UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 14 Savinay Avagya Aandolan Tatha Bharat Chhodo Aandolan

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Detailed Chapter 14 सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा भारत छोड़ो आंदोलन UP Board Solutions for Class 10 Social Science

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Class 10 Social Science Chapter 14 सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा भारत छोड़ो आंदोलन UP Board Solutions PDF

विरतृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. सविनय अवज्ञा आन्दोलन के क्या कारण थे ? उसके परिणामों पर प्रकाश डालिए। [2010, 11]
या
सविनय अवज्ञा आन्दोलन किन परिस्थितियों में प्रारम्भ किया गया ? इसका क्या प्रभाव पड़ा ? [2010]
या
सविनय अवज्ञा आन्दोलन का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करें। [2018]
Answer: सविनय अवज्ञा आन्दोलन का मतलब है विनम्रता से किसी आज्ञा या कानून को न मानना. मार्च 1930 में महात्मा गांधी ने यह आन्दोलन शुरू किया. इस आन्दोलन में उन्होंने गुजरात के डांडी नामक जगह से समुद्र तट तक पैदल यात्रा की, जिसमें हजारों लोगों ने उनका साथ दिया. वहाँ गांधी जी ने खुद नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा. इसके बाद, हजारों लोगों और बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया. यह आन्दोलन कुछ खास हालात में शुरू हुआ था:

1. अंग्रेजों ने एक नमक कानून बनाया था, जिससे गरीब भारतीयों पर बुरा असर पड़ा. इसलिए वे अंग्रेजों के इस गलत कानून से बहुत गुस्सा थे.

2. साइमन कमीशन में कोई भारतीय प्रतिनिधि शामिल नहीं था, जिससे लोगों में गुस्सा फैल गया.

3. अंग्रेजों ने नेहरू रिपोर्ट के अनुसार भारतीयों को डोमिनियन स्टेटस देने से मना कर दिया था, जिससे लोग बहुत निराश थे.

4. बारदोली में किसानों का आन्दोलन सफल हुआ था. इसकी सफलता देखकर गांधी जी को अंग्रेजों के खिलाफ एक और आन्दोलन शुरू करने की प्रेरणा मिली.

आन्दोलन की शुरुआत (सन् 1930-31 ई०): सविनय अवज्ञा आन्दोलन गांधी जी की डांडी यात्रा से शुरू हुआ. उन्होंने 12 मार्च 1930 को यह यात्रा शुरू की और 6 अप्रैल 1930 को डांडी के समुद्री तट पर पहुँच गए. वहाँ उन्होंने समुद्र के पानी से नमक बनाया और नमक कानून तोड़ दिया. यहीं से यह आन्दोलन पूरे देश में फैल गया. बहुत से लोगों ने सरकारी कानूनों को मानने से इनकार कर दिया.

सरकार ने इस आन्दोलन को दबाने के लिए कठोर कदम उठाए. गांधी जी और कई दूसरे आन्दोलनकारियों को जेल में डाल दिया गया. फिर भी आन्दोलन की गति कम नहीं हुई. इसी बीच गांधी जी और तत्कालीन वायसराय के बीच एक समझौता हुआ. इस समझौते के तहत गांधी जी ने दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने और आन्दोलन को रोकने की बात मान ली. इस तरह 1931 में सविनय अवज्ञा आन्दोलन कुछ समय के लिए रुक गया.

आन्दोलन की प्रगति (सन् 1930-33 ई०) तथा अन्त: 1931 में लंदन में दूसरा गोलमेज सम्मेलन बुलाया गया था. कांग्रेस की तरफ से गांधी जी ने इसमें हिस्सा लिया, लेकिन इस सम्मेलन में भी भारतीयों की समस्या का कोई सही हल नहीं निकला. गांधी जी निराश होकर भारत वापस आ गए और उन्होंने फिर से आन्दोलन शुरू कर दिया. सरकार ने आन्दोलनकारियों पर फिर से अत्याचार करने शुरू कर दिए. इन अत्याचारों के कारण आन्दोलन की गति थोड़ी धीमी हो गई. कांग्रेस ने 1933 में इस आन्दोलन को पूरी तरह बंद कर दिया.

परिणाम / प्रभाव: इस आन्दोलन के कई महत्वपूर्ण परिणाम हुए:

1. यह पहला मौका था जब इतनी बड़ी संख्या में भारतीयों ने किसी आन्दोलन में हिस्सा लिया.

2. इस आन्दोलन में मजदूर, किसान, महिलाएं और बड़े वर्ग के लोग-सभी शामिल हुए.

3. सरकारी अत्याचारों के बावजूद, लोगों ने हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया. इससे भारतीयों में आत्मविश्वास बढ़ा.

4. इस आन्दोलन ने कांग्रेस की कुछ कमजोरियों को भी सामने ला दिया. कांग्रेस के पास भविष्य के लिए कोई स्पष्ट आर्थिक-सामाजिक योजना नहीं थी, जिससे वह भारतीय जनता के पूरे गुस्से का सही इस्तेमाल नहीं कर सकी. यह आंदोलन भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जिसने लोगों में राष्ट्रीय चेतना को और मजबूत किया.
In simple words: सविनय अवज्ञा आन्दोलन गांधी जी ने अंग्रेजों के गलत कानूनों के खिलाफ शुरू किया था. इसमें नमक कानून तोड़ना और शांति से विरोध करना शामिल था. इस आंदोलन से भारतीयों में आत्मविश्वास बढ़ा, लेकिन कांग्रेस की कुछ कमजोरियां भी सामने आईं.

🎯 Exam Tip: जब सविनय अवज्ञा आन्दोलन के कारणों और परिणामों के बारे में पूछा जाए, तो डांडी मार्च, नमक कानून तोड़ना, और लोगों की भागीदारी जैसे मुख्य बिन्दुओं पर ध्यान दें. हर बिन्दु को स्पष्ट और संक्षिप्त रखें.

 

Question 2. भारत छोड़ो आन्दोलन के कारण एवं परिणाम पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
या
कांग्रेस ने 'भारत छोड़ो आन्दोलन' क्यों प्रारम्भ किया ? इसकी असफलता के क्या कारण थे?
या
भारत छोड़ो आन्दोलन के तीन कारण लिखिए। ब्रिटिश सरकार की इस पर क्या प्रतिक्रिया थी ? क्या आपके मत में यह असफल रहा ? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए। [2013]
या
भारत छोड़ो आन्दोलन क्या था ? इसका क्या प्रभाव पड़ा ? (2013)
या
भारत छोड़ो आन्दोलन की असफलता के दो प्रमुख कारणों का उल्लेख कीजिए [2016]
या
भारत छोड़ो आन्दोलन किसने चलाया ? इसके कोई दो कारण बताइए। [2016]
या
'भारत छोड़ो आन्दोलन' के तीन प्रमुख बिन्दुओं को इंगित कीजिए। [2017]
या
भारत छोड़ो आन्दोलन का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करें। [2018]
Answer: मार्च 1942 में सर स्टेफर्ड क्रिप्स कुछ प्रस्तावों के साथ भारत आए. इन प्रस्तावों में कहा गया था कि भारतीयों को सुरक्षा को छोड़कर भारत सरकार के सभी विभाग सौंप दिए जाएँगे. क्रिप्स का यह प्रस्ताव "स्वीकार करो या छोड़ दो" की भावना पर आधारित था, जिसे भारतीयों ने स्वीकार नहीं किया. आखिर में, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने 8 अगस्त 1942 को "भारत छोड़ो" का मशहूर प्रस्ताव मान लिया और इस आन्दोलन की जिम्मेदारी महात्मा गांधी को सौंप दी. यह आन्दोलन महात्मा गांधी ने ही चलाया था.

भारत छोड़ो आन्दोलन के कारण: भारत छोड़ो आन्दोलन शुरू करने के मुख्य कारण ये थे:

1. जापान का हमला बढ़ने का डर था. गांधी जी चाहते थे कि भारत इस हमले से सुरक्षित रहे, जो तभी मुमकिन था जब अंग्रेज भारत छोड़ दें.

2. अंग्रेज हर जगह हार रहे थे. सिंगापुर और बर्मा उनके हाथ से निकल चुके थे. गांधी जी को लगा कि अगर अंग्रेज भारत नहीं छोड़ते, तो यहाँ के लोगों का भी वही हाल होगा जो बर्मा और मलाया के लोगों का हुआ. उनका मानना था कि अगर अंग्रेज भारत छोड़ दें, तो जापान भारत पर हमला नहीं करेगा.

3. हिटलर और उसके साथियों का प्रचार बहुत बढ़ रहा था, जिसका असर भारतीयों पर भी पड़ रहा था. सुभाषचंद्र बोस भी बर्लिन से हिंदी में भाषण दे रहे थे. ऐसा महसूस हुआ कि भारत की रक्षा के लिए लोगों में जोश भरना जरूरी है, और यह तभी हो सकता था जब देश में एक बड़ा आन्दोलन हो.

4. बर्मा (म्यांमार) छोड़ने के समय भारतीयों के साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया गया. भारत लौटते समय उन्हें बहुत सी परेशानियाँ झेलनी पड़ीं. इस कारण भारत में अंग्रेजों के खिलाफ बहुत गुस्सा था, जिसने गांधी जी को आन्दोलन चलाने पर मजबूर किया.

5. दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान अंग्रेजों ने भारत में 'सब-कुछ जलाने' की नीति अपनाई थी. इससे बहुत से भारतीयों को नुकसान हुआ. कई लोगों की जमीनें बर्बाद हो गईं, उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला. कई लोगों की रोजी-रोटी छिन गई, चीजों के दाम बढ़ गए, और देश में असंतोष फैल गया. इन हालात का फायदा उठाने के लिए गांधी जी ने यह आन्दोलन शुरू किया.

भारत छोड़ो आन्दोलन के परिणाम / प्रभाव अथवा असफलता के कारण: भारत छोड़ो आन्दोलन के ये परिणाम/प्रभाव हुए:

1. आन्दोलन का तुरंत परिणाम यह हुआ कि ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गांधी और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सभी सदस्यों को जेल भेज दिया. कांग्रेस को गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया और उसके कार्यालयों पर पुलिस ने कब्जा कर लिया. सरकार की यह नीति कांग्रेस को दबाने के लिए थी.

2. आम जनता चुपचाप नहीं बैठी रही, उसने भी सरकार के खिलाफ विद्रोह शुरू कर दिया. गांधी जी ने यह नहीं सोचा था कि सरकार उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लेगी. इसका नतीजा यह हुआ कि गांधी जी और कांग्रेस के दूसरे नेताओं के गिरफ्तार होने के बाद आन्दोलन को दिशा देने वाला कोई नेता नहीं रहा. लोगों ने अपने मन से काम किया.

3. जब सरकार ने निर्दोष पुरुषों, महिलाओं और बच्चों पर गोली चलाई, तब लोगों ने भी हिंसा का रास्ता अपनाया. जहाँ भी अंग्रेज मिले, उन्हें मार डाला गया. बहुत मुश्किलों के बाद ब्रिटिश सरकार फिर से देश में अपनी सत्ता स्थापित करने में सफल हुई. भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसने अंग्रेजों को यह एहसास करा दिया कि अब भारत को गुलाम बनाए रखना मुश्किल है.
In simple words: भारत छोड़ो आन्दोलन 1942 में गांधी जी ने शुरू किया था. इसके पीछे जापान के हमले का डर, अंग्रेजों की हार, और भारतीयों के साथ खराब बर्ताव जैसे कारण थे. आन्दोलन के दौरान कई नेताओं को जेल हुई और लोगों ने भी काफी विरोध किया, लेकिन नेतृत्व की कमी के कारण इसे दबा दिया गया.

🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आन्दोलन के बारे में लिखते समय, 'करो या मरो' का नारा, क्रिप्स मिशन की असफलता, और आन्दोलन के तात्कालिक और दीर्घकालिक प्रभावों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है. यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था.

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. गांधी-इरविन समझौते के मुख्य चार बिन्दुओं पर प्रकाश डालिए ।
Answer: गांधी-इरविन समझौते (जिसे दिल्ली पैक्ट भी कहते हैं) के चार मुख्य बिन्दु ये थे:

1. जिन राजनीतिक कैदियों पर हिंसा का आरोप नहीं था, उन्हें छोड़कर बाकी सभी को रिहा कर दिया जाएगा.

2. भारतीय लोग समुद्र के किनारे नमक खुद बना सकेंगे, यह उनका अधिकार होगा.

3. भारतीय लोग शराब और विदेशी कपड़ों की दुकानों पर कानून की सीमा के अंदर धरना दे सकते हैं.

4. जिन सरकारी कर्मचारियों ने इस्तीफा दिया था, सरकार उन्हें वापस लेने में थोड़ी उदारता दिखाएगी. यह समझौता भारत में राजनीतिक तनाव को कम करने की एक कोशिश थी.
In simple words: गांधी और इरविन के बीच एक समझौता हुआ था. इसमें कुछ कैदियों को छोड़ने, भारतीयों को नमक बनाने की इजाजत देने, शराब और विदेशी कपड़ों की दुकानों के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और इस्तीफा देने वाले सरकारी कर्मचारियों को वापस लेने की बात शामिल थी.

🎯 Exam Tip: गांधी-इरविन समझौते के बिन्दुओं को याद रखने के लिए, प्रमुख शब्दों जैसे 'कैदियों की रिहाई', 'नमक बनाना', 'शांतिपूर्ण धरना', और 'कर्मचारियों की वापसी' पर ध्यान दें.

 

Question 2. स्वराज पार्टी का गठन क्यों किया गया था ?
Answer: महात्मा गांधी के गिरफ्तार होने के बाद जनता का उत्साह कम हो गया था. उस समय कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई थी, जहाँ कौन्सिल (विधानसभा) में शामिल होने को लेकर मतभेद थे. एक गुट का मानना था कि कौन्सिल में जाकर सरकार के कामों में बाधा डालनी चाहिए, इन्हें 'परिवर्तनवादी' कहा गया. मोतीलाल नेहरू और चितरंजन दास इसके प्रमुख नेता थे. दूसरे गुट का कहना था कि कौन्सिल का पूरी तरह से बहिष्कार करना चाहिए, इन्हें 'अपरिवर्तनवादी' कहा गया. परिवर्तनवादी नेताओं ने एक नई पार्टी 'स्वराज पार्टी' बनाई. स्वराज पार्टी को विधानसभाओं में अच्छी सीटें मिलीं. इस पार्टी ने सरकार के कामों में रुकावट डालकर अपने मकसद में कुछ हद तक सफलता पाई. लेकिन 1925 में इसके नेता सी.आर. दास की मौत के बाद पार्टी का असर कम हो गया. यह पार्टी भारतीयों को अपनी राजनीतिक आवाज उठाने का एक नया तरीका देती थी.
In simple words: स्वराज पार्टी इसलिए बनी थी क्योंकि कांग्रेस में कुछ नेता चाहते थे कि चुनाव लड़कर विधानसभा में जाएं और सरकार के कामों में रुकावट डालें. गांधी जी की गिरफ्तारी के बाद जब लोगों का जोश ठंडा पड़ गया, तो मोतीलाल नेहरू और चितरंजन दास जैसे नेताओं ने मिलकर यह पार्टी बनाई.

🎯 Exam Tip: स्वराज पार्टी के गठन के कारणों में 'कौन्सिल में प्रवेश', 'सरकार के कार्यों में बाधा' और 'महात्मा गांधी की गिरफ्तारी' जैसे प्रमुख बिन्दुओं को स्पष्ट रूप से समझाएं.

 

Question 3. 1930-1942 ई० के बीच की प्रमुख घटनाओं को एक चार्ट द्वारा तिथिक्रमबद्ध कीजिए ।
Answer: 1930-1942 ई. के बीच की प्रमुख घटनाएँ इस प्रकार हैं:

1. मार्च, 1930: डांडी मार्च और सविनय अवज्ञा आन्दोलन की शुरुआत.

2. मार्च, 1931: सविनय अवज्ञा आन्दोलन वापस ले लिया गया.

3. दिसम्बर, 1931: दूसरा गोलमेज सम्मेलन हुआ, जिसके बाद सविनय अवज्ञा आन्दोलन फिर से शुरू हुआ.

4. मार्च, 1942: सर स्टेफर्ड क्रिप्स भारत आए.

5. अगस्त, 1942: भारत छोड़ो आन्दोलन शुरू हुआ. ये घटनाएं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में महत्वपूर्ण मोड़ थीं.
In simple words: 1930 से 1942 के बीच डांडी मार्च, सविनय अवज्ञा आन्दोलन का शुरू और खत्म होना, दूसरा गोलमेज सम्मेलन, क्रिप्स मिशन का भारत आना, और भारत छोड़ो आन्दोलन का शुरू होना जैसी बड़ी घटनाएं हुईं.

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं को कालानुक्रम में याद रखने के लिए, हर घटना के साथ उसकी सही तारीख को जोड़कर याद करें. यह घटनाओं की श्रृंखला को समझने में मदद करता है.

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन की शुरुआत किस कानून को तोड़कर प्रारम्भ की ?
Answer: गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन की शुरुआत 'नमक कानून' को तोड़कर की थी. उन्होंने खुद नमक बनाकर इस कानून का विरोध किया था. यह अंग्रेजों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक कदम था.
In simple words: गांधी जी ने नमक कानून तोड़कर सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू किया था.

🎯 Exam Tip: सविनय अवज्ञा आन्दोलन का कारण और इसकी शुरुआत के तरीके को याद रखें, खासकर 'नमक कानून' का उल्लंघन एक प्रमुख बिन्दु है.

 

Question 2. स्वराज पार्टी का गठन किसने किया था ? [2011]
Answer: स्वराज पार्टी का गठन मोतीलाल नेहरू और चितरंजन दास ने मिलकर किया था. वे कांग्रेस के उन नेताओं में से थे जो विधानसभा चुनावों में भाग लेकर सरकारी नीतियों का विरोध करना चाहते थे.
In simple words: स्वराज पार्टी को मोतीलाल नेहरू और चितरंजन दास ने बनाया था.

🎯 Exam Tip: स्वराज पार्टी के संस्थापकों के नाम हमेशा याद रखें- मोतीलाल नेहरू और चितरंजन दास. यह भारतीय राजनीति के महत्वपूर्ण व्यक्तियों में से थे.

 

Question 3. प्रथम गोलमेज सम्मेलन कहाँ पर आयोजित किया गया ?
Answer: प्रथम गोलमेज सम्मेलन लंदन में आयोजित किया गया था. यह भारत में संवैधानिक सुधारों पर चर्चा करने के लिए ब्रिटिश सरकार और भारतीय प्रतिनिधियों के बीच हुआ एक महत्वपूर्ण आयोजन था.
In simple words: पहला गोलमेज सम्मेलन लंदन शहर में हुआ था.

🎯 Exam Tip: गोलमेज सम्मेलनों के स्थान और उनके उद्देश्य को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर लंदन में आयोजित पहला सम्मेलन.

 

Question 4. भारत छोड़ो आन्दोलन में गांधी जी ने कौन-सा नारा दिया ? [2017]
Answer: भारत छोड़ो आन्दोलन में गांधी जी ने "करो या मरो" का नारा दिया था. यह नारा भारतीयों में स्वतंत्रता के लिए अंतिम और निर्णायक संघर्ष की भावना को जगाने के लिए था, जिसमें हर नागरिक को अपनी पूरी ताकत लगानी थी.
In simple words: भारत छोड़ो आन्दोलन के समय गांधी जी ने "करो या मरो" का नारा दिया था.

🎯 Exam Tip: 'करो या मरो' का नारा भारत छोड़ो आन्दोलन का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है; इसे हमेशा गांधी जी से जोड़कर याद रखें.

 

Question 5. गांधी जी द्वारा चलाये गये किन्हीं दो आन्दोलनों के नाम लिखिए। सविनय अवज्ञा आन्दोलन आरम्भ होने के क्या कारण थे? कोई दो कारण लिखिए। [2012]
या
महात्मा गांधी द्वारा प्रारम्भ किये गये किन्हीं दो आन्दोलनों के नाम लिखिए। (2015)
Answer: गांधी जी द्वारा चलाये गये दो आन्दोलनों के नाम हैं:

1. सविनय अवज्ञा आन्दोलन

2. भारत छोड़ो आन्दोलन

सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू होने के दो कारण ये थे:

1. साइमन कमीशन में भारतीयों को कोई प्रतिनिधित्व न मिलने के कारण लोगों में गुस्सा था.

2. अंग्रेजों ने नेहरू रिपोर्ट के तहत भारतीयों को डोमिनियन स्टेटस देने से मना कर दिया था. ये कारण भारतीय जनता के असंतोष को दर्शाते थे.
In simple words: गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन और भारत छोड़ो आन्दोलन जैसे बड़े आंदोलन चलाए. सविनय अवज्ञा आंदोलन इसलिए शुरू हुआ क्योंकि साइमन कमीशन में भारतीय नहीं थे और नेहरू रिपोर्ट में डोमिनियन स्टेटस नहीं मिला था.

🎯 Exam Tip: गांधी जी के प्रमुख आन्दोलनों के नाम और उनके मुख्य कारणों को याद रखें. इससे आप भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे.

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. साइमन कमीशन कब भारत पहुँचा ? [2011]
(क) 1923 ई० में
(ख) 1928 ई० में
(ग) 1929 ई० में
(घ) 1930 ई० में
Answer: (ख) 1928 ई० में
In simple words: साइमन कमीशन 1928 में भारत आया था, और इसका उद्देश्य भारत में संवैधानिक सुधारों का अध्ययन करना था.

🎯 Exam Tip: साइमन कमीशन के भारत आगमन की तारीख को याद रखें, क्योंकि यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण घटना थी.

 

Question 2. सविनय अवज्ञा आन्दोलन का मुख्य केन्द्र कहाँ था ? [2017]
(क) साबरमती आश्रम
(ख) पोरबन्दर
(ग) खेड़ा
(घ) सूरत
Answer: (क) साबरमती आश्रम
In simple words: सविनय अवज्ञा आन्दोलन की शुरुआत साबरमती आश्रम से डांडी मार्च के साथ हुई थी.

🎯 Exam Tip: सविनय अवज्ञा आन्दोलन का मुख्य केंद्र साबरमती आश्रम था, जहाँ से गांधी जी ने अपनी ऐतिहासिक डांडी यात्रा शुरू की थी.

 

Question 3. गांधी-इरविन समझौता कब हुआ ?
(क) 1932 ई० में
(ख) 1930 ई० में
(ग) 1931 ई० में
(घ) 1928 ई० में
Answer: (ग) 1931 ई० में
In simple words: गांधी जी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच यह समझौता 1931 में हुआ था.

🎯 Exam Tip: गांधी-इरविन समझौते की तारीख (1931) को याद रखें, क्योंकि यह सविनय अवज्ञा आन्दोलन के निलंबन से जुड़ा था.

 

Question 4. भारत छोड़ो आन्दोलन का प्रस्ताव किस स्थान पर स्वीकार किया गया ?
या
कांग्रेस ने सन् 1942 में 'भारत छोड़ो आन्दोलन' प्रस्ताव कहाँ पारित किया था ? (2013)
(क) मुम्बई में
(ख) दिल्ली में
(ग) गुजरात में
(घ) वाराणसी में
Answer: (क) मुम्बई में
In simple words: भारत छोड़ो आन्दोलन का प्रस्ताव मुम्बई में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा स्वीकार किया गया था.

🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आन्दोलन के प्रस्ताव के पारित होने का स्थान (मुम्बई) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण तथ्य है.

 

Question 5. साइमन कमीशन का विरोध करते हुए निम्नलिखित में से कौन पुलिस की लाठियों के प्रहार से शहीद हुए ? [2011]
(क) मोतीलाल नेहरू
(ख) लाला लाजपत राय
(ग) गोपालकृष्ण गोखले
(घ) देशबन्धु चितरंजन दास
Answer: (ख) लाला लाजपत राय
In simple words: साइमन कमीशन के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की लाठी चार्ज में लाला लाजपत राय शहीद हो गए थे.

🎯 Exam Tip: लाला लाजपत राय का नाम साइमन कमीशन के विरोध और उनके बलिदान से जुड़ा है, इसे हमेशा याद रखें.

 

Question 6. गांधी जी ने डाण्डी यात्रा की थी [2011]
(क) रोलेट ऐक्ट के विरोध में
(ख) क्रिप्स प्रस्ताव के विरोध में
(ग) उत्तरदायी शासन की स्थापना हेतु
(घ) नमक कानून तोड़ने हेतु
Answer: (घ) नमक कानून तोड़ने हेतु
In simple words: गांधी जी ने डांडी यात्रा नमक पर लगे ब्रिटिश कानून को तोड़ने के लिए की थी.

🎯 Exam Tip: डांडी यात्रा का मुख्य उद्देश्य नमक कानून तोड़ना था, जो सविनय अवज्ञा आन्दोलन की शुरुआत का प्रतीक था.

 

Question 7. गांधी जी के अतिरिक्त किसका जन्मदिन दो अक्टूबर को मनाया जाता है? [2013]
(क) इन्दिरा गांधी
(ख) लाल बहादुर शास्त्री
(ग) गोविन्द वल्लभ पन्त
(घ) मोरारजी देसाई
Answer: (ख) लाल बहादुर शास्त्री
In simple words: महात्मा गांधी के अलावा, भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन भी 2 अक्टूबर को मनाया जाता है.

🎯 Exam Tip: 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के साथ-साथ लाल बहादुर शास्त्री जयंती भी मनाई जाती है, यह एक महत्वपूर्ण सामान्य ज्ञान का तथ्य है.

 

Question 8. गांधी जी ने नमक सत्याग्रह कहाँ प्रारम्भ किया था? (2017)
(क) पोरबन्दर
(ख) डाण्डी
(ग) वर्धा
(घ) चम्पारन
Answer: (ख) डाण्डी
In simple words: गांधी जी ने नमक सत्याग्रह डांडी नामक जगह पर शुरू किया था, जहाँ उन्होंने समुद्र से नमक बनाकर कानून तोड़ा था.

🎯 Exam Tip: नमक सत्याग्रह की शुरुआत का स्थान 'डांडी' भारतीय इतिहास में एक मील का पत्थर है और इसे हमेशा याद रखना चाहिए.

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