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Detailed Chapter 3 मानव प्रजनन UP Board Solutions for Class 12 Biology
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Class 12 Biology Chapter 3 मानव प्रजनन UP Board Solutions PDF
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
Question 1. एक आवृतबीजी पुष्प के उन अंगों के नाम बताएँ, जहाँ नर एवं मादा युग्मकोद्भिद का विकास होता है?
Answer: आवृतबीजी पादप (angiospermic plant) पुष्पीय पादप हैं। पुष्प एक रूपान्तरित प्ररोह (modified shoot) है जिसका कार्य प्रजनन होता है। पुष्प में निम्नलिखित चार चक्र होते हैं –
(क) बाह्यदलपुंज (Calyx) – इसका निर्माण बाह्यदल (sepals) से होता है।
(ख) दलपुंज (Corolla) – इसका निर्माण दल (petals) से होता है।
(ग) पुमंग (Androecium) – इसका निर्माण पुंकेसर (stamens) से होता है। यह पुष्प का नर जनन चक्र कहलाता है। पुंकेसर के परागकोश (anther) में परागकण मातृ कोशिका (pollen mother cells) से अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा परागकण (pollen grains) का निर्माण होता है। परागकण नर युग्मकोद्भिद (male gametophyte) कहलाता है।
(घ) जायांग (Gynoecium) – इसका निर्माण अण्डप (carpels) से होता है। यह पुष्प का मादा जनन चक्र कहलाता है। अण्डप के तीन भाग होते हैं – अण्डाशय (ovary), वर्तिका (style) तथा वर्तिकाग्र (stigma)। अण्डाशय में बीजाण्ड का निर्माण होता है। बीजाण्ड के बीजाण्डकाय की गुरुबीजाणु मातृ कोशिका (mega spore mother cell) से अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा अगुणिगुणित गुरुबीजाणु से मादा युग्मकोद्भिद (female gametophyte) अथवा भ्रूणकोष (embryo sac) का विकास होता है। इस प्रकार, नर युग्मकोद्भिद का विकास परागकोश में और मादा युग्मकोद्भिद का विकास बीजाण्ड के भीतर होता है।
In simple words: पुष्प में नर युग्मकोद्भिद (परागकण) का विकास पुंकेसर के परागकोश में होता है, जबकि मादा युग्मकोद्भिद (भ्रूणकोष) का विकास जायांग के बीजाण्ड के भीतर होता है।
🎯 Exam Tip: Examiners look for specific terms like 'Anther' (परागकोश) for male and 'Ovule/Embryo sac' (बीजाण्ड/भ्रूणकोष) for female gametophyte development. Make sure to underline these key structures in your answer.
Question 2. लघुबीजाणुधानी तथा गुरुबीजाणुधानी के बीच अन्तर स्पष्ट करें। इन घटनाओं के दौरान किस प्रकार का कोशिका विभाजन सम्पन्न होता है ? इन दोनों घटनाओं के अंत में बनने वाली संरचनाओं के नाम बताइए।
Answer: लघुबीजाणुधानी तथा गुरुबीजाणुधानी के मध्य मुख्य अन्तर निम्नलिखित तालिका में स्पष्ट किए गए हैं –
| क्र० सं० | लघुबीजाणुधानी (Microsporangium) | गुरुबीजाणुधानी (Megasporangium) |
|---|---|---|
| 1. | यह बाह्य त्वचा, मध्य स्तर तथा टेपीटम से घिरी रहती है। | यह बाह्य त्वचा तथा अन्तःअध्यावरण से घिरी रहती है। |
| 2. | परागकण मातृ कोशिका से सूक्ष्म बीजाणु बनते हैं जो कि परागकोश के चारों कोनों पर विकसित होते हैं। | गुरुबीजाणु मातृ कोशिका से गुरुबीजाणु (megaspore) बनते हैं जो कि अण्डाशय (ovary) में विकसित होते हैं। |
| 3. | सूक्ष्म बीजाणु मातृ कोशिका के अर्धसूत्री विभाजन द्वारा अनेक परागकणों (pollen grains) का निर्माण होता है। | गुरुबीजाणु मातृ कोशिका के अर्धसूत्री विभाजन से गुरुबीजाणुओं (megaspores) का निर्माण होता है। |
| 4. | परागकोश के स्फुटन पर परागकण विमुक्त होते हैं। परागकण नर युग्मकोद्भिद् बनाते हैं। | गुरुबीजाणु से भ्रूणकोष (embryo sac) बनता है जो मादा युग्मकोद्भिद् बनाता है। |
In simple words: लघुबीजाणुधानी में नर युग्मक (परागकण) बनते हैं और गुरुबीजाणुधानी में मादा युग्मक (भ्रूणकोष) बनता है। दोनों प्रक्रियाओं में अर्धसूत्री विभाजन होता है जो गुणसूत्रों की संख्या आधी कर देता है।
🎯 Exam Tip: When distinguishing between microsporangium and megasporangium, always present the answer in a tabular form. Clearly state that microsporangium leads to pollen grains while megasporangium leads to the embryo sac.
Question 3. निम्नलिखित शब्दावलियों को सही विकासीय क्रम में व्यवस्थित करें-परागकण, बीजाणुजन ऊतक, लघुबीजाणु चतुष्क, परागमातृ कोशिका, नर युग्मक।
Answer: उपरोक्त शब्दावलियों का सही विकासीय क्रम निम्नवत् है –
बीजाणुजन ऊतक → परागमातृ कोशिका → लघुबीजाणु चतुष्क → परागकण → नरयुग्मक। यह क्रम विकास की उन क्रमिक अवस्थाओं को दर्शाता है जो परागकोश के भीतर संपन्न होती हैं।
In simple words: यह विकास का क्रम है जिसमें सबसे पहले प्राथमिक ऊतक होता है, जिससे मातृ कोशिका बनती है, फिर अर्धसूत्री विभाजन से चार बीजाणु (चतुष्क) बनते हैं, जो परिपक्व होकर परागकण और अंत में नर युग्मक बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: Use arrows (→) to show the chronological direction of development. Double-check that 'परागमातृ कोशिका' precedes 'लघुबीजाणु चतुष्क'.
Question 4. एक प्रारूपी आवृतबीजी बीजाण्ड के भागों का विवरण दिखाते हुए एक स्पष्ट एवं साफ-सुथरा नामांकित चित्र बनाइए। (2010, 15, 17)
Answer: एक प्रारूपी आवृतबीजी बीजाण्ड (Anatropous ovule) की संरचना में मुख्यतः बीजाण्डवृत्त (funicle), नाभिका (hilum), अध्यावरण (integuments), बीजाण्डद्वार (micropyle), बीजाण्डकाय (nucellus), निभाग (chalaza) और भ्रूणकोष (embryo sac) शामिल होते हैं। यह चित्र पौधों में बीजाण्ड की आंतरिक संरचना और उसके विभिन्न सुरक्षात्मक परतों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
In simple words: यह बीजाण्ड (ovule) की संरचना है। इसमें बाहर सुरक्षात्मक आवरण (अध्यावरण) होते हैं, बीच में भ्रूणकोष होता है जहाँ अंडाणु बनता है, और नीचे एक डंठल (बीजाण्डवृत्त) होता है जो इसे जोड़ता है।
🎯 Exam Tip: Label both 'Chalaza' (निभाग) at the top and 'Micropyle' (बीजाण्डद्वार) at the bottom. Examiners award full marks when these opposite poles are clearly marked.
Question 5. आप मादा युग्मकोद्भिद् के एकबीजाणुज विकास से क्या समझते हैं ?
Answer: गुरुबीजाणुजनन के फलस्वरूप बने गुरुबीजाणु चतुष्क (tetrad) में से तीन नष्ट हो जाते हैं तथा केवल एक गुरुबीजाणु ही सक्रिय होता है जो मादा युग्मकोद्भिद् का विकास करता है। गुरुबीजाणु का केन्द्रक तीन सूत्री विभाजनों द्वारा आठ केन्द्रक बनाता है। प्रत्येक ध्रुव पर चार-चार केन्द्रक व्यवस्थित हो जाते हैं। भ्रूणकोष के बीजाण्डद्वारी ध्रुव पर स्थित चारों केन्द्रक में से तीन केन्द्रक कोशिकाएँ अण्ड उपकरण (egg apparatus) बनाते हैं, जबकि निभागी सिरे के चार केन्द्रकों में से तीन केन्द्रक एण्टीपोडल कोशिकाएँ (antipodal cells) बनाते हैं। दोनों ध्रुवों से आये एक-एक केन्द्रक, केन्द्रीय कोशिका में संयोजन द्वारा ध्रुवीय केन्द्रक (polar nucleus) बनाते हैं। चूँकि मादा युग्मकोद्भिद् सिर्फ एक ही क्रियाशील गुरुबीजाणु से विकसित होता है, अतः इसे एकबीजाणुज विकास (Monosporic development) कहते हैं। यह प्रक्रिया अधिकांश आवृतबीजी पौधों की एक विशिष्ट विशेषता है।
In simple words: जब मादा युग्मकोद्भिद् (भ्रूणकोष) का विकास केवल एक ही सक्रिय गुरुबीजाणु से होता है (जबकि बाकी तीन नष्ट हो जाते हैं), तो इसे एकबीजाणुज विकास कहते हैं।
🎯 Exam Tip: Clearly emphasize that out of 4 megaspores, 3 degenerate and only 1 remains functional. The keyword 'Monosporic' (एकबीजाणुज) must be highlighted.
Question 6. एक स्पष्ट एवं साफ-सुथरे चित्र के द्वारा परिपक्व मादा युग्मकोद्भिद् के 7-कोशिकीय, 8-न्यूक्लिएट (केन्द्रकीय) प्रकृति की व्याख्या करें।
Answer: आवृतबीजी पौधों का परिपक्व मादा युग्मकोद्भिद् 7-कोशिकीय व 8-केन्द्रकीय होता है। इसके परिवर्धन के समय क्रियाशील गुरुबीजाणु (functional megaspore) में प्रथम केन्द्रकीय विभाजन द्वारा दो केन्द्रक बनते हैं, जो दोनों ध्रुवों (माइक्रोपाइल व निभाग) पर चले जाते हैं। द्वितीय व तृतीय विभाजनों द्वारा दोनों सिरों पर चार-चार केन्द्रक बन जाते हैं। माइक्रोपाइलर शीर्ष पर चार केन्द्रकों में से तीन केन्द्रक अण्ड उपकरण (egg apparatus) बनाते हैं तथा चौथा केन्द्रक ऊपरी ध्रुव का चक्र बनाता है। निभागी शीर्ष पर चार केन्द्रकों में से तीन एण्टीपोडल कोशिकाएँ (antipodal cells) तथा चौथा केन्द्रक निचला ध्रुव केन्द्रक बनाता है। दोनों ध्रुवीय केन्द्रक मध्य में आकर संयोजन द्वारा द्वितीयक केन्द्रक (secondary nucleus) बनाते हैं। इस प्रकार, परिपक्व भ्रूणकोष में कुल 8 केन्द्रक होते हैं परंतु कोशिकाएं केवल 7 ही होती हैं, जो निषेचन की प्रक्रिया के लिए पूरी तरह तैयार होती हैं।
In simple words: परिपक्व मादा भ्रूणकोष में 8 केन्द्रक (nuclei) होते हैं, लेकिन कोशिकाएं केवल 7 होती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बीच वाली बड़ी कोशिका में दो केन्द्रक (ध्रुवीय केन्द्रक) एक साथ रहते हैं।
🎯 Exam Tip: State clearly why it is 7-celled but 8-nucleate: the central cell contains 2 polar nuclei. Drawing a simplified diagram representing 3 antipodals, 2 polar nuclei in 1 central cell, and 1 egg + 2 synergids helps get full marks.
Question 7. उन्मील परागणी पुष्पों से क्या तात्पर्य है ? क्या अनुन्मीलीय पुष्पों में पर-परागण सम्पन्न होता है ? अपने उत्तर की सतर्क व्याख्या करें।
Answer: वे पुष्प जिनके परागकोश तथा वर्तिकाग्र अनावृत (exposed) होते हैं, उन्मील परागणी (chasmogamous) पुष्प कहलाते हैं; जैसे-वायोला, ऑक्जेलिस। अनुन्मीलीय (cleistogamous) पुष्पों में पर-परागण सम्पन्न नहीं होता है क्योंकि ये पुष्प कभी खुलते ही नहीं हैं। अनुन्मीलीय पुष्पों के परागकोश तथा वर्तिकाग्र सदैव बंद अवस्था में एक-दूसरे के अत्यंत पास स्थित होते हैं। परागकोश के स्फुटित होने पर परागकण सीधे अपने ही पुष्प के वर्तिकाग्र के सम्पर्क में आकर परागण करते हैं। अतः अनुन्मीलीय पुष्पों में केवल और केवल स्व-परागण (self-pollination) ही संभव होता है। इस बंद संरचना के कारण बाहरी परागकणों का प्रवेश पूरी तरह अवरुद्ध रहता है।
In simple words: उन्मील पुष्प वे होते हैं जो खुले रहते हैं, जिससे पर-परागण हो सकता है। अनुन्मीलीय पुष्प हमेशा बंद रहते हैं, इसलिए उनमें कभी भी पर-परागण नहीं हो सकता, केवल स्व-परागण ही होता है।
🎯 Exam Tip: Use examples like 'Viola' and 'Oxalis' to support your answer. Clearly define cleistogamy as a guarantee for self-pollination.
Question 8. पुष्पों द्वारा स्व-परागण को रोकने के लिए विकसित की गयी दो कार्यनीतियों का विवरण दें।
Answer: पुष्पों में स्व-परागण को रोकने तथा पर-परागण को बढ़ावा देने हेतु विकसित की गयी दो प्रमुख कार्यनीतियाँ निम्नलिखित हैं –
1. स्व-बन्ध्यता (Self-sterility / Self-incompatibility) – इस कार्यनीति में यदि किसी पुष्प के परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं, तो जीन स्तर पर पारस्परिक क्रिया के कारण उनका अंकुरण या परागनली की वृद्धि रुक जाती है जिससे निषेचन नहीं हो पाता; जैसे-माल्वा में।
2. भिन्नकालपक्वता (Dichogamy) – इसमें नर तथा मादा जननांग अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं। जब परागकोश पहले परिपक्व होता है तो उसे पूर्वपुंपक्वता (Protandry) कहते हैं, और जब वर्तिकाग्र पहले परिपक्व होता है तो उसे पूर्वस्त्रीपक्वता (Protogyny) कहते हैं; जैसे-सैक्सीफ्रेगा कुल के सदस्यों में। ये प्राकृतिक अनुकूलन पौधों में आनुवंशिक विविधता बनाए रखने में मदद करते हैं।
In simple words: स्व-परागण रोकने के लिए पौधे दो तरीके अपनाते हैं: पहला, खुद के परागकणों को अंकुरित न होने देना (स्व-बन्ध्यता), और दूसरा, नर और मादा भागों का अलग-अलग समय पर पकना (भिन्नकालपक्वता)।
🎯 Exam Tip: Ensure you clearly explain 'Self-sterility' and 'Dichogamy' using these exact terms, as examiners specifically look for these keywords.
Question 9. स्व-अयोग्यता क्या है ? स्व-अयोग्यता वाली प्रजातियों में स्व-परागण प्रक्रिया बीज की रचना तक क्यों नहीं पहुँच पाती है ?
Answer: स्व-अयोग्यता (Self-incompatibility) पुष्पीय पौधों में पाई जाने वाली एक ऐसी आनुवंशिक युक्ति है जिसके फलस्वरूप पौधों में स्व-परागण होने पर भी निषेचन नहीं हो पाता है। स्व-अयोग्यता मुख्यतः दो प्रकार की होती है –
1. विषमरूपी (Heteromorphic) – इसमें एक ही जाति के पौधों में वर्तिकाग्र तथा परागकोशों की स्थिति में भिन्नता होती है, जिससे परागनली की वृद्धि वर्तिकाग्र में ही रुक जाती है।
2. समकारी (Homomorphic) – इस प्रकार की स्व-अयोग्यता विरोधी-S अलील्स (opposition-S-alleles) द्वारा नियंत्रित होती है। स्व-अयोग्यता वाले पौधों में जब स्व-परागकण वर्तिकाग्र पर आते हैं, तो आनुवंशिक अवरोध के कारण या तो परागकण अंकुरित नहीं होते या वर्तिका में परागनली की वृद्धि रुक जाती है। इस प्रकार नर युग्मक अण्डाशय तक नहीं पहुँच पाता और निषेचन न होने के कारण प्रक्रिया बीज की रचना तक नहीं पहुँच पाती है। यह व्यवस्था अंतःप्रजनन अवनमन को रोकने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
In simple words: स्व-अयोग्यता एक आनुवंशिक गुण है जिससे फूल अपने ही परागकणों को निषेचित नहीं होने देता। इसके कारण वर्तिकाग्र पर परागकण का अंकुरण रुक जाता है और बीज नहीं बन पाते।
🎯 Exam Tip: Mention that 'S-alleles' control this genetic mechanism. Emphasize that it prevents inbreeding depression.
Question 10. बैगिंग (बोरावस्त्रावरण) या थैली लगाना तकनीक क्या है ? पादप जनन कार्यक्रम में यह कैसे उपयोगी है ?
Answer: बैगिंग (बोरावस्त्रावरण) एक ऐसी तकनीक है जिसके अंतर्गत विपुंसित (emasculated) पुष्पों को एक निश्चित थैली (सामान्यतः बटर पेपर से बनी) से ढक दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्तिकाग्र को किसी भी अवांछित या अनैच्छिक परागकणों के संदूषण से बचाना है। पादप जनन कार्यक्रम (plant breeding programs) में यह तकनीक निम्नलिखित प्रकार से उपयोगी है –
1. इसके द्वारा केवल ऐच्छिक गुणों वाले परागकणों को ही वर्तिकाग्र पर छिड़ककर कृत्रिम परागण कराया जाता है।
2. इससे फसलों की उन्नत और संकर प्रजातियाँ तैयार की जाती हैं जो उच्च उत्पादकता और रोग प्रतिरोधक क्षमता से युक्त होती हैं। यह वैज्ञानिक विधि नई आनुवंशिक किस्में विकसित करने का मुख्य आधार है।
In simple words: बैगिंग का मतलब है फूल को थैली से ढकना ताकि कोई अवांछित परागकण उस पर न गिरे। इसका उपयोग वैज्ञानिक मनपसंद और अच्छी किस्म के पौधे उगाने के लिए करते हैं।
🎯 Exam Tip: Clearly state that bagging is done on 'emasculated' (विपुंसित) flowers using butter paper to prevent contamination of stigma by unwanted pollen.
Question 11. त्रि-संलयन क्या है ? यह कहाँ और कैसे सम्पन्न होता है ? त्रि-संलयन में सम्मिलित न्यूक्लीआई का नाम बताएँ।
Answer: परागनली से मुक्त दो नर युग्मकों में से एक नर युग्मक अंड कोशिका से संलयित होकर युग्मनज (2n) बनाता है। दूसरा नर युग्मक भ्रूणकोष के मध्य में स्थित द्विगुणित द्वितीयक केन्द्रक (secondary nucleus, 2n) से संलयन करता है। चूँकि इस प्रक्रिया में तीन केन्द्रकों का संलयन होता है, इसलिए इसे त्रि-संलयन (Triple Fusion) कहते हैं। यह प्रक्रिया भ्रूणकोष (embryo sac) के भीतर सम्पन्न होती है। त्रि-संलयन में निम्नलिखित तीन न्यूक्लीआई सम्मिलित होते हैं –
(i) एक अगुणित नर युग्मक केन्द्रक (haploid male gamete nucleus, n)
(ii) दो अगुणित ध्रुवीय केन्द्रक (haploid polar nuclei, n + n) जो मिलकर द्विगुणित द्वितीयक केन्द्रक बनाते हैं। इसके परिणामस्वरूप प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक (PEN) का निर्माण होता है जो आगे चलकर विकासशील भ्रूण को पोषण प्रदान करता है।
In simple words: जब दूसरा नर युग्मक भ्रूणकोष के बीच में मौजूद दो ध्रुवीय केन्द्रकों से मिलता है, तो इसे त्रि-संलयन कहते हैं। इससे भ्रूण को भोजन देने वाला भ्रूणपोष (endosperm) बनता है।
🎯 Exam Tip: Remember that Triple Fusion results in the formation of the triploid (3n) Primary Endosperm Nucleus (PEN). Mention the ploidy levels clearly.
Question 12. एक निषेचित बीजाण्ड में, युग्मनज प्रसुप्ति के बारे में आप क्या सोचते हैं ?
Answer: निषेचन के पश्चात् बीजाण्ड में युग्मनज (zygote) का विकास तुरंत शुरू नहीं होता, बल्कि वह कुछ समय के लिए निष्क्रिय या प्रसुप्त अवस्था (dormancy) में चला जाता है। युग्मनज प्रसुप्ति के पीछे मुख्य जैविक कारण यह है कि इस दौरान भ्रूणकोष में त्रि-संलयन के फलस्वरूप भ्रूणपोष (endosperm) का विकास तेजी से होने लगता है। जब भ्रूणपोष पर्याप्त मात्रा में विकसित हो जाता है और भोजन संचित कर लेता है, तब युग्मनज अपनी प्रसुप्ति समाप्त कर विभाजन शुरू करता है। इससे विकासशील भ्रूण को निरंतर और पर्याप्त पोषण मिलना सुनिश्चित हो जाता है। यह प्रकृति का एक उत्कृष्ट सुरक्षात्मक और अनुकूलन तंत्र है।
In simple words: निषेचन के बाद युग्मनज (zygote) तुरंत नहीं बढ़ता, वह कुछ समय आराम करता है। इस दौरान उसके लिए भोजन (भ्रूणपोष) तैयार होता है, ताकि बढ़ने पर उसे पूरा पोषण मिल सके।
🎯 Exam Tip: Explain that zygote dormancy is an adaptation to ensure that endosperm develops first to provide nutrition to the embryo.
Question 13. इनमें विभेद करें – (क) बीजपत्राधार तथा बीजपत्रोपरिक (ख) प्रांकुर चोल तथा मूलांकुर चोल (ग) अध्यावरण तथा बीज चोल (घ) परिभ्रूण पोष तथा फलभित्ति
Answer: दिए गए युग्मों में प्रमुख विभेद निम्नलिखित सारणियों के माध्यम से स्पष्ट किया गया है –
(क) बीजपत्राधार तथा बीजपत्रोपरिक में अन्तर:
| क्र० सं० | बीजपत्राधार (Hypocotyl) | बीजपत्रोपरिक (Epicotyl) |
|---|---|---|
| 1. | यह भ्रूणीय अक्ष का वह भाग है जो बीजपत्रों के स्तर से नीचे मूलांकुर के ठीक ऊपर स्थित होता है। | यह भ्रूणीय अक्ष का वह भाग है जो बीजपत्रों के स्तर से ऊपर प्रांकुर के ठीक नीचे स्थित होता है। |
| 2. | इसकी समाप्ति मूल-शीर्ष (root tip) में होती है। | इसकी समाप्ति प्रांकुर (plumule) में होती है। |
(ख) प्रांकुर चोल तथा मूलांकुर चोल में अन्तर:
| क्र० सं० | प्रांकुर चोल (Coleoptile) | मूलांकुर चोल (Coleorhiza) |
|---|---|---|
| 1. | यह प्रांकुर (plumule) को ढकने वाली एक खोखली पर्णीय सुरक्षात्मक संरचना होती है। | यह मूलांकुर (radicle) तथा मूल गोप को ढकने वाली एक सुरक्षात्मक परत होती है। |
| 2. | यह मिट्टी से ऊपर उठकर हरे पत्ते जैसी संरचना बनाता है। | यह मिट्टी के भीतर ही रहता है और बाहर नहीं निकलता। |
(ग) अध्यावरण तथा बीज चोल में अन्तर:
| क्र० सं० | अध्यावरण (Integument) | बीज चोल (Seed coat) |
|---|---|---|
| 1. | यह बीजाण्ड (ovule) की चारों ओर से सुरक्षा करने वाली जीवित परत होती है। | यह परिपक्व बीज को सुरक्षा प्रदान करने वाली बाह्य मृत परत होती है। |
| 2. | निषेचन के पश्चात् यही परत बीज चोल में परिवर्तित हो जाती है। | यह बीजाण्ड के बाह्य और अन्तः अध्यावरणों से विकसित होती है। |
(घ) परिभ्रूण पोष तथा फलभित्ति में अन्तर:
| क्र० सं० | परिभ्रूण पोष (Perisperm) | फलभित्ति (Pericarp) |
|---|---|---|
| 1. | यह बीजों में बचा हुआ बीजाण्डकाय (persistent nucellus) होता है; जैसे-काली मिर्च में। | यह निषेचन के पश्चात् अण्डाशय की दीवार से विकसित फल का छिलका होता है। |
| 2. | यह सामान्यतः शुष्क और पतली झिल्लीनुमा परत के रूप में होता है। | यह तीन परतों (बाह्य, मध्य, अन्तः फलभित्ति) में विभाजित हो सकती है। |
In simple words: यह पौधों के अलग-अलग अंगों के बीच के अंतर हैं, जैसे प्रांकुर चोल पत्तियों को बचाता है और मूलांकुर चोल जड़ों को। अध्यावरण बीजाण्ड का रक्षा कवच है, जबकि बीज चोल बीज का।
🎯 Exam Tip: Always present structural differences in a tabular form. Clearly highlight corresponding parts (e.g., epicotyl-hypocotyl, coleoptile-coleorhiza) with appropriate labels.
Question 14. एक सेब को आभासी फल क्यों कहते हैं ? पुष्प का कौन-सा भाग फल की रचना करता है ?
Answer: सामान्यतः फल का विकास निषेचित अण्डाशय (ovary) से होता है। परंतु जिन फलों के विकास में अण्डाशय के साथ-साथ पुष्प का अन्य भाग जैसे पुष्पासन (thalamus) भी भाग लेता है, उन्हें आभासी फल (false fruit) या कूट फल कहते हैं। सेब में खाने योग्य गूदेदार भाग पुष्पासन से विकसित होता है, न कि अण्डाशय से; इसी कारण सेब को आभासी फल कहते हैं। पुष्प का निषेचित अण्डाशय ही वास्तविक फल की रचना करता है। यह प्राकृतिक प्रक्रिया पौधों में परागण और बीज प्रकीर्णन की सफलता को बढ़ाने के लिए अनुकूलित है.
In simple words: सच्चा फल वह है जो केवल अंडाशय से बने। सेब में फल का मुख्य हिस्सा फूल के 'पुष्पासन' (thalamus) से बनता है, इसलिए इसे आभासी या झूठा फल कहते हैं।
🎯 Exam Tip: Use the term 'Thalamus' (पुष्पासन) as the key reason for apple being a false fruit. Clearly state that in true fruits, only the 'Ovary' develops into the fruit.
Question 15. विपुंसन से क्या तात्पर्य है ? एक पादप प्रजनक कब और क्यों इस तकनीक का प्रयोग करता है ?
Answer: द्विलिंगी पुष्प की कली अवस्था में, परागकोश के प्रस्फुटन से पूर्व उसे चिमटी या अन्य किसी साधन द्वारा काटकर अलग करने की प्रक्रिया को विपुंसन (emasculation) कहते हैं। एक पादप प्रजनक (plant breeder) इस तकनीक का प्रयोग कृत्रिम परागण (artificial hybridization) के दौरान करता है। वह इसका प्रयोग तब करता है जब उसे किसी द्विलिंगी पुष्प में स्व-परागण को रोकना हो और अपनी इच्छानुसार किसी अन्य उन्नत किस्म के परागकणों द्वारा निषेचन कराना हो। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च उत्पादकता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और वांछित गुणों वाली नई फसल किस्में विकसित करना है।
In simple words: द्विलिंगी फूलों से उनके नर भाग (परागकोश) को कली अवस्था में ही काट देना विपुंसन कहलाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि फूल खुद परागित न हो सके और वैज्ञानिक उस पर अपनी पसंद के परागकण डालकर नई किस्म बना सकें।
🎯 Exam Tip: Remember that emasculation is performed only in bisexual flowers before the anther dehisces. Mention its role in 'Artificial Hybridization' (कृत्रिम संकरण) to secure full marks.
Question 16. यदि कोई व्यक्ति वृद्धि कारकों का प्रयोग करते हुए अनिषेकजनन को प्रेरित करता है तो आप प्रेरित अनिषेकजनन के लिए कौन-सा फल चुनते हैं और क्यों ?
Answer: प्रेरित अनिषेकजनन (induced parthenocarpy) के लिए हम 'केला' (banana), 'अंगूर' (grapes) या 'संतरा' (orange) जैसे फल चुनेंगे। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि अनिषेकजनन द्वारा विकसित फल पूर्णतः बीज रहित (seedless) होते हैं। बीज रहित फल खाने में अधिक सुगम होते हैं और उनकी व्यावसायिक मांग भी अधिक होती है। इसके अतिरिक्त, इन फलों में गूदे का अनुपात काफी बढ़ जाता है जिससे खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता और उपभोक्ता की संतुष्टि दोनों में उल्लेखनीय सुधार होता है।
In simple words: हम अनिषेकजनन के लिए केला या अंगूर चुनेंगे क्योंकि इस प्रक्रिया से बने फल बिना बीज के होते हैं, जिन्हें खाना आसान होता है और बाजार में इनकी मांग ज्यादा होती है।
🎯 Exam Tip: Parthenocarpic fruits are 'seedless'. Mention this as the primary commercial and consumer advantage when selecting fruits like banana or grapes.
Question 17. परागकण भित्ति रचना में टेपीटम की भूमिका की व्याख्या कीजिए।
Answer: लघुबीजाणुधानी की सबसे भीतरी परत को टेपीटम (tapetum) कहते हैं। परागकण भित्ति रचना में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, जो निम्नलिखित है –
1. पोषण प्रदान करना: टेपीटम की कोशिकाएँ विकासशील लघुबीजाणुओं (परागकणों) को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती हैं।
2. स्पोरोपोलेनिन का स्राव: टेपीटम 'यूबिश काय' (Ubish bodies) का स्राव करती है जो परागकण की बाह्यचोल (exine) के निर्माण के लिए स्पोरोपोलेनिन (sporopollenin) प्रदान करती है। यह पदार्थ परागकणों को अत्यधिक प्रतिरोधी बनाता है।
3. पराग-किट (Pollen-kit) का निर्माण: कीट-परागित पुष्पों में यह परागकणों के चारों ओर एक चिपचिपी और पीले रंग की तैलीय परत (पराग-किट) बनाती है जो कीटों को आकर्षित करने में सहायक होती है। इन कार्यों के कारण परागकणों का सुरक्षित रहना और सफल निषेचन सुनिश्चित होता है।
In simple words: टेपीटम परागकणों को भोजन देता है। यह उनके बाहरी कठोर आवरण (स्पोरोपोलेनिन) को बनाने में मदद करता है, जिससे परागकण सालों-साल खराब नहीं होते।
🎯 Exam Tip: Keywords like 'Sporopollenin' (स्पोरोपोलेनिन) and 'Ubish bodies' (यूबिश काय) are critical for securing full marks. Clearly link tapetum with the formation of the outer exine layer.
Question 18. असंगजनन क्या है ? इसका क्या महत्त्व है ? (2014, 17)
Answer: बिना निषेचन (बिना युग्मक संलयन और अर्धसूत्री विभाजन) के ही बीज या नए पौधे के निर्माण की प्रक्रिया को असंगजनन (apomixis) कहते हैं; जैसे-एस्टेरेसी और घासों में। इसका कृषि तथा बागवानी में निम्नलिखित महत्व है –
1. संकर बीजों (hybrid seeds) के गुणों को बनाए रखना: संकर पौधों से प्राप्त साधारण बीजों को बोने पर उनके आनुवंशिक गुण पृथक (segregate) हो जाते हैं, जिससे अच्छी फसल नहीं मिलती। परतु असंगजनन द्वारा उत्पादित संकर बीजों से प्रतिवर्ष आनुवंशिक रूप से समान संतति प्राप्त होती है।
2. लागत में कमी: किसानों को हर साल महंगे संकर बीज खरीदने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे उनकी उत्पादन लागत काफी कम हो जाती है। यह आनुवंशिक तकनीक पारंपरिक कृषि पद्धतियों में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखती है।
In simple words: बिना निषेचन के सीधे बीज बन जाने की क्रिया को असंगजनन कहते हैं। इससे संकर (hybrid) पौधों के अच्छे गुण कई पीढ़ियों तक वैसे ही बने रहते हैं, जिससे किसानों का खर्च बचता है।
🎯 Exam Tip: Highlight that 'apomixis' mimics sexual reproduction but is actually asexual. Emphasize its role in preventing the segregation of hybrid traits.
परीक्षापयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. आवरणविहीन तथा एककोशिकीय जनन अंग प्रमुख लक्षण हैं – (2015)
(क) ब्रायोफाइटा के
(ख) टेरिडोफाइटा के
(ग) अनावृतबीजियों के
(घ) थैलोफाइटा के
Answer: (घ) थैलोफाइटा के
In simple words: थैलोफाइटा (जैसे शैवाल) के जनन अंग बहुत सरल, एककोशिकीय और बिना किसी सुरक्षा कवच के होते हैं।
🎯 Exam Tip: Thallophytes have the simplest body design, hence their reproductive organs lack multi-cellular sterile jackets.
Question 2. एक आवृतबीजी में 400 परागकणों को उत्पन्न करने के लिए कितने अर्ध-सूत्री विभाजन आवश्यक होंगे? (2015)
(क) 400
(ख) 100
(ग) 200
(घ) 50
Answer: (ख) 100
In simple words: एक अर्ध-सूत्री विभाजन से 4 परागकण बनते हैं। इसलिए 400 परागकण बनाने के लिए हमें 400 को 4 से भाग देना होगा, जो कि 100 आता है।
🎯 Exam Tip: Use the formula: Number of divisions = Total pollen grains / 4. This is a very common numerical question in exams.
Question 3. परागकण मातृकोशिका में गुणसूत्रों की संख्या होती है (2016)
(क) अगुणित
(ख) द्विगुणित
(ग) त्रिगुणित
(घ) बहुगुणित
Answer: (ख) द्विगुणित
In simple words: परागकण मातृकोशिका मुख्य पौधे का हिस्सा होती है, इसलिए इसमें गुणसूत्रों के दो सेट (द्विगुणित या 2n) होते हैं, जो विभाजन के बाद अगुणित हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: Mother cells (मातृकोशिका) of microspores are always diploid (2n), whereas the resulting pollen grains are haploid (n).
Question 4. बीजाण्ड का वह स्थान जहाँ बीजाण्डवृत्त जुड़ा होता है उसे कहते हैं (2017)
(क) निभाग (चलाजा)
(ख) नाभिका (हाइलम)
(ग) केन्द्रक
(घ) माइक्रोपाइल
Answer: (ख) नाभिका (हाइलम)
In simple words: बीजाण्ड की मुख्य देह और उसके डंठल (बीजाण्डवृत्त) के जोड़ वाले बिंदु को नाभिका (hilum) कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: Hilum represents the junction where the body of the ovule fuses with the funicle. Memorize this definition for quick marks.
Question 5. परागनलिका का अध्यावरण द्वारा बीजाण्ड में प्रवेश कहलाता है (2017)
(क) निभागी युग्मन
(ख) अण्डद्वारी प्रवेश
(ग) इनमें से दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (घ) इनमें से कोई नहीं
In simple words: अध्यावरण (integuments) के माध्यम से परागनलिका का प्रवेश 'मध्यप्रवेश' (mesogamy) कहलाता है, जो दिए गए विकल्पों में नहीं है।
🎯 Exam Tip: Entry through integuments is called Mesogamy, through micropyle is Porogamy, and through chalaza is Chalazogamy.
Question 6. द्विनिषेचन का तात्पर्य है (2017)
(क) दो नर युग्मकों का अण्डकोशिका से संयोजन
(ख) एक नर युग्मक का अण्डकोशिका से तथा दूसरे का द्वितीयक केन्द्रक से संयोजन
(ग) इनमें से दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ख) एक नर युग्मक का अण्डकोशिका से तथा दूसरे का द्वितीयक केन्द्रक से संयोजन
In simple words: द्विनिषेचन में दो अलग-अलग निषेचन होते हैं: एक से भ्रूण बनता है और दूसरे से भ्रूणपोष (भोजन) बनता है।
🎯 Exam Tip: Double fertilization is the defining feature of angiosperms, consisting of syngamy and triple fusion.
Question 7. द्विनिषेचन क्रिया होती है (2014)
(क) शैवालों में
(ख) ब्रायोफाइट्स में
(ग) अनावृतबीजी पौधों में
(घ) आवृतबीजी पौधों में
Answer: (घ) आवृतबीजी पौधों में
In simple words: द्विनिषेचन केवल आवृतबीजी (फूलों वाले पौधों) में ही पाया जाता है, यह अन्य किसी पादप वर्ग में नहीं होता।
🎯 Exam Tip: Double fertilization is exclusive to Angiosperms (आवृतबीजी). It was discovered by Nawaschin.
Question 8. भारतीय भ्रूण-विज्ञान के जनक है – (2017)
(क) राम उदार
(ख) बी०एन० प्रसाद
(ग) पी०एन० मेहरा
(घ) पी० माहेश्वरी
Answer: (घ) पी० माहेश्वरी
In simple words: प्रोफेसर पंचानन माहेश्वरी (P. Maheshwari) को भारत में भ्रूण-विज्ञान का जनक माना जाता है।
🎯 Exam Tip: Remember Professor P. Maheshwari for his pioneering work on plant embryology in India.
Question 9. नारियल का रेशे उत्पन्न करने वाला भाग है – (2016)
(क) बाह्य फलभित्ति
(ख) अन्तः फलभित्ति
(ग) मध्य फलभित्ति
(घ) तना तथा पत्ती
Answer: (ग) मध्य फलभित्ति
In simple words: नारियल के ऊपर जो रेशा होता है, वह उसकी बीच वाली परत यानी मध्य फलभित्ति (mesocarp) से बनता है।
🎯 Exam Tip: The fibrous husk of coconut is the mesocarp, whereas the edible white part is the endosperm.
Question 10. बहुभ्रूणता खोजी गई (2017)
(क) ल्यूवेनहॉक द्वारा
(ख) माहेश्वरी द्वारा
(ग) विन्कलर द्वारा
(घ) कूपर द्वारा
Answer: (क) ल्यूवेनहॉक द्वारा
In simple words: एंटोनी वॉन ल्यूवेनहॉक ने सबसे पहले संतरे के बीजों में एक से अधिक भ्रूण (बहुभ्रूणता) की खोज की थी।
🎯 Exam Tip: Leeuwenhoek discovered polyembryony in 1719 in Citrus plants (orange).
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. युक्तपुंकेसरी दशा किसे कहते हैं? (2017)
Answer: जब किसी पुष्प के सभी पुंकेसर (stamens) आपस में पूरी तरह जुड़े या संलग्न होते हैं, तो इस स्थिति को युक्तपुंकेसरी (synandrous) दशा कहते हैं; जैसे-Cucurbitaceae (कद्दू, लौकी) कुल के पौधों में। यह व्यवस्था परागण की प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने में मदद करती है।
In simple words: जब फूल के सारे पुंकेसर (नर भाग) आपस में जुड़े रहते हैं, तो उसे युक्तपुंकेसरी दशा कहते हैं।
🎯 Exam Tip: Provide 'Cucurbitaceae' as the standard textbook example for synandrous condition.
Question 2. चतुर्दी पुंकेसर किसे कहते हैं? (2017)
Answer: जब एक पुष्प में कुल छह पुंकेसर होते हैं, जिनमें से चार पुंकेसर लंबे (भीतर की ओर) तथा दो पुंकेसर छोटे (बाहर की ओर) होते हैं, तो इस अवस्था को चतुर्दी (tetradynamous) पुंकेसरी कहते हैं; जैसे-सरसों (Mustard) के पुष्प में। यह व्यवस्था परागकणों के वितरण को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने में सहायक होती है।
In simple words: यदि फूल में छह पुंकेसर हों, जिनमें से चार लंबे और दो छोटे हों, तो इसे चतुर्दी पुंकेसर कहते हैं (जैसे सरसों में)।
🎯 Exam Tip: Mention the specific arrangement (4 long + 2 short) and give 'Mustard' as the example to score full marks.
Question 3. जौ या गेहूँ के 100 दाने बनाने के लिए कितने अर्द्धसूत्री विभाजन की आवश्यकता होगी? (2017, 18)
Answer: जौ या गेहूँ के 100 दाने (बीज) बनाने के लिए 125 अर्द्धसूत्री विभाजनों की आवश्यकता होगी। इसमें 100 नर युग्मक बनाने के लिए 25 विभाजन (चूंकि 1 विभाजन से 4 परागकण बनते हैं) और 100 मादा युग्मक बनाने के लिए 100 विभाजन (चूंकि 1 विभाजन से केवल 1 क्रियाशील अंड बनता है) होते हैं। यह गणना कुल 100 सफल निषेचनों को दर्शाती है जो दानों के निर्माण के लिए आवश्यक हैं।
In simple words: 100 दाने बनाने के लिए 100 परागकण (25 विभाजन) और 100 अंड कोशिकाएं (100 विभाजन) चाहिए, इसलिए कुल 125 विभाजन होंगे।
🎯 Exam Tip: Use the formula: n + (n/4) for monocot seeds, where n is the number of seeds. (100 + 25 = 125).
Question 4. परिपक्व परागकोष की अनुप्रस्थ काट का चित्र बनाइए। (2015, 17)
Answer: एक परिपक्व परागकोष की अनुप्रस्थ काट (T.S. of mature anther) में मुख्यतः चार परागधानियाँ होती हैं जिनमें बाह्यत्वचा (epidermis), अंतःत्वचा (endothecium), मध्य परतें (middle layers), टेपीटम (tapetum) और परागकण (pollen grains) उपस्थित होते हैं। यह चित्र परागकोश के फटने के समय उसके आंतरिक अंगों की स्थिति को दिखाता है।
In simple words: यह परागकोश की अंदरूनी संरचना है जिसमें चार कोने होते हैं और हर कोने में परागकण भरे होते हैं।
🎯 Exam Tip: Label the four layers from outer to inner: Epidermis -> Endothecium -> Middle layers -> Tapetum. Clearly mark 'Pollen grains' inside.
Question 5. ऊर्ध्ववर्ती एवं अधोवर्ती अण्डाशयों की लम्ब काट का नामांकित चित्र बनाइए। (2015)
Answer: ऊर्ध्ववर्ती (superior) अण्डाशय में पुष्प के अन्य भाग पुष्पासन पर अण्डाशय के नीचे से निकलते हैं, जबकि अधोवर्ती (inferior) अण्डाशय में पुष्प के अन्य भाग अण्डाशय के ऊपर से निकलते हैं। यह अंतर पौधों के वर्गीकरण और उनके जैविक विकास को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
In simple words: ऊर्ध्ववर्ती में अण्डाशय फूल के बाकी हिस्सों से ऊपर होता है, जबकि अधोवर्ती में वह बाकी हिस्सों के नीचे दबा होता है।
🎯 Exam Tip: Draw superior ovary showing thalamus below it, and inferior ovary showing thalamus enclosing it, with calyx and corolla on top.
Question 6. पॉलीगोनम प्रकार के भ्रूणकोष में कितने केन्द्र उपस्थित होते हैं? (2017)
Answer: पॉलीगोनम प्रकार का भ्रूणकोष आवृतबीजी पौधों में सबसे सामान्य प्रकार का भ्रूणकोष है, जो परिपक्व होने पर 8-केन्द्रकीय (8-nucleate) तथा 7-कोशिकीय (7-celled) होता है। इसके विकास के दौरान क्रमिक केन्द्रकीय विभाजन होते हैं जो इस निश्चित प्रारूप को जन्म देते हैं।
In simple words: पॉलीगोनम प्रकार के भ्रूणकोष में कुल 8 केन्द्रक (nuclei) होते हैं।
🎯 Exam Tip: Remember that Polygonum type is monosporic, 7-celled, and 8-nucleate. Keep these numbers on your fingertips.
Question 7. भ्रूणपोष केन्द्रक का निर्माण कैसे होता है? इसमें उपस्थित गुणसूत्रों की संख्या कितनी होती (2015)
Answer: भ्रूणपोष केन्द्रक (Endosperm nucleus) का निर्माण भ्रूणकोष के भीतर द्विगुणित द्वितीयक केन्द्रक (2n) तथा एक अगुणित नर युग्मक (n) के संलयन (त्रि-संलयन) के फलस्वरूप होता है। त्रि-संलयन के कारण इसमें उपस्थित गुणसूत्रों की संख्या त्रिगुणित (triploid, 3n) होती है। यह केन्द्रक आगे विभाजित होकर भ्रूण को निरंतर पोषण पहुँचाने का कार्य करता है।
In simple words: भ्रूणपोष केन्द्रक दो ध्रुवीय केन्द्रकों और एक नर युग्मक के मिलने से बनता है। इसमें गुणसूत्रों की संख्या त्रिगुणित (3n) होती है।
🎯 Exam Tip: Clearly specify the combination: Secondary Nucleus (2n) + Male Gamete (n) = PEN (3n). Explicitly mention 'triploid' or '3n'.
Question 8. निमीलिता को परिभाषित कीजिए तथा एक उदाहरण भी दीजिए। (2014)
Answer: कुछ द्विलिंगी पुष्प कभी भी नहीं खिलते हैं (सदैव बंद रहते हैं), पुष्पों के इस लक्षण को निमीलिता (Cleistogamy) कहते हैं; जैसे-कनकौआ (Commelina), गुलमेहँदी (Impatiens), बनफसा (Viola) आदि। ऐसे बंद पुष्पों में स्व-परागण निश्चित रूप से संपन्न होता है क्योंकि बाहरी परागकणों का प्रवेश पूरी तरह असंभव होता है।
In simple words: फूलों का हमेशा बंद रहना जिससे उनमें केवल स्व-परागण ही हो सके, निमीलिता कहलाता है; जैसे कनकौआ में।
🎯 Exam Tip: Commelina (कनकौआ) is the most preferred textbook example. Define it as an adaptation that guarantees seed set even in the absence of pollinators.
Question 9. भ्रूणपोष का विकास आवृतबीजी पौधों में किस प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है? (2017)
Answer: आवृतबीजी पौधों में भ्रूणपोष (endosperm) का विकास द्विनिषेचन (double fertilization) के अंतर्गत होने वाली त्रि-संलयन (triple fusion) की प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है। यह त्रिगुणित संरचना विकासशील भ्रूण के लिए निरंतर खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करती है।
In simple words: भ्रूणपोष का विकास नर युग्मक और द्वितीयक केन्द्रक के मिलने (त्रि-संलयन) के बाद होता है, जो विकासशील भ्रूण को भोजन देता है।
🎯 Exam Tip: Use the term 'Triple fusion' (त्रि-संलयन) as it is the exact process that initiates endosperm development.
Question 10. प्रजनन की पाल्मेला स्टेज किस पादप में पाई जाती है? (2015)
Answer: प्रजनन की पाल्मेला स्टेज (palmella stage) क्लेमाइडोमोनास (Chlamydomonas) नामक एककोशिकीय हरे शैवाल में पाई जाती है। यह प्रतिकूल परिस्थितियों में कोशिका की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण अनुकूलन है।
In simple words: प्रतिकूल परिस्थितियों में क्लेमाइडोमोनास की कोशिकाएं विभाजित होकर एक लसदार परत में सुरक्षित हो जाती हैं, जिसे पाल्मेला स्टेज कहते हैं।
🎯 Exam Tip: The correct spelling of 'Chlamydomonas' (क्लेमाइडोमोनास) must be written to ensure full marks.
Question 11. पालिनिया का नामांकित चित्र बनाइये। (2017)
Answer: पालिनिया (Pollinia) आक (Calotropis) जैसे पौधों के परागकोशों में पाया जाने वाला एक विशिष्ट परागकण पिंड है। इस चित्र में कार्पसकुलम (corpusculum), कॉडिकल (caudicle) और पॉलिनिया (pollinia) की स्पष्ट स्थिति दर्शाई गई है जो कीटों द्वारा परागण में सहायक होती है।
In simple words: यह आक (मदार) के फूल की एक विशेष रचना है जिसमें बहुत सारे परागकण एक थैली जैसे पिंड में बंधे होते हैं ताकि कीट उन्हें एक साथ ले जा सकें।
🎯 Exam Tip: While drawing pollinia, label the key parts: 'Corpusculum' (चिपचिपा भाग), 'Caudicle' (डंठल), and 'Pollinia' (पराग पिंड) carefully.
Question 12. निम्न में अन्तर कीजिए – (2017)
(i) उभयलिंगाश्रयी तथा एकलिंगाश्रयी।
(ii) समकालपक्वता तथा पूर्वपुँपक्वता।
(iii) भ्रूणपोषी तथा अभ्रूणपोषी बीज।
Answer:
(i) उभयलिंगाश्रयी तथा एकलिंगाश्रयी: उभयलिंगाश्रयी (Monoecious) पौधों में नर तथा मादा पुष्प एक ही पौधे पर अलग-अलग स्थानों पर उपस्थित होते हैं; जैसे-लौकी, कद्दू, मक्का। इसके विपरीत, एकलिंगाश्रयी (Dioecious) पौधों में नर तथा मादा पुष्प दो अलग-अलग पौधों पर पाए जाते हैं; जैसे-पपीता, शहतूत। यह पौधों में स्व-परागण को रोकने की एक प्राकृतिक विधि है।
(ii) समकालपक्वता तथा पूर्वपुँपक्वता: समकालपक्वता (Homogamy) में पुष्प के परागकोश तथा वर्तिकाग्र एक ही समय पर परिपक्व होते हैं, जिससे स्व-परागण सुनिश्चित होता है; जैसे-सदाबहार (Vinca rosea)। पूर्वपुँपक्वता (Protandry) में पुष्प के परागकोश (पुमंग), जायांग से पहले परिपक्व हो जाते हैं, जिससे पर-परागण को बढ़ावा मिलता है; जैसे-गुड़हल, कपास।
(iii) भ्रूणपोषी तथा अभ्रूणपोषी बीज: भ्रूणपोषी (Endospermic / Albuminous) बीजों में भ्रूण के विकास और बीज के अंकुरण तक भ्रूणपोष सुरक्षित रहता है, जिससे बीजपत्र पतले होते हैं; जैसे-गेहूँ, मक्का, अरंडी। अभ्रूणपोषी (Non-endospermic / Exalbuminous) बीजों में भ्रूण के विकास के दौरान भ्रूणपोष पूरी तरह समाप्त हो जाता है और भोजन बीजपत्रों में संचित रहता है, जिससे वे मोटे हो जाते हैं; जैसे-चना, मटर, सेम।
In simple words:
(i) उभयलिंगाश्रयी में नर-मादा फूल एक ही पौधे पर होते हैं, जबकि एकलिंगाश्रयी में अलग-अलग पौधों पर होते हैं।
(ii) समकालपक्वता में नर-मादा भाग साथ में पकते हैं, जबकि पूर्वपुँपक्वता में नर भाग पहले पकता है।
(iii) भ्रूणपोषी बीजों में भ्रूणपोष (भोजन) बचा रहता है, जबकि अभ्रूणपोषी बीजों में यह विकास के दौरान खत्म हो जाता है।
🎯 Exam Tip: Always write differences under separate headings with proper examples. Correct scientific terms like 'Monoecious' and 'Dioecious' will fetch full marks.
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. आवृतबीजों में नर युग्मकोद्भिद का संक्षिप्त विवरण दीजिए। (2009, 16)
या
एक आवृतबीजी पौधे के परागकण के अंकुरण की विभिन्न अवस्थाओं का वर्णन कीजिए। (2010, 12, 15, 16)
Answer: आवृतबीजी पौधों में लघुबीजाणु या परागकण (pollen grain) ही नर युग्मकोद्भिद (male gametophyte) की प्रथम कोशिका है। परागकोश के स्फुटन से पूर्व ही इसके भीतर परागकण का अंकुरण प्रारंभ हो जाता है। सर्वप्रथम परागकण का केन्द्रक समसूत्री विभाजन द्वारा दो केन्द्रकों में विभाजित हो जाता है – एक बड़ा वर्दी केन्द्रक या नली केन्द्रक (vegetative or tube nucleus) तथा एक छोटा जनन केन्द्रक (generative nucleus)। वर्दी केन्द्रक कोशिका द्रव्य में तैरता रहता है और परागनली के विकास को नियंत्रित करता है।
परागण की क्रिया द्वारा परागकण स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र (stigma) पर पहुँचते हैं। यहाँ वे शर्करा युक्त स्राव को अवशोषित कर फूल जाते हैं। इसके बाद परागकण का अंतःचोल (intine) जनन छिद्र (germ pore) से होकर एक नली के रूप में बाहर निकलता है, जिसे परागनली (pollen tube) कहते हैं। परागनली वर्तिका के ऊतकों से होती हुई बीजाण्ड की ओर बढ़ती है। इसी दौरान जनन केन्द्रक समसूत्री विभाजन द्वारा विभाजित होकर दो अचल नर युग्मकों (male gametes) का निर्माण करता है। इस प्रकार, तीन केन्द्रक युक्त परागनली ही परिपक्व नर युग्मकोद्भिद का प्रतिनिधित्व करती है।
In simple words: परागकण ही नर युग्मकोद्भिद की शुरुआत है। पहले यह दो भागों (वर्दी और जनन केन्द्रक) में बंटता है। वर्तिकाग्र पर पहुँचने के बाद यह एक नली (परागनली) बनाता है जिसमें दो नर युग्मक बनते हैं जो निषेचन में भाग लेते हैं।
🎯 Exam Tip: Draw the developmental stages of pollen showing the division of generative cell and tube nucleus. Highlight that the mature male gametophyte is a 3-celled structure.
Question 2. वायु परागण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2016)
या
वायु परागित पुष्पों की विशेषताएँ लिखिए। (2017)
Answer: जब परागकणों का एक पुष्प से दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण वायु के माध्यम से होता है, तो इसे वायु परागण (Anemophily) कहते हैं तथा ऐसे पुष्पों को वायु परागित पुष्प कहते हैं। वायु परागित पुष्पों में निम्नलिखित मुख्य विशेषताएँ पाई जाती हैं –
(i) ये पुष्प छोटे, अनाकर्षक, रंगहीन, गंधहीन तथा मकरंद रहित होते हैं क्योंकि इन्हें कीटों को आकर्षित करने की आवश्यकता नहीं होती।
(ii) वायु परागण में बहुत सारे परागकणों का नुकसान होता है, इसलिए ये पुष्प अत्यधिक मात्रा में परागकण उत्पन्न करते हैं (जैसे-मक्का का एक पौधा लगभग 2 करोड़ परागकण बनाता है)।
(iii) परागकण बहुत छोटे, हल्के, शुष्क तथा चिकने होते हैं, जिससे वे हवा में आसानी से उड़ सकें। कुछ पौधों (जैसे-चीड़) में परागकण पंखयुक्त (winged) होते हैं।
(iv) इनके पुंकेसर लंबे तथा पुष्प के बाहर निकले होते हैं ताकि हवा के झोंकों से परागकण आसानी से बिखर सकें।
(v) इनका वर्तिकाग्र लंबा, शाखित या रोमयुक्त (feathery) होता है, जिससे हवा में उड़ते हुए परागकणों को आसानी से पकड़ा जा सके; जैसे मक्का की भुट्टे पर लटकने वाले लंबे धागे।
(vi) पुंकेसर के परागकोश बहुधा मुक्तदोली (versatile) होते हैं, जो हवा में आसानी से डोल सकते हैं।
(vii) ये पुष्प प्रायः एकलिंगी होते हैं और पत्तियों के निकलने से पहले ही खिल जाते हैं ताकि पत्तियों से परागण में बाधा न आए।
In simple words: हवा के द्वारा होने वाले परागण को वायु परागण कहते हैं। इसके फूल बहुत छोटे, बिना खुशबू और रंग के होते हैं, लेकिन इनके परागकण बहुत हल्के होते हैं और वर्तिकाग्र चिपचिपा या पंख जैसा होता है ताकि वे हवा से उड़ते हुए परागकणों को पकड़ सकें।
🎯 Exam Tip: List at least 4 anatomical adaptations of wind-pollinated flowers. The feathery stigma (रोमयुक्त वर्तिकाग्र) and versatile anthers (मुक्तदोली परागकोश) are highly expected keywords.
Question 3. आवृतबीजी पौधों में द्विनिषेचन की क्रिया का सचित्र वर्णन कीजिए। (2011)
या
द्विनिषेचन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2009, 11, 12, 14, 15, 16)
या
दोहरा निषेचन को परिभाषित कीजिए। (2017)
Answer: आवृतबीजी पौधों में निषेचन की क्रिया दो बार संपन्न होती है, जिसे द्विनिषेचन या दोहरा निषेचन (Double Fertilization) कहते हैं। इसकी खोज सर्वप्रथम एस० जी० नावाशिन (S.G. Nawaschin) ने 1898 में की थी। इसकी पूरी प्रक्रिया निम्नलिखित दो मुख्य चरणों में संपन्न होती है –
(i) युग्मक संलयन या वास्तविक निषेचन (Syngamy): परागनली से मुक्त होने वाले दो नर युग्मकों में से एक अगुणित नर युग्मक (n), मादा अंड कोशिका (n) के साथ संलयित होकर एक द्विगुणित युग्मनज (zygote, 2n) का निर्माण करता है। यही युग्मनज आगे चलकर भ्रूण (embryo) में विकसित होता है।
(ii) त्रि-संलयन (Triple Fusion): दूसरा अगुणित नर युग्मक (n), भ्रूणकोष के मध्य में स्थित द्विगुणित द्वितीयक केन्द्रक (secondary nucleus, 2n) के साथ संलयन करता है। चूँकि इसमें तीन केन्द्रकों का संलयन होता है, अतः इसे त्रि-संलयन कहते हैं। इसके फलस्वरूप त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक (PEN, 3n) बनता है जो विभाजित होकर भ्रूणपोष (endosperm) बनाता है।
एक ही भ्रूणकोष के भीतर इन दोनों संलयनों (युग्मक संलयन तथा त्रि-संलयन) के होने के कारण ही इसे द्विनिषेचन कहते हैं। यह आवृतबीजी पौधों का एक अत्यंत विशिष्ट और अनिवार्य लक्षण है।
In simple words: फूलों वाले पौधों में दो बार निषेचन होता है। पहला नर युग्मक अंड कोशिका से मिलकर बच्चा (भ्रूण) बनाता है, और दूसरा नर युग्मक बीच वाले केन्द्रक से मिलकर भोजन (भ्रूणपोष) बनाता है। इसी दोहरी क्रिया को द्विनिषेचन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: Clearly write both equations: (1) Male Gamete (n) + Egg Cell (n) -> Zygote (2n), and (2) Male Gamete (n) + Secondary Nucleus (2n) -> PEN (3n). Mention the discoverer 'Nawaschin'.
Question 4. द्विनिषेचन के पश्चात् किसी आवृतबीजी पौधे के बीजाण्ड में होने वाले बहुत से परिवर्तनों का उल्लेख कीजिए। (2017)
Answer: द्विनिषेचन की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद बीजाण्ड (ovule) के भीतर अनेक संरचनात्मक और कार्यिकी परिवर्तन होते हैं, जो अंततः बीजाण्ड को बीज (seed) में बदल देते हैं। ये मुख्य परिवर्तन निम्नलिखित हैं –
(i) बाह्य अध्यावरण (Outer Integument): यह बीजाण्ड की बाहरी परत होती है जो कठोर होकर बीज का बाहरी आवरण यानी बीजचोल या टेस्टा (testa) बनाती है।
(ii) अन्तः अध्यावरण (Inner Integument): यह आंतरिक परत पतली झिल्ली के रूप में बीज का अन्तःकवच या टेगमैन (tegmen) बनाती है।
(iii) बीजाण्डवृत्त (Funiculus): यह डंठल जैसी संरचना नष्ट हो जाती है या सूखकर बीज का वृन्त बनाती है। लीची में इससे एक खाद्य मांसल ऊतक एरिल (aril) बनता है।
(iv) बीजाण्डद्वार (Micropyle): यह वैसे ही बना रहता है और बीज में एक छोटे छिद्र के रूप में कार्य करता है, जिससे बीज अंकुरण के समय ऑक्सीजन और जल अवशोषित करता है।
(v) बीजाण्डकाय (Nucellus): यह प्रायः भ्रूण के विकास के दौरान पूरी तरह समाप्त हो जाता है, परन्तु कुछ पौधों (जैसे-काली मिर्च) में यह एक पतली परत के रूप में बचा रहता है जिसे परिभ्रूणपोष (perisperm) कहते हैं।
(vi) युग्मनज (Zygote): द्विगुणित युग्मनज बार-बार विभाजित होकर मुख्य भ्रूण (embryo) का निर्माण करता है।
(vii) प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक (PEN): त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक तेजी से विभाजित होकर भ्रूणपोष (endosperm) बनाता है जो भ्रूण को पोषण देता है।
(viii) सहायक कोशिकाएं एवं प्रतिमुख कोशिकाएं (Synergids & Antipodal cells): ये सभी कोशिकाएं निषेचन के तुरंत बाद अपघटित या नष्ट हो जाती हैं। ये क्रमिक परिवर्तन नए पौधे के जीवन चक्र की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत अनुकूलित हैं।
In simple words: निषेचन के बाद बीजाण्ड बीज बन जाता है। बाहरी परत छिलका (बीजचोल) बनती है, युग्मनज से भ्रूण (छोटा पौधा) बनता है, और प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक से भोजन (भ्रूणपोष) बनता है, जबकि बाकी फालतू कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं।
🎯 Exam Tip: Memorize the conversions as direct matching terms: Ovule -> Seed, Ovary -> Fruit, Zygote -> Embryo, PEN -> Endosperm. This table of changes is highly scoring.
Question 5. भ्रूणकोष तथा भ्रूणपोष की तुलना कीजिए। (2010, 14, 15, 17)
Answer: भ्रूणकोष (Embryo sac) तथा भ्रूणपोष (Endosperm) के मध्य मुख्य तुलनात्मक विभेद निम्नलिखित तालिका में स्पष्ट किया गया है –
| क्र० सं० | भ्रूणकोष (Embryo sac) | भ्रूणपोष (Endosperm) |
|---|---|---|
| 1. | यह मादा युग्मकोद्भिद् (female gametophyte) का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें अंड कोशिका होती है। | यह एक पोषक ऊतक (nutritive tissue) है जो विकासशील भ्रूण को पोषण प्रदान करता है। |
| 2. | यह निषेचन से पहले क्रियाशील गुरुबीजाणु से विकसित होता है। | यह निषेचन के पश्चात् त्रि-संलयन (triple fusion) की क्रिया के फलस्वरूप बनता है। |
| 3. | इसकी सभी कोशिकाएं (अंड, सहायक, प्रतिमुख) अगुणित (haploid, n) होती हैं। | यह आवृतबीजी पौधों में त्रिगुणित (triploid, 3n) होता है। |
| 4. | यह एक निश्चित 7-कोशिकीय तथा 8-केन्द्रकीय संरचना होती है। | यह एक अनिश्चित बहुकोशिकीय संरचना होती है जिसमें भोजन संचित रहता है। |
| 5. | यह सभी आवृतबीजी पौधों के बीजाण्ड में अनिवार्य रूप से पाया जाता है। | यह बीज बनने के दौरान कुछ पौधों में पूरी तरह समाप्त हो जाता है (अभ्रूणपोषी)। |
In simple words: भ्रूणकोष वह थैली है जहाँ अंडाणु (मादा भाग) होता है और यह निषेचन से पहले बनता है, जबकि भ्रूणपोष वह भोजन है जो निषेचन के बाद बनता है ताकि बच्चे (भ्रूण) को बढ़ने में मदद मिल सके।
🎯 Exam Tip: The ploidy difference is key: Embryo sac is haploid (n) and Endosperm is triploid (3n). Highlighting this difference will ensure full marks.
Question 6. निम्न पर टिप्पणी लिखिए –
(क) अनिषेकफलन (2014, 17)
(ख) बहुभ्रूणता (2010, 14, 15, 16)
या
अनिषेकफलन एवं बहुभ्रूणता में अन्तर लिखिए। (2017)
Answer:
(क) अनिषेकफलन (Parthenocarpy): बिना निषेचन के ही अण्डाशय से सीधे फल के विकास की प्रक्रिया को अनिषेकफलन कहते हैं। इस प्रकार बने फल पूर्णतः बीज रहित (seedless) होते हैं; जैसे-केला, अंगूर, अनानास। यह प्राकृतिक रूप से भी होता है और इसे ऑक्सिन व जिबरेलिन जैसे पादप हार्मोन के छिड़काव द्वारा कृत्रिम रूप से भी प्रेरित किया जा सकता है। व्यापारिक दृष्टिकोण से बीज रहित फल अत्यधिक मूल्यवान होते हैं।
(ख) बहुभ्रूणता (Polyembryony): एक ही बीजाण्ड या बीज में एक से अधिक भ्रूणों (embryos) के उत्पन्न होने की प्रक्रिया को बहुभ्रूणता कहते हैं। इसकी खोज सर्वप्रथम एंटोनी वॉन ल्यूवेनहॉक ने 1719 में संतरे (Citrus) के बीजों में की थी। अनावृतबीजी पौधों में यह एक सामान्य घटना है परंतु आवृतबीजी पौधों में कम पाई जाती है। यह भ्रूणकोष में एक से अधिक अंड कोशिकाओं के निषेचन या बीजाण्डकाय/अध्यावरण की कोशिकाओं से अतिरिक्त भ्रूणों के बनने के कारण हो सकती है।
In simple words:
(क) अनिषेकफलन का मतलब है बिना निषेचन के बिना बीज वाला फल बनना (जैसे केला)।
(ख) बहुभ्रूणता का मतलब है एक ही बीज के अंदर बहुत सारे बच्चों (भ्रूणों) का बनना (जैसे संतरे में)।
🎯 Exam Tip: Provide clear definitions and precise examples for both. State 'seedless fruits' for parthenocarpy and 'multiple embryos' for polyembryony as the core concepts.
Question 7. असंगजनन (apomixis) क्या है? उपयुक्त उदाहरण देकर इस प्रक्रिया को समझाइए। (2014, 17)
या
अपबीजाणुता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2015)
Answer: कभी-कभी पौधों के जीवन चक्र में बिना युग्मक संलयन (fertilization) तथा बिना अर्धसूत्री विभाजन (meiosis) के ही नए पौधे या बीज का विकास हो जाता है, जिसे असंगजनन (Apomixis) कहते हैं। इसकी खोज विंकर (Winkler) ने 1908 में की थी। यह मुख्य रूप से निम्नलिखित दो रूपों में पाया जाता है –
(i) कायिक जनन (Vegetative Reproduction): जब पौधे का विकास बीज के बिना किसी कली, तने या पत्ती से होता है; जैसे-गन्ना, आलू।
(ii) अनिषेकबीजता (Agamospermy): लैंगिक जनन की अनुपस्थिति में बीज का निर्माण अनिषेकबीजता कहलाता है। इसमें अर्धसूत्री विभाजन न होने के कारण द्विगुणित अण्ड कोशिका या बीजाण्डकाय/अध्यावरण की कोई द्विगुणित कोशिका सीधे भ्रूण बना देती है। इसे अपबीजाणुता (Apospory) भी कहते हैं। इसकी खोज रोजनबर्ग ने की थी; जैसे-क्रेपिस (Crepis), पार्थिनियम। यह विधि संकर बीजों के वांछित गुणों को पीढ़ियों तक अक्षुण्ण रखने में सहायक होती है।
In simple words: जब बिना निषेचन और बिना गुणसूत्रों के बंटवारे के सीधे ही बीज या नया पौधा बन जाता है, तो उसे असंगजनन कहते हैं। यह किसानों के लिए संकर पौधों के अच्छे गुण बचाए रखने में बहुत काम आता है।
🎯 Exam Tip: Clearly distinguish between vegetative reproduction and agamospermy under apomixis. Mention that apomixis is a form of asexual reproduction that mimics sexual reproduction.
Question 8. अपयुग्युमन पर टिप्पणी लिखें। (2017)
Answer: अपयुगमन (Apogamy) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अगुणित भ्रूणकोष (haploid embryo sac) की अंड कोशिका (egg cell) के अतिरिक्त किसी अन्य अगुणित कोशिका, जैसे सहायक कोशिका (synergid) या प्रतिमुख कोशिका (antipodal cell), से बिना निषेचन के सीधे ही भ्रूण (embryo) का विकास हो जाता है। चूँकि इस प्रक्रिया में नर और मादा युग्मकों का संलयन नहीं होता, इसलिए बनने वाला नया पौधा आनुवंशिक रूप से अगुणित (haploid, n) होता है; जैसे-एरीथ्रिया (Erythrea), लिलियम (Lilium) आदि। यह पादप प्रजनन में शुद्ध वंशक्रम तैयार करने के लिए एक अत्यंत उपयोगी जैविक घटना है।
In simple words: जब भ्रूणकोष की अंडाणु के अलावा कोई दूसरी सहेली कोशिका (जैसे सहायक कोशिका) बिना निषेचन के ही सीधे बच्चे (भ्रूण) में बदल जाती है, तो उसे अपयुगमन कहते हैं। इससे बनने वाला पौधा अगुणित होता है।
🎯 Exam Tip: Define Apogamy clearly as development of embryo from any haploid cell of the embryo sac *other than the egg cell* without fertilization. Give 'Lilium' as an example.
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
Question 1. पुष्पीय पादपों में लघुबीजाणुजनन का सचित्र वर्णन कीजिए। (2011)
या
केवल नामांकित चित्रों की सहायता से आवृतबीजी पौधों में लघुबीजाणुजनन का वर्णन कीजिए। (2009, 11)
या
संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए – ‘लघुबीजाणुजनन’। (2010, 11, 14, 16)
या
परागकोश के विकास की विभिन्न अवस्थाओं का चित्रों की सहायता से वर्णन कीजिए। (2017)
Answer: लघुबीजाणुजनन (Microsporogenesis): परागकोश के भीतर परागकण मातृ कोशिकाओं से अर्धसूत्री विभाजन द्वारा अगुणित लघुबीजाणुओं या परागकणों के निर्माण की प्रक्रिया को लघुबीजाणुजनन कहते हैं। परागकोश के विकास की प्रारंभिक अवस्था में यह एक समरूप मृदूतकीय (parenchymatous) कोशिकाओं का समूह होता है जो बाह्यत्वचा (epidermis) द्वारा घिरा रहता है। शीघ्र ही यह चार पालियों वाली संरचना में बदल जाता है। प्रत्येक पाली में बाह्यत्वचा के नीचे कुछ अधःस्तरीय कोशिकाएँ (hypodermal cells) आकार में बड़ी हो जाती हैं जिनका जीवद्रव्य सघन और केन्द्रक स्पष्ट हो जाता है। इन कोशिकाओं को प्रप्रसू कोशिकाएँ (archesporial cells) कहते हैं।
प्रप्रसू कोशिका एक परिणत विभाजन (periclinal division) द्वारा विभाजित होकर दो कोशिकाएँ बनाती है –
1. प्राथमिक भित्तीय कोशिका (Primary Parietal Cell): यह बाहर की ओर होती है और विभाजित होकर परागकोश की भित्ति (epidermis के नीचे endothecium, middle layers, tapetum) का निर्माण करती है। सबसे भीतरी परत टेपीटम (tapetum) विकासशील परागकणों को पोषण प्रदान करती है।
2. प्राथमिक बीजाणुजनक कोशिका (Primary Sporogenous Cell): यह भीतर की ओर होती है और बिना विभाजन के सीधे या कुछ समसूत्री विभाजनों के बाद लघुबीजाणु मातृ कोशिका (microspore mother cell, \( 2n \)) के रूप में कार्य करती है।
प्रत्येक लघुबीजाणु मातृ कोशिका (\( 2n \)) में अर्धसूत्री विभाजन (meiosis) होता है, जिसके फलस्वरूप चार अगुणित (\( n \)) लघुबीजाणु बनते हैं। ये चारों लघुबीजाणु प्रारंभ में एक समूह में जुड़े रहते हैं जिसे लघुबीजाणु चतुष्क (microspore tetrad) कहते हैं। यह चतुष्क मुख्यतः चतुष्फलकीय (tetrahedral) या समद्विपाश्विक (isobilateral) रूप में व्यवस्थित होता है। परागकोश के परिपक्व व शुष्क होने पर ये आपस में अलग हो जाते हैं और परागकण (pollen grains) कहलाते हैं। यह वैज्ञानिक विधि पौधों में स्वस्थ परागकणों के निर्माण का आधार है।
In simple words: परागकोश के विकास के दौरान कुछ विशेष कोशिकाएं प्रप्रसू कोशिकाएं बनाती हैं। ये कोशिकाएं विभाजित होकर परागकोश की दीवारें और अंदर परागकण मातृ कोशिकाएं बनाती हैं, जिनमें अर्धसूत्री विभाजन होने से चार-चार अगुणित परागकण बनते हैं।
🎯 Exam Tip: Draw and label the schematic flow of divisions starting from Archesporial cell -> Primary Parietal & Primary Sporogenous cells. Emphasize the reduction division (अर्धसूत्री विभाजन) in Microspore Mother Cell.
Question 2. गुरुबीजाणुजनन क्या है? आवृतबीजी पौधों में मादा युग्मकोद्भिद के परिवर्धन का वर्णन कीजिए। (2010, 11)
या
चित्रों की सहायता से एक सामान्य 8-केन्द्रकीय भ्रूणकोष के विकास का वर्णन कीजिए। (2009, 11, 12)
या
आवृतबीजी पौधों में भ्रूणकोष कैसे बनता है? चित्रों की सहायता से समझाइए। विभिन्न केन्द्रकों के कार्य की विवेचना कीजिए। (2010)
या
आवृतबीजी पौधों में गुरुबीजाणुजनन प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। (2014, 17)
या
‘आवृतबीजियों में मादा युग्मकोद्भिद्’ पर टिप्पणी लिखिए। (2015)
या
भ्रूणकोष का नामांकित चित्र बनाइए। (2017)
Answer: गुरुबीजाणुजनन (Megasporogenesis): गुरुबीजाणु मातृ कोशिका से अर्धसूत्री विभाजन द्वारा अगुणित गुरुबीजाणुओं (megaspores) के निर्माण की प्रक्रिया को गुरुबीजाणुजनन कहते हैं। बीजाण्डकाय (nucellus) के बीजाण्डद्वारी हिस्से में एक अधःस्तरीय कोशिका बड़ी होकर प्रप्रसू कोशिका बनाती है, जो विभाजित होकर प्राथमिक भित्तीय कोशिका तथा प्राथमिक बीजाणुजनक कोशिका बनाती है। बीजाणुजनक कोशिका बिना विभाजन के सीधे गुरुबीजाणु मातृ कोशिका (\( 2n \)) की तरह कार्य करती है। इसमें अर्धसूत्री विभाजन होने से चार अगुणित गुरुबीजाणु बनते हैं जो एक रैखिक क्रम (linear tetrad) में व्यवस्थित होते हैं। इनमें से निभागी (chalazal) सिरे का केवल एक गुरुबीजाणु सक्रिय रहता है तथा शेष तीन बीजाण्डद्वारी सिरे के गुरुबीजाणु नष्ट हो जाते हैं।
मादा युग्मकोद्भिद (भ्रूणकोष) का परिवर्धन (Development of Embryo Sac):
सक्रिय गुरुबीजाणु का केन्द्रक समसूत्री विभाजन द्वारा विभाजित होकर दो केन्द्रक बनाता है जो दोनों विपरीत ध्रुवों पर चले जाते हैं। यहाँ दोनों ध्रुवों पर दो और क्रमिक समसूत्री विभाजनों द्वारा चार-चार केन्द्रक बन जाते हैं (कुल 8 केन्द्रक)। प्रत्येक ध्रुव से एक-एक केन्द्रक मध्य में आकर संलयित होकर द्विगुणित द्वितीयक केन्द्रक (secondary nucleus, \( 2n \)) बनाता है। बीजाण्डद्वारी सिरे पर तीन केन्द्रक अंड उपकरण (egg apparatus = 1 अंड कोशिका + 2 सहायक कोशिकाएँ) बनाते हैं। निभागी सिरे पर तीन केन्द्रक प्रतिमुख कोशिकाएँ (antipodal cells) बनाते हैं। इस प्रकार एक परिपक्व भ्रूणकोष 7-कोशिकीय तथा 8-केन्द्रकीय होता है। यह संपूर्ण प्रक्रिया बीजाण्ड के संरक्षण में अत्यंत सुरक्षित रूप से पूर्ण होती है।
In simple words: बीजाण्ड के अंदर एक बड़ी कोशिका में अर्धसूत्री विभाजन से चार गुरुबीजाणु बनते हैं, जिनमें से तीन नष्ट हो जाते हैं और केवल एक जीवित रहता है। यह अकेला जीवित गुरुबीजाणु तीन बार विभाजित होकर 8 केन्द्रकों वाला मादा भ्रूणकोष बनाता है।
🎯 Exam Tip: Draw the developmental stages showing 2-nucleate, 4-nucleate, and 8-nucleate stages of embryo sac. Explicitly mention that 3 chalazal spores degenerate, leaving only 1 functional megaspore.
Question 3. परागण किसे कहते हैं? सैल्विया में होने वाले परागण की क्रिया का वर्णन कीजिए। (2012)
Answer: परागण (Pollination): परागकोश से परागकणों का उसी पुष्प या उसी जाति के किसी अन्य पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचने की क्रिया को परागण कहते हैं। यह मुख्यतः दो प्रकार का होता है – स्व-परागण (self-pollination) तथा पर-परागण (cross-pollination)।
सैल्विया में कीट-परागण की क्रिया (Pollination in Salvia):
सैल्विया (Salvia) द्विलिंगी पुष्प है जिसमें कीटों (जैसे मधुमक्खियों) द्वारा परागण होता है। इसके पुष्प में एक विशेष 'लीवर यंत्र क्रियाविधि' (lever mechanism) पाई जाती है जो निम्नलिखित है –
1. सैल्विया का दलपुंज द्विओष्ठी (bilabiate) होता है जिसका निचला ओष्ठ कीटों के बैठने के लिए मंच (stage) का कार्य करता है।
2. इसके पुंकेसर का पुंतंतु छोटा होता है परंतु संयोजी (connective) बहुत लंबा और लचीला होता है जो लीवर की तरह कार्य करता है। संयोजी के ऊपरी छोर पर एक चौड़ा क्रियाशील परागकोश पाल (fertile anther lobe) और निचले छोर पर एक बन्ध्य परागकोश पाल (sterile lobe) होता है।
3. जब कोई कीट मकरंद की खोज में निचले ओष्ठ पर बैठता है और पुष्प के भीतर घुसने का प्रयास करता है, तो उसका सिर बन्ध्य परागकोश पाल से टकराता है। इसके टकराते ही लीवर घूम जाता है और ऊपरी क्रियाशील परागकोश पाल नीचे झुककर कीट की पीठ पर परागकण छिड़क देता है।
4. सैल्विया पूर्वपुंपक्व (protandrous) होता है, अतः जब यह कीट किसी दूसरे परिपक्व मादा पुष्प (जिसका वर्तिकाग्र नीचे की ओर झुका होता है) पर बैठता है, तो इसकी पीठ पर लगे परागकण उस पुष्प के वर्तिकाग्र से रगड़ खाकर चिपक जाते हैं। इस प्रकार पर-परागण संपन्न होता है। यह प्रकृति में सह-विकास और जैविक अनुकूलन का एक अनुपम उदाहरण है।
In simple words: सैल्विया के फूल में दो पंखुड़ियाँ होती हैं और इसका पुंकेसर लीवर की तरह काम करता है। जब कोई कीड़ा रस पीने बैठता है, तो उसका सिर टकराने से पुंकेसर नीचे झुक जाता है और कीड़े की पीठ पर परागकण छिड़क देता है, जो दूसरे फूल पर पहुँच जाते हैं।
🎯 Exam Tip: Explain the 'Lever mechanism' (लीवर क्रियाविधि) step-by-step. Underline 'protandrous' (पूर्वपुंपक्व) to explain why self-pollination does not occur within the same flower.
Question 4. पर-परागण से होने वाले लाभ तथा हानि का उल्लेख कीजिए। (2016)
या
“स्व-परागण की अपेक्षा पर-परागण अधिक उपयोगी है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए। (2017)
Answer: पर-परागण से लाभ (Advantages of Cross-pollination):
1. पर-परागण से उत्पन्न बीजों से बने पौधे बड़े, स्वस्थ, ओजस्वी तथा प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं।
2. इससे उत्पन्न फल बड़े, भारी तथा स्वादिष्ट होते हैं और उनमें बीजों की संख्या भी अधिक होती है।
3. पर-परागण द्वारा आनुवंशिक पुनर्संयोजन (genetic recombination) के कारण संतति में नई विभिन्नताएँ (variations) उत्पन्न होती हैं, जो पौधों को बदलते वातावरण के अनुकूल बनाती हैं।
4. इसके द्वारा फसलों की नई और उन्नत रोग-अवरोधक (disease resistant) प्रजातियाँ विकसित की जा सकती हैं।
5. इसके फलस्वरूप हाइब्रिड विगर (hybrid vigour) उत्पन्न होता है जिससे उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों बढ़ जाती हैं।
पर-परागण से हानियाँ (Disadvantages of Cross-pollination):
1. पर-परागण के लिए पौधे बाह्य जैविक या अजैविक साधनों (जैसे- वायु, जल, कीट, जंतु) पर निर्भर रहते हैं, जिससे इसकी क्रिया सदैव अनिश्चित होती है।
2. कीटों को आकर्षित करने के लिए पौधों को चटकीले रंग, सुगंध तथा मकरंद उत्पन्न करने में बहुत अधिक ऊर्जा और पोषक पदार्थों का अपव्यय करना पड़ता है।
3. इसमें परागकणों का बहुत अधिक नुकसान होता है, विशेषकर वायु परागण में बहुत सारे परागकण बेकार चले जाते हैं।
4. पर-परागण से उत्पन्न बीजों की आनुवंशिक शुद्धता नष्ट हो जाती है। यह आनुवंशिक मिश्रण कभी-कभी अवांछित लक्षणों को भी जन्म दे सकता है।
In simple words: पर-परागण से पौधे मजबूत, बड़े और नई बीमारियों से लड़ने वाले बनते हैं, और उनके फल भी अच्छे होते हैं। लेकिन इसकी हानि यह है कि पौधों को हवा या कीड़ों पर निर्भर रहना पड़ता है और बहुत सारे परागकण बर्बाद हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: Frame your answer with clear subheadings for 'लाभ' (Advantages) and 'हानि' (Disadvantages). Mentioning 'Hybrid vigour' and 'Genetic Recombination' will fetch maximum marks.
Question 5. द्विबीजपत्री भ्रूण के विकास का वर्णन कीजिए। (2015)
या
द्विबीजपत्री पौधों में भ्रूण विकास की विभिन्न अवस्थाओं का केवल नामांकित चित्र बनाइए। (2017)
Answer: द्विबीजपत्री भ्रूण का विकास (Development of Dicot Embryo):
आवृतबीजी पौधों में भ्रूण के विकास की प्रारंभिक अवस्थाओं को भ्रूणोद्भव (embryogeny) कहते हैं। द्विबीजपत्री पौधों (जैसे- Capsella bursa-pastoris) में भ्रूण का विकास निम्नलिखित प्रकार से होता है –
1. निषेचन के बाद बना द्विगुणित युग्मनज (zygote) आकार में बढ़कर अपने चारों ओर सेलुलोज की भित्ति बना लेता है।
2. युग्मनज में पहला अनुप्रस्थ विभाजन (transverse division) होता है जिससे दो कोशिकाएँ बनती हैं – ऊपरी बीजाण्डद्वारी सिरे की ओर आधार कोशिका (basal cell) तथा नीचे निभागी सिरे की ओर अंतस्थ कोशिका (terminal cell)।
3. आधार कोशिका में कई अनुप्रस्थ विभाजनों द्वारा 6 से 10 कोशिकाओं लंबा एक सूत्राकार निलम्बक (suspensor) बनता है। निलम्बक की सबसे ऊपरी कोशिका फूलकर चूषकांग (haustorium) बनाती है जो बीजाण्डकाय से पोषण सोखता है। निलम्बक की सबसे निचली कोशिका को अधःस्फीतिका (hypophysis) कहते हैं, जो आगे चलकर मूलांकुर (radicle) के अग्र भाग का निर्माण करती है।
4. अंतस्थ कोशिका में क्रमिक अनुप्रस्थ और अनुदैर्घ्य विभाजनों द्वारा 8-कोशिकीय अष्टक (octant stage) बनता है। अष्टक की ऊपर की 4 कोशिकाएँ (epibasal cells) प्रांकुर (plumule) और बीजपत्रों (cotyledons) का निर्माण करती हैं, जबकि नीचे की 4 कोशिकाएँ (hypobasal cells) बीजपत्राधार (hypocotyl) का निर्माण करती हैं।
5. अष्टक की कोशिकाओं में परिणत विभाजन होने से बाह्य त्वचाजन (dermatogen) परत बनती है जो बाद में बाह्यत्वचा बनाती है। भ्रूण का आकार पहले गोलाकार (globular), फिर हृदयाकार (heart-shaped) और अंत में परिपक्व घोड़े की नाल के आकार (horse-shoe shaped) का हो जाता है जिसमें दो सुस्पष्ट बीजपत्र और एक अक्ष होता है। यह संपूर्ण विकास बीज के भीतर सुरक्षित रूप से पूर्ण होता है।
In simple words: निषेचन के बाद अंडा विभाजित होकर दो कोशिकाएं बनाता है। ऊपर वाली कोशिका से एक डंठल (निलम्बक) बनता है जो भ्रूण को पोषण देता है। नीचे वाली कोशिका लगातार विभाजित होकर पहले गोल, फिर दिल के आकार की और अंत में दो पत्तों (बीजपत्रों) वाले भ्रूण में बदल जाती है।
🎯 Exam Tip: Draw the sequential stages of embryo development: Zygote -> 2-celled -> Globular -> Heart-shaped -> Mature Embryo. Label 'Suspensor', 'Radicle', 'Plumule', and 'Cotyledons' carefully.
Question 6. भ्रूणपोष क्या है? इसके विभिन्न प्रकारों का संक्षिप्त विवरण दीजिए। (2014, 16)
या
आवृतबीजी पौधों में पाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के भ्रूणपोषों का वर्णन कीजिए। (2011)
या
‘भ्रूणपोष’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2010, 12)
Answer: भ्रूणपोष (Endosperm):
आवृतबीजी पौधों में द्विनिषेचन के अंतर्गत होने वाले त्रि-संलयन के फलस्वरूप बनने वाले त्रिगुणित (\( 3n \)) प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक से भ्रूणपोष का विकास होता है। यह एक अत्यंत विशिष्ट पोषक ऊतक है जो विकासशील भ्रूण को आवश्यक भोजन प्रदान करता है। विकास के आधार पर आवृतबीजी पौधों में भ्रूणपोष मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन प्रकार का होता है –
1. केन्द्रकीय भ्रूणपोष (Nuclear Endosperm): यह सबसे सामान्य प्रकार का भ्रूणपोष है। इसमें प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक बार-बार विभाजित होकर अनेक मुक्त केन्द्रक (free nuclei) बनाता है, परंतु इस दौरान कोशिकाओं के बीच भित्ति-निर्माण (cell wall formation) नहीं होता। बाद में केन्द्रक परिधि की ओर चले जाते हैं और बीच में एक बड़ी रिक्तिका (vacuole) बन जाती है। अंत में परिधि से केंद्र की ओर आंशिक भित्ति निर्माण होता है; जैसे-कैप्सेला, नारियल का पानी।
2. कोशिकीय भ्रूणपोष (Cellular Endosperm): इस प्रकार के भ्रूणपोष में प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक के प्रत्येक विभाजन के तुरंत बाद कोशिका भित्ति (cell wall) का निर्माण हो जाता है, जिससे यह प्रारंभ से ही पूरी तरह कोशिकीय होता है; जैसे-पेटुनिया, विल्लारसिया।
3. हेलोबियल भ्रूणपोष (Helobial Endosperm): यह उपर्युक्त दोनों प्रकारों के बीच की एक अंतरावस्था है। इसमें प्राथमिक विभाजन के बाद एक भित्ति बनती है जिससे एक बड़ी बीजाण्डद्वारी कोशिका और एक छोटी निभागी कोशिका बन जाती है। इसके बाद दोनों कोशिकाओं में मुक्त केन्द्रकीय विभाजन होते हैं; जैसे-एरीमुरस (Eremurus)। यह मुख्य रूप से एकबीजपत्री पौधों में पाया जाता है और उनके प्रारंभिक विकास में बहुत सहायक होता है।
In simple words: भ्रूणपोष भ्रूण के लिए भोजन का काम करता है। यह तीन प्रकार का होता है: केन्द्रकीय (जिसमें शुरू में कोशिका की दीवारें नहीं बनतीं जैसे नारियल पानी), कोशिकीय (जिसमें हर विभाजन के साथ दीवार बनती है), और हेलोबियल (जो दोनों का मिश्रण होता है)।
🎯 Exam Tip: Use diagrams to represent the three types of endosperm. Specifically point out that 'nariyal paani' is free nuclear endosperm, while the white kernel is cellular endosperm.
Question 7. पीढ़ियों का एकान्तरण क्या है? एक आवृतबीजी पौधे के जीवन इतिहास का केवल रेखांकित चित्रों की सहायता से वर्णन कीजिए। (2017)
Answer: पीढ़ियों का एकान्तरण (Alternation of Generations):
आवृतबीजी पौधों के जीवन चक्र में दो सुस्पष्ट अवस्थाएँ बारी-बारी से आती हैं। पहली मुख्य, दीर्घकालिक, स्वपोषी तथा द्विगुणित (\( 2n \)) अवस्था बीजाणुद्भिद् (sporophyte) होती है जो जड़, तना और पत्तियों में विभाजित होती है। दूसरी अल्पकालिक, आश्रित तथा अगुणित (\( n \)) अवस्था युग्मकोद्भिद् (gametophyte) होती है जो नर (परागकण) और मादा (भ्रूणकोष) युग्मकों का निर्माण करती है। द्विगुणित बीजाणुद्भिद् अवस्था से अर्धसूत्री विभाजन द्वारा अगुणित युग्मकोद्भिद् अवस्था का बनना तथा युग्मकों के संलयन (निषेचन) द्वारा पुनः द्विगुणित बीजाणुद्भिद् अवस्था का स्थापित होना पीढ़ियों का एकान्तरण कहलाता है। यह चक्र आनुवंशिक स्थिरता और विविधता दोनों को संतुलित रखने में सहायक होता है।
In simple words: पौधों के जीवन में दो अवस्थाएं बारी-बारी से आती हैं। एक मुख्य बड़ा पौधा (बीजाणुद्भिद्, \( 2n \)) और दूसरा छोटा जनन भाग (युग्मकोद्भिद्, \( n \)) जो नर और मादा युग्मक बनाता है। इन दोनों पीढ़ियों के अदल-बदल कर आने को ही पीढ़ियों का एकान्तरण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: Draw a neat cyclic diagram showing the alternation between diploid Sporophyte (\( 2n \)) and haploid Gametophyte (\( n \)). Mark 'Meiosis' (अर्धसूत्री विभाजन) and 'Fertilization' (निषेचन) clearly on opposite sides of the cycle.
Question 1. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
(क) मानव ...... उत्पत्ति वाला है। (अलैंगिक/लैंगिक)
(ख) मानव हैं। (अण्डप्रजक, सजीवप्रजक, अण्डजरायुज)
(ग) मानव में …….. निषेचन होता है। (बाह्य/आन्तरिक)
(घ) नर एवं मादा ……. युग्मक होते हैं। (अगुणित/द्विगुणित)
(ङ) युग्मनज ……. होता है। (अगुणित/द्विगुणित)
(च) एक परिपक्व पुटक से अण्डाणु (ओवम) के मोचित होने की प्रक्रिया को …… कहते हैं।
(छ) अण्डोत्सर्ग (ओव्यूलेशन) …… नामक हार्मोन द्वारा प्रेरित (इन्ड्यूस्ड) होता है।
(ज) नर एवं मादा युग्मक के संलयन (फ्यूजन) ……. को कहते हैं।
(झ) निषेचन …….. में संपन्न होता है।
(ञ) युग्मनज विभक्त होकर …….. की रचना करता है जो गर्भाशय में अंतरोपित (इंप्लांटेड) होता है।
(ट) भ्रूण और गर्भाशय के बीच संवहनी सम्पर्क बनाने वाली संरचना को …….. कहते हैं।
Answer:
(क) लैंगिक
(ख) सजीवप्रजक
(ग) आन्तरिक
(घ) अगुणित
(ङ) द्विगुणित
(च) अण्डोत्सर्ग (ovulation)
(छ) ल्यूटीनाइजिंग हार्मोन (LH)
(ज) निषेचन
(झ) अण्डवाहिनी नली के संकीर्ण पथ व तुंबिका के संधिस्थल (Ampullary-isthmic junction)
(ञ) ब्लास्टोसिस्ट (कोरकपुटी)
(ट) अपरा (placenta)
ये सभी रिक्त स्थान मानव जनन तंत्र की मुख्य जैविक प्रक्रियाओं, उनके विकास के विभिन्न स्तरों और संबंधित महत्वपूर्ण हार्मोन्स के कार्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं।
In simple words:
(क) मनुष्य लैंगिक जनन द्वारा बच्चे पैदा करता है।
(ख) मनुष्य सीधे बच्चे को जन्म देता है, अंडे नहीं देता।
(ग) निषेचन क्रिया मादा शरीर के अंदर होती है।
(घ) नर और मादा युग्मकों में गुणसूत्रों का एक सेट होता है।
(ङ) निषेचित अंडा (युग्मनज) द्विगुणित होता है।
(च) अंडाशय से अंडे का बाहर आना अण्डोत्सर्ग है।
(छ) एलएच (LH) हार्मोन अण्डोत्सर्ग कराता है।
(ज) शुक्राणु और अंडे का मिलना निषेचन है।
(झ) निषेचन फेलोपियन ट्यूब (अण्डवाहिनी) में होता है।
(ञ) गर्भाशय में ब्लास्टोसिस्ट चिपकता है।
(ट) मां और बच्चे के बीच भोजन का आदान-प्रदान अपरा (प्लेसेंटा) द्वारा होता है।
🎯 Exam Tip: Fill-in-the-blank questions test precise technical terms like 'Blastocyst' and 'LH'. Memorize both Hindi and English scientific terminology to avoid spelling mistakes.
Question 2. पुरुष जनन तन्त्र का एक नामांकित आरेख बनाएँ।
Answer: पुरुष जनन तन्त्र (Male Reproductive System) में मुख्यतः वृषण (testis), वृषण कोष (scrotum), शुक्रवाहिका (vas deferens), मूत्रमार्ग (urethra), शिश्न (penis) तथा सहायक ग्रंथियाँ (जैसे प्रोस्टेट, सेमिनल वेसिकल और काउपर्स ग्रंथि) शामिल हैं। यह आरेख नर जनन तंत्र के विभिन्न अंगों और ग्रंथियों के सटीक स्थान व उनके पारस्परिक संबंधों को वैज्ञानिक रूप से प्रदर्शित करता है।
In simple words: पुरुष जनन तंत्र में वृषण (टेस्टिस) मुख्य अंग हैं जो वृषण कोष (स्क्रोटम) में सुरक्षित रहते हैं। यहाँ शुक्राणु बनते हैं और शुक्रवाहिका (वास डिफ्रेंस) द्वारा बाहर आते हैं।
🎯 Exam Tip: In the exam, when drawing the male reproductive system, always label 'Testis' (वृषण), 'Epididymis' (अधिवृषण), 'Vas deferens' (शुक्रवाहक), and 'Prostate gland' (पुरःस्थ ग्रंथि) clearly as they carry key marks.
Question 3. स्त्री जनन तन्त्र का एक नामांकित आरेख बनाएँ।
Answer: स्त्री जनन तन्त्र (Female Reproductive System) में मुख्य रूप से एक जोड़ी अण्डाशय (ovary), अण्डवाहिनी या फैलोपियन नलिका (fallopian tube), गर्भाशय (uterus), योनि (vagina) और बाह्य जननांग शामिल होते हैं। यह नामांकित आरेख मादा जनन अंगों की नलिकाकार व्यवस्था और उनके सटीक शारीरिक संबंधों को स्पष्ट रूप से निरूपित करता है।
In simple words: स्त्री जनन तंत्र में अंडाशय (Ovary) मुख्य अंग है जहाँ अंडे बनते हैं। फैलोपियन ट्यूब अंडे को गर्भाशय (Uterus) तक लाती है, जहाँ शिशु का विकास होता है।
🎯 Exam Tip: In female reproductive system drawings, make sure to clearly label the 'Fallopian tube' (अण्डवाहिनी), 'Ovary' (अण्डाशय), 'Uterus' (गर्भाशय), and 'Vagina' (योनि). The funnel-like fimbriae are also crucial.
Question 4. वृषण तथा अण्डाशय के बारे में प्रत्येक के दो-दो प्रमुख कार्यों का वर्णन कीजिए।
Answer: वृषण (Testis) तथा अण्डाशय (Ovary) के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं –
वृषण के प्रमुख कार्य:
1. शुक्रजनन (Spermatogenesis): वृषण की शुक्रजनक नलिकाओं में जनन कोशिकाओं द्वारा नर युग्मकों यानी शुक्राणुओं (sperms) का निर्माण होता है।
2. हार्मोन स्राव (Hormone Secretion): वृषण की अन्तराली (लेडिग) कोशिकाओं से नर लिंग हार्मोन टेस्टोस्टेरोन या एण्ड्रोजन (androgens) का स्राव होता है, जो पुरुषों में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के विकास को नियंत्रित करते हैं। इसके अतिरिक्त वृषण की सर्टोली कोशिकाएं विकासशील शुक्राणुओं को पोषण प्रदान करती हैं।
अण्डाशय के प्रमुख कार्य:
1. अण्डजनन (Oogenesis): अण्डाशय की जनन उपकला कोशिकाओं द्वारा मादा युग्मकों यानी अण्डाणुओं (ova) का निर्माण होता है।
2. हार्मोन स्राव (Hormone Secretion): अण्डाशय की ग्राफियन पुटिकाओं से एस्ट्रोजन (estrogen) हार्मोन स्रावित होता है जो मादा के द्वितीयक लैंगिक लक्षणों को नियंत्रित करता है, तथा कॉर्पस ल्यूटियम से प्रोजेस्टेरोन (progesterone) हार्मोन स्रावित होता है जो गर्भावस्था को बनाए रखने में अत्यंत सहायक है।
In simple words: वृषण का काम पुरुषों में शुक्राणु बनाना और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन स्रावित करना है। अण्डाशय का काम महिलाओं में अंडे बनाना और एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बनाना है।
🎯 Exam Tip: Always write the endocrine (hormone) and exocrine (gamete production) functions separately for both organs to ensure clear, high-scoring responses.
Question 5. शुक्रजनक नलिका की संरचना का वर्णन कीजिए।
Answer: वृषण के भीतर पाई जाने वाली कुंडलित नलिकाकार संरचनाओं को शुक्रजनक नलिकाएँ (seminiferous tubules) कहते हैं। इनकी विस्तृत संरचना निम्नलिखित है –
1. प्रत्येक शुक्रजनक नलिका बाहर से एक पतली झिल्ली 'बहिःकुंचक' (tunica propria) तथा भीतर से 'जनन एपिथीलियम' (germinal epithelium) द्वारा घिरी होती है।
2. जनन एपिथीलियम में दो प्रकार की कोशिकाएं पाई जाती हैं – (क) शुक्रजन कोशिकाएं (Spermatogonia): जो अर्धसूत्री विभाजन द्वारा शुक्राणुओं का निर्माण करती हैं। (ख) सर्टोली कोशिकाएं (Sertoli cells): ये बड़ी, खंभाकार कोशिकाएं होती हैं जो विकासशील शुक्राणुओं को सहारा, पोषण और ऑक्सीजन प्रदान करती हैं।
3. शुक्रजनक नलिकाओं के बाहरी क्षेत्रों को अन्तराली अवकाश कहते हैं, जिनमें रुधिर वाहिकाओं के साथ-साथ 'लेडिग कोशिकाएं' या अन्तराली कोशिकाएं (Leydig's cells) स्थित होती हैं। ये कोशिकाएं नर हार्मोन टेस्टोस्टेरोन का स्राव करती हैं जो नर जनन तंत्र के विकास और शुक्रजनन को प्रेरित करता है।
In simple words: शुक्रजनक नलिकाएं वृषण की वे नलिकाएं हैं जहाँ शुक्राणु बनते हैं। इनके अंदर पोषण देने वाली सर्टोली कोशिकाएं और बाहर टेस्टोस्टेरोन हार्मोन बनाने वाली लेडिग कोशिकाएं होती हैं।
🎯 Exam Tip: The terms 'Sertoli cells' (सर्टोली कोशिकाएं) and 'Leydig's cells' (लेडिग कोशिकाएं) are extremely important keywords. Draw a neat sectional view of the seminiferous tubule to support your text.
Question 6. शुक्राणुजनन क्या है? संक्षेप में शुक्राणुजनन की प्रक्रिया का वर्णन करें।
Answer: वृषण की जनन उपकला की कोशिकाओं से नर युग्मक यानी शुक्राणुओं (sperms) के बनने की प्रक्रिया को शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) कहते हैं। यह संपूर्ण प्रक्रिया दो मुख्य चरणों में पूरी होती है –
(अ) स्पर्मेटिड (Spermatid) का निर्माण: यह प्रक्रिया निम्नलिखित तीन चरणों में पूरी होती है –
1. गुणन प्रावस्था (Multiplication Phase): प्राथमिक जनन कोशिकाएं बार-बार समसूत्री विभाजन द्वारा विभाजित होकर द्विगुणित स्पर्मेटोगोनिया (spermatogonia, \( 2n \)) बनाती हैं।
2. वृद्धि प्रावस्था (Growth Phase): स्पर्मेटोगोनिया पोषक पदार्थ ग्रहण कर आकार में बड़ी हो जाती हैं, जिन्हें प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट (primary spermatocyte, \( 2n \)) कहते हैं।
3. परिपक्वन प्रावस्था (Maturation Phase): प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट में पहला अर्धसूत्री विभाजन होने से दो अगुणित द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट (secondary spermatocytes, \( n \)) बनते हैं। इनमें पुनः समसूत्री विभाजन होने से चार अगुणित अचल स्पर्मेटिड्स (spermatids, \( n \)) का निर्माण होता है।
(ब) स्पर्मेटिड का कायान्तरण या शुक्राणु-कायान्तरण (Spermiogenesis): इस चरण में अचल, गोल स्पर्मेटिड्स अनेक भौतिक व संरचनात्मक परिवर्तनों के द्वारा सक्रिय, चल शुक्राणुओं (sperms) में बदल जाते हैं। इन परिवर्तनों में मुख्य रूप से न्यूक्लियस का ठोस व नुकीला होना, गॉल्जीकाय द्वारा एक्रोसोम (acrosome) का निर्माण होना तथा माइटोकॉन्ड्रिया का पूँछ के चारों ओर सर्पिलाकार रूप में व्यवस्थित होकर ऊर्जा प्रदान करना शामिल है। परिपक्व शुक्राणु अंततः सर्टोली कोशिकाओं में धंसकर पोषण प्राप्त करते हैं।
In simple words: वृषण में शुक्राणुओं का बनना शुक्राणुजनन कहलाता है। पहले समसूत्री और अर्धसूत्री विभाजनों द्वारा गोल स्पर्मेटिड कोशिकाएं बनती हैं, जो बाद में पूँछ वाले सक्रिय शुक्राणुओं में बदल जाती हैं।
🎯 Exam Tip: Use flowcharts to represent the three phases (Multiplication, Growth, Maturation). Always specify ploidy levels: Spermatogonia (\( 2n \)), Primary Spermatocyte (\( 2n \)), Secondary Spermatocyte (\( n \)), and Spermatid (\( n \)).
Question 7. शुक्राणुजनन की प्रक्रिया के नियमन में शामिल हॉर्मोनों के नाम बताइए।
Answer: शुक्राणुजनन (spermatogenesis) की प्रक्रिया को नियंत्रित व नियमित करने वाले प्रमुख हार्मोन निम्नलिखित हैं –
1. गोनेडोट्रॉपिन रिलीजिंग हार्मोन (GnRH): यह हाइपोथैलेमस से स्रावित होता है और पीयूष ग्रंथि को उद्दीपित करता है।
2. ल्यूटीनाइजिंग हार्मोन (LH): यह अग्र पीयूष ग्रंथि से स्रावित होकर लेडिग कोशिकाओं को एण्ड्रोजन (testosterone) के स्राव हेतु प्रेरित करता है।
3. फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन (FSH): यह अग्र पीयूष ग्रंथि से स्रावित होकर सर्टोली कोशिकाओं को कुछ आवश्यक कारकों के स्राव हेतु उद्दीपित करता है जो शुक्राणु-कायान्तरण में सहायक होते हैं।
4. एण्ड्रोजन या टेस्टोस्टेरोन (Androgen / Testosterone): यह लेडिग कोशिकाओं द्वारा बनाया जाता है और शुक्रजनन की प्रक्रिया को सीधे नियंत्रित व प्रेरित करता है।
5. इनहिबिन (Inhibin): यह हार्मोन पीयूष ग्रंथि द्वारा FSH के स्राव को ऋणात्मक पुनर्भरण (negative feedback) द्वारा नियंत्रित करता है।
In simple words: शुक्राणुजनन को नियंत्रित करने वाले मुख्य हार्मोन GnRH, LH, FSH, टेस्टोस्टेरोन और इनहिबिन हैं। ये मस्तिष्क और जनन अंगों के बीच संदेश भेजकर शुक्राणु बनाने की गति को नियंत्रित करते हैं।
🎯 Exam Tip: Hormonal control is a high-yield topic. Remember that GnRH comes from the hypothalamus, while LH and FSH are secreted by the anterior pituitary.
Question 8. शुक्राणुजनन एवं वीर्यसेचन (स्परमिशन) की परिभाषा लिखिए।
Answer: शुक्राणुजनन तथा वीर्यसेचन की सटीक परिभाषाएं निम्नलिखित हैं –
1. शुक्राणुजनन (Spermatogenesis / Spermiogenesis): वृषण की शुक्रजनक नलिकाओं में जनन कोशिकाओं से परिपक्व, चल शुक्राणुओं (motile sperms) के बनने की संपूर्ण जैविक प्रक्रिया को शुक्राणुजनन कहते हैं। इसके अंतर्गत स्पर्मेटिड्स का कायान्तरण होकर पूँछ वाले शुक्राणु बनते हैं (जिसे विशेष रूप से spermiogenesis कहते हैं)।
2. वीर्यसेचन (Spermiation): शुक्राणु-कायान्तरण (spermiogenesis) के पूर्ण होने के पश्चात् शुक्राणुओं के शीर्ष सर्टोली कोशिकाओं (Sertoli cells) से मुक्त हो जाते हैं। इन मुक्त शुक्राणुओं का शुक्रजनक नलिकाओं की गुहा (lumen) में मोचित (released) होने की प्रक्रिया को वीर्यसेचन (spermiation) कहते हैं।
In simple words: वृषण में शुक्राणुओं के बनने को शुक्राणुजनन कहते हैं। बनने के बाद जब ये शुक्राणु पोषण देने वाली कोशिकाओं से छूटकर नलिका की गुहा में बाहर निकल आते हैं, तो उसे वीर्यसेचन (स्परमिशन) कहते हैं।
🎯 Exam Tip: Students often confuse Spermatogenesis, Spermiogenesis, and Spermiation. Clearly state that Spermiation is the 'release' of sperm from Sertoli cells into the lumen of seminiferous tubules.
Question 9. शुक्राणु का एक नामांकित आरेख बनाइए।
Answer: मानव शुक्राणु (Sperm) एक सूक्ष्म, एककोशिकीय, अगुणित (\( n \)) और अत्यधिक गतिशील संरचना है। यह मुख्य रूप से चार भागों में विभाजित होता है – सिर (head) जिसमें एक्रोसोम और केन्द्रक होते हैं, ग्रीवा (neck), मध्य भाग (middle piece) जिसमें ऊर्जा प्रदान करने वाले माइटोकॉन्ड्रिया सर्पिलाकार रूप में व्यवस्थित होते हैं, और एक लंबी पूँछ (tail) जो इसे तैरने के लिए गति प्रदान करती है। यह आरेख निषेचन प्रक्रिया में शुक्राणु की सक्रिय गतिशीलता के लिए आवश्यक संरचनाओं को निरूपित करता है।
In simple words: शुक्राणु के तीन मुख्य भाग होते हैं: सिर (जिसमें अंडा भेदने वाला एक्रोसोम होता है), मध्य भाग (जिसमें तैरने की ताकत देने वाला माइटोकॉन्ड्रिया होता है), और पूँछ (जिससे वह आगे तैरता है)।
🎯 Exam Tip: Label the 'Acrosome' (अग्रपिंडक) at the very tip, and highlight the 'Mitochondria' in the middle piece as the powerhouse of the sperm.
Question 10. शुक्रीय प्रद्रव्य (सेमिनल प्लाज्मा) के प्रमुख संघटक क्या हैं?
Answer: नर सहायक ग्रंथियों (सेमिनल वेसिकल, प्रोस्टेट ग्रंथि तथा काउपर्स ग्रंथि) से स्रावित होने वाले द्रव को सामूहिक रूप से शुक्रीय प्रद्रव्य (seminal plasma) कहते हैं। इसके प्रमुख संघटक निम्नलिखित हैं –
1. फ्रक्टोस (Fructose): यह शर्करा शुक्राणुओं को ऊर्जा प्रदान करने का मुख्य स्रोत है।
2. कैल्शियम आयन (Calcium Ions): ये शुक्राणुओं की गतिशीलता और निषेचन क्षमता को सक्रिय बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।
3. एन्जाइम्स (Enzymes): इसमें प्रोस्टाग्लैंडिन्स, फाइब्रिनोजेन और अनेक प्रकार के फॉस्फेटेज व प्रोटीयोलाइटिक एन्जाइम उपस्थित होते हैं जो वीर्य के स्कंदन व उसे सुचारू बनाए रखने में मदद करते हैं। यह क्षारीय द्रव योनि की अम्लीयता को उदासीन कर शुक्राणुओं की सुरक्षा करता है।
In simple words: शुक्रीय प्रद्रव्य पुरुषों की सहायक ग्रंथियों से निकलने वाला द्रव है। इसमें मुख्य रूप से फ्रक्टोस (ऊर्जा के लिए), कैल्शियम (गति देने के लिए), और कई विशेष एंजाइम होते हैं जो शुक्राणुओं को जीवित रखते हैं।
🎯 Exam Tip: Specifically mention 'Fructose', 'Calcium', and 'Enzymes' as the three primary components. Fructose is highly checked by examiners as it is unique to seminal fluid.
Question 11. पुरुष की सहायक नलिकाओं एवं ग्रंथियों के प्रमुख कार्य क्या हैं?
Answer: पुरुष की सहायक नलिकाओं एवं ग्रंथियों के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं –
सहायक नलिकाओं के प्रमुख कार्य:
1. वृषण जालिकाएँ व अपवाही वाहिकाएँ: ये वृषण से शुक्राणुओं को अधिवृषण (epididymis) तक पहुँचाने का कार्य करती हैं।
2. अधिवृषण (Epididymis): यहाँ शुक्राणु अस्थायी रूप से संचित होते हैं और शारीरिक रूप से परिपक्व (mature) होकर तैरने की क्षमता प्राप्त करते हैं।
3. शुक्रवाहक (Vas deferens): यह परिपक्व शुक्राणुओं को स्खलन वाहिनी तक ले जाने का मार्ग प्रदान करती है।
सहायक ग्रंथियों के प्रमुख कार्य:
1. शुक्राशय (Seminal vesicle): यह कुल वीर्य का लगभग 60% भाग बनाता है जिसमें उपस्थित फ्रक्टोस शुक्राणुओं को ऊर्जा देता है।
2. पुरःस्थ ग्रंथि (Prostate gland): यह एक पतले क्षारीय द्रव का स्राव करती है जो शुक्राणुओं को सक्रिय रखता है और मूत्रमार्ग की अम्लीयता को समाप्त करता है।
3. काउपर्स ग्रंथि (Cowper's gland / Bulbourethral gland): मैथुन के समय यह एक चिकने, पारदर्शी द्रव का स्राव करती है जो मूत्रमार्ग को चिकना व उदासीन बनाता है।
In simple words: सहायक नलिकाएं शुक्राणुओं को सुरक्षित संचित रखने और उन्हें बाहर ले जाने का काम करती हैं। ग्रंथियां (जैसे प्रोस्टेट और शुक्राशय) एक विशेष द्रव बनाती हैं जो शुक्राणुओं को भोजन, सुरक्षा और तैरने का माध्यम देता है।
🎯 Exam Tip: Make sure to describe both categories: 'सहायक नलिकाएं' (epididymis, vas deferens) and 'सहायक ग्रंथियां' (seminal vesicles, prostate, Cowper's) with their specific secretion functions.
Question 12. अण्डजनन क्या है? अण्डजनन की संक्षिप्त व्याख्या करें।
Answer: स्त्री के अण्डाशय के जनन एपिथीलियम की कोशिकाओं से अण्डाणुओं (ova) का निर्माण, अण्डजनन (Oogenesis) कहलाता है। अण्डजनन की सम्पूर्ण प्रक्रिया निम्नलिखित तीन मुख्य चरणों में पूर्ण होती है –
(i) प्रोलीफेरेशन प्रावस्था (Proliferation Phase) – इस अवस्था की शुरुआत उस समय से होती है जब मादा फीटस (foetus) माँ के गर्भ में लगभग 7 माह की होती है। जनन कोशिकाएँ विभाजित होकर अण्डाशय की गुहा में कोशिका गुच्छ बना देती हैं जिसे पुटिका (follicle) कहते हैं। पुटिका की एक कोशिका आकार में बड़ी हो जाती है तथा इसे ऊगोनियम (oogonium) कहते हैं।
(ii) वृद्धि प्रावस्था (Growth Phase) – यह अवस्था भी उस समय पूरी हो जाती है जब मादा फीटस माँ के गर्भ में होती है। इस अवस्था में ऊगोनियम पोषक कोशिकाओं से भोजन एकत्रित करके आकार में अत्यधिक बड़ी हो जाती है। इसे प्राथमिक ऊसाइट (primary oocyte) कहते हैं।
(iii) परिपक्व प्रावस्था (Maturation Phase) – यह क्रिया पूरे जनन काल (11-45 वर्ष की आयु) में लगातार होती रहती है। प्राथमिक ऊसाइट में पहला अर्द्धसूत्री विभाजन होता है तथा दो असमान कोशिकाएँ बन जाती हैं। बड़ी कोशिका द्वितीयक ऊसाइट (secondary oocyte) कहलाती है, जबकि छोटी कोशिका को प्रथम ध्रुवी काय (first polar body) कहते हैं। यह विभाजन अण्डोत्सर्ग से पहले होता है। दूसरा समसूत्री विभाजन अण्डवाहिनी में, अण्डोत्सर्ग के बाद (शुक्राणु के प्रवेश के समय) होता है जिसके फलस्वरूप एक अण्डाणु तथा एक द्वितीयक ध्रुवी काय (second polar body) बनती है। सभी ध्रुवी काय नष्ट हो जाती हैं तथा इस सम्पूर्ण क्रिया में अंततः केवल एक अण्डाणु प्राप्त होता है। ध्रुवी काय का निर्माण अण्डाणुओं को समान आनुवंशिक पदार्थ वितरित करने तथा कोशिका द्रव्य को अण्डाणु में सुरक्षित रखने के लिए होता है।
In simple words: अंडाशय में अंडे के बनने को अण्डजनन कहते हैं। यह क्रिया लड़की के जन्म से पहले ही शुरू हो जाती है, जिसमें विभाजित होकर अंततः एक परिपक्व अंडा और बेकार ध्रुवी काय कोशिकाएं बनती हैं।
🎯 Exam Tip: Highlight that oogenesis is initiated during embryonic development, unlike spermatogenesis which starts at puberty. Emphasize that only one functional haploid ovum is produced per cycle.
Question 13. अण्डाशय की अनुप्रस्थ काट (ट्रांसवर्स सेक्शन) का एक नामांकित आरेख बनाएँ।
Answer: अण्डाशय की अनुप्रस्थ काट (T.S. of Ovary) में मुख्य रूप से संयोजी ऊतक (stroma), विभिन्न विकासशील अवस्थाओं में पुटिकाएँ (जैसे- प्राथमिक पुटिकाएँ, द्वितीयक पुटिकाएँ और परिपक्व ग्राफियन पुटिका), अंडोत्सर्ग के बाद बनी संरचना कॉर्पस ल्यूटियम (corpus luteum) और कॉर्पस एल्बिकेंस शामिल हैं। यह आरेख मादा अंडाशय के भीतर अंडों के क्रमिक विकास और मासिक चक्र के दौरान होने वाले चक्रीय परिवर्तनों को स्पष्ट रूप से निरूपित करता है।
In simple words: अंडाशय को काटने पर उसमें अलग-अलग आकार की पुटिकाएं दिखाई देती हैं जो धीरे-धीरे बड़ी होती हैं। अंडा निकलने के बाद बची हुई पुटिका पीले रंग की ग्रंथि 'कॉर्पस ल्यूटियम' में बदल जाती है।
🎯 Exam Tip: While drawing, ensure you show the progression of follicles: Primary -> Secondary -> Graafian follicle -> Ovulation -> Corpus Luteum. This chronological circle is key to scoring full marks.
Question 14. ग्राफी पुटिका (ग्राफियन फॉलिकल) का एक नामांकित आरेख बनाएँ।
Answer: ग्राफियन पुटिका (Graafian Follicle) अंडाशय में पाई जाने वाली एक परिपक्व पुटिका है, जिसके भीतर अण्डाणु (ovum) सुरक्षित रहता है। इसकी संरचना में मुख्य रूप से बाहरी सुरक्षात्मक परत थिका एक्सटर्ना (theca externa), आंतरिक परत थिका इंटरना (theca interna), दानेदार कोशिकाओं की परत मेम्ब्रेना ग्रेन्युलोसा (membrana granulosa), द्रव से भरी गुहा एन्ट्रम (antrum), जोना पेलुसिडा (zona pellucida) से घिरा अंड या ओवम और डिस्कस प्रोलिजरस शामिल हैं। यह आरेख निषेचन के लिए अंडोत्सर्ग हेतु तैयार परिपक्व पुटिका की आंतरिक वास्तुकला को प्रदर्शित करता है।
In simple words: ग्राफियन पुटिका एक परिपक्व थैली जैसी रचना है जिसमें तरल पदार्थ से भरी एक बड़ी गुहा (एन्ट्रम) होती है और नीचे की तरफ अंडा (ओवम) सुरक्षित रहता है जो बाद में फटकर बाहर निकलता है।
🎯 Exam Tip: The 'Antrum' (fluid-filled cavity) and 'Zona pellucida' (outer membrane of ovum) are the most important labels in a Graafian follicle diagram.
Question 15. निम्नलिखित के कार्य बताइए –
1. पीत पिण्ड (कॉर्पस ल्यूटियम)
2. गर्भाशय अन्तः स्तर (एन्डोमेट्रियम)
3. अग्र पिण्डक (एक्रोसोम)
4. शुक्राणु पुच्छ (स्पर्म टेल)
5. झालर (फिम्ब्री)
Answer: दिए गए जनन अंगों व संरचनाओं के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं –
1. पीत पिण्ड (कॉर्पस ल्यूटियम) – यह प्रोजेस्ट्रॉन, एस्ट्रोजन तथा रिलैक्सिन नामक हार्मोन का स्राव करता है जो गर्भाशय के अन्तः स्तर को बनाए रखते हैं तथा गर्भावस्था को सुचारू चलाने के लिए आवश्यक हैं।
2. गर्भाशय अन्तः स्तर (एन्डोमेट्रियम) – यह निषेचित अण्डे के प्रत्यारोपण तथा सगर्भता के लिए आवश्यक है। मासिक धर्म (आर्तव चक्र) के दौरान इसमें नियमित रूप से टूट-फूट और चक्रीय परिवर्तन होते हैं।
3. अग्र पिण्डक (एक्रोसोम) – इसमें उपस्थित एन्जाइम (जैसे हाइल्यूरोनिडेज) निषेचन के समय अण्डाणु की सुरक्षात्मक परतों को घोलने व उसमें शुक्राणु के प्रवेश में सहायक होते हैं।
4. शुक्राणु पुच्छ (स्पर्म टेल) – यह शुक्राणु को मादा जनन मार्ग में तैरने और आगे बढ़ने के लिए आवश्यक गतिशीलता प्रदान करती है।
5. झालर (फिम्ब्री) – यह अंडोत्सर्ग के समय अंडाशय से निकले अण्डाणु को एकत्र करके अण्डवाहिनी (fallopian tube) में भेजने में सहायता करती है।
In simple words:
1. कॉर्पस ल्यूटियम गर्भावस्था को चलाने वाले हार्मोन बनाता है।
2. एन्डोमेट्रियम गर्भाशय की वह परत है जहाँ बच्चा चिपकता है।
3. एक्रोसोम शुक्राणु की नोक है जो अंडे की दीवार को गलाती है।
4. पुच्छ शुक्राणु को तैरने में मदद करती है।
5. झालर अंडे को समेटकर ट्यूब में डालती है।
🎯 Exam Tip: Answer this question using the exact sub-part numbers from the question paper. Ensure the functions of 'Acrosome' (dissolving egg membrane) and 'Corpus Luteum' (secreting progesterone) are highlighted.
Question 16. सही अथवा गलत कथनों को पहचानें –
1. पुंजनों (एण्ड्रोसेन्स) का उत्पादन सटली कोशिकाओं द्वारा होता है। (सही/गलत)
2. शुक्राणु को सटली कोशिकाओं से पोषण प्राप्त होता है। (सही/गलत)
3. लीडिंग कोशिकाएँ, अण्डाशय में पायी जाती हैं। (सही/गलत)
4. लीडिंग कोशिकाएँ पूंजनों (एण्ड्रोसेन्स) को संश्लेषित करती हैं। (सही/गलत)
5. अण्डजनन पीत पिण्ड (कॉर्पस ल्यूटियम) में सम्पन्न होता है। (सही/गलत)
6. सगर्भता (प्रेगनेंसी) के दौरान आर्तव चक्र (मेन्सट्रअल साइकिल) बंद होता है। (सही/गलत)
7. योनिच्छद (हाइमेन) की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति कौमार्य (वर्जिनिटी) या यौन अनुभव का विश्वसनीय संकेत नहीं है। (सही/गलत)
Answer: दिए गए कथनों के सही/गलत होने का विवरण निम्नलिखित है –
1. गलत (पुंजनों या एण्ड्रोसेन्स का उत्पादन लेडिग कोशिकाओं द्वारा होता है, सर्टोली कोशिकाओं द्वारा नहीं।)
2. सही (सर्टोली कोशिकाएं विकासशील शुक्राणुओं को पोषण प्रदान करती हैं।)
3. गलत (लेडिग कोशिकाएं वृषण में पाई जाती हैं, अंडाशय में नहीं।)
4. सही (लेडिग कोशिकाएं नर हार्मोन टेस्टोस्टेरोन या एण्ड्रोजन का स्राव करती हैं।)
5. गलत (अण्डजनन की प्रक्रिया अण्डाशय के पुटिकाओं में सम्पन्न होती है, कॉर्पस ल्यूटियम में नहीं।)
6. सही (सगर्भता के दौरान प्रोजेस्ट्रॉन के उच्च स्तर के कारण आर्तव चक्र बंद रहता है।)
7. सही (योनिच्छद खेलकूद, घुड़सवारी या अचानक झटके के कारण भी टूट सकती है, इसलिए यह कौमार्य का निश्चित प्रमाण नहीं है।)
In simple words:
1. गलत, 2. सही, 3. गलत, 4. सही, 5. गलत, 6. सही, 7. सही।
🎯 Exam Tip: Do not just write 'सही' or 'गलत'. For maximum score, write a single-line scientific justification explaining why a statement is wrong.
Question 17. आर्तव चक्र क्या है? आर्तव चक्र (मेन्स्ट्रुअल साइकिल) का कौन-से हार्मोन नियमन करते हैं?
Answer: मादा प्राइमेट्स (जैसे स्त्री, बंदर, चिम्पैंजी) के अंडाशय और गर्भाशय में औसतन 28 दिन के अंतराल पर होने वाले चक्रीय परिवर्तनों को आर्तव चक्र या मासिक चक्र (Menstrual Cycle) कहते हैं। प्रत्येक स्त्री में यह चक्र 12-13 वर्ष की आयु (रजोदर्शन या menarche) से प्रारंभ होकर 45-55 वर्ष की आयु (रजोनिवृत्ति या menopause) पर समाप्त होता है। इस चक्र के प्रारंभ होने के साथ ही मादा गर्भधारण में सक्षम हो जाती है। आर्तव चक्र का नियमन निम्नलिखित हार्मोनों द्वारा किया जाता है –
(i) ल्यूटीनाइजिंग हार्मोन (LH): यह अग्र पीयूष ग्रंथि से स्रावित होता है तथा आर्तव चक्र के मध्य (14वें दिन) अपने उच्चतम स्तर पर पहुँचकर अण्डोत्सर्ग (ovulation) को प्रेरित करता है।
(ii) फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन (FSH): यह पीयूष ग्रंथि द्वारा स्रावित होकर अंडाशय में पुटिकाओं (follicles) की वृद्धि व विकास को प्रेरित करता है।
(iii) एस्ट्रोजन (Estrogen): यह विकासशील पुटिकाओं द्वारा स्रावित होकर गर्भाशय के अन्तः स्तर (endometrium) की मरम्मत और प्रचुरोद्भवन का कार्य करता है।
(iv) प्रोजेस्टेरोन (Progesterone): यह कॉर्पस ल्यूटियम द्वारा स्रावित होकर गर्भाशय के अन्तः स्तर को निषेचित अंडे के प्रत्यारोपण के लिए तैयार और सुरक्षित रखता है।
In simple words: महिलाओं के शरीर में हर महीने होने वाले हार्मोनल और शारीरिक बदलाव को आर्तव चक्र (मासिक धर्म) कहते हैं। इसे पीयूष ग्रंथि के LH व FSH हार्मोन तथा अंडाशय के एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन हार्मोन मिलकर चलाते हैं।
🎯 Exam Tip: Explain the role of FSH and LH from the pituitary, and Estrogen and Progesterone from the ovaries. Underline 'LH surge' (एलएच सर्ज) as the cause of ovulation.
Question 18. प्रसव (पारट्यूरिशान) क्या है? प्रसव को प्रेरित करने में कौन-से हार्मोन शामिल होते हैं?
Answer: गर्भावधि (मानव में लगभग 9 माह) पूरी होने के पश्चात् पूर्ण विकसित शिशु का माता के गर्भाशय से बाहर आने (जन्म लेने) की जैविक प्रक्रिया को प्रसव (Parturition) कहते हैं। यह एक जटिल तंत्रिका-अंतःस्रावी (neuroendocrine) क्रियाविधि द्वारा नियंत्रित होती है। प्रसव के समय गर्भाशयी पेशियों में तीव्र संकुचन शुरू होते हैं जिससे शिशु बाहर आ जाता है। प्रसव को प्रेरित करने वाले प्रमुख हार्मोन निम्नलिखित हैं –
1. ऑक्सीटोसिन (Oxytocin): यह पश्च पीयूष ग्रंथि से स्रावित होता है और गर्भाशय की मध्यम पेशी परत में तीव्र व शक्तिशाली संकुचन को प्रेरित करता है, जिसे प्रसव पीड़ा कहते हैं।
2. एस्ट्रोजन (Estrogen): यह गर्भावस्था के अंत में ऑक्सीटोसिन के प्रति गर्भाशय की संवेदनशीलता को बढ़ा देता है।
3. कोर्टिसोल (Cortisol): यह शिशु की एड्रीनल ग्रंथि से स्रावित होकर प्रसव प्रक्रिया को प्रारंभ करने का संकेत देता है।
4. रिलैक्सिन (Relaxin): यह प्रसव के समय श्रोणि बंधों (pubic symphysis) को ढीला कर जन्म नाल को चौड़ा करता है ताकि शिशु आसानी से बाहर आ सके।
In simple words: मां के पेट में बच्चे का विकास पूरा होने पर उसका बाहर जन्म लेना प्रसव कहलाता है। इसे मुख्य रूप से ऑक्सीटोसिन हार्मोन (जो गर्भाशय में संकुचन लाता है) और रिलैक्सिन हार्मोन (जो जन्म के रास्ते को फैलाता है) प्रेरित करते हैं।
🎯 Exam Tip: Mention 'Fetal ejection reflex' (गर्भ उत्सर्जन प्रतिवर्त) and 'Oxytocin' as the primary drivers of child birth. This neuroendocrine mechanism is highly checked.
Question 19. हमारे समाज में पुत्रियों को जन्म देने का दोष महिलाओं को दिया जाता है। बताएँ कि यह क्यों सही नहीं है?
Answer: हमारे समाज में पुत्रियों को जन्म देने का दोष महिलाओं को देना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पूर्णतः निराधार और गलत है। मनुष्य में लिंग निर्धारण (sex determination) आनुवंशिक रूप से निम्नलिखित प्रकार से होता है –
1. स्त्रियों में आनुवंशिक रूप से समरूप सेक्स गुणसूत्र 'XX' पाए जाते हैं, अर्थात् स्त्री द्वारा बनने वाले सभी अण्डाणु केवल 'X' गुणसूत्र युक्त होते हैं।
2. पुरुषों में विषम सेक्स गुणसूत्र 'XY' पाए जाते हैं, अर्थात् पुरुष द्वारा बनने वाले 50% शुक्राणु 'X' गुणसूत्र युक्त और शेष 50% शुक्राणु 'Y' गुणसूत्र युक्त होते हैं।
3. निषेचन के समय यदि स्त्री के अण्डाणु (X) से पुरुष का 'X' गुणसूत्र युक्त शुक्राणु मिलता है, तो लड़की (XX) का जन्म होता है। इसके विपरीत, यदि अण्डाणु (X) से पुरुष का 'Y' गुणसूत्र युक्त शुक्राणु संलयित होता है, तो लड़के (XY) का जन्म होता है।
अतः स्पष्ट है कि होने वाली संतान का लिंग पूरी तरह से पिता के शुक्राणु (X या Y) पर निर्भर करता है, न कि माता पर। यह वैज्ञानिक तथ्य सामाजिक रूढ़िवादिता को पूरी तरह खारिज करता है।
In simple words: महिलाओं के पास केवल X गुणसूत्र होता है जबकि पुरुषों के पास X और Y दोनों होते हैं। यदि पुरुष का X शुक्राणु अंडे से मिले तो लड़की बनेगी और यदि Y शुक्राणु मिले तो लड़का बनेगा। इसलिए लिंग निर्धारण के लिए पूरी तरह पुरुष जिम्मेदार है, महिला नहीं।
🎯 Exam Tip: Draw a simple genetic cross (XX x XY) to illustrate sex determination. State clearly that the male gamete (sperm) is heterogametic and determines the child's sex.
Question 20. एक माह में मानव अण्डाशय से कितने अण्डे मोचित होते हैं? यदि माता ने समरूप जुड़वाँ बच्चों को जन्म दिया हो तो आप क्या सोचते हैं कि कितने अण्डे मोचित हुए होंगे? क्या आपका उत्तर बदलेगा यदि जन्मे हुए जुड़वाँ बच्चे द्विअण्ड यमज थे?
Answer: एक सामान्य आर्तव चक्र या एक माह में मानव अण्डाशय से केवल एक ही परिपक्व अण्डाणु (ovum) मोचित होता है।
1. समरूप जुड़वाँ (Identical Twins) के सन्दर्भ में: यदि माता ने समरूप जुड़वाँ बच्चों को जन्म दिया है, तब भी अंडाशय से केवल एक ही अंडा मोचित हुआ होगा। निषेचन के बाद बना एक ही युग्मनज (zygote) प्रारंभिक विभाजन (blastomere stage) के दौरान दो अलग-अलग स्वतंत्र कोशिकाओं या ब्लास्टोसिस्ट खंडों में विभाजित हो जाता है, जिससे आनुवंशिक रूप से समान दो शिशुओं का विकास होता है।
2. द्विअण्ड यमज (Fraternal Twins) के सन्दर्भ में: हाँ, इस परिस्थिति में हमारा उत्तर बदल जाएगा। द्विअण्ड यमज के मामले में एक ही आर्तव चक्र में अंडाशय द्वारा दो अलग-अलग अंडे मोचित हुए होंगे और वे दोनों अलग-अलग शुक्राणुओं द्वारा निषेचित हुए होंगे, जिसके परिणामस्वरूप आनुवंशिक रूप से भिन्न दो बच्चों का जन्म होता है। यह घटना जुड़वाँ बच्चों में आनुवंशिक विविधता को भलीभांति स्पष्ट करती है।
In simple words: आमतौर पर हर महीने केवल 1 अंडा बाहर आता है। समरूप जुड़वाँ बच्चों में केवल 1 ही अंडा निषेचित होकर बाद में दो हिस्सों में बंट जाता है, जबकि द्विअण्ड यमज बच्चों में दो अलग-अलग अंडे अलग-अलग शुक्राणुओं से मिलकर दो अलग बच्चे बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: Differentiate between monozygotic (समरूप) twins requiring 1 egg, and dizygotic (द्विअण्ड) twins requiring 2 eggs. Using these precise terms shows strong subject knowledge.
Question 21. आप क्या सोचते हैं कि कुतिया जिसने 6 बच्चों को जन्म दिया है, के अण्डाशय से कितने अण्डे मोचित हुए थे?
Answer: कुतिया (bitch) के अंडाशय से 6 बच्चे जनने की स्थिति में कम से कम 6 अण्डे मोचित हुए थे। कुतिया एक बहुप्रजक (polyotocous) प्राणी है जिसके एक ही प्रसव काल में कई अंडों का अण्डोत्सर्ग (ovulation) होता है। ये सभी 6 अण्डे अलग-अलग शुक्राणुओं द्वारा निषेचित होकर स्वतंत्र भ्रूणों के रूप में गर्भाशय में विकसित हुए होंगे।
In simple words: कुतिया एक बार में कई अंडे पैदा करती है। इसलिए 6 बच्चों को जन्म देने के लिए उसके अंडाशय से 6 अंडे निकले होंगे जो अलग-अलग शुक्राणुओं से मिलकर बच्चे बने।
🎯 Exam Tip: Explain that dogs are polytocous animals, meaning they release multiple ova per ovulation cycle, resulting in multiple births.
परीक्षापयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. समरूप जुड़वाँ बच्चे पैदा होते हैं जब
(क) एक शुक्राणु दो अंडाणुओं का निषेचन करे
(ख) एक अण्डाणु का दो शुक्राणु निषेचन करें
(ग) दो अण्डाणु दो भिन्न शुक्राणुओं द्वारा निषेचित हों
(घ) एक निषेचित अण्डा दो कोरक खण्डों में विभक्त होकर पृथक-पृथक दो स्वतंत्र भ्रूण के रूप में विकसित हो
Answer: (घ) एक निषेचित अण्डा दो कोरक खण्डों में विभक्त होकर पृथक-पृथक दो स्वतंत्र भ्रूण के रूप में विकसित हो
In simple words: समरूप (एक जैसे) जुड़वाँ बच्चे तब बनते हैं जब एक ही निषेचित अंडा विभाजन के समय शुरू में ही दो अलग-अलग हिस्सों में टूट जाता है और दोनों हिस्से स्वतंत्र बच्चे के रूप में विकसित होते हैं।
🎯 Exam Tip: Identical twins are monozygotic, meaning they originate from a single zygote that splits during early cleavage.
Question 2. ब्लास्टुला अवस्था में भ्रूण को सर्वप्रथम गर्भाशय से जोड़ने का कार्य निम्न में से कौन-सी झिल्ली करती है?
(क) एम्निओन
(ख) अपरा/कोरियोन
(ग) ऐलेन्टॉयस
(घ) योक सैक
Answer: (ख) अपरा/कोरियोन
In simple words: कोरियोन (Chorion) भ्रूण की सबसे बाहरी झिल्ली है जो आगे चलकर अपरा (प्लेसेंटा) बनाती है और गर्भाशय से जुड़ने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: The chorion forms chorionic villi that interdigitate with the uterine wall to establish the placenta.
Question 1. फर्टीलाइजिन तथा एण्टी-फर्टीलाइजिन प्रक्रिया पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: निषेचन के समय मादा अण्डाणु (ovum) की सतह से एक विशेष ग्लाइकोप्रोटीन स्रावित होता है जिसे फर्टीलाइजिन (fertilizin) कहते हैं, तथा नर शुक्राणु (sperm) की सतह से एक अम्लीय प्रोटीन स्रावित होता है जिसे एण्टी-फर्टीलाइजिन (anti-fertilizin) कहते हैं। ये दोनों प्रोटीन आपस में ताला-चाबी की तरह पारस्परिक रासायनिक क्रिया करते हैं, जिसके फलस्वरूप शुक्राणु अण्डाणु की ओर आकर्षित होकर उसकी सतह से चिपक जाता है। यह क्रिया केवल एक ही जाति के शुक्राणु और अण्डाणु के बीच निषेचन सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
In simple words: अंडे से फर्टीलाइजिन और शुक्राणु से एण्टी-फर्टीलाइजिन नाम के रसायन निकलते हैं। ये दोनों आपस में मिलकर शुक्राणु को अंडे की तरफ आकर्षित करते हैं और उसे अंडे से चिपकने में मदद करते हैं ताकि सही निषेचन हो सके।
🎯 Exam Tip: Highlight that 'Fertilizin' is on the egg and 'Anti-fertilizin' is on the sperm. This is a lock-and-key species-specific chemical match.
Question 2. कृत्रिम शुक्रसेचन पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: कृत्रिम शुक्रसेचन (Artificial Insemination) के अंतर्गत उन परिस्थितियों में जहाँ पुरुष साथी में शुक्राणुओं की कमी होती है, स्वस्थ दाता या पति के वीर्य को एकत्रित व परिरक्षित किया जाता है। इस परिरक्षित वीर्य को कृत्रिम रूप से स्त्री की योनि या गर्भाशय में पहुँचाया जाता है। इसके अतिरिक्त परखनली शिशु (test tube baby) तकनीक में शरीर से बाहर (in vitro) प्रयोगशाला में निषेचन कराकर बने युग्मनज या भ्रूण को स्त्री के गर्भाशय में रोपित कर दिया जाता है, जिससे संतान का जन्म होता है। यह तकनीक उन दंपत्तियों के लिए वरदान साबित होती है जो प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में असमर्थ होते हैं।
In simple words: जब पुरुष में शुक्राणुओं की संख्या कम होती है, तब डॉक्टर स्वस्थ शुक्राणुओं को कृत्रिम रूप से महिला के जनन मार्ग में डालते हैं। परखनली शिशु तकनीक में अंडे और शुक्राणु का निषेचन बाहर कराकर भ्रूण को गर्भाशय में डाल दिया जाता है।
🎯 Exam Tip: Define both 'In vivo' (inside the body) and 'In vitro' (outside the body/test tube baby) applications of artificial insemination techniques clearly.
Question 3. ऐसे दो जन्तुओं के नाम लिखिए जिनमें रुधिर जरायु अपरा पाया जाता है।
Answer: स्तनधारियों के यूथीरिया (Eutheria) अधोवर्ग के प्राणियों में रुधिर जरायु अपरा (haemochorial placenta) पाया जाता है। इस प्रकार के अपरा में भ्रूण की बाहरी झिल्ली (chorion) सीधे माता के रक्त के संपर्क में रहती है; इसके उदाहरण मनुष्य (Humans) तथा कपि (Apes) हैं।
In simple words: रुधिर जरायु अपरा वह विशेष नाल है जिसमें बच्चे की बाहरी झिल्ली सीधे मां के खून के संपर्क में रहती है। यह मनुष्य और बंदरों (कपि) में पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: Use the precise terms 'haemochorial placenta' and 'Eutheria'. 'Man' (मनुष्य) and 'Apes' (कपि) are the best examples.
Question 4. मॉरुला तथा ब्लास्टुला में एक अन्तर लिखिए।
Answer: मॉरुला (Morula) निषेचन के बाद बनने वाली 16 कोशिकाओं की एक ठोस, गोल गेंद जैसी संरचना होती है जिसमें कोई आंतरिक गुहा नहीं पाई जाती। इसके विपरीत, ब्लास्टुला या ब्लास्टोसिस्ट (Blastula/Blastocyst) कोशिकाओं की एक खोखली परतदार संरचना होती है, जिसके भीतर एक स्पष्ट तरल से भरी गुहा पाई जाती है जिसे कोरक गुहा या ब्लास्टोसील (blastocoel) कहते हैं। यह संरचनात्मक अंतर भ्रूण के गर्भाशय में रोपण की तैयारी के लिए अत्यंत आवश्यक है।
In simple words: मॉरुला कोशिकाओं से बनी एक ठोस गेंद जैसी रचना होती है जिसमें अंदर कोई खाली जगह नहीं होती, जबकि ब्लास्टुला के अंदर एक खाली गुहा (ब्लास्टोसील) बन जाती है।
🎯 Exam Tip: Write this answer by highlighting 'solid ball' for morula and 'fluid-filled cavity' (blastocoel) for blastula as the core distinguishing features.
Question 5. भ्रूण के मीजोडर्म स्तर द्वारा निर्मित किन्हीं चार अंगों के नाम लिखिए।
Answer: भ्रूण के विकास के दौरान तीन जनन स्तर बनते हैं, जिनमें से मध्य स्तर यानी मीजोडर्म (mesoderm) द्वारा शरीर के अनेक महत्वपूर्ण अंगों का निर्माण होता है। मीजोडर्म द्वारा निर्मित किन्हीं चार अंगों के नाम निम्नलिखित हैं –
1. हृदय (Heart) तथा संपूर्ण रुधिर परिसंचरण तंत्र।
2. वृक्क (Kidneys) तथा उत्सर्जन अंग।
3. अन्तःकंकाल (Endoskeleton) जिसमें हड्डियाँ और उपास्थि शामिल हैं।
4. त्वचा की डर्मिस (Dermis of Skin) तथा संयोजी ऊतक (connective tissues)।
In simple words: भ्रूण की बीच वाली परत (मीजोडर्म) से हमारे शरीर की हड्डियाँ (अन्तःकंकाल), हृदय (दिल), गुर्दे (वृक्क), और त्वचा की अंदरूनी परत (डर्मिस) बनती है।
🎯 Exam Tip: List the organs clearly using bullet points. 'Heart' and 'Kidneys' are highly expected and easy-to-remember mesodermal organs.
Question 6. आपातकालीन ग्रन्थि का नाम लिखिए।
Answer: मानव शरीर में एड्रीनल ग्रंथि के मध्य भाग यानी एड्रीनल मेड्यूला (Adrenal Medulla) को आपातकालीन ग्रन्थि कहते हैं। संकट या आपातकालीन परिस्थितियों में इससे एड्रीनेलीन (adrenaline) और नॉर-एड्रीनेलीन हार्मोन्स स्रावित होते हैं जो शरीर को 'लड़ो या भागो' (fight or flight) की स्थिति के लिए तुरंत तैयार करते हैं।
In simple words: एड्रीनल ग्रंथि को आपातकालीन ग्रंथि कहते हैं। जब हम डरते हैं या संकट में होते हैं, तो इससे तुरंत हार्मोन निकलते हैं जो हमारे दिल की धड़कन तेज कर देते हैं ताकि हम खतरे का सामना कर सकें।
🎯 Exam Tip: Specify 'Adrenal Medulla' rather than just 'Adrenal gland' to demonstrate precise endocrinology knowledge.
Question 7. शिशुजन्म के बाद कौन-सा हार्मोन दूध मुक्त करता है? उसका स्रोत बताइए।
Answer: शिशुजन्म के बाद स्तनों से दूध के निर्माण को प्रोलैक्टिन (Prolactin) हार्मोन उत्तेजित करता है तथा दूध को स्तन से बाहर निकालने (दूध मुक्त करने) का कार्य ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) हार्मोन करता है। प्रोलैक्टिन अग्र पीयूष ग्रंथि (anterior pituitary) से तथा ऑक्सीटोसिन पश्च पीयूष ग्रंथि (posterior pituitary) से स्रावित होता है। यह संपूर्ण प्रक्रिया शिशु के स्तनपान करने की प्रतिवर्त क्रिया द्वारा नियंत्रित होती है।
In simple words: प्रोलैक्टिन हार्मोन दूध बनाने का काम करता है और ऑक्सीटोसिन हार्मोन दूध को बाहर निकालने (मुक्त करने) का काम करता है। ये दोनों हार्मोन मस्तिष्क में स्थित पीयूष ग्रंथि से निकलते हैं।
🎯 Exam Tip: Distinguish between Prolactin (for milk production) and Oxytocin (for milk ejection). Clearly mention 'Pituitary gland' (पीयूष ग्रंथि) as their source.
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. यौवनारम्भ क्या है? इस अवस्था में बालक एवं बालिकाओं के शरीर में होने वाले परिवर्तन का उल्लेख कीजिए।
Answer: यौवनारम्भ (Puberty): यौवनारम्भ शारीरिक और लैंगिक परिवर्तनों की वह क्रमिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा किशोर बालक एवं बालिकाओं का शरीर एक वयस्क जननक्षम शरीर के रूप में विकसित होता है तथा उनमें प्रजनन एवं निषेचन की जैविक क्षमता विकसित हो जाती है। यह आनुवंशिक और हार्मोनल संतुलन पर निर्भर करती है।
बालक के यौवनारम्भ पर उत्पन्न लक्षण (लगभग 15-18 वर्ष की आयु में) –
1. शरीर की सुडौलता – मांसपेशियों के विकास से शरीर अधिक सुदृढ़, गठीला और शक्तिशाली हो जाता है; कंधे चौड़े हो जाते हैं और लंबाई तेजी से बढ़ती है।
2. शरीर पर बालों का उगना – चेहरे पर मूंछ और दाढ़ी के बाल उगने लगते हैं, तथा बगल व जननांगों के आस-पास बाल निकल आते हैं।
3. आवाज का भारीपन – लैरिंक्स (कंठ) के बढ़ने के कारण आवाज भारी और गंभीर हो जाती है।
ये सभी परिवर्तन वृषण से स्रावित होने वाले नर हार्मोन टेस्टोस्टेरोन (testosterone) के कारण होते हैं।
बालिका के यौवनारम्भ पर उत्पन्न लक्षण (लगभग 11-13 वर्ष की आयु में) –
1. स्तनों का विकास – वसा के जमाव और दुग्ध ग्रंथियों के विकास के कारण स्तनों का आकार सुडौल व बड़ा होने लगता है।
2. श्रोणि भाग का चौड़ा होना – नितम्बों और श्रोणि मेखला (pelvic region) का क्षेत्र चौड़ा व भारी हो जाता है।
3. आवाज का सुरीला होना – पिच अधिक होने के कारण लड़कियों की आवाज पतली और मधुर हो जाती है।
4. आर्तव चक्र का प्रारंभ – अंडाशय में अंडों का परिपक्वन और मासिक धर्म (Menstrual cycle) शुरू हो जाता है।
ये सभी परिवर्तन अंडाशय द्वारा स्रावित होने वाले मादा हार्मोन्स एस्ट्रोजन (estrogen) के कारण होते हैं।
In simple words: वह उम्र जब किशोरों का शरीर जनन के लिए तैयार होता है, उसे यौवनारम्भ कहते हैं। लड़कों में दाढ़ी-मूंछ आना, आवाज भारी होना और लड़कियों में मासिक धर्म शुरू होना व स्तनों का विकास होना इसके मुख्य लक्षण हैं।
🎯 Exam Tip: Discuss the physical changes of boys and girls separately. State clearly that 'Testosterone' controls male puberty while 'Estrogen' controls female puberty.
Question 2. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए –
(क) मानव भ्रूण का रोपण
(ख) स्तनियों में अपरा
या
अपरा क्या है? इसके मुख्य कार्य लिखिए।
Answer: (क) मानव भ्रूण का रोपण (Implantation of Human Embryo): निषेचन के तुरंत बाद युग्मनज में विदलन शुरू हो जाता है। चौथे दिन तक यह 16 कोशिकाओं के ठोस मॉरुला में बदलकर गर्भाशय में पहुँच जाता है। गर्भाशय के पोषक रस को सोखकर यह एक खोखली कोरकपुटी या ब्लास्टोसिस्ट (blastocyst) में बदल जाता है, जिसकी बाहरी परत को ट्रोफोब्लास्ट (trophoblast) कहते हैं। निषेचन के लगभग 7-8 दिन बाद, ब्लास्टोसिस्ट गर्भाशय के अन्तः स्तर (endometrium) के संपर्क में आता है। ट्रोफोब्लास्ट की सतह से उंगली जैसे प्रवर्ध निकलकर गर्भाशय की दीवार में धंस जाते हैं और भ्रूण को गर्भाशय की दीवार से पूरी तरह जोड़ देते हैं। इसी क्रिया को रोपण कहते हैं।
(ख) स्तनियों में अपरा (Placenta in Mammals): अपरा या आँवल वह अत्यंत महत्वपूर्ण संयुक्त ऊतक है जो गर्भाशय के भीतर विकासशील भ्रूण को माता के शरीर से संरचनात्मक और क्रियात्मक रूप से जोड़ता है। इसका निर्माण भ्रूण की बाह्य कला (chorion) और गर्भाशय की आंतरिक दीवार के आपस में मिलने से होता है।
अपरा के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं –
1. पोषण (Nutrition) – भ्रूण अपरा के माध्यम से माता के रक्त में उपस्थित पचे हुए पोषक पदार्थों (जैसे ग्लूकोज, एमीनो अम्ल) को विसरण द्वारा प्राप्त करता है।
2. श्वसन (Respiration) – यह माता के रक्त से ऑक्सीजन भ्रूण तक पहुँचाने तथा भ्रूण के रक्त से कार्बन डाइऑक्साइड माता के रक्त में विसर्जित करने का कार्य करता है।
3. उत्सर्जन (Excretion) – भ्रूण के शरीर में बनने वाले यूरिया व अन्य अपशिष्ट पदार्थों को माता के रक्त में भेजने का कार्य अपरा द्वारा ही होता है।
4. हार्मोन स्राव (Endocrine role) – गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए अपरा द्वारा प्रोजेस्टेरोन, एस्ट्रोजन, एचसीजी (hCG) और रिलैक्सिन जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन्स का स्राव किया जाता है। यह संरचना मां और शिशु के बीच जीवन रेखा की तरह कार्य करती है।
In simple words:
(क) निषेचित अंडे का गर्भाशय की दीवार से मजबूती से चिपकना रोपण कहलाता है।
(ख) अपरा वह नाल है जो बच्चे को मां के गर्भाशय से जोड़ती है। इसके जरिए बच्चे को भोजन, ऑक्सीजन मिलती है और उसका कचरा बाहर निकलता है।
🎯 Exam Tip: For 'Implantation', define the role of 'Trophoblast'. For 'Placenta', write its four critical physiological roles (Nutrition, Respiration, Excretion, Endocrine) with appropriate headings to score maximum marks.
Question 3. अपरा द्वारा स्रावित हॉरमोन्स पर टिप्पणी कीजिए।
Answer: अपरा (placenta) अंतःस्रावी ग्रंथि की तरह भी कार्य करता है और गर्भावस्था को सुचारू बनाए रखने व शिशु के जन्म को सुगम करने के लिए अनेक हार्मोन्स का स्राव करता है। इससे मुख्यतः निम्नलिखित दो स्टेरॉइड तथा दो प्रोटीन हार्मोन्स स्रावित होते हैं –
1. मानव जरायु गोनेडोट्रॉपिन हार्मोन (hCG / CGH) – यह एक प्रोटीन हार्मोन है जो गर्भावस्था (pregnancy) को बनाए रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह अण्डाशय के कॉर्पस ल्यूटियम को सक्रिय रखकर उससे लगातार प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्राव को प्रेरित करता है।
2. मानव प्लेसेन्टल लैक्टोजेन (hPL) – यह भी एक प्रोटीन हार्मोन है जो गर्भावस्था के दौरान माता के स्तनों में दुग्ध ग्रंथियों के विकास व प्रसव के बाद दुग्ध स्राव की प्रारंभिक तैयारियों को प्रेरित करता है।
3. एस्ट्रोजन या ऐस्ट्रेडियॉल (Estrogen / Estradiol) – यह एक स्टेरॉइड हार्मोन है जो गर्भाशय की पेशियों के संकुचन व प्रसव के समय जन्म नाल को चौड़ा करने में सहायक होता है।
4. प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) – यह एक स्टेरॉइड हार्मोन है जो गर्भाशय के अन्तः स्तर को बनाए रखकर भ्रूण के सफल रोपण व शिशु के विकास को सुनिश्चित करता है। ये हार्मोन्स गर्भावस्था के दौरान माता के शरीर में होने वाले आवश्यक चयापचय (metabolic) परिवर्तनों को भी सुचारू बनाए रखते हैं।
In simple words: अपरा (प्लेसेंटा) से कई महत्वपूर्ण हार्मोन निकलते हैं। इनमें से hCG और प्रोजेस्टेरोन गर्भावस्था को सुरक्षित रखते हैं, hPL स्तनों में दूध बनाने की तैयारी करता है, और एस्ट्रोजन प्रसव के समय गर्भाशय की मदद करता है।
🎯 Exam Tip: hCG and hPL are hormones produced only during pregnancy by the placenta. Mentioning their chemical nature (protein vs steroid) displays advanced concepts.
Question 4. गर्भ झिल्लियों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
या
एम्निऑन के चार महत्त्वपूर्ण कार्य लिखिए।
Answer: भ्रूण की देह के बाहर विकसित होने वाली झिल्लियों अथवा कलाओं को अतिरिक्त भ्रूणीय झिल्लियां या भ्रूण-बहिस्थ कलाएँ (extra-embryonic membranes) कहते हैं। ये भ्रूण के परिवर्द्धन एवं जीवन के लिए विशेष कार्य करती हैं, परन्तु भ्रूण के प्रत्यक्ष अंगोत्पादन में भाग नहीं लेतीं। जन्म के समय ये शिशु के साथ बाहर आ जाती हैं और अनुपयोगी हो जाती हैं। मानव तथा अन्य सभी स्तनियों में निम्नलिखित चार भ्रूण-बहिस्थ कलाएँ पाई जाती हैं –
1. उल्व या एम्निऑन (Amnion) – यह कला भ्रूण को चारों ओर से घेरे रहती है। इसके भीतर एक गुहा पाई जाती है जिसे एम्निऑटिक गुहा (amniotic cavity) कहते हैं, जिसमें एम्निऑटिक तरल (amniotic fluid) भरा रहता है।
इसके चार प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं –
• यह तरल भ्रूण की बाह्य झटकों और आघातों से एक सुरक्षात्मक गद्दी (cushion) की भाँति रक्षा करता है।
• यह भ्रूण को बाहरी परतों से चिपकने से रोकता है।
• यह भ्रूण को हमेशा नम रखता है जिससे उसके सूखने (desiccation) का भय नहीं रहता।
• यह भ्रूण के अंगों में विकृतियाँ उत्पन्न होने से बचाता है और उसे तैरने के लिए सुगम माध्यम प्रदान करता है।
2. चर्मिका या कोरियॉन (Chorion) – यह एम्निऑन के बाहर की ओर स्थित सबसे बाहरी सुरक्षात्मक परत है। यह गर्भाशय की भित्ति के साथ मिलकर अपरा (placenta) का निर्माण करती है। इसकी बाह्य सतह से अंगुली जैसे रसांकुर (chorionic villi) निकलते हैं जो भ्रूण के पोषण, श्वसन तथा उत्सर्जन में सीधे सहायक होते हैं।
3. पीतक कोष (Yolk Sac) – मानव भ्रूण में पीतक (yolk) नहीं होता, अतः मानव का पीतक कोष बहुत छोटा और अवशेषी होता है। इसका मुख्य कार्य प्रारंभिक भ्रूण में लाल रुधिर कणिकाओं (RBCs) का निर्माण करना है।
4. अपरापोषक या एलैण्टॉइस (Allantois) – मानव भ्रूण में यह भी एक अवशेषी अंग के रूप में पाई जाती है। इसका मुख्य कार्य भ्रूण की रक्त वाहिकाओं का निर्माण करना और कोरियॉन के साथ मिलकर अपरा (placenta) व नाभि रज्जु (umbilical cord) के निर्माण में सहयोग देना है।
In simple words: भ्रूण को मां के पेट में सुरक्षित रखने के लिए चार झिल्लियां होती हैं। इनमें से एम्निऑन भ्रूण को धक्कों से बचाता है और सूखने नहीं देता; कोरियॉन प्लेसेंटा (अपरा) बनाता है; पीतक कोष खून बनाता है; और एलैण्टॉइस नाभि रज्जु बनाने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: Focus on 'Amnion' and its protective amniotic fluid as the primary cushion for the embryo. Listing all four membranes with their specific single-line roles ensures top marks.
Question 5. प्राणियों में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष भ्रूणीय विकास में उदाहरण सहित अन्तर बताइए।
या
प्रत्यक्ष एवं परोक्ष भ्रूणीय विकास क्या हैं? इनके उदाहरण दीजिए।
Answer: निषेचित अंडे (zygote) से पूर्ण विकसित शिशु बनने की प्रक्रिया को भ्रूणीय विकास (embryonic development) कहते हैं। प्राणियों में यह विकास मुख्यतः दो प्रकार का होता है –
1. परोक्ष या अप्रत्यक्ष भ्रूणीय विकास (Indirect Embryonic Development) – इस प्रकार के विकास में अंडे से निकलने वाला शिशु (नवजात) वयस्क प्राणी से शारीरिक संरचना में पूरी तरह भिन्न होता है। यह पहले एक मध्यवर्ती शिशु प्रावस्था जिसे लार्वा (larva) कहते हैं, से गुजरता है। लार्वा में तीव्र कायान्तरण (metamorphosis) होने के पश्चात् ही वह वयस्क में बदलता है। इनमें अंडों में पीतक (yolk) की मात्रा बहुत कम होती है; जैसे-मेंढक (लार्वा = टैडपोल), रेशम कीट, तथा अधिकांश अकशेरुकी जंतु।
2. प्रत्यक्ष भ्रूणीय विकास (Direct Embryonic Development) – इस प्रकार के विकास में अंडे से निकलने वाला नवजात शिशु या जन्म लेने वाला बच्चा बाह्य रूप से हूबहू अपने माता-पिता या वयस्क के समान ही दिखाई देता है, उसमें केवल जनन परिपक्वता (sexual maturity) नहीं होती। समय के साथ केवल उसके शरीर की वृद्धि होती है। इनमें अंडों में पीतक की मात्रा बहुत अधिक होती है या मादा में गर्भाशय के भीतर अपरा (placenta) द्वारा भ्रूण को सीधे पोषण दिया जाता है; जैसे-मनुष्य, बिल्ली, कुत्ता, सरीसृप तथा पक्षी।
In simple words: परोक्ष विकास में अंडे से पहले लार्वा (जैसे मेंढक का टैडपोल) निकलता है जो बाद में कायान्तरण करके बड़ा मेंढक बनता है। प्रत्यक्ष विकास में पैदा होने वाला बच्चा जन्म से ही अपने माता-पिता जैसा दिखता है, जैसे मानव का शिशु।
🎯 Exam Tip: Highlight the absence of 'larval stage' (लार्वा अवस्था) in direct development. Provide 'Frog' (मेंढक) as the standard example of indirect development, and 'Human' (मनुष्य) for direct development.
Question 1. निषेचन क्रिया किसे कहते हैं? मनुष्य में निषेचन में होने वाली क्रियाओं का उल्लेख कीजिए तथा अण्डाणु में शुक्राणु के प्रवेश का नामांकित चित्र बनाइए।
Answer: निषेचन (Fertilization): नर युग्मक (अगुणित शुक्राणु, \( n \)) और मादा युग्मक (अगुणित अण्डाणु, \( n \)) के केन्द्रकों के आपस में संलयन की प्रक्रिया को निषेचन कहते हैं, जिसके फलस्वरूप एक द्विगुणित युग्मनज (zygote, \( 2n \)) का निर्माण होता है। मनुष्य में यह प्रक्रिया अण्डवाहिनी (fallopian tube) के एम्पुला-इस्थमस संधिस्थल पर संपन्न होती है।
मनुष्य में निषेचन के प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं –
1. शुक्राणु का अण्डाणु तक पहुँचना – मैथुन के समय योनि में स्खलित वीर्य में से लाखों शुक्राणु तैरते हुए अण्डवाहिनी तक पहुँचते हैं। गर्भाशय के संकुचन इस गति को तीव्र करने में मदद करते हैं।
2. समूहन (Agglutination) – अण्डाणु की सतह से फर्टीलाइजिन तथा शुक्राणु की सतह से एण्टीफर्टीलाइजिन का स्राव होता है। इनकी पारस्परिक क्रिया से शुक्राणु अण्डाणु की ओर आकर्षित होकर उसकी सतह से चिपक जाता है।
3. संधारण (Capacitation) – मादा जनन मार्ग में शुक्राणुओं के ऊपर जमी कोलेस्ट्रॉल की परत हट जाती है, जिससे वे सक्रिय होकर निषेचन के योग्य बनते हैं।
4. शुक्राणु का अण्डाणु में प्रवेश (Penetration) – शुक्राणु का अग्रपिंडक (acrosome) स्पर्म लाइसिन नामक एंजाइम स्रावित करता है, जिसमें हाइल्यूरोनिडेज (hyaluronidase) मुख्य है। यह एंजाइम कोरोना रेडिएटा और जोना पेलुसिडा को घोल देता है, जिससे शुक्राणु का सिर अण्डाणु में प्रवेश कर जाता है। संपर्क स्थल पर निषेचन शंकु (fertilization cone) बनता है।
5. अण्डाणु का सक्रियण (Activation) – शुक्राणु के प्रवेश करते ही अण्डाणु में कॉर्टिकल कणिकाएं सक्रिय होकर निषेचन झिल्ली (fertilization membrane) बना देती हैं, जो अन्य किसी भी अतिरिक्त शुक्राणु के प्रवेश (polyspermy) को पूरी तरह रोक देती हैं।
6. केन्द्रकों का संलयन (Amphimixis) – अण्डाणु के भीतर नर पूर्व-केन्द्रक और मादा पूर्व-केन्द्रक एक निश्चित पथ पर आगे बढ़कर आपस में मिल जाते हैं (उभय मिश्रण), जिससे द्विगुणित (\( 2n \)) युग्मनज का निर्माण पूर्ण हो जाता है।
In simple words: नर शुक्राणु और मादा अंडे के मिलने को निषेचन कहते हैं। लाखों शुक्राणुओं में से केवल एक ही शुक्राणु अंडे के कोरोना रेडिएटा आवरण को गलाकर अंदर घुस पाता है। इसके घुसते ही अंडे के चारों ओर एक मजबूत दीवार बन जाती है जिससे दूसरा शुक्राणु अंदर न आ सके।
🎯 Exam Tip: Describe the role of 'Acrosome' and 'Cortical reaction' carefully. Underline 'Amphimixis' (उभय मिश्रण) as the final fusion step of both nuclei.
Question 2. विदलन एवं समसूत्री विभाजन में अन्तर स्पष्ट कीजिए। मनुष्य के युग्मनज में विदलन को समझाइए एवं इसके महत्त्व का वर्णन कीजिए।
Answer: विदलन (Cleavage) तथा सामान्य समसूत्री विभाजन (Mitosis) के मध्य मुख्य संरचनात्मक व कार्यिकी अन्तर निम्नलिखित तालिका में स्पष्ट किए गए हैं –
| क्र० सं० | विदलन (Cleavage) | समसूत्री विभाजन (Mitosis) |
|---|---|---|
| 1. | यह केवल निषेचित अण्डे (युग्मनज) या सक्रिय अंडों में होता है। | यह शरीर की सभी सामान्य कायिक (somatic) कोशिकाओं में होता है। |
| 2. | विभाजन के बाद बनने वाली संतति कोशिकाओं (blastomeres) का आकार लगातार छोटा होता चला जाता है। | बनने वाली नई कोशिकाओं का आकार मातृ कोशिका के समान ही रहता है, छोटा नहीं होता। |
| 3. | इसमें विभाजन के पश्चात् अन्तरालावस्था (interphase) में कोई वृद्धिकाल (growth phase) नहीं होता। | इसमें प्रत्येक विभाजन के बाद स्पष्ट अन्तरालावस्था और वृद्धिकाल होता है। |
| 4. | इस प्रक्रिया में DNA का संश्लेषण अत्यंत तीव्र गति से होता है। | इसमें DNA बनने की गति अपेक्षाकृत मंद होती है। |
| 5. | कोशिका विभाजन बहुत तेजी से और लगातार होता है। | कोशिका विभाजन सामान्य गति से और आवश्यकतानुसार होता है। |
| 6. | इसमें श्वसन दर और ऑक्सीजन की खपत बहुत अधिक बढ़ जाती है। | इसमें ऑक्सीजन का प्रयोग अपेक्षाकृत बहुत कम मात्रा में होता है। |
मानव में युग्मनज का विदलन अण्डवाहिनी (fallopian tube) में नीचे खिसकने के दौरान ही शुरू हो जाता है। इसमें पूर्णभंजी विदलन (holoblastic cleavage) पाया जाता है, जिसके अंतर्गत पूरा युग्मनज विभाजित होता है –
• प्रथम विदलन: निषेचन के लगभग 30 घण्टे बाद होता है, जिससे युग्मनज दो ब्लास्टोमीयर्स (blastomeres) में विभाजित हो जाता है।
• द्वितीय विदलन: निषेचन के लगभग 44 घण्टे बाद पहले विदलन के समकोण पर होता है, जिससे 4 कोशिकाएं बनती हैं।
• तृतीय विदलन: निषेचन के तीसरे दिन होता है, जिससे 8 कोशिकाएं बनती हैं।
इसके बाद क्रमिक और अनिश्चित विभाजनों द्वारा चौथे दिन 32 कोशिकाओं की एक ठोस संरचना बनती है, जिसे मॉरुला (morula) कहते हैं।
विदलन का महत्व:
1. यह एककोशिकीय युग्मनज को बहुकोशिकीय भ्रूण में परिवर्तित करता है।
2. यह ब्लास्टोमीयर्स में केन्द्रक और कोशिकाद्रव्य के निश्चित अनुपात को पुनः स्थापित करता है।
3. यह भ्रूण में जनन स्तरों (germ layers) के निर्माण की आधारशिला रखता है जिससे आगे चलकर अंग बनते हैं।
In simple words: विदलन वह विशेष विभाजन है जिसमें युग्मनज (अंडा) बिना अपना आकार बढ़ाए लगातार बहुत तेजी से विभाजित होकर ठोस कोशिकाओं की गेंद (मॉरुला) में बदल जाता है। यह सामान्य समसूत्री विभाजन से बहुत तेज होता है।
🎯 Exam Tip: Differentiate cleavage from mitosis clearly. Emphasize that during cleavage, 'total volume of cytoplasm remains constant' while cells multiply, which is a highly appreciated concept.
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