UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 15 Krantikariyon ka Yogdan

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Detailed Chapter 15 क्रांतिकारों का योगदान UP Board Solutions for Class 10 Social Science

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Class 10 Social Science Chapter 15 क्रांतिकारों का योगदान UP Board Solutions PDF

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. भारतीय स्वतन्त्रता संघर्ष में क्रान्तिकारियों की भूमिका की विवेचना कीजिए। [2013]
Answer: बीसवीं सदी की शुरुआत में, भारत के कई हिस्सों में स्पष्ट राजनीतिक आंदोलनों के अलावा कई क्रांतिकारी संगठन भी बने। इन संगठनों का संघर्ष हथियारबंद था। उन्हें संवैधानिक आंदोलनों में कोई विश्वास नहीं था। उनका मुख्य लक्ष्य ब्रिटिश अधिकारियों को डराकर सरकारी व्यवस्था को कमजोर करना और स्वतंत्रता प्राप्त करना था। इन क्रांतिकारियों की बहादुरी और बलिदान ने जनता को प्रेरणा दी। इस तरह जनता में राष्ट्रवाद की भावनाएं विकसित हुईं। इन क्रांतिकारियों ने देश की आजादी की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वतंत्रता आंदोलन के तीन प्रमुख क्रांतिकारियों का संक्षिप्त जीवन परिचय नीचे दिया गया है:
1. चन्द्रशेखर आजाद – चंद्रशेखर आज़ाद स्वतंत्रता के लिए हंसते-हंसते शहीद होने वाले क्रांतिकारियों में से एक थे। उनका जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्य प्रदेश के भाबरा गांव में हुआ था। चंद्रशेखर आज़ाद ने काकोरी कांड और सांडर्स की हत्या में हिस्सा लेकर अपनी क्षमता साबित की थी। उन्होंने क्रांतिकारी दल का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। ब्रिटिश सरकार उनसे बहुत परेशान थी और उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही थी। सन् 1931 में वे इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अपने साथियों के साथ बैठक कर रहे थे। वहां पुलिस से उनकी मुठभेड़ हुई। उन्होंने पुलिस के हाथों में आने से पहले ही खुद को गोली मारकर वीरगति प्राप्त की।
2. भगतसिंह – शहीद भगतसिंह भारत के सच्चे देशभक्त और महान क्रांतिकारी थे। उनका जन्म 27 दिसंबर, 1907 को पंजाब के लायलपुर जिले में हुआ था। ब्रिटिश सरकार उनके क्रांतिकारी कामों से बुरी तरह डर गई थी। उन्होंने पहले चंद्रशेखर आज़ाद के साथ मिलकर लाला लाजपत राय पर लाठी बरसाने वाले अंग्रेज अधिकारी सांडर्स की हत्या की। इसके बाद, उन्होंने सुखदेव और राजगुरु के साथ मिलकर 8 अप्रैल, 1929 को केंद्रीय असेंबली में बम फेंककर सनसनी फैलाई। उन्होंने देश की जनता को स्वतंत्रता के प्रति जागरूक करने के लिए खुद को गिरफ्तार करवा दिया। 23 मार्च, 1931 को उन्हें और उनके साथियों को लाहौर जेल में फांसी दे दी गई, लेकिन उनके बलिदान ने उन्हें भारतीय इतिहास में अमर कर दिया।
3. खुदीराम बोस – खुदीराम बोस भारत के परम देशभक्त और महान क्रांतिकारी थे। उनका जन्म 3 दिसंबर, 1889 को बंगाल के मिदनापुर जिले में हुआ था। शिक्षा पूरी करने के बाद वे बंगाल के क्रांतिकारी दल में शामिल हो गए। उन्होंने मुजफ्फरपुर में जस्टिस किंग्सफोर्ड की गाड़ी पर बम फेंका था। जस्टिस किंग्सफोर्ड उस गाड़ी में नहीं थे, लेकिन दो निर्दोष महिलाएं मारी गईं। उन्हें बाद में गिरफ्तार कर लिया गया और सन् 1908 में उन्हें फांसी दे दी गई। खुदीराम बोस ने देश की स्वाधीनता और सम्मान के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। इन सभी क्रांतिकारियों की गतिविधियों ने अंग्रेजी सरकार को बार-बार हिला दिया, जिससे सरकार कोई भी फैसला ठीक से नहीं ले पाती थी।
In simple words: भारत को आज़ाद कराने के लिए बीसवीं सदी की शुरुआत में कई गुप्त क्रांतिकारी दल बने। उन्होंने ब्रिटिश सरकार को डराकर देश को आज़ाद करने का लक्ष्य रखा। चंद्रशेखर आज़ाद, भगतसिंह और खुदीराम बोस जैसे वीर क्रांतिकारियों ने देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।

🎯 Exam Tip: स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारियों के योगदान का वर्णन करते समय प्रमुख नेताओं के नाम, उनके महत्वपूर्ण कार्य और बलिदान की तारीखों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. पंजाब तथा बंगाल की प्रमुख क्रान्तिकारी गतिविधियों पर प्रकाश डालिए।
Answer: उन्नीसवीं सदी के अंत और बीसवीं सदी की शुरुआत में भारत में क्रांतिकारी आंदोलन चला। यह आंदोलन तिलक-पक्षीय राजनीतिक उग्रवाद से बिल्कुल अलग था। क्रांतिकारी लोग अपीलें, प्रेरणाएँ और शांतिपूर्ण संघर्षों में विश्वास नहीं रखते थे। उनका यह पक्का मानना था कि पशु बल से स्थापित साम्राज्य को हिंसा के बिना उखाड़ फेंकना संभव नहीं था। ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीति ने उन्हें निराश कर दिया था। वे प्रशासन और उसके भारतीय सहायकों की हिम्मत तोड़ने के लिए हिंसक गतिविधियों पर भरोसा करते थे। वे अपने आंदोलन को चलाने के लिए सशस्त्र आक्रमण और सरकारी खजाने पर डकैती डालने को गलत नहीं मानते थे। विदेशों में रहने वाले राष्ट्रवादी भारतीयों ने भी इस आंदोलन में खुलकर भाग लिया। यह एक महत्वपूर्ण चरण था जिसने अंग्रेजों को दिखाया कि भारतीय लोग चुप नहीं बैठेंगे।
क्रान्तिकारी आन्दोलन के केन्द्र एवं गतिविधियाँ
क्रांतिकारी राष्ट्रवादियों का पहला केंद्र महाराष्ट्र था। सन् 1899 में रैण्ड और रिहर्स्ट की हत्या कर दी गई, जिसमें श्यामजी कृष्ण वर्मा का हाथ था। वे लंदन भाग गए और सन् 1905 में इंडियन होमरूल सोसायटी की स्थापना की। उनकी मदद से विनायक दामोदर सावरकर भी लंदन पहुंचकर 'इंडिया हाउस' में क्रांतिकारी दल के नेता बन गए। वी.डी. सावरकर ने 'अभिनव भारत' सोसायटी के सदस्यों के लिए पिस्तौलें भेजने की व्यवस्था की। विनायक सावरकर के भाई गणेश सावरकर पर मुकदमा चलाया गया और सन् 1909 में उन्हें फांसी दे दी गई।
बंगाल में क्रांतिकारियों का नेतृत्व अरविन्द घोष के भाई वी.के. घोष ने किया। उन्होंने 'युगांतर' अखबार के माध्यम से जनता को राजनीतिक और धार्मिक शिक्षा देना शुरू किया। वी.एन. दत्त और वी.के. घोष के नेतृत्व में कई क्रांतिकारी समितियां बनाई गईं, जिनमें 'अनुशीलन समिति' प्रमुख थी। इस समिति की शाखाएं कलकत्ता (कोलकाता) और ढाका में थीं। इस समिति ने आतंकवादी कार्यक्रम शुरू किया। सन् 1907 में लेफ्टिनेंट गवर्नर की गाड़ी को बम से उड़ाने का असफल प्रयास किया गया। प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस इस समिति के महत्वपूर्ण सदस्य थे। चाकी ने खुद को गोली मार ली और खुदीराम बोस को फांसी दे दी गई।
कलकत्ता (कोलकाता) षडयंत्र में अरविन्द घोष, वी.के. घोष, हेमचंद्र दास, नरेन्द्र गोसाईं, के.एल. दत्त, एस.एन. बोस आदि को गिरफ्तार करके मुकदमे चलाए गए। के.एल. दत्त और एस.एन. बोस को फांसी पर लटका दिया गया। क्रांतिकारियों ने चुन-चुनकर पुलिस अफसरों, मजिस्ट्रेटों, सरकारी वकीलों, विरोधी गवाहों और देशद्रोहियों को गोली मार दी।
मदनलाल ढींगरा ने इंग्लैंड में, भारत में आक्रमणकारियों को दी गई अमानवीय सजाओं के विरोध में सर विलियम कर्जन वायली को गोली मार दी। इस कारण उन्हें फांसी दे दी गई।
पॉन्डिचेरी (पुदुचेरी) भी क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र था। एम.पी. तिरुमल आचार्य और वी.वी.एस. अय्यर यहां के मुख्य कार्यकर्ता थे। उनके एक शिष्य वांची अय्यर को जिला मजिस्ट्रेट को गोली से उड़ाने के अपराध में फांसी पर चढ़ा दिया गया।
क्रांतिकारी गतिविधियों का एक केंद्र अमेरिका के प्रशांत तट पर था। 'इंडो-अमेरिकन एसोसिएशन' और 'यंग इंडिया एसोसिएशन' के मुख्य कार्यालय कैलिफोर्निया में थे और अन्य स्थानों पर इनकी शाखाएं थीं। इनके कार्यकर्ता मुख्य रूप से बंगाली छात्र थे जिन्हें आयरिश-अमेरिकन छात्रों का सहयोग मिला था। बंगाल और पंजाब में सन् 1913-16 के दौरान क्रांतिकारी आंदोलन उग्र रूप में था। पंजाब के कुछ क्रांतिकारियों ने भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड हार्डिंग की जान लेने की कोशिश की। दिल्ली षडयंत्र केस में अमीरचंद, अवध बिहारी, बालमुकुंद, बसंत कुमार और विश्वास को मौत की सजा हुई। कनाडा के सिख लोगों के लौटने से पंजाब में क्रांतिकारी आंदोलन को बल मिला।
हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक पार्टी ने सरकार के दमन और आतंक का मुकाबला करते हुए क्रांतिकारी आंदोलन को बल दिया। सरदार भगतसिंह, यतींद्रनाथ दास और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे क्रांतिकारियों ने देश के लिए अपना जीवन दे दिया।
In simple words: उन्नीसवीं सदी के अंत और बीसवीं सदी की शुरुआत में पंजाब और बंगाल क्रांतिकारी गतिविधियों के मुख्य केंद्र थे। महाराष्ट्र में भी श्यामजी कृष्ण वर्मा और सावरकर बंधु सक्रिय थे। इन जगहों पर क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ हथियारबंद संघर्ष किया, जिसका उद्देश्य अंग्रेजों को डराकर आज़ादी पाना था।

🎯 Exam Tip: पंजाब और बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधियों का वर्णन करते समय प्रमुख संगठनों (जैसे अनुशीलन समिति), नेताओं और महत्वपूर्ण घटनाओं (जैसे काकोरी कांड, सांडर्स की हत्या) का उल्लेख करें।

 

Question 3. निम्नलिखित घटनाओं के कारण तथा परिणामों का संक्षेप में वर्णन कीजिए – [2016]
(a) काकोरी काण्ड, (b) सेन्ट्रल असेम्बली (केन्द्रीय विधानसभा बम प्रहार), (c) लाहौर काण्ड।
या
काकोरी हत्याकाण्ड कब और कहाँ घटित हुआ था? [2018]

Answer:
(a) काकोरी काण्ड
अगस्त, 1925 में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्यों ने लखनऊ के पास काकोरी नामक स्थान पर लखनऊ जाने वाली गाड़ी के एक डिब्बे में रखे सरकारी खजाने को लूट लिया। इस घटना में 29 क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर उन पर काकोरी षडयंत्र कांड में दो साल तक मुकदमा चलाया गया। क्रांतिकारियों में रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन लाल और राजेंद्र लाहिड़ी को फांसी दे दी गई। यह घटना ब्रिटिश सरकार के खिलाफ क्रांतिकारी संघर्ष में एक महत्वपूर्ण कदम थी। काकोरी कांड में "हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन" के अधिकांश नेता गिरफ्तार कर लिए गए, जिससे इस संगठन का अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया। कुछ समय बाद, इस कांड के एकमात्र बचे क्रांतिकारी सदस्य चंद्रशेखर आज़ाद ने सन् 1928 में दिल्ली के 'फिरोजशाह कोटला मैदान' में एक बैठक आयोजित की और वहीं पर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' की स्थापना की। 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' का पहला क्रांतिकारी कार्य लाहौर के सहायक पुलिस अधीक्षक 'सांडर्स' की हत्या थी। यह हत्या 30 अक्टूबर, 1928 को साइमन कमीशन के विरोध के कारण और लाला लाजपत राय की पुलिस द्वारा की गई पिटाई का बदला था। सांडर्स की हत्या में भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद और राजगुरु शामिल थे।
(b) असेम्बली में बम विस्फोट
ब्रिटिश सरकार द्वारा सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली में 'सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम' (पब्लिक सेफ्टी बिल) और 'व्यापार विवाद अधिनियम' (ट्रेड डिस्प्यूट बिल) पेश किए गए थे। इन अधिनियमों के तहत अंग्रेज सरकार और पुलिस को भारतीय क्रांतिकारियों तथा स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ ज्यादा अधिकार दिए गए थे। असेंबली में इन अधिनियमों को सिर्फ एक वोट से हरा दिया गया। इन अधिनियमों की स्वीकृति पर चर्चा के दौरान हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के कार्यकर्ताओं ने सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली में बम विस्फोट करने की योजना बनाई। क्रांतिकारी आंदोलन के नेता चंद्रशेखर आज़ाद, बम-विस्फोट के पक्ष में नहीं थे। किसी तरह से एसोसिएशन के अन्य नेताओं ने भगतसिंह की इस योजना में शामिल होने के लिए चंद्रशेखर आज़ाद को सहमत कर लिया। आज़ाद ने बम विस्फोट का काम बटुकेश्वर दत्त और भगतसिंह को सौंप दिया।
8 अप्रैल, 1929 को बटुकेश्वर दत्त और भगतसिंह असेंबली की दर्शक-दीर्घा में पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने 'इंकलाब जिंदाबाद' का नारा लगाया और बटुकेश्वर दत्त ने असेंबली के खाली स्थान (जहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था) पर कुछ बम फेंके। भगतसिंह ने कुछ छपे हुए पर्चे (पैम्फ्लेट्स) असेंबली में मौजूद सदस्यों पर फेंके जिन पर लिखा था “बहरों को कोई बात सुनाने के लिए अधिक कोलाहल की आवश्यकता पड़ती है।” बम फेंकने का उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं था। बाद में बटुकेश्वर दत्त और भगतसिंह को गिरफ्तार करके अदालत में पेश किया गया, जहां दोनों ने अपने अपराध को स्वीकार कर लिया। ब्रिटिश फोरेंसिक विशेषज्ञों ने भी इस बात की पुष्टि की कि बम इतने शक्तिशाली नहीं थे, जिनसे किसी को घायल भी किया जा सकता था। यह घटना इतनी बड़ी नहीं थी, जिसके लिए उन्हें फांसी दी जा सके। इसलिए 12 जून, 1929 को दिल्ली के सेशन जजों ने विस्फोटकजन्य पदार्थ एक्ट की धारा चार तथा इंडियन पीनल कोड की धारा 307 के तहत उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
बटुकेश्वर दत्त को अंडमान में स्थित सेलुलर जेल, जिसे 'काला पानी' के नाम से जाना जाता था, भेज दिया गया। उन्हें लाहौर षडयंत्र केस में भी अदालत में पेश किया गया जिसमें उनको निर्दोष साबित कर दिया गया। उन्होंने मई, 1933 और जुलाई, 1937 में सेलुलर जेल में दो बार ऐतिहासिक भूख हड़ताल की। सन् 1937 में ही बटुकेश्वर दत्त को हिंदुस्तान भेज दिया गया, जहां पर पटना की बांकीपुर जेल से उन्हें सन् 1938 में रिहा कर दिया गया।
(c) लाहौर काण्ड
भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त की गिरफ्तारी के कारण कई एच.एस.आर.ए. क्रांतिकारी भी गिरफ्तार किए गए और उन पर लाहौर षडयंत्र कांड में संयुक्त रूप से मुकदमा चलाया गया। जेल में रहते हुए जिन कैदियों पर मुकदमा चलाया जा रहा था, उन्होंने साधारण अपराधियों के बजाय राजनीतिक बंदियों का दर्जा प्राप्त करने के लिए भूख हड़ताल की थी। इन भूख-हड़तालियों में जतिन दास भी थे, जिनका 13 सितंबर, 1929 को अनशन के 64वें दिन देहांत हो गया। लाहौर षडयंत्र कांड में अधिकांश क्रांतिकारियों को दोषी पाया गया और उनमें से तीन भगतसिंह, सुखदेव तथा राजगुरु को 23 मार्च, 1931 को फांसी दे दी गई।
In simple words: काकोरी कांड में सरकारी खजाना लूटा गया। असेंबली में बम फेंकने का मकसद अंग्रेजों को जगाना था। लाहौर कांड में भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गई। ये सभी घटनाएं अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई के महत्वपूर्ण हिस्से थे।

🎯 Exam Tip: घटनाओं का वर्णन करते समय हमेशा तारीख, स्थान, शामिल व्यक्ति और उनका उद्देश्य या परिणाम स्पष्ट रूप से बताएं।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की शाखाएँ किन-किन जगहों पर स्थापित की गयी ?
Answer: अक्टूबर, 1924 में सभी क्रांतिकारी दलों ने लखनऊ में एक सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में शचीन्द्रनाथ सान्याल, जगदीशचंद्र चटर्जी, रामप्रसाद बिस्मिल, योगेश चटर्जी आदि शामिल थे। नए नेताओं में भगतसिंह, शिव वर्मा, सुखदेव, भगवतीचरण वोहरा, चंद्रशेखर आज़ाद आदि शामिल थे। नए क्रांतिकारी देशभक्तों ने कुछ नए संगठनों की स्थापना की। ये संगठन उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और बंगाल जैसे केंद्रों में बनाए गए। इस संगठन की मुख्य शाखाएं बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और मद्रास (चेन्नई) प्रांतों में स्थापित की गईं।
In simple words: हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की शाखाएं उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, बंगाल, बिहार और चेन्नई जैसे कई राज्यों में स्थापित की गईं। इसका उद्देश्य पूरे भारत में क्रांतिकारियों को संगठित करना था।

🎯 Exam Tip: क्रांतिकारी संगठनों की स्थापना के स्थान और उद्देश्यों को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है।

 

Question 2. देश को स्वतन्त्रता दिलाने में मौलाना आजाद का क्या योगदान रहा ? [2011, 16]
Answer: मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का देश को स्वतंत्रता दिलाने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान था। उन्होंने 'मुस्लिम लीग' की नीतियों का विरोध करते हुए भारतीय मुसलमानों को राष्ट्रीय मुख्यधारा में जोड़ने की कड़ी कोशिश की। उन्होंने अंग्रेजों की 'फूट डालो और शासन करो' की नीति का कड़ा विरोध किया। भारतीय मुसलमानों को जागरूक करने के लिए आज़ाद ने 'अल हिलाल' नामक पत्र का प्रकाशन शुरू किया। यह पत्र मुसलमानों में बहुत लोकप्रिय था। 1916 में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के आपसी समझौते में उनका सराहनीय सहयोग था। उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया, जिसके कारण उन्हें 1 वर्ष की सजा हुई। 1923 के कांग्रेस अधिवेशन में उन्हें अध्यक्ष चुना गया। 1930 में जब गांधी जी ने 'सविनय अवज्ञा-आंदोलन' चलाया तो आज़ाद ने सक्रिय सहयोग दिया। उन्होंने हमेशा देश की एकता को प्राथमिकता दी। 1940 से 1946 तक वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभापति रहे। 1947 की अंतरिम सरकार में वे शिक्षामंत्री रहे। स्वतंत्र भारत में 1958 तक वे लगातार शिक्षामंत्री के पद पर बने रहे। उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक 'इंडिया विन्स फ्रीडम' थी।
In simple words: मौलाना आज़ाद ने मुसलमानों को आज़ादी की लड़ाई में शामिल किया। उन्होंने अंग्रेजों की 'बांटो और राज करो' नीति का विरोध किया। उन्होंने 'अल हिलाल' अखबार भी शुरू किया।

🎯 Exam Tip: मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के योगदान को बताते समय उनकी प्रमुख भूमिकाओं (जैसे कांग्रेस अध्यक्ष, शिक्षामंत्री) और उनके लेखन का उल्लेख करें।

 

Question 3. भारत के स्वाधीनता आन्दोलन में सुभाषचन्द्र बोस के योगदान की विवेचना कीजिए। [2015, 18]
Answer: सुभाषचन्द्र बोस ने राष्ट्रीय आंदोलन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आर.सी. मजूमदार के शब्दों में- “गांधी जी के बाद भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष में सबसे प्रमुख व्यक्ति निस्संदेह सुभाषचंद्र बोस ही थे।” सुभाषचंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को उड़ीसा के कटक नगर में हुआ था। सुभाषचंद्र बोस एक महान देशभक्त थे। वे राजनीतिक यथार्थवाद से प्रेरित थे। उन्होंने लाहौर अधिवेशन में 1929 में पं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत 'पूर्ण स्वराज्य' के प्रस्ताव का समर्थन किया। यहीं पर उनके विचारों में अचानक क्रांतिकारी विचारधारा उत्पन्न हुई। वे 1929 के लाहौर कांग्रेस के अधिवेशन से बाहर निकलने पर उन्होंने कांग्रेस प्रजातंत्र पार्टी का निर्माण किया। इसके बाद उन्होंने फारवर्ड ब्लॉक नामक एक अन्य दल की स्थापना की। उन्होंने गांधी जी के स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया, किंतु सुभाष और गांधी दोनों के विचार एक-दूसरे से पूरी तरह विपरीत थे। गांधी जी शांतिपूर्ण तरीकों से स्वराज्य-प्राप्ति में विश्वास करते थे, जबकि बोस क्रांतिकारी नीतियों में विश्वास करते थे, लेकिन दोनों का लक्ष्य स्वराज्य-प्राप्ति ही था। सुभाषचंद्र बोस का विचार था कि गांधी जी की नीति से स्वराज्य कभी नहीं मिलेगा, क्योंकि अंग्रेज इतने सीधे और सरल नहीं थे कि वे भारत को आसानी से स्वतंत्रता दे दें। अतः वे क्रांतिकारी साधनों में विश्वास करते थे। जब द्वितीय विश्वयुद्ध चल रहा था तो उन्होंने कहा था, “यह स्वतंत्रता-प्राप्ति का अच्छा अवसर है। हमको संगठित होकर ब्रिटिश सरकार से सत्ता छीनने का प्रयत्न करना चाहिए।” किंतु इस समय कांग्रेस ने उनका साथ नहीं दिया। वे 1941 में वेश बदलकर भारत से बाहर चले गए और गुप्त रहकर भारत को स्वतंत्र कराने का प्रयत्न करते रहे। उन्होंने एक सेना संगठित कर उसका नाम 'आज़ाद हिन्द फौज' रखा। इनका उद्देश्य भारत को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराना था। बोस इस सेना के प्रधान सेनापति थे। उनका उद्घोष था-'दिल्ली चलो।' सुभाष बाबू ने सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा था-“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा।” इस सेना ने अंग्रेजों की सेना में कई बार सफल मोर्चा लिया। उन्होंने एक अस्थायी सरकार का गठन भी किया। सुभाष का व्यक्तित्व इतना विशाल था कि उस काल की विश्व-शक्तियों ने उन्हें भारत की अस्थायी सरकार का प्रथम राष्ट्रपति घोषित किया था। जिसे जापान और जर्मनी ने भी मान्यता दे दी थी, किंतु 1945 में एक वायुयान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई।
In simple words: सुभाषचंद्र बोस ने भारत की आज़ादी के लिए बहुत काम किया। उन्होंने 'आज़ाद हिन्द फौज' बनाई और 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा' का नारा दिया। वह गांधी जी के अहिंसक तरीकों से अलग थे और आजादी के लिए हथियारबंद संघर्ष में विश्वास रखते थे।

🎯 Exam Tip: सुभाष चंद्र बोस के योगदान में 'आज़ाद हिन्द फौज' की स्थापना, उनके नारे और ब्रिटिश सरकार के खिलाफ उनके संघर्ष को प्रमुखता से उल्लेख करें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. 'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' की स्थापना कब की गयी थी ?
Answer: 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' की स्थापना सन् 1924 में कानपुर में की गई थी। इस संगठन ने भारत में क्रांतिकारी गतिविधियों को बढ़ावा दिया।
In simple words: हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना 1924 में कानपुर में हुई थी।

🎯 Exam Tip: क्रांतिकारी संगठनों की स्थापना के वर्ष और स्थान जैसे सीधे तथ्यों को सटीक रूप से याद रखें।

 

Question 2. काकोरी काण्ड के अन्तर्गत कितने क्रान्तिकारियों को फाँसी की सजा दी गयी ?
Answer: काकोरी कांड में रामप्रसाद बिस्मिल, राजेंद्र लाहिड़ी, अशफाक उल्ला खां और रोशन लाल को फांसी की सजा दी गई थी। ये चार प्रमुख क्रांतिकारी थे जिन्हें इस घटना के लिए दंडित किया गया।
In simple words: काकोरी कांड में चार क्रांतिकारियों को फांसी दी गई थी।

🎯 Exam Tip: काकोरी कांड में फांसी पाने वाले सभी चार क्रांतिकारियों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. लाला लाजपत राय के ऊपर लाठी चार्ज किस प्रदर्शन के दौरान किया गया ?
Answer: लाहौर में साइमन कमीशन का विरोध-प्रदर्शन करते समय लाला लाजपत राय के ऊपर लाठी चार्ज किया गया था। यह घटना ब्रिटिश सरकार के दमनकारी नीतियों का प्रतीक थी।
In simple words: लाला लाजपत राय पर साइमन कमीशन के विरोध के समय लाठी चार्ज हुआ था।

🎯 Exam Tip: लाठीचार्ज जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं को उनके कारण (किस आंदोलन या विरोध के दौरान) से जोड़कर याद करें।

 

Question 4. सी.आर. दास की मृत्यु के बाद बंगाल में कांग्रेसी नेतृत्व कितने गुटों में विभक्त हो गया था ?
Answer: सी.आर. दास की मृत्यु के बाद बंगाल में कांग्रेसी नेतृत्व दो गुटों में बंट गया था। इससे बंगाल में राजनीतिक फूट और नेतृत्व की कमी हुई।
In simple words: सी.आर. दास की मृत्यु के बाद बंगाल में कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई थी।

🎯 Exam Tip: किसी प्रमुख नेता की मृत्यु के बाद राजनीतिक दलों में होने वाले विभाजनों और उनके परिणामों पर ध्यान दें।

 

Question 5. साण्डर्स की हत्या में कौन-कौन से क्रान्तिकारी शामिल थे?
Answer: सांडर्स की हत्या में भगतसिंह, चंद्रशेखर आज़ाद और राजगुरु शामिल थे। उन्होंने यह हत्या लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज का बदला लेने के लिए की थी।
In simple words: भगतसिंह, चंद्रशेखर आज़ाद और राजगुरु ने मिलकर सांडर्स की हत्या की थी।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल सभी प्रमुख व्यक्तियों के नाम याद रखना आवश्यक है।

 

Question 6. बंगाल में क्रान्तिकारी गतिविधियों का नेतृत्व किस-किसने किया?
Answer: बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधियों का नेतृत्व सुभाषचंद्र बोस और जे.एम. सेन गुप्त ने किया था। इन नेताओं ने बंगाल में स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई दिशा दी।
In simple words: बंगाल में सुभाषचंद्र बोस और जे.एम. सेन गुप्त ने क्रांतिकारी कामों को आगे बढ़ाया।

🎯 Exam Tip: विभिन्न क्षेत्रों में क्रांतिकारी नेतृत्वकर्ताओं के नाम और उनके योगदान को याद रखना महत्वपूर्ण है।

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. काकोरी काण्ड किस जगह घटित हुआ ?
(a) वाराणसी में
(b) गोरखपुर में
(c) लखनऊ में
(d) पंजाब में
Answer: (c) लखनऊ में
In simple words: काकोरी कांड लखनऊ शहर में हुआ था। यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना थी।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं के लिए सही स्थान और तारीख याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. चन्द्रशेखर आजाद ने 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन” की स्थापना कहाँ पर की थी ?
(a) पंजाब में
(b) इलाहाबाद में
(c) दिल्ली में
(d) लखनऊ में
Answer: (c) दिल्ली में
In simple words: चंद्रशेखर आज़ाद ने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना दिल्ली में की थी।

🎯 Exam Tip: संगठन के नाम और उनके संस्थापक तथा स्थापना स्थल को याद रखना चाहिए।

 

Question 3. भगतसिंह, सुखदेव एवं राजगुरु को फाँसी कहाँ दी गयी ?
(a) पेशावर में
(b) लाहौर में
(c) दिल्ली में
(d) मुम्बई में
Answer: (b) लाहौर में
In simple words: भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को लाहौर की जेल में फांसी दी गई थी।

🎯 Exam Tip: प्रमुख शहीदों के अंतिम स्थान और घटनाओं से जुड़े शहरों को याद रखें।

 

Question 4. भगतसिंह को फाँसी दी गयी [2011]
(a) 23 मार्च, 1925 ई. को
(b) 23 मार्च, 1927 ई. को
(c) 23 मार्च, 1931 ई. को
(d) 23 मार्च, 1935 ई. को
Answer: (c) 23 मार्च, 1931 ई. को
In simple words: भगतसिंह को 23 मार्च, 1931 को फांसी दी गई थी। यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक दुखद घटना थी।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं की सटीक तारीखें याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर शहीदों से संबंधित।

 

Question 5. वह स्थान जहाँ चन्द्रशेखर आजाद शहीद हुए [2012]
(a) कानपुर
(b) इलाहाबाद
(c) लखनऊ
(d) झाँसी
Answer: (b) इलाहाबाद
In simple words: चंद्रशेखर आज़ाद इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद हुए थे।

🎯 Exam Tip: प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान स्थल और उनसे जुड़ी घटनाओं को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. 'इण्डिया विन्स फ्रीडम' पुस्तक का लेखक कौन है?
(a) महात्मा गांधी
(b) सुभाषचन्द्र बोस
(c) मौलाना अबुल कलाम आजाद
(d) जवाहरलाल नेहरू
Answer: (c) मौलाना अबुल कलाम आजाद
In simple words: 'इंडिया विन्स फ्रीडम' किताब मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने लिखी थी। यह भारत की आजादी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण लेख है।

🎯 Exam Tip: प्रमुख व्यक्तियों द्वारा लिखी गई पुस्तकों के नाम और उनके लेखकों को याद रखें।

 

Question 7. लाला हरदयाल थे एक [2015, 16]
(a) वैज्ञानिक
(b) समाज सुधारक
(c) शिक्षाविद्
(d) क्रान्तिकारी
Answer: (d) क्रान्तिकारी
In simple words: लाला हरदयाल एक क्रांतिकारी थे जिन्होंने भारत की आजादी के लिए संघर्ष किया। उन्होंने 'गदर पार्टी' की स्थापना भी की थी।

🎯 Exam Tip: स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं और उनके मुख्य योगदान (जैसे उनकी भूमिका) को जानें।

 

Question 8. हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का संस्थापक निम्नलिखित में से कौन था? (2017)
(a) अशफाक उल्ला खाँ
(b) शचीन्द्रनाथ सान्याल
(c) चन्द्रशेखर आजाद
(d) योगेश चटर्जी ।
Answer: (c) चन्द्रशेखर आजाद
In simple words: चंद्रशेखर आज़ाद हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के संस्थापकों में से एक थे। उन्होंने इस संगठन को फिर से खड़ा किया था।

🎯 Exam Tip: विभिन्न क्रांतिकारी संगठनों के संस्थापकों या प्रमुख नेताओं के नाम याद रखें।

 

Question 9. भगत सिंह को कब फाँसी दी गयी? (2018)
(a) 23 मार्च, 1927
(b) 23 मार्च, 1931
(c) 23 मार्च, 1935
(d) 23 मार्च, 1937
Answer: (b) 23 मार्च, 1931
In simple words: भगत सिंह को 23 मार्च, 1931 को फाँसी दी गई। यह भारतीय इतिहास की एक बहुत महत्वपूर्ण और दुखद तारीख है।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं की सटीक तारीखें, खासकर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी, हमेशा याद रखें।

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