Get the most accurate UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 5 जनपदीय न्यायालय एवं लोक अदालत here. Updated for the 2026 27 academic session, these solutions are based on the latest UP Board textbooks for Class 10 Social Science. Our expert-created answers for Class 10 Social Science are available for free download in PDF format.
Detailed Chapter 5 जनपदीय न्यायालय एवं लोक अदालत UP Board Solutions for Class 10 Social Science
For Class 10 students, solving UP Board textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 10 Social Science solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 5 जनपदीय न्यायालय एवं लोक अदालत solutions will improve your exam performance.
Class 10 Social Science Chapter 5 जनपदीय न्यायालय एवं लोक अदालत UP Board Solutions PDF
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
Question 1. जिले के दीवानी न्यायालय का सविस्तार वर्णन कीजिए।
या
जिला स्तर की अदालतों के गठन पर प्रकाश डालिए और उनके किन्हीं दो कार्यों का उल्लेख कीजिए। [2010]
Answer: दीवानी या व्यवहार के मामलों को निपटाने के लिए जिले में ये निम्नलिखित न्यायालय होते हैं:
- जिला न्यायाधीश का न्यायालय: यह दीवानी मामलों का सबसे बड़ा न्यायालय होता है। जिला न्यायाधीश सभी प्रकार के दीवानी मामलों की शुरुआती सुनवाई करते हैं। वे पांच लाख रुपये तक के विवादों की अपील भी सुनते हैं। यह न्यायालय मुकदमों पर निर्णय भी देता है और निचली अदालतों के निर्णयों के खिलाफ अपीलें भी सुनता है। यह न्यायालय जिले के सभी दीवानी न्यायालयों पर नियंत्रण रखता है।
- सिविल जज का न्यायालय: सिविल जज दीवानी मामलों में जिला न्यायाधीश से नीचे का न्यायाधीश होता है। सिविल जज को एक लाख रुपये तक के विवादों की शुरुआती सुनवाई का अधिकार होता है। जरूरत पड़ने पर उच्च न्यायालय के निर्देश पर यह राशि पांच लाख रुपये तक बढ़ाई जा सकती है। सिविल जज मुन्सिफ के फैसलों के खिलाफ अपीलें भी सुनते हैं, जिन्हें जिला जज सुनवाई के लिए भेजते हैं। यह प्रणाली विवादों को सुलझाने में मदद करती है।
- मुन्सिफ का न्यायालय: यह सिविल जज से नीचे की अदालत होती है। इन अदालतों में आमतौर पर दस हजार रुपये तक के मामले सुने जाते हैं, और विशेष अधिकार मिलने पर 25,000 तक की संपत्ति से जुड़े मामले भी सुने जाते हैं। इनके फैसलों के खिलाफ जिला न्यायाधीश की अदालत में अपील की जा सकती है।
- खफीफा जज का न्यायालय: कुछ जगहों पर छोटे मामलों को जल्दी और कम खर्च में निपटाने के लिए खफीफा जज के न्यायालय होते हैं। यह मुन्सिफ के न्यायालय से नीचे होता है। इस न्यायालय में पांच हजार रुपये तक के धन वसूली के मामले और 25,000 तक के मकानों और दुकानों की बेदखली के विवादों की सुनवाई होती है। इनके निर्णयों के खिलाफ अपील नहीं होती है। जिला न्यायाधीश के न्यायालय में पुनर्विचार (Revision) हो सकता है। ये न्यायालय बड़े शहरों में छोटे मुकदमों को तेजी से निपटाने के लिए स्थापित किए गए हैं।
- न्याय पंचायत: दीवानी विवादों में सबसे निचले स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में न्याय पंचायतें काम करती हैं। इन्हें 500 रुपये तक के धन-विवादों को सुनने का अधिकार है। इनके निर्णयों के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती। इसमें एक वकील की जरूरत नहीं होती, जिससे ग्रामीण लोगों को सस्ता और निष्पक्ष न्याय मिल सके।
In simple words: जिले में अलग-अलग तरह के दीवानी न्यायालय होते हैं, जैसे जिला न्यायाधीश, सिविल जज, मुन्सिफ और खफीफा जज। ये सभी अलग-अलग तरह के पैसे और संपत्ति से जुड़े विवादों को सुनते हैं। न्याय पंचायतें गांवों में छोटे विवादों को सुलझाने में मदद करती हैं।
🎯 Exam Tip: दीवानी न्यायालयों के प्रकार और उनके अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट रूप से लिखें, साथ ही यह भी बताएं कि वे किस प्रकार के मामलों को सुलझाते हैं।
Question 2. जिले के राजस्व न्यायालय पर प्रकाश डालिए ।
Answer: राजस्व न्यायालय ज़मीन के लगान (मालगुजारी) से जुड़े मुकदमों की सुनवाई करते हैं। प्रदेश स्तर पर इनकी व्यवस्था उच्च न्यायालय के अधीन इस प्रकार है:
राजस्व परिषद् (Board of Revenue)
\( \downarrow \)
आयुक्त (Commissioner)
\( \downarrow \)
जिलाधिकारी (D.M.)
\( \downarrow \)
अपर जिलाधिकारी (A.D.M.)
\( \downarrow \)
उपजिलाधिकारी (Deputy Collector or S.D.M.)
\( \downarrow \)
तहसीलदार (Tahsildar)
\( \downarrow \)
नायब तहसीलदार (Nayab Tahsildar)
- राजस्व परिषद्: यह हर राज्य में मालगुजारी संबंधी मुकदमों को निपटाने के लिए उच्च न्यायालय के बाद सबसे बड़ा राजस्व न्यायालय होता है। यह राज्य स्तर पर सबसे बड़ी अदालत है, और इसके फैसलों के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है।
- आयुक्त: राज्य को प्रशासन की आसानी के लिए कई कमिश्नरियों (मंडलों) में बांटा गया है। हर कमिश्नरी का मुख्य अधिकारी कमिश्नर कहलाता है। कमिश्नर मालगुजारी से जुड़े मामलों में जिलाधीश के फैसलों के खिलाफ अपीलें सुनते हैं। कमिश्नर के फैसलों के खिलाफ अपीलें राजस्व परिषद् में सुनी जाती हैं।
- जिलाधिकारी: यह जिले का सबसे बड़ा अधिकारी होता है। जिलाधिकारी उपजिलाधिकारी (S.D.M.) और तहसीलदार के निर्णयों के खिलाफ अपीलें सुनते हैं। इनके नीचे अपर जिलाधिकारी काम करते हैं। जिलाधिकारी जिले को कई सब-डिवीजन में बांटते हैं। प्रत्येक सब-डिवीजन में एक उपजिलाधिकारी होता है, जो राजस्व के साथ-साथ अपने क्षेत्र में कानून और व्यवस्था बनाए रखता है।
- तहसीलदार: हर तहसील में एक तहसीलदार होता है। वह अपने क्षेत्र में राजस्व इकट्ठा करने का काम देखता है और इससे जुड़े विवादों की सुनवाई करता है। तहसीलदार की मदद के लिए नायब तहसीलदारों को नियुक्त किया जाता है, जो उनके कार्यों में सहयोग करते हैं।
In simple words: राजस्व न्यायालय जमीन के लगान के मामलों को निपटाते हैं। इनकी व्यवस्था एक क्रम में होती है, जिसमें राजस्व परिषद् सबसे ऊपर और नायब तहसीलदार सबसे नीचे होते हैं। हर स्तर पर अलग-अलग अधिकारी राजस्व से जुड़े विवादों को सुनते हैं।
🎯 Exam Tip: राजस्व न्यायालयों की पूरी पदक्रम संरचना (hierarchy) को सही क्रम में लिखना महत्वपूर्ण है, साथ ही हर अधिकारी के मुख्य कार्य भी बताएं।
Question 3. लोक अदालतं पर एक लेख लिखिए। [2013]
या
लोक अदालत की विशेषताओं का वर्णन कीजिए। [2015, 16, 18]
या
लोक अदालत का क्या अभिप्राय है ? इसके किन्हीं दो कार्यों का उल्लेख कीजिए । [2012]
या
लोक अदालत क्या है? लोक अदालतों की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। क्या इसके निर्णय के विरुद्ध अपील हो सकती है? [2010, 11]
या
लोक अदालतों की स्थापना क्यों की गई थी ? [2007]
या
लोक अदालत गठित करने का उद्देश्य क्या है ? इसकी प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए। [2015]
या
लोक अदालतों की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। [2015]
या
लोक अदालतों के गठन एवं उसकी कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालिए। [2016]
या
भारतीय न्याय-व्यवस्था में लोक अदालतों के महत्व का वर्णन कीजिए। [2015]
या
भारतीय न्याय-व्यवस्था में लोक अदालतों की भूमिका का परीक्षण कीजिए। [2015]
Answer: आजकल अदालतों में लाखों मुकदमे पड़े हैं, जिससे न्याय मिलने में बहुत समय और पैसा लगता है। इन समस्याओं को कम करने और न्याय प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए भारत सरकार ने लोक अदालतों की शुरुआत की। ये अदालतें देश के अलग-अलग हिस्सों में 'शिविर' (Camp) के रूप में लगाई जाती हैं। लोक अदालतें न्यायिक प्रणाली को सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लोक अदालतों की कुछ मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- इन अदालतों में मुकदमों का निपटारा दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौतों से किया जाता है। यह समझौता 'कोर्ट फाइल' में दर्ज हो जाता है।
- वादी और प्रतिवादी अपने वकील के बिना सीधे न्यायाधीश के सामने बातचीत कर सकते हैं।
- इन अदालतों में वैवाहिक झगड़े, किराए, बेदखली, वाहनों के चालान, बीमा आदि जैसे सामान्य मुकदमों पर समझौता कराया जाता है।
- इन अदालतों में सेवानिवृत्त जज, सरकारी अधिकारी और समाज के सम्मानित लोग परामर्शदाता के रूप में बैठते हैं।
- ये अदालतें किसी ऐसे व्यक्ति को रिहा नहीं कर सकतीं जिसे सरकार ने बंदी बनाया हो। ये केवल समझौता करा सकती हैं, जुर्माना लगा सकती हैं या चेतावनी देकर छोड़ सकती हैं।
- लोक अदालत को सिविल कोर्ट के बराबर ही माना जाता है। इसके द्वारा दिए गए फैसले अंतिम होते हैं, जिन्हें सभी पक्षों को मानना पड़ता है। इस फैसले के खिलाफ किसी भी अदालत में अपील नहीं की जा सकती।
भारत में पहली लोक अदालत 1982 में गुजरात में लगाई गई थी। दिसंबर 1999 तक देश में 40,000 से ज्यादा लोक अदालतें लगाई गईं, जिनमें 92 लाख से अधिक मामले निपटाए गए। इससे लोक अदालतों की लोकप्रियता बढ़ी। सरकार अब स्थायी लोक अदालतें बनाने की सोच रही है।
जनपदीय स्तर पर परिवार न्यायालय, उपभोक्ता संरक्षण न्यायालय और विशेष महिला अदालतें भी स्थापित की गई हैं। उत्तर प्रदेश में 2 अक्टूबर, 1986 को परिवार न्यायालय कानून लागू किया गया। ये न्यायालय पारिवारिक विवादों जैसे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार आदि को तेजी से सुलझाते हैं। विशेष महिला अदालतें महिलाओं से संबंधित विवादों की सुनवाई करती हैं, और उपभोक्ता संरक्षण न्यायालय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हैं।
In simple words: लोक अदालतें ऐसी अदालतें हैं जहाँ लोग अपने मुकदमों को जल्दी और सस्ते में सुलझा सकते हैं। इनमें वकील की जरूरत नहीं होती और फैसला आपसी सहमति से होता है। इनके फैसलों के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती। ये छोटे मामलों को सुलझाने के लिए बनाई गई हैं।
🎯 Exam Tip: लोक अदालतों के उद्देश्य, कार्यप्रणाली और लाभों को स्पष्ट रूप से समझाएं। बताएं कि इनके फैसलों के खिलाफ अपील क्यों नहीं की जा सकती।
Question 4. परिवार न्यायालय पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। [2011]
या
परिवार न्यायालय के पक्ष में अपने तर्क दीजिए। [2015, 17]
Answer: जनपदीय स्तर पर सरकार ने परिवार न्यायालयों की स्थापना की है। उत्तर प्रदेश में 2 अक्टूबर, 1986 को परिवार न्यायालय कानून लागू किया गया। अब तक उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों में दस परिवार न्यायालय काम कर रहे हैं। इन न्यायालयों का मुख्य उद्देश्य पारिवारिक विवादों (जैसे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और संपत्ति) को जल्दी सुलझाना है। इन न्यायालयों में मुकदमे आपसी समझौतों के आधार पर निपटाए जाते हैं, और दोनों पक्ष न्यायाधीश के सामने सीधे बातचीत करते हैं। आज भारत में ऐसे न्यायालयों की बहुत जरूरत है, क्योंकि सामान्य अदालतों में करोड़ों मुकदमे वर्षों से लंबित हैं। परिवार से जुड़े कई विवाद जो तुरंत सुलझाए जाने चाहिए, वे भी वर्षों से अटके पड़े हैं। यही कारण है कि हमारे देश में परिवार न्यायालय बहुत आवश्यक हैं। परिवार न्यायालयों की स्थापना से कानूनी प्रक्रियाएं सरल हो जाती हैं।
In simple words: परिवार न्यायालय ऐसे कोर्ट हैं जो शादी, तलाक और संपत्ति जैसे पारिवारिक झगड़ों को सुलझाते हैं। ये कोर्ट आपसी बातचीत से मामले निपटाते हैं और इनका मकसद जल्दी न्याय दिलाना है।
🎯 Exam Tip: परिवार न्यायालयों की आवश्यकता और उनके कामकाज के तरीके को बताएं, विशेष रूप से आपसी सहमति और विवादों के त्वरित निपटान पर जोर दें।
फौजदारी न्यायालय
Question 1. जिले के फौजदारी न्यायालय की रचना का वर्णन कीजिए।
Answer: फौजदारी न्यायालय अपराधों से संबंधित मुकदमों की सुनवाई करते हैं। इनकी रचना इस प्रकार है:
- सत्र (सेशन) न्यायालय: यह उच्च न्यायालय के अधीन फौजदारी का सबसे बड़ा न्यायालय होता है। इसके मुख्य न्यायाधीश को सत्र न्यायाधीश कहते हैं। सत्र न्यायालय को फौजदारी और दीवानी दोनों तरह के मुकदमों पर निर्णय देने का अधिकार है। जब यह फौजदारी मुकदमे सुनता है तो सेशन जज कहलाता है, और जब दीवानी मुकदमे सुनता है तो जिला जज कहलाता है। राज्यपाल उच्च न्यायालय की सहमति से सत्र न्यायाधीश की नियुक्ति करते हैं। इस पद पर न्यायिक सेवा के सदस्य या सात साल तक वकील रहे व्यक्ति को नियुक्त किया जा सकता है। न्यायिक पदों के लिए लोक सेवा आयोग खुली प्रतियोगिताएं आयोजित करता है। इन प्रतियोगिताओं में पास होने वाले लोग पहले मुन्सिफ बनते हैं और फिर अपनी योग्यता के आधार पर सत्र न्यायाधीश के पद तक पहुंचते हैं। सत्र न्यायाधीश को अपने अधीनस्थ मजिस्ट्रेटों द्वारा दिए गए निर्णयों के खिलाफ अपीलें सुनने का अधिकार है। ये न्यायालय मृत्यु-दण्ड भी दे सकते हैं, लेकिन मृत्यु-दण्ड पर उच्च न्यायालय की पुष्टि जरूरी होती है। यह जिले के अन्य न्यायाधीशों के कामों की देखरेख भी करते हैं। बड़े जिलों में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश और सहायक सत्र न्यायाधीश भी होते हैं।
In simple words: फौजदारी न्यायालय अपराध के मामलों को सुनते हैं। सत्र न्यायालय सबसे बड़ा फौजदारी न्यायालय है, जिसके न्यायाधीश को सत्र न्यायाधीश कहते हैं। ये मृत्यु-दण्ड तक दे सकते हैं, लेकिन उच्च न्यायालय की मंजूरी चाहिए।
🎯 Exam Tip: फौजदारी न्यायालय की संरचना, विशेषकर सत्र न्यायालय के अधिकार और न्यायाधीश की नियुक्ति प्रक्रिया को विस्तार से समझाएं।
Question 2. जिला न्यायालय पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। [2013]
Answer: जनपदीय (जिला) न्यायालय राज्य के उच्च न्यायालय के अधीन काम करते हैं। प्रत्येक जिले में निम्नलिखित प्रकार के न्यायालय होते हैं:
- दीवानी न्यायालय: ये विस्तृत उत्तरीय प्रश्न 1 में वर्णित हैं, जो संपत्ति और धन से जुड़े मामलों को देखते हैं।
- फौजदारी न्यायालय: ये लघु उत्तरीय प्रश्न 1 में वर्णित हैं, जो आपराधिक मामलों को सुनते हैं।
- न्याय पंचायत: फौजदारी क्षेत्र में सबसे निचले स्तर पर न्याय पंचायतें होती हैं। न्याय पंचायतें 250 रुपये तक का जुर्माना कर सकती हैं, लेकिन वे जेल की सजा नहीं दे सकतीं। 73वें संविधान संशोधन के बाद बनाए गए पंचायती राज अधिनियम में न्याय पंचायत की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
- राजस्व न्यायालय: वर्तमान में उच्च न्यायालय के अधीन राजस्व परिषद्, कमिश्नर, जिलाधीश, परगनाधिकारी (S.D.M.), तहसीलदार और नायब तहसीलदार की अदालतें होती हैं। इन अदालतों में लगान, मालगुजारी आदि के मुकदमों की सुनवाई की जाती है।
- अन्य न्यायालय: ऊपर बताए गए न्यायालयों के अलावा कुछ विशेष मुकदमों का फैसला विशेष न्यायालयों में होता है। जैसे, आयकर संबंधी मुकदमों का फैसला आयकर अधिकारी ही कर सकता है। उसके निर्णय के विरुद्ध आयकर आयुक्त और आयकर अधिकरण (Income Tax Tribunal) में अपील की जा सकती है।
In simple words: जिला न्यायालय में दीवानी (पैसे-जमीन के विवाद), फौजदारी (अपराध), राजस्व (लगान) और अन्य विशेष मामले निपटाए जाते हैं। न्याय पंचायतें गांवों में छोटे फौजदारी मामले देखती हैं।
🎯 Exam Tip: जिला न्यायालय के विभिन्न प्रकारों को स्पष्ट करें और उनके मुख्य कार्यक्षेत्र का उल्लेख करें।
Question 3. लोक अदालतें क्यों महत्त्वपूर्ण हैं ? दो कारण बताइए। [2013]
या
लोक अदालतों की स्थापना के दो कारण बताइट । [2016]
Answer: भारत की वर्तमान न्याय-व्यवस्था में न्याय मिलने में बहुत समय लगता है और ज्यादा पैसा खर्च होता है। देश के सभी न्यायालयों में लाखों मुकदमे लंबित पड़े हैं। इस समस्या को सुलझाने और जल्दी न्याय दिलाने के लिए लोक अदालतें बहुत जरूरी हैं। ये अदालतें देश के कई हिस्सों में शिविरों के रूप में लगाई जाती हैं। इनकी महत्ता के दो मुख्य कारण ये हैं:
- न्यायिक व्यवस्था को सरल बनाना: न्यायिक प्रक्रिया को आसान और सुविधाजनक बनाने की जरूरत है। लोक अदालतों में वकील करने की जरूरत नहीं होती, जिससे लोगों का खर्च कम होता है।
- मुकदमों का तुरंत निपटारा: मुकदमों पर फैसला उसी दिन हो जाता है जिस दिन अदालत लगाई जाती है। इन फैसलों में आमतौर पर आर्थिक दंड या समझौता होता है, जिससे समय की बचत होती है।
In simple words: लोक अदालतें महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये न्याय को सरल बनाती हैं, वकील के खर्च से बचाती हैं, और मुकदमों को तेजी से निपटाती हैं। ये लंबित मामलों को कम करने में मदद करती हैं।
🎯 Exam Tip: लोक अदालतों के महत्व को संक्षेप में बताएं, विशेषकर समय और धन की बचत तथा त्वरित न्याय पर ध्यान केंद्रित करें।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. जिले का सबसे बड़ा न्यायालय कौन-सा है ?
Answer: जिले का सबसे बड़ा न्यायालय जनपद न्यायालय है।
In simple words: जिले का सबसे बड़ा न्यायालय जनपद न्यायालय होता है।
🎯 Exam Tip: सीधे प्रश्न का सीधा और सटीक उत्तर दें।
Question 2. न्याय पंचायत कितने रुपये तक का विवाद सुन सकती है ?
Answer: न्याय पंचायत 500 रुपये तक के धन-विवाद को सुन सकती है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे विवादों को सुलझाने में मदद करती है।
In simple words: न्याय पंचायत 500 रुपये तक के पैसे के झगड़े सुन सकती है।
🎯 Exam Tip: राशि को सही ढंग से याद रखें।
Question 3. सिविल जज (जूनियर डिवीजन) कितने रुपये तक का विवाद सुन सकता है ?
Answer: सिविल जज एक लाख रुपये मूल्य तक के मुकदमे सुन सकता है। आवश्यकता पड़ने पर यह सीमा बढ़ भी सकती है।
In simple words: सिविल जज एक लाख रुपये तक के विवादों पर सुनवाई कर सकता है।
🎯 Exam Tip: सिविल जज के अधिकार क्षेत्र में आने वाली राशि को सही बताएं।
Question 4. भारतीय जनता को सरल तथा सुविधाजनक न्याय प्रदान करने के लिए किस अदालत की स्थापना की गयी है ? [2009]
Answer: भारतीय जनता को सरल तथा सुविधाजनक न्याय प्रदान करने के लिए लोक अदालत की स्थापना की गयी है। लोक अदालतें जल्दी और कम खर्च में न्याय देती हैं।
In simple words: लोगों को आसान और सुविधाजनक न्याय देने के लिए लोक अदालतों की स्थापना की गई है।
🎯 Exam Tip: लोक अदालतों के मुख्य उद्देश्य पर ध्यान दें।
Question 5. लोक अदालत का एक लाभ एवं एक हानि लिखिए। [2009]
Answer:
लाभ: इन अदालतों में मुकदमों का निपटारा आपसी समझौते से होता है। वकीलों की जरूरत नहीं होती, जिससे खर्च बचता है और सुनवाई जल्दी पूरी हो जाती है। यह न्याय प्रक्रिया को सरल बनाता है।
हानि: इन अदालतों द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ किसी और अदालत में याचिका दायर नहीं की जा सकती। इससे एक बार फैसला होने के बाद बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं रहती।
In simple words: लोक अदालत का लाभ है कि यह जल्दी और सस्ते में न्याय देती है, पर इसकी हानि यह है कि इसके फैसले के खिलाफ कहीं अपील नहीं कर सकते।
🎯 Exam Tip: लोक अदालत के लाभ और हानि दोनों को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 6. जिले में राजस्व न्यायालय के रूप में सर्वोच्च अधिकारी कौन होता है ? उसके निर्णय के विरुद्ध अपील कहाँ की जा सकती है? [2010]
Answer: जिले में राजस्व न्यायालय का प्रमुख जिलाधिकारी होता है। वह जमीन, लगान आदि से संबंधित मुकदमों की सुनवाई करता है। उसके निर्णय के विरुद्ध आयकर आयुक्त और आयकर (अधिकरण) ट्रिब्यूनल में अपील की जा सकती है। यह राजस्व के मामलों में सर्वोच्च निर्णय प्रदान करता है।
In simple words: जिले में सबसे बड़ा राजस्व अधिकारी जिलाधिकारी होता है। उसके फैसले के खिलाफ आयकर आयुक्त या ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: राजस्व न्यायालय के सर्वोच्च अधिकारी और अपील के अगले चरण को सही से बताएं।
बहुविकल्पीय
Question 1. जिले का सबसे बड़ा दीवानी न्यायालय कौन-सा है?
(क) जिला जज का न्यायालय
(ख) सिविल जज का न्यायालय
(ग) मुन्सिफ का न्यायालय
(घ) न्याय पंचायत
Answer: (क) जिला जज का न्यायालय
In simple words: जिला जज का न्यायालय जिले में दीवानी मामलों के लिए सबसे बड़ा न्यायालय होता है।
🎯 Exam Tip: दीवानी न्यायालयों के पदानुक्रम को याद रखें।
Question 2. जिले का सबसे बड़ा फौजदारी न्यायालय है
(क) सेशन जज का न्यायालय
(ख) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
(ग) मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ।
(घ) न्याय पंचायत
Answer: (क) सेशन जज का न्यायालय
In simple words: जिले में फौजदारी मामलों के लिए सेशन जज का न्यायालय सबसे बड़ा है।
🎯 Exam Tip: फौजदारी न्यायालयों के पदानुक्रम को समझें।
Question 3. उत्तर प्रदेश में परिवार न्यायालय लागू किया गया
(क) 2 अक्टूबर, 1986 ई० को
(ख) 1988 ई० को
(ग) 1999 ई० को
(घ) 5 जनवरी, 2006 ई० को
Answer: (क) 2 अक्टूबर, 1986 ई० को
In simple words: उत्तर प्रदेश में परिवार न्यायालय 2 अक्टूबर 1986 को शुरू हुआ था।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण तिथियों को याद रखना परीक्षा में मदद करता है।
Question 4. जनपद न्यायालय का सर्वोच्च न्यायिक अधिकारी कौन होता है?
(क) जिला न्यायाधीश
(ख) जिलाधिकारी
(ग) सिविल जज
(घ) मुन्सिफ मजिस्ट्रेट
Answer: (क) जिला न्यायाधीश
In simple words: जनपद न्यायालय का सबसे ऊंचा न्यायिक अधिकारी जिला न्यायाधीश होता है।
🎯 Exam Tip: जिले के न्यायिक पदानुक्रम में सर्वोच्च पद को पहचानें।
Question 5. लोक अदालतों के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा तथ्य सही नहीं है?
(क) निर्णय आपसी सहमति के आधार पर होते हैं।
(ख) इसमें वकील मुदकमें की पैरवी कर सकते हैं।
(ग) इसमें निर्णय शीघ्र होते हैं।
(घ) ये अदालतें जन-कल्याण हेतु कार्य करती हैं।
Answer: (ख) इसमें वकील मुदकमें की पैरवी कर सकते हैं।
In simple words: लोक अदालतों में वकील मुकदमे की पैरवी नहीं करते, बल्कि लोग खुद न्यायाधीश के सामने बात करते हैं।
🎯 Exam Tip: लोक अदालतों की प्रमुख विशेषताओं को याद रखें, खासकर वकीलों की भूमिका के संबंध में।
Question 6. दिल्ली में पहली लोक अदालत किस वर्ष गठित की गई थी?
(क) 1985
(ख) 1986
(ग) 1985
(घ) 1988
Answer: (ख) 1986
In simple words: दिल्ली में पहली लोक अदालत 1986 में बनाई गई थी।
🎯 Exam Tip: लोक अदालतों की शुरुआत से जुड़ी महत्वपूर्ण तिथियों को याद रखें।
Free study material for Social Science
UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 5 जनपदीय न्यायालय एवं लोक अदालत
Students can now access the UP Board Solutions for Chapter 5 जनपदीय न्यायालय एवं लोक अदालत prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 10 Social Science textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest UP Board syllabus.
Detailed Explanations for Chapter 5 जनपदीय न्यायालय एवं लोक अदालत
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 10 Social Science chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 10 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these UP Board Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Social Science Class 10 Solved Papers
Using our Social Science solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 10 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 5 जनपदीय न्यायालय एवं लोक अदालत to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 5 जनपदीय न्यायालय एवं लोक अदालत is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 10 Social Science are as per latest UP Board curriculum.
Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 5 जनपदीय न्यायालय एवं लोक अदालत as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Social Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 5 जनपदीय न्यायालय एवं लोक अदालत will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 10 Social Science. You can access UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 5 जनपदीय न्यायालय एवं लोक अदालत in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 5 जनपदीय न्यायालय एवं लोक अदालत in printable PDF format for offline study on any device.