्ट पार्टी के एकाधिकार को रेखांकित (underline) अवश्य करें ताकि परीक्षक का ध्यान तुरंत उन पर जाए।

 

Question 2. सोवियत संघ के विघटन के क्या परिणाम हुए? सविस्तार बताइए।
Answer: सोवियत संघ के विघटन के परिणाम सोवियत संघ की दूसरी दुनिया एवं पूर्वी यूरोप की समाजवादी व्यवस्था के पतन के परिणाम विश्व राजनीति की दृष्टि से गंभीर रहे, जिनका विवरण निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत प्रस्तुत किया जा सकता है-

1. शीतयुद्ध के दौर की समाप्ति - सोवियत संघ की दूसरी दुनिया एवं पूर्वी यूरोप की समाजवादी व्यवस्था के पतन का प्रथम परिणाम शीतयुद्ध के दौर के संघर्ष की समाप्ति के रूप में हुआ। समाजवादी प्रणाली पूँजीवादी प्रणाली को हटा पाएगी या नहीं यह विवाद अब कोई मुद्दा नहीं रहा। समाजवादी एवं पूँजीवादी व्यवस्था के विचारात्मक शीतयुद्ध के इस विवाद ने दोनों गुटों की सेनाओं को उकसाया था। हथियारों की तीव्र होड़ शुरू की थी, परमाणु हथियारों के संचय को बढ़ावा दिया था और विश्व को सैन्य गुटों में बाँटा था। शीतयुद्ध के समाप्त होने से हथियारों की होड़ भी समाप्त हो गई और नई शान्ति की सम्भावना का जन्म हुआ। इससे वैश्विक स्तर पर शांति और सहयोग का एक नया युग शुरू हुआ।

2. अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति के शक्ति सम्बन्धों में बदलाव - शीतयुद्ध के अन्त के समय केवल दो सम्भावनाएँ थीं — या तो बनी हुई महाशक्ति का दबदबा रहेगा और एक ध्रुवीय विश्व बनेगा या फिर देशों के अलग-अलग समूह अन्तर्राष्ट्रीय व्यवस्था में महत्त्वपूर्ण मोहरे बनकर उभरेंगे और इस प्रकार बहु-ध्रुवीय विश्व बनेगा - किन्तु हुआ यह कि अमेरिका महाशक्ति बन बैठा और अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति के शक्ति सम्बन्धों में बदलाव आया। राजनीतिक रूप से उदारवादी लोकतन्त्र राजनीतिक जीवन को सूत्रबद्ध करने की सर्वश्रेष्ठ धारणा के रूप में उभरकर सामने आया।

3. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पूँजीवादी अर्थव्यवस्था के प्रभाव में वृद्धि - सोवियत संघ के विभाजन से सम्पूर्ण विश्व में साम्यवाद का प्रभाव भी कम हो गया था जिसके कारण संयुक्त राज्य अमेरिका की पूँजीवादी विचारधारा को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पैठ बनाने का सुअवसर प्राप्त हुआ। पूँजीवादी अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व की सबसे प्रभावशाली अर्थव्यवस्था बन गई। विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाएँ विभिन्न देशों की ताकतवर सलाहकार बन गईं क्योंकि इन्हीं देशों को पूँजीवाद की ओर कदम बढ़ाने के लिए इन संस्थाओं ने ऋण दिया था। इन समस्त बातों ने पूँजीवादी अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आगे बढ़ाने एवं विश्व में प्रभुत्व स्थापित करने में सहायता पहुँचायी।

4. नए स्वतन्त्र देशों का उदय - चौथा महत्त्वपूर्ण परिणाम यह निकला कि सोवियत खेमे के अन्त के साथ ही नए देशों का उदय हुआ। सोवियत संघ से अलग हुए गणराज्य एक सम्प्रभु और स्वतन्त्र राष्ट्र बन गए। ये राष्ट्र हैं-
1. रूस,
2. उक्रेन,
3. जॉर्जिया,
4. अर्मेनिया,
In simple words: The collapse of the Soviet Union ended the Cold War and stopped the dangerous arms race. It made the United States the main global superpower and led to the creation of many new independent countries like Russia and Ukraine.

🎯 Exam Tip: To score full marks, list all four major consequences clearly with subheadings like 'End of Cold War' and 'Rise of New Nations'.

 

Question 3. शॉक थेरेपी क्या है? इसके विभिन्न परिणाम बताइए।
Answer: शॉक थेरेपी का अर्थ-साम्यवाद के पतन के पश्चात् पूर्व सोवियत संघ के गणराज्य एक सत्तावादी समाजवादी व्यवस्था से लोकतान्त्रिक पूँजीवादी व्यवस्था के कष्टप्रद संक्रमण से होकर गुजरे। रूस, मध्य एशिया के गणराज्य और पूर्वी यूरोप के देशों में पूँजीवाद की ओर से संक्रमण का एक विशेष मॉडल अपनाया गया। विश्व बैंक एवं अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा निर्देशित इस मॉडल को ‘शॉक थेरेपी’ अर्थात् आघात पहुँचाकर उपचार करना कहा जाता है।

शॉक थेरेपी में सम्पत्ति पर निजी स्वामित्व, राज्य की सम्पदा के निजीकरण एवं व्यापारिक स्वामित्व के ढाँचे को अपनाना, पूँजीवादी पद्धति से खेती करना, मुक्त व्यापार को पूर्ण रूप से अपनाना, वित्तीय खुलापन एवं मुद्राओं की आपसी परिवर्तनशीलता को अपनाना शामिल है। यह मॉडल आर्थिक सुधारों को गति देने के लिए लागू किया गया था।

शॉक थेरेपी के प्रमुख परिणाम निम्नलिखित हैं:

1. अर्थव्यवस्था का नष्ट होना–सन् 1990 में अपनायी गयी शॉक थेरेपी जनता को उपभोग के उस आनन्द लोक तक नहीं ले गई, जिसका उसने वादा किया था। शॉक थेरेपी से पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था नष्ट हो गई और जनता को बर्बादी की मार झेलनी पड़ी। रूस में पूरा राज्य नियन्त्रित औद्योगिक ढाँचा चरमरा उठा। लगभग 90 प्रतिशत उद्योगों को निजी हाथों अथवा कम्पनियों को बेच दिया गया। आर्थिक ढाँचे का यह पुनर्निर्माण चूंकि सरकार द्वारा नियन्त्रित औद्योगीकरण नीति की अपेक्षा बाजार की शक्तियाँ कर रही थीं; इसलिए यह कदम सभी उद्योगों को नष्ट करने वाला सिद्ध हुआ। इसे इतिहास की सबसे बड़ी गैराज सेल कहा जाता है।
In simple words: Shock therapy was a sudden shift from a government-controlled socialist system to a free-market capitalist system in Russia and Eastern Europe. Instead of helping, it destroyed their economies and forced them to sell valuable state industries at very low prices.

🎯 Exam Tip: Clearly define 'Shock Therapy' as a transition model directed by the World Bank and IMF, and highlight its devastating economic impacts like the collapse of industries to score full marks.

शॉक थेरेपी के परिणाम

1. सबसे बड़ी ‘गराज सेल’ के नाम से जाना जाता है क्योंकि महत्त्वपूर्ण उद्योगों की कीमत कम-से-कम करके आँकी गयी तथा उन्हें औने-पौने दामों में बेच दिया गया। यद्यपि इस महाबिक्री में भाग लेने के लिए समस्त जनता को अधिकार पत्र प्रदान किए गए थे, लेकिन अधिकांश जनता ने अपने अधिकार पत्र कालाबाजारियों को बेच दिए क्योंकि उन्हें धन की आवश्यकता थी।

2. रूसी मुद्रा (रूबल) में गिरावट-शॉक थेरेपी के कारण रूसी मुद्रा रूबल के मूल्य में नाटकीय ढंग से गिरावट आयी। मुद्रास्फीति इतनी अधिक बढ़ी कि लोगों की जमा पूँजी धीरे-धीरे समाप्त हो गयी और लोग निर्धन हो गए।

3. खाद्यान्न सुरक्षा की समाप्ति-शॉक थेरेपी के कारण सामूहिक खेती की प्रणाली समाप्त हो गई। अब लोगों की खाद्यान्न सुरक्षा व्यवस्था भी समाप्त हो गई, जिस कारण लोगों के समक्ष खाद्यान्न की समस्या भी उत्पन्न होने लगी। रूस ने खाद्यान्न का आयात कर दिया। पुराना व्यापारिक ढाँचा तो टूट चुका था, लेकिन इसके स्थान पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पायी थी।

4. समाज कल्याण की समाजवादी व्यवस्था को नष्ट किया जाना-सोवियत संघ से अलग हुए राज्यों में समाज कल्याण की समाजवादी व्यवस्था को क्रम से नष्ट किया गया। समाजवादी व्यवस्था के स्थान पर नई पूँजीवादी व्यवस्था को अपनाया गया। इस व्यवस्था के बदलने से लोगों को प्रदान की जाने वाली राजकीय रियायतें समाप्त हो गईं; जिससे अधिकांश लोग निर्धन होने लगे। इस कारण मध्यम एवं शिक्षित वर्ग का पलायन हुआ और वहाँ कई देशों में एक नया वर्ग उभरकर सामने आया जिसे माफिया वर्ग के नाम से जाना गया। इस वर्ग ने वहाँ की अधिकांश आर्थिक गतिविधियों को अपने हाथों में ले लिया।

5. आर्थिक असमानताओं का जन्म-निजीकरण ने नई विषमताओं को जन्म दिया। पूर्व सोवियत संघ में शामिल गणराज्यों और विशेषकर रूस में अमीर और गरीब के बीच गहरी खाई तैयार हो गयी। अब धनी और निर्धन के बीच गहरी असमानता ने जन्म ले लिया था।

6. लोकतांत्रिक संस्थाओं के निर्माण को प्राथमिकता नहीं-सोवियत संघ से अलग हुए गणराज्यों में शॉक थेरेपी के अन्तर्गत आर्थिक परिवर्तन को बड़ी प्राथमिकता दी गई है और उसे पर्याप्त स्थान भी दिया गया, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं के निर्माण का कार्य ऐसी प्राथमिकता के साथ नहीं हो सका। इन सभी देशों में जल्दबाजी में संविधान तैयार किए गए। रूस सहित अधिकांश देशों में राष्ट्रपति को कार्यपालिका का प्रमुख बनाया गया और उसके हाथों में अधिकांश शक्तियाँ प्रदान कर दी गईं। फलस्वरूप संसद अपेक्षाकृत कमजोर संस्था रह गयी।

7. शासकों का सत्तावादी स्वरूप-एशिया के देशों में राष्ट्रपति को बहुत अधिक शक्तियाँ प्रदान कर दी गईं और इनमें से कुछ सत्तावादी हो गए। उदाहरण के लिए, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों ने पहले 10 वर्षों के लिए अपने को इस पद पर बहाल किया और उसके बाद समय सीमा को अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ा दिया। इन राष्ट्रपतियों ने अपने फैसले से असहमति या विरोध की अनुमति नहीं दी।

8. न्यायपालिका की स्वतंत्रता स्थापित नहीं-सोवियत संघ से अलग हुए गणराज्यों में न्यायिक संस्कृति एवं न्यायपालिका की स्वतंत्रता अभी तक स्थापित नहीं हो पायी है जिसे स्थापित किया जाना आवश्यक है।

🎯 Exam Tip: शॉक थेरेपी के परिणामों को लिखते समय इसके आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट करें ताकि पूरे अंक मिल सकें।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

 

Question 1. सोवियत प्रणाली के प्रमुख दोषों का उल्लेख कीजिए।
Answer: सोवियत प्रणाली के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं:
1. सोवियत प्रणाली पर नौकरशाही का पूर्ण नियन्त्रण था। सोवियत प्रणाली सत्तावादी होती चली गई तथा जन साधारण का जीवन लगातार कठिन होता चला गया। इस व्यवस्था में नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं थी, जिससे उनका असंतोष बढ़ता गया।
In simple words: सोवियत प्रणाली में सरकारी अधिकारियों का बहुत ज़्यादा नियंत्रण था, जिससे आम लोगों का जीवन बहुत कठिन हो गया और उन्हें अपनी बात कहने की आज़ादी नहीं थी।

🎯 Exam Tip: सोवियत प्रणाली के दोषों को लिखते समय नौकरशाही के नियंत्रण और सत्तावादी स्वरूप जैसे मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करना न भूलें।

 

Question 2. सोवियत प्रणाली की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Answer: सोवियत प्रणाली की विशेषताएँ समाजवादी सोवियत गणराज्य रूस में हुई सन् 1917 की समाजवादी क्रान्ति के बाद अस्तित्व में आया। यह प्रणाली लोक कल्याणकारी राज्य के आदर्शों पर आधारित थी। सोवियत प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं:
1. सोवियत राजनीतिक प्रणाली की धुरी कम्युनिस्ट पार्टी थी। इस दल का सभी संस्थाओं पर गहरा नियन्त्रण था।
2. सोवियत आर्थिक प्रणाली योजनाबद्ध एवं राज्य के नियन्त्रण में थी।
3. सोवियत संघ में सम्पत्ति पर राज्य का स्वामित्व एवं नियन्त्रण था।
4. सोवियत संघ की संचार प्रणाली बहुत उन्नत थी। इसके दूर-दराज के क्षेत्र भी आवागमन की सुव्यवस्थित एवं विशाल प्रणाली के कारण आपस में जुड़े हुए थे।
5. सोवियत संघ के पास विशाल ऊर्जा संसाधन थे जिनमें खनिज तेल, लोहा, उर्वरक, इस्पात व मशीनरी आदि शामिल थे।
6. सोवियत संघ का घरेलू उपभोक्ता उद्योग भी बहुत उन्नत था।
7. सोवियत संघ में बेरोजगारी नहीं थी।
In simple words: सोवियत प्रणाली एक ऐसी व्यवस्था थी जहाँ सब कुछ सरकार के नियंत्रण में था, जैसे ज़मीन, फ़ैक्टरियाँ और योजनाएँ, और वहाँ कोई बेरोज़गारी नहीं थी।

🎯 Exam Tip: सोवियत प्रणाली की मुख्य विशेषताओं जैसे कम्युनिस्ट पार्टी का एकछत्र नियंत्रण, राज्य का स्वामित्व और उन्नत घरेलू उपभोक्ता उद्योग को बिंदुओं में स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 3. सोवियत संघ तथा पूर्वी यूरोप की समाजवादी व्यवस्था के विघटन के विश्व राजनीति में क्या परिणाम निकले?
Answer: सोवियत संघ तथा पूर्वी यूरोप की समाजवादी व्यवस्था के विघटन के विश्व राजनीति में निम्नलिखित परिणाम निकले:
1. दूसरी दुनिया के पतन का एक परिणाम शीतयुद्ध के दौर के संघर्ष की समाप्ति में हुआ। शीतयुद्ध के समाप्त होने से हथियारों की होड़ भी समाप्त हो गई और एक नई शान्ति की सम्भावना का जन्म हुआ।
2. दूसरी दुनिया के पतन से विश्व राजनीति में शक्ति-सम्बन्ध बदल गए इस कारण विचारों और संस्थाओं के आपेक्षिक प्रभाव में भी बदलाव आया।
3. सोवियत संघ के पतन के बाद अमेरिका एकमात्र महाशक्ति बनकर उभरा और एक-ध्रुवीय विश्व राजनीति सामने आयी।
4. सोवियत खेमे के अन्त से अनेक नए देशों का उदय हुआ। इन देशों ने रूस के साथ अपने मजबूत रिश्ते को जारी रखते हुए पश्चिमी देशों के साथ सम्बन्ध बढ़ाए। इससे वैश्विक स्तर पर पूंजीवादी व्यवस्था और उदारवादी लोकतंत्र का प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया।
In simple words: सोवियत संघ के टूटने से अमेरिका दुनिया की इकलौती सबसे बड़ी ताकत बन गया, शीतयुद्ध खत्म हो गया और कई नए स्वतंत्र देशों का जन्म हुआ।

🎯 Exam Tip: शीतयुद्ध की समाप्ति, एक-ध्रुवीय विश्व का उदय और नए देशों के उदय जैसे मुख्य परिणामों को हेडिंग्स के साथ लिखें ताकि अच्छे अंक मिलें।

 

Question 4. मान लीजिए सोवियत संघ का विघटन नहीं हुआ होता तथा विश्व 1980 के मध्य की तरह द्वि-ध्रुवीय होता, तो यह अन्तिम दो दशकों के विकास को किस प्रकार प्रभावित करता? इस प्रकार के विश्व के तीन क्षेत्रों या प्रभाव तथा विकास का वर्णन करें, जो नहीं हुआ होता।
Answer: सन् 1991 में यदि सोवियत संघ का पतन नहीं हुआ होता तो ये अन्तिम दोनों दशक भी शीतयुद्ध की राजनीति से प्रभावित रहते और विश्व में निम्नलिखित प्रभाव होते:
1. एक-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था की स्थापना नहीं होती – यदि सोवियत संघ का पतन नहीं हुआ होता तो विश्व राजनीति में एक ही महाशक्ति अमेरिका का यह वर्चस्व नहीं होता जो सोवियत संघ के पतन के बाद हुआ है। दोनों महाशक्तियों के बीच हथियारों की होड़ और सैन्य प्रतिस्पर्धा लगातार जारी रहती।
2. अफगानिस्तान तथा इराक देशों की स्थिति में परिवर्तन – सोवियत संघ के पतन के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान और इराक में अपना हस्तक्षेप अत्यधिक बढ़ा दिया तथा दोनों को युद्ध के लिए मजबूर कर उन्हें तहस-नहस कर दिया। यदि सोवियत संघ का पतन न हुआ होता तो इन क्षेत्रों में सोवियत संघ अमेरिका का विरोध करता और युद्ध का विरोध करता।
In simple words: अगर सोवियत संघ नहीं टूटता, तो अमेरिका अकेले पूरी दुनिया पर राज नहीं कर पाता और अफगानिस्तान व इराक जैसे देशों में अमेरिकी हस्तक्षेप और तबाही को रोका जा सकता था।

🎯 Exam Tip: इस विश्लेषणात्मक प्रश्न में तार्किक रूप से समझाएं कि कैसे द्वि-ध्रुवीय व्यवस्था अमेरिकी मनमानी पर अंकुश लगाए रखती।

 

Question 5. द्वि-ध्रुवीय विश्व के पतन के कारणों को समझाइए।
Answer: द्वि-ध्रुवीय विश्व के पतन के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
1. अमेरिकी गुट में फूट - द्वि-ध्रुवीय विश्व के पतन का एक प्रमुख कारण अमेरिकी गुट में फूट पड़ना था। फ्रांस जैसा देश अमेरिका पर अविश्वास करने लगा था।
2. सोवियत गुट में फूट - सोवियत गुट से पूर्वी यूरोपीय देशों तथा चीन का अलग होना सोवियत खेमे को कमजोर कर गया।
3. सोवियत संघ का पतन - द्वि-ध्रुवीय विश्व के पतन का एक प्रमुख कारण सोवियत संघ का पतन रहा।
4. गुटनिरपेक्ष आन्दोलन - गुटनिरपेक्ष आन्दोलन ने अधिकांश विकासशील देशों को दोनों गुटों से अलग रखने में सफलता पायी। इससे द्वि-ध्रुवीय विश्व को झटका लगा। इसके अतिरिक्त, विश्व में शांति और सहयोग की भावना भी मजबूत हुई।
In simple words: The two-power world system ended because of internal conflicts within both the US and Soviet alliances, the collapse of the Soviet Union, and the rise of the Non-Aligned Movement which kept many developing countries independent.

🎯 Exam Tip: Clearly list all four major reasons with subheadings like 'अमेरिकी गुट में फूट' and 'गुटनिरपेक्ष आन्दोलन' to score full marks.

 

Question 6. 1950 के दशक में द्वि-ध्रुवीकरण में आयी दरारों का उल्लेख कीजिए।
Answer: द्वि-ध्रुवीकरण की दरारें - 1950 के दशक में ऐसे अनेक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए जिनके कारण द्वि-ध्रुवीकरण में कमजोरी आयी।

सोवियत खेमे में दरारें:
1. सन् 1948 में यूगोस्लाविया ने सोवियत संघ से अपने आपको स्वतन्त्र करने में सफलता प्राप्त कर ली।
2. सन् 1956 में हंगरी ने भी स्वतन्त्रता के प्रयास किए। इससे सोवियत खेमे को गहरा झटका लगा।
3. 1960 के दशक में चीन-सोवियत सीमा विवाद, 1970 के दशक में चीन अमेरिकी वार्ता आदि से चीन और सोवियत संघ में दरारें आयीं।
4. पोलैंड और चेकोस्लोवाकिया के उदारवादी आन्दोलन व रूमानिया द्वारा कार्य करने की स्वतन्त्रता ने सोवियत खेमे को और कमजोर कर दिया।

अमेरिकी खेमे में दरारें:
1. सन् 1956 में ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा स्वेज नहर के राष्ट्रीयकरण के प्रयासों से अमेरिकी खेमे के विश्वास को झटका लगा।
2. लैटिन अमेरिका में क्यूबा के साम्यवादी देश के रूप में उभरने से अमेरिकी गुट को धक्का लगा। इन घटनाओं ने दोनों महाशक्तियों के नियंत्रण को कमजोर कर दिया।
In simple words: During the 1950s, cracks appeared in both power blocks. Countries like Yugoslavia, Hungary, and China challenged the Soviet Union, while events in Cuba and the Suez Canal weakened the US alliance.

🎯 Exam Tip: Divide your answer into two clear sections: 'सोवियत खेमे में दरारें' and 'अमेरिकी खेमे में दरारें' to make it highly structured and easy to read.

 

Question 7. किन कारणों ने गोर्बाचेव को सोवियत संघ में सुधार करने के लिए बाध्य किया?
Answer: मिखाइल गोर्बाचेव सोवियत प्रणाली में निम्नलिखित कारणों की वजह से सुधार लाना चाहते थे:
(1) सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था पश्चिमी देशों की तुलना में काफी पिछड़ गयी थी, अर्थव्यवस्था में गतिरोध पैदा होने की वजह से देश में उपभोक्ता वस्तुओं की भारी कमी उत्पन्न हो रही थी। सोवियत संघ को पाश्चात्य देशों की बराबरी पर लाने के लिए गोर्बाचेव सोवियत प्रणाली में सुधार लाना चाहते थे।
(2) सोवियत संघ के अधिकांश गणराज्य समाजवादी शासन से ऊब गए थे और वे विद्रोह करने पर आमादा हो गए थे।
(3) गोर्बाचेव ने पश्चिम के देशों के साथ सम्बन्धों को सामान्य बनाने तथा सोवियत संघ को लोकतान्त्रिक रूप देने के लिए वहाँ सुधार करने पर फैसला किया। वे जनता को अधिक स्वतंत्रता और अधिकार देना चाहते थे।
In simple words: Gorbachev was forced to make reforms because the Soviet economy was failing compared to the West, people faced severe shortages of daily goods, and citizens were tired of the strict socialist rule.

🎯 Exam Tip: Mention the economic lag compared to Western countries and the shortage of consumer goods as key driving factors for Gorbachev's reforms.

 

Question 8. सोवियत संघ के विघटन में गोर्बाचेव की भूमिका का वर्णन कीजिए।
Answer: सोवियत संघ के विघटन में गोर्बाचेव की भूमिका - सोवियत संघ के विघटन में गोर्बाचेव की सुधारवादी नीतियों की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। गोर्बाचेव ने आर्थिक व राजनीतिक क्षेत्र में सुधार के प्रयत्न किए थे। वे सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था को पश्चिम की बराबरी पर लाना चाहते थे। परंतु उनकी इन नीतियों के कारण सोवियत संघ के विघटन की गति और तेज हो गई।
In simple words: Gorbachev tried to reform the Soviet Union's economy and politics to match the West, but his policies accidentally speeded up the collapse of the entire Soviet system.

🎯 Exam Tip: Highlight how Gorbachev's well-intentioned reforms of 'Glasnost' and 'Perestroika' ultimately backfired and led to the rapid collapse of the Soviet Union.

जिसके लिए उन्होंने प्रशासनिक ढांचे में लचीलापन लाने का प्रयास किया। लेकिन गोर्बाचेव ने देश में समानता, स्वतंत्रता, राष्ट्रीयता, भ्रातृत्व व एकता के वातावरण को तैयार किए बिना ही पुनर्गठन (पेरेस्त्रोइका) व खुलापन (ग्लासनोस्त) जैसी महत्त्वपूर्ण नीतियों को लागू कर दिया था।

गोर्बाचेव द्वारा लागू की गई जनतान्त्रिक नीतियों के कारण सोवियत संघ के कुछ गणराज्यों में सोवियत संघ से अलग होकर स्वतन्त्र राष्ट्र निर्माण का विचार उत्पन्न हुआ। रूस, बाल्टिक गणराज्य, उक्रेन व जॉर्जिया में राष्ट्रीयता व सम्प्रभुता की इच्छा का उभार सोवियत संघ के विघटन का तात्कालिक कारण सिद्ध हुआ। परिणामस्वरूप सोवियत संघ को अपने कुछ गणराज्यों के अलग होने के निर्णय को मान्यता देनी पड़ी। इसके पश्चात् तो एक के बाद एक सोवियत संघ के सभी 15 गणराज्य अलग होकर स्वतन्त्र होते गए और देखते-देखते सोवियत संघ का विघटन हो गया।

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

 

Question 1. बर्लिन की दीवार का निर्माण एवं विध्वंस किस प्रकार की घटना कहलाती है?
Answer: शीतयुद्ध के उत्कर्ष के चरम दौर में सन् 1961 में बर्लिन की दीवार खड़ी की गई। यह दीवार शीतयुद्ध का प्रतीक रही। सन् 1989 में पूर्वी जर्मनी की जनता ने इसे गिरा दिया। यह जर्मनी के एकीकरण, साम्यवादी खेमे की समाप्ति तथा शीतयुद्ध की समाप्ति की शुरुआत थी। यह घटना वैश्विक राजनीति में एक युगांतकारी परिवर्तन का प्रतीक बनी।
In simple words: बर्लिन की दीवार का बनना और टूटना शीतयुद्ध के शुरू होने और खत्म होने का सबसे बड़ा प्रतीक था। इसके टूटने से जर्मनी फिर से एक हो गया।

🎯 Exam Tip: बर्लिन की दीवार के निर्माण (1961) और विध्वंस (1989) के वर्षों को स्पष्ट रूप से लिखना न भूलें।

 

Question 2. सन् 1989 में बर्लिन की दीवार के ढहने को द्वि-ध्रुवीयता का अन्त क्यों कहा जाता है?
Answer: द्वि-ध्रुवीयता के दौर में जर्मनी दो भागों में विभाजित हो गया था। जहाँ पूर्वी जर्मनी साम्यवादी सोवियत संघ के प्रभाव में तथा पश्चिमी जर्मनी संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रभाव में था। सन् 1989 में बर्लिन की दीवार के ढहने के बाद ही सम्पूर्ण विश्व में से सोवियत संघ का प्रभाव भी समाप्त हो गया तथा अब तक दो ध्रुवों में विभाजित विश्व एक-ध्रुवीय हो गया। इस प्रकार अमेरिकी वर्चस्व की शुरुआत हुई।
In simple words: बर्लिन की दीवार गिरने से सोवियत संघ का प्रभाव खत्म हो गया, जिससे दुनिया में दो महाशक्तियों की टक्कर (द्वि-ध्रुवीयता) समाप्त हो गई और केवल अमेरिका ही एकमात्र महाशक्ति बचा।

🎯 Exam Tip: उत्तर में स्पष्ट करें कि कैसे जर्मनी का विभाजन दो महाशक्तियों के प्रभाव को दर्शाता था।

 

Question 3. ‘दूसरी दुनिया के देश’ से आपका क्या तात्पर्य है? अथवा समाजवादी खेमे के देशों से आप क्या समझते हैं?
Answer: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विश्व दो गुटों में विभक्त हो गया। एक गुट का नेतृत्व पूँजीवादी देश संयुक्त राज्य अमेरिका कर रहा था। इस गुट में सम्मिलित देशों को पहली दुनिया के देश कहा गया। दूसरे गुट का नेतृत्व साम्यवादी देश समाजवादी सोवियत गणराज्य (रूस) कर रहा था। इस गुट के देशों को दूसरी दुनिया के देश अथवा समाजवादी खेमे के देश कहा जाता है। इन देशों की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था सोवियत मॉडल पर आधारित थी।
In simple words: दूसरे विश्व युद्ध के बाद जो देश सोवियत संघ (रूस) के साम्यवादी गुट में शामिल हुए, उन्हें 'दूसरी दुनिया के देश' या समाजवादी खेमे के देश कहा जाता है।

🎯 Exam Tip: पहली दुनिया (अमेरिका समर्थित) और दूसरी दुनिया (सोवियत समर्थित) के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 4. ब्लादिमीर लेनिन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: ब्लादिमीर लेनिन का जन्म सन् 1870 को हुआ था। ब्लादिमीर रूस की बोल्शेविक कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक थे। ये सन् 1917 की रूसी क्रान्ति के नायक थे तथा सन् 1917-1924 की अवधि में सोवियत समाजवादी गणराज्य के संस्थापक अध्यक्ष रहे। ये मार्क्सवाद के असाधारण सिद्धान्तकार थे। इन्हें सम्पूर्ण विश्व में साम्यवाद का प्रेरणास्रोत माना जाता है। सन् 1924 में इनका निधन हो गया। उन्होंने मार्क्सवादी विचारों को व्यावहारिक रूप देकर दुनिया की पहली समाजवादी सरकार बनाई।
In simple words: ब्लादिमीर लेनिन रूस के एक महान नेता थे जिन्होंने 1917 की रूसी क्रांति का नेतृत्व किया और सोवियत संघ की स्थापना की।

🎯 Exam Tip: लेनिन के योगदान में 'बोल्शेविक पार्टी के संस्थापक' और '1917 की रूसी क्रांति के नायक' जैसे मुख्य बिंदुओं को अवश्य शामिल करें।

 

Question 5. सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था में गतिरोध क्यों आया? कोई दो कारण बताइए।
Answer: सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था में निम्नलिखित कारणों से गतिरोध आया:
1. सोवियत संघ ने अपने संसाधनों का अधिकांश भाग परमाणु हथियारों के विकास एवं सैन्य साजो सामान पर खर्च किया जिससे सोवियत संघ में आर्थिक संसाधनों की कमी आ गयी।
2. सोवियत संघ को पूर्वी यूरोप के अपने पिछलग्गू देशों के विकास पर अपने संसाधन खर्च करने पड़े जिससे वह धीरे-धीरे आर्थिक तौर पर कमजोर होता चला गया। इसके अतिरिक्त, घरेलू उपभोक्ताओं की बुनियादी जरूरतें पूरी न हो पाने से जनता में असंतोष बढ़ा।
In simple words: सोवियत संघ ने अपना ज्यादातर पैसा हथियारों और सेना पर खर्च कर दिया, और अपने साथी देशों की मदद करने में बहुत संसाधन गंवा दिए, जिससे उसकी खुद की अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई।

🎯 Exam Tip: दोनों कारणों को बिंदुवार (points) लिखें ताकि परीक्षक को मुख्य बिंदु आसानी से दिख सकें।

 

Question 6. आपकी राय में सोवियत संघ के विघटन के दो मुख्य कारण क्या थे?
Answer: सोवियत संघ के विघटन के दो मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
1. तत्कालीन सोवियत संघ के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव द्वारा चलाए गए राजनीतिक एवं आर्थिक सुधार कार्यक्रम।
2. सोवियत संघ के विभिन्न गणराज्यों (जैसे रूस, बाल्टिक गणराज्य, यूक्रेन और जॉर्जिया) में राष्ट्रवादी भावनाओं और संप्रभुता की इच्छा का तीव्र उभार। इन कारणों ने सोवियत संघ की आंतरिक स्थिरता को पूरी तरह समाप्त कर दिया।
In simple words: सोवियत संघ के टूटने के दो मुख्य कारण थे—पहला, मिखाइल गोर्बाचेव के सुधार जो उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पाए, और दूसरा, विभिन्न राज्यों में अपनी अलग पहचान और आजादी की मांग का बढ़ना।

🎯 Exam Tip: विघटन के कारणों में मिखाइल गोर्बाचेव की नीतियों (पेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्त) का उल्लेख अवश्य करें।

Question 7. मिखाइल गोर्बाचेव द्वारा किए गए कार्यों को संक्षेप में बताइए।
Answer: मिखाइल गोर्बाचेव सोवियत संघ के अन्तिम राष्ट्रपति थे। इन्होंने सोवियत संघ के पेरेस्त्रोइका (पुनर्रचना) और ग्लासनोस्त (खुलेपन) की नीति में आर्थिक और राजनीतिक सुधार शुरू किए। इन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मिलकर हथियारों की होड़ पर रोक लगाई। इन्होंने जर्मनी के एकीकरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया। उनके इन सुधारों ने अनजाने में सोवियत संघ के विघटन का मार्ग प्रशस्त कर दिया।
In simple words: Mikhail Gorbachev was the last leader of the Soviet Union. He tried to reform the economy and give people more freedom, but these changes eventually led to the breakup of the Soviet Union.

🎯 Exam Tip: Mention the two key policies 'Glasnost' (openness) and 'Perestroika' (restructuring) to score full marks in this question.

 

Question 8. बोरिस येल्तसिन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: बोरिस येल्तसिन रूस के प्रथम राष्ट्रपति चुने गए। इन्होंने सन् 1991 में सोवियत संघ के शासन के विरुद्ध आन्दोलन का नेतृत्व किया तथा सोवियत संघ के विघटन में प्रमुख भूमिका निभाई। इन्हें साम्यवाद से पूँजीवाद की ओर हुए संक्रमण के दौरान रूसी लोगों को हुए कष्ट के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। वह रूस में लोकतांत्रिक सुधारों के शुरुआती दौर के एक प्रमुख नायक माने जाते हैं।
In simple words: Boris Yeltsin was the first President of Russia. He led the protest against the old Soviet system and helped transition Russia from communism to capitalism.

🎯 Exam Tip: Highlight his role as the first elected President of Russia and his leadership during the 1991 coup.

 

Question 9. सोवियत संघ के विघटन के पश्चात् स्वतन्त्र गणराज्यों के नाम लिखिए।
Answer: सोवियत संघ के विघटन के बाद स्वतन्त्र हुए गणराज्य निम्नलिखित हैं:
1. रूस
2. बेलारूस
3. उक्रेन
4. अर्मेनिया
5. अजरबैजान
6. माल्दोवा
7. कजाकिस्तान
8. किरगिस्तान
9. ताजिकिस्तान
10. तुर्कमेनिस्तान
11. उज्बेकिस्तान
12. जॉर्जिया
13. एस्टोनिया
14. लताविया
15. लिथुआनिया। ये सभी देश अब स्वतंत्र संप्रभु राष्ट्रों के रूप में विश्व मानचित्र पर स्थापित हैं।
In simple words: After the Soviet Union broke apart in 1991, it split into 15 independent countries, including Russia, Ukraine, and Belarus.

🎯 Exam Tip: Memorize at least 5 to 6 major names like Russia, Ukraine, Belarus, and the Central Asian republics for quick recall during exams.

 

Question 10. शॉक थेरेपी से आपका क्या अभिप्राय है?
Answer: शॉक थेरेपी का शाब्दिक अर्थ, ‘आघात पहुँचाकर उपचार करना’ है। शॉक थेरेपी का अभिप्राय है धीरे-धीरे परिवर्तन न करके एकदम आमूल-चूल परिवर्तन के प्रयत्नों को लादना। रूसी गणराज्य में शॉक थेरेपी से परिवर्तन हेतु जल्दबाजी में निजी स्वामित्व, वित्तीय खुलापन, मुक्त व्यापार एवं मुद्राओं की आपसी परिवर्तनशीलता पर बल दिया। शॉक थेरेपी का यह मॉडल विश्व बैंक व अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा निर्देशित था। इस अचानक बदलाव ने वहां की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह नष्ट कर दिया।
In simple words: Shock Therapy was a sudden shift from a communist economy to a capitalist one. Instead of changing slowly, the government made rapid changes which caused a lot of economic pain to the citizens.

🎯 Exam Tip: Clearly define the literal meaning ('painful treatment') and mention that it was backed by the World Bank and IMF.

 

Question 11. पूर्व सोवियत संघ के इतिहास की सबसे बड़ी गराज सेल’ किसे कहा जाता है?
Answer: सोवियत संघ के पतन के बाद अस्तित्व में आए नए गणराज्यों में शॉक थेरेपी (आघात पहुँचाकर उपचार करना) की विधि द्वारा अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने का प्रयास किया लेकिन शॉक थेरेपी के फलस्वरूप सम्पूर्ण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था नष्ट हो गयी। रूस में, पूरा-का-पूरा राज्य-नियन्त्रित औद्योगिक ढाँचा चरमरा गया। लगभग 90 प्रतिशत उद्योगों को निजी हाथों या कम्पनियों को बेचा गया। इसे ही इतिहास की सबसे बड़ी गराज सेल’ कहा जाता है। इन बहुमूल्य उद्योगों को बहुत ही कम दामों पर बेचा गया था।
In simple words: The 'Largest Garage Sale in History' refers to when Russia sold off almost 90% of its state-owned factories and industries to private buyers at extremely cheap prices.

🎯 Exam Tip: Use the keyword '90 percent of industries' and explain that they were sold at throwaway prices to score full marks.

 

Question 12. जोजेफ स्टालिन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: जोजेफ स्टालिन लेनिन के बाद सोवियत संघ के सर्वोच्च नेता और राष्ट्राध्यक्ष बने। इन्होंने सोवियत संघ का सन् 1924 से 1953 तक नेतृत्व किया। इनके काल में सोवियत संघ का तेजी से औद्योगिकीकरण हुआ और द्वितीय विश्व युद्ध में जीत हासिल हुई। उन्होंने कृषि के बलपूर्वक सामूहिकरण की नीति अपनाई जिससे देश में भारी विरोध भी हुआ था।
In simple words: Joseph Stalin was a powerful leader of the Soviet Union who ruled for nearly three decades. He modernized the country's industries but also used very harsh methods to control agriculture.

🎯 Exam Tip: Mention his key policies like rapid industrialization and collectivization of agriculture along with his leadership period (1924-1953).

में सोवियत संघ में औद्योगीकरण को बढ़ावा मिला तथा खेती का बलपूर्वक सामूहिकीकरण किया गया। इन्हीं के काल में शीतयुद्ध का प्रारम्भ हुआ।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

 

Question 1. शीतयुद्ध का सबसे बड़ा प्रतीक था -
(a) बर्लिन की दीवार का खड़ा किया जाना
(b) बर्लिन की दीवार का गिराया जाना
(c) हिटलर के नेतृत्व में नाजी पार्टी का उत्थान
(d) None of the options
Answer: (a) बर्लिन की दीवार का खड़ा किया जाना
In simple words: The building of the Berlin Wall was the biggest symbol of the Cold War because it physically divided the communist and democratic worlds.

🎯 Exam Tip: Remember that the construction of the Berlin Wall in 1961 represented the physical division between the US and Soviet blocs.

 

Question 2. बर्लिन की दीवार कब बनाई गई थी -
(a) 1961 में
(b) 1951 में
(c) 1971 में
(d) 1981 में
Answer: (a) 1961 में
In simple words: The Berlin Wall was built in the year 1961 to stop people from moving between East and West Berlin.

🎯 Exam Tip: Memorize the year 1961 as the starting point of the physical division of Berlin.

 

Question 3. शॉक थेरेपी अपनाई गई थी -
(a) 1988 में
(b) 1989 में
(c) 1990 में
(d) 1992 में
Answer: (c) 1990 में
In simple words: Shock therapy, which was a sudden shift to a free-market economy, was adopted in 1990.

🎯 Exam Tip: Associate "Shock Therapy" directly with the year 1990 and the transition of the post-Soviet economy.

 

Question 4. पूर्वी जर्मनी के लोगों ने बर्लिन की दीवार गिरायी -
(a) 1948 में
(b) 1991 में
(c) 1989 में
(d) 1961 में
Answer: (c) 1989 में
In simple words: The people of East Germany pulled down the Berlin Wall in 1989, which marked the beginning of the end of the Cold War.

🎯 Exam Tip: Do not confuse the building year (1961) with the demolition year (1989) of the Berlin Wall.

 

Question 5. सोवियत संघ के विघटन के लिए किस नेता को जिम्मेदार माना गया -
(a) निकिता खुश्चेव
(b) स्टालिन
(c) बोरिस येल्तसिन
(d) मिखाइल गोर्बाचेव
Answer: (d) मिखाइल गोर्बाचेव
In simple words: Mikhail Gorbachev's policies of reform accidentally led to the fast collapse and breakup of the Soviet Union.

🎯 Exam Tip: Clearly mention Mikhail Gorbachev and his policies of Glasnost and Perestroika when discussing the disintegration of the USSR.

 

Question 6. सोवियत संघ के विभाजन के बाद विश्व पटल पर कितने नए देशों का उद्भव हुआ -
(a) 11
(b) 9
(c) 10
(d) 15
Answer: (d) 15
In simple words: When the Soviet Union broke apart, it split into 15 independent new countries, including Russia.

🎯 Exam Tip: Remember the number 15 as the total number of post-Soviet republics that gained independence.

 

Question 7. साम्यवादी गुट के विघटन का प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय प्रभाव पड़ा -
(a) द्वि-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था का उदय
(b) बहु-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था का उदय
(c) एक-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था का उदय
(d) None of the options
Answer: (c) एक-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था का उदय
In simple words: After the communist bloc collapsed, America became the only superpower, leading to a unipolar world.

🎯 Exam Tip: The collapse of the USSR ended the bipolar era and established US hegemony (unipolar world).

 

Question 8. वर्तमान विश्व में कौन-सा एकमात्र देश महाशक्ति है -
(a) रूस
(b) चीन
(c) अमेरिका
(d) फ्रांस
Answer: (c) अमेरिका
In simple words: Today, the United States is considered the sole global superpower because of its massive economic and military strength.

🎯 Exam Tip: Identify the USA as the dominant superpower in the post-Cold War era.

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