UP Board Solutions Class 11 Economics Chapter 7 Correlation

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Detailed Chapter 7 सह - संबंध UP Board Solutions for Class 11 Economics

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Class 11 Economics Chapter 7 सह - संबंध UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions For Class 11 Economics Statistics For Economics Chapter 7 Correlation (सहसंबंध)

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

Question 1. कद (फुटों में) तथा वजन (किलोग्राम में) के बीच सहसंबंध गुणांक की इकाई है
(क) किग्रा/फुट
(ख) प्रतिशत
(ग) अविद्यमान
उत्तर-
Answer: (ग) अविद्यमान
In simple words: सहसंबंध गुणांक एक इकाई रहित माप है, जिसका अर्थ है कि इसकी कोई भौतिक इकाई (जैसे किलोग्राम या फुट) नहीं होती। यह केवल दो चरों के बीच संबंध की शक्ति और दिशा को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: सहसंबंध गुणांक की प्रकृति एक शुद्ध संख्यात्मक मान होती है, जिसका आकलन करते समय इकाई का उल्लेख नहीं किया जाता, क्योंकि यह एक अनुपात है।

 

Question 2. सरल सहसंबंध गुणांक का परास निम्नलिखित होगा
(क) 0 से अनन्त तक
(ख) -1 से +1 तक
(ग) ऋणात्मक अनन्त (infinity) से धनात्मक अनन्त तक
उत्तर-
Answer: (ख) -1 से +1 तक
In simple words: सरल सहसंबंध गुणांक का मान हमेशा -1 और +1 के बीच होता है, जहाँ -1 पूर्ण नकारात्मक संबंध, +1 पूर्ण सकारात्मक संबंध और 0 कोई संबंध नहीं दर्शाता।

🎯 Exam Tip: यह परास (range) सहसंबंध गुणांक की एक मौलिक विशेषता है, जो इसकी व्याख्या और उपयोग को आसान बनाती है। इस सीमा के बाहर कोई भी मान गलत गणना का संकेत देगा।

 

Question 3. यदि r, धनात्मक है तो x और y के बीच का संबंध इस प्रकार का होता है
(क) जब y बढ़ता है तो x बढ़ता है
(ख) जब y घटता है तो x बढ़ता है।
(ग) जब y बढ़ता है तो x नहीं बदलता है।
उत्तर-
Answer: (क) जब y बढ़ता है तो x बढ़ता है।
In simple words: धनात्मक सहसंबंध का मतलब है कि जब एक चर बढ़ता है, तो दूसरा चर भी उसी दिशा में बढ़ता है, और जब एक चर घटता है, तो दूसरा भी घटता है।

🎯 Exam Tip: धनात्मक सहसंबंध सीधे अनुपातिक संबंध को दर्शाता है, जबकि ऋणात्मक सहसंबंध विपरीत अनुपातिक संबंध को दर्शाता है।

 

Question 4. यदि r = 0 तब चर x और y के बीच
(क) रेखीय संबंध होगी ।
(ख) रेखीय संबंध नहीं होगा
(ग) स्वतंत्र होगा ।
उत्तर-
Answer: (ग) स्वतंत्र होगा।
In simple words: जब सहसंबंध गुणांक r = 0 होता है, तो इसका मतलब है कि चरों के बीच कोई रेखीय संबंध नहीं है और वे एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं।

🎯 Exam Tip: शून्य सहसंबंध का अर्थ केवल रेखीय संबंध की अनुपस्थिति है; इसका मतलब यह नहीं है कि चरों के बीच कोई अरेखीय संबंध नहीं हो सकता। हालांकि, आमतौर पर इसे स्वतंत्रता का संकेत माना जाता है।

 

Question 5. निम्नलिखित तीन मापों में, कौन-सा माप किसी भी प्रकार के संबंध की माप कर सकता
(क) कार्ल पियर्सन सहसंबंध गुणांक
(ख) स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध
(ग) प्रकीर्ण आरेख
उत्तर-
Answer: (क) कार्ल पियर्सन सहसंबंध गुणांक
In simple words: कार्ल पियर्सन सहसंबंध गुणांक दो मात्रात्मक चरों के बीच रेखीय संबंध की शक्ति और दिशा को मापता है।

🎯 Exam Tip: यह गुणांक चरों के बीच के संबंध की मात्रात्मक दिशा और शक्ति को इंगित करने के लिए सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला माप है, खासकर जब डेटा सामान्य रूप से वितरित होता है।

 

Question 6. यदि परिशुद्ध रूप से मापित आँकड़े उपलब्ध हों, तो सरल सहसंबंध गुणांक
(क) कोटि सहसंबंध गुणांक से अधिक सही होता है।
(ख) कोटि सहसंबंध गुणांक से कम सही होता है।
(ग) कोटि सहसंबंध की ही भाँति सही होता है।
उत्तर-
Answer: (ग) कोटि सहसंबंध की ही भाँति सही होता है।
In simple words: जब आँकड़े सटीक रूप से मापे जाते हैं, तो सरल सहसंबंध गुणांक और कोटि सहसंबंध गुणांक दोनों ही समान रूप से विश्वसनीय होते हैं, हालांकि उनकी गणना विधि और उपयोग की शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं।

🎯 Exam Tip: दोनों गुणांक अलग-अलग स्थितियों में उपयोगी होते हैं- सरल सहसंबंध गुणांक मात्रात्मक डेटा के लिए, और कोटि सहसंबंध गुणांक क्रमिक डेटा या जब चरम मानों का प्रभाव कम करना हो।

 

Question 7. साहचर्य के माप के लिए को सहप्रसरण से अधिक प्राथमिकता क्यों दी जाती है?
Answer: सहसंबंध चरों के बीच संबंधों की गहनता एवं दिशा का अध्ययन एवं मापन करता है। सहसंबंध सह-प्रसरण का मापन करता है न कि कार्यकारण संबंध का। इसीलिए r को सह प्रसरण से अधिक प्राथमिकता दी जाती है।
In simple words: सहसंबंध को सहप्रसरण से अधिक प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि सहसंबंध चरों के बीच संबंध की गहनता (शक्ति) और दिशा दोनों को मापता है, जबकि सहप्रसरण केवल दिशा बताता है और इसकी इकाई भी चरों की इकाइयों पर निर्भर करती है। सहसंबंध गुणांक एक इकाई-मुक्त मान होता है, जिससे तुलना आसान हो जाती है।

🎯 Exam Tip: सहसंबंध गुणांक का मान -1 से +1 के बीच होता है, जिससे संबंध की शक्ति को समझना आसान होता है, जो सहप्रसरण से संभव नहीं है।

 

Question 8. क्या आँकड़ों के प्रकार के आधार परे r, -1 तथा + 1 के बाहर स्थित हो सकता है?
Answer: सहसंबंध गुणांक का मान -1 तथा +1 के बीच स्थित होता है -1
In simple words: नहीं, सहसंबंध गुणांक (r) का मान कभी भी -1 और +1 की सीमा से बाहर नहीं जा सकता, चाहे आँकड़ों का प्रकार कुछ भी हो। यह इसकी परिभाषित विशेषता है।

🎯 Exam Tip: यदि गणना के बाद सहसंबंध गुणांक का मान इस सीमा से बाहर आता है, तो इसका मतलब है कि गणना में कोई गलती हुई है।

 

Question 9. क्या सहसंबंध के द्वारा कार्यकारण संबंध की जानकारी मिलती है?
Answer: नहीं, सहसंबंध के द्वारा कार्यकारण संबंध की जानकारी नहीं मिलती है। सहसंबंध केवल चरों के बीच संबंधों की गहनता एवं दिशा का अध्ययन एवं मापन करता है। सहसंबंध सहप्रसरण का मापन करता है। न कि कार्यकारण संबंध का।
In simple words: सहसंबंध केवल यह बताता है कि दो चर एक साथ कैसे बदलते हैं (दिशा और शक्ति), लेकिन यह नहीं बताता कि एक चर दूसरे का कारण है। "सहसंबंध कार्यकारण का अर्थ नहीं है" यह एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है।

🎯 Exam Tip: कार्यकारण संबंध स्थापित करने के लिए अधिक उन्नत सांख्यिकीय तकनीकों और प्रायोगिक डिजाइन की आवश्यकता होती है।

 

Question 10. सरल सहसंबंध गुणांक की तुलना में कोटि सहसंबंध गुणांक कब अधिक परिशुद्ध होता है।
Answer: सरल सहसंबंध गुणांक तथा कोटि सहसंबंध गुणांक दोनों ही दो चरों के मध्य रेखीय संबंध मापते हैं। परन्तु जब चरों को सार्थक रूप से मापन नहीं किया जा सकता; जैसे-कीमत, आय, वजन आदि, तब कोटि सहसंबंध गुणांक साधारण सहसंबंध की तुलना में अधिक परिशुद्ध होता है।
In simple words: कोटि सहसंबंध गुणांक तब अधिक सटीक होता है जब चरों को सीधे मात्रात्मक रूप से मापना मुश्किल हो, जैसे कि सौंदर्य या ईमानदारी, और केवल उनकी कोटि (रैंक) दी जा सकती है। यह चरम मूल्यों के प्रभाव को कम करता है।

🎯 Exam Tip: कोटि सहसंबंध उन स्थितियों में उपयोगी होता है जहाँ गुणात्मक डेटा को कोटि में बदला जाता है, या जब डेटा में कुछ असामान्य अवलोकन (आउटलायर्स) होते हैं जो कार्ल पियर्सन के गुणांक को विकृत कर सकते हैं।

 

Question 11. क्या शून्य सहसंबंध का अर्थ स्वतंत्रता है?
Answer: यदि r = 0, तो दो चर असहसंबंधित होते हैं। यद्यपि इनके बीच कोई रेखीय संबंध नहीं होता। तथापि इनके बीच दूसरे प्रकार के सहसंबंध हो सकते हैं। अतः शून्य सहसंबंध का अर्थ सदैव स्वतंत्रता नहीं
In simple words: शून्य सहसंबंध का अर्थ है कि दो चरों के बीच कोई रेखीय संबंध नहीं है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वे पूरी तरह से स्वतंत्र हैं; उनके बीच अरेखीय संबंध हो सकता है।

🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि "स्वतंत्रता" एक मजबूत अवधारणा है, जिसमें किसी भी प्रकार का संबंध शामिल नहीं होता, जबकि "शून्य सहसंबंध" केवल रेखीय संबंध की अनुपस्थिति को दर्शाता है।

 

Question 12. क्या सरल सहसंबंध गुणांक किसी भी प्रकार के संबंध को माप सकता है?
Answer: हाँ, सरल सहसंबंध गुणांक किसी भी प्रकार के संबंध को माप सकता है।
In simple words: सरल सहसंबंध गुणांक मुख्यतः रेखीय संबंधों को मापता है, लेकिन इसकी गणना किसी भी प्रकार के डेटा पर की जा सकती है ताकि चरों के बीच के संबंध की दिशा और शक्ति का प्रारंभिक अनुमान लगाया जा सके।

🎯 Exam Tip: हालांकि यह किसी भी प्रकार के संबंध को माप सकता है, यह रेखीय संबंधों के लिए सबसे उपयुक्त है। अरेखीय संबंधों के लिए अन्य विशिष्ट सांख्यिकीय विधियाँ अधिक प्रभावी होती हैं।

 

Question 13. एक सप्ताह तक अपने स्थानीय बाजार से 5 प्रकार की सब्जियों की कीमतें प्रतिदिन एकत्र करें। उनका सहसंबंध गुणांक परिकलित कीजिए। इसके परिणाम की व्याख्या कीजिए ।
Answer: विद्यार्थी स्वयं करें ।
In simple words: यह एक परियोजना-आधारित प्रश्न है जहाँ छात्रों को वास्तविक डेटा एकत्र करना है, सहसंबंध गुणांक की गणना करनी है, और फिर समझना है कि विभिन्न सब्जियों की कीमतों के बीच क्या संबंध है।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्न प्रयोगात्मक कौशल और डेटा विश्लेषण की व्यावहारिक समझ का परीक्षण करते हैं। सटीक डेटा संग्रह और सूत्र का सही उपयोग महत्वपूर्ण है।

 

Question 14. अपनी कक्षा के सहपाठियों के कद मापिए। उनसे उनके बैंच पर बैठे सहपाठी का कद पूछिए । इन दो चरों का सहसंबंध गुणांक परिकलित कीजिए और परिणाम का निर्वचन कीजिए।
Answer: विद्यार्थी स्वयं करें ।
In simple words: यह भी एक व्यावहारिक प्रश्न है जिसमें छात्रों को अपने सहपाठियों के कद का डेटा एकत्र करके सहसंबंध गुणांक की गणना करनी है और यह देखना है कि क्या उनके बीच कोई संबंध मौजूद है।

🎯 Exam Tip: छात्रों को यह ध्यान रखना चाहिए कि क्या कद के डेटा में कोई विशिष्ट पैटर्न है, जैसे कि पुरुष और महिला छात्रों का मिश्रण, जो सहसंबंध को प्रभावित कर सकता है।

 

Question 15. कुछ ऐसे चरों की सूची बनाएँ जिनका परिशुद्ध मापन कठिन हो?
Answer: ऐसे चर जिनका परिशुद्ध मापन कठिन है
• तापमान एवं आइसक्रीम की बिक्री ।
• तापमान एवं समुद्र की तरफ जाने वाले पर्यटक ।
In simple words: ऐसे चर जिनका सटीक संख्यात्मक माप मुश्किल होता है, वे आमतौर पर गुणात्मक प्रकृति के होते हैं या कई बाहरी कारकों से प्रभावित होते हैं, जिससे उनका परिमाणीकरण जटिल हो जाता है।

🎯 Exam Tip: इन चरों का मापन अक्सर कोटि सहसंबंध या अन्य गैर-पैरामीट्रिक विधियों का उपयोग करके किया जाता है, जो मात्रात्मक माप की कठिनाइयों को दूर करते हैं।

 

Question 16. r के विभिन्न मापों +1, -1 तथा 0 की व्याख्या कीजिए ।
Answer:
• r का धनात्मक मान दर्शाता है कि दोनों चर एक ही दिशा में गतिमान होते हैं।
• r का ऋणात्मक मान दो चरों के मध्य प्रतिलोम संबंध दर्शाता है।
• यदि r = 0, तो दो चर असहसंबंधित होते हैं।
• यदि r = ± 1 या r = -1 हैं तो सहसंबंध पूर्ण है व इनके बीच सुनिश्चित सहसंबंध है।
In simple words: r = +1 का अर्थ है पूर्ण धनात्मक सहसंबंध (चर एक ही दिशा में पूरी तरह से चलते हैं); r = -1 का अर्थ है पूर्ण ऋणात्मक सहसंबंध (चर विपरीत दिशाओं में पूरी तरह से चलते हैं); और r = 0 का अर्थ है कि चरों के बीच कोई रेखीय संबंध नहीं है।

🎯 Exam Tip: यह तीनों मान सहसंबंध गुणांक की व्याख्या के लिए आधारभूत हैं, जो संबंध की दिशा और उसकी शक्ति को स्पष्ट करते हैं।

 

Question 17. पियर्सन सहसंबंध गुणांक से कोटि सहसंबंध गुणांक क्यों भिन्न होता है?
Answer: सामान्यतः कार्ल पियर्सन सहसंबंध गुणांक एवं कोटि सहसंबंध गुणांक की विशेषताएँ एकसमान होती हैं। दोनों ही मामलों में सहसंबंध गुणांक का मान ± 1 के मध्य होता है। परंतु कोटि सहसंबंध के परिणाम पियर्सन सहसंबंध के परिणाम की भाँति शुद्ध नहीं होता। सामान्यतः \(r \le r\) अर्थात् \(r_k, r\) की तुलना में बराबर अथवा कम होता है। इसका कारण यह है कि कोटि सहसंबंध में चर मूल्यों के बजाय कोटियों (ranks) का प्रयोग किया जाता है। पियर्सन सहसंबंध गुणांक चरों के चरम मूल्यों से भी प्रभावित होता है। जबकि कोटि सहसंबंध में चरम मूल्यों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
In simple words: पियर्सन सहसंबंध गुणांक वास्तविक मूल्यों पर आधारित होता है और रेखीय संबंधों के लिए उपयुक्त है, जबकि कोटि सहसंबंध गुणांक चरों की कोटियों (रैंक्स) पर आधारित होता है और गैर-सामान्य डेटा या चरम मूल्यों वाले डेटा के लिए अधिक robust (सुदृढ़) होता है।

🎯 Exam Tip: पियर्सन गुणांक अंतराल या अनुपात डेटा के लिए आदर्श है, जबकि कोटि सहसंबंध गुणांक (स्पीयरमैन) क्रमिक डेटा या जब डेटा में आउटलायर्स हों, तब बेहतर होता है।

 

Question 18. पिताओं (x) और उनके पुत्रों (y) के कदों का माप नीचे इंचों में दिया गया है। इन दोनों के बीच सहसंबंध गुणांक को परिकलित कीजिए-
x: 65 66 57 67 68 69 70 72
y: 67 56 65 68 72 72 69 71
हल-

पिताओं की ऊँचाई xपुत्रों की ऊँचाई yxyx2y2
6567435542254489
6656369643563136
5765370532494225
6768455644894624
6872489646245184
6972496847615184
7069483049004761
7271511251845041
Σx = 534Σy = 540Σxy = 36118Σx² = 35788Σy² = 36644
सूत्र \(r = \frac{\sum xy - \frac{(\sum x)(\sum y)}{N}}{\sqrt{\sum x^2 - \frac{(\sum x)^2}{N}} \sqrt{\sum y^2 - \frac{(\sum y)^2}{N}}}\) में मान रखने पर, \[r = \frac{36118 - \frac{(534)(540)}{8}}{\sqrt{35788 - \frac{(534)^2}{8}} \sqrt{36644 - \frac{(540)^2}{8}}}\]
\[ = \frac{36118 - \frac{288360}{8}}{\sqrt{35788 - \frac{285156}{8}} \sqrt{36644 - \frac{291600}{8}}}\]
\[ = \frac{36118 - 36045}{\sqrt{35788 - 35644.5} \sqrt{36644 - 36450}}\]
\[ = \frac{73}{\sqrt{143.5} \sqrt{194}}\]
\[ \implies \frac{73}{11.98 \times 13.93}\]
\[ \implies \frac{73}{166.88}\]
\[ = 0.44\]
Answer: पिताओं और पुत्रों के कदों के बीच सहसंबंध गुणांक 0.44 है।
In simple words: पिताओं और पुत्रों के कद के बीच 0.44 का सहसंबंध गुणांक एक मध्यम धनात्मक संबंध दर्शाता है, जिसका अर्थ है कि पिता का कद बढ़ने पर पुत्र का कद भी सामान्यतः बढ़ता है, लेकिन यह संबंध बहुत मजबूत नहीं है।

🎯 Exam Tip: गणना करते समय, Σx, Σy, Σxy, Σx², और Σy² के मानों को सही ढंग से सारणीबद्ध करना और सूत्र में मानों को सावधानीपूर्वक प्रतिस्थापित करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 19. x और y के बीच सहसंबंध गुणांक को परिकलित कीजिए और उनके संबंध पर टिप्पणी कीजिए-
x: -3 -2 -1 1 2 3
y: 9 4 1 1 4 9
हल-

xyx2y2xy
-39981-27
-24416-8
-1111-1
11111
244168
3998127
Σx = 0Σy = 28Σx² = 28Σy² = 196Σxy = 0
\[r = \frac{\sum xy - \frac{(\sum x)(\sum y)}{N}}{\sqrt{\sum x^2 - \frac{(\sum x)^2}{N}} \sqrt{\sum y^2 - \frac{(\sum y)^2}{N}}}\]
\[ = \frac{0 - \frac{0 \times 28}{6}}{\sqrt{28 - \frac{(0)^2}{6}} \sqrt{196 - \frac{(28)^2}{6}}}\]
\[ = \frac{0 - 0}{\sqrt{28 - 0} \sqrt{196 - \frac{784}{6}}}\]
\[ = \frac{0}{\sqrt{28} \sqrt{196 - 130.67}}\]
\[ = \frac{0}{\sqrt{28} \sqrt{65.33}}\]
\[ = 0\]
Answer: r = 0 (अतः दोनों चरों के बीच कोई सहसंबंध नहीं है।)
In simple words: x और y के बीच सहसंबंध गुणांक 0 है, जो दर्शाता है कि इन चरों के बीच कोई रेखीय संबंध नहीं है।

🎯 Exam Tip: यह उदाहरण दिखाता है कि कैसे कुछ चरों के बीच कोई सीधा रेखीय संबंध नहीं हो सकता, भले ही उनके मान एक साथ बदलते दिखें (यहाँ y, x का वर्ग है, जो अरेखीय संबंध है)।

 

Question 20. x और y के बीच सहसंबंध गुणांक को परिकलित कीजिए और उनके संबंध पर टिप्पणी कीजिए-
x: 1 3 4 5 7 8
y: 2 6 8 10 14 16
हल-

xyx2y2xy
12142
3693618
48166432
5102510050
7144919698
81664256128
Σx = 28Σy = 56Σx² = 164Σy² = 656Σxy = 328
\[r = \frac{\sum xy - \frac{\sum x \cdot \sum y}{N}}{\sqrt{\sum x^2 - \frac{(\sum x)^2}{N}} \sqrt{\sum y^2 - \frac{(\sum y)^2}{N}}}\]
\[ = \frac{328 - \frac{(28 \times 56)}{6}}{\sqrt{164 - \frac{(28)^2}{6}} \sqrt{656 - \frac{(56)^2}{6}}}\]
\[ = \frac{328 - \frac{1568}{6}}{\sqrt{164 - \frac{784}{6}} \sqrt{656 - \frac{3136}{6}}}\]
\[ = \frac{328 - 261.33}{\sqrt{164 - 130.67} \sqrt{656 - 522.67}}\]
\[ = \frac{66.67}{\sqrt{33.33} \sqrt{133.33}}\]
\[ = \frac{66.67}{5.77 \times 11.55}\]
\[ = \frac{66.67}{66.64}\]
\[ = 1\]
Answer: r = 1; अतः x एवं y में पूर्ण धनात्मक संबंध है।
In simple words: x और y के बीच सहसंबंध गुणांक 1 है, जिसका अर्थ है कि इन दोनों चरों के बीच पूर्ण धनात्मक संबंध है। जब एक चर बढ़ता है, तो दूसरा चर उसी अनुपात में और उसी दिशा में बढ़ता है।

🎯 Exam Tip: जब सहसंबंध गुणांक 1 आता है, तो यह दर्शाता है कि डेटा बिंदु एक सीधी रेखा पर पूरी तरह से संरेखित हैं, जो अर्थशास्त्र में दुर्लभ है लेकिन यह दर्शाता है कि चर एक-दूसरे से पूरी तरह से प्रभावित होते हैं।

 

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

Question 1. दो चर मूल्यों के मध्य परिवर्तन का अनुपात समान हो तो उनमें सहसंबंध पाया जाता है
(क) सरल
(ख) रेखीय
(ग) अरेखीय
(घ) धनात्मक
उत्तर-
Answer: (ख) रेखीय
In simple words: यदि दो चरों के बीच परिवर्तन का अनुपात स्थिर रहता है, तो उनके बीच का संबंध रेखीय होता है, जिसका अर्थ है कि डेटा बिंदुओं को एक सीधी रेखा पर दर्शाया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: रेखीय संबंध सहसंबंध विश्लेषण का आधार है, जहाँ चर एक निरंतर दर पर एक साथ बदलते हैं।

 

Question 2. सहसंबंध गुणांक का मान - के बीच होता है।
(क) +2 तथा -2
(ख) +1 तथा -1
(ग) +3 तथा -3
(घ) +0 तथा -1
उत्तर-
Answer: (ख) +1 तथा -1
In simple words: सहसंबंध गुणांक का मान हमेशा -1 और +1 के बीच ही रहता है, जो संबंध की शक्ति और दिशा को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: यह सीमा सहसंबंध गुणांक की एक मौलिक संपत्ति है और किसी भी गणना में इस सीमा का उल्लंघन त्रुटि का संकेत देता है।

 

Question 3. सहसंबंध गुणांक निकालने का सरलतम सूत्र है
(क) \(r = \frac{\sum dx dy}{\sqrt{\sum d^2x \times \sum d^2y}}\)
(ख) \(U = \frac{X - A}{h}\)
(ग) \(Q = \frac{\sum fd^2}{\sqrt{N}}\)
(घ) \(M = I_1 \frac{i}{f} (m-c)\)
उत्तर-
Answer: (क) \(r = \frac{\sum dx dy}{\sqrt{\sum d^2x \times \sum d^2y}}\)
In simple words: कार्ल पियर्सन का सहसंबंध गुणांक निकालने के लिए प्रत्यक्ष विधि का सरलतम सूत्र दिया गया है, जहाँ `dx` और `dy` माध्य से विचलन हैं।

🎯 Exam Tip: यह सूत्र वास्तविक माध्य से विचलनों का उपयोग करता है और गणना में सापेक्षिक सरलता प्रदान करता है, खासकर जब माध्य पूर्णांक में हों।

 

Question 4. “यदि यह सत्य होता कि अधिकांश उदाहरणों में दो चर (two variables) सदैव एक ही दिशा में या विपरीत दिशा में घटने-बढ़ने की प्रवृत्ति रखते हैं तो हमें यह मानते हैं कि उनमें एक संबंध पाया जाता है।” कथन है-
(क) पियर्सन का ।
(ख) सेलिगमैन का
(ग) प्रो० किंग का
(घ) डॉ० बाउले को
उत्तर-
Answer: (ग) प्रो० किंग का
In simple words: प्रो० किंग के अनुसार, यदि दो चर अधिकतर एक ही या विपरीत दिशा में एक साथ बदलते हैं, तो यह उनके बीच संबंध (correlation) का संकेत है।

🎯 Exam Tip: अर्थशास्त्र में, यह कथन चरों के बीच संबंधों की पहचान करने के लिए एक मूलभूत अवलोकन प्रदान करता है, जिससे आगे के विश्लेषण का मार्ग प्रशस्त होता है।

 

Question 5. सहसंबंध के प्रकार हैं-
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच
उत्तर-
Answer: (ख) तीन
In simple words: सहसंबंध को मुख्यतः तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है: धनात्मक/ऋणात्मक, सरल/आंशिक/बहुगुणी और रेखीय/अरेखीय।

🎯 Exam Tip: यह वर्गीकरण सहसंबंध के विभिन्न पहलुओं को समझने में मदद करता है और यह निर्धारित करता है कि किसी विशेष स्थिति में कौन सी विश्लेषण विधि का उपयोग किया जाना चाहिए।

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

Question 1. सहसम्बन्ध की परिभाषा दीजिए।
Answer: दो श्रेणियों अथवा समूहों के बीच कार्यकारण सम्बन्ध को सहसम्बन्ध कहते हैं।
In simple words: सहसंबंध दो या दो से अधिक चरों के बीच के उस संबंध को दर्शाता है जहाँ एक चर में परिवर्तन दूसरे चर में संगत परिवर्तन लाता है।

🎯 Exam Tip: यह परिभाषा चरों के बीच मात्रात्मक संबंध की दिशा और शक्ति को समझने के लिए आधार बनाती है।

 

Question 2. ‘सहसम्बन्ध तकनीक के प्रतिपादक कौन हैं?
Answer: सर्वप्रथम फ्रांस के खगोलशास्त्री ब्रावे ने इसके मूल तत्त्वों का प्रतिपादन किया था। तत्पश्चात् इस सिद्धान्त को आधुनिक रूप फ्रांसिस गाल्टन तथा कार्ल पियर्सन ने दिया।
In simple words: सहसंबंध तकनीक की नींव ब्रावे ने रखी थी, लेकिन इसे आधुनिक रूप फ्रांसिस गाल्टन और कार्ल पियर्सन ने विकसित किया।

🎯 Exam Tip: कार्ल पियर्सन का नाम सहसंबंध गुणांक से सबसे अधिक जुड़ा है, जो आज भी व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

 

Question 3. ऋणात्मक व धनात्मक सहसम्बन्ध में अन्तर बताइए ।
Answer: धनात्मक सहसम्बन्ध में दो पदमालाओं में परिवर्तन एकसमान दिशाई होता है जबकि ऋणात्मक सहसम्बन्ध में यह परिवर्तन विपरीत दिशाई होता है।
In simple words: धनात्मक सहसंबंध में चर एक ही दिशा में बदलते हैं (जैसे दोनों बढ़ते या घटते हैं), जबकि ऋणात्मक सहसंबंध में चर विपरीत दिशा में बदलते हैं (जैसे एक बढ़ता है तो दूसरा घटता है)।

🎯 Exam Tip: सहसंबंध गुणांक का धनात्मक या ऋणात्मक चिह्न संबंध की दिशा को तुरंत इंगित करता है, जो डेटा की व्याख्या में महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. पूर्ण सहेसम्बन्ध की स्थिति कब होती है?
Answer: जब दो चर मूल्यों में परिवर्तन एक ही दिशा में और एक ही अनुपात में हो तो इनमें पूर्ण सहसम्बन्ध होगा ।
In simple words: पूर्ण सहसंबंध तब होता है जब दो चर पूरी तरह से एक ही दिशा और अनुपात में एक साथ बदलते हैं, जिसका अर्थ है कि वे एक-दूसरे पर पूरी तरह से निर्भर करते हैं।

🎯 Exam Tip: पूर्ण सहसंबंध का मान +1 (पूर्ण धनात्मक) या -1 (पूर्ण ऋणात्मक) होता है।

 

Question 5. सहसम्बन्ध की उच्च सीमा क्या है?
Answer: ± 0.75 से ± 1 के मध्य ।
In simple words: सहसंबंध की उच्च सीमा आमतौर पर +0.75 से +1 या -0.75 से -1 के बीच मानी जाती है, जो एक बहुत मजबूत संबंध को इंगित करती है।

🎯 Exam Tip: सहसंबंध गुणांक का मान 0.75 से अधिक होने पर उसे आमतौर पर उच्च या मजबूत सहसंबंध माना जाता है, जबकि 0.25 से 0.75 के बीच मध्यम और 0.25 से कम निम्न सहसंबंध माना जाता है।

 

Question 6. बिन्दुरेखीय रीति द्वारा सहसम्बन्ध ज्ञात करने का प्रमुख दोष क्या है?
Answer: बिन्दुरेखीय विधि द्वारा सहसम्बन्ध की केवल दिशा को ही ज्ञात किया जा सकता है उसकी मात्रा को नहीं।
In simple words: बिन्दुरेखीय रीति (scatter diagram) का मुख्य दोष यह है कि यह केवल सहसंबंध की दिशा (धनात्मक या ऋणात्मक) का अनुमान दे सकती है, लेकिन संबंध की सटीक मात्रा या शक्ति को संख्यात्मक रूप से नहीं माप सकती।

🎯 Exam Tip: यह विधि त्वरित अवलोकन के लिए उपयोगी है, लेकिन सटीक विश्लेषण के लिए कार्ल पियर्सन या स्पीयरमैन जैसे गुणांकों की आवश्यकता होती है।

 

Question 7. कार्ल पियर्सन के सहसम्बन्ध गुणांक का प्रमुख गुण क्या है?
Answer: इस विधि के द्वारा केवल दिशा व मात्रा का अनुमान ही नहीं बल्कि उसका परिमाणात्मक माप भी प्राप्त होता है।
In simple words: कार्ल पियर्सन सहसंबंध गुणांक का प्रमुख गुण यह है कि यह दो चरों के बीच संबंध की दिशा के साथ-साथ उसकी सटीक संख्यात्मक शक्ति (मात्रा) भी प्रदान करता है।

🎯 Exam Tip: यह गुणांक सांख्यिकी में सबसे व्यापक रूप से स्वीकृत और उपयोग किया जाने वाला सहसंबंध माप है, जो इसकी गणना और व्याख्या में सटीकता के कारण है।

 

Question 8. कार्ल पियर्सन द्वारा प्रतिपादित सहसम्बन्ध गुणांक एक आदर्श माप क्यों है?
Answer: यह माप समान्तर माध्य और प्रमाप विचलन पर आधारित है। इसलिए यह एक आदर्श माप है।
In simple words: कार्ल पियर्सन सहसंबंध गुणांक को आदर्श माप इसलिए माना जाता है क्योंकि यह केंद्रीय प्रवृत्ति (समान्तर माध्य) और फैलाव (प्रमाप विचलन) के सभी डेटा बिंदुओं को ध्यान में रखता है, जिससे एक मजबूत और विश्वसनीय माप प्राप्त होता है।

🎯 Exam Tip: इसकी गणना में सभी अवलोकनों का उपयोग करने की क्षमता इसे अन्य, कम परिष्कृत उपायों की तुलना में अधिक सटीक बनाती है।

 

Question 9. कार्ल पियर्सन के सहसम्बन्ध गुणांक की दो मान्यताएँ बताइए ।
Answer:
• दो घटनाओं के मध्य परस्पर कारण और परिणाम का सम्बन्ध पाया जाता है।
• दोनों समंक श्रेणियों में रेखीय सहसम्बन्ध पाया जाता है।
In simple words: कार्ल पियर्सन सहसंबंध गुणांक की दो मुख्य मान्यताएं हैं कि चरों के बीच एक कारण-और-प्रभाव संबंध मौजूद है, और उनके बीच का संबंध रेखीय प्रकृति का होना चाहिए।

🎯 Exam Tip: इन मान्यताओं का उल्लंघन करने से पियर्सन गुणांक की व्याख्या गलत हो सकती है, खासकर जब चरों के बीच संबंध अरेखीय हो।

 

Question 10. स्पियरमैन की कोटि अन्तर विधि का प्रयोग किन परिस्थितियों में उपयुक्त है?
Answer: यह विधि उन परिस्थितियों में उपयुक्त है जहाँ तथ्यों का प्रत्यक्ष संख्यात्मक माप सम्भव न हो तथा उन्हें एक निश्चित क्रम के अनुसार रखा जा सके ।
In simple words: स्पीयरमैन की कोटि अंतर विधि तब सबसे उपयुक्त होती है जब डेटा को सीधे मापना मुश्किल हो लेकिन उसे कोटि (रैंक) दी जा सकती हो, या जब डेटा सामान्य रूप से वितरित न हो।

🎯 Exam Tip: यह विधि गुणात्मक चरों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जैसे सौंदर्य प्रतियोगिताओं में मूल्यांकन, जहाँ संख्यात्मक मान के बजाय कोटि महत्वपूर्ण होती है।

 

Question 11. स्पियरमैन कोटि अन्तर विधि का सूत्र बताइए ।
Answer:
\[ r_k = 1 - \frac{6 \sum D^2}{N (N^2-1)} \]
In simple words: स्पीयरमैन कोटि अंतर विधि का सूत्र \(r_k = 1 - \frac{6 \sum D^2}{N (N^2-1)}\) है, जहाँ \(D\) दो चरों की कोटियों के बीच का अंतर है और \(N\) अवलोकनों की संख्या है।

🎯 Exam Tip: इस सूत्र का उपयोग तब किया जाता है जब कोटियाँ दी गई हों या आसानी से प्राप्त की जा सकती हों, और यह चरम मानों के प्रति कम संवेदनशील होता है।

 

Question 12. यदि दो मूल्य बराबर आकार के हों और उन्हें बराबर क्रम प्रदान किए जाएँ तो संशोधित सूत्र क्या होगा?
Answer:
\[ r_k = 1 - \frac{6[\sum D^2 + \frac{1}{12}(m^3 - m)]}{N (N^2-1)} \]
In simple words: जब डेटा में समान कोटियाँ (tied ranks) होती हैं, तो स्पीयरमैन कोटि सहसंबंध गुणांक के सूत्र में एक संशोधन किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गणना सटीक रहे, जहाँ 'm' समान कोटि वाले मानों की संख्या है।

🎯 Exam Tip: यह संशोधित सूत्र वास्तविक सहसंबंध को अधिक सटीक रूप से दर्शाता है जब डेटा सेट में समान मान होते हैं, जिससे परिणाम की विश्वसनीयता बढ़ती है।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

Question 1. सहसम्बन्ध का महत्त्व बताइए ।
Answer: सहसम्बन्ध का महत्त्व सांख्यिकी में सहसम्बन्ध का सिद्धान्त अत्यधिक उपयोगी है। इस सिद्धान्त का विकास फ्रांसिस गाल्टन व कार्ल पियर्सन ने प्राणिशास्त्र तथा जनन-विद्या की अनेक समस्याओं के आधार पर किया है। सहसम्वन्ध के द्वारा ही अनेक वैज्ञानिक, सामाजिक तथा आर्थिक क्षेत्रों में दो-या-दो से अधिक घटनाओं के आपसी सम्बन्धों को स्पष्टीकरण मिलता है। इसकी सहायता से इस बात का आभास होता है कि विभिन्न समस्याओं के कारण तथा परिणाम में कितना और किस प्रकार का सम्बन्ध है। प्रतीपगमन (Regression), विचरण अनुपात (Ratio of Variation), आन्तरगणन (Interpolation), बाह्यगणन (Extrapolation) आदि अनेक सांख्यिकीय धारणाएँ सहसम्बन्ध सिद्धान्त पर आधारित हैं। सांख्यिकी के अतिरिक्त; मनोविज्ञान, शिक्षा, कृषि, अर्थशास्त्र आदि के क्षेत्रों में भी सहसम्बन्ध का विशेष महत्त्व है। अर्थशास्त्र में सहसम्बन्ध के उपयोग के बारे में नीसवेंजर लिखते हैं-“सहसम्बन्ध विश्लेषण आर्थिक व्यवहार को समझने में योग देता है, विशेष महत्त्वपूर्ण चरों, जिन पर अन्य चर निर्भर करते हैं, को खोजने में सहायता देता है, अर्थशास्त्री को उन सुझावों को स्पष्ट करता है जिनसे गड़बड़ी फैलती है तथा उसे उन उपायों का सुझाव देता है जिनके द्वारा स्थिरता लाने वाली शक्तियाँ प्रभावित हो सकती हैं।”
In simple words: सहसंबंध सांख्यिकी, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान और अन्य क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें दो या दो से अधिक चरों के बीच संबंधों की दिशा और शक्ति को समझने में मदद करता है, जो नीति निर्माण, भविष्यवाणी और समस्याओं के समाधान के लिए आधार प्रदान करता है।

🎯 Exam Tip: सहसंबंध का महत्व इस तथ्य में निहित है कि यह चरों के बीच के जटिल संबंधों को सरल बनाता है, जिससे शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को सूचित निर्णय लेने में सहायता मिलती है।

 

Question 2. कार्ल पियर्सन के सहसम्बन्ध गुणांक की विशेषताएँ बताइए ।
Answer:
1. यह रीति गणितीय दृष्टि से उपयुक्त है क्योंकि यह प्रमाप विचलन एवं समान्तर माध्य पर आधारित है।
2. यह रीति बीजगणितीय दृष्टि से उत्तम है क्योंकि यह श्रेणी क सभी मूल्यों व पदों पर आधारित होती
3. इस रीति से सहसम्बन्ध की दिशा, मात्रा व सीमाओं का ज्ञान सुविधापूर्वक हो जाता है।
4. यह सदैव ± 1 के मध्य रहता है।
In simple words: कार्ल पियर्सन सहसंबंध गुणांक एक गणितीय रूप से सुदृढ़ माप है जो सभी डेटा बिंदुओं पर आधारित होता है, संबंध की दिशा और शक्ति दोनों को दर्शाता है, और इसका मान हमेशा -1 से +1 के बीच रहता है, जिससे इसकी व्याख्या आसान हो जाती है।

🎯 Exam Tip: इसकी व्यापक स्वीकृति और उपयोगिता इसकी गणितीय शुद्धता और सभी डेटा बिंदुओं को शामिल करने की क्षमता पर आधारित है, जिससे यह रेखीय संबंधों के लिए एक विश्वसनीय उपाय बन जाता है।

 

Question 3. कार्ल पियर्सन के सहसम्बन्ध गुणांक के लघु रीति द्वारा गणन क्रिया के विभिन्न सूत्र बताइए। इनमें कौन-सा सूत्र सरल है?
Answer: लघु रीति द्वारा सहसम्बन्ध गुणांक के निम्नलिखित चार सूत्र हैं.-
(i) \(r = \frac{\sum dx dy - N (\bar{X} - A_x) (\bar{Y} - A_y)}{\sigma_x \sigma_y}\)
(ii) \(r = \frac{\sum dx dy - N (\frac{\sum dx}{N}) (\frac{\sum dy}{N})}{\sqrt{\sum d^2x - \frac{(\sum dx)^2}{N}} \sqrt{\sum d^2y - \frac{(\sum dy)^2}{N}}}\)
(iii) \(r = \frac{\sum dx dy}{\sqrt{\sum d^2x - \frac{(\sum dx)^2}{N}} \sqrt{\sum d^2y - \frac{(\sum dy)^2}{N}}}\)
(iv) \(r = \frac{N \times \sum dx dy - (\sum dx \times \sum dy)}{\sqrt{[N \times \sum d^2x - (\sum dx)^2] [N \times \sum d^2y - (\sum dy)^2]}}\)
उपर्युक्त में चतुर्थ सूत्र सरलतम है।
इसलिए प्रश्नों के हल में इसी का प्रयोग किया गया है।
In simple words: कार्ल पियर्सन सहसंबंध गुणांक के कई लघु सूत्र हैं, जिनमें से चौथा सूत्र \(r = \frac{N \times \sum dx dy - (\sum dx \times \sum dy)}{\sqrt{[N \times \sum d^2x - (\sum dx)^2] [N \times \sum d^2y - (\sum dy)^2]}}\) सबसे सरल और व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है क्योंकि इसमें प्रत्यक्ष रूप से गणना की जा सकती है।

🎯 Exam Tip: चतुर्थ सूत्र विशेष रूप से प्रभावी है क्योंकि यह कल्पित माध्य से विचलनों का उपयोग करता है, जिससे बड़ी संख्याओं के साथ गणना करते समय आसानी होती है और त्रुटियों की संभावना कम हो जाती है।

 

Question 4. सहसम्बन्ध गुणांक के प्रमुख गुण बताइए ।
Answer: सहसम्बन्ध गुणांक के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं
1. r की कोई इकाई नहीं होती, यह एक संख्या मात्र है।
2. r का ऋणात्मक मान विपरीत दिशाई सम्बन्ध बतलाता है। उदाहरणार्थ जब कीमत बढ़ती है तो माँग घट जाती है।
3. यदि r धनात्मक है तो यह बताता है कि दोनों चर एक ही दिशा में गतिमान हुए हैं। उदाहरणार्थ सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि कृषि-उत्पादन में वृद्धि करती है।
4. सहसम्बन्ध गुणांक को मान +1 तथा -1 के बीच होता है।
5. r का मान उद्गम परिवर्तन या पैमाने के परिवर्तन से प्रभावित नहीं होता है।
In simple words: सहसंबंध गुणांक एक इकाई-मुक्त संख्या है, जो -1 से +1 के बीच होती है, संबंध की दिशा (धनात्मक या ऋणात्मक) को दर्शाती है, और यह उद्गम या पैमाने में परिवर्तन से प्रभावित नहीं होती।

🎯 Exam Tip: ये गुण सहसंबंध गुणांक को सांख्यिकीय विश्लेषण में एक शक्तिशाली और विश्वसनीय उपकरण बनाते हैं, जिससे विभिन्न डेटा सेटों के बीच संबंधों की तुलना करना संभव हो जाता है।

 

Question 5. निम्नलिखित आँकड़ों से अल्पकालीन उच्चावचनों का सहसम्बन्ध गुणांक निकालिए ।
वर्ष : 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10
पूर्ति सूचकांक : 90 95 94 96 101 100 99 107 103 108
मूल्य सूचकांक : 115 110 111 100 98 102 106 98 102 97
हल-
नोट- सर्वप्रथम 3 वर्षीय चल माध्य निकाले जाएँगे और उनसे विचलन लिए जाएँगे ।

वर्षपूर्ति (X)मूल्य (Y)dxdy
XM.A.dxd²xYM.A.dyd²y
190115
29593+24110112-24-4
39495-11111107+416-4
49697-11100103-39+3
510199+2498100-24-4
610010000102102000
799102-39106102+416-12
8107103+41698102-416-16
9103106-3910299+39-9
1010897
Σd²x = 44Σd²y = 74Σdx dy = -46
\[r = \frac{\sum dxdy}{\sqrt{\sum d^2x \times \sum d^2y}}\]
\[ = \frac{-46}{\sqrt{44 \times 74}}\]
\[ = \frac{-46}{\sqrt{3256}}\]
\[ = \frac{-46}{57.06}\]
\[ = -0.807\]
Answer: अल्पकालीन उच्चावचनों का सहसंबंध गुणांक -0.807 है।
In simple words: -0.807 का सहसंबंध गुणांक यह दर्शाता है कि पूर्ति सूचकांक और मूल्य सूचकांक के बीच एक मजबूत ऋणात्मक संबंध है, जिसका अर्थ है कि जैसे-जैसे पूर्ति सूचकांक बढ़ता है, मूल्य सूचकांक कम होने की प्रवृत्ति रखता है।

🎯 Exam Tip: नकारात्मक सहसंबंध इस बात का संकेत है कि चर विपरीत दिशाओं में चलते हैं, और 0.807 का उच्च निरपेक्ष मान संबंध की शक्ति को दर्शाता है।

 

Question 6. सहसम्बन्ध गुणांक के परिकलन की पद-विचलन विधि समझाइए । निम्नलिखित उदाहरण में पद विचलन विधि द्वारा सहसम्बन्ध गुणांक का परिकलन कीजिए।
Answer: पद विचलन विधि-इस विधि का प्रयोग तब किया जाता है जब चरों के मान ऊँचे होते हैं। इसके अन्तर्गत x एवं y चरों को निम्नांकित प्रकार से परिवर्तित किया जाता है-
\[U = \frac{X - A}{h}; V = \frac{Y - B}{k}\]
यहाँ, A व B = कल्पित माध्य
h व k = समापवर्तक
अतः \(r_{UV} = r_{XY}\)
उदाहरण-

कीमत सूचकांक (X) :120150190220230
धन की पूर्ति (Rs. करोड़) (Y) :18002000250027003000
यहाँ, A = 100, h = 10, B = 1700, एवं k = 100
r का परिकलन निम्नांकित प्रकार से किया जाएगा -
U \(= \frac{X-100}{10}\)V \(= \frac{Y-1700}{100}\)U2V2UV
21412
5325915
98816472
1210144100120
1313169169169
ΣU = 41ΣV = 35ΣU² = 423ΣV² = 343ΣUV = 378
इन मानों को सूत्र में प्रतिस्थापित करने पर,
\[r = \frac{\sum UV - \frac{(\sum U)(\sum V)}{N}}{\sqrt{\sum U^2 - \frac{(\sum U)^2}{N}} \sqrt{\sum V^2 - \frac{(\sum V)^2}{N}}}\]
\[ = \frac{378 - \frac{41 \times 35}{5}}{\sqrt{423 - \frac{(41)^2}{5}} \sqrt{343 - \frac{(35)^2}{5}}}\]
\[ = \frac{378 - 287}{\sqrt{423 - 336.2} \sqrt{343 - 245}}\]
\[ = \frac{91}{\sqrt{86.8 \times 98}}\]
\[ = \frac{91}{\sqrt{8506.4}}\]
\[ = \frac{91}{92.23}\]
\[ = 0.99\]
In simple words: पद विचलन विधि उच्च मानों वाले डेटा के लिए सहसंबंध गुणांक की गणना को सरल बनाती है, जहाँ चरों को कल्पित माध्य और एक सामान्य भाजक (h, k) का उपयोग करके 'U' और 'V' में परिवर्तित किया जाता है, जिससे गणना आसान हो जाती है। परिणाम 0.99 का अर्थ है कीमत सूचकांक और धन की पूर्ति के बीच एक बहुत मजबूत धनात्मक संबंध।

🎯 Exam Tip: पद विचलन विधि विशेष रूप से बड़े डेटा सेट के साथ काम करते समय गणना को कम जटिल बनाने में मदद करती है, जिससे समय की बचत होती है और त्रुटियों की संभावना कम हो जाती है।

 

Question 7. एक सौन्दर्य प्रतियोगिता में 10 प्रतियोगियों को तीन निर्णायकों के द्वारा निम्न क्रम प्राप्त हुए हैं। यह निर्धारण करने के लिए
कोटि सहसम्बन्ध गुणांक का परिकलन कीजिए कि कौन-सा
युगल सन्दरता सम्बन्धी सामान्य रुचियों के अधिक निकट है।

प्रथम निर्णायक :16510324978
द्वितीयक निर्णायक :35847102169
तृतीय निर्णायक :64981231057
हल- सहसम्बन्ध परिकलित करने के लिए निम्नांकित संयोग बनाए जाएँगे
• प्रथम एवं द्वितीयक निर्णायक (R₁ वे R₂)
• द्वितीय व तृतीय निर्णायक (R₂ व R₃)
• प्रथम वे तृतीय निर्णायक (R₁ व R₃)
R₁R₂R₃R₁-R₂ = DR₂-R₃ = DR₁-R₃ = D
136-24-39-525
654111124
589-39-11-416
1048636-41624
371-41663624
2102-86486400
42324-1111
9110864-981-11
765111124
897-112411
N = 10ΣD² = 200ΣD² = 214ΣD² = 60
\[ r_k = 1 - \frac{6 \sum D^2}{N(N^2 - 1)} \] (R₁-R₂) \(r_k = 1 - \frac{6 \times 200}{10 (100-1)}\) = \(1 - 1.212\) = - 0.212
(R₂-R₃) \(r_k = 1 - \frac{6 \times 214}{10 (100-1)}\) = \(1 - 1.297\) = - 0.297
(R₁-R₃) \(r_k = 1 - \frac{6 \times 60}{10 (100-1)}\) = \(1 - 0.364\) = + 0.636
Answer: प्रथम और तृतीय निर्णायकों के निर्णयों में अधिक समानता है।
In simple words: कोटि सहसंबंध गुणांक की गणना से पता चलता है कि प्रथम और तृतीय निर्णायकों के बीच 0.636 का धनात्मक सहसंबंध है, जो दर्शाता है कि उनकी रुचियाँ सबसे अधिक समान हैं, जबकि अन्य दो युग्मों में ऋणात्मक और कमजोर संबंध हैं।

🎯 Exam Tip: उच्चतम धनात्मक सहसंबंध गुणांक उस युग्म को इंगित करता है जिनकी राय सबसे अधिक सुसंगत है, जबकि ऋणात्मक सहसंबंध विपरीत राय और शून्य सहसंबंध कोई स्पष्ट संबंध नहीं दिखाता है।

 

Question 8. कोटि अन्तर सहसम्बन्ध गुणांक के गुण व दोष बताइए ।
Answer:
गुण-
• यह समझने में अपेक्षाकृत सरल है।
• यह विधि गुणात्मक चरों में सहसम्बन्ध को ज्ञात करने में श्रेष्ठ है।
• केवल कोटि दिए होने पर भी सहसम्बन्ध की गणना की जा सकती है।
दोष-
• समूह आवृत्ति आवंटन श्रृंखलाओं में इस विधि का प्रयोग नहीं किया जा सकता।
• 20 से अधिक मदों वाली श्रृंखला में इस विधि का प्रयोग करना अत्यधिक कठिन है।
In simple words: कोटि अंतर सहसंबंध गुणांक को समझना और गणना करना आसान है, खासकर गुणात्मक डेटा के लिए, और यह केवल कोटियों पर आधारित होता है। हालांकि, यह बड़े डेटा सेट के लिए अनुपयुक्त है और समूह आवृत्ति वितरण पर लागू नहीं किया जा सकता।

🎯 Exam Tip: इसके गुणों के कारण, यह विधि छोटे डेटा सेट या गुणात्मक चरों के लिए बहुत उपयोगी है, लेकिन बड़े या जटिल डेटा सेट के लिए कार्ल पियर्सन का गुणांक अधिक उपयुक्त होता है।

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. सहसंबंध का अर्थ एवं परिभाषा दीजिए। यह कितने प्रकार का होता है?
Answer: सहसंबंध का अर्थ एवं परिभाषा वास्तविक जीवन में दो या दो से अधिक श्रृंखलाओं में परस्पर संबंध पाया जाता है। उदाहरण के लिए कीमत के बढ़ने पर माँग में कमी होती है। मुद्रा की पूर्ति बढ़ने पर कीमत स्तर में वृद्धि होती है। रोजगार में वृद्धि होने पर उत्पादन में वृद्धि होती है। ऐसी परिस्थितियों में दो या दो से अधिक सांख्यिकी श्रृंखलाओं का एक साथ अध्ययन करना आवश्यक हो जाता है। इस अध्ययन का उद्देश्य विभिन्न सांख्यिकीय शृंखलाओं में पारस्परिक संबंधों की जानकारी प्राप्त करना होता है। सहसंबंध इन पारस्परिक संबंधों की गणना करने की सांख्यिकीय विधि है।

जब दो चर राशियों में से एक चर राशि के बढ़ने से दूसरी चर राशि (variable) में वृद्धि हो या कमी हो एवं एक चर राशि की कमी से दूसरी चर राशि में वृद्धि हो या कमी हो तो उन दोनों चर राशियों में सहसंबंध पाया जाता है। सहसंबंध की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं-

1. प्रो० किंग के अनुसार- “यदि यह सत्य होता है कि अधिकांश उदाहरणों में दो चर (two variables) सदैव एक ही दिशा में या विपरीत दिशा में घटने-बढ़ने की प्रवृत्ति रखते हैं तो हम यह मानते हैं कि उनमें सहसंबंध पाया जाता है।”
2. टटिल के अनुसार- “दो या दो से अधिक चरों के सहविचरणों के विश्लेषण को सहसंबंध कहते है।”
3. प्रो० क्रॉक्सटन व काउडेन के अनुसार- “जब संबंधों की संख्यात्मक प्रकृति होती है तो उसे ज्ञात करने, मापने एवं एक सूत्र में स्पष्ट करने के उचित सांख्यिकीय यंत्र को सहसंबंध कहते हैं।”
4. प्रो० कॉनर के अनुसार- “जब दो या दो से अधिक परिमाण सहानुभूति में परिवर्तित होते हैं। जिससे एक के परिवर्तन के फलस्वरूप दूसरे में भी परिवर्तन हो जाता है तो वे राशियाँ 'सहसंबंधित' कहलाती हैं।”
5. प्रो० बोडिंगटन के अनुसार- “जब कभी दो या अधिक समूहों अथवा वर्गों अथवा समंकमालाओं में निश्चित संबंध विद्यमान हो तो उनमें सहसंबंध का होना कहा जाता है।”

सहसंबंध के प्रकार

1. धनात्मक अथवा ऋणात्मक सहसंबंध - यदि एक चर मूल्य घटने पर दूसरा चर मूल्य भी घटे अथवा एक चर मूल्य के बढ़ने पर दूसरा चर मूल्य भी बढ़े तो ऐसा सहसंबंध धनात्मक होता है। मूल्य एवं पूर्ति में इसी प्रकार का सहसंबंध पाया जाता है। ऋणात्मक सहसंबंध उस दशा में होता है जब एक चर मूल्य के घटने पर दूसरा चर मूल्य बढ़ता हो तथा एक चर मूल्य के बढ़ने पर दूसरे चर मूल्य में कमी होती हो। मूल्य एवं माँग में इसी प्रकार का - सहसंबंध पाया जाता है।
2. सरल, आंशिक अथवा बहुगुणी सहसंबंध- दो चर मूल्यों के सहसंबंध को सरल सहसंबंध कहते हैं। आंशिक सहसंबंध में दो मूल्यों में एक अन्य स्वतंत्र चर मूल्य का समावेश करके सहसंबंध ज्ञात किया जाता है। बहुगुणी सहसंबंध में तीन या अधिक चर मूल्यों के मध्य सहसंबंध का अध्ययन किया जाता है।
3. रेखीय तथा अरेखीय सहसंबंध- यदि दो चर मूल्यों के मध्य परिवर्तन का अनुपात समान होता है तो उनमें रेखीय सहसंबंध होगा। इन चर मूल्यों को यदि बिन्दुरेखीय पत्र पर अंकित किया जाए तो बिन्दु एक सीधी रेखा के रूप में होंगे। अरेखीय सहसंबंध जिसे वक्ररेखीय सहसंबंध' भी कहते हैं, में एक चर मूल्य के परिवर्तनों की मात्रा व दूसरे चर मूल्य के परिवर्तनों की मात्रा एक अनुपात में नहीं होगी। इन चर मूल्यों को बिन्दु रेखा पर अंकित करने पर वक्र बन जाता है।
In simple words: Correlation measures the strength and direction of a relationship between two or more variables. It can be positive (variables move in the same direction), negative (variables move in opposite directions), or zero (no linear relationship). Its types include positive/negative, simple/partial/multiple, and linear/non-linear.

🎯 Exam Tip: Understanding the types of correlation and their definitions is crucial for conceptual clarity and can be a common objective question.

 

Question 2. सहसंबंध का क्या अर्थ है? सहसंबंध के परिमाण (degrees) कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: नोट- सहसंबंध के अर्थ के लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 1 का उत्तर देखिए । सहसंबंध का परिमाण सहसंबंध निम्नलिखित परिमाण में हो सकता है-

1. पूर्ण सहसंबंध-
• जब दो श्रेणियों में परिवर्तन एक ही दिशा में तथा समान अनुपात में होते हैं। तो उनमें पूर्ण धनात्मक सहसंबंध पाया जाता है। ऐसी दशा में सहसंबंध गुणांक (r) + 1 होता है।
• जब दो श्रेणियों में परिवर्तन विपरीत दिशा में किंतु समान अनुपात में होते हैं तो उनमें पूर्ण ऋणात्मक सहसंबंध पाया जाता है। ऐसी दशा में सहसंबंध गुणांक (r) - 1 होता है। सामाजिक विज्ञान में पूर्ण सहसंबंध नहीं पाया जाता ।
2. सहसंबंध का अभाव- जब दो चरों अर्थात् श्रेणियों में तनिक भी परस्पर आश्रितता नहीं पायी जाती अर्थात् वे एक श्रेणी के मूल्यों को प्रभावित नहीं करते तो दोनों चरों अथवा श्रेणियों में सहसंबंध नहीं होता अर्थात् उनमें सहसंबंध का अभाव पाया जाता है। ऐसी दशा में सहसंबंध गुणांक (r) शून्य (0) होता है।
3. सीमित सहसंबंध- जब दोनों श्रेणियों में परिवर्तन समान रूप में नहीं होते, तो उनमें सहसंबंध सीमित मात्रा में पाया जाता है। इस प्रकार का सहसंबंध धनात्मक व ऋणात्मक दोनों प्रकार का हो संकता है। सामान्यतः यह 1 के मध्य होता है। परिमाण की दृष्टि से सीमित सहसंबंध तीन प्रकार के हो सकते हैं-
• उच्च स्तरीय सहसंबंध- यदि सहसंबंध गुणांक + 0.75 से लेकर + 1 के बीच होता है तो इसमें उच्च मात्रा का सहसंबंध माना जाता है।
• मध्यम स्तरीय सहसंबंध- जब सहसंबंध गुणांक + 0.25 से लेकर + 0.75 तक रहता है तो इसमें मध्यम मात्रा का सहसंबंध पाया जाता है।
• निम्न स्तरीय सहसंबंध- जब सहसंबंध गुणांक शून्य (0) से अधिक परंतु + 0.25 से कम रहता है तो इसमें निम्न स्तरीय सहसंबंध पाया जाता है।

तालिका

परिमाणधनात्मकऋणात्मक
पूर्ण+1-1
उच्च+0.75 और +1 के बीच-0.75 और -1 के बीच
मध्यम+0.25 और +0.75 के बीच-0.25 और -0.75 के बीच
निम्न0 और +0.25 के बीच0 और -0.25 के बीच
अभाव00

In simple words: The degree of correlation indicates the strength of the relationship. It ranges from -1 (perfect negative) to +1 (perfect positive), with 0 indicating no linear correlation. Different ranges like 0.75-1, 0.25-0.75, and 0-0.25 define high, moderate, and low correlations, respectively.

🎯 Exam Tip: Memorize the correlation coefficient ranges for perfect, high, medium, and low correlation, as this is frequently tested in multiple-choice questions.

 

Question 3. सहसंबंध का अर्थ एवं महत्त्व बताइए। सहसंबंध को ज्ञात करने की कौन-कौन-सी विधियाँ हैं?
Answer: नोट- सहसंबंध के अर्थ के लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 1 का उत्तर देखिए।
सहसंबंध का महत्त्व सांख्यिकीय में सहसंबंध का सिद्धांत अत्यंत उपयोगी है। इस सिद्धांत का विकास फ्रांसिस गाल्टन व कार्ल पियर्सन ने प्राणिशास्त्र तथा जनन-विद्या की अनेक समस्याओं के आधार पर किया था। अर्थशास्त्र में सहसंबंध के महत्त्व के बारे में नीसकेंजर लिखते हैं-“सहसंबंध विश्लेषण आर्थिक व्यवहार, को समझने में योग देता है, विशेष महत्त्वपूर्ण चरों जिन पर अन्य चर निर्भर करते हैं, को खोजने में सहायता देता है, अर्थशास्त्री को उन सुझावों को स्पष्ट करता है, जिससे गड़बड़ी फैलती है तथा उसे उन उपायों का सुझाव देता है जिनके द्वारा स्थिरता लाने वाली शक्तियाँ प्रभावित हो सकती हैं। सांख्यिकीय विधि के रूप में सहसंबंध के महत्त्व को निम्नलिखित प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है-

1. कारण एवं परिणाम में संबंध स्पष्ट करना- सहसंबंध वैज्ञानिक, सामाजिक तथा आर्थिक क्षेत्रों में दो या दो से अधिक घटनाओं के आपसी संबंधों को स्पष्ट करता है। यह स्पष्ट करता है कि विभिन्न समस्याओं के कारण और परिणाम में कितना और किस प्रकार का संबंध है।
2. नियमों तथा धारणाओं का निर्माण- सहसंबंध के अध्ययन से चरों के पारस्परिक संबंध की दिशा और मात्रा का ज्ञान होता है। जब यह विदित हुआ कि कीमत के बढ़ने पर माँग घट जाती है। और कीमत के घटने पर माँग बढ़ जाती है तब माँग के नियम का निर्माण हुआ ।
3. नीति निर्माण में सहायक- सहसंबंध नीति निर्माण में सहायक होता है। कर की दर और कर संग्रह में ऋणात्मक संबंध होने पर सरकार कर की दरों को कम करती है। इसी प्रकार मुद्रा की पूर्ति एवं मुद्रा स्फीति की दर में धनात्मक सहसंबंध होने पर सरकार मुद्रा की पूर्ति को नियंत्रित करती है।
4. व्यापारिक निर्णय लेने में सहायक- संहसंबंध विश्लेषण व्यापारिक निर्णय लेने में सहायक होता है। इसका कारण यह है कि एक चर में परिवर्तन की प्रवृत्ति से दूसरे चरों में होने वाली प्रवृत्ति का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है और इसी आधार पर व्यापारिक निर्णय लिए जाते हैं। माना जाता है कि सहसंबंध विश्लेषण पर आधारित अनुमान अधिक विश्वसनीय और निश्चित होते हैं। टिप्पेट के शब्दों में- “सहसंबंध हमारी भविष्यवाणी की अनिश्चितता को कम करता है।”

सहसंबंध ज्ञात करने की रीतियाँ सहसंबंध ज्ञात करने की प्रमुख रीतियाँ निम्नलिखित हैं-

(अ) बिन्दुरेखीय रीतियाँ।
• साधारण बिन्दुरेखीय रीति
• विक्षेप या बिन्दु चित्र रीति

(ब) गणितीय रीतियाँ
• कार्ल पियर्सन का सहसंबंध गुणांक
• स्पियरमैन की श्रेणी अंतर विधि ।
In simple words: Correlation is vital in statistics for understanding the relationship between variables, aiding in scientific, social, and economic analysis. It helps in clarifying cause and effect, forming rules, assisting policy-making, and guiding business decisions. Key methods to calculate correlation include graphical techniques (scatter diagrams) and mathematical techniques (Karl Pearson's coefficient and Spearman's rank correlation).

🎯 Exam Tip: This question requires a comprehensive understanding of correlation's significance and the different methods to calculate it. Focus on explaining each point clearly.

 

Question 4. सहसंबंध ज्ञात करने की साधारण बिन्दुरेखीय रीति की गणना प्रक्रिया को उदाहरण की सहायता से समझाइए ।
Answer: साधारण बिन्दुरेखीय रीति इस रीति के अनुसार, ग्राफ पेपर पर दोनों चरों को बिन्दुओं के रूप में प्रकट किया जाता है। भुजाक्ष (X-axis) पर समय, स्थान आदि को लिया जाता है तथा कोटि-अक्ष (Y-axis) पर श्रेणी के मूल्यों को अंकित किया जाता है। प्राप्त बिन्दुओं को मिला देने से वक्र प्राप्त हो जाता है।

1. यदि दोनों रेखाएँ एक ही दिशा के साथ-साथ चलती हैं तो धनात्मक सहसंबंध होगा ।
2. यदि दोनों रेखाएँ एक ही अनुपात में बढ़ती हैं तो उच्च स्तरीय धनात्मक सहसंबंध होगा।
3. यदि दोनों रेखाएँ दो विपरीत दिशाओं में उच्चावचन करती हैं तो ऋणात्मक सहसंबंध होगा।
4. यदि दोनों रेखाएँ समान गति से विपरीत दिशा में उच्चावचन करती हैं तो उच्च स्तरीय ऋणात्मक सहसंबंध होगा ।
5. यदि रेखाओं में इस प्रकार की किसी प्रवृत्ति का आभास नहीं मिलता तो दोनों श्रेणियों में कोई संबंध नहीं होगा।
उदाहरण - निम्नलिखित आँकड़ों से एक सहसंबंध रेखाचित्र बनाइए ।

वर्ष :
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
मजदूरों की संख्या (हजारों में): 384 385 362 348 384 395 403 400 385 415 418
प्रयुक्त गाँठें (लाखों में):
21
24
20
22
26
26
29
28
27
31
22


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख वर्षवार मजदूरों की संख्या (हजारों में) और प्रयुक्त गांठों (लाखों में) के बीच संबंध को दर्शाता है। इसमें दो अलग-अलग रेखाएँ हैं - एक मजदूरों की संख्या के लिए और दूसरी प्रयुक्त गांठों के लिए - जो एक ही समय-सीमा पर उनके परिवर्तनों को दिखाती हैं। रेखाओं की दिशा और पैटर्न को देखकर इन दोनों चरों के बीच धनात्मक, ऋणात्मक या कोई संबंध नहीं होने का अनुमान लगाया जा सकता है।
In simple words: The scatter diagram method involves plotting data points of two variables on a graph paper to visually identify the direction and strength of their relationship. If the points generally move in the same direction, it's a positive correlation; if opposite, it's negative; and if scattered without a clear pattern, there's no correlation.

🎯 Exam Tip: When explaining the graphical method, always include an example and a description of how to interpret the plotted points for different types of correlation.

 

Question 5. कार्ल पियर्सन के सहसंबंध गुणांक की गणना विधि उपयुक्त उदाहरणों की सहायता से समझाइए ।
Answer: कार्ल पियर्सन का सहसंबंध गुणांक यह सहसंबंध ज्ञात करने की सर्वोत्तम गणितीय रीति है। इस विधि द्वारा दिशा व मात्रा का अनुमान ही नहीं बल्कि उसका परिमाणात्मक माप भी प्राप्त होता है। यह गणितीय माध्य और प्रमाप विचलन पर आधारित है, इसलिए गणितीय दृष्टि से इसमें पूर्ण शुद्धता होती है। मुख्य विशेषताएँ।

• यह रीति गणितीय दृष्टि से उपयुक्त है क्योंकि यह प्रमाप विचलन एवं समान्तर माध्य पर आधारित
• यह रीति बीजगणितीय दृष्टि से उत्तम है क्योंकि यह श्रेणी के सभी मूल्यों व पदों पर आधारित होती
• इस रीति से सहसंबंध की दिशा, मात्रा व सीमाओं का ज्ञान सुविधापूर्वक हो जाता है।
• यह सदैव +1 के मध्य रहता है।

कार्ल पियर्सन के सहसंबंध गुणांक का परिकलन

(I) व्यक्तिगत श्रेणी में प्रत्यक्ष रीति- व्यक्तिगत श्रेणी में प्रत्यक्ष रीति द्वारा सहसंबंध गुणांक निकालने की किंया इस प्रकार है-

(i) सर्वप्रथम दोनों श्रेणियों का समान्तर माध्य ज्ञात किया जाता है। \( (\bar{X} \text{ व } \bar{Y}) \)
(ii) दोनों श्रेणियों में समान्तर माध्य से व्यक्तिगत मूल्यों के विचलन ज्ञात किए जाते हैं। (dx व dy)
(iii) dx व dy की गुणा करके उन गुणाओं का योग निकाला जाता है। \( (\Sigma dxdy) \)
(iv) दोनों श्रेणियों के विचलनों का वर्ग करके उनका योग ज्ञात किया जाता है। \( (\Sigma d^2 x \text{ व } \Sigma d^2 y) \)
(v) दोनों श्रेणियों के अलग-अलग प्रमाप विचलन निकाले जाते हैं। \( (\sigma_x \text{ व } \sigma_y) \)
(vi) अंत में निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है-
\[ r = \frac{\Sigma dx dy}{\sqrt{\Sigma d^2 x \times \Sigma d^2 y}} \] नोट - उपर्युक्त सूत्र सहसंबंध गुणांक निकालने का सरलतम सूत्र है; अतः इस अध्याय में इसी, सूत्र का प्रयोग किया गया है।
उदाहरण 1. निम्नलिखित आँकड़ों से एक सहसंबंध रेखाचित्र बनाइए।

ऊँचाई (इंचों में) :
57
59
62
63
64
65
55
58
57
भार (पौंड्स में) :
113
117
126
126
130
129
111
116
112

हल-

Xdx = X-60d²xYdy = Y - 120d²ydxdy
57-39113-74921
59-11117-393
62+24126+63612
63+39126+63618
64+416130+1010040
65+525129+98145
55-525111-98145
58-24116-4168
57-39112-86424
Σdx = 0Σd²x = 102Σdy = 0Σd²y = 472Σdx dy = 216

\[ r = \frac{\Sigma dx dy}{\sqrt{\Sigma d^2 x \times \Sigma d^2 y}} \]
\[ = \frac{216}{\sqrt{102 \times 472}} \]
\[ = \frac{216}{\sqrt{48144}} \]
\[ = \frac{216}{219.4} \]
\[ = + 0.985 \] (II) लघु रीति - गणन प्रक्रिया निम्नलिखित प्रकार से है-

(i) दोनों श्रेणियों में उपयुक्त व सुविधाजनक मूल्यों को कल्पित माध्य मान लिया जाता है। \( (A_x, A_y) \)
(ii) कल्पित माध्यों से मूल्यों के विचलन ज्ञात किए जाते हैं। \( (dx, dy) \)
(iii) विचलनों के योग प्राप्त किए जाते हैं। \( (\Sigma dx, \Sigma dy) \)
(iv) विचलनों की गुणा करके उनका योग निकाला जाता है। \( (\Sigma dxdy) \)
(v) विचलनों के वर्ग करके उन विचलनों के जोड़ \( \Sigma d^2 x \) और \( \Sigma d^2 y \) ज्ञात किए जाते हैं।
(vi) अंत में निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है-
\[ r = \frac{N \times \Sigma dx dy - (\Sigma dx \times \Sigma dy)}{\sqrt{[N \times \Sigma d^2 x - (\Sigma dx)^2] [N \times \Sigma d^2 y - (\Sigma dy)^2]}} \] उदाहरण 2. निम्नलिखित समंकों में, कार्ल पियर्सन सहसंबंध गुणांक ज्ञात कीजिए-

मजदूरी :
100
101
102
102
100
99
97
98
96
95
रहन-सहन का स्तर :
98
99
99
97
95
92
95
94
90
91

हल-

Xdx = X-100d²xYdy = Y-95d²ydxdy
1000098+390
101+1199+416+4
102+2499+416+8
102+2497+24+4
1000095000
99-1192-39+3
97-3995000
98-2494-11+2
96-41690-525+ 20
95-52591-416+ 20
N = 10Σdx = -10Σd²x = 64N = 10Σdy = 0Σd²y = 96Σdx dy = + 61

\[ r = \frac{N \times \Sigma dx dy - (\Sigma dx \times \Sigma dy)}{\sqrt{[N \times \Sigma d^2 x - (\Sigma dx)^2] [N \times \Sigma d^2 y - (\Sigma dy)^2]}} \]
\[ = \frac{10 \times 61 - (-10 \times 0)}{\sqrt{[10 \times 64 - (-10)^2] [10 \times 96 - (0)^2]}} \]
\[ = \frac{610}{\sqrt{[640 - 100] [960 - 0]}} \]
\[ = \frac{610}{\sqrt{(540 \times 960)}} \]
\[ = \frac{610}{\sqrt{518400}} \]
\[ = \frac{610}{720} \]
\[ = 0.85 \]
In simple words: Karl Pearson's coefficient of correlation is a precise mathematical method to quantify the linear relationship between two variables, indicating both direction and strength. It relies on the mean and standard deviation of the data. The direct method involves calculating deviations from the actual mean, while the short-cut method uses assumed means for simplified calculations.

🎯 Exam Tip: Be meticulous with calculations, especially when dealing with deviations and squares. Practice both direct and short-cut methods to ensure accuracy and speed.

 

Question 6. स्पीयरमैन के कोटि सहसम्बन्ध गुणांक की गणना विधि को उदाहरणों की सहायता से समझाइए ।
Answer: स्पीयरमैन का कोटि सहसम्बन्ध गुणांक गणना की दृष्टि से यह एक सरलतम विधि है क्योंकि यह श्रेणी के मूल्यों के क्रम (ranks) पर आधारित है। यह रीति ऐसी परिस्थितियों के लिए अधिक उपयुक्त है जहाँ तथ्यों का प्रत्यक्ष संख्यात्मक माप सम्भव न हो तथा उन्हें केवल एक निश्चित कोटि क्रम के अनुसार रखा जा सके। इस रीति द्वारा गणन प्रक्रिया निम्नलिखित प्रकार से है।

• प्रत्येक श्रेणी में दिए गए व्यक्तिगत मूल्यों के सामने उनके क्रम लिखे जाते हैं। सबसे बड़ी संख्या को क्रम 1, उससे छोटी संख्या को क्रम 2, उससे छोटी संख्या को क्रम 3............. आदि ।
• दोनों श्रेणियों के क्रमों का अन्तर (D) निकाला जाता है।
• इस अन्तर का वर्ग (D²) करके उसका योग ([latex]\sum { { D }^{ 2 } }[/latex]) ज्ञात किया जाता है।
• अन्त में निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है-
\[ r_k = 1 - \frac{6 \Sigma D^2}{N^3 - N} \] उदाहरण 1- निम्नलिखित आँकड़ों से श्रेणी अन्तर रीति द्वारा सहसम्बन्ध गुणांक ज्ञात कीजिए-

पूर्ति (X) :
160
164
172
182
166
170
178
192
186
कीमत (Y) :
292
280
260
234
266
254
230
190
200

हल-

XRanks XYRanks YRanks Difference D
16092921+864
16482802+636
17252604+11
18232346-39
16672663+416
17062545+11
17842307-39
19211909-864
18622008-636
N = 9N = 9ΣD = 0ΣD² = 236

\[ r_k = 1 - \frac{6 \Sigma D^2}{N^3 - N} \]
\[ = 1 - \frac{6 \times 236}{9^3 - 9} \]
\[ = 1 - \frac{1416}{729 - 9} \]
\[ = 1 - \frac{1416}{720} \]
\[ = 1 - 1.967 \]
\[ = -0.967 \] समान क्रम के लिए संशोधन - यदि श्रेणी में दो-या-दो से अधिक मूल्य समान आकार के होते हैं तो उनका क्रम उनके मूल्य के आधार पर तय कर लिया जाता है। समान क्रमों में रखने के कारण सहसम्बन्ध गुणांक में जो अन्तर पड़ेगा, उसके संशोधन के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है-
\[ r_k = 1 - \frac{6[\Sigma D^2 + \frac{1}{12}(m^3 - m)]}{N(N^2 - 1)} \] यहाँ, m का अर्थ उन पद मूल्यों की संख्या से है जिनके क्रम समान हैं। यदि एक ही मूल्य तीन बार आया हो तो m = 3 होगा।
उदाहरण 2- निम्नलिखित समंकों से श्रेणी अन्तर रीति द्वारा सह-सम्बन्ध ज्ञात कीजिए।

X:
48
33
40
9
16
16
65
24
16
57
Y:
13
13
24
6
15
4
20
9
6
19

हल-

XRanks XYRanks YD
483135.5-2.56.25
335135.5-0.50.25
404241+3.09.00
91068.5+1.52.25
168154+4.016.00
168410-2.04.00
651202-1.01.00
24697-1.01.00
16868.5-0.50.25
572193-1.01.00
N = 10N = 10ΣD² = 41.00

\[ r_k = 1 - \frac{6[\Sigma D^2 + \frac{1}{12}(m^3 - m) + ........]}{N(N^2 - 1)} \]
For X variable, value '16' appears 3 times, so \( m=3 \). The correction factor is \( \frac{1}{12}(3^3 - 3) = \frac{1}{12}(27-3) = \frac{24}{12} = 2 \).
For Y variable, value '13' appears 2 times, so \( m=2 \). The correction factor is \( \frac{1}{12}(2^3 - 2) = \frac{1}{12}(8-2) = \frac{6}{12} = 0.5 \).
For Y variable, value '6' appears 2 times, so \( m=2 \). The correction factor is \( \frac{1}{12}(2^3 - 2) = \frac{1}{12}(8-2) = \frac{6}{12} = 0.5 \).
\[ r_k = 1 - \frac{6[41 + 2 + 0.5 + 0.5]}{10 (10^2 - 1)} \]
\[ = 1 - \frac{6[41+3]}{10 (100 - 1)} \]
\[ = 1 - \frac{6 \times 44}{10 \times 99} \]
\[ = 1 - \frac{264}{990} \]
\[ = 1 - 0.266 \]
\[ = 0.734 \]
In simple words: Spearman's Rank Correlation Coefficient is a non-parametric measure used to assess the relationship between ranked variables. It's simpler than Pearson's and is ideal when data cannot be measured numerically but can be ordered. The method involves ranking each variable, finding the difference in ranks, squaring these differences, summing them up, and applying the formula. A modified formula is used when tied ranks occur.

🎯 Exam Tip: Remember to correctly assign ranks, especially when dealing with tied ranks, where the average rank is assigned. The formula for tied ranks is a common point of error.

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