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Detailed Chapter 16 पाचन और अवशोषण UP Board Solutions for Class 11 Biology
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Class 11 Biology Chapter 16 पाचन और अवशोषण UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 11 Biology Chapter 16 Digestion And Absorption (पाचन एवं अवशोषण)
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
Question 1. निम्न में से सही उत्तर छाँटें
(क)
आमाशय रेस में होता है
(a) पेप्सिन, लाइपेज और रेनिन
(b) ट्रिप्सिन, लाइपेज और रेनिन
(c) ट्रिप्सिन, पेप्सिन और लाइपेज
(d) ट्रिप्सिन, पेप्सिन और रेनिन
Answer: (a) पेप्सिन, लाइपेज और रेनिन
In simple words: गैस्ट्रिक जूस में मुख्य रूप से पेप्सिन (प्रोटीन पाचन), लाइपेज (वसा पाचन) और रेनिन (बच्चों में दूध प्रोटीन पाचन) एंजाइम होते हैं।
🎯 Exam Tip: आमाशयी रस की संरचना और कार्यप्रणाली को समझना, विशेषकर प्रमुख एंजाइमों और उनके कार्यों को याद रखना, महत्वपूर्ण है।
Question 1. (ख)
सक्कस एंटेरिकस नाम दिया गया है
(a) क्षुद्रांत्र (ileum) और बड़ी आँत के संधि स्थल के लिए
(b) आंत्रिक रस के लिए
(c) आहारनाल में सूजन के लिए
(d) परिशेषिका (appendix) के लिए
Answer: (b) आंत्रिक रस के लिए
In simple words: सक्कस एंटेरिकस छोटी आँत द्वारा स्रावित आंत्रिक रस का दूसरा नाम है, जिसमें कई पाचक एंजाइम होते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न पाचक ग्रंथियों और उनके स्रावों के नाम तथा कार्य याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 2. स्तम्भ । का स्तम्भ II से मिलान कीजिए
स्तम्भ । - स्तम्भ ||
(a) बिलिरुबिन व बिलिवर्डिन - (i) पैरोटिड
(b) मंड (स्टार्च) का जल अपघटन - (ii) पित्त
(c) वसा का पाचन - (iii) लाइपेज
(d) लार ग्रन्थि - (iv) एमाइलेज
Answer:
(a) (ii) - बिलिरुबिन व बिलिवर्डिन पित्त में पाए जाते हैं।
(b) (iv) - मंड (स्टार्च) का जल अपघटन एमाइलेज द्वारा होता है।
(c) (iii) - वसा का पाचन लाइपेज द्वारा होता है।
(d) (i) - लार ग्रन्थि पैरोटिड ग्रंथि का एक प्रकार है।
In simple words: इस प्रश्न में विभिन्न पाचक घटकों और उनके संबंधित कार्यों या स्थानों का मिलान करना है, जिससे पाचन तंत्र के अंगों और रसायनों की भूमिका स्पष्ट होती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न एंजाइमों, उनके सब्सट्रेट्स, उत्पादों और स्रावित होने वाले स्थानों का सही मिलान करने की क्षमता स्कोरिंग होती है।
Question 3. संक्षेप में उत्तर दें
(क)
अंकुर (villi) छोटी आँत में होते हैं, आमाशय में क्यों नहीं?
Answer: क्योंकि अंकुरों में रक्त केशिकाएँ होती हैं तथा एक बड़ी लसीका वाहिनी लेक्टिअल होती है। अवशोषण की क्रिया आँत में ही होती है।
In simple words: अंकुर छोटी आँत में होते हैं क्योंकि वे पोषक तत्वों के अवशोषण के लिए सतही क्षेत्र बढ़ाते हैं, जबकि आमाशय मुख्य रूप से भोजन के भंडारण और आंशिक पाचन के लिए होता है।
🎯 Exam Tip: छोटी आँत की संरचनात्मक अनुकूलन (जैसे विली और माइक्रोविली) को समझना पाचन और अवशोषण में उनकी भूमिका के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. (ख)
पेप्सिनोजन अपने सक्रिय रूप में कैसे परिवर्तित होता है?
Answer: पेप्सिनोजन एक प्रोएन्जाइम है जो HCI के साथ क्रिया करके सक्रिय पेप्सिन में परिवर्तित होता है।
In simple words: पेप्सिनोजन, जो एक निष्क्रिय एंजाइम है, आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCI) की उपस्थिति में सक्रिय एंजाइम पेप्सिन में बदल जाता है, ताकि प्रोटीन का पाचन शुरू हो सके।
🎯 Exam Tip: एंजाइमों के सक्रियण तंत्र, विशेषकर प्रो-एंजाइमों को सक्रिय एंजाइमों में बदलने वाली प्रक्रिया को याद रखें।
Question 3. (ग)
आहारनाल की दीवार के मूल स्तर क्या हैं?
Answer: आहारनाल की भित्ति में निम्न स्तर होते हैं
(a) सीरोसा
(b) मस्कुलेरिस
(c) सबम्यूकोसा
(d) म्यूकोसा
In simple words: आहारनाल की दीवार में चार मुख्य परतें होती हैं- सीरोसा, मस्कुलेरिस, सबम्यूकोसा और म्यूकोसा, जो पाचन क्रिया के लिए संरचनात्मक और कार्यात्मक समर्थन प्रदान करती हैं।
🎯 Exam Tip: आहारनाल की दीवार की चार परतों (सीरोसा, मस्कुलेरिस, सबम्यूकोसा, म्यूकोसा) और उनके कार्यों को क्रम में याद रखना सहायक होगा।
Question 3. (घ)
वसा के पाचन में पित्त कैसे मदद करता है?
Answer: पित्त वसा को इमल्सीकरण कर देता है। यह लाइपेज को सक्रिय करता है जो वसा का पाचन पित्त की सहायता से करता है वसा डाइ तथा मोनोग्लिसेराइड में टूटता है।
In simple words: पित्त रस वसा को छोटे-छोटे कणों में तोड़कर (इमल्सीकरण करके) लाइपेज एंजाइम के लिए उनके पाचन को आसान बनाता है, जिससे वसा डाइ- और मोनोग्लिसराइड्स में टूट जाती है।
🎯 Exam Tip: पित्त के कार्य, विशेषकर वसा के इमल्सीकरण और लाइपेज एंजाइम के सक्रियण में इसकी भूमिका को स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है।
Question 4. प्रोटीन के पाचन में अग्न्याशयी रस की भूमिका स्पष्ट कीजिए ।
Answer:
1. प्रोटीन के पाचन में अग्न्याशयी रस की भूमिका अग्न्याशयी रस (Pancreatic Juice) : यह क्षारीय होता है। इसमें लगभग 98% पानी, शेष लवण तथा अनेक प्रकार के एन्जाइम्स पाए जाते हैं। इसका pH मान 75-83 होता है। इसे पूर्ण पाचक रूप कहते हैं; क्योंकि इसमें कार्बोहाइड्रेट, वसा तथा प्रोटीन को पचाने वाले एन्जाइम्स पाए जाते हैं। प्रोटीन पाचक एन्जाइम्स निम्नलिखित होते हैं
2. ट्रिप्सिन तथा काइमोट्रिप्सिन (Trypsin and Chymotrypsin) :
ये निष्क्रिय ट्रिप्सिनोजन तथा काइमोट्रिप्सिनोजन के रूप में स्रावित होते हैं। ये आन्त्रीय रस एवं एण्टेरोकाइनेज एन्जाइम के कारण सक्रिय अवस्था में बदल जाते हैं। ये प्रोटीन का पाचन करके मध्यक्रम की प्रोटीन्स तथा ऐमीनो अम्ल बनाते हैं।
एण्टेरोकाइनेज ट्रिप्सिनोजन
\( \implies \) एण्टेरोकाइनेज
ट्रिप्सिनोजन
\( \implies \) (आन्त्रीय रस) ट्रिप्सिन
काइमोट्रिप्सिनोजन
\( \implies \) ट्रिप्सिन काइमोट्रिप्सिन
प्रोटीन्स
\( \implies \) ट्रिप्सिन पेप्टोन्स + पॉलीपेप्टाइड्स
पॉलीपेप्टाइड्स
\( \implies \) काइमोट्रिप्सिन ऐमीनो अम्ल
\( \implies \) कार्बोक्सिपेप्टिडेज
In simple words: अग्न्याशयी रस में ट्रिप्सिन और काइमोट्रिप्सिन जैसे निष्क्रिय एंजाइम होते हैं, जो छोटी आँत में सक्रिय होकर प्रोटीन को छोटे पेप्टाइड्स और अमीनो अम्लों में तोड़ते हैं, जिससे प्रोटीन का पूर्ण पाचन होता है।
🎯 Exam Tip: अग्न्याशयी एंजाइमों के सक्रियण पथ और उनके द्वारा प्रोटीन के पाचन की प्रक्रिया को चरण-दर-चरण याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 5. आमाशय में प्रोटीन के पाचन की क्रिया का वर्णन कीजिए ।
Answer: आमाशय में प्रोटीन का पाचन आमाशय की जठर ग्रन्थियों से जठर रस स्रावित होता है। यह अम्लीय (pH 0.9-3.5) होता है। इसमें 99% जल, 0:5% HCI तथा शेष एन्जाइम्स होते हैं। इसमें प्रोपेप्सिन, प्रोरेनिन तथा गैस्ट्रिक लाइपेज एन्जाइम होते हैं। प्रोपेप्सिन तथा प्रोरेनिन एन्जाइम HCI की उपस्थिति में सक्रिय पेप्सिन (pepsin) तथा रेनिन (rennin) में बदल जाते हैं। ये प्रोटीन तथा केसीन (दूध प्रोटीन) का पाचन करते हैं।
प्रोटीन्स
\( \implies \) पेप्सिन (HCl) पेप्टोन्स + पॉलीपेप्टाइड्स
केसीन
\( \implies \) रेनिन (HCl) + Ca पेप्टोन्स + पॉलीपेप्टाइड्स
In simple words: आमाशय में, अम्लीय जठर रस में उपस्थित पेप्सिन और रेनिन निष्क्रिय रूप से स्रावित होते हैं। HCI की उपस्थिति में ये सक्रिय होकर प्रोटीन को पेप्टोन्स और पॉलीपेप्टाइड्स में तोड़ते हैं, जिससे प्रोटीन का प्रारंभिक पाचन होता है।
🎯 Exam Tip: आमाशय में प्रोटीन पाचन के लिए HCI की भूमिका, पेप्सिन और रेनिन एंजाइमों के कार्य तथा उनकी सक्रियण स्थिति को ध्यान में रखें।
Question 6. मनुष्य का दंत सूत्र बताइए।
Answer: वयस्क मनुष्य का दंत सूत्र \( \frac{2123}{2123} \) होता है, जो प्रत्येक जबड़े के आधे हिस्से में 2 कृंतक, 1 रदनक, 2 अग्रचर्वणक और 3 चर्वणक दर्शाता है।
In simple words: मनुष्य का दंत सूत्र उसके जबड़े के प्रत्येक आधे भाग में दांतों के प्रकार और संख्या को दर्शाता है, जिसमें कृंतक, रदनक, अग्रचर्वणक और चर्वणक शामिल होते हैं।
🎯 Exam Tip: वयस्क मनुष्य और बच्चों दोनों के दंत सूत्रों को याद रखना और प्रत्येक प्रकार के दांत के कार्य को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 7. पित्त रस में कोई पाचक एन्जाइम नहीं होते, फिर भी यह पाचन के लिए महत्त्वपूर्ण है; क्यों?
Answer: पित्त (Bile) :
पित्त का स्रावण यकृत से होता है। इसमें कोई एन्जाइम नहीं होता। इसमें अकार्बनिक तथा कार्बनिक लवण, पित्त वर्णक, कोलेस्टेरॉल, लेसीथिन आदि होते हैं।
1. यह आमाशय से आई अम्लीय लुगदी (chyme) को पतली क्षारीय काइल (chyle) में बदलता है जिससे अग्न्याशयी एन्जाइम भोजन का पाचन कर सकें।
2. यह वसा का इमल्सीकरण (emulsification) करता है। इमल्सीकृत वसा का लाइपेज एन्जाइम द्वारा सुगमता से पाचन हो जाता है।
3. कार्बनिक लवण वसा के पाचन में सहायता करते हैं।
4. हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करके भोजन को सड़ने से बचाता है।
In simple words: पित्त रस में एंजाइम नहीं होते, लेकिन यह वसा का इमल्सीकरण करके पाचन में मदद करता है, अम्लीय कायम को क्षारीय बनाता है, और जीवाणुओं को नष्ट करके भोजन को सड़ने से बचाता है।
🎯 Exam Tip: पित्त के गैर-एंजाइमेटिक कार्यों को समझना महत्वपूर्ण है, विशेषकर वसा के पाचन और pH संतुलन में इसकी भूमिका।
Question 8. पाचन में काइमोट्रिप्सिन की भूमिका वर्णित करें। जिस ग्रन्थि से यह स्रावित होता है, इसी श्रेणी के दो अन्य एंजाइम कौन-से हैं?
Answer: काइमोट्रिप्सिन (Chymotrypsin) : अग्न्याशय से स्रावित प्रोटीन पाचक एन्जाइम है। यह निष्क्रिय अवस्था काइमोट्रिप्सिनोजन (chymotrypsinogen) के रूप में स्रावित होता है। यह आन्त्रीय रस में उपस्थित एण्टेरोकाइनेज (enterokinase) एन्जाइम की उपस्थिति में सक्रिय काइमोट्रिप्सिन में बदलता है। यह प्रोटीन को पॉलीपेप्टाइड तथा पेप्टोन (polypeptides and peptones) में बदलता है।
अग्न्याशय से स्रावित अन्य प्रोटीन पाचक एन्जाइम निम्नलिखित हैं
1. ट्रिप्सिनोजन (Trypsinogen)
2. कार्बोक्सिपेप्टिडेज (Carboxypeptidase)
In simple words: काइमोट्रिप्सिन अग्न्याशय द्वारा स्रावित एक प्रोटीन पाचक एंजाइम है जो निष्क्रिय रूप में निकलता है, फिर छोटी आँत में सक्रिय होकर प्रोटीन को पॉलीपेप्टाइड्स और पेप्टोन्स में तोड़ता है। ट्रिप्सिनोजन और कार्बोक्सिपेप्टिडेज इसी श्रेणी के अन्य एंजाइम हैं।
🎯 Exam Tip: अग्न्याशयी प्रोटीन पाचक एंजाइमों (जैसे काइमोट्रिप्सिन, ट्रिप्सिन और कार्बोक्सिपेप्टिडेज) के सक्रियण और कार्यों को याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी है।
Question 9. पॉलीसैकेराइड तथा डाइसैकेराइड का पाचन कैसे होता है?
Answer: पॉली तथा डाइसैकेराइड्स का पाचन
कार्बोहाइड्रेट्स का पाचन मुखगुहा से ही प्रारम्भ हो जाता है। भोजन में लार मिलती है। लार का pH मान 6.8 होता है। यह भोजन को चिकना तथा निगलने योग्य बनाती है। लार में टायलिन (ptyalin) एन्जाइम होता है। यह स्टार्च (पॉलीसैकेराइड) को डाइसैकेराइड (माल्टीस) में बदलता है।
आमाशय में कार्बोहाइड्रेट का पाचन नहीं होता। अग्न्याशय रस में ऐमाइलेज (amylase) एन्जाइम होता है। यह स्टार्च या पॉलीसैकेराइड्स को डाइसैकेराइड्स में बदलता है।
क्षुदान्त्र (छोटी आँत) में आंत्रीय रस में पाए जाने वाले कार्बोहाइड्रेट पाचक एन्जाइम्स के निम्नलिखित प्रकार इसके पाचन में सहायक होते हैं
माल्टोस \( \implies \) माल्टेज \( \implies \) ग्लूकोस + ग्लूकोस
लैक्टोस \( \implies \) लैक्टेज \( \implies \) ग्लूकोस + गैलेक्टोस
सुक्रोस \( \implies \) सुक्रेज \( \implies \) ग्लूकोस + फ्रक्टोस
(माल्टोस, लैक्टोस तथा सुक्रोस डाइसैकेराइड्स हैं।)
In simple words: पॉलीसैकेराइड और डाइसैकेराइड का पाचन मुखगुहा में शुरू होता है (टायलिन द्वारा) और छोटी आँत में पूरा होता है, जहाँ अग्न्याशयी एमाइलेज और आंत्रिक एंजाइम (माल्टेज, लैक्टेज, सुक्रेज) उन्हें ग्लूकोस, गैलेक्टोस और फ्रक्टोस जैसे मोनोसैकेराइड्स में तोड़ते हैं।
🎯 Exam Tip: कार्बोहाइड्रेट पाचन के विभिन्न चरणों, इसमें शामिल एंजाइमों (टायलिन, एमाइलेज, माल्टेज, लैक्टेज, सुक्रेज) और उनके उत्पादों को याद रखें।
Question 10. यदि आमाशय में HCI का स्राव नहीं होगा तो क्या होगा?
Answer: यदि आमाशय में HCI का स्राव नहीं होगा तो पेप्सिनोजन सक्रिय पेप्सिन में परिवर्तित नहीं होगा तथा पेप्सिन को कार्य करने के लिए अम्लीय माध्यम नहीं मिलेगा । HCI भोज्य पदार्थों के रेशेदार पदार्थों को गलाता है वे जीवाणु आदि को भी मारता है।
In simple words: HCI के बिना, पेप्सिनोजन सक्रिय पेप्सिन में नहीं बदलेगा, प्रोटीन पाचन प्रभावित होगा, और भोजन के जीवाणु नष्ट नहीं होंगे, जिससे पाचन और सुरक्षा दोनों में बाधा आएगी।
🎯 Exam Tip: HCI के विभिन्न कार्यों- एंजाइम सक्रियण, अम्लीय माध्यम प्रदान करना, भोजन को नरम करना, और जीवाणुनाशक क्रिया को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 11. आपके द्वारा खाए गए मक्खन का पाचन और उसका शरीर में अवशोषण कैसे होता है? विस्तार से वर्णन करें।
Answer: मक्खन वसा है और इसका पाचन डयूडिनमे में पित्तरस की सहायता से होता है। वसा अम्ल तथा ग्लिसरॉल अघुलनशील होते हैं अतः रक्त में अवशोषित नहीं किए जा सकते हैं। ये आंत्रीय म्यूकोसा में छोटी गुलिकाओं के रूप में जाते हैं। उसके पश्चात् उस पर प्रोटीन कवच चढ़ जाता है और इन गुलिकाओं को काइलोमाइक्रस (chylomicrous) कहते हैं। इनका संवहन रसांकुर में उपस्थित लिम्फ वाहिका (lacteal) में होता है। लिम्फ वाहिकाओं से ये रक्त द्वारा अवशोषित हो जाता है।
In simple words: मक्खन में मौजूद वसा का पाचन पित्त की मदद से छोटी आँत में होता है, फिर वसा अम्ल और ग्लिसरॉल छोटी गुलिकाओं (काइलोमाइक्रोन) में बदलकर लसीका वाहिकाओं (लेक्टियल) द्वारा अवशोषित होते हैं और फिर रक्त में मिल जाते हैं।
🎯 Exam Tip: वसा के पाचन और अवशोषण की अनूठी प्रक्रिया, विशेषकर काइलोमाइक्रोन का निर्माण और लसीका प्रणाली की भूमिका को स्पष्ट करें।
Question 12. आहारनाल के विभिन्न भागों में प्रोटीन के पाचन के मुख्य चरणों का विस्तार से वर्णन करें।
Answer: सर्वप्रथम प्रोटीन का पाचन आमाशय में दो प्रोटियोलिटिक विकरों के द्वारा होता है
(i) पेप्सिन : आमाशय द्वारा स्रावित
(ii) ट्रिप्सिन : अग्न्याशय द्वारा स्रावित ।
(i) आमाशय में प्रोटीन का पाचन : पेप्सिन अम्लीय माध्यम (pH 1.8) में सक्रिय होता है। रेनिन केवल छोटे बच्चों के आमाशय में दूध से प्रोटीन को पचाने के लिए मिलता है।
(ii) दांत्र में प्रोटीन का पाचन :
अग्न्याशय रस में ट्रिप्सिनोजन मिलता है जो एन्टेरोकाइनेज के द्वारा सक्रिय ट्रिप्सिन में परिवर्तित होता है। ट्रिप्सिन क्षारीय माध्यम में सक्रिय होता है।
प्रोटीन \( \implies \) प्सिन/काइमो प्सिन \( \implies \) अमीनो अम्ल
डाइपेप्टाइड \( \implies \) डाइपेट इडेजेज \( \implies \) अमीनो अम्ल
In simple words: प्रोटीन का पाचन आमाशय में पेप्सिन और रेनिन से शुरू होता है, फिर छोटी आँत में अग्न्याशय से स्रावित ट्रिप्सिन और काइमोट्रिप्सिन द्वारा जारी रहता है, जो प्रोटीन को पेप्टोन्स, पॉलीपेप्टाइड्स और अंततः अमीनो अम्लों में तोड़ते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन के पाचन में शामिल विभिन्न एंजाइमों (पेप्सिन, रेनिन, ट्रिप्सिन, काइमोट्रिप्सिन) के नाम, उनके सक्रियण की स्थितियाँ (pH) और उनके उत्पादों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 13. गर्तदंती (thecodont) तथा द्विबारदंती (diphyodont) शब्दों की व्याख्या करें।
Answer: जबड़े के गड्ढे में धंसे दाँत को गर्तदंती (thecodont) कहते हैं। द्विबारदंती का अर्थ है दाँत का दो बार आनाप्रथम दाँत अस्थाई होते हैं इन्हें क्षीर दंत भी कहते हैं। जो 14 वर्ष की अवस्था तक टूट जाते हैं। इनके स्थान पर दूसरी बार स्थाई दाँत आते हैं।
In simple words: गर्तदंती दांतों की वह व्यवस्था है जिसमें दांत जबड़े की हड्डियों के सॉकेट में गहरे धंसे होते हैं, जबकि द्विबारदंती का अर्थ है जीवनकाल में दो बार दांतों का उगना – पहले दूध के दांत और फिर स्थायी दांत।
🎯 Exam Tip: दांतों की संरचनात्मक विशेषताओं (जैसे कि गर्तदंती) और जीवनकाल के दौरान उनके विकास (जैसे कि द्विबारदंती) से संबंधित शब्दावली को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।
Question 14. विभिन्न प्रकार के दाँतों के नाम और एक वयस्क मनुष्य में दाँतों की संख्या बताइए।
Answer: वयस्क मनुष्य में 32 दाँत होते हैं। ये चार प्रकार के होते हैं
1. कुंतक (Incisor) - इनकी संख्या 2 होती है।
2. रदनक (Canine)-इनकी संख्या 1 होती है।
3. अग्र चवर्णक (Premolar)-इनकी संख्या 2 होती है।
4. चवर्णक (Molar)-इनकी संख्या 3 होती है। इस प्रकार एक जबड़े में 16 दाँत होते हैं और इस प्रकार मुख में 32 दाँत होते हैं
In simple words: एक वयस्क मनुष्य के कुल 32 दांत होते हैं, जिनमें कृंतक (काटने के लिए), रदनक (फाड़ने के लिए), अग्रचर्वणक और चर्वणक (चबाने और पीसने के लिए) शामिल होते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार के दांतों के नाम, उनकी संख्या और उनके विशिष्ट कार्यों को याद रखना दंत सूत्र को समझने में भी मदद करता है।
Question 15. यकृत के क्या कार्य हैं?
Answer: यकृत के कार्य
यकृत के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं
1. यकृत से पित्त रस स्रावित होता है। इसमें अकार्बनिक तथा कार्बनिक लवण; जैसे- सोडियम क्लोराइड, सोडियम बाइकार्बोनेट, सोडियम ग्लाइकोकोलेट, सोडियम टॉरोकोलेट आदि पाये जाते हैं। ये कोलेस्टेरॉल (cholesterol) को घुलनशील बनाए रखते हैं।
2. पित्तरस में हीमोग्लोबिन (haemoglobin) के विखण्डन से बने पित्त वर्णक (bile pigments) पाए जाते हैं; जैसे – बिलिरुबिन (bilirubin) तथा बिलिवर्डन (biliverdin)। यकृत कोशिकाएँ रुधिर से जब बिलिरुबिन को ग्रहण नहीं कर पातीं तो यह शरीर में एकत्र होने लगता है इससे पीलिया (jaundice) रोग हो जाता है।
3. पित्त रस आन्त्रीय क्रमाकुंचन गतियों को बढ़ाता है ताकि पाचक रस काइम में भली प्रकार मिल जाए।
4. पित्त रस काइम के अम्लीय प्रभाव को समाप्त करके काइल (chyle) को क्षारीय बनाता है। जिससे अग्न्याशयी तथा आन्त्रीय रसों की भोजन पर प्रतिक्रिया हो सके।
5. पित्त लवण काइम के हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करके काइम को सड़ने से बचाते हैं।
6. पित्त रस के कार्बनिक लवण वसाओं के धरातल तनाव (surface tension) को कम करके : इन्हें सूक्ष्म बिन्दुकों में तोड़ देते हैं। ये जल के साथ मिलकर इमल्सन या पायस बना लेते हैं। इस क्रिया को इमल्सीकरण (emulsification) कहते हैं।
7. पित्त लवणों के कारण वसा पाचक एन्जाइम सक्रिय होते हैं।
8. वसा में घुलनशील विटामिनों (A, D, E एवं K) के अवशोषण के लिए पित्त लवण आवश्यक । होते हैं ।
9. पित्त के द्वारा विषाक्त पदार्थ, अनावश्यक कोलेस्टेरॉल आदि का परित्याग किया जाता है।
10. यकृत में विषैले पदार्थों का विषहरण (detoxification) होता है।
11. यकृत में मृत लाल रुधिराणुओं का विघटन होता है।
12. यकृत अमोनिया को यूरिया में बदलता है।
13. यकृत कोशिकाएँ हिपैरिन (heparin) का स्रावण करती हैं। यह रक्त वाहिनियों में रक्त का थक्का बनने से रोकता है।
14. यकृत में प्लाज्मा प्रोटीन्स; जैसे-ऐल्बुमिन, ग्लोबुलिन, प्रोथॉम्बिन, फाइब्रिनोजन आदि का संश्लेषण होता है। फाइब्रिनोजन (fibrinogen) रक्त का थक्का बनने में सहायक होता है।
15. यकृत आवश्यकता से अधिक ग्लूकोस को ग्लाइकोजन में बदल करें संचित करता है।
16. आवश्यकता पड़ने पर यकृत प्रोटीन्स व वसा से ग्लूकोस का निर्माण करता है।
17. यकृत कोशिकाएँ विटामिन A, D, लौह, ताँबा आदि का संचय करती हैं। 18. यकृत की कुफ्फर कोशिकाएँ जीवाणु तथा हानिकारक पदार्थों का भक्षण करके शरीर की सुरक्षा करती हैं।
In simple words: यकृत शरीर का सबसे बड़ा ग्रंथि है, जो पित्त रस का स्राव, वसा का पाचन, विषहरण, रक्त प्रोटीन का संश्लेषण, विटामिन और खनिजों का भंडारण, और रक्त शर्करा के नियमन जैसे अनेक महत्वपूर्ण कार्य करता है।
🎯 Exam Tip: यकृत के सभी प्रमुख कार्यों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पाचन, उपापचय, डिटॉक्सीफिकेशन और रक्त के निर्माण में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाता है।
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. आमाशय की दीवार का पेशीय संकुचन कहलाता है।
(क) पाचन
(ख) संवहन
(ग) क्रमाकुंचन
(घ) मंथन
Answer: (ग) क्रमाकुंचन
In simple words: आमाशय की दीवार का लयबद्ध संकुचन जिससे भोजन आगे बढ़ता है, क्रमाकुंचन कहलाता है।
🎯 Exam Tip: आहारनाल में भोजन की गति से संबंधित विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं (जैसे क्रमाकुंचन, मंथन) के बीच अंतर स्पष्ट करें।
Question 2. वयस्क मनुष्य का दन्त सूत्र होता है।
Answer: (क) \( \frac{2123}{2123} \)
In simple words: वयस्क मनुष्य का दंत सूत्र \( \frac{2123}{2123} \) होता है, जो प्रत्येक जबड़े के आधे भाग में 2 कृंतक, 1 रदनक, 2 अग्रचर्वणक और 3 चर्वणक को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: मानव दंत सूत्र को सही ढंग से लिखना और समझना, जिसमें प्रत्येक प्रकार के दांतों की संख्या और उनका क्रम शामिल है, महत्वपूर्ण है।
Question 3. मनुष्य में प्रोटीन का पाचन कहाँ से प्रारम्भ होता है? (क) मुखगुहा
(ख) आमाशय
(ग) ग्रासनली
(घ) आँत
Answer: (ख) आमाशय
In simple words: मनुष्य में प्रोटीन का पाचन आमाशय से शुरू होता है, जहाँ पेप्सिन एंजाइम सक्रिय होकर इसे तोड़ना शुरू कर देता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न पोषक तत्वों (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा) के पाचन के प्रारंभिक स्थानों को याद रखें।
Question 4. मानव में विटामिन-C की कमी से कौन-सा रोग उत्पन्न हो जाता है ?
(क) सूखा रोग
(ख) स्कर्वी
(ग) बेरी-बेरी
(घ) रतौंधी
Answer: (ख) स्कर्वी
In simple words: विटामिन-C की कमी से स्कर्वी रोग होता है, जो कमजोर मसूड़ों, थकान और घाव भरने में देरी का कारण बनता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न विटामिनों की कमी से होने वाले रोगों और उनके लक्षणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. भोजन को परिभाषित कीजिए ।
Answer: ऐसे पोषक पदार्थ जो शारीरिक ऊतकों द्वारा संश्लेषित होकर जैविक ऑक्सीकरण कै फलस्वरूप ऊर्जा प्रदान करते हैं और जीवद्रव्य संश्लेषण का कार्य करते हैं, भोजन कहलाते हैं।
In simple words: भोजन वे पोषक तत्व हैं जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं और शारीरिक ऊतकों के निर्माण व रखरखाव के लिए आवश्यक होते हैं।
🎯 Exam Tip: भोजन की परिभाषा में ऊर्जा उत्पादन और जीवद्रव्य संश्लेषण के दोहरे उद्देश्य को स्पष्ट रूप से शामिल करें।
Question 2. मनुष्य के लिए आवश्यक पोषक पदार्थों के नामों का उल्लेख कीजिए।
Answer: मनुष्य के लिए आवश्यक पोषक पदार्थ इस प्रकार हैं
1. कार्बोहाइड्रेट्स
2. वसा
3. प्रोटीन तथा
4. खनिज लवण
In simple words: मनुष्य के लिए आवश्यक पोषक पदार्थों में कार्बोहाइड्रेट्स, वसा, प्रोटीन और खनिज लवण शामिल हैं, जो शरीर के कार्यों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख पोषक तत्वों (मैक्रोन्यूट्रिएंट्स) और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को पहचानना और सूचीबद्ध करना महत्वपूर्ण है।
Question 3. दो आवश्यक वसा अम्लों के नाम लिखिए।
Answer:
1. a - लिनोलेनिक अम्ल (ओमेगा-3 वसीय अम्ल) तथा
2. लिनोलिक अम्ल (ओमेगा-6 वसीय अम्ल)
In simple words: लिनोलेनिक अम्ल और लिनोलिक अम्ल दो आवश्यक वसा अम्ल हैं जिन्हें शरीर स्वयं नहीं बना सकता और इन्हें भोजन के माध्यम से प्राप्त करना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: आवश्यक पोषक तत्वों (जो शरीर द्वारा संश्लेषित नहीं किए जा सकते) को पहचानना और उनके उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 4. शाकाहारी भोजन में प्रोटीन देने वाले दो पदार्थों के नाम लिखिए ।
Answer: शाकाहारी भोजन में दूध एवं दालें प्रोटीन देने वाले दो प्रमुख पदार्थ हैं।
In simple words: दूध और दालें शाकाहारी भोजन के दो मुख्य स्रोत हैं जो शरीर को प्रोटीन प्रदान करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन के शाकाहारी और मांसाहारी स्रोतों को पहचानना और उनके उदाहरणों को याद रखना पोषण विज्ञान में उपयोगी है।
Question 5. स्तनधारियों में दुग्ध शर्करा किस रूप में उपस्थित होती है ?
Answer: स्तनधारियों में दुग्ध शर्करा लैक्टोस के रूप में उपस्थित होती है।
In simple words: दुग्ध शर्करा स्तनधारियों के दूध में लैक्टोस के रूप में पाई जाती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार की शर्कराओं (मोनोसैकेराइड, डाइसैकेराइड) और उनके प्राकृतिक स्रोतों को याद रखें।
Question 6. जन्तु शरीर में जल की क्या उपयोगिता है?
Answer: जल शरीर में होने वाली विभिन्न रासायनिक क्रियाओं के लिए माध्यम प्रदान करता है।
In simple words: जल जन्तु शरीर में एक महत्वपूर्ण विलायक के रूप में कार्य करता है, जो विभिन्न रासायनिक प्रतिक्रियाओं और उपापचयी प्रक्रियाओं के लिए एक माध्यम प्रदान करता है।
🎯 Exam Tip: जल की जैविक भूमिकाओं, जैसे विलायक, ताप नियामक, और परिवहन माध्यम के रूप में, पर प्रकाश डालें।
Question 7. होलोफाइटिक एवं होलोजोइक पोषण में उदाहरण सहित अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: वह पोषण जिसके अन्तर्गत जीव वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड, अमोनिया, नाइट्रेट्स, जल, लवण आदि अकार्बनिक पदार्थ लेकर कार्बनिक पोषक पदार्थों (कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन्स, वसा आदि) को स्वयं संश्लेषण करते हैं, होलोफाइटिक पोषण कहलाता है। उदाहरणार्थ-नीले-हरे शैवाल, हरे प्रोटिस्टा ( यूग्लीना) इत्यादि । वह पोषण जिसके अन्तर्गत जीव बिना पचे हुए ठोस या तरल भोजन का अन्तर्ग्रहण करते हैं, होलोजोइक पोषण कहलाता है। उदाहरणार्थ-कीटाहारी जन्तु तथा रुधिराहारी जन्तु ।
In simple words: होलोफाइटिक पोषण में जीव अकार्बनिक पदार्थों से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं (जैसे पौधे), जबकि होलोजोइक पोषण में जीव ठोस या तरल भोजन का सेवन करते हैं और फिर उसका पाचन करते हैं (जैसे मनुष्य)।
🎯 Exam Tip: स्वपोषी (होलोफाइटिक) और परपोषी (होलोजोइक) पोषण के बीच के अंतर को उनके ऊर्जा स्रोतों और भोजन ग्रहण करने की विधि के संदर्भ में स्पष्ट करें।
Question 8. शाकाहारी जीवों में कौन-सा दन्त अनुपस्थित होता है?
Answer: रदनक (चीरने-फाड़ने वाले) दन्त ।
In simple words: शाकाहारी जीवों में आमतौर पर रदनक (नुकीले दांत) अनुपस्थित या कम विकसित होते हैं क्योंकि उन्हें मांस फाड़ने की आवश्यकता नहीं होती।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के दांतों (कृंतक, रदनक, चवर्णक) के कार्यों को समझना और उन्हें विभिन्न पोषण विधियों वाले जीवों से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
Question 9. टायलिन (Ptyalin) क्या है? यह किस माध्यम में सक्रिय होता है?
Answer: टायलिन (Ptyalin) एक एन्जाइम है जो मुँह में पाई जाने वाली लार (saliva) में होता है। तथा मुखगुहा के क्षारीय माध्यम में सक्रिय होता है। यह मण्ड (starch) को पचाता है।
In simple words: टायलिन लार में पाया जाने वाला एक एंजाइम है जो मुखगुहा के क्षारीय माध्यम में स्टार्च का पाचन शुरू करता है।
🎯 Exam Tip: टायलिन के कार्य (स्टार्च पाचन) और इसके सक्रियण के लिए आवश्यक pH (क्षारीय) को याद रखें।
Question 10. एमाइलेज तथा लाइपेज में अन्तर बताइए ।
Answer: एमाइलेज कार्बोहाइड्रेट्स को तथा लाइपेज वसा का पाचन करता है।
In simple words: एमाइलेज कार्बोहाइड्रेट्स को तोड़ता है जबकि लाइपेज वसा को पचाता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न पाचक एंजाइमों और उनके विशिष्ट सब्सट्रेट्स को याद रखना, जैसे एमाइलेज (कार्बोहाइड्रेट्स) और लाइपेज (वसा), महत्वपूर्ण है।
Question 11. मनुष्य में प्रोटीन तथा वसा को पचाने वाले एन्जाइमों के नाम लिखिए
Answer:
1. प्रोटीन पाचक विकर – पेप्सिन, रेनिन, ट्रिप्सिन, इरेप्सिन ।
2. वसा पाचक विकर – लाइपेज ।
In simple words: मनुष्य में प्रोटीन को पचाने वाले एंजाइमों में पेप्सिन, रेनिन, ट्रिप्सिन और इरेप्सिन शामिल हैं, जबकि वसा को पचाने वाला मुख्य एंजाइम लाइपेज है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न पाचक एंजाइमों और उनके विशिष्ट पोषक तत्व सब्सट्रेट्स (प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट) को याद रखना आवश्यक है।
Question 12. पेप्सिन क्या है? यह किस माध्यम में सक्रिय होता है? इसका कार्य बताइए ।
Answer: पेप्सिन प्रोटीन पाचक विकर है। यह प्रोटीन को प्रोटिओजेज तथा पेप्टोन्स में बदलता है। यह अम्लीय माध्यम में सक्रिय होता है।
In simple words: पेप्सिन आमाशय में अम्लीय माध्यम में सक्रिय होने वाला एक एंजाइम है जो प्रोटीन को छोटे पेप्टोन्स में तोड़ता है।
🎯 Exam Tip: पेप्सिन के कार्य (प्रोटीन पाचन), उसके सक्रियण के लिए आवश्यक अम्लीय माध्यम, और उसके उत्पादों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 13. प्रोटीन क्या हैं? इसका पाचन कैसे होता है?
Answer: प्रोटीन अमीनो अम्लों के बहुलक होते हैं। प्रोटीन का पाचन पेप्सिन, रेनिन, ट्रिप्सिन, काइमोट्रिप्सिन तथा इरेप्सिन द्वारा होता है। प्रोटीन्स पाचन के पश्चात अमीनो अम्ल बनाती हैं।
In simple words: प्रोटीन अमीनो अम्लों के बड़े अणु होते हैं, जिनका पाचन विभिन्न एंजाइमों जैसे पेप्सिन और ट्रिप्सिन द्वारा होता है, जो उन्हें अंततः अमीनो अम्लों में तोड़ते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन की मूल संरचना (अमीनो अम्लों का बहुलक) और उनके पाचन में शामिल प्रमुख एंजाइमों के नाम याद रखें।
Question 14. आहारनाल के किस भाग में रसांकुर पाये जाते हैं? इनका क्या कार्य है?
Answer: रसांकुर क्षुद्रान्त्र भाग में पाये जाते हैं। ये पचे हुए भोजन का अवशोषण करते हैं।
In simple words: रसांकुर छोटी आँत में पाए जाने वाले छोटे, उँगलीनुमा उभार हैं, जिनका मुख्य कार्य पचे हुए भोजन के अवशोषण के लिए सतही क्षेत्र को बढ़ाना है।
🎯 Exam Tip: रसांकुर (विली) की स्थिति (छोटी आँत) और उनके कार्य (अवशोषण के लिए सतही क्षेत्र बढ़ाना) को स्पष्ट करें।
Question 15. यदि किसी मनुष्य की जठर ग्रन्थियाँ निष्क्रिय हो जाये तो उसकी पाचन क्रिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Answer: जठर ग्रन्थियों से जठर रस स्रावित होता है। इसमें पेप्सिन, लाइपेज तथा रेनिन एन्जाइम होते हैं। ये क्रमशः प्रोटीन, वसा तथा दूध की केसीन प्रोटीन का पाचन करते हैं। जठर ग्रन्थियों के निष्क्रिय होने से इनका पाचन प्रभावित हो जायेगा।
In simple words: यदि जठर ग्रंथियां निष्क्रिय हो जाएं, तो गैस्ट्रिक जूस का उत्पादन रुक जाएगा, जिससे प्रोटीन, वसा और दूध प्रोटीन का पाचन बाधित होगा, क्योंकि संबंधित एंजाइम (पेप्सिन, लाइपेज, रेनिन) अनुपलब्ध होंगे।
🎯 Exam Tip: जठर ग्रंथियों के कार्यों (HCI और एंजाइमों का स्राव) और उनकी निष्क्रियता से होने वाले परिणामों को पूरी तरह से समझें।
Question 16. किस विटामिन की कमी से मनुष्य में चर्मदाह (pellagra) रोग एवं रिकेट्स (rickets) रोग होता है? इन रोगों के प्रमुख लक्षण लिखिए ।
Answer:
(i) चर्मदाह (Pellagra) रोग विटामिन B5 (PP) :
निकोटिनिक अम्ल (C6H5NO2) की कमी से होता है। जीभ तथा त्वचा में पपड़ियाँ फड़ना इस रोग का प्रमुख लक्षण है।
(ii) रिकेट्स (Rickets) रोग विटामिन 'D' :
कैल्सीफेरॉल (C28 H44O) की कमी से होता है। हड्डियों एवं दाँतों का कमजोर हो जाना व टेढ़ा-मेढ़ा हो जाना इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं।
In simple words: विटामिन B5 (निकोटिनिक अम्ल) की कमी से पेलाग्रा (चर्मदाह) होता है जिसके लक्षणों में त्वचा और जीभ पर पपड़ी शामिल है, जबकि विटामिन D (कैल्सीफेरॉल) की कमी से रिकेट्स होता है, जिससे हड्डियां और दांत कमजोर और विकृत हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न विटामिनों, उनके रासायनिक नामों, उनकी कमी से होने वाले रोगों और उन रोगों के विशिष्ट लक्षणों को याद रखें।
Question 17. विटामिन 'ए' तथा विटामिन 'के' की कमी से कौन-सा रोग होता है? या मनुष्य में विटामिन ए' की अल्पता से होने वाली चार व्याधियों का उल्लेख कीजिए। इसके दो प्रमुख स्रोत लिखिए ।
Answer: विटामिन 'ए' की कमी से रतौंधी, जीरोफ्थैल्मिया; वृक्क संक्रमण, मन्दित वृद्धि, डर्मेटोसिस तथा विटामिन 'के' की कमी से रक्त का थक्का नहीं बनता है। अण्डा, घी, मछली, यकृत, गाजर तथा हरी सब्जियाँ विटामिन 'ए' के प्रमुख स्रोत हैं।
In simple words: विटामिन A की कमी से रतौंधी, जीरोफ्थैल्मिया और कमजोर वृद्धि होती है, जबकि विटामिन K की कमी से रक्त का थक्का जमने में समस्या आती है; विटामिन A के स्रोतों में अंडा, घी, मछली, गाजर और हरी सब्जियां शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: विटामिन A और K की कमी से होने वाले रोगों के नाम, उनके लक्षणों और प्रत्येक विटामिन के प्रमुख खाद्य स्रोतों को याद रखें।
Question 18. विटामिन 'सी' व विटामिन डी की कमी से कौन-सा रोग होता है। इनके स्रोत भी बताइए ।
Answer: विटामिन 'सी' की कमी से स्कर्वी तथा विटामिन डी की कमी से सूखा रोग हो जाता है। विटामिन 'डी' का स्रोत मक्खन, दूध, मछली, सूर्य का प्रकाश है। विटामिन 'सी' का प्रमुख स्रोत ताजे खट्टे फल होते हैं।
In simple words: विटामिन C की कमी से स्कर्वी और विटामिन D की कमी से सूखा रोग (रिकेट्स) होता है; विटामिन D के स्रोत मक्खन, दूध, मछली और सूर्य का प्रकाश हैं, जबकि विटामिन C के स्रोत ताजे खट्टे फल हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक विटामिन की कमी से होने वाले रोग, उनके लक्षण और उनके सामान्य खाद्य स्रोतों को याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 19. किस तत्त्व की कमी से कमजोर बच्चों के पैर टेढ़े हो जाते हैं ?
Answer: विटामिन डी की कमी से कमजोर बच्चों के पैर टेढ़े हो जाते हैं।
In simple words: बच्चों में विटामिन D की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे सूखा रोग होता है और पैर टेढ़े हो सकते हैं।
🎯 Exam Tip: विटामिन D और कैल्शियम के बीच संबंध और हड्डी के स्वास्थ्य में उनकी भूमिका को समझें।
Question 20. किस विटामिन को धूप विटामिन कहते हैं?
Answer: विटामिन 'डी' को।
In simple words: विटामिन D को "धूप विटामिन" कहा जाता है क्योंकि सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने पर त्वचा इसे संश्लेषित करती है।
🎯 Exam Tip: विटामिन D के प्राथमिक स्रोत (सूर्य का प्रकाश) और इसके महत्व को याद रखना आवश्यक है।
Question 21. कब्ज एवं अपच में अन्तर कीजिए ।
Answer: कब्ज में मलाशय में मल रुक जाता है। आँत द्वारा सारे जल का अवशोषण होने से मल अत्यन्त कठोर हो जाता है। आँत की गतिशीलता भी अनियमित हो जाती है, जबकि अपच में भोजन का पूर्ण पाचन नहीं हो पाता है। पेट भरा-सा लगता है। यह विकर स्रावण में कमी, व्याग्रता, खाद्य विषाक्तता, अधिकता में भोजन करना तथा अत्यन्त मसालेयुक्त व खट्टा भोजन करने आदि से होता है।
In simple words: कब्ज तब होता है जब मल कठोर हो जाता है और मल त्यागना मुश्किल हो जाता है, जबकि अपच भोजन के अपूर्ण पाचन को संदर्भित करता है, जिससे पेट भरा हुआ महसूस होता है और अक्सर एंजाइम की कमी या खराब खाने की आदतों के कारण होता है।
🎯 Exam Tip: कब्ज और अपच दोनों की परिभाषाओं, कारणों और परिणामों को स्पष्ट रूप से अलग-अलग याद रखें।
Question 22. प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण से आप क्या समझते हैं? मलबन्ध या कब्ज का कारण बताइए। या मनुष्य में प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण के कारण होने वाले दो रोगों के नाम लिखिए ।
Answer: यदि हम अपने भोजन में प्रोटीनयुक्त भोजन नहीं लेते हैं तो हमारे शरीर में प्रोटीन की कमी हो जाती है। इस स्थिति को ही प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण कहते हैं। क्वाशिओरकर, मैरेस्मसे आदि रोग इसी कारण से होते हैं। रेशेयुक्त भोजन का प्रयोग न करना मलबन्ध या कब्ज को प्रमुख कारण है।
In simple words: प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण शरीर में प्रोटीन की कमी के कारण होने वाली स्थिति है, जिसके परिणामस्वरूप क्वाशिओरकर और मैरेस्मस जैसे रोग होते हैं, जबकि कब्ज का मुख्य कारण रेशेदार भोजन की कमी है।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण (PEM) के विभिन्न रूपों (क्वाशिओरकर, मैरेस्मस) और उनके संबंधित लक्षणों को समझें, साथ ही कब्ज के मुख्य आहार संबंधी कारणों को भी जानें।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. जन्तुओं के लिए पोषक तत्त्व क्यों आवश्यक हैं? दो पोषक तत्वों के नाम लिखिए।
Answer: मनुष्य के शरीर में निरन्तर विभिन्न प्रकार की जैविक क्रियाएँ; जैसे-श्वसन, उत्सर्जन, गमन आदि होती रहती हैं। उन क्रियाओं के सम्पादन के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा पोषक पदार्थों से प्राप्त होती है। जीव इन पोषक पदार्थों को बाह्य वातावरण से ग्रहण करता है। शरीर में इन पोषक पदार्थों का पाचन होता है। अवशोषित पदार्थों का श्वसन में ऑक्सीकरण तथा अवशोषण होता है, जिससे ऊर्जा उत्पन्न होती है। दो पोषक तत्व
1. कार्बोहाइड्रेट्स
2. प्रोटीन
In simple words: जन्तुओं को ऊर्जा उत्पादन, वृद्धि और शारीरिक क्रियाओं को बनाए रखने के लिए पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जिनमें कार्बोहाइड्रेट्स और प्रोटीन प्रमुख हैं, जो पाचन और ऑक्सीकरण के बाद ऊर्जा प्रदान करते हैं।
🎯 Exam Tip: पोषक तत्वों के दोहरे महत्व (ऊर्जा उत्पादन और शरीर निर्माण) और प्रमुख पोषक तत्वों के नाम याद रखें।
Question 2. संतुलित आहार का वर्णन कीजिए तथा भोजन की ऊष्मीय गुणवत्ता का महत्त्व बताइए। या संतुलित आहार क्या है ?
Answer:
1. संतुलित आहार अपनी पोषण क्रिया (nutrition) में हम अपने भोजन से उन पोषक पदार्थों (nutrients) को पचाकर प्राप्त करते रहते हैं जो शरीर की कोशिकाओं के उपापचय (metabolism) में मिरन्तर खपते रहते हैं। अतः हमारे शरीर की वृद्धि, स्वास्थ्य, क्रियाशीलता, उद्यमशीलता, आयु आदि लक्षण हमारे आहार की गुणवत्ता (quality) तथा मात्रा (quantity) पर निर्भर करते हैं। स्पष्ट है कि हमारे आहार में विभिन्न प्रकार के सभी पोषक पदार्थ ऐसे अनुपात में होने चाहिए कि जिससे हमारे शंरीर की सारी विभिन्न आवश्यकताओं की निरन्तर पूर्ति होती रहे। ऐसे ही आहार को सन्तुलित आहार (balanced diet) कहते हैं।
2. भोजन की ऊष्मीय गुणवत्ता भोजन की उपापचयी उपयोगिता को ऊष्मीय ऊर्जा की इकाइयों (units) में व्यक्त किया जाता है जिन्हें ऊष्मांक (calories) कहते हैं। एक छोटा ऊष्मांक तापीय ऊर्जा (heat energy) की वह मात्रा होती है जो एक ग्राम जल के ताप को 1°C बढ़ा देती है। 1000 छोटे ऊष्मांकों का एक बड़ा ऊष्मांक अर्थात् किलो ऊष्मांक होता है। इसमें इतनी तापीय ऊर्जा होती है जो एक किलोग्राम जल के ताप को 1°C बढ़ा देती है। शरीर को जीवित दशा में बनाए रखने के लिए आवश्यक ऊर्जा हमें तीन श्रेणियों के दीर्घपोषक पदार्थों-कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन्स तथा वसाओं के ऑक्सीकर विखण्डन अर्थात् उपापचयी जारण (अपचय) से प्राप्त होती है। एक ग्राम कार्बोहाइड्रेट या प्रोटीन के उपापचयी जारण से 4 किलोकैलोरी तथा एक ग्राम वसा के जारण से 9.3 किलोकैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है।
In simple words: संतुलित आहार वह है जो शरीर की सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सही अनुपात में सभी आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है, जबकि भोजन की ऊष्मीय गुणवत्ता भोजन से प्राप्त होने वाली ऊर्जा की मात्रा को कैलोरी में व्यक्त करती है, जो उपापचयी क्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: संतुलित आहार की परिभाषा में गुणवत्ता और मात्रा दोनों का उल्लेख करें, और भोजन की ऊष्मीय गुणवत्ता को कैलोरी मान के साथ स्पष्ट करें, विभिन्न पोषक तत्वों से प्राप्त ऊर्जा को ध्यान में रखते हुए।
Question 3. विष्ठा भोजिता से क्या तात्पर्य है? किसी विष्ठा भोजी स्तनिक का वैज्ञानिक नाम बताइए ।
Answer: कुछ जीव अपने द्वारा त्यागे गये मल को पुनः सेवन करते हैं। पोषण की इस विधि को विष्ठा भोजिता कहते हैं।
उदाहरण
(i) खरगोश : ऑरिक्टोलेगस क्यूनिकुलस ।
In simple words: विष्ठा भोजिता एक पोषण विधि है जिसमें कुछ जीव अपने ही मल का पुनः सेवन करते हैं, जैसे खरगोश (ऑरिक्टोलेगस क्यूनिकुलस), ताकि अपचित पोषक तत्वों को फिर से अवशोषित किया जा सके।
🎯 Exam Tip: विष्ठा भोजिता की अवधारणा को समझना, इसके कारण (जैसे पोषक तत्वों का पुनः अवशोषण) और संबंधित जीवों के उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 4. दन्तावकाश क्या है? एक वयस्क मानव के दाँत का फॉर्मूला लिखिए। या दन्त विन्यास को परिभाषित कीजिए। मनुष्य में किसप्रकार का दन्त विन्यास पाया जाता है? वयस्क मनुष्य का दन्त सूत्र लिखिए। बुद्धि दन्त किसे कहते हैं?
Answer:
1. दन्तावकाश : अनेक शाकाहारी प्राणियों में रदनक (canines) नहीं पाये जाते हैं। इनके रिक्त स्थान को दन्तावकाश कहते हैं।
2. दन्त विन्यास :
मुख गुहिका में दाँतों के व्यवस्थित होने के क्रम को दन्त विन्यास कहते हैं। मानव का दन्त विन्यास गोल परवलयाकार के रूप में होता है। तृतीय चर्वणकों को बुद्धि दन्त कहते हैं।
वयस्क मानव का दन्त सूत्र :
(i = कृन्तक, c = रदनक, pm = प्रचर्वणक, m = चर्वणक) \( \frac{2123}{2123} \)
In simple words: दन्तावकाश रदनक जैसे दांतों की अनुपस्थिति के कारण दांतों के बीच का खाली स्थान है; दन्त विन्यास मुंह में दांतों की व्यवस्था है, वयस्क मनुष्य का दंत सूत्र \( \frac{2123}{2123} \) है, और तीसरे चर्वणक को बुद्धि दंत कहते हैं।
🎯 Exam Tip: दन्तावकाश, दंत विन्यास, वयस्क मानव दंत सूत्र और बुद्धि दंत की परिभाषाओं को स्पष्ट करें।
Question 5. पित्तरस शरीर के किस अंग में बनता है? पाचन में इसकी क्या भूमिका है?
Answer: पित्तरस (Bile juice) : इसका निर्माण यकृत में होता है। यह पित्ताशय में एकत्र होता रहता है और आवश्यकतानुसार सामान्य पित्तवाहिनी द्वारा ग्रहणी में पहुँचता है। यह भोजन के माध्यम को । क्षारीय बनाता है। भोजन की लुगदी (chyme) को पतला (chyle) करता है तथा वसा की। इमल्सीकरण करता है जिससे वसा का पाचन सुगमता से हो जाता है।
In simple words: पित्त रस यकृत में बनता है और पित्ताशय में जमा होता है; यह भोजन को क्षारीय बनाता है और वसा का इमल्सीकरण करके उसके पाचन को आसान बनाता है, हालांकि इसमें कोई एंजाइम नहीं होता।
🎯 Exam Tip: पित्त रस के उत्पादन स्थल (यकृत), भंडारण स्थल (पित्ताशय) और पाचन में इसकी एंजाइम-रहित भूमिका (वसा का इमल्सीकरण, pH संतुलन) पर ध्यान दें।
Question 6. पानी में घुलनशील विटामिन्स के नाम एवं कार्य लिखिए। या जल में घुलनशील विटामिन्स के नाम लिखिए तथा इनकी प्राप्ति के मुख्य स्रोत एवं इनकी कमी से होने वाले विभिन्न रोग/व्याधियों का वर्णन कीजिए। यो संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए-विटामिन्स की कमी से होने वाले रोग ।
Answer: जल में घुलनशील विटामिन्स के प्रकार, मुख्य स्रोत,
| विटामिन, नाम तथा रासायनिक सूत्र | मुख्य स्रोत | कार्य | अभाव से उत्पन्न रोग |
| B₁-थायमीन C12H16NSO | अनाज, फलियाँ, यीस्ट, मांस, अण्डे आदि। | कार्बोहाइड्रेट एवं वसा उपापचय में को-एन्जाइम के रूप में। | बेरी-बेरी (beri-beri)। |
| B₂(G)- राइबोफ्लेविन C17H20N4O6 | हरी पत्तियाँ, गेहूँ, यीस्ट, पनीर, अण्डे, जिगर, मांस आदि। | प्रोटीन उपापचय में FAD के घटक के रूप में। | होठों का फटना तथा त्वचीय रोग। |
| B₃-पेण्टोथेनिक अम्ल | टमाटर, मूँगफली, ईख, यीस्ट, दूध, अण्डे, मांस आदि। | उपापचय में को-एन्जाइम A का मुख्य घटक । | चर्म रोग, बालों का सफेद होना, जनन क्षमता में कमी आदि। |
| B₅ (PP)-निकोटिनिक अम्ल C6H5NO2 | अनाज, दालें, यीस्ट, दूध, जिगर, मछलियाँ, मांस आदि। | उपापचय में आवश्यक NAD के घटक के रूप में। | पेलाग्रा (pellagra) जीभ तथा त्वचा में पपड़ियाँ पड़ना। |
| B₆-पाइरीडॉक्सिन | शुष्क फल, सब्जियाँ, अनाज, यीस्ट, जिगर, मांस, मछलियाँ आदि। | प्रोटीन व अमीनो अम्ल उपापचय में योगदान । | रुधिराल्पता (anaemia) व चर्म रोग। |
| B₁₂ - सायनोकोबेलमिन | दूध, अण्डे, जिगर, मांस, मछलियाँ आदि। | रुधिराणुओ न्यूक्लिओटाइड्स निर्माण में योगदान। | व रुधिराल्पता व धीमी वृद्धि। |
| फोलिक अम्ल समूह | हरी पत्तियाँ, सोयाबीन, यीस्ट, जिगर, गुर्दे, अण्डे आदि। | न्यूक्लिक अम्लों के उपापचय, रुधिराणुओं के निर्माण व शारीरिक वृद्धि में योगदान। | रुधिराल्पता, धीमी वृद्धि। |
| H-बायोटिन | सब्जियाँ, फल, मूँगफली, गेहूँ, चॉकलेट, यीस्ट, अण्डा आदि। | वसीय अम्लों के संश्लेषण व ऊर्जा उत्पादन में योगदान। | बालों का झड़ना, चर्म रोग आदि। |
| C-ऐस्कॉर्बिक अम्ल C6H8O6 | आँवला, मुसम्मी, सन्तरा, नींबू, सब्जियाँ, रसीले फल आदि। | अन्तराकोशिकीय मैट्रिक्स, कोलेजन तन्तु, हड्डियों के मैट्रिक्स तथा दाँतों के डेण्टाइन के निर्माण में योगदान। | स्कर्वी रोग (scurvy), मसूड़ों से रुधिर स्राव, शरीर के भार में कमी होना आदि। |
In simple words: जल में घुलनशील विटामिन (जैसे B-कॉम्प्लेक्स और C) शरीर के उपापचय और विभिन्न शारीरिक कार्यों के लिए आवश्यक होते हैं, और उनकी कमी से विशिष्ट रोग जैसे बेरी-बेरी, पेलाग्रा, एनीमिया और स्कर्वी हो सकते हैं, जबकि उनके स्रोत अनाज, फल और सब्जियां हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक जल में घुलनशील विटामिन के रासायनिक नाम, मुख्य कार्य, सामान्य खाद्य स्रोत और कमी से होने वाले विशिष्ट रोगों को याद रखें।
Question 7. विटामिन 'ए' की कमी से रतौंधी किस प्रकार उत्पन्न होती है?
Answer: विटामिन 'ए' का प्रमुख कार्य हमारी आँखों में उपस्थित दृष्टि-रंगाओं का संश्लेषण करना होता है जिसके कारण हम कम रोशनी या रात में देख सकते हैं। इसके विपरीत विटामिन 'ए' की कमी म दृष्ट-२ गाओं का संश्लेषण नहीं हो पाता तथा हमें कम रोशनी या रात में स्पष्ट दिखाई देना बन्द हो जाता है। इसी रोग को रतौंधी कहा जाता है।
In simple words: विटामिन A की कमी से आंखों में प्रकाश-संवेदनशील वर्णक (रोडोप्सीन) का संश्लेषण बाधित हो जाता है, जिससे कम रोशनी या रात में देखने की क्षमता कम हो जाती है, जिसे रतौंधी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: विटामिन A की भूमिका को दृष्टि वर्णक (रोडोप्सीन) के संश्लेषण से जोड़ें और इसकी कमी से होने वाले रतौंधी के तंत्र को स्पष्ट करें।
Question 8. किन विटामिनों की कमी से निम्न रोग होते हैं? इनके स्रोत बताइए ।
(क) स्कर्वी रोग
(ख) रतौंधी
(ग) पेलाग्रा
(घ) घेघा
Answer:
(क) स्कर्वी रोग : यह रोग विटामिन 'C' की कमी से होता है। टमाटर, नींबू, सन्तरा, मुसम्मी, ताजे खट्टे फल इसके मुख्य स्रोत हैं।
(ख) रतौंधी : यह रोग विटामिन 'A' (retinol) की कमी से होता है। इसके मुख्य स्रोत दूध, मक्खन, अण्डा, यकृत, मछली का तेल, गाजर आदि हैं।
(ग) पेलाग्रा : यह रोग विटामिन 'B₅' की कमी से होता है। इसके मुख्य स्रोत मांस, यकृत, अण्डा, मछली, दूध, मेवा, मटर आदि फलियाँ होती हैं।
(घ) घेघा : यह रोग आयोडीन की कमी से होता है। आयोडीन युक्त नमक आयोडीन का प्रमुख स्रोत है।
(ङ) सूखा रोग : यह विटामिन डी की कमी के कारण होता है। त्वचा धूप में इसका संश्लेषण स्वयं कर लेती है। मछली का तेल, मक्खन, घी, आदि इसके अन्य स्रोत हैं।
In simple words: स्कर्वी विटामिन C की कमी से, रतौंधी विटामिन A की कमी से, पेलाग्रा विटामिन B₅ की कमी से, घेघा आयोडीन की कमी से, और सूखा रोग विटामिन D की कमी से होता है; इन सभी पोषक तत्वों के विभिन्न खाद्य स्रोत होते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक सूचीबद्ध रोग को उसके संबंधित विटामिन या खनिज की कमी और उनके प्रमुख खाद्य स्रोतों के साथ सुमेलित करें।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. पोषण क्या है? पाचन और पोषण में क्या अन्तर है? मनुष्य के पाचन तन्त्र का एक नामांकित चित्र बनाइए। या पाचन क्या है? मनुष्य की आहारनाल का सचित्र वर्णन कीजिए। या पाचन क्या है? पाचन व पोषण में विभेद कीजिए ।
Answer: पोषण
सभी जीवों को जीवित रहने तथा शरीर में होने वाली विभिन्न उपापचयी क्रियाओं को करने के लिए। ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा भोजन से प्राप्त होती है। विभिन्न प्रकार के जीव भोजन लेने के लिए विभिन्न विधियाँ अपनाते हैं। भोजन ग्रहण करने से लेकर, पाचन, अवशोषण, कोशिकाओं तक पहुँचाने, कोशिका में उसके ऊर्जा उत्पादन में प्रयोग करने अथवा जीवद्रव्य में स्वांगीकृत करने तथा भविष्य के लिए उसे शरीर में संगृहीत करने तक की सभी क्रियाओं का सम्मिलित नाम पोषण है। इस प्रकार पोषण जटिल क्रियाओं का नाम है तथा यह अनेक पदों या चरणों में पूरी होती है।
पाचन
भोर्जीन के जटिल एवं अविलेय पदार्थों को शरीर में उनके कार्यों को सम्पादित करने के लिए अवशोषित नहीं किया जा सकता है। पहले इनको सरल एवं विलेय पदार्थों में बदलने की आवश्यकता होती है। तथा यह कार्य अनेक भौतिक एवं रासायनिक क्रियाओं द्वारा किया जाता है। ये सभी क्रियाएँ सम्मिलित रूप से पाचन (digestion) कहलाती हैं अर्थात् भोजन को अवशोषण योग्य अवस्था में परिवर्तित करने की क्रिया पाचन कहलाती है, जो एक जटिल जैविक क्रियाओं का सम्मिलित नाम है और जिसमें कई भौतिक एवं रासायनिक प्रक्रियाएँ भाग लेती हैं। भौतिक क्रियाओं में भोज्य पदार्थ ग्रहण करना, इन्हें चबाकर निगलने योग्य बनाना तथा आहारनाल में इन्हें गति प्रदान करना आदि प्रमुख यान्त्रिक क्रियाएँ होती हैं, जबकि पोषक पदार्थों (कार्बोहाइड्रेट्स, वसाओं एवं प्रोटीन्स आदि) के जटिल अणुओं को जल अपघटन (hydrolysis) द्वारा उनके सरल एवं विलेय मोनोमर्स (monomers) में विखण्डित करना अति महत्त्वपूर्ण रासायनिक प्रक्रियाएँ हैं। पाचन की विभिन्न रासायनिक क्रियाएँ मुख्यतः एन्जाइम्स (enzymes) द्वारा नियन्त्रित होती हैं। मनुष्य में पाचन क्रिया एक नली में सम्पन्न होती है जिसे आहारनाल (alimentary canal) कहते हैं। आहारनाल से सम्बद्ध विभिन्न पाचक ग्रन्थियाँ पाई जाती हैं जो विभिन्न प्रकार के एन्जाइमों का स्रावण करती हैं।
पाचन एवं पोषण में अन्तर
सभी जीवों को विभिन्न कार्यों को करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा शरीर के अन्दर कोशिकाओं में भोज्य पदार्थों के ऑक्सीकरण से प्राप्त होती है। दूसरी ओर जीवद्रव्य की वृद्धि करने तथा उसे बनाये रखने के लिए अलग-अलग प्रकार से भोजन करके कोशिकाओं तक पहुँचाना, उसे स्वांगीकृत करना या आवश्यकता के लिए संगृहीत करना आदि का सम्मिलित नाम पोषण (nutrition) है। पोषण अत्यधिक जटिल प्रक्रिया है। पाचन पोषण के लिए भोजन पर की गई एक विशिष्ट प्रक्रिया है जिसमें अघुलनशील (जल में) भोज्य पदार्थों को घुलनशील अवस्था में बदलकर उन्हें अवशोषण (absorption) के योग्य बनाया जाता है, जिससे वे रुधिर में मिलकर शरीर के विभिन्न भागों में पहुँच जाएँ।
मनुष्य का पाचन तन्त्र (आहारनाल)
मनुष्य तथा स्तनियों में कशेरुकी जन्तुओं की अपेक्षा पाचन तन्त्र (digestive system) विशेषकर, इसकी आहारनाल (alimentary canal) अधिक लम्बी तथा जटिल प्रणाली होती है।
मनुष्य की आहारनाल भोजन को पचाने, तत्त्वों को अवशोषित करने आदि के लिए एक लम्बी, लगभग 8-9 मीटर लम्बी, नली जैसी संरचना होती है जो मुखद्वार (mouth) से मलद्वार (anus) तक फैली रहती है। इस नली को पाचन प्रणाली या आहारनाल (digestive tract or alimentary canal) कहते हैं। शरीर के भिन्न-भिन्न स्थानों पर आहारनाल का व्यास भिन्न-भिन्न होता है। इसको निम्नलिखित पाँच भागों में बाँटा जाता है
1. मुख व मुखगुहा (Mouth and buccal cavity) : दो चल होठों (ओष्ठों = lips) से घिरा हुआ मुखद्वार (mouth), मुखगुहा (buccal cavity) में खुलता है। मुखगुहा दोनों जबड़ों तक, गालों से घिरी चौड़ी गुहा है जिसमें ऊपरी जबड़ा खोपड़ी के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ तथा अचल होता है। निचला जबड़ा पाश्र्व-पश्च भाग में ऊपरी जबड़े के साथ सन्धित तथा चल होता है। मुखगुहा की छत, तालू (palate) कहलाती है। तालू का अगला तथा अधिकांश भाग कठोर होता है तथा कठोर तालू (hard palate) कहलाता है। इसके पीछे कंकालरहित कोमल तालू (soft palate) होता है, जो अन्त में एक कोमल लटकन के रूप में होता है। इसे काग (uvula or velum palati) कहते हैं।
काग के इधर-उधर छोटी-छोटी गाँठों के रूप में गलांकुर tonsiles) होते हैं। निचले तथा ऊपरी जबड़े में कुल मिलाकर 32 दाँत (teeth) होते हैं। दाँतों की संख्या उम्र के साथ बदलती रहती है। मुखगुहा के फर्श पर एक अति मुलायम लचीली तथा लसलसी जीभ या जिह्वा (tongue) होती है जिसका केवल अगला थोड़ा-सा भाग ही स्वतन्त्र होता है जो नीचे फर्श के साथ एक भंज (fold), जिह्वा फ्रेनुलम (frenulum linguae) के द्वारा जुड़ा दिखायी देता है। जीभ का पिछला भाग फर्श के साथ पूर्णतः जुड़ा होता है। जीभ की ऊपरी सतह अत्यन्त खुरदरी होती है जो इस पर उपस्थित अनेक जिल्ह्वा अंकुरों (lingual papillae) तथा कुछ सूक्ष्म गाँठों के कारण है। ये संरचनाएँ हमें विभिन्न पदार्थों के स्वाद का ज्ञान कराती हैं।
2. ग्रसनी (Pharynx) : नीचे जीभ तथा ऊपर काग के पीछे कीप के आकार का लगभग 12-15 सेमी लम्बा भाग ग्रसनी (pharynx) कहलाता है। इसके तीन भाग किये जा सकते हैं
(क) नासाग्रसनी (nasapharynx), जो श्वसन मार्ग के पीछे स्थित होता है।
(ख) स्वरयन्त्री ग्रसनी (laryngeal pharynx) यहाँ वायु मार्ग तथा आहार मार्ग एक-दूसरे को काटते (cross) हैं तथा
In simple words: पोषण एक व्यापक प्रक्रिया है जिसमें भोजन का सेवन, पाचन, अवशोषण, और ऊर्जा उत्पादन के लिए उसका उपयोग शामिल है, जबकि पाचन पोषण का एक चरण है जहाँ जटिल भोजन को सरल, अवशोषित होने योग्य रूपों में तोड़ा जाता है। मनुष्य का पाचन तंत्र मुखगुहा से शुरू होकर मलद्वार तक फैली एक लंबी आहारनाल है, जिसमें मुख, ग्रसनी, ग्रासनली, आमाशय, छोटी और बड़ी आँत जैसे कई अंग शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: पोषण और पाचन के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें, और मानव आहारनाल के प्रत्येक भाग (मुख, ग्रसनी, ग्रासनली आदि) की संरचना और कार्यात्मक भूमिकाओं का वर्णन करें।
Question 2. मनुष्य की आहारनाल में कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटको तथा वसा की पाचन क्रिया का वर्णन कीजिए। या मनुष्य की आहारनाल में प्रोटीन एवं वस-पाचन की क्रियाविधि समझाइए ।
Answer: कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन्स, वसाओं का पाचन
भोजन में उपस्थित पोषक पदार्थों (कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन तथा वसाएँ) के पाचन की विस्तृत प्रक्रिया मुखगुहा से प्रारम्भ होकर क्षुद्रान्त्र में पूरी होती है। इनके पाचन का सारांश निम्नलिखित है
1. कार्बोहाइड्रेट्स का पाचन (Digestion of Carbohydrates) : हमारे भोजन में कार्बोहाइड्रेट्स पॉलिसैकेराइड्स (मण्ड तथा ग्लाइकोजन), डाइसैकेराइड्स (सुक्रोज तथा लैक्टोज) और मोनोसैकेराइड्स (ग्लूकोज एवं फ्रक्टोस) के रूप में होते हैं। मुखगुहा में लार का ऐमाइलेज (salivary amylase) एन्जाइम कुछ मण्ड को माल्टोज नामक डाइसैकेराइड में विखण्डित करता है। इसका यह कार्य ग्रासनली में होता रहता है और भोजन के आमाशय में पहुँचने पर जठर रस की अम्लीयता के कारण बन्द हो जाता है। ग्रहणी में अग्न्याशयी ऐमाइलेज भोजन की शेष पॉलिसैकेराइड्स को डाइसैकेराइड्स में विखण्डित कर देता है। अन्त में आन्त्रीय रस के ब्रुश-बोर्डर कार्बोहाइड्रेट-पाचक एन्जाइम-माल्टेज, सुक्रेज तथा लैक्टज-काइम के डाइसैकेराइड्स, क्रमशः माल्टोज, सुक्रोज तथा लैक्टोज, को मोनोसैकेराइड्स, अर्थात् सरलतम शर्कराओं में विखण्डित कर देते हैं।
2. प्रोटीन्स का पाचन (Digestion of Proteins) : भोजन की प्रोटीन्स जटिल दीर्घअणुओं (macromolecules) के रूप में होती हैं। इनका पाचन आमाशय में प्रारम्भ होता है। जठर रस का HCI जटिल प्रोटीन अणुओं के कुण्डलों तथा वलनों को खोल देता है, फिर जठर रस को पेप्सिन (pepsin) एन्जाइम खुली हुई पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाओं में से 10 से 20% श्रृंखलाओं के बीच-बीच के पेप्टाइड बन्धों को तोड़कर इन्हें छोटी पेप्टाइड श्रृंखलाओं (व्युत्पन्न प्रोटीन्स) में विखण्डित कर देते हैं। ग्रहणी में अग्न्याशयी रस के ट्रिप्सिन तथा काइमोट्रिप्सिन एन्जाइम शेष पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाओं को इसी प्रकार छोटी श्रृंखलाओं में विखण्डित करते हैं। इसी रस का कार्बोक्सीपेप्टिडेज एन्जाइम कुछ पेप्टाइड श्रृंखलाओं के छोर बन्धों को तोड़कर इनसे ऐमीनो अम्ल इकाइयों को पृथक् करता है। अन्त में आन्त्रीय रस के ऐमीनोपेप्टिडेज तथा कार्बोक्सीपेप्टिडेज एन्जाइम सभी पेप्टाइड श्रृंखलाओं के छोर बन्धों को क्रमशः तोड़-तोड़कर इन्हें ऐमीनो अम्लों में विखण्डित कर देते हैं।
3. वसाओं का पाचन (Digestion of Fats) : हमारी भोजन सामग्री में अधिकांश वसाएँ सरल वसाओं, अर्थात् ट्राइग्लिसराइड्स (triglycerides) के रूप में होते हैं। लार तथा जठर रस के लाइपेज एन्जाइम कुछ वसाओं को वसीय अम्लों तथा मोनोग्लिसराइड्स में विखण्डित करते हैं। ग्रहणी में पित्त लवण समस्त वसाओं को छोटे-छोटे बिन्दुकों में तोड़ते हैं जिनका कि काइम में पायस (emulsion) बन जाता है। फिर अग्न्याशयी रस के लाइपेज, कोलेस्टेरॉल, एस्टरेज तथा फॉस्फोलाइपेज एन्जाइम और आन्त्रीय रस के लाइपेज एन्जाइम सारे वसाओं को वसीय अम्लों, मोनोग्लिसराइड्स, कोलेस्टेरॉल एवं फॉस्फोरिक अम्ल में विखण्डित कर देते हैं।
In simple words: मानव आहारनाल में कार्बोहाइड्रेट्स का पाचन मुंह में शुरू होकर छोटी आंत में पूरा होता है, जहां वे सरल शर्कराओं में टूट जाते हैं। प्रोटीन का पाचन पेट में शुरू होकर छोटी आंत में अमीनो एसिड में बदलता है। वसा का पाचन छोटी आंत में पित्त द्वारा इमल्सीकृत होकर लाइपेज एंजाइमों द्वारा फैटी एसिड और मोनोग्लिसराइड्स में विघटित होता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में विभिन्न पोषक तत्वों के पाचन स्थल, उनमें शामिल प्रमुख एंजाइमों और उनके कार्य को विस्तार से समझाना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक मैक्रोन्यूट्रिएंट के पाचन के अंतिम उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करें।
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