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Detailed Chapter 9 ठोस पदार्थों के यांत्रिक गुण UP Board Solutions for Class 11 Physics
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Class 11 Physics Chapter 9 ठोस पदार्थों के यांत्रिक गुण UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 11 Physics Chapter 9 Mechanical Properties Of Solids (ठोसों के यान्त्रिक गुण)
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
Question 1. 4.7 m लम्बे व 3.0 x 10-5 m² अनुप्रस्थ काट के स्टील के तार तथा 3.5 m लम्बे व 40 x 10-5m² अनुप्रस्थ काट के ताँबे के तार पर दिए गए समान परिमाण के भारों को लटकाने पर उनकी लम्बाइयों में समान वृद्धि होती है। स्टील तथा ताँबे के यंग-प्रत्यास्थता गुणांकों में क्या अनुपात है?
Answer: हल- यंग-प्रत्यास्थता गुणांक यहाँ दोनों तारों के लिए लटकाया गया भार \(F = Mg\) तथा लम्बाई में वृद्धि समान है, अतः \(Y \propto (L/A)\)
In simple words: इस प्रश्न में, हमें स्टील और ताँबे के तारों के यंग-प्रत्यास्थता गुणांकों का अनुपात ज्ञात करना है, जबकि उनके लिए भार और लम्बाई में वृद्धि समान दी गई है। यंग-प्रत्यास्थता गुणांक (Y), तार की लम्बाई (L) के समानुपाती और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
🎯 Exam Tip: यंग-प्रत्यास्थता गुणांक से संबंधित प्रश्नों में, दिए गए मापदंडों जैसे लम्बाई, क्षेत्रफल, और बल को ध्यान से पहचानें। समान वृद्धि या समान बल जैसी शर्तों का उपयोग करके अनुपातों की गणना करें।
Question 2. चित्र-9.1 में किसी दिए गए पदार्थ के लिए प्रतिबल-विकृति वक्र दर्शाया गया है। इस पदार्थ के लिए (a) यंग-प्रत्यास्थता गुणांक, तथा (b) सन्निकट पराभव सामर्थ्य क्या है?
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में एक प्रतिबल-विकृति वक्र दर्शाया गया है जो एक पदार्थ के यांत्रिक व्यवहार को प्रदर्शित करता है। वक्र में बिन्दु A सरल रेखीय भाग में है और बिन्दु B पराभव बिन्दु को दर्शाता है, जो पदार्थ की प्रत्यास्थ सीमा को इंगित करते हैं।
Answer: हल- (a) ग्राफ के सरल रेखीय भाग में बिन्दु A के संगत अनुदैर्ध्य प्रतिबल = \(150 \times 10^6\) न्यूटन/मी² तथा अनुदैर्ध्य विकृति = \(0.002\) यंग-प्रत्यास्थता गुणांक = \(\frac{\text{अनुदैर्ध्य प्रतिबल}}{\text{अनुदैर्ध्य विकृति}} = \frac{150 \times 10^6}{0.002} = 75 \times 10^9 \text{ न्यूटन/मी}^2\)
(b) पराभव बिन्दु लगभग B है। अतः इसके संगत पदार्थ की पराभव सामर्थ्य = \(300 \times 10^6\) न्यूटन/मीटर² = \(3.0 \times 10^8\) न्यूटन/मी²
In simple words: प्रतिबल-विकृति वक्र का उपयोग करके, हमने पदार्थ का यंग-प्रत्यास्थता गुणांक (जो प्रतिबल और विकृति का अनुपात है) और पराभव सामर्थ्य (वह अधिकतम प्रतिबल जिसे पदार्थ स्थायी रूप से विकृत हुए बिना सहन कर सकता है) ज्ञात किया है।
🎯 Exam Tip: प्रतिबल-विकृति वक्र से यंग-प्रत्यास्थता गुणांक (वक्र का ढाल) और पराभव सामर्थ्य (वह बिन्दु जहाँ से पदार्थ स्थायी रूप से विकृत होना शुरू होता है) की पहचान करना महत्वपूर्ण है। सुनिश्चित करें कि आप इकाइयों को सही ढंग से परिवर्तित करें।
Question 3. दो पदार्थों A और B के लिए प्रतिबल-विकृति ग्राफ चित्र-9.2 में दर्शाए गए हैं । इन ग्राफों को एक ही पैमाना मानकर खींचा गया है। (a) किस पदार्थ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक अधिक है? (b) दोनों पदार्थों में कौन अधिक मजबूत है?
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में दो पदार्थों A और B के लिए प्रतिबल-विकृति ग्राफ दर्शाए गए हैं, जिन्हें समान पैमाने पर बनाया गया है। इन वक्रों की तुलना करके हम दोनों पदार्थों के यंग-प्रत्यास्थता गुणांक और मजबूती का आकलन कर सकते हैं।
Answer: उत्तर- (a) : पदार्थ A के ग्राफ का ढाल दूसरे ग्राफ की तुलना में अधिक है; अतः पदार्थ A का यंग गुणांक अधिक है। (b) दोनों ग्राफों पर पराभव बिन्दुओं की ऊँचाई लगभग बराबर है परन्तु पदार्थ A के ग्राफ में पदार्थ B की तुलना में प्लास्टिक क्षेत्र अधिक सुस्पष्ट है; अतः पदार्थ A अधिक मजबूत है।
In simple words: प्रतिबल-विकृति ग्राफ के ढाल को देखकर हमने पाया कि पदार्थ A का यंग गुणांक अधिक है, जिसका अर्थ है कि यह पदार्थ अधिक प्रत्यास्थ है। पदार्थ A का प्लास्टिक क्षेत्र अधिक होने के कारण यह पदार्थ B से अधिक मजबूत भी है, क्योंकि यह अधिक विकृति सहन कर सकता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिबल-विकृति ग्राफ में, ढाल यंग-प्रत्यास्थता गुणांक को दर्शाता है- उच्च ढाल का अर्थ उच्च प्रत्यास्थता गुणांक है। पदार्थ की मजबूती उसके अधिकतम प्रतिबल (भंजक बिन्दु से पहले) और प्लास्टिक क्षेत्र की सीमा से निर्धारित होती है।
Question 4. निम्नलिखित दो कथनों को ध्यान से पढिए और कारण सहित बताइए कि वे सत्य हैं या असत्य (a) इस्पात की अपेक्षा रबड़ का यंग गुणांक अधिक है; (b) किसी कुण्डली का तनन उसके अपरूपण गुणांक से निर्धारित होता है।
Answer: उत्तर- (a) असत्य, रबड़ तथा इस्पात के बने एक जैसे तारों में समान विकृति उत्पन्न करने के लिए इस्पात के तार में रबड़ के तार की अपेक्षा अधिक प्रतिबल उत्पन्न होता है, इससे स्पष्ट है कि इस्पात का यंग गुणांक रबड़ की अपेक्षा अधिक है। (b) सत्य, जब हम किसी कुण्डली (स्प्रिंग) को खींचते हैं तो न तो स्प्रिंग निर्माण में लगे तार की लम्बाई में कोई परिवर्तन होता है और न ही उसके आयतन में। केवल स्प्रिंग का रूप बदल जाता है; अतः स्प्रिंग का तनन उसके अपरूपण गुणांक द्वारा निर्धारित होता है।
In simple words: यह कथन असत्य है कि रबड़ का यंग गुणांक इस्पात से अधिक है, वास्तव में इस्पात अधिक कठोर होता है और समान विकृति के लिए अधिक बल लगाता है। दूसरा कथन सत्य है कि एक स्प्रिंग का खिंचाव उसके अपरूपण गुणांक पर निर्भर करता है, क्योंकि खिंचाव के दौरान स्प्रिंग की लम्बाई और आयतन नहीं बदलते, बल्कि उसका आकार बदलता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्यास्थता गुणों को समझने के लिए विभिन्न सामग्रियों की तुलना करते समय, यंग-गुणांक की परिभाषा पर ध्यान दें। स्प्रिंग जैसे जटिल संरचनाओं के व्यवहार को नियंत्रित करने वाले सही प्रत्यास्थता गुणांक (यंग, आयतन, या अपरूपण) की पहचान करें।
Question 5. 0.25 cm व्यास के दो तार, जिनमें एक इस्पात का तथा दूसरा पीतल का है, चित्र-9.3 के अनुसार भारित हैं। बिना भार लटकाए इस्पात तथा पीतल के तारों की लम्बाइयाँ क्रमशः स्टील 1.5 m तथा 1.0m हैं। यदि इस्पात तथा पीतल के यंग गुणांक क्रमशः 20 x 1011 Pa तथा 0.91×1011 Pa हों तो इस्पात तथा पीतल के तारों में विस्तार की गणना कीजिए ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में दो तार- एक इस्पात का और एक पीतल का, एक-दूसरे से जुड़े हुए दर्शाए गए हैं, जिन पर नीचे की ओर भार लटकाया गया है। यह व्यवस्था तारों में उत्पन्न प्रतिबल और विकृति की गणना के लिए है।
Answer: हल- यहाँ स्टील के तार के लिए त्रिज्या \(r_1 = (0.25/2)\) सेमी = \(0.125\) सेमी = \(0.125 \times 10^{-2}\) मी
In simple words: यह प्रश्न इस्पात और पीतल के तारों में होने वाले विस्तार की गणना से संबंधित है जब उन पर भार लटकाया जाता है। इसके लिए हमें प्रत्येक तार के यंग-गुणांक, लम्बाई, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल और लगाए गए भार का उपयोग करके विस्तार के सूत्र का प्रयोग करना होगा।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, प्रत्येक तार के लिए यंग-गुणांक, लम्बाई, व्यास (या त्रिज्या से क्षेत्रफल) और लगाए गए बल की सही पहचान करना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक तार के लिए विस्तार की गणना अलग-अलग करें और यदि आवश्यक हो तो उन्हें जोड़ें।
Question 6. ऐलुमिनियम के किसी घन के किनारे 10 cm लम्बे हैं। इसकी एक फलक किसी ऊर्ध्वाधर दीवार से कसकर जड़ी हुई है। इस घन के सम्मुख फलक से 100 kg का एक द्रव्यमान जोड़ दिया गया है। ऐलुमिनियम का अपरूपण गुणांक 25 GPa है। इस फलक का ऊध्वाधर विस्थापन कितना होगा?
Answer: हल- दिया है : अपरूपण गुणांक \(G = 25 \text{ GPa} = 25 \times 10^9 \text{ Nm}^{-2}\) बल-आरोपित फलक का क्षेत्रफल \(A = 10 \text{ cm} \times 10 \text{ cm} = 100 \times 10^{-4} \text{ m}^2\)
In simple words: इस प्रश्न में, हमें एक एल्यूमीनियम घन की एक फलक के ऊर्ध्वाधर विस्थापन की गणना करनी है, जब उस पर एक भार लटकाया जाता है। यह अपरूपण गुणांक, आरोपित बल और घन के अनुप्रस्थ क्षेत्रफल के उपयोग से किया जाएगा।
🎯 Exam Tip: अपरूपण गुणांक से संबंधित समस्याओं को हल करते समय, बल, क्षेत्रफल, विस्थापन और लम्बाई के सही मानों को पहचानें। सुनिश्चित करें कि सभी इकाइयाँ SI प्रणाली में परिवर्तित हो गई हैं, और अपरूपण गुणांक के सूत्र का सही ढंग से उपयोग करें।
Question 7. मृदु इस्पात के चार समरूप खोखले बेलनाकार स्तम्भ 50,000 kg द्रव्यमान के किसी बड़े ढाँचे को आधार दिए हुए हैं। प्रत्येक स्तम्भ की भीतरी तथा बाहरी त्रिज्याएँ क्रमशः 30 तथा 60 cm हैं। भार वितरण को एकसमान मानते हुए प्रत्येक स्तम्भ की सम्पीडन विकृति की गणना कीजिए।
Answer: हल- दिया है : बाहरी त्रिज्या \(R_{\text{ext}} = 60 \text{ cm} = 0.6 \text{ m}\) भीतरी त्रिज्या \(R_{\text{int}} = 30 \text{ cm} = 0.3 \text{ m}\) प्रत्येक स्तम्भ का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल ...
In simple words: इस प्रश्न में, हमें चार खोखले इस्पात के स्तम्भों पर लगने वाले भारी ढाँचे के कारण उत्पन्न सम्पीडन विकृति की गणना करनी है। इसके लिए, हमें स्तम्भों का कुल अनुप्रस्थ क्षेत्रफल, कुल भार और इस्पात के यंग-गुणांक का उपयोग करना होगा।
🎯 Exam Tip: सम्पीडन विकृति की गणना करते समय, कुल बल (द्रव्यमान और गुरुत्वाकर्षण त्वरण से), कुल अनुप्रस्थ क्षेत्रफल (खोखले स्तम्भों के लिए बाहरी और भीतरी त्रिज्याओं के अंतर से) और सामग्री के यंग-गुणांक को सही ढंग से पहचानें। विकृति एक विमाहीन राशि है।
Question 8. ताँबे का एक टुकड़ा, जिसका अनुप्रस्थ परिच्छेद 15.2 mm x 19.1 mm का है, 44,500 N बल के तनाव से खींचा जाता है, जिससे केवल प्रत्यास्थ विरूपण उत्पन्न हो । उत्पन्न विकृति की गणना कीजिए।
Answer: हल- विरूपण विकृति से संगत प्रत्यास्थता गुणांक अपरूपण गुणांक (दृढ़ता गुणांक \(\eta\)) होता है जो यहाँ \(4.20 \times 10^{10} \text{ Pa}\) दिया है। ताँबे के टुकड़े का अनुप्रस्थ-परिच्छेद \(A = (15.2 \times 10^{-3} \text{ मी}) \times (19.1 \times 10^{-3} \text{ मी})\) \( = 290.32 \times 10^{-6} \text{ मी}^2 = 2.9 \times 10^{-4} \text{ मी}^2\) विरूपक बल \(F = 44500\) न्यूटन = \(4.45 \times 10^4\) न्यूटन
In simple words: इस प्रश्न में, हमें ताँबे के एक टुकड़े में उत्पन्न विकृति की गणना करनी है, जब उस पर तनाव बल लगाया जाता है। इसके लिए हमें आरोपित बल, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल और ताँबे के अपरूपण गुणांक का उपयोग करना होगा।
🎯 Exam Tip: अपरूपण विकृति की गणना के लिए, अपरूपण प्रतिबल (बल/क्षेत्रफल) को अपरूपण गुणांक से विभाजित करें। सुनिश्चित करें कि सभी इकाइयाँ (जैसे mm को m में) सही ढंग से परिवर्तित हों।
Question 9. 1.5 cm त्रिज्या का एक इस्पात का केबिल भार उठाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। । यदि इस्पात के लिए अधिकतम अनुज्ञेय प्रतिबल 108 Nm-2 है तो उस अधिकतम भार की गणना कीजिए जिसे केबिल उठा सकता है।
Answer: हल- केबिल के अनुप्रस्थ-परिच्छेद का क्षेत्रफल । \(A = \pi r^2 = 3.14 \times (1.5 \times 10^{-2} \text{ मी})^2 = 7.065 \times 10^{-4} \text{ मी}^2\) अधिकतम अनुज्ञेय प्रतिबल = \(10^8\) न्यूटन/मीटर² बल \(F = (\text{F/A}) \times A = \text{प्रतिबल} \times \text{अनुप्रस्थ-काट का क्षेत्रफल}\) केबिल द्वारा उठाया जा सकने वाला अधिकतम भार । \( = (10^8 \text{ न्यूटन /मी}^2) \times (7.065 \times 10^{-4} \text{ मी}^2)\) \( = 7.065 \times 10^4 \text{ न्यूटन} = 7.07 \times 10^4 \text{ न्यूटन}\)
In simple words: इस प्रश्न में, हमें इस्पात के केबिल द्वारा उठाए जा सकने वाले अधिकतम भार की गणना करनी है। यह केबिल की त्रिज्या से उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल को ज्ञात करके और उसे अधिकतम अनुज्ञेय प्रतिबल से गुणा करके किया जाता है।
🎯 Exam Tip: अधिकतम भार की गणना करते समय, केबिल के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल को सही ढंग से ज्ञात करें (त्रिज्या को मीटर में परिवर्तित करना न भूलें)। फिर अधिकतम अनुज्ञेय प्रतिबल से गुणा करके अधिकतम बल प्राप्त करें।
Question 10. 15 kg द्रव्यमान की एक दृढ़ पट्टी को तीन तारों, जिनमें से प्रत्येक की लम्बाई 2 m है, से सममित लटकाया गया है। सिरों के दोनों तार ताँबे के हैं तथा बीच वाली तार लोहे का है। तारों के व्यासों के अनुपात ज्ञात कीजिए जबकि प्रत्येक पर तनाव उतना ही रहता है।
Answer: हल- प्रत्येक तार द्वारा सम्भाला जाने वाला भार
In simple words: इस प्रश्न में, हमें ताँबे और लोहे के तारों के व्यासों का अनुपात ज्ञात करना है, जब एक दृढ़ पट्टी को उनसे लटकाया जाता है और प्रत्येक तार में तनाव समान रहता है। इसके लिए हमें प्रत्येक तार के यंग-गुणांक और क्षेत्रफल पर विचार करना होगा।
🎯 Exam Tip: इस तरह के सवालों में, यह ध्यान रखें कि यदि प्रत्येक तार पर तनाव समान है और लम्बाई में वृद्धि भी समान है, तो यंग-गुणांक, बल, लम्बाई और क्षेत्रफल के बीच का संबंध (\(Y = \frac{F/A}{\Delta L/L}\)) महत्वपूर्ण होगा। व्यासों के अनुपात को क्षेत्रफल के अनुपात से व्युत्पन्न करें।
Question 11. एक मीटर अतानित लम्बाई के इस्पात के तार के एक सिरे से 14.5 kg का द्रव्यमान बाँध कर उसे एक ऊर्ध्वाधर वृत्त में घुमाया जाता है, वृत्त की तली पर उसका कोणीय वेग 2 rev/s है। तार के अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल 0.065cm² है। तार में विस्तार की • गणना कीजिए जब द्रव्यमान अपने पथ के निम्नतम बिन्दु पर है। (इस्पात के लिए \(Y = 2 \times 10^{11}\) न्यूटन/मी²)
Answer: हल- ऊध्वाधर वृत्त के निम्नतम बिन्दु पर \(F – mg = mr\omega^2\) डोरी में तनाव बल \(F = mr\omega^2 + mg\) \(F = [14.5 \times 1.0 \times (2.0)^2 + 14.5 \times 9.8]\) न्यूटन \( = [58.0 + 142.1]\) न्यूटन = \(200.1\) न्यूटन तथा \(L = 1.00\) मी, अनुप्रस्थ-काट \(A = 0.065 \text{ सेमी}^2 = 0.065 \times 10^{-4} \text{ मी}^2\) तथा \(Y = 2 \times 10^{11}\) न्यूटन/मी² सूत्र
In simple words: इस प्रश्न में, हमें एक इस्पात के तार में विस्तार की गणना करनी है जब उसके एक सिरे पर द्रव्यमान बांधकर उसे ऊर्ध्वाधर वृत्त में घुमाया जाता है। पहले हमें वृत्त के निम्नतम बिन्दु पर तार में कुल तनाव बल (गुरुत्वाकर्षण और अभिकेंद्रीय बल के कारण) ज्ञात करना होगा, फिर यंग-गुणांक के सूत्र का उपयोग करके विस्तार की गणना करनी होगी।
🎯 Exam Tip: वृत्तीय गति के साथ प्रत्यास्थता के प्रश्नों में, निम्नतम बिन्दु पर लगने वाले शुद्ध बल (तनाव) की गणना सही ढंग से करें। कोणीय वेग को रेडियन/सेकंड में परिवर्तित करना और सभी इकाइयों को SI प्रणाली में रखना सुनिश्चित करें।
Question 12. नीचे दिए गए आँकड़ों से जल के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक की गणना कीजिए; प्रारम्भिक आयतन = 100.0, दाब में वृद्धि = 100.0 atm (1 atm = \(1.013 \times 10^5\) Pa), अन्तिम आयतन = 100.5 L नियत ताप पर जल तथा वायु के आयतन प्रत्यास्थता गुणांकों की तुलना कीजिए। सरल शब्दों में समझाइए कि यह अनुपात इतना अधिक क्यों है?
Answer: हल- यहाँ प्रारम्भिक आयतन \(V = 100.0\) लीटर अन्तिम आयतन \((V – u) = 100.5\) लीटर आयतन में कमी \(u = (V – u) – (V) = 100\) लीटर – \(100.5\) लीटर = \(-0.5\) लीटर दाब में वृद्धि \(p = 100\) वायुमण्डलीय दाब । \( = 100 \times 1.013 \times 10^5\) न्यूटन/मी² \( = 1.013 \times 10^7\) न्यूटन/मी² आयतन प्रत्यास्थता गुणांक हम जानते हैं कि STP पर वायु का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \(1 \times 10^5 \text{ Pa}\) है, अतः जल का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक वायु के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक से अधिक है। इसका कारण है कि समान दाब द्वारा जल के आयतन में होने वाली कमी, वायु के आयतन में होने वाली कमी की तुलना में नगण्य है।
In simple words: इस प्रश्न में, हमने दिए गए आँकड़ों का उपयोग करके जल के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक की गणना की और इसकी तुलना वायु के गुणांक से की। जल का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक वायु से बहुत अधिक होता है, क्योंकि जल असंपीड्य होता है और समान दाब परिवर्तन के लिए उसके आयतन में बहुत कम बदलाव आता है।
🎯 Exam Tip: आयतन प्रत्यास्थता गुणांक की गणना के लिए, दाब में परिवर्तन और आयतन में भिन्नात्मक परिवर्तन (आयतन में परिवर्तन / मूल आयतन) को सही ढंग से पहचानें। इकाइयों का सही रूपांतरण (लीटर से m³, atm से Pa) महत्वपूर्ण है। द्रव की असंपीड्यता को ध्यान में रखें।
Question 13. जल का घनत्व उस गंहराई पर, जहाँ दाब 80.0 atm हो, कितना होगा? दिया गया है कि | पृष्ठ पर जल का घनत्व \(103 \times 10 \text{ kg}^3 \text{ m}^{-3}\), जल की सम्पीडयता \(45.8 \times 10^{-11} \text{ Pa}^{-1} (1 \text{ Pa} = 1\text{Nm}^{-2})\)
Answer: हल- यहाँ पृष्ठ से गहराई तक जाने पर दाब परिवर्तन \(p = (80.0-1.0)\) वायुमण्डल = \(79\) वायुमण्डल अर्थात् । \(p = 79 \times 1.013 \times 10^5\) न्यूटन/मी² \( = 80.027 \times 10^5\) न्यूटन/मी² जहाँ जल की संपीडयता \(K = 45.8 \times 10^{-11} \text{ Pa}^{-1}\) जल को आयतन प्रत्यास्थता गुणांक पृष्ठ पर जल का घनत्व \(\rho = 1.03 \times 10^3 \text{ kg m}^{-3}\) माना \(\rho'\) किसी दी गई गहराई पर जल का घनत्व है। यदि \(V\) तथा \(V'\) जल के निश्चित द्रव्यमान \(M\) के पृष्ठ तथा दी गई गहराई के आयतन हैं तो
In simple words: इस प्रश्न में, हमें एक निश्चित गहराई पर जल का घनत्व ज्ञात करना है, जहाँ दाब बढ़ जाता है। हम जानते हैं कि दाब बढ़ने पर जल का आयतन थोड़ा कम हो जाता है, जिससे उसका घनत्व बढ़ जाता है। इसके लिए, हम आयतन प्रत्यास्थता गुणांक और सम्पीडयता के बीच संबंध का उपयोग करेंगे।
🎯 Exam Tip: गहराई के साथ घनत्व परिवर्तन की गणना करते समय, दाब में परिवर्तन और सम्पीडयता (जो आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का व्युत्क्रम है) का उपयोग करें। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि दाब बढ़ने पर आयतन कम होता है और घनत्व बढ़ता है।
Question 14. काँच के स्लेब पर 10 atm का जलीय दाब लगाने पर उसके आयतन में भिन्नात्मक अन्तर की गणना कीजिए।
Answer: हल- यहाँ दाब-परिवर्तन \(p = 10\) वायुमण्डलीय दाब = \(10 \times 1.013 \times 10^5 \text{ Pa} = 1.013 \times 10^6 \text{ Pa}\) आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \(B = 37 \times 10^9 \text{ Pa}\) आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \((B = \frac{-p}{\Delta V/V})\) आयतन में भिन्नात्मक परिवर्त यहाँ \((-)\) चिह्न आयतन में कमी का प्रतीक है।
In simple words: इस प्रश्न में, हमें काँच पर दाब लगाने से उसके आयतन में होने वाले भिन्नात्मक परिवर्तन की गणना करनी है। यह आयतन प्रत्यास्थता गुणांक और लगाए गए दाब का उपयोग करके किया जाता है, जहाँ ऋणात्मक चिह्न आयतन में कमी को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: भिन्नात्मक आयतन परिवर्तन \(\left( \frac{\Delta V}{V} \right)\) की गणना के लिए, आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \(B = \frac{-p}{(\Delta V/V)}\) के सूत्र का उपयोग करें। दाब (atm से Pa में) और आयतन प्रत्यास्थता गुणांक की इकाइयों को सही ढंग से परिवर्तित करें।
Question 15. ताँबे के एक ठोस धन का एक किनारा 10 cm का है। इस पर \(7.0 \times 10^6 \text{ Pa}\) का जलीय दाब लगाने पर इसके आयतन में संकुचन निकालिए ।
Answer: हल- आयतन विकृति परन्तु घन के किनारे की लम्बाई \(a = 10\) सेमी = \(0.10\) मी घन का आयतन \(V = a^3 = (0.10 \text{ मी})^3 = 10^{-3}\) मी³ अतः आयतन में परिवर्तन \(\Delta V = \text{आयतन विकृति} \times \text{आयतन} = -5 \times 10^{-5} \times 10^{-3} \text{ मी}^3 = -5 \times 10^{-8}\) मी³
In simple words: इस प्रश्न में, हमें ताँबे के घन पर जलीय दाब लगाने पर उसके आयतन में होने वाले संकुचन की गणना करनी है। इसके लिए हमें घन का आयतन, लगाए गए दाब और ताँबे के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का उपयोग करना होगा।
🎯 Exam Tip: आयतन में संकुचन ज्ञात करने के लिए, पहले आयतन विकृति \(\left( \frac{\Delta V}{V} \right)\) की गणना करें, फिर इसे मूल आयतन से गुणा करें। दाब और आयतन प्रत्यास्थता गुणांक की इकाइयों को SI प्रणाली में रखें।
Question 16. 1 लीटर जल पर दाब में कितना अन्तर किया जाए कि वह 0.10% से सम्पीडित हो जाए?
Answer: हल- यहाँ आयतन में प्रतिशत संकुचन = \(-0.10\) अर्थात् दाब \(2.2 \times 10^6 \text{ Pa}\) बढ़ाया जाये ।
In simple words: इस प्रश्न में, हमें यह ज्ञात करना है कि जल को 0.10% तक संपीडित करने के लिए कितने दाब अंतर की आवश्यकता होगी। इसके लिए, हमें जल के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक और दिए गए भिन्नात्मक आयतन परिवर्तन का उपयोग करना होगा।
🎯 Exam Tip: दाब अंतर की गणना के लिए, आयतन प्रत्यास्थता गुणांक और भिन्नात्मक आयतन परिवर्तन का सूत्र \((p = -B \frac{\Delta V}{V})\) उपयोग करें। प्रतिशत को भिन्नात्मक मान में परिवर्तित करना सुनिश्चित करें।
अतिरिक्त अभ्यास
Question 17. हीरे के एकल क्रिस्टलों से बनी निहाइयों, जिनकी आकृति चित्र-9.6 में दिखाई गई है, का उपयोग अति उच्च दाब के अन्तर्गत द्रव्यों के व्यवहार की जाँच के लिए किया जाता है। निहाई के संकीर्ण सिरों पर सपाट फलकों का व्यास 0.50 mm है। यदि निहाई के चौड़े सिरों पर 50,000 N का बल लगा हो तो उसकी नोंक पर दाब ज्ञात कीजिए।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र हीरे के एकल क्रिस्टल से बनी निहाई को दर्शाता है, जिसका उपयोग उच्च दाब के प्रयोगों में किया जाता है। निहाई का एक संकीर्ण सिरा होता है जिस पर बल केंद्रित होता है, जिससे उच्च दाब उत्पन्न होता है।
Answer: हल- सपाट फलक की त्रिज्या \(R = 0.25 \text{ mm} = 2.5 \times 10^{-4} \text{ m}\) हीरे के शंकु । फलक का क्षेत्रफल \(A = \pi R^2\) \( = 3.14 \times (2.5 \times 10^{-4} \text{m})^2\) \( = 196 \times 10^{-8} \text{m}^2\) जबकि आरोपित बल \(F = 50,000 \text{N}\) नोंक पर दाब \(P = \frac{F}{A} = \frac{50000}{196 \times 10^{-8}}\) \( = 2.55 \times 10^{11} \text{ Pa}\)
In simple words: इस प्रश्न में, हमने हीरे की निहाई की नोंक पर उत्पन्न दाब की गणना की, जब उसके चौड़े सिरे पर एक बड़ा बल लगाया जाता है। नोंक का छोटा क्षेत्रफल होने के कारण, यह बल एक बहुत अधिक दाब में परिवर्तित हो जाता है।
🎯 Exam Tip: दाब की गणना करते समय, बल को अनुप्रस्थ क्षेत्रफल से विभाजित करें। व्यास को त्रिज्या में और फिर त्रिज्या को मीटर में परिवर्तित करना सुनिश्चित करें ताकि क्षेत्रफल की गणना सही ढंग से हो सके। उच्च दाब के अनुप्रयोगों में छोटे संपर्क क्षेत्र का महत्व समझें।
Question 18. 1.05 m लम्बाई तथा नगण्य द्रव्यमान की एक छड़ को बराबर लम्बाई के दो तारों, एक इस्पात : का (तार A) तथा दूसरा ऐलुमिनियम का तार (तार B) द्वारा सिरों से लटका दिया गया है, जैसा कि चित्र-9.7 में दिखाया गया है। A तथा B के तारों के अनुप्रस्थ परिच्छेद के क्षेत्रफल क्रमशः 1.0 mm² और 2.0 mm हैं। छड़ के किस बिन्दु से एक द्रव्यमान m को लटका दिया जाए ताकि इस्पात तथा ऐलुमिनियम के तारों में (a) समान प्रतिबल, तथा (b) समान विकृति उत्पन्न हो?
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में एक छड़ को इस्पात (तार A) और एल्यूमीनियम (तार B) के दो तारों से लटकाया गया है। द्रव्यमान m को छड़ पर एक विशिष्ट बिंदु से लटकाने पर, तारों में समान प्रतिबल या समान विकृति उत्पन्न होती है।
Answer: हल- तारों के अनुप्रस्थ क्षेत्रफल \(A_A = 1.0 \text{ mm}^2\), \(A_B = 2.0 \text{ mm}^2\) \(Y_A = 2.0 \times 10^{11} \text{ Nm}^{-2}\), \(Y_B = 0.7 \times 10^{11} \text{ Nm}^{-2}\) माना द्रव्यमान को तार A वाले सिरे से, \(x\) दूरी पर बिन्दु C से लटकाया गया है, तब इसकी दूसरे 'सिरे से दूरी \((1.05 – x)\) m होगी । माना इस भार के कारण तारों में \(F_A\) तथा \(F_B\) तनाव बल उत्पन्न होते हैं। बिन्दु C के परितः आघूर्ण लेने पर, \(F_A .x = F_B (1.05-x) \ldots(1)\) (a) तारों में समान प्रतिबल उत्पन्न होता है; अतः
In simple words: यह प्रश्न एक ऐसे बिंदु का पता लगाने के बारे में है जहाँ एक द्रव्यमान को लटकाने पर इस्पात और एल्यूमीनियम के तारों में या तो समान प्रतिबल या समान विकृति उत्पन्न होती है। इसके लिए हमें उनके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल और यंग-गुणांकों का उपयोग करना होगा।
🎯 Exam Tip: इस तरह के सवालों को हल करने के लिए दो मुख्य स्थितियाँ होती हैं: समान प्रतिबल और समान विकृति। प्रत्येक स्थिति में बलों और आघूर्णों को संतुलित करके अज्ञात दूरी \(x\) ज्ञात करें। यंग-गुणांक और क्षेत्रफल के साथ संबंध का सही उपयोग महत्वपूर्ण है।
Question 19. मृदु इस्पात के एक तार, जिसकी लम्बाई 1.0 m तथा अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल – \(0.50 \times 10^{-2}\) cm² है, को दो खम्भों के बीच क्षैतिज दिशा में प्रत्यास्थ सीमा के अन्दर ही तनित किया जाता है। तार के मध्य बिन्दु से 100g का एक द्रव्यमान लटका दिया जाता है। मध्य बिन्दु पर अवनमन की गणना कीजिए।
Answer: हल- दिया है : तार की लम्बाई \(L = 1.0 \text{ m}\), अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल \(A = 0.50 \times 10^{-2} \text{ cm}^2 = 5 \times 10^{-7} \text{ m}^2\) \(m = 100 \text{ g} = 0.1 \text{ kg}\), \(Y = 2.0 \times 10^{11} \text{ Nm}^{-2}\) माना सन्तुलन की स्थिति में तार के दोनों भागों का क्षैतिज से – झुकाव \(\theta\) है तथा तार के दोनों भागों में समान तनाव \(T\) है। सन्तुलन की स्थिति में, \(2T \sin \theta = mg \ldots(1)\) (C तार का मध्य बिन्दु है जो भार लटकाने पर बिन्दु O तक विस्थापित हो जाता है।)
In simple words: इस प्रश्न में, हमें एक क्षैतिज रूप से तनित इस्पात के तार के मध्यबिंदु पर अवनमन की गणना करनी है, जब उस पर एक द्रव्यमान लटकाया जाता है। इसके लिए, हमें तनाव बल, गुरुत्वाकर्षण बल और तार की ज्यामिति (लम्बाई और अवनमन के कारण उत्पन्न कोण) के बीच संतुलन का उपयोग करना होगा।
🎯 Exam Tip: तार के मध्यबिंदु पर अवनमन की गणना करते समय, बलों का संतुलन (ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज घटक) और छोटे कोण सन्निकटन (\(\sin \theta \approx \tan \theta \approx \theta\)) का उपयोग करें। यंग-गुणांक का सूत्र (\(Y = \frac{\text{प्रतिबल}}{\text{विकृति}}\)) इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Question 20. धातु के दो पहियों के सिरों को चार रिवेट से आपस में जोड़ दिया जाता है। प्रत्येक रिवेट का व्यास 6 मिमी है। यदि रिवेट का अपरुपण प्रतिबल \(6.9 \times 10^7 \text{ Pa}\) से अधिक नहीं बढ़ना । हो तो रिवेट की हुई पट्टी द्वारा आरोपित तनाव का अधिकतम मान कितना होगा? मान लीजिए कि प्रत्येक रिवेट एक-चौथाई भार वहन कर सकता है।
Answer: हल- दिया है, प्रत्येक रिवेट का व्यास = 6 मिमी । त्रिज्या \(r = \text{व्यास}/2 = 6 \text{ मिमी}/2 = 3 \text{ मिमी} = 3 \times 10^{-3} \text{ मी}\) अतः रिवेट का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल । \(A = \pi r^2 = 3.14 \times (3 \times 10^{-3} \text{ मी})^2\) \( = 28.26 \times 10^{-6} \text{ मी}^2\) भंजक प्रतिबल = रिवेट द्वारा सहन किये जा सकने वाला अधिक अपरूपण प्रतिबल \( = 6.9 \times 10^7 \text{ Pa} = 6.9 \times 10^7\) न्यूटन/मीटर² प्रत्येक रिवेट द्वारा सहन किया जा सकने वाला अधिकतम तनाव = भंजक प्रतिबल \(\times A\) \( = (6.9 \times 10^7 \text{ न्यूटन/मी}^2) \times (28.26 \times 10^{-6} \text{ मी}^2)\) \( = 1.949 \times 10^3\) न्यूटन \(\approx 1.95 \times 10^3\)न्यूटन चूँकि पट्टी में चार रिवेट लगी हैं। अतः पट्टी द्वारा आरोपित अधिकतम तनाव \( = 4 \times 1.95 \times 10^3\) न्यूटन = \(7.8 \times 10^3\) न्यूटन
In simple words: इस प्रश्न में, हमें चार रिवेट से जुड़ी एक पट्टी द्वारा उठाए जा सकने वाले अधिकतम तनाव की गणना करनी है। इसके लिए, हमें प्रत्येक रिवेट के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल और उसके अधिकतम अनुज्ञेय अपरूपण प्रतिबल का उपयोग करना होगा, यह मानते हुए कि प्रत्येक रिवेट कुल भार का एक-चौथाई वहन करता है।
🎯 Exam Tip: रिवेट जैसे घटकों में अधिकतम तनाव की गणना करते समय, प्रति रिवेट पर पड़ने वाले बल को कुल भार के भाग के रूप में मानें। रिवेट के व्यास से उसके क्षेत्रफल को सही ढंग से ज्ञात करें और प्रतिबल के सूत्र (\(\text{बल/क्षेत्रफल}\)) का उपयोग करें।
Question 21. प्रशांत महासागर में स्थित मैरियाना नामक खाई एक स्थान पर पानी की सतह से 11 km नीचे चली जाती है और उस खाई में नीचे तक 0.32 m³ आयतन का इस्पात का एक गोला गिराया जाता है तो गोले के आयतन में परिवर्तन की गणना करें। खाई के तल पर जल का दाब \(1.1 \times 10^8 \text{ Pa}\) है और इस्पात का आयतन गुणांक 160 G Pa है।
Answer: हल- यहाँ दाब-परिवर्तन \(p = \text{खाई की तली पर दाब} = 1.1 \times 10^8 \text{ Pa}\) इस्पात का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \(B = 160 \text{ G Pa} = 160 \times 10^9 \text{ Pa} = 1.6 \times 10^{11} \text{ Pa}\) गोले का आयतन \(V = 0.32 \text{ मी}^3\) आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \((B = \frac{-p}{\Delta V/V})\) \((-)\) चिह्न आयतन में कमी का प्रतीक है। अर्थात् आयतन में \(2.2 \times 10^{-4} \text{ मी}^3\) की कमी होगी ।
In simple words: इस प्रश्न में, हमें मैरियाना खाई की गहराई में एक इस्पात के गोले के आयतन में होने वाले परिवर्तन की गणना करनी है। दाब में परिवर्तन और इस्पात के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का उपयोग करके, हम गोले के आयतन में संकुचन ज्ञात कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: आयतन में परिवर्तन की गणना के लिए, आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \((B = \frac{-p}{(\Delta V/V)})\) के सूत्र का उपयोग करें। दाब और आयतन प्रत्यास्थता गुणांक की इकाइयों (जैसे GPa से Pa) को सही ढंग से परिवर्तित करना सुनिश्चित करें।
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. प्रत्यास्थता गुणांक का मात्रक है|
(i) किग्रा/मीटर²-सेकण्ड
(ii) किग्रा/मीटर-सेकण्ड\(^2\)
(iii) किग्री/मीटर²-सेकण्ड\(^2\)
(iv) किग्रा/मीटर³-सेकण्ड\(^2\)
Answer: (ii) किग्रा/मीटर-सेकण्ड\(^2\)
In simple words: प्रत्यास्थता गुणांक का मात्रक, जो प्रतिबल और विकृति का अनुपात होता है, दाब या प्रतिबल के मात्रक के समान होता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्यास्थता गुणांक (यंग गुणांक, आयतन गुणांक, अपरूपण गुणांक) का मात्रक हमेशा दाब या प्रतिबल के मात्रक (न्यूटन/मीटर² या पास्कल) के समान होता है। विमाओं को भी याद रखना सहायक होता है।
Question 2. दृढ़ता गुणांक (प्रत्यास्थता गुणांक) का विमीय सूत्र है
(i) \(ML^{-1}T^{-2}\)
(ii) \(ML^{-2}T^3\)
(ii) \(MLT^{-2}\)
(iv) \(ML^{-1}T^1\)
Answer: (i) \(ML^{-1}T^{-2}\)
In simple words: दृढ़ता गुणांक, जो प्रत्यास्थता गुणांक का एक प्रकार है, का विमीय सूत्र दाब या प्रतिबल के विमीय सूत्र के समान होता है, क्योंकि विकृति एक विमाहीन राशि है।
🎯 Exam Tip: सभी प्रत्यास्थता गुणांकों (यंग, आयतन, दृढ़ता) की विमाएँ समान होती हैं, जो प्रतिबल की विमाएँ हैं। प्रतिबल \(= \text{बल}/\text{क्षेत्रफल}\), इसलिए \(\text{विमा} = \frac{[MLT^{-2}]}{[L^2]} = [ML^{-1}T^{-2}]\)।
Question 3. ताप बढ़ाने पर यंग-प्रत्यास्थता गुणांक का मान
(i) बढ़ता है।
(ii) घटता है।
(iii) अपरिवर्तित रहता है।
(iv) असामान्य रूप से घटता तथा बढ़ता है।
Answer: (ii) घटता है।
In simple words: जब किसी पदार्थ का ताप बढ़ता है, तो उसके परमाणुओं के बीच की दूरी बढ़ जाती है और उनके बीच के बन्धन कमज़ोर हो जाते हैं, जिसके कारण पदार्थ की कठोरता कम हो जाती है और उसका यंग-प्रत्यास्थता गुणांक घट जाता है।
🎯 Exam Tip: अधिकांश सामग्रियों के लिए, ताप बढ़ने पर यंग-प्रत्यास्थता गुणांक घटता है क्योंकि इंटरमॉलिक्युलर बल कमजोर हो जाते हैं। यह पदार्थ की प्रत्यास्थता और कठोरता में कमी को दर्शाता है।
Question 4. एक तार से भार\(mg\) लटकाने पर तार की लम्बाई में वृद्धि हो जाती है। इस प्रक्रिया में किया गया कार्य है।
(i) \(mgl\)
(ii) \(mgl\)
(iii) \(2mgl\)
(iv) शून्य
Answer: (i) \(mgl\)
In simple words: किसी तार पर भार लटकाने पर किया गया कार्य, उस भार के कारण तार की लम्बाई में हुई वृद्धि के कारण संचित स्थितिज ऊर्जा के बराबर होता है।
🎯 Exam Tip: तार को खींचने में किया गया कार्य \(\frac{1}{2} F \Delta L\) के बराबर होता है, जहाँ \(F\) बल है और \(\Delta L\) लम्बाई में वृद्धि है। यदि भार धीरे-धीरे लटकाया जाता है, तो औसत बल के रूप में \(\frac{1}{2}mg\) का उपयोग किया जाता है। हालांकि, यदि ऊर्जा के रूप में पूछा जाए, तो यह गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन से संबंधित होता है।
Question 5. एक धातु के तार की लम्बाई, जिसका यंग प्रत्यास्थता गुणांक है, में वृद्धि होती है, जब इस पर कुछ भार लगाया जाता है। तार के एकांक आयतन में संचित स्थितिज ऊर्जा है।
Answer: (iii)
In simple words: किसी तार के एकांक आयतन में संचित स्थितिज ऊर्जा प्रतिबल, विकृति और यंग-प्रत्यास्थता गुणांक के पदों में व्यक्त की जा सकती है, जो तार के खिंचाव के दौरान उसके परमाणुओं के बीच संग्रहित होती है।
🎯 Exam Tip: एकांक आयतन में संचित स्थितिज ऊर्जा का सूत्र \(\frac{1}{2} \times \text{प्रतिबल} \times \text{विकृति}\) या \(\frac{1}{2} Y (\text{विकृति})^2\) या \(\frac{1}{2Y} (\text{प्रतिबल})^2\) होता है। विकल्पों को पहचानते समय इस सूत्र का ध्यान रखें।
Question 6. यदि एक तार को खींचकर दोगुना कर दिया जाए तो उसका यंग प्रत्यास्थता गुणांक हो जायेगा
(i) आधा
(ii) समाने
(ii) दोगुना
(iv) चार गुना
Answer: (ii) समान
In simple words: यंग-प्रत्यास्थता गुणांक पदार्थ का एक आंतरिक गुण है, जो उसकी संरचना और परमाणविक बंधों पर निर्भर करता है। यह तार की लम्बाई या आकार बदलने से नहीं बदलता है।
🎯 Exam Tip: यंग-प्रत्यास्थता गुणांक एक पदार्थ का गुण है, न कि उसकी ज्यामिति का। इसलिए, तार की लम्बाई, व्यास, या आकार बदलने से उसका यंग-प्रत्यास्थता गुणांक नहीं बदलता है।
Question 7. पूर्णतया दृढ़ वस्तु के लिए यंग प्रत्यास्थता गुणांक का मान होता है।
(i) शून्य ।
(ii) अनन्त
(iii) 1
(iv) 100
Answer: (ii) अनन्त
In simple words: एक पूर्णतया दृढ़ वस्तु वह होती है जिसमें कोई विकृति उत्पन्न नहीं होती, चाहे उस पर कितना भी प्रतिबल लगाया जाए। चूंकि यंग-प्रत्यास्थता गुणांक प्रतिबल/विकृति होता है, तो विकृति शून्य होने पर गुणांक अनन्त हो जाता है।
🎯 Exam Tip: दृढ़ता की परिभाषा के अनुसार, एक पूर्णतया दृढ़ वस्तु में कोई विकृति उत्पन्न नहीं होती है। यंग-गुणांक विकृति के व्युत्क्रमानुपाती होता है, इसलिए शून्य विकृति का अर्थ अनंत यंग-गुणांक होता है।
Question 8. किसी खींचे हुए तार की प्रति एकांक आयतन की स्थितिज ऊर्जा होती है।
Answer: उत्तर- (iii) किसी खींचे हुए तार की प्रति एकांक आयतन की स्थितिज ऊर्जा \( = \frac{1}{2} \times \text{यंग प्रत्यास्थता गुणांक} \times (\text{विकृति})^2\)
In simple words: जब एक तार को खींचा जाता है, तो उसमें प्रति एकांक आयतन में ऊर्जा संचित होती है, जो यंग-प्रत्यास्थता गुणांक और विकृति के वर्ग के समानुपाती होती है।
🎯 Exam Tip: एकांक आयतन में संचित स्थितिज ऊर्जा के सूत्र को याद रखें, जो \(\frac{1}{2} \times \text{प्रतिबल} \times \text{विकृति}\) या \(\frac{1}{2} Y (\text{विकृति})^2\) के रूप में दिया जाता है। यह तार को विकृत करने में किए गए कार्य के बराबर होता है।
Question 9. यदि प्रतिबल \(\sigma\) है तथा तार के पदार्थ का यंग गुणांक \(Y\) है तो तार को खींचने पर उसके प्रति एकांक आयतन में संचित ऊर्जा
(i)
(ii)
(iii)
(iv)
Answer: (i) प्रति एकांक आयतन में संचित ऊर्जा \( = \frac{1}{2Y} \sigma^2\)
In simple words: तार को खींचने पर प्रति एकांक आयतन में संचित ऊर्जा प्रतिबल के वर्ग के समानुपाती और यंग-गुणांक के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
🎯 Exam Tip: प्रतिबल और यंग-गुणांक के पदों में एकांक आयतन में संचित ऊर्जा के सूत्र \(\frac{1}{2Y} (\text{प्रतिबल})^2\) को याद रखें। यह सूत्र प्रत्यास्थ ऊर्जा घनत्व को व्यक्त करता है।
Question 10. आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का व्युत्क्रम होता है।
(i) यंग प्रत्यास्थता गुणांक
(ii) दृढ़ता गुणांक
(iii) सम्पीडयता
(iv) विकृति
Answer: (iii) सम्पीडयता
In simple words: सम्पीडयता किसी पदार्थ का वह गुण है जो यह दर्शाता है कि उसे कितनी आसानी से संपीड़ित किया जा सकता है, और यह आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का व्युत्क्रम होता है।
🎯 Exam Tip: सम्पीडयता (K) और आयतन प्रत्यास्थता गुणांक (B) एक दूसरे के व्युत्क्रम होते हैं, यानी \(K = \frac{1}{B}\)। सम्पीडयता पदार्थ की दाब के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।
Question 11. पॉयसन अनुपात होता है ।
(i) अनुदैर्ध्य प्रतिबल/पाश्विक विकृति
(ii) पाश्विक विकृति/अनुदैर्ध्य विकृति
(iii) अनुदैर्ध्य विकृति/पाश्विक विकृति
(iv) अनुदैर्ध्य प्रतिबल/अनुदैर्ध्य विकृति
Answer: (ii) पाश्विक विकृति/अनुदैर्ध्य विकृति
In simple words: पॉयसन अनुपात एक आयामहीन राशि है जो किसी पदार्थ के पाश्विक विकृति (व्यास में परिवर्तन) और अनुदैर्ध्य विकृति (लम्बाई में परिवर्तन) का अनुपात होती है, जब उसे अक्षीय रूप से खींचा या दबाया जाता है।
🎯 Exam Tip: पॉयसन अनुपात की परिभाषा याद रखना महत्वपूर्ण है: यह पाश्विक विकृति और अनुदैर्ध्य विकृति का ऋणात्मक अनुपात होता है। यह दर्शाता है कि किसी सामग्री को खींचने पर वह कितना पतला होती है।
Question 12. प्रत्यास्थता में पॉयसन अनुपात का मान होता है।
(i) से अधिक
(ii) -1 से कम
(iii) -1 और 0.5 के बीच
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (iii) प्रत्यास्थता में पॉयसन अनुपात का मान -1 और 0.5 के बीच होता है।
In simple words: अधिकांश पदार्थों के लिए पॉयसन अनुपात का मान 0 और 0.5 के बीच होता है, हालांकि कुछ विशिष्ट मामलों में यह ऋणात्मक भी हो सकता है। यह पदार्थ की संपीड्यता को प्रभावित करता है।
🎯 Exam Tip: पॉयसन अनुपात के सामान्य मानों की सीमा \(-1 < \nu < 0.5\) होती है। अधिकांश धातुओं के लिए यह 0.25 से 0.35 के बीच होता है। यह पदार्थ के प्रत्यास्थ व्यवहार का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
Question 13. \(Y, \eta\) और \(B\) में सम्बन्ध होता है|
(i) \(Y = \eta B\)
(ii) \(\eta = YB\)
(iii)
(iv)
Answer: (iii) \(Y = 3\eta (1 - 2\nu) = 2B(1+\nu)\)
In simple words: यंग-प्रत्यास्थता गुणांक (Y), दृढ़ता गुणांक (\(\eta\)) और आयतन प्रत्यास्थता गुणांक (B) आपस में पॉयसन अनुपात (\(\nu\)) के माध्यम से जुड़े होते हैं, जो इन प्रत्यास्थता स्थिरांकों के बीच संबंध स्थापित करते हैं।
🎯 Exam Tip: यंग-गुणांक (Y), दृढ़ता गुणांक (\(\eta\)), आयतन प्रत्यास्थता गुणांक (B) और पॉयसन अनुपात (\(\nu\)) के बीच के संबंध सूत्र याद रखें: \(Y = 2\eta (1 + \nu)\) और \(Y = 3B (1 - 2\nu)\)। इन सूत्रों का उपयोग करके एक गुणांक से दूसरे की गणना की जा सकती है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. प्रत्यास्थता की सीमा से आप क्या समझते हैं?
Answer: उत्तर- किसी वस्तु पर लगाये गये विरूपक बल की उस अधिकतम सीमा को जिसके अन्तर्गत वस्तु के पदार्थ में प्रत्यास्थता का गुण विद्यमान रहता है, उस पदार्थ की प्रत्यास्थता की सीमा कहते हैं।
In simple words: प्रत्यास्थता की सीमा वह अधिकतम प्रतिबल है जिसे कोई पदार्थ स्थायी विकृति के बिना सहन कर सकता है। इस सीमा के भीतर पदार्थ अपने मूल आकार में लौट आता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्यास्थता सीमा को हमेशा प्रतिबल के रूप में व्यक्त किया जाता है। यह वह महत्वपूर्ण बिंदु है जिसके बाद पदार्थ स्थायी रूप से विकृत हो जाता है, भले ही विरूपण बल हटा दिया जाए।
Question 2. प्रतिबल की परिभाषा तथा मात्रक लिखिए।
Answer: उत्तर- साम्यावस्था में वस्तु की अनुप्रस्थ-काट के एकांक क्षेत्रफल पर कार्य करने वाले आन्तरिक प्रतिक्रिया बल को प्रतिबल कहते हैं। इसका मात्रक न्यूटन/मीटर² है।
In simple words: प्रतिबल वस्तु के आंतरिक प्रतिरोध बल को उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल से विभाजित करने पर प्राप्त होता है, जब वस्तु पर बाहरी बल लगाया जाता है। इसका मात्रक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर (पास्कल) है।
🎯 Exam Tip: प्रतिबल की परिभाषा को स्पष्ट और संक्षिप्त रखें, और इसके SI मात्रक (पास्कल या न्यूटन/मीटर²) को हमेशा लिखें। यह बल और क्षेत्रफल का अनुपात होता है।
Question 3. प्रतिबल एवं दाब में अन्तर बताइए।
Answer: उत्तर- किसी वस्तु की अनुप्रस्थ-काट के एकांक क्षेत्रफल पर कार्य करने वाले आन्तरिक प्रतिक्रिया बल को प्रतिबल कहते हैं जबकि किसी पृष्ठ के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर कार्य करने वाले अभिलम्बवत् बल को दाब कहते हैं।
In simple words: प्रतिबल एक आंतरिक प्रतिक्रिया बल है जो किसी वस्तु के अंदर उत्पन्न होता है जब उसे विकृत किया जाता है, जबकि दाब बाहरी बल है जो किसी सतह पर लंबवत रूप से कार्य करता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिबल आंतरिक पुनर्स्थापना बल है, जबकि दाब एक बाहरी लागू बल है। दाब हमेशा लंबवत कार्य करता है, जबकि प्रतिबल के अनुदैर्ध्य, अपरूपण आदि प्रकार हो सकते हैं। दोनों की इकाइयाँ समान होती हैं।
Question 4. भंजक प्रतिबल से आप क्या समझते हैं।
Answer: उत्तर- जब विरूपक बल का मान प्रत्यास्थता की सीमा से बाहर हो जाता है तो तार की लम्बाई में वृद्धि सदैव के लिए हो जाती है। विरूपक बल और अधिक बढ़ाने पर एक ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है कि विरूपक बल का मान एक निश्चित मान से अधिक हो जाता है और तार टूट जाता है। विरूपक बल को वह मान जिस पर तार टूट जाता है, भंजक बल (breaking force) कहलाता है। अतः तार के अनुप्रस्थ काट के एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला वह बल जिस पर तार टूट जाता है, भंजक प्रतिबल (breaking stress) कहलाता है।
In simple words: भंजक प्रतिबल वह अधिकतम प्रतिबल है जिसे कोई पदार्थ टूटने से ठीक पहले सहन कर सकता है। यह पदार्थ की अधिकतम सामर्थ्य को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: भंजक प्रतिबल पदार्थ की अंतिम शक्ति को दर्शाता है, जिसके बाद पदार्थ टूट जाता है। यह प्रतिबल-विकृति वक्र में अंतिम बिंदु होता है और इसका मान पदार्थ के प्रकार पर निर्भर करता है।
Question 5. विकृति से क्या तात्पर्य है?
Answer: उत्तर- विरूपक बल के कारण किसी वस्तु की इकाई विमा में होने वाले परिवर्तन को विकृति कहते हैं। इसका कोई मात्रक नहीं होता इसीलिए यह एक विमाहीन राशि है।
In simple words: विकृति किसी वस्तु के आकार या आकृति में हुए भिन्नात्मक परिवर्तन को कहते हैं, जब उस पर बाहरी बल लगाया जाता है। यह एक अनुपात होने के कारण इसका कोई मात्रक या विमा नहीं होती है।
🎯 Exam Tip: विकृति की परिभाषा को याद रखें: यह मूल विमा के सापेक्ष विमा में परिवर्तन का अनुपात है। इसकी विमाहीन प्रकृति को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 6. दृढ़ता गुणांक की परिभाषा लिखिए तथा इसका मात्रक भी लिखिए।
Answer: उत्तर- दृढ़ता गुणांक-प्रत्यास्थता की सीमा के अन्दर, अपरूपक प्रतिबल तथा अपरूपण विकृति के अनुपात को ठोस वस्तु के पदार्थ का दृढ़ता गुणांक (modulus of rigidity) कहते हैं। इसे \(\eta\) से प्रदर्शित किया जाता है। इसका मात्रक न्यूटन/मीटर² है।
In simple words: दृढ़ता गुणांक पदार्थ के अपरूपण प्रतिबल और अपरूपण विकृति का अनुपात होता है, जो पदार्थ के आकार को बदलने के प्रतिरोध को दर्शाता है। इसका मात्रक न्यूटन/मीटर² (पास्कल) है।
🎯 Exam Tip: दृढ़ता गुणांक (शेयर मॉडुलस) केवल अपरूपण प्रतिबल और अपरूपण विकृति से संबंधित होता है। इसकी परिभाषा, प्रतीक (\(\eta\) या G) और मात्रक (Pa) को ठीक से समझें।
Question 7. काँच, ताँबा, इस्पात तथा रबर को प्रत्यास्थता-गुणांकों के बढ़ते क्रम में लिखिए।
Answer: उत्तर- रबर, काँच, ताँबा, इस्पात ।
In simple words: इन पदार्थों को उनके यंग-प्रत्यास्थता गुणांक के आधार पर बढ़ते क्रम में व्यवस्थित किया गया है। रबर सबसे कम प्रत्यास्थ होता है, उसके बाद काँच, ताँबा और फिर इस्पात आता है, जो सबसे अधिक प्रत्यास्थ है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न पदार्थों के प्रत्यास्थता गुणांकों के तुलनात्मक मानों को याद रखना सहायक होता है। उच्च यंग-गुणांक वाले पदार्थ अधिक कठोर या अधिक प्रत्यास्थ माने जाते हैं।
Question 8. किसी तार को खींचने में कार्य क्यों करना पड़ता है? इस कार्य का क्या होता है?
Answer: उत्तर- तार को खींचने में अन्तरा-परमाणुक बलों के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। यह कार्य खिंचे तार में प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है।
In simple words: तार को खींचने के लिए उसके परमाणुओं के बीच के आकर्षक बलों के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। यह कार्य तार के अंदर प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के रूप में जमा हो जाता है, जिसे तार छोड़ने पर पुनः प्राप्त किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: कार्य-ऊर्जा प्रमेय को प्रत्यास्थता के संदर्भ में लागू करें। किया गया कार्य आंतरिक आणविक बलों के खिलाफ होता है और यह तार की आंतरिक प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है।
Question 9. एक तार की लम्बाई काटकर आधी कर दी जाती है। (i) दिए गए भार के अन्तर्गत इसकी लम्बाई में वृद्धि पर क्या प्रभाव पड़ेगा? (ii) अधिकतम भार पर, जो वह वहन करती है, क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: उत्तर- (i) लम्बाई में वृद्धि आधी रह जायेगी, (ii) कोई प्रभाव नहीं, क्योंकि विकृति \(\Delta L/L\) उतनी ही रहेगी।
In simple words: यदि तार की लम्बाई आधी कर दी जाती है, तो समान भार के लिए उसकी लम्बाई में वृद्धि भी आधी हो जाएगी। हालाँकि, तार द्वारा वहन किया जा सकने वाला अधिकतम भार नहीं बदलेगा, क्योंकि यह पदार्थ के भंजक प्रतिबल पर निर्भर करता है, न कि लम्बाई पर।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि यंग-गुणांक \((Y = \frac{F/A}{\Delta L/L})\) के सूत्र में, \(\Delta L\) सीधे \(L\) के समानुपाती होता है यदि \(F, A, Y\) नियत हों। अधिकतम भार तार के अनुप्रस्थ-काट के क्षेत्रफल पर निर्भर करता है, न कि लम्बाई पर।
Question 10. यदि किसी तार के लिए ब्रेकिंग बल \(F\) हो, तो (i) इसी आकार के दो समान्तर तारों के लिए तथा (ii) इस तार से दोगुने मोटे तार के लिए ब्रेकिंग बल क्या होंगे?
Answer: उत्तर- (i) \(2F\) क्योंकि कुल परिच्छेद-क्षेत्रफल दोगुना होगा । (ii) \(4F\) क्योंकि दोगुने मोटे तार का परिच्छेद-क्षेत्रफल चार गुना होगा।
In simple words: ब्रेकिंग बल सीधे तार के अनुप्रस्थ-काट के क्षेत्रफल के समानुपाती होता है। इसलिए, दो तारों का उपयोग करने पर कुल ब्रेकिंग बल दोगुना हो जाता है, और दोगुने व्यास वाले तार का उपयोग करने पर ब्रेकिंग बल चार गुना हो जाता है।
🎯 Exam Tip: ब्रेकिंग बल (या भंजक बल) तार के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के सीधे समानुपाती होता है। व्यास को दोगुना करने पर क्षेत्रफल चार गुना हो जाता है (\(A = \pi r^2\)), इसलिए ब्रेकिंग बल भी चार गुना हो जाता है।
Question 11. इस्पात तथा ताँबे की समान आकारों की स्प्रिंगों को समान वृद्धि तक खींचा जाता है। किस पर अधिक कार्य करना पड़ेगा?
Answer: उत्तर- इस्पात का यंग-प्रत्यास्थता गुणांक (Y) ताँबे की तुलना में अधिक होता है। अतः यदि स्प्रिंग समान आकार की है (A, L बराबर हैं), तो बराबर-बराबर खींचने (वृद्धि \(x\)) के लिए इस्पात की स्प्रिंग पर अधिक कार्य करना पड़ेगा। चूंकि इस्पात अधिक प्रत्यास्थ है।
In simple words: इस्पात का यंग-गुणांक ताँबे से अधिक होता है, जिसका अर्थ है कि इस्पात ताँबे की तुलना में अधिक कठोर होता है। इसलिए, समान वृद्धि के लिए इस्पात की स्प्रिंग को खींचने में अधिक कार्य करना पड़ेगा, क्योंकि उसे अधिक बल की आवश्यकता होगी।
🎯 Exam Tip: तार को खींचने में किया गया कार्य \(\frac{1}{2} F \Delta L\) होता है। चूंकि \(F = \frac{YA}{L} \Delta L\), कार्य \(= \frac{1}{2} \frac{YA}{L} (\Delta L)^2\) के समानुपाती होता है। इसलिए, उच्च यंग-गुणांक वाले पदार्थ के लिए अधिक कार्य की आवश्यकता होगी।
Question 12. किसी धातु के परमाणुओं के बीच की औसत दूरी 30 Å है। यदि धातु का यंग-प्रत्यास्थता गुणांक \(1.8 \times 10^{11}\) न्यूटन/मीटर² हो, तो उसका अन्तरा-परमाणुक बल-नियतांक ज्ञात कीजिए।
Answer: हल- \(k = 1.8 \times 10^{11} \times 3.0 \times 10^{-10} = 54\) न्यूटन/मी
In simple words: इस प्रश्न में, हमने धातु के यंग-प्रत्यास्थता गुणांक और परमाणुओं के बीच की औसत दूरी का उपयोग करके अन्तरा-परमाणुक बल-नियतांक की गणना की। यह नियतांक परमाणुओं के बीच के बंधनों की कठोरता को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: अन्तरा-परमाणुक बल-नियतांक \(k\) का संबंध यंग-गुणांक \(Y\) और परमाणुओं के बीच की औसत दूरी \(r_0\) से \(k = Y r_0\) द्वारा दिया जाता है। इकाइयों (Å से m) को परिवर्तित करना महत्वपूर्ण है।
Question 13. 1 वर्ग सेमी अनुप्रस्थ परिच्छेद के प्रत्यास्थ तार से 1.0 किग्रा द्रव्यमान का पिण्ड लटकाने पर तार में उत्पन्न प्रतिबल का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: हल- तार का क्षेत्रफल \(A = 1 \text{ वर्ग सेमी} = 1 \times 10^{-4} \text{ वर्ग मी}\), द्रव्यमान \(m = 1.0 \text{ किग्रा}\) । प्रतिबल \( = \frac{F}{A} = \frac{mg}{A} = \frac{1.0 \text{ किग्रा} \times 9.8 \text{ मी/से}^2}{1 \times 10^{-4} \text{ मी}^2} = 9.8 \times 10^4 \text{ न्यूटन/मी}^2\)
In simple words: इस प्रश्न में, हमें तार पर लटके 1.0 किग्रा द्रव्यमान के कारण उत्पन्न प्रतिबल की गणना करनी है। प्रतिबल बल को अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल से विभाजित करके प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिबल की गणना के लिए, लगाए गए बल (द्रव्यमान \( \times \) गुरुत्वाकर्षण त्वरण) और तार के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल को सही ढंग से पहचानें। क्षेत्रफल की इकाइयों (वर्ग सेमी से वर्ग मी) को परिवर्तित करना न भूलें।
Question 14. एक तार में \(2 \times 10^{-4}\) रेखीय विकृति उत्पन्न करने पर उसमें संचित एकांक आयतन की ऊर्जा ज्ञात कीजिए। तार के पदार्थ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक \(12 \times 10^{11}\) न्यूटन /मी² हैं।
Answer: हल- तार में विकृति = \(2 \times 10^{-4}\) तथा तार के पदार्थ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक = \(1.2 \times 10^{11}\) न्यूटन/मी² तार में संचित एकांक आयतन की ऊर्जा \(u = \frac{1}{2} \times \text{प्रत्यास्थता गुणांक} \times (\text{विकृति})^2\) \( = \frac{1}{2} \times 1.2 \times 10^{11} \times (2 \times 10^{-4})^2\) \( = \frac{1}{2} \times 1.2 \times 10^{11} \times 4 \times 10^{-8}\) \( = 2.4 \times 10^3\) जूल/मी³
In simple words: इस प्रश्न में, हमने तार में उत्पन्न रेखीय विकृति और तार के पदार्थ के यंग-प्रत्यास्थता गुणांक का उपयोग करके उसमें संचित एकांक आयतन की स्थितिज ऊर्जा की गणना की। यह ऊर्जा तार को विकृत करने में किए गए कार्य के बराबर होती है।
🎯 Exam Tip: एकांक आयतन में संचित ऊर्जा का सूत्र \(\frac{1}{2} Y (\text{विकृति})^2\) होता है। यंग-गुणांक और विकृति के दिए गए मानों को सही ढंग से सूत्र में रखें और गणना करें। ऊर्जा की इकाई जूल/मी³ होती है।
Question 15. L लम्बाई तथा A अनुप्रस्थ-काट के क्षेत्रफल का एक तार । लम्बाई से खींचा जाता है। यदि तार के पदार्थ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक Y है तो तार का बल नियतांक क्या है?
Answer: उत्तर- तार को \(\Delta L\) लम्बाई में खींचने के लिए आवश्यक बल \(F = YA \frac{\Delta L}{L}\) बल नियतांक \(k = \frac{F}{\Delta L} = \frac{YA}{L}\)
In simple words: तार का बल नियतांक वह बल होता है जो तार को इकाई लम्बाई से खींचने के लिए आवश्यक होता है। यह तार के यंग-प्रत्यास्थता गुणांक, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल और उसकी मूल लम्बाई पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: बल नियतांक \(k\) को हुक के नियम \(F = k\Delta L\) से परिभाषित किया जाता है। यंग-गुणांक के सूत्र \(Y = \frac{F/A}{\Delta L/L}\) से \(F = \frac{YA}{L}\Delta L\) व्युत्पन्न करके \(k = \frac{YA}{L}\) प्राप्त करें।
Question 16. सम्पीडयता से क्या तात्पर्य है?
Answer: उत्तर- किसी पदार्थ के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक के व्युत्क्रम अर्थात् \(1/B\) को उस पदार्थ की सम्पीडयता कहते हैं। इसे \(K\) से प्रदर्शित करते हैं।
In simple words: सम्पीडयता वह गुण है जो यह दर्शाता है कि कोई पदार्थ दाब में वृद्धि के प्रति कितना संवेदनशील है, यानी दाब बढ़ाने पर उसका आयतन कितना कम होगा। यह आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का व्युत्क्रम है।
🎯 Exam Tip: सम्पीडयता को आयतन प्रत्यास्थता गुणांक के व्युत्क्रम के रूप में परिभाषित करें। यह दर्शाता है कि कोई पदार्थ कितना आसानी से संपीड़ित हो सकता है।
Question 17. ठोस, द्रव तथा गैस में से किसकी सम्पीडयता सबसे अधिक होगी?
Answer: उत्तर- गैस की।
In simple words: गैसों में अंतर-परमाणु बल बहुत कमजोर होते हैं और उनके अणु एक-दूसरे से बहुत दूर होते हैं, जिससे उन्हें आसानी से संपीड़ित किया जा सकता है। इसलिए, गैसों की सम्पीडयता ठोस और द्रवों की तुलना में सबसे अधिक होती है।
🎯 Exam Tip: पदार्थ की अवस्था और उसके अणुओं के बीच की दूरी/बल को सम्पीडयता से जोड़ें। गैसों में अंतर-आणविक दूरी अधिक होने के कारण वे आसानी से संपीड़ित हो जाती हैं।
Question 18. एक छड़ में अनुदैर्ध्य एवं अनुप्रस्थ विकृति क्रमशः \(5 \times 10^{-3}\) एवं \(2 \times 10^{-3}\) हैं। छड़ का प्वासों अनुपात (\(\nu\)) ज्ञात कीजिए ।
Answer: हल- दिया है, छड़ की अनुदैर्ध्य विकृति = \(5 \times 10^{-3}\) तथा छड़ की अनुप्रस्थ विकृति = \(2 \times 10^{-3}\) प्वासों अनुपात \(\nu = \frac{\text{अनुप्रस्थ विकृति}}{\text{अनुदैर्ध्य विकृति}} = \frac{2 \times 10^{-3}}{5 \times 10^{-3}} = 0.4\)
In simple words: पॉयसन अनुपात अनुप्रस्थ विकृति और अनुदैर्ध्य विकृति का अनुपात होता है। इस प्रश्न में, हमने दिए गए विकृति मानों का उपयोग करके प्वासों अनुपात की गणना की।
🎯 Exam Tip: पॉयसन अनुपात के सूत्र \(\nu = \frac{\text{अनुप्रस्थ विकृति}}{\text{अनुदैर्ध्य विकृति}}\) को याद रखें। यह एक आयामहीन राशि है और आमतौर पर सकारात्मक होती है।
Question 19. \(30 \times 10^{-3}\) मी³ आयतन के तरल पर \(6 \times 10^6\) न्यूटन/मी² का दाब बढ़ाने पर उसमें \(5 \times 10^{-7}\) मी³ आयतन की कमी हो जाती है। तरल का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक ज्ञात कीजिए ।
Answer: हल- प्रारम्भिक आयतन \(V = 30 \times 10^{-3}\) मी³ दाब में वृद्धि \(\Delta p = 6 \times 10^6\) न्यूटन/मी² आयतन में कमी \(\Delta V = -5 \times 10^{-7}\) मी³ (ऋणात्मक चिह्न कमी को दर्शाता है) आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \(B = \frac{-\Delta p}{\Delta V/V} = \frac{-6 \times 10^6}{-5 \times 10^{-7} / (30 \times 10^{-3})} = \frac{6 \times 10^6 \times 30 \times 10^{-3}}{5 \times 10^{-7}} = 3.6 \times 10^{11} \text{ Pa}\)
In simple words: इस प्रश्न में, हमने दाब में वृद्धि और आयतन में कमी का उपयोग करके तरल के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक की गणना की। आयतन प्रत्यास्थता गुणांक पदार्थ के असंपीड्य स्वभाव को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \(B = \frac{-\Delta p}{\Delta V/V}\) के सूत्र का सही ढंग से उपयोग करें। \(\Delta V\) के लिए ऋणात्मक चिह्न का उपयोग करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आयतन में कमी को दर्शाता है।
Question 20. स्प्रिंग इस्पात की बनाई जाती है, ताँबे की क्यों नहीं?
Answer: उत्तर- समान विरूपक बल लगाने पर इस्पात की स्प्रिंग ताँबे की स्प्रिंग की तुलना में कम खिंचती है। क्योंकि इस्पात का यंग-प्रत्यास्थता गुणांक अधिक होता है। इसके अतिरिक्त, विरूपक बल हटा लेने पर इस्पात की स्प्रिंग ताँबे की स्प्रिंग की तुलना में शीघ्र अपनी पूर्व अवस्था प्राप्त कर लेती है।
In simple words: इस्पात का उपयोग स्प्रिंग बनाने के लिए किया जाता है क्योंकि इसका यंग-प्रत्यास्थता गुणांक ताँबे की तुलना में अधिक होता है, जिससे यह कम विकृत होता है और विरूपण बल हटाने पर अपनी मूल अवस्था में शीघ्रता से लौट आता है।
🎯 Exam Tip: स्प्रिंग जैसे अनुप्रयोगों के लिए पदार्थ का चुनाव उसके प्रत्यास्थ गुणों (विशेषकर यंग-गुणांक) पर निर्भर करता है। उच्च यंग-गुणांक वाले पदार्थ कम विकृत होते हैं और अधिक प्रभावी ढंग से ऊर्जा संग्रहित करते हैं।
Question 21. रेल की पटरी I-आकार की क्यों बनाई जाती है?
Answer: उत्तर- रेल की पटरी के ऊपर तथा नीचे के तल अधिक विकृत (strained) होते हैं। अतः उनके क्षेत्रफल अधिक होने चाहिए, जिससे कि उन पर दाब अथवा अभिलम्ब प्रतिबल (F/A) कम लगे। बीच के भाग पर बहुत कम विकृति होती है। अतः वे कम चौड़ाई के बनाये जाते हैं क्योंकि इससे लोहे की बचत होती है।
In simple words: रेल की पटरी को I-आकार में इसलिए बनाया जाता है ताकि यह अधिकतम तनाव और संपीडन को ऊपरी और निचले फलकों पर केंद्रित कर सके, जबकि बीच के भाग में कम सामग्री का उपयोग करके लोहे की बचत हो सके। यह I-सेक्शन को मजबूत और कुशल बनाता है।
🎯 Exam Tip: I-आकार के बीम (या रेल की पटरी) के संरचनात्मक लाभों पर ध्यान दें। यह डिजाइन सामग्री का कुशलतापूर्वक उपयोग करता है, अधिकतम बल सहन करने वाले क्षेत्रों में अधिक सामग्री प्रदान करता है और कम बल वाले क्षेत्रों में सामग्री बचाता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. तन्य पदार्थ एवं भंगुर पदार्थ से क्या तात्पर्य है?
Answer: उत्तर- तन्य पदार्थ (Ductile materials) – ये वे पदार्थ होते हैं जिनमें प्रत्यास्थता की सीमा के आगे प्लास्टिक क्षेत्र बड़ा होता है। ऐसे पदार्थों के प्रतिबल-विकृति वक्र में भंजक बिन्दु प्रत्यास्थता की सीमा के बिन्दु से काफी दूर होता है। इनके तार खींचे जा सकते हैं। इस प्रकार के पदार्थों का प्रयोग स्प्रिंग तथा चादर (sheet) बनाने में किया जाता है। उदाहरणार्थ-ताँबा, चाँदी, लोहा, ऐलुमिनियम आदि । भंगुर पदार्थ (Brittle materials)–ये वे पदार्थ हैं जिनके लिए प्रत्यास्थता की सीमा से परे प्लास्टिक क्षेत्र बहुत छोटा है। ऐसे पदार्थों के प्रतिबल-विकृति वक्र में भंजक बिन्दु प्रत्यास्थता की सीमा बिन्दु के निकट होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र भंगुर पदार्थ के लिए प्रतिबल-विकृति वक्र को दर्शाता है। इसमें प्लास्टिक क्षेत्र बहुत छोटा होता है, जिसका अर्थ है कि पदार्थ प्रत्यास्थ सीमा के तुरंत बाद टूट जाता है, बहुत कम स्थायी विकृति प्रदर्शित करता है। उदाहरणार्थ-काँच भंगुर पदार्थ है। इनके लिए प्रतिबल-विकृति वक्र संलग्न चित्र की भाँति होता है।
In simple words: तन्य पदार्थ वे होते हैं जिन्हें खींचा जा सकता है और जो टूटने से पहले काफी स्थायी विकृति (प्लास्टिक विरूपण) दिखाते हैं, जैसे ताँबा। भंगुर पदार्थ वे होते हैं जो बहुत कम या बिना किसी स्थायी विकृति के टूट जाते हैं, जैसे काँच।
🎯 Exam Tip: तन्यता और भंगुरता को प्रतिबल-विकृति वक्र में प्लास्टिक क्षेत्र की लम्बाई के आधार पर परिभाषित करें। तन्य पदार्थों में लंबा प्लास्टिक क्षेत्र होता है, जबकि भंगुर पदार्थों में यह क्षेत्र बहुत छोटा होता है। उदाहरणों को याद रखें।
Question 2. पॉयसन अनुपात क्या है? आयतन विकृति, पाश्विक विकृति तथा पॉयसन अनुपात में । सम्बन्ध लिखिए।
Answer: उत्तर- पॉयसन अनुपात-पाश्विक विकृति तथा अनुदैर्ध्य विकृति के अनुपात को वस्तु के पदार्थ का पॉयसन अनुपात कहते हैं। इसे \(\nu\) से प्रदर्शित करते हैं। इसका कोई मात्रक नहीं होता इसीलिए यह एक विमाहीन राशि है। आयतन विकृति, पाश्विक विकृति तथा पॉयसन अनुपात में सम्बन्ध (जहाँ \(A\) = छड़ की अनुप्रस्थ-काट का क्षेत्रफल)
In simple words: पॉयसन अनुपात एक आयामहीन मान है जो पाश्विक विकृति (चौड़ाई में परिवर्तन) का अनुदैर्ध्य विकृति (लम्बाई में परिवर्तन) से अनुपात दर्शाता है। यह पदार्थ के आकार में परिवर्तन को समझने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: पॉयसन अनुपात की परिभाषा को सटीक रूप से याद करें: यह अनुदैर्ध्य विकृति के कारण होने वाली पाश्विक विकृति का अनुपात है। इसकी विमाहीन प्रकृति को भी बताएं। आयतन विकृति और पॉयसन अनुपात के बीच के संबंध को भी ध्यान में रखें।
Question 3. हुक का प्रत्यास्थता सम्बन्धी नियम लिखिए।
Answer: उत्तर- सन् 1679 में ब्रिटेन के वैज्ञानिक रॉबर्ट हुक ने प्रयोगों के आधार पर किसी प्रत्यास्थ वस्तु पर लगाये गये विरूपक बल एवं उसके कारण उत्पन्न परिवर्तन में सम्बन्ध स्थापित किया। इसे हुक का नियम कहते हैं जिसका कथन (statement) निम्न प्रकार है “लघु विकृतियों की सीमा के भीतर, पदार्थ पर कार्यरत् प्रतिबल उसमें उत्पन्न विकृति के अनुक्रमानुपाती होता है।” अतः प्रतिबल \(\propto\) विकृति अथवा प्रतिबल \( = E \times \) विकृति
In simple words: हुक का नियम कहता है कि प्रत्यास्थ सीमा के भीतर, किसी पदार्थ में उत्पन्न प्रतिबल उस पदार्थ में उत्पन्न विकृति के सीधे समानुपाती होता है। इसका मतलब है कि पदार्थ जितना अधिक विकृत होता है, उतना ही अधिक बल उसे उसकी मूल अवस्था में लाने के लिए लगाना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: हुक के नियम को संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से बताएं, "प्रत्यास्थ सीमा के भीतर" वाक्यांश पर जोर दें। सूत्र "प्रतिबल = \(E \times\) विकृति" को अवश्य शामिल करें, जहाँ \(E\) प्रत्यास्थता गुणांक है।
Question 4. यंग-प्रत्यास्थता गुणांक की परिभाषा लिखिए तथा इसका मात्रक व विमा भी लिखिए।
Answer: उत्तर- यंग प्रत्यास्थता गुणांक (Young's modulus of elasticity)प्रत्यास्थता की सीमा के भीतर अनुदैर्ध्य प्रतिबल और अनुदैर्ध्य विकृति के अनुपात को वस्तु के पदार्थ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक कहते हैं। इसे \(Y\) से प्रदर्शित करते हैं। यदि \(L\) लम्बाई तथा \(A\) अनुप्रस्थ-काट के क्षेत्रफल वाले तार पर लम्बाई की दिशा में \(F\) बल लगाने से उसकी लम्बाई में वृद्धि \(\Delta L\) हो, तो अनुदैर्ध्य प्रतिबल \( = F/A\) तथा अनुदैर्ध्य विकृति \( = \Delta L/L\) यंग-प्रत्यास्थता गुणांक \(Y = \frac{F/A}{\Delta L/L}\) यदि \(r\) त्रिज्या अर्थात् \(A = \pi r^2\) के किसी तार को एक सिरे पर दृढ़ आधार से बाँधकर, दूसरे सिरे से भार \(Mg\) लटकाने पर उसकी लम्बाई में वृद्धि \(\Delta L\) हो, तो प्रतिबल \( = Mg/\pi r^2\) तथा विकृति \( = \Delta L/L\) (जहाँ \(r\) तार की त्रिज्या है ।) इसका मात्रक न्यूटन/मीटर² तथा विमीय सूत्र \([ML^{-1}T^{-2}]\) है।
In simple words: यंग-प्रत्यास्थता गुणांक, प्रत्यास्थ सीमा के भीतर अनुदैर्ध्य प्रतिबल और अनुदैर्ध्य विकृति का अनुपात होता है। यह पदार्थ की लम्बाई में परिवर्तन के प्रति उसके प्रतिरोध को मापता है। इसका मात्रक न्यूटन/मीटर² और विमीय सूत्र \([ML^{-1}T^{-2}]\) है।
🎯 Exam Tip: यंग-गुणांक की परिभाषा, सूत्र, मात्रक और विमीय सूत्र को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें। यह सुनिश्चित करें कि आप अनुदैर्ध्य प्रतिबल और विकृति के बीच के संबंध को सही ढंग से परिभाषित करते हैं।
Question 5. रबड़ और स्टील में कौन अधिक प्रत्यास्थ है? गणितीय आधार पर समझाइए।
Answer: उत्तर- रबड़ की अपेक्षा स्टील अधिक प्रत्यास्थ है-प्रत्यास्थता पदार्थ का वह गुण है जिसके कारण वस्तु आरोपित विरूपक बल द्वारा उत्पन्न आकार अथवा रूप के परिवर्तन का विरोध करती है। अतः हम कह सकते हैं। कि किसी प्रत्यास्थ वस्तु के आकार अथवा रूप में एक नियत परिवर्तन उत्पन्न करने के लिए जितना अधिक बाह्य बल लगाना होगा, वह वस्तु उतनी ही अधिक प्रत्यास्थ होगी। अतः रबड़ तथा स्टील में कौन अधिक प्रत्यास्थ है, इस बात को उपर्युक्त आधार पर निम्न प्रकार से ज्ञात कर सकते हैं माना स्टील व रबड़ के दो तार समान लम्बाई \(L\) व समान त्रिज्या \(r\) के हैं। माना इन पर \(Mg\) भार लटकाने से स्टील के तार की लम्बाई में वृद्धि \(\Delta L_s\); तथा रबड़ की डोरी की लम्बाई में वृद्धि \(\Delta L_R\), है। यदि स्टील व रबड़ के यंग प्रत्यास्थता गुणांक क्रमशः \(Y_S\) व \(Y_R\), हैं; तो चूँकि रबड़ का तार स्टील के तार की अपेक्षा समान भार के लिए लम्बाई में अधिक खिंचता है, अर्थात् \(\Delta L_R > \Delta L_S\), इसलिए \(Y_S > Y_R\) अर्थात् रबड़ की अपेक्षा स्टील अधिक प्रत्यास्थ है क्योंकि इसके लिए प्रत्यास्थता गुणांक \(Y_S\), का मान अधिक है।
In simple words: स्टील रबड़ की तुलना में अधिक प्रत्यास्थ है क्योंकि समान बल लगाने पर स्टील में कम विकृति उत्पन्न होती है, जिसका अर्थ है कि उसका यंग-प्रत्यास्थता गुणांक रबड़ से अधिक है। प्रत्यास्थता उस गुण को संदर्भित करती है जिससे पदार्थ अपनी मूल अवस्था में लौट आता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्यास्थता की अवधारणा को कठोरता से भ्रमित न करें। एक पदार्थ अधिक प्रत्यास्थ होता है यदि वह समान विकृति उत्पन्न करने के लिए अधिक प्रतिबल का सामना करता है, यानी उसका यंग-गुणांक अधिक होता है। तुलना के लिए यंग-गुणांक के सूत्र का उपयोग करें।
Question 6. आयतन प्रत्यास्थता-गुणांक किसे कहते हैं?
Answer: उत्तर- आयतनात्मैक प्रत्यास्थता गुणांक (Bulk modulus of elasticity)-प्रत्यास्थता की सीमा के भीतर, अभिलम्ब प्रतिबल तथा आयतन विकृति के अनुपात को वस्तु के पदार्थ का आयतनात्मक प्रत्यास्थता गुणांक कहते हैं। इसे \(B\) से प्रदर्शित करते हैं। माना किसी वस्तु पर \(F\) अभिलम्ब बल लगाकर उसके आयतन में \(\Delta V\) का परिवर्तन किया जाता है। माना वस्तु का प्रारम्भिक आयतन \(V\) तथा अनुप्रस्थ-काट का क्षेत्रफल \(A\) है, तो वस्तु पर लगने वला प्रतिबल \(F/A\) होगा जोकि वस्तु पर लगाया गया दाब है। अतः आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \(B = \frac{-\text{दाब परिवर्तन}}{\text{आयतन विकृति}} = \frac{-\Delta p}{\Delta V/V}\)
In simple words: आयतन प्रत्यास्थता गुणांक किसी पदार्थ के आयतन में परिवर्तन के प्रति उसके प्रतिरोध को मापता है। यह पदार्थ पर लगाए गए दाब परिवर्तन और उसके परिणामस्वरूप आयतन में हुए भिन्नात्मक परिवर्तन का अनुपात होता है।
🎯 Exam Tip: आयतन प्रत्यास्थता गुणांक की परिभाषा को सही ढंग से याद करें। दाब परिवर्तन और आयतन विकृति का अनुपात, जिसमें ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि दाब बढ़ने पर आयतन घटता है।
Question 7. किसी पदार्थ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक \(25 \times 10^{12}\) न्यूटन /मी² है। इस पदार्थ के 1 मीटर लम्बे तार की लम्बाई में 0.1% वृद्धि करने के लिये कितना बल लगाना होगा? तार कापरिच्छेद क्षेत्रफल 1 मिमी² है।
Answer: हल- दिया है, \(Y = 25 \times 10^{12}\) न्यूटन/मी², \(L = 1\) मी, \(\Delta L = 0.001 \times L = 0.001 \times 1 \text{ मी} = 1 \times 10^{-3} \text{ मी}\), (चूंकि 0.1% वृद्धि \(= 0.001 \times L\)) \(A = 1 \text{ मिमी}^2 = 1 \times 10^{-6} \text{ मी}^2\) । यंग-गुणांक \(Y = \frac{F/A}{\Delta L/L}\) से, बल \(F = Y A \frac{\Delta L}{L}\) \(F = 25 \times 10^{12} \times 1 \times 10^{-6} \times \frac{1 \times 10^{-3}}{1}\) \(F = 25 \times 10^3 \text{ न्यूटन}\)
In simple words: इस प्रश्न में, हमने यंग-प्रत्यास्थता गुणांक, तार की लम्बाई और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल का उपयोग करके तार में 0.1% वृद्धि करने के लिए आवश्यक बल की गणना की।
🎯 Exam Tip: यंग-गुणांक सूत्र \(Y = \frac{F/A}{\Delta L/L}\) का उपयोग करके \(F\) के लिए हल करें। लम्बाई में प्रतिशत वृद्धि को भिन्नात्मक विकृति में बदलना और सभी इकाइयों को SI प्रणाली में परिवर्तित करना न भूलें।
Question 8. धातु की 2 मिमी एकसमान अनुप्रस्थ-परिच्छेद की एक छड़ को 0°C से 20°C तक गर्म किया जाता है। छड़ का रेखीय प्रसार गुणांक \(12 \times 10^{-6}\) प्रति °c है। इसका यंग प्रत्यास्थता गुणांक \(10^{11}\) न्यूटन मीटर 2 है। छड़ के प्रति एकांक आयतन में संचित ऊर्जा की गणना कीजिए ।
Answer: हल- ताप में परिवर्तन \(\Delta T = 20^\circ \text{C} - 0^\circ \text{C} = 20^\circ \text{C}\) रेखीय प्रसार गुणांक \(\alpha = 12 \times 10^{-6}\) प्रति °C यंग प्रत्यास्थता गुणांक \(Y = 10^{11}\) न्यूटन/मी² विकृति \(\epsilon = \alpha \Delta T = 12 \times 10^{-6} \times 20 = 2.4 \times 10^{-4}\) एकांक आयतन में संचित ऊर्जा \(U = \frac{1}{2} Y \epsilon^2\) \(U = \frac{1}{2} \times 10^{11} \times (2.4 \times 10^{-4})^2\) \(U = \frac{1}{2} \times 10^{11} \times 5.76 \times 10^{-8} = 2.88 \times 10^3 \text{ जूल/मी}^3\)
In simple words: इस प्रश्न में, हमने छड़ के एकांक आयतन में संचित ऊर्जा की गणना की जब उसे गर्म किया जाता है। ताप में वृद्धि के कारण छड़ में विकृति उत्पन्न होती है, और यह विकृति Young's modulus का उपयोग करके ऊर्जा में परिवर्तित होती है।
🎯 Exam Tip: ताप परिवर्तन के कारण विकृति की गणना \(\Delta L/L = \alpha \Delta T\) से करें। फिर एकांक आयतन में संचित ऊर्जा के सूत्र \(U = \frac{1}{2} Y (\text{विकृति})^2\) का उपयोग करें। सभी इकाइयों को SI प्रणाली में रखें।
Question 9. धातु के एक तार की त्रिज्या 0.35 मिमी है। उसे तार की लम्बाई में 0.2% की वृद्धि करने के लिए कितने बल की आवश्यकता होगी? (\(Y = 9.0 \times 10^{10}\) न्यूटन/मी²)
Answer: हल- तार की त्रिज्या \(r = 0.35 \text{ मिमी} = 0.35 \times 10^{-3} \text{ मी}\) अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \(A = \pi r^2 = 3.14 \times (0.35 \times 10^{-3})^2 \text{ मी}^2\) लम्बाई में 0.2% की वृद्धि का अर्थ है विकृति \(\frac{\Delta L}{L} = 0.002\) यंग प्रत्यास्थता गुणांक \(Y = 9.0 \times 10^{10}\) न्यूटन/मी² बल \(F = Y A \frac{\Delta L}{L}\) \(F = 9.0 \times 10^{10} \times 3.14 \times (0.35 \times 10^{-3})^2 \times 0.002\) \(F = 9.0 \times 10^{10} \times 3.14 \times 0.1225 \times 10^{-6} \times 0.002\) \(F \approx 6.9 \times 10^1 \text{ न्यूटन} \approx 69 \text{ न्यूटन}\)
In simple words: इस प्रश्न में, हमने तार की त्रिज्या, यंग-प्रत्यास्थता गुणांक और लम्बाई में प्रतिशत वृद्धि का उपयोग करके आवश्यक बल की गणना की। यह बल तार को वांछित विकृति देने के लिए आवश्यक होता है।
🎯 Exam Tip: यंग-गुणांक के सूत्र \(F = Y A \frac{\Delta L}{L}\) का उपयोग करें। तार की त्रिज्या से क्षेत्रफल की गणना करते समय इकाइयों (मिमी से मी) का सही रूपांतरण सुनिश्चित करें। प्रतिशत वृद्धि को भिन्नात्मक विकृति में बदलना न भूलें।
Question 10. 1.0 मिमी² के एकसमान अनुप्रस्थ-परिच्छेद के तार को 50°C तक गर्म करके दृढतापूर्वक सिरों पर बाँधकर ताना गया है। यदि तार का ताप घटकर 30°C हो जाये तो तार के तनाव में परिवर्तन ज्ञात कीजिए। स्टील कारेखीय प्रसार गुणांक \(1.1 \times 10^{-5}\) प्रति °C तथा यंग प्रत्यास्थता गुणांक \(2.0 \times 10^{11}\) न्यूटन/मी² है।
Answer: हल- तार के ताप में \(\Delta t\) की कमी होने पर, तार में उत्पन्न तनाव बल \(F = YA \alpha \Delta t\) जहाँ \(Y\) तार के पदार्थ का यंग-प्रत्यास्थता गुणांक है, \(A\) तार का अनुप्रस्थ-परिच्छेद क्षेत्रफल है तथा \(\alpha\) तार के पदार्थ का अनुदैर्ध्य प्रसार गुणांक है। प्रश्नानुसार, \(Y = 2.0 \times 10^{11}\) न्यूटन /मी², \(A = 1.0 \text{ मिमी}^2 = 1.0 \times 10^{-6} \text{ मी}^2\), \(\alpha = 1.1 \times 10^{-5}\) प्रति °C, \(\Delta t = (50-30)^\circ \text{C} = 20^\circ \text{C}\) \(F = (2.0 \times 10^{11}) \times (1.0 \times 10^{-6}) \times (1.1 \times 10^{-5}) \times 20 = 44\) न्यूटन
In simple words: इस प्रश्न में, हमने एक तार के ताप में कमी के कारण उत्पन्न तनाव में परिवर्तन की गणना की। तार को गर्म करके कसने और फिर ठंडा करने पर उसमें तनाव उत्पन्न होता है, जिसकी गणना यंग-प्रत्यास्थता गुणांक, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल, रेखीय प्रसार गुणांक और ताप में परिवर्तन का उपयोग करके की जाती है।
🎯 Exam Tip: ताप में परिवर्तन के कारण उत्पन्न तनाव के लिए सूत्र \(F = YA \alpha \Delta T\) को याद रखें। सभी इकाइयों (मिमी² से मी², °C) को सही ढंग से परिवर्तित करना सुनिश्चित करें।
Question 11. एक तार की लम्बाई 1 मी तथा त्रिज्या 2 मिमी है। इससे 2 किग्रा का भार लटकाने पर इसकी लम्बाई में 1 मिमी की वृद्धि हो जाती है। उसी पदार्थ के दूसरे तार, जिसकी लम्बाई 2 मी तथा त्रिज्या 1 मिमी है, पर वही भार लटकाया जाए, तो उसकी लम्बाई में वृद्धि निकालिए।
Answer: हल- यदि L लम्बाई व r त्रिज्या के तार पर Mg भार लटकाने से तार की लम्बाई में वृद्धि \( \Delta L \) हो, तब यंग प्रत्यास्थता गुणांक \( Y = \frac{F/A}{\Delta L/L} = \frac{F \cdot L}{A \cdot \Delta L} \).
यहाँ F और Y दोनों तारों के लिए समान हैं।
तो, \( \Delta L = \frac{F \cdot L}{A \cdot Y} = \frac{F \cdot L}{(\pi r^2) \cdot Y} \).
चूंकि F और Y नियत हैं, अतः \( \Delta L \propto \frac{L}{r^2} \).
पहले तार के लिए: \( L_1 = 1 \) मी, \( r_1 = 2 \) मिमी, \( \Delta L_1 = 1 \) मिमी।
दूसरे तार के लिए: \( L_2 = 2 \) मी, \( r_2 = 1 \) मिमी।
अब, \( \frac{\Delta L_2}{\Delta L_1} = \frac{L_2/r_2^2}{L_1/r_1^2} = \frac{L_2}{r_2^2} \cdot \frac{r_1^2}{L_1} \).
\( \Delta L_2 = \Delta L_1 \cdot \frac{L_2}{r_2^2} \cdot \frac{r_1^2}{L_1} = 1 \text{ मिमी} \cdot \frac{2 \text{ मी}}{(1 \text{ मिमी})^2} \cdot \frac{(2 \text{ मिमी})^2}{1 \text{ मी}} \)
\( \Delta L_2 = 1 \cdot \frac{2}{1} \cdot \frac{4}{1} = 8 \text{ मिमी} \).
दूसरे तार की लम्बाई में वृद्धि 8 मिमी होगी।
In simple words: जब दो तारों पर समान भार लटकाया जाता है और वे एक ही पदार्थ के बने होते हैं, तो उनकी लम्बाई में वृद्धि उनकी मूल लम्बाई के सीधे आनुपातिक और त्रिज्या के वर्ग के व्युत्क्रमानुपातिक होती है। इस संबंध का उपयोग करके, हम दूसरे तार की लम्बाई में वृद्धि की गणना कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: यंग प्रत्यास्थता गुणांक के सूत्र \(Y = (FL)/(A\Delta L)\) को याद रखें और समझें कि एक ही पदार्थ और बल के लिए, \( \Delta L \) का संबंध \(L/r^2\) से कैसे बदलता है। इकाई रूपांतरणों पर विशेष ध्यान दें।
Question 12. 0.5 मी लम्बाई तथा 1.0 सेमी\(^2\) परिच्छेद की पीतल की छड़ को लम्बाई की तरफ से 5 किग्रा वजन से दबाया जाता है। छड़ की बढ़ी हुई ऊर्जा की गणना कीजिए। (पीतल का प्रत्यास्थता गुणांक Y = 1.0 x 10\(^{11}\) न्यूटन/मी\(^2\),g = 10 मी/से\(^2\))
Answer: हल-
दिया है:
छड़ की लम्बाई \(L = 0.5\) मी
अनुप्रस्थ परिच्छेद क्षेत्रफल \(A = 1.0 \text{ सेमी}^2 = 1.0 \times 10^{-4} \text{ मी}^2\)
द्रव्यमान \(m = 5\) किग्रा
गुरुत्वाकर्षण त्वरण \(g = 10\) मी/से\(^2\)
पीतल का यंग प्रत्यास्थता गुणांक \(Y = 1.0 \times 10^{11}\) न्यूटन/मी\(^2\)
लटकाया गया बल \(F = mg = 5 \times 10 = 50\) न्यूटन
छड़ की लम्बाई में वृद्धि (या कमी) \( \Delta L = \frac{F \cdot L}{A \cdot Y} = \frac{50 \text{ न्यूटन} \times 0.5 \text{ मी}}{1.0 \times 10^{-4} \text{ मी}^2 \times 1.0 \times 10^{11} \text{ न्यूटन/मी}^2} \)
\( \Delta L = \frac{25}{1.0 \times 10^7} = 25 \times 10^{-7} = 2.5 \times 10^{-6} \) मी
छड़ की बढ़ी हुई ऊर्जा (या संचित प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा) \( U = \frac{1}{2} F \Delta L \)
\( U = \frac{1}{2} \times 50 \text{ न्यूटन} \times 2.5 \times 10^{-6} \text{ मी} \)
\( U = 25 \times 2.5 \times 10^{-6} = 62.5 \times 10^{-6} = 6.25 \times 10^{-5} \) जूल।
In simple words: जब किसी छड़ को दबाया जाता है, तो उसमें प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा संचित होती है। इस ऊर्जा की गणना बल और लम्बाई में परिवर्तन के गुणा के आधे के रूप में की जाती है, जिसमें यंग प्रत्यास्थता गुणांक, छड़ की लम्बाई, और अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल का उपयोग करके लम्बाई में परिवर्तन ज्ञात किया जाता है।
🎯 Exam Tip: संचित ऊर्जा के सूत्र \(U = (1/2) F\Delta L\) को याद रखें, और \( \Delta L \) की गणना के लिए यंग प्रत्यास्थता गुणांक के सूत्र का सही उपयोग करें। इकाइयों को मीटर और न्यूटन में बदलना महत्वपूर्ण है।
Question 13. रबर की एक गेंद को किसी गहरी झील में 100 मी गहराई पर ले जाने से उसके आयतन में 0.2% की कमी हो जाती है। रबर के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक की गणना कीजिए। (दिया गया है, g = 10.0 मी/से\(^2\), जल का घनत्व = 1.0 x 10\(^3\) किग्रा/मी\(^3\))
Answer: हल-
दिया है:
गहराई \(h = 100\) मी
जल का घनत्व \( \rho = 1.0 \times 10^3 \) किग्रा/मी\(^3\)
गुरुत्वाकर्षण त्वरण \(g = 10.0\) मी/से\(^2\)
आयतन में प्रतिशत कमी \( = 0.2\% \)
आयतन विकृति \( \frac{\Delta V}{V} = -0.2\% = -\frac{0.2}{100} = -0.002 \) (ऋणात्मक चिह्न कमी दर्शाता है)
झील की गहराई पर दाब परिवर्तन \( \Delta P = \rho g h \)
\( \Delta P = 1.0 \times 10^3 \text{ किग्रा/मी}^3 \times 10.0 \text{ मी/से}^2 \times 100 \text{ मी} \)
\( \Delta P = 1.0 \times 10^6 \) न्यूटन/मी\(^2\) (या पास्कल)
आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \( B = -\frac{\Delta P}{\Delta V/V} \)
\( B = -\frac{1.0 \times 10^6 \text{ पास्कल}}{-0.002} \)
\( B = \frac{1.0 \times 10^6}{0.002} = \frac{1.0 \times 10^6}{2 \times 10^{-3}} = 0.5 \times 10^9 = 5 \times 10^8 \) पास्कल।
In simple words: किसी द्रव में गहराई के कारण लगने वाले दाब को जल के घनत्व, गुरुत्वाकर्षण त्वरण और गहराई से ज्ञात किया जाता है। आयतन प्रत्यास्थता गुणांक इस दाब परिवर्तन और आयतन में होने वाली भिन्नात्मक कमी के अनुपात से परिभाषित होता है, जो दर्शाता है कि सामग्री कितनी असंपीड्य है।
🎯 Exam Tip: आयतन प्रत्यास्थता गुणांक के सूत्र को \(B = -\Delta P/(\Delta V/V)\) याद रखें और दाब की गणना के लिए \( \Delta P = \rho g h \) का सही उपयोग करें। प्रतिशत कमी को भिन्नात्मक विकृति में बदलना एक सामान्य गलती है जिसे टाला जाना चाहिए।
विस्तृत उत्तंरीय प्रश्न
Question 1. अन्तरा-परमाणु बल नियतांक के लिए सूत्र स्थापित कीजिए।
Answer: उत्तर- अन्तरा-परमाणु बल-नियतांक-हम जानते हैं। कि किसी ठोस में प्रत्येक परमाणु पास वाले परमाणुओं से घिरा होता है। यह अन्तरा-परमाणविक बलों द्वारा परस्पर बँधे होते हैं तथा स्थिर साम्यावस्था में रहते हैं। जब ठोस पर विरूपक बल लगाया जाता है, तो ठोस के परमाणु अपनी साम्य स्थिति से विस्थापित हो जाते हैं। विरूपक बल को हटा लेने पर अन्तरा-परमाणविक बल उन्हें फिर वापस प्रारम्भिक स्थितियों में ले जाते हैं। ठोस पिण्ड पुनः अपनी प्रारम्भिक स्थिति, आकृति तथा आकार प्राप्त कर लेता है। जब किसी स्प्रिंग को बाह्य बल द्वारा खींचा जाता है, तो स्प्रिंग में उत्पन्न प्रत्यानयन (restoring) बल F, स्प्रिंग की लम्बाई में होने वाली वृद्धि x के अनुक्रमानुपाती होती है।
\(F \propto x\)
\( \implies F = kx \)
जहाँ k एक नियतांक है, जिसे स्प्रिंग का बल नियतांक कहते हैं।
ठीक इसी प्रकार, जब किसी ठोस पर बाह्य बल लगाते हैं, तो परमाणुओं के बीच दूरी बदल जाती है। इससे परमाणुओं के बीच उत्पन्न (अन्तरा-परमाणु) बल F', उनके बीच दूरी परिवर्तन \( \Delta r \) के अनुक्रमानुपाती होता है।
\(F' \propto \Delta r \implies F = k_{ar} \Delta r\),
जहाँ \(k_{ar}\) अन्तरा-परमाणु बल नियतांक है।
माना किसी तार में परमाणुओं के बीच साम्य दूरी \(r_0\) है, तार की लम्बाई L है। तार पर बाह्य बले F लगाने से तार की लम्बाई में वृद्धि \( \Delta L \) होती है, तो उसके परमाणुओं के बीच की दूरी \(r_0\) से बढ़कर \(r_0 + \Delta r\) हो जाती है (चित्र 9.11)। तब,
अनुदैर्ध्य विकृति \( = \frac{\Delta L}{L} \)
चूंकि परमाणुओं के बीच दूरी \(r_0\) है, अतः तार के अनुप्रस्थ-काट के \(r_0^2\) क्षेत्रफल में परमाणुओं की औसतन 1 कड़ी (chain) होगी (चित्र 9.12)। अर्थात् अनुप्रस्थ-काट के प्रति एकांक क्षेत्रफल में \(1/r_0^2\) कड़ियाँ होंगी। यदि तार का अनुप्रस्थ-काट का क्षेत्रफल A हो, तो उसमें कड़ियों की संख्या \(A/r_0^2\) होगी। इस प्रकार अन्तरा-परमाणु बल (किसी 1 कड़ी पर लगने वाली बल)
\(F_{applied} = F_{restoring}\)
स्ट्रेस (प्रतिबल) \( = \frac{F_{applied}}{A} \)
विकृति \( = \frac{\Delta L}{L} = \frac{\Delta r}{r_0} \)
यंग प्रत्यास्थता गुणांक \( Y = \frac{\text{प्रतिबल}}{\text{विकृति}} = \frac{F/A}{\Delta r/r_0} = \frac{F \cdot r_0}{A \cdot \Delta r} \)
इसलिए, \( F = \frac{Y \cdot A}{r_0} \cdot \Delta r \)
इसकी तुलना \( F = k_{ar} \Delta r \) से करने पर,
\( k_{ar} = \frac{Y \cdot A}{r_0} \)
अतः अन्तरा-परमाणु बल नियतांक k, तार के पदार्थ के यंग-प्रत्यास्थता गुणांक Y तथा तार के परमाणुओं के बीच सामान्य दूरी \(r_0\), के गुणनफल के बराबर होता है। (यहाँ यह अंतिम वाक्य अधूरा है, सही संबंध \(k_{ar} = Y r_0\) होता है जब A को परमाणु के अनुप्रस्थ-काट के रूप में लिया जाता है।)
In simple words: अन्तरा-परमाणु बल नियतांक, जो दो परमाणुओं को बांधे रखता है, यह दर्शाता है कि पदार्थ कितना कठोर है। यह यंग प्रत्यास्थता गुणांक और परमाणुओं के बीच की संतुलन दूरी से संबंधित होता है, जो यह बताता है कि पदार्थ पर बल लगाने पर परमाणु कैसे प्रतिक्रिया करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्यानयन बल और विस्थापन के बीच आनुपातिक संबंध \(F=kx\) से शुरू करें। यंग गुणांक, प्रतिबल, और विकृति की परिभाषाओं का उपयोग करके परमाणुओं के स्तर पर इस संबंध का विस्तार करें। व्युत्पत्ति के चरणों को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question 2. सिद्ध कीजिए कि तार को खींचने पर उसके प्रति एकांक आयतन की प्रत्यास्थ स्थितिज़ ऊर्जा का मान \( \frac{1}{2} \times \) प्रतिबल \( \times \) विकृति के बराबर होता है।
Answer: उत्तर-
जब किसी तार पर बाह्य बल लगाकर खींचा जाता है तो अन्तरा-परमाणुक बलों के विरुद्ध कुछ कार्य करना पड़ता है, जो तार में प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। प्रारम्भ में तार में आन्तरिक बल शून्य है, जो तार की लम्बाई बढ़ने के साथ-साथ बढ़ता जाता है तथा लम्बाई में वृद्धि हो जाने पर बल F हो जाता है जो कि आरोपित बल के बराबर है।
इस प्रकार तार की लम्बाई में वृद्धि के लिए औसत आन्तरिक बल \( = \frac{0+F}{2} = \frac{F}{2} \)
अतः तार पर किया गया कार्य \(W = \) औसत बल \( \times \) लम्बाई में वृद्धि \( = \frac{F}{2} \times l \)
यही तार में संचित प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा है। अतः \(U = \frac{1}{2} F l\).
यदि तार की लम्बाई L और अनुप्रस्थ-काट का क्षेत्रफल A हो, तो
प्रतिबल \( = \frac{F}{A} \implies F = \text{प्रतिबल} \times A \)
विकृति \( = \frac{l}{L} \implies l = \text{विकृति} \times L \)
इन मानों को ऊर्जा के सूत्र में रखने पर:
\( U = \frac{1}{2} (\text{प्रतिबल} \times A) (\text{विकृति} \times L) \)
\( U = \frac{1}{2} \times \text{प्रतिबल} \times \text{विकृति} \times (A \times L) \)
चूंकि \(A \times L\) तार का आयतन है,
तो \( U = \frac{1}{2} \times \text{प्रतिबल} \times \text{विकृति} \times \text{आयतन} \)
तार के एकांक आयतन में संचित प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा \( \frac{U}{\text{आयतन}} = \frac{1}{2} \times \text{प्रतिबल} \times \text{विकृति} \)
(यही सिद्ध करना था।)
In simple words: तार को खींचने में किया गया कार्य उसके अंदर स्थितिज ऊर्जा के रूप में जमा हो जाता है। यह ऊर्जा प्रतिबल और विकृति के गुणा के आधे के बराबर होती है, जब इसे तार के आयतन से भाग दिया जाता है, यह प्रति एकांक आयतन में संचित ऊर्जा को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: इस व्युत्पत्ति को बल-विस्थापन ग्राफ के क्षेत्रफल या औसत बल के विचार से शुरू करें। प्रतिबल और विकृति के पदों में ऊर्जा को व्यक्त करने के लिए यंग प्रत्यास्थता गुणांक के सूत्रों का सही उपयोग करना सुनिश्चित करें।
Question 3. किसी तार के लिए प्रतिबल तथा विकृति के बीच ग्राफ खींचिए। इस ग्राफ से प्रत्यास्थ सीमा, पराभव बिन्दु तथा भंजक बिन्दु समझाइए ।
Answer: उत्तर-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): एक प्रतिबल-विकृति ग्राफ X-अक्ष पर विकृति और Y-अक्ष पर प्रतिबल दर्शाता है। एक तन्य पदार्थ के लिए, ग्राफ में एक रेखीय क्षेत्र होता है जहाँ हुक का नियम लागू होता है (आनुपातिक सीमा तक)। इसके बाद एक वक्र होता है जो प्रत्यास्थ सीमा तक जाता है, जहाँ तक सामग्री अपने मूल आकार में वापस आ सकती है। प्रत्यास्थ सीमा के बाद, पराभव बिन्दु (yield point) आता है, जहाँ प्लास्टिक विरूपण शुरू होता है। ग्राफ में एक अधिकतम बिंदु होता है जिसे परम सामर्थ्य (ultimate tensile strength) कहते हैं, और अंत में भंजक बिंदु (fracture point) होता है जहाँ सामग्री टूट जाती है।
**प्रत्यास्थ सीमा:** यह भाग वक्रीय है, अतः विकृति प्रतिबल के अनुक्रमानुपाती नहीं होती है। इस क्षेत्र में हुक का नियम मान्य नहीं होता है। यदि B पर प्रतिबल हटा लिया जाये तो तार अपनी पूर्वावस्था में शीघ्र ही नहीं लौटता है। यदि तार को कुछ समय तक विरूपक बल से मुक्त रखा जाये तो वह अपनी प्रारम्भिक लम्बाई को प्राप्त करेगा। अतः इस बिन्दु B द्वारा निरूपित प्रतिबल को तार की प्रत्यास्थता सीमा (elastic limit) कहते हैं।
**पराभव बिन्दु:** यह भाग विकृति अक्ष के लगभग समान्तर है। अतः यह उस स्थिति को प्रकट करता है। जब मानो बिना प्रतिबल को बढ़ाये अपने आप ही विकृति बढ़ती रहती है। बिन्दु B, जहाँ पर ऐसी स्थिति, प्रारम्भ होती है, पराभव बिन्दु (yield point) कहलाता है।
**भंजक बिन्दु:** बिन्दु D से आगे यदि तार पर लटके भार को कम भी किया जाये तो भी तार पतला होता चला जाता है अर्थात् इसका अनुप्रस्थ-परिच्छेद एकसमान नहीं रहता है तथा तार का पदार्थ श्यान तरल (viscous fluid) की भाँति बढ़ना प्रारम्भ हो जाता है एवं एक बिन्दु E तक पहुँचते-पहुँचते तार टूट जाता है। बिन्दु E को भंजक बिन्दु कहते हैं।
In simple words: प्रतिबल-विकृति ग्राफ एक सामग्री के यांत्रिक व्यवहार को दर्शाता है। इसमें विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदु होते हैं: प्रत्यास्थ सीमा (जहां तक सामग्री अपने मूल आकार में लौट सकती है), पराभव बिन्दु (जहां प्लास्टिक विरूपण शुरू होता है), और भंजक बिन्दु (जहां सामग्री टूट जाती है)।
🎯 Exam Tip: प्रतिबल-विकृति ग्राफ के विभिन्न बिंदुओं (आनुपातिक सीमा, प्रत्यास्थ सीमा, पराभव बिन्दु, परम सामर्थ्य, भंजक बिन्दु) की सटीक परिभाषाओं और उनके महत्व को याद रखें। तन्य और भंगुर पदार्थों के लिए ग्राफ के आकार में अंतर को समझना भी महत्वपूर्ण है।
Question 4. किसी तार को खींचने में किए गए कार्य तथा प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के लिए व्यंजक का निगमन कीजिए।
Answer: हल-
किसी तार को खींचने में किया गया कार्य तथा प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के लिए व्यंजक-जब हम किसी तार को खींचते हैं, तो अन्तराणविक बलों के विरुद्ध कुछ कार्य करते हैं जो कि तार में प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। अतः तार की प्रत्यास्थता स्थितिज ऊर्जा बढ़ जाती है।
माना एक तार की लम्बाई L तथा परिच्छेद-क्षेत्रफल A है। यदि इस तार की लम्बाई के अनुदिश बले F लगाने से तार की लम्बाई में वृद्धि x हो जाती है। तब।
अनुदैर्ध्य प्रतिबल \( = \frac{F}{A} \)
अनुदैर्ध्य विकृति \( = \frac{x}{L} \)
यंग प्रत्यास्थता गुणांक \( Y = \frac{\text{प्रतिबल}}{\text{विकृति}} = \frac{F/A}{x/L} = \frac{F \cdot L}{A \cdot x} \)
इससे, तार पर लगने वाला बल \( F = \frac{Y \cdot A}{L} x \)
कार्य की गणना के लिए, मान लीजिए कि तार को धीरे-धीरे \( dx \) दूरी तक खींचा जाता है। इस छोटे से विस्थापन के लिए किया गया कार्य \( dW = F dx \).
तार को शून्य से कुल लम्बाई \( l \) तक खींचने में किया गया कुल कार्य \( W = \int_0^l F dx \)
\( W = \int_0^l \left( \frac{Y \cdot A}{L} x \right) dx \)
\( W = \frac{Y \cdot A}{L} \int_0^l x dx \)
\( W = \frac{Y \cdot A}{L} \left[ \frac{x^2}{2} \right]_0^l \)
\( W = \frac{Y \cdot A}{L} \left( \frac{l^2}{2} - 0 \right) = \frac{1}{2} \frac{Y \cdot A}{L} l^2 \)
यह किया गया कार्य ही तार में संचित प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा U है।
तो, \( U = \frac{1}{2} \frac{Y \cdot A}{L} l^2 \)
इसे प्रतिबल और विकृति के पदों में व्यक्त करने पर:
\( U = \frac{1}{2} \left( Y \frac{l}{L} \right) \left( A \frac{l}{L} \right) L \)
\( U = \frac{1}{2} \left( Y \frac{l}{L} \right) \left( \frac{l}{L} \right) A L \)
हम जानते हैं कि प्रतिबल \( \sigma = Y \frac{l}{L} \) और विकृति \( \epsilon = \frac{l}{L} \).
तथा आयतन \( V = AL \).
अतः, \( U = \frac{1}{2} \sigma \epsilon V \)
या प्रति एकांक आयतन में संचित ऊर्जा \( \frac{U}{V} = \frac{1}{2} \sigma \epsilon \).
In simple words: जब किसी तार को खींचा जाता है, तो आंतरिक परमाणुओं के बीच के बल के विरुद्ध कार्य किया जाता है, जो तार में प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के रूप में जमा हो जाता है। इस ऊर्जा की गणना तार में उत्पन्न बल और लम्बाई में हुई वृद्धि के आधे के गुणनफल के रूप में की जा सकती है, और इसे प्रतिबल और विकृति के पदों में भी व्यक्त किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: किया गया कार्य \(W = \int F dx\) से प्रारंभ करें, जहाँ \(F\) बल हुक के नियम से प्राप्त होता है। यंग प्रत्यास्थता गुणांक, प्रतिबल, और विकृति के सूत्रों का उपयोग करके अंतिम व्यंजक को \( \frac{1}{2} \sigma \epsilon V \) के रूप में व्यक्त करें।
Question 5. दो क्लैम्पों (दो दृढ़ आधारों) के बीच तने (कसे) तार का ताप बदलने या ठण्डा करने पर तार में उत्पन्न बल के लिए व्यंजक का निगमन कीजिए।
Answer: हल-
माना लम्बाई L तथा अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल A का एक तार दो दृढ़ आधारों के बीच कसा है। जब तार को ठण्डा किया जाता है, तो तार लम्बाई में सिकुड़ता है जिससे कि यह आधारों पर एक बल- आरोपित करता है।
माना तार के पदार्थ का यंग-प्रत्यास्थता गुणांक Y व अनुदैर्ध्य प्रसार गुणांक \( \alpha \) है।
यदि तार के ताप में \( \Delta T^\circ \)C की कमी होने पर तारे की लम्बाई में कमी \( \Delta L \) हो, तब मुक्त प्रसार के कारण लम्बाई में परिवर्तन \( \Delta L = L \alpha \Delta T \).
चूंकि तार को दृढ़ आधारों के बीच कसा गया है, यह विस्तार या संकुचन (जो यहां संकुचन है) नहीं हो सकता है। इसलिए, तार में एक तनाव उत्पन्न होता है जो इस संकुचन को रोकता है।
उत्पन्न विकृति \( \epsilon = \frac{\Delta L}{L} = \frac{L \alpha \Delta T}{L} = \alpha \Delta T \).
अब, यंग प्रत्यास्थता गुणांक की परिभाषा से:
\( Y = \frac{\text{प्रतिबल}}{\text{विकृति}} = \frac{F/A}{\epsilon} \)
जहाँ F तार में उत्पन्न बल है।
तो, \( F = Y \cdot A \cdot \epsilon \)
\( F = Y \cdot A \cdot (\alpha \Delta T) \)
इसलिए, तार में उत्पन्न बल का व्यंजक \( F = Y A \alpha \Delta T \) है।
यह बल तार में तनाव के रूप में कार्य करेगा जब तापमान घटता है और संपीड़न बल के रूप में जब तापमान बढ़ता है।
In simple words: जब एक कसे हुए तार का तापमान बदलता है, तो तार को फैलने या सिकुड़ने से रोका जाता है, जिससे उसमें एक आंतरिक बल उत्पन्न होता है। यह बल यंग प्रत्यास्थता गुणांक, तार के अनुप्रस्थ-काट के क्षेत्रफल, रैखिक प्रसार गुणांक और तापमान में परिवर्तन के गुणनफल के बराबर होता है।
🎯 Exam Tip: थर्मल विस्तार सूत्र \( \Delta L = L \alpha \Delta T \) से शुरू करें। फिर, यंग प्रत्यास्थता गुणांक और प्रतिबल-विकृति संबंध का उपयोग करके बल के व्यंजक \( F = Y A \alpha \Delta T \) तक पहुंचें। ताप वृद्धि और कमी दोनों के लिए बल की दिशा पर विचार करें।
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