UP Board Solutions Class 11 Biology Chapter 15 Plant Growth and Development

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Detailed Chapter 15 पौधे की वृद्धि और विकास UP Board Solutions for Class 11 Biology

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Class 11 Biology Chapter 15 पौधे की वृद्धि और विकास UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions For Class 11 Biology Chapter 15 Plant Growth And Development (पादप वृद्धि एवं परिवर्धन)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

 

Question 1. वृद्धि, विभेदन, परिवर्धन, निर्विभेदन, पुनर्विभेदन, सीमित वृद्धि, मेरिस्टेम तथा वृद्धि दर की परिभाषा दें।
Answer:
1. वृद्धि (Growth) : ऊर्जा खर्च करके होने वाली उपापचयी क्रियाएँ वृद्धि हैं। किसी भी जीवित प्राणी के लिए वृद्धि एक उत्कृष्ट घटना है। यह एक अनपलट, बढ़तयुक्त तथा मापदण्ड में प्रकट होने वाली क्रिया है; जैसे-आकार, क्षेत्रफल, लम्बाई, ऊँचाई, आयतन, कोशिका संख्या आदि।
2. विभेदन (Differentiation) : शीर्ष विभज्योतक, कैम्बियम आदि में बनने वाली कोशिकाएँ सर्वप्रथम समान होती हैं परन्तु बाद में विभेदिकरण के कारण विभिन्न रूपों में परिवर्तित होती है; जैसे-जाइलम व फ्लोएम के तत्त्व आदि ।
3. परिवर्धन (Development) : परिवर्धन वह प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत एक जीव के जीवन चक्र में आने वाले वे सारे बदलाव शामिल हैं, जो बीजांकुरण तथा जरावस्था के मध्य आते हैं।
4. निर्विभेदन (Dedifferentiation) : जीवित विभेदित स्थायी कोशिकाएँ जिनमें कोशिका विभाजन की क्षमता नहीं होती, उनमें से कुछ कोशिकाओं में पुन-विभाजन की क्षमता स्थापित हो जाती है। इस प्रक्रिया को निर्विभेदन (dedifferentiation) कहते हैं; जैसे-कॉर्क एधा, अन्तरापूलीय एधा ।
5. पुनर्विभेदन (Redifferentiation) : निर्विभेदित कोशिकाओं या ऊतकों से बनी कोशिकाएँ अपनी विभाजन क्षमता पुनः खो देती हैं और विशिष्ट कार्य करने के लिए रूपान्तरित हो जाती हैं। इस प्रक्रिया को पुनर्विभेदन (redifferentiation) कहते हैं।
6. सीमित वृद्धि (Determinate Growth) : पौधों में वृद्धि सीमित भी होती है और असीमित भी । पौधे जीवनपर्यन्त वृद्धि करते रहते हैं; अतः इनमें असीमित वृद्धि की क्षमता होती है। इस वृद्धि का कारण विभज्योतक ऊतक के शीर्ष पर उपस्थित है (मूल शीर्ष, स्तम्भ शीर्ष) । पार्श्व विभज्योतक के कारण पौधे चौड़ाई में बढ़ते हैं।
7. मेरिस्टेम (Meristem) : ये विभज्योतक ऊतक हैं। इनकी कोशिकाएँ सदैव विभाजित होती रहती हैं। ये ऊतक के शीर्ष व पाश्र्व में मिलता है; जैसे-मूल शीर्ष, स्तम्भ शीर्ष, कैम्बियम आदि ।
8. वृद्धि दर (Growth Rate) : समय की प्रति इकाई में बढ़ी हुई वृद्धि को वृद्धि दर कहते हैं। इसे गणित रूप में दर्शाया जा सकता है। एक जीव अथवा उसका अंग विभिन्न तरीकों से अधिक कोशिका निर्माण कर सकता है। वृद्धि दर इसे ज्यामितीय अथवा अंकगणितीय रुप से दर्शाती है।
In simple words: These terms define various aspects of plant growth, from the irreversible increase in size (growth) to the specialization of cells (differentiation), the entire life cycle changes (development), and specific tissues responsible for growth (meristem) and its measurement (growth rate).

🎯 Exam Tip: Understanding the precise definitions and examples of these fundamental growth processes is crucial for scoring well in plant physiology questions.

 

Question 2. पुष्पित पौधों के जीवन में किसी एक प्राचालिक (parameter) से वृद्धि को वर्णित नहीं किया जा सकता है, क्यों?
Answer: वृद्धि के प्राचालिक
वृद्धि सभी जीवधारियों की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता है। पौधों में वृद्धि कोशिका विभाजन, कोशिका विवर्धन या दीर्धीकरण तथा कोशिका विभेदन के फलस्वरूप होती है। पौधे की मेरिस्टेम कोशिकाओं (meristematic cells) में कोशा विभाजन की क्षमता पाई जाती है। सामान्यतया कोशिका विभाजन जड़ तथा तने के शीर्ष (apex) पर होता है। इसके फलस्वरूप जड़ तथा तने की लम्बाई में वृद्धि होती है। एधा (cambium) तथा कॉर्क एधा (8rk cambium) के कारण तने और जड़ की मोटाई में वृद्धि होती है। इसे द्वितीयक वृद्धि (secondary growth) कहते हैं। कोशिकीय स्तर पर वृद्धि मुख्यतः जीवद्रव्य मात्रा में वर्धन का परिणाम है। जीवद्रव्य की बढ़ोतरी या वर्धन का मापन कठिन है। वृद्धि दर मापन के कुछ मापदण्ड हैं-ताजे भोर में वृद्धि, शुष्क भार में वृद्धि, लम्बाई, क्षेत्रफल, आयतन तथा कोशिका संख्या में वृद्धि आदि । मक्का की जड़ को अग्रस्थ मेरिस्टेम प्रति घण्टे लगभग 17,500 कोशिकाओं का निर्माण करता है। तरबूज की कोशिका के आकार में लगभग 3,50,000 गुना वृद्धि हो सकती है। पराग नलिका की लम्बाई में वृद्धि होने से यह वर्तिकाग्र, वर्तिका से होती हुई अण्डाशय में स्थित बीजाण्ड में प्रवेश करती है।
In simple words: Plant growth is a complex, multi-faceted process involving various physiological changes, not just a single measurable parameter. It includes cell division, enlargement, and differentiation, affecting length, width, volume, and cell count, making it impossible to describe completely with just one factor.

🎯 Exam Tip: When explaining why a single parameter is insufficient, emphasize the different types of growth (primary, secondary) and the various quantifiable aspects (length, area, cell number, biomass).

 

Question 3. संक्षिप्त वर्णित कीजिए
(अ) अंकगणितीय वृद्धि
(स) सिग्मॉइड वृद्धि वक्र
(ब) ज्यामितीय वृद्धि
(द) सम्पूर्ण एवं सापेक्ष वृद्धि दर
Answer:
(अ) अंकगणितीय वृद्धि
समसूत्री विभाजन के पश्चात् बनने वाली दो संतति कोशिकाओं में से एक कोशिका निरन्तर विभाजित होती रहती है और दूसरी कोशिका विभेदित एवं परिपक्व होती रहती है। अंकगणितीय वृद्धि को हम हैं निश्चित दर पर वृद्धि करती जड़ में देख सकते हैं। यह है एक सरलतम अभिव्यक्ति होती है। संलग्न चित्र में वृद्धि (लम्बाई) समय के विरुद्ध आलेखित की गई है। इसके फलस्वरूप रेखीय वक्र (linear curve) प्राप्त होता है। इस वृद्धि को हम गणितीय रूप से व्यक्त कर सकते हैं \(L_1 = L_0 + rt\)
(\(L_1\) = समय 'r' पर लम्बाई,
\(L_0\) = समय '0' पर लम्बाई
r = वृद्धि दर दीर्घाकरण प्रति इकाई समय में)


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आलेख दिखाता है कि समय के साथ पौधे की लंबाई में नियत रेखीय वृद्धि कैसे होती है। इसमें वृद्धि को एक सीधी रेखा (linear curve) के रूप में दर्शाया गया है, जहाँ 'a' किसी निश्चित समय पर पौधे की ऊंचाई को इंगित करता है। यह अंकगणितीय वृद्धि का एक सीधा प्रतिनिधित्व है।

(ब) ज्यामितीय वृद्धि
एक कोशिका की वृद्धि अथवा पौधे के एक अंग की वृद्धि अथवा पूर्ण पौधे की वृद्धि सदैव एकसमान नहीं हैं होती। प्रारम्भिक धीमा वृद्धि काल (initial lag phase)
में वृद्धि की दर पर्याप्त धीमी होती है। तत्पश्चात् यह दर तीव्र हो जाती है और उच्चतम बिन्दु (maximum point) तक पहुँच जाती है। इसे मध्य तीव्र वृद्धि काल (middle logarithmic phase) कहते हैं। इसके पश्चात् यह दर धीरे-धीरे कम होती जाती है और अन्त में स्थिर हो जाती है। इसे अन्तिम धीमा वृद्धि काल (last stationary phase) कहते हैं। इसे ज्यामितीय वृद्धि कहते हैं। इसमें सूत्री विभाजन से बनी दोनों संतति कोशिकाएँ एक समसूत्री कोशिका विभाजन को


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक आदर्श सिग्मॉइड वक्र है जो ज्यामितीय वृद्धि को दर्शाता है। वक्र में तीन मुख्य चरण दिखाए गए हैं: एक प्रारंभिक 'लैग फेज' (धीमी वृद्धि), एक 'लॉगरिदमिक फेज' (तेज वृद्धि), और एक 'स्टेशनरी फेज' (स्थिर वृद्धि)। यह वक्र समय के सापेक्ष अंग के आकार या वजन में वृद्धि की विशिष्ट 'S' आकृति का प्रतिनिधित्व करता है।

अनुकरण करती हैं और इसी प्रकार विभाजित होने की क्षमता बनाए रखती हैं। यद्यपि सीमित पोषण, आपूर्ति के साथ वृद्धि दर धीमी होकर स्थिर हो जाती है। समय के प्रति वृद्धि दर को ग्राफ पर अंकित करने पर एक सिग्मॉइड वक्र (sigmoid curve) प्राप्त होता है। यह 'S' की आकृति का होता है। ज्यामितीय वृद्धि (geometrical growth) को गणितीय रूप से निम्नलिखित प्रकार व्यक्त कर सकते हैं
\(W_1 =\)
जहाँ \(W_1\) = अन्तिम आकार-भार, ऊँचाई, संख्या आदि
\(W_0\) = प्रारम्भिक आकार, वृद्धि के प्रारम्भ में
r = वृद्धि दर (सापेक्ष वृद्धि दर)
t = समय में वृद्धि
e = स्वाभाविक लघुगणक का आधार (base of natural logarithms)
r = एक सापेक्ष वृद्धि दर है। यह पौधे द्वारा नई पादप सामग्री का निर्माण क्षमता को मापने के लिए है, जिसे एक दक्षता सूचकांक (efficiency index) के रूप में संदर्भित किया जाता है; अतः \(W_1\) का अन्तिम आकार \(W_0\) के प्रारम्भिक आकार पर निर्भर करता है।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र तीन प्रकार की वृद्धि को दर्शाता है: (A) अंकगणितीय वृद्धि, जो एक सीधी श्रृंखला दिखाती है; (B) ज्यामितीय वृद्धि, जो एक पिरामिड या घातीय वृद्धि पैटर्न को दर्शाती है जहाँ सभी कोशिकाएँ विभाजित होती हैं; और (C) भ्रूण के विकास के दौरान अंकगणितीय और ज्यामितीय वृद्धि के चरण, यह दिखाते हुए कि कैसे एक युग्मनज विभाजित होकर भ्रूण बनाता है और फिर कोशिकाएँ विभाजित होती रहती हैं या अपनी विभाजन क्षमता खो देती हैं।

(स) सिग्मॉइड वृद्धि वक्र
ज्यामितिक वृद्धि को तीन प्रावस्थाओं में विभक्त कर सकते हैं
1. प्रारम्भिक धीमा वृद्धि काल (Initial lag phase)
2. मध्य तीव्र वृद्धि काल (Middle lag phase)
3. अन्तिम धीमा वृद्धि काल (Last stationary phase)
यदि वृद्धि दर का समय के प्रति ग्राफ बनाएँ तो 'S' की आकृति का वक्र प्राप्त होता है। इसे सिग्मॉइड वृद्धि वक्र कहते हैं।
(द) सम्पूर्ण एवं सापेक्ष वृद्धि दर
1. मापन और प्रति यूनिट समय में कुल वृद्धि को सम्पूर्ण या परम वृद्धि दर (absolute growth rate) कहते हैं।
2. किसी दी गई प्रणाली की प्रति यूनिट समय में वृद्धि को सामान्य आधार पर प्रदर्शित करना सापेक्ष वृद्धि दर (relative growth rate) कहलाता है।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र संपूर्ण और सापेक्ष वृद्धि दर को दर्शाता है, जिसमें पत्ती A और पत्ती B को दिखाया गया है। दोनों पत्तियों का प्रारंभिक क्षेत्रफल क्रमशः 5 सेमी² और 50 सेमी² है। एक निश्चित समय के बाद, पत्ती A का क्षेत्रफल 10 सेमी² हो जाता है (5 सेमी² की वृद्धि) और पत्ती B का क्षेत्रफल 55 सेमी² हो जाता है (5 सेमी² की वृद्धि)। यद्यपि दोनों पत्तियों में निरपेक्ष वृद्धि (5 सेमी²) समान है, पत्ती A की सापेक्ष वृद्धि दर अधिक है क्योंकि उसने अपने प्रारंभिक आकार (5 सेमी²) का दुगुना किया है, जबकि पत्ती B ने केवल 10% की वृद्धि की है।

दोनों पत्तियों ने एक निश्चित समय में अपने सम्पूर्ण क्षेत्रफल में समान वृद्धि की है, फिर भी A की सापेक्ष वृद्धि दर अधिक है।
In simple words: This question describes different ways plants grow and how we measure that growth. Arithmetic growth is a steady, linear increase, while geometric growth starts slow, accelerates, then slows again, forming an S-shaped (sigmoid) curve. Absolute growth measures the total increase, and relative growth measures the increase proportional to the initial size.

🎯 Exam Tip: Pay close attention to the mathematical expressions for arithmetic and geometric growth, and be able to draw and explain the sigmoid growth curve, labeling its distinct phases. Differentiate between absolute and relative growth rates with examples.

 

Question 4. प्राकृतिक पादप वृद्धि नियामकों के पाँच मुख्य समूहों के बारे में लिखिए। इनके आविष्कार, कार्यिकी प्रभाव तथा कृषि/बागवानी में इनके प्रयोग के बारे में लिखिए।
Answer: प्राकृतिक पादप वृद्धि नियामक
पौधों की विभज्योतकी कोशिकाओं (meristematic cells) और विकास करती पत्तियों एवं फलों में प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाले विशेष कार्बनिक यौगिकों को पादप हॉर्मोन्स (phytohormones) कहते हैं। ये अति सूक्ष्म मात्रा में परिवहन के पश्चात् पौधों के अन्य अंगों (भागों) में पहुँचकर वृद्धि एवं अनेक उपापचयी क्रियाओं को प्रभावित एवं नियन्त्रित करते हैं। वेण्ट (Went, 1928) के अनुसार वृद्धि नियामक पदार्थों के अभाव में वृद्धि नहीं होती। पादप हॉर्मोन्स को हम निम्नलिखित पाँच प्रमुख समूहों में बाँट लेते हैं (1) ऑक्सिन (Auxins)
(2) जिबरेलिन (Gibberellins)
(3) सायटोकाइनिन (Cytokinins)
(4) ऐब्सीसिक अम्ल (Abscisic acid)
(5) एथिलीन (Ethylene)

1. ऑक्सिन सर्वप्रथम डार्विन (Darwin, 1880) ने देखा कि कैनरी घास (Phalaris conariensis) के नवोभिद् के प्रांकुर चोल (coleoptile) एकतरफा प्रकाश की ओर मुड़ जाते हैं, परन्तु प्रांकुर चोल के शीर्ष को काट देने पर यह एकतरफा प्रकाश की ओर नहीं मुड़ता ।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र प्रांकुर चोल पर एकतरफा प्रकाश के प्रभाव को दर्शाता है। चित्र (A) में, जब प्रांकुर चोल को एक तरफ से प्रकाशित किया जाता है, तो यह प्रकाश की दिशा में मुड़ जाता है। चित्र (B) में दिखाया गया है कि यदि प्रांकुर चोल के शीर्ष को हटा दिया जाए, तो वह प्रकाश के प्रति प्रतिक्रिया नहीं करता है, यह दर्शाता है कि शीर्ष ही प्रकाश संवेदन के लिए जिम्मेदार है।

बायसेन :
जेन्सन (Boysen-Jensen 1910-1913) ने कटे हुए प्रांकुर चोल को अगार (agar) के घनाकार टुकड़े पर रखा, कुछ समय पश्चात् अगार के घनाकार टुकड़े को कटे हुए प्रांकुर चोल के स्थान पर रखने के पश्चात् एकतरफा प्रकाश से प्रकाशित करने पर प्रांकुर चोल प्रकाश की ओर मुड़ जाता है। वेण्ट (Went, 1928) ने इसी प्रकार के प्रयोग जई (Avena sativa) के नवोभिद् पर किए। उन्होंने प्रयोग से यह निष्कर्ष निकाला कि प्रांकुर चोल के शीर्ष पर बना रासायनिक पदार्थ अगार के टुकड़ों (block) में आ गया था। वेण्ट ने प्रांकुर चोल के कटे हुए शीर्ष को दो अगार के टुकड़ों पर रखा जिनके मध्य अभ्रक (माइका) की पतली प्लेट लगी थी, एकतरफा प्रकाश डालने पर रासायनिक पदार्थ का 65% भाग अप्रकाशित दिशा के टुकड़े में एकत्र हो जाता है और केवल 35% रासायनिक पदार्थ प्रकाशित दिशा के टुकड़े में एकत्र होता है।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र वेण्ट द्वारा किए गए प्रयोग को दर्शाता है जिसमें जई के प्रांकुर चोल के शीर्ष पर ऑक्सिन के वितरण का अध्ययन किया गया था। चित्र (A) में, प्रांकुर चोल के शीर्ष को अलग करके अगार ब्लॉक पर रखा गया है, जिसके बीच में माइका शीट है। चित्र (B) में, कुछ समय बाद, यह दिखाया गया है कि प्रकाश डालने पर ऑक्सिन असमान रूप से वितरित होता है, जिसमें 65% ऑक्सिन अप्रकाशित क्षेत्र में और 35% प्रकाशित क्षेत्र में एकत्रित होता है, जो ऑक्सिन की भूमिका को प्रकाशानुवर्तन में दर्शाता है।

वेण्ट ने इस रासायनिक पदार्थ को ऑक्सिन (auxin) नाम दिया। ऑक्सिन की सान्द्रती तने में वृद्धि को प्रेरित करती है और जड़ में वृद्धि का संदमन करती है। ऑक्सिन के असमान वितरण के फलस्वरूप ही प्रकाशानुवर्तन (phototropism) और गुरुत्वानुवर्तन (geotropism) गति होती है। केनेथ थीमान (Kenneth Thimann) ने ऑक्सिन को शुद्ध रूप में प्राप्त करके इसकी आण्विक संरचना ज्ञात की। ऑक्सिन के कार्यिकी प्रभाव एवं उपयोग
(i) प्रकाशानुवर्तन एवं गुरुत्वानुवर्तन (Phototropism and Geotropism) : ऑक्सिन की अधिक मात्रा तने के लिए वृद्धिवर्धक (promotional) तथा जड़ के लिए वृद्धिरोधक (inhibition) प्रभाव रखती है।
(ii) शीर्ष प्रभाविता (Apical dominance) : सामान्यतया पौधों के तने या शाखाओं के शीर्ष पर स्थित कलिका से स्रावित ऑक्सिन पाश्र्वीय कक्षस्थ कलिकाओं की वृद्धि का संदमन (inhibition) करते हैं। शीर्ष कलिका को काट देने से पाश्र्वीय कलिकाएँ शीघ्रता से वृद्धि करती हैं। चाय बागान में तथा चहारदीवारी के लिए प्रयोग की जाने वाली हैज को निरन्तर काटते रहने से झाड़ियाँ घनी होती हैं।
(iii) विलगन (Abscission) : परिपक्व पत्तियाँ, पुष्प और फल विलगन पर्त के बनने के कारण पौधे से पृथक् हो जाते हैं। ऑक्सिन; जैसे-IAA, IBA की विशेष सान्द्रता का छिड़काव करके अपरिपक्व फलों के विलगन को रोका जा सकता है। इससे फलों का उचित मूल्य प्राप्त होता है।
(iv) अनिषेकफलन (Parthenocarpy) : अनेक फलों में बिना परागण और निषेचन के भी फल को विकास हो जाता है; जैसे-अंगूर, केला, सन्तरा आदि में। ये फल बीजरहित होते हैं। ऑक्सिन का वर्तिकाग्र पर लेपन करने से बिना निषेचन के फल विकसित हो जाते हैं, इस प्रक्रिया को अनिषेकफलन कहते हैं। बीजरहित फलों में खाने योग्य पदार्थ की मात्रा अधिक होती है।
(v) खरपतवार निवारण (Weed destruction) : खेतों में प्रायः अनेक जंगली पौधे उग आते हैं, इन्हें खरपतवार कहते हैं। ये फसल के साथ प्रतिस्पर्धा करके पैदावार को प्रभावित करते हैं। परम्परागत तरीके से निराई-गुडाई, फसल चक्र अपनाकर खरपतवार नियन्त्रण किया जाता है। 2, 4-D नामक संश्लेषी ऑक्सिन का उपयोग करके एकबीजपत्री फसलों में उगने वाले द्विबीजपत्री खरपतवार को नष्ट किया जा सकता है।
(vi) कटे तनों पर जड़ विभेदन (Root differentiation on Stem cutting) : अनेक पौधों में कलम लगाकर नए पौधे तैयार किए जाते हैं। ऑक्सिनः जैसे-IBA का उपयोग कलम के निचले सिरे पर करने से जड़े शीघ्र निकल आती हैं। अतः ऑक्सिन का उपयोग मुख्यतया सजावटी पौधों को तैयार करने में किया जाता है।
(vii) प्रसुप्तती नियन्त्रण (Control of Dormancy) : आलू के कन्द तथा अन्य भूमिगत भोजन संचय करने वाले भागों की प्रसुप्त कलिकाओं के प्रस्फुटन को रोकने के लिए इन्हें कम ताप पर संगृहीत किया जाता है। ऑक्सिने का छिड़काव करके इन्हें सामान्य ताप पर संगृहीत किया जा सकता है। ऑक्सिन कलिकाओं के लिए वृद्धिरोधक का कार्य करते हैं।

2. जिबरेलिन धान की फसल में बैकेन (फूलिश सीडलिंग-foolish seedling) नामक रोग एक कवक जिबरेली फ्यूजीकुरोई (Gibberella fujikuroi) से होता है। इसमें पौधे अधिक लम्बे, पत्तियाँ पीली लम्बी और दाने छोटे होते हैं। कुरोसावा (Kurosawa, 1926) ने प्रमाणित किया कि यदि कवक द्वारा स्रावित रस को स्वस्थ पौधे पर छिड़का जाए तो स्वस्थ चौधा भी रोगी हो जाता है। याबुता और हयाशी (Yabuta and Hayashi, 1939) ने कवक के रस से वृद्धि नियामक पदार्थ को पृथक् किया, इसे जिबरेलिन-A (GA) नाम दिया गया। सबसे पहले खोजा गया जिबरेलिन-As है। अब तक लगभग 110 प्रकार के GA खोजे जा चुके हैं।
जिबरेलिन का पादप कार्यिकी पर प्रभाव एवं कृषि या बागवानी में महत्त्व
(i) लम्बाई बढ़ाने की क्षमता (Efficiency of increase the length) : जिबरेलिन के प्रयोग से आनुवंशिक रूप से बौने पौधे लम्बे हो जाते हैं, लेकिन यह लक्षण उन्हीं पौधों तक सीमित रहता है। जिन पर GA का छिड़काव किया जाता है। GA के उपयोग से सेब जैसे फल लम्बे हो जाते हैं। अंगुर के डंठल की लम्बाई बढ़ जाती है। गन्ने की खेती पर GA छिड़कने से तनों की लम्बाई बढ़ जाती है। इससे फसल का उत्पादन 20 टन प्रति एकड़ बढ़ जाता है।
(ii) पुष्पन पर प्रभाव (Effect of Flowering) : कुछ पौधों को पुष्पन हेतु कम ताप तथा दीर्घ प्रकाश अवधि (long photoperiod) की आवश्यकता होती है। यदि इन पौधों पर GA का छिड़काव किया जाए तो पुष्पन सुगमता से हो जाता है। द्विवर्षी पौधे एकवर्षी पौधों की तरह व्यवहार करने लगते हैं। GA के इस प्रभाव को बोल्टिग प्रभाव (Bolting effect) कहते हैं। इसका उपयोग चुकन्दर, गाजर, मूली, पत्तागोभी आदि के पुष्पन के लिए किया जाता है।
(iii) अनिषेकफलन (Parthenocarpy) : GA के छिड़काव से पुष्प से बिना निषेचन के फल बन जाता है। फल बीजरहित होते हैं।
(iv) जीर्णता या जरावस्था (Senescence) : GA फलों को जल्दी गिरने से रोकने में सहायक होते हैं।
(v) बीजों का अंकुरण (Seed Germination) : GA बीजों के अंकुरण को प्रेरित करते हैं।
(vi) पौधों की परिपक्वता (Maturity of Plants) : GA का छिड़काव करने से अनावृतबीजी पौधे शीघ्र परिपक्व होते हैं और बीज जल्दी तैयार हो जाता है।

3. सायटोकाइनिन सायटोकाइनिन ऑक्सिने की सहायता से कोशिका विभाजन को उद्दीपित करते हैं। एफ० स्कूग (E Skoog) तथा उसके सहयोगियों ने देखा कि तम्बाकू के तने के अन्तस्पर्व खण्ड से अविभेदित कोशिकाओं को समूह तभी बनता है, जब माध्यम में ऑक्सिन के अतिरिक्त सायटोकाइनिन नामक बढ़ावा देने वाला तत्त्व मिलाया गया। इसका नाम काइनेटिने रखा। लेथम तथा सहयोगियों ने मक्का के बीज से ऐसा ही पदार्थ प्राप्त करके इसका नाम जिएटिन (zeatin) रखा। काइनेटिन और जिएटिन सायटोकाइनिन ही हैं। सायटोकाइनिन का कार्यिकी प्रभाव एवं महत्त्व
1. ये पदार्थ कोशिका विभाजन को प्रेरित करते हैं।
2. ये जीर्णता (senescence) को रोकते हैं।
3. कोशिका विभाजन के अतिरिक्त सायटोकाइनिन पौधों के अंगों के निर्माण को नियन्त्रित करते हैं। यदि तम्बाकू की कोशिकाओं का संवर्धन शर्करा तथा खनिज लवणयुक्त माध्यम में किया जाए तो केवल कैलस (callus) ही विकसित होता है। यदि माध्यम में सायटोकाइनिन और ऑक्सिन का अनुपात बदलता रहे तो जड़ अथवा प्ररोह का विकास होता है। संवर्धन के प्रयोग आनुवंशिक इन्जीनियरी के लिए लाभदायक हैं; क्योंकि नई किस्म के पौधे उत्पन्न करने में कोशिका संवर्धन लाभदायक है।

4. ऐब्सीसिक अम्ल कार्ल्स एवं एडिकोट ने कपास के पौधे की पुष्पकलिकाओं से एक पदार्थ ऐब्सीसिन (abscisin) प्राप्त किया। इस पदार्थ को किसी पौधे पर छिड़कने से पत्तियों का विलगन हो जाता है। वेयरिंग (Wareing, 1963) ने एसर की पत्तियों से डॉरमिन (dormin) प्राप्त किया, यह बीजों के अंकुरण और कलिकाओं की वृद्धि का अवरोधन करता है। इन दोनों पदार्थों को ऐब्सीसिक अम्ल कहा गया। ऐब्सीसिक अम्ल का कार्यिकी प्रभाव एवं महत्त्व
(i) विलगने (Abscission) : यह पत्तियों के विलगन को प्रेरित करता है।
(ii) कलिकाओं की वृद्धि एवं बीजों का अंकुरण (Growth of buds and germination of seeds) : यह कलिकाओं की वृद्धि और बीजों के अंकुरण को रोकता है।
(iii) जीर्णता (Senescence) : यह जीर्णता को प्रेरित करता है।
(iv) वाष्पोत्सर्जन नियन्त्रण (Control of Transpiration) : यह रन्ध्रों को बन्द करके वाष्पोत्सर्जन की दर को कम करता है। इसका उपयोग कम जल वाली भूमि में खेती करने के लिए उपयुक्त है।
(v) कन्द निर्माण (TuberFormation) : आलू में कन्द निर्माण में सहायता करता है।
(vi) कोशिकाविभाजन एवं कोशिका दीर्धीकरण (Cell division and Cell Elongation) : ऐब्सीसिक अम्ल कोशिका विभाजन तथा कोशिका दीर्धीकरण को अवरुद्ध करता है। ऐब्सीसिक अम्ल बीजों को प्रसुप्ति के लिए प्रेरित करने और शुष्क परिस्थितियों में पौधे का बचाव करता है।

5. एथिलीन बर्ग (Burge, 1962) ने एथिलीन को पादप हॉर्मोन सिद्ध किया। यह मुख्यतः पकने वाले फलों से निकलने वाला गैसीय हॉर्मोन होता है। एथिलीन का कार्यिकी प्रभाव एवं महत्त्व
(i) पुष्पन (Flowering) : यह सामान्यतया पुष्पन को कम करता है, लेकिन अनन्नास में पुष्पन को प्रेरित करता है।
(ii) विलगने (Abscission) : यह पत्ती, पुष्प तथा फलों के विलगन को तीव्र करता है।
(iii) पुष्प परिवर्तन (Flower Modification) : कुकरबिटेसी कुल के पौधों में एथिलीन नर पुष्पों की संख्या को कम करके मादा पुष्पों की संख्या को बढ़ाता है।
(iv) फलों को पकना (Fruit Ripening) : यह फलों को पकाने में सहायक होता है। (आम, केला, अंगूर आदि फलों को पकाने के लिए इथेफोन (ethephon) का प्रयोग औद्योगिक स्तर पर किया जा रहा है। इससे पके फल प्राकृतिक रूप से पके फलों के समान होते हैं। इथेफोन से एथिलीन गैस निकलती है ।)
In simple words: Plant growth regulators are chemical substances that control various physiological processes in plants. Auxins promote growth and root formation; gibberellins stimulate stem elongation and flowering; cytokinins promote cell division; abscisic acid induces dormancy and abscission; and ethylene ripens fruits and causes senescence.

🎯 Exam Tip: For each plant hormone, remember its primary discovery, key physiological effects (e.g., cell elongation, dormancy, fruit ripening), and at least one practical application in agriculture or horticulture.

 

Question 5. दीप्तिकालिता तथा वसन्तीकरण क्या है? इनके महत्त्व का वर्णन कीजिए ।
Answer: दीप्तिकालिता पौधों के फलने-फूलने, वृद्धि, पुष्पन आदि पर प्रकाश की अवधि (photoperiod) का प्रभाव पड़ता है। पौधों द्वारा प्रकाश की अवधि तथा समय के प्रति अनुक्रिया को दीप्तिकालिता (photoperiodism) कहते हैं। (अथवा) दिन व रात के परिवर्तनों के प्रति कार्यात्मक अनुक्रियाएँ दीप्तिकालिता कहलाती है। दीप्तिकालिता. ‘ शब्द का प्रयोग गार्नर तथा एलार्ड (Garmer and Allard, 1920) ने किया।
(क) दीप्तिकालिता के आधार पर पौधों को मुख्य रूप से तीन समूहों में बाँट लेते हैं
1. अल्प प्रदीप्तकाली पौधा (Short day plant)
2. दीर्घ प्रदीप्तकाली पौधा (Long day plant)
3. तटस्थ प्रदीप्तकाली पौधा (Photo neutral plant)
अल्प प्रदीप्तकाली पौधों को मिलने वाली प्रकाश अवधि को कम करके और दीर्घ प्रदीप्तकाली पौधों को अतिरिक्त प्रकाश अवधि प्रदान करके पुष्पन शीघ्र कराया जा सकता है।
(ख) कायिक शीर्षस्थ या कक्षस्थ कलिका उपयुक्त प्रकाश अवधि प्राप्त होने पर ही पुष्प कलिका में रूपान्तरित होती है। यह परिवर्तन फ्लोरिजन (florigen) हॉर्मोन के कारण होता है जो दिन और रात्रि के अन्तराल के कारण संश्लेषित होता है। वसन्तीकरण कम ताप काल में पुष्पन को प्रोत्साहन वसन्तीकरणं कहलाता है। कुछ पौधों में पुष्पन गुणात्मक या मात्रात्मक तौर पर कम तापक्रम में अनावृत होने पर निर्भर करता है। इस गुण को वसन्तीकरण कहते हैं। वसन्तीकरण शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम टी०डी० लाइसेन्को (T.D. Lysenko, 1928) ने किया था। गेहूँ की शीत प्रजाति को वसन्त ऋतु में बोने योग्य बनाने के लिए इसके भीगे बीजों को 10-12 दिन तक 3°C ताप पर रखते हैं और फिर वसन्ती गेहूँ के साथ बोने से यह वसन्ती गेहूं के साथ ही पककर तैयार हो जाता है। पौधों में कायिक वृद्धि कम होती है। कम ताप उपचार से पौधे की कायिक अवधि कम हो जाती है। अनेक द्विवर्षी पौधों को कम तापक्रम में अनावृत कर दिए जाने से पौधों में दीप्तिकालिता के कारण पुष्पन की अनुक्रिया बढ़ जाती है। वसन्तीकरण के फलस्वरूप द्विवर्षी पौधों में प्रथम वृद्धिकाल में ही पुष्पन किया जा सकता है। पौधों में शीत के प्रति प्रतिरोध क्षमता बढ़ जाती है। वसन्तीकरण द्वारा पौधों को प्राकृतिक कुप्रभावों; जैसे-पाला, कुहरा आदि से बचाया जा सकता है।
In simple words: Photoperiodism is a plant's response to the duration of light and dark, influencing flowering and growth, categorizing plants as short-day, long-day, or day-neutral. Vernalization is the promotion of flowering by exposure to a period of cold temperatures, which can make biennial plants flower in one season and increase cold resistance.

🎯 Exam Tip: Clearly distinguish between photoperiodism and vernalization, explaining their mechanisms and importance for flowering, especially in agricultural practices. Remember the different plant classifications based on photoperiodic requirements.

 

Question 6. एब्सिसिक अम्ल को तनाव हार्मोन क्यों कहते हैं?
Answer: एब्सिसिक अम्ल का मुख्य कार्य प्रसुप्ति तथा विलगन का नियमन है। यह पादप वृद्धि निरोधक है। यह बीज के अंकुरण को रोकता है, रन्ध्र के बन्द होने को उत्तेजित करता है तथा विभिन्न प्रकार के तनावों को झेलने की क्षमता पौधों को देता है। अतः इसे तनाव हार्मोन कहते हैं।
In simple words: Abscisic acid (ABA) is called a stress hormone because it helps plants cope with adverse environmental conditions by promoting dormancy in seeds and buds, accelerating leaf and fruit shedding (abscission), and inducing stomatal closure to reduce water loss. These actions conserve resources and protect the plant during stress.

🎯 Exam Tip: Focus on the specific roles of ABA in plant stress responses, such as stomatal closure during drought and dormancy in unfavorable conditions, to explain why it's termed a "stress hormone."

 

Question 7. उच्च पादपों में वृद्धि एवं विभेदन खुला होता है, टिप्पणी करें?
Answer: पौधों में वृद्धि विशिष्ट प्रकार से होती है क्योंकि जीवनपर्यन्त उनमें वृद्धि की क्षमता होती है। ऐसा उनके विभज्योतक ऊतकों की स्थिति के कारण होता है। अतः इसे खुला' वृद्धि व विभेदन कहते हैं।
In simple words: In higher plants, growth and differentiation are considered "open" because plants retain the capacity for continuous growth throughout their lives due to the presence of meristematic tissues. These tissues allow for the formation of new cells and organs indefinitely, and cells can differentiate into various types as needed.

🎯 Exam Tip: When discussing "open growth," highlight the role of meristems (apical and lateral) in enabling indefinite growth and the plasticity of plant cells to differentiate into specialized tissues.

 

Question 8. अल्प प्रदीप्तकाली पौधे और दीर्घ प्रदीप्तकाली पौधे किसी एक स्थान पर साथ-साथ फूलते हैं। विस्तृत व्याख्या कीजिए।
Answer: अल्प प्रदीप्तकाली पौधों (short day plants) में निर्णायक दीप्तिकाल प्रकाश की वह अवधि है जिस पर या इससे कम प्रकाश अवधि पर पौधे पुष्प उत्पन्न करते हैं, परन्तु उससे अधिक प्रकाश अवधि में पौधा पुष्प उत्पन्न नहीं कर सकता। दीर्घ प्रदीप्तकाली पौधों (long day plants) में निर्णायक दीप्तिकाल प्रकाश की वह अवधि है। जिससे अधिक प्रकाश अवधि पर पौधे पुष्प उत्पन्न करते हैं, परन्तु उससे कम प्रकाश अवधि में पुष्प उत्पन्न नहीं होते। अतः अल्प प्रदीप्तकाली पौधों और दीर्घ प्रदीप्तकाली पौधों में विभेदन उनमें निर्णायक दीप्तिकाल से कम अवधि पर पुष्पन होना अथवा अधिक अवधि पर पुष्प उत्पन्न होने के आधार पर किया जाता है। दो जातियों के पौधे समान अवधि के प्रकाश में पुष्प उत्पन्न करते हैं, परन्तु उनमें से एक अल्प प्रदीप्तकाली पौधा तथा दूसरा दीर्घ प्रदीप्तकाली पौधा हो सकता है; जैसे-जैन्थियम (Xanthium) का निर्णायक दीप्तिकाल 15 1/2 घण्टे है और हाईओसायमस नाइजर (Hyoscyamus niger) को निर्णायक दीप्तिकाल 11 घण्टे है। दोनों पौधे 14 घण्टे की प्रकाशीय अवधि में पुष्प उत्पन्न कर सकते हैं। इस आधार पर जैन्थियम अल्प प्रदीप्तकाली पौधा है क्योंकि यह निर्णायक दीप्तिकाल से कम प्रकाशीय अवधि में पुष्पन करता है तथा हाइओसायमस नाइजर दीर्घ प्रदीप्तकाली पौधा है; क्योंकि यह निर्णायक दीप्तिकाल से अधिक प्रकाश अवधि में पुष्पन करता है।
In simple words: Short-day plants flower when day length is shorter than a critical period, while long-day plants flower when day length is longer. They can flower simultaneously in the same location if the actual day length falls within the flowering requirements of both, meaning it's shorter than the long-day critical period but longer than the short-day critical period, satisfying both conditions for flowering.

🎯 Exam Tip: To answer this, emphasize the concept of "critical photoperiod" for both short-day and long-day plants. Explain that the actual day length must satisfy the specific light-dark requirements of each plant type for co-flowering to occur.

 

Question 9. अगर आपको ऐसा करने को कहा जाए तो एक पादप वृद्धि नियामक का नाम दें
(क) किसी टहनी में जड़ पैदा करने हेतु
(ख) फल को जल्दी पकाने हेतु
(ग) पत्तियों की जरावस्था को रोकने हेतु
(घ) कक्षस्थ कलिकाओं में वृद्धि कराने हेतु
(ङ) एक रोजेट पौधे में 'बोल्ट' हेतु
(च) पत्तियों के रन्ध्र को तुरन्त बन्द करने हेतु
Answer:
(क) ऑक्सिन
(ख) एथिलीन
(ग) साइटोकाइनिन
(घ) ऑक्सिन, साइटोकाइनिन
(ङ) जिबरेलिन
(च) एब्सिसिक अम्ल
In simple words: This question asks to identify specific plant growth regulators for various plant responses. Auxin promotes rooting, ethylene ripens fruit, cytokinin delays aging, both auxin and cytokinin stimulate axillary bud growth, gibberellin causes bolting in rosette plants, and abscisic acid closes stomata.

🎯 Exam Tip: This question tests your knowledge of the specific functions and applications of different plant hormones. Memorize the primary roles of each hormone (Auxin, Gibberellin, Cytokinin, Abscisic Acid, Ethylene) for quick recall.

 

Question 10. क्या एक पर्णरहित पादप दीप्तिकालिता के चक्र से अनुक्रिया कर सकता है? हाँ या नहीं। क्यों?
Answer: प्रकाश अन्धकार काल का अनुभव पत्तियाँ करती हैं। इनमें बनने वाला फ्लोरिजन तना कलिका में पुष्पन प्रेरित करने के लिए तभी जाती हैं जब पौधे आवश्यक प्रेरित दीप्तिकाल में अनावृत होते हैं। ऐसा माना जाता है कि फ्लोरिजन (हार्मोन) पुष्पन के लिए उत्तरदायी है।
In simple words: No, a leafless plant cannot respond to a photoperiodic cycle because leaves are the primary organs that perceive light and synthesize the flowering hormone, florigen. Without leaves, the plant lacks the mechanism to sense photoperiod and initiate flowering.

🎯 Exam Tip: The key point here is that leaves are the photoreceptive organs for photoperiodism. Emphasize the role of florigen, a hypothetical hormone produced in leaves, which signals the shoot apex to flower.

 

Question 11. क्या हो सकता है अगर?
(क) जी एGAs) को धान के नवोभिदों पर डाला जाए।
(ख) विभाजित कोशिका विभेदन करना बन्द कर दें।
(ग) एक सड़ा फल कच्चे फलों के साथ मिला दिया जाए।
(घ) अगर आप संवर्धन माध्यम में साइटोकाइनिन डालना भूल जाएँ।
Answer:
(क) धान के पौधों की लम्बाई में वृद्धि होती है।
(ख) कोशिका विभेदन के रुक जाने से संरचनात्मक परिवर्तन आते हैं।
(ग) कच्चे फल तेजी से पक जाएँगे ।
(घ) यदि संवर्धन माध्यम में साइटोकाइनिन डालना भूल जाएँ तो कोशिका विभाजन, वृद्धि व विभेदन पर असर पड़ेगा। कोशिकाओं को जो केलस बनता है उनमें विभेदन न होने से कलिकाएँ नहीं बन सकती हैं।
In simple words: If gibberellins are applied to rice, plants grow taller. If dividing cells stop differentiating, structural abnormalities occur. A ripe fruit nearby will accelerate the ripening of raw fruits due to ethylene release. If cytokinin is omitted from culture media, cell division and differentiation are hampered, preventing bud formation from callus.

🎯 Exam Tip: For each scenario, link the event directly to the specific hormone or biological process involved. For example, GA to stem elongation, differentiation to structural integrity, ethylene to fruit ripening, and cytokinin to cell division/differentiation in tissue culture.

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. निम्नलिखित में से कौन-सी पादप-हॉर्मोन पत्तियों एवं फलों के विलगन (झड़ने) को रोकता है?
(क) जिबरेलिन
(ख) ऑक्सिन
(ग) साइटोकाइनिन
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ख) ऑक्सिन
In simple words: Auxin prevents the premature shedding of leaves and fruits from the plant.

🎯 Exam Tip: Remember that auxins generally prevent abscission, whereas abscisic acid (ABA) promotes it. This is a common point of confusion.

 

Question 2. लम्बे दिन वाले पौधों में कौन-सा रसायन पुष्पन को प्रेरित करता है ?
(क) IBA
(ख) IAA
(ग) GA3
(घ) NAA
Answer: (ग) GA3
In simple words: Gibberellin (GA3) is known to induce flowering in long-day plants, especially when light conditions are not optimal.

🎯 Exam Tip: Recognize GA3 (Gibberellin A3) as a key hormone for promoting flowering, particularly in long-day plants and for bolting in rosette plants.

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. रसायनानुवर्तन गति पर टिप्पणी लिखिए ।
Answer: पौधों द्वारा किसी रसायन के प्रति की जाने वाली गति रसायनानुवर्तन गति कहलाती है। उदाहरणार्थ-पौधों में ऑक्सिन, जिबरेलिन तथा साइटोकाइनिन रसायनों द्वारा वृद्धि होती है जबकि एथिलीन एवं एब्सिसिक अम्ल द्वारा वृद्धि रुक जाती है।
In simple words: Chemotropism is a plant's growth response towards or away from a chemical stimulus. For instance, plant growth hormones like auxins and gibberellins promote growth, while ethylene and abscisic acid inhibit it or cause specific responses.

🎯 Exam Tip: Provide clear examples of positive (e.g., pollen tube growth towards ovule chemicals) and negative chemotropism to illustrate the concept effectively.

 

Question 2. जीर्णावस्था किसे कहते हैं? जीर्णता को कौन-सा हॉर्मोन रोकता है?
Answer: काल के प्रभाव से पत्तियों के प्रोटीन्स विघटन एवं पर्णहरिम के नष्ट हो जाने से पत्तियाँ पीली हो जाती हैं और अंततः मर जाती हैं, जिसे जीर्णावस्था कहते हैं। साइटोकाइनिन हॉर्मोन पत्तियों की इस जीर्णता को रोकता है।
In simple words: Senescence is the natural aging process in plants, characterized by the breakdown of proteins and chlorophyll, leading to yellowing and eventual death of plant parts like leaves. Cytokinin is the hormone that delays or prevents this aging process.

🎯 Exam Tip: When defining senescence, mention the degradation of vital molecules (proteins, chlorophyll). For its prevention, remember cytokinin's role in maintaining metabolic activity and delaying aging.

 

Question 3. पादप हॉर्मोन की सहायता से बीज रहित फल उत्पन्न करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली क्रिया का नाम लिखिए।
Answer: ऑक्सिन्स का उपयोग करके बीज रहित फलों के निर्माण को अनिषेकफलन (parthenocarpy) कहते हैं।
In simple words: The process of producing seedless fruits using plant hormones like auxins without fertilization is called parthenocarpy.

🎯 Exam Tip: Recall that parthenocarpy is the development of fruit without fertilization, often induced by auxins, resulting in seedless fruits like bananas or grapes.

 

Question 4. 2, 4-D का पूरा नाम लिखिए तथा कृषि में इसके एक महत्त्व का उल्लेख कीजिए।
Answer: 2, 4-D का पूरा नाम 2, 4-डाइहाइड्रोफोनॉक्सी ऐसीटिक अम्ल है। इसका उपयोग खरपतवार नाशक के रूप में किया जाता है।
In simple words: 2,4-D stands for 2,4-Dichlorophenoxyacetic acid. Its main agricultural use is as a selective herbicide to control broadleaf weeds in monocot crops, as it acts as a synthetic auxin that disrupts weed growth.

🎯 Exam Tip: Remember 2,4-D primarily as a synthetic auxin used as a selective herbicide, effective against dicot weeds but generally safe for monocot crops like wheat or rice.

 

Question 5. फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए किस हॉर्मोन का प्रयोग किया जाता है?
Answer: एथिलीन गैस या इथेफोन का ।
In simple words: Ethylene gas, or its precursor ethephon, is commonly used to artificially ripen fruits because ethylene is the natural plant hormone responsible for fruit maturation.

🎯 Exam Tip: Identify ethylene as the gaseous plant hormone crucial for fruit ripening, both naturally and artificially.

 

Question 6. कोशिका विभाजन तथा कोशिकाद्रव्य विभाजन क्रियाओं का उद्दीपन करने वाले हॉर्मोन्स के नाम लिखिए ।
Answer: साइटोकाइनिन तथा ऑक्सिन्स।
In simple words: Cytokinins and auxins are the plant hormones that stimulate cell division and cytokinesis, often working together to regulate cell proliferation.

🎯 Exam Tip: Remember that both auxins and cytokinins are essential for cell division; their ratio often determines the type of growth (root or shoot development) in tissue culture.

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. प्रकाशानुवर्तन (phototropism) प्रक्रिया को उदाहरण देकर समझाइए। या प्रकाशानुवर्तन पर टिप्पणी लिखिए। या प्रकाशानुवर्तन क्या है? इस क्रिया का नियमन करने वाले हॉर्मोन्स का नाम लिखिए।
Answer: प्रकाशानुवर्तन
इस क्रिया में पौधों के विभिन्न भाग प्रकाश उद्दीपन द्वारा विभिन्न प्रकार की वक्रण गतियाँ प्रदर्शित करते हैं।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र प्रकाश के प्रभाव से ऑक्सिन के असमान वितरण को दर्शाता है। तने का शीर्ष (stem apex) प्रकाश की ओर अधिक ऑक्सिन प्राप्त करता है, जिससे वह प्रकाश की ओर मुड़ता है। वहीं, जड़ का शीर्ष (root tip) प्रकाश से दूर ऑक्सिन का संचय करता है, जिससे वह प्रकाश के विपरीत दिशा में मुड़ता है, यह दर्शाता है कि ऑक्सिन का वितरण तने में वृद्धि को बढ़ावा देता है और जड़ में उसे बाधित करता है।

प्रकाश के एकदिशीय उद्दीपन (unilateral stimulus) के कारण तने प्रकाश की ओर मुड़ जाते हैं। इसे धनात्मक प्रकाशानुवर्तन (positive phototropism) कहते हैं। जड़े प्रकाश के इस प्रकार के उद्दीपन के विपरीत वक्रण प्रदर्शित करती हैं। इसे ऋणात्मक प्रकाशानुवर्तन (negative phototropism) कहते हैं। पत्तियाँ उभय प्रकाशानुवर्तन (diaphototropism) तथा शाखाएँ प्रकाश के अन्य किसी कोण पर तिर्यक प्रकाशानुवर्तन (plagiophototropism) प्रदर्शित करती हैं। प्रकाशानुवर्तन का कारण कोलोडनी तथा वेण्ट (Cholodny and went) ने ऑक्सिन के असमान वितरण को पाया। अंधेरे के क्षेत्र की ओर अधिक ऑक्सिन एकत्रित हो जाने से तनों में उस ओर अधिक वृद्धि तथा जड़ों में वृद्धि का संदमन होने से तने प्रकाश की ओर, किन्तु जड़े प्रकाश के विपरीत वक्रण प्रदर्शित करती हैं। कुछ पौधे अथवा उनके अंग परिवर्द्धन के विभिन्न कालों में भिन्न-भिन्न व्यवहार प्रदर्शित करते हैं। मूंगफली (groundnut = Arachis hypoged) में अण्डाशय (ovary) के नीचे लगा वृन्त पहले धनात्मक किन्तु निषेचन (fertilization) के बाद ऋणात्मक प्रकाशानुवर्तन प्रदर्शित करता है।
एक सामान्य प्रयोग द्वारा प्रकाशानुवर्तन को निम्नवत् प्रदर्शित किया जा सकता है।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र प्रकाशानुवर्तन का प्रदर्शन करने के लिए एक प्रयोग को दर्शाता है। एक अंधेरे कक्ष (phototropic chamber) में एक छोटा सा छेद (opening for light) होता है जिससे प्रकाश अंदर आता है। एक गमले में लगे पौधे को इस कक्ष के अंदर रखने पर, पौधे की शाखाएँ प्रकाश के स्रोत (खिड़की) की ओर मुड़ जाती हैं, जो धनात्मक प्रकाशानुवर्तन को प्रदर्शित करता है।

लकड़ी का बना एक ऐसा बॉक्स लेते हैं जिसमें एक ओर प्रकाश के आने के लिए खिड़की बनी होती है। एक गमले में । लगा पौधा इस बॉक्स के अन्दर रख दिया जाता है। कुछ दिन बाद देखने पर पता चलता है कि पौधे की शाखायें खिड़की की ओर अर्थात् प्रकाश के स्रोत की ओर मुड़ जाती हैं। इससे सिद्ध होता है कि पौधे के वायवीय भाग विशेषकर तना धनात्मक प्रकाशानुवर्ती होते हैं।
In simple words: Phototropism is the directional growth of a plant organ in response to light. Stems typically show positive phototropism, growing towards light, while roots often show negative phototropism, growing away. This is regulated by auxins, which accumulate on the shaded side, causing cells there to elongate more, bending the plant towards light.

🎯 Exam Tip: Clearly explain that stems are positively phototropic (grow towards light) due to higher auxin concentration on the shaded side, promoting cell elongation there. Roots are negatively phototropic, where higher auxin inhibits elongation, causing them to bend away from light.

 

Question 2. गुरुत्वानुवर्तन पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: गुरुत्वानुवर्तन
गुरुत्वाकर्षण के उद्दीपन (stimulus) के प्रभाव से होने वाली वक्रण (curvature) गति गुरुत्वानुवर्ती गति (geotropic movement) कहलाती है। पौधों के वायवीय भाग विशेषकर तयों के शीर्ष ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती (negatively geotropic), किन्तु जड़े धनात्मक गुरुत्वानुवर्ती (positively geotropic) होती हैं।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र ऑक्सिन की मात्रा के आधार पर जड़ और तने में गुरुत्वानुवर्तन के प्रभाव को दर्शाता है। तने के शीर्ष में, ऑक्सिन की कम मात्रा वृद्धि को बढ़ावा देती है और तना गुरुत्वाकर्षण के विपरीत ऊपर की ओर बढ़ता है। जड़ के शीर्ष में, ऑक्सिन की अधिक मात्रा वृद्धि को बाधित करती है और जड़ गुरुत्वाकर्षण की दिशा में नीचे की ओर बढ़ती है, जिससे तना ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती और जड़ धनात्मक गुरुत्वानुवर्ती होती है।

गुरुत्वाकर्षण शक्ति (gravitational force)
के कारण क्षैतिज स्थिति में रखे हुए पौधे के तने व जड़ के शीर्षों (apices) में नीचे की ओर ऑक्सिन हॉर्मोन एकत्रित हो जाते हैं। तने के शीर्ष में नीचे की ओर एकत्रित ऑक्सिन की अधिक मात्रा के कारण तने के अग्रभाग के निचले क्षेत्र में अधिक वृद्धि होती है और यह ऊपर की ओर मुड़ जाता है। इसके विपरीत मूलाग्र के निचले भाग में एकत्रित ऑक्सिन की अधिक मात्रा वृद्धि को संदमित (supress) करती है, जबकि इस क्षेत्र के ऊपरी तल में ऑक्सिन की कम मात्रा वृद्धि को प्रोत्साहित करती है। अतः मूलाग्र नीचे की ओर वक्रता प्रदर्शित करता है।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र तीन चरणों में तने और जड़ में गुरुत्वानुवर्तन का प्रदर्शन करता है। चित्र (A) में, पौधा सीधा खड़ा है। चित्र (B) में, जब पौधे को क्षैतिज रूप से रखा जाता है, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण ऑक्सिन नीचे की ओर जमा हो जाता है। चित्र (C) में, तना ऊपर की ओर (ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन) और जड़ नीचे की ओर (धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन) मुड़ जाती है, क्योंकि ऑक्सिन का असमान वितरण तने की वृद्धि को बढ़ावा देता है और जड़ की वृद्धि को बाधित करता है।

गुरुत्वानुवर्तन का प्रदर्शन उपर्युक्ते प्रकार के वक्रण को एक सामान्य प्रयोग द्वारा समझाया जा सकता है। जब किसी गमले में लगे पौधे को भूमि के समान्तर रख देते हैं तो ऑक्सिन (auxin) हॉर्मोन के प्रभाव से तने में ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन (negative geotropism) तथा जड़ के निचले सिरे पर धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन (positive geotropism) होने लगता है। इसके कारण तना’ऊपर की ओर तथा जड़ नीचे की ओर वक्रण प्रदर्शित करती है।
In simple words: Geotropism (or gravitropism) is a plant's growth response to gravity. Stems exhibit negative geotropism, growing upwards against gravity, while roots show positive geotropism, growing downwards. This response is mediated by the redistribution of auxins; gravity causes auxins to accumulate on the lower side, which promotes stem growth but inhibits root growth.

🎯 Exam Tip: Explain that gravity causes auxin redistribution: in stems, higher auxin on the lower side promotes elongation (negative geotropism); in roots, higher auxin on the lower side inhibits elongation (positive geotropism).

 

Question 3. प्रकाशानुवर्तन तथा गुरुत्वानुवर्तन में अन्तर बताए।
Answer: प्रकाशानुवर्तन तथा गुरुत्वानुवर्तन में अन्तर

प्रकाशानुवर्तनगुरुत्वानुवर्तन
  • वृद्धि क्षेत्र पर एकतरफा प्रकाश के कारण उत्पन्न वक्रण है।
  • तना +ve प्रकाशानुवर्ती तथा जड़ -ve प्रकाशानुवर्ती होती है।
  • ऑक्सिन की सान्द्रता तने में वृद्धि की दर को प्रेरित करती है।
  • वृद्धि क्षेत्र पर गुरुत्वाकर्षण के एकतरफा उद्दीपन के कारण उत्पन्न वक्रण है।
  • जड़ +ve गुरुत्वानुवर्ती तथा तना -ve गुरुत्वानुवर्ती होता है।
  • ऑक्सिन की सान्द्रता जड़ों में वृद्धि की दर का संदमन करती है।

In simple words: Phototropism is growth in response to light, causing stems to grow towards light (positive) and roots away (negative), regulated by auxin's effect on cell elongation. Geotropism is growth in response to gravity, causing stems to grow up (negative) and roots down (positive), also regulated by auxin, which has opposite effects on stem and root growth at different concentrations.

🎯 Exam Tip: When comparing, highlight the stimulus (light vs. gravity), the direction of response in stems and roots, and the differential effects of auxin concentration in both tropisms.

 

Question 4. “स्पर्श से छुईमुई की पत्तियाँ सिकुड़ जाती हैं।” कारण स्पष्ट कीजिए। या कम्पानुकुंचनी गति पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: छुईमुई (Mimosa pudica) की पत्तियों के पत्रक स्पर्श या अन्य आघात के कारण बन्द हो जाते हैं। पत्तियों के आधार पर पर्णाधार में पायी जाने वाली मृदूतक कोशिकाओं के स्फीत होने पर पर्णक खुले रहते हैं, जबकि श्लथ दशा के कारण पर्णक बन्द हो जाते हैं। पर्णाधार के नीचे के आधे भाग की मृदूतक कोशिकाएँ श्लथ हो जाती हैं, क्योंकि उद्दीपन के कारण जल अन्तराकोशिकीय अवकाशों में चला जाता है और पर्णक बन्द हो जाते हैं। कोशिकाओं के स्फीत दशा में आ जाने से पत्ती सामान्य दशा में आ जाती है।
In simple words: The leaves of Mimosa pudica (touch-me-not plant) fold inward when touched due to a rapid change in turgor pressure within specialized cells called pulvini at the base of the leaves and leaflets. Upon touch, water quickly moves out of these cells, causing them to lose turgidity and leading to the drooping motion.

🎯 Exam Tip: Focus on the rapid loss of turgor pressure in the pulvini (motor organs) at the base of leaflets and petioles as the primary mechanism for the rapid folding movement in Mimosa pudica.

 

Question 5. प्रकाशानुवर्तन तथा प्रकाशानुकुंचन में अन्तर बताइए।
Answer: प्रकाशानुवर्तन तथा प्रकाशानुकुंचन में अन्तर

प्रकाशानुवर्तनप्रकाशानुकुंचन
  • प्रकाश के एकतरफा उद्दीपन के कारण तना प्रकाश की ओर तथा जड़े प्रकाश के विपरीत दिशा में मुड़ जाती है।
  • ऑक्सिन के असमान वितरण के फलस्वरूप प्रकाशानुवर्तन गति होती है। उद्दीपन तथा गति की दिशा में निश्चित सम्बन्ध होता है।
  • अनेक पौधों की पत्तियाँ तथा पुष्प दिन में खिले रहते हैं और रात को बन्द हो जाते हैं।
  • अनुकुंचन गतियों में उद्दीपन तथा गति की दिशा में निश्चित सम्बन्ध नहीं होता है। ये गतियाँ पार्श्व-सममित अंगों में होती हैं।

In simple words: Phototropism is a directional growth movement in response to a light source, causing permanent bending (e.g., stems towards light). Photonasty is a non-directional movement, often temporary and reversible, like the opening and closing of flowers or leaves in response to light intensity changes (e.g., flowers opening in daylight and closing at night).

🎯 Exam Tip: The key difference is directionality: phototropism is directional and involves growth, while photonasty is non-directional (a "nastic" movement) and often reversible, not involving growth in a specific direction relative to the stimulus.

 

Question 6. हॉर्मोन तथा एन्जाइम में अन्तर बताइए ।
Answer: हॉर्मोन तथा एन्जाइम में अन्तर

हॉर्मोनएन्जाइम
  • ये स्वभाव से प्रोटीन, अमीनो अम्ल या स्टेरॉयड्स के व्युत्पन्न होते हैं।
  • इनका अणुभार कम होता है।
  • ये अन्तःस्रावी ग्रन्थि से स्रावित होते हैं।
  • ये उपापचयी क्रियाओं में सीधे भाग नहीं लेते हैं।
  • ये रासायनिक क्रियाओं के बाद विघटित हो जाते हैं। इनका पुनः उपयोग नहीं हो सकता।
  • ये स्वभाव से प्रोटीन होते हैं।
  • इनका अणुभार बहुत अधिक होता है।
  • ये बहिःस्रावी ग्रन्थि से स्रावित होते हैं।
  • ये उपापचयी क्रियाओं को सीधे प्रभावित करते हैं।
  • ये रासायनिक क्रियाओं के बाद ज्यों के त्यों बचे रहते हैं और फिर से क्रिया में भाग ले सकते हैं।

In simple words: Hormones are chemical messengers that regulate various physiological processes, often acting far from their production site and can be proteins, steroids, or other molecules. Enzymes are biological catalysts, almost always proteins, that speed up specific biochemical reactions without being consumed in the process.

🎯 Exam Tip: Focus on their chemical nature (hormones varied, enzymes mostly proteins), function (regulation vs. catalysis), site of action (distant vs. specific reaction site), and reusability (enzymes reusable, hormones generally not). Also, mention whether they are secreted by endocrine (hormones) or exocrine (enzymes) glands or cells.

 

Question 3. प्रकाशानुवर्तन तथा गुरुत्वानुवर्तन में अन्तर बताए।


Answer:

प्रकाशानुवर्तन तथा गुरुत्वानुवर्तन में अन्तर

प्रकाशानुवर्तनगुरूत्वानुवर्तन
  • वृद्धि क्षेत्र पर एकतरफा प्रकाश के कारण उत्पन्न वक्रण है।
  • तना +ve प्रकाशानुवर्ती तथा जड़ -ve प्रकाशानुवर्ती होती है।
  • ऑक्सिन की सान्द्रता तने में वृद्धि की दर को प्रेरित करती है।
  • वृद्धि क्षेत्र पर गुरुत्वाकर्षण के एकतरफा उद्दीपन के कारण उत्पन्न वक्रण है।
  • जड़ +ve गुरुत्वानुवर्ती तथा तना -ve गुरुत्वानुवर्ती होता है।
  • ऑक्सिन की सान्द्रता जड़ों में वृद्धि की दर का संदमन करती है।
In simple words: प्रकाशानुवर्तन पौधों के अंगों का प्रकाश की ओर या उससे दूर मुड़ना है, जबकि गुरुत्वानुवर्तन गुरुत्वाकर्षण के प्रति प्रतिक्रिया में वृद्धि है। तना आमतौर पर प्रकाश की ओर बढ़ता है और जड़ गुरुत्वाकर्षण की ओर बढ़ती है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के तुलनात्मक प्रश्नों को तालिका प्रारूप में प्रस्तुत करने से अधिक अंक प्राप्त होते हैं, क्योंकि यह स्पष्टता और संक्षिप्तता दर्शाता है।

 

Question 4. “स्पर्श से छुईमुई की पत्तियाँ सिकुड़ जाती हैं।” कारण स्पष्ट कीजिए। या कम्पानुकुंचनी गति पर टिप्पणी लिखिए।


Answer: छुईमुई (Mimosa pudica) की पत्तियों के पत्रक स्पर्श या अन्य आघात के कारण बन्द हो जाते हैं। पत्तियों के आधार पर पर्णाधार में पायी जाने वाली मृदूतक कोशिकाओं के स्फीत होने पर पर्णक खुले रहते हैं, जबकि श्लथ दशा के कारण पर्णक बन्द हो जाते हैं। पर्णाधार के नीचे के आधे भाग की मृदूतक कोशिकाएँ श्लथ हो जाती हैं, क्योंकि उद्दीपन के कारण जल अन्तराकोशिकीय अवकाशों में चला जाता है और पर्णक बन्द हो जाते हैं। कोशिकाओं के स्फीत दशा में आ जाने से पत्ती सामान्य दशा में आ जाती है।In simple words: छुईमुई की पत्तियां स्पर्श करने पर सिकुड़ जाती हैं क्योंकि उनकी पत्तियों के आधार पर मौजूद विशेष कोशिकाएं (पल्वीनस) पानी खो देती हैं, जिससे पत्तियां मुड़ जाती हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में कम्पानुकुंचनी गति (seismonasty) के मूल यांत्रिक कारण (पानी के दबाव में बदलाव) पर ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. प्रकाशानुवर्तन तथा प्रकाशानुकुंचन में अन्तर बताइए।


Answer:

प्रकाशानुवर्तन तथा प्रकाशानुकुंचन में अन्तर

प्रकाशानुवर्तनप्रकाशानुकुंचन
  • प्रकाश के एकतरफा उद्दीपन के कारण तना प्रकाश की ओर तथा जड़ प्रकाश के विपरीत दिशा में मुड़ जाती है।
  • ऑक्सिन के असमान वितरण के फलस्वरूप प्रकाशानुवर्तन गति होती है। उद्दीपन तथा गति की दिशा में निश्चित सम्बन्ध होता है।
  • अनेक पौधों की पत्तियाँ तथा पुष्प दिन में खिले रहते हैं और रात को बन्द हो जाते हैं।
  • अनुकुंचन गतियों में उद्दीपन तथा गति की दिशा में निश्चित सम्बन्ध नहीं होता है। ये गतियाँ पार्श्व-सममित अंगों में होती हैं।
In simple words: प्रकाशानुवर्तन में पौधे का एक अंग प्रकाश की दिशा में बढ़ता या मुड़ता है, जबकि प्रकाशानुकुंचन में पौधे का एक अंग (जैसे फूल या पत्ती) प्रकाश की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर खुलता या बंद होता है, लेकिन किसी विशिष्ट दिशा में नहीं मुड़ता।

🎯 Exam Tip: प्रकाशानुवर्तन और प्रकाशानुकुंचन के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए उनके प्रेरक कारक और प्रतिक्रिया के प्रकार को उजागर करें।

 

Question 6. हॉर्मोन तथा एन्जाइम में अन्तर बताइए ।


Answer:

हॉर्मोन तथा एन्जाइम में अन्तर

हॉर्मोनएन्जाइम
  • ये स्वभाव से प्रोटीन, अमीनो अम्ल या स्टेरॉयड्स के व्युत्पन्न होते हैं।
  • इनका अणुभार कम होता है।
  • ये अन्तःस्रावी ग्रन्थि से स्रावित होते हैं।
  • ये उपापचयी क्रियाओं में सीधे भाग नहीं लेते हैं।
  • ये रासायनिक क्रियाओं के बाद विघटित हो जाते हैं। इनका पुनः उपयोग नहीं हो सकता।
  • ये स्वभाव से प्रोटीन होते हैं।
  • इनका अणुभार बहुत अधिक होता है।
  • ये बहिःस्रावी ग्रन्थि से स्रावित होते हैं।
  • ये उपापचयी क्रियाओं को सीधे प्रभावित करते हैं।
  • ये रासायनिक क्रियाओं के बाद ज्यों के त्यों बचे रहते हैं और फिर से क्रिया में भाग ले सकते हैं।
In simple words: हॉर्मोन रासायनिक संदेशवाहक होते हैं जो शरीर के कार्यों को नियंत्रित करते हैं और कम मात्रा में प्रभावी होते हैं, जबकि एन्जाइम प्रोटीन होते हैं जो रासायनिक प्रतिक्रियाओं को उत्प्रेरित करते हैं और प्रतिक्रिया के बाद अपरिवर्तित रहते हैं।

🎯 Exam Tip: हॉर्मोन और एन्जाइम के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझने के लिए उनकी रासायनिक प्रकृति, उत्पादन स्थान और क्रियाविधि पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 7. फाइटोक्रोम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।


Answer: फाइटोक्रोम फाइटोक्रोम एक प्रकाशग्राही वर्णक है। जैव रासायनिक दृष्टि से फाइटोक्रोम प्रोटीन है। फाइटोक्रोम अधिकतर पादपों में पाया जाता है। यह एक ऐसा वर्णक है, जिसका उपयोग पौधे प्रकाश को पहचानने के लिए करते हैं। यह प्रकाश के दृश्य स्पेक्ट्रम के लाल और अवरक्त प्रकाश के प्रति संवेदनशील है। कई पुष्पीय पौधे इसका उपयोग प्रकाशीय अवधि के आधार पर पुष्पन के समय का नियंत्रण हेतु करते हैं। यह अन्य प्रतिक्रियाओं; जैसे- बीज-अंकुरण, नवोभिद् की वृद्धि, आकार, आकृति, पत्तियों की संख्या, हरित लवकों का संश्लेषण आदि को भी नियंत्रित करते हैं। यह अधिकतर पौधों में पत्तियों पर पाया जाता है। फाइटोक्रोम में एक क्रोमोफोर, एक एकल बाइलिन अणु जिसमें, चार पाइरॉल रिंग की खुली श्रृंखला जो प्रोटीन से जुड़ी होती है, पाया जाता है। फाइटोक्रोम क्रोमोफोर साधारणतः फाइटोक्रोमोबिलिन होती है और फायकोसायनोबिलिन एवं बिलिरुबिन से सम्बन्धित होती है। फाइटोक्रोम वर्णक की खोज Sterling Hendricks एवं Harry Borthwick द्वारा की गयी थी। फाइटोक्रोम की पहचान Warren Butler एवं Harold Siegelman द्वारा 1959 में स्पेक्ट्रोफोटोमीटर की सहायता से की गयी थी। फाइटोक्रोम नाम Butler द्वारा दिया गया।In simple words: फाइटोक्रोम पौधों में पाया जाने वाला एक प्रकाश-संवेदनशील वर्णक है जो पौधों को प्रकाश की गुणवत्ता और अवधि को पहचानने में मदद करता है। यह बीज अंकुरण, पुष्पन और अन्य विकासात्मक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है।

🎯 Exam Tip: फाइटोक्रोम की रासायनिक प्रकृति (प्रोटीन वर्णक), प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता (लाल और अवरक्त), और पौधों में इसकी भूमिका (पुष्पन, अंकुरण नियंत्रण) को स्पष्ट रूप से बताएं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. बीज प्रसुप्तावस्था के कारणों का उल्लेख कीजिए।


Answer: प्रसुप्ति के कारणों को निम्नलिखित दो भागों में बाँटा गया है

A. प्रसुप्ति के बाह्य कारण (External Causes of Dormancy) :

कुछ पौधों के बीज शरद् ऋतु के अन्तिम भाग में परिपक्व होते हैं, उस समय उनके अंकुरण के लिए तापमान उच्च रहता है। अतः ये ताप कम होने तक प्रसुप्त (dormant) रहते हैं। ऑक्सीजन की अपर्याप्त उपलब्धि के कारण भी बीजों का अंकुरण रुक जाता है। कुछ बीज पकने पर तालाब में गिरते हैं और पेंदी में मृदा से आच्छादित हो जाते हैं जिससे उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। यहाँ पर बीज बहुत अधिक अवधि तक प्रसुप्त (dormant) रह सकते हैं और केवल सतह पर लाए जाने पर ही अंकुरित (germinate) होते हैं। कुछ जातियों के बीज; जैसे-सलाद (Lettuce), तम्बाकू की कुछ किस्में, मिसिल्टो (Viscum), आदि प्रकाश की अनुपस्थिति में अंकुरित नहीं होते और बहुत कम प्रकाश में रखने पर भी अंकुरित हो जाते हैं। ऐसे बीजों में दृश्य स्पेक्ट्रम (visible spectrum) का लाल (R 660 nm) क्षेत्र अंकुरण के लिए बहुत प्रभावी होता है तथा सुदूर लाल (Far red 730 nm) क्षेत्र, लाल प्रकाश के प्रभाव को समाप्त कर देता है। बीजों के अंकुरण पर लाल (red) तथा सुदूर लाल (far red) प्रकाश का प्रभाव, फाइटोक्रोम (phytochrome) नामक प्रोटीन वर्णक (pigment) के कारण होता है।

B. प्रसुप्ति के आन्तरिक कारण (Internal Causes of Dormancy) :

ये मुख्यतः निम्न हैं
1. बीजावरण की जल के लिए अपारगम्यता (Impermeability of Seed Coat to Water) : अनेक पौधों के बीजों में बीजावरण कठोर व जल के लिए अपारगम्य होता है, अतः बीज जल के सम्पर्क में रहने पर भी जल अवशोषित नहीं कर पाते और उनमें अंकुरण नहीं हो पाता। ऐसे बीज लम्बी अवधि तक भूमि में पड़े रहते हैं। प्राकृतिक अवस्था में मिट्टी के कणों के अपघर्षण (scarification) तथा जीवाणुओं व कवकों की क्रियाओं के फलस्वरूप बीजावरण धीरे-धीरे कमजोर होकर पारगम्य हो जाता है, इसके बाद ही बीज जल का अवशोषण करके अंकुरित होते हैं।
2. बीजावरण की ऑक्सीजन के लिए अपारगम्यता (Impermeability of Seed Coat to Oxygen) : कभी-कभी बीजों में प्रसुप्ति, बीजावरण के ऑक्सीजन के लिए अपारगम्य होने के कारण होती है जो कारक या पदार्थ बीजावरण को जल के लिए अपारगम्य बनाते हैं, वे ही धीरे-धीरे इसे ऑक्सीजन के लिए भी अपारगम्य बनाते हैं। जैन्थियम (Xanthium), अनेक घासों तथा कम्पोजिटी (Compositae) कुल के कुछ पौधों के बीजों में इसी प्रकार की प्रसुप्ति (dormancy) पाई जाती है।
3. यान्त्रिक रूप से प्रतिरोधी बीजावरण (Mechanically Resistant Seed Coat) : कुछ पौधों के बीजों में बीजावरण द्वारा जल व ऑक्सीजन तो ग्रहण कर ली जाती है, परन्तु बीजावरण इतना कठोर होता है कि भ्रूण (embryo) की पूरी वृद्धि नहीं हो पाती और उसका विकास केवल बीजावरण तक ही सीमित हो पाता है। बीजावरण न टूट पाने के कारण अंकुर रुक जाता है, जैसे-ऐलिस्मा प्लैंटेगो (Alisma plantqgo) के बीज में भ्रूण पानी के कारण फूल जाता है और अन्तः शोषण दाब (imbibition pressure) से बीजावरण को दबाता है; परन्तु उसे तोड़ नहीं पाता और अंकुरण रुक जाता है। इस प्रकार की प्रसुप्ति (dormancy) के कुछ अन्य उदाहरण-काली सरसों (Brassica nigra), लेपिडियम (Lepidium), ऐमारेन्थस, रेट्रोफ्लेक्सस (Amaranthus retroflexus), आदि है।
4. अपूर्ण परिवर्धित भ्रूण (Imperfectly Developed Embryo) : इस प्रकार की प्रसुप्ति (dormancy) में बीज के अन्दर भ्रूणीय विकास (embryonic development) क्रिया पूर्ण भी नहीं हो पाती कि वे मातृ पौधे से पृथक् हो जाते हैं। ऐसे बीजों में भ्रूणीय विकास की निषेचित अण्ड से लेकर, पूर्ण परिवर्धित भ्रूण के सभी श्रेणीकरण (gradation) पाए जाते हैं। कुछ बीजों में भ्रूणीय परिवर्धन शरद् अथवा शीत ऋतु में धीरे-धीरे होता है और बसंत ऋतु में अंकुरण के ठीक पूर्व तक पूर्ण हो जाता है, जैसे-ऐरीथ्रोनियम (Erythronium), रेननकुलस (Ranunculus) तथा इलेक्स (Ilex), आदि ।
5. भ्रूण की परिपक्वन के बाद शुष्क भण्डारण आवश्यकता (Embryo Requiring after Ripening in Dry Storage) : कुछ परिपक्व बीजों में भ्रूण (embryo) पूर्ण विकसित होते हैं परन्तु उन्हें अंकुरण से पूर्व कुछ समय तक शुष्क वातावरण में रखना आवश्यक हो जाता है, ऐसा न करने पर उनमें अंकुरण नहीं होता। इस प्रक्रिया में बीजों में अनेक ऐसे उपापचयी (metabolic) परिवर्तन होते हैं जो अंकुरण के लिए आवश्यक हैं। क्रेटीगस (Crategus) के बीजों में यह बाद का परिपक्वन प्रक्रम (after ripening process) एक से तीन महीनों में पूरा हो जाता है। इस प्रक्रिया में जैसे-जैसे बाद का पक्वन बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे भ्रूण (embryo) की अम्लीयता में वृद्धि होती जाती है। इससे जल का अवशोषण बढ़ता है और अंकुरण शीघ्र होता है।
6. अंकुरणरोधक पदार्थों की उपस्थिति (Presence of Germinating Inhibitors) : अनेक पौधों के भ्रूण, भ्रूणपोष, बीज, फल, आदि के ऊतकों में कुछ निरोधक या संदमक (inhibitors) पदार्थ, जैसे-ऐब्सिसिक अम्ल (abscisic acid), कौमेरिन (coumarin), फेरुलिक अम्ल (ferulic acid) तथा छोटी श्रृंखला वाले वसा अम्ल (fatty acid), आदि होते हैं। ये पदार्थ बीजों के अंकुरण को रोकते हैं।In simple words: बीज प्रसुप्तावस्था कई कारणों से होती है, जिनमें बाहरी कारक जैसे प्रतिकूल तापमान और ऑक्सीजन की कमी, तथा आंतरिक कारक जैसे कठोर बीजावरण जो पानी या ऑक्सीजन को अंदर नहीं आने देता, अपूर्ण भ्रूण विकास, और अंकुरण को रोकने वाले पदार्थों की उपस्थिति शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: बीज प्रसुप्तावस्था के कारणों को बाहरी और आंतरिक कारकों में वर्गीकृत करें और प्रत्येक श्रेणी के तहत विशिष्ट उदाहरणों के साथ स्पष्टीकरण प्रदान करें। यह एक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न है, अतः विस्तृत जानकारी देना महत्वपूर्ण है।

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