UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 14 Viksit Desh ke Roop mein Ubharta Bharat

Get the most accurate UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 14 उभरते भारत में विकसित देश के रूप here. Updated for the 2026 27 academic session, these solutions are based on the latest UP Board textbooks for Class 10 Social Science. Our expert-created answers for Class 10 Social Science are available for free download in PDF format.

Detailed Chapter 14 उभरते भारत में विकसित देश के रूप UP Board Solutions for Class 10 Social Science

For Class 10 students, solving UP Board textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 10 Social Science solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 14 उभरते भारत में विकसित देश के रूप solutions will improve your exam performance.

Class 10 Social Science Chapter 14 उभरते भारत में विकसित देश के रूप UP Board Solutions PDF

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. विकास के क्षेत्र में भारत की बदलती स्थिति पर निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत व्याख्या कीजिए [2015] (क) कृषि, (ख) उद्योग-धन्धे, (ग) जनसंख्या या भारत में औद्योगिक उत्पादन की वर्तमान स्थिति क्या है ? या कृषि में खाद्यान्न उत्पादन की बदलती स्थिति का वर्णन कीजिए। या भारत में शिक्षा के बदलते स्वरूप का वर्णन कीजिए । या भारत में प्रौढ़ शिक्षा की व्यापकता का संक्षेप में वर्णन कीजिए। या भारत शिक्षा कोष के विषय में आप क्या जानते हैं ? या विकसित देश के रूप में उभरते हुए भारत की कृषि के क्षेत्र में किन्हीं तीन उपलब्धियों का उल्लेख कीजिए। [2016]
Answer: स्वतंत्रता से पहले, भारत एक बहुत पिछड़ा हुआ देश था। आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक हर क्षेत्र में यह पीछे था। अंग्रेजों की नीतियों के कारण, हमारे पुराने छोटे उद्योग लगभग खत्म हो गए थे और हमें छोटी-छोटी चीजों के लिए भी दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था। आजादी के बाद भारत ने अपने प्राकृतिक साधनों का उपयोग करके आर्थिक विकास की ओर तेजी से बढ़ना शुरू किया। अब भारत पहले जैसा नहीं रहा है; यह अन्य विकासशील देशों की तुलना में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जीवन के कई क्षेत्रों में भारत ने बड़े बदलाव देखे हैं, और यह प्रक्रिया लगातार जारी है। इसी वजह से, भारत अब उन्नत देशों की सूची में गिना जाने लगा है और जल्द ही यह विकसित देशों की कतार में शामिल हो जाएगा। **कृषि में खाद्यान्न उत्पादन की बदलती स्थिति:** कुछ दशक पहले भारत प्रमुख खाद्यान्न आयात करने वाला देश था, लेकिन अब यह प्रमुख निर्यातक देशों में से एक बन गया है। यह खासकर चावल और गेहूं के निर्यात में मिली सफलता के कारण है। भारत ने नवंबर 2000 में चावल का और अप्रैल 2001 में गेहूं का निर्यात शुरू किया। सिर्फ तीन सालों में ही चावल निर्यात में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर आ गया और गेहूं निर्यात में आठवें स्थान पर पहुंच गया। इन तीन सालों में भारत ने 30 देशों को गेहूं और 54 देशों को चावल बेचा है। कॉमर्स मिनिस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, 2002-03 में भारत ने Rs. 1,700.18 करोड़ का 35.70 लाख टन गेहूं निर्यात किया, जबकि 2001-02 में यह Rs. 1,330.21 करोड़ का था। इस तरह गेहूं के निर्यात में एक साल में लगभग Rs. 370 करोड़ की वृद्धि हुई। इसी तरह, 2002-03 में बासमती चावल का निर्यात Rs. 1,729.54 करोड़ और अन्य प्रकार के चावल का निर्यात Rs. 3,634.08 करोड़ था, जबकि 2001-02 में अन्य चावल का निर्यात Rs. 1,331.37 करोड़ था। इससे पता चलता है कि 2002-03 में चावल के निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी हुई। दोनों प्रकार के चावलों के निर्यात में एक साल में करीब Rs. 4,000 करोड़ की वृद्धि हुई। 1965 में 1.03 करोड़ टन खाद्यान्न आयात किया जाता था, जो 1983-84 में सिर्फ 24 लाख टन रह गया। 2000-01 तक तो खाद्यान्न आयात की जरूरत ही नहीं पड़ी, और देश निर्यात करने की स्थिति में आ गया। यह भारतीय कृषि में आए बड़े बदलावों को दिखाता है। **उद्योग-धन्धे में औद्योगिक उत्पादन की वर्तमान स्थिति:** योजनाओं के समय से ही भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा काफी बढ़ा है। 1950-51 में GDP में औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा 13.3% था, जो रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार 2002-03 में बढ़कर 21.8% हो गया। विश्व भर में आई मंदी के बावजूद, वित्तीय वर्ष 2002-03 में भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर 5.8% रही, जबकि पिछले साल यह 2.7% थी। उद्योगों के प्रकार के हिसाब से 2002-03 में पूंजीगत उत्पादों में 10.4% की वृद्धि हुई। आधारभूत वस्तुओं का उत्पादन 4.8%, मध्यवर्ती उत्पादों का 3.8% और उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन 6.4% बढ़ा। छह मुख्य उद्योगों (बिजली, कोयला, इस्पात, कच्चा पेट्रोलियम, पेट्रोलियम रिफायनरी उत्पाद और सीमेंट) में 2002-03 में वृद्धि दर क्रमशः 3.1%, 4.3%, 8.7%, 3.3%, 4.9% और 8.8% रही। इन छह उद्योगों की कुल वृद्धि दर 2002-03 में 5.2% थी। यह आंकड़े भारतीय उद्योगों में आ रहे बदलाव को बताते हैं। **जनसंख्या:** भारत का क्षेत्रफल दुनिया का लगभग 2.4% है, लेकिन यहां दुनिया की 17.5% आबादी रहती है। जनसंख्या के मामले में भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरे नंबर पर है। भारत में जनसंख्या से जुड़ी जानकारी हर दस साल में होने वाली जनगणना से मिलती है। भारत में पहली सही जनगणना 1881 में हुई, तब भारत की जनसंख्या 23.7 करोड़ थी, जो 1991 में बढ़कर 84.63 करोड़ हो गई। 11 मई 2000 को भारत की जनसंख्या 100 करोड़ और मई 2011 की जनगणना के अनुसार, यह 1,210,193,422 थी। भारत में अब जनसंख्या वृद्धि एक बड़ी समस्या बन गई है, जिसे विद्वान 'जनसंख्या विस्फोट' कहते हैं। 2011 की आधिकारिक जनगणना के अनुसार, भारत की कुल जनसंख्या 121.02 करोड़ थी। इसमें ग्रामीण जनसंख्या लगभग 83.3 करोड़ (68.84%) और शहरी जनसंख्या 37.7 करोड़ (31.16%) थी। पुरुषों की संख्या 62.37 करोड़ (51.54%) और महिलाओं की संख्या 58.64 करोड़ (48.46%) थी। भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात 940:1000 है। सबसे ज्यादा स्त्री-पुरुष अनुपात केरल में 1034:1000 और सबसे कम बिहार में 877:1000 था। पिछले दस सालों (2001-2011) में जनसंख्या में कुल 17.64% की वृद्धि हुई। 2001-2011 की जनगणना में शहरी और ग्रामीण जनसंख्या वृद्धि दर क्रमशः 31.80% और 12.18% थी। ग्रामीण जनसंख्या वृद्धि दर बिहार में सबसे ज्यादा (23.90%) थी। हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण जनसंख्या का अनुपात सबसे ज्यादा (89.6%) था, जबकि शहरी जनसंख्या का अनुपात दिल्ली में सबसे ज्यादा (97.50%) था। भारत में सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश है और सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य सिक्किम है। **शिक्षा:** लोकतंत्र की सफलता और समाज व देश के विकास के लिए शिक्षा बहुत जरूरी है। यह सिर्फ व्यक्ति की काम करने की क्षमता नहीं बढ़ाती, बल्कि देश में कमाए गए धन का बराबर बंटवारा भी तय करती है। **शिक्षा पर बढ़ता व्यय:** शिक्षा मानव-पूंजी में निवेश का एक महत्वपूर्ण तरीका है। पहली पंचवर्षीय योजना से ही शिक्षा पर खर्च लगातार बढ़ाया गया है। दसवीं पंचवर्षीय योजना में शिक्षा को बहुत महत्व दिया गया और इसके लिए Rs. 43,825 करोड़ का बजट रखा गया, जबकि नौवीं योजना में यह बजट Rs. 24,908 करोड़ था। इस तरह इसमें 76% की बढ़ोतरी हुई। भारत शिक्षा कोष एक पंजीकृत संस्था है, जिसे शिक्षा के क्षेत्र के लिए सभी से समर्थन पाने और अतिरिक्त बजट जुटाने के लिए बनाया गया है। **भारत शिक्षा कोष:** इसकी स्थापना व्यक्तियों, केंद्र और राज्य सरकारों, अनिवासी भारतीयों और भारतीय मूल के लोगों से शिक्षा की अलग-अलग परियोजनाओं के लिए दान या चंदा इकट्ठा करने के लिए की गई है। **शिक्षा : एक मौलिक अधिकार:** संसद के दोनों सदनों ने 93वां संविधान संशोधन विधेयक पास किया है। इसके तहत 6 से 14 साल के सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया है। यह सभी के लिए शिक्षा के लक्ष्य को पूरा करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। **साक्षरता-दर में वृद्धि:** पिछले कुछ दशकों में साक्षरता दर में काफी सुधार हुआ है। कुल साक्षरता दर जो 1951 में 18.33% थी, वह 1991 में बढ़कर 52.21%, 2001 में 65.4% और 2011 में 74.04% हो गई। 2001 की जनगणना के अनुसार, पुरुषों की साक्षरता दर 75.85% और महिलाओं की 54.16% थी। पिछले दशक में महिला साक्षरता दर में पुरुषों की तुलना में 14.87% (11.72% के मुकाबले) की ज्यादा वृद्धि हुई, जिससे पुरुष-महिला साक्षरता दर का अंतर 1991 के 24.84% से घटकर 2001 में 21.7% हो गया। यह एक अच्छा संकेत है जो भारत के विकास की ओर इशारा करता है। 2000-01 में 6 से 14 साल के बच्चों की लगभग 193 मिलियन आबादी में से 81% बच्चे स्कूल जा रहे थे। 2011 की जनगणना के अनुसार, पुरुषों की साक्षरता दर 82.14% और महिलाओं की 65.46% थी। पिछले दशक में महिला साक्षरता दर में और भी ज्यादा वृद्धि हुई है। **तकनीकी तथा व्यावसायिक शिक्षा:** देश में तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा ने अच्छी मानव-शक्ति तैयार की है, जिसने आर्थिक और तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस तरह की शिक्षा से देश के विकास को गति मिलती है। वर्तमान में डिग्री स्तर के 1,200 से ज्यादा और डिप्लोमा स्तर के भी 1,200 मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। इनमें भारतीय IITs का विश्व में एक उच्च स्थान है। इसके अलावा, 1,000 से ज्यादा संस्थान मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (MCA) के कोर्स कराते हैं। MBA कोर्स कराने वाले 930 मान्यता प्राप्त मैनेजमेंट संस्थान भी हैं। **शैक्षिक कार्यक्रम:** भारत में साक्षरता दर बढ़ाने के लिए कई शैक्षिक कार्यक्रम चलाए गए हैं, जैसे अनौपचारिक शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, राष्ट्रीय साक्षरता मिशन, जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम, अल्पसंख्यकों को शिक्षा और सर्व शिक्षा अभियान। संसद ने 2002 में एक संविधान अधिनियम पास किया है, जिसमें 6 से 14 साल के बच्चों के लिए प्राथमिक शिक्षा को एक मूल अधिकार बनाया गया है। 'सर्व शिक्षा अभियान' योजना इसे लागू करने के लिए विकसित की गई है, जो नवंबर 2002 से शुरू हुई। इस अभियान के कुछ मुख्य लक्ष्य हैं: (1) 6 से 14 साल तक के सभी बच्चों को स्कूल/शिक्षा गारंटी योजना केंद्र/ब्रिज कोर्स में भेजना। (2) 2007 तक सभी बच्चों की 5 साल की प्राथमिक शिक्षा और 2010 तक 8 साल की स्कूली शिक्षा पूरी करना। (3) जीवन के लिए शिक्षा पर जोर देते हुए प्राथमिक शिक्षा देना। (4) 2007 तक प्राथमिक स्तर पर सभी लड़के-लड़कियों और सामाजिक वर्ग के अंतर को खत्म करना, और 2010 तक प्राथमिक शिक्षा स्तर पर इसे खत्म करना। (5) 2010 तक पढ़ाई बीच में छोड़ने वालों की संख्या को शून्य करना। **प्रौढ़ शिक्षा:** देश के 600 जिलों में से 587 जिलों को अब प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रमों में शामिल कर लिया गया है। इस समय 174 जिलों में पूरा साक्षरता अभियान, 212 जिलों में साक्षरता के बाद के कार्यक्रम और 201 जिलों में लगातार शिक्षा कार्यक्रम चल रहे हैं। यह स्थिति भारतीय शिक्षा के बदलते स्वरूप को अच्छी तरह से दिखाती है।In simple words: स्वतंत्रता के बाद भारत ने कृषि, उद्योग, जनसंख्या और शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों में बहुत बदलाव देखे हैं। देश अब विकासशील से विकसित देशों की ओर तेजी से बढ़ रहा है, आत्मनिर्भर बन रहा है और लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है।

🎯 Exam Tip: ऐसे विस्तृत उत्तरीय प्रश्नों में, हर शीर्षक के तहत मुख्य बदलावों और आंकड़ों को संक्षेप में बताएं। शुरुआत में एक सामान्य परिचय दें और अंत में निष्कर्ष जरूर लिखें।

 

Question 2. भारत के कपड़ा उद्योग तथा लौह-इस्पात उद्योग का वर्णन कीजिए। या भारत में कपड़ा उद्योग की बदलती स्थिति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। [2009] या भारत में बढ़ते हुए उद्योगों की स्थिति पर निम्नलिखित शीर्षकों पर निबन्ध लिखिए (क) वस्त्रोद्योग, (ख) लोहा एवं इस्पात उद्योग, (ग) पेट्रोलियम उद्योग, (घ) रसायन उद्योग ।
Answer: **कपड़ा उद्योग/वस्त्रोद्योग:** भारत का कपड़ा उद्योग सबसे बड़ा, व्यवस्थित और फैला हुआ उद्योग है। यह देश के कुल औद्योगिक उत्पादन का 14%, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 2.4%, कुल बने हुए औद्योगिक उत्पादन का 20% और कुल निर्यात का 23% देता है। भारत चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ इस क्षेत्र में प्रतियोगिता करता है। पंचवर्षीय योजनाओं से इस उद्योग को बहुत लाभ हुआ। इससे न केवल उद्योग का अच्छा विकास हुआ, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बनाने में सफल रहा। 1993 में सरकार ने 'कपड़ा आदेश' के जरिए इस उद्योग को लाइसेंस-मुक्त कर दिया। 31 मार्च 1999 तक देश में 1,824 सूत/कृत्रिम धागे की मिलें थीं, जिनमें से ज्यादातर महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात में थीं। भारत का वस्त्रोद्योग मुख्य रूप से सूत पर आधारित रहा है और देश में कपड़े की खपत का 58% सूत से जुड़ा है। अब भारत का वस्त्र उद्योग जूट और सूती कपड़ों के अलावा कृत्रिम रेशों से भी काफी कपड़े बनाता है और सिले-सिलाए कपड़े विदेशों में निर्यात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत के सिले कपड़ों की बहुत मांग है, जिससे हमें Rs. 51 हजार करोड़ से ज्यादा विदेशी मुद्रा मिलती है। **लोहा एवं इस्पात उद्योग:** आज भारत दुनिया का नौवां सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश है। इस उद्योग में Rs. 90,000 करोड़ का निवेश है और पांच लाख से ज्यादा लोगों को सीधे रोजगार मिलता है। बड़े पैमाने पर इस्पात का उत्पादन 1907 में जमशेदपुर में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO) की स्थापना के साथ शुरू हुआ था। 1974 में सरकार ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) की स्थापना की। दूसरी पंचवर्षीय योजना में सार्वजनिक क्षेत्र की भिलाई (छत्तीसगढ़), दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) और राउरकेला (ओडिशा) में 10-10 लाख टन इस्पात बनाने की क्षमता वाली परियोजनाएं सोवियत संघ, ग्रेट ब्रिटेन और जर्मनी के सहयोग से स्थापित की गईं। तीसरी पंचवर्षीय योजना में सोवियत संघ के सहयोग से बोकारो (बिहार) में एक और इस्पात कारखाने की स्थापना हुई। पिछले कुछ सालों में इस्पात उद्योग का उत्पादन संतोषजनक रहा है। 2002-03 में इस्पात की खपत 29.01 मिलियन टन थी, जबकि 2001-02 में यह 27.35 मिलियन टन थी। 2001-02 में तैयार इस्पात का निर्यात 1.27 मिलियन टन था, जो 2002-03 में बढ़कर 1.5 मिलियन टन हो गया। लोहे और इस्पात से बनी सभी चीजों के आयात और निर्यात पर अब पूरी छूट है। 2001-02 में परिष्कृत इस्पात का निर्यात 2.98 मिलियन टन था, जो 2002-03 में बढ़कर 4.2 मिलियन टन हो गया। यह स्थिति लोहे और इस्पात उद्योग में भारत की बदलती हुई स्थिति को दिखाती है। **पेट्रोलियम उद्योग:** पेट्रोलियम के मामले में भारत की स्थिति अब पहले से बेहतर हुई है। दूसरी पंचवर्षीय योजना तक देश में सिर्फ डिगबोई (असम) के आसपास तेल निकलता था। अब देश के कई हिस्सों से तेल निकाला जाने लगा है। भारत के तेल-क्षेत्र असम, त्रिपुरा, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, मुंबई, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, केरल के तटीय प्रदेशों और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में स्थित हैं। देश में कुल 13 करोड़ टन तेल का अनुमानित भंडार है। 1950-51 में देश में कच्चे तेल का उत्पादन सिर्फ 2.5 लाख टन था, जो 2002-03 में बढ़कर 33.05 मिलियन टन हो गया। खाद्यान्न और दूध उत्पादन में आत्मनिर्भरता के बाद, सरकार अब खनिज तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए कृष्ण क्रांति (Black Revolution) की योजना बना रही है। इसमें एथेनॉल का उत्पादन बढ़ाकर पेट्रोल में इसका 10% तक मिश्रण बढ़ाना और बायो-डीजल का उत्पादन करना शामिल है। यह पेट्रोलियम उद्योग में भारत की बदलती हुई स्थिति को दिखाता है। फरवरी 2003 में, देश में कच्चे तेल के दो बड़े भंडार अलग-अलग कंपनियों ने खोजे थे। ये भंडार बाड़मेर (राजस्थान) जिले में और मुंबई के तटवर्ती क्षेत्र में मिले थे। कृष्णा-गोदावरी बेसिन में प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार की खोज के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने भी सफलता पाई है। प्राकृतिक गैस का एक और भंडार मध्य प्रदेश के शहडोल में, कोलबेड मीथेन के सुहागपुर पश्चिम और सुहागपुर पूर्व अन्वेषण खंड में खोजा गया है। **रसायन उद्योग:** रसायन उद्योग में मुख्य रसायन और इसके उत्पाद, पेट्रोकेमिकल्स, फर्टिलाइजर्स, पेंट और वार्निश, गैस, साबुन, इत्र, सौंदर्य प्रसाधन और फार्मास्युटिकल्स शामिल हैं। रसायन 5 के उत्पादन का उपयोग कई उद्योगों में होता है। इसलिए इस उद्योग का व्यापारिक महत्व बहुत ज्यादा है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में भी काफी योगदान देता है। देश की GDP में इसका योगदान 3 प्रतिशत है। 11वीं योजना में पेट्रो रसायन और रसायनों की वृद्धि 12.6 प्रतिशत और 8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO) के अनुसार, भारतीय रसायन उद्योग दुनिया में 6वें और एशिया में तीसरे स्थान पर है। 2010 में रसायन उद्योग का आकार 108.4 बिलियन डॉलर था। रसायन उद्योग भारत के सबसे पुराने उद्योगों में से एक है, जो देश के औद्योगिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह उद्योग विज्ञान पर आधारित है और कपड़े, कागज, पेंट, वार्निश, चमड़ा आदि जैसे विभिन्न उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण रसायन उपलब्ध कराता है, जिनकी जरूरत जीवन के हर क्षेत्र में होती है। भारतीय रसायन उद्योग भारत के औद्योगिक और कृषि विकास की रीढ़ है और आगे के उद्योगों के लिए घटक प्रदान करता है। भारतीय रसायन उद्योग में छोटे और बड़े दोनों स्तर की इकाइयां शामिल हैं। 1980 के दशक के मध्य में छोटे क्षेत्र को दी गई वित्तीय रियायतों ने बड़ी संख्या में इकाइयों को स्थापित करने पर जोर दिया। वर्तमान में, भारतीय रसायन उद्योग धीरे-धीरे ग्राहक-केंद्रित होता जा रहा है। भारत को कच्चे माल की प्रचुरता का लाभ है, जिसे वैश्विक प्रतियोगिता का सामना करने और निर्यात में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए तकनीकी सेवाओं और व्यावसायिक क्षमताओं का विकास करना होगा। भारतीय अर्थव्यवस्था 1990 के दशक की शुरुआत तक एक संरक्षित अर्थव्यवस्था थी। रसायन उद्योग द्वारा बौद्धिक संपदा बनाने के लिए बड़े पैमाने पर रिसर्च और डेवलपमेंट पर बहुत कम काम हुआ था। इसलिए उद्योग को अंतरराष्ट्रीय रसायन उद्योग की प्रतियोगिता का सफलतापूर्वक सामना करने के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट में बड़ा निवेश करना होगा। विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों के साथ, देश की ताकत दूसरे उच्च स्तरीय प्रशिक्षित वैज्ञानिक जनशक्ति पर निर्भर करती है। भारत बड़ी संख्या में उत्कृष्ट और विशेषीकृत रसायनों का भी उत्पादन करता है, जिनका खाद्य संयोजक, चमड़ा रंगाई, बहुलक संयोजक, रबड़ उद्योग में प्रति-उपयामक आदि में व्यापक उपयोग होता है। रसायन क्षेत्र में, 100 प्रतिशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति है। रासायनिक उत्पादों, साथ ही कार्बनिक/अकार्बनिक रंग-सामग्री और कीटनाशक के ज्यादातर निर्माता लाइसेंस-मुक्त हैं। उद्यमियों को औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग के नियमों के अनुसार काम करना होता है, बशर्ते स्थानीयता का दृष्टिकोण लागू न हो। केवल निम्नलिखित वस्तुएं ही अपनी खतरनाक प्रकृति के कारण आवश्यक लाइसेंसिंग सूची में शामिल हैं: हाइड्रोरासायनिक अम्ल और इसके डेरिवेटिव, फॉस्जीन और इसके डेरिवेटिव, और हाइड्रोकार्बन के आइसोसाइनेट्स और डायआइसोसाइनेट्स।In simple words: भारत में कपड़ा, लोहा-इस्पात, पेट्रोलियम और रसायन जैसे बड़े उद्योगों में आजादी के बाद बहुत बदलाव आए हैं। इन उद्योगों ने देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और देश को आत्मनिर्भर बनाने में मदद की है।

🎯 Exam Tip: औद्योगिक विकास के प्रश्नों में, हर उद्योग का उत्पादन, निर्यात, विकास की दर और सरकार की नीतियों जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें। प्रमुख कंपनियों के नाम भी बताएं।

 

Question 3. भारत में परिवहन एवं दूरसंचार के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालिए। या राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम के घटकों का उल्लेख कीजिए । या इलेक्ट्रॉनिक मेल पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: **परिवहन:** देश के लगातार विकास के लिए एक अच्छी और व्यवस्थित परिवहन प्रणाली बहुत जरूरी है। वर्तमान प्रणाली में यातायात के कई साधन हैं, जैसे-रेल, सड़क, तटीय नौ-संचालन, वायु-परिवहन आदि। पिछले कुछ सालों में इस क्षेत्र में अच्छा विकास हुआ है, विस्तार भी हुआ है और इसकी क्षमता भी बढ़ी है, जिसका विवरण नीचे दिया गया है: **रेल:** देश में माल ढोने और यात्रियों को लाने-ले जाने का मुख्य साधन रेल है। आज देश भर में रेलवे का एक बड़ा जाल फैला हुआ है। रेलमार्ग की कुल लंबाई 63,140 किमी है। 31 मार्च 2002 तक भारतीय रेलवे के पास 7,739 इंजन, 39,236 यात्री डिब्बे और 2,16,717 माल डिब्बे थे। 31 मार्च 2011 तक भारतीय रेलवे के पास 9,213 इंजन, 53,220 यात्री गाड़ियां और 6,493 अन्य सवारी गाड़ियां और 2,19,381 रेल के डिब्बे थे। वर्तमान में लगभग 25% रेलमार्ग और 36% कुल रेल पटरी का विद्युतीकरण हो चुका है। भारतीय रेलवे एशिया की सबसे बड़ी और दुनिया की चौथे नंबर की रेलवे व्यवस्था है। 1950-51 में रेल-यात्रियों की संख्या लगभग 13 करोड़ थी, जो 2005-06 में बढ़कर 512 करोड़ हो गई। भारतीय रेलवे देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी देता है। **सड़क:** भारत का सड़क नेटवर्क दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है। भारत के सड़क यातायात में हर साल 10% की वृद्धि हो रही है। भारत में लगभग 33 लाख किलोमीटर लंबा सड़क नेटवर्क है। 1950-51 में यह नेटवर्क सिर्फ 4 लाख किलोमीटर था, जो अब 8 गुना से भी ज्यादा बढ़ गया है। नौवीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002) के तहत देश में सड़क नेटवर्क के समन्वित और संतुलित विकास पर जोर दिया गया था। इस दौरान सरकार ने व्यापक राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम (NHDP) भी शुरू किया, जिसमें अच्छी प्रगति हुई। दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002-07) के दौरान सड़कों के विकास को देश की पूरी परिवहन-प्रणाली का एक अहम हिस्सा माना गया। इसमें तीन काम करने वाले समूहों को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया था – प्राथमिक प्रणाली (राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेस मार्ग), अनुषंगी प्रणाली (राजमार्ग और प्रमुख जिला सड़कें) और ग्रामीण सड़कें। दसवीं पंचवर्षीय योजना में केंद्र सरकार के सड़क कार्यक्रम के लिए Rs. 59,490 करोड़ का बजट रखा गया था। राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम के दो मुख्य हिस्से हैं: 1. **स्वर्ण चतुर्भुज योजना:** चार बड़े शहरों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ी यह योजना कुल 5,846 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों को शामिल करती है। 2. **उत्तर-दक्षिण मार्ग (कॉरिडोर):** इसमें श्रीनगर को कन्याकुमारी से जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग और सिलचर को पोरबंदर से जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल है, जिसमें कोच्चि-सलेम स्पर मार्ग भी है। इन राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 7,300 किलोमीटर है। राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम के तहत 4/6 लेन का निर्माण करके राजमार्गों की क्षमता बढ़ाई गई है। इसके अलावा, सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहन चलाने की गुणवत्ता में सुधार के लिए कार्यक्रम शुरू किए हैं। इनके बनने से भारत के बड़े शहरों के बीच समय और दूरी बहुत कम हो जाएगी। **दूरसंचार:** दूरसंचार क्षेत्र में भारत की बदलती स्थिति बहुत अच्छी और संतोषजनक है। दूरसंचार नेटवर्क के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल हो गया है। नए टेलीफोन कनेक्शनों में काफी वृद्धि हुई है और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय लंबी दूरी के टेलीफोन टैरिफ में भारी गिरावट आई है, साथ ही सेल्युलर-से-सेल्युलर कॉल पर राष्ट्रीय लंबी दूरी के टैरिफ में भी कमी आई है। दूरसंचार क्षेत्र में निजी कंपनियों के आने और उनकी जोरदार मार्केटिंग नीतियों के कारण देश में टेलीफोन सेवा का तेजी से विकास हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2006 के अंत तक देश में टेलीफोन उपभोक्ताओं की कुल संख्या लगभग 20 करोड़ थी। ऐसा माना जाता है कि अब भारत में हर छठे व्यक्ति के पास एक फोन है। देश के 20 करोड़ टेलीफोन उपभोक्ताओं में से 15 करोड़ उपभोक्ता मोबाइल फोन के हैं। रिलायंस इन्फो, टाटा इंडिकॉम, एयरटेल, BSNL, आइडिया, वोडाफोन जैसी कंपनियां देश को मोबाइल फोन सेवाएं देने में एक-दूसरे से आगे निकल रही हैं। भारत जैसे विकासशील देश में दूरदर्शन प्रसारण का विशेष महत्व है। भारत की राष्ट्रीय प्रसारण सेवा दुनिया के सबसे बड़े स्थानीय प्रसारण संगठनों में से एक है। देश में आज स्थलीय और उपग्रह, दोनों तरह की प्रसारण सेवाएं मौजूद हैं। दूरदर्शन का पहला प्रसारण 15 सितंबर 1959 को हुआ था। 1975 तक दूरदर्शन सिर्फ कुछ शहरों तक ही सीमित था। आज देश के लगभग 8.2 करोड़ परिवारों में टेलीविजन है। इनमें से 51% परिवार उपग्रहों से प्रसारित कार्यक्रम देखते हैं। संख्या के हिसाब से राष्ट्रीय चैनल के दर्शक केबल दर्शकों से कहीं ज्यादा हैं। भारत में अब दूरसंचार क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं- ज्यादा से ज्यादा लोगों को कम कीमत पर टेलीफोन सेवा देना और ज्यादा से ज्यादा कंपनियों को कम कीमत वाली हाई स्पीड कंप्यूटर नेटवर्क सेवा देना। कंप्यूटर का उपयोग आज कई तरह से हो रहा है और समाज में इसकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। **इलेक्ट्रॉनिक मेल (ई-मेल):** इलेक्ट्रॉनिक मेल सेवा, कंप्यूटर आधारित 'स्टोर एंड फॉरवर्ड' संदेश प्रणाली है। इसमें भेजने वाले और प्राप्त करने वाले दोनों को एक साथ मौजूद रहने की जरूरत नहीं होती। यह सेवा डेटा संचार नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न प्रकार के पत्रों का संचार करती है। इस सेवा में कोई भी पत्र, याद दिलाने वाला नोट, टेंडर या विज्ञापन आदि टाइप करके किसी भी व्यक्ति को उसके तय पते पर भेजा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि पत्र भेजने वाले और प्राप्त करने वाले दोनों नेटवर्क से जुड़े हों। ई-मेल एकतरफा तरीका है। यह टेलीफोन की तरह दोनों तरफ से बातचीत नहीं करा सकती, लेकिन इससे बहुत तेजी से जानकारी भेजी जा सकती है। अब यह सुविधा हिंदी में भी उपलब्ध है। 'वेब दुनिया' के नाम से हिंदी का पोर्टल भी इंटरनेट पर आ चुका है और ई-पत्र की मदद से हिंदी भाषा में मेल भेजे और प्राप्त किए जा सकते हैं।In simple words: भारत में परिवहन (रेल, सड़क) और दूरसंचार (टेलीफोन, इंटरनेट, ई-मेल) के क्षेत्र में बहुत तेजी से विकास हुआ है। सड़कें और रेलवे नेटवर्क बहुत बड़े हो गए हैं, और संचार सेवाएं सस्ती और सुलभ हो गई हैं, जिससे देश के विकास में मदद मिली है।

🎯 Exam Tip: परिवहन और दूरसंचार के सवालों में, हर साधन के विकास के मुख्य चरण, महत्वपूर्ण आंकड़े और सरकारी योजनाओं का जिक्र करें। ई-मेल जैसे नए माध्यमों का संक्षिप्त वर्णन भी करें।

 

Question 4. भारत में शिक्षा के बदलते स्वरूप का वर्णन निम्न शीर्षकों में कीजिए (क) प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा, (ख) उच्च शिक्षा, (ग) तकनीकी शिक्षा । या भारत में शिक्षा के प्रसार पर स्वातन्त्र्योत्तर काल शिक्षा के वर्तमान स्वरूप पर एक लेख लिखिए।
Answer: **(क) प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा** **प्राथमिक शिक्षा:** प्राथमिक शिक्षा वह आधार है जिस पर देश और उसके हर नागरिक का विकास निर्भर करता है। हाल के सालों में भारत ने प्राथमिक शिक्षा में नामांकन, छात्रों की संख्या को बनाए रखने, उनकी नियमित उपस्थिति और साक्षरता के प्रसार के मामले में अच्छी प्रगति की है। जहां भारत की उन्नत शिक्षा पद्धति को भारत के आर्थिक विकास का मुख्य योगदानकर्ता माना जाता है, वहीं भारत में आधारभूत शिक्षा की गुणवत्ता एक चिंता का विषय है। भारत में 14 साल तक के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देना संवैधानिक जिम्मेदारी है। देश की संसद ने 2009 में 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' पास किया है, जिसके तहत 6 से 14 साल के सभी बच्चों के लिए शिक्षा एक मौलिक अधिकार बन गई है। हालांकि, देश में अभी भी आधारभूत शिक्षा को पूरी तरह से सबके लिए उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। इसका मतलब है-बच्चों का स्कूलों में 100% नामांकन और हर बस्ती में स्कूल की सुविधाओं के साथ उनकी संख्या को बनाए रखना। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने 2001 में 'सर्व शिक्षा अभियान' योजना शुरू की, जो दुनिया की सबसे बड़ी योजना है। सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी शिक्षा क्षेत्र में वंचित और अमीर दोनों समुदायों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की दूरी को पाटने का काम कर रही है। भारत विकास प्रवेशद्वार ने प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में भारत में मौलिक शिक्षा को सबके लिए सुलभ बनाने हेतु बहुत सारी सामग्री उपलब्ध कराकर छात्रों और शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने की पहल की है। **माध्यमिक शिक्षा:** प्राथमिक शिक्षा को सबके लिए उपलब्ध कराना एक संवैधानिक आदेश बन गया है, इसलिए यह बहुत जरूरी है कि इस विचार को माध्यमिक शिक्षा को सबके लिए उपलब्ध बनाने की ओर बढ़ाया जाए, जिसे कई विकसित देशों और कई विकासशील देशों में पहले ही हासिल कर लिया गया है। सभी युवा व्यक्तियों को अच्छी गुणवत्ता वाली माध्यमिक शिक्षा कम कीमत पर उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। इसी क्रम में, भारत सरकार ने 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान माध्यमिक स्तर पर शिक्षा को सबके लिए उपलब्ध बनाने और गुणवत्ता-सुधार हेतु 'राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (RMSA)' नामक एक केंद्रीय योजना शुरू की। इस योजना का उद्देश्य हर घर से उचित दूरी के भीतर माध्यमिक स्कूल उपलब्ध कराना, 5 साल के भीतर कक्षा में नामांकन अनुपात को 75 प्रतिशत करना, सभी माध्यमिक स्कूलों द्वारा तय मानकों का पालन करना, माध्यमिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना, महिला-पुरुष, सामाजिक-आर्थिक और विकलांगता के आधार पर बाधाओं को दूर करना, 2017 तक माध्यमिक स्तर की शिक्षा को सबके लिए उपलब्ध कराना और 2020 तक सभी बच्चों को स्कूलों में बनाए रखना है। मुख्य रूप से भौतिक लक्ष्यों में 5 साल के भीतर कक्षा IX-X हेतु नामांकन अनुपात को 2005-06 के 52.26 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करना, 2011-12 तक अनुमानित 32.20 लाख अतिरिक्त छात्रों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराना, 44,000 मौजूदा माध्यमिक स्कूलों को मजबूत बनाना, 11000 नए माध्यमिक स्कूल खोलना, 1.79 लाख अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति और 80,500 अतिरिक्त कक्षा-कक्षों का निर्माण शामिल था। 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान परियोजना लागत का 75 प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाना था और बाकी 25 प्रतिशत राज्य सरकारों द्वारा। 12वीं पंचवर्षीय योजना के लिए हिस्सेदारी पैटर्न 50:50 होगा। 11वीं और 12वीं योजनाओं दोनों के लिए पूर्वोत्तर राज्यों हेतु निधि का पैटर्न 90:10 रखा गया। 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान इस स्कीम हेतु Rs. 20,120 करोड़ आवंटित किए गए थे। 2010-11, जो इस कार्यक्रम का दूसरा साल था, में 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से वार्षिक योजना प्रस्ताव मिले। **(ख) उच्च शिक्षा** आजादी के बाद के सालों में उच्च शिक्षा क्षेत्र की संस्थागत क्षमता में बहुत वृद्धि हुई है। 1950 में विश्वविद्यालयों/विश्वविद्यालय स्तरीय संस्थाओं की संख्या 27 थी, जो 2009 में 18 गुना बढ़कर 504 हो गई है। इस क्षेत्र में 42 केंद्रीय विश्वविद्यालय, 243 राज्य विश्वविद्यालय, 53 राज्य निजी विश्वविद्यालय, 130 समविश्वविद्यालय, 33 राष्ट्रीय महत्व की संस्थाएं (संसद के अधिनियमों के तहत स्थापित) और पांच संस्थाएं (विभिन्न राज्य विधानों के तहत स्थापित) शामिल हैं। कॉलेजों की संख्या में भी कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है जो 1950 में सिर्फ 578 थी, 2011 में 30,000 से भी ज्यादा हो गए हैं। उच्चतर शिक्षा क्षेत्र में हुई वृद्धि में विश्वविद्यालय बहुत तेजी से बढ़े हैं, जो अध्ययन का सबसे ऊंचा स्तर है। 'यूनिवर्सिटी' शब्द लैटिन के "यूनिवर्सिटाज" से आया है, जिसका मतलब है "छात्रों और शिक्षकों के बीच विशेष समझौते"। इस लैटिन शब्द का अर्थ उन संस्थाओं से है जो अपने छात्रों को डिग्रियां देती हैं। वर्तमान में विश्वविद्यालय प्राचीन संस्थाओं से ज्यादा अलग नहीं हैं, बस आज विश्वविद्यालयों में पढ़ाए जाने वाले विषयों और छात्रों दोनों के मामले में वे बड़े हो गए हैं। भारत में विश्वविद्यालय का मतलब किसी केंद्रीय अधिनियम, किसी प्रांतीय अधिनियम या किसी राज्य अधिनियम के द्वारा स्थापित या निगमित विश्वविद्यालय से है, जिसमें इस अधिनियम के तहत बनाए गए नियमों के अनुसार उस संबंधित विश्वविद्यालय के परामर्श से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाएं शामिल हैं। हर साल देश-विदेश के लाखों छात्र मुख्य रूप से अपनी स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए इनमें एडमिशन लेते हैं, जबकि लाखों छात्र बाहरी दुनिया में काम करने के लिए इन संस्थाओं को छोड़ते हैं। उच्च शिक्षा केंद्र और राज्य दोनों की साझा जिम्मेदारी है। संस्थाओं में मानकों का समन्वय और निर्धारण केंद्र सरकार का संवैधानिक दायित्व है। केंद्र सरकार यूजीसी को अनुदान देती है और देश में केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्थापना करती है। केंद्र सरकार ही यूजीसी की सिफारिश पर शैक्षिक संस्थाओं को समविश्वविद्यालय घोषित करती है। वर्तमान में, विश्वविद्यालयों/विश्वविद्यालय स्तरीय संस्थाओं के मुख्य घटक हैं- केंद्रीय विश्वविद्यालय, राज्य विश्वविद्यालय, समविश्वविद्यालय और विश्वविद्यालय स्तरीय संस्थाएं। **केंद्रीय विश्वविद्यालय:** केंद्रीय अधिनियम द्वारा अथवा निगमित विश्वविद्यालय। **राज्य विश्वविद्यालय:** प्रांतीय अधिनियम द्वारा अथवा राज्य अधिनियम द्वारा स्थापित अथवा निगमित विश्वविद्यालय। **निजी विश्वविद्यालय:** ऐसा विश्वविद्यालय जो किसी राज्य/केंद्रीय अधिनियम के माध्यम से किसी प्रायोजक निकाय, जैसे सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 अथवा राज्य में उस समय लागू किसी अन्य संबंधित कानून के तहत पंजीकृत सोसायटी अथवा सार्वजनिक न्यास अथवा कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 25 के अंतर्गत पंजीकृत कंपनी द्वारा स्थापित किया गया है। **समविश्वविद्यालय:** विश्वविद्यालय जैसी संस्था, जिसे सामान्यतः समविश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है, का मतलब एक ऐसी उच्च-प्रदर्शन करने वाली संस्था से है जिसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अधिनियम, 1956 की धारा 3 के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा उस रूप में घोषित किया गया है। **राष्ट्रीय महत्त्व की संस्था:** संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित और राष्ट्रीय महत्व की संस्था के रूप में घोषित संस्था। **राज्य विधानमंडल अधिनियम:** किसी राज्य विधानमंडल अधिनियम द्वारा स्थापित अथवा के अंतर्गत संस्था निगमित कोई संस्था। **(ग) तकनीकी शिक्षा** भारत में तकनीकी शिक्षा का संचालन अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (AICTE) द्वारा किया जाता है। AICTE भारत में नई तकनीकी संस्थाएं शुरू करने, नए पाठ्यक्रम शुरू करने और तकनीकी संस्थाओं में प्रवेश-क्षमता में बदलाव करने हेतु अनुमोदन देती है। यह ऐसी संस्थाओं के लिए मानदंड भी तय करती है। इसकी स्थापना 1945 में सलाहकार निकाय के रूप में की गई थी और बाद में 1987 में संसद के अधिनियम द्वारा इसे सांविधिक दर्जा प्रदान किया गया। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है, जहां इसके अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव के कार्यालय हैं। कोलकाता, चेन्नई, कानपुर, मुंबई, चंडीगढ़, भोपाल और बेंगलुरु में इसके 7 क्षेत्रीय कार्यालय स्थित हैं। हैदराबाद में एक नया क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित किया गया है। यह तकनीकी संस्थाओं के प्रत्यायन या कार्यक्रमों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा के गुणवत्ता विकास को भी सुनिश्चित करती है। अपनी नियामक भूमिका के अलावा AICTE की एक बढ़ावा देने की भूमिका भी है जिसे यह तकनीकी संस्थाओं को अनुदान देकर महिलाओं, विकलांगों और समाज के कमजोर वर्गों के लिए तकनीकी शिक्षा का विकास, नवाचार, संकाय, अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने संबंधी योजनाओं के माध्यम से लागू करती है। परिषद 21 सदस्यों वाली कार्यकारी समिति के माध्यम से अपना काम करती है। 10 सांविधिक अध्ययन बोर्ड द्वारा सहायता प्राप्त है जो नामतः इंजीनियरी और प्रौद्योगिकी में अवर स्नातक अध्ययन, इंजीनियरी और प्रौद्योगिकी में स्नातकोत्तर और अनुसंधान, प्रबंध अध्ययन, व्यावसायिक शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, फार्मास्युटिकल शिक्षा, वास्तुकला, होटल प्रबंधन और कैटरिंग प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी, टाउन और कंट्री प्लानिंग परिषद की सहायता करते हैं।In simple words: आजादी के बाद से भारत में शिक्षा का स्वरूप बहुत बदला है। प्राथमिक से लेकर उच्च और तकनीकी शिक्षा तक, सरकार ने पहुंच बढ़ाई है, नए स्कूल और कॉलेज खोले हैं, और शिक्षा को एक मौलिक अधिकार बनाया है।

🎯 Exam Tip: शिक्षा से संबंधित प्रश्नों में, विभिन्न स्तरों (प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च, तकनीकी) पर हुए विकास, सरकारी योजनाओं और महत्वपूर्ण आंकड़ों को शामिल करें। हर उपशीर्षक के तहत मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 5. स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद भारतीय कृषि में कौन-कौन-से बदलाव आये हैं?
Answer: स्वतंत्रता के बाद भारतीय कृषि में तकनीकी बदलाव 1960 के दशक में शुरू हुए। तब भारतीय किसानों ने ज्यादा उपज देने वाले बीज, रासायनिक खाद, मशीनों का इस्तेमाल, कर्ज और बेचने की बेहतर सुविधाओं का उपयोग करना शुरू किया। केंद्र सरकार ने 1960 में गहन क्षेत्र विकास कार्यक्रम शुरू किया। मैक्सिको से ज्यादा उपज देने वाले गेहूं के बीज और फिलीपीन्स से पान के बीज भारत लाए गए। ज्यादा उपज वाले बीजों के अलावा, रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग भी शुरू किया गया और सिंचाई की सुविधाओं में सुधार व विस्तार किया गया। इस प्रकार स्वतंत्रता के बाद भारतीय कृषि में हुए बदलावों को इन बिंदुओं से समझ सकते हैं: 1. **भूमि उपयोग में सुधार:** देश के कुल 32.87 करोड़ हेक्टेयर भौगोलिक क्षेत्रफल में से 92.6% भूमि उपयोग के आंकड़े उपलब्ध हैं। राज्यों से मिले आंकड़ों के अनुसार 2000-01 में कुल 7.52% करोड़ हेक्टेयर (कुल क्षेत्रफल का 22.9%) में वन क्षेत्र था, जबकि 1950-51 में यह क्षेत्र 4.05 करोड़ हेक्टेयर था। इसी समय में बोई गई कुल जमीन का क्षेत्र 11.9 करोड़ हेक्टेयर से बढ़कर 14.6 करोड़ हेक्टेयर हो गया था। फसलों के मुख्य प्रकार से पता चलता है कि कुल फसल क्षेत्र में खाद्यान्न अन्य फसलों की तुलना में सबसे ज्यादा बोया जाता है। फिर भी 1950-51 के मुकाबले 2000-01 में इसका तुलनात्मक हिस्सा 76.7% से गिरकर 67.2% रह गया था। इसके साथ ही, भूमि-सुधार के लिए खेतों की चकबंदी की गई, जिससे किसानों की जमीन को एक जगह इकट्ठा करने की कोशिश की गई। यह किसानों के लिए खेती को अधिक कुशल बनाता है। 2. **रासायनिक खादों की खपत तथा सिंचाई से वृद्धि:** सिंचित क्षेत्र में वृद्धि और ज्यादा उपज देने वाले बीजों के प्रयोग के साथ-साथ रासायनिक खादों का उपयोग भी बढ़ रहा है। इनका उपयोग 1950-51 के 69 हजार टन से बढ़कर 2005-06 में 20.34 मीट्रिक टन हो गया है। इसी समय में रासायनिक खादों का प्रति हेक्टेयर उपभोग 2 किग्रा से बढ़कर 82 किग्रा हो गया है। कृषि विकास की नई नीति में सिंचाई सुविधाओं को प्राथमिकता दी गई है। 3. **प्रमाणीकृत बीजों के वितरण में वृद्धि:** सरकार ने बहुत पहले ही उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराने के महत्व को पहचान लिया था। 1963 में उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराने की जरूरत को पूरा करने के लिए 'राष्ट्रीय बीज निगम' की स्थापना की गई। पिछले कुछ सालों में देश भर में बीज प्रमाणीकरण संस्थाओं और बीज परीक्षण प्रयोगशालाओं का जाल-सा बिछ गया है। प्रमाणीकृत बीजों के वितरण में अच्छी वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय बीज निगम के अलावा विश्व बैंक की मदद से 1969 में स्थापित 'तराई विकास निगम' ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है। 4. **जल प्रबंधन:** एक नई पहल के तहत मार्च 2002 से पूर्वी भारत में फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए खेत में जल का प्रबंधन करने और उस पर केंद्र द्वारा एक योजना शुरू की गई। इस योजना का लक्ष्य भूमि के नीचे या भूमि की सतह पर मिलने वाले जल का उपयोग करके पूर्वी भारत में फसल की पैदावार बढ़ाना है। यह योजना असम, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मणिपुर, मिजोरम, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के 9 जिलों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के 35 जिलों में लागू की गई है। 5. **कृषि अनुसंधानों का विस्तार:** भारत के कृषि मंत्रालय के तहत कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग कृषि, पशुपालन और मछली पालन के क्षेत्र में अनुसंधान और शैक्षिक गतिविधियों को चलाने के लिए जिम्मेदार है। इसके अलावा, ये विभाग संबंधित क्षेत्रों में काम करने वाली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के विभिन्न विभागों और संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने में भी मदद करता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद कृषि प्रौद्योगिकी के विकास, निवेश सामग्री और खाद्यान्नों में आत्मनिर्भरता लाने के लिए मुख्य वैज्ञानिक जानकारी को सामान्य जनता तक पहुंचाने में प्रमुख भूमिका निभाती है। यह परिषद राष्ट्रीय स्तर की एक स्वायत्त संस्था है। यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों के क्षेत्र में कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार शिक्षा को बढ़ावा देती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन, फसलों, पशुओं, मछली उत्पादन आदि में आ रही समस्याओं का समाधान करने के लिए पारंपरिक और अग्रणी क्षेत्रों में बुनियादी और व्यावहारिक खोजों व अनुसंधानों में सीधे भाग लेती है। 6. **कृषि-साख और विभिन्न निगमों की स्थापना:** कृषि क्षेत्र के लिए सरकार ने पर्याप्त मात्रा में कृषि ऋण उपलब्ध कराने के प्रयास किए हैं। इस दिशा में सहकारी समितियां, कृषि पुनर्वित्त निगम और कृषि वित्त निगम प्रयास कर रहे हैं। अब इस दिशा में सभी कार्य नाबार्ड (NABARD)-राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक को सौंप दिए गए हैं। सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों के Rs. 10 हजार तक के ऋण माफ कर दिए हैं। कृषि विकास की नई नीति के तहत विभिन्न क्षेत्रों में निगमों की स्थापना को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।In simple words: आजादी के बाद भारतीय कृषि में कई बड़े बदलाव आए हैं, जैसे ज्यादा उपज वाले बीज, रासायनिक खाद का उपयोग, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, और कृषि अनुसंधान पर ज्यादा ध्यान देना। इससे कृषि उत्पादन बढ़ा और किसान आत्मनिर्भर बने।

🎯 Exam Tip: कृषि में बदलाव के प्रश्नों में, मुख्य योजनाओं, तकनीकी सुधारों और उनके प्रभावों को क्रमबद्ध तरीके से बताएं। विशेष रूप से बीजों, खाद और जल प्रबंधन पर हुए सुधारों का उल्लेख करें।

 

Question 6. भारत में 'बौद्धिक सम्पदा के क्षेत्र में की गयी प्रगति का वर्णन कीजिए। या 'बौद्धिक सम्पदा' से आप क्या समझते हैं ? इस पर संक्षेप में प्रकाश डालिए ।
Answer: बौद्धिक संपदा का मतलब किसी व्यक्ति का सर्वांगीण विकास है, जिसमें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक विकास तकनीकी शिक्षा पर निर्भर करता है। जब व्यक्ति जीवन के सभी क्षेत्रों में विकास करने की क्षमता हासिल कर लेता है, तभी उसका व्यक्तित्व पूरी तरह विकसित माना जाता है। वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा व्यक्ति को हर क्षेत्र में विकसित होने का मौका देती है। यह शारीरिक मेहनत के साथ-साथ मानसिक क्षमताओं का विकास करते हुए व्यक्ति को सोचने, समझने और जांचने का अवसर देती है, जिससे उसका बौद्धिक विकास होता है। उदाहरण के लिए, जब किसी छात्र में योग्यता और तकनीकी कौशल विकसित होता है, तो उसमें आत्मनिर्भरता की शक्ति भी पैदा होती है। यह बौद्धिक विकास का ही एक हिस्सा है। आज भारत ने ज्ञान-विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति कर देश में उपलब्ध संसाधनों का भरपूर उपयोग किया है। जैव प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और यंत्रीकरण, परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम, चिकित्सा और स्वास्थ्य देखभाल, दूर संवेदी उपग्रह प्रणाली, सूचना प्रौद्योगिकी, सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों के विकास में भारत अपनी बौद्धिक संपदा के दम पर ही आगे बढ़ रहा है। इंटरनेट एक बहुत ही उच्च तकनीक वाला उद्योग है, जिसमें नई उपलब्धियों का प्रयोग और पुरानी का खत्म होना बहुत तेजी से होता है। इससे कुछ नई स्थितियां भी पैदा हुई हैं। इनमें पहली बात पेटेंट और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित है। सॉफ्टवेयर चुंबकीय माध्यम में रिकॉर्ड होता है और इसीलिए इसका हस्तांतरण और कॉपी करना बहुत आसान हो जाता है। इसी कारण पेटेंट और बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा करना बहुत मुश्किल हो गया है। नौवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान दो नई योजनाएं शुरू की गईं: * **बौद्धिक संपदा अधिकार अध्ययन के बारे में वित्तीय सहायता योजना:** इसका उद्देश्य शिक्षाविदों में बौद्धिक संपदा अधिकार से संबंधित मामलों के बारे में सामान्य जागरूकता पैदा करना और विश्वविद्यालयों व अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों में बौद्धिक संपदा अधिकारों के बारे में अध्ययनों को बढ़ावा देना है। * **कॉपीराइट मामलों पर संगोष्ठी तथा कार्यशाला आयोजन:** इनका उद्देश्य कॉपीराइट और अन्य बौद्धिक संपदा अधिकारों पर जानकारी फैलाना है। भारत विश्व बौद्धिक संपदा संगठन का सदस्य है, जो कॉपीराइट तथा अन्य बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र संघ की एक खास एजेंसी है। भारत इनकी सभी चर्चाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।In simple words: बौद्धिक संपदा का अर्थ है किसी व्यक्ति के दिमाग से निकली कोई नई चीज, जैसे आविष्कार या कला। भारत ने विज्ञान और तकनीक में बहुत प्रगति की है, और अब हम नए विचारों को बचाने के लिए नियमों और कार्यक्रमों पर काम कर रहे हैं।

🎯 Exam Tip: बौद्धिक संपदा के प्रश्नों में, इसकी परिभाषा, भारत में इसके विकास के क्षेत्र और इसे सुरक्षित रखने के लिए उठाए गए कदमों या योजनाओं का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. भारतीय अर्थव्यवस्था किस पर आधारित है ?
Answer: वर्तमान में भारत की अर्थव्यवस्था 'वैश्वीकरण' और 'उदारीकरण' की प्रक्रिया पर आधारित है। वैश्वीकरण का मतलब है विश्व अर्थव्यवस्था से जुड़ाव और उदारीकरण का मतलब है नियमों को आसान बनाना।
In simple words: भारत की अर्थव्यवस्था इस समय वैश्वीकरण और उदारीकरण के नियमों पर चल रही है।

🎯 Exam Tip: अर्थव्यवस्था के आधार से जुड़े प्रश्नों में 'वैश्वीकरण' और 'उदारीकरण' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें।

 

Question 2. भारत के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि के घटते योगदान से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता हैं ?
Answer: भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कृषि के घटते योगदान से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि भारत विकास की ओर आगे बढ़ रहा है। जैसे-जैसे देश विकसित होता है, उद्योगों और सेवाओं का योगदान बढ़ता जाता है, जबकि कृषि का हिस्सा घटता है।
In simple words: जब देश के कुल उत्पादन में कृषि का हिस्सा कम होता है, तो इसका मतलब है कि देश विकास कर रहा है।

🎯 Exam Tip: GDP में कृषि के योगदान में कमी का अर्थ औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में वृद्धि को दर्शाना है, जो विकास का संकेत है।

 

Question 3. भारत में कृषि की महत्त्वपूर्ण क्रान्तियों के नाम लिखिए ।
Answer: भारत में कृषि की दो महत्त्वपूर्ण क्रान्तियां हैं: हरित क्रान्ति तथा पीली क्रान्ति। हरित क्रांति अनाज उत्पादन (विशेषकर गेहूं और चावल) से संबंधित थी, जबकि पीली क्रांति तिलहन (तेल के बीज) के उत्पादन को बढ़ाने के लिए लाई गई थी।
In simple words: भारत में खेती को बेहतर बनाने के लिए हरित क्रान्ति और पीली क्रान्ति जैसी बड़ी योजनाएं चलाई गईं।

🎯 Exam Tip: कृषि क्रांतियों के नाम याद रखते समय, यह भी याद रखें कि प्रत्येक क्रांति किस उत्पाद से जुड़ी थी।

 

Question 4. छः आधारभूत उद्योगों के नामों का उल्लेख कीजिए ।
Answer: भारत के छः आधारभूत उद्योग इस प्रकार हैं- बिजली, कोयला, इस्पात, कच्चा पेट्रोलियम, पेट्रोलियम रिफाइनरी तथा सीमेण्ट। ये उद्योग देश के अन्य सभी उद्योगों के लिए मुख्य आधार और ऊर्जा प्रदान करते हैं।
In simple words: बिजली, कोयला, इस्पात, कच्चा तेल, पेट्रोलियम रिफाइनरी और सीमेंट भारत के छह सबसे जरूरी उद्योग हैं।

🎯 Exam Tip: आधारभूत उद्योगों के नाम सीधे याद रखें क्योंकि ये देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं।

 

Question 5. सरकार ने कपड़ा उद्योग को कब लाइसेन्स मुक्त किया था ?
Answer: सरकार ने कपड़ा उद्योग को वर्ष 1993 ई० में लाइसेन्स मुक्त किया था। इस कदम से उद्योग को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और बाजार की मांगों के अनुसार काम करने की आजादी मिली।
In simple words: सरकार ने 1993 में कपड़ा उद्योग को लाइसेंस के नियम से आजाद कर दिया था।

🎯 Exam Tip: उद्योग सुधारों से संबंधित महत्वपूर्ण वर्षों और नीतियों को याद रखना अच्छा होता है।

 

Question 6. लोहा व इस्पात उद्योग में कितनी पूँजी लगी हुई है तथा कितने लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है ?
Answer: लोहा व इस्पात उद्योग में लगभग Rs. 90,000 करोड़ की पूँजी लगी हुई है और 5 लाख से अधिक लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिला हुआ है। यह उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में एक बड़ा योगदान देता है।
In simple words: लोहा और इस्पात उद्योग में लगभग Rs. 90,000 करोड़ लगे हैं और यह 5 लाख से ज्यादा लोगों को नौकरी देता है।

🎯 Exam Tip: किसी भी बड़े उद्योग के बारे में बताते समय निवेश की राशि और रोजगार के आंकड़े जरूर शामिल करें।

 

Question 7. भारतीय कोयला उद्योग का संचालन एवं नियन्त्रण करने वाले संस्थानों के नाम का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारतीय कोयला उद्योग का संचालन और नियन्त्रण सार्वजनिक क्षेत्र के दो प्रमुख संस्थानों-कोल इण्डिया लि० (CIL) तथा सिंगरैनी कोइलरीज द्वारा किया जा रहा है। ये संस्थाएं देश में कोयला उत्पादन और वितरण का प्रबंधन करती हैं।
In simple words: भारत में कोयला उद्योग को कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और सिंगरैनी कोइलरीज नाम की दो बड़ी सरकारी कंपनियां चलाती हैं।

🎯 Exam Tip: प्रमुख उद्योगों से संबंधित सरकारी या नियामक संस्थाओं के नाम याद रखें।

 

Question 8. वैश्वीकरण का क्या अर्थ है ? [2010]
Answer: किसी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था का विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ जुड़ना ही वैश्वीकरण कहलाता है। इसे भूमंडलीकरण भी कहते हैं। यह ऐसी प्रक्रिया है जो देशों के बीच व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान को बढ़ाती है, जिससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को विश्व स्तर पर उपलब्ध आर्थिक अवसरों से लाभ मिलता है।
In simple words: वैश्वीकरण का मतलब है जब किसी देश की अर्थव्यवस्था दुनिया के दूसरे देशों की अर्थव्यवस्थाओं से जुड़ जाती है।

🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण की परिभाषा में 'विश्व अर्थव्यवस्था से समन्वय' और 'आर्थिक अवसरों का लाभ' जैसे मुख्य बिंदुओं को शामिल करें।

 

Question 9. भारत में वैश्वीकरण की प्रक्रिया कब आरम्भ हुई ?
Answer: भारत में वैश्वीकरण की प्रक्रिया सन् 1991 ई० में आरम्भ हुई। इस प्रक्रिया को उस समय के प्रधानमंत्री पी०वी० नरसिंहराव और वित्तमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में लागू किया गया था। इस नीति ने भारत की अर्थव्यवस्था को दुनिया के लिए खोल दिया।
In simple words: भारत में वैश्वीकरण 1991 में शुरू हुआ, जब पी०वी० नरसिंहराव प्रधानमंत्री और मनमोहन सिंह वित्तमंत्री थे।

🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण की शुरुआत के वर्ष और प्रमुख नेताओं के नाम को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. वैश्वीकरण से होने वाले दो लाभ लिखिए।
Answer: वैश्वीकरण से होने वाले दो मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं: * संचार के क्षेत्र में कम दामों पर बेहतर सेवाएं मिलीं, जैसे मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं सस्ती हुईं। * औद्योगिक क्षेत्र में, खासकर सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्रों में देश को बहुत सफलता मिली। ये लाभ व्यापार में वृद्धि, नए उत्पादों की उपलब्धता और तकनीकी प्रगति के रूप में सामने आते हैं।
In simple words: वैश्वीकरण से संचार सेवाएं सस्ती हुईं और भारत को सूचना प्रौद्योगिकी और खाद्य प्रसंस्करण जैसे उद्योगों में बहुत तरक्की मिली।

🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण के लाभ बताते समय, विशिष्ट क्षेत्रों का उदाहरण दें जहां सकारात्मक प्रभाव दिखाई दिए हैं।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. भारतीय अर्थव्यवस्था किस पर आधारित है?
Answer: वर्तमान में भारत की अर्थव्यवस्था 'वैश्वीकरण' या 'उदारीकरण' की प्रक्रिया पर आधारित है। यह नीतियां देश को वैश्विक बाजार से जोड़कर विकास में मदद करती हैं।
In simple words: भारत की अर्थव्यवस्था वैश्वीकरण और उदारीकरण के सिद्धांतों पर आधारित है।

🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण और उदारीकरण की परिभाषा को स्पष्ट रूप से समझें क्योंकि ये भारतीय अर्थव्यवस्था के मूल सिद्धांत हैं।

 

Question 2. भारत के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि के घटते योगदान से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
Answer: भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कृषि का योगदान घटने से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि भारत विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है इसका मतलब है कि उद्योग और सेवा क्षेत्रों का विकास हो रहा है।
In simple words: कृषि का योगदान घटने का मतलब है कि भारत विकास कर रहा है, उद्योग और सेवा क्षेत्र बढ़ रहे हैं।

🎯 Exam Tip: यह समझें कि कृषि के घटते योगदान का अर्थ अर्थव्यवस्था के संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाता है, जहाँ अन्य क्षेत्र महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

 

Question 3. भारत में कृषि की महत्त्वपूर्ण क्रान्तियों के नाम लिखिए।
Answer: भारत में कृषि की महत्त्वपूर्ण क्रांतियाँ 'हरित क्रान्ति' और 'पीली क्रान्ति' हैं। हरित क्रान्ति ने अनाज उत्पादन बढ़ाया, जबकि पीली क्रान्ति ने तिलहन उत्पादन में वृद्धि की।
In simple words: भारत में कृषि की मुख्य क्रांतियाँ हरित क्रान्ति और पीली क्रान्ति हैं।

🎯 Exam Tip: हरित क्रान्ति (अनाज) और पीली क्रान्ति (तिलहन) के मुख्य उद्देश्यों और प्रभावों को याद रखें।

 

Question 4. छः आधारभूत उद्योगों के नामों का उल्लेख कीजिए।
Answer: छः आधारभूत उद्योग इस प्रकार हैं- बिजली, कोयला, इस्पात, कच्चा पेट्रोलियम, पेट्रोलियम रिफाइनरी तथा सीमेण्ट। ये उद्योग किसी भी देश के औद्योगिक विकास के लिए बहुत जरूरी होते हैं।
In simple words: बिजली, कोयला, इस्पात, कच्चा पेट्रोलियम, पेट्रोलियम रिफाइनरी और सीमेण्ट भारत के छह मुख्य उद्योग हैं।

🎯 Exam Tip: इन छह आधारभूत उद्योगों के नाम कंठस्थ कर लें, क्योंकि ये औद्योगिक विकास के आधार स्तंभ हैं।

 

Question 5. सरकार ने कपड़ा उद्योग को कब लाइसेन्स मुक्त किया था?
Answer: सरकार ने कपड़ा उद्योग को वर्ष 1993 ई० में लाइसेन्स मुक्त किया था। इस कदम से उद्योग को बढ़ने और प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिली।
In simple words: कपड़ा उद्योग को सरकार ने 1993 में लाइसेन्स की जरूरत से मुक्त कर दिया।

🎯 Exam Tip: कपड़ा उद्योग को लाइसेन्स मुक्त करने के वर्ष और उसके पीछे के आर्थिक तर्क को याद रखें।

 

Question 6. लोहा व इस्पात उद्योग में कितनी पूँजी लगी हुई है तथा कितने लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है?
Answer: लोहा व इस्पात उद्योग में लगभग Rs. 90,000 करोड़ की पूंजी लगी हुई है। इस उद्योग में 5 लाख से अधिक लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिला हुआ है। यह उद्योग देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: लोहा व इस्पात उद्योग में लगभग Rs. 90,000 करोड़ की पूंजी लगी है और 5 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है।

🎯 Exam Tip: लोहा व इस्पात उद्योग के लिए पूंजी निवेश और रोजगार संख्या जैसे महत्वपूर्ण आंकड़ों को याद रखें।

 

Question 7. भारतीय कोयला उद्योग का संचालन एवं नियन्त्रण करने वाले संस्थानों के नाम का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारतीय कोयला उद्योग का संचालन एवं नियंत्रण सार्वजनिक क्षेत्र के दो प्रमुख संस्थानों-कोल इण्डिया लि० (CIL) तथा सिंगरैनी कोइलरीज द्वारा किया जा रहा है। ये संस्थाएँ देश की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
In simple words: कोल इण्डिया लि० (CIL) और सिंगरैनी कोइलरीज भारतीय कोयला उद्योग को संभालते हैं।

🎯 Exam Tip: कोयला उद्योग के संचालन में शामिल मुख्य सरकारी संस्थाओं के नाम याद रखें।

 

Question 8. वैश्वीकरण का क्या अर्थ है? [2010]
Answer: वैश्वीकरण का अर्थ है किसी देश की अर्थव्यवस्था का विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ जुड़ना। इसे भूमण्डलीकरण या विश्वव्यापीकरण भी कहते हैं। यह ऐसी प्रक्रिया है जिससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर उपलब्ध आर्थिक अवसरों का लाभ मिलता है, जिससे व्यापार और निवेश बढ़ता है।
In simple words: वैश्वीकरण का मतलब है किसी देश की अर्थव्यवस्था का पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था से जुड़ना।

🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण की सरल और सटीक परिभाषा दें और इसके उद्देश्य को संक्षेप में बताएं।

 

Question 9. भारत में वैश्वीकरण की प्रक्रिया कब आरम्भ हुई?
Answer: भारत में वैश्वीकरण की प्रक्रिया सन् 1991 ई० में आरम्भ हुई। इस प्रक्रिया को उस समय के प्रधानमन्त्री पी०वी० नरसिंहराव और वित्तमन्त्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में लागू किया गया था, जिसने देश की आर्थिक नीतियों में बड़े बदलाव लाए।
In simple words: भारत में वैश्वीकरण 1991 में प्रधानमन्त्री नरसिंहराव और वित्तमन्त्री मनमोहन सिंह के समय शुरू हुआ था।

🎯 Exam Tip: भारत में वैश्वीकरण की शुरुआत के वर्ष और उसमें शामिल प्रमुख हस्तियों को याद रखें।

 

Question 10. वैश्वीकरण से होने वाले दो लाभ लिखिए।
Answer: वैश्वीकरण से होने वाले दो प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
(i) वैश्वीकरण के कारण संचार सेवाओं की लागत कम हुई और उनकी गुणवत्ता बेहतर हुई। इससे लोगों के लिए जानकारी साझा करना आसान हो गया।
(ii) औद्योगिक क्षेत्र, खासकर सूचना प्रौद्योगिकी, कम्प्यूटर और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में देश को बड़ी सफलता मिली। इससे नए रोजगार पैदा हुए और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला।
In simple words: वैश्वीकरण से संचार सस्ता और बेहतर हुआ, और औद्योगिक, सूचना प्रौद्योगिकी व खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में बड़ी तरक्की हुई।

🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण के किन्हीं दो महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभावों को स्पष्ट रूप से बताएं।

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. भारतीय अर्थव्यवस्था का विश्व अर्थव्यवस्था में स्थान है
(क) पहला
(ख) चौथा
(ग) सातवाँ
(घ) तीसरा
Answer: (ख) चौथा
In simple words: विश्व की अर्थव्यवस्था में भारत का स्थान चौथा है।

🎯 Exam Tip: भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति और रैंक से संबंधित तथ्यों को हमेशा अपडेट रखें, क्योंकि ये आंकड़े बदल सकते हैं।

 

Question 2. 'कृष्ण क्रान्ति सम्बन्धित है
(क) तेल उत्पादन से
(ख) केरोसिन उत्पादन से
(ग) पेट्रोल उत्पादन से
(घ) खनिज तेल उत्पादन से
Answer: (घ) खनिज तेल उत्पादन से
In simple words: कृष्ण क्रान्ति का संबंध खनिज तेल उत्पादन को बढ़ाने से है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न क्रांतियों (जैसे हरित, श्वेत, पीली, कृष्ण) और उनके संबंधित क्षेत्रों को याद रखें।

 

Question 3. 'शिक्षा-एक मौलिक अधिकार' को किस संशोधन द्वारा पारित किया गया?
(क) 93वाँ संशोधन
(ख) 92वाँ संशोधन
(ग) 85वाँ संशोधन
(घ) 91वाँ संशोधन
Answer: (क) 93वाँ संशोधन
In simple words: शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने के लिए 93वाँ संशोधन किया गया।

🎯 Exam Tip: शिक्षा के अधिकार से संबंधित संवैधानिक संशोधन और उसके वर्ष को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. देश के सकल घरेलू उत्पादन में कृषि का योगदान कितना प्रतिशत है?
(क) 24%
(ख) 25%
(ग) 26%
(घ) 27%
Answer: (ग) 26%
In simple words: देश के कुल उत्पादन में कृषि का हिस्सा 26% है।

🎯 Exam Tip: सकल घरेलू उत्पाद में विभिन्न क्षेत्रों (कृषि, उद्योग, सेवा) के योगदान के नवीनतम आंकड़ों पर ध्यान दें।

 

Question 5. भारत का कितना प्रतिशत कृषि क्षेत्रफल वर्षा पर निर्भर करता है?
(क) 50%
(ख) 55%
(ग) 60%
(घ) 65%
Answer: (ग) 60%
In simple words: भारत का 60% कृषि क्षेत्र वर्षा पर निर्भर करता है।

🎯 Exam Tip: भारतीय कृषि की वर्षा पर निर्भरता से जुड़े प्रतिशत को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. भारत की राष्ट्रीय आय का कितना प्रतिशत कृषि से प्राप्त होता है?
(क) 25%
(ख) 28%
(ग) 30%
(घ) 33%
Answer: (क) 25%
In simple words: भारत की कुल राष्ट्रीय आय का 25% कृषि से आता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आय में कृषि के योगदान के प्रतिशत को याद रखें, क्योंकि यह अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।

 

Question 7. भारत में रॉकेट प्रक्षेपण का केन्द्र है
(क) पोखरन
(ख) ट्रॉम्बे
(ग) मुम्बई
(घ) श्रीहरिकोटा
Answer: (क) पोखरन
In simple words: भारत का रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र पोखरन में स्थित है।

🎯 Exam Tip: भारत के प्रमुख अंतरिक्ष और रक्षा केंद्रों के स्थानों को याद रखें।

UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 14 उभरते भारत में विकसित देश के रूप

Students can now access the UP Board Solutions for Chapter 14 उभरते भारत में विकसित देश के रूप prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 10 Social Science textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest UP Board syllabus.

Detailed Explanations for Chapter 14 उभरते भारत में विकसित देश के रूप

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 10 Social Science chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 10 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these UP Board Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Social Science Class 10 Solved Papers

Using our Social Science solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 10 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 14 उभरते भारत में विकसित देश के रूप to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 14 उभरते भारत में विकसित देश के रूप for the 2026 27 session?

The complete and updated UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 14 उभरते भारत में विकसित देश के रूप is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 10 Social Science are as per latest UP Board curriculum.

Are the Social Science UP Board solutions for Class 10 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 14 उभरते भारत में विकसित देश के रूप as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Social Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 10 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 14 उभरते भारत में विकसित देश के रूप will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 14 उभरते भारत में विकसित देश के रूप in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 10 Social Science. You can access UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 14 उभरते भारत में विकसित देश के रूप in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Social Science UP Board solutions for Class 10 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 14 उभरते भारत में विकसित देश के रूप in printable PDF format for offline study on any device.