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Detailed Chapter 14 जैविक अणुओं UP Board Solutions for Class 12 Chemistry
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Class 12 Chemistry Chapter 14 जैविक अणुओं UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 12 Chemistry Chapter 14 Biomolecules (जैव-अणु)
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
Question 1. ग्लूकोस तथा सुक्रोस जल में विलेय हैं, जबकि साइक्लोहेक्सेन अथवा बेन्जीन (सामान्य छह सदस्यीय वलय युक्त यौगिक) जल में अविलेय होते हैं। समझाइए।
Answer: ग्लूकोस तथा सुक्रोस में क्रमश: 5 तथा 8 -OH समूह होते हैं। ये जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन आबन्ध बनाते हैं। अत्यधिक H- आबन्धन के कारण ग्लूकोस तथा सुक्रोस जल में विलेय हैं। दूसरी ओर, साइक्लोहेक्सेन में -OH समूह नहीं होते हैं। यह जल के साथ हाइड्रोजन आबन्ध नहीं बनाता है, अतएव इसमें अविलेय रहता है।
In simple words: ग्लूकोस और सुक्रोस में कई -OH समूह होते हैं जो जल के साथ हाइड्रोजन बंधन बनाते हैं, जिससे वे जल में घुलनशील होते हैं। साइक्लोहेक्सेन और बेंजीन में ऐसे -OH समूह नहीं होते, इसलिए वे जल के साथ हाइड्रोजन बंधन नहीं बना पाते और जल में अघुलनशील रहते हैं।
🎯 Exam Tip: जल में विलेयता का कारण अणुओं के बीच हाइड्रोजन आबंध बनाने की क्षमता पर निर्भर करता है। -OH समूहों की उपस्थिति इस क्षमता को बढ़ाती है।
Question 2. लैक्टोस के जल-अपघटन से किन उत्पादों के बनने की अपेक्षा करते हैं?
Answer: जल-अपघटन पर लैक्टोस मोनोसैकेराइड के दो अणु देता है अर्थात् D - (+) - ग्लूकोस तथा D - (+) गैलेक्टोस का एक-एक अणु ।
In simple words: लैक्टोस के जल-अपघटन से D - (+) - ग्लूकोस और D - (+) गैलेक्टोस के एक-एक अणु प्राप्त होते हैं।
🎯 Exam Tip: डाइसैकेराइड्स जैसे लैक्टोस का जल-अपघटन दो मोनोसैकेराइड इकाइयों में टूटता है, जो इसके मूल संघटक होते हैं।
Question 3. D – ग्लूकोस के पेन्टाऐसीटेट में आप ऐल्डिहाइड समूह की अनुपस्थिति को कैसे । समझाएँगे?
Answer: ग्लूकोस ऐल्डोहेक्सोस होने के कारण ऐल्डिहाइड समूह की लाक्षणिक अभिक्रियाएँ देता है; जैसे -NH2OH, टॉलेन अभिकर्मक तथा फेहलिंग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया । ग्लूकोस के ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड के साथ ऐसिलीकरण से प्राप्त ग्लूकोस पेण्टाऐसीटेट इन अभिक्रियाओं को नहीं देता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र ग्लूकोस के खुले श्रृंखला रूप (खुली श्रृंखला) और उसके ऐल्डिहाइड समूह के साथ NH2OH की अभिक्रिया से ग्लूकोस ऑक्सिम के निर्माण को दर्शाता है। साथ ही, यह α-ग्लूकोस पेन्टाऐसीटेट और β-ग्लूकोस पेन्टाऐसीटेट की संरचना को भी दिखाता है, जहाँ स्पष्ट किया गया है कि पेन्टाऐसीटेट में मुक्त ऐल्डिहाइड समूह नहीं होता है और इसलिए यह ऑक्सिम नहीं बनाता। यह दर्शाया गया है कि ग्लूकोस का ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड के साथ ऐसिलीकरण से ग्लूकोस पेन्टाऐसीटेट बनता है, जिसमें ऐल्डिहाइड समूह की प्रतिक्रियाशीलता छिपी रहती है।
इसका अभिप्राय है कि ग्लूकोस पेण्टाऐसीटेट में ऐल्डिहाइड समूह या तो अनुपस्थित होता है या इन अभिक्रियाओं के लिए उपलब्ध नहीं रहता है। वास्तव में D - ग्लूकोस के पेण्टाऐसीटेट में ऐल्डिहाइड समूह हेमीऐसीटल संरचना का भाग होता है, अतएव इन अभिक्रियाओं में भाग लेने के लिए उपलब्ध नहीं रहता है।
In simple words: ग्लूकोस का पेन्टाऐसीटेट ऐल्डिहाइड समूह की विशिष्ट अभिक्रियाएँ नहीं देता क्योंकि ऐल्डिहाइड समूह हेमीऐसीटल संरचना में बंधा होता है, जिससे वह अभिक्रियाओं के लिए उपलब्ध नहीं रहता। यह इंगित करता है कि ऐल्डिहाइड समूह मुक्त अवस्था में नहीं है।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न ग्लूकोस की चक्रीय संरचना और उसके डेरिवेटिव्स की प्रतिक्रियाशीलता को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। मुक्त ऐल्डिहाइड समूह की अनुपस्थिति चक्रीय संरचना के पक्ष में एक प्रमाण है।
Question 4. ऐमीनो अम्लों के गलनांक एवं जल में विलेयता सामान्यतः संगत हैलो अम्लों की तुलना में अधिक होती है। समझाइए ।
Answer: ऐमीनो अम्ल ज्विट्टर आयन (H3-CHR-COO-) के रूप में पाए जाते हैं। द्विध्रुवीय लवण सदृश लक्षण के कारण इनमें प्रबल द्विध्रुव-द्विध्रुव अथवा स्थिर-विद्युत आकर्षण बल पाए जाते हैं, अतएव ऐमीनो अम्लों के क्वथनांक उच्च होते हैं। ऐमीनो अम्ल H2O अणुओं के साथ प्रबल अन्योन्यक्रिया करते हैं। तथा इसमें विलेय होते हैं। हैलो अम्लों की लवण सदृश्य संरचना नहीं होती है, अतः इनके क्वथनांक निम्न होते हैं। हैलोअम्ल ऐमीनो अम्लों की तरह H2O अणुओं के साथ प्रबलता के साथ अन्योन्यक्रिया नहीं करते हैं, अतः जल में ऐमीनो अम्लों की विलेयता हैलोअम्लों से अधिक होती है।
In simple words: ऐमीनो अम्ल ज्विट्टर आयन बनाते हैं, जिनमें धनात्मक और ऋणात्मक आवेश होते हैं, जिससे प्रबल अंतर-आणविक बल और जल के साथ मजबूत हाइड्रोजन आबंध बनते हैं, परिणामतः उच्च गलनांक और जल में अधिक विलेयता होती है। हैलो अम्ल में ये गुण नहीं होते, इसलिए उनके गलनांक और जल में विलेयता कम होती है।
🎯 Exam Tip: ज्विट्टर आयन का बनना ऐमीनो अम्लों की विशेष प्रकृति है, जो उनके भौतिक गुणों को निर्धारित करता है। यह अवधारणा प्रोटीन संरचना के लिए भी महत्वपूर्ण है।
Question 5. अण्डे को उबालने पर उसमें उपस्थित जल कहाँ चला जाता है?
Answer: उबालने पर अण्डे में उपस्थित प्रोटीनों का पहले विकृतिकरण और फिर स्कंदन हो जाता है। इन स्कंदित प्रोटीनों द्वारा जल अवशोषित या अधिशोषित हो जाता है।
In simple words: अण्डे को उबालने पर प्रोटीन विकृतिकृत और स्कंदित हो जाते हैं, जिससे वे जल को अपने अंदर अवशोषित या अधिशोषित कर लेते हैं, इसलिए जल अदृश्य लगता है।
🎯 Exam Tip: यह प्रोटीन के विकृतीकरण और स्कंदन का एक व्यावहारिक उदाहरण है, जहाँ ऊष्मा प्रोटीन की संरचना को बदल देती है और पानी को बांध लेती है।
Question 6. हमारे शरीर में विटामिन C संचित क्यों नहीं होता?
Answer: विटामिन C (ऐस्कॉर्बिक अम्ल) जल में विलेय होता है। यह शीघ्र ही मूत्र के साथ उत्सर्जित हो जाता है तथा हमारे शरीर में संचित नहीं रह सकता है।
In simple words: विटामिन C जल में घुलनशील होने के कारण शरीर में संचित नहीं होता और अतिरिक्त मात्रा मूत्र के साथ बाहर निकल जाती है।
🎯 Exam Tip: जल-विलेय विटामिन शरीर में संचित नहीं होते और नियमित रूप से आहार में इनकी आवश्यकता होती है, जबकि वसा-विलेय विटामिन शरीर में जमा हो सकते हैं।
Question 7. यदि DNA के थायमीनयुक्त न्यूक्लियोटाइड का जल-अपघटन किया जाए तो कौन-कौन से उत्पाद बनेंगे?
Answer: 2-डीऑक्सी-D-राइबोस, फॉस्फोरिक अम्ल तथा थायमीन ।
In simple words: थायमीनयुक्त न्यूक्लियोटाइड के जल-अपघटन से 2-डीऑक्सी-D-राइबोस शर्करा, फॉस्फोरिक अम्ल और थायमीन नामक क्षारक प्राप्त होते हैं।
🎯 Exam Tip: न्यूक्लियोटाइड के घटक-शर्करा, फॉस्फेट समूह और नाइट्रोजनस क्षारक-जल-अपघटन पर अलग हो जाते हैं। DNA में, यह शर्करा 2-डीऑक्सीराइबोस होती है।
Question 8. जब RNA का जल-अपघटन किया जाता है तो प्राप्त क्षारकों की मात्राओं के मध्य कोई सम्बन्ध नहीं होता। यह तथ्य RNA की संरचना के विषय में क्या संकेत देता है?
Answer: DNA अणु में दो कुण्डलिनियों (strands) में चार पुरक क्षारक परस्पर युग्म बनाए रखते हैं जैसे साइटोसीन (C) सदैव ग्वानीन (G) के साथ युग्म बनाता है, जबकि थायमीन (T) सदैव ऐडेनीन के साथ युग्म बनाता है। इसलिए जब एक DNA अणु जल-अपघटित होता है, तब साइटोसीन की मोलर मात्राएँ सदैव ग्वानीन के तुल्य तथा इसी प्रकार ऐडेनीन की सदैव थायमीन के तुल्य होती हैं। RNA में भी चार क्षारक होते हैं जिनमें प्रथम तीन DNA के समान, परन्तु चौथा क्षारक यूरेसिल (U) होता है। चूंकि RNA में प्राप्त चारों क्षारकों (C,G, A तथा U) की मात्राओं के मध्य कोई सम्बन्ध नहीं होता है, इसलिए क्षारक-युग्मन सिद्धान्त (अर्थात् A के साथ U तथा C के साथ G का युग्म) का पालन नहीं होता है, इससे यह संकेत मिलता है कि DNA के विपरीत RNA में एक कुण्डलिनी होती है।
In simple words: RNA के जल-अपघटन से प्राप्त क्षारकों की मात्राओं के बीच संबंध की कमी यह दर्शाती है कि RNA में डबल हेलिक्स संरचना नहीं होती और यह चार्गाफ के नियम का पालन नहीं करता, जो इसके एकल-स्ट्रैंडेड प्रकृति का संकेत देता है।
🎯 Exam Tip: क्षारकों की मात्राओं के बीच संबंध का न होना RNA की एकल-कुंडलित संरचना को दर्शाता है, जो DNA की द्विकुंडलित संरचना और चार्गाफ के नियम से भिन्न है।
अतिरिक्त अभ्यास
Question 1. मोनोसैकेराइड क्या होते हैं?
Answer: वे कार्बोहाइड्रेट जो छोटे अणुओं में जल – अपघटित नहीं हो सकते, मोनोसैकेराइड कहलाते हैं।
In simple words: मोनोसैकेराइड सबसे सरल कार्बोहाइड्रेट होते हैं जिन्हें और अधिक छोटे शर्करा अणुओं में नहीं तोड़ा जा सकता।
🎯 Exam Tip: मोनोसैकेराइड्स कार्बोहाइड्रेट्स की मूल इकाइयाँ होती हैं, जैसे ग्लूकोस और फ्रक्टोस।
Question 2. अपचायी शर्करा क्या होती है?
Answer: कार्बोहाइड्रेट जो टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करते हैं तथा फेहलिंग विलयन के साथ लाल अवक्षेप देते हैं, अपचायी शर्कराएँ कहलाते हैं। सभी मोनोसैकेराईड (ऐल्डोस तथा कीटोस) तथा डाइसैकेराइड (सुक्रोस को छोड़कर) अपचायी शर्कराएँ हैं।
In simple words: अपचायी शर्कराएँ वे होती हैं जो टॉलेन और फेहलिंग अभिकर्मकों को अपचयित कर सकती हैं, जिनमें मुक्त ऐल्डिहाइड या कीटोन समूह होते हैं।
🎯 Exam Tip: अपचायी शर्कराओं में मुक्त ऐल्डिहाइड या कीटोन समूह होता है जो आसानी से ऑक्सीकृत हो सकता है, जिससे वे विशिष्ट रासायनिक परीक्षणों में धनात्मक परिणाम देते हैं। सुक्रोस इसका एक अपवाद है क्योंकि इसमें ऐल्डिहाइड/कीटोन समूह ग्लाइकोसाइडिक बंधन में बंधे होते हैं।
Question 3. पौधों में कार्बोहाइड्रेटों के दो मुख्य कार्यों को लिखिए।
Answer:
(i) पादप कोशिका भित्तियों का संरचनात्मक पदार्थ (Structural material for plant cell walls)
उदाहरणार्थ : पॉलीसैकेराइड सेलुलोस पादप कोशिका भित्ति का प्रमुख संरचनात्मक पदार्थ होता है।
(ii) जैव ईंधन (Bio fuels) कार्बोहाइड्रेट जैसे :
ग्लूकोस, फ्रक्टोस, शर्करा, स्टार्च तथा ग्लाइकोजन जैव ईंधनों के रूप में कार्य करते हैं तथा जैव तन्त्रों में विभिन्न कार्यों के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं।
उदाहरणार्थ :
In simple words: पौधों में कार्बोहाइड्रेट मुख्य रूप से कोशिका भित्तियों के लिए संरचनात्मक सामग्री (जैसे सेलुलोस) प्रदान करते हैं और ऊर्जा स्रोत (जैसे स्टार्च) के रूप में कार्य करते हैं।
🎯 Exam Tip: कार्बोहाइड्रेट्स पौधों में दो महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाते हैं: संरचनात्मक सहायता प्रदान करना और ऊर्जा का भंडारण।
Question 4. निम्नलिखित को मोनोसैकेराइड तथा डाइसैकेराइड में वर्गीकृत कीजिए-राइबोस, 2-डिऑक्सीराइबोस, माल्टोस, गैलेक्टोस, फ्रक्टोस तथा लैक्टोस
Answer:
1. मोनोसैकेराइड : राइबोस, 2-डीऑक्सीराइबोस, गैलेक्टोस, तथा फ्रक्टोस।
2. डाइसैकेराइड : माल्टोस तथा लैक्टोस ।
In simple words: मोनोसैकेराइड्स में राइबोस, 2-डिऑक्सीराइबोस, गैलेक्टोस और फ्रक्टोस शामिल हैं, जबकि डाइसैकेराइड्स में माल्टोस और लैक्टोस शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: मोनोसैकेराइड्स शर्करा की सबसे सरल इकाइयाँ हैं, जबकि डाइसैकेराइड्स दो मोनोसैकेराइड इकाइयों से मिलकर बनते हैं।
Question 5. ग्लाइकोसाइडी बन्ध से आप क्या समझते हैं?
Answer: दो मोनोसैकेराइड अणु परस्पर ऑक्सीजन आबन्ध द्वारा जुडे होते हैं जिसका निर्माण जल के अणु की हानि से होता है। दो मोनोसैकेराइड इकाइयों के मध्य ऑक्सीजन से होकर आबन्ध ग्लाइकोसाइडिक आबन्ध कहलाते हैं। उदाहरणार्थ :
माल्टोस अणु में ग्लाइकोसाइडिक आबन्ध नीचे प्रदर्शित है
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र माल्टोस अणु की संरचना को दर्शाता है, जिसमें दो α-D-ग्लूकोस इकाइयाँ ग्लाइकोसाइडिक लिंकेज के माध्यम से जुड़ी हुई हैं। ऑक्सीजन परमाणु के माध्यम से बनी यह कड़ी दो मोनोसैकेराइड इकाइयों को जोड़ती है।
In simple words: ग्लाइकोसाइडिक बन्ध वह ऑक्सीजन बन्ध है जो दो मोनोसैकेराइड इकाइयों को आपस में जोड़ता है, जिसमें जल के एक अणु का निष्कासन होता है।
🎯 Exam Tip: ग्लाइकोसाइडिक बन्ध मोनोसैकेराइड्स को डाइसैकेराइड्स और पॉलीसैकेराइड्स बनाने के लिए जोड़ने वाला महत्वपूर्ण बंधन है, और यह संघनन प्रतिक्रिया द्वारा बनता है।
Question 6. ग्लाइकोजन क्या होता है तथा ये स्टार्च से किस प्रकार भिन्न है?
Answer: जन्तुओं के शरीर में कार्बोहाइड्रेट ग्लाइकोजन के रूप में संचित रहता हैं। इसे जन्तु स्टार्च भी कहते हैं, क्योंकि इसकी संरचना ऐमाइलोपेक्टिन के समान होती है, लेकिन यह इससे अत्यधिक शाखित होता है। यह यकृत तथा पेशियों में संचित रहता है। जब हमारे शरीर को ग्लूकोस की आवश्यकता होती है तब एन्जाइम ग्लाइकोजन को ग्लूकोस में परिवर्तित कर देते हैं। दूसरी ओर, स्टार्च ऐमाइलोस (15-20%) जो कि जल में विलेय होता है तथा ऐमाइलोपेक्टिन (80-85%) जो कि जल में अविलेय होता है का मिश्रण होता है। ग्लाइकोजन तथा ऐमाइलोपेक्टिन दोनों α -D-ग्लूकोस के शाखित बहुलक होते हैं। स्टार्च पौधों का प्रमुख संचित पॉलीसैकेराइड होता है।
In simple words: ग्लाइकोजन जन्तुओं में ऊर्जा का संचित रूप है, जो अत्यधिक शाखित होता है और यकृत व पेशियों में पाया जाता है, जबकि स्टार्च पौधों में ऊर्जा का संचित रूप है, जो ऐमाइलोस और ऐमाइलोपेक्टिन का मिश्रण होता है।
🎯 Exam Tip: ग्लाइकोजन और स्टार्च दोनों ही ग्लूकोस के बहुलक हैं, लेकिन उनके शाखन पैटर्न और भंडारण स्थानों में अंतर होता है। ग्लाइकोजन अधिक शाखित होता है और जानवरों में पाया जाता है, जबकि स्टार्च पौधों में पाया जाता है।
Question 7. (अ) सुक्रोस तथा
(ब) लैक्टोस के जल-अपघटन से कौन-से उत्पाद प्राप्त होते हैं?
Answer:
(अ) सुक्रोस जल :
अपघटित होकर 1-अणु ग्लूकोस तथा 1-अणु फ्रक्टोस देता है।
इन्वर्टस
\[ \text{C}_{12}\text{H}_{22}\text{O}_{11} + \text{H}_2\text{O} \quad \xrightarrow{\text{इन्वर्टस} \\ \text{या H}_3\text{O}^+} \quad \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 + \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 \]
सुक्रोस ग्लूकोस फ्रक्टोस
(ब) लैक्टोस जल :
अपघटित होकर D-ग्लूकोस तथा D-गैलेक्टोस का सममोलर मिश्रण देता है।
लैक्टेस
\[ \text{C}_{12}\text{H}_{22}\text{O}_{11} + \text{H}_2\text{O} \quad \xrightarrow{\text{लैक्टेस} \\ \text{H}_3\text{O}^+} \quad \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 + \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 \]
लैक्टोस ग्लूकोस गैलेक्टोस
In simple words: सुक्रोस के जल-अपघटन से ग्लूकोस और फ्रक्टोस प्राप्त होते हैं, जबकि लैक्टोस के जल-अपघटन से ग्लूकोस और गैलेक्टोस प्राप्त होते हैं।
🎯 Exam Tip: डाइसैकेराइड्स के जल-अपघटन उत्पादों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। प्रत्येक डाइसैकेराइड एक विशिष्ट एंजाइम द्वारा टूटता है।
Question 8. स्टार्च तथा सेलुलोस में मुख्य संरचनात्मक अन्तर क्या है?
Answer: स्टार्च ऐमिलोस तथा ऐमिलोपेक्टिन से मिलकर बनता है। ऐमिलोस α – D -ग्लूकोस का रेखीय बहुलक होता है, जबकि सेलुलोस β – D-ग्लूकोस का रेखीय बहुलक होता है। ऐमिलोस में एक ग्लूकोस इकाई का C-1 अन्य ग्लूकोस इकाई के C-4 से α – ग्लाइकोसाइडी बन्ध द्वारा जुड़ा रहता है। इसे अग्रांकित चित्र में देखा जा सकता है
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र ऐमिलोस और सेलुलोस की संरचनाओं को दर्शाता है। ऐमिलोस में α-ग्लूकोस इकाइयां C-1 और C-4 के बीच α-बंधन द्वारा जुड़ती हैं, जिससे एक रेखीय बहुलक बनता है। सेलुलोस में β-ग्लूकोस इकाइयां C-1 और C-4 के बीच β-बंधन द्वारा जुड़ती हैं, जिससे एक रेखीय संरचना बनती है। ऐमिलोस की संरचना घुमावदार होती है, जबकि सेलुलोस एक सीधी श्रृंखला वाली संरचना होती है।
In simple words: स्टार्च (ऐमिलोस) α-D-ग्लूकोस इकाइयों से बना होता है जिसमें α-ग्लाइकोसाइडिक बन्ध होते हैं, जबकि सेलुलोस β-D-ग्लूकोस इकाइयों से बना होता है जिसमें β-ग्लाइकोसाइडिक बन्ध होते हैं। यह बन्धों का प्रकार ही इनकी संरचना और गुणों में मुख्य अंतर पैदा करता है।
🎯 Exam Tip: α-ग्लाइकोसाइडिक और β-ग्लाइकोसाइडिक बंधों के बीच का अंतर स्टार्च और सेलुलोस जैसे पॉलीसैकेराइड्स की भौतिक और जैविक गुणों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण है।
Question 9. क्या होता है जब D-ग्लूकोस की अभिक्रिया निम्नलिखित अभिकर्मकों से करते हैं?
(i) HI
(ii) ब्रोमीन जल
(iii) HNO3.
Answer:
(i)
\[ \text{CHO} \\ | \\ \text{(CHOH)}_4 + \text{HI} \quad \xrightarrow{\Delta} \quad \text{CH}_3\text{-(CH}_2\text{)}_4\text{-CH}_3 \\ | \\ \text{CH}_2\text{OH} \\ \text{D-ग्लूकोस} \quad \quad \text{n-हेक्सेन} \]
In simple words: जब D-ग्लूकोस HI से अभिक्रिया करता है, तो यह n-हेक्सेन देता है, जो इसकी सीधी श्रृंखला संरचना को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: HI के साथ अभिक्रिया द्वारा n-हेक्सेन का निर्माण ग्लूकोस की कार्बन श्रृंखला की सीधी संरचना का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है।
Question 10. ग्लूकोस की उन अभिक्रियाओं का वर्णन कीजिए जो इसकी विवृत श्रृंखला संरचना के द्वारा नहीं समझाई जा सकतीं।
Answer: निम्नलिखित अभिक्रियाएँ ग्लूकोस की विवृत श्रृंखला संरचना के द्वारा नहीं समझाई जा सकती हैं, इन्हें बॉयर ने प्रस्तावित किया था
1. ऐल्डिहाइड समूह उपस्थित होते हुए भी ग्लूकोस 2, 4 – DNP परीक्षण तथा शिफ़-परीक्षण नहीं देता एवं यह NaHSO3 के साथ हाइड्रोजन सल्फाइड योगज उत्पाद नहीं बनाता।
2. ग्लूकोस का पेन्टाऐसीटेट, हाइड्रॉक्सिलऐमीन के साथ अभिक्रिया नहीं करता जो मुक्त – CHO समूह की अनुपस्थिति को इंगित करता है।
3. जब D-ग्लूकोस को शुष्क हाइड्रोजन क्लोराईड गैस की उपस्थिति में मेथेनॉल के साथ अभिकृत कराया जाता है, तब यह दो समावयव मोनोमेथिल व्युत्पन्न देता है जिन्हें मेथिल -α – D-ग्लूकोसाइड तथा मेथिल β-D-ग्लूकोसाइड के नाम से जाना जाता है। ये ग्लूकोसाइड फेहलिंग विलयन को अपचयित नहीं करते तथा हाइड्रोजन सायनाइड अथवा हाइड्रॉक्सिलऐमीन के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं तथा मुक्त -CHO समूह की अनुपस्थिति को इंगित करते हैं।
In simple words: ग्लूकोस 2,4-DNP और शिफ़-परीक्षण जैसे विशिष्ट ऐल्डिहाइड परीक्षण नहीं देता, और इसका पेन्टाऐसीटेट हाइड्रॉक्सिलऐमीन से अभिक्रिया नहीं करता। साथ ही, मेथेनॉल से दो ग्लूकोसाइड बनते हैं जो अपचायी नहीं होते। ये सभी तथ्य ग्लूकोस की खुली श्रृंखला संरचना की तुलना में चक्रीय हेमीऐसीटल संरचना के अस्तित्व को दर्शाते हैं।
🎯 Exam Tip: ये अभिक्रियाएँ ग्लूकोस की चक्रीय हेमीऐसीटल संरचना के प्रमाण के रूप में महत्वपूर्ण हैं, जहाँ ऐल्डिहाइड समूह आंशिक रूप से छिपी हुई अवस्था में होता है।
Question 11. आवश्यक तथा अनावश्यक ऐमीनो अम्ल क्या होते हैं? प्रत्येक प्रकार के दो उदाहरण दीजिए।
Answer:
(i) आवश्यक ऐमीनो अम्ल (Essential amino acids) :
ऐमीनो अम्ल जिनकी आवश्यकता मानव स्वास्थ्य तथा वृद्धि के लिए होती है, लेकिन इनका संश्लेषण मनुष्य के शरीर में नहीं होता है, आवश्यक ऐमीनो अम्ल कहलाते हैं; जैसे-वेलिन, ल्यूसीन, फेनिलऐलानीन आदि ।
(ii) अनावश्यक ऐमीनो अम्ल (Non-essential amino acids) : ऐमीनो अम्ल जिनकी आवश्यकता मानव स्वास्थ्य तथा वृद्धि के लिए होती है तथा जिनका संश्लेषण मानव शरीर में होता है, अनावश्यक ऐमीनो अम्ल कहलाते हैं; जैसे-ग्लाइसीन, ऐलानीन, ऐस्पार्टिक अम्ल आदि ।
In simple words: आवश्यक ऐमीनो अम्ल वे होते हैं जिन्हें शरीर स्वयं नहीं बना सकता और उन्हें आहार से प्राप्त करना पड़ता है (जैसे वेलिन, ल्यूसीन), जबकि अनावश्यक ऐमीनो अम्ल वे होते हैं जिन्हें शरीर स्वयं संश्लेषित कर सकता है (जैसे ग्लाइसीन, ऐलानीन)।
🎯 Exam Tip: आवश्यक और अनावश्यक ऐमीनो अम्लों के बीच का अंतर उनकी शरीर द्वारा संश्लेषण क्षमता पर आधारित है, न कि उनके महत्व पर।
Question 12. प्रोटीन के सन्दर्भ में निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए
(i) पेप्टाइड बन्ध
(ii) प्राथमिक संरचना
(iii) विकृतीकरण ।
Answer:
(i) पेप्टाइड बन्ध (Peptide bond) :
रासायनिक रूप से पेप्टाइड आबन्ध, -COOH समूह तथा -NH2, समूह के मध्य बना एक आबन्ध होता है। दो एक जैसे अथवा भिन्न ऐमीनो अम्लों के अणुओं के मध्य अभिक्रिया एक अणु के ऐमीनो समूह तथा दूसरे अणु के कार्बोक्सिल समूह के मध्य संयोग से होती है जिसके फलस्वरूप एक जल का अणु मुक्त होता है तथा पेप्टाइड आबन्ध -CO-NH- बनता है। चूँकि उत्पाद दो ऐमीनो अम्लों के द्वारा बनता है, अतः इसे डाइपेप्टाइड कहते हैं। उदाहरणार्थ :
जब ग्लाइसीन का कार्बोक्सिल समूह, ऐलेनीन के ऐमीनो समूह के साथ संयोग करता है तो हमें एक डाइपेप्टाइड, ग्लाइसिलऐलैनीन प्राप्त होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र ग्लाइसिलऐलैनीन (Gly-Ala) के निर्माण को दर्शाता है। ग्लाइसीन के कार्बोक्सिल समूह (-COOH) और ऐलेनीन के ऐमीनो समूह (-NH2) के बीच संघनन अभिक्रिया होती है, जिसमें एक जल का अणु (-H2O) निकलता है। परिणामी संरचना में एक पेप्टाइड बंधन (-CO-NH-) बनता है जो दोनों ऐमीनो अम्लों को जोड़ता है।
(ii) प्राथमिक संरचना (Primary structure) : प्रोटीन में एक अथवा अनेक पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएँ उपस्थित हो सकती हैं। किसी प्रोटीन के प्रत्येक पॉलिपेप्टाइड में ऐमीनो अम्ल एक विशिष्ट क्रम में संयुक्त होते हैं। ऐमीनो अम्लों का यह विशिष्ट क्रम प्रोटीन्स की प्राथमिक संरचना बनाता है। प्राथमिक संरचना में किसी भी प्रकार का परिवर्तन अर्थात् ऐमीनो अम्लों के क्रम में परिवर्तन से भिन्न प्रोटीन उत्पन्न होती हैं।
(iii) विकृतीकरण (Denaturation) : जैविक निकाय में पायी जाने वाली विशेष त्रिविम संरचना तथा जैविक सक्रियता वाली प्रोटीन, प्राकृत प्रोटीन कहलाती हैं। जब प्राकृत प्रोटीन में भौतिक परिवर्तन जैसे ताप में परिवर्तन अथवा रासायनिक परिवर्तन करते हैं (जैसे-pH में परिवर्तन आदि) तो हाइड्रोजन आबन्धों में अस्तव्यस्तता उत्पन्न हो जाती है जिसके कारण गोलिका (ग्लोब्यूल) खुल जाती है तथा हेलिक्स अकुण्डलित हो जाती है तथा प्रोटीन अपनी जैविक सक्रियता को खो देती है। इसे प्रोटीन का विकृतीकरण कहते हैं। विकृतीकरण के दौरान 2° तथा 3° संरचनाएँ नष्ट हो जाती हैं, परन्तु 1° संरचना अप्रभावित रहती है। उबालने पर अण्डे की सफेदी का स्कन्दन विकृतीकरण का एक सामान्य उदाहरण है। एक अन्य उदाहरण दही का जमना है जो दूध में उपस्थित बैक्टीरिया द्वारा लैक्टिक अम्ल उत्पन्न होने के कारण होता है।
In simple words: (i) पेप्टाइड बन्ध दो ऐमीनो अम्लों के बीच -CO-NH- बन्ध है जो जल के अणु के निष्कासन से बनता है। (ii) प्राथमिक संरचना प्रोटीन में ऐमीनो अम्लों का विशिष्ट अनुक्रम है। (iii) विकृतीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें प्रोटीन अपनी त्रिविम संरचना और जैविक सक्रियता खो देता है, आमतौर पर गर्मी या pH में बदलाव के कारण।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन की संरचना के ये तीन स्तर (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक) और विकृतीकरण की अवधारणा जैव रसायन में मौलिक है और अक्सर पूछी जाती है।
Question 13. प्रोटीन की द्वितीयक संरचना के सामान्य प्रकार क्या हैं?
Answer: किसी प्रोटीन की द्वितीयक संरचना का सम्बन्ध उस आकृति से है जिसमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला विद्यमान होती है। यह दो भिन्न प्रकार की संरचनाओं में विद्यमान होती हैं α - हेलिक्स तथा β – प्लीटेड शीट संरचना। ये संरचनाएँ पेप्टाइड आबन्ध के तथा – NH -समूह के मध्य हाइड्रोजन आबन्ध के कारण पॉलिपेप्टाइड की मुख्य श्रृंखला के नियमित कुण्डलन में उत्पन्न होती हैं।
In simple words: प्रोटीन की द्वितीयक संरचना पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला के नियमित कुण्डलन को संदर्भित करती है, जिसमें मुख्य रूप से α-हेलिक्स और β-प्लीटेड शीट संरचनाएँ होती हैं, जो हाइड्रोजन आबन्धों द्वारा स्थिर होती हैं।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन की द्वितीयक संरचना को स्थिर करने में हाइड्रोजन आबंधों की भूमिका को समझना महत्वपूर्ण है। α-हेलिक्स और β-प्लीटेड शीट सबसे आम द्वितीयक संरचनाएँ हैं।
Question 14. प्रोटीन की -हेलिक्स संरचना के स्थायीकरण में कौन-से आबन्ध सहायक होते हैं?
Answer: प्रोटीन की z-हेलिक्स संरचना एक ऐमीनो अम्ल अवशिष्ट के C=O तथा चतुर्थ ऐमीनो अम्ल अवशेष के N – H के मध्य अन्तरा – आणविक H-आबन्ध द्वारा स्थायित्व प्राप्त करती है।
In simple words: α-हेलिक्स संरचना को पड़ोसी ऐमीनो अम्ल अवशेषों के कार्बोनिल समूह (C=O) और ऐमीनो समूह (N-H) के बीच बनने वाले अंतर-आणविक हाइड्रोजन आबंधों द्वारा स्थायित्व मिलता है।
🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन आबंध प्रोटीन की द्वितीयक संरचनाओं, विशेषकर α-हेलिक्स, के स्थायित्व के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 15. रेशेदार तथा गोलिकाकार (globular) प्रोटीन को विभेदित कीजिए ।
Answer:
(i) रेशेदार प्रोटीन (Fibrous proteins) : जब पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएँ समानान्तर होती हैं। तथा हाइड्रोजन एवं डाइसल्फाइड आबन्धों द्वारा संयुक्त रहती हैं तो रेशासम (रेशे जैसी) संरचना बनती है। इस प्रकार के प्रोटीन सामान्यत: जल में अविलेय होती हैं। रेशेदार प्रोटीन जन्तु ऊतकों की प्रमुख संरचनात्मक पदार्थ होती हैं। कुछ सामान्य उदाहरण किरेटिन (बाल, ऊन तथा रेशम में उपस्थित) तथा मायोसिन (मांसपेशियों में उपस्थित) आदि हैं।
(ii) गोलिकाकार प्रोटीन (Globular proteins) : जब पॉलिपेप्टाइड की श्रृंखलाएँ कुण्डली बनाकर गोलाकृति प्राप्त कर लेती हैं तो ऐसी संरचनाएँ प्राप्त होती हैं। ये सामान्यतः जल में विलेय होती हैं क्योकि इनके अणु दुर्बल अन्तराअणुक बलों द्वारा जुड़े रहते हैं। इन्सुलिन तथा ऐल्बुमिन इनके सामान्य उदाहरण
In simple words: रेशेदार प्रोटीन रेशे जैसी संरचना वाले जल में अघुलनशील प्रोटीन होते हैं जो संरचनात्मक भूमिका निभाते हैं (जैसे किरेटिन), जबकि गोलिकाकार प्रोटीन कुंडलित, गोलाकार, जल में घुलनशील प्रोटीन होते हैं जो जैविक कार्यों में शामिल होते हैं (जैसे इंसुलिन)।
🎯 Exam Tip: रेशेदार और गोलिकाकार प्रोटीन उनके आकार, जल में विलेयता और जैविक कार्य में भिन्न होते हैं। यह अंतर उनकी पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाओं के फोल्डिंग पैटर्न से उत्पन्न होता है।
Question 16. ऐमीनो अम्लों की उभयधर्मी प्रकृति को आप कैसे समझाएँगे?
Answer: ऐमीनो अम्ल में एक कार्बोक्सिल समूह (अम्लीय) तथा एक ऐमीन समूह (क्षारीय) समान अणु में पाए जाते हैं। जलीय विलयन में -COOH समूह एक H⁺ खोता है तथा — NH2, समूह इसे स्वीकार करता है। इस प्रकार ज्विट्टर आयन (zwitter ion) का निर्माण होता है।
\[ \text{H}_2\text{N-CH-COOH} \quad \longrightarrow \quad \text{H}_3\text{N}^+-\text{CH-COO}^- \]
R R
ज्विट्टर आयन
द्विध्रुवीय या ज्विट्टर आयन संरचना के कारण ऐमीनो अम्ल उभयधर्मी (amphoteric) प्रकृति के होते हैं। ऐमीनो अम्ल की अम्लीय प्रकृति के कारण होती है तथा क्षारीय प्रकृति COO- समूह के कारण होती है।
\[ \text{H}_3\text{N}^+-\text{CH-COOH} \quad \xrightarrow{\text{OH}^-} \quad \text{H}_2\text{N-CH-COO}^- \]
R R
I II
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र ऐमीनो अम्ल की ज्विट्टर आयन संरचना को दर्शाता है। इसमें ऐमीनो अम्ल का कार्बोक्सिल समूह (–COOH) एक प्रोटॉन (H⁺) त्यागकर –COO⁻ बनाता है, और ऐमीनो समूह (–NH2) एक प्रोटॉन स्वीकार करके –NH3⁺ बनाता है। इस प्रकार, एक ही अणु में धनात्मक और ऋणात्मक आवेश एक साथ मौजूद होते हैं, जिससे यह एक द्विध्रुवीय आयन (ज्विट्टर आयन) बन जाता है। नीचे दी गई अभिक्रिया दर्शाती है कि कैसे pH बदलने पर ज्विट्टर आयन अलग-अलग रूपों में परिवर्तित होता है।
In simple words: ऐमीनो अम्ल में अम्लीय कार्बोक्सिल समूह और क्षारीय ऐमीन समूह दोनों होते हैं, जिससे वे जलीय विलयन में ज्विट्टर आयन बनाते हैं। यह ज्विट्टर आयन प्रोटॉन दे और ले सकता है, जिससे ऐमीनो अम्लों की उभयधर्मी प्रकृति प्रदर्शित होती है।
🎯 Exam Tip: ज्विट्टर आयन का बनना ऐमीनो अम्लों की उभयधर्मी प्रकृति की कुंजी है। इसे समझने से उनके pH-निर्भर व्यवहार को समझने में मदद मिलती है।
Question 17. एन्जाइम क्या होते हैं?
Answer: एन्जाइम जैव-उत्प्रेरक होते हैं। जीवधारियों में होने वाली विभिन्न रासायनिक अभिक्रियाओं में समन्वयन के कारण ही जीवन सम्भव होता है।
उदाहरणार्थ : भोजन का पाचन, उपयुक्त अणुओं का अवशोषण तथा अन्ततः ऊर्जा का उत्पादन । इस प्रक्रम में अभिक्रियाएँ एक अनुक्रम में होती हैं तथा ये सभी अभिक्रियाएँ शरीर में मध्यम परिस्थितियों में सम्पन्न होती हैं। यह कुछ जैव-उत्प्रेरकों की सहायता से होता है। इन्हीं जैव-उत्प्रेरकों को एन्जाइम कहा जाता है। रासायनिक रूप में लगभग सभी एन्जाइम गोलिकाकार प्रोटीन होते हैं। एन्जाइम किसी विशेष अभिक्रिया अथवा विशेष क्रियाधार के लिए विशिष्ट होते हैं अर्थात् प्रत्येक जैव-तन्त्र के लिए भिन्न एन्जाइम की आवश्यकता होती है, इसलिए एन्जाइम अन्य प्रचलित उत्प्रेरकों से भिन्न होते हैं। ये अत्यन्त सक्रिय होते हैं तथा इनकी अत्यन्त सूक्ष्म मात्रा की ही आवश्यकता होती है। ये अनुकूल ताप (310K) तथा pH(7.4) एवं एक वायुमण्डलीय दाब पर कार्य करते हैं।
In simple words: एन्जाइम जैविक उत्प्रेरक होते हैं जो शरीर में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं की दर को बढ़ाते हैं। वे सामान्यतः गोलाकार प्रोटीन होते हैं और विशिष्ट क्रियाधारों के लिए अत्यंत सक्रिय होते हैं, जो अनुकूल परिस्थितियों में कार्य करते हैं।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम जैविक उत्प्रेरक होते हैं जो जैव रासायनिक प्रतिक्रियाओं की दर को बढ़ाते हैं, उनकी विशिष्टता और इष्टतम कार्य की परिस्थितियों को याद रखें।
Question 18. प्रोटीन की संरचना पर विकृतीकरण का क्या प्रभाव होता है?
Answer: प्रोटीन ऊष्मा, खनिज अम्ल, क्षार आदि की क्रिया के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। गर्म करने या खनिज अम्लों की क्रिया कराने पर गोलिकामय प्रोटीन (विलेय प्रोटीन) स्कन्दित या अवक्षेपित होकर तन्तुमय प्रोटीन देते हैं जोकि जल में अविलेय होते है जिसके परिणामस्वरूप प्रोटीन की जैव सक्रियता समाप्त हो जाती है। रासायनिक रूप से विकृतिकरण प्राथमिक संरचना को परिवर्तित नहीं करता है, लेकिन प्रोटीन की द्वितीयक तथा तृतीयक संरचनाएँ परिवर्तित हो जाती हैं।
In simple words: प्रोटीन का विकृतीकरण उसकी द्वितीयक और तृतीयक संरचनाओं को नष्ट कर देता है, जिससे प्रोटीन अपनी जैविक सक्रियता खो देता है और जल में अघुलनशील हो जाता है, हालाँकि इसकी प्राथमिक संरचना अपरिवर्तित रहती है।
🎯 Exam Tip: विकृतीकरण में प्राथमिक संरचना अपरिवर्तित रहती है, लेकिन उच्च-स्तरीय संरचनाएँ (द्वितीयक, तृतीयक) प्रभावित होती हैं, जिससे प्रोटीन का कार्य बाधित होता है।
Question 19. विटामिनों को किस प्रकार वर्गीकृत किया गया है? रक्त के थक्के जमने के लिए जिम्मेदार विटामिन का नाम दीजिए।
Answer: विटामिनों को जल या वसा में विलेयता के आधार पर दो वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है
1. जल में विलेय विटामिन (Water soluble vitamins) : विटामिन B-कॉम्प्लेक्स तथा विटामिन C।
2. वसा में विलेय विटामिन (Fat soluble vitamins) : विटामिन A, D, E, K आदि । विटामिन K रक्त के थक्के जमने के लिए उत्तरदायी है।
In simple words: विटामिनों को उनकी जल या वसा में घुलनशीलता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। विटामिन K रक्त के थक्के जमने के लिए जिम्मेदार होता है।
🎯 Exam Tip: विटामिनों का वर्गीकरण उनकी विलेयता के आधार पर होता है, जो उनके अवशोषण, परिवहन और भंडारण को प्रभावित करता है। विटामिन K की भूमिका को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 20. विटामिन A व C हमारे लिए आवश्यक क्यों हैं? उनके महत्त्वपूर्ण स्रोत दीजिए ।
Answer: विटामिन A की कमी से जीरोफ्थैल्मिया (xerophthalmia) तथा रतौंधी (night blindness) हो जाते हैं, अतः इसका प्रयोग हमारे लिए आवश्यक होता है।
(i) स्रोत (Sources) :
मछली के यकृत का तेल, गाजर, मक्खन तथा दूध । विटामिन C की कमी से स्कर्वी (scurvy) तथा पायरिया हो जाता है।
(ii) स्रोत (Sources) : नींबू, आँवला, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, अंकुरित अनाज आदि ।
In simple words: विटामिन A रतौंधी और जीरोफ्थैल्मिया को रोकने के लिए आवश्यक है (स्रोत: गाजर, दूध), जबकि विटामिन C स्कर्वी से बचाता है (स्रोत: नींबू, आँवला)।
🎯 Exam Tip: विभिन्न विटामिनों की कमी से होने वाले रोगों और उनके मुख्य स्रोतों को याद रखना प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 21. न्यूक्लीक अम्ल क्या होते हैं? इनके दो महत्त्वपूर्ण कार्य लिखिए।
Answer: न्यूक्लीक अम्ल वे जैव-अणु होते हैं जो सभी जीवित कोशिकाओं के नाभिकों में न्यूक्लियो- प्रोटीन अथवा क्रोमोसोम के रूप में पाए जाते हैं। न्यूक्लीक अम्ल मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—डिऑक्सीराइबोस न्यूक्लीक अम्ल (DNA) तथा राइबोसन्यूक्लीक अम्ल (RNA)। चूंकि न्यूक्लीक अम्ल न्यूक्लियोटाइडों की लम्बी श्रृंखला वाले बहुलक होते हैं, अतः इन्हें पॉलिन्यूक्लियोटाइड भी कहते हैं। न्यूक्लीक अम्लों के दो महत्त्वपूर्ण कार्य निम्नलिखित हैं
(i) DNA आनुवंशिकता का रासायनिक आधार है तथा इसे आनुवंशिक सूचनाओं के संग्राहक के रूप में जाना जाता है। DNA लाखों वर्षों से किसी जीव की विभिन्न प्रजातियों की पहचान बनाए रखने के लिए विशिष्ट रूप से उत्तरदायी है। कोशिका विभाजन के समय एक DNA अणु स्वप्रतिकरण (self replication) में सक्षम होता है तथा पुत्री कोशिका में समान DNA रज्जुक का अन्तरण होता है।
(ii) न्यूक्लीक अम्ल (DNA तथा RNA) का दूसरा महत्त्वपूर्ण कार्य कोशिका में प्रोटीन का संश्लेषण है। वास्तव में कोशिका में प्रोटीन का संश्लेषण विभिन्न RNA अणुओं द्वारा होता है, परन्तु किसी विशेष प्रोटीन के संश्लेषण का सन्देश DNA में उपस्थित होता है।
In simple words: न्यूक्लीक अम्ल (DNA और RNA) पॉलिन्यूक्लियोटाइड होते हैं जो आनुवंशिक जानकारी संग्रहीत करते हैं और इसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाते हैं (DNA), साथ ही कोशिका में प्रोटीन संश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं (DNA संदेश प्रदान करता है, RNA संश्लेषण करता है)।
🎯 Exam Tip: न्यूक्लीक अम्ल, विशेषकर DNA और RNA, आनुवंशिक जानकारी के भंडारण और अभिव्यक्ति के लिए मौलिक हैं। उनके मुख्य कार्यों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 22. न्यूक्लियोसाइड तथा न्यूक्लियोटाइड में क्या अन्तर होता है?
Answer:
1. न्यूक्लियोसाइड (Nucleosides) :
न्यूक्लियोसाइड में न्यूक्लिक अम्ल के दो आधारीय घटक होते हैं—पेण्टोस शर्करा तथा एक नाइट्रोजनी क्षारक ।
नाइट्रोजनी क्षारक + पेन्टोस शर्करा \(\implies\) न्यूक्लियोसाइड उपस्थित शर्करा के आधार पर न्यूक्लियोसाइड राइबोसाइड तथा डीऑक्सीराइबोसाइड प्रकार के होते हैं।
2. न्यूक्लियोटाइड (Nucleotides) :
न्यूक्लियोटाइड में न्यूक्लिक अम्लों के तीनों घटक अर्थात् H3 PO4, पेण्टोस शर्करा तथा नाइट्रोजनी क्षारक पाए जाते हैं।
नाइट्रोजनी क्षारक + पेन्टोस शर्करा + H3PO4 \(\implies\) न्यूक्लियोटाइड या न्यूक्लियोसाइड + H3PO4 \(\implies\) न्यूक्लियोटाइड उपस्थित शर्करा के प्रकार के आधार पर न्यूक्लियोटाइड दो प्रकार के होते हैं
1. राइबोन्यूक्लियोटाइड
2. डीऑक्सीराइबोन्यूक्लियोटइड ।
In simple words: न्यूक्लियोसाइड शर्करा और नाइट्रोजनी क्षारक से बनता है, जबकि न्यूक्लियोटाइड में इन दोनों के साथ एक फॉस्फेट समूह भी जुड़ा होता है।
🎯 Exam Tip: न्यूक्लियोटाइड, जो न्यूक्लीक अम्लों की मूलभूत इकाई है, न्यूक्लियोसाइड और फॉस्फेट समूह से मिलकर बनता है। इस अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 23. DNA के दो रज्जुक समान नहीं होते, अपितु एक-दूसरे के पूरक होते हैं। समझाइए ।
Answer: DNA अणु में दो रज्जुक, एक रज्जुक के प्यूरीन क्षारक तथा अन्य के पिरिमिडीन क्षारक के मध्य या इसके विपरीत के मध्य हाइड्रोजन आबन्धों के द्वारा जुड़े रहते हैं। क्षारकों के विभिन्न आकारों एवं ज्यामितियों के कारण DNA में एकमात्र सम्भव युग्मन G (ग्वानीन) तथा C (साइटोसीन) के मध्य तीन हाइड्रोजन आबन्धों द्वारा हो सकता है। दूसरे शब्दों में क्षारकों A (ऐडीनीन) तथा T (थायमीन) के मध्य दो हाइड्रोजन आबन्धों द्वारा युग्मन सम्भव होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र DNA की दोहरी रज्जुक हेलिक्स संरचना और उसमें क्षारक युग्मन को दर्शाता है। चित्र (क) में DNA की हेलिक्स संरचना की समग्र ज्यामिति दिखाई गई है, जबकि चित्र (ख) में विशिष्ट क्षारक युग्मन को दर्शाया गया है: G (ग्वानीन) और C (साइटोसीन) तीन हाइड्रोजन आबंधों से जुड़े हैं, और A (ऐडीनीन) और T (थायमीन) दो हाइड्रोजन आबंधों से जुड़े हैं। यह पूरकता सुनिश्चित करती है कि दोनों स्ट्रैंड एक-दूसरे के दर्पण समान हों, लेकिन समान न हों।
क्षारक-युग्मन सिद्धान्त के कारण एक रज्जुक में क्षारकों का अनुक्रम दूसरे रज्जुक में क्षारकों के अनुक्रम को स्वतः व्यवस्थित कर देता है। अत: DNA के दो रज्जुक समान नहीं होते, अपितु एक-दूसरे के पूरक होते हैं।
In simple words: DNA के दोनों रज्जुक पूरक होते हैं क्योंकि वे विशिष्ट क्षारक युग्मन (A-T और G-C) के माध्यम से हाइड्रोजन आबंधों द्वारा जुड़े होते हैं। इसका अर्थ है कि एक रज्जुक पर क्षारक का अनुक्रम दूसरे रज्जुक पर क्षारक के अनुक्रम को निर्धारित करता है, जिससे वे समान नहीं होते, बल्कि एक-दूसरे के साथ पूरी तरह से फिट होते हैं।
🎯 Exam Tip: DNA की पूरक क्षारक युग्मन (A-T और G-C) डबल हेलिक्स संरचना के लिए महत्वपूर्ण है और यह आनुवंशिक जानकारी के प्रतिलेखन और प्रतिकृति के लिए आधार प्रदान करता है।
Question 24. DNA तथा RNA में महत्त्वपूर्ण संरचनात्मक एवं क्रियात्मक अन्तर लिखिए।
Answer: संरचनात्मक अन्तर (Structural Difference)
| क्र. सं. | DNA | RNA |
| 1. | DNA में उपस्थित शर्करा 2-डिऑक्सी-D-(-)- राइबोस है। | RNA में उपस्थित शर्करा D-(-)- राइबोस है। |
| 2. | DNA में साइटोसीन तथा थायमीन पिरिमिडीन क्षारकों के रूप में होते हैं। | RNA में साइटोसीन तथा यूरेसिल पिरिमिडीन क्षारकों के रूप में होते हैं। |
| 3. | DNA की द्विकुण्डलित α-हेलिक्स संरचना होती है। | RNA की एकल कुण्डलित α-हेलिक्स संरचना होती है। |
| 4. | DNA अणु अत्यधिक विशाल होते हैं, इनका आण्विक द्रव्यमान 6×10\(^6\) से 16×10\(^6\) u के मध्य होता है। | RNA अणु अपेक्षाकृत छोटे होते हैं, इनका आण्विक द्रव्यमान 20,000 से 40,000 u के मध्य होता है। |
क्रियात्मक अन्तर (Functional Difference)
| क्र. सं. | DNA | RNA |
| 1. | DNA में प्रतिकरण (replication) का विशिष्ट गुण होता है। | RNA सामान्यतया प्रतिकरण नहीं करते हैं। |
| 2. | DNA आनुवंशिक प्रभावों के संचरण को नियन्त्रित करता है। | RNA प्रोटीन संश्लेषण को नियन्त्रित करता है। |
In simple words: DNA में 2-डिऑक्सीराइबोस शर्करा और थायमीन होता है, यह द्विकुंडलित होता है और आनुवंशिक जानकारी का भंडारण व प्रतिकृति करता है। RNA में राइबोस शर्करा और यूरेसिल होता है, यह एकल कुंडलित होता है और प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करता है।
🎯 Exam Tip: DNA और RNA के बीच के संरचनात्मक और कार्यात्मक अंतर को समझना आनुवंशिकी और आणविक जीव विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 25. कोशिका में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के RNA कौन-से हैं?
Answer: कोशिका में तीन प्रकार के RNA पाए जाते हैं
1. राइबोसोमल RNA (r-RNA)
2. सन्देशवाहक RNA (m-RNA)
3. स्थानान्तरण RNA (t-RNA)
In simple words: कोशिका में तीन मुख्य प्रकार के RNA होते हैं: राइबोसोमल RNA (r-RNA), संदेशवाहक RNA (m-RNA), और स्थानांतरण RNA (t-RNA)।
🎯 Exam Tip: RNA के ये तीनों प्रकार प्रोटीन संश्लेषण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, प्रत्येक का अपना विशिष्ट कार्य होता है।
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. यौगिकों का युग्म जिसमें दोनों यौगिक टॉलेन्स अभिकर्मक के साथ धनात्मक परीक्षण देते
(i) ग्लूकोस तथा सुक्रोस
(ii) फ्रक्टोस तथा सुक्रोस
(iii) ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस
(iv) ये सभी
Answer: (iii) ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस
In simple words: ग्लूकोस और फ्रक्टोस दोनों टॉलेन्स अभिकर्मक के साथ सकारात्मक परीक्षण देते हैं क्योंकि वे अपचायी शर्कराएँ हैं।
🎯 Exam Tip: अपचायी शर्कराएँ (जैसे ग्लूकोस और फ्रक्टोस) टॉलेन्स अभिकर्मक के साथ प्रतिक्रिया करती हैं; सुक्रोस एक गैर-अपचायी शर्करा है।
Question 2. सुक्रोस (sucrose) है एक
(i) मोनोसैकेराइड
(ii) डाइसैकेराइड
(iii) ट्राइसैकेराइड
(iv) पॉलिसैकेराइड
Answer: (i) डाइसैकेराइड
In simple words: सुक्रोस एक डाइसैकेराइड है, जो जल-अपघटन पर ग्लूकोस और फ्रक्टोस देता है।
🎯 Exam Tip: डाइसैकेराइड दो मोनोसैकेराइड इकाइयों से बनते हैं, जैसे सुक्रोस ग्लूकोस और फ्रक्टोस से।
Question 3. इन्युलिन के जल-अपघटन से प्राप्त होता है
(i) ग्लूकोस
(ii) फ्रक्टोस
(iii) ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस
(iv) लैक्टोस
Answer: (ii) फ्रक्टोस
In simple words: इन्युलिन एक पॉलीसैकेराइड है जो फ्रक्टोस इकाइयों का बहुलक होता है, इसलिए जल-अपघटन पर यह केवल फ्रक्टोस देता है।
🎯 Exam Tip: इन्युलिन फ्रक्टोस का एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक बहुलक है, और इसका जल-अपघटन केवल फ्रक्टोस देता है।
Question 4. सेलुलोस (cellulose) है एक
(i) मोनोसैकेराइड
(ii) डाइसैकेराइड
(iii) ट्राइसैकेराइड
(iv) पॉलिसैकेराइड
Answer: (iv) पॉलिसैकेराइड
In simple words: सेलुलोस एक पॉलीसैकेराइड है, जो ग्लूकोस की कई इकाइयों से मिलकर बना होता है और पौधों की कोशिका भित्तियों का मुख्य घटक है।
🎯 Exam Tip: सेलुलोस एक जटिल कार्बोहाइड्रेट है जो ग्लूकोस की बहुत सारी इकाइयों से बनता है, जिससे यह पॉलीसैकेराइड की श्रेणी में आता है।
Question 5. ग्लूकोस में ऐल्डिहाइड समूह के अतिरिक्त होता है
(i) एक द्वितीयक तथा चार प्राथमिक –OH समूह
(ii) एक प्राथमिक तथा चार द्वितीयक –OH समूह
(iii) दो प्राथमिक -OH तथा तीन द्वितीयक –OH समूह
(iv) तीन प्राथमिक – OH तथा दो द्वितीयक –OH समूह
Answer: (ii) एक प्राथमिक तथा चार द्वितीयक –OH समूह
In simple words: ग्लूकोस की संरचना में ऐल्डिहाइड समूह के अलावा, एक प्राथमिक (-OH) समूह और चार द्वितीयक (-OH) समूह होते हैं।
🎯 Exam Tip: ग्लूकोस में प्राथमिक और द्वितीयक हाइड्रॉक्सिल समूहों की पहचान करना इसकी संरचना और रासायनिक गुणों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 6. लैक्टोस के तनु अम्ल के साथ जल-अपघटन में प्राप्त होता है
(i) D-ग्लूकोस तथा D. ग्लूकोस का सममोलर मिश्रण ।
(ii) D-ग्लूकोस तथा D-गैलेक्टोस को सममोलर मिश्रण
(iii) D-ग्लूकोस तथा D-फ्रक्टोस का सममोलर मिश्रण
(iv) L-ग्लूकोस तथा D.फ्रक्टोस को सममोलर मिश्रण
Answer: (ii) D-ग्लूकोस तथा D-गैलेक्टोस को सममोलर मिश्रण
In simple words: लैक्टोस के जल-अपघटन से D-ग्लूकोस और D-गैलेक्टोस का समान मात्रा में मिश्रण प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: लैक्टोस एक डाइसैकेराइड है जो ग्लूकोस और गैलेक्टोस से बना होता है, इसलिए इसके जल-अपघटन से ये दो मोनोसैकेराइड प्राप्त होते हैं।
Question 7. ग्लूकोस फेनिलहाइड्राजीन के आधिक्य से क्रिया करके बनाता है
(i) ग्लूकोसाजोन
(ii) ग्लूकोस फेनिलहाइड्राजीन
(iii) ग्लूकोस ऑक्सिम
(iv) सोरबिटॉल
Answer: (i) ग्लूकोसाजोन
In simple words: जब ग्लूकोस फेनिलहाइड्राजीन के आधिक्य से अभिक्रिया करता है, तो यह ग्लूकोसाजोन बनाता है।
🎯 Exam Tip: फेनिलहाइड्राजीन के आधिक्य से एल्डोस शर्करा (जैसे ग्लूकोस) से ओसाजोन डेरिवेटिव्स का निर्माण होता है, जो कार्बोहाइड्रेट की पहचान में सहायक होता है।
Question 8. मेथिल α – D-ग्लूकोसाइड तथा मेथिल β-D-ग्लूकोसाइड हैं
(i) ऐपीमर
(ii) एनोमर
(iii) एनेन्शियोमर
(iv) डाइस्टीरियोमर
Answer: (ii) एनोमर
In simple words: मेथिल α – D-ग्लूकोसाइड और मेथिल β-D-ग्लूकोसाइड एनोमर होते हैं, जो केवल C1 कार्बन परमाणु पर विन्यास में भिन्न होते हैं।
🎯 Exam Tip: एनोमर कार्बोहाइड्रेट्स के चक्रीय रूपों के स्टीरियोआइसोमर होते हैं जो केवल एनोमेरिक कार्बन (जो मूल ऐल्डिहाइड या कीटोन कार्बन था) पर विन्यास में भिन्न होते हैं।
Question 9. वह कार्बोहाइड्रेट, जो मनुष्यों के पाचन तन्त्र में नहीं पचता है, है
(i) स्टार्च
(ii) सेलुलोस
(iii) ग्लाइकोजन
(iv) ग्लूकोस
Answer: (ii) सेलुलोस
In simple words: सेलुलोस वह कार्बोहाइड्रेट है जिसे मानव पाचन तंत्र में नहीं पचाया जा सकता क्योंकि मनुष्यों में इसे तोड़ने वाले एंजाइम नहीं होते।
🎯 Exam Tip: सेलुलोस में β-ग्लाइकोसाइडिक बंध होते हैं जिन्हें मनुष्य के पाचन एंजाइम नहीं तोड़ सकते, जबकि स्टार्च में α-ग्लाइकोसाइडिक बंध होते हैं जो आसानी से पच जाते हैं।
Question 10. निम्न में से कौन-सा यौगिक बाइयूरेट परीक्षण नहीं देता है?
(i) कार्बोहाइड्रेट
(ii) पॉलीपेप्टाइड
(iii) यूरिया
(iv) प्रोटीन
Answer: (i) कार्बोहाइड्रेट
In simple words: कार्बोहाइड्रेट बाइयूरेट परीक्षण नहीं देते हैं, क्योंकि यह परीक्षण प्रोटीन और पेप्टाइड में मौजूद पेप्टाइड बंधों का पता लगाता है।
🎯 Exam Tip: बाइयूरेट परीक्षण प्रोटीन या पॉलीपेप्टाइड में दो या अधिक पेप्टाइड बंधों की उपस्थिति का पता लगाने के लिए एक विशिष्ट परीक्षण है।
Question 11. दूध में शर्करा होती है
(i) सुक्रोस
(ii) माल्टोस
(iii) ग्लूकोस
(iv) लैक्टोस
Answer: (iv) लैक्टोस
In simple words: दूध में पाई जाने वाली मुख्य शर्करा लैक्टोस है, जिसे 'दूध शर्करा' भी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: लैक्टोस एक डाइसैकेराइड है जो ग्लूकोस और गैलेक्टोस से बनता है और यह दूध में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है।
Question 12. शरीर में आरक्षित ग्लूकोस के रूप में कार्य करने वाला कार्बोहाइड्रेट है
(i) सुक्रोस
(ii) स्टार्च
(iii) ग्लाइकोजन
(iv) फ्रक्टोस
Answer: (iii) ग्लाइकोजन
In simple words: ग्लाइकोजन शरीर में ग्लूकोस का मुख्य भंडारण रूप है, जिसे 'जंतु स्टार्च' भी कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: ग्लाइकोजन यकृत और मांसपेशियों में संचित रहता है और आवश्यकता पड़ने पर ग्लूकोस में टूट जाता है, जिससे ऊर्जा मिलती है।
Question 13. इन्सुलिन किसके उपापचय को नियन्त्रित करता है?
(i) खनिज
(ii) ऐमीनो अम्ल
(iii) ग्लूकोस
(iv) विटामिन
Answer: (iii) ग्लूकोस
In simple words: इन्सुलिन एक हॉर्मोन है जो रक्त में ग्लूकोस के स्तर को नियंत्रित करता है, कोशिकाओं को ग्लूकोस अवशोषित करने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: इन्सुलिन ग्लूकोस के उपापचय में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, रक्त शर्करा के स्तर को सामान्य बनाए रखता है।
Question 14. शर्करा के किस कार्बन परमाणु पर हाइड्रॉक्सिल समूह की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति RNA तथा DNA में विभेद करती है?
(i) दूसरे
(ii) तीसरे
(iii) चौथे
(iv) पहले
Answer: (i) दूसरे
In simple words: RNA में राइबोस शर्करा के दूसरे कार्बन पर एक हाइड्रॉक्सिल समूह होता है, जबकि DNA में 2-डीऑक्सीराइबोस शर्करा के दूसरे कार्बन पर यह हाइड्रॉक्सिल समूह अनुपस्थित होता है, जो इन दोनों को अलग करता है।
🎯 Exam Tip: राइबोस और 2-डीऑक्सीराइबोस शर्करा के C2' पर -OH समूह की उपस्थिति/अनुपस्थिति DNA और RNA के बीच महत्वपूर्ण संरचनात्मक अंतर है।
Question 15. बायर अभिकर्मक का उपयोग किया जाता है
(i) ऑक्सीकरण के लिए
(ii) द्वि-बन्ध की जाँच के लिए
(iii) ग्लूकोस की जाँच के लिए
(iv) अपचयन के लिए।
Answer: (i) ऑक्सीकरण के लिए
In simple words: बायर अभिकर्मक (ठंडा, तनु, क्षारीय पोटेशियम परमैंगनेट) का उपयोग आमतौर पर कार्बन-कार्बन द्वि-बंधों या अन्य ऑक्सीकरणीय समूहों की उपस्थिति का पता लगाने के लिए ऑक्सीकरण अभिकर्मक के रूप में किया जाता है।
🎯 Exam Tip: बायर अभिकर्मक असंतृप्तता का पता लगाने और ऑक्सीकरण प्रतिक्रियाओं में मंद ऑक्सीकरण के लिए एक क्लासिक अभिकर्मक है।
Question 16. प्रोटीनों में पाये जाने वाले ऐमीनो अम्ल जिन्हें मानव शरीर संश्लेषित करता है, हैं
(i) 20
(ii) 10
(iii) 5
(iv) 4
Answer: (ii) 10
In simple words: मानव शरीर लगभग 10 ऐमीनो अम्लों का संश्लेषण कर सकता है, जबकि अन्य 10 को 'आवश्यक ऐमीनो अम्ल' के रूप में आहार से प्राप्त करना होता है।
🎯 Exam Tip: मानव शरीर कुछ ऐमीनो अम्लों का संश्लेषण कर सकता है (अनावश्यक), जबकि अन्य आवश्यक होते हैं और उन्हें भोजन से प्राप्त किया जाना चाहिए।
Question 17. निम्न में से कौन-सा परीक्षण प्रोटीनों के लिए नहीं किया जाता है?
(i) मिलन परीक्षण
(ii) मोलिश परीक्षण
(iii) बाइयूरेट परीक्षण
(iv) निनहाइडूिन परीक्षण
Answer: (ii) मोलिश परीक्षण
In simple words: मोलिश परीक्षण कार्बोहाइड्रेट्स की उपस्थिति का पता लगाने के लिए उपयोग किया जाता है, न कि प्रोटीनों के लिए।
🎯 Exam Tip: मोलिश परीक्षण सभी कार्बोहाइड्रेट्स (मोनोसैकेराइड्स, डाइसैकेराइड्स, पॉलीसैकेराइड्स) के लिए एक सामान्य परीक्षण है।
Question 18. मानव शरीर में संश्लेषित हो सकने वाला ऐमीनो अम्ल है
(i) लाइसीन
(ii) हिस्टीडीन
(iii) वेलीन
(iv) ऐलानीन
Answer: (iv) ऐलानीन
In simple words: ऐलानीन एक अनावश्यक ऐमीनो अम्ल है जिसे मानव शरीर स्वयं संश्लेषित कर सकता है।
🎯 Exam Tip: अनावश्यक ऐमीनो अम्लों को शरीर द्वारा संश्लेषित किया जा सकता है, जबकि आवश्यक ऐमीनो अम्लों को आहार से प्राप्त करना होता है।
Question 19. α -ऐमीनो अम्ल जिसमें ऐरोमैटिक पाश्र्व श्रृंखला होती है, है
(i) प्रोलीन
(ii) टाइरोसीन
(iii) वेलीन
(iv) ट्रिप्टोफेन
Answer: (iv) ट्रिप्टोफेन
In simple words: ट्रिप्टोफेन एक ऐमीनो अम्ल है जिसमें एक ऐरोमैटिक (इंडोल) पार्श्व श्रृंखला होती है।
🎯 Exam Tip: ऐरोमैटिक ऐमीनो अम्लों में बेंजीन वलय या अन्य ऐरोमैटिक समूह होते हैं, जो उनके विशिष्ट गुणों के लिए जिम्मेदार होते हैं। ट्रिप्टोफेन इसका एक अच्छा उदाहरण है।
Question 20. ऐमीनो अम्लों के सन्दर्भ में निम्न में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(i) ये सभी प्रोटीनों के घटक होते हैं
(ii) ये सभी उच्च गलनांक वाले होते हैं
(iii) प्राकृतिक रूप में पाये जाने वाले ऐमीनो अम्लों का D-विन्यास होता है।
(iv) इनके अभिलाक्षणिक आइसोइलेक्ट्रिक बिन्दु होते हैं।
Answer: (iii) प्राकृतिक रूप में पाये जाने वाले ऐमीनो अम्लों का D-विन्यास होता है।
In simple words: प्राकृतिक रूप में पाए जाने वाले अधिकांश ऐमीनो अम्लों का विन्यास L-प्रकार का होता है, न कि D-प्रकार का।
🎯 Exam Tip: जीवों में पाए जाने वाले अधिकांश ऐमीनो अम्ल L-प्रकार के होते हैं, जबकि D-प्रकार के ऐमीनो अम्ल कुछ बैक्टीरिया और एंटीबायोटिक दवाओं में पाए जाते हैं।
Question 21. ऐमीनो अम्ल निम्न में से किसके निर्माण की इकाई होते हैं?
(i) कार्बोहाइड्रेट के
(ii) प्रोटीन के
(iii) वसा के
(iv) विटामिन के
Answer: (ii) प्रोटीन के
In simple words: ऐमीनो अम्ल प्रोटीन के निर्माण की मूलभूत इकाइयाँ (मोनोमर्स) हैं, जो पेप्टाइड बंधों द्वारा जुड़कर पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: ऐमीनो अम्ल प्रोटीन के बिल्डिंग ब्लॉक होते हैं। यह जैव-अणुओं की बुनियादी संरचना को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।
Question 22. एन्जाइम होते हैं
(i) तेल
(ii) वसा-अम्ल
(iii) प्रोटीन
(iv) खनिज
Answer: (iii) प्रोटीन
In simple words: एन्जाइम मुख्य रूप से प्रोटीन होते हैं जो जैविक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं।
🎯 Exam Tip: सभी एंजाइम (कुछ RNA एंजाइमों को छोड़कर) प्रोटीन होते हैं, जो उनकी विशिष्ट संरचना और कार्य के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 23. विटामिन B₁, का रासायनिक नाम है
(i) एस्कॉर्बिक अम्ल
(ii) रिबोफ्लेविन
(iii) थायमिन
(iv) पाइरीडॉक्सीन
Answer: (iii) थायमिन
In simple words: विटामिन B₁ का रासायनिक नाम थायमिन है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न विटामिनों के रासायनिक नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर सीधी-सीधी जानकारी वाले प्रश्नों में पूछे जाते हैं।
Question 24. मानव शरीर में निम्न में से किसका निर्माण नहीं हो सकता है?
(i) एन्जाइम
(ii) DNA
(iii) विटामिन्स
(iv) हॉर्मोन्स
Answer: (iii) विटामिन्स
In simple words: मानव शरीर अधिकांश विटामिन्स का संश्लेषण स्वयं नहीं कर सकता और उन्हें आहार से प्राप्त करना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन अनिवार्य पोषक तत्व हैं क्योंकि मानव शरीर उन्हें पर्याप्त मात्रा में संश्लेषित नहीं कर पाता है, इसलिए उन्हें बाहरी स्रोतों से प्राप्त करना आवश्यक है।
Question 25. कैल्सीफेरॉल कहलाता है
(i) विटामिन A
(ii) विटामिन B
(iii) विटामिन C
(iv) विटामिन D
Answer: (iv) विटामिन D
In simple words: कैल्सीफेरॉल विटामिन D का रासायनिक नाम है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: विटामिन D को कैल्सीफेरॉल भी कहा जाता है और यह कैल्शियम अवशोषण तथा हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 26. विटामिन A की कमी से होता है
(i) स्कर्वी
(ii) बेरी-बेरी
(iii) रतौंधी
(iv) अरक्तता
Answer: (iii) रतौंधी
In simple words: विटामिन A की कमी से रतौंधी नामक बीमारी होती है, जिसमें कम रोशनी में देखने की क्षमता प्रभावित होती है।
🎯 Exam Tip: विटामिन A की कमी से आँखों से संबंधित समस्याएं होती हैं, जिनमें रतौंधी (night blindness) प्रमुख है।
Question 27. निम्नलिखित में से कौन-सा विटामिन स्कर्वी रोग के लिए उत्तरदायी है?
(i) A
(ii) C
(iii) K
(iv) D
Answer: (ii) C
In simple words: स्कर्वी रोग विटामिन C की कमी से होता है, जिसे एस्कॉर्बिक अम्ल भी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: विटामिन C एक जल-विलेय विटामिन है जो कोलेजन संश्लेषण और प्रतिरक्षा कार्य के लिए आवश्यक है, और इसकी कमी से स्कर्वी होता है।
Question 28. ऐस्कॉर्बिक अम्ल है
(i) प्रोटीन
(ii) एन्जाइम
(iii) हॉर्मोन
(iv) विटामिन
Answer: (iv) विटामिन
In simple words: एस्कॉर्बिक अम्ल विटामिन C का रासायनिक नाम है, जो एक आवश्यक पोषक तत्व है।
🎯 Exam Tip: एस्कॉर्बिक अम्ल विटामिन C का रासायनिक रूप है, जो एक महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट है और स्कर्वी को रोकता है।
Question 29. बन्ध्यारोधी विटामिन है
(i) विटामिन D
(ii) विटामिन B समूह
(iii) विटामिन E
(iv) विटामिन A
Answer: (iii) विटामिन E
In simple words: विटामिन E को बन्ध्यारोधी विटामिन के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह प्रजनन क्षमता को बनाए रखने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन E एक एंटीऑक्सीडेंट है और प्रजनन स्वास्थ्य में इसकी भूमिका के लिए जाना जाता है, विशेष रूप से कमी से बांझपन हो सकता है।
Question 30. वसा के साथ आँत में अवशोषित होने वाले विटामिन हैं
(i) A, D
(ii) B, C
(iii) A, C
(iv) B, D
Answer: (i) A, D
In simple words: विटामिन A और D वसा में घुलनशील विटामिन हैं, इसलिए वे वसा के साथ आंत में अवशोषित होते हैं।
🎯 Exam Tip: वसा-विलेय विटामिन (A, D, E, K) को वसा के साथ अवशोषित किया जाता है और शरीर में वसा ऊतक में संग्रहीत किया जा सकता है।
Question 31. बायोटीन यीस्ट में पाये जाने वाला कार्बनिक पदार्थ है। इसे अन्य किस नाम से पुकारते हैं?
(i) विटामिन H
(ii) विटामिन K
(iii) विटामिन E
(iv) विटामिन B12
Answer: (i) विटामिन H
In simple words: बायोटीन को विटामिन H के नाम से भी जाना जाता है।
🎯 Exam Tip: बायोटीन (विटामिन H) B-कॉम्प्लेक्स विटामिन का एक हिस्सा है और उपापचय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Question 32. वह विटामिन जो न तो जल में और न ही वसा में विलेय है, है
(i) बायोटीन
(ii) थायमीन
(iii) कैल्सीफेरॉल
(iv) ये सभी
Answer: (i) बायोटीन
In simple words: बायोटीन कुछ हद तक जल-विलेय है, लेकिन इसकी विलेयता अन्य जल-विलेय विटामिनों की तुलना में कम होती है और यह वसा में भी घुलनशील नहीं होता।
🎯 Exam Tip: बायोटीन की अद्वितीय विलेयता विशेषताओं पर ध्यान दें, जो इसे अन्य जल- या वसा-विलेय विटामिनों से अलग करती हैं।
Question 33. निम्न में से प्यूरीन व्युत्पन्न है
(i) साइटोसीन
(ii) ग्वानीन
(iii) यूरेसिल
(iv) थायमीन
Answer: (ii) ग्वानीन
In simple words: ग्वानीन एक प्यूरीन क्षारक है, जो डीएनए और आरएनए दोनों में पाया जाता है, जबकि साइटोसीन, यूरेसिल और थायमीन पिरिमिडीन क्षारक हैं।
🎯 Exam Tip: प्यूरीन (एडीनीन और ग्वानीन) और पिरिमिडीन (साइटोसीन, थायमीन, यूरेसिल) क्षारक न्यूक्लीक अम्लों के मूलभूत घटक हैं, और इनके बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।
Question 34. DNA की द्विकुण्डलीत संरचना का कारण है
(i) स्थिर विद्युत आकर्षण
(ii) वाण्डरवाल्स बल
(iii) द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्यक्रियाएँ
(iv) हाइड्रोजन आबन्धन
Answer: (iv) हाइड्रोजन आबन्धन
In simple words: DNA की द्विकुंडलित संरचना क्षारकों के बीच हाइड्रोजन आबंधों द्वारा स्थिर होती है, जो विशिष्ट युग्मन (A-T और G-C) बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन आबंध डीएनए डबल हेलिक्स की स्थिरता के लिए मौलिक हैं और वे पूरक क्षारक युग्मन को सुनिश्चित करते हैं।
Question 35. DNA में पाये जाने वाले पिरीमिडीन क्षार हैं
(i) साइटोसीन तथा ऐडेनीन
(ii) साइटोसीन तथा ग्वानीन
(iii) साइटोसीन तथा थायमीन
(iv) साइटोसीन तथा यूरेसिल
Answer: (iii) साइटोसीन तथा थायमीन
In simple words: DNA में साइटोसीन और थायमीन पिरिमिडीन क्षारक होते हैं।
🎯 Exam Tip: डीएनए में पिरिमिडीन क्षारक साइटोसीन और थायमीन होते हैं, जबकि आरएनए में थायमीन की जगह यूरेसिल होता है।
Question 36. निम्न में से कौन-सा अंग फाइट या फ्लाइट हॉर्मोन स्रावित करता है?
(i) ऐड्रीनेलिन
(ii) ऐड्रीनल
(iii) पिट्यूटरी
(iv) वृक्क
Answer: (ii) ऐड्रीनल
In simple words: ऐड्रीनल ग्रंथि फाइट या फ्लाइट हॉर्मोन (जैसे ऐड्रीनेलिन) को स्रावित करती है, जो तनाव प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: ऐड्रीनल ग्रंथियाँ तनाव प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और ऐड्रीनेलिन जैसे हॉर्मोन का उत्पादन करती हैं।
Question 37. निम्न में से किस हॉर्मोन में आयोडीन होती है?
(i) टेस्टेस्टोरेन
(ii) ऐड्रीनेलिन
(iii) थायरोक्सिन
(iv) इन्सुलिन
Answer: (iii) थायरोक्सिन
In simple words: थायरोक्सिन हॉर्मोन में आयोडीन होता है, जो थायरॉयड ग्रंथि द्वारा स्रावित होता है और चयापचय को नियंत्रित करता है।
🎯 Exam Tip: थायरोक्सिन (थायरॉयड हॉर्मोन) में आयोडीन की उपस्थिति इसके संश्लेषण और कार्य के लिए महत्वपूर्ण है, और इसकी कमी से संबंधित रोग हो सकते हैं।
Question 27. निम्नलिखित में से कौन-सा विटामिन स्कर्वी रोग के लिए उत्तरदायी है?
(i) A
(ii) C
(iii) K
(iv) D
Answer: (ii) C
In simple words: विटामिन C की कमी से स्कर्वी नामक रोग होता है, इसलिए यह इस रोग के लिए उत्तरदायी है।
🎯 Exam Tip: विटामिन और उनकी कमी से होने वाले रोगों को याद रखना परीक्षा में अंक दिलाने वाला होता है।
Question 28. ऐस्कॉर्बिक अम्ल है
(i) प्रोटीन
(ii) एन्जाइम
(iii) हॉर्मोन
(iv) विटामिन
Answer: (iv) विटामिन
In simple words: ऐस्कॉर्बिक अम्ल, जिसे विटामिन C के नाम से भी जाना जाता है, एक आवश्यक विटामिन है जो शरीर के लिए महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: सामान्य नाम और रासायनिक नाम के बीच संबंध को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 29. बन्ध्यारोधी विटामिन है
(i) विटामिन D
(ii) विटामिन B समूह
(iii) विटामिन E
(iv) विटामिन A
Answer: (iii) विटामिन E
In simple words: विटामिन E को बन्ध्यारोधी विटामिन कहा जाता है क्योंकि यह प्रजनन क्षमता में सुधार से जुड़ा है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न विटामिनों के विशिष्ट कार्यों और स्वास्थ्य लाभों को जानना महत्वपूर्ण है।
Question 30. वसा के साथ आँत में अवशोषित होने वाले विटामिन हैं
(i) A, D
(ii) B, C
(iii) A, C
(iv) B, D
Answer: (i) A, D
In simple words: विटामिन A और D वसा में घुलनशील होते हैं, जिसका अर्थ है कि वे वसा के साथ आँतों में अवशोषित होते हैं।
🎯 Exam Tip: विटामिनों को जल-घुलनशील और वसा-घुलनशील श्रेणियों में वर्गीकृत करना उनकी अवशोषण प्रक्रिया को समझने में मदद करता है।
Question 31. बायोटीन यीस्ट में पाये जाने वाला कार्बनिक पदार्थ है। इसे अन्य किस नाम से पुकारते हैं?
(i) विटामिन H
(ii) विटामिन K
(iii) विटामिन E
(iv) विटामिन B12
Answer: (i) विटामिन H
In simple words: बायोटीन को विटामिन H के नाम से भी जाना जाता है और यह यीस्ट में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण कार्बनिक पदार्थ है।
🎯 Exam Tip: विटामिन के विभिन्न नामों और उनके प्राकृतिक स्रोतों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 32. वह विटामिन जो न तो जल में और न ही वसा में विलेय है, है
(i) बायोटीन
(ii) थायमीन
(iii) कैल्सीफेरॉल
(iv) ये सभी
Answer: (i) बायोटीन
In simple words: बायोटीन एक अनोखा विटामिन है जो न तो पानी में और न ही वसा में आसानी से घुलनशील है, जो इसे अन्य विटामिनों से अलग बनाता है।
🎯 Exam Tip: विटामिनों की विलेयता गुणों को समझना उनके वर्गीकरण और जैविक भूमिकाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 33. निम्न में से प्यूरीन व्युत्पन्न है
(i) साइटोसीन
(ii) ग्वानीन
(iii) यूरेसिल
(iv) थायमीन
Answer: (ii) ग्वानीन
In simple words: ग्वानीन एक प्यूरीन व्युत्पन्न है, जिसका अर्थ है कि यह डीएनए और आरएनए में पाए जाने वाले दो प्रकार के नाइट्रोजनस बेस (प्यूरीन और पाइरीमिडीन) में से एक है।
🎯 Exam Tip: न्यूक्लिक अम्ल के घटकों और प्यूरीन व पाइरीमिडीन के बीच अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 34. DNA की द्विकुण्डलीत संरचना का कारण है
(i) स्थिर विद्युत आकर्षण
(ii) वाण्डरवाल्स बल
(iii) द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्यक्रियाएँ
(iv) हाइड्रोजन आबन्धन
Answer: (iv) हाइड्रोजन आबन्धन
In simple words: DNA की दोहरी हेलिक्स संरचना हाइड्रोजन आबंधों द्वारा स्थिर होती है, जो विपरीत क्षार युग्मों (A-T और G-C) के बीच बनते हैं।
🎯 Exam Tip: DNA की संरचना को स्थिर करने वाले विभिन्न प्रकार के रासायनिक आबंधों को जानना जैविक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 35. DNA में पाये जाने वाले पिरीमिडीन क्षार हैं
(i) साइटोसीन तथा ऐडेनीन
(ii) साइटोसीन तथा ग्वानीन
(iii) साइटोसीन तथा थायमीन
(iv) साइटोसीन तथा यूरेसिल
Answer: (iii) साइटोसीन तथा थायमीन
In simple words: डीएनए में, साइटोसीन और थायमीन पाइरीमिडीन क्षार होते हैं, जबकि ऐडेनीन और ग्वानीन प्यूरीन क्षार होते हैं।
🎯 Exam Tip: डीएनए और आरएनए में मौजूद क्षारकों के प्रकार और उनके संबंधित प्यूरीन/पाइरीमिडीन वर्गीकरण को याद रखें।
Question 36. निम्न में से कौन-सा अंग फाइट या फ्लाइट हॉर्मोन स्रावित करता है?
(i) ऐड्रीनेलिन
(ii) ऐड्रीनल
(iii) पिट्यूटरी
(iv) वृक्क
Answer: (ii) ऐड्रीनल
In simple words: ऐड्रीनल ग्रंथि "फाइट या फ्लाइट" हॉर्मोन, ऐड्रीनेलिन (एपिनेफ्रीन) का स्राव करती है, जो शरीर को तनावपूर्ण स्थितियों के लिए तैयार करता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न ग्रंथियों और उनके द्वारा स्रावित हॉर्मोन के कार्यों को समझना शरीर विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 37. निम्न में से किस हॉर्मोन में आयोडीन होती है?
(i) टेस्टेस्टोरेन
(ii) ऐड्रीनेलिन
(iii) थायरोक्सिन
(iv) इन्सुलिन
Answer: (iii) थायरोक्सिन
In simple words: थायरोक्सिन एक थायरॉयड हॉर्मोन है जिसमें आयोडीन होता है, जो थायरॉयड ग्रंथि के उचित कार्य के लिए आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट हॉर्मोन की रासायनिक संरचना और उनके महत्वपूर्ण घटकों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. कार्बोहाइड्रेट को परिभाषित कीजिए।
Answer: कार्बोहाइड्रेट ध्रुवण घूर्णक पॉलीहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या कीटोन होते हैं या वे पदार्थ होते हैं जो जल-अपघटित होकर मोनोसैकेराइड के कई अणु देते हैं।
In simple words: कार्बोहाइड्रेट ऐसे यौगिक होते हैं जिनमें कई हाइड्रॉक्सिल समूह और एक ऐल्डिहाइड या कीटोन समूह होता है, और वे पानी में टूटकर साधारण शर्करा (मोनोसैकेराइड) बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: कार्बोहाइड्रेट की परिभाषा और उनकी मूल संरचनात्मक विशेषताओं को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 2. स्टार्च तथा सेलुलोस के मोनोमरों में संरचनात्मक अन्तर क्या होता है।
Answer: स्टार्च ऐमाइलोस (20%) तथा ऐमाइलोपेक्टिन (80%) से बना होता है तथा ये दोनों \( \alpha \)-D -ग्लूकोस से बने होते हैं। सेलुलोस \( \beta \)-D -ग्लूकोस अणुओं का रैखिक (linear) बहुलक (polymer) होता है।
In simple words: स्टार्च \( \alpha \)-D-ग्लूकोस से बना होता है और शाखित या अशाखित हो सकता है, जबकि सेलुलोस \( \beta \)-D-ग्लूकोस से बना एक सीधा बहुलक होता है, जो उनके अलग-अलग संरचनाओं का कारण बनता है।
🎯 Exam Tip: स्टार्च और सेलुलोस के मोनोमर इकाइयों ( \( \alpha \)-ग्लूकोस बनाम \( \beta \)-ग्लूकोस) और उनके बंधन के प्रकारों पर ध्यान दें।
Question 3. मानव शरीर के लिए कार्बोहाइड्रेट्स का महत्त्व क्या है?
Answer:
1. कार्बोहाइड्रेट्स पौधों तथा जन्तुओं दोनों के लिये आवश्यक हैं ये भोजन का मुख्य घटक हैं।
2. मोनोसैकेराइड शरीर की उपापचयी क्रियाओं में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
3. ये शारीरिक ईंधन के रूप में कार्य करते हैं।
4. ग्लूकोस शरीर के रक्त का एक मुख्य घटक है।
5. कार्बोहाइड्रेट संचित ऊर्जा के रूप में कार्य करता है।
In simple words: कार्बोहाइड्रेट शरीर के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत हैं, उपापचय में सहायता करते हैं, रक्त शर्करा को नियंत्रित करते हैं, और पौधों व जंतुओं दोनों के लिए आवश्यक संरचनात्मक घटक हैं।
🎯 Exam Tip: कार्बोहाइड्रेट के प्रत्येक कार्य को याद रखें, विशेषकर ऊर्जा उत्पादन और जैविक प्रक्रियाओं में उनकी भूमिका।
Question 4. ग्लूकोस के दो रासायनिक परीक्षण लिखिए।
Answer:
1. शुष्क परखनली में ग्लूकोस गर्म करने पर पिघलता है और फिर भूरा पड़ जाता है तथा जली शर्करा की-सी गन्ध आती है।
2. अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट विलयन के साथ ग्लूकोस चाँदी का दर्पण देता है।
In simple words: ग्लूकोस को गर्म करने पर वह पिघलकर भूरा हो जाता है और एक विशेष गंध देता है; यह अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट के साथ गर्म करने पर एक चाँदी का दर्पण भी बनाता है।
🎯 Exam Tip: ग्लूकोस के गुणात्मक परीक्षणों को याद रखना और उनके प्रेक्षणों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 5. मोलिश परीक्षण क्या है?
Answer: यह कार्बोहाइड्रेट का परीक्षण है। एक परखनली में ग्लूकोस का जलीय विलयन लेकर उसमें 2 मिली 2-नैफ्थॉल का ऐल्कोहॉलिक विलयन मिलाकर उसमें कुछ बूंद सान्द्र H2SO4 की डालने पर दो द्रवों के बीच बैंगनी रंग का वलय बनता है।
In simple words: मोलिश परीक्षण कार्बोहाइड्रेट की पहचान के लिए उपयोग की जाने वाली एक रासायनिक विधि है, जिसमें कार्बोहाइड्रेट युक्त घोल में 2-नैफ्थॉल और सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल मिलाने पर बैंगनी रंग का वलय बनता है।
🎯 Exam Tip: मोलिश परीक्षण की प्रक्रिया, अभिकर्मकों और अंतिम प्रेक्षण को ध्यान से समझें, क्योंकि यह कार्बोहाइड्रेट की पहचान के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण है।
Question 6. सुक्रोस का रासायनिक सूत्र लिखिए । शुष्क अवस्था में गर्म करने का इस पर क्या प्रभाव होता है?
Answer: सुक्रोस का रासायनिक सूत्र \( \text{C}_{12}\text{H}_{22}\text{O}_{11} \) है। शुष्क अवस्था में गर्म करने पर यह भूरे रंग का पदार्थ बनाता है।
In simple words: सुक्रोस का रासायनिक सूत्र \( \text{C}_{12}\text{H}_{22}\text{O}_{11} \) है, और इसे सूखा गर्म करने पर यह भूरे रंग में बदल जाता है, जो इसके कार्बनिक प्रकृति को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: सुक्रोस के रासायनिक सूत्र और गर्मी के प्रति उसकी प्रतिक्रिया को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 7. इनुलिन क्या है ? इनुलिन से फ्रक्टोस कैसे प्राप्त करते हैं। समीकरण दीजिए।
Answer: इनुलिन डहेलिया के पौधे की गाँठों से प्राप्त एक प्रकार का स्टार्च है। इनुलिन को तनु H2SO4 के साथ जल-अपघटित करने पर फ्रक्टोस औद्योगिक मात्रा में बनता है।
\[ \text{(C}_{6}\text{H}_{10}\text{O}_{5}\text{)}_n + n\text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{तनु H}_2\text{SO}_4} n\text{C}_{6}\text{H}_{12}\text{O}_6 \]
\[ \text{इनुलिन} \qquad \qquad \text{फ्रक्टोस} \]
In simple words: इनुलिन डहेलिया जैसे पौधों से प्राप्त एक प्राकृतिक पॉलीसेकेराइड है; इसे तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की उपस्थिति में पानी से अभिक्रिया कराकर फ्रक्टोस में बदला जा सकता है।
🎯 Exam Tip: इनुलिन के स्रोत और फ्रक्टोस बनाने के लिए इसकी हाइड्रोलिसिस प्रतिक्रिया को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 8. किस बैक्टीरिया की सहायता से पशु सेलुलोस को पचाते हैं।
Answer:
1. फाइब्रोबैक्टर सक्सिनोजिनस (Fibrobactor succinoginus)।
2. रूमिनोकस फ्लेवीफेशियन्स (Ruminocus flacifaciens)।
In simple words: पशु, विशेष रूप से रूमिनेंट्स, अपनी आंतों में रहने वाले विशेष बैक्टीरिया जैसे फाइब्रोबैक्टर सक्सिनोजिनस और रूमिनोकस फ्लेवीफेशियन्स की मदद से सेलुलोस को पचा पाते हैं।
🎯 Exam Tip: पशुओं में सेलुलोस पाचन में शामिल मुख्य बैक्टीरिया के नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 9. स्टार्च तथा ग्लूकोस में दो अन्तर बताइए ।
Answer: स्टार्च तथा ग्लूकोस में प्रमुख अन्तर निम्नवत् हैं
1. स्टार्च फेहलिंग विलयन के साथ गर्म करने पर क्यूप्प्रस ऑक्साइड का लाल अवक्षेप नहीं बनाता है, जबकि ग्लूकोस बनाता है।
2. स्टार्च टॉलेन अभिकर्मक के साथ गर्म करने पर सिल्वर दर्पण नहीं बनाता है जबकि ग्लूकोस बनाता
In simple words: स्टार्च फेहलिंग या टॉलेन अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया नहीं करता है, जबकि ग्लूकोस इन दोनों अभिकर्मकों के साथ अभिक्रिया करके क्रमशः लाल अवक्षेप और चाँदी का दर्पण बनाता है।
🎯 Exam Tip: स्टार्च और ग्लूकोस को अलग करने के लिए उपयोग किए जाने वाले विशिष्ट रासायनिक परीक्षणों और उनके संबंधित प्रेक्षणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 10. प्रोटीन के मुख्य स्रोत क्या हैं? इनमें पाये जाने वाले विभिन्न तत्त्वों के नाम लिखिए । प्रोटीन का हमारे भोजन में क्या महत्त्व है?
Answer:
मुख्य स्रोत : दूध, अण्डा, दालें, मछली, माँस आदि ।
मुख्य तत्त्व : C, H, N, O, S हैं। महत्त्व-प्रोटीन हमारे शरीर की वृद्धि के लिए अत्यन्त आवश्यक हैं। ये हमारे शरीर में नये ऊतकों का निर्माण करते हैं तथा पुराने ऊतकों की टूट-फूट को ठीक करते हैं। प्रोटीन हमारे शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करते हैं, परन्तु यह कार्य कार्बोहाइड्रेट तथा वसा की अनुपस्थिति में होता है। प्रोटीन संकीर्ण नाइट्रोजनयुक्त यौगिक हैं। ये हमारे शरीर में पाये जाने वाले खून आदि का pH भी ठीक रखते हैं।
In simple words: प्रोटीन दूध, अंडे, दालों और मांस जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है, इसमें कार्बन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और सल्फर होता है, और यह शरीर के विकास, ऊतक मरम्मत, ऊर्जा उत्पादन और रक्त pH संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन के मुख्य स्रोतों, इसके रासायनिक घटकों और शरीर में इसके महत्वपूर्ण कार्यों को याद रखना पोषण और जीव विज्ञान के लिए आवश्यक है।
Question 11. प्रोटीन क्या हैं? इनके महत्त्वपूर्ण उपयोग लिखिए।
Answer: प्रोटीन : प्रोटीन उच्च अणुभार वाले नाइट्रोजन युक्त जटिल कार्बनिक यौगिक हैं जो वनस्पति तथा जन्तु दोनों में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं और जल अपघटन पर 2-ऐमीनो अम्ल देते हैं। ये सभी जीव-जन्तुओं के शरीर का प्रमुख अवयव हैं। जन्तु शरीर का लगभग 19% भाग प्रोटीन का बना होता है। प्रोटीनों के उपयोग
1. आहार के रूप में : यह भोजन का आवश्यक अंग हैं; जैसे-अण्डा, मांस, दाल इत्यादि ।
2. एन्जाइम : समस्त एन्जाइम प्रोटीन हैं।
3. हॉर्मोन : शरीर की अनेक आवश्यक क्रियाओं में भाग लेने वाले पदार्थ प्रोटीन ही हैं।
4. वस्त्रों में : केसीन (casein) का उपयोग कृत्रिम ऊन और रेशम के बनाने में किया जाता है। इसके अतिरिक्त केसीन प्लास्टिक का उपयोग बटन बनाने में किया जाता है।
5. औषधियों में : जिलेटिन का उपयोग कैप्सूल (capsules) और फोटोग्राफी की फिल्म तथा प्लेट बनाने में किया जाता है। दवाइयों में प्रयुक्त होने वाले ऐमीनो अम्ल प्रोटीन से प्राप्त किए जाते हैं।
6. चमड़ा उद्योग में : चमड़े का निर्माण जानवरों की खालों की प्रोटीनों की कमाई (tanning) करके किया जाता है।
In simple words: प्रोटीन उच्च आणविक भार वाले नाइट्रोजन युक्त जटिल कार्बनिक यौगिक होते हैं जो जल-अपघटन पर ऐमीनो अम्ल देते हैं; ये भोजन के आवश्यक घटक हैं, एन्जाइम, हॉर्मोन, वस्त्र, औषधियों और चमड़ा उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन की परिभाषा और उनके विभिन्न औद्योगिक तथा जैविक अनुप्रयोगों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 12. विटामिन A का अणुसूत्र क्या है ? इसकी कमी से क्या हानि होती है?
Answer: विटामिन A का अणुसूत्र \( \text{C}_{20}\text{H}_{29}\text{OH} \) है। इसकी कमी से शरीर की वृद्धि रुक जाती है और रतौंधी नामक नेत्र रोग हो जाता है।
In simple words: विटामिन A का अणुसूत्र \( \text{C}_{20}\text{H}_{29}\text{OH} \) है, और इसकी कमी से बच्चों में वृद्धि रुक जाती है और वयस्कों में रतौंधी (रात में कम दिखना) हो जाती है।
🎯 Exam Tip: विटामिन A के रासायनिक सूत्र और इसकी कमी से होने वाले प्रभावों को याद रखना आवश्यक है।
Question 13. उन बीमारियों के नाम बताइए जो विटामिन 'B' की कमी के कारण उत्पन्न होती हैं। इसके दो स्रोत भी लिखिए। या विटामिन B का क्या महत्त्व है? या विटामिन बी कॉम्प्लेक्स पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: विटामिन बी कॉम्प्लेक्स जल में विलेय कई विटामिनों B, B2, B6, B12 आदि का जटिल मिश्रण है। आजतक लगभग 12 विटामिन B ज्ञात हैं और इनको B1, B2,......, B6...... B12 आदि कहा जाता है। बेरी-बेरी का रोग विटामिन B₁ के अभाव से होता है। विटामिन B2 की कमी से त्वचा के रोग हो जाते हैं। विटामिन B12 की कमी से ऐनीमिया हो जाता है। अधिक कमी होने पर स्नायविक दोष हो जाते हैं। इनकी कमी से बच्चों का शारीरिक विकास रुक जाता है। यह विटामिन खमीर में अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त दाल, अनाज, पत्तेदार तरकारियाँ, दूध के पदार्थ, माँस, कलेजी, अण्डे आदि इसके मुख्य स्रोत हैं।
In simple words: विटामिन B कॉम्प्लेक्स कई विटामिनों का एक समूह है, जिनकी कमी से बेरी-बेरी (B1), त्वचा रोग (B2), और एनीमिया (B12) जैसे रोग हो सकते हैं; इसके मुख्य स्रोतों में खमीर, दालें, अनाज और दूध उत्पाद शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: विटामिन B कॉम्प्लेक्स के विभिन्न घटकों, उनसे होने वाली बीमारियों और उनके खाद्य स्रोतों को याद रखना स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 14. विटामिन C का रासायनिक नाम तथा अणुसूत्र लिखिए। शरीर में इस विटामिन की कमी होने पर क्या हानि होती है?
Answer: विटामिन C का रासायनिक नाम ऐस्कॉर्बिक ऐसिड है तथा इसका अणुसूत्र \( \text{C}_{6}\text{H}_{8}\text{O}_{6} \) है। इस विटामिन के अभाव से स्कर्वी रोग हो जाता है, हड्डियाँ भंगुर होने लगती हैं तथा मसूड़े फूल जाते हैं और उनमें से रक्त आने लगता है तथा दाँत ढीले होकर गिरने लगते हैं। गर्म करने पर यह विटामिन नष्ट हो जाता है परन्तु आँवले में पाया जाने वाला विटामिन C गर्मी से नष्ट नहीं होता है। जल में अत्यधिक विलेय होने के कारण यह मूत्र के साथ शीघ्र उत्सर्जित हो जाता है तथा हमारे शरीर में संचित नहीं हो पाता। स्रोत-नींबू, आँवला, नारंगी, टमाटर, फल आदि ।
In simple words: विटामिन C का रासायनिक नाम ऐस्कॉर्बिक अम्ल है और इसका अणुसूत्र \( \text{C}_{6}\text{H}_{8}\text{O}_{6} \) है; इसकी कमी से स्कर्वी, कमजोर हड्डियाँ और मसूड़ों से खून आना होता है, और यह जल में अत्यधिक घुलनशील होने के कारण शरीर में जमा नहीं हो पाता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन C के रासायनिक नाम, सूत्र, कमी से होने वाले रोगों और इसके स्रोतों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 15. विटामिन A तथा विटामिन D के क्या स्रोत हैं? शरीर में इनकी कमी से कौन-सी बीमारियाँ हो सकती हैं?
Answer:
(i) विटामिन A के मुख्य स्रोत :
दूध, कॉड मछली का तेल, पालक, पपीता, गाजर, टमाटर आदि । इसकी कमी से शरीर की वृद्धि रुक जाती है और रतौंधी नामक नेत्ररोग हो जाता है।
(ii) विटामिन D के मुख्य स्रोत : सूर्य का प्रकाश, मक्खन, घी, अण्डे, मछली का तेल आदि । विटामिन D की कमी से हड्डियाँ कमजोर, लचीली और टेढ़ी पड़ जाती हैं और रिकेट्स नामक रोग हो जाता है। इसकी कमी से दाँत भी कमजोर हो जाते हैं।
In simple words: विटामिन A के स्रोत दूध, गाजर, पालक आदि हैं और इसकी कमी से वृद्धि रुक जाती है तथा रतौंधी होती है; विटामिन D के स्रोत सूर्य का प्रकाश, मक्खन, अंडे आदि हैं और इसकी कमी से हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं और रिकेट्स होता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक विटामिन के स्रोत और उनकी कमी से होने वाले विशिष्ट रोगों को याद रखें।
Question 16. सूर्य की किरणों की उपस्थिति में त्वचा के द्वारा कौन-सा विटामिन संश्लेषित होता है और कैसे?
Answer: सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में त्वचा में स्थित अगस्टीरॉल, अल्ट्रा-वायलेट किरणों के प्रभाव में विटामिन D2 में परिवर्तित हो जाता है।
In simple words: सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में हमारी त्वचा में मौजूद अगस्टीरॉल अल्ट्रा-वायलेट किरणों द्वारा विटामिन D2 में परिवर्तित हो जाता है, जिससे यह विटामिन हमारे शरीर में संश्लेषित होता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन D के संश्लेषण के मार्ग और इसमें शामिल मध्यवर्ती यौगिकों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 17. विटामिन E की कमी से होने वाले रोग का नाम बताइए तथा इसके दो स्रोत लिखिए।
Answer: विटामिन E की कमी से पेशियों में अपह्यसन होता है तथा जन्तुओं में बन्ध्यता रोग उत्पन्न होता है। विटामिन E गेहूँ के अंकुर के तेल, बिनौले के तेल आदि में पाया जाता है।
In simple words: विटामिन E की कमी से मांसपेशियों में कमजोरी और प्रजनन क्षमता में कमी आ सकती है; इसके मुख्य स्रोतों में गेहूँ के अंकुर का तेल और बिनौले का तेल शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: विटामिन E के प्रमुख कार्यों, इसकी कमी के प्रभावों और मुख्य स्रोतों को याद रखें।
Question 18. लिपिड क्या हैं? इनके मुख्य कार्य क्या हैं?
Answer: वे वसा और तेल जो जन्तुओं एवं वनस्पतिओं से प्राप्त होते हैं उन्हें लिपिड वर्ग के अन्तर्गत रखा गया है। लिपिड जल में अविलेय कार्बनिक पदार्थ हैं जो निम्न ध्रुवण के कार्बनिक विलायकों (जैसे-ईथर, क्लोरोफॉर्म) में विलेय होते हैं। कुछ महत्त्वपूर्ण लिपिड इस प्रकार हैं
1. वसा और तेल
2. फॉस्फोलिपिड
3. स्टेरॉयड
4. टर्मीन्स
लिपिड के कार्य :
1. कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन के अभाव में शरीर को ऊर्जा प्रदान करना।
2. शरीर के ताप को नियन्त्रित करना।
3. स्टेरॉयड कोशिका झिल्ली के घटक हैं।
4. ये हॉर्मोन्स विकास, वृद्धि, पोषण, जनन क्षमता को नियन्त्रित करते हैं।
In simple words: लिपिड वसा और तेल जैसे कार्बनिक यौगिक होते हैं जो पानी में अघुलनशील होते हैं, लेकिन कार्बनिक सॉल्वैंट्स में घुलनशील होते हैं; वे ऊर्जा प्रदान करते हैं, शरीर के तापमान को नियंत्रित करते हैं, कोशिका झिल्ली के घटक होते हैं, और विकास तथा प्रजनन के लिए आवश्यक हॉर्मोन बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: लिपिड की परिभाषा, उनके वर्गीकरण और शरीर में उनके विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों को याद रखें।
Question 19. मानव शरीर के लिए वसा का क्या महत्त्व है? ।
Answer: वसा शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। शरीर के कोमल भागों की रक्षा करती है और शरीर को बाहरी सर्दी, गर्मी से बचाती है।
In simple words: वसा मानव शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है, महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा करती है और शरीर को ठंडी या गर्मी से बचाने के लिए एक इन्सुलेटर के रूप में कार्य करती है।
🎯 Exam Tip: वसा के तीन मुख्य कार्यों- ऊर्जा, सुरक्षा और इन्सुलेशन को याद रखें।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. मोनोसैकेराइड, ओलिगोसैकेराइड तथा पॉलीसैकेराइड कार्बोहाइड्रेट से आप क्या समझते हैं? इनमें कैसे विभेद कीजिएगा? । कार्बोहाइड्रेटों को उदाहरण देते हुए वर्गीकृत कीजिए। या मोनोसैकेराइड एवं पॉलीसैकेराइड से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित वर्णन कीजिए ।
Answer: कार्बोहाइड्रेटों का वर्गीकरण-कार्बोहाइड्रेट का वर्गीकरण उनकी आणविक जटिलता या उनके जल-अपघटन पर उत्पन्न पदार्थों पर आधारित है। कार्बोहाइड्रेटों को निम्नलिखित मुख्य वर्गों में बाँटा गया है।
1. मोनोसैकेराइड :
ये सरल शक्कर होती हैं। इनका जल-अपघटन नहीं किया जा सकता है। इसके अणु में कार्बन परमाणु 6 से अधिक नहीं होते हैं, जैसे कि- \( \text{C}_{6}\text{H}_{12}\text{O}_{6} \) (ग्लूकोस), \( \text{C}_{6}\text{H}_{12}\text{O}_{6} \) (फ्रक्टोस) आदि ।
2. ओलिगोसैकेराइड : जो शर्कराएँ जल-अपघटित करने पर मोनोसैकेराइड के कुछ अणु (2 से 10 अणु) देती हैं ओलिगोसैकेराइड कहलाती हैं। ये शर्कराएँ डाइसैकेराइड, ट्राइसैकेराइड आदि प्रकार की होती हैं।
3. डाइसैकेराइड :
ये वे शक्करें हैं जो जल-अपघटने पर मोनोसैकेराइडों के दो अणु देती हैं; जैसे कि — \( \text{C}_{12}\text{H}_{22}\text{O}_{11} \) (सुक्रोस), \( \text{C}_{12}\text{H}_{22}\text{O}_{11} \) (माल्टोस) आदि ।
\[ \text{C}_{12}\text{H}_{22}\text{O}_{11} + \text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{तनु H}_2\text{SO}_4 \text{ गर्म}} \text{C}_{6}\text{H}_{12}\text{O}_{6} + \text{C}_{6}\text{H}_{12}\text{O}_{6} \]
\[ \text{सुक्रोस} \qquad \qquad \qquad \qquad \text{ग्लूकोस} \quad \text{फ्रक्टोस} \]
4. ट्राइसैकेराइड :
ये वे शक्करें हैं जो जल-अपघटन पर मोनोसैकेराइडों के तीन अणु देती हैं, जैसे कि- \( \text{C}_{18}\text{H}_{32}\text{O}_{16} \) (रैफिनोस)।
5. पॉलीसैकेराइड :
ये स्वाद में मीठे नहीं होते हैं; अतः इन्हें शक्कर नहीं कहते हैं। ये जल-अपघटन पर मोनोसैकेराइडों के बहुत अधिक अणु बनाते हैं। इनका सामान्य सूत्र \( \text{(C}_{6}\text{H}_{10}\text{O}_{5}\text{)}_n \), है । इनका अणुभार बहुत अधिक होता है, जैसे कि स्टार्च, सेलुलोस आदि ।
In simple words: कार्बोहाइड्रेट को उनकी आणविक जटिलता के आधार पर मोनोसैकेराइड (जैसे ग्लूकोस), ओलिगोसैकेराइड (2-10 मोनोसैकेराइड इकाइयाँ, जैसे सुक्रोस) और पॉलीसैकेराइड (कई मोनोसैकेराइड इकाइयाँ, जैसे स्टार्च) में वर्गीकृत किया जाता है; मोनोसैकेराइड जल-अपघटित नहीं हो सकते, जबकि अन्य हो सकते हैं।
🎯 Exam Tip: कार्बोहाइड्रेट के प्रत्येक वर्ग की परिभाषा, उनके जल-अपघटन व्यवहार और विशिष्ट उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. (i) ग्लूकोस और स्टार्च में विभेद के परीक्षण लिखिए। (ii) फ्रक्टोस फेहलिंग विलयन को अपचयित कर देता है, जबकि उसमें कीटोन समूह होता है।
Answer:
(i) ग्लूकोस और स्टार्च में विभेद के परीक्षण निम्नवत् हैं
| परीक्षण | ग्लूकोस | स्टार्च |
| पदार्थ के जलीय विलयन में फेहलिंग विलयन डालकर गर्म करने पर | क्यूप्रस ऑक्साइड का लाल अवक्षेप बनता है। | लाल अवक्षेप नहीं बनता। |
| पदार्थ के जलीय विलयन में टॉलेन अभिकर्मक (अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट) डालकर गर्म करने पर | सिल्वर दर्पण या सिल्वर का काला अवक्षेप बनता है। | सिल्वर दर्पण या सिल्वर का काला अवक्षेप नहीं बनता है। |
| पदार्थ के जलीय विलयन में आयोडीन विलयन मिलाने पर | नीला रंग नहीं बनता है। | नीला रंग आता है। |
| पदार्थ के जलीय विलयन में रिसॉर्सिनॉल के HCI में बने विलयन की कुछ मात्रा मिलाने पर | हल्का गुलाबी रंग प्राप्त होता है। | गहरा लाल-भूरा रंग प्राप्त होता है जो ऐल्कोहॉल में विलेय है। |
(ii) फ्रक्टोस, टॉलेन अभिकर्मक तथा फेहलिंग विलयन द्वारा ऑक्सीकृत होकर क्रमशः रजत दर्पण तथा लाल अवक्षेप बनाता है। इसका कारण यह है कि दोनों अभिकर्मकों में उपस्थित क्षार की उपस्थिति में फ्रक्टोस का ग्लूकोस में पुनर्विन्यास हो जाता है, इस प्रकार प्राप्त ग्लूकोस की टॉलेन अभिकर्मक तथा फेहलिंग विलयन से अभिक्रिया के फलस्वरूप क्रमशः रजत दर्पण तथा लाल अवक्षेप प्राप्त होते हैं।
In simple words: ग्लूकोस फेहलिंग और टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करता है, जबकि स्टार्च नहीं; फ्रक्टोस, एक कीटोन होने के बावजूद, क्षारीय माध्यम में ग्लूकोस में परिवर्तित होकर फेहलिंग और टॉलेन अभिकर्मकों को अपचयित करता है।
🎯 Exam Tip: ग्लूकोस, स्टार्च और फ्रक्टोस के बीच अंतर करने वाले विशिष्ट रासायनिक परीक्षणों और उनके अंतर्निहित रासायनिक सिद्धांतों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. ग्लूकोस तथा सुक्रोस में विभेद करने वाले दो रासायनिक समीकरण लिखिए।
Answer:
1. ग्लूकोस सान्द्र\( \text{H}_2\text{SO}_4 \) के साथ ठण्डे में नहीं झुलसता परन्तु गर्म करने पर काला हो जाता है।
2. सुक्रोस सान्द्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) के साथ ठण्डे में झुलसकर काली हो जाती है।
In simple words: ग्लूकोस ठंडे सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ काला नहीं होता, जबकि सुक्रोस ठंडे सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ काला हो जाता है, जिससे उन्हें आसानी से अलग किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: ग्लूकोस और सुक्रोस को अलग करने के लिए उपयोग किए जाने वाले विशिष्ट रासायनिक परीक्षणों और उनकी प्रतिक्रियाओं को याद रखें।
Question 4. डाइसैकेराइड क्या हैं? इनके प्रकार तथा किसी एक के रासायनिक परीक्षण भी लिखिए।
Answer: डाइसैकेराइड (Disaccharides) :
जो कार्बोहाइड्रेट जल अपघटित करने पर मोनोसैकेराइड के दो अणु देते हैं, डाइसैकेराइड कहलाते हैं
उदाहरण : सुक्रोस, नाटोस, लैक्टोस । डाइसैकेराइड दो प्रकार के होते हैं
1. अपचायी शर्कराएँ : जो शर्करा फेहलिंग विलयन को अपचयित करते हैं उन्हें अपचायी शर्करा कहते हैं; जैसे- माल्टोज और लैक्टोस
2. अनपचयी शर्कराएँ : जो शर्करा फेहलिंग विलयन को अपचयित नहीं करते हैं उन्हें अनपचयी शर्करा कहते हैं; जैसे- सुक्रोस
परीक्षण :
1. डाइसैकेराइड भी अन्य कार्बोहाड्रेट की तरह मॉलिश परीक्षण देते हैं।
2. सुक्रोस फेहलिग विलयन को अपचयित नहीं करता जबकि माल्टोस और लेक्टोस फेहलिंग विलयन को अपचयित करता है।
In simple words: डाइसैकेराइड वे कार्बोहाइड्रेट हैं जो जल-अपघटन पर दो मोनोसैकेराइड अणु देते हैं, जिन्हें अपचायी (जैसे माल्टोस, लैक्टोस) और अनपचयी (जैसे सुक्रोस) शर्करा में वर्गीकृत किया जाता है; मोलिश परीक्षण सभी डाइसैकेराइड के लिए सकारात्मक होता है, लेकिन सुक्रोस फेहलिंग विलयन को अपचयित नहीं करता जबकि माल्टोस और लैक्टोस करते हैं।
🎯 Exam Tip: डाइसैकेराइड की परिभाषा, उनके प्रकार (अपचायी/अनपचयी), उदाहरणों और उनके विशिष्ट रासायनिक परीक्षणों को समझना महत्वपूर्ण है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. ग्लूकोस का संरचना सूत्र लिखिए। इसकी तीन रासायनिक अभिक्रियाओं का वर्णन कीजिए जिनसे इसके पॉलीहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड का होना सिद्ध होता है। या उस रासायनिक समीकरण का उल्लेख कीजिए जिससे ज्ञात होता है कि ग्लूकोस में पाँच हाइड्रॉक्सिल समूह उपस्थित हैं।
Answer: ग्लूकोस की संरचना
\[ \text{CHO} \]
\[ \text{|} \]
\[ \text{H-C-OH} \]
\[ \text{|} \]
\[ \text{HO-C-H} \]
\[ \text{|} \]
\[ \text{H-C-OH} \]
\[ \text{|} \]
\[ \text{H-C-OH} \]
\[ \text{|} \]
\[ \text{CH}_2\text{-OH} \]
\[ \text{ग्लूकोस} \]
(i) ग्लूकोस में -OH समूह की उपस्थिति :
ग्लूकोस की \( \text{CH}_3\text{COCl} \) के साथ क्रिया कराने पर ग्लूकोस पेन्टा ऐसीटेट बनता है जिससे यह सिद्ध होता है कि ग्लूकोस में 5(-OH) समूह उपस्थित
\[ \text{CHO} \]
\[ \text{|} \]
\[ \text{(CHOH)}_4 + 5\text{CH}_3\text{COCl} \longrightarrow \text{(CHOCOCH}_3\text{)}_4 + 5\text{HCl} \]
\[ \text{|} \qquad \qquad \qquad \qquad \qquad \text{|} \]
\[ \text{CH}_2\text{OH} \qquad \qquad \qquad \qquad \text{CH}_2\text{OCOCH}_3 \]
\[ \text{ग्लूकोस पेन्टा ऐसीटेट} \]
(ii) ग्लूकोस में कार्बोनिल समूह की उपस्थिति :
ग्लूकोस की HCN के साथ क्रिया कराने पर ग्लूकोस सायनोहाइड्रिन बनता है।
\[ \text{H-C=O} + \text{HCN} \longrightarrow \text{H-C-OH} \]
\[ \text{|} \qquad \qquad \qquad \text{|} \]
\[ \text{(CHOH)}_4 \qquad \quad \quad \text{(CHOH)}_4 \]
\[ \text{|} \qquad \qquad \qquad \text{|} \]
\[ \text{CH}_2\text{OH} \qquad \qquad \quad \text{CH}_2\text{OH} \]
\[ \text{ग्लूकोस सायनोहाइड्रिन} \]
(iii) ग्लूकोस में-CHO समूह की उपस्थिति :
ग्लूकोस फेहलिंग विलयन एवं टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करता है।
\[ \text{CHO} \]
\[ \text{|} \]
\[ \text{(CHOH)}_4 + 2\text{CuO} \longrightarrow \text{(CHOH)}_4 + \text{Cu}_2\text{O} \]
\[ \text{|} \qquad \qquad \qquad \quad \text{|} \]
\[ \text{CH}_2\text{OH} \qquad \qquad \quad \text{CH}_2\text{OH} \]
\[ \text{Red ppt} \]
उपर्युक्त अभिक्रियाओं से यह प्रदर्शित होता है कि ग्लूकोस पॉलिहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड है।
In simple words: ग्लूकोस एक पॉलीहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड है जिसका संरचना सूत्र CHO-(CHOH)4-CH2OH है। यह पांच हाइड्रॉक्सिल समूह (ऐसीटाइल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया से पेन्टाऐसीटेट बनता है), एक कार्बोनिल समूह (HCN के साथ सायनोहाइड्रिन बनता है) और एक ऐल्डिहाइड समूह (फेहलिंग और टॉलेन अभिकर्मकों को अपचयित करता है) की उपस्थिति दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: ग्लूकोस की खुली श्रृंखला संरचना और प्रमुख कार्यात्मक समूहों (ऐल्डिहाइड, हाइड्रॉक्सिल) की पुष्टि करने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं को उनके अभिकर्मकों और उत्पादों के साथ याद रखें।
Question 2. ऐमीनो अम्ल क्या हैं? इनका वर्गीकरण कैसे किया जाता है। उदाहरण देकर समझाइए।
Answer: ऐमीनो अम्ल-ऐमीनो अम्लों के अणु प्रोटीन अणुओं की निर्माण की इकाई या एकलक इकाइयाँ हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख एक ऐमीनो अम्ल की मूल संरचना को दर्शाता है। इसमें एक केंद्रीय कार्बन परमाणु होता है, जिसे अल्फा-कार्बन कहा जाता है, जो एक ऐमीन समूह (\( \text{-NH}_2 \)), एक कार्बोक्सिल समूह (\( \text{-COOH} \)), एक हाइड्रोजन परमाणु (H) और एक विशिष्ट पार्श्व श्रृंखला (R) से जुड़ा होता है। पार्श्व श्रृंखला (R) ऐमीनो अम्ल के प्रकार को निर्धारित करती है।
ऐमीनो अम्ल में \( \text{-NH}_2 \) तथा \( \text{-COOH} \) समूह होते हैं। इसे निम्नलिखित सूत्र से प्रदर्शित करते हैं
\[ \text{H} \]
\[ \text{|} \]
\[ \text{R-C-COOH} \]
\[ \text{|} \]
\[ \text{NH}_2 \]
जहाँ R ऐल्किल या ऐरिल समूह है।
ऐमीनो अम्लों का वर्गीकरण
1. प्रकृति के आधार पर
(i) उदासीन ऐमीनो अम्ल :
वे ऐमीनो अम्ल जिनमें \( \text{-NH}_2 \), तथा \( \text{-COOH} \) समूह की संख्या समान होती है, उन्हें उदासीन ऐमीनो अम्ल कहते हैं।
उदाहरण :
\( \text{-NH}_2\text{-CH}_2\text{-COOH} \)
(ii) अम्लीय ऐमीनो अम्ल :
वे ऐमीनो अम्ल जिनमें प्रत्येक अणु में केवल एक ऐमीनो (\( \text{-NH}_2 \)) समूह तथा एक से अधिक कार्बोक्सिल (\( \text{-COOH} \)) समूह होते हैं।
उदाहरण :
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह संरचना एस्पार्टिक अम्ल को दर्शाती है, जो एक अम्लीय ऐमीनो अम्ल है। इसमें दो कार्बोक्सिल समूह (\( \text{-COOH} \)) और एक ऐमीन समूह (\( \text{-NH}_2 \)) होते हैं। एक कार्बोक्सिल समूह केंद्रीय कार्बन से जुड़ा होता है, जबकि दूसरा पार्श्व श्रृंखला में होता है, जिससे इसका अम्लीय गुण बढ़ता है।
(iii) क्षारीय ऐमीनो अम्ल :
इनमें एक-\( \text{COOH} \) समूह तथा एक से अधिक \( \text{-NH}_2 \), समूह होते हैं।
उदाहरण :
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह संरचना लाइसिन को दर्शाती है, जो एक क्षारीय ऐमीनो अम्ल है। इसमें केंद्रीय कार्बन से जुड़ा एक कार्बोक्सिल समूह (\( \text{-COOH} \)) और दो ऐमीन समूह (\( \text{-NH}_2 \)) होते हैं- एक केंद्रीय कार्बन से जुड़ा और दूसरा लंबी पार्श्व श्रृंखला में, जिससे इसका क्षारीय गुण बढ़ता है।
(iv) सल्फरयुक्त ऐमीनो अम्ल :
इनमें सल्फर उपस्थित होता है।
उदाहरण :
2. हाइड्रोकार्बन की प्रकृति के आधार पर
(i) ऐलिफैटिक ऐमीनो अम्ल :
इनमें पार्श्व श्रृंखला भाग R ऐल्किल समूह होता है।
उदाहरण : ग्लाइसीन, ऐलानीन आदि ।
(ii) ऐरोमैटिक ऐमीनो अम्ल :
इनमें पार्श्व श्रृंखला भाग R ऐरिल समूह होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह संरचना फेनिलऐलानीन को दर्शाती है, जो एक ऐरोमैटिक ऐमीनो अम्ल है। इसमें केंद्रीय कार्बन से जुड़ा एक ऐमीन समूह, एक कार्बोक्सिल समूह और एक पार्श्व श्रृंखला होती है जिसमें एक फेनिल समूह (एक बेंजीन वलय) होता है, जो इसे ऐरोमैटिक प्रकृति प्रदान करता है।
(iii) विषम चक्रीय ऐमीनो अम्ल :
इनमें पार्श्व श्रृंखला भाग R विषम चक्रीय होता है।
उदाहरण :
प्रोलीन
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह संरचना प्रोलीन को दर्शाती है, जो एक विषम चक्रीय ऐमीनो अम्ल है। इसमें ऐमीन समूह अपनी पार्श्व श्रृंखला के साथ एक वलय संरचना बनाता है जो केंद्रीय कार्बन से जुड़ती है, जिससे एक विषम चक्रीय प्रणाली बनती है।
In simple words: ऐमीनो अम्ल प्रोटीन के निर्माण खंड हैं, जिनमें एक ऐमीन और एक कार्बोक्सिल समूह होता है; उन्हें प्रकृति (उदासीन, अम्लीय, क्षारीय, सल्फरयुक्त) या हाइड्रोकार्बन पार्श्व श्रृंखला की प्रकृति (ऐलिफैटिक, ऐरोमैटिक, विषम चक्रीय) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
🎯 Exam Tip: ऐमीनो अम्ल की मूल संरचना, उनके वर्गीकरण के विभिन्न मापदंडों और प्रत्येक श्रेणी के विशिष्ट उदाहरणों को याद रखें।
Question 3. प्रोटीन की द्वितीयक संरचना से आप क्या समझते हैं। प्रोटीन की संरचना को स्थायित्व प्रदान करने वाले कारकों को लिखिए।
Answer: प्रोटीन की द्वितीयक संरचना-किसी प्रोटीन की द्वितीयक (2°) संरचना का सम्बन्ध उस आकृति से है जिसमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला पायी जाती हैं। ये दो प्रकार की संरचनाएँ हैं \( \alpha \)-हेलिक्स तथा \( \beta \)-प्लीटेड शीट संरचना ।
1.\( \alpha \)-हेलिक्स संरचना :
इस संरचना में पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला दक्षिणावर्ती पेंच के समान मुडी रहती है। इसमें प्रत्येक ऐमीनो अम्ल अवशिष्ट का \( \text{NH} \) समूह, कुण्डली के अगले मोड़ पर स्थित (\( \text{-C = O} \)) समूह के साथ हाइड्रोजन आबन्ध बनाता है। हेलिक्स संरचना को 3-\( \text{6}_{13} \)हेलिक्स भी कहते हैं क्योंकि हेलिक्स के प्रत्येक घुमाव में 3-6 ऐमीनो अम्ल अवशेष रहते हैं। हेलिक्स विभिन्न भागों में \( \text{C = O} \) तथा \( \text{-NH} \) समूहों के मध्य \( \text{H} \)-आबन्ध द्वारा 13 सदस्य वलय बनाती है। बालों व ऊन जैसी रेशेदार प्रोटीनों की संरचना इस प्रकार की होती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख एक \( \alpha \)-हेलिक्स संरचना को दर्शाता है, जो प्रोटीन की द्वितीयक संरचना का एक सामान्य रूप है। पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला एक दक्षिणावर्ती पेंच के रूप में कुंडलित होती है, जिसमें हाइड्रोजन आबंध उसी श्रृंखला के भीतर के ऐमीनो अम्ल अवशेषों के C=O और N-H समूहों के बीच बनते हैं, जिससे संरचना स्थिर होती है।
2.\( \beta \)-प्लीटेड शीट संरचना :
इस प्रकार की संरचना में सभी पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ खुली हुई अवस्था में एक-दूसरे के पार्श्व में स्थित होती हैं तथा परस्पर अन्तराण्विक हाइड्रोजन बन्धों द्वारा जुड़ी होती हैं। अतः इस प्रकार की संरचना वाली प्रोटीन मुलायम होती है। रेशम की संरचना ऐसी ही होती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख एक \( \beta \)-प्लीटेड शीट संरचना को दर्शाता है, जो प्रोटीन की द्वितीयक संरचना का दूसरा सामान्य रूप है। इस संरचना में पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएँ एक-दूसरे के समानांतर या प्रति-समानांतर व्यवस्थित होती हैं, और विभिन्न श्रृंखलाओं के N-H और C=O समूहों के बीच अंतर-आणविक हाइड्रोजन आबंध बनते हैं, जिससे एक प्लीटेड, मुलायम संरचना बनती है।
प्रदान करने वाले कारक प्रोटीन की संरचना को स्थायित्व प्रदान करने वाले प्रमुख कारक निम्न हैं
1. आयनिक आबन्ध या लवण आबन्ध
2. हाइड्रोजन आबन्ध
3. हाइड्रोफोबिक आबन्ध (जलविरोधी बन्ध)
4. डाइसल्फाइड आबन्ध
In simple words: प्रोटीन की द्वितीयक संरचना में पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाओं की स्थानीय, नियमित व्यवस्था शामिल होती है, जैसे कि \( \alpha \)-हेलिक्स (पेचदार कुंडल) और \( \beta \)-प्लीटेड शीट (समानांतर मुड़ी हुई चादरें), जो मुख्य रूप से हाइड्रोजन आबंधों द्वारा स्थिर होती हैं, साथ ही आयनिक, हाइड्रोफोबिक और डाइसल्फाइड आबंध भी स्थायित्व प्रदान करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन की द्वितीयक संरचना के दो मुख्य रूपों (\( \alpha \)-हेलिक्स और \( \beta \)-प्लीटेड शीट) को समझना, उनके बनने के तरीके और उन्हें स्थिर करने वाले आबंधों को जानना महत्वपूर्ण है।
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