UP Board Solutions Class 11 Biology Chapter 8 Cell The Unit of Life

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Detailed Chapter 8 कोशिका: जीवन की इकाई UP Board Solutions for Class 11 Biology

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Class 11 Biology Chapter 8 कोशिका: जीवन की इकाई UP Board Solutions PDF

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

Question 1. इनमें से कौन-सा सही नहीं है?
(अ) कोशिका की खोज राबर्ट ब्राउन ने की थी।
(ब) श्लीडेन व श्वान ने कोशिका सिद्धान्त प्रतिपादित किया था।
(स) विरचोव के अनुसार कोशिका पूर्व स्थित कोशिका से बनती है।
(द) एककोशिकीय जीव अपने जीवन के कार्य एक कोशिका के भीतर करते हैं।
Answer: (अ) कोशिका की खोज राबर्ट ब्राउन ने की थी।
In simple words: रॉबर्ट ब्राउन ने केंद्रक की खोज की थी, जबकि कोशिका की खोज रॉबर्ट हुक ने की थी, इसलिए यह कथन गलत है।

🎯 Exam Tip: कोशिका की खोज और उसके सिद्धांत से संबंधित वैज्ञानिकों के नाम और उनके योगदान याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. नई कोशिका का निर्माण होता है
(अ) जीवाणु-किण्वन से ।
(ब) पुरानी कोशिकाओं के पुनरुत्पादन से
(स) पूर्व स्थित कोशिकाओं से
(द) अजैविक पदार्थों से
Answer: (स) पूर्व स्थित कोशिकाओं से ।
In simple words: नई कोशिकाएं हमेशा पहले से मौजूद कोशिकाओं के विभाजन से बनती हैं, इस सिद्धांत को 'ओम्निस सेलुला ई सेलुला' कहते हैं।

🎯 Exam Tip: कोशिका विभाजन के सिद्धांत को समझें और इसके महत्व पर ध्यान दें।

 

Question 3. निम्न के सही जोड़े बनाइए
(अ) क्रिस्टी – (i) पीठिका में चपटी कलामय थैली
(ब) कुंडिका – (ii) सूत्रकणिका में अन्तर्वलन
(स) थाइलेकोइड – (iii) गॉल्जी उपकरण में बिंब आकार की थैली
Answer: (अ) (ii)
(ब) (iii)
(स) (i)

In simple words: क्रिस्टी माइटोकॉन्ड्रिया के आंतरिक वलन हैं, कुंडिका गॉल्जी उपकरण की डिस्क-जैसी थैलियां हैं, और थाइलेकोइड क्लोरोप्लास्ट की चपटी कलामय थैलियां हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न कोशिकांगों की संरचनात्मक विशेषताओं और उनके विशिष्ट नामों को याद रखें।

 

Question 4. इनमें से कौन-सा सही है?
(अ) सभी जीव कोशिकाओं में केन्द्रक मिलता है।
(ब) दोनों जन्तु व पादप कोशिकाओं में स्पष्ट कोशिका भित्ति होती है।
(स) प्रोकैरियोटिक की झिल्ली में आवरित अंगक नहीं मिलते हैं।
(द) कोशिका का निर्माण अजैविक पदार्थों से नए सिरे से होता है।
Answer: (स) प्रोकैरियोटिक की झिल्ली में आवरित अंगक नहीं मिलते हैं।
In simple words: प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में नाभिकीय झिल्ली या झिल्ली-बद्ध अंगक जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जी उपकरण, आदि नहीं होते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिकाओं के बीच के मुख्य अंतरों को जानें, विशेषकर कोशिकांगों की उपस्थिति/अनुपस्थिति के संबंध में।

 

Question 5. प्रोकैरियोटिक कोशिका में क्या मीसोसोम होता है? इसके कार्य का वर्णन करो ।
Answer: प्रोकैरियोटिक कोशिका में विशिष्ट झिल्ली नामक एक संरचना मिलती है जो प्लाज्मा झिल्ली में वलनों से बनती है इसे मीसोसोम (mesosome) कहते हैं। इसका मुख्य कार्य श्वसन में सहायता करना है।
In simple words: मीसोसोम प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में प्लाज्मा झिल्ली के अंदर की ओर बने वलन होते हैं जो श्वसन और डीएनए प्रतिकृति जैसे कार्यों में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: मीसोसोम की संरचना और प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में इसके कार्यों को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 6. कैसे उदासीन विलेय जीवद्रव्य झिल्ली से होकर गति करते हैं? क्या ध्रुवीय अणु उसी प्रकार से इससे होकर गति करते हैं। यदि नहीं तो इनका जीवद्रव्य झिल्ली से होकर परिवहन कैसे होता है?
Answer: जीवद्रव्य झिल्ली का महत्त्वपूर्ण कार्य “इससे होकर अणुओं का परिवहन है।” यह झिल्ली वरणात्मक पारगम्य (selectively permeable) होती है। उदासीन विलेय अणु सामान्य या निष्क्रिय परिवहन द्वारा उच्च सान्द्रता से कम सान्द्रता की ओर साधारण विसरण द्वारा झिल्ली से आते-जाते रहते हैं। इसमें ऊर्जा व्यय नहीं होती । ध्रुवीय अणु सामान्य विसरण द्वारा इससे होकर आ-जा नहीं सकते, इन्हें परिवहन हेतु वाहक प्रोटीन्स की आवश्यकता होती है। इन्हें आयने कैरियर (ion carriers) भी कहते हैं। इनका परिवहन सामान्यतया सक्रिय विसरण द्वारा होता है। इसमें ऊर्जा व्यय होती है। ऊर्जा ATP से प्राप्त होती है। ऊर्जा व्यय करके आयन या अणुओं का परिवहन निम्न सान्द्रता से उच्च सान्द्रता की ओर भी हो जाता है।
In simple words: उदासीन अणु निष्क्रिय रूप से विसरण द्वारा झिल्ली से गुजरते हैं, जबकि ध्रुवीय अणुओं को ऊर्जा के साथ सक्रिय परिवहन के लिए विशिष्ट वाहक प्रोटीन की आवश्यकता होती है।

🎯 Exam Tip: जीवद्रव्य झिल्ली की वरणात्मक पारगम्यता और निष्क्रिय तथा सक्रिय परिवहन के सिद्धांतों को उदाहरणों सहित समझें।

 

Question 7. दो कोशिकीय अंगकों के नाम बताइए जो द्विककला से घिरे होते हैं। इन दो अंगकों की क्या विशेषताएँ हैं? इनके कार्य लिखिए व रेखांकित चित्र बनाइए ।
Answer: माइटोकॉन्ड्रिया (mitochondria) तथा लवक (plastid) द्विकला (double membrane) से घिरे कोशिकांग (cell organelles) हैं। माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना माइटोकॉन्ड्रिया को सर्वप्रथम कालीकर (Kallikar, 1880) ने देखा । आल्टमैन (1894) ने इन्हें बायोप्लास्ट कहा। बेण्डा (1897) ने इन्हें माइटोकॉन्ड्रिया कहा। माइटोकॉन्ड्रिया को कॉन्ड्रियोसोम भी कहते हैं। यह शलाका, गोल अथवा कणिकारूपी होते हैं। इनकी लम्बाई 40µ तक तथा व्यास 3.5 µ तक होता है। प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में इनका अभाव होता है।

परासंरचना (Ultrastructure):
यह दोहरी पर्त वाली संरचना है। बाह्य पर्त चिकनी तथा अन्दर की पर्त में अंगुलियों के समान अन्तर्वलन मिलते हैं जिन्हें क्रिस्टी (cristae) कहते हैं। दोनों पर्यो के मध्य के स्थान को पेरीमाइटोकॉन्ड्रियल स्थान कहते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया की गुहा में प्रोटीनयुक्त मैट्रिक्स मिलता है। क्रिस्टी की सतह पर छोटे-छोटे कण मिलते हैं जिन्हें F1 कण अथवा ऑक्सीसोम (oxysomes) कहते हैं। ऑक्सीसोम ऑक्सीकरणीय फॉस्फेटीकरण (श्वसन) की क्रिया में ATP निर्माण में भाग लेते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया के क्रिस्टी पर इलेक्ट्रॉन अभिगमन होता है जिसके फलस्वरूप ATP बनते हैं। इसके मैट्रिक्स में D.N.A., राइबोसोम, जल, लवण, क्रेब्स चक्र सम्बन्धी विकर आदि मिलते हैं।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक संरचना को दर्शाता है। इसमें दोहरी झिल्ली, क्रिस्टी (अंदर की झिल्ली के वलन), मैट्रिक्स और ऑक्सीसोम जैसे घटक दिखाए गए हैं। यह ऊर्जा उत्पादन के लिए कोशिका का पावरहाउस है।

रासायनिक संघटन (Chemical Composition):
इनमें 65-70% प्रोटीन, 25% लिपिड, D.N.A., R.N.A. आदि मिलते हैं। अन्दर की कला में श्वसन तन्त्र श्रृंखला सम्बन्धी सभी साइटोक्रोम; जैसे-Cyt b, c, a, a 3, क्वीनोन, NAD, FAD, FMN आदि मिलते हैं।

माइटोकॉन्ड्रिया का कार्य माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में क्रेब्स चक्र तथा ऑक्सीसोम (F1 कण) पर श्वसन' श्रृंखला का इलेक्ट्रॉन अभिगमन तन्त्र सम्पन्न होता है, इससे मुक्त ऊर्जा ATP में संचित होती है। ATP समस्त जैविक क्रियाओं के लिए गतिज ऊर्जा प्रदान करता है। माइटोकॉन्ड्रिया को 'कोशिका का ऊर्जा गृह' (Power house of the cell) कहते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया में स्वद्विगुणन की क्षमता होती है।

लवक की संरचना
लवक दोहरी झिल्ली से घिरे होते हैं। ये यूकैरियोटिक पादप कोशिकाओं में ही मिलते हैं। ये कवक में नहीं मिलते हैं। हीकेल (1865) ने इसकी खोज की तथा शिम्पर ने इसे प्लास्टिड (Plastid) नाम दिया। लवक तीन प्रकार के होते हैं ल्यूकोप्लास्ट- क्रोमोप्लास्ट तथा क्लोरोप्लास्ट।

1. ल्यूकोप्लास्ट (Leucoplast) : ये संचयी लवक हैं। वर्णक न होने के कारण ये रंगहीन होते हैं। ये तीन प्रकार के एमाइलोप्लास्ट (मण्ड संचयी)- इलियोप्लास्ट (वसा संचयी) तथा प्रोटीनोप्लास्ट (प्रोटीन संचयी) होते हैं।

2. क्रोमोप्लास्ट (Chromoplast) : ये रंगीन लवक हैं। सामान्यतः फूलों की पंखुड़ियों, फल, रंगीन पत्तियों आदि में होते हैं। भूरे शैवालों में फियोप्लास्ट, लाल शैवालों में रोडोप्लास्ट तथा प्रकाश संश्लेषी जीवाणुओं में क्रोमैटोफोर आदि मिलते हैं।

3. क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast) :
हरितलवक अथवा क्लोरोप्लास्ट की खोज शिम्पर (Schimper, 1864) ने की। इनमें क्लोरोफिल (पर्णहरित) मिलता है। ये लवक पौधे के हरे भागों में सामान्यतः पत्तियों में (मीसोफिल, खम्भ ऊतक, क्लोरेनकाइमा) मिलते हैं। ये विभिन्न आकार के होते हैं। हरे शैवाल सामान्यतः हरितलवकं के आकार से पहचाने जाते हैं। उच्च पादप में ये गोल, अण्डाकार, चपटे, दीर्घवृत्ताकार (elliptical) होते हैं। सामान्यतया इनकी लम्बाई 2-5µ तथा चौड़ाई 3-4µ होती है। कोशिका में इनकी संख्या 20-40 तक हो सकती है।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र क्लोरोप्लास्ट की संरचना को दर्शाता है। इसमें दोहरी झिल्ली, स्ट्रोमा, ग्रैनम (थाइलेकोइड्स के ढेर), स्ट्रोमा लैमेली और ऑस्मिओफिलिक ड्रॉपलेट्स जैसे घटक दिखाए गए हैं। यह पादप कोशिका में प्रकाश संश्लेषण का स्थल है।

4. हरितलवक की परासंरचना (Ultrastructure of Chloroplast):
इनकी संरचना जटिल होती है। यह दो एकक कलाओं की झिल्ली से बना होता है। दोनों कलाओं के मध्य का स्थान पेरीप्लास्टीडियल स्थान कहलाता है। झिल्ली से घिरा रंगहीन मैट्रिक्स स्ट्रोमा (stroma) होता है। मैट्रिक्स में कलातन्त्र से बना ग्रैना (grana) होता है। ग्रैना में प्लेट जैसी रचना का समूह होता है, जो पटलिकाओं से जुड़ी रहती हैं, इन्हें लैमिली कहते हैं। ग्रेना की इकाई को थाइलेकॉइड कहते हैं। ये एक-दूसरे के ऊपर स्थित होते हैं। दो ग्रैना को जोड़ने वाली पटलिका को स्ट्रोमा लैमिली अथवा फ्रेट चैनल कहते हैं। थाइलेकॉइड पर 'क्वान्टासोम (quantasomes) पाए जाते हैं। प्रत्येक क्वान्टासोम पर लगभग 230 पर्णहरित अणु पाए जाते हैं। क्लोरोप्लास्ट का रासायनिक संघटन

5. (Chemical Composition of Chloroplast):
प्रत्येक क्लोरोप्लास्ट में 40-50% प्रोटीन, 23-25% फॉस्फोलिपिड- 3-10% पर्णहरित, 5% R.N.A., 0. 02 -0.01% D.N.A., 1-2% कैरोटीन, विभिन्न विकर, विटामिन तथा धातु- जैसे Mg, Fe, Cu, Mn, Zn आदि मिलते हैं।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र ग्रैना और स्ट्रोमा लैमिली की संरचना को स्पष्ट करता है, जिसमें थाइलेकोइड्स, फ्रेट चैनल और लॉक्यूल जैसे तत्व दर्शाए गए हैं। यह क्लोरोप्लास्ट के भीतर प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के लिए महत्वपूर्ण हैं।

6. क्लोरोप्लास्ट के कार्य (Functions of Chloroplast):
क्लोरोप्लास्ट का मुख्य कार्य प्रकाश संश्लेषण है। ग्रैना में प्रकाश संश्लेषण की प्रकाशीय क्रिया तथा स्ट्रोमा में अप्रकाशीय क्रिया होती है। प्रकाशीय क्रिया में जल के अपघटन से ऊर्जा निकलती है तथा अप्रकाशीय अभिक्रिया में CO2, का स्वांगीकरण होता है। भोजन बनाने का चित्र-ग्रेना तथा स्ट्रोमा लैमिली की संरचना। दायित्व होने के कारण इसे कोशिका की किचिन अथवा रसोई कहते हैं।
In simple words: माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका के ऊर्जा घर होते हैं जो श्वसन से ATP बनाते हैं, जबकि लवक (क्लोरोप्लास्ट) प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं, दोनों ही द्विकला-युक्त कोशिकांग हैं।

🎯 Exam Tip: माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट की संरचना, कार्य और रासायनिक संघटन को विस्तृत रूप से पढ़ें, साथ ही उनके बीच के अंतर को भी समझें।

 

Question 8. प्रोकैरियोटिक कोशिका की क्या विशेषताएँ हैं?
Answer: प्रोकैरियोटिक कोशिका या असीमकेन्द्रकीय कोशिकाएँ ऐसी कोशिकाएँ, जिनमें सत्य केन्द्रक (केन्द्रक-कला सहित) नहीं पाया जाता तथा केन्द्रक में पाए जाने वाले प्रोटीन एवं न्यूक्लीक अम्ल (D.N.A. तथा R.N.A.) केन्द्रक-कला के अभाव में कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) के सम्पर्क में रहते हैं, प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ कहलाती हैं। इनमें एक ही घेरेदार क्रोमोसोम होता है, जिसमें हिस्टोन प्रोटीन नहीं होती। इनमें राइबोसोम्स 70S प्रकार के होते हैं। इन कोशिकाओं में अनेक कोशिकांग- जैसे-केन्द्रिक, गॉल्जीकाय, माइटोकॉन्ड्रिया, अन्तःप्रद्रव्यी जालिका आदि- नहीं होते हैं। प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में सूत्री विभाजन के लिए घटकों का अभाव होता है। रचना की दृष्टि से इस प्रकार की कोशिकाएँ आदिम मानी गई हैं। जीवाणु कोशिका तथा नीली-हरी शैवालों की कोशिकाएँ प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं के उदाहरण हैं।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं, जैसे नीली-हरी शैवाल और जीवाणु कोशिका की संरचना दर्शाता है। इसमें कोशिका भित्ति, प्लाज्मा झिल्ली, मीसोसोम, राइबोसोम, न्यूक्लियॉइड (DNA), साइटोप्लाज्म और फ्लैजेला जैसे घटक दिखाए गए हैं। यह एक सरल कोशिका प्रकार है जिसमें स्पष्ट केंद्रक और झिल्ली-बद्ध कोशिकांगों का अभाव होता है।
In simple words: प्रोकैरियोटिक कोशिकाएं सरल होती हैं, जिनमें स्पष्ट केंद्रक और झिल्ली-बद्ध कोशिकांग नहीं होते हैं; उनका आनुवंशिक पदार्थ कोशिकाद्रव्य में बिखरा रहता है।

🎯 Exam Tip: प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं की मूलभूत विशेषताओं, जैसे केन्द्रक की अनुपस्थिति, 70S राइबोसोम, और झिल्ली-बद्ध अंगकों के अभाव पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 9. बहुकोशिकीय जीवों में श्रम विभाजन की व्याख्या कीजिए।
Answer: एककोशिकीय जीवों में समस्त जैविक क्रियाएँ- जैसे- श्वसन, गति (प्रचलन), पोषण, उत्सर्जन, जनन आदि जीव कोशिका द्वारा ही सम्पन्न होती हैं। इनमें इन कार्यों को सम्पन्न करने हेतु सामान्यतया विशिष्ट अंगक नहीं होते । इनमें मान्य कोशिकाविभाजन द्वारा ही जनन प्रक्रिया हो जाती है। कुछ एककोशिकीय जीवों में लैंगिक जनन भी पाया जाता है। सरल बहुकोशिकीय जीवों में- जैसे- स्पंज में विभिन्न जैविक कार्य अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं द्वारा सम्पन्न होते हैं, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर कोशिका अन्य कार्य भी सम्पन्न कर सकती है। इनमें कार्य विभाजन या श्रम विभाजन स्थायी नहीं होता। संघ सीलेन्ट्रेटा (Coelenterata) के सदस्यों में कोशिकाएँ विभिन्न जैविक कार्यों के लिए विशिष्टीकृत हो जाती हैं, वे अन्य कार्य सम्पन्न नहीं करतीं। इसे श्रम विभाजन कहते हैं। श्रम विभाजन की परिकल्पना सर्वप्रथम हेनरी मिल्ने एडवर्ड (H. M. Edward) ने प्रस्तुत की। विभिन्न कार्यों को सम्पन्न करने के लिए कोशिकाएँ ऊतक तथा ऊतक तन्त्र का निर्माण करती हैं। समान कार्य करने वाली कोशिकाओं में संरचनात्मक समानता पाई जाती है। इसका तात्पर्य यह है कि कोशिकाओं में कार्यिकी भिन्नन (physiological differentiation) के अनुरूप संरचनात्मक और औतिकीय भिन्नन (structural and histological differentiation) पाया जाता है।
In simple words: बहुकोशिकीय जीवों में, अलग-अलग कोशिकाओं या ऊतकों को विशिष्ट कार्य सौंपे जाते हैं, जिससे शरीर के विभिन्न कार्य कुशलतापूर्वक संपन्न हो सकें, इसे श्रम विभाजन कहते हैं।

🎯 Exam Tip: श्रम विभाजन की अवधारणा, एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीवों में इसके अंतर, और इसके महत्व को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 10. कोशिका जीवन की मूल इकाई है। संक्षिप्त में वर्णन करें।
Answer: कोशिका शरीर निर्माण की इकाई ही नहीं बल्कि जीवन की कार्यिक इकाई भी है। जीव की सभी क्रियाएँ कोशिका में हो रहे कार्यों के समन्वय से होती हैं। नई कोशिका पूर्व स्थित कोशिका से बनती है। एक कोशिका से पूर्ण जीव का निर्माण सम्भव है। कोशिका की यह क्षमता टोटीपोटेंसी कहलाती है। प्रत्येक कोशिका में अनेको अंगक होते हैं जो कोशिका द्रव्य में रहते हैं। इनमें हो रहे कार्यों से ही जीव का जीवन चलता है।
In simple words: कोशिका जीवन की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है क्योंकि सभी जैविक क्रियाएं इसमें होती हैं और नए जीव कोशिकाओं से ही विकसित होते हैं।

🎯 Exam Tip: कोशिका सिद्धांत और टोटीपोटेंसी की अवधारणा को विस्तार से पढ़ें, क्योंकि ये जीवन की मूलभूत समझ के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 11. केन्द्रक छिद्र क्या है? इनके कार्य बताइए ।
Answer:

केन्द्रक छिद्र
केन्द्रक के चारों ओर 10 nm से 50 nm मोटी दोहरी केन्द्रक-कला (nuclear membrane) होती है। दोनों झिल्लियों (कलाओं) के मध्य स्थान को परिकेन्द्रकीय स्थान (perinuclear space) कहते हैं। यह लगभग 100-300 Åचौड़ी होती है। केन्द्रक कला पर अनेक सूक्ष्म छिद्र होते हैं। इन्हें केन्द्रक छिद्र (nuclear pores) कहते हैं। प्रत्येक का व्यास लगभग 400-1000 Å होता है। केन्द्रक-कला का सम्बन्ध कोशिकाद्रव्य में स्थित अन्तःप्रद्रयी जालिका (ER) से होता है।
कार्य : केन्द्रक में निर्मित विभिन्न प्रकार के R.N.A. अणु विशेषकर m-R.N.A. केन्द्रक कला छिद्रों से होकर कोशिकाद्रव्य में पहुँचते हैं और प्रोटीन संश्लेषण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
In simple words: केन्द्रक छिद्र केंद्रक झिल्ली में मौजूद छोटे-छोटे छेद होते हैं जो केंद्रक और कोशिकाद्रव्य के बीच पदार्थों, विशेष रूप से RNA अणुओं के आवागमन को नियंत्रित करते हैं।

🎯 Exam Tip: केन्द्रक छिद्रों की संरचना, व्यास और उनके माध्यम से होने वाले पदार्थ के परिवहन को समझें, विशेषकर RNA अणुओं के संदर्भ में।

 

Question 12. लयनकाय तथा रसधानी दोनों अन्तः झिल्लीमय संरचनाएँ हैं परन्तु कार्य की दृष्टि से ये अलग होते हैं। इस पर टिप्पणी लिखें।
Answer: लयनकाय (lysosome) एकक कला युक्त थैली है जो गॉल्जी काय से बनती है। इसमें हाइड्रोलिटिक विकर होते हैं- जैसे-लाइपेज, ओप्टिएज आदि जो अम्लीय pH में सक्रिय होते हैं। ये विकर कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, न्यूक्लिक अम्ल आदि का पाचन करते हैं। रसधान्ने (vacuole) कोशिकाद्रव्य में उपस्थित थैलीनुमा संरचना है जो एकक कला टोनोप्लास्ट से घिरी रहती है। इसमें जल, उत्सर्जी पदार्थ जो कोशिका के लिए आवश्यक नहीं हैं तथा कोशिका रस मिलता है। पौधों में ये कोशिका आयतन का 90 प्रतिशत घेर लेती है। पौधों में टोनोप्लास्ट आयन तथा अन्य पदार्थों का सान्द्रता विभव के विरुद्ध रसधानियों में आना सुनिश्चित रहता है। अतः रसधानी में सान्द्रता कोशिकाद्रव्य से अधिक रहती है। अमीबा में संकुचनशील रसधानी मिलती है जो उत्सर्जन का कार्य करती है। प्रोटिस्टा के सदस्यों में खाद्य वेक्युओल मिलते हैं जो खाद्य पदार्थों के निगलने के कारण बनते हैं।
In simple words: लयनकाय अपशिष्ट पदार्थों का पाचन करते हैं, जबकि रसधानियाँ जल, पोषक तत्वों और अपशिष्ट को संग्रहित करती हैं, जिससे कोशिका का आकार और टर्गर दबाव नियंत्रित रहता है।

🎯 Exam Tip: लयनकाय और रसधानी के कार्यों, संरचना और पौधों व जंतुओं में उनकी भूमिकाओं के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से जानें।

 

Question 13. रेखांकित चित्र की सहायता से निम्नलिखित की संरचना का वर्णन कीजिए
(i) केन्द्रक
(ii) तारककाय ।
Answer:

(i) केन्द्रक
सामान्यतः कोशिका का सबसे बड़ा, स्पष्ट तथा महत्त्वपूर्ण कोशिकांग केन्द्रक है। सर्वप्रथम इसकी खोज रॉबर्ट ब्राउन (1831) ने की। यह एक सघन, गोल अथवा अण्डाकार संरचना है। एक कोशिका में इनकी संख्या सामान्यतः एक (एककेन्द्रकीय- uninucleate) होती है। कभी-कभी इनकी संख्या दो (द्विकेन्द्रकी- binucleate) अथवा अनेक (बहुकेन्द्रकी multinucleate) होती है। पादप कोशिका के परिपक्वन के साथ-साथ रिक्तिका के केन्द्र में स्थित होने से यह कोशिका दृति (primordial utricle) में एक ओर आ जाता है।

1. संरचना (Structure) : केन्द्रक के चारों ओर दोहरी केन्द्रक कला (nuclear membrane) मिलती है। यह कला एकक कला (unit membrane) के समान ही लिपोप्रोटीन की बनी होती है। दोनों कलाओं के मध्य परिकेन्द्रीय स्थान (perinuclear space) मिलता है। केन्द्रक कला सतत (continuous) नहीं होती है। इसमें बीच-बीच में छिद्र मिलते हैं। इन्हें केन्द्रकीय छिद्र (nuclear pore) कहते हैं। इनका व्यास लगभग 400 होता है। ये केन्द्रकद्रव्य तथा कोशिकाद्रव्य में सम्बन्ध बनाए रखते हैं। बाह्य केन्द्रक कला का सम्बन्ध अन्तर्द्रव्यी जालिका से होता है। बाहरी केन्द्रक कला पर राइबोसोम चिपके रहते हैं। केन्द्रक कला के अन्दर प्रोटीनयुक्त सघन तरल होता है, जिसे केन्द्रकद्रव्य (nucleoplasm) कहते हैं। केन्द्रकद्रव्य में प्रोटीन तथा फॉस्फोरस की मात्रा अधिक होती है। इसमें न्यूक्लियोप्रोटीन (nucleoprotein) मिलते हैं। केन्द्रकद्रव्य में केन्द्रिक (nucleolus) तथा क्रोमैटिन (chromatin) सूत्र मिलते हैं। केन्द्रिक सामान्यतः एक, परन्तु कभी-कभी अधिक भी हो सकते हैं। केन्द्रिक में r-R.N.A. संश्लेषण होता है, जो राइबोसोम के लिए आवश्यक है। केन्द्रिक कोशिका विभाजन के समय लुप्त हो जाते हैं।

2. क्रोमैटिन सूत्र (Chromatin threads) :
सामान्य अवस्था में जाल के रूप में रहते हैं। इसका कुछ भाग अभिरंजन में गहरा रंग लेता है जिसे हेटरोक्रोमैटिन कहते हैं तथा जो भाग हल्का रंग लेता है, उसे यूक्रोमैटिन (euchromatin) कहते हैं। कोशिका विभाजन के समय ये संघनित होकर गुणसूत्र बनाते हैं।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र केन्द्रक की विस्तृत संरचना दर्शाता है, जिसमें बाहरी और भीतरी नाभिकीय झिल्ली, परिकेंद्रकीय स्थान, नाभिकीय छिद्र, न्यूक्लियोलस, क्रोमैटिन धागे (यूक्रोमैटिन और हेटरोक्रोमैटिन) और कैरियोलिम्फ जैसी संरचनाएं शामिल हैं। यह कोशिका के आनुवंशिक नियंत्रण और कार्यप्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है।

केन्द्रक के कार्य
केन्द्रक के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं


1. सम्पूर्ण कोशिका की संरचना, संगठन व कार्यों का नियन्त्रण तथा नियमन करना।
2. D.N.A. पर उपस्थित संदेश m-R.N.A. के रूप में कोशिकाद्रव्य में जाते हैं और वहाँ प्रोटीन के रूप में अनुवादित होते हैं।
3. प्रोटीन से विभिन्न विकर बनते हैं जो विभिन्न उपापचयी क्रियाओं का नियन्त्रण करते हैं।
4. कोशिका विभाजन का उत्तरदायित्व केन्द्रक पर होता है।
5. आनुवंशिक पदार्थ D.N.A केन्द्रक में मिलता है। संतति में लक्षण इसी के द्वारा पहुँचते हैं।
6. नई संतति में जीन ही लक्षणों को पहुँचाते हैं तथा संगठित स्वरूप प्रदान करते हैं।

(ii) तारककाय
तारककाय प्रायः जन्तु कोशिकाओं में केन्द्रक के समीप पाया जाता है। कुछ शैवाल तथा कवक आदि की पादप कोशिकाओं में भी तारककाय पाया जाता है। तारककार्य में दो सेन्ट्रिओल (centriole) पाए जाते हैं। प्रत्येक सेन्ट्रिओल नौ जोड़े (nine sets) त्रिक तन्तुओं (triplets fibres) से बना होता है। प्रत्येक त्रिक तन्तु में तीन सूक्ष्म नलिकाएँ (microtubules) एक रेखा में स्थित होती हैं। ये त्रिक तन्तु एमॉरफस पदार्थ में धंसे रहते हैं। सेन्ट्रिओल के चारों ओर स्वच्छ कोशिकाद्रव्य का आवरण होता है, इसे सेन्ट्रोस्फीयर (centrosphere) कहते हैं। सेन्ट्रिओल तथा सेन्ट्रोस्फीयर मिलकर तारककाय (centrosome) कहलाते हैं।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में सेन्ट्रोसोम की संरचना को दर्शाता है, जिसमें परिधीय त्रिक नलिकाएं, केंद्रीय स्थान, बाहरी मैट्रिक्स और आंतरिक मैट्रिक्स जैसी संरचनाएं शामिल हैं। सेन्ट्रोसोम कोशिका विभाजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

तारककाय के कार्य


1. यह कोशिका विभाजन के समय त (spindle) का निर्माण करता है। तारककाय विभाजित होकर विपरीत ध्रुवों का निर्माण करता है।
2. शुक्राणुओं के निर्माण के समय दोनों सेन्ट्रियोल में से एक शुक्राणु के अक्षीय तन्तु (axial filament) का निर्माण करता है।
In simple words: केंद्रक कोशिका के कार्यों को नियंत्रित करता है और आनुवंशिक जानकारी रखता है, जबकि तारककाय कोशिका विभाजन और शुक्राणु निर्माण में महत्वपूर्ण है।

🎯 Exam Tip: केन्द्रक की विस्तृत संरचना, उसके विभिन्न घटकों (न्यूक्लियोप्लाज्म, क्रोमैटिन, न्यूक्लियोलस) के कार्य, और तारककाय की भूमिका को अच्छी तरह से तैयार करें।

 

Question 14. गुणसूत्र बिन्दु क्या है? गुणसूत्र बिन्दु की स्थिति के आधार पर गुणसूत्र का वर्गीकरण किस रूप में होता है? अपने उत्तर को देने हेतु विभिन्न प्रकार के गुणसूत्रों पर गुणसूत्र बिन्दु की स्थिति को दर्शाने हेतु चित्र बनाइए ।
Answer:

गुणसूत्र बिन्दु
प्रत्येक गुणसूत्र दो अर्द्धगुणसूत्र या क्रोमेटिड्स (chromatids) से बना होता है। क्रोमेटिड्स पर क्रोमोमीयर्स (chromomeres) स्थित होते हैं। गुणसूत्र के दोनों क्रोमेटिड्स गुणसूत्र बिन्दु या सेन्ट्रोमीयर (centromere) द्वारा परस्पर जुड़े होते हैं। गुणसूत्र बिन्दु की स्थिति के आधार पर गुणसूत्रे निम्नलिखित प्रकार के होते हैं


1. अन्तकेन्द्री (Telocentric) : इसमें गुणसूत्र बिन्दु गुणसूत्र के एक ओर स्थित होता है।
2. अग्र बिन्दु (Acrocentric) : इसमें गुणसूत्र का एक भाग बहुत छोटा तथा दूसरा भाग बहुत बड़ा होता है। इसमें गुणसूत्र बिन्दु एक सिरे के पास स्थित होता है।
3. उपमध्य केन्द्री (Submetacentric) : इसमें गुणसूत्र बिन्दु एक किनारे के पास होता है। इसे गुणसूत्र की दोनों भुजाएँ असमान होती हैं।
4. मध्य केन्द्री (Metacentric) : इसमें गुणसूत्र बिन्दु गुणसूत्र के बीचों-बीच स्थित होता है। इससे गुणसूत्र की दोनों भुजाएँ बराबर लम्बाई की होती हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र सेन्ट्रोमीयर (गुणसूत्र बिन्दु) की स्थिति के आधार पर गुणसूत्रों के विभिन्न प्रकारों को दर्शाता है, जैसे मेटॉसेंट्रिक (मध्य में), सब-मेटॉसेंट्रिक (मध्य से थोड़ा दूर), एक्रोसेंट्रिक (किनारे के पास) और टिलोसेंट्रिक (एक सिरे पर)। इसमें एसेन्ट्रिक गुणसूत्र भी दिखाया गया है जहाँ सेन्ट्रोमीयर अनुपस्थित होता है।

जब गुणसूत्र में गुणसूत्र बिन्दु (centromere) नहीं पाया जाता तो गुणसूत्र को एसेन्ट्रिक (acentric) कहते हैं और जब गुणसूत्र बिन्दु की संख्या दो या अधिक होती है तो इसे डाइसेन्ट्रिक (dicentric) या पॉलीसेन्ट्रिक (polycentric) कहते हैं। कुछ गुणसूत्रों में द्वितीयक संकीर्णन (secondary constriction) पाया जाता है। इस प्रकार के गुणसूत्र को सैट गुणसूत्र (sat-chromosome) कहते हैं।
In simple words: गुणसूत्र बिन्दु वह स्थान है जहाँ क्रोमेटिड्स जुड़े होते हैं; इसकी स्थिति के आधार पर गुणसूत्रों को टिलोसेंट्रिक, एक्रोसेंट्रिक, सबमेटासेंट्रिक और मेटोसेंट्रिक में वर्गीकृत किया जाता है।

🎯 Exam Tip: गुणसूत्र बिन्दु की परिभाषा, उसके विभिन्न प्रकारों का वर्गीकरण और प्रत्येक प्रकार की विशेषता को याद रखें, विशेषकर उनके चित्रों के साथ।

 

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

Question 1. जीवन का भौतिक आधार है।
(क) केन्द्रक
(ख) लिंग गुणसूत्र
(ग) जीवद्रव्य
(घ) DNA
Answer: (ग) जीवद्रव्य
In simple words: जीवद्रव्य कोशिका का जीवित पदार्थ है जिसमें सभी महत्वपूर्ण जैविक क्रियाएं होती हैं, इसलिए इसे जीवन का भौतिक आधार माना जाता है।

🎯 Exam Tip: जीवद्रव्य की परिभाषा और कोशिका में इसकी भूमिका को समझें।

 

Question 2. वह कोशिकांग जो रूपान्तरण में मदद करता है, है।
(क) केन्द्रक
(ख) हरितलवक
(ग) राइबोसोम्स
(घ) माइटोकॉण्ड्रिया
Answer: (ग) राइबोसोम्स
In simple words: राइबोसोम्स प्रोटीन संश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जहाँ आनुवंशिक जानकारी प्रोटीन में रूपांतरित होती है।

🎯 Exam Tip: राइबोसोम के कार्य और प्रोटीन संश्लेषण में इसकी भूमिका को याद रखें।

 

Question 3. राइबोसोम की दोनों सब-इकाइयों के जुड़ने में Mg++ सान्द्रता की आवश्यकता होती है।
(क) 0.001 M
(ख) 0.0001 M
(ग) 0.01 M
(घ) 0.1 M
Answer: (घ) 0.1 M
In simple words: मैग्नीशियम आयन की एक विशिष्ट सांद्रता (0.1 M) राइबोसोम की छोटी और बड़ी उप-इकाइयों को एक साथ जोड़ने के लिए आवश्यक है ताकि वे कार्यशील राइबोसोम बना सकें।

🎯 Exam Tip: राइबोसोम के संयोजन में मैग्नीशियम आयन की सटीक सांद्रता को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. 70 S राइबोसोम के कौन-से दो उपभाग है?
(क) 50 S और 20 S
(ख) 50 S और 30 S
(ग) 50 S और 40 S
(घ) 40 S और 30 S
Answer: (ख) 50 S और 30 S
In simple words: 70S राइबोसोम, जो प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में पाया जाता है, 50S और 30S नामक दो उप-इकाइयों से मिलकर बना होता है।

🎯 Exam Tip: 70S और 80S राइबोसोम की उप-इकाइयों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

 

Question 5. 80 S राइबोसोम के कौन-से दो उपभाग होते हैं?
(क) 40 S और 40 S
(ख) 50 S और 30 S
(ग) 60 S और 40 S
(घ) 70 S और 30 S
Answer: (ग) 60 S और 40 S
In simple words: 80S राइबोसोम, जो यूकैरियोटिक कोशिकाओं में पाया जाता है, 60S और 40S नामक दो उप-इकाइयों से मिलकर बना होता है।

🎯 Exam Tip: 70S और 80S राइबोसोम की उप-इकाइयों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

 

Question 6. डाइमोर्फिक हरितलवक पत्तियों में पाये जाते हैं ।
(क) मटर में
(ख) सूर्यमुखी में
(ग) साइप्रस में
(घ) चना में
Answer: (ग) साइप्रस में
In simple words: डाइमोर्फिक हरितलवक (दो अलग-अलग प्रकार के क्लोरोप्लास्ट) कुछ पौधों, जैसे साइप्रस में पाए जाते हैं, जो विशेष प्रकाश संश्लेषण पथों के अनुकूल होते हैं।

🎯 Exam Tip: डाइमोर्फिक क्लोरोप्लास्ट वाले पौधों के उदाहरणों को याद रखें, विशेषकर C4 पौधों के संदर्भ में।

 

Question 7. यूलोथ्रिक्स में हरितलवक का आकार लेता है।
(क) मेखला के आकार का
(ख) कप के आकार का
(ग) सर्पिलाकार का
(घ) तारा के आकार का
Answer: (क) मेखला के आकार का
In simple words: यूलोथ्रिक्स नामक शैवाल में, क्लोरोप्लास्ट मेखला (गर्डल-शेप्ड) के आकार का होता है, जो इसकी एक विशिष्ट विशेषता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न शैवालों में क्लोरोप्लास्ट के आकार की विविधता को याद रखना सहायक होता है।

 

Question 8. एण्टीकोडोन्स पाये जाते हैं।
(क) t-RNA में
(ख) r-RNA में
(ग) m-RNA में
(घ) इनमें से सभी में
Answer: (क) t-RNA में
In simple words: एंटीकोडॉन ट्रांसफर RNA (t-RNA) पर स्थित होते हैं और संदेशवाहक RNA (m-RNA) पर कोडॉन से जुड़कर प्रोटीन संश्लेषण में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: t-RNA, m-RNA और r-RNA की संरचना और कार्यों को समझें, विशेषकर एंटीकोडॉन और कोडॉन के संबंध में।

 

Question 9. डी०एन०ए० नहीं होता है।
(क) क्लोरोप्लास्ट में
(ख) माइटोकॉण्ड्रिया में
(ग) न्यूक्लियस में
(घ) परऑक्सीसोम्स में
Answer: (घ) परऑक्सीसोम्स में
In simple words: परऑक्सीसोम्स में डीएनए नहीं पाया जाता है, जबकि क्लोरोप्लास्ट, माइटोकॉन्ड्रिया और केंद्रक सभी में डीएनए होता है।

🎯 Exam Tip: कोशिकांगों में डीएनए की उपस्थिति या अनुपस्थिति को याद रखें, जो उनके स्व-प्रतिकृति क्षमता से संबंधित है।

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

Question 1. प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं के दो उदाहरण दीजिए ।
Answer:
1. एश्केरिशिया कोलाई
2. आकबैक्टीरिया
In simple words: एश्केरिशिया कोलाई और आर्कबैक्टीरिया प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं के उदाहरण हैं, जिनमें एक सरल कोशिका संरचना होती है जिसमें नाभिकीय झिल्ली का अभाव होता है।

🎯 Exam Tip: प्रोकैरियोटिक जीवों के सामान्य उदाहरण याद रखें, जैसे बैक्टीरिया और आर्किया।

 

Question 2. प्रोकैरियोटिक कोशिका के केन्द्रक की क्या विशेषताएँ होती हैं?
Answer: प्रोकैरियोटिक कोशिका में आरम्भी अवास्तविक केन्द्रक होता है जिसे न्यूक्लियाड कहते हैं। केन्द्रक,कला एवं केन्द्रिका भी अनुपस्थित होती हैं। DNA के धागों के साथ प्रोटीन नहीं जुड़ी होती है।
In simple words: प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में एक वास्तविक केंद्रक नहीं होता; इसके बजाय, आनुवंशिक सामग्री (न्यूक्लियॉइड) कोशिकाद्रव्य में सीधे मौजूद होती है और इसमें हिस्टोन प्रोटीन नहीं होते।

🎯 Exam Tip: प्रोकैरियोटिक न्यूक्लियॉइड की विशेषताओं को समझें और इसे यूकैरियोटिक केंद्रक से अलग पहचानें।

 

Question 3. प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटिक कोशिकाओं के केन्द्रकों में क्या अन्तर होता है?
Answer: प्रोकैरियोटिक कोशिका में विशिष्ट केन्द्रक अनुपस्थित होता है तथा उसके स्थान पर न्यूक्लियाईड या जीनोफोर उपस्थित होता है जबकि यूकैरियोटिक कोशिकाओं में केन्द्रक कला, क्रोमैटिन, केन्द्रक द्रव्य, केन्द्रक मैट्रिक्स व केन्द्रिक युक्त एक विशिष्ट केन्द्रक होता है।
In simple words: प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में एक परिभाषित केंद्रक झिल्ली या न्यूक्लियोलस नहीं होता, जबकि यूकैरियोटिक कोशिकाओं में एक सुसंगठित, झिल्ली-बद्ध केंद्रक होता है जिसमें क्रोमैटिन और न्यूक्लियोलस होते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक केंद्रक के बीच के मुख्य अंतरों को याद रखें, विशेषकर झिल्ली, क्रोमैटिन और न्यूक्लियोलस की उपस्थिति के संबंध में।

 

Question 4. एक यूकैरियोटिक पादप कोशिका में पाये जाने वाले दो अर्द्ध-स्वायत्त कोशिकांगों के नाम बताइए। या सुकेन्द्रकीय कोशिका में पाये जाने वाले दो अर्द्ध-स्वायत्त कोशिकांगों के नाम लिखिए।
Answer: यूकैरियोटिक पादप कोशिका में पाये जाने वाले माइटोकॉण्डिया (mitochondria) तथा लवक (plastids) अर्द्ध-स्वायत्त कोशिकांग (semi-autonomous cell organelles) हैं।
In simple words: माइटोकॉन्ड्रिया और लवक (जैसे क्लोरोप्लास्ट) यूकैरियोटिक पादप कोशिकाओं के अर्द्ध-स्वायत्त कोशिकांग हैं क्योंकि उनके पास अपना डीएनए और राइबोसोम होते हैं, जिससे वे अपनी कुछ प्रोटीन स्वयं बना सकते हैं।

🎯 Exam Tip: अर्द्ध-स्वायत्त कोशिकांगों की परिभाषा और उनके उदाहरणों को याद रखें, साथ ही उनकी 'अर्द्ध-स्वायत्तता' का कारण भी समझें।

 

Question 5. तृतीयक कोशिकाभित्ति का पता लगाने वाले वैज्ञानिक का नाम लिखिए।
Answer: साइरिल फिग।
In simple words: साइरिल फिग नामक वैज्ञानिक ने पौधों में तृतीयक कोशिका भित्ति की खोज की, जो कुछ विशेष पादप कोशिकाओं में द्वितीयक भित्ति के भीतर बनती है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न कोशिका भित्ति परतों की खोज से जुड़े वैज्ञानिकों के नामों को याद रखें।

 

Question 6. एण्डोप्लाज्मिक रेटिकुलम के कार्य बताइए ।
Answer:
1. प्रोटीन संश्लेषण के लिए स्थान प्रदान करना।
2. ग्लाइकोजन संश्लेषण तथा संचय करना।
In simple words: एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम प्रोटीन और लिपिड के संश्लेषण, भंडारण और परिवहन में शामिल एक झिल्ली-बद्ध कोशिकांग है।

🎯 Exam Tip: एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम के मुख्य कार्यों (प्रोटीन संश्लेषण, लिपिड चयापचय, डिटॉक्सीफिकेशन) को याद रखें।

 

Question 7. हरितलवक के किस भाग में कार्बन स्वांगीकरण होता है?
Answer: हरितलवक (chloroplast) के स्ट्रोमा (stroma) भाग में ।
In simple words: क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा में कार्बन डाइऑक्साइड को शर्करा में बदलने की प्रक्रिया (केल्विन चक्र) होती है, जो प्रकाश संश्लेषण का अप्रकाशीय चरण है।

🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषण के प्रकाशीय और अप्रकाशीय चरणों के स्थानों को याद रखें (ग्रैना में प्रकाशीय, स्ट्रोमा में अप्रकाशीय)।

 

Question 8. पर्णहरित के पाइरोल चक्र से सम्बन्धित तत्त्व का नाम लिखिए।
Answer: Mg (मैग्नीशियम)।
In simple words: मैग्नीशियम क्लोरोफिल अणु के केंद्र में स्थित धातु आयन है, जो प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

🎯 Exam Tip: क्लोरोफिल की संरचना और उसमें मौजूद प्रमुख धातु आयन (मैग्नीशियम) को याद रखना आवश्यक है।

 

Question 9. पादप कोशिका के उस कोशिकांग का नाम लिखिए जो प्रकाश श्वसन के लिए उत्तरदायी है।
Answer: परऑक्सीसोम (peroxisome)।
In simple words: परऑक्सीसोम वे कोशिकांग हैं जो प्रकाश श्वसन नामक प्रक्रिया में शामिल होते हैं, जहाँ वे पौधों में कुछ चयापचयी प्रतिक्रियाओं को अंजाम देते हैं।

🎯 Exam Tip: परऑक्सीसोम के कार्यों को याद रखें, विशेषकर प्रकाश श्वसन और विषहरण में उनकी भूमिका।

 

Question 10. किसी एक पौधे का नाम बताइए जिसमें द्विआकारिक हरितलवक होते हैं।
Answer: मक्का (C4 पौधे) में द्विआकारिक हरितलवक पाये जाते हैं।
In simple words: मक्का जैसे C4 पौधों में, बंडल शीथ कोशिकाओं और मीसोफिल कोशिकाओं में दो अलग-अलग प्रकार के क्लोरोप्लास्ट होते हैं, जिन्हें द्विआकारिक हरितलवक कहते हैं।

🎯 Exam Tip: C4 पौधों में द्विआकारिक क्लोरोप्लास्ट की अवधारणा को समझें और इसके उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 11. उस कोशिकांग का नाम बताइए जो प्रोटीन-संश्लेषण से सम्बन्धित है।
Answer: राइबोसोम ।
In simple words: राइबोसोम कोशिकांग प्रोटीन संश्लेषण के लिए जिम्मेदार होते हैं, जहां आनुवंशिक कोड को प्रोटीन में अनुवादित किया जाता है।

🎯 Exam Tip: राइबोसोम को 'प्रोटीन फैक्ट्री' के रूप में याद रखें और इसके कार्य को जानें।

 

Question 12. RNA में कौन-सी शर्करा पाई जाती है?
Answer: RNA में राइबोस (ribose) शर्करा पाई जाती है।
In simple words: आरएनए (RNA) में राइबोस शर्करा होती है, जबकि डीएनए (DNA) में डीऑक्सीराइबोस शर्करा होती है।

🎯 Exam Tip: DNA और RNA के बीच के प्रमुख रासायनिक अंतरों में से एक, उनकी शर्करा के प्रकार को याद रखें।

 

Question 13. न्यूक्लियोसोम अभिधारणा किस वैज्ञानिक ने दी?
Answer: वुडकोक (1973) ने क्रोमेटिन की संरचना के अध्ययन के दौरान न्यूक्लियोसोम शब्द का प्रयोग किया, जबकि इसकी संरचना का वर्णन कॉर्नबर्ग (1974) द्वारा किया गया।
In simple words: वुडकोक ने न्यूक्लियोसोम शब्द दिया और कॉर्नबर्ग ने इसकी संरचना का वर्णन किया, जो क्रोमैटिन में डीएनए और हिस्टोन प्रोटीन की पैकेजिंग इकाई है।

🎯 Exam Tip: न्यूक्लियोसोम की अवधारणा और इसकी खोज में शामिल वैज्ञानिकों के नामों को याद रखें।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

Question 1. निम्नलिखित में अन्तर स्पष्ट कीजिए
(क) प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटिक कोशिका
(ख) जन्तु कोशिका तथा वनस्पति कोशिका।
(ग) डी०एन०ए० तथा आर०एन०ए०
Answer:

(क)

प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटिक कोशिकाओं के बीच अन्तर

प्रोकैरियोटिक कोशिकायूकैरियोटिक कोशिका
• इनका आकार 0.1-5.0 µm होता है।• इनका आकार 5-100µm होता है।
• कोशिका भित्ति यदि उपस्थित होती है तो म्यूकोपेप्टाइड या पेप्टाइडोग्लाइकेन की बनी होती है।• कोशिका भित्ति यदि उपस्थित होती है तो सेलुलोस (cellulose) की बनी होती है। पेप्टाइडोग्लाइकेन अनुपस्थित होता है।
• एक विशिष्ट केन्द्रक अनुपस्थित होता है, इसके स्थान पर न्यूक्लियाइड या जीनोफोर (nucleoid or genophore) उपस्थित होता है।• यूकैरियोटिक कोशिका केन्द्रक कला (nuclear membrane), क्रोमेटिन (chromatin), केन्द्रक द्रव्य (nucleoplasm), केन्द्रक मैट्रिक्स (nuclear matrix) व केन्द्रिक (nucleolus) का बना एक विशिष्ट केन्द्रक (nucleus) रखती है।
• न्यूक्लियाइड या DNA स्वतन्त्र रूप से कोशिकाद्रव्य में पाया जाता है।• DNA केन्द्रक, माइटोकॉण्ड्रिया व लवकों के अन्दर पाया जाता है।
• DNA सामान्यतः वृत्ताकार (circular) होता है।• DNA सामान्यतः रेखिक (linear) होता है, किन्तु वृत्ताकार (circular) DNA माइटोकॉण्ड्रिया व लवकों के अन्दर होता है।
• DNA हिस्टोन प्रोटीन (histone protein) के बिना किसी संयुग्म वाला होता है।• DNA हिस्टोन से जुड़ा होता है।
• DNA की मात्रा कम होती है।• DNA की मात्रा तुलनात्मक रूप से अधिक होती है।
• कुछ कोशिकाओं में प्लाज्मिड (plasmid) पाये जाते हैं।• प्लाज्मिड (plasmid) प्रायः नहीं पाए जाते हैं।
• कोशिका कला (plasma membrane) के अन्तर्वलन (invagenation) से मीसोसोम्स (mesosomes) नामक संरचनाएँ बनती हैं।• मीसोसोम (mesosome) सदृश संरचना सामान्यतः अनुपस्थित होती है।
• कोशिका झिल्ली द्विगुणित उत्पादों को पृथक् करने में प्रयुक्त होती है।• कोशिका झिल्ली द्विगुणित उत्पादों को पृथक् करने में प्रयुक्त नहीं होती है।
• तर्क उपकरण (spindle apparatus) कोशिका विभाजन के समय नहीं बनता है।• तर्क उपकरण (spindle apparatus) कोशिका विभाजन के समय बनता है।
• कशामिका (flagellum) छोटी (4-5 µm x 12 µm) होती है।• कशामिका (flagellum) बड़ी (150-200 µm x 200 nm) होती है।
• कशाभिका (flagellum) एक श्रृंखला वाली होती है।• कशाभिका (flagellum) 11- श्रृंखलाओं की (9 + 2) होती है।
• जीवद्रव्य भ्रमण अनुपस्थित होता है।• कोशिकाद्रव्य प्रवाह या जीवद्रव्य भ्रमण (cytoplasmic movement or protoplasmic movement) सामान्यतः होता है।
• कोशिकाद्रव्य में विभिन्न कोशिकांग (organelles) अनुपस्थित होते हैं।• कोशिकाद्रव्य में विभिन्न कोशिकांग (organelles)- जैसे-माइटोकॉण्ड्रिया, गॉल्जीकाय, अन्तःप्रद्रव्यी जालिका आदि उपस्थित होते हैं।
• श्वसन की क्रिया मीसोसोम्स (mesosomes) तथा जीवद्रव्य में सम्पन्न होती है।• श्वसन की क्रिया माइटोकॉण्ड्रिया तथा जीवद्रव्य में सम्पन्न होती है।
• हरितलवक अनुपस्थित होता है परन्तु प्रकाश संश्लेषी तन्त्र के के रूप में आन्तरिक झिल्लियाँ पाई जाती हैं।• पादपों में प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) की क्रिया हरितलवक नामक भाग में सम्पन्न होती है।
• सूत्री एवं अर्धसूत्री कोशिका विभाजन नहीं पाया जाता है।• कोशिका विभाजन (cell division) सूत्री (mitosis) तथा अर्द्धसूत्री (meiosis) प्रकार का पाया जाता है।
• राइबोसोम्स (ribosomes) 70S प्रकार के पाये जाते हैं।• राइबोसोम्स (ribosomes) 80S, 70S, 55S प्रकार के पाये जाते हैं।
• लैंगिक जनन (sexual reproduction) प्रायः अनुपस्थित होता है परन्तु आनुवंशिक पुनर्योजन (genetic recombination) पाया जाता है।• लैंगिक जनन (sexual reproduction) पूर्ण विकसित प्रकार का पाया जाता है।
• इसमें रोम (pili) या झालर (fimbrial) पाये जा सकते हैं।• इसमें अनुपस्थित होते हैं।

(ख)

जन्तु तथा पादप (वनस्पति) कोशिकाओं के बीच अन्तर

जन्तु कोशिकापादप कोशिका
• कोशिका भित्ति (cell wall) अनुपस्थित होती है।• पादप कोशिका दृढ़ कोशिका भित्ति (cell wall) द्वारा घिरी होती है।
• कोशिका भित्ति की अनुपस्थिति के कारण, जन्तु कोशिका का आकार निश्चित नहीं होता है।• आकार निश्चित होता है।
• एक ऊतक द्रव्य (tissue fluid) सामान्यतः कोशिकाओं को भिगोता है।• ऊतक द्रव्य (tissue fluid) पादपों में नहीं होता है।
• जीवद्रव्य पूरी कोशिका को भर देता है।• जीवद्रव्य सामान्यतः परिधीय होता है।
• रिक्तिकाएँ (vacuoles) या तो अनुपस्थित होती हैं या संख्या में कम तथा आकार में छोटी होती हैं।• पादप कोशिका में एक बड़ी केन्द्रीय रिक्तिका (central vacuole) होती है।
• केन्द्रक (nucleus) केन्द्र में होता है।• केन्द्रक (nucleus) परिधीय कोशिकाद्रव्य में होता है।
• क्रिस्टल अनुपस्थित होते हैं।• पादप कोशिकाओं में विभिन्न प्रकार के क्रिस्टल पाये जा सकते हैं।
• संचित भोजन ग्लाइकोजेन (glycogen) होता है।• संचित भोजन मण्ड (starch) होता है।
• लवक (plastids) अनुपस्थित होते है।• लवक (plastids) पादप कोशिकाओं में होते हैं।
• गॉल्जी उपकरण सामान्यतः एकल संकर होता है।• गॉल्जी उपकरण कई पृथक् इकाइयों जिसे डिक्टियोसोम्स कहते हैं, का बना होता है।
• तारककाय (centrosome) उपस्थित होता है।• तारककाय (centrosome) कुछ निम्न श्रेणी के पादपों को छोड़कर सभी में अनुपस्थित होता है।
• ग्लाइऑक्सीसोम (glyoxysome) अनुपस्थित होता है।• ग्लाइऑक्सीसोम (glyoxysome) कुछ पादप कोशिकाओं में पाया जाता है।
• लाइसोसोम्स (lysosomes) उपस्थित होते हैं।• लाइसोसोम्स (lysosomes) प्रायः अनुपस्थित होते हैं। इनका कार्य दूसरे घटकों द्वारा ले लिया जाता है।
• जन्तु कोशिका अपने लिए आवश्यक कुछ अमीनो अम्ल, विटामिन व सह एन्जाइमों को बनाने में असमर्थ होती है।• पादप कोशिका अपने लिए आवश्यक सभी पदार्थों का संश्लेषण करने में समर्थ होती है।
• कोशिकाद्रव्य विभाजन विदलन (cleavage) द्वारा होता है।• कोशिकाद्रव्य विभाजन सामान्यतः कोशिका प्लेट (cell plate) विधि द्वारा होता है।

(ग)

डी०एन०ए० तथा आर०एन०ए० के बीच अन्तर

डी०एन०ए० (DNA)आर एन०ए० (RNA)
• डीऑक्सीराइबोज (deoxyribose) शर्करा पाई जाती है।• राइबोज (ribose) शर्करा पाई जाती है।
• थाइमीन (thymine) नाइट्रोजन बेस पाया जाता है।• थाइमीन के स्थान पर यूरैसिल (uracil) नाइट्रोजन बेस पाया जाता है।
• अणु दो लम्बे, कुण्डलित तथा एक-दूसरे के पूरक सूत्रों (helices) का बना होता है।• अणु में केवल एक ही सूत्र (helix) होता है।
• यह आनुवंशिक पदार्थ (genetic material) है और कोशिका में होने वाली सभी क्रियाओं पर आर०एन०ए० के द्वारा नियन्त्रण करता है।• यह आनुवंशिक पदार्थ नहीं है (कुछ विषाणुओं को छोड़कर) और प्रोटीन संश्लेषण में विशेष योगदान देता है।
• यह मुख्य रूप से केन्द्रक के क्रोमैटिन सूत्रों (chromatin threads) में ही पाया जाता है।• यह मुख्य रूप से केन्द्रक के केन्द्रकीय द्रव्य, केन्द्रिक और कोशिकाद्रव्य में पाया जाता है।
• द्विगुणन (duplication or replication) के द्वारा अपने समान नये अणु उत्पन्न करता है।• द्विगुणन का गुण नहीं पाया जाता है। इसका निर्माण डी०एन०ए० अणुओं के द्वारा लिप्यन्तरण (transcription) से होता है।

In simple words: प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिकाएं, जन्तु और पादप कोशिकाएं, और डीएनए व आरएनए सभी अपनी संरचना और कार्यों में मौलिक अंतर रखते हैं जो जीवन प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक हैं।

🎯 Exam Tip: इन तीनों तुलनात्मक अंतरों को सारणीबद्ध रूप में याद रखें, क्योंकि यह अक्सर बोर्ड परीक्षाओं में पूछा जाता है। प्रत्येक बिंदु के विशिष्ट विवरण पर ध्यान दें।

(ग) डी०एन०ए० तथा आर०एन०ए० के बीच अन्तर
Answer:

डी०एन०ए० (DNA)आर०एन०ए० (RNA)
  • डीऑक्सीराइबोज (deoxyribose) शर्करा पाई जाती है।
  • राइबोज (ribose) शर्करा पाई जाती है।
  • थाइमीन (thymine) नाइट्रोजन बेस पाया जाता है।
  • थाइमीन के स्थान पर यूरैसिल (uracil) नाइट्रोजन बेस पाया जाता है।
  • अणु दो लम्बे, कुण्डलित तथा एक-दूसरे के पूरक सूत्रों (helices) का बना होता है।
  • अणु में केवल एक ही सूत्र (helix) होता है।
  • यह आनुवंशिक पदार्थ (genetic material) है और कोशिका में होने वाली सभी क्रियाओं पर आर०एन०ए० के द्वारा नियन्त्रण करता है।
  • यह आनुवंशिक पदार्थ नहीं है (कुछ विषाणुओं को छोड़कर) और प्रोटीन संश्लेषण में विशेष योगदान देता है।
  • यह मुख्य रूप से केन्द्रक के क्रोमैटिन सूत्रों (chromatin threads) में ही पाया जाता है।
  • यह मुख्य रूप से केन्द्रक के केन्द्रकीय द्रव्य, केन्द्रिक और कोशिकाद्रव्य में पाया जाता है।
  • द्विगुणन (duplication or replication) के द्वारा अपने समान नये अणु उत्पन्न करता है।
  • द्विगुणन का गुण नहीं पाया जाता है। इसका निर्माण डी०एन०ए० अणुओं के द्वारा लिप्यन्तरण (tran-scription) से होता है।

In simple words: DNA and RNA are nucleic acids, differing primarily in their sugar component, a base (thymine vs. uracil), and their typical structure (double helix vs. single strand). DNA serves as the genetic material, while RNA plays crucial roles in protein synthesis and gene expression.

🎯 Exam Tip: Understanding the key differences between DNA and RNA, including their chemical composition and functional roles, is essential for scoring well. Pay attention to the specific nitrogenous bases and sugar types present in each.

 

Question 2. एक ग्रेनम थायलेकॉयड की संरचना का नामांकित चित्र बनाइए ।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक ग्रेनम थायलेकॉयड की संरचना को दर्शाता है, जिसमें पिगमेंट, थायलेकॉयड, थायलेकॉयड स्पेस, और ATP सिंथेस जैसे घटक दिखाए गए हैं। इसमें स्ट्रोमा और ग्रैनम भी शामिल हैं, जो प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।
In simple words: A granum thylakoid diagram illustrates the internal structure of chloroplasts, showing the stacked thylakoids where light-dependent reactions of photosynthesis occur. It highlights components like pigments and ATP synthase crucial for energy conversion.

🎯 Exam Tip: When drawing or interpreting diagrams of cellular organelles, clearly label all parts and understand their function within the cell. This demonstrates a thorough understanding of cell structure and physiology.

 

Question 3. राइबोसोम की संरचना तथा कार्य का वर्णन कीजिए। या राइबोसोम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: राइबोसोम राइबोसोम कलाविहीन (non-membranous) तथा गोलाकार आकृति के सूक्ष्म कण होते हैं। ये कोशिका में अन्तःप्रद्रव्यी जालिका से चिपके हुए अथवा कोशिकाद्रव्य में स्वतन्त्र रूप में मिलते हैं। ये लगभग समान परिमाण के होते हैं तथा इनमें लगभग 60% राइबोन्यूक्लिक अम्ल (RNA) तथा 40% प्रोटीन्स होते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक 70S राइबोसोम की सूक्ष्म संरचना को दर्शाता है, जिसमें इसकी दो मुख्य इकाइयाँ, एक बड़ी सबयूनिट (50S) और एक छोटी सबयूनिट (30S) दिखाई गई हैं। ये दोनों इकाइयाँ प्रोटीन संश्लेषण के लिए मिलकर कार्य करती हैं। राइबोसोम लगभग 100-150 Å व्यास के दो प्रकार के होते हैं 70S तथा 80S, इनमें से 70S आकार के राइबोसोम छोटे होते हैं तथा ये जीवाणु कोशिका, माइटोकॉण्ड्रिया क्लोरोप्लास्ट तथा अन्य प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में पाये जाते हैं तथा 80S राइबोसोम्स सभी यूकैरियोटिक कोशिकाओं में पाये जाते हैं। राइबोसोम्स की संरचना अत्यन्त जटिल होती है। इसकी दो इकाइयाँ होती हैं। एक इकाई छोटी और दूसरी बड़ी होती है। दोनों इकाइयाँ मिलकर एक गरारी की तरह की संरचना बनाती हैं। बड़ी इकाई गुम्बदाकार तथा छोटी इकाई टोपी की तरह होती है। कोशिकाद्रव्य में जब Mg++ आयन का सान्द्रण कम हो जाता है तो दोनों इकाइयाँ अलग अलग हो जाती हैं, किन्तु इन आयनों की अधिकता होने पर दो राइबोसोम भी जुड़ जाते हैं। इन जुड़े हुए आकारों को डायमर (dimer) कहते हैं। राइबोसोम का निर्माण केन्द्रिक में होता है तथा वहाँ से केन्द्रक द्रव्य में होकर ये केन्द्रक कला के छिद्रों से निकलकर कोशिकाद्रव्य में आ जाते हैं। राइबोसोम्स के कार्य इबोसोम (ribosome), ऐसी विशिष्ट संरचनाएँ हैं जो प्रोटीन संश्लेषण (protein synthesis) के स्थल के रूप में कार्य करती हैं। इनकी संरचना में राइबोसोमल आर०एन०ए० (ribosomal RNA = r-RNA) होता है। यह अन्य आर०एन०ए० अणुओं (messenger RNA =m-RNA and transfer RNA= t-RNA) के साथ मिलकर प्रोटीन संश्लेषण की न्तिम कड़ी बनाते हैं। इसी पर विभिन्न एन्जाइम्स आदि की उपस्थिति में प्रोटीन का संश्लेषण होता है। प्रोटीन के संश्लेषण के लिए कई राइबोसोम्स (ribosomes) मिलकर पॉलिराइबोसोम (polyribosome) श्रृंखला का निर्माण करते हैं जिनमें उपस्थित r-RNA अणु महत्त्वपूर्ण कार्य करते हैं। ये सन्देशवाहक आर०एन०ए० (messenger RNA = m-RNA के द्वारा) डी०एन०ए० से प्राप्त सन्देशों के अनुसार अन्तरण आर०एन०ए० अणुओं (transfer RNA = t-RNA) की सहायता से एक निश्चित तथा विशेष क्रम में अमीनो अम्लों को संगठित (organize) तथा श्रृंखलाबद्ध करते हैं। अपने-अपने कार्यों को सम्पादित करने के लिए विभिन्न RNA अणुओं पर विशेष प्रकार के कोड (code) तथा प्रतिकोड (anticode) स्थित होते हैं। इन्हीं के आधार पर श्रृंखला की विशेषता तथा निश्चित क्रम बना रहता है।
In simple words: Ribosomes are non-membranous cellular organelles crucial for protein synthesis, composed of ribosomal RNA and proteins. They exist as two subunits (large and small) and can form polyribosomes to efficiently translate mRNA into protein chains.

🎯 Exam Tip: Understanding the structure of ribosomes, their composition, and their central role in protein synthesis (translation) is vital. Remember the difference between 70S and 80S ribosomes and where they are found.

 

Question 4. 80 S तथा 70 s राइबोसोम्स में अन्तर बताइए ।
Answer:

क्र० सं०लक्षण80S70S
1.स्रोत (Source)यूकैरियोटिक कोशिकाप्रोकैरियोटिक कोशिका
2.अवसादन गुणांक (Sedimentation coefficient)80S70S
3.उपइकाई (Sub-units)बड़ी उपइकाईछोटी उपइकाईबड़ी उपइकाईछोटी उपइकाई
4.अवसादन गुणांक (Sedimentation coefficient)60S40S50S30S
5.RNA का अवसादन गुणांक28S
5.8S
5S
18S23S
5S
16S

In simple words: 80S ribosomes are larger and found in eukaryotic cells, while 70S ribosomes are smaller and characteristic of prokaryotic cells, as well as mitochondria and chloroplasts in eukaryotes. They differ in their sedimentation coefficients and subunit compositions.

🎯 Exam Tip: Memorize the key distinctions between 70S and 80S ribosomes, especially their location and subunit sizes, as this is a common comparative question in exams.

 

Question 5. केन्द्रिका की अतिसूक्ष्म संरचना का नामांकित चित्र बनाइए।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र केन्द्रिका की अतिसूक्ष्म संरचना को दर्शाता है, जिसमें पेरिन्यूक्लियोलर क्रोमैटिन (Perinucleolar chromatin), मैट्रिक्स (पार्स एमॉरफा), ग्रैन्यूलर पोर्शन (राइबोसोमल प्रीकर्सर), फाइब्रिलर पोर्शन (RNA फाइब्रिल्स), और इंट्रानेक्लियोलर क्रोमैटिन जैसे विभिन्न भाग शामिल हैं। यह संरचना RNA संश्लेषण और राइबोसोम निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: The nucleolus ultrastructure diagram illustrates its components like chromatin, matrix, granular and fibrillar regions, all involved in ribosome biogenesis and RNA synthesis within the cell nucleus.

🎯 Exam Tip: For diagrams, ensure all parts are clearly labeled and understand the function of each component. Knowing the processes associated with the nucleolus, like ribosome synthesis, will aid in explaining its significance.

 

Question 6. गुणसूत्रों की आकृतिक संरचना तथा उनके कार्यों का उल्लेख चित्रों की सहायता से कीजिए।
Answer: कोशिका विभाजन की मध्यावस्था (metaphase) में प्रत्येक गुणसूत्र में लम्बे तथा पूरी लम्बाई में फैले अर्द्ध-गुणसूत्र या क्रोमैटिड (chromatids) पाये जाते हैं। दोनों अर्द्ध गुणसूत्र एक-दूसरे से एक स्थान पर जुडे रहते हैं जिसे गुणसूत्र बिन्दु (centromere) कहते हैं। गुणसूत्र बिन्दु से गुणसूत्र दो भागों में विभाजित होता है उन्हें गुणसूत्र की भुजा (arm) कहते हैं। कुछ गुणसूत्र में एक लम्बी भुजा में द्वितीय संकीर्णन (secondary constriction) भी मिलता है। द्वितीय संकीर्णन के बाद क्रोमोसोम का जो सबसे छोटा भाग होता है, उसे सैटेलाइट (satellite) कहते हैं। जिन गुणसूत्रों में सैटेलाइट मिलता है, उन्हें SAT chromosome कहते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र गुणसूत्र की इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शीय संरचना को दर्शाता है, जिसमें इसके विभिन्न भाग जैसे टेलोमेयर, हेटरोक्रोमैटिन, क्रोमोनिमाटा, सेंट्रोमेयर, क्रोमोमीयर, न्यूक्लियोलर ऑर्गनाइज़र, प्राइमरी और सेकेंडरी कॉन्स्ट्रिक्शन, और सैटेलाइट दिखाए गए हैं। चित्र के (A) भाग में गुणसूत्र के विभिन्न भाग और (B) भाग में यूक्रोमैटिन तथा हेटेरोक्रोमैटिन की स्थिति दर्शाई गई है। गुणसूत्र का वह भाग जो केन्द्रिक से जुड़ा रहता है उसे केन्द्रिक संघटक (nucleolar organiser) कहते हैं। प्रत्येक गुणसूत्र परसूक्ष्म मोतीनुमा संरचनाएँ (beaded structure) होती हैं, उन्हें क्रोमोमियर्स (chromomeres) कहते हैं। कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार ये ही जीन्स तथा जीन्स के समूह हैं जो आनुवंशिक लक्षणों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानान्तरित करते हैं।
In simple words: Chromosomes are condensed structures of DNA and proteins that carry genetic information. They have a centromere, arms, and sometimes secondary constrictions or satellites, crucial for cell division and hereditary trait transmission.

🎯 Exam Tip: Focus on drawing and labeling the different parts of a chromosome accurately. Understand the significance of the centromere, telomeres, and the role of chromosomes in heredity and cell division for a complete answer.

 

Question 7. क्रोमैटिन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
Answer: क्रोमैटिन धागे सदृश रचना हैं जो एक-दूसरे के ऊपर फैलकर एक जाल-सदृश रचना बना लेते हैं। जिसे क्रोमैटिन जालिका (chromatin reticulum) कहते हैं, परन्तु यह वास्तविक जाल नहीं होता, क्योकि प्रत्येक क्रोमैटिन धागे का सिरा अलग होता है। कोशिका विभाजन (cell division) के अवसर पर ये धागे एक-दूसरे से पृथक् हो जाते हैं और सिकुड़कर छोटे व मोटे हो जाते हैं। इन्हें गुणसूत्र (chromosomes) कहते हैं। केन्द्रक का सबसे महत्त्वपूर्ण भाग क्रोमैटिन है। रासायनिक दृष्टि से यह एक न्यूक्लिओप्रोटीन (nucleoprotein) है जो न्यूक्लिक अम्ल और क्षारीय प्रोटीन (base protein) के मिश्रण से बनता है। क्षारीय प्रोटीन विशेष रूप से हिस्टोन (histone) है जो क्षारीय अमीनो अम्ल से बना होता है।
In simple words: Chromatin is a complex of DNA and proteins (histones) found in eukaryotic cells, forming a reticulum within the nucleus. It condenses into chromosomes during cell division, playing a crucial role in packaging DNA and regulating gene expression.

🎯 Exam Tip: When explaining chromatin, highlight its composition (DNA and histones), its appearance as a network, and its crucial role in forming chromosomes during cell division. Differentiating between euchromatin and heterochromatin can add value.

 

Question 8. हेटरोक्रोमैटिन तथा यूक्रोमैटिन में क्या अन्तर है?
Answer:

क्र०सं०हेटरोक्रोमैटिनयूक्रोमैटिन
1.
  • इसमें सक्रिय जीन की कमी होती है।
  • यह सक्रिय जीन रखने वाला साधारण गुणसूत्र होता है।
2.
  • ट्रान्सक्रिप्शन अनुपस्थित होता है।
  • यह RNA के निर्माण या ट्रान्सक्रिप्शन में भाग लेता है।
3.
  • हेटरोक्रोमैटिन मोटा होता है (100Å या ज्यादा)।
  • यूक्रोमैटिन सँकरा होता है (10-30Å मोटा)।
4.
  • यह कणिकामय होता है।
  • यह तन्तुमय होता है।
5.
  • ये गुणसूत्र का एक भाग दर्शाते हैं।
  • ये गुणसूत्र का बल्क (bulk) बनाते हैं।
6.
  • यह गाढ़ा अभिरंजित होता है।
  • इन्टरफेज में हल्का अभिरंजित होता है।
7.
  • यह संघनित होता है।
  • ये विसरित दिखायी देते हैं।
8.
  • हेटरोक्रोमैटिन न्यूक्लियोसोम श्रृंखला की सोलेनॉइड प्रकार की कुण्डलियों द्वारा बनते हैं।
  • इसकी नाभिकीय श्रृंखलाएँ बहुत कम कुण्डलित होती हैं।
9.
  • इसमें इन कारकों का बहुत कम प्रभाव पड़ता है।
  • ये pH, ताप, हॉर्मोन, विषैले पदार्थों आदि में परिवर्तन द्वारा प्रभावित होते हैं।
10.
  • इसकी उपस्थिति द्वारा विनिमय घटता है।
  • यह सामान्य विनिमय दिखाता है।
11.
  • ये S-प्रावस्था के अन्त की ओर देर से द्विगुणित होते हैं जो G2 प्रावस्था से ऊपर होती है।
  • यूक्रोमैटिन कोशिका चक्र की पूर्व S-प्रावस्था में द्विगुणित होते हैं।

In simple words: Heterochromatin is highly condensed, transcriptionally inactive, and rich in repetitive DNA, while euchromatin is less condensed, transcriptionally active, and contains most of the cell's genes. They represent different states of DNA packaging and gene expression.

🎯 Exam Tip: Focus on the key differences in condensation, transcriptional activity, and genetic content between heterochromatin and euchromatin. These distinctions are fundamental to understanding gene regulation and cell function.

 

Question 9. स्थानान्तरण आर.एन.ए. (t-RNA) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
Answer: इसका अणुभार लगभग 25000 डाल्टन होता है। इसमें क्षारक का अनुपात A : U तथा G: C लगभग 1 होता है। यह लगभग 70-75 न्यूक्लिओटाइड की एक श्रृंखला है। इस श्रृंखला का 80% भाग द्विक कुण्डलीय (double helical) हो जाता है। इसके CS' सिरे पर G तथा C3' सिरे पर C-C-A क्षार मिलता है। AUGC के अतिरिक्त और भी क्षारक मिलते हैं, जैसे-5' राइबोसिले यूरेसिल अथवा स्यूडोयूरिडिन (5' ribosyl uracil or pseudouridine Ψ), डाइहाइड्रो यूरिडायलिक अम्ल (dihydro uridylic acid), 5-मिथाइल साइटोसीन (5-methyl cytosine) आदि । इस प्रकार के क्षारक कुल क्षारकों का 10-20% तक होते हैं। t-RNA की संरचना क्लोवर की पत्ती (clover leaf) के समान होती है। इसके चार भुजाएँ (arms), तीन लूप (loop) तथा एक लम्प (lump) होता है। C3' भुजा को ग्राही भुजा (acceptor arm) कहते हैं। इस पर C-C-A अनुक्रम होता है। इस भुजा पर अमीनो अम्ल जुड़ता है तथा अमीनो एसाइल t-RNA बनता है। TWC लूप या राइबोसोम बन्ध लूप (ribosomal binding site) में राइबोसोम से जुड़ता है। दूसरा लूप एन्टीकोडोन लूप होता है। इस पर तीन विशिष्ट क्षारक कोड बनते हैं जिससे m-RNA के कोडॉन की पहचान की जाती है। तीसरा लूप DHU लूप होता है। यह अमीनो अम्ल सिंथेटेस को बाँधता है। यह 8-12 क्षारकों का बना होता है। TWCलूप तथा एन्टीकोडोन लूप के मध्य एक लम्प (lump) मिलता है। t-RNA के क्लोवर लीफ मॉडल को आर० होले (R. Holley) ने 1968 में यीस्ट (Yeast) के t-RNA विश्लेषण के समय प्रस्तुत किया। किम (Kim) तथा उनके साथियों ने 1973 में X-किरणों के विवर्तन से यीस्ट के फिनाइल एलानीन t-RNA का ‘L' आकार का मॉडल प्रस्तुत किया। यह t-RNA की त्रिविम 'रचना भी कहलाती है।
In simple words: tRNA (transfer RNA) is a small RNA molecule that plays a crucial role in protein synthesis by carrying specific amino acids to the ribosome based on the codons in mRNA. Its cloverleaf structure with distinct loops (acceptor arm, anticodon loop, TΨC loop, DHU loop) is essential for its function.

🎯 Exam Tip: Familiarize yourself with the structure of tRNA, especially its cloverleaf model and the function of each arm/loop (e.g., acceptor arm for amino acids, anticodon loop for mRNA binding). This is critical for understanding translation.

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. (क) पादप कोशिका की संरचना का, जैसा कि इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में दिखाई देती है, एक स्वच्छ नामांकित चित्र बनाइए।
Answer:

Question 1. (ख) दो कोशिकांगों के कार्यों का वर्णन कीजिए। या एक यूकैरियोटिक पादप कोशिका की इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शीय संरचना का नामांकित चित्र खीचिए। या निम्नलिखित में से एक कोशिकांग की संरचना तथा कार्य का विस्तृत विवरण दीजिए
(क) हरितलवक (chloroplast)।
(ख) माइटोकॉण्ड्रिया (mitochondria)।
या माइटोकॉण्ड्रिया की संरचना तथा कार्य का वर्णन कीजिए। या हरितलवक की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए। या पादप हरितलवक का एक इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शीय नामांकित चित्र बनाइए। या पौधे के विभिन्न भागों को रंगयुक्त बनाने वाले लवकों का नाम लिखिए तथा उनकी अभिलक्षणिक विशेषताओं का भी उल्लेख कीजिए।

Answer:

पादप कोशिका
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक प्रारूपिक पादप कोशिका को इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में दिखाए गए रूप में दर्शाता है। इसमें कोशिका भित्ति, कोशिका झिल्ली, केन्द्रक (जिसमें न्यूक्लियोलस, यूक्रोमैटिन और हेटेरोक्रोमैटिन शामिल हैं), माइटोकॉन्ड्रिया, क्लोरोप्लास्ट, रिक्तिका, एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम, राइबोसोम, गॉल्जी कॉम्प्लेक्स, माइक्रो ट्यूब्यूल, प्लास्मोडेस्माटा और मध्य पटलिका जैसे विभिन्न कोशिकांग और संरचनाएं स्पष्ट रूप से लेबल की गई हैं।

(क) हरितलवकमाइटोकॉन्ड्रिया (mitochondria) तथा लवक (plastid) द्विकला (double membrane) से घिरे कोशिकांग (cell organelles) हैं। लवक की संरचना लवक दोहरी झिल्ली से घिरे होते हैं। ये यूकैरियोटिक पादप कोशिकाओं में ही मिलते हैं। ये कवक में नहीं मिलते हैं। हीकेल ने इसकी खोज की तथा शिम्पर ने इसे प्लास्टिड (Plastid) नाम दिया। लवक तीन प्रकार के होते हैं ल्यूकोप्लास्ट- क्रोमोप्लास्ट तथा क्लोरोप्लास्ट। 1. ल्यूकोप्लास्ट (Leucoplast) : ये संचयी लवक हैं। वर्णक न होने के कारण ये रंगहीन होते हैं। ये तीन प्रकार के एमाइलोप्लास्ट (मण्ड संचयी); इलियोप्लास्ट (वसा संचयी) तथा प्रोटीनोप्लास्ट (प्रोटीन संचयी) होते हैं। 2. क्रोमोप्लास्ट (Chromoplast) : ये रंगीन लवक हैं। सामान्यतः फूलों की पंखुड़ियों, फल, रंगीन पत्तियों आदि में होते हैं। भूरे शैवालों में फियोप्लास्ट, लाल शैवालों में रोडोप्लास्ट तथा प्रकाश संश्लेषी जीवाणुओं में क्रोमैटोफोर आदि मिलते हैं। 3. क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast) : हरितलवक अथवा क्लोरोप्लास्ट की खोज शिम्पर ने की। इनमें क्लोरोफिल (पर्णहरित) मिलता है। ये लवक पौधे के हरे भागों में सामान्यतः पत्तियों में (मीसोफिल, खम्भ ऊतक, क्लोरेनकाइमा) मिलते हैं। ये विभिन्न आकार के होते हैं। हरे शैवाल सामान्यतः हरितलवक के आकार से पहचाने जाते हैं। उच्च पादप में ये गोल, अण्डाकार, चपटे, दीर्घवृत्ताकार (elliptical) होते हैं। सामान्यतया इनकी लम्बाई 2-5µ तथा चौड़ाई 3-4µ होती है। कोशिका में इनकी संख्या 20-40 तक हो सकती है। 4. हरितलवक की परासंरचना (Ultrastructure of Chloroplast) : इनकी संरचना जटिल होती है। यह दो एकक कलाओं की झिल्ली से बना होता है। दोनों कलाओं के मध्य का स्थान पेरीप्लास्टीडियल स्थान कहलाता है। झिल्ली से घिरा रंगहीन मैट्रिक्स स्ट्रोमा (stroma) होता है। मैट्रिक्स में कलातन्त्र से बना ग्रैना (grana) होता है। ग्रैना में प्लेट जैसी रचना का समूह होता है, जो पटलिकाओं से जुड़ी रहती हैं, इन्हें लैमिली कहते हैं। ग्रेना की इकाई को थाइलेकॉइड कहते हैं। ये एक-दूसरे के ऊपर स्थित होते हैं। दो ग्रैना को जोड़ने वाली पटलिका को स्ट्रोमा लैमिली अथवा फ्रेट चैनल कहते हैं। थाइलेकॉइड पर 'क्वान्टासोम (quantasomes) पाए जाते हैं। प्रत्येक क्वान्टासोम पर लगभग 230 पर्णहरित अणु पाए जाते हैं। क्लोरोप्लास्ट का रासायनिक संघटन 5. (Chemical Composition of Chloroplast) : प्रत्येक क्लोरोप्लास्ट में 40-50% प्रोटीन, 23-25% फॉस्फोलिपिड; 3-10% पर्णहरित, 5% R.N.A., 0. 02 -0.01% D.N.A., 1-2% कैरोटीन, विभिन्न विकर, विटामिन तथा धातु; जैसे Mg, Fe, Cu, Mn, Zn आदि मिलते हैं। 6. क्लोरोप्लास्ट के कार्य (Functions of Chloroplast) : क्लोरोप्लास्ट का मुख्य कार्य प्रकाश संश्लेषण है। ग्रैना में प्रकाश संश्लेषण की प्रकाशीय क्रिया तथा स्ट्रोमा में अप्रकाशीय क्रिया होती है। प्रकाशीय क्रिया में जल के अपघटन से ऊर्जा निकलती है तथा अप्रकाशीय अभिक्रिया में \( \text{CO}_{2} \), का स्वांगीकरण होता है। भोजन बनाने का चित्र-ग्रेना तथा स्ट्रोमा लैमिली की संरचना। दायित्व होने के कारण इसे कोशिका की किचिन अथवा रसोई कहते हैं।

(ख) माइटोकॉण्ड्रियामाइटोकॉन्ड्रिया (mitochondria) तथा लवक (plastid) द्विकला (double membrane) से घिरे कोशिकांग (cell organelles) हैं। माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना माइटोकॉन्ड्रिया को सर्वप्रथम कालीकर ने देखा । आल्टमैन ने इन्हें बायोप्लास्ट कहा। बेण्डा ने इन्हें माइटोकॉन्ड्रिया कहा। माइटोकॉन्ड्रिया को कॉन्ड्रियोसोम भी कहते हैं। यह शलाका, गोल अथवा कणिकारूपी होते हैं। इनकी लम्बाई 40µ तक तथा व्यास 3.5 µ तक होता है। प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में इनका अभाव होता है। परासंरचना (Ultrastructure) : यह दोहरी पर्त वाली संरचना है। बाह्य पर्त चिकनी तथा अन्दर की पर्त में अंगुलियों के समान अन्तर्वलन मिलते हैं जिन्हें क्रिस्टी (cristae) कहते हैं। दोनों पर्यो के मध्य के स्थान को पेरीमाइटोकॉन्ड्रियल स्थान कहते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया की गुहा में प्रोटीनयुक्त मैट्रिक्स मिलता है। क्रिस्टी की सतह पर छोटे-छोटे कण मिलते हैं जिन्हें F1 कण अथवा ऑक्सीसोम (oxysomes) कहते हैं। ऑक्सीसोम ऑक्सीकरणीय फॉस्फेटीकरण (श्वसन) की क्रिया में ATP निर्माण में भाग लेते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया के क्रिस्टी पर इलेक्ट्रॉन अभिगमन होता है जिसके फलस्वरूप ATP बनते हैं। इसके मैट्रिक्स में D.N.A., राइबोसोम, जल, लवण, क्रेब्स चक्र सम्बन्धी विकर आदि मिलते हैं। रासायनिक संघटन (Chemical Composition) : इनमें 65-70% प्रोटीन, 25% लिपिड, D.N.A., R.N.A. आदि मिलते हैं। अन्दर की कला में श्वसन तन्त्र श्रृंखला सम्बन्धी सभी साइटोक्रोम; जैसे-Cyt b, c, a, a 3, क्वीनोन, NAD, FAD, FMN आदि मिलते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया का कार्य माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में क्रेब्स चक्र तथा ऑक्सीसोम (F1 कण) पर श्वसन' श्रृंखला का इलेक्ट्रॉन अभिगमन तन्त्र सम्पन्न होता है, इससे मुक्त ऊर्जा ATP में संचित होती है। ATP समस्त जैविक क्रियाओं के लिए गतिज ऊर्जा प्रदान करता है। माइटोकॉन्ड्रिया को 'कोशिका का ऊर्जा गृह' (Power house of the cell) कहते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया में स्वद्विगुणन की क्षमता होती है।
In simple words: Plant cells have a rigid cell wall, a large central vacuole, and chloroplasts for photosynthesis, unlike animal cells. Mitochondria are double-membraned organelles responsible for cellular respiration and ATP production, earning them the title "powerhouse of the cell."

🎯 Exam Tip: For detailed questions on cell organelles, ensure you can describe their structure, chemical composition, and functions comprehensively. Practice drawing and labeling diagrams to reinforce your understanding.

 

Question 2. निम्नलिखित की संरचना तथा कार्य का वर्णन कीजिए।
(क) केन्द्रक,
(ख) प्लाज्मा झिल्ली ।
या जीवद्रव्य कला से आप क्या समझते हैं? चित्र की सहायता से इसके कार्यों का उल्लेख कीजिए।

Answer:

(क) केन्द्रकसामान्यतः कोशिका का सबसे बड़ा, स्पष्ट तथा महत्त्वपूर्ण कोशिकांग केन्द्रक है। सर्वप्रथम इसकी खोज रॉबर्ट ब्राउन ने की। यह एक सघन, गोल अथवा अण्डाकार संरचना है। एक कोशिका में इनकी संख्या सामान्यतः एक (एककेन्द्रकीय- uninucleate) होती है। कभी-कभी इनकी संख्या दो (द्विकेन्द्रकी- binucleate) अथवा अनेक (बहुकेन्द्रकी multinucleate) होती है। पादप कोशिका के परिपक्वन के साथ-साथ रिक्तिका के केन्द्र में स्थित होने से यह कोशिका दृति (primordial utricle) में एक ओर आ जाता है। 1. संरचना (Structure) : केन्द्रक के चारों ओर दोहरी केन्द्रक कला (nuclear membrane) मिलती है। यह कला एकक कला (unit membrane) के समान ही लिपोप्रोटीन की बनी होती है। दोनों कलाओं के मध्य परिकेन्द्रीय स्थान (perinuclear space) मिलता है। केन्द्रक कला सतत (continuous) नहीं होती है। इसमें बीच-बीच में छिद्र मिलते हैं। इन्हें केन्द्रकीय छिद्र (nuclear pore) कहते हैं। इनका व्यास लगभग 400 होता है। ये केन्द्रकद्रव्य तथा कोशिकाद्रव्य में सम्बन्ध बनाए रखते हैं। बाह्य केन्द्रक कला का सम्बन्ध अन्तर्द्रव्यी जालिका से होता है। बाहरी केन्द्रक कला पर राइबोसोम चिपके रहते हैं। केन्द्रक कला के अन्दर प्रोटीनयुक्त सघन तरल होता है, जिसे केन्द्रकद्रव्य (nucleoplasm) कहते हैं। केन्द्रकद्रव्य में प्रोटीन तथा फॉस्फोरस की मात्रा अधिक होती है। इसमें न्यूक्लियोप्रोटीन (nucleoprotein) मिलते हैं। केन्द्रकद्रव्य में केन्द्रिक (nucleolus) तथा क्रोमैटिन (chromatin) सूत्र मिलते हैं। केन्द्रिक सामान्यतः एक, परन्तु कभी-कभी अधिक भी हो सकते हैं। केन्द्रिक में r-R.N.A. संश्लेषण होता है, जो राइबोसोम के लिए आवश्यक है। केन्द्रिक कोशिका विभाजन के समय लुप्त हो जाते हैं। 2. क्रोमैटिन सूत्र (Chromatin threads) : सामान्य अवस्था में जाल के रूप में रहते हैं। इसका कुछ भाग अभिरंजन में गहरा रंग लेता है जिसे हेटरोक्रोमैटिन कहते हैं तथा जो भाग हल्का रंग लेता है, उसे यूक्रोमैटिन (euchromatin) कहते हैं। कोशिका विभाजन के समय ये संघनित होकर गुणसूत्र बनाते हैं। केन्द्रक के कार्य केन्द्रक के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं 1. सम्पूर्ण कोशिका की संरचना, संगठन व कार्यों का नियन्त्रण तथा नियमन करना। 2. D.N.A. पर उपस्थित संदेश m-R.N.A. के रूप में कोशिकाद्रव्य में जाते हैं और वहाँ प्रोटीन के रूप में अनुवादित होते हैं। 3. प्रोटीन से विभिन्न विकर बनते हैं जो विभिन्न उपापचयी क्रियाओं का नियन्त्रण करते हैं। 4. कोशिका विभाजन का उत्तरदायित्व केन्द्रक पर होता है। 5. आनुवंशिक पदार्थ D.N.A केन्द्रक में मिलता है। संतति में लक्षण इसी के द्वारा पहुँचते हैं। 6. नई संतति में जीन ही लक्षणों को पहुँचाते हैं तथा संगठित स्वरूप प्रदान करते हैं।

(ख) प्लाज्मा झिल्ली या जीवद्रव्य कलासंरचना (Structure) : प्लाज्मा झिल्ली या जीवद्रव्य कला (plasmalemma or plasma membrane) कोशिका में उपस्थित अन्य इकाई कलाओं के समान ही होती है। यह रासायनिक संरचना में प्रोटीन्स (proteins) तथा लिपिड्स (lipids) से मिलकर बनती है। इनमें प्रोटीन्स पात्रा में लगभग 60% तथा लिपिड्स लगभग 40% पाये जाते हैं। प्लाज्मा झिल्ली में मध्य में फॉस्फोलिपिड्स (phospholipids) अणुओं की दो पर्ते पाई जाती हैं जिनके दोनों ओर प्रोटीन अणुओं की एक-एक परत पाई जाती है। प्रत्येक प्रोटीन की परत की मोटाई (thickness) 20-25 A तथा दोनों स्तरों के मध्य की लिपिड परत की मोटाई 25-35 A होती है। स्पष्ट है, इकाई कला की संरचना त्रिस्तरीय (trilamellar) होती है तथा इसकी कुल मोटाई लगभग 75-100 मैं होती है। यह 75-100 $ मोटाई की प्रोटीन-लिपिड-प्रोटीन (protein-lipid-protein = PLP-sandwich) संरचना रॉबर्टसन ने इकाई कला मत (unit membrane concept) के अन्तर्गत दी। दूसरे वैज्ञानिक जैसे बेन्सन ने इकाई कला को प्रोटीन तथा लिपिड अणुओं के पुंजों के रूप में लगे हुए माना है तथा इन पुंजों (clusters) के बीच-बीच में अनेक चैनलों (channels) का प्रतिपादन किया है। कुछ वैज्ञानिकों जैसे फिनियन के अनुसार इकाई कला के फॉस्फोलिपिड अणुओं के बीच-बीच कॉलेस्टेरॉल (Cholesterol) के अणु भी होते हैं। अध्ययन की अनेक नयी तकनीकों (techniques) के प्रयोग करने से जैव कलाओं (biomembranes) की संरचना के सम्बन्ध में नये-नये तथ्य प्रकट किये गये हैं। इस दिशा में कार्य करने वाले वैज्ञानिकों में कैवेनौ, बेन्सन, कॉर्न, लेहनिंगर, लिन प्रमुख रहे । इन्होंने कई प्रकार के मॉडल दिये । वर्ष 1962 में बेल ने इन कलाओं में कार्बोहाइड्रेट्स की उपस्थिति स्पष्ट की। कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा तथा स्वरूप कोशिका के कार्य आदि पर निर्भर करता है। जैव कलाओं का तरल मोजेक मॉडल सिंगर तथा निकोलसन (S.J. Singer and G. Nicholson, 1974) ने विशेष तकनीकों तथा रासायनिक विश्लेषणों के आधार पर जैव कलाओं की संरचना के लिए तरल मोजेक मॉडल प्रस्तुत किया है। इसके अनुसार, प्रोटीन की दो परतों का लिपिड की परत के बाहर होना ही आवश्यक नहीं, बल्कि प्रोटीन परत के अणु दो प्रकार के होते हैं 1. परिधीय या बाह्य (extrinsic or peripheral) तथा 2. समाकल (intrinsic or integral)। समाकल प्रोटीन के अणु लिपिड अणुओं में कुछ दूरी तक धंसे हुए अथवा आर-पार भी हो सकते हैं। इस विचारधारा में यह भी बताया गया है कि धंसी हुई समाकल प्रोटीन (intrinsic protein) सरलता सेअलग नहीं की जा सकती है जबकि बाह्य प्रोटीन परत को आसानी से अलग कर सकते हैं। इस प्रकार इस विचारधारा के अनुसार 1. लिपिड अणु (lipid molecules) तथा समाकल प्रोटीन (intrinsic protein) कलाओं में मोजेक व्यवस्था (mosaic arrangement) में होते हैं तथा । 2. जैव कलायें (biomembranes) अर्द्ध-तरल (quasi-fluid) होती हैं जिससे लिपिड तथा समाकल प्रोटीन-लिपिड के द्विअणु स्तर में गति कर सकते हैं। प्लाज्मा झिल्ली के कार्य (Functions of plasmalemma) : प्लाज्मा झिल्ली का प्रमुख कार्य पदार्थों का कोशिका की सतह पर आदान-प्रदान (विनिमय) करना है। यह एक जीवित कला होती है, अतः कोशिका की आवश्यकता तथा संरचना के अनुसार पदार्थों के चयन में विशेष रूप में महत्त्वपूर्ण है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र सिंगर तथा निकोलसन द्वारा प्रस्तुत तरल मोजेक मॉडल को दर्शाता है, जिसमें जैव कलाओं की संरचना दिखाई गई है। इसमें लिपिड अणु एक दोहरी परत (लिपिड बाइलेयर) में व्यवस्थित होते हैं, जिसके भीतर और सतह पर प्रोटीन अणु (बाह्य, परिधीय और नेटवर्क प्रोटीन) एम्बेडेड होते हैं। ग्लाइकोप्रोटीन भी दिखाई गई है, जो इस मॉडल की तरलता और गतिशीलता को दर्शाती है।
In simple words: The nucleus controls cell activities and stores genetic material (DNA), while the plasma membrane regulates molecular movement in and out of the cell. The fluid mosaic model describes the plasma membrane as a dynamic structure of lipids and proteins, allowing for selective permeability.

🎯 Exam Tip: For the nucleus, focus on its components (nuclear envelope, nucleoplasm, chromatin, nucleolus) and functions (genetic control, RNA synthesis). For the plasma membrane, understand the fluid mosaic model, its composition (lipids, proteins, carbohydrates), and its role in transport and cell recognition.

 

Question 3. डी०एन०ए० की संरचना एवं इसके महत्त्व का वर्णन कीजिए। या कोशिका में न्यूक्लिक अम्ल कहाँ पाये जाते हैं? डी०एन०ए० की संरचना को केवल नामांकित चित्रों की सहायता से समझाइए ।
Answer: कोशिका में न्यूक्लिक अम्ल अधिकतम मात्रा में केन्द्रक में होते हैं। इनमें DNA प्रमुखतः क्रोमैटिन (गुणसूत्रों) का भाग होता है जबकि RNA केन्द्रिक (न्यूक्लियोलस) में प्रमुखता से पाया जाता है। RNA सम्पूर्ण जीवद्रव्य में विभिन्न प्रकार की संरचनाओं के साथ अथवा स्वतन्त्र रूप में भी पाया जाता है। DNA माइटोकॉण्ड्रिया तथा क्लोरोप्लास्ट्स में भी कुछ मात्रा में मिलता है। डी०एन०ए० = डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल एक डी०एन०ए० (डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल) अणु में दो लम्बी श्रृंखलाओं के बने दो कुण्डल (helixes) होते हैं जो आधारभूत रूप में विशेष इकाइयों जिन्हें न्यूक्लियोटाइड्स (nucleotides) कहा जाता है, से बने होते हैं। इस प्रकार, एक अणु में सहस्रों से लेकर लाखों तक न्यूक्लियोटाइड्स अणु होते हैं। इस प्रकार DNA में दो पॉलिन्यूक्लियोटाइड (polynucleotide) श्रृंखलाएँ पाई जाती हैं। प्रत्येक श्रृंखला का प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड अणु एक विशिष्ट तथा जटिल संरचना है। यह स्वयं तीन प्रकार के घटकों (components) से मिलकर बना होता है, जिनमें 1. एक पेण्टोज शर्करा (pentose sugar) डीऑक्सीराइबो (deoxyribo) प्रकार की होती है। 2. एक फॉस्फेट (phosphate) मूलक तथा । 3. एक नाइट्रोजन क्षारक (nitrogen base) जो दो प्रकार के चार क्षारकों में से एक होता है। ये हैं (क) प्यूरीन (purine) प्रकार के, ऐडीनीन (adenine) व ग्वैनीन (guanine) तथा (ख) पिरीमिडीन (pyrimidine) प्रकार के साइटोसीन (cytosine) तथा थाइमीन (thymine) क्षारक । वाटसन एवं क्रिक का DNA मॉडल वाटसन तथा क्रिक (Watson & Crick) को डी०एन०ए० की संरचना को समझाने तथा प्रतिरूप तैयार करने के लिए सन् 1962 में नोबेल पुरस्कार मिला था। यद्यपि उन्होंने यह, खोज 1953 ई० में कर ली थी। उनके अनुसार केवल चार प्रकार के नाइट्रोजन क्षारकों से चार ही प्रकार के न्यूक्लियोटाइड्स अणुओं का निर्माण होता हैं। ये चारों प्रकार के न्यूक्लियोटाइड अणु विशिष्ट क्रमों में जुड़कर एक लम्बी पॉलिन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला (polynucleotide chain) का निर्माण करते हैं। DNA में इस प्रकार की दो श्रृंखलाएँ पाई जाती हैं। प्रत्येक कुण्डल का स्तम्भ या सूत्र डीऑक्सीराइबो शर्करा तथा फॉस्फेट के द्वारा बना होता है जबकि सीढ़ी के पगदण्डों की तरह की रचना नाइट्रोजन क्षारकों के निश्चित युग्मों (pairs) के जुड़े होने से होती है। दो निकटतम युग्मों की दूरी 3.4A तथा एक कुण्डल जिसकी लम्बाई 34A होती है, में कुल 10 क्षारक युग्म होते हैं। इन युग्मों में प्यूरीन क्षारक ऐडीनीन (adenine) केवल पिरीमिडीन क्षारक थाइमीन (thymine) से तथा ग्वैनीन (guanine) प्रकार का प्यूरीन क्षारक केवल पिरामिडीन प्रकार के साइटोसीन (cytosine) क्षारक के साथ ही जुड़कर पगदण्ड को एक भाग बनाता है। इसमें अन्य किसी भी प्रकार का युग्म सम्भव नहीं है। इस प्रकार, यदि एक श्रृंखला में T-C-G-A-T-C-G- आदि हैं तो दूसरी श्रृंखला में T के सामने A, C के सामने G, G के सामने C तथा A के सामने T आदि ही होंगे। इस प्रकार । T-C-G-A-T-C-G
\( \implies \) एक कुण्डल
\( || \ \ || \ \ || \ \ || \ \ || \ \ || \ \ || \)
\( \implies \) पग दण्ड A-G-C-T-A-G-C-
\( \implies \) दूसरा कुण्डल पगदण्ड में न्यूक्लियोटाइड के क्षारक हाइड्रोजन बन्धों (bonds) के द्वारा जुड़े होते हैं। इसमें ऐडीनीन, थाइमीन के साथ दो तथा साइटोसीन, ग्वैनीन के साथ तीन बन्धों से बन्धनयुक्त होता है। क्षारकों का निश्चित क्रम डी०एन०ए० की रासायनिक शब्दावली बनाता है जिससे आनुवंशिक लक्षणों की स्थापना होती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र डी०एन०ए० के द्विकुंडलित मॉडल को दर्शाता है, जिसमें अणु के विभिन्न अवयवों की व्यवस्था - S (पेण्टोज शर्करा), P (फॉस्फेट), A (ऐडीनीन), G (ग्वैनीन), T (थाइमीन), C (साइटोसीन) - स्पष्ट रूप से लेबल किए गए हैं। चित्र में शुगर-फॉस्फेट बैकबोन, बेस पेयरिंग, माइनर और मेजर एक्सिस, तथा 3'5' दिशाएं भी दिखाई गई हैं, जो डी०एन०ए० की हेलिकल संरचना को समझने में मदद करती हैं। डी०एन०ए० का महत्त्व प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सम्पूर्ण कोशिका पर सभी प्रकार का नियन्त्रण डी०एन०ए० का ही होता है। इस प्रकार के कार्यों को यह आर०एन०ए० के द्वारा सम्पन्न करता है। यह एक आनुवंशिक पदार्थ है। अतः क्रोमैटिन के रूप में गुणसूत्रों में रहकर जीव के लक्षणों को संतति में ले जाने का कार्य करता है।
In simple words: DNA, a double-helical nucleic acid composed of nucleotides (sugar, phosphate, and nitrogenous bases), serves as the genetic material. It stores and transmits hereditary information, controlling all cellular activities, and its specific base sequence dictates genetic traits.

🎯 Exam Tip: Ensure a clear understanding of the Watson-Crick model of DNA, including its double-helical structure, base pairing rules (A-T, G-C), and the components of a nucleotide. Emphasize DNA's role as the genetic blueprint and its significance in heredity.

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