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Detailed Chapter 8 आधारभूत संरचना UP Board Solutions for Class 11 Economics
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Class 11 Economics Chapter 8 आधारभूत संरचना UP Board Solutions PDF
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1.आधारित संरचना की व्याख्या कीजिए।
Answer: आधारित संरचना से अभिप्राय उन सुविधाओं, क्रियाओं तथा सेवाओं से है जो अन्य क्षेत्रों के संचालन तथा विकास में सहायक होती हैं। ये समाज के दैनिक जीवन में भी सहायक होती हैं। इन सेवाओं में सड़क, रेल, बन्दरगाह, हवाई अड्डे, बाँध, बिजली-घर, तेल व गैस पाइप लाइन, दूरसंचार सुविधाएँ, शिक्षण संस्थान, अस्पताल के स्वास्थ्य व्यवस्था, सफाई, पेयजल और बैंक व अन्य वित्तीय संस्थाएँ तथा मुद्रा प्रणाली सम्मिलित हैं।
In simple words: Infrastructure refers to the essential facilities and services that support the functioning and development of other sectors of an economy and aid daily life. It includes vital services like roads, railways, ports, airports, power plants, and financial institutions.
🎯 Exam Tip: Define infrastructure clearly and provide diverse examples covering economic and social aspects for full marks.
Question 2.आधारित संरचना को विभाजित करने वाले दो वर्गों की व्याख्या कीजिए। दोनों एक-दूसरे पर कैसे निर्भर हैं?
Answer: आधारित संरचना निम्न दो प्रकार की होती है
1. सामाजिक आधारित संरचना- सामाजिक आधारित संरचना से अभिप्राय सामाजिक परिवर्तन जैसे स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, नर्सिंग होम; के मूल तत्त्वों से है जो किसी देश के सामाजिक विकास की प्रक्रिया के लिए आधारशिला का कार्य करते हैं। इस प्रकार की संरचना आदमी की कुशलता एवं उत्पादकता को बढ़ाती है। शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आवास मुख्य रूप से सामाजिक आधारित संरचना के भाग हैं। ये अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक क्रियाओं में सहयोग करते हैं।
2. आर्थिक आधारित संरचना- आर्थिक आधारित संरचना से अभिप्राय आर्थिक परिवर्तन के उन सभी तत्त्वों (जैसे शक्ति, परिवहन तथा संचार) से है जो आर्थिक संवृद्धि की प्रक्रिया के लिए एक आधारशिला का कार्य करते हैं। इस प्रकार की संरचना उत्पादन पर सीधा प्रभाव डालती है। शक्ति, ऊर्जा, परिवहन एवं दूरसंचार आदि को आर्थिक आधारिक संरचना में सम्मिलित किया जाता है। आर्थिक आधारिक संरचना संवृद्धि की प्रक्रिया में वृद्धि लाती है जबकि सामाजिक आधारिक संरचना मानव विकास की प्रक्रिया में वृद्धि लाती है इसीलिए आर्थिक तथा सामाजिक आधारिक संरचना एक-दूसरे की पूरक हैं। दोनों एक-दूसरे के प्रभाव को प्रबल बनाती हैं एवं सहायता प्रदान करती हैं।
In simple words: Infrastructure is divided into social (like education and health) and economic (like power and transport) categories. Social infrastructure improves human capital indirectly aiding economic activities, while economic infrastructure directly supports production and growth. Both are interdependent and reinforce each other's impact on development.
🎯 Exam Tip: Clearly distinguish between social and economic infrastructure with examples, and explain their complementary relationship for a comprehensive answer.
Question 3.आधारिक संरचना उत्पादन का संवर्द्धन कैसे करती है?
Answer: आधारिक संरचना ऐसी सहयोगी प्रणाली है, जिस पर एक आधुनिक औद्योगिक अर्थव्यवस्था की कार्यकुशल प्रणाली निर्भर करती है। संरचनात्मक सुविधाएँ एक देश के आर्थिक विकास में उत्पादन के तत्त्वों की उत्पादकता में वृद्धि करके और उसकी जनता के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करके अपना योगदान करती हैं।
In simple words: Infrastructure boosts production by providing essential support systems that enhance the productivity of factors of production in an economy. It makes industrial operations more efficient and improves the overall quality of life, which indirectly contributes to economic output.
🎯 Exam Tip: Focus on how efficient infrastructure directly impacts productivity, reduces costs, and facilitates smooth operations in an industrial economy.
Question 4.किसी देश के आर्थिक विकास में आधारिक संरचना योगदान करती है। क्या आप सहमत हैं? कारण बताइए ।
Answer: आधारिक संरचना कसी देश के आर्थिक विकास की आधारशिला है। यह औद्योगिक व कृषि उत्पादन, घरेलू व विदेशी व्यापार तथा वाणिज्य के प्रमुख क्षेत्रों में सहयोगी सेवाएँ उपलब्ध कराती है। इस संरचना से विकास के लिए उपयुक्त एवं पर्याप्त वातावरण तैयार होता है। इस संरचना की भूमिका निम्न प्रकार है
1. संरचनात्मक सुविधाएँ एक देश के आर्थिक विकास में उत्पादन के तत्त्वों की उत्पादकता में वृद्धि करके और उसकी जनता के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करके अपना योगदान करती हैं।
2. जलापूर्ति और सफाई में सुधार से प्रमुख जल संक्रमित बीमारियों में अस्वस्थता में कमी आती है। और बीमारी के होने पर भी उसकी गम्भीरता कम होती है।
3. परिवहन और संचार के साधनों से कच्चा माल व तैयार माल आसानी से एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाया जा सकता हैं।
4. अर्थव्यवस्था की वित्त-प्रणाली सभी क्रियाकलापों के लिए मौद्रिक आपूर्ति करती है। मौद्रिक आपूर्ति जितनी अधिक मात्रा में सुगमता से उपलब्ध होती है, उतनी ही जल्दी आर्थिक परियोजनाएँ सफल होती हैं।
5. किसी भी देश की औद्योगिक प्रगति बिजली उत्पादन, परिवहन व संचार के विकास पर निर्भर करती है।
6. मानव संसाधन की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।
In simple words: Yes, infrastructure is crucial for economic development as it improves productivity, enhances public health, facilitates trade through better transport and communication, and provides financial stability. It forms the backbone for industrial growth and human resource development.
🎯 Exam Tip: Support your agreement with specific points on how infrastructure impacts different sectors like health, transport, finance, and industrial growth, linking each to overall economic development.
Question 5.भारत में ग्रामीण आधारिक संरचना की क्या स्थिति है?
Answer: भारत में ग्रामीण आधारिक संरचना की स्थिति ग्रामीण भारत आर्थिक व सामाजिक दोनों ही आधारिक संरचनाओं में बहुत पिछड़ा हुआ है। सन् 2001 की जनगणना के आँकड़े यह बताते हैं कि ग्रामीण भारत में केवल 56 प्रतिशत परिवारों के लिए ही बिजली की सुविधा है जबकि 43 प्रतिशत परिवारों में आज भी मिट्टी के तेल का प्रयोग होता है। ग्रामीण क्षेत्र में लगभग 90 प्रतिशत परिवार खाना बनाने में जैव ईंधन का इस्तेमाल करते हैं। केवल 24 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों में लोगों को नल का पानी उपलब्ध है। लगभग 76 प्रतिशत लोग पानी के खुले स्रोतों से पानी पीते हैं। गाँव में टेलीफोन घनत्व बहुत कम है। ग्रामीण साक्षरता का स्तर भी निम्न है। इस प्रकार सामाजिक व आर्थिक दृष्टि से ग्रामीण क्षेत्र अभी भी अविकसित हैं।
In simple words: Rural infrastructure in India is significantly underdeveloped, marked by low access to electricity, dependence on traditional fuels, inadequate tap water, and poor telephone density. Socially, rural literacy rates are also low, indicating a need for substantial improvement in both economic and social infrastructure.
🎯 Exam Tip: Quote specific statistics (like electricity access, fuel usage, water access) to illustrate the poor state of rural infrastructure, highlighting both economic and social indicators.
Question 6.'ऊर्जा का महत्त्व क्या है? ऊर्जा के व्यावसायिक और गैर-व्यावसायिक स्रोतों में अन्तर कीजिए ।
Answer: ऊर्जा का महत्त्व
आर्थिक आधारित संरचना का बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण संघटक ऊर्जा है। किसी राष्ट्र की विकास प्रक्रिया में ऊर्जा का एक महत्त्वपूर्ण स्थान है, साथ ही यह उद्योगों के लिए भी अनिवार्य है। आज ऊर्जा का कृषि और उससे सम्बन्धित क्षेत्रों जैसे खाद, कीटनाशक और कृषि उपकरणों के उत्पादन और यातायात; में उपयोग भारी स्तर पर हो रही है। इस प्रकार प्रत्येक गतिविधि को सम्पन्न हेतु ऊर्जा आवश्यक है। ऊर्जा के उपभोग स्तर से सामाजिक एवं आर्थिक संवृद्धि निर्धारित होती है।
| आधार | व्यावसायिक ऊर्जा | गैर-व्यावसायिक ऊर्जा |
|---|---|---|
| 1 | घटक कोयला, बिजली, प्राकृतिक गैस व पेट्रोलियम पदार्थ । | ईंधन की लकड़ी, पशु व कृषि अपशिष्ट । |
| 2 | प्रयोग मुख्यतः वाणिज्यिक व औद्योगिक उद्देश्यों के लिए । | मुख्यतः घरेलू तथा उपभोग उद्देश्यों के लिए। |
| 3 | प्रकृति वाणिज्यिक ऊर्जा वाली वस्तुओं का कीमत होती है है और इन वस्तुओं की प्राप्त हो जाती हैं। | ये सामान्यतः ग्रामवासियों को निःशुल्क प्राप्त हो जाती हैं। |
In simple words: Energy is a vital component of economic infrastructure, essential for industrial, agricultural, and transport sectors, directly influencing a nation's social and economic growth. Commercial energy sources like coal and electricity are used for industrial purposes and are priced, while non-commercial sources like fuelwood and agricultural waste are primarily for domestic use and often free.
🎯 Exam Tip: Explain energy's importance across sectors and clearly delineate commercial vs. non-commercial sources based on components, usage, and cost/availability in a structured format like a table.
Question 7.विद्युत के उत्पादन के तीन बुनियादी स्रोत कौन-से हैं?
Answer: विद्युत के उत्पादन के तीन बुनियादी स्रोत इस प्रकार हैं
1. तापीय विद्युत (कोयला),
2. जलविद्युत (जल) तथा
3. आणविक ऊर्जा (नाभिकीय विखण्डन)।
In simple words: The three main sources of electricity generation are thermal power, which uses coal; hydroelectric power, which harnesses water; and nuclear power, which is generated from atomic fission.
🎯 Exam Tip: List the three primary sources of electricity generation, ensuring their full names and the basic input material are mentioned.
Question 8.संचारण और वितरण हानि से आप क्या समझते हैं? उन्हें कैसे कम किया जा सकता है?
Answer: संचारण और वितरण हानि से आशय संचारण और वित-नि से आशय विद्युत की चोरी से है। यह हानि विद्युत के कुछ भाग में तकनीकी खराबी के कारण तथा कुछ बिजली कर्मचारियों की सहायता से होने वाली बिजली चोरी के कारण होती है। आज विद्युत संचारण एवं वितरण से होने वाले घाटे सर्वविदित हैं।
नियन्त्रण के उपाय संचारण और वितरण हानि को कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए
1. उत्पादक क्रियाओं के लिए बिजली की दर ऊँची कर देनी चाहिए।
2. संचारण एवं वितरण की हानि को तकनीकी में सुधार करके कम कर देना चाहिए।
3. वितरण का निजीकरण करके बिजली चोरी को कम किया जा सकता है।
In simple words: Transmission and distribution losses refer to the electricity lost due to technical faults and theft during its delivery. These losses can be reduced by increasing electricity tariffs for productive uses, implementing technical improvements in the transmission and distribution network, and privatizing distribution to curb theft.
🎯 Exam Tip: Clearly define transmission and distribution losses by mentioning both technical issues and theft. Provide actionable solutions focusing on policy, technology, and governance.
Question 9.ऊर्जा के विभिन्न गैर-व्यावसायिक स्रोत कौन-से हैं?
Answer: ऊर्जा के गैर-व्यावसायिक स्रोतों में जलाऊ लकड़ी, कृषि का कूड़ा-कचरा और सूखा गोबर आते हैं। ये गैर-व्यावसायिक हैं, क्योंकि ये हमें प्रकृति/जंगलों में मिलते हैं।
In simple words: Non-commercial energy sources include firewood, agricultural waste, and dried cow dung. These are considered non-commercial because they are typically gathered directly from nature or produced locally for household use, rather than being bought or sold in a market.
🎯 Exam Tip: Provide a clear list of non-commercial energy sources and explain why they are classified as such, focusing on their direct availability from nature or local production.
Question 10.इस कथन को सही सिद्ध कीजिए कि ऊर्जा के पुनर्नवीनीकृत स्रोतों के इस्तेमाल से ऊर्जा संकट दूर किया जा सकता है?
Answer: पुनर्नवीनीकृत (गैर-परम्परागत) ऊर्जा संसाधन है-सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, बायो ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा आदि । नव्यकरणीय साधन होने के नाते, ये ऊर्जा के विश्वसनीय संसाधन हैं। यह सही है कि उनके प्रयोग से ऊर्जा संकट दूर किया जा सकता है। इसके पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं
1. अनव्यीकृतं साधन (परम्परागत साधन) क्षयशील हैं और कभी भी समाप्त हो सकते हैं। इसके विपरीत पुनर्नवीनीकृत साधनों को पूर्णतः कभी भी क्षय नहीं होगा; उदाहरण के लिए सूर्य ऊर्जा का अक्षय स्रोत है। जब तक ब्रह्माण्ड में सूर्य विद्यमान रहेगा, सौर ऊर्जा प्राप्त की जाती रहेगी।
2. वैज्ञानिक तकनीक के विकास के साथ-साथ इन संसाधनों का भी विकास किया जाता रहेगा।
3. इनको निरन्तर उपयोग किया जाना सम्भव है।
4. ये ऊर्जा के अक्षयी संसाधन हैं। अतः इनसे अनवरत ऊर्जा की आपूर्ति होती रहेगी ।
5. ऊर्जा के ये साधन प्रदूषण नहीं फैलाते । अतः इनका मनुष्य के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता ।
स्पष्ट है कि इन संसाधनों के अधिकाधिक उत्पादन एवं प्रयोग से हम ऊर्जा संकट को समाप्त कर सकते हैं। परन्तु आधुनिक तकनीक के अभाव में, इनकी पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद हम इनका व्यापक उपभोग नहीं कर पा रहे हैं। अतः ऊर्जा संकट से छुटकारा पाने के लिए इस ओर अधिकाधिक प्रयास करने की आवश्यकता है।
In simple words: Renewable energy sources like solar and wind power can resolve the energy crisis because they are inexhaustible, unlike traditional fossil fuels, and are environmentally friendly, causing no pollution. While their widespread use is currently limited by technology, increased efforts in their development and utilization are essential for a sustainable energy future.
🎯 Exam Tip: Clearly state the advantages of renewable energy (inexhaustible, non-polluting) over non-renewable sources. Conclude with the importance of technological advancement for wider adoption to effectively address the energy crisis.
Question 11.पिछले वर्षों के दौरान ऊर्जा के उपभोग प्रतिमानों में कैसे परिवर्तन आया है?
Answer: 1953-54 में ऊर्जा के कुल उपभोग के 55 प्रतिशत में कोयले का प्रयोग होता था। पेट्रोलियम तथा विद्युत ऊर्जा का उपभोग क्रमशः 16.7 प्रतिशत व 3.2 प्रतिशत था। इस समय प्राकृतिक गैस का प्रयोग नहीं किया जाता था। 1960-61 ई० में ऊर्जा स्रोत के रूप में कोयले के उपभोग में कमी हुई। इसके विपरीत पेट्रोलियम तथा विद्युत ऊर्जा के उपभोग में मामूली-सी वृद्धि हुई । सत्तर के दशक में यह वृद्धि 1953-54 की तुलना में दो गुनी हो गई तथा कोयले का उपभोग 56.1 प्रतिशत रह गया। इसी दशक में प्राकृतिक गैस का भी ऊर्जा के रूप में उपयोग होने लगा। यही वृद्धि अस्सी वे नब्बे के दशक में भी जारी रही। वर्तमान में भारत में कुल ऊर्जा उपभोग का 65 प्रतिशत व्यावसायिक ऊर्जा से पूरा होता है। इसमें कोयले का अंश सर्वाधिक (55 प्रतिशत) है। इसके अतिरिक्त इसमें तेल (31 प्रतिशत), प्राकृतिक गैस (11 प्रतिशत) और जल ऊर्जा (3 प्रतिशत) सम्मिलित हैं। जलाऊ लकड़ी, गाय का गोबर और कृषि का कूड़ा-कचरा आदि गैर-व्यावसायिक ऊर्जा स्रोतों का उपभोग भारत में कुल ऊर्जा उपभोग का 30 प्रतिशत से ज्यादा है।
In simple words: India's energy consumption patterns have shifted significantly over decades, initially dominated by coal, then seeing a rise in petroleum and electricity. Natural gas also emerged as a source later. Currently, commercial energy accounts for 65% of total consumption, with coal remaining dominant, while non-commercial sources like firewood still constitute over 30%.
🎯 Exam Tip: Detail the historical shift in energy sources, providing specific percentages for coal, petroleum, electricity, and natural gas across different time periods. Conclude with the current dominance of commercial energy and the significant share of non-commercial sources.
Question 12.ऊर्जा के उपभोगे और आर्थिक संवृद्धि की दरें कैसे परस्पर सम्बन्धित हैं?
Answer: किसी राष्ट्र की विकास प्रक्रिया में ऊर्जा का महत्त्वपूर्ण स्थान है, साथ ही यह उद्योगों के लिए भी अनिवार्य है। आज ऊर्जा का उपभोग कृषि और उससे सम्बन्धित क्षेत्रों जैसे खाद, कीटनाशक और कृषि उपकरणों के उत्पादन और यातायात में भारी स्तर पर हो रहा है। घरों में इसकी आवश्यकता भोजन बनाने, घरों को प्रकाशित करने और गर्म करने के लिए होती है। संक्षेप में ऊर्जा के अधिक इस्तेमाल का मतलब अधिक आर्थिक विकास होता है। ऊर्जा के नवीनीकृत स्रोतों के इस्तेमाल से धारणीय आर्थिक विकास होता
In simple words: Energy consumption is directly linked to economic growth; higher energy use typically correlates with greater economic activity across industries, agriculture, and households. While increased energy use generally means more development, shifting towards renewable energy sources is crucial for achieving sustainable economic growth that minimizes environmental impact.
🎯 Exam Tip: Emphasize the direct correlation between energy consumption and economic growth, citing examples from various sectors. Highlight the importance of renewable energy for sustainable development as a key aspect of this relationship.
Question 13.भारत में विद्युत क्षेत्रक किन समस्याओं का सामना कर रहा है?
Answer: भारत में विद्युत क्षेत्रक में उत्पादन एवं वितरण की प्रणाली पर सरकार का एकाधिकार है। राज्य विद्युत बोर्ड, जो बिजली का वितरण करते हैं, वित्तीय घाटा उठा रहे हैं। इस वित्तीय घाटे के लिए निम्नलिखित कारण उत्तरदायी हैं
1. विभिन्न पॉवर स्टेशनों द्वारा जनित बिजली का पूरा उपभोग उपभोक्ता नहीं करते। 2. बिजली के सम्प्रेषण में विद्युत का क्षय होता है। 3. किसानों व लघु उद्योगों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता कम है।
इस वित्तीय घाटे को कम करने के लिए सरकार निजी व विदेशी क्षेत्रक को विद्युत उत्पादन व वितरण में सहभागिता बढ़ाने को प्रोत्साहित कर रही है। उपर्युक्त समस्याओं के अतिरिक्त भारत में बिजली से जुड़ी कुछ और समस्याएँ निम्नलिखित हैं
1. भारत की वर्तमाने बिजली उत्पादन क्षमता 7 प्रतिशत की प्रतिवर्ष आर्थिक क्षमता अभिवृद्धि के लिए पर्याप्त नहीं है।
2. राज्य विद्युत बोर्ड जो विद्युत वितरण करते हैं, की लाइन हानि पाँच सौ मिलियन से ज्यादा है । इसका कारण सम्प्रेषण और वितरण में क्षय, बिजली की अनुचित कीमतें और अकार्यकुशलता है।
3. बिजली के क्षेत्र में निजी व विदेशी क्षेत्रक की भूमिका बहुत कम है।
4. भारत के विभिन्न भागों में बिजली की ऊँची दरें और लम्बे समय तक बिजली गुल होने से आमतौर पर जनता में असन्तोष है।
5. तापीय संयन्त्रों में कच्चे माल एवं कोयले की आपूर्ति कम है।
In simple words: India's power sector faces significant challenges including financial losses by state electricity boards due to under-consumption, transmission losses, and inadequate subsidies. Other issues include insufficient generation capacity, high line losses from theft and inefficient pricing, limited private sector participation, power outages, and raw material shortages for thermal plants.
🎯 Exam Tip: List a range of problems, from financial losses and operational inefficiencies (technical losses, theft, raw material shortages) to issues of capacity, pricing, and public dissatisfaction, to provide a comprehensive answer.
Question 14.भारत में ऊर्जा संकट से निपटने के लिए किए गए सुधारों पर चर्चा कीजिए ।
Answer: निरन्तर आर्थिक विकास और जनसंख्या वृद्धि से भारत में ऊर्जा की माँग में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है। यह माँग वर्तमान में देश में उत्पन्न हो रही ऊर्जा की तुलना में बहुत अधिक है। अतः भारत ऊर्जा के संकट खे गुजर रहा है।
ऊर्जा संकट से बचाव के उपाय
इस संकट से बचने के लिए निम्नलिखित सुधार किए गए हैं
1. भारत ने निजी व विदेशी क्षेत्रकों को बिजली उत्पादन तथा वितरण के लिए अनुमति दे दी है।
2. सरकार गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के उपभोग को प्रोत्साहन दे रही है।
3. सरकार विद्युत वितरण में होने वाली हानि (लाइन लॉस) को कम करने का प्रयास कर रही है।
4. विद्युत उत्पादन की समस्या से बचने के लिए केन्द्रीय विद्युत अथॉरिटी एवं केन्द्रीय नियमन आयोग की स्थापना की गई है।
In simple words: To combat the energy crisis caused by rising demand, India has implemented reforms such as allowing private and foreign investment in power generation and distribution. The government also promotes the use of non-conventional energy sources, works to reduce transmission losses, and has established regulatory bodies like the Central Electricity Authority and Regulatory Commission to manage power production issues.
🎯 Exam Tip: Outline the key reforms by categorizing them into liberalization (private/foreign investment), promotion of renewables, loss reduction, and regulatory mechanisms, demonstrating a holistic approach to tackling the energy crisis.
Question 15.हमारे देश की जनता के स्वास्थ्य की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
Answer: स्वास्थ्य सम्पूर्ण शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक कल्याण की अवस्था है। इसका अर्थ केवल बीमारी का न होना ही नहीं है, बल्कि इससे अभिप्राय एक व्यक्ति की स्वस्थ शारीरिक एवं मानसिक अवस्था से है। स्वास्थ्य राष्ट्र की समग्र संवृद्धि और विकास से जुड़ी एक महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है। एक देश की स्वास्थ्य की स्थिति को शिशु मृत्यु दर, मातृत्व मृत्यु दर, जीवन प्रत्याशा, पोषण स्तर, छूत एवं अछूत की बीमारियों के आधार पर आँका जाता है। हमारे देश भारत में कुछ स्वास्थ्य सूचक निम्नलिखित तालिका में दर्शाए गए हैं
| क्र०सं० | सूचक | |
|---|---|---|
| 1 | शिशु मृत्यु दर/प्रति 1000 शिशु | 68 |
| 2 | पाँच वर्ष के नीचे मृत्यु दर/प्रति 1000 शिशु | 87 |
| 3 | प्रशिक्षित परिचारिका द्वारा जन्म | 43 |
| 4 | पूर्ण प्रतिरक्षित | 67 |
| 5 | सकल घरेलू उत्पाद में स्वास्थ्य पर व्यय (%) | 4.8 |
| 6 | कुल व्यय में सरकारी हिस्सेदारी | 21.3 |
| 7 | कुल स्वास्थ्य व्यय में सरकारी हिस्सेदारी । | |
| 8 | स्वास्थ्य पर व्यय (अन्तर्राष्ट्रीय डॉलर में प्रति व्यक्ति आय) | 96 |
In simple words: Health is defined as a state of complete physical, mental, and social well-being, crucial for national development. Key health indicators in India include high infant and under-five mortality rates, moderate percentages of births attended by skilled personnel, and relatively low public health expenditure as a percentage of GDP and total health spending, reflecting ongoing challenges.
🎯 Exam Tip: Begin with a clear definition of health, then present relevant statistical indicators (like IMR, U5MR, health expenditure) using the provided table to illustrate India's health status accurately.
Question 16.रोग वैश्विक भार (GDB) क्या है?
Answer: विश्व रोग भार (GDB) एक सूचक है जिसका प्रयोग विशेषज्ञ किसी विशेष रोग के कारण असमय मरने वाले लोगों की संख्या के साथ-साथ रोगों के कारण असमर्थता में बिताए सालों की संख्या जानने के लिए करते हैं।
In simple words: Global Burden of Disease (GBD) is an indicator used by experts to measure the total impact of diseases, combining the number of people who die prematurely due to specific diseases and the years lived with disability caused by those illnesses.
🎯 Exam Tip: Define GBD as a comprehensive health metric that quantifies both premature mortality and years lived with disability due to diseases, indicating its use by experts.
Question 17.हमारी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की प्रमुख कमियाँ क्या हैं?
Answer: हमारी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की प्रमुख कमियाँ इस प्रकार हैं
1. यद्यपि देश की 72 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है परन्तु ग्रामीण जनसंख्या की तुलना में शहरी जनसंख्या को अधिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
2. अधिकतर सरकारी अस्पताल शहरों में स्थित हैं।
3. गाँवों में कुल अस्पताल को 30 प्रतिशत तथा बिस्तर का 25 प्रतिशत से अधिक नहीं है।
4. ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक 1 लाख लोगों पर 0.36 अस्पताल हैं जबकि शहरी क्षेत्रों में यह संख्या 3.6 । अस्पतालों की है।
5. ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों में एक्स-रे या खून की जाँच करने जैसी सुविधाएँ नहीं हैं।
6. ग्रामीणों को शिशु चिकित्सा, स्त्री रोग चिकित्सा, संवेदनाहरण तथा प्रसूति विद्या जैसी विशिष्ट चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं।
7. गाँवों में चिकित्सक का हमेशा अभाव रहता है।
8. भारत में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले निर्धनतमे लोग अपनी आय का 12 प्रतिशत स्वास्थ्य सुविधाओं पर व्यय करते हैं जबकि धनी केवल 2 प्रतिशत व्यय करते हैं।
In simple words: India's healthcare system suffers from significant rural-urban disparities, with more services concentrated in urban areas despite a larger rural population. There's a severe shortage of hospitals, beds, specialized medical facilities, and doctors in rural areas, leading to high out-of-pocket health expenditures for the poor.
🎯 Exam Tip: List the shortcomings systematically, focusing on rural-urban imbalance in healthcare access, facility and personnel shortages in rural areas, and the disproportionate financial burden on the poor.
Question 18.महिलाओं का स्वास्थ्य गहरी चिन्ता का विषय कैसे बन गया है?
Answer: भारत की जनसंख्या का लगभग आधा भाग महिलाओं का है। शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी, पुरुषों की अपेक्षा काफी कम है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार देश में शिशु-लिंग अनुपात प्रति हजार पुरुषों पर महिलाएँ 943 हैं। 15 वर्ष से कम आयु वर्ग की लगभग 3 लाख लड़कियाँ न केवल शादीशुदा हैं बल्कि कम-से-कम एक बच्चे की माँ भी हैं। विवाहित महिलाओं में 50 प्रतिशत से ज्यादा रक्ताभाव एवं रक्तक्षीणता से पीड़ित हैं। इसी कारण महिलाओं का स्वास्थ्य गहरी चिन्ता बन गया है।
In simple words: Women's health in India is a major concern due to their lower participation in education and economic activities compared to men. High rates of anemia among married women, coupled with issues like child marriage and early motherhood, contribute to a challenging health status for women.
🎯 Exam Tip: Link the reasons for concern to socio-economic factors such as lower educational and economic participation, along with specific health indicators like the child sex ratio and high rates of anemia among married women.
Question 19.सार्वजनिक स्वास्थ्य का अर्थ बतलाइए। राज्य द्वारा रोगों पर नियन्त्रण के लिए उठाए गए प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को बताइए ।
Answer: सार्वजनिक स्वास्थ्य का अर्थ सार्वजनिक स्वास्थ्य से आशय देश के समस्त लोगों के स्वास्थ्य से है। किसी देश के लोगों के स्वास्थ्य से सम्बन्धित प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं
1. माँ का स्वास्थ्य उत्तम हो ताकि बच्चे भी नीरोगी व स्वस्थ पैदा हों।
2. बच्चों को भयानक बीमारियों; जैसे-मलेरिया, तपेदिक, चेचक, पोलियो आदि; से बचाव के लिए उन्हें समय पर उचित टीके लगाए जाने चाहिए।
3. लोगों को खाने के लिए पर्याप्त एवं पौष्टिक भोजन प्राप्त होना चाहिए। सन्तुलित भोजन से बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
4. बीमारी के समय उचित उपचार की सुविधा होनी चाहिए, इससे रोग संक्रामक नहीं हो पाएँगे।
रोगों के नियन्त्रण सम्बन्धी कार्यक्रम
राज्य द्वारा रोगों को नियन्त्रित करने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए गए हैं
1. मलेरिया नियन्त्रण-यह मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारी के विरुद्ध विश्व का सबसे बड़ा स्वास्थ्य कार्यक्रम है।
2. राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण कार्यक्रम-कुष्ठ प्रभावित व्यक्तियों की दृष्टि से विश्व के कुल प्रभावित व्यक्तियों का लगभग 67% भारत में है। इसे दूर करने के लिए सन् 1983 में राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण कार्यक्रम आरम्भ किया गया।
3. तपेदिक नियन्त्रण कार्यक्रम-अनुमान है कि देश में लगभग 64 मिलियन लोग सक्रिय तपेदिक से प्रभावित हैं। इस कार्यक्रम के द्वारा तपेदिक अब लाइलाज बीमारी नहीं रह गई है।
4. अन्धता नियन्त्रण-देश में अन्धता नियन्त्रण पर पर्याप्त ध्यान दिए जाने के कारण अब अन्धता दर में निरन्तर कमी आ रही है। 5. एच०आई०वी०/एड्स नियन्त्रण-सन् 1987 से प्रारम्भ इस कार्यक्रम के अन्तर्गत इस रोग से ग्रसित रोगियों का पता लगाने, रोग के संक्रमण को नियन्त्रित करने तथा रोगियों का समुचित उपचार करने के लिए, सरकार बहु-क्षेत्रीय कार्यक्रम चला रही है।
6. पोलियो नियन्त्रण-पोलियो की प्रभावदर को शून्य करने के लिए 5 वर्ष तक के बच्चों को प्रतिमाह पोलियो की खुराक पिलाई जा रही है।
In simple words: Public health refers to the overall well-being of all people in a country, emphasizing preventive care, nutrition, timely treatment, and maternal-child health. The government has implemented various disease control programs, including for malaria, leprosy, tuberculosis, blindness, HIV/AIDS, and polio, to improve public health outcomes and reduce the prevalence of infectious diseases.
🎯 Exam Tip: Define public health broadly, then enumerate key disease control programs by their names and a brief description of their objectives and impact, showcasing the state's efforts.
Question 20.चिकित्सा की छः भारतीय प्रणालियों की सूची बनाइए ।
Answer: चिकित्सा की भारतीय प्रणाली में निम्नलिखित छः व्यवस्थाएँ हैं
1. आयुर्वेद ।
2. योग ।
3. यूनानी ।
4. सिद्ध ।
5. प्राकृतिक चिकित्सा ।
6. होम्योपैथी ।
In simple words: The six traditional Indian systems of medicine are Ayurveda, Yoga, Unani, Siddha, Naturopathy, and Homeopathy. These diverse practices offer different approaches to health and healing, often focusing on holistic well-being.
🎯 Exam Tip: List all six Indian medical systems accurately. No further explanation is needed as the question only asks for a list.
Question 21.हम स्वास्थ्य सुविधा कार्यक्रमों की प्रभावशीलता को कैसे बढ़ा सकते हैं?
Answer: किसी व्यक्ति के काम करने की योग्यता एवं क्षमता काफी सीमा तक उसके स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। अच्छा स्वास्थ्य जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि करता है। स्वास्थ्य सुविधा कार्यक्रमों की प्रभावशीलता का निर्धारण शिशु एवं मातृ मृत्युदर, जीवन प्रत्याशा, पोषण स्तर, छूत एवं अछूत बीमारियों के स्तर से होता है। उपर्युक्त सूचकों के स्तर के आधार पर कहा जा सकता है कि भारत में स्वास्थ्य सुविधा कार्यक्रमों की प्रभावशीलता को बढ़ाने की आवश्यकता है। इसे निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है
1. स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी व्यय सकल घरेलू उत्पाद का मात्र 5 प्रतिशत है। यह अन्य देशों के मुकाबले काफी कम है। स्वास्थ्य सुविधा कार्यक्रमों की सफलता के लिए सरकार को स्वास्थ्य व्यय बढ़ाना चाहिए।
2. बच्चों को भयानक बीमारियों; जैसे-मलेरिया, क्षयरोग (TB), चेचक, पोलियो आदि; से बचाव के लिए उन्हें उचित टीके लगाए जाने चाहिए ।
3. गरीब लोगों को खाने के पर्याप्त एवं सन्तुलित भोजन की आपूर्ति करनी चाहिए जिससे कुपोषण से होने वाली बीमारियों को रोका जा सके ।
4. स्वास्थ्य व सफाई के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा की जानी चाहिए।
5. सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएँ विकेन्द्रित होनी चाहिए।
6. स्वास्थ्य सुविधाओं का शहरों एवं गाँवों में स्पष्ट विभाजन होना चाहिए।
In simple words: To enhance the effectiveness of health programs, India needs to significantly increase public spending on health, ensure universal immunization for children, provide adequate and nutritious food for the poor to combat malnutrition, and raise public awareness about health and sanitation. Additionally, decentralizing public health services and bridging the urban-rural gap in healthcare access are critical steps.
🎯 Exam Tip: Provide a multi-faceted answer, including increasing government expenditure, focusing on preventive care (vaccination, nutrition), public awareness, and structural reforms like decentralization and equitable distribution of services.
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1.विद्युत के उत्पादन का बुनियादी स्रोत है
(क) तापीय विद्युत
(ख) जलविद्युत
(ग) आणविक ऊर्जा
(घ) ये सभी
Answer: (घ) ये सभी
In simple words: The basic sources for electricity generation include thermal power (from coal), hydroelectric power (from water), and nuclear energy (from atomic fission). All of these are fundamental methods for producing electricity.
🎯 Exam Tip: Remember that electricity can be generated from multiple primary sources, not just one. For MCQs, consider all options carefully to identify the most comprehensive answer.
Question 2.सन् 2011 की जनगणना के अनुसर शिशु लिंग अनुपात प्रति हजार पुरुषों पर महिलाएँ
(क) 900
(ख) 943
(ग) 950
(घ) 955
Answer: (ख) 943
In simple words: According to the 2011 census, the child sex ratio in India was 943 females per 1000 males. This indicator highlights the gender imbalance at birth and is a crucial demographic statistic.
🎯 Exam Tip: Accurately recall specific statistical data like census figures. For gender ratios, remember whether it's per 1000 males or females and the age group it refers to.
Question 3.खनिज तेल उत्पादक क्षेत्र नहीं है
(क) उत्तर प्रदेश
(ख) राजस्थान
(ग) गुजरात
(घ) डिगबोई
Answer: (क) उत्तर प्रदेश ।
In simple words: Among the given options, Uttar Pradesh is not known as a mineral oil-producing region. Rajasthan, Gujarat, and Digboi (in Assam) are significant areas for mineral oil production in India.
🎯 Exam Tip: Familiarize yourself with the key geographical locations for various mineral and energy resources in India. Knowing major producing states or regions helps in identifying non-producing ones.
Question 4.विश्व में सम्भाव्ये जल-शक्ति की दृष्टि से भारत का कौन-सा स्थान है?
(क) पहला
(ख) दूसरा
(ग) तीसरा
(घ) पाँचवाँ
Answer: (घ) पाँचवाँ,
In simple words: In terms of potential hydropower, India ranks fifth globally. This indicates its significant capacity for generating electricity using water resources, though often not fully utilized.
🎯 Exam Tip: Remember India's global ranking in terms of potential resources, especially for energy sources like hydropower. This often appears as factual recall in exams.
Question 5.भारत में सर्वप्रथम परमाणु ऊर्जा केन्द्र कहाँ स्थापित किया गया?
(क) तारापुर में
(ख) रावतभाटा में
(ग) काकरापाड़ा में
(घ) नरौरा में
Answer: (क) तारापुर में ।
In simple words: The first nuclear power plant in India was established at Tarapur. This marked a significant milestone in India's journey towards harnessing atomic energy for power generation.
🎯 Exam Tip: Know the historical firsts in critical infrastructure development, such as the location of India's first nuclear power plant. These are common knowledge-based questions.
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1.आधारिक संरचना क्या है?
Answer: किसी अर्थव्यवस्था के पूँजी स्टॉक के उस भाग को जो विभिन्न प्रकार की सेवाएँ प्रदान करने की दृष्टि से अनिवार्य होता है, आधारिक संरचना कहा जाता है।
In simple words: Infrastructure refers to the essential part of an economy's capital stock that provides various services necessary for its functioning and growth. It comprises fundamental facilities and systems crucial for a country's development.
🎯 Exam Tip: Define infrastructure concisely, linking it to capital stock and its role in providing essential services for economic operation.
Question 2.आधारिक संरचना के कुछ उदाहरण दीजिए।
Answer: आधारिक संरचना के कुछ उदाहरण हैं-परिवहन सुविधाएँ प्रदान करने वाली सड़कें, बसें, रेलवे, स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने वाले अस्पताल, सिंचाई की सुविधा प्रदान करने वाली नहरें, कुएँ आदि पूँजी स्टॉक आधारिक संरचना हैं।
In simple words: Examples of infrastructure include transportation facilities like roads, buses, and railways; healthcare services like hospitals; and irrigation facilities such as canals and wells. These are all part of a nation's capital stock that enable various economic and social activities.
🎯 Exam Tip: Provide a diverse set of examples covering different sectors (transport, health, agriculture) to illustrate the broad scope of infrastructure.
Question 3.आर्थिक आधारिक संरचना से आप क्या समझते हैं?
Answer: आर्थिक आधारिक संरचनाएँ वे सुविधाएँ तथा सेवाएँ हैं जो उत्पादन तथा वितरण की प्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं। ये अर्थव्यवस्था के लिए एक दूसरा सहयोगी ढाँचा प्रदान करती हैं। इसके मुख्य घटक हैं 1. परिवहन एवं संचार तन्त्र, 2. विद्युत और सिंचाई तथा 3. मौद्रिक व वित्तीय संस्थाएँ।
In simple words: Economic infrastructure comprises facilities and services that directly influence production and distribution processes within an economy. Key components include transportation and communication systems, power and irrigation, and monetary and financial institutions, all providing crucial support for economic activities.
🎯 Exam Tip: Focus on the "direct impact" on production and distribution when defining economic infrastructure. List its core components for a complete answer.
Question 4.सामाजिक आधारिक संरचना से आप क्या समझते हैं?
Answer: सामाजिक आधारिक संरचनाएँ वे सुविधाएँ तथा सेवाएँ हैं जो आर्थिक सुविधाओं को अप्रत्यक्ष रूप से तथा उत्पादन एवं वितरण की प्रणाली को बाहर से अपना योगदान करती हैं। ये सेवाएँ अर्थव्यवस्था के एक महत्त्वपूर्ण सहायक ढाँचे का निर्माएँ करती हैं। इसके प्रमुख घटक हैं
1. शिक्षा, प्रशिक्षण एवं अनुसन्धान,
2. स्वास्थ्य,
3. आवास,
4. नागरिक सुविधाएँ तथा
5. सार्वजनिक वितरण प्रणाली।।
In simple words: Social infrastructure consists of facilities and services that indirectly contribute to economic processes and the production-distribution system by improving human capital and quality of life. Its main components include education, healthcare, housing, civic amenities, and public distribution systems.
🎯 Exam Tip: Emphasize the "indirect contribution" to economic activity when defining social infrastructure. List key components like education, health, and housing to illustrate its scope.
Question 5.संरचनात्मक सुविधाओं का देश के आर्थिक विकास में क्या महत्त्व है?
Answer: संरचनात्मक सुविधाएँ एक देश के आर्थिक विकास में उत्पादन के तत्त्वों की उत्पादकता में वृद्धि करके और उसकी जनता के जीवन व गुणवत्ता में सुधार करके अपना योगदान करती हैं।
In simple words: Structural facilities are crucial for a country's economic development as they enhance the productivity of production factors and improve the overall quality of life for its citizens. They act as the backbone for both economic and social progress.
🎯 Exam Tip: Highlight the dual role of structural facilities: increasing productivity of resources and improving living standards, both of which are central to economic development.
Question 6.जलापूर्ति एवं सफाई में सुधार का क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: जलापूर्ति एवं सफाई में सुधार से प्रमुख जल संक्रमित बीमारियों से अस्वस्थता में कमी आती है। और बीमारी के हो जाने पर भी उसकी गम्भीरता कम होती है।
In simple words: Improvements in water supply and sanitation directly reduce waterborne diseases, leading to a decrease in overall sickness and minimizing the severity of illnesses when they do occur. This significantly boosts public health.
🎯 Exam Tip: Focus on the direct health benefits: reduction in waterborne diseases, decreased illness prevalence, and reduced severity of diseases, emphasizing public health improvement.
Question 7.आर्थिक विकास की गति को तेज करने के लिए सरकार को क्या करना चाहिए?
Answer: आर्थिक विकास की गति को तेज करने के लिए सरकार को आधारिक संरचना सुविधाओं में निवेश को बढ़ाना चाहिए ।
In simple words: To accelerate the pace of economic development, the government should prioritize increasing investment in infrastructure facilities. Enhanced infrastructure directly supports various sectors, boosting productivity and overall economic activity.
🎯 Exam Tip: The core action for accelerating economic development is increased investment in infrastructure. Keep the explanation direct and concise.
Question 8.आय में वृद्धि के साथ आधारिक संरचना में क्या महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आते हैं?
Answer: अल्प आय वाले देशों के लिए सिंचाई, परिवहन व बिजली अधिक महत्त्वपूर्ण है जबकि उच्च आय वाले देशों में बिजली और दूरसंचार अधिक महत्त्वपूर्ण हैं। इस प्रकार आधारिक संरचना का विकास और आर्थिक विकास साथ-साथ होते हैं।
In simple words: As income levels rise, the focus of infrastructure development shifts from basic needs like irrigation, transport, and electricity (crucial for low-income countries) to more advanced services such as sophisticated electricity grids and telecommunications (important for high-income countries). This illustrates that infrastructure development evolves in tandem with economic progress.
🎯 Exam Tip: Explain the shift in infrastructure priorities with rising income levels, differentiating between the needs of low-income and high-income countries, and highlighting co-evolution.
Question 9.आर्थिक आधारिक संरचना का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक क्या है?
Answer: आर्थिक आधारिक संरचना का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक 'ऊर्जा' है क्योंकि इसके बिना औद्योगिक उत्पादन सम्भव नहीं है।
In simple words: The most crucial component of economic infrastructure is 'energy' because industrial production and almost all economic activities cannot function without a reliable and sufficient energy supply.
🎯 Exam Tip: Identify energy as the most important component and briefly explain its indispensability for industrial production and economic activity.
Question 10.वाणिज्यिक और गैर-वाणिज्यिक ऊर्जा के महत्त्वपूर्ण घटक बताइए ।
Answer:
1. वाणिज्यिक ऊर्जा के महत्त्वपूर्ण घटक- कोयला, पेट्रोलियम उत्पाद, प्राकृतिक गैस तथा बिजली ।
2. गैर-वाणिज्यिक ऊर्जा के महत्त्वपूर्ण घटक- ईंधन की लकड़ी, कृषि अवशिष्ट (भूसा) और पशु अवशिष्ट (गोबर)।
In simple words: Key components of commercial energy include coal, petroleum products, natural gas, and electricity, which are traded in markets. Non-commercial energy sources primarily consist of fuelwood, agricultural waste (chaff), and animal waste (cow dung), typically used directly without market transactions.
🎯 Exam Tip: Clearly list the distinct components for both commercial and non-commercial energy sources. Ensure accurate examples for each category.
Question 11.ऊर्जा के परम्परागत स्रोत क्या हैं? उदाहरण सहित बताइए ।
Answer: ऊर्जा के परम्परागत स्रोत वे हैं जिनकी हमें जानकारी है और जिनका प्रयोग हम बहुत लम्बे समय से कर रहे हैं; जैसे - कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और बिजली ।।
In simple words: Traditional energy sources are those that have been known and used for a long time. Examples include coal, petroleum, natural gas, and electricity (derived from these sources), which have historically been primary energy providers.
🎯 Exam Tip: Define traditional energy sources by their long-standing use and familiarity. Provide common examples like fossil fuels and conventionally generated electricity.
Question 12.ऊर्जा के गैर-पारम्परिक स्रोत क्या हैं? उदाहरण सहित बताइए ।
Answer: ऊर्जा के गैर-पारम्परिक स्रोत वे हैं जिनकी खोज हाल ही के वर्षों में की गई है और जिनकी लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ रही है; जैसे-सौर ऊर्जा, वायु ऊर्जा, बायोमास ।
In simple words: Non-conventional energy sources are those recently discovered or developed, whose popularity is gradually increasing. Examples include solar energy, wind energy, and biomass, which are often renewable and environmentally friendly alternatives to traditional sources.
🎯 Exam Tip: Define non-conventional energy sources by their recent discovery/development and growing popularity. Provide examples such as solar, wind, and biomass energy.
Question 13.भारतीय कोयले का मुख्य दोष क्या है?
Answer: भारतीय कोयले का मुख्य दोष यह है कि इसमें राख बहुत अधिक मात्रा में पाई जाती है और उष्णता कम मात्रा में इसका तापविद्युत स्टेशनों की कुशलता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
In simple words: The primary drawback of Indian coal is its high ash content and low calorific value, which significantly reduces the efficiency of thermal power stations. This characteristic makes it less ideal for energy production compared to higher-quality coal.
🎯 Exam Tip: State the two main flaws of Indian coal: high ash content and low heat value. Explain how these characteristics negatively impact the efficiency of power generation.
Question 14.प्राकृतिक गैस का प्रयोग किस रूप में होता है? इसके भण्डार कहाँ हैं?
Answer: प्राकृतिक गैस का प्रयोग उर्वरक तथा पेट्रोलियम पदार्थों में कच्चे माल के रूप में होता है। इसके मुख्य भण्डार मुम्बई, गुजरात, त्रिपुरा, आन्ध्र प्रदेश तथा राजस्थान में पाए जाते हैं।
In simple words: Natural gas is primarily used as a raw material in the production of fertilizers and petrochemicals. Its major reserves are found in regions like Mumbai High, Gujarat, Tripura, Andhra Pradesh, and Rajasthan, contributing to its domestic availability.
🎯 Exam Tip: Identify the main industrial uses of natural gas (fertilizers, petrochemicals) and list the significant states or regions where its reserves are found in India.
Question 15.भारत में बिजली प्राप्ति के मुख्य स्रोत क्या हैं?
Answer: भारत में बिजली प्राप्ति के तीन मुख्य स्रोत हैं-
1. तापविद्युत स्टेशन,
2. जल विद्युत स्टेशन तथा
3. आणविक शक्ति स्टेशन।
In simple words: The three main sources of electricity in India are thermal power stations (primarily coal-based), hydroelectric power stations (using water), and nuclear power stations (harnessing atomic energy). These collectively form the backbone of the nation's power generation.
🎯 Exam Tip: List the three principal sources of electricity generation in India clearly: thermal, hydro, and nuclear power stations.
Question 16.भारत में आणविक शक्ति स्टेन के कुछ प्रमुख स्थान बताइए ।
Answer: भारत में आणविक शक्ति स्टेशन के कुछ प्रमुख स्थान हैं-
1. मुम्बई के पास, तारापुर में,
2. कोटा (राजस्थान) के पास राणाप्रताप सागर बाँध,
3. चेन्नई (तमिलनाडु) के समीप कलपक्कम में,
4. बुलन्दशहर (उत्तर प्रदेश) के पास नरौरा में।।
In simple words: Major locations of nuclear power stations in India include Tarapur near Mumbai, Rawatbhata near Kota in Rajasthan, Kalpakkam near Chennai in Tamil Nadu, and Narora near Bulandshahr in Uttar Pradesh. These facilities are crucial for the country's atomic energy program.
🎯 Exam Tip: Name several key locations of nuclear power plants across different states in India. Knowing both the plant name and its state helps score well.
Question 17.पर्यावरण की दृष्टि से ऊर्जा के परम्परागत और गैर-परम्परागत स्रोतों के बीच मुख्य अन्तर क्या है?
Answer: ऊर्जा के परम्परागत स्रोत (विशेष रूप से कोयला और पेट्रोलियम) पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। जबकि ऊर्जा के गैर-परम्परागत स्रोत पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करते।
In simple words: The main difference from an environmental perspective is that traditional energy sources, particularly coal and petroleum, cause pollution and contribute to environmental degradation. In contrast, non-conventional energy sources are generally non-polluting and environmentally friendly.
🎯 Exam Tip: The core distinction is environmental impact: traditional sources pollute, while non-conventional sources do not. Keep the answer focused on this key difference.
Question 18.बायो ऊर्जा से क्या आशय है?
Answer: बायो ऊर्जा जीव तथा जैव पदार्थ से प्राप्त की जाती है। यह दो प्रकार की होती है- 1. बायो गैस-इसे गोबर गैस प्लाण्ट में गोबर डालकर प्राप्त किया जाता है। बायो मास-इसे पौधों तथा वृक्षों के माध्यम से प्राप्त किया जाता है।
In simple words: Bioenergy is derived from organic matter such as living organisms and biological substances. It primarily comes in two forms: biogas, produced by fermenting cow dung in biogas plants, and biomass, obtained from plants and trees.
🎯 Exam Tip: Define bioenergy by its source (organic matter) and then distinguish between its two main types, biogas and biomass, with a brief explanation for each.
Question 19.ऊर्जा के प्राथमिक स्रोत क्या हैं?
Answer: ऊर्जा के प्राथमिक वे स्रोत हैं जो प्रकृति से निःशुल्क उपहार के रूप में प्राप्त होते हैं। इनका प्रत्यक्ष प्रयोग होता है; जैसे-कोयला, लिग्नाइट, पेट्रोलियम आदि ।
In simple words: Primary energy sources are those naturally occurring gifts from nature that can be used directly for energy, without undergoing any conversion process. Examples include coal, lignite, and petroleum, which are directly extracted and utilized.
🎯 Exam Tip: Define primary energy sources as natural and directly usable. Provide examples of raw fossil fuels like coal, lignite, and petroleum.
Question 20.ऊर्जा के अन्तिम स्रोत क्या हैं?
Answer: ऊर्जा के अन्तिम स्रोत वे हैं जिनका प्रयोग अन्तिम उत्पाद के रूप में किया जाता है जैसे विद्युत शक्ति ।
In simple words: Final energy sources are those forms of energy that are directly used by consumers as the end product, after being converted from primary sources. An example is electrical power, which is the direct energy used in homes and industries.
🎯 Exam Tip: Define final energy sources as end-use products, giving electricity as the prime example. Distinguish them from primary sources which require conversion.
Question 21.प्राकृतिक गैस के उपयोग बताइए।
Answer: प्राकृतिक गैस तरल पदार्थ के रूप में होती है। इसका प्रयोग अधिकतर घरों में ईंधन के रूप में किया जाता है। वर्तमान में इसका व्यावसायिक उपयोग भी बढ़ता जा रहा है; जैसे-स्टील निर्माण में, हल्के वाहनों को चलाने आदि में ।।
In simple words: Natural gas, though a fluid, is widely used as fuel in most homes. Its commercial applications are also expanding, notably in steel manufacturing and as fuel for light vehicles, making it a versatile energy source.
🎯 Exam Tip: List both domestic (household fuel) and commercial/industrial uses (steel production, vehicle fuel) of natural gas to demonstrate its versatility.
Question 22.स्वास्थ्य से क्या आशय है?
Answer: स्वास्थ्य सम्पूर्ण शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक कल्याण की अवस्था है। इसका आशय एक व्यक्ति की स्वस्थ शारीरिक तथा मानसिक अवस्था से है।
In simple words: Health means a state of complete physical, mental, and social well-being, going beyond just the absence of disease. It implies an individual's sound physical and mental condition that allows for productive participation in society.
🎯 Exam Tip: Define health comprehensively, including physical, mental, and social well-being, rather than just the absence of illness.
Question 23.अच्छे स्वास्थ्य का क्या महत्त्व है?
Answer: अच्छा स्वास्थ्य जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि लाता है। यह मानव संसाधन विकास का एक महत्त्वपूर्ण घटक है और राष्ट्र की एक परिसम्पत्ति है।
In simple words: Good health significantly enhances the quality of life, serves as a crucial component of human resource development, and represents a valuable asset for the nation. A healthy population is more productive and contributes more effectively to economic growth.
🎯 Exam Tip: Emphasize the importance of good health in improving quality of life, fostering human resource development, and serving as a national asset for economic growth.
Question 24.बिजली के संचालन तथा वितरण में होने वाली हानि के क्या कारण हैं?
Answer: बिजली के संचालन तथा वितरण में होने वाली हानि के कारण हैं 1. पारेषण की पिछड़ी तकनीक तथा 2. बिजली कर्मचारियों की सहायता से बिजली की चोरी ।
In simple words: Losses in electricity transmission and distribution are caused by two primary factors: outdated transmission technology leading to technical inefficiencies, and electricity theft, often facilitated by corrupt power utility employees.
🎯 Exam Tip: Identify the two main causes: outdated technology (technical losses) and electricity theft (commercial losses, often aided by internal personnel), which are frequently asked in exams.
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1.सामाजिक आधारिक संरचना एवं आर्थिक आधारिक संरचना से आप क्या समझते हैं?
Answer: आधारित संरचना दो प्रकार की होती है-
1. सामाजिक आधारिक संरचना एवं
2. आर्थिक आधारिक संरचना।
1. सामाजिक आधारिक संरचना- सामाजिक आधारिक संरचनाएँ वे सुविधाएँ तथा सेवाएँ हैं, जो आर्थिक प्रक्रियाओं को अप्रत्यक्ष रूप से तथा उत्पादन एवं वितरण की प्रणाली को बाहर से अपना योगदान प्रदान करती हैं। ये सेवाएँ अर्थव्यवस्था के एक महत्त्वपूर्ण सहायक ढाँचे का निर्माण करती हैं । सामाजिक आधारिक संरचना के प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं
• सामाजिक शिक्षा, प्रशिक्षण एवं अनुसन्धान,
• सामाजिक स्वास्थ्य,
• सामाजिक आवास,
• सामाजिक नागरिक सुविधाएँ तथा
• सार्वजनिक वितरण प्रणाली।।
2. आर्थिक आधारिक संरचना- आर्थिक आधारिक संरचनाएँ वे सुविधाएँ तथा सेवाएँ हैं, जो उत्पादन तथा वितरण की प्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं। ये सेवाएँ बाहर स्थित न होकर उत्पादन एवं वितरण की प्रणाली के अन्दर ही स्थित होती हैं। ये अर्थव्यवस्था के लिए एक दूसरा सहयोगी ढाँचा प्रदान करती हैं।
आर्थिक आधारिक संरचना के मुख्य घटक निम्नलिखित हैं
1. परिवहन और संचार तन्त्र,
2. विद्युत और सिंचाई तथा
3. मौद्रिक और वित्तीय संस्थाएँ।
In simple words: Social infrastructure (like education, health, housing) provides indirect support to economic activities by enhancing human capital and improving quality of life, forming a crucial supportive framework. Economic infrastructure (like transport, communication, power, finance) directly impacts production and distribution processes, existing within the economic system itself and providing a direct operational framework.
🎯 Exam Tip: Clearly differentiate between social and economic infrastructure based on their direct vs. indirect impact on economic processes, and provide specific examples for each category's components.
Question 2.ऊर्जा संसाधन से क्या तात्पर्य है? इन्हें कितने भागों में बाँटा जाता है?
Answer: जिन पदार्थों से मनुष्य को कृषि, उद्योग तथा परिवहन साधनों हेतु ऊर्जा की प्राप्ति होती है, उन्हें ऊर्जा संसाधन (Energy Resources) कहा जाता है। प्राचीन काल में मानव ऊर्जा के लिए मानव शक्ति, पशु शक्ति तथा लकड़ी आदि पर निर्भर करता था, परन्तु आज वह जिन पदार्थों से ऊर्जा प्राप्त कर रहा है, उनमें कोयला, खनिज तेल (पेट्रोलियम), प्राकृतिक गैस, पनविद्युत, परमाणु खनिज, सूर्यातप, पवन, भू-गर्भीय ताप, ज्वारीय तरंगें, गन्ने की खोई एवं कूड़ा-कचरा आदि का प्रमुख स्थान है।
ऊर्जा संसाधनों का वर्गीकरण - उपलब्धता के आधार पर ऊर्जा संसाधनों को दो भागों में विभाजित किया जाता है
1. परम्परागत ऊर्जा संसाधन-इनमें कोयला, खनिज तेल (पेट्रोलियम), प्राकृतिक गैस एवं
1. परमाणु खनिज सम्मिलित किए जाते हैं जो भू- गर्भ से निकाले जाते हैं। इन ऊर्जा संसाधनों के भण्डार सीमित हैं और कभी भी समाप्त हो सकते हैं अर्थात् ये अविश्वसनीय ऊर्जा संसाधन हैं।
2. गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधन- इनके अन्तर्गत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, बायो ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा आदि को सम्मिलित किया जाता है। वास्तव में ये ऊर्जा के नव्यकरणीय संसाधन हैं। इसी कारण इन्हें ऊर्जा के विश्वसनीय संसाधन कहा जाता है।
In simple words: Energy resources are materials providing energy for human activities like agriculture, industry, and transport. They are broadly categorized into conventional (non-renewable) and non-conventional (renewable) sources. Conventional sources like coal and petroleum are finite, while non-conventional sources such as solar and wind energy are inexhaustible and considered reliable.
🎯 Exam Tip: Define energy resources broadly and then provide a clear, two-part classification into conventional and non-conventional sources, explaining the key characteristics (finite/inexhaustible) of each with relevant examples.
Question 3.जीवाश्मीय ईंधनों में कौन-से अवगुण पाए जाते हैं?
Answer: कोयला, खनिज तेल (पेट्रोलियम) तथा प्राकृतिक गैस की उत्पत्ति जैव पदार्थों से हुई है। इनका उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है। इसी कारण इन्हें जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) भी कहा जाता है। जीवाश्मीय ईंधनों में निम्नलिखित अवगुण पाए जाते हैं
1. ये ऊर्जा के क्षयी संसाधन हैं अर्थात् इनके भण्डार कभी भी समाप्त हो सकते हैं।
2. जीवाश्मीय ईंधन के प्रयोग से राख, धुआँ एवं गन्दगी उत्पन्न होती है जिनसे पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है।
3. एक बार उपभोग करने के बाद ये सदैव के लिए समाप्त हो जाते हैं अर्थात् इनका नवीनीकरण नहीं किया जा सकता है (पनविद्युत को छोड़कर)।
4. इनके आवागमन में भारी व्यय करना पड़ता है, परन्तु इनसे ताप शक्ति की प्राप्ति अधिक होती है।
5. जीवाश्मीय ईंधनों के उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण में वृद्धि होती जा रही है जो आधुनिक युग की सबसे ज्वलन्त समस्या है जिसका सामना विश्व के सभी देश कर रहे हैं।
In simple words: Fossil fuels like coal, petroleum, and natural gas are non-renewable, meaning their reserves are finite and deplete with use. Their combustion generates significant pollution (ash, smoke, dirt), contributing to environmental degradation and climate change, which is a global concern. Despite high transportation costs, they offer considerable thermal energy.
🎯 Exam Tip: List the disadvantages of fossil fuels, focusing on their non-renewable nature, significant environmental pollution, and the high costs associated with their transportation, highlighting their unsustainable aspects.
Question 4.कोयला, खनिज तेल तथा प्राकृतिक गैस को जीवाश्मीय ईंधन क्यों कहते हैं? इनके दो। विशेष अवगुण कौन-से हैं?
Answer: कोयला, खनिज तेल तथा प्राकृतिक गैस की उत्पत्ति जैव पदार्थों से हुई है। इनका उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है। इसी कारण इन्हें जीवाश्मीय ईंधन कहा जाता है। कोयले की उत्पत्ति प्राचीन काल (कार्बोनिफेरस युग) में प्राकृतिक वनस्पति के भू-गर्भ में दबकर कालान्तर में रूपान्तरित और कठोर हो जाने के फलस्वरूप हुई है। दबाव के कारण इसे वनस्पति की
जलवाष्प समाप्त हो गई तथा वह कोयले में परिणत हो गई। कोयला जितने समय तक भू-गर्भ में दबा रहता है, उतना ही उत्तम और कार्बनयुक्त होता जाता है। इस प्रकार खनिज तेल तथा प्राकृतिक गैस की उत्पत्ति भी भू-गर्भ में दबी हुई वनस्पति तथा जलजीवों के रासायनिक परिवर्तनों के कारण हुई आसवन क्रिया का परिणाम है। भू-गर्भ से निकलने के कारण इनमें अनेक अशुद्धियाँ मिली होती हैं, अतः उपभोग करने से पूर्व इन्हें परिष्करणशालाओं में रासायनिक क्रियाओं द्वारा साफ किया जाता है।
जीवाश्मीय ईंधन के अवगुण
कोयला, खनिज तेल तथा प्राकृतिक गैस के दो विशेष अवगुण इस प्रकार हैं
1. एक बार उपभोग करने के उपरान्त ये सदैव के लिए समाप्त हो जाते हैं अर्थात् इनका नवीनीकरण नहीं किया जा सकता है।
2. कोयला, खनिज तेल तथा प्राकृतिक गैस, ऊर्जा के ऐसे संसाधन हैं; जिनके उपयोग से राख, धुआँ, गन्दगी आदि पदार्थ निकलते हैं, जिनसे पर्यावरण प्रदूषित होता है।
In simple words: Coal, mineral oil, and natural gas are called fossil fuels because they originate from the decomposition of organic matter (plants and marine organisms) over millions of years under intense heat and pressure underground. Their two main disadvantages are that they are non-renewable resources, depleting permanently after a single use, and their combustion produces ash, smoke, and pollutants, leading to environmental pollution.
🎯 Exam Tip: Explain the geological formation of fossil fuels from organic matter. Then, clearly state their two primary drawbacks: non-renewability and environmental pollution from combustion, as these are fundamental concepts.
Question 5.परमाणु ऊर्जा के निर्माण में किन खनिजों को प्रयुक्त किया जाता है? भारत के ऊर्जा क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा क्यों महत्त्वपूर्ण है?
Answer: परमाणु ऊर्जा के निर्माण में प्रयुक्त खनिज परमाणु ऊर्जा के निर्माण में यूरेनियम, थोरियम, जिरकेनियम, बेरियम, जिरकॉन, एण्टीमनी, बेरीलियम, प्लूटोनियम, चेरोलिट, इल्मेनाइट तथा ग्रेफाइट नामक खनिज प्रयुक्त किए जाते हैं। इनमें यूरेनियम, थोरियम तथा प्लूटोनियम प्रमुख परमाणु खनिज हैं।
भारत में परमाणु ऊर्जा का महत्त्व
भारत में परमाणु ऊर्जा के महत्त्व को निम्नलिखित तथ्यों द्वारा व्यक्त किया जा सकता है
1. भारत में ऊर्जा के आपूर्ति संसाधनों; यथा-उत्तम कोटि के कोयले, खनिज तेल तथा प्राकृतिक गैस की पर्याप्त कम है। इनके भण्डार सीमित हैं। अतः हमें जल शक्ति अथवा परमाणु ऊर्जा पर निर्भर रहना पड़ेगा।
2. परमाणु शक्ति केन्द्र ऐसे क्षेत्रों में सरलता से स्थापित किए जा सकते हैं, जहाँ शक्ति के अन्य संसाधन या तो हैं ही नहीं अथवा उनकी अत्यधिक कमी है।
3. अन्य ऊर्जा संसाधनों की अपेक्षा परमाणु खनिजों के विघटन से अत्यधिक ऊर्जा शक्ति की प्राप्ति होती है।
4. चिकित्सा तथा कृषि जैसे क्षेत्रों में परमाणु ऊर्जा के शान्तिपूर्ण उपयोग में भारत विश्व में अग्रणी स्थान रखता है।
In simple words: Nuclear energy is generated using minerals like uranium, thorium, and plutonium. It is vital for India's energy sector because the country has limited reserves of high-quality fossil fuels, making nuclear power a crucial alternative. Nuclear plants can be easily set up in energy-deficient regions, provide enormous power from small amounts of fuel, and India also uses atomic energy for peaceful applications in medicine and agriculture.
🎯 Exam Tip: List the main minerals used in nuclear energy production. For its importance, highlight India's limited conventional fuel reserves, strategic placement of plants, high energy output, and peaceful applications in other sectors.
Question 6.भारत में परमाणु ऊर्जा केन्द्र कहाँ-कहाँ स्थापित किए गए हैं?
Answer: भारत में परमाणु ऊर्जा के केन्द भारत में परमाणु शक्ति बोर्ड द्वारा देश के विभिन्न भागों में परमाणु ऊर्जा केन्द्र स्थापित किए गए हैं। यहाँ सव्रप्रथम सन् 1960 में मुम्बई के निकट तारापुर में परमाणु ऊर्जा केन्द्र स्थापित किया गया था। इसके पश्चात् राजथान में कोटा के निकट रावतभाटा नामक स्थान पर, चन्नई के निकट कलपक्कम नामक स्थान पर, उत्तर प्रदेश में बुलन्दशहर के निकट नरौरा नामक स्थान पर तथा गुजरात में काकरापाड़ा नामक स्थान पर परमाणु ऊर्जा केन्द्रों की स्थापना की गई है। इस प्रकार से भारत में छः स्थानों;
1. तारापुर एवं ट्रॉम्बे (महराष्ट्र),
2. रावतभाटा (कोटा-राजस्थान),
3. कलपक्कम (चेन्नई- तमिलनाडु),
4. नरौरा (बुलन्दशहर-उत्तर प्रदेश),
5. काकरापाड़ा (गुजरात),
6. कैगा (कर्नाटक) में परमाणु ऊर्जा के केन्द्र स्थापित किए गए हैं। वर्तमान में देश में 14 परमाणु ऊर्जा रिएक्टर्स काम कर रहे हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 2,720 मेगावाट है। देश में अन्य परमाणु ऊर्जा के रिएक्टर्स निर्माणाधीन हैं जिनकी स्थापना के बाद देश की परमाणु विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 7300 मेगावाट हो जाएगी।
In simple words: India has established nuclear power centers across various states, with the first at Tarapur (Maharashtra) in 1960. Other key locations include Rawatbhata (Rajasthan), Kalpakkam (Tamil Nadu), Narora (Uttar Pradesh), Kakrapar (Gujarat), and Kaiga (Karnataka). Currently, 14 operational reactors produce 2,720 MW, with ongoing projects expected to raise the capacity to 7,300 MW.
🎯 Exam Tip: List the major nuclear power plant locations along with their respective states. Mentioning the first plant (Tarapur) and providing current and projected capacity figures enhances the answer's factual depth.
Question 7.जलविद्युत शक्ति, कोयला एवं खनिज तेल की तुलना में अधिक सुविधाजनक है। क्यों?
Answer: जलविद्युत शक्ति, कोयले एवं खनिज तेल की अपेक्षा अधिक सुविधाजनक है; क्योंकि
1. जलविद्युत, शक्ति का अक्षय एवं अविरल स्रोत है, जबकि कोयला एवं खनिज तेल कभी भी समाप्त हो सकते हैं।
2. जलविद्युत उत्पादक परियोजना (बहुउद्देशीय परियोजना) का एक बार विकास हो जाने पर उसका उपयोग सदैव तथा सतत रूप में किया जा सकता है।
3. तारों (केबिल्स) के माध्यम से जलविद्युत शक्ति को कम खर्च में दुर्गम एवं दूरवर्ती स्थानों तक ले जाया जा सकता है, जबकि कोयला या खनिज तेल का परिवहन व्यय बहुत अधिक होता है।
4. जलविद्युत के उपयोग में धुआँ एवं गन्दगी आदि न उत्पन्न होने से यह स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त । रहती है, जबकि कोयला तथा खनिज तेल धुआँ एवं गन्दगी उत्पन्न कर पर्यावरण को प्रदूषित करते
5. कोयला एवं खनिज तेल के भण्डारण में पर्याप्त व्यय करना पड़ता है, जबकि जलविद्युत में इस प्रकार का कोई व्यय नहीं करना पड़ता है।
6. खनिज तेल की प्राप्ति ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर तनाव पैदा किए हैं, जबकि जलविद्युत शक्ति के साथ ऐसा कोई तथ्य नहीं है। इसका प्रमुख उदाहरण इराक-अमेरिकी युद्ध है।
In simple words: Hydropower is more advantageous than coal and mineral oil because it is a renewable and continuous energy source, unlike finite fossil fuels. Once developed, hydroelectric projects offer perpetual use, and electricity can be transmitted cheaply to remote areas via cables, avoiding the high transport costs and environmental pollution associated with fossil fuels. Moreover, hydropower doesn't create geopolitical tensions like oil.
🎯 Exam Tip: Compare hydropower with fossil fuels on multiple parameters: renewability, operational longevity, transmission efficiency, environmental impact, storage costs, and geopolitical implications. This comprehensive comparison showcases a strong understanding.
Question 8.ऊर्जा के परम्परागत एवं गैर-परम्परागत साधनों की तुलना कीजिए। अथवा गैर-पारम्परिक ऊर्जा के साधन अनन्त काल तक प्रयोग में लाए जा सकते हैं।” उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए ।
Answer: ऊर्जा के परम्परागत तथा गैर-परम्परागत साधनों की तुलना
| क्र०सं० | परम्परागत साधन | गैर-परम्परागत साधन |
|---|---|---|
| 1. | मानव, पशु, ईंधन (लकड़ी, कोयला, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस, जलविद्युत शक्ति, ऊर्जा के परम्परागत साधन हैं। | सौर ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायो गैस (कूड़ा-कचरा, मल-मूत्र एवं गोबर से निर्मित) ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधन हैं। |
| 2. | ऊर्जा के परम्परागत साधनों को मानव प्राचीनकाल से ही उपयोग में ला रहा है। | ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों का विकास वैज्ञानिक तकनीकी विकास के साथ-साथ सम्भव हुआ है। |
| 3. | जलविद्युत शक्ति को छोड़कर, अन्य सभी ऊर्जा के परम्परागत साधन नव्यकरणीय साधन अनव्यकरणीय हैं अर्थात् इनका एक बार उपयोग कर लिए जाने के उपरान्त ये सदैव के लिए समाप्त हो जाते हैं। | ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधन नव्यकरणीय होते हैं। इनका निरन्तर उपयोग किया जाता रहेगा, उदाहरण के लिए जब तक ब्रह्माण्ड में सूर्य रहेगा, सौर ऊर्जा अनवरत रूप से प्राप्त होती रहेगी। |
| 4. | ये ऊर्जा के क्षयी संसाधन भी कहलाते हैं। | इन्हें ऊर्जा के 'अक्षयी संसाधन' कहा जाता है। |
| 5. | ऊर्जा के परम्परागत साधनों का उपयोग विश्व में व्यापक स्तर पर किया जाता है। | ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों की उपलब्धता तो पर्याप्त है, परन्तु अभी तक उनका व्यापक उपयोग नहीं हो पाया है। |
| 6. | ऊर्जा के ये साधन पर्यावरण प्रदूषण में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं (जलविद्युत को छोड़कर)। | ऊर्जा के ये साधन पर्यावरण प्रदूषण से मुक्त हैं अर्थात् प्रदूषण नहीं फैलाते हैं। |
In simple words: Traditional energy sources (like coal, petroleum) have been used historically, are largely non-renewable (except hydro), finite, widely used, and cause significant environmental pollution. Non-conventional sources (like solar, wind, geothermal) are newer, renewable, inexhaustible, environmentally friendly, but their widespread use is still developing due to technological limitations.
🎯 Exam Tip: Use a comparative table to clearly distinguish traditional and non-conventional energy sources across multiple parameters like origin, usage history, renewability, availability, environmental impact, and current usage levels.
Question 6. भारत में परमाणु ऊर्जा केन्द्र कहाँ-कहाँ स्थापित किए गए हैं?
Answer: भारत में परमाणु ऊर्जा के केन्द भारत में परमाणु शक्ति बोर्ड द्वारा देश के विभिन्न भागों में परमाणु ऊर्जा केन्द्र स्थापित किए गए हैं। यहाँ सव्रप्रथम सन् 1960 में मुम्बई के निकट तारापुर में परमाणु ऊर्जा केन्द्र स्थापित किया गया था। इसके पश्चात् राजथान में कोटा के निकट रावतभाटा नामक स्थान पर, चन्नई के निकट कलपक्कम नामक स्थान पर, उत्तर प्रदेश में बुलन्दशहर के निकट नरौरा नामक स्थान पर तथा गुजरात में काकरापाड़ा नामक स्थान पर परमाणु ऊर्जा केन्द्रों की स्थापना की गई है। इस प्रकार से भारत में छः स्थानों;
1. तारापुर एवं ट्रॉम्बे (महराष्ट्र),
2. रावतभाटा (कोटा-राजस्थान),
3. कलपक्कम (चेन्नई- तमिलनाडु),
4. नरौरा (बुलन्दशहर-उत्तर प्रदेश),
5. काकरापाड़ा (गुजरात),
6. कैगा (कर्नाटक) में परमाणु ऊर्जा के केन्द्र स्थापित किए गए हैं। वर्तमान में देश में 14 परमाणु ऊर्जा रिएक्टर्स काम कर रहे हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 2,720 मेगावाट है। देश में अन्य परमाणु ऊर्जा के रिएक्टर्स निर्माणाधीन हैं जिनकी स्थापना के बाद देश की परमाणु विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 7300 मेगावाट हो जाएगी।
In simple words: भारत में परमाणु ऊर्जा केन्द्रों की स्थापना देश के विभिन्न भागों में की गई है, जिसकी शुरुआत 1960 में तारापुर से हुई थी। वर्तमान में 14 रिएक्टर काम कर रहे हैं, और कई निर्माणाधीन हैं, जिससे भविष्य में कुल उत्पादन क्षमता 7300 मेगावाट तक पहुँच जाएगी।
🎯 Exam Tip: परमाणु ऊर्जा केन्द्रों के प्रमुख स्थानों और उनके योगदान को याद रखना महत्त्वपूर्ण है, खासकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा में इनकी भूमिका के संदर्भ में।
Question 7. जलविद्युत शक्ति, कोयला एवं खनिज तेल की तुलना में अधिक सुविधाजनक है। क्यों?
Answer: जलविद्युत शक्ति, कोयले एवं खनिज तेल की अपेक्षा अधिक सुविधाजनक है; क्योंकि
1. जलविद्युत, शक्ति का अक्षय एवं अविरल स्रोत है, जबकि कोयला एवं खनिज तेल कभी भी समाप्त हो सकते हैं।
2. जलविद्युत उत्पादक परियोजना (बहुउद्देशीय परियोजना) का एक बार विकास हो जाने पर उसका उपयोग सदैव तथा सतत रूप में किया जा सकता है।
3. तारों (केबिल्स) के माध्यम से जलविद्युत शक्ति को कम खर्च में दुर्गम एवं दूरवर्ती स्थानों तक ले जाया जा सकता है, जबकि कोयला या खनिज तेल का परिवहन व्यय बहुत अधिक होता है।
4. जलविद्युत के उपयोग में धुआँ एवं गन्दगी आदि न उत्पन्न होने से यह स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त रहती है, जबकि कोयला तथा खनिज तेल धुआँ एवं गन्दगी उत्पन्न कर पर्यावरण को प्रदूषित करते
5. कोयला एवं खनिज तेल के भण्डारण में पर्याप्त व्यय करना पड़ता है, जबकि जलविद्युत में इस प्रकार का कोई व्यय नहीं करना पड़ता है।
6. खनिज तेल की प्राप्ति ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर तनाव पैदा किए हैं, जबकि जलविद्युत शक्ति के साथ ऐसा कोई तथ्य नहीं है। इसका प्रमुख उदाहरण इराक-अमेरिकी युद्ध है।
In simple words: जलविद्युत कोयला और खनिज तेल से अधिक सुविधाजनक है क्योंकि यह अक्षय, प्रदूषण मुक्त है, एक बार स्थापित होने के बाद इसका उपयोग लगातार किया जा सकता है, और इसके परिवहन या भंडारण में कम खर्च आता है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय तनाव भी कम होता है।
🎯 Exam Tip: जलविद्युत के लाभों को कोयला और खनिज तेल जैसे पारंपरिक स्रोतों के नुकसान के साथ तुलना करके याद रखें। पर्यावरणीय स्थिरता और आर्थिक कारकों पर ध्यान दें।
Question 8. ऊर्जा के परम्परागत एवं गैर-परम्परागत साधनों की तुलना कीजिए। अथवा गैर-पारम्परिक ऊर्जा के साधन अनन्त काल तक प्रयोग में लाए जा सकते हैं।” उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए ।
Answer: ऊर्जा के परम्परागत तथा गैर-परम्परागत साधनों की तुलना
| क्र० सं० | परम्परागत साधन | गैर-परम्परागत साधन |
|---|---|---|
| 1. | मानव, पशु, ईंधन (लकड़ी, कोयला, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस, जलविद्युत शक्ति, ऊर्जा के परम्परागत साधन हैं। | सौर ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायो गैस (कूड़ा-कचरा, मल-मूत्र एवं गोबर से निर्मित) ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधन हैं। |
| 2. | ऊर्जा के परम्परागत साधनों को मानव प्राचीनकाल से ही उपयोग में ला रहा है। | ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों का विकास वैज्ञानिक तकनीकी विकास के साथ-साथ सम्भव हुआ है। |
| 3. | जलविद्युत शक्ति को छोड़कर, अन्य सभी ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधन नव्यकरणीय साधन अनव्यकरणीय हैं अर्थात् इनका एक बार होते हैं। इनका निरन्तर उपयोग किया जाता उपयोग कर लिए जाने के उपरान्त ये सदैव के रहेगा, उदाहरण के लिए जब तक ब्रह्माण्ड में लिए समाप्त हो जाते हैं। | सूर्य रहेगा, सौर ऊर्जा अनवरत रूप से प्राप्त होती रहेगी। |
| 4. | ये ऊर्जा के क्षयी संसाधन भी कहलाते हैं। | इन्हें ऊर्जा के 'अक्षयी संसाधन' कहा जाता है। |
| 5. | ऊर्जा के परम्परागत साधनों का उपयोग विश्व में व्यापक स्तर पर किया जाता है। | ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों की उपलब्धता तो पर्याप्त है, परन्तु अभी तक उनका व्यापक उपयोग नहीं हो पाया है। |
| 6. | ऊर्जा के ये साधन पर्यावरण प्रदूषण में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं (जलविद्युत को छोड़कर)। | ऊर्जा के ये साधन पर्यावरण प्रदूषण से मुक्त हैं अर्थात् प्रदूषण नहीं फैलाते हैं। |
In simple words: परम्परागत ऊर्जा स्रोत जैसे कोयला और पेट्रोलियम सीमित हैं, प्रदूषित करते हैं, और प्राचीन काल से उपयोग में हैं, जबकि गैर-परम्परागत स्रोत जैसे सौर और पवन ऊर्जा अक्षय हैं, प्रदूषण मुक्त हैं, और उनका विकास हाल ही में हुआ है।
🎯 Exam Tip: इस तुलना को एक तालिका के रूप में याद रखना आसान होगा, जिसमें प्रत्येक प्रकार के ऊर्जा स्रोत की विशेषताओं, उपलब्धता और पर्यावरणीय प्रभावों को संक्षेप में बताया गया हो।
Question 9. जलविद्युत, ऊर्जा के गैर-पारम्परिके साधनों की अपेक्षा अधिक महत्त्वपूर्ण क्यों है?
Answer: जलविद्युत, ऊर्जा के गैर-पारम्परिक साधनों की अपेक्षा अधिक महत्त्वपूर्ण है क्योंकि
1. जलविद्युत, ऊर्जा का अक्षय एवं अविरल स्रोत है अर्थात् जलविद्युत नव्यकरणीय ऊर्जा संसाधन है, जबकि ऊर्जा के अन्य पारम्परिक साधन कभी भी समाप्त हो सकते हैं अर्थात् उनका नवीनीकरण नहीं किया जा सकती है।
2. जलविद्युत उत्पादक शक्तिगृह का एक बार विकास हो जाने पर उसका उपयोग सदैव एवं सतत रूप में किया जा सकता है अर्थात् उसे परे बार-बार व्यय नहीं करना पड़ता है।
3. जलविद्युत शक्ति का उत्पादन जल से किया जाता है तथा जल ऊर्जा को स्थायी स्रोत है। अतः जलविद्युत शक्ति के उत्पादन में पर्यावरण प्रदूषित नहीं होता है, जबकि ऊर्जा के अन्य पारम्परिक साधन; यथा-कोयला, खनिज तेल आदि; धुआँ एवं गन्दगी उत्पन्न कर वायु प्रदूषण को जन्म देते
4. जलविद्युत, ऊर्जा का एक ऐसा स्रोत है, जिसे तारों (केबिल्स) के माध्यम से दुर्गम क्षेत्रों में भी उपभोक्ताओं को सुलभ कराया जा सकता है, जबकि पारम्परिक ऊर्जा संसाधनों को दूरवर्ती उपभोक्ताओं तक भेजने में बार-बार परिवहन व्यय करना पड़ता है।
5. जलविद्युत, शक्ति के विकास के लिए एक बार ही व्यय करना पड़ता है, जबकि पारम्परिक ऊर्जा संसाधनों के दोहन में बार-बार पर्याप्त व्यय करना पड़ता है।
6. पारम्परिक ऊर्जा संसाधनों के उपभोग से पूर्व भण्डारण, निस्तारण तथा परिवहन में अत्यधिक व्यय करना पड़ता है, जबकि जलविद्युत शक्ति के उपभोग हेतु इस प्रकार का कोई व्यय नहीं करना पड़ता है।
7. पारम्परिक ऊर्जा संसाधन (खनिज तेल) ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर तनाव उत्पन्न किए हैं, जैसा कि दक्षिण-पश्चिमी एशिया में, जबकि जलविद्युत शक्ति के साथ ऐसा कोई तथ्य नहीं है।
8. जलविद्युत शक्ति के उत्पादन के बाद जो जल शेष बचता है, उसके भौतिक एवं रासायनिक गुणों में कोई परिवर्तन नहीं होता है। अतः इस जल का उपयोग सिंचन तथा अन्य कार्यों में आसानी से किया जा सकता है।
In simple words: जलविद्युत अन्य गैर-पारंपरिक स्रोतों से बेहतर है क्योंकि यह एक अक्षय, प्रदूषण मुक्त और निरंतर उपयोग वाला स्रोत है। यह एक बार के निवेश के बाद कम लागत पर ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे पर्यावरणीय और भू-राजनीतिक स्थिरता बनी रहती है।
🎯 Exam Tip: जलविद्युत के पर्यावरणीय लाभों और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता पर विशेष जोर दें, क्योंकि ये इसकी महत्ता के मुख्य कारण हैं।
Question 10. भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं के सन्दर्भ में बताइए ।
Answer:
भारत में स्वास्थ्य सेवाएँ
स्वास्थ्य सेवाएँ सामाजिक आधारिक संरचना का एक महत्त्वपूर्ण घटक है। अच्छा स्वास्थ्य लोगों को अधिक कार्य कुशल बनाता है। इसके लिए एक उपयुक्त स्वास्थ्य ढाँचे का होना आवश्यक है। इस ढाँचे का निर्माण करते समय हमारे पास दो विकल्प होते हैं-1. बीमारियों को रोकथाम पर ध्यान देना तथा
2. अस्पताल/समुदाय आधारित स्वास्थ्य सुविधाओं पर ध्यान देना। भारत में अस्पताल आधारित स्वास्थ्य सेवाएँ केवल देश के बड़े शहरों तक ही सीमित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में, समुदाय आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को तेजी से विस्तार हो रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, उपकेन्द्र व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बड़ी मात्रा में स्थापित किए जा रहे हैं; किन्तु हमें बीमारियों की रोकथाम पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
In simple words: भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं में बीमारी की रोकथाम और अस्पताल/समुदाय आधारित सेवाओं पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन वर्तमान में अस्पताल सेवाएं शहरों तक सीमित हैं, और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और उपकेन्द्रों का विस्तार किया जा रहा है, जिसमें बीमारियों की रोकथाम पर विशेष जोर है।
🎯 Exam Tip: भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के दो मुख्य विकल्पों - रोकथाम और उपचार - पर ध्यान केंद्रित करें और ग्रामीण-शहरी असमानताओं को स्पष्ट करें।
Question 11. देश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए हमें क्या करना चाहिए?
Answer: देश में स्वास्थ्य सेवाओं का ढाँची उस देश की सामाजिक प्राथमिकताओं को प्रकट करता है। अच्छा स्वास्थ्य लोगों को अधिक कार्यकुशल व उत्पादक बनाता है। अतः यह आवश्यक है कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं के उपयुक्त ढाँचे का निर्माण हो। इसके लिए सीमित साधनों की दशा में हमें सुविचारित ढंग से स्वास्थ्य सेवाओं पर निवेश करना होगा। सर्वप्रथम हमें बीमारियों की रोकथाम पर ध्यान देना होगा। देश के सभी लोगों के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएँ, अधिक अच्छी जन-सुविधाएँ तथा स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करनी होगी। प्राथमिक केन्द्रों एवं उपकेन्द्रों के साथ ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं का भी तेजी से विस्तार होगा तथा परिवार कल्याण कार्यक्रम को अधिक सफल बनाना होगा।
In simple words: देश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए हमें बीमारियों की रोकथाम पर ध्यान देना होगा, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ पेयजल और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों का विस्तार करना होगा, साथ ही परिवार कल्याण कार्यक्रमों को सफल बनाना होगा।
🎯 Exam Tip: स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में रोकथाम, जन-सुविधाओं की उपलब्धता और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँच बढ़ाने के महत्व को रेखांकित करें।
Question 12. भारत में स्वास्थ्य व्यवस्था पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: भारत में स्वास्थ्य व्यवस्था भारत की स्वास्थ्य आधारिक संरचना और स्वास्थ्य सुविधाओं की त्रिस्तरीय व्यवस्था है-प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक । प्राथमिक क्षेत्रक सुविधाओं में प्रचलित स्वास्थ्य समस्याओं का ज्ञान तथा उन्हें पहचानने, रोकने तथा नियन्त्रित करने की विधि, खाद्य पूर्ति और उचित पोषण और जल की पर्याप्त पूर्ति तथा मूलभूत स्वच्छता, शिशु एवं मातृत्व देखभाल, प्रमुख संक्रामक बीमारियों और चोटों से प्रतिरोध तथा मानसिक स्वास्थ्य का संवर्द्धन और आवश्यक दवाओं का प्रावधान सम्मिलित है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र, सामुदायिक चिकित्सा केन्द्र और उपकेन्द्र स्थापित किए गए हैं। द्वितीयक क्षेत्रक में वे अस्पताल आते हैं जिनमें शल्य चिकित्सा, एक्स-रे, ई०सी०जी० जैसी बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इन्हें माध्यमिक चिकित्सा संस्थाएँ कहते हैं। ये प्राथमिक चिकित्सा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ दोनों ही प्रदान करते हैं। ये प्रायः जिला मुख्यालय और बड़े कस्बों में पाए जाते हैं। तृतीय क्षेत्रक में, उच्चस्तरीय उपकरणों से युक्त अस्पताल, मेडिकल कॉलेज व अन्य संस्थान आते हैं। जो मेडिकल शिक्षा के साथ-साथ विशिष्ट स्वास्थ्य सेवाएँ भी प्रदान करते हैं।
In simple words: भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था त्रिस्तरीय है- प्राथमिक (बीमारी की रोकथाम और सामान्य देखभाल), द्वितीयक (माध्यमिक अस्पताल सेवाएं) और तृतीयक (विशेषज्ञ सेवाएं और मेडिकल कॉलेज)। यह व्यवस्था शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करती है।
🎯 Exam Tip: भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था के त्रिस्तरीय मॉडल को स्पष्ट रूप से समझें और प्रत्येक स्तर पर प्रदान की जाने वाली सेवाओं के उदाहरणों पर ध्यान दें।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. आधारिक संरचना से क्या आशय है? यह कितने प्रकार की होती है?
Answer:
आधारिक संरचना से आशय
किसी अर्थव्यवस्था में उत्पादन करने के लिए अनेक वस्तुओं तथा सेवाओं की आवश्यकता पड़ती है। ये वस्तुएँ तथा सेवाएँ ही आधारिक संरचना (Infrastructure) कहलाती हैं। दूसरे शब्दों में-“आधारिक संरचना के अन्तर्गत ने वस्तुएँ, सुविधाएँ तथा सेवाएँ सम्मिलित की जाती हैं जो आर्थिक क्रियाओं को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से अपना योगदान प्रदान करती हैं।” उत्पादन उत्पत्ति के साधनों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है अर्थात् उत्पादक को उत्पादन क्रिया के लिए विभिन्न उपादानों की आवश्यकता पड़ती है; उदाहरण के लिए उत्पादन के लिए सर्वप्रथम भूमि चाहिए, फिर पूँजी चाहिए जिससे हल, ट्रैक्टर, मशीनें व औजार क्रय किए जा सकें; कार्य करने के लिए श्रमिक चाहिए, उत्पादन व्यवस्था के प्रबन्धक चाहिए और उत्पादन कार्य में निहित जोखिम वहन करने के लिए उद्यमी । केवल इन साधनों की समुचित उपलब्धि ही पर्याप्त नहीं है, अपितु उत्पादित वस्तुओं को उपभोक्ता क्षेत्रों तक पहुँचाने के लिए परिवहन, परिवहन के साधन-टूक, रेलगाड़ी आदि चाहिए। पत्र-व्यवहार व अद्यतन सूचनाओं के लिए संचार के साधन (डाक, तार व टेलीफोन आदि) चाहिए। धन सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बैंक व वित्तीय संस्थाएँ चाहिए। अनिश्चितता और जोखिमों के भार को वहन करने के लिए बीमा कम्पनियाँ चाहिए। वस्तुओं की बिक्री को बढ़ाने के लिए विज्ञापन के साधन भी महत्त्वपूर्ण हैं।संक्षेप में, वस्तुओं के उत्पादन व वितरण के लिए दो चीजें चाहिए-1. वस्तु व 2. सेवाएँ। आधारिक संरचना से आशय उन सेवाओं से है जिनका वस्तु के उत्पादन व वितरण के दौरान प्रयोग होता है जैसे कच्चा माल व निर्मित उत्पादों को लाने व ले जाने के लिए परिवहन सेवाएँ अथवा उत्पादित वस्तुओं की बिक्री बढ़ाने के लिए विज्ञापन सेवाएँ। ये सेवाएँ उत्पादन व वितरण प्रक्रिया में सहायता पहुँचाती हैं और वस्तुओं के मूल्य में भी वृद्धि करती हैं, इसलिए इन्हें 'उत्पादक सेवाएँ' कहा जाता है। कुछ ऐसी सेवाएँ होती हैं जिन्हें हम एक वस्तु की तरह खरीदते हैं तथा उनका प्रयोग करते हैं। जब हम एक सेवा वस्तु की भाँति खरीदते हैं जैसे यात्रियों द्वारा परिवहन के साधनों का प्रयोग, मरीजों द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अस्पतालों एवं चिकित्सालयों का उपयोग तो वह उपभोक्ता सेवा कहलाती है। उपर्युक्त दोनों ही प्रकार की सेवाएँ प्रदान करने के लिए कुछ सुविधाओं (जैसे सड़कें, बस, विद्यालय, अस्पताल आदि) का निर्माण करना आवश्यक होता है। ये अर्थव्यवस्था के पूँजी ढाँचे का उसी प्रकार से एक भाग होती हैं जिस प्रकार से वस्तुओं का उत्पादन करने वाली फैक्ट्रियाँ और मशीनें तथा खेत पर
आधारित उद्योगों का विस्तार होता है और नए-नए उद्योगों की स्थापना होती है। इसके फलस्वरूप उत्पादन में वृद्धि होती है, राष्ट्रीय आय एवं प्रति व्यक्ति आय बढ़ती है, उपभोग स्तर एवं जीवन-स्तर में वृद्धि होती है तथा निर्धनता एवं बेरोजगारी जैसी समस्याओं का समाधान होता है। इस प्रकार आधारित संरचना का विकास देश के आर्थिक विकास में सहायक होता है।
In simple words: आधारिक संरचना वे मूलभूत सुविधाएँ और सेवाएँ हैं जो आर्थिक गतिविधियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देती हैं, जैसे परिवहन, संचार, ऊर्जा, और वित्तीय संस्थाएँ। ये उत्पादन और वितरण को सुचारू बनाने के साथ-साथ जीवन स्तर में सुधार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देती हैं।
🎯 Exam Tip: आधारिक संरचना की परिभाषा और उसके विभिन्न घटकों को स्पष्ट रूप से समझें। आर्थिक विकास में इसकी भूमिका और प्रकारों पर विशेष ध्यान दें।
Question 3. पारम्परिक ऊर्जा संसाधनों से क्या अभिप्राय है? प्रमुख पारम्परिक ऊर्जा संसाधनों को संक्षेप में बताइए ।
Answer: पारम्परिक ऊर्जा संसाधनों से आशय कोयला, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस तथा परमाणु शक्ति ऊर्जा के प्रमुख खनिज संसाधन हैं। ये सभी संसाधन भू-गर्भ से निकाले जाते हैं तथा इनके भण्डार सीमित हैं और कभी भी समाप्त हो सकते हैं। इन्हें 'परम्परागत ऊर्जा संसाधन' भी कहा जाता है। अतः इन संसाधनों का उपयोग बड़ी मितव्ययिता से किया जाना चाहिए। भू-गर्भ से निकाले जाने के कारण इन्हें ऊर्जा के खनिज संसाधन कहा जाता है। कोयला, खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस की उत्पत्ति जैविक पदार्थों से हुई है। इनका उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है। इसी कारण इन्हें जीवाश्म ईंधन' भी कहा जाता है।
पारम्परिक ऊर्जा संसाधन प्रमुख पारम्परिक ऊर्जा संसाधन हैं-
1. कोयला,
2. पेट्रोलियम,
3. प्राकृतिक गैस तथा
4. बिजली ।
1. कोयला
कोयला औद्योगिक ऊर्जा का प्रमुख साधन है। लोहा, इस्पात तथा रासायनिक उद्योगों के लिए कोयला अनिवार्य है। भारत में व्यावसायिक शक्ति का 67% से भी अधिक भाग कोयले एवं लिग्नाइट के द्वारा पूरा होता है।
भारत का 98% कोयला शोण्डवानायुगीन है। यहाँ 75% कोयला भण्डार दामोदर नदी घाटी क्षेत्र में स्थित है। यहाँ रानीगंज, झरिया गिरिडीह, बोकारो तथा कर्णपुरा में कोयले की प्रमुख खाने हैं। गोदावरी, महानदी, सोन तथा वर्धा नदियों को घाटियों में भी कोयले के भण्डार पाए जाते हैं। सतपुड़ा पर्वतश्रेणी तथा छत्तीसगढ़ के मैदानों में कोयले के विशाल भण्डार हैं। कोयले के संचित भण्डार की दृष्टि से भारत का विश्व में छठा स्थान है। देश में कोयले के सुरक्षित भण्डार 24,784.7 करोड़ टन आँके गए हैं। जिसका 29.6% झारखण्ड, 24.6% ओडिशा, 11.3 पश्चिम बंगाल, 23.4% छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश तथा शेष 11.1% अन्य राज्यों में पाया जाता है।
2. पेट्रोलियम (खनिज तेल)
खनिज तेल ऊर्जा का महत्त्वपूर्ण संसाधन है। कृषि व औद्योगिक मशीनों एवं वाहनों में खनिज तेल चालकशक्ति के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। यह भू-गर्भीय चट्टानों से निकाला जाता है। भू-गर्भ से निकले हुए कच्चे तेल में अनेक अशुद्धियाँ मिली होती हैं। अतः तेल शोधनशालाओं में इन अशुद्धियों को रासायनिक क्रियाओं द्वारा शुद्ध किया जाता है जिससे पेट्रोल, मिट्टी का तेल, मोबिल ऑयल, ग्रीस, डीजल आदि अनेक उपयोगी पदार्थ प्राप्त होते हैं। खनिज तेल का उपयोग वायुयान, जलयान, रेलगाड़ियों, मोटर तथा अन्य वाहनों के संचालन में किया जाता है। इससे निकले पदार्थों से फिल्म, प्लास्टिक, वार्निश, पॉलिश, मोमबत्ती, वैसलीन आदि अनेक पदार्थ प्राप्त होते हैं। खनिज तेल उत्पादक क्षेत्र-भारत के प्रमुख खनिज तेल उत्पादक क्षेत्र निम्नलिखित हैं
1. असम तेल क्षेत्र-
(क) डिगबोई तेल क्षेत्र,
(ख) नहरकटिया तेल क्षेत्र तथा
(ग) सुरमा घाटी तल क्षेत्र-मसीपुर, बदरपुर एवं पथरिया ।
2. गुजरात तेल क्षेत्र-
(क) अंकलेश्वर तेल क्षेत्र,
(ख) लुनेज तेल क्षेत्र (खम्भात तेल क्षेत्र),
(ग) अहमदाबाद-कलोल तेल क्षेत्र तथा
(घ) वड़ोदरा तेल क्षेत्र
3. अरब सागर-अपतटीय तेल क्षेत्र-
(क) बॉम्बे हाई तेल क्षेत्र तथा
(ख) अलियाबेट तेल क्षेत्र ।
4. अन्य तेल क्षेत्र- राजस्थान, हिमाचल प्रदेश तथा अरुणाचल प्रदेश ।
5. नवीन सम्भावित, तेल क्षेत्र- गंगा नदी की घाटी, गोदावरी, कावेरी, कृष्णा और महनदी के डेल्टाई भागों के समीप गहरे सागरीय क्षेत्र तथा असम राज्य।
3. प्राकृतिक गैस
प्राकृतिक गैस ऊर्जा का संसाधन होने के साथ-साथ पेट्रो-रसायन उद्योगों के लिए कच्चा माल भी है। वर्तमान में प्रकृतिक गैस का उत्पादन लगभग 30 अरब घन मीटर हो गया है तथा इसका उपयोग रासायनिक उर्वरकों के निर्माण में भी किया जाने लगा है। इसके अनुमानित भण्डार 638 अरब घन मीटर है। वास्तव में, ऊर्जा संसाधनों की कमी वाले देशों में प्राकृतिक गैस की उपलब्धि एक अनमोल उपहार है। प्राकृतिक गैस के भण्डार प्रायः खनिज तेल के साथ ही पाए जाते हैं। परन्तु खनिज तेल क्षेत्रों से अलग केवल प्राकृतिक गैस के भण्डार त्रिपुरा एवं राजस्थान राज्यों में पाए गए हैं। इसके अतिरिक्त गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश तथा ओडिशा के तटों से दूर गहरे सागर में भी प्राकृतिक गैस के भण्डार पाए गए हैं। प्राकृतिक गैस का संरक्षण कठिन होता है। इसे सिलिण्डरों में भरकर रसोई ईंधन के रूप में सुरक्षित तो रखा जा सकता है, परन्तु अधिक समय तक उसे सँभालकर रखने में आग लगने की आशंका बनी रहती है। अतः प्राकृतिक गैस का तुरन्त उपयोग करना ही श्रेयस्कर रहता है। पेट्रो-रसायन एवं रासायनिक उर्वरक उद्योगों द्वारा इसके अधिक उपयोग से इसका संरक्षण सम्भव हो पाया है।
4. विद्युत (बिजली)
विश्व में सम्भाव्य जल शक्ति की दृष्टि से भारत का पाँचवाँ स्थान है। वर्ष 2010-11 की अवधि में 811-14 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ जिसमें 665.01 अरब यूनिट ताप बिजली, 114.26 अरब यूनिट पनबिजली, 2627 अरब यूनिट परमाणु बिजली और 5.61 अरब यूनिट भूटान से आयातित बिजली शामिल है। जलविद्युत भारत में ऊर्जा का सबसे उपयोगी एवं सुविधाजनक साधन है। भारत में बिजली के तीन स्रोत हैं
1. ताप विद्युत (Thermal Power),
2. जल विद्युत (Hydro-electricity),
3. आणविक शक्ति (Atomic Power)।
In simple words: परम्परागत ऊर्जा संसाधन वे सीमित भू-गर्भीय स्रोत हैं जैसे कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और बिजली, जो जैविक पदार्थों से बनते हैं और जिन्हें जीवाश्म ईंधन भी कहा जाता है। भारत में इनके विशाल भण्डार हैं और ये औद्योगिक व घरेलू ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
🎯 Exam Tip: परम्परागत ऊर्जा स्रोतों, विशेषकर कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के भारत में भण्डार क्षेत्रों और उपयोगों को विस्तार से याद रखें।
Question 4. ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधन से आप क्या समझते हैं? प्रत्येक को संक्षेप में समझाइए । आधुनिक समय में इन साधनों का क्या महत्त्व है?
Answer: ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधन से आशय सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, जैव पदार्थों से प्राप्त ऊर्जा तथा कृषि अपशिष्टों से प्राप्त ऊर्जा एवं आदि ऊर्जा के गैर-परम्परागत संसाधन कहलाते हैं। ये नव्यकरणीय (अक्षय) ऊर्जा स्रोत हैं। इनका विवरण निम्नलिखित है-
1. पवन ऊर्जा-
नौ-परिवहन पवन और प्रवाहित जल का उपयोग प्राचीनकाल से होता चला आ रहा है। प्राचीनकाल में अनाज (आटा) पीसने के लिए पवनचक्कियों का उपयोग किया जाता था। भू-गर्भ से जल खींचने में भी पवनचक्कियों का प्रचलन था। वास्तव में, ऊर्जा के ये ऐसे संसाधन हैं। जिनको बार-बार नवीनीकरण किया जा सकता है। अन्य संसाधनों की अपेक्षा इनसे ऊर्जा प्राप्त करने में व्यय कम करना पड़ता है। ऐसा अनुमान लगाया गया है कि पवन के उपयोग से 200 मेगावाट तक विद्युत शक्ति उत्पन्न की जा सकती है।
2. ज्वारीय ऊर्जा-
भारत की समुद्री सीमा लगभग 6,100 किमी लम्बी है । तटीय क्षेत्रों में ज्वार-भाटे की प्रक्रिया द्वारा ज्वारीय ऊर्जा का उत्पादन सुगमता से किया जा सकता है। यदि ज्वार-भाटे के समय किसी संयन्त्र के माध्यम से ऊर्जा प्राप्त कर ली जाए तो प्राप्त ऊर्जा शक्ति का उत्पादन बहुत ही सस्ता पड़ता है। यह ऊर्जा का अक्षय संसाधन है। भारत में कच्छ एवं खम्भात की खाड़ियाँ ज्वारीय ऊर्जा के उत्पादन में ओदर्श दशाएँ प्रस्तुत करती हैं, क्योंकि यहाँ सँकरी खाड़ियों में ज्वारीय जल बहुत-ही तीव्रता से ऊपर उठता है।।
3. भू-तापीय ऊर्जा-
भूताषीय ऊर्जा केवल उन्हीं क्षेत्रों में सम्भव है जहाँ गर्म जल के स्रोत उपलब्ध हैं। वास्तव में गर्म जल के स्रोत ज्वालामुखी क्षेत्रों में ही उपलब्ध हो सकते हैं। भारत इस संसाधन में धनी नहीं है। हिमाचल प्रदेश में मणिकरण नामक गर्म जल स्रोत से ऊर्जा प्राप्ति के प्रयास चल रहे हैं।
4. जैव पदार्थों से प्राप्त ऊर्जा-
बंजर भूमि तथा कृषि अयोग्य अपरदित भूमि का उपयोग वृक्षारोपण के लिए किया जा सकता है। इन पर ऐसे वृक्ष रोपे जा सकते हैं जिनकी वृद्धि शीघ्र हो सके तथा उनमें तापजन्य गुण भी हों। इनसे ईंधन की लकड़ी, काष्ठ कोयला और शक्ति प्राप्त की जा सकती है। भारत में इन वृक्षों का उपयोग करके लगभग 1.5 मेगावाट शक्ति का उत्पादन किया जाता है।
5. अपशिष्टों से प्राप्त ऊर्जा-
बड़े-बड़े नगरों एवं महानगरों में लाखों टन कूड़ा-कचरा एकत्र होता है, जिसका उपयोग ऊर्जा उत्पादन में किया जा सकता है। दिल्ली महागनर में ठोस पदार्थों के रूप में प्राप्त कूड़े-कचरे से ऊर्जा प्राप्त करने के लिए परीक्षण के रूप में एक संयन्त्र कार्यशील है। जिससे प्रतिवर्ष 4 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है। इससे प्रोत्साहित होकर अन्य नगरों एवं महानगरों में ऐसे संयन्त्रों की स्थापना के प्रयास किए जा रहे हैं।
6. कृषि अपशिष्टों से प्राप्त ऊर्जा-
वर्तमान में भारत में चीनी मिलों से भारी मात्रा में खोई (बैगास) की प्राप्ति होती है। अतः गन्ने के पेराई मौसम में इस खोई से 2000 मेगावाट विद्युत शक्ति का उत्पादन किया जा सकता है। कृषि, पशुओं तथा मानव के अपशिष्टों द्वारा उत्पादित ऊर्जा ग्रामीण क्षेत्रों की ऊर्जा आवश्यकता में प्रयुक्त की जा सकती है। इस दिशा में बायो गैस संयन्त्रों का संचालन महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है।
7. सौर ऊर्जा-
सूर्य ऊर्जा का अक्षय स्रोत है। इससे विपुल मात्रा में अनवरत रूप से ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। वास्तव में, सौर ऊर्जा भविष्य के लिए ऊर्जा का सबसे महत्त्वपूर्ण संसाधन सिद्ध हो सकता है क्योंकि ऊर्जा संसाधन जैसे कोयला एवं खनिज तेल आदि; जीवाश्मीय इधन कभी भी पूर्ण रूप से समाप्त हो सकते हैं। परन्तु ब्रह्माण्ड में जब तक सूर्य विद्यमान रहेगा, उससे भारी मात्रा में सौर ऊर्जा प्राप्त की जाती रहेगी। इस प्रकार उपर्युक्त ऊर्जा संसाधनों की विशेषताओं का ध्यान में रखते हुए निःसन्देह कहा जा सकता है कि हमारा भविष्य ऊर्जा के लिए इन्हीं गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधनों पर निर्भर रहेगा।
In simple words: गैर-परम्परागत ऊर्जा साधन वे अक्षय और प्रदूषण मुक्त स्रोत हैं जैसे सौर, पवन, ज्वारीय, भू-तापीय और बायो ऊर्जा, जो आधुनिक समय में ऊर्जा संकट से निपटने और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये कभी समाप्त नहीं होते और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाते।
🎯 Exam Tip: गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के प्रकारों और उनके महत्व पर ध्यान दें, विशेषकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता में उनकी भूमिका के संदर्भ में।
ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों का महत्त्व
अधुनिक समय में, गैर परम्परागत ऊर्जा संसाधनों के महत्त्व को निम्नलिखित रूपों में व्यक्त किया जा सकता है1. सौर ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायो ऊर्जा (कूड़-कचरा, मल-मूत्र एवं गोबर आदि से निर्मित) ऊर्जा के प्रमुख गैर-परम्परागत संसाधन हैं।
2. ऊर्जा के गैर परम्परागत साधनों का विकास वैज्ञानिक तकनीक के विकास के साथ-साथ किया जा सर्केता है।
3. ऊर्जा के गैर परम्परागत साधन नव्यकरणीय होते हैं। इनका निरन्तर उपयोग किया जाता रहेगा; जैसे-जब तक बाह्यमाण्ड में सूर्य विद्यमान रहेगा, सौर ऊर्जा अनवरत रूप से प्राप्त होती रहेगी।
4. इन्हें ऊर्जा के 'अक्षीय संसाधन' कहा जाता है।
5. वर्तमान में ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों की उपलब्धता तो पर्याप्त मात्रा में है परन्तु तकनीकी । विकास की कमी के कारण उनका उपभोग व्यापक नहीं हो पाया है।
6. ऊर्जा के ये साधन पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से मुक्त हैं अर्थात् इनसे प्रदूषण नहीं होता है। इस प्रकार उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट होता है कि ऊर्जा साधनों की प्राप्ति के लिए भारत का भविष्य गैर-परम्परागत ऊर्जा साधनों में ही सुरक्षित है। हमें इसी ओर अधिकाधिक प्रयास करने की आवश्यकता
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