UP Board Solutions Class 11 Geography Chapter 4 Distribution of Oceans and Continents

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Geography Chapter 04 महासागरों और महाद्वीपों का वितरण

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

बहुवैकल्पिक प्रश्न

Question (i). निम्न में से किसने सर्वप्रथम यूरोप, अफ्रीका व अमेरिका के साथ स्थित होने की सम्भावना व्यक्त की?
(क) अल्फ्रेड वेगनर
(ख) अब्राहमें आरटेलियस
(ग) एनटोनियो पेलेग्रिनी
(घ) एडमण्ड हैस ।
Answer: (ग) एनटोनियो पेलेग्रिनी ।
In simple words: एनटोनियो पेलेग्रिनी वह व्यक्ति थे जिन्होंने सबसे पहले यह सुझाव दिया कि यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका एक साथ जुड़े हुए हो सकते हैं, जो महाद्वीपीय बहाव के सिद्धांत का एक प्रारंभिक विचार था।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में वैज्ञानिकों के नाम और उनके प्रमुख योगदानों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर महाद्वीपीय विस्थापन जैसे मौलिक सिद्धांतों से जुड़े।

 

Question (ii). पोलर फ्लीइंग बल (Polar fleeing Force) निम्नलिखित में से किससे सम्बन्धित है?
(क) पृथ्वी का परिक्रमण
(ख) पृथ्वी को घूर्णन
(ग) गुरुत्वाकर्षण
(घ) ज्वारीय बल
Answer: (ख) पृथ्वी को घूर्णन।
In simple words: पोलर फ्लीइंग बल पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने (घूर्णन) के कारण उत्पन्न होता है, जो भूमध्य रेखा पर उभरी हुई आकृति के लिए जिम्मेदार है।

🎯 Exam Tip: वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत में 'पोलर फ्लीइंग बल' और 'ज्वारीय बल' जैसे कारकों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये बलों की अवधारणा से जुड़े हैं।

 

Question (iii). इनमें से कौन-सी लघु (Minor) प्लेन नहीं है?
(क) नजका
(ख) फ़िलिपीन
(ग) अरब
(घ) अण्टार्कटिक
Answer: (घ) अण्टार्कटिक ।
In simple words: अंटार्कटिक एक प्रमुख प्लेट है, जबकि नजका, फिलिपीन और अरब जैसी प्लेटें पृथ्वी के स्थलमंडल की छोटी प्लेटों में गिनी जाती हैं।

🎯 Exam Tip: प्रमुख और लघु विवर्तनिक प्लेटों के नाम और उनकी भौगोलिक स्थिति को पहचानना प्लेट विवर्तनिकी के अध्ययन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

Question (iv). सागरीय अध-स्तल विस्तार सिद्धान्त की व्याख्या करते हुए हैस ने निम्न में से किस अवधारणा पर विचार नहीं किया?
(क) मध्य-महासागरीय कटकों के साथ ज्वालामुखी क्रियाएँ
(ख) महासागरीय नितल की चट्टानों में सामान्य व उत्क्रमण चुम्बकत्व क्षेत्र की पट्टियों का होना
(ग) विभिन्न महाद्वीपों में जीवाश्मों का वितरण
(घ) महासागरीय तल की चट्टानों की आयु ।
Answer: (ग) विभिन्न महाद्वीपों में जीवाश्मों का वितरण।
In simple words: हैस का सागरीय अध-स्तल विस्तार सिद्धांत महासागरों के फैलाव की प्रक्रिया पर केंद्रित था, जिसमें महाद्वीपों पर जीवाश्मों के वितरण जैसे पुराने प्रमाणों पर सीधे तौर पर विचार नहीं किया गया।

🎯 Exam Tip: सागरीय अध-स्तल विस्तार सिद्धांत के मुख्य साक्ष्यों (जैसे चुंबकीय पट्टियाँ, ज्वालामुखी क्रियाएँ और चट्टानों की आयु) को समझना आवश्यक है ताकि यह पहचाना जा सके कि कौन सा कारक इस सिद्धांत से संबंधित नहीं है।

 

Question (v). हिमालय पर्वतों के साथ भारतीय प्लेट की सीमा किस तरह की प्लेट सीमा है?
(क) महासागरीय-महाद्वीपीय अभिसरण
(ख) अपसारी सीमा
(ग) रूपान्तरण सीमा
(घ) महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसरण
Answer: (घ) महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसरण ।
In simple words: हिमालय पर्वत का निर्माण भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के टकराव से हुआ है, ये दोनों महाद्वीपीय प्लेटें हैं, इसलिए यह महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसरण का एक उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: प्लेट सीमाओं के विभिन्न प्रकारों (अभिसारी, अपसारी, रूपांतरण) और उनके भौगोलिक उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं और महासागरीय खाइयों से संबंधित।

 

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

Question (i). महाद्वीपों के प्रवाह के लिए वेगनर ने किन बलों का उल्लेख किया?
Answer: वेगनर ने महाद्वीपीय विस्थापन के लिए निम्नलिखित दो बलों का उल्लेख किया है
1. पोलर या ध्रुवीय फ्लीइंग बल (Polar feeling force) तथा
2. ज्वारीय बल (Tidal force)।
ध्रुवीय फ्लीइंग बल पृथ्वी के घूर्णन से सम्बन्धित है। वास्तव में पृथ्वी की आकृति एक सम्पूर्ण गोले जैसी नहीं है, वरन् यह भूमध्य रेखा पर उभरी हुई है। यह उभार पृथ्वी के घूर्णन के कारण है। दूसरा ज्वारीय बल सूर्य व चन्द्रमा के आकर्षण से सम्बद्ध है, जिससे महासागर में ज्वार पैदा होता है। वेगनर का मानना था कि करोड़ों वर्षों के दौरान ये बल प्रभावशाली होकर विस्थापन के लिए सक्षम हुए ।
In simple words: वेगनर ने महाद्वीपों के विस्थापन के लिए दो मुख्य बल सुझाए - पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न पोलर फ्लीइंग बल और सूर्य व चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से उत्पन्न ज्वारीय बल।

🎯 Exam Tip: वेगनर द्वारा महाद्वीपीय विस्थापन के लिए बताए गए बलों के नाम और उनके संक्षिप्त स्पष्टीकरण को याद रखें, क्योंकि यह उनके सिद्धांत का एक केंद्रीय भाग है।

 

Question (ii). मैंटल में संवहन धाराओं के आरम्भ होने और बने रहने के क्या कारण हैं?
Answer: 1930 के दशक में आर्थर होम्स ने मैंटल भाग में संवहन धाराओं के प्रभाव की सम्भावना व्यक्त की थी। संवहन धाराएँ रेडियोएक्टिव तत्त्वों से ताप भिन्नता के कारण मैंटल में उत्पन्न होती हैं। ये धाराएँ रेडियोएक्टिव तत्त्वों की उपलब्धता के कारण ही मैंटल में बनी रहती हैं तथा इन्हीं तत्त्वों से संवहनीय धाराएँ आरम्भ होकर चक्रीय रूप में प्रवाहित होती रहती हैं।
In simple words: मैंटल में संवहन धाराएँ रेडियोएक्टिव तत्वों से निकलने वाली गर्मी के कारण उत्पन्न होती हैं, जो तापमान के अंतर से तरल पदार्थ को ऊपर उठने और नीचे जाने के लिए प्रेरित करती हैं, जिससे एक चक्रीय प्रवाह बनता है।

🎯 Exam Tip: मैंटल में संवहन धाराओं के पीछे के मुख्य कारण (रेडियोएक्टिव तत्व और ताप भिन्नता) को समझना प्लेट टेक्टोनिक्स के लिए ऊर्जा स्रोत की व्याख्या करता है।

 

Question (iii). प्लेट की रूपान्तर सीमा, अभिसरण सीमा और अपसारी सीमा में मुख्य अन्तर क्या है?
Answer: प्लेट की रूपान्तर सीमा में पर्पटी का न तो निर्माण होता है और न ही विनाश। जबकि अभिसरण सीमा में पर्पटी का विनाश होता है तथा अपसारी सीमा में पर्पटी का निर्माण होता है। अतः रूपान्तर, अभिसरण और अपसारी सीमा में मुख्य अन्तर पर्पटी के निर्माण, विनाश और दिशा संचालन के कारण है।
In simple words: रूपांतरण सीमा पर न तो नई पर्पटी बनती है और न ही नष्ट होती है; अभिसरण सीमा पर पर्पटी नष्ट होती है, और अपसारी सीमा पर नई पर्पटी का निर्माण होता है।

🎯 Exam Tip: तीनों प्रकार की प्लेट सीमाओं (अभिसारी, अपसारी, रूपांतरण) को उनके मुख्य कार्यों- पर्पटी के निर्माण, विनाश या संरक्षण- के आधार पर पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question (iv). दक्कन ट्रैप के निर्माण के दौरान भारतीय स्थलखण्ड की स्थिति क्या थी?
Answer: आज से लगभग 14 करोड़ वर्ष पूर्व भारतीय स्थलखण्ड सुदूर दक्षिण में 50° दक्षिणी अक्षांश पर स्थित था। भारतीय उपमहाद्वीप व यूरेशियन प्लेट को टैथीज सागर अलग करता था और तिब्बती खण्ड एशियाई खण्ड के करीब था। इण्डियन प्लेट के एशियाई प्लेट की तरफ प्रवाह के दौरान एक प्रमुख घटना लावा प्रवाह के कारण दक्कन टैप का निर्माण हुआ। अतः भारतीय स्थलखण्ड दक्कन टैप निर्माण के समय भूमध्य रेखा के निकट स्थित था।
In simple words: दक्कन ट्रैप के निर्माण के समय, भारतीय स्थलखण्ड भूमध्य रेखा के पास, सुदूर दक्षिण में 50° दक्षिणी अक्षांश पर स्थित था, और इसका यूरेशियन प्लेट की ओर प्रवाह हो रहा था।

🎯 Exam Tip: दक्कन ट्रैप के निर्माण से संबंधित भारतीय प्लेट की प्राचीन स्थिति और भूमध्य रेखा से उसकी निकटता को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत के भूगर्भीय इतिहास की एक प्रमुख घटना है।

 

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

Question (i). महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के पक्ष में दिए गए प्रमाणों का वर्णन करें।
Answer: महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के तहत वेगनर ने कहा है कि 20 करोड़ वर्ष पहले सभी महाद्वीप आज की तरह अलग-अलग नहीं थे, बल्कि पैंजिया के ही भाग थे। इसको प्रमाणित करने के लिए वेगनर ने कई साक्ष्य दिए हैं (क) भूवैज्ञानिक क्रियाओं के फलस्वरूप 47 करोड़ से 35 करोड़ वर्ष पुरानी पर्वत पट्टी का निर्माण एक अविच्छिन्न कटिबंध के रूप में हुआ था। ये पर्वत अब अटलांटिक महासागर द्वारा पृथक कर दिए गए हैं। (ख) कुछ जीवाश्म भी यह बताते हैं कि समस्त महाद्वीप कभी परस्पर जुड़े हुए थे। उदाहरण के लिए, ग्लोसोप्टेरिस नामक पौधे तथा मेसोसौरस एवं लिस्ट्रोसौरस नामक जंतुओं के जीवाश्म गोंडवानालैंड के सभी महाद्वीपों में मिलते हैं जबकि आज ये महाद्वीप एक-दूसरे से काफी दूर हैं। (ग) अफ्रीका के घाना तट पर सोने का निक्षेप पाया जाता है जबकि 5000 कि॰मी॰ चौड़े महासागर के पार दक्षिणी अमेरिका में ब्राजील के तटवर्ती भाग में भी सोने का निक्षेप पाया जाता है। (घ) पर्मोकार्बनी काल में मोटे हिमानी निक्षेप उरुग्वे, ब्राजील, अफ्रीका, दक्षिणी भारत, दक्षिणी आस्ट्रेलिया तथा तस्मानिया के धरातल पर दिखाई देते थे। इन अवसादों की प्रकृति में एकरूपता यह सिद्ध करती है कि भूवैज्ञानिक अतीत काल में समस्त महाद्वीप एक-दूसरे से जुड़े हुए थे तथा यहाँ एक जैसी जलवायविक दशाएँ थीं। (ङ) महाद्वीपों का विस्थापन अभी भी जारी है। अटलांटिक महासागर की चौड़ाई प्रतिवर्ष कई सेंटीमीटर के हिसाब से बढ़ रही है जबकि प्रशांत महासागर छोटा हो रहा है। लाल सागर भूपर्पटी में एक दरार का हिस्सा है जो भविष्य में करोड़ों वर्ष पश्चात एक नए महासागर की रचना करेगा। दक्षिणी अटलांटिक महासागर के चौड़ा होने से अफ्रीका तथा दक्षिणी अमेरिकी एक-दूसरे से अलग हो गए हैं।
In simple words: वेगनर ने महाद्वीपीय विस्थापन को प्रमाणित करने के लिए कई साक्ष्य दिए, जैसे कि विभिन्न महाद्वीपों पर भूवैज्ञानिक संरचनाओं, जीवाश्मों, सोने के निक्षेपों और हिमानी निक्षेपों में समानता। उन्होंने यह भी बताया कि महाद्वीपों का विस्थापन आज भी जारी है।

🎯 Exam Tip: महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के प्रमुख प्रमाणों (जैसे जिग-सॉ फिट, जीवाश्म वितरण, प्लेसर निक्षेप और टिलाइट) को विस्तार से जानना चाहिए, क्योंकि ये सिद्धांत की नींव हैं।

 

Question (ii). महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत व प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत में मूलभूत अंतर बताइए ।
Answer: महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत की आधारभूत संरचना यह थी कि सभी महाद्वीप पहले एक ही भूखंड के भागे थे, जिसे पैंजिया नाम दिया गया था। ये भूखंड एक बड़े महासागर से घिरा हुआ था। वेगनर के अनुसार, लगभग 20 करोड़ वर्ष पहले पैंजिया का विभाजन आरंभ हुआ । पैंजिया पहले दो बड़े भूखंड लारेशिया और गोंडवानालैंड के रूप में विभक्त हुआ। इसके बाद लारेशिया व गोंडवानालैंड धीरे-धीरे अनेक छोटे-छोटे हिस्सों में बँट गए जो आज के वर्तमान महाद्वीप के रूप में हैं। प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत के अनुसार, पृथ्वी के स्थलमंडल को सात मुख्य प्लेटों व कुछ छोटी प्लेटों में विभक्त किया जाता है। नवीन वलित पर्वतश्रेणियाँ, खाइयाँ और भ्रंश इन मुख्य प्लेटों को सीमांकित करते हैं। महाद्वीप एक प्लेट का हिस्सा है और प्लेट गतिमान है। वेगनर की संकल्पना कि केवल महाद्वीप ही गतिमान है, सही नहीं है।
In simple words: महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत केवल महाद्वीपों के संचलन पर केंद्रित था, जबकि प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत यह बताता है कि पूरे स्थलमंडल (महाद्वीप और महासागर दोनों) प्लेटों के रूप में गतिमान हैं।

🎯 Exam Tip: महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत और प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत के बीच के मुख्य अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर गतिमान इकाई (महाद्वीप बनाम प्लेट) और गति के पीछे की मूल अवधारणा के संदर्भ में।

 

Question (iii). महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत के उपरांत की प्रमुख खोज क्या है, जिससे वैज्ञानिकों ने महासागर व महाद्वीप वितरण के अध्ययन में पुनः रुचि ली?
Answer: महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत के द्वारा वेगनर ने ज जानकारी प्रस्तुत की थी, वह पुराने तर्क पर आधारित थी। वर्तमान में जानकारी के जो स्रोत हैं, वे वेगनर के समय में उपलब्ध नहीं थे। चट्टानों के चुंबकीय अध्ययन और महासागरीय तल के मानचित्रण ने विशेष रूप से निम्न तथ्यों को उजागर किया (क) यह देखा गया कि मध्य-महासागरीय कटकों के साथ-साथ ज्वालामुखी उद्‌गार सामान्य क्रिया है और ये उद्गार इस क्षेत्र में बड़ी मात्रा में लावा निकालते हैं। (ख) महासागरीय कटक के मध्य भाग के दोनों तरफ समान दूरी पर पाई जाने वाली चट्टानों के निर्माण का समय, संरचना, संघटन और चुंबकीय गुणों में समानता पाई जाती है। महासागरीय कटकों के समीप की चट्टानों में सामान्य चुंबकत्व ध्रुवण पाई जाती है तथा ये चट्टानें नवीनतम हैं। कटकों के शीर्ष से दूर चट्टानों की आयु भी अधिक है। (ग) महासागरीय पर्पटी की चट्टानें महाद्वीपीय पर्पटी की चट्टानों की अपेक्षा अधिक नई हैं। महासागरीय पर्पटी की चट्टानें कहीं भी 20 करोड़ वर्ष से अधिक पुरानी नहीं हैं। महाद्वीपीय पर्पटी के भूकंप उद्गम केंद्र अधिक गहराई पर हैं जबकि मध्य-महासागरीय कटकों के क्षेत्र के भूकंप उद्गम केंद्र कम गहराई पर विद्यमान हैं। (घ) गहरी खाइयों में भूकंप उद्गम केंद्र अधिक गहराई पर हैं जबकि मध्य-महासागरीय कटकों के क्षेत्र के भूकंप उद्गम केंद्र कम गहराई पर विद्यमान हैं।
In simple words: महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत के बाद महासागरीय नितल के चुंबकीय अध्ययन, चट्टानों की आयु, भूकंपीय गतिविधि और मध्य-महासागरीय कटकों पर ज्वालामुखी उद्गारों की खोजों ने वैज्ञानिकों को महासागर और महाद्वीप वितरण में फिर से रुचि लेने के लिए प्रेरित किया।

🎯 Exam Tip: उन प्रमुख भूभौतिकीय और भूगर्भीय खोजों (जैसे चुंबकीय पट्टियाँ, महासागरीय नितल की आयु, भूकंप की गहराई) को याद रखना महत्वपूर्ण है, जिन्होंने सागरीय अध-स्तल विस्तार और प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांतों की नींव रखी।

 

सागरीय अध-स्तल परिकल्पना

चुम्बकीय गुणों के आधार पर हैस ने 1961 में एक परिकल्पना प्रस्तुत की जिसे 'सागरीय अध-स्तल विस्तार के नाम से जाना जाता है। हैस के तर्कानुसार महासागरीय कटकों के शीर्ष पर लगातार ज्वालामुखी उद्भदन से महासागरीय पर्पटी में विभेदन हुआ और नया लावा इस दरार को भरकर महासागरीय पर्पटी के दोनों तरफ धकेल रहा है। इस प्रकार महासागरीय अध-स्तल का विस्तार हो रही है। इसके साथ ही दूसरे महासागर के न सिकुड़ने पर हैस ने महासागरीय पर्पटी के क्षेपण की बात कही है। अतः एक ओर महासागरों में पर्पटी का निर्माण होता है तो दूसरी तरफ महासागरीय गर्गों में इसका विनाश भी होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र महासागरीय पर्पटी के निर्माण और विनाश की प्रक्रियाओं को दर्शाता है, जिसमें एक तरफ नए पर्पटी का निर्माण होता है और दूसरी तरफ पुराने पर्पटी का क्षेपण होता है।

 

प्लेट विवर्तनिक संकल्पना

हैस की परिकल्पना के उपरान्त विद्वानों की महासागरों वे महाद्वीपों के वितरण के अध्ययन में फिर से रुचि उत्पन्न हुई। सन् 1967 में मैकेन्जी, पारकर और मोरगन ने स्वतन्त्र रूप से उपलब्ध विचारों को समन्वित कर अध्ययन प्रस्तुत किया, जिसे प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त कहा गया। एक विवर्तनिक प्लेट ठोस चट्टान का विशाल व अनियमित आकार का खण्ड है, जो महाद्वीप व महासागर स्थलमण्डलों के संयोग से बना है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र पृथ्वी की विवर्तनिक प्लेटों को उनके आकार और सीमाओं के साथ दर्शाता है, जो महाद्वीप और महासागरों को मिलाकर बनी हैं। यह प्लेटें दुर्बलतामण्डल पर गतिशील रहती हैं।

ये प्लेटें दुर्बलतामण्डल पर दृढ़ इकाई के रूप में संवहन धाराओं के प्रभाव से चलायमान हैं। इन प्लेटों द्वारा ही महाद्वीप व महासागरों का वितरण, निर्माण तथा अन्य भूगर्भीय घटनाएँ निर्धारित होती हैं।

 

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

Question 1. वेगनर ने महाद्वीपीय विस्थापन के लिए कितने बलों का उल्लेख किया है?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
Answer: (ख) दो।
In simple words: वेगनर ने महाद्वीपों के विस्थापन के लिए दो प्रकार के बलों का उल्लेख किया था: पोलर फ्लीइंग बल और ज्वारीय बल।

🎯 Exam Tip: वेगनर के सिद्धांत में वर्णित बलों को सटीक रूप से याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे महाद्वीपीय गति की उनकी व्याख्या का आधार थे।

 

Question 2. आर्थर होम्स ने मैंटल भाग में संवहन धाराओं के प्रभाव की सम्भावना व्यक्त की थी
(क) 1910 के दशक में
(ख) 1920 के दशक में
(ग) 1930 के दशक में
(घ) 1940 के दशक में
Answer: (ग) 1930 के दशक में ।
In simple words: आर्थर होम्स ने 1930 के दशक में मैंटल में संवहन धाराओं की अवधारणा प्रस्तुत की, जो प्लेट विवर्तनिकी के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरक शक्ति है।

🎯 Exam Tip: भूवैज्ञानिक इतिहास में प्रमुख वैज्ञानिकों और उनकी खोजों के समय-कालों को याद रखना उत्तरों में सटीकता जोड़ता है।

 

Question 3. मैकेन्जी और पारकर ने प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त कब प्रतिपादित किया?
(क) 1966 में
(ख) 1967 में
(ग) 1968 में
(घ) 1969 में
Answer: (ख) 1967 में।
In simple words: मैकेन्जी और पारकर ने 1967 में प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत को प्रतिपादित किया, जिसने महाद्वीपों और महासागरों के वितरण की हमारी समझ को बदल दिया।

🎯 Exam Tip: प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत के प्रतिपादन का वर्ष और प्रमुख वैज्ञानिकों के नाम याद रखना तथ्यात्मक प्रश्नों के लिए आवश्यक है।

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

Question 1. पैंजिया क्या है?
Answer: 150 मिलियन वर्ष पूर्व एक विशाल महाद्वीप जिसमें वर्तमान सभी महाद्वीप एक साथ जुड़े हुए थे, पैंजिया कहलाता था। वेगनर ने अपने ‘महाद्वीप विस्थापन सिद्धान्त' के अन्तर्गत इसी पैंजिया के विखण्डन से वर्तमान महाद्वीपों की उत्पत्ति और वितरण की व्याख्या की है।
In simple words: पैंजिया वह विशाल प्राचीन महाद्वीप था जिसमें आज के सभी महाद्वीप लगभग 150 मिलियन वर्ष पहले एक साथ जुड़े हुए थे, जिसके विखंडन से वर्तमान महाद्वीपों का निर्माण हुआ।

🎯 Exam Tip: पैंजिया की अवधारणा महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत की मूल है, इसलिए इसकी परिभाषा और समय-काल को स्पष्ट रूप से समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. प्लेट के संचरण के लिए कौन-सा बल कार्य करता है?
Answer: संवहन धाराएँ तथा तापीय संवहन की प्रक्रिया प्लेट को खिसकाने में बल का कार्य करती हैं। गर्म धाराएँ जैसे ही धरातल के पास पहुँचती हैं, ठण्डी हो जाती हैं। उसी समय ठण्डी धाराएँ नीचे जाती हैं। यही संवाहनिक संचरण धरातलीय प्लेट को खिसकाता है।
In simple words: मैंटल में उत्पन्न होने वाली संवहन धाराएँ और तापीय संवहन की प्रक्रियाएं ही धरातलीय प्लेटों को गतिमान करने वाली मुख्य शक्तियाँ हैं।

🎯 Exam Tip: प्लेट संचरण के पीछे की प्रेरक शक्ति, मैंटल संवहन धाराओं को पहचानना प्लेट विवर्तनिकी को समझने के लिए आवश्यक है।

 

Question 3. पैंथालासा क्या हैं?
Answer: पैंथालासा का सामान्य अर्थ जल-क्षेत्र है। वैज्ञानिकों का मत है कि पूर्वकाल में सभी महासागर एक सम्बद्ध जल-क्षेत्र था पैंथालासा कहा जाता था। पैंजिया स्थल क्षेत्र इसी जल-क्षेत्र के लगभग मध्य में स्थित था जिसके विखण्डन से महाद्वीपों का निर्माण हुआ है।
In simple words: पैंथालासा वह विशालकाय महासागर था जो प्राचीन पैंजिया महाद्वीप को चारों ओर से घेरे हुए था, और इसका अर्थ 'समस्त जल' है।

🎯 Exam Tip: पैंथालासा और पैंजिया दोनों अवधारणाएं महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के प्रारंभिक मॉडल को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 4. पैजिया का प्रारम्भिक विखण्डन कब व कितने खण्डों में हुआ था?
Answer: वेगनर के अनुसार लगभग 20 करोड़ वर्ष पूर्व पैंजिया का विभाजन आरम्भ हुआ। इस समय पैंजिया के निम्नलिखित दो खण्ड हुए-
• लारेशिया जिससे उत्तरी महाद्वीप बने तथा
• गोंडवानालैण्ड जिसमें दक्षिण महाद्वीप सम्मिलित थे।
In simple words: पैंजिया का प्रारंभिक विखंडन लगभग 20 करोड़ वर्ष पूर्व हुआ, जिससे लारेशिया (उत्तरी महाद्वीप) और गोंडवानालैंड (दक्षिणी महाद्वीप) नामक दो बड़े खंड बने।

🎯 Exam Tip: पैंजिया के विखंडन के समय, बने हुए दो मुख्य भूखंडों (लारेशिया और गोंडवानालैंड) और उनके द्वारा निर्मित वर्तमान महाद्वीपों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. पोलर वेण्डरिंग क्या है?
Answer: भूगर्भिक परिवर्तन की प्रक्रिया जिसके अन्तर्गत ध्रुवों (Poles) की स्थिति बदल गई, पोलर वेण्डरिंग कहलाता है।
In simple words: पोलर वेण्डरिंग भूवैज्ञानिक प्रक्रिया को संदर्भित करता है जिसमें पृथ्वी के भौगोलिक ध्रुवों की स्थिति समय के साथ बदल जाती है।

🎯 Exam Tip: 'पोलर वेण्डरिंग' एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के इतिहास और महाद्वीपीय विस्थापन को समझने में मदद करती है।

 

Question 6. कौन-सी प्लेट महासागरीय धरातल से बनी है?
Answer: प्रशान्त प्लेट महासागरीय धरातल से बनी है।
In simple words: प्रशांत प्लेट मुख्य रूप से महासागरीय पर्पटी से बनी है, जो इसे सबसे बड़ी महासागरीय प्लेट बनाती है।

🎯 Exam Tip: प्रमुख महासागरीय प्लेटों के नाम और उनकी संरचना (महासागरीय या महाद्वीपीय) को जानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. रूपान्तरण सीमा क्या है?
Answer: प्लेट संचलन की वह सीमा जहाँ न तो कोई नई पर्पटी का निर्माण होता है और न ही पर्पटी का विनाश होता है, रूपान्तरण सीमा कहलाती है।
In simple words: रूपांतरण सीमा वह प्लेट किनारा है जहाँ प्लेटें एक-दूसरे के समानांतर सरकती हैं, जिससे न तो नई क्रस्ट बनती है और न ही पुरानी क्रस्ट नष्ट होती है।

🎯 Exam Tip: रूपांतरण सीमा को अन्य प्लेट सीमाओं (अभिसारी और अपसारी) से अलग करने वाली विशेषता (कोई निर्माण या विनाश नहीं) को याद रखें।

 

Question 8. अभिसरण के प्रकार बताइए ।
Answer: अभिसरण के निम्नलिखित तीन प्रकार हो सकते हैं
• महासागरीय व महाद्वीपीय प्लेट के मध्य अभिसरण ।
• महासागरीय प्लेटों के मध्य अभिसरण ।
• दो महाद्वीपीय प्लेटों के मध्य अभिसरण ।
In simple words: अभिसरण तब होता है जब दो प्लेटें टकराती हैं, और यह महासागरीय-महाद्वीपीय, महासागरीय-महासागरीय या महाद्वीपीय-महाद्वीपीय प्लेटों के बीच हो सकता है।

🎯 Exam Tip: अभिसरण के तीनों प्रकारों को उनके उदाहरणों (जैसे हिमालय, एंडीज पर्वत) के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. अपसारी सीमा क्या है? इसका एक उदाहरण दीजिए।
Answer: जब दो प्लेटें एक-दूसरे से विपरीत दिशा में अलग हटती हैं और नई पर्पटी का निर्माण होता है तो उन्हें अपसारी प्लेट कहते हैं। अपसारी सीमा का सबसे अच्छा उदाहरण मध्य अटलांटिक कटक है।
In simple words: अपसारी सीमा वह प्लेट किनारा है जहाँ प्लेटें एक-दूसरे से दूर जाती हैं, जिससे नई महासागरीय पर्पटी का निर्माण होता है, जिसका सबसे अच्छा उदाहरण मध्य अटलांटिक कटक है।

🎯 Exam Tip: अपसारी सीमाओं की परिभाषा और उनके विशिष्ट भू-आकृतियों (जैसे मध्य-महासागरीय कटक) को पहचानना आवश्यक है।

 

Question 10. प्रविष्ठन (Subduction) क्षेत्र क्या होता है?
Answer: अभिसरण सीमा पर जहाँ भू-प्लेट धंसती है, उस क्षेत्र को प्रविष्ठन क्षेत्र कहते हैं। हिमालय पर्वतीय क्षेत्र इसका प्रमुख उदाहरण है।
In simple words: प्रविष्ठन क्षेत्र वह स्थान है जहाँ एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे धंसती है, आमतौर पर अभिसरण सीमाओं पर, जिससे गहरी खाईयाँ और ज्वालामुखी बनते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रविष्ठन क्षेत्र की अवधारणा को समझना अभिसरण प्लेट सीमाओं से जुड़ी भू-आकृतियों और भूगर्भीय घटनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

Question 1. भारतीय प्लेट की अवस्थिति एवं विस्तार पर प्रकाश डालिए ।
Answer: भारतीय प्लेट में प्रायद्वीप भारत और ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप सम्मिलित हैं। इसकी उत्तरी सीमा हिमालय पर्वत श्रेणियों में स्थित प्रविष्ठन क्षेत्र द्वारा निर्धारित होती है, जो पूर्व दिशा में म्यांमार के राकिन्योमा पर्वत से होते हुए एक चाप के रूप में जावा खाई तक विस्तृत है। भारतीय प्लेट की पूर्वी सीमा विस्तारित तल के रूप में तथा पश्चिमी सीमा पाकिस्तान की किरथर श्रेणियों का अनुसरण करती हुई मकरान तट के साथ-साथ लाल सागर द्रोणी तक स्थित है। यह प्लेट महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसरण के रूप में अर्थात् दो महाद्वीपों से प्लेटों की सीमा निश्चित होती है। वर्तमान में इस प्लेट की अवस्थिति का विश्लेषण नागपुर क्षेत्र में पाई जाने वाली चट्टानों के आधार पर किया जाता है।
In simple words: भारतीय प्लेट में भारत और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं; इसकी उत्तरी सीमा हिमालय पर्वत पर, पूर्वी सीमा जावा खाई तक और पश्चिमी सीमा लाल सागर द्रोणी तक फैली हुई है, जो महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसरण का उदाहरण प्रस्तुत करती है।

🎯 Exam Tip: भारतीय प्लेट की भौगोलिक सीमाएँ और यह अन्य प्लेटों के साथ कैसे संपर्क करती है (अभिसरण) को याद रखना इस क्षेत्र की भूगर्भीय विशेषताओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. विवर्तनिक प्लेटों को संचालित करने वाले कौन-से बल हैं, वर्णन कीजिए ।
Answer: जिस समय वेगनर ने महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धान्त प्रस्तुत किया था, उस समय यह माना जाता था कि पृथ्वी एक ठोस गतिरहित पिण्ड है। किन्तु सागरीय अध-स्तल विस्तार और प्लेट विवर्तनिक दोनों सिद्धान्तों से यह सिद्ध हो गया है कि पृथ्वी का धरातल एवं भूगर्भ दोनों ही स्थिर न होकर गतिमान हैं। प्लेट चलायमान है, आज यह निर्विवाद तथ्य है। ऐसा माना जाता है कि दृढ़ प्लेट के नीचे चलायमान चट्टानें वृत्ताकार रूप में चल रही हैं। उष्ण पदार्थ धरातल पर पहुँचता है, फैलता है और धीरे-धीरे ठण्डा होता है, फिर गहराई में जाकर नष्ट हो जाता है। यही चक्र बारम्बार दोहराया जाता है। वैज्ञानिक इसे संवहन प्रवाह (Convection Flow) कहते हैं। इस विचार को सर्वप्रथम 1930 में होम्स ने प्रतिपादित किया था। इनके आधार पर वर्तमान में यही माना जाता है कि मैंटल में स्थित रेडियोधर्मी तत्त्वों के क्षय से उत्पन्न बल ही संवहनीय धाराओं के रूप में प्लेट को संचलित करने के लिए उत्तरदायी है।
In simple words: विवर्तनिक प्लेटों को मैंटल में उत्पन्न होने वाली संवहन धाराएं संचालित करती हैं, जो रेडियोधर्मी तत्वों के क्षय से निकलने वाली गर्मी द्वारा पैदा होती हैं। ये धाराएं गर्म पदार्थ को ऊपर उठाती हैं और ठंडे पदार्थ को नीचे खींचती हैं, जिससे प्लेटें गति करती हैं।

🎯 Exam Tip: प्लेटों के संचलन के लिए उत्तरदायी मुख्य बल (मैंटल संवहन धाराएँ) और उनके कार्यप्रणाली को समझना प्लेट विवर्तनिकी के यांत्रिकी को स्पष्ट करता है।

 

Question 3. प्लेट प्रवाह दरें कैसे निर्धारित होती हैं? प्लेट प्रवाह की न्यूनतम एवं वृहदतम् दरें बताइए ।
Answer: सामान्य व उत्क्रमण चुम्बकीय क्षेत्र पट्टियाँ जो मध्य महासागरीय कटक के समानान्तर हैं, प्लेट प्रवाह की दर को समझने में वैज्ञानिकों के लिए सहायक सिद्ध हुई हैं। प्लेट प्रवाह की दरों में विभिन्नताएँ मिलती हैं। स्थलमण्डलीय प्लेटों में आर्कटिक कटक की प्रवाह दर सबसे कम (2.5 सेंटीमीटर प्रतिवर्ष से भी कम) है, जबकि पूर्वी द्वीप के निकट पूर्वी प्रशान्त महासागरीय उभार, जो चिली से 3400 किमी पश्चिम की ओर दक्षिण प्रशान्त महासागर में है, इसकी प्रवाह दर सर्वाधिक (5 सेमी प्रतिवर्ष से भी अधिक) है।
In simple words: प्लेट प्रवाह दरों को मध्य-महासागरीय कटकों के समानांतर पाए जाने वाले चुंबकीय क्षेत्र पट्टियों का विश्लेषण करके निर्धारित किया जाता है; आर्कटिक कटक में सबसे धीमी (2.5 सेमी/वर्ष से कम) और पूर्वी प्रशांत महासागरीय उभार पर सबसे तेज (5 सेमी/वर्ष से अधिक) दरें पाई जाती हैं।

🎯 Exam Tip: प्लेट प्रवाह दरों के निर्धारण की विधि (चुंबकीय पट्टियों का विश्लेषण) और विभिन्न भौगोलिक स्थानों पर न्यूनतम व अधिकतम दरों के उदाहरणों को याद रखना चाहिए।

 

Question 4. पृथ्वी के स्थलमण्डल की सात मुख्य प्लेटों के नाम लिखिए।
Answer: प्लेट विवर्तनिकी के सिद्धान्त के अनुसार पृथ्वी का स्थलमण्डल सात मुख्य प्लेटों व कुछ छोटी प्लेटों में विभक्त है। सात मुख्य प्लेटों के नाम निम्नलिखित हैं
(1) अंटार्कटिक प्लेट (जिसमें अंटार्कटिक से घिरा महासागर भी सम्मिलित है),
(2) उत्तरी अमेरिकी प्लेट,
(3) दक्षिणी अमेरिकी प्लेट,
(4) प्रशान्त महासागरीय प्लेट,
(5) इंडो-ऑस्ट्रेलियन-न्यूजीलैण्ड प्लेट,
(6) अफ्रीकी प्लेट,
(7) यूरेशियाई प्लेट (जिसमें पूर्वी अटलांटिक महासागरीय तल भी सम्मिलित है)।
In simple words: पृथ्वी का स्थलमंडल सात प्रमुख प्लेटों में विभाजित है: अंटार्कटिक, उत्तरी अमेरिकी, दक्षिणी अमेरिकी, प्रशांत, इंडो-ऑस्ट्रेलियाई-न्यूजीलैंड, अफ्रीकी और यूरेशियन प्लेट।

🎯 Exam Tip: सभी सात प्रमुख प्लेटों के नाम को याद रखना प्लेट विवर्तनिकी की मूलभूत जानकारी है।

 

Question 5. स्थलमण्डल की महत्त्वपूर्ण छोटी प्लेटों के नाम लिखिए तथा इनकी स्थिति बताइए।
Answer: स्थलमण्डल की महत्त्वपूर्ण छोटी प्लेटों के नाम निम्नलिखित हैं
1. कोकोस प्लेट- यह प्लेट मध्यवर्ती अमेरिका और प्रशान्त महासागरीय प्लेट के बीच स्थित है।
2. नफ्रका प्लेट- यह दक्षिण अमेरिका व प्रशान्त महासागरीय प्लेट के मध्य है।
3. अरेबियन प्लेट- इसमें अधिकतर अरब प्रायद्वीप का भूभाग स्थित है।
4. फिलिपीन प्लेट- यह एशिया महाद्वीप और प्रशान्त महासागरीय प्लेट के बीच स्थित है।
5. कैरोलिन प्लेट- यह न्यूगिनी के उत्तर में फिलिपियन व इण्डियन प्लेट के बीच स्थित है।
6. फ्यूजी प्लेट- यह ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्व में स्थित है।
In simple words: स्थलमंडल में कई छोटी प्लेटें भी हैं, जैसे कोकोस (मध्य अमेरिका और प्रशांत), नजका (दक्षिण अमेरिका और प्रशांत), अरेबियन (अरब प्रायद्वीप), फिलिपीन (एशिया और प्रशांत), कैरोलिन (न्यू गिनी के उत्तर) और फ्यूजी (ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्व)।

🎯 Exam Tip: प्रमुख प्लेटों के साथ-साथ महत्वपूर्ण छोटी प्लेटों और उनकी संबंधित भौगोलिक स्थितियों को जानना विभिन्न भूगर्भीय घटनाओं को समझने में सहायक होता है।

 

Question 6. संवहन धारा सिद्धान्त क्या है?
Answer: पृथ्वी के मैंटल में स्थित रेडियोएक्टिव तत्त्वों में ताप-भिन्नता के कारण संवहन धाराएँ प्रवाहित होती रहती हैं। 1930 के दशक में आर्थर होम्स ने सबसे पहले इन संवहन धाराओं की उपस्थिति तथा इनके चक्रीय प्रवाह की सम्भावनाएँ व्यक्त की थीं। होम्स ने ही महाद्वीप व महासागरों के वितरण और पर्वतों के निर्माण के सम्बन्ध में संवहन धारा सिद्धान्त को प्रतिपादन किया था। यह सिद्धान्त पर्वतों, महाद्वीप तथा महासागरों की उत्पत्ति एवं इनके वितरण की वैज्ञानिक व्याख्या करता है तथा अपने से पूर्व के सभी सिद्धान्तों से अधिक मान्य है।
In simple words: संवहन धारा सिद्धांत यह बताता है कि मैंटल में रेडियोधर्मी तत्वों से उत्पन्न ताप-भिन्नता के कारण पदार्थ का चक्रीय प्रवाह होता है, जो महाद्वीपों और महासागरों के वितरण तथा पर्वतों के निर्माण के लिए जिम्मेदार है।

🎯 Exam Tip: संवहन धारा सिद्धांत की मूल अवधारणा (ताप-भिन्नता से उत्पन्न चक्रीय प्रवाह) और इसके भूगर्भीय महत्व (महाद्वीपीय-महासागरीय वितरण) को समझना आवश्यक है।

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

Question 1. प्लेट विवर्तनिक सिद्धान्त का वर्णन कीजिए तथा प्लेटों की प्रक्रिया पर प्रकाश डालिए।'
Answer: प्लेट विवर्तनिक सिद्धान्त महाद्वीपीय विस्थापन एवं सागरीय तल विस्तार अवधारणा के पश्चात् महाद्वीप, महासागर एवं पर्वतों का निर्माण तथा वितरण सम्बन्धी समस्याओं के समाधान हेतु सन् 1967 में मैकेन्जी (Mekenzie), पारकर (Parker) और मोरगन (Morgan) ने स्वतन्त्र रूप से उपलब्ध विचारों को समन्वित कर अध्ययन प्रस्तुत किया, जिसे प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त कहा गया। एक विवर्तनिक प्लेट ठोस चट्टान का विशाल व अनियमित आकार का खण्ड है। अतएव स्थलमण्डल अनेक प्लेटों में विभक्त है। प्रत्येक प्लेट स्वतन्त्र रूप से दुर्बलतामण्डल से संचलन करती रहती है महाद्वीप एवं महासागरों की सतह को संचलने इन प्लेटों के माध्यम से ही होता है। स्थलमण्डल की ये 7 बड़ी एवं छोटी कठोर प्लेटें हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र पृथ्वी की विवर्तनिक प्लेटों को उनके आकार और सीमाओं के साथ दर्शाता है, जो महाद्वीप और महासागरों को मिलाकर बनी हैं। यह प्लेटें दुर्बलतामण्डल पर गतिशील रहती हैं।

इन भू-प्लूटों पर स्थलाकृतियों का निर्माण, भ्रंशन तथा विस्थापन क्रियाओं द्वारा होता है जिन्हें विवर्तनिकी कहते हैं।

प्लेट विवर्तनिकी प्रक्रिया

संवहनीय धाराओं के आधार पर भू-प्लेटों की प्रक्रिया, विस्तार एवं क्षेत्र निम्नलिखित प्रकार से सम्पन्न होता है-
1. अपसारी क्षेत्र (प्लेट)-जब दो प्लेट एक-दूसरे से विपरीत दिशा में अलग हटती हैं और नई पर्पटी का निर्माण होता है, उन्हें अपसारी प्लेट कहते हैं। वह स्थान जहाँ से प्लेट एक-दूसरे से दूर हटती हैं, प्रसारी स्थान (Spreading Site) या अपसारी क्षेत्र कहलाता है।
2. अभिसारी क्षेत्र (प्लेट)-जब एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे धंसती है और जहाँ भूपर्पटी नष्ट होती है, वह अभिसरण क्षेत्र या सीमा कहलाता है। इस प्रक्रिया में जब दो भिन्न दिशाओं में प्लेटें एक-दूसरे के ऊपर चढ़ जाती हैं तो संपीडन के कारण पर्वत, खाइयाँ आदि स्थल-रूप निर्मित होते हैं।
3. रूपान्तर क्षेत्र (प्लेट)-इन किनारों पर न तो नये पदार्थ का निर्माण होता है और न विनाश होता - है। ऐसी स्थिति महासागरीय कटक के पास होती है।
In simple words: प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत बताता है कि पृथ्वी का स्थलमंडल कई बड़ी और छोटी प्लेटों में बंटा हुआ है जो मैंटल की संवहन धाराओं के कारण लगातार गतिमान रहती हैं, जिससे भूकम्प, ज्वालामुखी, पर्वत निर्माण और महाद्वीपीय तथा महासागरीय वितरण जैसी भूगर्भीय घटनाएँ होती हैं।

🎯 Exam Tip: प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत की मुख्य अवधारणाओं, प्लेटों के प्रकार (अभिसारी, अपसारी, रूपांतरण) और उनसे जुड़ी भूगर्भीय प्रक्रियाओं (जैसे पर्वत निर्माण, ज्वालामुखी) का विस्तृत वर्णन करें।

 

Question 2. वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धान्त का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer: महाद्वीपीय प्रवाह (विस्थापन) सिद्धान्त महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धान्त जर्मन मौसमविद् अल्फ्रेड वेगनर (Alfred wegner) द्वारा सन् 1912 में प्रस्तावित किया था। यह सिद्धान्त महाद्वीप एवं महासागरों के वितरण से सम्बन्धित है। इस सिद्धान्त की आधारभूत संकल्पना यह थी कि सभी महाद्वीप पूर्वकाल में परस्पर जुड़े हुए थे जिसे पैंजिया कहा जाता है। इसके चारों तरफ महासागर था, जिसे पैन्थालासा कहा जाता है पैंजिया सियाल निर्मित था जो सघन सीमा पर तैर रहा था। पैंजिया के मध्य में टैथिज उथला सागर था। इस सागर को उत्तरी भाग अंगारालैण्ड तथा दक्षिणी भाग गोंडवानालैण्ड था। अंगारालैण्ड में उत्तरी अमेरिका तथा यूरेशिया संलग्न थे। गोंडवानालैण्ड में दक्षिणी अमेरिका, अफ्रीका प्रायद्वीपीय भारत तथा अंटार्कटिका आदि परस्पर संलंग्न थे। कार्बोनिफेरस युग के अन्त में पैंजिया टूट गया। पैंजिया के विखण्डित भाग उत्तर में भूमध्यरेखा तथा पश्चिमी की ओर विस्थापित हुए। भूमध्यरेखा की ओर विस्थापन का कारण वेगनर गुरुत्वाकर्षण एवं प्लवनशीलता बल को तथा पश्चिम की ओर विस्थापकों का कारण ज्वारीय बल को मानते हैं। वेगनर इसी विस्थापन को महाद्वीप एवं महासागर के वर्तमान क्रम के लिए उत्तरदायी मानते हैं।
In simple words: वेगनर का महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत यह बताता है कि लगभग 20 करोड़ वर्ष पूर्व, सभी महाद्वीप एक विशाल भूखंड, पैंजिया, का हिस्सा थे, जो पैंथालासा नामक महासागर से घिरा था। पैंजिया के विखंडन और उसके बाद महाद्वीपों के उत्तर और पश्चिम की ओर संचलन ने वर्तमान महाद्वीप और महासागरों का वितरण बनाया, जिसके लिए गुरुत्वाकर्षण, प्लवनशीलता और ज्वारीय बल जिम्मेदार थे।

🎯 Exam Tip: वेगनर के सिद्धांत के प्रमुख बिंदुओं, जैसे पैंजिया और पैंथालासा की अवधारणा, विखंडन का समय, और महाद्वीपों के संचलन के लिए सुझाए गए बलों को विस्तार से लिखें।

 

Question 3. वेगनर के महाद्वीपीय सिद्धान्त एवं प्लेट विवर्तनिक सिद्धान्त की तुलनात्मक विवेचना कीजिए।
Answer: वास्तव में वेगनर ने अपने सिद्धान्त में युग तथा दिशा को सही ढंग से समझाने का प्रयास नहीं किया है। धरातल पर कई प्रकार के परिवर्तन हुए हैं। पृथ्वी का भू-वैज्ञानिक इतिहास इसका साक्षी है। महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धान्त यद्यपि विभिन्न भूगर्भिक समस्याओं की विवेचना करता है, फलस्वरूप इसे एक अच्छा सिद्धान्त तो माना जाता है, परन्तु इसे सत्य सिद्धान्त नहीं कहा जा सकता है। वेगनर के सिद्धान्त के अनुसार केवल महाद्वीप गतिमान है, सही नहीं है। वास्तव में महाद्वीप एक प्लेट का हिस्सा है और प्लेट गतिमान है। यह निर्विवाद तथ्य है कि भूवैज्ञानिक इतिहास में सभी प्लेट गतिमान रही हैं और भविष्य में भी गतिमान रहेंगी।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र विभिन्न भूवैज्ञानिक कालों में महाद्वीपों की बदलती हुई स्थिति को दर्शाता है, जिसमें महाद्वीपीय पिण्डों का एक-दूसरे से दूर या पास आना-जाना दिखाया गया है।

पुराचुम्बकीय आँकड़ों के केवल महाद्वीप गतिमान है, सही नहीं है। वास्तव में महाद्वीप एक प्लेट का हिस्सा है और प्लेट गतिमान है। यह निर्विवाद तथ्य है कि भूवैज्ञानिक इतिहास में सभी प्लेट गतिमान रही हैं और भविष्य में भी गतिमान रहेंगी।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र विभिन्न भूवैज्ञानिक कालों में महाद्वीपों की बदलती हुई स्थिति को दर्शाता है, जिसमें महाद्वीपीय पिण्डों का एक-दूसरे से दूर या पास आना-जाना दिखाया गया है।

पुराचुम्बकीय आँकड़ों के आधार पर वैज्ञानिकों ने विभिन्न भूकालों में प्रत्येक महाद्वीपीय खण्ड की अवस्थिति निर्धारित की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि महाद्वीपीय पिण्ड जो प्लेट के ऊपर स्थित है भू-वैज्ञानिक कालपर्यन्त चलायमान थे और पैंजिया अलग-अलग महाद्वीपीय खण्डों के अभिसरण से बना था, जो कभी एक या किसी दूसरी प्लेट के हिस्से थे। अतः महासागरों एवं महाद्वीपों की उत्पत्ति एवं वर्तमान क्रम महाद्वपीय विस्थापन से नहीं बल्कि प्लेट विवर्तन प्रक्रिया के परिणामस्वरूप है।
In simple words: वेगनर का महाद्वीपीय सिद्धांत केवल महाद्वीपों की गति पर केंद्रित था और इसमें सटीक समय व दिशा का अभाव था, जबकि प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत अधिक व्यापक है, जो बताता है कि पूरा स्थलमंडल (महाद्वीप और महासागर दोनों) प्लेटों के रूप में गतिमान हैं, और यह भूगर्भीय घटनाओं की अधिक सटीक व्याख्या करता है।

🎯 Exam Tip: दोनों सिद्धांतों की तुलना करते समय, गतिमान इकाई (महाद्वीप बनाम प्लेट), गति के पीछे के बल, और भूगर्भीय घटनाओं (जैसे पर्वत निर्माण, भूकंप) की व्याख्या करने की उनकी क्षमता के आधार पर अंतर स्पष्ट करें।

 

Question 4. महासागरीय अध-स्तल की बनावट का वर्णन कीजिए।
Answer: महासागरीय अध-स्तल की बनावट महाद्वीप एवं महासागरों के वितरण को समझने में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है। गहराई एवं उच्चावच के आधार पर महासागरीय तल को निम्नलिखित तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया जा सकता है-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र महासागरीय अध-स्तल की बनावट को गहराई और उच्चावच के आधार पर तीन प्रमुख भागों- महाद्वीपीय सीमा, वितलीय मैदान और मध्य महासागरीय कटक में विभाजित करके दिखाता है।

1. महाद्वीपीय सीमा-महाद्वीपीय सीमा महाद्वीपीय किनारों और गहरे समुद्री बेसिन के बीच का भाग है। इसके अन्तर्गत महाद्वीपीय मग्नतट, महाद्वीपीय ढाल, महाद्वीपीय उभार और गहरी महासागरीय खाइयाँ आदि सम्मिलित हैं। महासागरों व महाद्वीपों के वितरण को समझने में गहरी महासागरीय खाइयों का विशेष महत्त्व है।
2. वितलीय मैदान-महाद्वीपीय तट एवं मध्य महासागरीय कटकों के बीच स्थित लगभग समतल क्षेत्र को वितलीय मैदान कहते हैं। इनका निर्माण महाद्वीपों से बहाकर लाए गए अवसादों द्वारा महासागरों के तटों से दूर निक्षेपण से होता है।
3. मध्य महासागरीय कटक-मध्य महासागरीय कटक परस्पर संलग्न पर्वतों की एक श्रृंखला है। यह महासागरीय जल में डूबी हुई पृथ्वी के धरातल पर पाई जाने वाली सम्भवतः सबसे लम्बी पर्वत श्रृंखला मानी जाती है। यह वास्तव में सक्रिय ज्वालामुखी क्षेत्र ही नहीं बल्कि विवर्तनिकी का मुख्य क्षेत्र है जो महाद्वीप एवं महासागरों के निर्माण एवं वितरण में महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
In simple words: महासागरीय अध-स्तल को तीन मुख्य भागों में बांटा गया है: महाद्वीपीय सीमा (मग्नतट, ढाल, उभार, खाइयाँ), वितलीय मैदान (महासागरीय तल के समतल क्षेत्र) और मध्य महासागरीय कटक (जलमग्न पर्वत श्रृंखला जहाँ ज्वालामुखी क्रिया होती है)।

🎯 Exam Tip: महासागरीय अध-स्तल के तीनों प्रमुख भागों (महाद्वीपीय सीमा, वितलीय मैदान, मध्य महासागरीय कटक) और उनकी विशेषताओं का विस्तृत वर्णन करें, क्योंकि यह समुद्री भू-आकृतियों का मूलभूत ज्ञान है।

 

Question 5. भारतीय प्लेट संचलन का वर्णन कीजिए।
Answer: भारतीय प्लेट का संचलन पूर्व में भारत एक वृहत् द्वीप था, जो ऑस्ट्रेलियाई तट से दूर एक विशाल महासागर में स्थित थी। लगभग 22.5 करोड़ वर्ष पहले तक टेथीस सागर इसे एशिया महाद्वीप से अलग करता था। ऐसा माना जाता है। कि लगभग 20 करोड़ वर्ष पहले, जब पैंजिया विभक्त हुआ तब भारत ने उत्तर दिशा की ओर खिसकना आरम्भ किया। लगभग 4 से 5 करोड़ वर्ष पूर्व भारत एशिया से टकराया परिणामस्वरूप हिमालय पर्वत का उत्थान हुआ । 7.1 करोड़ वर्ष पूर्व भारत की स्थिति मानचित्र 4.5 में दर्शाई गई है। इस चित्र में भारतीय उपमहाद्वीप व यूरेशियन प्लेट की स्थिति भी दर्शाई गई है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह मानचित्र भारतीय उपमहाद्वीप और यूरेशियन प्लेट की भूवैज्ञानिक स्थिति को विभिन्न कालों में दर्शाता है, जिसमें उनके संचलन और टकराव से हिमालय पर्वत के निर्माण की प्रक्रिया भी शामिल है।

आज से लगभग 14 करोड़ वर्ष पूर्व भारतीय उपमहाद्वीप सुदूर दक्षिण में 50° दक्षिणी अक्षांश पर स्थित था। इन दो प्रमुख प्लेटों को टेथीस सागर अलग करता था। और तिब्बतीय खण्ड, एशियाई स्थलखण्ड के निकट था। भारतीय प्लेट के एशियाई प्लेट की ओर प्रवाह के समय दक्षिण में लावा प्रवाह से दक्कन ट्रैप का निर्माण हुआ, जिसे एक विशेष घटना माना जाता है। यह घटना लगभग 6 करोड़ वर्ष पूर्व से आरम्भ होकर लम्बे समय तक जारी रही। भारतीय प्लेट प्रवाह के सम्बन्ध में उल्लेखनीय बिन्दु, यह है कि भारतीय उपमहाद्वीप तब भी भूमध्य रेखा के निकट था और वर्तमान में भी भूमध्य रेखा के निकट हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह मानचित्र भारतीय उपमहाद्वीप और यूरेशियन प्लेट की भूवैज्ञानिक स्थिति को विभिन्न कालों में दर्शाता है, जिसमें उनके संचलन और टकराव से हिमालय पर्वत के निर्माण की प्रक्रिया भी शामिल है।


In simple words: भारतीय प्लेट, जिसमें भारत और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं, लगभग 20 करोड़ वर्ष पूर्व पैंजिया के विखंडन के बाद उत्तर की ओर बढ़ना शुरू किया। यह 4-5 करोड़ वर्ष पूर्व यूरेशियन प्लेट से टकराई, जिससे हिमालय का निर्माण हुआ। इस प्रवाह के दौरान, लगभग 6 करोड़ वर्ष पूर्व दक्कन ट्रैप का लावा प्रवाह भी हुआ, और प्लेट भूमध्य रेखा के करीब बनी रही।

🎯 Exam Tip: भारतीय प्लेट के संचलन के प्रमुख चरणों (टेथीस सागर से अलगाव, यूरेशियन प्लेट से टकराव, हिमालय का निर्माण, दक्कन ट्रैप का उद्भव) और संबंधित भूवैज्ञानिक समय-कालों को कालक्रमानुसार याद रखें।

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