UP Board Solutions Class 12 Biology Chapter 1 Reproduction in Organisms

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Detailed Chapter 1 जीवों में प्रजनन UP Board Solutions for Class 12 Biology

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Class 12 Biology Chapter 1 जीवों में प्रजनन UP Board Solutions PDF

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

 

Question 1. जीवों के लिए जनन क्यों अनिवार्य है?
Answer: जनन जीवों का एक अति महत्त्वपूर्ण लक्षण है। यह एक अति आवश्यक जैविक प्रक्रिया है। जिसके द्वारा न सिर्फ जीवों की उत्तरजीविता में मदद मिलती है बल्कि इससे जीव-जाति की निरन्तरता भी बनी रहती है। जनन जीवों के अमरत्व में भी सहायक होता है। प्राकृतिक मृत्यु, वयता व जीर्णता के कारण होने वाले जीव ह्रास की आपूर्ति, जनन द्वारा ही होती है। जनन से जीवों की संख्या बढ़ती है। जनन एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा लाभदायक विभिन्नताएं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक स्थानान्तरित होती हैं। अतः जनन जैव विकास में भी सहायक होता है। यह प्रक्रिया पृथ्वी पर जीवन के संतुलन को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इन समस्त कारणों के आधार पर कहा जा सकता है कि जनन जीवों के लिए अनिवार्य है।
In simple words: Reproduction is necessary because it helps living things produce young ones of their own kind. This ensures that their species continues to live on Earth and does not become extinct.

🎯 Exam Tip: Mention key terms like 'species continuity' (जीव-जाति की निरन्तरता) and 'genetic variation' (विभिन्नताएं) to score full marks in this answer.

 

Question 2. जनन की अच्छी विधि कौन-सी है और क्यों?
Answer: प्राय: लैंगिक जनन (sexual reproduction) को जनन की श्रेष्ठ विधि माना गया है। लैंगिक जनन के दौरान गुणसूत्रों की अदला-बदली होती है जिससे युग्मकों (gametes) में नये लक्षण विकसित होते हैं तथा नये जीव का विकास होता है जो अपने जनकों से भिन्न होता है। अतः लैंगिक जनन जैव विकास में सहायक होता है। लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न विभिन्नताएं जीवों को बदलते पर्यावरण में जीवित रहने के अनुकूल बनाती हैं।
In simple words: Sexual reproduction is the best method because it combines traits from two parents. This creates unique variations that help the offspring adapt and survive better in changing environments.

🎯 Exam Tip: Clearly state 'Sexual Reproduction' as the best method and explain how genetic variation (गुणसूत्रों की अदला-बदली) leads to evolution.

 

Question 3. अलैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न हुई सन्तति को क्लोन क्यों कहा गया है ?
Answer: आकारिकीय व आनुवंशिक रूप से एक समान जीव क्लोन (clone) कहलाते हैं। अलैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न सन्तति आनुवंशिक व आकारिकीय रूप से अपने जनक के एकदम समान होती है, जिसमें किसी भी प्रकार का आनुवंशिक बदलाव नहीं होता, अतः इसे क्लोन कहते हैं।
In simple words: Offspring produced by asexual reproduction are exact copies of their parent, both in look and genetics, which is why they are called clones.

🎯 Exam Tip: Clearly define the term 'clone' by mentioning both morphological (physical) and genetic similarity to get full marks.

 

Question 4. लैंगिक जनन के परिणामस्वरूप बनी सन्तति के जीवित रहने के अच्छे अवसर होते हैं। क्यों ? क्या यह कथन हर समय सही होता है ?
Answer: लैंगिक जनन के दौरान गुणसूत्रों का विनिमय होने से आनुवंशिक विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं, जो जनक से सन्तति में स्थानांतरित होती हैं। युग्मकों की उत्पत्ति व निषेचन के कारण नये तथा बेहतर गुणों युक्त सन्तति का जन्म होता है। अतः लैंगिक जनन के परिणामस्वरूप उत्पन्न सन्तति के जीवित रहने के अच्छे अवसर होते हैं। यह विभिन्नता जीवों को बदलते पर्यावरण में अनुकूलित होने में मदद करती है। यह कथन सदैव सही नहीं होता है। जनकों के रोगग्रस्त होने पर वह रोग आने वाली पीढ़ियों में स्थानांतरित हो जाता है।
In simple words: Sexual reproduction mixes genes from two parents, creating unique offspring with better survival traits. However, if parents have genetic diseases, those can also be passed down.

🎯 Exam Tip: Divide your answer into two parts: first explain why survival chances are better (due to variations), and second, explain why this isn't always true (transmission of genetic diseases).

 

Question 5. अलैंगिक जनन द्वारा बनी सन्तति लैंगिक जनन द्वारा बनी सन्तति से किस प्रकार से भिन्न है?
Answer: अलैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न सन्तान आनुवंशिक व संरचनात्मक रूप से जनक के समान होती है अर्थात् अपने जनक का क्लोन (clone) होती है। इसके विपरीत, लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न सन्तान में माता-पिता दोनों के गुणों का मिश्रण होता है जिससे वह आनुवंशिक रूप से जनक से भिन्न होती है।
In simple words: Asexually produced offspring are identical copies (clones) of a single parent, while sexually produced offspring have a mix of genes from two parents and are genetically unique.

🎯 Exam Tip: Use the word 'clone' for asexual offspring and 'variation' or 'genetically unique' for sexual offspring to impress the examiner.

 

Question 6. अलैंगिक तथा लैंगिक जनन के मध्य विभेद स्थापित करो। कायिक जनन को प्रारूपिक अलैंगिक जनन क्यों माना गया है ?
Answer: अलैंगिक तथा लैंगिक जनन के मध्य विभेद निम्नलिखित हैं:

क्र०सं०अलैंगिक जननलैंगिक जनन
1.इसमें सिर्फ एक जनक भाग लेता है।इसमें दो जनक, नर तथा मादा भाग लेते हैं।
2.इसमें युग्मक निर्माण व निषेचन का अभाव होता है।इसमें युग्मक निर्माण व निषेचन होता है।
3.यह जनक की कायिक कोशिकाओं में होता है।यह जनक की जनन कोशिकाओं में होता है।
4.इसमें समसूत्री विभाजन होता है।इसमें अर्धसूत्री व समसूत्री दोनों प्रकार के विभाजन होते हैं।
5.यह सरल व तीव्र गति से होने वाला जनन है।यह जटिल व धीमी गति से होने वाला जनन है।
6.इसके द्वारा उत्पन्न सन्तति आनुवंशिक रूप से जनक के समान होती है।इसके द्वारा उत्पन्न सन्तति आनुवंशिक रूप से अपने जनक से भिन्न होती है।
7.जनक इकाई कलिका, खण्ड या जनक का सम्पूर्ण शरीर होता है।जनक इकाई युग्मक (gamete) होते हैं।
8.इस प्रकार का जनन निम्न अकशेरुकी व निम्न कॉर्डेट में पाया जाता है।यह उच्च पौधों व जन्तुओं में पाया जाता है।
कायिक जनन (vegetative reproduction), अलैंगिक जनन की ऐसी विधि है जिसमें पौधे के कायिक भाग (जैसे जड़, तना, पत्ती) से नये पौधे का निर्माण होता है। चूंकि इस प्रक्रिया में केवल एक ही जनक भाग लेता है, कोई युग्मक नहीं बनता और संतति आनुवंशिक रूप से जनक के समान होती है, इसलिए कायिक जनन को प्रारूपिक अलैंगिक जनन माना गया है।
In simple words: Asexual reproduction involves one parent and produces identical offspring, while sexual reproduction involves two parents and creates genetic diversity. Vegetative reproduction is considered asexual because new plants grow directly from parts of a single parent plant without seeds or gametes.

🎯 Exam Tip: Presenting differences in a tabular format with clear parameters (like number of parents, cell division type) helps you score full marks easily.

Question 7. कायिक प्रवर्धन से आप क्या समझते हैं ? कोई दो उपयुक्त उदाहरण दो।
Answer: कायिक प्रवर्धन जनन की ऐसी विधि है जिसमें पौधे के शरीर का कोई भी कायिक भाग प्रवर्धक का कार्य करता है तथा नये पौधे में विकसित हो जाता है। मातृ पौधे के कायिक अंग; जैसे-जड़, तना, पत्ती, कलिका आदि से नये पौधे का पुनर्जन्म, कायिक प्रवर्धन कहलाता है। यह प्रक्रिया बागवानी और कृषि में पौधों की संख्या तेजी से बढ़ाने के लिए बहुत उपयोगी होती है। कायिक प्रवर्धन के दो उदाहरण निम्न हैं –
1. अजूबा (Bryophyllum) के पौधे में पत्तियों के किनारों से पादपकाय उत्पन्न होते हैं जो मातृ पौधे से अलग होकर नये पौधे को जन्म देते हैं।
2. आलू के कन्द में उपस्थित पर्वसन्धियाँ (nodes) कायिक प्रवर्धन में सहायक होती हैं। पर्वसन्धियों में कलिकाएँ स्थित होती हैं तथा प्रत्येक कलिका नये पौधे को जन्म देती है।
In simple words: जब पौधे के किसी हिस्से जैसे जड़, तना या पत्ती से एक नया पौधा तैयार होता है, तो उसे कायिक प्रवर्धन कहते हैं। जैसे आलू की आँख (पर्वसन्धि) से नया आलू का पौधा उगना।

🎯 Exam Tip: कायिक प्रवर्धन के उदाहरण लिखते समय अजूबा (Bryophyllum) और आलू के कन्द का उल्लेख अवश्य करें और मुख्य शब्दों को रेखांकित करें।

 

Question 8. व्याख्या कीजिए –
(क) किशोर चरण
(ख) प्रजनक चरण
(ग) जीर्णता चरण या जीर्णावस्था।

Answer:
(क) किशोर चरण (Juvenile phase) – सभी जीवधारी लैंगिक रूप से परिपक्व होने से पूर्व एक निश्चित अवस्था से होकर गुजरते हैं, इसके पश्चात् ही वे लैंगिक जनन कर सकते हैं। इस अवस्था को प्राणियों में किशोर चरण या अवस्था तथा पौधों में कायिक अवस्था (vegetative phase) कहते हैं। इसकी अवधि विभिन्न जीवों में भिन्न-भिन्न होती है। यह जीवों के विकास का एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक काल होता है।
(ख) प्रजनक चरण (Reproductive phase) – किशोरावस्था अथवा कायिक प्रावस्था के समाप्त होने पर प्रजनक चरण अथवा जनन प्रावस्था प्रारम्भ होती है। पौधों में इस अवस्था को स्पष्ट पहचाना जा सकता है क्योंकि पौधों में पुष्पन (flowering) प्रारम्भ हो जाता है। प्राणियों में भी अनेक शारीरिकी एवं आकारिकी परिवर्तन आ जाते हैं। इस चरण में जीव संतति उत्पन्न करने योग्य हो जाता है। यह अवस्था विभिन्न जीवों में अलग-अलग होती है।
(ग) जीर्णता चरण या जीर्णावस्था (Senescent phase) – यह जीवन चक्र की अन्तिम अवस्था अथवा तीसरी अवस्था होती है। प्रजनन आयु की समाप्ति को जीर्णता चरण या जीर्णावस्था की प्रारम्भिक अवस्था माना जा सकता है। इस चरण में उपापचय क्रियाएँ मन्द होने लगती हैं, ऊतकों का क्षय होने लगता है तथा शरीर के अंग धीरे-धीरे कार्य करना बन्द कर देते हैं और अन्ततः जीव की मृत्यु हो जाती है। इसे वृद्धावस्था भी कहते हैं।
In simple words: जीवन के तीन मुख्य चरण होते हैं: पहला बचपन या बढ़ने की उम्र (किशोर चरण), दूसरा बच्चे पैदा करने की उम्र (प्रजनक चरण), और तीसरा बुढ़ापा जब शरीर कमजोर होने लगता है (जीर्णता चरण)।

🎯 Exam Tip: तीनों चरणों की परिभाषा लिखते समय उनके अंग्रेजी वैज्ञानिक नाम (Juvenile, Reproductive, Senescent) को कोष्ठक में लिखने से उत्तर अधिक प्रभावशाली बनता है।

 

Question 9. अपनी जटिलता के बावजूद बड़े जीवों ने लैंगिक प्रजनन को पाया है, क्यों ?
Answer: लैंगिक प्रजनन जटिल तथा धीमी गति से होने के बावजूद भी अनेक रूप से उत्तम है। इस प्रकार के जनन के दौरान गुणसूत्रों का विनिमय होने से नये लक्षण विकसित होते हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानान्तरित होते रहते हैं। गुणसूत्रों के आदान-प्रदान से विभिन्नताएं भी उत्पन्न होती हैं, जो जैव विकास में सहायक होती हैं। यह विभिन्नता जीवों को बदलते पर्यावरण के अनुकूल ढलने में मदद करती है। अपने इन्हीं गुणों के कारण बड़े जीवों में लैंगिक जनन पाया जाता है।
In simple words: लैंगिक प्रजनन से बच्चों में माता-पिता दोनों के गुण आते हैं, जिससे नए और बेहतर बदलाव (विभिन्नता) पैदा होते हैं। यही बदलाव जीवों को जीवित रहने और विकसित होने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर में 'विभिन्नता' (variation) और 'जैव विकास' (evolution) जैसे मुख्य शब्दों को अवश्य शामिल करें क्योंकि परीक्षक इन्हीं कीवर्ड्स को ढूंढते हैं।

 

Question 10. व्याख्या करके बताएँ कि अर्द्धसूत्री विभाजन तथा युग्मकजनन सदैव अन्तर-सम्बन्धित (अन्तर्बद्ध) होते हैं।
Answer: लैंगिक जनन करने वाले जीवधारियों में प्रजनन के समय अर्द्धसूत्री विभाजन (meiosis) तथा युग्मकजनन (gametogenesis) सदैव अन्तर-सम्बन्धित होते हैं। युग्मकजनन के दौरान नर और मादा युग्मकों का निर्माण होता है जो कि अगुणित (haploid) होते हैं। द्विगुणित (diploid) जनक कोशिकाओं से इन अगुणित युग्मकों के निर्माण के लिए अर्द्धसूत्री विभाजन अनिवार्य रूप से होता है ताकि गुणसूत्रों की संख्या आधी रह सके। निषेचन के बाद जब ये युग्मक मिलते हैं, तो पुनः द्विगुणित अवस्था स्थापित हो जाती है।
In simple words: शरीर की कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या दोगुनी होती है, लेकिन बच्चों में सही संख्या बनाए रखने के लिए अंडों और शुक्राणुओं में गुणसूत्रों को आधा करना पड़ता है। यह आधा करने का काम अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा ही संभव होता है।

🎯 Exam Tip: स्पष्ट करें कि युग्मक हमेशा अगुणित (n) होते हैं और जनक कोशिकाएं द्विगुणित (2n) होती हैं, और इस अंतर को बनाए रखने के लिए अर्द्धसूत्री विभाजन आवश्यक है।

(gametogenesis) प्रक्रियाएँ होती हैं। सामान्यतया लैंगिक जनन करने वाले जीव द्विगुणित (diploid) होते हैं। युग्मक निर्माण प्रक्रिया को युग्मकजनन (gametogenesis) कहते हैं। शुक्राणुओं के निर्माण को शुक्रजनन तथा अण्डणुओं के निर्माण को अण्डजनन कहते हैं। इनका निर्माण क्रमशः नर तथा मादा जनदों (gonads) में होता है। युग्मकों में गुणसूत्रों की संख्या आधी रह जाती है, अर्थात् युग्मक अगुणित (haploid) होते हैं। युग्मकजनन प्रक्रिया अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा होती है। अतः युग्मकजनन तथा अर्द्धसूत्री विभाजन क्रियाएँ अन्तरसम्बन्धित (अन्तर्बद्ध) होती हैं। निषेचन के फलस्वरूप नर तथा मादा अगुणित युग्मक संयुग्मन द्वारा द्विगुणित युग्माणु (diploid zygote) बनाता है। द्विगुणित युग्माणु से भ्रूणीय परिवर्धन द्वारा नए जीव का विकास होता है।

 

Question 11. प्रत्येक पुष्पीय पादप के भाग को पहचानिए तथा लिखिए कि वह अगुणित (n) है या द्विगुणित (2n)
1. अण्डाशय
2. परागकोश
3. अण्डा या डिम्ब
4. पराग
5. नर युग्मक
6. युग्मनज

पुष्प के मुख्य भाग (Diagram Labels):

  • Anther (परागकोश)
  • Petal (दल / पंखुड़ी)
  • Filament (पुंतंतु)
  • Stigma (वर्तिकाग्र)
  • Style (वर्तिका)
  • Ovary (अण्डाशय)
  • Sepal (बाह्यदल)
Answer:
पुष्पीय भाग –
1. अण्डाशय (Ovary) – द्विगुणित (2n)
2. परागकोश (Anther) – द्विगुणित (2n)
3. अण्डा या डिम्ब (Ova) – अगुणित (n)
4. परागकण (Pollen grain) – अगुणित (n)
5. नर युग्मक (Male gamete) – अगुणित (n)
6. युग्मनज (Zygote) – द्विगुणित (2n)
[युग्मनज (zygote) शुक्राणु तथा अण्ड के मिलने से बनी द्विगुणित संरचना (2n) होती है। यह नई पीढ़ी की पहली कोशिका होती है जो आगे चलकर भ्रूण का निर्माण करती है।]
In simple words: Plant parts can be either haploid (having one set of chromosomes, n) or diploid (having two sets of chromosomes, 2n). Reproductive cells like pollen and eggs are haploid, while parts like the ovary, anther, and the fertilized zygote are diploid.

🎯 Exam Tip: Remember that gametes (male and female reproductive cells) are always haploid (n), while the zygote formed by their fusion is always diploid (2n).

 

Question 12. बाह्य निषेचन की व्याख्या कीजिए। इसके नुकसान बताइए।
Answer: बाह्य निषेचन (External Fertilization) वह प्रक्रिया है जिसमें नर और मादा युग्मकों (शुक्राणु और अंडाणु) का संलयन जीव के शरीर के बाहर, बाहरी माध्यम (आमतौर पर जल) में होता है। यह प्रक्रिया अधिकांश जलीय जीवों जैसे मछलियों, मेंढकों और शैवालों में पाई जाती है। नर और मादा जीव अपने युग्मकों को एक ही समय पर पानी में छोड़ते हैं जहाँ उनका निषेचन होता है।
बाह्य निषेचन के नुकसान:
1. कम सुरक्षा: पानी में छोड़े गए अंडे और भ्रूण शिकारियों के लिए आसान शिकार होते हैं, जिससे उनकी जीवित रहने की दर बहुत कम हो जाती है।
2. पर्यावरणीय कारक: पानी के बहाव, तापमान में बदलाव और प्रतिकूल मौसम के कारण कई युग्मक नष्ट हो जाते हैं और निषेचन की संभावना कम हो जाती है।
3. अधिक युग्मकों की आवश्यकता: निषेचन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए जीवों को बहुत बड़ी संख्या में युग्मक उत्पन्न करने पड़ते हैं, जिसमें अत्यधिक ऊर्जा खर्च होती है।
In simple words: External fertilization happens outside the parent's body, usually in water. Its main disadvantage is that the eggs and young ones are unprotected and can easily be eaten by predators or washed away by water.

🎯 Exam Tip: Clearly define external fertilization first, give a common example like frogs or fish, and then list at least two distinct disadvantages with bullet points to score full marks.

बाह्य निषेचन (External Fertilization)

शुक्राणु (नर युग्मक) तथा अण्ड (मादा युग्मक) के संयुमन या संलयन को निषेचन कहते हैं। इसके फलस्वरूप द्विगुणित युग्माणु (diploid zygote) का निर्माण होता है। अधिकांश शैवालों, मछलियों में और उभयचर प्राणियों में शुक्राणु (नर युग्मक) तथा अण्ड (मादा युग्मक) का संलयन शरीर से बाहर जल में होता है, इसे बाह्य निषेचन (external fertilization) कहते हैं।

बाह्य निषेचन से हानियाँ (Disadvantages of External Fertilization)

  • 1. जीवधारियों को अत्यधिक संख्या में युग्मकों का निर्माण करना होता है जिससे निषेचन के अवसर बढ़ जाएँ अर्थात् इनमें युग्मक संलयन के अवसर कम होते हैं।
  • 2. संतति अत्यधिक संख्या में उत्पन्न होती हैं।
  • 3. संतति शिकारियों द्वारा शिकार होने की स्थिति से गुजरती है, इसके फलस्वरूप इनकी उत्तरजीविता जोखिमपूर्ण होती है अर्थात् सन्तानें कम संख्या में जीवित रह पाती हैं।

 

Question 13. जूस्पोर (अलैंगिक चल बीजाणु) तथा युग्मनज के बीच विभेद करें।
Answer: जूस्पोर (अलैंगिक चल बीजाणु) – यह नग्न, चल, कशाभिका युक्त संरचना है जो अलैंगिक जनन की इकाई है। इनका निर्माण जनक कोशिका के जीवद्रव्य से सूत्री विभाजन द्वारा होता है। इनके अग्र भाग पर स्थित कशाभिका जल में तैरने हेतु सहायक होती हैं। ये चलबीजाणु धानी में बनते हैं। उदाहरण – यूलोथ्रिक्स, क्लेमाइडोमोनास आदि।

युग्मनज (Zygote) – लैंगिक जनन के दौरान नर तथा मादा युग्मकों (gametes) के निषेचन से बनी रचना, युग्मनज कहलाती है। यह द्विगुणित (diploid = 2n) होता है तथा विकसित होकर भ्रूण अथवा लार्वा में परिवर्तित हो जाता है। लैंगिक जनन करने वाले जीवों का विकास युग्मनज से होता है। बाह्य निषेचन करने वाले जीवों में युग्मनज का निर्माण बाह्य माध्यम (जल) में होता है; जैसे – मेढ़क जबकि आन्तरिक निषेचन करने वाले जीवों में यह मादा के शरीर में विकसित होता है; जैसे – मनुष्य आदि। यह दोनों ही जनन प्रक्रियाओं के महत्वपूर्ण चरण हैं जो जीवन की निरंतरता सुनिश्चित करते हैं।
In simple words: जूस्पोर अलैंगिक जनन की एक तैरने वाली इकाई है जो खुद तैर सकती है, जबकि युग्मनज नर और मादा युग्मकों के मिलने से बनता है जो आगे चलकर नया जीव बनता है।

🎯 Exam Tip: अंतर स्पष्ट करते समय दोनों के मुख्य अंतर जैसे जनन का प्रकार (अलैंगिक बनाम लैंगिक) और गुणसूत्रों की संख्या (अगुणित बनाम द्विगुणित) को स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 14. युग्मकजनन एवं भ्रूणोद्भव के बीच अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: यह दोनों प्रक्रियाएं जीवों में पीढ़ी दर पीढ़ी आनुवंशिक लक्षणों के संचरण और विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

क्र० सं०युग्मकजनन (Gametogenesis)भ्रूणोद्भव (Embryogenesis)
1.नर तथा मादा जनदों (gonads) में युग्मकों (gametes) के बनने की प्रक्रिया को युग्मकजनन कहते हैं।युग्मनज या युग्माणु (zygote) से संतति के विकसित होने की क्रिया को भ्रूणोद्भव कहते हैं।
2.यह अर्द्धसूत्री विभाजन (meiosis) द्वारा होता है।यह सूत्री विभाजन (mitosis) द्वारा होता है।
3.युग्मकजनन दो प्रकार के होते हैं—
(i) शुक्रजनन (spermatogenesis)
(ii) अण्डजनन (oogenesis)
भ्रूणोद्भव के अन्तर्गत निम्नलिखित प्रक्रियाएँ होती हैं—
(i) युग्मकजनन (gametogenesis)
(ii) निषेचन (fertilization)
(iii) विदलन एवं भ्रूण निर्माण (segmentation and embryo formation)

In simple words: युग्मकजनन में शरीर के अंदर नर और मादा कोशिकाएं (युग्मक) बनती हैं। भ्रूणोद्भव में निषेचित अंडे से धीरे-धीरे पूरा नया जीव या बच्चा विकसित होता है।

🎯 Exam Tip: परीक्षा में अंतर वाले प्रश्नों को हमेशा सारणी (table) बनाकर ही प्रस्तुत करें, इससे पूरे अंक मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

 

Question 15. एक पुष्प में निषेचन-पश्च परिवर्तनों की व्याख्या कीजिए।
Answer: पुष्प में निषेचन-पश्च परिवर्तन (Post fertilization development in a flower) - पुष्पीय पौधों में दोहरा निषेचन तथा त्रिक संलयन (double fertilization and triple fusion) होता है। इसके फलस्वरूप भ्रूणकोष (embryo sac) में द्विगुणित युग्मनज (zygote) तथा त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक (primary endospermic nucleus) बनता है। इनसे क्रमशः भ्रूण (embryo) तथा भ्रूणपोष (endosperm) बनता है। भ्रूणपोष विकासशील भ्रूण को पोषण प्रदान करता है। यह पोषण भ्रूण के स्वस्थ विकास के लिए अत्यंत आवश्यक होता है। इसके साथ-साथ बीजाण्ड में निम्नलिखित परिवर्तन होते हैं जिसके फलस्वरूप बीजाण्ड से बीज तथा अण्डाशय से फलावरण (pericarp) का निर्माण होता है:
1. बीजाण्डवृन्त – बीजवृन्त बनाता है।
2. अध्यावरण – बीजावरण बनाता है।
3. अण्डद्वार – बीजद्वार बनाता है।
4. बीजाण्डकाय (nucellus) – प्रायः नष्ट हो जाता है, कभी-कभी भोजन संचित होने के कारण पेरिस्पर्म (perisperm) बनाता है।
5. भ्रूणकोष (embryosac):
• अण्ड कोशिका (egg cell) – भ्रूण (embryo) बनाती है।
• सहायक कोशिकाएँ (synergids) – नष्ट हो जाती हैं।
• प्रतिमुख कोशिकाएँ (antipodal cells) – नष्ट हो जाती हैं।
• ध्रुवीय केन्द्रक (polar nuclei) – भ्रूणपोष बनाता है।
6. अण्डाशय की भित्ति – फलभित्ति बनाती है। बीज में भ्रूण सुप्तावस्था में रहता है। बीज चारों ओर से बाह्यकवच तथा अन्त:कवच (testa & tegmen) से बने अध्यावरण से घिरा होता है। भ्रूण बीजपत्रों के मध्य स्थित होता है। फलभित्ति की संरचना के आधार पर फल सरस अथवा शुष्क होते हैं।
In simple words: निषेचन के बाद, फूल के अलग-अलग हिस्से बदलकर बीज और फल बन जाते हैं। जैसे, बीजाण्ड से बीज बनता है और अण्डाशय से फल का बाहरी हिस्सा बनता है।

🎯 Exam Tip: परीक्षा में निषेचन के बाद होने वाले सभी 6 मुख्य परिवर्तनों की सूची को बिंदुवार स्पष्ट रूप से लिखें ताकि पूरे अंक मिल सकें।

 

Question 16. एक द्विलिंगी पुष्प क्या है? अपने आस-पास से पाँच द्विलिंगी पुष्पों को एकत्र कीजिए और अपने शिक्षक की सहायता से इनके सामान्य (स्थानीय) एवं वैज्ञानिक नाम पता कीजिए।
Answer: द्विलिंगी पुष्प (Bisexual flower) – जब पुष्प में पुमंग (androecium) तथा जायांग (gynoecium) दोनों होते हैं तो पुष्प द्विलिंगी (bisexual) कहलाता है। ऐसे पुष्प स्व-परागण और पर-परागण दोनों के लिए अनुकूल होते हैं। सामान्यतया समीपवर्ती क्षेत्रों में पाए जाने वाले द्विलिंगी पुष्प निम्नलिखित हैं:
1. सरसों – ब्रेसिका कैम्पेस्ट्रिस (Brassica campestris)
2. मूली – रेफेनस सैटाइवस (Raphanus sativus)
3. मटर – पाइसम सटाइवम (Pisum sativum)
4. सेम – डॉलीकोस लबलब (Dolichos lablab)
5. अमलतास – केसिआ फिस्टुला (Cassia fistula)
6. गुड़हल – हिबिस्कस रोजा सिनेन्सिस (Hibiscus rosa sinensis)
In simple words: जिस फूल में नर (पुमंग) और मादा (जायांग) दोनों प्रजनन अंग होते हैं, उसे द्विलिंगी फूल कहते हैं। जैसे गुड़हल और सरसों के फूल।

🎯 Exam Tip: द्विलिंगी पुष्प की परिभाषा के साथ कम से कम 3-4 पौधों के वैज्ञानिक नाम (Scientific Names) को सही वर्तनी के साथ लिखना न भूलें।

 

Question 17. किसी भी कुकुरबिट पादप के कुछ पुष्पों की जाँच कीजिए और पुंकेसरी व स्त्रीकेसरी पुष्पों को पहचानने की कोशिश कीजिए। क्या आप अन्य एकलिंगी पौधों के नाम जानते हैं?
Answer: कुकुरबिट पादप पुष्प एकलिंगी होते हैं। नर पुष्प में जायांग अनुपस्थित होता है। पुष्प में पाँच पुंकेसर होते हैं। ये प्रायः 2 + 2 + 1 के रूप में संयुक्त रहते हैं। इनके परागकोश व्यावृत (twisted) होते हैं। इसके अतिरिक्त अन्य एकलिंगी पौधों के उदाहरण पपीता (Papaya), तरबूज (Watermelon) और मक्का (Maize) हैं।
In simple words: कुकुरबिट (जैसे कद्दू या लौकी) के फूल एकलिंगी होते हैं, यानी उनमें या तो केवल नर भाग होता है या केवल मादा भाग। पपीता और तरबूज भी ऐसे ही पौधों के उदाहरण हैं।

🎯 Exam Tip: एकलिंगी पौधों के उदाहरणों को स्पष्ट रूप से लिखें, क्योंकि परीक्षा में इनके उदाहरण अक्सर बहुविकल्पीय प्रश्नों में पूछे जाते हैं।

मादा पुष्प में पुमंग (androecium) अनुपस्थित होता है। जायांग त्रिअण्डपी, युक्ताण्डपी, एककोष्ठीय तथा अधोवर्ती अण्डाशय से बना होता है। इसमें भित्तिलग्न बीजाण्डन्यास होता है। अण्डाशय से विकसित सरल सरस फल पेपो (pepo) कहलाता है।

अन्य एकलिंगी पौधे:

  • 1. मक्का – जिआ मेज (Zea mays)
  • 2. खजूर – फीनिक्स सिल्वेस्ट्रिस (Phoenix sylvestris)
  • 3. पपीता – कैरिका पपाया (Carica papaya)
  • 4. नारियल – कोकोस न्यूसीफेरा (Cocos nucifera)

 

Question 18. अण्डप्रजक प्राणियों की सन्तानों का उत्तरजीवन (सरवाइवल) सजीवप्रजक प्राणियों की तुलना में अधिक जोखिमयुक्त क्यों होता है? व्याख्या कीजिए।
Answer: अण्डप्रजक (oviparous) प्राणियों में निषेचित अण्डे (युग्मनज) का विकास मादा प्राणी के शरीर से बाहर होता है। मादा कैल्सियमयुक्त कवच से ढके अण्डों को सुरक्षित स्थान पर निक्षेपित करती है। अण्डों में भ्रूणीय विकास के फलस्वरूप शिशु का विकास होता है। शिशु निश्चित अवधि के पश्चात अण्डे के स्फुटन के फलस्वरूप मुक्त हो जाता है। अण्डप्रजक में बाह्य परिवर्द्धन (external development) होता है। यह पर्यावरणीय प्रतिकूल परिस्थितियों तथा शिकारी प्राणियों से प्रभावित होता है। इसके फलस्वरूप इन प्राणियों की उत्तरजीविता अधिक जोखिमयुक्त होती है। अण्डप्रजक प्राणियों को विकास के लिए कम समय मिलता है। अतः इन जीवों में आन्तरिक परिपक्वता सजीवप्रजक की तुलना में कम होती है। जैसे – मत्स्य, उभयचर, सरीसृप तथा पक्षी वर्ग के प्राणी अण्डप्रजक होते हैं।

सजीवप्रजक (जरायुज – viviparous) में निषेचित अण्डे (युग्मनज) का परिवर्द्धन मादा प्राणी के शरीर में होता है। इसे आन्तरिक परिवर्द्धन (internal development) कहते हैं। शिशु का विकास पूरा होने के पश्चात् प्रसव द्वारा इनका जन्म होता है, शिशु का विकास आन्तरिक होने के कारण और परिवर्द्धन में अधिक समय लगने के कारण इनकी उत्तरजीविता अपेक्षाकृत कम जोखिमपूर्ण होती है। आन्तरिक परिवर्द्धन होने के कारण ये बाह्य वातावरण तथा बाह्य परभक्षी जीवों से सुरक्षित रहते हैं। यही कारण है कि सजीवप्रजक की उत्तरजीविता अण्डप्रजक की अपेक्षा अधिक होती है।
In simple words: अण्डप्रजक जीव अंडे देते हैं जो बाहरी वातावरण और शिकारियों के खतरों के प्रति असुरक्षित होते हैं। इसके विपरीत, सजीवप्रजक जीव अपने बच्चों का विकास शरीर के भीतर सुरक्षित रूप से करते हैं, जिससे उनके जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है।

🎯 Exam Tip: परीक्षा में पूरे अंक पाने के लिए बाह्य परिवर्द्धन और आन्तरिक परिवर्द्धन के बीच के मुख्य अंतरों को स्पष्ट रूप से लिखें और दोनों के उदाहरण भी दें।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. पौधों के निम्नलिखित अंगों में कौन-सा कायिक प्रजनन के लिए सर्वाधिक अनुकूल है?
(a) जड़
(b) तना
(c) पत्ती
(d) पत्र-प्रकलिका
Answer: (b) तना
In simple words: पौधों में तना कायिक जनन के लिए सबसे उपयुक्त अंग है क्योंकि इसमें कलिकाएँ होती हैं जो आसानी से नए पौधे को जन्म दे सकती हैं।

🎯 Exam Tip: कायिक प्रवर्धन के लिए तने की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है, इसलिए इस विकल्प को हमेशा प्राथमिकता दें।

 

Question 2. शकरकन्द एवं डहेलिया में कायिक जनन होता है
(a) पत्तियों द्वारा
(b) पुष्पों द्वारा
(c) जड़ों द्वारा
(d) तने द्वारा
Answer: (c) जड़ों द्वारा
In simple words: शकरकंद और डहेलिया जैसे पौधे अपनी जड़ों के माध्यम से नए पौधों को जन्म देते हैं।

🎯 Exam Tip: शकरकंद और आलू के बीच का अंतर याद रखें; शकरकंद में जड़ों द्वारा और आलू में भूमिगत तने द्वारा कायिक जनन होता है।

p>Question 3. निम्न में कृत्रिम कायिक प्रवर्धन सम्भव है
(a) आलू में
(b) अजूबा में
(c) आम में
(d) प्याज में
Answer: (c) आम में
In simple words: Artificial vegetative propagation like grafting is commonly used in mango trees to grow new plants from branches.

🎯 Exam Tip: Remember that mango is propagated artificially using grafting, whereas potato and onion propagate naturally through tubers and bulbs.

 

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. जनन किसे कहते हैं?
Answer: वह क्रिया जिसमें जीव अपने समान जीव को उत्पन्न करता है, जनन कहलाती है। यह पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
In simple words: Reproduction is the biological process by which living organisms produce new individuals of their own kind. This helps in continuing their generation on Earth.

🎯 Exam Tip: Always define reproduction clearly and mention its importance for the survival of a species to score full marks.

 

Question 2. जनन कितने प्रकार का होता है?
Answer: जनन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:
1. लैंगिक जनन तथा
2. अलैंगिक जनन। ये दोनों विधियाँ जीवों में अपनी प्रजाति की आबादी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
In simple words: Living organisms reproduce mainly in two ways: sexual reproduction (which requires two parents) and asexual reproduction (which requires only one parent).

🎯 Exam Tip: List both types clearly using numbers, as examiners look for these two specific terms to award full marks.

 

Question 3. मुकुलन पर टिप्पणी लिखिए। (2017)
Answer: मुकुलन (Budding) – इस प्रकार का विभाजन यीस्ट (Yeast) एवं कुछ जीवाणुओं में पाया जाता है। इस प्रक्रिया में कोशिका में बाह्य वृद्धि होकर एक या एक-से-अधिक छोटी रचनाएँ बन जाती हैं तथा केन्द्रक सूत्री-विभाजन (mitosis) द्वारा (Lindgreen, 1949 के अनुसार) विभाजित होकर दो भागों में बँट जाता है। कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार केन्द्रक का यह विभाजन असूत्री विभाजन या अमाइटोसिस (amitosis) प्रकार का होता है। प्रत्येक मुकुल (bud) मातृ कोशिका से अलग होकर यीस्ट की नई कोशिका में परिवर्तित हो जाती है। इस क्रिया को मुकुलन (budding) कहते हैं। जब ये उर्द्ध रचनाएँ (outgrowths) अपनी मातृ-कोशिका से अलग नहीं होती तो श्रृंखला बनाती हैं, जिसे स्युडोमाइसीलीयम कहते हैं। परन्तु अन्त में ये अलग हो जाती हैं। यह अलैंगिक जनन की एक बहुत ही सरल और तीव्र विधि है।
In simple words: Budding is a type of asexual reproduction where a small bulb-like outgrowth, called a bud, forms on the parent body. This bud eventually grows, splits its nucleus, and separates to become a new independent organism.

🎯 Exam Tip: Mentioning 'Yeast' as an example and explaining the formation of 'pseudomycelium' will help you get maximum marks in this short note.

 

Question 4. कृत्रिम कायिक प्रवर्धन की दो विधियों के नाम लिखिए।
Answer: कृत्रिम कायिक प्रवर्धन की दो प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं:
1. कर्तन (Cutting) तथा
2. रोपण (Grafting)। इन कृत्रिम विधियों द्वारा हम कम समय में बेहतर गुणवत्ता वाले पौधे आसानी से उगा सकते हैं।
In simple words: Artificial vegetative propagation means growing new plants from parts of an old plant using human-made methods. Cutting and grafting are two very common ways to do this.

🎯 Exam Tip: Clearly state the names of the methods like cutting and grafting. Writing simple examples alongside them makes your answer stronger.

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. पौधों में जनन की कितनी विधियाँ पायी जाती हैं? प्रत्येक का संक्षेप में वर्णन कीजिए। (2017)
Answer: पौधों में जनन की विधियाँ:
पौधों में मुख्य रूप से जनन की निम्नलिखित दो विधियाँ पायी जाती हैं –
1. अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) – यह जनन का एक सामान्य प्रकार है जिसमें केवल एक ही जीव या जनक (Parents) भाग लेता है। इस विधि में वयस्क बनने के बाद जीव अपनी हूबहू प्रतिलिपियों (identical copies) के रूप में सन्ततियाँ उत्पन्न करता है। अतः जनक तथा सन्ततियों के बीच आनुवंशिक पदार्थ एवं लक्षणों में कोई अन्तर नहीं होता है। इसीलिए अलैंगिक जनन के फलस्वरूप उत्पन्न सन्ततियों को क्लोन (clone) कहते हैं। ऐसा जनन अपेक्षाकृत तीव्र दर से होता है। इसके लिए शरीर में कोई विशिष्ट ऊतक या अंग नहीं होते। यह विधि पौधों में तेजी से अपनी प्रजाति का विस्तार करने में बहुत सहायक होती है।
2. लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) – लैंगिक जनन की प्रक्रिया जटिल होती है। इसके लिए शरीर में विशेष प्रकार के जननांग (reproductive organs) होते हैं। शरीर की सामान्य दैहिक कोशिकाओं (somatic cells) से भिन्न प्रकार की दो अगुणित (haploid = n) कोशिकाओं का संयुगमन लैंगिक जनन की आधारभूत प्रक्रिया होती है। इन अगुणित कोशिकाओं को लैंगिक कोशिकाएँ (sex cells) या युग्मक (gamets) कहते हैं। शरीर की दैहिक कोशिकाएँ द्विगुणित (diploid) होती हैं। लैंगिक कोशिकाएँ प्रमुख जननांगों अर्थात् जनदों (gonads) की जनन कोशिकाओं (germ cells) में विशेष प्रकार के अर्धसूत्री या मीयोटिक विभाजन (reductional or meiotic division) से बनती हैं। इनके बनने की इस प्रक्रिया को युग्मकजनन (gametogenesis) कहते हैं।
संयुगमन में भाग लेने वाली दो लैंगिक कोशिकाएँ भिन्न प्रकार की होती हैं – एक नर युग्मक कोशिका तथा दूसरी मादा युग्मक कोशिका। इनके संयुगमन से बनी द्विगुणित कोशिका को युग्मनज अर्थात् जाइगोट (zygote) कहते हैं। इसी से नई सन्तान का प्रारम्भ होता है। जनन कोशिकाओं के अर्धसूत्री विभाजन द्वारा बनी युग्मक कोशिकाओं में जनन कोशिकाओं के जोड़ीदार अर्थात् समजात गुणसूत्रों (homologous chromosomes) का बँटवारा अनियमित एवं संयोगिक (random) होता है। फिर युग्मनजों (zygotes) के बनने में नर व मादा युग्मक का संयुगमन भी संयोगिक होता है। इसके कारण युग्मनजों के जीन प्रारूप (genotypes) जनन कोशिकाओं के जीन प्रारूपों से कुछ भिन्न होते हैं। इसी कारण लैंगिक जनन के फलस्वरूप बनी सन्तति माता-पिता से थोड़ी भिन्न दिखाई देती है।
In simple words: पौधों में जनन दो तरह से होता है: अलैंगिक जनन (जिसमें केवल एक जनक की जरूरत होती है और संतान बिल्कुल माता-पिता जैसी होती है) और लैंगिक जनन (जिसमें नर और मादा युग्मकों के मिलने से नई और थोड़ी भिन्न संतान बनती है)।

🎯 Exam Tip: परीक्षा में अलैंगिक और लैंगिक जनन के बीच मुख्य अंतरों को स्पष्ट करने के लिए 'क्लोन' और 'अर्धसूत्री विभाजन' जैसे महत्वपूर्ण शब्दों का उपयोग अवश्य करें।

 

Question 2. टिप्पणी लिखिए-ब्रायोफाइट्स में वर्षी प्रजनन। (2015)
Answer: ब्रायोफाइट्स के युग्मकोद्भिद में अनेक प्रकार का वर्षी (कायिक) प्रजनन होता है। उदाहरणार्थ-विखंडन, जेमा, कन्द, पुंतन्तु, पत्र-प्रकलिका द्वारा।
विखंडन विधि में बहुकोशिकीय जनक पौधे का शरीर दो या दो से अधिक टुकड़ों में विखंडित हो जाता है तथा प्रत्येक टुकड़ा पुनरुद्भवन द्वारा एक नई वयस्क सन्तति में विकसित हो जाता है। कभी-कभी पौधे की पत्ती व तने के अग्र भाग पर बहुकोशिकीय एवं हरे रंग की रचनाएँ निकलती हैं, जिन्हें जेम्यूल कहते हैं। ये अलग होकर अंकुरण द्वारा नये पौधे को जन्म देती हैं। पौधों के कन्द तथा पुंतन्तु भी नये पौधों को जन्म देते हैं। ब्रायोफाइट्स में पत्र-प्रकलिकाओं द्वारा भी वर्दी प्रजनन होता है। वे कलिकाएँ जिनमें खाद्य-पदार्थ संचित रहता है, पत्र-प्रकलिकाएँ कहलाती हैं। ये कलिकाएँ मातृ पौधे से टूटकर भूमि पर गिर जाती हैं तथा अनुकूल मौसम में इनमें अपस्थानिक जड़ें निकल आती हैं जो भूमि से जल एवं खनिज लवणों का अवशोषण करती हैं तथा प्रकलिकाएँ वृद्धि करके नवीन पौधे बनाती हैं। यह प्रक्रिया ब्रायोफाइट्स को प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवित रहने और अपनी आबादी बढ़ाने में मदद करती है।
In simple words: ब्रायोफाइट्स पौधे अपने शरीर के अंगों जैसे टुकड़ों (विखंडन), विशेष कलियों (जेमा या जेम्यूल), कन्द और पत्र-प्रकलिकाओं के टूटने और मिट्टी में गिरने से नए पौधे बना लेते हैं।

🎯 Exam Tip: ब्रायोफाइट्स में वर्षी प्रजनन के विभिन्न प्रकारों (जैसे विखंडन, जेमा, पत्र-प्रकलिका) को उदाहरण सहित लिखने पर पूरे अंक मिलते हैं।

 

Question 3. सूक्ष्म प्रवर्धन (माइक्रो प्रोपेगेशन) पर एक टिप्पणी लिखिए। (2015)
या
ऊतक संवर्धन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2018)

Answer: सूक्ष्म प्रवर्धन (Micropropagation) या ऊतक संवर्धन (Tissue Culture) आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी की एक अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीक है। इस विधि में पौधे के किसी छोटे से हिस्से (जैसे कोशिका, ऊतक या अंग) को कृत्रिम पोषक माध्यम में नियंत्रित और रोगाणुमुक्त परिस्थितियों में उगाया जाता है। यह ऊतक विभाजित होकर कोशिकाओं का एक समूह बनाता है जिसे कैलस (callus) कहते हैं। कैलस को विभिन्न हार्मोनों वाले माध्यम में स्थानांतरित करके नए छोटे पौधे (plantlets) विकसित किए जाते हैं, जिन्हें बाद में मिट्टी में रोपित कर दिया जाता है। इस तकनीक द्वारा बहुत कम समय और सीमित स्थान में एक ही जनक से हजारों की संख्या में रोगमुक्त और आनुवंशिक रूप से समान पौधे तैयार किए जा सकते हैं।
In simple words: सूक्ष्म प्रवर्धन या ऊतक संवर्धन एक ऐसी आधुनिक तकनीक है जिसमें पौधे के एक छोटे से हिस्से या कोशिका को प्रयोगशाला में परखनेली के अंदर विशेष पोषक घोल में रखकर बहुत सारे नए पौधे उगाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर में 'कैलस' (Callus), 'कृत्रिम पोषक माध्यम' और 'रोगाणुमुक्त परिस्थिति' जैसे तकनीकी शब्दों को रेखांकित करना न भूलें।

यह कायिक प्रवर्धन की सबसे आधुनिक विधि है। इस विधि में मातृ पौधे के थोड़े से ऊतक से हजारों की संख्या में पादपों (plants) को प्राप्त किया जा सकता है। यह विधि ऊतक तथा कोशिका संवर्धन तकनीक (tissue and cell culture technique) पर आधारित है.

इस विधि में जिस पौधे से प्रवर्धन करना होता है, उसके किसी भाग से ऊतक (tissue) का छोटा भाग अलग कर लिया जाता है। अब इस ऊतक की अजर्म परिस्थितियों (aseptic conditions) में किसी उचित संवर्धन माध्यम (culture medium) में वृद्धि कराते हैं। यह ऊतक पोषक पदार्थों का अवशोषण करके वृद्धि करता है जिससे कोशिकाओं के गुच्छे बन जाते हैं जिन्हें कैलस (callus) कहा जाता है। इस कैलस को लम्बे समय तक गुणन के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर कैलस का एक छोटा टुकड़ा दूसरे ऐसे माध्यम पर स्थानान्तरित कर दिया जाता है जहाँ यह वृद्धि करके नन्हे पौधे के रूप में विकसित होता है। इस पादप को निकालकर मृदा में लगा दिया जाता है। इस विधि में एक बार ऊतक संवर्धन करके लम्बे समय तक पौधे प्राप्त किए जाते हैं और ये अधिक संख्या में प्राप्त होते हैं। यह विधि आर्किड्स (Orchids), कार्नेशन्स (Carnations), गुलदाउदी (Chrysanthemum) एवं सतावर (Asparagus) में अधिक सफल है। इस विधि से मशरूमों (Mushrooms) का भी संवर्धन किया जाता है।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. कायिक जनन किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार का होता है? प्राकृतिक कायिक प्रवर्धन का विस्तृत वर्णन कीजिए। (2014, 15, 16, 17)
या
कायिक प्रवर्धन किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार का होता है? (2014, 16)
या
प्राकृतिक कायिक प्रवर्धन पर टिप्पणी लिखिए। (2015)
या
पौधों में कायिक जनन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2018)

Answer:
पौधों में कायिक जनन
कायिक जनन प्रजनन की अथवा नए पौधे के पुनर्निर्माण (regeneration) की क्रिया है। इस क्रिया में नया पौधा मातृ पौधे के किसी भी कायिक भाग से बनता है। इसके सभी लक्षण व गुण मातृ पौधे के समान ही होते हैं। कायिक जनन को कायिक प्रवर्धन (vegetative propagation) के नाम से भी जाना जाता है। यह प्रक्रिया बागवानी और कृषि में बहुत उपयोगी होती है क्योंकि इससे पौधों की मूल विशेषताएं सुरक्षित रहती हैं।

मातृ पौधे के कायिक अंगों द्वारा नये पादपों का बनना कायिक जनन या कायिक प्रवर्धन कहलाता है। यह क्रिया निम्न पादपों (lower plants) में सामान्य रूप से देखने को मिलती है जबकि उच्च श्रेणी के पौधों (higher plants) में यह केवल निम्न दो प्रकार से होती है –
1. प्राकृतिक कायिक प्रवर्धन (Natural vegetative propagation)
2. कृत्रिम कायिक प्रवर्धन (Artificial vegetative propagation)

प्राकृतिक कायिक प्रवर्धन: यह क्रिया प्रकृति में मिलती है। इस क्रिया के अन्तर्गत पादप का कोई अंग अथवा रूपान्तरित भाग मातृ पौधे से अलग होकर नया पौधा बनाता है। यह क्रिया अनुकूल परिस्थितियों में होती है। पौधे का कायिक भाग; जैसे-जड़, तना व पत्ती इस क्रिया में भाग लेते हैं। ये भाग इस प्रकार से रूपान्तरित होते हैं कि वे अंकुरित होकर नया पौधा बना सकें। विभिन्न प्राकृतिक कायिक प्रवर्धन की विधियाँ अग्रवत् हैं।
In simple words: Vegetative propagation is a way of growing new plants from parts of an old plant, like its roots, stems, or leaves, without using seeds. The new plant looks exactly like its parent plant.

🎯 Exam Tip: Clearly define both natural and artificial vegetative propagation and list the plant parts (root, stem, leaf) involved to score full marks.

(A) भूमिगत तना (Underground Stem)

भूमिगत तना तने का मुख्य भाग अथवा कुछ भाग होता है जो भूमि के अंदर (भूमिगत) वृद्धि करता है। यह मुख्य रूप से भोजन संग्रह करने वाले अंग के रूप में रूपांतरित हो जाता है। परन्तु इस पर कक्षस्थ कलिकाएँ मिलती हैं जिनसे नया पौधा विकसित होता है अथवा शाखाएँ निकलती हैं जो मृदा से बाहर आकर नया पौधा बना लेती हैं।

 

Question 1. कन्द (Tuber) किसे कहते हैं? इसकी संरचना और उदाहरण स्पष्ट कीजिए।
Answer: कन्द (Tuber) में तने की वृद्धि असमान (diffuse) होती है; जैसे – आलू (potato)। इस पर आँख (eye) मिलती है, जिसमें कक्षस्थ कलिका (axillary bud) शल्क पत्रों से ढकी रहती है। यह कक्षस्थ कलिका अनुकूल समय में अंकुरित होकर नया पौधा बना लेती है। इसमें निश्चित पर्व सन्धियाँ नहीं मिलती हैं।
In simple words: आलू कन्द का सबसे अच्छा उदाहरण है। इसकी 'आँख' वास्तव में एक कली होती है जिससे अनुकूल मौसम में नया पौधा उगता है।

🎯 Exam Tip: Remember that tubers like potato do not have distinct nodes and internodes, and the "eyes" represent the nodes containing axillary buds.

 

चित्र में दर्शाए गए भूमिगत तने के विभिन्न प्रकार और उनके भाग:

  • (A) कन्द (Tuber): आँख (Eye), शल्क पत्र (Scale leaf), कली (Bud)
  • (B) प्रकन्द (Rhizome): पर्वसन्धि (Node), शल्क पत्र (Scale leaf), कली (Bud)
  • (C) घनकन्द (Corm): प्ररोह (Shoots), जड़ें (Roots)
  • (D) घनकन्द (जिमीकन्द): पुत्री घनकन्द (Daughter corm), मुख्य घनकन्द (Corm)
  • (E) शल्ककन्द (Bulb): शल्ककन्द (Crocus/Allium)

 

Question 2. प्रकन्द (Rhizome) की विशेषताएँ और उदाहरण लिखिए।
Answer: प्रकन्द (Rhizome) भूमिगत तना है जो मृदा के भीतर समानान्तर अथवा क्षैतिज (horizontal) वृद्धि करता है। इस पर पर्व (internode) व पर्वसन्धियाँ (nodes) मिलती हैं। इसके पर्व संघनित (condensed) होते हैं। पर्वसन्धियाँ शल्कपत्रों से ढकी रहती हैं जिनमें कक्षस्थ कलिका मिलती है। इन कक्षस्थ कलिकाओं से नए पौधे निकलते हैं; जैसे—अदरक (ginger), हल्दी (Curcuma) आदि।
In simple words: प्रकन्द जमीन के अंदर आड़ा (horizontal) बढ़ता है। अदरक और हल्दी इसके उदाहरण हैं, जिन पर साफ गांठे (nodes) दिखाई देती हैं।

🎯 Exam Tip: Key identifiers for rhizomes are horizontal growth under the soil and distinct nodes covered with scale leaves.

 

Question 3. घनकन्द (Corm) किसे कहते हैं? इसके उदाहरण दीजिए।
Answer: घनकन्द (Corm) वह भूमिगत तना है जो मृदा में ऊर्ध्व (vertical) वृद्धि करता है। इसमें पर्वसन्धियों (nodes) पर शल्कपत्रों से कलिकाएँ ढकी रहती हैं जिनसे नया पौधा बनता है; जैसे – अरबी (Colocasia), केसर (Crocus), जिमीकन्द (Amorphophallus) आदि।
In simple words: घनकन्द जमीन के अंदर सीधे ऊपर की ओर बढ़ता है। अरबी और केसर इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

🎯 Exam Tip: Differentiate corm from rhizome by remembering that corms grow vertically (ऊर्ध्व) while rhizomes grow horizontally (क्षैतिज).

 

Question 4. शल्ककन्द (Bulb) की संरचना और उदाहरण स्पष्ट कीजिए।
Answer: शल्ककन्द (Bulb) प्ररोह का वह रूपान्तरण है जहाँ तना छोटा (reduced) होता है तथा इस संघनित तने के चारों ओर रसीले गूदेदार शल्क पत्र (fleshy scale leaves) मिलते हैं। शल्क पत्रों के कक्ष में कक्षस्थ कलिकाएँ होती हैं जो नये पौधे को जन्म देती हैं; जैसे – प्याज (Allium cepa), ट्यूलिप (Tulip), रजनीगंधा (Narcissus) आदि।
In simple words: प्याज एक शल्ककन्द है, जिसमें तना बहुत छोटा होता है और हम जो खाते हैं वे उसकी रसीली पत्तियां (शल्क पत्र) होती हैं।

🎯 Exam Tip: In bulbs, the stem is highly reduced (disc-like) and the food is stored in fleshy scale leaves.

 

(B) अर्धवायवीय तना (Sub-aerial Stem)

यह तना भूमि के समानान्तर क्षैतिज वृद्धि करता है। प्रत्येक पर्वसन्धि (node) से जड़े तथा प्ररोह (शाखा) निकलते हैं। कभी-कभी पर्वसन्धि का कुछ भाग मृदा में अथवा जल में मिलता है।

 

Question 5. ऊपरी भूस्तारी (Runner) को उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: ऊपरी भूस्तारी (Runner) अर्धवायवीय तने का एक प्रकार है। यह तना विसर्गी (creeping) होता है तथा मृदा के बाहर की ओर क्षैतिज रूप से मिलता है। इसकी प्रत्येक पर्वसन्धि (node) से जड़े फूटती हैं तथा प्ररोह (शाखा) निकलता है जो विपरीत दिशा में वायु में वृद्धि करता है।
In simple words: ऊपरी भूस्तारी (रनर) जमीन की सतह पर रेंगते हुए बढ़ता है और हर गांठ से नई जड़ें और पत्तियां बनाता है।

🎯 Exam Tip: Remember that runners grow horizontally on the soil surface and help the plant spread rapidly through vegetative reproduction.

से निकलती प्रत्येक शाखा एक नया पौधा बना लेती है; जैसे—दूब घास (Cyanodon), खट्टी बूटी (Oxalis), सेन्टेला (Centella) आदि ।

 

(ii) भूस्तारी (Stolon) – इनमें पर्वसन्धियों से जड़ें एवं वायवीय भाग निकलते हैं। भूस्तारी के टूटने पर प्रत्येक वायवीय शाखा स्वतन्त्र पौधा बन जाती है; उदाहरण–अरवी, केला आदि ।

 

चित्र – अर्धवायवीय तने

  • (A) Runner
  • (B) Offset
  • (C) Sucker
  • (D) Stolon

 

(iii) भूस्तारिका (Offset) – जलोद्भिद होने के कारण इनकी पर्वसन्धियाँ जल निमग्न होती हैं। प्रत्येक पर्वसन्धि से पत्तियों का एक समूह (tuft) निकलता है, जिसमें नीचे जड़ों का गुच्छा होता है जो मातृ पादप से अलग होकर नया पादप बनाता है; जैसे–समुद्रसोख (Water hyacinth), पिस्टिया (Pistia) आदि ।

 

(iv) अन्तःभूस्तारी (Sucker) – मुख्य तना (पर्व) मृदा के भीतर क्षैतिज रूप (horizontal) में बढ़ता है। शाखाएँ प्रत्येक पर्वसन्धि से मृदा के बाहर निकल आती हैं; जैसे-पोदीना (mint)

 

(C) मूल (Root)

कुछ पौधों के मूल (जड़) कायिक प्रवर्धन करते हैं; जैसे – शकरकन्द (Ipomoea batatas), सतावर, डेहलिया (Dahelia), याम (Dioscored) आदि में अपस्थानिक कलिकाएँ (adventitious buds) निकलती हैं जो नया पौधा बना लेती हैं। कुछ काष्ठीय पौधों की जड़ों; जैसे-मुराया (Muraya), एल्बीजिया (Albuzzia), शीशम (Dalbergia) आदि से भी प्ररोह (shoot) निकलते हैं। जिनकी वृद्धि नए पौधे के रूप में होती है।

चित्र-मूल द्वारा कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation by Roots)

  • (A) शीशम (New plant, Young plant, Reproductive root)
  • (B) शकरकन्द (Root tuber, Adventitious buds)

 

(D) पत्ती (Leaf)

पत्तियों द्वारा कायिक प्रवर्धन सामान्यतः कम ही मिलता है। कुछ पौधों; जैसे–ब्रायोफिल्लम (Bryophyllum) तथा केलेन्चो (Kalanchoe) में पत्ती के किनारों (leaf margins) पर पत्र कलिकाएँ बनती हैं जिनसे छोटे-छोटे पौधे विकसित होते हैं। बिगोनिया (Begonia) अथवा एलिफेन्ट इअर प्लान्ट में पत्र कलिकाएँ पर्णवृन्त तथा शिराओं आदि पर व पूर्ण सतह पर निकलती हैं।

 

चित्र-पत्तियों द्वारा कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation by Leaves)

  • (A) ब्रायोफिल्लम (Bryophyllum) - New plant, Leaf
  • (B) केलेन्चो (Kalanchoe) - Foliar bud
  • (C) बिगोनिया (Begonia)

 

(E) बुलबिल (Bulbil)

ये प्रकलिकाएँ कायिक प्रवर्धन करने वाले जनन अंग हैं। ग्लोबा बल्बीफेरा (Globba bulbifera) में पुष्पक्रम के निचले भाग के कुछ पुष्प बुलबिल अथवा प्रकलिकाएँ बनाते हैं जो रूपान्तरित बहुकोशिकी संरचनाएँ हैं। प्याज (Allium cepa), अमेरिकन एगेव (Agave) आदि में भी प्रकलिकाएँ मिलती हैं जो बहुत-से पुष्पों के परिवर्तन से बनती हैं। प्रकलिकाएँ मातृ पौधे से अलग होकर नए पौधे के रूप में विकसित होती हैं।

डायोस्कोरिया बल्बीफेरा (Dioscorea bulbifera) की जंगली प्रजाति तथा लिलियम बल्बीफेरम (Lilium bulbiferum) आदि में प्रकलिका (bulbil) पत्ती के अक्ष से निकलती है। खट्टी बूटी (Oxalis) में प्रकलिकाएँ कन्दिल मूल (tuberous root) के फूले हुए भाग से निकलती हैं। ये सभी प्रकलिकाएँ मातृ पादप से अलग होकर नए पादप में विकसित होती हैं।

 

चित्र-बुलबिल (Vegetative Propagation by Bulbils)

  • (A) ग्लोबा बल्बीफेरा (Globba bulbifera) - Bulbil
  • (B) एगेव (Agave)
  • (C) डायोस्कोरिया बल्बीफेरा (Dioscorea bulbifera) - Leaf, Stem, Bulbil
  • (D) ऑक्सेलिस (Oxalis) - Bulbils, Fleshy root
  • (E) अनन्नास (Pineapple) - Fruit, Stem

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Where can I find the latest UP Board Solutions Class 12 Biology Chapter 1 जीवों में प्रजनन for the 2026 27 session?

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Are the Biology UP Board solutions for Class 12 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 12 Biology Chapter 1 जीवों में प्रजनन as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Biology concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 12 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 12 Biology Chapter 1 जीवों में प्रजनन will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 12 Biology Chapter 1 जीवों में प्रजनन in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Biology. You can access UP Board Solutions Class 12 Biology Chapter 1 जीवों में प्रजनन in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Biology UP Board solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 12 Biology Chapter 1 जीवों में प्रजनन in printable PDF format for offline study on any device.