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Detailed Chapter 2 एकदलीय वर्चस्व का युग UP Board Solutions for Class 12 Civics
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Class 12 Civics Chapter 2 एकदलीय वर्चस्व का युग UP Board Solutions PDF
Question 1. सही विकल्प को चुनकर खाली जगह भरें-
(क) 1952 के पहले आम चुनाव में लोकसभा के साथ-साथ ........ के लिए भी चुनाव कराए गए थे। (भारत के राष्ट्रपति पद/राज्य विधानसभा/राज्यसभा/प्रधानमन्त्री)
(ख) ……….. लोकसभा के पहले आम चुनाव में 16 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही। (प्रजा सोशलिस्ट पार्टी/भारतीय जनसंघ/भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी/भारतीय जनता पार्टी)
(ग) ……… स्वतन्त्र पार्टी का एक निर्देशक सिद्धान्त था। (कामगार तबके का हित/रियासतों का बचाव/राज्य के नियन्त्रण से मुक्त अर्थव्यवस्था/संघ के भीतर राज्यों की स्वायत्तता)।
Answer:
(क) राज्य विधानसभा
(ख) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
(ग) राज्य के नियन्त्रण में मुक्त अर्थव्यवस्था
In simple words: पहले आम चुनाव में लोकसभा के साथ राज्यों की विधानसभाओं के भी चुनाव हुए थे। कम्युनिस्ट पार्टी दूसरे स्थान पर रही थी और स्वतंत्र पार्टी चाहती थी कि व्यापार पर सरकारी नियंत्रण न हो।
🎯 Exam Tip: खाली स्थान वाले प्रश्नों में सही विकल्प को ध्यान से चुनकर पूरे वाक्य को दोबारा लिखें ताकि उत्तर स्पष्ट दिखे।
Question 2. यहाँ दो सूचियाँ दी गई हैं। पहले में नेताओं के नाम दर्ज हैं और दूसरे में दलों के। दोनों सूचियों में मेल बैठाएँ:
| नेता (सूची 1) | दल (सूची 2) |
|---|---|
| (क) एस० ए० डांगे | (i) भारतीय जनसंघ |
| (ख) श्यामा प्रसाद मुखर्जी | (ii) स्वतन्त्र पार्टी |
| (ग) मीनू मसानी | (iii) प्रजा सोशलिस्ट पार्टी |
| (घ) अशोक मेहता | (iv) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी |
सही मिलान इस प्रकार है:
| नेता | सही दल |
|---|---|
| (क) एस० ए० डांगे | (iv) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी |
| (ख) श्यामा प्रसाद मुखर्जी | (i) भारतीय जनसंघ |
| (ग) मीनू मसानी | (ii) स्वतन्त्र पार्टी |
| (घ) अशोक मेहता | (iii) प्रजा सोशलिस्ट पार्टी |
🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में उत्तर लिखते समय आमने-सामने सही जोड़े बनाकर लिखें, इससे परीक्षक को कॉपी जाँचने में आसानी होती है।
Question 3. एकल पार्टी के प्रभुत्व के बारे में यहाँ चार कथन लिखे गए हैं। प्रत्येक के आगे सही या गलत का चिह्न लगाएँ:
(क) विकल्प के रूप में किसी मजबूत राजनीतिक दल का अभाव एकल पार्टी-प्रभुत्व का कारण था।
(ख) जनमत की कमजोरी के कारण एक पार्टी का प्रभुत्व कायम हुआ।
(ग) एकल पार्टी प्रभुत्व का सम्बन्ध राष्ट्र के औपनिवेशिक अतीत से है।
(घ) एकल पार्टी-प्रभुत्व से देश में लोकतान्त्रिक आदर्शों के अभाव की झलक मिलती है।
Answer:
(क) सही
(ख) गलत
(ग) सही
(घ) गलत
In simple words: भारत में कांग्रेस के प्रभुत्व का कारण मजबूत विपक्ष की कमी और आजादी के आंदोलन की विरासत थी, न कि लोगों की कमजोरी या लोकतंत्र की कमी।
🎯 Exam Tip: सही/गलत वाले प्रश्नों में केवल उत्तर लिखने के बजाय कथन के सामने 'सही' या 'गलत' लिखना अधिक स्पष्ट रहता है।
Question 4. अगर पहले आम चुनाव के बाद भारतीय जनसंघ अथवा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार बनी होती तो किन मामलों में इस सरकार ने अलग नीति अपनाई होती? इन दोनों दलों द्वारा अपनाई गई नीतियों के बीच तीन अन्तरों का उल्लेख करें।
Answer: यदि पहले आम चुनावों के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी या जनसंघ की सरकार बनती तो देश की नीतियां काफी अलग होतीं। भारतीय जनसंघ 'एक देश, एक संस्कृति और एक राष्ट्र' के विचार पर बल देता, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी आर्थिक समानता और मजदूरों के अधिकारों को प्राथमिकता देती।
दोनों दलों की नीतियों में तीन मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
1. विदेश नीति: भारतीय जनसंघ भारत को एक मजबूत परमाणु शक्ति संपन्न देश बनाने और स्वतंत्र विदेश नीति का समर्थक था, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सोवियत संघ (USSR) के साथ मजबूत संबंधों और समाजवादी गुट के समर्थन की नीति अपनाती।
2. आर्थिक नीति: जनसंघ निजी उद्योगों और भारतीय संस्कृति के अनुकूल स्वदेशी अर्थव्यवस्था का पक्षधर था, वहीं कम्युनिस्ट पार्टी बड़े उद्योगों के राष्ट्रीयकरण, भूमि सुधार और जमींदारी प्रथा के पूर्ण खात्मे पर जोर देती।
3. सांस्कृतिक व भाषाई नीति: जनसंघ हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने और अखंड भारत के विचार का समर्थन करता था, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी भाषाई विविधता और विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय स्वायत्तता का सम्मान करने की नीति पर चलती।
In simple words: जनसंघ की सरकार देश की संस्कृति, अखंड भारत और स्वदेशी व्यापार पर ध्यान देती। वहीं कम्युनिस्ट सरकार गरीबों, मजदूरों के हक और सोवियत संघ के साथ दोस्ती को बढ़ावा देती।
🎯 Exam Tip: अंतर स्पष्ट करने वाले प्रश्नों को हमेशा बिंदुवार (points) लिखें, इससे उत्तर प्रभावशाली बनता है और पूरे अंक मिलते हैं।
नीति के मामलों में दोनों दलों द्वारा अपनाई गई नीतियों में तीन प्रमुख अन्तर:
| क्र० सं० | भारतीय जनसंघ | भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी |
|---|---|---|
| (1) | जनसंघ सम्भवतः असंलग्नता की विदेश नीति को न अपनाकर अमेरिकी गुट के साथ मिलकर चलता। | कम्युनिस्ट पार्टी असंलग्नता की नीति को अपनाते हुए सोवियत गुट के साथ मिलकर विदेश नीति का संचालन करती। |
| (2) | जनसंघ अंग्रेजी भाषा को हटाकर हिन्दी को राष्ट्रभाषा का स्थान दिलाने में महती भूमिका निभाता। | कम्युनिस्ट पार्टी राष्ट्रभाषा के सन्दर्भ में कांग्रेस की नीति का ही समर्थन करती। |
| (3) | जनसंघ कश्मीर में 370 (धारा) का प्रयोग नहीं करती। इस तरह कश्मीर का भारत में अन्य राज्यों की तरह विलय करती। | कम्युनिस्ट पार्टी इस प्रकार का कोई प्रयास नहीं करती। |
Question 5. कांग्रेस किन अर्थों में एक विचारधारात्मक गठबन्धन थी? कांग्रेस में मौजूद विभिन्न विचारधारात्मक उपस्थितियों का उल्लेख करें।
Answer: भारत जब स्वतन्त्र हुआ तब तक कांग्रेस एक गठबन्धन का आकार ले चुकी थी तथा इसमें सभी प्रकार की विचारधाराओं का समर्थन करने वाले विचारकों व समूहों ने अपने को कांग्रेस के साथ मिला दिया। कांग्रेस को निम्नलिखित अर्थों में एक विचारधारात्मक गठबन्धन की संज्ञा दी जा सकती है- यह संगठन समाज के हर वर्ग को अपने साथ जोड़ने में पूरी तरह सफल रहा।
(1) प्रारम्भ में ही अनेक समूहों ने अपनी पहचान को कांग्रेस के साथ समाहित कर लिया। अनेक बार किसी समूह ने अपनी पहचान को कांग्रेस के साथ एकसार नहीं किया तथा अपने-अपने विश्वासों पर विचार करते हुए एक व्यक्ति या समूह के रूप में कांग्रेस के भीतर बने रहे। इस अर्थ में कांग्रेस एक विचारधारात्मक गठबंधन था।
(2) सन् 1924 में भारतीय साम्यवादी दल की स्थापना हुई। सरकार ने इसे प्रतिबन्धित कर दिया। यह दल सन् 1942 तक कांग्रेस को एक गुट के रूप में रहकर ही काम करता रहा। सन् 1942 में इस गुट को कांग्रेस से अलग करने के लिए सरकार ने इस पर से प्रतिबन्ध हटाया। कांग्रेस ने शान्तिवादी और क्रान्तिकारी, रूढ़िवादी और परिवर्तनकारी, गरमपन्थी और नरमपन्थी, दक्षिणपन्थी और वामपन्थी तथा प्रत्येक धारा के मध्यमार्गियों को समाहित कर लिया गया।
(3) कांग्रेस ने समाजवादी समाज की स्थापना को अपना लक्ष्य बनाया। इसी कारण स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् कई समाजवादी पार्टियाँ बनीं लेकिन विचारधारा के आधार पर वे अपनी स्वतन्त्र पहचान नहीं स्थापित कर सकी तथा कांग्रेस के प्रभुत्व व वर्चस्व को नहीं हिला सकीं। इस प्रकार कांग्रेस एक ऐसा मंच था जिस पर अनेक हित समूह और राजनीतिक दल एकत्रित होकर राष्ट्रीय आन्दोलन में भाग लेते थे। आजादी से पहले अनेक संगठन और पार्टियों को कांग्रेस में रहने की अनुमति प्राप्त थी।
(4) कांग्रेस में अनेक ऐसे समूह थे जिनके अपने स्वतन्त्र संविधान थे और संगठनात्मक ढाँचा भी अलग था जैसे कि कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी। फिर भी उन्हें कांग्रेस के एक गुट में बनाए रखा गया। वर्तमान में विभिन्न दलों के गठबन्धन बनते हैं और सत्ता की प्राप्ति के प्रयत्न करते हैं परन्तु स्वतन्त्रता के समय कांग्रेस ही एक प्रकार से एक विचारधारात्मक गठबन्धन था। जहाँ तक कांग्रेस में मौजूद विभिन्न विचारधारात्मक उपस्थिति के उल्लेख का सम्बन्ध है इसके लिए निम्नलिखित तथ्य प्रकाश में लाए जा सकते हैं-
(i) कांग्रेस का उदय सन् 1885 में हुआ था। उस समय यह नवशिक्षित, कार्यशील और व्यापारिक वर्गों का मात्र हित-समूह थी परन्तु बीसवीं सदी में इसने जन आन्दोलन का रूप धारण कर लिया। इसी कारण से कांग्रेस ने एक जनव्यापी राजनीतिक पार्टी का रूप ले लिया और राजनीतिक व्यवस्था में इसका वर्चस्व स्थापित हुआ।
In simple words: आजादी के समय कांग्रेस केवल एक राजनीतिक दल नहीं थी, बल्कि इसमें अलग-अलग विचारों और सोच वाले लोग एक साथ मिलकर काम करते थे। इसमें गरम दल, नरम दल, समाजवादी और दक्षिणपंथी सभी शामिल थे, जिससे यह एक बड़े गठबंधन की तरह काम करती थी।
🎯 Exam Tip: परीक्षा में पूरे अंक पाने के लिए कांग्रेस के भीतर मौजूद विभिन्न विचारधाराओं (जैसे समाजवादी, दक्षिणपंथी, वामपंथी) का स्पष्ट उल्लेख करें और समझाएं कि कैसे कांग्रेस ने इन सभी को एक मंच पर बनाए रखा।
Question 6. क्या एकल पार्टी-प्रभुत्व की प्रणाली का भारतीय राजनीति के लोकतान्त्रिक चरित्र पर खराब असर हुआ?
Answer: एकल पार्टी प्रभुत्व की प्रणाली का भारतीय राजनीति की लोकतान्त्रिक प्रवृत्ति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है तथा प्रभुत्व प्राप्त दल विपक्षी पार्टियों की आलोचना की परवाह न करके मनमाने ढंग से शासन चलाने लगता है व लोकतन्त्र को तानाशाही शासन में बदलने की सम्भावना विकसित होती है, परन्तु हमारे देश में ऐसा नहीं हुआ। पहले तीन आम-चुनावों में कांग्रेस के प्रभुत्व के भारतीय राजनीति पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़े तथा इसने भारतीय लोकतन्त्र, लोकतान्त्रिक राजनीति व लोकतान्त्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया। यह भारतीय लोकतंत्र की एक अनूठी विशेषता थी जिसने बहुदलीय व्यवस्था की नींव को मजबूत किया। इस प्रकार एकल पार्टी-प्रभुत्व प्रणाली के अच्छे परिणामों की पुष्टि निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर होती है-
1. कांग्रेस राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान किए गए वायदों को पूर्ण करने में सफल रही। जनमानस में कांग्रेस एक विश्वसनीय दल था, जनमानस की आशाएँ उसी से जुड़ी थीं, अतः मतदाताओं ने उसे ही चुना।
2. तत्कालीन भारत में लोकतन्त्र और संसदीय शासन-प्रणाली अपनी शैशवावस्था में थी। यदि उस समय कांग्रेस का प्रभुत्व न होता और सत्ता के लिए प्रतिस्पर्धा होती तो जनसाधारण का विश्वास लोकतन्त्र और संसदीय शासन-प्रणाली में उठ जाता।
3. तत्कालीन मतदाता राजनीतिक विचारधाराओं के सम्बन्ध में पूर्ण शिक्षित नहीं था, उसका मात्र 15% भाग ही शिक्षित था। मतदाताओं को कांग्रेस में ही आस्था थी। अतः जनता का मानना था कि कांग्रेस से ही जनकल्याण की आशा की जा सकती है।
4. प्रभुत्व की स्थिति प्राप्त होने के कारण विपक्षी दलों द्वारा सरकार की आलोचना होने पर भी सरकार अपना कार्य करती रही। इसने भारतीय लोकतन्त्र, संसदीय शासन-प्रणाली व भारतीय राजनीति की लोकतान्त्रिक प्रकृति को सुदृढ़ करने में योगदान दिया।
In simple words: No, the single-party dominance of Congress did not harm India's democracy. Instead, it helped stabilize the country's democratic systems and institutions during their early, sensitive years.
🎯 Exam Tip: Mention the specific percentage of educated voters (15%) and list the four key points clearly to score full marks.
Question 7. समाजवादी दलों और कम्युनिस्ट पार्टी के बीच के तीन अन्तर बताएँ। इसी तरह भारतीय जनसंघ और स्वतन्त्र पार्टी के बीच के तीन अन्तरों का उल्लेख करें।
Answer: समाजवादी दल और कम्युनिस्ट पार्टी में अन्तर समाजवादी दल की जड़ों को स्वतन्त्रता से पहले के उस समय में ढूँढा जा सकता है जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जन-आन्दोलन चला रही थी। वहीं दूसरी ओर 1920 के दशक के प्रारम्भिक वर्षों में भारत के विभिन्न भागों में कम्युनिस्ट ग्रुप (साम्यवादी समूह) उभरे। समाजवादी दल लोकतांत्रिक समाजवाद में विश्वास करते थे, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी क्रांतिकारी समाजवाद और सर्वहारा वर्ग के शासन में विश्वास करती थी। इसी प्रकार, भारतीय जनसंघ 'एक देश, एक संस्कृति और एक राष्ट्र' के विचार पर बल देता था, जबकि स्वतन्त्र पार्टी मुक्त अर्थव्यवस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की वकालत करती थी। ये दल देश के विकास के लिए अलग-अलग विचारधाराओं और नीतियों का समर्थन करते थे।
In simple words: Socialist parties believed in achieving equality through democratic means, while Communist parties favored revolutionary methods. Similarly, Jan Sangh focused on national culture, whereas the Swatantra Party supported free markets and individual freedom.
🎯 Exam Tip: Clearly structure your answer by comparing the origins and core ideologies of these parties to highlight their differences.
समाजवादी दल और कम्युनिस्ट पार्टी के बीच निम्नलिखित अन्तर हैं:
| समाजवादी दल | कम्युनिस्ट पार्टी |
|---|---|
| 1. समाजवादी दल पूर्ण रूप से राज्य द्वारा नियन्त्रित अर्थव्यवस्था के समर्थक नहीं थे। वह समाजवादी कार्यक्रमों तथा जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करना चाहते थे। | 1. कम्युनिस्ट पार्टी पूर्ण रूप से राज्य द्वारा नियन्त्रित अर्थव्यवस्था और उत्पादन व वितरण पर सरकार का पूर्ण स्वामित्व चाहती थी। |
| 2. समाजवादी पूँजीपतियों और पूँजी को पूर्णतः अनावश्यक व समाज विरोधी नहीं मानते हैं। | 2. कम्युनिस्ट पार्टी पूँजी और पूँजीपतियों को पूर्णतः अनावश्यक व समाजद्रोही मानती है। |
| 3. समाजवादी दल सामाजिक नियन्त्रण व लोकतान्त्रिक परम्पराओं तथा संवैधानिक उपायों के द्वारा समाजवाद को लागू करना चाहते हैं। | 3. कम्युनिस्ट पार्टी सामाजिक क्रान्ति और आन्दोलन तथा हिंसात्मक तरीकों में विश्वास रखती है चाहे सरकार जबरदस्ती उत्पादन के साधनों और भूमि का राष्ट्रीयकरण करने के लिए मजबूर क्यों न हो। |
भारतीय जनसंघ और स्वतन्त्र पार्टी में अन्तर
भारतीय जनसंघ का गठन सन् 1951 में हुआ था। श्यामाप्रसाद मुखर्जी इसके संस्थापक अध्यक्ष थे। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में जमीन की हदबंदी, खाद्यान्न के व्यापार, सरकारी अधिग्रहण और सहकारी खेती का प्रस्ताव पारित हुआ था। इसके बाद अगस्त 1959 में स्वतन्त्र पार्टी अस्तित्व में आई। इन दोनों पार्टियों में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं:
| भारतीय जनसंघ | स्वतन्त्र पार्टी |
|---|---|
| 1. भारतीय जनसंघ भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप अर्थव्यवस्था चाहती थी। यह देश में जमींदारी उन्मूलन चाहती थी, परन्तु यह स्वैच्छिक सहकारी कृषि प्रणाली की विरोधी नहीं थी। | 1. स्वतन्त्र पार्टी सरकार की अर्थव्यवस्था में कम-से-कम हस्तक्षेप रखने में विश्वास करती थी। उसका विश्वास था कि देश की समृद्धि स्वतन्त्रता के तरीके के माध्यम से आ सकती है। |
| 2. भारतीय जनसंघ सम्पूर्ण देश में एक भाषा, एक संस्कृति के विचार की समर्थक थी और धारा 370 का विरोध करती थी। | 2. स्वतन्त्र पार्टी ने एक भाषा, एक संस्कृति की बात नहीं की और न ही धारा 370 का विरोध किया। |
| 3. यह पार्टी सभी तरह के उद्योगों के राष्ट्रीयकरण की विरोधी थी परन्तु देश की प्रतिरक्षा और मौलिक उद्योगों में सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदारी की विरोधी भी नहीं थी। | 3. स्वतन्त्र पार्टी राज्य के हस्तक्षेप, केन्द्रीयकृत नियोजन, राष्ट्रीयकरण तथा अर्थव्यवस्था के अन्दर सार्वजनिक क्षेत्र की उपस्थिति को पसन्द नहीं करती थी। |
Question 8. भारत और मैक्सिको दोनों ही देशों में एक खास समय तक एक पार्टी का प्रभुत्व रहा। बताएँ कि मैक्सिको में स्थापित एक पार्टी का प्रभुत्व कैसे भारत की एक पार्टी के प्रभुत्व से अलग था।
Answer: इंस्टीट्यूशनल रिवोल्यूशनरी पार्टी जिसे स्पेनिश में पी० आर० आई० कहा जाता है का मैक्सिको में लगभग 60 वर्षों तक शासन रहा। इस पार्टी की स्थापना सन् 1929 में हुई थी तब इसे ‘रिवोल्यूशनरी पार्टी’ कहा जाता था। मूलतः पी० आर० आई० राजनेता व सैनिक नेता, मजदूर तथा किसान संगठन व अनेक राजनीतिक दलों सहित विभिन्न किस्म के हितों का संगठन था। समय बीतने के साथ-साथ पी० आर० आई० के संस्थापक प्लूटार्क इलियास कैलस ने इसके संगठन पर कब्जा कर लिया व इसके पश्चात् नियमित रूप से होने वाले चुनावों में प्रत्येक बार पी० आर० आई० ही विजय प्राप्त करती रही। शेष पार्टियाँ नाममात्र की थीं जिससे कि शासक दल को वैधता प्राप्त होती रहे। चुनाव के नियम भी इस प्रकार तय किए गए कि पी० आर० आई० की जीत हर बार निश्चित हो सके। शासक दल ने अक्सर चुनावों में हेर-फेर और धाँधली की। यह लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन का एक स्पष्ट उदाहरण था। पी० आर० आई० के शासन को ‘परिपूर्ण तानाशाही’ कहा जाता है। अन्ततः सन् 2000 में हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव में इस पार्टी को पराजय का मुँह देखना पड़ा।
In simple words: मैक्सिको में पी.आर.आई. पार्टी ने हेर-फेर और तानाशाही के बल पर सालों तक राज किया, जबकि भारत में कांग्रेस का प्रभुत्व पूरी तरह से लोकतांत्रिक और स्वतंत्र चुनावों पर आधारित था।
🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय दोनों देशों के प्रभुत्व के अंतर को स्पष्ट करने के लिए 'लोकतांत्रिक' और 'अलोकतांत्रिक (तानाशाही)' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
भारत और मैक्सिको में एकल पार्टी के प्रभुत्व में अंतर
मैक्सिको अब एक पार्टी के प्रभुत्व वाला देश नहीं रहा फिर भी अपने प्रभुत्व के काल में पी.आर.आई. ने जो तरीके अपनाए थे उनका लोकतंत्र की सेहत पर बहुत प्रभाव पड़ा। मुक्त और निष्पक्ष चुनाव की बात पर अब भी वहाँ के नागरिकों का पूर्ण विश्वास नहीं जम पाया है।
भारत में स्वतंत्रता संघर्ष से लेकर लगभग सन् 1967 तक देश की राजनीति पर एक ही पार्टी (कांग्रेस) का प्रभुत्व रहा। यहाँ हम मैक्सिको की तुलना भारत में कांग्रेस के प्रभुत्व से करते हैं तो दोनों में अनेक प्रकार के अंतर मिलते हैं जिनमें से निम्नलिखित प्रमुख हैं:
- (1) भारत और मैक्सिको में एकल पार्टी का प्रभुत्व सम्बन्धी अन्तर यह है कि भारत में कांग्रेस का प्रभुत्व एक साथ नहीं रहा, जबकि मैक्सिको में पी.आर.आई. का शासन निरन्तर 60 वर्षों तक चला।
- (2) भारत और मैक्सिको में एक पार्टी के प्रभुत्व के मध्य एक बड़ा अन्तर यह है कि मैक्सिको में एक पार्टी का प्रभुत्व लोकतंत्र की कीमत पर कायम हुआ, जबकि भारत में ऐसा कभी नहीं हुआ। भारत में कांग्रेस पार्टी के साथ-साथ प्रारम्भ से ही अनेक पार्टियाँ चुनाव में राष्ट्रीय स्तर व क्षेत्रीय स्तर के रूप में भाग लेती रहीं जबकि मैक्सिको में ऐसा नहीं हुआ।
- (3) भारत में प्रजातांत्रिक संस्कृति व प्रजातांत्रिक प्रणाली के अन्तर्गत कांग्रेस का प्रभुत्व रहा जबकि मैक्सिको में शासक दल की तानाशाही के कारण इसका प्रभुत्व रहा।
इस प्रकार उपर्युक्त विवेचन के द्वारा स्पष्ट होता है कि भारत और मैक्सिको दोनों ही देशों में लम्बे समय तक एक ही पार्टी का प्रभुत्व रहा। परन्तु कुछ दृष्टियों में दोनों के प्रभुत्व में अन्तर था।
Question 9. भारत का एक राजनीतिक नक्शा लीजिए (जिसमें राज्यों की सीमाएँ दिखाई गई हों) और उसमें निम्नलिखित को चिह्नित कीजिए:
(क) ऐसे दो राज्य जहाँ सन् 1952-67 के दौरान कांग्रेस सत्ता में नहीं थी।
(ख) दो ऐसे राज्य जहाँ इस पूरी अवधि में कांग्रेस सत्ता में रही।
Answer: (क) (i) जम्मू और कश्मीर, (ii) केरल। (ख) (i) महाराष्ट्र, (ii) उत्तर प्रदेश। ये वे राज्य हैं जहाँ इस पूरी अवधि में कांग्रेस का निरंतर शासन रहा और उनकी राजनीतिक पकड़ बहुत मजबूत थी।
In simple words: This question asks us to identify states on India's map based on political control between 1952 and 1967. Jammu & Kashmir and Kerala are examples where Congress was not in power, while Maharashtra and Uttar Pradesh are states where Congress ruled continuously.
🎯 Exam Tip: Always practice locating these states on a blank outline map of India, as map-pointing questions are highly scoring and frequently asked in exams.
Question 9. मानचित्र के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए:
(ख) 1952-67 के दौरान ऐसे दो राज्यों के नाम बताइए जहाँ कांग्रेस सत्ता में रही थी।
Answer:
(ख) (i) महाराष्ट्र, (ii) मध्य प्रदेश। ये दोनों राज्य उस दौर में कांग्रेस के मजबूत गढ़ माने जाते थे और यहाँ पार्टी को भारी जनसमर्थन प्राप्त था।
In simple words: दिए गए नक्शे के अनुसार, साल 1952 से 1967 के बीच महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार सत्ता में थी।
🎯 Exam Tip: मानचित्र वाले प्रश्नों में संकेतों (Legend) को ध्यान से पढ़कर ही उत्तर लिखें ताकि पूरे अंक मिल सकें।
कांग्रेस के संगठनकर्ता पटेल कांग्रेस को दूसरे राजनीतिक समूह में निसंग रखकर उसे एक सर्वांगसम तथा अनुशासित पार्टी बनाना चाहते थे। वे चाहते थे कि कांग्रेस सबको समेटकर चलने वाला स्वभाव छोड़े और अनुशासित कॉडर से युक्त एक सगुंफित पार्टी के रूप में उभरे। ‘यथार्थवादी’ होने के कारण पटेल व्यापकता की जगह अनुशासन को ज्यादा तरजीह देते थे। अगर “आन्दोलन को चलाते चले जाने” के बारे में गांधी के ख्याल हद से ज्यादा रोमानी थे तो कांग्रेस को किसी एक विचारधारा पर चलने वाली अनुशासित तथा धुरन्धर राजनीतिक पार्टी के रूप में बदलने की पटेल की धारणा भी उसी तरह कांग्रेस की उस समन्वयवादी भूमिका को पकड़ पाने में चूक गई जिसे कांग्रेस को आने वाले दशकों में निभाना था। – रजनी कोठारी
Question 10. उपर्युक्त अवतरण को पढ़कर इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(क) लेखक क्यों सोच रहा है कि कांग्रेस को एक सर्वांगसम तथा अनुशासित पार्टी नहीं होना चाहिए?
(ख) शुरुआती सालों में कांग्रेस द्वारा निभाई गई समन्वयवादी भूमिका के कुछ उदाहरण दीजिए।
Answer:
(क) लेखक का यह विचार है कि कांग्रेस को एक सर्वांगसम तथा अनुशासित पार्टी नहीं होना चाहिए क्योंकि एक अनुशासित पार्टी में किसी विवादित विषय पर स्वस्थ विचार-विमर्श सम्भव नहीं हो पाना, जो कि देश एवं लोकतन्त्र के लिए अच्छा होता है। लेखक का यह विचार है कि कांग्रेस पार्टी में सभी धर्मों, जातियों, भाषाओं एवं विचारधाराओं के नेता शामिल हैं, उन्हें अपनी बात कहने का पूरा हक है तभी देश का वास्तविक लोकतन्त्र उभरकर सामने आएगा इसलिए लेखक कहता है कि कांग्रेस पार्टी को सर्वांगसम एवं अनुशासित पार्टी नहीं होना चाहिए। यह आंतरिक लोकतंत्र ही पार्टी को मजबूत बनाए रखता था।
(ख) कांग्रेस ने अपनी स्थापना के प्रारम्भिक वर्षों में कई विषयों में समन्वयकारी भूमिका निभाई। इसने देश के नागरिकों एवं ब्रिटिश सरकार के मध्य एक कड़ी का कार्य किया। कांग्रेस ने अपने अन्दर क्रान्तिकारी और शान्तिवादी, कंजरवेटिव और रेडिकल, गरमपन्थी और नरमपन्थी, दक्षिणपन्थी, वामपन्थी और हर धारा के मध्यवर्गियों को समाहित किया। कांग्रेस एक मंच की तरह थी, जिस पर अनेक समूह हित और राजनीतिक दल तक आ जुटते थे और राष्ट्रीय आन्दोलन में भाग लेते थे। इस प्रकार कांग्रेस ने समाज के सभी वर्गों को एक साथ लाने का ऐतिहासिक काम किया।
In simple words: लेखक का मानना है कि कांग्रेस को एक अनुशासित पार्टी के बजाय सभी विचारों को साथ लेकर चलने वाला मंच होना चाहिए। शुरुआती दिनों में कांग्रेस ने समाज के हर वर्ग, जैसे गरमपंथी, नरमपंथी, अमीर और गरीब सभी को एक साथ जोड़कर देश की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
🎯 Exam Tip: गद्यांश आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखते समय गद्यांश में दिए गए मुख्य शब्दों जैसे 'समन्वयवादी भूमिका' और 'अनुशासित पार्टी' का प्रयोग अवश्य करें।
Up Board Class 12 Civics Chapter 2 Intext Questions
Up Board Class 12 Civics Chapter 2 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर
Question 1. हमारे लोकतन्त्र में ही ऐसी कौन-सी खूबी है? आखिर देर-सबेर हर देश ने लोकतान्त्रिक व्यवस्था को अपना ही लिया है। है न?
Answer: भारत में राष्ट्रवाद की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए दुनिया के अन्य राष्ट्रों (जो उपनिवेशवाद के चंगुल से आजाद हुए) ने भी देर-सबेर लोकतान्त्रिक ढाँचे को अपनाया। लेकिन भारत की चुनौतियों से सबक सीखते हुए उन्होंने राष्ट्रीय एकता की स्थापना को प्रथम प्राथमिकता दी और इसके बाद धीरे-धीरे लोकतन्त्र की स्थापना करने का निर्णय लिया। हमारे लोकतन्त्र की खूबी यह थी कि हमारे स्वतन्त्रता संग्राम की गहरी प्रतिद्वन्द्विता लोकतन्त्र के साथ थी। हमारे नेता लोकतन्त्र में राजनीति की निर्णायक भूमिका को लेकर सचेत थे। वे राजनीति को समस्या के रूप में नहीं देखते थे, वे राजनीति को समस्या के समाधान का उपाय मानते थे। भारतीय नेताओं ने विभिन्न समूहों के हितों के मध्य टकरा हट को दूर करने का एकमात्र उपाय लोकतान्त्रिक राजनीति को माना। इसीलिए हमारे नेताओं ने इसी रास्ते को चुना। यह लोकतांत्रिक ढांचा ही है जो भारत की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोए रखता है।
In simple words: Our democracy is unique because our leaders saw politics not as a problem, but as a way to solve conflicts and bring different groups together. While other newly independent nations delayed democracy to focus on unity, India chose to build both unity and democracy together from the very start.
🎯 Exam Tip: Highlight how Indian leaders viewed politics as a solution rather than a problem to score full marks in this question.
Question 2. क्या आप उन जगहों को पहचान सकते हैं जहाँ कांग्रेस बहुत मजबूत थी? किन प्रान्तों में दूसरी पार्टियों को ज्यादातर सीटें मिलीं?
Answer: मानचित्र के अध्ययन से स्पष्ट है कि कांग्रेस पार्टी देश के अधिकांश भागों में बहुत मजबूत थी, विशेषकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, आंध्र प्रदेश और मद्रास आदि राज्यों में उसे भारी बहुमत मिला था। इसके विपरीत, जम्मू और कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और केरल में डेमोक्रेटिक लेफ्ट (1957-1959) को अधिक सीटें मिलीं और वहाँ दूसरी पार्टियों का प्रभाव था। यह चुनावी इतिहास दर्शाता है कि शुरुआती वर्षों में कांग्रेस का वर्चस्व कितना व्यापक था।
In simple words: Looking at the map, the Congress party was extremely strong across almost all of India, especially in central and northern states. Other parties only managed to win majorities in a few specific regions, like the Democratic Left in Kerala and the National Conference in Jammu and Kashmir.
🎯 Exam Tip: Clearly distinguish between the regions of Congress dominance and the specific states where opposition parties won to present a well-structured answer.
नक्शा किसी पैमाने के हिसाब से बनाया गया भारत का मानचित्र नहीं है। इसमें दिखाई गई भारत की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा रेखा को प्रामाणिक सीमा रेखा न माना जाए।
1. 1952 से 1967 के दौरान कांग्रेस शासित राज्य थे - पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, मणिपुर, उड़ीसा, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश, मैसूर, पाण्डिचेरी, मद्रास आदि।
2. जिन राज्यों में अन्य दलों को सीटें प्राप्त हुईं वे थे - केरल में केरल-डेमोक्रेटिक लेफ्ट फ्रंट (1957-1959) तथा जम्मू और कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी।
Question 3. पहले हमने एक ही पार्टी के भीतर गठबंधन देखा और अब पार्टियों के बीच गठबंधन होता देख रहे हैं। क्या इसका मतलब यह हुआ कि गठबंधन सरकार 1952 से ही चल रही है?
Answer: भारत में ‘पार्टी में गठबंधन’ और ‘पार्टियों का गठबंधन’ का सिलसिला 1952 से ही चला आ रहा है लेकिन इस गठबंधन के स्वरूप एवं प्रकृति में व्यापक अन्तर है।
आजादी के समय एक पार्टी अर्थात् कांग्रेस के अन्दर गठबंधन था। इस पार्टी में प्रारम्भ में नवशिक्षित, कामकाजी और व्यापारियों का बोलबाला रहा। इसके पश्चात् उद्योगपति, किसान, मजदूरों, निम्न और उच्च वर्ग के लोगों को जगह मिली। कांग्रेस ने अपने अन्दर क्रान्तिकारी और शान्तिवादी, कंजरवेटिव और रेडिकल, गरमपंथी और नरमपंथी, दक्षिणपंथी, वामपंथी और हर प्रकार की विचारधाराओं के लोगों को समाहित किया। कांग्रेस एक मंच की तरह थी, जिस पर अनेक समूह हित और राजनीतिक दल आ जुटते थे और राजनीतिक कार्यों में भाग लेते थे। कांग्रेस पार्टी ने इन विभिन्न वर्गों, समुदायों एवं विचारधारा के लोगों में आम सहमति बनाए रखी। यह आंतरिक तालमेल ही कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत थी।
लेकिन सन् 1967 के बाद अनेक राजनीतिक दलों का विकास हुआ और गठबंधन की राजनीति शुरू हुई जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थन के आधार पर सरकारों का गठन किया जाने लगा। लेकिन यह गठबंधन निजी स्वार्थों व शर्तों पर आधारित होते हैं जिनमें परस्पर आम सहमति कायम रखना बहुत ही कठिन कार्य है। यही कारण है कि वर्तमान बहुदलीय व्यवस्था में राजनीतिक स्थायित्व का अभाव पाया जाता है।
In simple words: Before 1967, the coalition was inside one single party (Congress) which had people of all different ideas working together. After 1967, coalitions started happening between different political parties, which is harder to manage because of different selfish interests.
🎯 Exam Tip: Clearly distinguish between 'coalition within a party' (pre-1967 Congress) and 'coalition between different parties' (post-1967) to score full marks.
UP Board Class 12 Civics Chapter 2 Other Important Questions
UP Board Class 12 Civics Chapter 2 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
Question 1. प्रथम तीन आम चुनावों के सन्दर्भ में एक दल की प्रधानता का वर्णन कीजिए तथा इस प्रधानता के कारकों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत में सर्वप्रथम सन् 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई। अपने प्रारम्भिक रूप में यह नवशिक्षित, कामकाजी और व्यापारिक वर्गों का हित समूह भर थी, लेकिन 20वीं सदी में इसने जन-आन्दोलन का रूप धारण कर लिया और इसने एक जनव्यापी राजनीतिक पार्टी का रूप ले लिया। स्वतन्त्रता के बाद भारत के राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस का वर्चस्व लगातार तीन दशकों तक कायम रहा। इस वर्चस्व ने देश की शुरुआती लोकतांत्रिक राजनीति को एक अनूठा आकार दिया।
भारत में एक दल की प्रधानता के कारण
भारत में स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् चुनावों में एक दल के प्रभुत्व के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-
1. कांग्रेस पार्टी को सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व प्राप्त था - कांग्रेस पार्टी के प्रभुत्व का सबसे महत्त्वपूर्ण कारण यह था कि इसमें देश के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व प्राप्त था। कांग्रेस पार्टी उदारवादी, गरमपंथी, दक्षिणपंथी, साम्यवादी तथा मध्यमार्गी नेताओं का एक महान मंच था जिसके कारण लोग इसी पार्टी को मत दिया करते थे।
2. अधिकांश राजनीतिक दलों का निर्माण कांग्रेस पार्टी से ही हुआ - स्वतन्त्रता प्राप्ति के प्रारम्भिक वर्षों में जितने भी विरोधी राजनीतिक दल थे उनमें से अधिकांश राजनीतिक दल कांग्रेस से ही निकले; जैसे - सोशलिस्ट पार्टी, प्रजा समाजवादी पार्टी, संयुक्त समाजवादी पार्टी, जनसंघ, राम राज्य परिषद् तथा हिन्दू महासभा आदि।
In simple words: After independence, the Congress party dominated Indian politics for three decades because it represented all sections of society and most opposition parties had actually branched out from Congress itself.
🎯 Exam Tip: Mention the year of establishment of Congress (1885) and list the key reasons like representing all classes and being the parent of other parties to write a complete answer.
3. कांग्रेस का चमत्कारिक नेतृत्व: कांग्रेस में पं० जवाहरलाल नेहरू थे जो भारतीय राजनीति के सबसे करिश्माई और लोकप्रिय नेता थे। नेहरू ने कांग्रेस पार्टी के चुनाव अभियान की अगुवाई की तथा पूरे देश का दौरा किया। वह किसी भी प्रतिद्वन्द्वी से चुनावी दौड़ में बहुत आगे रहे। फलतः कांग्रेस को तीनों प्रथम आम चुनावों में अभूतपूर्व सफलता मिली।
4. राष्ट्रीय आन्दोलन की विरासत: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चमत्कारिक नेतृत्व में भारत को स्वतन्त्रता प्राप्त हुई। राष्ट्रीय आन्दोलन का केन्द्र भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस रही। इसलिए कांग्रेस पार्टी को स्वतन्त्रता संग्राम की विरासत प्राप्त थी। तब के दिनों में यही एकमात्र पार्टी थी जिसका संगठन सम्पूर्ण भारत में था। इसका लाभ चुनावों में कांग्रेस पार्टी को मिला।
5. गुटों में तालमेल और सहनशीलता: कांग्रेस के गठबन्धनी स्वभाव ने उसे असाधारण ताकत दी। गठबन्धन के कारण कांग्रेस सर्व-समावेशी स्वभाव और सुलह समझौते के द्वारा गुटों के सन्तुलन कायम करती रही। अपने गठबन्धनी स्वभाव के कारण कांग्रेस विभिन्न गुटों के प्रति सहनशील थी और इस स्वभाव से विभिन्न गुटों को बढ़ावा भी मिला। इसलिए विभिन्न हित और विचारधाराओं की नुमाइंदगी कर रहे नेता कांग्रेस के भीतर ही बने रहे। इस तरह कांग्रेस एक भारी-भरकम मध्यमार्गी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आती थी। दूसरी पार्टियाँ कांग्रेस के इस या उस गुट को प्रभावित करने की कोशिश करती थीं। इस तरह वे हाशिये पर ही रहकर नीतियों और फैसलों को अप्रत्यक्ष रीति से प्रभावित कर पाती थीं। अतः वे कांग्रेस का कोई विकल्प प्रस्तुत नहीं कर पाती थीं। फलतः कांग्रेस को प्रथम तीन चुनावों तक अभूतपूर्व सफलता मिलती रही।
Question 2. स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद भारत के लोकतान्त्रिक प्रणाली अपनाने के प्रतिकूल कौन-कौन सी चुनौतियाँ थीं? विस्तारपूर्वक उल्लेख कीजिए।
Answer: स्वतन्त्र भारत का जन्म अत्यन्त कठिन परिस्थितियों में हुआ। देश के सामने प्रारम्भ से ही राष्ट्र-निर्माण की चुनौती थी। ऐसी अनेक चुनौतियों की चपेट में आकर कई अन्य देशों के नेताओं ने फैसला किया कि उनके देश में अभी लोकतन्त्र को ही नहीं अपनाया जा सकता है। इन नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय एकता हमारी पहली प्राथमिकता है और लोकतन्त्र को अपनाने से मतभेद और संघर्ष को बढ़ावा मिलेगा। उपनिवेशवाद के चंगुल से आजाद हुए कई देशों में इसी कारण अलोकतान्त्रिक शासन-व्यवस्था कायम हुई। इस अलोकतान्त्रिक शासनव्यवस्था के कई रूप थे। अलोकतान्त्रिक शासन व्यवस्थाओं की शुरुआत इस वायदे से हुई कि शीघ्र ही लोकतन्त्र कायम कर दिया जाएगा।
भारत में भी परिस्थितियाँ बहुत अलग नहीं थीं, परन्तु स्वतन्त्र भारत के नेताओं ने अपने लिए कहीं अधिक कठिन रास्ता चुनने का फैसला लिया। नेताओं ने कोई और रास्ता चुना होता तो वह अचम्भित करने वाली बात होती क्योंकि हमारे स्वतन्त्रता-संग्राम की गहरी प्रतिबद्धता लोकतन्त्र से थी। हमारे नेताओं ने राजनीति को समस्या के रूप में नहीं देखा तथा वे लोकतन्त्र में राजनीति की निर्णायक भूमिका को लेकर सचेत थे। वे राजनीति को समस्या के समाधान का उपाय मानते थे। किसी भी समाज में कई समूह होते हैं, इनकी आकांक्षाएँ अक्सर अलग-अलग एक-दूसरे के विपरीत होती हैं। हर समाज के लिए यह फैसला करना आवश्यक होता है कि उसका शासन कैसे चलेगा और वह किन कायदे-कानूनों पर अमल करेगा। सत्ता और प्रतिस्पर्धा राजनीति की दो सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण चीजें हैं। परन्तु राजनीतिक गतिविधि का उद्देश्य जनहित का फैसला करना और उस पर अमल करना होता है। अतः हमारे नेताओं ने लोकतान्त्रिक राजनीति के रास्ते को चुनने का फैसला किया। इसके अलावा, देश के नागरिकों को जागरूक बनाना भी एक महत्वपूर्ण आवश्यकता थी। स्वतन्त्रता प्राप्ति के समय निम्नलिखित परिस्थितियाँ थीं जो लोकतन्त्र की सफलता में बाधक या चुनौती थीं -
1. निरक्षरता: लोकतन्त्र की सफलता शिक्षित समाज पर ही निर्भर करती है। स्वतन्त्रता के समय, सन् 1951 की जनगणना के अनुसार भारत में साक्षरता की दर 18 प्रतिशत थी तथा इसमें भी महिला साक्षरता का 8-9 प्रतिशत था। इतनी संख्या में अशिक्षित जनता को मत देने का अधिकार बुद्धिमत्तापूर्ण नहीं कहा जा सकता क्योंकि अशिक्षित व्यक्ति अपने मत का दुरुपयोग भी कर सकते हैं, उनका वोट खरीदा भी जा सकता है। अशिक्षित व्यक्ति राजनीतिक विचारधाराओं व शासन की वास्तविकताओं को भली-भाँति समझ नहीं पाता तथा राजनीतिक दलों के झांसे में आ जाता है। इस तरह निरक्षरता एक बड़ी चुनौती थी।
In simple words: आजादी के बाद भारत ने लोकतान्त्रिक रास्ता चुना, जो बहुत मुश्किल था क्योंकि उस समय देश में गरीबी और निरक्षरता बहुत अधिक थी। नेताओं का मानना था कि राजनीति समस्याओं को सुलझाने और जनहित के काम करने का सबसे अच्छा माध्यम है।
🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय मुख्य चुनौतियों जैसे 'निरक्षरता' को हेडिंग बनाकर लिखें और 1951 की साक्षरता दर (18%) का उल्लेख अवश्य करें ताकि पूरे अंक मिल सकें।
भारतीय लोकतंत्र की मुख्य चुनौतियाँ
- 2. निर्धनता: ब्रिटिश शासन काल के दौरान अंग्रेजों द्वारा देश का अत्यधिक शोषण किया गया था। स्वतन्त्रता के समय देश की अर्थव्यवस्था अत्यन्त दयनीय थी। इस प्रकार की स्थिति में गरीब मतदाताओं के प्रभावित होने की गुंजाइश थी। इनके वोट को खरीदा भी जा सकता था।
- 3. जातिवाद: भारत के सम्पूर्ण राज्यों की राजनीति जातिवाद के कुप्रभाव से प्रभावित थी। जातिवाद लोगों की आँखों पर पट्टी बाँध देता है तथा उन्हें योग्य व चरित्रवान व्यक्ति दिखाई नहीं देता। केवल अपनी जाति का ही उम्मीदवार दिखाई देता है चाहे वह कैसा भी क्यों न हो। जातिवाद के आधार पर ही राजनीतिक दल टिकट देते हैं तथा मतदाता भी इसी आधार पर मतदान करते हैं। जातिवाद के कारण कभी-कभी हिंसक घटनाएँ भी हो जाती हैं।
- 4. क्षेत्रवाद: क्षेत्रवाद की भावना संकीर्ण विचारों व मानसिकता पर आधारित होती है। क्षेत्रीय आधार पर नई-नई क्षेत्रीय पार्टियों का निर्माण किया जाता है। ये पार्टियाँ क्षेत्रवाद को बढ़ावा देती हैं। वर्तमान में गठबन्धन की राजनीति ने इन क्षेत्रीय दलों के महत्त्व में अप्रतिम वृद्धि की है।
- 5. साम्प्रदायिकता: साम्प्रदायिकता धार्मिक आधार पर एक संकीर्ण विचारधारा है तथा लोकतन्त्र के लिए बहुत बड़ा खतरा है। हमारे देश में अनेक दलों जैसे हिन्दू सभा, मुस्लिम लीग, अकाली दल, शिव सेना, विश्व हिन्दू परिषद् आदि का निर्माण साम्प्रदायिक आधार पर किया गया। तमिलनाडु के डी०एम०के० तथा ए०आई०ए०डी०एम०के० गैर-ब्राह्मण लोगों की पार्टियाँ हैं। राजनीतिक दल साम्प्रदायिक आधार पर मतदाताओं को प्रभावित करते हैं जो कि लोकतन्त्र की सफलता में बाधक है।
- 6. स्त्री-पुरुष असमानता: लोकतन्त्र सभी नागरिकों के लिए समानता के सिद्धान्त पर आधारित है परन्तु भारतीय समाज में स्त्रियों को पुरुषों के समान नहीं समझा जाता था तथा उन्हें अपनी इच्छाएँ बताने की भी स्वतन्त्रता प्राप्त नहीं थी। अतः वे राजनीति में कम भाग लेती थीं तथा परिवार के पुरुषों की इच्छाओं के अनुरूप ही मतदान करती थीं।
Question 3. स्वतन्त्रता पूर्व से सन् 1967 तक मिली-जुली सरकारों के उदाहरण प्रस्तुत कीजिए तथा बताइए कि भारतीय राज्यों में मिली-जुली सरकारों की राजनीति सन् 1967 के पश्चात् क्यों प्रारम्भ हुई।
Answer: स्वतन्त्रता प्राप्ति से पूर्व मिली-जुली सरकार भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में मिली-जुली सरकार के गठन का इतिहास स्वतन्त्रता प्राप्ति के पूर्व से प्रारम्भ होता है। स्वतन्त्र भारत में नियमों व विधानों के निर्माण हेतु तथा नवीन संविधान की रचना हेतु कैबिनेट मिशन के द्वारा एक अन्तरिम सरकार का गठन किया गया था। इस सरकार में भारत के प्रमुख राजनीतिक दलों, कांग्रेस, मुस्लिम लीग, अकाली दल आदि को शामिल किया गया था। इस अन्तरिम सरकार के सभी दलों को मिलाकर कुल 14 प्रतिनिधि शामिल किए गए जिसमें कांग्रेस के 6, मुस्लिम लीग के 5, अकाली दल का 1, एंग्लो इण्डियन समुदाय का 1 तथा पारसी समुदाय का 1 प्रतिनिधि था। अन्तरिम सरकार का अध्यक्ष गवर्नर जनरल को बनाया गया। भारतीय प्रशासन के सभी विभाग अन्तरिम सरकार को सौंपे गए। इस अन्तरिम सरकार के प्रधानमन्त्री पं० जवाहरलाल नेहरू थे। इस अन्तरिम सरकार ने स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद तब तक यह कार्य किया जब तक कि संविधान लागू नहीं हुआ।
1952 से 1967 तक मिली-जुली सरकार भारत के प्रथम आम-चुनाव 1952 में हुए। इन चुनावों में चुनाव आयोग ने 14 राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दल के रूप में मान्यता प्रदान की। इन चुनावों में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ, क्योंकि उस समय राजनीतिक दल कांग्रेस के समान व्यापक स्तर के नहीं थे फिर भी पं० जवाहरलाल नेहरू ने डॉ० बी० आर० अम्बेडकर, श्यामाप्रसाद मुखर्जी, गोपालस्वामी आयंगर जैसे गैर-कांग्रेसी सदस्यों को भी अपने मन्त्रिमण्डल में शामिल किया। भारतीय राज्यों में मिली-जुली सरकारों की राजनीति सन् 1967 के बाद प्रारम्भ हुई। इस प्रकार, भारत में बहुदलीय प्रणाली के विकास ने गठबंधन सरकारों के मार्ग को और अधिक प्रशस्त किया। इसके उदय के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे-
In simple words: Before 1967, India mostly had a single-party dominance (Congress), but even before independence, temporary coalition governments were formed to run the country together. After 1967, as other regional parties grew stronger, coalition politics became more common in Indian states.
🎯 Exam Tip: Mention the composition of the interim government (14 representatives) and the year 1967 clearly to score full marks in coalition politics questions.
Question 4. भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा एवं कार्यक्रमों का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के संदर्भ में, 5 अप्रैल, 1980 को भूतपूर्व जनसंघ के सदस्यों का नई दिल्ली में दो दिवसीय सम्मेलन हुआ और एक नई पार्टी बनाने का निर्णय लिया गया। इसके पश्चात्, 6 अप्रैल, 1980 को तत्कालीन विदेशमन्त्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की अध्यक्षता में 'भारतीय जनता पार्टी' के नाम से एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल का गठन किया गया। यह दल लोकतांत्रिक मूल्यों और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के सिद्धांतों पर आधारित है। भारतीय जनता पार्टी के घोषणा-पत्र में अनेक कार्यक्रमों को स्वीकृति प्रदान की गई है।
भारतीय जनता पार्टी की नीतियां एवं कार्यक्रम:
भारतीय जनता पार्टी के चुनावी घोषणा-पत्र में विभिन्न मुद्दों को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित नीतियां एवं कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं:
(क) राजनीतिक कार्यक्रम:
1. सत्ता की पुनः स्थापना करना: घोषणा-पत्र में कहा गया है कि पार्टी का सबसे पहला काम राज्य की सत्ता को पुनः स्थापित करना है।
2. राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता: चुनाव घोषणा-पत्र में स्पष्ट किया गया है कि भारतीय जनता पार्टी देश की एकता और अखण्डता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
3. संवैधानिक सुधार: पार्टी पिछले कुछ वर्षों के अनुभवों के आधार पर कुछ महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर संविधान की समीक्षा करने के पक्ष में है।
In simple words: The Bharatiya Janata Party (BJP) was formed on April 6, 1980, under the leadership of Atal Bihari Vajpayee. Its key political goals are to restore proper governance, protect the unity and integrity of India, and review the constitution to make helpful improvements based on past experiences.
🎯 Exam Tip: To score full marks, make sure to write the exact date of establishment (6 April 1980) and list all three key political programs clearly with their headings.
4. सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता—भारतीय जनता पार्टी सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखती है। धर्मनिरपेक्षता का अर्थ धर्महीन राज्य नहीं है। पार्टी सभी धर्मों को समान मानने में विश्वास रखती है।
5. पंचायती राज को सुदृढ़ करना—भाजपा पंचायती राज को सुदृढ़ करने के लिए 73वें तथा 74वें संविधान संशोधन में परिवर्तन करेगी। पंचायती राज को आर्थिक दृष्टि से सुदृढ़ करने का प्रयास करेगी।
6. प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार—पार्टी जनता का हित चिन्तक, निष्पक्ष और जवाबदेह बनने के लिए तथा नागरिकों को उत्तम सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रशासनिक सुधार करेगी।
(ख) आर्थिक कार्यक्रम एवं नीतियाँ
भाजपा के आर्थिक कार्यक्रम एवं नीतियाँ इस प्रकार हैं—
- देश में भुखमरी की समस्या का समाधान करने पर बल।
- सार्वजनिक क्षेत्र का व्यावसायिक आधार पर प्रबन्धन करने पर बल।
- विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के बारे में राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियों का निर्धारण करना।
- भाजपा देश में कृषिगत क्षेत्र के विस्तार तथा किसानों की स्थिति में सुधार एवं उनके कृषिगत उत्पादों के उचित मूल्य दिलवाने हेतु कटिबद्ध है।
- भाजपा चुनावी घोषणा-पत्र में उद्योगों के चहुंमुखी विकास के बारे में विशेष कार्यक्रमों की व्यवस्था की गई है।
- पार्टी ने नागरिकों को काम के मौलिक अधिकार को स्वीकार करते हुए कहा है कि उसकी सभी नीतियां रोजगारोन्मुखी होंगी।
- पार्टी ग्रामीण व नगरीय विकास हेतु कटिबद्ध है।
(ग) सामाजिक कार्यक्रम
सामाजिक कार्यक्रम के अन्तर्गत पार्टी—
- अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजातियों के कल्याण हेतु वचनबद्ध है।
- यह महिलाओं के सशक्तीकरण हेतु कार्यक्रमों व योजनाओं के निर्माण पर बल देती है, यह 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा, महिला शिक्षा व ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की उचित व्यवस्था करने के पक्ष में है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा-पार्टी राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने में बड़ी जिम्मेदारी से काम करेगी। पार्टी सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील सीमावर्ती राज्यों; जैसे-जम्मू-कश्मीर, पंजाब, पूर्वोत्तर प्रदेश तथा असम की सामाजिक एवं राजनीतिक गड़बड़ियों को दूर करने की कोशिश करेगी।
(ङ) विदेश नीति
पार्टी स्वतन्त्र विदेशी नीति की पक्षधर है तथा विश्व शान्ति, निःशस्त्रीकरण, गुटनिरपेक्षता को मजबूत करने और पड़ोसी देशों के साथ शान्ति एवं मित्रता की नीति अपनाने, SAARC व आसियान जैसे क्षेत्रीय समूहीकरण को बढ़ावा देने के लिए वचनबद्ध है।
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. प्रथम आम चुनाव में कांग्रेस को भारी सफलता प्राप्त होने के कारणों का उल्लेख कीजिए।
Answer: प्रथम आम चुनाव में कांग्रेस को भारी सफलता प्राप्त होने के प्रमुख कारण निम्नांकित हैं-
1. कांग्रेस दल ने प्रथम आम चुनाव में लोकसभा की कुल 489 सीटों में से 364 सीटें जीतीं और इस प्रकार वह किसी भी प्रतिद्वन्द्वी से चुनावी दौड़ में आगे निकल गई।
2. लोकसभा के चुनाव के साथ-साथ विधानसभा के चुनाव भी कराए गए थे। विधानसभा के चुनावों में कांग्रेस पार्टी को बड़ी जीत प्राप्त हुई।
3. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रचलित नाम कांग्रेस पार्टी था और इस पार्टी को स्वाधीनता संग्राम की विरासत प्राप्त थी। उस समय एकमात्र यही पार्टी थी, जिसका संगठन सम्पूर्ण देश में था। इस संगठन की मजबूत पकड़ ने उसे चुनावों में अद्वितीय बढ़त दिलाई।
In simple words: प्रथम आम चुनाव में कांग्रेस की जीत का मुख्य कारण उसका मजबूत देशव्यापी संगठन, स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और लोकसभा व विधानसभा दोनों चुनावों में भारी बहुमत हासिल करना था।
🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय कांग्रेस की जीत के मुख्य कारणों जैसे—स्वतंत्रता संग्राम की विरासत और देशव्यापी संगठन को बिंदुवार (points) स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 2. एक प्रभुत्व वाली दल प्रणाली के लाभ व दोषों का उल्लेख कीजिए।
Answer: एक प्रभुत्व वाली दल प्रणाली के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
• सत्ताधारी दल की स्थिति सुदृढ़ होती है तथा वह स्वतन्त्र रूप से शासन का संचालन कर सकता है।
• शासन प्रणाली में स्थायित्व रहता है, राष्ट्रीय नीतियों में अधिक परिवर्तन नहीं होता तथा उनमें निरन्तरता बनी रहती है।
• यह प्रणाली आपातकाल का मुकाबला आसानी से कर सकती है। यह देश को संकट के समय स्थिरता प्रदान करती है।
एक प्रभुत्व वाली दल प्रणाली के कुछ मुख्य दोष (हानियाँ) निम्नलिखित हैं:
• एक दलीय व्यवस्था लोकतन्त्र की सफलता और विकास हेतु उचित नहीं है।
• प्रभुत्वशाली शासन का संचालन तानाशाहीपूर्ण रीति से करने लगते हैं जिससे शक्ति का दुरुपयोग होता है।
• इस व्यवस्था में विरोधी दल कमजोर होते हैं, अतः सरकार की आलोचना प्रभावशाली ढंग से नहीं हो पाती।
In simple words: एक दल के शासन से सरकार मजबूत और स्थिर रहती है, लेकिन इससे तानाशाही का खतरा बढ़ जाता है और विपक्ष कमजोर हो जाता है।
🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय लाभ और दोष दोनों को अलग-अलग बिंदुओं (bullet points) में स्पष्ट रूप से लिखें ताकि परीक्षक को समझने में आसानी हो।
Question 3. सन् 1967 के बाद भारतीय राजनीति में कांग्रेस के प्रभुत्व में गिरावट के कारणों पर प्रकाश डालिए।
Answer: सन् 1967 के आम चुनाव में कांग्रेस को केवल इतनी ही सीटें प्राप्त हुईं कि वह साधारण बहुमत द्वारा सरकार गठित कर सके। कांग्रेस के प्रभुत्व में इस गिरावट के निम्नलिखित कारण थे:
1. सन् 1964 में पण्डित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद कांग्रेस में कोई प्रभावशाली व्यक्तित्व दिखाई नहीं देता था।
2. देश के विभिन्न भागों में क्षेत्रवादी भावनाएँ पनपने लगी थीं, इससे अनेक राज्यों में क्षेत्रीय दलों का संगठन होने लगा।
3. सन् 1964 में देश के अन्य राजनीतिक दलों; जैसे-साम्यवादी दल, भारतीय जनसंघ, मुस्लिम लीग तथा समाजवादी दल के प्रभाव में वृद्धि हुई।
4. केन्द्र में विरोधी दलों के विरुद्ध कांग्रेस की सरकार ने संविधान के कुछ प्रावधानों का दुरुपयोग किया जिससे लोगों में नकारात्मकता उत्पन्न हुई।
5. विभिन्न राज्यों में मिली-जुली सरकारों के गठन की राजनीति प्रारम्भ हो गई थी।
6. 1975 से 1977 तक आपातकालीन परिस्थितियों ने भी जनता पर कांग्रेस के विरुद्ध प्रतिकूल प्रभाव डाला। इस राजनीतिक बदलाव ने देश में बहुदलीय प्रणाली का मार्ग प्रशस्त किया।
In simple words: नेहरू जी के निधन के बाद कांग्रेस में मजबूत नेतृत्व की कमी हो गई, और क्षेत्रीय व अन्य राजनीतिक दलों के मजबूत होने से कांग्रेस का प्रभाव कम होने लगा।
🎯 Exam Tip: गिरावट के कारणों को क्रमानुसार (1 से 6) लिखें और नेहरू जी के निधन तथा क्षेत्रीय दलों के उदय जैसे मुख्य बिंदुओं को रेखांकित (underline) करें।
Question 4. प्रारम्भ से ही कांग्रेस पार्टी का भारतीय राजनीति में केन्द्रीय स्थान रहा है। क्यों?
Answer: कांग्रेस एशिया का सबसे पुराना राजनीतिक दल रहा है। भारतीय राजनीति के केन्द्र में यह दो दृष्टिकोणों से प्रमुख है - प्रथम, अनेक दल तथा गुट कांग्रेस के केन्द्र से विकसित हुए हैं और इसके इर्द-गिर्द अपनी नीतियों तथा अपनी गुटीय रणनीतियों को विकसित किया; तथा द्वितीय, भारतीय राजनीति के वैचारिक वर्णक्रम के केन्द्र का प्रतिनिधित्व करते हुए यह एक ऐसे केन्द्रीय दल के रूप में स्थित है, जिसके दोनों तरफ अन्य दल तथा गुट नजर आते हैं। भारत में केवल एक केन्द्रीय दल उपस्थित है और वह है - कांग्रेस पार्टी। लेकिन वर्तमान समय में दलीय व्यवस्था के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन आया है जिसमें बहुदलीय व्यवस्था और क्षेत्रीय दलों के विकास ने एकदलीय प्रभुत्व की स्थिति को कमजोर बना दिया है लेकिन फिर भी अन्य दलों के मुकाबले कांग्रेस का भारतीय राजनीति में केन्द्रीय स्थान है। यह दल आज भी राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण धुरी बना हुआ है।
In simple words: कांग्रेस भारत का सबसे पुराना दल है और अधिकांश राजनीतिक दल इसी के इर्द-गिर्द विकसित हुए हैं, इसलिए इसे भारतीय राजनीति का केंद्र माना जाता है।
🎯 Exam Tip: इस उत्तर में 'दो दृष्टिकोणों' (प्रथम और द्वितीय) को स्पष्ट रूप से विभाजित करके लिखने से पूरे अंक मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
Question 5. प्रथम तीन आम चुनावों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की मजबूत स्थिति के पीछे उत्तरदायी कारणों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer: कांग्रेस की प्रधानता के लिए उत्तरदायी कारण - कांग्रेस पार्टी सन् 1920 से लेकर 1967 तक भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की मुख्य वाहक रही थी और इसे स्वतंत्रता संग्राम की महान विरासत प्राप्त थी।
In simple words: आजादी की लड़ाई में मुख्य भूमिका निभाने के कारण शुरुआती चुनावों में जनता का कांग्रेस पर अटूट विश्वास था।
🎯 Exam Tip: स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और देशव्यापी संगठन जैसे मुख्य कारणों को संक्षेप में स्पष्ट करें।
Question 6. भारत में राजनीतिक दलों द्वारा अपने कार्यों का निर्वहन करने में आने वाली कठिनाइयों का उल्लेख कीजिए।
Answer: राजनीतिक दलों की समस्याएँ - भारत में राजनीतिक दलों की प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं:
1. दलीय व्यवस्था में अस्थिरता - भारतीय दलीय व्यवस्था निरन्तर बिखराव और विभाजन का शिकार रही है। सत्ता प्राप्ति की लालसा ने राजनीतिक दलों को अवसरवादी बना दिया है जिससे यह संकट उत्पन्न हुआ है। इसके कारण राजनीतिक स्थिरता को भारी नुकसान पहुँचता है।
2. राजनीतिक दलों में गुटीय राजनीति - भारत के अधिकांश राजनीतिक दलों में तीव्र आन्तरिक गुटबन्दी विद्यमान है। इन दलों में छोटे-छोटे गुट पाए जाते हैं।
3. दलों में आन्तरिक लोकतन्त्र का अभाव - भारत के अधिकांश राजनीतिक दलों में आन्तरिक लोकतन्त्र का अभाव है और वे घोर अनुशासनहीनता से पीड़ित हैं। भारत में अधिकांश राजनीतिक दल नेतृत्त्व की मनमानी प्रवृत्ति और सदस्यों की अनुशासनहीनता से पीड़ित हैं।
In simple words: Political parties in India face major challenges like division within parties, internal fights among small groups, and a lack of democracy inside the party where leaders make all decisions. This makes it hard for them to work smoothly.
🎯 Exam Tip: Clearly list the three main points (instability, factionalism, and lack of internal democracy) with brief explanations to score full marks.
Question 7. भारत में 91वें संवैधानिक संशोधन द्वारा दल-बदल को रोकने के लिए क्या-क्या उपाय किए गए हैं?
Answer: भारत में दल-बदल को रोकने के लिए 52वें संवैधानिक संशोधन द्वारा बनाया गया कानून पूरी तरह असफल रहा। इसी कारण से दल-बदल को और अधिक कठोर बनाने के लिए दिसम्बर 2003 में संविधान में 91वाँ संशोधन किया गया। इस संवैधानिक संशोधन द्वारा यह व्यवस्था की गई कि दल-बदल करने वाला कोई सांसद या विधायक सदन की सदस्यता खोने के साथ-साथ अगली बार चुनाव जीतने तक अथवा सदन के शेष कार्यकाल तक (जो पहले हो) मन्त्री पद या लाभ का कोई अन्य पद प्राप्त नहीं कर सकेगा। इस कानून में सांसदों या विधायकों के दल-बदल करने के लिए एक-तिहाई संख्या की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया। इस कड़े कदम से राजनीतिक अस्थिरता पर काफी हद तक रोक लगाने का प्रयास किया गया।
In simple words: To stop politicians from changing parties greedily, the 91st Amendment was made. Now, if a lawmaker changes their party, they lose their seat and cannot become a minister or hold any powerful post until they win the election again.
🎯 Exam Tip: Mention the year (December 2003) and the key consequence (losing membership and ministerial posts) to secure maximum marks.
Question 8. 1952 के पहले आम चुनाव से लेकर 2004 के आम चुनाव तक मतदान के तरीके में क्या बदलाव आए हैं?
Answer: 1952 से लेकर 2004 के आम चुनाव तक मतदान के तरीकों में निम्नलिखित बदलाव आए हैं:
1. 1952 के पहले आम चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार के नाम व चुनाव चिह्न की एक मतपेटी रखी गई थी। हर मतदाता को एक खाली मत-पत्र दिया गया जिसे उसने अपने पसन्द के उम्मीदवार की मतपेटी में डाला। शुरुआती दो चुनावों के बाद यह तरीका बदल दिया गया।
2. बाद के चुनावों में मत-पत्र पर हर उम्मीदवार का नाम व चुनाव चिह्न अंकित किया गया। मतदाता को मत-पत्र में अपने पसन्द के उम्मीदवार के आगे मुहर लगानी होती थी। मतदान पूर्णतः गुप्त रखा जाता था। यह प्रणाली काफी समय तक सफलतापूर्वक चलती रही।
3. 1990 के दशक के अन्त में चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का प्रयोग शुरू कर दिया और 2004 के आम चुनावों में मशीनों से वोट डाले गए।
In simple words: Voting in India changed from using separate boxes for each candidate, to using a single paper ballot where voters stamped their choice, and finally to using Electronic Voting Machines (EVMs) starting in 2004.
🎯 Exam Tip: Write the answer chronologically in three distinct phases (separate boxes, paper ballots with stamps, and EVMs) to show a clear progression.
Question 9. भारतीय दलीय व्यवस्था की कमियों का उल्लेख कीजिए। अथवा सरकारों की अस्थिरता के लिए उत्तरदायी भारतीय दलीय व्यवस्था की कमियों का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारतीय दलीय व्यवस्था की कमियाँ निम्नलिखित हैं जो कि सरकार की अस्थिरता के लिए उत्तरदायी हैं:
1. राजनीतिक दल-बदल-भारतीय राजनीतिक दलों में वैचारिक प्रतिबद्धता का अभाव तीव्र आन्तरिक गुटबन्दी और गहरी सत्ता लिप्सा ने दलीय व्यवस्था में राजनीतिक दल-बदल को जन्म दिया है। इस दल-बदल की स्थिति ने राजनीतिक अस्थिरता को जन्म दिया। यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है।
2. नेतृत्व संकट-भारत के राजनीतिक दलों के समक्ष नेतृत्व का संकट भी है। अधिकांश राजनीतिक दलों के पास ऐसा नेतृत्व नहीं है जिसका अपना कोई ऊँचा राजनीतिक कद हो। नेतृत्व का बौना कद दल को एकजुट रखने में असमर्थ रहता है।
3. वैचारिक प्रतिबद्धता का अभाव-भारतीय राजनीतिक दलों में कोई वैचारिक प्रतिबद्धता नहीं है। व्यवहार में विचारधारा पर आधारित दलों जैसे-मार्क्सवादी दल, भारतीय साम्यवादी दल, भाजपा आदि ने भी घोर अवसरवादी राजनीति का परिचय दिया है। इन सभी राजनीतिक दलों का उद्देश्य येन-केन प्रकारेण सत्ता प्राप्त करना है और ये सत्ता प्राप्त करने के लिए अपने तथाकथित सिद्धान्तों को तिलांजलि देने को तत्पर हैं।
In simple words: भारतीय राजनीतिक दलों में सिद्धांतों की कमी, आपसी गुटबाजी और सत्ता का लालच बहुत अधिक है। इसके कारण नेता आसानी से दल बदल लेते हैं, जिससे सरकारें अस्थिर हो जाती हैं।
🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय तीनों मुख्य बिंदुओं (दल-बदल, नेतृत्व संकट, वैचारिक प्रतिबद्धता का अभाव) को हेडिंग डालकर स्पष्ट करें ताकि पूरे अंक मिलें।
Question 10. भारतीय जनसंघ के गठन व विचारधारा पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: भारतीय जनसंघ का गठन सन् 1951 में हुआ था। इसके संस्थापक अध्यक्ष श्यामाप्रसाद मुखर्जी थे। प्रारम्भिक वर्षों में इस पार्टी को हिन्दी भाषी राज्यों जैसे-राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में समर्थन मिला। जनसंघ के नेताओं में श्यामाप्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और बलराज मधोक के नाम शामिल हैं। यह दल राष्ट्रवाद की भावना से ओतप्रोत था।
जनसंघ की विचारधारा:
1. जनसंघ ने ‘एक देश, एक संस्कृति और एक राष्ट्र’ के विचार पर बल दिया। इसका मानना था कि देश भारतीय संस्कृति और परम्परा के आधार पर आधुनिक, प्रगतिशील और ताकतवर बन सकता है।
2. जनसंघ ने भारत और पाकिस्तान को एक करके ‘अखण्ड भारत’ बनाने की बात कही।
3. जनसंघ अंग्रेजी को हटाकर हिन्दी को राजभाषा बनाने का पक्षधर था।
4. इसने धार्मिक व सांस्कृतिक अल्पसंख्यकों को रियायत देने की बात का विरोध किया।
In simple words: भारतीय जनसंघ की स्थापना 1951 में श्यामाप्रसाद मुखर्जी द्वारा की गई थी। यह दल 'एक देश, एक संस्कृति' और 'अखण्ड भारत' के विचार में विश्वास रखता था और हिंदी को राजभाषा बनाना चाहता था।
🎯 Exam Tip: जनसंघ के गठन का वर्ष (1951) और इसके संस्थापक का नाम (श्यामाप्रसाद मुखर्जी) लिखना न भूलें, यह बहुत महत्वपूर्ण है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. भारतीय दलीय व्यवस्था की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: भारतीय दलीय व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. भारत में बहुदलीय व्यवस्था है और राजनीतिक दल विभिन्न हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
2. भारतीय दलों के साथ-साथ क्षेत्रीय दलों का भी अस्तित्व है। ये क्षेत्रीय दल स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने में मदद करते हैं।
In simple words: भारत में बहुत सारे राजनीतिक दल हैं (बहुदलीय व्यवस्था) और यहाँ राष्ट्रीय दलों के साथ-साथ राज्यों के अपने क्षेत्रीय दल भी काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: अति लघु उत्तरीय प्रश्नों में सीधे और सटीक बिंदु लिखें, जैसे 'बहुदलीय व्यवस्था' और 'क्षेत्रीय दलों का अस्तित्व'।
Question 2. उपनिवेशवाद से क्या अभिप्राय है?
Answer: उपनिवेशवाद वह विचारधारा है जिससे प्रेरित होकर प्रायः एक शक्तिशाली राष्ट्र अन्य राष्ट्र या किसी राष्ट्र विशेष के किसी भाग पर अपना वर्चस्व स्थापित कर, उसके आर्थिक एवं प्राकृतिक संसाधनों का शोषण अपने हित में करता है उसे 'उपनिवेशवाद' कहते हैं। इतिहास में ब्रिटिश शासन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
In simple words: जब कोई शक्तिशाली देश किसी कमजोर देश पर कब्ज़ा करके उसके संसाधनों और धन-दौलत का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करता है, तो उसे उपनिवेशवाद कहते हैं।
🎯 Exam Tip: उपनिवेशवाद की परिभाषा में 'शक्तिशाली राष्ट्र द्वारा कमजोर राष्ट्र के संसाधनों का शोषण' कीवर्ड का उपयोग अवश्य करें।
Question 3. भारत के पहले तीन चुनावों में कांग्रेस के प्रभुत्व के दो कारण बताइए।
Answer: भारत के पहले तीन चुनावों में कांग्रेस के प्रभुत्व के दो मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. राष्ट्रीय संघर्ष में कांग्रेसी नेताओं का जनता में अधिक लोकप्रिय होना उसकी प्रधानता का प्रमुख कारण था। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत ने उन्हें जनता का चहेता बना दिया था।
2. कांग्रेस ही ऐसा दल था जिसके पास राष्ट्र के कोने-कोने व ग्रामीण स्तर तक फैला हुआ संगठन था।
In simple words: आजादी की लड़ाई में कांग्रेस के नेताओं की लोकप्रियता बहुत अधिक थी और उनका संगठन पूरे देश में गाँव-गाँव तक फैला हुआ था, इसलिए वे शुरुआती चुनाव जीते।
🎯 Exam Tip: कांग्रेस के प्रभुत्व के कारणों में 'स्वतंत्रता संग्राम की विरासत' और 'मजबूत राष्ट्रव्यापी संगठन' जैसे बिंदुओं को रेखांकित करें।
Question 4. भारत में एकदलीय प्रधानता का युग कब समाप्त हुआ? इसके क्या कारण थे?
Answer: भारत में सन् 1977 में एकदलीय प्रधानता का युग समाप्त हुआ। इसके मुख्य कारण थे आपातकाल के दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार की लोगों पर ज्यादतियाँ/अन्याय। दूसरा कारण था-तत्कालीन सरकार के तानाशाही दृष्टिकोण से लोग नाराज हो गए और विपक्षी पार्टियाँ एक गठबंधन के रूप में सामने आईं। इस राजनीतिक बदलाव ने भारतीय लोकतंत्र को एक नया मोड़ दिया।
In simple words: The single-party dominance of the Congress party ended in 1977 because people were angry with the emergency rules and strict government decisions, leading opposition parties to unite.
🎯 Exam Tip: Mention the year 1977 clearly and list the two main reasons (Emergency excesses and opposition coalition) to get full marks.
Question 5. 1977 के चुनावों में कांग्रेस की हार के प्रमुख कारण क्या थे?
Answer: सन् 1977 के चुनावों में कांग्रेस की हार के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे-
1. सरकार की तानाशाही पद्धति, मौलिक अधिकारों को भंग करना।
2. आवश्यक वस्तुओं का बाजार से गायब होना, जमाखोरी तथा आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उछाल।
3. सन् 1975 के आपातकाल की ज्यादतियाँ/परिवार नियोजन जबरदस्ती से करना। इन सभी कारणों से जनता में सरकार के प्रति भारी असंतोष फैल गया था।
In simple words: Congress lost the 1977 elections because of the forced emergency rules, rising prices of daily goods, and the removal of basic rights of the citizens.
🎯 Exam Tip: Present the reasons in a numbered list format as shown in the textbook to make your answer clear and easy to read.
Question 6. क्या क्षेत्रीय दल आवश्यक हैं? अपने उत्तर के पक्ष में कोई दो तर्क दीजिए।
Answer: भारत में क्षेत्रीय दलों का होना अति आवश्यक है। क्षेत्रीय दलों के होने के दो महत्त्वपूर्ण कारण निम्नलिखित हैं-
1. भारत में विभिन्न भाषाओं, धर्मों तथा जातियों के लोग रहते हैं। अनेक क्षेत्रीय दलों का निर्माण जाति, धर्म एवं भाषा के आधार पर हुआ है।
2. भारत की भौगोलिक बनावट में विभिन्नता पायी जाती है। विभिन्न क्षेत्रों की अपनी समस्याएँ तथा आवश्यकताएँ हैं। इनकी पूर्ति के लिए क्षेत्रीय दलों का होना आवश्यक है। ये दल स्थानीय लोगों की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाने का काम करते हैं।
In simple words: Yes, regional parties are important because India has diverse languages, cultures, and regions, and these local parties help solve specific local problems.
🎯 Exam Tip: Clearly state 'Yes' first, and then provide two distinct points focusing on cultural diversity and regional issues.
Question 7. आलोचक ऐसा क्यों सोचते थे कि भारत में चुनाव सफलतापूर्वक नहीं कराए जा सकेंगे? किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारत में चुनाव सफलतापूर्वक सम्पन्न नहीं कराए जा सकने के सम्बन्ध में आलोचकों के निम्नलिखित तर्क थे-
1. भारत क्षेत्रफल तथा जनसंख्या की दृष्टि से बहुत बड़ा देश है तथा शुरू से ही नागरिकों को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार प्रदान कर दिया गया है। इतने बड़े निर्वाचक मण्डल के लिए व्यवस्था करना बहुत कठिन होगा।
2. भारत के अधिकांश मतदाता अशिक्षित थे। वे स्वतन्त्रतापूर्वक व समझदारी से मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे, इस पर उन्हें सन्देह था। आलोचकों का मानना था कि अनपढ़ लोग सही उम्मीदवार का चुनाव नहीं कर पाएंगे।
In simple words: Critics doubted India's first elections because the country was huge with a massive population, and most of the voters were uneducated and poor.
🎯 Exam Tip: Focus on two main keywords: 'huge size/population' and 'illiteracy of voters' to secure maximum marks.
Question 8. निर्दलीयों की बढ़ती संख्या एक चुनौती है, स्पष्ट कीजिए।
Answer: चुनाव में राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त न होने की स्थिति में निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या में वृद्धि हो रही है। ये निर्दलीय उम्मीदवार भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं। यह भारतीय दलीय व्यवस्था के हित में नहीं है। इससे सरकारों में अस्थिरता भी पैदा होती है।
In simple words: When no single party wins a majority, independent candidates gain too much power, which can lead to corruption and make the government unstable.
🎯 Exam Tip: Explain how independent candidates can lead to political instability and corruption when there is no clear majority.
Question 9. सी० राजगोपालाचारी के व्यक्तित्व पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: सी० राजगोपालाचारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं प्रसिद्ध साहित्यकार थे। ये संविधान सभा के सदस्य थे तथा भारत के प्रथम गवर्नर जनरल बने। ये केन्द्र सरकार के मन्त्री तथा मद्रास के मुख्यमन्त्री भी रहे। सन् 1959 में इन्होंने स्वतन्त्र पार्टी की स्थापना की। इनकी सेवाओं के लिए इन्हें ‘भारत रत्न’ से भी सम्मानित किया गया। वे अपनी बुद्धिमत्ता और राजनीतिक सूझबूझ के लिए जाने जाते थे।
In simple words: C. Rajagopalachari was a respected leader, writer, and the first Indian Governor-General of India who also founded the Swatantra Party and received the Bharat Ratna.
🎯 Exam Tip: Remember to mention key achievements like 'first Indian Governor-General', 'founder of Swatantra Party', and 'Bharat Ratna recipient'.
Question 10. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के सम्बन्ध में आप क्या जानते हैं?
Answer: श्यामाप्रसाद मुखर्जी संविधान सभा के सदस्य थे। ये हिन्दू महासभा के महत्त्वपूर्ण नेता तथा भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे। ये कश्मीर को स्वायत्तता देने के विरुद्ध थे। कश्मीर नीति पर जनसंघ के प्रदर्शन के दौरान इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। सन् 1953 में हिरासत में ही इनकी मृत्यु हो गई। वे देश की अखंडता और एकता के प्रबल समर्थक थे।
In simple words: Shyama Prasad Mukherjee was a key leader, founder of Bharatiya Jana Sangh, and strongly opposed special autonomy for Kashmir, where he died in custody in 1953.
🎯 Exam Tip: Highlight his role as the founder of Bharatiya Jana Sangh and his stance on Kashmir's integration with India.
Question 11. मौलाना अबुल कलाम आजाद पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: मौलाना अबुल कलाम आजाद (1888-1958) का पूरा नाम अबुल कलाम मोहियुद्दीन अहमद था। ये इस्लाम के विद्वान थे। साथ ही ये एक स्वतन्त्रता सेनानी व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। वे स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री भी बने और उन्होंने देश की शिक्षा प्रणाली की मजबूत नींव रखी।
In simple words: Maulana Abul Kalam Azad was a great scholar, freedom fighter, and the first Education Minister of independent India who worked hard to improve schools and colleges.
🎯 Exam Tip: Mention his full name, his role as a freedom fighter, and emphasize that he was the first Education Minister of India.
p>Question 12. सोशलिस्ट पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी के मध्य दो अन्तर बताइए।Answer: सोशलिस्ट पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी के मध्य दो मुख्य अन्तर निम्नलिखित हैं:
1. सोशलिस्ट पार्टी लोकतांत्रिक विचारधारा में विश्वास करती है जबकि कम्युनिस्ट पार्टी सर्वहारा वर्ग के अधिनायकवादी लोकतन्त्र में विश्वास करती है। यह दोनों दलों के बुनियादी दृष्टिकोण को दर्शाता है।
2. सोशलिस्ट पार्टी पूँजीपतियों और पूँजी को अनावश्यक और समाज विरोधी नहीं मानती जबकि कम्युनिस्ट पार्टी निजी पूँजी और पूँजीपतियों को पूर्णतया अनावश्यक और समाज विरोधी मानती है।
In simple words: The Socialist Party believes in democratic ways and does not completely oppose capitalists, while the Communist Party believes in a dictatorship of the working class and wants to completely eliminate private wealth and capitalists.
🎯 Exam Tip: Clearly list the differences in points to make it easy for the examiner to read and award full marks.
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
Question 1. 1952 के चुनावों में कुल मतदाताओं में केवल साक्षर मतदाताओं का प्रतिशत था-
(a) 35 प्रतिशत
(b) 25 प्रतिशत
(c) 15 प्रतिशत
(d) 75 प्रतिशत
Answer: (c) 15 प्रतिशत
In simple words: During India's first general elections in 1952, only 15 percent of the total voters were educated and able to read and write.
🎯 Exam Tip: Remember that literacy rates were very low during India's first general election, which was a major challenge for the democratic process.
Question 2. कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक थे-
(a) श्यामाप्रसाद मुखर्जी
(b) आचार्य नरेन्द्र देव
(c) ए० वी० वर्धन
(d) कु० मायावती
Answer: (b) आचार्य नरेन्द्र देव
In simple words: Acharya Narendra Dev was the key leader who helped set up the Congress Socialist Party within the main Congress party.
🎯 Exam Tip: Do not confuse the Congress Socialist Party with the Communist Party; Acharya Narendra Dev is the key name to remember here.
Question 3. 1948 में भारत में गवर्नर जनरल पद की शपथ किसने ली-
(a) लॉर्ड लिटन
(b) लॉर्ड माउण्टबेटन
(c) लॉर्ड रिपन
(d) चक्रवर्ती राजगोपालाचारी
Answer: (d) चक्रवर्ती राजगोपालाचारी
In simple words: C. Rajagopalachari became the first and only Indian Governor-General of independent India in 1948.
🎯 Exam Tip: Remember that C. Rajagopalachari was the first Indian to hold this prestigious post after Lord Mountbatten left.
Question 4. भारत का संविधान तैयार हुआ-
(a) 26 जनवरी, 1950
(b) 26 नवम्बर, 1949
(c) 15 अगस्त, 1947
(d) 30 जनवरी, 1948
Answer: (b) 26 नवम्बर, 1949
In simple words: The Constitution of India was completed and adopted on 26 November 1949, though it came into full effect on 26 January 1950.
🎯 Exam Tip: Be careful not to confuse the adoption date (26 November 1949) with the implementation date (26 January 1950).
Question 5. भारत में दलितों का मसीहा किसे कहा जाता है-
(a) राजा राममोहन राय
(b) दयानन्द सरस्वती
(c) डॉ० बी० आर० अम्बेडकर
(d) गोपालकृष्ण गोखले
Answer: (c) डॉ० बी० आर० अम्बेडकर
In simple words: Dr. B.R. Ambedkar is known as the savior of Dalits because he fought tirelessly for their rights and social equality.
🎯 Exam Tip: Dr. B.R. Ambedkar's role as the father of the Indian Constitution and champion of Dalit rights is a highly expected exam topic.
Question 6. स्वतन्त्र भारत के पहले शिक्षा मन्त्री थे-
(a) मौलाना अबुल कलाम
(b) डॉ० बी० आर० अम्बेडकर
(c) सरदार पटेल
(d) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद
Answer: (a) मौलाना अबुल कलाम
In simple words: Maulana Abul Kalam Azad was appointed as the very first Education Minister of independent India.
🎯 Exam Tip: Memorize the first cabinet ministers of independent India, as they are frequently asked in objective questions.
Question 7. स्वतन्त्र पार्टी का गठन किया-
(a) सी० राजगोपालाचारी
(b) श्यामाप्रसाद मुखर्जी
(c) पं० दीनदयाल उपाध्याय
(d) रफी अहमद किदवई
Answer: (a) सी० राजगोपालाचारी
In simple words: C. Rajagopalachari formed the Swatantra Party in 1959 to advocate for free-market policies and individual freedom.
🎯 Exam Tip: Associate the Swatantra Party directly with C. Rajagopalachari's vision of minimal government intervention in the economy.
Question 8. भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे-
(a) मोरारजी देसाई
(b) मीनू मसानी
(c) अटल बिहारी वाजपेयी
(d) श्यामाप्रसाद मुखर्जी
Answer: (d) श्यामाप्रसाद मुखर्जी
In simple words: Shyama Prasad Mukherjee founded the Bharatiya Jana Sangh in 1951, which later evolved into today's Bharatiya Janata Party (BJP).
🎯 Exam Tip: Remember that Bharatiya Jana Sangh was founded by Shyama Prasad Mukherjee, which is a crucial milestone in Indian political history.
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