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Detailed Chapter 7 रोजगार वृद्धि, अनौपचारिकीकरण और अन्य मुद्दे UP Board Solutions for Class 11 Economics
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Class 11 Economics Chapter 7 रोजगार वृद्धि, अनौपचारिकीकरण और अन्य मुद्दे UP Board Solutions PDF
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1. श्रमिक किसे कहते हैं?
Answer: सकल राष्ट्रीय उत्पाद में योगदान देने वाले सभी क्रियाकलापों को हम आर्थिक क्रियाएँ कहते हैं। वे सभी व्यक्ति जो आर्थिक क्रियाओं में संलग्न होते हैं, श्रमिक कहलाते हैं।
In simple words: श्रमिक वे व्यक्ति होते हैं जो आर्थिक गतिविधियों में शामिल होकर देश के सकल राष्ट्रीय उत्पाद में योगदान देते हैं। इसमें वे सभी लोग शामिल हैं जो काम करते हैं और बदले में कुछ मूल्य पैदा करते हैं।
🎯 Exam Tip: श्रमिकों की परिभाषा अर्थशास्त्र में महत्वपूर्ण है, जो आर्थिक क्रियाओं और राष्ट्रीय आय में उनके योगदान को दर्शाती है।
Question 2. श्रमिक-जनसंख्या अनुपात की परिभाषा दें।
Answer: श्रमिक जनसंख्या अनुपात एक सूचक है जिसका प्रयोग देश में रोजगार की स्थिति के विश्लेषण करने के लिए किया जाता है। यह अनुपात यह जानने में सहायक है कि जनसंख्या का कितना अनुपात वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में सक्रिय योगदान दे रहा है।
In simple words: श्रमिक-जनसंख्या अनुपात बताता है कि कुल आबादी का कितना प्रतिशत हिस्सा काम करके देश के उत्पादन में योगदान दे रहा है। यह रोजगार की स्थिति का आकलन करने का एक महत्वपूर्ण पैमाना है।
🎯 Exam Tip: इस अनुपात का उपयोग किसी देश में कार्यबल की भागीदारी और आर्थिक गतिविधि के स्तर को समझने के लिए किया जाता है, जिससे नीति निर्माण में मदद मिलती है।
Question 3. क्या ये भी श्रमिक हैं: एक भिखारी, एक चोर, एक तस्कर, एक जुआरी? क्यों?
Answer: एक भिखारी, एक चोर, एक तस्कर और एक जुआरी श्रमिक नहीं हैं क्योंकि ये आर्थिक क्रियाओं में कोई योगदान नहीं देते हैं।
In simple words: ये व्यक्ति श्रमिक नहीं माने जाते क्योंकि वे वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में कोई वैध आर्थिक योगदान नहीं देते हैं, जिससे राष्ट्रीय आय में वृद्धि नहीं होती।
🎯 Exam Tip: श्रमिक की परिभाषा में आर्थिक क्रियाओं में संलग्नता और सकल राष्ट्रीय उत्पाद में योगदान आवश्यक है; अवैध या गैर-उत्पादक गतिविधियाँ इसमें शामिल नहीं होतीं।
Question 4. इस समूह में कौन असंगत प्रतीत होता है-
(क) नाई की दुकान का मालिक,
(ख) एक मोची,
(ग) मदर डेयरी का कोषपाल,
(घ) ट्यूशन पढ़ाने वाला शिक्षक,
(ङ) परिवहन कम्पनी का संचालक,
(च) निर्माण मजदूर ।
Answer: (घ) ट्यूशन पढ़ाने वाला शिक्षक
In simple words: ट्यूशन पढ़ाने वाला शिक्षक असंगत है क्योंकि वह स्वनियोजित होता है, जबकि अन्य सभी सूचीबद्ध व्यक्ति किसी न किसी के लिए काम करते हैं या किराये के श्रमिक की श्रेणी में आते हैं।
🎯 Exam Tip: असंगत विकल्प की पहचान के लिए स्वनियोजित और वेतनभोगी श्रमिकों के बीच का अंतर समझना महत्वपूर्ण है।
Question 5. नए उभरते रोजगार मुख्यतः क्षेत्रक में ही मिल रहे हैं। (सेवा/विनिर्माण)
Answer: सेवा।
In simple words: आजकल अधिकतर नए रोजगार सेवा क्षेत्रक में उत्पन्न हो रहे हैं, जो अर्थव्यवस्था के विकास की वर्तमान प्रवृत्ति को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: सेवा क्षेत्रक भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन का एक प्रमुख स्रोत बन गया है, जो आर्थिक संरचना में बदलाव को इंगित करता है।
Question 6. चार व्यक्तियों को मजदूरी पर काम देने वाले प्रतिष्ठान को................ क्षेत्रक कहा जाता है। (औपचारिक/अनौपचारिक)
Answer: अनौपचारिक।
In simple words: चार या उससे कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को अनौपचारिक क्षेत्रक में माना जाता है, क्योंकि वे अक्सर सामाजिक सुरक्षा और नियमित रोजगार लाभ प्रदान नहीं करते।
🎯 Exam Tip: कर्मचारियों की संख्या के आधार पर प्रतिष्ठानों को औपचारिक या अनौपचारिक क्षेत्र में वर्गीकृत किया जाता है; 10 से कम कर्मचारी आमतौर पर अनौपचारिक माने जाते हैं।
Question 7. राज स्कूल जाता है। पर जब वह स्कूल में नहीं होता, तो प्रायः अपने खेत में काम करता- दिखाई देता है। क्या आप उसे श्रमिक मानेंगे? क्यों?
Answer: वे सभी व्यक्ति जो आर्थिक क्रियाकलाप में भाग लेते हैं, श्रमिक कहलाते हैं। खेत में काम करना भी एक आर्थिक क्रियाकलाप है क्योंकि इससे वस्तुओं के प्रवाह में बढ़ोतरी होती है। अतः राज को एक श्रमिक माना जा सकता है।
In simple words: हाँ, राज को श्रमिक माना जाएगा क्योंकि वह खेत में काम करके आर्थिक क्रियाकलाप में शामिल होता है, जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है, भले ही वह स्कूल भी जाता हो।
🎯 Exam Tip: श्रमिक की परिभाषा में किसी भी उत्पादक गतिविधि में भागीदारी शामिल होती है, चाहे वह पूर्णकालिक हो या अंशकालिक, और स्कूल जाने वाले छात्र भी इसमें शामिल हो सकते हैं यदि वे आर्थिक योगदान कर रहे हों।
Question 8. शहरी महिलाओं की अपेक्षा ग्रामीण महिलाएँ अधिक काम करती दिखाई देती हैं। क्यों?
Answer: भारत में शहरी क्षेत्रों में केवल 14 प्रतिशत महिलाएँ ही किसी आर्थिक कार्य में व्यस्त हैं तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 30 प्रतिशत महिलाएँ आर्थिक कार्यों में लगी हुई हैं। शहरी क्षेत्रों में महिलाओं का प्रतिशत इसलिए कम है क्योंक वहाँ पर पुरुष पर्याप्त रूप से उच्च आय अर्जित करने में सफल रहते हैं और वे परिवार की महिलाओं को घर से बाहर रोजगार प्राप्त करने को प्रायः निरुत्साहित करते हैं। शहरी महिलाएँ घरेलू कामकाज में ही व्यस्त रहती हैं और महिलाओं द्वारा परिवार के लिए किए गए अनेक कार्यों को आर्थिक या उत्पादन कार्य ही नहीं माना जाता।
In simple words: ग्रामीण महिलाएँ अधिक काम करती हैं क्योंकि शहरी क्षेत्रों में पुरुषों की उच्च आय के कारण महिलाएँ अक्सर घर से बाहर काम करने के लिए हतोत्साहित होती हैं और उनके घरेलू कार्यों को आर्थिक गतिविधि नहीं माना जाता।
🎯 Exam Tip: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की कार्यबल भागीदारी में अंतर सामाजिक-आर्थिक कारकों, पारिवारिक आय और घरेलू श्रम के मूल्यांकन के आधार पर होता है।
Question 9. मीना एक गृहिणी है। घर के कामों के साथ-साथ वह अपने पति की कपड़े की दुकान के काम में भी हाथ बँटाती है। क्या उसे एक श्रमिक माना जा सकता है? क्यों?
Answer: हाँ, मीना को एक श्रमिक माना जा सकता है क्योंकि वह घरेलू कामकाज के साथ-साथ पति की कपड़े की दुकान में भी हाथ बंटाती है जोकि एक आर्थिक क्रियाकलाप है।
In simple words: मीना को श्रमिक माना जाएगा क्योंकि वह अपने पति के व्यापार में योगदान देकर एक आर्थिक गतिविधि में संलग्न है, जिससे वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में वृद्धि होती है।
🎯 Exam Tip: पारिवारिक व्यवसायों में अवैतनिक योगदान भी आर्थिक गतिविधि मानी जाती है, जिससे ऐसे व्यक्ति भी श्रमिक की श्रेणी में आते हैं।
Question 10. यहाँ किसे असंगत माना जाएगा
(क) किसी अन्य के अधीन रिक्शा चलाने वाला,
(ख) राजमिस्त्री,
(ग) किसी मेकेनिक की दुकान पर काम करने वाला श्रमिक,
(घ) जूते पॉलिश करने वाला लड़का।
Answer: (घ) जूते पॉलिश करने वाला लड़का।
In simple words: जूते पॉलिश करने वाला लड़का असंगत है क्योंकि वह स्वनियोजित है, जबकि अन्य सभी विकल्प (रिक्शा चालक, राजमिस्त्री, मेकेनिक) किराए के श्रमिक या किसी के अधीन काम करने वाले हैं।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न स्वनियोजित और वेतनभोगी श्रमिकों के बीच के मौलिक अंतर को स्पष्ट करता है, जो रोजगार के विभिन्न स्वरूपों को समझने में मदद करता है।
Question 11. निम्न सारणी में 1972-73 ई० में भारत में श्रमबल का वितरण दिखा गया है। इसे ध्यान से पढ़कर श्रमबल के वितरण के स्वरूप के कारण बताइए। ध्यान रहे कि ये आँकड़े 30 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं।
| निवास स्थान | श्रमबल (करोड़ में) | ||
|---|---|---|---|
| पुरुष | महिलाएँ | कुल योग | |
| ग्रामीण | 12.5 | 6.9 | 19.4 |
| शहरी | 3.2 | 0.7 | 3.9 |
Answer: उपर्युक्त तालिका में दिए गए तथ्यों के आधार पर निम्न निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं
1. भारत में कुल श्रमबल (19.4 + 3.9 = 23.3 करोड़) या 233 मिलियन था, जिसमें 194 मिलियन ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत थे, शेष शहरी क्षेत्रों में कार्यरत थे।
2. कुल श्रमबल में 157 मिलियन पुरुष (68%) तथा 76 मिलियन (32%) महिलाएँ थीं।
3. 125 मिलियन पुरुष (64%) ग्रामीण क्षेत्रों में काम करते थे ।
4. कुल रोजगार में पुरुष श्रमिकों का प्रतिशत 82 तथा महिलाओं का प्रतिशत 9.18 था।
5. कुल महिला श्रमिकों में ग्रामीण महिला श्रमिकों का प्रतिशत 91 तथा शहरी क्षेत्रों में महिला श्रमिकों का प्रतिशत 9 था।
In simple words: 1972-73 के आंकड़ों के अनुसार, भारत का अधिकांश श्रमबल ग्रामीण क्षेत्रों में और पुरुषों का प्रतिशत महिलाओं की तुलना में अधिक था। यह श्रमबल की ग्रामीण-शहरी और लैंगिक संरचना में महत्वपूर्ण अंतर दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के सारणी-आधारित प्रश्नों में, दिए गए डेटा का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करें और प्रतिशत तथा कुल संख्या के आधार पर सटीक निष्कर्ष निकालें।
Question 12. इस सारणी में 1999-2000 में भारत की जनसंख्या और श्रमिक जनानुपात दिखाया गया है। क्या आप भारत के (शहरी और सकल) श्रमबल का अनुमान लगा सकते हैं?
| क्षेत्र | अनुमानित जनसंख्या (करोड़ में) | श्रमिक जनसंख्या अनुपात | श्रमिकों की अनुमानित संख्या (करोड़ में) |
|---|---|---|---|
| ग्रामीण | 71.88 | 41.9 | \( 71.88 \times 41.9 / 100 = 30.12 \) |
| शहरी | 28.52 | 33.7 | ? |
| योग | 100.40 | 39.5 | ? |
Answer:
| क्षेत्र | अनुमानित जनसंख्या (करोड़ में) | श्रमिक जनसंख्या अनुपात | श्रमिकों की अनुमानित संख्या (करोड़ में) |
|---|---|---|---|
| ग्रामीण | 71.88 | 41.9 | \( \frac{71.88 \times 41.9}{100} = 30.12 \) |
| शहरी | 28.52 | 33.7 | \( \frac{28.52 \times 33.7}{100} = 9.61 \) |
| योग | 100.40 | 39.5 | \( \frac{100.40 \times 39.5}{100} = 39.66 \) |
ग्रामीण क्षेत्र में कुल कार्यबल = 30.12
करोड़ शहरी क्षेत्र में कुल कार्यबल = 9.61 करोड़
कुल कार्यबल = 39.66 करोड़
In simple words: शहरी क्षेत्र में कुल श्रमिक 9.61 करोड़ हैं और भारत का कुल श्रमिकबल 39.66 करोड़ है, जो जनसंख्या और श्रमिक जनसंख्या अनुपात के आधार पर गणना की गई है।
🎯 Exam Tip: श्रमिक बल की गणना के लिए जनसंख्या को श्रमिक जनसंख्या अनुपात से गुणा करें और प्रतिशत को 100 से भाग देना न भूलें।
Question 13. शहरी क्षेत्रों में नियमित वेतनभोगी कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्र से अधिक क्यों होते हैं?
Answer: भारत में अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च आय के अवसर सीमित होते हैं। श्रम बाजार में भागीदारी हेतु भी संसाधनों की उनके पास कमी होती है। उनमें से अधिकांश व्यक्ति स्कूल, महाविद्यालय या किसी प्रशिक्षण संस्थान में नहीं जा पाते। यदि कुछ जाते भी हैं तो वे बीच में ही छोड़कर श्रम शक्ति में सम्मिलित हो जाते हैं। इसके विपरीत शहरी लोगों के पास शिक्षा और प्रशिक्षण पाने हेतु अधिक अवसर होते हैं। शहरी जनसमुदाय को रोजगार के भी विविधतापूर्ण अवसर उपलब्ध हो जाते हैं। वे अपनी शिक्षा और योग्यता के अनुरूप रोजगार की तलाश में रहते हैं किन्तु ग्रामीण क्षेत्र के लोग घर पर नहीं बैठ सकते, क्योंकि उनकी आर्थिक दशा उन्हें ऐसा नहीं करते देती। इस कारण गाँवों की तुलना में शहरों में नियमित वेतनभोगी श्रमिक अधिक पाए जाते हैं।
In simple words: शहरों में नियमित वेतनभोगी कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक होते हैं क्योंकि शहरों में शिक्षा और प्रशिक्षण के अधिक अवसर तथा विविध रोजगार विकल्प उपलब्ध होते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में ये सीमित होते हैं।
🎯 Exam Tip: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार के स्वरूप में अंतर को समझने के लिए शिक्षा, कौशल विकास और आर्थिक अवसरों की उपलब्धता जैसे कारकों पर ध्यान दें।
Question 14. नियमित वेतनभोगी कर्मचारियों में महिलाएँ कम क्यों हैं?
Answer: जब किसी श्रमिक को कोई व्यक्ति या उद्यम नियमित रूप से काम पर रख उसे मजदूरी देता है, तो वह श्रमिक नियमित वेतनभोगी कर्मचारी कहलाता है। भारत में नियमित वेतनभोगी रोजगारधारियों में पुरुष अधिक अनुपात में लगे हुए हैं। देश के 18 प्रतिशत पुरुष नियमित वेतनभोगी हैं और इस वर्ग में केवल 6 प्रतिशत ही महिलाएँ हैं। महिलाओं की इस कम सहभागिता का एक कारण कौशल स्तर में अन्तर हो सकता है। नियमित वेतनभागी वाले कार्यों में अपेक्षाकृत उच्च कौशल और शिक्षा के उच्च स्तर की आवश्यकता होती है। सम्भवतः इस अभाव के कारण ही अधिक अनुपात में महिलाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहे हैं।
In simple words: नियमित वेतनभोगी कार्यों में महिलाओं की कम भागीदारी का मुख्य कारण अक्सर उच्च कौशल और शिक्षा की आवश्यकता है, जिसकी कमी के कारण उन्हें इन नौकरियों में पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते।
🎯 Exam Tip: महिलाओं की कार्यबल भागीदारी को बढ़ाने के लिए शिक्षा और कौशल विकास में निवेश महत्वपूर्ण है, खासकर नियमित वेतनभोगी क्षेत्रों में।
Question 15. भारत में श्रमबल के क्षेत्रकवार वितरण की हाल की प्रवृत्तियों का विश्लेषण करें ।
Answer: देश के आर्थिक विकास के क्रम में श्रमबल का प्रवाह कृषि एवं सम्बन्धित क्रयाकलापों से उद्योग एवं सेवा क्षेत्रक की ओर बढ़ा है। आर्थिक संवृद्धि की प्रक्रिया में मजदूर ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों को प्रवसन करते हैं। विकास के अन्तर्गत सेवा क्षेत्रक का अधिक विकास होने पर उद्योग क्षेत्र का रोजगार के मामले में हिस्सा घटने लगता है। भारत में अधिकांश श्रमिकों के रोजगार का प्रमुख स्रोत प्राथमिक क्षेत्रक है। द्वितीयक क्षेत्रक केवल 16 प्रतिशत श्रमबल को ही नियोजित कर रहा है। लगभग 24 प्रतिशत श्रमिक सेवा क्षेत्रक में लगे हुए हैं। ग्रामीण भारत में कृषि, खनन एवं उत्खनन की क्रियाओं में तीन-चौथाई प्रतिशत ग्रामीण रोजगार पाते हैं जबकि विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्रक में रोजगार पाने वाले ग्रामीणों का अनुपात क्रमशः 10 एवं 13 प्रतिशत है। 60 प्रतिशत शहरी श्रमिक सेवा क्षेत्रक में हैं। लगभग 30 प्रतिशत शहरी श्रमिक द्वितीयक क्षेत्रक में नियोजित हैं।
In simple words: भारत में श्रमबल प्राथमिक क्षेत्र (कृषि) से हटकर उद्योग और सेवा क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है, शहरी क्षेत्रों में सेवा क्षेत्र का प्रभुत्व अधिक है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी उद्योग और सेवा रोजगार में वृद्धि हो रही है।
🎯 Exam Tip: श्रमबल के क्षेत्रकवार वितरण का विश्लेषण करते समय प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों में रोजगार के प्रतिशत और ग्रामीण-शहरी अंतर पर ध्यान दें।
Question 16. 1970 से अब तक विभिन्न उद्योगों में श्रमबल के वितरण में शायद ही कोई परिवर्तन आया है। टिप्पणी करें।
Answer: भारत एक कृषिप्रधान देश है। यहाँ की जनसंख्या का बहुत बड़ा भाग ग्रामीण क्षेत्रों में बसा है एवं कृषि और उससे सम्बन्धित क्रियाओं पर निर्भर है। भारत में विकास योजनाओं का ध्येय कृषि पर निर्भर जनसंख्या के अनुपात को कम करना रहा है। लेकिन कृषि श्रम का गैर-कृषि श्रम के रूप में खिसकाव अपर्याप्त रहा है। वर्ष 1972-73 में प्राथमिक क्षेत्रक में 74 प्रतिशत श्रमबल लगा था, वहीं 1999-2000 ई० में यह अनुपात घटकर 60 प्रतिशत रह गया। द्वितीयक तथा सेवा क्षेत्रक में यह प्रतिशत क्रमशः 11 से बढ़कर 16 तथा 15 से बढ़कर 24 प्रतिशत हो गया है। परन्तु राष्ट्र की विशालता एवं भौतिक प्राकृतिक संसाधनों की तुलना में उक्त बदलाव नगण्य दिखाई पड़ता है।
In simple words: 1970 से श्रमबल के वितरण में परिवर्तन धीमी गति से हुआ है; प्राथमिक क्षेत्र पर निर्भरता कुछ कम हुई है और द्वितीयक व सेवा क्षेत्रों में भागीदारी बढ़ी है, लेकिन यह बदलाव देश की विशालता और जरूरतों के अनुपात में अपर्याप्त रहा है।
🎯 Exam Tip: यह विश्लेषण करते समय कि क्या परिवर्तन पर्याप्त रहा है, दीर्घकालिक आर्थिक विकास लक्ष्यों और जनसंख्या के आकार के सापेक्ष वास्तविक परिवर्तनों की तुलना करें।
Question 17. क्या आपको लगता है पिछले 50 वर्षों में भारत में रोजगार के सृजन में भी सकल घरेलू उत्पाद के अनुरूप वृद्धि हुई है? कैसे? उत्तर
Answer: सकल घरेलू उत्पाद (G.D.P.) एक वर्ष की अवधि में देश में हुए सभी वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन का बाजार मूल्य होता है। 1960-2000 ई० की अवधि में सकल घरेलू उत्पाद में सकारात्मक वृद्धि हुई है और यह संवृद्धि दर रोजगार वृद्धि दर से अधिक रही है। सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर में कुछ उतार-चढ़ाव भी आते रहे हैं परन्तु इस अवधि में रोजगार की वृद्धि लगभग 2 प्रतिशत बनी रही। परन्तु 1990 ई० के अन्तिम वर्षों में रोजगार वृद्धि दर कम होकर उसी स्तर पर पहुँच गई जहाँ योजनाकाल के प्रथम चरणों में थी। इस अवधि में सकल घरेलू उत्पाद एवं रोजगार बढ़ोतरी की दरों में अन्तर रहा है। इस प्रकार हम भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन के बिना ही अधिक वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करने में सक्षम रहे हैं।
In simple words: पिछले 50 वर्षों में भारत में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि रोजगार सृजन की तुलना में अधिक रही है, जिसका अर्थ है कि देश ने रोजगार बढ़ाए बिना ही अधिक वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन किया है।
🎯 Exam Tip: 'रोजगारहीन संवृद्धि' (jobless growth) की अवधारणा को समझने के लिए जीडीपी वृद्धि और रोजगार वृद्धि दरों के बीच के अंतर का विश्लेषण करें, जो आर्थिक विकास के बावजूद पर्याप्त रोजगार सृजन न होने की स्थिति को दर्शाता है।
Question 18. क्या औपचारिक क्षेत्रक में ही रोजगार का सृजन आवश्यक है? अनौपचारिक में नहीं? कारण बसाइए ।
Answer: सार्वजनिक क्षेत्रक की सभी इकाइयाँ एवं 10 या अधिक कर्मचारियों को रोजगार देने वाले निजी क्षेत्रक की इकाइयाँ औपचारिक क्षेत्रक माने जाते हैं। इन इकाइयों में काम करने वाले को औपचारिक क्षेत्र के कर्मचारी कहा जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य सभी इकाइयाँ और उनमें कार्य कर रहे श्रमिक, अनौपचारिक श्रमिक कहलाते हैं।
औपचारिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के लाभ मिलते हैं। इनकी आमदनी भी अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों से अधिक होती है। इसके विपरीत अनौपचारिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों की आय नियमित नहीं होती है तथा उनके काम में भी निश्चितता एवं नियमितता नहीं होती। किन्तु दोनों ही क्षेत्रक रोजगार देते हैं, अतः दोनों को ही विकास आवश्यक है। साथ ही अनौपचारिक क्षेत्र को नियमित एवं नियन्त्रित करना भी आवश्यक है।
In simple words: रोजगार सृजन औपचारिक और अनौपचारिक दोनों क्षेत्रों में आवश्यक है क्योंकि दोनों ही रोजगार प्रदान करते हैं, हालांकि औपचारिक क्षेत्र सामाजिक सुरक्षा और बेहतर आय प्रदान करता है, अनौपचारिक क्षेत्र को भी नियंत्रित और विकसित करना महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रों के बीच के अंतर, उनके लाभ और चुनौतियों को समझें, और यह भी कि समावेशी आर्थिक विकास के लिए दोनों का संतुलित विकास क्यों महत्वपूर्ण है।
Question 19. विक्टर को दिन में केवल दो घण्टे काम मिल पाता है। बाकी सारे समय वह काम की तलाश में रहता है। क्या वह बेरोजगार है? क्यों? विक्टर जैसे लोग क्या काम करते होंगे?
Answer: विक्टर दिन में दो घण्टे काम करता है अर्थात् वह आर्थिक क्रियाकलाप में बहुत कम समय के लिए भाग लेता है। आर्थिक क्रियाकलाप में भाग लेने के कारण उसे श्रमिक कहा जा सकता है। लेकिन विक्टर को पूर्ण रोजगार प्राप्त नहीं है। उसका रोजगार अनियमित है। दूसरे शब्दों में वह अर्द्ध-बेरोजगार है। ऐसे लोग सकल घरेलू उत्पाद में तनिक-सा ही योगदान कर पाते हैं। अतः उनको नियमित रोजगार दिया जाना चाहिए।
In simple words: विक्टर अर्द्ध-बेरोजगार है क्योंकि उसे पूरा समय काम नहीं मिल रहा है जबकि वह काम करने को इच्छुक है। ऐसे लोग अक्सर कम वेतन वाले, अनियमित और अल्पकालिक काम करते हैं और राष्ट्रीय उत्पादन में सीमित योगदान देते हैं।
🎯 Exam Tip: अर्द्ध-बेरोजगारी की अवधारणा को समझें, जिसमें व्यक्ति काम करने के इच्छुक होते हुए भी अपनी क्षमता से कम काम करते हैं या कम घंटे काम करते हैं।
Question 20. क्या आप गाँव में रह रहे हैं? यदि आपको ग्राम-पंचायत को सलाह देने को कहा जाए तो आप - गाँव की उन्नति के लिए किस प्रकार के क्रियाकलाप का सुझाव देंगे, जिससे रोजगार सृजन भी हो ।
Answer: ग्रामवासी होन के नाते मैं ग्राम पंचायत को गाँव की उन्नति के लिए निम्नलिखित सुझाव दूंगा
1. ग्राम पंचायत आधारित संरचना के विकास पर समुचित ध्यान दे। नालियाँ, पुलियाएँ व सड़क : बनवाएँ। इससे रोजगार के नए-नए अवसर सृजित होंगे।
2. वह गाँव में कुटीर उद्योगों के विकास पर बल दे। इससे खाली समय में लोगों को रोजगार मिलेगा।
3. गाँवों में सार्वजनिक निर्माण कार्यों को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार वित्तीय सहायता उपलब्ध - कराए।
4. ग्रामीणों के लिए रोजगार सुनिश्चित किया जाए।
5. बेसहारा बुजुर्गों, विधवा महिलाओं और अनाथ बच्चों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराए।
6. ग्राम पंचायत देखे कि गाँव का प्रत्येक बच्चा पढ़ने के लिए पाठशाला जाता है।
7. ग्राम पंचायत गाँव में बच्चों के लिए स्वस्थ मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराए।
In simple words: गाँव में रोजगार सृजन के लिए ग्राम पंचायत को बुनियादी ढाँचे के विकास (सड़क, पुलिया), कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने, सार्वजनिक निर्माण कार्यों को प्रोत्साहित करने, सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने और शिक्षा व मनोरंजन सुविधाओं में सुधार करने जैसे उपाय अपनाने चाहिए।
🎯 Exam Tip: ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है, जिसमें बुनियादी ढाँचा, स्थानीय उद्योग, सामाजिक कल्याण और शिक्षा शामिल हों।
Question 21. अनियत दिहाड़ी मजदूर कौन होते हैं?
Answer: जब एक श्रमिक को जितने समय काम करना चाहिए उससे कम समय काम मिलता है अथवा वर्ष में कुछ महीनों के लिए बेकार रहना पड़ता है तो उसे अनियत दिहाड़ी मजदूर कहा जाता है। अनियत मजदूर को अपने काम के बदले उचित दाम व सामाजिक सुरक्षा के लाभ नहीं मिलते हैं। निर्माण मजदूर अनियत मजदूरी वाले श्रमिक कहलाते हैं।
In simple words: अनियत दिहाड़ी मजदूर वे होते हैं जिन्हें अनियमित या कम समय के लिए काम मिलता है, उचित मजदूरी या सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती, और उन्हें वर्ष के कुछ महीनों के लिए बेरोजगार रहना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: अनियत दिहाड़ी मजदूरों की पहचान उनकी अनियमित आय, सामाजिक सुरक्षा की कमी और अल्पकालिक रोजगार से होती है, जो अनौपचारिक क्षेत्र की विशेषता है।
Question 22. आपको यह कैसे पता चलेगा कि कोई व्यक्ति अनौपचारिक क्षेत्रक में काम कर रहा है?
Answer: भारत में श्रमबल को औपचारिक तथा अनौपचारिक दो वर्गों में विभाजित किया गया है। सभी सार्वजनिक प्रतिष्ठानों तथा 10 या अधिक कर्मचारियों को रोजगार देने वाले निजी क्षेत्रक में काम करने वाले श्रमिकों को औपचारिक श्रमिक हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य सभी उद्यम और उनमें काम कर रहे श्रमिकों को अनौपचारिक श्रमिक हो जाएगा। किसान, मोची, छोटे दुकानदार अनौपचारिक क्षेत्रक में काम करने वाले श्रमिक हैं।
In simple words: कोई व्यक्ति अनौपचारिक क्षेत्रक में काम कर रहा है यह तब पता चलता है जब वह सार्वजनिक क्षेत्र में या 10 से अधिक कर्मचारियों वाले निजी क्षेत्र में कार्यरत न हो। छोटे किसान, मोची या दुकानदार जैसे स्वनियोजित या छोटे प्रतिष्ठानों में काम करने वाले लोग अनौपचारिक श्रमिक कहलाते हैं।
🎯 Exam Tip: औपचारिक क्षेत्र की पहचान सामाजिक सुरक्षा लाभों, नियमित आय और 10 या अधिक कर्मचारियों वाले निजी या सभी सार्वजनिक प्रतिष्ठानों से होती है; शेष सभी अनौपचारिक क्षेत्र में आते हैं।
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. गाँवों की तुलना में शहरों में नियमित वेतनभोगी श्रमिक पाए जाते हैं
(क) कम
(ख) अधिक
(ग) नगण्य ।
(घ) लगभग बराबर
Answer: (ख) अधिक
In simple words: शहरों में नियमित वेतनभोगी श्रमिक गाँवों की तुलना में अधिक होते हैं, क्योंकि शहरी क्षेत्रों में शिक्षा, कौशल और संगठित रोजगार के अवसर ज्यादा होते हैं।
🎯 Exam Tip: शहरीकरण और औद्योगीकरण अक्सर संगठित क्षेत्र में नियमित रोजगार के अवसरों में वृद्धि करते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में अनौपचारिक या कृषि-आधारित रोजगार अधिक होता है।
Question 2. जब श्रमिक की उत्पादकता शून्य अथवा ऋणात्मक होती है, उसे कहते हैं
(क) मौसमी बेरोजगारी ।
(ख) स्थायी बेरोजगारी ।
(ग) छिपी हुई बेरोजगारी
(घ) शिक्षित बेरोजगारी
Answer: (ग) छिपी हुई बेरोजगारी
In simple words: जब किसी कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग लगे होते हैं और उनमें से कुछ को हटा देने पर भी उत्पादन पर कोई फर्क नहीं पड़ता, तो उसे छिपी हुई बेरोजगारी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: छिपी हुई बेरोजगारी अक्सर कृषि क्षेत्र में पाई जाती है जहाँ परिवार के सभी सदस्य काम में लगे रहते हैं, भले ही उनकी सीमांत उत्पादकता शून्य हो।
Question 3. बेरोजगारी का सामाजिक दुष्परिणाम है१
(क) मानव संसाधन का निष्क्रिय पड़ा रहना
(ख) उत्पादन की हानि होना ।
(ग) उत्पादता का स्तर निम्न रहना
(घ) सामाजिक अशान्ति बढ़ना
Answer: (घ) सामाजिक अशान्ति बढ़ना
In simple words: बेरोजगारी का एक प्रमुख सामाजिक दुष्परिणाम सामाजिक अशान्ति का बढ़ना है, क्योंकि इससे लोगों में निराशा, अपराध और वर्ग संघर्ष बढ़ सकता है।
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी के सामाजिक परिणामों में केवल आर्थिक हानि ही नहीं, बल्कि गरीबी, अपराध और सामाजिक अस्थिरता जैसी व्यापक समस्याएं भी शामिल हैं।
Question 4. भारत का मुख्य व्यवसाय क्या है?
(क) कृषि
(ख) वाणिज्य
(ग) खनन
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) कृषि
In simple words: भारत का मुख्य व्यवसाय कृषि है, क्योंकि देश की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर करती है।
🎯 Exam Tip: भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी काफी हद तक कृषि पर आधारित है, हालांकि सेवा और उद्योग क्षेत्रों का योगदान बढ़ रहा है।
Question 5. भारत में कौन-सी बेरोजगारी की स्थिति बड़ी करुण व दयनीय है?
(क) शिक्षित
(ख) मौसमी
(ग) औद्योगिक
(घ) अदृश्य
Answer: (क) शिक्षित
In simple words: शिक्षित बेरोजगारी की स्थिति सबसे दयनीय मानी जाती है क्योंकि उच्च शिक्षा प्राप्त होने के बावजूद युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार नहीं मिल पाता, जिससे निराशा और संसाधनों का अपव्यय होता है।
🎯 Exam Tip: शिक्षित बेरोजगारी मानव पूंजी के अक्षमतापूर्ण उपयोग को दर्शाती है और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं को बढ़ा सकती है, जिससे नीति निर्माताओं के लिए यह एक गंभीर चिंता का विषय बन जाता है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. सकल घरेलू उत्पाद क्या है?
Answer: किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य इसका सकल घरेलू उत्पाद' कहलाता है।
In simple words: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) एक देश में एक साल के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल बाजार मूल्य होता है।
🎯 Exam Tip: जीडीपी किसी देश की आर्थिक गतिविधियों और उसके उत्पादन क्षमता का एक महत्वपूर्ण मापक है।
Question 2. आर्थिक क्रियाएँ क्या हैं?
Answer: सकल राष्ट्रीय उत्पाद में योगदान देने वाले सभी क्रियाकलापों को आर्थिक क्रियाएँ कहते हैं।
In simple words: आर्थिक क्रियाएँ वे गतिविधियाँ हैं जो वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करती हैं और राष्ट्रीय आय में योगदान देती हैं।
🎯 Exam Tip: आर्थिक क्रियाओं में उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग से संबंधित सभी गतिविधियाँ शामिल हैं।
Question 3. श्रमिक कौन हैं?
Answer: वे सभी व्यक्ति जो आर्थिक क्रियाओं में संलग्न होते हैं, श्रमिक कहलाते हैं।
In simple words: श्रमिक वह व्यक्ति है जो किसी भी आर्थिक गतिविधि में शामिल होकर वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: श्रमिक की परिभाषा में वेतनभोगी और स्वनियोजित दोनों तरह के व्यक्ति शामिल होते हैं, बशर्ते वे आर्थिक योगदान दे रहे हों।
Question 4. भारत में रोजगार की प्रकृति कैसी है?
Answer: भारत में रोजगार की प्रकृति बहुमुखी है। कुछ लोगों को वर्ष भर रोजगार प्राप्त होता है तो कुछ लोग वर्ष में कुछ महीने ही रोजगार पाते हैं।
In simple words: भारत में रोजगार की प्रकृति विविध है, जिसमें कुछ लोगों को पूरे साल काम मिलता है जबकि कई लोग मौसमी या अनियमित रोजगार से जुड़े होते हैं।
🎯 Exam Tip: भारत में रोजगार की प्रकृति को समझने के लिए कृषि क्षेत्र की मौसमीता, अनौपचारिक क्षेत्र के प्रभुत्व और कुशल-अकुशल श्रम के अंतर को ध्यान में रखें।
Question 5. देश में रोजगार की स्थिति के विश्लेषण के लिए किस सूचक का प्रयोग किया जाता है?
Answer: देश में रोजगार की स्थिति के विश्लेषण के लिए 'श्रमिक जनसंख्या अनुपात' का प्रयोग किया जाता है। यह सूचक यह जानने में सहायक है कि जनसंख्या का कितना अनुपात वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है।
In simple words: देश में रोजगार की स्थिति का विश्लेषण करने के लिए 'श्रमिक जनसंख्या अनुपात' का उपयोग किया जाता है, जो यह दर्शाता है कि कुल आबादी का कितना हिस्सा काम कर रहा है।
🎯 Exam Tip: श्रमिक जनसंख्या अनुपात एक महत्वपूर्ण संकेतक है जो कार्यबल की भागीदारी दर को मापता है और आर्थिक नियोजन में सहायक होता है।
Question 6. 'जनसंख्या से क्या अभिप्राय है?
Answer: 'जनसंख्या' शब्द का अभिप्राय किसी क्षेत्र-विशेष में किसी समय-विशेष पर रह रहे व्यक्तियों की कुल संख्या से है।
In simple words: जनसंख्या का अर्थ किसी निश्चित क्षेत्र और समय में रहने वाले लोगों की कुल संख्या है।
🎯 Exam Tip: जनसंख्या, किसी अर्थव्यवस्था के लिए मानव संसाधन का आधार होती है और इसकी संरचना, वृद्धि दर व वितरण आर्थिक विकास को प्रभावित करते हैं।
Question 7. श्रमिक-जनसंख्या अनुपात का आकलन कैसे किया जाता है?
Answer: श्रमिक-जनसँख्या अनुपात का आकलन करने के लिए देश में कार्य कर रहे सभी श्रमिकों की संख्या को देश की जनसंख्या से भाग देकर उसे 100 से गुणा कर दिया जाता है। सूत्र रूप में,
In simple words: श्रमिक-जनसंख्या अनुपात की गणना देश में काम कर रहे श्रमिकों की संख्या को कुल जनसंख्या से विभाजित करके और फिर 100 से गुणा करके की जाती है।
🎯 Exam Tip: इस अनुपात की गणना में श्रमिकों की सटीक पहचान और कुल जनसंख्या के आंकड़ों का सही उपयोग महत्वपूर्ण है।
Question 8. 'श्रमबल से क्या आशय है?
Answer: 'श्रमबल' से आशय व्यक्तियों की उस संख्या से है जो वास्तव में काम कर रहे हैं या काम करने के इच्छुक हैं।
In simple words: श्रमबल में वे सभी लोग शामिल होते हैं जो वर्तमान में कार्यरत हैं या जो काम करने के लिए उपलब्ध और इच्छुक हैं, भले ही उन्हें अभी काम न मिला हो।
🎯 Exam Tip: श्रमबल में नियोजित और बेरोजगार दोनों व्यक्ति शामिल होते हैं, जो किसी अर्थव्यवस्था की संभावित कार्यशक्ति को दर्शाता है।
Question 9. 'कार्यबल से क्या आशय है?
Answer: 'कार्यबल' से आशय व्यक्तियों की उस संख्या से है जो वास्तव में काम कर रहे हैं।
In simple words: कार्यबल (वर्कफोर्स) केवल उन व्यक्तियों की कुल संख्या है जो वास्तव में वर्तमान में किसी आर्थिक गतिविधि में कार्यरत हैं।
🎯 Exam Tip: कार्यबल, श्रमबल का एक हिस्सा है, जिसमें केवल नियोजित व्यक्ति शामिल होते हैं, जबकि बेरोजगार व्यक्तियों को इसमें शामिल नहीं किया जाता।
Question 10. सहभागिता दर से क्या आशय है?
Answer: सहभागिता दर से आय जनसंख्या के उस प्रतिशत से है जो वास्तव में उत्पादन क्रिया में सहभागी होते हैं। इसे देश की कुल जनसंख्या तथा कार्यबल के बीच अनुपात के रूप में मापा जाता है। सूत्र रूप में,
In simple words: सहभागिता दर का अर्थ है कुल जनसंख्या का वह प्रतिशत जो किसी आर्थिक गतिविधि में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है, यानी कार्यबल का कुल जनसंख्या के अनुपात में होना।
🎯 Exam Tip: सहभागिता दर किसी अर्थव्यवस्था में श्रम बल की सक्रियता को दर्शाती है, जो रोजगार के अवसरों और आर्थिक विकास के साथ सहसंबंधित होती है।
Question 11. 'मजदूरी रोजगार' में कौन आते हैं?
Answer: 'मजदूरी रोजगार' में वे व्यक्ति आते हैं जिनको अन्य व्यक्तियों ने रोजगार प्रदान किया हुआ है और इन्हें अपनी सेवाओं के बदले मजदूरी प्राप्त होती है।
In simple words: मजदूरी रोजगार उन व्यक्तियों को संदर्भित करता है जो किसी और के लिए काम करते हैं और अपनी सेवाओं के बदले वेतन या मजदूरी प्राप्त करते हैं।
🎯 Exam Tip: मजदूरी रोजगार, स्वनियोजित रोजगार से भिन्न है, जहाँ व्यक्ति स्वयं के लिए काम करते हैं।
Question 12. स्वनियोजित किन व्यक्तियों को कहा जाता है?
Answer: स्वनियोजित उन व्यक्तियों को कहा जाता है जो अपने उद्यम के स्वामी और संचालक होते हैं। कपड़े की दुकान का स्वामी स्वनियोजित है।
In simple words: स्वनियोजित वे व्यक्ति होते हैं जो अपने स्वयं के व्यवसाय या उद्यम के मालिक और प्रबंधक होते हैं, और दूसरों के लिए काम करने के बजाय स्वयं को रोजगार देते हैं।
🎯 Exam Tip: स्वनियोजन उद्यमशीलता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, जहाँ व्यक्ति अपने जोखिम और लाभ के लिए काम करते हैं।
Question 13. नियमित वेतनभोगी कर्मचारी कौन हैं?
Answer: जब किसी श्रमिक को कोई व्यक्ति या उद्यम नियमित रूप से काम पर रख उसे मजदूरी देता है तो वह श्रमिक नियमित वेतनभोगी कर्मचारी' कहलाता है।
In simple words: नियमित वेतनभोगी कर्मचारी वे श्रमिक होते हैं जिन्हें किसी नियोक्ता द्वारा नियमित आधार पर काम पर रखा जाता है और वे नियमित वेतन या मजदूरी प्राप्त करते हैं।
🎯 Exam Tip: नियमित वेतनभोगी कर्मचारियों को आमतौर पर सामाजिक सुरक्षा लाभ और रोजगार की स्थिरता मिलती है, जो उन्हें अनियत या स्वनियोजित श्रमिकों से अलग करती है।
Question 14. देश की आजीविका का सर्वप्रमुख स्रोत क्या है? "
Answer: देश की आजीविका का सर्वप्रमुख स्रात 'स्वरोजगार है। 50 प्रतिशत से अधिक लोग इसी वर्ग में कार्यरत हैं।
In simple words: भारत में आजीविका का सबसे बड़ा स्रोत स्वरोजगार है, जिसमें 50% से अधिक लोग अपने स्वयं के व्यवसाय या उद्यमों के माध्यम से काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: स्वरोजगार भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बड़ी आबादी को रोजगार प्रदान करता है, विशेष रूप से ग्रामीण और अनौपचारिक क्षेत्रों में।
Question 15. भारत में अधिकांश श्रमिकों के रोजगार का प्रमुख स्रोत कौन-सा है?
Answer: भारत में अधिकांश श्रमिकों के रोजगार का स्रोत प्राथमिक क्षेत्रक (लगभग 60%) है।
In simple words: भारत में श्रमिकों के रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत प्राथमिक क्षेत्र है, मुख्य रूप से कृषि, जिसमें लगभग 60% श्रमिक कार्यरत हैं।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक क्षेत्र की प्रधानता भारतीय अर्थव्यवस्था के विकासशील स्वरूप को दर्शाती है, हालांकि सेवा क्षेत्र का महत्व बढ़ रहा है।
Question 16. गत 50 वर्षों से योजनाबद्ध विकास का प्रमुख उददेश्य क्या रहा है?
Answer: गते 50 वर्षों से योजनाबद्ध विकास का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय उत्पाद और रोजगार में वृद्धि के माध्यम से अर्थव्यवस्था का प्रसार रहा है।
In simple words: पिछले 50 वर्षों से भारत में योजनाबद्ध विकास का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय उत्पाद और रोजगार दोनों में वृद्धि करके अर्थव्यवस्था का विस्तार करना रहा है।
🎯 Exam Tip: योजनाबद्ध विकास का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि साथ ही पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा करना भी होता है ताकि समग्र आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित हो सके।
Question 17. श्रमबल में किन श्रमिकों का अनुपात निरन्तर बढ़ रहा है? "
Answer: श्रमबल में अनियत श्रमिकों का अनुपात निरन्तर बढ़ रहा है।
In simple words: भारत में श्रमबल में अनियत श्रमिकों का अनुपात लगातार बढ़ रहा है, जो अनौपचारिक रोजगार के बढ़ते चलन को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: अनियत श्रमिकों का बढ़ता अनुपात रोजगार की अनिश्चितता और सामाजिक सुरक्षा के अभाव की ओर संकेत करता है, जो नीति निर्माताओं के लिए एक चुनौती है।
Question 18. श्रमबल को किन दो वर्गों में विभाजित किया जाता है?
Answer: श्रमबल को निम्नलिखित दो वर्गों में विभाजित किया जाता है- 1. औपचारिक अथवा संगठित वर्ग, 2. अनौपचारिक अथवा असंगठित वर्ग ।।
In simple words: श्रमबल को मुख्य रूप से औपचारिक (संगठित) और अनौपचारिक (असंगठित) इन दो वर्गों में बांटा जाता है, जो रोजगार की प्रकृति और लाभों के आधार पर भिन्न होते हैं।
🎯 Exam Tip: इन दो वर्गों के बीच का अंतर सामाजिक सुरक्षा लाभों, रोजगार की स्थिरता और कानूनी संरक्षण के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
Question 19. संगठित अथवा औपचारिक वर्ग में कौन-कौन से प्रतिष्ठान आते हैं?
Answer: सभी सार्वजनिक क्षेत्रक प्रतिष्ठान तथा 10 या अधिक कर्मचारियों को रोजगार देने वाले निजी क्षेत्रक प्रतिष्ठान, संगठित क्षेत्र में सम्मिलित किए जाते हैं।
In simple words: संगठित या औपचारिक क्षेत्र में सभी सरकारी प्रतिष्ठान और वे निजी प्रतिष्ठान आते हैं जिनमें 10 या अधिक कर्मचारी कार्यरत होते हैं।
🎯 Exam Tip: संगठित क्षेत्र के प्रतिष्ठान अपने कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा लाभ, नियमित वेतन और बेहतर कार्य परिस्थितियाँ प्रदान करते हैं।
Question 20. अनौपचारिक (असंगठित क्षेत्रक में कौन-कौन से कर्मचारी सम्मिलित होते हैं?
Answer: अनौपचारिक (असंगठित) क्षेत्रक में करोड़ों किसान, कृषि श्रमिक, छोटे-छोटे काम धन्धे चलाने वाले और उनके कर्मचारी तथा सभी सुनियोजित व्यक्ति जिनके पास भाड़े के श्रमिक नहीं हैं, सम्मिलित हैं।
In simple words: अनौपचारिक क्षेत्रक में छोटे किसान, कृषि श्रमिक, छोटे व्यवसायी और उनके कर्मचारी शामिल होते हैं, जिनमें सामाजिक सुरक्षा और नियमित रोजगार के लाभों की कमी होती है।
🎯 Exam Tip: अनौपचारिक क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का एक विशाल हिस्सा है, जिसमें अधिकांश श्रमिक सामाजिक सुरक्षा और कानूनी संरक्षण के बिना काम करते हैं।
Question 21. बेरोजगारी से क्या आशय है?
Answer: बेरोजगारी वह दशा है जिसमें शारीरिक तथा मानसिक दृष्टि से कार्य करने के योग्य और प्रचलित मजदूरी पर कार्य करने को तत्पर व्यक्ति को कार्य न मिले।।
In simple words: बेरोजगारी एक ऐसी स्थिति है जहाँ कोई व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से काम करने के योग्य और प्रचलित मजदूरी पर काम करने को तैयार होता है, लेकिन उसे काम नहीं मिल पाता।
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी को मापने के लिए व्यक्ति की इच्छा और क्षमता दोनों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐच्छिक बेरोजगारी को अक्सर वास्तविक बेरोजगारी नहीं माना जाता है।
Question 22. ऐच्छिक बेरोजगारी से क्या आशय है?
Answer: प्रत्येक समाज में प्रत्येक समय कुछ-न-कुछ व्यक्ति ऐसे अवश्य होते हैं जो काम करने के योग्य होते हुए भी काम करना नहीं चाहते। यह ऐच्छिक बेरोजगारी की अवस्था कहलाती है।
In simple words: ऐच्छिक बेरोजगारी तब होती है जब कोई व्यक्ति, काम करने में सक्षम और उपलब्ध होने के बावजूद, अपनी इच्छा से काम नहीं करना चाहता।
🎯 Exam Tip: ऐच्छिक बेरोजगारी में व्यक्ति अपनी मर्जी से काम नहीं करते हैं, जबकि अनैच्छिक बेरोजगारी में वे काम करना चाहते हैं लेकिन उन्हें काम नहीं मिल पाता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. बेरोजगारी के आर्थिक व सामाजिक दुष्परिणाम बताइए ।
Answer: बेरोजगारी के आर्थिक दुष्परिणाम निम्नलिखित हैं
1. मानव संसाधन निष्क्रिय रहते हैं। यह एक प्रकार का अपव्यय है।
2. उत्पादन की हानि होती है।
3. निवेशाधिक्य सृजित न होने के कारण पूँजी-निर्माण की दर धीमी रहती है।
4. उत्पादकता का स्तर निम्न रहता है।
बेरोजगारी के सामाजिक दुष्परिणाम निम्नलिखित हैं
1. जीवन की गुणवत्ता कम होती है।
2. आय तथा सम्पत्ति के वितरण में असमानता बढ़ती जाती है।
3. इससे सामाजिक अशान्ति बढ़ती है।
4. इस अवस्था में वर्ग-संघर्ष पनपता है।
In simple words: बेरोजगारी के आर्थिक दुष्परिणामों में मानव संसाधनों का अपव्यय, उत्पादन और पूंजी निर्माण में कमी शामिल है, जबकि सामाजिक दुष्परिणामों में जीवन की गुणवत्ता में गिरावट, आय असमानता और सामाजिक अशांति व वर्ग-संघर्ष की वृद्धि शामिल है।
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी के बहुआयामी प्रभावों को समझने के लिए आर्थिक और सामाजिक दोनों पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करें, क्योंकि ये एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।
Question 2. रोजगार/बेरोजगारी की सामान्य, साप्ताहिक तथा दैनिक स्थिति को समझाइए ।
Answer: 1. सामान्य स्तर- यह वह स्थिति है जिसमें एक व्यक्ति अपना अधिकांश समय काम में व्यतीत करता है। भारत में सामान्य तथा 183 दिवस काम को मानक सीमा बिन्दु माना जाता है। जो व्यक्ति वर्ष में 183 या अधिक दिन काम करते हैं, वे सामान्य रोजगार प्राप्त हैं, अन्य सामान्य रूप से बेरोजगार हैं।
2. साप्ताहिक स्तर- यदि अनुबन्धित सप्ताह के दौरान आप कार्यबल का भाग बन जाते हैं तो आपको साप्ताहिक स्तर के आधार पर रोजगार प्राप्त माना जाएगा अन्यथा साप्ताहिक स्तर पर बेरोजगार ।
3. दैनिक स्तर- इसका अनुमान व्यक्ति दिवसों के रूप में लगाया जाता है। 'साप्ताहिक स्तर दीर्घकालीन बेरोजगारी की ओर संकेत करता है जबकि 'दैनिक स्तर' दीर्घकालीन तथा छिपी दोनों बेरोजगारियों का संकेत देता है।
In simple words: रोजगार/बेरोजगारी को सामान्य (वर्ष में 183 दिन से अधिक काम), साप्ताहिक (संदर्भित सप्ताह में काम) और दैनिक (संदर्भित दिन में काम) जैसे विभिन्न स्तरों पर मापा जाता है, जो बेरोजगारी के विभिन्न रूपों और समय-सीमाओं को समझने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: रोजगार के विभिन्न मापन स्तरों को समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि वे बेरोजगारी के अलग-अलग पहलुओं (दीर्घकालिक, मौसमी, छिपी हुई) को दर्शाते हैं।
Question 3. अदृश्य अथवा छिपी बेरोजगारी से क्या आशय है? ।
Answer: अदृश्य अथवा छिपी बेरोजगारी आंशिक बेरोजगारी की वह अवस्था है जिसमें रोजगार में संलग्न श्रम शक्ति का उत्पादन में यागदान शून्य या लगभग शून्य होता है। किसी व्यवसाय/उद्योग में आवश्यकता से अधिक श्रम का लगा होना अदृश्य बेरोजगारी को जन्म देता है। अदृश्य बेरोजगारी निम्न दो रूपों में पाई जाती है
1. जब लोग अपनी योग्यता से कम उत्पादन कार्यों में लगे होते हैं। यह सामान्यतः औद्योगिक देशों में पाई जाती है।
2. जब किसी कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग लगे होते हैं। यह बेरोजगारी प्रायःअल्पविकसित कृषिप्रधान देशों में पाई जाती है।
अदृश्य बेरोजगारी की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
1. इसका सम्बन्ध अपना निजी काम करने वालों से होता है, मजदूरी पर काम करने वाले लोगों से - नहीं।
2. यह दीर्घकालीन जनाधिक्य का परिणाम होती है।
3. इसका कारण पूरक साधनों की कमी का होना है।
In simple words: अदृश्य या छिपी हुई बेरोजगारी वह स्थिति है जहाँ व्यक्ति काम में लगे हुए तो दिखते हैं, लेकिन उनकी सीमांत उत्पादकता शून्य या नगण्य होती है, यानी उन्हें काम से हटाने पर भी कुल उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ता। यह अक्सर आवश्यकता से अधिक श्रमिकों के कारण होती है और आमतौर पर कृषि जैसे क्षेत्रों में पाई जाती है।
🎯 Exam Tip: छिपी हुई बेरोजगारी की अवधारणा को समझने के लिए यह याद रखें कि इसमें लोग काम करते हुए दिखते हैं, लेकिन उनका योगदान अप्रभावी होता है, जिससे संसाधनों का अप्रत्यक्ष अपव्यय होता है।
Question 4. सामान्यतः आर्थिक क्रियाओं को किन वर्गों में विभाजित किया जाता है?
Answer: आर्थिक क्रियाओं को निम्न वर्गों में विभाजित किया जाता है-
1. प्राथमिक क्षेत्रक, जिसमें
(क) कृषि तथा
(ख) खनन व उत्खनन सम्मिलित होते हैं।
2. द्वितीयक क्षेत्रक, जिसमें
(क) विनिर्माण,
(ख) विद्युत, गैस एवं जलापूर्ति तथा
(ग) निर्माण कार्य सम्मिलित होते हैं।
3. तृतीयक अथवा सेवा क्षेत्रक, जिसमें (क) वाणिज्य,
(ख) परिवहन और भण्डारण तथा
(ग) सेवाएँ सम्मिलित होती हैं।
In simple words: आर्थिक क्रियाओं को मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है: प्राथमिक (कृषि, खनन), द्वितीयक (विनिर्माण, विद्युत, निर्माण) और तृतीयक या सेवा क्षेत्र (वाणिज्य, परिवहन, सेवाएँ)।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक क्षेत्र में शामिल गतिविधियों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अर्थव्यवस्था की संरचना और विकास के विभिन्न चरणों को समझने में मदद करता है।
Question 5. सरकार रोजगार सृजन के लिए क्या प्रयास करती है?
Answer: केन्द्र एवं राज्य सरकारें रोजगार सृजन हेतु अवसरों की रचना करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती आ रही हैं। इनके प्रयासों को दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है-प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष। प्रत्यक्ष रूप से सरकार अपने विभिन्न विभागों में प्रशासकीय कार्यों के लिए नियुक्तियाँ करती है। सरकार अनेक उद्योग, होटल और परिवहन कम्पनियाँ भी चला रही है। इन सब में वह प्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान करती है। सरकारी उद्यमों में उत्पादकता के स्तर में वृद्धि अन्य उद्यमों के विस्तार को प्रोत्साहित करती है जिससे रोजगार के नए-नए अवसर सृजित होते हैं। देश में निर्धनता निवारण के लिए चलाए ज रहे विभिन्न कार्यक्रम रोजगार सृजन कार्यक्रम ही हैं। से कार्यक्रम केवल रोजगार ही उपलब्ध नहीं कराते अपितु इनके सहारे प्राथमिक, जनस्वास्थ्य, प्राथमिक शिक्षा, ग्रामीण आवास, ग्रामीण जलापूर्ति, पोषण, लोगों की आय तथा रोजगार सृजन करने वाली परिसम्पत्तियाँ खरीदने में सहायता, दिहाड़ी रोजगार के सृजन के माध्यम से सामुदायिक परिसम्पत्तियों का विकास, गृह और स्वच्छता सुविधाओं का निर्माण, गृहनिर्माण के लिए सहायता, ग्रामीण सड़कों का निर्माण और बंजर भूमि आदि के विकास के कार्य पूरे किए जाते हैं।
In simple words: सरकार प्रत्यक्ष रूप से अपने विभागों और उद्यमों में नियुक्तियाँ करके तथा अप्रत्यक्ष रूप से गरीबी उन्मूलन और रोजगार सृजन कार्यक्रमों, जैसे कि बुनियादी ढाँचे के विकास, ग्रामीण आवास और शिक्षा के माध्यम से रोजगार सृजन का प्रयास करती है।
🎯 Exam Tip: सरकार द्वारा रोजगार सृजन के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रणनीतियों को समझना महत्वपूर्ण है, जिसमें सार्वजनिक निवेश, सामाजिक कल्याण कार्यक्रम और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन शामिल हैं।
Question 6. क्या आप जानते हैं कि भारत जैसे देश में रोजगार वृद्धि की दर को 2 प्रतिशत स्तर पर बनाए रखना इतना आसान काम नहीं है? क्यों?
Answer: भारत एक विकासशील देश है। कृषि यहाँ का मुख्य व्यवसाय है। भारत के लगभग 60 प्रतिशत लोग कृषि कार्यों में संलग्न हैं। जनसंख्या की तीव्र वृद्धि के कारण कृषि क्षेत्र में श्रमाधिक्य है। पूँजी व अन्य सहायक साधनों के अभाव में रोजगार के आवश्यक अवसरों का सृजन नहीं हो पाता है। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी तथा सार्वजनिक रूप से बढ़ते भ्रष्टाचार के कारण ये परियोजनाएँ पूर्णतः सफल नहीं हो पाती हैं। बढ़ती मुद्रा स्फीति के कारण इन परियोजनाओं की लागत भी बढ़ती जाती है। इसके अतिरिक्त, इनके लाभ भी लाभार्थियों तक नहीं पहुँच पाते हैं।
In simple words: भारत में 2% रोजगार वृद्धि दर बनाए रखना मुश्किल है क्योंकि यह एक विकासशील देश है जिसमें कृषि पर भारी निर्भरता, तीव्र जनसंख्या वृद्धि, पूंजी और संसाधनों की कमी, और सरकारी योजनाओं के धीमे क्रियान्वयन व भ्रष्टाचार जैसी चुनौतियाँ हैं।
🎯 Exam Tip: रोजगार वृद्धि को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में जनसंख्या वृद्धि, कृषि पर निर्भरता, पूंजी निर्माण और सरकारी नीतियों का प्रभावी कार्यान्वयन शामिल हैं।
Question 7. इनमें से असंगठित क्षेत्रकों की क्रियाओं में लगे व्यक्तियों के सामने चिह्न अंकित करें
1. एक ऐसे होटल का कर्मचारी, जिसमें सात भाड़े के श्रमिक एवं तीन पारिवारिक सदस्य हैं।
2. एक ऐसे निजी विद्यालय का शिक्षक, जहाँ 25 शिक्षक कार्यरत हैं।
3. एक पुलिस सिपाही ।
4. सरकारी अस्पताल की एक नर्स ।
5. एक रिक्शाचालक।
6. कपड़े की दुकान का मालिक, जिसके यहाँ नौ श्रमिक कार्यरत हैं।
7. एक ऐसी बेस कम्पनी का चालक, जिसमें 10 से अधिक बसें और 20 चालक, संवाहक तथा अन्य कर्मचारी हैं।
8. दस कर्मचारियों वाली निर्माण कम्पनी का सिविल अभियन्ता ।
9. राज्य सरकारी कार्यालय में अस्थायी आधार पर नियुक्त कम्प्यूटर ऑपरेटर ।
10. बिजली दफ्तर का एक क्लर्क ।
Answer: असंगठित क्षेत्रकों की क्रियाओं में संलग्न व्यक्ति हैं-
(1) एक ऐसे होटल का कर्मचारी, जिसमें सात भाड़े के श्रमिक एवं तीन पारिवारिक सदस्य हैं।
(5) एक रिक्शाचालक ।
(6) कपड़े की दुकान का मालिक, जिसके यहाँ नौ श्रमिक कार्यरत हैं।
(9) राज्य सरकारी कार्यालय में अस्थायी आधार पर नियुक्त कम्प्यूटर ऑपरेटर ।
In simple words: असंगठित क्षेत्र में ऐसे प्रतिष्ठान या व्यक्ति आते हैं जिनमें 10 से कम कर्मचारी हों (जैसे 7 श्रमिक वाला होटल, 9 श्रमिक वाली दुकान), स्वनियोजित (रिक्शाचालक), या अस्थायी सरकारी कर्मचारी शामिल होते हैं।
🎯 Exam Tip: असंगठित क्षेत्र की पहचान 10 से कम कर्मचारियों, अस्थायी रोजगार, और सामाजिक सुरक्षा लाभों की अनुपस्थिति से होती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. बेरोजगारी किसे कहते हैं? भारत में बेरोजगारी के विभिन्न स्वरूप बताइए।
Answer: पूर्ण रोजगार के अभाव की स्थिति को बेरोजगारी कहते हैं। यह एक अत्यन्त पतित एवं दूषित स्थिति है जिसे 'आर्थिक बरबादी' के नाम से भी पुकारा जाता है। वस्तुतः बेरोजगारी की स्थिति आर्थिक विकास के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है जो सामाजिक और राजनीतिक अशान्ति को जन्म देती है। इसका समस्त समाज पर व्यापक दुष्प्रभाव पड़ता है। अर्थशास्त्रीय दृष्टि से वही व्यक्ति बेरोजगार कहलाता है, जो शारीरिक तथा मानसिक दृष्टि से कार्य करने के योग्य हो। साथ ही, प्रचलित मजदूरी की दर पर कार्य करने को तत्पर भी हो, परंतु उसे कार्य न मिले । इसके विपरीत, यदि कोई व्यक्ति शारीरिक या मानसिक दृष्टि से कार्य करने के योग्य नहीं है अथवा प्रचलित मजदूरी की दर पर कार्य करने के लिए तत्पर नहीं है (जबकि उसे कार्य उपलब्ध हो) तो उसे बेरोजगार नहीं कहा जाएगा। अभिप्राय यह है कि अर्थशास्त्र में ऐच्छिक बेरोजगारी (Voluntary Unemployment) को बेरोजगारी नहीं कहा जाता।
ऐच्छिक बेरोजगारी प्रत्येक समाज में प्रत्येक समय कुछ-न-कुछ व्यक्ति ऐसे अवश्य पाए जाते हैं जो काम करने के स्रोग्य होते हुए भी काम नहीं करना चाहते। इस प्रकार की बेरोजगारी प्रायः तीन कारणों से उत्पन्न होती है
1. कुछ व्यक्ति आलसी व कमजोर होने के कारण काम पसन्द नहीं करते जैसी भिखारी, साधु आदि ।
2. कुछ व्यक्ति धनी होने के कारण काम करने की आवश्यकता ही नहीं समझते ।
3. कुछ व्यक्ति उदासीन प्रकृति के होते हैं।
अनैच्छिक बेरोजगारी
जब स्वस्थ, योग्य एवं काम के इच्छुक व्यक्तियों को मजदूरी की प्रचलित दर पर काम नहीं मिल पाता तो इसे अनैच्छिक बेरोजगारी कहते हैं। कीन्स के अनुसार-"इस प्रकार की बेरोजगारी प्रभावपूर्ण माँग में कमी होने के कारण उत्पन्न होती है।"
भारत में बेरोजगारी का स्वरूप
भारत एक विकासशील देश है। अतः यहाँ ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी का स्वरूप एक-सा नहीं पाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी के तीन मुख्य रूप दिखाई देते हैं-खुली बेरोजगारी, मौसमी बेरोजगारी और छिपी हुई बेरोजगारी। शहरों में पाई जाने वाली बेरोजगारी मुख्यतः दो प्रकार की है - औद्योगिक बेरोजगारी और शिक्षित बेरोजगारी ।
ग्रामीण बेरोजगारी भारत में ग्रामीण बेरोज़गारी का अध्ययन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत किया जा सकता है
1. खुली बेरोजगोरी- इससे हमारा अभिप्राय उन व्यक्तियों से है जिन्हें जीवन-यापन हेतु कोई कार्य नहीं मिलता। इसे स्थायी बेरोजगारी भी कहा जाता है। इस स्थायी बेरोजगारी के अन्तर्गत भारतीय गाँवों में बहुत सारे व्यक्ति बेरोजगार रहते हैं। स्थायी बेरोजगारी का मुख्य कारण कृषि पर जनसंख्या की अत्यधिक निर्भरता है।
2. मौसमी बेरोजगारी - इस प्रकार की बेरोजगारी वर्ष के कुछ महीनों में अधिक दिखाई देती है। श्रम की माँग में होने वाले परिवर्तनों में मौसमी बेरोजगारी की मात्रा भी परिवर्तित होती रहती है। सामान्यतः फसलों के बोने तथा काटने के समय श्रम की अधिक माँग रहती है, परन्तु अन्य मौसमों में रोजगार उपलब्ध नहीं होता। ग्रामीणों को सामान्यतया साल में 128 से 196 दिन तक बेरोजगार रहना पड़ता है।
3. छिपी हुई बेरोजगारी - जब श्रमिक की उत्पादकता शून्य अथवा ऋणात्मक होती है, तब उसे छिपी हुई या अदृश्य बेरोजगारी कहते हैं। इस प्रकार की बेरोजगारी का अनुमान लगाना कठिन है।, देश की लगभग 67% जनसंख्या कृषि में संलग्न है जबकि इतनी जन-शक्ति की वहाँ आवश्यकता नहीं है।
शहरी बेरोजगारी
भारत की शहरी बेरोजगारी का अध्ययन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत किया जा सकता है
1. औद्योगिक बेरोजगारी- औद्योगिक क्षेत्र में पाई जाने वाली बेरोजगारी को औद्योगिक बेरोजगारीकहा जाता है। इस प्रकार की बेरोजगारी चक्रीय बेरोजगारी तथा तकनीकी बेरोजगारी से प्रभावित होती है। शिक्षित बेरोजगारी
2. शिक्षा के प्रसार के साथ- साथ इस प्रकार की बेरोजगारी का प्रसार हो रहा है। देश में शिक्षित बेरोजगारी की स्थिति बड़ी करुण एवं दयनीय हो गई है। 'भारत में प्रशिक्षितों की बेरोजगारी' नामक पुस्तक में स्थिति का मूल्यांकन इन शब्दों में किया गया है-"हमारे ।
In simple words: बेरोजगारी वह स्थिति है जब काम करने के योग्य और इच्छुक व्यक्ति को प्रचलित मजदूरी पर काम न मिले। भारत में बेरोजगारी के कई स्वरूप हैं, जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में खुली, मौसमी और छिपी हुई बेरोजगारी, और शहरी क्षेत्रों में औद्योगिक व शिक्षित बेरोजगारी।
🎯 Exam Tip: दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में, बेरोजगारी की परिभाषा, उसके प्रकार (ऐच्छिक, अनैच्छिक) और भारत में ग्रामीण-शहरी संदर्भ में विभिन्न स्वरूपों का विस्तृत वर्णन करें। प्रत्येक प्रकार की विशेषताओं को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. भारत में बेरोजगारी के प्रमुख कारण बताइए। बेरोजगारी को दूर करने के लिए उपयुक्त - सुझाव दीजिए।
Answer: भारत में बेरोजगारी के कारण भारत में बेरोजगारी के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं
1. जनसंख्या में तीव्र वृद्धि-देश में जनसंख्या की वृद्धि-दर लगभग 1.93% वार्षिक रही है। इस प्रकार, जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है, लेकिन रोजगार की सुविधाओं में उस अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है।
2. कुटीर उद्योगों का अभाव - भारत में कुटीर उद्योगों का ह्रास हो जाने के कारण भी बेरोजगारी में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है क्योंकि उनमें संलग्न लोगों को अन्य क्षेत्रों में रोजगार नहीं मिला है।
3. दोषपूर्ण शिक्षा-प्रणाली- हमारे देश में दोषपूर्ण शिक्षा-प्रणाली के कारण भी बेरोजगारी में वृद्धि हुई है। भारत में शिक्षा पद्धति व्यवसाय-प्रधान न होकर सिद्धान्त-प्रधान है, जो बेरोजगारी को जन्म दे रही है।
4. यन्त्रीकरण में वृद्धि – विकास की गति को तेज करने के लिए कृषि व उद्योगों में यन्त्रीकरण व आधुनिकीकरण की नीति को अपनाया जा रहा है, जिसके कारण अस्थायी बेरोजगारी को बढ़ावा मिला है।
5. श्रमिकों की गतिशीलता में कमी- शिक्षा का अभाव, पारिवारिक मोह, रूढ़िवादिता, अन्धविश्वास आदि भारतीय श्रमिक की गतिशीलता में बाधक हैं, जिसके कारण व्यक्ति घर पर बेकार रहना पसन्द करता है।
6. अविकसित प्राकृति साधन- यद्यपि हमारे देश में प्राकृतिक साधने पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। तथापि उनका पूर्ण विदोहन नहीं हुआ है, जिसके कारण देश के औद्योगिक विकास की गति धीमी रही है।
7. तकनीकी ज्ञान का अभाव - देश के शिक्षित समुदाय में तकनीकी ज्ञान का अभाव है। वह केवल लिपिक बन सकता है, किसी भी व्यवसाय को आरम्भ करने की क्षमता उसमें नहीं है। इस कारण देश में शिक्षित बेरोजगारी की प्रचुरता है।
8. बचत तथा विनियोग की न्यून दर - प्रति व्यक्ति आय कम होने के कारण हमारे देश में बचत करने की शक्ति कम है, जिसके फलस्वरूप विनियोग भी कम होता है। विनियोग के अभाव में नवीन उद्योग स्थापित नहीं हो पाते।
9. शरणार्थियों का आगमन - म्यांमार, ब्रिटेन, श्रीलंका, कीनिया, युगाण्डा आदि देशों से भारतीयों के लौटने तथा पाकिस्तान के शरणार्थियों के आगमन के कारण बेरोजगारों की संख्या में वृद्धि रही
10. दोषपूर्ण विचार पद्धति-अधिकांश व्यक्ति पढ़ाई के पश्चात् नौकरी चाहते हैं। वे स्वयं अपना कोई कार्य करना पसन्द नहीं करते, जिससे रोजगार चाहने वालों की संख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही
11. पूँजी-गहन परियोजनाओं पर अधिक बल–द्रिय योजना के प्रारम्भ से ही हमने आधारभूत उद्योगों के विकास पर अधिक बल दिया है, जिससे भारी इन्जीनियरी व रसायन उद्योगों में अधिक पूँजी तो लगाई गई, लेकिन उसमें रोजगार के अवसर ज्यादा नहीं खुल पाए।
In simple words: भारत में बेरोजगारी के प्रमुख कारणों में तीव्र जनसंख्या वृद्धि, कुटीर उद्योगों का ह्रास, दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली, बढ़ते यंत्रीकरण, श्रमिकों की कम गतिशीलता, अविकसित प्राकृतिक संसाधनों, तकनीकी ज्ञान की कमी, कम बचत-निवेश दर, शरणार्थियों का आगमन, नौकरी-केंद्रित मानसिकता और पूंजी-गहन परियोजनाओं पर अधिक जोर शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी के कारणों को वर्गीकृत करके याद रखें (जैसे जनसांख्यिकीय, संरचनात्मक, शैक्षिक)। सुझाव देते समय इन कारणों को संबोधित करने वाले विशिष्ट उपायों पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 2. भारत में बेरोजगारी के प्रमुख कारण बताइए। बेरोजगारी को दूर करने के लिए उपयुक्त सुझाव दीजिए।
Answer: ज्यादा नहीं खुल पाए।
12. रोजगार-नीति व अंम-शक्ति नियोजन का अभाव योजनाओं में रोजगार प्रदान करने केसम्बन्ध में कोई व्यापक व प्रगतिशील नीति नहीं अपनाई गई । श्रम-शक्ति नियोजन की दिशा में कोई विशेष प्रगति नहीं हुई। इसके फलस्वरूप देश में बेरोजगारी बढ़ी है।
बेरोजगारी को दूर करने हेतु सुझाव
1. देश में श्रम-शक्ति की वृद्धि को रोकने के लिए जनसंख्या की वृद्धि पर प्रभावपूर्ण नियन्त्रण लगाया जाए।
2. जन-शक्ति के उचित उपयोग के लिए जन-शक्ति का नियोजन (Man-power planning) किया जाए।
3. योजना में वित्तीय लक्ष्यों की उपलब्धि के साथ रोजगार लक्ष्यों की पूर्ति पर ध्यान केन्द्रित होना चाहिए। अन्य शब्दों में, पंचवर्षीय योजनाओं को पूर्णरूपेण 'रोजगार-प्रधान' बनाया जाए।
4. कुटीर तथा लघु उद्योगों का विकास किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में तो ये उद्योग ही सम्भावित रोजगार के केन्द्रबिन्दु हैं।
5. कृषि के विकास तथा हरित क्रान्ति को स्थायी बनाने के प्रयास किए जाएँ।
6. ग्रामीण औद्योगीकरण का विस्तार किया जाए।
7. बचत तथा विनियोग दर में वृद्धि का हर सम्भव प्रयास किया जाए, क्योंकि अधिक पूँजी का विनियोग रोजगार के अधिक अवसर प्रदान करेगा।
8. आर्थिक विकास के लिए उपयुक्त वातावरण तैयार करने की दृष्टि से शिक्षा-प्रणाली तथा सामाजिक व्यवस्था में वांछित परिवर्तन किया जाए ।
9. रोजगार कार्यालयों (Employment Exchanges) द्वारा रोजगार सेवाओं का विस्तार किया जाए।
10. बेरोजगारी विशेषज्ञ समिति का सुझाव है कि रोजगार और जन-शक्ति के आयोजन के लिए एक राष्ट्रीय आयोग स्थापित किया जाए।
In simple words: बेरोजगारी भारत में एक जटिल समस्या है जिसके कई कारण हैं जैसे जनसंख्या वृद्धि, कुटीर उद्योगों का ह्रास, दोषपूर्ण शिक्षा-प्रणाली और यंत्रीकरण में वृद्धि। इसे दूर करने के लिए जनसंख्या नियंत्रण, कुटीर उद्योगों का विकास, कृषि में सुधार और रोजगारोन्मुखी योजनाएँ बनाना आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न भारत में बेरोजगारी के कारणों और निवारण उपायों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। उत्तर लिखते समय प्रमुख कारणों और उनके समाधानों को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करना चाहिए ताकि अधिकतम अंक प्राप्त हो सकें।
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