Get the most accurate UP Board Solutions for Class 11 Hindi Sanskrit संस्कृत शब्दो में विभक्ति की पहचान here. Updated for the 2026 27 academic session, these solutions are based on the latest UP Board textbooks for Class 11 Hindi. Our expert-created answers for Class 11 Hindi are available for free download in PDF format.
Download Class 11 Hindi Sanskrit संस्कृत शब्दो में विभक्ति की पहचान UP Board Answers
Want to build a strong core? For Class 11 students, working through UP Board textbook questions is essential. Our Class 11 Hindi solutions use clear, step-by-step methods so you grasp the reasoning behind each answer. Practicing these Sanskrit संस्कृत शब्दो में विभक्ति की पहचान solutions will help you score better marks in exams.
Download Solutions: Sanskrit संस्कृत शब्दो में विभक्ति की पहचान (Class 11 Hindi UP Board)
नवीनतम पाठयक्रम के अनुसार परीक्षा में रेखांकित शब्दों में लगी विभक्ति अथवा दिये गये शब्दों में प्रयुक्त विभक्ति से सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके लिए 2 अंक निर्धारित हैं। ये प्रश्न बहुविकल्पीय भी हो सकते हैं। विभक्ति का निर्देश करते समय छात्र से उससे सम्बन्धित सूत्र का उल्लेख करने की अपेक्षा भी की जाती है।
(1) सूत्र-अभितः परितः समया निकषा हा प्रतियोगेऽपि ।
अभितः (चारों ओर या सभी ओर), परितः (सभी ओर), समया (समीप), निकषा (समीप), हा (शोक के लिए प्रयुक्त शब्द), प्रति (ओर, तरफ) शब्दों के योग में द्वितीया विभक्ति होती है।
उदाहरण - आश्रमम् अभितः वनम् अस्ति। आश्रम के चारों ओर वन हैं।
ग्रामं परितः उपवनानि सन्ति । गाँव के सब ओर उपवन हैं।
लंकां समया (निकषा वा)। लंका के समीप।
हा ! कृष्णाभक्तम्। कृष्ण के अभक्त पर खेद है।
सः ग्रामं प्रति गच्छति । वह गाँव की ओर जा रहा है।
गृहं परितः। घर के चारों ओर।
ग्रामं निकषा नदी वहति। गाँव के निकट नदी बहती है।
ग्राम निकषा। गाँव के निकट ।
विद्यालयम् अभितः । विद्यालय के चारों ओर।
विद्यालयं परितः। विद्यालय के सब ओर।
बुभुक्षितं न प्रतिभाति किंचित्। कोई भूखा नहीं दीखता।
विद्यालयं समया। विद्यालय के समीप।
श्यामः रामं निकषा तिष्ठति। श्याम राम के निकट बैठता है।
दीनं प्रति । दीन की ओर।
अयोध्यां निकषा । अयोध्या के निकट।
ग्रामं परितः। गाँव के सब ओर।
धनुर्धरः हरिणं प्रति अपश्यत्। धनुर्धर ने हिरण की ओर देखा।
विद्यालयं निकषा जलाशयः अस्ति। विद्यालय के समीप जलाशय है।
मातुः हृदयं कन्यां प्रति स्निग्धं भवति। माता का हृदय कन्या के प्रति कोमल होता है।
ग्रामं समया पाठशाला अस्ति। गाँव के समीप पाठशाला है।
(2) सूत्र-येनाङ्गविकारः
जिस, अंग में विकार होने से शरीर विकृत दिखाई दे, उस विकारयुक्त अंग में तृतीया विभक्ति होती है।
उदाहरण - शिरसा खल्वाटः । सिर से गंजा।
कर्णाभ्यां बधिरः। कानों का बहरा।
अक्ष्णा काणः। आँख का काना।
पादेन खञ्जः। पैर का लँगड़ा।
कर्णेन बधिरः। कान का बहरा।
कट्या कुब्जः। कमर से कुबड़ा।
राकेशः शिरसा खल्वाटः अस्ति। राकेश सिर से गंजा है।
मोहनः कट्याः कुब्जः अस्ति। मोहन कमर से कुबड़ा है।
गिरिधरः नेत्रेण काणः अस्ति। गिरधर नेत्र से काना है।
देवदत्तः कर्णेन बधिरः अस्ति। देवदत्त कान से बहरा है।
मोहनः पादेन खञ्जः अस्ति। मोहन पैर से लँगड़ा है।
(3) सूत्र-सहयुक्तेऽप्रधाने
साथ अर्थ वाले सह, साकम्, सार्धम्, समम् शब्दों के योग में अप्रधान (जिसके साथ जाने वाला जाये) में तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
उदाहरण - रामः लक्ष्मणेन सह वनम् अगच्छत्। राम लक्ष्मण के साथ वन में गये।
अहमपि त्वया सार्धं यास्यामि । मैं भी तुम्हारे साथ जाऊँगा।
सः पित्रा सह विद्यालयं गच्छति। वह पिता के साथ विद्यालय जाता है।
पुत्रेण सह। पुत्र के साथ।
छात्रेण सह। छात्र के साथ।
मृगाः मृगैः सङ्गमनुव्रजन्ति। मृग मृगों के साथ गमन करते हैं।
जनकेन सह। जनक के साथ।
नैकेनापि समं गता वसुमती। वसुमती के साथ एक भी नहीं गयी।
सीता रामेण सह वनम् अगच्छत्। सीता राम के साथ वन गयीं।
गुरुणा सह। गुरु के साथ।
माता पुत्रेण सह गच्छति। माता पुत्र के साथ जाती है।
उपाध्यायः छात्रैः समं स्नाति । अध्यापक छात्रों के साथ स्नान करता है।
(4) सूत्र-साधकतमं करणम् जिसकी सहायता से कार्य पूर्ण होता है, उसमें तृतीया विभक्ति होती है। उदाहरण प्रकृत्या साधु । प्रकृति से साधु ।
(5) सूत्र-नमःस्वस्तिस्वाहास्वधाऽलंवषट् योगाच्च
नमः (नमस्कार), स्वस्ति (कल्याण), स्वाहा (आहुति), स्वधा (बलि), अलम् (समर्थ, पर्याप्त), वषट् (आहुति)-इन शब्दों के योग में चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है।
उदाहरण - देवेभ्यः नमः। देवों को नमस्कार।
श्रीगुरवे नमः। श्रीगुरु को नमस्कार।
स्वस्ति तुभ्यं भवते। तुम्हारा कल्याण हो।
अग्नये स्वाहा। अग्नि के लिए स्वाहा।
इन्द्राये स्वाहा। इन्द्र के लिए स्वाहा।
पितृभ्यः स्वधा। पितरों के लिए स्वधा ।
दैत्येभ्यः हरिः अलम्। दैत्यों के लिए हरि पर्याप्त हैं।
दुर्गादेव्यै नमः। दुर्गा देवी के लिए नमस्कार।
राधाकृष्णाय वषट्। राधा-कृष्ण के लिए भेंट।
विष्णवे वषट्। विष्णु के लिए भेंट।
प्रजाभ्यः स्वस्ति। प्रजा का कल्याण हो।
नमः व्यासाय। व्यास को नमस्कार।
श्रीगणेशाय नमः। श्रीगणेश को नमस्कार।
अलं मल्लो मल्लाय। मल्ल (पहलवान) के लिए मल्ल पर्याप्त है।
विष्णवे स्वाहा। विष्णु के लिए स्वाहा।
तस्मै नमः। उसको नमस्कार।
छात्रेभ्यः स्वस्ति। छात्रों का कल्याण हो।
आकाशाय नमः। आकाश को नमस्कार।
कृष्णाय नमः। कृष्ण को नमस्कार।
तस्मै स्वधा । उसके लिए स्वधा।
(6) सूत्र-ध्रुवमपायेऽपादानम्
स्वयं से अलग करने वाले अर्थात् ध्रुव (मूल) में पंचमी विभक्ति होती है; जैसे-वृक्ष से पत्ते गिरते हैं। इस वाक्य में पत्तों को स्वयं से अलग करने वाला वृक्ष है; अतः वृक्ष में पंचमी विभक्ति होगी।
सः ग्रामात् आगच्छति। वह गाँव से आता है।
रामः कूपात् जलम् आनर्यात। राम कुएँ से पानी लाता है।
रामः विद्यालयात् गृहं गच्छति। राम विद्यालय से घर जाता है।
(7) सूत्र-आख्यातोपयोगे
नियमपूर्वक विद्या ग्रहण करने में जिससे विद्या ग्रहण की 'ती है, उसमें पंचमी विभक्ति होती है।
(8) सूत्र-भीत्रार्थानां भयहेतुः
'भय' तथा 'रक्षा' अर्थ वाली धातुओं के योग में जिससे डरा जाता है या रक्षा की जाती है, उसमें पंचमी विभक्ति होती है।
(9) सूत्र-षष्ठी शेषे
छह कारकों के अतिरिक्त सम्बन्ध अर्थ शेष बचता है। सम्बन्ध अर्थ में षष्ठी विभक्ति होती है।
उदाहरण - राज्ञः पुत्रः। राजा का पुत्र।
गृहस्य अन्तरे। घर के अन्दर।
समुद्रस्य तटम्। समुद्र का तट।
राज्ञः पुरुषः। राजा का पुरुष।
बालकस्य माता। बालक की माता।
कृष्णः वसुदेवस्य पुत्र आसीत्। कृष्ण वसुदेव के पुत्र थे।
खेमू नरेशस्य सेवकः अस्ति। रामू नरेश का नौकर है।
समुद्रस्य जलं क्षारं भवति। समुद्र का जल खारा होता है।
कूषस्य जलं मधुरं अस्ति। कुएँ का जल मीठा है।
(10) सूत्र-यतश्च निर्धारणम्
जहाँ बहुतों में से किसी एक को छाँटा जाये, वहाँ जिसमें से छाँटा जाये, उसमें षष्ठी अथवा सप्तमी विभक्ति, होती है।
उदाहरण - गवां/गोषु कपिला श्रेष्ठा। गायों में कपिला श्रेष्ठ है।
बालकानां/बालकेषु वा रामः ज्येष्ठः। बालकों में राम सबसे बड़ा है।
कन्यानां/कन्यासु वा लता कनिष्ठा। कन्याओं में लता सबसे छोटी है।
कवीनां/कविषु कालिदासः श्रेष्ठः। कवियों में कालिदास श्रेष्ठ हैं।
छात्राणां/छात्रासु रत्ना श्रेष्ठा। छात्राओं में रत्ना श्रेष्ठ है।
पुष्पिका छात्राणां श्रेष्ठा अस्ति। छात्राओं में पुष्पिका श्रेष्ठ है।
छात्रेषु अनिलः श्रेष्ठः । छात्रों में अनिल श्रेष्ठ है।
विशेष-संस्कृत शब्दों में विभक्ति की पहचान से सम्बन्धित प्रश्नों के चार सम्भावित प्रारूप हो सकते हैं। विभिन्न परीक्षा प्रश्न-पत्रों में इन चारों प्रारूपों के पूछे गये प्रश्न दिये जा रहे हैं
प्रश्न (क) निम्नलिखित शब्दों के शुद्ध विभक्ति रूप की पहचान कीजिए या दिये गये विकल्पों में जो सही विकल्प है, उसे बताइए
Question 1. 'राजन्' शब्द को चतुर्थी विभक्ति एक वचन का रूप होता है- (क) राजानम् (ख) राजभिः (ग) राज्ञे (घ) राज्ञः
Answer: (ग) राज्ञे
In simple words: 'राजन्' शब्द का चतुर्थी विभक्ति एकवचन रूप 'राज्ञे' होता है, जो 'राजा' शब्द के लिए 'के लिए' अर्थ में प्रयोग होता है।
🎯 Exam Tip: राजन् जैसे न-कारान्त शब्दों के विभक्ति रूपों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर चतुर्थी एकवचन जैसे विशिष्ट प्रयोगों पर ध्यान दें।
Question 2. 'सरित्' शब्द का पंचमी विभक्ति द्विवचन का रूप होता है- (क) सरिते (ख) सरित्सु (ग) सरिभ्याम् (घ) सरिति
Answer: (ग) सरिभ्याम्
In simple words: 'सरित्' (नदी) शब्द का पंचमी विभक्ति द्विवचन रूप 'सरिभ्याम्' है, जिसका अर्थ 'दो नदियों से/के द्वारा' होता है।
🎯 Exam Tip: 'सरित्' जैसे त-कारान्त स्त्रीलिंग शब्दों के रूपों को याद करने पर बल दें, विशेष रूप से पंचमी और तृतीया के द्विवचन रूप अक्सर समान होते हैं।
Question 3. 'आत्मन्' शब्द का तृतीयो एकवचन का रूप होता है- (क) आत्मनि (ख) आत्मने (ग) आत्मना (घ) आत्मनः
Answer: (ग) आत्मना
In simple words: 'आत्मन्' शब्द का तृतीय एकवचन रूप 'आत्मना' है, जिसका अर्थ 'आत्मा से' या 'आत्मा के द्वारा' होता है।
🎯 Exam Tip: 'आत्मन्' जैसे न-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों के विभिन्न विभक्ति रूपों को समझें, विशेषकर तृतीया एकवचन में 'ना' प्रत्यय का प्रयोग।
Question 4. 'इदम्' शब्द का षष्ठी विभक्ति बहुवचन का रूप होता है- (क) अस्मिन् (ख) एषाम् (ग) अस्मै (घ) अस्य
Answer: (ख) एषाम्
In simple words: 'इदम्' (यह) शब्द का षष्ठी विभक्ति बहुवचन रूप 'एषाम्' होता है, जिसका अर्थ 'इन सभी का' होता है।
🎯 Exam Tip: 'इदम्' जैसे सर्वनाम शब्दों के तीनों लिंगों में रूपों को याद रखें, क्योंकि ये अक्सर विभिन्न परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
Question 5. 'सर्व' शब्द (पुं० ) द्वितीया विभक्ति, बहुवचन का रूप होता है- (क) सर्वेभ्यः (ख) सर्वस्य (ग) सर्वान् (घ) सर्वम्
Answer: (ग) सर्वान्
In simple words: 'सर्व' (सभी) पुंल्लिङ्ग शब्द का द्वितीया विभक्ति बहुवचन रूप 'सर्वान्' है, जिसका अर्थ 'सभी को' होता है।
🎯 Exam Tip: सर्वनाम 'सर्व' के तीनों लिंगों में रूपों की अच्छी समझ रखें, खासकर बहुवचन के रूपों पर विशेष ध्यान दें।
Question 6. 'जगत्' का पंचमी एकवचन में होता है- (क) जगती (ख) जम्बोः (ग) जगति (घ) जगतः
Answer: (घ) जगतः
In simple words: 'जगत्' (संसार) शब्द का पंचमी एकवचन रूप 'जगतः' है, जिसका अर्थ 'संसार से' होता है।
🎯 Exam Tip: 'जगत्' जैसे नपुंसकलिङ्ग शब्दों के पंचमी और षष्ठी एकवचन रूप अक्सर समान होते हैं, इन पर ध्यान दें।
Question 7. 'नदी' का सप्तमी बहुवचन में रूप होना है- (क) नदीभ्यः (ख) नद्योः (ग) नदीषु (घ) नद्याः
Answer: (ग) नदीषु
In simple words: 'नदी' शब्द का सप्तमी बहुवचन रूप 'नदीषु' है, जिसका अर्थ 'नदियों में' होता है।
🎯 Exam Tip: ई-कारान्त स्त्रीलिंग शब्दों के सप्तमी बहुवचन में 'षु' या 'सु' का प्रयोग होता है, 'नदीषु' इसका एक उदाहरण है।
Question 8. 'सरित्' का तृतीया विभक्ति एकवचन में रूप होता है- (क) सरितेन (ख) सरितौ (ग) सरितोः (घ) सरिता
Answer: (घ) सरिता
In simple words: 'सरित्' (नदी) शब्द का तृतीया एकवचन रूप 'सरिता' है, जिसका अर्थ 'नदी से' या 'नदी के द्वारा' होता है।
🎯 Exam Tip: व्यंजन-कारान्त स्त्रीलिंग शब्दों में 'आ' प्रत्यय के साथ तृतीया एकवचन का निर्माण अक्सर देखा जाता है।
Question 9. 'जगत्' का सप्तमी बहुवचन में रूप होता है- (क) जगति (ख) जगेत्सु (ग) जगताम् (घ) जगद्भिः
Answer: (ख) जगेत्सु
In simple words: 'जगत्' (संसार) शब्द का सप्तमी बहुवचन रूप 'जगेत्सु' है, जिसका अर्थ 'संसारों में' होता है।
🎯 Exam Tip: 'जगत्' जैसे त-कारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्दों के सप्तमी बहुवचन में 'सु' का प्रयोग होता है, ध्यान दें कि 'त्' का परिवर्तन भी होता है।
Question 10. 'पितृ' का षष्ठी एकवचन में रूप होता है- (क) पितुः (ख) पित्रे (ग) पितरः (घ) पित्रोः
Answer: (क) पितुः
In simple words: 'पितृ' (पिता) शब्द का षष्ठी एकवचन रूप 'पितुः' है, जिसका अर्थ 'पिता का' होता है।
🎯 Exam Tip: ऋ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों के षष्ठी एकवचन में 'उः' प्रत्यय का प्रयोग होता है, यह एक सामान्य पैटर्न है।
Question 11. 'सर्वे' (पुं०) तृतीया बहुवचन का रूप है- (क) सर्वो (ख) सर्वयोः (ग) सर्वैः (घ) सर्वस्य
Answer: (ग) सर्वैः
In simple words: 'सर्व' (सभी) पुंल्लिङ्ग शब्द का तृतीया बहुवचन रूप 'सर्वैः' है, जिसका अर्थ 'सभी के द्वारा' होता है।
🎯 Exam Tip: 'सर्व' जैसे सर्वनाम शब्दों के तृतीया बहुवचन में 'ऐः' प्रत्यय का प्रयोग होता है, इसे पहचानना सीखें।
Question 12. 'आत्मन्' का चतुर्थी, एकवचन का रूप होता है- (क) आत्मनः (ख) आत्मना (ग) आत्मने (घ)
Answer: (ग) आत्मने
In simple words: 'आत्मन्' शब्द का चतुर्थी एकवचन रूप 'आत्मने' है, जिसका अर्थ 'आत्मा के लिए' होता है।
🎯 Exam Tip: न-कारान्त शब्दों में चतुर्थी एकवचन 'ने' प्रत्यय के साथ समाप्त होता है, यह एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक बिंदु है।
Question 13. पुत्र' शब्द का तृतीया एकवचन में रूप होता है- (क) पुत्रेषु (ख) पुत्रान् (ग) पुत्रेण
Answer: (ग) पुत्रेण
In simple words: 'पुत्र' शब्द का तृतीया एकवचन रूप 'पुत्रेण' है, जिसका अर्थ 'पुत्र से' या 'पुत्र के द्वारा' होता है।
🎯 Exam Tip: अ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों में तृतीया एकवचन 'एण' प्रत्यय के साथ बनता है, जो संस्कृत व्याकरण का एक मूल नियम है।
Question 14. 'राजन्' शब्द का षष्ठी एकवचन में रूप होता है- (क) राज्ञाम् (ख) राज्ञः (ग) राज्ञां (घ) राज्ञोः
Answer: (ख) राज्ञः
In simple words: 'राजन्' (राजा) शब्द का षष्ठी एकवचन रूप 'राज्ञः' है, जिसका अर्थ 'राजा का' होता है।
🎯 Exam Tip: न-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों के षष्ठी एकवचन में 'ज्ञः' का प्रयोग एक विशिष्ट पैटर्न है, जिसे याद रखना चाहिए।
Question 15. 'राजन्' शब्द का तृतीया बहुवचन में रूप होता है- (क) राज्ञः (ख) राजभिः (ग) राजान्ः (घ) राजभ्यः
Answer: (ख) राजभिः
In simple words: 'राजन्' (राजा) शब्द का तृतीया बहुवचन रूप 'राजभिः' है, जिसका अर्थ 'राजाओं के द्वारा' होता है।
🎯 Exam Tip: 'भिः' प्रत्यय का प्रयोग तृतीया बहुवचन में होता है, जो 'राजन्' जैसे शब्दों में भी लागू होता है।
Question 16. जगत्' शब्द का सप्तमी द्विवचन में रूप होता है- (क) जगते (ख) जगन्ति (ग) जगतोः (घ) जगति
Answer: (ग) जगतोः
In simple words: 'जगत्' (संसार) शब्द का सप्तमी द्विवचन रूप 'जगतोः' है, जिसका अर्थ 'दो संसारों में' होता है।
🎯 Exam Tip: नपुंसकलिङ्ग शब्दों के सप्तमी द्विवचन में 'तोः' या 'ओः' का प्रयोग एक सामान्य रूप है।
प्रश्न (ख). निम्नलिखित शब्दों की विभक्ति और वचन के सही विकल्प को चुनकर लिखिए -
Question 1. रामाय - (क) चतुर्थी एकवचन (ख) सप्तमी एकवचन (ग) तृतीया द्विवचन (घ) द्वितीया एकवचन
Answer: (क) चतुर्थी एकवचन
In simple words: 'रामाय' शब्द 'राम' का चतुर्थी विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'राम के लिए' होता है।
🎯 Exam Tip: अ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों में चतुर्थी एकवचन का रूप 'आय' से समाप्त होता है, जैसे 'रामाय'।
Question 2. हस्तेन - (क) प्रथमा बहुवचन (ख) पञ्चमी एकवचन (ग) तृतीया एकवचन (घ) चतुर्थी द्विवचन
Answer: (ग) तृतीया एकवचन
In simple words: 'हस्तेन' शब्द 'हस्त' (हाथ) का तृतीया विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'हाथ से' या 'हाथ के द्वारा' होता है।
🎯 Exam Tip: 'एन' प्रत्यय अ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों के तृतीया एकवचन की पहचान है।
Question 3. रामानाम् - (क) चतुर्थी एकवचन (ख) षष्ठी एकवचन (ग) षष्ठी बहुवचन (घ) द्वितीया बहुवचन
Answer: (ग) षष्ठी बहुवचन
In simple words: 'रामानाम्' शब्द 'राम' का षष्ठी विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'रामों का/के/की' होता है।
🎯 Exam Tip: 'आनाम्' या 'णाम्' प्रत्यय षष्ठी बहुवचन की पहचान है, जो कई शब्दों में प्रयुक्त होता है।
Question 4. शिश्वोः - (क) तृतीया द्विवचन (ख) द्वितीया द्विवचन (ग) द्वितीया बहुवचन (घ) सप्तमी द्विवचन
Answer: (घ) सप्तमी द्विवचन
In simple words: 'शिश्वोः' शब्द 'शिशु' का सप्तमी विभक्ति द्विवचन रूप है, जिसका अर्थ 'दो शिशुओं में' होता है।
🎯 Exam Tip: उ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों में सप्तमी द्विवचन 'वोः' या 'ओः' से समाप्त होता है, यह एक सामान्य पैटर्न है।
Question 5. नदीषु - (क) सप्तमी बहुवचन (ख) चतुर्थी बहुवचन (ग) पञ्चमी एकवचन (घ) सप्तमी एकवचन
Answer: (क) सप्तमी बहुवचन
In simple words: 'नदीषु' शब्द 'नदी' का सप्तमी विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'नदियों में' होता है।
🎯 Exam Tip: 'ई' और 'उ' कारान्त शब्दों के सप्तमी बहुवचन में 'षु' प्रत्यय का प्रयोग होता है।
Question 6. आत्मने - (क) द्वितीया बहुवचन (ख) चतुर्थी एकवचन (ग) षष्ठी द्विवचन (घ) सप्तमी द्विवचने
Answer: (ख) चतुर्थी एकवचन
In simple words: 'आत्मने' शब्द 'आत्मन्' का चतुर्थी विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'आत्मा के लिए' होता है।
🎯 Exam Tip: न-कारान्त शब्दों के चतुर्थी एकवचन रूप 'ने' प्रत्यय के साथ बनते हैं।
Question 7. नामसु - (क) तृतीया एकवचन (ख) द्वितीया बहुवचन (ग) पञ्चमी द्विवचन (घ) सप्तमी बहुवचन
Answer: (घ) सप्तमी बहुवचन
In simple words: 'नामसु' शब्द 'नामन्' (नाम) का सप्तमी विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'नामों में' होता है।
🎯 Exam Tip: सप्तमी बहुवचन में 'सु' या 'षु' का प्रयोग होता है, जो शब्द के अंतिम वर्ण पर निर्भर करता है।
Question 8. भानून् - (क) षष्ठी बहुवचन (ख) सप्तमी एकवचन (ग) द्वितीया बहुवचन (घ) चतुर्थी एकवचन
Answer: (ग) द्वितीया बहुवचन
In simple words: 'भानून्' शब्द 'भानु' (सूर्य) का द्वितीया विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'सूर्यों को' होता है।
🎯 Exam Tip: उ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों के द्वितीया बहुवचन में 'ऊन्' प्रत्यय का प्रयोग होता है।
Question 9. राज्ञि - (क) तृतीया बहुवचन (ख) सप्तमी एकवचन (ग) षष्ठी द्विवचन (घ) पञ्चमी एकवचन
Answer: (ख) सप्तमी एकवचन
In simple words: 'राज्ञि' शब्द 'राजन्' (राजा) का सप्तमी विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'राजा में' या 'राजा पर' होता है।
🎯 Exam Tip: न-कारान्त शब्दों में सप्तमी एकवचन के लिए 'ज्ञि' या 'जनि' का प्रयोग होता है, यह विशिष्ट रूप है।
Question 10. जगता - (क) द्वितीया बहुवचन (ख) चतुर्थी द्विवचन (ग) तृतीया एकवचन (घ) षष्ठी एकवचन
Answer: (ग) तृतीया एकवचन
In simple words: 'जगता' शब्द 'जगत्' (संसार) का तृतीया विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'संसार से' या 'संसार के द्वारा' होता है।
🎯 Exam Tip: त-कारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्दों के तृतीया एकवचन में 'ता' प्रत्यय का प्रयोग होता है।
Question 11. आत्मनि - (क) सप्तमी एकवचन (ख) षष्ठी द्विवचन (ग) पञ्चमी बहुवचन (घ) प्रथमा द्विवचन
Answer: (क) सप्तमी एकवचन
In simple words: 'आत्मनि' शब्द 'आत्मन्' (आत्मा) का सप्तमी विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'आत्मा में' होता है।
🎯 Exam Tip: न-कारान्त शब्दों के सप्तमी एकवचन में 'नि' या 'नि' का प्रयोग होता है।
Question 12. आत्मनाम् - (क) द्वितीया एकवचन (ख) चतुर्थी द्विवचन । (ग) षष्ठी बहुवचन (घ) सप्तमी एकवचन
Answer: (ग) षष्ठी बहुवचन
In simple words: 'आत्मनाम्' शब्द 'आत्मन्' का षष्ठी विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'आत्माओं का' होता है।
🎯 Exam Tip: 'नाम्' प्रत्यय का प्रयोग षष्ठी बहुवचन में होता है, जो 'आत्मन्' जैसे शब्दों में भी लागू होता है।
Question 13. नामभिः - (क) प्रथमा बेहुवचन (ख) तृतीया बहुवचन (ग) चतुर्थी बहुवचन (घ) सप्तमी बहुवचन
Answer: (ख) तृतीया बहुवचन
In simple words: 'नामभिः' शब्द 'नामन्' (नाम) का तृतीया विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'नामों के द्वारा' होता है।
🎯 Exam Tip: 'भिः' प्रत्यय तृतीया बहुवचन की पहचान है, जो विभिन्न शब्दों में प्रयुक्त होता है।
Question 14. रामात् - (क) द्वितीया एकवचन (ख) पञ्चमी एकवचन (ग) तृतीया द्विवचन (घ) सप्तमी एकवचन
Answer: (ख) पञ्चमी एकवचन
In simple words: 'रामात्' शब्द 'राम' का पंचमी विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'राम से' (अलग होने के अर्थ में) होता है।
🎯 Exam Tip: 'आत्' या 'अत्' प्रत्यय पंचमी एकवचन की पहचान है, विशेषकर अ-कारान्त शब्दों में।
Question 15. सरिते - (क) चतुर्थी एकवचन (ख) तृतीया द्विवचन (ग) प्रथम बहुवचन (घ) षष्ठी बहुवचन
Answer: (क) चतुर्थी एकवचन
In simple words: 'सरिते' शब्द 'सरित्' (नदी) का चतुर्थी विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'नदी के लिए' होता है।
🎯 Exam Tip: 'सरित्' जैसे व्यंजन-कारान्त स्त्रीलिंग शब्दों में चतुर्थी एकवचन में 'ए' या 'ऐ' का प्रयोग होता है।
Question 16. मतीनाम् - (क) सप्तमी बहुवचन (ख) चतुर्थी द्विवचन (ग) तृतीया एकवचन (घ) षष्ठी बहुवचन
Answer: (घ) षष्ठी बहुवचन
In simple words: 'मतीनाम्' शब्द 'मति' (बुद्धि) का षष्ठी विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'बुद्धियों का' होता है।
🎯 Exam Tip: 'इनाम्' या 'नाम' प्रत्यय षष्ठी बहुवचन की पहचान है, जो स्त्रीलिंग शब्दों में पाया जाता है।
Question 17. नयः - (क) प्रथमा बहुवचन (ख) षष्ठी एकवचन (ग) तृतीया एकवचन (घ) द्वितीया बहुवचन
Answer: (क) प्रथमा बहुवचन
In simple words: 'नयः' शब्द 'नय' का प्रथमा विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'नीतियाँ' होता है।
🎯 Exam Tip: अ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों में प्रथमा बहुवचन में विसर्ग के साथ 'आः' का प्रयोग होता है।
Question 18. वानराः - (क) तृतीया एकवचन (ख) सप्तमी द्विवचन (ग) प्रथमा बहुवचन (घ) द्वितीया एकवचन
Answer: (ग) प्रथमा बहुवचन
In simple words: 'वानराः' शब्द 'वानर' का प्रथमा विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'बंदर' (बहुत से) होता है।
🎯 Exam Tip: अ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों के प्रथमा बहुवचन का रूप विसर्ग के साथ समाप्त होता है।
Question 19. हरिभिः - (क) तृतीया एकवचन (ख) द्वितीया द्विवचन (ग) तृतीया बहुवचन (घ) प्रथमा द्विवचन
Answer: (ग) तृतीया बहुवचन
In simple words: 'हरिभिः' शब्द 'हरि' का तृतीया विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'हरियों के द्वारा' होता है।
🎯 Exam Tip: 'भिः' प्रत्यय इ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों में तृतीया बहुवचन की पहचान है।
Question 20. जगत्सु - (क) पंचमी एकवचन (ख) षष्ठी एकवचन (ग) द्वितीया बहुवचन (घ) सप्तमी, बहुवचन
Answer: (घ) सप्तमी, बहुवचन
In simple words: 'जगत्सु' शब्द 'जगत्' (संसार) का सप्तमी विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'संसारों में' होता है।
🎯 Exam Tip: सप्तमी बहुवचन में 'सु' या 'षु' का प्रयोग होता है, जो शब्द के अंतिम वर्ण पर निर्भर करता है।
Question 21. आत्मानम् - (क) षष्ठी बहुवचन (ख) द्वितीया एकवचने, (ग) सप्तमी द्विवचन (घ) चतुर्थी एकवचन
Answer: (ख) द्वितीया एकवचने
In simple words: 'आत्मानम्' शब्द 'आत्मन्' का द्वितीया विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'आत्मा को' होता है।
🎯 Exam Tip: न-कारान्त शब्दों के द्वितीया एकवचन में 'आनाम्' प्रत्यय नहीं, बल्कि 'आन्' या 'अम्' प्रत्यय का प्रयोग होता है। यहां 'आत्मानम्' सही है।
Question 22. राज्ञाम् - (क) पञ्चमी द्विवचन (ख) द्वितीया एकवचन (ग) षष्ठी बहुवचन (घ) चतुर्थी एकवचन
Answer: (ग) षष्ठी बहुवचन
In simple words: 'राज्ञाम्' शब्द 'राजन्' (राजा) का षष्ठी विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'राजाओं का' होता है।
🎯 Exam Tip: 'आम्' या 'नाम्' प्रत्यय षष्ठी बहुवचन की पहचान है, जो न-कारान्त शब्दों में भी देखा जाता है।
Question 23. रमायाम् - (क) पंचमी बहुवचन (ख) चतुर्थी एकवचन (ग) षष्ठी द्विवचन (घ) सप्तमी एकवचन
Answer: (घ) सप्तमी एकवचन
In simple words: 'रमायाम्' शब्द 'रमा' का सप्तमी विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'रमा में' या 'रमा पर' होता है।
🎯 Exam Tip: आ-कारान्त स्त्रीलिंग शब्दों के सप्तमी एकवचन में 'याम्' प्रत्यय का प्रयोग होता है।
Question (ग). इन संस्कृत शब्दों में से काले अक्षरों में छपे शब्दों में विभक्ति को पहचान कर लिखिए - (1) राज्ञः पुत्रः (2) पुत्रेण सह । (3) वृक्षात् पतति । (4) पादेन खञ्जः । (5) छात्रेभ्यः स्वस्ति । (6) ग्रामं निकषा ।
Answer: (1) षष्ठीएकवचन, (2) तृतीया एकवचन, (3) पञ्चमी एकवचन, (4) तृतीया एकवचन, (5) चतुर्थी बहुवचन, (6) द्वितीया एकवचन ।
In simple words: यह प्रश्न विभिन्न विभक्ति नियमों का परीक्षण करता है, जैसे षष्ठी संबंध के लिए, तृतीया 'के साथ' या 'अंग विकार' के लिए, पंचमी 'अलग होने' के लिए, चतुर्थी 'स्वस्ति' जैसे शब्दों के साथ, और द्वितीया 'निकषा' जैसे शब्दों के साथ।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक शब्द के लिए प्रयुक्त सूत्र या नियम को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे 'सहयुक्तेऽप्रधाने' या 'येनाङ्गविकारः', जो सही विभक्ति की पहचान में मदद करता है।
Question (घ). निम्नांकित शब्दों में प्रयुक्त विभक्ति और वचन का उल्लेख कीजिए-
(1) आत्मनोः
(2) राजभ्यः
(3) सर्वेषु
(4) सरिद्भिः
(5) राजभिः
(6) सर्वयोः
(7) गुरवे
(8) नाम्नि
(9) सरिताम्
(10) रामैः
(11) आत्मभिः
(12) सरिति
(13) यान्
(14) राज्ञाम्
(15) राज्ञा
(16) सर्वस्मै
(17) नाम्नाम्
(18) राज्ञे
(19) सरिद्भिः
(20) आत्मनः
(21) नामनि
(22) जगते
(23) गंगायै
(24) ग्रामात्
(25) पितृणाम्
(26) आत्मसु
(27) सरिता
(28) सर्वस्मात्
(29) बालकस्य
(30) शिशूनां
(31) हरयः
(32) राजानौ
(33) नाम्ना
(34) सर्वान्
(35) जगताम्
(36) जगति
(37) सर्वस्मिन्
(38) राजानम्.
(39) आत्मनि
(40) सरित्सु
(41) नाम्ने
(42) सर्वेषाम्
(43) गृहस्य
(44) सर्वाम्गि
(45) सरिते
(46) राज्ञि
(47) अस्याम्
(48) यासु
(49) यस्मै
(50) यस्मिन्
(51) जगता
(52) राजसु
(53) सर्वस्याम्
(54) आत्मना
(55) सर्वेषु
(56) यस्मात्
(57) येषाम
(58) सरितम्
(59) सर्वण
(60) अस्मिन्
(61) राजानः
(62) याभि
Answer: (1) षष्ठी/सप्तमी विभक्ति, द्विवचन,
(2) चतुर्थी/पञ्चमी विभक्ति, बहुवचन,
(3) सप्तमी विभक्ति, बहुवचन,
(4) तृतीया विभक्ति, बहुवचन,
(5) तृतीया विभक्ति, बहुवचन,
(6) षष्ठी/सप्तमी विभक्ति, द्विवचन,
(7) चतुर्थी विभक्ति, एकवचन,
(8) सप्तमी विभक्ति, एकवचन,
(9) षष्ठी विभक्ति, बहुवचन,
(10) तृतीया विभक्ति, बहुवचन,
(11) तृतीया, बहुवचन,
(12) सप्तमी, एकवचन,
(13) यत् (पुं०) द्वितीया, बहुवचन,
(14) षष्ठी बहुवचन,
(15) तृतीया, एकवचन,
(16) सर्व (पुं०) चतुर्थी, एकवचन,
(17) षष्ठी, बहुवचन,
(18) चतुर्थी, एकवचन,
(19) तृतीया, बहुवचन,
(20) पञ्चमी-षष्ठी, एकवचन,
(21) सप्तमी, एकवचन,
(22) चतुर्थी एकवचन,
(23) चतुर्थी, एकवचन,
(24) पञ्चमी एकवचन,
(25) षष्ठी, बहुवचन,
(26) सप्तमी, बहुवचन,
(27) तृतीया, एकवचन,
(28) पञ्चमी, एकवचन,
(29) षष्ठी, एकवचन,
(30) षष्ठी, बहुवचन,
(31) प्रथमा, एकवचन,
(32) प्रथमा/द्वितीया, द्विवचन
(33) तृतीया, एकवचन,
(34) द्वितीय, बहुवचन (पुं०),
(35) षष्ठी, बहुवचन,
(36) सप्तमी, एकवचन,
(37) सप्तमी, एकवचन (पुं०),
(38) द्वितीया, एकवचन,
(39) सप्तमी, एकवचन,
(40) सप्तमी, बहुवचन,
(41) चतुर्थी, एकवचन,
(42) षष्ठी, बहुवचन,
(43) षष्ठी, एकवचन,
(44) प्रथमा, बहुवचन (नपुं०),
(45) चतुर्थी, एकवचन,
(46) सप्तमी, एकवचन,
(47) सप्तमी, एकवचन (स्त्री०),
(48) सप्तमी, बहुवचन (स्त्री०),
(49) यत् (पुं०), चतुर्थी, एकवचन,
(50) यत् (पुं०), सप्तमी, एकवचन,
(51) तृतीया, एकवचन,
(52) सप्तमी, बहुवचन,
(53) सर्व (स्त्री०), सप्तमी, एकवचन,
(54) तृतीया, एकवचन,
(55) सर्व (पुं०), सप्तमी, बहुवचन,
(56) यत् (पुं०), पंचमी, एकवचन।
(57) षष्ठी, बहुवचन,
(58) द्वितीय, एकवचन,,
(59) तृतीया, एकवचन,
(60) सप्तमी, एकवचन,
(61) प्रथमा, बहुवचन,
(62) तृतीया, बहुवचन। उत्तरः
In simple words: यह प्रश्न विभिन्न संस्कृत शब्दों के विभक्ति और वचन की पहचान करने का अभ्यास कराता है। प्रत्येक शब्द के अंत में जुड़े प्रत्यय और शब्द के मूल रूप को समझकर सही विभक्ति और वचन पहचाने जा सकते हैं।
🎯 Exam Tip: शब्द-रूपों को याद करने के लिए नियमित अभ्यास और पैटर्न पहचानना महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से अ-कारान्त, इ-कारान्त, उ-कारान्त, ऋ-कारान्त तथा सर्वनाम शब्दों के रूपों पर ध्यान दें।
ध्यातव्य-यद्यपि पाठ्यक्रम में शब्द-रूप निर्धारित नहीं हैं, फिर भी विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विभक्तियों से सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए कुछ शब्दों के रूप दिये जा रहे हैं-
(1) अकारान्त पुंल्लिङ्ग राम'
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | रामः | रामौ | रामाः |
| द्वितीया | रामम् | रामौ | रामान् |
| तृतीया | रामेण | रामाभ्याम् | रामैः |
| चतुर्थी | रामाय | रामाभ्याम् | रामेभ्यः |
| पञ्चमी | रामात् | रामाभ्याम् | रामेभ्यः |
| षष्ठी | रामस्य | रामयोः | रामाणाम् |
| सप्तमी | रामे | रामयोः | रामेषु |
| सम्बोधन | हे राम ! | हे रामौ ! | हे रामाः ! |
विशेष-नरः, पुत्रः, जनकः, नृपः, शिष्यः, सूर्यः, चन्द्रः, खगः, मयूरः, धर्मः, अनलः, पवनः, करः, सिंहः, मृगः, गजः, देवः, इन्द्रः, सुर, आदि अकारान्त पुंल्लिङ्ग शब्द हैं। इन सभी के रूप 'राम' शब्द की तरह चलते हैं।
(2) इकारान्त पुंल्लिङ्ग 'हरि'
| प्रथमा | हरिः | हरी | हरयः |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | हरिम् | हरी | हरीन् |
| तृतीया | हरिणा | हरिभ्याम् | हरिभिः |
| चतुर्थी | हरये | हरिभ्याम् | हरिभ्यः |
| पञ्चमी | हरेः | हरिभ्याम् | हरिभ्यः |
| षष्ठी | हरे: | हर्योः | हरीणाम् |
| सप्तमी | हरौ | हर्योः | हरिषु |
| सम्बोधन | हे हरे ! | हे हरी ! | हे हरयः ! |
विशेष- कपि, कवि, मुनि आदि इकारान्त शब्दों के रूप 'हरि' के समान चलते हैं।
(3) उकारान्त पुंल्लिङ्ग 'गुरु' (अध्यापक)
| प्रथमा | गुरुः | गुरू | गुरवः |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | गुरुम् | गुरू | गुरून् |
| तृतीया | गुरुणा | गुरुभ्याम् | गुरुभिः |
| चतुर्थी | गुरवे | गुरुभ्याम् | गुरुभ्यः |
| पञ्चमी | गुरोः | गुरुभ्याम् | गुरुभ्यः |
| षष्ठी | गुरोः | गुर्वोः | गुरूणाम् |
| सप्तमी | गुरौ - | गुर्वोः | गुरुषु |
| सम्बोधन | हे गुरो ! | हे गुरू ! | हे गुरवः ! |
विशेष-तरु, शिशु, बन्धु, भानु इत्यादि उकारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों के रूप 'गुरु' की भाँति ही चलते हैं।
(4) सम्बन्धवाची ऋकारान्त पुंल्लिङ्ग 'पितृ'
| प्रथमा | पिता | पितरौ | पितरः |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | पितरम् | पितरौ | पितृन् |
| तृतीया | पित्रा | पितृभ्याम् | पितृभिः |
| चतुर्थी | पित्रे | पितृभ्याम् | पितृभ्यः |
| पञ्चमी | पितुः | पितृभ्याम् | पितृभ्यः |
| षष्ठी | पितुः | पित्रोः | पितृणाम् |
| सप्तमी | पितरि | पित्रोः | पितृषु |
| सम्बोधन | हे पितृः ! | हे पितरौ ! | हे पितरः ! |
विशेष-भ्रातृ, नृ (मनुष्य), देवृ (देवर), श्रोतॄ, होतॄ, भर्तॄ, नेतॄ इत्यादि ऋकारान्त शब्दों के रूम भी 'पितृ' की भाँति चलते हैं।
(5) आत्मन् (आत्मा) संज्ञा (पुंल्लिङ्ग)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | आत्मा | आत्मानौ | आत्मानः |
| द्वितीया | आत्मानम् | आत्मानौ | आत्मनः |
| तृतीया | आत्मना | आत्मभ्याम् | आत्मभिः |
| चतुर्थी | आत्मने | आत्मभ्याम् | आत्मभ्यः |
| पञ्चमी | आत्मनः | आत्मभ्याम् | आत्मभ्यः |
| षष्ठी | आत्मनः | आत्मनोः | आत्मनाम् |
| सप्तमी | आत्मनि | आत्मनोः | आत्मसु |
| सम्बोधन | हे आत्मन् ! | हे आत्मानौ ! | हे आत्मानः ! |
(6) राजन् (राजा) संज्ञा (पुंल्लिङ्ग)
| प्रथमा | राजा | राजानौ | राजानः |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | राजानम् | राजानौ | राज्ञः |
| तृतीया | राज्ञा | राजभ्याम् | राजभिः |
| चतुर्थी | राज्ञे | राजभ्याम् | राजभ्यः |
| पञ्चमी | राज्ञः | राजभ्याम् | राजभ्यः |
| षष्ठी | राज्ञः | राज्ञोः | राज्ञाम् |
| सप्तमी | राज्ञि, राजनि | राज्ञोः | राजसु |
| सम्बोधन | हे राजन् ! | हे राजानौ ! | हे राजानः ! |
(7) आकारान्त स्त्रीलिङ्ग 'रमा' (लक्ष्मी)
| प्रथमा | रमा | रमे | रमाः |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | रमाम् | रमे | रमाः |
| तृतीया | रमया | रमाभ्याम् | रमाभिः |
| चतुर्थी | रमायै | रमाभ्याम् | रमाभ्यः |
| पञ्चमी | रमायाः | रमाभ्याम् | रमाभ्यः |
| षष्ठी | रमायाः | रमयोः | रमाणाम् |
| सप्तमी | रमायाम् | रमयोः | रमासु |
| सम्बोधन | हे रमा ! | हे रमा! | हे रमाः! |
विशेष-बाला, कन्या, भार्या, माला, छात्रा, सीता इत्यादि आकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों के रूप 'रमा' की भाँति चलते हैं।
(8) इकारान्त स्त्रीलिङ्ग 'मति' (बुद्धि)
| प्रथमा | मतिः | मती | मतयः |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | मतिम् | मती | मतीः |
| तृतीया | मत्या | मतिभ्याम् | मतिभिः |
| चतुर्थी | मत्यै, मतये | मतिभ्याम् | मतिभ्यः |
| पञ्चमी | मत्याः, मते | मतिभ्याम् | मतिभ्यः |
| षष्ठी | मत्याः, मते | मत्योः | मतीनाम् |
| सप्तमी | मत्याम्, मतौ | मत्योः | मतिसु |
| सम्बोधन | हे मते ! | हे मती ! | हे मतयः ! |
विशेष- बुद्धि, गति, भक्ति, धूलि, जाति, कृति, सन्तति इत्यादि इकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों के रूप 'मति' की भाँति चलते हैं।
(9) ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग 'नदी'
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | नदी | नद्यौ | नद्यः |
| द्वितीया | नदीम् | नद्यौ | नदीः |
| तृतीया | नद्या | नदीभ्याम् | नदीभिः |
| चतुर्थी | नद्यै | नदीभ्याम् | नदीभ्यः |
| पञ्चमी | नद्याः | नदीभ्याम् | नदीभ्यः |
| षष्ठी | नद्याः | नद्योः | नदीनाम् |
| सप्तमी | नद्याम् | नद्योः | नदीषु |
| सम्बोधन | हे नदि ! | हे नद्यौ ! | हे नद्यः ! |
विशेष- राज्ञी, नारी, पार्वती, कुन्ती, गौरी, पुत्री, दासी, श्रीमती इत्यादि ईकारान्त शब्दों के रूप 'नदी' की भाँति चलते हैं।
(10) उकारान्त स्त्रीलिङ्ग 'धेनु'
| प्रथमा | धेनुः | धेनू | धेनवः |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | धेनुम् | धेनू | धेनूः |
| तृतीया | धेन्वा | धेनुभ्याम् | धेनुभिः |
| चतुर्थी | धेनवे, धेन्वै | धेनुभ्याम् | धेनुभ्यः |
| पञ्चमी | धेनोः, धेन्वाः | धेनुभ्याम् | धेनुभ्यः |
| षष्ठी | धेनोः, धेन्वाः | धेन्वोः | धेनूनाम् |
| सप्तमी | धेनौः, धेन्वाम् | धेन्वोः | धेनुषु ! |
| सम्बोधन | हे धेनो ! | हे धेनू ! | हे धेनवः ! |
विशेष-तनु, रेणुः हनु इत्यादि उकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों के रूप 'धेनु की भाँति चलते हैं।
(11) ऊकारान्त स्त्रीलिङ्ग 'वधू'
| प्रथमा | वधूः | वध्वौ | वध्वः |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | वधूम् | वध्वौ | वधूः |
| तृतीया | वध्वा | वधूभ्याम् | वधूभिः |
| चतुर्थी | वध्वै | वधूभ्याम् | वधूभ्यः |
| पञ्चमी | वध्वाः | वधूभ्याम् | वधूभ्यः |
| षष्ठी | वध्वाः | वध्वोः | वधूनाम् |
| सप्तमी | वध्वाम् | वध्वोः | वधूषु |
| सम्बोधन | हे वधु ! | हे वध्वौ ! | हे वध्वः ! |
विशेष-ऊकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों के रूप 'वधू' की भाँति चलते हैं।
(12) सरित् (नदी) संज्ञा (स्त्रीलिङ्ग)
| प्रथमा | सरित्, सरिद् | सरितौ | सरितः |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | सरितम् | सरितौ | सरितः |
| तृतीया | सरिता | सरिद्भ्याम् | सरिद्भिः |
| चतुर्थी | सरिते | सरिद्भ्याम् | सरिद्भ्यः |
| पञ्चमी | सरितः | सरिद्भ्याम् | सरिद्भ्यः |
| षष्ठी | सरितः | सरितोः | सरिताम् |
| सप्तमी | सरिति | सरितोः | सरित्सु |
| सम्बोधन | हे सरित्!, हे सरिद्! | हे सरितौ ! | हे सरितः ! |
(13) अकारान्त नपुंसकलिङ्ग 'गृह' (घर)
| प्रथमा | गृहम् | गृहे | गृहाणि |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | गृहम् | गृहे | गृहाणि |
| तृतीया | गृहेण | गृहाभ्याम् | गृहैः |
| षष्ठी | मधुनः | मधुनोः | मधूनाम् |
| सप्तमी | मधुनि | मधुनोः | मधुषु |
| सम्बोधन | हे मधु !, | हे मधुनी ! | हे मधूनि ! मधो! |
विशेष-जानु (घुटना), दारु (लकड़ी), तालु, वस्तु, सानु (पर्वत की चोटी) इत्यादि उकारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्दों के रूप 'मधु' की भाँति चलते हैं।
(16) जगत् (संसार) संज्ञा (नपुंसकलिङ्ग)
| प्रथमा | जगत् | जगती | जगन्ति |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | जगत् | जगती | जगन्ति |
| तृतीया | जगता | जगद्भ्याम् | जगद्भिः |
| चतुर्थी | जगते | जगद्भ्याम् | जगद्भ्यः |
| पञ्चमी | जगतः | जगद्भ्याम् | जगद्भ्यः |
| षष्ठी | जगतः | जगतोः | जगताम् |
| सप्तमी | जगति | जगतोः | जगत्सु |
| सम्बोधन | हे जगत्! | हे जगती ! | हे जगन्ति ! |
(17) नामन् (नाम) संज्ञा (नपुंसकलिङ्ग)
| प्रथमा | नाम | नाम्नी, नामनी | नामानि |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | नाम | नाम्नी, नामनी | नामानि |
| तृतीया | नाम्ना | नामभ्याम् | नामभिः |
| चतुर्थी | नाम्ने | नामभ्याम् | नामभ्यः |
| पञ्चमी | नाम्नः | नामभ्याम् | नामभ्यः |
| षष्ठी | नाम्नः | नाम्नोः | नाम्नाम् |
| सप्तमी | नाम्नि, नामनि, | नाम्नोः | नामसु |
| सम्बोधन | हे नाम !, हे नामन् ! | हे नाम्नी!, हे नामनी ! | हे नामानि ! |
(18) सर्व (सब) सर्वनाम
(अ) पुंल्लिङ्ग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सर्वः | सर्वो | सर्वे |
| द्वितीया | सर्वम् | सर्वो | सर्वान् |
| तृतीया | सर्वेण | सर्वाभ्याम् | सर्वैः |
| चतुर्थी | सर्वस्मै | सर्वाभ्याम् | सर्वेभ्यः |
| पञ्चमी | सर्वस्मात् | सर्वाभ्याम् | सर्वेभ्यः |
| षष्ठी | सर्वस्य | सर्वयोः | सर्वेषाम् |
| सप्तमी | सर्वस्मिन् | सर्वयोः | सर्वेषु |
(ब) स्त्रीलिङ्ग
| प्रथमा | सर्वा | सर्वे | सर्वाः |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | सर्वाम् | सर्वे | सर्वाः |
| तृतीया | सर्वया | सर्वाभ्याम् | सर्वाभिः |
| चतुर्थी | सर्वस्यै | सर्वाभ्याम् | सर्वाभ्यः |
| पञ्चमी | सर्वस्याः | सर्वाभ्याम् | सर्वाभ्यः |
| षष्ठी | सर्वस्याः | सर्वयोः | सर्वासाम् |
| सप्तमी | सर्वस्याम् | सर्वयोः | सर्वासु |
(स) नपुंसकलिङ्ग
| प्रथमा | सर्वम् | सर्वे | सर्वाणि |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | सर्वम | सर्वे | सर्वाणि |
[संकेत - तृतीया से सप्तमी तक के शेष रूप पुंल्लिङ्ग की तरह चलेंगे।।]
(19) इदम् (यह)
(अ) पुंल्लिङ्ग
| प्रथमा | अयम् | इमौ | इमे |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | इमम्, एनम् | इमौ, एनौ | इमान्, एनान् |
[संकेत- तृतीया से सप्तमी तक के शेष रूप पुंल्लिङ्ग की तरह चलेंगे।।]
(20) यत् (जो)
(अ) पुंल्लिङ्ग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | यः | यौ | ये |
| द्वितीया | यम् | यौ | यान् |
| तृतीया | येन | याभ्याम् | यैः |
| चतुर्थी | यस्मै | याभ्याम् | येभ्यः |
| पञ्चमी | यस्मात्, यस्माद् | याभ्याम् | येभ्यः |
| षष्ठी | यस्य | ययोः | येषाम् |
| स सप्तमी | यस्मिन् | ययोः | येषु |
(ब) स्त्रीलिङ्ग
| प्रथमा | या | ये | याः |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | याम् | ये | याः |
| तृतीया | यया | याभ्याम् | याभिः |
| चतुर्थी | यस्यै | याभ्याम् | याभ्यः |
| पञ्चमी | यस्याः | याभ्याम् | याभ्यः |
| षष्ठी | यस्याः | ययोः | यासाम् |
| सप्तमी | यस्मान् | ययोः | यासु |
(स) नपुंसकलिङ्ग
| प्रथमा | यत्, यद् | ये | यानि |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | यत्, यद् | ये | यानि |
[संकेत- तृतीया से सप्तमी तक के शेष रूप पुंल्लिङ्ग की तरह चलेंगे।।]
(21) एतद् (यह)
(अ) पुंल्लिङ्ग
| प्रथमा | एषः | एतौ | एते |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | एतम्, एनम् | एतौ, एनौ | एतान्, एनान् |
| तृतीया | एतेन, एनेन | एताभ्याम् | एतैः |
| चतुर्थी | एतस्मै | एताभ्याम् | एतेभ्यः |
| पञ्चमी | एतस्मात् | एताभ्याम् | एतेभ्यः |
| षष्ठी | एतस्य | एतयोः, एनयोः | एतेषाम् |
| सप्तमी | एतस्मिन् | एतयोः, एनयोः | एतेषु |
(ब) स्त्रीलिङ्ग
| प्रथमा | एषा | एते | एताः |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | एताम्, एनाम् | एते, एने | एताः, एनाः |
| तृतीया | एतया, एनया | एताभ्याम् | एताभिः |
| चतुर्थी | एतस्यै | एताभ्याम् | एताभ्यः |
| पञ्चमी | एतस्याः | एताभ्याम् | एताभ्यः |
| षष्ठी | एतस्याः | एतयोः, एनयोः | एतासाम् |
| सप्तमी | एतस्याम् | एतयोः, एनयोः | एतासु |
(स) नपुंसकलिङ्ग
| प्रथमा | एतत्, एतद् | एते | एतानि |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | एतत्, एनत् | एते, एने | एतानि, एनानि |
(22) अदस् (वह)
(अ) पुंल्लिङ्ग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | असौ | अमू | अमी |
| द्वितीया | अमुम् | अमू | अमून् |
| तृतीया | अमुना | अमूभ्याम् | अमीभिः |
| चतुर्थी | अमुष्मै | अमूभ्याम् | अमीभ्यः |
| पञ्चमी | अमुष्मात् | अमूभ्याम् | अमीभ्यः |
| षष्ठी | अमुष्य | अमुयोः | अमीषाम् |
| सप्तमी | अमुष्मिन् | अमुयोः | अमीषु |
(ब) स्त्रीलिङ्ग
| प्रथमा | असौ | अमू | अमूः |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | अमुम् | अमू | अमूः |
| तृतीया | अमुया | अमूभ्याम् | अमूभिः |
| चतुर्थी | अमुष्यै | अमूभ्याम् | अमूभ्यः |
| पञ्चमी | अमुष्याः | अमूभ्याम् | अमूभ्यः |
| षष्ठी | अमुष्याः | अमुयोः | अमूषाम् |
| सप्तमी | अमुष्याम्, | अमुयोः | अमूषु |
(स) नपुंसकलिङ्ग
| प्रथमा | अदः | अमू | अमूनि |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | अदः | अमू | अमूनि |
[संकेत - तृतीया से सप्तमी तक के शेष रूप पुल्लिङ्ग की भाँति चलेंगे।]
(23) किम् (कौन)
(अ) पुंल्लिङ्ग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | कः | कौ | के |
| द्वितीया | कम् | कौ | कान् |
| तृतीया | केन | काभ्याम् | कैः |
| चतुर्थी | कस्मै | काभ्याम् | केभ्यः |
| पञ्चमी | कस्मात् | काभ्याम् | केभ्यः |
| षष्ठी | कस्य | कयोः | केषाम् |
| सप्तमी | कस्मिन् | कयोः | केषु |
(ब) स्त्रीलिङ्ग
| प्रथमा | का | के | काः |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | काम् | के | काः |
| तृतीया | कया | काभ्याम् | काभिः |
| चतुर्थी | कस्यै | काभ्याम् | काभ्यः |
| पञ्चमी | कस्याः | काभ्याम् | काभ्यः |
| षष्ठी | कस्याः | कयोः | कासाम् |
| सप्तमी | कस्याम् | कयोः | कासु |
(स) नपुंसकलिङ्ग
| प्रथमा | किम् | के | कानि |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | किम् | के | कानि |
[संकेत- तृतीया से सप्तमी तक के शेष रूप पुल्लिङ्ग की तरह चलेंगे।]
Free study material for Hindi
Step-by-Step Textbook Answers: Class 11 Hindi Sanskrit संस्कृत शब्दो में विभक्ति की पहचान
Chapter-wise Textbook Answers for Class 11
Find reliable UP Board Solutions for Sanskrit संस्कृत शब्दो में विभक्ति की पहचान designed to simplify your homework and study sessions. Every question from the Class 11 Hindi textbook is thoroughly answered in accordance with current academic term requirements and the active UP Board syllabus.
Mastering Theoretical & Practical Questions
Our faculty has formulated detailed, step-by-step explanations for challenging problems across the Class 11 Hindi chapter. Beyond giving direct outcomes, we break down the underlying theories to foster genuine topic comprehension. Ideal for Class 11 learners tackling both theoretical and numerical questions, reviewing these UP Board Questions and Answers significantly strengthens fundamental concepts.
Effective Self-Study and Homework Assistance
Integrating our Hindi solution guides into your routine enhances cognitive pacing and accuracy. These resources act as an effective roadmap for Class 11 homework tasks, which can be augmented further using our curated Revision Notes and Sample Papers for Sanskrit संस्कृत शब्दो में विभक्ति की पहचान to ensure comprehensive exam coverage.
FAQs
The complete and updated UP Board Solutions Class 11 Hindi Sanskrit संस्कृत शब्दो में विभक्ति की पहचान is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 11 Hindi are as per latest UP Board curriculum.
Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 11 Hindi Sanskrit संस्कृत शब्दो में विभक्ति की पहचान as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 11 Hindi Sanskrit संस्कृत शब्दो में विभक्ति की पहचान will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 11 Hindi. You can access UP Board Solutions Class 11 Hindi Sanskrit संस्कृत शब्दो में विभक्ति की पहचान in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 11 Hindi Sanskrit संस्कृत शब्दो में विभक्ति की पहचान in printable PDF format for offline study on any device.