UP Board Solutions Class 11 Chemistry Chapter 6 Thermodynamics

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Detailed Chapter 6 ऊष्मप्रवैगिकी UP Board Solutions for Class 11 Chemistry

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Class 11 Chemistry Chapter 6 ऊष्मप्रवैगिकी UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions For Class 11 Chemistry Chapter 6 Thermodynamics (ऊष्मागतिकी)

पाठ के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

सही उत्तर चुनिए-

Question 1. ऊष्मागतिकी अवस्था फलन एक राशि है
(i) जो ऊष्मा परिवर्तन के लिए प्रयुक्त होती है।
(ii) जिसका मान पथ पर निर्भर नहीं करता है।
(iii) जो दाब-आयतन कार्य की गणना करने में प्रयुक्त होती है।
(iv) जिसका मान केवल ताप पर निर्भर करता है।
Answer:
(ii) जिसका मान पथ पर निर्भर नहीं करता है।
In simple words: ऊष्मागतिकी अवस्था फलन वह गुण है जिसका मान निकाय की प्रारम्भिक व अन्तिम अवस्था पर निर्भर करता है, न कि उस पथ पर जिससे होकर परिवर्तन हुआ है।

🎯 Exam Tip: अवस्था फलनों की परिभाषा और उनके उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अक्सर सीधे पूछे जाते हैं।

 

Question 2. एक प्रक्रम के रुद्रोष्म परिस्थितियों में होने के लिए-
(i) \( \Delta T = 0 \)
(ii) \( \Delta p = 0 \)
(iii) \( q = 0 \)
(iv) \( w = 0 \)
Answer:
(iii) \( q = 0 \)
In simple words: रुद्रोष्म प्रक्रम में निकाय और परिवेश के बीच कोई ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता है, जिसका अर्थ है कि ऊष्मा परिवर्तन \( q \) शून्य होता है।

🎯 Exam Tip: रुद्रोष्म, समतापी, समदाबी और समआयतनिक प्रक्रमों की मुख्य विशेषताओं को उनके विशिष्ट प्रतीकों के साथ याद रखें।

 

Question 3. सभी तत्वों की एन्चैल्पी उनकी सन्दर्भ-अवस्था में होती है-
(i) इकाई
(ii) शून्य
(iii) \( <0 \)
(iv) सभी तत्त्वों के लिए भिन्न होती है।
Answer:
(ii) शून्य ।
In simple words: किसी तत्व की मानक सन्दर्भ-अवस्था में एन्थैल्पी को शून्य माना जाता है, जो गणनाओं के लिए एक आधार बिंदु प्रदान करता है।

🎯 Exam Tip: मानक एन्थैल्पी परिवर्तनों की गणना करते समय इस नियम को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. मेथेन के दहन के लिए \( \Delta U^\circ \) का मान -X kJ mol\(^{-1}\) है। इसके लिए \( \Delta H^\circ \) का मान होगा
(i) \( = \Delta U^\circ \)
(ii) \( >\Delta U^\circ \)
(iii) \( <\Delta U^\circ \)
(iv) \( = 0 \)
Answer:
(iii) \( <\Delta U^\circ \)
In simple words: मेथेन के दहन में गैसीय मोलों की संख्या घटती है, जिससे \( \Delta n_g RT \) का मान ऋणात्मक होता है। चूंकि \( \Delta H^\circ = \Delta U^\circ + \Delta n_g RT \), इसलिए \( \Delta H^\circ \) का मान \( \Delta U^\circ \) से कम होगा।

🎯 Exam Tip: \( \Delta H^\circ \) और \( \Delta U^\circ \) के बीच संबंध में \( \Delta n_g \) के चिह्न का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि यह संबंध में सकारात्मक या नकारात्मक योगदान को निर्धारित करता है।

 

Question 5. मेथेन, ग्रेफाइट एवं डाइहाइड्रोजन के लिए 298 K पर दहन एन्थैल्पी के मान क्रमशः -890.3 kJ mol\(^{-1}\), -393.5 kJ mol\(^{-1}\) एवं -285.8 kJ mol\(^{-1}\) हैं। CH\(_4\)(g) की विरचन एन्थैल्पी क्या होगी?
(i) -74.8 kJ mol\(^{-1}\)
(ii) -52.27 kJ mol\(^{-1}\)
(iii) +74.8 kJ mol\(^{-1}\)
(iv) +52.26 kJ mol\(^{-1}\)
Answer:
(i) -74.8 kJ mol\(^{-1}\)
In simple words: हेस के नियम का उपयोग करके, ज्ञात दहन एन्थैल्पी डेटा को इस तरह से संयोजित किया जाता है कि लक्ष्य अभिक्रिया (मेथेन का विरचन) प्राप्त हो सके, जिससे इसकी एन्थैल्पी की गणना की जा सके।

🎯 Exam Tip: हेस के नियम का उपयोग करते समय, अभिक्रियाओं को जोड़ते, घटाते या गुणा करते समय एन्थैल्पी मानों पर उचित संक्रियाएँ लागू करना सुनिश्चित करें।

 

Question 6. एक अभिक्रिया A+ B \( \rightarrow \) C +D+q के लिए एन्ट्रॉपी परिवर्तन धनात्मक पाया गया। यह अभिक्रिया सम्भव होगी-
(i) उच्च ताप पर
(ii) निम्न ताप पर
(iii) किसी भी ताप पर नहीं
(iv) किसी भी ताप पर
Answer:
(iv) किसी भी ताप पर
In simple words: यदि किसी अभिक्रिया में \( \Delta H \) ऋणात्मक (ऊष्माक्षेपी) और \( \Delta S \) धनात्मक (एन्ट्रॉपी में वृद्धि) हो, तो गिब्स मुक्त ऊर्जा \( \Delta G = \Delta H - T\Delta S \) हमेशा ऋणात्मक होगी, जिससे अभिक्रिया किसी भी ताप पर स्वतः प्रवर्तित होगी।

🎯 Exam Tip: \( \Delta G = \Delta H - T\Delta S \) समीकरण के विभिन्न संयोजन ( \( \Delta H \) और \( \Delta S \) के चिह्न) और उनके ताप निर्भरता के साथ स्वतः प्रवर्तित होने की शर्तों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. एक प्रक्रम में निकाय द्वारा 701 J ऊष्मा अवशोषित होती है एवं 394J कार्य किया जाता है। इस प्रक्रम में आन्तरिक ऊर्जा में कितना परिवर्तन होगा?
Answer:
दिया है, q = +701J, w = -394 J, \( \Delta U = ? \)
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियमानुसार,
\( \Delta U=q+w=+701J+(-394 J) = +307 J \)
अर्थात् निकाय की आन्तरिक ऊर्जा 307 J बढ़ती है।
In simple words: ऊष्मागतिकी के पहले नियम के अनुसार, निकाय द्वारा अवशोषित ऊष्मा और उस पर किए गए कार्य का योग निकाय की आंतरिक ऊर्जा में कुल परिवर्तन देता है।

🎯 Exam Tip: ऊष्मा (q) और कार्य (w) के लिए सही चिह्न परिपाटी का उपयोग करें: अवशोषित ऊष्मा (+) और निकाय द्वारा किया गया कार्य (-)।

 

Question 8. एक बम कैलोरीमीटर में NH\(_{2}\)CN (s) की अभिक्रिया डाइऑक्सीजन के साथ की गई एवं \( \Delta U \) का मान-742.7 kJ mol\(^{-1}\) पाया गया (298K पर)। इस अभिक्रिया के लिए 298K पर एन्थैल्पी परिवर्तन ज्ञात कीजिए:-
Answer:
दिए गए समीकरण के लिए,
\( \Delta n = (1+1)-\left(\frac{3}{2}\right) = +\frac{1}{2} \) mol
\( \Delta H = \Delta U+\Delta nRT \)
\( \Delta H = -742.7+ \left(\frac{1}{2} \times 8.314\times 10^{-3} \times 298 \right) \)
(R = 8.314\( \times 10^{-3} \) kJ mol\(^{-1}\)K\(^{-1}\))
\( = -741.5 \) kJ mol\(^{-1}\)
In simple words: बम कैलोरीमीटर स्थिर आयतन पर ऊर्जा परिवर्तन ( \( \Delta U \) ) को मापता है, और इसे स्थिर दाब पर ऊर्जा परिवर्तन ( \( \Delta H \) ) में बदलने के लिए गैसीय मोलों की संख्या में परिवर्तन ( \( \Delta n_g \) ) और गैस स्थिरांक (R) का उपयोग करके \( \Delta H = \Delta U + \Delta n_g RT \) सूत्र का प्रयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करें कि आप \( \Delta n_g \) की गणना करते समय केवल गैसीय उत्पादों और अभिकारकों के मोलों पर विचार करें, और R के मान की इकाइयाँ \( \Delta U \) की इकाइयों के अनुरूप हों।

 

Question 9. 60.0 g ऐलुमिनियम का ताप 35°C से 55°C करने के लिए कितने kJ ऊष्मा की आवश्यकता होगी? AI की मोलर ऊष्माधारिता 24Jmol\(^{-1}\) K\(^{-1}\) है।
Answer:
पदार्थ के n मोलों के लिए,
\( q=n \times C_m \times \Delta t \)
इस परिस्थिति में,
\( n=\frac{60.0}{27} = 2.22 \) mol
\( C_m = 24 J mol^{-1}K^{-1} = 24\times 10^{-3} \) kJ mol\(^{-1}\)K\(^{-1}\)
\( \Delta T = (273+55)-(273+35) = 20 K \)
तथा
\( q=2.22\times 24\times 10^{-3} \times 20 = 1.07 \) kJ
In simple words: किसी पदार्थ के तापमान को बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा उसके मोलों की संख्या, मोलर ऊष्माधारिता और तापमान में परिवर्तन के गुणनफल के बराबर होती है।

🎯 Exam Tip: गणना करते समय इकाइयों (Joule, kJ, mol, K) में संगति बनाए रखना महत्वपूर्ण है। तापमान अंतर \( \Delta T \) के लिए सेल्सियस या केल्विन स्केल दोनों का उपयोग किया जा सकता है, क्योंकि अंतर समान रहता है।

 

Question 10. 10.0°C पर 1 मोल जल की बर्फ – 10°C पर जमाने पर एन्थैल्पी-परिवर्तन की गणना कीजिए।
\( \Delta_{fus} H = 6.03 \) kJ mol\(^{-1}\) 0°C पर,
Cp[H\(_2\)O(l)] = 75.3Jmol\(^{-1}\) K\(^{-1}\)
Cp[H\(_2\)O(s)] = 36.8 Jmol\(^{-1}\)K\(^{-1}\)
Answer:
\( \Delta H_{total}=(10^\circ C \) पर 1 मोल जल \( \rightarrow 0^\circ C \) पर 1 मोल जल)
\( +(0^\circ C \) पर 1 मोल जल\( \rightarrow 0^\circ C \) पर 1 मोल बर्फ)
\( +(0^\circ C \) पर 1 मोल बर्फ\( \rightarrow -10^\circ C \) पर 1 मोल बर्फ)
\( = C_p[H_2O(l)] \times \Delta T + \Delta H_{freezing} + C_p[H_2O(s)] \times \Delta T \)
\( = (75.3 \text{ J mol}^{-1}\text{K}^{-1}) (-10 \text{ K})+(-6.03 \text{ KJ mol}^{-1}) \)
\( +(36.8 \text{ J mol}^{-1}\text{K}^{-1}) (-10 \text{ K}) \)
\( = -753 \text{ J mol}^{-1} -6.03 \text{ kJ mol}^{-1}-368 \text{ J mol}^{-1} \)
\( = -0.753 \text{ kJ mol}^{-1} -6.03 \text{ kJ mol}^{-1} -0.368 \text{ kJ mol}^{-1} \)
\( = -7.151 \text{ kJ mol}^{-1} \)
In simple words: कुल एन्थैल्पी परिवर्तन विभिन्न चरणों में होने वाले एन्थैल्पी परिवर्तनों का योग है: जल को 10°C से 0°C तक ठंडा करना, 0°C पर जल का बर्फ में जमना, और बर्फ को 0°C से -10°C तक ठंडा करना।

🎯 Exam Tip: बहु-चरणीय प्रक्रमों में, प्रत्येक चरण के एन्थैल्पी परिवर्तन की अलग-अलग गणना करें और फिर कुल परिवर्तन के लिए उन्हें जोड़ दें। यह सुनिश्चित करें कि सभी मानों की इकाइयाँ एकसमान हों (उदाहरण के लिए, सभी kJ में)।

 

Question 11. CO\(_{2}\) की दहन एन्थैल्पी – 393.5 kJ mol\(^{-1}\) है। कार्बन एवं ऑक्सीजन से 35.2 g CO\(_{2}\) बनने पर उत्सर्जित ऊष्मा की गणना कीजिए ।
Answer:
सम्बन्धित समीकरण निम्नवत् है
C(s)+O\(_{2}\)(g)\( \rightarrow \) CO\(_{2}\)(g) \( \Delta H \) = -393.5 kJ mol\(^{-1}\)
1 mol = 44 g
उत्सर्जित ऊष्मा जब 44 g CO\(_{2}\) निर्मित होती है = 393.5 kJ
.. 35.2 g CO\(_{2}\) निर्मित होने पर निर्मुक्त ऊष्मा = \( \frac{393.5}{44} \times 35.2 \) kJ = 314.8 kJ
In simple words: CO\(_{2}\) के एक मोल (44 g) के निर्माण से उत्सर्जित ऊष्मा को जानकर, हम अनुपात का उपयोग करके 35.2 g CO\(_{2}\) के निर्माण से उत्सर्जित ऊष्मा की गणना कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: रासायनिक समीकरण से स्टोइशियोमेट्री का उपयोग करके द्रव्यमान को मोल में बदलना और फिर एन्थैल्पी परिवर्तन की गणना करना एक सामान्य और महत्वपूर्ण कदम है।

 

Question 12. CO(g), CO\(_{2}\)(g), N\(_{2}\)O(g) एवं N\(_{2}\)O\(_{4}\)(g) की विरचन एन्थैल्पी क्रमशः-110,393, 81 एवं 9.7 kmol\(^{-1}\) हैं। अभिक्रिया N\(_{2}\)O\(_{4}\) (g) +3C0(g) \( \rightarrow \)N\(_{2}\)O(g)+3CO\(_{2}\)(g) के लिए \( \Delta_r H^\circ \) का मान ज्ञात कीजिए।
Answer:
\( \Delta_r H = \Sigma \Delta_f H^\circ_{उत्पाद} - \Sigma \Delta_f H^\circ_{अभिकारक} \)
\( = \{\Delta_f H^\circ[N_2O(g)]+3\times\Delta_f H^\circ[CO_2(g)]\} \)
\( -\{\Delta_f H^\circ[N_2O_4(g)]+3\times\Delta_f H^\circ[CO(g)]\} \)
\( = \{81+[3\times(-393)]\} + \{9.7+3\times(-110)\} \)
\( = [-1098-(-320.3)] = - 777.7 \) kJ
In simple words: अभिक्रिया की मानक एन्थैल्पी उत्पादों की मानक विरचन एन्थैल्पी के योग में से अभिकारकों की मानक विरचन एन्थैल्पी के योग को घटाकर निकाली जाती है।

🎯 Exam Tip: सूत्र \( \Delta_r H^\circ = \Sigma \Delta_f H^\circ_{उत्पाद} - \Sigma \Delta_f H^\circ_{अभिकारक} \) का सही उपयोग सुनिश्चित करें और गुणांकों को ध्यान में रखें। गणना में चिह्न की गलतियाँ आम हैं।

 

Question 13. N\(_{2}\)(g)+3H\(_{2}\)(g) \( \rightarrow \) 2NH\(_{3}\)(g); \( \Delta H^\circ \) = -92-4kJ mol\(^{-1}\) NH\(_{3}\) गैस की मानक विरचन एन्थैल्पी क्या है?
Answer:
\( \frac{1}{2}N_2(g)+\frac{3}{2}H_2(g) \rightarrow NH_3 (g) \)
\( \Delta_f H^\circ [NH_3 (g)] = \frac{1}{2}\Delta H^\circ = \frac{1}{2}\times(-92.4) = - 46.2 \) kJ mol\(^{-1}\)
In simple words: किसी यौगिक की मानक विरचन एन्थैल्पी उसके एक मोल को उसके घटकों से बनाने में होने वाला एन्थैल्पी परिवर्तन है; दी गई अभिक्रिया दो मोल NH\(_{3}\) के निर्माण को दर्शाती है, इसलिए एक मोल के लिए एन्थैल्पी परिवर्तन आधा होगा।

🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करें कि विरचन एन्थैल्पी हमेशा प्रति मोल उत्पाद के रूप में व्यक्त की जाती है, इसलिए अभिक्रिया की स्टोइशियोमेट्री को सही ढंग से समायोजित करें।

 

Question 14. निम्नलिखित आँकड़ों से CH\(_{3}\)OH(l) की मानक विरचन एन्थैल्पी ज्ञात कीजिए-
CH\(_{3}\)OH(l)+\(\frac{3}{2}\) O\(_{2}\)(g) \( \rightarrow \) CO\(_{2}\)(g) + 2H\(_{2}\)O(l); \( \Delta_r H^\circ \) = -726 kJ mol\(^{-1}\)
C(s) + O\(_{2}\)(g) \( \rightarrow \) CO\(_{2}\)(g); \( \Delta_f H^\circ \) = -393 kJ mol\(^{-1}\)
H\(_{2}\)(g) + \(\frac{1}{2}\) O\(_{2}\)(g) \( \rightarrow \) H\(_{2}\)O(l); \( \Delta_f H^\circ \) = -286 kJ mol\(^{-1}\)
Answer:
दिए गए आँकड़ों के अनुसार,
\( \Delta_f H^\circ [(CO_2)(g)] = -393 \) kJ mol\(^{-1}\)
\( \therefore \Delta_r H^\circ = \Sigma \Delta_f H^\circ (उत्पाद) - \Sigma \Delta_f H^\circ (अभिकारक) \)
या
\( \Delta_r H^\circ = \{\Delta_f H^\circ [CO_2(g)]+2\times\Delta_f H^\circ [H_2O(l)]\} – \)
\( \{\Delta_f H^\circ [CH_3OH(l)]+\frac{3}{2}\times\Delta_f H^\circ[O_2(g)]\} \)
या
\( -726= \{-393 +2\times(-286)\} - \{\Delta_f H^\circ [CH_3OH(l)]+\frac{3}{2}\times 0 \} \)
\( -726=(-965) - \Delta_f H^\circ [CH_3OH(l)] \)
या
\( \Delta_f H^\circ [CH_3OH(l)]= +726 – 965 = -239 \) kJ mol\(^{-1}\)
In simple words: हेस के नियम का उपयोग करके, उत्पादों की मानक विरचन एन्थैल्पी के योग में से अभिकारकों की मानक विरचन एन्थैल्पी के योग को घटाकर अभिक्रिया की एन्थैल्पी परिवर्तन ज्ञात किया जाता है, जिससे अज्ञात यौगिक (CH\(_{3}\)OH(l)) की विरचन एन्थैल्पी निकाली जा सकती है।

🎯 Exam Tip: मानक एन्थैल्पी गणना में, तत्वों की मानक अवस्था में विरचन एन्थैल्पी शून्य होती है। साथ ही, उत्पादों और अभिकारकों के गुणांकों का सही ढंग से ध्यान रखें।

 

Question 15. CCl\(_{3}\)(g) \( \rightarrow \) C(g) + 4CI(g) अभिक्रिया के लिए एन्थैल्पी-परिवर्तन ज्ञात कीजिए एवं CCI\(_{3}\) में C-CI की आबन्ध एन्थैल्पी की गणना कीजिए-
\( \Delta_{vap}H^\circ (CCl_4) \) = 30.5 kJ mol\(^{-1}\)
\( \Delta_f H^\circ (CCI_4) \) = -1355 kJ mol\(^{-1}\)
\( \Delta_a H^\circ (C) \) = 715.0 kJ mol\(^{-1}\),
\( \Delta_a H^\circ(Cl_2) \) = 242 kJ mol\(^{-1}\)
यहाँ \( \Delta_a H^\circ \) परमाण्वीकरण एन्थैल्पी है।
Answer:
दिए गए आँकड़े निम्नवत् प्रस्तुत किए जा सकते हैं-
CCl\(_{4}\) (l)\( \rightarrow \) CCl\(_{4}\)(g); \( \Delta_{vap}H \) = 30.5 kJ mol\(^{-1}\) ...(i)
C(s)+2Cl\(_{2}\)(g) \( \rightarrow \) CCl\(_{4}\) (l); \( \Delta_f H^\circ \) = -135.5 kJ mol\(^{-1}\) ...(ii)
C(s) \( \rightarrow \) C(g); \( \Delta_a H^\circ \) = 715.0 kJ mol\(^{-1}\) ...(iii)
Cl\(_{2}\)(g)\( \rightarrow \) 2Cl(g); \( \Delta_a H^\circ \) = 242 kJ mol\(^{-1}\) ...(iv)
वांछित समीकरण निम्न है -
CCl\(_{4}\)(g)\( \rightarrow \) C(g)+4Cl(g), \( \Delta H = ? \)
समी०, (iii) + 2 \( \times \) समी० (iv) - समी० (i) – समी० (ii) से
\( \Delta H \) = 715.0+(2\( \times \)242)-30.5-(-135.5) = 1304 kJ mol\(^{-1}\)
CCl\(_{4}\) में C-C1 की आबन्ध एंथैल्पी (औसत मान) = \( \frac{1304}{4} = 326 \) kJ mol\(^{-1}\)
In simple words: हेस के नियम का उपयोग करके, ज्ञात एन्थैल्पी परिवर्तनों को इस तरह से संयोजित किया जाता है कि लक्ष्य अभिक्रिया (CCl\(_{4}\) का गैसीय परमाणुओं में विखंडन) प्राप्त हो सके, जिससे इसकी एन्थैल्पी निकाली जा सके। फिर, औसत आबन्ध एन्थैल्पी की गणना के लिए इस मान को C-Cl आबन्धों की संख्या से विभाजित किया जाता है।

🎯 Exam Tip: हेस के नियम को लागू करते समय, अभिक्रियाओं को जोड़ते, घटाते या गुणा करते समय एन्थैल्पी मानों पर उचित संक्रियाएँ लागू करना सुनिश्चित करें और अंत में औसत आबन्ध एन्थैल्पी के लिए कुल एन्थैल्पी को आबन्धों की संख्या से विभाजित करें।

 

Question 16. एक विलगित निकाय के लिए \( \Delta U = 0 \), इसके लिए AS क्या होगा?
Answer:
उत्तर यहाँ \( \Delta U \) का मान शून्य है जिसका तात्पर्य है कि यहाँ ऊर्जा कारक की कोई भूमिका नहीं है। \( \Delta U = 0 \) दोनों पर प्रक्रम तभी स्वतः प्रवर्तित हो सकता है जब एंट्रॉपी कारक प्रक्रम कराने में सहायक हो अर्थात् AS का मान धनात्मक (+ve) होगा।
In simple words: एक विलगित निकाय के लिए, यदि आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन शून्य है, तो स्वतः प्रवर्तन के लिए आवश्यक है कि एंट्रॉपी में वृद्धि हो, क्योंकि एंट्रॉपी में वृद्धि ब्रह्मांड की कुल एंट्रॉपी को बढ़ाती है, जिससे प्रक्रम स्वतः प्रवर्तित होता है।

🎯 Exam Tip: विलगित निकाय की अवधारणा को याद रखें (न ऊर्जा का आदान-प्रदान, न पदार्थ का आदान-प्रदान) और स्वतः प्रवर्तन के लिए गिब्स मुक्त ऊर्जा ( \( \Delta G < 0 \) ) और एंट्रॉपी ( \( \Delta S_{total} > 0 \) ) मानदंडों को समझें।

 

Question 17. 298 K पर अभिक्रिया 2A+ B \( \rightarrow \) c के लिए।
\( \Delta H \) = 400 kJ mol\(^{-1}\) एवं \( \Delta S \) = 0.2 kJ K\(^{-1}\)mol\(^{-1}\)
\( \Delta H \) एवं \( \Delta S \) को ताप-विस्तार में स्थिर मानते हुए बताइए कि किस ताप पर अभिक्रिया स्वतः होगी?
Answer:
सर्वप्रथम उस ताप की गणना करते हैं, जिस पर अभिक्रिया साम्यावस्था में होगी अर्थात् \( \Delta G = 0 \)
\( \Delta G=\Delta H-T\Delta S \)
\( 0=\Delta H-T\Delta S \)
\( T=\frac{\Delta H}{\Delta S} = \frac{400}{0.2} = 2000 \) K
अभिक्रिया के स्वतः प्रवर्तित होने के लिए \( \Delta G \) का मान ऋणात्मक होना चाहिए, अतः T, 2,000 K से अधिक होना चाहिए।
In simple words: किसी अभिक्रिया के स्वतः प्रवर्तित होने के लिए \( \Delta G \) ऋणात्मक होना चाहिए। यदि \( \Delta H \) धनात्मक और \( \Delta S \) धनात्मक है, तो अभिक्रिया उच्च तापमान पर स्वतः प्रवर्तित होगी, जहां \( T\Delta S \) पद \( \Delta H \) से बड़ा हो जाता है।

🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि \( \Delta G = \Delta H - T\Delta S \) समीकरण में \( \Delta H \) और \( \Delta S \) के चिह्न कैसे स्वतः प्रवर्तन की ताप निर्भरता को प्रभावित करते हैं। साम्यावस्था ताप वह बिंदु है जहाँ \( \Delta G = 0 \)।

 

Question 18. अभिक्रिया 2CI(g) \( \rightarrow \) Cl\(_{2}\)(g) के लिए \( \Delta H \) एवं \( \Delta S \) के चिह्न क्या होंगे?
Answer:
दी गयी अभिक्रिया में आबन्ध निर्माण होता है, अतः ऊर्जा निर्मुक्त होती है अर्थात् \( \Delta H \) ऋणात्मक होता है। पुनः 2 मोल परमाणुओं की यादृच्छिकता (randomness) 1 मोल अणुओं से अधिक होती है, अतः यादृच्छिकता घटती है अर्थात् \( \Delta S \) ऋणात्मक होगा।
In simple words: जब दो क्लोरीन परमाणु मिलकर एक क्लोरीन अणु बनाते हैं, तो ऊर्जा मुक्त होती है ( \( \Delta H \) ऋणात्मक) और अधिक व्यवस्थित संरचना बनने के कारण अव्यवस्था कम होती है ( \( \Delta S \) ऋणात्मक)।

🎯 Exam Tip: एन्थैल्पी (आबन्ध निर्माण या टूटना) और एंट्रॉपी (अव्यवस्था में वृद्धि या कमी) में परिवर्तन के संबंध को समझने से आप इनके चिह्नों का अनुमान लगा सकते हैं।

 

Question 19. अभिक्रिया 2A(g) + B (g) \( \rightarrow \) 2D (g) के लिए \( \Delta U^\circ \) = -10.5 kJ एवं \( \Delta S^\circ \) =-44.1JK\(^{-1}\) अभिक्रिया के लिए \( \Delta G \) की गणना कीजिए और बताइए कि क्या अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित हो सकती है?
Answer:
दी गयी अभिक्रिया के लिए,
\( \Delta n = 2-(2+1) = -1 \)
\( \Delta H^\circ = \Delta U^\circ + \Delta nRT \)
\( = -10.5+(-1)\times 8.314\times 10^{-3} \times 298 \)
\( = -12.98 \) kJ
( सभी पदार्थों के लिए मानक परिस्थितियों में R = 8.314\( \times 10^{-3} \) kJ mol\(^{-1}\)K\(^{-1}\), T=298 K)
अतः
\( \Delta G^\circ = \Delta H^\circ - T\Delta S^\circ \)
\( = -12.98-[298\times(-44.1\times 10^{-3})] = 0.162 \) kJ
चूँकि \( \Delta G^\circ \) का मान धनात्मक आता है, अतः अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित नहीं होगी।
In simple words: पहले \( \Delta U \) से \( \Delta H \) की गणना की जाती है, फिर इस \( \Delta H \) और दिए गए \( \Delta S \) का उपयोग करके गिब्स मुक्त ऊर्जा ( \( \Delta G \) ) की गणना की जाती है। यदि \( \Delta G \) धनात्मक है, तो अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित नहीं होगी।

🎯 Exam Tip: \( \Delta G^\circ = \Delta H^\circ - T\Delta S^\circ \) सूत्र का सही उपयोग करें और \( \Delta n_g \) की गणना में गैसीय मोलों पर ही विचार करें। इकाइयों की संगति (kJ और J) पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 20. 300 K पर एक अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक 10 है। \( \Delta G \) का मान क्या होगा? (R = 8.314 JK\(^{-1}\)mol\(^{-1}\))
Answer:
\( \Delta G^\circ = -2.303 RT \log K \)
\( \Delta G^\circ = -2.303\times 8.314\times 300\times \log 10 \)
\( = -2.303\times 8.314\times 300\times 1 \)
\( = -5744.1 \) J = -5.744 kJ
In simple words: गिब्स मुक्त ऊर्जा और साम्य स्थिरांक के बीच के संबंध \( \Delta G^\circ = -RT \ln K \) का उपयोग करके, साम्य स्थिरांक (K) और तापमान (T) दिए होने पर \( \Delta G^\circ \) की गणना की जा सकती है।

🎯 Exam Tip: \( \ln K \) और \( \log K \) के बीच के संबंध को याद रखें ( \( \ln K = 2.303 \log K \) ) और गैस स्थिरांक R की सही इकाइयों का उपयोग करें ताकि \( \Delta G^\circ \) की इकाई सही हो।

 

Question 21. निम्नलिखित अभिक्रियाओं के आधार पर NO(g) तथा NO\(_{2}\)(g) के ऊष्मागतिकी स्थायित्व पर टिप्पणी कीजिए-
\( \frac{1}{2}N_2(g) + \frac{1}{2}O_2(g) \rightarrow NO(g) \); \( \Delta H^\circ \) = 90 kJ mol\(^{-1}\)
NO(g) + \( \frac{1}{2}O_2(g) \rightarrow NO_2(g) \); \( \Delta H^\circ \) =-74 kJ mol\(^{-1}\)
Answer:
NO(g) के निर्माण में ऊर्जा अवशोषित होती है, अत: NO(g) अस्थायी है। चूंकि दूसरी अभिक्रिया में ऊर्जा निर्मुक्त होती है, अत: NO\(_{2}\)(g) स्थायी है। अतः अस्थायी NO(g) स्थायी NO\(_{2}\)(g) में परिवर्तित होती है।
In simple words: जिस यौगिक के निर्माण में ऊष्मा अवशोषित होती है (धनात्मक \( \Delta H \)), वह अस्थायी होता है, जबकि जिसके निर्माण में ऊष्मा निर्मुक्त होती है (ऋणात्मक \( \Delta H \)), वह स्थायी होता है।

🎯 Exam Tip: किसी पदार्थ के ऊष्मागतिकी स्थायित्व का संबंध उसकी विरचन एन्थैल्पी से होता है: अधिक ऋणात्मक एन्थैल्पी अधिक स्थायित्व दर्शाती है, जबकि धनात्मक एन्थैल्पी अस्थायित्व दर्शाती है।

 

Question 22. जब 1.00 mol H\(_{2}\)O(l) को मानक परिस्थितियों में विरचित किया जाता है, तब परिवेश के एन्ट्रॉपी-परिवर्तन की गणना कीजिए। ( \( \Delta H^\circ \) = -286 kJ mol\(^{-1}\) )
Answer:
\( H_2(g)+\frac{1}{2}O_2(g) \rightarrow H_2O(l) \); \( \Delta_f H^\circ \) = -286 kJ mol\(^{-1}\)
समीकरण के अनुसार 1 mol H\(_{2}\)O (l) निर्मित होता है तथा 286 kJ ऊष्मा निर्मुक्त होती है। यह ऊष्मा परिवेश द्वारा अवशोषित कर ली जाती है।
\( q_{surr} \) = +286 kJ mol\(^{-1}\)
अतः परिवेश में एंट्रॉपी परिवर्तन,
\( \Delta S_{surr} = \frac{q_{surr}}{T} = \frac{286}{298} = 0.9597 \) kJ K\(^{-1}\) mol\(^{-1}\)
\( = 959.7 \) J mol\(^{-1}\)
In simple words: जल के निर्माण में निर्मुक्त ऊष्मा परिवेश द्वारा अवशोषित की जाती है। परिवेश की एंट्रॉपी में परिवर्तन अवशोषित ऊष्मा को तापमान से विभाजित करके निकाला जाता है।

🎯 Exam Tip: परिवेश की एंट्रॉपी गणना में, \( q_{surr} \) के चिह्न का ध्यान रखें, जो निकाय द्वारा अवशोषित या निर्मुक्त ऊष्मा के विपरीत होता है। तापमान हमेशा केल्विन में होना चाहिए।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. जब निकाय को ऊष्मा (q) दी जाए तथा निकाय के द्वारा \( w \) कार्य किया जाए तो ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम का गणितीय रूप होता है-
(i) \( \Delta E \) =q+w
(ii) \( \Delta E \) =q-W
(iii) \( \Delta E \) =-q+w
(iv) \( \Delta E \) =-q-W
Answer:
(ii) \( \Delta E \) =q-W
In simple words: ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम बताता है कि निकाय की आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन ( \( \Delta E \) ) निकाय को दी गई ऊष्मा (q) और निकाय द्वारा किए गए कार्य (W) का अंतर होता है, क्योंकि निकाय द्वारा कार्य करने पर ऊर्जा बाहर निकलती है।

🎯 Exam Tip: ऊष्मा (q) और कार्य (w) के लिए मानक चिह्न परिपाटी (q धनात्मक जब ऊष्मा अवशोषित हो, w ऋणात्मक जब निकाय कार्य करे) को याद रखें।

 

Question 2. किसी आदर्श गैस के समतापी प्रसार में
(i) आन्तरिक ऊर्जा घटती है।
(ii) आन्तरिक ऊर्जा बढ़ती है।
(iii) संपूर्ण ऊर्जा घटती है
(iv) आन्तरिक ऊर्जा स्थिर रहती है।
Answer:
(iv) आन्तरिक ऊर्जा स्थिर रहती है।
In simple words: एक आदर्श गैस की आंतरिक ऊर्जा केवल तापमान पर निर्भर करती है। समतापी प्रक्रम में तापमान स्थिर रहता है, इसलिए आदर्श गैस की आंतरिक ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

🎯 Exam Tip: आदर्श गैसों के लिए, \( \Delta U \) और \( \Delta H \) दोनों केवल तापमान के फलन होते हैं, इसलिए समतापी प्रक्रम ( \( \Delta T = 0 \) ) में \( \Delta U = 0 \) और \( \Delta H = 0 \) होता है।

 

Question 3. एन्थैल्पी \( \Delta H \) और आन्तरिक ऊर्जा \( \Delta E \) में सम्बन्ध है|
(i) \( \Delta E \) = \( \Delta H \) + PAV
(ii) \( \Delta E \)+ \( \Delta V \) = \( \Delta H \)
(iii) \( \Delta H \) = \( \Delta U \)+ PAV
(iv) \( \Delta H \) = \( \Delta E \)-PAV
Answer:
(iii) \( \Delta H \) = \( \Delta U \)+ PAV
In simple words: एन्थैल्पी ( \( \Delta H \) ) स्थिर दाब पर ऊष्मा परिवर्तन है, जबकि आंतरिक ऊर्जा ( \( \Delta U \) ) स्थिर आयतन पर ऊष्मा परिवर्तन है। इन दोनों के बीच का संबंध दाब-आयतन कार्य (PAV) के माध्यम से स्थापित होता है।

🎯 Exam Tip: इस मूलभूत संबंध को याद रखें, क्योंकि यह ऊष्मागतिकी में कई गणनाओं और अवधारणाओं का आधार है।

 

Question 4. निकाय के एन्थैल्पी परिवर्तन \( \Delta H \) और आन्तरिक ऊर्जा परिवर्तन \( \Delta E \) में सम्बन्ध है-
(i) \( \Delta E \) = \( \Delta H \) + PAU
(ii) \( \Delta E \) = \( \Delta H \)+\( \Delta nRT \)
(iii) \( \Delta H \) = \( \Delta U \)+\( \Delta nRT \)
(iv) \( \Delta H \) = \( \Delta E \) – P\( \Delta U \)
Answer:
(iii) \( \Delta H \) = \( \Delta U \)+\( \Delta nRT \)
In simple words: यह संबंध विशेष रूप से तब उपयोगी होता है जब रासायनिक अभिक्रियाओं में गैसीय मोलों की संख्या में परिवर्तन होता है, जहां \( \Delta nRT \) दाब-आयतन कार्य में गैसीय अभिकारकों और उत्पादों के योगदान को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: इस सूत्र का उपयोग करते समय, \( \Delta n \) की गणना में केवल गैसीय अभिकारकों और उत्पादों के मोलों पर विचार करना सुनिश्चित करें।

 

Question 5. हाइड्रोजन गैस की 25°C पर दहन ऊष्मा -68.4 kcal है। जल की 25°C पर सम्भवन ऊष्मा होगी-
(i) – 34.2 kcal
(ii) -68.4kcal
(iii) - 136.8 kcal
(iv) + 68.4 kcal
Answer:
(ii) – 68.4 kcal
In simple words: हाइड्रोजन का दहन जल के निर्माण की अभिक्रिया है। चूंकि दहन अभिक्रिया में जल ही एकमात्र उत्पाद है, इसलिए हाइड्रोजन की दहन ऊष्मा जल की सम्भवन ऊष्मा के बराबर होगी।

🎯 Exam Tip: तत्वों से यौगिकों के निर्माण की अभिक्रियाओं में, यदि तत्व अपनी मानक अवस्था में हैं, तो अभिक्रिया की एन्थैल्पी सीधे यौगिक की सम्भवन एन्थैल्पी होती है।

 

Question 6. समीकरण H\(_{2}\)(g)+Cl\(_{2}\)(g) \( \rightarrow \) 2HCl(g)+ 44.0 kcal से निष्कर्ष निकलता है कि HCI(g) की सम्भवन ऊष्मा है।
(i) – 44.0 kcal
(ii) + 22.0 kcal
(iii) – 22.0 kcal
(iv) +44.0 kcal
Answer:
(iii) -22.0 kcal
In simple words: दी गई अभिक्रिया में 2 मोल HCl बनते हैं और 44.0 kcal ऊष्मा निर्मुक्त होती है (दहन एन्थैल्पी ऋणात्मक होती है)। इसलिए, 1 मोल HCl की सम्भवन ऊष्मा इस मान का आधा और ऋणात्मक होगी।

🎯 Exam Tip: एन्थैल्पी मान हमेशा अभिक्रिया की स्टोइशियोमेट्री से जुड़े होते हैं; सम्भवन एन्थैल्पी प्रति मोल उत्पाद के लिए परिभाषित होती है।

 

Question 7. 1 मोल H\(_{2}\)O\(_{2}\) का प्लेटिनमें ब्लैक द्वारा अपघटन होता है, 96.6 kJ ऊष्मा उत्पन्न होती है। 1 मोल H\(_{2}\)O की सम्भवन ऊष्मा है-
(i) 193.2 kJ
(ii) 48.3 kJ
(iii) 96.6 kJ
(iv) 386.4kJ
Answer:
(iii) 96.6 kJ
In simple words: प्रश्न में 1 मोल H\(_{2}\)O\(_{2}\) के अपघटन से 96.6 kJ ऊष्मा उत्पन्न होने की जानकारी दी गई है, लेकिन यह जल की सम्भवन ऊष्मा नहीं है। सम्भवन ऊष्मा वह ऊर्जा है जो तत्वों से यौगिक बनाने में लगती है। यहां, अपघटन से उत्पन्न ऊष्मा सीधे तौर पर जल की सम्भवन ऊष्मा के बराबर नहीं है, जब तक कि हाइड्रोजन परॉक्साइड से जल बनने की प्रक्रिया में सीधे 1 मोल H2O बनने के लिए समान ऊर्जा का मान न हो। हालांकि, विकल्पों को देखते हुए, यह एक गलत तरीके से प्रस्तुत प्रश्न लगता है या इसमें कुछ जानकारी अधूरी है, लेकिन दिए गए विकल्पों में से 96.6 kJ ही निकटतम मान है। आदर्श रूप से, हमें H2O की सम्भवन एन्थैल्पी के लिए एक अलग अभिक्रिया चाहिए। मान लेते हैं कि प्रश्न में H2O2 का अपघटन सीधा H2O के निर्माण से जुड़ा है।

🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि आप प्रश्न में दिए गए अभिक्रिया के प्रकार (दहन, निर्माण, अपघटन) और पूछी गई एन्थैल्पी (सम्भवन, दहन, आदि) को ध्यान से पहचानें ताकि सही मान का चयन कर सकें।

 

Question 8. CO\(_{2}\) की सम्भवन ऊष्मा –90.4 किलोकैलोरी है। यह दर्शाता है कि-
(i) CO\(_{2}\) ऊष्माक्षेपी यौगिक है।
(ii) CO\(_{2}\) ऊष्माशोषी यौगिक है।
(iii) CO\(_{2}\) समतापीय यौगिक है।
(iv) इनमें से कोई नहीं
Answer:
(i) CO\(_{2}\) ऊष्माक्षेपी यौगिक है
In simple words: नकारात्मक सम्भवन ऊष्मा का अर्थ है कि जब CO\(_{2}\) बनता है, तो ऊर्जा मुक्त होती है, जो इसे एक ऊष्माक्षेपी यौगिक बनाती है।

🎯 Exam Tip: ऋणात्मक एन्थैल्पी परिवर्तन ऊष्माक्षेपी प्रक्रमों को दर्शाता है, जहाँ ऊर्जा निर्मुक्त होती है, और ये यौगिक आमतौर पर अधिक स्थिर होते हैं।

 

Question 9. सही सम्बन्ध चुनिए |
(i) Qp =- \( \Delta H \)
(ii) Q\(_{v}\) = \( \Delta H \)
(iii) Qp = \( \Delta E \)
(iv) Q\(_{v}\) = \( \Delta E \)
Answer:
(iv) Q\(_{v}\) = \( \Delta E \)
In simple words: स्थिर आयतन पर अवशोषित या निर्मुक्त ऊष्मा (Q\(_{v}\) ) निकाय की आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन ( \( \Delta E \) ) के बराबर होती है, क्योंकि कोई दाब-आयतन कार्य नहीं होता है।

🎯 Exam Tip: स्थिर आयतन पर ऊष्मा परिवर्तन आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन के बराबर होता है (\( q_v = \Delta U \)), और स्थिर दाब पर ऊष्मा परिवर्तन एन्थैल्पी परिवर्तन के बराबर होता है (\( q_p = \Delta H \))।

 

Question 10. अभिक्रिया H\(_{2}\)(g) + Cl\(_{2}\)(g) \( \rightarrow \) 2HCl(g) के एन्थैल्पी परिवर्तन, \( \Delta H \) का मान – 68.4 Kcal है। इसका ऋण चिह्न प्रदर्शित करता है-
(i) अभिकारकों की एन्थैल्पी से उत्पादों की एन्थैल्पी अधिक है।
(ii) अभिकारकों की एन्थैल्पी से उत्पादों की एन्थैल्पी कम है।
(iii) अभिक्रिया ऊष्माशोषी है।
(iv) अभिक्रिया अग्र दिशा में नहीं होती है।
Answer:
(ii) अभिकारकों की एन्थैल्पी से उत्पादों की एन्थैल्पी कम है।
In simple words: एक ऋणात्मक \( \Delta H \) का अर्थ है कि अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी है, यानी अभिक्रिया के दौरान ऊर्जा मुक्त होती है। इसका मतलब है कि उत्पादों की कुल एन्थैल्पी अभिकारकों की कुल एन्थैल्पी से कम है।

🎯 Exam Tip: ऋणात्मक \( \Delta H \) मान हमेशा ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया को इंगित करता है, जहाँ उत्पाद अभिकारकों की तुलना में कम ऊर्जावान (अधिक स्थिर) होते हैं।

 

Question 11. मेथेन, ऐसीटिलीन, एथिलीन तथा बेंजीन की दहन ऊष्माएँ क्रमशः – 213, -310, – 337 तथा – 410 kcal हैं। सबसे अच्छा ईंधन है।
(i) मेथेन
(ii) ऐसीटिलीन
(iii) एथिलीन
(iv) बेंजीन
Answer:
(iv) बेंजीन
In simple words: सबसे अच्छा ईंधन वह होता है जो प्रति ग्राम या प्रति मोल सबसे अधिक ऊर्जा (ऊष्मा) उत्पन्न करता है। हालांकि, यहां प्रति मोल दहन ऊष्मा दी गई है और बेंजीन की दहन ऊष्मा (परमाणुओं की संख्या के सापेक्ष) सबसे अधिक होती है।

🎯 Exam Tip: अच्छे ईंधन के लिए दहन एन्थैल्पी का मान प्रति इकाई द्रव्यमान या मोल पर अधिकतम होना चाहिए। इस प्रश्न में, संख्यात्मक मान के आधार पर, सबसे अधिक ऋणात्मक एन्थैल्पी (जो सबसे अधिक ऊष्मा निर्मुक्ति दर्शाती है) बेंजीन की है।

 

Question 12. मानक अवस्थाओं की स्थितियाँ हैं-
(i) 25 K तथा 1 atm
(ii) 0°C तथा 1 atm
(iii) 20°C तथा 1 atm
(iv) 25°C तथा 1 atm
Answer:
(iv) 25°C तथा 1 atm
In simple words: मानक अवस्थाएँ वे संदर्भ स्थितियाँ होती हैं जिन पर रासायनिक गणनाएँ की जाती हैं, और उन्हें 25°C (298.15 K) तापमान और 1 वायुमंडल (या 1 बार) दाब पर परिभाषित किया गया है।

🎯 Exam Tip: मानक अवस्थाओं की सटीक परिभाषा (तापमान और दाब) को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई ऊष्मागतिकी मान इन शर्तों के तहत परिभाषित किए जाते हैं।

 

Question 13. अभिक्रिया की स्वतः प्रवर्तित होने की कसौटी है
(i) \( \Delta G \) का ऋणात्मक होना
(ii) \( \Delta G \) का धनात्मक होना
(iii) \( \Delta G \) का मान शून्य होना
(iv) \( \Delta G \) धनात्मक तथा \( \Delta S \) ऋणात्मक होना
Answer:
(i) \( \Delta G \) का ऋणात्मक होना
In simple words: गिब्स मुक्त ऊर्जा ( \( \Delta G \) ) में कमी का मतलब है कि एक प्रक्रम स्वतः प्रवर्तित होगा, क्योंकि यह प्रणाली की ऊर्जा को कम करता है जो कार्य करने के लिए उपलब्ध है।

🎯 Exam Tip: स्वतः प्रवर्तन के लिए \( \Delta G < 0 \), साम्यावस्था के लिए \( \Delta G = 0 \), और गैर-स्वतः प्रवर्तन के लिए \( \Delta G > 0 \) की शर्त को याद रखें।

 

Question 14. जब बर्फ पिघलती है, तो इसकी एंटॉपी |
(i) घटती है
(ii) बढ़ती है
(iii) शून्य हो जाती है
(iv) स्थिर रहती है
Answer:
(ii) बढ़ती है।
In simple words: बर्फ पिघलने पर, ठोस की व्यवस्थित संरचना से द्रव की अधिक अव्यवस्थित संरचना बनती है, जिससे एंट्रॉपी (अव्यवस्था की माप) बढ़ जाती है।

🎯 Exam Tip: ठोस से द्रव या गैस में अवस्था परिवर्तन हमेशा एंट्रॉपी में वृद्धि की ओर ले जाता है, जबकि विपरीत प्रक्रियाएं एंट्रॉपी में कमी करती हैं।

 

Question 15. कपूर को वाष्पीकृत करने पर इसकी एंट्रॉपी-
(i) घटती है
(ii) बढ़ती है।
(iii) स्थिर रहती है।
(iv) शून्य हो जाती है।
Answer:
(ii) बढ़ती है।
In simple words: कपूर को वाष्पीकृत करने पर, ठोस अवस्था से गैसीय अवस्था में सीधे परिवर्तन होता है। गैसें ठोसों की तुलना में बहुत अधिक अव्यवस्थित होती हैं, इसलिए एंट्रॉपी बढ़ जाती है।

🎯 Exam Tip: अवस्था परिवर्तन में, पदार्थ की कणों की स्वतंत्रता की डिग्री बढ़ने के साथ एंट्रॉपी बढ़ती है (ठोस < द्रव < गैस)।

 

Question 16. CH\(_{3}\)COOH तथा NaOH की उदासीनीकरण ऊष्मा होती है-
(i) -13.6 Kcal/mol
(ii) -13.6 Kcal/mol से अधिक ऋणात्मक
(iii) -13.6 Kcal/mol से कम ऋणात्मक
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer:
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं
In simple words: प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार के उदासीनीकरण की ऊष्मा लगभग -13.7 kcal/mol होती है। हालांकि, CH\(_{3}\)COOH एक दुर्बल अम्ल है, इसलिए इसके उदासीनीकरण में कुछ ऊर्जा इसके आयनीकरण के लिए उपयोग होती है, जिससे निर्मुक्त कुल ऊष्मा प्रबल अम्ल-प्रबल क्षार की तुलना में कम ऋणात्मक होती है।

🎯 Exam Tip: दुर्बल अम्ल या दुर्बल क्षार के उदासीनीकरण की एन्थैल्पी प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार के उदासीनीकरण की तुलना में कम ऋणात्मक होती है, क्योंकि आयनीकरण के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

 

Question 17. 36.5 ग्राम HCI और 40 ग्राम NaOH के द्वारा उत्पन्न होने वाली उदासीनीकरण ऊष्मा का मान होगा-
(i) 76.5 किलोकैलोरी
(ii) 12.7 किलोकैलोरी
(iii) शून्य
(iv) 13.7 किलोकैलोरी
Answer:
(iv) 13.7 किलोकैलोरी
In simple words: 36.5 ग्राम HCl (1 मोल) और 40 ग्राम NaOH (1 मोल) दोनों प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार के 1-1 मोल हैं। प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार के उदासीनीकरण की ऊष्मा लगभग 13.7 किलोकैलोरी प्रति मोल होती है।

🎯 Exam Tip: प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार के उदासीनीकरण की एन्थैल्पी लगभग एक स्थिर मान (-57.3 kJ/mol या -13.7 kcal/mol) होती है, क्योंकि इसमें मुख्य रूप से \( H^+ \) और \( OH^- \) आयनों का संयोजन होकर जल बनाना शामिल होता है।

 

Question 18. अभिक्रिया H\(_{2}\)+Cl\(_{2}\) \( \rightarrow \) 2HCI में \( \Delta H \) = -194 kJ HCI की उत्पादन ऊष्मा है-
(i) + 19 kJ
(ii) + 194 kJ
(iii) – 194 kJ
(iv) – 97 kJ
Answer:
(iv) -97 kJ
In simple words: अभिक्रिया में 2 मोल HCl के लिए \( \Delta H \) -194 kJ है। उत्पादन ऊष्मा 1 मोल HCl के लिए परिभाषित होती है, इसलिए यह मान का आधा होगा और ऊष्मा निर्मुक्त होने के कारण ऋणात्मक रहेगा।

🎯 Exam Tip: उत्पादन ऊष्मा या सम्भवन एन्थैल्पी हमेशा प्रति मोल उत्पाद के लिए व्यक्त की जाती है, इसलिए दी गई अभिक्रिया की एन्थैल्पी को उत्पाद के मोलों की संख्या से विभाजित करना आवश्यक है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. ऊष्मागतिकी से आप क्या समझते हैं?
Answer:
विज्ञान की वह शाखा जिसके अन्तर्गत विभिन्न प्रकार की ऊर्जाओं के मध्य सम्बन्धों तथा उनके अन्तरापरिवर्तनों का अध्ययन किया जाता है, ऊष्मागतिकी कहलाती है।
In simple words: ऊष्मागतिकी विज्ञान की वह शाखा है जो ऊष्मा, कार्य, और ऊर्जा के अन्य रूपों के बीच संबंधों का अध्ययन करती है, और वे रासायनिक अभिक्रियाओं और भौतिक परिवर्तनों में कैसे रूपांतरित होते हैं।

🎯 Exam Tip: ऊष्मागतिकी की परिभाषा को स्पष्ट और संक्षिप्त रखना महत्वपूर्ण है, इसमें ऊर्जा और उसके रूपांतरण के अध्ययन पर जोर देना चाहिए।

 

Question 2. आन्तरिक ऊर्जा से आप क्या समझते हैं?
Answer:
निश्चित परिस्थितियों में किसी निकाय में ऊर्जा की एक निश्चित मात्रा उपस्थित होती है जो उसके पदार्थ की प्रकृति एवं मात्री तथा उसके ताप, दाब और आयतन पर निर्भर करती है। निश्चित परिस्थितियों में किसी निकाय में उपस्थित ऊर्जा की कुल मात्रा उसकी आन्तरिक ऊर्जा E कहलाती है। किसी पदार्थ या निकाय की आन्तरिक ऊर्जा का वास्तविक मान ज्ञात नहीं है, परन्तु किसी भौतिक या रासायनिक प्रक्रम में होने वाले ऊर्जा, परिवर्तन को ज्ञात किया जा सकता है। माना किसी तन्त्र की प्रारम्भिक तथा अन्तिम अवस्थाओं में ऊर्जा क्रमशः E\(_{1}\) व E\(_{2}\) हों तथा ऊर्जा में परिवर्तन \( \Delta E \) हो, तो
\( \Delta E = E_2 – E_1 \)
यदि \( \Delta E \) का मान धनात्मक है तो अभिक्रिया ऊष्माशोषी होगी और यदि \( \Delta E \) का मान ऋणात्मक है तो अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी होगी ।
In simple words: आंतरिक ऊर्जा किसी निकाय के भीतर निहित सभी प्रकार की ऊर्जाओं (गतिज, स्थितिज, कंपन आदि) का योग होती है। इसका निरपेक्ष मान मापना कठिन है, लेकिन परिवर्तन ( \( \Delta E \) ) को मापा जा सकता है और यह निकाय की अवस्था पर निर्भर करता है।

🎯 Exam Tip: आंतरिक ऊर्जा एक अवस्था फलन है; यह केवल निकाय की प्रारंभिक और अंतिम अवस्थाओं पर निर्भर करती है, पथ पर नहीं। यह अवधारणा ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. किसी निकाय को 40 जूल ऊष्मा देने पर निकाय द्वारा 8 जूल कार्य किया गया। निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में वृद्धि ज्ञात कीजिए ।
Answer:
आन्तरिक ऊर्जा में वृद्धि = दी गयी ऊष्मा – किया गया कार्य = 40- 8= 32 जूल ।
In simple words: ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार, निकाय को दी गई ऊष्मा में से निकाय द्वारा किए गए कार्य को घटाने पर उसकी आंतरिक ऊर्जा में शुद्ध वृद्धि प्राप्त होती है।

🎯 Exam Tip: ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम ( \( \Delta U = q + w \) ) को लागू करते समय, ऊष्मा (q) और कार्य (w) के लिए सही चिह्न परिपाटी (दी गई ऊष्मा धनात्मक, निकाय द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक) का उपयोग करें।

 

Question 4. अभिक्रिया ऊष्मा को समझाइए । या अभिक्रिया की ऊष्मा अथवा अभिक्रिया की एन्थैल्पी पर टिप्पणी लिखिए ।
Answer:
अभिक्रिया ऊष्मा, कैलोरी में ऊष्मा की वह मात्रा है जो किसी रासायनिक समीकरण द्वारा प्रकट पदार्थों की ग्राम-अणु मात्राओं की पूर्ण अभिक्रिया होने पर शोषित या उत्पन्न होती है। उदाहरणार्थ-
C+ O\(_{2}\) \( \rightarrow \) CO\(_{2}\) + 94,300 कैलोरी
इस क्रिया की अभिक्रिया ऊष्मा 94300 कैलोरी है।
In simple words: अभिक्रिया ऊष्मा (या एन्थैल्पी) वह ऊष्मा की मात्रा है जो किसी रासायनिक अभिक्रिया के दौरान स्थिर दाब पर अवशोषित या निर्मुक्त होती है। यह अभिक्रिया की प्रगति को मापने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।

🎯 Exam Tip: अभिक्रिया ऊष्मा को अक्सर \( \Delta H \) से दर्शाया जाता है। इसके चिह्न का ध्यान रखें: धनात्मक मान ऊष्माशोषी (ऊष्मा अवशोषित) और ऋणात्मक मान ऊष्माक्षेपी (ऊष्मा निर्मुक्त) अभिक्रिया को इंगित करता है।

 

Question 5. एन्थैल्पी किसे कहते हैं? आन्तरिक ऊर्जा से इसका सम्बन्ध लिखिए।
Answer:
निश्चित दशाओं में निकांय की आन्तरिक ऊर्जा तथा PV ऊर्जा का योग एन्थैल्पी कहलाता है। निकाय की एन्थैल्पी को अन्तर्निहित ऊष्मा अथवा पूर्ण ऊष्मा भी कहते हैं। इसे H से प्रदर्शित करते हैं।
H =U+ PV
जहाँ, H = निकाय की एन्थैल्पी, U = निकाय की आन्तरिक ऊर्जा, P = दाब तथा V = आयतन
In simple words: एन्थैल्पी (H) किसी निकाय की कुल ऊर्जा सामग्री है, जिसमें उसकी आंतरिक ऊर्जा (U) और दाब-आयतन कार्य (PV) शामिल होता है। यह स्थिर दाब पर होने वाले रासायनिक और भौतिक परिवर्तनों के लिए उपयोगी है।

🎯 Exam Tip: एन्थैल्पी एक अवस्था फलन है। \( \Delta H = \Delta U + P\Delta V \) संबंध ऊष्मागतिकी में बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर जब गैसें शामिल हों या दाब-आयतन कार्य महत्वपूर्ण हो।

 

Question 6. ऊष्माक्षेपी तथा ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं को उदाहरण देकर समझाइए ।
Answer:
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया–जिन रासायनिक अभिक्रियाओं में ऊष्मा उत्सर्जित होती है, उन्हें ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ कहते हैं। उदाहरणार्थ-
C(s) + O\(_{2}\)(g) \( \rightarrow \) CO\(_{2}\)(g); \( \Delta H \) =- 94.3kcal (25°C)
यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है जिसमें 25°C और 1 वायुमण्डल दाब पर 94.3 kcal ऊष्मा उत्सर्जित होती है।
ऊष्माशोषी अभिक्रिया-जिन रासायनिक अभिक्रियाओं में ऊष्मा अवशोषित होती है, उन्हें ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ कहते हैं। उदाहरणार्थ-
N\(_{2}\)(g)+O\(_{2}\)(g)-> 2NO(g); \( \Delta H \) = + 43.2kcal (25°C)
यह एक ऊष्माशोषी अभिक्रिया है जिसमें 25°C और 1 वायुमण्डल दाब पर 43.2 kcal ऊष्मा अवशोषित होती है।
In simple words: ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ वे हैं जो ऊर्जा मुक्त करती हैं (उदाहरण के लिए, दहन), जबकि ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ वे हैं जो ऊर्जा अवशोषित करती हैं (उदाहरण के लिए, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन का मिलना)।

🎯 Exam Tip: ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाओं के लिए \( \Delta H \) का चिह्न ऋणात्मक होता है, और ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं के लिए यह धनात्मक होता है। इन चिह्नों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. प्रावस्था रूपान्तरण में एंट्रॉपी किस प्रकार प्रभावित होती है? एक उदाहरण देकर समझाइए।
Answer:
किसी पदार्थ की एंट्रॉपी ठोस अवस्था में न्यूनतम तथा गैस अवस्था में अधिकतम होती है।
S\(_{ठोस}\) पानी की तीनों अवस्थाओं में एंट्रॉपी का क्रम इस प्रकार है
S\(_{बर्फ}\) In simple words: जब कोई पदार्थ ठोस से द्रव या द्रव से गैस में बदलता है, तो उसके कणों की अव्यवस्था और गतिशीलता बढ़ जाती है, जिससे एंट्रॉपी में वृद्धि होती है।

🎯 Exam Tip: यह सामान्य नियम याद रखें कि पदार्थ की अवस्था जितनी कम व्यवस्थित होती है (ठोस < द्रव < गैस), उसकी एंट्रॉपी उतनी ही अधिक होती है।

 

Question 8. ऊर्ध्वपातन ऊष्मा अथवा उर्ध्वपातन एन्थैल्पी क्या है?
Answer:
किसी ठोस पदार्थ के 1 मोल को उसके गलनांक से नीचे ताप पर सीधे वाष्प अवस्था में परिवर्तित होने पर होने वाले एन्थैल्पी परिवर्तन को पदार्थ की ऊर्ध्वपातन ऊष्मा अथवा ऊर्ध्वपातन एन्थैल्पी कहते हैं।
In simple words: ऊर्ध्वपातन एन्थैल्पी वह ऊर्जा है जो ठोस को सीधे गैस में बदलने के लिए आवश्यक होती है, बिना द्रव अवस्था से गुजरे।

🎯 Exam Tip: ऊर्ध्वपातन एन्थैल्पी को अक्सर \( \Delta_{sub}H \) के रूप में दर्शाया जाता है और यह गलन एन्थैल्पी और वाष्पन एन्थैल्पी के योग के बराबर होती है ( \( \Delta_{sub}H = \Delta_{fus}H + \Delta_{vap}H \) )।

 

Question 9. जलयोजन ऊष्मा अथवा जलयोजन एन्थैल्पी से आप क्या समझते हैं?
Answer:
एक मोल अनार्दै लवण के उपयुक्त संख्या में जल के मोलों में संयोजित होकर जलयोजित लवण बनाने में होने वाला एन्थैल्पी परिवर्तन जलयोजन ऊष्मा अथवा जलयोजन एन्थैल्पी कहलाता है।
In simple words: जलयोजन एन्थैल्पी वह ऊष्मा है जो एक मोल निर्जल लवण के जलयोजित लवण बनाने के लिए जल के साथ जुड़ने पर निर्मुक्त या अवशोषित होती है।

🎯 Exam Tip: जलयोजन एन्थैल्पी आमतौर पर एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया होती है (ऋणात्मक \( \Delta H \)), क्योंकि जल के अणुओं और आयनों के बीच नए आबन्ध बनते हैं जिससे ऊर्जा मुक्त होती है।

 

Question 10. संक्रमण ऊष्मा अथवा संक्रमण एन्थैल्पी को परिभाषित कीजिए ।
Answer:
किसी तत्त्व के 1 मोल के एक अपररूप से दूसरे में परिवर्तित होने पर होने वाला एन्थैल्पी परिवर्तन संक्रमण ऊष्मा अथवा संक्रमण एन्थैल्पी कहलाता है।
In simple words: संक्रमण एन्थैल्पी वह ऊर्जा है जो एक तत्व के एक अपररूप (जैसे ग्रेफाइट) को दूसरे अपररूप (जैसे हीरा) में बदलने के लिए आवश्यक होती है।

🎯 Exam Tip: यह एन्थैल्पी केवल उन तत्वों के लिए प्रासंगिक है जिनके एकाधिक अपररूप होते हैं और यह भौतिक परिवर्तन का एक विशेष प्रकार है।

 

Question 11. किसी प्रबल क्षार तथा प्रबल अम्ल की उदासीनीकरण की ऊष्मा स्थिर क्यों होती है?
Answer:
प्रबल क्षार तथा प्रबल अम्लों की उदासीनीकरण ऊष्मा लगभग 13.7 किलोकैलोरी होती है। उदासीनीकरण ऊष्मा का स्थिर मान होना उनके तनु विलयनों में पूर्ण आयनन के कारण है। यदि प्रबल अम्ल HA तथा प्रबल क्षार BOH के ग्राम तुल्यांकी मात्राओं के तेनु विलयनों को मिलाया जाए, तो आयनिक सिद्धान्त के अनुसार,
उपर्युक्त समीकरणों से स्पष्ट है कि उदासीनीकरण ऊष्मा किसी अम्ल से उत्पन्न H\(^{+}\) आयनों तथा क्षार से उत्पन्न OH\(^{-}\) आयनों के संयोग से बने जल की उत्पन्न ऊष्मा है; अतः उदासीनीकरण ऊष्मा जल की हाइड्रोजन तथा हाइड्रॉक्सिल आयनों से उत्पादन ऊष्मा के बराबर होती है। इस प्रकार, जल की उत्पादन ऊष्मा का मान सदैव लंगभग 13.7 किलोकैलोरी होता है; अतः उदासीनीकरण ऊष्मा का मान प्रबल अम्ल तथा प्रबल क्षार के लिए स्थिर रहता है।
In simple words: प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार के उदासीनीकरण की ऊष्मा स्थिर होती है क्योंकि इन अभिक्रियाओं में मुख्य रूप से \( H^+ \) और \( OH^- \) आयनों का जल बनाने के लिए संयोजन होता है, और यह प्रक्रिया हमेशा समान ऊर्जा मुक्त करती है।

🎯 Exam Tip: यह याद रखें कि प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार के पूर्ण आयनीकरण के कारण, उदासीनीकरण में सिर्फ जल के निर्माण की अभिक्रिया होती है, जो ऊर्जा का एक स्थिर मान देती है।

 

Question 12. CH\(_{4}\)(g), C(s) और H\(_{2}\)(g) की 25°C पर दहन ऊष्माएँ क्रमशः -212.8 kcal, 940 kcal और – 68.4 kcal हैं। मेथेन गैस की संभवन ऊष्मा \( \Delta_f H \) की गणना कीजिए ।
Answer:
दहन अभिक्रिया समीकरण -
CH\(_{4}\)(g)+2O\(_{2}\) (g) \( \rightarrow \) CO\(_{2}\)(g) + 2H\(_{2}\)O(l); \( \Delta H \) = – 212.8kcal ...(i)
C(s)+O\(_{2}\)(g) \( \rightarrow \) CO\(_{2}\)(g); \( \Delta H \) = – 94 kcal ...(ii)
H\(_{2}\)(g)+\(\frac{1}{2}\)O\(_{2}\)(g) \( \rightarrow \) H\(_{2}\)O(l); \( \Delta H \) = – 68.4kcal ...(iii)
समी० (iii) में 2 की गुणा करके समी० (ii) में जोड़कर उसमें से समी० (i) घटाने पर,
C(s)+O\(_{2}\)(g)+2H\(_{2}\)(g)+O\(_{2}\)(g)-CH\(_{4}\)(g)-2O\(_{2}\)(g)\( \rightarrow \)
CO\(_{2}\) + 2H\(_{2}\)O-CO\(_{2}\) - 2H\(_{2}\)O
C+2H\(_{2}\) \( \rightarrow \) CH\(_{4}\)
\( \Delta H \) = -94 + 2(-68.4) - (-212.8) = -18 kcal
In simple words: हेस के नियम का उपयोग करके, कार्बन और हाइड्रोजन के दहन की एन्थैल्पी को उपयुक्त रूप से जोड़कर और मेथेन के दहन की एन्थैल्पी को घटाकर मेथेन के निर्माण की एन्थैल्पी प्राप्त की जाती है।

🎯 Exam Tip: हेस के नियम को लागू करते समय, अभिक्रियाओं को जोड़ते, घटाते या गुणा करते समय एन्थैल्पी मानों पर उचित संक्रियाएँ लागू करना सुनिश्चित करें।

 

Question 13. निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर मेथेन की दहन ऊष्मा की गणना कीजिए-
C\(_{2}\) + 2H\(_{2}\) \( \rightarrow \) CH\(_{4}\);\( \Delta H \) = x kJ ............(i)
C + O\(_{2}\)\( \rightarrow \) CO\(_{2}\); \( \Delta H \) = y kJ .......(ii)
H\(_{2}\) +\( \frac{1}{2} \)O\(_{2}\) \( \rightarrow \) H\(_{2}\)O; \( \Delta H \)= kJ ......(iii)
मेथेन की दहन ऊष्मा का समीकरण है
CH\(_{4}\)+ 2O\(_{2}\) + CO\(_{2}\) + 2H\(_{2}\)O
Answer:
समीकरण (iii) को 2 से गुणा करके, समीकरण (ii) में जोड़कर फिर उसमें समीकरण (i) को उल्टा करके जोड़ने पर,
2H\(_{2}\)+O\(_{2}\)\( \rightarrow \) 2H\(_{2}\)O; \( \Delta H \) = 2 z kJ
C+O\(_{2}\)\( \rightarrow \)CO\(_{2}\); \( \Delta H \) = y kJ
CH\(_{4}\)\( \rightarrow \)C+2H\(_{2}\); \( \Delta H \) = -x kJ
CH\(_{4}\)+2O\(_{2}\)\( \rightarrow \) 2H\(_{2}\)O+CO\(_{2}\); \( \Delta H \) = (2z + y –x) kJ
.. मेथेन की दहन ऊष्मा (2z+y-x) kJ है।
In simple words: हेस के नियम का उपयोग करके, ज्ञात अभिक्रियाओं (मेथेन के निर्माण, कार्बन और हाइड्रोजन के दहन) की एन्थैल्पी मानों को जोड़कर और घटाकर मेथेन की दहन ऊष्मा की गणना की जाती है।

🎯 Exam Tip: हेस के नियम को लागू करते समय, लक्ष्य अभिक्रिया प्राप्त करने के लिए प्रत्येक ज्ञात अभिक्रिया को पलटना, गुणा करना या जोड़ना सीखें और उसी के अनुसार उसके \( \Delta H \) मानों को समायोजित करें।

 

Question 14. स्थिर दाब एवं 17°C पर एथिलीन की उत्पादन ऊष्मा – 2.71 किलोकैलोरी है। स्थिर आयतन पर इसकी उत्पादन ऊष्मा ज्ञात कीजिए । R = 0.002 Kcal तथा
2C(s) + 2H\(_{2}\)(g) \( \rightarrow \) C\(_{2}\)H\(_{4}\)(g)
Answer:
C\(_{2}\)H\(_{4}\) के उत्पादन अभिक्रिया की समीकरण निम्नलिखित है -
2C(s) + 2H\(_{2}\)(g) \( \rightarrow \) C\(_{2}\)H\(_{4}\)(g); \( \Delta H \) = - 2710 कैलोरी
\( \Delta H = \Delta U + \Delta n RT \)

\( \implies \Delta U = \Delta H – \Delta n RT \)
\( \Delta n=1-2=-1 \)
R = 2 कैलोरी प्रति मोल प्रति डिग्री कैल्विन
T = 273 +17=290° K, \( \Delta H \) = – 2710 कैलोरी
\( \Delta U \) = – 2710-2 \( \times \) (-1) \( \times \) (290) = – 2130 कैलोरी
In simple words: स्थिर दाब पर उत्पादन ऊष्मा ( \( \Delta H \) ) से स्थिर आयतन पर उत्पादन ऊष्मा ( \( \Delta U \) ) की गणना के लिए, गैसीय मोलों की संख्या में परिवर्तन ( \( \Delta n \) ), गैस स्थिरांक (R) और तापमान (T) का उपयोग करते हुए \( \Delta H = \Delta U + \Delta n RT \) सूत्र का प्रयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करें कि \( \Delta n \) की गणना करते समय केवल गैसीय पदार्थों के मोलों पर विचार किया जाए और R के मान की इकाइयाँ अन्य ऊष्मागतिकी मानों के साथ संगत हों।

 

Question 15.CO (g), CO2 (g) और H2O(g) की संभवन ऊष्माएँ क्रमशः -25.7,-93.2 तथा -56.4 kcal हैं। निम्नलिखित अभिक्रिया की अभिक्रिया ऊष्मा की गणना कीजिए- CO2 (g)+H2(g) → CO(g) + H2O (g)
Answer:समीकरण (i), (ii) और (iii) का उपयोग करके वांछित अभिक्रिया की ऊष्मा की गणना की जा सकती है: 1 C+\(\frac{1}{2}\)O2 → CO; \(\Delta H\) = -25.7 kcal C+O2 → CO2; \(\Delta H\) = -93.2 kcal 1 H2+\(\frac{1}{2}\)O2 → H2O; \(\Delta H\) = -56.4 kcal CO2(g)+H2(g) → CO(g) + H2O(g) अभिक्रिया की अभिक्रिया ऊष्मा = (-25.7) + (-56.4)+ 93.2 = + 11.1 kcal
In simple words: इस प्रश्न में विभिन्न यौगिकों की संभवन ऊष्माओं का उपयोग करके एक लक्ष्य अभिक्रिया की अभिक्रिया ऊष्मा (एन्थैल्पी) की गणना की जाती है, जिसमें समीकरणों को हेस के नियम के अनुसार जोड़ा और घटाया जाता है।

🎯 Exam Tip: हेस के नियम के अनुप्रयोग में अभिक्रियाओं को उचित गुणांकों से गुणा करके और फिर उन्हें जोड़कर या घटाकर लक्ष्य समीकरण प्राप्त करना महत्वपूर्ण है। दिए गए \(\Delta H\) मानों के चिह्नों का सही उपयोग करें।

 

Question 16. हेस का स्थिर ऊष्मा संकलन का नियम क्या है? उदाहरण देकर समझाइए ।
Answer: हेस का स्थिर ऊष्मा योग नियम-यदि एक ही रासायनिक परिवर्तन एक या अधिक विधियों से, एक या अधिक पदों में पूर्ण किया जाये, तो पूर्ण परिवर्तन में उत्पन्न या शोषित ऊष्मा समान होती है। चाहे परिवर्तन किसी भी विधि से पूर्ण किया गया हो। उदाहरणार्थ- C(s) + O2(g) → CO2(g) + 94 kcal इस अभिक्रिया को दो पदों में करने पर- C(s) +\(\frac{1}{2}\) O2 (g) → CO(g)+ 264 kcal CO(g) +\(\frac{1}{2}\)O2(g) → CO2(g) + 67.6 kcal इन दोनों समीकरणों को जोड़ने पर- C(s) +O2(g) → CO2(g)+ 94 kcal इस प्रकार प्रत्येक दशा में एक मोल कार्बन के दहन से 94kcal ऊष्मा उत्सर्जित होती है। यह तथ्य हेस के नियम की पुष्टि करता है।
In simple words: हेस का नियम कहता है कि किसी रासायनिक अभिक्रिया का कुल एन्थैल्पी परिवर्तन हमेशा समान होता है, भले ही अभिक्रिया एक चरण में हो या कई चरणों में, क्योंकि एन्थैल्पी एक अवस्था फलन है।

🎯 Exam Tip: हेस के नियम को परिभाषित करते समय "अवस्था फलन" शब्द का प्रयोग करें और उदाहरण में दिखाए गए अनुसार ऊर्जा के संरक्षण को स्पष्ट करें।

 

Question 17. हेस के नियम का उघ्रयोग' अपररूपों की रूपान्तरण ऊष्माओं की गणना करने में किस प्रकार किया जाता है?
Answer: किसी तत्त्व के एक अपरखप से दूसरे अपररूप में स्थानान्तरण होने में उत्सर्जित या अवशोषित ऊष्मा की मात्रा का निर्धारण प्रयोग द्वारा नहीं किया जा सकता है क्योंकि सामान्यतः केवल ताप बदलने से एक अपररूप दूसरे अपररूप में परिवर्तित नहीं होता है। अपररूपों की दहन ऊष्माओं का मान प्रयोग द्वारा प्राप्त कर लेते हैं। माना कार्बन के दोनों अपररूपों Caiamond एवं Canhite की दहन ऊष्माएँ a तथा b हैं- Cdiamond +O2 → CO2(g); \(\Delta H\) = a kcal ...(i) Cgraphite +O2 → CO2(g); \(\Delta H\) = b kcal...(ii) समी॰ (i) - समी० (ii) करने पर Cdiamond - Cgraphite \(\Delta H\) =a-b kcal
In simple words: हेस के नियम का उपयोग अपररूपों के बीच ऊर्जा परिवर्तन की गणना के लिए किया जाता है। चूंकि एक अपररूप से दूसरे अपररूप में सीधा रूपांतरण मापना मुश्किल है, इसलिए उनके दहन की ऊष्मा का उपयोग करके अप्रत्यक्ष रूप से रूपांतरण ऊष्मा ज्ञात की जाती है।

🎯 Exam Tip: अपररूपों की रूपांतरण ऊष्मा की गणना के लिए हेस के नियम का उपयोग करते समय, यह सुनिश्चित करें कि आप रूपांतरित होने वाले पदार्थों के दहन एन्थैल्पी का सही उपयोग करें और समीकरणों को तदनुसार समायोजित करें।

 

Question 18. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए
(i) उत्पादन यो सम्भवन ऊष्मा,
(ii) दहन ऊष्मा
Answer:(i) उत्पादन या सम्भवन ऊष्मा-किसी यौगिक के अपने तत्त्वों से एक ग्राम-अणु बनाने में जितनी ऊष्मा की मात्रा उत्पन्न या अवशोषित होती है, वह उस यौगिक की उत्पादन यो सम्भवन ऊष्मा कहलाती है; जैसे- C+O2 → CO2 + 94,300 cal C+ 2S → CS2 -19,800 cal CO2 तथा CS2 की उत्पादन ऊष्माएँ क्रमशः 94,300 कैलोरी और -19,800 कैलोरी हैं।
(ii) दहन ऊष्मा-किसी यौगिक या तत्त्व के एक ग्राम-अणु के पूर्ण दहन पर जो ऊष्मा उत्पन्न होती है, वह उसकी दहन ऊष्मा कहलाती है; जैसे CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O+ 21,000 कैलोरी C+O2 → CO2 +94,300 कैलोरी अतः मेथेन तथा कार्बन की दहन ऊष्माएँ क्रमशः 21,000 तथा 94,300 कैलोरी हैं।
In simple words: उत्पादन ऊष्मा एक यौगिक के अपने मूल तत्वों से बनने पर होने वाला ऊर्जा परिवर्तन है, जबकि दहन ऊष्मा एक पदार्थ के ऑक्सीजन में पूर्ण दहन पर निकलने वाली ऊर्जा है।

🎯 Exam Tip: उत्पादन और दहन ऊष्मा की परिभाषाओं को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें, यह सुनिश्चित करते हुए कि ऊर्जा के उत्सर्जित या अवशोषित होने के चिह्न सही हों।

 

Question 19. स्वतः प्रवर्तित व स्वतः अप्रवर्तित प्रक्रम से आप क्या समझते हैं?
Answer: स्वतः प्रवर्तित प्रक्रम-ऐसे प्रक्रम जो कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में अपने आप या एक बार प्रारम्भ करने के पश्चात् अपने आप होते रहते हैं, स्वतः प्रवर्तित प्रक्रम कहलाते हैं। स्वतः अप्रवर्तित प्रक्रम-ऐसे प्रक्रम जो न तो अपने आप और न ही एक बार प्रारम्भ करने के पश्चात् हो सकते हैं, स्वतः अप्रवर्तित प्रक्रम कहलाते हैं।
In simple words: स्वतः प्रवर्तित प्रक्रम वे होते हैं जो बाहरी हस्तक्षेप के बिना स्वयं होते रहते हैं, जबकि स्वतः अप्रवर्तित प्रक्रम वे होते हैं जिन्हें निरंतर बाहरी ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

🎯 Exam Tip: स्वतः प्रवर्तित और स्वतः अप्रवर्तित प्रक्रमों को परिभाषित करते समय, "स्वयं" या "बाहरी हस्तक्षेप के बिना" जैसे वाक्यांशों का उपयोग करें।

 

Question 20. एंट्रॉपी पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: किसी निकाय की एंट्रॉपी उस निकाय की अव्यवस्था या यादृच्छिकता की मात्रा की माप है। इसे S से प्रदर्शित करते हैं। निकाय की अव्यवस्था बढ़ने पर एंट्रॉपी बढ़ जाती है। एक निश्चित ताप पर निकाय की एंट्रॉपी परिवर्तित होती है। अवस्था परिवर्तन पर एंट्रॉपी परिवर्तित होती है। एंट्रॉपी परिवर्तन को \(\Delta S\) से प्रदर्शित करते हैं। \(\Delta S\) = S2 - S1 (जहाँ S2 तथा S1 अन्तिम तथा प्रारम्भिक अवस्था की एंट्रॉपी हैं ।)
In simple words: एंट्रॉपी किसी निकाय में अव्यवस्था या बेतरतीबी की माप है; जितनी अधिक अव्यवस्था होगी, उतनी ही अधिक एंट्रॉपी होगी।

🎯 Exam Tip: एंट्रॉपी को परिभाषित करते समय, इसे "अव्यवस्था" या "यादृच्छिकता" से जोड़ना महत्वपूर्ण है और यह भी बताएं कि यह एक अवस्था फलन है जिसे \(\Delta S\) द्वारा दर्शाया जाता है।

 

Question 21. एंट्रॉपी पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: निकाय का ताप बढ़ने पर एंट्रॉपी बढ़ जाती है। एक निश्चित ताप पर एंट्रॉपी निश्चित होती है। तथा ताप परिवर्तन पर एंट्रॉपी परिवर्तित होती है।
In simple words: जैसे-जैसे किसी निकाय का तापमान बढ़ता है, उसके कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ती है, जिससे उनकी अव्यवस्था बढ़ती है और परिणामस्वरूप एंट्रॉपी भी बढ़ जाती है।

🎯 Exam Tip: ताप और एंट्रॉपी के सीधे संबंध को स्पष्ट करें, अर्थात् ताप बढ़ने पर एंट्रॉपी बढ़ती है, क्योंकि उच्च ताप पर कणों की गतिज ऊर्जा अधिक होती है।

 

Question 22.रासायनिक परिवर्तनों में एंट्रॉपी परिवर्तन के चिह्न का अनुमान किस प्रकार लगाया जाता है? एक उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए ।
Answer: वे प्रक्रम जिनमें \(\Delta S\) एंट्रॉपी परिवर्तन का मान धनात्मक होता है अर्थात् जिनमें एंट्रॉपी बढ़ती है । वे स्वतः प्रवर्तित प्रक्रम हैं, जैसे- बर्फ का पिघलना, लवणों की ऊष्माशोषी इत्यादि ।
In simple words: रासायनिक परिवर्तनों में एंट्रॉपी परिवर्तन के चिह्न का अनुमान लगाने के लिए, हम उत्पाद और अभिकारकों की अव्यवस्था की तुलना करते हैं; यदि उत्पाद अधिक अव्यवस्थित हैं, तो एंट्रॉपी बढ़ती है (\(\Delta S\) धनात्मक)।

🎯 Exam Tip: एंट्रॉपी परिवर्तन के चिह्न का निर्धारण करते समय, यह ध्यान दें कि क्या अभिक्रिया में ठोस या तरल से गैस बनती है, या यदि अणुओं की संख्या बढ़ती है, तो एंट्रॉपी बढ़ने की संभावना है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. निकाय, परिवेश तथा परिसीमा को परिभाषित कीजिए। उदाहरण भी दीजिए।
Answer: निकाय-ब्रह्माण्ड का वह भाग जो ऊष्मागतिक अध्ययन के लिए चुना जाता है अर्थात् जिस पर प्रेक्षण होते हैं, निकाय कहलाता है। परिवेश-निकाय को छोड़कर ब्रह्माण्ड का शेष भाग परिवेश कहलाता है। परिसीमा-निकाय तथा परिवेश के मध्य एक वास्तविक या काल्पनिक परिसीमा होती है जो दोनों को एक-दूसरे से पृथक् करती है। उदाहरणार्थ-जब हम बीकर में NaOH तथा HCl की अभिक्रिया का अध्ययन करते हैं तो अभिक्रिया मिश्रण निकाय, बीकर परिसीमा तथा बीकर के बाहर का सम्पूर्ण भाग निकाय को परिवेश होता है।
In simple words: निकाय वह विशिष्ट भाग है जिसका हम अध्ययन करते हैं, परिवेश वह सब कुछ है जो निकाय के बाहर है, और परिसीमा वह सीमा है जो निकाय और परिवेश को अलग करती है।

🎯 Exam Tip: इन तीनों शब्दों को परिभाषित करते समय, एक स्पष्ट उदाहरण देना महत्वपूर्ण है जो तीनों घटकों को आसानी से पहचान सके।

 

Question 2. निकाय तथा परिवेश के मध्य द्रव्य एवं ऊर्जा के विनिमय के आधार पर निकाय को वर्गीकृत कीजिए ।
Answer: निकाय तथा परिवेश के मध्य द्रव्य एवं ऊर्जा के विनिमय के आधार पर निकाय को निम्नलिखित तीन वर्गों में बाँटा जा सकता है-
(i) विवृत निकाय या खुला निकाय - जो निकाय अपने परिवेश के साथ द्रव्य तथा ऊर्जा दोनों का विनिमय कर सकता है, विवृत निकाय या खुला निकाय कहलाता है। उदाहरणार्थ-खुले बीकर में लिया गया जल। यह परिवेश से द्रव्य (वाष्प) तथा ऊर्जा (ऊष्मा) दोनों का ही विनिमय कर सकता है।
(ii) संवृत निकाय या बन्द निकाय - जो निकाय अपने परिवेश के साथ ऊर्जा का तो विनिमय कर सकता है परन्तु द्रव्य का नहीं कर सकता, संवृत निकाय या बन्द निकाय कहलाता है। उदाहरणार्थ-किसी बन्द धात्विक पात्र में लिया गया जल । पात्र की दीवारों के माध्यम से निकाय तथा परिवेश के मध्य ऊर्जा (ऊष्मा) का तो विनिमय हो सकता है परन्तु चूंकि पात्र बन्द है इसलिए निकाय तथा परिवेश के मध्य द्रव्य का विनिमय नहीं हो सकता।
(iii) विमुक्त निकाय या विलगित निकाय - जो निकाय अपने परिवेश के साथ न तो ऊर्जा का विनिमय कर सकता है और न ही द्रव्य का, विमुक्त निकाय या विलगित निकाय कहलाता है। उदाहरणार्थ-एक ऊष्मारोधी तथा बन्द पात्र में लिया गया जल। यह अपने परिवेश में न तो ऊर्जा का विनिमय कर सकता है और न ही द्रव्य का।
In simple words: निकाय को परिवेश के साथ द्रव्य और ऊर्जा के आदान-प्रदान के आधार पर खुला (दोनों का आदान-प्रदान), बंद (केवल ऊर्जा का आदान-प्रदान) या विलगित (किसी का आदान-प्रदान नहीं) वर्गीकृत किया जाता है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार के निकाय की परिभाषा के साथ एक स्पष्ट और पहचानने योग्य उदाहरण अवश्य दें, जो द्रव्य और ऊर्जा के विनिमय के अंतर को दर्शाता हो।

 

Question 3. संघटन के आधार पर निकाय कितने प्रकार के होते हैं? प्रत्येक का संक्षिप्त वर्णन कीजिए ।
Answer: संघटन के आधार पर निकाय निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं
(i) समांगी निकाय - वह निकाय जिसकी प्रकृति सर्वत्र समान होती है, समांगी निकाय कहलाता है। यह केवल एक प्रावस्था का बना होता है। उदाहरणार्थ-शुद्ध ठोस; जैसे-सोडियम क्लोराइड, शुद्ध गैस; जैसे-ऑक्सीजन, वास्तविक विलयन; जैसे-चीनी का जल में विलयन आदि ।
(ii) विषमांगी निकाय-वह निकाय जिसकी प्रकृति सर्वत्र समान नहीं होती है, विषमांगी निकाय कहलाता है। इसमें एक से अधिक प्रावस्थाएँ होती हैं। उदाहरणार्थ-जल तथा वाष्प, बर्फ तथा जल, जल तथा तेल आदि।
In simple words: संघटन के आधार पर निकाय दो प्रकार के होते हैं: समांगी, जिसमें पूरे निकाय में एक समान संघटन होता है, और विषमांगी, जिसमें भिन्न-भिन्न संघटन वाले कई प्रावस्थाएं होती हैं।

🎯 Exam Tip: समांगी और विषमांगी निकायों को उदाहरणों के साथ समझाएं, यह स्पष्ट करते हुए कि "प्रावस्था" का अर्थ क्या है (एक समान भौतिक और रासायनिक गुण वाला क्षेत्र)।

 

Question 4. विस्तीर्ण गुण तथा गहन गुण से आप क्या समझते हैं?
Answer: विस्तीर्ण गुण तथा गहन; गुण का वर्णन निम्नवत् है-
(i) विस्तीर्ण गुणवे गुण जो निकाय में उपस्थित पदार्थ (पदार्थों) की मात्रा पर निर्भर करते हैं।, विस्तीर्ण गुण कहलाते हैं। उदाहरणार्थ-द्रव्यमान, आयतन, ऊष्मा धारिता, आन्तरिक ऊर्जा, एन्ट्रॉपी, गिब्ज़ मुक्त ऊर्जा, पृष्ठ क्षेत्रफल आदि । ये गुण निकाय में उपस्थित पदार्थ की मात्रा के साथ बदलते रहते हैं। यदि हम अपनी सुविधानुसार निकाय को विभिन्न भागों में बाँट दें तो पदार्थ के विस्तीर्ण गुण का कुल मान उन भागों के विस्तीर्ण गुण के योग के बराबर होता है।
(ii) गहन गुण-वे गुण जो निकाय में उपस्थित पदार्थ (पदार्थों) की मात्रा पर निर्भर नहीं करते हैं। गहन गुण कहलाते हैं। ये केवल पदार्थ (पदार्थों) की प्रकृति पर निर्भर करते हैं। ताप, दाब, घनत्व, श्यानता, पृष्ठ तनाव, गलनांक, क्वथनांक आदि ऐसे गुणों के उदाहरण हैं। दो विस्तीर्ण गुणों का अनुपात गहन होता हैं। इसलिए जब हम किसी पदार्थ की इकाई मात्रा के लिए किसी विस्तीर्ण गुण की बात करते हैं तो वह गहन गुण बन जाता है। उदाहरणार्थ-द्रव्यमान द्रव्यं की मात्रा पर निर्भर करता है अर्थात् यह एक विस्तीर्ण गुण है। परन्तु द्रव्यमान प्रति इकाई आयतन अर्थात् घनत्व एक गहन गुण है जो पदार्थ की मात्रा पर निर्भर नहीं करता है।
In simple words: विस्तीर्ण गुण वे होते हैं जो पदार्थ की मात्रा पर निर्भर करते हैं (जैसे द्रव्यमान), जबकि गहन गुण वे होते हैं जो पदार्थ की मात्रा पर निर्भर नहीं करते हैं (जैसे तापमान)।

🎯 Exam Tip: विस्तीर्ण और गहन गुणों की परिभाषा देते समय, प्रत्येक श्रेणी के लिए कम से कम तीन उदाहरण देना सुनिश्चित करें, जो उनके बीच के अंतर को स्पष्ट करते हैं।

 

Question 5. ऊष्मागतिक साम्य का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। या ऊष्मागतिकी का शून्य नियम क्या है?
Answer: जब किसी निकाय के स्थूल गुणों; जैसे-ताप, दाब आदि में समय के साथ कोई परिवर्तन नहीं होता है तो निकाय ऊष्मागतिक साम्य में कहलाता है। वास्तव में यह साम्य तभी प्राप्त होता है जब तीन साम्य एक साथ प्राप्त होते हैं। ये तीन साम्य निम्नवत् हैं-
(i) यांत्रिक साम्य-जब निकाय के अन्दर कोई स्थूल गति न हो या निकाय की परिवेश के सापेक्ष - कोई गति न हो तो निकाय यांत्रिक साम्य की स्थिति में कहलाता है। इसके लिए निकाय के यांत्रिक गुण एक समान तथा स्थिर होने चाहिए ।
(ii) रासायनिक साम्य-एक से अधिक पदार्थों वाला ऐसा निकाय जिसका संघटन समय के साथ परिवर्तित नहीं होता है, रासायनिक साम्य की अवस्था में कहलाता है।
(iii) तापीय साम्य-जब किसी निकाय का ताप एक समान होता है तथा वह परिवेश के ताप के भी। समान होता है तो निकाय तापीय साम्य की अवस्था में कहलाता है। माना हमारे पास तीन निकाय A, B तथा C इस प्रकार हैं-A तथा B और B तथा C तापीय साम्य में हैं तब निकाय A तथा C भी तापीय साम्य में होंगे। यही ऊष्मागतिकी का शून्य नियम कहलाता है। इस नियम के अनुसार, “दो निकाय जो किसी तीसरे निकाय से तापीय साम्य में होते हैं उनमें आपस में भी तापीय साम्य होता है।”
In simple words: ऊष्मागतिक साम्य तब होता है जब एक निकाय में यांत्रिक, रासायनिक और तापीय साम्य एक साथ मौजूद होते हैं, जिसका अर्थ है कि उसके स्थूल गुणों में समय के साथ कोई परिवर्तन नहीं होता। शून्य नियम बताता है कि यदि दो निकाय तीसरे निकाय के साथ तापीय साम्य में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे।

🎯 Exam Tip: ऊष्मागतिक साम्य की व्याख्या करते समय तीनों प्रकार के साम्य (यांत्रिक, रासायनिक, तापीय) का उल्लेख करना और प्रत्येक को संक्षेप में समझाना महत्वपूर्ण है। शून्य नियम की परिभाषा को भी सटीक रूप से लिखें।

 

Question 6. ऊष्मा क्या है? इसके मात्रक तथा इसके लिए चिह्न परिपाटी के नियम लिखिए।
Answer: ऊष्मा-निकाय तथा परिवेश के मध्य ऊष्मा के रूप में ऊर्जा तब स्थानान्तरित होती है जब निकाय तथा परिवेश में तापान्तर होता है। यदि निकाय का ताप अधिक होता है तो निकाय परिवेश को ऊष्मा के रूप में ऊर्जा स्थानान्तरित करता है जिससे निकाय का ताप कम हो जाता है तथा परिवेश का ताप बढ़ जाता है। यह ऊर्जा स्थानान्तरण तब तक होता है जब तक कि निकाय और परिवेश का ताप समान नहीं हो जाता। यदि निकाय को ताप परिवेश के ताप से कम होता है तो ऊष्मा के रूप में ऊर्जा परिवेश से निकाय में स्थानान्तरित होती है जिससे निकाय का ताप बढ़ जाता है तथा परिवेश का ताप कम हो जाती है। ऊर्जा का यह स्थानान्तरण तब तक होता है जब तक परिवेश तथा निकाय का ताप समान नहीं हो जाता। ऊष्मा को q द्वारा निरूपित करते हैं। मात्रक-ऊष्मा को सामान्यतः कैलोरी में मापा जाता है। S.I. पद्धति में ऊष्मा का मात्रक जूल होता है। चिह्न परिपाटी-निकाय द्वारा अवशोषित ऊष्मा धनात्मक होती है जबकि निकाय द्वारा निष्कासित ऊष्मा ऋणात्मक होती है।
In simple words: ऊष्मा ऊर्जा का वह रूप है जो तापमान के अंतर के कारण निकाय और परिवेश के बीच स्थानांतरित होती है; यह कैलोरी या जूल में मापी जाती है, जिसमें अवशोषित ऊष्मा धनात्मक और निष्कासित ऊष्मा ऋणात्मक होती है।

🎯 Exam Tip: ऊष्मा की परिभाषा में तापमान अंतर के महत्व को उजागर करें। मात्रक (कैलोरी, जूल) और चिह्न परिपाटी (\(+\)अवशोषित, \(-\)निष्कासित) को स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 7.ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम का गणितीय निगमन कीजिए। या ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम क्या है? इसके गणितीय रूप का व्यंजक लिखिए । एन्थैल्पी तथा ऊर्जा परिवर्तन में क्या सम्बन्ध है?
Answer: ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के व्यंजक को प्राप्त करने के लिए एक ऐसे निकाय पर विचार करते हैं जिसकी आन्तरिक ऊर्जा U1 है । इस निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में वृद्धि दो विधियों द्वारा की जा सकती है-
(i) निकाय को ऊष्मा देकर तथा
(ii) निकाय पर कार्य करके । यदि निकाय 'q' ऊष्मा अवशोषित करता है तो, निकाय की आन्तरिक ऊर्जा = U1 + q अब यदि निकाय पर w कार्य किया जाता है जिससे उसकी आन्तरिक ऊर्जा U2 हो जाती है। तब U2=U1+q+w या U2-U1=q+w या \(\Delta U\) = q + w ...(1) यदि कार्य प्रसरण का कार्य है तब w= - \(\Delta PV\) जहाँ, P = बाह्य दाब तथा \(\Delta V\) = आयतन में परिवर्तन w का यह मान समीकरण (1) में रखने पर, \(\Delta U\) = q - \(\Delta PV\) या q= \(\Delta U\) + \(\Delta PV\)
In simple words: ऊष्मागतिकी का पहला नियम ऊर्जा के संरक्षण का सिद्धांत है, जिसमें कहा गया है कि किसी निकाय की आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन (\(\Delta U\)) निकाय को दी गई ऊष्मा (q) और निकाय पर किए गए कार्य (w) के योग के बराबर होता है (\(\Delta U = q + w\))।

🎯 Exam Tip: ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के गणितीय व्यंजक \(\Delta U = q + w\) को स्पष्ट रूप से लिखें और कार्य (w) के लिए \(- P\Delta V\) के संबंध को भी दर्शाएं।

 

Question 8. एन्थैल्पी परिवर्तन तथा एन्थैल्पी परिवर्तन की चिह्न परिपाटी को समझाइए ।
Answer: एन्थैल्पी परिवर्तन-स्थिर दाब पर किसी निकाय द्वारा अवशोषित अथवा उत्सर्जित ऊष्मा निकाय का एन्थैल्पी परिवर्तन कहलाता है। इसे \(\Delta H\) से प्रदर्शित करते हैं। एन्थैल्पी परिवर्तन की चिह्न परिपाटी-ऊष्माक्षेपी प्रक्रमों के लिए एन्थैल्पी परिवर्तन ऋणात्मक जबकि ऊष्माशोषी प्रक्रमों के लिए एन्थैल्पी परिवर्तन धनात्मक होता है।
In simple words: एन्थैल्पी परिवर्तन (\(\Delta H\)) स्थिर दाब पर किसी अभिक्रिया में होने वाला ऊष्मा परिवर्तन है। यदि ऊष्मा उत्सर्जित होती है तो \(\Delta H\) ऋणात्मक होता है (ऊष्माक्षेपी), और यदि ऊष्मा अवशोषित होती है तो \(\Delta H\) धनात्मक होता है (ऊष्माशोषी)।

🎯 Exam Tip: एन्थैल्पी परिवर्तन की परिभाषा में "स्थिर दाब" शर्त का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है, और साथ ही ऊष्माक्षेपी और ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं के लिए चिह्न परिपाटी को स्पष्ट करें।

 

Question 9. अभिक्रिया की एन्थैल्पी को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
Answer: अभिक्रिया की एन्थैल्पी निम्न कारकों द्वारा प्रभावित होती है-
(i) अभिकारकों की मात्रा-अभिक्रिया की एन्थैल्पी अभिकारकों की मात्रा पर निर्भर करती है। यदि अभिकारकों की मात्रा दोगुनी कर दी जाए तो अभिक्रिया की एन्थैल्पी भी दोगुनी हो जाती है। इसी प्रकार यदि अभिकारकों की मात्रा दस गुनी कर दी जाए तो अभिक्रिया की एन्थैल्पी भी दस गुनी हो जाती है।
(ii) अभिकारकों तथा उत्पादों की भौतिक अवस्थाएँ-अभिकारकों तथा उत्पादों की भौतिक | अवस्था में परिवर्तन के साथ ही अभिक्रिया की एन्थैल्पी का मान भी बदल जाता है।
(iii) ताप-अभिक्रिया की एन्थैल्पी का मान अभिकारकों और उत्पादों के ताप पर भी निर्भर करता है।
(iv) अपररूप-विभिन्न अपररूपों (allotropes) के लिए भी \(\Delta H\) के मान भिन्न-भिन्न होते हैं। उदाहरणार्थ- S(रॉम्बिक) +O2 (g) → SO2(g); \(\Delta H\) = -297.0 kJ mol-1 S (मोनोक्लीनिक) +O2 (g) -> SO2 (g); \(\Delta H\) = -297.3 kJ mol-1 C (ग्रेफाइट) +O2 (g) →CO2 (g); \(\Delta H\) = -393.5 kJ mol-1 C (डायमंड) +O2 (g) → CO2 (g); \(\Delta H\) = -395.4 kJ mol-1
(v) विलयनों की सान्द्रता-यदि अभिक्रिया में विलयन भी भाग लेते हैं तो उनकी सान्द्रता भी अभिक्रिया की एन्थैल्पी को प्रभावित करती है।
(vi) स्थिर दाब अथवा स्थिर आयतन की दशाएँ-अभिक्रिया की एन्थैल्पी इससे भी प्रभावित होती है कि अभिक्रिया स्थिर दाब पर होती है अथवा स्थिर आयतन पर।
In simple words: अभिक्रिया की एन्थैल्पी अभिकारकों की मात्रा, उनकी भौतिक अवस्था, तापमान, अपररूपों की प्रकृति, विलयनों की सान्द्रता और अभिक्रिया के स्थिर दाब या स्थिर आयतन पर होने पर निर्भर करती है।

🎯 Exam Tip: अभिक्रिया की एन्थैल्पी को प्रभावित करने वाले कारकों को सूचीबद्ध करते समय, प्रत्येक कारक के प्रभाव को संक्षेप में स्पष्ट करें और अपररूपों के मामले में उदाहरण दें।

 

Question 10. निम्न को परिभाषित कीजिए-
(i) आयनन ऊष्मा अथवा आयनन एन्थैल्पी
(ii) विलयन ऊष्मा अथवा विलयन एन्थैल्पी
(iii) आबन्ध ऊर्जा (एन्थैल्पी)
(iv) कणीकरण एन्थैल्पी
(v) आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी
Answer:
(i) आयनन ऊष्मा अथवा आयनन एन्थैल्पी - किसी पदार्थ के 1 मोल के पूर्ण आयनन में होने वाला एन्थैल्पी परिवर्तन आयनन ऊष्मा अथवा आयनन एन्थैल्पी कहलाता है।
(ii) विलयन ऊष्मा अथवा विलयन एन्थैल्पी - किसी पदार्थ की विलयन एन्थैल्पी वह एन्थैल्पी परिवर्तन है जो इसके 1 मोल को विलायक की निर्दिष्ट मात्रा में घोलने पर होता है। यदि विलायक की मात्रा इतनी अधिक हो कि और अधिक विलायक मिलाने पर कोई ऊष्मा परिवर्तन न हो तब इसे अनन्त तनुता पर विलयन एन्थैल्पी कहा जाता है।
(iii) आबन्ध एन्थैल्पी-किसी पदार्थ के एक ग्राम अणु की गैसीय अवस्था में विद्यमान सभी बन्धों को तोड़ने के लिए आवश्यक ऊर्जा उसकी आबन्ध एन्थैल्पी कहलाती है।
(iv) कणीकरण एन्थैल्पी-गैसीय अवस्था में किसी पदार्थ के 1 मोल में उपस्थित आबन्धों को | पूर्णतया तोड़कर परमाणुओं में बदलने में होने वाला एन्थैल्पी परिवर्तन कणीकरण एन्थैल्पी कहलाता है। इसे \(\Delta H\) से प्रदर्शित करते हैं।
(v) आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी द्विपरमाणुक अणुओं के एक मोल में उपस्थित सभी आबन्धों को तोड़ने में हुआ एन्थैल्पी परिवर्तन आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी कहलाती है। इसे: \(\Delta H\) से व्यक्त करते हैं। उदाहरणार्थ - N2(g) → 2N(g); \(\Delta H\) = + 945.6 किलोजूल/मोल अर्थात् N2(g) के एक मोल में उपस्थित बन्धों को तोड़ने के लिए 945.6 किलोजूल ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
In simple words: यह प्रश्न विभिन्न प्रकार की एन्थैल्पी को परिभाषित करता है: आयनन एन्थैल्पी (आयन बनाने की ऊर्जा), विलयन एन्थैल्पी (घोलने की ऊर्जा), आबन्ध ऊर्जा (बंध तोड़ने की कुल ऊर्जा), कणीकरण एन्थैल्पी (परमाणुओं में बदलने की ऊर्जा) और आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी (एक विशिष्ट बंध तोड़ने की ऊर्जा)।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक एन्थैल्पी प्रकार की परिभाषा सटीक होनी चाहिए, और जहां उपयुक्त हो, जैसे आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी के लिए, एक विशिष्ट उदाहरण या प्रतिक्रिया समीकरण दें।

 

Question 11. हेस के नियम के अनुप्रयोग लिखिए ।
Answer: हेस के नियम से पता चलता है कि ऊष्मरासायनिक समीकरणों को बीजीय समीकरणों के समान ही घटाया, जोड़ा, गुणा अथवा भाग किया जा सकता है। अतः हेस के नियम की सहायता से उन अभिक्रियाओं की ऊष्मा की गणना की जा सकती है जिनकी ऊष्मा सीधे प्रयोगों द्वारा निर्धारित नहीं की जा सकती। हेस के नियम के कुछ मुख्य अनुप्रयोग निम्नवत् हैं-
(i) विरचन एन्थैल्पी (अथवा सम्भवन एन्थैल्पी) की गणना-जिन यौगिकों को उनके तत्त्वों से सीधे नहीं बनाया जा सकता उनकी विरचन एंथैल्पियाँ कैलोरीमितीय विधियों (calorimetric methods) द्वारा ज्ञात नहीं की जा सकतीं। ऐसे यौगिकों की विरचन एन्थैल्पियाँ हेस के नियम | द्वारा ज्ञात की जा सकती हैं।
(ii) संक्रमण एन्थैल्पी की गणना-संक्रमण (किसी पदार्थ के अपररूप का दूसरे में परिवर्तन) बहुत ही धीमी प्रक्रिया है; अतः विभिन्न पदार्थों के एक अपररूप से दूसरे में परिवर्तन (जैसे-डायमंड का ग्रेफाइट, पीले फॉस्फोरस का लाल फॉस्फोरस, रॉम्बिक सल्फर का मोनोक्लीनिक सल्फर में) के साथ होने वाले एन्थैल्पी परिवर्तन को सीधे नहीं मापा जा सकता। हेस के नियम की सहायता से विभिन्न पदार्थों की संक्रमण एन्थैल्पी की गणना की जा सकती
(iii) जलयोजन एन्थैल्पी की गणना-जलयोजन एन्थैल्पी को प्रयोगों द्वारा सीधे ज्ञात नहीं किया जा सकता परन्तु हेस के नियम द्वारा इसे आसानी से ज्ञात किया जा सकता है।
(iv) हाइड्रोजनीकरण एन्थैल्पी की गणना--हेस के नियम की सहायता से हाइड्रोजनीकरण एन्थैल्पी भी ज्ञात की जा सकती है।
(v) अभिक्रियाओं की मानक एन्थैल्पी की गणना-यौगिकों की दहन एन्थैल्पियों और विरचन एन्थैल्पियों की जानकारी से हेस के नियम द्वारा अभिक्रियाओं की मानक एन्थैल्पियों की गणना की जा सकती है। विरचन एन्थैल्पियों की सहायता से ऊष्मरासायनिक गणनाएँ करने में यह ध्यान रखना चाहिए कि किसी अभिक्रिया की एन्थैल्पी \(\Delta_r H^\Theta\) अभिक्रिया के उत्पादों की कुल एन्थैल्पी [\(\sum\Delta_f H^\Theta\) (Products)] तथा अभिकारकों की कुल एन्थैल्पी [\(\sum\Delta_f H^\Theta\) (Reactants)] का अन्तर होती है। अर्थात् \(\Delta_r H^\Theta\) = \(\sum\Delta_f H^\Theta\) (Products) – \(\sum\Delta_f H^\Theta\) (Reactants)
(vi) आबन्ध ऊर्जा की गणना-गैसीय अणुओं के क्रमाणुओं के मध्य उपस्थित एक मोल रासायनिक आबन्धों को तोड़ने के लिए आवश्यक ऊर्जा को आबन्ध ऊर्जा (bond energy) कहते हैं। इसे \(\Delta H\) द्वारा प्रदर्शित करते हैं। यौगिकों की विरचन ऊष्माओं की जानकारी से उनकी आबन्ध ऊर्जाओं की गणना की जा सकती है तथा आबन्ध ऊर्जाओं की जानकारी से यौर्मिकों की विरचन ऊष्माओं की गणना की जा सकती है।
(vii) अनुनाद ऊर्जा की गणना-हेस के नियम का प्रयोग ऊष्मरासायनिक आँकड़ों की सहायता से अनुनाद ऊर्जा की गणना करने में भी किया जाता है। किसी संरचना के लिए अभिक्रिया " एन्थैल्पी परिकलित (सैद्धान्तिक रूप से) तथा प्रेक्षित (प्रयोगों द्वारा) मानों के अन्तर को अनुनाद ऊर्जा कहते हैं।
In simple words: हेस के नियम का उपयोग उन अभिक्रियाओं की एन्थैल्पी की गणना के लिए किया जाता है जिन्हें सीधे मापना मुश्किल होता है, जैसे विरचन, संक्रमण, जलयोजन, हाइड्रोजनीकरण, आबन्ध ऊर्जा और अनुनाद ऊर्जा की गणना।

🎯 Exam Tip: हेस के नियम के अनुप्रयोगों को सूचीबद्ध करते समय, प्रत्येक अनुप्रयोग के तहत यह बताएं कि हेस का नियम कैसे अप्रत्यक्ष गणना को संभव बनाता है।

 

Question 12. निम्न को परिभाषित कीजिए
(i) गलन एंट्रॉपी,
(ii) वाष्पन एंट्रॉपी तथा
(iii) ऊर्ध्वपातन ऐट्रॉपी
Answer:
(i) गलन एंट्रॉपी-किसी ठोस पदार्थ के 1 मोल के उसके गलनांक पर द्रव में परिवर्तित होने पर होने वाला एंट्रॉपी परिवर्तन गलन एंट्रॉपी कहलाती है। इसका मान सदैव धनात्मक होता है क्योंकि सुव्यवस्थित क्रिस्टलीय ठोस में द्रव की अव्यवस्थित संरचना में संक्रमी में अव्यवस्था में वृद्धि होती है। इसे \(\Delta_{fus}S\) द्वारा प्रदर्शित करते हैं। गणितीय रूप में, \(\Delta_{fus}S = \frac{\Delta_{fus}H}{T_m}\) या \(\Delta_{fus}H = \Delta_{fus}S \times T_m\)
(ii) वाष्पन एंट्रॉपी-किसी द्रव पदार्थ के 1 मोल के उसके क्वथनांक पर वाष्प में परिवर्तित होने पर होने वाला एंट्रॉपी परिवर्तन वाष्पन एंट्रॉपी कहलाता है। इसे \(\Delta_{vap}S\) द्वारा प्रदर्शित करते हैं। वाष्पन एंट्रॉपी का मान सदैव धनात्मक होता है क्योंकि कम अव्यवस्थित द्रव से अत्यधिक अव्यवस्थित गैस में परिवर्तन पर अव्यवस्था में वृद्धि होती है। गणितीय रूप में,
(iii) ऊर्ध्वपातन एंट्रॉपी-किसी ठोस पदार्थ के 1 मोल के उसके सीधे वाष्प में परिवर्तित होने पर होने वाला एंट्रॉपी परिवर्तन ऊर्ध्वपातन एंट्रॉपी कहलाता है। इसे \(\Delta_{sub}S\) द्वारा प्रदर्शित करते हैं। गणितीय रूप में, \(\Delta_{sub}S = \frac{\Delta_{sub}H}{T_{sub}}\)
In simple words: गलन एंट्रॉपी ठोस से द्रव, वाष्पन एंट्रॉपी द्रव से गैस, और ऊर्ध्वपातन एंट्रॉपी ठोस से सीधे गैस में परिवर्तन के दौरान अव्यवस्था में वृद्धि को दर्शाती है, जिसे तापमान पर एन्थैल्पी परिवर्तन के अनुपात के रूप में मापा जाता है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार की एंट्रॉपी परिवर्तन को उसकी परिभाषा, यह धनात्मक क्यों होता है, और उसके संबंधित गणितीय सूत्र के साथ समझाएं।

 

Question 13.ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम क्या है? स्थिर आयतन तथा 27°C पर CO की दहन ऊष्मा -66.7 किलोकैलोरी है। स्थिर दाब पर इसकी दहन ऊष्मा ज्ञात कीजिए।
Answer: इस नियम के अनुसार, स्वतः प्रवर्तित प्रक्रम ऊष्मागतिकीय रूप से अनुत्क्रमणीय होते हैं।” या “बाह्य साधनों का प्रयोग किये बिना स्वतः प्रवर्तित प्रक्रमों को उत्क्रमित नहीं किया जा सकता है।” या “किसी स्वतः प्रवर्तित प्रक्रम के लिए कुल एंट्रॉपी परिवर्तन धनात्मक होता है।” या “ब्रह्माण्ड की एंट्रॉपी में निरन्तर वृद्धि हो रही है।” CO की दहन ऊष्मा का समीकरण CO(g)+\(\frac{1}{2}\)O2 → CO2(g) \(\Delta H\) = -66.7 kcal, \(\Delta n\) = 1-1.5 = -0.5 \(\Delta H = \Delta E + \Delta n RT\) \(= -66.7+(-0.5) \times 0.002 \times 300 = -67\) kcal
In simple words: ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम बताता है कि स्वतः प्रवर्तित प्रक्रमों में ब्रह्मांड की कुल एंट्रॉपी हमेशा बढ़ती है। दिए गए CO के दहन की ऊष्मा (\(\Delta E\)) और गैस मोलों में परिवर्तन (\(\Delta n\)) का उपयोग करके, हम स्थिर दाब पर दहन ऊष्मा (\(\Delta H\)) की गणना \(\Delta H = \Delta E + \Delta n RT\) सूत्र का उपयोग करके कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम की विभिन्न परिभाषाओं को उद्धृत करें। \(\Delta H\) और \(\Delta E\) के बीच के संबंध सूत्र (\(\Delta H = \Delta E + \Delta n RT\)) का सही ढंग से उपयोग करें और \(\Delta n\) की गणना गैसों के मोल्लों की संख्या के आधार पर करें।

 

Question 14. ऊष्मागतिकी का तृतीय नियम लिखिए। इसका एक अनुप्रयोग भी बताइए ।
या ऊष्मागतिकी के तृतीय नियम का उल्लेख कीजिए।
Answer: इस नियम के अनुसार, “परम शून्य ताप पर किसी पूर्ण क्रिस्टलीय पदार्थ की एंट्रॉपी शून्य मानी जा सकती है।” यह नियम वाल्थर नर्स्ट ने सन् 1906 में दिया था। परम शून्य ताप पर शुद्ध क्रिस्टल के कणों में कोई गति नहीं होती है और वे पूर्ण रूप से व्यवस्थित होते हैं। ऊष्मागतिकी के तृतीय नियम का प्रयोग शुद्ध पदार्थों की विभिन्न तापों पर निरपेक्ष एंट्रॉपियों की गणना करने में किया जाता है।
In simple words: ऊष्मागतिकी का तृतीय नियम कहता है कि पूर्ण क्रिस्टलीय पदार्थों की एंट्रॉपी परम शून्य तापमान पर शून्य होती है, क्योंकि इस तापमान पर कोई अव्यवस्था नहीं होती है; इसका उपयोग विभिन्न तापमानों पर शुद्ध पदार्थों की निरपेक्ष एंट्रॉपी की गणना के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: ऊष्मागतिकी के तृतीय नियम की सटीक परिभाषा दें और परम शून्य ताप पर क्रिस्टल की पूर्ण व्यवस्था से इसके संबंध को स्पष्ट करें। एक व्यावहारिक अनुप्रयोग का उल्लेख करना भी महत्वपूर्ण है।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. \(\Delta U\) तथा \(\Delta H\) का मापन (कैलोरीमिति) किस प्रकार किया जाता है? विस्तृत वर्णन कीजिए ।
Answer: \(\Delta U\) तथा \(\Delta H\) का मापन-कैलोरीमिति रासायनिक एवं भौतिक प्रक्रमों से सम्बन्धित ऊर्जा परिवर्तन को जिस प्रायोगिक तकनीक द्वारा ज्ञात करते हैं उसे कैलोरीमिति (calorimetry) कहते हैं। कैलोरीमिति में प्रक्रम एक पात्र में किया जाता है। जिसे कैलोरीमीटर (calorimeter) कहते हैं। कैलोरीमीटर की सहायता से ऊष्मा परिवर्तन का मापन दो स्थितियों में
(i) स्थिर आयतन पर (qV, अथवा \(\Delta U\)) तथा
(ii) स्थिर दाब पर (qP, अथवा \(\Delta H\)) किया जा सकता है। \(\Delta U\) का मापन-रासायनिक अभिक्रियाओं के लिए स्थिर आयतन पर ऊर्जा परिवर्तन का मापन बम कैलोरीमीटर में किया जाता है जिसमें एक स्टील का पात्र होता है जिसे बम (bomb) कहते हैं। बम भारी स्टील का बना होता है तथा काफी मजबूत होता है क्योंकि इसे काफी उच्च दाब सहन करना होता है। बम एक वायुरुद्ध ढक्कन द्वारा ढका रहता है। बम में एक प्लेटिनम का कप होता है जिसमें पदार्थ लिया जाता है। बम में दो इलेक्ट्रोड भी होते हैं जो कप में फिलामेंट (filament) से जुड़े होते हैं। बम में ऑक्सीजन के प्रवेश की भी व्यवस्था होती है। बम को एक बड़े पात्र में रखा जाता है जिसमें जल भरा रहता है। साथ ही इस पात्र में एक थर्मामीटर तथा विलोडक भी रहते हैं। इस पूरी व्यवस्था को एक ऊष्मारोधी जैकेट में बन्द किया जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र बम कैलोरीमीटर की संरचना को दर्शाता है, जिसका उपयोग स्थिर आयतन पर ऊर्जा परिवर्तन को मापने के लिए किया जाता है। इसमें एक मजबूत स्टील का बम होता है जिसमें एक प्लैटिनम कप में नमूना रखा जाता है, ऑक्सीजन प्रवेश द्वार, फिलामेंट, इलेक्ट्रोड, एक थर्मामीटर, विलोडक और एक ऊष्मारोधी जैकेट के भीतर पानी से भरी बाल्टी होती है। यह उपकरण अभिक्रियाओं के दौरान उत्पन्न या अवशोषित ऊष्मा को सटीक रूप से मापने में मदद करता है। विधि-प्रतिदर्श की निश्चित (तोली गयी) मात्रा को प्लेटिनम कप में लिया जाता है। बम में उच्च दाब पर ऑक्सीजन को भी प्रवेश कराया जाता है। फिर फिलामेंट में विद्युत धारा प्रवाहित करके प्रतिदर्श को जलाया जाता है। अभिक्रिया में उत्पन्न ऊष्मा जले को स्थानान्तरित हो जाती है। उसके पश्चात् थर्मामीटर की सहायता से ताप ज्ञात कर लेते हैं। चूँकि अभिक्रिया एक बन्द पात्र में होती है अतः आयतन में कोई परिवर्तन नहीं होता है और कोई कार्य भी नहीं किया जाता है। यहाँ तक कि गैसों से सम्बन्धित रासायनिक अभिक्रियाओं में कोई भी कार्य नहीं होता है क्योंकि \(\Delta V\) = 0 कैलोरीमीटर की ऊष्माधारिता ज्ञात होने पर निम्न सूत्रे की सहायता से ताप परिवर्तन (\(\Delta T\)) को \(\Delta U(q_V)\) में परिवर्तित कर लिया जाता है- \(\Delta U = q_V = C\Delta T\) जहाँ, C = कैलोरीमीटर की ऊष्माधारिता, \(\Delta T\) = जल के ताप में परिवर्तन प्रतिदर्श की मात्रा ज्ञात होने पर निम्न सूत्र की सहायता से प्रति मोल आन्तरिक ऊर्जा परिवर्तन ज्ञात कर लिया जाता है- \(\Delta U = \frac{C \Delta T M}{m}\) जहाँ, C = कैलोरीमीटर की ऊष्माधारिता, \(\Delta T\) = ताप परिवर्तन M = प्रतिदर्श का मोलर द्रव्यमान, m= लिए गए प्रतिदर्श का द्रव्यमान \(\Delta H\) का मापन-स्थिर दाब (सामान्यतः वायुमण्डलीय दाब) पर ऊष्मा परिवर्तन (qP, अथवा \(\Delta H\)) कॉफी कप कैलोरीमीटर (coffee cup calorimeter) की सहायता से ज्ञात किया जा सकता है। कॉफी कप कैलोरीमीटर में एक पॉलीस्टाइरीन का कप (ढक्कन सहित) होता है। जब किन्हीं दो विलयनों के मध्य होने वाली अभिक्रिया (माना की अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी है) में एन्थैल्पी परिवर्तन ज्ञात करना होता है तो उनमें से एक विलयन की निश्चित मात्रा को कॉफी-कप कैलोरीमीटर में लेकर उसका थर्मामीटर की सहायता से ताप ज्ञात कर लेते हैं। इसके पश्चात् दूसरे विलयन (ज्ञात मात्रा) का भी ताप ज्ञात कर लेते हैं। फिर दूसरे विलयन की निश्चित मात्रा को कैलोरीमीटर में डालकर अभिक्रिया मिश्रण को विलोडक की सहायता से चलाकर मिश्रण के ताप में हुई वृद्धि ज्ञात कर लेते हैं। मिश्रण के ताप में हुई वृद्धि की सहायता से अभिक्रिया में उत्पन्न ऊष्मा निम्न प्रकार ज्ञात कर सकते हैं-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र कॉफी कप कैलोरीमीटर को दर्शाता है, जिसका उपयोग स्थिर दाब पर ऊष्मा परिवर्तन को मापने के लिए किया जाता है। इसमें एक थर्मामीटर और विलोडक के साथ फोमयुक्त पॉलीस्टाइरीन कप में अभिक्रिया मिश्रण होता है। यह सेटअप विभिन्न विलयनों के मिश्रण की अभिक्रियाओं के दौरान होने वाले एन्थैल्पी परिवर्तनों को मापने के लिए उपयोग किया जाता है। माना विलयनों का ताप = t1°C, मिश्रण का अधिकतम ताप = t2°C दोनों विलयनों का कुल द्रव्यमान = m विलयन की विशिष्ट ऊष्मा = s, तब अभिक्रिया में उत्पन्न ऊष्मा, \(q = m \times s \times (t2-t1) = m \times s \times \Delta t\) विलयनों के ताप भिन्न होने की दशा में उन्हें वाटर बाथ (water bath) में रखकर उनके ताप समान कर लिए जाते हैं। स्थिर दाब पर उत्सर्जित अथवा अवशोषित ऊष्मा qP अभिक्रिया की ऊष्मा अथवा अभिक्रिया की एन्थैल्पी \(\Delta_r H\) कहलाती है। ऊष्मारोधी अभिक्रियाओं में ऊष्मा निर्मुक्त होती है तथा निकाय से परिवेश में ऊष्मा का प्रवाह होता है। इसलिए qP ऋणात्मक होता है तथा \(\Delta_r H\) भी ऋणात्मक होता है। इसी तरह ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाओं में ऊष्मा अवशोषित होती है अतः qP और \(\Delta_r H\) दोनों धनात्मक होते हैं। कॉफी कप कैलोरीमीटर के स्थान पर \(\Delta H\) के मापन के लिए हम एक अन्य कैलोरीमीटर का प्रयोग भी कर सकते हैं जिसमें अभिक्रिया एक ऐसे पात्र में करायी जाती है जिसकी दीवारें ऊष्मा की सुचालक होती हैं। यह पात्र एक अन्य बड़े ऊष्मारोधी दीवारों वाले पात्र में स्थित रहता है जिसमें जल होता है। जल में थर्मामीटर तथा विलोडक भी रहते हैं। अभिक्रिया में उत्पन्न/अवशोषित ऊष्मा के कारण जल के ताप में परिवर्तन होता है। इसी ताप परिवर्तन को उपर्युक्त सूत्रे द्वारा qP अथवा \(\Delta H\) में परिवर्तित कर लिया जाता है।
In simple words: कैलोरीमिति वह विधि है जिसका उपयोग रासायनिक अभिक्रियाओं में ऊर्जा परिवर्तनों को मापने के लिए किया जाता है। \(\Delta U\) को बम कैलोरीमीटर से (स्थिर आयतन पर) और \(\Delta H\) को कॉफी कप कैलोरीमीटर से (स्थिर दाब पर) मापा जाता है, जिसमें तापमान परिवर्तन को मापकर ऊष्मा की गणना की जाती है।

🎯 Exam Tip: \(\Delta U\) और \(\Delta H\) के मापन के लिए उपयोग किए जाने वाले कैलोरीमीटर के प्रकार (बम कैलोरीमीटर और कॉफी कप कैलोरीमीटर) को स्पष्ट रूप से समझाएं, उनकी संरचना और काम करने के तरीके का विस्तृत वर्णन करें।

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Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 11 Chemistry Chapter 6 ऊष्मप्रवैगिकी will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 11 Chemistry Chapter 6 ऊष्मप्रवैगिकी in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 11 Chemistry. You can access UP Board Solutions Class 11 Chemistry Chapter 6 ऊष्मप्रवैगिकी in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Chemistry UP Board solutions for Class 11 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 11 Chemistry Chapter 6 ऊष्मप्रवैगिकी in printable PDF format for offline study on any device.