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Detailed Chapter 7 पी ब्लॉक तत्व UP Board Solutions for Class 12 Chemistry
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Class 12 Chemistry Chapter 7 पी ब्लॉक तत्व UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 12 Chemistry Chapter 7 The P Block Elements (P-ब्लॉक के तत्त्व)
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
Question 1. ट्राइसैलाइडों से पेन्टाहैलाइड अधिक सहसंयोजी क्यों होते हैं?
Answer: किसी अणु में केन्द्रीय परमाणु की जितनी उच्च धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था होती है, उसकी ध्रुवण क्षमता उतनी ही अधिक होती है जिसके कारण केन्द्रीय परमाणु और अन्य परमाणु के मध्य बने आबन्ध में सहसंयोजी गुण बढ़ता जाता है। इस प्रकार चूंकि पेन्टालाइडों में केन्द्रीय परमाणु \(+5\) ऑक्सीकरण अवस्था में होता है, जबकि ट्राइहैलाइडों में यह \(+3\) ऑक्सीकरण अवस्था में होता है, इसलिए ट्राइलाइडों से पेन्टाहैलाइड अधिक सहसंयोजी होते हैं।
In simple words: पेन्टाहैलाइड्स की अधिक ऑक्सीकरण अवस्था ( \(+5\) ) के कारण उनमें ध्रुवण क्षमता अधिक होती है, जिससे वे ट्राइहैलाइड्स ( \(+3\) ऑक्सीकरण अवस्था) की तुलना में अधिक सहसंयोजी होते हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में ऑक्सीकरण अवस्था और ध्रुवण क्षमता के बीच संबंध को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. वर्ग 15 के तत्वों के हाइड्राइडों में BiH3 सबसे प्रबल अपचायक क्यों है?
Answer: वर्ग 15 के तत्वों के हाइड्राइडों में BiH3 के प्रबल अपचायक होने का कारण यह है कि इस वर्ग के हाइड्राइडों में Bi-H आबन्ध की लम्बाई सबसे अधिक होती है जिसके कारण BiH3 सबसे कम स्थायी होता है।
In simple words: BiH3 में Bi-H आबंध की लंबाई अधिक होने के कारण यह कम स्थायी होता है और आसानी से हाइड्रोजन छोड़ सकता है, इसलिए यह सबसे प्रबल अपचायक है।
🎯 Exam Tip: हाइड्राइडों की स्थायित्व और अपचायक क्षमता के वर्ग में नीचे की ओर प्रवृत्ति को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 3. N2 कमरे के ताप पर कम क्रियाशील क्यों है?
Answer: N2 कमरे के ताप पर कम क्रियाशील होती है; क्योंकि प्रबल \(p\pi - p\pi\) अतिव्यापन के कारण त्रिओबन्ध \(N \equiv N\) बनता है।
In simple words: नाइट्रोजन अणु में एक बहुत मजबूत त्रिपल बंधन (\(N \equiv N\)) होता है जो उच्च ऊर्जा के कारण आसानी से नहीं टूटता, जिससे यह कमरे के तापमान पर कम क्रियाशील होता है।
🎯 Exam Tip: N2 की कम क्रियाशीलता का मुख्य कारण उसके मजबूत त्रिपल बंधन की उच्च बंधन वियोजन ऊर्जा है।
Question 4. अमोनिया की लब्धि को बढ़ाने के लिए आवश्यक स्थितियों का वर्णन कीजिए।
Answer: अमोनिया का निर्माण हेबर प्रक्रम से किया जाता है। इसकी लब्धि बढ़ाने के लिए ला-शातेलिए सिद्धान्त के अनुसार आवश्यक स्थितियाँ निम्नवत् हैं-
1. तापमान = 700 K
2. उच्च दाब \(200 \times 10^5\) Pa (लगभग 200 वायुमण्डल)
3. उत्प्रेरक; जैसे- K2O तथा Al2O5 मिश्रित आयरन ऑक्साइड।
In simple words: अमोनिया के उत्पादन को बढ़ाने के लिए हैबर विधि में उच्च दाब, अनुकूलित तापमान (700 K), और K2O तथा Al2O5 जैसे उत्प्रेरकों का उपयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: ला-शातेलिए के सिद्धांत के अनुसार, ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाओं में उत्पाद की मात्रा बढ़ाने के लिए कम तापमान और उच्च दाब आवश्यक है।
Question 5. Cu2+ आयन के साथ अमोनिया कैसे क्रिया करती है?
Answer: Cu2+ आयन अमोनिया से क्रिया करके गहरे नीले रंग का संकुल बनाते हैं।
In simple words: कॉपर (II) आयन अमोनिया के साथ मिलकर गहरे नीले रंग का एक जटिल यौगिक बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: इस अभिक्रिया में अमोनिया एक लिगैंड के रूप में कार्य करती है और एक संकुल आयन का निर्माण करती है।
Question 6. N2O5 में नाइट्रोजन की सहसंयोजकता क्या है?
Answer: सहसंयोजकता इलेक्ट्रॉनों के सहभाजित युग्मों की संख्या पर निर्भर करती है। चूंकि N2O5 में, प्रत्येक नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉनों के चार सहभाजित युग्म उपस्थित हैं जैसा कि निम्नवत् दिखाया गया है -
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह डायग्राम N2O5 की संरचना को दर्शाता है। इसमें दो नाइट्रोजन परमाणु एक ऑक्सीजन परमाणु से जुड़े होते हैं (N-O-N)। प्रत्येक नाइट्रोजन परमाणु पर दो ऑक्सीजन परमाणु दोहरे बंध से और एक ऑक्सीजन परमाणु एकल बंध से जुड़ा होता है। इस संरचना में, प्रत्येक नाइट्रोजन परमाणु चार सहभाजित युग्मों से घिरा होता है, जिससे उसकी सहसंयोजकता 4 होती है।
इसलिए N2O5 में N की सहसंयोजकता 4 है।
In simple words: N2O5 की संरचना में प्रत्येक नाइट्रोजन परमाणु चार अन्य परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉन युग्म साझा करता है, इसलिए नाइट्रोजन की सहसंयोजकता 4 होती है।
🎯 Exam Tip: सहसंयोजकता की गणना करते समय, केंद्रीय परमाणु द्वारा बनाए गए सहसंयोजक बंधों की कुल संख्या पर ध्यान दें।
Question 7. PH3 से PH⁺4 ई का आबन्ध कोण अधिक है। क्यों?
Answer: PH3 तथा PH+4 दोनों \(sp^3\) संकरित हैं। PH⁺4 में चारों कक्षक आबन्धित होते हैं, जबकि PH3 में P पर इलेक्ट्रॉनों का एकाकी युग्म उपस्थित होता है जो PH3 में एकाकी युग्म-आबन्ध युग्म प्रतिकर्षण के लिए उत्तरदायी है जिससे आबन्ध कोण 109°28′ से कम हो जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में PH3 अणु (पिरॅमिडी) और PH4+ आयन (चतुष्फलकीय) की संरचनाएं दिखाई गई हैं। PH3 में फास्फोरस के पास एक एकाकी युग्म और तीन हाइड्रोजन परमाणु होते हैं, जबकि PH4+ में फास्फोरस चार हाइड्रोजन परमाणुओं से जुड़ा होता है और कोई एकाकी युग्म नहीं होता। PH3 में एकाकी युग्म-आबंध युग्म प्रतिकर्षण के कारण आबंध कोण कम हो जाता है।
In simple words: PH3 में फास्फोरस पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है, जो आबंध युग्मों को प्रतिकर्षित करता है और आबंध कोण को कम करता है। PH4+ में कोई एकाकी युग्म नहीं होता, जिससे प्रतिकर्षण कम होता है और आबंध कोण अधिक होता है।
🎯 Exam Tip: VSEPR सिद्धांत का उपयोग करके एकाकी युग्म-आबंध युग्म प्रतिकर्षण के प्रभाव को समझाना इस प्रश्न का महत्वपूर्ण पहलू है।
Question 8. क्या होता है जब श्वेत फॉस्फोरस को CO2 के अक्रिय वातावरण में सान्द्र कॉस्टिक सोडा विलयन के साथ गर्म करते हैं?
Answer: श्वेत फॉस्फोरस NaOH से अभिक्रिया करके फॉस्फीन (PH3) बनाता है।
\[P4 + 3NaOH + 3H2O \xrightarrow{\Delta \text{CO}_2 \text{ का वातावरण}} PH3\uparrow + 3NaH2PO2\]
फॉस्फोरस फॉस्फीन सोडियम हाइपोफॉस्फाइट
In simple words: जब सफेद फॉस्फोरस को NaOH विलयन के साथ CO2 के अक्रिय वातावरण में गर्म किया जाता है, तो फॉस्फीन गैस और सोडियम हाइपोफॉस्फाइट बनते हैं।
🎯 Exam Tip: इस अभिक्रिया में अक्रिय वातावरण और NaOH की उपस्थिति में फॉस्फोरस के अपचयन को दर्शाना महत्वपूर्ण है।
Question 9. क्या होता है जब PCI5 को गर्म करते हैं?
Answer: PCI5 में तीन निरक्षीय (equatorial) [202 pm] तथा दो अक्षीय (axial) [240 pm] बन्ध होते हैं। चूंकि अक्षीय बन्ध निरक्षीय बन्धों से दुर्बल होते हैं, इसलिए जब PCI5 को गर्म किया जाता है तो कम स्थायी अक्षीय बन्ध टूटकर PCI3 बनाते हैं।
In simple words: गर्म करने पर PCI5 टूटकर PCI3 में बदल जाता है क्योंकि इसकी अक्षीय बंध (axial bonds) कमजोर होती हैं और आसानी से टूट जाती हैं।
🎯 Exam Tip: PCI5 की त्रिकोणीय द्विपिरैमिडी संरचना में अक्षीय और निरक्षीय बंधों की भिन्नता को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 10. PCI5 की भारी पानी में जल-अपघटन अभिक्रिया का सन्तुलित समीकरण लिखिए।
Answer: PCI5 भारी जल (D2O) से अभिक्रिया करके फॉस्फोरस ऑक्सी-क्लोराइड (POCI3) तथा डयूटीरियम क्लोराइड (DCI) बनाता है।
\[PCI5 + D2O \rightarrow POCI3 + 2 DCI\]
In simple words: PCI5 भारी पानी (D2O) के साथ अभिक्रिया करके फॉस्फोरस ऑक्सी-क्लोराइड और डयूटीरियम क्लोराइड बनाता है।
🎯 Exam Tip: भारी जल के साथ अभिक्रिया में हाइड्रोजन के स्थान पर डयूटीरियम का उपयोग करें।
Question 11. H3PO4 की क्षारकता क्या है?
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र H3PO4 (ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल) की संरचना को दर्शाता है। इसमें एक केंद्रीय फास्फोरस परमाणु होता है जो एक ऑक्सीजन से दोहरे बंध और तीन हाइड्रॉक्सिल (-OH) समूहों से एकल बंध से जुड़ा होता है।
H3PO4 अणु में तीन -OH समूह उपस्थित हैं, इसलिए इसकी क्षारकता 3 है।
In simple words: H3PO4 में तीन हाइड्रॉक्सिल (-OH) समूह होते हैं जो प्रोटॉन दान कर सकते हैं, इसलिए इसकी क्षारकता 3 होती है।
🎯 Exam Tip: किसी अम्ल की क्षारकता उसके प्रतिस्थापन योग्य हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या से निर्धारित होती है, जो सीधे ऑक्सीजन से जुड़े होते हैं।
Question 12. क्या होता है जब H3PO4 को गर्म करते हैं?
Answer: ऑफॉस्फोरस अम्ल या फॉस्फोरस अम्ल (H3PO4) गर्म करने पर असमानुपातित होकर ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल या फॉस्फोरिक अम्ल तथा फॉस्फीन देता है।
\[4H3PO3 \xrightarrow{\Delta} 3H3PO4 + PH3\uparrow\]
ऑर्थोफॉस्फोरस अम्ल ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल फॉस्फीन
In simple words: जब H3PO3 को गर्म किया जाता है, तो यह विघटित होकर ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल (H3PO4) और फॉस्फीन गैस (PH3) बनाता है।
🎯 Exam Tip: यह अभिक्रिया एक असमानुपातन (disproportionation) अभिक्रिया का उदाहरण है, जहाँ एक ही तत्व की ऑक्सीकरण अवस्था बदलती है।
Question 13. सल्फर के महत्त्वपूर्ण स्रोतों को सूचीबद्ध कीजिए।
Answer: भूपर्पटी में सल्फर की मात्रा 0.03 - 0.1% होती है। संयुक्त अवस्था में सल्फर सल्फेट के रूप में- जिप्सम (CaSO4.2H2O), एप्सम लवण (MgSO4 . 7H2O), बेराइट (BaSO4) तथा सल्फाइड के रूप में - गैलेना (PbS), जिंक ब्लैण्ड (ZnS), पाइराइट (CuFeS2) में पाया जाता है। कार्बनिक पदार्थों जैसे अण्डा, प्रोटीन, लहसुन, प्याज, सरसों, बाल तथा फर में सल्फर पाया जाता है। ज्वालामुखी में सल्फर के अंश H2S के रूप में पाए जाते हैं।
In simple words: सल्फर विभिन्न खनिजों जैसे जिप्सम, एप्सम लवण, बेराइट, गैलेना, जिंक ब्लैण्ड और पाइराइट में पाया जाता है, और यह कई कार्बनिक पदार्थों जैसे अंडे और लहसुन में भी मौजूद होता है।
🎯 Exam Tip: सल्फर के विभिन्न खनिज स्रोतों को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे सल्फेट और सल्फाइड अयस्क।
Question 14. वर्ग 16 के तत्वों के हाइड्राइडों के तापीय स्थायित्व के क्रम को लिखिए।
Answer: चूँकि तत्वों का आकार वर्ग में नीचे जाने पर बढ़ता है, इसलिए E-H बन्ध वियोजन ऊर्जा घटती है। जिससे E-H बन्ध सरलता से टूट जाते हैं। अतः वर्ग 16 के तत्वों के हाइड्रोइडों का ऊष्मीय स्थायित्व वर्ग में नीचे जाने पर घटता है। \(H2O > H2S > H2Se > H2Te > H2Po\)
In simple words: वर्ग 16 के तत्वों के हाइड्राइडों का तापीय स्थायित्व वर्ग में नीचे जाने पर घटता है क्योंकि परमाणु आकार बढ़ने से E-H बंध कमजोर हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: E-H बंध की लंबाई और बंधन वियोजन ऊर्जा के वर्ग में नीचे की ओर प्रवृत्ति को समझना आवश्यक है।
Question 15. H2O एक द्रव तथा H2S गैस क्यों है?
Answer: ऑक्सीजन के छोटे आकार तथा उच्च विद्युत ऋणात्मकता के कारण H2O में अन्तराआण्विक हाइड्रोजन बन्ध पाए जाने के परिणामस्वरूप यह कमरे के ताप पर द्रव होता है । H2S सल्फर के बड़े आकार के कारण हाइड्रोजन बन्ध नहीं बनाती है, अतः इसके अणुओं के मध्य दुर्बल वान्डर वाल्स बल कार्य करते हैं। इस कारण कक्ष ताप पर H2S गैस होती है।
In simple words: H2O में हाइड्रोजन बंधन होता है क्योंकि ऑक्सीजन की विद्युत ऋणात्मकता अधिक होती है, जिससे यह द्रव रहता है, जबकि H2S में हाइड्रोजन बंधन नहीं होता और इसके अणुओं के बीच कमजोर वान्डर वाल्स बल होने के कारण यह गैस होता है।
🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन बंधन की उपस्थिति या अनुपस्थिति पदार्थ की भौतिक अवस्था (द्रव या गैस) को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
Question 16. निम्नलिखित में से कौन-सा तत्व ऑक्सीजन के साथ सीधे अभिक्रिया नहीं करता? Zn, Ti, Pt, Fe
Answer: प्लैटिनम एक उत्कृष्ट धातु है। इसकी पहली चार आयनन एन्थैल्पियों का योग बहुत अधिक होता है, इसलिए यह ऑक्सीजन से सीधे संयोग नहीं करती है। दूसरी ओर Zn, Ti तथा Fe सक्रिय धातुएँ हैं, इसलिए ये ऑक्सीजन से सीधे संयोग करके संगत ऑक्साइड बनाती हैं।
In simple words: प्लैटिनम ऑक्सीजन के साथ सीधे अभिक्रिया नहीं करता क्योंकि यह एक उत्कृष्ट धातु है जिसकी आयनन एन्थैल्पी बहुत अधिक होती है।
🎯 Exam Tip: धातुओं की आयनन एन्थैल्पी उनकी रासायनिक क्रियाशीलता को प्रभावित करती है, उच्च आयनन एन्थैल्पी कम क्रियाशीलता दर्शाती है।
Question 17. निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए -
1. C2H4 + O2 \(\rightarrow\)
2. 4 Al + 3O2 \(\rightarrow\)
Answer:
1. \(C2H4 + 3O2 \underrightarrow { \triangle } 2CO2\uparrow + 2H2O\)
2. \(4Al + 3O2 \underrightarrow { \triangle } 2Al2O3\)
In simple words: पहली अभिक्रिया में एथिलीन ऑक्सीजन के साथ जलकर कार्बन डाइऑक्साइड और पानी बनाती है, जबकि दूसरी अभिक्रिया में एल्युमिनियम ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके एल्युमिनियम ऑक्साइड बनाता है।
🎯 Exam Tip: रासायनिक समीकरणों को संतुलित करते समय अभिकारक और उत्पादों में परमाणुओं की संख्या बराबर होनी चाहिए।
Question 18. O3 एक प्रबल ऑक्सीकारक की तरह क्यों क्रिया करती है?
Answer: O3 शीघ्रता से अपघटित होकर नवजात ऑक्सीजन उत्पन्न करती है, जो विभिन्न पदार्थों को ऑक्सीकृत कर देती है। इसलिए यह प्रबल ऑक्सीकारक की तरह क्रिया करती है।
In simple words: ओजोन एक प्रबल ऑक्सीकारक है क्योंकि यह आसानी से अपघटित होकर अत्यधिक क्रियाशील नवजात ऑक्सीजन मुक्त करती है, जो अन्य पदार्थों को ऑक्सीकृत कर देती है।
🎯 Exam Tip: नवजात ऑक्सीजन की उच्च क्रियाशीलता ही ओजोन को एक प्रबल ऑक्सीकारक बनाती है।
Question 19. O3 का मात्रात्मक आकलन कैसे किया जाता है?
Answer: जब ओजोन पोटैशियम आयोडाइड के आधिक्य, जिसे बोरेट बफर (pH 9.2) के साथ बफरीकृत करते हैं, से अभिक्रिया करती है तो आयोडीन उत्पन्न होती है, इसे सोडियम थायोसल्फेट के मानक विलयन के साथ अनुमापित करते हैं। इस प्रकार O3 का मात्रात्मक आकलन किया जाता है।
In simple words: ओजोन की मात्रा का आकलन पोटैशियम आयोडाइड के साथ अभिक्रिया करके बनने वाली आयोडीन को सोडियम थायोसल्फेट के साथ अनुमापन द्वारा किया जाता है।
🎯 Exam Tip: इस विधि में आयोडीन का उत्पादन ओजोन की मात्रा का सीधा संकेतक होता है, जिसका अनुमापन करके सटीक आकलन किया जाता है।
Question 20. तब क्या होता है जब सल्फर डाइऑक्साइड को Fe(III) लवण के जलीय विलयन में से प्रवाहित करते हैं?
Answer: SO2 अपचायक की भाँति कार्य करती है, इसलिए यह आयरन (III) लवण को आयरन (II) लवण में अपचयित कर देती है।
\[SO2 + 2H2O \rightarrow SO^{2-}_4 + 4H^+ + 2e^-\]
\[2Fe^{3+} +2e^- \rightarrow 2Fe^{2+}\]
\[2Fe^{3+} + SO2 + 2H2O \rightarrow 2Fe^{2+} + SO^{2-}_4 + 4H^+\]
In simple words: सल्फर डाइऑक्साइड आयरन (III) लवण को आयरन (II) लवण में अपचयित कर देती है क्योंकि SO2 एक अपचायक के रूप में कार्य करती है।
🎯 Exam Tip: SO2 की अपचायक प्रकृति को दर्शाने वाली संतुलित रेडॉक्स अभिक्रिया को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 21. दो S-O आबन्धों की प्रकृति पर टिप्पणी कीजिए जो SO2 अणु बनाते हैं। क्या SO2 अणु के ये दोनों S-O आबन्ध समतुल्य हैं?
Answer: SO2 में बनने वाले दोनों S-O आबन्ध सहसंयोजक (covalent) हैं तथा अनुनादी संरचनाओं के कारण समान रूप से प्रबल होते हैं।
In simple words: SO2 अणु में दोनों S-O बंध सहसंयोजक होते हैं और अनुनाद के कारण उनकी शक्ति और लंबाई बराबर होती है, जिससे वे समतुल्य होते हैं।
🎯 Exam Tip: SO2 की अनुनादी संरचनाओं और प्रत्येक S-O आबंध में आंशिक द्विबंध विशेषता पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
Question 22. SO2 की उपस्थिति का पता कैसे लगाया जाता है?
Answer: SO2 एक तीक्ष्ण गन्ध वाली गैस है। इसकी उपस्थिति को निम्नलिखित दो परीक्षणों से ज्ञात किया जा सकता है -
(i) SO2 गुलाबी-बैंगनी रंग के अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट (VII) विलयन को \(MnO^{4-}\) के \(Mn^{2+}\) आयन में अपचयन के कारण रंगहीन कर देती है।
\[(SO2 + 2H2O \rightarrow SO^{2-}_4 + 4H^+ + 2e^-) \times 5\]
\[(MnO^{4-} + 8H^+ + 5e^- \rightarrow Mn^{2+} + 4H2O) \times 2\]
\[5SO2 + 2MnO^{4-} + 2H2O \rightarrow 5SO^{2-}_4 + 4H^+ + 2Mn^{2+}\]
(गुलाबी रंग) रंगहीन
(ii) SO2 अम्लीकृत K2Cr2O7 को \(Cr_2O^{2-}_7\) के \(Cr^{3+}\) आयनों में अपचयन के कारण हरा कर देती है।
\[(SO2 + 2H2O \rightarrow SO^{2-}_4 + 4H^+ + 2e^-) \times 3\]
\[Cr_2O^{2-}_7 + 14H^+ + 6e^- \rightarrow 2Cr^{3+} + 7H2O\]
\[Cr_2O^{2-}_7 + 3SO2 + 2H^+ \rightarrow 2Cr^{3+} + 3SO^{2-}_4 + H2O\]
(नारंगी) (हरा)
In simple words: SO2 की पहचान पोटैशियम परमैंगनेट विलयन को रंगहीन करने या अम्लीकृत पोटैशियम डाइक्रोमेट विलयन को नारंगी से हरे रंग में बदलने की क्षमता से की जाती है।
🎯 Exam Tip: SO2 की अपचायक प्रकृति का उपयोग करके इन दोनों परीक्षणों में रंग परिवर्तन को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 23. उन तीन क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए जिनमें H2SO4 महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Answer:
1. उर्वरकों; जैसे- अमोनियम सल्फेट, सुपर फॉस्फेट के निर्माण में ।
2. पेट्रोलियम शोधन में।
3. सीसा संचायक बैटरियों में।
In simple words: सल्फ्यूरिक अम्ल का उपयोग उर्वरक उत्पादन, पेट्रोलियम शोधन और लेड-एसिड बैटरी जैसे कई औद्योगिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
🎯 Exam Tip: सल्फ्यूरिक अम्ल के प्रमुख औद्योगिक उपयोगों को याद रखना इसके महत्व को दर्शाता है।
Question 24. संस्पर्श प्रक्रम द्वारा H2SO4 की मात्रा में वृद्धि करने के लिए आवश्यक परिस्थितियों को लिखिए।
Answer: H2SO4 के निर्माण में प्रमुख पद SO2 का O2 के साथ उत्प्रेरकीय ऑक्सीकरण है। इसमें V2O5 उत्प्रेरक की उपस्थिति में SO3 प्राप्त होती है। अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी तथा उत्क्रमणीय है। अग्रगामी अभिक्रिया में आयतन का ह्रास होता है। इसलिए कम ताप तथा उच्च दाब उत्पाद की मात्रा में वृद्धि करने के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ हैं, परन्तु ताप अत्यधिक कम नहीं होना चाहिए, अन्यथा अभिक्रिया की दर कम हो जाएगी ।
In simple words: संस्पर्श प्रक्रम द्वारा H2SO4 उत्पादन बढ़ाने के लिए कम तापमान (जो अभिक्रिया दर को प्रभावित न करे) और उच्च दाब की आवश्यकता होती है, क्योंकि अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी और आयतन में कमी वाली होती है।
🎯 Exam Tip: संस्पर्श प्रक्रम में ला-शातेलिए के सिद्धांत का अनुप्रयोग और उत्प्रेरक (V2O5) की भूमिका को स्पष्ट करना आवश्यक है।
Question 25. जल में H2SO4 के लिए Ka2 << Ka1 क्यों है?
Answer: H2SO4 एक द्विक्षारकीय अम्ल है, यह दो पदों में आयनित होता है, इसलिए इसके दो वियोजन स्थिरांक होते हैं।
1. \(H2SO4 (aq) + H2O (l) \rightarrow H3O^+ (aq) + HSO^-_4 (aq)\); \(Ka1 > 10\)
2. \(HSO^-_4 (aq) + H2O (l) \rightarrow H3O^+ (aq) + SO^{2-}_4 (aq)\); \(Ka2 = 1.2 \times 10^{-2}\)
Ka1 (>10) के अधिक मान से तात्पर्य यह है कि H2SO4, H3O+ तथा HSO-4 में अधिक वियोजित है। मुख्यतः H3O+ और H2SO-4 में प्रथम आयनन के कारण H2SO4 जल में प्रबल अम्ल है। HSO-4 का H3O⁺ तथा \(SO^{2-}_4\) आयनों में आयनन लगभग नगण्य होता है; अत: Ka2 << Ka1
In simple words: H2SO4 का पहला आयनन लगभग पूर्ण होता है (बड़ा Ka1), जबकि दूसरे आयनन में \(HSO^-_4\) से प्रोटॉन निकालना बहुत कठिन होता है क्योंकि यह पहले से ही ऋण आवेशित होता है, जिससे Ka2 बहुत छोटा होता है।
🎯 Exam Tip: किसी बहुप्रोटिक अम्ल के क्रमिक वियोजन स्थिरांकों के बीच अंतर को आयनिक आवेश के बढ़ने से प्रोटॉन निष्कासन में कठिनाई के संदर्भ में समझाना चाहिए।
Question 26. आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी, इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी तथा जलयोजन एन्थैल्पी जैसे प्राचलों को महत्त्व देते हुए F2 तथा CI2 की ऑक्सीकारक क्षमता की तुलना कीजिए।
Answer: ऑक्सीकारक क्षमता F2 से CI2 तक घटती है। जलीय विलयन में हैलोजेनों की ऑक्सीकारक क्षमता वर्ग में नीचे की ओर घटती है (F से CI तक)। फ्लुओरीन का इलेक्ट्रोड विभव (\(+287\) V) क्लोरीन (\(+136\) V) की तुलना में उच्च होता है, इसलिए F2 क्लोरीन की तुलना में प्रबल ऑक्सीकारक है। इलेक्ट्रोड विभव निम्नलिखित प्राचलों पर निर्भर करता है -
\[ \frac{1}{2}X2(g) \xrightarrow{\Delta_{diss}H^\circ} X(g) \xrightarrow{\Delta_{eg}H^\circ} X^-(g) \xrightarrow{\Delta_{hyd}H^\circ} X^-(aq) \]
| \( \Delta_{diss}H \) | \( \Delta_{eg}H \) | \( \Delta_{hyd}H \) | अतः Fप्रबल | |
|---|---|---|---|---|
| फ्लुओरीन | \( 158.8 \) kJ \( mol^{-1} \) | \( -333 \) kJ \( mol^{-1} \) | \( 515 \) kJ \( mol^{-1} \) | |
| क्लोरीन | \( 242.6 \) kJ \( mol^{-1} \) | \( -349 \) kJ \( mol^{-1} \) | \( 381 \) kJ \( mol^{-1} \) | ऑक्सीकारक है। |
In simple words: फ्लुओरीन की उच्च ऑक्सीकारक क्षमता उसकी कम आबंध वियोजन एन्थैल्पी और उच्च जलयोजन एन्थैल्पी के कारण होती है, जबकि क्लोरीन की बंधन वियोजन एन्थैल्पी अधिक और जलयोजन एन्थैल्पी कम होती है।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीकारक क्षमता का निर्धारण करने में बंधन वियोजन एन्थैल्पी, इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी और जलयोजन एन्थैल्पी के संयुक्त प्रभाव को समझाना आवश्यक है।
Question 27. दो उदाहरणों द्वारा फ्लुओरीन के असामान्य व्यवहार को दर्शाइए ।
Answer: फ्लुओरीन का असामान्य व्यवहार इसके-
1. लघु आकार
2. उच्च विद्युत ऋणात्मकता
3. कम F-F आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी तथा
4. इसके संयोजी कोश में d-कक्षकों की अनुपलब्धता के कारण होता है।
उदाहरणार्थ -
1. फ्लुओरीन केवल एक ऑक्सोअम्ल बनाती है, जबकि अन्य हैलोजेन अधिक संख्या में ऑक्सो- अम्लों का निर्माण करते हैं।
2. हाइड्रोजन फ्लुओराइड प्रबल हाइड्रोजन बन्धों के कारण द्रव होता है, जबकि अन्य हाइड्रोजन हैलाइड गैसीय होते हैं।
In simple words: फ्लुओरीन का असामान्य व्यवहार उसके छोटे आकार, उच्च विद्युत ऋणात्मकता, कमजोर F-F बंध और d-कक्षकों की अनुपस्थिति के कारण होता है, जैसे कि यह केवल एक ऑक्सोअम्ल बनाता है और HF हाइड्रोजन बंधन के कारण द्रव होता है।
🎯 Exam Tip: फ्लुओरीन के असामान्य व्यवहार के पीछे के कारणों (आकार, विद्युत ऋणात्मकता, d-कक्षकों की अनुपस्थिति) को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 28. समुद्र कुछ हैलोजेन का मुख्य स्रोत है। टिप्पणी कीजिए।
Answer: समुद्र जल में मैग्नीशियम, कैल्सियम, सोडियम तथा पोटैशियम के क्लोराइड, ब्रोमाइड तथा आयोडाइड पाए जाते हैं जिनमें सोडियम क्लोराइड (द्रव्यमान अनुसार 2.5%) प्रमुख हैं। समुद्री जमाव में सोडियम क्लोराइड तथा कार्नेलाइट [KCI . MgCl2 . 6H2O] प्रमुख होते हैं। जीवधारियों के तन्त्र में आयोडीन पायी जाती है। कुछ समुद्री खरपतवारों (लेमिनेरिया प्रजाति) में 0.5% आयोडीन तथा चिली साल्टपीटर में 0.2% सोडियम आयोडेट होता है।
In simple words: समुद्र जल हैलोजेन जैसे क्लोराइड, ब्रोमाइड और आयोडाइड का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जिसमें सोडियम क्लोराइड और कार्नेलाइट जैसे लवण प्रमुख हैं, और आयोडीन समुद्री खरपतवारों में भी पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: हैलोजेन के विभिन्न समुद्री स्रोतों और उनके रासायनिक रूपों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 29. Cl2 की विरंजक क्रिया का कारण बताइए।
Answer: CI2 की विरंजक क्रिया ऑक्सीकरण के कारण होती है। नमी अथवा जलीय विलयन की उपस्थिति में CI2 नवजात ऑक्सीजन मुक्त करती है।
यह नवजात ऑक्सीजन वनस्पतियों तथा कार्बनिक द्रव्यों में उपस्थित रंगीन पदार्थों का ऑक्सीकरण करके उन्हें रंगहीन पदार्थ में परिवर्तित कर देती है।
रंगीन पदार्थ + [O] \(\rightarrow\) रंगहीन पदार्थ
अतः CI2 की विरंजक क्रिया ऑक्सीकरण के कारण होती है।
In simple words: क्लोरीन की विरंजक क्रिया उसके द्वारा नवजात ऑक्सीजन मुक्त करने की क्षमता के कारण होती है, जो रंगीन पदार्थों को ऑक्सीकृत करके रंगहीन कर देती है।
🎯 Exam Tip: क्लोरीन की विरंजक क्रिया में नवजात ऑक्सीजन की भूमिका को स्पष्ट करना और ऑक्सीकरण प्रक्रिया पर जोर देना महत्वपूर्ण है।
Question 30. उन दो विषैली गैसों के नाम लिखिए जो क्लोरीन गैस से बनाई जाती हैं?
Answer: फॉस्जीन (COCI2) तथा मस्टर्ड गैस (CICH2CH2SCH2CH2CI)।
In simple words: क्लोरीन गैस से बनने वाली दो विषैली गैसें फॉस्जीन और मस्टर्ड गैस हैं।
🎯 Exam Tip: क्लोरीन गैस के हानिकारक उपोत्पादों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 31. I2 से ICI अधिक क्रियाशील क्यों है?
Answer: I2 से ICI अधिक क्रियाशील होता है क्योंकि I-I आबन्ध से I-CI आबन्ध दुर्बल होता है। परिणामस्वरूप ICI सरलता से टूटकर हैलोजेन परमाणु देता है जो तीव्रता से अभिक्रिया करते हैं।
In simple words: ICl, I2 की तुलना में अधिक क्रियाशील है क्योंकि I-Cl आबंध I-I आबंध से कमजोर होता है, जिससे ICl आसानी से टूटकर अधिक क्रियाशील हैलोजन परमाणु देता है।
🎯 Exam Tip: अंतरा-हैलोजन यौगिकों की क्रियाशीलता को समझने के लिए उनके आबंध की ध्रुवता और शक्ति पर ध्यान दें।
Question 32. हीलियम को गोताखोरी के उपकरणों में उपयोग क्यों किया जाता है?
Answer: आधुनिक गोताखोरी के उपकरणों में हीलियम ऑक्सीजन के तनुकारी के रूप में उपयोग में आती है; क्योंकि रुधिर में इसकी विलेयता बहुत कम है।
In simple words: हीलियम का उपयोग गोताखोरी में ऑक्सीजन को पतला करने के लिए किया जाता है क्योंकि यह रक्त में बहुत कम घुलनशील होती है, जिससे डीकंप्रेसन बीमारी का खतरा कम होता है।
🎯 Exam Tip: रक्त में गैसों की विलेयता गोताखोरों के लिए श्वसन मिश्रण के चयन का एक महत्वपूर्ण कारक है।
Question 33. निम्नलिखित समीकरण को सन्तुलित कीजिए – \(XeF 6 + H2O \rightarrow XeO2F2 + HF\)
Answer:\[XeF6 + 2H2O \rightarrow XeO2F2 + 4 HF\]
In simple words: जीनॉन हेक्साफ्लुओराइड पानी के साथ अभिक्रिया करके जीनॉन ऑक्सीडाइफ्लुओराइड और हाइड्रोजन फ्लुओराइड बनाता है।
🎯 Exam Tip: जीनॉन यौगिकों की जल-अपघटन अभिक्रियाओं को संतुलित करते समय सभी परमाणुओं को गिनना सुनिश्चित करें।
Question 34. रेडॉन के रसायन का अध्ययन करना कठिन क्यों था?
Answer: रेडॉन अत्यन्त कम अर्द्धआयुकाल का रेडियोऐक्टिव तत्व है, इस कारण रेडॉन के रसायन का अध्ययन करना कठिन था।
In simple words: रेडॉन का अध्ययन करना मुश्किल था क्योंकि यह एक रेडियोधर्मी तत्व है जिसका अर्ध-जीवनकाल बहुत कम होता है।
🎯 Exam Tip: रेडॉन की रेडियोधर्मिता और छोटे अर्ध-जीवनकाल के कारण इसके रासायनिक गुणों का अध्ययन सीमित हो जाता है।
अतिरिक्त अभ्यास
Question 1. वर्ग 15 के तत्वों के सामान्य गुणधर्मो की उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, ऑक्सीकरण अवस्था, परमाण्विक आकार, आयनन एन्थैल्पी तथा विद्युत ऋणात्मकता के सन्दर्भ में विवेचना कीजिए।
Answer: नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, आर्सेनिक, ऐण्टिमनी तथा बिस्मथ को आवर्त सारणी के V-A उपसमूह में रखा गया है। इन तत्त्वों को नाइट्रोजन परिवार के तत्त्व कहते हैं। इन्हें प्रायः निक्टोजन (Pnictogen) भी कहते हैं। ये तत्त्व p-ब्लॉक के तत्त्व हैं।
इनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न प्रकार है -
7 N = 2,5 = \(1s^2, 2s^2 2p^3\)
15 P = 2,8,5 = \(1s^2, 2s^2 2p^6, 3s^2 3p^3\)
33 As = 2,8,18,5 = \(1s^2, 2s^2 2p^6, 3s^2 3p^6 3d^{10}, 4s^2 4p^3\)
51 Sb = 2,8,18,18,5 = \(1s^2, 2s^2 2p^6,3s^2 3p^6 3d^{10}, 4s^24p^6 4d^{10}, 5s^2 5p^3\)
83 Bi = 2,8,18,32,18,5 = \(1s^2, 2s^2 2p^6, 3s^2 3p^6 3d^{10}, 4s^2 4p^6 4d^{10} 4f^{14},5s^25p^65d^{10}, 6s^2 6p^3\)
सभी तत्त्वों के बाहरी कोश में 5 इलेक्ट्रॉन हैं और बाह्यतम कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \(ns^2 np^3\) है। भीतर के सभी उपकोश पूर्ण हैं। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में समानता होने के कारण इनको एक ही उपसमूह में रखा जाना उचित है।
इनके गुणों में समानता तथा उनमें क्रमिक परिवर्तन तत्त्वों को एक ही उपवर्ग में रखे जाने की पुष्टि करते हैं।गुणों में समानता
1. इन तत्त्वों की मुख्य संयोजकता 3 तथा 5 है।
2. ये (N2 को छोड़कर) स्वतन्त्र अवस्था में नहीं पाये जाते हैं।
3. N2 के अतिरिक्त सभी ठोस हैं।
4. N2 को छोड़कर सभी अपररूपता प्रदर्शित करते हैं।
5. ये सभी हाइड्राइड बनाते हैं और सभी सहसंयोजक यौगिक हैं; जैसे- NH3, PH3, AsH3, SbH3 तथा BiH3.
6. ये सभी बहु-परमाणुकता प्रकट करते हैं।
7. ये सभी M2O3 तथा M2O5 प्रकार के ऑक्साइड बनाते हैं। नाइट्रोजन N2O, NO, NO2 प्रकार के भी ऑक्साइड बनाती है।
8. ये सभी MX3 प्रकार के हैलाइड बनाते हैं, जिनका जल-अपघटन हो जाता है।
\[NCI3 + 3H2O \rightarrow NH3 \uparrow + 3HOCI\]
\[PCl3 + 3H2O \rightarrow H3PO3 + 3HCI\]
फॉस्फोरस अम्ल
\[AsCl3 + 3H2O \rightarrow H3AsO3 + 3HCl\]
आर्मीनियस अम्ल
\[SbCl3 + H2O \rightarrow SbOCl + 2HCl\]
ऐण्टिमनी ऑक्सीक्लोराइडगुणों में क्रमिक परिवर्तन – परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ-साथ ऊपर से नीचे की ओर चलने पर
1. परमाणु त्रिज्या तथा इलेक्ट्रॉन बन्धुता बढ़ती है।
2. आयनन विभव तथा ऋण-विद्युतता घटती है।
3. धात्विक लक्षण बढ़ता है।
| N | P | As | Sb | Bi |
|---|---|---|---|---|
| अधातु | उपधातु | धातु |
4. इनके क्वथनांक तथा घनत्व क्रमशः बढ़ते हैं।
5. इनके ऑक्साइडों का अम्लीय लक्षण घटता है।
6. जबकि नाइट्रोजन के ऑक्साइडों में अम्लीय प्रकृति का क्रम इस प्रकार है - \(N2O < NO < N2O3 < N2O4 < N2O5\)
7. हाईड्राइडों का स्थायित्व घटता है, विषैलापन बढ़ता है और क्षारीय गुण घटता है, जबकि अम्लीय गुण बढ़ता है।
8. इनके गलनांक व क्वथनांक NH3 से SbH3 तक घटते हैं, जबकि अपचायक क्रम इस प्रकार है - \(BiH3 > SbH3 > AsH3 > PH3\)
9. इन सभी में \(sp^3\) - संकरण होता है और पिरेमिड ज्यामिति होती है, परन्तु बन्ध कोण NH3 से BiH तक घटता है।
10. इनके ऑक्सी-अम्लों की प्रबलता घटती है। \(HNO3 > H3PO4 > H3AsO4 > H3SbO4 > H3BiO4\)
11. इनके हैलाइडों का स्थायित्व N से Bi तक बढ़ता है तथा वाष्पशीलता घटती है। अतः ये ट्राइहैलाइड बनाते हैं। नाइट्रोजन को छोड़कर अन्य सभी तत्त्व पेण्टाहैलाइड भी बनाते हैं।
In simple words: वर्ग 15 के तत्व p-ब्लॉक के तत्व हैं जिनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \(ns^2 np^3\) होता है। इनमें ऑक्सीकरण अवस्थाएं \(-3, +3, +5\) होती हैं, परमाणु आकार और धात्विक गुण वर्ग में नीचे बढ़ने पर बढ़ते हैं, जबकि आयनन एन्थैल्पी और विद्युत ऋणात्मकता घटती है।
🎯 Exam Tip: वर्ग 15 के तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, ऑक्सीकरण अवस्थाओं की प्रवृत्तियों और भौतिक-रासायनिक गुणों में क्रमिक परिवर्तनों को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. नाइट्रोजन की क्रियाशीलता फॉस्फोरस से भिन्न क्यों है?
Answer: N2 अणु में उपस्थित \(N \equiv N\) बन्ध की अत्यधिक बन्ध वियोजन एन्थैल्पी (\(941.4\) kJ \(mol^{-1}\)) के कारण नाइट्रोजन अणु फॉस्फोरस अणु की तुलना में बहुत कम क्रियाशील हैं। फॉस्फोरस अणु (P4) में उपस्थित P-P बन्धों की बन्ध वियोजन एन्थैल्पी काफी कम (\(201.6\) kJ \(mol^{-1}\)) होती है।
In simple words: नाइट्रोजन की क्रियाशीलता फॉस्फोरस से भिन्न है क्योंकि N2 अणु में मजबूत त्रिपल N-N बंध के कारण इसकी बंधन वियोजन एन्थैल्पी बहुत अधिक होती है, जिससे यह कम क्रियाशील होता है। इसके विपरीत, फॉस्फोरस में P-P एकल बंध कमजोर होते हैं, जिससे यह अधिक क्रियाशील होता है।
🎯 Exam Tip: तत्वों की क्रियाशीलता को समझने के लिए उनके बंधन की शक्ति (बंधन वियोजन एन्थैल्पी) पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
Question 3. वर्ग 15 के तत्वों की रासायनिक क्रियाशीलता की प्रवृत्ति की विवेचना कीजिए।
Answer: 1. हाइड्राइड (Hydrides) - वर्ग 15 के सभी तत्व MH3 तथा MH4 प्रकार के हाइड्राइड बनाते हैं। (M = N, P, As, Sb, Bi)।
1. क्षारीय गुण (Basic character) – हाइड्राइडों के क्षारीय गुण उनके आकार बढ़ने अर्थात् इलेक्ट्रॉन घनत्व घटने के साथ घटते हैं।
2. ऊष्मीय स्थायित्व (Thermal stability) – वर्ग में नीचे जाने पर हाइड्राइडों का ऊष्मीय स्थायित्व घटता है क्योंकि परमाणु आकार बढ़ता है जिससे बन्ध लम्बाई (M - H) बढ़ती है।
3. अपचायक गुण (Reducing character) – यह वर्ग में नीचे जाने पर बढ़ता है क्योंकि स्थायित्व घटता है। NH3 के अतिरिक्त सभी प्रबल अपचायक होते हैं।
4. क्वथनांक (Boiling point) – NH3 का क्वथनांक हाइड्रोजन आबन्ध के कारण PH3 से अधिक होता है।
क्वथनांक PH3 से आगे जाने पर बढ़ते हैं क्योंकि आण्विक द्रव्यमान बढ़ने के कारण वान्डर वाल्स बलों में वृद्धि होती है।
अभिक्रियाएँ –
• \(Ca3P2 + 6H2O \rightarrow 2PH3 \uparrow + 3 Ca(OH)2\)
• \(P4 + 3 KOH + 3H2O \rightarrow PH3 \uparrow + 3 KH2PO2\)
• \(2NH3 + NaOCI \rightarrow N2H4 + NaCl + H2O\)
2. हैलाइड (Halides) :
(i) ट्राइहैलाइड (Trihalides) – ये सभी प्रकार के हैलोजेनों से सीधे संयोग करके MX3 प्रकार के ट्राइलाइड बनाते हैं। NBr3 तथा NI3 को छोड़कर सभी ट्राइहैलाइड स्थायी तथा पिरैमिडी संरचना के होते हैं। BiF3 के अतिरिक्त सभी ट्राइहैलाइड सहसंयोजी प्रकृति के होते हैं। ट्राइहैलाइडों की सहसंयोजी प्रकृति तत्व के आकार के बढ़ने पर घटती है। ट्राइहैलाइड सरलता से जल-अपघटित हो जाते हैं -
• \(NCI3 + 3H2O \rightarrow NH3 \uparrow + 3 HOCI\)
• \(PCl3 + 3H2O \rightarrow H3PO3 + 3 HCI\)
• \(4 AsCl3 + 6H2O \rightarrow As4O6 + 12 HCI\)
• \(SbCl3 + H2O \rightarrow SbOCl + 2 HCI\)
• \(BiCl3 + H2O \rightarrow BiOCl + 2 HCI\)
फॉस्फोरस तथा एण्टीमनी के ट्राइहैलाइड लूइस अम्ल की भाँति व्यवहार करते हैं।
• \(PF3 + F2 \rightarrow PF5\)
• \(SbF3 + 2F^{–} \rightarrow [SbF5]^{2-}\)
(ii) पेन्टाहैलाइड (Pentahalides) – P, As तथा Sb सूत्र MCI5 के पेन्टालाइड बनाते हैं। N पेन्टाहलाइड नहीं बनाता है; क्योंकि इलेक्ट्रॉन के उत्तेजन के लिए d-कक्षक अनुपस्थित होते हैं। Bi अक्रिय-युग्म प्रभाव के कारण पेन्टाहैलाइड नहीं बनाता । पेन्टाक्लोराइडों में \(sp^3\) संकरण होता है तथा इनकी संरचना त्रिकोणीय द्विपिरैमिडी होती है।
3. ऑक्साइड (Oxides) – ये ऑक्सीजन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़कर अधिक संख्या में ऑक्साइड बनाते हैं।
(i) नाइट्रोजन के ऑक्साइड (Oxides of nitrogen) – नाइट्रोजन ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके कई प्रकार के ऑक्साइड बनाता है। इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नांकित रूप में तालिकाबद्ध है -
| नाम | सूत्र | नाइट्रोजन की ऑ० अवस्था | बनाने की सामान्य विधियाँ | भौतिक रंग-रूप तथा रासायनिक प्रवृत्ति |
|---|---|---|---|---|
| डाइनाइट्रोजन ऑक्साइड [नाइट्रोजन ऑक्साइड (I)] | N2O | +1 | \(NH4NO3 \xrightarrow{\text{ताप}} N2O\uparrow + 2H2O\) | रंगहीन गैस, उदासीन। |
| नाइट्रोजन मोनोक्साइड [नाइट्रोजन ऑक्साइड (II)] | NO | +2 | \(2NaNO2 + 2FeSO4 + 3H2SO4\rightarrow Fe2(SO4)3 + 2NaHSO4 + 2H2O + 2NO\uparrow\) | रंगहीन गैस, उदासीन। |
| डाइनाइट्रोजन ट्राइऑक्साइड [नाइट्रोजन ऑक्साइड (III)] | N2O3 | +3 | \(2NO + N2O4 \xrightarrow{250K} 2N2O3\) | नीला ठोस, अम्लीय। |
| नाइट्रोजन डाइऑक्साइड [नाइट्रोजन ऑक्साइड (IV)] | NO2 | +4 | \(2Pb(NO3)2 \xrightarrow{673K} 4NO2\uparrow + 2PbO + O2\uparrow\) | भूरी गैस, अम्लीय। |
| डाइनाइट्रोजन टेट्राऑक्साइड [नाइट्रोजन ऑक्साइड (IV)] | N2O4 | +4 | \(2NO2 \xrightarrow{\text{ठण्डा ताप}} N2O4\) | रंगहीन ठोस/द्रव, अम्लीय। |
| डाइनाइट्रोजन पेन्टाऑक्साइड [नाइट्रोजन ऑक्साइड (V)] | N2O5 | +5 | \(4HNO3+P4O10 \rightarrow 4HPO3 + 2N2O5\) | रंगहीन ठोस, अम्लीय। |
(ii) फॉस्फोरस के ऑक्साइड (Oxides of phosphorus) – फॉस्फोरस के दो महत्त्वपूर्ण ऑक्साइड \(P4O6\) (\(P2O3\) का द्विलक) तथा \(P4O10\) (\(P2O5\) का द्विलक) हैं। इन्हें अग्रवत् प्राप्त किया जाता है - \[P4 + 6O \text{ (सीमित) } \underrightarrow { \triangle } P4O6\] \[P4 + 5O2 \text{ (आधिक्य) } \rightarrow P4O10\] (iii) अन्य तत्वों के ऑक्साइड (Oxides of other elements) – \(As4O6\), \(As2O5\), \(Sb4O6\), \(Sb2O5\), \(Bi2O3\) तथा \(Bi2O5\). N, P तथा As के ट्राइऑक्साइड अम्लीय होते हैं। अम्लीय गुण वर्ग में नीचे जाने पर घटता है। Sb का ऑक्साइड उभयधर्मी होता है, जबकि Bi का ऑक्साइड क्षारीय होता है। सभी पेन्टाऑक्साइड अम्लीय होते हैं। \(N2O5\) प्रबलतम तथा \(Bi2O5\) दुर्बलतम अम्लीय ऑक्साइड होता है।
(4) ऑक्सी-अम्ल (Oxy-acids) – Bi को छोड़कर अन्य सभी तत्व ऑक्सी-अम्लों (जैसे- HNO3, H3PO4, H3AsO4, तथा H2SbO4) का निर्माण करते हैं। ऑक्सी-अम्लों का सामर्थ्य तथा स्थायित्व वर्ग में नीचे जाने पर घटता है। \[HNO3 > H3PO4 > H3AsO4 > H3SbO4\] सामर्थ्य का घटता क्रम
In simple words: वर्ग 15 के तत्वों की रासायनिक क्रियाशीलता उनके हाइड्राइडों (क्षारीय गुण, तापीय स्थायित्व, अपचायक गुण और क्वथनांक में प्रवृत्तियाँ), हैलाइडों (ट्राइहैलाइड और पेन्टाहैलाइड के स्थायित्व और संरचनाएँ) और ऑक्साइडों (नाइट्रोजन के विभिन्न ऑक्साइड, फॉस्फोरस के ऑक्साइड और अन्य तत्वों के ऑक्साइड की अम्लीयता) के निर्माण पर आधारित होती है।
🎯 Exam Tip: वर्ग 15 के तत्वों के हाइड्राइडों, हैलाइडों और ऑक्साइडों के गुणों और संरचनात्मक विशेषताओं को समझना और उन्हें उदाहरणों के साथ स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 4. NH3 हाइड्रोजन बन्ध बनाती है, परन्तु PH3 नहीं बनाती, क्यों?
Answer: नाइट्रोजन की विद्युत ऋणात्मकता (3: O) हाइड्रोजन (2 : 1) से अधिक होती है। अतः N - H आबन्ध ध्रुवीय होता है। इसलिए NH3 में अन्तराआण्विक हाइड्रोजन आबन्ध होते हैं। इसके विपरीत P तथा H दोनों की विद्युत ऋणात्मकता 2 : 1 होती है, इसलिए PH बन्ध ध्रुवीय नहीं होता, अतः इसमें हाइड्रोजन बन्ध नहीं होता है।
In simple words: NH3 हाइड्रोजन बंध बनाती है क्योंकि नाइट्रोजन की उच्च विद्युत ऋणात्मकता N-H बंध को ध्रुवीय बनाती है, जबकि PH3 हाइड्रोजन बंध नहीं बनाती क्योंकि फास्फोरस की विद्युत ऋणात्मकता कम होने के कारण P-H बंध ध्रुवीय नहीं होता।
🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन बंध के निर्माण के लिए उच्च विद्युत ऋणात्मकता वाले छोटे परमाणु (जैसे N, O, F) का हाइड्रोजन से जुड़ा होना आवश्यक है।
Question 5. प्रयोगशाला में नाइट्रोजन कैसे बनाते हैं? सम्पन्न होने वाली अभिक्रिया के रासायनिक समीकरणों को लिखिए।
Answer: प्रयोगशाला में अमोनियम क्लोराइड के सममोलर जलीय विलयन की सोडियम नाइट्राइट के साथ अभिक्रिया से नाइट्रोजन बनाते हैं। इस अभिक्रिया में द्विअपघटन के परिणामस्वरूप अमोनियम नाइट्राइट बनता है जो अस्थायी होने के कारण अपघटित होकर डाइनाइट्रोजन गैस बनाता है।
\[NH4Cl(aq) + NaNO2 (aq) \rightarrow NH4NO2 (aq) + NaCl (aq)\]
\[NH4NO2(aq) \xrightarrow{\Delta} N2(g) + 2H2O(l)\]
अमोनियम नाइट्राइट डाइनाइट्रोजन गैस
In simple words: प्रयोगशाला में नाइट्रोजन गैस अमोनियम क्लोराइड और सोडियम नाइट्राइट के जलीय विलयनों की अभिक्रिया से बनाई जाती है, जिससे अस्थायी अमोनियम नाइट्राइट बनता है जो गर्म करने पर नाइट्रोजन और पानी में अपघटित हो जाता है।
🎯 Exam Tip: इस अभिक्रिया के रासायनिक समीकरणों को संतुलित करना और अमोनियम नाइट्राइट के अपघटन को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 6. अमोनिया का औद्योगिक उत्पादन कैसे किया जाता है?
Answer: अमोनिया का औद्योगिक उत्पादन हेबर प्रक्रम से किया जाता है। \(N2 (g) + 3H2 (g) \rightleftharpoons 2NH3 (g)\), \(\DeltaΗ = -46.1\) kJ \(mol^{-1}\)
शुष्क नाइट्रोजन तथा हाइड्रोजन को 1 : 3 में लेकर उच्च दाब (200 से 300 वायुमण्डल) तथा ताप । (723 K से 773 K) पर Al2O3 मिश्रित आयरन उत्प्रेरक पर प्रवाहित करने पर NH3 प्राप्त होती है। जिसे द्रवित करके तरल रूप में प्राप्त कर लेते हैं।
In simple words: अमोनिया का औद्योगिक उत्पादन हेबर विधि द्वारा किया जाता है, जिसमें नाइट्रोजन और हाइड्रोजन को उच्च दाब (200-300 वायुमण्डल), अनुकूलित तापमान (723-773 K) और आयरन/एल्युमिनियम ऑक्साइड उत्प्रेरक की उपस्थिति में अभिक्रिया कराया जाता है।
🎯 Exam Tip: हेबर प्रक्रम में ला-शातेलिए सिद्धांत की भूमिका, उच्च दाब और अनुकूल तापमान की आवश्यकता, और उत्प्रेरक के उपयोग को स्पष्ट करें।
Question 7. उदाहरण देकर समझाइए कि कॉपर धातु HNO3 के साथ अभिक्रिया करके किस प्रकार भिन्न उत्पाद दे सकती है?
Answer: तनु HNO3 कॉपर के साथ अभिक्रिया करके कॉपर नाइट्रेट तथा नाइट्रिक ऑक्साइड बनाता है, जबकि सान्द्र HNO3 कॉपर के साथ अभिक्रिया करके कॉपर नाइट्रेट तथा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड बनाता है।
(i)
\[2HNO3 \text{ (dil.) } \rightarrow H2O + 2NO + 3[0]\]
\[3Cu + 3[0] \rightarrow 3CuO\]
\[3CuO + 6HNO3 \text{ (dil.) } \rightarrow 3Cu(NO3)2 + 3H2O\]
\[3Cu + 8HNO3 \text{ (dil.) } \rightarrow 3Cu(NO3)2 + 4H2O + 2NO \uparrow\]
(ii)
\[2HNO3 \text{ (Conc.) } \rightarrow H2O + 2NO2 + [0]\]
\[Cu + [0] \rightarrow CuO\]
\[CuO + 2HNO3 \text{ (Conc.) } \rightarrow Cu(NO3)2 + H2O\]
\[Cu + 4HNO3 \text{ (Conc.) } \rightarrow Cu(NO3)2 + 2H2O + 2NO2\uparrow\]
In simple words: कॉपर धातु HNO3 की सांद्रता के आधार पर अलग-अलग उत्पाद देती है; तनु HNO3 के साथ यह नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) बनाती है, जबकि सांद्र HNO3 के साथ यह नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) बनाती है।
🎯 Exam Tip: नाइट्रिक अम्ल की सांद्रता के ऑक्सीकरण उत्पादों पर प्रभाव को दर्शाने वाली संतुलित अभिक्रियाएं लिखना महत्वपूर्ण है।
Question 8. NOतथा N2O5 की अनुनादी संरचनाओं को लिखिए ।
Answer:
(i) NO2 की अनुनादी संरचनाएँ -
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र NO2 की अनुनादी संरचनाओं को दर्शाता है। इसमें एक केंद्रीय नाइट्रोजन परमाणु होता है जो एक ऑक्सीजन परमाणु से दोहरे बंध से और दूसरे ऑक्सीजन परमाणु से एकल बंध से जुड़ा होता है, जिसमें नाइट्रोजन पर एक अप्रयुक्त इलेक्ट्रॉन (unpaired electron) होता है। अनुनाद के कारण, इलेक्ट्रॉन घनत्व दोनों ऑक्सीजन परमाणुओं पर वितरित होता है।
X = नाइट्रोजन का अप्रयुक्त इलेक्ट्रॉन
(ii) N2O5 की अनुनादी संरचनाएँ -
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र N2O5 की अनुनादी संरचनाओं को दर्शाता है। इसमें दो नाइट्रोजन परमाणु एक केंद्रीय ऑक्सीजन परमाणु से जुड़े होते हैं। प्रत्येक नाइट्रोजन परमाणु दो ऑक्सीजन परमाणुओं से भी जुड़ा होता है। इलेक्ट्रॉनों का विस्थापन कई अनुनादी संरचनाओं के माध्यम से दिखाया गया है, जहां इलेक्ट्रॉन युग्म केंद्रीय और टर्मिनल ऑक्सीजन परमाणुओं के बीच साझा होते हैं, जिससे अणु स्थिर होता है।
In simple words: NO2 और N2O5 दोनों में इलेक्ट्रॉन युग्मों के वितरण के कारण कई अनुनादी संरचनाएँ होती हैं, जो इन अणुओं को स्थिरता प्रदान करती हैं।
🎯 Exam Tip: अनुनादी संरचनाएं बनाते समय, लुईस संरचना नियमों का पालन करें और सभी संभावित विन्यास दिखाएं।
Question 9. HNH कोण का मान, HPH, HAsH तथा HSbH कोणों की अपेक्षा अधिक क्यों होता है? (संकेत- NH3 में \(sp^3\) संकरण के आधार तथा हाइड्रोजन और वर्ग के दूसरे तत्वों के बीच केवल s-p आबंधन के द्वारा व्याख्या की जा सकती है।)
Answer: नाइट्रोजन परमाणु का आकार में बहुत छोटे तथा अधिक विद्युत ऋणात्मक होने के कारण NH3 में N परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व का मान अधिकतम होता है। इस कारण बन्ध युग्मों के मध्य अधिकतम प्रतिकर्षण होता है और इस कारण HNH बन्ध कोण का मान अधिकतम होता है। परमाणु आकार में वृद्धि होने के कारण N से Bi की ओर जाने पर M की विद्युत ऋणात्मकता घटती है। फलस्वरूप इलेक्ट्रॉन युग्मों के मध्य प्रतिकर्षण कम हो जाता है। यही कारण है कि NH3 से BiH3 की ओर जाने पर H-M-H बन्ध कोण घटता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र MH3 प्रकार के हाइड्राइडों की संरचना दर्शाता है, जिसमें केंद्रीय परमाणु M और तीन हाइड्रोजन परमाणु होते हैं। M के ऊपर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म भी दर्शाया गया है। यह NH3 और PH3 जैसे पिरामिडीय अणुओं की ज्यामिति को समझने में मदद करता है।
In simple words: NH3 में नाइट्रोजन की उच्च विद्युत ऋणात्मकता और छोटे आकार के कारण इलेक्ट्रॉन घनत्व अधिक होता है, जिससे बंध युग्मों के बीच प्रतिकर्षण अधिक होता है और HNH कोण बड़ा होता है। वर्ग में नीचे जाने पर केंद्रीय परमाणु का आकार बढ़ने और विद्युत ऋणात्मकता घटने से यह प्रतिकर्षण कम हो जाता है, जिससे H-M-H कोण घटता जाता है।
🎯 Exam Tip: केंद्रीय परमाणु के आकार, विद्युत ऋणात्मकता और एकाकी युग्म-आबंध युग्म प्रतिकर्षण (VSEPR सिद्धांत) के प्रभाव को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 10. R3P = O पाया जाता है जबकि R3N = O नहीं, क्यों (R = ऐल्किल समूह)?
Answer: d- ऑर्बिटलों की अनुपस्थिति के कारण, N अपनी सहसंयोजकता को 4 से अधिक करने में और \(d\pi - p\pi\) बन्धों का निर्माण करने में असमर्थ है। इस कारण, यह R3N = O प्रकार के यौगिकों का निर्माण नहीं करता है। इसके विपरीत P के पास d- ऑर्बिटल होते हैं और यह \(d\pi - p\pi\) बहुल बन्ध बनाने में सक्षम है। अतः यह अपनी सहसंयोजकता को 5 तक बढ़ाकर R3P = O प्रकार के यौगिक बनाता है।
In simple words: नाइट्रोजन के पास d-कक्षक नहीं होते, इसलिए यह अपनी सहसंयोजकता को 4 से अधिक नहीं बढ़ा सकता और \(d\pi - p\pi\) बंध नहीं बना सकता, जिससे R3N=O नहीं बनता। जबकि फॉस्फोरस के पास d-कक्षक होते हैं, यह अपनी सहसंयोजकता को 5 तक बढ़ा सकता है और R3P=O बनाता है।
🎯 Exam Tip: तीसरे आवर्त और उसके बाद के तत्वों में d-कक्षकों की उपस्थिति उनकी बढ़ी हुई संयोजकता और \(d\pi - p\pi\) बंधन बनाने की क्षमता के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 11. समझाइए कि क्यों NH3 क्षारकीय है, जबकि BiH3 केवल दुर्बल क्षारक है?
Answer: N परमाणु का आकार (70 pm), Bi के परमाणु आकार (148 pm) की तुलना में काफी कम है। इस कारण NH3 में N परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व का मान BiH3 में Bi पर इलेक्ट्रॉन घनत्व के मान से काफी अधिक होता है। इस कारण BiH3 की तुलना में NH3 अधिक प्रभावशाली ढंग से इलेक्ट्रॉनों के एकल युग्म को दे सकता है। यही कारण है कि BiH3 की तुलना में NH3 अधिक क्षारीय है।
In simple words: NH3 में नाइट्रोजन का छोटा आकार और उच्च इलेक्ट्रॉन घनत्व इसे इलेक्ट्रॉनों का एकाकी युग्म आसानी से दान करने में सक्षम बनाता है, जिससे यह प्रबल क्षारकीय होता है। इसके विपरीत, BiH3 में बिस्मथ का बड़ा आकार और कम इलेक्ट्रॉन घनत्व इसे दुर्बल क्षारक बनाता है।
🎯 Exam Tip: लुईस क्षारकता को केंद्रीय परमाणु के आकार और इलेक्ट्रॉन घनत्व से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
Question 12. नाइट्रोजन द्विपरमाणुक अणु के रूप में पाया जाता है तथा फॉस्फोरस P4 के रूप में, क्यों?
Answer: छोटे परमाणु आकार तथा अधिक विद्युत ऋणात्मकता के कारण नाइट्रोजन में स्वयं से \(p\pi - p\pi\) बहुल बन्धों को बनाने की प्रबल प्रवृत्ति होती है। इस प्रकार, यह \(N \equiv N\) बन्ध का निर्माण कर एक द्वि-परमाणविक अणु (N2) के रूप में पाया जाता है। इसके विपरीत, बड़े परमाणु आकार तथा कम विद्युत ऋणात्मकता के कारण फॉस्फोरस में स्वयं से \(P\pi - P\pi\) बहुल बन्ध को बनाने की प्रवृत्ति नहीं होती है। अत: यह P – P एकल बन्धों को बनाकर एक समचतुष्फलकीय P4 अणु का निर्माण करता है।
In simple words: नाइट्रोजन का छोटा आकार और उच्च विद्युत ऋणात्मकता \(p\pi - p\pi\) बहुल बंधन को बढ़ावा देती है, जिससे यह N2 के रूप में मौजूद होता है। फॉस्फोरस का बड़ा आकार और कम विद्युत ऋणात्मकता इसे \(p\pi - p\pi\) बहुल बंधन बनाने से रोकती है, जिसके परिणामस्वरूप यह P4 के रूप में एकल P-P बंधों से जुड़ता है।
🎯 Exam Tip: \(p\pi - p\pi\) बंधन बनाने की क्षमता तत्व के आकार और विद्युत ऋणात्मकता पर निर्भर करती है, जो उनकी आणविक संरचना को निर्धारित करती है।
Question 13. श्वेत फॉस्फोरस तथा लाल फॉस्फोरस के गुणों की मुख्य भिन्नताओं को लिखिए।
Answer: श्वेत फॉस्फोरस तथा लाल फॉस्फोरस के गुणों की मुख्य भिन्नताएँ निम्नलिखित हैं -
| क्र. सं. | गुण | श्वेत फॉस्फोरस | लाल फॉस्फोरस |
|---|---|---|---|
| 1. | अवस्था | मोमीय ठोस | भंगुर पदार्थ |
| 2. | रंग | श्वेत, प्रकाश में रखने पर पीला पड़ जाता है। | लाल |
| 3. | गन्ध | लहसुन जैसी गन्ध | गन्धहीन |
| 4. | कठोरता | मोम जैसा मृदु तथा चाकू से काटा जा सकता है। | कठोर |
| 5. | विषैली प्रकृति | विषैला | विषैला नहीं होता। |
| 6. | विलेयता | CS2 में विलेय | CS2 में अविलेय |
| 7. | गलनांक | 317 K | 563 K पर ऊर्ध्वपातित हो जाता है तथा 43 वायुमण्डलीय दाब एवं 862 K पर पिघल जाता है। |
| 8. | घनत्व | 1.80 gcm-3 | 2.10 gcm-3 |
| 9. | क्रियाशीलता | अति क्रियाशील | कम क्रियाशील |
| 10. | क्लोरीन की क्रिया | क्लोरीन में तीव्रता से जलकर PC13 तथा PC15 बनाता है। | गर्म करने पर केवल Cl2 से जुड़ जाता है। |
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र (a) श्वेत फॉस्फोरस और (b) लाल फॉस्फोरस की संरचनाएं दर्शाता है। श्वेत फॉस्फोरस एक टेट्राहेड्रल P4 अणु है जिसमें P-P सहसंयोजक बंध होते हैं। लाल फॉस्फोरस श्वेत फॉस्फोरस की एक बहुलक संरचना है जिसमें कई P4 इकाइयां एक दूसरे से सहसंयोजक बंधों और वान्डर वाल्स बलों द्वारा जुड़ी होती हैं, जो इसे अधिक स्थिर बनाती हैं।
In simple words: श्वेत फॉस्फोरस मोमीय, विषैला और CS2 में विलेय होता है, जबकि लाल फॉस्फोरस भंगुर, अविषैला और CS2 में अविलेय होता है। इनकी अवस्था, रंग, गंध, कठोरता, विलेयता, गलनांक, घनत्व और क्रियाशीलता में अंतर होता है।
🎯 Exam Tip: श्वेत और लाल फॉस्फोरस के भौतिक और रासायनिक गुणों में प्रमुख अंतरों को एक तालिका के रूप में याद रखना तुलनात्मक अध्ययन के लिए उपयोगी है।
Question 14. फॉस्फोरस की तुलना में नाइट्रोजन श्रृंखलन गुणों को कम प्रदर्शित करती है, क्यों?
Answer: शृंखलन का गुण तत्व की बन्ध प्रबलता पर निर्भर करता है। चूंकि N-N बन्ध की प्रबलता \(159 \text{ kJ mol}^{-1}\)), P-P बन्ध की प्रबलता (\(212 \text{ kJ mol}^{-1}\)) से कम होती है, इसलिए नाइट्रोजन फॉस्फोरस की तुलना में कम श्रृंखलन गुणों को दर्शाती है।
In simple words: नाइट्रोजन की N-N बंधन ऊर्जा फॉस्फोरस की P-P बंधन ऊर्जा से कम होती है, जिससे नाइट्रोजन में श्रृंखलन (कैटिनेशन) गुण फॉस्फोरस की तुलना में कम होता है।
🎯 Exam Tip: शृंखलन गुण की तुलना करते समय बंधन ऊर्जा के मानों पर ध्यान दें, क्योंकि यह स्थिरता को निर्धारित करता है।
Question 15. H3PO3 की असमानुपातन अभिक्रिया दीजिए।
Answer: गर्म किये जाने पर H3PO3 निम्न प्रकार से असमानुपातन प्रदर्शित करता है -
\[
\begin{array}{rcl}
\overset{+3}{\text{4H}_3\text{PO}_3} & \xrightarrow{\triangle} & \overset{-3}{\text{PH}_3} \uparrow + \overset{+5}{\text{3H}_3\text{PO}_4} \\
\text{फॉस्फोरस अम्ल} & & \text{फॉस्फीन ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल}
\end{array}
\]
In simple words: जब H3PO3 को गर्म किया जाता है, तो यह असमानुपातित होकर फॉस्फीन (PH3) और ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल (H3PO4) बनाता है, जहाँ फॉस्फोरस की ऑक्सीकरण अवस्था एक साथ घटती और बढ़ती है।
🎯 Exam Tip: असमानुपातन अभिक्रियाओं में, एक ही तत्व की ऑक्सीकरण अवस्था एक साथ बढ़ती और घटती है।
Question 16. क्या PCI5 ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों का कार्य कर सकता है? तर्क दीजिए।
Answer: PCI5 में P की ऑक्सीकरण अवस्था +5 है जो P की उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था है। अतः, यह अपनी ऑक्सीकरण अवस्था को +5 से अधिक प्रदर्शित नहीं कर सकता है, अर्थात् इसे और अधिक ऑक्सीकृत नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार यह अपचायक की भाँति व्यवहार नहीं कर सकता है। इसके विपरीत, यह आसानी से एक ऑक्सीकारक की भाँति व्यवहार कर सकता है क्योंकि यह अपनी ऑक्सीकरण अवस्था को +5 से घटाकर +3 कर सकता है।
\[
\begin{array}{rcl}
\overset{+5}{\text{PCl}_5} + \overset{0}{\text{H}_2} & \longrightarrow & \overset{+3}{\text{PCl}_3} + \overset{+1}{\text{HCl}} \\
\overset{+5}{\text{PCl}_5} + \overset{0}{\text{Zn}} & \longrightarrow & \overset{+3}{\text{PCl}_3} + \overset{+2}{\text{ZnCl}_2}
\end{array}
\]
In simple words: PCl5 केवल ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है क्योंकि इसमें फॉस्फोरस अपनी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था (+5) में होता है, जिससे यह आगे ऑक्सीकृत नहीं हो सकता लेकिन अपचयित हो सकता है।
🎯 Exam Tip: किसी भी यौगिक में केंद्रीय परमाणु की उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था यह संकेत देती है कि वह केवल अपचायक के रूप में कार्य कर सकता है, जबकि निम्नतम ऑक्सीकरण अवस्था यह संकेत देती है कि वह केवल ऑक्सीकारक के रूप में कार्य कर सकता है।
Question 17. O, Se, Te तथा Po को इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, ऑक्सीकरण अवस्था तथा हाइड्राइड निर्माण के सन्दर्भ में आवर्त सारणी के एक ही वर्ग में रखने का तर्क दीजिए।
Answer: (i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic configuration)- इन सभी तत्वों का संयोजी कोश इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान, ns\(^2\) np\(^4\) (n = 2 से 6 तक) होता है। इससे इन तत्वों को आवर्त सारणी के वर्ग 16 में रखा जाना चरितार्थ होता है।
\[
\begin{array}{rcl}
\text{8O} & = & \text{[He]} \ 2\text{s}^2 2\text{p}^4 \\
\text{16S} & = & \text{[Ne]} \ 3\text{s}^2 3\text{p}^4 \\
\text{34Se} & = & \text{[Ar]} \ 3\text{d}^{10} 4\text{s}^2 4\text{p}^4 \\
\text{52Te} & = & \text{[Kr]} \ 4\text{d}^{10} 5\text{s}^2 5\text{p}^4 \\
\text{84Po} & = & \text{[Xe]} \ 4\text{f}^{14} 5\text{d}^{10} 6\text{s}^2 6\text{p}^4
\end{array}
\]
(ii) ऑक्सीकरण अवस्था (Oxidation state) – इन्हें समीपवर्ती अक्रिय गैस विन्यास प्राप्त करने के लिए अर्थात् द्विऋणात्मक आयन बनाने के लिए दो अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता पड़ती है, इसलिए इन तत्वों की न्यूनतम ऑक्सीकरण अवस्था -2 होनी चाहिए। ऑक्सीजन विशिष्ट रूप से तथा सल्फर कुछ मात्रा में विद्युत ऋणात्मक होने के कारण -2 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं। इस वर्ग के अन्य तत्व, O तथा S से अधिक विद्युत ऋणात्मक होने के कारण ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित नहीं करते हैं। चूंकि इन तत्वों के संयोजी कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए ये तत्व अधिकतम +6 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित कर सकते हैं। इन तत्वों द्वारा प्रदर्शित अन्य धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ +2 तथा +4 हैं। यद्यपि ऑक्सीजन d-कक्षकों की अनुपस्थिति के कारण +4 तथा +6 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित नहीं करता, अतः न्यूनतम तथा अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्थाओं के आधार पर इन तत्वों को समान वर्ग अर्थात् वर्ग 16 में रखा जाना पूर्णतया न्यायोचित है।
(iii) हाइड्राइडों का निर्माण (Formation of hydrides) – सभी तत्व अपने संयोजी इलेक्ट्रॉनों में से दो इलेक्ट्रॉनों की हाइड्रोजन के 1s-कक्षक के साथ सहभागिता करके अपने-अपने अष्टक पूर्ण कर लेते हैं। तथा सामान्य सूत्र EH\( _2\) के हाइड्राइड बनाते हैं; जैसे- H\( _2\)O, H\( _2\)S, H\( _2\)Se. H\( _2\)Te तथा H\( _2\)Po, इसलिए सामान्य सूत्र EH\( _2\) वाले हाइड्राइड बनाने के आधार पर इन तत्वों को समान वर्ग अर्थात् वर्ग 16 में रखा जाना पूर्णतया न्यायोचित है।
In simple words: ऑक्सीजन, सल्फर, सेलेनियम, टेल्यूरियम और पोलोनियम सभी में समान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (ns\(^2\)np\(^4\)), समान ऑक्सीकरण अवस्थाएँ (विशेषकर -2, +2, +4, +6) और समान प्रकार के हाइड्राइड (EH\( _2\)) होते हैं, जो उन्हें आवर्त सारणी के वर्ग 16 में रखने का समर्थन करता है।
🎯 Exam Tip: तत्वों को एक ही वर्ग में वर्गीकृत करने का आधार उनके संयोजी कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाएँ और यौगिकों के प्रकारों की समानता है।
Question 18. क्यों डाइऑक्सीजन एक गैस है, जबकि सल्फर एक ठोस है?
Answer: ऑक्सीजन p\(\pi\)-p\(\pi\) बहुल बन्ध बनाता है। छोटे आकार तथा उच्च विद्युत ऋणात्मकता के कारण ऑक्सीजन द्विपरमाणुक अणु (O\( _2\)) के रूप में पाया जाता है। ये अणु परस्पर दुर्बल वाण्डर वाल्स आकर्षण बलों द्वारा जुड़े रहते हैं जो कमरे के ताप पर अणुओं के संघट्टों द्वारा सरलता से हट जाते हैं। अतः O\( _2\) कमरे के ताप पर एक गैस होती है।
सल्फर अपने विशाल आकार तथा कम विद्युत ऋणात्मकता के कारण p\(\pi\)-p\(\pi\) बहुल बन्ध नहीं बनाता है, अपितु यह S-S एकल बन्ध बनाते हैं। पुनः O-O एकल बन्धों से अधिक प्रबल S-S बन्धों के कारण सल्फर में श्रृंखलन का गुण ऑक्सीजन से अधिक होता है। अतः सल्फर श्रृंखलन की उच्च प्रवृत्ति तथा p\(\pi\)-p\(\pi\) बहुल बन्ध बनाने की अल्प प्रवृत्ति के कारण अष्टपरमाणुक अणु (S\( _8\)) बनाता है जिसकी संकुचित वलय संरचना (puckered ring structure) होती है। विशाल आकार के कारण S\( _8\) अणुओं को परस्पर बाँधे रखने वाले आकर्षण बल पर्याप्त प्रबल होते हैं जिन्हें कमरे के ताप पर अणुओं के संघट्टों द्वारा नहीं हटाया जा सकता है। अतः सल्फर कमरे के ताप पर एक ठोस होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र सल्फर के अष्टपरमाणुक अणु (S\( _8\)) की संकुचित वलय संरचना को दर्शाता है। प्रत्येक सल्फर परमाणु दो अन्य सल्फर परमाणुओं से जुड़ा होता है, जिससे एक रिंग जैसी आकृति बनती है, जिसमें S-S बंधन लम्बाई 212 pm और S-S-S बंधन कोण 107° है।
In simple words: ऑक्सीजन अपने छोटे आकार के कारण मजबूत p\(\pi\)-p\(\pi\) बंधन बनाता है और O\( _2\) अणु के रूप में मौजूद होता है, जिनके बीच कमजोर वाण्डर वाल्स बल होते हैं, जिससे यह गैस होता है। इसके विपरीत, सल्फर का बड़ा आकार p\(\pi\)-p\(\pi\) बंधन को रोकता है और यह मजबूत S-S एकल बंधन बनाकर S\( _8\) वलय संरचना (कैटिनेशन) बनाता है, जिसके अणुओं के बीच अधिक मजबूत आकर्षण बल होते हैं, जिससे यह ठोस होता है।
🎯 Exam Tip: p\(\pi\)-p\(\pi\) बंधन और कैटिनेशन (श्रृंखलन) क्षमता का विश्लेषण करते समय तत्वों के परमाणु आकार और विद्युत ऋणात्मकता को ध्यान में रखें।
Question 19. यदि O → O\(^-\) तथा O → O\(^{2-}\) के इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी मान पता हों, जो क्रमशः \(141 \text{ kJ mol}^{-1}\) तथा \(702 \text{ kJ mol}^{-1}\) हैं तो आप कैसे स्पष्ट कर सकते हैं कि O\(^{2-}\) स्पीशीज वाले ऑक्साइड अधिक बनते हैं न कि O\(^-\) वाले? (संकेत-यौगिकों के बनने में जालक ऊर्जा कारक को ध्यान में रखिए।)
Answer: O\(^{2-}\) मूलक युक्त ऑक्साइडों (अर्थात् MO प्रकार के ऑक्साइड) की जालक ऊर्जा (lattice energy) का मान O\(^{2-}\) मूलक युक्त ऑक्साइडों (अर्थात् M\( _2\)O प्रकार के ऑक्साइड) की जालक ऊर्जाओं से काफी अधिक होता है क्योंकि O\(^{2-}\) तथा M\(^{2+}\) पर आवेश की मात्रा अधिक होती है। इसलिए O → O\(^{2-}\) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान O → O\(^-\) के सम्बन्धित मान की तुलना में काफी अधिक होने के बाद भी MO का निर्माण M\( _2\)O के निर्माण की तुलना में ऊर्जा की दृष्टि से अधिक सम्भाव्य है। यही कारण है कि MO प्रकार के ऑक्साइडों की संख्या M\( _2\)O प्रकार के ऑक्साइडों की तुलना में काफी अधिक है।
In simple words: भले ही O\(^{2-}\) बनाने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, लेकिन \(M^{2+}\) और O\(^{2-}\) आयनों के बीच मजबूत इलेक्ट्रोस्टैटिक आकर्षण के कारण बनने वाले ऑक्साइडों (MO) की जालक ऊर्जा इतनी अधिक होती है कि वह ऊर्जा लागत की भरपाई कर देती है, जिससे O\(^{2-}\) वाले ऑक्साइड अधिक स्थायी होते हैं।
🎯 Exam Tip: जालक ऊर्जा आयनिक यौगिकों की स्थिरता में एक महत्वपूर्ण कारक है; उच्च जालक ऊर्जा अत्यधिक ऊर्जावान इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी को भी संतुलित कर सकती है।
Question 20. कौन-से ऐरोसॉल्स ओजोन को कम करते हैं?
Answer: क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) ऐरोसॉल जैसे-फ्रियोन (CCl\( _2\)F\( _2\)) वायुमण्डल के स्ट्रेटोस्फियर : (stratosphere) में उपस्थित ओजोन पर्त को विच्छेदित करते हैं। निहित अभिक्रियाएँ निम्न हैं –
\[
\text{CF}_2\text{Cl}_2 + \text{hv} \longrightarrow \text{CF}_2\text{Cl} \cdot + \text{Cl} \cdot \\
\text{Cl} \cdot + \text{O}_3 \longrightarrow \text{ClO} \cdot + \text{O}_2 \\
\text{ClO} \cdot + \text{O} \cdot \longrightarrow \text{Cl} \cdot + \text{O}_2
\]
In simple words: क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) सूर्य के प्रकाश में क्लोरीन मुक्त मूलक बनाते हैं, जो ओजोन परत में ओजोन अणुओं को तोड़कर ऑक्सीजन में बदल देते हैं, जिससे ओजोन परत का क्षरण होता है।
🎯 Exam Tip: ओजोन परत क्षरण में उत्प्रेरक के रूप में क्लोरीन मुक्त मूलकों की भूमिका पर ध्यान दें और CFCs के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को समझें।
Question 21. संस्पर्श प्रक्रम द्वारा H2SO4 के उत्पादन का वर्णन कीजिए।
Answer: संस्पर्श विधि द्वारा H\( _2\)SO\( _4\) का उत्पादन (Production of H\( _2\)SO\( _4\) by Contact Process)
सल्फ्यूरिक अम्ल का उत्पादन संस्पर्श प्रक्रम द्वारा तीन चरणों में सम्पन्न होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र संस्पर्श प्रक्रम द्वारा सल्फ्यूरिक अम्ल के उत्पादन के प्रवाह को दर्शाता है, जिसमें सल्फर बर्नर से SO2 और O2 का मिश्रण प्राप्त होता है, फिर उत्प्रेरकीय परिवर्तक (V2O5 उत्प्रेरक) से SO3 में परिवर्तित होता है। SO3 को सल्फ्यूरिक अम्ल में अवशोषित करके ओलियम (H2S2O7) बनता है, जिसे जल के साथ तनु करके H2SO4 प्राप्त किया जाता है, साथ ही शुद्धिकरण और शीतलीकरण के लिए विभिन्न मीनारें भी दिखाई गई हैं।
1. सल्फर अथवा सल्फाइड अयस्कों को वायु में जलाकर सल्फर डाइऑक्साइड का उत्पादन करना।
2. उत्प्रेरक (V\( _2\)O\( _5\)) की उपस्थिति में ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कराकर SO\( _2\) का SO\( _3\) में परिवर्तन करना।
3. SO\( _3\) को सल्फ्यूरिक अम्ल में अवशोषित करके ओलियम (H\( _2\)S\( _2\)O\( _7\)) प्राप्त करना।
सल्फ्यूरिक अम्ल के उत्पादन का प्रवाह चित्र, चित्र-7 में दिया गया है। प्राप्त सल्फर डाइऑक्साइड को धूल के कणों एवं आर्सेनिक यौगिकों जैसी अन्य अशुद्धियों से मुक्त कर शुद्ध कर लिया जाता है। सल्फ्यूरिक अम्ल के उत्पादन में ऑक्सीजन द्वारा SO\( _2\) गैस का V\( _2\)O\( _5\) उत्प्रेरक की उपस्थिति में SO\( _3\) प्राप्त करने के लिए उत्प्रेरकी ऑक्सीकरण मूल पद है।
यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी तथा उत्क्रमणीय है एवं अग्र अभिक्रिया में आयतन में कमी आती है। अतः कम ताप और उच्च दाब उच्च लब्धि (yield) के लिए उपयुक्त स्थितियाँ हैं, परन्तु तापक्रम बहुत कम नहीं होना चाहिए अन्यथा अभिक्रिया की गति धीमी हो जाएगी। सल्फ्यूरिक अम्ल के उत्पादन में प्रयुक्त संयन्त्र का संचालन 2 bar दाब तथा 720 K ताप पर किया जाता है। उत्प्रेरकी परिवर्तक से प्राप्त SO\( _3\) गैस, सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल, में अवशोषित होकर ओलियम (H\( _2\)S\( _2\)O\( _7\)) बना देती है। जल द्वारा ओलियम का तनुकरण करके वांछित सान्द्रता वाला सल्फ्यूरिक अम्ल प्राप्त कर लिया जाता है। प्रक्रम के सतत संचालन तथा लागत में भी कमी लाने के लिए उद्योग में उपर्युक्त दोनों प्रक्रियाएँ साथ-साथ सम्पन्न की जाती हैं।
\[
\begin{array}{rcl}
\text{SO}_3 + \text{H}_2\text{SO}_4 & \longrightarrow & \text{H}_2\text{S}_2\text{O}_7 \\
\text{H}_2\text{S}_2\text{O}_7 + \text{H}_2\text{O} & \longrightarrow & 2\text{H}_2\text{SO}_4
\end{array}
\]
संस्पर्श विधि द्वारा सल्फ्यूरिक अम्ल की शुद्धता सामान्यतः 96-98% होती है।
In simple words: संस्पर्श प्रक्रम में, सल्फर डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन के साथ वैनेडियम पेंटाऑक्साइड उत्प्रेरक की उपस्थिति में सल्फर ट्राइऑक्साइड में ऑक्सीकृत किया जाता है, फिर सल्फर ट्राइऑक्साइड को सल्फ्यूरिक अम्ल में अवशोषित करके ओलियम बनाया जाता है, जिसे जल मिलाकर सल्फ्यूरिक अम्ल प्राप्त किया जाता है।
🎯 Exam Tip: संस्पर्श प्रक्रम की दक्षता के लिए उत्प्रेरक, तापमान और दबाव की अनुकूलतम परिस्थितियों को समझना महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से \( \text{SO}_2 \to \text{SO}_3 \) चरण।
Question 22. SO2 किस प्रकार से एक वायु प्रदूषक है?
Answer: SO\( _2\) एक अत्यन्त हानिकारक गैस है। वायुमण्डल में इसकी उपस्थिति से श्वसन रोग, हृदय रोग, गले तथा आँखों में अनेक परेशानियाँ उत्पन्न होती हैं। यह अम्ल वर्षा (acid rain) का मुख्य कारण है। अम्ल वर्षा जन्तुओं, वनस्पतियों एवं भवनों के लिए अत्यन्त घातक है। अम्ल वर्षा से सम्बन्धित प्रकाश-रासायनिक अभिक्रियाएँ निम्न हैं –
• \( \text{SO}_2 + \text{hv} \longrightarrow \text{SO}_2 \)
• \( \text{SO}_2 + \text{O}_2 \longrightarrow \text{SO}_3 + \text{O} \)
• \( \text{SO}_2 + \text{SO}_2 \longrightarrow \text{SO}_3 + \text{SO} \)
• \( \text{SO} + \text{SO}_2 \longrightarrow \text{SO}_3 + \text{S} \)
• \( \text{SO} + \text{H}_2\text{O} \longrightarrow \text{H}_2\text{SO}_4 \)
इस प्रकार, SO\( _2\) एक घातक वायु प्रदूषक है।
In simple words: SO2 एक हानिकारक गैस है जो मनुष्यों और पर्यावरण के लिए हानिकारक है, यह श्वसन संबंधी समस्याओं का कारण बनती है और अम्ल वर्षा का मुख्य स्रोत है, जिससे जन्तुओं, वनस्पतियों और भवनों को नुकसान होता है।
🎯 Exam Tip: SO2 के पर्यावरणीय प्रभावों को सूचीबद्ध करते समय, विशेष रूप से अम्ल वर्षा के गठन में इसकी भूमिका पर ध्यान दें।
Question 23. हैलोजेन प्रबल ऑक्सीकारक क्यों होते हैं?
Answer: हैलोजेनों में अल्प आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी, उच्च विद्युत ऋणात्मकता तथा अधिक ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के कारण इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अपचयित होने की प्रबल प्रवृत्ति होती है। \( \text{X} + \text{e}^- \longrightarrow \text{X}^- \)
अतः हैलोजेन प्रबल ऑक्सीकरण कर्मक या ऑक्सीकारक होते हैं। यद्यपि इनकी ऑक्सीकारक क्षमता F\( _2\) से I\( _2\) तक घटती है जैसा कि इनके इलेक्ट्रोड विभवों से सत्यापित होता है –
\[
\begin{array}{rcl}
\text{E}^{\circ}_{\text{F}_2/\text{F}^-} & = & +2.87 \text{ V} \\
\text{E}^{\circ}_{\text{Br}_2/\text{Br}^-} & = & +1.09 \text{ V}
\end{array}
\quad
\begin{array}{rcl}
\text{E}^{\circ}_{\text{Cl}_2/\text{Cl}^-} & = & +1.36 \text{ V} \\
\text{E}^{\circ}_{\text{I}_2/\text{I}^-} & = & +0.54 \text{ V}
\end{array}
\]
इसलिए F\( _2\) प्रबलतम तथा I\( _2\) दुर्बलतम ऑक्सीकारक होता है।
In simple words: हैलोजन मजबूत ऑक्सीकारक होते हैं क्योंकि उनकी उच्च इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति (उच्च विद्युत ऋणात्मकता और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी) होती है, जिससे वे आसानी से इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके अपचयित हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीकारक क्षमता का निर्धारण करते समय आबंध वियोजन एन्थैल्पी, इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी और विद्युत ऋणात्मकता के संयुक्त प्रभावों पर विचार करें।
Question 24. स्पष्ट कीजिए कि फ्लुओरीन केवल एक ही ऑक्सो-अम्ल, HOF क्यों बनाता है?
Answer: फ्लोरीन सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मक तत्त्व है और केवल -1 ऑक्सीकरण अवस्था ही प्राप्त कर सकती है। इसका परमाणु आकार भी काफी कम होता है। इस कारण यह उच्च ऑक्सी अम्लों जैसे- HOXO, HOXO\( _2\) तथा HOXO\( _3\) आदि में केन्द्रीय परमाणु के रूप में स्थित नहीं हो पाती है और केवल एक ही ऑक्सी अम्ल HOF का निर्माण करती है। इस अम्ल में इसकी ऑक्सीकरण अवस्था -1 है।
In simple words: फ्लोरीन केवल HOF जैसा एक ही ऑक्सो-अम्ल बनाता है क्योंकि इसकी उच्च विद्युत ऋणात्मकता, छोटा आकार और d-कक्षक की अनुपस्थिति इसे +1 से अधिक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करने से रोकती है, जिससे यह अधिक जटिल ऑक्सो-अम्लों का निर्माण नहीं कर पाता।
🎯 Exam Tip: फ्लोरीन के अद्वितीय गुणों, जैसे कि उच्च विद्युत ऋणात्मकता, छोटे आकार और d-कक्षक की अनुपस्थिति को याद रखें, जो इसके रासायनिक व्यवहार को प्रभावित करते हैं।
Question 25. व्याख्या कीजिए कि क्यों लगभग एकसमान विद्युत ऋणात्मकता होने के पश्चात् भी नाइट्रोजन हाइड्रोजन आबन्ध निर्मित करता है, जबकि क्लोरीन नहीं।
Answer: यद्यपि O तथा Cl दोनों की विद्युत ऋणात्मकताओं के मान लगभग समान हैं, तथापि उनके परमाणु आकार काफी भिन्न होते हैं (O = 66 pm, Cl = 99 pm)। इस कारण Cl परमाणु की तुलना में O परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व का मान काफी अधिक होता है। इस कारण ही ऑक्सीजन तो हाइड्रोजन बन्ध बनाने में सक्षम है, लेकिन Cl नहीं।
In simple words: ऑक्सीजन और क्लोरीन की विद्युत ऋणात्मकता समान होने के बावजूद, ऑक्सीजन का छोटा आकार और उच्च इलेक्ट्रॉन घनत्व इसे हाइड्रोजन बंधन बनाने की अनुमति देता है, जबकि क्लोरीन का बड़ा आकार इसे हाइड्रोजन बंधन बनाने से रोकता है।
🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन बंधन की उपस्थिति को निर्धारित करने में परमाणु आकार के साथ-साथ विद्युत ऋणात्मकता को महत्वपूर्ण कारक के रूप में पहचानें।
Question 26. ClO2 के दो उपयोग लिखिए।
Answer:
1. ClO\( _2\) एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक तथा क्लोरीनीकारक है। अतः इसका उपयोग जल के शुद्धीकरण में किया जाता है।
2. यह एक उत्कृष्ट विरंजक (bleaching agent) है और इसका उपयोग कागज की लुगदी तथा वस्त्रों के विरंजन में किया जाता है।
In simple words: ClO2 का उपयोग जल शुद्ध करने और कागज तथा वस्त्रों जैसे पदार्थों को विरंजित करने के लिए किया जाता है, क्योंकि यह एक प्रभावी ऑक्सीकारक और विरंजक है।
🎯 Exam Tip: क्लोरीन डाइऑक्साइड के मुख्य उपयोगों को याद रखें, खासकर जल उपचार और विरंजन एजेंट के रूप में।
Question 27. हैलोजेन रंगीन क्यों होते हैं?
Answer: सभी हैलोजेन रंगीन होते हैं। इसका कारण यह है कि इनके अणु दृश्य क्षेत्र में प्रकाश अवशोषित कर लेते हैं जिसके फलस्वरूप इनके इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा स्तरों में चले जाते हैं, जबकि शेष प्रकाश उत्सर्जित हो जाता है। हैलोजेनों का रंग वास्तव में इस उत्सर्जित प्रकाश का रंग होता है। उत्तेजन के लिए आवश्यक ऊर्जा की मात्रा परमाणु आकार के अनुसार F से I तक लगातार घटती है, अतः उत्सर्जित प्रकाश की ऊर्जा F से I तक बढ़ती है। दूसरे शब्दों में, हैलोजेन का रंग F\( _2\) से I\( _2\) तक गहरा होता जाता है।
उदाहरणार्थ- F\( _2\) बैंगनी प्रकाश अवशोषित करके हल्का पीला दिखाई देता है, जबकि आयोडीन पीला तथा हरा प्रकाश अवशोषित करके गहरा बैंगनी रंग का प्रतीत होता है। इसी प्रकार हम Cl\( _2\) के हरे-पीले तथा ब्रोमीन के नारंगी-लाल रंग की व्याख्या कर सकते हैं।
In simple words: हैलोजन रंगीन होते हैं क्योंकि वे दृश्य प्रकाश को अवशोषित करते हैं, जिससे उनके इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तरों में उत्तेजित हो जाते हैं। फिर वे शेष प्रकाश को उत्सर्जित करते हैं, जिसका रंग हमें दिखाई देता है।
🎯 Exam Tip: यह समझने पर ध्यान दें कि कैसे इलेक्ट्रॉन का उत्तेजना और उत्सर्जित प्रकाश का रंग हैलोजन के दृश्य रंग को निर्धारित करता है।
Question 28. जल के साथ F2 तथा CI2 की अभिक्रियाएँ लिखिए।
Answer: प्रबल ऑक्सीकारक होने के कारण F\( _2\), जल को O\( _2\), या O\( _3\); में ऑक्सीकृत कर देता है।
• \( 2\text{F}_2 \text{(g)} + 2\text{H}_2\text{O} \text{(l)} \longrightarrow 4\text{HF} \text{(aq)} + \text{O}_2 \text{(g)} \)
• \( 3\text{F}_2 \text{(g)} + 3\text{H}_2\text{O} \text{(l)} \longrightarrow 6\text{HF} \text{(aq)} + \text{O}_3 \text{(g)} \)
Cl\( _2\) जल से क्रिया कर हाइड्रोक्लोरिक तथा हाइपोक्लोरस अम्लों का निर्माण करता है।
In simple words: फ्लोरीन जल को ऑक्सीजन या ओजोन में ऑक्सीकृत करता है, जबकि क्लोरीन जल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और हाइपोक्लोरस अम्ल बनाता है।
🎯 Exam Tip: फ्लोरीन और क्लोरीन की जल के साथ अभिक्रियाओं के उत्पादों में अंतर को याद रखें, जो उनकी ऑक्सीकारक शक्ति में भिन्नता को दर्शाता है।
Question 29. आप HCI से Cl2 तथा CI2 से HCI को कैसे प्राप्त करेंगे? केवल अभिक्रियाएँ लिखिए।
Answer:
1. HCI से cl\( _2\) :
\[
\begin{array}{rcl}
\text{MnO}_2 \text{(s)} + 4\text{HCl} \text{(aq)} & \longrightarrow & \text{MnCl}_2 \text{(aq)} + 2\text{H}_2\text{O} \text{(l)} + \text{Cl}_2 \text{(g)}
\end{array}
\]
2. Cl\( _2\) से HCl :
\[
\begin{array}{rcl}
\text{Cl}_2 \text{(g)} + \text{H}_2 \text{(g)} & \longrightarrow & 2\text{HCl} \text{(g)}
\end{array}
\]
In simple words: HCl से Cl2 को MnO2 के साथ अभिक्रिया कराकर प्राप्त किया जा सकता है, जबकि Cl2 से HCl को हाइड्रोजन गैस के साथ सीधे संयोग द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: इन अभिक्रियाओं में ऑक्सीकरण-अपचयन सिद्धांतों को समझें और इन रासायनिक परिवर्तनों के लिए आवश्यक अभिकारकों और शर्तों पर ध्यान दें।
Question 30. एन-बार्टलेट Xe तथा PtF6 के बीच अभिक्रिया कराने के लिए कैसे प्रेरित हुए?
Answer: नील बार्टलेट ने प्रेक्षित किया कि PtF\( _6\) की अभिक्रिया O\( _2\) से होने पर एक आयनिक ठोस O\(_2\)\(^+\)\[\text{PtF}_6\]\(^-\) प्राप्त होता है।
यहाँ O\( _2\), PtF\( _6\) द्वारा O\(_2\) \(^+\) में ऑक्सीकृत हो जाता है।
बार्टलेट ने पाया कि Xe की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (\(1170 \text{ kJ mol}^{-1}\)) O\( _2\) अणुओं की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (\(1175 \text{ kJ mol}^{-1}\)) के लगभग समान है, इसलिए PtF\( _6\) द्वारा Xe को Xe\(^+\) में ऑक्सीकृत करना चाहिए। इस प्रकार वे Xe तथा PtF\( _6\) के बीच अभिक्रिया कराने के लिए प्रेरित हुए। जब Xe तथा PtF\( _6\) को मिश्रित किया गया, तब एक तीव्र अभिक्रिया हुई तथा सूत्र Xe\(^+\)\[\text{PtF}_6\]\(^-\) का एक लाल ठोस पदार्थ प्राप्त हुआ।
\[
\text{Xe} + \text{PtF}_6 \xrightarrow{278K} \text{Xe}^+[\text{PtF}_6]^-
\]
In simple words: नील बार्टलेट ने देखा कि ऑक्सीजन को PtF6 द्वारा ऑक्सीकृत किया जा सकता है। चूंकि ज़ीनॉन की आयनन ऊर्जा ऑक्सीजन के समान है, इसलिए उन्होंने अनुमान लगाया कि PtF6 ज़ीनॉन को भी ऑक्सीकृत कर सकता है, जिससे Xe\(^+\)[PtF6]\(^-\) का पहला ज़ीनॉन यौगिक बना।
🎯 Exam Tip: नोबल गैसों की प्रतिक्रियाशीलता के ऐतिहासिक संदर्भ और कैसे आयनन ऊर्जा का तुलनात्मक विश्लेषण नए यौगिकों की खोज की ओर ले जा सकता है, इसे याद रखें।
Question 31. निम्नलिखित में फॉस्फोरस की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्या हैं? (i) H2PO2 (ii) PCI3 (iii) Ca3P2 (iv) Na3PO4 (v) POF3
Answer: माना कि फॉस्फोरस की ऑक्सीकरण अवस्था : है –
(i) H\( _3\)PO\( _3\) \( (+1) \times 3 + \text{x} + (-2) \times 3 = 0; \quad \text{या} \quad \text{x} = +3 \)
(ii) PCl\( _3\) \( \text{x} + (-1) \times 3 = 0 \quad \text{या} \quad \text{x} = +3 \)
(iii) Ca\( _3\)P\( _2\) \( (+2) \times 3 + (\text{x}) \times 2 = 0; \quad \text{या} \quad \text{x} = -3 \)
(iv) Na\( _3\)PO\( _4\) \( (+1) \times 3 + \text{x} + (-2) \times 4 = 0; \quad \text{या} \quad \text{x} = +5 \)
(v) POF\( _3\) \( \text{x} + (-2) + (-1) \times 3 = 0; \quad \text{या} \quad \text{x} = +5 \)
In simple words: इन यौगिकों में फॉस्फोरस की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ H\( _3\)PO\( _3\) में +3, PCl\( _3\) में +3, Ca\( _3\)P\( _2\) में -3, Na\( _3\)PO\( _4\) में +5 और POF\( _3\) में +5 हैं।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण अवस्था की गणना के लिए प्रत्येक तत्व के ज्ञात ऑक्सीकरण अवस्थाओं (जैसे H = +1, O = -2, F = -1, Cl = -1, Na = +1, Ca = +2) का उपयोग करें।
Question 32. निम्नलिखित के लिए सन्तुलित समीकरण दीजिए – (i) जब NaCl को MnO2 की उपस्थिति में सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म किया जाता है । (ii) जब क्लोरीन गैस को Nal के जलीय विलयन में से प्रवाहित किया जाता है।
Answer:
(i)
\[
\begin{array}{rcl}
\text{NaCl(s)} + \text{H}_2\text{SO}_4\text{(aq)} & \longrightarrow & \text{NaHSO}_4\text{(aq)} + \text{HCl(aq)} \times 4 \\
\text{MnO}_2 \text{(s)} + 4\text{HCl(aq)} & \longrightarrow & \text{MnCl}_2\text{(aq)} + \text{Cl}_2\text{(g)} + 2\text{H}_2\text{O} \text{(l)} \\
4\text{NaCl(s)} + \text{MnO}_2\text{(s)} + 4\text{H}_2\text{SO}_4\text{(aq)} & \longrightarrow & 4\text{NaHSO}_4\text{(aq)} \\
& & \text{MnCl}_2\text{(aq)} + \text{Cl}_2\text{(g)} + 2\text{H}_2\text{O} \text{(l)}
\end{array}
\]
(ii)
\[
\begin{array}{rcl}
\text{Cl}_2 \text{(g)} + 2\text{NaI} \text{(aq)} & \longrightarrow & 2\text{NaCl} \text{(aq)} + \text{I}_2 \text{(s)}
\end{array}
\]
In simple words: (i) NaCl को MnO2 और सान्द्र H2SO4 के साथ गर्म करने पर क्लोरीन गैस बनती है, (ii) क्लोरीन गैस को NaI के जलीय विलयन में प्रवाहित करने पर आयोडीन विस्थापित होती है।
🎯 Exam Tip: रेडॉक्स अभिक्रियाओं को संतुलित करते समय, प्रत्येक तत्व की ऑक्सीकरण अवस्था में परिवर्तन को ध्यान में रखें और उत्पादों को सही ढंग से लिखें।
Question 33. जीनॉन फ्लुओराइड XeF2, XeF4 तथा XeF6 कैसे बनाए जाते हैं?
Answer: जीनॉन फ्लुओराइडों को Xe तथा F\( _2\) के मध्य विभिन्न परिस्थितियों में सीधे अभिक्रिया द्वारा प्राप्त किया जाता है।
• \( \text{Xe (g)} + \text{F}_2 \text{(g)} \xrightarrow{\text{673K, 1bar}} \text{XeF}_2 \text{(s)} \)
• \( \text{Xe (g)} + 2\text{F}_2 \text{(g)} \xrightarrow{\text{873K, 7bar}} \text{XeF}_4 \text{(s)} \)
• \( \text{Xe (g)} + 3\text{F}_2 \text{(g)} \xrightarrow{\text{573K, 60-70bar}} \text{XeF}_6 \text{(s)} \)
In simple words: जीनॉन फ्लुओराइड्स (XeF2, XeF4, XeF6) जीनॉन और फ्लोरीन गैस के बीच विशिष्ट तापमान और दबाव की स्थितियों में सीधे अभिक्रिया द्वारा बनाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: जीनॉन फ्लोराइड्स के संश्लेषण के लिए प्रत्येक उत्पाद के लिए आवश्यक तापमान और दबाव की सटीक शर्तों को याद रखें, क्योंकि ये महत्वपूर्ण हैं।
Question 34. किस उदासीन अणु के साथ ClO\(^-\) समइलेक्ट्रॉनी है? क्या यह अणु एक लूइस क्षारक है?
Answer: ClO\(^-\) में कुल \(17 + 8 + 1 = 26\) इलेक्ट्रॉन हैं। यह CIF अणु से समइलेक्ट्रॉनिक है क्योंकि CIF में भी \(17 + 9 = 26\) इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं। CIF एक लूइस बेस की भाँति व्यवहार करता है क्योंकि क्लोरीन परमाणु पर इलेक्ट्रॉनों के तीन एकल युग्म (lone pairs) उपस्थित हैं। यह पुनः F से क्रिया कर CIF\( _3\) बना सकती है।
In simple words: ClO\(^-\) अणु CIF अणु के समइलेक्ट्रॉनी है क्योंकि दोनों में 26 इलेक्ट्रॉन होते हैं। CIF एक लुईस क्षारक है क्योंकि क्लोरीन परमाणु पर तीन एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं।
🎯 Exam Tip: समइलेक्ट्रॉनी प्रजातियों की पहचान करने के लिए कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना करें और लुईस क्षारकों को उनके पास मौजूद एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों के आधार पर पहचानें।
Question 35. XeO3 तथा XeF4 किस प्रकार बनाए जाते हैं?
Answer: XeF\( _4\) तथा XeF\( _6\) के जल-अपघटन पर XeO\( _3\) बनता है।
• \( 6\text{XeF}_4 + 12\text{H}_2\text{O} \longrightarrow 4\text{Xe} + 2\text{XeO}_3 + 24\text{HF} + 3\text{O}_2\uparrow \)
• \( \text{XeF}_6 + 3\text{H}_2\text{O} \longrightarrow \text{XeO}_3 + 6\text{HF} \)
जीनॉन तथा फ्लुओरीन को 1 : 5 अनुपात में लेकर 873 K तथा 7 bar पर अभिक्रिया कराने पर XeF\( _4\) बनता है।
\[
\text{Xe(g)} + 2\text{F}_2\text{(g)} \xrightarrow{\text{873 K, 7 bar}} \text{XeF}_4\text{(s)} \\
\text{(1:5 अनुपात)}
\]
In simple words: XeO3 को XeF4 या XeF6 के जल-अपघटन से प्राप्त किया जा सकता है, जबकि XeF4 जीनॉन और फ्लोरीन को विशिष्ट तापमान और दबाव पर अभिक्रिया कराकर बनाया जाता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न जीनॉन यौगिकों के संश्लेषण के लिए जल-अपघटन अभिक्रियाओं और प्रत्यक्ष संयोजन अभिक्रियाओं की शर्तों को याद रखें।
Question 36. निम्नलिखित प्रत्येक समुच्चय को सामने लिखे गुणों के अनुसार सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए –
Answer:
1. F\( _2\), Cl\( _2\), Br\( _2\), I\( _2\) - आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी बढ़ते क्रम में ।
F\( _2\) से I\( _2\) तक आबन्ध दूरी बढ़ने पर आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी घटती है क्योंकि F से I की ओर जाने पर परमाणु के आकार में वृद्धि होती है। यद्यपि F-F आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी, Cl-Cl की तुलना में कम होती है तथा Br-Br की आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी से भी कम होती है। इसका कारण यह है कि F परमाणु अत्यधिक छोटा होता है तथा प्रत्येक F परमाणु पर इलेक्ट्रॉनों के तीन एकाकी युग्म F\( _2\) अणु में F-परमाणुओं को बाँधे रखने वाले आबन्ध युग्मों को प्रतिकर्षित करते हैं। अतः आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी का बढ़ता क्रम इस प्रकार होता है- \( \text{I}_2 < \text{F}_2 < \text{Br}_2 < \text{Cl}_2 \).
2. HF, HCl, HBr, HI - अम्ल सामर्थ्य बढ़ते क्रम में ।
HF, HCl, HBr, HI की आपेक्षिक अम्ल सामर्थ्य इनकी आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी पर निर्भर करती है। F से I तक परमाणु का आकार बढ़ने पर H-X आबन्ध की आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी H-F से H-I तक घटती है। इसलिए अम्ल सामर्थ्य विपरीत क्रम में इस प्रकार बढ़ता है- \( \text{HF} < \text{HCl} < \text{HBr} < \text{HI} \).
3. NH\( _3\), PH\( _3\), AsH\( _3\), SbH\( _3\), BiH\( _3\) - क्षारक सामर्थ्य बढ़ते क्रम में।
NH\( _3\), PH\( _3\), AsH\( _3\), BiH\( _3\) में केन्द्रीय परमाणु पर इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्म की उपस्थिति के कारण ये सभी लुईस क्षारों की भाँति व्यवहार करते हैं। यद्यपि NH\( _3\) से BiH\( _3\) तक जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता है, परिणामस्वरूप इलेक्ट्रॉनों का एकाकी युग्म अधिक आयतन घेर लेता है। दूसरे शब्दों में, केन्द्रीय परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व घटता है तथा क्षारक सामर्थ्य NH\( _3\) से BiH\( _3\) तक घटती है, इसलिए क्षारक सामर्थ्य का बढ़ता क्रम है- \( \text{BiH}_3 < \text{SbH}_3 < \text{AsH}_3 < \text{PH}_3 < \text{NH}_3 \).
In simple words: (1) आबंध वियोजन एन्थैल्पी I2 < F2 < Br2 < Cl2 क्रम में बढ़ती है, (2) अम्ल सामर्थ्य HF < HCl < HBr < HI क्रम में बढ़ती है, और (3) क्षारक सामर्थ्य BiH3 < SbH3 < AsH3 < PH3 < NH3 क्रम में बढ़ती है।
🎯 Exam Tip: तत्वों के गुणों के क्रम को याद रखने के लिए, परमाणु आकार, विद्युत ऋणात्मकता और बंधन ऊर्जा जैसे अंतर्निहित सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 37. निम्नलिखित में से कौन-सा एक अस्तित्व में नहीं है?
Answer: NeF\( _2\) अस्तित्व में नहीं है। इसका कारण यह है कि फ्लोरीन Ne को Ne\(^{+2}\) में ऑक्सीकृत नहीं कर सकता क्योंकि Ne की प्रथम तथा द्वितीय आयनन एन्थैल्पी के योग का मान Xe की तुलना में काफी अधिक है। इसलिए XeF\( _2\), XeOF\( _4\), तथा XeF\( _6\) प्राप्त किये जा सकते हैं, लेकिन NeF\( _2\) नहीं।
In simple words: NeF2 अस्तित्व में नहीं है क्योंकि नियॉन की उच्च आयनन एन्थैल्पी फ्लोरीन को नियॉन को ऑक्सीकृत करने से रोकती है, जबकि ज़ीनॉन के लिए कम आयनन एन्थैल्पी इसे फ्लोरीन के साथ यौगिक बनाने की अनुमति देती है।
🎯 Exam Tip: अक्रिय गैसों के यौगिकों के बनने का कारण उनकी आयनन ऊर्जा और अन्य तत्वों की ऑक्सीकारक शक्ति के बीच का संतुलन है।
Question 38. उस उत्कृष्ट गैस स्पीशीज का सूत्र देकर संरचना की व्याख्या कीजिए जो कि इनके साथ समसंरचनीय है –
Answer:
1. ICl\( _4\)\(^-\), XeF\( _4\) से समइलेक्ट्रॉनिक है। दोनों वर्ग समतलीय हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह ICl4- आयन और XeF4 अणु की वर्ग समतलीय संरचनाओं को दर्शाता है। ICl4- में, केंद्रीय आयोडीन परमाणु चार क्लोरीन परमाणुओं से घिरा होता है और इसमें दो एकाकी युग्म होते हैं, जो एक वर्ग समतलीय ज्यामिति बनाते हैं। इसी तरह, XeF4 में, केंद्रीय ज़ीनॉन परमाणु चार फ्लोरीन परमाणुओं से घिरा होता है और इसमें दो एकाकी युग्म होते हैं, जो भी वर्ग समतलीय ज्यामिति बनाते हैं।
2. IBr\( _2\)\(^-\), XeF\( _2\) से समइलेक्ट्रॉनिक है। दोनों रेखीय हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह IBr2- आयन और XeF2 अणु की रेखीय संरचनाओं को दर्शाता है। IBr2- में, केंद्रीय आयोडीन परमाणु दो ब्रोमीन परमाणुओं से बंधा होता है और इसमें तीन एकाकी युग्म होते हैं, जो एक रेखीय ज्यामिति में व्यवस्थित होते हैं। इसी तरह, XeF2 में, केंद्रीय ज़ीनॉन परमाणु दो फ्लोरीन परमाणुओं से बंधा होता है और इसमें तीन एकाकी युग्म होते हैं, जो भी रेखीय ज्यामिति में व्यवस्थित होते हैं।
3. BrO\( _3\)\(^-\), XeO\( _3\) से समइलेक्ट्रॉनिक है। दोनों पिरामिडीय आकृति के होते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह BrO3- आयन और XeO3 अणु की पिरामिडीय संरचनाओं को दर्शाता है। BrO3- में, केंद्रीय ब्रोमीन परमाणु तीन ऑक्सीजन परमाणुओं से बंधा होता है और इसमें एक एकाकी युग्म होता है, जो पिरामिडीय ज्यामिति बनाता है। इसी तरह, XeO3 में, केंद्रीय ज़ीनॉन परमाणु तीन ऑक्सीजन परमाणुओं से बंधा होता है और इसमें एक एकाकी युग्म होता है, जो भी पिरामिडीय ज्यामिति बनाता है।
In simple words: ICl4- (वर्ग समतलीय) XeF4 के समइलेक्ट्रॉनी है, IBr2- (रेखीय) XeF2 के समइलेक्ट्रॉनी है, और BrO3- (पिरामिडीय) XeO3 के समइलेक्ट्रॉनी है।
🎯 Exam Tip: समइलेक्ट्रॉनी प्रजातियों की पहचान करने के लिए कुल इलेक्ट्रॉनों की गणना करें और उनकी ज्यामिति का निर्धारण करने के लिए VSEPR सिद्धांत का उपयोग करें, खासकर जब एकाकी युग्म मौजूद हों।
Question 39. उत्कृष्ट गैसों के परमाण्विक आकार तुलनात्मक रूप से बड़े क्यों होते हैं?
Answer: उत्कृष्ट गैसों की परमाण्विक त्रिज्या अपने सम्बन्धित आवर्गों में सर्वाधिक होती है। इसका कारण यह है कि उत्कृष्ट गैसों की त्रिज्या केवल वान्डर वाल्स त्रिज्या होती है (क्योंकि ये अणु नहीं बनाती हैं), जबकि अन्यों की सहसंयोजक त्रिज्याएँ होती है। वान्डर वाल्स त्रिज्या सहसंयोजक त्रिज्या से अधिक होती है, अतः उत्कृष्ट गैसों के परमाण्विक आकार तुलनात्मक रूप से बड़े होते हैं।
In simple words: उत्कृष्ट गैसों का परमाणु आकार अपने आवर्त में सबसे बड़ा होता है क्योंकि वे केवल वान्डर वाल्स त्रिज्या को दर्शाते हैं (जो सहसंयोजक त्रिज्या से बड़ी होती है), क्योंकि वे अणु नहीं बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: वान्डर वाल्स त्रिज्या और सहसंयोजक त्रिज्या के बीच के अंतर को याद रखें; उत्कृष्ट गैसों के लिए, केवल वान्डर वाल्स त्रिज्या प्रासंगिक होती है।
निऑन के उपयोग (Uses Of Neon)
Answer:
1. निऑन का उपयोग विसर्जन ट्यूब तथा प्रदीप्त बल्बों में विज्ञापन प्रदर्शन हेतु किया जाता है।
2. निऑन बल्बों का उपयोग वनस्पति उद्यान तथा ग्रीन हाउस में किया जाता है।
आर्गन के उपयोग (Uses Of Argon)
1. आर्गन का उपयोग उच्चताप धातुकर्मीय प्रक्रमों में अक्रिय वातावरण उत्पन्न करने के लिए किया जाता है (धातुओं तथा उपधातुओं के आर्क वेल्डिंग में)।
2. इसका उपयोग विद्युत-बल्ब को भरने के लिए किया जाता है।
3. प्रयोगशाला में इसका उपयोग वायु सुग्राही पदार्थों के प्रबन्धन में भी किया जाता है।
In simple words: नियॉन का उपयोग विज्ञापन रोशनी और ग्रीनहाउस में किया जाता है, जबकि आर्गन का उपयोग धातुकर्म, विद्युत बल्बों और प्रयोगशालाओं में अक्रिय वातावरण के लिए किया जाता है।
🎯 Exam Tip: अक्रिय गैसों के अनुप्रयोगों को उनके रासायनिक निष्क्रियता और विशिष्ट भौतिक गुणों से जोड़कर याद रखें।
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. निम्नलिखित में सर्वाधिक स्थायी है -
(i) AsH\( _3\)
(ii) SbH\( _3\)
(iii) PH\( _3\)
(iv) NH\( _3\)
Answer: (iv) NH3
In simple words: NH3 वर्ग 15 के हाइड्राइडों में सबसे अधिक स्थायी है क्योंकि नाइट्रोजन का आकार छोटा होता है और N-H बंध मजबूत होता है।
🎯 Exam Tip: वर्ग में नीचे जाने पर हाइड्राइडों का स्थायित्व घटता है, क्योंकि केंद्रीय परमाणु का आकार बढ़ता है और M-H बंध की शक्ति कम होती जाती है।
Question 2. सफेद फॉस्फोरस को किस द्रव में रखते हैं?
(i) जल
(ii) केरोसीन
(iii) एथिल ऐल्कोहॉल
(iv) क्लोरोफॉर्म
Answer: (i) जल
In simple words: सफेद फॉस्फोरस को जल में रखा जाता है ताकि इसे ऑक्सीजन के संपर्क से बचाया जा सके, क्योंकि यह वायु में बहुत क्रियाशील होता है।
🎯 Exam Tip: सफेद फॉस्फोरस की उच्च अभिक्रियाशीलता और जल में अघुलनशीलता के कारण इसे जल में संग्रहीत किया जाता है।
Question 3. निम्नलिखित में से किसकी अभिक्रिया से फॉस्फोरस से फॉस्फीन बनाया जाता है?
(i) HCl
(ii) NaOH
(iii) CO\( _2\)
(iv) CO\( _2\)
Answer: (ii) NaOH
In simple words: फॉस्फोरस सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) के साथ अभिक्रिया करके फॉस्फीन बनाता है।
🎯 Exam Tip: फॉस्फीन बनाने की प्रयोगशाला विधि में सफेद फॉस्फोरस की NaOH के साथ अभिक्रिया एक महत्वपूर्ण रेडॉक्स प्रतिक्रिया है।
Question 4. अमोनिया और फॉस्फीन गैसों के कौन-से निम्नलिखित गुण में भिन्नता है?
(i) अणु संरचनाओं में
(ii) क्लोरीन के साथ अभिक्रियाओं में
(iii) अपचायक गुण में
(iv) वायु में जलने में
Answer: (iv) वायु में जलने में
In simple words: अमोनिया और फॉस्फीन गैसें वायु में जलने के तरीके में भिन्न होती हैं, क्योंकि फॉस्फीन वायु के संपर्क में स्वतः ज्वलनशील होती है जबकि अमोनिया नहीं।
🎯 Exam Tip: अमोनिया और फॉस्फीन के गुणों की तुलना करते समय उनकी ज्वलनशीलता और अपचायक गुणों पर ध्यान दें, जो उनके बंधन और स्थिरता से प्रभावित होते हैं।
Question 5. SO2 अणु में सल्फर परमाणु का संकरण है -
(i) sp
(ii) sp\(^2\)
(iii) sp\(^3\)
(iv) sp\(^3\)d
Answer: (ii) sp2
In simple words: SO2 अणु में सल्फर परमाणु का संकरण sp\(^2\) होता है, जिससे यह एक समतल त्रिकोणीय ज्यामिति अपनाता है जिसमें एक एकाकी युग्म भी शामिल होता है।
🎯 Exam Tip: किसी भी अणु में केंद्रीय परमाणु के संकरण का निर्धारण करने के लिए लुईस संरचना और VSEPR सिद्धांत का उपयोग करें, जिसमें बंध युग्म और एकाकी युग्म दोनों की गणना करें।
Question 6. प्रबल विद्युत ऋणात्मक हैलोजन है -
(i) F\( _2\)
(ii) Cl\( _2\)
(iii) Br\( _2\)
(iv) I\( _2\)
Answer: (i) F2
In simple words: फ्लोरीन (F2) सबसे प्रबल विद्युत ऋणात्मक हैलोजन है, क्योंकि इसकी परमाणु त्रिज्या सबसे छोटी होती है और यह इलेक्ट्रॉनों को सबसे अधिक मजबूती से आकर्षित करता है।
🎯 Exam Tip: आवर्त सारणी में विद्युत ऋणात्मकता का रुझान याद रखें, यह वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर घटती है और आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर बढ़ती है।
Question 7. सर्वाधिक इलेक्ट्रॉन बन्धुता वाला तत्त्व है - (i) N (ii) O (iii) Cl (iv) F
Answer: (iii) Cl
In simple words: क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन बन्धुता सर्वाधिक होती है, क्योंकि यह अपने छोटे आकार और अपेक्षाकृत बड़े परमाणु में इलेक्ट्रॉनों के बीच कम प्रतिकर्षण के कारण अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन को सबसे अधिक ऊर्जा के साथ ग्रहण कर सकता है।
🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन बन्धुता के सामान्य रुझान में, क्लोरीन फ्लोरीन से अधिक होता है, जो अपवाद को उजागर करता है जिसके पीछे छोटे परमाणुओं में इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण का कारण होता है।
Question 8. F, Ci, Br तथा I तत्त्वों के इलेक्ट्रॉन बन्धुता का सही क्रम है -
(i) F > Cl > Br > I
(ii) I > Br > Cl > F
(iii) F > Br > Cl > I
(iv) F > Cl > Br > I
Answer: (i) F > Cl > Br > I
In simple words: हैलोजनों की इलेक्ट्रॉन बन्धुता का सही क्रम F > Cl > Br > I है, जहाँ फ्लोरीन का अपवाद क्लोरीन से थोड़ा कम होता है, लेकिन सामान्य प्रवृत्ति यही है कि यह वर्ग में नीचे जाने पर घटती है।
🎯 Exam Tip: हैलोजनों की इलेक्ट्रॉन बन्धुता के क्रम को याद रखें, फ्लोरीन का मान क्लोरीन से थोड़ा कम होता है, लेकिन विकल्प में इसे उच्चतम दिया गया है, जो एक सामान्य सरलीकरण हो सकता है।
Question 9. निम्न में से कौन-सा कथन सही है?
(i) NO\( _2\) नाइट्रिक अम्ल का ऐनहाइड्राइड है
(ii) CO फॉर्मिक अम्ल का ऐनहाइड्राइड है
(iii) Cl\( _2\)O\( _3\) हाइपोक्लोरस अम्ल का ऐनहाइड्राइड है
(iv) Cl\( _2\)O\( _7\) परक्लोरिक अम्ल का ऐनहाइड्राइड है
Answer: (iv) Cl2O7 परक्लोरिक अम्ल का ऐनहाइड्राइड है
In simple words: Cl2O7 परक्लोरिक अम्ल (HClO4) का ऐनहाइड्राइड है, जिसका अर्थ है कि यह जल के साथ अभिक्रिया करके परक्लोरिक अम्ल बनाता है।
🎯 Exam Tip: किसी भी अम्ल का ऐनहाइड्राइड वह ऑक्साइड होता है जो जल के साथ अभिक्रिया करके वह अम्ल बनाता है। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि ऐनहाइड्राइड में धातु की ऑक्सीकरण अवस्था अम्ल में धातु की ऑक्सीकरण अवस्था के समान होनी चाहिए।
Question 10. निम्न में से विस्फोटक है -
(i) Hg\( _2\)Cl\( _2\)
(ii) PCl\( _3\)
(iii) NCl\( _3\)
(iv) SbCl\( _3\)
Answer: (iii) NCl3
In simple words: NCl3 एक अत्यधिक अस्थिर और विस्फोटक यौगिक है, जबकि अन्य विकल्प आमतौर पर स्थिर होते हैं।
🎯 Exam Tip: NCl3 की अस्थिरता को नाइट्रोजन और क्लोरीन के बीच आकार में बड़े अंतर और बंधन ऊर्जा से जोड़ा जा सकता है, जो इसे विस्फोटक बनाता है।
Question 11. क्लोरीन का प्रबलतम ऑक्सी अम्ल है -
(i) HClO\( _2\)
(ii) HClO\( _4\)
(iii) HClO
(iv) HClO\( _3\)
Answer: (ii) HClO4
In simple words: परक्लोरिक अम्ल (HClO4) क्लोरीन का सबसे प्रबल ऑक्सी अम्ल है, क्योंकि इसमें क्लोरीन अपनी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था (+7) में होता है, जो इसे एक मजबूत ऑक्सीकारक बनाता है।
🎯 Exam Tip: किसी भी ऑक्सी अम्ल की प्रबलता केंद्रीय परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था बढ़ने के साथ बढ़ती है।
Question 12. निष्क्रिय गैसों की खोज का श्रेय जाता है -
(i) रैले को
(ii) विलियम रैमसे को
(iii) जॉनसन को
(iv) डेवार को
Answer: (i) रैले को
In simple words: अक्रिय गैसों की खोज का श्रेय मुख्य रूप से रैले को जाता है, जिन्होंने आर्गन को वायु से अलग करके इसकी पहचान की।
🎯 Exam Tip: अक्रिय गैसों की खोज के लिए रैले और रैमसे दोनों के योगदान को याद रखें, हालांकि आर्गन की पहचान में रैले की भूमिका महत्वपूर्ण थी।
Question 13. वायुमण्डल में सर्वाधिक पायी जाने वाली गैस है -
(i) हीलियम
(ii) निऑन
(iii) आर्गन
(iv) क्रिप्टन
Answer: (iii) आर्गन
In simple words: आर्गन वायुमंडल में सबसे प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली अक्रिय गैस है, जो वायु का लगभग 0.93% भाग बनाती है।
🎯 Exam Tip: अक्रिय गैसों की वायुमंडलीय प्रचुरता को याद रखें, जिसमें आर्गन सबसे आम है और हीलियम भी काफी मात्रा में पाया जाता है।
Question 14. निम्न में से कौन-सी गैस वायुयानों के टायरों में भरी जाती है?
(i) H\( _2\)
(ii) He
(iii) N\( _2\)
(iv) Ar
Answer: (ii) He
In simple words: हीलियम (He) का उपयोग वायुयानों के टायरों में भरा जाता है क्योंकि यह हाइड्रोजन की तुलना में अज्वलनशील और बहुत हल्का होता है।
🎯 Exam Tip: हीलियम की हल्की प्रकृति और अज्वलनशीलता को याद रखें, जो इसे वायुयानों के टायरों में उपयोग के लिए आदर्श बनाती है।
Question 15. वायुमण्डल में पायी जाने वाली अक्रिय गैस है -
(i) He तथा Ne
(ii) He, Ne तथा Ar
(iii) He, Ne, Ar तथा Kr
(iv) Rn को छोड़कर सभी
Answer: (iv) Rn को छोड़कर सभी
In simple words: रेडॉन (Rn) को छोड़कर सभी अक्रिय गैसें- हीलियम, नियॉन, आर्गन, क्रिप्टन और ज़ीनॉन- वायुमंडल में स्वाभाविक रूप से पाई जाती हैं।
🎯 Exam Tip: रेडॉन एक रेडियोधर्मी गैस है जो यूरेनियम के क्षय से बनती है और इसकी अल्पायु के कारण यह सामान्यतः वायुमंडल में बड़ी मात्रा में नहीं पाई जाती है।
Question 16. हीलियम का मुख्य स्रोत है - (i) वायु (ii) मोनाजाइट रेत (iii) रेडियम (iv) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ii) मोनोजाइट रेत
In simple words: हीलियम का मुख्य स्रोत मोनाजाइट रेत है, जो एक खनिज है जिसमें थोरियम और यूरेनियम होते हैं, जो अल्फा कणों (हीलियम नाभिक) का उत्सर्जन करके क्षय होते हैं।
🎯 Exam Tip: हीलियम के प्रमुख प्राकृतिक स्रोत के रूप में मोनाजाइट रेत को याद रखें, जो रेडियोधर्मी क्षय से संबंधित है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. अमोनिया की क्लोरीन से क्या अभिक्रिया होती है?
Answer: अमोनिया की क्लोरीन से अभिक्रिया निम्नलिखित दो प्रकार से होती है –
1. जब अमोनिया आधिक्य में होती है तो N\( _2\) तथा NH\( _4\)Cl प्राप्त होते हैं।
\[
8\text{NH}_3 + 3\text{Cl}_2 \longrightarrow \text{N}_2 \uparrow + 6\text{NH}_4\text{Cl}
\]
2. जब क्लोरीन आधिक्य में होती है तो NCl\( _3\) तथा HCl प्राप्त होते हैं।
\[
\text{NH}_3 + 3\text{Cl}_2 \longrightarrow \text{NCl}_3 + 3\text{HCl}
\]
In simple words: जब अमोनिया अधिक होती है, तो यह क्लोरीन के साथ अभिक्रिया करके नाइट्रोजन और अमोनियम क्लोराइड बनाती है; लेकिन जब क्लोरीन अधिक होती है, तो यह नाइट्रोजन ट्राइक्लोराइड (NCl3) और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनाती है।
🎯 Exam Tip: अभिकारकों की सापेक्ष मात्रा (आधिक्य) के आधार पर अभिक्रिया के उत्पादों को याद रखें।
Question 2. नाइट्रस अम्ल, ऑक्सीकारक एवं अपचायक दोनों के रूप में कार्य करता है। प्रत्येक को एक-एक उदाहरण देकर समझाइए।
Answer: नाइट्रस अम्ल अपघटित होकर नवजात ऑक्सीजन देता है \( 2\text{HNO}_2 \longrightarrow 2\text{NO} \uparrow + [\text{O}] + \text{H}_2\text{O} \)
नवजात ऑक्सीजन विभिन्न पदार्थों को ऑक्सीकृत कर देती है। इसके विपरीत यह प्रबल ऑक्सीकारकों के प्रति अपचायक का कार्य भी करती है, क्योंकि यह उनमें नवजात ऑक्सीजन ग्रहण करके स्वयं नाइट्रिक अम्ल में बदल जाती है।
\[
\text{HNO}_2 + [\text{O}] \longrightarrow \text{HNO}_3
\]
उदाहरण -
1. ऑक्सीकारक गुण – नाइट्रस अम्ल सल्फर डाइऑक्साइड को सल्फ्यूरिक अम्ल में ऑक्सीकृत कर देता है। \[ \text{SO}_2 + 2\text{HNO}_2 \longrightarrow \text{H}_2\text{SO}_4 + 2\text{NO} \]
2. अपचायक गुण – नाइट्रस अम्ले H\( _2\)O\( _2\) को H\( _2\)O में अपचयित कर देता है। \[ \text{H}_2\text{O}_2 + \text{HNO}_2 \longrightarrow \text{HNO}_3 + \text{H}_2\text{O} \]
In simple words: नाइट्रस अम्ल (HNO2) ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों के रूप में कार्य करता है; यह SO2 को H2SO4 में ऑक्सीकृत कर सकता है (ऑक्सीकारक के रूप में) और H2O2 को H2O में अपचयित कर सकता है (अपचायक के रूप में)।
🎯 Exam Tip: किसी भी पदार्थ की ऑक्सीकारक और अपचायक भूमिका को समझने के लिए, केंद्रीय परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था की जांच करें और देखें कि यह ऑक्सीकरण या अपचयन के माध्यम से किस दिशा में जा सकता है।
Question 3. फॉस्फोरस के अपररूप लिखिए।
Answer: फॉस्फोरस के तीन मुख्य अपररूप निम्नवत् हैं –
1. सफेद या पीला फॉस्फोरस
2. लाल फॉस्फोरस
3. काला फॉस्फोरस
In simple words: फॉस्फोरस के मुख्य अपररूप सफेद (या पीला), लाल और काला फॉस्फोरस हैं, जिनमें प्रत्येक की अपनी विशिष्ट भौतिक और रासायनिक गुण होते हैं।
🎯 Exam Tip: फॉस्फोरस के विभिन्न अपररूपों के नाम याद रखें और उनकी संरचनाओं और गुणों को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है।
Question 4. सफेद फॉस्फोरस से लाल फॉस्फोरस कैसे प्राप्त किया जाता है?
Answer: सफेद फॉस्फोरस को निष्क्रिय वातावरण में 240°C ताप पर गर्म करने से वह लाल फॉस्फोरस में बदल जाता है।
In simple words: सफेद फॉस्फोरस को ऑक्सीजन रहित वातावरण में 240°C पर गर्म करने से लाल फॉस्फोरस में परिवर्तित किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: इस रूपांतरण के लिए तापमान और अक्रिय वातावरण की आवश्यकता को याद रखें, क्योंकि सफेद फॉस्फोरस वायु में बहुत प्रतिक्रियाशील होता है।
Question 5. फॉस्फोरस के निम्नलिखित ऑक्सी अम्लों के संरचना सूत्र लिखिए - (i) हाइपो फॉस्फोरिक अम्ल (ii) फॉस्फोरिक अम्ल (iii) ऑर्थों फॉस्फोरिक अम्ल (iv) पाइरो फॉस्फोरिक अम्ल
Answer:
(i) हाइपो फॉस्फोरिक अम्ल
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह हाइपोफॉस्फोरिक अम्ल (H4P2O6) की संरचना को दर्शाता है। इसमें दो फॉस्फोरस परमाणु एक एकल P-P बंध से जुड़े होते हैं, और प्रत्येक फॉस्फोरस परमाणु एक ऑक्सीजन परमाणु से द्विबंध द्वारा और दो -OH समूहों से एकल बंध द्वारा जुड़ा होता है।
(ii) फॉस्फोरिक अम्ल
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह फॉस्फोरिक अम्ल (H3PO4) की संरचना को दर्शाता है। इसमें केंद्रीय फॉस्फोरस परमाणु एक ऑक्सीजन परमाणु से द्विबंध द्वारा और तीन -OH समूहों से एकल बंध द्वारा जुड़ा होता है।
(iii) ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल (H3PO4) की संरचना को दर्शाता है। इसमें केंद्रीय फॉस्फोरस परमाणु एक ऑक्सीजन परमाणु से द्विबंध द्वारा और तीन -OH समूहों से एकल बंध द्वारा जुड़ा होता है।
(iv) पाइरो फॉस्फोरिक अम्ल
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह पाइरोफॉस्फोरिक अम्ल (H4P2O7) की संरचना को दर्शाता है। इसमें दो फॉस्फोरस परमाणु एक ऑक्सीजन परमाणु से P-O-P बंध द्वारा जुड़े होते हैं, और प्रत्येक फॉस्फोरस परमाणु एक ऑक्सीजन परमाणु से द्विबंध द्वारा और दो -OH समूहों से एकल बंध द्वारा जुड़ा होता है।
In simple words: फॉस्फोरस के ऑक्सी अम्लों में केंद्रीय फॉस्फोरस परमाणु ऑक्सीजन परमाणुओं और -OH समूहों से जुड़ा होता है, जिसमें संरचनाएँ फॉस्फोरस की ऑक्सीकरण अवस्था और O-H बंधों की संख्या के आधार पर भिन्न होती हैं।
🎯 Exam Tip: फॉस्फोरस के ऑक्सी अम्लों की संरचनाओं को याद रखने के लिए, प्रत्येक फॉस्फोरस परमाणु पर एक P=O बंध और कम से कम एक P-OH बंध की उपस्थिति को ध्यान में रखें, साथ ही P-H बंध भी हो सकते हैं।
Question 6. एक अभिक्रिया लिखिए जिसमें ओजोन अपचायक हो परन्तु स्वयं भी अपचयित होती है -
Answer: ओजोन हाइड्रोजन परॉक्साइड को जल में अपचयित करती है और स्वयं भी अपचयित हो जाती है।
\[
\text{H}_2\text{O}_2 + \text{O}_3 \longrightarrow 2\text{O}_2 \uparrow + \text{H}_2\text{O}
\]
In simple words: ओजोन हाइड्रोजन परॉक्साइड को जल में अपचयित कर देती है और स्वयं ऑक्सीजन में अपचयित हो जाती है।
🎯 Exam Tip: ओजोन के अपचायक गुण को याद रखें जब यह हाइड्रोजन परॉक्साइड जैसी कमजोर ऑक्सीकारक प्रजातियों के साथ अभिक्रिया करती है, जहाँ ओजोन ऑक्सीजन में बदल जाती है।
Question 7. सल्फर के किन्हीं चार ऑक्सी अम्लों के नाम लिखिए।
Answer:
1. H\( _2\)SO\( _4\) (सल्फ्यूरिक अम्ल)
2. H\( _2\)S\( _2\)O\( _7\) (डाइसल्फ्यूरिक अम्ल)
3. H\( _2\)S\( _2\)O\( _3\) (थायोसल्फ्यूरिक अम्ल)
4. H\( _2\)S\( _2\)O\( _6\) (डाइथायोनिक अम्ल)
In simple words: सल्फर के कुछ ऑक्सी अम्ल सल्फ्यूरिक अम्ल, डाइसल्फ्यूरिक अम्ल, थायोसल्फ्यूरिक अम्ल और डाइथायोनिक अम्ल हैं।
🎯 Exam Tip: सल्फर के विभिन्न ऑक्सी अम्लों के नाम और उनके सामान्य रासायनिक सूत्र याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 8. रासायनिक समीकरण देते हुए SO2 की विरंजक क्रिया का कारण समझाइए।
Answer: SO\( _2\) अपचयन के आधार पर विरंजक गुण व्यक्त करती है।
\[
\text{SO}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \longrightarrow \text{H}_2\text{SO}_4 + 2[\text{H}] \\
\text{रंगीन पदार्थ} + [\text{H}] \longrightarrow \text{रंगहीन पदार्थ}
\]
In simple words: सल्फर डाइऑक्साइड की विरंजक क्रिया अपचयन के कारण होती है; यह जल के साथ अभिक्रिया करके नवजात हाइड्रोजन उत्पन्न करता है, जो रंगीन पदार्थों को रंगहीन कर देता है।
🎯 Exam Tip: SO2 की विरंजक क्रिया को अपचायक गुण से जोड़ना महत्वपूर्ण है, जो नवजात हाइड्रोजन के बनने के कारण होता है, जबकि क्लोरीन की विरंजक क्रिया ऑक्सीकरण के कारण होती है।
Question 9. जल की अपेक्षा आयोडीन, KI विलयन में क्यों अधिक विलेय है?
Answer: जल के द्वारा आयोडीन का बिल्कुल भी अपघटन नहीं होता है जबकि आयोडीन KI विलयन में घुलकर भूरे रंग का पोटैशियम ट्राइआयोडाइड (KI\( _3\)) संकर यौगिक बनाती है।
\[
\text{KI} + \text{I}_2 \longrightarrow \text{KI}_3
\]
In simple words: आयोडीन जल की तुलना में KI विलयन में अधिक विलेय है क्योंकि यह KI के साथ अभिक्रिया करके एक घुलनशील संकर यौगिक पोटैशियम ट्राइआयोडाइड (KI3) बनाती है।
🎯 Exam Tip: आयोडीन की विलेयता में वृद्धि के लिए संकर आयन (ट्राइआयोडाइड) के निर्माण में जटिल आयन रसायन विज्ञान की भूमिका को याद रखें।
Question 10. सामान्य ताप एवं दाब पर ब्रोमीन एक द्रव है जबकि आयोडीन ठोस। कारण स्पष्ट कीजिए।
Answer: आयोडीन का अणुभार तथा आकार दोनों ब्रोमीन से अधिक हैं चूंकि आयोडीन अणु के मध्य लगने वाला आणविक आकर्षण बल ब्रोमीन की तुलना में अधिक है, इसलिए आयोडीन ठोस तथा ब्रोमीन द्रव है।
In simple words: ब्रोमीन कमरे के तापमान पर द्रव होता है, जबकि आयोडीन ठोस होता है क्योंकि आयोडीन का बड़ा आकार और अधिक अणुभार ब्रोमीन की तुलना में मजबूत वान्डर वाल्स बलों को जन्म देता है, जिससे उसके अणु अधिक कसकर बंधे होते हैं।
🎯 Exam Tip: हैलोजनों के भौतिक अवस्था में अंतर को उनके परमाणु आकार और परिणामस्वरूप वान्डर वाल्स बलों की प्रबलता में वृद्धि से जोड़ें।
Question 11. हैलोजनों के दो ऑक्सी अम्लों के संरचना सूत्र लिखिए।
Answer: हैलोजनों के दो ऑक्सी अम्लों के संरचना सूत्र निम्नवत् हैं –
1. क्लोरीन अम्ल
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह क्लोरीन अम्ल (HClO) की संरचना को दर्शाता है, जहाँ केंद्रीय क्लोरीन परमाणु एक हाइड्रोजन परमाणु से एकल बंध द्वारा और एक ऑक्सीजन परमाणु से एकल बंध द्वारा जुड़ा होता है।
2. हेलिक अम्ल
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह हेलिक अम्ल (HXO3) की सामान्य संरचना को दर्शाता है, जहाँ X क्लोरीन (Cl), ब्रोमीन (Br) या आयोडीन (I) हो सकता है। केंद्रीय हैलोजन परमाणु तीन ऑक्सीजन परमाणुओं से द्विबंध द्वारा और एक हाइड्रोजन परमाणु से एकल बंध द्वारा जुड़ा होता है।
In simple words: हैलोजेन के ऑक्सी अम्ल जैसे क्लोरीन अम्ल (HClO) और हेलिक अम्ल (HXO3) होते हैं, जिनमें हैलोजन केंद्रीय परमाणु होता है जो ऑक्सीजन और हाइड्रोजन से जुड़ा होता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न ऑक्सी अम्लों की संरचनाओं को याद रखने के लिए केंद्रीय हैलोजन परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था और इससे जुड़े ऑक्सीजन और हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या पर ध्यान दें।
Question 12. HCl का क्वथनांक HF से कम क्यों होता है?
Answer: हाइड्रोजन हैलाइडों के क्वथनांक HCl से HI तक बढ़ते हैं। HF का क्वथनांक अन्तराअणुक हाइड्रोजन आबन्धन के कारण अपसामान्य रूप से इन सबसे उच्च है।
In simple words: HF का क्वथनांक HCl से अधिक होता है क्योंकि फ्लोरीन की उच्च विद्युत ऋणात्मकता के कारण HF अणु मजबूत हाइड्रोजन बंधन बनाते हैं, जिससे उन्हें अलग करने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
🎯 Exam Tip: HF में हाइड्रोजन बंधन की उपस्थिति को याद रखें, जो इसके असाधारण उच्च क्वथनांक का मुख्य कारण है, जबकि अन्य हैलाइडों में यह अनुपस्थित होता है।
Question 13. उत्कृष्ट प्रैसे क्या होती हैं? उत्कृष्ट गैसों के नाम लिखिए।
Answer: आवर्त सारणी में शून्य वर्ग के तत्त्वों को उत्कृष्ट गैसें कहते हैं, क्योंकि ये तत्त्व रासायनिक रूप से अक्रिय होते हैं। हीलियम, आर्गन, निऑन, रेडॉन, क्रिप्टॉन तथा जीनॉन उत्कृष्ट गैसें हैं।
In simple words: उत्कृष्ट गैसें आवर्त सारणी के वर्ग 18 के तत्व हैं जो रासायनिक रूप से अक्रिय होते हैं, जैसे हीलियम, नियॉन, आर्गन, क्रिप्टन, ज़ीनॉन और रेडॉन।
🎯 Exam Tip: उत्कृष्ट गैसों की निष्क्रियता को उनके पूर्ण संयोजी कोश इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से जोड़ें, जो उन्हें रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेने से रोकता है।
Question 14. अक्रिय गैसों की चार विशेषताएँ/गुण लिखिए।
Answer:
अक्रिय गैसों के गुण –
1. ये रंगहीन, गंधहीन तथा स्वादहीन गैसें हैं।
2. इनकी अन्तिम कक्षा का विन्यास ns\(^2\)np\(^6\) (हीलियम को छोड़कर) होता है।
3. इनकी संयोजकता शून्य होती है।
4. ये एक परमाणुक गैसें हैं, जिनकी विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात (Cp/Cv) 1.66 होता है।
In simple words: अक्रिय गैसें रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन होती हैं, उनका संयोजी कोश पूर्ण होता है (ns\(^2\)np\(^6\)), उनकी संयोजकता शून्य होती है और वे एक परमाणुक गैसें होती हैं।
🎯 Exam Tip: अक्रिय गैसों के इन गुणों को उनकी रासायनिक निष्क्रियता और स्थिर इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से जोड़कर याद रखें।
Question 15. अक्रिय गैसों की इलेक्ट्रॉन बन्धुता शून्य क्यों होती है?
Answer: क्योंकि इनके अन्दर और बाहर के सभी कोश पूर्ण रूप से भरे होते हैं।
In simple words: अक्रिय गैसों की इलेक्ट्रॉन बन्धुता शून्य होती है क्योंकि उनके संयोजी कोश पूर्ण रूप से भरे होते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की कोई प्रवृत्ति नहीं होती है।
🎯 Exam Tip: पूर्ण संयोजी कोश वाले परमाणुओं की इलेक्ट्रॉन बन्धुता शून्य या लगभग शून्य होती है क्योंकि अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करने के लिए उच्च ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
Question 16. उत्कृष्ट गैसें अक्रिय क्यों होती हैं? इनके द्वारा बनाये गये दो यौगिकों के सूत्र लिखिए।
Answer: उत्कृष्ट या अक्रिय गैसों के सभी कक्ष पूर्णतया भरे होने के कारण ये संतृप्त होती हैं और इसी कारण रासायनिक रूप से निष्क्रिय होती हैं। इन तत्त्वों के आयनन विभव स्थायी इलेक्ट्रॉन कक्ष होने के कारण उच्च होते हैं, अतः ये रासायनिक क्रिया में भाग नहीं लेते हैं। इनके द्वारा बनाये गये दो यौगिक क्रमशः WHe\( _2\) व Ar\( _6\)H\( _2\)O हैं।
In simple words: उत्कृष्ट गैसें अक्रिय होती हैं क्योंकि उनके संयोजी कोश पूरी तरह से भरे होते हैं और उनमें इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करने या खोने की प्रवृत्ति नहीं होती है। कुछ बनाए गए यौगिकों में WHe2 और Ar6H2O शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: उत्कृष्ट गैसों की निष्क्रियता का मुख्य कारण उनके स्थिर इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और उच्च आयनन ऊर्जा है, जिससे वे आसानी से रासायनिक बंध नहीं बनाते हैं।
Question 17. उत्कृष्ट गैसों के आयनन विभव के मान ऊँचे होते हैं? समझाइए।
Answer: उत्कृष्ट गैसों के उच्च आयनन विभव इनके छोटे आकार के कारण होते हैं।
In simple words: उत्कृष्ट गैसों के आयनन विभव बहुत अधिक होते हैं क्योंकि उनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास स्थिर होता है और इलेक्ट्रॉनों को हटाने के लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
🎯 Exam Tip: अक्रिय गैसों की उच्च आयनन ऊर्जा को उनके स्थिर इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (पूर्ण अष्टक) और परमाणु आकार से जोड़ें, जिससे इलेक्ट्रॉनों को हटाना मुश्किल हो जाता है।
Question 18. कारण सहित स्पष्ट कीजिए कि He उत्कृष्ट गैसों में सबसे ज्यादा निष्क्रिय है।
Answer: उत्कृष्ट गैसों की आयनन ऊर्जाओं का क्रम निम्नवत् होता है – \( \text{He} > \text{Ne} > \text{Ar} > \text{Kr} > \text{Xe} > \text{Rn} \). इससे स्पष्ट है कि He की आयनन ऊर्जा सर्वोच्च है। अतः इसमें से इलेक्ट्रॉन निष्कासित करना आसान नहीं है। इसी के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि He उत्कृष्ट गैसों में सबसे ज्यादा निष्क्रिय है।
In simple words: हीलियम उत्कृष्ट गैसों में सबसे अधिक निष्क्रिय है क्योंकि इसकी आयनन ऊर्जा सभी अक्रिय गैसों में सर्वाधिक होती है, जिसका अर्थ है कि इससे इलेक्ट्रॉन निकालना अत्यंत कठिन है, जिससे इसकी रासायनिक अभिक्रियाशीलता न्यूनतम हो जाती है।
🎯 Exam Tip: वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन ऊर्जा घटती है, इसलिए सबसे छोटे आकार वाली हीलियम की आयनन ऊर्जा सर्वाधिक होती है, जो उसकी अत्यधिक निष्क्रियता का कारण बनती है।
Question 1. NF5 नहीं बनता है जबकि PF ज्ञात है। समझाइए।
Answer:
F
F
P-F
F
F
In simple words: नाइट्रोजन के पास कम ऊर्जा वाले d-कक्षक नहीं होते, इसलिए वह अपने अष्टक का विस्तार नहीं कर सकता और NF5 नहीं बना पाता। फॉस्फोरस के पास 3d-कक्षक उपलब्ध होते हैं, जिससे वह अपने अष्टक का विस्तार करके PF5 बना सकता है।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न फास्फोरस और नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्थाओं में अंतर और d-कक्षक की उपलब्धता के महत्व को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 2. अमोनिया तथा फॉस्फीन बनाने की प्रयोगशाला विधि का रासायनिक समीकरण लिखिए तथा सफेद फॉस्फोरस की क्लोरीन से अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण भी लिखिए।
Answer: अमोनिया गैस बनाने की प्रयोगशाला विधि का रासायनिक समीकरण - प्रयोगशाला में अमोनिया गैस अमोनियम क्लोराइड को बुझे हुए चूने के साथ गर्म करके बनायी जाती है।
\(2NH_4Cl + Ca(OH)_2 \longrightarrow CaCl_2 + 2NH_3 \uparrow + 2H_2O\)
फॉस्फीन गैस बनाने की प्रयोगशाला विधि का रासायनिक समीकरण - प्रयोगशाला में फॉस्फीन गैस वायु की अनुपस्थिति में सफेद फॉस्फोरस को सान्द्र कास्टिक सोडा विलयन के साथ गर्म करके बनायी जाती है।
सफेद फॉस्फोरस की क्लोरीन से अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण - सफेद फॉस्फोरस साधारण ताप पर क्लोरीन गैस में स्वतः जलने लगता है।
\(P_4 + 6Cl_2 \longrightarrow 4PCl_3\)
\(P_4 + 10Cl_2 \longrightarrow 4PCl_5\)
In simple words: अमोनिया अमोनियम क्लोराइड और बुझे चूने से बनती है, जबकि फॉस्फीन सफेद फॉस्फोरस और कॉस्टिक सोडा से। सफेद फॉस्फोरस क्लोरीन से क्रिया करके फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड या फॉस्फोरस पेन्टाक्लोराइड बनाता है।
🎯 Exam Tip: इन अभिक्रियाओं के अभिकर्मक और उत्पाद, साथ ही रासायनिक समीकरणों का संतुलन, परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 3. फॉस्फीन बनाने की प्रयोगशाला विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। इसके दो गुण एवं उपयोग लिखिए।
Answer: प्रयोगशाला में फॉस्फीन को सान्द्र सोडियम हाइड्रॉक्साइड को अक्रिय वातावरण में सफेद फॉस्फोरस के साथ उबालकर प्राप्त करते हैं।
\(P_4 + 3NaOH + 3H_2O \longrightarrow 3NaH_2PO_2 + PH_3 \uparrow\)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र फॉस्फीन के प्रयोगशाला निर्माण को दर्शाता है। एक गोल पेंदे वाले फ्लास्क में सफेद फॉस्फोरस और NaOH विलयन होता है। फ्लास्क को गर्म किया जाता है, जिससे PH3 गैस उत्पन्न होती है। गैस को एक निकास नली के माध्यम से जल से भरे बर्तन में प्रवाहित किया जाता है, जिससे यह बुलबुलों के रूप में निकलती है, जो वायुमंडल में उपस्थित ऑक्सीकारक गैसों के साथ क्रिया कर सकती है।
इसके दो प्रमुख गुण निम्नवत् हैं -
1. यह वायु से भारी तथा जल में अल्प विलेय होती है।
2. यह विषैली प्रकृति की होती है।
इसके दो प्रमुख उपयोग निम्नवत् हैं -
1. इसका उपयोग धातुओं के फॉस्फाइड बनाने में किया जाता है।
2. इसका उपयोग समुद्री यात्राओं में होम्ज सिग्नल के लिए किया जाता है।
In simple words: फॉस्फीन को सफेद फॉस्फोरस और कॉस्टिक सोडा को गर्म करके अक्रिय वातावरण में बनाया जाता है। यह वायु से भारी और विषैली गैस है, जिसका उपयोग धातुओं के फॉस्फाइड बनाने और होम्ज सिग्नल में होता है।
🎯 Exam Tip: फॉस्फीन के निर्माण की विधि, उसके गुण और उपयोग, साथ ही संबंधित रासायनिक समीकरणों का सही ज्ञान महत्वपूर्ण है। चित्र की संरचना और प्रक्रिया को समझें।
Question 4. अमोनिया तथा फॉस्फीन के दो रासायनिक विभेदीय परीक्षण लिखिए।
Answer:
1. अमोनिया जलीय कॉपर सल्फेट के साथ गहरा नीला विलयन बनाती है जबकि फॉस्फीन जलीय कॉपर सल्फेट के साथ कॉपर फॉस्फाइड बनाती है।
2. अमोनिया सान्द्र HCl के साथ सघन श्वेत धूम देती है जबकि फॉस्फीन HCl से क्रिया करके फॉस्फोनियम क्लोराइड बनाती है।
In simple words: अमोनिया कॉपर सल्फेट के साथ नीला विलयन बनाती है और HCl के साथ सफेद धूम देती है, जबकि फॉस्फीन कॉपर सल्फेट के साथ कॉपर फॉस्फाइड और HCl के साथ फॉस्फोनियम क्लोराइड बनाती है।
🎯 Exam Tip: अमोनिया और फॉस्फीन के बीच के रासायनिक अंतर को समझने के लिए ये परीक्षण महत्वपूर्ण हैं, खासकर उनके उत्पादों के रंग और प्रकृति के आधार पर।
Question 5. होम्ज सिग्नल में किस गैस का प्रयोग किया जाता है और कैसे?
Answer: होम्ज सिग्नल में फॉस्फीन गैस का प्रयोग किया जाता है। इस कार्य के लिए कैल्सियम फॉस्फाइड व कैल्सियम कार्बाइड से भरे हुए दो डिब्बे छेद करके समुद्र में डाल दिये जाते हैं। जल के सम्पर्क में आने पर फॉस्फीन तथा ऐसीटिलीन दोनों ही साथ-साथ जलती हैं।
\(Ca_3P_2 + 6H_2O \longrightarrow 3Ca(OH)_2 + 2PH_3 \uparrow\)
\(CaC_2 + 2H_2O \longrightarrow Ca(OH)_2 + C_2H_2 \uparrow\)
फॉस्फीन शीघ्र ज्वलनशील होने के कारण ऐसीटिलीन को जला देती है जिससे प्रकाश उत्पन्न होता है तथा दूर से ऐसा लगता है कि समुद्र में आग लग रही है। इस प्रकार से सूचना समुद्री जहाज के चालकों को मिल जाती है।
In simple words: होम्ज सिग्नल में फॉस्फीन गैस का उपयोग होता है, जिसे कैल्सियम फॉस्फाइड और कैल्सियम कार्बाइड के जल से अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न किया जाता है। यह जलने पर चमकदार प्रकाश उत्पन्न करता है, जिससे जहाजों को संकेत मिलते हैं।
🎯 Exam Tip: होम्ज सिग्नल के पीछे की रासायनिक अभिक्रियाओं और उसके अनुप्रयोग को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 6. डाइऑक्सीजन के विरचन की प्रमुख विधियाँ तथा इसके रासायनिक गुण एवं उपयोग लिखिए।
Answer: विरचन की विधियाँ
1. ब्रिन विधि - बेरियम ऑक्साइड वायु में 500°C पर गर्म करने पर बेरियम परॉक्साइड में बदल जाता है तथा बेरियम परॉक्साइड 800°C पर गर्म करने से पुनः BaO और O2 में अपघटित हो जाता है।
\(2BaO + O_2 \xrightarrow{500^oC} 2BaO_2\)
\(2BaO_2 \xrightarrow{800^oC} 2BaO + O_2\)
2. प्रयोगशाला विधि - प्रयोगशाला में ऑक्सीजन गैस पोटैशियम क्लोरेट और मैंगनीज डाइऑक्साइड के मिश्रण को 340°C तक गर्म करके बनायी जाती है।
रासायनिक गुण
ऑक्सीकारक गुण - लगभग सभी तत्त्व ऑक्सीजन से सीधे संयोग करके ऑक्साइड बनाते हैं।
1. \(C + O_2 \longrightarrow CO_2 + \) ऊष्मा \( + \) प्रकाश
2. \(S + O_2 \longrightarrow SO_2 + \) ऊष्मा \( + \) प्रकाश
3. \(4P + 5O_2 \longrightarrow 2P_2O_5 + \) ऊष्मा \( + \) प्रकाश (यह मूल पाठ में `4P + SO2` था, जो गलत है, `4P + 5O2` होना चाहिए)
4. \(3Fe + 2O_2 \longrightarrow Fe_3O_4\)
5. \(CH_4 + 2O_2 \longrightarrow CO_2 + 2H_2O\)
उपयोग
1. ऑक्सीकारक के रूप में
2. श्वसन में,
3. रासायनिक उद्योगों में
4. ऑक्सी-ऐसीटिलीन ज्वाला प्राप्त करने में
In simple words: ऑक्सीजन को ब्रिन विधि या पोटैशियम क्लोरेट और मैंगनीज डाइऑक्साइड के मिश्रण को गर्म करके बनाया जा सकता है। यह एक प्रबल ऑक्सीकारक है जो कई पदार्थों के साथ क्रिया करके ऑक्साइड बनाता है, और इसका उपयोग श्वसन, उद्योग व ऑक्सीकारक के रूप में होता है।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीजन के निर्माण की विभिन्न विधियों के रासायनिक समीकरण, इसके ऑक्सीकारक गुण के उदाहरण और व्यावहारिक उपयोग परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं।
Question 7. सीमेन्स और हाल्सके ओजोनाइजर द्वारा ओजोन के निर्माण का सचित्र वर्णन कीजिए तथा पोटैशियम फैरोसायनाइड और स्टेनस क्लोराइड पर इसकी अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण लिखिए।
Answer: सीमेन्स और हाल्सके ओजोनाइजर द्वारा ओजोन का औद्योगिक निर्माण - ओजोन का औद्योगिक निर्माण सीमेन्स और हाल्सके (Siemens and Halske) ओजोनाइजर द्वारा किया जाता है। इस ओजोनाइजर की रचना संलग्न चित्र में प्रदर्शित है। यह ओजोनाइजर लोहे का एक बॉक्स होता है जिसमें काँच या पॉर्सिलेने की कई बेलनाकार नलियाँ होती हैं। इन नलियों में ऐलुमिनियम की छड़े लगी होती हैं। जिनका निचला सिरा काँच की प्लेट पर टिका रहता है। ये छड़े इलेक्ट्रोडों का कार्य करती हैं।
उपकरण को ठण्डा रखने के लिए बेलनाकार नलियों के चारों ओर ठण्डा जल लगातार प्रवाहित किया जाता है। लोहे के बॉक्स को भू-सम्पर्कित करके छड़ों को लगभग 10 हजार वोल्ट के विभव पर रखा जाता है। ओजोनाइजर के निचले भाग से शुद्ध और शुष्क ऑक्सीजन गैस की मन्द धारा ओजोनाईजर में प्रवाहित की जाती है। छड़ों और नलियों के बीच के वलयाकार अन्तराल (annular space) में ऑक्सीजन प्रवेश करती है तथा ऊपर की ओर उठती है और ओजोन में परिवर्तित हो जाती है। बाहर निकलने वाली ओजोनित ऑक्सीजन में ओजोन आयतन से 10% तक होती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र सीमेन्स और हाल्सके ओजोनाइजर को दर्शाता है, जिसका उपयोग ओजोन के औद्योगिक उत्पादन के लिए होता है। इसमें एक प्रेरण कुण्डली से जुड़े इलेक्ट्रोड होते हैं, जिनके बीच शुष्क ऑक्सीजन प्रवाहित की जाती है। ठण्डा पानी बाहरी जैकेट से प्रवाहित होता है ताकि ताप नियंत्रित रहे। शुद्ध ऑक्सीजन ओजोनित ऑक्सीजन के रूप में बाहर निकलती है।
ओजोन की पोटैशियम फैरोसायनाइड से अभिक्रिया
यह पोटैशियम फैरोसायनाइड को पोटैशियम फैरीसायनाड में ऑक्सीकृत करती है।
ओजोन की स्टैनस क्लोराइड से अभिक्रिया
यह स्टैनस क्लोराइड को स्टैनिक क्लोराइड में ऑक्सीकृत करती है।
In simple words: सीमेन्स और हाल्सके ओजोनाइजर ऑक्सीजन को विद्युत विसर्जन द्वारा ओजोन में परिवर्तित करता है। ओजोन पोटैशियम फैरोसायनाइड को फैरीसायनाइड में और स्टैनस क्लोराइड को स्टैनिक क्लोराइड में ऑक्सीकृत करती है।
🎯 Exam Tip: ओजोन के निर्माण की विधि, उसके औद्योगिक उपयोग और विभिन्न यौगिकों के साथ उसकी ऑक्सीकरण अभिक्रियाएँ महत्वपूर्ण हैं। चित्र को समझना और अभिक्रियाओं को लिखना आवश्यक है।
Question 8. ओजोन एक ऑक्सीकारक एवं अपचायक पदार्थ है। उदाहरणों द्वारा समीकरण देते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए।
Answer: ओजोन एक ऑक्सीकारक एवं अपचायक दोनों है। इसे हम निम्नलिखित उदाहरणों द्वारा समझ सकते हैं -
1. ऑक्सीकारक गुण - ओजोन जल की उपस्थिति में सल्फर को सल्फ्यूरिक अम्ल में ऑक्सीकृत कर देती है।
\(S + H_2O + 3O_3 \longrightarrow H_2SO_4 + 3O_2\)
2. अपचायक गुण - ओजोन बेरियम परॉक्साइड को बेरियम मोनोऑक्साइड में अपचयित कर देती है।
\(BaO_2 + O_3 \longrightarrow BaO + 2O_2 \uparrow\)
In simple words: ओजोन ऑक्सीकारक के रूप में सल्फर को सल्फ्यूरिक अम्ल में बदलती है, और अपचायक के रूप में बेरियम परॉक्साइड को बेरियम मोनोऑक्साइड में अपचयित करती है।
🎯 Exam Tip: ओजोन के ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों गुणों को याद रखें, साथ ही प्रत्येक का एक संतुलित रासायनिक समीकरण भी।
Question 9. ओजोन की मर्करी, शुष्क आयोडीन तथा स्टैनस क्लोराइड से अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए।
Answer:
1. ओजोन की मर्करी से अभिक्रिया का समीकरण
ओजोन मर्करी को मयूरस ऑक्साइड में ऑक्सीकृत कर देती है।
2. ओजोन की शुष्क आयोडीन से अभिक्रिया का समीकरण
ओजोन शुष्क आयोडीन को पीले रंग के ऑक्साइड (I4O9) में ऑक्सीकृत कर देती है।
\(2I_2 + 9O_3 \longrightarrow I_4O_9 + 9O_2\)
शुष्क आयोडीन ओजोन आयोडीन आयोडेट
3. ओजोन की स्टैनस क्लोराइड से अभिक्रिया का समीकरण
ओजोन स्टैनस क्लोराइड को स्टैनिक क्लोराइड में ऑक्सीकृत कर देती है।
\(3SnCl_2 + 6HCl + O_3 \longrightarrow 3SnCl_4 + 3H_2O\)
स्टैनस क्लोराइड ओजोन स्टैनिक क्लोराइड
In simple words: ओजोन मर्करी को मयूरस ऑक्साइड में, शुष्क आयोडीन को I4O9 में और स्टैनस क्लोराइड को स्टैनिक क्लोराइड में ऑक्सीकृत करती है।
🎯 Exam Tip: ओजोन की ऑक्सीकरण अभिक्रियाएँ और उनके उत्पादों के रासायनिक समीकरण परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 10. 'सल्फर के अपररूप' पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: सल्फर के अनेक क्रिस्टलीय अपररूप ज्ञात हैं; जैसे- रोम्बिक सल्फर (rhombic sulphur or d-sulphur), मोनोक्लाइनिक सल्फर (monoclinic sulphur or B-sulphur), अमॉरफस सल्फर (amorphous sulphur), कोलॉइडी सल्फर (colloidal sulphur), प्लास्टिक सल्फर (plastic sulphur) आदि । रोम्बिक सल्फर और मोनोक्लाइनिक सल्फर, सल्फर के दो मुख्य अपररूप हैं। रोम्बिक और मोनोक्लाइनिक सल्फर दोनों के क्रिस्टल S8 अणुओं से बने होते हैं किन्तु क्रिस्टलों में अणओं की व्यवस्था में अन्तर होता है। साधारण ताप पर सल्फर का स्थायी रूप रोम्बिक सल्फर है। गर्म करने पर 95.6°C पर रोम्बिक सल्फर धीरे-धीरे मोनोक्लाइनिक सल्फर में बदल जाती है। 95.6°C से ऊपर के किसी ताप से ठण्डा करने पर मोनोक्लाइनिक सल्फर 95.6°C पर पुनः रोम्बिक सल्फर में बदल जाती है।
95.6°C से नीचे सल्फर का स्थायी रूप रोम्बिक रूप और 95.6°C से ऊपर मोनोक्लाइनिक रूप विद्यमान होता है।
In simple words: सल्फर कई अपररूपों में पाया जाता है, जिनमें रोम्बिक और मोनोक्लाइनिक सल्फर प्रमुख हैं। रोम्बिक सल्फर 95.6°C से नीचे स्थायी होता है, जबकि मोनोक्लाइनिक सल्फर इस तापमान से ऊपर स्थायी होता है, और दोनों में S8 अणु होते हैं।
🎯 Exam Tip: सल्फर के विभिन्न अपररूपों के नाम, उनकी संरचना (S8 अणु), और उनके रूपांतरण के तापमान की जानकारी महत्वपूर्ण है।
Question 11. सल्फर डाइऑक्साइड के निर्माण की प्रयोगशाला विधि का वर्णन कीजिए। इसके ऑक्सीकारक और अपचायक गुण देते हुए इसके उपयोग भी दीजिए।
Answer: प्रयोगशाला विधि - प्रयोगशाला में सल्फर डाइऑक्साइड गैस कॉपर धातु की छीलन को सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म करके बनाई जाती है।
\(Cu + 2H_2SO_4 \longrightarrow CuSO_4 + 2H_2O + SO_2\)
ऑक्सीकारक गुण - सल्फर डाइऑक्साइड अनेक क्रियाओं में ऑक्सीकारक का कार्य करती हैं; जैसे-
1. H2S का S में ऑक्सीकरण
\(2H_2S + SO_2 \longrightarrow 3S + 2H_2O\)
2. आयरन का फेरस ऑक्साइड में ऑक्सीकरण
\(3Fe + SO_2 \longrightarrow 2FeO + FeS\)
अपचायक गुण - सल्फर डाइऑक्साइड अनेक क्रियाओं में अपचायक का कार्य करती हैं; जैसे-
1. \(K_2Cr_2O_7\) का \(Cr_2(SO_4)_3\) में अपचयन
\(K_2Cr_2O_7 + H_2SO_4 + 3SO_2 \longrightarrow K_2SO_4 + Cr_2(SO_4)_3 + H_2O\)
2. Cl को HCl में अपचयन
\(Cl_2 + 2H_2O + SO_2 \longrightarrow H_2SO_4 + 2HCl\)
उपयोग
1. ऑक्सीकारक के रूप में
2. अपचायक के रूप में
3. कीटाणु और रोगाणुनाशक के रूप में
4. चीनी उद्योग में
In simple words: सल्फर डाइऑक्साइड को प्रयोगशाला में कॉपर और सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल को गर्म करके बनाते हैं। यह H2S को सल्फर में ऑक्सीकृत करके और पोटेशियम डाइक्रोमेट को Cr2(SO4)3 में अपचयित करके ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों गुणों को प्रदर्शित करती है। इसका उपयोग ऑक्सीकारक, अपचायक, कीटाणुनाशक और चीनी उद्योग में होता है।
🎯 Exam Tip: सल्फर डाइऑक्साइड की प्रयोगशाला विधि, उसके ऑक्सीकारक और अपचायक गुणों के उदाहरण, और विभिन्न उपयोगों को याद रखना महत्वपूर्ण है। रासायनिक समीकरणों पर विशेष ध्यान दें।
Question 12. सीसा कक्ष विधि द्वारा सल्फ्यूरिक अम्ल के निर्माण का सचित्र वर्णन कीजिए। संयंत्र के प्रत्येक भाग में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण भी दीजिए।
Answer: सीसा कक्ष विधि द्वारा सल्फ्यूरिक अम्ल का निर्माण करने में सल्फर डाइऑक्साइड, वायु और नाइट्रिक ऑक्साइड (उत्प्रेरक) मिश्रण के भाग से क्रिया कराने पर सल्फ्यूरिक अम्ल प्राप्त होता है।
\(2SO_2 + O_2 + 2[NO] + 2H_2O \longrightarrow 2H_2SO_4 + 2[NO]\)
सल्फर डाइ ऑक्साइड (वायु) (उत्प्रेरक) (भाप) सल्फ्यूरिक अम्ल उत्प्रेरक
इस विधि द्वारा सल्फ्यूरिक अम्ल का निर्माण करने में प्रयुक्त संयंत्र संलग्न चित्र में प्रदर्शित है। इस संयंत्र के गुणक भाग और उनमें होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण निम्नवत् हैं -
1. पाइराइट बर्नर -
\(4FeS_2 + 11O_2 \longrightarrow 2Fe_2O_3 + 8SO_2\)
\(S + O_2 \longrightarrow SO_2\)
2. धूल कक्ष - पाइराइट बर्नर में प्राप्त सल्फर डाइऑक्साइड गैस और वायु के मिश्रण को धूल कक्ष में भेजा जाता है। इस कक्ष में गैसीय मिश्रण भाप के सम्पर्क में आता है और उसमें उपस्थित धूल के कण भारी होकर कक्ष की पेंदी में बैठ जाते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह सीसा कक्ष विधि द्वारा सल्फ्यूरिक अम्ल के निर्माण के संयंत्र का प्रवाह चित्र है। इसमें Glover tower, Lead chambers, और Gay-Lussac tower जैसे मुख्य भाग शामिल हैं, जहाँ सल्फर डाइऑक्साइड, वायु, नाइट्रोजन के ऑक्साइड और पानी की भाप विभिन्न चरणों में सल्फ्यूरिक अम्ल बनाने के लिए प्रतिक्रिया करते हैं।
3. नाइटर पात्र
\(4NH_3 + 5O_2 \xrightarrow{Pt~जाली} 4NO + 6H_2O\)
वायु
4. ग्लोवर टावर
\(SO_2 + NO_2 + H_2O \longrightarrow H_2SO_4 + NO\)
\(2(NO \cdot HSO_4) + H_2O \longrightarrow 2H_2SO_4 + NO_2 + NO\)
5. सीसा कक्ष
\(2SO_2 + O_2 + 2NO + 2H_2O \longrightarrow 2H_2SO_4 + 2NO\)
6. गे-लुसैक टावर
\(2H_2SO_4 + NO + NO_2 \longrightarrow 2(NO \cdot HSO_4) + H_2O\)
In simple words: सीसा कक्ष विधि सल्फ्यूरिक अम्ल बनाने के लिए सल्फर डाइऑक्साइड, वायु, नाइट्रिक ऑक्साइड और पानी का उपयोग करती है। यह प्रक्रिया कई चरणों में होती है, जिसमें पाइराइट बर्नर में SO2 का उत्पादन, धूल कक्ष में शुद्धिकरण, और ग्लोवर, सीसा कक्ष और गे-लुसैक टावर में आगे की प्रतिक्रियाएँ शामिल हैं, जहाँ NO उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है।
🎯 Exam Tip: सीसा कक्ष विधि की प्रक्रिया के प्रत्येक चरण को चित्र सहित समझें। प्रत्येक भाग में होने वाली अभिक्रियाओं के संतुलित समीकरणों को याद रखना और विधि के समग्र सिद्धांतों को जानना महत्वपूर्ण है।
Question 13. सल्फ्यूरिक अम्ल एक ऑक्सीकारक एवं निर्जलीकारक है। इसके एक-एक उदाहरण दीजिए।
Answer:
1. ऑक्सीकारक गुण - गर्म करने पर सान्द्र H2SO4 अपघटित होकर ऑक्सीजन परमाणु देता है और ऑक्सीकारक का कार्य करता है।
\(H_2SO_4 \longrightarrow SO_2 + H_2O + O\)
(i) HBr तथा HI को क्रमशः Br2 और I2 में ऑक्सीकृत कर देता है।
\(2HBr + H_2SO_4 \longrightarrow Br_2 \uparrow + SO_2 \uparrow + 2H_2O\)
\(2HI + H_2SO_4 \longrightarrow I_2 \uparrow + SO_2 \uparrow + 2H_2O\)
(ii) कार्बन को CO2 में तथा सल्फर को SO2 में ऑक्सीकृत करता है।
\(C + 2H_2SO_4 \longrightarrow CO_2 \uparrow + 2SO_2 \uparrow + 2H_2O\)
\(S + 2H_2SO_4 \longrightarrow 3SO_2 \uparrow + 2H_2O\)
2. निर्जलीकारक गुण - यह कार्बनिक यौगिकों; जैसे-चीनी, फॉर्मिक अम्ल तथा ऑक्लैलिक अम्ल से जल का शोषण कर लेता है। अतः चीनी काली पड़ जाती है।
\(C_{12}H_{22}O_{11} + [H_2SO_4] \longrightarrow 12C + [H_2SO_4 \cdot 11H_2O]\)
चीनी
\(HCOOH + [H_2SO_4] \longrightarrow CO \uparrow + [H_2SO_4 \cdot H_2O]\)
\(COOH\)
\(COOH + [H_2SO_4] \longrightarrow CO \uparrow + CO_2 \uparrow + [H_2SO_4 \cdot H_2O]\)
In simple words: सल्फ्यूरिक अम्ल एक ऑक्सीकारक है, जो HBr और HI को क्रमशः Br2 और I2 में ऑक्सीकृत करता है, तथा कार्बन और सल्फर को CO2 और SO2 में बदलता है। यह एक शक्तिशाली निर्जलीकारक भी है, जो चीनी और फॉर्मिक अम्ल जैसे कार्बनिक यौगिकों से जल को अवशोषित करता है।
🎯 Exam Tip: सल्फ्यूरिक अम्ल के ऑक्सीकारक और निर्जलीकारक गुणों के विभिन्न उदाहरणों और उनके संबंधित रासायनिक समीकरणों को अच्छी तरह से तैयार करें।
Question 14. क्लोरीन, ब्रोमीन तथा आयोडीन के फ्लोरीन से बने किन्हीं चार अन्तरा हैलोजन यौगिकों के बनाने का रासायनिक समीकरण दीजिए।
Answer: अन्तरा हैलोजन यौगिक दो भिन्न हैलोजनों के सीधे संयोग द्वारा या निम्न अन्तरा हैलोजन यौगिक की हैलोजन से क्रिया द्वारा बनाए जाते हैं।
\(Cl_2 + F_2 \xrightarrow{250^oC} 2ClF\)
\(Cl_2 + 3F_2 \text{ (आधिक्य)} \xrightarrow{500^oC} 2ClF_3\)
\(Br_2 + 5F_2 \text{ (आधिक्य)} \xrightarrow{500^oC} 2BrF_5\)
\(IF_5 + F_2 \longrightarrow IF_7\)
In simple words: अन्तरा हैलोजन यौगिक दो अलग-अलग हैलोजन परमाणुओं के सीधे संयोजन से बनते हैं। उदाहरण के लिए, क्लोरीन और फ्लोरीन विभिन्न तापमानों पर क्रिया करके ClF और ClF3 बनाते हैं, जबकि ब्रोमीन और फ्लोरीन BrF5 बनाते हैं, और IF5 फ्लोरीन के साथ क्रिया करके IF7 बनाता है।
🎯 Exam Tip: अन्तरा हैलोजन यौगिकों के निर्माण की विधियों को याद रखें, विशेषकर विभिन्न परिस्थितियों में प्राप्त होने वाले उत्पादों को। संतुलित रासायनिक समीकरणों पर ध्यान दें।
Question 15. अन्तरा हैलोजन यौगिक क्या हैं? उदाहरण द्वारा समझाइए । AB3 प्रकार के क्लोरीन तथा फ्लोरीन के अन्तरा हैलोजन यौगिक बनाने का रासायनिक समीकरण लिखिए।
या
ClF3 के बनाने की विधि का ताप तथा दाब की परिस्थितियों को दिखाते हुए रासायनिक समीकरण लिखिए।
Answer: दो भिन्न हैलोजन परमाणु X तथा X' से बने यौगिक अन्तरा हैलोजन यौगिक कहलाते हैं। इनका सामान्य सूत्र XX' और XX'n है। (जहाँ n = 3 से 7 तक)
IF को छोड़कर सभी XX' प्रकार के अन्तराहैलोजन यौगिक बनाये गए हैं।
AB3 प्रकार के क्लोरीन तथा फ्लोरीन के अन्तरा हैलोजन यौगिक
\(Cl_2 + 3F_2 \xrightarrow{300^oC} 2ClF_3\)
In simple words: अन्तरा हैलोजन यौगिक दो भिन्न हैलोजन परमाणुओं से बने होते हैं। उदाहरण के लिए, क्लोरीन और फ्लोरीन 300°C पर क्रिया करके ClF3 बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: अन्तरा हैलोजन यौगिकों की परिभाषा, उनके सामान्य सूत्र, और ClF3 जैसे विशिष्ट यौगिकों के निर्माण की शर्तों और समीकरणों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 16. आवर्त सारणी में अक्रिय गैसों के स्थान की विवेचना कीजिए।
Answer: आवर्त सारणी में अक्रिय गैसों को दायीं ओर शून्य समूह (वर्ग-18) में रखा गया है। इन तत्त्वों को इनके गुणों में समानता होने के कारण एक साथ रखा गया है। He को छोड़कर सभी अक्रिय गैसों के बाह्य कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं। रेडॉन को छोड़कर सभी अक्रिय गैसें वायुमण्डल में मौजूद हैं। आन्तरिक और बाह्य सभी कोश पूर्ण होने के कारण ये रासायनिक रूप से निष्क्रिय होती हैं। अतः इन्हें अक्रिय गैस कहा जाता है।
In simple words: अक्रिय गैसों को आवर्त सारणी के वर्ग-18 में रखा गया है क्योंकि उनके बाह्यतम कोश पूर्ण होते हैं, जिससे वे रासायनिक रूप से निष्क्रिय होते हैं।
🎯 Exam Tip: अक्रिय गैसों की आवर्त सारणी में स्थिति, उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की स्थिरता और रासायनिक निष्क्रियता के कारणों को समझना महत्वपूर्ण है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर नाइट्रोजन वर्ग (पाँचवे वर्ग) के तत्त्वों की आवर्त सारणी में स्थिति की विवेचना कीजिए।
Answer: नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, आर्सेनिक, ऐण्टिमनी तथा बिस्मथ को आवर्त सारणी के V-A उपसमूह में रखा गया है। इन तत्त्वों को नाइट्रोजन परिवार के तत्त्व कहते हैं। इन्हें प्रायः निक्टोजन (Pnictogen) भी कहते हैं। ये तत्त्व p-ब्लॉक के तत्त्व हैं।
इनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न प्रकार है -
\(^7N = 2,5 = 1s^2, 2s^2 2p^3\)
\(^{15}P = 2,8,5 = 1s^2, 2s^2 2p^6, 3s^2 3p^3\)
\(^{33}As = 2,8,18,5 = 1s^2, 2s^2 2p^6, 3s^2 3p^6 3d^{10}, 4s^2 4p^3\)
\(^{51}Sb = 2,8,18,18,5 = 1s^2, 2s^2 2p^6, 3s^2 3p^6 3d^{10}, 4s^2 4p^6 4d^{10}, 5s^2 5p^3\)
\(^{83}Bi = 2,8,18,32,18,5 = 1s^2, 2s^2 2p^6, 3s^2 3p^6 3d^{10}, 4s^2 4p^6 4d^{10} 4f^{14}, 5s^2 5p^6 5d^{10}, 6s^2 6p^3\)
सभी तत्त्वों के बाहरी कोश में 5 इलेक्ट्रॉन हैं और बाह्यतम कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \(ns^2 np^3\) है। भीतर के सभी उपकोश पूर्ण हैं। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में समानता होने के कारण इनको एक ही उपसमूह में रखा जाना उचित है। इनके गुणों में समानता तथा उनमें क्रमिक परिवर्तन तत्त्वों को एक ही उपवर्ग में रखे जाने की पुष्टि करते हैं।
गुणों में समानता
1. इन तत्त्वों की मुख्य संयोजकता 3 तथा 5 है।
2. ये (N2 को छोड़कर) स्वतन्त्र अवस्था में नहीं पाये जाते हैं।
3. N2 के अतिरिक्त सभी ठोस हैं।
4. N2 को छोड़कर सभी अपररूपता प्रदर्शित करते हैं।
5. ये सभी हाइड्राइड बनाते हैं और सभी सहसंयोजक यौगिक हैं; जैसे- NH3, PH3, AsH3, SbH3 तथा BiH3.
6. ये सभी बहु-परमाणुकता प्रकट करते हैं।
7. ये सभी M2O3 तथा M2O5 प्रकार के ऑक्साइड बनाते हैं। नाइट्रोजन N2O, NO, NO2 प्रकार के भी ऑक्साइड बनाती है।
8. ये सभी MX3 प्रकार के हैलाइड बनाते हैं, जिनका जल-अपघटन हो जाता है।
\(NCl_3 + 3H_2O \longrightarrow NH_3 \uparrow + 3HOCl\)
\(PCl_3 + 3H_2O \longrightarrow H_3PO_3 + 3HCl\)
फॉस्फोरस अम्ल
\(AsCl_3 + 3H_2O \longrightarrow H_3AsO_3 + 3HCl\)
आर्सीनियस अम्ल
\(SbCl_3 + H_2O \longrightarrow SbOCl + 2HCl\)
ऐण्टिमनी ऑक्सीक्लोराइड
गुणों में क्रमिक परिवर्तन - परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ-साथ ऊपर से नीचे की ओर चलने पर
1. परमाणु त्रिज्या तथा इलेक्ट्रॉन बन्धुता बढ़ती है।
In simple words: नाइट्रोजन परिवार के तत्व (वर्ग 15) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns²np³ होता है, जिससे इनके गुणों में समानता दिखती है। इनकी संयोजकता 3 और 5 होती है, और ये हाइड्राइड, ऑक्साइड और हैलाइड बनाते हैं। समूह में नीचे जाने पर धात्विक गुण बढ़ते हैं और आयनन विभव घटता है।
🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन परिवार के तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, संयोजकता, हाइड्राइडों, ऑक्साइडों और हैलाइडों की सामान्य अभिक्रियाएँ, साथ ही समूह में गुणों में क्रमिक परिवर्तनों को याद रखें।
Question 2. हेबर विधि द्वारा अमोनिया के औद्योगिक निर्माण का नामांकित चित्र सहित वर्णन कीजिए। इसके दो प्रमुख गुण एवं दो उपयोग लिखिए। इस विधि में ला-शातेलिए नियम का क्या महत्त्व है ?
Answer: हेबर विधि का सिद्धान्त-यदि शुद्ध नाइट्रोजन और हाइड्रोजन के 1 : 3 अनुपात के मिश्रण को गर्म किया जाए तो अमोनिया बनती है।
यह एक ऊष्माक्षेपी उत्क्रमणीय अभिक्रिया है और क्रिया के पश्चात् आयतन में कमी होती है, इसलिए ला-शातेलिए के नियमानुसार कम ताप और अधिक दाब पर अमोनिया अधिक उत्पन्न होगी। कम ताप पर अभिक्रिया का वेग बढ़ाने के लिए एक उत्प्रेरक प्रयोग किया जाता है। इस अभिक्रिया का उत्प्रेरक की उपस्थिति में अनुकूलतम ताप 450°-500°C तथा उच्च दाब 200 वायुमण्डल है; क्योंकि अभिक्रिया उत्क्रमणीय है, इसलिए अमोनिया को बराबर क्रिया क्षेत्र से हटाने के बाद, अमोनिया गैस अधिक बनेगी। इस अभिक्रिया में लोहे का बारीक चूर्ण (उत्प्रेरक) तथा मॉलिब्डेनम (उत्प्रेरक वर्धक) की सूक्ष्म मात्रा प्रयुक्त होती है। इसमें गैसीय मिश्रण शुद्ध होना चाहिए जिससे उत्प्रेरक विषाक्त न हो ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह हेबर प्रक्रम द्वारा अमोनिया के निर्माण का प्रवाह चित्र है। इसमें नाइट्रोजन और हाइड्रोजन को 1:3 अनुपात में कंप्रेसर पम्प के माध्यम से उत्प्रेरक कक्ष में भेजा जाता है। उत्प्रेरक कक्ष में आयरन और मॉलिब्डेनम उत्प्रेरक की उपस्थिति में अभिक्रिया होती है। बनी हुई अमोनिया को संघनित्र में द्रवित किया जाता है, और असम्बद्ध गैसों को वापस उत्प्रेरक कक्ष में भेज दिया जाता है।
विधि- शुद्ध N2 तथा H2 को 1 : 3 अनुपात में मिलाकर 200 वायुमण्डल दाब पर तप्त लोहे के बारीक चूर्ण (उत्प्रेरक) को, जिसमें मॉलिब्डेनम (उत्प्रेरक वर्धक) मिला होता है, 500°C ताप पर गर्म करते हैं। इस विधि में 10 - 15% अमोनिया बनती है, जिसे संघनित्र में प्रवाहित करके द्रवित कर लेते हैं। शेष गैसों को फिर से उत्प्रेरक कक्ष में प्रवाहित करते हैं जिससे N2 व H2 के संयोजन द्वारा NH3 का लगातार उत्पादन होता रहता है।
रासायनिक गुण
1. क्षारीय गुण - यह क्षारीय गैस है तथा लाल लिटमस को नीला कर देती है। यह अम्लों से क्रिया करके लवण बनाती है।
\(NH_3 + HCl \longrightarrow NH_4Cl\)
अमोनियम क्लोराइड
\(2NH_3 + H_2SO_4 \longrightarrow (NH_4)_2SO_4\)
अमोनियम सल्फेट
2. धातु ऑक्साइडों का अपचयन - यह धातु ऑक्साइडों को अपचयित कर देती है।
\(3CuO+ 2NH_3 \xrightarrow{रक्त~तप्त} 3Cu + N_2 \uparrow + 3H_2O\)
कॉपर नाइट्रोजन
\(3PbO+ 2NH_3 \xrightarrow{रक्त~तप्त} 3Pb + N_2 \uparrow + 3H_2O\)
\(3FeO+ 2NH_3 \xrightarrow{रक्त~तप्त} 3Fe \downarrow + N_2 \uparrow + 3H_2O\)
उपयोग
1. प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में।
2. बर्फ बनाने तथा कोल्ड स्टोरेज में प्रशीतक के रूप में; क्योंकि इसके वाष्पन की गुप्त ऊष्मा 327 कैलोरी/ग्राम (उच्च) होती है।
In simple words: हेबर विधि में नाइट्रोजन और हाइड्रोजन 1:3 अनुपात में, उच्च दाब और अनुकूल तापमान (450-500°C) पर आयरन और मोलिब्डेनम उत्प्रेरक की उपस्थिति में अमोनिया बनाते हैं। ला-शातेलिए के नियम के अनुसार, निम्न ताप और उच्च दाब पर अधिक अमोनिया बनती है। अमोनिया एक क्षारीय गैस है जो धातु ऑक्साइडों को अपचयित करती है और इसका उपयोग अभिकर्मक तथा प्रशीतक के रूप में होता है।
🎯 Exam Tip: हेबर विधि के सिद्धांत (ला-शातेलिए नियम का अनुप्रयोग), नामांकित चित्र, प्रमुख रासायनिक गुण और उपयोग, साथ ही संतुलित रासायनिक समीकरणों पर विशेष ध्यान दें।
Question 3. प्रयोगशाला में नाइट्रस ऑक्साइड बनाने की विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। नाइट्रस ऑक्साइड के दो प्रमुख रासायनिक गुण एवं दो उपयोग लिखिए।
Answer: प्रयोगशाला में नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) को सोडियम नाइट्रेट तथा अमोनियम सल्फेट के मिश्रण को अथवा केवल अमोनियम नाइट्रेट को गर्म करके बनाया जाता है।
\(2NaNO_3 + (NH_4)_2SO_4 \xrightarrow{गर्म} 2NH_4NO_3 + Na_2SO_4\)
\(NH_4NO_3 \xrightarrow{गर्म} N_2O + 2H_2O\)
अमोनियम सल्फेट व सोडियम नाइट्रेट के मिश्रण को एक गोल पेंदे के फ्लास्क में लेकर गर्म किया जाता है। इस क्रिया से N2O बनती है, जिसमें Cl2, NO व NH3 की अशुद्धियाँ होती हैं। अतः इस गैस को क्रमशः NaOH विलयन, FeSO4 विलयन व सान्द्र H2SO4 में से प्रवाहित किया जाता है जहाँ क्रमशः Cl2, NO व NH3 एवं जल-वाष्प आदि अशुद्धियाँ अवशोषित हो जाती हैं। N2O ठण्डे जल में अत्यन्त विलेय है; अतः इसे गर्म पानी के ऊपर गैस जार में एकत्रित कर लेते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र प्रयोगशाला में नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) के निर्माण को दर्शाता है। एक फ्लास्क में अमोनियम सल्फेट और सोडियम नाइट्रेट का मिश्रण गर्म किया जाता है। उत्पादित गैस को NaOH, फेरस सल्फेट और सल्फ्यूरिक अम्ल के विलयन से गुजारा जाता है ताकि अशुद्धियाँ हट जाएं। अंत में, शुद्ध N2O गैस को गर्म जल पर गैस जार में एकत्रित किया जाता है।
रासायनिक गुण
1. सोडामाइड से अभिक्रिया होने पर सोडियम ऐजाइड बनता है।
\(NaNH_2 + N_2O \longrightarrow NaN_3 + H_2O\)
2. KMnO4 इसको नाइट्रिक ऑक्साइड में ऑक्सीकृत कर देता है।
\(N_2O + [O] \xrightarrow{KMnO_4/H_2SO_4} 2NO \uparrow\)
उपयोग
1. ऑक्सीजन के साथ इसका मिश्रण दाँतों की शल्य चिकित्सा (dental surgery) में निश्चेतक (anaesthetic) के रूप में प्रयोग किया जाता है।
2. सोडियम ऐजाइड बनाने में।
In simple words: नाइट्रस ऑक्साइड को अमोनियम नाइट्रेट को गर्म करके प्रयोगशाला में बनाया जाता है। यह गैस वायु से भारी, रंगहीन और जल में कम घुलनशील होती है। इसके रासायनिक गुणों में सोडामाइड से सोडियम ऐजाइड बनाना और KMnO4 द्वारा ऑक्सीकृत होना शामिल है। इसका उपयोग निश्चेतक और सोडियम ऐजाइड बनाने में होता है।
🎯 Exam Tip: नाइट्रस ऑक्साइड के प्रयोगशाला निर्माण की विधि, नामांकित चित्र, रासायनिक अभिक्रियाएँ, और उनके उपयोगों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 4. ओस्टवाल्ड विधि द्वारा नाइट्रिक अम्ल के औद्योगिक निर्माण का सचित्र वर्णन कीजिए । सम्बन्धित अभिक्रियाओं का समीकरण दीजिए । तनु नाइट्रिक अम्ल (20%) की लेड पर अभिक्रिया लिखिए।
या
अमोनिया से नाइट्रिक अम्ल के निर्माण की विधि का सचित्र वर्णन कीजिए तथा अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण भी दीजिए। Cu पर इस अम्ल की क्रिया किस प्रकार होती है? यदि अम्ल (i) गर्म और सान्द्र हो (ii) ठण्डा और तनु हो। सभी अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए।
Answer: ओस्टवाल्ड विधि- इसमें अमोनिया गैस वायु से ऑक्सीकृत होकर नाइट्रिक ऑक्साइड बनाती है जो फिर ऑक्सीकृत होकर नाइट्रोजन डाइऑक्साइड देती है। यह जल से क्रिया करके नाइट्रिक अम्ल में परिवर्तित हो जाती है।
\(4NH_3 + 5O_2 \xrightarrow{Pt} 4NO + 6H_2O\)
\(2NO + O_2 \longrightarrow 2NO_2\)
\(3NO_2 + H_2O \longrightarrow 2HNO_3 + NO \uparrow\)
शुद्ध NH3 व वायु का मिश्रण 1 : 9 के अनुपात में परिवर्तक में प्रवाहित किया जाता है। यहाँ प्लेटिनम की जाली 650° - 800°C पर गर्म रखी जाती है जो उत्प्रेरक का कार्य करती है। यहाँ NH3 का 90% भाग ऑक्सीकृत होकर नाइट्रिक ऑक्साइड बनाता है। अब गैसों का मिश्रण ऑक्सीकारक स्तम्भ में पहुँचाया जाता है, जहाँ NO ऑक्सीकृत होकर नाइट्रोजन डाइऑक्साइड देती है। NO2 अवशोषण स्तम्भ में जल में अवशोषित होकर नाइट्रिक अम्ल बनाती है। इस प्रकार प्राप्त नाइट्रिक अम्ल तनु होता है। इसका आसवन करने पर एक निश्चित क्वथनांक का मिश्रण प्राप्त होता है, जिसे साधारण सान्द्र नाइट्रिक अम्ल कहते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह ओस्टवाल्ड विधि द्वारा नाइट्रिक अम्ल के निर्माण का प्रवाह चित्र है। इसमें अमोनिया और वायु के मिश्रण को उत्प्रेरक (प्लेटिनम जाली) पर 800°C पर क्रिया कराया जाता है, जिससे NO बनता है। NO फिर ऑक्सीकारक स्तम्भ में NO2 में बदलता है, जिसे अवशोषण स्तम्भ में जल के साथ क्रिया कराकर तनु नाइट्रिक अम्ल प्राप्त किया जाता है।
तनु नाइट्रिक अम्ल की लेड पर अभिक्रिया - इस अभिक्रिया के फलस्वरूप लेड नाइट्रेट, NO व जल बनता है।
\( [Pb + 2HNO_3 \longrightarrow Pb(NO_3)_2 + 2H] \times 3 \)
\( [HNO_3 + 3H \longrightarrow NO + 2H_2O] \times 2 \)
\( 3Pb + 8HNO_3 \longrightarrow 3Pb(NO_3)_2 + 2NO \uparrow + 4H_2O \)
लेड नाइट्रेट नाइट्रिक ऑक्साइड
Cu पर क्रिया
1. गर्म और सान्द्र HNO3 कॉपर से क्रिया करके Cu (NO3)2, N2 और जल देता है।
\(5Cu + 12HNO_3 \longrightarrow 5Cu(NO_3)_2 + N_2 \uparrow + 6H_2O\)
2. ठण्डा और तनु HNO, कॉपर से क्रिया करके Cu(NO3)2 N2O और जल देता है।
\(4Cu + 10HNO_3 \longrightarrow 4Cu(NO_3)_2 + N_2O \uparrow + 5H_2O\)
In simple words: ओस्टवाल्ड विधि में, अमोनिया का प्लेटिनम उत्प्रेरक पर ऑक्सीकरण करके नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) बनाया जाता है, जो फिर ऑक्सीजन से क्रिया करके नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) बनता है। NO2 जल से क्रिया करके नाइट्रिक अम्ल (HNO3) बनाता है। तनु HNO3 लेड के साथ लेड नाइट्रेट और NO देता है, जबकि कॉपर के साथ HNO3 की सान्द्रता के आधार पर अलग-अलग उत्पाद (N2 या N2O) प्राप्त होते हैं।
🎯 Exam Tip: ओस्टवाल्ड विधि की पूरी प्रक्रिया, सभी मध्यवर्ती चरणों के रासायनिक समीकरणों, नामांकित चित्र, और विभिन्न धातुओं के साथ नाइट्रिक अम्ल की अभिक्रियाओं को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 5. हड्डी की राख से फॉस्फोरस प्राप्त करने की आधुनिक विधि का वर्णन कीजिए। फॉस्फोरस से फॉस्फीन गैस कैसे बनाओगे?
Answer: हड्डियों की राख या खनिज कैल्सियम फॉस्फेट \( [Ca_3(PO_4)_2] \) को कोक एवं रेत के साथ मिलाकर हॉपर मार्ग से पेचदार चालक की सहायता से विद्युत भट्टी में गिराते हैं। इस भट्ठी में दो कार्बन इलेक्ट्रोड होते हैं जिनके बीच विद्युत आर्क उत्पन्न किया जाता है। जिसके फलस्वरूप 1500°C ताप उत्पन्न हो जाता है। सर्वप्रथम कैल्सियम फॉस्फेट \( [Ca_3(PO_4)_2] \), रेत (SiO2) के साथ क्रिया कर कैल्सियम सिलिकेट (CaSiO3) और फॉस्फोरस पेन्टॉक्साइड (P2O5) बनाता है। फिर P2O5 कार्बन द्वारा अपचयित होकर फॉस्फोरस की वाष्प देता है। यह वाष्प ऊपर के द्वार से निकलकर जल में ठोस रूप में एकत्रित हो जाती है। कैल्सियम सिलिकेट (धातुमल) नीचे के द्वार से निकाल लिया जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र शुद्ध सफेद फॉस्फोरस के निर्माण की प्रक्रिया को दर्शाता है। इसमें एक विद्युत भट्टी में हॉपर के माध्यम से कैल्सियम फॉस्फेट, बालू (रेत), और कोक का मिश्रण डाला जाता है। कार्बन इलेक्ट्रोडों के बीच उत्पन्न उच्च ताप पर अभिक्रिया होती है, जिससे फॉस्फोरस की वाष्प ऊपर से निकलती है और नीचे से कैल्सियम सिलिकेट धातुमल के रूप में बाहर निकलता है।
\(Ca_3(PO_4)_2 + 3SiO_2 \xrightarrow{1500^oC} 3CaSiO_3 + P_2O_5\)
कैल्सियम फॉस्फेट कैल्सियम सिलिकेट
\(2P_2O_5 + 10C \longrightarrow P_4 + 10CO \uparrow\)
शुद्धिकरण - इस प्रकार प्राप्त फॉस्फोरस में कुछ अशुद्धियाँ होती हैं। इनको पृथक् करने के लिए एक टैंक में अशुद्ध फॉस्फोरस को क्रोमिक अम्ल (\(K_2Cr_2O_7 + \) सान्द्र H2SO4) में डालकर पिघलाते हैं। इससे अशुद्धियाँ ऑक्सीकृत होकर मल के रूप में द्रव के ऊपर तैरने लगती हैं और फॉस्फोरस एक निर्मल और रंगहीन द्रव के रूप में टैंक के पेंदी में बैठ जाता है। पिघले हुए फॉस्फोरस को एक लम्बी नली में से प्रवाहित करते हैं जिसमें वह ठण्डा होकर जम जाता है। नली में जल डालकर ठोस फॉस्फोरस को जल में एकत्रित करते हैं।
फॉस्फोरस से फॉस्फीन गैस बनाना - फॉस्फोरस को निष्क्रिय वातावरण में NaOH के सान्द्र विलयन के साथ गर्म करने पर फॉस्फीन गैस बनती है।
\(P_4 + 3NaOH + 3H_2O \xrightarrow{निष्क्रिय~वातावरण} 3NaH_2PO_2 + PH_3 \uparrow\)
फॉस्फीन
In simple words: फॉस्फोरस को हड्डी की राख (कैल्सियम फॉस्फेट), रेत और कोक को विद्युत भट्टी में गर्म करके बनाया जाता है, जहाँ P2O5 कार्बन से अपचयित होकर P4 वाष्प देता है। फॉस्फोरस को NaOH के साथ अक्रिय वातावरण में गर्म करके फॉस्फीन गैस बनाई जाती है।
🎯 Exam Tip: फॉस्फोरस के निष्कर्षण की विधि (रासायनिक समीकरणों सहित), शुद्धिकरण की प्रक्रिया, और फॉस्फीन बनाने की विधि का अच्छी तरह से अध्ययन करें।
Question 6. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी में ऑक्सीजन एवं सल्फर तत्त्वों की स्थिति की विवेचना कीजिए।
या
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी में ऑक्सीजन परिवार (VI-A वर्ग के तत्त्वों) के तत्त्वों की स्थिति की विवेचना कीजिए।
Answer: मेंडलीव की आवर्त सारणी के VI-A समूह में पाँच तत्त्व हैं। तत्त्वों का यह परिवार 'ऑक्सीजन परिवार' कहलाता है। इस समूह के प्रथम चार तत्त्वों को सामूहिक रूप में 'कैल्कोजन' (chalcogen) के रूप में पुकारा जाता है। इस समूह में परमाणु भार की वृद्धि के साथ धात्विक या धन विद्युतीय गुण बढ़ता है तथा घनत्व, क्वथनांक और गलनांक में वृद्धि होती है। इस समूह में O, S अधातु हैं, जबकि Se व Te उपधातुएँ हैं और Po धातु है।
VI समूह
ऑक्सीजन \(O\)
सल्फर \(S\)
सेलीनियम \(Se\) \(Cr\)
टेल्यूरियम \(Te\) \(Mo\)
पोलोनियम \(Po\) \(W\)
(A) (B)
रासायनिक गुणों में ऑक्सीजन, परिवार के अन्य तत्त्वों से भिन्न है, परन्तु अन्य सभी तत्त्वों के गुणों में समानता पाई जाती है।
1. ऑक्सीजन, सल्फर व सेलीनियम परमाणु के बाह्यतम संयोजी कक्ष में 6 इलेक्ट्रॉन हैं।
\(^8O = 2,6 = 1s^2, 2s^2 2p^4\)
\(^{16}S = 2,8,6 = 1s^2, 2s^2 2p^6, 3s^2 3p^4\)
\(^{34}Se = 2,8,18,6 = 1s^2, 2s^2 2p^6, 3s^2 3p^6 3d^{10}, 4s^2 4p^4\)
अतः इन तीनों तत्त्वों के परमाणु रासायनिक अभिक्रिया में अन्य परमाणुओं से 2 इलेक्ट्रॉन लेकर अथवा 2 इलेक्ट्रॉन के जोड़े साझा करके अपनी बाह्यतम कक्ष में अधिकतम इलेक्ट्रॉन (8) प्राप्त करने हेतु संयोग करते हैं।
2. तीनों ही अधातु हैं (Se धात्विक गुण भी रखती है) जो प्रकृति में स्वतन्त्र व संयुक्त अवस्था में पाये जाते है।
3. तीनों समान यौगिक बनाते हैं।
CO2, H2O, P2O5, As2O5,
SO2, H2S, P2S5, As2S5,
SeO2, H2Se, P2Se3,
C2H2OH तथा C2H2SH; C2H2-O-C2H5 तथा C2H5-S-C2H5
4. तीनों ही हाइड्रोजन के साथ संयोग कर लेते हैं।
H2O, H2S, H2S3, H2Se,
H2O2, H2S2, H2S4
5. तीनों ही RO2 प्रकार के ऑक्साइड बनाते हैं; जैसे- O3, SO2, SeO2 आदि । O3 ऑक्सीजन का ऑक्साइड माना जाता है।
6. तीनों ही कार्बन के साथ संयोग करके क्रमशः CO2, CS2 व CSe2 बनाते हैं।
7. तीनों ही अपररूपती प्रदर्शित करते हैं।
8. तीनों तत्त्व ऑक्सीजन, सल्फर व सेलीनियम शृंखलन गुण भी व्यक्त करते हैं।
9. धातु से क्रिया- ये Na, Cu, Zn, Fe आदि धातुओं के साथ क्रिया करके क्रमशः ऑक्साइड, सल्फाइड व सेलिनाइड बनाते हैं।
In simple words: ऑक्सीजन परिवार (वर्ग 16) के तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \(ns^2np^4\) होता है, जिससे वे 2 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अपना अष्टक पूरा करते हैं। ये तत्व अधातु से धातु तक के गुण प्रदर्शित करते हैं, हाइड्रोजन के साथ हाइड्राइड और ऑक्सीजन के साथ ऑक्साइड बनाते हैं, और अपररूपता तथा शृंखलन गुण दिखाते हैं।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीजन परिवार के तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, संयोजकता, धात्विक-अधात्विक गुण, और उनके द्वारा बनाए गए यौगिकों (जैसे हाइड्राइड, ऑक्साइड) के प्रकारों पर ध्यान दें।
Question 6. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी में ऑक्सीजन एवं सल्फर तत्त्वों की स्थिति की विवेचना कीजिए।
Answer: मेंडलीव की आवर्त सारणी के VI-A समूह में पाँच तत्त्व हैं। तत्त्वों का यह परिवार 'ऑक्सीजन परिवार' कहलाता है। इस समूह के प्रथम चार तत्त्वों को सामूहिक रूप में 'कैल्कोजन' (chalcogen) के रूप में पुकारा जाता है। इस समूह में परमाणु भार की वृद्धि के साथ धात्विक या धन विद्युतीय गुण बढ़ता है तथा घनत्व, क्वथनांक और गलनांक में वृद्धि होती है। इस समूह में O, S अधातु हैं, जबकि Se व Te उपधातुएँ हैं और Po धातु है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक वर्गीकरण वृक्ष को दर्शाता है जिसमें VI समूह के तत्वों को ऑक्सीजन (O), सल्फर (S), सेलेनियम (Se), टेल्यूरियम (Te), और पोलोनियम (Po) के रूप में दिखाया गया है, साथ ही कुछ अन्य संबंधित तत्वों जैसे क्रोमियम (Cr), मोलिब्डेनम (Mo), और टंगस्टन (W) को भी दर्शाया गया है। यह संरचना इन तत्वों की समूह VI में स्थिति और उनके संबंधों को स्पष्ट करती है।
रासायनिक गुणों में ऑक्सीजन, परिवार के अन्य तत्त्वों से भिन्न है, परन्तु अन्य सभी तत्त्वों के गुणों में समानता पाई जाती है।
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic configuration)
1. ऑक्सीजन, सल्फर व सेलीनियम परमाणु के बाह्यतम संयोजी कक्ष में 6 इलेक्ट्रॉन हैं।
\( \text{8O} = 2,6 = 1\text{s}^2, 2\text{s}^2 2\text{p}^4 \)
\( \text{16S} = 2, 8, 6 = 1\text{s}^2, 2\text{s}^2 2\text{p}^6, 3\text{s}^2 3\text{p}^4 \)
\( \text{34Se} = 2, 8, 18, 6 = 1\text{s}^2, 2\text{s}^2 2\text{p}^6, 3\text{s}^2 3\text{p}^6 3\text{d}^{10}, 4\text{s}^2 4\text{p}^4 \)
अतः इन तीनों तत्त्वों के परमाणु रासायनिक अभिक्रिया में अन्य परमाणुओं से 2 इलेक्ट्रॉन लेकर अथवा 2 इलेक्ट्रॉन के जोड़े साझा करके अपनी बाह्यतम कक्ष में अधिकतम इलेक्ट्रॉन (8) प्राप्त करने हेतु संयोग करते हैं।
2. तीनों ही अधातु हैं (Se धात्विक गुण भी रखती है) जो प्रकृति में स्वतन्त्र व संयुक्त अवस्था में पाये जाते है।
3. तीनों समान यौगिक बनाते हैं।
(a) \( \text{CO}_2, \text{H}_2\text{O}, \text{P}_2\text{O}_5, \text{As}_2\text{O}_5 \)
(b) \( \text{SO}_2, \text{H}_2\text{S}, \text{P}_2\text{S}_5, \text{As}_2\text{S}_5 \)
(c) \( \text{SeO}_2, \text{H}_2\text{Se}, \text{P}_2\text{Se}_3 \)
(d) \( \text{C}_2\text{H}_2\text{OH} \) तथा \( \text{C}_2\text{H}_2\text{SH}; \text{C}_2\text{H}_2\text{-O-C}_2\text{H}_5 \) तथा \( \text{C}_2\text{H}_5\text{-S-C}_2\text{H}_5 \)
4. तीनों ही हाइड्रोजन के साथ संयोग कर लेते हैं।
(a) \( \text{H}_2\text{O}, \text{H}_2\text{S}, \text{H}_2\text{S}_3, \text{H}_2\text{Se} \)
(b) \( \text{H}_2\text{O}_2, \text{H}_2\text{S}_2, \text{H}_2\text{S}_4 \)
5. तीनों ही \( \text{RO}_2 \) प्रकार के ऑक्साइड बनाते हैं; जैसे- \( \text{O}_3, \text{SO}_2, \text{SeO}_2 \) आदि। \( \text{O}_3 \) ऑक्सीजन का ऑक्साइड माना जाता है।
6. तीनों ही कार्बन के साथ संयोग करके क्रमश: \( \text{CO}_2, \text{CS}_2 \) व \( \text{CSe}_2 \) बनाते हैं।
7. तीनों ही अपररूपती प्रदर्शित करते हैं।
8. तीनों तत्त्व ऑक्सीजन, सल्फर व सेलीनियम शृंखलन गुण भी व्यक्त करते हैं।
9. धातु से क्रिया– ये Na, Cu, Zn, Fe आदि धातुओं के साथ क्रिया करके क्रमश: ऑक्साइड, सल्फाइड व सेलिनाइड बनाते हैं।
10. ऑक्साइड व ऑक्सी अम्ल – ये तत्त्व ऑक्सीजन से संयोग करके डाई ऑक्साइड बनाते हैं। (सल्फर ट्राइ ऑक्साइड) भी बनाते हैं; जैसे- SO2, SeO2 आदि। ये जल में घुलकर ऑक्सी अम्ल बनाते हैं।
(a) \( \text{SO}_2 + \text{H}_2\text{O} \to \text{H}_2\text{SO}_3 \)
(b) \( \text{SeO}_2 + \text{H}_2\text{O} \to \text{H}_2\text{SeO}_3 \)
इनकी प्रबलता का क्रम \( \text{H}_2\text{SO}_3 > \text{H}_2\text{SeO}_3 \) है।
अतः स्पष्ट है कि ऑक्सीजन, सल्फर व सेलीनियम तीनों को ही आवर्त सारणी के षष्ठम् समूह में एक साथ रखना औचित्यपूर्ण है।In simple words: ऑक्सीजन परिवार (वर्ग 16) के तत्व अपने इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, धात्विक/अधात्विक गुणों, और यौगिक बनाने की प्रवृत्तियों में समानता दिखाते हैं, जिससे उन्हें एक ही समूह में रखना उचित है। इन तत्वों में ऑक्सीजन, सल्फर, सेलेनियम, टेल्यूरियम और पोलोनियम शामिल हैं, जो विभिन्न ऑक्साइड, हाइड्राइड और ऑक्सी-अम्ल बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, धात्विक गुण, और विभिन्न प्रकार के यौगिकों के निर्माण का वर्णन करके समूह 16 के तत्वों की आवर्त सारणी में स्थिति को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 7. शुद्ध ओजोन किस प्रकार प्राप्त करते हैं? \( \text{SnCl}_2 \), \( \text{FeSO}_2 \) और KI के साथ इसकी अभिक्रियाएँ लिखिए।
Answer: प्रयोगशाला में ओजोन, ऑक्सीजन के नीरव विद्युत विसर्जन विधि द्वारा प्राप्त की जाती है।
\( 3\text{O}_2 \implies 2\text{O}_3 \uparrow \)
नीरव विद्युत विसर्जन के लिए सीमेन्स का ओजोनाइजर या ब्रॉडी का ओजोनाइजर प्रयोग किया जाता है।
ब्रॉडी का ओजोनाइजर – यह एक U आकार की नली का बना होता है जिसका एक सिरा काफी चौड़ा होता है। इस सिरे में एक पतली परखनली को डालकर ऊपर वाले भाग को बन्द कर दिया जाता है। परखनली में तनु \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) भरा होता है और उसमें एक प्लेटिनम का तार लटका देते हैं। सारे उपकरण को तनु \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) में रखते हैं। इस बर्तन में भी एक प्लेटिनम का तार लटका देते हैं। प्लेटिनम के दोनों इलेक्ट्रोडों को चित्रानुसार प्रेरण कुण्डली से जोड़ देते हैं। नली में शुष्क ऑक्सीजन प्रवाहित करते हैं, जिससे 25% ओजोन प्राप्त होती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह ब्रॉडी ओजोनाइजर का आरेख है, जिसमें एक प्लेटिनम तार के साथ एक भीतरी नली और तनु \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) से भरा एक बाहरी बर्तन दिखाया गया है। यह सेटअप प्रेरण कुण्डली से जुड़ा हुआ है, जिससे शुष्क ऑक्सीजन प्रवाहित करने पर ओजोन युक्त ऑक्सीजन प्राप्त होती है, जो ओजोन के उत्पादन की विधि को दर्शाता है।
ऑक्सीकारक गुण
1. यह स्टैनस क्लोराइड को तनु HCl की उपस्थिति में स्टैनिक क्लोराइड में ऑक्सीकृत कर देती है।
\( 3\text{SnCl}_2 + 6\text{HCl} + \text{O}_3 \to 3\text{SnCl}_4 + 3\text{H}_2\text{O} \)
2. यह फेरस सल्फेट को तनु \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) की उपस्थिति में फेरिक सल्फेट में ऑक्सीकृत कर देती है।
\( 2\text{FeSO}_4 + \text{O}_3 + \text{H}_2\text{SO}_4 \to \text{Fe}_2(\text{SO}_4)_3 + \text{H}_2\text{O} + \text{O}_2 \)
3. KI विलयन में प्रवाहित करने पर \( \text{I}_2 \) में ऑक्सीकृत कर देती है।
\( 2\text{KI} + \text{H}_2\text{O} + \text{O}_3 \to 2\text{KOH} + \text{I}_2 \uparrow + \text{O}_2 \uparrow \)
उपयोग
1. प्रबल ऑक्सीकारक के रूप में।
2. जीवाणुनाशक के रूप में।In simple words: शुद्ध ओजोन नीरव विद्युत विसर्जन विधि से ऑक्सीजन से बनाई जाती है, जिसका उपयोग ब्रॉडी ओजोनाइजर में किया जाता है। ओजोन एक प्रबल ऑक्सीकारक है और स्टैनस क्लोराइड, फेरस सल्फेट, और पोटैशियम आयोडाइड जैसे पदार्थों को ऑक्सीकृत करती है, साथ ही यह जीवाणुनाशक के रूप में भी उपयोगी है।
🎯 Exam Tip: ओजोन के उत्पादन की विधि (विशेषकर ब्रॉडी ओजोनाइजर) का वर्णन और उसके ऑक्सीकारक गुणों को रासायनिक समीकरणों के साथ दर्शाना महत्वपूर्ण है।
Question 8. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर क्लोरीन, ब्रोमीन एवं आयोडीन की आवर्त सारणी में स्थिति स्पष्ट कीजिए
Answer: क्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन को फ्लोरीन तथा ऐस्टैटीन के साथ आवर्त सारणी के VIIA उप-समूह में रखा गया है। VIIA के प्रथम चार तत्त्वों (F, Cl, Br, I) को हैलोजन कहते हैं। 'हैलोजन' शब्द की उत्पत्ति दो ग्रीक शब्दों 'हैल्स' (Hals) तथा 'जेन्स' (Genes) से हुई है, जिसका अर्थ है-समुद्री लवण पैदा करने वाला। ये सभी तत्त्वे अपने लवण के रूप में समुद्री जल में पाये जाते हैं। इनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास इस प्रकार हैं –
\( \text{9F} = 2,7 = 1\text{s}^2, 2\text{s}^2 2\text{p}^5 \)
\( \text{17Cl} = 2, 8, 7 = 1\text{s}^2, 2\text{s}^2 2\text{p}^6, 3\text{s}^2 3\text{p}^5 \)
\( \text{35Br} = 2, 8, 18, 7 = 1\text{s}^2, 2\text{s}^2 2\text{p}^6, 3\text{s}^2 3\text{p}^6 3\text{d}^{10}, 4\text{s}^2 4\text{p}^5 \)
\( \text{53I} = 2, 8, 18, 18, 7 = 1\text{s}^2, 2\text{s}^2 2\text{p}^6, 3\text{s}^2 3\text{p}^6 3\text{d}^{10}, 4\text{s}^2 4\text{p}^6 4\text{d}^{10}, 5\text{s}^2 5\text{p}^5 \)
इन सभी तत्त्वों के बाहरी कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं और बाहरी कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( \text{ns}^2 \text{np}^5 \) है तथा भीतर के सभी कोश पूर्ण हैं। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में समानता होने के कारण इनके गुणों में समानता है और उनमें क्रमिक परिवर्तन पाया जाता है।
गुणों में समानता
1. ये वैद्युत संयोजकता (-1) तथा सह-संयोजकता दोनों ही प्रकट करते हैं।
2. इनकी वाष्प रंगीन तथा तीक्ष्ण गन्ध वाली होती है।
3. गैसीय अवस्था में ये द्वि-परमाणुक होते हैं।
4. सभी प्रारूपिक अधातु हैं।
5. हाइड्रोजन से सीधा संयोग कर हाइड्रो अम्ल बनाते हैं; जैसे- HCl, HBr, HI
6. इनकी धातुएँ वाष्प में जलकर हैलाइड बनाती हैं।
\( 2\text{Na} + \text{Cl}_2 \to 2\text{NaCl} \)
\( \text{Mg} + \text{Br}_2 \to \text{MgBr}_2 \)
7. \( \text{Cl}_2 \) तथा \( \text{Br}_2 \) जल के साथ क्रिया कर \( \text{O}_2 \) निकालती है।
\( 2\text{Cl}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \to 4\text{HCl} + \text{O}_2 \)
8. \( \text{Cl}_2, \text{Br}_2, \text{I}_2 \), ऑक्सीकारक के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
9. ये तत्त्व वैद्युत तथा ऊष्मा के कुचालक होते हैं।
10. क्षारों के साथ समान रूप से क्रिया करते हैं।
11. सभी प्रबल ऑक्सीकारक हैं।
\( \text{H}_2\text{S} + \text{Cl}_2 \to 2\text{HCl} + \text{S} \)
\( \text{SO}_2 + \text{Cl}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \to 2\text{HCl} + \text{H}_2\text{SO}_4 \)
12. सभी अम्लीय ऑक्साइड बनाते हैं।
गुणों में क्रमिक परिवर्तन – परमाणु संरचना तथा गुणों की समानता से स्पष्ट है कि इन तत्त्वों को एक ही समूह में रखना न्यायोचित है। इसके अतिरिक्त तत्त्वों के गुणों में श्रेणीबद्ध परिवर्तन परमाणु क्रमांक के परिवर्तन पर निर्भर करता है तथा किसी समूह में तत्त्वों की विभिन्न स्थानों पर स्थिति का निर्णायक भी है। इन तत्त्वों के गुणों में परमाणु क्रमांक बढ़ने पर श्रेणीबद्ध परिवर्तन इस प्रकार हैं –
1. तत्त्वों की अवस्था में क्रमिक परिवर्तन होता है; जैसे- क्लोरीन गैस है, ब्रोमीन द्रव तथा आयोडीन ठोस है।
2. गैसों का रंग गहरा होता जाता है। अतः फ्लोरीन हल्की पीली है, क्लोरीन हरी-पीली, ब्रोमीन लाल-भूरी तथा आयोडीन वाष्प गहरी बैंगनी है।
3. इनकी क्रियाशीलता घटती है।
4. इनका ऑक्सीकारक स्वभाव भी घटता है।
5. क्वथनांक बढ़ते हैं तथा आपेक्षिक ताप घटते हैं।
6. परमाणु त्रिज्याएँ बढ़ती हैं।
7. आयनन विभव घटते हैं।
इन तत्त्वों के गुणों में समानता तथा परमाणु क्रमांक में क्रमिक वृद्धि के साथ गुणों में श्रेणीबद्ध परिवर्तन इस बात का निर्णायक है कि ये तत्त्व एक समूह में रखे जाने चाहिए। इनके परमाणुओं के बाहरी कोश की \( \text{ns}^2 \text{np}^5 \) संरचना सह इंगित करती है कि इनकी सातवें समूह में स्थिति न्यायोचित है।In simple words: क्लोरीन, ब्रोमीन और आयोडीन जैसे हैलोजन तत्व, अपने समान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( \text{ns}^2 \text{np}^5 \) के कारण आवर्त सारणी के समूह VIIA में स्थित होते हैं, जो उनके समान रासायनिक गुणों को दर्शाता है। परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ इन तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणों में क्रमिक परिवर्तन होता है, जैसे कि उनकी भौतिक अवस्था, रंग, क्रियाशीलता, ऑक्सीकारक क्षमता और परमाणु त्रिज्या।
🎯 Exam Tip: हैलोजनों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, सामान्य गुणों और परमाणु क्रमांक के साथ गुणों में होने वाले क्रमिक परिवर्तनों का विस्तृत विवरण देना, उनके आवर्त सारणी में स्थान को स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 9. डीकन विधि द्वारा क्लोरीन के निर्माण का सचित्र वर्णन कीजिए। यह निम्नलिखित से किस प्रकार की क्रिया करती है? (i) सोडियम आर्सेनाइट विलयन, (ii) गर्म चूने का पानी।
Answer: क्लोरीन के औद्योगिक निर्माण की निम्नलिखित तीन विधियाँ हैं-
1. वेल्डन विधि
2. डीकन विधि तथा
3. वैद्युत-अपघटनी विधि ।
डीकन विधि या HCl से क्लोरीन के निर्माण की विधि – इस विधि में HCl का ऑक्सीकरण क्यूप्प्रस क्लोराइड (उत्प्रेरक) की उपस्थिति में वायु की ऑक्सीजन द्वारा निम्न प्रकार किया जाता है –
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह डीकन विधि द्वारा क्लोरीन उत्पादन के संयंत्र का प्रवाह चित्र है। इसमें HCl गैस और वायु को उत्प्रेरक कक्ष में प्रवाहित किया जाता है, जिसके बाद गैसों को शीतकारक कक्ष, धावन कक्ष (जल के साथ) और शुष्कन कक्ष (सान्द्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) के साथ) से गुजारा जाता है, जिससे क्लोरीन और वायु का मिश्रण प्राप्त होता है।
\( 4\text{HCl} + \text{O}_2 \xrightarrow{ \text{Cu}_2\text{Cl}_2 } 2\text{H}_2\text{O} + 2\text{Cl}_2 \uparrow \)
उत्प्रेरक कक्ष में झाँबा पत्थर क्यूप्रस क्लोराइड विलयन में भिगोकर रख देते हैं तथा ताप 450°C कर देते हैं। HCl तथा वायु का मिश्रण 4 : 1 के अनुपात में लेकर उत्प्रेरक कक्ष में प्रवाहित किया जाता है। यहाँ क्लोरीन बनती है, पर इसमें HCl, \( \text{N}_2, \text{O}_2 \) तथा जल-वाष्प मिले होते हैं। इस मिश्रण को स्क्रबर में प्रवाहित करके HCl हटा देते हैं। दूसरे कक्ष में प्रवाहित करने पर सान्द्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) द्वारा जल-वाष्प पृथक् कर देते हैं। इस प्रकार \( \text{N}_2, \text{O}_2 \) मिश्रित क्लोरीन प्राप्त होती है। उत्प्रेरक की क्रिया निम्न प्रकार होती है –
* \( 2\text{Cu}_2\text{Cl}_2 + \text{O}_2 \to 2\text{Cu}_2\text{OCl}_2 \)
* \( 2\text{HCl} + \text{Cu}_2\text{OCl}_2 \to 2\text{CuCl}_2 + \text{H}_2\text{O} \)
* \( 2\text{CuCl}_2 \to \text{Cu}_2\text{Cl}_2 + \text{Cl}_2 \uparrow \)
क्रियाएँ
1. यह सोडियम आर्सेनाईट को सोडियम आर्सिनेट में ऑक्सीकृत कर देती है।
\( \text{Na}_3\text{AsO}_3 + \text{H}_2\text{O} + \text{Cl}_2 \to \text{Na}_3\text{AsO}_4 + 2\text{HCl} \)
2. क्लोरीन गर्म चूने के पानी के साथ कैल्सियम क्लोराइड तथा कैल्सियम क्लोरेट बनाती है।
\( 6\text{Ca(OH)}_2 + 6\text{Cl}_2 \to 5\text{CaCl}_2 + \text{Ca(ClO}_3)_2 + 6\text{H}_2\text{O} \)
ऑक्सीकारक गुण – यह \( \text{H}_2\text{S} \) को सल्फर में ऑक्सीकृत कर देती है।
\( \text{H}_2\text{S} + \text{Cl}_2 \to 2\text{HCl} + \text{S} \downarrow \)
\( \text{NH}_3 \) से अभिक्रिया
\( \text{NH}_3 + 3\text{Cl}_2 \to \text{NCl}_3 + 3\text{HCl} \)In simple words: डीकन विधि में, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को क्यूप्प्रस क्लोराइड उत्प्रेरक की उपस्थिति में वायु की ऑक्सीजन द्वारा ऑक्सीकृत करके क्लोरीन गैस बनाई जाती है। क्लोरीन एक प्रबल ऑक्सीकारक है जो सोडियम आर्सेनाइट को सोडियम आर्सेनेट में और गर्म चूने के पानी के साथ अभिक्रिया करके कैल्शियम क्लोराइड और कैल्शियम क्लोरेट में परिवर्तित करती है।
🎯 Exam Tip: डीकन विधि का प्रवाह चित्र, रासायनिक समीकरण, और क्लोरीन की सोडियम आर्सेनाइट तथा गर्म चूने के पानी के साथ अभिक्रियाओं को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 10. प्रयोगशाला में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के विरचन की विधि, प्रमुख रासायनिक गुण तथा उपयोग का वर्णन कीजिए।
Answer: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के विरचन की प्रयोगशाला विधि – प्रयोगशाला में हाइड्रोजन क्लोराइड गैस सोडियम क्लोराइड (नमक) को सान्द्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) के सार्थ गर्म करके बनाई जाती है।
\( \text{NaCl} + \text{H}_2\text{SO}_4 \xrightarrow{ \text{गैस} } \text{NaHSO}_4 + \text{HCl} \)
\( \text{सोडियम क्लोराइड} + \text{सल्फ्यूरिक अम्ल} \to \text{सोडियम हाइड्रोजन सल्फेट} + \text{हाइड्रोजन क्लोराइड गैस} \)
हाइड्रोजन क्लोराइड गैस को जल में अवशोषित करने पर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल प्राप्त होता है। हाइड्रोजन क्लोराइड गैस के जलीय विलयन को हाइड्रोक्लोरिक अम्ल कहते हैं। हाइड्रोजन क्लोराइड गैस एवं हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनाने में प्रयुक्त उपकरण संलग्न चित्र में प्रदर्शित है।
1. हाइड्रोजन क्लोराइड गैस बनाने की विधि – एक गोल पेंदे के फ्लास्क में कुछ सोडियम क्लोराईड (ठोस) लो और थिसेल फनल द्वारा सावधानी से सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल फ्लास्क में डालो जिससे फनल का निचला सिरा अम्ल में डूब जाए। फ्लास्क को गर्म करो। गर्म करने पर हाइड्रोजन क्लोराइड गैस बनती हैं और निकास नली से बाहर निकलने लगती है। गैस को वायु के उपरिमुखी विस्थापन द्वारा एक गैस जार में एकत्रित कर लो। शुष्क HCl गैस प्राप्त करने के लिए निकास नली को सान्द्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) की बोतल से जोड़ दो जिससे कि नम HCl गैस सान्द्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) में से प्रवाहित होकर शुष्क हो जाए। सान्द्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) युक्त बोतल में लगी दूसरी निकास नली से निकल रही शुष्क HCl गैस को अब जार में एकत्रित कर लो।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रयोगशाला में HCl गैस के निर्माण की व्यवस्था है, जिसमें सोडियम क्लोराइड और सल्फ्यूरिक अम्ल को गर्म किया जाता है। उत्पन्न HCl गैस को सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल से गुजारा जाता है ताकि उसे शुष्क किया जा सके, फिर एक गैस जार में एकत्र किया जाता है।
2. हाइड्रोजन क्लोराइड गैस से हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनाने की विधि – चित्र में प्रदर्शित फ्लास्क में लगी हुई निकास नली के बाहर निचले सिरे पर रबर की नली के द्वारा एक साधारण फनल (छोटे स्तम्भ की) जोड़ दो। फनल का कुछ भाग एक पात्र में भरे जल में डुबा दो। निकास नली से फनल के द्वारा HCl गैस जल में पहुँचेगी और जल में विलेय हो जाएगी। इस प्रकार HCl गैस का जलीय विलयन अर्थात् हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बन जाएगा।
रासायनिक गुण
1. धातुओं से क्रिया – कॉपर, मरकरी, सिल्वर, गोल्ड और प्लैटिनम धातुओं को छोड़कर लगभग सभी धातुएँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से क्रिया करती हैं। क्रिया में धातु क्लोराइड बनता है और हाइड्रोजन गैस निकलती है।
* \( 2\text{Na} + 2\text{HCl} \to 2\text{NaCl} + \text{H}_2 \)
* \( \text{Mg} + 2\text{HCl} \to \text{MgCl}_2 + \text{H}_2 \)
* \( \text{Zn} + 2\text{HCl} \to \text{ZnCl}_2 + \text{H}_2 \)
* \( \text{Fe} + 2\text{HCl} \to \text{FeCl}_2 + \text{H}_2 \)
* \( 2\text{Al} + 6\text{HCl} \to 2\text{AlCl}_2 + 3\text{H}_2 \)
सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सान्द्र नाइट्रिक अम्ल के आयतन से 3 : 1 मिश्रण को 'ऐक्वारेजिया' (aquaregia) कहते हैं। इस मिश्रण में गोल्ड (Au), प्लेटिनम (Pt) आदि धातुएँ घुल जाती हैं।
\( 3\text{HCl} + \text{HNO}_3 \to \text{NOCl} + \text{Cl}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \)
\( \text{Au} + \text{Cl}_2 + \text{NOCl} \to \text{AuCl}_3 + \text{NO} \)
\( \text{Au} + \text{HNO}_3 + 3\text{HCl} \to \text{AuCl}_3 + \text{NO} + 2\text{H}_2\text{O} \)
\( \text{गोल्ड} + \text{नाइट्रिक अम्ल (सान्द्र)} + \text{हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (सान्द्र)} \to \text{ऑरिक क्लोराइड} + \text{नाइट्रिक ऑक्साइड} + \text{जल} \)
\( \text{AuCl}_3 + \text{HCl} \to \text{H}[\text{AuCl}_4] \)
\( \text{ऑरिक क्लोराइड} + \text{हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (सान्द्र)} \to \text{टेट्राक्लोरो ऑरिक अम्ल} \)
2. क्षारों से क्रिया – क्षार और अम्ल के परस्पर क्रिया करने से लवण और जल बनता है। इस क्रिया को उदासीनीकरण कहते हैं।
* \( \text{NaOH} + \text{HCl} \to \text{NaCl} + \text{H}_2\text{O} \)
* \( \text{Ba(OH)}_2 + 2\text{HCl} \to \text{BaCl}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \)
3. धातु ऑक्साइडों से क्रिया – धातु ऑक्साइड और अम्ल की परस्पर क्रिया कराने पर लवण और जल बनता है।
1. \( \text{MgO} + 2\text{HCl} \to \text{MgCl}_2 + \text{H}_2\text{O} \)
2. \( \text{CuO} + 2\text{HCl} \to \text{CuCl}_2 + \text{H}_2\text{O} \)
3. \( \text{ZnO} + 2\text{HCl} \to \text{ZnCl}_2 + \text{H}_2\text{O} \)
4. अमोनिया से क्रिया – अमोनिया और HCl गैस की परस्पर क्रिया से अमोनियम क्लोराइड के सफेद धूम (fumes) बनते हैं।
अमोनियम के जलीय विलयन की HCl विलयन से क्रिया कराने पर अमोनियम क्लोराइड और जल बनता है।
\( \text{NH}_4\text{OH} + \text{HCl} \to \text{NH}_4\text{Cl} + \text{H}_2\text{O} \)
5. धातु कार्बोनेट से क्रिया – धातु कार्बोनेट की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से क्रिया कराने पर लवण, जल और कार्बन डाइऑक्साइड बनते हैं।
* \( \text{Na}_2\text{CO}_3 + 2\text{HCl} \to 2\text{NaCl} + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2 \)
* \( \text{CaCO}_3 + 2\text{HCl} \to \text{CaCl}_2 + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2 \)
उपयोग
1. धातुओं के क्लोराइड बनाने में।
2. अम्ल के रूप में।
3. ऐक्वारेजिया (आयतन से 1 भाग सान्द्र \( \text{HNO}_3 \) + 3 भाग सान्द्र HCl) बनाने में।
4. क्लोरीन गैस बनाने में।
5. गाई, चमड़े और अन्य उद्योगों में।In simple words: प्रयोगशाला में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल सोडियम क्लोराइड और सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल को गर्म करके बनाया जाता है। यह धातुओं, क्षारों, धातु ऑक्साइडों, अमोनिया और धातु कार्बोनेटों के साथ अभिक्रिया करता है, क्लोराइड लवण, जल और हाइड्रोजन गैस या कार्बन डाइऑक्साइड जैसे उत्पाद देता है। इसके उपयोगों में क्लोराइड निर्माण, ऐक्वारेजिया बनाना और विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाएं शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: HCl के प्रयोगशाला विरचन की विधि, इसके रासायनिक गुणधर्मों (धातुओं, क्षारों, ऑक्साइडों, अमोनिया, कार्बोनेटों से अभिक्रिया) और विभिन्न उपयोगों को रासायनिक समीकरणों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 11. विरंजक चूर्ण क्या है? विरंजक चूर्ण के निर्माण की विधि का वर्णन नामांकित चित्र के साथ कीजिए तथा इसका एक ऑक्सीकारक गुण भी लिखिए।
Answer: यह एक मिश्रित लवण है जिसको कैल्सियम क्लोरोहाइपोक्लोराइट भी कहते हैं। विरंजक चूर्ण के एक अणु में एक कैल्सियम आयन (\( \text{Ca}^{2+} \)), एक क्लोराइड आयन (\( \text{Cl}^- \)) तथा एक हाइपोक्लोराइट आयन (\( \text{OCl}^- \)) होते हैं, जिसको \( \text{Ca}^{2+} (\text{Cl}^-) (\text{OCl}^-) \) रूप में भी व्यक्त कर सकते हैं। विरंजक चूर्ण का निर्माण बैचमान विधि द्वारा किया जाता है। इसके अन्तर्गत शुष्क बुझे हुए चूने पर क्लोरीन की अभिक्रिया करायी जाती है।
विधि- यह विधि विरंजक चूर्ण (\( \text{CaOCl}_2 \)) बनाने की आधुनिक विधि है। इसमें लोहे का बना हुआ एक टॉवर होता है जिसमें खाने बने होते हैं। संयंत्र के ऊपरी भाग से हॉपर द्वारा बुझा हुआ चूना [\( \text{Ca(OH)}_2 \)] डाला जाता है। टॉवर में नीचे से गर्म वायु और क्लोरीन की धारा प्रवाहित की जाती है। \( \text{Ca(OH)}_2 \) व \( \text{Cl}_2 \) गैस की क्रिया से विरंजक चूर्ण बनता है, जिसे संयंत्र के निचले भाग से बाहर निकाल लेते हैं। व्यर्थ गैसें संयंत्र के ऊपरी भाग से बाहर निकल जाती हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह विरंजक चूर्ण के औद्योगिक निर्माण की बैचमान विधि का आरेख है। इसमें शुष्क बुझा हुआ चूना हॉपर से डाला जाता है और गर्म वायु तथा क्लोरीन को नीचे से प्रवाहित किया जाता है। क्लोरीन चूने के साथ अभिक्रिया कर विरंजक चूर्ण बनाती है, जो नीचे एकत्र होता है, जबकि बची हुई क्लोरीन ऊपर से निकल जाती है।
ऑक्सीकारक गुण – यह तनु अम्ल की अभिक्रिया से ऑक्सीजन देता है, अतः यह एक ऑक्सीकारक है।
1. यह PbO को \( \text{PbO}_2 \) में ऑक्सीकृत कर देता है।
\( 2\text{CaOCl}_2 + 2\text{PbO} \to 2\text{CaCl}_2 + 2\text{PbO}_2 \)
2. यह अम्लीय माध्यम में KI को \( \text{I}_2 \) में ऑक्सीकृत कर देता है।
\( \text{CaOCl}_2 + 2\text{CH}_3\text{COOH} + 2\text{KI} \to (\text{CH}_3\text{COO})_2\text{Ca} + 2\text{KCl} + \text{I}_2 \uparrow + \text{H}_2\text{O} \)In simple words: विरंजक चूर्ण (कैल्सियम क्लोरोहाइपोक्लोराइट) शुष्क बुझे हुए चूने पर क्लोरीन गैस की अभिक्रिया से बैचमान विधि द्वारा औद्योगिक रूप से बनाया जाता है। यह एक मिश्रित लवण है जिसमें \( \text{Ca}^{2+} \), \( \text{Cl}^- \), और \( \text{OCl}^- \) आयन होते हैं। यह एक प्रबल ऑक्सीकारक है जो तनु अम्लों की उपस्थिति में ऑक्सीजन मुक्त करता है और अन्य पदार्थों जैसे PbO और KI को ऑक्सीकृत कर सकता है।
🎯 Exam Tip: विरंजक चूर्ण के रासायनिक सूत्र, निर्माण विधि (बैचमान प्रक्रिया के चित्र सहित), और इसके ऑक्सीकारक गुणों के रासायनिक समीकरणों को समझना महत्वपूर्ण है।
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