Get the most accurate UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 2 पुष्पीय पौधों में लैंगिक प्रजनन here. Updated for the 2026 27 academic session, these solutions are based on the latest UP Board textbooks for Class 12 Biology. Our expert-created answers for Class 12 Biology are available for free download in PDF format.
Detailed Chapter 2 पुष्पीय पौधों में लैंगिक प्रजनन UP Board Solutions for Class 12 Biology
For Class 12 students, solving UP Board textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 12 Biology solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 2 पुष्पीय पौधों में लैंगिक प्रजनन solutions will improve your exam performance.
Class 12 Biology Chapter 2 पुष्पीय पौधों में लैंगिक प्रजनन UP Board Solutions PDF
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
Question 1. एक आवृतबीजी पुष्प के उन अंगों के नाम बताएँ, जहाँ नर एवं मादा युग्मकोद्भिद का विकास होता है?
Answer: आवृतबीजी पादप (angiospermic plant) पुष्पीय पादप हैं। पुष्प एक रूपान्तरित प्ररोह (modified shoot) है जिसका कार्य प्रजनन होता है। पुष्प में निम्नलिखित चार चक्र होते हैं –
(क) बाह्यदलपुंज (Calyx) – इसका निर्माण बाह्यदल (sepals) से होता है।
(ख) दलपुंज (Corolla) – इसका निर्माण दल (petals) से होता है।
(ग) पुमंग (Androecium) – इसका निर्माण पुंकेसर (stamens) से होता है। यह पुष्प का नर जनन चक्र कहलाता है। पुंकेसर के परागकोश (anther) में परागकण मातृ कोशिका (pollen mother cells) से अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा परागकण (pollen grains) का निर्माण होता है। परागकण नर युग्मकोद्भिद (male gametophyte) कहलाता है।
(घ) जायांग (Gynoecium) – इसका निर्माण अण्डप (carpels) से होता है। यह पुष्प का मादा जनन चक्र कहलाता है। अण्डप के तीन भाग होते हैं – अण्डाशय (ovary), वर्तिका (style) तथा वर्तिकाग्र (stigma)। अण्डाशय में बीजाण्ड का निर्माण होता है। बीजाण्ड के बीजाण्डकाय की गुरुबीजाणु मातृ कोशिका (mega spore mother cell) से अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा अगुणिगुणित गुरुबीजाणु से मादा युग्मकोद्भिद (female gametophyte) अथवा भ्रूणकोष (embryo sac) का विकास होता है। इस प्रकार, नर युग्मकोद्भिद का विकास परागकोश में और मादा युग्मकोद्भिद का विकास बीजाण्ड के भीतर होता है।
In simple words: पुष्प में नर युग्मकोद्भिद (परागकण) का विकास पुंकेसर के परागकोश में होता है, जबकि मादा युग्मकोद्भिद (भ्रूणकोष) का विकास जायांग के बीजाण्ड के भीतर होता है।
🎯 Exam Tip: Examiners look for specific terms like 'Anther' (परागकोश) for male and 'Ovule/Embryo sac' (बीजाण्ड/भ्रूणकोष) for female gametophyte development. Make sure to underline these key structures in your answer.
Question 2. लघुबीजाणुधानी तथा गुरुबीजाणुधानी के बीच अन्तर स्पष्ट करें। इन घटनाओं के दौरान किस प्रकार का कोशिका विभाजन सम्पन्न होता है ? इन दोनों घटनाओं के अंत में बनने वाली संरचनाओं के नाम बताइए।
Answer: लघुबीजाणुधानी तथा गुरुबीजाणुधानी के मध्य मुख्य अन्तर निम्नलिखित तालिका में स्पष्ट किए गए हैं –
| क्र० सं० | लघुबीजाणुधानी (Microsporangium) | गुरुबीजाणुधानी (Megasporangium) |
|---|---|---|
| 1. | यह बाह्य त्वचा, मध्य स्तर तथा टेपीटम से घिरी रहती है। | यह बाह्य त्वचा तथा अन्तःअध्यावरण से घिरी रहती है। |
| 2. | परागकण मातृ कोशिका से सूक्ष्म बीजाणु बनते हैं जो कि परागकोश के चारों कोनों पर विकसित होते हैं। | गुरुबीजाणु मातृ कोशिका से गुरुबीजाणु (megaspore) बनते हैं जो कि अण्डाशय (ovary) में विकसित होते हैं। |
| 3. | सूक्ष्म बीजाणु मातृ कोशिका के अर्धसूत्री विभाजन द्वारा अनेक परागकणों (pollen grains) का निर्माण होता है। | गुरुबीजाणु मातृ कोशिका के अर्धसूत्री विभाजन से गुरुबीजाणुओं (megaspores) का निर्माण होता है। |
| 4. | परागकोश के स्फुटन पर परागकण विमुक्त होते हैं। परागकण नर युग्मकोद्भिद् बनाते हैं। | गुरुबीजाणु से भ्रूणकोष (embryo sac) बनता है जो मादा युग्मकोद्भिद् बनाता है। |
In simple words: लघुबीजाणुधानी में नर युग्मक (परागकण) बनते हैं और गुरुबीजाणुधानी में मादा युग्मक (भ्रूणकोष) बनता है। दोनों प्रक्रियाओं में अर्धसूत्री विभाजन होता है जो गुणसूत्रों की संख्या आधी कर देता है।
🎯 Exam Tip: When distinguishing between microsporangium and megasporangium, always present the answer in a tabular form. Clearly state that microsporangium leads to pollen grains while megasporangium leads to the embryo sac.
Question 3. निम्नलिखित शब्दावलियों को सही विकासीय क्रम में व्यवस्थित करें-परागकण, बीजाणुजन ऊतक, लघुबीजाणु चतुष्क, परागमातृ कोशिका, नर युग्मक।
Answer: उपरोक्त शब्दावलियों का सही विकासीय क्रम निम्नवत् है –
बीजाणुजन ऊतक → परागमातृ कोशिका → लघुबीजाणु चतुष्क → परागकण → नरयुग्मक। यह क्रम विकास की उन क्रमिक अवस्थाओं को दर्शाता है जो परागकोश के भीतर संपन्न होती हैं।
In simple words: यह विकास का क्रम है जिसमें सबसे पहले प्राथमिक ऊतक होता है, जिससे मातृ कोशिका बनती है, फिर अर्धसूत्री विभाजन से चार बीजाणु (चतुष्क) बनते हैं, जो परिपक्व होकर परागकण और अंत में नर युग्मक बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: Use arrows (→) to show the chronological direction of development. Double-check that 'परागमातृ कोशिका' precedes 'लघुबीजाणु चतुष्क'.
Question 4. एक प्रारूपी आवृतबीजी बीजाण्ड के भागों का विवरण दिखाते हुए एक स्पष्ट एवं साफ-सुथरा नामांकित चित्र बनाइए। (2010, 15, 17)
Answer: एक प्रारूपी आवृतबीजी बीजाण्ड (Anatropous ovule) की संरचना में मुख्यतः बीजाण्डवृत्त (funicle), नाभिका (hilum), अध्यावरण (integuments), बीजाण्डद्वार (micropyle), बीजाण्डकाय (nucellus), निभाग (chalaza) और भ्रूणकोष (embryo sac) शामिल होते हैं। यह चित्र पौधों में बीजाण्ड की आंतरिक संरचना और उसके विभिन्न सुरक्षात्मक परतों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
In simple words: यह बीजाण्ड (ovule) की संरचना है। इसमें बाहर सुरक्षात्मक आवरण (अध्यावरण) होते हैं, बीच में भ्रूणकोष होता है जहाँ अंडाणु बनता है, और नीचे एक डंठल (बीजाण्डवृत्त) होता है जो इसे जोड़ता है।
🎯 Exam Tip: Label both 'Chalaza' (निभाग) at the top and 'Micropyle' (बीजाण्डद्वार) at the bottom. Examiners award full marks when these opposite poles are clearly marked.
Question 5. आप मादा युग्मकोद्भिद् के एकबीजाणुज विकास से क्या समझते हैं ?
Answer: गुरुबीजाणुजनन के फलस्वरूप बने गुरुबीजाणु चतुष्क (tetrad) में से तीन नष्ट हो जाते हैं तथा केवल एक गुरुबीजाणु ही सक्रिय होता है जो मादा युग्मकोद्भिद् का विकास करता है। गुरुबीजाणु का केन्द्रक तीन सूत्री विभाजनों द्वारा आठ केन्द्रक बनाता है। प्रत्येक ध्रुव पर चार-चार केन्द्रक व्यवस्थित हो जाते हैं। भ्रूणकोष के बीजाण्डद्वारी ध्रुव पर स्थित चारों केन्द्रक में से तीन केन्द्रक कोशिकाएँ अण्ड उपकरण (egg apparatus) बनाते हैं, जबकि निभागी सिरे के चार केन्द्रकों में से तीन केन्द्रक एण्टीपोडल कोशिकाएँ (antipodal cells) बनाते हैं। दोनों ध्रुवों से आये एक-एक केन्द्रक, केन्द्रीय कोशिका में संयोजन द्वारा ध्रुवीय केन्द्रक (polar nucleus) बनाते हैं। चूँकि मादा युग्मकोद्भिद् सिर्फ एक ही क्रियाशील गुरुबीजाणु से विकसित होता है, अतः इसे एकबीजाणुज विकास (Monosporic development) कहते हैं। यह प्रक्रिया अधिकांश आवृतबीजी पौधों की एक विशिष्ट विशेषता है।
In simple words: जब मादा युग्मकोद्भिद् (भ्रूणकोष) का विकास केवल एक ही सक्रिय गुरुबीजाणु से होता है (जबकि बाकी तीन नष्ट हो जाते हैं), तो इसे एकबीजाणुज विकास कहते हैं।
🎯 Exam Tip: Clearly emphasize that out of 4 megaspores, 3 degenerate and only 1 remains functional. The keyword 'Monosporic' (एकबीजाणुज) must be highlighted.
Question 6. एक स्पष्ट एवं साफ-सुथरे चित्र के द्वारा परिपक्व मादा युग्मकोद्भिद् के 7-कोशिकीय, 8-न्यूक्लिएट (केन्द्रकीय) प्रकृति की व्याख्या करें।
Answer: आवृतबीजी पौधों का परिपक्व मादा युग्मकोद्भिद् 7-कोशिकीय व 8-केन्द्रकीय होता है। इसके परिवर्धन के समय क्रियाशील गुरुबीजाणु (functional megaspore) में प्रथम केन्द्रकीय विभाजन द्वारा दो केन्द्रक बनते हैं, जो दोनों ध्रुवों (माइक्रोपाइल व निभाग) पर चले जाते हैं। द्वितीय व तृतीय विभाजनों द्वारा दोनों सिरों पर चार-चार केन्द्रक बन जाते हैं। माइक्रोपाइलर शीर्ष पर चार केन्द्रकों में से तीन केन्द्रक अण्ड उपकरण (egg apparatus) बनाते हैं तथा चौथा केन्द्रक ऊपरी ध्रुव का चक्र बनाता है। निभागी शीर्ष पर चार केन्द्रकों में से तीन एण्टीपोडल कोशिकाएँ (antipodal cells) तथा चौथा केन्द्रक निचला ध्रुव केन्द्रक बनाता है। दोनों ध्रुवीय केन्द्रक मध्य में आकर संयोजन द्वारा द्वितीयक केन्द्रक (secondary nucleus) बनाते हैं। इस प्रकार, परिपक्व भ्रूणकोष में कुल 8 केन्द्रक होते हैं परंतु कोशिकाएं केवल 7 ही होती हैं, जो निषेचन की प्रक्रिया के लिए पूरी तरह तैयार होती हैं।
In simple words: परिपक्व मादा भ्रूणकोष में 8 केन्द्रक (nuclei) होते हैं, लेकिन कोशिकाएं केवल 7 होती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बीच वाली बड़ी कोशिका में दो केन्द्रक (ध्रुवीय केन्द्रक) एक साथ रहते हैं।
🎯 Exam Tip: State clearly why it is 7-celled but 8-nucleate: the central cell contains 2 polar nuclei. Drawing a simplified diagram representing 3 antipodals, 2 polar nuclei in 1 central cell, and 1 egg + 2 synergids helps get full marks.
Question 7. उन्मील परागणी पुष्पों से क्या तात्पर्य है ? क्या अनुन्मीलीय पुष्पों में पर-परागण सम्पन्न होता है ? अपने उत्तर की सतर्क व्याख्या करें।
Answer: वे पुष्प जिनके परागकोश तथा वर्तिकाग्र अनावृत (exposed) होते हैं, उन्मील परागणी (chasmogamous) पुष्प कहलाते हैं; जैसे-वायोला, ऑक्जेलिस। अनुन्मीलीय (cleistogamous) पुष्पों में पर-परागण सम्पन्न नहीं होता है क्योंकि ये पुष्प कभी खुलते ही नहीं हैं। अनुन्मीलीय पुष्पों के परागकोश तथा वर्तिकाग्र सदैव बंद अवस्था में एक-दूसरे के अत्यंत पास स्थित होते हैं। परागकोश के स्फुटित होने पर परागकण सीधे अपने ही पुष्प के वर्तिकाग्र के सम्पर्क में आकर परागण करते हैं। अतः अनुन्मीलीय पुष्पों में केवल और केवल स्व-परागण (self-pollination) ही संभव होता है। इस बंद संरचना के कारण बाहरी परागकणों का प्रवेश पूरी तरह अवरुद्ध रहता है।
In simple words: उन्मील पुष्प वे होते हैं जो खुले रहते हैं, जिससे पर-परागण हो सकता है। अनुन्मीलीय पुष्प हमेशा बंद रहते हैं, इसलिए उनमें कभी भी पर-परागण नहीं हो सकता, केवल स्व-परागण ही होता है।
🎯 Exam Tip: Use examples like 'Viola' and 'Oxalis' to support your answer. Clearly define cleistogamy as a guarantee for self-pollination.
Question 8. पुष्पों द्वारा स्व-परागण को रोकने के लिए विकसित की गयी दो कार्यनीतियों का विवरण दें।
Answer: पुष्पों में स्व-परागण को रोकने तथा पर-परागण को बढ़ावा देने हेतु विकसित की गयी दो प्रमुख कार्यनीतियाँ निम्नलिखित हैं –
1. स्व-बन्ध्यता (Self-sterility / Self-incompatibility) – इस कार्यनीति में यदि किसी पुष्प के परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं, तो जीन स्तर पर पारस्परिक क्रिया के कारण उनका अंकुरण या परागनली की वृद्धि रुक जाती है जिससे निषेचन नहीं हो पाता; जैसे-माल्वा में।
2. भिन्नकालपक्वता (Dichogamy) – इसमें नर तथा मादा जननांग अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं। जब परागकोश पहले परिपक्व होता है तो उसे पूर्वपुंपक्वता (Protandry) कहते हैं, और जब वर्तिकाग्र पहले परिपक्व होता है तो उसे पूर्वस्त्रीपक्वता (Protogyny) कहते हैं; जैसे-सैक्सीफ्रेगा कुल के सदस्यों में। ये प्राकृतिक अनुकूलन पौधों में आनुवंशिक विविधता बनाए रखने में मदद करते हैं।
In simple words: स्व-परागण रोकने के लिए पौधे दो तरीके अपनाते हैं: पहला, खुद के परागकणों को अंकुरित न होने देना (स्व-बन्ध्यता), और दूसरा, नर और मादा भागों का अलग-अलग समय पर पकना (भिन्नकालपक्वता)।
🎯 Exam Tip: Ensure you clearly explain 'Self-sterility' and 'Dichogamy' using these exact terms, as examiners specifically look for these keywords.
Question 9. स्व-अयोग्यता क्या है ? स्व-अयोग्यता वाली प्रजातियों में स्व-परागण प्रक्रिया बीज की रचना तक क्यों नहीं पहुँच पाती है ?
Answer: स्व-अयोग्यता (Self-incompatibility) पुष्पीय पौधों में पाई जाने वाली एक ऐसी आनुवंशिक युक्ति है जिसके फलस्वरूप पौधों में स्व-परागण होने पर भी निषेचन नहीं हो पाता है। स्व-अयोग्यता मुख्यतः दो प्रकार की होती है –
1. विषमरूपी (Heteromorphic) – इसमें एक ही जाति के पौधों में वर्तिकाग्र तथा परागकोशों की स्थिति में भिन्नता होती है, जिससे परागनली की वृद्धि वर्तिकाग्र में ही रुक जाती है।
2. समकारी (Homomorphic) – इस प्रकार की स्व-अयोग्यता विरोधी-S अलील्स (opposition-S-alleles) द्वारा नियंत्रित होती है। स्व-अयोग्यता वाले पौधों में जब स्व-परागकण वर्तिकाग्र पर आते हैं, तो आनुवंशिक अवरोध के कारण या तो परागकण अंकुरित नहीं होते या वर्तिका में परागनली की वृद्धि रुक जाती है। इस प्रकार नर युग्मक अण्डाशय तक नहीं पहुँच पाता और निषेचन न होने के कारण प्रक्रिया बीज की रचना तक नहीं पहुँच पाती है। यह व्यवस्था अंतःप्रजनन अवनमन को रोकने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
In simple words: स्व-अयोग्यता एक आनुवंशिक गुण है जिससे फूल अपने ही परागकणों को निषेचित नहीं होने देता। इसके कारण वर्तिकाग्र पर परागकण का अंकुरण रुक जाता है और बीज नहीं बन पाते।
🎯 Exam Tip: Mention that 'S-alleles' control this genetic mechanism. Emphasize that it prevents inbreeding depression.
Question 10. बैगिंग (बोरावस्त्रावरण) या थैली लगाना तकनीक क्या है ? पादप जनन कार्यक्रम में यह कैसे उपयोगी है ?
Answer: बैगिंग (बोरावस्त्रावरण) एक ऐसी तकनीक है जिसके अंतर्गत विपुंसित (emasculated) पुष्पों को एक निश्चित थैली (सामान्यतः बटर पेपर से बनी) से ढक दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्तिकाग्र को किसी भी अवांछित या अनैच्छिक परागकणों के संदूषण से बचाना है। पादप जनन कार्यक्रम (plant breeding programs) में यह तकनीक निम्नलिखित प्रकार से उपयोगी है –
1. इसके द्वारा केवल ऐच्छिक गुणों वाले परागकणों को ही वर्तिकाग्र पर छिड़ककर कृत्रिम परागण कराया जाता है।
2. इससे फसलों की उन्नत और संकर प्रजातियाँ तैयार की जाती हैं जो उच्च उत्पादकता और रोग प्रतिरोधक क्षमता से युक्त होती हैं। यह वैज्ञानिक विधि नई आनुवंशिक किस्में विकसित करने का मुख्य आधार है।
In simple words: बैगिंग का मतलब है फूल को थैली से ढकना ताकि कोई अवांछित परागकण उस पर न गिरे। इसका उपयोग वैज्ञानिक मनपसंद और अच्छी किस्म के पौधे उगाने के लिए करते हैं।
🎯 Exam Tip: Clearly state that bagging is done on 'emasculated' (विपुंसित) flowers using butter paper to prevent contamination of stigma by unwanted pollen.
Question 11. त्रि-संलयन क्या है ? यह कहाँ और कैसे सम्पन्न होता है ? त्रि-संलयन में सम्मिलित न्यूक्लीआई का नाम बताएँ।
Answer: परागनली से मुक्त दो नर युग्मकों में से एक नर युग्मक अंड कोशिका से संलयित होकर युग्मनज (2n) बनाता है। दूसरा नर युग्मक भ्रूणकोष के मध्य में स्थित द्विगुणित द्वितीयक केन्द्रक (secondary nucleus, 2n) से संलयन करता है। चूँकि इस प्रक्रिया में तीन केन्द्रकों का संलयन होता है, इसलिए इसे त्रि-संलयन (Triple Fusion) कहते हैं। यह प्रक्रिया भ्रूणकोष (embryo sac) के भीतर सम्पन्न होती है। त्रि-संलयन में निम्नलिखित तीन न्यूक्लीआई सम्मिलित होते हैं –
(i) एक अगुणित नर युग्मक केन्द्रक (haploid male gamete nucleus, n)
(ii) दो अगुणित ध्रुवीय केन्द्रक (haploid polar nuclei, n + n) जो मिलकर द्विगुणित द्वितीयक केन्द्रक बनाते हैं। इसके परिणामस्वरूप प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक (PEN) का निर्माण होता है जो आगे चलकर विकासशील भ्रूण को पोषण प्रदान करता है।
In simple words: जब दूसरा नर युग्मक भ्रूणकोष के बीच में मौजूद दो ध्रुवीय केन्द्रकों से मिलता है, तो इसे त्रि-संलयन कहते हैं। इससे भ्रूण को भोजन देने वाला भ्रूणपोष (endosperm) बनता है।
🎯 Exam Tip: Remember that Triple Fusion results in the formation of the triploid (3n) Primary Endosperm Nucleus (PEN). Mention the ploidy levels clearly.
Question 12. एक निषेचित बीजाण्ड में, युग्मनज प्रसुप्ति के बारे में आप क्या सोचते हैं ?
Answer: निषेचन के पश्चात् बीजाण्ड में युग्मनज (zygote) का विकास तुरंत शुरू नहीं होता, बल्कि वह कुछ समय के लिए निष्क्रिय या प्रसुप्त अवस्था (dormancy) में चला जाता है। युग्मनज प्रसुप्ति के पीछे मुख्य जैविक कारण यह है कि इस दौरान भ्रूणकोष में त्रि-संलयन के फलस्वरूप भ्रूणपोष (endosperm) का विकास तेजी से होने लगता है। जब भ्रूणपोष पर्याप्त मात्रा में विकसित हो जाता है और भोजन संचित कर लेता है, तब युग्मनज अपनी प्रसुप्ति समाप्त कर विभाजन शुरू करता है। इससे विकासशील भ्रूण को निरंतर और पर्याप्त पोषण मिलना सुनिश्चित हो जाता है। यह प्रकृति का एक उत्कृष्ट सुरक्षात्मक और अनुकूलन तंत्र है।
In simple words: निषेचन के बाद युग्मनज (zygote) तुरंत नहीं बढ़ता, वह कुछ समय आराम करता है। इस दौरान उसके लिए भोजन (भ्रूणपोष) तैयार होता है, ताकि बढ़ने पर उसे पूरा पोषण मिल सके।
🎯 Exam Tip: Explain that zygote dormancy is an adaptation to ensure that endosperm develops first to provide nutrition to the embryo.
Question 13. इनमें विभेद करें – (क) बीजपत्राधार तथा बीजपत्रोपरिक (ख) प्रांकुर चोल तथा मूलांकुर चोल (ग) अध्यावरण तथा बीज चोल (घ) परिभ्रूण पोष तथा फलभित्ति
Answer: दिए गए युग्मों में प्रमुख विभेद निम्नलिखित सारणियों के माध्यम से स्पष्ट किया गया है –
(क) बीजपत्राधार तथा बीजपत्रोपरिक में अन्तर:
| क्र० सं० | बीजपत्राधार (Hypocotyl) | बीजपत्रोपरिक (Epicotyl) |
|---|---|---|
| 1. | यह भ्रूणीय अक्ष का वह भाग है जो बीजपत्रों के स्तर से नीचे मूलांकुर के ठीक ऊपर स्थित होता है। | यह भ्रूणीय अक्ष का वह भाग है जो बीजपत्रों के स्तर से ऊपर प्रांकुर के ठीक नीचे स्थित होता है। |
| 2. | इसकी समाप्ति मूल-शीर्ष (root tip) में होती है। | इसकी समाप्ति प्रांकुर (plumule) में होती है। |
(ख) प्रांकुर चोल तथा मूलांकुर चोल में अन्तर:
| क्र० सं० | प्रांकुर चोल (Coleoptile) | मूलांकुर चोल (Coleorhiza) |
|---|---|---|
| 1. | यह प्रांकुर (plumule) को ढकने वाली एक खोखली पर्णीय सुरक्षात्मक संरचना होती है। | यह मूलांकुर (radicle) तथा मूल गोप को ढकने वाली एक सुरक्षात्मक परत होती है। |
| 2. | यह मिट्टी से ऊपर उठकर हरे पत्ते जैसी संरचना बनाता है। | यह मिट्टी के भीतर ही रहता है और बाहर नहीं निकलता। |
(ग) अध्यावरण तथा बीज चोल में अन्तर:
| क्र० सं० | अध्यावरण (Integument) | बीज चोल (Seed coat) |
|---|---|---|
| 1. | यह बीजाण्ड (ovule) की चारों ओर से सुरक्षा करने वाली जीवित परत होती है। | यह परिपक्व बीज को सुरक्षा प्रदान करने वाली बाह्य मृत परत होती है। |
| 2. | निषेचन के पश्चात् यही परत बीज चोल में परिवर्तित हो जाती है। | यह बीजाण्ड के बाह्य और अन्तः अध्यावरणों से विकसित होती है। |
(घ) परिभ्रूण पोष तथा फलभित्ति में अन्तर:
| क्र० सं० | परिभ्रूण पोष (Perisperm) | फलभित्ति (Pericarp) |
|---|---|---|
| 1. | यह बीजों में बचा हुआ बीजाण्डकाय (persistent nucellus) होता है; जैसे-काली मिर्च में। | यह निषेचन के पश्चात् अण्डाशय की दीवार से विकसित फल का छिलका होता है। |
| 2. | यह सामान्यतः शुष्क और पतली झिल्लीनुमा परत के रूप में होता है। | यह तीन परतों (बाह्य, मध्य, अन्तः फलभित्ति) में विभाजित हो सकती है। |
In simple words: यह पौधों के अलग-अलग अंगों के बीच के अंतर हैं, जैसे प्रांकुर चोल पत्तियों को बचाता है और मूलांकुर चोल जड़ों को। अध्यावरण बीजाण्ड का रक्षा कवच है, जबकि बीज चोल बीज का।
🎯 Exam Tip: Always present structural differences in a tabular form. Clearly highlight corresponding parts (e.g., epicotyl-hypocotyl, coleoptile-coleorhiza) with appropriate labels.
Question 14. एक सेब को आभासी फल क्यों कहते हैं ? पुष्प का कौन-सा भाग फल की रचना करता है ?
Answer: सामान्यतः फल का विकास निषेचित अण्डाशय (ovary) से होता है। परंतु जिन फलों के विकास में अण्डाशय के साथ-साथ पुष्प का अन्य भाग जैसे पुष्पासन (thalamus) भी भाग लेता है, उन्हें आभासी फल (false fruit) या कूट फल कहते हैं। सेब में खाने योग्य गूदेदार भाग पुष्पासन से विकसित होता है, न कि अण्डाशय से; इसी कारण सेब को आभासी फल कहते हैं। पुष्प का निषेचित अण्डाशय ही वास्तविक फल की रचना करता है। यह प्राकृतिक प्रक्रिया पौधों में परागण और बीज प्रकीर्णन की सफलता को बढ़ाने के लिए अनुकूलित है.
In simple words: सच्चा फल वह है जो केवल अंडाशय से बने। सेब में फल का मुख्य हिस्सा फूल के 'पुष्पासन' (thalamus) से बनता है, इसलिए इसे आभासी या झूठा फल कहते हैं।
🎯 Exam Tip: Use the term 'Thalamus' (पुष्पासन) as the key reason for apple being a false fruit. Clearly state that in true fruits, only the 'Ovary' develops into the fruit.
Question 15. विपुंसन से क्या तात्पर्य है ? एक पादप प्रजनक कब और क्यों इस तकनीक का प्रयोग करता है ?
Answer: द्विलिंगी पुष्प की कली अवस्था में, परागकोश के प्रस्फुटन से पूर्व उसे चिमटी या अन्य किसी साधन द्वारा काटकर अलग करने की प्रक्रिया को विपुंसन (emasculation) कहते हैं। एक पादप प्रजनक (plant breeder) इस तकनीक का प्रयोग कृत्रिम परागण (artificial hybridization) के दौरान करता है। वह इसका प्रयोग तब करता है जब उसे किसी द्विलिंगी पुष्प में स्व-परागण को रोकना हो और अपनी इच्छानुसार किसी अन्य उन्नत किस्म के परागकणों द्वारा निषेचन कराना हो। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च उत्पादकता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और वांछित गुणों वाली नई फसल किस्में विकसित करना है।
In simple words: द्विलिंगी फूलों से उनके नर भाग (परागकोश) को कली अवस्था में ही काट देना विपुंसन कहलाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि फूल खुद परागित न हो सके और वैज्ञानिक उस पर अपनी पसंद के परागकण डालकर नई किस्म बना सकें।
🎯 Exam Tip: Remember that emasculation is performed only in bisexual flowers before the anther dehisces. Mention its role in 'Artificial Hybridization' (कृत्रिम संकरण) to secure full marks.
Question 16. यदि कोई व्यक्ति वृद्धि कारकों का प्रयोग करते हुए अनिषेकजनन को प्रेरित करता है तो आप प्रेरित अनिषेकजनन के लिए कौन-सा फल चुनते हैं और क्यों ?
Answer: प्रेरित अनिषेकजनन (induced parthenocarpy) के लिए हम 'केला' (banana), 'अंगूर' (grapes) या 'संतरा' (orange) जैसे फल चुनेंगे। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि अनिषेकजनन द्वारा विकसित फल पूर्णतः बीज रहित (seedless) होते हैं। बीज रहित फल खाने में अधिक सुगम होते हैं और उनकी व्यावसायिक मांग भी अधिक होती है। इसके अतिरिक्त, इन फलों में गूदे का अनुपात काफी बढ़ जाता है जिससे खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता और उपभोक्ता की संतुष्टि दोनों में उल्लेखनीय सुधार होता है।
In simple words: हम अनिषेकजनन के लिए केला या अंगूर चुनेंगे क्योंकि इस प्रक्रिया से बने फल बिना बीज के होते हैं, जिन्हें खाना आसान होता है और बाजार में इनकी मांग ज्यादा होती है।
🎯 Exam Tip: Parthenocarpic fruits are 'seedless'. Mention this as the primary commercial and consumer advantage when selecting fruits like banana or grapes.
Question 17. परागकण भित्ति रचना में टेपीटम की भूमिका की व्याख्या कीजिए।
Answer: लघुबीजाणुधानी की सबसे भीतरी परत को टेपीटम (tapetum) कहते हैं। परागकण भित्ति रचना में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, जो निम्नलिखित है –
1. पोषण प्रदान करना: टेपीटम की कोशिकाएँ विकासशील लघुबीजाणुओं (परागकणों) को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती हैं।
2. स्पोरोपोलेनिन का स्राव: टेपीटम 'यूबिश काय' (Ubish bodies) का स्राव करती है जो परागकण की बाह्यचोल (exine) के निर्माण के लिए स्पोरोपोलेनिन (sporopollenin) प्रदान करती है। यह पदार्थ परागकणों को अत्यधिक प्रतिरोधी बनाता है।
3. पराग-किट (Pollen-kit) का निर्माण: कीट-परागित पुष्पों में यह परागकणों के चारों ओर एक चिपचिपी और पीले रंग की तैलीय परत (पराग-किट) बनाती है जो कीटों को आकर्षित करने में सहायक होती है। इन कार्यों के कारण परागकणों का सुरक्षित रहना और सफल निषेचन सुनिश्चित होता है।
In simple words: टेपीटम परागकणों को भोजन देता है। यह उनके बाहरी कठोर आवरण (स्पोरोपोलेनिन) को बनाने में मदद करता है, जिससे परागकण सालों-साल खराब नहीं होते।
🎯 Exam Tip: Keywords like 'Sporopollenin' (स्पोरोपोलेनिन) and 'Ubish bodies' (यूबिश काय) are critical for securing full marks. Clearly link tapetum with the formation of the outer exine layer.
Question 18. असंगजनन क्या है ? इसका क्या महत्त्व है ? (2014, 17)
Answer: बिना निषेचन (बिना युग्मक संलयन और अर्धसूत्री विभाजन) के ही बीज या नए पौधे के निर्माण की प्रक्रिया को असंगजनन (apomixis) कहते हैं; जैसे-एस्टेरेसी और घासों में। इसका कृषि तथा बागवानी में निम्नलिखित महत्व है –
1. संकर बीजों (hybrid seeds) के गुणों को बनाए रखना: संकर पौधों से प्राप्त साधारण बीजों को बोने पर उनके आनुवंशिक गुण पृथक (segregate) हो जाते हैं, जिससे अच्छी फसल नहीं मिलती। परतु असंगजनन द्वारा उत्पादित संकर बीजों से प्रतिवर्ष आनुवंशिक रूप से समान संतति प्राप्त होती है।
2. लागत में कमी: किसानों को हर साल महंगे संकर बीज खरीदने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे उनकी उत्पादन लागत काफी कम हो जाती है। यह आनुवंशिक तकनीक पारंपरिक कृषि पद्धतियों में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखती है।
In simple words: बिना निषेचन के सीधे बीज बन जाने की क्रिया को असंगजनन कहते हैं। इससे संकर (hybrid) पौधों के अच्छे गुण कई पीढ़ियों तक वैसे ही बने रहते हैं, जिससे किसानों का खर्च बचता है।
🎯 Exam Tip: Highlight that 'apomixis' mimics sexual reproduction but is actually asexual. Emphasize its role in preventing the segregation of hybrid traits.
परीक्षापयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. आवरणविहीन तथा एककोशिकीय जनन अंग प्रमुख लक्षण हैं – (2015)
(क) ब्रायोफाइटा के
(ख) टेरिडोफाइटा के
(ग) अनावृतबीजियों के
(घ) थैलोफाइटा के
Answer: (घ) थैलोफाइटा के
In simple words: थैलोफाइटा (जैसे शैवाल) के जनन अंग बहुत सरल, एककोशिकीय और बिना किसी सुरक्षा कवच के होते हैं।
🎯 Exam Tip: Thallophytes have the simplest body design, hence their reproductive organs lack multi-cellular sterile jackets.
Question 2. एक आवृतबीजी में 400 परागकणों को उत्पन्न करने के लिए कितने अर्ध-सूत्री विभाजन आवश्यक होंगे? (2015)
(क) 400
(ख) 100
(ग) 200
(घ) 50
Answer: (ख) 100
In simple words: एक अर्ध-सूत्री विभाजन से 4 परागकण बनते हैं। इसलिए 400 परागकण बनाने के लिए हमें 400 को 4 से भाग देना होगा, जो कि 100 आता है।
🎯 Exam Tip: Use the formula: Number of divisions = Total pollen grains / 4. This is a very common numerical question in exams.
Question 3. परागकण मातृकोशिका में गुणसूत्रों की संख्या होती है (2016)
(क) अगुणित
(ख) द्विगुणित
(ग) त्रिगुणित
(घ) बहुगुणित
Answer: (ख) द्विगुणित
In simple words: परागकण मातृकोशिका मुख्य पौधे का हिस्सा होती है, इसलिए इसमें गुणसूत्रों के दो सेट (द्विगुणित या 2n) होते हैं, जो विभाजन के बाद अगुणित हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: Mother cells (मातृकोशिका) of microspores are always diploid (2n), whereas the resulting pollen grains are haploid (n).
Question 4. बीजाण्ड का वह स्थान जहाँ बीजाण्डवृत्त जुड़ा होता है उसे कहते हैं (2017)
(क) निभाग (चलाजा)
(ख) नाभिका (हाइलम)
(ग) केन्द्रक
(घ) माइक्रोपाइल
Answer: (ख) नाभिका (हाइलम)
In simple words: बीजाण्ड की मुख्य देह और उसके डंठल (बीजाण्डवृत्त) के जोड़ वाले बिंदु को नाभिका (hilum) कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: Hilum represents the junction where the body of the ovule fuses with the funicle. Memorize this definition for quick marks.
Question 5. परागनलिका का अध्यावरण द्वारा बीजाण्ड में प्रवेश कहलाता है (2017)
(क) निभागी युग्मन
(ख) अण्डद्वारी प्रवेश
(ग) इनमें से दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (घ) इनमें से कोई नहीं
In simple words: अध्यावरण (integuments) के माध्यम से परागनलिका का प्रवेश 'मध्यप्रवेश' (mesogamy) कहलाता है, जो दिए गए विकल्पों में नहीं है।
🎯 Exam Tip: Entry through integuments is called Mesogamy, through micropyle is Porogamy, and through chalaza is Chalazogamy.
Question 6. द्विनिषेचन का तात्पर्य है (2017)
(क) दो नर युग्मकों का अण्डकोशिका से संयोजन
(ख) एक नर युग्मक का अण्डकोशिका से तथा दूसरे का द्वितीयक केन्द्रक से संयोजन
(ग) इनमें से दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ख) एक नर युग्मक का अण्डकोशिका से तथा दूसरे का द्वितीयक केन्द्रक से संयोजन
In simple words: द्विनिषेचन में दो अलग-अलग निषेचन होते हैं: एक से भ्रूण बनता है और दूसरे से भ्रूणपोष (भोजन) बनता है।
🎯 Exam Tip: Double fertilization is the defining feature of angiosperms, consisting of syngamy and triple fusion.
Question 7. द्विनिषेचन क्रिया होती है (2014)
(क) शैवालों में
(ख) ब्रायोफाइट्स में
(ग) अनावृतबीजी पौधों में
(घ) आवृतबीजी पौधों में
Answer: (घ) आवृतबीजी पौधों में
In simple words: द्विनिषेचन केवल आवृतबीजी (फूलों वाले पौधों) में ही पाया जाता है, यह अन्य किसी पादप वर्ग में नहीं होता।
🎯 Exam Tip: Double fertilization is exclusive to Angiosperms (आवृतबीजी). It was discovered by Nawaschin.
Question 8. भारतीय भ्रूण-विज्ञान के जनक है – (2017)
(क) राम उदार
(ख) बी०एन० प्रसाद
(ग) पी०एन० मेहरा
(घ) पी० माहेश्वरी
Answer: (घ) पी० माहेश्वरी
In simple words: प्रोफेसर पंचानन माहेश्वरी (P. Maheshwari) को भारत में भ्रूण-विज्ञान का जनक माना जाता है।
🎯 Exam Tip: Remember Professor P. Maheshwari for his pioneering work on plant embryology in India.
Question 9. नारियल का रेशे उत्पन्न करने वाला भाग है – (2016)
(क) बाह्य फलभित्ति
(ख) अन्तः फलभित्ति
(ग) मध्य फलभित्ति
(घ) तना तथा पत्ती
Answer: (ग) मध्य फलभित्ति
In simple words: नारियल के ऊपर जो रेशा होता है, वह उसकी बीच वाली परत यानी मध्य फलभित्ति (mesocarp) से बनता है।
🎯 Exam Tip: The fibrous husk of coconut is the mesocarp, whereas the edible white part is the endosperm.
Question 10. बहुभ्रूणता खोजी गई (2017)
(क) ल्यूवेनहॉक द्वारा
(ख) माहेश्वरी द्वारा
(ग) विन्कलर द्वारा
(घ) कूपर द्वारा
Answer: (क) ल्यूवेनहॉक द्वारा
In simple words: एंटोनी वॉन ल्यूवेनहॉक ने सबसे पहले संतरे के बीजों में एक से अधिक भ्रूण (बहुभ्रूणता) की खोज की थी।
🎯 Exam Tip: Leeuwenhoek discovered polyembryony in 1719 in Citrus plants (orange).
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. युक्तपुंकेसरी दशा किसे कहते हैं? (2017)
Answer: जब किसी पुष्प के सभी पुंकेसर (stamens) आपस में पूरी तरह जुड़े या संलग्न होते हैं, तो इस स्थिति को युक्तपुंकेसरी (synandrous) दशा कहते हैं; जैसे-Cucurbitaceae (कद्दू, लौकी) कुल के पौधों में। यह व्यवस्था परागण की प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने में मदद करती है।
In simple words: जब फूल के सारे पुंकेसर (नर भाग) आपस में जुड़े रहते हैं, तो उसे युक्तपुंकेसरी दशा कहते हैं।
🎯 Exam Tip: Provide 'Cucurbitaceae' as the standard textbook example for synandrous condition.
Question 2. चतुर्दी पुंकेसर किसे कहते हैं? (2017)
Answer: जब एक पुष्प में कुल छह पुंकेसर होते हैं, जिनमें से चार पुंकेसर लंबे (भीतर की ओर) तथा दो पुंकेसर छोटे (बाहर की ओर) होते हैं, तो इस अवस्था को चतुर्दी (tetradynamous) पुंकेसरी कहते हैं; जैसे-सरसों (Mustard) के पुष्प में। यह व्यवस्था परागकणों के वितरण को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने में सहायक होती है।
In simple words: यदि फूल में छह पुंकेसर हों, जिनमें से चार लंबे और दो छोटे हों, तो इसे चतुर्दी पुंकेसर कहते हैं (जैसे सरसों में)।
🎯 Exam Tip: Mention the specific arrangement (4 long + 2 short) and give 'Mustard' as the example to score full marks.
Question 3. जौ या गेहूँ के 100 दाने बनाने के लिए कितने अर्द्धसूत्री विभाजन की आवश्यकता होगी? (2017, 18)
Answer: जौ या गेहूँ के 100 दाने (बीज) बनाने के लिए 125 अर्द्धसूत्री विभाजनों की आवश्यकता होगी। इसमें 100 नर युग्मक बनाने के लिए 25 विभाजन (चूंकि 1 विभाजन से 4 परागकण बनते हैं) और 100 मादा युग्मक बनाने के लिए 100 विभाजन (चूंकि 1 विभाजन से केवल 1 क्रियाशील अंड बनता है) होते हैं। यह गणना कुल 100 सफल निषेचनों को दर्शाती है जो दानों के निर्माण के लिए आवश्यक हैं।
In simple words: 100 दाने बनाने के लिए 100 परागकण (25 विभाजन) और 100 अंड कोशिकाएं (100 विभाजन) चाहिए, इसलिए कुल 125 विभाजन होंगे।
🎯 Exam Tip: Use the formula: n + (n/4) for monocot seeds, where n is the number of seeds. (100 + 25 = 125).
Question 4. परिपक्व परागकोष की अनुप्रस्थ काट का चित्र बनाइए। (2015, 17)
Answer: एक परिपक्व परागकोष की अनुप्रस्थ काट (T.S. of mature anther) में मुख्यतः चार परागधानियाँ होती हैं जिनमें बाह्यत्वचा (epidermis), अंतःत्वचा (endothecium), मध्य परतें (middle layers), टेपीटम (tapetum) और परागकण (pollen grains) उपस्थित होते हैं। यह चित्र परागकोश के फटने के समय उसके आंतरिक अंगों की स्थिति को दिखाता है।
In simple words: यह परागकोश की अंदरूनी संरचना है जिसमें चार कोने होते हैं और हर कोने में परागकण भरे होते हैं।
🎯 Exam Tip: Label the four layers from outer to inner: Epidermis -> Endothecium -> Middle layers -> Tapetum. Clearly mark 'Pollen grains' inside.
Question 5. ऊर्ध्ववर्ती एवं अधोवर्ती अण्डाशयों की लम्ब काट का नामांकित चित्र बनाइए। (2015)
Answer: ऊर्ध्ववर्ती (superior) अण्डाशय में पुष्प के अन्य भाग पुष्पासन पर अण्डाशय के नीचे से निकलते हैं, जबकि अधोवर्ती (inferior) अण्डाशय में पुष्प के अन्य भाग अण्डाशय के ऊपर से निकलते हैं। यह अंतर पौधों के वर्गीकरण और उनके जैविक विकास को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
In simple words: ऊर्ध्ववर्ती में अण्डाशय फूल के बाकी हिस्सों से ऊपर होता है, जबकि अधोवर्ती में वह बाकी हिस्सों के नीचे दबा होता है।
🎯 Exam Tip: Draw superior ovary showing thalamus below it, and inferior ovary showing thalamus enclosing it, with calyx and corolla on top.
Question 6. पॉलीगोनम प्रकार के भ्रूणकोष में कितने केन्द्र उपस्थित होते हैं? (2017)
Answer: पॉलीगोनम प्रकार का भ्रूणकोष आवृतबीजी पौधों में सबसे सामान्य प्रकार का भ्रूणकोष है, जो परिपक्व होने पर 8-केन्द्रकीय (8-nucleate) तथा 7-कोशिकीय (7-celled) होता है। इसके विकास के दौरान क्रमिक केन्द्रकीय विभाजन होते हैं जो इस निश्चित प्रारूप को जन्म देते हैं।
In simple words: पॉलीगोनम प्रकार के भ्रूणकोष में कुल 8 केन्द्रक (nuclei) होते हैं।
🎯 Exam Tip: Remember that Polygonum type is monosporic, 7-celled, and 8-nucleate. Keep these numbers on your fingertips.
Question 7. भ्रूणपोष केन्द्रक का निर्माण कैसे होता है? इसमें उपस्थित गुणसूत्रों की संख्या कितनी होती (2015)
Answer: भ्रूणपोष केन्द्रक (Endosperm nucleus) का निर्माण भ्रूणकोष के भीतर द्विगुणित द्वितीयक केन्द्रक (2n) तथा एक अगुणित नर युग्मक (n) के संलयन (त्रि-संलयन) के फलस्वरूप होता है। त्रि-संलयन के कारण इसमें उपस्थित गुणसूत्रों की संख्या त्रिगुणित (triploid, 3n) होती है। यह केन्द्रक आगे विभाजित होकर भ्रूण को निरंतर पोषण पहुँचाने का कार्य करता है।
In simple words: भ्रूणपोष केन्द्रक दो ध्रुवीय केन्द्रकों और एक नर युग्मक के मिलने से बनता है। इसमें गुणसूत्रों की संख्या त्रिगुणित (3n) होती है।
🎯 Exam Tip: Clearly specify the combination: Secondary Nucleus (2n) + Male Gamete (n) = PEN (3n). Explicitly mention 'triploid' or '3n'.
Question 8. निमीलिता को परिभाषित कीजिए तथा एक उदाहरण भी दीजिए। (2014)
Answer: कुछ द्विलिंगी पुष्प कभी भी नहीं खिलते हैं (सदैव बंद रहते हैं), पुष्पों के इस लक्षण को निमीलिता (Cleistogamy) कहते हैं; जैसे-कनकौआ (Commelina), गुलमेहँदी (Impatiens), बनफसा (Viola) आदि। ऐसे बंद पुष्पों में स्व-परागण निश्चित रूप से संपन्न होता है क्योंकि बाहरी परागकणों का प्रवेश पूरी तरह असंभव होता है।
In simple words: फूलों का हमेशा बंद रहना जिससे उनमें केवल स्व-परागण ही हो सके, निमीलिता कहलाता है; जैसे कनकौआ में।
🎯 Exam Tip: Commelina (कनकौआ) is the most preferred textbook example. Define it as an adaptation that guarantees seed set even in the absence of pollinators.
Question 9. भ्रूणपोष का विकास आवृतबीजी पौधों में किस प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है? (2017)
Answer: आवृतबीजी पौधों में भ्रूणपोष (endosperm) का विकास द्विनिषेचन (double fertilization) के अंतर्गत होने वाली त्रि-संलयन (triple fusion) की प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है। यह त्रिगुणित संरचना विकासशील भ्रूण के लिए निरंतर खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करती है।
In simple words: भ्रूणपोष का विकास नर युग्मक और द्वितीयक केन्द्रक के मिलने (त्रि-संलयन) के बाद होता है, जो विकासशील भ्रूण को भोजन देता है।
🎯 Exam Tip: Use the term 'Triple fusion' (त्रि-संलयन) as it is the exact process that initiates endosperm development.
Question 10. प्रजनन की पाल्मेला स्टेज किस पादप में पाई जाती है? (2015)
Answer: प्रजनन की पाल्मेला स्टेज (palmella stage) क्लेमाइडोमोनास (Chlamydomonas) नामक एककोशिकीय हरे शैवाल में पाई जाती है। यह प्रतिकूल परिस्थितियों में कोशिका की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण अनुकूलन है।
In simple words: प्रतिकूल परिस्थितियों में क्लेमाइडोमोनास की कोशिकाएं विभाजित होकर एक लसदार परत में सुरक्षित हो जाती हैं, जिसे पाल्मेला स्टेज कहते हैं।
🎯 Exam Tip: The correct spelling of 'Chlamydomonas' (क्लेमाइडोमोनास) must be written to ensure full marks.
Question 11. पालिनिया का नामांकित चित्र बनाइये। (2017)
Answer: पालिनिया (Pollinia) आक (Calotropis) जैसे पौधों के परागकोशों में पाया जाने वाला एक विशिष्ट परागकण पिंड है। इस चित्र में कार्पसकुलम (corpusculum), कॉडिकल (caudicle) और पॉलिनिया (pollinia) की स्पष्ट स्थिति दर्शाई गई है जो कीटों द्वारा परागण में सहायक होती है।
In simple words: यह आक (मदार) के फूल की एक विशेष रचना है जिसमें बहुत सारे परागकण एक थैली जैसे पिंड में बंधे होते हैं ताकि कीट उन्हें एक साथ ले जा सकें।
🎯 Exam Tip: While drawing pollinia, label the key parts: 'Corpusculum' (चिपचिपा भाग), 'Caudicle' (डंठल), and 'Pollinia' (पराग पिंड) carefully.
Question 12. निम्न में अन्तर कीजिए – (2017)
(i) उभयलिंगाश्रयी तथा एकलिंगाश्रयी।
(ii) समकालपक्वता तथा पूर्वपुँपक्वता।
(iii) भ्रूणपोषी तथा अभ्रूणपोषी बीज।
Answer:
(i) उभयलिंगाश्रयी तथा एकलिंगाश्रयी: उभयलिंगाश्रयी (Monoecious) पौधों में नर तथा मादा पुष्प एक ही पौधे पर अलग-अलग स्थानों पर उपस्थित होते हैं; जैसे-लौकी, कद्दू, मक्का। इसके विपरीत, एकलिंगाश्रयी (Dioecious) पौधों में नर तथा मादा पुष्प दो अलग-अलग पौधों पर पाए जाते हैं; जैसे-पपीता, शहतूत। यह पौधों में स्व-परागण को रोकने की एक प्राकृतिक विधि है।
(ii) समकालपक्वता तथा पूर्वपुँपक्वता: समकालपक्वता (Homogamy) में पुष्प के परागकोश तथा वर्तिकाग्र एक ही समय पर परिपक्व होते हैं, जिससे स्व-परागण सुनिश्चित होता है; जैसे-सदाबहार (Vinca rosea)। पूर्वपुँपक्वता (Protandry) में पुष्प के परागकोश (पुमंग), जायांग से पहले परिपक्व हो जाते हैं, जिससे पर-परागण को बढ़ावा मिलता है; जैसे-गुड़हल, कपास।
(iii) भ्रूणपोषी तथा अभ्रूणपोषी बीज: भ्रूणपोषी (Endospermic / Albuminous) बीजों में भ्रूण के विकास और बीज के अंकुरण तक भ्रूणपोष सुरक्षित रहता है, जिससे बीजपत्र पतले होते हैं; जैसे-गेहूँ, मक्का, अरंडी। अभ्रूणपोषी (Non-endospermic / Exalbuminous) बीजों में भ्रूण के विकास के दौरान भ्रूणपोष पूरी तरह समाप्त हो जाता है और भोजन बीजपत्रों में संचित रहता है, जिससे वे मोटे हो जाते हैं; जैसे-चना, मटर, सेम।
In simple words:
(i) उभयलिंगाश्रयी में नर-मादा फूल एक ही पौधे पर होते हैं, जबकि एकलिंगाश्रयी में अलग-अलग पौधों पर होते हैं।
(ii) समकालपक्वता में नर-मादा भाग साथ में पकते हैं, जबकि पूर्वपुँपक्वता में नर भाग पहले पकता है।
(iii) भ्रूणपोषी बीजों में भ्रूणपोष (भोजन) बचा रहता है, जबकि अभ्रूणपोषी बीजों में यह विकास के दौरान खत्म हो जाता है।
🎯 Exam Tip: Always write differences under separate headings with proper examples. Correct scientific terms like 'Monoecious' and 'Dioecious' will fetch full marks.
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. आवृतबीजों में नर युग्मकोद्भिद का संक्षिप्त विवरण दीजिए। (2009, 16)
या
एक आवृतबीजी पौधे के परागकण के अंकुरण की विभिन्न अवस्थाओं का वर्णन कीजिए। (2010, 12, 15, 16)
Answer: आवृतबीजी पौधों में लघुबीजाणु या परागकण (pollen grain) ही नर युग्मकोद्भिद (male gametophyte) की प्रथम कोशिका है। परागकोश के स्फुटन से पूर्व ही इसके भीतर परागकण का अंकुरण प्रारंभ हो जाता है। सर्वप्रथम परागकण का केन्द्रक समसूत्री विभाजन द्वारा दो केन्द्रकों में विभाजित हो जाता है – एक बड़ा वर्दी केन्द्रक या नली केन्द्रक (vegetative or tube nucleus) तथा एक छोटा जनन केन्द्रक (generative nucleus)। वर्दी केन्द्रक कोशिका द्रव्य में तैरता रहता है और परागनली के विकास को नियंत्रित करता है।
परागण की क्रिया द्वारा परागकण स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र (stigma) पर पहुँचते हैं। यहाँ वे शर्करा युक्त स्राव को अवशोषित कर फूल जाते हैं। इसके बाद परागकण का अंतःचोल (intine) जनन छिद्र (germ pore) से होकर एक नली के रूप में बाहर निकलता है, जिसे परागनली (pollen tube) कहते हैं। परागनली वर्तिका के ऊतकों से होती हुई बीजाण्ड की ओर बढ़ती है। इसी दौरान जनन केन्द्रक समसूत्री विभाजन द्वारा विभाजित होकर दो अचल नर युग्मकों (male gametes) का निर्माण करता है। इस प्रकार, तीन केन्द्रक युक्त परागनली ही परिपक्व नर युग्मकोद्भिद का प्रतिनिधित्व करती है।
In simple words: परागकण ही नर युग्मकोद्भिद की शुरुआत है। पहले यह दो भागों (वर्दी और जनन केन्द्रक) में बंटता है। वर्तिकाग्र पर पहुँचने के बाद यह एक नली (परागनली) बनाता है जिसमें दो नर युग्मक बनते हैं जो निषेचन में भाग लेते हैं।
🎯 Exam Tip: Draw the developmental stages of pollen showing the division of generative cell and tube nucleus. Highlight that the mature male gametophyte is a 3-celled structure.
Question 2. वायु परागण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2016)
या
वायु परागित पुष्पों की विशेषताएँ लिखिए। (2017)
Answer: जब परागकणों का एक पुष्प से दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण वायु के माध्यम से होता है, तो इसे वायु परागण (Anemophily) कहते हैं तथा ऐसे पुष्पों को वायु परागित पुष्प कहते हैं। वायु परागित पुष्पों में निम्नलिखित मुख्य विशेषताएँ पाई जाती हैं –
(i) ये पुष्प छोटे, अनाकर्षक, रंगहीन, गंधहीन तथा मकरंद रहित होते हैं क्योंकि इन्हें कीटों को आकर्षित करने की आवश्यकता नहीं होती।
(ii) वायु परागण में बहुत सारे परागकणों का नुकसान होता है, इसलिए ये पुष्प अत्यधिक मात्रा में परागकण उत्पन्न करते हैं (जैसे-मक्का का एक पौधा लगभग 2 करोड़ परागकण बनाता है)।
(iii) परागकण बहुत छोटे, हल्के, शुष्क तथा चिकने होते हैं, जिससे वे हवा में आसानी से उड़ सकें। कुछ पौधों (जैसे-चीड़) में परागकण पंखयुक्त (winged) होते हैं।
(iv) इनके पुंकेसर लंबे तथा पुष्प के बाहर निकले होते हैं ताकि हवा के झोंकों से परागकण आसानी से बिखर सकें।
(v) इनका वर्तिकाग्र लंबा, शाखित या रोमयुक्त (feathery) होता है, जिससे हवा में उड़ते हुए परागकणों को आसानी से पकड़ा जा सके; जैसे मक्का की भुट्टे पर लटकने वाले लंबे धागे।
(vi) पुंकेसर के परागकोश बहुधा मुक्तदोली (versatile) होते हैं, जो हवा में आसानी से डोल सकते हैं।
(vii) ये पुष्प प्रायः एकलिंगी होते हैं और पत्तियों के निकलने से पहले ही खिल जाते हैं ताकि पत्तियों से परागण में बाधा न आए।
In simple words: हवा के द्वारा होने वाले परागण को वायु परागण कहते हैं। इसके फूल बहुत छोटे, बिना खुशबू और रंग के होते हैं, लेकिन इनके परागकण बहुत हल्के होते हैं और वर्तिकाग्र चिपचिपा या पंख जैसा होता है ताकि वे हवा से उड़ते हुए परागकणों को पकड़ सकें।
🎯 Exam Tip: List at least 4 anatomical adaptations of wind-pollinated flowers. The feathery stigma (रोमयुक्त वर्तिकाग्र) and versatile anthers (मुक्तदोली परागकोश) are highly expected keywords.
Question 3. आवृतबीजी पौधों में द्विनिषेचन की क्रिया का सचित्र वर्णन कीजिए। (2011)
या
द्विनिषेचन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2009, 11, 12, 14, 15, 16)
या
दोहरा निषेचन को परिभाषित कीजिए। (2017)
Answer: आवृतबीजी पौधों में निषेचन की क्रिया दो बार संपन्न होती है, जिसे द्विनिषेचन या दोहरा निषेचन (Double Fertilization) कहते हैं। इसकी खोज सर्वप्रथम एस० जी० नावाशिन (S.G. Nawaschin) ने 1898 में की थी। इसकी पूरी प्रक्रिया निम्नलिखित दो मुख्य चरणों में संपन्न होती है –
(i) युग्मक संलयन या वास्तविक निषेचन (Syngamy): परागनली से मुक्त होने वाले दो नर युग्मकों में से एक अगुणित नर युग्मक (n), मादा अंड कोशिका (n) के साथ संलयित होकर एक द्विगुणित युग्मनज (zygote, 2n) का निर्माण करता है। यही युग्मनज आगे चलकर भ्रूण (embryo) में विकसित होता है।
(ii) त्रि-संलयन (Triple Fusion): दूसरा अगुणित नर युग्मक (n), भ्रूणकोष के मध्य में स्थित द्विगुणित द्वितीयक केन्द्रक (secondary nucleus, 2n) के साथ संलयन करता है। चूँकि इसमें तीन केन्द्रकों का संलयन होता है, अतः इसे त्रि-संलयन कहते हैं। इसके फलस्वरूप त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक (PEN, 3n) बनता है जो विभाजित होकर भ्रूणपोष (endosperm) बनाता है।
एक ही भ्रूणकोष के भीतर इन दोनों संलयनों (युग्मक संलयन तथा त्रि-संलयन) के होने के कारण ही इसे द्विनिषेचन कहते हैं। यह आवृतबीजी पौधों का एक अत्यंत विशिष्ट और अनिवार्य लक्षण है।
In simple words: फूलों वाले पौधों में दो बार निषेचन होता है। पहला नर युग्मक अंड कोशिका से मिलकर बच्चा (भ्रूण) बनाता है, और दूसरा नर युग्मक बीच वाले केन्द्रक से मिलकर भोजन (भ्रूणपोष) बनाता है। इसी दोहरी क्रिया को द्विनिषेचन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: Clearly write both equations: (1) Male Gamete (n) + Egg Cell (n) -> Zygote (2n), and (2) Male Gamete (n) + Secondary Nucleus (2n) -> PEN (3n). Mention the discoverer 'Nawaschin'.
Question 4. द्विनिषेचन के पश्चात् किसी आवृतबीजी पौधे के बीजाण्ड में होने वाले बहुत से परिवर्तनों का उल्लेख कीजिए। (2017)
Answer: द्विनिषेचन की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद बीजाण्ड (ovule) के भीतर अनेक संरचनात्मक और कार्यिकी परिवर्तन होते हैं, जो अंततः बीजाण्ड को बीज (seed) में बदल देते हैं। ये मुख्य परिवर्तन निम्नलिखित हैं –
(i) बाह्य अध्यावरण (Outer Integument): यह बीजाण्ड की बाहरी परत होती है जो कठोर होकर बीज का बाहरी आवरण यानी बीजचोल या टेस्टा (testa) बनाती है।
(ii) अन्तः अध्यावरण (Inner Integument): यह आंतरिक परत पतली झिल्ली के रूप में बीज का अन्तःकवच या टेगमैन (tegmen) बनाती है।
(iii) बीजाण्डवृत्त (Funiculus): यह डंठल जैसी संरचना नष्ट हो जाती है या सूखकर बीज का वृन्त बनाती है। लीची में इससे एक खाद्य मांसल ऊतक एरिल (aril) बनता है।
(iv) बीजाण्डद्वार (Micropyle): यह वैसे ही बना रहता है और बीज में एक छोटे छिद्र के रूप में कार्य करता है, जिससे बीज अंकुरण के समय ऑक्सीजन और जल अवशोषित करता है।
(v) बीजाण्डकाय (Nucellus): यह प्रायः भ्रूण के विकास के दौरान पूरी तरह समाप्त हो जाता है, परन्तु कुछ पौधों (जैसे-काली मिर्च) में यह एक पतली परत के रूप में बचा रहता है जिसे परिभ्रूणपोष (perisperm) कहते हैं।
(vi) युग्मनज (Zygote): द्विगुणित युग्मनज बार-बार विभाजित होकर मुख्य भ्रूण (embryo) का निर्माण करता है।
(vii) प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक (PEN): त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक तेजी से विभाजित होकर भ्रूणपोष (endosperm) बनाता है जो भ्रूण को पोषण देता है।
(viii) सहायक कोशिकाएं एवं प्रतिमुख कोशिकाएं (Synergids & Antipodal cells): ये सभी कोशिकाएं निषेचन के तुरंत बाद अपघटित या नष्ट हो जाती हैं। ये क्रमिक परिवर्तन नए पौधे के जीवन चक्र की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत अनुकूलित हैं।
In simple words: निषेचन के बाद बीजाण्ड बीज बन जाता है। बाहरी परत छिलका (बीजचोल) बनती है, युग्मनज से भ्रूण (छोटा पौधा) बनता है, और प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक से भोजन (भ्रूणपोष) बनता है, जबकि बाकी फालतू कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं।
🎯 Exam Tip: Memorize the conversions as direct matching terms: Ovule -> Seed, Ovary -> Fruit, Zygote -> Embryo, PEN -> Endosperm. This table of changes is highly scoring.
Question 5. भ्रूणकोष तथा भ्रूणपोष की तुलना कीजिए। (2010, 14, 15, 17)
Answer: भ्रूणकोष (Embryo sac) तथा भ्रूणपोष (Endosperm) के मध्य मुख्य तुलनात्मक विभेद निम्नलिखित तालिका में स्पष्ट किया गया है –
| क्र० सं० | भ्रूणकोष (Embryo sac) | भ्रूणपोष (Endosperm) |
|---|---|---|
| 1. | यह मादा युग्मकोद्भिद् (female gametophyte) का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें अंड कोशिका होती है। | यह एक पोषक ऊतक (nutritive tissue) है जो विकासशील भ्रूण को पोषण प्रदान करता है। |
| 2. | यह निषेचन से पहले क्रियाशील गुरुबीजाणु से विकसित होता है। | यह निषेचन के पश्चात् त्रि-संलयन (triple fusion) की क्रिया के फलस्वरूप बनता है। |
| 3. | इसकी सभी कोशिकाएं (अंड, सहायक, प्रतिमुख) अगुणित (haploid, n) होती हैं। | यह आवृतबीजी पौधों में त्रिगुणित (triploid, 3n) होता है। |
| 4. | यह एक निश्चित 7-कोशिकीय तथा 8-केन्द्रकीय संरचना होती है। | यह एक अनिश्चित बहुकोशिकीय संरचना होती है जिसमें भोजन संचित रहता है। |
| 5. | यह सभी आवृतबीजी पौधों के बीजाण्ड में अनिवार्य रूप से पाया जाता है। | यह बीज बनने के दौरान कुछ पौधों में पूरी तरह समाप्त हो जाता है (अभ्रूणपोषी)। |
In simple words: भ्रूणकोष वह थैली है जहाँ अंडाणु (मादा भाग) होता है और यह निषेचन से पहले बनता है, जबकि भ्रूणपोष वह भोजन है जो निषेचन के बाद बनता है ताकि बच्चे (भ्रूण) को बढ़ने में मदद मिल सके।
🎯 Exam Tip: The ploidy difference is key: Embryo sac is haploid (n) and Endosperm is triploid (3n). Highlighting this difference will ensure full marks.
Question 6. निम्न पर टिप्पणी लिखिए –
(क) अनिषेकफलन (2014, 17)
(ख) बहुभ्रूणता (2010, 14, 15, 16)
या
अनिषेकफलन एवं बहुभ्रूणता में अन्तर लिखिए। (2017)
Answer:
(क) अनिषेकफलन (Parthenocarpy): बिना निषेचन के ही अण्डाशय से सीधे फल के विकास की प्रक्रिया को अनिषेकफलन कहते हैं। इस प्रकार बने फल पूर्णतः बीज रहित (seedless) होते हैं; जैसे-केला, अंगूर, अनानास। यह प्राकृतिक रूप से भी होता है और इसे ऑक्सिन व जिबरेलिन जैसे पादप हार्मोन के छिड़काव द्वारा कृत्रिम रूप से भी प्रेरित किया जा सकता है। व्यापारिक दृष्टिकोण से बीज रहित फल अत्यधिक मूल्यवान होते हैं।
(ख) बहुभ्रूणता (Polyembryony): एक ही बीजाण्ड या बीज में एक से अधिक भ्रूणों (embryos) के उत्पन्न होने की प्रक्रिया को बहुभ्रूणता कहते हैं। इसकी खोज सर्वप्रथम एंटोनी वॉन ल्यूवेनहॉक ने 1719 में संतरे (Citrus) के बीजों में की थी। अनावृतबीजी पौधों में यह एक सामान्य घटना है परंतु आवृतबीजी पौधों में कम पाई जाती है। यह भ्रूणकोष में एक से अधिक अंड कोशिकाओं के निषेचन या बीजाण्डकाय/अध्यावरण की कोशिकाओं से अतिरिक्त भ्रूणों के बनने के कारण हो सकती है।
In simple words:
(क) अनिषेकफलन का मतलब है बिना निषेचन के बिना बीज वाला फल बनना (जैसे केला)।
(ख) बहुभ्रूणता का मतलब है एक ही बीज के अंदर बहुत सारे बच्चों (भ्रूणों) का बनना (जैसे संतरे में)।
🎯 Exam Tip: Provide clear definitions and precise examples for both. State 'seedless fruits' for parthenocarpy and 'multiple embryos' for polyembryony as the core concepts.
Question 7. असंगजनन (apomixis) क्या है? उपयुक्त उदाहरण देकर इस प्रक्रिया को समझाइए। (2014, 17)
या
अपबीजाणुता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2015)
Answer: कभी-कभी पौधों के जीवन चक्र में बिना युग्मक संलयन (fertilization) तथा बिना अर्धसूत्री विभाजन (meiosis) के ही नए पौधे या बीज का विकास हो जाता है, जिसे असंगजनन (Apomixis) कहते हैं। इसकी खोज विंकर (Winkler) ने 1908 में की थी। यह मुख्य रूप से निम्नलिखित दो रूपों में पाया जाता है –
(i) कायिक जनन (Vegetative Reproduction): जब पौधे का विकास बीज के बिना किसी कली, तने या पत्ती से होता है; जैसे-गन्ना, आलू।
(ii) अनिषेकबीजता (Agamospermy): लैंगिक जनन की अनुपस्थिति में बीज का निर्माण अनिषेकबीजता कहलाता है। इसमें अर्धसूत्री विभाजन न होने के कारण द्विगुणित अण्ड कोशिका या बीजाण्डकाय/अध्यावरण की कोई द्विगुणित कोशिका सीधे भ्रूण बना देती है। इसे अपबीजाणुता (Apospory) भी कहते हैं। इसकी खोज रोजनबर्ग ने की थी; जैसे-क्रेपिस (Crepis), पार्थिनियम। यह विधि संकर बीजों के वांछित गुणों को पीढ़ियों तक अक्षुण्ण रखने में सहायक होती है।
In simple words: जब बिना निषेचन और बिना गुणसूत्रों के बंटवारे के सीधे ही बीज या नया पौधा बन जाता है, तो उसे असंगजनन कहते हैं। यह किसानों के लिए संकर पौधों के अच्छे गुण बचाए रखने में बहुत काम आता है।
🎯 Exam Tip: Clearly distinguish between vegetative reproduction and agamospermy under apomixis. Mention that apomixis is a form of asexual reproduction that mimics sexual reproduction.
Question 8. अपयुग्युमन पर टिप्पणी लिखें। (2017)
Answer: अपयुगमन (Apogamy) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अगुणित भ्रूणकोष (haploid embryo sac) की अंड कोशिका (egg cell) के अतिरिक्त किसी अन्य अगुणित कोशिका, जैसे सहायक कोशिका (synergid) या प्रतिमुख कोशिका (antipodal cell), से बिना निषेचन के सीधे ही भ्रूण (embryo) का विकास हो जाता है। चूँकि इस प्रक्रिया में नर और मादा युग्मकों का संलयन नहीं होता, इसलिए बनने वाला नया पौधा आनुवंशिक रूप से अगुणित (haploid, n) होता है; जैसे-एरीथ्रिया (Erythrea), लिलियम (Lilium) आदि। यह पादप प्रजनन में शुद्ध वंशक्रम तैयार करने के लिए एक अत्यंत उपयोगी जैविक घटना है।
In simple words: जब भ्रूणकोष की अंडाणु के अलावा कोई दूसरी सहेली कोशिका (जैसे सहायक कोशिका) बिना निषेचन के ही सीधे बच्चे (भ्रूण) में बदल जाती है, तो उसे अपयुगमन कहते हैं। इससे बनने वाला पौधा अगुणित होता है।
🎯 Exam Tip: Define Apogamy clearly as development of embryo from any haploid cell of the embryo sac *other than the egg cell* without fertilization. Give 'Lilium' as an example.
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
Question 1. पुष्पीय पादपों में लघुबीजाणुजनन का सचित्र वर्णन कीजिए। (2011)
या
केवल नामांकित चित्रों की सहायता से आवृतबीजी पौधों में लघुबीजाणुजनन का वर्णन कीजिए। (2009, 11)
या
संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए – ‘लघुबीजाणुजनन’। (2010, 11, 14, 16)
या
परागकोश के विकास की विभिन्न अवस्थाओं का चित्रों की सहायता से वर्णन कीजिए। (2017)
Answer: लघुबीजाणुजनन (Microsporogenesis): परागकोश के भीतर परागकण मातृ कोशिकाओं से अर्धसूत्री विभाजन द्वारा अगुणित लघुबीजाणुओं या परागकणों के निर्माण की प्रक्रिया को लघुबीजाणुजनन कहते हैं। परागकोश के विकास की प्रारंभिक अवस्था में यह एक समरूप मृदूतकीय (parenchymatous) कोशिकाओं का समूह होता है जो बाह्यत्वचा (epidermis) द्वारा घिरा रहता है। शीघ्र ही यह चार पालियों वाली संरचना में बदल जाता है। प्रत्येक पाली में बाह्यत्वचा के नीचे कुछ अधःस्तरीय कोशिकाएँ (hypodermal cells) आकार में बड़ी हो जाती हैं जिनका जीवद्रव्य सघन और केन्द्रक स्पष्ट हो जाता है। इन कोशिकाओं को प्रप्रसू कोशिकाएँ (archesporial cells) कहते हैं।
प्रप्रसू कोशिका एक परिणत विभाजन (periclinal division) द्वारा विभाजित होकर दो कोशिकाएँ बनाती है –
1. प्राथमिक भित्तीय कोशिका (Primary Parietal Cell): यह बाहर की ओर होती है और विभाजित होकर परागकोश की भित्ति (epidermis के नीचे endothecium, middle layers, tapetum) का निर्माण करती है। सबसे भीतरी परत टेपीटम (tapetum) विकासशील परागकणों को पोषण प्रदान करती है।
2. प्राथमिक बीजाणुजनक कोशिका (Primary Sporogenous Cell): यह भीतर की ओर होती है और बिना विभाजन के सीधे या कुछ समसूत्री विभाजनों के बाद लघुबीजाणु मातृ कोशिका (microspore mother cell, \( 2n \)) के रूप में कार्य करती है।
प्रत्येक लघुबीजाणु मातृ कोशिका (\( 2n \)) में अर्धसूत्री विभाजन (meiosis) होता है, जिसके फलस्वरूप चार अगुणित (\( n \)) लघुबीजाणु बनते हैं। ये चारों लघुबीजाणु प्रारंभ में एक समूह में जुड़े रहते हैं जिसे लघुबीजाणु चतुष्क (microspore tetrad) कहते हैं। यह चतुष्क मुख्यतः चतुष्फलकीय (tetrahedral) या समद्विपाश्विक (isobilateral) रूप में व्यवस्थित होता है। परागकोश के परिपक्व व शुष्क होने पर ये आपस में अलग हो जाते हैं और परागकण (pollen grains) कहलाते हैं। यह वैज्ञानिक विधि पौधों में स्वस्थ परागकणों के निर्माण का आधार है।
In simple words: परागकोश के विकास के दौरान कुछ विशेष कोशिकाएं प्रप्रसू कोशिकाएं बनाती हैं। ये कोशिकाएं विभाजित होकर परागकोश की दीवारें और अंदर परागकण मातृ कोशिकाएं बनाती हैं, जिनमें अर्धसूत्री विभाजन होने से चार-चार अगुणित परागकण बनते हैं।
🎯 Exam Tip: Draw and label the schematic flow of divisions starting from Archesporial cell -> Primary Parietal & Primary Sporogenous cells. Emphasize the reduction division (अर्धसूत्री विभाजन) in Microspore Mother Cell.
Question 2. गुरुबीजाणुजनन क्या है? आवृतबीजी पौधों में मादा युग्मकोद्भिद के परिवर्धन का वर्णन कीजिए। (2010, 11)
या
चित्रों की सहायता से एक सामान्य 8-केन्द्रकीय भ्रूणकोष के विकास का वर्णन कीजिए। (2009, 11, 12)
या
आवृतबीजी पौधों में भ्रूणकोष कैसे बनता है? चित्रों की सहायता से समझाइए। विभिन्न केन्द्रकों के कार्य की विवेचना कीजिए। (2010)
या
आवृतबीजी पौधों में गुरुबीजाणुजनन प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। (2014, 17)
या
‘आवृतबीजियों में मादा युग्मकोद्भिद्’ पर टिप्पणी लिखिए। (2015)
या
भ्रूणकोष का नामांकित चित्र बनाइए। (2017)
Answer: गुरुबीजाणुजनन (Megasporogenesis): गुरुबीजाणु मातृ कोशिका से अर्धसूत्री विभाजन द्वारा अगुणित गुरुबीजाणुओं (megaspores) के निर्माण की प्रक्रिया को गुरुबीजाणुजनन कहते हैं। बीजाण्डकाय (nucellus) के बीजाण्डद्वारी हिस्से में एक अधःस्तरीय कोशिका बड़ी होकर प्रप्रसू कोशिका बनाती है, जो विभाजित होकर प्राथमिक भित्तीय कोशिका तथा प्राथमिक बीजाणुजनक कोशिका बनाती है। बीजाणुजनक कोशिका बिना विभाजन के सीधे गुरुबीजाणु मातृ कोशिका (\( 2n \)) की तरह कार्य करती है। इसमें अर्धसूत्री विभाजन होने से चार अगुणित गुरुबीजाणु बनते हैं जो एक रैखिक क्रम (linear tetrad) में व्यवस्थित होते हैं। इनमें से निभागी (chalazal) सिरे का केवल एक गुरुबीजाणु सक्रिय रहता है तथा शेष तीन बीजाण्डद्वारी सिरे के गुरुबीजाणु नष्ट हो जाते हैं।
मादा युग्मकोद्भिद (भ्रूणकोष) का परिवर्धन (Development of Embryo Sac):
सक्रिय गुरुबीजाणु का केन्द्रक समसूत्री विभाजन द्वारा विभाजित होकर दो केन्द्रक बनाता है जो दोनों विपरीत ध्रुवों पर चले जाते हैं। यहाँ दोनों ध्रुवों पर दो और क्रमिक समसूत्री विभाजनों द्वारा चार-चार केन्द्रक बन जाते हैं (कुल 8 केन्द्रक)। प्रत्येक ध्रुव से एक-एक केन्द्रक मध्य में आकर संलयित होकर द्विगुणित द्वितीयक केन्द्रक (secondary nucleus, \( 2n \)) बनाता है। बीजाण्डद्वारी सिरे पर तीन केन्द्रक अंड उपकरण (egg apparatus = 1 अंड कोशिका + 2 सहायक कोशिकाएँ) बनाते हैं। निभागी सिरे पर तीन केन्द्रक प्रतिमुख कोशिकाएँ (antipodal cells) बनाते हैं। इस प्रकार एक परिपक्व भ्रूणकोष 7-कोशिकीय तथा 8-केन्द्रकीय होता है। यह संपूर्ण प्रक्रिया बीजाण्ड के संरक्षण में अत्यंत सुरक्षित रूप से पूर्ण होती है।
In simple words: बीजाण्ड के अंदर एक बड़ी कोशिका में अर्धसूत्री विभाजन से चार गुरुबीजाणु बनते हैं, जिनमें से तीन नष्ट हो जाते हैं और केवल एक जीवित रहता है। यह अकेला जीवित गुरुबीजाणु तीन बार विभाजित होकर 8 केन्द्रकों वाला मादा भ्रूणकोष बनाता है।
🎯 Exam Tip: Draw the developmental stages showing 2-nucleate, 4-nucleate, and 8-nucleate stages of embryo sac. Explicitly mention that 3 chalazal spores degenerate, leaving only 1 functional megaspore.
Question 3. परागण किसे कहते हैं? सैल्विया में होने वाले परागण की क्रिया का वर्णन कीजिए। (2012)
Answer: परागण (Pollination): परागकोश से परागकणों का उसी पुष्प या उसी जाति के किसी अन्य पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचने की क्रिया को परागण कहते हैं। यह मुख्यतः दो प्रकार का होता है – स्व-परागण (self-pollination) तथा पर-परागण (cross-pollination)।
सैल्विया में कीट-परागण की क्रिया (Pollination in Salvia):
सैल्विया (Salvia) द्विलिंगी पुष्प है जिसमें कीटों (जैसे मधुमक्खियों) द्वारा परागण होता है। इसके पुष्प में एक विशेष 'लीवर यंत्र क्रियाविधि' (lever mechanism) पाई जाती है जो निम्नलिखित है –
1. सैल्विया का दलपुंज द्विओष्ठी (bilabiate) होता है जिसका निचला ओष्ठ कीटों के बैठने के लिए मंच (stage) का कार्य करता है।
2. इसके पुंकेसर का पुंतंतु छोटा होता है परंतु संयोजी (connective) बहुत लंबा और लचीला होता है जो लीवर की तरह कार्य करता है। संयोजी के ऊपरी छोर पर एक चौड़ा क्रियाशील परागकोश पाल (fertile anther lobe) और निचले छोर पर एक बन्ध्य परागकोश पाल (sterile lobe) होता है।
3. जब कोई कीट मकरंद की खोज में निचले ओष्ठ पर बैठता है और पुष्प के भीतर घुसने का प्रयास करता है, तो उसका सिर बन्ध्य परागकोश पाल से टकराता है। इसके टकराते ही लीवर घूम जाता है और ऊपरी क्रियाशील परागकोश पाल नीचे झुककर कीट की पीठ पर परागकण छिड़क देता है।
4. सैल्विया पूर्वपुंपक्व (protandrous) होता है, अतः जब यह कीट किसी दूसरे परिपक्व मादा पुष्प (जिसका वर्तिकाग्र नीचे की ओर झुका होता है) पर बैठता है, तो इसकी पीठ पर लगे परागकण उस पुष्प के वर्तिकाग्र से रगड़ खाकर चिपक जाते हैं। इस प्रकार पर-परागण संपन्न होता है। यह प्रकृति में सह-विकास और जैविक अनुकूलन का एक अनुपम उदाहरण है।
In simple words: सैल्विया के फूल में दो पंखुड़ियाँ होती हैं और इसका पुंकेसर लीवर की तरह काम करता है। जब कोई कीड़ा रस पीने बैठता है, तो उसका सिर टकराने से पुंकेसर नीचे झुक जाता है और कीड़े की पीठ पर परागकण छिड़क देता है, जो दूसरे फूल पर पहुँच जाते हैं।
🎯 Exam Tip: Explain the 'Lever mechanism' (लीवर क्रियाविधि) step-by-step. Underline 'protandrous' (पूर्वपुंपक्व) to explain why self-pollination does not occur within the same flower.
Question 4. पर-परागण से होने वाले लाभ तथा हानि का उल्लेख कीजिए। (2016)
या
“स्व-परागण की अपेक्षा पर-परागण अधिक उपयोगी है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए। (2017)
Answer: पर-परागण से लाभ (Advantages of Cross-pollination):
1. पर-परागण से उत्पन्न बीजों से बने पौधे बड़े, स्वस्थ, ओजस्वी तथा प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं।
2. इससे उत्पन्न फल बड़े, भारी तथा स्वादिष्ट होते हैं और उनमें बीजों की संख्या भी अधिक होती है।
3. पर-परागण द्वारा आनुवंशिक पुनर्संयोजन (genetic recombination) के कारण संतति में नई विभिन्नताएँ (variations) उत्पन्न होती हैं, जो पौधों को बदलते वातावरण के अनुकूल बनाती हैं।
4. इसके द्वारा फसलों की नई और उन्नत रोग-अवरोधक (disease resistant) प्रजातियाँ विकसित की जा सकती हैं।
5. इसके फलस्वरूप हाइब्रिड विगर (hybrid vigour) उत्पन्न होता है जिससे उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों बढ़ जाती हैं।
पर-परागण से हानियाँ (Disadvantages of Cross-pollination):
1. पर-परागण के लिए पौधे बाह्य जैविक या अजैविक साधनों (जैसे- वायु, जल, कीट, जंतु) पर निर्भर रहते हैं, जिससे इसकी क्रिया सदैव अनिश्चित होती है।
2. कीटों को आकर्षित करने के लिए पौधों को चटकीले रंग, सुगंध तथा मकरंद उत्पन्न करने में बहुत अधिक ऊर्जा और पोषक पदार्थों का अपव्यय करना पड़ता है।
3. इसमें परागकणों का बहुत अधिक नुकसान होता है, विशेषकर वायु परागण में बहुत सारे परागकण बेकार चले जाते हैं।
4. पर-परागण से उत्पन्न बीजों की आनुवंशिक शुद्धता नष्ट हो जाती है। यह आनुवंशिक मिश्रण कभी-कभी अवांछित लक्षणों को भी जन्म दे सकता है।
In simple words: पर-परागण से पौधे मजबूत, बड़े और नई बीमारियों से लड़ने वाले बनते हैं, और उनके फल भी अच्छे होते हैं। लेकिन इसकी हानि यह है कि पौधों को हवा या कीड़ों पर निर्भर रहना पड़ता है और बहुत सारे परागकण बर्बाद हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: Frame your answer with clear subheadings for 'लाभ' (Advantages) and 'हानि' (Disadvantages). Mentioning 'Hybrid vigour' and 'Genetic Recombination' will fetch maximum marks.
Question 5. द्विबीजपत्री भ्रूण के विकास का वर्णन कीजिए। (2015)
या
द्विबीजपत्री पौधों में भ्रूण विकास की विभिन्न अवस्थाओं का केवल नामांकित चित्र बनाइए। (2017)
Answer: द्विबीजपत्री भ्रूण का विकास (Development of Dicot Embryo):
आवृतबीजी पौधों में भ्रूण के विकास की प्रारंभिक अवस्थाओं को भ्रूणोद्भव (embryogeny) कहते हैं। द्विबीजपत्री पौधों (जैसे- Capsella bursa-pastoris) में भ्रूण का विकास निम्नलिखित प्रकार से होता है –
1. निषेचन के बाद बना द्विगुणित युग्मनज (zygote) आकार में बढ़कर अपने चारों ओर सेलुलोज की भित्ति बना लेता है।
2. युग्मनज में पहला अनुप्रस्थ विभाजन (transverse division) होता है जिससे दो कोशिकाएँ बनती हैं – ऊपरी बीजाण्डद्वारी सिरे की ओर आधार कोशिका (basal cell) तथा नीचे निभागी सिरे की ओर अंतस्थ कोशिका (terminal cell)।
3. आधार कोशिका में कई अनुप्रस्थ विभाजनों द्वारा 6 से 10 कोशिकाओं लंबा एक सूत्राकार निलम्बक (suspensor) बनता है। निलम्बक की सबसे ऊपरी कोशिका फूलकर चूषकांग (haustorium) बनाती है जो बीजाण्डकाय से पोषण सोखता है। निलम्बक की सबसे निचली कोशिका को अधःस्फीतिका (hypophysis) कहते हैं, जो आगे चलकर मूलांकुर (radicle) के अग्र भाग का निर्माण करती है।
4. अंतस्थ कोशिका में क्रमिक अनुप्रस्थ और अनुदैर्घ्य विभाजनों द्वारा 8-कोशिकीय अष्टक (octant stage) बनता है। अष्टक की ऊपर की 4 कोशिकाएँ (epibasal cells) प्रांकुर (plumule) और बीजपत्रों (cotyledons) का निर्माण करती हैं, जबकि नीचे की 4 कोशिकाएँ (hypobasal cells) बीजपत्राधार (hypocotyl) का निर्माण करती हैं।
5. अष्टक की कोशिकाओं में परिणत विभाजन होने से बाह्य त्वचाजन (dermatogen) परत बनती है जो बाद में बाह्यत्वचा बनाती है। भ्रूण का आकार पहले गोलाकार (globular), फिर हृदयाकार (heart-shaped) और अंत में परिपक्व घोड़े की नाल के आकार (horse-shoe shaped) का हो जाता है जिसमें दो सुस्पष्ट बीजपत्र और एक अक्ष होता है। यह संपूर्ण विकास बीज के भीतर सुरक्षित रूप से पूर्ण होता है।
In simple words: निषेचन के बाद अंडा विभाजित होकर दो कोशिकाएं बनाता है। ऊपर वाली कोशिका से एक डंठल (निलम्बक) बनता है जो भ्रूण को पोषण देता है। नीचे वाली कोशिका लगातार विभाजित होकर पहले गोल, फिर दिल के आकार की और अंत में दो पत्तों (बीजपत्रों) वाले भ्रूण में बदल जाती है।
🎯 Exam Tip: Draw the sequential stages of embryo development: Zygote -> 2-celled -> Globular -> Heart-shaped -> Mature Embryo. Label 'Suspensor', 'Radicle', 'Plumule', and 'Cotyledons' carefully.
Question 6. भ्रूणपोष क्या है? इसके विभिन्न प्रकारों का संक्षिप्त विवरण दीजिए। (2014, 16)
या
आवृतबीजी पौधों में पाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के भ्रूणपोषों का वर्णन कीजिए। (2011)
या
‘भ्रूणपोष’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2010, 12)
Answer: भ्रूणपोष (Endosperm):
आवृतबीजी पौधों में द्विनिषेचन के अंतर्गत होने वाले त्रि-संलयन के फलस्वरूप बनने वाले त्रिगुणित (\( 3n \)) प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक से भ्रूणपोष का विकास होता है। यह एक अत्यंत विशिष्ट पोषक ऊतक है जो विकासशील भ्रूण को आवश्यक भोजन प्रदान करता है। विकास के आधार पर आवृतबीजी पौधों में भ्रूणपोष मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन प्रकार का होता है –
1. केन्द्रकीय भ्रूणपोष (Nuclear Endosperm): यह सबसे सामान्य प्रकार का भ्रूणपोष है। इसमें प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक बार-बार विभाजित होकर अनेक मुक्त केन्द्रक (free nuclei) बनाता है, परंतु इस दौरान कोशिकाओं के बीच भित्ति-निर्माण (cell wall formation) नहीं होता। बाद में केन्द्रक परिधि की ओर चले जाते हैं और बीच में एक बड़ी रिक्तिका (vacuole) बन जाती है। अंत में परिधि से केंद्र की ओर आंशिक भित्ति निर्माण होता है; जैसे-कैप्सेला, नारियल का पानी।
2. कोशिकीय भ्रूणपोष (Cellular Endosperm): इस प्रकार के भ्रूणपोष में प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक के प्रत्येक विभाजन के तुरंत बाद कोशिका भित्ति (cell wall) का निर्माण हो जाता है, जिससे यह प्रारंभ से ही पूरी तरह कोशिकीय होता है; जैसे-पेटुनिया, विल्लारसिया।
3. हेलोबियल भ्रूणपोष (Helobial Endosperm): यह उपर्युक्त दोनों प्रकारों के बीच की एक अंतरावस्था है। इसमें प्राथमिक विभाजन के बाद एक भित्ति बनती है जिससे एक बड़ी बीजाण्डद्वारी कोशिका और एक छोटी निभागी कोशिका बन जाती है। इसके बाद दोनों कोशिकाओं में मुक्त केन्द्रकीय विभाजन होते हैं; जैसे-एरीमुरस (Eremurus)। यह मुख्य रूप से एकबीजपत्री पौधों में पाया जाता है और उनके प्रारंभिक विकास में बहुत सहायक होता है।
In simple words: भ्रूणपोष भ्रूण के लिए भोजन का काम करता है। यह तीन प्रकार का होता है: केन्द्रकीय (जिसमें शुरू में कोशिका की दीवारें नहीं बनतीं जैसे नारियल पानी), कोशिकीय (जिसमें हर विभाजन के साथ दीवार बनती है), और हेलोबियल (जो दोनों का मिश्रण होता है)।
🎯 Exam Tip: Use diagrams to represent the three types of endosperm. Specifically point out that 'nariyal paani' is free nuclear endosperm, while the white kernel is cellular endosperm.
Question 7. पीढ़ियों का एकान्तरण क्या है? एक आवृतबीजी पौधे के जीवन इतिहास का केवल रेखांकित चित्रों की सहायता से वर्णन कीजिए। (2017)
Answer: पीढ़ियों का एकान्तरण (Alternation of Generations):
आवृतबीजी पौधों के जीवन चक्र में दो सुस्पष्ट अवस्थाएँ बारी-बारी से आती हैं। पहली मुख्य, दीर्घकालिक, स्वपोषी तथा द्विगुणित (\( 2n \)) अवस्था बीजाणुद्भिद् (sporophyte) होती है जो जड़, तना और पत्तियों में विभाजित होती है। दूसरी अल्पकालिक, आश्रित तथा अगुणित (\( n \)) अवस्था युग्मकोद्भिद् (gametophyte) होती है जो नर (परागकण) और मादा (भ्रूणकोष) युग्मकों का निर्माण करती है। द्विगुणित बीजाणुद्भिद् अवस्था से अर्धसूत्री विभाजन द्वारा अगुणित युग्मकोद्भिद् अवस्था का बनना तथा युग्मकों के संलयन (निषेचन) द्वारा पुनः द्विगुणित बीजाणुद्भिद् अवस्था का स्थापित होना पीढ़ियों का एकान्तरण कहलाता है। यह चक्र आनुवंशिक स्थिरता और विविधता दोनों को संतुलित रखने में सहायक होता है।
In simple words: पौधों के जीवन में दो अवस्थाएं बारी-बारी से आती हैं। एक मुख्य बड़ा पौधा (बीजाणुद्भिद्, \( 2n \)) और दूसरा छोटा जनन भाग (युग्मकोद्भिद्, \( n \)) जो नर और मादा युग्मक बनाता है। इन दोनों पीढ़ियों के अदल-बदल कर आने को ही पीढ़ियों का एकान्तरण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: Draw a neat cyclic diagram showing the alternation between diploid Sporophyte (\( 2n \)) and haploid Gametophyte (\( n \)). Mark 'Meiosis' (अर्धसूत्री विभाजन) and 'Fertilization' (निषेचन) clearly on opposite sides of the cycle.
Free study material for Biology
UP Board Solutions Class 12 Biology Chapter 2 पुष्पीय पौधों में लैंगिक प्रजनन
Students can now access the UP Board Solutions for Chapter 2 पुष्पीय पौधों में लैंगिक प्रजनन prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 12 Biology textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest UP Board syllabus.
Detailed Explanations for Chapter 2 पुष्पीय पौधों में लैंगिक प्रजनन
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 12 Biology chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 12 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these UP Board Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Biology Class 12 Solved Papers
Using our Biology solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 2 पुष्पीय पौधों में लैंगिक प्रजनन to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated UP Board Solutions Class 12 Biology Chapter 2 पुष्पीय पौधों में लैंगिक प्रजनन is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Biology are as per latest UP Board curriculum.
Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 12 Biology Chapter 2 पुष्पीय पौधों में लैंगिक प्रजनन as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Biology concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 12 Biology Chapter 2 पुष्पीय पौधों में लैंगिक प्रजनन will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 12 Biology. You can access UP Board Solutions Class 12 Biology Chapter 2 पुष्पीय पौधों में लैंगिक प्रजनन in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 12 Biology Chapter 2 पुष्पीय पौधों में लैंगिक प्रजनन in printable PDF format for offline study on any device.