NCERT Solutions for Class 11 Geography: Chapter 03 अक्षांश, देशांतर और समय
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Practice Class 11 Geography Solutions: Chapter 03 अक्षांश, देशांतर और समय
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UP Board Solutions for Class 11 Geography: Practical Work in Geography Chapter 3 Latitude, Longitude and Time (अक्षांश, देशांतर और समय)
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question (i). पृथ्वी पर दो प्राकृतिक सन्दर्भ बिन्दु कौन-से हैं?
Answer: पृथ्वी के अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व घूर्णन करने से दो प्राकृतिक सन्दर्भ बिन्दु प्राप्त होते हैं, जो उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव कहलाते हैं।
In simple words: पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव ही दो प्राकृतिक संदर्भ बिंदु हैं।
🎯 Exam Tip: इन ध्रुवों को पहचानना पृथ्वी के भौगोलिक निर्देशांकों को समझने के लिए मौलिक है।
Question (ii). बृहत् वृत्त क्या है?
Answer: उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव के मध्य विषुवत रेखा को सबसे बड़ा अक्षांश या बृहत् वृत्त कहा जाता है। यह अक्षांश रेखाओं द्वारा बना सबसे बड़ा बृहत् है जो ग्लोब (पृथ्वी) को दो बराबर भागों में बाँटता है।
In simple words: विषुवत रेखा को बृहत् वृत्त कहते हैं, जो पृथ्वी को दो बराबर गोलार्धों में विभाजित करती है और सबसे बड़ा अक्षांश है।
🎯 Exam Tip: विषुवत वृत्त पृथ्वी को समान भागों में बांटता है, यह इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है।
Question (iii). निर्देशांक क्या है?
Answer: अक्षांश एवं देशान्तर रेखाओं को सामान्यतः भौगोलिक निर्देशांक (Co-ordinate) कहा जाता है, क्योंकि ये रेखाओं के जाल का एक तन्त्र बनाती हैं, जिस पर हम धरातल के विभिन्न लक्षणों की स्थिति को प्रदर्शित कर सकते हैं। इन निर्देशांकों की सहायता से विभिन्न बिन्दुओं की अवस्थिति, दूरी तथा दिशा को आसानी से निर्धारित किया जा सकता है।
In simple words: निर्देशांक अक्षांश और देशांतर रेखाओं का एक ग्रिड है जो पृथ्वी पर किसी भी स्थान की सटीक स्थिति, दूरी और दिशा को निर्धारित करने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: भौगोलिक निर्देशांकों का उपयोग पृथ्वी पर किसी भी स्थान की सटीक पहचान और मानचित्रण के लिए महत्वपूर्ण है।
Question (iv). सूर्य पूर्व से पश्चिम जाता हुआ क्यों दिखाई देता है?
Answer: हम जानते हैं कि पृथ्वी अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। इसीलिए सूर्य पूर्व में उदय और पश्चिम में अस्त होता है। अतः हमें सूर्य पूर्व से पश्चिम की ओर जाता हुआ दिखाई देता है।
In simple words: पृथ्वी के पश्चिम से पूर्व की ओर घूमने के कारण ही हमें सूर्य पूर्व से निकलता और पश्चिम में अस्त होता हुआ दिखाई देता है।
🎯 Exam Tip: यह परिघटना पृथ्वी के दैनिक घूर्णन का प्रत्यक्ष परिणाम है और यह खगोलीय गति का एक मूल सिद्धांत है।
Question (v). स्थानीय समय से आप क्या समझते हैं?
Answer: किसी देश का स्थानीय समय वहाँ के प्रमुख याम्योत्तर पर होने वाला समय होता है अर्थात् किसी स्थान के देशान्तर पर जब सूर्य ठीक ऊपर होता है तो दोपहर के 12 बजे होते हैं। यह उस स्थान का स्थानीय समय कहलाता है।
In simple words: स्थानीय समय वह समय होता है जब किसी स्थान पर सूर्य ठीक सिर के ऊपर होता है, जिससे उस देशांतर पर दोपहर के 12 बजते हैं।
🎯 Exam Tip: स्थानीय समय का निर्धारण उस विशेष स्थान के देशांतर पर सूर्य की स्थिति पर निर्भर करता है।
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
Question 2. अक्षांशों एवं देशान्तरों के बीच अन्तर स्पष्ट करें।
Answer: अक्षांश एवं देशान्तर रेखाओं के मध्य अन्तर
| क्र०सं० | अक्षांश रेखा | देशान्तर रेखा |
|---|---|---|
| 1. | ये रेखाएँ पूर्व से पश्चिम को खींची हुई मानी जाती हैं। | ये रेखाएँ उत्तर से दक्षिणी को खींची हुई मानी जाती हैं। |
| 2. | अक्षांश रेखाएँ भूमध्य रेखा के समान्तर होती हैं। | देशान्तर रेखाएँ दोनों ध्रुवों को मिलाती हुई असमान्तर रेखाएँ हैं। |
| 3. | अक्षांश रेखाओं से पूरा वृत्त बनता है जो भूमध्य रेखा पर सबसे बड़ा व ध्रुव पर सबसे छोटा होता है। | देशान्तर रेखाएँ बृहत् वृत्त के आधे के बराबर होती हैं। |
| 4. | प्रत्येक अक्षांश वृत्त दूसरे से छोटा होता जाता है। | अक्षांश समान्तर के विपरीत इनकी लम्बाई समान होती है। |
| 5. | 0 अक्षांश को विषुवत् वृत्त एवं 90° को ध्रुव कहा जाता है। | देशान्तर 360° के होते हैं जो प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व एवं पश्चिम दोनों ओर 180° में बँटे होते हैं। |
In simple words: अक्षांश और देशांतर रेखाएँ पृथ्वी पर काल्पनिक रेखाएँ हैं जो स्थानों का पता लगाने में मदद करती हैं; अक्षांश भूमध्य रेखा के समानांतर पूर्व-पश्चिम वृत्त हैं, जबकि देशांतर उत्तर-दक्षिण रेखाएँ हैं जो ध्रुवों पर मिलती हैं।
🎯 Exam Tip: अक्षांश और देशांतर के बीच के प्रमुख अंतरों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर उनकी दिशा, आकार और पृथ्वी पर उनके कार्य को लेकर।
Question 1. जब ग्रिनिच पर दोपहर के 12 बजे हैं, तब 90° पूर्व देशान्तर पर स्थत थिम्पू, भूटान का स्थानीय समय क्या होगा? (पा० पु० पृ० सं० 28)
प्रकथन-प्रमुख याम्योत्तर के पूर्व में प्रति 1° देशान्तर पर समय 4 मिनट की दर से बढ़ता है।
Answer: ग्रिनिच एवं थिम्पू के बीच का अन्तर = 90° देशान्तर
समय को कुल अन्तर = 90 x 4 = 360 मिनट
\( \implies \) = 6 घण्टा । अतः थिम्पू का स्थानीय समय ग्रिनिच से 6 घण्टे कम आया अर्थात् अपराह्न 6.00 बजे का होगा।
In simple words: ग्रिनिच से 90° पूर्व में स्थित थिम्पू का स्थानीय समय 6 घंटे आगे होगा, इसलिए यदि ग्रिनिच में दोपहर के 12 बजे हैं, तो थिम्पू में शाम के 6 बजे होंगे।
🎯 Exam Tip: देशांतर और समय के बीच संबंध को समझने के लिए, 1° देशांतर के लिए 4 मिनट के समय परिवर्तन को याद रखना महत्वपूर्ण है; पूर्व में समय बढ़ता है और पश्चिम में घटता है।
Question 2. जब ग्रिनिच पर दोपहर के 12 बजे हों, तब 90° पश्चिम देशान्तर पर स्थित न्यू औरलियेंस (अक्टूबर 2005 में कैटरीना तूफान से सबसे अधिक प्रभावित होने वाला क्षेत्र) का स्थानीय समय क्या होगा? (पा० पु० पृ० सं० 28)
प्रकथन-प्रमुख याम्योत्तर के पश्चिम में 1° देशान्तर पर समय 4 मिनट की दर से घटता है।
Answer: ग्रिनिच एवं न्यू औरलियेंस के बीच का अन्तर = 90° देशान्तर
समय का कुल अन्तर = 90 x 4 =360 मिनट
\( \implies \) = 6 घण्टा अतः न्यू औरलियेंस का स्थानीय समय ग्रिनिच से 6 घण्टा कम आया अर्थात् अपराह्न 6.00 बजे का होगा।
In simple words: ग्रिनिच से 90° पश्चिम में स्थित न्यू ऑरलिन्स का स्थानीय समय 6 घंटे पीछे होगा, इसलिए यदि ग्रिनिच में दोपहर के 12 बजे हैं, तो न्यू ऑरलिन्स में सुबह के 6 बजे होंगे।
🎯 Exam Tip: समय की गणना करते समय देशांतर की दिशा (पूर्व या पश्चिम) पर ध्यान दें, क्योंकि यह समय को जोड़ने या घटाने का निर्धारण करती है।
Question 3. मानक याम्योत्तर का चुनाव किस प्रकार किया जाता है? भारत के मानक समय का निर्धारण बताइए । विश्व में कितने समय कटिबन्ध हैं?
Answer: मानक याम्योत्तर का चुनाव इस प्रकार किया जाता है कि यह 150° या 7° 30′ द्वारा विभाजित हो, ताकि मानक समय एवं ग्रिनिच माध्य समय के बीच के अन्तर को 1 या आधे घण्टे के गुणांक को बताया जा सके।
भारत के मानक समय का निर्धारण 82° 30′ पू० (E) से किया जाता है, जोकि मिर्जापुर से गुजरती है। अतः भारतीय मानक समय (IST) ग्रिनिच माध्य समय (GMT) से घण्टे आगे है। (82°30′ x 4) * (60 मिनट) = 5 घण्टे 30 मिनट ।.
विश्व के सभी देश अपनी प्रशासनिक सीमाओं के अन्दर तक मानक याम्योत्तर तय करके देश के स्थानीय समय का निर्धारण करते हैं। पूर्व-पश्चिम में अधिक विस्तार वाले देश एक से अधिक याम्योत्तर चुन सकते हैं, जैसा कि रूस, कनाडा तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में है।
विश्व को मानक याम्योत्तर समय के आधार पर 24 कटिबन्धों में विभाजित किया गया है। (चित्र 3.1)
In simple words: मानक याम्योत्तर का चयन 7°30' के गुणकों में किया जाता है ताकि समय अंतर आधा घंटे या एक घंटे में रहे; भारत का मानक समय 82°30' पूर्व है, जो GMT से 5.5 घंटे आगे है, और विश्व में देश अपनी सीमाओं के आधार पर कई समय कटिबंध चुनते हैं।
🎯 Exam Tip: मानक याम्योत्तर का महत्व यह है कि यह किसी देश के भीतर एक समान समय सुनिश्चित करता है और इसकी गणना में 7°30' के गुणकों का उपयोग एक महत्वपूर्ण मानदंड है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र विश्व के प्रमुख समय कटिबंधों को दर्शाता है, जिसमें विभिन्न देशांतर रेखाओं के आधार पर पृथ्वी को 24 समय क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। यह मानचित्र प्रदर्शित करता है कि कैसे अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा और प्रमुख याम्योत्तर विश्व के समय निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छात्र इस मानचित्र से विभिन्न क्षेत्रों के समय अंतर को समझ सकते हैं।
Question 4. किस देशान्तर के समय में 0° देशान्तर से ठीक 12 घण्टे का अन्तर होता है, चाहे प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व जाएँ या पश्चिम ?
Answer: 180° देशान्तर पर समय में 0° देशान्तर से ठीक 12 घण्टे का अन्तर होता है। हम जानते हैं कि जहाँ विश्व को 24 टाइम जोन में विभाजित किया गया है, वहीं एक स्थान तो ऐसा होगा जहाँ ग्रिनिच समय से पूरे दिन का अन्तर होगा; अतः ऐसा स्थान, जहाँ से पृथ्वी पर सचमुच दिन का प्रारम्भ होता है, 180° देशान्तर रेखा लगभग उसी स्थान पर स्थित है, जहाँ से अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा गुजरती है। अतः इस देशान्तर के समय में 0° देशान्तर से ठीक 12 घण्टे का अन्तर होता है, चाहे प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व जाएँ या पश्चिम ।।
In simple words: 180° देशांतर पर 0° देशांतर (प्रमुख याम्योत्तर) से ठीक 12 घंटे का अंतर होता है, क्योंकि यह अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के पास स्थित है और यहीं से दिन की शुरुआत मानी जाती है।
🎯 Exam Tip: अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (180° देशांतर) को 12 घंटे के समय अंतर का महत्वपूर्ण बिंदु समझना चाहिए, क्योंकि यह दिन और तारीख में बदलाव का स्थान है।
Question 5. सूर्य पूर्व से पश्चिम गोलार्द्ध में जाने में कितना समय लेता है? प्रति घण्टा या प्रति मिनट के आधार पर यह कितनी देशान्तर पार कर लेता है? समझाइए ।
Answer: पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती हुई 360° देशान्तर अर्थात् एक चक्कर लगभग 24 घण्टे में पूरा करती है। चूंकि 180° देशान्तर प्रमुख याम्योत्तर के पूर्व एवं पश्चिम दोनों ओर स्थित है; अतः सूर्य पूर्व से पश्चिमी गोलार्द्धमें जाने में 12 घण्टे का समय लेता है।
इस प्रकार सूर्य पूर्व से पश्चिम प्रति घण्टा 15° देशान्तर या 4 मिनट में 1° देशान्तर को पार कर लेता है। इस आधार पर हम यह भी कह सकते हैं कि जब हम पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ते हैं तब स्थानीय समय बढ़ता है और जब हम पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ते हैं तब समय घटता है।
In simple words: सूर्य को पूर्व से पश्चिमी गोलार्ध में जाने में 12 घंटे लगते हैं, क्योंकि पृथ्वी 24 घंटे में 360° देशांतर घूमती है, जिसका अर्थ है कि यह प्रति घंटे 15° देशांतर या प्रति मिनट 1° देशांतर पार करती है।
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि पृथ्वी की घूर्णन गति समय और देशांतर के बीच सीधा संबंध स्थापित करती है, जहाँ पूर्व की ओर जाने पर समय बढ़ता है और पश्चिम की ओर जाने पर घटता है।
Question 6. ग्लोब (पृथ्वी) पर अक्षांश समान्तर एवं देशान्तर याम्योत्तर को चित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
Answer: चित्र 3.2 एवं 3.3 का अवलोकन कीजिए।
In simple words: अक्षांश समांतर (समानांतर रेखाएं) और देशांतर याम्योत्तर (उत्तर-दक्षिण रेखाएं) ग्लोब पर काल्पनिक रेखाएं हैं जो भौगोलिक स्थिति दर्शाती हैं, जिनका प्रदर्शन अगले चित्रों में किया गया है।
🎯 Exam Tip: अक्षांश और देशांतर का दृश्य प्रतिनिधित्व भौगोलिक अवधारणाओं को स्पष्ट करने और उनकी समझ को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र पृथ्वी पर अक्षांश समानांतर रेखाओं को दर्शाता है। इसमें भूमध्य रेखा (0° विषुवत् वृत्त) के ऊपर और नीचे खींची गई काल्पनिक क्षैतिज रेखाएं दिखाई गई हैं, जो उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों की ओर घटती जाती हैं। यह दर्शाता है कि अक्षांश रेखाएं पूर्ण वृत्त बनाती हैं और एक-दूसरे के समानांतर होती हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र पृथ्वी पर देशांतर याम्योत्तर रेखाओं को दर्शाता है। इसमें उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक खींची गई काल्पनिक ऊर्ध्वाधर रेखाएं दिखाई गई हैं, जो प्रमुख याम्योत्तर (ग्रीनविच इंग्लैण्ड) के संदर्भ में पूर्व और पश्चिम में डिग्री में मापी जाती हैं। यह दर्शाता है कि देशांतर रेखाएं ध्रुवों पर मिलती हैं और भूमध्य रेखा पर सबसे दूर होती हैं।
Question 7. भारत का मानक समय ज्ञात करो जबकि ग्रीनविच पर दोपहर के 12.00 बजे हैं। भारत का मानक समय इलाहाबाद में पूर्व से मापा जाता है।
Answer: ग्रीनविच का देशान्तर 0° तथा इलाहाबाद का देशान्तर \( 82\frac{1}{2} \) है।
अतः दोनों स्थानों में देशान्तरों में अन्तर = \( 82\frac{1}{2} - 0° = 82\frac{1}{2} \)
1 देशान्तर में अन्तर = 4 मिनट
\( 82\frac{1}{2} \) में अन्तर = \( 82\frac{1}{2} \times 4 = \frac{165}{2} \times 4 = 330 \) मिनट
330 मिनट \( \div 60 \) = 5 घण्टे 30 मिनट का अन्तर होगा।
अर्थात् जब ग्रीनविच पर दोपहर के 12 बज रहे हैं तो इलाहाबाद में 12 बजे + 5 घण्टे 30 मिनट = इलाहाबाद या समस्त भारत में सायं 5.30 बजे का समय होगा।
| ग्रिनविच | इलाहाबाद | |
| 00 | देशान्तर में अन्तर \( 82\frac{1}{2} \) | \( 82\frac{1}{2} \) पूर्व |
| समय | इलाहाबाद | |
| 12.00 घंटे | 5.30 घंटे |
In simple words: यदि ग्रीनविच में दोपहर के 12 बजे हैं, तो 82.5° पूर्व देशांतर पर स्थित भारत का मानक समय 5 घंटे 30 मिनट आगे होगा, यानी शाम के 5.30 बजे होंगे।
🎯 Exam Tip: भारत के मानक समय की गणना में 82.5° पूर्वी देशांतर का उपयोग और 1° देशांतर के लिए 4 मिनट के समय अंतर का नियम याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 8. अक्षांश समान्तर क्या हैं?
Answer: वे काल्पनिक रेखाएँ जो भूमध्य रेखा के समान्तर पूर्व से पश्चिम को खिंची हुई मानी गई हैं, अक्षांश समान्तर कहलाती हैं (चित्र 3.2)।
In simple words: अक्षांश समांतर भूमध्य रेखा के समानांतर पूर्व से पश्चिम की ओर खींची गई काल्पनिक रेखाएं हैं जो पृथ्वी पर किसी स्थान की उत्तर-दक्षिण स्थिति बताती हैं।
🎯 Exam Tip: अक्षांश समांतरों की मुख्य विशेषता उनका भूमध्य रेखा के समानांतर होना और पूर्व-पश्चिम दिशा में फैला होना है।
Question 9. देशान्तर याम्योत्तर क्या है?
Answer: उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव को मिलाने वाली काल्पनिक रेखाओं को देशान्तर याम्योत्तर कहते हैं। (चित्र 3.3)।
In simple words: देशांतर याम्योत्तर वे काल्पनिक रेखाएं हैं जो उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से जोड़ती हैं और पृथ्वी पर किसी स्थान की पूर्व-पश्चिम स्थिति दर्शाती हैं।
🎯 Exam Tip: देशांतर याम्योत्तर की मुख्य विशेषता उनका उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों को जोड़ना और पृथ्वी को समय क्षेत्रों में विभाजित करना है।
Question 10. पृथ्वी पर दो अक्षांशों के बीच की दूरी लगभग कितनी होती है?
Answer: दो अक्षांशों के बीच की दूरी लगभग 111 किलोमीटर होती है।'
In simple words: पृथ्वी पर किन्हीं भी दो लगातार अक्षांश रेखाओं के बीच की औसत दूरी लगभग 111 किलोमीटर होती है।
🎯 Exam Tip: दो अक्षांशों के बीच की दूरी (लगभग 111 किमी) एक स्थिर मान है जिसे याद रखना चाहिए।
Question 11. याम्योत्तर के बीच की दूरी विषुवैत वृत्त, ध्रुव तथा मध्य में कितनी होती है?
Answer: याम्योत्तर के बीच की दूरी सर्वत्र समान नहीं होती। यह दूरी विषुवत् वृत्त पर अधिकतम (111.3 किलोमीटर), ध्रुवों पर न्यूनतम (0 किलोमीटर) तथा मध्य में अर्थात् 45° अक्षांश पर यह 79 किलोमीटर होती है।
In simple words: दो याम्योत्तरों के बीच की दूरी विषुवत वृत्त पर सबसे अधिक (111.3 किमी) होती है, ध्रुवों पर शून्य हो जाती है, और 45° अक्षांश पर लगभग 79 किमी होती है।
🎯 Exam Tip: यह महत्वपूर्ण है कि याम्योत्तरों के बीच की दूरी भूमध्य रेखा पर अधिकतम होती है और ध्रुवों की ओर घटती जाती है, इस परिवर्तनशील प्रकृति को समझना आवश्यक है।
Question 12. ग्लोब के लिए 20° दक्षिणी अक्षांश समान्तर आप किस प्रकार बनाएँगे। चित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Answer: एक किसी भी आकार का वृत्त बनाएँ तथा केन्द्र में से एक क्षैतिज रेखा खींचकर इसे दो बराबर भागों में बाँटें । यह आपकी विषुवत् रेखा होगी। इस वृत्त पर चॉदा (प्रोटेक्टर) को इस प्रकार से रखें कि चॉदा की 0° एवं 180° की रेखा वृत्त के मध्य खिंची रेखा से मिल जाए। अब 20° दे० (S) दर्शाने के लिए वृत्त के निचले आधे भाग में विषुवत् वृत्त से 20° का कोण बनाते हुए पूर्व एवं पश्चिम में दो बिद् लगाएँ जैसा कि चित्र 3.5 में दिखाया गया है। कोण की दोनों भुजाएँ वृत्त के दो बिन्दुओं को काटती हैं। विषुवत् वृत्त के समान्तर रेखा खींचते हुए इन दो बिन्दुओं को मिला दें। यही 20° दे० (S) होगा।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक ग्लोब पर 20° दक्षिणी अक्षांश समानांतर रेखा बनाने की विधि को स्पष्ट करता है। इसमें एक वृत्त बनाकर उसे विषुवत रेखा द्वारा दो भागों में बांटा गया है, फिर प्रोटेक्टर का उपयोग करके विषुवत रेखा से दक्षिणी भाग में 20° का कोण बनाया गया है। इस कोण की सहायता से वृत्त पर दो बिंदु चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें जोड़कर 20° दक्षिणी अक्षांश रेखा को दर्शाया गया है।
In simple words: 20° दक्षिणी अक्षांश बनाने के लिए, एक वृत्त में विषुवत रेखा खींचें, फिर प्रोटेक्टर से विषुवत रेखा के नीचे 20° का कोण बनाएं और कोण के बिंदुओं को जोड़कर समानांतर रेखा खींच दें।
🎯 Exam Tip: अक्षांश रेखाएँ बनाने की प्रक्रिया को समझने के लिए प्रोटेक्टर का सही उपयोग और कोणों का सटीक माप महत्वपूर्ण है।
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Geography Class 11 Curriculum Solutions: Chapter 03 अक्षांश, देशांतर और समय
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