UP Board Solutions Class 11 Hindi Chapter Sanskrit Shabdon Mein Vibhakti Ki Pehchan

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Download Solutions: Sanskrit संस्कृत शब्दो में विभक्ति की पहचान (Class 11 Hindi UP Board)

नवीनतम पाठयक्रम के अनुसार परीक्षा में रेखांकित शब्दों में लगी विभक्ति अथवा दिये गये शब्दों में प्रयुक्त विभक्ति से सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके लिए 2 अंक निर्धारित हैं। ये प्रश्न बहुविकल्पीय भी हो सकते हैं। विभक्ति का निर्देश करते समय छात्र से उससे सम्बन्धित सूत्र का उल्लेख करने की अपेक्षा भी की जाती है।

(1) सूत्र-अभितः परितः समया निकषा हा प्रतियोगेऽपि ।
अभितः (चारों ओर या सभी ओर), परितः (सभी ओर), समया (समीप), निकषा (समीप), हा (शोक के लिए प्रयुक्त शब्द), प्रति (ओर, तरफ) शब्दों के योग में द्वितीया विभक्ति होती है।
उदाहरण - आश्रमम् अभितः वनम् अस्ति। आश्रम के चारों ओर वन हैं।
ग्रामं परितः उपवनानि सन्ति । गाँव के सब ओर उपवन हैं।
लंकां समया (निकषा वा)। लंका के समीप।
हा ! कृष्णाभक्तम्। कृष्ण के अभक्त पर खेद है।
सः ग्रामं प्रति गच्छति । वह गाँव की ओर जा रहा है।
गृहं परितः। घर के चारों ओर।
ग्रामं निकषा नदी वहति। गाँव के निकट नदी बहती है।
ग्राम निकषा। गाँव के निकट ।
विद्यालयम् अभितः । विद्यालय के चारों ओर।
विद्यालयं परितः। विद्यालय के सब ओर।
बुभुक्षितं न प्रतिभाति किंचित्। कोई भूखा नहीं दीखता।
विद्यालयं समया। विद्यालय के समीप।
श्यामः रामं निकषा तिष्ठति। श्याम राम के निकट बैठता है।
दीनं प्रति । दीन की ओर।
अयोध्यां निकषा । अयोध्या के निकट।
ग्रामं परितः। गाँव के सब ओर।
धनुर्धरः हरिणं प्रति अपश्यत्। धनुर्धर ने हिरण की ओर देखा।
विद्यालयं निकषा जलाशयः अस्ति। विद्यालय के समीप जलाशय है।
मातुः हृदयं कन्यां प्रति स्निग्धं भवति। माता का हृदय कन्या के प्रति कोमल होता है।
ग्रामं समया पाठशाला अस्ति। गाँव के समीप पाठशाला है।

(2) सूत्र-येनाङ्गविकारः
जिस, अंग में विकार होने से शरीर विकृत दिखाई दे, उस विकारयुक्त अंग में तृतीया विभक्ति होती है।
उदाहरण - शिरसा खल्वाटः । सिर से गंजा।
कर्णाभ्यां बधिरः। कानों का बहरा।
अक्ष्णा काणः। आँख का काना।
पादेन खञ्जः। पैर का लँगड़ा।
कर्णेन बधिरः। कान का बहरा।
कट्या कुब्जः। कमर से कुबड़ा।
राकेशः शिरसा खल्वाटः अस्ति। राकेश सिर से गंजा है।
मोहनः कट्याः कुब्जः अस्ति। मोहन कमर से कुबड़ा है।
गिरिधरः नेत्रेण काणः अस्ति। गिरधर नेत्र से काना है।
देवदत्तः कर्णेन बधिरः अस्ति। देवदत्त कान से बहरा है।
मोहनः पादेन खञ्जः अस्ति। मोहन पैर से लँगड़ा है।

(3) सूत्र-सहयुक्तेऽप्रधाने
साथ अर्थ वाले सह, साकम्, सार्धम्, समम् शब्दों के योग में अप्रधान (जिसके साथ जाने वाला जाये) में तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
उदाहरण - रामः लक्ष्मणेन सह वनम् अगच्छत्। राम लक्ष्मण के साथ वन में गये।
अहमपि त्वया सार्धं यास्यामि । मैं भी तुम्हारे साथ जाऊँगा।
सः पित्रा सह विद्यालयं गच्छति। वह पिता के साथ विद्यालय जाता है।
पुत्रेण सह। पुत्र के साथ।
छात्रेण सह। छात्र के साथ।
मृगाः मृगैः सङ्गमनुव्रजन्ति। मृग मृगों के साथ गमन करते हैं।
जनकेन सह। जनक के साथ।
नैकेनापि समं गता वसुमती। वसुमती के साथ एक भी नहीं गयी।
सीता रामेण सह वनम् अगच्छत्। सीता राम के साथ वन गयीं।
गुरुणा सह। गुरु के साथ।
माता पुत्रेण सह गच्छति। माता पुत्र के साथ जाती है।
उपाध्यायः छात्रैः समं स्नाति । अध्यापक छात्रों के साथ स्नान करता है।

(4) सूत्र-साधकतमं करणम् जिसकी सहायता से कार्य पूर्ण होता है, उसमें तृतीया विभक्ति होती है। उदाहरण प्रकृत्या साधु । प्रकृति से साधु ।

(5) सूत्र-नमःस्वस्तिस्वाहास्वधाऽलंवषट् योगाच्च
नमः (नमस्कार), स्वस्ति (कल्याण), स्वाहा (आहुति), स्वधा (बलि), अलम् (समर्थ, पर्याप्त), वषट् (आहुति)-इन शब्दों के योग में चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है।
उदाहरण - देवेभ्यः नमः। देवों को नमस्कार।
श्रीगुरवे नमः। श्रीगुरु को नमस्कार।
स्वस्ति तुभ्यं भवते। तुम्हारा कल्याण हो।
अग्नये स्वाहा। अग्नि के लिए स्वाहा।
इन्द्राये स्वाहा। इन्द्र के लिए स्वाहा।
पितृभ्यः स्वधा। पितरों के लिए स्वधा ।
दैत्येभ्यः हरिः अलम्। दैत्यों के लिए हरि पर्याप्त हैं।
दुर्गादेव्यै नमः। दुर्गा देवी के लिए नमस्कार।
राधाकृष्णाय वषट्। राधा-कृष्ण के लिए भेंट।
विष्णवे वषट्। विष्णु के लिए भेंट।
प्रजाभ्यः स्वस्ति। प्रजा का कल्याण हो।
नमः व्यासाय। व्यास को नमस्कार।
श्रीगणेशाय नमः। श्रीगणेश को नमस्कार।
अलं मल्लो मल्लाय। मल्ल (पहलवान) के लिए मल्ल पर्याप्त है।
विष्णवे स्वाहा। विष्णु के लिए स्वाहा।
तस्मै नमः। उसको नमस्कार।
छात्रेभ्यः स्वस्ति। छात्रों का कल्याण हो।
आकाशाय नमः। आकाश को नमस्कार।
कृष्णाय नमः। कृष्ण को नमस्कार।
तस्मै स्वधा । उसके लिए स्वधा।

(6) सूत्र-ध्रुवमपायेऽपादानम्
स्वयं से अलग करने वाले अर्थात् ध्रुव (मूल) में पंचमी विभक्ति होती है; जैसे-वृक्ष से पत्ते गिरते हैं। इस वाक्य में पत्तों को स्वयं से अलग करने वाला वृक्ष है; अतः वृक्ष में पंचमी विभक्ति होगी।

सः ग्रामात् आगच्छति। वह गाँव से आता है।
रामः कूपात् जलम् आनर्यात। राम कुएँ से पानी लाता है।
रामः विद्यालयात् गृहं गच्छति। राम विद्यालय से घर जाता है।

(7) सूत्र-आख्यातोपयोगे
नियमपूर्वक विद्या ग्रहण करने में जिससे विद्या ग्रहण की 'ती है, उसमें पंचमी विभक्ति होती है।

(8) सूत्र-भीत्रार्थानां भयहेतुः
'भय' तथा 'रक्षा' अर्थ वाली धातुओं के योग में जिससे डरा जाता है या रक्षा की जाती है, उसमें पंचमी विभक्ति होती है।

(9) सूत्र-षष्ठी शेषे
छह कारकों के अतिरिक्त सम्बन्ध अर्थ शेष बचता है। सम्बन्ध अर्थ में षष्ठी विभक्ति होती है।
उदाहरण - राज्ञः पुत्रः। राजा का पुत्र।
गृहस्य अन्तरे। घर के अन्दर।
समुद्रस्य तटम्। समुद्र का तट।
राज्ञः पुरुषः। राजा का पुरुष।
बालकस्य माता। बालक की माता।
कृष्णः वसुदेवस्य पुत्र आसीत्। कृष्ण वसुदेव के पुत्र थे।
खेमू नरेशस्य सेवकः अस्ति। रामू नरेश का नौकर है।
समुद्रस्य जलं क्षारं भवति। समुद्र का जल खारा होता है।
कूषस्य जलं मधुरं अस्ति। कुएँ का जल मीठा है।

(10) सूत्र-यतश्च निर्धारणम्
जहाँ बहुतों में से किसी एक को छाँटा जाये, वहाँ जिसमें से छाँटा जाये, उसमें षष्ठी अथवा सप्तमी विभक्ति, होती है।
उदाहरण - गवां/गोषु कपिला श्रेष्ठा। गायों में कपिला श्रेष्ठ है।
बालकानां/बालकेषु वा रामः ज्येष्ठः। बालकों में राम सबसे बड़ा है।
कन्यानां/कन्यासु वा लता कनिष्ठा। कन्याओं में लता सबसे छोटी है।
कवीनां/कविषु कालिदासः श्रेष्ठः। कवियों में कालिदास श्रेष्ठ हैं।
छात्राणां/छात्रासु रत्ना श्रेष्ठा। छात्राओं में रत्ना श्रेष्ठ है।
पुष्पिका छात्राणां श्रेष्ठा अस्ति। छात्राओं में पुष्पिका श्रेष्ठ है।
छात्रेषु अनिलः श्रेष्ठः । छात्रों में अनिल श्रेष्ठ है।

विशेष-संस्कृत शब्दों में विभक्ति की पहचान से सम्बन्धित प्रश्नों के चार सम्भावित प्रारूप हो सकते हैं। विभिन्न परीक्षा प्रश्न-पत्रों में इन चारों प्रारूपों के पूछे गये प्रश्न दिये जा रहे हैं

प्रश्न (क) निम्नलिखित शब्दों के शुद्ध विभक्ति रूप की पहचान कीजिए या दिये गये विकल्पों में जो सही विकल्प है, उसे बताइए

 

Question 1. 'राजन्' शब्द को चतुर्थी विभक्ति एक वचन का रूप होता है- (क) राजानम् (ख) राजभिः (ग) राज्ञे (घ) राज्ञः
Answer: (ग) राज्ञे
In simple words: 'राजन्' शब्द का चतुर्थी विभक्ति एकवचन रूप 'राज्ञे' होता है, जो 'राजा' शब्द के लिए 'के लिए' अर्थ में प्रयोग होता है।

🎯 Exam Tip: राजन् जैसे न-कारान्त शब्दों के विभक्ति रूपों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर चतुर्थी एकवचन जैसे विशिष्ट प्रयोगों पर ध्यान दें।

 

Question 2. 'सरित्' शब्द का पंचमी विभक्ति द्विवचन का रूप होता है- (क) सरिते (ख) सरित्सु (ग) सरिभ्याम् (घ) सरिति
Answer: (ग) सरिभ्याम्
In simple words: 'सरित्' (नदी) शब्द का पंचमी विभक्ति द्विवचन रूप 'सरिभ्याम्' है, जिसका अर्थ 'दो नदियों से/के द्वारा' होता है।

🎯 Exam Tip: 'सरित्' जैसे त-कारान्त स्त्रीलिंग शब्दों के रूपों को याद करने पर बल दें, विशेष रूप से पंचमी और तृतीया के द्विवचन रूप अक्सर समान होते हैं।

 

Question 3. 'आत्मन्' शब्द का तृतीयो एकवचन का रूप होता है- (क) आत्मनि (ख) आत्मने (ग) आत्मना (घ) आत्मनः
Answer: (ग) आत्मना
In simple words: 'आत्मन्' शब्द का तृतीय एकवचन रूप 'आत्मना' है, जिसका अर्थ 'आत्मा से' या 'आत्मा के द्वारा' होता है।

🎯 Exam Tip: 'आत्मन्' जैसे न-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों के विभिन्न विभक्ति रूपों को समझें, विशेषकर तृतीया एकवचन में 'ना' प्रत्यय का प्रयोग।

 

Question 4. 'इदम्' शब्द का षष्ठी विभक्ति बहुवचन का रूप होता है- (क) अस्मिन् (ख) एषाम् (ग) अस्मै (घ) अस्य
Answer: (ख) एषाम्
In simple words: 'इदम्' (यह) शब्द का षष्ठी विभक्ति बहुवचन रूप 'एषाम्' होता है, जिसका अर्थ 'इन सभी का' होता है।

🎯 Exam Tip: 'इदम्' जैसे सर्वनाम शब्दों के तीनों लिंगों में रूपों को याद रखें, क्योंकि ये अक्सर विभिन्न परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

 

Question 5. 'सर्व' शब्द (पुं० ) द्वितीया विभक्ति, बहुवचन का रूप होता है- (क) सर्वेभ्यः (ख) सर्वस्य (ग) सर्वान् (घ) सर्वम्
Answer: (ग) सर्वान्
In simple words: 'सर्व' (सभी) पुंल्लिङ्ग शब्द का द्वितीया विभक्ति बहुवचन रूप 'सर्वान्' है, जिसका अर्थ 'सभी को' होता है।

🎯 Exam Tip: सर्वनाम 'सर्व' के तीनों लिंगों में रूपों की अच्छी समझ रखें, खासकर बहुवचन के रूपों पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 6. 'जगत्' का पंचमी एकवचन में होता है- (क) जगती (ख) जम्बोः (ग) जगति (घ) जगतः
Answer: (घ) जगतः
In simple words: 'जगत्' (संसार) शब्द का पंचमी एकवचन रूप 'जगतः' है, जिसका अर्थ 'संसार से' होता है।

🎯 Exam Tip: 'जगत्' जैसे नपुंसकलिङ्ग शब्दों के पंचमी और षष्ठी एकवचन रूप अक्सर समान होते हैं, इन पर ध्यान दें।

 

Question 7. 'नदी' का सप्तमी बहुवचन में रूप होना है- (क) नदीभ्यः (ख) नद्योः (ग) नदीषु (घ) नद्याः
Answer: (ग) नदीषु
In simple words: 'नदी' शब्द का सप्तमी बहुवचन रूप 'नदीषु' है, जिसका अर्थ 'नदियों में' होता है।

🎯 Exam Tip: ई-कारान्त स्त्रीलिंग शब्दों के सप्तमी बहुवचन में 'षु' या 'सु' का प्रयोग होता है, 'नदीषु' इसका एक उदाहरण है।

 

Question 8. 'सरित्' का तृतीया विभक्ति एकवचन में रूप होता है- (क) सरितेन (ख) सरितौ (ग) सरितोः (घ) सरिता
Answer: (घ) सरिता
In simple words: 'सरित्' (नदी) शब्द का तृतीया एकवचन रूप 'सरिता' है, जिसका अर्थ 'नदी से' या 'नदी के द्वारा' होता है।

🎯 Exam Tip: व्यंजन-कारान्त स्त्रीलिंग शब्दों में 'आ' प्रत्यय के साथ तृतीया एकवचन का निर्माण अक्सर देखा जाता है।

 

Question 9. 'जगत्' का सप्तमी बहुवचन में रूप होता है- (क) जगति (ख) जगेत्सु (ग) जगताम् (घ) जगद्भिः
Answer: (ख) जगेत्सु
In simple words: 'जगत्' (संसार) शब्द का सप्तमी बहुवचन रूप 'जगेत्सु' है, जिसका अर्थ 'संसारों में' होता है।

🎯 Exam Tip: 'जगत्' जैसे त-कारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्दों के सप्तमी बहुवचन में 'सु' का प्रयोग होता है, ध्यान दें कि 'त्' का परिवर्तन भी होता है।

 

Question 10. 'पितृ' का षष्ठी एकवचन में रूप होता है- (क) पितुः (ख) पित्रे (ग) पितरः (घ) पित्रोः
Answer: (क) पितुः
In simple words: 'पितृ' (पिता) शब्द का षष्ठी एकवचन रूप 'पितुः' है, जिसका अर्थ 'पिता का' होता है।

🎯 Exam Tip: ऋ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों के षष्ठी एकवचन में 'उः' प्रत्यय का प्रयोग होता है, यह एक सामान्य पैटर्न है।

 

Question 11. 'सर्वे' (पुं०) तृतीया बहुवचन का रूप है- (क) सर्वो (ख) सर्वयोः (ग) सर्वैः (घ) सर्वस्य
Answer: (ग) सर्वैः
In simple words: 'सर्व' (सभी) पुंल्लिङ्ग शब्द का तृतीया बहुवचन रूप 'सर्वैः' है, जिसका अर्थ 'सभी के द्वारा' होता है।

🎯 Exam Tip: 'सर्व' जैसे सर्वनाम शब्दों के तृतीया बहुवचन में 'ऐः' प्रत्यय का प्रयोग होता है, इसे पहचानना सीखें।

 

Question 12. 'आत्मन्' का चतुर्थी, एकवचन का रूप होता है- (क) आत्मनः (ख) आत्मना (ग) आत्मने (घ)
Answer: (ग) आत्मने
In simple words: 'आत्मन्' शब्द का चतुर्थी एकवचन रूप 'आत्मने' है, जिसका अर्थ 'आत्मा के लिए' होता है।

🎯 Exam Tip: न-कारान्त शब्दों में चतुर्थी एकवचन 'ने' प्रत्यय के साथ समाप्त होता है, यह एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक बिंदु है।

 

Question 13. पुत्र' शब्द का तृतीया एकवचन में रूप होता है- (क) पुत्रेषु (ख) पुत्रान् (ग) पुत्रेण
Answer: (ग) पुत्रेण
In simple words: 'पुत्र' शब्द का तृतीया एकवचन रूप 'पुत्रेण' है, जिसका अर्थ 'पुत्र से' या 'पुत्र के द्वारा' होता है।

🎯 Exam Tip: अ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों में तृतीया एकवचन 'एण' प्रत्यय के साथ बनता है, जो संस्कृत व्याकरण का एक मूल नियम है।

 

Question 14. 'राजन्' शब्द का षष्ठी एकवचन में रूप होता है- (क) राज्ञाम् (ख) राज्ञः (ग) राज्ञां (घ) राज्ञोः
Answer: (ख) राज्ञः
In simple words: 'राजन्' (राजा) शब्द का षष्ठी एकवचन रूप 'राज्ञः' है, जिसका अर्थ 'राजा का' होता है।

🎯 Exam Tip: न-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों के षष्ठी एकवचन में 'ज्ञः' का प्रयोग एक विशिष्ट पैटर्न है, जिसे याद रखना चाहिए।

 

Question 15. 'राजन्' शब्द का तृतीया बहुवचन में रूप होता है- (क) राज्ञः (ख) राजभिः (ग) राजान्ः (घ) राजभ्यः
Answer: (ख) राजभिः
In simple words: 'राजन्' (राजा) शब्द का तृतीया बहुवचन रूप 'राजभिः' है, जिसका अर्थ 'राजाओं के द्वारा' होता है।

🎯 Exam Tip: 'भिः' प्रत्यय का प्रयोग तृतीया बहुवचन में होता है, जो 'राजन्' जैसे शब्दों में भी लागू होता है।

 

Question 16. जगत्' शब्द का सप्तमी द्विवचन में रूप होता है- (क) जगते (ख) जगन्ति (ग) जगतोः (घ) जगति
Answer: (ग) जगतोः
In simple words: 'जगत्' (संसार) शब्द का सप्तमी द्विवचन रूप 'जगतोः' है, जिसका अर्थ 'दो संसारों में' होता है।

🎯 Exam Tip: नपुंसकलिङ्ग शब्दों के सप्तमी द्विवचन में 'तोः' या 'ओः' का प्रयोग एक सामान्य रूप है।

 

प्रश्न (ख). निम्नलिखित शब्दों की विभक्ति और वचन के सही विकल्प को चुनकर लिखिए -

 

Question 1. रामाय - (क) चतुर्थी एकवचन (ख) सप्तमी एकवचन (ग) तृतीया द्विवचन (घ) द्वितीया एकवचन
Answer: (क) चतुर्थी एकवचन
In simple words: 'रामाय' शब्द 'राम' का चतुर्थी विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'राम के लिए' होता है।

🎯 Exam Tip: अ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों में चतुर्थी एकवचन का रूप 'आय' से समाप्त होता है, जैसे 'रामाय'।

 

Question 2. हस्तेन - (क) प्रथमा बहुवचन (ख) पञ्चमी एकवचन (ग) तृतीया एकवचन (घ) चतुर्थी द्विवचन
Answer: (ग) तृतीया एकवचन
In simple words: 'हस्तेन' शब्द 'हस्त' (हाथ) का तृतीया विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'हाथ से' या 'हाथ के द्वारा' होता है।

🎯 Exam Tip: 'एन' प्रत्यय अ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों के तृतीया एकवचन की पहचान है।

 

Question 3. रामानाम् - (क) चतुर्थी एकवचन (ख) षष्ठी एकवचन (ग) षष्ठी बहुवचन (घ) द्वितीया बहुवचन
Answer: (ग) षष्ठी बहुवचन
In simple words: 'रामानाम्' शब्द 'राम' का षष्ठी विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'रामों का/के/की' होता है।

🎯 Exam Tip: 'आनाम्' या 'णाम्' प्रत्यय षष्ठी बहुवचन की पहचान है, जो कई शब्दों में प्रयुक्त होता है।

 

Question 4. शिश्वोः - (क) तृतीया द्विवचन (ख) द्वितीया द्विवचन (ग) द्वितीया बहुवचन (घ) सप्तमी द्विवचन
Answer: (घ) सप्तमी द्विवचन
In simple words: 'शिश्वोः' शब्द 'शिशु' का सप्तमी विभक्ति द्विवचन रूप है, जिसका अर्थ 'दो शिशुओं में' होता है।

🎯 Exam Tip: उ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों में सप्तमी द्विवचन 'वोः' या 'ओः' से समाप्त होता है, यह एक सामान्य पैटर्न है।

 

Question 5. नदीषु - (क) सप्तमी बहुवचन (ख) चतुर्थी बहुवचन (ग) पञ्चमी एकवचन (घ) सप्तमी एकवचन
Answer: (क) सप्तमी बहुवचन
In simple words: 'नदीषु' शब्द 'नदी' का सप्तमी विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'नदियों में' होता है।

🎯 Exam Tip: 'ई' और 'उ' कारान्त शब्दों के सप्तमी बहुवचन में 'षु' प्रत्यय का प्रयोग होता है।

 

Question 6. आत्मने - (क) द्वितीया बहुवचन (ख) चतुर्थी एकवचन (ग) षष्ठी द्विवचन (घ) सप्तमी द्विवचने
Answer: (ख) चतुर्थी एकवचन
In simple words: 'आत्मने' शब्द 'आत्मन्' का चतुर्थी विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'आत्मा के लिए' होता है।

🎯 Exam Tip: न-कारान्त शब्दों के चतुर्थी एकवचन रूप 'ने' प्रत्यय के साथ बनते हैं।

 

Question 7. नामसु - (क) तृतीया एकवचन (ख) द्वितीया बहुवचन (ग) पञ्चमी द्विवचन (घ) सप्तमी बहुवचन
Answer: (घ) सप्तमी बहुवचन
In simple words: 'नामसु' शब्द 'नामन्' (नाम) का सप्तमी विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'नामों में' होता है।

🎯 Exam Tip: सप्तमी बहुवचन में 'सु' या 'षु' का प्रयोग होता है, जो शब्द के अंतिम वर्ण पर निर्भर करता है।

 

Question 8. भानून् - (क) षष्ठी बहुवचन (ख) सप्तमी एकवचन (ग) द्वितीया बहुवचन (घ) चतुर्थी एकवचन
Answer: (ग) द्वितीया बहुवचन
In simple words: 'भानून्' शब्द 'भानु' (सूर्य) का द्वितीया विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'सूर्यों को' होता है।

🎯 Exam Tip: उ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों के द्वितीया बहुवचन में 'ऊन्' प्रत्यय का प्रयोग होता है।

 

Question 9. राज्ञि - (क) तृतीया बहुवचन (ख) सप्तमी एकवचन (ग) षष्ठी द्विवचन (घ) पञ्चमी एकवचन
Answer: (ख) सप्तमी एकवचन
In simple words: 'राज्ञि' शब्द 'राजन्' (राजा) का सप्तमी विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'राजा में' या 'राजा पर' होता है।

🎯 Exam Tip: न-कारान्त शब्दों में सप्तमी एकवचन के लिए 'ज्ञि' या 'जनि' का प्रयोग होता है, यह विशिष्ट रूप है।

 

Question 10. जगता - (क) द्वितीया बहुवचन (ख) चतुर्थी द्विवचन (ग) तृतीया एकवचन (घ) षष्ठी एकवचन
Answer: (ग) तृतीया एकवचन
In simple words: 'जगता' शब्द 'जगत्' (संसार) का तृतीया विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'संसार से' या 'संसार के द्वारा' होता है।

🎯 Exam Tip: त-कारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्दों के तृतीया एकवचन में 'ता' प्रत्यय का प्रयोग होता है।

 

Question 11. आत्मनि - (क) सप्तमी एकवचन (ख) षष्ठी द्विवचन (ग) पञ्चमी बहुवचन (घ) प्रथमा द्विवचन
Answer: (क) सप्तमी एकवचन
In simple words: 'आत्मनि' शब्द 'आत्मन्' (आत्मा) का सप्तमी विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'आत्मा में' होता है।

🎯 Exam Tip: न-कारान्त शब्दों के सप्तमी एकवचन में 'नि' या 'नि' का प्रयोग होता है।

 

Question 12. आत्मनाम् - (क) द्वितीया एकवचन (ख) चतुर्थी द्विवचन । (ग) षष्ठी बहुवचन (घ) सप्तमी एकवचन
Answer: (ग) षष्ठी बहुवचन
In simple words: 'आत्मनाम्' शब्द 'आत्मन्' का षष्ठी विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'आत्माओं का' होता है।

🎯 Exam Tip: 'नाम्' प्रत्यय का प्रयोग षष्ठी बहुवचन में होता है, जो 'आत्मन्' जैसे शब्दों में भी लागू होता है।

 

Question 13. नामभिः - (क) प्रथमा बेहुवचन (ख) तृतीया बहुवचन (ग) चतुर्थी बहुवचन (घ) सप्तमी बहुवचन
Answer: (ख) तृतीया बहुवचन
In simple words: 'नामभिः' शब्द 'नामन्' (नाम) का तृतीया विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'नामों के द्वारा' होता है।

🎯 Exam Tip: 'भिः' प्रत्यय तृतीया बहुवचन की पहचान है, जो विभिन्न शब्दों में प्रयुक्त होता है।

 

Question 14. रामात् - (क) द्वितीया एकवचन (ख) पञ्चमी एकवचन (ग) तृतीया द्विवचन (घ) सप्तमी एकवचन
Answer: (ख) पञ्चमी एकवचन
In simple words: 'रामात्' शब्द 'राम' का पंचमी विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'राम से' (अलग होने के अर्थ में) होता है।

🎯 Exam Tip: 'आत्' या 'अत्' प्रत्यय पंचमी एकवचन की पहचान है, विशेषकर अ-कारान्त शब्दों में।

 

Question 15. सरिते - (क) चतुर्थी एकवचन (ख) तृतीया द्विवचन (ग) प्रथम बहुवचन (घ) षष्ठी बहुवचन
Answer: (क) चतुर्थी एकवचन
In simple words: 'सरिते' शब्द 'सरित्' (नदी) का चतुर्थी विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'नदी के लिए' होता है।

🎯 Exam Tip: 'सरित्' जैसे व्यंजन-कारान्त स्त्रीलिंग शब्दों में चतुर्थी एकवचन में 'ए' या 'ऐ' का प्रयोग होता है।

 

Question 16. मतीनाम् - (क) सप्तमी बहुवचन (ख) चतुर्थी द्विवचन (ग) तृतीया एकवचन (घ) षष्ठी बहुवचन
Answer: (घ) षष्ठी बहुवचन
In simple words: 'मतीनाम्' शब्द 'मति' (बुद्धि) का षष्ठी विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'बुद्धियों का' होता है।

🎯 Exam Tip: 'इनाम्' या 'नाम' प्रत्यय षष्ठी बहुवचन की पहचान है, जो स्त्रीलिंग शब्दों में पाया जाता है।

 

Question 17. नयः - (क) प्रथमा बहुवचन (ख) षष्ठी एकवचन (ग) तृतीया एकवचन (घ) द्वितीया बहुवचन
Answer: (क) प्रथमा बहुवचन
In simple words: 'नयः' शब्द 'नय' का प्रथमा विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'नीतियाँ' होता है।

🎯 Exam Tip: अ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों में प्रथमा बहुवचन में विसर्ग के साथ 'आः' का प्रयोग होता है।

 

Question 18. वानराः - (क) तृतीया एकवचन (ख) सप्तमी द्विवचन (ग) प्रथमा बहुवचन (घ) द्वितीया एकवचन
Answer: (ग) प्रथमा बहुवचन
In simple words: 'वानराः' शब्द 'वानर' का प्रथमा विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'बंदर' (बहुत से) होता है।

🎯 Exam Tip: अ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों के प्रथमा बहुवचन का रूप विसर्ग के साथ समाप्त होता है।

 

Question 19. हरिभिः - (क) तृतीया एकवचन (ख) द्वितीया द्विवचन (ग) तृतीया बहुवचन (घ) प्रथमा द्विवचन
Answer: (ग) तृतीया बहुवचन
In simple words: 'हरिभिः' शब्द 'हरि' का तृतीया विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'हरियों के द्वारा' होता है।

🎯 Exam Tip: 'भिः' प्रत्यय इ-कारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों में तृतीया बहुवचन की पहचान है।

 

Question 20. जगत्सु - (क) पंचमी एकवचन (ख) षष्ठी एकवचन (ग) द्वितीया बहुवचन (घ) सप्तमी, बहुवचन
Answer: (घ) सप्तमी, बहुवचन
In simple words: 'जगत्सु' शब्द 'जगत्' (संसार) का सप्तमी विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'संसारों में' होता है।

🎯 Exam Tip: सप्तमी बहुवचन में 'सु' या 'षु' का प्रयोग होता है, जो शब्द के अंतिम वर्ण पर निर्भर करता है।

 

Question 21. आत्मानम् - (क) षष्ठी बहुवचन (ख) द्वितीया एकवचने, (ग) सप्तमी द्विवचन (घ) चतुर्थी एकवचन
Answer: (ख) द्वितीया एकवचने
In simple words: 'आत्मानम्' शब्द 'आत्मन्' का द्वितीया विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'आत्मा को' होता है।

🎯 Exam Tip: न-कारान्त शब्दों के द्वितीया एकवचन में 'आनाम्' प्रत्यय नहीं, बल्कि 'आन्' या 'अम्' प्रत्यय का प्रयोग होता है। यहां 'आत्मानम्' सही है।

 

Question 22. राज्ञाम् - (क) पञ्चमी द्विवचन (ख) द्वितीया एकवचन (ग) षष्ठी बहुवचन (घ) चतुर्थी एकवचन
Answer: (ग) षष्ठी बहुवचन
In simple words: 'राज्ञाम्' शब्द 'राजन्' (राजा) का षष्ठी विभक्ति बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'राजाओं का' होता है।

🎯 Exam Tip: 'आम्' या 'नाम्' प्रत्यय षष्ठी बहुवचन की पहचान है, जो न-कारान्त शब्दों में भी देखा जाता है।

 

Question 23. रमायाम् - (क) पंचमी बहुवचन (ख) चतुर्थी एकवचन (ग) षष्ठी द्विवचन (घ) सप्तमी एकवचन
Answer: (घ) सप्तमी एकवचन
In simple words: 'रमायाम्' शब्द 'रमा' का सप्तमी विभक्ति एकवचन रूप है, जिसका अर्थ 'रमा में' या 'रमा पर' होता है।

🎯 Exam Tip: आ-कारान्त स्त्रीलिंग शब्दों के सप्तमी एकवचन में 'याम्' प्रत्यय का प्रयोग होता है।

 

Question (ग). इन संस्कृत शब्दों में से काले अक्षरों में छपे शब्दों में विभक्ति को पहचान कर लिखिए - (1) राज्ञः पुत्रः (2) पुत्रेण सह । (3) वृक्षात् पतति । (4) पादेन खञ्जः । (5) छात्रेभ्यः स्वस्ति । (6) ग्रामं निकषा ।
Answer: (1) षष्ठीएकवचन, (2) तृतीया एकवचन, (3) पञ्चमी एकवचन, (4) तृतीया एकवचन, (5) चतुर्थी बहुवचन, (6) द्वितीया एकवचन ।
In simple words: यह प्रश्न विभिन्न विभक्ति नियमों का परीक्षण करता है, जैसे षष्ठी संबंध के लिए, तृतीया 'के साथ' या 'अंग विकार' के लिए, पंचमी 'अलग होने' के लिए, चतुर्थी 'स्वस्ति' जैसे शब्दों के साथ, और द्वितीया 'निकषा' जैसे शब्दों के साथ।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक शब्द के लिए प्रयुक्त सूत्र या नियम को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे 'सहयुक्तेऽप्रधाने' या 'येनाङ्गविकारः', जो सही विभक्ति की पहचान में मदद करता है।

 

Question (घ). निम्नांकित शब्दों में प्रयुक्त विभक्ति और वचन का उल्लेख कीजिए-
(1) आत्मनोः
(2) राजभ्यः
(3) सर्वेषु
(4) सरिद्भिः
(5) राजभिः
(6) सर्वयोः
(7) गुरवे
(8) नाम्नि
(9) सरिताम्
(10) रामैः
(11) आत्मभिः
(12) सरिति
(13) यान्
(14) राज्ञाम्
(15) राज्ञा
(16) सर्वस्मै
(17) नाम्नाम्
(18) राज्ञे
(19) सरिद्भिः
(20) आत्मनः
(21) नामनि
(22) जगते
(23) गंगायै
(24) ग्रामात्
(25) पितृणाम्
(26) आत्मसु
(27) सरिता
(28) सर्वस्मात्
(29) बालकस्य
(30) शिशूनां
(31) हरयः
(32) राजानौ
(33) नाम्ना
(34) सर्वान्
(35) जगताम्
(36) जगति
(37) सर्वस्मिन्
(38) राजानम्.
(39) आत्मनि
(40) सरित्सु
(41) नाम्ने
(42) सर्वेषाम्
(43) गृहस्य
(44) सर्वाम्गि
(45) सरिते
(46) राज्ञि
(47) अस्याम्
(48) यासु
(49) यस्मै
(50) यस्मिन्
(51) जगता
(52) राजसु
(53) सर्वस्याम्
(54) आत्मना
(55) सर्वेषु
(56) यस्मात्
(57) येषाम
(58) सरितम्
(59) सर्वण
(60) अस्मिन्
(61) राजानः
(62) याभि
Answer: (1) षष्ठी/सप्तमी विभक्ति, द्विवचन,
(2) चतुर्थी/पञ्चमी विभक्ति, बहुवचन,
(3) सप्तमी विभक्ति, बहुवचन,
(4) तृतीया विभक्ति, बहुवचन,
(5) तृतीया विभक्ति, बहुवचन,
(6) षष्ठी/सप्तमी विभक्ति, द्विवचन,
(7) चतुर्थी विभक्ति, एकवचन,
(8) सप्तमी विभक्ति, एकवचन,
(9) षष्ठी विभक्ति, बहुवचन,
(10) तृतीया विभक्ति, बहुवचन,
(11) तृतीया, बहुवचन,
(12) सप्तमी, एकवचन,
(13) यत् (पुं०) द्वितीया, बहुवचन,
(14) षष्ठी बहुवचन,
(15) तृतीया, एकवचन,
(16) सर्व (पुं०) चतुर्थी, एकवचन,
(17) षष्ठी, बहुवचन,
(18) चतुर्थी, एकवचन,
(19) तृतीया, बहुवचन,
(20) पञ्चमी-षष्ठी, एकवचन,
(21) सप्तमी, एकवचन,
(22) चतुर्थी एकवचन,
(23) चतुर्थी, एकवचन,
(24) पञ्चमी एकवचन,
(25) षष्ठी, बहुवचन,
(26) सप्तमी, बहुवचन,
(27) तृतीया, एकवचन,
(28) पञ्चमी, एकवचन,
(29) षष्ठी, एकवचन,
(30) षष्ठी, बहुवचन,
(31) प्रथमा, एकवचन,
(32) प्रथमा/द्वितीया, द्विवचन
(33) तृतीया, एकवचन,
(34) द्वितीय, बहुवचन (पुं०),
(35) षष्ठी, बहुवचन,
(36) सप्तमी, एकवचन,
(37) सप्तमी, एकवचन (पुं०),
(38) द्वितीया, एकवचन,
(39) सप्तमी, एकवचन,
(40) सप्तमी, बहुवचन,
(41) चतुर्थी, एकवचन,
(42) षष्ठी, बहुवचन,
(43) षष्ठी, एकवचन,
(44) प्रथमा, बहुवचन (नपुं०),
(45) चतुर्थी, एकवचन,
(46) सप्तमी, एकवचन,
(47) सप्तमी, एकवचन (स्त्री०),
(48) सप्तमी, बहुवचन (स्त्री०),
(49) यत् (पुं०), चतुर्थी, एकवचन,
(50) यत् (पुं०), सप्तमी, एकवचन,
(51) तृतीया, एकवचन,
(52) सप्तमी, बहुवचन,
(53) सर्व (स्त्री०), सप्तमी, एकवचन,
(54) तृतीया, एकवचन,
(55) सर्व (पुं०), सप्तमी, बहुवचन,
(56) यत् (पुं०), पंचमी, एकवचन।
(57) षष्ठी, बहुवचन,
(58) द्वितीय, एकवचन,,
(59) तृतीया, एकवचन,
(60) सप्तमी, एकवचन,
(61) प्रथमा, बहुवचन,
(62) तृतीया, बहुवचन। उत्तरः
In simple words: यह प्रश्न विभिन्न संस्कृत शब्दों के विभक्ति और वचन की पहचान करने का अभ्यास कराता है। प्रत्येक शब्द के अंत में जुड़े प्रत्यय और शब्द के मूल रूप को समझकर सही विभक्ति और वचन पहचाने जा सकते हैं।

🎯 Exam Tip: शब्द-रूपों को याद करने के लिए नियमित अभ्यास और पैटर्न पहचानना महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से अ-कारान्त, इ-कारान्त, उ-कारान्त, ऋ-कारान्त तथा सर्वनाम शब्दों के रूपों पर ध्यान दें।

ध्यातव्य-यद्यपि पाठ्यक्रम में शब्द-रूप निर्धारित नहीं हैं, फिर भी विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विभक्तियों से सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए कुछ शब्दों के रूप दिये जा रहे हैं-

(1) अकारान्त पुंल्लिङ्ग राम'

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमारामःरामौरामाः
द्वितीयारामम्रामौरामान्
तृतीयारामेणरामाभ्याम्रामैः
चतुर्थीरामायरामाभ्याम्रामेभ्यः
पञ्चमीरामात्रामाभ्याम्रामेभ्यः
षष्ठीरामस्यरामयोःरामाणाम्
सप्तमीरामेरामयोःरामेषु
सम्बोधनहे राम !हे रामौ !हे रामाः !

विशेष-नरः, पुत्रः, जनकः, नृपः, शिष्यः, सूर्यः, चन्द्रः, खगः, मयूरः, धर्मः, अनलः, पवनः, करः, सिंहः, मृगः, गजः, देवः, इन्द्रः, सुर, आदि अकारान्त पुंल्लिङ्ग शब्द हैं। इन सभी के रूप 'राम' शब्द की तरह चलते हैं।

(2) इकारान्त पुंल्लिङ्ग 'हरि'

प्रथमाहरिःहरीहरयः
द्वितीयाहरिम्हरीहरीन्
तृतीयाहरिणाहरिभ्याम्हरिभिः
चतुर्थीहरयेहरिभ्याम्हरिभ्यः
पञ्चमीहरेःहरिभ्याम्हरिभ्यः
षष्ठीहरे:हर्योःहरीणाम्
सप्तमीहरौहर्योःहरिषु
सम्बोधनहे हरे !हे हरी !हे हरयः !

विशेष- कपि, कवि, मुनि आदि इकारान्त शब्दों के रूप 'हरि' के समान चलते हैं।

(3) उकारान्त पुंल्लिङ्ग 'गुरु' (अध्यापक)

प्रथमागुरुःगुरूगुरवः
द्वितीयागुरुम्गुरूगुरून्
तृतीयागुरुणागुरुभ्याम्गुरुभिः
चतुर्थीगुरवेगुरुभ्याम्गुरुभ्यः
पञ्चमीगुरोःगुरुभ्याम्गुरुभ्यः
षष्ठीगुरोःगुर्वोःगुरूणाम्
सप्तमीगुरौ -गुर्वोःगुरुषु
सम्बोधनहे गुरो !हे गुरू !हे गुरवः !

विशेष-तरु, शिशु, बन्धु, भानु इत्यादि उकारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों के रूप 'गुरु' की भाँति ही चलते हैं।

(4) सम्बन्धवाची ऋकारान्त पुंल्लिङ्ग 'पितृ'

प्रथमापितापितरौपितरः
द्वितीयापितरम्पितरौपितृन्
तृतीयापित्रापितृभ्याम्पितृभिः
चतुर्थीपित्रेपितृभ्याम्पितृभ्यः
पञ्चमीपितुःपितृभ्याम्पितृभ्यः
षष्ठीपितुःपित्रोःपितृणाम्
सप्तमीपितरिपित्रोःपितृषु
सम्बोधनहे पितृः !हे पितरौ !हे पितरः !

विशेष-भ्रातृ, नृ (मनुष्य), देवृ (देवर), श्रोतॄ, होतॄ, भर्तॄ, नेतॄ इत्यादि ऋकारान्त शब्दों के रूम भी 'पितृ' की भाँति चलते हैं।

(5) आत्मन् (आत्मा) संज्ञा (पुंल्लिङ्ग)

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाआत्माआत्मानौआत्मानः
द्वितीयाआत्मानम्आत्मानौआत्मनः
तृतीयाआत्मनाआत्मभ्याम्आत्मभिः
चतुर्थीआत्मनेआत्मभ्याम्आत्मभ्यः
पञ्चमीआत्मनःआत्मभ्याम्आत्मभ्यः
षष्ठीआत्मनःआत्मनोःआत्मनाम्
सप्तमीआत्मनिआत्मनोःआत्मसु
सम्बोधनहे आत्मन् !हे आत्मानौ !हे आत्मानः !

(6) राजन् (राजा) संज्ञा (पुंल्लिङ्ग)

प्रथमाराजाराजानौराजानः
द्वितीयाराजानम्राजानौराज्ञः
तृतीयाराज्ञाराजभ्याम्राजभिः
चतुर्थीराज्ञेराजभ्याम्राजभ्यः
पञ्चमीराज्ञःराजभ्याम्राजभ्यः
षष्ठीराज्ञःराज्ञोःराज्ञाम्
सप्तमीराज्ञि, राजनिराज्ञोःराजसु
सम्बोधनहे राजन् !हे राजानौ !हे राजानः !

(7) आकारान्त स्त्रीलिङ्ग 'रमा' (लक्ष्मी)

प्रथमारमारमेरमाः
द्वितीयारमाम्रमेरमाः
तृतीयारमयारमाभ्याम्रमाभिः
चतुर्थीरमायैरमाभ्याम्रमाभ्यः
पञ्चमीरमायाःरमाभ्याम्रमाभ्यः
षष्ठीरमायाःरमयोःरमाणाम्
सप्तमीरमायाम्रमयोःरमासु
सम्बोधनहे रमा !हे रमा!हे रमाः!

विशेष-बाला, कन्या, भार्या, माला, छात्रा, सीता इत्यादि आकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों के रूप 'रमा' की भाँति चलते हैं।

(8) इकारान्त स्त्रीलिङ्ग 'मति' (बुद्धि)

प्रथमामतिःमतीमतयः
द्वितीयामतिम्मतीमतीः
तृतीयामत्यामतिभ्याम्मतिभिः
चतुर्थीमत्यै, मतयेमतिभ्याम्मतिभ्यः
पञ्चमीमत्याः, मतेमतिभ्याम्मतिभ्यः
षष्ठीमत्याः, मतेमत्योःमतीनाम्
सप्तमीमत्याम्, मतौमत्योःमतिसु
सम्बोधनहे मते !हे मती !हे मतयः !

विशेष- बुद्धि, गति, भक्ति, धूलि, जाति, कृति, सन्तति इत्यादि इकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों के रूप 'मति' की भाँति चलते हैं।

(9) ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग 'नदी'

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमानदीनद्यौनद्यः
द्वितीयानदीम्नद्यौनदीः
तृतीयानद्यानदीभ्याम्नदीभिः
चतुर्थीनद्यैनदीभ्याम्नदीभ्यः
पञ्चमीनद्याःनदीभ्याम्नदीभ्यः
षष्ठीनद्याःनद्योःनदीनाम्
सप्तमीनद्याम्नद्योःनदीषु
सम्बोधनहे नदि !हे नद्यौ !हे नद्यः !

विशेष- राज्ञी, नारी, पार्वती, कुन्ती, गौरी, पुत्री, दासी, श्रीमती इत्यादि ईकारान्त शब्दों के रूप 'नदी' की भाँति चलते हैं।

(10) उकारान्त स्त्रीलिङ्ग 'धेनु'

प्रथमाधेनुःधेनूधेनवः
द्वितीयाधेनुम्धेनूधेनूः
तृतीयाधेन्वाधेनुभ्याम्धेनुभिः
चतुर्थीधेनवे, धेन्वैधेनुभ्याम्धेनुभ्यः
पञ्चमीधेनोः, धेन्वाःधेनुभ्याम्धेनुभ्यः
षष्ठीधेनोः, धेन्वाःधेन्वोःधेनूनाम्
सप्तमीधेनौः, धेन्वाम्धेन्वोःधेनुषु !
सम्बोधनहे धेनो !हे धेनू !हे धेनवः !

विशेष-तनु, रेणुः हनु इत्यादि उकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों के रूप 'धेनु की भाँति चलते हैं।

(11) ऊकारान्त स्त्रीलिङ्ग 'वधू'

प्रथमावधूःवध्वौवध्वः
द्वितीयावधूम्वध्वौवधूः
तृतीयावध्वावधूभ्याम्वधूभिः
चतुर्थीवध्वैवधूभ्याम्वधूभ्यः
पञ्चमीवध्वाःवधूभ्याम्वधूभ्यः
षष्ठीवध्वाःवध्वोःवधूनाम्
सप्तमीवध्वाम्वध्वोःवधूषु
सम्बोधनहे वधु !हे वध्वौ !हे वध्वः !

विशेष-ऊकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों के रूप 'वधू' की भाँति चलते हैं।

(12) सरित् (नदी) संज्ञा (स्त्रीलिङ्ग)

प्रथमासरित्, सरिद्सरितौसरितः
द्वितीयासरितम्सरितौसरितः
तृतीयासरितासरिद्भ्याम्सरिद्भिः
चतुर्थीसरितेसरिद्भ्याम्सरिद्भ्यः
पञ्चमीसरितःसरिद्भ्याम्सरिद्भ्यः
षष्ठीसरितःसरितोःसरिताम्
सप्तमीसरितिसरितोःसरित्सु
सम्बोधनहे सरित्!, हे सरिद्!हे सरितौ !हे सरितः !

(13) अकारान्त नपुंसकलिङ्ग 'गृह' (घर)

प्रथमागृहम्गृहेगृहाणि
द्वितीयागृहम्गृहेगृहाणि
तृतीयागृहेणगृहाभ्याम्गृहैः
षष्ठीमधुनःमधुनोःमधूनाम्
सप्तमीमधुनिमधुनोःमधुषु
सम्बोधनहे मधु !,हे मधुनी !हे मधूनि !
मधो!

विशेष-जानु (घुटना), दारु (लकड़ी), तालु, वस्तु, सानु (पर्वत की चोटी) इत्यादि उकारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्दों के रूप 'मधु' की भाँति चलते हैं।

(16) जगत् (संसार) संज्ञा (नपुंसकलिङ्ग)

प्रथमाजगत्जगतीजगन्ति
द्वितीयाजगत्जगतीजगन्ति
तृतीयाजगताजगद्भ्याम्जगद्भिः
चतुर्थीजगतेजगद्भ्याम्जगद्भ्यः
पञ्चमीजगतःजगद्भ्याम्जगद्भ्यः
षष्ठीजगतःजगतोःजगताम्
सप्तमीजगतिजगतोःजगत्सु
सम्बोधनहे जगत्!हे जगती !हे जगन्ति !

(17) नामन् (नाम) संज्ञा (नपुंसकलिङ्ग)

प्रथमानामनाम्नी, नामनीनामानि
द्वितीयानामनाम्नी, नामनीनामानि
तृतीयानाम्नानामभ्याम्नामभिः
चतुर्थीनाम्नेनामभ्याम्नामभ्यः
पञ्चमीनाम्नःनामभ्याम्नामभ्यः
षष्ठीनाम्नःनाम्नोःनाम्नाम्
सप्तमीनाम्नि, नामनि,नाम्नोःनामसु
सम्बोधनहे नाम !, हे नामन् !हे नाम्नी!, हे नामनी !हे नामानि !

(18) सर्व (सब) सर्वनाम
(अ) पुंल्लिङ्ग

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमासर्वःसर्वोसर्वे
द्वितीयासर्वम्सर्वोसर्वान्
तृतीयासर्वेणसर्वाभ्याम्सर्वैः
चतुर्थीसर्वस्मैसर्वाभ्याम्सर्वेभ्यः
पञ्चमीसर्वस्मात्सर्वाभ्याम्सर्वेभ्यः
षष्ठीसर्वस्यसर्वयोःसर्वेषाम्
सप्तमीसर्वस्मिन्सर्वयोःसर्वेषु

(ब) स्त्रीलिङ्ग

प्रथमासर्वासर्वेसर्वाः
द्वितीयासर्वाम्सर्वेसर्वाः
तृतीयासर्वयासर्वाभ्याम्सर्वाभिः
चतुर्थीसर्वस्यैसर्वाभ्याम्सर्वाभ्यः
पञ्चमीसर्वस्याःसर्वाभ्याम्सर्वाभ्यः
षष्ठीसर्वस्याःसर्वयोःसर्वासाम्
सप्तमीसर्वस्याम्सर्वयोःसर्वासु

(स) नपुंसकलिङ्ग

प्रथमासर्वम्सर्वेसर्वाणि
द्वितीयासर्वमसर्वेसर्वाणि

[संकेत - तृतीया से सप्तमी तक के शेष रूप पुंल्लिङ्ग की तरह चलेंगे।।]

(19) इदम् (यह)
(अ) पुंल्लिङ्ग

प्रथमाअयम्इमौइमे
द्वितीयाइमम्, एनम्इमौ, एनौइमान्, एनान्

[संकेत- तृतीया से सप्तमी तक के शेष रूप पुंल्लिङ्ग की तरह चलेंगे।।]

(20) यत् (जो)
(अ) पुंल्लिङ्ग

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमायःयौये
द्वितीयायम्यौयान्
तृतीयायेनयाभ्याम्यैः
चतुर्थीयस्मैयाभ्याम्येभ्यः
पञ्चमीयस्मात्, यस्माद्याभ्याम्येभ्यः
षष्ठीयस्यययोःयेषाम्
स सप्तमीयस्मिन्ययोःयेषु

(ब) स्त्रीलिङ्ग

प्रथमायायेयाः
द्वितीयायाम्येयाः
तृतीयाययायाभ्याम्याभिः
चतुर्थीयस्यैयाभ्याम्याभ्यः
पञ्चमीयस्याःयाभ्याम्याभ्यः
षष्ठीयस्याःययोःयासाम्
सप्तमीयस्मान्ययोःयासु

(स) नपुंसकलिङ्ग

प्रथमायत्, यद्येयानि
द्वितीयायत्, यद्येयानि

[संकेत- तृतीया से सप्तमी तक के शेष रूप पुंल्लिङ्ग की तरह चलेंगे।।]

(21) एतद् (यह)
(अ) पुंल्लिङ्ग

प्रथमाएषःएतौएते
द्वितीयाएतम्, एनम्एतौ, एनौएतान्, एनान्
तृतीयाएतेन, एनेनएताभ्याम्एतैः
चतुर्थीएतस्मैएताभ्याम्एतेभ्यः
पञ्चमीएतस्मात्एताभ्याम्एतेभ्यः
षष्ठीएतस्यएतयोः, एनयोःएतेषाम्
सप्तमीएतस्मिन्एतयोः, एनयोःएतेषु

(ब) स्त्रीलिङ्ग

प्रथमाएषाएतेएताः
द्वितीयाएताम्, एनाम्एते, एनेएताः, एनाः
तृतीयाएतया, एनयाएताभ्याम्एताभिः
चतुर्थीएतस्यैएताभ्याम्एताभ्यः
पञ्चमीएतस्याःएताभ्याम्एताभ्यः
षष्ठीएतस्याःएतयोः, एनयोःएतासाम्
सप्तमीएतस्याम्एतयोः, एनयोःएतासु

(स) नपुंसकलिङ्ग

प्रथमाएतत्, एतद्एतेएतानि
द्वितीयाएतत्, एनत्एते, एनेएतानि, एनानि

(22) अदस् (वह)
(अ) पुंल्लिङ्ग

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाअसौअमूअमी
द्वितीयाअमुम्अमूअमून्
तृतीयाअमुनाअमूभ्याम्अमीभिः
चतुर्थीअमुष्मैअमूभ्याम्अमीभ्यः
पञ्चमीअमुष्मात्अमूभ्याम्अमीभ्यः
षष्ठीअमुष्यअमुयोःअमीषाम्
सप्तमीअमुष्मिन्अमुयोःअमीषु

(ब) स्त्रीलिङ्ग

प्रथमाअसौअमूअमूः
द्वितीयाअमुम्अमूअमूः
तृतीयाअमुयाअमूभ्याम्अमूभिः
चतुर्थीअमुष्यैअमूभ्याम्अमूभ्यः
पञ्चमीअमुष्याःअमूभ्याम्अमूभ्यः
षष्ठीअमुष्याःअमुयोःअमूषाम्
सप्तमीअमुष्याम्,अमुयोःअमूषु

(स) नपुंसकलिङ्ग

प्रथमाअदःअमूअमूनि
द्वितीयाअदःअमूअमूनि

[संकेत - तृतीया से सप्तमी तक के शेष रूप पुल्लिङ्ग की भाँति चलेंगे।]

(23) किम् (कौन)
(अ) पुंल्लिङ्ग

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाकःकौके
द्वितीयाकम्कौकान्
तृतीयाकेनकाभ्याम्कैः
चतुर्थीकस्मैकाभ्याम्केभ्यः
पञ्चमीकस्मात्काभ्याम्केभ्यः
षष्ठीकस्यकयोःकेषाम्
सप्तमीकस्मिन्कयोःकेषु

(ब) स्त्रीलिङ्ग

प्रथमाकाकेकाः
द्वितीयाकाम्केकाः
तृतीयाकयाकाभ्याम्काभिः
चतुर्थीकस्यैकाभ्याम्काभ्यः
पञ्चमीकस्याःकाभ्याम्काभ्यः
षष्ठीकस्याःकयोःकासाम्
सप्तमीकस्याम्कयोःकासु

(स) नपुंसकलिङ्ग

प्रथमाकिम्केकानि
द्वितीयाकिम्केकानि

[संकेत- तृतीया से सप्तमी तक के शेष रूप पुल्लिङ्ग की तरह चलेंगे।]

Step-by-Step Textbook Answers: Class 11 Hindi Sanskrit संस्कृत शब्दो में विभक्ति की पहचान

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