UP Board Solutions Class 11 Geography Chapter 4 Climate

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Detailed Chapter 4 जलवायु UP Board Solutions for Class 11 Geography

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Class 11 Geography Chapter 4 जलवायु UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions For Class 11 Geography: Indian Physical Environment Chapter 4 Climate (जलवायु)

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

बहुवैकल्पिक प्रश्न

 

Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए
(i) जाड़े के आरम्भ में तमिलनाडु के तटीय प्रदेशों में वर्षा किस कारण होती है?
(क) दक्षिण-पश्चिमी मानसून
(ख) उत्तर-पूर्वी मानसून
(ग) शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात
(घ) स्थानीय वायु परिसंचरण
Answer: (ख) उत्तर-पूर्वी मानसून
In simple words: तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में जाड़ों में वर्षा का मुख्य कारण उत्तर-पूर्वी मानसून है, जो बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर आता है।

🎯 Exam Tip: मानसूनी हवाओं की दिशा और उनके नमी ग्रहण करने के मार्ग को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर सर्दियों में वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए।

 

Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए
(ii) भारत के कितने भू-भाग पर 75 सेंटीमीटर से कम औसत वार्षिक वर्षा होती है?
(क) आधा
(ख) दो-तिहाई
(ग) एक-तिहाई
(घ) तीन-चौथाई
Answer: (ग) एक-तिहाई
In simple words: भारत का लगभग एक-तिहाई क्षेत्र ऐसा है जहाँ वार्षिक वर्षा 75 सेंटीमीटर से कम होती है, जो इन क्षेत्रों को शुष्क या अर्ध-शुष्क बनाता है।

🎯 Exam Tip: भारत में वर्षा के वितरण की असमानता पर ध्यान दें, यह कृषि और जल संसाधनों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए
(iii) दक्षिण भारत के सन्दर्भ में कौन-सा तथ्य ठीक नहीं है?
(क) यहाँ दैनिक तापान्तर कम होता है,
(ख) यहाँ वार्षिक तापान्तर कम होता है।
(ग) यहाँ तापमान वर्षभर ऊँचा रहता है।
(घ) यहाँ जलवायु विषम पाई जाती है ।
Answer: (घ) यहाँ जलवायु विषम पाई जाती है।
In simple words: दक्षिण भारत में समुद्री प्रभाव के कारण दैनिक और वार्षिक तापमान का अंतर कम होता है, और जलवायु विषम नहीं बल्कि सम रहती है, जिससे तापमान में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव नहीं होता।

🎯 Exam Tip: तटीय क्षेत्रों की जलवायु पर समुद्री प्रभाव के महत्व को याद रखें, जो तापमान के अंतर को कम करता है।

 

Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए
(iv) जब सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में मकर रेखा पर सीधा चमकता है, तब निम्नलिखित में से क्या होता है?
(क) उत्तरी-पश्चिमी भारत में तापमान कम होने के कारण उच्च वायुदाब विकसित हो जाता है।
(ख) उत्तरी-पश्चिमी भारत में तापमान बढ़ने के कारण निम्न वायुदाब विकसित हो जाता है।
(ग) उत्तरी-पश्चिमी भारत में तापमान व वायुदाब में कोई परिवर्तन नहीं आता।
(घ) उत्तरी-पश्चिमी भारत में झुलसा देने वाली तेज लू चलती है।
Answer: (क) उत्तरी-पश्चिमी भारत में तापमान कम होने के कारण उच्च वायुदाब विकसित हो जाता है।
In simple words: जब सूर्य मकर रेखा पर सीधा चमकता है, तो उत्तरी गोलार्द्ध में सर्दियाँ होती हैं, जिससे उत्तरी-पश्चिमी भारत में तापमान कम हो जाता है और उच्च वायुदाब बनता है।

🎯 Exam Tip: सूर्य की स्थिति और उसके साथ जुड़े तापमान और वायुदाब के पैटर्न को समझें, जो विभिन्न क्षेत्रों की जलवायु को प्रभावित करते हैं।

 

Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए
(v) कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार भारत में 'As' प्रकार की जलवायु कहाँ पाई जाती है?
(क) केरल और तटीय कर्नाटक में
(ख) अण्डमान और निकोबार द्वीप-समूह में
(ग) कोरोमण्डल तट पर
(घ) असम व अरुणाचल प्रदेश में
Answer: (ग) कोरोमण्डल तट पर।
In simple words: कोपेन के जलवायु वर्गीकरण में 'As' प्रकार की जलवायु कोरोमंडल तट पर पाई जाती है, जिसका अर्थ है शुष्क ग्रीष्मकाल और सर्दियों में वर्षा।

🎯 Exam Tip: कोपेन के जलवायु वर्गीकरण और भारत के विभिन्न क्षेत्रों में उनके अनुप्रयोग को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दो में दीजिए
(i) भारतीय मौसम तन्त्र को प्रभावित करने वाले तीन महत्त्वपूर्ण कारक कौन-से हैं?
Answer: भारतीय मौसम तन्त्र को प्रभावित करने वाले तीन महत्त्वपूर्ण कारक निम्नलिखित हैं (क) वायुदाब तथा पवने, (ख) जेट वायुधाराएँ। (ग) उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात।
In simple words: भारतीय मौसम को मुख्य रूप से वायुदाब और हवाएँ, जेट स्ट्रीम और उष्णकटिबंधीय चक्रवात प्रभावित करते हैं, जो वर्षा और तापमान पैटर्न को निर्धारित करते हैं।

🎯 Exam Tip: भारतीय मानसून एक जटिल प्रणाली है; इसके प्रमुख कारकों को संक्षेप में समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दो में दीजिए
(ii) अन्तःउष्ण कटिबन्धीय अभिसरण क्षेत्र क्या है?
Answer: विषुवत् वृत्त या उसके पास निम्न वायुदाब तथा आरोही वायु का क्षेत्र अन्तःउष्ण कटिबन्धीय अभिसरण क्षेत्र कहलाता है। इस क्षेत्र में व्यापारिक पवनें मिलती हैं; अतः इस क्षेत्र में वायु ऊपर उठने लगती है। इसे कभी-कभी मानसूनी गर्त भी कहते हैं।
In simple words: यह विषुवत रेखा के पास निम्न वायुदाब का क्षेत्र है जहाँ उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक हवाएँ मिलती हैं और ऊपर उठती हैं, जिससे मानसूनी वर्षा होती है।

🎯 Exam Tip: ITCZ (अन्तःउष्ण कटिबन्धीय अभिसरण क्षेत्र) की स्थिति और उसके मौसमी बदलाव मानसून की गतिशीलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दो में दीजिए
(iii) मानसून प्रस्फोट से आपका क्या अभिप्राय है?' भारत में सबसे अधिक वर्षा प्राप्त करने वाले| स्थान का नाम लिखिए।
Answer: वर्षा ऋतु अर्थात् दक्षिण-पश्चिमी मानसून की ऋतु में जब अचानक वर्षा होती है तो बिजली तथा बादलों की गरजना भी होती है और तीव्रता के साथ वर्षा होने लगती है। अतः प्रचण्ड गर्जन और बिजली की कड़क के साथ आर्द्रता भरी पवनों का चलना तथा वर्षा होना मानसून प्रस्फोट कहलाता है। भारत में मेघालय राज्य में स्थित मॉसिनराम सबसे अधिक वर्षा प्राप्त करने वाला स्थान है।
In simple words: मानसून प्रस्फोट का अर्थ है दक्षिण-पश्चिमी मानसून के अचानक और तीव्र आगमन के साथ होने वाली तेज वर्षा, बिजली और गर्जना। भारत में सबसे अधिक वर्षा मॉसिनराम, मेघालय में होती है।

🎯 Exam Tip: मानसून प्रस्फोट की परिभाषा और भारत में सर्वाधिक वर्षा वाले स्थान का नाम याद रखें।

 

Question 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दो में दीजिए
(iv) जलवायु प्रदेश क्या होता है? कोपेन की पद्धति के प्रमुख आधार कौन-से हैं?
Answer: वह क्षेत्र जिसमें समान जलवायु दशाएँ (तापमान एवं वर्षा) पाई जाती है, जलवायु प्रदेश कहा जाता है। अतः एक जलवायु प्रदेश में जलवायु दशाओं की समरूपता होती है तो वास्तव में जलवायु कारकों के संयुक्त प्रभाव से उत्पन्न होती है। कोपेन ने जलवायु प्रदेशों के निर्धारण में तापमान तथा वर्षण के मासिक मानों को आधार माना है।
In simple words: जलवायु प्रदेश एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ तापमान और वर्षा जैसी जलवायु संबंधी परिस्थितियाँ समान होती हैं। कोपेन ने इन प्रदेशों को परिभाषित करने के लिए मासिक तापमान और वर्षा के आंकड़ों का उपयोग किया।

🎯 Exam Tip: जलवायु प्रदेश की अवधारणा और कोपेन के वर्गीकरण के मुख्य मापदंडों - तापमान और वर्षा - पर ध्यान दें।

 

Question 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दो में दीजिए
(v) उत्तर-पश्चिमी भारत में रबी की फसलें बोने वाले किसानों को किस प्रकार के चक्रवातों से वर्षा प्राप्त होती है? वे चक्रवात कहाँ उत्पन्न होते हैं?
Answer: उत्तर-पश्चिमी भारत में रबी की फसलें बोने के समय शीतोष्ण चक्रवात से वर्षा प्राप्त होती है। ये चक्रवात पूर्वी भूमध्य सागर से आते हैं। इनको पश्चिमी विक्षोभ भी कहा जाता है। ये चक्रवात पूर्वी भागों में पहुँचते हैं तथा सर्दियों में भारत में वर्षा करते हैं जो रबी फसल की बुवाई में उपयोगी होती है।
In simple words: उत्तर-पश्चिमी भारत में रबी की फसलों को शीतोष्ण चक्रवातों से वर्षा मिलती है, जिन्हें पश्चिमी विक्षोभ कहते हैं, जो पूर्वी भूमध्य सागर में उत्पन्न होते हैं।

🎯 Exam Tip: रबी फसलों के लिए पश्चिमी विक्षोभ की भूमिका और उनके उत्पत्ति स्थान को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में लिखिए।
(i) जलवायु में एक प्रकार का ऐक्य होते हुए भी भारत की जलवायु में क्षेत्रीय विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। उपयुक्त उदाहरण देते हुए इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत में मानसून की जलवायविक प्रवृत्ति देश की जलवायु में एक प्रकार का ऐक्य प्रकट करती है। यद्यपि भारत में बहुत-सी जलवायु सम्बन्धी प्रादेशिक विभिन्नताएँ देखने को मिलती हैं। उदाहरण के लिए-केरल और तमिलनाडु की जलवायु उत्तरी भारत के उत्तर प्रदेश तथा बिहार से भिन्न है, जबकि सारे देश में मानसूनी जलवायु कही जाती है। जलवायु तत्त्वों में तापमान एवं वर्षा के वितरण में इसी प्रकार की जलवायु सम्बन्धी विभिन्नताएँ मिलती हैं। उदहारण के लिए राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र में तापमान ग्रीष्म ऋतु में 55C तक पहुँच जाता है, जबकि इसी समय अरुणाचल प्रदेश में तवांग का तापमान केवल 19°C रहता है। वर्षा के वितरण में भी इसी प्रकार की विभिन्नताएँ देखी जाती हैं। मेघालय के चेरापूंजी और मॉसिनराम में वार्षिक वर्षा 1,080 सेमी होती है जबकि राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र में केवल 10 सेमी वर्षा होती है। अतः जलवायु तत्त्वों के आधार पर यह देखा जाता है कि भारत में क्षेत्रीय विभिन्नताएँ विद्यमान हैं, किन्तु मानसून के आधार पर देश के विभिन्न सामाजिक और आर्थिक कार्यों एवं सांस्कृतिक विशेषताओं में पर्याप्त समानताएँ व्याप्त हैं।
In simple words: भले ही भारत की जलवायु को मानसूनी कहा जाता है, फिर भी इसमें महत्वपूर्ण क्षेत्रीय विविधताएँ हैं, जैसे राजस्थान में अत्यधिक गर्मी और मेघालय में भारी वर्षा, जबकि केरल में सम तापमान।

🎯 Exam Tip: भारतीय जलवायु की क्षेत्रीय विविधताओं को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है, खासकर तापमान और वर्षा के संदर्भ में।

 

Question 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में लिखिए।
(ii) भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार भारत में कितने स्पष्ट मौसम पाए जाते हैं? किसी एक मौसम की दशाओं की सविस्तार व्याख्या कीजिए।
Answer: भारत में मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार वर्ष में अनुसार वर्ष में निम्नलिखित चार प्रकार के मौसम होते हैं (1) शीत ऋतु। (2) ग्रीष्म ऋतु (3) दक्षिण-पश्चिमी मानसून की ऋतु और (4) मानसून के निवर्तन की ऋतु।

शीत ऋतु।

भारत में शीत ऋतु का प्रारम्भ मध्य नवम्बर से हो जाता है। इस समय उत्तरी भारत में तापमान में गिरावट आरम्भ हो जाती है तथा उत्तरी भारत के अधिकांश भागों में औसत तापमान 21°C से कम रहता है। (जनवरी-फरवरी) रात्रि का तापमान काफी कम हो जाता है, जो पंजाब और राजस्थान में हिमांक से भी नीचे चला जाता है। दक्षिणी भारत में सर्दी की ऋतु नहीं के बराबर होती है। यहाँ तापान्तर बहुत कम रहता हैं। तटीय प्रदेशों में तो यह बहुत कम रहता है। त्रिवेन्द्रम का तापमान जनवरी में 31C तथा जून में 29.5C तक रहता है। शीत ऋतु में पवनें उत्तर-पश्चिम से दक्षिण को चलती हैं जहाँ वायुदाब कम होता है। शीत ऋतु में वर्षा अल्पतम होती है। इस समय उत्तरी भारत में वर्षा शीतोष्ण चक्रवात, जिन्हें पश्चिमी विक्षोभ कहते हैं, से होती है। यह वर्षा रबी की फसल के लिए लाभदायक रहती है। इसी समय भारत के पूर्वी तटीय भाग में भी विशेषकर तमिलनाडु में वर्षा होती है।
In simple words: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने वर्ष को चार मुख्य मौसमों में बांटा है: शीत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, दक्षिण-पश्चिमी मानसून ऋतु और मानसून निवर्तन ऋतु। शीत ऋतु में उत्तरी भारत में तापमान गिरता है और कभी-कभी पाला पड़ता है, जबकि दक्षिणी भारत में तापमान अपेक्षाकृत स्थिर रहता है; इस दौरान पश्चिमी विक्षोभ से उत्तरी भारत में कुछ वर्षा होती है।

🎯 Exam Tip: भारत के चारों मौसमों के नाम और उनमें से किसी एक मौसम, जैसे शीत ऋतु की प्रमुख विशेषताओं को विस्तार से बताने की तैयारी करें।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. भारत में न्यूनतम तापमान कहाँ पाया जाता है?
(क) लेह में
(ख) शिमला में
(ग) चेरापूंजी में
(घ) श्रीनगर में
Answer: (क) लेह में।
In simple words: लेह, जो लद्दाख में स्थित है, भारत में सबसे कम तापमान वाले क्षेत्रों में से एक है, खासकर सर्दियों के दौरान।

🎯 Exam Tip: भारत में तापमान की चरम स्थितियों, जैसे न्यूनतम और अधिकतम तापमान वाले स्थानों को याद रखें।

 

Question 2. भारत में अधिकतम तापमान कहाँ पाया जाता है?
(क) तिरुवनन्तपुरम् में
(ख) भोपाल में
(ग) जैसलमेर में
(घ) अहमदाबाद में
Answer: (ग) जैसलमेर में।
In simple words: राजस्थान का जैसलमेर क्षेत्र भारत में सबसे अधिक तापमान वाले स्थानों में से एक है, खासकर गर्मियों के दौरान, क्योंकि यह थार रेगिस्तान में स्थित है।

🎯 Exam Tip: भारत के भौगोलिक क्षेत्रों और उनके संबंधित तापमान चरम सीमाओं को समझना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. भारत में अधिकतम वर्षा वाला स्थान है
(क) शिलांग
(ख) मॉसिनराम
(ग) गुवाहाटी
(घ) पंजाब
Answer: (ख) मॉसिनराम।
In simple words: मॉसिनराम, मेघालय में स्थित है, और यह अपनी अत्यधिक वर्षा के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

🎯 Exam Tip: भारत में सर्वाधिक वर्षा वाले स्थान का नाम और उसके भौगोलिक कारण को जानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. भारत का नगर जो वृष्टिछाया प्रदेश में पड़ता है
(क) मुम्बई
(ख) जोधपुर
(ग) पुणे
(घ) चेन्नई
Answer: (ग) पुणे।
In simple words: पुणे पश्चिमी घाट के पूर्वी ढलान पर स्थित है, जिसके कारण यह वृष्टिछाया प्रदेश में आता है और कम वर्षा प्राप्त करता है।

🎯 Exam Tip: वृष्टिछाया प्रदेश की अवधारणा और भारत में इसके उदाहरणों को समझें, विशेष रूप से भौगोलिक कारकों के संदर्भ में।

 

Question 5. आम्रवृष्टि कहाँ होती है?
(क) केरल में
(ख) आन्ध्र प्रदेश में
(ग) तमिलनाडु में
(घ) असोम में
Answer: (क) केरल में।
In simple words: आम्रवृष्टि केरल में मानसून पूर्व की वर्षा को दिया गया स्थानीय नाम है, जो आम के फलों को पकने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: मानसून पूर्व की स्थानीय वर्षाओं के विभिन्न नामों और उनके संबंधित क्षेत्रों को याद रखें।

 

Question 6. 'काल-बैसाखी कहाँ प्रचलित है?
(क) केरल में
(ख) असोम में
(ग) उत्तर प्रदेश में
(घ) पंजाब में
Answer: (ख) असोम में।
In simple words: 'काल-बैसाखी' असम और पश्चिम बंगाल में गर्मियों में होने वाली तीव्र तूफानी वर्षा को कहा जाता है, जो बैसाख महीने में आती है।

🎯 Exam Tip: भारत के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय तूफानों और वर्षा के नामों को जानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. जेट धाराएँ हैं
(क) हिन्द महासागरों में चलने वाली
(ख) बंगाल की खाड़ी के चक्रवात
(ग) उपरितन वायु
(घ) मानसूनी पवनें
Answer: (ग) उपरितन वायु।
In simple words: जेट धाराएँ वायुमंडल के ऊपरी परतों में तेजी से चलने वाली हवाएँ हैं जो मौसम प्रणालियों को प्रभावित करती हैं।

🎯 Exam Tip: जेट स्ट्रीम्स की परिभाषा और उनकी मौसमी घटनाओं, जैसे मानसून पर प्रभाव को समझना आवश्यक है।

 

Question 8. उत्तर भारत में शीतकालीन वर्षा का कारण है
(क) लौटते हुए मानसून,
(ख) आगे बढ़ते हुए मानसून
(ग) शीतकालीन मानसून
(घ) पश्चिमी विक्षोभ ।
Answer: (घ) पश्चिमी विक्षोभ।
In simple words: उत्तर भारत में सर्दियों की वर्षा पश्चिमी विक्षोभों के कारण होती है, जो भूमध्य सागर से उत्पन्न होते हैं।

🎯 Exam Tip: पश्चिमी विक्षोभों की उत्पत्ति और भारत में उनके द्वारा लाई गई वर्षा का महत्व, खासकर रबी फसलों के लिए, याद रखें।

 

Question 9. सम्पूर्ण भारत में सर्वाधिक वर्षा वाला महीना है
(क) जून
(ख) जुलाई
(ग) अगस्त
(घ) ये सभी
Answer: (ख) जुलाई।
In simple words: भारत में जुलाई का महीना सबसे अधिक वर्षा वाला होता है क्योंकि दक्षिण-पश्चिमी मानसून इस समय अपनी चरम अवस्था पर होता है।

🎯 Exam Tip: भारतीय मानसून के महीनों और उनके संबंधित वर्षा वितरण को जानें।

 

Question 10. चेरापूंजी किस राज्य में स्थित है?
(क) असोम में
(ख) मेघालय में
(ग) मिजोरम में
(घ) मणिपुर में
Answer: (ख) मेघालय में।
In simple words: चेरापूंजी भारत के पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में स्थित है, और यह दुनिया के सबसे अधिक वर्षा वाले स्थानों में से एक है।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थानों और उनकी संबंधित विशेषताओं को याद रखें।

 

Question 11. भारत में सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र कौन-सा है?
(क) उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र
(ख) उत्तर-पूर्वी क्षेत्र
(ग) दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र
(घ) दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र
Answer: (ख) उत्तर-पूर्वी क्षेत्र।
In simple words: भारत में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र, विशेषकर मेघालय, सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करता है, जिसका मुख्य कारण उसकी भौगोलिक स्थिति और मानसूनी हवाओं का अवरोध है।

🎯 Exam Tip: भारत में वर्षा के वितरण की असमानता और प्रमुख वर्षा वाले क्षेत्रों को जानें।

 

Question 12. दैनिक तापान्तर निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में सर्वाधिक पाया जाता है?
(क) दक्षिणी पठारी क्षेत्र
(ख) पूर्वी तटवर्ती क्षेत्र
(ग) थार मरुस्थल
(घ) पश्चिमी तटवर्ती क्षेत्र
Answer: (ग) थार मरुस्थल।
In simple words: थार मरुस्थल में दैनिक तापान्तर सर्वाधिक होता है क्योंकि यहाँ दिन में तीव्र गर्मी और रात में तीव्र ठंड पड़ती है, जिसका कारण रेतीली भूमि की विशिष्ट ऊष्मा क्षमता है।

🎯 Exam Tip: मरुस्थलीय जलवायु की विशेषताओं, जैसे उच्च दैनिक तापान्तर, को समझें।

 

Question 13. निम्नलिखित में से कौन राज्य भारत के सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्र में सम्मिलित है?
(क) मेघालय
(ख) मध्य प्रदेश
(ग) ओडिशा
(घ) गुजरात
Answer: (क) मेघालय।
In simple words: मेघालय भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित है और इसमें मॉसिनराम जैसे स्थान शामिल हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक वर्षा प्राप्त करते हैं।

🎯 Exam Tip: भारत में उच्चतम वर्षा प्राप्त करने वाले राज्यों को याद रखें।

 

Question 14. भारत के किस राज्य में शीत ऋतु में वर्षा होती है?
(क) गुजरात
(ख) पश्चिम बंगाल
(ग) कर्नाटक
(घ) तमिलनाडु
Answer: (घ) तमिलनाडु।
In simple words: तमिलनाडु में शीत ऋतु में उत्तर-पूर्वी मानसून से वर्षा होती है, जब ये हवाएँ बंगाल की खाड़ी से नमी ग्रहण करती हैं।

🎯 Exam Tip: भारत में शीतकालीन वर्षा के क्षेत्रों और उनके कारणों, जैसे उत्तर-पूर्वी मानसून या पश्चिमी विक्षोभ, पर ध्यान दें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. मानसून से क्या अभिप्राय है?
Answer: मानसून उन पवनों को कहते हैं जो वर्ष में छः महीने (ग्रीष्म ऋतु) सागरों से स्थल की ओर तथा शेष छः महीने (शीत ऋतु) स्थल से सागरों की ओर चलती हैं।
In simple words: मानसून ऐसी मौसमी हवाएँ हैं जो साल के आधे हिस्से में समुद्र से जमीन की ओर और बाकी आधे हिस्से में जमीन से समुद्र की ओर अपनी दिशा बदलती हैं, जिससे मौसम में बदलाव आता है।

🎯 Exam Tip: मानसून की परिभाषा और उसकी दिशा परिवर्तन की विशेषता को याद रखें।

 

Question 2. भारत में अधिकांश वर्षा किस ऋतु में होती है ?
Answer: भारत में अधिकांश अर्थात् 75% से 90% तक वर्षा आगे बढ़ते हुए मानसूनों द्वारा (जून से सितम्बर माह में) वर्षा ऋतु में होती है।
In simple words: भारत में ज्यादातर वर्षा दक्षिण-पश्चिमी मानसून ऋतु में होती है, जो जून से सितंबर के बीच आती है।

🎯 Exam Tip: भारतीय कृषि के लिए वर्षा ऋतु की महत्ता को ध्यान में रखें।

 

Question 3. थार मरुस्थल में अल्प वर्षा क्यों होती है ? दो कारण लिखिए।
Answer: थार मरुस्थल में अल्प वर्षा होने के दो कारण निम्नलिखित हैं
• थार मरुस्थल अरबसागरीय मानसूनों के मार्ग में पड़ता है, किन्तु यहाँ मानसून पवनों को रोकने के लिए कोई ऊँची पर्वत-श्रेणी स्थित नहीं है।
• अरावली की पहाड़ियाँ नीची हैं तथा पवनों की दिशा के समानान्तर हैं।
In simple words: थार मरुस्थल में कम वर्षा होने के दो मुख्य कारण हैं: पहला, मानसून पवनों को रोकने के लिए ऊँचे पहाड़ों की अनुपस्थिति, और दूसरा, अरावली पहाड़ियाँ जो मानसूनी हवाओं के समानांतर होने के कारण उन्हें रोक नहीं पातीं।

🎯 Exam Tip: भारत के मरुस्थलीय क्षेत्रों में कम वर्षा के भौगोलिक कारणों को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. दक्षिण-पश्चिमी मानसून की उत्पत्ति का प्रमुख क्या कारण है ?
Answer: दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्पत्ति के दो प्रमुख कारण हैं
• ग्रीष्म काल में देश के उत्तर-पश्चिमी (स्थलीय) भू-भागों में निम्न वायुदाब तथा समीपवर्ती समुद्री भागों (हिन्द महासागर, अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी) में उच्च वायुदाब का होना ।
• क्षोभमण्डल की ऊपरी परतों में तीव्रगामी पुरवा जेट पवनों का चलना ।
In simple words: दक्षिण-पश्चिमी मानसून की उत्पत्ति का मुख्य कारण गर्मियों में उत्तर-पश्चिमी भारत में बनने वाला निम्न वायुदाब और समुद्री क्षेत्रों में उच्च वायुदाब है, साथ ही क्षोभमंडल की ऊपरी परतों में पूर्वी जेट स्ट्रीम का प्रवाह भी इसे प्रभावित करता है।

🎯 Exam Tip: दक्षिण-पश्चिमी मानसून की उत्पत्ति के लिए तापमान और वायुदाब के अंतर तथा जेट स्ट्रीम की भूमिका को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. जेट वायुधाराएँ किन्हें कहते हैं ?
Answer: वायुमण्डल की क्षोभमण्डल नामक परत के ऊपरी भाग में तेज गति से चलने वाली पवनों को जेट वायुधाराएँ कहते हैं। ये बहुत सँकरी पट्टी में चलती हैं।
In simple words: जेट वायुधाराएँ क्षोभमंडल की ऊपरी परतों में बहुत तेज गति से चलने वाली संकरी हवाएँ हैं, जो वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करती हैं।

🎯 Exam Tip: जेट स्ट्रीम्स की परिभाषा और उनकी विशेषताओं, जैसे उच्च गति और संकरी पट्टी में चलना, को याद रखें।

 

Question 6. भारत में पायी जाने वाली ऋतुओं के नाम लिखिए।
Answer: (1) शीत ऋतु, (2) ग्रीष्म ऋतु, (3) वर्षा ऋतु (आगे बढ़ते मानसून की ऋतु) तथा (4) शरद ऋतु (पीछे हटते हुए मानसून की ऋतु)।
In simple words: भारत में चार मुख्य ऋतुएँ हैं: शीत, ग्रीष्म, वर्षा (जब मानसून आगे बढ़ता है) और शरद (जब मानसून पीछे हटता है)।

🎯 Exam Tip: भारत में मौसमों के नामों को सही क्रम में जानना आवश्यक है।

 

Question 7. भारत में सर्वाधिक वर्षा किस राज्य में होती है ?
Answer: भारत में सर्वाधिक वर्षा मेघालय (मॉसिनराम) राज्य में होती है।
In simple words: भारत में सबसे ज्यादा वर्षा मेघालय राज्य के मॉसिनराम में होती है।

🎯 Exam Tip: भारत में सर्वाधिक वर्षा वाले स्थान का नाम और उसका राज्य याद रखें।

 

Question 8. ग्रीष्मकालीन मानसूनी पवनों की दिशा का वर्णन कीजिए।
Answer: ग्रीष्मकालीन मानसूनी पवनों की दिशा उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम होती है।
In simple words: गर्मियों में मानसूनी हवाएँ आमतौर पर उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहती हैं।

🎯 Exam Tip: ग्रीष्मकालीन मानसून की दिशा और उसके प्रभाव को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. भारत में अधिकांश वर्षा किस प्रकार की होती है?
Answer: भारत की लगभग 95% अधिकांश वर्षा पर्वतीय है।
In simple words: भारत में ज्यादातर वर्षा पर्वतीय प्रकार की होती है, जहाँ नमी से भरी हवाएँ पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती हैं और संघनित होकर वर्षा करती हैं।

🎯 Exam Tip: भारत में वर्षा के मुख्य प्रकार - पर्वतीय वर्षा - और उसके कारण को याद रखें।

 

Question 10. लौटते हुए मानसून से भारत के किन दो राज्यों में वर्षा होती है ?
Answer: लौटते हुए मानसून से भारत में तमिलनाडु एवं पॉण्डिचेरी (अब पुदुचेरी) राज्यों में वर्षा होती है।
In simple words: लौटते हुए मानसून, जिसे उत्तर-पूर्वी मानसून भी कहते हैं, से तमिलनाडु और पुदुचेरी जैसे दक्षिण-पूर्वी तटीय राज्यों में वर्षा होती है।

🎯 Exam Tip: लौटते हुए मानसून के प्रभाव वाले राज्यों और इसके कारण होने वाली वर्षा के प्रकार को जानना महत्वपूर्ण है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. वर्षा और वर्षण में अन्तर लिखिए।
Answer:
(i) वर्षा-यह वर्षण का एक विशिष्ट रूप है, जिसमें बादलों के जल-वाष्प कण संघनित होकर जल की बूंदों या हिमकणों के रूप में भू-पृष्ठ पर गिरते हैं। जलवर्षा तथा हिमवर्षा इसके दो रूप हैं।
(ii) वर्षण-यह एक व्यापक प्रक्रिया है, जिसमें वायुमण्डल की आर्द्रता संघनित होकर वर्षा, हिम, ओला, पाला आदि रूपों में धरातल पर गिरती है। जल-वर्षा, वर्षण का एक साधारण रूप है। हिमवृष्टि, ओलावृष्टि, हिमपात आदि इसके अनेक रूप हैं।
In simple words: वर्षण एक व्यापक प्रक्रिया है जिसमें वायुमंडल से नमी पृथ्वी पर विभिन्न रूपों (जैसे वर्षा, हिम, ओला) में गिरती है, जबकि वर्षा वर्षण का ही एक रूप है जिसमें जलवाष्प संघनित होकर पानी की बूंदों के रूप में गिरता है।

🎯 Exam Tip: वर्षा और वर्षण के बीच के मूलभूत अंतर को स्पष्ट रूप से समझें और उनके विभिन्न रूपों को याद रखें।

 

Question 2. 'आम्रवृष्टि' और 'काल-बैसाखी में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(i) आम्रवृष्टि-ग्रीष्म ऋतु के अन्त में केरल तथा कर्नाटक के तटीय भागों में मानसून से पूर्व की वर्षा का यह स्थानीय नाम इसलिए पड़ा है, क्योकि यह वर्षा आम के फलों को शीघ्र पकाने में सहायता करती है।
(ii) काल-बैसाखी-ग्रीष्म ऋतु में बंगाल तथा असोम में भी उत्तर-पश्चिमी तथा उत्तरी पवनों द्वारा, वर्षा की तेज बौछारें पड़ती हैं। यह वर्षा प्रायः सायंकाल में होती है। इसी वर्षा को 'काल-बैसाखी' कहते हैं। इसका अर्थ है-बैसाख मास का काल।
In simple words: आम्रवृष्टि केरल और कर्नाटक में मानसून-पूर्व की वर्षा है जो आमों को पकने में मदद करती है, जबकि काल-बैसाखी बंगाल और असम में गर्मियों में होने वाली तेज तूफानी वर्षा को कहते हैं।

🎯 Exam Tip: भारत के विभिन्न क्षेत्रों में मानसून-पूर्व की वर्षा के स्थानीय नामों और उनकी विशेषताओं को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. भारत में आगे बढ़ते हुए मानसून की ऋतु की तीन विशेषताएँ लिखिए।
Answer: भारत में आगे बढ़ते हुए मानसून की ऋतु की तीन विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।
• भारत में आगे बढ़ते हुए मानसून की ऋतु जून से सितम्बर तक रहती है। इस ऋतु में समस्त भारत में वर्षा होती है।
• वर्षा ऋतु की अवधि दक्षिण से उत्तर की ओर तथा पूर्व से पश्चिम की ओर घटती जाती है। देश के सबसे उत्तर-पश्चिमी भागों में यह अवधि केवल दो महीने की होती है।
• देश की 75 से 90% वर्षा इसी ऋतु में होती है।
In simple words: आगे बढ़ता मानसून जून से सितंबर तक पूरे भारत में वर्षा लाता है, जिसकी अवधि दक्षिण से उत्तर और पूर्व से पश्चिम की ओर घटती जाती है, और इसी ऋतु में भारत की अधिकांश वर्षा होती है।

🎯 Exam Tip: भारतीय मानसून की मुख्य विशेषताओं, जैसे अवधि, वर्षा का प्रतिशत और क्षेत्रीय वितरण, को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. भारत में कम वर्षा वाले तीन क्षेत्र कौन-कौन-से हैं?
Answer: कम वर्षा वाले क्षेत्रों से अभिप्राय ऐसे क्षेत्रों से है जहाँ 50 सेमी से भी कम वार्षिक वर्षा होती है। ये क्षेत्र हैं-
• पश्चिमी राजस्थान तथा इसके निकटवर्ती पंजाब, हरियाणा व गुजरात के क्षेत्र।
• सह्याद्रि के पूर्व में फैले दकन के पठार के आन्तरिक भाग।
• कश्मीर में लेह के आस-पास का प्रदेश।
In simple words: भारत में कम वर्षा वाले क्षेत्र पश्चिमी राजस्थान, दक्कन के पठार का आंतरिक भाग और कश्मीर के लेह क्षेत्र हैं, जहाँ वार्षिक वर्षा 50 सेमी से कम होती है।

🎯 Exam Tip: भारत में कम वर्षा वाले क्षेत्रों के नाम और उनके कारणों (जैसे वृष्टिछाया प्रदेश) को याद रखें।

 

Question 5. जाड़ों में वर्षा वाले भारत के दो क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
Answer: शीत ऋतु में स्थलीय पवनें शुष्क होती हैं; अतः प्रायः सम्पूर्ण देश में मौसम शुष्क रहता है, परन्तु निम्नलिखित दो क्षेत्रों में जाड़ों में भी वर्षा होती है
1. देश के उत्तर-पश्चिमी भाग-भूमध्य सागर की ओर से आने वाले पश्चिमी विक्षोभों से कुछ वर्षा। देश के उत्तर-पश्चिमी भागों में होती है।
2. तमिलनाडु तट-तमिलनाडु तट पर भी शीतकाल में वर्षा होती है। उत्तर-पूरब की ओर से चलने वाली स्थलीय मानसून पवनें जब बंगाल की खाड़ी को पार कर तमिलनाडु तट पर पहुँचती हैं तो ये कुछ आर्द्रता ग्रहण कर लेती हैं तथा तटों पर वर्षा करती हैं।
In simple words: भारत में जाड़ों में वर्षा मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में होती है: उत्तर-पश्चिमी भारत में पश्चिमी विक्षोभों से, और तमिलनाडु के तट पर उत्तर-पूर्वी मानसून हवाओं द्वारा, जो बंगाल की खाड़ी से नमी लेती हैं।

🎯 Exam Tip: शीतकालीन वर्षा के क्षेत्रों और उनके कारणों - पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर-पूर्वी मानसून - को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 6. जलवायु का प्राकृतिक वनस्पति व जीव-जन्तुओं पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer: पर्यावरण के सभी अंगों में जलवायु मानव-जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करती है। भारत में कृषि राष्ट्र के अर्थतन्त्र की धुरी है, जो वर्षा की विषमता से सबसे अधिक प्रभावित होती है। मानसूनी वर्षा बड़ी ही अनियमित एवं अनिश्चित है। जिस वर्ष वर्षा अधिक एवं मूसलाधार रूप में होती है तो अतिवृष्टि के परिणामस्वरूप बाढ़े आ जाती हैं तथा भारी संख्या में धन-जन का विनाश करती हैं। इसके विपरीत जिन क्षेत्रों में वर्षा कम होती है या अनिश्चितता की स्थिति होती है तो अनावृष्टि के कारण सूखा पड़ जाता है, जिससे फसलें सूख जाती हैं तथा पशुधन को भी पर्याप्त हानि उठानी पड़ती है। जलवायु का प्राकृतिक वनस्पति व जीव-जन्तुओं पर प्रभाव निम्नलिखित है
1. प्राकृतिक वनस्पति पर प्रभाव-किसी देश की प्राकृतिक वनस्पति न केवल धरातल और मिट्टी के गुणों पर निर्भर करती है, वरन् वहाँ के तापमान और वर्षा को भी उस पर प्रभाव पड़ता है, क्योंकि पौधे के विकास के लिए वर्षा, तापमान, प्रकाश और वायु की आवश्यकता पड़ती है; उदाहरणार्थ-भूमध्यरेखीय प्रदेशों में निरन्तर तेज धूप, कड़ी गर्मी और अधिक वर्षा के कारण ऐसे वृक्ष उगते हैं; जिनकी पत्तियाँ घनी, ऊँचाई बहुत और लकड़ी अत्यन्त कठोर होती है। इसके विपरीत मरुस्थलों में काँटेदार झाड़ियाँ भी बड़ी कठिनाई से उग पाती हैं; क्योंकि यहाँ वर्षा का अभाव होता है। वास्तव में जलवायु वनस्पति का प्राणाधार है।
2. जीव-जन्तुओं पर प्रभाव-जलवायु की विविधता ने प्राणियों में भी विविधता स्थापित की है। जिस प्रकार विभिन्न जलवायु में विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ पायी जाती हैं, वैसे ही विभिन्न जलवायु प्रदेशों में अनेक प्रकार के जीव-जन्तु पाये जाते हैं; उदाहरणार्थ-कुछ जीव-जन्तु वृक्षों की शाखाओं पर रहकर सूर्य की गर्मी और प्रकाश प्राप्त करते हैं; जैसे-नाना प्रकार के बन्दर, चमगादड़ आदि। इसके विपरीत कुछ जीव-जन्तु जल में निवास करते हैं; जैसे-मगरमच्छ, दरियाई घोड़े आदि। ठीक इससे भिन्न प्रकार के प्राणी टुण्ड्री प्रदेश में पाये जाते हैं जिनके शरीर पर लम्बे और मुलायम बाल होते हैं, जिनके कारण वे कठोर शीत से अपनी रक्षा करते हैं।
In simple words: जलवायु प्राकृतिक वनस्पति और जीव-जन्तुओं के वितरण और प्रकार को सीधे प्रभावित करती है। पर्याप्त वर्षा और तापमान सघन वनस्पति का समर्थन करते हैं, जबकि शुष्क और ठंडी जलवायु में भिन्न अनुकूलन वाले जीव और पौधे पाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: जलवायु के जैविक और अजैविक घटकों पर प्रभाव को स्पष्ट रूप से समझाएँ, वनस्पति और जीव-जन्तुओं के उदाहरणों का उपयोग करें।

 

Question 7. अल्पवृष्टि तथा अतिवृष्टि का वर्णन कीजिए।
Answer: 1. अल्पवृष्टि। अल्पवृष्टि का तात्पर्य वर्षा न होने से है जिसके कारण अकाल की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जलाभाव के कारण फसलें नष्ट हो जाती हैं। नदी, तालाब, कुएँ सूखने लगते हैं। पानी का घोर संकट उत्पन्न हो जाता है जिससे सभी प्रकार के जीवों का जीवन संकटग्रस्त हो जाता है। पशुओं के लिए पानी तथा चारे की समस्या पैदा हो जाती है।
2. अतिवृष्टि अतिवृष्टि का तात्पर्य ऐसी अत्यधिक वर्षा से है जो लाभ की अपेक्षा हानि पहुँचाती है। अतिवृष्टि से नदी, जलाशय, तालाब सभी जल से भर जाते हैं। नदियों में बाढ़ आ जाती है जिससे उनके किनारे बसे गाँव, नगर तथा फसलें प्रभावित हो जाती हैं। अतिवृष्टि से बहुत-से लोग घर-विहीन हो जाते हैं। बाढ़ के बाद अनेक प्रकार के संक्रामक रोग फैलने लगते हैं। अतिवृष्टि का सर्वाधिक प्रभाव फसलों पर पड़ता है। इससे सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।
In simple words: अल्पवृष्टि का अर्थ है कम वर्षा, जिससे सूखा, जल की कमी और फसलें नष्ट होती हैं, जबकि अतिवृष्टि का अर्थ है अत्यधिक वर्षा, जिससे बाढ़, संपत्ति का विनाश और संक्रामक बीमारियाँ फैलती हैं, दोनों ही मानव जीवन और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।

🎯 Exam Tip: अल्पवृष्टि और अतिवृष्टि की परिभाषाओं, उनके कारणों और उनके परिणामों को विस्तार से जानें।

 

Question 8. भारत की चार प्रमुख ऋतुओं के नाम लिखकर उनका संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: भारत की चार ऋतुओं के नाम तथा उनका संक्षिप्त विवेचन निम्नवत् है- 1. शीत ऋतु-लगभग पूरे भारत में दिसम्बर, जनवरी तथा फरवरी के महीनों में शीत ऋतु होती है। इस ऋतु में उत्तर-पश्चिमी मैदानी भागों में उच्च वायुदाब रहता है तथा देश के ऊपरी भागों में उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवने स्थल से सागरों की ओर चलती हैं। पवनों के स्थल भागों से चलने के कारण यह ऋतु शुष्क होती है। इस ऋतु में दक्षिण से उत्तर की ओर जाने में तापमान घटता जाता है। यहाँ दिन सामान्यतः अल्प उष्ण एवं रातें ठण्डी होती हैं। ऊँचे स्थानों पर पाला भी पड़ जाता है।
2. ग्रीष्म ऋतु-21 मार्च के बाद सूर्य की स्थिति उत्तरायण हो जाती है। अब मार्च, अप्रैल और मई के बीच अधिक तापमान की पेटी दक्षिण से उत्तर की ओर खिसक जाती है। इस समय देश के उत्तर-पश्चिमी भागों में तापमान 48° सेल्सियस तक पहुँच जाता है। फलस्वरूप अत्यधिक गर्मी पड़ने के कारण इस भाग में निम्न वायुदाब के क्षेत्र बन जाते हैं। इसे 'मानसून का निम्न वायुदाब गर्त कहते हैं। इस ऋतु में शुष्क एवं गर्म पवनें चलने लगती हैं, जिन्हें 'लू' कहा जाता है। इन दिनों पंजाब, हरियाणा, पूर्वी राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश में धूलभरी आँधियाँ भी चलती हैं।
3. आगे बढ़ते हुए मानसून की ऋतु-सम्पूर्ण देश में जून, जुलाई, अगस्त और सितम्बर के महीनों में ही अधिकांश वर्षा होती है। वर्षा की अवधि एवं मात्रा उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम की ओर घटती जाती है। भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों में यह अवधि केवल दो महीनों की होती है। तथा वर्षा का 75% से 90% भाग इसी अवधि में प्राप्त हो जाता है।
4. पीछे लौटते हुए मानसून की ऋतु-अक्टूबर और नवम्बर के महीनों में मानसूने पीछे लौटने लगता है। अक्टूबर माह के अन्त तक मानसून मैदान से पूर्णतः पीछे हट जाता है। इस समय शुष्क ऋतु का आगमन होता है तथा आकाश स्वच्छ हो जाता है। तापमान में कुछ वृद्धि होती है। उच्च तापमान और आर्द्रता के कारण मौसम कष्टदायी हो जाता है। निम्न वायुदाब के क्षेत्र बंगाल की खाड़ी में स्थानान्तरित हो जाते हैं। इस अवधि में पूर्वी तट पर व्यापक वर्षा होती है। सम्पूर्ण कोरोमण्डल तट पर अधिकांश वर्षा इन्हीं चक्रवातों और अवदाबों के कारण होती है।
In simple words: भारत में चार मुख्य ऋतुएँ हैं: शीत ऋतु (दिसंबर-फरवरी) में ठंडी और शुष्क हवाएँ चलती हैं; ग्रीष्म ऋतु (मार्च-मई) में उच्च तापमान और 'लू' चलती है; आगे बढ़ता मानसून (जून-सितंबर) देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा लाता है; और लौटता मानसून (अक्टूबर-नवंबर) में तापमान बढ़ता है और पूर्वी तट पर चक्रवातीय वर्षा होती है।

🎯 Exam Tip: भारत की चारों ऋतुओं का क्रम, उनकी समय अवधि और प्रत्येक ऋतु की प्रमुख मौसमी विशेषताओं को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. मानसून से क्या अभिप्राय है? ग्रीष्मकालीन मानसूनी वर्षा की चार विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Answer: 'मानसून' शब्द की व्युत्पत्ति अरबी भाषा के 'मौसिम' शब्द से हुई है। इनका शाब्दिक अर्थ ऋतु है। इस प्रकार मानसून का अर्थ एक ऐसी ऋतु से है, जिसमें पवनों की दिशा पूरी तरह से उलट जाती है। मानसूनी पवनें हिन्द महासागर में विषुवत् वृत्त पार करने के बाद दक्षिण-पश्चिमी व्यापारिक पवनों के रूप में बहने लगती हैं। इस प्रकार शुष्क तथा गर्म स्थलीय व्यापारिक पवनों का स्थान आर्द्रता से परिपूर्ण समुद्री पवनें ले लेती हैं। मानसूनी पवनों के अध्ययन से पता चला है कि इन पवनों का प्रसार 20° उत्तर तथा 20° दक्षिण अक्षांशों के बीच उष्ण कटिबन्धीय भू-भागों पर होता है। लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप में मानसून हिमालय की पर्वत-श्रेणी से बहुत अधिक प्रभावित होता है। इन पर्वत-श्रेणियों के कारण पूरा भारतीय उपमहाद्वीप दो से पाँच महीनों तक आर्द्र विषुवतीय पवनों के प्रभाव में आ जाता है। अतः जून से लेकर सितम्बर तक ही 75-90% के बीच वार्षिक वर्षा होती है।
ग्रीष्मकालीन मानसूनी वर्षा की चार विशेषताएँ
1. ग्रीष्मकालीन मानसूनी वर्षा की अवधि दक्षिण से उत्तर तथा पूर्व से पश्चिम की ओर घटती जाती है। देश के सबसे उत्तर-पश्चिमी भाग में यह अवधि केवल दो महीने की होती है। इस अवधि में 75% से 90% तक वर्षा हो जाती है।
2. ग्रीष्मकालीन मानसूनी वर्षावाहिनी पवनें बड़ी तेजी से चलती हैं। इनकी औसत गति 30 किलोमीटर प्रति घण्टा होती है। उत्तर-पश्चिमी भागों को छोड़कर ये एक महीने में सारे भारत में फैल जाती हैं। आर्द्रता से भरी इन पवनों के आने के साथ ही बादलों का प्रचण्ड ग़र्जन तथा बिजली चमकनी शुरू हो जाती है। इसे मानसून का फटना' या टूटना' कहते हैं।
3. ग्रीष्मकालीन मानसूनी वर्षा लगातार नहीं होती। कुछ दिनों तक वर्षा होने के बाद मौसम सूखा रहता है। मानसून के इस घटते-बढ़ते स्वरूप का कारण चक्रवातीय अवदाब हैं, जो मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी के शीर्ष भाग में उत्पन्न होते हैं और भारत-भूमि के ऊपर से गुजरते हैं।
4. ग्रीष्मकालीन मानसूनी वर्षा अपनी स्वेच्छाचारिता के लिए विख्यात है। इससे एक ओर तो कुहीं भारी वर्षा से भयंकर बाढ़ आ सकती है तो दूसरे स्थान पर सूखा पड़ सकता है। इससे करोड़ों किसानों के खेती के काम प्रभावित होते हैं।
In simple words: मानसून ऐसी मौसमी हवाएँ हैं जो अपनी दिशा बदलती हैं और भारतीय उपमहाद्वीप में अधिकांश वर्षा लाती हैं। ग्रीष्मकालीन मानसूनी वर्षा की चार मुख्य विशेषताएँ हैं: इसकी अवधि दक्षिण से उत्तर और पूर्व से पश्चिम घटती जाती है, हवाएँ तेज़ गति से चलती हैं और 'मानसून का फटना' होता है, वर्षा निरंतर नहीं होती बल्कि चक्रवातों से प्रभावित होती है, और यह अपनी अनिश्चितता के लिए जानी जाती है, जिससे बाढ़ या सूखा हो सकता है।

🎯 Exam Tip: मानसून की परिभाषा और ग्रीष्मकालीन मानसूनी वर्षा की विशिष्ट विशेषताओं को विस्तार से याद रखें, क्योंकि यह भारतीय जलवायु का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

 

Question 10. भारत की जलवायु पर हिमालय पर्वत के प्रभावों को स्पष्ट कीजिए।
या यदि भारत के उत्तर में हिमालय पर्वत न होता तो उसका भारत की जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ता?
Answer: हिमालय पर्वत की स्थिति का भारत की जलवायु पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ता है 1. हिमालय पर्वत उत्तर में साइबेरिया तथा उत्तरी ध्रुव की ओर से आने वाली शीतल तथा बर्फीली पवनों के मार्ग में बाधक बनकर उन्हें भारत में आने से रोक देता है। यदि ये पवनें भारत में प्रवेश कर जातीं तो सम्पूर्ण उत्तरी भारत हिम से जम जाता।
2. हिमालय पर्वत दक्षिण की ओर से आने वाली ग्रीष्मकालीन मानसूनी पवनों को रोककर उन्हें भारत में वर्षा करने को विवश कर देता है। यदि भारत के उत्तर में हिमालय पर्वत न होता तो उत्तर का विशाल मैदान शुष्क मरुस्थल में परिणत हो गया होता।
3. हिमालय पर्वत के उच्च शिखरों पर जमी हुई हिम, ग्रीष्म ऋतु में भी नदियों को सतत रूप से जल प्रदान करती रहती है तथा उन्हें सदानीरा बनाए रखती है। इससे समस्त उत्तरी भारत को ग्रीष्म ऋतु में भी कृषि फसलों की सिंचाई के लिए जल उपलब्ध होता रहता है।
In simple words: हिमालय पर्वत भारत की जलवायु पर गहरा प्रभाव डालता है; यह उत्तर से आने वाली ठंडी हवाओं को रोकता है, जिससे उत्तरी भारत ठंडा होने से बचता है, और यह दक्षिणी मानसूनी हवाओं को रोककर देश में वर्षा कराता है। साथ ही, इसकी बर्फ पिघलकर नदियों को वर्षभर पानी प्रदान करती है।

🎯 Exam Tip: हिमालय पर्वत की जलवायु संबंधी भूमिका को उसके दोहरे प्रभाव - ठंडी हवाओं को रोकने और मानसूनी वर्षा को आकर्षित करने - के संदर्भ में याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 11. शीतकालीन वर्षा का भारतीय कृषि पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: भारत में शीतकालीन वर्षा बहुत ही कम होती है। इसकी मात्रा कुल वर्षा का केवल 2% भाग ही है। इतनी कम वर्षा होते हुए भी फसलोत्पादन पर इसका महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। शीत ऋतु के आरम्भ में मानसून लौटने लगते हैं; अतः इनकी दिशा बदलकर स्थल से समुद्र की ओर हो जाती है। स्थल भागों से आने के कारण लौटते मानसून आर्द्रता-शून्य होते हैं; अतः वर्षा नहीं कर पाते, परन्तु पूर्वी भूमध्य सागर में उत्पन्न चक्रवाते अर्थात् पश्चिमी विक्षोभों द्वारा उत्तरी भारत में तथा बंगाल की खाड़ी में उठने वाले चक्रवातों से : तमिलनाडु में शीतकालीन वर्षा होती है, जिसका औसत 65 सेमी रहता है। तमिलनाडु राज्य शीत ऋतु में वर्षा प्राप्त करने वाला प्रधान राज्य है। इस राज्य में मार्च से मई तक वर्षा की कमी के कारण कृषि कार्य स्थगित रखना पड़ता है, परन्तु अक्टूबर-नवम्बर माह में वर्षा होने पर नई फसलें बोई जाती हैं। अतः शीत ऋतु यहाँ कृषि उत्पादन के लिए सर्वोत्तम समय है। यहाँ शीत ऋतु में वर्षा होते ही चावल की दूसरी फसल बोई जाती है। शीत ऋतु में होने वाली वर्षा के कारण ही यह क्षेत्र भारत का महत्त्वपूर्ण चावल उत्पादक प्रदेश बन गया है।
In simple words: शीतकालीन वर्षा, हालांकि कम होती है, भारतीय कृषि के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर रबी फसलों और तमिलनाडु में चावल की दूसरी फसल के लिए, क्योंकि यह सिंचाई की आवश्यकता को कम करती है।

🎯 Exam Tip: शीतकालीन वर्षा की मात्रा, इसके कारणों (जैसे पश्चिमी विक्षोभ) और भारतीय कृषि, विशेषकर रबी फसलों पर इसके सकारात्मक प्रभाव पर ध्यान दें।

 

Question 12. दक्षिण-पश्चिमी मानसून की उत्पत्ति के क्या कारण हैं?
Answer: 21 मार्च को सूर्य विषुवत रेखा पर लम्बवत् चमकता है तथा इसके पश्चात् वह कर्क रेखा की ओर बढ़ने लगता है। 21 जून को सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर लम्बवत् चमकती हैं, फलस्वरूप समस्त उत्तरी भारत में तापमाने अत्यधिक बढ़ जाता है। भारत का पाकिस्तान-सीमावर्ती क्षेत्र मरुस्थलीय होने के कारण और भी अधिक गर्म हो जाता है। इस अत्यधिक गर्मी के परिणामस्वरूप भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों में निम्न वायुदाब के क्षेत्र उत्पन्न हो जाते हैं तथा पवनें हल्की होकर ऊपर उठ जाती हैं, फलस्वरूप इस भाग में पवनों का दबाव अत्यन्त कम हो जाता है। इसके विपरीत हिन्द महासागर में तापमान निम्न होने के कारण वायुदाब उच्च हो जाता है। इसका परिणाम यह होता है कि निम्न वायुदाब, उच्च वायुदाब को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। अर्थात् पवने महासागरों की ओर से स्थल-खण्डों की ओर चलने लगती हैं। सागर के ऊपर से चलने के कारण ये पवनें आर्द्रता से परिपूर्ण हो जाती हैं और दक्षिण से उत्तर की ओर चलना आरम्भ कर देती हैं, परन्तु जैसे ही ये पवने विषुवत् रेखा को पार करती हैं, पृथ्वी की दैनिक गति के कारण इनकी दिशा दक्षिण-पश्चिम हो जाती है, जो दक्षिण-पश्चिमी मानसून कहलाता है। इस प्रकार विपरीत वायुदाबों की उत्पत्ति ही दक्षिण-पश्चिमी मानसून की उत्पत्ति का प्रमुख कारण है।
In simple words: दक्षिण-पश्चिमी मानसून की उत्पत्ति का मुख्य कारण गर्मियों में उत्तरी भारत में सूर्य की स्थिति के कारण उत्पन्न होने वाला अत्यधिक निम्न वायुदाब और हिंद महासागर में उच्च वायुदाब का अंतर है, जिससे हवाएँ समुद्र से भूमि की ओर आकर्षित होती हैं और विषुवत रेखा पार करने पर दक्षिण-पश्चिमी दिशा में मुड़ जाती हैं।

🎯 Exam Tip: दक्षिण-पश्चिमी मानसून की उत्पत्ति के लिए तापमान, वायुदाब के अंतर, और पृथ्वी की दैनिक गति जैसे भौतिक कारकों को विस्तार से समझना आवश्यक है।

 

Question 13. पश्चिमी विक्षोभ से क्या तात्पर्य है?
Answer: शीत ऋतु में भूमध्य सागर की ओर से भारत की ओर चलने वाली तूफानी पवनों को पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के नाम से जाना जाता है। भारत में शीत ऋतु बड़ी सुहावनी एवं आनन्ददायक होती है। स्वच्छ आकाश, निम्न तापमान एवं आर्द्रता, शीतल मन्द समीर तथा वर्षारहित दिन इस ऋतु की प्रमुख विशेषताएँ हैं, परन्तु इस सुहावने मौसम में कभी-कभी पश्चिमी अवदाबों (Depressions) के आ जाने के कारण भी मौसत बदल जाता है। ये अवदाब जब पूर्व की ओर बढ़ते हैं तो मार्ग में पड़ने वाले कैस्पियन सागर एवं फारस की खाड़ी से कुछ आर्द्रता ग्रहण कर लेते हैं, जिस कारण उत्तरी भारत में हल्की वर्षा हो जाती है। यद्यपि इस वर्षा की मात्रा बहुत कम होती है, परन्तु रबी की फसल, विशेष रूप से गेहूं की कृषि के लिए यह वर्षा बहुत लाभप्रद होती है।
In simple words: पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर में उत्पन्न होने वाले तूफानी पवनें हैं जो शीत ऋतु में भारत में हल्की वर्षा लाते हैं, जो रबी फसलों के लिए फायदेमंद होती है और मौसम में बदलाव लाती है।

🎯 Exam Tip: पश्चिमी विक्षोभ की परिभाषा, उत्पत्ति स्थान, और भारतीय कृषि पर इसके प्रभावों को जानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 14. पर्वतीय वर्षा एवं वृष्टि-छाया प्रदेश किसे कहते हैं?
Answer: निम्न वायुभार उच्च वायुभार को अपनी ओर आकर्षित करता है। यदि उच्च वायुभार राशि किसी जल आप्लावित क्षेत्र से होकर गुजरे तो वह आर्द्रतायुक्त हो जाती है। जब इसके मार्ग में कोई पर्वत शिखर या पठार अवरोधस्वरूप उपस्थित होता है तो वायुराशि द्रवीभूत होकर वर्षा करती है। इस प्रकार होने वाली वर्षा को पर्वतीय वर्षा या उच्चावचीय वर्षा कहते हैं। मध्यवर्ती अक्षांशों में शरद् ऋतु एवं शीत ऋतु के आरम्भ में तथा मानसूनी प्रदेशों में ग्रीष्म ऋतु में इसी प्रकार की वर्षा होती है। वायुराशियों द्वारा अवरोध के सम्मुख वाले भाग में अत्यधिक वर्षा होती है, जबकि विमुख भागों तक पहुँचते-पहुँचते वायुराशियों की आर्द्रता समाप्त हो जाती है। इन प्रदेशों को वृष्टि-छाया प्रदेश के नाम से पुकारा जाता है। उदाहरण के लिए भारत में दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी पवनों की अरब सागरीय शाखा द्वारा पश्चिमी घाट के वायु अभिमुख ढाल पर 640 सेमी (महाबलेश्वर में) वर्षा हो जाती है, जबकि इसके विमुख ढाल पर पुणे में मात्रा 50 सेमी या उससे भी कम वर्षा होती है। अतः दक्षिण भारत का यह क्षेत्र वृष्टि-छाया प्रदेश कहलाता है।
In simple words: पर्वतीय वर्षा तब होती है जब नमी युक्त हवाएँ पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती हैं और संघनित होकर वर्षा करती हैं। इसके विपरीत, पहाड़ों के विमुख ढालों पर स्थित क्षेत्र, जहाँ वर्षा बहुत कम होती है क्योंकि हवा अपनी नमी खो चुकी होती है, वृष्टि-छाया प्रदेश कहलाते हैं, जैसे पश्चिमी घाट के पूर्व में पुणे।

🎯 Exam Tip: पर्वतीय वर्षा और वृष्टि-छाया प्रदेश की अवधारणाओं को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें, उनके निर्माण के भौगोलिक कारणों पर ध्यान दें।

 

Question 15. उत्तरी भारत के किन राज्यों में बाढ़ (Flood) का प्रकोप रहता है और क्यों?
Answer: उत्तरी भारत के असम, पश्चिम बंगाल, बिहार तथा उत्तर प्रदेश राज्यों में बाढ़ का प्रकोप सर्वाधिक रहता है। इन प्रदेशों में एक ओर तो मूसलाधार वर्षा होती है, दूसरे जल के साथ पर्याप्त मिट्टी बहकर नदियों की तली में एकत्र हो जाती है, जिस कारण अवसादों के जमा होने से नदियों की तलहटी ऊँची हो जाती है, फलस्वरूप नदियों का जल अपनी घाटी के दोनों ओर फैलकर बाढ़ का रूप ले लेता है। इसके अतिरिक्त उत्तरी भारत में धरातल का ढाल भी अत्यन्त कम है, जो बाढ़ को प्रोत्साहित करता है। इन्हीं कारणों से उत्तरी भारत में वर्षा ऋतु में बाढ़ का प्रकोप अधिक रहता है।
In simple words: उत्तरी भारत के असम, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में बाढ़ का प्रकोप अधिक रहता है, क्योंकि इन क्षेत्रों में भारी वर्षा होती है और नदियों में गाद जमा होने से उनका तल ऊपर उठ जाता है, जिससे पानी किनारों से बाहर फैल जाता है। साथ ही, इन क्षेत्रों का कम ढाल भी बाढ़ को बढ़ावा देता है।

🎯 Exam Tip: उत्तरी भारत में बाढ़ के कारणों - भारी वर्षा, नदियों में गाद जमाव, और कम ढाल - को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 16. क्या कारण है कि चेरापूँजी में अत्यधिक वर्षा होती है?
Answer: चेरापूंजी, मेघालय राज्य में एक ऐसी घाटी की तलहटी में स्थित है जो तीन ओर से गारो, खासी तथा जयन्तिया की पहाड़ियों से घिरा है। बंगाल की खाड़ी के मानसून की एक शाखा उत्तर तथा उत्तर-पूर्व दिशा में ब्रह्मपुत्र की घाटी की ओर बढ़ जाती है। इससे उत्तर-पूर्वी भारत में अत्यधिक वर्षा होती है। इसकी एक उपशाखा मेघालय स्थित गारो, खासी और जयन्तिया की पहाड़ियों से टकराती है। इन पहाड़ियों के दक्षिण भाग में चेरापूंजी स्थिति है। अतः स्थलाकृति की दृष्टि से विशिष्ट स्थिति तथा पवनों की दिशा के कारण चेरापूँजी संसार का अत्यधिक वर्षा वाला स्थान बन गया है। यहाँ की वार्षिक वर्षा का औसत 1,200 सेमी से भी अधिक है। यहाँ 2,250 सेमी तक वर्षा हो चुकी है। अब चेरापूंजी के समीप (मात्र 16 किमी की दूरी पर) मॉसिनराम गाँव में सर्वाधिक वर्षा (1,354 सेमी) होती है।
In simple words: चेरापूंजी में अत्यधिक वर्षा उसकी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण होती है; यह गारो, खासी और जयंतिया पहाड़ियों से घिरी एक घाटी में स्थित है, जहाँ बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाएँ फंसकर ऊपर उठती हैं और भारी वर्षा करती हैं।

🎯 Exam Tip: चेरापूंजी में अत्यधिक वर्षा के भौगोलिक कारणों को विस्तार से समझाएँ, जिसमें पहाड़ियों की स्थिति और मानसूनी हवाओं की भूमिका शामिल है।

 

Question 17. 'क्वार मास की उमस' का क्या अर्थ है?
Answer: अक्टूबर एवं नवम्बर के महीनों में भारत की मुख्य भूमि से मानसून लौटने लगता है, क्योंकि इस ऋतु में मानसून का निम्न वायुदाब गर्त क्षीण पड़ जाता है तथा उसका स्थान उच्च वायुदाब लेने लगता है। वायुभार बढ़ने तथा मानसूनी पवनों की शक्ति क्षीण हो जाने के कारण मानसूनी पवनें लौटने लगती हैं, फलस्वरूप भारतीय क्षेत्र से इसका प्रभाव क्षेत्र सिकुड़ने लगता है। धरातलीय पवनों की दिशा विपरीत होनी आरम्भ हो जाती है। अक्टूबर माह के अन्त तक मानसून विशाल मैदानों से पूर्णतः पीछे हट जाता है। ये दोनों महीने संक्रमणीय जलवायु दशाएँ रखते हैं। इनमें उष्णार्द्र वर्षा ऋतु का स्थान शुष्क ऋतु ले लेती है। मानसून के प्रत्यावेदन से आकाश साफ हो जाता है और तापमान पुनः बढ़ने लगता है। भूमि अभी भी आर्द्रता से युक्त होती है। अतः उच्च तापमान एवं आर्द्रता के कारण मौसम बड़ा ही कष्टदायक हो जाता है, जिसे क्वार की उमस के नाम से पुकारा जाता है।
In simple words: 'क्वार मास की उमस' अक्टूबर और नवंबर के महीनों में होने वाली असहनीय गर्मी और चिपचिपाहट को संदर्भित करती है, जब मानसून लौटने लगता है, जिससे आकाश साफ हो जाता है, तापमान बढ़ता है, और हवा में नमी बनी रहती है।

🎯 Exam Tip: 'क्वार मास की उमस' की अवधारणा और इसके कारणों - मानसून का निवर्तन, उच्च तापमान और आर्द्रता - को स्पष्ट करें।

 

Question 18. जेट पवनें किन्हें कहते हैं?
Answer: ऊपरी वायुमण्डल के अध्ययन से मौसम वैज्ञानिकों ने मानसूनों की उत्पत्ति के सम्बन्ध में अनेक महत्त्वपूर्ण तथ्यों का रहस्योद्घाटन किया है। वास्तव में ऊपरी वायुमण्डल में तीव्र गति से चलने वाली पवनो को जेट पवनें कहते हैं? जेट पवनों का नामकरण अमेरिकी बमवर्षक विमान बी-29 के नाम पर हुआ है। द्वितीय महायुद्ध में इन बमवर्षकों को जापान की उड़ान भरने पर प्रबल वेग वाली वायु का सामना करना पड़ता था, जिससे विमानों की गति मन्द पड़ जाती थी तथा कभी-कभी इनका आगे बढ़ना भी कठिन हो जाता था। परन्तु जब यही विमान अमेरिका की ओर वापस आते थे, तब इनके वेग में अपार वृद्धि हो जाती थी। इसी कारण इनका नामकरण जेट पवनों (जेट स्ट्रीम्स) के नाम पर हुआ। ये जेट धाराएँ पूर्व से पश्चिम की ओर 62 किमी की ऊँचाई पर चलती हैं। शीत ऋतु में ये विषुवत् रेखा के अधिक निकट परन्तु 20° अक्षांशों तक प्रवाहित होती हैं। ग्रीष्म ऋतु की अपेक्षा शीत ऋतु में इनका वेग दोगुना हो जाता है। सामान्य रूप से इनका वेग 480 किमी प्रति घण्टा होता है।
In simple words: जेट पवनें क्षोभमंडल के ऊपरी स्तरों में तीव्र गति से चलने वाली हवाएँ हैं जो मौसम प्रणालियों को प्रभावित करती हैं, और इनका नामकरण द्वितीय विश्व युद्ध के बमवर्षक विमानों के अनुभव पर आधारित है।

🎯 Exam Tip: जेट स्ट्रीम्स की परिभाषा, उनकी गति, ऊंचाई, और मौसम प्रणालियों पर उनके प्रभाव को याद रखें।

 

Question 19. चेन्नई का तट शुष्क रहता है जबकि मालाबार का तट जुलाई के महीने में वर्षा प्राप्त करता है। कारण बताइए।
Answer: मालाबार तट भारत के पश्चिमी तटीय क्षेत्र में स्थित है, जबकि चेन्नई तट पूर्वी तटीय प्रदेश में है। जुलाई माह में अरब सागर से आने वाली वर्षावाही मानसून पवनें पश्चिमी घाट से टकराकर भारी वर्षा करती हैं। इन्हीं पवनों से मालाबार तट पर जुलाई मास में पर्याप्त वर्षा होती है, किन्तु तब ये पवनें पूर्व की ओर आगे बढ़ती हैं तब ये जलविहीन हो जाती हैं। अतः इन पवनों से चेन्नई तट पर वर्षा नहीं होती है। यही कारण है कि जुलाई में जब मालाबार तट पर भारी वर्षा होती है तब चेन्नई तट शुष्क रहता है।
In simple words: जुलाई में मालाबार तट पश्चिमी घाट के कारण दक्षिण-पश्चिमी मानसून से भारी वर्षा प्राप्त करता है, जबकि चेन्नई तट पश्चिमी घाट के वृष्टि-छाया प्रदेश में होने और इस दौरान मानसून पवनों के शुष्क होने के कारण शुष्क रहता है।

🎯 Exam Tip: मालाबार और चेन्नई तट के वर्षा पैटर्न में अंतर के भौगोलिक कारणों को स्पष्ट रूप से समझाएँ, खासकर पश्चिमी घाट और मानसूनी पवनों की भूमिका के संदर्भ में।

 

Question 20. भारत में मानसून को 'किसान के लिए जुआ क्यों कहा जाता है?
Answer: भारत में कृषि मानसूनी वर्षा पर अधिक निर्भर है। जिस वर्ष वर्षा पर्याप्त नियमित एवं समय पर हो जाती है उस वर्ष किसान की फसल की पैदावार भी अच्छी होती है, किन्तु जब वर्षा कम होती है या समय पर नहीं होती तो किसान की फसल नष्ट हो जाती है। इसी दृष्टि से भारत में मानसून को किसान का जुआ कहते हैं। वास्तव में मानसूनी वर्षा की प्रकृति इस प्रकार की है जिसे देखकर इससे होने वाले लाभ-हानि को निश्चित नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से वर्षा के असमान वितरण, अतिवृष्टि, अनावृष्टि तथा अल्प अवधि में ही अधिक वर्षा आदि लक्षणों के कारण इसे किसान की फसल की दृष्टि से एक जुआ माना जाता
In simple words: भारत में मानसून को 'किसान के लिए जुआ' इसलिए कहा जाता है क्योंकि भारतीय कृषि मानसूनी वर्षा पर अत्यधिक निर्भर करती है, और वर्षा की अनिश्चितता, असमान वितरण, अतिवृष्टि या अनावृष्टि के कारण फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो सकती हैं।

🎯 Exam Tip: भारतीय कृषि के लिए मानसून की अनिश्चितता और उसके परिणामों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 21. भारत के मानसून रचना तन्त्र का वर्णन कीजिए।
Answer: मानसूनों के विषय में प्राचीन मत यही था कि इसका सम्बन्ध केवल धरातलीय पवनों से ही है, परन्तु आधुनिक अनुसन्धानों से ज्ञात हुआ है कि ऊपरी जेट पवनें मानसून के रचना तन्त्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मौसम वैज्ञानिकों को प्रशान्त महासागर तथा हिन्द महासागर के ऊपर होने वाले मौसम सम्बन्धी परिवर्तनों के पारस्परिक सम्बन्धों की जानकारी प्राप्त हुई है। उत्तरी गोलार्द्ध में प्रशान्त महासागर के उपोष्ण कटिबन्धीय प्रदेश में जिस समय कयुभार अधिक होता है उसी समय हिन्द महासागर. के दक्षिणी भाग में वायुभार कम रहता है। ऋतुओं में विषुवत् वृत्त के आर-पार पवनों की स्थिति भी बदलती रहती है। विषुवत् वृत्त के आर-पार पवन-पेटियों के खिसकने तथा इनकी तीव्रता से मानसून प्रभावित होता है। 20° दक्षिणी अक्षांशों से लेकर 20° उत्तरी अक्षांशों के मध्य में स्थित उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों पर मानसून का प्रसार रहता है, परन्तु भारतीय उपमहाद्वीप में इन पर हिमालय पर्वतश्रेणियों का बहुत प्रभाव पड़ता है। इनके प्रभाव से पूरा भारतीय उपमहाद्वीप विषुवतीय आर्द्र पवनों के प्रभाव में आ जाता है। मानसूनों का यह प्रभाव 2 से 5 माह तक बना रहता है। यहाँ जून से सितम्बर तक 75% से 90% तक वर्षा इसी मानसून तन्त्र के कारण होती है।
In simple words: भारत का मानसून तंत्र धरातलीय और ऊपरी वायुमंडलीय हवाओं (जेट धाराओं) के जटिल अंतर्संबंध का परिणाम है, जो प्रशांत और हिंद महासागरों में वायुदाब परिवर्तनों से प्रभावित होता है, और हिमालय की पर्वतमालाएँ इस पर गहरा प्रभाव डालती हैं, जिससे भारत में अधिकांश वर्षा जून से सितंबर के दौरान होती है।

🎯 Exam Tip: भारतीय मानसून तंत्र के गठन में धरातलीय और ऊपरी वायुमंडलीय कारकों (जैसे जेट स्ट्रीम्स) की भूमिका को समझें।

 

Question 22. मानसून के 'फटने या 'टूटने से क्या तात्पर्य है ?
Answer: आर्द्रता से भरी दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी पवनें बड़ी तेज चलती हैं। इनकी औसत गति 30 किलोमीटर प्रति घण्टा है। उत्तर-पश्चिमी भागों को छोड़कर ये एक महीने की अवधि में सारे भारत में फैल जाती हैं। आर्द्रता से भरी इन पवनों के आने के साथ ही बादलों का प्रचण्ड गर्जन तथा बिजली का चमकना शुरू हो जाता है। इसे ही मानसून का 'फटना' या 'टूटना' कहा जाता है।
In simple words: मानसून का 'फटना' या 'टूटना' दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाओं के अचानक और तीव्र आगमन को संदर्भित करता है, जिसमें बिजली और बादलों की गर्जना के साथ भारी वर्षा होती है, जो लगभग एक महीने में पूरे भारत में फैल जाती है।

🎯 Exam Tip: 'मानसून का फटना' की परिभाषा और इसकी विशेषताओं, जैसे अचानक शुरुआत और तीव्र वर्षा, को याद रखें।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. जलवायु से आप क्या समझते हैं ? जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों (परिघटनाओं) का वर्णन कीजिए।
या भारत की स्थिति का उसकी जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
या भारत की जलवायु पर हिमालय पर्वत का क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer: जलवायु लम्बी अवधि (30 से 50 वर्षों) के दौरान मौसम सम्बन्धी दशाओं के साधारणीकरण को जलवायु कहते हैं अर्थात् भू-पृष्ठ के विस्तृत क्षेत्र में मौसम की दशाओं की समग्र जटिलता, उसके औसत लक्षण और परिवर्तन का परिसर जलवायु कहलाता है। सामान्यतः ये दशाएँ अनेक वर्षों की दशाओं का परिणाम होती हैं और ताप, वायुमण्डलीय दाब, वायु आर्द्रता, मेघ, वर्षण तथा अन्य मौसम तत्त्वों के कारण उत्पन्न होती हैं।
भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक
विभिन्न स्थानों पर भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं
1. अवस्थिति-भारत भूमध्य रेखा के उत्तर में 8°4 तथा 37°6′ उत्तर अक्षांश तथा 687' से 97°25′ पूर्वी देशान्तर के बीच स्थित है। कर्क वृत्त रेखा देश के लगभग मध्य से होकर गुजरती है। इसीलिए देश का उत्तरी भाग उपोष्ण कटिबन्ध में तथा दक्षिणी भाग उष्ण कटिबन्ध में पड़ता है। इस कटिबन्धीय स्थिति के कारण दक्षिणी भाग में ऊँचे तापमान तथा उत्तरी भाग में विषम तापमान पाये जाते हैं। भारत हिन्द महासागर, अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी से घिरा एक प्रायद्वीपीय देश है। इस प्रायद्वीपीय स्थिति का प्रभाव तापमानों तथा वर्षा पर पड़ता है। समुद्रतटीय भागों की जलवायु सम रहती है, जब कि आन्तरिक भागों में विषम जलवायु पायी जाती है। वर्षा की मात्रा भी तटीय भागों से आन्तरिक भागों की ओर घटती है।
2. पृष्ठीय पवनें-उपोष्ण कटिबन्धीय स्थिति के कारण भारत शुष्क व्यापारिक पवनों के क्षेत्र में पड़ता है, किन्तु भारत की विशिष्ट प्रायद्वीपीय स्थिति, तापमानों-वायुदाब की भिन्नता आदि कारणों से भारत में मानसूनी पवनें सक्रिय रहती हैं। ये पवनें ऋतु-क्रम से अपनी दिशा बदलती रहती हैं। तदनुसार भारत में ग्रीष्मकालीन (दक्षिण-पश्चिमी) मानसून तथा शीतकालीन (उत्तर-पूर्वी) मानसून सक्रिय होते हैं। इन्हीं मानसूनों से भारत को अधिकांश वर्षा प्राप्त होती है। अतः भारतीय मानसून के अध्ययन के बिना उसकी जलवायु के विषय में नहीं जाना जा सकता।
3. उच्चावच (हिमाचल)-भारत के उत्तर में हिमालय पर्वत-श्रेणी एक प्रभावशाली जलवायु विभाजक का कार्य करती है। यह उत्तरी बर्फीली पवनों को भारत में प्रवेश करने से रोकती है तथा दक्षिण की ओर से आने वाली मानसूनी पवनों को रोककर देश में व्यापक वर्षा कराती है। इसी प्रकार पश्चिमी घाट की पहाड़ियाँ भी अरबसागरीय मानसूनों को रोककर पश्चिमी ढालों पर भारी वर्षा कराती हैं। हिमालय रूपी पर्वत-श्रृंखला के कारण ही उत्तरी भारत में उष्ण-कटिबन्धीय जलवायु पायी जाती है। इस जलवायु की दो विशेषताएँ हैं-(i) पूरे वर्ष में अपेक्षाकृत उच्च तापमान तथा (ii) शुष्क शीत ऋतु। कुछ क्षेत्रों को छोड़कर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में ये दोनों ही विशेषताएँ पायी जाती हैं।
4. उपरितन वायु-उपरितन वायु से अभिप्राय ऊपरी वायुमण्डल में चलने वाली वायुधाराओं से है। ये भूपृष्ठ से बहुत ऊँचाई पर (9 किमी से 12 किमी तक) तीव्र गति से चलती हैं। इन्हें जेट वायुधाराएँ भी कहते हैं। ये बहुत सँकरी पट्टी में चलती हैं। शीत ऋतु में हिमालय के दक्षिणी भाग के ऊपर स्थित समताप मण्डल में पश्चिमी जेट वायुधारा चलती है। जून में यह उत्तर की ओर खिसक जाती है तथा 15° उत्तरी अक्षांश के ऊपर चलने लगती है। उत्तरी भारत में मानसून के अचानक विस्फोट के लिए यही वायुधारा उत्तरदायी मानी जाती है। इसके शीतल प्रभाव से बादल उमड़ने लगते हैं, फिर बरसते हैं। आठ-दस दिनों में ही पूरे देश में मानसून का प्रसार हो जाता है। ग्रीष्म ऋतु की अपेक्षा शीत ऋतु में इनका वेग दोगुना हो जाता है। साधारणतः इनका वेग लगभग 500 किमी प्रति घण्टा होता है तथा ध्रुवीं की ओर बढ़ने पर इनके वेग में कमी आ जाती है।
5. अलनिनो-यह एक ऐसी मौसमी परिघटना है, जिसका प्रभाव समूचे विश्व पर पड़ता है। भारत की मानसूनी जलवायु भी इस परिघटना से प्रभावित होती है। इस तन्त्र में पूर्वी प्रशान्त महासागर के पीरू तट पर गर्म धारा प्रकट होने पर हिन्द महासागर में स्थित भारत में अकाल या वर्षा की कमी की स्थिति हो जाती है। अलनिनो के समाप्त होने पर प्रशान्त महासागर की सतह पर तापमान तथा वायुदाब की स्थिति पहले जैसी हो जाती है। इन उतार-चढ़ावों को 'दक्षिणी दोलन' (Southern Oscillation) कहा जाता है। मानसूनों के प्रबल या दुर्बल होने में 'दक्षिणी दोलन' का बहुत प्रणव पड़ता है।
In simple words: जलवायु एक क्षेत्र में लंबे समय तक रहने वाली मौसमी दशाओं का औसत है। भारत की जलवायु को कई कारक प्रभावित करते हैं, जिनमें इसकी अक्षांशीय स्थिति (उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र), पृष्ठीय पवनें (मानसून), हिमालय जैसे उच्चावच (ठंडी हवाओं को रोकना और वर्षा कराना), ऊपरी वायु धाराएँ (जेट स्ट्रीम्स), और वैश्विक मौसमी घटनाएँ (जैसे अल नीनो) शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: जलवायु की परिभाषा और भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों - अक्षांश, पवने, उच्चावच, जेट स्ट्रीम्स और अल नीनो - को विस्तार से जानें।

 

Question 2. उत्तर-पूर्वी मानसून तथा लौटते हुए मानसून में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: उत्तर-उत्तर-पूर्वी मानसून तथा लौटते हुए मानसून में निम्नवत् अन्तर हैं

क्र०सं०उत्तर-पूर्वी मानसूनलौटता हुआ मानसून
1.शीत ऋतु में भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों में तापमान की कमी के कारण उच्च वायुदाब के क्षेत्र बन जाने से पवनें स्थलीय भागों से सागरीय भागों की ओर चलने लगती हैं, जिन्हें उत्तर-पूर्वी मानसून कहते हैं।अक्टूबर एवं नवम्बर के महीनों में देश के उत्तर-पश्चिमी भागों में विकसित निम्न वायुदाब का गर्त कमजोर पड़ने लगता है तथा उसका स्थान उच्च वायुदाब ले लेता है जिससे मानसून लौटते लगता है, जिसे लौटता हुआ मानसून कहा जाता है।
2.उत्तर-पूर्वी मानसून के समय देश के उत्तर-पश्चिमी भाग शुष्क रहते हैं।लौटते हुए मानसून के समय शुष्क ऋतु का आगमन आरम्भ हो जाता है।
3.इस ऋतु में दिन सामान्यतः कोष्ण तथा रात्रि ठण्डी होती है।इस ऋतु में मौसम बड़ा ही कष्टदायक हो जाता है जिसका प्रचलित स्थानीय 'नाम क्वार की उसम' है।
4.यह ऋतु बड़ी सुहावनी तथा आनन्ददायक होती है। स्वच्छ आकाश, निम्न तापमान एवं आर्द्रता, शीतल मन्द समीर तथा वर्षा की कमी इस ऋतु की प्रमुख विशेषता है।इस ऋतु में पर्यावरण बड़ा ही उमस भरा होता है। तापमान घटना आरम्भ हो जाता है, आकाश स्वच्छ रहता है तथा मृदा में आर्द्रता बनी रहती है, जिस कारण मौसम कष्टदायक हो जाता है।
5.उत्तर-पूर्वी मानसून के साथ चक्रवातीय अवदाबों तथा पश्चिमी विक्षोभों के मिल जाने के कारण उत्तरी भारत में कुछ हल्की वर्षा हो जाती है जो रबी फसल के लिए बहुत लाभदायक होती है।लौटते हुए मानसून के समय उत्तर-पश्चिमी भारत के निम्न वायुदाब क्षेत्र का स्थानान्तरण बंगाल की खाड़ी में हो जाने के कारण अण्डमान सागर में पुनः चक्रवात बनने लगते हैं जिनके द्वारा पूर्वी तटीय भागों में भारी वर्षा होती है। ये चक्रवात भारी विनाशकारी होते हैं।

In simple words: उत्तर-पूर्वी मानसून शीत ऋतु में उत्तर-पश्चिमी भारत में उच्च वायुदाब से उत्पन्न शुष्क हवाएँ हैं, जो कभी-कभी पश्चिमी विक्षोभों से हल्की वर्षा लाती हैं, जबकि लौटता हुआ मानसून अक्टूबर-नवंबर में मानसूनी गर्त के कमजोर होने से उत्पन्न होता है, जो 'क्वार की उमस' और बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों के कारण पूर्वी तट पर भारी वर्षा लाता है।

🎯 Exam Tip: उत्तर-पूर्वी मानसून और लौटते हुए मानसून के बीच के अंतर को उनकी उत्पत्ति, विशेषताओं और भारत में उनके प्रभाव के संदर्भ में स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 3. भारत की ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन जलवायु का वर्णन कीजिए।
या भारतीय जलवायु का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों में कीजिए
(क) शीत ऋतु तथा (ख) ग्रीष्म ऋतु।
या शीत ऋतु में दक्षिण भारत में वर्षा क्यों होती है ?
Answer: भारत की ग्रीष्मकालीन जलवायु
भारत में ग्रीष्मकालीन जलवायु मार्च से मध्य जून तक रहती है। इस ऋतु में देश में मौसम की सामान्य दशाएँ निम्नलिखित होती हैं-
1. तापमान-सूर्य के उत्तरायण होने के कारण ऊष्मा की पेटी दक्षिण से उत्तर की ओर खिसकने लगती है। सम्पूर्ण देश में तापमान बढ़ने लगता है। अप्रैल में गुजरात तथा मध्य प्रदेश में तापमान 42° से 43° सेल्सियस तक पहुँच जाता है। मई में तापमान की वृद्धि 48° सेल्सियस तक हो जाती है। तथा मरुस्थलीय क्षेत्र में 50° सेल्सियस तक तापमान पहुँच जाता है।
2. वायुदाब तथा पवनें-उत्तरी भारत में तापमानों की वृद्धि होने से वायुदाब घट जाता है। मई के अन्त तक एक लम्बा सँकरो निम्न वायुदाब गर्त थार मरुस्थल से लेकर बिहार में छोटा नागपुर के पठार तक विस्तृत हो जाता है। इस निम्न वायुदाब गर्त के चारों ओर वायु का संचरण होने लगता है। दोपहर के बाद शुष्क और गर्म 'लू' (पवने) चलने लगती हैं। पंजाब, हरियाणा, पूर्वी राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश में सायंकाल को धूलभरी आँधियाँ आती हैं। यदा-कदा आँधियों के बाद हल्की वर्षा हो जाती है तथा मौसम सुहाना हो जाता है।
3. वर्षण-यदा-कदा आर्द्रता से लदी पवनें मानसून के निम्न दाब गर्त की ओर खिंच आती हैं। तब शुष्क और आर्द्र वायु-राशियों के मिलने से स्थानीय तूफान आते हैं। तेज पवनें, मूसलाधार वर्षा और कभी-कभी ओले भी पड़ते हैं। केरल तथा कर्नाटक के तटीय भागों में ग्रीष्म ऋतु के अन्त में तथा मानसून से पूर्व कुछ वर्षा होती है, जिसे स्थानीय रूप से 'आम्रवर्षा' कहते हैं। यह वर्षा आम के फल को शीघ्र पकाने में सहायक होती है, इसीलिए इसे 'आम्रवृष्टि' नाम दिया गया है। अप्रैल में, बंगाल और असोम में उत्तर-पश्चिमी तथा उत्तरी पवनों द्वारा मेघ गर्जन, तड़ित-झंझा के साथ तेज बौछारें पड़ती हैं। इन्हें 'काल-बैसाखी' कहते हैं। कभी-कभी इन पवनों के द्वारा इन क्षेत्रों को भारी हानि भी उठानी पड़ जाती है।
भारत की शीतकालीन जलवायु
भारत में शीतकालीन जलवायु दिसम्बर से फरवरी तक रहती है। इस जलवायु की सामान्य दशाएँ निम्नलिखित हैं
1. तापमान-सामान्यतः देश में तापमान दक्षिण से उत्तर की ओर तथा समुद्र तट से आन्तरिक भागों की ओर घटते हैं। तिरुवनन्तपुरम् तथा चेन्नई में दिसम्बर में औसत तापमान 25° से 27°C के लगभग रहते हैं। दिल्ली और जोधपुर में तापमान 15° से 16°C तक रहते हैं। लेह में औसत तापमान -6°C तक गिर जाते हैं। उत्तरी मैदान में व्यापक रूप से पाला पड़ता है। इस ऋतु में दिन सामान्यतः कोष्ण (कम उष्ण) एवं रातें ठण्डी होती हैं।
2. वायुदाब-देश के उत्तर-पश्चिमी भाग में उच्च वायुदाब क्षेत्र स्थापित होता है। यहाँ से पवनें बाहर की ओर 3 किमी से 5 किमी प्रति घण्टा के वेग से चलने लगती हैं। इस क्षेत्र की स्थलाकृति का प्रभाव भी इन पवनों पर पड़ता है। समुद्रवर्ती भागों में कम वायुदाब रहता है; अतः पवनें स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं। गंगा घाटी में इन पवनों की दिशा पश्चिमी या उत्तर-पश्चिमी होती है। गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में इनकी दिशा उत्तरी हो जाती है। स्थलाकृति के प्रभाव से मुक्त होकर बंगाल की खाड़ी के ऊपर इनकी दिशा उत्तर-पूर्वी हो जाती है।
3. वर्षा-स्थलीय पवनें शुष्क होती हैं; अतः प्रायः सम्पूर्ण देश में मौसम शुष्क रहता है। भूमध्य सागर की ओर से आने वाले पश्चिमी विक्षोभों से कुछ वर्षा देश के उत्तर-पश्चिमी भागों में होती है। हिमालय श्रेणी में हिमपात होता है। तमिलनाडु तट पर भी शीतकाल में वर्षा होती है। उत्तर-पूरब की ओर से चलने वाली स्थलीय मानसूनी पवनें जब बंगाल की खाड़ी को पार कर तमिलनाडु तट पर पहुँचती हैं, तो ये कुछ आर्द्रता ग्रहण कर लेती हैं तथा तटों पर वर्षा करती हैं।
In simple words: ग्रीष्मकालीन जलवायु (मार्च-जून) में उत्तरी भारत में अत्यधिक उच्च तापमान, निम्न वायुदाब और स्थानीय हवाएँ जैसे 'लू' चलती हैं, साथ ही आम्रवृष्टि और काल-बैसाखी जैसी मानसून-पूर्व वर्षा भी होती है। शीतकालीन जलवायु (दिसंबर-फरवरी) में उत्तरी भारत में ठंडे तापमान और उच्च वायुदाब होते हैं, जबकि दक्षिण में हल्के रहते हैं, और पश्चिमी विक्षोभों से कुछ वर्षा होती है, विशेषकर तमिलनाडु में उत्तर-पूर्वी मानसून से।

🎯 Exam Tip: ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन जलवायु की प्रमुख विशेषताओं (तापमान, वायुदाब, पवने और वर्षण) को विस्तार से जानें, और क्षेत्रीय विविधताओं पर भी ध्यान दें।

 

Question 4. भारतीय मानसूनी वर्षा की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए ।
Answer: भारतीय वर्षा की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
1. मानसूनी वर्षा-भारतीय वर्षा को लगभग 75% भाग दक्षिण-पश्चिमी मानसूनों द्वारा प्राप्त होता है, अर्थात् कुल वार्षिक वर्षा का 75% वर्षा ऋतु में, 13% शीत ऋतु में, 10% वसन्त ऋतु में तथा 2% ग्रीष्म ऋतु में प्राप्त होता है।
2. वर्षा की अनिश्चितता-भारतीय मानसूनी वर्षा का प्रारम्भ अनिश्चित है। मानसून कभी शीघ्र आते हैं तो कभी देर से । कभी-कभी वर्षा ऋतु में सूखा पड़ जाता है तथा कभी अत्यधिक वर्षा से बाढ़े तक आ जाती हैं। किसी वर्ष वर्षा नियत समय से पूर्व ही आरम्भ हो जाती है एवं निश्चित समय से पूर्व ही समाप्त हो जाती है।
3. वितरण की असमानता-भारतीय वर्षा का वितरण बड़ा ही असमान है। कुछ भागों में वर्षा 490 सेमी या उससे अधिक हो जाती है, जबकि कुछ भाग ऐसे हैं जहाँ वर्षा का औसत 12 सेमी से भी कम रहता है।
4. मूसलाधार वर्षा-भारत में वर्षा अनवरत गति से नहीं होती, वरन् कुछ दिनों के अन्तराल से होती है। कभी-कभी वर्षा मूसलाधार रूप में होती है और एक ही दिन में 50 सेमी तक हो जाती है। यह मिट्टी का अपरदन करती है, जिससे मिट्टी के उत्पादक तत्त्व बह जाते हैं।
5. असमान वर्षा-कुछ भागों में वर्षा बड़ी तीव्र गति से होती है तथा कुछ भागों में केवल बौछारों के रूप में। एक ओर मॉसिनराम गाँव (चेरापूँजी) में 1,354 सेमी से भी अधिक वर्षा होती है, तो वहीं राजस्थान में केवल 10 सेमी से भी कम ।
6. वर्षा की अल्पावधि-भारत में वर्षा के दिन बहुत ही कम होते हैं। उदाहरण के लिए-चेन्नई में 50 दिन, मुम्बई में 75 दिन, कोलकाता में 118 दिन तथा अजमेर में केवल 30 दिन ।
7. वर्षा की निश्चित अवधि-कुल वर्षा का लगभग 80% जून से सितम्बर तक प्राप्त हो जाता है, फलतः वर्ष का दो-तिहाई भाग सूखा ही रह जाता है, जिससे फसलों की सिंचाई करनी पड़ती है।
8. पर्वतीय वर्षा-भारत की लगभग 95% वर्षा पर्वतीय है, जबकि मात्र 5% वर्षा ही चक्रवातों द्वारा होती है।
9. वर्षा की निरन्तरता-भारत में प्रत्येक मास में किसी-न-किसी क्षेत्र में वर्षा होती रहती है। शीतकालीन चक्रवातों द्वारा जनवरी एवं फरवरी महीनों में उत्तरी भारत में वर्षा होती है। मार्च में चक्रवात असोम एवं पश्चिम बंगाल राज्यों में सक्रिय रहते हैं। इनसे तब तक वर्षा होती है जब तक दक्षिण-पश्चिमी मानसून पुनः चलना न आरम्भ कर दें।
In simple words: भारतीय मानसूनी वर्षा अनिश्चित, असमान और अनियमित होती है, जिससे बाढ़ और सूखा दोनों स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। यह मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिमी मानसून द्वारा होती है और इसका वितरण पर्वतीय तथा मैदानी क्षेत्रों में अत्यधिक भिन्न होता है।

🎯 Exam Tip: मानसूनी वर्षा की विशेषताओं को उदाहरण सहित समझाना, जैसे कि वर्षा की मात्रा और समय की अनिश्चितता, अच्छे अंक दिलाता है।

 

Question 6. भारत में वर्षा के वार्षिक वितरण को स्पष्ट कीजिए तथा अपने उत्तर की पुष्टि रेखाचित्र से कीजिए ।
या भारतीय वर्षा के वितरण पर एक लेख लिखिए।

Answer: भारत में वर्षा का वार्षिक वितरण । भारत में वर्षा का वितरण बहुत विषम है। देश में कुल वर्षा का औसत लगभग 110 सेमी (40 इंच) है। किन्तु इस सामान्य से वर्षा का विचलन 10% से 40% तक हो जाता है। सामान्यतः 85% वर्षा दक्षिण-पश्चिमी मानसूनों (जुलाई-सितम्बर) से प्राप्त होती है, लगभग 10% ग्रीष्मकालीन मानसूनों से, 5% लौटते हुए मानसूनों से (अक्टूबर-दिसम्बर) तथा 5% शीतकाल में होती है। देश में वर्षा का प्रादेशिक वितरण भी बहुत असमान रहता है। सामान्य रूप से भारत में वर्षों की निश्चितता तथा अनिश्चितता के आधार पर उसे दो भागों में विभाजित किया जा सकता है
1. निश्चित वर्षा के प्रदेश-इस प्रदेश के अन्तर्गत हिमालय का तराई प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, असोम, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैण्ड, मेघालय, त्रिपुरा, मणिपुर, पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल, ऊपरी नर्मदा घाटी तथा मालाबार तट सम्मिलित किये जाते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र भारत के वार्षिक वर्षा वितरण को दर्शाता है। इसमें विभिन्न रंग कोड का उपयोग करके उन क्षेत्रों को दिखाया गया है जहाँ 50 सेमी से कम, 51 से 100 सेमी, 101 से 200 सेमी, और 200 सेमी से अधिक औसत वार्षिक वर्षा होती है। यह भारत के भौगोलिक क्षेत्रों में वर्षा के असमान वितरण को स्पष्ट रूप से चित्रित करता है।
2. अनिश्चित वर्षा के प्रदेश-अनिश्चित वर्षा के प्रदेश में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात के मध्यवर्ती भाग, पूर्वी घाट, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश के दक्षिणी और पश्चिमी भाग, कर्नाटक, बिहार तथा ओडिशा सम्मिलित हैं। अनिश्चित वर्षा वाले प्रदेशों को अग्रलिखित । भागों में बाँटा गया है
(i) अधिक वर्षा वाले क्षेत्र-इसके अन्तर्गत पश्चिमी तट के कोंकण, मालाबार, दक्षिणी कनारा तथा उत्तर में हिमालय के दक्षिणी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, मेघालय, असोम, नागालैण्ड, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर तथा त्रिपुरा राज्य सम्मिलित हैं। इन क्षेत्रों में वर्षा का औसत 200 सेमी से अधिक रहता है।
(ii) साधारण वर्षा वाले क्षेत्र-इन क्षेत्रों में बिहार, ओडिशा, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी घाट के पूर्वोत्तर ढाल, पश्चिम बंगाल, दक्षिणी उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश सम्मिलित हैं। यहाँ वर्षा का औसत 100 से 200 सेमी के मध्य रहता है। इन क्षेत्रों में वर्षा की विषमता 15 से 20% तक पायी जाती है। कभी-कभी इन क्षेत्रों में अधिक वर्षा होने से बाढ़ आ जाती है, जबकि कभी वर्षा की कमी से अकाल पड़ जाते हैं। इस प्रकार इन क्षेत्रों में वर्षा की अधिकता एवं कमी में मानसूनों का प्रमुख योगदान होता है। इसी कारण यहाँ बड़ी-बड़ी बहुउद्देशीय नदी-घाटी परियोजनाएँ क्रियान्वित की गयी हैं।
(ii) न्यून वर्षा वाले क्षेत्र-इन क्षेत्रों में वर्षा की कमी अनुभव की जाती है। यहाँ पर वर्षा का वार्षिक औसत 50 से 100 सेमी तक रहता है। इस प्रदेश के अन्तर्गत दक्षिण की प्रायद्वीप, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी मध्य प्रदेश, उत्तरी एवं दक्षिणी आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, पूर्वी राजस्थान, दक्षिणी पंजाब तथा दक्षिणी उत्तर प्रदेश राज्यों के भाग सम्मिलित हैं। वर्षा की विषमता 20 से 25 सेमी तक तथा अपर्याप्त व अनिश्चित रहती है। इन प्रदेशों में अकाल की सम्भावना बनी रहती है। अतः यहाँ सिंचाई के सहारे गेहूँ, कपास, ज्वार, बाजरा, तिलहन आदि फसलें उत्पन्न की जाती हैं।
(iv) अपर्याप्त वर्षा के क्षेत्र अथवा मरुस्थलीय क्षेत्र-ये भारत के शुष्क क्षेत्र हैं, जहाँ पर 50 सेमी से भी कम वर्षा होती है। वर्षा की कमी के कारण यहाँ सदैव सूखे की समस्या बनी रहती है। बिना सिंचाई के कृषि-कार्य इन क्षेत्रों में बिल्कुल असम्भव है। पश्चिमी राजस्थान के सम्पूर्ण क्षेत्र इसके अन्तर्गत आते हैं। तमिलनाडु का रायलसीमा क्षेत्र भी इसके अन्तर्गत आता है।
In simple words: भारत में वर्षा का वितरण अत्यधिक असमान है, जिसे निश्चित और अनिश्चित वर्षा वाले प्रदेशों में विभाजित किया जा सकता है। यह असमानता देश के विभिन्न भागों में 50 सेमी से लेकर 200 सेमी से अधिक तक की वार्षिक वर्षा दिखाती है, जिससे कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे की स्थिति बनती है।

🎯 Exam Tip: वर्षा वितरण के क्षेत्रीय विभाजन (निश्चित, अनिश्चित, अधिक, साधारण, न्यून और मरुस्थलीय) और उनके प्रमुख उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. भारतीय जलवायु पर चक्रवातीय एवं प्रतिचक्रवातीय तूफानों को क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: चक्रवातों एवं प्रतिचक्रवातों का मौसम व जलवायु पर विशेष प्रभाव पड़ता है। इनका ऊपरी वायु संचरण से भी गहरा सम्बन्ध होता है। ये कभी-कभी इतने प्रबल हो जाते हैं कि वायु के सामान्य परिसंचरण को अस्पष्ट कर देते हैं। चक्रवात अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी में चलते हैं तथा तटीय क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं। बंगाल की खाड़ी में चलने वाले चक्रवातों से कभी-कभी भारी धन-जन की हानि होती है। वास्तव में चक्रवात में वायुदाब बाहर से अन्दर की ओर कम होता जाता है। समदाब रेखाएँ वृत्ताकारे या अण्डकार होती हैं। अल्पतम वायुदाब केन्द्र दो गर्त-रेखाओं का प्रतिच्छेदन बिन्दु होती है। इसी कारण इनमें वायु बाहर से अन्दर की ओर चलती है। चक्रवात बहुत बड़े क्षेत्र पर फैले होते हैं जिनका व्यास छोटे क्षेत्रों में कई सौ किमी जबकि बड़े चक्रवातों को कई हजार किमी में होता है। इस प्रकार चक्रवात से प्रभावित क्षेत्र का मौसम बड़ा ही खराब होता है।
प्रतिचक्रवात सामान्यतः साफ मौसम का प्रतीक समझा जाता है, परन्तु इसमें सदैव मौसम साफ नहीं रहता। इसका मौसम इसकी वायुराशि के गुणों और ग्रीष्म एवं शीत ऋतु पर निर्भर रहता है। ग्रीष्म ऋतु में प्रतिचक्रवात में शुष्क, गरम मौसम एवं स्वच्छ आकाश होता है जिसमें उच्च दैनिक ताप परिसर पाए जाते हैं। शीत ऋतु में जिन प्रतिचक्रवातों में ध्रुवीय ठण्डी एवं शुष्क वायु होती है, उनमें निम्न ताप और स्वच्छ आकाश के साथ रात्रि में पाला पड़ता है। परन्तु जिन प्रतिचक्रवातों में ध्रुवीय समुद्री वायु होती है, उनमें आकाश स्तरी मेघों से ढक जाता है, जिसे प्रतिचक्रवाती अंधकार कहते हैं। ऐसी दशा में बड़े नगरों के उद्योगों द्वारा प्रदूषण की गम्भीर समस्या उत्पन्न हो जाती है और कुहरा छाया रहता है।
In simple words: चक्रवात भारतीय जलवायु में भारी वर्षा, तूफान और विनाश लाते हैं, जबकि प्रतिचक्रवात साफ मौसम का प्रतीक होते हैं, लेकिन कभी-कभी ध्रुवीय हवाओं के कारण कुहरा और प्रदूषण भी ला सकते हैं। ये दोनों ही वायु परिसंचरण को प्रभावित करते हैं।

🎯 Exam Tip: चक्रवात और प्रतिचक्रवात के मौसम और जलवायु पर पड़ने वाले प्रभावों की तुलनात्मक व्याख्या करने से आप विषय की गहरी समझ प्रदर्शित कर सकते हैं।

 

Question 8. भारत की जलवायु दशाओं की क्षेत्रीय विषमताओं को उपयुक्त उदाहरण देते हुए समझाइए ।
Answer: भारत में विभिन्न प्रकार की जलवायु दशाएँ पाई जाती हैं। एक स्थान से दूसरे स्थान और एक ऋत से दूसरी ऋतु में तापमान एवं वर्षा में पर्याप्त अन्तर पाया जाता है। भारतीय जलवायु में निम्नलिखित विषमताएँ उल्लेखनीय हैं
1. तापन्तर-तापमान का जलवायु पर विशिष्ट प्रभाव पड़ता है। भारत में राजस्थान और दक्षिण-पश्चिमी पंजाब जैसे ऐसे भी स्थान हैं जहाँ तापमान 55° सेल्सियस तक पहुँच जाता है, जबकि दूसरी ओर जम्मू और कश्मीर में कारगिल के समीप ऐसे स्थान हैं जहाँ तापमान -45° सेल्सियस तक नीचे चला जाता है।
2. वर्षा की निश्चित अवधि-सामान्यतया भारत में मानसूनी वर्षा की अवधि 15 जून से 15 सितम्बर तक होती है। इस समय देश में 75% से 90% तक वर्षा हो जाती है। इस अवधि को वर्षा ऋतु कहा जाता है। इस प्रकार वर्षा का अधिकांश भाग वर्षारहित रहता है, केवल कुछ छिट-पुट क्षेत्रों में ही सामान्य वर्षा हो पाती है।
3. मूसलाधार वर्षा-भारत में वर्षा बहुत ही तीव्र गति से (मूसलाधार) होती है। कभी-कभी एक ही दिन में 50 सेमी तक वर्षा हो जाना सामान्य-सी बात है। वर्षा की तीव्रता के कारण अधिकांश जल अनावश्यक ही बह जाता है। इस कारण मृदा का अपरदन होता है तथा वह अनुत्पादक हो जाती है।
4. अनिश्चित वर्षा-भारत में दक्षिण-पश्चिमी मानसून की सबसे बड़ी विषमता उसकी अनिश्चितता है। कभी-कभी वर्षा अत्यधिक हो जाती है जिससे बाढ़ आ जाती है या कभी-कभी वर्षा बिल्कुल ही नहीं हो पाती है जिससे सूखा पड़ जाता है। इसी कारण भारतीय कृषि मानसून का जुआ कहलाती है।
5. वर्षा की अनियमितता-भारत में वर्षा पूर्णतया मानसून पर निर्भर करती है। यदि मानसून शीघ्र आ जाता है तो वर्षा भी शीघ्र ही आरम्भ हो जाती है। इसके विपरीत मानसून के देर से आने पर वर्षा भी देर से ही आरम्भ होती है।
6. वर्षा का असमान वितरण-देश में वर्षा का वितरण बड़ा ही असमान है। एक ओर माँसिनराम गाँव (चेरापूंजी के निकट) में वार्षिक वर्षा का औसत 1,354 सेमी रहता है, तो दूसरी ओर राजस्थान में यह औसत केवल 5 सेमी से 10 सेमी के मध्य ही रहता है।
In simple words: भारत में तापमान और वर्षा की क्षेत्रीय विषमताएँ बहुत अधिक हैं, जहाँ राजस्थान में 55°C तापमान और 5 सेमी से भी कम वर्षा होती है, वहीं कारगिल में -45°C और मॉसिनराम में 1,354 सेमी से अधिक वर्षा होती है, जो मानसून की अनिश्चितता और असमान वितरण को दर्शाती है।

🎯 Exam Tip: तापमान और वर्षा की चरम स्थितियों के उदाहरणों को याद रखें (जैसे राजस्थान में उच्च तापमान, कारगिल में निम्न तापमान, मॉसिनराम में अधिक वर्षा) ताकि आप क्षेत्रीय विषमताओं को प्रभावी ढंग से समझा सकें।

 

Question 9. भारत की अधिकांश वर्षा गर्मियों में होती है-कारणों का उल्लेख करते हुए भारत में वर्षा का वितरण लिखिए।
या भारत की मानसून ऋतु का वर्णन कीजिए।
या भारत में दक्षिण-पश्चिमी मानसून द्वारा होने वाली वर्षा का वर्णन कीजिए।
या 'आगे बढ़ता हुआ मानसून-भारत की इस ऋतु का वर्णन कीजिए।

Answer: भारत की वैषी ऋतु (मानसून ऋतु)
वर्षा ऋतु (आगे बढ़ते हुए मानसून की ऋतु)-जून से सितम्बर के मध्य सम्पूर्ण देश में व्यापक रूप से वर्षा होती है। वर्षा का 75% से 90% भाग इसी अवधि में प्राप्त हो जाता है।
दक्षिण-पश्चिमी मानसून की उत्पत्ति-ग्रीष्म ऋतु में देश के उत्तर-पश्चिमी मैदानी भागों में निम्न वायुदाब का क्षेत्र विकसित हो जाता है। जून के प्रारम्भ तक निम्न वायुदाब का यह क्षेत्र इतना प्रबल हो जाता है कि दक्षिण गोलार्द्ध की व्यापारिक पवनें भी इस ओर खिंचे आती हैं। इन दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनों की उत्पत्ति समुद्र से होती है। हिन्द महासागर में विषुवत् वृत्त को पार करके ये पवनें बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर में पहुँच जाती हैं । इसके बाद ये भारत के वायु-संचरण का अंग बन जाती हैं। विषुवतीय गर्म धाराओं के ऊपर से गुजरने के कारण ये भारी मात्रा में आर्द्रता ग्रहण कर लेती हैं। विषुवत् । वृत्त पार करते ही इनकी दिशा दक्षिण-पश्चिम हो जाती है। इसीलिए इन्हें दक्षिण-पश्चिमी मानसून कहा जाता है।
मानसून का फटना-वर्षावाहिनी पवनें बड़ी तेज चलती हैं। इनकी औसत गति 30 किमी प्रति घण्टा होती है। उत्तर-पश्चिम के दूरस्थ भागों को छोड़कर ये पवनें एक महीने के अन्दर-अन्दर सारे भारत में फैल जाती हैं। आर्द्रता से लदी इन पवनों के साथ ही बादलों का प्रचण्ड गर्जन तथा बिजली का चमकना शुरू हो जाता है। इसे मानसून का 'फटना' अथवा 'टूटना' कहते हैं।
दक्षिण-पश्चिमी मानसून की शाखाएँ-भारत की प्रायद्वीपीय स्थिति के कारण मानसून की दो शाखाएँ हो जाती हैं
(क) अरब सागर की शाखा-अरब सागर की शाखा सबसे पहले पश्चिमी घाट के पर्वतों से टकराकर सह्याद्रि के पवनाभिमुख ढालों पर भारी वर्षा करती है। पश्चिमी घाट को पार करके यह शाखा दकन के पठार और मध्य प्रदेश में पहुँच जाती है। वहाँ भी इससे पर्याप्त मात्रा में वर्षा होती है। तत्पश्चात् इसका प्रवेश गंगा के मैदानों में होता है, जहाँ बंगाल की खाड़ी की शाखा भी आकर इसमें मिल जाती है। अरब सागर के मानसून की शाखा का दूसरा भाग सौराष्ट्र के प्रायद्वीप तथा कच्छ में पहुँच जाता है। इसके बाद यह पश्चिमी राजस्थान और अरावली पर्वत-श्रेणियों के ऊपर से गुजरता है। वहाँ इसके द्वारा बहुत हल्की वर्षा होती है। पंजाब और हरियाणा में पहुँचकर यह शाखा भी बंगाल की खाड़ी की शाखा में मिलकर हिमालय के पश्चिमी भाग में भारी वर्षा करती है।
(ख) बंगाल की खाड़ी की शाखा-बंगाल की खाड़ी की मानसून शाखा म्यांमार (बर्मा) तट की ओर तथा बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी भागों की ओर बढ़ती है। परन्तु म्यांमार के तट के साथ-साथ फैली अराकान पहाड़ियाँ इस शाखा के बहुत बड़े भाग को भारतीय उपमहाद्वीप की दिशा में मोड़ देती हैं। इस प्रकार यह पश्चिमी दिशा से न आकर दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्वी दिशाओं से आती है। विशाल हिमालय तथा उत्तर-पश्चिमी भारत के निम्न वायुदाब के प्रभाव से यह शाखा दो भागों में बँट जारी है। एक शाखा पश्चिम की ओर बढ़ती है तथा गंगा के मैदानों को पार करती हुई पंजाब के मैदानों तक पहुँचती है। इसकी दूसरी शाखा ब्रह्मपुत्र की घाटी की ओर बढ़ती है। यह उत्तर-पूर्वी भारत में भारी वर्षा करती है। इसकी एक उपशाखा मेघालय में गारो और खासी की पहाड़ियों से टकराती है और वहाँ खूब वर्षा करती है। सबसे अधिक वर्षा मॉसिनराम (Mausinram) (मेघालय) में होती है। यहाँ वार्षिक वर्षा का औसत 1,354 सेण्टीमीटर है।
वर्षा का वितरण-दक्षिण-पश्चिमी मानसून से होने वाली वर्षा के वितरण पर उच्चावच का बहुत प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए-पश्चिमी घाट के पवनविमुख ढालों पर 250 सेमी से अधिक वर्षा होती है। इसके विपरीत पश्चिमी घाट के पवनाभिमुख ढालों पर 50 सेमी से भी कम वर्षा होती है। इसी प्रकार उत्तर-पूर्वी राज्यों में भी भारी वर्षा होती है, परन्तु उत्तरी मैदानों में वर्षा की मात्रा पूर्व से पश्चिम की ओर घटती जाती है। इस विशिष्ट ऋतु में कोलकाता में लगभग 120 सेमी, पटना में 102 सेमी, इलाहाबाद में 91 सेमी तथा दिल्ली में 56 सेमी वर्षा होती है।
In simple words: भारत में अधिकांश वर्षा जून से सितम्बर के दौरान दक्षिण-पश्चिमी मानसून से होती है, जो निम्न वायुदाब और उच्चावच के कारण उत्पन्न होती है। इसकी अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की शाखाएँ पूरे देश में वर्षा वितरित करती हैं, हालांकि इसका वितरण अत्यधिक असमान होता है।

🎯 Exam Tip: दक्षिण-पश्चिमी मानसून की उत्पत्ति, इसके 'फटने' की प्रक्रिया और इसकी विभिन्न शाखाओं के वितरण को समझाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. भारत की जलवायु का कृषि तथा उद्योग-धन्धों/आर्थिक जीवन पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
Answer: (क) कृषि
जलवायु का प्रभाव कृषि कार्य और उत्पादन भारत को उद्योग/आर्थिक जीवन पर भी पड़ता है, जो निम्नवत् है 1. भारत में खरीफ फसलों की बुवाई वर्षा के आरम्भ होने के साथ शुरू हो जाती है। जब वर्षा समयसे प्रारम्भ हो जाती है और नियमित अन्तराल पर होती रहती है तब कृषि उत्पादन यथेष्ठ मात्रा में प्राप्त होता है।
2. जिन भागों में कम वर्षा होती है अथवा सूखा पड़ता है वहाँ कृषि फसलें सिंचाई के बिना पैदा नहीं की जा सकती हैं।
3. मूसलाधार वर्षा होते रहने से बाढ़ आ जाती है और बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में कृषि फसलें नष्ट हो जाती हैं तथा भारी धन-जन की हानि होती है।
4. समय से पूर्व वर्षा आरम्भ होने तथा समय से पहले वर्षा समाप्त होने से भी आर्थिक क्रियाकलाप प्रभावित होते हैं।
5. ग्रीष्म ऋतु में उत्तरी भारत में तापमान बहुत ऊँचे हो जाते हैं और गर्म लू चलने लगती है जिससे खेतों में काम करना कठिन हो जाता है अर्थात् आर्थिक क्षमता घट जाती है।
6. भारत में किसी वर्ष जलवृष्टि बहुत कम हो पाती है, जिससे फसलें नष्ट हो जाती हैं और देश में अकाल पड़ जाता है। इसके विपरीत कभी-कभी वर्षा इतनी अधिक हो जाती है, जिसके कारण नदियों में बाढ़ आ जाती है। इससे भी फसलें नष्ट हो जाती हैं। इस कारण भारत की कृषि को मानसून का जुआ कहा जाता है।
7. भारत की जलवायु के कृषकों को भाग्यवादी एवं निराशावादी बना दिया है।
8. चक्रवाती वर्षा के कारण पंजाब, हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश में गेहूं व गन्ने की फसलों को लाभ मिलता है।
9. भारत में ग्रीष्मऋतु में हरे चारे की कमी हो जाती है जिससे पशुओं पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
(ख) उद्योग धन्ये/आर्थिक जीवन
दक्षिणी भारत की जलवायु उत्तरी भारत की अपेक्षा अधिक सम है, समुद्री तट निकट होने के कारण यहाँ उष्णार्द्र जलवायु पाई जाती है। यही कारण है कि भारत में अधिकांश सूती वस्त्र की मिलें दक्षिणी भारत के महाराष्ट्र, गुजरात राज्यों के तटीय भागों में स्थित हैं। इसके विपरीत उत्तरी पर्वतीय भाग अधिक ठण्डा जलवायु प्रदेश है, इसीलिए वहाँ ऊनी वस्त्रों को कुटीर व लघु उद्योगों के रूप में विकसित किया गया है। इसी प्रकार मैदानी भाग में गन्ना उत्पादन की अनुकूल दशाओं के कारण चीनी उद्योग का पर्याप्त विकास हुआ है।
अतः भारत की जलवायु का कृषि प्रतिरूप एवं औद्योगिक विकास पर पर्याप्त प्रभाव पड़ा है जिससे देश की अर्थव्यवस्था का जलवायु से व्यापक सम्बन्ध सिद्ध होता है।
In simple words: भारत की जलवायु कृषि और उद्योग-धंधों को गहराई से प्रभावित करती है; मानसूनी वर्षा की अनिश्चितता के कारण कृषि उत्पादन सीधे तौर पर प्रभावित होता है, जिससे सूखा और बाढ़ जैसी स्थितियाँ बनती हैं। जलवायु उद्योगों के स्थान और प्रकार को भी निर्धारित करती है, जैसे दक्षिणी भारत में सूती वस्त्र उद्योग और उत्तरी भारत में ऊनी वस्त्र उद्योग।

🎯 Exam Tip: कृषि पर जलवायु के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में विशिष्ट उद्योगों के विकास पर इसके प्रभाव को उदाहरणों सहित समझाना महत्वपूर्ण है।

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