UP Board Solutions Class 11 Economics Chapter 8 Index Numbers

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Detailed Chapter 8 अनुक्रमणिका संख्याएँ UP Board Solutions for Class 11 Economics

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Class 11 Economics Chapter 8 अनुक्रमणिका संख्याएँ UP Board Solutions PDF

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

Question 1. मदों के सापेक्षिक महत्त्व को बताने वाले सूचकांक को
(क) भारित सूचकांक कहते हैं।
(ख) सरल समूहित सूचकांक कहते हैं।
(ग) सरल मूल्यानुपातों का औसत कहते हैं।
Answer: (क) भारित सूचकांक कहते हैं।
In simple words: वस्तुओं के सापेक्षिक महत्व को दर्शाने वाला सूचकांक भारित सूचकांक कहलाता है, जहाँ प्रत्येक मद को उसके महत्व के अनुसार भार दिया जाता है।
In simple words: An index that shows the relative importance of items is called a weighted index, where each item is assigned a weight according to its significance.

🎯 Exam Tip: भारित सूचकांक (Weighted Index) उन सूचकांकों को कहते हैं जिनमें विभिन्न मदों को उनके महत्व के अनुसार भार (weight) दिया जाता है, जिससे गणना अधिक यथार्थ हो।

Question 2. अधिकांश भारित सूचकांकों में भार का सम्बन्ध
(क) आधार वर्ष से होता है।
(ख) वर्तमान वर्ष से होता है।
(ग) आधार एवं वर्तमान वर्ष दोनों से होता है।
Answer: (ख) वर्तमान वर्ष से होता है।
In simple words: अधिकांश भारित सूचकांकों में, वस्तुओं को दिया जाने वाला भार आमतौर पर वर्तमान वर्ष की मात्रा या मूल्य से संबंधित होता है ताकि यह वर्तमान आर्थिक स्थिति को बेहतर ढंग से दर्शा सके।
In simple words: In most weighted index numbers, the weight assigned to items is typically related to the quantity or value of the current year to better reflect the current economic situation.

🎯 Exam Tip: भारित सूचकांकों में भार (weights) का निर्धारण करते समय आधार वर्ष (Base Year) और वर्तमान वर्ष (Current Year) दोनों के आंकड़ों पर विचार किया जा सकता है, लेकिन सामान्यतः वर्तमान वर्ष के भार का प्रयोग किया जाता है।

Question 3. ऐसी कंस्तु जिसका सूचकांक में कम भार है, उसकी कीमत में परिवर्तन से सूचकांक में कैसा परिवर्तन होगा
(क) कस
(ख) अधिक
(ग) अनिश्चित
Answer: (क) कम
In simple words: यदि किसी वस्तु का भार सूचकांक में कम है, तो उसकी कीमत में होने वाला परिवर्तन सूचकांक के कुल मान पर कम प्रभाव डालेगा।
In simple words: If an item has a low weight in an index, a change in its price will have a smaller impact on the overall value of the index.

🎯 Exam Tip: सूचकांक में किसी मद का भार जितना कम होगा, उसकी कीमत में परिवर्तन सूचकांक को उतना ही कम प्रभावित करेगा, जिससे समग्र सूचकांक पर उसका प्रभाव न्यूनतम रहेगा।

Question 4. कोई उपभोक्ता सूचकांक किस परिवर्तन को मापता है?
(क) खुदरा कीमत ।
(ख) थोक कीमत
(ग) उत्पादकों की कीमत
Answer: (क) खुदरा कीमत
In simple words: उपभोक्ता सूचकांक (Consumer Price Index) खुदरा स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में औसत परिवर्तन को मापता है, जो उपभोक्ताओं द्वारा भुगतान की जाने वाली कीमतों को दर्शाता है।
In simple words: A Consumer Price Index (CPI) measures the average change in prices of goods and services at the retail level, reflecting the prices paid by consumers.

🎯 Exam Tip: उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) सामान्यतः जीवन-निर्वाह लागत (Cost of Living) में परिवर्तन को दर्शाता है, जिसका सीधा संबंध आम उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति से होता है।

Question 5. औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक में किस मद के लिए उच्चतम भार होता है?
(क) खाद्य पदार्थ
(ख) आवास
(ग) कपड़े
Answer: (क) खाद्य पदार्थ
In simple words: औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता कीमत सूचकांक में, खाद्य पदार्थों को सबसे अधिक भार दिया जाता है क्योंकि ये उनके कुल उपभोग व्यय का सबसे बड़ा हिस्सा होते हैं।
In simple words: In the Consumer Price Index for industrial workers, food items are given the highest weight because they constitute the largest portion of their total consumption expenditure.

🎯 Exam Tip: CPI में मदों का भार उनके उपभोग पैटर्न और कुल व्यय में उनके अनुपात पर निर्भर करता है, खाद्य पदार्थ अक्सर निम्न आय वर्ग के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।

Question 6. सामान्यतः मुद्रा-स्फीति में परिकलन में किसका प्रयोग होता है?
(क) थोक कीमत सूचकांक
(ख) उपभोक्ता कीमत सूचकांक
(ग) उत्पादक कीमत सूचकांक
Answer: (क) थोक कीमत सूचकांक
In simple words: मुद्रा-स्फीति की गणना के लिए आमतौर पर थोक कीमत सूचकांक (Wholesale Price Index) का उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह बड़ी मात्रा में वस्तुओं के मूल्य परिवर्तनों को ट्रैक करता है।
In simple words: The Wholesale Price Index (WPI) is commonly used for calculating inflation, as it tracks price changes for goods at a wholesale level.

🎯 Exam Tip: थोक कीमत सूचकांक (WPI) उत्पादकों और थोक विक्रेताओं द्वारा वस्तुओं के लेनदेन के औसत मूल्य परिवर्तनों को मापता है और इसे व्यापक आर्थिक नीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

Question 7. हमें सूचकांक की आवश्यकता क्यों होती है?
उतर सूचकांक सम्बन्धित चरों के समूह के परिमाण में परिवर्तनों को मापने का एक सांख्यिकीय साधन है। ये अर्थव्यवस्था के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। निम्नलिखित कारणों से हमें सूचकांक की आवश्यकता होती है
1. मजदूरी तय करने, लगान, कर, आय नीति का निर्धारण, कीमत-निर्धारण एवं आर्थिक नीति बनाने - के लिए सूचकांक का प्रयोग किया जाता है।
2. उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) फुटकर (retail)-कीमतों में औसत परिवर्तन मापने के लिए आवश्यक होता है।
3. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IPI) अनेक उद्योगों के औद्योगिक उत्पादन के स्तर में परिवर्तन को मापने में सहायक होता है।
4. थोक कीमत सूचकांक (WPI) सामान्य कीमत स्तर में परिवर्तन का संकेत देता है।
5. कृषि क्षेत्र की प्रगति का जायजा लेने के लिए कृषि उत्पादन सूचकांक (API) आवश्यक होता है।
In simple words: सूचकांक हमें समय के साथ विभिन्न आर्थिक चरों जैसे कीमत, उत्पादन और जीवन-स्तर में होने वाले परिवर्तनों को मापने और समझने में मदद करते हैं, जिससे आर्थिक विश्लेषण और नीति-निर्माण आसान हो जाता है।

🎯 Exam Tip: सूचकांक आर्थिक गतिविधियों को मापने, तुलना करने और भविष्य की प्रवृत्तियों का अनुमान लगाने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, जिससे नीतियाँ बनाने और निर्णय लेने में सहायता मिलती है।

Question 8. आधार अवधि (आधार वर्ष) के वांछित गुण क्या होते हैं?
उत्तर आधार अवधि (आधार वर्ष) के वांछित गुण निम्नलिखित होने चाहिए-
1. आधार वर्ष एक सामान्य वर्ष होना चाहिए, इस वर्ष असाधारण प्राकृतिक अथवा राजनीतिक घटनाएँ घटित न हुई हों।
2. आधार वर्ष में कीमत स्तर में असाधारण परिवर्तन न हुए हों।
3. यह वर्ष न तो अत्यधिक पुराना हो और न ही अत्यधिक नया ।।
4. इस वर्ष में पर्याप्त एवं विश्वसनीय आँकड़े उपलब्ध होने चाहिए ।
In simple words: आधार वर्ष वह अवधि होनी चाहिए जो सामान्य, स्थिर और हाल की हो, जहाँ कोई असामान्य आर्थिक या राजनीतिक घटनाएँ न हुई हों, ताकि तुलना के लिए एक विश्वसनीय आधार मिल सके।

🎯 Exam Tip: आधार वर्ष का चुनाव सूचकांक की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण है; एक अस्थिर या असामान्य आधार वर्ष गलत या भ्रामक परिणाम दे सकता है।

Question 9. भिन्न उपभोक्ताओं के लिए भिन्न उपभोक्ता कीमत सूचकांकों की अनिवार्यता क्यों होती
उत्तर भिन्न उपभोक्ताओं के उपभोग में व्यापक भिन्नताएँ पाई जाती हैं। इसलिए भिन्न उपभोक्ताओं के लिए भिन्न उपभोर्ग कीमत सूचकांक बनाए जाते हैं। भारत में तीन उपभोक्ता कीमत सूचकांक बनाए जाते
1. औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक (आधार वर्ष 1982)
2. शहरी गैर-शारीरिक (मजदूर) कर्मचारियों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक (आधार वर्ष | 1984-85)
3. कृषि श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक (आधार वर्ष 1986-87)।
In simple words: अलग-अलग आय समूहों और व्यवसायों के लोगों की उपभोग की आदतें और खर्च करने के पैटर्न भिन्न होते हैं, इसलिए उनके जीवन-यापन की लागत में परिवर्तनों को सटीक रूप से मापने के लिए विशेष उपभोक्ता कीमत सूचकांक बनाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक समूह के लिए विशिष्ट CPI बनाने से सरकार और शोधकर्ताओं को विभिन्न सामाजिक-आर्थिक वर्गों पर मूल्य परिवर्तनों के सटीक प्रभाव का आकलन करने में मदद मिलती है, जिससे लक्षित नीतियां बनाई जा सकती हैं।

Question 10. औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक क्या मापता है?
उत्तर भारत के औद्योगिक श्रमिकों के लिए अलग से उपभोक्ता कीमत सूचकांक बनाया जाता है। इसे 1982 को आधार वर्ष मानकर बनाया जाता है। इसका नियमित रूप से हर महीने परिकलन किया जाता है। यह सूचकांक औद्योगिक श्रमिकों के जीवन-निर्वाह पर फुटकर कीमतों में आए परिवर्तनों के प्रभावों को मापता है। इनका प्रकाशन श्रमिक केन्द्र शिमला द्वारा किया जाता है। इसका निर्माण करते समय औद्योगिक श्रमिकों के लिए मुख्य वस्तु समूहों को उपयुक्त भार दिया जाता है।
In simple words: औद्योगिक श्रमिकों का उपभोक्ता कीमत सूचकांक, 1982 को आधार वर्ष मानकर, खुदरा कीमतों में होने वाले मासिक परिवर्तनों को मापता है और बताता है कि ये परिवर्तन इन श्रमिकों की जीवन-निर्वाह लागत को कैसे प्रभावित करते हैं।

🎯 Exam Tip: औद्योगिक श्रमिकों के CPI का उपयोग मजदूरी समझौतों, महंगाई भत्ते (DA) के निर्धारण और श्रमिकों की वास्तविक आय की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

Question 11. कीमत सूचकांक तथा मात्रा सूचकांक में क्या अन्तर है?
उत्तर कीमत सूचकांक एक अभारित सूचकांक है। यह वस्तु की वर्तमान वर्ष की कीमत एक आधार वर्ष की कीमत का सरल अनुपात होता है। सूत्र रूप में,
\( {p}_{01 }=\cfrac { { \Sigma p }_{ 1 } }{ { \Sigma p }_{ 0 } } \times 100 \)
यहाँ, P01 = कीमत सूचकांक
P₁ = वर्तमान वर्ष की कीमत
Po = आधार वर्ष की कीमत
मात्रा सूचकांक कीमत के स्थान पर उत्पादन की मात्रा का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। इस प्रकार के सूचकांक की रचना करते समय सर्वप्रथम मात्रा अनुपात ज्ञात किए जाते हैं। सूत्रानुसार,
\( \cfrac { q1 }{ q0 } \times 100 \)
यहाँ, Q.R. = मात्रानुपात
q = वर्तमान वर्ष में उत्पादन की मात्रा
qo = आधार वर्ष में उत्पादन की मात्रा इसके बाद प्रचलित वर्ष के सभी मात्रानुपातों का समान्तर माध्य निकाल लिया जाता है। यही मात्रा सूचकांक है।।
In simple words: कीमत सूचकांक समय के साथ कीमतों में हुए परिवर्तनों को मापता है, जबकि मात्रा सूचकांक समय के साथ उत्पादन या उपभोग की मात्रा में हुए परिवर्तनों को मापता है।

🎯 Exam Tip: कीमत सूचकांक मुद्रास्फीति और क्रय शक्ति का आकलन करने में मदद करता है, जबकि मात्रा सूचकांक आर्थिक विकास और उत्पादन के स्तर को ट्रैक करने के लिए महत्वपूर्ण है।

Question 12. क्या किसी भी तरह की कीमत परिवर्तन एक कीमत सूचकांक में प्रतिबिम्बित होता है?
उत्तर कीमत सूचकांक फुटकर कीमतों में परिवर्तनों के औसत को मापता है। यह किसी विशिष्ट कीमत परिवर्तन को प्रदर्शित नहीं करता है, जबकि प्रत्येक प्रकार की कीमत में परिवर्तन कीमत सूचकांक के मान को प्रभावित करता है।
In simple words: नहीं, कीमत सूचकांक सभी व्यक्तिगत कीमत परिवर्तनों को सीधे प्रतिबिंबित नहीं करता, बल्कि यह वस्तुओं के समूह की औसत कीमतों में हुए बदलाव को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: सूचकांक औसत मूल्य परिवर्तनों को दर्शाता है; यह किसी एक वस्तु के मूल्य में अत्यधिक वृद्धि या कमी को छिपा सकता है यदि अन्य वस्तुओं में विपरीत परिवर्तन हुए हों, इसलिए इसकी व्याख्या सावधानी से करनी चाहिए।

Question 13. क्या शहरी गैर-शारीरिक कर्मचारियों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक भारत के राष्ट्रपति के निर्वाह लागत में परिवर्तन का प्रतिनिधित्व कर सकता है?
उत्तर नहीं, शहरी गैर-शारीरिक कर्मचारियों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक भारत के राष्ट्रपति के निर्वाह लागत में परिवर्तन का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है।
In simple words: नहीं, शहरी गैर-शारीरिक कर्मचारियों के लिए बना उपभोक्ता कीमत सूचकांक राष्ट्रपति की जीवन-निर्वाह लागत को प्रतिबिंबित नहीं कर सकता, क्योंकि दोनों के उपभोग पैटर्न और खर्चों में बहुत बड़ा अंतर होता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न उपभोक्ता समूहों के उपभोग पैटर्न और आय स्तर अलग-अलग होते हैं, इसलिए प्रत्येक समूह के लिए एक विशिष्ट CPI का उपयोग करना आवश्यक है; एक सामान्य CPI सभी के लिए उपयुक्त नहीं होता।

Question 14. नीचे एक औद्योगिक केन्द्र के श्रमिकों द्वारा 1980 एवं 2005 के दौरान निम्न मदों पर प्रति व्यक्ति मासिक व्यय को दर्शाया गया है। इन मदों का भार क्रमशः 75, 10, 5, 6 तथा 4 है। 1980 को आधार मानकर 2005 के लिए जीवन-निर्वाह लागत का एक भारित सूचकांक तैयार कीजिए।

मदवर्ष 1980 में कीमतवर्ष 2005 की कीमत
खाद्य-पदार्थ100200
कपड़े2025
ईंधन एवं बिजली1520
मकान किराया3040
विविध3565

हल

मदव्यय या भार % में Wकीमत (Rs. में)R = \( \cfrac{P_1}{P_0} \times 100 \)WR
वर्ष 1980 में कीमत P0वर्ष 2005 में कीमत P1
खाद्य-पदार्थ75100200\( \cfrac{200}{100} \times 100 = 200 \)\( 75 \times 200 = 15000 \)
कपड़े102025\( \cfrac{25}{20} \times 100 = 125 \)\( 10 \times 125 = 1250 \)
ईंधन एवं बिजली51520\( \cfrac{20}{15} \times 100 = 133.33 \)\( 5 \times 133.33 = 666.65 \)
मकान किराया63040\( \cfrac{40}{30} \times 100 = 133.33 \)\( 6 \times 133.33 = 799.98 \)
विविध43565\( \cfrac{65}{35} \times 100 = 185.71 \)\( 4 \times 185.71 = 742.84 \)
ΣW =100ΣWR =
18459.47

\( CPI=\cfrac { \Sigma wR }{ \Sigma W } =\cfrac { 18459.47 }{ 100 } =184.59 \)
In simple words: वर्ष 1980 को आधार मानकर वर्ष 2005 के लिए औद्योगिक श्रमिकों के जीवन-निर्वाह लागत का भारित सूचकांक 184.59 है, जिसका अर्थ है कि इन 25 वर्षों में श्रमिकों के जीवन-निर्वाह की लागत में 84.59% की वृद्धि हुई है।

🎯 Exam Tip: जीवन-निर्वाह लागत सूचकांक की गणना करते समय, विभिन्न मदों के भार (weights) सही ढंग से निर्धारित करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये भार सूचकांक के अंतिम मूल्य को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं।

Question 15. निम्नलिखित सारणी को ध्यानपूर्वक पढिए एवं अपनी टिप्पणी कीजिए।

उद्योगऔद्योगिक उत्पादन सूचकांक
(आधार 1993-94)
भार % में1996-19972003-2004
सामान्य सूचकांक100130.8189.0
खनन एवं उत्खनन10.73118.2146.9
विनिर्माण79.58133.6196.6
विद्युत10.69122.0172.6

उत्तर उपर्युक्त तालिका से निम्नलिखित बातें प्रतिबिम्बित होती हैं
1. विभिन्न उद्योगों, खनन एवं उत्खनन, विनिर्माण एवं विद्युत की संवृद्धि दरें भिन्न-भिन्न हैं। इनमें विनिर्माण क्षेत्र की संवृद्धि दर सबसे अधिक है, जबकि खनन एवं उत्खनन क्षेत्र की संवृद्धि दर सबसे कम है।
2. विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों को भिन्न-भिन्न भार दिए गए हैं। इनमें सबसे अधिक भार विनिर्माण क्षेत्र को तथा सबसे कम भार विद्युत क्षेत्र को दिया गया है।
3. सामान्य संवृद्धि दर खनन एवं उत्खनन तथा विद्युत क्षेत्र से अधिक है किन्तु विनिर्माण क्षेत्र से कम
In simple words: तालिका दर्शाती है कि 1993-94 को आधार मानकर 1996-97 से 2003-04 तक भारतीय औद्योगिक उत्पादन में विभिन्न क्षेत्रों (विनिर्माण, खनन, विद्युत) की वृद्धि दरें अलग-अलग थीं, जिसमें विनिर्माण की वृद्धि सबसे अधिक और खनन की सबसे कम रही।

🎯 Exam Tip: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की व्याख्या करते समय, प्रत्येक क्षेत्र को दिए गए भार और उनकी संबंधित वृद्धि दरों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये समग्र आर्थिक प्रदर्शन को समझने में मदद करते हैं।

Question 16. अपने परिवार में उपभोग की जाने वाली महत्त्वपूर्ण मदों की सूची बनाने का प्रयास कीजिए।
उत्तर हमारे परिवार में उपभोग की जाने वाली महत्त्वपूर्ण मदों की सूची
1. ईंधन एवं प्रकाश,
2. वस्त्र,
3. खाद्य-पदार्थ,
4. शिक्षा,
5. मकान का किरायी,
6. परिवहन,
7. मनोरंजन,
8. जूते-चप्पल,
9. फर्नीचर,
10. विविध
In simple words: परिवार में उपभोग की महत्वपूर्ण मदों में बुनियादी आवश्यकताएं जैसे खाद्य, वस्त्र, आवास, ईंधन और शिक्षा शामिल होती हैं, साथ ही परिवहन, मनोरंजन और अन्य विविध वस्तुएं भी शामिल होती हैं।

🎯 Exam Tip: यह सूची उपभोक्ता व्यय पैटर्न को समझने और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की संरचना को सीखने के लिए एक व्यावहारिक अभ्यास है, जिसमें विभिन्न मदों को उनके महत्व के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है।

Question 17. यदि एक व्यक्ति का वेतन आधार वर्ष में 4000 प्रतिवर्ष था और उसका वर्तमान वर्ष में वेतन Rs.6000 है। उसके जीवन-स्तर को पहले जैसा ही बनाए रखने के लिए उसके वेतन में कितनी वृद्धि होनी चाहिए, यदि उपभोक्ता कीमत सूचकांक 400 हो।
उतर
वर्तमान वर्ष का CPI = 400
आधार वर्ष का वेतन = 4000
वर्तमान वर्ष का वेतन = 6000
आधार वर्ष का CPI = 100
CPI में वृद्धि = \( \cfrac{(400-100) \times 100}{100} \) %
= \( \cfrac{300 \times 100}{100} \) % \( \implies \) 300%
आधार वर्ष की तुलना में आधार पर समान जीवन-स्तर को कायम रखने के लिए उसके वेतन में 300 प्रतिशत वृद्धि होनी चाहिए।
अतः
उसका वेतन होना चाहिए = Rs.4000 + \( \cfrac{4000 \times 300}{100} \)
= 4000 + Rs.12000
= 16000
वेतन में वृद्धि = Rs.16000 - 6000 = 10000
वेतन में प्रतिशत बढ़ोतरी \( \cfrac { 10000\times 100 }{ 6000 } =166.67 \)%
जीवन-स्तर का समान स्तर कायम रखने हेतु वेतन में 166.67% वृद्धि होनी चाहिए।
In simple words: एक व्यक्ति को अपने जीवन-स्तर को बनाए रखने के लिए, उसके वेतन में 166.67% की वृद्धि होनी चाहिए, क्योंकि उपभोक्ता कीमत सूचकांक में 300% की वृद्धि हुई है, जबकि उसके वेतन में केवल 50% की वृद्धि हुई है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, उपभोक्ता कीमत सूचकांक का उपयोग वास्तविक आय और क्रय शक्ति में परिवर्तनों को मापने के लिए किया जाता है, जो जीवन-स्तर को बनाए रखने के लिए आवश्यक वेतन वृद्धि को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण है।

Question 18. जून 2005 में उपभोक्ता कीमत सूचकांक 125 था। खाद्य सूचकांक 120 तथा अन्य मदीं का सूचकांक 135 था। खाद्य-पदार्थों को दिया जाने वाला भार कुल भार का कितना प्रतिशत है? ।
उत्तर
खाद्य सूचकांक = 120
अन्य मदों का सूचकांक = 135
कुल सूचकांक = 120 + 135 = 255
खाद्य सूचकांक का प्रतिशत = \( \cfrac{\text{खाद्य सूचकांक}}{\text{कुल सूचकांक}} \times 100 \)
= \( \cfrac{120}{255} \times 100\% = 47.06\% \)
In simple words: दिए गए आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों को कुल भार का 47.06% दिया गया था, यह दर्शाता है कि खाद्य मदें उपभोक्ताओं के कुल व्यय का लगभग आधा हिस्सा थीं।

🎯 Exam Tip: CPI में विभिन्न मदों का भार उनके सापेक्षिक महत्व को दर्शाता है; यदि खाद्य पदार्थों का भार अधिक है, तो यह इंगित करता है कि वे उपभोक्ता बजट का एक बड़ा हिस्सा हैं और उनकी कीमतों में बदलाव का समग्र सूचकांक पर अधिक प्रभाव पड़ेगा।

Question 19. किसी शहर में एक मध्यवर्गीय पारिवारिक बजट में जाँच-पड़ताल से निम्नलिखित जानकारी प्राप्त होती है।

मदों का व्ययखाद्य-पदार्थ
35%
ईंधन 10%कपड़ा
20%
किराया
15%
विविध
20%
2004 में कीमत (Rs. में)1500250750300400
1995 में कीमत (Rs. में)1400200500200250

1995 की तुलना में 2004 में निर्वाह सूचकांक का मान क्या होगा?
हल

मदव्यय या भार
% में W
कीमत (Rs. में)R = \( \cfrac{P_1}{P_0} \times 100 \)W \( \times \) R
2004 P11995 Po
खाद्य-पदार्थ3515001400\( \cfrac{1500}{1400} \times 100 = 107.14 \)\( 35 \times 107.14 = 3749.90 \)
ईंधन10250200\( \cfrac{250}{200} \times 100 = 125.00 \)\( 10 \times 125 = 1250.00 \)
कपड़ा20750500\( \cfrac{750}{500} \times 100 = 150.00 \)\( 20 \times 150 = 3000.00 \)
किराया15300200\( \cfrac{300}{200} \times 100 = 150.00 \)\( 15 \times 150 = 2250.00 \)
विविध20400250\( \cfrac{400}{250} \times 100 = 160.00 \)\( 20 \times 160 = 3200.00 \)
ΣW =100ΣWR = 13449.9

उपभोक्ता कीमत सूचकांक = \( \cfrac{\Sigma WR}{\Sigma W} \)
निर्वाह सूचकांक = \( \cfrac{13449.9}{100} = 134.499 \) or 134.50
In simple words: 1995 को आधार मानकर 2004 के लिए मध्यवर्गीय पारिवारिक बजट का निर्वाह सूचकांक 134.50 है, जिसका अर्थ है कि 1995 की तुलना में 2004 में जीवन-निर्वाह लागत में 34.50% की वृद्धि हुई है।

🎯 Exam Tip: निर्वाह सूचकांक की गणना भारित औसत विधि का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है; सुनिश्चित करें कि आप भारों (weights) और कीमत अनुपातों (price relatives) की सही गणना करें।

Question 20. दो सप्ताह तक अपने परिवार के (प्रति इकाई) दैनिक व्यय, खरीदी गई मात्रा तथा दैनिक खरीददारी को अभिलेखित कीजिए। कीमत में आए परिवर्तन आपके परिवार को किस तरह से प्रभावित करते हैं?
उत्तर स्वयं करें ।
In simple words: इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए, छात्रों को अपने परिवार के दैनिक खरीददारी के रिकॉर्ड को ट्रैक करना होगा, जिसमें खरीदी गई वस्तुओं की मात्रा, कीमतें और कुल व्यय शामिल हैं, और फिर यह विश्लेषण करना होगा कि कीमतों में बदलाव ने उनके परिवार के बजट को कैसे प्रभावित किया।

🎯 Exam Tip: यह एक व्यावहारिक प्रश्न है जो छात्रों को सूचकांकों के वास्तविक जीवन के अनुप्रयोग को समझने में मदद करता है; व्यवस्थित रूप से डेटा इकट्ठा करना और तुलनात्मक विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है।

Question 21. निम्नलिखित आँकड़े दिए गए हैं।

वर्षऔद्योगिक श्रमिकों का CPI
(1982 = 100)
नगरीय गैर-शारीरिक कर्मचारियों का CPI
(1984-85 = 100)
कृषि श्रमिक का CPI
(1986-87 = 100)
थोक कीमत सूचकांक
(1993-94 = 100)
1995-96313257234121.6
1996-97342283256127.2
1997-98366302264132.8
1998-99414337293140.7
1999-2000428352306145.3
2000-01444352306155.7
2001-02463390309161.3
2002-03482405319166.8
2003-04500420331175.9

रस्रोत- आर्थिक सर्वेक्षण, भारत सरकार, 2004-2005.
(क) विभिन्न सूचकांकों को प्रयुक्त करते हुए मुद्रास्फीति की दर का परिकलन कीजिए।
(ख) सूचकांकों के सापेक्षिक मानों पर टिप्पणी कीजिए।
(ग) क्या ये तुलना योग्य हैं?
उत्तर
(क) (i)

वर्षऔद्योगिक श्रमिकों का सूचकांक
1982 = 100
मुद्रा स्फीति की दर % में
\( \cfrac{X_t - X_{t-1}}{X_{t-1}} \times 100 \)
1995-96313\( \cfrac{(313-100)}{100} \times 100 = 213 \)
1996-97342\( \cfrac{(342-100)}{100} \times 100 = 242 \)
1997-98366\( \cfrac{(366-100)}{100} \times 100 = 266 \)
1998-99414\( \cfrac{(414-100)}{100} \times 100 = 314 \)
1999-2000428\( \cfrac{(428-100)}{100} \times 100 = 328 \)
2000-01444\( \cfrac{(444-100)}{100} \times 100 = 344 \)
2001-02463\( \cfrac{(463-100)}{100} \times 100 = 363 \)
2002-03482\( \cfrac{(482-100)}{100} \times 100 = 382 \)
2003-04500\( \cfrac{(500-100)}{100} \times 100 = 400 \)

(ii)
वर्षनगरीय, गैर-शारीरिक कर्मचारियों का CPI
1984-85 = 100
मुद्रा स्फीति की दर % में
\( \cfrac{X_t - X_{t-1}}{X_{t-1}} \times 100 \)
1995-96257\( \cfrac{(257 - 100)}{100} \times 100 = 157 \)
1996-97283\( \cfrac{(283-100)}{100} \times 100 = 183 \)
1997-98302\( \cfrac{(302-100)}{100} \times 100 = 202 \)
1998-99337\( \cfrac{(337-100)}{100} \times 100 = 237 \)
1999-2000352\( \cfrac{(352-100)}{100} \times 100 = 252 \)
2000-01352\( \cfrac{(352-100)}{100} \times 100 = 252 \)
2001-02390\( \cfrac{(390-100)}{100} \times 100 = 290 \)
2002-03405\( \cfrac{(405-100)}{100} \times 100 = 305 \)
2003-04420\( \cfrac{(420-100)}{100} \times 100 = 320 \)

(iii)
वर्षकृषि श्रमिक का CPI
1986 - 87 = 100
मुद्रा स्फीति की दर % में
\( \cfrac{X_t - X_{t-1}}{X_{t-1}} \times 100 \)
1995-96234\( \cfrac{(234-100)}{100} \times 100 = 134 \)
1996-97256\( \cfrac{(256-100)}{100} \times 100 = 156 \)
1997-98264\( \cfrac{(264-100)}{100} \times 100 = 164 \)
1998-99293\( \cfrac{(293 - 100)}{100} \times 100 = 193 \)
1999-2000306\( \cfrac{(306-100)}{100} \times 100 = 206 \)
2000-01306\( \cfrac{(306-100)}{100} \times 100 = 206 \)
2001-02309\( \cfrac{(309-100)}{100} \times 100 = 209 \)
2002-03319\( \cfrac{(319-100)}{100} \times 100 = 219 \)
2003-04331\( \cfrac{(331-100)}{100} \times 100 = 231 \)

(iv)
वर्षथोक मूल्य सूचकांक
1993-94 = 100
मुद्रा स्फीति (% में)
\( \cfrac{X_t - X_{t-1}}{X_{t-1}} \times 100 \)
1995-96121.6\( \cfrac{(121.6-100)}{100} \times 100 = 21.6 \)
1996-97127.2\( \cfrac{(127.2-100)}{100} \times 100 = 27.2 \)
1997-98132.8\( \cfrac{(132.8-100)}{100} \times 100 = 32.8 \)
1998-99140.7\( \cfrac{(140.7-100)}{100} \times 100 = 40.7 \)
1999-2000145.3\( \cfrac{(145.3-100)}{100} \times 100 = 45.3 \)
2000-01155.7\( \cfrac{(155.7-100)}{100} \times 100 = 55.7 \)
2001-02161.3\( \cfrac{(161.3-100)}{100} \times 100 = 61.3 \)
2002-03166.8\( \cfrac{(166.8-100)}{100} \times 100 = 66.8 \)
2003-04175.9\( \cfrac{(175.9-100)}{100} \times 100 = 75.9 \)

(ख) औद्योगिक श्रमिकों के लिए आधार वर्ष 1982 के साथ उपभोक्ता कीमत सूचकांक सबसे अधिक है। थोक मूल्य सूचकांक पूरी अवधि में सबसे कम है। (1993-96 से 2003-04 तक)
(ग) तालिका में दिए गए सूचकांक निम्नलिखित कारणों से तुलनात्मक नहीं हैं
1. आधार वर्ष अलग-अलग हैं।
2. विभिन्न सूचकांकों की मदें भिन्न हो सकती हैं।
3. अलग-अलग सूचकांकों के लिए विभिन्न मदों को भिन्न भार प्रदान किए जा सकते हैं।
In simple words: तालिका विभिन्न उपभोक्ता समूहों और थोक बाजारों के लिए अलग-अलग मुद्रास्फीति दरें दर्शाती है, जिसमें औद्योगिक श्रमिकों के लिए मुद्रास्फीति सबसे अधिक और थोक मूल्य सूचकांक के लिए सबसे कम है, लेकिन इन सूचकांकों की तुलना सीधे नहीं की जा सकती क्योंकि उनके आधार वर्ष, मदें और भार अलग-अलग हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न सूचकांकों की तुलना करते समय, उनके आधार वर्ष, शामिल मदों और भारण विधियों में अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये कारक उनकी प्रत्यक्ष तुलना को बाधित कर सकते हैं और गलत निष्कर्षों की ओर ले जा सकते हैं।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

Question 1. “कीमत क्य सूचकांक आधार-वर्ष की तुलना में किसी अन्य समय में कीमतों की औसत ऊँचाई को प्रकट करने वाली संख्या है।” यह परिभाषा दी है
(क) प्रो० चैण्डलर ने
(ख) प्रो० बाउले ने
(ग) किनले ने ।
(घ) हार्पर ने
Answer: (क) प्रो० चैण्डलर ने
In simple words: कीमत सूचकांक की यह परिभाषा प्रो. चैण्डलर ने दी है, जो इसे आधार वर्ष की तुलना में किसी अन्य समय में कीमतों की औसत वृद्धि को दर्शाने वाली संख्या के रूप में वर्णित करती है।

🎯 Exam Tip: सूचकांक की परिभाषाएं अक्सर उनके मूल उद्देश्य और माप विधि को स्पष्ट करती हैं, इसलिए विभिन्न अर्थशास्त्रियों द्वारा दी गई परिभाषाओं को याद रखना महत्वपूर्ण है।

Question 2. सूचकांक की विशेषता नहीं है
(क) सूचकांक मुद्रा के मूल्य का निरपेक्ष माप न होकर सापेक्ष माप है।
(ख) सूचकांकों को प्रतिशतों में व्यक्त नहीं किया जाता है।
(ग) यह एक विशेष प्रकार का माध्य ही है।
(घ) सूचकांक आर्थिक पहलू के उच्चावचनों को संख्यात्मक रूप में ही माप सकता है।
Answer: (ख) सूचकांकों को प्रतिशतों में व्यक्त नहीं किया जाता है।
In simple words: सूचकांक की गलत विशेषता यह है कि उन्हें प्रतिशतों में व्यक्त नहीं किया जाता, जबकि वास्तव में सूचकांक हमेशा आधार वर्ष के सापेक्ष प्रतिशत परिवर्तन को ही दर्शाते हैं।

🎯 Exam Tip: सूचकांकों की विशेषताओं को ध्यान से समझें; वे सापेक्ष माप होते हैं, प्रतिशतों में व्यक्त किए जाते हैं, और आर्थिक प्रवृत्तियों का संख्यात्मक माप प्रदान करते हैं।

Question 3. “सूचकांक की श्रेणी एक ऐसी श्रेणी होती है, जो अपने झुकाव तथा उच्चावचनों द्वारा जिस परिमाण से संबंधित है, में होने वाले परिवर्तनों को स्पष्ट करती है।”
(क) डॉ० बावले ने
(ख) चैण्डलर ने
(ग) होरेस सेक्राइस्ट ने
(घ) किनले ने
Answer: (ग) होरेस सेक्राइस्ट ने
In simple words: सूचकांक की यह परिभाषा होरेस सेक्राइस्ट ने दी है, जो बताती है कि सूचकांक समय के साथ किसी मात्रा में होने वाले परिवर्तनों और प्रवृत्तियों को उजागर करने वाली एक संख्यात्मक श्रृंखला है।

🎯 Exam Tip: यह परिभाषा सूचकांकों के गतिशील स्वरूप पर जोर देती है, जो आर्थिक प्रवृत्तियों और चक्रीय परिवर्तनों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

Question 4. श्रृंखला मूल्यानुपात
(क) \( \cfrac{\text{चालू वर्ष का मूल्य}}{\text{आधार-वर्ष का मूल्य}} \times 100 \)
(ख) \( \cfrac{\text{आधार-वर्ष का मूल्य}}{\text{चालू वर्ष का मूल्य}} \times 100 \)
(ग) \( \cfrac{\text{चालू वर्ष का मूल्य}}{\text{पिछलेवर्ष का मूल्य}} \times 100 \)
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ग) \( \cfrac{\text{चालू वर्ष का मूल्य}}{\text{पिछलेवर्ष का मूल्य}} \times 100 \)
In simple words: श्रृंखला मूल्यानुपात (Chain Base Link Relative) वह सूचकांक है जो वर्तमान वर्ष के मूल्य को पिछले वर्ष के मूल्य के सापेक्ष प्रतिशत के रूप में मापता है, जिससे लगातार वर्षों के बीच परिवर्तनों को ट्रैक किया जा सके।

🎯 Exam Tip: श्रृंखला मूल्यानुपात की गणना में, प्रत्येक वर्ष के मूल्य की तुलना उसके ठीक पिछले वर्ष के मूल्य से की जाती है, जिससे लगातार अवधियों में परिवर्तनों की अधिक सटीक तस्वीर मिलती है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

Question 1. सूचकांक क्या है?
उत्तर सूचकांक सम्बन्धित चरों के समूह के परिमाण में परिवर्तनों को मापने की एक सांख्यिकी विधि है।
In simple words: सूचकांक एक सांख्यिकीय उपकरण है जो समय या स्थान के साथ संबंधित चर (जैसे कीमत या मात्रा) के समूह में होने वाले औसत परिवर्तनों को मापता है।

🎯 Exam Tip: सूचकांक एक सापेक्ष माप होता है, जो आधार अवधि के सापेक्ष वर्तमान अवधि में होने वाले प्रतिशत परिवर्तनों को दर्शाता है।

Question 2. सूचकांकों को किस रूप में व्यक्त किया जाता है?
उत्तर सूचकांकों को प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है।
In simple words: सूचकांकों को हमेशा प्रतिशत के रूप में दर्शाया जाता है, जिससे विभिन्न अवधियों या स्थानों के बीच तुलना करना आसान हो जाता है।

🎯 Exam Tip: प्रतिशत के रूप में व्यक्त होने के कारण, सूचकांक विभिन्न आर्थिक संकेतकों में सापेक्ष परिवर्तन को स्पष्ट रूप से समझने में मदद करते हैं।

Question 3. आधार-वर्ष क्या है? उत्तर दो वर्षों में से जिस वर्ष को आधार मानकर तुलना की जाती है, उसे आधार-वर्ष कहते हैं।
In simple words: आधार-वर्ष वह प्रारंभिक संदर्भ वर्ष होता है जिसके मूल्यों या मात्राओं की तुलना वर्तमान वर्ष के मूल्यों या मात्राओं से की जाती है।

🎯 Exam Tip: आधार-वर्ष का चुनाव करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि वह एक सामान्य और स्थिर वर्ष हो ताकि तुलना के परिणाम विश्वसनीय हों।

Question 4. कीमत सूचकांक का क्या उपयोग है?
उत्तर कीमत सूचकांक कुछ वस्तुओं की कीमतों की माप करता है जिससे उनकी तुलना सम्भव हो जाती
In simple words: कीमत सूचकांक का उपयोग समय के साथ वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में होने वाले औसत परिवर्तनों को मापने के लिए किया जाता है, जिससे मुद्रास्फीति और क्रय शक्ति का आकलन करने में मदद मिलती है।

🎯 Exam Tip: कीमत सूचकांक आर्थिक नीतियों के निर्माण, वेतन निर्धारण और उपभोक्ता की क्रय शक्ति के विश्लेषण के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है।

Question 5. परिमाणात्मक सूचकांक क्या मापते हैं? उत्तर-परिमाणात्मक सूचकांक उत्पादन की भौतिक मात्रा, निर्माण तथा रोजगार में परिवर्तन को मापते हैं। प्रश्न 6. उत्पार्दन सूचकांक किसका सूचक है?
उत्तर उत्पादन सूचकांक अर्थव्यवस्था में उत्पादन के स्तर का सूचक होता है।
In simple words: परिमाणात्मक सूचकांक, कीमतों के बजाय, उत्पादन की मात्रा, निर्माण गतिविधि और रोजगार के स्तर में समय के साथ होने वाले परिवर्तनों को मापते हैं।

🎯 Exam Tip: मात्रा सूचकांकों का उपयोग आर्थिक विकास, औद्योगिक प्रगति और किसी देश की उत्पादन क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है।

Question 6. उत्पार्दन सूचकांक किसका सूचक है?
उत्तर उत्पादन सूचकांक अर्थव्यवस्था में उत्पादन के स्तर का सूचक होता है।
In simple words: उत्पादन सूचकांक किसी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं के कुल उत्पादन के स्तर में समय के साथ हुए परिवर्तनों को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: उत्पादन सूचकांक आर्थिक विकास और औद्योगिक गतिविधियों की गति को मापने का एक महत्वपूर्ण पैमाना है, जिसका उपयोग योजना और नीति निर्माण में किया जाता है।

Question 7. एक सरल समूहित कीमत सूचकांक का सूत्र बताइए ।
उत्तर
\( { p }_{ 01 }=\cfrac { { \Sigma }p_{ 1 } }{ { \Sigma p }_{ 0 } } \times 100 \)
In simple words: सरल समूहित कीमत सूचकांक का सूत्र वर्तमान वर्ष की सभी वस्तुओं की कीमतों के योग को आधार वर्ष की सभी वस्तुओं की कीमतों के योग से विभाजित करके 100 से गुणा करना है।

🎯 Exam Tip: यह सबसे सरल सूचकांक विधि है, लेकिन यह विभिन्न वस्तुओं के सापेक्ष महत्व को ध्यान में नहीं रखती, जिससे इसके परिणाम सीमित उपयोगी होते हैं।

Question 8. एक भारित समूहित कीमत सूचकांक का सूत्र बताइए।
उत्तर \( { p}_{ 01 }=\cfrac { { \Sigma }p_{ 1 }{q}_{ 1 } }{ { \Sigma p }_{ 2 }{q}_{ 2 } } \times 100 \)
In simple words: भारित समूहित कीमत सूचकांक का सूत्र प्रत्येक वस्तु की वर्तमान वर्ष की कीमत को उसकी मात्रा से गुणा करके योग करने और इसे आधार वर्ष की कीमत को उसकी मात्रा से गुणा करके योग करने से विभाजित करके 100 से गुणा करना है।

🎯 Exam Tip: भारित सूचकांक में मात्राओं का उपयोग भार के रूप में किया जाता है; लास्पीयर और पाशे के सूचकांक इसी श्रेणी में आते हैं, जो मात्राओं को आधार वर्ष या वर्तमान वर्ष से संबंधित करते हैं।

Question 9. मूल्यानुपातों के भारित सूचकांक का सूत्र बताइए।
उत्तर
\( { p }_{ 01 }=\cfrac { \Sigma W(\cfrac { {P}_{ 1 } }{ { P }_{ 2 } } )\times 100 }{ \Sigma w } \)
In simple words: मूल्यानुपातों के भारित सूचकांक का सूत्र प्रत्येक वस्तु के मूल्य अनुपात (वर्तमान कीमत/आधार कीमत * 100) को उसके भार (W) से गुणा करके योग करना और फिर इस योग को कुल भार से विभाजित करना है।

🎯 Exam Tip: यह विधि प्रत्येक वस्तु के सापेक्ष मूल्य परिवर्तन को उसके महत्व के अनुसार भारित करती है, जिससे सूचकांक अधिक सटीक और वास्तविक आर्थिक स्थिति को दर्शाने में सक्षम होता है।

Question 10. उपभोक्ता कीमत सूचकांक क्या मापता है?
उत्तर यह फुटकर कीमतों में औसत परिवर्तन को मापता है।
In simple words: उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) सामान्य उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की खुदरा कीमतों में होने वाले औसत परिवर्तनों को मापता है।

🎯 Exam Tip: CPI का उपयोग मुद्रास्फीति, जीवन-निर्वाह लागत में परिवर्तन, मजदूरी और पेंशन के समायोजन और सरकार की आर्थिक नीतियों के आकलन के लिए किया जाता है।

Question 11. उपभोक्ता कीमत सूचकांक बनाने की क्या उपयोगिता है?
उत्तर उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) मजदूरी समझौता, आय-नीति, कीमत-नीति, किराया नियन्त्रण, कराधान तथा सामान्य आर्थिक नीतियों के निर्माण में सहायक होते हैं।
In simple words: उपभोक्ता कीमत सूचकांक का उपयोग मजदूरी और आय नीतियों के निर्धारण, किराया नियंत्रण, कराधान के समायोजन और सामान्य आर्थिक नीतियों की योजना बनाने में मदद करता है, जिससे यह व्यक्तिगत और व्यापक आर्थिक निर्णय लेने के लिए महत्वपूर्ण है।

🎯 Exam Tip: CPI एक महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक है जो सरकार और व्यवसायों को मूल्य स्थिरता बनाए रखने और उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति की रक्षा करने के लिए सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।

Question 12. थोक कीमत सूचकांक का प्रयोग सामान्यतः किसलिए किया जाता है?
उत्तर थोक कीमत सूचकांक (WPI) का प्रयोग सामान्य रूप से मुद्रा स्फीति को मापने के लिए किया जाता है।
In simple words: थोक कीमत सूचकांक (WPI) का मुख्य रूप से उपयोग अर्थव्यवस्था में वस्तुओं के थोक मूल्य स्तर में होने वाले परिवर्तनों को ट्रैक करके समग्र मुद्रास्फीति दर को मापने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: WPI आर्थिक विश्लेषण में एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जो उत्पादकों और थोक विक्रेताओं के स्तर पर मूल्य दबावों को दर्शाता है, और मौद्रिक नीति निर्णयों को प्रभावित करता है।

Atilaghu Uttareey Prashn

 

Question 13. मुद्रा की क्रय शक्ति एवं वास्तविक मजदूरी के परिकलन के लिए किस सूचकांक का प्रया किया जाता है?
Answer: उपभोक्ता कीमत सूचकांक ।
In simple words: This index measures how much the purchasing power of money and real wages change.

🎯 Exam Tip: Understanding the purpose of different index numbers is crucial for applications in economics.

 

Question 14. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की क्या उपयोगिता है?
Answer: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक हमें औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन में परिवर्तन के बारे में परिमाणात्मक अंक प्रदान करता है।
In simple words: This index provides quantitative data on changes in industrial output, showing growth or decline in the industrial sector.

🎯 Exam Tip: Knowing the utility of specialized index numbers helps in analyzing specific economic sectors.

 

Question 15. कृषि उत्पादन सूचकांक का क्या उपयोग है।
Answer: कृषि उत्पादन सूचकांक हमें कृषि क्षेत्र के निष्पादन के बारे में बताते हैं।
In simple words: This index indicates the performance of the agricultural sector by tracking changes in agricultural output.

🎯 Exam Tip: Sector-specific index numbers are important for evaluating the health and progress of different parts of the economy.

 

Question 16. सेंसेक्स क्या है?
Answer: सेंसेक्स वह सूचक है जो कि भारतीय स्टॉक बाजार में होने वाले परिवर्तनों को दर्शाता है। इसका आधार-वर्ष 1978-79 है।
In simple words: Sensex is an indicator reflecting changes in the Indian stock market, with its base year being 1978-79.

🎯 Exam Tip: Be aware of key economic indicators and their base years as they are frequently tested concepts.

 

Question 17. सूचकांकों की दो विशेषताएँ बताइए ।
Answer:1. सूचकांक मुद्रा के मूल्य का निरपेक्ष माप न होकर सापेक्ष माप है। 2. सूचकांकों को प्रतिशतों में व्यक्त किया जाता है।
In simple words: Index numbers are relative measures of change, not absolute, and are always expressed as percentages.

🎯 Exam Tip: Core characteristics of index numbers are fundamental and often asked in exams.

 

Question 18. सूचकांकों के दो लाभ बताइए ।
Answer:1. सामान्य मूल्य-स्तर में होने वाले परिवर्तनों को मापने के लिए सूचकांकों का प्रयोग किया जाता 2. सूचकांक वास्तविक आय में होने वाले परिवर्तन का सूचक होता है।
In simple words: Index numbers help measure changes in the general price level and indicate shifts in real income.

🎯 Exam Tip: Listing benefits of index numbers requires a clear understanding of their economic utility.

 

Question 19. सूचकांकों की दो सीमाएँ बताइए ।
Answer:1. सूचकांके निरपेक्ष परिवर्तनों की मापों की अपेक्षा सापेक्ष परिवर्तनों की ही माप करता है। 2. विभिन्न सूचकांक अलग-अलग उद्देश्यों को पूरा करते हैं।
In simple words: Index numbers only provide relative measures of change, not absolute, and different indexes serve distinct purposes, making direct comparisons sometimes misleading.

🎯 Exam Tip: Limitations of index numbers are as important as their uses for a balanced economic understanding.

 

Question 20. फिशर का आदर्श सूचकांक का सूत्र बताइए ।
Answer: Fisher's Ideal index \( \sqrt { \cfrac { { \Sigma p }_{ 1 }{ q }_{ 0 } }{ \Sigma { p }_{ 0 }{ q }_{ 0 } } \times \cfrac { { \Sigma { p }_{ 1 } }{ q }_{ 1 } }{ \Sigma { p }_{ 0 }{ q }_{ 1 }}} \times 100 \)
In simple words: Fisher's Ideal Index combines Laspeyre's and Paasche's formulas geometrically, providing a balanced measure that accounts for both base and current year quantities.

🎯 Exam Tip: Memorizing the formula for Fisher's Ideal Index is essential, as it's considered a standard for its desirable properties.

 

Laghu Uttareey Prashn

 

Question 1. सूचकांकों की विशेषताएँ बताइए ।
Answer: सूचकांकों की निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं
1. सूचकांक मुद्रा के मूल्य का निरपेक्ष माप न होकर सापेक्ष माप है।
2. सूचकांकों को प्रतिशतों में व्यक्त किया जाता है।
3. इनका प्रयोग ऐसे तथ्यों के परिवर्तनों को मापने के लिए किया जाता है, जिन्हें प्रत्यक्ष माप से नहीं मापा जा सकता।
4. यह एक विशेष प्रकार का माध्य ही है।
5. सूचकांक आर्थिक पहलू के उच्चावचों को संख्यात्मक रूप में ही माप सकता है।
In simple words: Index numbers are relative measures, expressed as percentages, used to track changes in complex economic variables that cannot be directly measured, serving as a specific type of average to quantify economic fluctuations.

🎯 Exam Tip: When asked for characteristics, ensure each point is distinct and clearly explains a fundamental property of index numbers.

 

Question 2. सूचकांकों के प्रमुख लाभ (उपयोगिता) बताइए ।
Answer: सूचकांकों के कुछ महत्त्वपूर्ण लाभ निम्नलिखित हैं-
1. सूचकांकों द्वारा समय-समय पर कीमत स्तर में होने वाले परिवर्तन या मुद्रा के मूल्य की क्रय शक्ति में होने वाले परिवर्तन को मापा जा सकता है।
2. सूचकांकों की सहायता से समाज में जीवन-स्तर के परिवर्तन का ज्ञान होता है। ये वास्तविक आय में परिवर्तन के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।
3. इनकी सहायता से वेतन-भत्तों में परिवर्तन करके वास्तविक आय को स्थिर रखने का प्रयास किया जाता है।
4. व्यापारी व उत्पादक कीमत स्तर के परिवर्तन के अनुसार ही अपने उत्पादन तथा व्यापार की योजनाएँ तैयार करते हैं।
5. आर्थिक स्थिति को ज्ञान प्राप्त करके ही आर्थिक नीतियों का निर्धारण किया जाता है।
6. सूचकांकों के आधार पर ही सरकार मौद्रिक व राजकोषीय नीति का प्रारूप तैयार करती है।
In simple words: Index numbers are vital economic tools used to measure price level changes, assess living standards, adjust wages, aid business planning, and inform government economic, monetary, and fiscal policies.

🎯 Exam Tip: Focus on the practical applications and policy implications of index numbers to score well on questions about their utility.

 

Question 3. 'फिशर का सूचकांक एक आदर्श सूचकांक है।' इस कथन के समर्थन में अपने तर्क दीजिए।
Answer: 'फिशर का सूचकांक एक आदर्श सूचकांक है। इसके पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं
1. यह परिवर्तनशील भारों पर आधारित है।
2. इसमें आधार-वर्ष व चालू वर्ष दोनों की मात्राओं तथा मूल्यों को शामिल किया जाता है।
3. यह गुणोत्तर माध्य पर आधारित है।
4. यह 'समय व्युत्क्रम परीक्षण' तथा 'तत्त्व व्युत्क्रम परीक्षण' दोनों को पूरा करता है।
In simple words: Fisher's Index is considered ideal because it uses varying weights, incorporates both base and current year quantities and prices, uses a geometric mean, and satisfies both time and factor reversal tests.

🎯 Exam Tip: Clearly state the reasons why Fisher's index is preferred, focusing on its mathematical properties and economic relevance.

 

Question 4. सूचकांक कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: उद्देश्य के आधार पर सूचकांकों को दो भागों में बाँटा जा सकता है
1. थोक मूल्य सूचकांक तथा
2. जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक ।
1. **थोक मूल्य सूचकांक-** ये सूचकांक थोक मूल्यों के परिवर्तनों को प्रकट करने के लिए बनाए जाते हैं। इसमें किसी भी सामान्य वर्ष को आधार मानकर किसी भी अन्य चालू अवधि या अवधियों के मूल्यों में परिवर्तनों का अध्ययन किया जाता है। कुछ प्रतिनिधि वस्तुओं को चुनकर उनके थोक मूल्य लिए जाते हैं, आधार-वर्ष के मूल्यों को 100 मानकर चालू-वर्ष या वर्षों के मूल्यानुपात (Price Relatives) निकाले जाते हैं तथा उनका माध्य ज्ञात किया जाता है। औसत मूल्यानुपात में परिवर्तन सामान्य मूल्य-स्तर में परिवर्तन को प्रदर्शित करते हैं।
2. **जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक-** जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक किसी स्थान विशेष पर वर्ग विशेष के व्यक्तियों के निर्वाह व्यय में होने वाले परिवर्तनों की दिशा व मात्रा को प्रकट करते हैं। अतः इस सूचकांक को बनाने में उस विशिष्ट वर्ग द्वारा प्रयोग की जाने वाली प्रतिनिधि वस्तुओं को लेते हैं तथा उने सही फुटकर मूल्य ज्ञात करते हैं। विभिन्न वस्तुओं को उनके जीवन-निर्वाह में महत्त्व के अनुसार उचित भारांकन भी किया जाता है।
In simple words: Based on their purpose, index numbers are broadly classified into Wholesale Price Index (WPI), which tracks wholesale price changes, and Cost of Living Index (CLI), which measures changes in the cost of living for a specific group.

🎯 Exam Tip: Classifying index numbers by their primary objective helps organize their study and application.

 

Question 5. सूचकांक की रचना करते समय किन-किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
Answer: सूचकांक की रचना करते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए
1. सूचकांक का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए।
2. सूचकांक के लिए मदों का चयन सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए ताकि ये उनका प्रतिनिधित्व कर सकें ।
3. आधार-वर्ष एक सामान्य वर्ष होना चाहिए और इसे नियमित रूप से अद्यतन किया जाना चाहिए।
4. उद्देश्य के अनुरूप सूत्र को चयन किया जाना चाहिए।
5. आँकड़ों के संग्रह में उचित सावधानी बरती जानी चाहिए।
In simple words: When constructing an index number, it's crucial to define its purpose, carefully select representative items, choose a normal base year that is regularly updated, pick an appropriate formula, and collect data meticulously.

🎯 Exam Tip: This question tests your understanding of the practical considerations in index number construction; elaborate on each point with a brief explanation.

 

Question 6. संवेदी सूचकांक (Sensex) क्या है?
Answer: संवेदी सूचकांक (Sensex) वह सूचक है जो कि भारतीय स्टॉक बाजार में होने वाले परिवर्तनों को दर्शाता है। यह मुम्बई स्टॉक एक्सचेंज संवेदी सूचकांक का संक्षिप्त रूप है। इसका आधार वर्ष 1978-79 है। संवेदी सूचकांक का मान इस अवधि के सन्दर्भ में होता है। इसके अन्तर्गत 30 स्टॉक हैं जो अर्थव्यवस्था . के 13 क्षेत्रकों का प्रतिनिधित्व करते हैं। संवेदी सूचकांक का ऊपर चढ़ना यह बताता है कि अर्थव्यवस्था की दशा अच्छी है, बाजार ठीक चल रहा है और निवेशकों के लाभ बढ़ रहे हैं। इसके विपरीत, सूचकांक का नीचे आना शेयर धारकों की हानि का सबब बनता है।
In simple words: Sensex is a stock market index of the Bombay Stock Exchange (BSE), representing the performance of 30 major stocks across 13 sectors of the Indian economy, with a base year of 1978-79; its upward or downward movement indicates the overall health of the economy and investor sentiment.

🎯 Exam Tip: Be precise with the definition, base year, and the number of stocks/sectors represented by Sensex. Its interpretation (up/down) is also key.

 

Question 7. फिशर का आदर्श सूचकांक 'समय उत्क्राम्यता परीक्षण पर कैसे खरा उतरता है?
Answer: समय उत्क्राम्यता परीक्षण के अनुसार यदि आधार-वर्ष के आधार पर प्रचलित वर्ष का सूचकांक (Poi) निकाला जाए और फिर प्रचलित वर्ष के आधार पर प्रचलित वर्ष का सूचकांक (Po) ज्ञात किया जाए तो ये दोनों एक-दूसरे के व्युत्क्रम होंगे
अर्थात् इन दोनों का गुणनफल 1 होगा। सूत्रानुसार,
\( P_{01} = \cfrac{1}{P_{10}} \)
या
\( P_{01} \times P_{10} = 1 \)
फिशर का आदर्श सूचकांक इस परीक्षण को पूरा करता है-
\( P_{01} = \sqrt{\cfrac{\Sigma P_1 q_0}{\Sigma P_0 q_0} \times \cfrac{\Sigma P_1 q_1}{\Sigma P_0 q_1}} \)
\( P_{10} = \sqrt{\cfrac{\Sigma P_0 q_1}{\Sigma P_1 q_1} \times \cfrac{\Sigma P_0 q_0}{\Sigma P_1 q_0}} \)
\( P_{01} \times P_{10} = \sqrt{\cfrac{\Sigma P_1 q_0}{\Sigma P_0 q_0} \times \cfrac{\Sigma P_1 q_1}{\Sigma P_0 q_1} \times \cfrac{\Sigma P_0 q_1}{\Sigma P_1 q_1} \times \cfrac{\Sigma P_0 q_0}{\Sigma P_1 q_0}} \)
In simple words: Fisher's Ideal Index passes the Time Reversal Test, meaning if the base and current periods are swapped, the new index number is the reciprocal of the original, ensuring consistency over time.

🎯 Exam Tip: Understanding the time reversal test and how Fisher's index satisfies it requires knowing the concept of swapping base and current periods.

 

Question 8. फिशर का आदर्श सूचकांक 'तत्त्व उत्क्राम्यता परीक्षण पर कैसे खरा उतरता है?
Answer: तत्त्व क्राम्यता परीक्षण-इस परीक्षण के अनुसार, यदि 'मूल्य' के स्थान पर 'मात्रा' और 'मात्रा के स्थान पर ‘मूल्य' रखकर सूचकांक (901) तैयार किया जाए तो उसका और मूल्य सूचकांक poi का गुणनफल चालू वर्ष के कुल मूल्य (Ep191) और आधार-वर्ष के कुल मूल्य (Epoqo) के अनुपात के बराबर होना चाहिए।
सूत्रानुसार,
\( P_{01} \times Q_{01} = \cfrac{\Sigma P_1 q_1}{\Sigma P_0 q_0} \)
फिशर का आदर्श सूत्र तत्त्व उत्क्राम्यता परीक्षा पर भी पूरा उतरता है।
\( P_{01} = \sqrt{\cfrac{\Sigma P_1 q_0}{\Sigma P_0 q_0} \times \cfrac{\Sigma P_1 q_1}{\Sigma P_0 q_1}} \)
\( Q_{01} = \sqrt{\cfrac{\Sigma q_1 P_0}{\Sigma q_0 P_0} \times \cfrac{\Sigma q_1 P_1}{\Sigma q_0 P_1}} \)
\( P_{01} \times Q_{01} = \sqrt{\cfrac{\Sigma P_1 q_0}{\Sigma P_0 q_0} \times \cfrac{\Sigma P_1 q_1}{\Sigma P_0 q_1} \times \cfrac{\Sigma q_1 P_0}{\Sigma q_0 P_0} \times \cfrac{\Sigma q_1 P_1}{\Sigma q_0 P_1}} \)
\( = \sqrt{\cfrac{(\Sigma P_1 q_1)^2}{(\Sigma P_0 q_0)^2}} \)
\( = \cfrac{\Sigma P_1 q_1}{\Sigma P_0 q_0} \)
In simple words: Fisher's Ideal Index satisfies the Factor Reversal Test, meaning that when the price index and quantity index for the same period are multiplied, the result equals the ratio of the total value in the current year to the total value in the base year.

🎯 Exam Tip: Mastering both Time and Factor Reversal Tests, along with their mathematical proof, is crucial for demonstrating a deep understanding of index number theory.

 

Deergh Uttareey Prashn

 

Question 1. सूचकांक क्या है? इनकी उपयोगिता तथा सीमाओं का वर्णन कीजिए।
Answer:
**सूचकांक : अर्थ एवं परिभाषाएँ**
समाज में वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमतों में सदैव परिवर्तन होते रहते हैं। वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में परिवर्तन होने के कारण मुद्रा का मूल्य भी परिवर्तित होता रहता है, जिससे समाज का प्रत्येक वर्ग प्रभावित होता है, फलस्वरूप कीमत-स्तर, उपभोग, जनसंख्या, बचत, निवेश, राष्ट्रीय आय, आयात-निर्यात, मजदूरी, ब्याज, किराया व लगान आदि चरों में सदैव परिवर्तन होते रहते हैं। अतः मुद्रा-मूल्य में हुए परिवर्तनों का माप करना व्यावहारिक दृष्टि से अत्यधिक महत्त्वपूर्ण व उपयोगी है। इन परिवर्तनों को निरपेक्ष रूप से मापने का कोई साधन नहीं है; अतः इनको सापेक्ष माप लिया जाता है। सूचकांक विशिष्ट प्रकार के सापेक्ष माप होते हैं, जिनके आधार पर समंकों की उचित एवं स्पष्ट तुलना की जा सकती है।
**सूचकांकों की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं**
1. **चैण्डलर के अनुसार**-“कीमत का सूचकांक आधार-वर्ष की तुलना में किसी अन्य समय में कीमतों की औसत ऊँचाई को प्रकट करने वाली संख्या है।”
2. **डॉ० बाउले के शब्दों में**- “सूचकांक की श्रेणी एक ऐसी श्रेणी होती है, जो अपने झुकाव तथा उच्चावचनों द्वारा जिस परिमाण से संबंधित है, में होने वाले परिवर्तनों को स्पष्ट करती है।”
3. **किनले के शब्दों में**- “सूचकांक वह अंक है, जो किसी पूर्व निश्चित तिथि को चुनी वस्तुओं या-वस्तु-समूह के मूल्य का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे प्रामाणिक मानते हुए किसी बाद की तिथि को-उन्हीं वस्तुओं के मूल्य से तुलना करते हैं।"
4. **क्रॉक्सटन व काउडेन के अनुसार**- "सूचकांक, संबंधित चर-मूल्यों के आकार में होने वाले-अंतरों की माप करने के साधन हैं।"
5. **होरेस सेक्राइस्ट के शब्दों में**- "सूचकांक अंकों की एक ऐसी श्रेणी है, जिसके द्वारा किसी भी तथ्य के परिमाण में होने वाले परिवर्तनों का समय या स्थान पर मापन किया जा सकता है।”
**सूचकांकों की विशेषताएँ**
उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर सूचकांकों की निम्नलिखित विशेषताएँ स्पष्ट होती हैं-
1. सूचकांक मुद्रा के मूल्य का निरपेक्ष माप न होकर सापेक्ष माप है।”
2. सूचकांकों को प्रतिशतों में व्यक्त किया जाता है।
3. इनका प्रयोग ऐसे तथ्यों के परिवर्तनों को मापने के लिए किया जाता है, जिन्हें प्रत्यक्ष माप से नहीं मापा जा सकता।
4. यह एक विशेष प्रकार का माध्य ही है।
5. सूचकांक आर्थिक पहलू के उच्चावचनों को संख्यात्मक रूप में ही माप सकता है।
**सूचकांक की उपयोगिता**
सूचकांकों की सार्वभौमिक उपयोगिता है। ये व्यापारी, अर्थशास्त्री व राजनीतिज्ञों का पथ-प्रदर्शन करते हैं। और उन्हें भावी प्रवृत्तियों का अनुमान लगाने में सहायता करते हैं। कीमत, जीवन-निर्वाह, औद्योगिक उत्पादन, खाद्यान्न उत्पादन, निर्यात, आयात, लाभ, मुद्रा-पूर्ति, जनसंख्या, राष्ट्रीय आय, बजट घाटा अथवा आधिक्य आदि से संबंधित सूचकांक विभिन्न घटनाओं का सापेक्षिक माप प्रस्तुत करते हैं, इसीलिए सूचकांक 'आर्थिक वायुमापक यंत्र' (Economic Barometers) कहलाते हैं। व्यावहारिक रूप में सूचकांकों से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं
1. **मुद्रा के मूल्य की माप**- सामान्य मूल्य-स्तर में होने वाले परिवर्तनों को मापने के लिए सूचकांकों का प्रयोग किया जाता है। सामान्य मूल्य-स्तर में होने वाले परिवर्तन से मुद्रा की क्रय-शक्ति में होने वाले परिवर्तनों का अनुमान लगाया जा सकता है।
2. **आर्थिक स्थिति की तुलना**-रहन-सहन संबंधी सूचकांकों की तुलना करके समाज के किसी-वर्ग के रहन-सहने में होने वाले परिवर्तनों का अनुमान लगाया जा सकता है।
3. **मजदूरी निर्धारण में उपयोगिता**- सूचकांक वास्तविक आय में होने वाले परिवर्तन का सूचक होता है। अतः मजदूरी व वेतन के निर्धारण में इनसे बहुत अधिक सहायता मिलती है।”
4. **ऋणों के न्यायपूर्ण भुगतान का आधार**- सूचकांकों की सहायता से मूल्य-स्तर में परिवर्तन का अनुमान लगाया जा सकता है और इसी आधार पर ऋणों की मात्रा में परिवर्तन करके उनका न्यायपूर्ण भुगतान किया जा सकता है। इससे किसी भी पक्ष को असंगत लाभ या हानि नहीं होती।
5. **अंतर्राष्ट्रीय तुलना करने में सहायक**- सूचकांकों की सहायता से विभिन्न प्रकार की अंतर्राष्ट्रीय तुलनाएँ करना संभव है। विभिन्न देशों की मुद्राओं की क्रय-शक्ति में क्या परिवर्तन जहुए हैं, इसकी जानकारी व तुलना सूचकांकों की सहायता से की जा सकती है।
6. **देश के आर्थिक विकास का अनुमान**- उत्पादन सूचकांक देश में उत्पादन संबंधी जानकारी देते हैं, जिनके आधार पर सरकार अपनी औद्योगिक नीति का निर्माण करती हैं सूचकांकों की सहायता से ही विदेशी व्यापार की स्थिति व देश में पूँजी व विनियोग की मात्रा को ज्ञान होता है।
7. **भावी प्रवृत्तियों का अनुमान**- सूचकांक न केवल वर्तमान परिवर्तनों को बताते हैं बल्कि इनकी सहायता से भविष्य के संबंध में भी महत्त्वपूर्ण अनुमान लगाए जा सकते हैं।
8. **जटिल तथ्यों को सरल बनाना**- सूचकांकों की सहायता से ऐसे जटिल तथ्यों में होने वाले परिवर्तनों की माप भी की जा सकती है, जिनकी माप किसी अन्य साधन से संभव नहीं है।
9. **नियंत्रण एवं नीतियाँ**- सूचकांकों के आधार पर ही सरकार आर्थिक नियोजन व नियंत्रण संबंधी नीतियाँ बनाती है।
**सूचकांकों की सीमाएँ**
सबसे अधिक उपयोगी सांख्यिकीय विधि होते हुए भी सूचकांक परिवर्तनों की एक अपूर्ण माप है। इसकी प्रमुख सीमाएँ निम्मलिखित हैं
1. **सापेक्ष परिवर्तनों की अनुमानित माप**- सूचकांक निरपेक्ष परिवर्तनों की मापों की अपेक्षा सापेक्ष परिवर्तनों की ही माप करता है और वह भी मात्र अनुमान के रूप में। वास्तव में, सूचकांक केवल सामान्य प्रवृत्तियों की ओर ही संकेत करते हैं।
2. **शुद्धता की कमी**- सूचकांक बनाते समय समूह की प्रत्येक इकाई को शामिल नहीं किया जाता है। वरन् इसके लिए कुछ प्रतिनिधि इकाइयों का ही चयन किया जाता है। इससे प्रतिदर्श अपर्याप्त और अप्रतिनिधि परिणामों की सत्यता कम हो जाती है।
3. **उद्देश्य में अंतर** - विभिन्न सूचकांक अलग-अलग उद्देश्यों को पूरा करते हैं। एक सूचकांक, जो एक उद्देश्य के लिए उपयुक्त हो सकता है, अन्य उद्देश्यों के लिए अनुपयुक्त हो सकता है। कोई भी सूचकांक सार्व-उद्देशीय नहीं होता ।
4. **अंतर्राष्ट्रीय तुलना कठिन**- सूचकांकों की सहायता से दो देशों के संबंध में किसी प्रकार की तुलना करना काफी कठिन होता है क्योंकि सूचकांकों की निर्माण-विधि, उनका आधार-वर्ष तथाप्रतिनिधि वस्तुओं की सूची विभिन्न देशों में भिन्न-भिन्न होती है।
5. **विभिन्न समय में तुलना करना कठिन**- लोगों के द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुओं में-परिवर्तन होता रहता है। अतः सूचकांकों की सहायता से विभिन्न समयों में तुलना करना संभव नहींहोता है।
6. **भार निर्धारण अवैज्ञानिक**- भारित सूचकांकों में भार निर्धारण मनमाना तथा अवैज्ञानिक होता है। भिन्न-भिन्न वर्षों में एक ही वस्तु के भार बदल जाते हैं, जिसके कारण परिणामों में अंतर आ जाता है।
In simple words: Index numbers are statistical tools that measure relative changes in economic variables over time or space, summarizing complex data into a single figure, used for policy making, economic analysis, and forecasting, but they have limitations such as being only approximate measures, issues with sample accuracy, difficulty in international and inter-temporal comparisons, and subjective weighting.

🎯 Exam Tip: For long answer questions, define the concept clearly, list its advantages (utility) and disadvantages (limitations) with brief explanations for each point.

 

Question 2. सूचकांक रचना संबंधी समस्याओं का विवेचन कीजिए ।
Answer: सूचकांक रचना संबंधी प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं
1. सूचकांक का उद्देश्य,
2. पदों या वस्तुओं का चुनाव,
3. मूल्य उद्धरण,
4. आधार-वर्ष का चुनाव और सूचकांकों का परिगणन,
5. माध्य का चुनाव,
6. भारांकन विधि ।।
1. **सूचकांक का उद्देश्य** सूचकांक रचना से पूर्व उसके उद्देश्य को निश्चित कर लेना चाहिए क्योंकि वस्तुओं के चुनाव, उनके मूल्य उद्धरण तथा भारांकन आदि का निर्धारण सूचकांक के उद्देश्य पर ही निर्भर करता है। उदाहरण के लिए एक सूक्ष्मग्राही मूल्य सूचकांक में केवल उन वस्तुओं का समावेश किया जाना चाहिए, जिनके मूल्यों में तेजी से परिवर्तन होते रहते हैं। इसके विपरीत, सामान्य उद्देश्य वाले मूल्य सूचकांक में अधिकाधिक वस्तुओं का समावेश किया जाना चाहिए ताकि वह समाज में सभी वर्गों का सही-सही प्रतिनिधित्व कर सके।
2. **पदों या वस्तुओं का चुनाव**
चूंकि किसी भी एक सूचकांक में समस्त पदों या वस्तुओं का चुना जाना संभव नहीं है; अतः कुछ प्रतिनिधि वस्तुओं का चुनाव कर लिया जाना चाहिए। इस संबंध में उठने वाले स्वाभाविक प्रश्न इस प्रकार हैं
(अ) **कौन-सी वस्तुएँ चुनी जाएँ**- चुनी जाने वाली वस्तुओं में निम्नलिखित गुण होने चाहिए|
(i) वस्तुएँ ऐसी होनी चाहिए, जो अपने वर्ग का सच्चे अर्थों में प्रतिनिधित्व कर सकें ।
(ii) वस्तुएँ ऐसी होनी चाहिए, जो सरलता से पहचानी जा सकें तथा जिनका स्पष्ट रूप से वर्णन किया जा सके।
(iii) चुनी हुई वस्तुएँ प्रमापित व एकरूप होनी चाहिए।
(iv) वस्तुएँ लोकप्रिय होनी चाहिए।
(ब) **वस्तुओं की संख्या कितनी हो**-सामान्यतः सूचकांक में जितनी अधिक वस्तुएँ सम्मिलित की जाएँगी, वह उतना ही अधिक शुद्ध व विश्वसनीय माना जाएगा, परंतु बहुत अधिक वस्तुओं को सूचकांक में सम्मिलित करना भी संभव नहीं है। वास्तव में, संख्या का निर्धारण सूचकांक के उद्देश्य, उपलब्ध समय, धन तथा वांछित शुद्धता पर अधिक निर्भर करता है। सामान्य परम्परा यह है कि सूचकांक में 25 से 50 वस्तुओं तक का चयन किया जाता है।
(स) **वस्तुएँ किस किस्म की हों** सूचकांकों में ऐसी किस्म की वस्तुएँ शामिल की जानी चाहिए, जो सबसे अधिक प्रचलित हों; प्रमापित हों तथा गुणों में स्थिर हों।
(द) **वस्तुओं का किस प्रकार वर्गीकरण किया जाए**- चुनी हुई वस्तुओं को सजातीयता के आधार पर कुछ निश्चित वर्गों और उपवर्गों में विभाजित कर देना चाहिए, जिससे सम्पूर्ण मूल्य सूचकांक के साथ-साथ वर्ग सूचकांक भी ज्ञात हो जाए।
3. **मूल्य उद्धरण**
मूल्य उद्धरण लेते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए
(अ) **थोक या फुटकर मूल्य** सामान्यतः मूल्य सूचकांकों की रचना में वस्तुओं के थोक मूल्य ही लिए जाते हैं क्योंकि वे फुटकर मूल्यों की अपेक्षा कम परिवर्तनशील होते हैं, स्थान-स्थान के आधार पर उनमें कम अंतर होते हैं और उन्हें ज्ञात करना भी सरल होता है।
(ब) **द्रव्य-मूल्य अथवा वस्तु-मूल्य**- सूचकांकों के लिए मूल्य उद्धरण द्रव्य के रूप में ही व्यक्त किए। जाने चाहिए, वस्तुओं के परिमाण के रूप में नहीं। यदि मूल्य उद्धरण वस्तु-मूल्य के रूप में हों तो उन्हें पहले द्रव्य-मूल्यों के रूप में बदल लेना चाहिए।
(स) **मूल्य उद्धरणों की संख्या व आवृत्ति** – सूचकांक निर्माण से पूर्व यह भी तय कर लेना चाहिए, कि मूल्य कितनी बार और किस अंतराल में लिए जाने हैं। मूल्य उद्धरणों की आवृत्ति सूचकांक के उद्देश्य, अवधि, उपलब्ध साधन व शुद्धता के स्तर पर निर्भर होती है।
(द) **मूल्य उद्धरण प्राप्ति के स्थान व साधन**- मूल्य उन मण्डियों से प्राप्त किए जाने चाहिए, जहाँ पर वस्तुओं का बड़ी मात्रा में क्रय-विक्रय होता हो लेकिन जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक बनाने के लिए उसी स्थान के मूल्यों को प्राप्त करना चाहिए। मूल्य उद्धरण के स्रोत निष्पक्ष, विश्वसनीय तथा उपयुक्त होने चाहिए।
4. **आधार-वर्ष का चुनाव और सूचकांकों का परिगणन**
आधार-वर्ष से हमारा आशय उस वर्ष विशेष से होता है, जिसको आधार मानकर हम आर्थिक क्रियाकलापों की तुलना करते हैं। अतः आधार-वर्ष का चुनाव अत्यंत सतर्कतापूर्वक करना चाहिए। यथासंभव आधार-वर्ष
1. सामान्य होना चाहिए,
2. वास्तविक होना चाहिए,
3. उस काल की समस्त सूचनाएँ उपलब्ध होनी चाहिए तथा
4. वह वर्ष अधिक पुराना नहीं होना चाहिए। आधार वर्ष निश्चित करने की निम्नलिखित दो रीतियाँ हैं
(अ) स्थिर आधार रीति,
(ब) श्रृंखला आधार रीति ।
(अ) **स्थिर आधार रीति**-इस रीति के अनुसार सर्वप्रथम एक सामान्य वर्ष चुन लिया जाता है और फिर अन्य वर्षों के मूल्य-स्तर की तुलना उस स्थिर वर्ष के आधार पर की जाती है। स्थिर आधार-वर्षे दो प्रकार का हो सकता है
1. **एकवर्षीय आधार**-एकवर्षीय आधार में जो वर्ष आधार-वर्ष के रूप में चुना जाता है, अन्ये वर्षों के मूल्यों की तुलना उस स्थिर वर्ष के आधार पर की जाती है।
2. **बहुवर्षीय मध्य आधार**-कभी-कभी कोई अंक वर्ष ऐसा नहीं होता, जो सामान्य हो और जिसे स्थिर आधार माना जा सके। ऐसी दशा में अनेक ऐसे वर्ष छाँट लिए जाते हैं, जिनमें कम उतार-चढ़ाव हुए हों और फिर उन वर्षों के मूल्य-स्तर का समान्तर माध्य निकालकर उन माध्य मूल्यों को आधार माना जाता है।
आधार- वर्ष को निश्चित कर लेने के उपरांत चालू वर्ष के सूचकांक तैयार करने के लिए मूल्यानुपात निकाले जाते हैं। इसके लिए आधार-वर्ष के मूल्य को 100 मानकर, चालू वर्ष के मूल्यों का निकाला गया प्रतिशत मूल्यानुपात' कहलाता है। सूत्रानुसार,
स्थिर एकवर्षीय आधार
\[ P = \cfrac{P_1}{P_0} \times 100 \]
यहाँ, \( P_1 \) = चालू वर्ष का मूल्य
\( P_0 \) = आधार-वर्ष का मूल्य
स्थिर बहुवर्षीय माध्य आधार
\[ R = \cfrac{P}{P_x} \times 100 \]
यहाँ, \( P_x \) = सभी वर्षों का औसत मूल्य
R = मूल्यानुपात
**नोट**- विभिन्न वस्तुओं के मूल्यानुपातों का समांतर माध्य ही चालू वर्ष का 'सरल सूचकांक' कहलाता है। दूसरे शब्दों में, मूल्यानुपातों के योग को वस्तुओं की संख्या से भाग दे दिया जाता है।
सूत्रानुसार,
चालू वर्ष के लिए सूचकांक = \( \cfrac{\Sigma R}{N} \)
\( \Sigma R \) = मूल्यानुपातों का योग
N = वस्तुओं की संख्या
5. **माध्य का चुनाव**
सूचकांक विभिन्न वस्तुओं के मूल्यानुपातों का माध्य है। अतः यह निर्धारित करना आवश्यक है कि सूचकांक रचना में किस माध्ये का प्रयोग किया जाए। व्यवहार में माध्यिका समान्तर माध्य अथवा गुणोत्तर माध्य में से किसी एक का प्रयोग करना उपयुक्त रहता है।
6. **भारांकन विधि** व्यवहार में भिन्न-भिन्न वस्तुओं का भिन्न-भिन्न सापेक्षिक महत्त्व होता है। उदाहरण के लिए उपभोग के क्षेत्र में लोहे की तुलना में नमक का महत्त्व अधिक है। इसी प्रकार उत्पादन के क्षेत्र में टी०वी० की तुलना में कपड़े का महत्त्व अधिक है। अतः विभिन्न वस्तुओं अथवा पदों के तुलनात्मक महत्त्व को प्रकट करने के लिए किसी सुनिश्चित आधार पर भारों का प्रयोग किया जाता है। ऐसे सूचकांक ‘भारित सूचकांक कहलाते हैं।
In simple words: Constructing an index number involves several challenges: clearly defining its purpose, carefully selecting representative items (considering their type, number, quality, and classification), accurately collecting price quotes (deciding between wholesale/retail, value/quantity, frequency, and source), choosing an appropriate base year (stable, recent, with reliable data), and selecting the right average (usually arithmetic or geometric mean) for calculations.

🎯 Exam Tip: This question requires a detailed discussion of the practical difficulties in index number construction. Organize your answer by listing each problem and then elaborating on the sub-issues involved.

 

Question 3. साधारण सूचकांक रचना की
1. सरल समूहीकरण विधि व
2. सरल मूल्य अनुपात माध्य विधि को उदाहरणों की सहायता से समझाइए ।
Answer: साधारण सूचकांक बनाने की दो मुख्य विधियाँ हैं।
1. **सरल समूहीकरण विधि (Simple Aggregative Method)**,
2. सरल मूल्य अनुपात विधि (Simple Average of Price Relative Method) । 1. सरल समूहीकरण विधि-इस विधि में प्रचलित वर्ष के विभिन्न वस्तुओं के मूल्यों के जोड़ को आधार वर्ष के जोड़ से भाग देकर 100 से गुणा कर दिया जाता है। सूत्र रूप में,
\[ P_{01} = \cfrac{\Sigma p_1}{\Sigma p_0} \times 100 \]
यहाँ, \( P_{01} \) = वर्तमान वर्ष का मूल्य सूचकांक -
\( \Sigma P_1 \) = वर्तमान वर्ष की विभिन्न वस्तुओं के मूल्यों का योग
\( \Sigma P_0 \) = आधारे-वर्ष की उन्हीं वस्तुओं के मूल्यों का योग
**उदाहरण**
1. निम्नांकित आँकड़ों से सरल समूहीकरण विधि द्वारा 2011 को आधार-वर्ष मानकर वर्ष 2015 के मूल्य सूचकांक तैयार कीजिए ।
वस्तुएँ :
A
B
C
D
E
F
G
2011 की कीमतें (Rs. में):
240
300
540
480
450
690
300
2015 की कीमतें (Rs. में):
330
540
750
720
750
930
780
हल-

वस्तुएँ2011 की कीमतें (Po) (Rs. में)2015 की कीमतें (P1) (Rs. में)
A240330
B300540
C540750
D480720
E450750
F690930
G300780
योग\( \Sigma P_0 = 3000 \)\( \Sigma P_1 = 4800 \)

\( 2015 \ P_{01} = \cfrac{\Sigma P_1}{\Sigma P_0} \times 100 \)
\( = \cfrac{4800}{3000} \times 100 = 160 \)
\( 2015 \ P_{01} = 160 \)
यह विधि अत्यंत सरल है किंतु इस विधि का प्रयोग तभी किया जाना चाहिए जब सभी वस्तुओं के मूल्य एक ही इकाई के रूप में व्यक्त किए गए हों। अन्यथा निकाले गए निष्कर्ष भ्रामक होंगे।

2. **सरल मूल्य अनुपात माध्य विधि** - इस विधि के अनुसार सबसे पहले प्रत्येक वस्तु का मूल्य अनुपात निकाला जाता है। किसी वस्तु का मूल्य अनुपात चालू वर्ष तथा आधार-वर्ष की कीमत का प्रतिशत अनुपात है। इसमें सभी वस्तुओं को शामिल नहीं किया जाता अपितु केवल उन्हीं वस्तुओं का न्यादर्श लिया जाता है जो समग्र (Variance) की विशिष्टता को दर्शाते हैं।
स्थिर आधार के मूल्य को 100 मानकर निकाला गया प्रचलित वर्ष का प्रतिशत ही मूल्यानुपात कहलाता है। अतः
\[ P_{01} = \cfrac{p_1}{p_0} \times 100 \]
यहाँ, \( P_{01} \) = मूल्य अनुपात
\( P_1 \) = वर्तमान वर्ष की कीमत
\( P_0 \) = आधार-वर्ष की कीमत
निम्नलिखित सूत्र की सहायता से वर्तमान वर्ष का कीमत सूचकांक ज्ञात किया जा सकता है-
\[ P_{01} = \cfrac{\Sigma (\cfrac{p_1}{p_0} \times 100)}{N} \]
यहाँ, R x 100 = मूल्य अनुपात
N = वस्तुओं की संख्या
\( P_1 \) = चालू वर्ष के मूल्य
\( P_0 \) = आधार-वर्ष के मूल्य
**उदाहरण**
1. निम्नांकित आँकड़ों की सहायता से सरल मूल्यानुपात माध्य विधि द्वारा 2011 को आधार-वर्ष मानते हुए 2015 के लिए मूल्य सूचकांक ज्ञात कीजिए
वस्तु :
गेहूँ
चना
चावल
अरहर
मूँग
उड़द
मसूर
2011 मूल्य (Rs. में):
80
100
180
160
150
230
100
2015 मूल्य (Rs. में):
110
180
250
240
250
310
260
हल-
वस्तुएँआधार-वर्ष 2011 की कीमतें (Po) (Rs. में)2015 की कीमतें (P1) (Rs. में)2015 का 2011 की तुलना में मूल्य अनुपात \( \cfrac{P_1}{P_0} \times 100 \)
गेहूँ80110\( \cfrac{110}{80} \times 100 = 137.5 \)
चना100180\( \cfrac{180}{100} \times 100 = 180.0 \)
चावल180250\( \cfrac{250}{180} \times 100 = 138.9 \)
अरहर160240\( \cfrac{240}{160} \times 100 = 150.0 \)
मूँग150250\( \cfrac{250}{150} \times 100 = 166.7 \)
उड़द230310\( \cfrac{310}{230} \times 100 = 134.8 \)
मसूर100260\( \cfrac{260}{100} \times 100 = 260.0 \)
\( \Sigma \cfrac{P_1}{P_0} \times 100 = 1167.9 \)

\( P_{01} = \cfrac{\Sigma \cfrac{P_1}{P_0} \times 100}{N} = \cfrac{1167.9}{7} = 166.8 \)
\( P_{01} = 166.8 \)
In simple words: Simple index number construction can use either the Simple Aggregative Method, which sums current year prices and divides by the sum of base year prices, or the Simple Average of Price Relatives Method, which calculates a price relative for each item and then averages these relatives.

🎯 Exam Tip: Understand the calculation steps for both simple methods and when each is appropriate. Pay close attention to the definition of each component in the formulas.

 

Question 4. भारित सूचकांक से क्या आशय है? भारित सूचकांक के निर्माण की विधियों को उदाहरण की सहायता से समझाइए ।
Answer:
**भारित सूचकांक का अर्थ**
भारित सूचकांक वे सूचकांक हैं जिनमें श्रृंखला के विभिन्न मदों को उनके सापेक्षिक महत्त्व के आधार पर विभिन्न भार दिए जाते हैं। इसलिए भारित सूचकांक विभिन्न वस्तुओं की कीमतों का भारित औसत है। उदाहरण-मानी एक उपभोक्ता खाद्यान्नों पर कपड़े की तुलना में तीन गुणा अधिक व्यय करता है तो कपड़े को 1 व खाद्यान्नों को 3 भार दिया जाएगा।
**भारित सूचकांक के निर्माण की विधियाँ**
भारित सूचकांक के निर्माण की दो विधियाँ हैं
1. भारित औसत मूल्य अनुपात माध्य विधि
2. भारित समूही विधि ।
1. **भारित औसत मूल्य अनुपात माध्य विधि** - इस विधि द्वारा भारित सूचकांक को ज्ञात करने के लिए, विभिन्न वस्तुओं के मूल्य अनुपातों को उनके भार से गुणा करके गुणनफल के योग को भार के योग से भाग दे दिया जाता है। वस्तुओं को भार उनकी मात्रा के आधार पर दिया जाता है। सूत्र रूप में,
\[ P_{01} = \cfrac{\Sigma RW}{\Sigma W} \]
यहाँ,
\( P_{01} \) = आधार-वर्ष के मूल्यों के आधार पर वर्तमान वर्ष के मूल्यों का सूचकांक
W = भार
R = मूल्य अनुपात
**उदाहरण 1.** निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से मूल्य अनुपात विधि से 2011 को आधार-वर्ष मानकर 2016 का भारित सूचकांक ज्ञात करें

वस्तुएँभार2011 के मूल्य (Rs. में)2015 के मूल्य (Rs. में)
A40Rs. 100 प्रति क्विटलRs. 200 प्रति क्विटल
B30Rs. 200 प्रति क्विटलRs. 800 प्रति क्विटल
C15Rs. 2 प्रति लीटरRs. 16 प्रति लीटर
D10Rs. 8 प्रति किलोRs. 40 प्रति किलो
E5Rs. 1 प्रति किलोRs. 6 प्रति किलो

हल-
**भारित सूचकांक**
वस्तुएँभारआधार-वर्ष की कीमत (2011) (Po)चालू वर्ष की कीमत (2016) (P1)\( R = \cfrac{P_1}{P_0} \times 100 \)RW
A40Rs. 100 प्रति क्विंटलRs. 200 प्रति क्विंटल\( \cfrac{200}{100} \times 100 = 200 \)\( 200 \times 40 = 8000 \)
B30Rs. 200 प्रति क्विंटलRs. 800 प्रति क्विंटल\( \cfrac{800}{200} \times 100 = 400 \)\( 400 \times 30 = 12000 \)
C15Rs. 2 प्रति लीटरRs. 16 प्रति लीटर\( \cfrac{16}{2} \times 100 = 800 \)\( 800 \times 15 = 12000 \)
D10Rs. 8 प्रति किलोRs. 40 प्रति किलो\( \cfrac{40}{8} \times 100 = 500 \)\( 500 \times 10 = 5000 \)
E5Rs. 1 प्रति किलोRs. 6 प्रति किलो\( \cfrac{6}{1} \times 100 = 600 \)\( 600 \times 5 = 3000 \)
योग\( \Sigma W = 100 \)\( \Sigma RW = 40000 \)

\( P_{01} = \cfrac{\Sigma RW}{\Sigma W} = \cfrac{40000}{100} = 400 \)
\( P_{01} = 400 \)

2. **भारित समूही विधि** – इस विधि में विभिन्न वस्तुओं को उनकी खरीदी हुई मात्राओं के आधार पर भार प्रदान किया जाता है। विभिन्न विद्वानों ने सूचकांकों का निर्माण करने के लिए भार देने की अलग-अलग विधियों का वर्णन किया है। कुछ प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं।
(i) **लास्पीयर की विधि (Laspeyre's Method)**-लास्पीयर के आधार-वर्ष की मात्रा (q0) के आधार पर भार प्रदान किए हैं। सूत्रानुसार,
\[ P_{01} = \cfrac{\Sigma p_1 q_0}{\Sigma p_0 q_0} \times 100 \]
(ii) **पाश्चे की विधि (Paasche's Method)**- पाश्चे ने चालू वर्ष की मात्रा (q1) के आधार पर भार प्रदान किए हैं। सूत्रानुसार,
\[ P_{01} = \cfrac{\Sigma p_1 q_1}{\Sigma p_0 q_1} \times 100 \]
(iii) **फिशर की विधि (Fisher's Method)**- फिशर ने आधार-वर्ष तथा चालू वर्ष दोनों की मात्राओं (q0 व q1) के आधार पर भार प्रदान किए हैं। सूत्रानुसार,
\[ P_{01} = \sqrt{\cfrac{\Sigma p_1 q_0}{\Sigma p_0 q_0} \times \cfrac{\Sigma p_1 q_1}{\Sigma p_0 q_1}} \times 100 \]
**उदाहरण**-2011 को आधार-वर्ष मानते हुए निम्नांकित आँकड़ों के कीमत सूचकांक वर्ष 2016 ज्ञात कीजिए-
मद
आधार-वर्ष (2011)
चक्र वर्ष (2016)
कीमत
मात्रा
कीमत
मात्रा
A
10
10
20
25
B
35
3
40
10
C
30
5
20
15
D
10
20
8
20
E
40
2
40
5
हल-
**कीमत सूचकांक**
मदआधार-वर्ष (2011)चक्र वर्ष (2016)\( P_0 q_0 \)\( P_0 q_1 \)\( P_1 q_0 \)\( P_1 q_1 \)
कीमतमात्राकीमतमात्रा
A10102025100250200500
B3534010105350120400
C3052015150450100300
D1020820200200160160
E4024058020080200
\( \Sigma P_0 q_0 = 635 \)\( \Sigma P_0 q_1 = 1450 \)\( \Sigma P_1 q_0 = 660 \)\( \Sigma P_1 q_1 = 1560 \)

(i) **लास्पीयर विधि** -
\[ P_{01} = \cfrac{\Sigma P_1 q_0}{\Sigma P_0 q_0} \times 100 \]
\( = \cfrac{660}{635} \times 100 = 103.94 \)
\( P_{01} = 103.94 \)
(ii) **पाश्चे विधि**-
\[ P_{01} = \cfrac{\Sigma P_1 q_1}{\Sigma P_0 q_1} \times 100 \]
\( = \cfrac{1560}{1450} \times 100 = 107.59 \)
\( P_{01} = 107.59 \)
In simple words: Weighted index numbers assign importance (weights) to different items based on their relative significance. Key methods include the Weighted Average of Price Relatives Method and Weighted Aggregative Methods like Laspeyre's (using base year quantities as weights), Paasche's (using current year quantities as weights), and Fisher's (geometric mean of Laspeyre's and Paasche's, considered ideal).

🎯 Exam Tip: Differentiate between the two main types of weighted methods. For weighted aggregative methods, clearly state the quantity used as weights for Laspeyre's, Paasche's, and Fisher's formulas and be prepared to apply them with examples.

 

Question 5. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक अथवा निर्वाह व्यय सूचकांक से क्या आशय है? इसके निर्माण की विधि उदाहरण की सहायता से समझाइए ।
Answer: उपभोक्ता मूल्य सूचकांक अथवा निर्वाह व्यय सूचकांक का अर्थ उपभोक्ता मूल्य सूचकांक वह सूचकांक है जो विशिष्ट वर्ग के उपभोक्ताओं द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमतों में आधार-वर्ष की तुलना में चालू वर्ष में होने वाले परिवर्तन को मापता है। इनका निर्माण विभिन्न स्थानों में रहने वाले उपभोकॅता वर्गों पर फुटकर मूल्यों में होने वाले औसत परिवर्तनों के प्रभावों को मापने के लिए किया जाता है। चूंकि ये किसी वर्ग विशेष के लोगों की निर्वाह लागत में होने वाले परिवर्तन की दिशा तथा मात्रा को प्रकट करते हैं, इसलिए इन्हें निर्वाह व्यय सूचकांक कहा जाता है। भारत में मुख्यतः निम्नलिखित समूहों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक बनाए जाते हैं
• औद्योगिक श्रमिक,
• शहरी गैर-शारीरिक कर्मचारी तथा
• कृषि श्रमिक

जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांकों की रचना

जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांकों की रचना में निम्नलिखित प्रमुख कार्य करने पड़ते हैं
1. सजातीय वर्ग का चुनाव- सर्वप्रथम यह निश्चित किया जाता है कि सूचकांक किस विशेष वर्ग के लिए बनाए जाते हैं। वर्ग सजातीय होना चाहिए। सजातीय वर्ग का चुनाव मुख्यतः निम्नलिखित आधारों पर किया जाता है-
• आय की समानता,
• पेशे की समानता,
• स्थान की समानता।
2. वस्तुओं का चुनाव - विभिन्न वर्गों के लोग विभिन्न प्रकार की वस्तुओं का प्रयोग करते हैं। अतः
जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक बनाने के लिए वस्तुएँ वही होनी चाहिए, जिनका उपभोग उस वर्ग के लोग करते हैं, जिनके लिए जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक बनाना है। वस्तुओं को मुख्यतः निम्नलिखित वर्गों में बाँट लेते हैं
• खाद्य-पदार्थ,
• वस्त्र,
• ईंधन तथा प्रकाश,
• मकान किराया,
• अन्य ।
3. मूल्य उद्धरण - प्रायः चुनी हुई वस्तुओं के फुटकर मूल्य प्राप्त करने पड़ते हैं। ये मूल्य उस स्थान के बाजार मूल्य होने चाहिए, जहाँ से वह वर्ग उन वस्तुओं को खरीदता है। चूंकि स्थान-स्थान पर फुटकर मूल्यों में बहुत अंतर होता है; अत; उन्हें उस स्थान की उच्चकोटि की पत्रिकाओं, सरकारी एवं अर्द्ध-सरकारी प्रकाशनों, व्यापार परिषदों अथवा प्रतिष्ठित व्यापारियों की सहायता से प्राप्त करना चाहिए।
4. भारांकन - विभिन्न वस्तुओं को उनके महत्त्व के अनुसार भारांकित करना चाहिए। वास्तव में, सभी वस्तुएँ बराबर महत्त्व की नहीं होतीं। भार निम्नलिखित दो प्रकारों में से किसी एक प्रकार से दिया जा सकता है-
(अ) समूही आय विधि- भार देने की इस रीति की प्रमुख प्रक्रियाएँ निम्नलिखित हैं।
1. प्रत्येक वस्तु से चालू वर्ष के मूल्य में आधार-वर्ष की मात्रा का गुणा करते हैं।
(P1 q0)
2. प्रत्येक वस्तु के आधार-वर्ष के मूल्य में आधार-वर्ष की मात्रा का गुणा करते हैं। (po qo)
3. दोनों वर्षों के गुणनफलों को अलग-अलग जोड़ लेते हैं।
4. चालू वर्ष के गुणनफलों के योग में आधार-वर्ष के गुणनफलों के योग का भाग दे देते हैं।
5. प्राप्त भजनफल में 100 का गुणा कर देते हैं। सूत्रानुसार,
\[{ p }_{01 }=\cfrac { { \Sigma }p_{ 1 }{ q }_{ 0 } }{ { \Sigma p }_{0}{ q }_{0} } \times 100 \]
उदाहरण
1. प्रदत्त आँकड़ों की सहायता से 2011 को आधार-वर्ष मानकर 2016 के लिए जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक (Cost of Living Indexed Number) तैयार कीजिए ।

वर्ग2011 में उपभोग मात्राइकाई2011
(आधार-वर्ष) में मूल्य
2016 (चालू वर्ष) में मूल्य
गेहूँ4 क्विटलप्रति क्विटल50120
चावल1 क्विटलप्रति क्विटल80200
चना1 क्विटलप्रति क्विटल40100
दालें2 क्विटलप्रति क्विटल80200
घी50 क्विटलप्रति किग्रा1020
चीनी50 क्विटलप्रति किग्रा13
लकड़ी5 क्विटलप्रति क्विटल1025
मकान किराया1 मकानप्रतिमाह50100
वर्ग2011 में उपभोग
मात्रा Po
इकाई2011
(आधार-वर्ष)
में मूल्य Po
2016
(चालू वर्ष)
में मूल्य P1
आधार-वर्ष
कुल व्यय
Poqo
चालू वर्ष
कुल व्यय
P1qo
गेहूं4 किंवटलप्रति क्विटल50120200480
चावल1 क्विटलप्रति क्विटल8020080200
चना1 क्विंटलप्रति क्विंटल4010040100
दालें2 क्विटलप्रति क्विटल80200160400
घी50 क्विंटलप्रति किग्रा10205001000
चीनी50 क्विंटलप्रति किग्रा1350150
लकड़ी5 क्विंटलप्रति क्विटल102550125
मकान किराया1 मकानप्रतिमाह5010050100
ΣPoqo = 1130ΣP1qo = 2555

P01 (2016) = \(\cfrac{\Sigma P_1 q_0}{\Sigma P_0 q_0} \times 100 = \cfrac{2555}{1130} \times 100\)
= 226.11
P01 = 226.11
(ब) पारिवारिक बजट या भारित मूल्यानुपात विधि-इस विधि के अनुसार भार देने की प्रक्रिया निम्नलिखित है
(i) प्रत्येक वस्तु के आधार- वर्ष के मूल्य और आधार-वर्ष में उपभोग की गई मात्रा का गुणा करते हैं।
\[(\cfrac { {p}_{1}}{{p}_{ 0 } } \times 100) \]
(ii) प्रत्येक वस्तु के आधार-वर्ष के मूल्य और आधार-वर्ष में उपभोग की गई मात्रा का गुणा करते हैं।
(Po qo)
(iii) प्रत्येक मूल्यानुपात को उसके भार से गुणा करते हैं। (RW)।
(iv) इन गुणनफलों का योग कर लेते हैं (ERW)।
(v) भारों का योग निकाल लेते हैं (∑w)।
(vi) गुणनफलों के योग में भारों के योग का भाग दे देते हैं।
\[(\cfrac { \Sigma RW }{ \Sigma W } )\]
प्राप्त भजनफल सूचकांक होता है। सूत्र रूप में,
\[\text{Index No.}=\cfrac { \Sigma RW }{ \Sigma W } \]
उदाहरण
2. निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से 2011 को आधार-वर्ष मानकर 2015 और 2016 के लिए जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक तैयार कीजिए

वर्गइकाईभार
(W)
2011
Po
R02015
P2
R2R2W2016
P2
R2R2W
खाद्य-पदार्थप्रति 40 किग्रा616.0010018.00112.567520.00125.0750
वस्त्रप्रति मीटर42.001001.8090.03602.20110.0440
ईंधनप्रति 40 किग्रा24.001005.00125.02505.50137.5275
विद्युतप्रति इकाई20.201000.25125.02500.25125.0250
मकान किरायाप्रति कमरा410.0010012.00120.048015.00150.0600
विविधप्रति इकाई20.501000.60120.02400.75150.0300
ΣW = 20ΣR1W = 2255ΣR2W = 2615

P01(2015) = \(\cfrac{\Sigma R_1 W}{\Sigma W} = \cfrac{2255}{20} = 112.75\)
P01(2015) = 112.75
P01(2016) = \(\cfrac{\Sigma R_2 W}{\Sigma W} = \cfrac{2615}{20} = 130.75\)
P01(2016) = 130.75
In simple words: उपभोक्ता मूल्य सूचकांक या जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक, उपभोक्ताओं के एक विशिष्ट वर्ग की जीवन लागत में होने वाले परिवर्तनों को मापता है। इसका निर्माण वस्तुओं के उपभोग और उनके मूल्यों के आधार पर किया जाता है, जिसमें आधार वर्ष के मूल्यों की तुलना वर्तमान वर्ष के मूल्यों से करके प्रतिशत परिवर्तन निकाला जाता है।

🎯 Exam Tip: जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक को ठीक से समझने के लिए, विभिन्न मदों पर भार और आधार व वर्तमान वर्ष के मूल्यों के अंतर पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक क्या है? इसकी निर्माण विधि समझाइए।
Answer: औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक का अर्थ
औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक एक देश में किसी आधार-वर्ष की तुलना में चालू वर्ष में औद्योगिक उत्पादन की मात्रा में होने वाली वृद्धि या कमी का माप करता है। इनकी सहायता से हम औद्योगिक उत्पादन की मात्रा में होने वाले परिवर्तनों को मापते हैं, मूल्यों में होने वाले परिवर्तनों को नहीं।

औद्योगिक उत्पादन के सूचकांक की रचना

औद्योगिक उत्पादन के सूचकांक की रचना निम्नलिखित चरणों में की जाती है
1. उद्योगों को समान्यतया तीन वर्गों में बाँट लिया जाता है
(i) खनन,
(ii) विनिर्माण तथा
(iii) विद्युत ।
2. उत्पादन संबंधी आँकड़े मासिक, त्रैमासिक या वार्षिक आधार पर एकत्र कर लिए जाते हैं।
3. विभिन्न वर्गों को उपयुक्त भार दिया जाता है। भारत में वर्तमान में इस प्रकार भार दिए गए हैं
(i) खनन = 10.47;
(ii) विनिर्माण = 79.36 तथा
(iii) विद्युत = 10.17
4. निम्नांकित सूत्र का प्रयोग किया जाता है-
\[IP=\left[ \cfrac { \Sigma (\cfrac { { q }_{ 1 } }{ {q}_{ 2 } } )W }{ \Sigma w } \right] \]
यहाँ, IP = औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक ।
q₁ = चालू वर्ष में उत्पादन का स्तर ।
१०= आधार-वर्ष में उत्पादन का स्तर
W = भार ।
उदाहरण-निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक ज्ञात कीजिए

उद्योगउत्पादनभारइकाई
आधार-वर्षचालू-वर्ष
खनन658710मी० टन
विनिर्मित उत्पाद12230085मी० टन
विद्युत उपकरण2034005हजार मी० टन
उद्योगउत्पादनमूल्यानुपात (R)
R = \(\cfrac{q_1}{q_0}\) \(\times\) 100
भार
(W)
R.W.
आधार-वर्ष (q0)चालू-वर्ष (q1)
खनन6587\(\cfrac{87}{65} \times 100 = 134\)101340.0
विनिर्मित उत्पाद122300\(\cfrac{300}{122} \times 100 = 245.9\)8520901.5
विद्युत उपकरण203400\(\cfrac{400}{203} \times 100 = 197.0\)5985.0
ΣW = 100ΣRW = 23226.5

IP = \(\cfrac{\Sigma RW}{\Sigma W} = \cfrac{23226.5}{100} = 232.265\)
= 232.27
IP = 232.27
In simple words: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक किसी देश में समय के साथ औद्योगिक उत्पादन के स्तर में बदलाव को मापता है। यह कच्चे माल, विनिर्माण और बिजली जैसे क्षेत्रों में उत्पादन की मात्रा के आधार पर बनाया जाता है, जिसमें प्रत्येक क्षेत्र को उसका संबंधित भार दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की गणना में, प्रत्येक औद्योगिक क्षेत्र के उत्पादन अनुपात और भार को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है ताकि सही परिणाम मिल सके।

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