UP Board Solutions Class 10 Science Chapter 9 Heredity and Evolution

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Detailed Chapter 9 आनुवंशिकता और विकास UP Board Solutions for Class 10 Science

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UP Board Solutions For Class 10 Science Chapter 9 Heredity And Evolution (अनुवांशिकता एवं जैव विकास)

पाठगत हल प्रश्न

[NCERT IN-TEXT QUESTIONS SOLVED]

खंड 9.1 (पृष्ठ संख्या 157)

 

Question 1. यदि एक 'लक्षण-A' अलैंगिक प्रजनन वाले समष्टि के 10 प्रतिशत जीवों में पाया जाता है तथा ‘लक्षण B' उसी समष्टि के 60 प्रतिशत जीवों में पाया जाता है, तो कौन-सा लक्षण पहले उत्पन्न हुआ होगा?
Answer: लक्षण-B पहले उत्पन्न हुआ होगा क्योंकि यह 60 प्रतिशत है तथा पीढ़ी दर पीढी लक्षण (trail or variations) किसी समष्टि की जनसंख्या संग्रहित होते हैं।
In simple words: लक्षण-B पहले उत्पन्न हुआ होगा क्योंकि यह जनसंख्या में अधिक व्यापक है (60% जीवों में पाया जाता है), जबकि लक्षण-A केवल 10% जीवों में है। अधिक व्यापक लक्षण अक्सर पहले विकसित होते हैं और पीढ़ियों तक बने रहते हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, जनसंख्या में अधिक प्रतिशत वाला लक्षण पहले उत्पन्न हुआ माना जाता है क्योंकि यह अधिक स्थिर और फैला हुआ होता है।

 

Question 2. विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज़ का अस्तित्व किस प्रकार बढ़ जाता है?
Answer: विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज़ के अस्तित्व की संभावना इसलिए बढ़ जाती है, क्योंकि वह स्पीशीज़ स्वयं को वातावरण के अनुसार अनुकूलित करने में सक्षम हो जाता है। उदाहरण के लिए उष्णता को सहन करने की क्षमता वाले जीवाणुओं को अधिक गर्मी से बचने की संभावना अधिक होती है। यदि वैश्विक ऊष्मीकरण (global warming) के कारण जल का ताप बढ़ जाता है, तो जीवाणु मर जाते हैं केवल उष्ण प्रतिरोधी क्षमता वाले ही जीवित रह पाते हैं।
In simple words: विभिन्नताएँ किसी स्पीशीज़ को बदलते वातावरण में जीवित रहने और अनुकूलन करने में मदद करती हैं, जिससे उनके अस्तित्व की संभावना बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, यदि तापमान बढ़ता है, तो गर्मी प्रतिरोधी जीवाणु जीवित रह पाते हैं जबकि अन्य मर जाते हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्नताएँ जैव-विकास की कुंजी हैं, क्योंकि वे जीवों को बदलते पर्यावरणीय दबावों के खिलाफ एक "सुरक्षा कवच" प्रदान करती हैं।

खंड 9.2 (पृष्ठ संख्या 161)

 

Question 1. मेंडल के प्रयोगों द्वारा कैसे पता चला कि लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी हैं?
Answer: मेंडल ने पाया कि शुद्ध लंबे मटर के पौधे तथा शुद्ध बौने मटर के पौधे के बीच संकरण से F₁ पीढ़ी में प्राप्त सभी पौधे लंबे थे।
I.
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख मेंडल के मटर के पौधों पर किए गए प्रयोगों को दर्शाता है। इसमें एक लंबे पौधे (TT) और एक बौने पौधे (tt) के बीच संकरण (cross) दिखाया गया है। F1 पीढ़ी में सभी पौधे लंबे (Tt) होते हैं, जो यह दर्शाता है कि लंबापन एक प्रभावी लक्षण है। इसके बाद, F1 पीढ़ी के पौधों में स्वपरागण (self-pollination) से F2 पीढ़ी प्राप्त होती है जिसमें लंबे और बौने पौधे 3:1 के अनुपात में होते हैं। अर्थात्, दो लक्षणों में से केवल एक पैतृक जनकीय लक्षण ही दिखाई देता है। इसे प्रभावी लक्षण (Dominant traits) कहते हैं। द्वितीय चरण में उन्होंने F₁ (Tt) पीढ़ी से प्राप्त पौधों में स्वपरागण करवाया तो पाया कि लंबे तथा बौने पौधे का अनुपात 3:1 था । अर्थात् F2 पीढ़ी में भी लंबे पौधे प्रभावी थे, परंतु बौने पौधे अप्रभावी लक्षण (recessive traits) वाले भी थे ।
II.
यह इंगित करता है कि F₁ पौधों द्वारा लंबाई एवं बौनेपन दोनों के विकल्पी लक्षणों की वंशानुगति हुई। F₁ पीढ़ी में लंबाई वाला विकल्प अपने आपको व्यक्त कर पाया क्योंकि वह प्रभावी विकल्प है और बौनापन अप्रभावी विकल्प है। अर्थात् मेंडल के प्रयोग से स्पष्ट हो जाता है कि लक्षण प्रभावी या अप्रभावी हो सकते हैं।
In simple words: मेंडल ने शुद्ध लंबे और शुद्ध बौने पौधों को क्रॉस किया। F₁ पीढ़ी में सभी पौधे लंबे थे, जिससे पता चला कि 'लंबापन' प्रभावी लक्षण है। फिर, F₁ पीढ़ी के पौधों के स्वपरागण से F₂ पीढ़ी में लंबे और बौने पौधे 3:1 के अनुपात में मिले, जिससे 'बौनापन' अप्रभावी लक्षण साबित हुआ।

🎯 Exam Tip: मेंडल के एकसंकर संकरण का 3:1 अनुपात प्रभावी और अप्रभावी लक्षणों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। F1 पीढ़ी में केवल प्रभावी लक्षण ही दिखते हैं।

 

Question 2. मेंडल के प्रयोगों से कैसे पता चला कि विभिन्न लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं?
Answer: मेंडल के प्रयोग में F₁ पीढ़ी के सभी पौधे लंबे थे तथा पुनः जब F₁ पीढ़ी के दो पौधों का संकरण किया गया तब F2 पीढ़ी के पौधे या तो लंबे या बौने थे। लंबे तथा बौने का अनुपात 3-1 था। कोई भी पौधा बीच की ऊँचाई का नहीं था। अर्थात् लंबे/ बौनेपन का लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं।
In simple words: मेंडल के द्विसंकर संकरण प्रयोगों से पता चला कि जब दो या अधिक लक्षण एक साथ वंशानुगत होते हैं, तो वे एक-दूसरे पर निर्भर नहीं करते। उदाहरण के लिए, बीज का रंग और बीज का आकार स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं।

🎯 Exam Tip: मेंडल के द्विसंकर संकरण के परिणाम (9:3:3:1 अनुपात) स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम की पुष्टि करते हैं, जो बताता है कि अलग-अलग लक्षण एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं।

 

Question 3. एक 'A-रुधिर वर्ग' वाला पुरुष एक स्त्री जिसका रुधिर वर्ग 'O' है, से विवाह करता है। उनकी पुत्री का रुधिर वर्ग – ‘O' है। क्या यह सूचना पर्याप्त है यदि आपसे कहा जाए कि कौन-सा विकल्प लक्षण-रुधिर वर्ग -A अथवा 'O' प्रभावी लक्षण है? अपने उत्तर का स्पष्टीकरण दीजिए।
Answer: नहीं, यह सूचना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि
(1) यदि रक्त समूह A प्रभावी हो तथा रक्त समूह O अप्रभावी तब भी पुत्री का रुधिर समूह (वर्ग) O हो सकता है ।
(2) यदि रक्त वर्ग A अप्रभावी परंतु रक्त वर्ग O प्रभावी हो तब भी पुत्री का रक्त वर्ग O हो सकता है।
In simple words: यह जानकारी पर्याप्त नहीं है क्योंकि 'O' रक्त समूह अप्रभावी होने पर भी (यदि पिता हेटेरोजाइगस A हो) या 'O' रक्त समूह प्रभावी होने पर भी (यदि A अप्रभावी हो) बेटी का रक्त समूह 'O' हो सकता है। हमें अधिक आनुवंशिक जानकारी चाहिए।

🎯 Exam Tip: रक्त समूह की वंशागति को समझने के लिए माता-पिता के जीनोटाइप (जैसे IAIO या IOIO) जानना आवश्यक है, केवल फिनोटाइप (रक्त वर्ग) से हमेशा प्रभावी/अप्रभावी का निर्धारण नहीं किया जा सकता है।

 

Question 4. मानव में बच्चे का लिंग निर्धारण कैसे होता है?
Answer: बच्चों का लिंग निर्धारण इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें अपने पिता से किस प्रकार का गुणसूत्र प्राप्त हुआ है। जिस बच्चे को अपने पिता से 'X' गुणसूत्र वंशानुगत हुआ है वह लड़की तथा जिसे पिता से 'Y' गुणसूत्र वंशानुगत होता है, वह लड़का होगा ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र मानव में लिंग निर्धारण की प्रक्रिया को दर्शाता है। इसमें पुरुष (XY) और स्त्री (XX) के युग्मक (gametes) दिखाए गए हैं। पुरुष X और Y गुणसूत्र वाले शुक्राणु उत्पन्न करता है, जबकि स्त्री केवल X गुणसूत्र वाले अंडे उत्पन्न करती है। जब पुरुष का X शुक्राणु स्त्री के X अंडे से मिलता है (XX), तो पुत्री (लड़की) पैदा होती है। जब पुरुष का Y शुक्राणु स्त्री के X अंडे से मिलता है (XY), तो पुत्र (लड़का) पैदा होता है। अतः नर तथा मादा उत्पन्न होने की संभावनाएँ 1:1 के अनुपात में होती हैं।
In simple words: मानव में बच्चे का लिंग पिता से प्राप्त लिंग गुणसूत्र (sex chromosome) द्वारा निर्धारित होता है। यदि पिता से X गुणसूत्र मिलता है, तो लड़की (XX) पैदा होती है, और यदि Y गुणसूत्र मिलता है, तो लड़का (XY) पैदा होता है। माता से हमेशा X गुणसूत्र ही मिलता है।

🎯 Exam Tip: मानव में लिंग निर्धारण के लिए पिता के Y गुणसूत्र की उपस्थिति या अनुपस्थिति मुख्य कारक है, और लड़के या लड़की होने की संभावना हमेशा 50% होती है।

खंड 9.3 (पृष्ठ संख्या 165)

 

Question 1. वे कौन से विभिन्न तरीके हैं, जिनके द्वारा एक विशेष लक्षण वाले व्यष्टि जीवों की संख्या समष्टि में बढ़ सकती है?
Answer: निम्नलिखित तरीकों द्वारा एक विशेष लक्षण वाले व्यष्टि जीवों की संख्या समष्टि में बढ़ सकती है।
(1) प्राकृतिक चयन (Natural selection)-प्रकृति द्वारा लाभप्रद विविधताओं वाली समष्टि को सतत् बनाए रखना प्राकृतिक चयन कहलाता है। वे लक्षण जो किसी व्यष्टि जीव के उत्तरजीविता तथा प्रजनन में लाभदायक होती हैं, अगली पीढ़ी (संतति) में हस्तान्तरित (passed on) हो जाती हैं। परंतु जिनसे कोई लाभ नहीं होता वे लक्षण संतति में नहीं जाते । उदाहरण-जितने अधिक कौए होंगे उतने अधिक लाल शृंग उनके शिकार बनेंगे तथा समष्टि में हरे भृगों की संख्या बढ़ती जाएगी, क्योंकि हरी पत्तियों की झाड़ियों में हरे भुंग को कौए नहीं देख पाते हैं।
(2) आनुवंशिक विचलन (Genetic drift)-कभी-कभी आकस्मिक दुर्घटना के कारण किसी समष्टि के ज्यादातर जीव मर जाते हैं ऐसी स्थिति में जीन सीमित रह जाते हैं इसके कारण उस समष्टि का रूप बदल जाता है तथा उनकी संतति में केवल जीवित सदस्यों के लक्षण ही दिखाई देते हैं। इसे आनुवंशिक विचलन (Genetic drift) कहा जाता है। जैसे-महामारी तथा परभक्षण (Predation) आदि की स्थिति में ।
(3) विभिन्नताएँ एवं अनुकूलन-विभिन्नताएँ एवं अनुकूलता पर्यावरण में जीवों की उत्तरजीविता कायम रखने में सहायक होते हैं।
In simple words: एक विशेष लक्षण वाले जीवों की संख्या प्राकृतिक चयन (अनुकूल लक्षणों का चुनाव), आनुवंशिक विचलन (संयोगवश लक्षणों का बदलना), और विभिन्नताओं व अनुकूलन (जो उन्हें पर्यावरण के लिए बेहतर बनाते हैं) के माध्यम से बढ़ सकती है।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न जैव-विकास के मुख्य तंत्रों को कवर करता है। प्राकृतिक चयन, आनुवंशिक विचलन, और अनुकूलन (विभिन्नताओं के कारण) तीनों ही प्रजातियों के विकास और लक्षणों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

Question 2. एक एकल जीव द्वारा उपार्जित लक्षण सामान्यतः अगली पीढ़ी में वंशानुगत नहीं होते । क्यों?
Answer: केवल वे ही लक्षण वंशानुगत होते हैं जो जनन कोशिकाओं के DNA द्वारा अगली पीढ़ी में जाते हैं। उपार्जित लक्षण का जनन कोशिका के जीन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, कायिक ऊतकों में होने वाले परिवर्तन, लैंगिक कोशिकाओं के DNA में नहीं जा सकते ।
In simple words: उपार्जित लक्षण (जो जीवनकाल में प्राप्त किए जाते हैं, जैसे मांसपेशियां बनाना) अगली पीढ़ी में वंशानुगत नहीं होते क्योंकि वे जनन कोशिकाओं (जो आनुवंशिक सामग्री को अगली पीढ़ी तक ले जाती हैं) के DNA में परिवर्तन नहीं करते। केवल वही लक्षण वंशानुगत होते हैं जो DNA में कोडित होते हैं।

🎯 Exam Tip: इस अवधारणा को लैमार्क के उपार्जित लक्षणों की वंशागति के सिद्धांत के विपरीत समझा जाता है। डार्विन का प्राकृतिक चयन और आधुनिक आनुवंशिकी इस बात पर जोर देते हैं कि केवल जनन कोशिकाओं में होने वाले परिवर्तन ही वंशागत होते हैं।

 

Question 3. बाघों की संख्या में कमी आनुवंशिकता की दृष्टि से चिंता का विषय क्यों है?
Answer: बाघों की संख्या में कमी आनुवंशिकता की दृष्टि से इसलिए चिंता का विषय है, क्योंकि यदि बाघ विलुप्त (extinct) हो गए, तो इसके स्पीशीज़ का जीन भी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा तथा बाघों के स्पीशीज़ को पुनः वापस ला पाना असंभव होगा। हमारी अगली पीढी बाघ को नहीं देख पाएगी।
In simple words: बाघों की संख्या में कमी आनुवंशिक विविधता को कम करती है। यदि वे विलुप्त हो गए, तो उनके जीन पूल हमेशा के लिए नष्ट हो जाएंगे, जिससे भविष्य में उन्हें वापस लाना असंभव हो जाएगा और हमारी पीढ़ी उन्हें देख नहीं पाएगी।

🎯 Exam Tip: जैव-विविधता का संरक्षण महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रत्येक प्रजाति का एक अनूठा जीन पूल होता है जो पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में योगदान देता है। प्रजातियों का विलुप्त होना अपरिवर्तनीय आनुवंशिक क्षति है।

खंड 9.4 ( पृष्ठ संख्या 166)

 

Question 1. वे कौन-से कारक हैं, जो नयी स्पीशीज़ के उद्भव में सहायक हैं?
Answer: नयी स्पीशीज़ के उद्भव में सहायक कारक निम्न हैं
(a) जीन प्रवाह (genetic flow) का स्तर कम होना।
(b) प्राकृतिक चयन (वरण) (Natural selection)
(c) विभिन्नताएँ।
(d) भौगोलिक पृथक्करण के कारण जनन पृथक्करण (Reproductive isolation)
(e) आनुवंशिक विचलन (genetic drift)
In simple words: नई प्रजातियों के निर्माण में जीन प्रवाह का कम होना, प्राकृतिक चयन, विभिन्नताएँ, भौगोलिक पृथक्करण के कारण जनन पृथक्करण, और आनुवंशिक विचलन जैसे कारक सहायक होते हैं।

🎯 Exam Tip: ये कारक मिलकर एक स्पीशीज़ के भीतर आनुवंशिक अलगाव और परिवर्तन का कारण बनते हैं, जिससे नई प्रजातियों का विकास होता है। भौगोलिक अलगाव और जनन अलगाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 2. क्या भौगोलिक पृथक्करण स्वपरागित स्पीशीज़ के पौधों के जाति-उद्भव का प्रमुख कारण हो सकता है? क्यों या क्यों नहीं?
Answer: नहीं, भौगोलिक पृथक्करण स्वपरागित स्पीशीज़ के पौधों के जाति-उद्भव का प्रमुख कारण नहीं हो सकता, क्योंकि ये पौधे दूसरे पौधों पर आगे जनन प्रक्रिया के लिए निर्भर नहीं करते हैं।
In simple words: नहीं, भौगोलिक पृथक्करण स्वपरागित पौधों के लिए जाति-उद्भव का प्रमुख कारण नहीं है, क्योंकि वे परागण के लिए किसी अन्य पौधे पर निर्भर नहीं करते हैं और स्वयं से प्रजनन कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: स्वपरागित पौधों में, नए लक्षणों का विकास मुख्यतः आंतरिक उत्परिवर्तन और प्राकृतिक चयन पर निर्भर करता है, न कि बाहरी आबादी से अलगाव पर।

 

Question 3. क्या भौगोलिक पृथक्करण अलैंगिक जनन वाले जीवों के जाति उद्भव का प्रमुख कारक हो सकता है? क्यों अथवा क्यों नहीं?
Answer: नहीं, क्योंकि अलैंगिक जनन करने वाले जीवों को जनन के लिए किसी अन्य जीव की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
In simple words: नहीं, भौगोलिक पृथक्करण अलैंगिक जनन करने वाले जीवों के जाति-उद्भव का प्रमुख कारक नहीं है, क्योंकि वे प्रजनन के लिए किसी दूसरे जीव पर निर्भर नहीं करते। उनका जनन क्लोनिंग के समान होता है, और भौगोलिक अलगाव उनके जीन पूल को प्रभावित नहीं करता।

🎯 Exam Tip: अलैंगिक जनन में, आनुवंशिक परिवर्तन उत्परिवर्तन के माध्यम से होते हैं, न कि आनुवंशिक पुनर्संयोजन या भौगोलिक अलगाव के कारण होने वाले जीन प्रवाह के अभाव से।

खंड 9.5 (पृष्ठ संख्या 171)

 

Question 1. उन अभिलक्षणों का एक उदाहरण दीजिए जिनका हम दो स्पीशीज़ के विकासीय संबंध निर्धारण के लिए करते हैं?
Answer: समजात अंगों की उपस्थिति से हमें दो स्पीशीज़ के सदस्यों में विकासीय संबंध स्थापित करने में सहायता मिलती है। उदाहरण- पक्षियों, सरीसृप एवं जल-स्थलचर (Amphibians) की तरह स्तरधारियों के चार पैर (पाद) होते हैं। सभी में पैरों की आधारभूत संरचना एक समान होती है, परंतु कार्यों में भिन्न होते हैं। ऐसे अंग समजात अंग कहलाते हैं। ये अभिलक्षण इंगित करते हैं कि वे समान जनक से वंशानुगत हुए हैं।
In simple words: समजात अंग (Homologous organs) ऐसे अभिलक्षण हैं जो दो प्रजातियों के बीच विकासीय संबंध को दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, पक्षियों, सरीसृपों और स्तनधारियों के अग्रपादों की मूल संरचना समान होती है, भले ही उनके कार्य अलग-अलग हों, जो यह संकेत देता है कि वे एक सामान्य पूर्वज से विकसित हुए हैं।

🎯 Exam Tip: समजात अंग समान पूर्वज और अपसारी विकास (Divergent evolution) के प्रमाण हैं, जबकि समरूप अंग (Analogous organs) अभिसारी विकास (Convergent evolution) के प्रमाण हैं।

 

Question 2. क्या एक तितली और चमगादड़ के पंखों को समजात अंग कहा जा सकता है? क्यों अथवा क्यों नहीं?
Answer: नहीं, वे अंग जिनकी आधारभूत संरचना समान परंतु कार्य भिन्न-भिन्न होते हैं, समजात अंग कहलाते हैं। लेकिन तितली और चमगादड़ के पंखों की आधारभूत संरचना भिन्न हैं, परंतु ये कार्य में एक समान हैं। इसलिए इन्हें समरूप अंग कहते हैं।
In simple words: नहीं, तितली और चमगादड़ के पंख समजात अंग नहीं हैं। समजात अंग वे होते हैं जिनकी मूल संरचना समान हो लेकिन कार्य अलग हों, जबकि इन पंखों की संरचना अलग है लेकिन कार्य समान है। इसलिए, इन्हें समरूप अंग कहा जाता है, जो अभिसारी विकास का परिणाम हैं।

🎯 Exam Tip: समजात अंग विकासीय संबंध दर्शाते हैं जबकि समरूप अंग समान पर्यावरणीय दबावों के कारण समान कार्य के लिए स्वतंत्र विकास को दर्शाते हैं, न कि सामान्य पूर्वज को।

 

Question 3. जीवाश्म क्या है? वे जैव-विकास प्रक्रम के विषय में क्या दर्शाते हैं।
Answer: कभी-कभी जीव अथवा उसके कुछ भाग भूपटल की कठोर सतहों के बीच दब जाती हैं, जिसके कारण उसका अपघटन नहीं होता है तथा वे परिरक्षित (Preserved) रूप में मिलती हैं, जिन्हें जीवाश्म कहते हैं। जीवाश्म जैव-विकास के लिए एक प्रमाण (evidence) प्रदान करता है, जो इसे समझने में सहायता करता है। उदाहरण के लिए- आर्कियोप्टेरिक्स (Archaeopteryx) एक पक्षी जीवाश्म जो पक्षी की तरह दिखते हैं, परंतु इसमें अनेक ऐसे लक्षण हैं जो सरीसृप में पाए जाते हैं। इस तरह यह पक्षी तथा सरीसृप के बीच एक जैव-विकास संबंध (evolutionary relation) की कड़ी स्थापित करता है तथा प्रमाणित करते हैं कि पक्षी बहुत निकटता से सरीसृप से संबंधित हैं।
In simple words: जीवाश्म प्राचीन जीवों के संरक्षित अवशेष हैं जो चट्टानों में पाए जाते हैं। ये जैव-विकास के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं, जो दर्शाते हैं कि समय के साथ जीवन कैसे बदला और विकसित हुआ। वे विभिन्न प्रजातियों के बीच विकासीय संबंध और विलुप्त हो चुके रूपों की जानकारी प्रदान करते हैं।

🎯 Exam Tip: जीवाश्म विकासीय इतिहास को समझने के लिए प्रत्यक्ष प्रमाण प्रदान करते हैं, खासकर विभिन्न भूवैज्ञानिक परतों में पाए जाने वाले जीवाश्मों की आयु और विशेषताओं की तुलना करके।

खंड 9.6 (पृष्ठ संख्या 173)

 

Question 1. क्या कारण है कि आकृति, आकार, रंग-रूप में इतने भिन्न दिखाई पड़ने वाले मानव एक ही स्पीशीज़ के सदस्य हैं?
Answer: आधुनिक मानव स्पीशीज़ 'होमो सेपियंस” का उद्भव अफ्रीका में हुआ था। कुछ हजार वर्ष पूर्व हमारे पूर्वजों ने अफ्रीका छोड़ दिया, जबकि कुछ वहीं रह गए। वे अलग-अलग देश के वातावरण में फैल गए जिसके कारण उनका आकार, आकृति रंग-रूप भिन्न हो गए। इन विविधताओं के बावजूद वे परस्पर सफल लैंगिक जनन (interbreeding) करने में समर्थ हैं तथा बच्चे पैदा कर सकते हैं, जिसके आधार पर उन्हें एक स्पीशीज़ के सदस्य कहा जाता है।
In simple words: विभिन्न आकृति, आकार और रंग-रूप वाले मानव एक ही स्पीशीज़ के सदस्य हैं क्योंकि वे अभी भी आपस में प्रजनन कर सकते हैं और उपजाऊ संतान पैदा कर सकते हैं। यह भिन्नता भौगोलिक प्रसार और विभिन्न वातावरणों में अनुकूलन के कारण हुई है, लेकिन आनुवंशिक रूप से वे अभी भी एक प्रजाति हैं।

🎯 Exam Tip: एक स्पीशीज़ को परिभाषित करने का मुख्य मानदंड यह है कि उसके सदस्य आपस में सफलतापूर्वक प्रजनन कर सकें और उपजाऊ संतान उत्पन्न कर सकें। शारीरिक भिन्नताएँ अक्सर भौगोलिक अनुकूलन का परिणाम होती हैं।

 

Question 2. विकास के आधार पर क्या आप बता सकते हैं कि जीवाणु, मकड़ी मछली तथा चिम्पैंजी में किसका शारीरिक अभिकल्प उत्तम है? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए ।
Answer: जैव विकास में यह प्रवृत्ति दिखाई देती है कि समय के साथ-साथ उसके शारीरिक अभिकल्प की जटिलता में वृद्धि होती है। इस आधार पर चिम्पैंजी का शारीरिक अभिकल्प उत्तम प्रतीत होता है, परंतु प्रतिकूल एवं अत्यंत कठिन परिस्थितियों में उत्तरजीविता की दृष्टि से सरलतम अभिकल्प वाला एक समूह-जीवाणु-विषम पर्यावरण जैसे ऊष्ण झरने, गहरे समुद्र के गर्म स्रोत तथा अंटार्कटिका की बर्फ में भी पाए जाते हैं। अतः यह आवश्यक नहीं कि जटिल शारीरिक अभिकल्प वाले जीव जैवविकासीय दृष्टि से सरल शारीरिक अभिकल्प वाले जीवों से उत्तम हों। क्योंकि ये कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रह पाते हैं।
In simple words: विकास हमेशा जटिलता को "उत्तम" नहीं बनाता है। जबकि चिम्पैंजी का शारीरिक अभिकल्प जीवाणु, मकड़ी और मछली की तुलना में अधिक जटिल है, जीवाणु जैसी सरल संरचनाएँ भी अत्यधिक कठिन वातावरण में जीवित रहने में सक्षम हैं। इसलिए, "उत्तम" अभिकल्प केवल जटिलता से नहीं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूलन और उत्तरजीविता से मापा जाता है।

🎯 Exam Tip: विकासीय सफलता जटिलता से नहीं, बल्कि पर्यावरण के साथ अनुकूलन और जीवित रहने की क्षमता से निर्धारित होती है। एक सरल जीव भी अपने वातावरण में अत्यंत सफल हो सकता है।

पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न

[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED]

 

Question 1. मेंडल के एक प्रयोग में लंबे मटर के पौधे जिनके बैंगनी पुष्प थे, का संकरण बौने पौधों जिनके सफ़ेद पुष्प थे, से कराया गया। इनकी संतति के सभी पौधों में पुष्प बैंगनी रंग के थे। परंतु उनमें से लगभग आधे-बौने थे। इससे कहा जा सकता है कि लंबे जनक पौधों की आनुवंशिक रचना निम्न थी
(a) TTWW
(b) TTww
(c) TtWw
(d) TtWw
Answer: (c) TtWw
In simple words: चूंकि F1 पीढ़ी में सभी फूल बैंगनी थे (बैंगनी प्रभावी है) लेकिन लगभग आधे पौधे बौने थे (बौना अप्रभावी है), इसका मतलब है कि लंबापन के लिए जनक हेटेरोजाइगस (Tt) और फूल के रंग के लिए होमोजाइगस प्रभावी (WW) होना चाहिए था। लेकिन यहां बौने पौधे भी हैं, तो लंबे जनक का जीनोटाइप TtWw था, जहां T (लंबा) प्रभावी है और W (बैंगनी) प्रभावी है, जिससे TtWw से क्रॉस करने पर F1 में लंबे और बैंगनी फूल वाले पौधे मिलते हैं, लेकिन F2 में बौने और सफेद फूल वाले भी पैदा हो सकते हैं। (यहां दिए गए विकल्पों में सबसे सटीक TtWw है।)

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, F1 पीढ़ी के परिणामों का विश्लेषण करके माता-पिता के जीनोटाइप का अनुमान लगाएं। प्रभावी लक्षणों की उपस्थिति और अप्रभावी लक्षणों की आंशिक उपस्थिति हेटेरोजाइगस माता-पिता का संकेत देती है।

 

Question 2. समजात अंगों का उदाहरण है
(a) हमारा हाथ तथा कुत्ते के अग्रपाद
(b) हमारे दाँत तथा हाथी के दाँत
(c) आलू एवं घास के उपरिभूस्तारी
(d) उपरोक्त सभी
Answer: (d) उपरोक्त सभी
In simple words: समजात अंग वे होते हैं जिनकी मूल संरचना समान होती है लेकिन कार्य भिन्न-भिन्न हो सकते हैं, क्योंकि वे एक सामान्य पूर्वज से विकसित हुए होते हैं। दिए गए सभी विकल्प- मानव का हाथ और कुत्ते का अग्रपाद, मानव के दांत और हाथी के दांत, तथा आलू और घास के उपरिभूस्तारी- समजात अंगों के उदाहरण हैं।

🎯 Exam Tip: समजात अंग अपसारी विकास को दर्शाते हैं और यह सिद्ध करते हैं कि विभिन्न प्रजातियों का एक सामान्य पूर्वज रहा है।

 

Question 3. विकासीय दृष्टिकोण से हमारी किस से अधिक समानता है? ।
(a) चीन के विद्यार्थी
(b) चिम्पैंजी
(c) मकड़ी
(d) जीवाणु
Answer:
(a) चीन के विद्यार्थी

In simple words: विकासीय दृष्टिकोण से हम चीन के विद्यार्थियों से सबसे अधिक समानता रखते हैं, क्योंकि वे भी मानव प्रजाति (Homo sapiens) के सदस्य हैं। जबकि चिम्पैंजी, मकड़ी और जीवाणु हमारे करीबी या दूर के विकासीय रिश्तेदार हैं, लेकिन वे हमारी ही प्रजाति के नहीं हैं।

🎯 Exam Tip: विकासवादी समानता का मूल्यांकन करते समय, सबसे करीबी विकासीय संबंध अक्सर एक ही प्रजाति या बहुत निकट संबंधी प्रजातियों के बीच होता है।

 

Question 4. एक अध्ययन से पता चला कि हल्के रंग की आँखों वाले बच्चों के जनक (माता-पिता) की आँखें भी हल्के रंग की होती हैं। इसके आधार पर क्या हम कह सकते हैं कि आँखों के हल्के रंग को लक्षण प्रभावी है अथवा अप्रभावी? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए ।
Answer: नहीं, यह बताना संभव नहीं है कि आँखों के हल्के रंग का लक्षण प्रभावी है अथवा अप्रभावी जब तक कि दोनों प्रकार के विकल्पों का पता न हो। ऐसा भी संभव है कि जनक (माता-पिता) में दोनों ही विकल्प हल्के रंग की आँखों के हों, क्योंकि लक्षण की प्रतिकृति दोनों जनकों (माता-पिता) से वंशानुगत होती हैं, अप्रभावी तभी होंगे, जब दोनों से प्राप्त जीन अप्रभावी हों। अतः हम केवल अनुमान लगा सकते हैं।
In simple words: यह जानकारी पर्याप्त नहीं है क्योंकि हल्के आँखों का रंग प्रभावी या अप्रभावी दोनों हो सकता है, जब तक कि हमें अन्य आनुवंशिक जानकारी न मिले। यदि माता-पिता दोनों में हल्के रंग की आंखें हैं, तो हो सकता है कि यह एक अप्रभावी लक्षण हो जो दोनों से वंशागत हुआ हो, या यह एक प्रभावी लक्षण भी हो सकता है।

🎯 Exam Tip: केवल माता-पिता के फिनोटाइप (दिखने वाले लक्षण) के आधार पर प्रभावी या अप्रभावी लक्षण का निर्धारण करना मुश्किल हो सकता है। वंशागति पैटर्न और जीनोटाइप की जानकारी आवश्यक है।

 

Question 5. जैव-विकास तथा वर्गीकरण का अध्ययन आपस में किस प्रकार परस्पर संबंधित है।
Answer: विभिन्न जीवों के बीच समानताओं एवं विभिन्नताओं के आधार पर ही उनका वर्गीकरण करते हैं। दो स्पीशीज़ के बीच जितने अधिक अभिलक्षण समान होंगे उनका संबंध भी उतना ही निकट का होगा। जितनी अधिक समानताएँ होंगी, उनका उद्भव भी निकट अतीत में समान पूर्वजों से हुआ होगा।
In simple words: जैव-विकास और वर्गीकरण आपस में गहरे से जुड़े हैं। वर्गीकरण जीवों की समानताओं और विभिन्नताओं पर आधारित है, और ये समानताएँ उनके विकासीय इतिहास को दर्शाती हैं। जिन जीवों में अधिक समानताएँ होती हैं, वे विकासीय रूप से अधिक निकट होते हैं और उनका उद्भव हाल ही में एक सामान्य पूर्वज से हुआ होता है।

🎯 Exam Tip: वर्गीकरण विकासीय संबंधों को प्रतिबिंबित करता है। जीवों को उनके विकासीय इतिहास (फाइलोजेनी) के आधार पर समूहों में रखना, उनके सामान्य पूर्वजों को समझने में मदद करता है।

 

Question 6. समजात अंग एवं समरूप अंगों को उदाहरण देकर समझाइए ।
Answer: समजात अंग (Homologous organs)-विभिन्न जीवों में ऐसे अंग जिनकी समान आधारभूत संरचना होती है, परंतु कार्य भिन्न-भिन्न होते हैं, समजात अंग कहलाते हैं। जैसे- मेंढक, पक्षी एवं मनुष्य के अग्रपादों में अस्थियों की समान आधारभूत संरचना होती है, परंतु इनके कार्य भिन्न-भिन्न होते हैं। समरूप अंग (Analogous organs)-ऐसे अंग जो एक-समान कार्य संपन्न करते हैं, परंतु संरचनात्मक रूप से भिन्न होते हैं, उन्हें समरूप अंग कहते हैं। उदाहरण के लिए, कीट के पंख तथा पक्षी के पंख ।
In simple words: समजात अंग वे हैं जिनकी मूल संरचना समान हो पर कार्य भिन्न हों (जैसे मानव हाथ और कुत्ते का अग्रपाद), जो सामान्य पूर्वज से अपसारी विकास दर्शाते हैं। समरूप अंग वे हैं जिनकी संरचना भिन्न हो पर कार्य समान हों (जैसे तितली और पक्षी के पंख), जो अभिसारी विकास दर्शाते हैं।

🎯 Exam Tip: समजात अंग विकासीय संबंध को दर्शाते हैं (समान पूर्वज), जबकि समरूप अंग केवल समान पर्यावरणीय दबावों के कारण समान कार्य करने वाले अंगों को दर्शाते हैं (समान पूर्वज नहीं)।

 

Question 7. कुत्ते की खाल का प्रभावी रंग ज्ञात करने के उद्देश्य से एक प्रोजेक्ट बनाइए।
Answer: इसके लिए एक शुद्ध काली खाल वाले कुत्ते (BB) तथा एक शुद्ध सफेद खाल वाली कुतिया (bb) का चयन किया जाता है। उनका समय पर संकरण कराएँ। यदि उनसे उत्पन्न सभी पिल्ले (कुत्ते के बच्चे) काली खाल वाले हैं, तो काली खाल का लक्षण प्रभावी है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख कुत्ते की खाल के रंग की वंशागति को समझने के लिए एक आनुवंशिक क्रॉस दिखाता है। इसमें एक शुद्ध काली खाल वाले कुत्ते (BB) का एक शुद्ध सफेद खाल वाली कुतिया (bb) के साथ संकरण किया गया है। F1 पीढ़ी में सभी संतानें (पिल्ले) काली खाल वाले (Bb) होते हैं, जो यह दर्शाता है कि काली खाल का लक्षण प्रभावी है। प्रभावी रंग- सफ़ेद, अप्रभावी रंग- काला
In simple words: कुत्ते की खाल का प्रभावी रंग जानने के लिए, एक शुद्ध काली खाल वाले कुत्ते और एक शुद्ध सफेद खाल वाली कुतिया का संकरण कराएं। यदि सभी पिल्ले काली खाल वाले पैदा होते हैं, तो काली खाल का रंग प्रभावी लक्षण है।

🎯 Exam Tip: आनुवंशिक प्रयोगों में प्रभावी लक्षण वह होता है जो F1 पीढ़ी में पूरी तरह से व्यक्त होता है, जबकि अप्रभावी लक्षण F1 पीढ़ी में छिपा रहता है लेकिन F2 पीढ़ी में पुनः प्रकट हो सकता है।

 

Question 8. विकासीय संबंध स्थापित करने में जीवाश्म का क्या महत्त्व है?
Answer: विकासीय संबंध स्थापित करने में जीवाश्मे के निम्नलिखित महत्त्व हैं
(1) पृथ्वी की सतह के निकट वाले जीवाश्म गहरे स्तर पर पाए जाने वाले जीवाश्मों की अपेक्षा अधिक नए हैं। इससे हमें यह ज्ञात होता है कि किस जीव का उद्भव पहले तथा किसका बाद में हुआ।
(2) “फॉसिल डेटिंग' विधि से भी जीवाश्म का समय निर्धारण किया जाता है तथा जीव के समय-काल का पता चलता है।
(3) जीवाश्म-आर्कियोप्टेरिक्स (Archaeopteryx) दो भिन्न प्रकार के स्पीशीज़ के बीच एक कड़ी (link) दर्शाती है।
(4) जीवाश्मों से जीवों और उनके पूर्वजों के बीच विकासीय विशेषकों को स्थापित करने में सहायता मिलती है।
In simple words: जीवाश्म विकासीय संबंधों को समझने में महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे जीवों के प्राचीन रूपों को दर्शाते हैं। वे बताते हैं कि कौन से जीव कब विकसित हुए (कालानुक्रम), विभिन्न प्रजातियों के बीच विकासीय कड़ी (जैसे आर्कियोप्टेरिक्स) स्थापित करते हैं, और पूर्वजों के लक्षणों को समझने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: जीवाश्म न केवल विकासीय इतिहास का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं, बल्कि वे विलुप्त प्रजातियों, विकासीय परिवर्तनों और विभिन्न समूहों के बीच संक्रमणकालीन रूपों को भी दर्शाते हैं।

 

Question 9. किन प्रमाणों के आधार पर हम कह सकते हैं कि जीवन की उत्पत्ति अजैविक पदार्थों से हुई है?
Answer: स्टेनले एल० मिलर एवं हेराल्ड सी० उरे द्वारा 1953 में किए गए प्रयोगों के आधार पर इसकी पुष्टि की जा सकती है। उन्होंने कृत्रिम रूप से ऐसे वातावरण को निर्मित किया, जो संभवतः प्राथमिक/प्राचीन वातावरण के समान था (इसमें अमोनिया, मीथेन तथा हाइड्रोजन सल्फाइड के अणु थे, लेकिन ऑक्सीजन के नहीं), पात्र में जल भी था। इसे 100° सेल्सियस से कुछ कम ताप पर रखा गया। गैसों के मिश्रण में चिनगारियाँ उत्पन्न की गईं; जैसे- आकाश में बिजली एक सप्ताह के बाद, 15 प्रतिशत कार्बन (मीथेन से) सरल कार्बनिक यौगिकों में परिवर्तित हो गए। इनमें एमीनों अम्ल भी संश्लेषित हुए जिनसे प्रोटीन के अणुओं का निर्माण होता है। हम जानते हैं कि प्रोटीन जीवन का आधार है। अतः हम कह सकते हैं कि जीवन की उत्पत्ति अजैविक पदार्थों (अकार्बनिक पदार्थों) से हुई है।
In simple words: मिलर और उरे के प्रयोगों से यह प्रमाणित होता है कि जीवन की उत्पत्ति अजैविक पदार्थों से हुई है। उन्होंने आदिम पृथ्वी के वातावरण को प्रयोगशाला में बनाया, जिसमें बिजली की चिनगारियों का उपयोग करके सरल अकार्बनिक पदार्थों (जैसे मीथेन, अमोनिया) से अमीनो अम्ल और अन्य कार्बनिक यौगिकों का संश्लेषण किया, जो जीवन के निर्माण खंड हैं।

🎯 Exam Tip: मिलर-उरे प्रयोग ने साबित किया कि पृथ्वी की प्रारंभिक परिस्थितियों में अकार्बनिक अणुओं से जीवन के लिए आवश्यक कार्बनिक अणुओं (जैसे अमीनो अम्ल) का निर्माण संभव था, जो जैव-जनन (abiogenesis) के सिद्धांत का समर्थन करता है।

 

Question 10. अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न विभिन्नताएँ अधिक स्थायी होती हैं। व्याख्या कीजिए यह लैंगिक प्रजनन करने वाले जीवों में विकास को किस प्रकार प्रभावित करता है?
Answer: अलैंगिक जनन में केवल एक ही जनक से DNA प्रतिकृति होती है, जिसके कारण उनमें बहुत अधिक समानताएँ होती हैं; जैस- गन्ने के पौधे । इनमें थोड़ी बहुत विभिन्नताएँ प्रतिकृति बनने के दौरान त्रुटियों के कारण होती है, जो बहुत न्यून (कम) होती हैं। परंतु लैंगिक जश्न में दो जनक के युग्मकों से प्राप्त हुए DNA का संलयन होता है, जिसके कारण संतति में बहुत अधिक विभिन्नताएँ आ जाती हैं। विभिन्नताओं का प्राकृतिक चयन (natural selection) होता है। अनुकूल विभिन्नताएँ पीढ़ी-दर-पीढी संचित होती रहती हैं तथा एक नई प्रजाति के रूप में विकसित होती हैं। स्पष्टतः ये विभिन्नताएँ वंशानुगत होती हैं तथा जैव विकास को प्रभावित करती हैं।
In simple words: लैंगिक जनन में दो जनकों से DNA का मिश्रण होता है, जिससे अधिक और स्थायी विभिन्नताएँ पैदा होती हैं, जो अलैंगिक जनन की तुलना में कम होती हैं। ये विभिन्नताएँ जीवों को बदलते वातावरण में बेहतर ढंग से अनुकूलित होने में मदद करती हैं, जिससे प्राकृतिक चयन और नई प्रजातियों का विकास होता है, इस प्रकार जैव-विकास को बढ़ावा मिलता है।

🎯 Exam Tip: लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न आनुवंशिक विभिन्नताएँ प्राकृतिक चयन के लिए कच्ची सामग्री प्रदान करती हैं, जिससे प्रजातियों को बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल होने और विकास करने की अधिक क्षमता मिलती है।

 

Question 11. संतति में नर एवं मादा जनकों द्वारा आनुवंशिक योगदान में बराबर की भागीदारी किस प्रकार सुनिश्चित की जाती है?
Answer: लैंगिक जनन क्रिया में क्रोमोसोम (गुणसूत्र) अर्धसूत्री विभाजन द्वारा दो भागों में बँटे जाते हैं और जब निषेचन क्रिया होती है, तो युग्मनज में आधे गुणसूत्र पिता से और आधे गुणसूत्र माता से आकर आपस में संयोजित हो जाते हैं। अर्थात् नर से (23 गुणसूत्र) तथा मादा से (23 गुणसूत्र) मिलकर संतति में 46 गुणसूत्र होते हैं तथा बराबरी की भागीदारी होती है। यही कारण है कि प्रत्येक पीढी के लक्षणों में विभिन्ताएँ आती रहती हैं।
In simple words: लैंगिक जनन में, नर और मादा दोनों जनक अर्धसूत्री विभाजन द्वारा आधे गुणसूत्रों (प्रत्येक से 23) का योगदान करते हैं। निषेचन के दौरान, ये आधे गुणसूत्र मिलकर संतति में पूर्ण 46 गुणसूत्रों का निर्माण करते हैं, जिससे दोनों जनकों से आनुवंशिक सामग्री की बराबर भागीदारी सुनिश्चित होती है।

🎯 Exam Tip: अर्धसूत्री विभाजन और निषेचन की प्रक्रियाएँ यह सुनिश्चित करती हैं कि प्रत्येक पीढ़ी में गुणसूत्रों की संख्या स्थिर रहे और दोनों जनकों से आनुवंशिक सामग्री का समान योगदान हो, जिससे विभिन्नताएँ बनी रहें।

 

Question 12. केवल वे विभिन्नताएँ जो किसी एकल जीव (व्यष्टि) के लिए उपयोगी होती हैं, समष्टि में अपना अस्तित्व बनाए रखती हैं। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? क्यों एवं क्यों नहीं?
Answer: हाँ, वे विभिन्नताएँ जो किसी एकल जीव के लिए उपयोगी होती हैं, समष्टि में अपना अस्तित्व बनाए रखती हैं। उत्तरजीविता में लाभ वाली विभिन्नताओं का ही प्राकृतिक चयन होता है। इसे एक उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है उदाहरण के लिए, प्रारंभ में केवल एक हरे भुंग थे। कौए हरी पत्तियों में हरे भुंग को नहीं देख पाते हैं। अतः इन्हें नहीं खा पाते हैं, जिससे शृंगों की समष्टि में लाल भूगों की समष्टि की अपेक्षा हरे भूगों की संख्या बढ़ती जाती है। अर्थात्, लाल भृग तथा नीले भृग की तुलना में हरे भुंग के लिए उत्तरजीविता (survival) के लिए लाभ है।
In simple words: हाँ, यह कथन सही है। केवल वे विभिन्नताएँ जो एक जीव को उसके पर्यावरण में बेहतर ढंग से जीवित रहने या प्रजनन करने में मदद करती हैं, प्राकृतिक चयन द्वारा चुनी जाती हैं और अगली पीढ़ियों में बनी रहती हैं। जो विभिन्नताएँ लाभकारी नहीं होतीं या हानिकारक होती हैं, वे समय के साथ समाप्त हो जाती हैं।

🎯 Exam Tip: प्राकृतिक चयन का सिद्धांत यह बताता है कि पर्यावरण के लिए अनुकूल (उपयोगी) विभिन्नताओं वाले जीव ही जीवित रहते हैं और प्रजनन करते हैं, जिससे उनकी संख्या समष्टि में बढ़ती है। यह "योग्यतम की उत्तरजीविता" का आधार है।

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