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Detailed Chapter 13 अमीन्स UP Board Solutions for Class 12 Chemistry
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Class 12 Chemistry Chapter 13 अमीन्स UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 12 Chemistry Chapter 13 Amines (ऐमीन)
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
Question 1. निम्नलिखित ऐमीनों को प्राथमिक, द्वितीयक अथवा तृतीयक ऐमीनों में वर्गीकृत कीजिए.
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो ऐमीन यौगिकों को दर्शाता है। पहले चित्र (i) में एक बेंजीन वलय के साथ सीधे एक \( \text{NH}_2 \) समूह जुड़ा हुआ है, जो ऐनिलीन (एक प्राथमिक ऐमीन) का प्रतिनिधित्व करता है। दूसरे चित्र (ii) में एक बेंजीन वलय के साथ सीधे एक \( \text{N(CH}_3)_2 \) समूह जुड़ा हुआ है, जो N,N-डाइमेथिलऐनिलीन (एक तृतीयक ऐमीन) का प्रतिनिधित्व करता है।
(i)
(ii)
(iii) (C2H5)2 CHNH2,
(iv) (C2H5)2 NH.
Answer:
(i) प्राथमिक ऐमीन
(ii) तृतीयक ऐमीन
(iii) प्राथमिक ऐमीन
(iv) द्वितीयक ऐमीन
In simple words: प्राथमिक ऐमीन में नाइट्रोजन परमाणु से एक एल्किल समूह जुड़ा होता है, द्वितीयक ऐमीन में दो एल्किल समूह और तृतीयक ऐमीन में तीन एल्किल समूह जुड़े होते हैं। दिए गए यौगिकों में, \( \text{NH}_2 \) एक प्राथमिक समूह है, \( \text{N(CH}_3)_2 \) एक तृतीयक समूह है, \( \text{CHNH}_2 \) एक प्राथमिक समूह है, और \( \text{NH} \) एक द्वितीयक समूह है।
🎯 Exam Tip: ऐमीनों का सही वर्गीकरण उनकी संरचना में नाइट्रोजन से जुड़े एल्किल समूहों की संख्या पर आधारित होता है। इसे समझकर आसानी से अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।
Question 2. (i) अणुसूत्र C4H11N से प्राप्त विभिन्न समावयवी ऐमीनों की संरचना लिखिए।
(ii) सभी समावयवों के आई०यू०पी०ए०सी० नाम लिखिए।
(iii) विभिन्न युग्मों द्वारा कौन-से प्रकार की समावयवता प्रदर्शित होती है? या सूत्र C4H11N से कितने प्राथमिक ऐमीन सम्भव हैं?
Answer:
आठ समावयवी ऐल्कीन सम्भव हैं
(i) \( \text{CH}_3\text{-CH}_2\text{-CH}_2\text{-CH}_2\text{-NH}_2 \)
ब्यूटेन-1-ऐमीन (प्राथमिक)
(ii) \( \text{CH}_3\text{-CH(CH}_3)\text{-CH}_2\text{-NH}_2 \)
2-मेथिलप्रोपेन-1-ऐमीन (प्राथमिक)
(iii) \( \text{CH}_3\text{-CH}_2\text{-CH(NH}_2)\text{-CH}_3 \)
ब्यूटेन-2-ऐमीन (प्राथमिक)
(iv) \( \text{CH}_3\text{-C(CH}_3)_2\text{-NH}_2 \)
2-मेथिलप्रोपेन-2-ऐमीन (प्राथमिक)
(v) \( \text{C}_2\text{H}_5\text{-N(H)-C}_2\text{H}_5 \)
N-एथिलएथेनेमीन (द्वितीयक)
(vi) \( \text{C}_3\text{H}_7\text{-N(H)-CH}_3 \)
N-मेथिलप्रोपेन-1-ऐमीन (द्वितीयक)
(vii) \( \text{CH}_3\text{-CH(CH}_3)\text{-N(H)-CH}_3 \)
N-मेथिलप्रोपेन-2-ऐमीन (द्वितीयक)
(viii) \( \text{CH}_3\text{-N(CH}_3)\text{-CH}_2\text{CH}_3 \)
N,N-डाइमेथिलएथेनेमीन (तृतीयक)
In simple words: अणुसूत्र \( \text{C}_4\text{H}_{11}\text{N} \) से आठ विभिन्न ऐमीन समावयवी बन सकते हैं, जिनमें चार प्राथमिक, तीन द्वितीयक और एक तृतीयक ऐमीन शामिल हैं। प्रत्येक की संरचना और IUPAC नाम भिन्न होते हैं।
🎯 Exam Tip: समावयवता के प्रश्नों में, सभी संभावित संरचनात्मक आइसोमर्स को व्यवस्थित रूप से खींचना और उनके IUPAC नाम लिखना महत्वपूर्ण है, ताकि कोई भी छूट न जाए।
विभिन्न ऐमीनों द्वारा प्रदर्शित समावयवता :
• श्रृंखला समावयवी : (i) तथा (ii); (iii) तथा (iv); (i) तथा (iv)
• स्थाने समावयवी : (ii) तथा (iii); (ii) तथा (iv)
• मध्यावयवी : (v) तथा (vi); (vii) तथा (viii)
• क्रियात्मक समावयवी : तीनों प्रकार की ऐमीन एक-दूसरे की क्रियात्मक समावयवी होती हैं।
Question 3. आप निम्नलिखित परिवर्तन कैसे करेंगे? (i) बेन्जीन से ऐनिलीन
(ii) बेन्जीन से N, N-डाइमेथिल ऐनिलीन
(iii) CI-(CH2)4-CI से हेक्सेन - 1, 6 - डाइऐमीन
Answer:
(i) बेन्जीन \( \xrightarrow{\text{सान्द्र HNO}_3\text{ + सान्द्र H}_2\text{SO}_4 \\ \text{333 K (नाइट्रीकरण)}} \) नाइट्रोबेन्जीन \( \xrightarrow{\text{Fe/HCl} \\ \text{अपचयन}} \) ऐनिलीन
(ii) बेन्जीन \( \xrightarrow{\text{i) सान्द्र HNO}_3\text{ + सान्द्र H}_2\text{SO}_4 \\ \text{ii) Fe/HCl}} \) ऐनिलीन \( \xrightarrow{\text{CH}_3\text{I (2 मोल) } \Delta \\ \text{- 2HI}} \) N,N-डाइमेथिल ऐनिलीन
(iii) Cl-(CH2)4-Cl \( \xrightarrow{\text{2KCN (alc.) } \Delta} \) NC-(CH2)4-CN
हेक्सेन-1,6-डाइनाइट्राइल \( \xrightarrow{\text{i) LiAlH}_4\text{/ ईथर} \\ \text{ii) H}_3\text{O}^+} \) H2N-(CH2)6 - NH2
हेक्सेन-1,6-डाइऐमीन
In simple words: इन परिवर्तनों में, बेन्जीन को नाइट्रेशन और अपचयन के माध्यम से ऐनिलीन में, और फिर मिथाइलेशन द्वारा N,N-डाइमेथिल ऐनिलीन में बदला जा सकता है। डाइक्लोरोब्यूटेन को KCN से क्रिया कराकर डाइनाइट्राइल में और फिर LiAlH4 से अपचयन करके हेक्सेन-1,6-डाइऐमीन में परिवर्तित किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: रासायनिक परिवर्तनों को करते समय, प्रत्येक चरण में अभिकारकों, अभिकर्मकों और स्थितियों को सही ढंग से समझना महत्वपूर्ण है। नाइट्रेशन, अपचयन और नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएं ऐमीनों के संश्लेषण में प्रमुख हैं।
Question 4. निम्नलिखित को उनके बढ़ते हुए क्षारकीय प्रबलता के क्रम में लिखिए (i) C2H5NH2, C6H5NH2, NH3, C6H5CH2NH2 तथा (C2H5)2 NH
(ii) C2H5NH2, (C2H5)2 NH, (C2H5)3 N, C6H5NH2
(iii) CH3NH2,(CH3)2NH, (CH3)3N, C6H5NH2, C6H5CH2NH2
Answer:
(i) C6H5NH2 < NH3 < C6H5CH2NH2 < C2H5NH2 < (C2H5)2 NH
(ii) C6H5NH2 < C2H5NH2 < (C2H5)3N < (C2H5)2 NH
(iii) C6H5NH2 < C6H5CH2NH2 < (CH3)3N < CH3NH2 < (CH3)2NH
In simple words: ऐमीनों की क्षारकीय प्रबलता उनके नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व की उपलब्धता पर निर्भर करती है। इलेक्ट्रॉन दाता समूह जैसे एल्किल समूह इसे बढ़ाते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन ग्राही समूह जैसे फेनिल समूह इसे घटाते हैं, जिससे ऐरोमैटिक ऐमीन दुर्बल क्षारक होते हैं।
🎯 Exam Tip: क्षारकीय प्रबलता का क्रम निर्धारित करते समय, इलेक्ट्रॉन दान करने वाले और इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूहों के प्रभावों को ध्यान में रखें, साथ ही विलायकन प्रभाव (aqueous phase) और स्टेरिक बाधा को भी।
Question 5. निम्नलिखित अम्ल-क्षारक अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए तथा उत्पादों के नाम लिखिए (i) CH3CH2CH2NH2 + HCI →
(ii) ((C2H5)2 N + HCI →
Answer:
(i) CH3CH2CH2NH2 + H-Cl → CH3CH2CH2NH3Cl
n-प्रोपिलऐमीन n-प्रोपिल अमोनियम क्लोराइड
(ii) (C2H5)3N+H-Cl → (C2H5)3NHCl-
ट्राइएथिल ऐमीन ट्राइएथिल अमोनियम क्लोराइड
In simple words: ऐमीन क्षारीय प्रकृति के होते हैं और अम्ल के साथ अभिक्रिया करके लवण बनाते हैं। इस अभिक्रिया में, n-प्रोपिलऐमीन हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ n-प्रोपिल अमोनियम क्लोराइड बनाता है, और ट्राइएथिल ऐमीन ट्राइएथिल अमोनियम क्लोराइड बनाता है।
🎯 Exam Tip: ऐमीन-अम्ल अभिक्रियाएं सरल उदासीनीकरण प्रतिक्रियाएं होती हैं जहां ऐमीन के नाइट्रोजन पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म अम्ल के प्रोटॉन को ग्रहण करता है, जिससे अमोनियम लवण बनते हैं।
Question 6. सोडियम कार्बोनेट विलयन की उपस्थिति में मेथिल आयोडाइड के आधिक्य द्वारा ऐनिलीन के ऐल्किलन में उत्पन्न होने वाले उत्पादों के लिए अभिक्रिया लिखिए।
Answer:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{CH}_3\text{I} \longrightarrow \text{[C}_6\text{H}_5\text{NH}_2\text{CH}_3\text{]}^+ \text{I}^- \)
ऐनिलीन N-मेथिलऐनिलीनियम आयोडाइड
\( \text{2[C}_6\text{H}_5\text{NH}_2\text{CH}_3\text{]}^+ \text{I}^- + \text{Na}_2\text{CO}_3 \longrightarrow \text{2C}_6\text{H}_5\text{NHCH}_3 + \text{CO}_2\uparrow + \text{2NaI} + \text{H}_2\text{O} \)
N-मेथिल ऐनिलीन
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{NHCH}_3 \xrightarrow{\text{CH}_3\text{I} \\ \text{Na}_2\text{CO}_3} \text{C}_6\text{H}_5\text{N(CH}_3)_2 \)
N,N-डाइमेथिलऐनिलिन
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{N(CH}_3)_2 + \text{CH}_3\text{I} \longrightarrow \text{[C}_6\text{H}_5\text{N(CH}_3)_3\text{]}^+ \text{I}^- \)
N,N,N-ट्राइमेथिलऐनिलीनियम आयोडाइड
\( \text{2C}_6\text{H}_5\text{N(CH}_3)_3\text{]}^+ \text{I}^- + \text{Na}_2\text{CO}_3 \longrightarrow \text{[C}_6\text{H}_5\text{N(CH}_3)_3\text{]}_2\text{CO}_3^{2-} + \text{2NaI} \)
In simple words: ऐनिलीन का मेथिल आयोडाइड के आधिक्य में ऐल्किलीकरण करने पर N-मेथिलऐनिलीन, N,N-डाइमेथिलऐनिलीन और अंत में N,N,N-ट्राइमेथिलऐनिलीनियम आयोडाइड जैसे विभिन्न उत्पाद प्राप्त होते हैं। सोडियम कार्बोनेट मध्यवर्ती आयोडाइड लवणों से ऐमीन को मुक्त करने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: ऐमीनों के ऐल्किलीकरण में, प्राथमिक ऐमीन से शुरू होकर द्वितीयक, तृतीयक ऐमीन और अंततः चतुष्क अमोनियम लवण तक उत्पाद प्राप्त होते हैं। आधिक्य में अभिकर्मक का उपयोग उत्पादों की मात्रा को नियंत्रित करता है।
Question 7. ऐनिलीन की बेन्जोइल क्लोराइड के साथ रासायनिक अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न उत्पादों के नाम लिखिए।
Answer:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{C}_6\text{H}_5\text{COCl} \xrightarrow{\text{NaOH (aq)}} \text{C}_6\text{H}_5\text{NHCOC}_6\text{H}_5 + \text{HCl} \)
ऐनिलीन बेन्जोइल क्लोराइड
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{NHCOC}_6\text{H}_5 \xrightarrow{\text{-HCl}} \text{C}_6\text{H}_5\text{NHCOC}_6\text{H}_5 \)
N-फेनिलबेन्जेमाइड (बेन्जेनिलाइड)
In simple words: ऐनिलीन, बेन्जोइल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया करके N-फेनिलबेन्जेमाइड (जिसे बेन्जेनिलाइड भी कहते हैं) नामक ऐमाइड बनाता है। यह अभिक्रिया ऐनिलीन के नाइट्रोजन पर उपस्थित हाइड्रोजन परमाणु के प्रतिस्थापन के कारण होती है।
🎯 Exam Tip: बेन्जोइलीकरण अभिक्रिया में ऐनिलीन एक नाभिकरागी के रूप में कार्य करती है, जो बेन्जोइल क्लोराइड के कार्बोनिल कार्बन पर आक्रमण करती है, जिससे एक ऐमाइड का संश्लेषण होता है। यह ऐमीनों के लक्षण को दर्शाता है।
Question 8. अणुसूत्र C3H9 N से प्राप्त विभिन्न समावयवों की संरचना लिखिए। उन समावयवों के आई०यू०पी०ए०सी० नाम लिखिए जो नाइट्रस अम्ल के साथ नाइट्रोजन गैस मुक्त । करते हैं।
Answer:
आण्विक सूत्र C3H9 N चार समावयवी ऐलिफैटिक ऐमीनों को निरूपित करता है। ये निम्नवत् है।
(i) CH3CH2CH2NH2
प्रोपेन-1-ऐमीन (1°)
(ii) CH3-NH-C2H5
N-मेथिलएथेनेमीन (2°)
(iii) CH3-N(CH3)-CH3
N,N-डाइमेथिलमेथेनेमीन (3°)
(iv) CH3-CH(NH2)-CH3
प्रोपेन-2-ऐमीन (1°)
केवल प्राथमिक ऐमीन नाइट्रस अम्ल (HONO) के साथ क्रिया करके N2 गैस मुक्त करती हैं तथा संगत प्राथमिक ऐल्कोहॉल बनाती हैं।
CH3CH2CH2NH2 + HNO2 → CH3CH2CH2OH + H2O + N2 ↑
प्रोपेन-1-ऐमीन प्रोपेन-1-ऑल (मुख्य उत्पाद)
CH3-CH(NH2)-CH3 + HNO2 → CH3-CH(OH)-CH3 + H2O + N2 ↑
प्रोपेन-2-ऐमीन प्रोपेन-2-ऑल (मुख्य उत्पाद)
In simple words: अणुसूत्र \( \text{C}_3\text{H}_9\text{N} \) से 1-प्रोपेनऐमीन, N-मेथिलएथेनेमीन, N,N-डाइमेथिलमेथेनेमीन और 2-प्रोपेनऐमीन जैसे चार ऐमीन समावयवी बन सकते हैं। इनमें से, केवल प्राथमिक ऐमीन (1-प्रोपेनऐमीन और 2-प्रोपेनऐमीन) नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया करके नाइट्रोजन गैस मुक्त करते हैं और संगत प्राथमिक ऐल्कोहॉल बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: नाइट्रस अम्ल परीक्षण प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीनों में विभेद करने के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण है। प्राथमिक ऐमीन N2 मुक्त करते हैं, जबकि द्वितीयक ऐमीन नाइट्रोसोऐमीन (तेलीय पीला) बनाते हैं, और तृतीयक ऐमीन कोई स्पष्ट अभिक्रिया नहीं देते।
Question 9. निम्नलिखित परिवर्तन कीजिए (i) 3 - मेथिल ऐनिलीन से 3 - नाइट्रोटॉलूईन
(ii) ऐनिलीन से 1, 3, 5 - ट्राइब्रोमो बेन्जीन ।
Answer:
(i) 3-मेथिल ऐनिलीन \( \xrightarrow{\text{NaNO}_2\text{/HBF}_4 \\ \text{273-278K (डाइऐजोटीकरण)}} \) 3-मेथिलबेन्जीन डाइऐजोनियम फ्लुओरोबोरेट \( \xrightarrow{\text{NaNO}_2\text{/Cu} \\ \text{ऊष्मा}} \) 3-नाइट्रोटॉलूईन
(ii) ऐनिलीन \( \xrightarrow{\text{Br}_2\text{/H}_2\text{O (ब्रोमीनीकरण)}} \) 2,4,6-ट्राइब्रोमो ऐनिलीन \( \xrightarrow{\text{NaNO}_2\text{/HCl} \\ \text{273-278 K (डाइऐजओकरण)}} \) 2,4,6-ट्राइब्रोमो-बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड \( \xrightarrow{\text{C}_2\text{H}_5\text{OH, ऊष्मा} \\ \text{अथवा H}_3\text{PO}_2\text{/Cu}^+\text{ (विऐमीनीकरण)}} \) 1,3,5-ट्राइब्रोमो बेन्जीन
In simple words: 3-मेथिल ऐनिलीन को डाइऐजोटीकरण और फिर कॉपर/नाइट्राइट के साथ ऊष्मीकरण द्वारा 3-नाइट्रोटॉलूईन में परिवर्तित किया जा सकता है। ऐनिलीन को पहले ब्रोमीन जल के साथ ट्राईब्रोमोऐनिलीन में ब्रोमीनीकृत किया जाता है, फिर डाइऐजोटीकरण करके और अंत में इथेनॉल से अपचयन करके 1,3,5-ट्राइब्रोमो बेन्जीन में बदला जाता है।
🎯 Exam Tip: ऐरोमैटिक यौगिकों के संश्लेषण में डाइऐजोटीकरण अभिक्रियाएं बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि डाइऐजोनियम लवणों को विभिन्न प्रतिस्थापन अभिकर्मकों द्वारा कई अन्य कार्यात्मक समूहों में परिवर्तित किया जा सकता है।
अतिरिक्त अभ्यास
Question 1. निम्नलिखित यौगिकों को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों में वर्गीकृत कीजिए तथा इनके आई०यू०पी०ए०सी० नाम लिखिए
1. (CH3)2CHNH2
2. CH3(CH2)2CH2NH2
3. CH3NHCH(CH3)2
4. (CH3)3CNH2
5. C6H5NHCH3
6. (CH3CH2)2NCH3
7. m-BrC6H4NH2
Answer:
1. प्रोपेन-2-ऐमीन (1°)
2. प्रोपेन-1-ऐमीन (1°)
3. N-मेथिल प्रोपेन-2-ऐमीन (2°)
4. 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऐमीन (3°)
5. N-मेथिलबेन्जीनेमीन या N-मेथिलऐनिलीन (2°)
6. N-एथिल, N-मेथिलऐथेनेमीन (3°)
7. 3-ब्रोमोबेन्जैनेमीन या 3-ब्रोमोऐनिलीन (1°)
In simple words: ऐमीनों का वर्गीकरण नाइट्रोजन से जुड़े कार्बन परमाणुओं की संख्या पर आधारित होता है - एक के लिए प्राथमिक, दो के लिए द्वितीयक, और तीन के लिए तृतीयक। प्रत्येक यौगिक का IUPAC नाम उसकी कार्बन श्रृंखला और प्रतिस्थापकों को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: ऐमीनों के IUPAC नामकरण में, N-प्रतिस्थापित ऐमीनों के लिए 'N-' उपसर्ग का उपयोग करके प्रतिस्थापकों को इंगित करना महत्वपूर्ण है। प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक वर्गीकरण नाइट्रोजन से सीधे जुड़े एल्काइल समूहों की संख्या पर निर्भर करता है।
Question 2. निम्नलिखित युग्मों के यौगिकों में विभेद के लिए एक रासायनिक परीक्षण दीजिए (i) मेथिल ऐमीन एवं डाइमेथिल ऐमीन
(ii) द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन
(iii) एथिल ऐमीन एवं ऐनिलीन
(iv) ऐनिलीन एवं बेन्जिल ऐमीन
(v) ऐनिलीन एवं N-मेथिल ऐनिलीन ।
Answer:
(i) मेथिल ऐमीन एवं डाइमेथिल ऐमीन :
इनमें कार्बिलऐमीन परीक्षण द्वारा विभेद किया जा सकता है। मेथिलऐमीन प्राथमिक ऐमीन है, इसलिए यह कार्बिलऐमीन परीक्षण देती है अर्थात् KOH के ऐल्कोहॉलिक विलयन तथा CHCl3 के साथ गर्म करने पर यह मेथिल काबिलेमीन की तीव्र गन्ध देती है। इसके विपरीत, डाइमेथिलऐमीन एक द्वितीयक ऐमीन है, इसलिए यह कार्बिलऐमीन परीक्षण नहीं देती।
CH3NH2 + CHCl3 + 3KOH \( \xrightarrow{\text{ऊष्मा} \\ \text{(alc.)}} \) CH3NC + 3KCl + 3H2O
मेथिल ऐमीन मेथिल कार्बिलऐमीन (तीव्र गन्ध)
(CH3CH2)2NH \( \xrightarrow{\text{CHCl}_3\text{/KOH(alc.)} \\ \text{ऊष्मा}} \) कोई अभिक्रिया नहीं।
डाइमेथिल ऐमीन
(ii) द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन :
इनमें लिबरमैन नाइट्रोसोऐमीन परीक्षण द्वारा विभेद किया जा सकता है। द्वितीयक ऐमीन लिबरमैन नाइट्रोसोऐमीन परीक्षण देती हैं, जबकि तृतीयक ऐमीन ये परीक्षण नहीं देती ।। द्वितीयक ऐमीन HNO2, से अभिक्रिया करके पीले रंग का तैलीय N-नाइट्रोसोऐमीन देती हैं। यहाँ HNO2, को खनिज अम्ल (HCl) तथा सोडियम नाइट्राइट की अभिक्रिया द्वारा माध्यम में (in situ) ही बनाया जाता है
(CH3CH2)2NH + HO-N=O → (CH3CH2)2N-N=O + H2O
डाइएथिल ऐमीन N-नाइट्रोसोडाइएथिल ऐमीन (पीला रंग)
N-नाइट्रोसोडाइएथिल ऐमीन को फीनॉल के क्रिस्टल तथा सान्द्र H2SO2 के साथ गर्म करने पर यह एक हरा विलयन देती है जिसे जलीय NaOH के साथ क्षारीय बनाए जाने पर गहरा नीला विलयन प्राप्त होता है जो तनुकरण पर लाल हो जाता है। तृतीयक ऐमीन यह परीक्षण नहीं देती हैं।
(iii) एथिल ऐमीन एवं ऐनिलीन :
एथिलऐमीन प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीन है, जबकि ऐनिलीने प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीन है। इन्हें ऐजो रंजक परीक्षण द्वारा विभेदित किया जा सकता है। ऐजो रंजक परीक्षण – इसमें ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन की HNO2, (NaNO2, + तनु HCl ) के साथ 273-278K पर अभिक्रिया होती है तथा इसके पश्चात् 2 नैफ्थॉल (ß – नैफ्थॉल) के क्षारीय विलयन के साथ अभिक्रिया से गहरे पीले, नारंगी या लाल रंग का रंजक प्राप्त होता है।
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{HONO} + \text{HCl} \xrightarrow{\text{273-278 K}} \text{C}_6\text{H}_5\text{N} \equiv \text{NCl}^- + \text{2H}_2\text{O} \)
ऐनिलीन बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड
बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड \( \xrightarrow{\text{तनु NaOH, pH 9-10}} \) 1-फेनिल-ऐजो-2-नैफ्थॉल (नारंगी रंजक)
ऐलिफैटिक प्राथमिक ऐमीन उपर्युक्त परिस्थितियों के अन्तर्गत प्राथमिक ऐल्कोहॉलों के निर्माण के साथ नाइट्रोजन गैस तीव्रता से मुक्त करती हैं अर्थात् विलयन पारदर्शी ही रहता है।
(iv) ऐनिलीन एवं बेन्जिल ऐमीन :
इन्हें नाइट्रस अम्ल परीक्षण द्वारा विभेदित किया जा सकता है। नाइट्रस अम्ल परीक्षण – बेन्जिल ऐमीन नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया करके डाइऐजोनियम लवण बनाती है जो कम ताप पर भी अस्थायी होने के कारण N2, के विमुक्तन के साथ विघटित हो जाता है।
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_2\text{NH}_2 + \text{HNO}_2 + \text{HCl} \longrightarrow \text{[C}_6\text{H}_5\text{CH}_2\text{-N} \equiv \text{NCl]}^- \)
बेन्जिल ऐमीन
\( \text{[C}_6\text{H}_5\text{CH}_2\text{-N} \equiv \text{NCl]}^- \xrightarrow{\text{H}_2\text{O} \\ \text{विघटन}} \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_2\text{OH} + \text{HCl} + \text{N}_2 \uparrow \)
बेन्जिल ऐल्कोहॉल
ऐनिलीन HNO2, से अभिक्रिया करके बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड बनाती है जो 273 - 278 K पर स्थायी होता है, इसलिए विघटित होकर नाइट्रोजन गैस नहीं देता है।
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 \xrightarrow{\text{HNO}_2\text{ (NaNO}_2\text{+HCl)}} \text{C}_6\text{H}_5\text{N} \equiv \text{NCl}^- \)
ऐनिलीन बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड
(v) ऐनिलीन एवं N-मेथिल ऐनिलीन :
इनमें कार्बिलऐमीन परीक्षण द्वारा विभेद किया जा सकता है। ऐनिलीन प्राथमिक ऐमीन होने के कारण कार्बिलऐमीन परीक्षण देती है अर्थात् ऐल्कोहॉलिक KOH विलयन तथा CHCl3 के साथ गर्म करने पर यह फेनिल आइसोसायनाइड की हानिकारक गन्ध देती है। इसके विपरीत, N - मेथिल ऐनिलीन द्वितीयक ऐमीन होने के कारण यह परीक्षण नहीं देती ।
C6H5NH2 + CHCl3 + 3KOH \( \xrightarrow{\text{ऊष्मा} \\ \text{(alc.)}} \) C6H5NC + 3KCl + 3H2O
ऐनिलीन (प्राथमिक ऐमीन) फेनिल आइसोसायनाइड (हानिकारक दुर्गन्ध)
C6H5-NH-CH3 \( \xrightarrow{\text{CHCl}_3\text{/KOH(alc.)}} \) कोई अभिक्रिया नहीं।
N-मेथिल ऐनिलीन (द्वितीयक ऐमीन)
In simple words: विभिन्न प्रकार के ऐमीनों को पहचानने के लिए विशिष्ट रासायनिक परीक्षणों का उपयोग किया जाता है। कार्बिलऐमीन परीक्षण प्राथमिक ऐमीनों के लिए है, लिबरमैन नाइट्रोसोऐमीन परीक्षण द्वितीयक ऐमीनों के लिए, और ऐजो रंजक परीक्षण ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीनों के लिए है।
🎯 Exam Tip: विभेदक परीक्षणों में अभिकारकों और अवलोकन (जैसे रंग परिवर्तन, गैस का निकलना, गंध) को याद रखना महत्वपूर्ण है। इन परीक्षणों के पीछे के रासायनिक सिद्धांतों को समझना भी सहायक होता है।
Question 3. निम्नलिखित के कारण बताइए (i) ऐनिलीन का pKp मेथिल ऐमीन की तुलना में अधिक होता है।
(ii) एथिल ऐमीन जल में विलेय है, जबकि ऐनिलीन नहीं।
(iii) मेथिल ऐमीन फेरिक क्लोराइड के साथ जल में अभिक्रिया करने पर जलयोजित फेरिक ऑक्साइड का अवक्षेप देती है।
(iv) यद्यपि ऐमीनो समूह इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में ऑर्थों एवं पैरा-निर्देशक होता है, फिर भी ऐनिलीन नाइट्रीकरण द्वारा यथेष्ट मात्रा में मेटा-नाइट्रोऐनिलीन देती है।
(v) ऐनिलीन फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया प्रदर्शित नहीं करती।
(vi) ऐरोमैटिक ऐमीनों के डाइऐजोनियम लवण ऐलिफैटिक ऐमीनों से प्राप्त लवण से अधिक स्थायी होते हैं।
(vii) प्राथमिक ऐमीन के संश्लेषण में गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण को प्राथमिकता दी जाती
Answer:
(i) ऐनिलीन, मेथिलऐमीन से अधिक दुर्बल क्षार होती है। ऐनिलीन में N - परमाणु पर एकाकी युग्म इलेक्ट्रॉन बेन्जीन वलय पर विस्थानीकृत हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व घट जाता है। दूसरी ओर, मेथिलऐमीन में CH3 समूह के + I प्रभाव के कारण N-परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है। अतः ऐनिलीन मेथिलऐमीन से दुर्बल क्षार होता है, अतः इसका pKb, मान मेथिलऐमीन से उच्च होता है।
(ii) एथिलऐमीन जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन आबन्ध बनाने के कारण जल में विलेय होती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह व्याख्या एथिलऐमीन के पानी में घुलनशीलता को दर्शाती है, जहाँ एथिलऐमीन के अणु पानी के अणुओं के साथ हाइड्रोजन बंधन बना सकते हैं। यह हाइड्रोजन बंधन एथिलऐमीन के जल में विलेय होने का कारण है।
दूसरी ओर, ऐनिलीन जल में वृहत् हाइड्रोकार्बन भाग C6 H5 के कारण अविलेय होता है, क्योंकि यह हाइड्रोजन आबन्ध नहीं बनाता है।
(iii) मेथिलऐमीन जल से अधिक क्षारीय होने के कारण जल से प्रोटॉन ग्रहण करके OH- आयन मुक्त करती है।
ये OH- आयन जल में उपस्थित Fe3+ आयनों से संयुक्त होकर जलयोजित फेरिक ऑक्साइड का भूरा अवक्षेप देती हैं।
\( \text{FeCl}_3 \longrightarrow \text{Fe}^{3+} + \text{3Cl}^- \)
\( \text{2Fe}^{3+} + \text{6OH}^- \longrightarrow \text{2Fe(OH)}_3 \text{ या Fe}_2\text{O}_3\text{.3H}_2\text{O} \)
जलयोजित फेरिक ऑक्साइड (भूरा अवक्षेप)
(iv) नाइट्रीकरण की प्रक्रिया सान्द्र HNO3 तथा सान्द्र H2SO4 के मिश्रण की उपस्थिति में होती है। इन अम्लों की उपस्थिति में अधिकांश ऐनिलीन प्रोटॉनीकृत होकर ऐनिलीनियम आयन बनाती है। अतः । अम्लों की उपस्थिती में अभिक्रिया मिश्रण में ऐनिलीन और ऐनिलीनियम आयन होते हैं -NH2, समूह ऐनिलीन में ऑर्थों तथा पैरा निर्देशक होता है तथा सक्रियक (dactivating) होता है, जबकि ऐनिलीनियम आयन में समूह मेटा निर्देशक तथा निष्क्रियकारक होता है। ऐनिलीन के नाइट्रीकरण से p-नाइट्रोऐनिलीन प्राप्त होती है, जबकि ऐनिलीनियम आयन मेटा नाइट्रोऐनिलीन देता है।
ऐनिलीन \( \xrightarrow{\text{+ NO}_2 \\ \text{-H}^+} \) p-नाइट्रोऐनिलीन (51%)
ऐनिलीनियम आयन \( \xrightarrow{\text{+ NO}_2 \\ \text{-H}^+} \) o-नाइट्रोऐनिलीन (2%) m-नाइट्रोऐनिलीन (47%)
अतः ऐनिलीन का नाइट्रीकरण ऐमीनो समूह के प्रोटॉनीकरण द्वारा m - नाइट्रोऐनिलीन देता है।
(v) ऐल्किलीकरण तथा ऐसिलीकरण की तरह ऐनिलीन फ्रीडल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया नहीं देती है क्योंकि यह एलुमिनियम क्लोराइड जो कि उत्प्रेरक के रूप में प्रयुक्त होता है (लुईस अम्ल) के साथ लवण बनाती है। इस नाइट्रोजन परमाणु के कारण ऐनिलीन -NH2, समूह के नाइट्रोजन परमाणु पर धनावेश आ जाता है अतः यह पुनः अभिक्रिया के लिए प्रबल निष्क्रियकारक समूह का कार्य करता है।
(vi) ऐरोमैटिक ऐमीनों के डाइऐजोनियम लवण ऐलिफैटिक ऐमीनों के लवणों से अधिक स्थायी होते हैं। क्योंकि निम्न ताप पर ऐलिफैटिक ऐमीनों के डाइऐजोनियम लवण वियोजित होकर नाइट्रोजन गैस देते हैं।
R-CH2NH2 \( \xrightarrow{\text{HNO}_3 \text{ + HCl} \\ \text{273-278 K}} \) [R-CH2-N≡NCl-]-
अस्थायी यौगिक
वियोजन \( \downarrow \) H2O
R-CH2OH + N2 \( \uparrow \) + HCl
ऐनिलीन \( \xrightarrow{\text{HNO}_2 \text{ + HCl} \\ \text{273-278K}} \) [C6H5-N≡NCl-]-
(स्थायी, वियोजित नहीं होता है।)
(vii) गैब्रिएल थैलिमाइड अभिक्रिया से शुद्ध प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होती है। अतएव, इसका प्रयोग प्राथमिक ऐमीनों के संश्लेषण में किया जाता है।
In simple words: ऐमीनों के व्यवहार को उनकी क्षारीयता, जल में घुलनशीलता, अभिक्रियाशीलता और संश्लेषण विधियों के आधार पर समझा जा सकता है। अनुनाद, इलेक्ट्रॉन दाता/ग्राही प्रभाव और हाइड्रोजन बंधन जैसे कारक इन गुणों को प्रभावित करते हैं, जिससे ऐलिफैटिक और ऐरोमैटिक ऐमीनों के बीच महत्वपूर्ण अंतर आते हैं।
🎯 Exam Tip: 'कारण बताइए' प्रकार के प्रश्नों के लिए, रासायनिक सिद्धांतों जैसे अनुनाद, प्रेरणिक प्रभाव, हाइड्रोजन बंधन, और स्टेरिक बाधाओं को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक बिंदु के लिए ठोस रासायनिक तर्क प्रस्तुत करें।
Question 8. निम्नलिखित परिवर्तन निष्पादित कीजिए (i) नाइट्रोबेन्जीन से बेन्जोइक अम्ल
(ii) बेन्जीन से m-ब्रोमोफीनॉल
(iii) बेन्जोइक अम्ल से ऐनिलीन
(iv) ऐनिलीन से 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ्लुओरोबेन्जीन
(v) बेन्जिल क्लोराइड से 2 – फेनिलएथेनेमीन
(vi) क्लोरोबेन्जीन से p – क्लोरोऐनिलीन
(vii) बेन्जेमाइड से टॉलूईन
(viii) ऐनिलीन से p – ब्रोमोऐनिलीन
(ix) ऐनिलीन से बेन्जिल ऐल्कोहॉल
Answer:
(i)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह अनुक्रम नाइट्रोबेन्जीन से बेन्जोइक अम्ल में परिवर्तन को दर्शाता है। पहले नाइट्रोबेन्जीन का अपचयन Fe/HCl और NaOH से ऐनिलीन में होता है, फिर डाइऐजोटीकरण से बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड बनता है। अंत में, CuCN/KCN और जल-अपघटन (H3O+) के माध्यम से बेन्जोइक अम्ल प्राप्त होता है।
(ii)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस प्रक्रिया में बेन्जीन से m-ब्रोमोफीनॉल का संश्लेषण दिखाया गया है। बेन्जीन का नाइट्रीकरण नाइट्रोबेन्जीन देता है, जिसका ब्रोमीनीकरण m-ब्रोमोनाइट्रोबेन्जीन में होता है। फिर अपचयन (Sn/HCl) से m-ब्रोमोऐनिलीन बनता है, और डाइऐजोटीकरण के बाद जल के साथ क्वथन (तनु H2SO4) से m-ब्रोमोफीनॉल प्राप्त होता है।
(iii)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह बेन्जोइक अम्ल को ऐनिलीन में बदलने का मार्ग दिखाता है। बेन्जोइक अम्ल को SOCl2 से बेन्जोइल क्लोराइड में परिवर्तित किया जाता है, जो फिर NH3 से बेन्जेमाइड बनाता है। अंततः, हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया (Br2-KOH) का उपयोग करके बेन्जेमाइड से ऐनिलीन प्राप्त होती है।
(iv)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह ऐनिलीन को 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ्लुओरोबेन्जीन में बदलने की प्रक्रिया है। ऐनिलीन का ब्रोमीनीकरण (Br2-H2O) 2,4,6-ट्राइब्रोमोऐनिलीन देता है। इसका डाइऐजोटीकरण (NaNO2/HBF4) 2,4,6-ट्राइब्रोमोबेन्जीन डाइऐजोनियम फ्लुओरोबोरेट बनाता है, जिसे गर्म करने पर 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ्लुओरोबेन्जीन प्राप्त होता है।
(v)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस परिवर्तन में बेन्जिल क्लोराइड से 2-फेनिलएथेनेमीन का निर्माण दिखाया गया है। बेन्जिल क्लोराइड की KCN के साथ अभिक्रिया से फेनिलएथेननाइट्राइल बनता है, जिसका LiAlH4 द्वारा अपचयन करने पर 2-फेनिलएथेनेमीन प्राप्त होता है।
(vi)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह क्लोरोबेन्जीन को p-क्लोरोऐनिलीन में बदलने की प्रक्रिया है। क्लोरोबेन्जीन का नाइट्रीकरण (सान्द्र HNO3 + सान्द्र H2SO4) p-क्लोरोनाइट्रोबेन्जीन (मुख्य समावयवी) देता है, जिसका Sn/HCl से अपचयन करने पर p-क्लोरोऐनिलीन प्राप्त होता है।
(vii)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह बेन्जोइक अम्ल को टॉलूईन में बदलने की प्रक्रिया है (चित्र में बेन्जेमाइड से टॉलूईन दिखाया गया है, प्रश्न में बेन्जेमाइड से टॉलूईन है)। बेन्जेमाइड की हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया (Br2/NaOH) से ऐनिलीन प्राप्त होती है। ऐनिलीन का डाइऐजोटीकरण (NaNO2+HCl) बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड देता है। इसका अपचयन (H3PO2/-H2O/Cu) बेन्जीन बनाता है, जिसे CH3Cl+ निर्जल AlCl3 के साथ क्रिया कर टॉलूईन में बदला जाता है। (चित्र में m-ब्रोमोऐनिलीन से p-ब्रोमोऐनिलीन की भी प्रक्रिया है जो भाग (viii) से संबंधित है।)
(viii)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह ऐनिलीन से p-ब्रोमोऐनिलीन में परिवर्तन का मार्ग है। ऐनिलीन का ऐसीटिलीकरण [(CH3CO)2O/CH3COOH] ऐसीटिनेलाइड बनाता है। ऐसीटिनेलाइड का ब्रोमीनीकरण (Br2/CH3COOH) p-ब्रोमोऐसीटिनेलाइड (मुख्य समावयवी) देता है। अंत में, जल-अपघटन (H2O/OH-) द्वारा p-ब्रोमोऐनिलीन प्राप्त होता है।
(ix)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह टॉलूईन से बेन्जिल ऐल्कोहॉल में परिवर्तन का मार्ग है। टॉलूईन का पार्श्व श्रृंखला क्लोरीनीकरण (Cl2/hv) बेन्जिल क्लोराइड देता है। बेन्जिल क्लोराइड का जलीय KOH के साथ जल-अपघटन करने पर बेन्जिल ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है।In simple words: Question 8 involves multiple-step conversions of organic compounds, typically using reactions like nitration, reduction, diazotization, hydrolysis, and alkylation to transform one functional group or aromatic ring derivative into another. Each part requires a specific sequence of reagents and conditions to achieve the desired product.
🎯 Exam Tip: Mastering common named reactions and reagents used for functional group interconversions (e.g., Hofmann bromamide degradation, Sandmeyer reaction, Friedel-Crafts alkylation) is crucial for scoring well in multi-step conversion questions.
Question 9. निम्नलिखित अभिक्रियाओं में A, B तथा C की संरचना दीजिए
(i) CH3CH2I \( \xrightarrow{\text{NaCN}} \) A \( \xrightarrow{\text{OH-}} \) B \( \xrightarrow{\text{NaOH + Br2}} \) C
(ii) C6H5N2Cl \( \xrightarrow{\text{CuCN}} \) A \( \xrightarrow{\text{H2O/H+}} \) B \( \xrightarrow{\text{NH3 गर्म}} \) C
(iii) CH3CH2Br \( \xrightarrow{\text{KCN}} \) A \( \xrightarrow{\text{LiAlH4}} \) B \( \xrightarrow{\text{HNO2 (0°C)}} \) C
(iv) C6H5NO2 \( \xrightarrow{\text{Fe/HCl}} \) A \( \xrightarrow{\text{NaNO2 + HCl (273 K)}} \) B \( \xrightarrow{\text{H2O/H+}}} \) C
(v) CH3COOH \( \xrightarrow{\text{NH3 Δ}} \) A \( \xrightarrow{\text{NaOBr}} \) B \( \xrightarrow{\text{NaNO2 + HCl Δ}} \) C
(vi) C6H5NO2 \( \xrightarrow{\text{Fe/HCl}} \) A \( \xrightarrow{\text{HNO2 (273 K)}} \) B \( \xrightarrow{\text{C6H5OH (युग्मन अभिक्रिया)}} \) C
Answer:
(i)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस अभिक्रिया क्रम में आयोडोएथेन (CH3CH2I) को पहले NaCN से क्रिया करके प्रोपेननाइट्राइल (A) में बदला जाता है। फिर आंशिक जल-अपघटन (OH-) से एथेनेमाइड (B) बनता है। अंत में, हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया (Br2/NaOH) से मेथेनेमीन (C) प्राप्त होता है।
(ii)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को सायनोबेन्जीन (A) में परिवर्तित करता है, जो CuCN के साथ अभिक्रिया करता है। फिर सायनोबेन्जीन का जल-अपघटन (H2O/H+) बेन्जोइक अम्ल (B) देता है। अंत में, बेन्जोइक अम्ल को अमोनिया के साथ गर्म करने पर बेन्जेमाइड (C) प्राप्त होता है।
(iii)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस क्रम में एथिल ब्रोमाइड (CH3CH2Br) की KCN के साथ अभिक्रिया से एथिल सायनाइड (A) बनता है। इसका LiAlH4 द्वारा अपचयन n-प्रोपिलऐमीन (B) देता है। अंत में, n-प्रोपिलऐमीन की HNO2 (0°C) से अभिक्रिया n-प्रोपिल ऐल्कोहॉल (C) बनाती है।
(iv)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह नाइट्रोबेन्जीन को ऐनिलीन (A) में अपचयित करता है (Fe/HCl के साथ)। फिर ऐनिलीन का डाइऐजोटीकरण (NaNO2 + HCl, 273 K) बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड (B) देता है। अंत में, बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड का जल-अपघटन (H2O/H+) फीनॉल (C) बनाता है।
(v)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस प्रक्रिया में ऐसीटिक ऐसीड (CH3COOH) को अमोनिया के साथ गर्म करने पर ऐसीटेमाइड (A) प्राप्त होता है। फिर ऐसीटेमाइड की NaOBr के साथ अभिक्रिया से मेथिलऐमीन (B) बनती है। अंत में, मेथिलऐमीन की NaNO2 + HCl के साथ अभिक्रिया मेथिल ऐल्कोहॉल (C) देती है।
(vi)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस क्रम में नाइट्रोबेन्जीन को Fe/HCl से अपचयित कर ऐनिलीन (A) प्राप्त किया जाता है। फिर ऐनिलीन का डाइऐजोटीकरण (HNO2, 273 K) बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड (B) बनाता है। अंत में, बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड की फीनॉल (C6H5OH) के साथ युग्मन अभिक्रिया (कपलिंग रिएक्शन) से p-हाइड्रॉक्सीऐजोबेन्जीन (C) प्राप्त होता है।In simple words: This question requires identifying intermediate and final products (A, B, C) in a series of organic reactions, which often involve transformations like nitrile hydrolysis, amide degradation, amine diazotization, and reduction of nitro groups.
🎯 Exam Tip: Pay close attention to the reagents, reaction conditions (especially temperature), and the specific type of transformation each step represents. Understanding named reactions is key.
Question 10. एक ऐरोमैटिक यौगिक 'A' जलीय अमोनिया के साथ गर्म करने पर यौगिक 'B' बनाता है जो Br2, (ब्रोमीन) एवं KOH के साथ गर्म करने पर अणुसूत्र C6H7N वाला यौगिक 'C' बनाता है। A, B एवं C यौगिकों की संरचना एवं इनके आई०यू०पी०ए०सी० नाम । लिखिए।
Answer:
चूंकि यह ऐरोमैटिक यौगिक है अतः इसमें बेन्जीन वलय होगी । B, Brतथा KOH के साथ गर्म करने पर (हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया) यौगिक 'C' (अणुसूत्र C6H7N) बनाता है। केवल उच्च ऐमाइड हॉफमैन ब्रोमेमाइड अभिक्रिया [Br2 +KOH] द्वारा निम्न ऐमीन देते हैं। अतएव B, C6H5CONH2, तथा C, C6H5NH2, हैं। चूंकि यौगिक C6H5CONH2, A से प्राप्त होता है, अत: A, C6H5COOH (कार्बोक्सिलिक अम्ल) होगा, अभिक्रियाओं का अनुक्रम और A, B तथा C की संरचनाएँ अग्रवत् होंगी
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह बेन्जोइक अम्ल (A) से बेन्जेमाइड (B) और फिर ऐनिलीन (C) में परिवर्तन को दर्शाता है। बेन्जोइक अम्ल को जलीय अमोनिया के साथ गर्म करने पर बेन्जेमाइड बनता है। बेन्जेमाइड की Br2 और KOH के साथ हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया से बेन्जीनेमीन (ऐनिलीन) प्राप्त होती है, जिसका सूत्र C6H7N है।In simple words: This question uses a deductive approach: given the final product of a Hofmann bromamide degradation (C6H7N, which is aniline), and knowing it came from an amide (benzamide, B), which in turn came from a carboxylic acid (benzoic acid, A), we can identify the structures of A, B, and C.
🎯 Exam Tip: When given a sequence of reactions and the formula of a final product, work backward to identify the intermediate compounds and the initial reactant. Recognizing named reactions is crucial.
Question 11. निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए
(i) C6H5NH2 + CHCl3 + (ऐल्कोहॉली) KOH \( \longrightarrow \)
(ii) C6H5N2Cl + H3PO2 + H2O \( \longrightarrow \)
(iii) C6H5NH2 + H2SO4 (सान्द्र) \( \longrightarrow \)
(iv) C6H5N2Cl + C2H5OH \( \longrightarrow \)
(v) C6H5NH2 + Br2 (aq) \( \longrightarrow \)
(vi) C6H5NH2 + (CH3CO)2O \( \longrightarrow \)
(vii) C6H5N2Cl \( \xrightarrow{\text{(i) HBF4}} \xrightarrow{\text{(ii) NaNO2/Cu,Δ}} \)
Answer:
(i) C6H5NH2 + CHCl3 + 3KOH (alc.) \( \xrightarrow{\text{Δ}} \) C6H5NC + 3KCl + 3H2O
ऐनिलीन कार्बिलऐमीन अभिक्रिया फेनिल आइसोसायनाइड
(ii) C6H5N2Cl + H3PO2 + H2O \( \xrightarrow{\text{Cu+}} \) C6H6 + N2 + H3PO3 + HCl
बेन्जीनडाइऐजोनियम क्लोराइड अपचयन बेन्जीन
(iii) C6H5NH2 + H2SO4 (conc.) \( \longrightarrow \) C6H5NH3HSO4¯
ऐनिलीन ऐनिलीनियम हाइड्रोजन सल्फेट
(iv) C6H5N2Cl + C2H5OH \( \longrightarrow \) C6H6 + CH3CHO + N2 + HCl
बेन्जीनडाइऐजोनियम क्लोराइड बेन्जीन एथेनल
(v)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): ऐनिलीन की जलीय ब्रोमीन (Br2(aq)) के साथ अभिक्रिया से 2,4,6-ट्राइब्रोमोऐनिलीन और 3HBr प्राप्त होता है। यह ऐनिलीन के प्रबल सक्रियण के कारण होता है।
(vi)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): ऐनिलीन का ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड [(CH3CO)2O] के साथ पिरीडीन की उपस्थिति में ऐसीटिलीकरण करने पर ऐसीटिनेलाइड और ऐसीटिक ऐसीड प्राप्त होता है।
(vii)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड की HBF4 के साथ अभिक्रिया से बेन्जीन डाइऐजोनियम फ्लुओरोबोरेट बनता है। फिर इसकी NaNO2/Cu की उपस्थिति में गर्म करने पर नाइट्रोबेन्जीन, BF3 और NaF प्राप्त होता है।In simple words: This question involves completing various reactions of amines and diazonium salts, including carbylamine reaction, reduction of diazonium salts, salt formation with acids, electrophilic substitution with bromine water, acetylation, and the Balz-Schiemann reaction.
🎯 Exam Tip: Familiarize yourself with the typical reactions of aromatic amines and diazonium salts, including their reagents and expected products. Understanding reaction mechanisms can help predict products accurately.
Question 12. ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन को गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण से क्यों नहीं बनाया जा सकता? उत्तर : ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण द्वारा नहीं बनाई जा सकती क्योंकि ऐरिल हैलाइड थैलिमाइड द्वारा निर्मित ऋणीयन के साथ नाभिकस्नेही प्रतिस्थापने अभिक्रियाएँ नहीं देते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह थैलिमाइड ऋणायन और ऐल्किल हैलाइड के बीच SN2 अभिक्रिया को दर्शाता है, जिससे N-ऐल्किलथैलिमाइड बनता है। दूसरी ओर, थैलिमाइड ऋणायन और ऐरिल हैलाइड के बीच कोई अभिक्रिया नहीं होती है, क्योंकि ऐरिल हैलाइड नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन नहीं देते हैं।In simple words: Gabriel phthalimide synthesis cannot produce aromatic primary amines because aryl halides do not undergo nucleophilic substitution (SN2) reactions with the phthalimide anion, which is required for the synthesis.
🎯 Exam Tip: Understand the mechanism of Gabriel phthalimide synthesis and the limitations of SN2 reactions, especially with aryl halides, to explain why aromatic amines cannot be synthesized by this method.
Question.13. ऐलिपैटिक एवं ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीनों की नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया लिखिए ।
Answer:
(i) ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन HCI की उपस्थिचिभमें माइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया करके ऐरोमैटिक डाइऐजोनियम लवण बनाती हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह ऐनिलीन (ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन) की HNO2 और HCl के साथ 273-278 K पर डाइऐजोटीकरण अभिक्रिया को दर्शाता है, जिससे बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड और जल प्राप्त होता है।
(ii) ऐलिफैटिक प्राथमिक ऐमीन नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया करके प्राथमिक ऐल्कोहॉल तथानाइट्रोजन गैस देती हैं।In simple words: Aromatic primary amines react with nitrous acid in the presence of HCl to form stable diazonium salts at low temperatures, while aliphatic primary amines react to form highly unstable aliphatic diazonium salts, which rapidly decompose to give alcohols and nitrogen gas.
🎯 Exam Tip: Remember the key difference in reactivity: aromatic primary amines form relatively stable diazonium salts, while aliphatic primary amines yield unstable diazonium salts that quickly decompose.
Question 14. निम्नलिखित में प्रत्येक का सम्भावित कारण बताइए (i) समतुल्य अणु द्रव्यमान वाले ऐमीनों की अम्लता ऐल्कोहॉलों से कम होती है।
(ii) प्राथमिक ऐमीनों का क्वथनांक तृतीयक ऐमीनों से अधिक होता है।
(iii) ऐरोमैटिक ऐमीनों की तुलना में ऐलिफैटिक ऐमीन प्रबल क्षारक होते हैं।
Answer:
(i) किसी ऐमीन से एक प्रोटॉन निकलने पर ऐमाइड आयन प्राप्त होता है, जबकि ऐल्कोहॉल से एक प्रोटॉन निकलने पर ऐल्कॉक्साइड आयन प्राप्त होता है जैसा कि निम्नवत् दर्शाया गया है
\( \text{R-NH2} \longrightarrow \text{R-NH}^- + \text{H}^+ \)
ऐमीन ऐमाइड आयन
\( \text{R-O-H} \longrightarrow \text{RO}^- + \text{H}^+ \)
चूँकि N की तुलना में O अधिक विद्युतऋणात्मक है, इसलिए RO¯° पर ऋणावेश RNH¯° की तुलना में अधिक सरलता से रह सकता है। दूसरे शब्दों में, ऐमीन ऐल्कोहॉल से कम अम्लीय होती हैं।
(ii) प्राथमिक ऐमीनों के N-परमाणुओं पर दो हाइड्रोजन परमाणुओं की उपस्थिति के कारण ये विस्तीर्ण अन्तराअणुक हाइड्रोजन आबन्ध दर्शाती हैं, जबकि तृतीयक ऐमीन में नाइट्रोजन पर हाइड्रोजन अणुओं के अभाव के कारण अन्तराआण्विक संघटन नहीं होता। इसलिए प्राथमिक ऐमीनों का क्वथनांक तृतीयक ऐमीनों से अधिक होता है।
उदाहरणार्थ :
n-ब्यूटिलऐमीन का क्वथनांक (351 K) तृतीयक ब्यूटिलऐमीन (क्वथनांक 319 K) से अधिक होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्राथमिक ऐमीनों में नाइट्रोजन-हाइड्रोजन बंधों के कारण बनने वाले अन्तराअणुक हाइड्रोजन आबन्ध को दर्शाता है, जो उन्हें उच्च क्वथनांक देता है। इसके विपरीत, तृतीयक ऐमीनों में नाइट्रोजन पर कोई हाइड्रोजन परमाणु नहीं होने के कारण हाइड्रोजन आबन्ध नहीं बनता, जिससे उनका क्वथनांक कम होता है।
(iii) ऐरोमैटिक ऐमीनों की तुलना में ऐलिफेटिक ऐमीन प्रबल क्षारक होते हैं क्योंकि
(क) ऐरोमैटिक ऐमीनों में अनुनाद के कारण नाइट्रोजन परमाणु का एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म बेन्जीन वलय पर विस्थानीकृत हो जाता है, इसलिए यह प्रोटॉनीकरण के लिए सरलतापूर्वक उपलब्ध हो जाता है।
(ख) ऐरिल ऐमीन आयनों को स्थायित्व संगत ऐरिल ऐमीनों की तुलना में कम होता है अर्थात् ऐरोमैटिक ऐमीनों का प्रोटॉनीकरण उपयुक्त नहीं होता है।In simple words: Amines are less acidic than alcohols due to nitrogen being less electronegative than oxygen, making the O-H bond more polarized. Primary amines have higher boiling points than tertiary amines because they can form more extensive intermolecular hydrogen bonds. Aliphatic amines are stronger bases than aromatic amines because the lone pair on nitrogen in aromatic amines is delocalized into the benzene ring, making it less available for protonation.
🎯 Exam Tip: For acidity/basicity and boiling point comparisons, always consider electronegativity, inductive effects, resonance, and the extent of hydrogen bonding. These are fundamental concepts for explaining organic properties.
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण का प्रयोग किसके विरचन के लिए किया जाता है?
(i) 1° ऐमीन
(ii) 2° ऐमीन
(iii) 3° ऐमीन
(iv) ये सभी
Answer: (i) 1° ऐमीन
In simple words: Gabriel phthalimide synthesis is a method specifically used to prepare primary (1°) amines.
🎯 Exam Tip: Remember that Gabriel phthalimide synthesis is highly selective and produces only primary amines, not secondary or tertiary amines.
Question 2. क्लोरोफॉर्म तथा ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ किसे गर्म करने पर कार्बिलऐमीन की अरुचिकर गन्ध प्राप्त होती है?
(i) कोई ऐरोमैटिक ऐमीन
(ii) कोई प्राथमिक ऐमीन
(iii) कोई ऐमीन
(iv) कोई ऐलिफैटिक ऐमीन
Answer: (ii) कोई प्राथमिक ऐमीन
In simple words: The carbylamine reaction (also known as isocyanide test) is a characteristic reaction of primary amines (both aliphatic and aromatic) where they react with chloroform and alcoholic KOH to produce foul-smelling isocyanides.
🎯 Exam Tip: The carbylamine reaction is a key test to distinguish primary amines from secondary and tertiary amines, as only primary amines give this positive result.
Question 3. निम्न में से किस अभिक्रिया द्वारा ऐमाइड ऐमीन में परिवर्तित किये जा सकते हैं? (i) पर्किन
(ii) क्ले जन
(iii) हॉफमान ब्रोमेमाइड
(iv) क्लीमेन्सन
Answer: (iii) हॉफमान ब्रोमेमाइड
In simple words: The Hofmann bromamide degradation reaction converts an amide into a primary amine with one less carbon atom than the original amide.
🎯 Exam Tip: Hofmann bromamide degradation is a crucial reaction for chain shortening (decreasing carbon atoms) while converting an amide to a primary amine.
Question 4. निम्न में से कौन हॉफमान अभिक्रिया द्वारा प्राथमिक ऐमीन देता है? (i) RCOCI
(ii) RCONHCH3
(iii) RCONH2
(iv) RCOOR
Answer: (iii) RCONH2
In simple words: The Hofmann bromamide degradation reaction specifically applies to primary amides (RCONH2), converting them into primary amines.
🎯 Exam Tip: Identify the functional group: the Hofmann bromamide reaction is specific for amides with a -CONH2 group.
Question 5. C3H7NH2, NH3, CH3NH2, C2H5NH2 तथा C6H5NH2, में से सबसे कम क्षारीय यौगिक है।
(i) C3H7NH2
(ii) NH3
(iii) CH3NH2
(iv) C6H5NH2
Answer: (iv) C6H5NH2
In simple words: Among the given compounds, aniline (C6H5NH2) is the least basic because the lone pair of electrons on the nitrogen atom is delocalized into the benzene ring, making it less available for protonation compared to aliphatic amines or ammonia.
🎯 Exam Tip: Remember that resonance stabilization of the lone pair makes aromatic amines weaker bases than aliphatic amines or ammonia. Alkyl groups increase basicity through +I effect.
Question 6. निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक KOH तथा प्राथमिक ऐमीन के साथ गर्म करने पर कार्बिलेमीन परीक्षण देता है? (i) CHCl3
(ii) CH3CI
(iii) CH3OH
(iv) CH3 CN
Answer: (i) CHCI3
In simple words: Chloroform (CHCl3) is the reagent that, when heated with a primary amine and KOH, gives the characteristic foul smell of a carbylamine, indicating a positive carbylamine test.
🎯 Exam Tip: The reagents for the carbylamine reaction are a primary amine, chloroform (CHCl3), and a base (like alcoholic KOH).
Question 7. निम्न में से कौन-सी ऐमीन नाइट्रस अम्ल के साथ क्रिया करके N, मुक्त नहीं करती है? (i) ट्राइमेथिलेमीन
(ii) ऐथिलेमीन
(iii) s – ब्यूटिलेमीन
(iv) t – ब्यूटिलेमीन
Answer: (i) ट्राइमेथिलेमीन
In simple words: Tertiary amines (like trimethylamine) do not have a hydrogen atom attached to the nitrogen, so they cannot react with nitrous acid to release nitrogen gas, unlike primary and secondary amines.
🎯 Exam Tip: Primary and secondary amines react with nitrous acid to release N2 gas. Tertiary amines react differently, typically forming N-nitrosoammonium salts which do not evolve N2.
Question 8. निम्न में से कौन – सी ऐमीन KMnO4, द्वारा संगत नाइट्रोयौगिक में सीधे ऑक्सीकृत हो जाती है?
(i)CH3NH2
(ii) C6H5NH2
(iii) (CH3)2NH
(iv) (CH3)3C-NH2
Answer: (iii) (CH3)2NH
In simple words: Secondary amines (like dimethylamine) can be oxidized by strong oxidizing agents like KMnO4 to form nitroso compounds, which can further oxidize to nitro compounds. Primary amines often undergo deamination, while tertiary amines resist direct oxidation to nitro compounds.
🎯 Exam Tip: The oxidation products of amines vary with their class. Primary amines are often converted to imines or nitriles, secondary amines to nitrosoamines or nitro compounds, and tertiary amines are generally resistant or undergo C-N bond cleavage.
Question 9. निम्नलिखित में से धनात्मक कार्बिलेमीन परीक्षण कौन देता है? (i) 2, 4 – डाइमेथिलेनिलीन
(ii) N, N – डाइमेथिलेनिलीन
(iii) N – मेथिल -o- मेथिलेनिलीन
(iv) p – मेथिलबेन्जिलेमीन
Answer: (i) 2, 4-डाइमेथिलेनिलीन
In simple words: The carbylamine test is positive for primary amines. Among the given options, 2,4-dimethylaniline is a primary aromatic amine, while N,N-dimethylaniline and N-methyl-o-methylaniline are tertiary and secondary amines respectively. p-methylbenzylamine is also primary. Rechecking the options. Wait, p-मेथिलबेन्जिलेमीन (p-methylbenzylamine) is C6H4(CH3)CH2NH2, which is also a primary amine. 2,4-Dimethylaniline is C6H3(CH3)2NH2, which is also a primary amine. The question asks for "कौन देता है" (which gives). Let me re-evaluate.
p-मेथिलबेन्जिलेमीन is C6H4(CH3)CH2NH2 - a primary aliphatic amine (benzylamine derivative).
2,4-डाइमेथिलेनिलीन is C6H3(CH3)2NH2 - a primary aromatic amine.
Both are primary amines and would give the carbylamine test. Usually, MCQs have one best answer. In many contexts, "ऐनिलीन" (aniline) refers to the primary aromatic amine structure. Both (i) and (iv) are primary amines. If the question implies typical aromatic amine, (i) is a direct derivative of aniline. If it implies any primary amine, both are correct. Given the context of amines, both are primary. I will stick to the provided answer. If it's a primary amine, it gives a positive test. I will assume the provided answer (i) is specific enough.
Let's check the options again:
(i) 2,4-डाइमेथिलेनिलीन (2,4-dimethylaniline) - This is a primary aromatic amine. (R-NH2)
(ii) N,N-डाइमेथिलेनिलीन (N,N-dimethylaniline) - This is a tertiary aromatic amine. (R-NR2)
(iii) N-मेथिल-o-मेथिलेनिलीन (N-methyl-o-methylaniline) - This is a secondary aromatic amine. (R-NHR')
(iv) p-मेथिलबेन्जिलेमीन (p-methylbenzylamine) - This is a primary aliphatic amine. (Ar-CH2-NH2)
Both (i) and (iv) are primary amines and should give the carbylamine test. If the question implicitly targets an *aniline derivative* or a common structure, then (i) might be preferred. But chemically, (iv) is equally valid. However, since the provided answer is (i), I will proceed with that.
🎯 Exam Tip: The carbylamine test is specific for all primary amines, whether aliphatic or aromatic. Therefore, any compound containing an -NH2 group directly attached to an alkyl or aryl group will give a positive test.
Question 10. n – प्रोपिलेमीन वाष्पशील यौगिक X देती है जो ऐल्कोहॉलीय क्षार तथा क्लोरोफॉर्म के साथ गर्म करने पर अरुचिकर गन्ध देती है।xकी संरचना है। (i) CH3CH2CH2 CN
(ii) (CH3)2CHCN
(iii) CH3CH2CH2 NC
(iv) (CH3)2CHNC
Answer: (iii) CH3CH2CH2 NC
In simple words: n-Propylamine, being a primary amine, undergoes the carbylamine reaction (with alcoholic base and chloroform) to form a foul-smelling isocyanide. Since n-propylamine has a straight chain of three carbons, the corresponding isocyanide will be n-propyl isocyanide (CH3CH2CH2NC).
🎯 Exam Tip: The carbylamine reaction converts a primary amine (R-NH2) into an isocyanide (R-NC) without altering the carbon skeleton of the alkyl group. Identify the alkyl group in the starting amine to determine the isocyanide product.
Question 11. नाइट्रोबेन्जीन का प्रबल अम्लीय माध्यम में अपचयन करने पर अन्तिम उत्पाद बनता है (2017)
(i) ऐनिलीन
(ii) फेनिल हाइड्रॉक्सिल ऐमीन
(iii) p – ऐमीनो फीनॉल
(iv) ऐजोबेन्जीन
Answer: (i) ऐनिलीन
In simple words: When nitrobenzene is reduced in a strong acidic medium (e.g., with Sn/HCl or Fe/HCl), it is completely reduced to aniline.
🎯 Exam Tip: Remember that the reduction product of nitrobenzene varies with the medium. In acidic medium, it yields aniline; in neutral medium, phenylhydroxylamine; and in alkaline medium, azoxybenzene, azobenzene, or hydrazobenzene, depending on the conditions.
Question 12. नाइट्रोबेन्जीन को कहते हैं (2017)
(i) कसीस का तेल
(ii) मिरवेन का तेल
(iii) सिनेमन ऑयल
(iv) विन्टरग्रीन का तेल
Answer: (ii) मिरवेन का तेल
In simple words: Nitrobenzene is commonly known as "Oil of Mirbane" due to its almond-like odor.
🎯 Exam Tip: Knowing common names of important organic compounds like nitrobenzene can be helpful for quick recall in exams.
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. ऐमीन किन्हें कहते हैं? प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन का एक-एक उदाहरण दीजिए तथा उनके साधारण नाम लिखिए । उत्तर : ऐमीन :
अमोनिया के ऐल्किल व्युत्पन्न को ऐल्किल ऐमीन कहते हैं।
Answer:
प्राथमिक ऐमीन - CH3-CH2-NH2
एथिल ऐमीन
(1° ऐमीन)
द्वितीयक ऐमीन - CH3-NH-CH3
डाइमेथिल ऐमीन
(2° ऐमीन)
तृतीयक ऐमीन - CH3-N-CH3
CH3
ट्राइमेथिल ऐमीन
(3° ऐमीन)
In simple words: Amines are organic compounds derived from ammonia (NH3) by replacing one or more hydrogen atoms with alkyl or aryl groups. They are classified as primary, secondary, or tertiary based on the number of alkyl/aryl groups attached to the nitrogen atom.
🎯 Exam Tip: Classification of amines is fundamental. Understand that it depends on the substitution on the nitrogen, not on the carbon attached to nitrogen (which is the case for alcohols and halides).
Question 2. नाइट्रोबेन्जीन के उदासीन माध्यम में अपचयन की अभिक्रिया लिखिए।
Answer:
नाइट्रोबेन्जीन का उदासीन माध्यम में अपचयन करने पर फेनिल हाइड्रॉक्सिल ऐमीन प्राप्त होता है। उदाहरण के लिए, जिंक चूर्ण और अमोनियम क्लोराइड (Zn/NH4Cl) के साथ नाइट्रोबेन्जीन का अपचयन।
\( \text{C6H5NO2} + 2\text{Zn} + 4\text{NH4Cl} \longrightarrow \text{C6H5NHOH} + 2\text{ZnCl2} + 4\text{NH3} + \text{H2O} \)
नाइट्रोबेन्जीन फेनिल हाइड्रॉक्सिल ऐमीन
In simple words: In a neutral medium, nitrobenzene is reduced to phenylhydroxylamine, not directly to aniline.
🎯 Exam Tip: The type of reducing agent and the pH of the medium significantly influence the reduction product of nitrobenzene. Neutral reduction typically stops at the hydroxylamine stage.
Question 3. क्या होता है जब ऐनिलीन की क्रिया Br, जल से करायी जाती है?
Answer:
जब ऐनिलीन की क्रिया Br2 जल से करायी जाती है, तो 2, 4, 6 – ट्राइब्रोमोऐनिलीन बनता है।
\( \text{C6H5NH2} + 3\text{Br2 (aq)} \longrightarrow \text{C6H2Br3NH2} + 3\text{HBr} \)
ऐनिलीन 2, 4, 6 – ट्राइब्रोमोऐनिलीन
In simple words: Aniline reacts rapidly with bromine water to form 2,4,6-tribromoaniline as a white precipitate, due to the strong activating effect of the -NH2 group on the benzene ring.
🎯 Exam Tip: The -NH2 group is a powerful activating group, leading to tribromination of the benzene ring even in the absence of a Lewis acid catalyst when reacting with bromine water.
Question 4. क्या होता है जब एथिलेमीन की क्रिया बेन्जेल्डिहाइड से कराते हैं?
Answer:
जब एथिलेमीन की क्रिया बेन्जेल्डिहाइड से कराते हैं, तो बेन्जेलिडीन एथिलेमीन (शिफ क्षारक) बनता है।
\( \text{C6H5CHO} + \text{CH3CH2NH2} \longrightarrow \text{C6H5CH=NCH2CH3} + \text{H2O} \)
बेन्जेल्डिहाइड एथिलेमीन बेन्जेलिडीन एथिलेमीन (शिफ क्षारक)
In simple words: Ethylamine reacts with benzaldehyde via a condensation reaction to form an imine, specifically N-ethylbenzaldimine, also known as a Schiff base.
🎯 Exam Tip: The reaction between an aldehyde/ketone and a primary amine forms a Schiff base (imine) and water. This is a common condensation reaction in organic chemistry.
Question 5. मेण्डियस अभिक्रिया को प्रदर्शित कीजिए।
Answer:
मेण्डियस अभिक्रिया (Mendius Reaction) : यह ऐल्किल या ऐरिल सायनाइडों का सोडियम तथा ऐल्कोहॉल के साथ अपचयन है, इससे प्राथमिक (1°) ऐमीन प्राप्त होती है।
\( \text{R-CN} + 4[\text{H}] \xrightarrow{\text{Na/C2H5OH}} \text{R-CH2NH2} \)
ऐल्किल सायनाइड प्राथमिक ऐमीन
In simple words: The Mendius reaction is the reduction of nitriles (alkyl or aryl cyanides) using sodium and alcohol, which yields primary amines.
🎯 Exam Tip: The Mendius reaction is a useful method for synthesizing primary amines, and it results in a chain elongation (one more carbon atom than the starting halide if starting from R-X \( \longrightarrow \) R-CN \( \longrightarrow \) R-CH2NH2).
Question 6. क्या होता है जब बेन्जेमाइड को ब्रोमीन के साथ क्षार की उपस्थिति में गर्म किया जाता है? रासायनिक समीकरण लिखिए। उत्तर : ऐनिलीन बनती है।
Answer:
\( \text{C6H5CONH2} + \text{Br2} + 4\text{KOH} \longrightarrow \text{C6H5NH2} + \text{K2CO3} + 2\text{KBr} + 2\text{H2O} \)
बेन्जैमाइड ऐनिलीन
In simple words: When benzamide is heated with bromine and a base (like KOH), it undergoes Hofmann bromamide degradation to form aniline, which has one less carbon atom than the original benzamide.
🎯 Exam Tip: Recognize this as the Hofmann bromamide degradation reaction, a classic method for converting primary amides to primary amines with chain shortening.
Question 7. आप एथेनेमाइड को मेथेनेमीन में किस प्रकार परिवर्तित करेंगे?
Answer:
एथेनेमाइड (CH3CONH2) को मेथेनेमीन (CH3NH2) में परिवर्तित करने के लिए हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया का प्रयोग किया जाता है।
\( \text{CH3CONH2} + \text{Br2} + 4\text{KOH} \longrightarrow \text{CH3NH2} + \text{K2CO3} + 2\text{KBr} + 2\text{H2O} \)
एथेनेमाइड मेथेनेमीन
In simple words: Ethanamide can be converted to methanamine using the Hofmann bromamide degradation reaction, which removes the carbonyl carbon and converts the amide to a primary amine with one fewer carbon.
🎯 Exam Tip: The Hofmann bromamide reaction is the go-to method for synthesizing an amine with one carbon less than the starting amide. It's a key chain-shortening reaction.
Question 8. क्या होता है जब R – N = C का जल अपघटन अम्लीय माध्यम में किया जाता है? रासायनिक समीकरण लिखिए ।
Answer:
जब एक आइसोसायनाइड (R-N=C) का अम्लीय माध्यम में जल अपघटन किया जाता है, तो यह प्राथमिक ऐमीन और फॉर्मिक अम्ल देता है।
\( \text{R-NC} + 2\text{H2O} \xrightarrow{\text{H+}} \text{R-NH2} + \text{HCOOH} \)
आइसोसायनाइड प्राथमिक ऐमीन फॉर्मिक अम्ल
In simple words: The hydrolysis of an isocyanide in an acidic medium produces a primary amine and formic acid.
🎯 Exam Tip: This reaction is a characteristic chemical property of isocyanides, providing a pathway to primary amines and formic acid upon hydrolysis.
Question 9. निम्न अभिक्रियाओं को पूर्ण कर उनके नाम लिखिए (i) RNH2 +CHCl3 + 3KOH \( \longrightarrow \)
(ii) RCONH2 + Br2 + 4NaOH \( \longrightarrow \)
Answer:
(i) \( \text{RNH2} + \text{CHCl3} + 3\text{KOH} \longrightarrow \text{R-NC} + 3\text{KCl} + 3\text{H2O} \)
यह अभिक्रिया कार्बिलेमीन अभिक्रिया कहलाती है।
(ii) \( \text{RCONH2} + \text{Br2} + 4\text{NaOH} \longrightarrow \text{R-NH2} + \text{Na2CO3} + 2\text{NaBr} + 2\text{H2O} \)
इस अभिक्रिया को हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया या हॉफमान निम्नीकरण अभिक्रिया कहते हैं।
In simple words: The first reaction is the carbylamine test, where a primary amine reacts with chloroform and a base to form an isocyanide. The second reaction is Hofmann bromamide degradation, which converts a primary amide into a primary amine with one less carbon.
🎯 Exam Tip: These two reactions are important named reactions in amine chemistry: carbylamine test for primary amines and Hofmann bromamide degradation for synthesizing primary amines from amides.
Question 10. निम्न में A तथा B को पहचानिए
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस अभिक्रिया में बेन्जिल ब्रोमाइड (CH2Br) की KCN के साथ अभिक्रिया से बेन्जिल सायनाइड (A) बनता है। फिर बेन्जिल सायनाइड का LiAlH4 द्वारा अपचयन करने पर फेनिल एथेनेमीन (B) प्राप्त होता है।
A: बेन्जिल सायनाइड (Phenyl Cyanide) or फेनिल मेथिलनाइट्राइल (Phenylmethanenitrile)
B: फेनिल एथेनेमीन (2-Phenylethanamine)In simple words: In this reaction sequence, benzyl bromide undergoes nucleophilic substitution with cyanide to form benzyl cyanide (A), which is then reduced by LiAlH4 to form 2-phenylethylamine (B).
🎯 Exam Tip: Remember that KCN with alkyl halides leads to nitriles (cyanides), and LiAlH4 is a strong reducing agent that can reduce nitriles to primary amines.
Question 10. निम्न में A तथा B को पहचानिए
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह अभिक्रिया बेन्जिल ब्रोमाइड से बेन्जिल सायनाइड (यौगिक A) के निर्माण को दर्शाती है, जिसके बाद लिथियम एल्युमिनियम हाइड्राइड (LiAlH₄) द्वारा अपचयन से फेनिलएथेनेमीन (यौगिक B) बनता है। यह दो चरणों वाली एक संश्लेषण प्रक्रिया है। यौगिक A: बेन्जिल सायनाइड (Benzyl cyanide) यौगिक B: फेनिलएथेनेमीन (Phenylethanemine)
In simple words: बेन्जिल ब्रोमाइड को पोटेशियम सायनाइड के साथ अभिक्रिया कराकर बेन्जिल सायनाइड (A) बनाया जाता है, जिसे फिर अपचयित करके फेनिलएथेनेमीन (B) में बदला जाता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में अभिकर्मकों और उनकी कार्यप्रणाली को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर मध्यवर्ती उत्पादों (A) और अंतिम उत्पादों (B) की पहचान करने के लिए।
Question 11. ऐमीनों के क्वथनांक संगत ऐल्केनों से उच्च क्यों होते हैं?
Answer: ऐमीनों के क्वथनांक संगत ऐल्केनों से हाइड्रोजन आबन्धन के कारण उच्च होते हैं। ऐल्केनों में केवल दुर्बल वाण्डरवाल्स बल पाए जाते हैं।
In simple words: ऐमीनों में नाइट्रोजन-हाइड्रोजन बंध होते हैं जो हाइड्रोजन आबंध बना सकते हैं, जिससे अणुओं को एक साथ रखने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऐल्केनों में केवल कमजोर वैन डर वाल्स बल होते हैं, इसलिए उनके क्वथनांक कम होते हैं।
🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन आबंध की उपस्थिति और सामर्थ्य को क्वथनांक, विलेयता और अन्य भौतिक गुणों की व्याख्या के लिए एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में पहचानें।
Question 12. ट्राइमेथिलेमीन तथा n-प्रोपिलेमीन का अणुभार समान होता है लेकिन ट्राइमेथिलेमीन निम्न ताप (276 K) तथा n-प्रोपिलेमीन अधिक ताप (322 K) पर उबलता है। समझाइए।
Answer: n-प्रोपिलेमीन में N-परमाणु पर दो हाइड्रोजन परमाणु होते हैं, अतः इसका क्वथनांक अन्तरा - आणविक हाइड्रोजन आबन्धन के कारण अधिक होता है। ट्राइमेथिलेमीन \((CH_3)_2N\) तृतीयक ऐमीन होने के कारण इसमें N-परमाणु पर H-परमाणु नहीं होते हैं। जिसके परिणामस्वरूप इसमें हाइड्रोजन आबन्धन अनुपस्थित होता है तथा इसका क्वथनांक निम्न होता है।
In simple words: n-प्रोपिलेमीन में दो हाइड्रोजन परमाणु होते हैं जो हाइड्रोजन आबंध बना सकते हैं, जिससे उसका क्वथनांक अधिक होता है। ट्राइमेथिलेमीन में नाइट्रोजन से जुड़ा कोई हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता, इसलिए यह हाइड्रोजन आबंध नहीं बना पाता और इसका क्वथनांक कम होता है।
🎯 Exam Tip: आणविक संरचना में हाइड्रोजन आबंध बनाने वाले परमाणुओं की संख्या क्वथनांक को प्रभावित करती है; अधिक हाइड्रोजन आबंध अधिक क्वथनांक का कारण बनते हैं।
Question 13. कौन अधिक क्षारीय है-ऐनिलीन या अमोनिया?
Answer: अमोनिया ऐनिलीन से अधिक क्षारीय होती है।
In simple words: अमोनिया ऐनिलीन से अधिक क्षारीय है क्योंकि ऐनिलीन में नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के अनुनाद के कारण कम उपलब्ध होता है, जिससे उसकी क्षारीयता कम हो जाती है।
🎯 Exam Tip: क्षारीयता को प्रभावित करने वाले कारकों को समझें, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉन दान करने की क्षमता और अनुनाद स्थिरीकरण के प्रभाव को।
Question 14. बेन्जीन वलय पर एक इलेक्ट्रॉन विमोचक प्रतिस्थापी की उपस्थिति किस प्रकार ऐरोमैटिक ऐमीन की क्षारीय सामर्थ्य को प्रभावित करती है?
Answer: ऐरोमैटिक ऐमीन की क्षारीय सामर्थ्य बढ़ती है।
In simple words: इलेक्ट्रॉन विमोचक समूह (जो इलेक्ट्रॉन प्रदान करते हैं) बेंजीन वलय पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं, जिससे नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन युग्म की उपलब्धता बढ़ जाती है और ऐमीन की क्षारीयता बढ़ जाती है।
🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन-दान करने वाले और इलेक्ट्रॉन-निकासी करने वाले समूहों के प्रभावों को याद रखें क्योंकि वे ऐमीनों की क्षारीयता और अन्य प्रतिक्रियाशीलता को प्रभावित करते हैं।
Question 15. ऐरोमैटिक ऐमीनों में इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन, बेन्जीन की तुलना में शीघ्रता से क्यों होता है।
Answer: अनुनाद के कारण ऐनिलीन के N-परमाणु पर इलेक्ट्रॉन बेन्जीन वलय पर विस्थानीकृत (delocalised) हो जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप बेन्जीन वलय पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है। दूसरे शब्दों में, ऐनिलीन सक्रिय हो जाती है अतः ऐनिलीन में इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन शीघ्रता से होता है।
In simple words: ऐनिलीन में नाइट्रोजन पर मौजूद इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय में चला जाता है, जिससे वलय में इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है। यह वलय को अधिक सक्रिय बनाता है और इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं को बेंजीन की तुलना में तेजी से होने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: ऐनिलीन में -NH₂ समूह के अनुनाद प्रभाव को पहचानें जो ऑर्थो- और पैरा-स्थितियों को सक्रिय करता है, जिससे यह इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन के लिए अधिक प्रतिक्रियाशील हो जाता है।
Question 16. क्या होता है जब एथिलेमीन की क्रिया एथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड से कराते हैं?
Answer: एथेन बनती है।
In simple words: जब एथिल ऐमीन, एथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड जैसे ग्रिगनार्ड अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया करता है, तो एथिल ऐमीन में सक्रिय हाइड्रोजन परमाणु होने के कारण एथेन गैस बनती है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि प्राथमिक और द्वितीयक ऐमीन ग्रिगनार्ड अभिकर्मकों के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोकार्बन बनाते हैं क्योंकि वे ग्रिगनार्ड अभिकर्मक के एल्किल भाग से एक प्रोटॉन दान करते हैं।
Question 17. एथिलेमीन से एथिल आइसोसायनाइड के विरचन के लिए रासायनिक समीकरण लिखिए।
Answer:\[C_2H_5NH_2 + CHCl_3 + 3KOH \xrightarrow{\Delta} C_2H_5NC + 3KCl + 3H_2O\]
(एथिलेमीन) (एथिल आइसोसायनाइड)
In simple words: एथिल ऐमीन को क्लोरोफॉर्म और एल्कोहॉलिक पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गर्म करने पर एथिल आइसोसायनाइड बनता है, जो कार्बिलऐमीन अभिक्रिया का एक उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: कार्बिलऐमीन अभिक्रिया प्राथमिक ऐमीनों की पहचान के लिए एक विशिष्ट परीक्षण है और इसमें एक दुर्गंधयुक्त आइसोसायनाइड उत्पाद बनता है।
Question 18. एथिल ऐमीन की पहचान करने वाला एक रासायनिक परीक्षण लिखिए।
Answer: C₂H₅NH₂ को CHCl₃ और (alc.) KOH के साथ गर्म करने पर तीव्र दुर्गन्ध युक्त पदार्थ एथिल आइसोसायनाइड बनता है।
In simple words: एथिल ऐमीन की पहचान करने के लिए कार्बिलऐमीन परीक्षण का उपयोग किया जाता है, जिसमें क्लोरोफॉर्म और अल्कोहॉलिक KOH के साथ गर्म करने पर एक तेज गंध वाला एथिल आइसोसायनाइड बनता है।
🎯 Exam Tip: कार्बिलऐमीन परीक्षण प्राथमिक ऐमीनों के लिए विशिष्ट है, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीन यह परीक्षण नहीं देते हैं, इसलिए यह विभेदक परीक्षण के रूप में उपयोगी है।
Question 19. ऐमीनोएथेन (एथिलेमीन) किस प्रकार एथेनल (ऐसीटेल्डिहाइड) से प्राप्त करते हैं?
Answer: ऐमीनोएथेन (एथिलेमीन) को एथेनल से प्राप्त करने के लिए, एथेनल (एसिटैल्डिहाइड) को लिथियम एल्युमिनियम हाइड्राइड (LiAlH₄) जैसे अपचायक अभिकर्मक से अपचयित करके एथेनॉल बनाया जाता है। फिर एथेनॉल को अमोनिया से अभिक्रिया करके एथिल ऐमीन प्राप्त किया जा सकता है, या इसे पहले हैलाइड में परिवर्तित करके गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण द्वारा भी प्राप्त किया जा सकता है।
In simple words: एथेनल को पहले एथेनॉल में अपचयित किया जाता है और फिर एथेनॉल को अमोनिया या गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण के माध्यम से एथिलेमीन में बदला जाता है।
🎯 Exam Tip: एथेनल जैसे एल्डिहाइडों को LiAlH₄ द्वारा आसानी से प्राथमिक अल्कोहल में अपचयित किया जा सकता है, जो फिर अन्य संश्लेषणों के लिए महत्वपूर्ण मध्यवर्ती होते हैं।
Question 20. निम्न अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह अभिक्रिया बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड (N₂⁺Cl⁻) के अपचयन को दर्शाती है, जहाँ \(H_3PO_2\) (हाइपोफॉस्फोरस अम्ल) और \(H_2O\) (पानी) की उपस्थिति में इसे बेन्जीन में परिवर्तित किया जाता है। उत्पाद के रूप में बेन्जीन, हाइपोफॉस्फोरस अम्ल, नाइट्रोजन गैस और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल प्राप्त होते हैं।
\[ \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2^+\text{Cl}^- + \text{H}_3\text{PO}_2 + \text{H}_2\text{O} \longrightarrow \text{C}_6\text{H}_6 + \text{H}_3\text{PO}_3 + \text{N}_2 + \text{HCl} \]
In simple words: बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को हाइपोफॉस्फोरस अम्ल और पानी के साथ अभिक्रिया कराने पर बेन्जीन, फॉस्फोरस अम्ल, नाइट्रोजन गैस और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनते हैं।
🎯 Exam Tip: डाइऐजोनियम लवणों की अभिक्रियाओं में अपचयन और प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के लिए विभिन्न अभिकर्मकों को याद रखें। \(H_3PO_2\) बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को बेन्जीन में अपचयित करने के लिए एक सामान्य अभिकर्मक है।
Question 21. ऐमाइड ऐमीनों से अधिक अम्लीय होते हैं, क्यों?
Answer: ऐमाइड ऐमीनों से अधिक अम्लीय होते हैं, क्योंकि -NH₂ समूह के N-परमाणु में एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित होता है, लेकिन एकाकी युग्म में निम्नवत् अनुनाद (resonance) पाया जाता है
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह अनुनाद संरचनाओं को दर्शाता है जहाँ ऐमाइड के नाइट्रोजन परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म कार्बोनिल समूह के साथ अनुनाद में होता है। पहली संरचना में नाइट्रोजन पर एकाकी युग्म है, जबकि दूसरी संरचना में यह कार्बोनिल कार्बन के साथ एक द्विबंध बनाता है और ऑक्सीजन पर नकारात्मक आवेश होता है।
\[ \text{R}-\text{C}\text{O}-\text{NH}_2 \longleftrightarrow \text{R}-\text{C}(\text{O}^-)=\text{NH}_2^+ \]
\(+\) R प्रभाव के कारण –NH₂ समूह के नाइट्रोजन परमाणु पर एकाकी युग्म इलेक्ट्रॉन की उपलब्धता घटती है जिसके परिणामस्वरूप ऐसिड ऐमाइड ऐमीन से दुर्बल क्षार होते हैं। N-परमाणु पर धनावेश के कारण यह आसानी से प्रोटॉन त्यागकर दुर्बल अम्ल के समान व्यवहार करता है।
In simple words: ऐमाइड ऐमीनों से अधिक अम्लीय होते हैं क्योंकि उनके नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन युग्म कार्बोनिल समूह के साथ अनुनाद में होता है। यह नाइट्रोजन से इलेक्ट्रॉनों को हटाता है, जिससे यह प्रोटॉन दान करने के लिए अधिक प्रवण हो जाता है और इस प्रकार ऐमाइड अधिक अम्लीय होते हैं।
🎯 Exam Tip: अनुनाद प्रभाव की भूमिका को पहचानें जो नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व को कम करके ऐमाइडों की अम्लीयता को बढ़ाता है, जबकि यह ऐमीनों में मौजूद नहीं होता है।
Question 22. निम्नलिखित को घटते हुए अम्लीयता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए o – नाइट्रो बेन्जोइक एसिड p – नाइट्रो बेन्जोइक एसिड m – नाइट्रो बेन्जोइक एसिड
Answer:घटते हुए अम्लीयता का क्रम:
p-नाइट्रो बेन्जोइक एसिड > o-नाइट्रो बेन्जोइक एसिड > m-नाइट्रो बेन्जोइक एसिड
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह तीन नाइट्रोबेन्जोइक एसिड समावयवों की संरचनाओं को दर्शाता है: ऑर्थो-नाइट्रोबेन्जोइक एसिड, मेटा-नाइट्रोबेन्जोइक एसिड और पैरा-नाइट्रोबेन्जोइक एसिड। प्रत्येक संरचना में एक बेंजीन वलय होता है जिसमें एक कार्बोक्सिलिक एसिड (-COOH) समूह और एक नाइट्रो (-NO₂) समूह विभिन्न स्थितियों (ऑर्थो, मेटा या पैरा) पर लगे होते हैं। ये चित्र केवल संरचनात्मक निरूपण हैं और सीधे अम्लीयता के क्रम को नहीं दर्शाते, बल्कि उस क्रम को निर्धारित करने के लिए आवश्यक अणुओं को दिखाते हैं।
In simple words: पैरा-नाइट्रोबेन्जोइक एसिड सबसे अम्लीय होता है, उसके बाद ऑर्थो-नाइट्रोबेन्जोइक एसिड, और फिर मेटा-नाइट्रोबेन्जोइक एसिड आता है। यह नाइट्रो समूह के इलेक्ट्रॉन-खींचने वाले प्रभाव और हाइड्रोजन आबंध जैसे कारकों के कारण होता है।
🎯 Exam Tip: ऑर्थो, मेटा, और पैरा-स्थितियों में प्रतिस्थापकों के इलेक्ट्रॉनिक प्रभावों (प्रेरणिक और अनुनाद) को समझें, क्योंकि वे बेंजोइक एसिड की अम्लीयता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं।
Question 23. सल्फैनेलिक अम्ल के दो महत्त्वपूर्ण उपयोग लिखिए।
Answer: सल्फैनेलिक अम्ल का प्रयोग सल्फा औषधियों तथा रंजकों के निर्माण के लिए किया जाता है।
In simple words: सल्फैनेलिक अम्ल का उपयोग दवाइयां बनाने और रंगों के उत्पादन में किया जाता है।
🎯 Exam Tip: सल्फैनेलिक अम्ल के महत्वपूर्ण औद्योगिक अनुप्रयोगों को याद रखें, विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल्स (सल्फा ड्रग्स) और डाई उद्योग में।
Question 24. बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड से बेन्जोनाइट्राइल के निर्माण का रासायनिक समीकरण लिखिए।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह अभिक्रिया बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को क्यूप्रस सायनाइड (\(CuCN\)) या पोटेशियम सायनाइड (\(KCN\)) के साथ अभिक्रिया करके बेन्जोनाइट्राइल में परिवर्तित करने को दर्शाती है। इस अभिक्रिया में डाइऐजोनियम समूह (-N₂⁺Cl⁻) को सायनाइड (-CN) समूह से प्रतिस्थापित किया जाता है।
\[ \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2^+\text{Cl}^- \xrightarrow{\text{CuCN/KCN}} \text{C}_6\text{H}_5\text{CN} + \text{N}_2 + \text{KCl} \]
(बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड) (बेन्जोनाइट्राइल)
In simple words: बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को \(CuCN/KCN\) के साथ गर्म करने पर बेन्जोनाइट्राइल बनता है।
🎯 Exam Tip: यह सैंडमेयर अभिक्रिया का एक उदाहरण है, जहाँ डाइऐजोनियम लवणों से विभिन्न एरिल हैलाइड्स और सायनाइड्स का संश्लेषण किया जाता है।
Question 25. अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए C6H5N2Cl+KI →
Answer:\[ \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2^+\text{Cl}^- + \text{KI} \longrightarrow \text{C}_6\text{H}_5\text{I} + \text{N}_2 + \text{KCl} \]
(बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड) (आयोडोबेन्जीन)
In simple words: बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को पोटेशियम आयोडाइड के साथ अभिक्रिया कराने पर आयोडोबेन्जीन, नाइट्रोजन गैस और पोटेशियम क्लोराइड बनता है।
🎯 Exam Tip: डाइऐजोनियम लवणों की यह अभिक्रिया सीधे आयोडोबेन्जीन बनाने का एक महत्वपूर्ण तरीका है, जिसमें क्यूप्रस आयोडाइड के उपयोग की आवश्यकता नहीं होती है।
Question 26. आप बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को नाइट्रोबेन्जीन में किस प्रकार परिवर्तित करेंगे ?
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह अभिक्रिया बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को टेट्राफ्लुओरोबोरेट (\(N_2BF_4\)) में परिवर्तित करने के लिए \(HBF_4\) के साथ अभिक्रिया को दर्शाती है। इसके बाद, \(NaNO_2\) (सोडियम नाइट्राइट) और \(Cu/\Delta\) (कॉपर धातु की उपस्थिति में गर्म करने) के साथ अभिक्रिया करके नाइट्रोबेन्जीन प्राप्त होता है।
\[ \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2^+\text{Cl}^- \xrightarrow{\text{HBF}_4} \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2^+\text{BF}_4^- \xrightarrow{\text{NaNO}_2/\text{Cu},\Delta} \text{C}_6\text{H}_5\text{NO}_2 + \text{N}_2 + \text{NaBF}_4 \]
(बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड) (बेन्जीन डाइऐजोनियम फ्लुओरोबोरेट) (नाइट्रोबेन्जीन)
In simple words: बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को पहले \(HBF_4\) से डाइऐजोनियम फ्लुओरोबोरेट में बदलते हैं, फिर इसे \(NaNO_2\) और \(Cu/\Delta\) के साथ अभिक्रिया करके नाइट्रोबेन्जीन में परिवर्तित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: यह अभिक्रिया डाइऐजोनियम लवण से नाइट्रो समूह को जोड़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका है, जो कि प्रत्यक्ष नाइट्रेशन द्वारा संभव नहीं है, खासकर यदि अन्य प्रतिस्थापक भी मौजूद हों।
Question 27. निम्न अभिक्रिया के मुख्य उत्पाद का सूत्र दीजिए
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह अभिक्रिया बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को क्यूप्रस क्लोराइड (\(Cu_2Cl_2\)) और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (\(HCl\)) के साथ अभिक्रिया करके क्लोरोबेन्जीन में परिवर्तित करने को दर्शाती है। इस अभिक्रिया में डाइऐजोनियम समूह (-N₂⁺Cl⁻) को क्लोरीन परमाणु से प्रतिस्थापित किया जाता है, साथ ही नाइट्रोजन गैस भी निकलती है।
\[ \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2^+\text{Cl}^- \xrightarrow{\text{Cu}_2\text{Cl}_2/\text{HCl}} \text{C}_6\text{H}_5\text{Cl} + \text{N}_2 \]
(बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड) (क्लोरोबेन्जीन)
In simple words: बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को \(Cu_2Cl_2/HCl\) के साथ अभिक्रिया कराने पर क्लोरोबेन्जीन और नाइट्रोजन गैस मुख्य उत्पाद के रूप में बनते हैं।
🎯 Exam Tip: यह सैंडमेयर अभिक्रिया का एक क्लासिक उदाहरण है, जिसका उपयोग ऐनिलीन से विभिन्न एरिल हैलाइड्स को संश्लेषित करने के लिए किया जाता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. नाइट्रोबेन्जीन की - NO2, समूह तथा बेन्जीन वलय की एक-एक अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण लिखिए।
Answer: नाइट्रोबेन्जीन में नाइट्रोसमूह बेन्जीन वलय से जुड़ा होता है जो एक ऑक्सीकारक समूह है। इस कारण अभिक्रियाओं में इसका अपचयन होता है।
**अपचयन :**
नाइट्रोबेन्जीन का अपचयन निम्न पदों में होता है
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह नाइट्रोबेन्जीन के अपचयन को दर्शाता है। पहले नाइट्रोबेन्जीन को \(2[H]\) से नाइट्रोसोबेन्जीन में अपचयित किया जाता है। फिर नाइट्रोसोबेन्जीन को \(2[H]\) से फेनिलहाइड्रॉक्सिलऐमीन में अपचयित किया जाता है, और अंत में, फेनिलहाइड्रॉक्सिलऐमीन को \(2[H]\) से ऐनिलीन में अपचयित किया जाता है।
\[ \text{C}_6\text{H}_5\text{NO}_2 \xrightarrow{2[\text{H}]} \text{C}_6\text{H}_5\text{NO} \xrightarrow{2[\text{H}]} \text{C}_6\text{H}_5\text{NHOH} \xrightarrow{2[\text{H}]} \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 \]
(नाइट्रोबेन्जीन) (नाइट्रोसोबेन्जीन) (फेनिलहाइड्रॉक्सिल ऐमीन) (ऐनिलीन)
नाइट्रोबेन्जीन का अपचयन उत्पाद माध्यम के pH और अपचायक की प्रकृति पर निर्भर करता है।
**बेन्जीन वलय की अभिक्रिया**
इलेक्ट्रॉन स्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया नाइट्रोबेन्जीन में – NO₂ समूह बेन्जीन वलय से जुड़ा होता है।
**नाइट्रीकरण –** नाइट्रोबेन्जीन को सान्द्र नाइट्रिक अम्ल तथा सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के मिश्रण के साथ 95-100°C पर गर्म करने पर m-डाइनाइट्रो बेन्जीन बनती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह नाइट्रोबेन्जीन के नाइट्रेशन को दर्शाता है। नाइट्रोबेन्जीन को सान्द्र \(HNO_3\) और सान्द्र \(H_2SO_4\) के साथ 95-100°C पर गर्म करने पर m-डाइनाइट्रोबेन्जीन बनता है। नाइट्रो समूह मेटा-निर्देशक होने के कारण, आने वाला नाइट्रो समूह मेटा स्थिति पर जुड़ता है।
\[ \text{C}_6\text{H}_5\text{NO}_2 + \text{HNO}_3 (\text{conc.}) \xrightarrow{\text{conc. H}_2\text{SO}_4, 95-100^\circ\text{C}} \text{C}_6\text{H}_4(\text{NO}_2)_2 + \text{H}_2\text{O} \]
(नाइट्रोबेन्जीन) (m-डाइनाइट्रोबेन्जीन)
m-डाइनाइट्रोबेन्जीन को सधूम नाइट्रिक अम्ल और सधूम सल्फ्यूरिक अम्ल के मिश्रण के साथ गर्म करने पर 1, 3, 5 TNB बनती है। यह अभिक्रिया लगभग 5 दिन में पूर्ण होती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह m-डाइनाइट्रोबेन्जीन के आगे नाइट्रेशन को दर्शाता है। m-डाइनाइट्रोबेन्जीन को सधूम \(HNO_3\) और सधूम \(H_2SO_4\) के साथ गर्म करने पर 1,3,5-ट्राइनाइट्रोबेन्जीन (TNB) बनता है।
In simple words: नाइट्रोबेन्जीन का नाइट्रो समूह अपचयन अभिक्रियाएँ देता है, जैसे कि ऐनिलीन में अपचयन। इसकी बेन्जीन वलय इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ देती है, जैसे कि नाइट्रेशन जिसमें यह m-डाइनाइट्रोबेन्जीन बनाता है क्योंकि नाइट्रो समूह एक मेटा-निर्देशक और निष्क्रिय करने वाला समूह है।
🎯 Exam Tip: नाइट्रो समूह का इलेक्ट्रॉन-निकासी प्रभाव और मेटा-निर्देशक प्रकृति इसकी अपचयन अभिक्रियाओं और इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं को निर्धारित करती है।
Question 2. एक कार्बनिक यौगिक A के अपचयन से अणुसूत्र C2H7N वाला ऐमीन प्राप्त होता है जो क्लोरोफॉर्म तथा कास्टिक पोटाश के साथ गर्म करने पर तीव्र दुर्गन्ध वाला यौगिक B बनाता है। A तथा B के संरचनात्मक सूत्र तथा नाम लिखिए।
Answer: प्रश्नानुसार यौगिक A की C₆H₅NO₂ होने की सम्भावना लगती है।
\[ \text{C}_6\text{H}_5\text{NO}_2 \xrightarrow{6[\text{H}]} \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 \]
(यौगिक A) (ऐनिलीन)
C₂H₅NH₂ की CHCl₃ तथा KOH से क्रिया कराने पर यौगिक B बनता है जिसकी तीव्र दुर्गन्ध होती है।
\[ \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{CHCl}_3 + 3\text{KOH(alc.)} \longrightarrow \text{C}_6\text{H}_5\text{NC} + 3\text{KCl} + 3\text{H}_2\text{O} \]
(ऐनिलीन) (फेनिल आइसोसायनाइड)
यौगिक A. C₆H₅NO₂ (नाइट्रोबेन्जीन)
यौगिक B. C₆H₅NC (फेनिल आइसोसायनाइड)
In simple words: यौगिक A नाइट्रोबेन्जीन है, जो अपचयन के बाद ऐनिलीन बनाता है। ऐनिलीन क्लोरोफॉर्म और KOH के साथ अभिक्रिया करके तीव्र दुर्गंध वाला फेनिल आइसोसायनाइड (यौगिक B) बनाता है।
🎯 Exam Tip: कार्बिलऐमीन परीक्षण प्राथमिक ऐमीनों की पहचान करने के लिए एक विशिष्ट परीक्षण है, जो तीव्र दुर्गंध वाले आइसोसायनाइड्स का उत्पादन करता है।
Question 3. डाइऐजोनियम लवण क्या है? बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड से क्लोरोबेन्जीन प्राप्त करने की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
Answer: ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन का सबसे अधिक क्रियाशील व्युत्पन्न डाइऐजोनियम लवण है जिसका सामान्य सूत्र \(ArN_2^+X^-\) होता है।
जहाँ Ar ऐरिल समूह तथा X⁻ आयन, Cl⁻, Br⁻, I⁻, \(HSO_4^-\), \(BF_4^-\) आदि में से कोई भी हो सकता है। इन लवणों में \(-N \equiv N\) या \(N=N^+\) आयन को डाइऐजोनियम आयन कहते हैं।
बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को HCl के साथ क्यूप्रस क्लोराइड की उपस्थिति में गर्म करने पर क्लोरोबेन्जीन प्राप्त होती है।
\[ \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2^+\text{Cl}^- + \text{HCl} \xrightarrow{\text{Cu}_2\text{Cl}_2/\Delta} \text{C}_6\text{H}_5\text{Cl} + \text{N}_2 + \text{HCl} \]
(बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड) (क्लोरोबेन्जीन)
In simple words: डाइऐजोनियम लवण एरोमैटिक प्राथमिक ऐमीनों के व्युत्पन्न होते हैं, जिनमें \(N_2^+\) समूह होता है। बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को क्यूप्रस क्लोराइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ गर्म करने पर क्लोरोबेन्जीन बनाया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: डाइऐजोनियम लवण विभिन्न कार्बनिक यौगिकों के संश्लेषण में महत्वपूर्ण मध्यवर्ती होते हैं, विशेष रूप से सैंडमेयर और गेटरमैन अभिक्रियाओं में।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. प्रयोगशाला में एथिल ऐमीन बनाने की विधि का चित्र सहित वर्णन कीजिए तथा सम्बन्धित अभिक्रिया भी लिखिए । इसके दो रासायनिक गुण भी दीजिए ।
Answer: **प्रयोगशाला विधि :**
प्रोपिओनेमाइड पर ब्रोमीन तथा कास्टिक पोटाश विलयन (आधिक्य में) की क्रिया कराने से एथिल ऐमीन बनती है। यह क्रिया हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया कहलाती है और यह निम्नलिखित पदों में होती है
(i) \[ \text{C}_2\text{H}_5\text{CONH}_2 + \text{Br}_2 \longrightarrow \text{C}_2\text{H}_5\text{CONHBr} + \text{HBr} \]
(प्रोपिओनेमाइड) (ब्रोमोप्रोपिओनेमाइड)
\[ \text{HBr} + \text{KOH} \longrightarrow \text{KBr} + \text{H}_2\text{O} \]
(ii) \[ \text{C}_2\text{H}_5\text{CONHBr} + \text{KOH} \longrightarrow \text{C}_2\text{H}_5\text{NCO} + \text{KBr} + \text{H}_2\text{O} \]
(एथिल आइसोसायनेट)
(iii) \[ \text{C}_2\text{H}_5\text{NCO} + 2\text{KOH} \longrightarrow \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{K}_2\text{CO}_3 \]
(एथिल ऐमीन)
कुल अभिक्रिया:
\[ \text{C}_2\text{H}_5\text{CONH}_2 + \text{Br}_2 + 4\text{KOH} \longrightarrow \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{K}_2\text{CO}_3 + 2\text{KBr} + 2\text{H}_2\text{O} \]
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रयोगशाला में एथिल ऐमीन बनाने की विधि को दर्शाता है। एक गोल पेंदी वाला फ्लास्क (थर्मामीटर और संघनित्र के साथ) पानी के स्नान में गर्म किया जाता है। फ्लास्क में ब्रोमीन और प्रोपिओनेमाइड का मिश्रण होता है, जिसमें KOH का विलयन बूंद-बूंद करके मिलाया जाता है। उत्पन्न एथिल ऐमीन गैस को संघनित करके एक ग्राही में तनु HCl में एकत्र किया जाता है।
**विधि:** संलग्न चित्रानुसार, एक गोल पेंदी वाले फ्लास्क में 20 ग्राम प्रोपिओनेमाइड और 18 मिली ब्रोमीन लेकर ठण्डा करते हैं, फिर इसमें 10% KOH का 200 मिली विलयन मिलाते हैं। मिश्रण को तब तक हिलाते रहते हैं जब तक कि ब्रोमोप्रोपिओनेमाइड के कारण पीले रंग का विलयन न बन जाए। अब इसमें 50% KOH को 100 मिली विलयन पृथक्कारी कीप से डालकर जल ऊष्मक पर 60-70°C पर गर्म करते हैं जिससे विलयन रंगहीन हो जाए। तत्पश्चात् फ्लास्क के द्रव का आसवन करते हैं जिससे एथिल ऐमीन गैस निकलती है जो ग्राही में रखे तनु HCl से क्रिया करके एथिल ऐमीन हाइड्रोक्लोराइड का विलयन देती है। इसे तनु KOH विलयन से क्रिया कराकर एथिल ऐमीन प्राप्त कर ली जाती है।
**एथिल ऐमीन के रासायनिक गुण**
(i) **ऐसीटिल क्लोराइड से अभिक्रिया :** प्रतिस्थापित ऐमाइड बनाता है।
(ii) **ऐल्कोहॉलीय कास्टिक पोटाश तथा क्लोरोफॉर्म के साथ क्रिया करके एथिल आइसोसायनाइड \((C_2H_5NC)\) बनता है।**
In simple words: एथिल ऐमीन प्रयोगशाला में हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया द्वारा बनाई जाती है, जहाँ प्रोपिओनेमाइड, ब्रोमीन और KOH के साथ अभिक्रिया करता है। यह एसिटाइल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया करके एमाइड बनाता है और कार्बिलऐमीन अभिक्रिया में आइसोसायनाइड बनाता है।
🎯 Exam Tip: हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया एक महत्वपूर्ण नाम अभिक्रिया है जिसका उपयोग ऐमाइड से एक कार्बन परमाणु कम वाले प्राथमिक ऐमीन के संश्लेषण के लिए किया जाता है।
Question 2. प्रयोगशाला में ऐनिलीन बनाने की विधि का वर्णन कीजिए। सम्बन्धित रासायनिक समीकरण भी दीजिए तथा इसका प्रमुख रासायनिक गुण एवं उपयोग भी बताइए।
Answer: **प्रयोगशाला विधि :** प्रयोगशाला में नाइट्रोबेन्जीन का टिन तथा सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल द्वारा अपचयन करने से ऐनिलीन प्राप्त होती है।
\[ \text{Sn} + 4\text{HCl} \longrightarrow \text{SnCl}_4 + 4[\text{H}] \]
\[ \text{C}_6\text{H}_5\text{NO}_2 + 6[\text{H}] \xrightarrow{\text{Sn/HCl}} \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \]
(नाइट्रोबेन्जीन) (ऐनिलीन)
उपर्युक्त अभिक्रिया में बनी ऐनिलीन, स्टैनिक क्लोराइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से संयोग करके ऐनिलीन स्टैनिक क्लोराइड नामक ठोस लवण बनाती है।
जब इस ठोस लवण को कास्टिक सोड़े के सान्द्र विलयन के साथ हिलाते हैं तो ऐनिलीन काले रंग के तेल के रूप में पृथक् हो जाती है।
\[ (\text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2)_2 \cdot \text{H}_2\text{SnCl}_6 + 8\text{NaOH} \longrightarrow 2\text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{Na}_2\text{SnO}_3 + 6\text{NaCl} + 5\text{H}_2\text{O} \]
(ऐनिलीन स्टैनिक क्लोराइड) (ऐनिलीन)
मिश्रण का भाप आसवन करने पर ऐनिलीन आसुत में आ जाती है।
**रासायनिक गुण**
1. **कार्बिल ऐमीन अभिक्रिया :** फेनिल आइसोसायनाइड बनता है।
2. **ऐल्डिहाइडों के साथ अभिक्रिया :** बेन्जिलीडीनऐनिलीन बनता है।
3. **ग्रिगनार्ड अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया-**ऐनिलीन ग्रिगनार्ड अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोकार्बन बनाती है।
\[ \text{C}_2\text{H}_5\text{MgBr} + \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 \longrightarrow \text{C}_2\text{H}_6 + \text{C}_6\text{H}_5\text{NHMgBr} \]
**उपयोग :**
1. दवाइयाँ तथा सल्फा औषधियों के निर्माण में
2. ऐजोरंजक बनाने में मध्यवर्ती यौगिक के रूप में
3. रबड़ उत्पाद बनाने में
4. फेनिल आइसोसायनेट बनाने में जिसका उपयोग पॉलियूरिथेन नामक प्लास्टिक बनाने में होता है।
In simple words: ऐनिलीन प्रयोगशाला में नाइट्रोबेन्जीन के टिन और HCl द्वारा अपचयन से बनती है। यह कार्बिलऐमीन अभिक्रिया (फेनिल आइसोसायनाइड) देती है, एल्डिहाइडों से अभिक्रिया करती है, ग्रिगनार्ड अभिकर्मकों से प्रतिक्रिया करती है, और इसका उपयोग दवाइयों, रंगों और प्लास्टिक बनाने में होता है।
🎯 Exam Tip: नाइट्रोबेन्जीन के ऐनिलीन में अपचयन की विधि और ऐनिलीन की कार्बिलऐमीन अभिक्रिया जैसे विशिष्ट रासायनिक गुणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. प्रयोगशाला में नाइट्रोबेन्जीन बनाने की विधि का वर्णन कीजिए तथा सम्बन्धित रासायनिक समीकरण भी लिखिए। इसके प्रमुख रासायनिक गुण एवं उपयोग भी बताइए ।
Answer: **प्रयोगशाला विधि :** प्रयोगशाला में नाइट्रोबेन्जीन बेन्जीन को सान्द्र नाइट्रिक अम्ल और सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के मिश्रण के साथ 50-60°C ताप पर गर्म करके बनाते हैं।
**विधि :** एक गोल पेंदी के फ्लास्क में बेन्जीन (60 मिली) लेकर उसमें धीरे-धीरे सान्द्र नाइट्रिक अम्ल (60 मिली) और सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल (90 मिली) का ठण्डा मिश्रण मिलाते हैं। फ्लास्क में एक सीधा खड़ा हुआ वायु संघनित्र लगाकर मिश्रण को जल-ऊष्मक पर 50-60°C पर लगभग 1 घण्टे तक गर्म करते हैं। नाइट्रोबेन्जीन बनती है और अम्ल के ऊपर पीले रंग के द्रव की परत के रूप में एकत्रित हो जाती है। फ्लास्क को ठण्डा करके एक पृथक्कारी फनल की सहायता से अम्ल की परत को नाइट्रोबेन्जीन की परत से अलग कर देते हैं। नाइट्रोबेन्जीन को क्रमशः सोडियम कार्बोनेट विलयन और जल से धोकर निर्जल कैल्सियम क्लोराइड के ऊपर सुखाते हैं। फिर एक सूखे हुए वायु-संघनित्र लगे आसवन फ्लास्क में उसका आसवन करते हैं। शुद्ध नाइट्रोबेन्जीन 208-211°C ताप रेन्ज में आसवित होकर ग्राही में एकत्रित हो जाती है।
**रासायनिक गुण**
**अपचयन :** नाइट्रोबेन्जीन का अपचयन निम्नलिखित पदों में होता है
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह नाइट्रोबेन्जीन के चरण-दर-चरण अपचयन को दर्शाता है। नाइट्रोबेन्जीन से नाइट्रोसोबेन्जीन, फिर फेनिलहाइड्रॉक्सिल ऐमीन और अंत में ऐनिलीन का निर्माण होता है। प्रत्येक चरण में हाइड्रोजन की आवश्यकता होती है, और पानी उप-उत्पाद के रूप में निकल सकता है।
\[ \text{C}_6\text{H}_5\text{NO}_2 \xrightarrow{2[\text{H}], -\text{H}_2\text{O}} \text{C}_6\text{H}_5\text{NO} \xrightarrow{2[\text{H}]} \text{C}_6\text{H}_5\text{NHOH} \xrightarrow{2[\text{H}], -\text{H}_2\text{O}} \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 \]
(नाइट्रोबेन्जीन) (नाइट्रोसोबेन्जीन) (फेनिलहाइड्रॉक्सिल ऐमीन) (ऐनिलीन)
नाइट्रोबेन्जीन का अपचयन उत्पाद माध्यम के pH और अपचायक की प्रकृति पर निर्भर करता है।
1. **अम्लीय माध्यम में अपचयन :** टिन और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (Sn \(+\) HCl), या आयरन और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (Fe \(+\) HCl), द्वारा नाइट्रोबेन्जीन का ऐनिलीन में अपचयन होता है।
2. **उदासीन माध्यम में अपचयन :** ऐलुमिनियम-मर्करी युग्म और जल, या जिंक चूर्ण और अमोनियम क्लोराइड (Zn \(+\) \(NH_4Cl\)), द्वारा नाइट्रोबेन्जीन का फेनिलहाइड्रॉक्सिल ऐमीन में अपचयन होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह उदासीन माध्यम में नाइट्रोबेन्जीन के अपचयन को दर्शाता है। जिंक चूर्ण और अमोनियम क्लोराइड (\(Zn/NH_4Cl\)) का उपयोग करके नाइट्रोबेन्जीन को \(2[H]\) से नाइट्रोसोबेन्जीन में अपचयित किया जाता है, जो आगे \(2[H]\) से फेनिलहाइड्रॉक्सिल ऐमीन में अपचयित होता है।
\[ \text{C}_6\text{H}_5\text{NO}_2 + 2[\text{H}] \xrightarrow{\text{Zn/NH}_4\text{Cl}, -\text{H}_2\text{O}} \text{C}_6\text{H}_5\text{NO} \xrightarrow{2[\text{H}]} \text{C}_6\text{H}_5\text{NHOH} \]
(नाइट्रोबेन्जीन) (नाइट्रोसोबेन्जीन) (फेनिलहाइड्रॉक्सिल ऐमीन)
**बेन्जीन वलय की प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ।**
1. **सल्फोनीकरण :** नाइट्रोबेन्जीन को सधूम सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म करने पर m-नाइट्रोबेन्जीनसल्फोनिक अम्ल बनता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह नाइट्रोबेन्जीन के सल्फोनीकरण को दर्शाता है। नाइट्रोबेन्जीन को सधूम \(H_2SO_4\) के साथ गर्म करने पर m-नाइट्रोबेन्जीनसल्फोनिक एसिड बनता है, क्योंकि नाइट्रो समूह मेटा-निर्देशक होता है।
\[ \text{C}_6\text{H}_5\text{NO}_2 + \text{H}_2\text{SO}_4 (\text{सधूम}) \xrightarrow{\text{गर्म}} \text{C}_6\text{H}_4(\text{SO}_3\text{H})(\text{NO}_2) + \text{H}_2\text{O} \]
(नाइट्रोबेन्जीन) (m-नाइट्रोबेन्जीनसल्फोनिक अम्ल)
2. **हैलोजनीकरण :** नाइट्रोबेन्जीन की क्लोरीन के साथ क्रिया कराने पर m-क्लोरोनाइट्रोबेन्जीन बनती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह नाइट्रोबेन्जीन के क्लोरीनीकरण को दर्शाता है। नाइट्रोबेन्जीन को क्लोरीन (\(Cl_2\)) के साथ अभिक्रिया कराने पर m-क्लोरोनाइट्रोबेन्जीन और \(HCl\) बनता है। नाइट्रो समूह की मेटा-निर्देशक प्रकृति के कारण क्लोरीन मेटा स्थिति पर जुड़ता है।
\[ \text{C}_6\text{H}_5\text{NO}_2 + \text{Cl}_2 \longrightarrow \text{C}_6\text{H}_4(\text{Cl})(\text{NO}_2) + \text{HCl} \]
(नाइट्रोबेन्जीन) (m-क्लोरोनाइट्रोबेन्जीन)
**उपयोग :**
1. विलायक के रूप में।
2. मिरबेन के तेल के नाम से जूतों की पॉलिश और साबुन बनाने में सस्ती सुगन्ध के रूप में।
3. ऐनिलीन और ऐजो-रंजकों (azo-dyes) के निर्माण में ।
4. ऑक्सीकारक के रूप में।
In simple words: नाइट्रोबेन्जीन को बेंजीन के नाइट्रेशन से बनाया जाता है। इसके रासायनिक गुणों में अम्लीय या उदासीन माध्यम में अपचयन द्वारा ऐनिलीन या फेनिलहाइड्रॉक्सिलऐमीन का निर्माण, और बेंजीन वलय पर सल्फोनीकरण और हैलोजनीकरण जैसी इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ शामिल हैं। यह विलायक, सुगंध और रंगों के निर्माण में उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: नाइट्रोबेन्जीन का संश्लेषण और उसके नाइट्रो समूह की मेटा-निर्देशक और निष्क्रिय करने वाली प्रकृति, साथ ही अपचयन उत्पादों का माध्यम पर निर्भर होना, महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं।
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